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00:00:00:01 से आता हूं इस शहर का नाम है गाजीपुर मुख्तार अंसारी यहीं के रहने वाले हैं समझ रहे हैं और इस शहर का एक आलम हुआ करता था एक जमाने में कि कोई उनके खिलाफ बोल नहीं सकता था आप समझ रहे हैं कोई उनके खिलाफ बोल नहीं सकता था आज वो स्थितियां परिवर्तित हो गई है है ना तो आप ये देखिए ये कैसे परिवर्तित हुई है यह राजनीति से परिवर्तित हुई है तो राजनीति भी उसका एकदम है ना कोई शंकराचार्य नहीं आ रहा था जब ऐसे बड़े बड़े माफिया डन हमारे गले के नीचे छुरी लेकर के खड़े थे समझ रहे हैं योगी जी आए आप समझ रहे हैं आप इन चीजों को समझिए और राजनीति और धर्म बिल्कुल एक दूसरे से जुड़े हुए अगर आप ये कहते हैं कि भाई राजनीति के लिए कि मैं कहता बिल्कुल राजनीति के लिए किया बिल्कुल राजनी अपनी बात जब खत्म कर ले तो मुझे बताइएगा एक दो मिनट और चाहिए बस ठीक है तो बिल्कुल राजनीति और धर्म एक दूसरे से कभी अलग हो ही नहीं सकते अच्छा जब हम लोग उस समय बात कर रहे थे तो आप मेरा ये कहना था कि भाई धर्म जो है वो क्या कहते है शास्त्र उनको सपोर्ट कर सकते हैं उनमें हेल्प कर सकते हैं लेकिन शास्त्र से ही धर्म है ऐसा नहीं है है ना शास्त्रों से पहले भी धर्म
00:01:15:07 था जब शास्त्र नहीं रहेंगे तो भी धर्म रहेगा अच्छा इसका एक एग्जांपल देता हूं आपको साइंस के टर्म में दो शब्द होते हैं एक होता है इन्वेंशन दूसरा होता है डिस्कवरी है ना इन्वेंशन क्या होता है जैसे की बल्ब बल् है बल्ब का इन्वेंशन हुआ इंसान की सोची समझी चीज है उसने उसको बना दिया वो बल्ब है है ना वो बल्ब बना दिया है ना मजहब क्या है रिलीजन क्या है वो इन्वेंशन है समझ रहे है डिस्कवरी क्या होती है डिस्कवरी वो होती है जो पहले से हो जो सनातन हो जिसको कभी किसी ने बनाया ना हो आप समझ रहे जैसे की न्यूटन के नियम जो है ना वो न्यूटन नहीं था तो भी उसके नियम थे समझ रहे हैं इस सृष्टि में ज आत्मा ना कभी जन्म लेती है ना कभी मरती है जैसे जैसे कि न्यूटन का नियम है ग्रेविटी ऐसा थोड़ी नटन आया तो गटी न्यूटन से पहले भी ग्रेविटी ीने ग्रेविटी के बारे में बताया बस बता दिया है ना वैसे ही धर्म है है ना जो शास्त्र है वो धर्म के बारे में कुछ ज्ञान दे पाते हैं पूरा नहीं दे पाते व भी समझ रहे वो ब्रम के बारे में कुछ बता पाते हैं आप यह समझिए कि जैसे की एक और लास्ट एपल आपको देता हूं उसके बाद आप कर जैसे की मान लीजिए कोई व्यक्ति है वो दो व्यक्ति है है एक पानी
00:02:30:09 को हाथ प लेकर के महसूस किया है कि पानी कैसा फील होता है है ना और दूसरा व्यक्ति है उसने पढ़ा है कि पानी को छूने पर कैसा कैसा महसूस होता है ठीक है आप ये मान लीजिए कि जिस व्यक्ति ने पानी को छुआ हुआ है वो कोई भाषा नहीं जानता वो किसीने कभी कोई पुस्तक पढ़ी ही ना हो ठीक है लेकिन दूसरा जो व्यक्ति है वो बहुत पढ़ा लिखा है और उसने सारे पानी के बारे में सारे रिसर्च पढ़ रखे हैं आप ये बताइए कि किसको पानी के बारे में ज्यादा ज्ञान है जिसने पानी को छू लिया है और जान लिलिया है कि वो कैसा फील होता है जिसने पानी के बारे में सब पढ़ा है कि उसको छूने पर ऐसा फील होता है वैसा फील होता है ऐसा फील होता है समझ रहे हैं आप तो ऐसा नहीं है कि जिसने ग्रंथ नहीं पढ़े हैं वो ब्रह्म को नहीं जानता है समझ रहे हैं बहुत सारे ऐसे व्यक्ति है धर्मात्मा है पुरुष है जो कि पानी को छू चुके हैं आप समझ रहे हैं मैं प्रतीक्षा कर रहा हूं अपनी बात की मेरा अवसर कब आएगा मैं तो सुन ही रहा हूं आपको काफी देर से सुन रहा बस 10 सेक उसम ऐसा है ना कि एक साथ बहुत सारे टॉपिक जब हो जाते तो कोई ना कोई टॉपिक जरूर छूट जाएगा इसलिए मैं सोच रहा था कि आप संक्षिप्त बात कस और फिर जो है पॉइंट टू पॉइंट जाएंगे उस तो मेरा वही था कि भाई जो पानी
00:03:45:18 को छू चुका है व जानता है भले उसने कोई किताबें नहीं पढ़ी जो ब्रह्म को छू चुका है जो जान चुका है वो जानता है कि कैसा वो महसूस करता है और कराता है और क्या उसके भाव कैसे निकलते हैं उससे चाहे उसने कोई ग्रंथ ना पढ बस य ये तो मैं आपको अभी दो चीजें समझाऊं कि आप शंकराचार्य पर कहां कहा पर डिसएग्री होते हैं एक जातिवाद और दूसरा दूसरा शास्त्र के प्रति निष्ठा है ना नहीं ऐसा नहीं है कि शास्त्र के प्रति निषा नहीं है शास्त्र के प्रति अधीनता शास्त्र के प्रति अधीनता अधीन हो जाना की बिल्कुल और तीसरा थोड़ा बहुत कंप्रोमाइज हो जाना चाहिए राजनीति के अकॉर्डिंग योगी जी के अकॉर्डिंग मोदी जी के कॉम्प्रोमाइज नहीं इसे कहेंगे मैं ये कहूंगा कि अब मुझे एक शास्त्र अगर ये बात कह रहे हैं मान लीजिए यस और मोदी जी कह रहे हैं नो तो यहां पर शास्त्र के साथ कॉम्प्रोमाइज करना पड़ेगा ना अगर मोदी जी के साथ जाना है तो क्योंकि मोदी जी ने गुंडों को खत्म किया है नहीं नहीं मैं उसका उसका मार्ग बताता हूं मैं मतलब मेरे हिसाब से बताता हूं बाकी तो ज्ञानी लोग अपना बता अभी पहले अभी मैं विषय
00:05:00:27 क्लियर कर रहा हूं मुझे विषय रख लेने दीजिए लोगों के समक्ष कि विषय ये है आपका एक तो जातिवाद के लेकर के शंकराचार्य जी से वो है डिसएग्रीमेंट और एक दूसरा डिसएग्रीमेंट है आपका कि भाई यह जो शास्त्र शास्त्रों के प्रति इतना निष्ठावान ना रहे ठीक है वो समय समय के अनुसार थोड़ा सा उसको कमप कर थोड़ा उसम किया जा सकता है किया जा यानी शास्त्र अगर बोले यस तो उसके साथ थोड़ा बहुत कंप्रोमाइज कर लो हां शास्त्र हो सकता है कि वो समय शास्त्र मानने का ना हो मैं समझ मैं पहली बात आपसे पूछूंगा कि आप भी मुझे धर्म रक्षक समझ में आ रहे हैं पहले तो मैं प्रश्न पूछने से पहले एक कहानी सुना दूं आपको छोटी सी दमयंती की कहानी है अभी कुछ दिनों पहले ब्रह्मचारी शिकश ब्रह्मचारी जी है उन्होंने मंच से सुनाई थी दमयंती को एक अजगर निकलने वाला था अजगर अजगर से दमयंती को व्याध ने बचा लिया अब व्याध का व्याध ने बचा तो लिया मगर उसकी कुदृष्टि हो गई दमयंती पर तो ऐसे में क्या दमयंती को अपनी जो गरिमा है उसको भंग
00:06:15:27 कर देने की छूट दे देनी चाहिए व्याध को या नहीं दे देनी चाहिए नहीं देनी क्यक क्योंकि क्योंकि व्याध ने अभी अभी उसकी जान बचाई अगर वो जान ना बचाता तो दमती तो जीवित ही ना होती तो इसलिए एक पक्ष तो ये है कि जीवित नहीं होती तो फिर क्या होता दूसरा पक्ष ये है कि जान बड़ी है या गरिमा बड़ी है सम्मान बड़ा है तो कुल मिलाकर के यह जो एक चीज है ना यह जो तर्क है कि अभी शंकराचार्य जी कहां थे नीचे जब गोली लेकर के गुंडे घूम रहे थे तो ये वैसी ही कुछ कहानी है इसके आधार पर हम ये नहीं कह सकते कि नहीं अगर उन्होंने गुंडों से हमें बचाया तो सिद्धांत हो गया कि अब योगी जी जो कहेंगे जो करेंगे वही अंतिम निर्णय होगा बिल्कुल नहीं ये मैंने कभी नहीं क अब विषय अब अब मैं विषय को आगे बढ़ा दू विषय आगे का ये है कि आप कह रहे हैं आप भी सनातनी मैं भी सनातनी हूं ठीक है और हम सब धर्म के रक्षक है तो जब हम किसी चीज की रक्षा कर रहे हैं तो वो एक चीज निश्चित होनी चाहिए ना कि हम इसकी रक्षा कर रहे हैं तो वो सनातन धर्म की परिभाषा क्या है आपकी मेरी वो सनातन धर्म की वो सारी परिभाषा जो उपनिषद में है जो भगवत गीता में है
00:07:31:01 आप बोलिए भगवत गीता में है जो है ना अच्छा यानी कि आप भगवत गीता को प्रमाण मानते हैं कि भाई यह हमारा धर्म है इसकी हम रक्षा कर रहे हैं ठीक है अच्छा एक मिनट आप कहने का अर्थ ये है कहने का अर्थ ये है कि भगवत गीता हमारा धर्म है और हम सारे हिंदू भगवत गीता की रक्षा कर रहे है उसम जो लिखा है वो हमारे लिए अंतिम प्रमाण है है ना उसी की रक्षा कर रहे है ना बिल्कुल उसकी तो होनी होनी चाहिए जी अब आपने दो बातें यहां पर की है उनका मैं बताने जा रहा हूं भगवत गीता 164
00:08:28:07 16 [संगीत] कुल मिलाकर के आपका कहने का अर्थ कि हम सब लोग अगर देखा जाए आप सही कह रहे गलत नहीं कह रहे हम सब लोग अगर रक्षा कर रहे हैं तो भगवत गीता में दिए गए ज्ञान की रक्षा कर रहे हैं क भगवत गीता सभी सभी शास्त्रों का निचोड़ है निचोड़ है इसलिए इसलिए
00:09:02:04 जाते उपनिषद भी काफी सक ज्ञान देते हैं ो इस सब निचोड़ हो जाता है इसमें भी खास दूसरा अध पैरामीटर सेट कर सकते हम भगवत गीता की रक्षा कर रहे हैं अब बात ये आती है कि यह सवा अध्याय है भगवत गीता का
00:09:43:07 और यह सवा अध्याय भगवत गीता का और 24 वा श्लोक है इसमें भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं तेरे लिए कर्तव्य आप सुन पा रहे हैं मुझे देख पा रहे हैं एक सेकंड एक सेक हा बोलिए इसमें भगवान आपके पीछे शोर आ रहा है बहुत हा हा एक्चुअली आ रहा था इसलिए नीचे आ गया शप तो वो लोग आना जा इसम भगवान श्री कृष्ण कह रहे आपके लिए जो शास्त्र है एक तरीके से आपके लिए भगवत गीता जो है व आपका अंतिम वो है जीवन जीने का आधार हो गया ना धर्म अब इसमें लिखा हुआ है तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य अच्छा और बुरा करने योग्य और ना करने योग्य की व्यवस्था में शास्त्र ही प्रमाण है शास्त्र ही प्रमाण है तो शास्त्र तो आप पकड़े हुए है ना हा आपने कहा शास्त्र ही प्रमाण है मगर आप ये कह रहे कि स्थितियों में शास्त्र को छोड़ देना चाहिए तो उस समय हमारा अच्छा बुरा किस आधार पर तय होगा और सबसे पहली बात तो ये आ जाती है क्या हम श्री कृष्ण के इस वचन से डिसएग्री
00:10:58:16 है शास्त्र ही प्रमाण है शास्त्र ही प्रमाण है न शास्त्र सबके लिए अलग अलग हो सकता है [संगीत] नास्त्रे मुझे आप पहले बताइए क्या पहले एक चीज क्लियर करले क्या श्री कृष्ण के इस वचन से आप डिग्री करते हैं करता तो फिर आपकी वो जो लाइन है कि शास्त्र ही सब कुछ शास्त्र ही अंतिम नहीं होने चाहिए शास्त्र के साथ कॉम्प्रोमाइज हो जाना चाहिए उसका क्या करें नहीं तो उसम मैंने उसम मैंने आपको यह भी तो बताया कि मैं किन शास्त्रों को संरक्षित करने की बात कर रहा हूं मैं उपनिषद और भगवत गीता की बात कर रहा हूं पौराणिक शास्त्र कहेंगे मेरा पौराणिक शास्त्रों प मतलब कई जगह मतभेद हो जाएगा फिर मेरा ठीक है मतलब आप शास्त्र को व अंतिम मानते हैं ना इतना तो है शास्त्र को अंतिम मानते हैं पर पुराणों को नहीं मानते नहीं मतलब कई देखिए ऐसा नहीं पुराणों को सिरे से खारिज करता हूं ठीक है उसम भी जगह है उसम भी स्पेस है उसके लिए ठीक है कर कर पुराणों के साथ पूर्णत सहमत नहीं है सा
00:12:14:28 अब य बताइए की जो राम मंदिर को ले लेते हैं राम मंदिर में जो प्राण प्रतिष्ठा हुई है मूर्ति का विग्रह विग्रह बनाया गया है भागवत पुराण से आप एग्रीड है एग्री नहीं भागवत पुराण से मैं काफी सारी जगहो पर डिग्रीड हूं उसका तो मतलब लिटरली मतलब साइंटिफिक मल आप कस्टमाइज है इन को लेकर के कस्टमाइज है इन को लेकर के
00:13:31:10 आप किसी शांति वाली जगह पर जाए क्योंकि शोर में बात नहीं हो पाएगी यही है ना आन में शांति तो आपको समय नहीं देना चाहिए था य वाला एकली फिर मेरे पास कोई समय भी नहीं हैके अनुसार हमने समय रखा था हम अपनी चीजों को छोड़ करके शेड्यूल बना करके बैठे हुए भा चलिए आपसे चर्चा होगी मतलब ये है कि आप कहने का अर्थ ये है कहने का अर्थ ये है आप उधर बात कर लीजिए कोई आपसे बात करने को बोल रहा
00:14:10:20 है किसी और को आना चाह आना है लाइव में तो बताएं जी धन्यवाद आपका ओबिटो जी अच्छा मुझसे टेक्निकल गलतियां कई बार हो जाती है वैंपायरो गेमिंग जी कह रहे भाई लाइव आ जाओ हम लोग लाइव आ चुके थे पर मैंने उसको गो लाइव उस पर टच नहीं किया था हम लोगों की कन्वर्सेशन चल रही थी तो यह टेक्निकली थोड़ा वीक हो जाता हूं यहां
00:14:44:28 पर किसने बोला कि होगा 30 मिनट डिले स्टार्ट है हां जी अभी तो कम से कम 15 20 मिनट तो शांति के मिलेंगे हम लोग को चलिए कर ले हां तो कहने का अर्थ ये है कि शास्त्र तो आपके लिए अंतिम है है ना हां हां अंतिम शास्त्र है आपका जो धर्म है वो आपके उस अनुभव से स्फुट नहीं हो रहा है आपका धर्म शास्त्रों से स्फुट हो रहा है अनुभव से नहीं हो रहा है अनुभव नहीं नहीं नहीं अनुभव से भी है नहीं अच्छा ठीक ठीक इसका मतलब इसका मतलब आपके पास जो धर्म है से हु शास्त्र
00:15:26:20 उसमें आपके लिए अंतिम निर्णायक क्या है शास्त्र है या नहीं है अच्छे बुरे का अंतिम निर्णय कहां से हो रहा है आपके वो तो अनुभव से हो रहा है अनुभव से हो हमेशा अनुभव से होगा ठीक है आचार्य चाणक चाणक्य जी ने एक बात कही थी धर्मे ना पशु भी समाना धर्म जो है वो स्टार्ट होता है शास्त्रों से देखिए आपने जो कहा धर्म था धर्म था है मगर वो व्यवहारिक जैसे ब्रह्म ब्रह्म है पर वो व्यवहारिक कब होता है जब वो हमें साकार सगुण साकार रूप में हमारे सामने प्रकट होता है जैसे एक काट की लकड़ी है उसमें अग्नि जो प्रज्वलन क्षमता है व पूरी लकड़ी में है मगर हमको उसका बोध तभी होता है जब वो जलती है उसका एक साकार स्वरूप हमें दिखाई देता है इसी तरीके से जो ब्रह्म है वो अव्यावहारिक है हमारे व्यवहार में आ सकने वाला नहीं है वो भले ही उसका अंतिम माधवाचार्य जी ने उसको सगुण साकार कहा हो या या निबार काचार्य जी ने उसको साकार कहा हो या राधा या शंकराचार्य जी ने उसको निर्गुण निराकार मगर सबने ये बात मानी है कि उनका वो जो शरीर है वो भौतिक इंद्रियों के द्वारा पकड़ में आने वाला नहीं है व्यवहार के योग्य नहीं है हम लोग व्यवहार उसके साथ नहीं कर सकते तो वही ईश्वर जो व्यवहारिक नहीं है वही ईश्वर जब वो
00:16:41:21 होता है व्यवहारिक जो व्यवहारिक नहीं है वो जब व्यवहारिक होता है तो वो बन जाता है सगुण साकार उसी तरीके से जो धर्म था वो जब आपके व्यवहार के लिए होता है तो ये शास्त्रों का स्वरूप लेता है शास्त्रों का स्वरूप लेता है गुरु वाणी का स्वरूप लेता है तब वो आपके लिए व्यवहारिक हो जाता है ठीक है तो व्यवहारिक धर्म व्यवहारिक धर्म हमारा शास्त्रों से सुनिश्चित होता है अब बात य आती है कि आपने कहा कि मेरे पास जीवन को जीने के अच्छे बुरे को डिसाइड करने के लिए दो परिमाप है एक शास्त्र और दूसरा अनुभव ठीक है यानी कि आपका कहना है कि कोई व्यक्ति बिना शास्त्र के भी मनुष्य जैसा बन सकता है किसके जैसा बन सकता है बिना बिना शास्त्रों से के द्वारा जो ज्ञान मि उस ज्ञान के बिना भी व मनुष्य जैसा बन सकता है बिना शास्त्रों के ज्ञान के भी कोई व्यक्ति मनुष्य जैसा बन सकता है बिल्कुल बिना शास्त्र के ज्ञान के भी मनुष्य ऋषि और महर्षि बन सकता है नहीं आपसे आपसे आ चले आगे चलेंगे धर्मे पशु भी समाना अब धर्म हमको मिल रहा है शास्त्रों से जो वेद है वो हमारा
00:17:57:12 अंतिम से भी मिल रहा है आप समझ अच्छा आपको अलग से भी मिल रहा है आपका कहना ये है अच्छा ये बताइए फिर इसका मतलब है कि हम दो प्रकार के धर्म की रक्षा कर रहे हैं एक भगवत गीता से जो मिलता है वो एक मिनट और दूसरा धर्म जो जो राय जी है गाजीपुर के रहने वाले उनको जो अनुभव हो रहा है उस धर्म की भी हम रक्षा कर रहे हैं नहीं वो दोनों एक ही है तो आपका अनुभव और दूसरे का अनुभव एक ही होगा धर्म के अगर व देखिए जब जब मैं अपना प्रश्न मैं अपना प्रश्न क्लियर कर दूं मैं अपना प्रश्न क्लियर कर दूं आपके अनुभव के आधार पर मैं बता दूंगा अभी आपको मैं आपको प्रश्न क्लियर कर दूं आपके अनुभव के आधार पर आपने अपना धर्म सुनिश्चित किया दूसरे ने अपने अनुभव के आधार पर अपना धर्म सुनिश्चित किया तो क्या आप ये मानते हैं कि दोनों का धर्म एक ही होगा वो सनातन भी कहलाएगा अगर वो अगर वो धार्मिक होगा तो व धर्म अनुभव एक होगा और वो धर्म के पक्ष में होगा यानी अनुभव से पहले र्म होना चा उसम भी होगा अब कैसे मैं बता दे रहा हूं आपको क्यों होगा वो मैं बता देर अब जैसे कि यानी सुनिए सुनिए शास्त्रों में भी होना चाहिए इस चीज को ले लेते हैं आपने कहा श ये आपने बहुत अच्छी चीज कही है
00:19:12:20 शास्त्रों में भी होना चाहिए यानी कि जब हमें यानी कि हमारे लिए अंतिम निर्णायक अनुभव नहीं है शास्त्र है अगर हमें एक मिनट क्लियर कर दूं अगर कोई अभ आया बता दूंगा बोलने देंगे तो फिर मैं बताऊंगा कैसे सुनिए सु देखिए आपने काफी लंबा बोला था मैं बिल्कुल शांत था मैं ये कह रहा हूं ब मैं ये कह रहा हूं कि जैसे मुझे अनुभव आया अब ये अनुभव सही है या गलत है इसको अगर मैं शास्त्र से वेरीफाई कर रहा हूं तो तो मेरे लिए शास्त्र अंतिम प्रमाण है भले ही मुझे अनुभव आया मगर मैंने उसको वेरीफाई किया तो सत्यापन किससे हुआ शास्त्र से हुआ ना और केवल शास्त्र से भी नहीं आज की तारीख में हम केवल शास्त्र पर भी डिपेंड नहीं कर सकते गुरु गोविंद और ग्र क्योंकि शास्त्र तो कई कंपनियां छाप रही है भाई भगवत गीता स्पन भी छाप रही है आर्य समाज भी छाप रहा है यथार्थ गीता भी छप रही है ब्रह्मा कुमारी की गीता भी छप रही है आप कबीर पंथिया की गीता भी छप रही है तो केवल केवल उस शास्त्र पर नहीं परंपरा प्राप्त आचार्य द्वारा प्रमाणिक शास्त्र को हम आधार बना सकते कि मेरे मन में जो विचार आ रहा है अनुभव की वजह से क्या वो सही है कि नहीं तो उसके लिए हम जब परंपरा प्राप्त आचार्य द्वारा स्वीकार किए गए जो शास्त्र
00:20:27:27 है उ से जब हम वेरीफाई कर लेंगे तो इसका अर्थ य कि हमारा जो धर्म है उसका अंतिम निर्णायक वही परंपरा प्राप्त शास्त्र ही है हमारा अनुभव हमारा अनुभव हमारा अनुभव हमें दे तो रहा है मगर उसका भी सत्यापन करने हम जा रहे हैं किसके पास शास्त्र के पास अच्छा इसमें बात ये आ जाती है पूरा कर लू इसमें बात ये भी आ जाती है कि यदि हमारा अंतिम निर्णायक शास्त्र कोई है ही नहीं कोई भी ऐसी चीज दुनिया में है ही नहीं जो हमारा अंतिम निर्णायक हो सिवाय हमारे अनुभव के तो इसका मतलब यह है कि हम अपने अनुभव की रक्षा करने के लिए लड़ रहे हैं और वह भी आपका अनुभव अलग मेरा अनुभव अलग अजीत भारती का अनुभव अलग इन अनुभवों की रक्षा को आप सनातन कहते हैं क्या नहीं फिर मैं आपको आप बोलिए आप बोलिए अब जैसे मान लीजिए की हमारे इस धरती पर जो है ठीक है खोज हो चुकी है ग्रेविटी की कोई न्यूटन आया उसने खोज कर दी या फिर उससे पहले हमारे आचार्य थे ऑलरेडी कर चुके थे है ना ग्रेविटी की खोज न्यूटन ने तो दोबारा है ना लिख के छाप दिया अच्छा मान लीजिए क्या
00:21:43:01 ऐसा हो सकता है क्या कि ग्रेविटी के जो नियम है या फिर जो न्यूटन के नियम है वो मुझे कुछ और अनुभव हो जाए और किसी और को कुछ और अनुभव हो जाए नहीं नहीं नहीं होंगे ना और अगर किसी और को कुछ अनुभव हो जाता है तो उस अनुभव को सही भी नहीं कहा जाएगा प्रैक्टिकली व गलत साबित कर देगा कोई भी की भाई इस चर्चा को चर्चा चर्चा सुन लीजिए मैं यहां पर कह दू यह चर्चा विस्तृत ना हो जाए इसलिए मैं एक छोटा सा क्लू दे दूं यहां पर आपको न्यूटन का लॉ अगर किसी और को दूसरा अनुभव आएगा दूसरा अनुभव आएगा तो दोनों व्यवहारिक दृष्टि से उसे तुरंत सत्यापित कर सकते हैं कि पेड़ से फल नीचे गिरेगा कि नहीं गिरेगा सत्यापित आंखों के सामने किया जा सकता है ब्रह्म में कौन जाके हुआ कि नहीं हुआ इसका आप सत्यापन व्यवहारिक दृष्टि में नहीं कर सकते तो इसकी तुलना उससे ना करिए ऐसा नहीं जो विलीन हो रहा है ब्रह्म में वो वापस आक हमको यह नहीं बता सकता कि मैं ब्रह्म में विलीन हो गया इसलिए इसलिए न्यूटन का लॉ अगर किसी के दिमाग में गलत आएगा तो उसका हम सत्यापन कर लेंगे मगर ब्रह्म में जाने वाले का लॉ जब हमारे मन में गलत आ जाएगा तो उसका हम सत्यापन नहीं कर सकते गलत आया कि नहीं आया
00:22:59:25 चलिए सही सामाजिक व्यवहार से भी धर्म को जाना जा सकता है समझ रहे हैं आप समाज में किस तरह का व्यवहार करते हैं और देखिए धर्म और ब्रह्म को जान क्या मेरे को जो सबसे ये लगता है कि सबसे पहले जो चीज नष्ट हो जाती है वो होती है व्यक्ति का ईगो नष्ट हो जाता है सबसे पहली चीज तो वो नष्ट हो जाती है है ना ये देखिए आपने कहा मेरे को लगती है ये आपका अनुभव आप ला रहे हो ना बारबार ये मेरा अनुभव है हां ये मेरा अनुभव है कि सबसे पहले जो मैं य पर आपको एक चीज कहना चाहूंगा मुस्लिम घर में जन्म लेने वाला बच्चा यह सोचता है कि मैं अपनी चचेरी बहन से विवाह कर लू उसका अनुभव है क्या करें इसका नहीं तो नहीं नहीं तो वो तो साइंटिफिकली भी ग प्रन है
00:23:49:24 तुम ये आप कह रहे हो एक जान एक जानवर भी जब है ना वो करता है और अपने अपने बडि करता और बढ़ाता है तो उसमें से सबसे पहले क्या किया जाता है मेल मेंबर को निकाल फेंकता है व बाहर तुम जाओ तुम अपना अलग किंगडम बनाओ है ना ताकि तुम अपने ही जो है घर के उसके साथ ना करो ताकि वो तुम्हारी वंश खत्म ही ना हो जाए उससे उनके पास उनके पास भी साइंस पर आधारित उनके पास भी साइंस पर आधारित बहुत अच्छी अच्छी व्याख्या आपको मिल जाएंगी जिसमें वो आपको य बता देंगे हम इस कारण से मास खाते हैं प्रोटीन मिलता है मास से प्रोटीन अब अब मेरे पास भी बहुत सी साइंटिफिक ऐसी बातें बिलकुल नहीं खाना चाहिए देख देखिए मैं कह रहा हूं सभी हिंदुओं को आपके अनुसार अनुभव आएगा क्या यह संभव है आपके द्वारा स्वीकार किए जाने वाले सिद्धांत सभी हिंदू स्वीकार करेंगे क्या है संभव है दूसरी बात आपने भी साइंस का वो दिया आपने भी साइंस का वो दिया क्या साइंस के जो नियम होते हैं वो सनातन होते हैं क्या उन पर रि नियम होते आज साइंस नहीं होते हैं आज साइंस ये कह रही है आज साइंस ये कह रही है कि भाई अपने
00:25:05:01 ही उसमें विवाह करना वो है गलत है मान लिया आपके अनुसार आपके अनुसार आप आज साइंस से कह रही है कि अपने ही उसमें विवाह करेंगे तो ऐसा ऐसा हो सकता है कल को साइंस कोई साइंटिस्ट होगा तो वो ये भी निकाल निकाल देगा कि भाई नहीं अब थोड़ा-थोड़ा ऐसे क्लूज मिल गए कि ऐसा नहीं है दूसरी बात इसमें भी दूस अरे क्यों नहीं ऐसा हुआ है जब बत बी बात रामानुजन मुझे लगता उनसे बड़ा मैथमे कोई सृष्टि में पैदा हुआ होगा उनकी बात दोहराना चाहता हूं ठीक है जो मैथ के नियम होते हैं ना ठीक है जैसे है ना की मैथ की बात नहीं कर रहा हूं सु सास मैथ तो साइंस का पट है तो पार्ट है मगर मगर जो साइंस के नियमों की बात कर रहे कि भाई अभी तक एड्स का इलाज नहीं था आगे एडस का इलाज है तो उसके आधार पर हमय नहीं मान सक य अच्छा य बुरा है साइंस के आधार पर सहारा दे सकती है बिल्कुल बिल्कुल दे सकती है और मैं यह बता रहा हूं कि साइंस और ईश्वर दो चीज नहीं है आप बता दे रहा
00:26:14:15 हूं मगर जो हमारे सामने क य नहीं क रहाय नहीं क र सा ईश्वर अलग चीज कह रहा जो प्रस्तुत की जा रही है वही ईश्वर वाली साइंस है जो प्रस्तुत की जा रही है वही ईश्वर वाली साइंस है तो गलत है वही तो मैं कहना चाह रहा हूं सता है ईश्वर वाली साइंस दूसरी ओ प्रतु गलत वही तो मैं कह रहा हूं जैसे साइंस में आगे बढ़ने की और खोजने की और जानने की और बदलाव की जरूरत है इसका मतलब ये है कि आप ये कह रहे हैं कि मेरे को अनुभव हुआ जैसे किसी मुस्लिम को अनुभव बहतर करने के आप जैसे कि मैं एक छोटा सा एग्जांपल देता हूं देखिए जैसे ना जो जैसे कि मैं आप आपको यह बताता हूं कि हर व्यक्ति एक तरीके से मोक्ष नहीं प्राप्त कर सकता है ना जैसे कि मोक्ष प्राप्त करने का सबसे आसान मार्ग जो कि मास के लिए सबसे अच्छा मार्ग है व है भक्ति मार्ग है ना भक्ति में लीन रहिए इससे अच्छा मोक्ष का मार्ग नहीं होता य मा देखिए हम लोग विषय से भटक रहे हैं हम लोग विषय से भटक रहे हैं मैं आपको विषय बहलाता हूं दोबारा हम अगर किसी मुस्लिम से आपको अनुभव य आ रहा है कि अपनी चचेरी बहन से विवाह ना करो और हम किसी और किसी मुस्लिम के मन में ये आ रहा है किसी
00:27:30:00 अ हिंदू के मन में ये मन आ रहा है या आजकल तो हिंदू भी ऐसे हो रहे हैं कि मैं अपनी चचेरी बहन से विवाह कर लू उसके मन में य आ रहा है और ज्यादातर ऐसा होता है संस्कारों की वजह से कि उनको अपने यहां संस्कार कैसे मिल रहे हैं ठीक है अब बात ये आती है कि आप उससे ये कह रहे हो कि नहीं भाई ये तो तू गलत कर सोच रहा है ये जो अनुभव है अब आप उसको साइंस भी दे दे रहे हो कि इसमें जो है साइंस भी है देख भाई इसका अर्थ क्या हुआ इसका अर्थ ये हुआ और आप फिर कह भी रहे हो कि साइंस का नाम है बदलाव आप ये भी स्वीकार कर रहे हो यानी कि आप उससे
00:28:04:01 ब र एक मिनट एक मिनट यानी कि आप उससे यह कह रहे हो कि देख भाई तुझे जो अनुभव आ रहा है वो गलत है इस सिद्धांत के अनुसार जो कि आगे चलके बदल सकता है हो सकता है आगे चलके यह तेरा जो अनुभव सही सिद्ध हो मगर आज तू मेरी बात मान ले क्योंकि मेरा अनुभव ऐसा है नहीं मैं अपना अनुभव नहीं बता रहा हूं मैं प्रैक्टिकल अनुभव बता रहा हूं आप समल अ सास के आप नियम वो बदल रहे ना वो साइंस के नियम किसी साइंटिस्ट ने आपको दिए है ना के नियम ऐसे नहीं डिस्कवर किए जाते किसी ने कुछ भी लिख दिया और कोई भी कैसे भी मान लेता ठीक आपके जीवन का है जैसे आपने बताया ना कि व से जब तक गिरेगा नहीं तब तक वो नहीं मानेगा वैसे ही नियम आते हैं साइंस के कोई भी नियम
00:28:56:12 हो रहस है जो साइंटिस्ट उजागर करता है वो रहस्य ईश्वर नहीं बनाए है वो न्यूटन का नियम ईश्वर ने बनाया और क्लियर कर लेता हूं थोड़ा सा विषय हमारा क्लियर हो जाए कि हम रक्षा कर रहे हैं उस धर्म की परिभाषा क्या है हम हम धर्म की रक्षा कर रहे हैं परित है मगर उसम आप य कर रहे हो भगवत गीता अतिम नहीं उस मेरा मतलब मेरे लिए लेकि मा केलिए नहीं बता या की हम सब रक्षा कर रहे व गीता की कर रहे आपके अनुभव की नहीं कर रहे ब अपने अ रक्ष कर
00:29:49:01 रहा ू कैसे हो सकता है हिंदू एक कैसे हो सकता है भगवत गीता के आधार पर अगर उसम मलाला द कि आपका अनुभव क्या कहता है तो उस पॉइंट पर ू एक नहीं होगा मैं आपकी इस बात को स्वीकार कर रहा हूं वो उस बात करेंगे आपका आपके अनुभव प तो मैं इस बात को मतलब ये समझ ल कि भगवत गीता वो धर्म है जिसके जिसकी पूरा सनातन धर्म रक्षा कर रहा है इसमें कोई भी मिलावट नहीं होनी चाहिए ठीक है बिल्कुल अब भगवत गीता यह कह रही है कि भाई शास्त्र ही हमारे लिए प्रमाण है इस बात के लिए कि अच्छा हो बुरा हो भगवान श्री कृष्ण नहीं कह अनुभव हमारे लिए प्रमाण है क्योंकि भगवत गीता में अर्जुन यह कहता है कि मेरी इंद्रियों के द्वारा अगर मेरे मन में ऐसा भाव उत्पन्न हो जाएगा जो गलत काम करने के लिए मुझे प्रेरित करेगा तो मैं उसे कैसे पहचानू तो वहां पर भगवान ने कहा कि आपके मन में यदि भगवान के रूप में भी अगर ऐसा भाव उत्पन्न हो जाए कि भगवान आके कह रहे हैं ये काम करो तब भी उसे परंपरा प्राप्त शास्त्र और आचार्य से आप सत्यापित करवाए तो यहां पर यह बात मानी जाए या ना मानी जाए
00:31:01:10 एक सेकंड एक सेकंड सॉरी सॉरी सॉरी जी तो अर्जुन ने यह बात कही कि भगवान मेरे मन में मेरी जो इंद्र है क्योंकि भगवान तो यह कह रहे हैं कि मैंने तो तुम्हें पशु व्रत बनाया है आपके अंदर जो मध्य मास मदरा मैथुन ये सब जो है यह भाव मैंने तुम्हारे अंदर इनबिल्ट किए माया से प्रभावित मैंने तुमको वो किया है तो अब यहां से तुम्हें अगर मुक्त होना है तो तुम्हें आलंबन
00:32:16:19 लेना होगा धर्म का शास्त्रों का ठीक है अब आप कह रहे हैं कि मेरे मेरा जो धर्म है व्यक्तिगत वो वो भगवत गीता प्लस मेरा अनुभव है अनुभव भी मुझे बताएगा भले ही भले ही भगवत गीता उसके विरुद्ध जा रही होगी तो मैं वहां पर अनुभव को मानूंगा भगवत गीता को नहीं मानूंगा मैं अपने पर्सनल जीवन में जी हां आप वहां पर इसका अर्थ ये है कि आपका जो धर्म है वो वो आपका अनुभव है वो भगवत गीता आपका धर्म नहीं है पर हां आप समाज की रक्षा के लिए भगवत गीता के लिए लड़ रहे हो हां मैं समाजिक रूप से भगवत गीता के लिए लड़ रहा हूं लेकिन कहीं कहीं मेरा पसल पर्सनल जो धर्म है वो भगवत गीता नहीं है तो उससे उससे उससे उससे मैं वो मैं कभी समाज प थोपू भी तो नहीं ना उससे मैं नहीं नहीं मैं थोपने की बात नहीं कर रहा हूं एक चीज क्लियर कर ले आपका जो व्यक्तिगत धर्म है वो भगवत गीता नहीं है नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है वो भगवत गीता है अंतिम प्रमाण क्या है आपका अनुभव या भगवत गीता अंतिम प्रमाण मेरा अनुभव है तो फिर अंतिम प्रमाण ही तो धर्म होता है व्यक्ति का आपका मत क्या है आप किसकी ओर जाएंगे मेरे लिए समाज के लिए भगवत गीता अच्छा ठीक है ठीक है तो मैं आपसे वही पूछ रहा हूं आपका जो व्यक्तिगत धर्म है अंतिम प्रमाण क्या है आपके जीवन
00:33:31:22 का मेरे लिए तो मेरा अनुभव है हां अनुभव है अब सनातन की परिभाषा और सनातनी की परिभाषा क्या है सनातन की और सनातनी की परिभाषा तो आप शास्त्रों से लेंगे ना सनातन की परिभाषा बताइए तो जिसकी आप रक्षा कर रहे हैं वह परिभाषा क्या है मतलब ऐसी कोई एक परिभाषा तो है नहीं ये तो अगर हम लोग बहुत बहुत संक्षिप्त में अगर ले तो सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर जो कि मनुष्य की चाह का वास्तविक विषय है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त कर सकने वाली मर्यादा का नाम धर्म है और सनातन का जो अर्थ है अथर्ववेद में दिया गया है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसका नाम सनातन है ठीक है ना ही वो उत्पन्न हो ना ही वो खत्म हो उसका नाम सनातन है अब आप अगर आज आपके मन में कोई एक अनुभव आता है जो कि हमारे जो परंपरा प्राप्त शास्त्र जो सृष्टि के प्रारब्ध से और ईश्वर के साथ सदैव से थे अनादी है उन शास्त्रों से मैच नहीं खा रहा है तो आपका जो अनुभव है वो आज आया वो शास्त्र कौन से है वो शास्त्र कौन से है वो बाद में बात करेंगे अभी शास्त्र अनुभव की अभी
00:34:46:22 शास्त्र अभ नहीं नहीं नहीं सुनिए तो अभी शास्त्र मैं तो भगवत गीता को ही रख रहा हू मैं अभी अभी आपके समक्ष भगवत गीता को ही रख रहा हूं ना अभी तो मैंने कोई दूसरा शास्त्र नहीं लाया ठीक है तो अब आपका कहना है कि यदि मेरे मन के अंदर आज कोई अनुभव जनित वो आता है तो मैं वहां पर अपने अनुभव को स्वीकार करूंगा भगवत गीता को नहीं जो कि परंपरा प्राप्त तरीके से सृष्टि के प्रारब्ध से और वो भी ईश्वर के मुख से ईश्वर से ही आ रही है क्योंकि हमारे जो शास्त्र है वो सनातन शास्त्र है अब आपका जो अनुभव है वो आज जनित हो रहा है आप अपने अनुभव को आज प्रायोरिटी दे रहे हैं शास्त्र को पीछे कर रहे हैं तो आप व्यक्तिगत रूप से सनातनी कैसे हुए सनातन को ना मानने वाला सनातनी कैसे हुआ मैं बताता हूं आपको अच्छा एक बात इसीलिए तो मैं कह रहा हूं ना देखिए जैसे क्या होता है वैसे तो मेरे अनुभव कभी भी शास्त्र विरुद्ध कभी हुए नहीं जैसे आपने कहा कभी मेरे को ऐसा नहीं फील हुआ कि हा मुझे मुर्गा खा लेना चाहिए वो आपको नहीं होगा अभी मैं नियम बताऊंगा वो क्यों नहीं हो रहा है वो आपको नियम बताऊंगा क्यों नहीं हो रहा है समझ रहे जो मैं जिन शास्त्रों को मानता हूं उन शास्त्रों के विरुद्ध तो कभी अभी तक ऐसा मुझे जिन शास्त्रों को आप मान रहे हैं केवल उसकी सीमा में रहते हुए ही ये सिद्ध करूंगा
00:36:01:24 कि आपको वो जो चीजें फील नहीं हो रही है वो क्यों नहीं हो रही है मैं आपको सिद्ध करूंगा जी ठीक बताइए तो मुझे अभी तक तो ऐसा फील नहीं हुआ लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि हमेशा ना एक जैसे कि हम इससे पहले बात करते हमेशा एक ओपन स्पेस होना चाहिए जगह होनी चाहिए बदलाव की बदलाव का मतलब ये नहीं है कि हम सनातन के बेसिक रूल्स है उसको ही मोल्ड करने है ना उसको मोल्ड नहीं करेंगे है ना वो जस के तस रहेंगे है ना लेकिन उसम एक स्पेस बनाएंगे जहां से कि हम और लोगों को एंट्री दे सके और उनको भी इसमें सम्मिलित कर सके आप समझ रहे हैं इस बात को बात को अगर इस बात को अगर मैं व्यवहारिक रूप से देखूं तो हम लोग रक्षा कर रहे हैं धर्म की कि नहीं भाई माता के साथ माता जैसा व्यवहार होगा बहन के साथ बहन जैसा व्यवहार होगा इसके विरुद्ध हम लोग नहीं इस भाव की इस व्यवहार की हम रक्षा कर रहे हैं मगर दूसरे को अगर इसमें मिलाना है तो हम उससे कहते हैं चलो ठीक है थोड़े दिन तुम माता के साथ वैसा व्यवहार कर लो जैसा तुम चाह रहे हो नहीं फर अब हम बताते हैं अब देखिए य आप ये नहीं है जैसे की
00:37:17:00 अब जैसे मान लीजिए आपके गुरु जी के गुरु जी करपात्री महाराज का ये कहना था कि मुसलमानों को कभी सम्मिलित नहीं किया जा सकता क्योंकि फिर आप उन्हे किस वर्ण में रखेंगे और मैं यह कहता हूं कि हमें वो ओपन स्पेस रखना चाहिए कि हम उनको भी रिवर्ट करके सना आपसे पूछ रहा हूं देखिए हम तार्किक हम तार्किक चीजों पर भी जाएंगे हम लोग जा रहे हैं रेशनल हूं मैं तार्किकता प हम जाएंगे ठीक है पहले हम निर्णय कर ले कि आप सनातनी कैसे आप स्वयं को सनातनी कह रहे हो कि नहीं हा कह रहा हूं कह रहे हो मगर आप यह कह रहे हो कि जो सनातन शास्त्र है अगर मेरे मन में कोई अनुभव आएगा तो मैं उसको ऊपर रखूंगा प सुनि सु मैं क्या कह रहा हूं सामाजिक
00:38:04:07 त सामाजिक रूप से मैं जब समाज में व्यवहार कर आपकी बात समझ गया मैं आपकी व्यक्तिगत विचारधारा पूछ रहा हूं कि व्यक्तिगत क्या होगा जिन सनातन शास्त्रों को आप मान रहे हैं कि सनातन शास्त्र है वेद गीता उपनिषद ठीक है इनको मान रहे है ना वेद गीता उपनिषद यह सनातन शास्त्र है अब आपके मन में जो अनुभव आ रहा है उसको आप प्र दे रहे सनातन को ठुकरा रहे सनातन शास्त्रों को वहां पर ठुकरा रहे हैं ठीक है तो फिर आप सनातनी कैसे हो रहे हैं वो सिद्ध करिए मुझे क्योंकि सनातन का अर्थ क्या है कि वो जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना तो उत्पन्न हो अब जैसे की इस्लाम की बात करें तो इस्लाम सनातन क्यों नहीं है इस्लाम वाले अधिकतर ये कहते हैं कि भाई हमारा तो ईश्वर जो है उसी ने सृष्टि बनाई है इसलिए हम भी हमारा भी धर्म जो है शाश्वत है मगर दो 187 में कुरान में लिखा हुआ है कि जो पवित्र महीना उनके यहां का होता है रमदान उसमें स्त्री संग करना पहले मना था मगर आज मैं आप लोगों के लिए अलाउ कर दे रहा हूं पहले मना था मगर आज मैं आपको लोगों के लिए अलाउ कर दे रहा हूं यह क्या हुआ कि वो खुद बता रही है कि जो नियम पहले नहीं था वो आज मैं उत्पन्न कर रहा हूं वो खुद ये कह रही है तो फिर
00:39:19:09 उस किताब से मिलने वाला जो मत है विचार है वो सनातन विचार सनातन नियम नहीं है वो खुद क मैं बदल रही हू तो अब जब आप इन सनातन शास्त्रों को अस्वीकार कर रहे हैं आज जो आपके मन में जनित हो रहा है उस विचार के आगे तो फिर आप सनातनी कैसे कह पा रहे खुद को मैं य जानना चाह रहा हूं चलिए फिर मैं आपसे कुछ जो है क्वे कर लेता हूं ठीक है यह बात बताइए जो गुरु शिष्य परंपरा से ना आया हो वह सनातनी है कि नहीं सनातनी के दो अर्थ है इसको समझिए एक दुनिया का प्रत्येक प्राणी सनातन है सृष्टि सनातन है ईश्वर सनातन है हमारे ग्रंथ सनातन है हम उस सनातनी की बात कर रहे हैं जो सनातन शास्त्र मूल रूप से वेद आदि पर आस्थान वित हो वह सनातनी है अगर व उसके प्रति आस्थान वित नहीं है तो वह दिखाई दे रहा है व्यवहारिक रूप से लोगों को दिख रहा है ऐसे भी लोग है जो शास्त्रों को नहीं मानते हैं वेदों को नहीं मानते मगर चंदन लगाए सब कुछ कर रहे हैं क्रॉस कर रहे हैं तो वो क्या हो जाएंगे अज्ञात नास्तिक अज्ञात सना गैर सनातनी अज्ञात अ हिंदू और आज हमारी जो सबसे ज्यादा
00:40:34:16 जनसंख्या है वो ऐसी ही है सिद्धांत विहीन है वो उसको मालूम ही नहीं है कि हमारे मूल सिद्धांत है क्या अगर हमसे क्वेश्चन कर लिया जाए कि तुम हिंदू हो तो किस आधार पर हो और हिंदू नहीं हो तो किस आधार पर नहीं हो ज्यादातर हमारी जनसंख्या ऐसी है उसको कहते हैं भटका हुआ हिंदू जन्म तो हिंदू में हो गया जन्म तो हिंदू में हो गया और प्राणी है तो वो तो सनातन है आत्मा सनातन है नैनम छ सण नन दती पावक तो उस हिसाब से प्राणी मात्र भी है तो वो सनातन है मगर यहां बात हो रही है किसने सनातनी विचारधारा को एक्सेप्ट किया हुआ है और कौन सी विचारधारा है जो हमारे सनातन शास्त्रों से स्फुट हो रही है तो इसीलिए तो मेरा प्रश्न ये है कि जो जिसने जो गुरु शिष्य परंपरा से नहीं आता क्या वो सनातनी है कि नहीं सनातनी है वही मैं बोल रहा हूं अगर वो उसको ठुकरा देगा मालूम होने पर भी तो उसके सनातनी होने पर प्रश्न चिन्ह लग जाएगा अगर वो ये बता दिया जाए कि भा अगर गुरु शिष्य परंपरा से नहीं आता लेकिन मानता नहीं गुरु श परंपरा तो होनी चाहिए मानता नहीं जब उसके सामने रख दिया जब उसके सामने रख दिया कि भाई भगवत गीता तो यह कह रही है वेद तो यह कह रहे हैं तुम ये कैसे कर रहे हो सपोज ट आज की हमारी बहुत सी ऐसी परंपराएं है
00:41:50:00 गली जो कस्बे है उनमें ऐसे वर्ण है जहां पर अपनी ममेरी फेरी बहनों से विवाह हो रहा ठीक है मनुस्मृति में दिया गया है कि ममेरी फुफेरी बहनों से विवाह कदाचित वर्जित नहीं है चचेरी बहन से ित वर्जित है वर्जित नहीं नहीं गलत कह दिया वर्जित है क्योंकि क्योंकि ये सभी बहने है अब हम उनको जाकर के मनुस्मृति दिखा रहे हैं जो कि सनातन शास्त्र है हम उनको जाकर के व शास्त्र दिखा रहे जो प्रभु श्री राम ने स्वीकार किया हुआ है जब बाली को प्रभु श्री राम ने तीर मारा था वाली ने उनका खंडन किया था कि अगर तुमने मुझे मांस खाने के लिए मारा है तो तुम मनुस्मृति के श्लोक उद्र की माली ने वहां पर और फिर जवाब में राम जी ने उनका खंडन किया कि मैंने तुम्हें मनु महाराज के द्वारा बताए गए इन इन श्लोकों के आधार पर मारा है तो यानी कि जो राम जी है उनके लिए जो शास्त्र अंतिम है प्रमाण है वो शास्त्र उन लोगों के लिए प्रमाण नहीं है जो अपनी ममेरी फुपी बहनों से विवाह कर रहे हैं मगर फिर भी वो स्वयं को राम का भक्त कह रहे हैं मगर फिर भी वो स्वयं को हिंदू कह रहे हैं तो वो हिंदू आप बताए वही मैं कह रहा वही मैं कह रहा हूं मैंने मैंने एक चार्ट बनाया मैं आपको चार्ट दिखा देता
00:43:18:13 हूं हमारे पास एक चार्ट है यह वाले जो हिंदू है जो जिनके सिद्धांत नहीं है मैं आपको दिखा रहा हूं अपना हमें इन्ही हिंदुओं का वापस लाना है क्योंकि सबसे ज्यादा संख्या स्कन की नहीं है सबसे ज्यादा संख्या आर समाज की नहीं है सबसे ज्यादा संख्या ब्रह्मा कुमारी की नहीं है सबसे ज्यादा संख्या कबीर पंथिया की नहीं है सबसे ज्यादा संख्या है इन हिंदुओं की जिनको अपने सिद्धांत ही नहीं पता है और इन हिंदुओं को हम लोग शास्त्र गुरु गोविंद ग्रंथ की सहायता से जब एक कर लेंगे तो हम मुठी बन पाएंगे सत्य है क्योंकि ये लोग इनके सिद्धांत नहीं है सिद्धांत विहीन है रामचंद्र जी का नाम तो ले रहे हैं मगर रामचंद्र जी का ही विरोध कर रहे हैं कई जगहो पर जैसे कि आचार्य प्रशांत जीत हो सता है ये तो सही है आचार्य प्रशांत जी है आचार्य प्रशांत जी ने कहा मैं नहीं मानता कि किसी ने कभी मनुस्मृति को प्रमाण माना हो अब वो हिंदू धर्म का प्रचारक कहला रहे हैं और राम जी ने उसको प्रमाण मान लिया प्रशांत जी तो पता नहीं क्या ही प्रचार करते रहते उसका तो भाई बहुत ज्यादा उनसे तो मतलब उनकी क्या बात करें है ना मैं एक बात कह रहा हूं अब मैं उनकी इस चीज को डालू आना
00:44:33:15 तो बहुत ही मतलब मेरे लिए खुद ही बहुत ही कठिन है तो मैं क्या बोल बात ये है मैं इसकी वजह बता रहा हूं आपको जैसे हमने श्री राम को जाना श्री राम जी भी गुरु वशिष्ठ के पास जाते हैं शिक्षा लेने बचपन से ही ठीक है इना तो मानते हैं आप श्री राम जी के लिए कहा गया वाल्मीकि रामायण 337 1 राम विग्रहवां धर्मा आपको कुछ नहीं मालूम है राम ने जैसा जैसा किया वैसा वैसा कर लो आप धर्म का पालन कर लोगे मगर राम जी की गुरु के पास जाने वाली जो बात है उसको हम नहीं मानेंगे गुरु विहीन है हम लोग इसलिए जो बंदा है भटक रहा है इसलिए डॉक्टर जाकिर नायक किसी का ब्रेन वश कर पाता है इसलिए केरला स्टोरी जैसी फिल्में सामने आती है जिसमें बिटिया अपने ही पिता पर जाकर थूक देती है यह सारी कहानिया इसलिए है क्योंकि व्यक्ति गुरु विहीन है क्योंकि जैसे हम जब वाल्मीकि रामायण अगर पढ़ेंगे तो उसमें वृतांत आपको बता दूं हनुमान जी गए हैं सीता मैया को खोजने ठीक है अब वो सीता मैया के अंदरूनी अंगों के बारे में विचार कर रहे हैं स्पष्ट शब्द लिखे व नाम लिखे उन अंगों के अब इस ग्रंथ को यदि कोई बिना गुरु व्यक्ति पढ़ेगा तो
00:45:48:19 क्या होगा अरे हनुमान जी तो माता सीता के बारे में ऐसी बातें सोच रहे मगर उन्होंने किस परिपेक्ष में वो बातें सोची इसको हम प्रैक्टिकली अगर देखें तो हम अपनी माताओं को अपनी बहनों को अगर किसी भीड़ में ढूंढने जाएंगे वहां पर तो हनुमान जी ने सीता माता को पहले कभी देखा ही नहीं था मगर हम अपनी माताओं बहनों को जब ढूंढने जाते हैं कहीं पर भी तो हमारे पास पहला जो प्रमाण होता है कि वो एक स्त्री है यही तो होता है कि हम एक स्त्री को ढूंढने निकले हैं भले व उसके मतलब उसके अंगों का विचार हमारे मन में होता है तो वो जो डीप लेवल का विचार है सनातन धर्म क्या करता है बिल्कुल खोल के रख देता है और जो चीज जो दर्शन जो ज्ञान ऐसा है जो खोल के नहीं रखता उसको उसको लगता है बुरा कर रहा है बुरा कर रहा है वो बुरा कर रहा है तो अब उसने वो वहां पर वाल्मीकि जी ने बिल्कुल स्पष्ट खोल दिया कि उन्होंने मन में क्याक सोचा उस समय क्या क्या विचार है तो मन में यही सोचा कि भाई स्त्री है तो उसके अंग ऐसे ऐसे होने चाहिए वो ऐसी होनी चाहिए अगर वो राज घराने की तो वो ऐसी होनी चाहिए उस दृष्टिकोण से सीता माता को पहचानने के लिए हनुमान जी ने वो सोचा मगर यदि इस तरह से व्याख्या करने वाला कोई मार्गदर्शक कोई गुरु नहीं होगा तो व्यक्ति भटक जाएगा इसीलिए स्कंद पुराण
00:47:03:26 में वचन है सीधे सधे इसीलिए राम जी भी जब जन्म लेते हैं तो वशिष्ठ के पास जाते हैं इसीलिए कृष्ण जी जन्म लेते हैं तो व शीपन के पास जाते हैं मगर हमारा जो आज का 60 पर 65 पर जो हिंदू है बचा कुचा जो इकोन इन से बच गया है विचारधाराओं से वोह गुरु के पास नहीं जाता हैम इस जो मेरा क्रॉस क्वेन रहेगा और वो मुझे लगता है कि ये बहुत सारे लोग का होगा जैसे देखिए मेरा ये मानना है कि धर्म जो है ना नदी की तरह है उसम बहता पानी है पानी सनातन है उसमें लेकिन वो बहता रहता है आप समझ रहे हैं वो कहीं चौड़ा हो जाएगा जगह के अनुसार वो कहीं पतला हो जाएगा धारा उसकी कहीं तीव्र हो जाएगी कहीं धीमी हो जाएगी आप समझिए इस बात को अब जैसे जब आप त्रेता में होते हैं तो वचनबद्धता ही धर्म रहता है आप सुनिए सुनिए मैं एक आपको चार्ट भेजूंगा हम ये चार्ट बना चुके हैं प्रथम स्तर पर कौन हिंदू है जो सं पूर्णत धार्मिक है भगवत गीता में एक वचन आया है यदि आप
✅ This part is already used · 00:48:06:26 – 00:48:17:04 (0:10)
→ Used in: A · Live जात पात की करो विदाई #hindu #dheerendrakrishnashastri #bhageshwardhamsarkar at 1:40:39 ↗
00:48:06:26 अज्ञानता वश अथवा व्यवस्था वश धर्म का अनुकरण ना कर पाने की स्थिति में धर्म का अनुकरण ना कर पाने का पश्चाताप मन
⬜ Not used yet · 00:48:17:04 – 01:30:30:00 (42:13)
00:48:17:04 में रख के चल रहे हैं तो आप धार्मिक ही कहलाएंगे धर्मजीत यदि आप धर्म का अनुकरण ना कर पाने की स्थिति में उसको न्यायोचित ठहराए और जो आपका जो धर्म जो स्फुट हो रहा है शास्त्रों से उसको आप कहेंगे मैं नहीं मानता इसको तो वहां पर आप जो हमारा सेकंड जो हमारा दूसरे नंबर पर जो हिंदू है जो अभी तक किसी विशेष उसमें फसा नहीं है है ना तो वो सेकंड नंबर का जो हिंदू है वो यही है पता चल जाने पर भी उसके मन में ये आएगा कि मैं सही हूं शास्त्र गलत है भले ही वो शास्त्रों के उस वाक्य को ढूंढने जाए कहीं पर या ना जाए इसी के बारे में भगवान ने कहा संशय आत्मा विनती भगवत गीता 44 कि संशय में रहने वाले व्यक्ति का ना तो इस जन्म इस दुनिया में कुछ हो सकता है ना परलोक की तो बात बहुत दूर है मगर हिंदू धर्म को लेकर ही व्यक्ति के मन में पस संशय है वो संशय खत्म करने के लिए कहीं नहीं जा रहा है वो संशय लेकर ही घूम रहा है यह है हमारा जो जो ज्यादा संख्या हिंदुओं की जनसंख्या वो यही है गुरु विहीन हिंदू सिद्धांत हिंदू सिद्धांत है ही नहीं अब जो ममेरी फुफेरी बहनों से विवाह करने वाला है उसको हम यह बता
00:49:32:09 रहे हैं कि भैया मनुस्मृति मना कर रही है आगे मत करना स्वीकार कर लो गलती हो गई व कह रहा जन है अगर इसके लिए मनुस्मृति की आवश्यकता पड़ रही है तो मतलब क्या कहा जाए फ तो जानवर से भी बेकार है देखिए यय बात हैका दृष्टिकोण है आपका दृष्टिकोण किसी और के लिए मान नहीं हो सकता है उसके लिए सुपीरियर अथॉरिटी का दृष्टिकोण मान्य हो सकता है मगर वो यह कह रहा है मैं राम को तो मानता हूं मगर राम जिसको मानता था मैं उसको नहीं मानता हूं वो यह कह रहा है फिर भी वो सनातनी है फिर भी वो राम भक्त है तो जो आपने प्रश्न पूछा था ना कि जो गुरु परंपरा से नहीं जुड़ा है आपने जो प्रश्न पूछा था कि जो गुरु परंपरा से नहीं जुड़ा है उस प्रश्न का उत्तर यही है कि यदि वोह गुरु परंपरा से नहीं जुड़ा है दूर रह कर के भी कुछ गलतियां कर भी रहा है मगर उसको यदि कभी पता चलता है कि परंपरा प्राप्त शास्त्रों का मैं खंडन कर रहा हूं उस स्थिति में वो स्वीकार कर लेता मान लीजिए वो तुरंत की तुरंत सुधर ना पाए जैसे कोई बच्चा है वो सिगरेट पी रहा है किसी दिन उसके पापा ने बताया भैया इससे फेफड़े खराब हो जाएंगे ऐसा ऐसा है नहीं पीनी चाहिए तार्किक और प्रमाणिक दोनों धरातल पर गुरु बताते गुरु कभी भी केवल प्रमाण नहीं देता है युक्ति और तर्क से युक्ति
00:50:47:15 और तर्क से आपके संशय को मिटाता है कि य लिखा तो क्यों लिखा हमने अगर ये बात कही तो क्यों कही मगर व्यक्ति उसके पास जा ही नहीं रहा प्रणाम है मेरा ये प्रश्न था आप मैं वो बात पूरी कर लू तो बच्चे को जब पता चला कि पापा ने मुझे सही चीज बता दी है तो दो बातें हुई या तो बच्चे ने सोचा कि मैं जैसे तैसे करके इस आदत से भगवान निजात पाऊ जो पापा जो कह रहे हैं उनकी बात मान पाऊ पिताजी जो बात कह रहे वो बात मान पाऊ दूसरा बच्चा य नहीं पिताजी गलत कह रहे हैं पिताजी को क्या मालूम सिगरेट पीने से थोड़ा सा माइंड बूस्ट होता है पढ़ने में मन लगता है वो अपने आप को तार्किक सिद्ध कर रहा है मनी मन तो यह वो हिंदू है जो कि फिर पिताजी के पिताजी की तरफ आस्थान वित नहीं कहलाया जा सकता क्योंकि वह अपने विचारों को अपने अनुभव को वहां पर प्रायोरिटी दे रहा है और कह रहा है कि मैं सनातन हूं पता पता तो हिरण हो सकते आप समझ रहे ना हा नहीं तो मैंने क्या कहा य युक्ति और प्रमाण मैंने कहा युक्ति बिल्कुल बिल्कुल देखिए मैं आपको गुरु की व्याख्या बता दूं गुरु गुरु की व्याख्या बता दूं आपको गुरु की व्याख्या भी बता देता हूं अथर्ववेद 11 पा 16
00:52:02:28 अंतिम निर्णायक ब्रह्मचारी सन्यासी हो सकता है मनुस्मृति 12वां अध्याय 112 से 114 पहली बात वो अंतिम निर्णायक आप किसी भी गुरु के सानिध्य में वो गुरु किसी सन्यासी के सानिध्य में हो अब हमारे टॉप लेवल पर जो बैठने वाले जो गुरु होते हैं शंकराचार्य निबार काचार्य मधवा चार्य रामानुजाचार्य इन पदों पर बैठने वाले जो गुरु होते हैं सन्यासी होते हैं दूसरी बात अब दूसरा आता है कि वो परंपरा प्राप्त होना चाहिए सेल्फ प्रोक्लेम नहीं होना चाहिए अपने अनुभव के आधार पर बना हुआ गुरु नहीं होना चाहिए आचार्य प्रशांत जैसा नहीं होना चाहिए आचार्य प्रशांत जी क्या है देखिए आचार्य प्रशांत जी की बात बताऊ कि की बात कर रहे हम लोग एक बात बता दूं जब बात आही गई है अब जैसे वो वो भी कहते मेरा अनुभव है मैं बता रहा हूं वो सही है क्या करेंगे हम लोग सही है और फिर हम फिर हम एक कैसे हो पाएंगे तो हम करेंगे उ बैठ के हम बैठेंगे ना उनके साथ हम उनको चैलेंज करेंगे ना कि आइए जैसे वही तो हम कर रहे हैं वही हम कर रहे हैं तो आप हमारा विरोध कर रहे हैं वही हम कर रहे हैं क्या बात कर र मैंने कभी आपका विरोध नहीं किया नहीं नहीं अच्छा अच्छ मैं बात पूरी कर लू आचार्य प्रशांत जी की बात पूरी कर पहले कमेंट में भी यही था कि मतलब कि आप भी सही है कुछ चीजों में आर्य
00:53:18:01 समाज भी सही है कहीं आप भी गलत है कहीं वो भी गलत है मिल के बैठिए एक ऐसा मंच बनाइए सबको समम सबको एक साथ ले चला आर प्रशांत जी की बात पूरी कर आचार्य प्रशांत जी की बात पूरी कर लू वो अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कहां से की है यह प्रूफ करने के लिए वहा लिखा दिखाते हैं आई आई एम फलाना फलाना मैंने आईआईटी यहां से की दिखाते हैं इसका मतलब वो बता रहे हैं कि भाई अभियंत्रिकी की जो शिक्षा है मैंने फलानी जगह से प्राप्त की मगर धर्म की शिक्षा को रखते समय वह नहीं बताते कि मैंने कहां से प्राप्त की यानी कि भौतिकी का ज्ञान तो मैं बताऊंगा कि कहां से मिला मगर अध्यात्म का ज्ञान मुझे कहां मिला मैं नहीं बताऊंगा है ना तो ये हो गए तो दूसरा पॉइंट क्या है गुरु का पहला था ब्रह्मचारी सन्यासी दूसरा है परंपरा प्राप्त आचार्य ये कहां है आप देखिए भगवत गीता चौथा अध्याय दूसरा श्लोक भगवान कह रहे हैं भगवान जब किसी ज्ञान का सौंदर्य बता रहे हैं तो उस ज्ञान का सौंदर्य बताते समय यह बात रख रहे हैं कि परंपरा प्राप्त ज्ञान है ऐसा वैसा नहीं है परंपरा प्राप्त एवं परंपरा प्राप्ति मम अच्छा तीसरा अध्याय सवा श्लोक कि जो परंपरा से य जो चक्र के अनुसार जो चलते हैं परंपरा प्राप्त के अनुसार जो चलते हैं वही मोक्ष पा पाते हैं तीसरा अध्याय सवा शलोक
00:54:33:16 तो परम तो दूसरा आ गया कि वो जो है परंपरा से होना चाहिए चौथा तीसरा क्या है तीसरा है कि वो सभी जितने भी शति स्मृति शास्त्र है उसमें सामंजस्य की शिक्षा दे अब इसमें क्या होगा इसमें वो व्यक्ति कट जाएंगे जो विष्णु पुराण को मानेंगे मगर शिव पुराण को नहीं मानेंगे 145 वा अध्याय 5वा शलोक है पुराण का कि जो गुरु हो वो शति स्मृति शास्त्रों में सामंजस की शिक्षा दे अब मालूम पड़ा हम लोग कह रहे हैं कि भाई कृष्ण ही भगवान है और महादेव भगवान नहीं है वो मोक्ष दायक नहीं है मगर श्वेता शतु उपनिषद में तो लिखा है यजुर्वेद में तो लिखा है इसका क्या करें नहीं वो सारी बातें भ्रामक है अच्छा राम जी कह रहे हैं राम जी भी कह रहे हैं भैया कि जो है भगवान है ईश्वर है नहीं नहीं राम जी भी ब्राह्मण है अब राम जी भी मर्यादा पुत्तम नहीं रहे वो भी झूठ बोल रहे वो भी चल कर रहे हैं चलिए कृष्ण जी की बात तो चलिए उन्होंने लीला की लीला रूप में उने भक्ति कर दी भगवान की मगर राम जी भी झूठ ही फैला रहे हैं उनके अनुसार तो तीसरा पॉइंट आ गया तीसरा पॉइंट आ गया कि सभी सुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा दे ऐसा ना करें यह कुछ कह रहा है यह कुछ कह रहा है इसको
00:55:48:16 मान लो इसको ना मानो चौथा पॉइंट है गुरु वही जो आपके संचय को मिटा दे क्योंकि गुरु की आवश्यकता कब आई थी हमें अपना संशय दूर करना है कि गुरुदेव ये कह रहे हैं जातिवाद नहीं होना चाहिए शास्त्र में लिखा जातिवाद नहीं होना चाहिए ये क्यों लिखा है हमारा संशय दूर करो गुरु वही जो आपका संशय दूर कर दे आपको संतुष्ट करा दे तो गुरु का अंतिम जो निर्णायक है क्या है संशय दूर जो कर दे युक्ति और प्रमाण से करेगा मगर क्या है हम दूर ही दूर से गुरुओ को क्रिटिसाइज कर लेंगे दूर ही दूर से हम अपनी उनके बारे में धारणा बना लेंगे उनके पास जाएंगे नहीं कि गुरुदेव ऐसा बोला तो क्यों बोला और उनको नकारने की आड़ में हम क्योंकि वो स्त्रोत है जो गीता प्रेस गोरखपुर है वो अगर किताबें छाप रही है तो परंपरा प्राप्त आचार्यों से लिया ज्ञान वो छाप रही है अगर हम परंपरा प्राप्त आचार्य को डिनायर रहे हैं तो हमें उन ग्रंथों पर भरोसा कैसे है अगर हमें उन पर विश्वास नहीं है परंपरा प्राप्त आचार्यों प तो हमें उनसे प्राप्त होने वाले ग्रंथों पर विश्वास कैसे है उसमें लिखा जो राम का वर्णन है उस पर विश्वास कैसे है कि राम ऐसे थे धनुष लेक चलते थे देखिए आप कितनी बौद्ध मत है जिसमें लिखा हुआ राम थे ही नहीं जैन थे ही नहीं उन्होंने तो यह तक कह दिया बौद्ध जैनों ने कि भाई जैनियों
00:57:04:00 अचार सत्यार्थ प्रकाश में भी लिखा हुआ है कि जैन के मंदिरों को विष्णु के मंदिरों में बदला गया है अब बताइए जैन के मंदिरों को विष्णु के मंदिर में बदला गया तो इसका अर्थ क्या है कि हम जो ये भगवान को देख रहे हैं जिस स्वरूप में विष्णु भगवान को ये सब काल्पनिक आप देखेंगे तो बहुत बारी ये दोनों तरीके से चीज हुई है बहुत बार विष्णु मंदिर को भी बौद्ध मंदिरों में बदला गया और बध मंदिर फ विष्णु मंदिर में बदले गए उसका अलग बात अलग है वो बात एक अलग है मगर हम जो वर्णन पढ़ रहेने होता था जो नहीं हो रहा है करने के लिए क रहा होता क्या होता था जैनों के जो भी आचार्य होते थे और सनातनी आचार्य होते थे बौद्ध आचार्य होते थे बध तो उस टाइम नहीं था जैन ज्यादा पुराना है तो जैन और हिंदू आचार्य आपस में बैठ के श करते थे कभी कभी ऐसे राजा होते थे कि वो अपने पहले 20 साल सनातनी होते थे
00:57:57:08 मैं इस चीज पर प्रकाश डाल रहा हूं कि अगर हम वो विषय मेरा विषय अलग है मैं वो नहीं कह रहा हूं मेरा विषय यह है जो मूर्ति हमें भगवान की दिख रही है और हम उसे राम मान रहे हैं उसे एक महापुरुष या भगवान मान रहे हैं हम उसके प्रति आस्थान वित है और यदि हम वो मूर्ति का वर्णन हमें प्राप्त हुआ गुरु परंपरा से हम गुरु परंपरा पर अविश्वास जता रहे बिना उसका पक्ष सुने बिना उसको अवसर दिए बिना उसके प्रश्न पूछे हम उसको नकार रहे नाई कर रहे हैं तो हम उससे प्राप्त होने वाले भगवान श्री राम के भगवान श्री कृष्ण के भगवान विष्णु के वर्णन को डिनायर हैं अप्रत्यक्ष रूप से
00:58:38:03 और इसका एक छोटा सा उदाहरण आपको देना चाहता हूं स्कंद पुराण में सत्यनारायण की कथा है लगभग सभी हिंदुओं के घर में य होती होगी ठीक है ऐसी कोई ऐसा कोई स्कंद पुराण नहीं है जिसमें सत्यनारायण की कथा हो मगर उसम गुरु गीता ना हो उमा महेश्वर संवाद ना हो उमा महेश्वर संवाद है शिवजी और पार्वती के बीच में बातें हो रही है अब व्यक्ति बैठ कर के सत्यनारायण की कथा तो सुन रहा है और उस पर आस्थान वित भी है मगर जिस ग्रंथ से वह कथा मिल रही है उसी ग्रंथ में लिखा है मनुष्य चाहे चारों वेद पढ़ ले सारे पुराण पढ़ ले जप तप व्रत दान पुण्य कर्म तीर्थ दान यज्ञ सब कुछ व्यर्थ है अगर आपका गुरु नहीं है तो वो भी प्रमाणिक अब व्यक्ति से जब मैंने कहा भा आपका गुरु नहीं है वो कह रहा हम गुरु को नहीं मानते तो क्या कह रहा है हम स्कंद पुराण को नहीं मानते और क्या कह रहा है कि स्कंद पुराण को नहीं मानते तो अप्रत्यक्ष रूप से व यह कह रहा है कि मैं सत्यनारायण की कथा को भी नहीं मानता हूं यही है आज का 65 75 पर हिंदू सिद्धांत विहीन है लेकिन उसम सुनि वही तो मैं कह रहा हूं कि आप उसको छोड़ कर के अपने आप को होलियर देन दाव
00:59:53:09 दिखा कर नहीं काम चला सकते आपको ऐसा मार्ग निकालना होगा उसको ले को छोड़ने की बात नहीं कर र क्या कह रहा आप मेरी बात सुनि ठीक आप इ दे बोल सुन रहा था सुनिए देखिए क्या होता है देखि आप ये कहे कि यार ये लड़का एलकेजी में पड़ता है इससे इसको हटाओ यहां से है ना एलकेजी वाले से हमारा क्या मतलब तो सिर्फ पीएचडी वालो से ही बात करेंगे और पीडी वाला ही मेरे मतलब का है नहीं नहीं नहीं हमको यह प्रयास करना है कि वो एल केजी वाला यूकेजी में जाए और पूरा दवी 12वी की कक्षा पार करके वो पीएचडी तक पहुंचे समझ रहे हैं आप आपको उसको छोड़ना नहीं है या फिर आपको उसको नीचा है नहीं दिखाना आप समझिए इस बात को आपको उसको अगर आप ज्ञानी है अगर आप कह रहे कि मैंने ठेका उठा रखा है भाई मैं ज्ञानी हूं तो फिर आपको उसका हाथ पकड़ के ऊपर खींचना पड़ेगा आप समझ रहे दूसरी बात मैं जब वो बात आपने कही थी कि राम विग्र वान धर्म कि भाई राम ने जो किया वही धर्म है तो फिर तो भीष्म पिता ज्यादा धर्म वाले हुए क नहीं हुए वचन बद्ध और अपने वचन पर अड़े रहे तो भीष्म कृष्ण ने तो बात बात पर वचन भी तोड़ दिए है ना बिल्कुल सही कह रहे हैं भगवान श्री कृष्ण स्वयं य कह रहे हैं भगवान श्री कृष्ण स्वयं ये कह रहे हैं बिल्कुल सही
01:01:08:13 कह रहे हैं कृष्णो विग्रहवां धर्म शास्त्रों में नहीं है कहीं भी भगवान ने धर्म का प्रतिपादन कराया है सुन लीजिए कृष्ण को हम फॉलो नहीं कर सकते कृष्ण को ओबे करेंगे कृष्ण जो कह रहे हैं वो करेंगे अनुसरण और अनुकरण में अंतर है अनुसरण और अनुसरण करेंगे कृष्ण का मिट मैं पूरा कर लू मैं पूरा कर लू कृष्ण भगवान को हम अनुसरण कर सकते हो भगवान श्री राम को अनुकरण कर सकते हैं कृष्णों विग्रहवां धर्मा कहीं नहीं है शास्त्रों में शास्त्रों में है रामो विग्रहवां धर्मा अच्छा दूसरी बात भगवान श्री कृष्ण ने भगवत गीता में कहा कि भाई लोग हमेशा श्रेष्ठ को फॉलो करना चाहिए कहा ना श्रेष्ठ को उन्होंने कभी स्वयं को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा या किसी और ने उनको मर्यादा पुरुषोत्तम कहा नहीं कहा राम को कहा तो जितनी भी चीजें राम के अंदर आएंगी सीमा में वो सारी चीजें हमारे लिए अनुकरणीय हो जाएंगी अगर वो कृष्ण है भीष्म है कोई भी है राम ने ख को मर्यादा पुतम थोड़ी कहा था वो तो लोगों ने उनको मर्यादा पुरुषोत्तम मैं वही कह रहा हूं किसी अनने कहा मुझे वही मैं वही कह रहा हूं किसी भी प्रमाणिक व्यक्ति ने उनको कृष्ण अ धार्मिक काम नहीं करेंगे आप समझिए इस बात को समझ रहे हैं जो धर्म विरुद्ध है वो भगवान
01:02:23:20 नहीं कर सकते समझिए मैं ये कह रहा हूं र् सुन लीजिए आप इ देर बोल रहे थे थोड़ा मेरा भी सुनिए क करिए थोड़ा सा ठीक मैं क्या कह रहा हूं कि धर्म का जो बीज है जो मूल है जो कोर है ना वो चेंज नहीं होता समझ रहे हैं को भगवान चीज बोल ना गलत फहमी पहुच जाएगी मुझे कृष्ण का विरोधी मान लेंगे लोग एक चीज बोल लू भगवान श्री कृष्ण जो है वो लीला पुरुषोत्तम कहे गए हैं शास्त्रों में लीला पुरुषोत्तम लीला में सबसे लेवल पर कौन गया भगवान श्री कृष्ण मर्यादा में सबसे पीक लेवल पर कौन गया भगवान श्री राम तो मर्यादा की प्र भी कहा गया है भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम माना गया मर्यादा पु जब भी बात आएगी मर्यादा की धर्म की तो वहां फॉलो किया जाएगा भगवान श्री राम को अनुसरण किया जाएगा भगवान श्री कृष्ण अनुसरण उनकी बात मानी जाएगी वो जो कह रहे हैं वो करिए मगर वो जो दिन में रात कर दे रहे हैं और दिन में रात कर के जो है वहां छल पूर्वक काल्या वन को मार रहे हैं बहुत 16000 शादियां कर रहे हैं लीलाएं कर रहे हैं वो सब हमारे लिए ग्राह नहीं है वो आध्यात्मिक वो आध्यात्मिक राल परने वा मेरे लिए है मैं बता रहा हूं आपको मेरे लिए है मेरे लिए बिल्कुल उनका
01:03:38:25 अनुसरण और अनुकरण दोनों ही आवश्यक है खासकर आज के युग में तो इसका अर्थ वो आप ये कह रहे हैं कि भगवान श्री कृष्ण मर्यादा पुरुषोत्तम भी है मर्यादा पुरुषोत्तम भी है वो भी है धर्म के विरुद्ध अब ये जो मर्यादा पुरुषोत्तम वाली बात है आप रख लीजिएगा आप अब आप या तो यह कह रहे हैं कि धर्म के विरुद्ध कार्य किया आप तो ये कह रहे ना कि ईश्वर ने में धर्म के विरुद्ध कार्य करना शुरू कर दिया ता तक तो व धार्मिक था द्वापर में आ ईश्वर धम विरुद्ध हो गया ऐसा नहीं है अब आप सुन लीजिए ईश्वर धर्म विरुद्ध नहीं हुआ है देखिए देखिए गलत चीज चली जाएगी मुझे बता दे लोग देख रहे ईश्वर धर्म विरुद्ध नहीं हुआ है उसने धर्म का ही प्रतिपादन कराया उसने अपने जो गीता कही उसमें कहीं नहीं कहा कि ऐसे ऐसे करो ईश्वर ने स्वयं जो किया वो लीला पूर्वक बहुत सी ऐसी चीजें की है जिनके कोई आध्यात्मिक कुछ साइंटिफिक कुछ स्पिरिचुअल कारण है वो कारण समझने के लिए आपको की रासलीला इनके साइंटिफिक कारण है इनके साइंटिफिक अर्थ है मगर अगर हम श्री कृष्ण ने ये सब भगवत पुराण का हिस्सा है तो रासलीला में मैं तो उतना मानता भी नहीं हूं ठीक है चलिए वो जब आप उसका किसी गुरु के पास जाकर के अर्थ समझ लेंगे तो मानेंगे उसका अर्थ आपको आर स माजियो से प्राप्त है वही बात
01:04:53:27 है ऐसे नहीं सुनिए उसका गलत प्रचार उस उसका सुन ली उसका गलत प्रचार प्रसार किया गया है एक आप य बुक खरीदिए एक आप य बुक खरीदिए एक आप बुक खरीदिए इसमें पुराणों को लेकर के जितने भी आक्षेप लगते हैं सुनिए पुराणों को लेकर के जितने भी आक्षेप लगते हैं इसमें सबका निदान है ब्रह्मा ने सरस्वती से विवाह क्यों किया इसका क्या अर्थ है शिव का मोहिनी तरफ आकर्षित हो जाने का क्या अर्थ है श्री कृष्ण की रासला का क्या अर्थ है सबका है जी बताइए अब वो उसको खोलेंगे ना तो पेंडोरा बॉक्स खुल जाएगा वो बहुत बड़ा पेंडोरा बॉक्स है ठीक है और उसम फिर आप आप भी नहीं आंसर दे पाएंगे बहुत सारे तो वो छोड़ दीजिए उसको दूसरी बात यह है कि देखिए कृष्ण कभी ईश्वर कभी मर्यादा के विरुद्ध और धर्म के विरुद्ध काम नहीं करता मैं बस ये कह रहा हूं और मैं थोड़ा कंक्लूजन वाले मोड में जा रहा हूं क्योंकि मेरे को नीचे काम दिया है ना मैं
01:05:59:28 कंक्लूजन का जो प्रवाह है वो नदी की तरह होता है समझ रहे हैं वो मोड़ लेता है वो घूमता है फिरता वो वो ऐसे तालाब की तरह नहीं होता बस यही है तालाब में इतना पानी है वो अगर तालाब की तरह होगा तो उसम दुर्गंध आ जाएगा वो फिर वो वो खराब हो जाएगा आप समझ रहे हैं वो नदी के प्रवाह होता सिधांत ऐसे दीजिए सुन लीजिए पूरा सुन मेरी बात को पूरा सुनि जैसे जब द्वापर में मर्यादा को बचाए रखना है ना पिता ने जो कह दिया वही धर्म था अगर आप राम विवान धर्म एकदम अडिग रहेंगे तो आपको ऐसा लगेगा कि भीष्म पितामह से बड़ा धर्म परायण कोई था ही नहीं पिता अधर्मी निकल गए आप समझिए इस बात को उनसे बड़ा पित भक्त कोई था उनसे बड़ा वचन बद्ध कोई था पूरे महाभारत में कोई नहीं था पूछ रहे शत रभ मैं कं क्लूड कर लू उसके बाद तो मैं ये कहता हूं द्वापर में क्या हुआ द्वापर में धर्म का प्रवाह बदल गया धर्म का प्रवाह बदल जाता है कोर सेम रहेगा आप समझिए धर्म के जो बेसिक सनातन सिद्धांत है वो वैसे के वैसे ही रहेंगे लेकिन धर्म की क्या प्रवाह बदल जाता है है ना आज की स्थिति यह हो चुकी है कि मतलब अगर
01:07:15:07 सही में ईश्वर और यह हर युग में हुआ है य हर युग में हुआ या आने वाले युग में भी होगा ज्ञान का अपने मठाधीश होने का ो इतना ज्यादा हो गया लोगों को अपने ज्ञान का ग इतना ज्यादा हो गया ईश्वर खुद अवतार लेकर आ जाए ना और कह दे य कृष्ण के साथ भी था य राम के साथ भी हुआ था और आज भी होगा लिखित कह देता हूं अगर ईश्वर लेके आ जाए इस मैं आपको कहता हूं मैं ऐसा मैं ऐसा एक खुद वीडियो बनाने वाला था जिसम मैं कहना चाहता हूं कि अच्छा हुआ आज भगवान रामचंद्र स्वयं आक आपसे नहीं बोल रहे कि भैया ये कार्यक्रम ऐसा ऐसा मत करो अशा स्त्री है या मैं इसम नहीं आऊंगा वरना आप लोग राम को भी क्रिसा करने लगते तुम गलत हो प्राण प्रतिष्ठा में नहीं आ रहे हो होता है अच्छा है अगर राम आ कर के क देते मैं तो आ गया हूं तो भी आप भीय कह देते नहीं नहीं तुम रा ड़ रे कहने से क्या होता हम ज्यादा जानते हम शास्त्र को जानते नहीं इस आपको बता सकता आप ये बताइए क्या आप ये बताइए पहली बात चलिए ो की बात छोड़ देते अब एक बात पूछ आप यह बताइए क्या भगवान सब कुछ कर सकता है या नहीं बिल्कुल कर सकता है
01:08:30:19 झूठ बोल सकता है कि नहीं बिल्कुल बोल सकता है अधर्म कर सकता है कि नहीं करने करने का उसका वो रखता है लेकिन व कभी अपने बनाए नियम को तोड़ता नहीं वो कुछ भी भगवान विष्णु के अवतार को मानते हैं कि नहीं बुद्ध भगवान ने कहा वेदों को मत मानो नहीं नहीं नहीं पहली बात तो ये बुद्ध वो बुद्ध भी नहीं है जिन बुद्ध अवतार की बात होती है बौद्ध अवतार य जिस बुद्ध अवतार की बात मैं कर रहा हूं जो हमारे शास्त्रों में वर्णित है जो आप मान रहे हैं उसी बुद्ध का यही रोल ही था कि उन्होंने वेदों से अनाधिकृत लोगों को यज्ञों से अनाधिकृत लोगों को दूर करने के लिए उनको यह कहा कि वेदों में कुछ नहीं रखा है दूर हो जाओ हो सके उस समय के हिसाब से धर्म का अगर हम बुद्ध को मान ले वहां पर अगर हम बुद्ध को वहां पर मान ले अगर हम बुद्ध को वहां पर मान ले तो हम र जाएंगे इसका अर्थ य है इसका अर्थ यह है मैं कहना ये चाह रहा हूं कि जो धर्म है जो वेदा शास्त्र है वो मार्ग है और जो लक्ष्य हैरी परिभाषा की धर्म की तर
01:09:42:16 कर व उस सम शायद धर्म यही था इसलिए ईश्वर ने आ कहा अभी वेद को रहने दो आप समझ रहे हम उनका अनुक कर रहे क्या अनुकरण कर रहे हैं क्या जब उन्होंने ऐसा कहा तो जो जिन जो लोग उनके फॉलोअर हुए आप समझ नहीं रहे आप सुनना नहीं चाह रहे मैं ये कह रहा हूं आप आप सास में फसे रह जाएंगे धर्म फिर प्रभाव बदलेगा धर्म फिर मोड़ देगा आपकी बात मैंने आपको बताई कि आज का हिंदू जो 65 पर है वो ऐसा क्यों है क्योंकि वो अपने संशय को मिटा नहीं रहा है रासलीला के बारे में क्या है 10 अवतार के बारे में क्या वो नहीं मिटा रहा है वो वैसे ही जीना चाहता है मैं आपके साथ हूं उस मैं आपके साथ हूं तो बात यही है कि अगर आपके मन में अपनी चीजों को लेकर के देखिए परंपरा प्राप्त शास्त्र ही हमारा धर्म है प्रमाण है हमारा अगर उनको लेकर के कहीं पर भी आपका डिसएग्रीमेंट आ रहा है तो आपका कर्तव्य वहां पर यह बनता है आप स्वयं जाए भाई कुआ तो प्यासे के पास आएगा नहीं सुनिए जो हमारे शंकराचार्य है जिनकी मैं बात कर रहा हूं सुनिए शरार नहीं पढ़े थे क्या द्रोणाचार्य परंपरा प्राप्त शास्त्र से नहीं पढ़े थे हम जदा ठीक ठीक है इसका जब प्रश्न
01:10:57:20 पूछ लीजिए प्रश्न पूछ लीजिए बात करने केय नहीं क रहा आपने कुछ प्रश्न पूछा पूछ इस काउंटर करू ठीक है आपने द्रोणाचार्य रावण य सब क्या परंपरा प्राप्त शास्त्र से नहीं पढ़े थे क्या पहली बात तो य हैय तो व अच्छे लोग है कर रहे तो कह रहे कि मैं गलत कर रहा हूं यह वो अच्छे लोग है आज का आदमी तो गलत कर रहा है तो स्वीकार भी नहीं कर रहा कि मैं गलत कर रहा हूर सुनिए
01:11:39:15 तो पूरी लाइन बोल दीजिए की जब द्रोणाचार्य कौरव शास्त्रों के विरुद्ध आचरण करते हैं तो कहते हैं ताल ठोकते हैं मैं अधर्म कर रहा हूं आओ तो बचा लो वो खुद प्रमाणित कर रहे यानी वय नहीं कह रहे कि मैं जो कर रहा हूं वो धर्म है गौरव ये नहीं कह रहे कि मैं जो कर रहा हूं वो धर्म है मगर मैं कर रहा हूं यानी कि वो खुद वेरीफाई कर रहे हैं कि परंपरा प्राप्त जो चीजें है वो अलग है मैं अलग कर रहा हूं मैं अलग जा रहा हूं तो वो तो वप खुद ही बता रहे हैं ना ये चीज नहीं नहीं ऐसा कौरव ने तो कभी एक्सेप्ट नहीं किया हा द्रोण और भीष्म जरूर एक्सेप्ट करते हैं कौ दुर्योधन तो अपने ही मध्य में रहता है ना तो कृष्ण कोही बांध के चल देता हैका जहा पर कौरवों की पार्टी के किसी भी व्यक्ति ने किसी भी व्यक्ति ने कौरवों की तरफ के किसी भी व्यक्ति ने यह स्वीकार अवश्य किया है कहीं पर ऐसा संदर्भ है जब उसने ताल टोकी भाई मैं अधर्म कर रहा हूं तुम में दम है तो आके बचा लो इसका मतलब जब उन्होंने धर्म के विरुद्ध गए उन्होने मान लिया तो आप इनका उदाहरण कैसे दे रहे हैं कि भाई द्रोणाचार्य ने परंपरा प्राप्त पढ़ाई नहीं की थी ये तो वो लोग है जो धर्म के विरुद्ध जब गए तो उन्होने माना कि हम धर्म विरुद्ध चले गए वही वही
01:12:54:15 तो मैं कह रहा हूं ना कि वो परंपरा के साथ दूसरी बात य है कि मैंने आपको केवल परंपरा नहीं कहा दूसरी बात य मैंने आपको केवल परंपरा नहीं कहा मैंने कहा ब्रह्मचारी सन्यासी लक्षण से वो क्या हो ब्रह्मचारी सन्यासी अंतिम दूसरा परंपरा प्राप्त हो तीसरा सभी सुति शास्त्रों में सामंजस की शिक्षा दे चौथा आपका संशय दूर कर दे मैंने आपको केवल परंपरा नहीं कहा केवल परंपरा वाले हैं जो धूर्त भी है धूर्त भी है पर से परंपरा से है मगर वो अपनी आमदनी के लिए कुछ दूसरी चीज कर रहे हैं एक बहुत सुंदर वो है ये पुराणों की ही किस पुराण में पता नारद जी जाते हैं विष्णु जी के पास और पूछते हैं कि भाई आपका सबसे प्रिय भक्त कौन है नारा जी को ल गह गृहस्थ गृहस्थ का नाम लेते किसान का जो कि सुबह एक बार राम बोलता है और शाम को एक बार राम बोलता है बस दो बार राम बोलता है तो नारद जी कहते या हद हो ग मतलब ये दो बार राम राम नाम दिया और आप प्र भक्त हो गया और मैं दिन भर नारायण नारायण करता हूं मैं आपका प्र भक्त ही नहीं ऐसा नहीं है ही तो मैं कह रहा हूं भगवान को प्रिय कोई भी हो सकता है वो नहीं कह रहा भगवान ने क्या कहा शिक्षा किससे लो सुनिए भगवान ने क्या कहा शिक्षा
01:14:09:25 किससे लो देखिए पहली बात तो य अथर्ववेद 11 16 में मेंशन है ब्रह्मचारी ही आचार्य बनेगा अच्छा भगवान ने भगवत गीता में कहा 4 34 में कि तत्वदर्शी गुरु से जाकर के शिक्षा लो तत्वदर्शी की व्याख्या अगर आगे हम पढ़ेंगे तो एक व्याख्या आती है जिसका मान मोह नष्ट हो चुका हो जिसकी काम इंद्रिया वगैरह सब वो हो चुकी मतलब वो उन पर ध्यान ना देता हो कंट्रोल्ड हो यह सारे लक्षण होते हैं सन्यासी के लक्षण से सन्यासी विद्या से परंपरा और न्याय से सभी शति स्मृति शास्त्र और फल स्वरूप आपका संशय मिटाने वाला होता है गुरु गुरु की व्याख्या है कि अवतार का उपनिषद में गुरु की व्याख्या है गु का मतलब अंधकार रू का मतलब अंधकार से निकालने वाला तो गुरु का तो अर्थ ही वही है जो आपके प्रश्न का उत्तर दे क्योंकि क्योंकि अज्ञानता क्या है अंधकार तो गुरु का अर्थ क्या हुआ जो आपके प्रश्न का उत्तर दे भाई आपका अंधकार मिटाए कि गुरुदेव मेरी रास लीला को लेके जातिवाद को लेकर येय समस्याए है जति गम कर दे हा तो हम ऐसे गुरु के आपको कभी नहीं बोलते किसी को
01:15:24:27 नहीं बोल रहे हैं जो तमसो मा ज्योतिर गमाया ना करे मगर बात ये है कि व्यक्ति उस स्टेज तक आने से पहले ही निर्णय ले रहा है किय तमस वाला नहीं अहंकारी है क्योंकि ऐसा प्रचार व्यवस्था है नहीं देखिए इसलिए तो मैं कह रहा हूं एक ऐसा इशन एक ऐसा वो ब अच्छा एक चीज रह गई आप जो अ अच्छा आपने याद दिला दिया एक चीज मैं बता दूं आपने कहा था कि जब स्थिति खराब होती है तो उसको नीचे से आपको हाथ पकड़ के खींचना है ठीक है [संगीत] चाहा पहली बात य है की जब हम के मंदिर में गए अगर आपने हमारा वीडियो देखा हो या हम किसी के भी पास जा रहे हैं जो भटका हुआ हमें लग रहा है कि यहां शोधन हो सकता है तो हम वहां पर कैसा व्यवहार कर रहे हैं कि हम तुमसे विरक्त है हम तुमसे अलग है तुम तिरस्कृत हो तुम अधिकृत नहीं ऐसा व्यवहार आपने देखा आपने हमारे अन्य वीडियो देखे
01:16:40:08 क्या हम आर समाज के मंदिर में गए थे बाकायदा उनसे आधे घंटे तक बातचीत हुई लगभग पन घंटे तक और सभी विषयों पर बातचीत हुई थी मगर माइक खराब था तो केवल परंपरा पर बात हुई थी जो बात है वो रिकॉर्ड हो पाई उसके बाद वो जो सज्जन थे उन्होंने हम चाय भी पूछी वो हमारे पास समय का अभाव था तो हमने चाय नहीं पी पाए वहां पर एक विवाह हो रहा था हमने उन्ह कहा अलग हटा दिया अलग हमने कब हटाया अलग किसको हटाया जो व्यक्ति शनी वक्ति है लेकिन उ लोगों की बात कर रहा हू हम किसी को भी अलग उठ नहीं रहे हम
01:17:22:00 तोही जो मैं उनकी बात कर रहा हूं उनको भी नहीं छोड़ना उन्ह भी खीच केर ले आना समझ रहे ड़ना किसी को नहीं मैं जो आपने हाथ पकड़ के खींचने की बात कही उसी को करने का हम लोग प्रयास कर रहे गुरुदेव की कृपा से राम जी की कृपा से कि भाई हम लड़ने नहीं जाते हैं हम तो यह पूछते हैं क्या जिस विचारधारा को आपने स्वीकार किया है उस विचारधारा के अनुसार प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है क्या वो सर्वशक्तिमान है और मैं तो यह आज भी कहता हूं और बहुत टाइम से कह रहा हूं जो भी विचारधारा ऐसी है जो हमें सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत सनातन धर्म देगी मैं उसी विचारधारा का व्यक्ति हूं मैं किसी एक विशेष विचारधारा का व्यक्ति नहीं हूं मगर कैच ये है कि जब हम इस पर आ जाएंगे कि नहीं भगवान को सर्वशक्तिमान सिद्ध करना है कैच ये है जब हम इस पर आ जाएंगे नहीं मनुष्य को जो मोक्ष है वो परम स्वतंत्र देना है जब हम इस पर आ जाएंगे नहीं मनुष्य को जो धर्म देना शाश्वत देना है तो हम आदि शंकराचार्य जी की बात कर रहे होंगे उस दिन ये कैच है मगर अगर इसको हटा भी दे अगर इसको हटा भी दे अगर हम इसको हटा भी दे आदि शंकराचार्य
01:18:37:01 नेदार में शिव देखा था अगर अगर हम इसको एक मिनट एक मिनट अगर हम इसको हटा भी दे तो हम इतनी सी बात कर रहे लोगों से जाके भाई हम लोगों को जो एक कर सकती है वो तीन चीज हैं व्यवहार में सनातन धर्म उसका साधन क्या है सर्वशक्तिमान ईश्वर और उसका परिणाम क्या है परम स्वतंत्र मोक्ष इन तीन चीजों की आप बात करो बस हम तो यही जाके पूछते आ समायो से भी पूछते स्न वालो से भी पूछते कबीर पंथ से भी पूछते हैं जिसको थोड़ा बहुत समझ में आएगा वापस आ जाएगा भाई हम लोग एक जगह पर आ जाएंगे अगर ईश्वर हमारी जिम्मेदारी बन गई है आप समझ लीजिए तो दूसरी बात जो आपने बात बोली थी उसका हाथ पकड़ के खचो जहां पर की है ना डेमोग्राफिक चेंज हो रहा है आप यह समझिए ये आगे पया बहुत कठिन पैदा होने वाली है खासकर य छोटे छोटे यूपी के शहर बिहार के शहर हरियाणा के शहर जहां पर मैं तो आप य
01:19:41:08 मा रहे तो किस तरीके से आे हम उस भी विचार करना है आप समझ रहे अब दूसरी बात ये आती है कि ऐसा नहीं है कि जो हमारे आचार्य गण है भले ही व निर् काचार्य जी शंकराचार्य जी हो मधवा चार जी की परंपरा से हो जो हमारे आचार्य गण है ऐसा नहीं है कि वो व्यवहारिकता पर ध्यान नहीं देते हैं देते हैं जैसे अभी वो करपात्री जी ने वहां पर नया विश्वनाथ मंदिर बना आपको शायद मालूम हो नया विश्वनाथ मंदिर कैसे बना क्यों बना वो सारी चीजें आपको संभवत मालूम हो तो ऐसा नहीं ध्यान नहीं देते मगर बात जब ये आ जाएगी कि किसी को नीचे से निकालना है हाथ पकड़ के खींचना है उस समय भी हमारे कुछ मर्यादा तो ऐसी होनी चाहिए कि जो ना टूटे या बिल्कुल ही हम स्वछंद छोड़ दे मर्यादाओं को तब भी कुछ ना कुछ पैरामीटर तो होंगे ना सुनिए तो सुनिए मैं जो कहना चाह रहा हूं तब भी कुछ ना कुछ मर्यादा है तो अब बात अब बात ये आएगी कि जब किसी को नीचे से ऊपर खींचना है तो एक तो हम किसी को तकत कर ही नहीं रहे मुसलमान बिटिया भी आकर के वहां पर प्रश्न कर रही है शंकराचार्य जी के पास इवन मैं खुद ऐसी डिबेट में गया हूं जहा मुफ्ती लोग बैठे हैं वहा उनसे मैंने बातें की मैंने ईश्वर सर्वशक्तिमान कैसे है आपका बताइए आपके द्वारा प्रतिपादित होने
01:20:56:08 वाला ईश्वर कैसे सर्वशक्तिमान है आपकी जो बुक है उसके अनुसार निकलने वाला जो धर्म है वो कैसे शाश्वत है आप सिद्ध करिए चलिए हम आपके हो जाएंगे आप कहेंगे मैं अपना नाम मुसलमान कर लूंगा सर्वशक्तिमान ईश्वर तो दो सर्वशक्तिमान ईश्वर तो दे दो मैं अ समाजी बन जाऊंगा ईश्वर सर्वशक्तिमान तो दो आप मैं मैं जो आप मुझे परम स्वतंत्र वो तो दो आपको मैंने वहा पर केवल उदाहरण के लिए आपको अगर इससे खु मि तो मैं अपने आप को आ समाजी कहने लगूंगा मुझे तीन चीज दे दो कभी ना बदलने वाला धर्म परम स्वतंत्र मोक्ष ईश्वर सर्वशक्तिमान तीन
01:21:51:19 चीज क्या शश भाई टेकल ग्लिच आ गया [संगीत] क्या जब हम जो दो बातें थी ना किसी को हाथ [संगीत] पकड़ करही नहीं रहे वो रहा है हम त्रित कर रहे दूसरी बात ये है कि अगर नीचे से खींचना भी है तो कितना हम नियमों को कॉम्प्रोमाइज करें कितना ना करें इसका निर्णय करता कौन होगा नहीं नियम को कंप्रोमाइज हम नहीं करेंगे अरे हम क्यों करेंगे निम को कंप्रोमाइज नहीं नहीं अब जैसे मैं आपको एक एग्जांपल देता हूं अपना रियल लाइफ एपल देता हूं मेरा एक फ्रेंड होता था है ना कॉलेज के टाइम में अनुज है ना तो वो उस समय मानसा हार करता था खूब मतलब जो है उसका मीट मानस चलता था खूब दबा के पता था अच्छा मैंने कभी नहीं किया मैं अंडा तक नहीं खाता मेरे पिताजी लहसुन प्याज भी नहीं खाते वो जो है अब अगर मेरे को ये पता था अगर मैं इसको रोज बोलूंगा ना कि अबे मत किया कर मत किया कर मत किया कर तो उसका ो हर्ट होगा और वो कभी नहीं छोड़ेगा मानसा तो और आपको ऐसा रास्ता अपनाना होगा कि उसको सेल्फ रिलाइजेशन हो जाए एक पॉइंट टाइम के बाद नहीं भाई यज सही नहीं है आप समझ क्या कह
01:23:09:27 रहा ों मार्ग अपनाना होगा जिसे के पॉट पर पहुच करय जो मार्ग है मैं अब आपसे एक उदाहरण पूछ रहा हूं [संगीत] कि उसको ज्ञान है उसके हिसाब से उसने यह सोच कि मैं एक ऐसा मार्ग अपना रहा हूं जो कि थोड़ा सा म्यूचुअल टाइप का है वहा से निकालने के लिए व्यक्ति को गलत अपनाया मर उससे सहमत नहीं हो रहे हैं तो ऐसे में क्या करेंगे क्या उस राजा को नकार देंगे कि तुम गलत कर रहे हो राजा को क्यों र वो देखि उे आप जैसे वो वाला एमल दे रहे
01:24:03:09 [संगीत] थेप इंटरनेट का इशू आ रहा बहुत ज्यादा लग रहा है गुरुदेव या ऐसा प्रयास नहीं करते हैं कि लोग जो फस गए भटक [संगीत] ग मर्यादाओं को तय करने वाला कौन होगा परंपरा प्राप्त [संगीत] आचार्य आई नहीं मेरे तक मतलब बा र इंटरनेट का इ आ रहा चलिए फिर ऐसा करते फिर किसी और दिन आज हमारे बीच के काफी मतभेद मिटे मुझे आ ले मुझे भी क्लेरिटी आई [संगीत] है ज्यादा दूर ना हो ज्यादा ज्यादा दूर ना रहते हो तो प्रयागराज में गुरुदेव पाच से लेकर के 16 तारीख तक रहने अभी तो अभी
01:25:10:16 तो मेरा निवेदन है कि यदि संभव हो पाए तो अन्यथा भगवान ने तो आप मजबूर है विवश है धर्म का पूरी तरीके से अनुकरण मगर आपके मन में य है एक दिन करूंगा या पश्चाताप है तो आप धर्म चिंता मत करो ले आऊ कर बकुल मतलब मैं ुद मिलना चाहूंगा आपका भी कभी साइड आना हो बनारस से आगे गाजीपुर पड़ता है हमारा लहरी काशी कहते हमारे शहर को ठीक है तो आ मुलाकात होगी और मम कभी उधर लखनऊ आना हुआ तो बिल्कुल आपसे का रते आ हु तो जरूर आएंगे ठीक है वो चार्ट कटेग किया है सबसे ज्यादा जो जनसंख्या है व किस हिंदु की है क्योंकि हिंदुओ से हम यह भी पूछते हैं ना क्या
01:26:07:24 सय भी नहीं पता होता है चलिए आपसे चर्चा करके अच्छा लगा मुझे चलिए आपके आने के लिए जी बिल्कुल आवाज कट रही है [संगीत] आपकी राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम चलिए सभी को जय श्री राम आपको मैं जी जी ठीक है आपको मैं रिमूव कर देता हूं मैं देखता हूं अगर कोई आना चाहेगा तो आएगा अन्यथा फिर बंद
01:27:01:02 कर जय श्री राम जय श्रीम भाई यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण था यह विषय हम सभी प्रकार के हिंदुओं से बात कर रहे हैं एक चार्ट है हम उसको अभी पहले डाल चुके पोस्ट में जा कर के देखिएगा और इंस्टा आईडी पर भी डाल देंगे कल तो उसमें हमने स्तर बनाए हैं चार्ट गुरुदेव की कृपा से वो तैयार किया है कि भाई हम कौन सा हिंदू कितने प्रतिशत और किस स्तर पर है तो यह भी एक विषय है कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ कबीर पंक्तियों से ही बात करनी है स्कन से ही बात करनी है आर समाज से ही बात करनी है सबसे ज्यादा जो संख्या है ना वो ऐसे हिंदुओं की है जिनके पास सिद्धांत है ही नहीं तो इसलिए जो भाई साहब थे इनसे बात करना आवश्यक था इस चर्चा को हम विराम देते हैं आशा है इनके कई प्रकार के जो संशय है आज मिट पाए हो भगवान से प्रार्थना करेंगे इनके जीवन में वह इनको अपनी भक्ति प्रदान करें ज्यादा से ज्यादा और भगवान की भक्ति करें जिससे और इनके संशय
01:28:16:07 मिटे ये जो गुरु का मेंशन है फल के बाद यह ज्ञान व्यक्ति पुण्य कर्मों के बाद तो यह एक रेशनल हिंदू थेय किसी भी विचारधारा से जुड़े हुए नहीं है अपने आपको मगर ज्यादातर आप ऐसे हिंदुओं से जब आप मिलेंगे जिनका गुरु नहीं है तो या तो वो ऐसे होंगे जो फ्लेक्सिबल होंगे मतलब फ्लेक्सिबल जैसे ही आपने शास्त्र लिखा तो शास्त्र को अधीन हो गए आपने जैसे शास्त्र बोले तो उसको मान लिया यह वह हिंदू है जिनको जिनके पुण्य कर्म है जिसकी वजह से वह शास्त्र जब दिखाए जाते हैं तो उसको सह स्वीकार कर लेते हैं तो यह भी प्रथम श्रेणी वाले हिंदू है मगर ज्यादातर जो हिंदू आपको मिलेंगे जब आप उन्हें शास्त्र खोल के दिखाओगे वही शास्त्र जिनके द्वारा प्रतिपादित होने वाले भगवान की हम पूजा कर रहे जिनके द्वारा प्रतिपादित होने वाले विग्रह की हम प्राण प्रतिष्ठा कर रहे हैं वही शास्त्र जब उनको खोल के दिखाओगे आर समाज हों के शास्त्र के द्वारा प्र होने वाले भगवान को हम स्थापित नहीं करें राम मंदिर में पौराणिक शास्त्रों के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की स्थापना हुई है राम मंदिर में
01:29:31:08 और पुराण कोई अलग से नहीं है व आर समाज कहते हैं वह बात एक अलग है मगर पुराण तो वेदों का वेदांग है पुराण भी पाचवा वेद कहा जाता है पुराणों को तो ज्यादातर हिंदू ऐसे होंगे जब आप पुराण शास्त्रों के वचन उनके सामने खोल के रख देंगे तो वो उसको डिनायर लगेंगे और वहां पर भी स्वयं को सनातनी नहीं कहेंगे वहां पर भी स्वयं को पौराणिक भी कहेंगे वहां पर स्वयं को भगवान को साकार मानने वाला भी कहेंगे और पुराण के द्वारा वर्णित भगवान की ही पूजा करेंगे मगर स् उनको मना कर देंगे पुराणों को तो इसी चीज पर प्रकाश डालने के लिए ये जो लाइव चर्चा है वो रखी थी और आप लोगों ने देखी समय भी दिया उसके लिए आभार सभी को जय श्री
01:30:20:25 राम i
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