⬜ Not used yet · 00:00:03:02 – 00:10:19:16 (10:16)
00:00:03:02 तो सभी को जय श्री राम और आज हमारे पास हैं दो विशेष अतिथि हमारे चैनल पर युगल किशोर शर्मा जी हैं रामानुजाचार्य परंपरा से श्री संप्रदाय से दीक्षित हैं और उसी मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं और भव्य शर्मा जी हैं यह भी ू चैनल के माध्यम से अपने ा इत्यादि के माध्यम से जो धर्म के प्रति जागरूकता है वो फैलाने का प्रयास करते हैं तो आप लोगों का बहुत-बहुत स्वागत है युगल किशोर जी आप बताएं अपने बारे में मेरा नाम ल किशोर शर्मा है देखिए आज जो है कल स्कोन की एक वीडियो आई थी जहां पर हमने लिखा था कि जो भगवत गीता वो जिस तरीके से अन्य व्यक्ति को जो जिसने मांस खाया हुआ और व कह रहा है कि मैंने मांसाहार किया हुआ है तो जो है मैं भगवत गीता को स्पर्श नहीं कर सकता व अपनी श्रद्धा को वहां पर व्यक्त कर रहा है किंतु वहां पर यह लोग क्या करते हैं कि हम जो है आप भगवत गीता ले लीजिए किंतु भगवत
00:01:18:07 गीता के अंदर एक विधि और निषेध का पालन करते हु हमारे वेदा दि शास्त्रों के अंदर कि हमको इस नियम का पालन करना है संध्या बंदन भी करना है तो उसके अंदर भी नियम आते हैं हर एक जब हम करते तो उसके अंदर नियम है जहां पर हम विधि की बात करते हैं वहां पर निषेध अपने आप लागू हो जाता है किंतु जहां पर हम विधि की बात नहीं करेंगे वहां पर निषेध भी लागू नहीं होता अब जैसे हम कहते हैं कि हरि नाम जपने में राम नाम जपने में कृष्ण नाम जपने में कोई विधि नहीं है तो जहां विधि नहीं है वहा निषेध भी नहीं है तो नहाते हुए भी हम हरि नाम को ज जप सकते हैं कोई भी का हम अशुद्ध अवस्था के अंदर भी हरि नाम को जप सकते हैं किंतु यदि हम विधि की बात करें संध्या वंदन आदि की बात करेंगे ग्रंथों के अवलोकन की बात करेंगे तो वहां पर पवित्रता चाहिए हमको गीता के अंदर स्पष्ट लिखा हुआ है दमते ना तपस ना भक्ता कदाचना ना चास श सवे वाचम इस प्रकार से भगवत गीता के अंदर लिखा है कि तप रहित व्यक्ति जो हो श्रद्धा से रहित जो व्यक्ति हो भक्ति से रहित जो व्यक्ति हो उसके समक्ष मेरे ज्ञान को प्रकट मत करो और भगवत गीता के अंदर एक और शब्द का प्रयोग हुआ है गुय त ममा माने कि मेरा जो भगवत गीता का
00:02:33:08 ज्ञान है वो अत्यंत गोपनीय है गुय है उसको छुपाओ किससे छुपाओ जो सत पात्र नहीं है 17 वा अध्याय भगवत गीता का पढ़ेंगे तो 17वी अध्याय के अंदर क्या बताया है कि हम यदि दान करते हैं तो दान के तीन भेद बताए हैं सात्विक दान राजसिक दान और तामसिक दान उसके अंदर बताया आदेश काले यद दनम दिय नपा अकारी यानी कि देश को देखो काल को देखो पात्र को देखो उसको देखते हुए ही हमको दान करना है यदि किसी व्यक्ति के अंदर प्रति उपकार की भावना करते हुए कोई व्यक्ति दान करता है तो वो राजसी दान है इसी प्रकार से जब हम दान के भेद तो य क्या कर रहे भगवत गीता का दान कर रहे हैं ना कहते हम दान कर रहे हैं तो दान क्या कर रहे भगवत गीता और भगवत गीता क्या कर रहे हैं की भगवान कृष्ण की वाणी है तो भगवान कृष्ण की वाणी का जितना हम प्रचार करेंगे अच्छा एक सबसे विचित्र बात ये है कि यदि हम इनसे प्रश्न करते हैं हमने इनसे कोई प्रश्न करा तो यदि इनके पास उसका उत्तर नहीं है तो यह कुछ अभद्र टिप्पणियां करने लग जाते हैं मेरी कल बात हुई थी एक व्यक्ति से जहां पर मैंने उससे कुछ प्रश्न रखे तो एक समय तक तो उसने अच्छी तरीके से बात
00:03:48:08 की ठीक है बाद में तुम मायावादी हो तुम अपने आप को नारायण समझते हो यह है वो है फिर क्या करने लगते हैं अच्छा अगर इनके सिद्धांतों के विरुद्ध चले गए तो आप मास खाते हो आप जो है वो चाय पीते हो आपसे चाय नहीं छोड़ी जाती आप मांस खाते हो आप प्याज लहसुन खाते हो आप संप्रदाय हीन हो आपको मेरे बारे में कोई जानकारी नहीं है क्योंकि मैंने आपके केवल इनसे प्रश्न कर देने पर ही ये सिद्ध हो जाता है कि आप आपके सारे क्योंकि मैं आपके विरुद्ध जा रहा हूं तो क्योंकि मेरे अंदर जलना मेंक वृत्ति पैदा हुई क्योंकि यह व्यक्ति मेरे विरुद्ध गया है इसीलिए अब मैं इसके ऊपर आरोप लगाऊंगा कैसे कैसे आरोप ये व्यक्ति संप्रदाय हीन है तो संप्रदाय हीन जानता नहीं है वो व्यक्ति मेरी अच्छा मैं यह टीका लगा कर के वीडियोस बनाता हूं यह टीका मेरी हर वीडियो में होता है तो आप यह जो टीका देख रहे हो यह जो टीका है इससे चिन्हित होता है कि मैं श्री संप्रदाय से हूं यह किसी अन्य संप्रदाय का टीका तो नहीं है ये श्री संप्रदाय का टीका है श्री संप्रदाय के अंदर भी दो संप्रदाय हैं एक रामानंदी संप्रदाय रामानु जीी संप्रदाय तो मैं रामानु जीी संप्रदाय से
00:05:03:13 हूं रामानंदी संप्रदाय है उसके अंदर रामानंदी संप्रदाय रामानुज संप्रदाय दोनों विशिष्टा दत को मानती है अब जो रामानंदी संप्रदाय है उसके अंदर जो आचार्य है व भिन्न है रामानु जी का जो आचार्य है वह परंपरा अलग है किंतु जो सिद्धांत है विशिष्टा दवे वो एक ही है इस प्रकार से हमारी गुरु परंपरा चलती है लक्ष्मी नारायण से लक्ष्मी नारायण से होते होते नुर याम चार्य तक आते आते फिर वो जो आज वर्तमान में जो रामानुजाचार्य जी है तो वहां तक य गुरु परंपरा हमारी है अब श्री संप्रदाय जगतगुरु राघवाचार्य इत्यादि है जो हा हा तो राघवाचार्य जी है वो श्री संप्रदाय से अब राघवाचार्य जी का वक्तव्य आप सुनिए तो राघवाचार्य जी ने क्या कहा है कि जो व्यक्ति ज्ञान का दुरुपयोग कर रहा है जो व्यक्ति ज्ञान का दुरुपयोग कर रहा है भाई ज्ञान हमको जितने भी संप्रदाय सभी के अंदर श्रीधरी टीका का सम्मान है और सभी लोग वहां से पढ़ते हैं सीखते हैं अपक्ष के कारण उस ज्ञान को ना
00:06:18:18 पचाने की स्थिति में वह व्यक्ति क्या है वमन कर देता है और जो वमन करता है वह कुत्ते के खाने के लायक भी नहीं है यह शब्द मेरे नहीं य शब्द है हमारे श्री संप्रदाय के आचार्य के तो यह आप देखिए कि जो व्यक्ति ज्ञान को पचा नहीं पा रहा वह क्या कर रहा है वहां पर अपच की उल्टी कर रहा है वमन कर रहा है जोक कुत्ते के खाने के लायक नहीं है तो ज्ञान को किस प्रकार से प्रचारित किया जा रहा है वमन के रूप में वो ज्ञान नहीं है वो वमन है जो वो कर रहे हैं जी क्योंकि हमसे बस हम एक चीज है कि हम इनसे प्रश्न ना करें भाई देखो अगर तुम मेरे सिद्धांत के अंदर हो अगर तुमने मेरी साइड ले दी तो इसका अर्थ है कि तुम प्रकांड विद्वान हो तुम नहीं भी हो तब भी हम तुमको प्रकांड विद्वान घोषित कर देंगे बना देंगे इनका ये है मैंने देखा है कि इन लोगों के जो वो है कुछ कुतर्क होते हैं बहुत निराधार टाइप की चीजें होती है जो सामना होने पर तुरंत दूध का दूध और पानी पानी हो जाए मगर उसमें भी कुछ लोग कहते वाह वाह वाह वाह वो वाली बात याद आती है वो फिल्मों का वो डायलॉग है ना कि अर्ज किया है तो पहले ही लोग चालू हो जाते हैं वा वाह वा वा तो वो कहता है अमिताभ बच्चन जो है वो कहता है कि अमा शुरू तो करने दो
00:07:33:25 इनका वो वाला रहता है पहले से ही वावा वावा हो जाता है भगवत गीता का जोवा अध्याय है उसके अंदर क्या है ओम तत्सत ति इति निर्देश ब्राह्मणा स्त्री विधा स्मता ब्राह्मणा तेन वेद यज्ञ ता पुरा ता का अर्थ है वहां पर की निर्माण किया ठीक है तो वहां पर बताया जा रहा है कि ब्राह्मण का वेद का और यज्ञ का भगवान ने सृष्टि के आरंभ में निर्माण किया माने कि ब्राह्मण ने अभी कर्म नहीं किया किंतु भगवान ने ब्राह्मण का निर्माण कर दिया तो जन्म से सिद्ध हो ही गया भगवत गीता के अंदर क्योंकि कर्म नहीं किया नाभी उसने किंतु ब्राह्मण का निर्माण किया भगवान ने नहीं तो इस मामले में तो मैंने बताया ना इनसे जब भी कोई सिद्धांत पूछते हैं तो यह क्लियर कट सिद्धांत नहीं देते हैं जैसे अभी सुबह ही मैंने किसी से पूछा कि जो मुक्ति है वो क्या है तो पहले बोला जीवन मरण से मुक्त हो जाना और गोलोक धाम को प्राप्त कर लेना यह मुक्ति है उसके बाद जब मैंने वहां के प्रश्न पूछे कि नहीं मुक्ति यहां भी है अगर आप यहां पर ये करते हैं तो यहां भी मुक्ति है फिर जब मैंने ये पूछा कि जब यहां पर भी मुक्ति है तो गोलोक धाम में यहां पर अंतर क्या है तो पहले तो बोला कि वहां पर श्री कृष्ण स्वयं है तो इसका मतलब जहां पर प्रभु है वहां ज्यादा
00:08:48:28 अच्छा है इसका मतलब य थोड़ा वीक है तो जब मैंने इतना डेप्थ में जाकर के पूछने लगा तो भाई साहब जो है वो आउट हो गए वो लीव कर गए र तो ये क्लियर कट जवाब नहीं देते हैं जब भी इनसे कुछ भी पूछा जाता है कि वर्ण व्यवस्था जन्म से या कर्म से तो इनका जो लखनऊ के वह है और भी मैंने कई देखे उसमें वह जन्म से भी मानते हैं कर्म से भी मानते हैं भाई या तो जन्म से हो सकता है कर्म से हो सकता है जन्म और कर्म दोनों से नहीं हो सकता है शुरुआत की बात कर रहा हूं बाकी तो किसी की भी पहचान उसके कर्म से ही होती है मगर शुरुआत की हम किसी को नामांकन कैसे करेंगे वो जन्म से ही करना पड़ता है तो इनके जो परम श्यामदास जी है उनसे किसी ने पूछा था लाइव चर्चा में कि कि अगर हम लव मैरिज जो होती है वो करनी चाहिए कि नहीं करनी चाहिए तो उन्होंने बोला नहीं लव मैरिज तो नहीं करनी चाहिए अब लव मैरिज का मतलब क्या है वो बोले कि अपनी ही कास्ट में करनी चाहिए फिर बोलते हैं कि अगर कोई व्यक्ति भक्ति कर रहा है तो फिर व उसम ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र नहीं देखा जाएगा अब बात आती कितनी भक्ति कर रहा है यह भी तो देखना पड़ेगा अगर कोई अगर भक्ति करने की वजह से वो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र हो रहा है तो
00:10:04:00 उसका सर्टेन अमाउंट क्या है वो कोई अमाउंट नहीं है अभी मैंने अभी कल एक रील डाली थी उसम दिखाया था वो कोई अमाउंट नहीं है तो ये क्या करते हैं किसी भी कोई भी सवाल आप पूछो कोई भी सवाल उसमें एक निश्चित सिद्धांत नहीं है ए
✅ This part is already used · 00:10:19:16 – 00:10:22:16 (0:03)
→ Used in: A · Live क्या गीता में भगवान श्री कृष्ण ने किसी और की शरण में जाने को कहा है? #rampaljim... at 13:40 ↗
00:10:19:16 बी सी डी ई एफ जी एच आई जे के एल एम एन ओ पी क्यू
⬜ Not used yet · 00:10:22:16 – 01:02:13:21 (51:51)
00:10:22:16 आर एस टी यूवी डब् एक्स वाई जड ये पूरा बोल दिया तो हमने पूछा एप्पल की स्पेलिंग कहां से शुरू होती है ए से होती है बी से होती है नहीं ए बी सी डी जी एच के प आर एस टीड एक्स वा उसम क्या होता है अगर हमने इनको काउंटर किया कि नहीं बी से नहीं होती भाई ए से होती हमने बोला तो हमने तो ए टू जेड बोला है उसम से जो आपको सही लगे ले लो ये सिद्धांत है राम चर आपके बारे में य जानना चाह रहा था कि थोड़ा सा अपने बारे में बता दे कि आपके गुरु कहां से हैं आप दीक्षित कहां से हैं
00:11:02:01 और मतलब उनके पीछे का परंपरा थोड़ी सी कुछ उस पर प्रकाश डाल दीजिए जी तो जो हमारे गुरु जी है उनका नाम है कृष्ण चंद्र शास्त्री जी जो इंद्रेश उपाध्याय जी है उनके पिताजी और उनका जो निवासी स्थान है वो है वृंदावन तो वृंदावन के अंदर वो तो वृंदावन के अंदर ही हमारी जो है गुरु दीक्षा हुई थी गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर गुरु दीक्षा का इनका वो गुरुदेव के साथ का एक चित्र है वो जरा प्रदर्शित कर दीजिए ऑपरेटर
00:11:39:09 महोदय जी आप बोले तो हमारी संप्रदाय जो है उसके अंदर जो गुरु दीक्षा उसका विधान क्या शंख और चक्र लगा कर के गुरु दीक्षा दी जाती है तो यहां पर शंख लगाते हैं उसको तपा करके शंख चक्र यहां पर लगा करके और गुरु दीक्षा दी जाती है और फिर उसमें गुरु दीक्षा के अंदर तीन मंत्र दिए जाते हैं पहला मंत्र तो अष्टा को सार्वजनिक रूप से बोलना अपराध है उसको नहीं बोलना चाहिए दूसरा मंत्र में बोल सकता हूं दूसरा मंत्र सभी के सामने बोल सकते हैं श्रीमन नारायण चरणो शरणम प्रपद्ये श्रीमते नारायणाय नमः ये दूसरा मंत्र है तीसरा जो है वो गीता जी का श्लोक है वो हम शरणागति के लिए बोलते हैं सर्व धर्मा परमा शरणं ब्रजा अहम तोम सर्व पाप मोक्ष श्याम माचा तो ये तीन मंत्र हमको दिए जाते हैं पहला मंत्र है उसकी गुरुदेव ने बताया कि इसका विधि विधान है मूलता आप समय ज्यादा नहीं है तो आप पांच माला कर लीजिए इसकी ऐसा गुरुदेव का आदेश है अगर है तो आप अधिक भी कर सकते हैं किंतु पांच से कम नहीं करनी तो अष्टा मंत्र की विधि है की स्नान करके शुद्ध अवस्था के अंदर
00:12:54:14 आसन बिछा कर के और तुलसी की माला लेकर के आपको जप करना है दूसरे मंत्र का विधान कि आप कैसी भी अवस्था के अंदर है शुद्ध है अशुद्ध है तो आप उस मंत्र को जो श्रीमन नारायण चरणों शरणम है उसको किसी भी प्रकार से आप जाप कर सकते हैं सर्व धर्मा परिज जो गीता जी का श्लोक है वह आप एक बार बोलिए बस इतना कि भगवान को ध्यान दिलाने के लिए बस हम इसको बोलते हैं कि हे भगवान हम आपकी शरण में है आप ही ने कहा है गीता जी के अंदर कि सर्व धर्मा परत माम शरण बजा मेरी शरण में आओ मैं तुम्ह मुक्त कर दूंगा तो हम केवल आपको ध्यान दिला रहे प्रभु हम आपकी शरण में ही है तो इस प्रकार से गुरुदेव ने कहा अब गुरुदेव ने जब दीक्षा दी तो स्पष्ट रूप से इस बात का उन्होने ध्यान देते हुए यह बात कही कि आजकल जो लोग हैं वह जिस संप्रदाय के अंदर दीक्षित हो जाते हैं तो संप्रदायवाद फैल जाता है वहां पर किसी को हीन दृष्टि से देखना किसी अन्य संप्रदाय के व्यक्ति को तो इस प्रकार से फिर गुरुदेव ने कहा कि आप आज से श्री वैष्णव हो चुके हैं पहले के जो आपके पाप थे वो सब अब नष्ट हो गए अब से आपका नया जन्म है क्योंकि गुरु दीक्षा के बाद जो है प्राणी का एक नया जन्म हो जाता है पहरा तो माता पिता के गर्भ से होता है दूसरा
00:14:09:18 जन्म जो है वो दीक्षा के बाद होता है तो इस प्रकार से फिर गुरुदेव ने वहां पर कहा कि कोई भी भगवान शिव का अपराध ना करे कोई भी भगवान शिव जी का अपमान ना करे उनको हीन या निंद दृष्टि से ना देखे गणेश भगवान का शक्ति का सब मतलब कंपैरेटिव बात ना करें कि विष्णु से छोटे हैं जी जी कोई अच्छा एक एक बात मैं आपको बताऊं कि स्कन की मैं एक बार क्लास ले रहा था बहुत पहले मैं देखो मैं सिखाते क्या है मैं उनके मैंने कई सारे कंपटीशन के अंदर भी हिस्सा लिया हुआ है और उन्हीं की तरफ से मेरे को गीता मिली हुई थी जब मैं जीता था इंग्लिश की और हिंदी की दोनों की उ की तरफ से मैंने कोई खरीदी वरीदी नहीं उनकी गीता उन्हीं की तरफ से आई कंपटीशन जीता था आपने क्या अच्छा
00:15:01:14 मैं उनके उसम गीता कंपटीशन में पाट लिया था तो उसम विनर रहा था तो उसके अंदर आप विनर है हमारी गीता कंपटीशन के तो हम आपको गीता भिजवा चाहते हैं तो आप बता दीजिए आपकी इच्छा आपको हिंदी में चाहिए की इंग्लिश में चाहिए मैंने कहा हिंदी की तो मेरे पास है आप इंग्लिश में भिजवा दीजिए इंग्लिश की गीता उन्होने मेरे पास भिजवाई और जो हिंदी की गीता है वो तो कौन सी आई थी आपके पास वो प्रभुपाद जी की जो ओरिजिनल है या बाद में जो इन लोगों ने चेंज कर द है वो कौन सी आई थी जो चेंज वाली है ना एज इट इज जो चेंज की हुई है में आज चेंज करके चल रही है प्रभुपाद जी वाली ओरिजनल नहीं आई थी ओरिजनल नहीं वो चेंज की हुई है तो वो गीता इन लोगों ने भेजी उसके साथ भगवान कृष्ण का जो चित पत्र है वो भी भेजा था भगवान कृष्ण का विग्रह जो था पार्थ सारथी कहते हैं वृंदावन के अंदर वो इस कोन के अंदर वो उन्होने भेजा था अच्छा मैं जब इनकी क्लास ले रहा था तो मैंने इनसे प्रश्न किया क्या भगवान शिव जो है वो डेमी गड है बहुत साल पहले मेरे मन के मेरे अंदर जिज्ञासा रही है कि मैं जानू और जान आज भी इच्छाओं के चक्कर में नाया कितने ग्रंथ डेली पढ़ता रहता हूं तो मैंने क्या भगवान शिव डेमी गड है तो इनके
00:16:16:18 जो स्कोन के अध्यापक जो पढ़ा रहे थे उन्होंने कहा कि जो भगवान शिव है वो भी जन्म मृत्यु के चक्र में फसे हुए हैं भगवान शिव जो है वो जन्म लेते रहते हैं तो बाद में मेरी गुरु दीक्षा हुई थी फिर मैं गुरुदेव के पास गया मेरे को इसमें थोड़ा संशय था तब भी मैंने कहा ये कैसे हो सकता है भगवान शिव जन्म लेते हू मेरे को इसमें तब भी संशय मैं गुरुदेव के पास गया मैंने गुरुदेव से पूछा कि गुरुदेव ऐसा ऐसा है कि भगवान शिव को किसी ने मेरे को बताया है कि वो जो भगवान शिव है वो जन्म मृत्यु के चक्र में फसे हुए हैं और वो हमारी तरह ही चीटी भी बनते हैं छेटा भी बनते है मच्छर भी बनते है और इस प्रकार से जन्म भी लेते 84 लाख योनियों में भटकते रहते हैं तो गुरुदेव ने कहा कि जो महादेव है भगवान शंकर है वो वास्तविकता में उनका जो स्वरूप है उनकी कोई ऐसी पदवी नहीं है कि कोई व्यक्ति अपने कर्म के द्वारा उसको ले ले भगवान शिव शिव है वो भगवान ही है उ कोई जन्म मृत्यु के चक्र में 84 लाख के चक्र में नहीं फसे हैं यदि किसी ने बताया है तो गुमरा किया है गलत बताया है तो वहा पर इसका खंडन मतलब यके गुरुदेव ने सीधे सीधे स्कोन के द्वारा दी जाने वाली जो गलत शिक्षा है इसका जो है प्रतिकार किया एक एक और चीज अब मैंने इनसे ये
00:17:31:26 एक और बात पूछी थी क्या हम हनुमान जी का प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं तब इन्होंने कहा कि नहीं हनुमान जी का जो प्रसाद है वो ग्रहण नहीं कर सकते ये कोई मनगण कहानियां नहीं है ये स्कोन के द्वारा जब मैंने क्लास ली थी तो इसका सबसे बड़ा प्रमाण मालूम है क्या है इन्होंने मेरे से कहा था कि आप हमारे लिए वीडियो बनाइए तो मैंने इनके लिए वीडियो शूट की और इन्हीं के चैनल पे सोनिक नाम का चैनल आप जाइएगा उसपे मेरी वीडियो है अभी भी है तो मैं जो है हा तो मैं कोई अलग तिलक लगा कर के जब दीक्षित नहीं था तब अलग तिलक लगा कर के मैं वीडियो इनकी बना रहा था मैंने इनके पास वीडियो भेजी इनके पास जब मैंने अपनी वीडियो भेजी इन्होने मेरे से कहा कि आप तिलक यह वाला नहीं जो हम लगाते हैं गड़ संप्रदाय का वो तिलक लगाइए मैंने कहा ठीक है फिर मैंने गीता प्रेस की जो गीता है मैं वही पढ़ता था तो मैंने कहा कि उन्होंने मेरे को एक श्लोक भेज दिया कि इस श्लोक का अर्थ आपको वहां पर बताना है वीडियो के अंदर मैंने कहा ठीक है मैंने कहा गीता प्रेस की मेरे पास गीता उसे नहीं नहीं नहीं नहीं गीता प्रेस की नहीं हम आपको भेज रहे हैं अपनी श्रीला प्रभुपाद जी की जो गीता है केवल उसी को आप पढ़िए और उसी के बेस पर आप बता सकते हैं माने
00:18:47:00 कि तिलक भी चाहिए हमारी ही संप्रदाय का और यदि आप जो ग्रंथ पढ़ रहे हैं आप हमारी वीडियो तभी बनाइए जवाब प्रभुपाद जी का जो ग्रंथ है वही होगा मेरे पास प्रभुपाद जी कई सारे ग्रंथ रखे हुए हैं इ तरफ से मेरे को भेजे थे जब कंपटीशन में मैं जीता था जी तो इस प्रकार से जो इस कोन के अंदर है और जब हनुमान जी की जो बात थी कि प्रसाद नहीं खाना है यह बात मेरे को बड़ी अजीब लगी मैंने इनसे पूछा कि हनुमान जी तो वैष्णव है ना भाई भगवान श्री राम के भक्त है तो फिर हम उनका प्रसाद क्यों नहीं ग्रहण कर सकते बोले अन्य देवी देवता का प्रसाद ग्रहण करना अपराध है अपराध की कोट में आता आपको प्रसाद ग्रहण करना है केवल भगवान कृष्ण का वो आप कर सकते हैं मैंने पूछा काली माता का कर सकते बोले नहीं काली माता का भी नहीं कर सकते तो हनुमान जी का प्रसाद ग्रहण नहीं करना शक्ति का ग्रहण नहीं करना और शिव का तो करना ही नहीं है शिव से तो परमय आपको कुछ अब्रिक नहीं लगता है जो यहां पर कहा गया है कि वो जो ऊपर वाले की तरफ जो चढ़ाया गया प्रसाद उसी को ग्रहण करो सवाल मत पूछो वो तो होही गया कि हरे कृष्ण का जाप करो ज्यादा ग्रंथों की गराई में मत जाओ यहां पर यहां पर
00:20:02:00 आप देखिए कि अब देखिए हनुमान जी कौन है हनुमान जी भक्त है किसके भगवान श्री राम के अब जब इन्होंने यह कह दिया कि आप हनुमान जी का प्रसाद ग्रहण नहीं कर सकते तो वैष्णव निंदा हो गई अब दूसरी बात ये इनके जो गुरु है प्रभुपाद जी उनका चरणामृत हम धो धो कर पिए कुछ नहीं क्यों भाई प्रभुपाद जी का चरणामृत क्यों पी रहे हो आप क्यों क्योंकि वो वैष्णव है उन्होंने गीता जी का प्रचार किया तो भाई वो भी तो भक्त कोटि के अंदर आ र भगवान तो नहीं है फिर हम प्रभुपाद जी का उचि क्यों पाए हनुमान जी का उचि क्यों ना पाए बात आ गई ना मतलब हनुमान जी क्या प्रभुपाद जी से जी तो वैष्णव है हनुमान जी भी तो वैष्णव है हनुमान जी का भोग नहीं खा सकते मगर शी प्रभुपाद जी का उ चिट खा सकते हैं यही पॉइंट यही पॉइंट मेरे दिमाग में आया मैं इनका हनुमान जी का नहीं खा सकते उ प्रभुपाद जी का खा सकते हैं क्या हनुमान जी से अधिक श्रेष्ठ है प्रभुपाद जी क्या तुलसीदास जी से भी अधिक श्रेष्ठ है प्रभुपाद जी निंदा किसी की नहीं है सभी हमारे आचार्य कोटि सभी को प्रणाम है किंतु इस प्रकार की बातें करना कि आप इसका प्रसाद ये जो बातें जो आज इसकन के सामने इसकन की आ रही है ये मेरे से कई लोगों ने स्कन के लोगों ने संपर्क किया है
00:21:17:20 कि जो बाहर के देशों में जो इकन तंत्र चल रहा है उसकी कई चीजें जो आज हमारे इंडिया में चल रहा है इससे बहुत डिफरेंट है दूसरी बात यह भी है कि हम अभी भी उसमें नहीं है जो प्रभुपाद जी की शिक्षा है कई लोगों ने मुझसे कहा स्कोन के जुड़े हुए वो मैसेजिंग में आते हैं कभी-कभी बहुत कम मगर उन्होंने ये कहा है कि प्रभुपाद जी ने यह कहा था कि जिसका जो ईस्ट है उसको सर्वोपरि मानते हुए वो शिक्षा दी है वो केवल कृष्ण तक सीमित नहीं रहे अब जो यहां पर बात आ रही है यहां पर कृष्ण तक सीमित हो जाने की कृष्ण के विरुद्ध किसी को भी छोटा करने की तो यह सारी बातें जो है वो एक सस्पिशंस उनका नाम लेकर के कही जा रही है जैसे चैतन्य महाप्रभु जी ने कही है या उनका नाम लेकर के कही जा रही है क्योंकि अपनी बात को प्रमाणिक सिद्ध करना है तो किसी को अवतार बना लो या किसी महान इंसान का जो महान व्यक्ति रहा हो उसका आप साथ अपने अपने से उसको जोड़ लो कि ये उन्होंने कहा था इसलिए हम कह रहे हैं ठीक है तो एक तो ये बात मैं थोड़ा जानना चाह रहा था कि तुलसीदास के बारे अच्छा पहले तो आप ये बताइए थोड़ा कि ये जो मीट जो आपका जो मीट वाले जो मामले प जो वो चिकन खाया था और दूसरे हाथ से गीता दे रहे थे इस मामले पर कैसे क्या थोड़ा इसको
00:22:32:26 ठीक से बताइए क्योंकि लव भारत जी के साथ भी इसी मामले पर कुछ हुआ है हां तो देखिए ऐसा क्या हुआ कि मेरे को बाद में पता पहली वीडियो आई थी मैंने आपकी वीडियो देखी अब भाई कोई व्यक्ति शेयर करता है सोशल मीडिया पर कोई चीज हमको नहीं पता रहती हम किसी और काम में व्यस्त है ऐसा तो नहीं पूरे दिन सोशल मीडिया पर ही रहते हो एक मिनट की मुश्किल से वीडियो बनाते हैं ा के लिए तो ज्यादा से ज्यादा उसमें 10 पा मिनट चले जाते हो हमारे उसके अलावा का जो हमारा पूरा दिन उसम हम क्या करते हैं यह भी पूरान डिसाइड कर लेता है क्योंकि हमने इनसे प्रश्न कर लिया कि भाई पूरे दिन तुम सोशल मीडिया चलाते हो अच्छा तो मैंने आपकी वीडियो देखी उस पर की आपने जो वीडियो डाली थी कि एक व्यक्ति जो है स्न का वह भगवत गीता एक ऐसे व्यक्ति को दे रहा है जो व्यक्ति सामने से कह रहा है कि मैंने चिकन खाया है तो वक्ति ने कहा कि मैंने भाई चिकन खाया मैं इस गीता को स्पर्श नहीं कर सकता तो मैंने सोचा इन्होंने वीडियो बनाई है मेरे को भी बनानी चाहिए हम तो साथ काम कर ही रहे हैं जी तो अब वीडियो बनाने में समस्या क्या है क्योंकि हमको तो भाई अधिक से अधिक इस बात का प्रचार करना है कि आप गलत शिक्षा कहीं से यदि आपको प्राप्त हो रही है तो मत लीजिए
00:23:48:12 जब मैं आगरा के अंदर जब गुरुदेव आए थे शंकराचार्य जी तब मैं उनसे मिलने के लिए गया था तो वहां पर कोई अंग्रेज था वो भी भगवत गीता बेच रहा था तो मैंने वीडियो बना दिया इसके ऊपर तो जो आपसे जो डिस्कशन हुआ था जिस व्यक्ति का नाम मैं नहीं लेना चाहता उसका ले ले भी दू तो कोई समस्या नहीं है किंतु अपने आप समझ जाएगा जो भी देख रहा के साथ हुआ था ना अरे क्या बात है नाम लीजिए ठीक है भव्य के साथ ना जतिन नाम का व्यक्ति था तो उसके साथ जतिन जो हरे अल्लाह हरे अल्ला करने करने को वही व्यक्ति अच्छा अब वो क्या कमेंट बॉक्स में बारबार कमेंट करने लग रहा मैन का बारबार कमेंट भाई तुम बारबार एक व्यक्ति यदि कमेंट करता रहेगा उस वीडियो प तो एक गलत इंप्रेशन जाता है व्यक्ति के पास अभी कोई दूसरा व्यक्ति आक के पढ़े उसको तो हो सकता है वो भी अपनी धारणा उसके अनुसार बना ले तो वहां पर हमको सब कुछ ध्यान रखना होता है मैंने इनके कमेंट डिलीट कर दिए आपसे डिस्कशन के बाद वहां पर उत्तर तो उसको नहीं निकलते आपके पास उत्तर नहीं मिले उसको आपके सामने जवाब नहीं दे पाया जवाब नहीं बना तो कमेंट बॉक्स में आकर के
00:25:04:03 टक टक टक टक टक टक करने लगा कमेंट बॉक्स से मैंने कमेंट डिलीट कर दिए अब यह तो भाई आहवान की फैन करले जैसी आहवान की वीडियो आती है ऐ इसकी वीडियो आ जाती है अब इसके ऊपर तो हमारे भव्य जी भी उन्होंने भी वीडियो बनाई थी जी तो अब इनका खंडन देखिए कि भाई मैंने आपका सपोर्ट करा तो मैं आपकी फैन गरल हो गया अब भाई मैंने मैंने आपका जो वीडियो देखा जो इनका डिस्कशन चला तो मैं देख रहा हूं कि ये जो कुछ बंदा बोल रहा है वो वही वो वही वाक्य बोल रहा है जो अमोग लीला चिपका है सबको सेम अमोग लीला के वाक्य ही ये व्यक्ति आपके समक्ष आ कर के बोलता है तो भाई तुम अमोग लीला की फैन कर लो क्या तो मतलब जो तुम मेरे से बोल रहे हो वो तुम्हारे ऊपर ही तुम्हारा ही खंडन होता जा रहा है सीधा तुम मेरा खंडन क्या करोगे भाई मैं जो कुछ अच्छा मैंने जितने वीडियो अब तक बनाए हैं स्कोन के लिए वो सारे प्रमाण सहित बनाए उसम प्रमाण रहित कोई वीडियो नहीं है उसमें एक एक ग्रंथ का प्रमाण मिलेगा चाहे वो गीता का हो चाहे वो भागवत का हो या फिर वो अन्य रामचरित मानस का हो या अन्य किसी ग्रंथ का हो 18 पुराणों में से लिया हो लेकिन प्रमाण अवश्य है अब इनको विषय से विषयात करते हुए बात को अपनी को रखना है तो
00:26:19:20 अभी इसने वीडियो बनाया मेरे ऊपर कि भाई हम सुबह सुबह उठते हैं साधना आदि करते हैं सोचते हैं थोड़ा रील स्क्रोल कर ले अब वक्ति मैं मैं जतिन जतिन के बारे में बता दूं अभी कुछ दिन पहले एक दो स्टोरी जतिन ने लगाई थी अपने मेरे ऊपर आजकल वो कुछ चलते फिरते ऐसा लग रहा है जैसे कहीं से कोई स्वास्थ्य ठीक नहीं है एक तो दुबले पतले तो है ही बहुत ज्यादा तो कुछ स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो जबरदस्ती उनको मार मार के उनसे जो है कहा जा रहा है कि रील बनाओ रील बनाओ ऐसा कुछ जब रील बनाते हैं तो आवाज भी नहीं सुनाई देती तो मेरे कुछ बनाई थी तो मैंने कहा कि जतिन जी माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो आप प्रत्यक्ष वार्ता कर रही है आप सभ्य व्यक्ति है भव्य की तरह तो है नहीं जिसके पास सभ्यता संस्कार नहीं है आचरण हीन तो है नहीं वो ठीक है आचरण में है तो मैंने कहा कि आप जो है लाइव आ जाइए लाइव आकर के जो है आमने सामने हम लोग प्रत्यक्ष चर्चा करेंगे तो उसने बोला कि मैं आता हूं आता हूं अच्छा भव्य से भी जब लाइव की बात हुई थी भव ने कहा था मुझे 15 दिन का समय चाहिए अब 15 दिन के समय में क्या तैयारी करते हैं कोई क्या पहाड़ से टकराने जा रहे हैं ये समझ में नहीं आता है तो भवे ने आज जतिन ने भी यही कहा कि मैं आता हूं मैं करूंगा आऊंगा लाइव आज तक उसका अता पता नहीं है वो कब आएगा तो भाई
00:27:35:00 क्या आपके सिद्धांत क्लियर है तो आ क्यों नहीं रहे हो और आप जो एनर्जी कमेंट करके कर लेते हो जो एनर्जी आप स्टेटस लगा के कर लेते हो स्टोरी लगा के कर लेते हो सामना करके क्यों नहीं करते डर है क्या कोई तो यह वाली बात है आप कंटिन्यू करिए थोड़ा सा फिर हम लोग थोड़ा सा लव भारत जी को सुनेंगे भवे शर्मा हां तो ये जो जतिन है फिर इसने क्या बोला कि हम भाई सुबह साधना करके थोड़ा उठते हैं तो हमको लगता है कि थोड़ा रील स्क्रोल कर ले अब ये साधना करके रील स्क्रोल करने में अपने समय को बर्बाद करता है ये नहीं कि मैं कुछ अध्ययन कर लू थोड़ा पढ़ लू नहीं मेरे को तो सब ज्ञान है भाई जो होता है बस उसके लिए वही संसार है जो कुए के अंदर है बाहर का कोई संसार है ही नहीं उसके लिए ा ा वही उसका संसार है तो वहां पर देखता है कि मेरी वीडियो चल रही है ओ उसका तो पूरा मूड खराब हो जाता है तो भाई मैंने कहा कि तुमरी देखो मुझे ब्लॉक कर दो ग करके करे जा रहे हो मैं तुम्हारे कमेंट को डिलीट कर रहा हूं फिर भी बे श्रमा से तुम कमेंट कर रहे हो एक बार तु हार के जा भी आवान के द्वारा लेकिन फिर भी कमेंट करे जा रहे हो इस प्रकार सेरा दोस्त फिर वो चर्चा प आया मेरे साथ मैंने कहा देखो भाई मेरे पास साधन
00:28:50:04 नहीं है मैं तुमसे लाइव चर्चा नहीं कर सकता आप इच्छुक हो आवान जी भी इच्छुक है आवान से जाकर के आप करिए उनको कोई संतुष्ट नहीं कर सकता वो बिल्कुल भ्रमित व्यक्ति है तो भाई तो भाई तुम जा कोई नहीं है टक्कर में तो फिर उस व्यक्ति से मेरी थोड़ी बहुत वार्ता होने लगी अब मैंने उसके ऊपर थोड़े प्रश्न डाल दिए उसके ऊपर तो फिर अब वो बला गया बला हट के मारे मेरे पास उसका मैसेज पड़ा हुआ बलाह के मारे उसने क्या मैसेज करा अरे तुम मायावादी हो तुम प्रसन्न बध हो तुमको सुनने से हमारा सत्यानाश हो जाएगा हमारी भक्ति खत्म हो जाएगी अब ना जाने कैसी कैसी मैंने कहा अब तुमसे चर्चा नहीं करनी फिर कहने लगा अच्छा ये बताओ क्या तुम अपने आप को नारायण समझते हो मैंने कहा तुमको उत्तर मिल जाता अगर मर्यादित भाषा में बात करते तो मैं अपने आपको को नारायण समझता हूं या नहीं समझता हूं उसका उत्तर मैं दे देता किंतु अब नहीं दूंगा क्यों नहीं दूंगा अमर्यादित जो भाषा का तुमने प्रयोग किया है तुम्हें पहले मर्यादित हो करर के बात करना चाहिए ना यदि आप किसी को बुला भी बुला भी रहे हो अपने पास बात करने के लिए चर्चा करने के लिए तो मर्यादित हो कर के बुलाओ आप कहोगे सुन इधर मेरे से बात कर कोई आएगा क्या आपके पास तो एक मर्यादा आपके अंदर आचरण नहीं है आप आचरण
00:30:05:12 हीन है स्कोन के अंदर यही सिखाया जाता है कि भाई देखो यदि तुम्हारे ऊपर बने तुमको लगे कि मेरी पोल पट्टी खुलने वाली है बस तुरंत अभद्र भाषा का प्रयोग करना आरंभ कर देना वो व्यक्ति अपने आप चले जाएगा वो फिर भिड़ेगा ही नहीं तुमसे तो ये इनका सिद्धांत है तो दो बातें मैं यहां पर कहूंगा पहली बात तो यह है कि इनका ा पर चैनल है युगल किशोर जी का ा पेज है इनका भगवत वचन नाम से और य पर भी आपका चैनल है ना य पर भी इनका चैनल है आप लोग वहां पर भी फॉलो कर सकते हैं इ दूसरी बात मैं कहूंगा एक सवाल आ रहा है कि इनके गुरु कौन है तो रामानुजाचार्य परंपरा के प्रामाणिक आचार्य जिनका इन्होंने अभी पीछे कुछ देर पहले नाम बताया है बारबार गुरु का नाम लेना उचित नहीं है ही हम इनसे कहेंगे कि गुरु का नाम ले और साथ ही साथ इन्होंने यह भी प्रकाश डाला कि जो इनके जो परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य हैं जिनसे दीक्षित है उन्होंने यह बताया कि सनातन धर्म में पंच देव उपासना है भेद नहीं है बस यह है कि श्री संप्रदाय कौन सा है जो विष्णु के प्रति समर्पित है जैसे मैं भी पंचदेव उपासक हूं मगर मैं कौन हूं जो राम के प्रति समर्पित
00:31:20:24 है है ना तो भेद दृष्टि नहीं है अपने ईष्ट का अपने ईट के प्रति अन्यता तो है है मगर दूसरे के ईट के प्रति हीनता की भावना नहीं है कि नहीं नहीं वो जो है दास है वो परम वैष्णव है फिर वो परम वैष्णव भी नहीं है फिर वो काम इंद्रियों के वशीभूत है यह सब नहीं है ठीक है तो एक तो बात ये आ जाती है दूसरी तुलसी दास जी के लिए इन्होंने क्या कहा है वो थोड़ा सा प्रकाश डाले वो जो बनारस वाली बात है जो भगवान का कहा हुआ है और वैष्णव निंदा हो रही है जब भन का कहा हुआ नहीं मान रहे महादेव जी व थो सिद्धांत है इनकी जो बातें है वो श्री वैष्णव से भी टकराती हैन चाहे वो रामानुज जी हो दोनों से ही टकराती है श्री तो एक ही है ठीक है तो रामचरित मानस के अंदर स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है अच्छा रामचरित मानस की एक चौपाई के बल पर इनकेन की पूरी नीव हिल जाएगी एक चौपाई में बोलता हूं शूद्र कर जब तपत नाना बैठी बसन कर ना सब नर कल्पित करही अचारा बाद में क्या कहा जान बरनी अनीति अरा इस अनीति का मैं वर्णन नहीं
00:32:35:27 कर सकता तुलसीदास जी क्या कह रहे हैं शूद्र कर जब कलयुग क्या लक्षण बता रहे हैं कि शूद्र जो है वो तप करेंगे व्रत करेंगे नाना प्रकार के होम करेंगे इस प्रकार से और व्यास गद्दी पर बैठ कर के उसको विकृत करेंगे और सनर कल्पित अपने मनो कल्पित विचार के द्वारा जो वेद की विधा है जो पुराण की विधा उसको अपने मनोक विचार के द्वारा फॉलो करेंगे उसका आरंभ करेंगे जान बनी अनीति ऐसी अनीति का मैं वर्णन नहीं तुलसीदास जी की वेदना है कि मैं ऐसी अनीति का वर्णन कैसे करू भाई तो तुलसीदास जी को तो य प्रामाणिक नहीं मानते प्रमाण नहीं मानते तुलसीदास जी को मायावादी कहते हैं श्री संप्रदाय को तो प्रमाणिक मानते हैं ना श्री संप्रदाय को मानते हैं शय के अंदर दो हो रामानुज रामानंदी अच्छा अमोग लीला जो है वो आप देखिए वहां पर डाला हुआ उनका कि वो यदि प्रमाणिक नहीं मानते तो जो राम भद्राचार्य जी हैं उनके पास क्यों गए थे ये लोग उन्होंने स् कन से कहा था कि निष्ठा पूर्वक यदि आपने अपनी माता का दूध पिया हो तो मुझसे आके शास्त्रार्थ करें भगवान श्री राम को उन्होंने 12 कलाओं का और भगवान कृष्ण को 16 कलाओं का इत्यादि इन्होंने वक्तव्य दिया था उस पर नहीं ग
00:33:51:16 तो ये राम भद्राचार्य जी के पास क्यों गए वो तो रामानंदी संप्रदाय के है यदि प्रमाणिक नहीं मानते तो अवॉइड कर देना चाहिए था कि भाई हम तुमको अवॉइड करते हैं तुमको मानते ही नहीं है किंतु ये लोग मानते हैं अब तुलसीदास जी की जहां तक बात है तुलसी रामचरित मानस के अंदर स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है रामचरित मानस का निर्माण जो है तुलसीदास जी ने किया दो साल के अंदर किया दो साल के अंदर कुछ महीने और कुछ दिन उसके अंदर वर्णित है उसके अंदर तुलसीदास जी ने रामचरित मानस लिखी रामचरित मानस को परम प्रमाण त करने के लिए उन्होंने विश्व काशी में वो गए काशी के अंदर विश्वनाथ जी का जो मंदिर है उसके अंदर रामचरित मानस को भगवान शिव को और माता पार्वती को उन्होंने सुनाया ऐसा लिखा है बाद में मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए कपाट जब बंद कर दिए गए तो भगवान शिव की वाणी भी सुनाई दी और भगवान शिव ने अपने हस्त कमल से उस ग्रंथ पर लिखा था सत्यम शिवम सुंदरम ग्रंथ प्रमाणित करते हुए उन्होंने सत्यम शिवम सुंदरम लिख दिया अब बात ये आती है अगर इस कन यहां पर तुलसीदास जी का विरोध करता है रामचरित मानस का विरोध करता है तो यह विरोध जाते जाते कहां तक जाएगा अब देखिए तो अगर रामचरित मानस का विरोध हुआ ना
00:35:07:02 तो तुलसीदास जी का विरोध हुआ परम भक्त का विरोध हो गया तो वैष्णव निंदा हो गई अब तुलसीदास जी के बाद चलो हम ये कहेंगे तुलसीदास जी ने जो लिखा स लिख दिया लेकिन शिवजी को प्रमाणित करने की क्या आवश्यकता थी जब गलत लिखा था तो भाई भाई भगवान ने प्रमाणित किया अब शिवजी तक बात पहुंच गई है कि भाई शिवजी ने प्रमाणित क्यों किया यानी कि अब शिवजी को आरोपित इस कौन की नजर में कौन दोषी हो गया शिवजी अच्छा ये भी वैष्णव जिंदा हो गई अब शिवजी से बात जाएगी नारायण तक वैवा नाम यथा शंभु इनका हां तो शिवजी से अब बात जाएगी नारायण तक कि भाई शिवजी ने प्रमाणित कर दिया कर दिया नारायण को तो रोकना चाहिए था ना क्योंकि नारायण के पुजारी शिवजी है तो भाई नारायण ने भी नहीं रोका इसका मतलब नारायण की भी स्वीकृति है शिवजी की भी स्वीकृति है वैष्णव नाम यथा शंभू की स्वीकृति है वैष्णव इनके हिसाब से वैष्णव की स्वीकृति है परम वैष्णव की स्वीकृति है तो यहां पर खंडन किसका कर रहे हो नारायण का तो यह तो फिर यहां पर वैष्णव निंदा सिद्ध हो रही है तुलसीदास जी का खंडन करने में पूरी वैष्णव निंदा हो गई वो इनको नहीं दिखती है वैष्णव निंदा इनका अर्थ है जो इस कन के ऊपर प्रश्न कर दे वो वैष्णव बाकी राण प्रश्न होता रहे इनके द्वारा उ उन पर होता रहे उनको प्रमाणिक अप प्रामाणिक करते रहे अच्छा मैं बस
00:36:22:02 भवे शर्मा जी के पास जाऊंगा बस जाने से पहले एक बात क्लियर कर दूं जो ये सारी बात उठी है वो जो वीडियो है उससे उठी है तो उस वीडियो में एक व्यक्ति है जो इकोन को फॉलो करने वाला दिखाई दे रहा है और वह इकोन की गीता को प्रदान इकोन के ग्रंथों को प्रदान करने का प्रयास कर रहा है एक ऐसे व्यक्ति के में जो जिसने अभी अभी चिकन खाया और वह कह रहा है कि यह जो है मैंने अभी अभी चिकन खाया मैं हाथ में भगवत गीता नहीं ले सकता हूं तो ऐसे में इनका कहना है कि अगर इस भगत गीता को देखने के बाद तुरंत उसकी मृत्यु हो जाएगी तो इस कारण से उनका वहां पर उनको भगवत गीता देने का प्रयास करना उचित था तो पहली बात यहां पर आती है कि अगर गीता देखने से भगवान श्री कृष्ण का चित्र देख लेने से मुक्ति हो जाती है फिर भी ये नहीं बनता है कि हम उसको भगवत गीता प्रदान करें हाथ में दे दिखा दो य भाई देख ले देख ले अभी इसके बाद तुरंत तेरी मिट्टी हो गई तो फिर क्या होगा तो इसलिए देखता रहे और थोड़ी देर रुको वहां पर दिखाते रहो थोड़ी देर दूसरी बात कि जब आती है बात विधि विधान की विधि विधान का पालन तो करना ही चाहिए तो क्या विधि विधान का पालन स्कोन वाले नहीं करते
00:37:37:07 वो नहीं कहते चार नियमों का पालन मास छोड़ दो जुआ छोड़ दो व्यभिचार छोड़ दो और एक कोई और है चौथा वो छोड़ दो ये क्या नहीं करते जैसे आपने वि हा ये टिंगटिंग और ये सब हां हा मैं अब इनको कहूंगा कि इन्होंने 10 अपराध बताए हैं जी जी जी 10 अपराध इन्होने बताए हैं वो अपराध इस बारे में बताए यदि आप नाम जप कर रहे हो और यह 10 अपराध में से एक अपराध कर रहे हो तो शिव और विष्णु को यदि आप एक समझ रहे हो तो आप जो है अपराध कर रहे हो आपको नाम जप का फल नहीं मिलेगा यानी कि नाम जप पर भी आपने विधि को स्वीकार किया हुआ है नाम जप है विधि को आपने भी स्वीकार किया है कि अगर ऐसा करोगे तो ही वो होगा तो जब विधि का सब जगह अपने अनुसार तो विधि है मगर शास्त्र में लिखी हुई विधि विधि नहीं है जबकि इनके बहुत सारे वीडियोस है एक एक वही वीडियो नहीं है उस वीडियो से तो हमारे जो है दृष्टि में आया मामला कि हमें इस पर वीडियो बनाना चाहिए मगर इनके बहुत से वीडियो है जिसमें ये इस तरह का प्रोत्साहन कर रहे हैं कि जो व्यक्ति
00:38:52:14 एक तरफ मास खा रहा है तो दूसरे हाथ में मैंने उसको गीता पकड़ा दी जबकि अगर हमने थाली से एक बाइक उठाकर खा लिया वो थाली झूठी हो जाती है दोबारा उसको छुए या ना छुए वो थाली झूठी हो गई तो हमारा शरीर हमारा ही दूसरा हाथ झूठा नहीं हुआ क्या हा झूठा हो गया जब वो खाली जो हमारा अंग नहीं है वो झूठी मानी जा रही तो हमारा हाथ नहीं झूठ हुआ क्या उसी दशा में हम जाकर राइट हैंड से भगवान के मंदिर में जाकर के इनके य मंदिर में ऐसे ही पूजा होती है गर्भ ग्रह में एक तरफ आदमी ने खाना खाया दूसरे हाथ से भगवान को सेवा कर दी तो विधि का विधि का इन्होंने एक्सेप्ट किया हुआ है मगर य विधि वो विधि है जो हमने मानी है ना तो शास्त्र में हो भले ही और ना तो गुरु इनके ही गुरुओ ने ना कही हो भले ही मगर व कोई वो नहीं है जी तो लव भारत जी थोड़ा सा मैं आपसे कहूंगा कि आप अपने बारे में बताए और एक सबसे एक चीज और मैं कहना चाहूंगा कि जो लोग भी इस तरह से धर्म को आगे लाना चाहते हैं आप आप देखिएगा लव भारत जी एक न्यूट्रल रहते हुए अपने वीडियोस बनाते हैं धार्मिक जागरण के निमित मगर क्या
00:40:07:16 होता है कि इनका ऐसा चल रहा है कि जो व्यक्ति भले ही वो वैष्णव हो यह भी वैष्णव है भले ही कोई व्यक्ति वैष्णव हो मगर यदि वो स्कोन का नहीं है तो उसको रोका जाता है तो यह जो चीज कही जाती है ना वैष्णव निंदा वैष्णव अपराध तो आपके सामने आज एक यह जो कितनी सामंजस्य है जो शुद्ध सनातन आर्वैदिक हिंदू धर्म के लोग है उनमें कितनी सामंजस्य है वो वो आप देखिए और यह जो तथाकथित तंत्र है जो धर्म रक्षा का वो देते हैं दावा करते हैं कि हम धर्म रक्षा के हम धर्म प्रचारक है उनका ये देखिए जो उनकी संस्था के द्वारा स्वीकार सिद्धांतों के साथ खड़ा नहीं होगा वो भले ही वैष्णव हो कोई भी हो उसको रोकेंगे आगे बढ़ने से आज इनका चैनल आप देखिए भव्य शर्मा जी का ल भारत नाम से युगल किशोर जी का देखिए वहां पर उसको आगे बढ़ने ही नहीं दिया जाता और मैं एक आवान करना चाहूंगा हमारे जितने भी वैष्णवास्त्र
00:41:27:10 सामने आएगा इसकन ना तो श्री संप्रदाय रह जाएगा श्री संप्रदाय का कोई वो रह जाएगा सामग्री रह जाएगी ना वो रह जाएगा क्योंकि जिस तरीके से इनकी कार्य प्रणाली है और अगर वो सही है अगर उसका समर्थन किया जा रहा है तो अगर इस तरह से हम चलेंगे तो आने वाले समय में वैष्णव का अर्थ केवल एक होगा जो वैष्णव नहीं है आने वाले समय में वैष्णव का अर्थ एक होगा जो वैष्णव नहीं है क्योंकि वो वैष्णव की निंदा कर रहा है अपराध कर रहा है शिव जी का बात नहीं मान रहा है तुलसीदास जी को मायावादी कह रहा है और वो हरि और वो हरि हरि में भी भेद कर रहा है हरि हरि में भी भेद कर रहा है तो वैष्णव का अर्थ क्या होगा आने वाले समय में जो वैष्णव नहीं है तो इसलिए मैं ये आवान करना चाहूंगा जी लव भारत जी आप अपने बारे में बताए थोड़ा सा जी तो मेरी एक ये आदत है कि मैं न्यूट्रल तो हूं ही और साथ ही साथ जब भी मुझे लगता है कि शास्त्र विरुद्ध यदि कोई काम कर र है तो मैं उसका विरोध करता हूं अब पहली बार जब मैंने स्कोन का यहां पर विरोध करा क भी मैंने फोन का यहां पर विरोध नहीं करा परंतु पहली बार जब मैंने करा इस चीज को लेकर तो आप देखेंगे कि कैसे जो भाषा की मर्यादा है उसका बिल्कुल वो हो जाती है टूट जाती है पूरी अलग हो जाती है अच्छा आपने आपने इसी बारे में विरोध किया था कि मछली
00:42:42:20 जो वो उसने चिकन खाया था वो उसी पे मैंने विरोध करा था तो जैसे फ मैंने वीडियो बनाई तो ा पर भी और य प भी तो जो भव्य राधा कृष्ण दास जी है मैं नाम मैंने ले लिया तो इनका क्या है ये पहले मेरे से काफी अच्छे से बात करते थे जब मैं उनका हमेशा मतलब उनकी चीजों के लिए बहुत अच्छा बोलता था वो करता था उनको प्रोत्साहन करता था तो तब ये इनकी जो बा बात करने की शैली है बहुत अच्छी होती थी कैसे जैसे कि आप भव्य राधा कृष्ण दास है उन्होंने उस टाइम पर मुझे लिखते थे बहुत-बहुत धन्यवाद आपका और आपके काम के बारे में कौन नहीं जानता प्रभु जी आप सनातन धर्म का बहुत प्रचार ार करते हैं और विधर्मी हों से लड़ते हैं आपके चरणों में मेरा प्रणाम आप कितने अच्छा कितना अच्छा लगा ये जान के कि आपका नाम भी भव्य है ऐसे करके मतलब कितने प्रेम के साथ मेरे से बातें कर रहे हैं और फिर उसके बाद अब जब मैंने वीडियो बना दी फिर देखिए आप ये जो कमेंट है यहां पर ये क्या लिखते हैं क्या आप लाइव में आके बात करेंगे मेरे साथ आपकी विचारधारा मायावादी
00:43:57:09 प्रभावित है यानी प्रभावित है ये नहीं कि जरा सा भी थोड़ा सा भी वो बोल दिया कि नहीं मतलब थोड़ा सा वो हो सकता है मुझे ऐसा लग रहा है या ये है प्रभावित है डिसीजन दे दिया कि निर्णय सुना दिया फ तो यही करके कि आप आके एक बार मुझसे फिर चर्चा कर अब मैं मेरा ये चीज है कि मैं इनसे फिर चर्चा करूं क्यों जब इन्होने ये आपकी ये आपकी रील प कमेंट आया है क्या ये वाला जी क्या आप लाइव आके बात करेंगे मेरे साथ जी जी जी भैया कि अब मैं इनसे जाकर क्यों चर्चा तो ये तो कुछ प्रिया चरित्र जैसा दिख रहा है कि ये तो कुछ िया चरित्र जैसा दिख रहा है जैसे ही विचार मेल नहीं खाए तुरंत आउट और जो अपमान जनक स्थिति आ गई फिर आगे क्या कहा उन्होने भैया तो इस पर इन्होने बोला कि लाइव आकर मेरे से चर्चा करो मुझे कोई डर नहीं है मैं जाकर लाइव भी चर्चा करूंगा जहां बुलाएंगे वहां करूंगा परंतु आप यहां पर निर्णय दे रहे हैं जब की आपकी विचारधारा मा के द्वारा प्रभावित है तो ये तब निर्णय क्यों नहीं देंगे कि हम जीत गए ऐसा निर्णय क्यों नहीं देंगे जब ये अभी ही निर्णय दे रहे हैं बात ये है निर्णायक बन रहे निर्णायक निर्णायक बन रहे है जी फिर इनका ही इससे आपका
00:45:12:26 इससे आपका हृदय थोड़ा आहत हुआ होगा जब उन्होंने एकदम से एक होता है ना कि पहले राजेश खन्ना स्वर्ग के हैं तो उनको बहुत सम्मान हो रहा है स्वर्ग में और फिर जब उनका हां कुछ हो जाता है फैक्ट्री वैक्ट्री में आग लग जाती है तो उसके बाद जो उन के भाई उन्हें पूछना बंद कर देते हैं ठीक बिलकुल कुछ ऐसा ही है अब यहां प तो फिर आप ये है कि एक तो इन्होंने करा भव्य राधा कृष्ण दास फिर बाकी भी जितने भी इस फोन किए हैं अब यहां पर एक है नितिन करके इनकी भी प्रोफाइल मैंने यहां पर अगर आप शो कर सकते हैं तो यहां पे ये लिखते हैं भाई लेट मी आंसर योर क्वेश्चन आई अप्रिशिएट दैट यू रिस्पेक्ट कोन पहले इन्होंने लिखा कि आप स्पन का सम्मान करते हैं हमें बहुत अच्छा लगा फिर क्या लिखते हैं यू आर नथिंग टू टेल स्पन व्हाट दे शुड इंप्रूव यानी यहां पर फिरने निर्णय दे दिया कि आप कोई नहीं होते इस कोन के बारे में कि स्कोन को क्या करना चाहिए ये बताने वाले आप कोई भी नहीं होते फिर मैंने इनको बोला मर्यादा में बात करी मैंने ना आपके लिए ना इस कोन के लिए मर्यादा भंग नहीं करी कोई भी ऐसा शब्द नहीं बोला जिससे कि भावना आहत हो या कुछ थोड़ा लगे गलत लगे ऐसा मैंने कुछ कहा ही नहीं फिर ये सॉरी भी कहते हैं अगले कमेंट में
00:46:27:27 लेकिन उसके बाद पहली बात तो इनके जितने भीय प्रश्न थे उन सबका मैंने उत्तर दिया फिर इनके पास कोई भी उत्तर नहीं था आप देखेंगे अभी भी जाकर मेरे चैनल में तो वहां पे इनके आगे का मैंने दो इन्होंने प्रश्न पूछे मतलब वो करके दो कमेंट तो फिर मैंने दो उत्तर दिए उसके बाद इनका कोई उत्तर नहीं है कोई इनके इनके पास कोई आंसर नहीं है उसके बाद ऐसा भी नहीं है कि इन्होंने फोन रख दिया हो ऑफलाइन हो गए हो इनको पता ना हो कि अब मैंने कोई रिप्लाई दिया इनको रि में तो फिर ये उस टाइम प ऑनलाइन थे और फिर ये क्या करते हैं उसकी थोड़ी देर बाद जब मैंने इनको उत्तर दे दिया और ये निरुत्तर हो गए फिर ये दूसरे मेरे मतलब मेरी कमेंट वीडियो के कमेंट बॉक्स में दूसरी कमेंट में जाकर क्या लिखते हैं हर जगह कॉपी पेस्ट करता फिरे क्या भाई यही जवाब तेरी खुद की औकात नहीं है एक भी बंदे को भक्त बनाने की यानी आप अभी फिर से पर्सनल हो रहे हैं फिर से निर्णय दे रहे हैं और औकात पे आ रहे हैं यानी य भाषा की शैली है ऐसी बात की जाती है आप एक जगह अपने ही कमेंट में बो इनका इनका ये जो आचरण ऐसा क्यों बदलता है इस पर मैं कुछ कहना चाहूंगा क्योंकि मुझे नहीं लगता प्रभुपाद जी ने ऐसा कहा होगा मगर उनके नाम से ये सब चीजें लिखी हुई है ना कि रास्कल
00:47:43:07 का उन्होंने करपात्री जी के लिए उन्होंने रासकल शब्द का उपयोग उसमें लिखा हुआ है अखंडानंद सरस्वती जी अखंडानंद सरस्वती जी को तो उन्होंने कृपा जी को भी बुलाया था उन्होंने उद्घाटन में जब यहां मथुरा वृंदावन वाले मंदिर का उद्घाटन हुआ था तो करपात्री जी को भी बुलाया था करपात्री जी वर्णाश्रम धर्म की मर्यादा के उसमें नहीं गए थे अखंडानंद जी गए थे तो वो साथ में बैठे हुए फोटो है और उनके लिए लिखा हुआ है इनके नाम से प्रभुपाद जी के नाम से कि उन्होंने उनको रासकल कहा जिसको व्यक्ति रासकल कहेगा उसको क्यों बुलाने जाएगा कृष्ण भगवान के बारे में भी रासकल लिखा हुआ है प्रभुपाद जी की तरफ से अब वो कितना रियल है वो नहीं पता मगर अगर जब ये यह पढ़ेंगे अपने ग्रंथों में कि हमारे जो पूज्य आचार्य गण है वो रासकल इत्यादि शब्द का उपयोग कर रहे हैं तो उनका आचरण रामो विग्रहवां धर्मा रामो दुर्वी भाषित ये सब कब सीखेंगे वो वो तो ऐसा ही करेंगे आगे प्रिया चरित्र वाला जी भ जी तो यही है कि इनकी भाषा की शैली जो ऐसे बदली है इससे तो मैं बहुत आहत हुआ हूं और फिर मुझे अब लगता है कि अब एक और वीडियो बनाऊंगा और वीडियो इनके ऊपर बनानी पड़ जाएगी क्योंकि ये नहीं है कि जरा भी हा मतलब
00:48:58:12 बहुत आराम आपको ये कहना चाहूंगा आप मुझ मतलब इस तरह से बनाए अगर बनाएंगे तो केवल वो अगर किसी एकाद व्यक्ति ने कुछ कर दिया तो उसको समष्टि के रूप में ना देखें पूरा स्कोन ही ऐसा है अगर आपको पूरे स्न से किस प्रकार का व्यवहार दिखता है उसके उसके निमित्त आप अपनी प्रतिक्रिया दे क्योंकि कोई भव्य और य यह लोग कोई उनके वो नहीं है प्रतिनिधि यह लोग तो अपने मन में य कई बातो में उनका भी विरोध कर रहे हैं इन्होंने अपने लाइव में कई बातें की जी अ जितने भी ओवरऑल एक्सपीरियंस जो है ना स्कन के प्रति यदि वो आपको लग रहा है ना ओवरऑल वाला तो उस परे फिर आप प्रतिक्रिया दें वो आप बताए वो क्या है वही चीज है कि पहले बहुत ही ज्यादा प्रेम बहुत ही ज्यादा अच्छे से व्यवहार करना मतलब जब तक आप इनकी उसके हिसाब से रहोगे कि जरा सा भी कहीं भी कुछ विरोध नहीं करना कि भैया चाहे शास्त्र विरोध आचरण हो जो भी चीज कर रहे हैं वो शास्त्र विरोध भी हो गलत हो तो भी अगर आपने कुछ नहीं बोला तो आपको गले लगाएंगे आपको करेंगे कि नहीं बहुत अच्छा बहुत बढ़िया लेकिन जब भी अगर आपने थोड़ा सा भी बोल दिया कि नहीं यार यहां पे ना कुछ गलत है यहां पे थोड़ा शास्त्र के अनुसार सही नहीं है मैंने इनको 18 अध्याय के अनुसार मतलब
00:50:13:19 पूरा कोट करके पूरा एक एक रेफरेंस देके वीडियो बना के समझाया है मतलब जो वीडियो बनाई है मैंने उसको भी इतना ये पूरा समझा कर रहा हूं मैं कि ज 18 अध्याय में भगवान ने कहा है कि जो गीता है वो भक्तों को जो भक्त नहीं है जो भगवान के प्रति जिनकी श्रद्धा नहीं है भगवान के प्रति जो तप तप नहीं करते हैं जो जिनकी इच्छा नहीं है उनके उनके साथ यह जो भगवत गीता का रहस्य है वह साझा नहीं करना उनको नहीं बताना तो आप फिर भी बता रहे हो तो मैं इसके इसी चीज को लेकर को ये नहीं है कि मैं अपने हिसाब से मन में मेरा कोई द्वेष हो इसन के लिए या वो हो परंतु मैं केवल शास्त्र के अनुसार ही बता रहा हूं उस पर ही इनको इतना वो आ गया कि नहीं आप शास्त्र के अनुसार भी बोल नहीं सकते यह बात सही बात है मुझे मैं समझ सकता हूं आपको किस प्रकार का लग रहा होगा हालांकि मैं मेरे को तो कोई ऐसी अपेक्षा नहीं रहती है इन लोगों से मगर हां उसने लाइव में आकर के इस तरह की बातें की थी कि आप मुझसे बड़े हैं ये हैं वो है तो फिर बाद में वहां जाकर के वो गटर छाप तेरी बेटा ये वो अच्छा एक बात सत्य है यदि किसी दिन सामना हुआ तो सामने क्या ये अपने वही शब्द दोहराएंगे जो अब कह रहे हैं रहा है यह
00:51:28:22 कर रहा है नहीं दोहराएंगे क्योंकि सामना हुआ तो यह जो है धरती फाड़ के गाड़ दिए जाएंगे सामना होगा तो ये यह शब्द नहीं दोहराएंगे जो आज यह किसी मंच पर शब्द दोहराएंगे क्या नहीं दोहरा सकते तो ये क्या है मनुस्मृति में एक बात कही गई है वही कार्य करिए जो आपको छुपाना ना पड़े छिपाने वाले कार्य तामसिक होते हैं अब इनके य क्या कहा जा रहा है कि आप सात्विकता की ओर जाओ तो यदि ये दोहरी प्रकार की भाषा कर रहे हैं कि मैं जब लाइव में आऊंगा तो अलग बोलूंगा मंच पर आऊंगा तो अलग बोलूंगा पब्लिकली बोलूंगा तो अलग बोलूंगा और पीठ पीछे या छुप करके कुछ अलग बात बोलूंगा तो यह क्या है यह छिपाने वाला भाव है तो यह तामसिक का है ठीक है शास्त्र विरुद्ध हो गया दूसरी बात यदि आपको ऐसा लग रहा है कि सामने वाले ने आपके प्रति कोई अभद्र आचरण किया है तब भी आपको अनुमति यह नहीं है कि आप भी अभद्र आचरण करो आपको लड़ने की है मगर गिरो उस झरने की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता खोने नहीं देता आप जैसे रावण ने सीता माता का हरण किया तो राम भी कर सकते थे श्री राम ने नहीं सिखाया ना कि आप जाकर वहा मंदोदरी का हरण कर लो लड़ो लड़ के सामने से जीत के लाओ अपनी गरिमा आत्म
00:52:43:24 सम्मान उसके लिए लड़ो तो यह नहीं है कि अधर्म से लड़ने के लिए खुद अधर्मी बन जाओ यह नहीं सिखाया उन्होंने अच्छा इसके बाद क्या है कि उनकी बातें गटर छाप है उसका ईश्वर निर्लज है और घटिया है बहुत बहुत गंदी गंदी चीजें कही है तो उस पर अगर बंद नहीं किया तो हम लोग कारवाई भी करेंगे ऐसा नहीं है कारवाई नहीं समय का थोड़ा अभाव है धर्म रक्षा में रहते हैं मगर यह जो त्रिया चरित्र है जो दोहरा रूप है यह सात्विकता तो नहीं है और मैं इनसे मैं इनसे यह कहूं कि तुम सामने आओ मान लो तुम दोबारा अगर यह लाइव भी आ जाएंगे तो क्या यह बोलेंगे यही भाषा गटर छाप शब्द का उपयोग करेंगे यह जो घटिया है इस शब्द का उपयोग करेंगे करेंगे तोय क्या है त्रिया चरित्र कि पब्लिकली कुछ और और पीठ पीछे कुछ और है ना जब मेरे सामने होंगे तो य क्या कह पाएंगे मुझे घटिया नहीं कह पाएंगे मालूम है यह हाथ जब किसी के ऊपर पड़ता है तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है तो तब नहीं कर पाएंगे तो ये है यह कुछ है त्रिया चरित्र टाइप का खैर आशु जी आपके पास में वापस आऊंगा यह पूछूंगा कि
00:53:59:27 अ ये मायावादी क्या क्योंकि ये क्लेम किया जाता है कि उन्होंने खंडन किया और तो जो मायावादी ने शंकराचार्य जी का खंडन किया या उसमें सामंजस्य है कुछ एकत्व है सिद्धांतों में वो आप उस पर थोड़ा सा प्रकाश डाल दीजिए क्योंकि आप रामानु परंपरा से दीक्षित है देखिए ऐसा है कि अब जैसे कि अब आपका जैसे सिद्धांत है शंकराचार्य जी का अद्वैत हमारा सिद्धांत है विशिष्टा दवे हम गृहस्थ के अंदर है ठीक है हम गृहस्ती के अंदर है और हम किस संप्रदाय से हैं श्री संप्रदाय से हमारे सामने कोई श्री संप्रदाय का आचार्य आएगा तो हम क्या करेंगे उसको दंडवत प्रणाम करेंगे अब हमारे सामने यदि शंकराचार्य जी आ गए संत है वो तो हम क्या करेंगे अरे यह तो मायावादी है उनके सामने हम तू तड़ाक शब्दों का प्रयोग करेंगे क्या रामानुजाचार्य जी ने यह नहीं सिखाया कि भाई शंकराचार्य जी को तुम हीन दृष्टि से देखो शंकराचार्य जी की तुम लोग निंदा करो रामानुजाचार्य जी ने यह नहीं
00:55:14:27 सिखाया किसी के सिद्धांत में भेद होने से यह सिद्ध नहीं हो जाता कि वह व्यक्ति उसकी निंदा कर रहा है आपने कभी श्री संप्रदाय के आचार्यों के मुखारविंद से जब वो कथा कहते हैं आदि की रामायण आदि की तो कभी आपने यह नहीं सुना होगा श्री संप्रदाय के आचार्यों से कि जितने भी शैव लोग है वो सब श्री में आकर के वैष्णव हो जाओ लेकिन आपको कोन के अंदर य सुनने को मिल जाएगा कि जितने भी शव लोग है वो आकर के वैष्णव हो जाओ क्यों क्योंकि भगवान शिव जो है वो भगवान कृष्ण का ध्यान करते हैं अब कितनी बार ऐसा आया है शास्त्रों के अंदर की जो भगवान शिव है वो राम जी का ध्यान करते हैं एक मैं ग्रंथ पढ़ रहा था उत्पत्ति तंत्र नामक ग्रंथ उत्पत्ति तंत्र नामक ग्रंथ के अर स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है कि जो वैष्णव है जो शास्त्र है जो गाण पत्य है तो जितने संप्रदाय है अगर यह भगवान शिव की पूजा नहीं करेंगे तो जो अन्य देवी देवता हैं वो इनको छोड़ कर के चले जाते हैं उत्पत्ति तंत्र के अंदर य स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है कि वैष्णव को शकतो को और गणपति को इन सभी संप्रदाय के लोगों को भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए अब रही जहां तक रामानुज चार के सिद्धांत की बात शंकराचार्य जी के तो रामानुजाचार्य जी का जो विशिष्टा दत
00:56:30:01 सिद्धांत है विशिष्ट का अर्थ क्या हैम चेतन और अचेतन इन दोनों से युक्त ब्रम और अद्वैत का अर्थ है एकता अभेद तो ये विशिष्टा द्वत है तो विशिष्ट के अंदर भी अद्वैत आ ही रहा है कहीं ना कहीं मैं एक ग्रंथ पढ़ रहा था योगा वशिष्ठ नामक ग्रंथ तो योगा वशिष्ठ के अंदर आप देखेंगे उसके अंदर मेरे को अद्वैत अद्वैत दिखाई दिया जहां पर वशिष्ठ जी श्री राम से कह रहे हैं य जो पूरा जगत है ब्र स्वरूप है योगा गुरु परंपरा उसको आप बिना के पढ़ नहीं सकते गीता प्रयोगा नहीं लिखा दे दिया जाएगा उसको बदल देंगे इनको दे दिया जाएगा उसको बदल देंगे योग की कमेंट्री में अनुवाद में सब बदल देंगे हमने तो भक्ति में लिखा है हम तो बदल सकते है नाम बदल सकते सब कुछ बदल सकते हैं टोटल तो इसका अर्थ रामानुजाचार्य जी ने अपना त लिखा शंकराचार्य जी ने शंकराचार्य जी तो उनका अपना अलग सि मुझे विशिष्ट दत ऐसा लगता है जैसे जो हम लोग जो बात बताने ना व्यवहार में द्वैत और परमार्थ में अद्वैत तो यह जो चीज है इसी को नाम दिया गया विशिष्टा द्वैत जैसे मान लीजिए शंकराचार्य जी का वो क्लियर नहीं समझ पाया
00:57:45:04 कि व्यवहार में उन्होंने द्वैत को अपनाया और परमार्थिक रूप से अद्वैत की स्थापना कर दी तो इसको जब व्यक्ति समझ नहीं पाया तो इसी को एक नाम और दिया गया इस चीज को बीच की जो दोनों तरफ से कड़ियों को जोड़ते हैं तो विशिष्टा द्वैत बन गया कुछ ऐसा समझ में आता है जीन तो केवल मोक्ष को भी नहीं मानेगा किंतु शास्त्रों के अंदर केवल मोक्ष का वर्णन है या नहीं है केवल मोक्ष का वर्णन है इकोन को कौन सा वाला मोक्ष चाहिए इसन को चाहिए कि हम गलोक में जाए उनको भाई गलोक चाहिए वो यदि किसी से भक्ति करवाएंगे तो क्या लेकर के आते हैं कि हम तुमको गलोक ले जाएंगे गलोक के अंदर क्या है अखंड आनंद गलोक के बाद आपको जन्म मृत्यु के चक्र से आप बिल्कुल मुक्त हो जाते हैं गलोक के अंदर कोई आधि व्याधि नहीं है गलोक के अंदर भगवान कृष्ण की नित्य सेवा आप करिए तो यह मैं पूछना कमेंट आ रहे हैं कुछ ऐसे कमेंट आ रहे हैं कि रावण उजा चार परंपरा ने अद्वैत का खंडन किया है खंडन नहीं किया है शाब्दिक भेद से मध्यस्थता सामंजस्य स्थापित की है दूसरी बात यह है कि रामानुजाचार्य परंपरा ने क्या कहा है क्या नहीं कहा है यह कौन बताएगा भाई रामानुज यह तो कम से कम उन्हें बता लेने दो जो रामानुज वाले हैं श्रीधर ने क्या कहा यह आप बताओगे रामानुज
00:59:00:18 जी ने क्या कहा वो आप बताओगे मतलब श्रीधर स्वामी की परंपरा से जहां से वो बुक आ रही है वो नहीं बताएंगे वो दूसरे लोग बताएंगे और स्न ने जो कहा वो तो स्कन बताएगा ही जी एक बात और देखिए आप जैसे की एक माता होती है ना वो कहती है बच्चा अगर छोटा हो तो इस कमरे के अंदर म यहां मत जाना यहां पर भूत रहता है यहां पर बंदर रहता है तो ऐसे इ लोगों ने शंकराचार्य जी के लिए कर रखा है देखो भाई वो मायावादी है वहां तुम जाओगे भक्ति खराब हो जाएगी हमारी शंकराचार्य जी को ना सुनना है ना उनके ग्रंथों को तुमको पढ़ना है वो बिल्कुल इन्होने शंकराचार्य जी को ऐसे उन्होंने शंकराचार्य जी के ग्रंथ नहीं पढ़े शंकराचार्य जी के सिद्धांत को नहीं जाना उन्होंने केवल एक चीज बताई है कि शंकराचार्य जी ने क्या बोला है जीव और ब्रह्म एक है माने कि वो स्वयं को कृष्ण समझते हैं स्वयं को नारायण समझते हैं तो जो है आप इस सिद्धांत को मत मानिए वो निर्गुण निराकार को मानते हैं एक विकृत रूप अद्वेता इस कोन के अंदर प्रतिपादित मेरे को जब मैंने स्कोन को सुना था तो मेरे को भी यही लगा मैंने कहा अत अच्छा ऐसा है कि मतलब इतना विकृत रूप है उसका एक बार मैंने पूरी शंकराचार्य जी की वीडियो देखी मैं कोई वीडियो देख रहा था क्योंकि सुनता रहता हूं जिज्ञास तो मैंने कोई वीडियो देखी शंकराचार्य की मेरे को उनका वक्तव्य बड़ा अच्छा मैंने उनकी
01:00:15:21 वीडियो कब से देखना स्टार्ट करी जब मुझे पता चला कि धर्म सम्राट कृपा जीहा हैं मैंने तकी व देखना आकि धर्म सम कृपा जी बहुत बचपन से जानता हूं उनको उनके बारे में मैंने पढ़ाया सुना है कि प्रकार अच्छे विद्वान रहे हैं वो अपने गुरुदेव से भी सुना है अच्छा मैंने ये देखा है कि रावण संप्रदाय के भी लोग जो अपने कथा करते हैं तो उसमें कितने अच्छे से वो शंकराचार्य जी का मतलब वो करते हैं कि उन्होंने हमको जैसे प्रेमानंद जी आप तो वहां पास में ही रहते हैं वृंदावन के तो प्रेमानंद जी के विचार जो है शंकराचार्य जी के लिए करपात्री जी के लिए कि मायावादी नहीं है माया का नाश करने वाले हैं शंकराचार्य जी माया से छूटते कैसे हैं उन्होंने सिखाया तो प्रेमानंद महाराज जी ने में देखिए सत्य भदा गमना नमन तो इस लोक का उच्चारण किसका है ये शंकराचार्य जी का ही तो दिया हुआ है तो शंकराचार्य जी के को भी प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं और प्रेमानंद महाराज जीने क्या कहा था की गीता प्रेस की भगवत गीता जो साधक संजीवनी है राम सुख दास जी के द्वारा लिखित वो आप पढ़िए शंकरा पुरी श जब राम सुख दास जी ने जो साधक संजीवनी ग्रंथ लिखा था तो पुरी शंकराचार्य जी को उन्होंने अपने पास बुलाया
01:01:30:24 था कुछ प्रवचन करने के लिए उस ग्रंथ के लेखन के लिए क्योंकि उन्होंने बताया था तो इस प्रकार से उन्होंने शंकराचार्य जी को बुलाया तो वहां पर जो उनके कुछ बात उनकी साधक संजीवनी के अंदर शंकराचार्य जी के द्वारा भी लिखित है सिद्धांत उसम मतलब उसम जो है एक दूसरे की वो विचार विमर्श से वो लिखा गया जो वर्ण व्यवस्था है वो जन्म को लेकर है इसका मतलब प्रेमानंद महाराज जी जो है वो जन्मना वर्ण व्यवस्था को स्वीकार करते हैं क्योंकि स्पन की गीता तो वो नहीं पढ़ते वो कौन सी पढ़ते हैं साधक संजीवनी तो जितने भी हमारे बड़े-बड़े आचार्य आप देखिए वो भागवत भी पढ़ते हैं तो ये थोड़ा क्लियर कर दीजिए थोड़ा ठोस तरीके से कि रामानुज संप्रदाय में वर्ण व्यवस्था को दोहरा माना जाता है ए
✅ This part is already used · 01:02:13:21 – 01:02:17:06 (0:03)
→ Used in: A · Live क्या गीता में भगवान श्री कृष्ण ने किसी और की शरण में जाने को कहा है? #rampaljim... at 13:40 ↗
→ Used in: B · Live रित्विक सिस्टम या गुरु परंपरा का सत्यानाश at 40:52 ↗
01:02:13:21 बी सी डी ई एफ जी एच आई जे के एल एम एन ओ पी क्यू आर एस टी डब्लू एक्स वाई जड
⬜ Not used yet · 01:02:17:06 – 01:21:38:00 (19:21)
01:02:17:06 ऐसा या जन्म से या कर्म से ऐसा कुछ रामानुजाचार्य संप्रदाय के अंदर जो वर्ण व्यवस्था है वो जन्म से मानी जाती है से ण श्री संप्रदाय के अंदर मानी जाती है य क्यों नामक ग्रंथ में माधवाचार्य शास्त्री हुए वो भी श्री संप्रदाय से हैं तो श्री संप्रदाय के आचार्य ने स्वयं प्रमाणित किया है कि हम जन्म से वर्ण व्यवस्था को स्वीकार करते हैं उन्होंने वहा पर प्रमाण भी दिए हैं उन्होंने वहा प्रमाण भी दिए जी अच्छा मैं ये कह रहा हूं ये जो श्री संप्रदाय के जो वैष्णवास्त्र ये आपके यहां पर इनकी पुराण दिग दर्शन इत्यादि को प्रामाणिक माना जाता है इनको या मतलब इसमें कुछ थोड़ा सा बताइए जो माधवाचार्य जी जिन्होने क्योंकि वो बहुत अच्छा ग्रंथ है क्यों और पुराण दिग्दर्शन और इन्होंने जब यह ग्रंथ लिखा है तो ग्रंथ मेरे पास है ये इसमें इन्होंने वर्ण व्यवस्था
01:03:20:09 को जन्म से इन्होंने सिद्ध किया है यह यह जो ग्रंथ है इसमें जन्म से सिद्ध किया है इसमें सबसे बड़ी बात क्या है ना इसमें जब यह इन्होंने ग्रंथ लिखा है उसके बाद इन्होंने कई आचार्यों से इस पर जो है भूमिका में साइन करवाए कई आचार्यों से इसकी प्रामाणिकता के लिए ऐसे नहीं है तो यह एक सामंजस्य होती है हमारे जो शुद्ध सनातन वैदिक कपा जी भूमिका ख रहे हैं
01:04:02:09 वैष्णवास्त्र जी के ग्रंथों में कपाती जी के जो भक्ति सुदा है उसमें निंबार्काचार्य जी ने भूमिका में कि हस्ताक्षर तो ऐसा है अब देखिए यदि आप इनके पास जाएंगे और यह कहेंगे कि हम जो है अद्वैत का ग्रंथ पढ़ रहे हैं शंकराचार्य जी के द्वारा लिखा हुआ ग्रंथ पढ़ रहे हैं तो ये तुरंत मना कर देंगे कि उसको मत पढ़िए अब मैं आपको अपनी बताता हूं मैं अपने गुरुदेव के पास गया मैंने अपने गुरुदेव को बताया कि मैं जो है धर्म सम्राट करपात्री जी महाराज के द्वारा लिखित जो ग्रंथ है भक्ति सुदा आदि उनको उनका अध्ययन करता हूं उन्होंने नाम पूछे थे मेरे से ग्रंथों के कि किन ग्रंथों का अध्ययन करते हो तब मैंने उनको बताया था कि करपात्री जी के ये अमुक अमुक ग्रंथ है तो उन्होंने कहा कि करपात्री जी तो बहुत प्रकांड विद्वान रहे हैं और बहुत अच्छे संत रहे हैं और गुरुदेव ने ये भी बताया कि वो जब छोटे थे जब उनका विद्या अध्ययन का समय था तो उनके जो गुरुदेव है हमारे गुरुदेव के जो गुरुदेव है उनका नाम है रामानुज प्रपन्नाचार्य जी जो भागवत जी का सचल विग्रह उनको कहते हैं तो तो उनके मित्र थे करपात्री जी महाराज हमारे गुरुदेव के जो मित्र थे करपात्री जी महाराज उनके आश्रम पर भी आया करते थे तो एक बार करपात्री जी गुरुदेव
01:05:17:19 ने बताया छोटा सा उनका संस्मरण सुनाया कि करपात्री जी महाराज रामानुज प्रपन्नाचार्य जी के आश्रम पर आए तब वहां पर गुरुदेव छोटे से बालक थे तब विद्या अध्ययन के लिए आए ही थे तब करपात्री जी का उनको वहां पर दर्शन सुलभ हुआ तो करपात्री जी ने उनको अपनी गोद में बिठाला था और उनसे पूछा कि क्या करता है य बालक तो उनके गुरुदेव ने बताया कि ये अभी ब्रजवासी बालक है अभी ये देखिए ये कमेंट आ रहा है य माकन वाले जो है व माधवाचार्य शास्त्री जी को प्रमाणिक नहीं मानते तो माधवाचार्य जी का जो ग्र है ना उसको लिखने के बाद उसको जब आप पढ़ेंगे तो उसी ग्रंथ में ही अनेकानेक जो वैष्णव चार्य शंकराचार्य है और सभी से उसमें सम्मति में हस्ताक्षर करवाए गए हैं तो यह आपको पढ़ना चाहिए है ना इसमें कई सारे आचार्यों का इसमें दिया गया है और सबसे बड़ी बात है कि
01:06:24:16 वैष्णवास्त्र अगर आपको अपने धर्म की रक्षा करनी है तो आपको इनके ग्रंथों की आवश्यकता पड़ ही जाएगी कभी ना कभी यह देख लीजिएगा आर्य समाजी जब आर्य समाजी जब क्यों उठाएंगे ना आपकी आपके सिद्धांतों पर क्यों तो उन क्यों का जवाब आपको इनके ग्रंथों में मिलेगा तो पहली बात तो यह है कि यह भूल जाइए कि इनके बिना आपका निर्वाह हो पाएगा दूसरी बात कि आपके जो जो ये परंपरा प्राप्त है कि नहीं आचार्य ये कौन बताएगा यह
01:07:24:15 वैष्णवास्त्र प्रमाण इनको प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है इनके द्वारा लिखित इन ग्रंथों को अब अगर वही वाली बात है कि इकोन के बारे में क्या है और क्या नहीं यह कौन बताएगा सबसे जो अंततोगत्वा जो इस कन का होगा वही प्रमाण माना जाएगा तो इसी प्रकार से श्री संप्रदाय के कौन है और कौन नहीं है यह कौन बताएगा जो श्री संप्रदाय का होगा वो बताएगा और अगर नहीं मानते तो फिर डॉक्टर जाकिर नायक भी आकर के तुम्हारे ग्रंथों को खोल करके उल्टी सीधी व्याख्या कर दे मान लो उसकी बात उससे भी तो आप यही तर्क करते हो कि अपनी मां की बात मानते हो कि आपके पिता कौन है इस प्रश्न के संबंध में या फिर किसी और से पूछते हो मां जो कहेगी ये तुम्हारे पिता है वही मानना पड़ता है उसी प्रकार से जब वैष्णवास्त्र
01:08:42:09 वैष्णवास्त्र जी के बारे में पूछा था तो गुरुदेव ने कहा था ये तो शास्त्रार्थ महारथी है उनको ज्ञात है उनके बारे में माधवाचार्य शास्त्री जी के बारे में श महार हा शास्त महारथ गुरुदेव ने ने कहा था ये शा महारथी श्री संप्रदाय के और आप देखिए जब मेरे गुरुदेव के जो गुरुदेव है रामानुज प्रपन्नाचार्य जी जब उनकी मित्रता धर्म सम्राट से है वो कौन है अद्वैत अद्वैत और वो कौन है विशिष्टा तो उनकी मित्रता वो एक दूसरे को हीन दृष्टि से नहीं देख रहे मेरी आपसे मित्रता है मैं आपका किसी उसम साथ दे रहा हूं तो ये लोग क्या कह रहे हैं कि भाई ये तो मायावादी है ये तो माया इसमें मायावादी कहां से आया मेरी समझ में नहीं आया जी तो बड़ी विचित्र बात है इनकी और गीता को य प्रमाण मानते हैं किसके रूप में कि भगवान कृष्ण की ही वो वाणी है इसलिए हम उसको प्रमाण मानते हैं तो भाई भगवान की वाणी मान कर के यदि आप उसको प्रमाण मानोगे तो भगवद उक्ति होने के कारण जो बौद्ध दर्शन है उसको भी आपको प्रमाण मानना पड़ेगा क्योंकि भगवत गता को हम प्रमाण क्यों मानते हैं भगवत गीता को हम प्रमाण इसलिए मानते हैं कि वो वेद का अनुसरण करती है यदि वेकल है नुकूल हा यदि वो वेदानु कूल
01:09:57:10 नहीं होती भगवत गीता तो उसको भी हम प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं करते यदि आप यह कहते हो कि भाई भगवान श्री कृष्ण के मुखारविंद से निशित श्रीमद् भगवत गीता है इसलिए हम उसको प्रमाण के रूप में मानते हैं फिर आपको जो भगवान बध वो भी भगवान विष्णु का अवतार माने जाते हैं बुद्ध नाम जन की कटे भविष्यति तो फिर बुद्ध भगवान के द्वारा जो निश्चित बौद्ध दर्शन है उसको भी आपको प्रमाण मानना होगा उसका भी आप खंडन नहीं कर सकते जी तो वा रूप सकते जी जी जीमें है जो वेद की निंदा करेगा वो नास्तिक
01:10:39:22 है तो अ एक चीज और लेंगे हमसे हो गया है लगभग लगभग मेरे तो कई सारे रामानुजाचार्य परंपरा और जो शंकराचार्य परंपरा या अन्य जितनी भी जो प्रामाणिक परंपराएं हैं उनके बीच जो सामंजस्य है और एकत्व है और जिस एकत्व को प्रदर्शित करते हुए हम सनातन समाज को संगठित कर सकते हैं मुख्य उद्देश्य य नहीं है कि हमारा सिद्धांत ऊपर है हमारा सिद्धांत ऊपर है जिस सिद्धांत से हम लोग एक हो जाए वो सिद्धांत ऊपर है जिससे कि हिंदू एक हो जाए संगठित हो जाए व सि सीधे है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं और जिस सिद्धांत से ईश्वर अबाध सिद्ध हो रहा है वह सिद्धांत हमारा है फिर वह रामानुजाचार्य जी का हो शंकराचार्य जी का हो या मधवा चार जी का हो मगर इसमें क्या है कि अलग अलग तरीके से इसकी ईट उसका रोड़ा भानुमति का कुंडमा जोड़ा भागवत पढ़ी सीदर स्वामी से और हम है मधुवा
01:11:54:25 चार्य जी के फॉलोअर मधुवा चार्य जी की परंपरा शुरू हो रही है हंस भगवान से और इनकी परंपरा इनकी भगवत गीता में परंपरा शुरू हो रही है श्री कृष्ण से मगर हम है मधवा चार्य जी के फॉलोअर मधुवा चार्य जी बताते हैं कि उसमें इनके द्वारा बताया जाता है कि जो बलराम जी है वो बलराम जी बलराम जी के बारे में बताया जाता है इनके द्वारा कि बलराम श्री कृष्ण के बाद जो सबसे पहला एक्सपेंशन है श्री कृष्ण का बलराम जी है उसके बाद जो शि है वो तो और तीसरे चौथे नंबर पर कहीं आते हैं मगर मधवा चार्य जी के द्वारा बताया गया जो सिद्धांत है उसमें तो शिव जी बहुत पहले आ जाते हैं बलराम जी बाद में आते हैं वो है वो हम तारतम में लाएंगे किसी दिन हमारी बात चल रही है मधवा चार जी वालों से तो हम वो तारतम में वहां पर जो मधुवा चार्य जी के कहां कहां पर स्कोन की चीजें अगेंस्ट जाती है वो सब हम सामने लाएंगे और ये जो जिसको इसकी प्रमाणिकता जाननी हो बहुत ज्यादा महंगी नहीं है ये ग्रंथ और बहुत काम के हैं क्योंकि आर समाज यों के जितने भी आरोप होते हैं उनका संक्षिप्त में इसमें उत्तर है अवतारवाद बहुत सारे उत्तर हैं इसमें तिलक क्यों लगाया जाए शिखा क्यों लगाई जाए छोटे छोटे से बहुत सारे उत्तर हैं गणेश जी के सर क्यों थे हाथी के बहुत
01:13:09:26 अच्छा अच्छे ग्रंथ है आप सबके पास जो भी हिंदू धर्म के सिद्धांतों की रक्षा करना चाहते हैं सनातन वैद कार्य हिंदू धर्म पहले सिर्फ धर्म लिखने से काम चल जाता था रामायण इत्यादि काल में मगर आज धर्म धर्म के नाम पर धर्मा भास बहुत सारे हैं तो इसलिए एडजेक्टिव लगा लगाना पड़ता है अब एक लगा दिया सनातन तो फिर कहेगा सनातन वेद वाला ना हां भाई सनातन वैदिक फिर हिंदू भी लगाना पड़ता है हार भी लगाना पता सनातन वैदिक आर हिंदू धर्म इतने सारे एडजेक्टिव है धर्म का अर्थ ही है सनातन धर्म और कल हमारा एक वीडियो आएगा आर समाज ने एक वीडियो है कोई बना है जिसमें वो बता रहे हैं कि वो ब्रह्म वैवर्त पुराण में इतना ज्यादा वो गंदगी देखी मैंने मतलब हीन दिखा रहे हैं पुराण को हीनता को लेकर के बोल रहे हैं तो उसमें हमारा एक कल वीडियो हम लाने वाले हैं बना दिया है व कुछ व्यस्तता के चलते ऐसा हो रहा है तो हम लोग आने वाले हैं आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद मैं फिर से एक बार सबसे कहूंगा कि लव भारत जी का जो चैनल है वह आप लोग सब्सक्राइब करें फॉलो करें और इनके पेज इनको सपोर्ट करें क्योंकि जो शुद्ध धर्म को बचा बता बचाने का प्रयास कर रहे हैं हमें उनका सपोर्ट करना चाहिए फिर वो युगल किशोर जी हो रामानुज परंपरा से या भव्य जी हो वैष्णव परंपरा से
01:14:25:19 या कोई भी ऐसा व्यक्ति जो निर्विवाद रूप से उस सिद्धांत का प्रचार प्रसार कर रहा है जिससे कि हमारे धर्म की रक्षा की जा सकती है देखिए व्यक्तिगत रूप से हम किसके प्रति आस्त है ड मैटर किसी प्रति आस्त हो सकते मगर हमें सिद्धांत कौन सा बचा पाएगा जो सार्वभौम हो जिसको दुनिया में काटा ना जा सके और शंकराचार्य का विरोध करते हुए आप ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं कर पाएंगे शंकराचार्य जी द्वारा नि सीमा में रहते हुए आप अंदर रहते हुए भक्ति कर सकते हैं द्वैत की दैत का पालन कर सकते हैं सभी का पालन कर मगर आप यह कहते हुए आगे बढ़ेंगे कि हम उसका खंडन कर रहे हैं उसको मानते ही नहीं है यह कहते हुए जब आप आगे बढ़ेंगे तो ईश्वर आपका बाधित हो जाएगा जैसे ही आपने किया तो आप जो सकारात्मक दृष्टि से देखने का प्रयास करने वाले लोग हैं मैं उनको कहना चाहूंगा आप इस बात पर ध्यान दे कि जो माया अद्वैत इत्यादि की आवश्यकता इसीलिए है जिससे कि ईश्वर की सर्व शक्तिमता हो सके ईश्वर सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं हो पाएगा अद्वैत को बिना माने ग्रंथ का नाम पूछ रहे हैं आकाश जोशी जी तो उनके लिए बता दूं ग्रंथ का नाम है क्यों इसके दो भाग हैं पूर्वार्ध और उत्तरार्ध और एक ग्रंथ
01:15:40:20 है पुराण दिग्दर्शन इसमें आपको सनातन धर्म से रिलेटेड बहुत सारे सवालों के उत्तर मिल जाएंगे प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे सभी हिंदुओं के पास य ग्रंथ होना चाहिए है ना बहुत अच्छा ग्रंथ है और इसकी शुरू में ही इसकी प्रमाणिकता भी आपको यथा सामर्थ मिल जाएगी और प्रमाणिकता जाननी है तो हमसे संपर्क कर लीजिएगा हम पूरा इनके गुरु कौन थे उनके गुरु कौन थे कैसे वो रामानुज तक पहुंचते हैं वो सारी वंशावली दे देंगे मायने रखता है कि आपको हमारी बात पर विश्वास है कि नहीं अगर विश्वास नहीं है तो नहीं है आप कह रहे हो कि आप प्रभुपाद जी के शिष्य हो अभी हम कह दे सबूत दो अब सबूत तो कोई सनातन ग्रंथ से तो दे नहीं पाओगे कि हम प्रभुपाद जी के शिष्य है तो हम क्यों माने तो भाई रामानुज परंपरा से कौन है कौन नहीं है राम अनुज परंपरा के जो अधिकृत आचार्य गण है वो बताएंगे वो बता रहे हैं राम अनुज परंपरा के हैं इतना काफी है ठीक है तो
01:16:39:22 आपका आने का बहुत-बहुत धन्यवाद आप दोनों का और इस तरह की चर्चाएं हम चाहेंगे कि आगे भी हमारे चैनल पर होती रहे जिसमें कि हम जो निंबार्क परंपरा राम अनुज परंपरा मधवा चार परंपरा ये लोग बैठ कर के जो वर्णाश्रम धर्मी है जो वर्णाश्रम धर्मी वो लोग बैठ कर के आपस में जो है एक सामंजस प्रकट करें जिससे कि ये जो तथाकथित उद् भाषित तंत्र इनकी दाल जो है ना गल पाए और अशुद्ध धर्म का प्रचार ना हो पाए शुद्ध धर्म का प्रचार करें हम सबके साथ है ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहिए अल्लाह से मत जोड़िए एक वो पूरी शंकराचार्य जी का वक्तव्य है इनके इन्होंने कमेंट करा मेरी वीडियो पर कि जो पुरी शंकराचार्य है वो भी तो कह रहे हैं कि भाई जो अला है जो वो भी तो कह रहे हैं कि अल्लाह जो है हमारे भगवान का ही नाम है इसका मैं द इसका मैं दू उत्तर इसका उत्तर मैं दूं पहली बात पूरी शंकराचार्य जी ने अल्लाह नहीं कहा है अल्लाह कहा है और अल्लाह शब्द संस्कृत का है आप देख लीजिए गलत तो नहीं है दूसरी बात ये है कि ठोक के उन्होंने आप कितने भी वो दे दीजिए अंततोगत्वा व्यक्ति की वाणी तो ये सिद्ध कर रही है ना कि वो क्या बोल रहे हैं ठोक के कहा है कि कुरान
01:17:55:03 की सीमा का ईश्वर बाइबल की सीमा का ईश्वर जगत बना सकता है जगत बन नहीं सकता साक्षात अवतार ले नहीं सकता बाधित है ठोक के कह दिया तो अब आप उनके नाम से छपे हुए अनाधिकृत अधिकृत कोई भी ग्रंथ ले आओ और उन्होंने वहां पर यह कहा था वो कहा था भाई आपने किस परंपरा से उनका ज्ञान प्राप्त किया आप आइए हमसे बताइए कहां पर उन्होंने अल्लाह के साथ सामंजस्य बिठाई है अल्लाह और अल्लाह में अंतर है दूसरी बात ये है कि आपके ग्रंथों में स्पष्ट लिखा है कि अल्लाह अल्लाह अल्लाह नहीं अल्लाह कुरान की सीमा का जो ईश्वर है बाइबल की सीमा का जो ईश्वर है वो और कृष्ण एक है और फिर हमने ऐसे नहीं कहा कि दूरी दूर से बैठ कर के वीडियो सुन कर के बैठ गए हो ऐसे नहीं या दूर ही दूर से ग्रंथ पढ़ लिया और उसके अनुसार हमने वो दे दिया हम गए मंदिर में गए पूछा ये जो अल्लाह है यह जो यहोवा है यह कौन है इन्होंने कहा शिवजी भगवान नहीं है शिवजी और कृष्ण को एक समझने वाले पाखंडी हैं मगर अल्लाह कृष्ण और यहोवा ये तीनों एक है इनमें कोई भेद नहीं है जाके देख लीजिए वीडियो खुद पूछा हमने कोई भी
01:19:10:09 अपने मन से आपकी किताब पढ़ के हमने अपने मन से अर्थ किसी भी बात का किया हो जो आप ना मानते हो बता दीजिए हमको जो आप ना मानते हो और हमने उस बात को चैलेंज किया हो मगर आप उन बातों को लेकर चैलेंज कर रहे हैं जो हम नहीं मानते हम उन बातों को लेकर के प्रश्न कर रहे हैं जो आप मानते हैं आप कहते हैं कि कृष्ण अल्लाह यहोवा एक है आप कहते हैं कि शिव और विष्णु में भेद है आप कहते हैं कि विष्णु और कृष्ण में भेद है तो आप ये क्लेम नहीं कर सकते कि हम जो नहीं मानते आप हमारी बातों का गलत मतलब निकाल करके उस पर उसका प्रचार कर रहे हैं नहीं हम उसी बात को उठा रहे हैं जो आपने ठोक के स्वीकार की है हमने जब आज सुबह पूछा आपसे कि आपका जो धाम है वो नित्य है कि नहीं तो आप बोल वहां पर नित्य सुख है तो मैंने कहा कि सेवा का सुख अंतिम सुख बताया है भगवान की तो मैंने पूछा कि अगर आप वहां पर तिलक लगा रहे हो भगवान को तो लगाते ही रहोगे लगाते ही रहोगे हालांकि इसमें भी नित्यता में बाधा आ रही है नीचे से ऊपर गया तिलक उसके बाद वापस जब हाथ आया तो उतनी देर जितनी देर वापस हाथ आया उतनी देर नित्य नहीं रहा रुक गया ना मामला तिलक लगाया लगाते टाइम तो ठीक है लगा दिया फिर वापस आएगा हाथ तो इतनी देर वो नित्य नहीं रहा बाधा आ गई रुक गया तिलक लगा ही चले
01:20:25:09 जाओ तिलक अनंत हो तोय श्रृंगार नहीं रहा श्रंगार तो नहीं रहा सेवा तो नहीं रही फय लगाते ही चले जाओ और कोई मत अच्छा दूसरी बात ये है कि तो हम उन बातों पर प्रश्न करते हैं जो आप जो केवल हमने आपने आपके ग्रंथों से पढ़ कर के और गलत अर्थ निकाल करके हमने कोई प्रश्न नहीं किया है ग्रंथों से जो हमें दिखा उस पर हमने प्रश्न किया और आपने उसको स्वीकार किया जैसे हमने पूछा कि कृष्ण और अल्लाह क्या एक मानते हो हा मानते हैं क्यों मानते हो क्योंकि वहां पर भी वो सुप्रीम है वहां पर भी वो सुप्रीम भाई शिव पुराण के ईश्वर को तुम क्यों नहीं कह देते कि शिव और कृष्ण एक है जब तुम बाइबल के ईश्वर को सुप्रीम एसी कुरान के ईश्वर को सुप्रीम एसी होने के कारण एक बता दोगे कृष्ण के समान तो शिव पुराण के ईश्वर को एक बताने में कोई दिक्कत है क्या है दिक्कत दिक्कत ये है कि फिर विष्णु की सर्वोच्चता कैसे हो कृष्ण की कृष्ण में सीमित कैसे होंगे लोग तो ये सब बातें हैं आने के लिए आप दोनों का धन्यवाद और बहुत अच्छा लगा आपके साथ चर्चा करके सभी को जय श्री राम भव्य जी आपको भी जय श्री राम युगल किशोर जी आपको भी जय श्री राम [संगीत]
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
Live: Required tasks are not set on the Rules page yet.
-
⬜Hindi SRT
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
Discussion With रामानुजाचार्य परंपरा #sanatandharma #hindu @Bhagwat Vachan
% not setDescription
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮