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00:00:04:14 सभी को जय श्री राम आज एक बहुत ही गंभीर विषय पर हम लोग यहां पर आए हैं आप लोगों के समक्ष एक संदेश जो हमें जन समाज में और विशेष विशेषतः उनको जिनको केंद्र में रख कर के यह चर्चा हम लोग करने जा रहे हैं उन तक पहुंचाना है अभी क्या हो रहा है कि जो परंपरा प्राप्त शुद्ध वैदिक धर्म है सनातन धर्म का जो स्वरूप है उसका न केन प्रकार किसी बहाने से अपमान करना मजाक बनाना फतिया कसना या फिर उसकी चीजों को नकार ही देना यह सब बातें इस समय मतलब बहुत आम सी हो गई है अब ऐसे में करते क्या है लोग कि जो ऐसे व्यक्तित्व होते हैं जो उदारवादी हैं या जो आपके ऊपर ध्यान नहीं दे रहे जो कुछ आप करो तो करते रहो तो ऐसे
00:01:19:27 सॉफ्ट टारगेट ढूंढता है सॉफ्ट टारगेट सॉफ होते हैं तो उन्हीं में से एक है अनिरुद्धाचार्य जी वह बहुत ही सरल तरीके से जितना उनको गुरु गोविंद ग्रंथ की कृपा से प्राप्त है उसको बहुत ही सरल बिल्कुल सामान्य विवेक का उपयोग करते हुए सामान्य भाषा में सामान्य शब्दों में बता देते हैं और जो चीजें उनको नहीं भी पता होती हैं तो उसमें भी वह ऐसा नहीं करते कि दंब भरते हो अगर जैसे को कुछ किसी विषय में नहीं भी ज्ञात है तो उनसे मतलब वो दम तो झलकता ही नहीं है कभी मैंने देखा ही नहीं जी जय श्री राम सुजीत वैष्णव जी आभार आपका सुजीत जी छोटे भाई हैं इन इग्राम पर काफी एक्टिव रहते हैं और जो शुद्ध जी चीजें हैं धर्म की जो सामग्री है वो वितरित करते हैं तो इसी बारे में आज हम चर्चा करने आए हैं कि यह
00:02:35:03 जो हालात है इसमर इस पर हम लोग किस तरीके से कार्य कर सकते हैं क्या कर सकते हैं इसका निदान क्या इसका समाधान क्या हो सकता है अभी आप देखिए छोटे छो देखिए पहली बात तो यह चीज है यह उत्पन्न क्यों हो रहा है समाज में यह हास्य क्यों बनाया जा रहा है आप देखिए बहुत ही मार्मिक दृश्य कई बार देखने को मिलते हैं जब अनिरुद्धाचार्य जी के लिए बहुत ही अभद्र तरीके से मजाक वाले मेम्स बना रहे हैं और पहले तो ये कुछ मैचोर पर्सन ही बनाते थे आजकल तो छोटा बच्चा भी बना रहे है ये एक बहुत ही खतरे की मतलब हानिकारक है समाज के लिए बच्चों में जो हमारे परंपरा से जुड़े हुए जो कथावाचक हैं जो उदारवादी हैं उनके प्रति क्या मैसेज जा रहा है जो एक छोटा बच्चा भी आज उनका मजाक बनाने से घबरा नहीं रहा है यह स्थिति आ गई है और इसमें कहीं ना कहीं एक चीज में यह भी देख रहा हूं शता जी की इसमें कहीं ना कहीं एक अभाव या कमी कह ले कि इनकी भी है अनिरुद्धाचार्य जी
00:03:50:10 की और इसीलिए मैंने उनको केंद्र में रख कर के आज इस विषय को उठाए मैंने कई मीम्स देखे उनके ऊपर कि वो मान लो कुछ भी सरल सरल भाव को व्यक्त करते हुए कर रहे हैं तो तरह तरह के जोकर बना दिया मतलब जिसको भी अगर हमारे धर्म का मजाक उड़ाना है तो उसके लिए सबसे पहला और सबसे सरल सॉफ्ट टारगेट है कि अनिरुद्धाचार्य जी के बारे में मजाक बना लिया जाए क्योंकि अनचार जी भाई सरल स्वभाव के हैं वह कह देते हैं कि ठीक है अगर उसको इस तरीके से उसका रोजी रोटी चल रही तो चलने दो मगर मैं एक बात यहां पर याद दिलाना चाहूंगा अनुर अनिरुद्धाचार्य जी को
00:04:39:00 कि आप भी गुरु भाव रखते हैं पूरी के शंकराचार्य जी के लिए हमने देखा है आप गए भी हैं कई बार उनका सानिध्य भी आपको प्राप्त है क्या शंकराचार्य कभी यह बोलते हैं कि आप अपनी उदारता का स्तर इतना पराकाष्ठा तक पहुंचा दो कि सामने वाला व्यक्ति आपके अस्तित्व और आदर्श को भी नष्ट करने पर अमादा हो जाए तब भी आप शांत रहो ऐसा तो नहीं है गुरुदेव ने अपना जो गीता का सार्वभौम सिद्धांत नामक जो ग्रंथ लिखा है उसमें जो सबसे स्ट्रोकिंग जो सबसे स्ट्रोकिंग वाला जो पार्ट है उसमें वही है जो गुरुदेव ख उसमें लिखा है गुरुदेव ने दो भगवत गीता के श्लोकों को मिलाकर के उसका एक वक्तव्य वहां पर लिखा है उसका भावार्थ के साथ कि जो उदारता अपने अस्तित्व और आदर्श पर हावी हो जा नष्ट करने के लिए आमादा हो जाए वो उदारता नहीं कायरता होती है तो कैसी उदारता है अनचार जी अभी कुछ समय पूर्व जो आज आपके साथ हो रहा है यही प्रेम ये देखिए फनियस्ट बाबा एक्सपोज यह सब टाइटल है इनके और यह सब और यह ऐसा नहीं है सामर्थ वान है यह बहुत
00:05:54:02 सामर्थ मान है अगर ये अपनी पर आ जाए तो इनको बहुत ज्यादा समय नहीं लगेगा य सब कुछ ठीक करने में ये जो हो रहा है मगर ये इनकी उदारता है शस्ता है मगर मैं आज इनको जगाने के लिए यह लाइव चला रहा हूं यह जो जैसे नारद जी ने जामवंत जी ने मिलकर के हनुमान जी को पुकारा था ना बजरंग बली कहां गई वो शक्ति विलक्षण कुछ याद करो अपना पवन सुत बाल पर इसीलिए लाइव मैंने रखा है कि अनिरुद्धाचार्य जी आपसे हाथ जोड़ कर के विनम्र निवेदन है मेरा कि इस प्रकार का इस प्रकार की उदारता का आलंबन ना लीजिए जो आपके अस्तित्व और आदर्श का ही मजाक बना रही है अभी कुछ समय पूर्व प्रेमानंद जी महाराज जो है उनका भी मजाक बनाया गया था जी उनका भी इस तरह से मीम्स वगैरह बन रहे थे कुछ समय पूर्व मगर क्या हुआ उनकी जो पीआर टीम है बहुत एक्टिव रहती है और उन्होंने क्या किया तुरंत फुरत जो भी एक्शन लिए जाते हैं लीगल और ऑफिली जो भी चीज करनी होती उन्होंने फटाफट की और यह सब कुछ तुरंत की तुरंत व आड़े हाथ लिया और बंद हो गया
00:07:09:15 आज उनके जो मीम्स बनने चालू हुए तो बंद हो गए देखिए यह एक पूरा एक तंत्र है जो वास्तविक सनातन को नष्ट करना चाहता है वास्तविक सनातन वर्णाश्रम धर्मी परंपरा प्राप्त ज्ञान पर चलने वाला इतना सा पता है मगर चल परंपरा पर रहे हा है ना उससे मतलब नहीं कितना कितनी किस लेवल तक है मगर परंपरा से जुड़े हुए लोगों पर प्रहार वर्णाश्रम यों पर प्रहार राम चार परंपरा पर प्रहार शंकराचार्य परंपरा पर प्रहार मधुवा चार्य परंपरा पर प्रहार परंपरा वादियों से दिक्कत है दुनिया को तो उन्होंने बंद करवा दिया प्रेमानंद जी ने तो क्या आपके पास सामर्थ्य नहीं है आप इतना सारा आपके पास इतना सामर्थ्य है कि आप दो दिन के अंदर चाहो तो इस सबको कंट्रोल कर सकते हो और जो उनको फॉलो करते हैं मैं उनको भी घसीट होंगा इसमें कि आप लोग क्या अंधे हैं क्या या फिर जो आपकी लज्जा वाला भाव है स्वाभिमान वाला भाव है चलो वह उदारवाद दिखला रहे हैं वह
00:08:24:18 सहिष्णुता दिखरा रहे हैं आप लोग कैसे मोन हो भाई जो उनको फॉलो करते हैं मैं उनसे बात कर रहा हूं इस समय जी अरे जाइए उनको कहिए जाकर के के उठो और लड़ो अपने अस्तित्व और आदर्श के लिए अच्छा इस इसका एक कारण अभी देखिए यह भी बात है इसमें कि अगर देखा जाए तो ये जो मजाक बनता है ना ये धार्मिक व्यक्तित्व का या धार्मिक सामग्री का जो मजाक बनता है ये क्यों बनता है पहली बात तो यह है कि आज से डेढ़ दो साल से पहले मजाक नहीं बनता था अब पिछले डेढ़ दो साल में क्या हुआ य आप लोग आकलन लगा सकते हो क्यों बना क्यों बन रहा है आज आज ये दूसरे लोगों को विधियों को या लोगों को मजाक बनाने का मौका क्यों मिल रहा है इसका कारण क्या है यह आकलन आप स्वयं लगाए पिछले 100 डे स सालों में क्या चीजें हुई है सनातन का चोला ओढ करके सनातन विरुद्ध कार्य करने वाले तंत्र अस्तित्व में आ गए बिल्कुल परंपरा को
00:09:39:20 ना मानने वाले तंत्र अस्तित्व में आ गए और उन्होंने थाली में परोस करके दिया है उन्होंने इन चीजों को थाली में परोस करके दिया है क्यों 100 1 स साल या 200 साल पहले भी जो हमारे रिचुअल्स थे जो परंपरा प्राप्त जो हमारी सामग्री थी अध्ययन था यह सब कुछ अस्तित्व में था मगर मजाल है कि कोई मजाक बना दे ऐसा कुछ नहीं हो सकता था तब मगर ये जी इसमें ऐसा होता है ना कि जो यह जो कुत है ना जो इस तरह का कार्य करते हैं वह दिमाग में घुसने का कार्य कर ये होता है उनका पहले धीरे धीरे क्या है मजाक के स्तर पर शुरू करना ठीक है बहुत बहुत ही फनी लग रहा है अच्छा लग रहा है मतलब की हंसी आ रही है चीज आ रही है फिर ऐसे करते करते करते करते जब आप उसी चीज को बार बार बार बार बार बार देखेंगे सुनेंगे देखेंगे सुनेंगे जब रील्स में आपके आते रहेंगे ना तो एक मानसिकता ऐसी बन जाएगी कि कि यह व्यक्ति ऐसा ही है और फिर उसको सीरियस लेना बंद कर देंगे तो जितने भी आचार्य हमारे जो है जिनके साथ इस तरह की चीजें हो रही है ना जिसमें अचार्य जी बिल्कुल है तो उनके साथ क्या होगा कि एक समय ऐसा
00:10:54:24 आएगा कि फिर उनको लोग सीरियस लेना बंद कर देंगे और फिर जब जब आचार्यों को लेना बंद कर देंगे तो धर्म से अपने आप ही अलग हो जाएंगे ठीक है तो ये बहुत ही मतलब मुझे ऐसा कभी-कभी लगता है कि बहुत ही मब सोच समझ के ये सब चीजें होती है और बिल्कुल मैं हां मैं जानता हूं कि कई लोग उसमें बह जाते हैं और कई लोग फिर लाइव फॉलोअर्स के खातिर क्या बोलते हैं वो लोग बनाना शुरू कर देते हैं लेकिन उकी शुरुआत ऐसे ही होती है ठीक है जैसे मीम बनना फिर डंक मीम बनना फिर ऐसे ऐसे बनेंगे कि मतलब कि उसमें बिल्कुल एकदम धर्म को एक तरफ छोड़कर मानवता का एक तरफ छोड़कर बस एकदम उसपे मजाक मस्ती हो रही है ठीक है तो इस तरह की चीजें होती है और ये बहुत डेंजरस है और ये अभी से नहीं ये जब ये फ के समय से और कुट के समय से ही शुरू हो गया था कि लोगों के दिमाग पे अ मतलब कि हावी होना और हावी कैसे होगा जब एक ही चीज आपके पास बार-बार आपको दिखती रहेगी दिखती रहेगी तो अपने आप हावी होने लग जाएगी मेरे ऐसे बहुत सारे मित्र हैं जो बिल्कुल जैसे मान लीजिए कोई एक एक पार्टी के बिल्कुल अगेंस्ट है ठीक है अब मैं एग्जांपल दे रहा हूं एक कोई एक्स वाई जड लेसे कोई पार्टी है अब क्या हुआ कि उसके फीड प उसी के बारे में अच्छी चीजें अच्छी चीज ऐसे आने लगी आने लगी आने लग गई तो अब क्या हुआ कि उसकी पूरी मानसिकता पूरी बदल गई बस उसको लगा यही सही है क्योंकि
00:12:10:02 और ये बेसिक ह्यूमन नेचर है कि जब इंफॉर्मेशन आपके पास बैक टू बैक बैक टू बक फ्लो होगा ना आप जब आपके दिमाग आपके दिमाग में वो घुस जाएगी चीज तो आप उसे ही सत्य मानने बैठ जाओगे ये बिल्कुल सही है ऐसे ही ब्रेन वश होता है आतंकवादियों का भी जब उनको एक ही चीज बारबार रिपीट कराई जाती है कराई जाती कराई जाती है वो मानते कि वही सत है ठीक है तो इसी चीज का जो बुरा और अच्छा दोनों के लिए प्रयोग में आता है अच्छे में कैसे आता है अच्छे में हमारी सेना के लिए आता है जैसे सेना में अगर बोल दिया जाए कि आपके कमांडिंग ऑफिसर का ये आदेश है आपको ये मानना है तो मानना है उसके अंदर भीय बात फीड की गई है लेकिन वो जो सोर्स है मतलब वो जो एम है वो क्या है वो अच्छे के लिए वो धर्म के लिए है ठीक है और उसी चीज का फायदा उठा के देखिए यहां पर ये सब चीजें होती है और फिर इसके बाद और ये बहुत बुरा है देश के लिए इतना बुरा है कि आज आप देख लीजिए पश्चिम को वेस्ट में क्या हो रहा है टिकटक ने किस तरह से हावी कर लिया है कि लोग मतलब पागल है उसके पीछे मतलब ऐसा है कि अगर एक दो दिन नहीं चलाएंगे तो एकदम मतलब साइकिक प्रॉब्लम हो गई है उनको ठीक है ये समस्या और यही समस्या अभी और वो सिर्फ टिकटक नाम हटाए ना लेकिन ये टेक्नोलॉजी नहीं हटी है जो जो जैसे ये रील्स आ गई और यह जो अलग अलग करके ये फु प या ं पे या जितने प्लेटफार्म है उन सब पे तो समस्या ये आ रही है और इस चीज को बिल्कुल मुझे लगता है
00:13:25:03 कि फिल्टर करना चाहिए मैं ये नहीं कह रहा हूं कि ये सही नहीं है बिल्कुल बिल्कुल ठीक और इस सब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तो बिल्कुल करता हम हम भी करते हैं आप भी करते हैं आवान भी करता है सब लोग करते हैं इसको सीखने के लिए समझने के लिए अपने विचारों को फैलाने के लिए सही चीजों को बताने के लिए ठीक है लेकिन फिर उसका दुरुपयोग फिर इस तरह से होता है तो मेरा भी य मेरा मैं बिल्कुल आपसे सहमत हूं कि इसमें फिल्टरेशन बहुत बहुत आवश्यक है होना ही चाहिए क्योंकि अगर वह नहीं होगा तो यह एक बहुत बड़ा अभिशाप बन जाएगा समाज के लिए तो और यह बिल्कुल भी ठीक नहीं बन वाला सीन आपने बताया ना यह कुछ दिन पूर्व हमने एक वीडियो बनाया था उसमें हमने इसको दर्शाया था कि किसी व्यक्ति को मतलब कोई तंत्र बेन बशिंग कैसे करता है स्लीपर सेल्स तैयार किए जाते हैं जो जी वो चक्कर काट रहे हैं कि तुम्हें ये करना है वो तुम्हारा बॉस है वो तुमको वो जो कहेगा वही तुम्हें करना है वो बार-बार उसके कान में जब वो आवाज जाती है तो एक दिन वो पता नहीं शुरू क्यों हुई थी कहां से हुई थी मगर एक दिन वो आवाज प्रमाण बन जाती है उसके लिए हा य यही यही चीज है यही चीज इसी तरीके से आज क्या हो रहा है कि अनिरुद्धाचार्य जी के रूप में या अन्य अन्य जो वो चीज हैं उनके
00:14:40:04 रूप में जो कटाक्ष हो रहे हैं धार्मिक सामग्री पर धार्मिक उन पर प्रकल्प पर इन कटाक्ष की वजह से धर्म को क्षति बहुत पहुंच रही है और उसम पूरा टेक्नोलॉजी का है यही है जैसे इसम अगर बात कहे आज से डेढ़ दो साल से लेकर पहले से लेकर आज तक क्या हुआ है क्या अंतर आया है तो इस इन चीजों का दोष आप किसको दोगे है ना भाई यह जो स्थिति है जो मजाक बन रहा है धर्म का इसका दोष आप किसे दोगे सामने वाले को या किसी ऐसे अपने को जिसने हमारी चीजों को थाली में परोस करके सामने वाले को दे दिया किसको दोगे इसका दोष
00:15:29:09 अब इसका दोष आप राजा राम मोहन रॉय को दे दो आर्य समाज को दे दो या इसी कड़ी में और आते आने वाले जो तंत्र है मैं तो इसका साक्षात आपको प्रूफ दे दूं अभी के अभी यही कहीं और किसी ऐतिहासिक घटना में जाने की आवश्यकता ही नहीं है किसी भी ऐतिहासिक घटना में जाने की आवश्यकता नहीं है मैं जब मुस्लिम लोगों से बात कर रहा हूं क्या तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है एक ऐसा बिंदु जिसकी काट है ही नहीं पूरे संसार में एक ऐसा बिंदु उस पर मैं विधर्मी हों से बात कर रहा हूं विधर्मी हों को ताकत देने वाला वहां उस समय पता है कौन है आर समाज वहां वो लोग मुझसे कह रहे हैं कि तुम्हारा जो हिंदू है तुम्हारा जो सनातनी भाई है आर समाजी वो तो खुद कह रहा है ईश्वर अवतार नहीं ले सकता तो पहले जाओ अपना अपना मामला सुल फिर आना हमारे पास मैं क्यों आज ये हाथ मुंह धो के पीछे पड़ा सर्वशक्तिमान सोच सबसे पहले किसके पास गया ना स्कोन के पास ना आर्य समाज के पास सबसे पहले धर्मिस ही गया था तब उस दिन मुझे पता चला था कि भाई वास्तव में वर्क कहां करना है हालांकि वहां पर मैंने अपनी चीजें रखी
00:16:44:26 कि आर्य समाज की बात क्यों नहीं मान्य है सनातन की तरफ से वह सब मैंने रखा मगर फिर भी उनको तो बल मिलता है और और जो मैंने रखाब हा जब एक साधारण हिंदू को वो चीजें ना पता हो मैंने रखी वहा पर आसानी से व वहा पर उसका ब्रेन वश हो जाएगा आसानी से वय सोचने लगेगा कि हा भाई हमारा धर्म कमजोर है कौन परोस के दे रहा है व कमजोरी अब यह जो चीज है कि यह पहले तो यह हो गया कि पिछले 100 डे स वर्षों में यह जो तथाकथित जो धर्म का प्रचार करने वाले तंत्र है यह हमारी धार्मिक चीजों का खिलवाड़ बना कर के प्रस्तुत कर रहे हैं और फिर उस प्रस्तुत करने का उपयोग दुरुपयोग करते हैं दूसरे लोग मजाक बनाते हैं भा अब एक दूसरा पहलू और है वह भी लगभग इससे मिलता जुलता ही है वह क्या है कि आजक जिसको देखो वो आचार्य को प्राप्त करने लगा है बिल्कुल इसको देखो वो
00:18:00:22 बच्चों को कथावाचक बना के बिठा दिया जने हुआ कि नहीं हुआ नहीं पता यज्ञ पवित हुआ है कि नहीं हुआ नहीं पता परंपरा प्राप्त अध्यन हो रहा है कि नहीं हो रहा है नहीं पता मगर भैया वो अथॉरिटी टाइप से बनकर बैठे हुए कि हम बताएंगे आपको धर्म बिल्कुल शंकराचार्य नहीं बताएंगे रामानुजाचार्य नहीं बताएंगे उस परंपरा के प्रामाणिक आचार्य नहीं बताएंगे वो डले रहेंगे ग गौशाला होगी कहीं वहां पर गौ माता की सेवा करते हुए व वो ऐसे मिलेंगे आपको और जो यह इस तरह का जो एक सेना तैयार हो रही है सनातन के प्रचार के नाम पर एक तथाकथित सो कॉल्ड अथॉरिटी बनकर के वह बैठ जाते हैं गद्दी पर स्वयं को व्यास के रूप में प्रस्तुत करते हैं और वो बताते हैं कि भैया ऐसे नहीं ऐसे अभी कल मैं देख रहा था कोई मात्र ने ट्वीट कर दिया कि करवा चौत तो वो तो खैर ट्वीट जो किया वो समाजी थी कि भूखे रहने से किसी की आयु क्यों बढ़ती है अब फिर वही बात आ जाएगी कि तुम्हारा विश्वास विश्वास
00:19:15:25 और दूसरे का विश्वास नथिंग अंधविश्वास अविश्वास तुम्हारा विश्वास विश्वास जहां तक जिस सीमा तक तुम्हें विश्वास है कि गायत्री मंत्र से हम मुक्ति पाएंगे प्रणव के उच्चारण से मुक्ति पा जहां तक तुम्हारी आस्था है तुम्हारा विश्वास है वहां तक ठीक है और फास्टिंग की अगर बात कर ले तो साइंटिफिकली बात करने आ जाना भाई ऐसा नहीं है गुरुदेव की लाइब्रेरी में साइंस वाली किताब पढ़ाई जाती है तो जो इस तरह के कटाक्ष करने वाले लोग हैं कि इससे क्या होगा वह क्या होगा वह आते ही नहीं है बस दूर ही दूर से बैठ कर के तो फिर मुझे फिर भा बातें याद आती फिर फिर मुझे मेरे ही समर्थक कहते भैया उससे घमंड बोला मत करो जी कभी-कभी ऐसा होता है कि मैं मैं आपको खुद बता दूं कुछ 10 साल पहले जब मैं ऐसे अकाट्य रूप से अपनी बातों को निरता से बोलने वाले लोगों को देखता था सुनता था तो मुझे लगता था कि अहंकारी है एक सामान्य व्यक्ति की दृष्टिकोण से देखो कभी-कभी निर्विवाद निर्भीक हो करर के सत्य बोलने वाला अहंकारी लगता
00:20:31:01 है मगर मेरा एक गुरु कृपा रही माता पिता की कृपा रही आशीर्वाद रहा भगवत कृपा रही जो बचपन से एक श्री राम के प्रति बहुत ज्यादा निष्ठा रही तो उसकी वजह से कुछ सिद्धांत वादी मुझे लगता है कि मैं बना था मैं अपनी अपनी य प्रशंसा नहीं कर रहा हूं मुझे अपने पर बहुत डाउट रहता है कि भाई मेरे से बहुत सारे पाप आचरण हो रहे होंगे गलतियां हो रही होंगी मगर एक निष्ठा की वजह से मुझे ऐसा लगता है कि कुछ सिद्धांत थे जो लगातार सदैव बने हुए थे और उनमें से एक सिद्धांत यह था कि जब भी जीवन में कोई भी विषय वस्तु स्थिति व्यक्ति आपको गलत लगे तो मैं इस तरह से सोचता था मन में और अपने मित्रों को कहता भी था साथ वालों को कि जब भी आप कोई विषय वस्तु स्थिति या व्यक्ति गलत लग रहा है ऐसा आपको लग रहा है कि गलत है तो सबसे पहले आप उसके लॉयर बन जाइए आप लॉयर बन जाइए
00:21:43:20 और एक मिनट बस उसके आप लॉयर बनिए और यह सोचिए कि वह आपका क्लाइंट है आप न्यायालय में खड़े हुए हैं आपको उसकी उसका जो है केस लड़ना है आपको उसको बचाना है उस पर केस चल रहा है और वही सारे दोष है जो आप अभी देख रहे थे उसमें दोष अब आप यह सोचिए कि क्या कोई ऐसा रास्ता है जिससे वह बच सकता है और जब उसके एक निष्ठावान एक क्या कहते हैं पक्षपात विहीन और न्याय प्रिय लॉयर जो कोई भी धोखा नहीं दे रहा अपने क्लाइंट को ऐसे लॉयर बनते हुए जब आपको एक भी रास्ता ना मिले ना उसे बचाने का तब समझना कि वह दोषी है वरना तब तक किसी को दोषी नहीं स्वीकार करना चाहिए सबसे पहले जब भी किसी पर किसी में दोष दृष्टि आए तो आप यह सोचो वो आपका भाई है वह आपका बेटा है वो आपका पिता है इस दृष्टि से जब उसको देखो और सोचो कि मैं क्या क्या आंकड़े लगा सकता हूं कौन-कौन से तर्क दे सकता हूं कि यह जो दो मुझे
00:22:58:25 इसमें दिख रहा है यह जो है निर्दोष सिद्ध हो सके और जब ऐसा कोई रास्ता ना मिले उसके बाद हमें किसी में दोष देखना चाहिए बिल्कुल तो इस तरह के कुछ छोटे मोटे छोटे मोटे ऐसे कुछ सिद्धांत रहे जीवन में जिनके कारण जो प्रभु श्री राम के जो सानिध्य था माता-पिता का आशीर्वाद तो जिनके कारण यह गुरु कृपा इत्यादि जो है प्राप्त हुई मगर बात वही है कि इस तरह से पक्षपात विहीन दृष्टिकोण आज उन लोगों के पास भी नहीं है जो जो डंका डंका पीटते हैं इस बात का डंका बजाते कि हम बहुत बड़े सनातन प्रचार का प्रचार करने वाले हैं और ऐसे लोग जो शष्ण शता जिनके अंदर विनम्रता है आप देखिए कभी भी दम नहीं दिखता है कभी भी अ जी को कभी भी देखिए उनके अंदर कभी आपको दम नहीं दिखेगा वो बहुत बड़ी बड़ी बातें भी कह रहे होंगे तो कहो उसमें भी इतना विनम्रता दिखे कि पूछिए नहीं जैसे कभी कभी किसी बालक
00:24:13:27 से बात कर रहे हो और जबक उनका व्यक्तित्व ऐसा वैसा नहीं है भाई व चाहे तो अपने व्यक्तित्व का खूब उपयोग कर सकते अपने दम को प्रस्तुत करने में अपनी वर्चस्व सिद्ध करने में मगर उन्होंने एक वो बना के रखा है मगर भैया अनिरुद्धाचार्य जी मेरा आपसे निवेदन है कि आप अपनी सामर्थ्य को याद करिए आप कौन हैं किन गुरुओं के शिष्य हैं और किन गुरुओं की परंपरा को आप आगे बढ़ा रहे हैं सनातन परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं आप याद करिए स्मरण करिए और जागिए और कारवाई करिए यह सब जो आपके विरुद्ध हो रहा है आप चाहे तो इसको कंट्रोल कर सकते हैं और भैया के जो फॉलोअर्स है जगाए जाइए जाकर के जगाए इनको इनकी शक्तियों को भूल गए ये अपनी शक्तियां हनुमान जी की तरह इनको इनकी शक्तियां याद
00:25:16:06 दिलाए और ये जो दूसरा पहलू जो मैं आपको बता रहा था दूसरा पहलू कि भाई कोई बच्चा है वो कथावाचक बनकर बैठा है वो कथाएं सुना रहा है वो अपने हिसाब से जो मनाए वो धर्म के विषय में धर्म अधर्म सब कुछ बता दे रहा है फिर कथा वाचिका है वोह परंपरा से जुड़ी हुई है परंपरा प्राप्त लोगों से जुड़ी हुई है है ना और अवतारवाद को मानने वाली है फिर सत्यार्थ प्रकाश के साथ फोटो खिंचा आती है यह कैसा यह हिंदू हिंदू हिंदू के अंदर वो जो बाहर वाला सेकुलर हिंदू है वो तो अलग है य ये सेकुलरिज्म है भाई स्पष्ट वादी सतवादी बनो ना या तो अवतार को मान लो या मत मानो मैं तो कभी प्रमोशन नहीं कर सकता ये देखिए ना कि उनका कुछ ना कुछ तो स्वार्थ होगा कि उनको ऐसा करना पड़ रहा है स्वार्थ यही है गौतम टट्टर जी की भी फैन फॉलोइंग बहुत लंबी है हमारी भी लंबी है हम दोनों की मिल जाएगी दोनों की बढ़ जाएगी यही स्वार्थ है हां वही ना तो अब ये तो ये लेकिन रास्ता धर्म का नहीं है ना नहीं है अब इसमें ये हो गया आपके लिए प्राथमिकता क्या है हां
00:26:31:12 अपनी वो वस्ता अपना वो क्या कहते हैं फेमस होना या फिर धर्म क्या आपके लिए प्राथमिक है तो वो पता चल गया बिल्कुल जिसमें कहा जा रहा है जिस पुस्तक में लिखा है मूर्ति पूजा पाखंड है अधर्म है राम लीला देखना पाप है ये सब चीजें बताने वाली लोगों को आप साथ में खड़े होकर के उस और वो भी आप कोई आप कोई राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं है आपका कि आप वोट मांगने जा रहे हैं आपको सबको खुश करना है आपको हिंदू को खुश करना है उसमें भी उस हिंदू को खुश करना है जो मूर्ति पूजक है आपकी पहचान है इस बारे में बिल्कुल हम और तब भी आप जो है सत्यार्थ प्रकाश को लेकर के प्रमोट कर रहे हो तो ये एक मुझे वो डायलॉग याद आता है कि ना फलाने से है ना फलाने से है इस देश में तकलीफ बेईमानों से है बिल्कुल बिल्कुल
00:27:32:10 येय अब ये समस्या जब उस जगह बैठे हुए लोगों के साथ में है जब वहां से ही श शोधित नहीं होगी तो फिर नीचे जो उनके फॉलोअर्स है जो उनके ऊपर अपनी आंख उठाकर देखते हैं उनको कि इनसे हमें यह प्राप्त होगा ज्ञान प्राप्त होगा नॉलेज प्राप्त होग अंडरस्टैंडिंग प्राप्त होगी तो जब वही जो सोर्स बेस ही अगर ऐसा है जब नीव ही ऐसी है तो ऊपर खड़ा हुआ जो मकान है फिर वो तो फिर हिलेगा ही ना क्योंकि धर्म से तो वो बंधा नहीं है व मकान उसकी नीव धर्म से नहीं बंधी है उसकी नीव बंधी है कि फॉलोवर्स बढ़ जाए नाम हो जाए इन सब चीजों से इन मैटेरियलिस्टिक चीजों से तो फिर तो नीव हिलेगी हिलेगी और जब हिलेगी तो फिर ऊपर जितना बड़ा अपने जो मकान खड़ा किया है वो ढगा वो एकदम से ढगा और ढगा तो फिर सबको कष्ट होगा यह समस्या आती है तो इसलिए मेरा भी यही मानना है कि नीव हमारी वही परंपरा प्राप्त आचार ही है धर्म की और उसी पर ही हमारा जीवन जो है खड़ा होता है तो इस तरह से जो जया किशोरी जी है वह परंपरा प्राप्त आचार से प्रत्यक्ष ना जुड़ी हो मगर यदि वह पुराण पर बात कर रही है कथा सुना रही है जाकर के पौराणिक
00:28:47:25 है ना भगवान की लीलाए सुना रही है जाकर के तो इसका अर्थ है कि वो गुप्त या प्रकट रूप से कहीं ना कहीं से वो परंपरा का ज्ञान ही उसमें तोड़ मरोड़ करके उसी पर सवाल भी उठा रहे हो आपकी ये जो मिलावट कर दी है इन्होने भाई मिलावट कर द है तो जाओ ना बन जाओ समाजी एक और समाज खोल दो जया किशोरी समाज खोल दो एक और जया समाज खोल दोने अंत में नाम ले ही लिया कोशिश कर रहे थे नारायण बिल्कुल सही बात है मैं बिल्कुल सहमत हूं आपसे य यही है इस बारे में कोई अगर अपना विचार रखना चाहता हो तो भी आ सकता है एक पंकज जी है वो आना चाह रहे हैं शायद आप लिंक दे दीजिए और भाई इतना सहन मत करो कि कोई आपकी गरिमा आत्म सम्मान उसको ही कुचल करके चला जाए मैं फिर कह रहा हूं अनिरुद्धाचार्य जी को मैं बोल रहा हूं उनके फॉलोअर्स को बोल रहा हूं कि अब जाग जाइए इतना मत सोइए इतना मत सहिष्णु हो जाइए कोई आपके घर में घुसकर आपके घर की गरिमा आपके घर के जो सम्मान है उसको सबको रद के चला जाए और आप कहते रहे कि मैं जो है शष्ण हूं गुरुदेव का वचन याद
00:30:02:26 करिए गुरु भाव आप भी रखते हैं उनके प्रति सदैव कहते हैं अरे ओ अर्जुन जो उदारता तेरे अस्तित्व और आदर्श को नष्ट करने के लिए हावी हो जाए तुझ पर वोह उदारता नहीं वो कायरता होती है हृदय की शुद्र दुर्बलता होती है मुझे तो लगता है पास साधन है टीम है उनके पास टीम नहीं तो साधन तो उनके पास इतने इतने है कि वो उस बहुत अच्छा साधन है पता नहीं क्या हनुमान जी की स्थिति हो गई है कि भूल गए कि कौन है क्या है पता नहीं क्या बात है वही दो तीन दिन से ज्यादा नहीं लगेंगे कि ये जितने मेम सेम बन रहे सब लोग हिल जाएंगे मगर पता नहीं क्या बात एक से अभी एक दोय चैनल अपने आप ही जब स्ट्राइक पड़ेगी ना दो तीन तीन मिलियन फॉलोवर्स वाले चैनल है प्रेमानंद जी महारा में ब बहुत बढ़िया कार्य हुआ था इस मामले में कई य चैनल बंद हो गए और दूसरे सुधर ग हो नहीं
00:31:12:21 है इसमें मुझे वही आता है कि शायद य अपनी शक्तियां भूल के बैठे हैं तो आज मैं उनकी शक्तियां जगाने आया हूं अब जागो हे अंजनी के लाल लंका की ओर प्रस्थान करो हे भूतकाल के विकट वीर माता का पता रामपाल के वेरीफाइड चैनल ने कोई आए पंकज कटारे जी राम कोई कह रहा है कि रामपाल जी के वेरीफाइड चैनल ने कुछ कमेंट किया है चैट में एक बार देखेंगे कौन सा है चैनल बता जी क्या किया है मैं देख वही देख रहा हूं क्या एम खबर फास्ट कौन सा है चैनल बता दीजिए एक बार कमेंट्स में एमपी खबर फास्ट ये है क्या जी जय श्री राम पंकज जय श्री राम भैया जय श्री राम बताए यह बात तो आप बिल्कुल सही कह रहे हैं कि प्रेमानंद जी महाराज की जो आप कह रहे थे और उस पर इतनी जल्दी एक्शन लिया गया [संगीत] और आपकी आवाज चली गई है नेट
00:32:27:28 नहीं आ रहा शायद आप जहां पर है मैं मीनवाइल एक बार पताका कमेंट पंकज जी आपकी आवाज कट रही है मैं कह रहा हूं कि एमपी खबर फास्ट नाम का एक वेरीफाइड चैनल है रामपाल जी का वो लिख रहे हैं कि मूर्ति पूजा का विरोध किया है सा सात में भले मूर्ति पूजा का विरोध किया है भले प्राणी रामायण में लिखा है कलयुग योग ना यज्ञ ना ज्ञान एक आधार नाम गुण गना ये रामायण में कहां लिखा है रामायण तो संस्कृत में है जहां तक मेरा ज्ञान है अरे इनको बाद में देख इनके अपने अल इनके अपने अलग चला करते सारे जो प्रोटोकॉल्स है अरे मैं एक बात कह रहा हूं जो मूर्ति पूजा का वेदों द्वारा मूर्ति पूजा का विरोध करते हैं मैं उनसे एक बात कह रहा हूं कि जो जिसके द्वारा मूर्ति पूजा वैदिक मूर्ति पूजा का विरोध शुरू हुआ वो है जनक उसका है आर्य समाज ठीक है अब आर्य समाज ने क्या किया है कि जहां जहां पर भगवान के आकार स्वरूप के संदर्भ में बातें हुई है वेदों में मंत्र आए हैं जब तो वहां पर आर्य समाज ने कह दिया कि फलाना
00:33:43:06 अलंकार है यहां पर वास्तव में यहां पर रूप की बात नहीं हो रही है इसीलिए हम लोग अलंकार समाज कहते हैं उन्ह मगर मैं एक बात कह रहा हूं भैया कि ठीक है वहां पर वास्तविकता कुछ और है मगर बात तो हुई ना हुई ना तो समझ लो तुम्हारे जो भाई है मूर्ति पूजा के अलंकार वाली पूजा कर रहे हैं अपमान तो मत करो ना भाई वेदों ने भी वो बात की ना अलंकार के अलंकार के माध्यम से ही सही वेदों ने बात तो की ना वो तो उतने इसलिए कम से कम यह जो द द्वैत अद्वैत वाला जो मामला है ना इसमें आचार्य गण एक दूसरे का सम्मान क्यों करते हैं क्यों करते हैं सम्मान सब लोगों के हिसाब से सामने वाले का जो सिद्धांत वो अंतिम सत्य नहीं है हमारा वाला अंतिम सत्य है मगर सम्मान क्यों करते हैं इसी बात को रखने के लिए कि यह जो धारणा बोल रहा है इस धारणा को वेद में लिख दिया गया है भले ही किसी और सत्यता के रूप में दिया गया हो इसलिए एक दूसरे का सम्मान है कि इसकी वेदों में प्रमाण बुद्धि है मगर आपके हिसाब से आपने वो एक अलग मैटर है वो अलंकार है कि नहीं है ईश्वर को आवश्यकता क्या अलंकार लगाने की जब ईश्वर को आवश्यकता
00:34:58:10 नहीं है अवतार लेने की तो अलंकार लगाने की क्या आवश्यकता है वो सब एक अलग बात मगर अलंकार के रूप में ही सही मूर्ति पूजा स्वरूप का वर्णन है तो आपके ही अनुसार बात कर रहा हूं अरे तो भाई जब कोई कर रहा है तो अपमान तो मत करो उसको समझाओ थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा बस अपने हिसाब से अपमान तो ना करो ईश्वर के स्वरूप का वर्णन करने वालों का क्योंकि अगर आप उनका अपमान करोगे तो इन अलंकार को लगाने वाले का भी अपमान है जिसने ये बात की बकुल अलंकार लगाने के रूप में आपके अनुसार फिलहाल दुर्जन तोष न आय मैंने स्वीकार नहीं कर लिया कि वेदों में मूर्ति पूजा नहीं है तो अगर इस भाव से अपमान हो रहा है अ अलंकार लगाने वाले का तो वेद का अपमान हो गया का अपमान वेदों ने अलंकार के रूप में सही मूर्ति का स्वरूप का वर्णन तो किया बिल्कुल आपके अनुसार अगर मान ले तब जी पंकज कटारी जी जी भैया जय श्री राम मैं मीडिया की बात करें आपने भी वो चीज बता ही दी थी और इसमें जो तंत्र की बात है कि तंत्र कितना भी मजबूत क्यों ना हो आपके पास भी हर संसाधन है अगर संघ बल की बात करें जनसंख्या की बात करें और अपनी आम
00:36:13:13 भाषा में अगर फॉलोअर्स की बात करें तो भारत में अगर केवल धर्म के प्रचार के लिए और कथावाचक के रूप में आपके पास में इतना बड़ा संघ बल है और आपके पास इतनी बड़ी टीम है जो हमेशा एक्टिव रहती है लेकिन इस मामले में जो है क्यों नहीं आगे आ रहे कारण पता नहीं है और इसके लिए जब तक आप आगे नहीं आएंगे यह तो 24 घंटे का मामला है आप इसको 24 घंटे में खत्म कर सकते हमारे पास इतनी ताकत है हमें यहां बोलना क्यों पड़ रहा है क्योंकि आप कुछ नहीं कर रहे हम आपके साथ इसीलिए तो खड़े हैं यह बात आपको समझनी पड़ेगी महाराज जी जी बिल्कुल सही संसाधन है और अगर इसमें बात करें कि देखो बाम पंथ मैंने आपको उदाहरण दिया कि ब्रेन वश कैसे किस तरीके से जैसे पंडित जी ने बोला कि उनको इस तरीके से बोला जाता मैं आपको एक उदाहरण समझा देता हूं बहुत पुराना उदाहरण है कि जब कोलगेट इस भारत में लंच किया गया था तो वहां पर
00:37:11:20 एक प जी आवाज कट गई आपकी पंकज जी आवाज फिर से चली गई कोल गट लच से हम लोग दोबारा बात करेंगे शुभम जी आए हैं कोई शुभम जी आप अपना चेहरा रिवील करें जी शुभम जी जय श्री राम आवाज नहीं आ रही
00:37:43:12 आपकी आवाज नहीं आ रही है आप शुभम जी एक बार जाके दोबारा आइए हां हेलो जी बोलिए जय श्री राम जय श्री राम भैया जय श्री राम मैं इस तरह से कह रहा था कि यह जो मूर्ति पूजा है और मूर्ति पूजा और आदि अभी अभ्यासक्रम ही उस तर से डिजाइन किया जा रहा है हम जो सोशल साइंस पढ़ते थे मैं की बात कर रहा हूं मैं एक स्टूडेंट हूं अभी तो सीए की पढ़ाई कर रहा हूं पर जब हम सोशल साइंस पढ़ते जिन लोगों ने भारत में मूर्तियों का खंडन किया है और ऐसे लोग का इतिहास पढ़ाया जा रहा है ना और जगतगुरु शंकराचार्य और आदि जितने भी
00:38:46:24 वैष्णवास्त्र ही नहीं है यह तो बहुत बुरी बात है मैं खुद भी सा माहौल रहा कि जिससे सब से बच सका हम हमार संध्या वंदन आद से हम पोषित हो यज्ञ के बाद वरना हम भी इस तरह से बह जाते और आज का जो युद्ध है जो हम हम पढ़ रहे हैं मैं कॉलेज खुद जाता हूं तो मैं लोगों को देखता हूं ये जिस तरह से अनुर चार्य जी की बात है तो उनके सामने तो ने कॉमेडी इतने बन रहे हैं और इस तरह से धर्म का पूरा मजाक उड़ाया जा रहा है कि हम खुद सहन नहीं कर सकते हम कहते हैं कि भाई आप फॉलो करो इनको कोई बात नहीं मगर एक बार शंकराचार्य जी की भी बात मान लो उनको भी वीडियो देख लो तो आपको धर्म यथारूप मिलेगा उनकी वाणी में से प्रवाहित होता रहेगा और आपको जो जो ज्ञान है वह प्राप्त होगा और उससे आप धर्म में पुन आप वापस से एंटर कर सकोगे वरना इस तरह से तो कुछ समय में भारत के जितने भी युवा है वह सबके लिए तो अध्यात्म तो एक मजाक ही बन जाएगा मुझे ऐसा लग रहा है एक आधुनिक ओ आए इस समय जो तीव्रता से सबका बने हुए हैं और जो मनाए वो बक रहे हैं अपने मंच से आधुनिक
00:40:03:03 न अब वो क्या कर रहे हैं अपने आपको अवती बताते हैं मगर है ओशो वादी आचरण से ओशो है और बताते हैं हम अद्वैत है शंकराचार्य वाले हैं उनका उनका यय जो पूरी की पूरी टीम है ना कहीं ना कहीं यह दिखा रही है कि मैं सनातन की रक्षक हूं मैं हिंदुत्व की बात करती हूं मगर सबसे बड़ा जहर हिंदुत्व के लिए यही लोग है सबसे घातक जहर ये जो ये जो टोली बना बना के अपने साथ में ले जा रहे हैं जन समाज को इसी के कारण तो आज हम लोग एकत्रित नहीं है संगठित नहीं है ये साहब का एक मैंने वीडियो देखा उसमें इतनी कुतर्क भरी बातें करते हो व लोग वहां पर वावा वावा भी करते हैं उनके उनके जो फॉलोअर्स है वो गाना गा रहे हैं जा जा जात मेरी ब्रह्म और गोत्र मेरा नहीं जात मेरी जीव और गोत्र मेरा ब्रह्म ऐसे करके गाना गा रहे हैं हा गिटार बजा के ये कहा मुझे भी देखना है कल देखा था मैंने ा पर उन्होंने डाला था व जो है ना युगल किशोर शर्मा जी
00:41:18:04 भगवत वचन वाले उन्होंने डाला था तो शुभम जी अभी अभी मैं लेता हूं आपसे दोबारा बात करता हूं कोई आ गए शायद पंकज जी आ गए जी पंकज जी एक मिनट में बस बात कर जी जी बात पूरी कर लू तो वो उसम बता रहे हैं मूर्ति वाले मामले में की मूर्ति इसलिए है अब देखो जब जब कोई इंटेलेक्चुअल पर्सन थोड़ा बहुत भी होगा ना तो इनकी हर बात को काउंटर किया जा सकता है
00:41:58:06 अभिनव जी आवाज आ रही है म्यूट कर दीजिए अपने आप अभिनव जी क्या की केवल ये वो वाली बात होती है हा केवल केवल वह बात होती है थोड़ी देर म्यूट कर दीजिए ना अभिनव जी को केवल वो बात होती है मैं जब छोटा था तो मैं अपने मित्रों के साथ शरारत करता था वो शरारत क्या होती थी कि जैसे कभी-कभी कोई मित्र आया तो वह बैठा मेरे पास तो मैंने यूं ही उसकी टांग खींचने के लिए मैंने क्या किया मैंने उससे बोला कि तुम हंसते तो हो मगर तुम्हारी हंसी खोखली है तुम्हें लोगों ने तुम्हें लोगों ने सारा जीवन बहुत धोखा दिया है तुम बहुत तुम तुमने सबके साथ वफा की और सबने तुम्हारे साथ दगा किया है जब मैं ऐसा बोल दू तो वो मित्र मेरा बिल्कुल कायल हो जाए अरे आपने कैसी बात बोल दी शिवांश भाई इतनी आपको कैसे पता चला भाई ये
00:43:13:07 एक जनरल बात है हर कोई व्यक्ति अपने आप को विक्टिम मानता है ह हर दूसरा व्यक्ति अपने आप को विक्टिम मानता है मानता है एक जनरल नॉलेज है और मैंने वही जनरल नॉलेज एक भाव पूर्ण तरीके से चिपका दी सामने वाला मेरा अनुगामी हो गया इस ढर्रे पर चलने वाले हैं यह लोग होशो वादी यह तथाकथित आचार्य प्रशांत वादी इस डरने पर ऐसी बातें बोलो जिससे व्यक्ति अरे यह तो बिल्कुल वही बोल रहा है जो मेरे साथ बीतता है भाई तुझे पता था वह बात उसने वही बात अच्छे तरीके से तेरे सामने पेश कर दी जैसे फेमिनिज्म वाली बातें
00:43:54:06 कि यह सब जो वो अपने घर से जाएगी स्त्रियों का ऐसा होना चाहिए कि उनका जो वही निकाल दिया जाए वो पार्ट निकाल दिया जाए मैं साइंस से एक वो कहूं अब साइंस से मैं इतना निवेदन करूंगा कि वो एक काम करे कि जो नारियां है उनका जो संतान को जन्म देने वाला हिस्सा है उसको बाहर निकाल दे अब नारियां खुश ये कितना अच्छी बातें कर रहा है मेरे लिए तो ये क्या है आपके पास ओरिजिनल चीजें तो है नहीं देने के लिए तो आपने कुछ ऐसी चीजें उठाई जो आपको पता है जन समाज को पता जैसे कभी-कभी कुछ ऐसे लोग भी फकीर टाइप के मिल जाएंगे जो धुआ हुआ लेकर के चलते हैं और जा बच्चा जा तेरा ये हो रहा है तेरा नुकसान हो रहा है तो व्यक्ति तुरंत कनेक्ट हो जाता है क्योंकि वो जनरल बात है उससे तुरंत व्यक्ति कनेक्ट होता है और उसी को थोड़ा सा वाक पटता वाला व्यक्ति हो सजा करके अगर बोल दे तो सामने वाला व्यक्ति बस उसम लट्टू हो जाता है तो यह जितने भी है आधुनिक ये जो नए ओशो है पुराने ओो ओो के पास क्या था यही था ओो भी करते थे ऐसी बातें बोलो जिससे जो व्यक्ति को पता है उसके साथ क्या हो रहा है समाज में क्या हो रहा है उसी को ऐसे बोलो अरे यह तो मेरी बात करने वाला है और वह इस चक्कर में कि उसने मेरी
00:45:09:07 बात की वो उसका फॉलोअर बन गया अब वो उसकी बातों को प्रमाण मानने लगेगा अगली बात है वो उसकी सही है या गलत है डजन मैटर उसने मेरी बात कर दी मेरे दुख की बात कर दी मेरे दुख को ग्लोरिफाई कर दिया अच्छे से बस अब ये मैं इसको जो फॉलो करूंगा तो ये जो प्रशांत है ये क्या बोल रहे हैं कि भाई मूर्ति इसलिए है कि मूर्ति के मूर्ति के बाद आप अमूर्त में जा सको ठीक है मगर वह व्यवहार नहीं है अमूर्त जो है व्यवहार नहीं है व्यवहार का विषय नहीं है अब वो कह रहे हैं कि सब जगह शिव है सब जगह शिव है तो मैं यह प्रशांत जी से ही पूछूंगा वहीं पर खड़ा हंगा सब जगह सेव सम दृष्टि वाला आप बन जाओ माता बहन पनी में समद ले आओगे क्या खत्म मगर वहां कोई पूछता ही नहीं है कुछ समय पहले ऐसी फिल्में आने लगी थी पहले बहुत पहले जो यह चलचित्र आते थे मनोरंजन के लिए तो उसमें थोड़ा सा ऐसे ऐसा मजाक होता था कि हसी आए पहले जो कॉमेडी फिल्में आप देखो तो उनमें ऐसा मजाक होता था कि आपको हंसी आए मगर उसके बाद अभी मैंने एक दौर देखा
00:46:24:18 जिसमें की हंसी नहीं आ रही है मर जबरदस्ती लोग हंस रहे हैं थिएटर में बैठ कर के तो यह जो इनकी बातें होती है ना ये ऐसे ही कुतर्क होते हैं और वहां पर इनको फॉलो करने वाले ऐसे हा हा वाह वाह क्या बात कही है चारों तरफ से मूर्त से मुहूर्त में जाने के लिए ये वो कुतर्क है और कुछ नहीं हैय वही की वही एक व्यक्ति क्वेश्चन कर दे खड़ा हुआ भैया ये ऐसे है आप कह रहे हो समय शिव है तो क्या हम लोग ऐसा व्यवहार शुरू कर दे क्या करोगे आप क्या करते हो अपने घर में जाकर के माता बहनों पत्नी में समदिन हो कि नहीं रखते हो जब तक आपको यह व्यवहारिक जीवन प्राप्त है व्यवहारिक देह प्राप्त है भौतिकता प्राप्त है तब तक आपको भेद का निर्वाह करना है द्वैत का निर्वाह करना है अद्वैत आपका व्यवहारिक विषय नहीं है जानने का विषय जरूर है मगर उस पर चलने का विषय नहीं है तो वो भाई साहब केवल बड़ी-बड़ी बातें वही वाली बात कि तुम्हारे चेहरे पर जो हंसी है झूठी खोखली अब व्यक्ति तुरंत मोशनल हो गया बस मैं इसका मैं इसका फॉलोअर आज से इसने तो ऐसी बात कह दी जो किसी ने नहीं कही आज तक जी जी प्रशांत
00:47:40:08 जी पंकज जी बता रहे थे पले वो पूरी कर लीजिए हा कोलगेट वाली बात आपकी अधूरी थी मैं वही कह रहा था ना कि ब्रेन वस किस तरीके से किया जाता है कि कोलगेट जो है हमारी मातृ शक्ति को किस तरीके से उसम दिखाया गया मैंने बहुत एक वो एक सटीक उदाहरण है समझाने के लिए कि सांसों की बदबू दातो की सड़न कि जो है ना कि महिला और पुरुष जो है मातृ शक्ति जो वो पीछे आगे जा रहा है कि जब तक आप कोलगेट नहीं करोगे आप मेरे पास नहीं आ सकते मतलब इस गंदे तरीके से यहां से शुरुआत हो चुकी है वामपंथ ने इतना जो है गंदा वो किया हुआ है और इस तरीके से जो ब्राह्मण जो प्रचार हो रहे हैं कि हमारे मतलब कि हमारे जो देवी देवताओं के जो चित्र है वो किस तरीके से जो है चिपकाए जा रहे हैं उस पर बहुत सारे एक्शंस के लिए कारवाही बहुत सारे संगठन कर रहे हैं और हम सभी भी लोग बोलते हैं सब कुछ करते हैं लेकिन इसमें एक बात और समझने वाली है कि ब्रेन वॉश इस तरीके से किया जाता है जैसे मैं एक शब्द का नाम और लूंगा जो नाम है मैडम इतना घृणित और इतना घटिया शब्द है वो जो आजकल की जो है मातृ शक्ति के लिए बोलना नहीं चाहिए लेकिन उनको यह बुलवाने में मतलब गर्व महसूस होता है पहले उस शब्द का जो है
00:48:55:10 आप अनजाने में कोई चीज बलवा रहे हो समझ में आता है लेकिन आप बड़े बोलते हो अरे मेरे से कई लोगों ने पूछा अच्छा ये हमारी बहन को मात जो हमारी बहन है उनको मैडम बोल रहे पहले बहन का मतलब तो सोचो कि वो आया कहां से यूरोप से आया है वो शब्द जहां पर जो है परस्त्री गमन और परव पुरुष गमन होता है मिस्टर और मिसेस जो है ना आप बड़े गर्व के साथ बोलते शी इज माय मिसेस तब मैं उनसे कहता हूं रियली सी इज योर मिसेस तो इतना मतलब इस तरीके से ब्रेन वश किया गया है और जे नए आधुनिक वषों की आप बात कर रहे थे ना यहां पर ये तालियां जो बसती है ना उनको इस तरीके से बोला जाता है कि म मैडम पहले मादाम का पूरा मतलब समझ लो क्या सारी स्त्रियां आपकी है तो इतनी सारी चीजें जो है इस तरीके से हमारे छोटे-छोटे बच्चों के अंदर टेलीविजन के द्वारा ओटीटी के द्वारा इस तरीके से घुसाया जा रहा है वामपंथ के द्वारा और भैया अभी हमें जो है काम करने की ये हमें उनसे सीखने की आवश्यकता है कि वो जिस तरीके से काम कर रहे हैं हमें उसी तरीके से काम करना होगा संगठित तो हमें होना ही है लेकिन हमें
00:50:06:06 वो पंकज जी फिर आपकी आवाज चली गई जी श्रीम एक क्वेश्चन है मेरा आपसे पंत जी आपने जो आप बात कर रहे सही है लेकिन आज हम के परिपेक्ष में देखें कि हमारे घर के आसपास अभी नवरात्र का समय गया तो भगवती की पूजा के लिए पंडाल लगाए जाते हैं सब किए जाते हैं लेकिन उसी पंडाल के पीछे व्यक्ति क्या कर रहा है नशे कर रहा है मादक पदार्थों का सेवन कर रहा है और आगे भगवती की पूजा करता है मेरे घर से कुछ दूरी पर भगवान शिव राधा कृष्ण के रूप में उनको नचाया जा रहा है वो परम पिता परमेश्वर की सुनो गणेश की मम्मी ऐसे गानों पर नचाया जा रहा है और लोग क्या बोलते हैं कि चलो इससे धर्म का ही कार्य हो रहा है तो हमें इसके बारे में नहीं बोलना चाहिए
00:50:57:12 इस मैं इसका आपको उत्तर दूंगा पंकज जी की बात पूरी हो जाए जो आप बात कर रहे थे वो आप पूरी कर लीजिए जी जी मैं मैं इसका भी उत्तर भैया भी दे देंगे मैं भी दे देता हूं नवरात्रि के ही दिनों की बात है ठीक है अब अभी मैं शरीर पर दिखा नहीं सकता हूं करीबन 40 से 50 लोगों ने मेरे ऊपर लट मारे और मैंने वहां विरोध किया था वहां पर अकेले जाकर खड़ा हुआ था कि यहां पर जो है ना कि यह जलेबी बाई वाले गाने जो हैय हमारी मां भगवती बैठी हु इस तरीके से आप ये चला रहे हैं ना ये केवल और केवल जो है ना हिंदू धर्म ही मज बन रहा हा आप मुसलमानों
00:51:34:25 होहा एक मिनट पंकज जी ऐसा नहीं है अभी मैं छत्तीसगढ़ रायपुर में था सुबह सुबह मैं निकल रहा था सतलोक आश्रम के लिए छापा मारी जा मैं जा रहा था वहां पर सतलोक आश्रम तो वहां पर सुब डीजे डीजे डीजे डीजे डीजे उस दिन कुछ था इनका अभी निकट की बात है उस दिन इनका कुछ था तो उस दिन वहां पर हम लोग यही देख रहे देखो यह जो कहा जाता है ना कि हमारे ही यहां ऐसा होता है ऐसा नहीं है होता हूं दूसरी जगह भी है मगर उठाया केवल हमारे को जाता है कि हिंदू बेवकूफ है हिंदू धर्म ऐसा है उसको मानने वाले ऐसे हैं जिससे कि हम अपने ही धर्म को लेकर के अपने समाज को लेकर के इफरिट
00:52:20:01 कॉम्प्लेक्शन में नहीं है ठोस उसके पास सिद्धांत नहीं है वो कहीं ना कहीं उससे ऐसी चीजें होंगी और दूसरे यहां भी होती है ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि हम अपने लिए इरिटी नहीं लानी वो भी करते हैं डीजे डीजे डीजे इस तरह चल रहा था उनका टेपो क्या ही रहते ज्यादातर उसकी बात अभी निकट भविष्य में क्या अभी निकट में कुछ निकल के गया इस्लाम मानने वालों का कोई त्यौहार था क्या था वो हां मोहर्रम मोहर्रम था एक हफ्ते पहले मोहम्मद जी का जन्मदिन था उस दिन ूब हमा मैं भोपाल से हं तो हमारे सिटी में सब मनाते कुछ रहा होगा और इस्लाम के अनुसार व नाच गाना वगैरा हरा वो कर रहे हैं मगर वो कर रहे हैं ठीक है तो ऐसा नहीं है कि उनके य नहीं होता है मगर हम इन चीजों को हमारे को इरिटी
00:53:28:28 जो जाति व्यवस्था को लेके होता है मेरा एक दोस्त है वो शुक्रवार को नवाज पढ़ने जाता है तो दूसरे मुसलमानों की मस्जिदों में नहीं जाता जो स्पेशली असाइन है उसकी जाति या जो भी है वो उसी में जाता है और उनको वहां से भगा दिया जाता है अग वो दूसरी जगह जाए लेकिन आज हमारे य हम तो मंदिर में सबको आने देते हैं वो बोलता है फिर भाई हमारे में तो ऐसा ही होता है देखिए ऐसा है इसमें ये वाली बात है जो आपने चीजें कही है अभी इसमें यह वाली बात है कि दो ठोस उत्तर में दूंगा जैसे आपने कहा कि पंडाल लगा है उसके पीछे कुछ हो रहा है तो सबसे पहली बात है कि यदि कोई बेटा अपने पिता से छुपकर सिगरेट पी रहा है तो हम यह दोष पिता को नहीं दे सकते कि पिता ने उसको सिगरेट पीना सिखाया है वो उसका दोष है जैसे मैं एक बार प्रचार कर रहा था य आवान की क्लासेस के पर्चे बाट रहा था और पता है मैं कैसे कर रहा था प्रचार बीच चौराहे पर माइक लेकर के मंदिर था पास में मैं कह रहा था कि आप आपके बच्चों का धर्म परिवर्तन करा दिया जाता है यह पोर्टेबल एक स्पीकर था मेरे हाथ में अकेला और मैं ऐसे मा
00:54:43:28 पर बोल रहा था मैं कि आपके बच्चों का धर्म परिवर्तन करा दिया जाता आप लोग साप्ताहिक क्लास में अपने बच्चों को भेजे न युवक आए तो उस समय एक कोई ब्रेन वश कोई बौद्ध मत को अपना चुका ऐसा हमारा भटका हुआ हिंदू वो आया और वह आकर के बोलता है कि भाई क्या हिंदू धर्म को क्यों बचा रहे हो उसम भी तो बहुत सी बुराइयां है मैंने मेरा तुरंत दूसरा वाला पाठ चालू हो जाता है जैसे ही जैसे ही कोई अटैकिंग आक्रमण करने आता है तो फिर खून की गति थोड़ा दूसरे तरीके से बहने लगती तो मैंने तुरंत उसको एक सीधा हिंदू धर्म में एक कण के बराबर भी कोई बुराई नहीं है तो उसको यह चीज अहंकार लगी अच्छा कोई बुराई नहीं है तो उसने मुझे दो चीज गिना दी प्रथा और दहेज मैंने कहा कहां लिखा है द लो कहां लिखा है कि सती को जला दो यह धर्म यह धर्म शास्त्रों ने नहीं कहा है य व्यक्ति अपने मन से कर रहा है और जो धर्मशास्त्रों ने कहा है वह उपहार के रूप में कहा है कि जब पिता अपनी बेटी को विदा कर करता है तो व स्वरूप कुछ देता है मगर उसको दबाब के रूप में
00:55:59:00 उपयोग करना गलत है और मान नहीं सकते जी हा दबाब नहीं डालना चाहिए और दवाब डालने को मना किया गया मनुस्मृति के अनुसार मना किया गया जो लोग अपने पुत्र का विवाह धन के लालच में करते हैं वो लोग पाप करते हैं उसको निषेध किया गया उसको तो द का खंडन हो गया तो यदि कोई ल अब पहली बात तो ये हो गई कि ये दोष हम इसको नहीं दे सकते दूसरी बात ये है कि अगर इस तरह की चीजें हम लोग देख रहे हो रही है तो इसमें यह बनता है कि जैसे हम परचून की दुकानों पर जाते हैं परचून की दुकानों पर भी भ्रष्ट होती है यह देखिए पुरी शंकराचार्य जी का उत्तर मैं आपको ज्यादातर यह कहा करता हूं कि अपने धर्म पर उठने वाले किसी भी प्रकार के संशय के लिए संशय को कभी मन में ना रहने दे पहली बात आपको कोई भी संशय है उसको लिख लीजिए एक नोटबुक बनाइए संशय संशय नाम लिख दीजिए उस नोटबुक का उस नोटबुक में जब भी कोई संशय आया करे उसको लिख दिया करिए और फिर सबसे पहले संशय का निराकरण कैसे ढूंढेंगे अपना संशय लिख दिया पूरी शंकराचार्य ज्यादातर
00:57:14:20 उम्मीद है ज्यादा से ज्यादा संभावना है कि आपका उत्तर आ जाएगा नहीं है तो हमें भेजिए हम उसका निराकरण और पता है क्या है जब आप संशय लिख लेते हैं तो बहुत ज्यादा चांस हो जाते हैं कि उस संशय का निराकरण आपको स्वतः मिल जाए क्लेरिटी आ जाती है लिखने में हां अपने ही मेहनत से चिंतन मनन करके मिल जाता है काफी बार तो और क्या जो गणेश पंडाल और इसका शास्त्रीय पक्ष है कुछ जो बैठ मैं एक बात पूरी कर लू तीन पॉइंट्स थे हा तो जो हम कह रहे हैं कि भाई पंडाल लगा उसके पीछे ऐसा ऐसा हो रहा है पहली बात तो धर्म नहीं सिखाता कि ऐसा करो मगर लोग कर रहे हैं ऐसा दूसरी बात ये है कि डॉक्टर है हॉस्पिटल है दुनिया में हॉस्पिटल में भी भ्रष्टा आचरण होता है मेडिकल साइंस नहीं सिखाती मगर भ्रष्ट आचरण होता है तो क्या व्यक्ति हॉस्पिटल जाना बंद कर देगा नहीं पुलिस स्टेशन में भी भ्रष्टा आचरण होता है तो क्या व्यक्ति पुलिस स्टेशन जाना छोड़ देगा नहीं परचून की दुकान प भी भ्रष्टा आचरण होता है तो क्या व्यक्ति सभी परचून की दुकान जाना बंद कर देगा नहीं मगर इस बहाने से लोग मंदिरों से किनारा
00:58:29:28 क्यों कर लेते हैं कि वहां तो पंडित ऐसा कर रहा था या उस पंडाल के पीछे ऐसा हो रहा था क्यों कर पाते हैं क्योंकि वह जो वहां से मिलने वाला जो फल है ना वह अप्रत्यक्ष है अव्यक्त है वो फल इस वजह से निष्ठा ना होने के कारण आस्था का अभाव होने के कारण व्यक्ति को आसान होता है कि मैं तो वैसे ही मजबूरी में आया था य मुझे कारण मिल गया ना जाने का अब क्या जाना पर की दुकान पर झक मार के दोबारा जाएंगे अरे उस पर नहीं जाएंगे तो दूसरी पर जाएंगे मगर ऐसे लोग आपको मिल जाएंगे जो मंदिर एक मंदिर में किसी में भ्रष्टा आचरण हो गया मंदिर जाना ही बंद कर दिया एक संत का नाम खराब हो गया संतो की ओर देखना बंद कर दिया य गलत बात है एक ही लकड़ी से शेर और बकरी को थोड़ी ना आग दोगे भाई जैसे आपकी एक बेसिक नीड है परचून की दुकान पर जाना पुलिस पुलिस स्टेशन जाना आपको समझना होगा कि आपकी बेसिक नीड है धर्म मंदिर संत तो अगर कहीं से कुछ हो गया है उसको शोधन करिए पता करिए कौन सा सही संत है कौन सा सही मंदिर है उसम ढूंढ उसम जाइए ये इसका निराकरण है और इसी के लिए प्रामाणिक संतों का प्रचार बहुत आवश्यक है प्रामाणिक संतो की नियमावली है चार पांच पॉइंट है वो रटा दो सबको और देखिए
00:59:45:12 व्यक्ति प्रामाणिक संतो के पास जाएगा उसको कभी धोखा नहीं मिलेगा प्रामाणिक संतो के पास जाइए संत को संत के रूप में स्वीकार तब करिए जब उस पर प्रामाणिक जो नियमावली है शास्त्रों द्वारा बताई गई वो उसमें क्या कहते उस कसौटी पर खरे उतर जाए तो ये हो हा तो ये एक चीज होती है कि हमें ऐसे इस इस आधार पर के अरे पंडाल के पीछे ये हो रहा है हमें इस दृष्टिकोण को नहीं बनाना चाहिए कि नहीं हम किनारा उसका शोधन करिए जैसे मान लीजिए आज एक पंक्ति बहुत आती ज जब हम कहते वर्ण अवस्था तो कहा जाता है मुझसे सवाल किया जाता है वर्ण व्यवस्था की वजह से ही आजकल सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन हो रहा है ये एक बहुत साधारण सी बात कही जाती है तो इसका जवाब क्या है आज आप वर्ण व्यवस्था को छोड़ दो ठीक है कोई बात नहीं आज आप यह यह पंडित लोकी जी ने परंपरा प्राप्त आचार्य का विवरण दिया है यह
01:00:52:09 आपको जो यह आपको वो नियम है जिनसे आपको किसी को भी संत के रूप में गुरु के रूप में स्वीकार करना है तो वर्ण व्यवस्था के ऊपर लोग कटाक्ष करते वर्ण व्यवस्था जो है वो उसके कारण धन परिवर्तन हो रहा है उसके कारण कश्चन बन रहे हैं भाई आज आप धर्म आज आपने एक धार्मिक सीमा है जो हटा दी ठीक है जो मनुष्य है उसके मूल में भौतिकी होने के कारण उसका जो मेन उद्देश्य है व कंपशन है वो दूसरी चीज के लिए जाएगा फिर आज आपने एक मर्यादा हटा दी वर्ण व्यवस्था की अगले दिन उसको ये करना है मुझे चाचा की लड़कियों से विवाह करना है अब उसको भी हटाओ फिर आपका कल वक्तव्य ये आएगा कि चचेरी बहनों से शादी ना होने देने के कारण विस्थापन हो रहा है तो फिर भैया उसको भी हटा देना फिर और एक मर्यादा हटाना फिर बढ़ता जाएगा वो क्योंकि मनुष्य तो उसका तो मेन जो वो है वो कंजप्शन में है और धर्म का लगाम उसकी उस कंजप्शन प लगाम धर्म मर्यादा तो आप अपनी वो नहीं कि वो बाढ़ आ गई है तो दो इंच और दो इंच और
01:02:07:12 बाढ़ का पानी खतरे के निशान तक आ गया तो क्या करें खतरे का निशान और दो इंच ब दो कान और ये नहीं आवश्यकता है वर्ण व्यवस्था का जो सही स्वरूप है जो सही शिक्षा है वो लोगों तक पहुंचा है जो एक भ्रम डाल दिया गया है वर्ण व्यवस्था के नाम पर ऊंच नीच का व है घणा मूलक वर्ण व्यवस्था को घणा मूलक बता दिया गया है उसको दूर करना है और लोगों को बताना है कि वर्ण व्यवस्था गणा मूलक नहीं व्यवस्था मूलक है है ना तो यह
01:02:47:26 है जी अभिनव जी बोलिए नहीं मैं आपसे यही पूछ था कि जो पंडाल जो लगते हैं ये तो लो बाल गंगाधर तिलक जी ने चालू किया था मुंबई में गणेश पंडाल से तो इसका कोई शास्त्रीय पक्ष है कि इसको रखना चाहिए कि नहीं जैसे सड़को जो हम देखते हैं म मेंा कर देखिए इसका ये है हो सकता है शास्त्रीय पक्ष हो भी वस्तु प्रश्न है हो सकता है हो भी हो सकता है ना भी हो मगर बात ये है अगर हम किसी वैदिक मर्यादा का उल्लंघन ना करते हुए किसी धर्म की मर्यादा का उल्लंघन करते हुए अपने भगवान का समारोप बना भी रहे हैं तो उससे कोई आपत्ति नहीं है भाई पंडाल लग रहा है जब राम जी ब्या के सीता माता को ला रहे हैं तब क्या हुआ था हाथी खड़े हैं दुदम भी बज रही है पूरा सड़क सजा दी गई ये भी तो वही है वही चीज तो है सड़कों पर उतर आए लोग त्यौहार मनाने के लिए तो उसका दूसरा अगर मर्यादा का उल्लंघन नहीं हो रहा है व्यवस्था का उल्लंघन नहीं हो रहा है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है कि इस तरह का समारोह बनाया जाए नहीं क्योंकि जो अंदर विग्रह स्थापित करते हैं वो तो उसमें स्पर्श कौन को किसको करना चाहिए
01:04:02:26 किसको नहीं करना चाहिए उसकी कोई मज परपरा प्रात वो परंपरा प्राप्त आचार्य से दूरी उसका वो है वही जैसे कि मैं श्री राजेंद्र दास जी के प्रवचन सुनता हूं और गुरुदेव के स्वामी सरस्वती जी के भी तो उससे बहुत क्लेरिटी आती है जैसे चांडाल वाली कहानी शंकराचार्य जी की उसको बहुत गले गलत वे में पोट्रे करते हैं लोग लेकिन अगर कपाती जी का उस पर उत्तर देखा जाए तो व बहुत मतलब मीनिंगफुल था कि व्यवहार की दृष्टि से तो अलग ही होगा देखा जाए तो नाली का पानी भी पानी है और गंगा का पानी भी पानी है पीने न नाली का नहीं होगा बिल्कुल इसी बात को लेकर मे एक डाउट था कि मैं े ही मे लड़ाई चलती है थोड़े श्द और फ्रेंड है उनसे जहा मैं बात करता हूं गीता के पहले अध्याय में भगवान कहते है कि शंकर य बात आती है न घर प कोई मानता ही नहीं बोलते नहीं ऐसा नहीं होता जन्म से कुछ नहीं होता उसको मैं घर के में कैसे डिफेंड करू वो डिफेंड आप देखिए तो धारा बदल जाएगी हम लोग जो बातें कर रहे थे उसकी डिफेंड करने के लिए सिंपल है दुर्जन तोष न्याय प आ जाइए अगर जन्म से नहीं मानेंगे कर्म से मानेंगे तो व्यवस्था करके दिखा दीजिए हम अपना लेंगे सिंपल
01:05:18:09 बात आप उनसे कहिए आप कमित कर दीजिए समाज होगा ही नहीं भाई कर्म का अर्थ य है कि कोई अपने मन मुताबिक कभी भी बदल सके अपना वर्ण तो जब बदल रहा है तो हम उसके लिए किसी को बाध्य थोड़ी ना कर सकते हैं कि जा अर्जुन तेरा धर्म रक्षा करना जाक रक्षा कर वो तो कह देगा अर्जुन मैं कथा करने जा रहा हूं मैं व्यास ब्यास हो गया हूं लो तो ऐसा तर्क देंगे क्या भगवान श्री कृष्ण जो वही खड़े खड़े दो मिनट में चूर चूर हो जाए ये तोम जब ऐसे लोगों से बातचीत हो तब है मैं आपको एक बात बता रहा था कि वर्णाश्रम धर्म से लोग किनारा करते हैं पंजाब में सबसे ज्यादा वर्णाश्रम धर्म को ना मानने वाले लोग हैं सिख ठीक है सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन कहां है इस समय देख लीजिए वो जो इशू इशू इशू इशू वाले वीडियोस आप देखते हो सबसे ज्यादा कहां के होते हैं लंगड़ा भी खड़ा हो जाता है काम करने लगी कहां प होली में डेरे मिलेंगे नाम भी उनका डेरा कर दिया गया है ताकि अडॉप्ट हो जाए के लोकल लोगों प डेरे किसके यीशु मसीह के डेरे ये देखिए ऐसे होता है
01:06:34:07 परिवर्तन नहीं क्योंकि मैं खुद क्रिश्चन स्कूल का हूं तो वहां पर क्या क्या सिखाया जाता है मैं क्या ही बोलू आपको हर फ्राइडे चर्च जाया करते थे हम लोग भी एक टाइम प बंकी करने लेकिन वहां प ये आदमी इसी प्रन था मोस्ट की बंक करने के नाम पर क्लास बंक करेंगे तो चर्च में बैठ जाता देखिए पजाब सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन देखिए पंजाब में जहां पर वर्ण व्यवस्था जन्म से जीरो है कोई वर्ण व्यवस्था नहीं है सबसे ज्यादा और वर्ण व्यवस्था का ना मानने का एक सबसे बड़ी चीज बताऊ आपको कि वर्ण व्यवस्था में सबसे प्यारी चीज है कि बचपन से व्यक्ति को पता होता है कि मुझे क्या करना है क्योंकि व्यक्ति धर्म के अकॉर्डिंग पैसा कमाने के लिए भोग करने के लिए उसने जन्म नहीं लिया है उसने जन्म लिया है मनुष्य का मुक्ति के लिए मुक्ति के लिए जिससे कि वो इन चीजों में परेशान ना हो कि उसको क्या करना है क्या नहीं करना है खाना कैसे खाना है कहां रहना है वो परेशान ना हो तो वर्ण व्यवस्था से उसको पहले से ही पता होता मुझे यह करना है तो वह उसमें परेशान नहीं होता मुस्लिम
01:07:49:15 आपका जो रोजगार है वो मुस्लिम अपना रहे जी सबकी मगर नहीं व्यवस्था को नहीं मानेंगे जन्म से तो क्या हो रहा है आज देखिए हर जगह प वो डेमो जो डेमोग्राफी जो घटती जा र है और जो धर्म के ठेकेदार बनते हैं वो कहते हैं कि भैया क्या कहते हैं वो हिंदुओं की दुकान से सामान लो अरे भैया हिंदू बचेगा आदमी तब ना
01:08:27:26 अवेलेबल है नहीं हिंदू को आपने इतना ज्यादा ब्रेन वश किया है कि मैंने ऐसे लोग देखे बहुत कट्टर हिंदू आरएसएस से जुड़े हुए बहुत कट्टर हिंदू भाई देखिए यह मानना पड़ेगा कि हिंदुत्व है ऐसा नहीं है ु की रक्षा के नाम पर ही आरएसएस है नाम अब वो शीर्ष में क्या हो रहा है दिशा हीनता है क्या कर रहे हैं वो समीक्षा नहीं करेंगे मगर जो कट्टर हिंदू है वो कह रहे मैं अपनी दुकान में नाम लिखवा ना है ज्वेलर्स मैं एक बार ज्वेलर्स के पास था किसी मीटिंग में तो व अपने आप पर दुकान का नाम लिखवा रहे थे अब वोह बोले मुझसे कि मैंने पहले हिंदू को यह कार्य दिया था करने को हिंदू ने वो कार्य करने में इतना नाटक किया इतना नाटक किया कि पहले उसने 15 दिन मुझे परेशान कर दिया और देखो मैंने इसको मुस्लिम को दिया दो दिन में कर रहा है और कर दिया उसने तो क्या हो रहा है कि आपकी जो ताकत थी जो शक्ति थी जो आपकी जो गुणवत्ता थी वह तो आपने कम करवा दी है फिर कह रहे हो कि नहीं हिंदू सेही रीद ू आज आज स्थिति यह हो चुकी है कि आपका पूरा
01:09:42:28 काम पूरा एक दिन कटेगा ही नहीं बिना किसी मुस्लिम से कोई ना कोई आदान प्रदान किए बिना यह स्थिति है और य स्थिति क्यों आई है वर्णाश्रम धर्म को ना मानने के कारण वर्णाश्रम धर्म से जो जीविका होती है जन्म से सुरक्षित होती है तो जीविका को लेकर के व्यक्ति परेशान नहीं होता भटकता नहीं है और अपने उस पर ध्यान देता है धर्म और सबका दोष कहां दिया जाता है शंकराचार्य को शंकराचार्य क्या कर रहे हैं शंकराचार्य क्या कर र अरे भाई खड़ा कौन है शंकराचार्य के साथ गौतम खट्टर जी अभी दो तीन दिन पहले उनका वक्तव्य देखा मैंने कि शंकराचार्य जो है व दुनिया में कोई भी ऐसा मुस्लिम नहीं है जो अपने मौलवी को वो कहता हो दुनिया में कोई भी ऐसा पादरी नहीं है बड़ा वही वाली बात वही अभी ओो वाली ो वाली बात वही मैंने तुम्हारे चेहरे पर व जो है मुस्कान देखी है झूटी है धोखा है ये अंदर से तुम खोखले हो अंदर से तुम बहुत दुखी हो बस वही चीज है आपकी भावनाओं के साथ खेलता है व्यक्ति इन शब्दों से
01:10:57:28 और कुछ नहीं है अब व्यक्ति को लग कितनी बात कर रहा है यार हमारी भाई हम आपको ऐसे मौलवी दिखा दे जो दूसरे मौलवी को क्रिसा कर रहे हैं बताइए ऐसे मौलवी दिखा दे और मौलवियों को छोड़ दो आर समाज के अंदर ही अग्नि क्या नाम है अग्निवेश नाम है क्या उनका जिन पर पूरा आर समाज जो है दो दो पार्ट में बट गया था और विदेशों में सबसे ज्यादा अ समाज का प्रचार करने वाले हैं उनका नाम मुझे याद नहीं आ रहा है बवली तो अगर अगर आर समाज का अर्थ ये है जिसको गौतम खट्टर फॉलो करते हैं आर समाज का अगर अर्थ ये है कि भैया जो आपका दूसरा सनातनी होगा व अगर कुछ गलत कर रहा होगा या वो स्पष्ट नहीं होंगी चीज उस पर मगर उंगली नहीं उठाएगा तो आपने तो उठाई है यह कैसा दोगलापन है भाई अपनी पब्लिसिटी के लिए बड़ी बड़ी बातें हाकने के लिए
01:11:57:19 आप कुछ भी झूठ बोलते चले जा रहे हो अच्छा आपसे पूछा जाएगा साई को लेकर के क्या व है हमारे शंकराचार्य तो नहीं मानते हैं साई को भगवान वहां पर गौतम खट्टर शंकराचार्य को मानने वाले हो गए और किताब कौन सी बेच रहे हैं किताब कौन सी बेच रहे हैं जिसमें शंकराचार्य शंकराचार्य के लिए बुराई गोड़ी पोप भांड कितने बुरे बुरे शब्द पुराण को मानने वालों के लिए बहुत बुरे बुरे शब्द है कैसा दोगलापन है भाई य और आप कह रहे हो कि शंकराचार्य जो धर्म की सर्वोच्च गद्दी बैठे भाई धर्म की सर्वोच्च गद्दी पर बैठने का अर्थ क्या है यह तो बताओ क्या अर्थ है कि धर्म और अधर्म का निर्णय अंततोगत्वा किसके हाथ में है शंकराचार्य के हाथ में जब तुम खुद कह रहे हो शंकराचार्य के हाथ में ये है क्या करना क्या नहीं करना फिर तुम क्यों समझा रहे हो कि क्या करना है क्या नहीं करना है और जितना तुमने चिल्लाया माइक प जाकर के क्या शंकराचार्य का एक वीडियो दिखा दो इसमें शंकराचार्य चिल्ला रहे हो कि वो जो है वो फलानी पीठ के जो है वो मैं वो नहीं है अरे एक बार कहीं पर वक्तव्य दे दिया जो कांग्रेस जिको
01:13:12:25 शंकराचार्य बना के घुमा रही है जो ऐसे ऐसे तथाकथित लोग जो अल्लाह अकबर के नारे लगा रहे हैं शंकराचार्य स्वयं को बताते हुए उनका खंडन चिल्ला चिल्ला के कर रहे हैं और आपसी मतभेद का तो नहीं कर रहे इस तरह से जैसे तुमने चिल्लाया हाथी में बैठ कर के अजीब दोगलापन है भाई कुल मिला सी जो अव्यवस्था है जो हमारी जो अगली पीढ़ी जो नई पीढ़ी है मॉडर्न जिसको कहते हैं वह ऐसे तथाकथित ओशो वादियों के उस में जा रही है यह तथाकथित नकली जो स्वयं को अपने आप ही आचार्य बना लेते हैं किसने बनाया कौन ने बनाया कुछ नहीं पता ऐसे उसम जा रही है तो ये अनास्ता उत्पन्न होने का कारण यही है माता पिता को नहीं पता था नाम जो पिछले डेढ़ दो वर्षों में जो राजा राम मोहन राय और आर्य समाज जैसे जो तंत्र खड़े हो गए जिन्होंने जाति और वर्ण व्यवस्था को आघात पहुंचाया उनका परिणाम है कि आज की पीढ़ी जो है परंपरा प्राप्त जो शास्त्र सतता ये का वो प्रति भावना धर्म के प्रति ये सब गुम होती जा रही जी अभिनव जी
01:14:28:09 मेरे मम्मी को खुद नहीं पता था चार पीठ के आचार्य चरणों का नाम अब मैं आपसे क्या बोलू क्योंकि इतनी अवे थी नहीं क्योंकि आप पॉपुलर करते नहीं आप लाइम लाइट में आते नहीं थे क्योंकि जो व्यक्ति धर्म को जानता होगा वही इस पद को जानता होगा मर्यादा को जानता होगा लेकिन आजकल हम देखते हैं कि कोई भी उठके महंत डैश डैश डैश य महामंडलेश्वर बन जाता है खुद ब खुद अथॉरिटी यहां तक कि मैं देखता हूं कि कहना तो नहीं चाहिए जो अखाड़ा है अखाड़े जो बनाए गए हैं वो भी कहीं ना कहीं कंट करते हैं आचार्य चरणों की बातों से कि वो बोलते होंगे तो बोलते होंगे जिसका अभी जो जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर है महामंडलेश्वर उन्होने ही राम मंदिर के केस में कितना विवाद मतलब कॉन्फ्लेट किया इस बारे में कि नहीं आते तो नहीं आए वो जबकि अखाड़े बनाए आचार्य चरणों के द्वारा ही थे लेकिन अब वो अपना सो क्यों भूल गए देखिए मैं इसमें एक बात कहता हूं अगर चारों पीठ के शंकराचार्य के बीच में योजनाओं को लेकर के व्यावहारिक जो प्रासंगिक जो बातें उनको लेकर के अगर भेद है भी उनके निर्णयों में इससे आपके धर्म और
01:15:43:13 ब्रह्म पर कौन सा असर पड़ रहा है बताइए अंत अथवा उनका जो मूल स्वरूप है धर्म और ब्रह्म के लिए है अगर कोई गौ माता राष्ट्र माता की बात कर रहा कोई हिंदू राष्ट्र की बात कर रहा है और इस बात को लेकर के अंतर है दोनों के बीच में तो आपका धर्म ब्रम बिगड़ रहा है क्यासे यह केवल एक पॉइंट उठाया जा रहा है देखो देखो देखो इनम कितना वो है तो अंतर तो मुझे लगता नहीं ना हो उससे ज्यादा
01:16:16:01 है तो मैं अभी थोड़ा आयुष जी आपको लूंगा बताए जय श्री राम जय श्री राम जी मैं आपको लगभग छ महीने से सुन रहा था और आपकी बातें मुझे बहुत अच्छी लगती है कुछ समय पहले पटना में एक केस हो गया था तो आपसे ट पर मेरी बात हुई थी अच्छा जी तो मैंने आपको व पर बताया था कि आपके बातों को सुन कर के और धर्म के बारे में आपके थ्रू जान करके मेरे लाइफ में बहुत अच्छे अच्छे चेंजेज आए हैं और कल आपका सेशन मैंने मिस कर दिया था जो आपने बताया था कि आवाहन के का जो लोग संतुष्ट है उन्होंने आ करके अपने अपने विचार रखे थे थोड़ा बिजी होने के कारण मैंने आज उसके बारे में सुना और जैसे मैंने सेशन देखा तो मुझे लगा कि आज मैं जल्द से जल्द आपको जवाइन कर सकू तो मैं यही बताना चाहूंगा कि आपके मतलब बातों से और धर्म के बारे में जान करके मेरे लाइफ में बहुत पॉजिटिव चेंज आया है पहले मैं बहुत ज्यादा नेगेटिव रहता था थोड़ा डिप्रेसो से बात सुन करके जैसे कि कंफ्यूज हो गया था जैसे ही आपके बारे में ना मैं एक्ली भगवत वचन जिनका वो है चैनल है युगल किशोर जी उनके थ्रू
01:17:31:06 आपको जान पाया हूं तो जैसे आपके बारे में जाना आपके लाइव स्ट्रीम को देखा तो मुझे यह लगा कि आपके अंदर कितनी क्लेरिटी है आपके गुरुदेव के बारे में जाना और उसके बाद से मैंने य पर उनका थोड़ा बहुत लेक्चर जो भी मुझे लगता है मैंने देखा अभी फिलहाल मैं फाइनल ईयर इंजीनियरिंग में हूं और आपके ही लाइव स्ट्रीम और वगैरह को देख कर के भगवान की कृपा से ही जो भी हो सके मैं एक मतलब बहुत बड़ी कंपनी में हो सकता है जवाइन करने वाला हूं अरे बकम प्राथना करें बक प्रभु श्री रामना थक कहना चा रहा था आभार से मुझे थोड़ भगवत भक्ति के बारे में थोड़ा सा हु इंजीनियरिंग कॉलेज में तोय रहता है थ मस्टिक चीजों में ही रहता है थोड़ा बहुत और बीच में थोड़ स्न वगर से भी जुड़ गया था ब आपकी जैसे लाइव स्ट्रीम गग देखना चालू किया तो मतलब आप कहते ही है कि जिसके अंदर थोड़ी सी भी समझ होगी थोड़ा सा वो ऑटोमेटिक अने अपने आप को सही करने के पीछे जाएगा मैं भी कोशिश करता हूं कि मतलब जितना हो सके अपने स्तर प ही अच्छे से अच्छे करके भगवान की भक्ति कर सकूं और साथ के साथ अपना काम भी कर सकू बहुत बि फिलहाल तो मैं स्टूडेंट हूं भैया बस आप ऐसी
01:18:46:07 कृपा बनाए रखें और आपकी स्ट्रीम्स मैं डेली देखता हूं मुझे बहुत आनंद आता है भया अरे बहुत बढ़िया और हमारी प्रार्थना आना होगा तो आपसे जरूर मिलूंगा बिल्कुल ब भगवान से हमारी प्रार्थना है प्रभु श्री राम आप पर कृपा बनाए और आपको आपके लक्ष्य में और उत्तीर्ण करें आपका लक्ष्य आपको प्राप्त हो आभार आपका समर्थन प्रकट करने के लिए जीया आप जो व्यासपीठ है उसकी जो मर्यादा है जैसे स्त्रियों को नहीं बैठना चाहिए व्यासपीठ पर लेकिन आज हम देखते हैं कि छोटे छोटे बच्चे या बच्चियों को भी हम व्यासपीठ में बिठा देते हैं और कथा तो होती नहीं वहां और भजन चलते हैं बस हो जाता है जिस कथा उसी का उसी का नतीजा है ना ये जो आप देखो जब इस तरह के व्यक्तित्व जाकर के ऑथराइज सीट पर बैठ जाते तो क्या होता है जो अमानुष लोग है अमानुष पशुता प्रधान लोग मैं अभी नाम नहीं लूंगा ऐसे लोग जो जानवर बनके खा जाना चाहते हैं स्त्रियों को मात शक्तियों को रद देना चाहते हैं सारे नियम तोड़ देना चाहते हैं ऐसे लोगों का रास्ते का काटा कौन है धर्म धर्म का प्रचार प्रसार करने वाले लोग
01:20:02:04 कि वही हमको रोकेंगे आकर के ये गलत है ये मत करो वो मत करो तो क्या करते हैं वो लोग जब उनको धर्म का ऐसा कोई बिंदु मिलता है कमजोर लोग कि वो ऑथराइज नहीं है जाके बैठ गए उनको पकड़ते हैं बुलाते हैं उनको दिखाते हैं कि हमने जो है उनके साथ वार्तालाप की और वो ढेर हो गए देखो तो अब क्या हुआ जो जनरेशन है जिसने वो वो वीडियो देखा उसका धर्म के प्रति अनास्ता वान होना शुरू हुआ और आस्थावान किसके प्रति होना शुरू हुआ जो वो भोगी है जिसने जो रोना चाहता है मानवता को कुचल देना चाहता है जो नास्तिक है उसकी ओर आस्थावान होना शुरू हुआ क्यों क्योंकि हमने ऐसे लोगों को भी व्यास गद्दी पर बैठा कर के पूजना शुरू कर दिया जो लोग धर्म को स शुद्ध रूप से बताने में सामर्थ वान है ही नहीं इस कारण से क्या हुआ नास्तिकता फैलना शुरू हुई और फल स्वरूप क्या हुआ फल स्वरूप हुआ दुराचार मात शक्तियों के साथ अचरण बलात्कार अपराध पाप यह सब क्यों होता है जहां पर धर्म का अभाव हो जाता है वहां ये सब होता है तो अभाव लोभ के
01:21:17:04 कारण होता है जोध क ऐसा लगता है क्योंकि होता है लोभ शुरू हुआ य से हमने किसी बच्चे को उसने कुछ श्लोक पढ़ लिए कुछ श्लोक रट लिए कुछ कर दिया उसको बिठा दिया ब दिया उसको जब लोग फॉलो करने लगे उसके बाद किसी नास्तिक की नजर पड़ी यह बढ़िया है शंकराचार्य को तो मैं नहीं हरा पाऊंगा भाई शंकराचार्य के पास जाके तर्क नहीं कर पाऊंगा इसको मैं वीडियो लेकर बना लेता हूं वो कुछ बोल सामने पूरा पूरी मानवता सुरक्षित है शंकराचार्य जी द्वारा दिए गए जो सिद्धांत है भगवत आद शकरा उन सिद्धा की सीमा में अंदर रह कर के आज पूरी मानवता सुरक्षित है जिस दिन वो सीमा टूटेगी ना ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है अवाद सर्वशक्तिमान ईश्वर की आप जैसे ही उस सीमा के बाहर जाओगे देखो मानवता भंग नास्तिकता चालू धर्म का लो इसलिए तो मतलब जो सिद्धांत सिद्धांत उसको भी लोग गलत वे में पोट करते हैं कि देखो जब माया जब जगत ही मिथ्या है तो उसमें जो भगवान आते हैं वो भी मिथक है ऐसा कुछ लोग कते क्योंकि मैं तो वि मानता हं जी व्यवहार और परमार्थ का अंतर
01:22:33:26 है भगवान अपनी इा से आते हैं अपना रूप बनाते हैं लीला करते हैं अपनी इच्छा से क्योंकि विशिष्ट द्वेत जो है उसमें थोड़ा मेरे को मतलब कॉन्फ्लेट नजर आता है अब कॉन्ट ऐसा कुछ नहीं है सत्य सता की क्रमिक अभिव्यक्ति है जो माधवाचार्य शास्त्री जी है जिन्होंने क्यों लिखी है उसमें उन्होंने द्वैत अद्वैत विशिष्ट द्वैत इसके बारे में लिखा है कि द्वैत जो है एक किनारा है अखंड अपने उस पर खड़ा हुआ ट के अवत दूसरा किनारा है अपने उस पर खड़ा हुआ टट के और शिता वो नदी है जो दोनों को छूती है ये उन्होंने लिखा है छूती है अच्छा जी लेकिन य प हम देखें जो वल्लभ कुली है या जो पुष्टि मागी है वो तो ना शंकराचार्य जी को मानते ना दूसरे आचार्य चरण को मानते हैं वो मतलब उनमें मुझे निष्ठा के नाम पर वो कटता दिखाई देती है जो जो
01:23:48:27 एक हार्मनी है जो सोशल हार्मोनी है उसको वो नकाते हैं ना पंचदेव की उपासना में वो लोग कहते हैं नरा यमुना जी की पूजा की देखिए ऐसा है की बात यह है कि पंच देवो पासना को नहीं मान रहे ठीक है पंच देव पासना की धारणा क्या है कि पांचों देवों को अपने ईस्ट में स्थापित कर लो जी हे ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश में आप सबकी भक्ति राम के रूप में करने जा रहा हूं श रूप में करने रहा मुझे इस रूप में दर्शन दे दीजिए वो इस बात को नहीं मा उसे क्या दिक्कत है आप यह समझ लो व जिस रूप में भी भगवान को मान रहे हैं आपके इट उनके अंदर है व आपके भगवान ईश्वर को मगर दिक्कत तब आती है जब यह भेद तो किया जा रहा है मगर उस स्वरूप को जो जो अलग किया गया उसको जोड़ दिया अल्ला से अल्ला अल्लाह और कृष्ण एक है कृष्ण शिव एक नहीं है कृष्ण अल्लाह एक है दूसरी बात निंदा करने के उसको साबित करते जो बाकी स् और दूसरी बात वश्रम धर्म को दिया वर्णाश्रम धर्म रीड है धर्म की रीड हां कुछ ऐसे है कि ये वैष्णव वैष्णव तो वर्णाश्रम धर्म
01:25:04:06 क्या होता है वैष्णव तो शादी कर दो ये सिद्धांतों पर भी कुछ संप्रदाय चालू हो गए हैं कोई भी पर सिद्धांत है वो ऐसी बात जो आचार्य गण है वो ऐसी बात नहीं करते नहीं करते जी लेकिन कुछ है जैसे मैं अभी त नहीं लूगा कुछ संगठन है जो इसी टॉपिक प चले वो संगठन है तो हम लोग जहां उते वैष्णव रूप धारण करेंगे लेकिन मर्यादाओं का अतिक्रमण करते जाएंगे ये रमेश प्र प्रजापति कौन है भाई जय श्री राम रमेश जी बताइए रामपाल जी की तरफ से है
01:25:42:27 क्या जय श्री राम रमेश जी [संगीत] से आपको एक और शिकायत थी शिकायत तो नहीं लेकिन हां एक ये थी कि आपने रामानंदी संप्रदाय को रामानु जीी में ही इंक्लूड किया जबक श्री रामानंद संप्रदाय एक प्रथक संप्रदाय है नहीं नहीं मैंने नहीं किया आप ध्यान से देखिएगा वीडियो आपका रामल वाला देखा था मैंने तो आपने बोला की रामानुज की परंपरा में रामानंद जी हुए तो उसको लेकर थोड़ा वो तो देखिए ऐसा था कि पहले ऐसा ही माना जाता था उसके बाद ये महाकालेश्वर में उज्जैन में एक शास्त्रार्थ हुआ था जिस शास्त्रार्थ के बाद रामानंदी संप्रदाय यह घोषित करता है कि हम रामानुज जी नहीं है अलग है मगर रामानु जी अभी भी यही कहते कि हमसे ही निकले हा वो उनको तो कहते हैं जबक नहीं कहा जा सकता है क्या होता है इतने सारे लोग खड़े हैं तो बहुत से तथ्य को ध्यान में रखना और फिर बोल पाना तो कहीं कहीं पर हो जाता है मगर पूरी तरीके से गलत नहीं
01:26:57:28 है क्योंकि रामानुज संप्रदाय तो यह कहता है कि वो हमसे ही निकले हैं रामानंदी वो ये कहता है कि हमने सिद्ध कर लिया हम अलग है एक कोई शास्त्रार्थ हुआ उसके बाद उन्होंने अपने आप को अलग घोषित कर लिया और मैं उसके बाद से जब से मुझे वो महाकालेश्वर वाले इतिहास का पता चला तो फिर मैं अपने मुख से यह वक्तव्य नहीं देता हूं कि क्या कहते हैं वो वो राम संप्रदाय के जैसे अभी पि ब रामा रामानुज जी आए थे जो एक हमने किया था तो वो बोल रहे थे मगर मैंने ये नहीं कहा था कि नहीं वो रामानु जी है क्योंकि उसमें भगवान शिव की भी निंदा करते हैं वो सब और अन्य देवी देवताओं की भी निंदा करते हमारा चटर नहीं है यह समीक्षाएं वैसे भी हम नहीं करते जो हमारे प्रामाणिक संप्रदाय हैं उनकी कोई समीक्षा हम नहीं करते हैं वर्णाश्रम धर्मी है परंपरा प्राप्त है सत सता की क्रमिक अभिव्यक्ति है कोई समी करने के हम योग्य ही नहीं है योग्य नहीं है सही बिल्कुल रामानुज संप्रदाय क्या कर रहे हैं रामानंद संप्रदाय के प्रामाणिक आचार्य क्या कर रहे हम योग्य ही नहीं है उस स्तर का हमारे पास ना ज्ञान है ना बुद्धि है ना बल है कुछ नहीं नगन तो हम कहां से बात कर ले उस बारे में ठीक
01:28:12:15 है चलिए फिर आज का य हम लोग समाप्त करते हैं मैं फिर से कहूंगा अनिरुद्धाचार्य जी कि कुछ याद करो अपना पवन सुतो बालपन विद्युत की गति विद्युत की गति कहां गई है केसरी नंदन कुछ याद करो अपना पवन सुत बालपन और उनके जो फॉलोअर्स है उनको मैं कहूंगा कि आप जाइए उनकी शक्तियों को जागृत करिए अपने अस्तित्व और आदर्श की रक्षा के लिए उठ खड़े हुइए अभी नहीं तो कभी नहीं य उदारता का त्याग कर दीजिए जो आपके अस्तित्व और आदर्श पर हावी हो रही है हाथ जोड़कर विनती है आप आज आगे जाए तो आपके पीछे पीछे बहुत सारे ऐसे लोग आपका आपको फॉलो करेंगे जिनके मन में यही कुंठा होगी जय श्री
01:29:06:18 राम सबका आभार जुड़ने के लिए सभी को जय श्री राम
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