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00:00:00:19 तो सभी को जय श्री राम और आज हमारे चैनल पर आए हैं दार्शनिक लिखते हैं यह भाई साहब और प्रेम जीत सिरोही आपका स्वागत है चैनल पर सिरोही जी ने अपना खुद का एक दर्शन है दर्शन शास्त्र लिखा है जिसका नाम है संपूर्ण जीवन दर्शन तो इन्होंने मैंने एक दो वीडियोस उनके देखे हैं गुरुदेव को भी इन्होने क्रिटिसाइज किया है कहीं कहीं पर उनकी चीजों को लेकर भी इन्ह आपत्ति रही है और वेदों से भी पूर्णतया सहमत नहीं है इवन अभी तक जितने भी दर्शन लिखे गए हैं जितने भी दार्शनिकों द्वारा उन किसी से भी पूर्णतया सहमत नहीं है और इन्होंने इसीलिए अपना एक नया दर्शन लिखा है जिसे इन्होंने नाम दिया है संपूर्ण जीवन दर्शन उन्होंने एक महत्त्वपूर्ण किताब इनके दृष्टिकोण से और लिखी है जिसका नाम है संपूर्ण समाधान तो अभी कुछ दिनों पूर्व ही इन्होंने हमसे संपर्क किया था इस चर्चा के लिए तो हम लोग आज
00:01:15:21 चर्चा में आपके सामने उपस्थित है तो थोड़ा सा कुछ अपने बारे में बता दीजिए जिसे कि हम चर्चा को आगे बढ़ाए सिरोही जी जी मेरा नाम प्रेमजीत सिरोही है जैसा आप ने बताया और मैं अपने आपको को ज दार्शनिक प्रेजेंट करता हूं लोगों के बीच में तो और यूएलएम एक संस्था चलाता हूं जिसका फुल फॉर्म है यूनिवर्सल लाइफ मैनेजमेंट उसमें दो किताबें जैसा सर ने आपको बताया कि दो किताबें मैंने लिखी है एक संपूर्ण जीवन दर्शन और एक संपूर्ण समाधान
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00:01:54:25 मैंने मेरी जो रिसर्च है उसमें मैंने पाया कि संपूर्ण माने जो जीवन दर्शन है अब तक चले आ रहे हैं जीवन में विभिन्न धर्मों के द्वारा या विभिन्न धार्मिक ग्रंथों के द्वारा उसमें मैंने बहुत सारी त्रुटियां पाई खास तौर से बेसिकल बेसिक रूप में मूल रूप और उसी की वजह से आज तक कोई ऐसा समाधान क्रिएट नहीं हो पाया क्योंकि कोई भी व्यक्ति अंततः किसी ना किसी दर्शन के अंतर्गत ही होकर आगे की कोई प्लानिंग सोचता है या किसी चीज को समझता है या करता है तो चूंकि मुझे दर्शन ही गलत जान पड़े तो इसलिए उस तरह की व्यवस्थाएं भी नहीं हुई और उनका परिणाम तो हमारे सामने है ही कि कोई भी ऐसी व्यवस्था अभी तक पूरी दुनिया में ऐसी कारगर नहीं दिखाई देती जितनी की हिस्ट्री है और अभी तक जो वह ऐसे परिणाम दे पाई हो जैसे परिणाम की अपेक्षा हम मनुष्य लोग सब करते हैं तो उसमें क्या खामिया रही और क्या वो रही वो मैंने उसमें सब एक्सप्लेन की है और एक संपूर्ण समाधान भी उस आधार पर दिया है अगर वह आ जाएगा तो उसके वैसे परिणाम होंगे जैसे परिणाम हम सब मनुष्य अपने जीवन में अपेक्षित करते हैं किसी भी व्यवस्था से किसी भी जीवन दर्शन से
00:03:09:25 जी अच्छा तो हमारा वैसे आज का टॉपिक जो है वो ईश्वर का अस्तित्व है कि आपने अपना जो दर्शन दिया है उसमें ईश्वर का अस्तित्व किस तरह का आपने स्वीकार किया है तो उस पर आएंगे पर पहले आपने भी कुछ बातें जो कही है उस उसम से एक बात मैं कहूंगा जैसे आपने कहा कि इतिहास में कोई भी ऐसा नहीं है जिसने ऐसा परफेक्ट एक सामाजिक व्यवस्था दी हुई हो है ना तो आपने रामायण का अध्ययन किया है जी लेकिन मुझे किसी ने नहीं बताया कि रामायण कोई इतिहास ग्रंथ ऐतिहासिक ग्रंथ है उसे ऐतिहासिक ग्रंथ के रूप में वो तो एक बात अलग है मैं आप देखिए वो विश्वास करना और ना करना वो एक अलग परिपेक्ष हो गया मगर रामायण का अध्ययन आपने किया होगा तो रामायण का अध्ययन करते समय हमें प्राप्त होता है कि हवा भी उतनी ही चलती जितनी चलनी चाहिए धूप भी उतनी आपने मेरे पढ़ने मेरे पढ़ने में इस तरह से नहीं आया और रामायण एकाद नहीं है कई रामायण है जिनम आपस मेंही बहुत सारे अ जो मूल रामायण है वाल्मीकि रामायण उसकी बात में कर मूल रामायण वाल्मीकि रामायण है ऐसा भी कहीं नहीं लिखा हुआ अध्यात्म रामायण भी है ल
00:04:26:06 भी हम बात कर लेंगे मूल उसे क्यों माना जाए हां मूल क्यों माना जाए सही बात है और अगर मूल उसे माना जाए तो बाकी क्यों लिखी गई है उनको प्र साइड करना चाहिए उनको पढ़ने देना नहीं चाहिए नहीं नहीं ऐसा ऐसा नहीं है कि वह बाकी की लिखी गई साइड करने लायक है जो उस रामायण में जो प्रकरण नहीं आ पाए बाकियों में आ ग मगर यदि कोई यदि कोई प्रकरण वाल्मीकि रामायण को कांट्रडिक्ट करेगा खंडित कर देगा वाकी रामायण के किसी तथ्य को तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा ठीक है तो आप रामायण के आधार पर बात करना चाहते हैं तो रामायण के आधार पर भी कर सकते मुझे दिक्कत नहीं रामायण के आधार पर नहीं पर मैं एक आपको तथ्य से अवगत करा रहा था कि हम उस दर्शन को मानते हैं उन सिद्धांतों को मानते हैं जहां पर हमारा विश्वास य है कि एक समय ऐसा आ गया था ऐसी सामाजिक व्यवस्था थी राम राज्य में जहां पर हवा भी उतनी ही चलती थी जितनी चलनी चाहिए धूप उतनी ही निकलती थी जितनी निकलनी चाहिए कोई भी अकाल मृत्यु मरता नहीं था कोई भीना होता नहीं था कोई भी विजवा होती नहीं थी यह है राम अब मानने के लिए मुझे मुझे कोई आपत्ति नहीं है कोई क्या मानता है इसमें मेरी कोई आपत्ति नहीं है कोई सोने
00:05:41:13 को लोहा लोहे को काशा कुछ भी मानता रहे किसी के मानने में मेरी कोई आपत्ति नहीं है वो सब स्वतंत्र है कुछ भी चीज को कुछ भी मानने के लिए आपके अनुसार ईश्वर है यह कैसे सिद्ध करते हैं आप मैं कैसे सिद्ध करता हूं सीधी सी बात है शब्द कोष में ईश्वर की जो परिभाषा है वैसा कहीं जान पड़ता है तो ईश्वर है वैसा कहीं नहीं जान पड़ता तो आप क्या मानते ईश्वर है कि नहीं ईश्वर है तो वो ईश्वर किस प्रकार से व सिद्ध कर हा जैसा कि परिभाषा में ईश्वर का मतलब है जिसके पास ऐश्वर्य है जिसके पास जितना है उसे जा आपकी ईश्वर की परिभाषा क्या है पहले तोय बताइए यह मेरी नहीं जो शब्द कोश में है भाषा के उसी परिभाषा को मैं भी फॉलो करता हूं जी हा जो आपने स्वीकारा हो ईश्वर के लिए वो क्या है हा हा हा वही जिसके पास ऐश्वर्य हो और जितना ऐश्वर्य उसके पास है उतना ही वह ईश्वर है यही परिभाषा है मतलब ऐश्वर्य ऐसा ना हो जिसके बाद उसे किसी भी चीज की आवश्यकता ना पड़े
00:06:56:21 ना ना ऐश्वर्य का मतलब है कि सुख सीमित ऐश् असीमित ऐश्वर्य या फिर सीमित ऐश्वर्य सीमित होगा तो उसे सीमित ईश्वर बोलेंगे और असीमित ईश्वर होगा तो ऐश्वर्य होगा तो असीमित ईश्वर बो आपने ईश्वर को सीमित सीमित माना है या असीमित माना है दोनों तरह का सीमित भी दिखाई पड़ता है सीमित भी दिखाई पड़ता है अच्छा आपने कहा कि ईश्वर सीमित भी है और असीमित भी है हां जैसे लोग हैं गरीब इसको थोड़ा सा बताइए तो आपकी बात आपकी बात आपकी बात थोड़ी समझ में आ सके इस तरह से उसको एक्सप्लोर करिए थोड़ा व्याख्या करिए कि ईश्वर को आप कैसे सिद्ध करते हैं हां जी अगर आप ऐसे मान लीजिए कि मैं आपके सामने खड़ा हुआ हूं जी और मैं आपसे पूछ रहा हूं ईश्वर है य सिद्ध करो तो अब आप मुझे सिद्ध करिए कि ईश्वर है हां तो उसके पहले ईश्वर को समझना पड़ेगा कि ईश्वर मतलब क्या है और फिर उसे मैं आपको साक्षात दिखा दूंगा कि ये देखो ये दिख रहा है तो आपको समझ में आ जाएगा हा ठीक बात है और अगर ऐसा नहीं दिता तो गलत हो जाएगी आपकी परिभाषा थोड़ी मैं आपको दिखाऊंगा जी मैं अपनी परिभाषा नहीं कह रहा हूं जो ईश्वर की सर्वमान्य परिभाषा है वही बात करूंगा और अगर वो नहीं
00:08:13:09 है अगर व सन अगर वो सर्वमान्य परिभाषा नहीं भी होगी तो मैं उसको भी सिद्ध करूंगा कि वो आपकी भी वही परिभाषा है मैं उसको भी सि एक सर्व शक्तिमान सत्ता जी जो सब कुछ कर सकने में सक्षम है सब कुछ का मतलब सब कुछ उसका नाम ईश्वर अब आप ऐसी सत्ता को सिद्ध करिए कि ऐसी सत्ता है इस दुनिया में अगर आप य मानते हैं कि ईश्वर ईश्वर सर्व शक्तिमान नहीं है तो फिर बात आगे बढ़े कि मैं आपको सिद्ध करूं कि ईश्वर सर्व शक्तिमान है नहीं अभी तो अभी तो ऐसी कोई सत्ता मुझे तो नहीं दिखाई दे रही जो कुछ भी कर सके ऐसी तो कोई सत्ता मुझे तो नहीं दिख रही आप दिखाइए ऐसी कोई सत्ता हो अच्छा मतलब आपने ईश्वर को सीमित ही सीमित ही स्वीकार किया असीमित स्वीकार नहीं किया है हां मतलब असीमित हो सकती है कहीं पर कभी इन फ्यूचर आपने स्वीकार क्या किया आपके दर्शन का सिद्धांत क्या हो सकता है सिद्धांत तोड़ी ना होता है हां अगर सिद्धांत पूछ रहे देखो आपने अभी तक ईश्वर की परिभाषा पूछी सिद्धांत पूछ रहे हैं आपसे पूछा था आपके अनुसार ईश्वर सीमित है या असीमित है तो आपने बोला सीमित सीमित दोनों है अब मैंने
00:09:28:15 जब कहा कि ईश्वर सर्व शक्तिमान है सब कुछ कर सकने वाला है तो आपने कहा मुझे अभी तक ऐसा नहीं मिला है कि कोई भी सत्ता ऐसी हो जो सब कुछ कर सकती हो बिल्कुल है ना तो फिर इसका मतलब है आपके अनुसार ईश्वर सीमित ही है जी हां इस अर्थ में आप देखेंगे तो ईश्वर सेवित होगा बिल्कुल फिर आप एक थोड़ी सी एक छोटी रेफरेंस होता है ना आप आप जिस रेफरेंस में पूछेंगे उसी रेफरेंस में बताऊंगा ना मैं रेफरेंस बिंदु होता है किस के अनुसार जो आपने दर्शन दिया है उसम ईश्वर सीमित है या सीमित है मैं फिर पूछ रहा हूं उसमें सीमित ही है सीमित ईश्वर अब अपने सीमित ईश्वर को आप सिद्ध करिए कि वो है हर चीज आप देख रहे हो कि ईश्वर का मैंने परिभाषा बताई कि जिस व्यक्ति के पास में जितना ऐश्वर्य है वह उतना ही ईश्वर है और अभी तक जितने भी व्यक्ति दिखाई पड़ते हैं किसी के पासना ना ईश्वर जो आप कह रहे हो तना मतलब सीम म क मैं ये कह रहा हूं इस दुनिया में कोई ऐसा है जो अल्टीमेट हो जो हम मनुष्य से कम से कम ज्यादा हो वो सिद्ध करिए आप ई पड़
00:10:43:16 मुझे नहीं दिखाई पड़ा कि मनुष्यों से ज्यादा कोई ईश्वर है ऐसा मुझे नहीं मतलब इसका मतलब आप एक अप्रत्यक्ष रूप से कह रहे इस दुनिया में कोई ईश्वर ही नहीं है जो मनुष्य से ज्यादा नहीं तो ईश्वर हा आपके हिसाब से कोई मनुष्य ही ईश्वर है हा मेरे हिसाब से अच्छा ठीक है तो अब बात ये आ गई कोई मनुष्य ही है जो आपका ईश्वर है ईश्वर से आपका अर्थ है कि एक तरीके से वो जिसके पास ऐश्वर्य हो सर मेरा ईश्वर नहीं ईश्वर मतलब आप ऐसा क्यों बोल र हो वो मेरा वो अभी मैं बताऊंगा ना कि हम किस ईश्वर को मानते है मैं वो बताऊ हमारा ईश्वर कैसे जी फिलहाल अभी तक जो आपने ईश्वर को स्वीकार किया है वो वो ईश्वर है जिसके पास तो एक तरीके से आपका कहना यह है कि हर ऐश्वर्य ज्यादा वाला व्यक्ति हर ऐश्वर्य कम वाले व्यक्ति का ईश्वर जी बिल्कुल उस तरह से है हा तो फिलहाल आपकी नजर में ऐसा कोई है जिसके पास सबसे ज्यादा ऐश्वर्य हो अभी न्यूज के आधार पर तो देख सकते हैं जी हां जैसे अमेरिका में एक वो है क्या नाम है इसका टीला वाले का तो उसकी संपत्ति सबसे ज्यादा बताई जाती है सबसे ज्यादा
00:11:59:19 वही है फिर सबका ईश्वर अभी तो टेस्ला आपका ईश्वर है टेस्ला नहीं उसका नाम मुझे याद नहीं आ रहा क्या नाम है उसका जो ला कंपनी का मालि अपने ईश्वर आप उसे ईश्वर मानते हैं कि नहीं मानते हैं हां हां बिल्कुल ईश्वर ही है सही बात है आपको जानकारी एक होनी चाहिए ना कि हमारा ईश्वर है तो उसका ये है वो है थोड़ा बहुत कुछ तो बता तो दिए आदमी है नाम उसका अभी आप बोलेंगे तो मैं खोज के बता है इत इतना का ऐसा आपका कहने का अर्थ है कि जिसके पास सबसे ज्यादा धन समृद्धि है वो ईश्वर है आप आपके अनुसार जी और बाकी अगर हम बात करें कि कोई अल्टीमेट कोई पावर है कोई अल्टीमेट इस मनुष्यों से अलग कोई एक शक्ति है सर्वशक्तिमान सत्ता है तो वो ऐसा कोई एजिस्ट नहीं करता है ये कहना है आपका मेरे मेरे अनुभव में नहीं है आपके में होगी तो आप बताएंगे हां मैं तो बताने ही वाला हूं पहले एक विषय क्लियर कर रहा हूं हां जी जी बिल्कुल बिल्कुल बकुल हां चलिए अब ठीक है अब अब मैं जिस ईश्वर को हम मानते हैं उसकी बात करते हैं हम ईश्वर को कैसे अब यहां पर मैं ब उपनिषद का एक श्लोक पढ़ूंगा असतो मा सद गमाया तमसो मा ज्योतिर
00:13:14:19 गमाया मृत मा मतया इसमें एक जीव की चाह बताई जा रही है जीव की चाह है कभी ना मरने की चा ये प्रत्येक जीव के अंदर है कि नहीं आप मानते हैं कि नहीं जी हां बिल्कुल ब दूसरी चा बताई जा रही है तमसो मा जोतिया वो दूसरी चा बताई जा रही है कि प्रत्येक जीव के अंदर एक चा है अखंड ज्ञानी बन जाने की चा सब कुछ सारा ज्ञान प्राप्त कर लेने की चा इसको आप स्वीकार कर ऐसा मुझ में सभी के अंदर नहीं दिखाई पड़ता कुछ मनुष्य के अंदर है इंप्लीमेंटेशन हो या ना हो इंप्लीमेंटेशन हो या ना हो मगर सर चाहा की बात कर रहे हम चाहा की बात कर रहे इंप्लीमेंटेशन की बात नहीं कर रहे अभी चाहत की बात हो रही है अभी इंप्लीमेंटेशन तो ये भी नहीं हुआ कि हम अमर हो गए लेकिन चाहत अमर हो गए नहीं अगर मैं आपके ऊपर हाथ घुमाऊ तो एट द एंड आपकी कितनी भी उम्र हो गई हो अगर आपको दिख रहा है कि मैं हाथ घुमा रहा हूं तो आपकी पलक झपक जाएगी भ यह भ इसीलिए है क्योंकि मृत्यु का भय जो है इल्ट है ठीक है जी जी बिल्कुल बकुल बात है अब जो आपका जो ईश्वर है जिसको आपने ईश्वर क्या क्या वो मृत्यु से
00:14:29:20 ग्रसित हो सकता है या नहीं हो सकता है बिल्कुल हो सकता है मगर आपके अंदर एक चा आ रही है अमर हो जाने की चा जी तो अगर आपके अंदर चा आ रही है तो और आप यह कह रहे हो आप अमर होना चाहते हो मगर आप ये कह रहे हो कि इस दुनिया में कोई अमर नहीं है अभी तक तो नहीं है जी नहीं है मगर आप चाहते हो तो इस हिसाब से तो आप मूल मति सिद्ध हुए क्योंकि आप चाहते हो अमर होना मगर उसका सब्जेक्ट है नहीं इस दुनिया में जी हां बिल्कुल उसका ज्ञान नहीं है जन नहीं उस बारे में अज्ञानी है बिल्कुल सही बात है तो ये माना जाए कि आप ममती है हां बिल्कुल इस मामले में म म क्यक आप ऐसी चीज चाह रहे हैं आप ऐसी चीज चाह रहे हैं जिसका सब्जेक्ट इस दुनिया में मौजूद नहीं है नहीं ऐसा नहीं कह सकते कि मौजूद ही नहीं है उस पर रिसर्च जारी है हो सकता है कि कभी अभी राट आपका क्या अभी राइट ना आपका क्या मानना है मौजूद है कि नहीं मेरे ख्याल से होना चाहिए मौजूद लेकिन अभी तक उसका ज्ञान नहीं है यह बात है आप दार्शनिक है आप किसी स्टेज पर पहुंचे हैं दुनिया को आप किताब छाप के दे रहे हैं आप बता रहे हैं ईश्वर के बारे में आप कह रहे मेरे ख्याल से ऐसा होना चाहिए नहीं तो ईश्वर का मतलब इस बात से कोई नहीं है कि वो अमर है कि मर जाता
00:15:44:21 फिलहाल आपसे मैं फिलहाल आपसे ये पूछ रहा हूं कि आपके अंदर इच्छा आ रही है कभी ना मरने की मगर आप ये कह रहे हो इस दुनिया में अभी तक अभी तक ऐसा कोई नहीं है जो कभी ना मरे जी जी बिल्कुल अच्छा ठीक है अब अखंड ज्ञानी वाली बात छोड़ दीजिए तीसरी वाली बात करते हैं तीसरी वाली बात कर लेते हैं कि दुनिया के प्रत्येक जीव में एक चाह विद्यमान है कभी दुखी ना होने की बिल्कुल अनंतानंद की तो क्या आपकी नजर में आपका जो ईश्वर है उसको कभी भी कोई कष्ट नहीं होता है किसी भी प्रकार का गैस तक नहीं बनती पेट में बनती है इसका मतलब है कि आप कह रहे जी ऐसा हो कभी दुखी मगर इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जो कभी दुखी नहीं होता जी अभी तक तो है नहीं ठीक बात है तो इसका अर्थ य है जो हम जिस ईश्वर को मानते हैं मैं वो बता दूं आपको कि दुनिया के प्रत्येक जीव के अंदर तीन प्रकार की चाहा विद्यमान है कभी जी ना मरने की और अखंड ज्ञानी हो जाने की और जी कभी दुखी ना होने की इन तीन प्रकार की चाह को अगर हम
00:16:59:22 मिक्स करके एक नजर में अगर देखे ग्लांस तो एक नास्तिक व्यक्ति भी जो य कहता है कोई अल्टीमेट सत्ता नहीं है मनुष्य से ऊपर की व नास्तिक व्यक्ति भी कभी कभी मन में सोचता है कि बारिश ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए रूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए आज ठंडी बहुत ज्यादा है कम हो जाए यानी कि वो मौसम को भी कंट्रोल करने वाला बनना चाहता है जी दूसरी बात य आती है कि एक नास्तिक व्यक्ति भी कभी कभी ऐसा सोच लेता कल पाकिस्तान और इंडिया के मैच में कौन जीतने वाला है मुझे अभी पता चल जाए यह है चि की प्या और तीसरी अगर अगर तीसरी अगर देखे तो एक नास्तिक व्यक्ति भी कभी भी दुख को प्राप्त नहीं होना चाहता है मेरे बाल कभी सफेद ना हो मेरे माता पिता कभी मृत्यु को प्राप्त ना हो मैं कभी मृत्यु को प्राप्त ना हो मेरे झुरिया कभी ना आए तो यह सारी चीजें एक नास्तिक व्यक्ति भी चाहता है अब दूसरी बात आती है बात ये आती है कि इन सबको निचोड़ करके देख ले तो एक नास्तिक व्यक्ति सब कुछ कर सकने वाला बनना चाहता है वो प्रकृति को भी कंट्रोल नहीं लगता नहीं मतलब मैंने नहीं देखा ऐसे किसी आदमी को
00:18:14:25 जो सब कुछ करना चाहता हो माने आप आप बताए सब कुछ करना चाहता हो नहीं आप मेरी बात सु मैंने बोला सब कुछ कर सकने वाला सब कुछ कर सकने वाला हां जैसे आपसे पूछ सुनिए सुनिए कर सकने की क्षमता कर सकने की क्षमता जो उसके मन में आ जाए वो कर सके अरे सर वही बता रहा हूं कर सकने की क्म क्षमता हो ऐसा मुझे नहीं हां करना चाहेगा तभी क्षमता चाहेगा उसकी मैं ये नहीं कह रहा हूं कि क्षमता है कि नहीं मैं अभी बात कर रहा हूं एक मनुष्य के अंदर प्रकृति से प्राप्त भी सारे नियमों को तोड़ देने की इच्छा व्याप्त है सर मेरे अंदर तो नहीं है अगर आपको के किसी नियम को नहीं तोड़ना चाहता नहीं नहीं ये ये ठीक है तो मैं आपसे कह रहा हूं आप मुझे कोई अपनी ज ऐसी बताएंगे जिसमें जब मैं आपके ऊपर हाथ उठाऊं तो आपकी पलके ना झपके हां तो पलके झपक क्योंकि क्योंकि मैं जीवित रहना चाहता यानी कि आप प्रकृति का जो नियम है कि आपको मृत्यु प्राप्त होनी ही है उसको तोड़ना चाहते ये प्रकृति का नियम है ऐसा करके कोई सिद्ध नहीं है कहीं पर भी अभी ये नियम है अभी फिलहाल आपकी नजरों में कोई अमर है
00:19:30:09 कोई नहीं है तो फिर फिलहाल का नियम तो यही हुआ ना अरे सर इसे ऐसे करके नियम सिद्ध नहीं होते ना नियम सिद्ध करने पड़ते हैं ऐसे करके नियम नहीं सिद्ध होते कि अभी अभी तक किसी ने हवाई जहाज नहीं उड़ाया तो हवाई जहाज नहीं उड़ेगा क्या भाई ऐसे करके नहीं होता है तो आपका कहने का मतलब है कि हां भाई एक दिन इस दुनिया में कोई होगा जो अमर हो सकता है हां बिल्कुल और जिस दिनकी पता चलेगा उस दिन बहुत लोगमर हो जाए आप ये चाहते हैं कि नहीं हो एक दिन एक ना एक दिन सा हां बिल्कुल क्योंकि हम ऐसा चाहते हैं और उसम लगे ही हुए हैं जिस दिन सफल हो जाएंगे तो अर्थ य है कि आप भी अमरता को ढूंढ रहे हैं ना बिल्कुल ढूंढ रहे यह सही बात है आपकी आप भी दुख प्रद जीवन से दूर हट कर के सुख प्रद जीवन को ढूंढ रहे हैं ना जी बिल्कुल यह बिल्कुल आपकी एकदम सोलेने बात है तो हमारा ईश्वर हम ईश्वर उसे ही मानते हैं जो नियम है जो सिद्धांत है वो ये है कि मनुष्य के अंदर ऐसी कोई र नहीं है जिसका अस्तित्व जिसका सब्जेक्ट मौजूद ना हो जैसे कि हमारे अंदर भूख है तो भूख होने से ही ये सिद्ध हो गया कि इस दुनिया में खाना है अगर अगर हमारे अंदर प्यास है तो प्यास होने से ही यह सिद्ध हो गया कि इस दुनिया में जल है
00:20:46:02 अगर हमारे अंदर सुनने की क्षमता है तो उससे ही ये सिद्ध हो गया कि इस दुनिया में आवाज है अगर हमारे अंदर देखने की क्षमता है तो उसी से सिद्ध हो गया कि इस दुनिया में दृश्य रूप है जी जी तो जिस प्रकार से नेत्रों का विषय दृश्य सिद्ध होता है कानों का विषय आवाज सिद्ध होता है भूख का विषय खाना सिद्ध होता है उसी प्रकार से जो हमारे अंदर तीन तरह की प्यास है कभी ना मरने की प्यास सत ल नोइंग बनने की प्यास चित और कभी दुख को प्राप्त ना करने की प्यास आनंद तो जिस प्रकार से नेत्रों का विषय द्रश्य भूख का विषय खाना प्यास का विषय पानी सिद्ध होता है उसी प्रकार से एक के अंदर भी व्याप्त यह जो तीन सच्चित आनंद की चा है इसका विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर सिद्ध होता है तो हम उस परमेश्वर को मानते परमेश्वर परमेश्वर कैसे सिद्ध होता है इससे तो इतना ही सि होता परमेश्वर कहते पस हम उसको परमेश्वर कहते हैं जो इसका प्यास का विषय जहां पर आप पहुंचना चाहते हैं एक सेकंड एक सेकंड माने आप कह रहे हैं कि अमरता का ज्ञान
00:22:01:13 और ज्ञान माने अमर होना और ज्ञान और तीसरा क्या बोला आपने अनंतानंद तीसरा क्या बोला अनंतानंद ओके एक आनंद और एक अमर होना और तीसरा तीसरा क्या कहते हैं अखंड ज्ञान ओके एक अखंड ज्ञान हो गया हा तो ये तो हमारे अंदर य जो प्यास है सछ मिनटर ये तीन हमारे हमारे अंदर ये तीन प्यास है अब आप इसको कह रहे हैं कि अमर जो है वो ईश्वर है आनंद जो है वो ईश्वर हैवर एक पंक्ति दोबारा कहने दीजिए हमारे अंदर य जो तीन प्यास है इसी से ही सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई है जो सत है सत की प्यास से सिद्ध हो जाता है कि इस दुनिया में कोई है जो सत है चित की प्यास से सि हो जाता है एक सेकंड सत सत की क्या परिभाषा सत माने मतलब किस किस बात को सत बोल रहे हो अमरता को यहां सत से रिप्रेजेंट
00:23:16:20 कर रहे हैं कैसे सत का ये आपने अर्थ कहां से लिया सत चिता आनंद को हटा दीजिए वो ज्यादा डिटेल कैसे हटा दे अरे भाई जैसे आपने अभी आपने शुरू में ये बोला था कि मैं ईश्वर को सीमित और असीमित दोनों मानता हूं बाद में आपने कहा सीमित मानता हूं हा तो मैंने आपको बताया कि संदर्भ संदर्भ मैंने आपको बता दिया आप दोबारा क्लियर करिए आपने जो बोला कि ईश्वर असीमित भी है सीमित भी है अभी आप कह रहे हैं कि सीमित है हां उस उस रूप में मैं बता रहा था ऐश्वर्य ऐश्वर्य के रूप में कि किसी व्यक्ति के पास में ऐश्वर्य उसकी जरूरत से ज्यादा भी हो सकता है उस तरह क्योंकि मैं केवल बता रहा हूं कि ऐश्वर्य का मतलब है ईश्वर मैं नहीं कह रहा कि अमर होना मतलब ईश्वर है ज्ञान मतलब मैं आपसे पूछ रहा हूं कि आपने कहा आपका ईश्वर सीमित भी है असीमित भी है आपने सीमित ईश्वर को डिफाइन कर दिया अब आप असीमित ईश्वर को डिफाइन करिए हां असीमित ईश्वर है कि जिसके पास में उसको जितनी सुख सुविधाएं चाहिए उससे अधिक का ऐश्वर्य है वो असीमित ईश्वर है असीमित बताइए किसी से अपेक्षाकृत अधिक कोना असीमित नहीं है डेफिनेशन क्लियर करिए नहीं नहीं ऐश्वर्य की बात
00:24:31:24 हो य हा ऐश्वर्य ऐश्वर्य ऐश्वर्य आपने बोला मैं ईश्वर को असीमित और सीमित दोनों मानता हूं बता तो रहा हूं मैं आपको सीमित का मतलब हो गया जैसे मेरे पास में उतने संसाधन उतना ऐश्वर्य नहीं है जितनी के मैं चाहता हूं कि मेरे पास हो ठीक है मतलब मेरी जो जितनी जरूरत हैम ईश्वर का मतलब ये हुआ कि कोई ऐसा है जिस के पास चीजें कोई असीमित है असीमित अनलिमिटेड पास सर अर्थ तो बता रहा हूं ना मैं हां हां अनलिमिटेड वही बात है हां क्योंकि इसका पैमाना होगा ना कि किस पैमाने से चीजें सीमित होंगी पैमाना जिस पैमाना लग जाए वोम असीमित कहां से रहा अरे सर पैमाना का मतलब है कि कोई क्राइटेरिया होगा ना जिससे सीमित वही तो मैं कह रहा हूं जब क्राइटेरिया अगर लगा देंगे तो असीमित कहां से रहा कोई भी क्राइटेरिया लागू कर दिया तो असीमित कहां से रहा हा तो अगर आप बिना क्राइटेरिया के पूछ रहे हैं तो फिर सीमित है सब कुछ इसीलिए आपने बोला था आपने जो वर्ड बोला था उस वर्ड को आपने बाने इसलिए आपको संदर्भ बता दिया दिया सुनि तो अगर आप बिना क्राइटेरिया
00:25:46:24 आपने एक वर्ड बोला असीमित उसको बाद में आपने छोड़ रहे ना असीमित को मतलब आपने पहले गलत बोला था श्वर मैंने समझा के छोड़ा है ना आप समझा के छोड़ क्या समझाया आपने आप आप सत बताइए ना फिर स आपको आपने असीमित को छोड़ा बताइए हां मैंने इसलिए छोड़ा कि जब आप पूछने लगे कि अल्टीमे अल्टीमेटली बताइए अल्ट अल्टीमेट भी नहीं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं आपका असीमित ईश्वर आप डिफाइन करिए असीमित को डिफाइन करिए आप तो मैंने कर तो दिया डिफाइन कि जिसके पास उसकी जरूरत से ज्यादा जिसके पास उसकी जरूरत से ज्यादा चलिए असीमित की परिभाषा बताइए सर बता तो रहा हा बता रहा हूं कि जिसके पास में उसकी जरूरत से ज्यादा ऐश्वर्य हो केवल केवल जो असीमित वर्ड है असीमित अनलिमिटेड इसको खोलिए केवल अभी ईश्वर के बारे में बात मत करिए पहले असीमित वर्ड को खोलिए पहले इसको असीमित हा असीमित का मतलब है कि जिसकी कोई सीमा ना हो हा सीमा ना हो असीमित की परिभाषा में क्या ये आ रहा है कि जिसके पास पहले से ज्यादा धन हो इसीलिए मैंने आपको सम के य बात आपका ड गलत हो रहा है इसको आपको स्वीकार
00:27:01:27 करना चाहिए तो तो हम आगे बढ़े आपका वर्ड गलत हो रहा हैने समझाया थोड़ी ना आप मुझे असीमित की परिभाषा बताइए पहले आपने बोला असम हा हा मैंने बता दिया ना इस तरह से देखेंगे तो वो बात गलस तर सीमित सीमित और असीमित में अगर अल्टीमेटली देखेंगे तो असीमित कोई चीज होती नहीं दुनिया में आपने स है ईश्वर तो मैंने अपना अर्थ बता दिया कि मैं उन अर्थ में बोल रहा था और मैंने छोड़ दिया आप इसका मतलब अर्थ जो है वो गलत गलत लेते हैं क्या चीजों का आपको नहीं पता था असीमित का मतलब क्या होता है नहीं नहीं भाषा में संदर्भ के अनुसार भी अर्थ लिए जाते हैं मैं आपसे पूछ रहा हूं आपको असीमित का सही एटली अर्थ पता है कि नहीं पता है पता है तो असीमित का जब आपको अर्थ पता है तो आपने असीमित ईश्वर को स्वीकार क्यों किया हां इसलिए किया कि जिस संदर्भ में बता रहा था उस संदर्भ में असीमित का दूसरा अर्थ होता है किस संदर्भ में होता है असीमित का दूसरा अर्थ अब समझाइए मुझे दोबारा समझना है हां उसको आप दोबारा समझिए कि ऐश्वर्य का हमारे जीवन में एक स्थान होता है ठीक है ऐश्वर्य एक चीज
00:28:16:28 होती है ऐश्वर्य का मतलब है कि जिससे हमारी इच्छाओं की पूर्ति होती है वैसे तो ऐश्वर्य का कोई कनेक्शन नहीं मैं आपसे असीमित का दूसरे संदर्भ में दूसरा अर्थ पूछ रहा हूं अरे सर ऐश्वर्य से ही तो पता चलेगा कि जिसे ईश्वर बो तो ईश्वर की बात हो रही है जब आप ईश्वर कोमित से जोड़ तो कि पहले हम असीमित शब्द की मीमांसा कर रहे हैं नामित शब्द को हम खोल रहे आप असीमित का किस संदर्भ में दूसरा अर्थ लेते हैं जहां पर वो असीमित का अर्थ भी निकले कि वो क्या कहते हैं सीमित हो हा हां इसीलिए तो मैंने आपको बताया कि अगर केवल आप असीमित का अर्थ पूछ रहे हैं तो उसका मतलब है है कि जिसकी सीमा ना हो तो अब आपने जब असीमित ईश्वर कहा तो ऐसा ईश्वर हो गया जिसकी सीमा ना हो हां तो फिर आपने असीमित ईश्वर को स्वीकार क्यों किया जबक आप कहते कि ईश्वर सीमित है इसीलिए मैंने आपको वो वर्ड वापस ले लिया अगर आप इस आधार अरे वापस ले लिया तो ये कह के लीजिए कि मैंने वो गलत कहा था ये कह के लीजिए ये मत कए क्या अरे तो आपको समझा तो दिया कि इस अर्थ में ये गलत ये समझाया थोड़ी ना आप कहां समझा रहे हो आप जब मैं पूछ रहा हूं कि असीमित ईश्वर
00:29:29:14 आपने सुनिए आपने असीमित ईश्वर जब कहा तो ईश्वर वो हो गया जिसकी सीमा ना हो अब जब मैं आपसे पूछ रहा हूं आपका आप तो असीमित ईश्वर को मानते नहीं तो आप कह रहे हो कि मैंने आपको बता तो दिया वापस ले तो लिया तो इसमें कहां से आपका ईश्वर दिया और और यह बता के ले लिया कि जिस जिस अर्थ में आप पूछ रहे हैं उस अर्थ में वो गलत है बोल तो दिया किस अर्थ में सीमित ईश्वर सही है अब अब आप बताइए कि जिस अर्थ में आप सत ले रहे हैं सत गलत है तो छोड़ दीजिए मैं तो मना नहीं कर रहा बता गलत नहीं कह रहा मैं इसलिए उस बात नहीं कर रहा हूं मैं समझाऊ उसको समझाऊ पहले आप मुझे बताइए कि आप असीमित ईश्वर को किस अर्थ में असीमित सिद्ध कर सकते हैं किस अर्थ अभी तो मैंने आपको बताया फिर दोबारा से बताऊ क्या एक भी बार नहीं बताया एक भी बा चलिए दोबारा से बता दीजिए दोबारा से बता दीजिए नहीं हां मैं फिर बता देता हूं के ईश्वर का मतलब होता है कि जिसके पास ऐश्वर्य है ये बात समझ में आ रही है ठीक है हा अब तो जिसको ईश्वर बोल रहे हैं अगर उसके पास में उसकी जरूरत से ज्यादा ऐश्वर्य है तो वह उसके लिए असीमित हो जाएगा और उससे कम है तो वो उसके लिए सीमित हो जाएगा अब ये आप मुझे लॉ बताइए कि जिसके पास जरूरत से ज्यादा हो कोई चीज तो वो असीमित कहलाएगा
00:30:44:25 इसके लिए क्या संदर्भ उसके लिए उसके लिए उसके लिए किसके लिए जिस इसके लिए लॉ बताइए इसके लिए सिद्धांत बताइए जैसे अभी आपने कहा ना ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है क्योंकि वो आपकी क्योंकि वो आपकी सीमा के बाहर हो गया क्योंकि जितने जितने की आपको जरूरत है वहां तक आपकी सीमा है उसके बाहर की चीज आप इस्तेमाल ही नहीं कर सकते कभी भी तो व आपकी सीमा के बाहर हो गया माने असीम हो गया आपके लिए इस तरह से व असीमित हो जाता है अरे भाई आप ये बताइए कि लॉ कहां पर है जहां पर यह हो कि उसकी सीमा से जरा सा भी ज्यादा है तो असीमित है ये बताइए असीमित का अर्थ ये नहीं था सुनिए असीमित का अर्थ ये नहीं था असीमित का अर्थ आपने असीमित पता है आपको असीमित का अर्थ असीमित का अर्थ आपने अभी मुझे बताया जिसकी कोई सीमा ना हो तो असीमित ईश्वर का अर्थ असीमित ईश्वर का अर्थ हुआ जिसकी कोई सीमा ना हो अब आप ये बता रहे अपेक्षाकृत किसी के पास अगर ज्यादा है तो वो असीमित ईश्वर है अपेक्षाकृत अपेक्षाकृत ये परिभाषा आपने तब क्यों नहीं बताई जब मैंने आपसे पूछा सीमित का असीमित की ज परिभाषा पूछी सर इसको आप इस रिकॉर्डिंग को बाद में देख लीजिएगा पहले ही बता दिया मैंने आपने नहीं बताया खैर मैं आपको
00:32:00:06 मैं सत के ऊपर मैं सत के ऊपर बात इसलिए नहीं कर रहा हूं क्योंकि वो विषयात हो जाएगा उसमें भी एक अलग चैप्टर खुलेगा उसको मुझे आपको लगाना पड़ेगा जबकि हम लोग एक मुख्य विषय पर जब चर्चा कर रहे हैं तो उसी पर रहना चाहता हूं विषयात ना हो इसलिए मैं कह रहा हूं अगर आप नहीं मान रहे हैं अमरता को सत तो ठीक है वो उस जगह छोड़ देते हैं अब मैं कह रहा हूं इस दुनिया में कोई अमर नहीं है फिर भी आप अमरता को ढूंढ रहे हैं यह बात तो सत्य हां ढूंढ रहे हैं तो फिर आप पागल सिद्ध हुए ना आज कैसे पागल सिद्ध हो गए आपके अंदर जो चा है उसका कोई विषय है हा विषय तो है ना क्या है विषय यही के मैं मरू ना विषय तो य आप ढूंढ रहे अमरता को कोई अमर है इस दुनिया में अरे सर अभी तक अमर नहीं है लेकिन मुझे नहीं लगता ऐसा कि आगे नहीं हो पाएगा आज के टाइम में सब्जेक्ट है आपकी बा और मैं ऐसी बात सिद्ध कर दूं कि जो चीजें नहीं थी और उनको इमेजिन किया गया चाहा गया और बाद में वो प्राप्त हो गई य नहीं कह रहा मैं ये नहीं कह रहा आज की तारीख में जो सगल कैसे क वैज्ञानिक पागल होते हैं क्या नहीं तो आप ढूंढ उसको आज रहे हो ना उस दिन ढूंढना जब वो हो जाए
00:33:15:16 आप ढूंढ तो आज रहे हो ना आप आज ढूंढ रहे हो अरे भाई साहब जब हो जाएगी तब ढूंढने की जरूरत क्या है अरे जैसे कि आपको पता चल गया कि दुनिया में कोई है जो अमर हो गया ठीक है अब आप ये कहो मुझे अब आप मुझे ये क मुझे अब आप मुझे कहो कि मुझे कोई मारने आए मैं मरना नहीं चाहता क्योंकि भाई मैं उसके जैसा होना चाहता हूं तो यह तो हो गया सही बात किसके जैसा होना चाहता जब ये सि हो गया कि हा भाई अमरता को ढूंढ लिया गया है अरे भाई जब अमरता ढूंढ लिया जाएगा तब अमर हो जाऊंगा ना फिर का के लिए ढूंढा अरे भाई अमरता को आप ही ढूंढेंगे आप साइंटिस्ट साइंस पर काम कर रहे हैं आप अमरता को ढूंढने के लिए हां मैं भी भी काम कर रहा हूं और भी बहुत लोग काम कर रहे हैं खाली मैं थोना चाहता और भी बहुत लोग चाहते मैं भी कर रहा हूं मैं भी कर रहा हूं क्या किया आपने अरे कर अरे कर रहा हूं अभी तक सफल नहीं बताइए ना क्या किया थोड़ा सा बताइए क्या किया अरे भाई कोई फार्मूला कुछ कोई फार्मूला कुछ बताइए क्या कर रहे हैं अमरता के लिए भाई फार्मूला तब बताएंगे ना जब खोजने में आ जाएगा जब तक खोजने में नहीं आया तो क्या बताए तो यानी कि आप जोची खोजने में अभी आई नहीं उसके बारे में क्या देखिए चलिए अभी तक की अभी तक की वो एक निष्कर्ष
00:34:30:28 निकाल ले थोड़ा सा फिर आगे बढ़ते हैं पहली बात तो ये है कि आपने ईश्वर को असीमित कहा फिर जब आपने सोचा कि भाई वो असीमित का अर्थ मैं कुछ और लूंगा तो आपने माना कि ईश्वर जो है आपका सीमित है ठीक है जी बिल्कुल बिल्कुल उसके बाद आपने य माना कि कि आपके अंदर भी अमरता की प्यास है आपके अंदर भी कभी ना दुखी होने की प्यास है परंतु इस दुनिया में कोई नहीं है जो अमर हो जो दुखी हो अच्छा जो जो हिंदू धर्म में जो हमारा सनातन धर्म है उसके अनुसार हम ईश्वर उसको मानते हैं जो इस चाह का विषय है और इसीलिए उसको कहते हैं सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर सत का मतलब यहां अमरता से ही है सनातन शास्त्रों के आधार पर फिर वही आप मुझे भाषा में दिखाएंगे कि सत मत सचिदानंद स्वरूप को छोड़ दीजिए हिंदुइज्म का ईश्वर वही है जो कभी मरता नहीं सत का मतलब बताइ ना अरे भाई सत का अरे मैं कह रहा हूं ना भाई उस शब्द को छोड़ दो मैं ये कह रहा हूं शब्द को छोड़ दो अंतर होगा उससे विषय अंतर होगा ओके आपकी ऐसी मान्यता है आप ऐसा बता रहे हैं सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार अब मेरा अगला सवाल ये है हां सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है और उसे आप भी मानते हैं ऐसा आप कह रहे हैं बिल्कुल बिल्कुल बि हां अब मैं आपसे एक बात पूछ रहा हूं कि ये जो
00:35:45:28 दर्शन शास्त्र है आपने कब लिखा किस आयु में लिखा जी यह मैंने लिखा 2018 में मैंने इसको लिखना शुरू किया और 20 तक पूरा किया तो आपकी आयु क्या रही थी तब तक मेरी आयु अब 51 साल होने वाली है तो आप आप समझ लीजिए कि तीन 49 नहीं 51 है तो 46 की आयु में लिखना शुरू किया अच्छा 201 जी तो 46 के आसपास लि तो 46 की उम्र तक आप ईश्वर में यकीन रखते थे या किसी दर्शन में यकीन रखते थे या नहीं रखते थे मैं खोज में था खोज पर था किसी देखो मैं यकीन नहीं रखता हूं मैं खोजी आदमी हूं जो चीज खोजने में आती दर्शन कोने अपनाया नहीं किसी दर्शन को नहीं अपनाया मैं उनकी स्टडी करता था ये जानने के लिए कुछ ऐसा है क्या हो गया अच्छा जी तो मैं यह पूछना चाहता हूं कि 46 की उम्र तक आपने अपनी माता बहन और पत्नी में अंतर किस आधार पर किया संबंधों के आधार पर संबंध किसने बताया आपको कैसे पता लगे भाषा से अरे भाषा से बताए
00:37:02:14 किसने मेरे माता ने पिता ने क्या वो लोग भी ऐसे ही थे जिन्होने जो ईश्वर को ना मानते हो खोजी हो हा ऐसे कुछ थे खोजी वाले भी कुछ थे मानने वाले भी दोनों तरह के लोग थे तो ठीक है तो अब मुझे आप बताइए कि माता को माता मानने का आपका आधार क्या था 46 साल की उम्र तक और आज क्या है आधार आधार नहीं है बस भाषा आधार है कोई आधार नहीं है ना भाषा आधार आधार भाषा को जरा समझाएंगे नहीं फिर बाद में फिर आप कहेंगे मेरा उस संदर्भ ताय था इसलिए क्लियर कर दीजिए हा हा भाषा का मतलब है कि किसी स्त्री से अगर कोई पैदा होता है तो तो उस स्त्री को माता बोलते हैं भाषा में और उसको पुत्र या माता बोलते हैं वो तो ठीक है माता को किस दृष्टि से देखना है मैंने अंतर पूछा अंतर करने का आधार क्या है माता को दृष्टि से देखते हैं वो हमारा लालन पालन करती है है वो पोषण करती है अभी अभी मुझे और थोड़ा सा खोलना पड़ेगा एक पत्नी के साथ आप आप एक अपनी पत्नी के साथ कोई मनुष्य उसके साथ संभोग कर सकता है करता है जी हा माता के साथ नहीं करता है तो आप आप क्या इस चीज को फॉलो करते थे किस
00:38:17:16 चीज को जो मैंने अभी सिद्धांत बताया हां मैंने अभी तक तो फॉलो किया है हां तो इसका आधार क्या है आपका अभी फलो किया आगे हो सकता ना भी करे अब आगे का किसको पता है मैं कोई भविष्यवक्ता तो हूं नहीं भविष्यवाणी आपके अपने जीवन के सिद्धांत नहीं है जबक आपने सार्वभौम सिद्धांत दिए दुनिया को आपके अपने जीवन जीने के सिद्धांत है नहीं ये कोई मेरा सिद्धांत नहीं है नाने स्वीकारा है नहीं कोई सि भाई साब आपने कोई सिद्धांत स्वीकारा है कि नहीं आपने किताब लिख द दुनिया के लिए आपने सिद्धांत को स्वीकारा कि नहीं हां स्वीकारा भाषा स्वीकारी है मैंने नहीं नहीं भाषा नहीं माता के साथ गमन नहीं करना है सिद्धांत को आपने अपनाया हुआ है कि नहीं नहीं यह कोई सिद्धांत के रूप में मैंने कहीं पढ़ा नहीं है अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं माता के साथ आप पत्नी जैसा व्यवहार नहीं करते ना हां नहीं करता नहीं करते तो आगे भी नहीं करेंगे या फिर हो सकता आगे कर दे आगे का पता नहीं लेकिन मेरी तो कोई योजना है नहीं करने का मा योजना नहीं आप देखिए आपने वो दिया है कि भैया संपूर्ण समाधान ये लीजिए दुनिया को दे दिया आपने बहुत अच्छी बात है संपूर्ण समाधान
00:39:32:20 में अगर पूछ रहे तो संपूर्ण समाधान में कोई भी दो व्यक्ति जो देखिए मैं ये नहीं पूछ रहा य विषयात हो रहा है विष हो रहा है मैं कुछ और बात कह रहा सुने कहा आप दुनिया से चा मैं नहीं चाहता दुनिया से मैं क्यों चाहूंगा दुनिया से भाई आपने एक सिद्धांत दिया है संपूर्ण समाधान आप अपने मन में भाव रखते हैं कि दुनिया उसको अगर फॉलो करे तो सुखी हो जाए हां अगर करे और और यह सबको देखना है कि अगर करना है कि नहीं करना है हा आपके मन का भाव क्या है करें कि ना करें हां मेरे मन का भाव यह है कि क्योंकि मेरी जो स्टडी है उसमें हर आदमी सुखी होना चाहता है जैसे आपने भी बताया कि हर आदमी सुखी होना चाहता है मेरी भी स्टडी में यही निकल के आया अरे सर वही तो बता आप कोई सिद्धांत है जो दुनिया को दे रहे हैं ये तो मानते हैं ना हा आपका अपना आप को नहीं पता कि आज आप माता के साथ माता जैसा व्यवहार कर रहे हैं पर कल को करेंगे कि नहीं करें ये नहीं पता आपको देखो अगर कल को मेरी माता ने मुझसे रिक्वेस्ट की प्रार्थना की कि भाई उनकी ऐसी इच्छा है और वो इसके बिना सुखी नहीं हो सकती हैं तो मैं उनकी इच्छा पूर्ति कर सकता हूं उनको सुखी करने के
00:40:47:20 लिए इसलिए यह निर्णय मैं अकेला नहीं ले सकता आप दो लोगों का निर्णय मुझे अकेले से पूछ रहे हैं ये गलत बात है ये नहीं नहीं नहीं नहीं देखिए तो इसका अर्थ ये है इसका अर्थ ये इसका अर्थ सर सुनिए ना प एक सेकंड सुनिए जैसे मेरा और आपका आज क्या संबंध है और कल को हमारे और मेरे और आपके बीच में क्या संबंध होगा यह मैं और आप दोनों मिलके तय कर सकते हैं मैं अकेला मतलब है कि आपके अपने सिद्धांत परिवर्तनशील है नहीं यही सिद्धांत दिया है मैंने संपूर्ण जीवन दर्शन में भी यही सिद्धांत है और यही हैनल है वो हां लोगों की इच्छा के ऊपर है परिवर्तनशील जब जिसको जिसके साथ सोने का मन करे जब जिसको जिसके साथ सोने का मन करे उसको सुख हो रहा है तो उसको दे देना चाहिए ये सिद्धांत है आपका अगर वो दोनों राजी है उस बात से तो बिल्कुल सही बात है हा यही अब ये बताइए जानवरों में आपने अभी तो बोला सर इस मामले में कोई अंतर नहीं है जानवर भी सुखी होना चाहते है आदमी भी सुखी होना चाहता है इस माम के पास मर्यादा नहीं है अरे आपके पास है जिसको आप तोड़ रहे तो अब बताइए जानवर में अंतर क्या कहते ही निद्राथन ये चार चीज इंसानों में जा
00:42:02:25 में बराबर है एक ही चीज एक्स्ट्रा होती है धर्म अब आप कह रहे हमारे पास ये मर्यादा भी नहीं है कल को अगर माता ने कहा सुखी होना चाहती तो हम तोड़ भी सकते हैं इसका मतलब है आपके पास कोई भी चीज एक्स्ट्रा है ही नहीं तो जानवरों में आप में अंतर क्या है अरे भाई नहीं है इस मामले में कोई अंतर बताया तो इस मामले में क्या मर्यादा ही तो है जानवर से भिन्न बना रही है ना ना बहुत सार ची ब केव बताइए बताइए बताइए अरे ज जैसे कुल मिला के आपका कहने का मतलब ये आपका सिद्धांत यह कहता है कि जब जिसका मन जिसके साथ आए उसके साथ गमन कर ले संभोग कर ले सुख को बस चाहिए बस सुख होना चाहिए कोई भी संबंध कोई भी संबंध दो लोग आपस में अपनी इच्छा के आधार पर बना सकते हैं यही सुख का सिद्धांत है बहुत बढ़िया अब आपसे मिलकर के हमें अच्छा लगा अच्छा लगा आप यहां आए आपको राम राम भैया दूर की राम राम ले या ना ले व भी मुझे नहीं पता है अरे तो अभी अभी आप अपनी बात तो बताए बा बता देखिए आप दर्शन दिया है उसको आप अपने साथ लेकर के इस दुनिया से जाएंगे और कुछ दो चार लोग होंगे को
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00:43:10:28 मानेंगे मानव को सुनि मनुष्य आप मानव चित समाज को सिद्धांत दे रहे हो पशुओ का चाहे त किसी कर एक सेकंड आप खाना खाते हैं मैंने बोला नार चार चीज समान है मुझे
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→ Used in: B · Video नास्तिक बनने से पहलेये वीडियो अंत तक देख लो 🚩 माता-बहन के प्रति सोच कैसी हो जाए... at 41:41 ↗
00:43:31:18 इस चर्चा को आगे नहीं बढ़ना है जो माता के साथ गमन करना चाहे उससे मुझे बात ही नहीं करनी है खतम हो गया और सुनिए आपने शंकराचार्य जी के बारे में बोला है ना भी मैंने दे है समय रहते समय मिलने पर उस पर कारवाई होगी आप याद
⬜ Not used yet · 00:43:48:27 – 00:55:45:00 (11:56)
00:43:48:27 रखिए धन्यवाद इस क्या बढ़िया कोर्ट में कोर्ट में जो चिंतन मनन होगा उसम क्या बिल्कुल बिल्कुल और और इतना जल्दी भाग कहां रहे हो इतना जल्दी भाग कहां रहे हो भाई हेलो बका इतना जल्दी भाग कहां रहे हो यह तो बताओ इना भाग क रहे हो
00:44:23:13 और तो भाई आई होप कि आप लोगों ने इस व्यक्ति को देखा हो मैं कुछ आप लोगों से बातें कर लेता हूं आया हूं तो बड़े दिनों के बाद यह है संपूर्ण जीवन दर्शन और क्या कहते हैं संपूर्ण समाधान की माता के साथ भी सो
00:45:06:26 जाओ भैया आपसे कैसे जुडू वैभव द्विवेदी जी नंबर नोट कर लीजिए 740 830 और 730 830 और 18 69 ठीक है कांटेक्ट नंबर है
00:45:51:24 हमारा इग्नोर करो गाइस वीडियो को ऐसा क्यों बोल रहे हो वीडियो को कोई किसी का अगर कोई जुड़ना चाहता हो तो या फिर कोई आपके क्वेश्चन वगैरह हो तो बताएं हां लखनऊ में आप मिल सकते हैं मैंने अभी नंबर बताया है आप कांटेक्ट करिएगा भाई देखिए सिंपल सी बात है बात की जाती है मनुष्यों से य भाई साहब ने कह दिया कल को अपनी माता के साथ गमन भी करेंगे अब इनकी पत्नी है वो क्या है क्या नहीं है इनकी माता है क्या नहीं है क्या कर चुके हैं यही अंतर आता है दुनिया में अल्टीमेट ईश्वर को मानना और ना मानने में यही अंतर है मानवता और पशुता का आपने देखा होगा अगर ईश्वर को अल्टीमेट नहीं मानेंगे तो यह होगा एक दिन व्यक्ति के पास अब य यह व्यक्ति कैसे यहां तक पहुंचा होगा क्योंकि इस इसने जब सर्च किया होगा ना ईश्वर के लिए तो इसको वो चीजें मिली होंगी जो परंपरा प्राप्त आचार्यों से नहीं आती है इनको ईश्वर मिला होगा बाधित लिमिटेड तो लिमिटेड ईश्वर पर भी अंत में एक ना एक दिन जाते हैं कहां इस अधर्म पर
00:47:06:26 कि कल को मैं अपनी माता के साथ यह क्या बोल रहे थे कि कल को मैं अपनी माता के साथ भी गमन कर लूंगा तो पशुओं के साथ बात नहीं होती है ना भाई पशुओं के साथ तो मुक्का लात होती है अभय अपने किसी सुरक्षित स्थान पर बैठे हैं कुछ कर तो सकते नहीं है कुछ भी बोल लो अपने कमरे से तो इससे बुरा दिन हमारा कभी नहीं हो सकता जो हमें इतने घटिया इंसान से यह सुनने को मिला यही घटिया पन में आपके सामने लाना चाहता था भाई जी आपका बहुत अच्छा एंड नॉन सेन को एक्सपोज करने के लिए धन्यवाद आपका टू
00:48:05:03 जी यह चार भाग भी नहीं था यह चार भाग भी नहीं था यह चार भाग भी नहीं था इसने अपना एक अलग ही दर्शन लिखा है और सबसे बड़ी बात यह है कि य अपना स्वयं के जीवन में किसी सिद्धांत पर अडिग नहीं है मगर ये एक्सपेक्ट करता है कि मेरे दिए हुए सिद्धांतों को दुनिया मान ले परिवर्तनशील है तोव सिद्धांत कहां रहा इसीलिए तो यह यह हालत क्यों होती है हम लोगों की किसी मनुष्य की हालत क्यों होती है क्योंकि वह जो सही शिक्षा उसको प्राप्त होनी चाहिए एक समय पर वह नहीं होती है उसका नतीजा है अब इनकी लाइफ में आज आज के टाइम में कोई है ही नहीं जो ईश्वर हो और ये अब दुनिया से यह तो कह नहीं सकते कोई ईश्वर नहीं है वरना दुनिया हटना कटना शुरू हो जाएगी तो फिर एक नाम लेते लेता है व्यक्ति जैसे कुछ लोग हैं जो सनातन के नाम पर सनातन विरुद्ध शिक्षा देते हैं पर वो सनातन के नाम को क्यों पकड़े रहते हैं क्योंकि अगर सनातन का नाम छोड़ दिया तो फिर उनकी उनको कोई सुनेगा नहीं सर्वशक्तिमान कहते हुए भी ईश्वर को बाधित कर देते हैं पर वोह सर्वशक्तिमान टैग इसलिए पकड़ के चलते हैं कि अगर हमने सर्वशक्तिमान ही कहना बंद कर दिया तो कौन
00:49:20:06 आएगा हमारे पास हमारी बात को सुनने समझने तो इन्होंने भी अपना जो एक तथाकथित ईश्वर बना रखा जो आदमी सबसे अमीर होगा व ईश्वर है जो आदमी सबसे सुखी होगा व वो उसको छोड़ दो अगर मान लो देखा जाए मनुष्य में तो यही ढूंढ लिया जाए सबसे ज्यादा सुखी कौन है जिसे कष्ट ना होता परेशानी ना होती हो तो इनका ईश्वर वो है जो सबसे ज्यादा पैसे वाला हो तो इसका अर्थ यह हुआ कि इनकी निगाह में जो जो गरिमा सम्मान माता स का व्यवहार पिता का व्यवहार य सब कुछ नहीं है रिश्ते नाते अगर कोई प्रोस्टिट्यूशन है और वह ऐसे वीडियोस बनाती है जो कि अश्लील वीडियोस हैं और वह पैसे में किसी गरीब से ज्यादा है जो मेहनत कर कर के अपने प्याज रोटी खा कर के जीवित रहता है तो वो ईश्वर है वो जो प्रोस्टिट्यूशन का काम कर रहे हैं जो वो ईश्वर है इस व्यक्ति के लिए इसके
00:50:23:01 अनुसार हां आपको पता चलेगा आपको देखिए ऐसा है ना आप जैसे लोगों से प्रेमजीत जी बातें नहीं होती है आप जैसों से किसी दिन अगर व्यवहारिक रूप से अगर भगवान ना करे आपसे कभी सामना हो मगर आप भी यही प्रार्थना करिएगा कि सामना ना हो है ना आप जैसे लोगों के लिए जन्म हुआ है भगवत कृपा से मनुष्यों के समाज को पशुओं का आचरण सिखाने वाले लोग क्यों क्योंकि सही समय पर कोई इनको यह नहीं बता पाया कि भैया इस दुनिया में कोई अल्टीमेट ईश्वर है जिसे प्राप्त करने वाली मर्यादा का नाम धर्म है
00:51:12:06 सिंपल अब इससे ज्यादा और किसी को क्या एक्सपोज करूं जो उनसे बातें करू जब उसने यही कह दिया कि भैया देखो मेरे अंदर चाह तो है अमर बनने की मगर इस दुनिया में अमर कोई है नहीं जब उसने यही कह दिया जब उसने यही कह दिया कि मैं आज अपनी पत्नी के साथ जो व्यवहार करता हूं कल अपनी मां के साथ भी कर लूंगा तो क्या बचा और क्या एक्सपोज करू जो उससे मैं बातें करू बैठ कर के ऐसे मतलब घृणित व्यक्ति के साथ में क्या बातें करू जी जब अनटचेबिलिटी का पाखंड फैला था तब क्या शंकराचार्य ने उसका विरोध नहीं किया देखिए अनटचेबिलिटी का पाखंड एक अलग चीज है और अनटचेबिलिटी एक अलग चीज है इस पर हम एक वीडियो लाने वाले हैं जैसे कि अहिंसा और हिंसा में एक अंतर है अगर किसी को हम द्वेष पूर्ण एक सुई भी चुबा हैं तो वह हिंसा मगर वहीं पर एक डॉक्टर इलाज करने के उद्देश्य से किसी का मास तक काट देता है वो भी हिंसा नहीं है वो अहिंसा है तो अनटचेबिलिटी के पीछे उद्देश्य क्या है य देखना पड़ेगा जैसे कि एक स्त्री के लिए बताया जाता है कि भाई वो पर पुरुष को ना छुए तो क्या वो जो पर पुरुष है जिसको उसको
00:52:27:12 नहीं छूना है क्या वह घृणा योग्य है तो अनटचेबिलिटी यदि घृणा मूलक है तो वो पाखंड है अनटचेबिलिटी यदि की व्यवस्था मूलक है वो पाखंड नहीं है तो यदि कोई इसका दुरुपयोग करता है अनटचेबिलिटी का उसको घृणा मूलक सिद्ध करता है घृणा मूलक आचरण करता है अनटचेबिलिटी का वो गलत है मगर ऐसा नहीं है कि अनटचेबिलिटी नहीं है अभी कोरोना जब आया था अपनी माता से ही व्यक्ति दूर रह रहा था और पर पुरुष से स्पर्श ना करने को क्यों कहा जाता है जरा सोच के देखिए उससे उससे कैसे व विचार हो जा रहा है व्यभिचार तो तब होगा ना जब बाकायदा वो जो आगे की चीज वो हो प्रतिफल मगर अनटचेबिलिटी से क्या होता है कि जो गुण दोष नहीं आने चाहिए इस वंश में इस जगह पर इस शरीर में वोह गुण दोष थोड़े बहुत मिनिमाइज ही सही वो आ जाते हैं इसका सबसे बड़ा उदाहरण कि आप जब भी कोई गलत चीज को छू लेते हैं उसके बाद हैंड वश करते हैं इसका अर्थ है कि छूने से सामने वाली जो चीजें हैं वो हमारे पास आ सकती है तो अनटचेबिलिटी का वहां पर एक जो स्त्री के साथ जो व्यवहार होता है किसी और को ना छुए इवन पर पुरुष इवन पुरुष को भी नहीं छूना
00:53:42:16 चाहिए पराई स्त्री को तो वहां पर इसलिए ऐसा होता है पर पराय स्त्री पर पर पुरुष को ना छूने का व्यवहार क्योंकि जो सामने वाले के जो जेनेटिक्स है जो डीएनए है जो भी है उनके गुण दोष धर्म जो भी है उनके शरीर के जरा भी इधर ना जिससे कि जो प्योरिटी ऑफ ब्लड है जो शुद्धता है वो मिक्सचर ना हो क्योंकि जितना शुद्ध प्योरिटी जो वंश है वो प्योर रहेगा उतना ही उसका शरीर सक्षम रहेगा गायत्री मंत्र के उच्चारण के लिए अथवा भिन्न-भिन्न प्रकार के कर्मों के लिए क्षत्रिय क्षत्रिय के अंदर क्षत्रिय तोव अच्छा रहेगा वैश्य के अंदर व्यापार के गुण अच्छे रहेंगे शूद्र के अंदर जो उद्योग है लघु उद्योग है जो जितनी भी सर्विस वाले डिपार्टमेंट्स है वो सब प्योर उसके अंदर वो रहेगा जितना ज्यादा हम यह
00:54:54:02 जो ब
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