⬜ Not used yet · 00:00:03:02 – 01:15:53:00 (1:15:50)
00:00:03:02 सभी को जय श्री राम और हम लोगों का जो ऑपरेशन नाम जप है नामा स्त्र वह चालू हो चुका है उसमें लोग जुड़ रहे हैं और हम सब मिलकर के साथ में भगवान का ध्यान करते हैं भगवान का नाम जपते हैं और आज भी उसमें मतलब ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग जुड़ते जा रहे हैं तो मैं जितने भी भाई बहन है उन सबको आहवान करना चाहूंगा कि आप लोग भी इस अभियान से जुड़े यह दोनों ही चीजें हमारे लिए आवश्यक हैं नीचे संघ का बल और ऊपर आध्यात्म का बल नामा स्त्र से अवश्य ही जुड़े जुड़ने के लिए हम कई बार अपना नंबर दे चुके उस पर आपको केवल ट करना है
00:00:54:19 74836 एक सुबह का सेशन होता है जिसमें हम सीधे सवा घंटे का नाम जब करते हैं अ वो उसमें मैं स्वयं भी होता हूं और फिर जिनके पास ऐसा अवसर नहीं है कि वह सुबह सवा घंटे दे सके तो फिर उनके लिए पूरे दिन का 15-15 मिनट भी है पूरे दिन में 1515 मिनट पांच बार आप लोग नाम जप करें नाम जप करने के लिए जो सुबह जो हमारे इष्ट राम है तो हम उनका नाम जप करते हैं मगर यदि आपके इष्ट
00:01:32:00 बजरंग बली है शिव जी हैं मां है मां भगवती हैं या राधा जी हैं तो आप उनके नाम का जप कर सकते हैं उस समय मगर क्या होता है परस्पर जो एक दूसरे की सहभागिता होती है उपस्थिति होती है उससे बल मिलता है और हम लोग हमारे अंदर वह बल निर्माण कर पाते हैं संग की सहायता से सत्संग से है ना हमें आपका मिल जाता है आपको हमारा मिल जाएगा इस तरह से तो आप लोग जुड़े उससे और आगे के जो पांच सेशन होते हैं उसमें भी ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश यह पंच परमेश्वर है तो इनके नाम का पांच बार में जप होता है वहां पर भी वही है कि अगर आपको आपके ईस्ट है तो आप उनके नाम का जप करें प्राथमिकता उनको दे और यदि संभव नहीं हो पा रहा है तो श्रवण कर ले 15 मिनट श्रवण कर ले तो उससे भी आपके मन में मानसिक जब तो हो ही गया वो एक सवा घंटे की जो भक्ति का तपोबल जो एकत्र करना है हमें वो वहां से हम उसके लिए थोड़ा सा प्रयास हैय बस और कुछ नहीं अच्छा कल एक किसी ने कमेंट किया था
00:02:47:25 कि भाई अगर नाम जब से ही सारे युद्ध लड़े जाने हैं जिसमें जिसमें मैं रहता हूं यह गल मीट पर होता है जूम पर वो वाले होते हैं जो 1515 मिनट के हैं यह गल मीट पर होता है जिसमें मैं रहता हूं सवा घंटे वाला तो कल एक कमेंट पढ़ने में आया था जब हमने पहले थोड़ा पीछे से शुरू करता हूं कि हमने अभी कुछ दिन पूर्व आर्य समाज की विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर के एक वीडियो बनाया था जिसमें हमने कुछ जग जोड़ देने वाले जो दृश्य है वह भी दिखाए थे जैसे जो हमारे भक्ति का आस्था का केंद्र है उनकी तुलना पर्न अभिनेत्रियों से की गई ऐसे वीडियोस है जिसमें कि आर्य समाज के वक्ता है उसमें अब हमने वहां पर एक वक्तव्य दिया कि भाई आप लोग कैसे वीर सेब हो और इत्यादि इत्यादि तो इस पर कुछ आर्य समाज के लोगों की तरफ से टिप्पण आई कुछ अपना प्रस्तुतीकरण आया निराकरण आया
00:04:03:15 कि हमने तो वह चीज छुपा कर रखी थी जो वो पंक्ति है आर्य समाज के ग्रंथों में हमने तो वह चीज छिपा कर रखी थी आपने वह चीज उजागर कर दी हम तो उजागर नहीं करना चाहते थे तो यह आपकी गलत फहमी है आपके लोग उसे उजागर कर रहे हैं दूसरी बात यह है कि इस दृष्टिकोण को आप राधा जी पर नहीं सोच सकते हो जब आप राधा जी के बारे में आपके वक्ता लोग यहां वहां अपनी प्रसिद्धि के लिए बात कर रहे होते हैं तो आपको वहां यह सोचना चाहिए कि आप उनका उनका प्रतिकार करें जाकर के कि ये छुपी हुई चीजें रहने दो केवल जो विवादास्पद बातें ना हो केवल उनको
00:04:45:21 उठाओ वीडियो की क्वालिटी खराब आ रही है हां दीदी एक मिनट ता वीडियो की क्वालिटी खराब आ रही है क्या यह अभी भी थोड़ा सा धुला ही आ रहा है ला ही आ रहा है
00:05:36:00 धरा होगा हा तो भाई यह बेस्ट हो सकता है वीडियो जो देख चल रहा है तो कुछ जो मुझे स्मरण है जब तक हमारे जो आज के अतिथि हैं रामानंद संप्रदाय से वह जब तक नहीं आ रहे हैं को वो जब तक नहीं आ रहे हैं तब तक हम जो कुछ पॉइंट्स मुझे याद है उन पर बात कर लेते हैं जैसे कि उन्होंने एक पॉइंट यह कहा कि भाई वह जो शिव जी के लिए जो नपुंसक इत्यादि शब्दों का नपुंसक नहीं हुआ और भी गिरा हुआ श है पर बारबार बोल नहीं सकते तो नपुंसक इत्यादि जो शब्दों का उपयोग हुआ है उनके ग्रंथों में
00:06:31:13 तो उनका एक उनका यह कहना था कि भाई हमने इन चीजों को उजागर नहीं किया है आप कर रहे हो हम तो छुपा रहे थे तो पहली बात तो यह है कि छुपाना उन चीजों को पड़ता है जिन्हें आप सत्य ना मानते हो पहली बात तो यह ठीक है फिर आप सत्य मानते हैं मगर एक व्यवहारिकता के लिए आप उसको छुपा रहे हैं शांत रह रहे मगर आपकी तरफ के जो लोग है वो नहीं छिपा रहे ना राधा जी के बारे में पटांग टिप्पणियां और यह मतलब एन केन प्रकार बहुत सी चीज वो शॉर्ट वीडियो बनाते हैं हम आप लोगों का सहयोग है आप में से जो लोग हमारा साथ देना चाहे शॉर्ट वीडियो इत्यादि बनाने में वह हमसे जुड़ सकते हैं धर्म रक्षा के निमित्त कार्य कर सकते हैं
00:07:26:02 74036 तो शॉर्ट वीडियो बनाने में हमारी सहायता करें तो पहली बात तो यह है कि आपके लोग जो हैं आप नहीं बोल रहे मगर आपके लोग बोल रहे हैं दूसरी बात यह है कि राधा जी के बारे में आपने कहा कि यह है वह है वहां पर कुब्जा के साथ य हुआ कृष्ण के कृष्ण ने ऐसा किया वैसा किया तो इन सारी चीजों का मिनट से पहले निरुत्तर कर देने वाला उत्तर है मेरे पास जितनी भी आप कथाएं कर लीजिए जितने भी पन्ने खोल खोल के दिखा दीजिए मिनट से पहले एक मिनट लगेगा और आप निरुत्तर हो जाएंगे और वह क्या है पंक्ति जिन शास्त्रों का अर्थ आप हम मैं बता उन्हीं शास्त्रों में दिया गया है कि स्व अध्ययन ना करें उन्हीं शास्त्रों में दिया गया है स्कंद पुराण में दिया गया जिसका गुरु नहीं वो पशु है चाहे आप चारों वेद पढ़ ले सारे पुराण पढ़ ले सारे उपनिषद पढ़ ले जब तब व्रत दान पुण्य कर्म तीर्थ दान यज्ञ सब कुछ वर्थ है किसके बिना गुरु के बिना वो भी परंपरा प्राप्त प्रामाणिक इसके भी प्रमाण है तो आप गुरु परंपरा प्र प्रणाली को नहीं मानते हो आप गुरु की महत्ता
00:08:41:20 को नहीं मानते हो हां शायद इंटरनेट की वजह से खराब हो रही है अभी थोड़ी देर में ठीक हो जाएगी तो आप गुरु गुरु की महत्ता को नहीं मानते मगर जिन ग्रंथों को आप बताने का दावा कर रहे हो कि हम इसका यह अर्थ आपको बता रहे देखिए कितना गलत अर्थ वो ग्रंथ जो है गुरु की महत्ता को मानते हैं वो ग्रंथ यह नहीं कहते कि हमारा अध्ययन आप स्वयं से कर ले जो आचार्य गण उन ग्रंथों को मानने वाले हैं स्वीकार करने वाले हैं वह कभी भी स्वतंत्र रूप से उन ग्रंथों का अध्ययन करने की शिक्षा नहीं देते भागवत पुराण की कथा होती है पूरी के शंकराचार्य जी ये नहीं कहते जाओ भागवत पुराण का अध्ययन करो जाकर के अपने आप अध्ययन करो मगर फिर जो गुरुओं की गुरुओं के द्वारा जो बताए जा रहे सिद्धांत उसकी सीमा में रह के कर वही शास्त्र कह रहे हैं जिसका आप अर्थ बता रहे हो ब्रह्मवर्त पुराण स्कंद पुराण भागवत पुराण सब में गुरु की महिमा है तो तो जब आप उसकी किसी चीज का अर्थ बता रहे हो कि देखो कितना गंदा लिखा है तो दूसरी चीज का भी अर्थ बताओ ना कि इन शास्त्रों को गुरु के बिना नहीं पढ़ना है खत्म हो गया गुरु के पास जाओगे वो आपको आदि दैविक आदि भौतिक आध्यात्मिक अर्थ के साथ बताएगा
00:09:57:14 कि क्यों है यह लीला जैसे गोपियों के वस्त्र उठाना आपका एक क्लेम आता है गोपियों के वस्त्र उठाए भगवान श्री कृष्ण ने क्या निराकार ईश्वर जो है आर्य समाज का वह उन गोपियों को नगन अवस्था में नहीं देख रहा होता है वहां नहीं होता है वह देखने के लिए यह सारी बातें हैं हमारे अतिथि गण आ गए सबसे पहले जय श्री राम आपको पुनीत जी और रामानंद जय श्री राम इनका थोड़ा सा परिचय मैं बता दूं कि यह रामानंद संप्रदाय से हैं और फिर मेरे पास उतने शब्द नहीं है कि मैं सारी इनकी चीजें बता सकूं तो यह खुद ही बताएंगे तो बत ज्यादा अच्छा लगेगा बस मैं जो एक बात बोल रहा था उसको अंत कर दूं कि हमने उस वीडियो में वीर सेवों को बताया था कि तुम कैसे शिव भक्त हो जो अपने शिव के बारे में ऐसी बातें सुन लेते हो प्रदीप मिश्रा से नाक र नाक रगवाने वा वह राधा भक्त अब कहां है जो राधा जी के बारे में इतनी गंदी बातें होने पर भी चुप रह जाते हैं तो जब मैंने वहां पर य कहा था कि तुमसे कुछ नहीं होगा यह होगा तो इस पर जब प्रतिक्रिया स्वरूप जो वीडियो बनाया
00:11:13:08 गया समाज यों की तरफ से अलंकार वालों की तरफ से तो उसमें यह कहा गया कि भाई आप इसमें कहना क्या चाह रहे हैं वीर सेब लोगों से उनको क्या करना चाहिए क्या कहना चाह रहे हैं तो यह उनकी जो हमारा उसके बाद जो नेक्स्ट वीडियो आया उसमें हमने अपनी मंशा आपको प्रकट कर दी कि हम चाह रहे हैं कि जो भी व्यक्ति भगवान में आस्थान वित है भगवान के भगवत विग्रह में आस्थान वित है ब विष्णु महेश भगवती और गणेश में आस्थान वित है राम कृष्ण उनके जो अवतार उम आस्थान वित है वह नाम जप करना स्टार्ट करें तो हमने जो उसमें आवान किया था सबका वह सबसे पहले उ उनसे हमने अनुरोध किया कि आप नाम जप करना स्टार्ट करें प एक तो यह बात हो गई अ दूसरी बात इसी में लगा लगा एक व्यक्ति का एक क्वेश्चन आया कि महाराणा प्रताप क्या
00:12:28:16 महाराणा प्रताप क्या यूं ही युद्ध लड़े नाम जप करना चाहिए था मेरे भाई महाराणा प्रताप जब युद्ध करने जाते होंगे तो जाने से पहले जल का पान जल पान या फिर भोजन इत्यादि करते हैं कि नहीं करते हैं तो अगर हम यह कहे कि सबसे पहले आप भोजन कर लो युद्ध पर जाने से पहले सबसे पहले आप अस्त्र शस्त्र एकत्रित कर लो युद्ध पर जाने से पहले तो इसका अर्थ आप यह निकालेंगे कि वहां पर जब आप यह कह रहे होंगे कि महाराणा प्रताप को महाराणा प्रताप जी को या छत्रपति शिवाजी को अस्त्र शस्त्र उठा लेने चाहिए युद्ध पर जाने से पहले तो क्या आपसे काउंटर क्वेश्चन किया जाना उचित होगा कि अगर हथियार उठा लेने से ही काम चल जाता तो युद्ध लड़ने की क्या आवश्यकता थी छत्रपति शिवाजी ने अनावश्यक ही युद्ध लड़ा यह सब घटक है मेरे भाई क्रमिक क्रमिक अभिव्यक्ति है यह सब हमारे प्रयोजन की जब आपके अंदर नामा जब आप नाम जप का तप अपने अंदर निर्माण करेंगे भगवान की भगवत भक्ति का बल एकत्रित करेंगे तब आपको वो बल आएगा जब आप विप्लव की स्थितियों में अपने धर्म की रक्षा के लिए खड़े हो पाएंगे बस इतना ही बताऊंगा अब आगे हमारे जो अतिथि आए हैं आदरणीय
00:13:43:19 पुनीत जी तो आप सबसे पहले थोड़ा सा अपने बारे में और आपका जो एक बहुत ही दिव्य एक पुराना आपका वंशावली और आपका एक बैकग्राउंड है बहुत प्रभावशाली वह बताते हुए हमारे दर्शकों को अपना परिचय अवश्य दे जिससे कि वो जान पाए व जहां जो चीजें मैंने आपके बारे में जानी थी तो मैं तो मंत्रमुग्ध हो गया था उन सब चीजों को सुन कर के थोड़ा सा वह सब बताएं अपने बारे में दर्श श्रीराम सर्वप्रथम तो मैं क्षमा चाहूंगा मैं थोड़ा विलंब से आया आपके इस कार्यक्रम में उसके लिए सर्वप्रथम मैं क्षमा मांगता हूं और चंद्रमौलेश्वर भगवान को प्रणाम करते हुए मैं पुनीत पाठक और हमारे कोय सौभाग्य प्राप्त हुआ यह शरीर जो है ऐसे परिवार में जन्म लिया जहां पर पीढ़ियों से श्री राम कथा श्री राम के गुणगान से ही जीवन चला है हमारे प्र पितामह पंडित श्री राम गुलाम जी महाराज काशी के परम विद्वान थे श्रीमद भागवत के प्रकांड विद्वान थे उसके बाद उनके उसके बाद जो हमारे परदादा थे श्री राधेश्याम रामायणी जी उसके बाद जो हमारे पिता महा थे श्री गोस्वामी इंदु भूषण रामायणी जी मैं उनका उनके
00:14:59:08 सु पौत्र उनका कृपा पात्र हूं और उसी परंपरा में जो हमारी गुरु परंपरा है वह भी पुरी से ही संबंध है उसका भी हमारे जो दादा गुरुदेव थे परम पूज्य श्री महंत श्री गंगादास जी महाराज छोटा छता पुरी तो वह हमारी रामानंदी परंपरा है इस प्रकार से इस दास को सौभाग्य मिला कि भगवत सेवा और अपने श्री मुख से ये श्री राम के गुणगान को कर सके अपना जीवन चला सके क्या बात है बहुत अच्छी आपने और आपने हमें एक जगह और दिखाई थी कि आपके य कुछ प्राचीन गद्दी है गुरु गद्दी है शायद वहा जहा हम पहुंचे थे जहा आपका निवास है भगत कपा जिस समय भारत में अंग्रेजी शासन था शिवांग जी उस समय हमारे जो पितामह थे वह आंदोलन में थे ता संग्राम सेनानी थे तो वह अपनी जगह छोड़ कर के जहा उनका जन्म स्थान था वहां से वृंदावन आए वृंदावन में उन्होंने मानस मंदिर का निर्माण किया मानस मंदिर से अभिप्राय श्री रामचरित्र मानस का व 40 वर्ष अखंड पारायण हुआ
00:16:14:19 40 वर्ष अखंड पारायण अनवरत चला तो वहां पर व्यासपीठ है और उसी और व सौभाग्य से हमें जगह ऐसी प्राप्त हुई थी वो श्री ब्रह्मकुंड वृंदावन में एक जगह ब्रह्मकुंड जहां से भगवान श्री कृष्ण ने अपने गो वालो को वैकुंठ के दर्शन कराए थे स्नान करवा के ब्रह्मकुंड में तो वहीं पर श्री कर्माबाई की गुफा है जिसकी आप चर्चा कर रहे हैं वह गुफा वो उस घर की नीव में मतलब हमारा जो घर है उसकी नीव में वो गुफा अभी भी है और अभी भी व पूजा सेवा होती है विधिवत मैं तो इस समय भगवत कथा के लिए श्री राम कथा के लिए जलंधर में आया हुआ हूं अभी मैं आपसे जहां से जुड़ा हुआ हूं जलंधर शहर से जुड़ा हुआ हूं नहीं तो मैं अगर वृंदावन होता तो निश्चित आपको अभी समय और जितने भी लोग आपके संग आपका परिकर जुड़ा है उनको दर्शन करवाता जी जी जी नहीं नहीं मैं तो वहां पर जाकर के बड़ा मतलब थोड़ा धन्य मुझे अनुभव हुआ कि भगवत कृपा से उस जगह वहां वो ब्रह्म कुंड के दर्शन आपने कराए वहां से पूरे वृंदावन के आपने दर्शन कराए तो बहुत ही सौभाग्यशाली मुझे आप अगर भौतिक दृष्टि से देखा जाए तो मुझे आपसे थोड़ी जलस भी हुआ उस समय ईर्ष्या भी हुई कि आप कि आप इतने पावन जगह पर स्थित है स्थाई स्थाई रूप से हैं और
00:17:29:20 हम लोग यहां वहां पर फिर लगा के जहां पर भक्ति हो जाए भगवान की तो वहीं पर भगवान मिल जाते हैं फिर इस तरह से अपने हदय को संतोष दिया हृदय को के आप ऐसे करके मगर बहुत जितनी उपयोगिता शरीर में मुझे लगता है कि अचल अंगों के जैसे दिल है और हमारी बुद्धि है वो तो एक स्थिर है उनका तो काम लेकिन जैसे हमारे पैर है हाथ है उनकी आवश्यकता भी क्योंकि आप कितना भी बढ़िया सोच ले कितने भी अच्छे विचार रख ले जब तक वो विचार जो है प्रसारित नहीं होंगे आप के माध्यम से जिस तरह का आप मैं वास्तव में आपके कार्य की सराहना करता हूं कि मतलब एक योद्धा जो होता है सनातन धर्म को इस समय योद्धाओं की बहुत आवश्यकता है नितांत आवश्यकता है क् जिस दिशा में हमारा अभी आप मैं तो थोड़ा लेट जुड़ा आपसे आप जो चर्चा कर रहे थे मैं श्रवण कर रहा था कि यह गल उनकी नहीं है जो प्रश्न कर रहे हैं उनका ब्रेन पूरी तरह से वश कर दिया गया है वो सवाल ही ऐसा कर रहे अरे भाई महाराणा प्रताप अभी आप चर्चा कर रहे थे श्री महाराणा प्रताप के इष्टदेव हैं भगवान शंकर चित्तौड़ के किले में
00:18:44:26 उनका उनकी जो स्थापना है एकलिंग महादेव के नाम से है और एकलिंग के परम भक्त थे श्री महाराणा प्रताप बिना उनकी सेवा की है वो अपना दिनचर्या शुरू ही नहीं करते थे आप आज भी जाकर के चितौड़ दुर्ग में दर्शन कर सकते हैं एकलिंग महादेव वहां विराजमान है जी जी जी जी तो कहने का अभिप्राय यह है कि यह प्रश्न क्यों उठ रहे हैं क्योंकि और हमसे क्यों उठ रहे हैं देखिए जब तक घाव दबा हुआ है दबा हुआ है बीमारी दबी हुई है दबी हुई है लेकिन जब उस पर कोई कुरेता है ना तो वो बीमारी उठती है उफनती है बाहर आती है वो जखम बाहर आता है तो ये गलती उनकी नहीं है ये गलती तो किसी ने बड़ा घनघोर षड्यंत्र करके के और जैसे हमारे परम पूज्य आचार्य परम पूज्य गुरुदेव श्रीमद जगतगुरु शंकराचार्य भगवान श्री पूरी पीठाधीश्वर जो है आपको शायद विधित हो एक बार उनके खिलाफ षड्यंत्र किया गया था महाराज श्री को विष देने की कोशिश की गई थी जी जी जी और तब से आप देखते होंगे महाराज श्री अपने संग एक तामे का पात्र में जल हमेशा और बारबार उसको क्योंकि उनकी षडयंत्र किया गया था क्यों भाई क्यों ऐसा द्वेष है क्या क्या पीड़ा
00:20:00:28 है तो आप जैसे जो क्रांतिकारी मैं तो आपको संत मानूंगा क्रांतिकारी जहां पर वशिष्ट की उपयोगिता है हमारे शास्त्रों में हमारे पुराणों में जहा वशिष्ठ गुरुदेव की उपयोगिता है वही विश्वामित्र की भी उपयोगिता है कि एक एक ऐसा अस्त्र है परमाणु अस्त्र जो विध्वंस कर सकता है वही अगस्त ऋषि की भी उपयोगिता है जो तीन अंजलि में केशवा नमो नारायण नमो माधवा नमो करके समुद्र सुखा दे तो दोनों की ज्ञान से भी भक्ति योग भी है ज्ञान योग भी और कर्म योग भी है तो तीनों चाहिए तब जाकर के जो है जो जो संस्कृति है हमारी सभ्यता है व पुष्ट होती है जी जी जी आपने जैसे अभी आभार आपका अने जो कहा आपने जैसे जो अभी गुरुदेव का जो जीवन के बारे में बताया हमें गुरुदेव का जीवन जो जीवन के बारे में उतना डेप्थ में नहीं पता है जितना आपको पता है उसका कारण मैं चाहूंगा कि एक बार थोड़ा सा बताएं दर्शकों को वैसे तो पूज्य महाराज श्री के दर्शन का सौभाग्य मुझे एक बार उनका चतुर्मास वृंदावन में चल रहा था तब हुआ था उसके बाद उनके अति निकट एक उनके परम शिष्य
00:21:16:01 हैं श्री भारत भूषण पांडे जी वो आरा के हैं तो उनसे मेरी एक बार उनके संग मैंने बिहार के बेगूसराय जिले में कथा करी थी तो तब से उनसे अत्यंत प्रेम हो गया तब उन्होंने मुझे ये चर्चाएं बताई थी कि इस इस प्रकार की घटना है और हमारा ऐसे भी जुड़ाव है कि वर्तमान जो पीठाधीश्वर है पुरी के उनके जो परमाचार्य थे पूर्वा चार्य थे श्रीमद जगतगुरु शंकराचार्य पाद भगवान श्री निरंजन देव तीर्थ जी महाराज जी उनके संग हमारे पितामह जो है एक बार उनकी दोनों की कथा आरा में एक जगह बड़ी मठिया तो बड़ी मठिया में पूज्य महाराज श्री शंकराचार्य भगवान भी आते थे और हमारे दादाजी भी जाते थे वहां दोनों की कथाएं होती थी तो इस प्रकार से अत्यंत सन्निकट प्रेम है उनसे अच्छा अच्छा और कुछ करपात्री जी महाराज के साथ भी आपका कुछ वो रहा है जुड़ाव ऐसा कुछ मेरा तो खैर जन्म भी नहीं था उस समय का मेरी आयु मात्र 26 वर्ष है लेकिन हमारे जो पितामह थे परम पूज्य श्री गोस्वामी इंदु भूषण रामायणी जी महाराज उनकी गीता प्रेस गोरखपुर में हनुमान प्रसाद पोदार जी ने वो कराई थी कथा तब पूज्य महाराज श्री धर्म सम्राट स्वामी कृपा प्री स्वामी जी
00:22:31:03 महाराज वहां उपस्थित थे उस समय हमारे पिता मा ने एक हनुमान चालीसा पर भाष्य लिखा था तो उस पर पूज्य महाराज श्री ने वक्तव्य दिया था कि जिसके घर में पुराण आदि शास्त्र ना भी हो लेकिन यह हनुमान चालीसा भाष्य हो तो भी उसके घर में मंगलमय मंगल होगा उसका घर स्वर्ग होगा क्योंकि ये बहुत अलौकिक ग्रंथ उन्होंने लिखा था हनुमान चालीसा प उससे पहले कोई भाष्य था ही नहीं अच्छा अच्छा अच्छा भाष्य अभी भी उपलब्ध है हनुमान चालीसा पर हा भाष पतिया उपलब्ध है और हमारा जो हमारा जो हमारी जो टीम है मानस मंदिर के द्वारा राम कथा सत्संग मंडल के द्वारा उसके द्वारा हम उसको पुनः रिप्रिंट करवा रहे हैं ताकि सबको जनमानस को व सुलभ हो जाए जी जी बिल्कुल आप हमें बताइएगा तो हम भी यहां से प्रचारित प्रसारित उसको करना चाहेंगे जो हनुमान जरूर जरूर जरूर बारबार आपकी इसलिए प्रशंसा करना चाहूंगा कि देखिए बात पता है क्या है यह है कि जिस चीज को हमने जाना नहीं है जिस चीज को हमने जाना नहीं है उस चीज के प्रति हमारा खिंचाव नहीं होगा और जिस चीज के प्रति हमारा खिंचाव नहीं हो रहा है ना
00:23:46:04 उससे सहज प्रेम नहीं होगा और जिससे प्रेम नहीं होगा ना उसके मर्म को हम कभी नहीं जान पाएंगे और जिसका मर्म हम कभी नहीं जान पाएंगे ना उसके प्रति ऐसी उल्टी पुल्टी बातें करेंगे ये है जैसे धर्म तत्वम नीतम गुया महा जनो यन गत स पं ये जो वेदा शास्त्रों के तत्व है ना ये कूट है ये सं भ्रमित करने वाले हैं जी जी और मैं तो कहता हूं ये उल्टे पल्टे जो अर्थ होते हैं और जो ये जो होता है ना इसको देख कर के मेरे को ऐसा प्रतीत होता है कभी कभी व्यास जी महाराज जो खुश होते होंगे बोले अच्छा है भाग गया स नहीं आया रामचरित मानस में एक चौपाई लिखी आवत यही सर अति कठिनाई जो राम चरित है राम का चरित्र है पुराण आदि है वेदा शास्त्रों का जो परम सरोवर है आवत यही सर अति कठिनाई वहां पहुंचने में बहुत कठिनाई है आ ही नहीं सकता कैसे आ सकता है राम कृपा बिनु आव ना जाई बिना राम की कृपा के कोई आ ही नहीं सकता तो राम की कृपा कैसे होती है राम जिस पर कृपा करेंगे उसको सबसे पहले किसी सद गुरु
00:25:01:08 से मिलवा जाएंगे ध्रुव जी ने संकल्प किया हमारे शास्त्रों में कथा है पुराणों में कता है ध्रुव जी ने संकल्प किया ध्रुव जी ने क्या नारद जी को इन्विटेशन भेजा था भाई तुम आओ मुझे दीक्षा दो नहीं उन्होंने बस संकल्प किया कि मुझे भगवत प्राप्ति करनी है सदगुरु खुद मिल गए जी खुद मिल गए तो कहने का अभिप्राय आप जो अभी बात कर रहे थे पुराणों की जो भाषा है ना वो जन साधारण नहीं समझ सकते हैं जी जी कैसे कैसे आप आप कुछ क रहे हा इसमें क्या है कि मतलब मैं यह सोचता हूं कि व्यक्ति इतना पक्षपाती और अन्याय शष्ण कैसे हो जाता है भाई जो उन्होंने वेद के अर्थ लिखे हैं उसके नीचे से उनका भाष्य उनकी कमेंट्री हटा दो उनके वेद के भाष्य वेदों के भाष्य में आपको मिल जाएगा वेदों के भाष में आपको वैसे ही तत्व मिल जाएंगे वेदों के अर्थ में वैसे ही तत्व मिल जाएंगे जैसे जिन तत्वों का विरोध कर रहे हैं निंदा कर रहे हैं पुराण की है ना अब क्या किया इन्होंने वहां पर जी जी हां जी हा बोलिए यहां पर वेदों में इस तरह की बात आई तो इन्होंने अब क्योंकि वेद के अलावा फिर
00:26:16:08 कहां जाएंगे वेद के बाद कौन सा विकल्प रह जाएगा स्वयं को सनातनी कहने के लिए तो कोई भी उनका मंतव्य र हो मगर वेद की रक्षा के लिए उन्होंने क्या किया कि जहां पर इस तरह की बातें आई है वहां पर भाव अपने हिसाब से वो कुछ भी अलंकार के नाम पर कुछ भी करके वहां पर तो इन्होंने कोशिश की कि हम इसके इस अर्थ को बदल दे और सही अर्थ लोगों को बता द अपने मन मुताबिक बता दे मगर जब पुराणों में वैसी बातें आ रही है तो अगर आप उसका भाष्य करने में इंटरेस्टेड नहीं है तो कम से कम दुष्प्रचार तो नहीं करना चाहिए अपमान तो नहीं करना चाहिए दुष्प्रचार क्यों कर रहे हो उसका भी भाष्य कर दो जैसे आपने वेदों का अपने मन मुताबिक भाष्य कर दिया और फिर प्रचार करो उसका मगर वहां पर केवल अर्थ लेकर के प्रचार कर कर दिया ये जो ग्रंथ है ये पुराण दिग दर्शन पंडित माधवाचार्य शास्त्री जी का इसमें इन्होंने प्रमाण के साथ सारी कहानी बताई है कि वेद में भी कहां कहा दयानंद श ऋषि जो दयानंद है उनके भाष्य में भी उनके अर्थों में भी कहां-कहां पर ऐसी ही अगर यह उसको अश्लीलता कहते हैं पुराण आदि के कुछ जो अंश है उनको अश्लीलता कहते हैं तो यही तत्व इनके वेद भाष्य में भी उपलब्ध है मगर उस पर ये बात नहीं करेंगे अब वहां पर
00:27:31:09 क्या है कि बात नहीं करेंगे हां वहां पर क्या है जब हम इनके इ इन तत्वों प उठाएंगे हम जब इनके इन त एक बस पूरी कर लो अपनी बात जब हम इनके इन प्रकरणों पर बात करेंगे तो ये कहेंगे तुम समझे नहीं अरे तो भैया वही तो हम कह रहे हैं कि आप समझे नहीं आप समझो ना आप चाहते हो कि आपकी चीजों को हम आपके पास आकर समझे तो आप यह क्यों नहीं चाहते हो कि जो हमारी चीजें हैं जिन पर आप उंगली उठा रहे हो आप हमारे पास आके समझो वो अपने आप वही की वही अच्छा वो चीजें कह रही है कि अगर मनुष्य बिना गुरु के इनका अध्ययन करेगा तो उसकी मति भ्रष्ट हो जाएगी क्यों कर रहे हो बिना गुरु के अध्ययन मत करो जाओ आप भगवत भागवत इत्यादि का पाठ कराने वाले जो सामर्थ वान गुरु हैं उनके पास जाओ देखो अभी दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा तो ये उनकी तरफ से आता है जी
00:28:29:16 मैं बताता हमारे दादा एक बात बोलते थे यह कहते थे जैसे कभी व्यक्ति गरिष्ठ भोजन कर लेता है ना जी पिस्ते की खीर खा लेता है मेवे मेवे की खीर खा लेता है तो क्या होता है उसके पेट में अपच हो जाता है जा डाइजेशन हो जाता है उसी तरह से वेद शास्त्र का जो ज्ञान है वो गाढ़ा है गुण है गाढ़ है जी हैवी है बिना गुरु के उसको अध्ययन किए हुए उसके अर्थों को अर्थ से काम नहीं चलता अर्थ तो यह भी हो जाएगा मैं बहुत सरल उदाहरण किसी शास्त्र किसी पुराण का उदाहरण नहीं दे रहा एक रामचरित मानस की एक चौपाई का उदाहरण दे रहा हूं प्रात काल उठ के रघुनाथा मात पिता गुरु ना वही माथा तो सरल अर्थ क्या है गीता प्रेस गोरखपुर ने जो अर्थ लिखा उसके हिसाब से क्या अर्थ होगा प्रात काल उट के रघुनाथा मात पिता गुरु ना महि माथा मतलब माता पिता और गुरु को भगवान राम प्रणाम करते थे यही अर्थ की आज वर्तमान में आवश्यकता है कि हर नौजवान
00:29:45:01 हर लड़का अपने माता पिता और गुरु के आगे झुके अब एक जैसा कोई खुरा आती हो तो वो क्या करेगा बोले नहीं नहीं नहीं प्रातकाल उठ के रघुनाथा मात पिता गुरु नाव माथा माता पिता और गुरु तीनों जाकर के रघुनाथ को प्रणाम करते थे क्योंकि तीनों जानते थे ये भगवान है अर्थ यह भी है लेकिन इस अर्थ की उपयोगिता नहीं है आज इस पर मुझे एक बात याद आई ये चाल शोभराज था पता नहीं नेटवर लाल था उसके बारे में एक बात याद आई उसने कभी ऐसा को किस्सा सुनाया गया वो मन गणन है काल्पनिक है क्या है बचपन में किसी अपने अग्रज से सुनी थी ये कहानी कि उसने कहा कि मैं जी जी मैं जो है इतनी फलानी फलानी तारीख को यहां से भाग जाऊंगा जेल से उसने य चैलेंज कर दिया जेल प्रशासन को तो जेल प्रशासन ने क्या किया कि सतर्कता को बढ़ाने के लिए उसने एक पर्ची लिखवा दी रोको मत जाने दो रोको मत जाने दो मगर उन्होंने अपनी शैली में लिखवा दी उसमें कौमा वगैरह उन्होंने नहीं लगवाया और सीधे उन्होंने लिखवा दिया हालांकि हमारे जो धर्म ग्रंथ रचे जाते हैं वो तो बिल्कुल
00:31:00:07 जो शास्त्रोक्त भाषा होती है उसमें रचे जाते हैं वो हमारी अल्पज्ञ होती है कि जैसे जैसे युग बदलता जाता है हमारी प्रज्ञा शक्ति घटती जाती है तो हमें सामर्थ मान गुरु चाहिए होते हैं यथावत उनको जानने के लिए मगर उसने वहां पर ये गलती की कि उसने कोई कोमा नहीं लगाया तो सबके हाथ में जो पर्ची गई तो लोगों ने यह समझ लिया वहां के जो प्रशासन में थे पुलिस पुलिस वाले सुरक्षा कर्मचारी उन्होंने यह समझ लिया रोको मत जाने की ज मत जाने दो की जगह रोको मत जाने दो वो नटवरलाल जो जाना चाहता था वहां उस पर्ची का मतलब उन्होंने यह समझ लिया कि रोको मत जाने दो अर्थ था रोको मत जाने दो और उन्होंने समझ लिया रोको मत जाने दो ठीक उल्टा तो जब वो उसको भागना था हां तो जब उसको भागना था तो उसको कोई रोक ही नहीं रहा जा रहा है क्योंकि ऊपर से आदेश आया है तो इसी प्रकार से हां इसी प्रकार से यह लोग अर्थ करते हैं अपने हिसाब से जहां पर इनको विद्रोह करना है परंपरा प्राप्त सिद्धांतों का तो वहां अपने हिसाब से अर्थ कर देते हैं और फिर कहते हैं देखो देखो यहां तो यह लिखा है यहां राधा जी के बारे में यह लिखा है यहां कृष्ण को इतना बुरा दिखाया जा रहा है
00:32:15:16 ऐसे शास्त्रों को पढ़ेंगे हम ऐसे शिव को पढ़ेंगे हम हम तो शिव को देवता मानते हैं यह है वो है तो यह सारी चीजें हैं यदि किसी शास्त्र का आलंबन ले भी रहे तो पूरा लो उसी शास्त्र में लिखा है गुरु के बारे में उन्हीं शास्त्रों में उन्ही 18 महा पुराणों में जगह जगह गुरु तत्व की बात है गुरु तत्व के ही बारे में हर लगभग हर पुराण में बात चल रही है गुरु के बारे और जो गुरु गीता मैं आपको एक लोक से बता देता हूं आपको हर पुराण में दर्शन होंगे उ लोक के नारायणम नमस्कृत्य नरम चव नरोत्तम देवी सरस्वती व्यास तो जय मुर अब इसमें करता कौन है
00:32:59:25 क्योंकि नारायण नारायण नमस्कृत्य नरम चैव नरोत्तम देवी सरस्वति व्यास य ग्रंथ ही ततो जय अहम मुरे ग्रंथ कह रहा है यह ध्यान दीजिएगा लोक में ततो जय अ मु ग्रंथ स्वयं कह रहा है मैं वंदना कर रहा हूं किसकी बोले नारायण की नारायण का ही चरित्र सारे ग्रंथों का है नारायण नमस्कृत्य नरम चव नरोत्तम नर नारायण भक्त और भगवान चरित्र हर ग्रंथ में है देवी सरस्वती देवी यानी शक्ति आदि शक्ति के बगैर भगवान अवतार ले नहीं सकते और लीला के लिए सहायक चाहिए यथा श्रीमद् भागवत का य श्लोक है भगवान प्रता रात्री शरद उत्पन्न मल्लिका वि मन चक्र योग मायाम उपा योग माया को आश्रय लेकर के ही भगवान अवतार लेते हैं तो शक्ति की उपासना देवी फिर सरस्वति सरस्वती वाणी देती है देवी सरस्वती व्यास व्यास विस्तार करते हैं त जय हम मुद रहे तो बिना इनके साधन तो हो जाएगा सिद्ध नहीं होगा जी ये एक बार मैं कहूंगा थोड़ा सा आप ना लीव करके एक बार दोबारा आ जाइए क्योंकि आपका वीडियो रुक रुक कर चल रहा है
00:34:15:20 ओके एक बार लीव करके आ जाइए दोबारा तो बड़ी ही मधुर चर्चा चल रही है और विभिन्न विषयों पर प्रकाश डाल रहे हैं पुनीत जी बहुत ही अच्छे वक्ता भी है और साथ ही साथ अपने जो वंश है जो घर परिवार है उससे बहुत ही जो वैदिक वांगम है और शास्त्र सम्मत संविधान है उससे बहुत ही पुष्ट परिवार से बिलोंग करते हैं जो कि उनकी वाणी से दिख भी रहा है
00:34:58:22 आ गए हैं पुनीत जी जीटू जी महाराज आ गया हा जी अब अच्छा आ रहा है तो अब मैं थोड़ा सा चर्चा को थोड़ा आगे दिशा में बढ़ाना चाहूंगा एक चीज आती है कि जैसे आपने जो है एक समर्थन प्रकट किया एक एकता प्रकट की जो शंकराचार्य हैं पुरी के शंकराचार्य जी कपाती जी के प्रति आस्था और प्रकट की और ये अ सबसे पहले मैं एक चीज क्लियर करना चाहूंगा कि मतलब आपको भी वैष्णव ही कहा जाता है ना रामानंद संप्रदाय को वैष्णव में ही आता है रामानंद संप्रदाय है ना तो तो जब वैष्णव में आता है तो एक प्रचार किया जाता है कि शंकराचार्य तो मायावादी हैं या वह माया से ग्रसित है यह इस तरह का दुष्प्रचार किया जाता है हालांकि हमने कई अच्छे संतों से इसका निराकरण सुना है थोड़ा सा इस विषय में आपसे मैं सुनना चाहूंगा कि शंकराचार्य जो मायावादी है सब आक्षेप लगाया जाता है उनसे थोड़ा सा लोगों के मन में वैमनस्यता डालने के लिए तो इस विषय पर आप क्या कहना चाहेंगे कि क्या जो तुलसीदास जी महाराज है उन्होंने जो कहा कि देह दृष्टि से मैं आपका सेवक हूं और पद की दृष्टि से आप
00:36:13:25 मेरे स्वामी मैं आपका सेवक हूं और यह थोड़ी सी इस व्याख्या इससे जोड़ते हुए थोड़ा सा हमें प्रकाश डाले माया ये जो माया का एक वो चलता है एक नैरेटिव हालांकि कुछ पिछले कुछ दशकों में ज्यादा चलाया गया वो आप बताए हम एक बात कते सबसे बड़े यह तो प्रचलित बात है सबसे बड़े जो वैष्णव है वैष्णवास्त्र [संगीत]
00:36:58:06 वैष्णवास्त्र [संगीत] कामदेवाय नम ठाय नम करते ना पाठ कौन है भगवान राम के आचार्य जी शंकराचार्य भगवान कौन है स्वयं भगवान शंकर जी प्रथक नहीं किया आचार्य गुरु और गोविंद को पथक नहीं किया हैक है त एक है तो जी भगवत शंकराचार्य भगवान जो है वह स्वयं साक्षात शिवा अवतार है और ब से लेकर नारायण समारंभा शंकराचार्य मध्यमाम से लेकर आज पर्यंत जितने शंकराचार्य आसीन हुए हैं पद पर वो सब भगवान शंकर के ही अवतार है भेद नहीं है उ वो एक ही है जी ठीक ये तो बात हो गई अब
00:38:13:19 जो यह कहा जाता है कि शंकराचार्य तो मायावादी कैसे हुए मैं पहले ये पूछना चाहूंगा फिर मायावादी कैसे हुए यदि भगवान शंकर भगवान शंकर मायावादी नहीं है भगवान शंकर माया से परे है त्रिगुणा तीत है सदा सच्चिदानंद माया प विजय दिलाने वाले माया प विजय दिलाने वाले हैं माया पर विजय दिलाने वाले माया पर विजय दिलाने वाले क्योंकि भगवान ने ये कहा भगवान ने ये कहा गीता में दैवी हेशा
00:38:46:24 गुणमककुम नहीं है पुरुष की माया कम नहीं है पुरुष के ऊपर एक माया होती है वो स्त्रीय माया त्रिया चरित्र जी स्त्री की माया स्त्री के ऊपर माया होती है आसुरी माया यंत्र मंत्र तंत्र की माया आसुरी माया के ऊपर होती है दव माया और दव माया के ऊपर तब भगवान ने कहा देवी हेशा गुमई मम माया दुर य सब मेरी माया के अंडर आती है यह किसी को भी मोहित कर सकती सबको मोहित किया नारद को मोहित किया सबको मोहित किया पर भगवान शंकर एकमात्र ऐसे भक्त है कि भगवान की माया से अच्छी तरह से परिचित है जी अच्छी तरह से परिचित तभी तो उन्होंने यह कहा कि होई है सोई जो राम रच राखा को करि तर्क बढ़ाव शाखा राम कीन चाहि सोई होई राम जो कहेंगे वही होगा इसका मतलब माया से परिचित है तो माया से भगवान शंकर मायावादी नहीं है माया से परे हैं माया तीत है त्रिगुणा तीत है इनको माया के चक्कर में नहीं फसा सकता कोई उसी प्रकार से मैंने अभी बोला भगवान शंकर में और भगवान शंकराचार्य
00:40:01:28 में जो भेद करता है वो फिर व फिर मू मती है नहीं नहीं भेद नहीं करते आरोप एक आरोप लगाया जाता है कि पद्म पुराण में कहीं पर जिसको कुछ वैष्णवास्त्र दे रहे हैं कि आप जाकर के ऐसे शास्त्रों का निर्माण करो जिससे कि जिसे पढ़ के लोग वेदों से थोड़ा मतलब जो बौद्ध बौद्ध और बौद्ध से मिलता जुलता जो है माया वाला दर्शन आप उसका वो करो माया वाला अ शास्त्रम आपने सुना हो तो इसका स्कोन नामक संस्था की ओर से बहुत प्रचार किया जाता है उनके प्रति द्वेष भरने के लिए शंकराचार्य के मत को ना मानने के लिए तो मैं ये जानना चाहता हूं क्या तुलसीदास जी यहां गुरुदेव क्या है कि लोगों को ने को कहते हैं रामचरित मानस और एक तरफ दिखाया जाता है कि आदि शंकराचार्य और वैष्णव बहुत दूर आपस में और यहां गुरुदेव तुलसीदास जी का ग्रंथ पढ़ने को कहते हैं तो यह कैसे मायावादी है जो एक वैष्णव के ग्रंथ को पढ़ने को कह रहे हैं पहली बात दूसरी बात जी मैं एक
00:41:18:06 बलक शप तो कहीं भी घुस सकती क्या चीज क्या कहा आपने काली भेड़ जो होती है ना वो तो ब्लक शीप जो होती है ना काली भेड़ वो कहीं भी घुस सकती है वैष्णवास्त्र ही नहीं है हरि हर ऐक्य है दोनों में ऐक्य है स्थापित किया गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज ने सेवक स्वामी सखा पीए सी के हित निरपद सब विधि तुलसी के गुरु मा महेश भवानी प्रण दन बंधु दिन दानी य तुलसीदास जी का वचन है जी और अगर राम मानस की क्रेडिबिलिटी पर प्रश्न चिन्ह लगेगा तो मैं पहले ही बोल दू गोस्वामी जी कहते नाना पुराण निगम समत यद रामायण नितम पचित जितनी अब तक रामायण कही गई उनका रेफरेंस है 18 पुराणों का रेफरेंस है शास्त्रों का रेफरेंस वेद का रेफरेंस हैल करोगे बताओ वो ल कह रहे हैं भक्त माल के सुमेरू भक्त माला के सुमेरू मणि माल के सुमेरू
00:42:33:09 श्री गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज कह रहे हैं कि शंकर विमुख भगत चह मोरी सो नार की मूढ़ मति थोरी जो शंकर के बगैर मेरी भक्ति प्राप्त करना चाह रहा है गोस्वामी जी के शब्दों में वो मूड मती है जी तो मतलब एक तरीके से दे देखा जाए तो कहीं पर भी तुलसीदास जी ने या इन्होंने खंडन नहीं किया है आदि शंकराचार्य जी के सिद्धांतों का बल्कि और परस्पर सहभागिता है तुलसीदास जी करही तुलसीदास जी ने तो पहले ही कह दिया तस क हो जस हर के प्रेरेटिनल
00:43:27:06 करके कहा है अंत में जब मैंने काशी में समर्पण किया है तब भगवान ने अपने दसत किए सत्यम शिवम सुंदरम और क्या बचता है जी जी तो इसका मतलब यह प्रचार करना गलत है जो एक वैष्णव एक वैमनस्यता फैलाने के लिए प्रचार किया जाता है कि वैष्णव में और शंकराचार्य जो आचार्य परंपरा है उसमें अंतर है यह गलत किया जाता है प्रचार मैं मैं तो एक बात कहूंगा आयम तुही युग धर्म
00:43:59:16 दूषण श्रीम भागवत का वचन है जी इस काल में तो यह हो नहीं नहीं था होना तभी तो तभी तो तभी तो वह तभी तो भविष्य को देखते हुए दूर्गा में दृष्टि को देखते हुए भगवत पाद आदि शंकराचार्य भगवान ने पहले ही सेना तैयार कर दी चवा आश्रम चवा आचार्य चार पीठ चार उस पर चार आचार्यों को नियुक्त किया गया क्यों किया है इसी दिन के लिए किया गया ये दिन आएगा य होगा हरित भूम त्रण संकुल समझ पई नहीं पंथ जिमी पाखंड के बाद ते गुप्त हो ही सद ग्रंथ जिस तरह बरसात में कुकुर मुत्ते हो जाते हैं मशरूम हो जाता है कुकुर मुत्ता उस प्रकार से कलयुग की बरसात में पाखंड की बरसात में पाखंडवाद इतना बढ़ जाएगा कि जैसे जो आपने क अध्ययन करते ही नहीं है तो गुप्त हो ही सद ग्रंथ सद ग्रंथों का हो जाएगा वो छुप जाएंगे उनका उनका जो तेज है वो हर किसी को नहीं दिखेगा क्योंकि अ अरे भैया मैं आपसे कहता लाइट का प्रकाश किसको दिखेगा जिसकी आंख में रोशनी होगी चम जो अंधा है उससे आप काहे उम्मीद कर रहे कि वो प्रकाश देख लेगा व अंधा है जी जी
00:45:14:21 जी इसमें इस विषय में गुरुदेव ल तुलसीदास जी का एक वचन उधत करते थे कहीं पर हनुमान जी से पूछा राम जी ने कि बताओ तुम्हारा हमारा क्या संबंध वो और जो हनुमान जी उन्होंने तीन तरीके से परिभाषित किया था अपना उनका संबंध कि देह दृष्टि से आप मेरे स्वामी है मैं आपका सेवक हूं यह वाला थोड़ा सा मैं आपसे सुनना चाह रहा था वो मैंने आपको बोली वो सेवक स्वामी सखा सीय पय के सीय पय माने श्री सीता के प्रिय यानी श्री राम के शंकर सेवक भी है दास भी है और तत्व की दृष्टि से देखें तो एक कही है आप
00:45:59:10 जी दास्ता की कहा की जिस समय शिव विवाह का प्रसंग आता है भगवान ने कहा बोले विवाह करो भगवान शंकर ने कहा हम विवाह विवाह नहीं करेंगे जब ते सती जाही तन त्यागा तब ते शिव मन अब तो केवल राम कथा योगी श्री राम जय राम जय जय राम विवाह विवाह कुछ नहीं तब भगवान शंकर को आदेश दिया भगवान ने नारायण ने जाही विवाह शैल जीी रामचरित का प्रसंग है कि जाके आप विवाह कीजिए तब भगवान यही कहते हैं सिर धरी आए करि तुम्हारा आपके वचन को मैं शिरोधार्य करता हूं दास्ता वहां प्रमाणित होती है फिर सेवक के बाद आते हैं स्वामी भगवान शंकर श्री राम के स्वामी भी है कैसे लिंग थाप विधिवत करी पूजा शिव समान प्रिय मोहि न दूजा भगवान श्री राम कहते हैं रामेश्वरम के तट पर वहां पर शिव की स्थापना करके भगवान ने श्री रामनाथ को शंकर को अपना नाथ माना अपना स्वामी माना जे रामेश्वर दर्शन करें जो इस रामेश्वर के दर्शन करेगा वो मेरे लोग को मेरी मेरे लोक को प्राप्त करेगा ते तनज मम लोक से राम जी का वचन राम जी कह रहे वहा पर अपना स्वामी माना और अपना सखा भी माना
00:47:15:02 मित्र भी माना कहने का अभिप्राय है श्री राम के सखा भी है श्री राम के स्वामी भी और श्री राम के सेवक भी तीनों है तीनों रिश्ते प्रमाण होते और तत्व कहीं पर यह भी कहा कि आप और मैं एक ही है तत्व कि आप और मैं भेद नहीं जी एक ही है जी यही कहा यही श्वर लंका कांड के प्रसंग मेंही कहा की लिंग थाप विधिवत कर पूजा शिव समान मोहिन जो दूजा शिव द्रोही मम भगत कहावा सोनर सपने मोहिन भावा जो शिव का द्रोही होकर के मेरी उपासना करेगा उसको सपने में भी स्वीकार नहीं कर सक जी क्यों क्यों बहुत अच्छा बड़ा प्रामाणिक ग्रंथ राम का भक्त वैष्णव होने की सबसे बड़ी पहचान ये है कि वो सबसे पहले शिव भक्त होगा भगवान शंकर ही भगवान श्री राम के भक्ति का अविष्का आशीर्वाद की देने की सामर्थ्य रखते हैं विद्या का आशीर्वाद गणपति देते हैं वाणी का आशीर्वाद सरस्वती देती है लेकिन भगवत भक्ति का जो आशीर्वाद है वो केवल भगवान शंकर ही दे सकते और कोई नहीं दे सकता जी राम रसायन
00:48:30:15 तुम्हरे पासा इसलिए तो हनुमान चालीसा में कहा ना राम रसायन तुम्हरे पास हनुमान जी कौन है शिवा उतार है जी राम रूपी भक्ति का जो रसायन है वो शिव के पास ही है भैया और किसी के पास नहीं है दे ही नहीं सकता कोई अमर कथा किसने सुनाई शिव जी ने सुनाई जी जी पार्वती को जो कथा सुनाई चाहे श्री भागवत की बोल लीजिए चाहे श्री राम कथा बोल लीजिए किसने सुनाई वहा श्रोता कौन है पार्वती जी है वक्ता कौन है आचार्य कौन है राम कथा के आदि आचार्य कौन भगवान शंकर जी तो मतलब रामानंद संप्रदाय जो कि वैष्णव है और तुलसीदास जी को बहुत बड़ा कलयुग में बहुत मान्य वैष्णव है प्रामाणिक आचार्य तो इनके अनुसार अगर देखें तो तत्व हरि और हर में भेद नहीं है दोनों ही पूर्ण परम ब्रम परमात्मा के रूप है बिल्कुल जी अब इसमें एक इसी क्रम में आगे और चलते हैं तो इसमें मैं कहूंगा जैसे आज य प्रचारित किया जा रहा है हालांकि जो प्रामाणिक
00:49:45:03 वैष्णवास्त्र जी जो ग्रंथ लिख कर के गए क्यों इत्यादि जिसमें की आर समाज से उन्होंने मुख्यतः लोहा लिया आर्य समाज के जो प्रासंगिक कथन उठते थे उसमें कुब्जा समागम धा जी के ऊपर जो आक्षेप और यह सब हालांकि भक्ति सुदा में भगवान के भक्ति सुदा में करपात्री जी ने लिखा राधा सुदा में लिखा उन्होंने तो माधवा जो प्रमाणिक वैष्णवास्त्र [प्रशंसा]
00:50:24:29 [संगीत] स्वयं को वैष्णव होने का दावा कर रही है उनको प्रामाणिक संप्रदाय कोई नहीं स्वीकार कर रहा वो कह रहे है कि हम वैष्णव है हालांकि अभी एक बात ये भी देखने में आ कि जो गड़िया वैष्णव संप्रदाय है उसके यहां पर अभी बंगाल में शंकराचार्य ये जो इस समय गौ ध्वज लेकर के निकले हैं जो अभ मुक्तेश्वर जी है जो शंकर परंपरा के ही सन्यासी आचार्य है जी जी तो वो जब अभी बंगाल में गए तो उनका स्वागत हुआ उनका चरण वंदना की चरण पूजन किया और उनका दिशा निर्देश भी लिया मुक्तेश्वर जी का वहां गौड़ी संप्रदाय वालों ने तो पहली बात तो यह अपने आप गड़िया भी कहते हैं इकोन वाले अब बात यह आती है कि जितने भी वैष्णव संप्रदाय है प्रामाणिक और इनकी बताई जाने वाली जो परंपरा भी है गुरु परंपरा इकोन की उसमें देखा जाए तो चैतन्य महाप्रभु जो है महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु वहां तक सारे आचार्य जो है ब्राह्मण थे जन्म से चैतन्य महाप्रभु के बाद शायद कुछ वहां कहां से बदल गया कि अब कोई भी आचार्य वहां पर लिख रहा है तो मैं ये जानना चाहता हूं कि रामानंद संप्रदाय का वर्ण व्यवस्था के बारे में क्या दृष्टिकोण है जन्म से कर्म से कैसे कैसे उसमें
00:51:40:03 क्या है नहीं रामानंद संप्रदाय में तो कबीर भी आते हैं कबीर ने भी रामानंद को गुरु माना था जी जी ठीक है ना जी जी ये भी बात है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है ना कि गधा घोड़ा तुम एक कर दोगे जी गधा घोड़ा एक कर दोगे ये थोड़ी मतलब हो जाएगा इसका जी ये मतलब मतलब कहने का ये है कि जिसकी जो व्यास गद्दी है उस पर क्या कर्म कोई किसी भी कुल में जन्म लिया हो वो क्या व्यास गद्दी पर जाके उस या वोह ब्राह्मण ही हो जब ब्राह्मण कुल से ही हो तभी व्यास गद्दी इत्यादि पर बैठे इस बारे में थोड़ाहे रामानंदाचार्य हो चाहे रामानुजाचार्य हो चाहे माधव गणेश्वरा आचार्य हो चाहे निंबार्काचार्य हो चाहे वो वल्लभाचार्य हो है ना जी कोई भी हो चाहे शंकर परंपरा से कोई हो विरक्त वैष्णव विप्र इसका क्या अर्थ लगाएगा विरक्त वैष्णव और विप्र वेद शास्त्र प्रभेद कुशल स विप्र यह संज्ञा है सॉरी विशेषण
00:52:55:06 है एडजेक्टिव है विप्र वेद शास्त्र प्रभेद वेदा शास्त्रों के प्रभेद को कुशलता से जानता हो स विप्र वो वेद शास्त्र का अध्ययन ही तब कर पाएगा जब उसके कंधे पर यज्ञ पवित होगा बिना नहीं कर सकता जी जी जी ब नहीं कर सकता अब अब इससे ज्यादा और क्या प्रमाण मांगेंगे होते समय विद्या वेधन शुरू होता है और यज पवित के समय ही डिसाइड हो जाता है उसने तो किसी को भी वही तो बोल रहा गधा घोड़ा सबको एक कर दिया
00:53:39:24 उन्होने जी सबको एक कर दिया चातु वण फिर भगवान क्यों चातु वण मया सटम ब्राह्मणन इसका क्या अर्थ करेंगे फिर एसन वाले उल्टा करते हैं उल्टा करते हैं कि इसमें जन्म की बात कहां की भगवान नहीं नहीं मैं तो वही कह रहा हूं ना जब व्यक्ति ज्यादा मेवे पिस्ते खीर खा लेता है तो उसकी पेट में अपच हो जाता है उसी तरह से जब व्यक्ति मीठा ठाला बैठा रहता है और बिना सदगुरु के अध्ययन करता है तो उसकी बुद्धि में अपच हो जाता है उसकी बुद्धि में अपच हो जाता है जी जी कैसे कर दोगे तुम हु टोल्ड यू किसने लाइसेंस दिया तु किस परंपरा के लाइसेंस दिया क्या तुम्हारे आदि आचार्य श्री चैतन्य महाप्रभु ने अर्थ किया ये उन्होंने महामंत्र को इसलिए आनो पूर्वी हमारे यहां भी परंपरा है श्रीमद शंकराचार्य पाद भगवान भी करते हैं पूर्वी आनो करके मंत्र क्यों मंत्र का दुरुपयोग नहीं हो इसलिए उन्होंने उपनिषद के महामंत्र को आनो पूर्वी करके हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम करके प्रचार प्रसारित किया तो अगर उनके
00:54:55:09 मन में ये अगर उनके मन में शास्त्र की मर्यादा का ख्याल नहीं होता तो वो पूर्वी आनो क्यों करते मंत्र को वो सीधे सधे प्र प्रसारित करते उसको पढ़ने से सब उसको पढ़ने से जब ब्राह्मण हो जाते हैं तो फिर उसको बदलने की क्या आवश्यकता थी ये ये एक वो है पॉइंट उन्होंने जो बदला उसको व इसीलिए बदला कि सब उसको पढ़ सके अगर उसको पढ़ने से ब्राह्मण अगर उसको पढ़ने से ब्राह्मण सिद्ध होता किसी का तो फिर उसको बदलने की आवश्यकता थोड़ी ना थी जो भी उसको पढ़ लेता ब्राह्मण हो जाता नहीं तो उन्होंने क मैं तो यह कह रहा हूं ना ले आओ कोई वाणी ले आओ कोई उनके ग्रंथ का चैतन्य का कोई प्रमाण उनके संग छ गोस्वामी आए थे उनका कोई प्रमाण क्या गोपाल भट्ट गोस्वामी जी की यज्ञ पवित्र था क्या गोपाल भट्ट गोस्वामी जी ब्राह्मण नहीं थे क्या रूप सनातन जी ब्राह्मण नहीं थे और ब्राह्मण नहीं थे जी जी जी जिस ग्रंथ को प्रमाण मानते थे श्री स्वामी का ग्रंथ था शंकराचार्य वो भी थे अपने समय के जिसको चैतन्य महाप्रभु प्रमाण मानते थे वो भी वर्ण को जन्म से ही मानते आए उनकी परंपरा में सब वर्ण को जन्म से माना तो ये तो सनम बेवफा
00:56:10:14 वाली बात हो गई ना जब ये अपनी अपनी आचार्य को अपनी आचार्य के रेफरेंस को नहीं माने तो इनसे क्या बहस की जाए क्या बात की जाए ये तो मन मुखी साधन है जिसके जो मन में आ रहा है अरे महाराज हमारे गुरुदेव एक बात कहते थे हमारे हमारे गुरुदेव दो बात है एक है आचार्य और एक है प्रचार हमारे यहां आचार्य हमारे यहां आचार्य है वल्लभाचार्य शंकराचार्य निबार काचार्य रामानुजाचार्य रामानंदाचार्य इनके क्या है प्रचार गीता पकड़ा देंगे हाथ में भाई बाटो प्रचार प्रचार है प्रचार हमेशा हमेशा प्रचार नकली स्तु का होता है आपने सूर्य का कभी प्रचार सुना है अखबार में टाइम होता है सूर्य का इतने बजे सूर्योदय हो होगा टाइम एंड टाइट वेट फर नून इसी के लिए नहीं रुकता आपने ये आपने बड़ा ये आपने बहुत गुढ अर्थ प्रकट कर दिया क्योंकि एक बार मैंने एक छोटा सा वीडियो बनाया था यह गुण अर्थ है बहुत इसमें क्या है मैंने बोला था कि मुझे इनकी तरफ से एक बात सुनाई
00:57:25:22 देती जी कि भाई हमने जो है 900 मंदिर बनाए हैं 900 मंदिर बनाए पूरे वर्ल्ड में अब बात होती मैंने फिर एक दिन सोचा कि 900 मंदिर बनाए ये बात क्या है ये फिर मैंने यह तत्व निकाला कि जो इकोन के टेंपल्स है वह हरि हर भेद करते हैं कि नहीं थर जो है वह छोटा है और कृष्ण को अल्लाह से जोड़ देते हैं उनकी उनका एक ग्रंथ है इसमें पहले ही पेज पर लिखा हुआ है आप शुरू करोगे सबसे पहले कृष्ण के बारे में बात हो रही है और यहां पर लिखा हुआ है अल्लाह बुद्ध बुद्ध यहोवा यानी बाइबल का ईश्वर राम दिख रहा है आपको यह सब एक है जी ये देखिए जी अल्लाह जी जी है ना बुद्ध हा बुद्ध यहोवा राम कृष्ण यह सब कृष्ण है ये सब एक है तो यह सब इनके मंदिरों में तो मैंने कहा कि अगर यह कृष्ण को अल्लाह के समान बताने वाले अगर पूरी दुनिया में 900
00:58:40:27 मंदिर हैं तो भगवत पद आरी शंकराचार्य आज हम देखते हैं कि हम जब कहीं पर भी सामान्य से शहरों में सड़क पर निकल जाए तो हमारे जो सामान्य मंदिर होते हैं उसमें हरि हर में भेद नहीं है वहां पर हरि भी है हर भी है मां भगवती भी है और बजरंग बली भी है सबकी पूजा बराबरी से होती है तो मैंने देखा कि कि अगर ऐसे मंदिरों को गिना जाए जहां पर भगवान को अल्लाह से नहीं जोड़ा जाता जहां पर हरि हर भेद नहीं होता है पांचों परमेश्वर को समान समझा जाता है तो ऐसे तो मेरे ख्याल से अनगिनत मंदिर निकल आएंगे अगर पूरी दुनिया में हम खोजें तो अनगिनत तो अब यहां पर दिक्कत क्या हुई है कि जो आदि शंकराचार्य जी के सिद्धांतों के आधार या जो हमारे प्रामाणिक आचार्य गण है अन्य जैसे आपने अभी नाम लिया इनके सिद्धांतों के आधार पर जब मंदिर बनता है तो वहां पर यह लोग प्रचार नहीं करते यह वल्लभाचार्य का मंदिर है यह शंकराचार्य का मंदिर है यह रामानंदाचार्य का मंदिर है यह प्रचार नहीं किया जाता वहा आचार्य होते हैं य आपने जोभी गुण अर्थ कहा और यह लोग जब मंदिर बनाते हैं तो वहां अपना तमगा लगा देते हैं किय स्कोन मंदिर है यह स्कोन मंदिर है तो क्या हुआ एक जगह प्रचार है
00:59:56:04 जी जी मैं वही कह रहा था बहुत गुण अर्थ आपने बताया जो स्वर्ण होता है असली जो सोना होता है उसका कहीं आपने प्रचार सुना है भा आवाज आपकी आवाज बहुत कम आ रही है ग्राम आज सोना इतने हज 10 ग्राम प्रचार तो ये मन होता है इमिटेशन माने आपकी आवाज कम आ रही है मैं कह रहा हूं प्रचार होता है हमेशा अली वस्तु का होता है आपने कभी असली स्वर्ण का सुना होगा अखबार में भाव होता है असली सोने का आज सोना इतने हजार रुप सोना इतने हजार रुप 10 ग्राम प्र नहीं होता प्रचार मद्रास के गोल्ड का होता है इमिटेशन है चमक नहीं उतरेगी इ तो कहने का अभिप्राय यह है कि समन्वय पूर्वक चिंतन करना पड़ेगा चाहे वैष्णवास्त्र
01:00:56:08 खंडन किया हो श मत का कहीं नहीं किया तो वाण मैं कह रहा हूं ब्रह्म तत्व को लेकर के जो थोड़ा बहुत डिफरेंस है भी मगर जो धर्म धर्म तत्व है उसको लेकर के तो सब लोग मतक है बिल्कुल कि वर्ण व्यवस्था जन्म से हो आचार्य व्यास ग पर वही बैठे सब स्वा स्वा कर्मणा का पालन करें ब्रह्म तत्व को लेकर के डिफरेंस मत अलग हो सकता है ना जिसने जैसा देखा वैसा अनुभूति करी वैसा लिखा ब तो निराकार है ब्रह्म तो निराकार है जल जो है निराकार है उसम नीला डालोगे तो नीला हो जाएगा पीला डालोगे तो पीला हो जाएगा जी तो निराकार हैकी तो बात ल लेकिन जो सिद्धांत है एकम सद बहुदा वदंती जो सिद्धांत है सिद्धांत जब तुम हमारी जो परंपरा है वो मंडन करने की है मंडन मिश्र को जीता था खंडन करने की नहीं है जैसे तुम जी किया किसी वस्तु का आज हमारे पूरी पीठ के शंकराचार्य महा भाग है क्यों नहीं बोलते वो क्यों नहीं बोलेंगे नहीं अगर उन्होंने बोल दिया तो इसको तो वेटेज मिल जाएगी ना जी मिल जाएगी ना फिर ये कोई फोकस में आ जाएगा
01:02:11:09 लाइम लाइट में आ जाएगा भैया ये कुछ है क्यों है ये भी बात है पर हा जरूरी है अपने लेवल पर इसका खंडन भी जरूरी है लेकिन हमारी जो परंपरा है वो खंडन की नहीं है मंडन की है जोड़ने की है इसलिए हमारे आचार्य ने किसी वैष्णव आचार्य ने शैव्य मत का कभी विरोध नहीं किया जी कहीं कहीं पर यह रखा है कि जो ईस्ट के प्रति जो अनन्य का होता है भाव उसको सुरक्षित रखने के लिए जो ईस्ट की महिमा तो गाई है ईस्ट की महिमा खूब गाई है मगर यह नहीं है कि वहां पर जो हरि की निंदा के रूप में जो हरि निंदा की व पाखंड है या उनको जो शिव शिव जी के जो भक्त है वह पाखंडी है शिव को भगवान मानने वाले पाखंडी है यह सब निंदा क्मक रवैया थोड़ा सा और अगर कहीं पर ग्रंथों के माध्यम से हो भी गया तो उसको प्रचार नहीं किया यह भी है कई ग्रंथों के रूप में अगर स्वीकार कर लिया तो उसका बहुत ज्यादा मैं आपको एक बात बताता हूं एक बात आपसे क्षमा चाहूंगा फिर मेरे को थोड़ा सा वि ना पड़ेगा
01:03:26:27 मैं आपको एक बात बताता हूं बात क्या है कि तीन तरह के लोग होते हैं तीन तरह के संसार में एक होते हैं विद्वान एक होते हैं विद्वान एक होते हैं विद्वान एक होते है साधक और एक होते हैं गृहस्थ गृहस्थ को व्यवहार चाहिए होता है विद्वानों को विचार चाहिए होता है और संतों को भाव चाहिए होता है ठीक संत भाव के भूखे हैं विद्वान विचार के भूखे हैं गृहस्थ व्यवहार के भूखे आपने देखा होगा दिवाली होली किसी तीज त्यौहार पर तुम्हारे घर पर नहीं आया तो हम भी तुम्हारे घर नहीं जाएंगे तो व्यवहार त है ये एकय ये
01:04:24:21 वैष्णवास्त्र तो मतलब तुम छोटे हम बड़े छोटे बड़े की बात ही कहां आती है जी ये है तो कहने का अभिप्राय यह है कि मैंने जैसा अभी कहा कि ये इसे युग प्रभाव मान सकते हैं या इसे काल का चक्र मान सकते हैं कि अब जैसे भगवान गिन रहे थे ना 99 की गिनती पूरी हो तो मैं सुदर्शन फेंकू शिशुपाल प तो शायद उसी का इंतजार है इसलिए शायद इन लोगों की चीजें क्योंकि जो चीज बड़ी तीव्रता से चढ़ती है व तीव्रता से उतरती हुई है यह मैंने अनुभव किया है इसलिए मैं एक सकारात्मक विचार के संग आपके इस कार्यक्रम से विदा लूंगा कि आपने जो यह अथक प्रयास किया है यह बहुत सरानी है हमारा किसी से विरोध नहीं है लेकिन कार्य करने की का कार्य करने की जो शैली है यह गलत है इसमें सुधार की आवश्यकता है तुम सुधर जाओ हमें क्या दिक्कत हमारा भी यही कहना है कि आप जो शोधन कर दीजिए तो हमें हम और आप साथ में मिलकर धर्म का प्रचार करें बहुत बहुत अच्छा लगा आपका ज्यादा समय हम नहीं लेंगे क्योंकि आप जो है आप व्यस्त है वहां पर और मैं अपेक्षा करूंगा ऐसी आशा करते
01:05:39:26 हुए कि एक बार जो है पुनः यहां पर आते रहे और ऐसे कुछ एक विद्वत चर्चा जो है आपसे हमें प्राप्त होती रहे और आने के लिए बहुत बहुत आभार आपका क्योंकि आपके रू में मुझे आपने आमंत्रित किया और इतना सम्मान प्राप्त हुआ स्नेह प्राप्त हुआ आप लोगों से और भगवत पाद शंकराचार्य कुछ चर्चाएं हुई तो मैं अपने को अपना आभारी मानता हूं आपका और ी के संग अपने शब्दों को और जरूर निश्चित ही शीघ्र अति शीघ्र पुनः मुलाकात होगी और फिर चर्चा भगवत चर्चा और हम आपकी वो जो हनुमान चालीसा का जो भाष्य जो पुनर प्रकाशित हो रहा है उसको भी आप ध्यान में रखिएगा कि जब जैसे ही प्रकाशित हो तो आप हमें बताइएगा तो जो हमारे दर्शक होंगे वो भी उनको भी हम बताएंगे है ना ठीक है फिर निश्चित रूप से जरूर समित करूंगा जी जी जी जय श्री राम जय श्री राम ज जय श्री
01:06:40:19 राम तो आशा करते हैं आप लोगों को चर्चा अच्छी लगी हो विद्वान थे और मैंने जैसा कि बताया कि इनका जो कुटुंब है वंश है वो पूरा पुष्ट है सनातन सिद्धांत से और त प्र धर्म से बहुत त मैं इनके यहां पर गया था तो वहां पर छोटी सी गौशाला भी थी वहां पीछे इनके निवास में ही इतना तो इनका मतलब जो निवास स्थान है पूरा दिव्य था एक तो वहीं पर एक व्यास गद्दी जो इनकी परंपरा की जो इनकी दादा की गद्दी थी और वहीं पर वो जो एक गुफा की बात बताई इन्होंने वहीं पर जो इनका घर है वो सटा हुआ है उस ब्रह्म कुंड से सटा हुआ इनका घर है तो सोचिए एक दिव्य दर्शन आपको इनके घर पर जाएंगे तो होते रहेंगे और ऐसी कृपा में फिर मैं जब वहां पहुंचा तो इन्होंने कहा कि भाई आप लोग क्या पीते हैं तो हमने कहा कि हम तो चायवा तो नहीं पीते हैं तो लोकाचार की दृष्टि से इन्होंने पूछा था जो प्रासंगिक होता है तो फिर इन्होंने कहा कि गौ माता का जो शुद्ध दूध है वो आप ले आइए तो हम जो ये आधुनिक नगरों में रहने वाले लोग हमको कहां ऐसा जो बहुमूल्य है तत्व वो कहां प्राप्त होता है तो हमने जट से हां कर दी फिर बढ़िया
01:07:55:24 गौ माता का जो बिल्कुल देसी गाय होती है उनका दूध आया तो व हमने प्राप्त किया फिर इनसे वहां पर थोड़ी बहुत चर्चा भी हुई और हमने इनकी जो अच्छा इनका कुछ और भी चीजें थी जैसे कपाती जी के साथ और भी इनके जो दादा है उनका कुछ संबंध है उसका विवरण है रहा है तो मैंने आपको कई बार बताया कि जो वैष्णवास्त्र पटक कर लेते हैं इस से पच गया था दूध तो
01:08:37:00 वैष्णवास्त्र जी का बहुत महिमा मंडन हुआ है भाई अगर मायावादी का भाष्य सुनते ही सर्वनाश होता है एक जगह आप इसका प्रचार कर रहे हो और आपके अनुसार शंकर संप्रदाय मायावादी है कपाती जी मायावादी तो वही आचार्य जिनके द्वारा आप ऐसा प्रचार कर रहे हो जिनके नाम पर वही आचार उस उनका जो है उनकी इतना महिमा मंडर कर रहे हैं कि व पूरे विश्व में एक उनके जैसा कोई विद्वान नहीं है दूसरा उनकी वाणी है सुनिए इवन प्रभुपाद जी ने स्कोन मंदिर के उद्घाटन में करपाती जी को आमंत्रित किया था और हमारे पास वो छाया प्रतियां है जिसमें कि खंडा सरस्वती जी वहां पहुंचे थे वृंदावन में हमारे पास वो फोटोज है तो जब प्रभुपाद जी अब जैसे वही वाली बात है कि प्रभुपाद जी इतने बड़े वैष्णव इतना बड़ा वैष्णव नाम प्रचार प्रसार करने वाले फिर उनके नाम से ही तुलसीदास जी के बारे में लिखा हुआ है कि वोह जो है प्योर वैष्णव नहीं थे वो मायावादी थे तो यह कुछ बातें फिर एक दूसरे को करती है कि यह प्रभुपाद जी के नाम
01:09:52:04 पर गलत प्रचार किया जा रहा है राज कल तक लिखा हुआ है कृष्ण भगवान के लिए वशिष्ठ जी के लिए रासकल लिखा हुआ है कि प्रभुपाद जी ने उनको रासकल कहा तो यह सब बातें मेरी हजम मेरे हजम नहीं होती कि प्रभुपाद जी ने जो है तुलसीदास जी को मायावादी कहते हुए निंदा की कपाती जी को रासकल का एक तरफ बढ़ाई कर रहे दूसरी तरफ रासकल का एक तरफ कृष्ण भगवान की भक्ति कर रहे हैं दूसरी तरफ रासकल का यह सब मुझे मतलब मैं इन बातों को नहीं स्वीकार करता कि प्रभुपाद जी ने सब कहा है यह ऐसा दिखाई पड़ता है कि उनके ना नाम से एक दुष्प्रचार किया जा रहा है अपने मंतव्य की सिद्धि के लिए तो ऐसा दिखाई देता है और बाकी
01:10:36:06 वैष्णवास्त्र में भूमिका लिख रहे हैं वैष्णवास्त्र की भूमिका लिख रहे हैं और वैष्णवास्त्र शंकराचार्य या करपात्री जी और करपात्री जी के बारे में बताते हुए वैष्णवास्त्र एक आपको अच्छा सा वक्तव्य प्राप्त होगा और उनके द्वारा भी देखिए कपाती जी का वर्णन आएगा तो कितनी मिठास और कितना महिमा गान होगा उनका और इसी प्रकार से जैसे अभी आपने इनको सुना रामानंदी तो वैष्णवास्त्र
01:11:55:10 करपात्री जी का बात आई तो उन्होंने कहा कुछ चीजें संप्रदाय से बिल्कुल अलग हट के होती है करपात्री जी की कुछ कुछ बात ही नहीं कही जा सकती इस तरह का उन्होंने यह सारी सामंजस्य हम लोग दिखाते रहेंगे आपको जो तात्विक कहीं कहीं पर भेद है सिद्धांतों में अंत में बिल्कुल जाकर के आखिर में वो ब्रह्म क्या है वो तात्विक भेद है ठीक है व तत्वों के नाम पर वो सिद्धांति मगर जो ब्रह्म में ये जो भेद आया मगर जो आचरण यानी कि धर्म है उसमें कोई बहुत बड़ा भेद नहीं आया वर्ण व्यवस्था या गायत्री मंत्र का जाप कौन करेगा कौन नहीं करेगा यह विधि विधान को लेकर के कोई भेद प्रामाणिक आचार्यों के रूप में नहीं आता इसलिए हम कहते हैं कि आप शंकर संप्रदाय से दीक्षा ल राम संप्रदाय से दीक्षा ले वल्लभाचार्य संप्रदाय से दीक्षा ल किसी भी प्रामाणिक संप्रदाय से दीक्षा ल जो सनातन का चोला ओ सनातन को अब्राम दिखाने की कोशिश कर रहे हैं अब्राम से वो जो अब्राम विचारधारा है वह सिद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं उनसे अपने आप को बचाए और हो सके तो कम से
01:13:10:13 कम उन बातों को ना माने जो बातें विवादास्पद है जो बातें प्रामाणिक आचार्य द्वारा स्वीकार नहीं की जा रही है उनको ना स्वीकार करें तो इन सब चीजों के साथ हम इसको जो है लाइव को पूरा करते हैं और जो है अच्छा रहा गौशाला में यज्ञ होना है नवंबर में चलिए शुद्ध दूध पिलाते हैं देसी गाय का जी बिल्कुल श्रेयस जी अवश्य शेश जी भी आपके साथ भी हम जाएंगे और दूध पिएंगे गौ माता का और भविष्य निकट भविष्य में ऐसा भी है जी अवनीश जी बहुत-बहुत आभार आपका समर्थन प्रकट करने के लिए पुनीत जी बहुत अच्छे वक्ता हैं थोड़ा सा नेट की प्रॉब्लम रही जो जिस कारण से आज कहीं कहीं पर वो आपको असुविधा दिख रही होगी मगर ऐसी प्रार्थना करते हैं कि अगली बार जब उनका वक्तव्य प्राप्त हो तो वह ऐसी जगह पर हो जहां पर धारा में उनकी बिल्कुल धारा प्रवाह उनका वक्तव्य सुनाई
01:14:18:01 दे राघवाचार्य जी जो रामन संप्रदाय के जो प्रामाणिक आचार्य हैं उनमें और जो पुरी के पुरी पीठ के जो गुरुदेव हैं उनके गुरु भाई हैं आचार्य राम शंकर शुक्ल जिनका अभी अभी रिसेंटली चालू हुआ है यू चैनल तो उनसे बहुत अच्छे संबंध है राघवाचार्य जी के और जो आचार्य राम शंकर शुक्ल है उनसे बहुत अच्छे संबंध है तो अभी वो कब होना है यह अभी निश्चित नहीं हुआ है पर बहुत जल्दी होगा हां भाई दूध आरडी से दूध का सेवन करेंगे अबकी बार बिल्कुल ठीक सभी को जय श्री राम अपना समय देने के लिए आभार नाम जप से जुड़िए धर्म के लिए कुछ भी करना है तो सबसे पहले नामा आस्त्र उठाइए उसके बाद फिर भगवान आपको दिशा निर्देश स्वयं देने लगेंगे कि आपको करना क्या है व स्वयं आपको दिशा निर्देश देंगे गुरु की शरणागति प्राप्त हो जाएगी और सार्वभौम सिद्धांत प्राप्त होंगे सभी का सभी का आभार सभी को जय श्री राम
01:15:27:06 यह ना मास्त्र का देख लीजिए ना मास्त्र अभियान चल रहा है जो लोग भी इस नाम जब ऑपरेशन से जुड़ना चाहते हैं वह हमें ट कर सकते हैं 74836 पर और इस पर ट करने पर आपको एक ऑटो जनरेट फॉर्म प्राप्त होगा उसको भर करके आप इस अभियान से जुड़ सकते जय श्री राम सर
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