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00:00:01:13 गुरु पूर्णिमा की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं तो बहुत सारे प्रश्न हमें आते रहते हैं तो उनका कुछ स्वा अध्यन से गुरुदेव के द्वारा जो स्वीकार्य सिद्धांत उनकी सीमाओं में रहते हुए और जिनका जिनके बारे में उत्तर नहीं होता है उसके बारे में में जो हमारे आचार्य गण [संगीत] है जैसे आचार्य राम शंकर शुक्ल जी जो गुरुदेव के गुरु भाई हैं पूज्य पाद धर्म सम्राट कपाती जी महाराज के शिष्य हैं उनसे और कुछ ऐसे जटिल प्रश्न भी होते हैं जिनके लिए गुरुदेव के पास भी जाना पड़ता है तो ऐसे कई सारे प्रश्न है जो हमारे पास एकत्रित हो चुके पिछले एक दो महीने से हमने लाइव भी नहीं किया है इस कारण से बहुत सारे प्रश्न एकत्रित हो गए प्रश्नों पर जाने से पहले एक आप लोगों से बात करना चाहूंगा एक वीडियो भी फिर से अपलोड हुआ है बीइंग द स्पिरिट सोल वाले का उसम उ उसने फिर से वही बातें कही
00:01:16:14 है हो सकता है उसे मालूम नहीं था कि हमारा एक दिन पहले ही वीडियो आ जाएगा उसने जो वीडियो डाला है उसम उसने मैंने तो बता ही दिया कि मैं उसके रेलीन में कोई वीडियो नहीं बनाने वाला उसमें जो उसने वीडियो बना कर के बताना चाहा है कि भाई जो शंकराचार्य वाले हैं या उसमें जो हमारे पूर्वा चार्य है भारती कृष्ण तीर्थ जी उनका नाम लेते हुए पुरी शंकराचार्य जी का नाम लेते हुए भी उसने य सिद्ध करने का प्रयास किया कि इन लोगों ने अब्राम आइडल जीी को स्वीकार किया है और प्रमोट किया है तो यह सभी बातें मतलब एक दिन पहले ही जो हमारा वीडियो आया है के माध्यम से ही निरस्त हो जाती क्योंकि सीधा पहला प्रश्न आता है कि भाई आपने शंकर परंपरा का जो ज्ञान है जो उनके लिखे हुए ग्रंथों का अर्थ आप बता रहे हो वह कहां से लिया हमने अपनी तरफ से कुछ भी नहीं कहा स्कोन की के ग्रंथों को किताबों को पढ़ के जो हमें समझ में आया उसे पहले कंफर्म किया और जब कन्फर्मेशन मिली तब हमने ये आपत्ति जताई ये बात तो गलत है अगर आप कृष्ण
00:02:31:25 और अल्लाह को एक नहीं मानते हो तो अपने जन प्रतिनिधियों द्वारा यह बोलवा ना भरी सभा में कि नहीं मानते कुरान के अल्लाह को हम कृष्ण के समान नहीं मानते और बाइबल के यहोवा को हम कृष्ण के समान नहीं मानते मगर वह तो ठोक के कहते हैं ना कि हां कृष्ण यहोवा और अल्लाह एक है दूसरा क्या है कि आप गुरुदेव के अच्छा एक पक्ष भी रखा आपने कि वो देखो खंडन हो रहा है देखो इस कन के द्वारा उसकी आडलज का खंडन हो रहा है बाइबल की डोलजी का या किसी विधि का तो यह तो आपका प्रश्न होना चाहिए ना उनसे यदि बाइबल का यवा और भागवत का कृष्ण एक है तो फिर यहां पर गलत कसे लिखा जा रहा है तो आपका अपना प्रश्न है आप प्रश्न करिए कांट्रडिक्टिंग बातें क्यों हो रही है अा दूसरी बात यह है कि हमने जो भाई हमने एक चीज बताई थी हम इकोन की उन चीजों पर बात करते हैं जो इन स्वीकार करते स्न के जो प्रतिनिधि है व स्वीकार करते हैं और
00:03:36:25 जो आप लोग जो बातें कर रहे हैं वह आप उन चीजों पर बात कर रहे हैं जो हमारे जो परंपरा प्राप्त आचार स्वीकार ही नहीं करते जैसे कि आप एक बोलना चाह रहे हो कि जो पूरी शंकराचार्य जी है भारतीय कृष्ण तीर्थ जी है उन्होंने इस्लाम को प्रमोट किया अब सीधे-सीधे उनका जो वक्तव्य प्राप्त है कुरान की सीमा का ईश्वर साक्षात अवतार नहीं ले सकता सीमित है बाइबल की सीमा का ईश्वर साक्षात अवतार नहीं ले सकता सीमित है जिनका ईश्वर जगत जगत बनाता ही नहीं बनता भी है उन्हीं का ईश्वर श्री राम कृष्ण आदि के रूप में अवतार लेता है तो क्या हुआ इसका अर्थ यही हुआ कि उन्होंने यहां पर खंडन किया मना किया ना हमारा हमारा ईश्वर और उनका ईश्वर एक समान नहीं है तो उनके आप अपने मन से अर्थ ना करें उनके ग्रंथों का कोई भी हो अपने मन से अर्थ ना करें इसकी उसका रोड़ा भानुमति का कुमा जोड़ा ना करें वैसे भी आपकी तो हिंदी दुरुस्त नहीं है किसी और के पास पहले ट्रांसलेशन कराने जाते
00:04:51:27 होंगे तो यह सब है बाकी आइए कभी सामने से बात करते हैं और एक अंत में फिर एक बात बताऊंगा मैं हमने अगर यह प्रश्न किया है कि इसकन ब्राह्मण चीजों के साथ कृष्ण की तुलना क्यों कर रहा है तो यह आपका फिर दायित्व है आप अपनी बात बताइए कि हम अ ऐसा मानते हैं क्या नहीं मानते हैं अगर आप मान नहीं मानते हो कृष्ण अल्ला को एक तो बोलो ना अपने रिप्रेजेंटेटिव से बोलो के मंच प आके बोले कि अगर हम अल्लाह को प्रेज कर रहे हैं तो उस समय हम कुरान के अल्लाह की बात नहीं कर रहे हैं यह बोलो अच्छा दूसरी एक बात यह भी है कि आप इसके एप्लीकेशन में अगर हमारी चीज दिखा देंगे देखो इन्होने य किया देखो इन्होने वो किया तो किसी और के गलत हो जाने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता है अपने सही होने के पक्ष में क्या कह रहे हो आप आप बोल दो कृष्ण अल्ला एक नहीं है मंच से आकर के कुरान का अल्लाह और भागवत का कृष्ण एक नहीं है हम मान लेंगे आपकी किताबों में कुछ भी लिखा हो अपने रिप्रेजेंटेटिव से कहिए जो मंच पर जाते हैं जनप्रतिनिधि बनके वो बोले कि नहीं कुरान का अल्लाह और कृष्ण में जमीन आसमान का अंतर है बोलिए हम आपके साथ खड़े हो जाएंगे
00:06:06:28 तो ये नहीं कर रहे हैं ना वो तो हम उसी चीज पर बोल रहे हैं जो आप लिखा भी है और स्वीकार भी कर रहे हो आप लिखे हुए का अपने हिसाब से मैनिपुलेट करके अर्थ बता दो आप आइए हम सिद्ध करेंगे कि आपने जो अर्थ लिया वो गलत लिया है सिंपल और फिर वही बात कि अगर आपको ये लगता भी है अतो गत्वा कि हम गलत है हमारी ओर से इस्लाम को प्रेज किया जा रहा है प्रमोट किया जा रहा है तो हमारे गलत होने से भी आपका सही होना सिद्ध नहीं होता आप बताइए भागवत का कृष्ण सनातन कृष्ण को आप जो कुरान का अल्लाह या बाइबल का यवा उसके साथ खड़ा कैसे कर रहे हो ठीक है तो ये आपकी जिम्मेदारी है वही वाली बात हो गई टिकट वो रेलवे ट्रेन में जब टीसी पूछता है कि भाई टिकट कहां है अरे उसने उसके पास भी तो टिकट नहीं है उसके पास भी तो टिकट नहीं है तो क्या इस तरह से आपका चालान होने से बच जाएगा क्या आप निर्दोष सिद्ध हो जाएंगे दूसरे का दोषी सिद्ध होने से नहीं अपना बताइए खैर बहुत बातें हो गई इतना ज्यादा मैं आपसे स्कन के बारे में बात करना चाहता हूं मैं स्कन कानपुर से हूं हम बात करेंगे पर अभी यह जो लाइव सेशन है यह दूसरी चीजों के लिए है आप एक नंबर नोट कर लीजिए
00:07:24:28 74036 पियूष वादवानी छोटा भाई भी आया स्न से लोग लोग मुझे कहते हैं इस बच्चे को क्यों बुला लेते हो यह मेरे पीछे पड़ा रहता है मेरे साथ दोबारा लाइव आओ मेरे साथ दोबारा लाइव आओ वहां पर आकर के ऊट पटांग बचकानी हरकत करता है बस और कुछ नहीं तो यह सब चीजें हैं हम लोग लाइव आएंगे 740 8301 69
00:07:57:19 तो इस पर आप करिए एक फॉर्म मिलेगा आपको जिसमें की ये आप फॉर्म को भर देंगे वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा वाला फॉर्म तो उसको आप भर दीजिएगा जिसमें कि हम लोग आपसे संपर्क कर लेंगे और आपके साथ हमारा एक हमारी लाइव चर्चा सुनिश्चित हो जाएगी
00:08:36:12 तो अभी हम लोग कुछ क्वेश्चन आंसर कर रहे हैं पहला प्रश्न है अवनीश यादव जी का मुजफ्फरपुर से हैं बिहार से इन्होंने पूछा है कि हनुमान जी वानर जाति के थे तो वह जनेऊ कैसे धारण करते थे वानर जो है वानर जाति से उनका वर्ण प्रभावित नहीं होता है वो क्षत्रिय वर्ण के थे राजका थाना बाली सुग्रीव भी राज करते थे क्षत्रिय वर्ण के थे क्षत्रिय कुल में उत्पन्न और फिर क्षत्रियो चित धर्म का अनुपालन करते हुए क्षत्रिय वर्ण के थे तो इसलिए वह जने धारण करते थे यह हमने आचार्य राम शंकर शुक्ल जी से भी इस बारे में कंफर्म किया था हर्षदीप सिंह जी का कहना है कृष्ण हर्षदीप सिंह जी लुधियाना से इनका कहना है कि श्री कृष्ण ने गीता में ऐसा क्यों कहा कि जो लोग अन्य देवी देवताओं की पूजा करते हैं वह
00:09:38:19 अविधवा सत्ता को स्वीकार कर लेते हो तो अपने आप ही वह सीमित हो गया भगवान श्री कृष्ण से अगर अलग समझते हुए आप भगवान शिव को पूज रहे हैं भगवान विष्णु को पूज रहे हैं या किसी किसी भी रूप में ईश्वर को पूज रहे हैं तो वो अविधवा हो जाएगी मगर हमारे यहां क्या है कि अतो गत्वा शेव और विष्णु एक है शिव और कृष्ण एक है तो इस अगर इस तरह से आप किसी की पूजा कर रहे हो तब तो सही है मगर आप ये समझते हो कि नहीं शिव इज मोर पावरफुल देन कृष्ण शिव इज मोर पावरफुल देन विष्णु ये सनातन सिद्धांत के रूप में स्वीकार करते हुए अगर भज रहे हो तो फिर आप अवेध पूर्वक कर रहे हो आपको एक मानना पड़ेगा इनके बीच में एकत्व को स्वीकार करते हुए कि हे ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश मैं आप सबकी भक्ति शिव रूप में कर रहा हूं मुझे शिव रूप में अपनी भक्ति प्रदान करें इस तरह से जब आप वंदना करेंगे तो ही आपकी वंदना विधि पूर्ण मानी जाएगी अगर आपने कृष्ण को शिव से अलग मान कर के कृष्ण की पूजा करनी शुरू कर दी वो भी अ विधि पूर्वक है अगर आपने शिव को कृष्ण से अलग मान करके शिव की पूजा करना शुरू कर दिया तो व भी अध पूर्वक है इसी भाव को भगवान ने यहां पर दर्शाया है अभिजीत मंडल जी है
00:10:53:22 यह मालदा से हैं और इनके दलित ब्रैकेट में लिखा है शूद्र पहली बात मैं क्लियर कर दूं कि जो दलित शब्द है ये धार्मिक ग्रंथों से प्राप्त शब्द नहीं है तो आप केवल शूद लिखें दलित भाइयों के सनातन धर्म में क्या-क्या अधिकार है वो तो बहुत लंबी लिस्ट है छोटे-छोटे से बहुत सारे हो सकते हैं तो उसको वर्बल इस तरह से बता पाना संभव नहीं है बजाय इस पर ध्यान देने के क्या-क्या अधिकार है इस पर ध्यान अगर हम दे ले कहां क्या-क्या अधिकार में नहीं है तो हमारे वो अधिकार सुनिश्चित हो जाते हैं जो जो उसकी सीमा में ना आते हो जो निषेध की सीमा में ना आते वो सब अधिकार है है ना तो निषेध के बारे में आप जानकारी कर लेंगे तो आपको अपने आपको शूद्रों का जो क्राइटेरिया व पता चल जाएगा और यह क्राइटेरिया केवल शूद्र के लिए ही नहीं है ब्राह्मण के लिए भी है जैसे ब्राह्मण का अधिकार नहीं है 50 वर्ष के बाद गृहस्थ आश्रम में रहना ब्राह्मण का अधिकार नहीं है 25 वर्ष से ज्यादा गृहस्थ आश्रम में रहना तो अधिकार नहीं है ब्राह्मण का अधिकार नहीं है अपनी जो रोटी कपड़ा और मकान उससे ज्यादा धन संचय करना ब्राह्मण का अधिकार नहीं है सम्मान के लिए खोज करना सम्मान के लिए इधर उधर सर्चिंग
00:12:13:04 करना दलित को मंदिर में जाने का प्रवेश है कि नहीं हां बिल्कुल है कुछ ऐसे विशेष मंदिर होते हैं द्विज के द्वारा स्थापित जहां पर वैदिक विधि विधान के अनुसार जो प्राण प्रतिष्ठा आदि होती है वहां डायरेक्ट जो गर्भ ग्रह होता है उससे बाहर की सीमा में रहना चाहिए और वहां पर यदि कोई वहां पर यदि कोई ब्राह्मण भी उपयुक्त उसमें नहीं है और सामने वाले को पता चल गया कि उपयुक्त स्थिति में नहीं अंदर जाने योग्य स्थिति में नहीं है तो भी वह अंदर नहीं जाएगा तो शूद्रों शूद्र के लिए ऐसा इसलिए कहा गया क्योंकि शूद्रों का जो जीवन यापन होता है वह जो गर्भ ग्रह में मंदिर में सेवा करने के जो विधि विधान होते हैं उनके बिल्कुल प्रतिकूल होता है और वो अगर नहीं हो तो यह भी संभव नहीं हो पाएगा तो सबकी अपनी अपनी अहमियत है मगर हम समान अधिकार से सबको नहीं देख सकते कि सभी को बिल्कुल एक जैसा बिल्कुल कार्य करने को दे दिया जाए कभी किसी को कुछ कार्य करने को दिया गया किसी को कुछ कार्य करने को दिया गया जिसको ऐसा कार्य करने को दिया गया जो इस कार्य करने वाले की जो कार्य प्रणाली है उसके प्रतिकूल है तो इस स्थिति में उसको वहां से निषेध किया गया तो मंदिर में जाना सभी को अलाउ नहीं है आप खुद सोचो
00:13:28:08 मैं भी अगर मंदिर जाता हूं अधिकांशत हम जिस मंदिर में हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी साप्ताहिक रूप से करते हैं वहां पर मंदिर के प्रशासन के द्वारा हमको कहा गया कि आप यहां के जो विग्रह है उनकी सेवा स्वयं कर सकते हैं मगर अंदर से वह आत्मविश्वास नहीं होता है जब हम वहां पहुंचते हैं कि हम इसको छू पाए तो इसलिए जो व्यक्ति उसके लिए नियुक्त होता है पूरी तरीके से उस पर्यावरण के लिए उस वातावरण के लिए जो पूरे दिन केवल उसका यही काम है कि मुझे मंदिर के उपयुक्त बने रहना है उसको ही उसमें प्रवेश की अनुमति दी जाती है शास्त्रों के अनुसार इवन जो गुरुदेव है पूज्य गुरुदेव पूरी शंकराचार्य जी वो भी कई बार ऐसे मंदिरों में जाते हैं जहां के पुजारी कोई और होते हैं महंत कोई और होते हैं तो वहां पर अपने वो शंकराचार्य नहीं उठाते ऐसा नहीं कि कोई उन्ह रोक देगा मगर वहां पर जो गुरुदेव होते हैं वो रुक जाते हैं और एक श्रद्धालु की तरह से वहां पर दर्शन करके वापस आ जाते हैं वहां पर सीमाओं का अतिक्रमण नहीं करते इसी रूप में जो जो हमारा चतुर्थ वर्ण है शूद्र को शूद्रों को मंदिर प्रवेश में उस जगह जहां पर वैदिक विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा की गई है वहां पर गर्भ ग्रह में ऐसा नहीं मंदिर बहुत बड़ा होता है तो गर्भ ग्रह
00:14:43:10 में जाने से वो किया जाता है और सबसे इसका एक कारण यह भी है क्योंकि यह बैलेंसिंग बनाई गई है कि शूद्र को दायित्व से मुक्त किया गया है कि अगर तुम भी मंदिर में जा अगर तुम्हारा भी मंदिर में जाना हम अनिवार्य कर देंगे तो फिर तुम्हें वैसा जीवन यापन करना पड़ेगा तो तुम्हें बहुत कठिनाई हो जाएगी क्योंकि तुम ऐसी ऐसी फील्ड में वर्क कर रहे हो जहां पर तुम्हारा इन नियमों का पालन कि इसके बाद इतने कुल्ले इसके बाद इतने कुल्ले मट्टी लेकर साथ में चलना सौचा चार यह सब ध्यान नहीं रहे ये सब धारण कर पाना इन सब चीजों का पालन कर पाना आपके लिए बहुत ज्यादा कठिन हो जाएगा इसलिए आपको कुछ दायित्वों से मुक्त किया गया है तो यह एक आपको सरलता दी गई है जिससे कि आपका जीवन सरल हो जाए जब आप इतनी ज्यादा मेहनत इधर कर रहे हो तो आपसे कह दिया जा गया कि आपका जो मोक्ष है वो केवल जो मंदिर की ध्वजा है उसको ही देख लोगे तो वहीं से हो जाएगा बाध्यता इसलिए डाली गई कि अगर बाध्यता नहीं डालेंगे तो व्यवस्था भंग हो जाएगी बाध्यता इसलिए डाली गई जैसे कि जैसे कि हमने कहा कि शूद्र का जो जीवन होता है वो ऐसा होता है कि वोह उपयुक्त नहीं होता है मंदिर के अंदर के पर वातावरण के लिए उसके लिए जो उसी के लिए पूरे दिन जीवन बिता रहा है
00:15:58:10 कुल्ले करना ये करना वो करना जनी उधारण करना पूरे बिल्कुल विधि विधान से तो उसके लिए वो सही होता है अब बात ये आ जाती है कि हो सकता है कि कोई शुद्र ऐसा भी हो जो बिल्कुल इसी तरीके से अपनी जो अपने जीवन का यापन कर रहा हो बिल्कुल हो सकता है ऐसा नहीं है कि नहीं हो सकता मगर यहां पर क्या होगा कि हमें फिर व्यक्ति को चेक करना पड़ेगा मान लीजिए 100 लोग आकर के खड़े हो गए तो हमें ऐसी व्यवस्था वहां पर लगानी पड़ेगी हर व्यक्ति को चेक करो कौन व्यक्ति ने कैसा जीवन जिया कहां से आ रहा है वो और चेक करने के बाद तो ये क्या हुआ हमारा समय हमारा श्रम श्रम अधिक लगने लगा और जबकि वो जो है एक मूल उद्देश्य नहीं है तो इसलिए श्रम समय ना हो अव्यवस्था ना फैले इसलिए एक लिमिट बना दी गई कि इसके अंदर इस वर्ग के लोग जाए ही ना काम खत्म अब जिस चीज से वंचित हो रहे हैं उसका क्या उससे मिलने वाले फल का क्या नहीं ये लोग बाहर से अगर ध्वजा का दर्शन कर लेंगे तो इससे इन्ह वही फल मिलेगा जो एक ब्राह्मण को अंदर जाकर के मिलेगा सिंपल तो कहीं भी मंदिर के अंदर प्रवेश जीवन का मूल उद्देश्य नहीं कहीं भी प्रतिमा का जो प्रतिमा को स्पर्श करना जीवन का मूल उद्देश्य नहीं है शास्त्रों में नहीं लिखा शास्त्रों में दो चीजें लिखी है अथातो धर्म जिज्ञासा यानी कि धर्म को धारण करना
00:17:13:12 आपका उद्देश्य है अथातो ब्रह्म जिज्ञासा यानी कि ब्रह्म को जानना आपका उद्देश्य और इन दोनों को चीजों को साधने से क्या होगा मोक्ष तो आपके जीवन का जो मूल उद्देश्य है वो मोक्ष है वो आपको मिल रहा है तो यह जो चीजें हैं कि मुझे मंदिर के अंदर जाना है पर वंचित हो गया या मुझे उसी मूर्ति को छूना है मैं वंचित हो गया ये जो चीजें हैं ये जो विरोधी तंत्र है उनके द्वारा हमारे लिए नैरेटिव बनाए गए हैं कैसे देखिए सबसे पहली बात है कि जो जो चीजें मनुष्य के लिए सर्वाधिकार रूप से लागू है इक्वली रूप से सबके लिए हैं उन उन चीजों की जो प्यास है वो मनुष्य के अंदर बचपन मतलब जन्म से ही है बाय बर्थ उसके अंदर इनबिल्ट प्यास प्यास है क्या है कि जैसे कि बाय बर्थ सबको पानी की प्यास है बाय बर्थ सबको खाने की भूख है तो खाना उनके लिए अवेलेबल है बाय बर्थ सबको सांस चाहिए ऑक्सीजन चाहिए तो सबके लिए ऑक्सीजन अवेलेबल है यदि प्रतिमा को छूना वेद को उसी रूप में पढ़ना जिस रूप में वेद हमें प्राप्त है उसी रूप में पढ़ना उन्हीं रचाओ के रूप में पढ़ना यदि यह सब भी इक्वली रूप से सबके लिए होता तो सबके अंदर इस चीज के लिए ईश्वर ने इनबिल्ट इच्छा दी होती
00:18:29:03 अब बात ये आती है कि कई कई बार आपने आर समाज के लोगों को भी कहते हुए सुना होगा कि आप बस सत्यार्थ प्रकाश पढ़ लो आपका सब हो जाएगा सब कुछ आपको हो जाएगा यानी वहा उन्होंने माना कि वेद का ज्ञान ही सत्यार्थ प्रकाश के रूप में भी अगर व्यक्ति ले लेगा तो उसका फुलफिल हो जाएगा तो इसी प्रकार से वेद का ज्ञान तो सबको चाहिए मगर वेद की जो रचाए है जो उसका व्यवहारिक स्वरूप है उसी रूप में चाहिए ऐसा नहीं है इसके साथ ही साथ इसमें हम एक तर्क देखते हैं क्या भगवान पक्षपाती है जो वेद से कुछ लोगों को वो कर देगा तो यह तो तब भी लागू होता है कि एक एक बच्चे का जो जन्म है वह उस घर में हो रहा है जहां पर वेद रखे हुए हैं वेद के पाठ हो रहे हैं और एक बच्चे का जन्म हो रहा है सा साउथ अफ्रीका के जंगलों में तो वेद की प्यास ना होना मंदिर के अंदर जाने की प्यास ना होना मंदिर के अंदर स्थापित जो मूर्ति है उसकी प्यास ना होना बाय बर्थ यह सिद्ध करता है कि उसके लिए आप लोग समान रूप से सभी के लिए वो चीजें नहीं है अब इसमें क्या है कि नैरेटिव कैसे चलाया गया कि जब आपको आपके भाइयों से अलग करना है तोड़ना है फूट डलवानी है तो क्या करना है कि पहले नैरेटिव चलाओ जो चीजों से आपको प्यार नहीं है जो चीजें आपके लिए अभी
00:19:44:04 क्योंकि आप कुछ जानते नहीं हो तो जो चीजें आपके लिए आवश्यक नहीं है पहले मार्केट में एजेंडा चलाया जाए और उन चीजों को पहले आवश्यक बनाया जाए तो क्या आवश्यक गायत्री मंत्र गायत्री मंत्र गायत्री मंत्र वेद का पाठ वेद का पाठ वेद का पाठ या फिर इस मंदिर प्रवेश मंदिर प्रवेश मंदिर प्रवेश ये सब चीजें आपको बचपन से नहीं चाहिए थी बचपन से आप क्या मांगते थे सच्चितानंद आपको सचित आनंद चाहिए था बचपन से आप जो खाना मांग रहे हो एसी मांग रहे हो टीवी मांग रहे हो फ्रिज मांग रहे हो इन सब में आपको सत चित आनंद मांग रहे हो आप बचपन से आपको सच्चित आनंद चाहिए था जन्म से ही और उसके लिए कहीं भी मना नहीं किया गया है तो यह आपके लिए व्यवहारिक स्वरूप में आपको पहले एक नैरेटिव फैलाया जाता है कि भाई जो है वेद का पाठ का पाठ गायत्री गायत्री मंत्र गायत्री मंत्र गायत्री मंत्र जिससे कि एक वातावरण ऐसा तैयार हो जाए कि भैया अगर भगवत प्राप्ति करनी तो गायत्री मंत्र के द्वारा ही करनी है अगर जो है आपको ज्ञान लेना है तो वेद पाठ के द्वारा ही मिलेगा अब बताइए जो सत्यार्थ प्रकाश पढ़ लेगा आर समाज के अनुसार वर्ण व्यवस्था को ना मानने वालों के अनुसार जो सत्यार्थ प्रकाश को पढ़ लेगा उसको समग्र ज्ञान हो जाएगा क्या ऐसा कहना नहीं है आर समाज यों का तो फिर वो उसको तो कैसे ज्ञान
00:20:59:09 हो रहा है वेद का ही ज्ञान है ना उनके अनुसार बात कर रहे हैं वेद का ही ज्ञान सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार अगर कोई व्यक्ति प्राप्त कर लेता तो उसका उसकी भी सद्गति हो जाएगी य आ समाज के अनुसार बोल रहा हूं इसी प्रकार से जो प्रभुपाद जी के द्वारा लिखे गए ग्रंथ है इसकन के अनुसार उनका यदि कोई समग्र रूप से अध्ययन कर लेगा तो उसकी भी सद्गति हो जाएगी तो इसका अर्थ क्या है कि व्यक्ति को व्यक्ति को ज्ञान की आवश्यकता है जो व्यवहारिक स्वरूप में जिस रूप में वेदा आदि शास्त्र या विधि विधान है उसी रूप में उनका अनुकरण अनुसरण या उन्हें प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है तो यह हमें आपस में फूट डलवाने के लिए एजेंडा चलाया जाता है कि गायत्री मंत्र इंपॉर्टेंट है वेद पाठ इंपॉर्टेंट है अगर वेद पाठ ही इंपॉर्टेंट है तो फिर सत्यार्थ प्रकाश की वैल्यू क्या है क्यों है सीधे वेद पढ़ाइए मत लिखिए सत्यार्थ प्रकाश आपने सत्यार्थ प्रकाश में वही तो लिखा वेदों का मर्म आपके अनुसार हमारे अनुसार मर्म नहीं है वो कुछ और है मगर आपके अनुसार तो आपने वही लिखा ना तो आप ही जब वेदों का विकल्प लोगों को दे रहे हो तो इससे सिद्ध हो रहा है कि वेदों को वेदों के द्वारा
00:22:14:20 ही भक्ति प्राप्ति हो ऐसा नहीं है वेदों के व्यवहारिक स्वरूप द्वारा ही लोगों को भगवत प्राप्ति हो ऐसा नहीं है तो यह क्या हुआ जो चीज आपके लिए आवश्यक नहीं थी जो चीज आपके लिए मनमोहक नहीं थी वो चीजें आपने जो है इंपॉर्टेंट बनाई वह चीज आपने नहीं जो लोगों के द्वारा नैरेटिव चलाया ग जिससे कि आपके कानों में एक प्रोग्रामिंग होने लगी कि नहीं मुझे जो है गायत्री मंत्री चाहिए गायत्री मंत्री चाहिए गायत्री मंत्री चाहिए राम नाम नहीं व फीका है हनुमान नाम वो फीका है गायत्री मंत्री चाहिए गाय म प्रणवी चाहिए प्रणवी चाहिए यज्ञ प चाहिए ञ प चाहिए मंदिर में जाना चाहिए मंदिर में जाना ही चाहिए मूर्ति को छूना चाहिए मूर्ति को छना चाहिए इस तरह से यह नैरेटिव चलाए गए अब इसके बाद जब यह प्रोग्रामिंग हो गई कि को स्पर्श डायरेक्ट करना सबसे जरूरी है उसके बाद आपके पास आए क्रिश्चियन मिशनरीज की तरह लोग और फिर कहना शुरू किया कि वो लोग तुझे नीच समझते हैं वो लोग तुझे नीच समझते हैं इसलिए तुझे गायत्री मंत्र से वंचित कर रहे हैं फिर आपके अंदर फिर उनके अंदर वो आना शुरू होता है भाव अरे यार मेरे साथ इतना बड़ा अन्याय मतलब जो समस्या थी ही नहीं पहले उसको बिल्ड अप किया गया फिर उस समस्या से आपको जोड़ दिया गया तो ये एक तरीका है कैसे फूट डाली जाती कैसे वर्ण व्यवस्था को भंग किया जाता है अब इसका
00:23:29:26 एक वो भी है वर्ण व्यवस्था का कि अगर जो चीज शास्त्रों ने कही है तो वो तो आज लागू है अगर वर्ण व्यवस्था जन्म से नहीं है और सबका समान अधिकार है तो वो तो आज लागू है सब लोग सब जगह व्यापार कर रहे हैं आज की स्थिति ज्यादा वो है भयावह आज अधर्म ज्यादा है या जब यह चीजें ये जो तथाकथित तंत्र जो आकर के ज पिछले 100 स सालों में वर्ण व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं तब की स्थिति ज्यादा अच्छी थी बताइए धर्म की दृष्टि से देखिए आज दुनिया में कौन सी जो साइट है अश्लील साइट वो सर्चिंग में है सबसे नंबर वन पर कौन सी सेट रहती है आज अधर्म ज्यादा है आज से 100 स साल पहले रामराज में लिखा हुआ है कि सब लोग अपने अपने वर्णा अनुसार कर्म करते थे तो अगर वहां पर कर्मणा वण व्यवस्था थी तो आज तो वही माला वही उसी के अनुसार काम हो रहा है किसी को भी कहीं भी भर्ती कर दिया जाता है कहीं पर भी जन्म लेने वाला कहीं पर भी लागू हो जाता है हालांकि कुछ चीज ऐसी है अभी भी अनुकरण किया जाता है जैसे आप फौज देखो आप फौज को देखो फौज में बटालियन बनी होती वो वाली रेजीमेंट वो वाली रेजीमेंट वहां पर व्यक्ति के जन्म के हिसाब से उसम उसको डाल दिया जाता है ऐसा आज भी चल रहा है राजपूताना राइफल्स
00:24:44:28 या ये जो थापा होते हैं उनकी एक अलक्ष से होती है उनका क्या नाम होता है कुछ एक नाम होता है ध्यान नहीं आ रहा है तो ऐसे करके रेजीमेंट्स बनी होती है अच्छा इसका एक उदाहरण और ले लीजिए अगर व्यक्ति के कर्म से ही उसे जांचना है तो मैंने एक जो हमारी क्लासेस होती है उसमें मैंने एक बार बताया था कि किसी भी दृष्टांत को यदि समझना है तो आप उसके उस स्थिति को बड़ा कर दो सबसे उसकी मतलब जो जिस चीज जिस दृष्टांत को समझ रहे हैं उसके निमित्त ऐसा उदाहरण सोचो जो उदाहरण बहुत हायर लेवल का उसमें क्वांटिटी बढ़ जाए जैसे की जब हम कहते ना नास्तिक के पास नियम नहीं होते हैं तो अगर उससे छोटे मोटे नियम पूछे कि भाई तुम हाथ क्यों धोते हो तो कह देगा नहीं धो अरे भाई किचन में तुम चप्पल पहन के क्यों नहीं जाते जाते हो तो वो कह देगा नहीं छोटे मोटे नियम जब पूछेंगे तो वो कह देगा ठीक है मैं इन नियमों के बिना भी रह लूंगा मगर जब हम उससे पूछेंगे सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में से माता बहन और पत्नी में अंतर कैसे करोगे तो उस वो यहां पर अटक जाएगा तो इसलिए किसी दृष्टांत को समझने के लिए उसके बहुत एक्सट्रीम लेवल के उदाहरण को निकालना पड़ता है तो अब ऐसे ही मैंने आपको एक बात कही कि अगर मंदिर के अंदर यह
00:26:00:02 व्यवस्था कर दी जाए कि हम उसको कर्म से वहां पहचाने कि कौन शूद्र है या कौन कौन किस तरह का जीवनयापन कर रहा है और तब अंदर ले तो कितनी अवस्था फैल जाएगी अब इस चीज को हम एक बड़े उदाहरण से समझते हैं अभी सभी लोग वो कोई बिल पास करा रहे थे एनआरसी बाहर से रोहिंग्या मुसलमानों को आने नहीं दिया जाएगा तो हर रोहिंग्या मुसलमान गलत है या सही है आपको पता आप बॉर्डर पर खड़े हो जाओ और चेक करो कौन व्यक्ति अच्छा है उससे बातचीत करो उसका पता लगाओ और कौन व्यक्ति वहां पर रोहिंग्या मुसलमान है जो अच्छा है वो कैसा जीवनयापन कर रहा है उसकी हिस्ट्री क्या है वो सब पता लगाओ उसके बाद जो गलत जो सही ना हो उसको मत आने दो और जो सही हो उसको आने दो मगर यहां पर तो सारे जितने भी लोग इस इस सिचुएशन में जितने भी लोग इस तरह से विरोध करते हैं वहां पर यहां से उसको जन्म से ही मान लिया कि नहीं भैया ये अगर वहां पर जन्मा है तो इसके इस इस तरह के फीचर्स होंगे तो ये ऐसा इसलिए किया गया कि हमारे पास इतना सामर्थ्य नहीं है कि हम बॉर्डर पर खड़े होकर ऐसी व्यवस्था कर सके कि जो अच्छा मुसलमान हो वो अंदर आए जो अच्छा रोहिंग्या हो वो अंदर आए और जो ना हो वो अंदर ना आए ठीक है इसी तरीके से ये होता है
00:27:15:04 कि वहां पर भी यही होता है कि किसने ऐसा जीवन यापन किया जो मंदिर में आने के लिए अनुकूल है और किसने ऐसा नहीं किया जो प्रतिकूल है तो इसके लिए हम वहां खड़ा नहीं कर सकते किसी को ये अव्यवस्था का धोत होता है ठीक है और इसके अलावा और भी कई कारण है चलिए अब आगे होते हैं क्या देखिए आप दलित दलित लिख रहे तो मुझसे भी दलित ही बुलवाएं नहीं हो सकती हमारे कई ऐसे शूद्र भाई है गुरु भाई है और वह आते हैं और हम सब मिलकर हिंदू राष्ट्र जो अभियान है उसम कार्य कर रहे हैं अपने अपने जो मर्यादा है उसकी सीमा के अंदर रहते हुए क्यों नहीं हो सक समाज अन्य धर्म में ना जाए इसके लिए क्या कदम उठाए इसके लिए जो सामर्थ वान गुरुओं के द्वारा जो व्याख्या की जाती है धर्म ग्रंथ की उस व्याख्या को सामर्थ वान गुरुओं तक उन्हें पहुंचाए एक सौहार्द पूर्ण संवाद स्थापित करवाए सबसे बड़ी बात है संचय आत्मा विनती वह छोड़िए कि शूद्र जा रहे अरे भाई मैंने तो क्षत्रियों को बदलते हुए देखा है मैंने क्षत्रियों को बदलते हुए देखा है कलमा पढ़ते हुए देखा है शूद्र की तो बात छोड़ छोड़ दीजिए जब भटका जाएगा जिसके मन
00:28:30:08 में संसद इंजेक्ट कर दिया जाएगा तो वो तो फिर कोई भी हो सकता है धर्म अपना परिवर्तित कराने वाला ठीक है इसको छोड़िए तो समग रूप से बात क्या है संशय आत्मा विनश्यति भगवत गीता 440 हमारा शत्रु है संशय और हिंदुओं के मन में भरा हुआ है अपने धर्म ब्रह्म को लेकर के संशय तो क्या करना है हमें उस संशय का निवारण करना है तो निवारण भी अपने द्वारा मत करिए शास्त्रों में उसकी व्यवस्था है संशय कौन दूर करेगा गुरु अंधकार कौन दूर करेगा गुरु गु का मतलब अंधकार रू का मतलब निकालने वाला गुरु उसके बाद गुरु भी अपने मन से ऐसे नहीं छोड़ दिया जाओ गुरु किसी को रामपाल को बना लो या जो कहे कि हमें शास्त्रों की गहराई में जाने की आवश्यकता नहीं है बस हमें तो जो कहा जा रहा है वो करने लगो शास्त्रों की गहराई में नहीं जाना है और फिर शास्त्रों की गहराई से ही बात करो फिर यहां ये लिखा है वहां वो लिखा है अपनी बात को बताने के लिए यहां ये लिखा है वहां वो लिखा है और जब हम कुछ पूछे शास्त्रों से तो शास्त्रों की गहराई में नहीं जाना है बस हरे कृष्ण का जाप करो तो ऐसा नहीं होना चाहिए तो क्या है गुरु के लक्षण क्या है पहली बात वो लक्षण से अंतिम निर्णय ऐसा नहीं है ग्रस्त आपका गुरु नहीं हो सकता है हो सकता है मगर वो भी किसी सन्यासी की सीमा में रह कर के ही आपको शिक्षा दे रहा हो किसी सन्यासी का शिष्य तो
00:29:45:26 क्या है पहला है अंतिम निर्णायक कौन होगा ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बनाए पहला लक्षण दूसरा क्या है ज्ञान वही प्रमाणिक जो परंपरा से प्राप्त हो तीसरा क्या है कि सभी शति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा दे ऐसा ना कहे विष्णु पुराण को मत मानो शिव पुराण को मानो यह गलत है सभी में सामंजस ऐसी शिक्षा दे कि उसमें सामंजस हो जाए किसी का खंडन ना हो और चौथा क्या है कि चौथा है गुरु वही जो आपको संशय से निकाल दे आपका अंधकार दूर कर दे आपसे ये ना कहे अरे ज्यादा प्रश्न मत करो 5101 कुरान में कहा गया कि ज्यादा ऐसे सवाल मत करो कि आपके लिए ऐसे प्रश्नों को ऐसी ऐसे विधियों को खोल दिया जाए जिसके कारण आपके जीवन में कठिनाई आ जाए क्योंकि पहले ऐसा हुआ था तो कुछ लोग बागी हो गए थे तो ऐसा नहीं अथातो धर्म जिज्ञासा अथातो ब्रह्म जिज्ञासा आपका संशय दूर हो आपका संशय करने वाला आपका गुरु तो यह चार पांच जो पैरामीटर है इनकी सीमा में आने वाले आपके गुरु हो सकते
00:30:56:27 हैं अभी लेंगे आपके कुछ कुछ प्रश्न ले लेंगे नास्तिक कहता है कि किताबी परिभाषा नहीं पहली बात तो ये है कि अनुभव की परिभाषा भी है अनुभव की परिभाषा भी है मगर यदि हम अनुभव के ऊपर ही तुल जाए जब हमें अनुभव होगा तो आपके जीवन का एक मिनट नहीं खिसक पाएगा अनुभव के आधार पर आप अगर चलेंगे तो आपके जीवन का एक मिनट नहीं खिसक पाएगा आपने जापान को नहीं देखा मगर किसी ने बताया कि जापान है आपको उस पर विश्वास हुआ आपने मान लिया कि जापान है आपने अनुभव नहीं किया तो यह दुनिया जो चलती है वो विश्वास में चलती है ठीक है अनुभव भी अवेलेबल है मगर वही अव्यवस्था वाला कार्य आप अपना जीवन बिना अनुभव बिना विश्वास के एक दिन जीवन काट के दिखा दे नास्तिक एक दिन ऐसा कोई ना कोई कार्य वो करेगा ही पूरे दिन में जिसमें वह केवल विश्वास पर कर लेगा मंजन भी करेगा तो वो विश्वास में करेगा कि इसमें जो है ऐसा पदार्थ नहीं डाला गया है जो मुझे नहीं चाहिए विश्वास प करेगा अपने मुंह में डालेगा पैकेट लाकर खोलेगा फाड़े विश्वास पर खाएगा ठीक है तो यह खामा खा का तर्क है ऐसे लोगों को आप
00:32:12:00 हमारा नंबर दिया करें और अभी बहुत जल्द हम लोगों का लाइव चर्चा शुरू हो जाएगी [संगीत] ओके क्या शूद्र ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य हो सकते हैं जी हो सकते हैं जन्म जनमा में हो सकते हैं जन्म जन्मांतर में एक 10 65 नंबर का श्लोक है मनुस्मृति का जहां पर जहां से उठा कर के इसका विवरण दिया जाता है इससे जस्ट पहले वाला श्लोक है उसका ही अगला अंश है जन्म जन्मांतर में ऐसा हो सकता है या फिर स्वयं भगवान आ करके कह दे कि हां अ ये हो गया जैसे विश्वामित्र जी के उसम हुआ था उनका जो जन्म है उनके जन्म का प्रयोजन ही ऐसा था कि उसमें जो है उनकी माता जी ने ब्राह्मण उचित खीर खाई थी तो उनके अंदर दिव्य लीला के दवा पहले से ही ब्राह्मण वाले गुण व्याप्त थे उसके बाद उन्होंने उन्होंने परंपरा प्राप्त जो वश जी थे उनके पास कई बार गए कि हमें ब्राह्मण घोषित कर द अगर उन्होंने मना कर दिया तो इससे भी सिद्ध हो रहा है जन्म से कौन थे वो ब्राह्मण ब्राह्मण जन्म से थे तो इससे सिद्ध हो रहा घटना से इसके बात उन्होंने बहुत तपस्या की तो भगवान आए ब्रह्मा जी आदि के द्वारा उनको घोषित किया गया कि वो ऐसा तो आप हो सकते हैं इतनी ऐसी तपस्या हो जाए कि भगवान या ऐसी दिव्य लीला के द्वारा आप घोषित हो जाए बाकी जन्म जन्मांतर
00:33:27:09 में हो स जन् में कैसे कर्म करें और मैं तो यह कहूंगा फिर वही बात ब्राह्मण बनना जीवन का उद्देश्य है यह आप कहां लिखा है यही तो बात है समस्या बनाई गई है यह हमारे जीवन में समस्या नहीं है ब्राह्मण बनना हमारे जीवन का उद्देश्य नहीं है एक जब शिशु जन्म लेता है वह खाना मांगता है खुशी मांगता है ब्राह्मण बनना नहीं मानता मांगता है यह ब्राह्मण बनना बनने में खुशी मिलेगी यह आपको समझाया गया है ये आपके दिमाग में ग्रामिंग की गई हमारा उद्देश्य है सत चितता आनंद असतो मा सद गम ये नहीं लिखा है असतो मा ब्राह्मण गम है ना मृत्युर मा मतम गम ये नहीं लिखा है मृतु मा ब्राह्मण गम ये सब नहीं लिखा है हमारे शास्त्रों में तो क्या लिखा है हमारा उद्देश्य जीवन का है हमें चाहिए सच्चितानंद हमें ब्राह्मण बनना चाहिए ही नहीं आपकी सबसे ऊंची पहचान है आप राम के भक्त है और सामर्थ्य मान गुरु के शिष्य मेरी सबसे ऊंची पहचान है मैं प्रभु श्री राम का साधारण सा भक्त और श्रीमद जगतगुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर जी काल्पा जैसा शिष्य इससे ऊंची कोई हो ही नहीं सकती आप बताइए व्यवहारिक जीवन में इससे बड़ी कोई हो तो
00:34:42:09 बताइए जो राम का भक्त हो गया वो सब कुछ हो गया तो ब्राह्मण बनना जीवन का उद्देश्य है ही नहीं उसको आप जीवन के उद्देश्य में क्यों ले रहे हैं और फिर भी जो शास्त्र है वो कहते हैं कि जन्म जन्मांतर में बन सकते हैं मगर फिर वही बात क्यों जन्म जन्मांतर की बात हम सोचे भाई हमें तो इसी जन्म में भगवान से मिलना है ऐसा सोचिए ना क्यों सोच रहे हैं कि अभ और हम अगले दो चार जन्म यहां पर बिताए फिर उसमें जन्म लेंगे छोटे बच्चे के रूप में फिर कभी बुझली के बोर्ड में उंगली डाल देंगे चित की प्यास के कारण छोटे बच्चे जो ये सब कार्य करते हैं कि मना करने पर भी कूद जाते हैं पलंग से और बिजली के बोर्ड में उंगली डाल देते हैं य सब कार्य क्यों करते हैं चित की प्यास होती है अखंड ज्ञान यह भी जान लो बोर्ड में क्या है यह सब बातें उसके उस समय दिमाग में आ रही होती है ना यह क्या कर रहे वो क्या कर रहे है सब ये लोग मेरी बात क्यों नहीं मान रहे यह क्या है चित की प्यास अखंड ज्ञानी बन जाने की प्यास और वहीं पर आनंद की प्यास क्या होती है कि मुझे कुछ चाहिए दूध चाहिए या मैंने मूत्र त्याग कर दिया है तो मेरे को गीला महसूस हो रहा है अब सही क्यों नहीं रहा बोल पा नहीं रहे सक्षम नहीं है शरीर सामने वाले को बताने के लिए तो रो
00:35:57:12 रहे वो क्या है अखंड सुख की प्यास अनंत आनंद की प्यास है ना हर्षदीप सिंह जी हैं लुधियाना से नाथस प्रतिमा अस्थ का अर्थ है कोई भी परमात्मा के बराबर नहीं है तो क्या यह बात केवल निराकार ब्रह्म पर ही लागू होती है क्योंकि साकार ईश्वर की प्रतिमा बनाई जा सकती है हां यह जो बात है भगवान के परमार्थिक स्वरूप की बात हो रही है जो परमार्थिक स्वरूप है भगवान का उसकी कोई प्रतिमा नहीं है ठीक है परमार्थिक स्वरूप निर्गुण निराकार निराकार स्वरूप जो है उसकी कोई प्रतिमा नहीं
00:36:41:06 है अभिजीत मंडल जी दोबारा पश्चिम बंगाल से आप लोकतंत्र को मलित शासन व्यवस्था बताया है क्या लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था भारत के लिए अनुकूल नहीं है आपको क्या लगता है अनुकूल है भारत के संविधान के प्रति हमको निष्ठा बनाए रखना चाहिए कि नहीं हां बिल्कुल बनाए रखना चाहिए तब तक जब तक उसके ध्वज के नीचे हम लोग अपने देश की रक्षा कर रहे हैं बिल्कुल बनाना चाहिए क्यों नहीं बनाना चाहिए मगर प्रॉब्लम यह है कि हम उसे शाश्वत सिद्धांत के रूप में नहीं ले सकते क्यों क्योंकि मैं चलो अभी मैं मान गया आप ही से पूछता हूं अभी कुछ लोग ज्यादा ऐसे सत्ता में पहुंच गए पहली बात तो आपको य मानना पड़ेगा ऐसे लोग भी चना जीत सकते हैं जो आपके अनुकूल ना हो वह लोग वहां पर पहुंच करके संसद में ऐसा बिल पास करा सकते हैं जो आपको बिल्कुल स्वीकार ना हो और हो रहा है भाई जो धर्म नहीं है जो सनातन सिद्धांत नहीं उसकी पहचान क्या व बदलता है तो संविधान बदल रहा है लिविन रिलेशनशिप जिसको हमारे यहां पर व्यभिचार कहा गया जिसको पाप कहा गया उसको अलाउ कर दिया गया जहां तक मेरी जानकारी है तो
00:37:57:19 बहुत सी चीज है बदलता जाएगा दुनिया में धर्म और अधर्म के मूल में है ईश्वर बाधित और ईश्वर अबाध धर्म जहां है वहां पर ईश्वर अबाध है और ये अधर्म जहां है वहां पर ईश्वर बाधित है इसके भी मूल में क्या है हम लोग सोचते धर्म के नाम पर लड़ाया जा रहा नहीं मानवता और पशुता ह्यूमैनिटी वर्सेस एनिमलिज्म तो टी वो जहां पर ईश्वर हो अवाद ईश्वर और एनिमलिस म वो जहां पर ईश्वर ना हो या फिर हो तो बाधित ईश्वर हो ठीक है तो यदि ऐसा संविधान है जिसको कभी भी चेंज किया जा सकता है तो उसको आप अपने जीवन का आधार नहीं बना सकते हां क्योंकि अभी स्थितियां विपरीत है तो जो है उसके प्रति यथा सामर्थ निष्ठा होनी चाहिए उसकी सीमा में रहकर के कार्य करना चाहिए क्या प्राचीन भारत में राजाओं के युग के शासन व्यवस्था ही अनुकूल है जो मनुस्मृति से या अन्य शास्त्र से होता था भैया रामराज मनुस्मृति के हिसाब
00:39:12:25 से ही था अगर हम यह नहीं मानते कि वह व्यवस्था अनुकूल है तो पहली बात तो हम राम को नहीं मानते राम को नहीं मानते तो सनातन को नहीं मानते सनातन को नहीं मानते तो ईश्वर को नहीं मानते अवाद श्वर को अवाद को नहीं मानते अबद ईश्वर को नहीं मानते तो ईश्वर को नहीं मानते ईश्वर को नहीं मानते तो हम पशु है यही सिद्ध होगा कान को कैसे भी पकड़ लीजिए सनातन का विरोध करने वाला वह स्वयं को मनुष्य भी सिद्ध नहीं कर पाएगा उसको सनातन की शरण में आना पड़ेगा ठीक
00:39:50:15 है अगर आप या हम आधुनिक भारत में राजाओं सम्राटों का शासन व्यवस्था कैसे संभव होगा क्या करना पड़ेगा मानवता की जो शिक्षा है धर्म की शिक्षा मानवता का अर्थ है धर्म तो धर्म की जो शिक्षा उसको ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना शुरू करिए और आप देखेंगे कि आपको नींद भी बहुत अच्छी आएगी साथ ही साथ आपको आप एक धर्मार्थ का के अग्रणी सैनिक भी बनेंगे भारत की स्वदेशी न्याय व्यवस्था कैसे संचालित होनी चाहिए क्या परिवर्तन करना चाहिए और कैसे संभव होगा यह सब कुछ निर्भर करता है जब व्यास गद्दी का शोधन यानी कि व्यास गद्दी पर ऐसे सामर्थ वान गुरु बैठे हो व्यास के रूप में लोग उन सामर्थ वान गुरुओं को जानते हो जो धर्म की ऐसी सही शिक्षा आपको बताए वो अकाट्य शिक्षा जिसके नीचे मानव समाज सुनियोजित तरीके से एक छत्र हो स तब यह सब चीजें लागू होंगी तो व्यास गद्दी और शासन तंत्र का शोधन जब व्यास गद्दी सही होगी व्यास गद्दी को उसकी
00:41:05:19 सही जगह मिलेगी व्यास गद्दी पर सही व्यक्ति बैठेगा तो उसके द्वारा जो चयनित शासन तंत्र होगा वोह भी सही से चलेगा पहले क्या होता था कि जो धर्म होता जो राजनीति होती थी वह धर्म के आधार पर होती थी प्रभु श्री राम भी अपने जीवन के महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए जो निर्भर करते थे भगवान जो गुरु वशिष्ठ थे उन पर वहां जाते थे और उनसे जाकर के वो निर्देश लेते थे कि क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए धर्म और अधर्म का निर्णय कौन करते थे तो राजनीति कैसे चली धर्म से अभी क्या हो रहा है कि ऐसे लोग भी व्यास गद्दी पर बैठे हैं जिनको शासन तंत्र से निर्देश मिलता है कि उन्हें क्या करना चाहिए तो जैसे ही यह चीज बदलेगी सार्वभौम जो आचार गद्दी है वो हमारी खित हो जाएगी मैं ये नहीं कह रहा शंकराचार्य के रूप में ही ह आप करने जब जाओगे तार्किक रूप से तो आपको आना पड़ेगा व बात बात की है मगर मैं ये कह रहा हूं आप ही कोई जो इस बात को ना मानते हो आप ही कोई ऐसी व्यास गद्दी बना दीजिए जिसके नीचे पूरा सनातन समाज एक हो सके जब सनातन समाज एक होगा तो उसके द्वारा जो विरचित मानवीय व्याख्या मानव उचित शल की व्याख्या वह ज्यादा से ज्यादा वर्ल्ड में फेमस
00:42:20:25 होंगी और पूरा मानव समाज में तो कह रहा हूं वो एक होगा तो व्यास गद्दी का शोधन और शासन तंत्र का शोधन ये दो चीजें आधार है स्वदेशी और गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था कैसी होनी चाहिए क्या क्योंकि मै कोले ने शिक्षा व्यवस्था से अधिक हानि पहुंचाई है देश में ऐसा कैसे संभव है फिलहाल तो जो अवेलेबल है प्राप्त ज्ञान का समादार करिए जो उपलब्ध है यथा सम्मत यदि उसका ही पालन करने लगेंगे तो बहुत सशक्तिकरण हो जाएगा एक बार गुरुदेव से किसी ने बोला था कि अगर हमने फलान को नहीं मारा तो वो लोग हमें मार देंगे क्या करना चाहिए गुरुदेव ने कहा था यदि हिंदू यथा सम्मत अपने धर्म का निर्वाह करने लगे तो बहुत बड़ा तो जो तंत्र है हिंदू विरोधी जितने तंत्र है उन तंत्रों में ऐसे लोग खड़े हो जाएंगे जो अपने तंत्रों का शोधन कर देंगे उदाहरण के लिए उन्होंने बताया बौद्धों के य देखो अहिंसा को बताया गया किसी भी हालत में हिंसा नहीं करनी है मगर जब उन्हें लोग खा खाने आ रहे थे तो तो उन्होंने एक नया नियम निकाला कि भाई अपनी रक्षा के लिए अगर हिंसा करनी पड़े तो हिंसा नहीं है तो क्या हुआ उतने अंश में वो बौद्ध मत को छोड़ कर के हिंदू हो गए इसी
00:43:35:27 प्रकार से कोई इस्लाम को मानने वाली स्त्री जब मन में यह सोच रही होती है कि मेरा जो पति हो वो केवल मेरे बारे में सोचे और किसी के बारे में ना सोचे जबकि वहां कहा गया है कि एक से चार तक विवाह करना अधर्म नहीं है मतलब उसे निम्न नहीं कहा गया हमारे यहां पर अमुक अमुक स्थितियों में ही कर सकते हो जब आपको ऐसी स्थिति हो जाए जिसकी बाध्यता हो जाए उसमें ही वो दिया गया वरना एक नारी सदा ब्रह्मचारी भगवान राम की भले भगवान राम के पिताजी की भले ही तीन पत्नियां थी मगर भगवान राम ने जब वैष्णो माता आई उनके पास या सूप नका आई तो उससे कह दिया मैं विवाहित हूं मैं मैं एक पत्नी व्रत धारण किए हुए हूं और मैं जो है एक से ज्यादा विवाह नहीं कर सकता और इस मर्यादा को मर्यादा पुरुषोत्तम कह कर के सिद्ध कर दिया गया एक नारी तक सीमित रहना ही सनातन धर्म के द्वारा दी गई म ज्यादा है जो सर्वोच्च है अब बाकी विशेष आपातकालीन परिस्थिति में अलग-अलग चीजें हो सकती है मगर सामान्य स्थितियों में नहीं हो सकती तो क्या हुआ हमारे यहां पर सामान्य स्थिति में क्या कहा गया एक नारी और वहां पर सामान्य स्थिति में कहा गया क्या क्या कहा गया एक से ज्यादा तो एक इस्लाम को मानने वाली जो स्त्री होती है वो भी अपने मन में एक सोच
00:44:51:01 रही होती है कि भाई मेरा पति जो है मुझ तक सीमित हो कर के रहे इसका अर्थ क्या है कि मन ही मन उस समय जहां पर एक या चार विवाह करने वाले को समान कहा गया है इस शिक्षा का खंडन कर रही होती है और जहां पर एक विवाह करने वाले को श्रेष्ठ और उससे ज्यादा विवाह करने वाले को निम्न कहा गया है उस शिक्षा का अनुकरण कर रही होती मनी मन तो क्या होगा इसका अर्थ क्या है क्यों पड़े हो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में घुमा फिरा करके आपको मानना ही पड़ेगा सनातन के सनातन के उसमें आना ही पड़ेगा अ नोनिया जाति से मुझे संस्कृति यह शिवम कुमार जी हैं गौतम बुद्ध नगर से हैं और इनको अद्वैत वेदांत के दर्शन के बाद देखिए शुरुआत यह करिए जो गुरुदेव आपके मन में जो जो ब्रह्म विषयक धर्म विषयक प्रश्न आते हैं उन प्रश्नों को एज इट टाइप करिए वहां टू के स उसम बार में और आगे डाल दीजिए पूरी शंकराचार्य जी तो गुरुदेव ने करीब साढ़े 5000 प्रश्नों के जवाब दिए हुए अब तो बहुत ज्यादा हो गए होंगे हम लोग करीब 6000 प्रश्न हो गए होंगे तो आप के प्रश्नों के जवाब पहली बात तो यह है कि उनको सुनना शुरू करिए जो प्राप्त है पहले उसको धारण करिए और जो जो चीज अभी दुर्गम है उनके
00:46:06:04 पीछे बाद में करिएगा ऐसा नहीं वो नहीं करनी मगर जो अवेलेबल है वहां से शुरुआत करिए जहां खड़े हैं वहीं से शुरुआत करिए ठीक है तो यह सारी आपकी शिक्षा पद्धति शुरू हो जाएगी दूसरी बात एक बात जरूर कहूंगा कि भगवान के नाम का नाम का वो लीजिए शरण लीजिए दिन भर में कम से कम सवा घंटे भगवान के नाम का वो करिए जाप करिए इससे क्या होगा भगवान ने क्या कहा भगवत गीता 92 में कि
✅ This part is already used · 00:46:34:02 – 00:46:39:16 (0:05)
→ Used in: A · Video बांग्लादेश जैसी घटना भारत में भी हो सकती है Part-2 #StopViolenceAgainstHindus at 12:27 ↗
00:46:34:02 जब तू मेरी शरण में आ जाता है तो तेरी प्राप्ति की रक्षा अप्राप्य की चिंता मैं करता
⬜ Not used yet · 00:46:39:16 – 01:03:51:00 (17:11)
00:46:39:16 हूं फिर आपको कुछ करना ही नहीं पड़ेगा भगवान आपके पीछे पीछे चलेंगे चलो भाई अद्वैत का य वाला ग्रंथ दिलवा उसको ऐसे गुरुओं के पास आपको स्वत ले जाएंगे कि आपको पता ही नहीं चलेगा मगर व्यक्ति की प्रॉब्लम क्या है कि वो सब कुछ अपने हाथों से करना चाहता है भगवान के पास नहीं जाता है प भगवान के पास जाओ भगवान की शरण पहले लो राम राम रटने लगो अभी सुबह से लेकर रात तक अभी देखो कुछ ही दिनों में आपकी काया पलट होने लगी जो जो चीज आपके लिए बहुत आवश्यक है सब आने लगेंगी आपके पास तो पहले भगवान की शरण
00:47:15:09 पकड़ी मेरे जीवन में भी जो पूज्य गुरुदेव का आगमन हुआ है भगवान के जो नाम का रट्टा लगाने के कारण ही हुआ एक वीडियो मैंने बताया था मैं शंकराचार्य महाराज को सुनता हूं उनसे दीक्षा प्राप्त करना चाहता हूं इसके लिए गुरुदेव जहां पर भी होते हैं वहां पर आपको पहुंचना होता है अपने पारंपरिक वस्त्र के साथ आप घर से निकल सकते हैं अपने गृहस्थ वाली वेशभूषा में जो आज की प्रासंगिक वेशभूषा उसमें मगर जब आपको गुरुदेव दीक्षा देने के लिए देख रहे होंगे तो उस समय आपने धोती और उपवत यानी की जो गमछा है वो धारण किया हो अचला और उस रूप में वह आपको देखेंगे और आपको दीक्षा दे देंगे इसके लिए कोई शुल्क नहीं होता है कुछ भी ले जाना अलग से नहीं होता जो आपकी श्रद्धा हो गुरु के लिए वह आप ले जा सकते हैं कुछ लोग ऐसा कहते हैं कि दीक्षा को जो है बांटा जा रहा है ऐसे किया जा रहा है भाई दीक्षा से ही तो विद्या आना शुरू होता है व जो ब्राह्मण को दीक्षा प्राप्त हो जाती गायत्री मंत्र की कब पाच वर्ष से माना गया है मनुस्मृति में तो तो आपका जो शिक्षा शुरू ही होती है व दीक्षा से ही होती है तो यह कुतर्क हो
00:48:35:08 गया इसके बाद है देव सत्यम पॉल हा यह है सिलिगुरी से वेस्ट बंगाल वो कब आएंगे वो कब कहां होते हैं इसके लिए बहुत पहले नहीं बताया जाता है कुछ सुरक्षात्मक कारणों के कारण आप हमारे चैनल्स को गोवर्धन मटके चैनल को ट चैनल है गोवर्धन मट का इनको फॉलो करते रहिए गोवर्धन मट का एक ऑफिशियल नंबर भी है वहां दीक्षा के लिए जाने के लिए या फिर आदित्य वाहिनी से जुड़ने के लिए जो है आप जो है इन सब चीजों को फॉलो करिए टेलीग्राम चैनल है हमारा उसको जरूर फॉलो करिए वहां पर हम लोग कोशिश करते हैं कि अपडेटेड रहे ह दीप सिंह फिर से आए आ गए लुधियाना से इस कौन कहता है कि चार वैष्णव संप्रदाय प्रामाणिक है और इसका प्रमाण शास्त्रों में है तो क्या शंकर परंपरा का वर्णन हमने दिखाया है ना शंकर परंपरा का वर्णन वायु पुराण उक्त एक लिंग महात्म में है और आप उस जो एक जगह पर एक पंक्ति में दिया उसको छोड़ भी दीजिए तो अलग अलग जब शास्त्रों का अध्ययन करेंगे तो इसके गुरु
00:49:50:14 यह थे ये मिल जाएगा राम जी के गुरु ये थे ये मिल जाएगा वशिष्ठ जी के पुत्र ये थे ये मिल जाएगा ऐसे करते हुए चेन बन जाएगी आपकी नाम सार्थक श्रीवास्तव आयु जिला बस्ती देवदासी प्रथा की सत्यता क्या है देवदासी प्रथा देखिए प्रथा की बात ऐसी होती है कि कहीं कहीं पर शिक्षा में विकृति के कारण कोई परंपरा अगर चालू हो गई है तो कई बार ऐसा कहते हैं लोग कि जो जो हमारे यहां पर जने शादी के समय होता है वो हमारे यहां क्या सनातन से बाहर है क्या तो हमें करना ये चाहिए अगर हमें पता चल गया कि शास्त्र सत नहीं है और हमारा सामर्थ्य है तो हमें ऐसी प्रथाओं को रोकना चाहिए तो हमारे यहां की परंपरा के नाम पर स्वयं को सनातन विरुद्ध घोषित नहीं करना [संगीत]
00:50:50:20 चाहिए और सामर्थ वान गुरुओं की शरण में जाएं तो आपके जो धर्म और ब्रह्म का जो वह है साधन वह सुलभ हो जाएगा हा यह देखिए यह वस्तुनिष्ट बातें हो गई जो आपने पूछी है 36 से 96 ऐसा यह वस्तुनिष्ट बातें हैं सैद्धांतिक विषयक प्रश्न आप किया करें कि जो विधि विधान से निमित्त जो चीज होती है कि इसमें इतना यह करना है वह हम भी आचार्य श्री से ही मार्गदर्शन लेते हैं तो
00:51:28:00 हर्षदीप सिंह लुधियाना से क्या श्रीमत जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी महाराज से सूत्रों को भी दीक्षा मिल सकती है हां बिल्कुल गुरुदेव जो दीक्षा देते हैं वह शूद्रों को भी देते हैं और हमारे कई शूद्र गुरु भाई हैं ऑलरेडी कई लोग कहते हैं निराकार का अर्थ होता है जिससे सभी आकार आए हैं यह अर्थ भी होता है मगर जिससे सभी आकार आए हैं तो इसका अर्थ एक ये भी तो हो गया कि उसका कोई आकार नहीं है अगर इस अर्थ को भी मान ले सभी आकार आए हैं तो अगर जिससे सभी आकार आए हैं तो इसका मतलब सभी आकारों के आने से पहले कोई आकार नहीं था तो अपने आप ही इसी परिभाषा में ही निराकार शब्द है दूसरी बात हमारे धर्म शास्त्रों में निराकार वोह जो है यह जो कहा गया एक बात आई है कि अनाक नहीं कहा गया है ना अनाक कहना चाहिए मगर अनाक शब्द का उपयोग भी हमारे शास्त्रों में है और यह बात गलत है कि निराकार का अर्थ केवल यही है कि जिससे सभी आ आकार जो है निकले हैं और रामानंदाचार्य जी निराकार का अर्थ यह भी है कि हमारी जो कर्मेंद्रियां है उनका वो विषय नहीं है यह भी अर्थ हो गया हमारी आंखें नहीं
00:52:43:00 देख सकती वोह भले ही वास्तव में आकार वाला ही हो जैसे नामन जो शुद्ध द्वैत परंपरा उसम माना गया कि भगवान है तो मगर भगवान साकार तो है मगर उनका वो अभौतिक स्वरूप है दिव्य स्वरूप है तो हमारी इन आंखों का विषय नहीं हो सकता व्यावहारिक दृष्टि से व निराकार है आफ्टर ऑल व एक रूप है मगर व ऐसा रूप है जो हमारी आंखें नहीं देख सकती तो व्यावहारिक दृष्टि क्या हो गई मनुष्य की दृष्टि से निराकार ही हो [संगीत] गए अभिषेक पाठक जी यह जो जानकारी है शुद्ध दत वाली की आखिरी में उन्होंने क्या माना इसको कन्फर्म भी कर लीजिएगा काफी दिन हो गए इस बारे में पढ़े हुए
00:53:29:25 अभिषेक पाठक जी ब्राह्मण क्या पुराण वैदिक है यदि हां तो किन वेदों उपनिषदों में इसका प्रमाण है देखि सबसे पहली बात तो कई उसम है पुराणों के बारे में बताया गया है और कई जगह पर वर्णन है मगर मैं आपको एक जगह का भी बता दे रहा हूं पुराणों को प्रमाणिक माना गया है यह देखिए अ अवेद 11 सा च अथर्ववेद 11 सा च अच्छा उल्टा दिखाई दे रहा है तो इसमें जो है पुराणों की बात हो रही है और कई जगह पर भी है जैसे बदर उपनिषद दो च द यहां पर भी पुराणों को माना गया है और पंचम वेद के रूप में पुराणों को माना जाता है दूसरी बात यह है कि अब बात य आती पुराण को तो सभी मानते हैं बस यह है कि ये दिक्कत हो सकती ये अंतर आ जाता है कि वो लोग उनको पुराण नहीं कहते जिनको हम पुराण कहते हैं ये अंतर हो सकता है ऐसा नहीं है कि वो लोग पुराण को ठुकरा सकते तो जो लोग ये कहते हैं पौराणिक जो लोग ये कहते हैं पौराणिक वो खुद अवैध हो जाते हैं पौराणिक को अपने से अलग करते हैं यदि
00:54:45:08 तो वो खुद अवैध हो जाते हैं क्योंकि पौराणिक का अर्थ तो ये हो गया जब पुराण शब्द उसमें आया वेदों में शास्त्रों के रूप में तो पुराण के अर्थ में वो किसी भी शास्त्र को मानते हो वो ब्राह्मण ग्रंथ को मानते हो मगर पुराण को तो मान रहे हैं ना ब्राह्मण ग्रंथ के रूप में मान रहे हैं तो पुराण को यदि वो मान रहे तो पौराणिक तो वो भी हो गए तो फिर इसलिए पौराणिक संज्ञा देकर के पौराणिक से अपने आप को अलग नहीं करना चाहिए को कोई और संज्ञा ढूंढनी चाहिए दूसरी बात कि इस प्रमाण को हटा दीजिए जो मैंने आपको दिया है प्रमाण को अभी साइड कर दीजिए मैं बस इतना पूछूंगा कि वेद आपको प्राप्त कैसे हुए आपको परंपरा प्राप्त आचार्यों से वेद प्राप्त हुए जब परंपरा प्राप्त आचार्य से वेद प्राप्त हुए तो क्या हुआ कि यदि आपको परंपरा प्राप्त आचार्यों से प्राप्त होने वाले वेदों पर विश्वास है तो उनके द्वारा प्राप्त होने वाले पुराणों पर अविश्वास होना उचित सिद्ध नहीं होता और यदि परंपरा प्राप्त आचार्यों से प्राप्त होने वाले पुराणों पर आपको विश्वास नहीं है तो उन्हीं से प्राप्त होने वाले वेदों पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता तो आप पहले निर्णय करें कि हमारे पास यह वेदा आदि शास्त्र
00:56:00:08 आए कैसे बात खत्म हो जाएगी या तो आप यह मानिए कि अभी 100 स साल पहले दयानंद जी ने ही वेदों का लिखा है और वही वैदिक धर्म है प्राचीन धर्म है ही नहीं सनातन शास्त्र है ही नहीं वरना बताइए कैसे आए किसने किसको दिए नाम लेकर थोड़ा बताइए ज्यादा पीछे मत जाइए कुछ जैसे अभी टीपू सुल्तान आदि की बात आप करते हैं अलंकार समाजी तो उसमें क्या है टीपू सुल्तान की बात जब करते यानी कि आपको दुनिया का 200 300 साल पुराना भी वो मालूम है इतिहास तो अपना तो बता दो अपना तो बता दो भाई तुम दुनिया भर की बातें कर रहे हो 5000 साल पहले ये वहां ये वहां वो अपना इतिहास बता नहीं रहे हो दो 300 साल पहले का नहीं बता रहे हो तो ये है ठीक है और यह जो यह वाली बात जो है कि टीपू सुल्तान की सहायता की थी तो जो शंकराचार्य वो एक मान्य के रूप में उन्हें माना जाता था उनको महाराष्ट्रीय जो मराठा थे वह भी उनकी सेवा करते थे और यदि कोई यह टीपू सुल्तान जैसा व्यक्ति था तो वह भी सेवा कर सकता था ऐसा नहीं है कि उनकी आइडल जीी को उनके द्वारा लिए जा रहे निर्णयों
00:57:15:18 को समर्थन प्राप्त था मगर वह एक मंदिर के जैसा था तो वहां पर कोई भी अपना माथा टेक सकता था तो सभी टेकते थे अगर ऐसा होता तो जो उसी जहां इतिहास में ये भी लिखा है जिस वेबसाइट में ये सब आया है जिस के ऊपर टीपू सुल्तान का समर्थक होने का आरोप लगाया जा रहा है और टीपू सुल्तान जिनका दुश्मन है मराठा का मराठा भी उन्हें मराठा ने खुद घोषित किया बाजीराव पेशवा द्वितीय ने यह घोषित किया कि हमारे यहां सबसे पहले जो शेरी के शंकराचार्य हैं उनका पूजन होगा मतलब गुरु के रूप में तो अगर वो वाकई में उनके समर्थक थे और दुश्मन थे तो फिर आपका कटाक्ष तो इनके ऊपर भी होना चाहिए बाजीराव पेशवा के ऊपर तो आप फिर शिवाजी आदि के विरोधी हो जाएंगे विरोधी तो है ही क्योंकि व हिंदवी धज के नीचे लड़ते थे और आप कह रहे हो हिंदू का अर्थ है काफिर चोर लुटेरा तो फिर वही होता ऐसा जब उनके पास [प्रशंसा]
00:58:18:18 कहोगे जब भैरव परमात्मा स्वरूप है तो वृंदावन वाले पंडित यह सब रस की बातें हो सकती है जब भैरव परमात्मा स्वरूप है तो वृंदावन वाले पंडित माधवाचार्य जी जिन्होंने 13 ब बार गायत्री मंत्र पुरश्चरण किया था 12 वर्षों की पुरश्चरण के पश्चात एक अवधूत के कहने पर शीघ्र परिणाम प्राप्त करने के लिए भगवान भैरव की भी साधना करने लगे थे भगवान भैरव ने उनके सामने प्रकट होने से मना कर दिया था क्योंकि भगवान भैरव का यह कहना था कि उन्होंने 12 वर्ष तक गायत्री का पुरश्चरण किया है इसलिए उनके तेज के सामने व प्रकट नहीं हो सकते यदि वह प्रकट हो हैं तो वह भस्म हो जाएंगे यदि पंडित माधवाचार्य वही वृंदावन के पंडित जी थे जिन्होंने माधव निदान नाम करके एक आयुर्वेद ग्रंथ पुस्तक लिखी थी तो मेरा प्रश्न यह है जो मैंने उपयुक्त शलोक लिखा है एवं जो मैंने आपको कथा कही है मुझे तो विवादास्पद है यदि भैरव परमात्मा स्वरूप है गायत्री मंत्र से मतलब भस्म कैसे हो सकते हैं ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है जब भगवान श्री कृष्ण सबको वश में करने वाले होते हुए भी रण को छोड़कर भाग सकते हैं तो फिर वह गायत्री मंत्र से सस भी हो सकते
00:59:33:22 हैं तो पहला सिद्धांत अपने माइंड में फीड करके रखिए ईश्वर के ऊपर कोई भी नियम लागू नहीं होता वह कुछ भी कर सकते हैं कुछ भी का मतलब कुछ भी कोई लिमिट नहीं है कोई वो नहीं है तो भस्म हो के भी दिखा सकते हैं आपको इसमें इसमें बुरा क्या मानना दूसरी बात यह है सिद्धांत आदेश अभी अभी बात कर लेंगे आप लोग थोड़ा अपने सवालों को थोड़ा रोक के रखिए ये प्रश्न खत्म हो जाए पहले उसके बाद हम बात करेंगे होने वाले हैं तो ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है दूसरी बात आपने जो वृतांत लिया है य वस्तुनिष्ठ प्रसंग है तो इसके बारे में जो पूरी जानकारी मतलब आप जहां से पढ़ रहे हैं वहां कौन से परंपरा है उस परंपरा प्राप्त आचार्य में वहां जाकर के जानकारी ले के ऐसा हुआ भी था कि नहीं हुआ था यह है पहली बात मगर अगर मैं कह रहा हूं ऐसा हुआ भी था तो जो हमरा साम सिद्धांत वो क्या है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है व किसी भी प्रकार के नियम के नीचे भी नहीं है वह सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है तो व हसेगा भी व रोएगा भी वह रास भी रचाए वह भस्म भी होगा लो कुछ भी नहीं कुछ भी संसार में ऐसा नहीं है जो वह नहीं कर सकता वह
01:00:48:22 गायत्री मंत्र से बसम के भी दिखा देगा ठीक है बाकी आप वस्तुनिष्ट इसकी कफ कर लीजिएगा मगर भगवान यदि ऐसी लीला कर रहे हैं तो उससे कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए राधा जी और कृष्ण का क्या रिश्ता था जो रस का जो भाव होता है देखिए आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत सारी बातें हैं क्या बिना विवाह के संबंध रखना ठीक है आपको ये जो दो दृष्टि है परमार्थिक दृष्टि और व्यवहारिक दृष्टि भगवान कृष्ण की कई ऐसी लीलाए हैं जो मानवीय दृष्टि से नहीं देखी गही है आध्यात्मिक दृष्टि व्यास जैसे आचार्य गणों ने उनको देखा और उनको नोट डाउन किया और आपको किसी एक विशेष मंतव्य से बताया जैसे कि जो रामायण है महाभारत इसका जो युद्ध है यह मनुष्य ने भी देखा मगर यह कुछ घटनाए भगवान श्री कृष्ण की जास लीला या उनका ऐसा हुआ उनके साथ ये मनुष्य ने नहीं देखा कई ऐसी लीला भगवान श्री कृष्ण की जिनको मनुष्य ने नहीं तो उनको आचार्य आपको क्यों बता रहे हैं इसका अर्थ आपको आचार्य की दृष्टि से ही लेना चाहिए अगर
01:02:03:26 आचार्य कह रहे हैं कि यह करके भगवान यह दिखाना चाह रहे हैं आपको तो उसमें फिर आपको यह नहीं कहना चाहिए कि नहीं इससे तो अधर्म की स्थापना हो रही है ये ठीक इस प्रकार से है जैसे कि वायु हर जगह जा सकती है अब वायु आपको बताना चाहती है कि मैं कहां कहा जा सकती हूं तो वायु के पास यदि सामर्थ्य है तो उसने ऐसा रूप बनाया जो आप कर्मेंद्रियों का ज्ञानेंद्रियों का विषय बन सके तो वह प्रकट हो गई एक मानव रूप में अब बोली मैं वायु हूं जैसे आपने देखा है आजकल कुछ ऐसे प्रोग्राम्स है बैंक वगैरह में अक्सर होते हैं हेलो आई एम एलेक्सा तो जो पूरा सिस्टम है बैंक का वह एक एलेक्सा नाम की लड़की के रूप में दिखने लगा उसको वो सारी चीजें उसके अंदर जो उस पूरे सिस्टम के अंदर तो इसी तरीके से अब उसने सिस्टम ने क्या किया कि वो जो सिस्टम है उसने आपसे संपर्क स्थापित करने के लिए एक ऐसा रूप बनाया जिसको आप जिसकी बातें आप समझ सको सुन सको जो आपकी कर्म इंद्रियों का विषय बन सके इसी तरीके से भगवान भी है वो अवतार लेते हैं ऐसे ही स सर्वव्यापक भगवान ऐसे ही अवतार ले लेते हैं दूसरा क्या है कि जैसे कि अ ये वायु
01:03:19:07 ने वायु ने कहा कि भाई मैं ऐसा करता हूं मैं बताता हूं तो उसने एक अवतार लिया वो वायु के रूप में आ गया अब वो आपको बताना चाह मैं कान के अंदर जा सकता हूं आपको बताना चाह रहा है मैं हर जगह जा सकता हूं तो वायु जो है हर जगह जाकर बता रही है नाली में भी जाक बता रही ऐसी जगह पर जहां पर जाना आपको आपत्ति जनक लग सकता है अब आप उसके उस दृष्टिकोण को ना देखते हुए उससे यह कह रहे हो कि देखो ये यह कैसी जगह जा रहा है यह कैसा आपत्ति जनक कार्य कर रहा है तो इसी प्रकार से भगवान ने इस बात को कहा भी भगवत गीता में कि जो लोग मानव
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01:03:51:00 देह में देखकर मुझे मेरे ब्र ब्रह्म को भूल जाते हैं वो मूर्ख होते हैं
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01:03:56:29 [संगीत] नाम सार्थक श्रीवास्तव अच्छा य हो [संगीत] गया देखिए हमारे आचार्य जो है आप अपने जो जैसे आपने प्रश्न पूछा क्या ब्रह्म वैवर्त पुराण में में कोई मिलावट हुई है क्या भगवान कृष्ण का जीवन पालन करने योग्य है भगवान श्री कृष्ण को कहीं भी धर्म नहीं कहा गया है वो लीला पुरुषोत्तम है मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं है तो उनका हम अनुसरण कर सकते अनुकरण नहीं कर सकते तो फॉलो और ओबे यह दोनों हम राम का कर सकते हैं मगर यहां पर केवल ओबे करना है आपको उनका अनुसरण नहीं करना है अनुसरण करेंगे तो आपके अंदर वैसा सामर्थ्य भी होना चाहिए वो कुछ भी कर सकते हैं तो आपको भी कुछ भी कर सकने वाला होना चाहिए ये ठीक
01:04:59:27 है य इसके बाद क्या है हां ब्रह्म वैवर्त पुराण में कोई मिलावट हुई है तो देखिए आपको परंपरा प्राप्त आचार्यों पर निर्भर होना होगा कि कौन से शास्त्र हमारे लिए सही है और कौन से शास्त्र नहीं है खत्म हो गई बात यह जो हम अगर प्रामाणिक आचार को जान जाएंगे तो हमारी यह चीज खत्म हो जाएगी प्रामाणिक आचार्य बताएंगे भाई ये परंपरा प्राप्त सही है इसमें मिलावट नहीं हुई है और यह परंपरा प्राप्त सही नहीं है इस मिलावट हुई है और अगर मिलावट हुई भी होगी तो व यह भी बता देंगे इतने अंश में मिलावट हुई है उतने अंश में नहीं हुई है जैसे कि कुछ ऐसे आगम शास्त्र वैष्णव और शवों के जैसे ब्रह्म समिता और यह पंचरा इत्यादि इसके लिए पूरी तरीके से अमान्य नहीं कहा है आचार्य ने उन्होंने क्या कहा कि उनका वह अंश जो वेद के विरुद्ध है वह केवल अनम में नहीं बाकी वो भी प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा ठीक है [संगीत]
01:06:02:00 क्या शूद्र को पुराण गीता रामायण महाभारत इतिहास पढ़ने का अधिकार है भाई मैं तो कह रहा हूं ब्राह्मण को भी वेद पुराण वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है यदि गुरु के सानिध्य ना हो तो गुरु का सानिध्य प्राप्त करिए डायरेक्ट स्वाध्य ना करि गुरुओं के द्वारा निर्धारित जो सिद्धांत स्वीकार किए गए हैं उनकी सीमा में र कर के जिससे आप जब अध्ययन करेंगे तो भटक नहीं दूसरी बात अगर शास्त्र में ऐसी कोई चीज आती जो हमारे समझ में नहीं आ रही है तो हम शास्त्र के प्रति धर्म के प्रति अनास्ता मान नहीं होंगे उस समय हमारे पास य होगा इसका जरूर कोई ना कोई आंसर गुरुदेव के पास होगा किसी समय जाऊंगा और ले लूंगा और उसको अपनी नोटबुक में आप लिख लीजिए तो अध्ययन करिए बिल्कुल मन से अध्ययन करिए क्या हमारे धर्म ग्रंथों में किसी भी प्रकार की मिलावट बाहरी लोगों के द्वारा की गई है और अगर की गई है तो क्या उनको हम किसी किस प्रकार से सुधार सकते हैं इन सबका एक वही है निराकरण पहली बात तो की गई है और नहीं भी की गई है कई जहां की गई है तो वहां के बारे में परंपरा प्राप्त आचार्य बता देंगे ये चीज गलत है प्रक्षिप्त है और जहां नहीं की गई है वहां के बारे में परंपरा प्राप्त आचार्य बता देंगे प्रक्षिप्त नहीं है तो हमें परंपरा प्राप्त आचार्यों की ओर मुख करना हो हम
01:07:17:06 खुद अपने जैसे वही वाली बात कही ना मैंने कि वो हम अपने हिसाब से सब कुछ करना चाहते हैं तो पहले भगवान की ओर जाओ तो इसी तरीके से ग्रंथ आदि विषयक जो चीजें हैं इसमें क्या है आप आप परंपरा प्राप्त आचार्य की शरणागति हो जाओ जब ऐसा होगा तो क्या होगा कि आपका यह जो धर्म अधर्म का निर्णय है बहुत सरल हो जाएगा एक प्रश्न और है
01:08:05:04 [संगीत] देखिए विष्णु में और शिव में तत्व कोई भेद नहीं है जैसे ही भेद को स्वीकार करेंगे तत्व में तो ईश्वर को आप सीमित करना पड़ेगा तो इसलिए जो संग्राम जीत सिंह जी हैं इन्होंने क्वेश्चन भेजा है कि थोड़ी व्याख्या आपने वस्तुनिष्ट दी है जिसमें कि आपने कहा है कि कुल मिलाकर के विष्णु जी लिमिटेड है 24 पुस्तक तो विष्णु जी को अगर आप शिव जी से अलग कर देंगे तो वह जो है सीमित हो जाएंगे शिव जी सीमित हो जाएंगे जैसे ही अलग करेंगे तो अलग करते समय आपको उनको सीमित करना पड़ेगा तो सीमित नहीं कर सकते कुल मिलाकर के सभी
01:08:54:03 में यही ही है कि हे ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश जो वेदा दि शास्त्र है उनके द्वारा प्रतिपादित जो ईश्वर के पांच स्वरूप है उत्पत्ति स्थिति समार निग्रह अनुग्रह करने के लिए तो हे ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश मैं आप सबकी भक्ति भगवान विष्णु के रूप में या भगवान शिव के रूप में भगवान कृष्ण के रूप में माता के रूप में करना चाहता हूं आप सभी मुझे आपकी भक्ति इस रूप में प्रदान करें आशीर्वाद दें और फिर अपनी भक्ति कर ध्रुव सोलंकी जी हैं यह जो प्रश्न का मैंने आंसर दिया है इनका नाम है संग्रमजीत सिंह जो इन्होंने बताया नहीं हां वेस्ट बंगाल से मुर्शिदाबाद से इसके बाद ध्रुव सोलंकी जी हैं सूरत गुजरात
01:09:51:14 से नहीं कर सकते क्योंकि पुराण इन्होंने पूछा है कि क्या वो पुराण का भाष्य कर सकते हैं नहीं करना चाहिए क्यों नहीं करना चाहिए देखिए सकते वाली भाषा जो है ना वो गलत हो जाती है करना नहीं चाहिए क्यों नहीं करना चाहिए क्योंकि ब्रह्म का जो ज्ञान उसमें भी है पुराणों में भी है और ब्रह्म का ज्ञान करते समय विदुर ने भी विदुर जी ने भी मना कर दिया था कि मैं जो है मैंने आपको काफी कुछ बता दिया है मगर मैं ब्राह्मण नहीं हूं तो मैं ब्रह्म ज्ञान नहीं दूंगा तो अगर भाष्य करने बैठेंगे तो आपको ब्रह्म ज्ञान भी लिखना पड़ेगा तो इसलिए भाष्य नहीं करना चाहिए गुरुओं के सानिध्य में अध्ययन करना चाहिए ठीक है तो यह प्रश्न हो गए कुल और अभी मेरे सामने कुछ एक प्रश्न आ रहा है कि ईश्वर यह भी कर सकता है वो भी कर सकता है कुल मिलाकर के देखिए आपके लिए जो चीजें बुरी है हमें इस कसौटी पर ईश्वर को कभी नहीं देखना चाहिए कि ईश्वर एक घृणित कार्य कैसे कर सकता है आपके लिए जो चीजें बुरी है आपके लिए अच्छाई बुराई है दुनिया में ईश्वर के लिए अच्छाई बुराई नहीं है इसको एक उदाहरण से आप समझिए कि अभी आप अपने परिवार के साथ यहां पर रह रहे हैं और कुछ ऐसा हो कि भगवान आपको अपने सा साथ ले जाए अपने साथ बिठा ले
01:11:06:24 और फिर जैसे वो इस दुनिया को देखते हैं वैसे ही आप भी देखे आप मुक्त हो जाए मोक्ष मिल जाए और भगवान के साथ आप बैठ जाए जाकर आर्य समाज के ईश्वर के साथ आप बैठ जाए अब जब आप वहां से इस दुनिया को देख रहे हैं तो इस दुनिया में आपके जो सगे संबंधी रह गए हैं उनको दुख होगा क्लेश होगा सुनामी आएगी यह होगा वो होगा तो क्या आप वहां पर बैठ कर के घबराए परेशान होंगे या हंसी करेंगे जो चीज आपके लिए बुरी है जो चीज आपके लिए दुखी है वह चीज वहां बैठे हुए मुक्त आपके लिए बुरी नहीं होगी उस समय अगर बुरी है उस समय भी तो आप मुक्त नहीं है मुक्त होने के लिए ही तो धर्म है और अब आप क्या कह रहे हो कि आप जो भगवान है वो इन चीजों से प्रभावित होते हैं भाई जो चीज आपके लिए अच्छी या बुरी है वो चीज भगवान के लिए अच्छी बुरी नहीं उसने तो इन सबको समग्र रूप से बनाया है उसके लिए कोई भेद नहीं है इन चीजों में आपके लिए है तो जब आप मुक्त होने के बाद इन चीजों पर ध्यान नहीं दोगे बल्कि हंसोगे एंजॉय करोगे तो भगवान से क्यों ऐसी अपेक्षा कर रहे हो कि वो इनसे प्रभावित हो कि वो दारू अच्छी चीज है या वो बुरी चीज है वो वहां ये हो रहा है भगवान प्रभावित अगर हो जाएंगे तो इसका मतलब है भगवान भी मुक्त नहीं है और जब इसका अर्थ क्या है कि दुनिया में कोई ईश्वर ही नहीं है और
01:12:21:26 इसका अर्थ क्या है कि ईश्वर को ना मानने वाला कौन है आपको बेहतर पता है तो ठीक है तो भगवान पर इस तरह का कटाक्ष करने पहले सोचा करिए और दूसरी बात य भी सोचिए चलिए दारू व नहीं पी सकता है भगवान जैसा आपने वक्तव्य दिया मगर दारू पीने वाले को बना सकता है दारू को बना सकता है तो बुराई को बनाना भी बुराई होती है ठीक है एक दो प्रश्न ले लेते हैं [संगीत]
01:12:58:12 मेरे ख्याल से काफी समय हो [संगीत] गया कुल मिलाकर के भगवान को जो आपकी मानवो चित मर्यादा है ना उस चश्मे को लगाकर देखना बंद करिए भगवान व्यापक है यह आपके लिए है कि अच्छा है और यह बुरा है यह आपके लिए क्योंकि आप मनुष्य भाव से ग्रसित जीव भाव से ग्रसित है और आपको मुक्त होने के लिए धर्म और अधर्म की व्याख्या की गई है अच्छाई और बुराई की व्याख्या की गई है कि जब जो चीज आपको भगवान के समीप ले जाएगी वो अच्छी है जो चीज आपको भगवान से दूर ले जाएगी वो बुरी है अगर भगवान भी अच्छाई और बुराई से प्रभावित हो रहे हैं तो वो भगवान नहीं है वो भी आपकी तरह वो हो गए ना फसे हुए जो मुक्त नहीं है तो क्या आपका ईश्वर ऐसा है जो प्रभावित होता है और ऐसा नहीं है तो यहां पर स्थिति कैसी है जैसे कि एक छोटा बच्चा होता है वह कभी-कभी क्रोध में अपने माता-पिता के ऊपर घूंसे मारता है उनको लड़ने लगता है उस समय उसके वो घूंसे गुदगुदी के समान लग रहे होते हैं तो जैसे वह मूल शंकर जी ने वो देखा था चूहे जो है दयानंद जी ने देखा था चूहे जो है शिवलिंग पर कूद रहे हैं तो उन्होंने कहा कि अरे जो
01:14:13:12 अपनी रक्षा नहीं कर सकता ऐसी कहानी प्रसिद्ध है उनके बारे में मुझे नहीं पता कंफर्म क्या है तो जो अपनी रक्षा नहीं कर सकता वो हमारी रक्षा क्या करेगा उस दिन से उन्होंने मूर्ति पूजा खंडन कि अरे भाई तुमको लग रहा है ना अगर चूहों का उछलना कूदना बुरा है उन्हें तो अच्छा लग रहा हो सकता है पता तो करो पहले तो आपने अपने मन से मान लिया तो जैसे एक माता-पिता के साथ क्रोध में जो बच्चा होता है वो घू से मार रहा होता ये कर रहा होता वो कई बार ऐसा होता है कि माता-पिता हंस रहे होते हैं इस मूर्ख को पता नहीं है कि इससे कुछ नहीं हो रहा है इसी प्रकार से यहां वाली जो चीजें हैं वो भगवान पर प्रभाव नहीं डालती है कि दारू है कि ये है कि वो है प्रभाव डाल नहीं तो व भगवान नहीं तो इसको थोड़ा समझिए समझने का प्रयास करिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ चलिए तो आपको समझ में आ जाएगा ठीक केवल यह मत सोचिए कि हमें किसी को हराना है मैं नहीं कह रहा कि आप सभी मत मंत्र को छोड़ कर के विचारों को छोड़ कर के आप जो है शंकराचार्य जी के शिष्य बन जाइए मैं कभी नहीं कहता मैं तो आपको प्रामाणिक गुरु की व्याख्या ही बताता हूं ना सदैव उनके आधार पर जो गुरु बन सके उसको बनाइए शास्त्र समत व्याख्या बताता हूं दूसरी बात ये है कि आप तीन चीज पकड़ लीजिए जीवन में क्या
01:15:28:25 परम स्वतंत्र मोक्ष सर्वशक्तिमान ईश्वर और शाश्वत धर्म बस यह जहां से मिले वही आपका आप घुमा फिरा के अपने आप शंकराचार्य तक पहुंच जाएंगे मुझे आपसे नाम नाम लेकर के नहीं कहना पड़ेगा कि आप शंकराचार्य तक आइए तो क्या तीन चीजें पकड़नी है परम स्वतंत्र मोक्ष ऐसा मोक्ष जिसके बाद परतंत्रता ना रहे और सर्वशक्तिमान ईश्वर इस मोक्ष को प्राप्त कैसे होगा जब सर्व शक्तिमान ईश्वर की ओर हम जाएंगे और इस इन दोनों को इन दोनों को प्राप्त कराने वाला साधन क्या है शाश्वत धर्म ऐसा धर्म जो बदलता ना हो बस बदलने वाला धर्म ना हो बाद ईश्वर ना हो और परतंत्र मोक्ष ना हो आप खोल लीजिए अपना नया कॉलेज खोल लीजिए खूब बनाइए आर्य समाज हम भी आएंगे हम भी उसका प्रचार प्रसार करेंगे खब बनाइए इसकन बनाइए ईश्वर को बाधित मत करिए मोक्ष को परतंत्र मत करिए और धर्म को बदलने वाला परिवर्तनशील मत दिखाइए बस हम आपका प्रचार करेंगे करिए आप नई किताबें छापी श्रीमद् भागवत भाष्य लिखिए खब और नई सत्या प्रकाश लिखिए है ना बाधित ना हो ईश्वर और क्या
01:16:45:08 [संगीत] है शारीरिक बनावट मैंने कहा ना ईश्वर वही है जिसके ऊपर कोई नियम लागू नहीं होता तो गणेश जी और देखिए पहला देखि भगवान की कई लीलाएं हैं उन सभी लीलाओं के पीछे आदि दैविक आदि भौतिक आध्यात्मिक दृष्टांत दिए गए मगर एक दृष्टांत ऐसा है जो इन मालाओं के मोतियों में सूत्र के रूप में पिरोया गया है वह दृष्टांत क्या है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है इसको ध्यान रखिए सदैव कभी नहीं मात खाएंगे कहीं पर भी फसगे नहीं सामने वाले को फसना होगा ईश्वर के ऊपर कोई नियम लागू नहीं हो सकता ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वह सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है ठीक है जय श्री [संगीत]
01:17:53:25 राम h
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AHVAAN is live! सामान्य चर्चा भाग 4 #iskcon #aryasamaj #rampaljimaharaj #brahmakumaris
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