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00:00:01:27 तो जय श्री राम सभी को। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और वैसे लाइव कल होने वाली थी पर अंतिम जब बिल्कुल होने वाले होने से थोड़ी देर पहले हमें एक पार्ट हमारा मिसिंग था जो जिसमें जो एक माउंट करने का पार्ट होता है कैमरे का उस कारण से फिर उस समय फिर नहीं हो पाई वो मामला बिगड़ गया खैर आज बहुत ढूंढना ढूंढा ढूंढने पर नहीं मिला है तो फिर कैमरे स्टैंड का इंतजाम किया गया है और अब व्यवस्था पूर्वक वो कैमरा सामने जब लगा अभी हम लोग लाइव हुए हैं। आज की लाइव रामपाल के मामले में और जो ज्ञानार्थक प्रतिकार है, खंडन है उसके मामले में बहुत रोचक होने वाली है। यह मैं आपको अभी से प्रॉमिस कर रहा हूं। वचन पूर्वक बात कह रहा हूं। तो जो रामपाल है वह डम डम डिगा डिगा ड्रामेबाजी बहुत सी करता है और जो उसने शास्त्रार्थ का जो वो सिग सगुफा
00:01:17:10 सिगूफा क्या था दिया था चूर्ण अपने भगतों को तो उसका तो बैंड कैसा बजा है वो आपने देख ही लिया है हर तरफ से बेचारे पर ऐसी बिजलियां गिड़ी है गीली गिर रही है कि हम लोग हम लोगों ने यहां से सीधेसीधे उनके कॉल सेंटर्स में कॉल किया और पूछा भाई कि भाई यह लाइव कैसे है? क्या है? इसका निर्णय कैसे होगा? ये भाई जो जो चीज अस्तित्व में है ही नहीं उसका समूह का समूफा एक बना दिया कि आ जाना। अच्छा लोग कमेंट कहते रहते हैं कि आ जाना आ जाना। कहां आ जाना? भाई लाइव तुम ले नहीं रहे हो। अच्छा कुछ लोग धनाना आश्रम पहुंचे इनके तो वहां पर बेचारे रो-रो के हाथ जोड़ रहे हैं प्रशासन के कि इनको आने मत दो। तो कहां आ जाना हवा में आ जाना बस आ जाना आ जाना कहां आ जाना भाई तानाशाही नहीं चलेगी किसकी के किसी की भी वो हाल है इनका तो [हंसी] सबसे पहली बात है कि रामपाल ने जो चैलेंज दिया है उसमें शुरुआती विषय था सृष्टि रचना तो सृष्टि रचना के लिए सबसे पहली जो बात है कि वो जो सृष्टि रचना प्रस्तुत कर रहा है सनातन ियों के परिपेक्ष से पूछ रहा हूं।
00:02:32:28 बाकी और वो अपने कबीर से जुड़े हुए ग्रंथ को लेकर के कुछ कहे। हालांकि उसमें भी एक बहुत बड़ा ढोल का पोल है। किसी दिन कोई फस जाएगा उस दिन उससे बात की जाए। कबीर सागर अगर 600 वर्ष पहले का है या कबीर वाणी कुछ वर्ष पहले की है जो भी है इनका गरीब दास की वाणी है कि कबीर वाणी है। क्योंकि कभी-कभी लोग कबीर वाणी को प्रमाण कहते हैं अंतिम। कभी कभी लोग गरीब दास की वाणी को प्रमाण कहते हैं। अंतिम कभी-कभी लोग गरीब दास की वाणी को छमम छमम वेद बताते हैं और कबीर कबीर वाणी को बताते हैं। वो इनका ढोल का बोल है। खैर वो मूल रूप से हस्तलिखित जिसकी कार्बन डेटिंग भी कराई जा सके। वो कबीर वाणी कहां पर है मूल रूप से और फिर मैच कराया जाए कि इन्होंने कबीर वाण कहां कहां पर कैसे क्या किया है कबीर वाणी के साथ। है ना? जैसे एक चीज सामने आई थी शुक्राईनाथ जी की उसमें बता रहे थे कि निराकार को निराकार कर दिया है। निराकार को निराकार कर दिया। ऐसा ही इसने गीता में कई जगह किया है। जब भगवान कह रहे हैं कि मेरे पास आकर के तेरे दुख दूर हो जाएंगे तो ये लिख रहा है कि दुख वो दुख आएंगे। समाप्त नहीं होंगे। आएंगे। भगवान कह रहे हैं कि
00:03:48:00 भैया मैं ही पूर्ण पुरुषोत्तम हूं। अस्मि आ रहा है वहां पर। तो यह लिख रहा है वहां पर कि नहीं नहीं उससे कोई दूसरा पूर्ण पुरुषोत्तम यह सब चीजें हो रही तो सबसे पहली बात यह है कि कबीर वाणी में क्या है सृष्टि रचना क्या नहीं है जो रामपाल ने जो दावा किया है उसमें सबसे पहला जो विरोध है उसकी कही हुई बातों में वो पहला यह है कि सनातनी नहीं मानता कि कबीर भगवान है। ठीक है? हिंदू वह है वैदिक वा वैदिक वैदिक वांगमय को मानने वाला फिर वैदिक वांगमय का समर्थन करने वाले और उसके सिद्धांतों की सीमा में चल चलने वाले जो आगे शास्त्र है पुराण स्मृति ग्रंथ इत्यादि उनको मानने वाला कबीर को भगवान नहीं मानता है। तुमको कबीर को भगवान बनवाना है। यहीं से बात शुरू है ना? तो कबीर को भगवान बनवाने के लिए तुम कह रहे हो कि भैया जिन शास्त्रों को तुम मानते हो उनके साथ साथ एक कबीर वाणी को भी शास्त्र मानना पड़ेगा। क्यों? क्योंकि परमेश्वर की वाणी है। यानी कि जो जंग होने वाली है वो इस बात को लेकर होने वाली है कि रामपाल कबीर को भगवान मनवा
00:05:03:10 रहा है सनातनियों को। रामपाल दावा कर रहा है कि कबीर भगवान है। मगर यह प्रतिस्पर्धा होने से पहले इस बात पर चर्चा होने से पहले तर्क वितर्क होने से पहले किसी भी प्रकार का जो पक्ष विपक्ष है वो प्रस्तुत होने से पहले ही रामपाल ये चाहता है कि हम ये मान ले कि कबीर वाणी जो है परमात्मा की वाणी है। ये है इनका सपा बजाओ ताली ठोको ताली। तो ये तो हो गई पहली बात। अब दूसरी बात ये आती है कि यह जो सृष्टि रचना बता रहा है यह सृष्टि रचना का सनातन धर्म ग्रंथों में प्रमाण कहां पर है? कहां प्रमाण है? जो सृष्टि रचना ये बता रहा है जिस क्रम में बता रहा है जो जो उसमें घटनाएं हैं उसका प्रमाण कहां है? कहीं नहीं है। तो इसका अर्थ है कि इसके द्वारा जो सृष्टि रचना बताई जा रही है उसको मानने के लिए जैसे कि वो प्रकृति ने हाथ उठाया, दुर्गा ने हाथ उठाया। फिर जो है इसने जो वहां पर अपनी अश्लीलता भरी है जो अश्लीलता इसको बबिता के प्रकरण में याद आती थी या जेल में याद आती होगी या
00:06:18:14 इनके यहां जो बिना जननांग के प्राणी उत्पन्न होते हैं और फिर ये फेविकॉल से उसमें जननांग चिपका देते हैं। अपना मन चाहा जैसे मान लीजिए कि किसी का पुरुष के साथ गमन करने का मन है तो वहां पर स्त्री का जननांग चिपकाते हैं। क्योंकि इसने बताया है कि जो हिंदुओं की जो विवाह पद्धति है वो गलत है। क्यों गलत है? क्योंकि जो देव लोक में दय जो समागम हो रहे हैं देवी देवताओं के भगवान के वहां पर कहीं पर भी सात फेरे नहीं हुए। इसलिए यहां पर हम लोग सात फेरे लेकर के गलत कर रहे हैं। यानी कि वो जो दय घटनाएं होती है वो एज इट इज यहां पर मनुष्य लोक में लागू होती है। तो उसी आधार पर मैं ये बता रहा हूं कि इसके यहां पर ये दय घटना है एक कि एक बहन है। उसके भाई की उस पर कुदृष्टि हो गई। उस बहन के पास जननांग नहीं था। वो बहन क्यों है? ये रामपाल ही जानता है। मगर जननांग ना होते हुए भी वो बहन है, वो स्त्री है और उस पर उसके भाई की कुदृष्टि हो रही है। तो जब कुदृष्टि हो रही है तो अपना काम निकालने के लिए वो अपना उल्लू सीधा करने
00:07:33:18 के लिए नाखूनों से वो जो आवश्यक इंद्रिय है जो भोग के लिए आवश्यक है। उस इंद्री को वो किसी तरीके से चिपकाता है। है ना अपनी बहन के यह रामपाल की दय घटना है। रामपाल के जो सड़ी हुई किताब है उन्होंने लिखी हुई है। हां वो बात और है कि हमारा विरोध इस बात को लेकर है कि ये चंपक कहानियां उसने हमारे देवी देवताओं के नाम से जोड़कर लिखी है। यह विरोध है। बाकी तू खूब चंपक कहानी लिख कोई दिक्कत नहीं। मनोहर कहानी मनोहर कहानी जो रेलवे स्टेशन के बाहर खेल पर मिलती है ना जो सरबिए भगड़ी नशेड़ी है ना जो जगह ढूंढ रहे होते हैं अपने काम वासनाओं की तृप्ति के लिए वो बेचारे जो है वो किताबें खरीद कर ही काम चलाते हैं अपना रेलवे स्टेशन के बाहर तो उस तरह की किताबें छापो कोई दिक्कत नहीं है अपने नाम पर कि रामपाल के जो है धर्म ग्रंथ यही है छापो उससे कोई दिक्कत नहीं है समस्या तब है जब हमारे देवी देवताओं से जोड़कर हमारे वैदिक प्रतीक चिन्हों से जोड़कर के तुम
00:08:48:21 छापते हो। तो अ इसने ये बताया इसके अनुसार इसने हमारे यहां के विवाह की तुलना की। कहां से? देवलोक की घटनाओं से। तो इसके यहां की देवलोक की घटना है कि बहन पर भाई की कुदृष्टि हो गई। भाई ने आवश्यकता अनुसार वह जो जननांग होता है वह चिपका दिया बहन के और उसके बाद उसको अपनी वासना का बनाया शिकार बहन के साथ जबरदस्ती की फिर उसके बाद उस बहन में भी तथाकथित वो जो उसकी चंपक कहानी है चंपक नहीं चंपक तो अच्छे स्तर की किताब है वो रेलवे स्टेशन के बाहर वाली जो किताबें होती है तो बहन के अंदर भी फिर वो जाग गई वासना इत्यादि ये सब इसने लिखा है तो अब एज इट इज उन चीजों को लागू कर दो तो यह मानना पड़ेगा कि रामपाल के यहां भी बहन पर भाई को दृष्टि डालते हैं। एज इट इज लागू करना है ना देवलोक की घटनाओं को तो इसी के यहां की घटना है वो देवलोक की इसने बताया जैसा कि सृष्टि रचना के समय में तो उसको एज इट इज जब लागू करेंगे तो क्या निकल के आएगा कि भैया रामपाल के यहां भाइयों की कुदृष्टि हो जाती है बहनों पर और जो पिता होता है वो जब बहन शिकायत करने पहुंचती है कि भाई मुझ पर कुदृष्टि डाल रहा है तो पिता होता है
00:10:03:25 वो और उसको जो है समर्थन कर देता है कि जा तू इसी के साथ भोग कर तेरे लिए मैं ये सब कर देता हूं इंतजाम तू उसके साथ अपनी बहन के साथ भोग कर ले। तो ये एज इट इज लागू हो गई। तो रामपाल को जो चीजें जो वासनाएं अपने यहां दिखती है या जेल में दिखी होगी जेल में जब वो 18 से 20 साल तक 20 वर्ष तक रहा। कितने? 111 वर्ष तक रहा। वो असल में ऐसा इसलिए होता है ना 11 12 वर्ष मुझे 1820 में मुख से निकल गया। जब मैं देखता हूं कि 5000 एक लाख ऐसे लोग हैं जो समर्थन करते हो शायद है ना उसमें भी कट्टर भगत कितने होंगे वो सोचने वाली बात है मगर उसको जब ये लोग 15 करोड़ 20 करोड़ बता देते हैं तो भाई वहां पर हमारा वाकलन तो हो ही सकता है हमें तो भगवती का वरदान प्राप्त नहीं है आप लोगों को मालूम होगा भगवती वरदान किसको दिया था तो भैया जहां लोग 500 की संख्या को 1 लाख तक कह एक लाख की संख्या को 15 करोड़ 20 करोड़ कह देते हैं। उनको जरा भी उसमें शर्म नहीं आती है। कहते हुए लज्जा नहीं आती है। अपने ऊपर जरा भी संदेह
00:11:19:08 नहीं होता है। तो फिर ऐसे में भाई 111 वर्ष को हम अगर 1820 वर्ष बता दे तो क्या कौन सा बड़ा आंकड़ा हमने बदल दिया? है ना? खैर तो इनके यहां पर दैव लोक की घटनाएं सीधे यहां पर लागू होती है। तो इस हिसाब से फिर रामपाल भी अपनी आवश्यकता अनुसार जेल को काटते समय क्या-क्या करता रहा हो, कौन सा अंग अपने चिपकाता रहा हो, कौन सा अंग सामने वाले की चिपकाता रहा हो ये तो भगवान ही जाने। अगर उसको सीधे-सीधे लागू कर दिया गया। तो अब यह जो घटनाएं हैं जो इसने अपनी सृष्टि रचना में बताई है यह घटनाएं किसी भी सनातन शास्त्र में नहीं मिलती है। जबकि ये हिंदुओं को ये बताता है कि भाई शास्त्र की मानो शास्त्र के अनुसार चलो। ठीक है? पहली बात। दूसरी बात ये है कि कई ऐसी घटनाएं हैं जो इसकी घटनाओं को काट देती है। गलत कर देती है कि यहां तो कुछ और हो रहा है। जैसे कि अभी हम आगे चलेंगे। तो ऐसे में क्या मानना होगा इस चर्चा को करते समय रामपाल के साथ जब तर्क वितर्क हो रहा होगा और हिंदुओं को अपने शास्त्रों को मानना होगा तो अपने शास्त्रों को मानने के नाम पर उसे पहले ये मानना होगा कि हमारे शास्त्र जो है एक तो अधूरे हैं।
00:12:34:14 उसमें केवल संकेत है। मुख्य बातें तो जो रामपाल के द्वारा रगड़ रगड़ के छापी गई जो किताबें हैं जिसका कि ना और है ना छोर। मुख्य बातें तो उसमें वो रेलवे स्टेशन की बाहर की जो खेल पर मिलने वाली किताबें होती है मुख्य बातें उसमें। दूसरी बात यह है कि हमारे शास्त्र झूठ भी बोलते हैं। यानी हमारे शास्त्रों को जिसने रचा है वो झूठ बोलते हैं। यानी कि जिसने रचा है वो झूठ भी बोलता है। तो इसका अर्थ ये है कि सनातनियों को अपने शास्त्रों को मानने के नाम पर सनातनियों को अपने शास्त्रों से श्रद्धा हटानी पड़ेगी। यानी यह मानना पड़ेगा यह शास्त्र तो गलत है। कुछ भी बोल सकते हैं। इनकी सब बातें हमें सच नहीं माननी है। तो उनके प्रति अश्रद्धा रखनी होगी और उनसे निकल कर के बाहर जाना होगा। वो दो जगह है रामपाल और रामपाल के द्वारा छापे गए ग्रंथ। वो भी तब तक जब तक रामपाल उस पर उंगली रख रहा है। वो कबीर वाणी को भी मना कर देगा अगर उसमें कुछ ले आए। इसीलिए मैंने कहा हस्तलिखित मनुस्कृत कहां है? भाई ऋग्वेद की 1500 से 1800 वर्ष पूर्व की जो मनुस्क्रिप्ट है वो लिखी हुई है प्राप्त है ओरिएंटल ओरिएंटल रिसर्च इंस्टट्यूट शायद पुणे में है वहां पर रखी हुई
00:13:49:18 है और ग्रंथों में जो यूनेस्को है उसने सबसे प्राचीन ग्रंथ माना है ऋग्वेद की उस प्रति को ठीक है तो हमें 1800 वर्ष पूर्व की अपनी प्रति प्राप्त ऋग्वेद की ठीक है हस्त हस्तलिखित थी वो तो कबीर वाणी जो पिछले 500 या गरीब दास की वाणी जो भी आई हो पिछले 600 से लेकर के उससे कम वर्षों में ये कबीर वाणी हस्तलिखित कहां है उसको प्रस्तुत किया जाए जिससे मिलान कर सके अब रामपाल ने अपने हाथों से लिखी होगी तो कार्बन डेटिंग में पता चल जाएगा है ना ये तो हो गई इनके चमचम वेद की बात दूसरी बात आती है कि अब पहले जो सृष्टि रचना बता रहा है कुल मिलाकर के सृष्टि रचना में जो मुख्य मूल कारण है सृष्टि रचना का वो रामपाल के अनुसार है इनका कबीर जो हमारे शास्त्रों में कहीं पर भी नहीं बताया गया कि कबीर मूल कारण है। ठीक है? और रामपाल यह कहता है कि हमारे शास्त्रों के अनुसार हमारे सनातन देवी देवताओं को अ पूर्ण ब्रह्म
00:15:04:26 या पूर्ण मुक्ति देने वाला मानना गलत है। पूर्ण भगवान पूर्ण परम परमेश्वर मानना गलत है। यानी हमारे शास्त्रों में ब्रह्मा विष्णु महेश भवती गणेश इनको पूर्ण परमेश्वर मानने पर निषेध किया गया है। देवता स्वरूप तो मानो ये रामपाल कहता है। हालांकि इसमें भी एक पोल है। रामपाल की इस बात में भी एक पोल है। जब हम जैसे शास्त्रों में पितरों को स्वतंत्र सत्ता मान करके उनकी भक्ति करने पर निषेध किया गया। तो उन वाक्यों का उपयोग रामपाल इस रूप में करता है कि देखो देखो पितरों की साधना करने को तो मना किया जा रहा है। जबकि पितरों का जो तर्पण इत्यादि कर्म है पितरों की पूजा अतिथि की पूजा गुरु की पूजा माता पिता की पूजा कन्या पूजन ये सब हमारे यहां कर्तव्य कर्मों में आता है। धर्म में आता है। इस रूप में हम करते हैं और कहीं भी इनको स्वतंत्र सत्ता मान करके नहीं करते हैं। उसमें उसी परम परमेश्वर का दर्शन करते हैं। जिस समय जिसका पूजन कर रहे होते हैं जिस परम परमेश्वर को पूर्ण कहा गया है। ठीक है? मगर इन निषेध वचनों के आधार पर रामपाल पितरों का या इस तरह की और चीजों का सीधेसीधे खंडन कर देता है। अब बात ये आती है कि पितरों का ही पूजन श्राद्ध इत्यादि
00:16:20:00 जो कर्म है उसकी आज्ञा हमें प्राप्त है। यजुर्वेद से प्राप्त है। ऋग्वेद से प्राप्त है। शास्त्रों से प्राप्त है। विभिन्न शास्त्रों में मेंशन गया महात्मा इत्यादि ये उसमें लिखा हुआ है। सब स्कंद पुराण सारे महात्म लिखे हैं। तो अब ये है [गला साफ़ करने की आवाज़] कि अब ये क्या करता है कि पितृ पूजन को निषेध करने वाले स्वतंत्र रूप से पितृ पूजन नहीं करना चाहिए। उसको निषेध करने वाले उसके आधार पर सीधे-सीधे खंडन कर देता है कि नहीं नहीं पितृ पूजा करनी नहीं है। ठीक है? अब क्या है कि इसने कई जगह यह लिखा है कि नहीं नहीं ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा करने वाले दूषित कर्म करने वाले नीच ठीक है यहां निष निषेध वाक्य में मिल गया उसके बावजूद भी ये ताल ठोकता है कि मैं ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति करवाता हूं हालांकि करवाते नहीं है कुछ नहीं करवाते वो मगर लोगों को दिखाने के लिए तो कहते हैं ना तो चलो लोगों को दिखाने के लिए जो कह रहा है इसका मतलब निषेध परख वचन होने के बाद भी इसके यहां भी उन्हीं तत्वों की भक्ति करने की बात भी है। जिन तत्वों की भक्ति को इसके यहां निषेध किया गया है। इसका मतलब क्या है? वहां भी यही मानना
00:17:35:06 पड़ेगा। ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति तो है मगर पूर्ण ब्रह्म के रूप में नहीं है। उसी तरीके से पितृ पूजन है। ये पूर्ण ब्रह्म के रूप में नहीं है। तो अब बात ये आती है कि अ जो सृष्टि रचना जो ये बता रहा है वो हमारे शास्त्रों में है नहीं। फिर जिन शास्त्रों को जिन शास्त्रों को मानने की बात कर रहा है उन शास्त्रों को रामपाल के अनुसार माने जाने का अर्थ है कि उन शास्त्रों को ना मानना क्यों क्योंकि उनको अधूरा मानना है कि उसमें जो संकेत है दूसरे ग्रंथ का छमम छमम वेद का संकेत है। कबीर का संकेत है। कुछ भी क्लियर नहीं है। जो ये मनवाना चाहता है वो हमारे शास्त्रों में क्लियर नहीं है। हमारे शास्त्रों में उसका संकेत है। संकेत के आधार पर इसकी कही हुई बात मान लो बाबा की जेल कट्टू ठीक है तो हमें रामपाल के अनुसार शास्त्रों को मानने का अर्थ है शास्त्रों को ना मानो क्यों क्योंकि एक तो पहले उन्हें अधूरा मानो भले ही वेद घोषणा कर रहे हो कि वेद के अलावा दूसरा कोई मार्ग नहीं है ना और भले ही प्रत्येक पुराण प्रारंभ होते ही घोषणा कर रहा हो कि इसके अलावा सब और किसी शास्त्र की आवश्यकता नहीं है। फिर
00:18:50:12 भी हमें यह मानना है कि यह सभी शास्त्र परम पवित्र तो हैं मगर झूठे भी है। परम पवित्र तो हैं मगर एक काम के नहीं है। ये मानना है रामपाल के अनुसार। ठीक है? दो बातें। अब तीसरी बात ये है कि रामपाल के अनुसार इनमें इन शास्त्रों में हम जिनकी पूजा करते हैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश उनकी पूजा को निषेध किया गया है। पूर्ण ब्रह्म के रूप में निषेध किया गया है हमारे शास्त्रों में। तो अब इस बात का सवाल का जवाब कौन देगा कि हमने यह पूजा पूर्ण ब्रह्म के रूप में ब्रह्मा विष्णु महेश की करना क्यों शुरू की? उसका प्रमाण कहां है? इनके पास कुछ नहीं है। इनके पास इनके कबीर सागर को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करने का कुछ नहीं आधार। जो भी ये दिखाएंगे उसमें ढोल में पोल हो जाएगी। तो ये तो रही इनकी सृष्टि रचना की बात। अब हम बहुत एक सरल सा खेल खेलेंगे क्योंकि रामपाल की बातों का जवाब देना खेल खेलने जैसा ही है। कोई व्यक्ति अगर तर्कसंगत व्यक्ति अगर बात का इनकी का जवाब दे तो रामपाल की बातों का जवाब देना एक खेल है बच्चों का खेल। वही हम आज खेलने जा रहे हैं और आपको बहुत आनंद आने वाला है। अच्छा इनका जो शास्त्रार्थ
00:20:05:18 का सगुफा है वो भी आप जान ही चुके हो कि भाई इनसे सामने जाकर के शास्त्रार्थ करने नहीं देंगे। लाइव आएंगे नहीं। फिर अगर यह कहेंगे कि वीडियो बना के खंडन कर दो तो कितने लोग वीडियो बनाकर खंडेन कर देंगे और कितने खंडनों पर तुम कितने लोगों को 50-50 लाख दोगे? जनता का निर्णय तय कैसे होगा? जनता ने निर्णय क्या लिया? बहुत सी इसमें बहुत सारे चीजें हैं। एक बात ये भी आ जाती है कि अगर तुम अपने यहां बैठकर के आमने सामने तर्क वितर्क ना होने को भी शास्त्रार्थ कहते हो। चलो मान लिया कि अपने घर में बैठकर के अगर कोई बात कर रहा है और तुम कहीं और हो और तुम भले ही मेरा लाइव देखो ना देखो मैं तो वीडियो बना रहा हूं उसको भी तुम शास्त्रार्थ कहते हो ठीक है तो फिर अपने घर में बैठकर केवल अपने पक्ष रखने को क्या कहेंगे क्योंकि वो तो शास्त्रार्थ हो गया तो फिर केवल पक्ष रखना किसे कहेंगे क्योंकि केवल पक्ष रखने को तो तुमने शास्त्रार्थ बता दिया समझ रहे हो तुम भों जो रामपाल के चेले चाली देख रहे होंगे वो इस बात को समझे केवल अपने पक्ष रखने को तुमने क्या कहा ये तो शास्त्रार्थ है यानी ये तो भिड़ंत है ठीक है तो फिर केवल अपना पक्ष रखना वो क्या है सोचने वाली बात
00:21:21:13 खैर अब बात आगे करते हैं सबसे जरूरी बात [गला साफ़ करने की आवाज़] तो पहले देखते हैं अब हम खोल रहे हैं चैट जीपीटी आपके सामने लाइव होगा आज चैट जीपीटी ठीक है क्योंकि रामपाल तो आएगा नहीं तो अब हम चैट जीपीटी से एक एक करके पूछ रहे हैं कि भैया षष्ठी रचना के विषय में जो रामपाल ने ताल ठोकी है उसके विषय में क्या कहता है हमारा कौन सा पुराण और पुराण से उसको वेरीफाई भी कर लेंगे चैट जीपीटी क्या कहेगा क्या बता रहा है मैं ये करके आपको इसलिए दिखा रहा हूं कि रामपाल की बातों में केवल वस्तुनिष्ठ बातें हैं किसका नाम क्या है किसका किसके साथ ये वस्तुनिष्ठ चीज वहां ना तर्क है ना तात्विक सिद्धांत जिसको समझने के लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़े गुरुओं से समझना पड़े केवल आपको वहां पर रटी हुई चीजें चाहिए होंगी उसका खंडन करने के लिए प्रतिकार करने के लिए तो रटी हुई चीजें तो आपको जानकारियां चैट जीपीडी बहुत सारी मिल जाएगी तो इसको शुरू करते हैं जरा देखते हैं तो सबसे पहले देखते हैं भाई
00:22:36:28 हां जी मुझे यह जानना है कि विष्णु पुराण के अनुसार सृष्टि का मूल कारण किसे कहा गया है? एक सेकंड मेरे विचार दर्शन और पुराणों के नजरिए से देख तो आदि शक्ति को सभी शक्तियों का मूल स्रोत कहा जा सकता है। लेकिन यहां फर्क समझना जरूरी है। शक्ति वह सामर्थ्य है जिससे सृष्टि चलती है। जबकि आदि शक्ति उस शक्ति का सार्वभौमिक रूप मानी जाती है। शक्तिमान वो है जिसमें वह शक्ति निहित है। अलग-अलग दर्शनों में शक्ति और शक्तिमान का संबंध थोड़ा अलग बताया गया है। अगर आप चाहे तो मैं बता सकता हूं कि शाब्द दर्शन और दूसरे मतों में इसे कैसे अलग-अलग तरह से समझाया गया है। क्या आप शाण की बात है या किसी और परंपरा के? नहीं नहीं ऐसे नहीं। मुझे नाम लेकर बताइए विष्णु पुराण में जो सबसे परम परमेश्वर कहे गए हैं। उनका नाम क्या है? विष्णु पुराण के अनुसार। ठीक है। मैं विष्णु पुराण के अनुसार देखता हूं। विष्णु पुराण के अनुसार परमेश्वर का नाम भगवान विष्णु है। उदाहरण के लिए विष्णु पुराण प्रथम अंश अध्याय दो श्लोक अका
00:23:52:04 से चार में सृष्टि स्थिति और विनाश के स्रोत के रूप में भगवान विष्णु को नमस्कार किया गया है। अगर आप किसी खास श्लोक से प्रमाण चाहते हैं तो अध्याय और श्लोक संख्या बताना जरूरी होगा। क्या विष्णु क्या आप उसी श्लोक को जानना चाहते हैं? नहीं नहीं ठीक है मैं देख ले। आपने जो प्रथम अंश का है मैं देख लूंगा। अभी मैं फिलहाल मैं ये पूछ रहा हूं। क्या विष्णु भगवान को विष्णु पुराण में अविनाशी कहा गया है? अविनाशी। एक सेकंड मैं देखता हूं। विष्णु पुराण में भगवान विष्णु को नारायण कहा गया है। अविनाशी अजन्मा
00:24:32:26 एक मिनट मैं देखता हूं। आपका आखरी वाक्य थोड़ा स्पष्ट रह गया। क्या आप यह पूछ रहे हैं कि विष्णु पुराण में नारायण को भजने का या नारायण नाम के जप का प्रमाण कहां है? नहीं नहीं मैं पूछ रहा हूं तो मैं संबंधित श्लोक मैं पूछ रहा हूं विष्णु पुराण में भगवान विष्णु को अजन्मा अविनाशी ये कहां पर कहा गया है? देखता हूं।
00:25:06:04 क्या आप पूछ रहे हैं कि विष्णु पुराण में भगवान विष्णु को अजन्मा और अव्यय कहां-कहां गया है? जी जी या किसी दूसरे शब्द का नहीं नहीं अजन्मा और अव्यय श्लोक 40 41 और श्लोक 55 में नारायण को अच और अव्यय कहा गया है। जो विशुद्ध बोध स्वरूप नित्य अजन्मा अक्षय अव्यक्त और अविकारी है। वही विष्णु का परम पद है। इस संदर्भ में नारायण को अजन्मा और अव्यय कहा गया है। आप चाहे तो मैं श्लोक 40 का हिंदी अर्थ भी बता सकता हूं। हां बताइए आप एक मिनट क्या आपने बताया है एक दो चार विष्णु पुराण का ना हिंदी अर्थ क्या है बताइए विष्णु पुराण के प्रथम अंश अध्याय नौ श्लोक 50 में लिखा है जो विशुद्ध बोध स्वरूप नित्य अजन्म अक्षय अव्यक्त और अविकारी है वही विष्णु का परम पद है श्लोक 51 में शक्ति के बारे में कहा
00:26:21:06 है कि जिसकी अत्यंत सूक्ष्म अंश में यह विश्व शक्ति स्थित है। ऐसे परबह्म स्वरूप अव्यय भगवान को मैं प्रणाम करता हूं। अव्यय ठीक है। यानी वो अविनाशी भी है। और अव्ययम शब्द आए हैं। ठीक है। ठीक है। ठीक है। चलिए ठीक है। अब अब मुझे बता दीजिए क्या विष्णु पुराण में ये लिखा हुआ है कि विष्णु भगवान की पूजा करने से मोक्ष मिलेगा? एक मिनट मैं देखता हूं। हां विष्णु पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि भगवान विष्णु वासुदेव की आराधना से मोक्ष मिलता है। उदाहरण के लिए प्रथम अंश अध्याय फोर श्लोक 18 में कहा गया है कि वासुदेव की आराधना किए बिना कोई मोक्ष नहीं पा सकता। साथ ही प्रथम अंश अध्याय 18 श्लोक 23 24 में ज्ञान ध्यान और समाधि द्वारा हरि के तत्व को जानकर मोक्ष प्राप्त करने की बात है। निष्कर्ष यह है कि विष्णु पुराण के अनुसार विष्णु वासुदेव की आराधना मोक्ष का साधन है। और भी कई श्लोकों में यह विचार आता है। ठीक है। मुझे ज्यादा नहीं चाहिए। ज्यादा नहीं चाहिए। मुझे आप यह बताइए कि यह उन्हीं विष्णु की बात हो रही है। मतलब विष्णु पुराण में विष्णु भगवान की पहचान के चिन्ह जैसे वो शंख चक्र गधा धारण करते हैं। लक्ष्मी के पति हैं।
00:27:36:21 है ना? इस तरह की पहचान कि हम उन्हीं विष्णु की बात कर रहे हैं। क्योंकि कुछ लोग हैं वो यह कहते हैं कि नहीं नहीं यह दूसरा विष्णु है। एक सेकंड मैं देखता हूं। हां अब समझ गया। आप पूछ रहे हैं कि विष्णु पुराण में जिन भगवान विष्णु का वर्णन है क्या वही शंख चक्र गदा और पद्मधारी विष्णु ही है? जी जी हां विष्णु पुराण में वही भगवान विष्णु का उल्लेख है। प्रथम अंश अध्याय फोर श्लोक 18 में वासुदेव की आराधना से मोक्ष प्राप्ति की बात है। और प्रथम अंश अध्याय 22 में उनके शंख चक्र गदा आदि आयु का वर्णन है। तो साफ है कि वहां इन्हें अलग देवता नहीं माना गया है। वासुदेव हरि और विष्णु एक ही परम तत्व के नाम है। बहुत बढ़िया। मैं जरा आपसे ना वैसे बात करता हूं लिख लिख के क्योंकि शायद आपकी आवाज कम जा रही होगी वहां। आवाज कैसी जा रही है मुझे कोई कमेंट करके बता दे।
00:28:45:20 नारायण। आवाज ठीक आ रही है? तो इसको आगे बढ़ाएं नहीं तो मैं पढ़ के बताऊं जो चैट जीपीटी [नाक से की जाने वाली आवाज़] आंसर दे रहा है। है ना? सही है। ठीक है। चलिए अब हम आगे जाते हैं इसी में। अह मोक्ष वाला हो गया। विष्णु पुराण से विष्णु भगवान का मोक्ष स्वरूप हो गया। सच्चिदानंद स्वरूप हो गया। सृष्टि बनाने वाला हो गया। और यह वही विष्णु है जो लक्ष्मी जी के पति हैं। और उनका हमने रूप भी देख लिया। वो शंख चक्र गदा वाला। ये सब आंसर इसने यहां दे दिए। और यहां पर श्लोक क्रमांक भी आ रहे हैं और कुछ श्लोक क्रमांक आपको स्क्रीन पर दिख जाएंगे। ठीक है? अब जो है और क्या [गला साफ़ करने की आवाज़] क्या प्रश्न होता है? हां। [नाक से की जाने वाली आवाज़]
00:30:06:15 [खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये बताइए विष्णु पुराण में भगवान विष्णु विष्णु को परम पुरुष या पुरुषोत्तम कहीं पर कहा गया है? एक सेकंड हां मैं जरा चेक कर लो। हां बिल्कुल विष्णु पुराण में भगवान विष्णु को पुरुषोत्तम कहा गया है। इस प्रकार प्रथम अंश अध्याय दो श्लोक पांच से आठ के आसपास मिलता है। अलग-अलग संस्करणों में श्लोक क्रमांक बदल सकते हैं। अगर आप चाहे तो मैं सटीक अध्याय श्लोक नंबर मिलान करके दे दूं। हां जी हां जी। अगर आपके पास ऑनलाइन पाठ खुला है ऑनलाइन उपलब्ध पाठ में पुरुषोत्तम के लिए यही वर्णन मिलता है हां तो
00:30:50:16 अभी तक हमने विष्णु पुराण से विष्णु के द्वारा सृष्टि रचना वही विष्णु जो लक्ष्मी के पति और जिनका जिस स्वरूप में हम लोग हिंदू लोग जो जिनकी पूजा करते हैं आराधना करते उन्हीं विष्णु की बात हो रही है। ठीक है। अब हम लोग शिव पुराण की बात करेंगे। शिव पुराण के तो हालांकि मेरे पास भी प्रमाण है पर आज मैं चैट जीपीटी से बताऊंगा। मेरे पास तो बहुत सारे कल मतलब बहुत टाइम लग जाएगा। पर मैं आज चैट जीपीटी से बात कर करके आपको बताऊंगा कितना सरल है रामपाल की बातों का जवाब देना। ठीक है? तो चैट जीपीटी से अब हम आगे करते हैं बात। [खांसने की आवाज़]
00:31:28:07 ये बताइए शिव पुराण के अनुसार शिव पुराण के अनुसार हां सृष्टि को बनाने वाला जी सृष्टि को बनाने वाले का क्या नाम है? शिव पुराण के अनुसार मैं शिव पुराण में देख रहा हूं। शिव पुराण के अनुसार शक्ति की उत्पत्ति भगवान शिव से हुई है। श्री शिव महापुराण की रुद्र संहिता में शिव द्वारा अपने शरीर से देवी शक्ति को प्रकट करने का वर्णन मिलता है। मूल संस्कृत पाठ में भी यही भाव आता है। शक्ति को उत्पन्न करने वाले के रूप में सदाशिव का उल्लेख आता है। ठीक है, ठीक है।
00:32:11:03 अ सृष्टि रचना करने वाले यही हैं। सृष्टि की रचना करने वाले मैं कंफर्म कर लेता हूं। हां जी शिव पुराण के इस प्रसंग के अनुसार शक्ति की रचना करने वाले शक्ति नहीं शक्ति नहीं मैं सृष्टि मैं सृष्टि बोल रहा हूं सृष्टि हां जी बोलिए मैं सृष्टि रचना कह रहा हूं सृष्टि की रचना करने वाले ठीक है अब साफ कर देता हूं शिव पुराण रुद्र संहिता सृष्टि खंड अध्याय छ श्लोक न में कहा गया है शक्ति सदा शिव के अपने स्वरूप से प्रकट हुई और उनसे अभिन्न है। अरे भाई मैं कह रहा हूं मैं शक्ति नहीं कह रहा हूं। मैं कह रहा हूं सृष्टि सृष्टि संसार की रचना करने वाला किसे कहा गया है?
00:32:59:20 एक सेकंड मैं देखता हूं। अगर आपका प्रश्न ये है कि संसार की रचना करना किसका काम है? हम शिव पुराण के अनुसार रचना पालन और संहार के कार्य मिलते हैं। सृष्टि खंड अध्याय 16 श्लोक 47 से 48 में कहा गया है कि ब्रह्मा ने शिव की आज्ञा से सृष्टि की और वही शिव को परब्रह्म कहा गया है तथा ब्रह्मा विष्णु और रुद्र को उनके रूप बताया गया है। शिव जी को अब ये जो शिव पुराण सृष्टि खंड अध्याय 16 बहुत बढ़िया अब ये जो शिव जी आपने बताए हैं कि शिव जी ने ब्रह्मा विष्णु महेश को मतलब ब्रह्मा विष्णु महेश के आविर्भाव के कारण जो है शिव जी हैं। ये जो आपने बताया है यह शिवजी वही शिव जी है ना जो त्रिशूल धारण करते हैं। क्या इनको कहीं पर कहा गया शिव जी को त्रिशूल धारण करने वाला, जटा में गंगा धारण करने वाला, चंद्रमा धारण करने वाला। ऐसा कहा गया है कहीं शिव पुराण में?
00:33:56:04 हां, मैं चेक कर लेता हूं। हां शिव पुराण में उसी शिव को त्रिशूलधारी जटाधारी गंगाधर और चंद्रमा को मस्तक पर धारण करने वाला बताया गया है। सृष्टि खंड के अध्याय छह में इसका एक स्पष्ट प्रमाण मिलता है। बहुत बढ़िया। आप ये देखिए कि कितनी कितनी नेचुरल नेचुरल नहीं ऑर्गेनिक धुलाई हो रही है रामपाल ये ऑर्गेनिक इसमें कोई मिलावट नहीं है। सीधेसीधे प्रश्न कर रहा हूं चैट जीपीटी से। शिव पुराण में शिव पुराण एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट चैट जीपीटी से जब पूछा गया शिव पुराण के अनुसार सृष्टि रचना किसने की है? तो सृष्टि रचना का प्रमाण से उसने उत्तर दे दिया कि शिव जी ने की है। अब मैंने ये कहा कि जब ये लोग करने लगे वो आदि शिव आदि शिव आदि गणेश आदि गणेश आदि राम आदि राम। ठीक है तो अब मैंने ये कहा कि एक मिनट आप सुन रहा हूं। अरे यार चुप हो जाओ। चुप हो जाओ एक मिनट। तो अब मैंने ये कहा कि अ क्योंकि ये लोग कहते हैं ना ये वो वाला शिव नहीं है। तो फिर मैंने ये कहा
00:35:11:06 कि भाई शिव की पहचान भी बता दो जिसने सृष्टि रचना की है। तो शिव पुराण में शंख ये त्रिशूल धारण करने वाले जटा में गंगा धारण करने वाले जिस रूप की पूजा हम करते हैं वो कोई अलग नहीं काल नहीं उसी वही भगवान शिव शंकर। अच्छा यह भी कह देता हूं शंकर कहा है कि नहीं। ठीक है और आगे चलते हैं। हां तो शिव पुराण के अनुसार जिन भगवान शिव ने सृष्टि रचना की है और वही जो वही जो अपने जटा में गंगा चंद्रमा धारण करते हैं, त्रिशूल धारण करते हैं। क्या उनको शंकर भी कहा गया है?
00:35:53:08 मैं चेक करता हूं। शिव पुराण के अनुसार आप यह पूछ रहे हैं कि शिव जी ने शक्ति की रचना कैसे की और शक्ति को अपने शरीर से प्रकट करने का क्या प्रसंग है? नहीं नहीं मैं ये नहीं पूछ रहा। मैं ये नहीं पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं कि शिव पुराण में सृष्टि की रचना संसार की रचना करने वाले परम तत्व परमेश्वर शिव को कहीं पर शंकर भी कहा गया है? एक सेकंड मैं जांचता हूं। [गला साफ़ करने की आवाज़] जी अब आपका प्रश्न क्लियर है। आप पूछ रहे हैं कि शिव पुराण में सृष्टि करने वाले परम तत्व शिव को संकल्प कहा गया है या नहीं? शिव पुराण संहिता सृष्टि खंड अध्याय छ में उल्लेख है कि सृष्टि के समय के आने पर परम ब्रह्म के भीतर इच्छा उत्पन्न हुई कि वह एक से अनेक हो। इसके बाद निराकार परम ब्रह्म ईश्वर मूर्ति भगवान सदाशिव के रूप में प्रकट हुए। लेकिन अभी तक मुझे ऐसा सटीक श्लोक नहीं मिला है जिसमें भगवान शिव को स्वयं संकल्प नाम दिया गया हो। संकल्प नहीं अलग रखना चाहिए। संकल्प नहीं शंकर हां शंकर की बात कर रहा हूं शंकर
00:37:07:20 हां समझ गए संकल्प नहीं शंकर पूछ रहे हैं कि शिव पुराण में सृष्टि के परम कारण भगवान शिव को शंकर ही कहा गया है या नहीं शिव पुराण के रुद्र संहिता सृष्टि खंड के प्रथम अध्याय के शुरुआती श्लोक में शिव को विश्व की उत्पत्ति स्थिति और लय का एकमात्र कारण बताया गया है और एक स्पष्ट उदाहरण शिव पुराण के महात्म के शुरुआत में मिलता है। जहां लिखा है कि हे शंकर मैं आपका दास हूं जो कर्म रूपी ग्राह से ग्रस्त है। इसे शिव पुराण में शंकर नाम के प्रयोग का प्रमाण मिलता है। हालांकि सृष्टि के परम कारण और शंकर नाम को एक ही संदर्भ में जोड़ने के लिए संबंधित अध्याय का पूरा श्लोक देखना उचित होगा। अगर आप चाहे तो मैं उस खाने का पूरा श्लोक खोजकर पढ़ सकता हूं। मैं मैं बता देता हूं। वायवीय सम्यता में संभवत पूर्व खंड है। जहां पर भगवान शिव की भक्ति करने की बात कही जा रही है। उन्हें अजर भी कहा जा रहा है। जरा से रहित कहा जा रहा है। वहीं पर उनकी भक्ति करने के लिए शंकराय नमः करके जो है मंत्र भी बताया गया है। वायवीय समिता पूर्व खंड
00:38:15:25 एक सेकंड मैं देखता हूं। मैं समझ रहा हूं कि आप शिव पुराण की उस संहिता और खंड की बात कर रहे हैं जहां भगवान शिव को अजर और जरा रहित कहा गया है और उनकी उपासना के लिए शंकराया नमः जैसे मंत्र बताए गए हैं। आप कृपया ये स्पष्ट कर दे कि आप शत्रुद्रा संहिता की बात कर रहे हैं या वायवीय संहिता के पूर्व भाग मैं वायवीय संता की बात कर रहा हूं। थोड़ा सा अंश बता दे वायवीय संभिता की बात कर रहा हूं मैं। मैं जयकारा जी वायर संिता का ऑनलाइन संस्कृत पाठ उपलब्ध है और इसमें भगवान शिव के लिए शंकर नाम का प्रयोग मिलता है। अब उसी संगीता में आपके बताए अनुसार अजर और जारित वाले प्रसंग का मिलान करना होगा। लेकिन मैं अभी इसका सटीक अध्याय और श्लोक क्रमांक प्रमाणित नहीं कर पाया हूं। इसलिए कोई अनुमानित संदर्भ देना होगा। ठीक है। मैं देता हूं आपको अनुमानित संदर्भ। अध्याय या श्लोक नंबर बता दे। ठीक है। मैं बताता हूं।
00:39:15:18 ये शिव पुराण वायवीय समिता द्वितीय खंड बोलिए भाई
00:39:54:14 जहां पर शिव पुराण की भारतीय संभिता का अध्ययन और श्लोक से बताइए मैं उसी संस्कृत के आधार पर हां दूसरे भाग में है वायवी समिता दूसरे भाग में है संभता छठवा अध्याय रहा होगा जिसमें जो संध्या को भक्ति का वो बता रहे हैं ना भक्ति कैसे करनी है हम जी
00:40:32:07 अब आपका मत वाला पसंद हो गया है। वशिष्ठ द्वारा ओम नमः शंकर मंत्र से जप तप करने का उपदेश शिव पुराण की रुद्र संहिता के सती खंड में दिया गया है। ना की वायवीय संहिता में ये प्रसंग अध्याय पांच में मिलता है। श्लोक लगभग 60 से 68 के आसपास है। संस्करण के अनुसार क्रमांक बदल सकते हैं। जी वही इसी प्रसंग में शिव को धर्म अर्थ काम और मोक्ष का आदि कारण और पुरुषोत्तम भी कहा गया है। यह प्रमाण आपके तथ के लिए उपयोगी हो सकता है क्योंकि यह शंकर नाम उपासना के मंत्र में आता है और उसी प्रसंग में उन्हें सृष्टि का आदरण और पुरुषोत्तम बताया गया है। बहुत बढ़िया ये
00:41:16:12 आपने कौन सा बताया? रुद्र समिता का सती खंड हां रुद्र संहिता का सती खंड हां रुद्र सम्यिता का सती खंड है रुद्र समिता का सती खंड अध्याय कौन सा बताया आपने छह एक सेकंड हां जी अध्याय छह भी बताया था इसे शिव पुराण की रुद्र संहिता का सती खंड द्वितीय खंड कहा जाता है। ध्यान दें। मैंने पहले जो श्लोक संख्या बताई थी वो सटीक रूप से स्रोत से सत्यापित नहीं की गई है। तो कृपया प्रमाण देते समय अध्याय और श्लोक संख्या अपने संस्करण से मिला ले। ये ये मिल गया मिल गया। देखिए ये पष्ठ संख्या 328 निकालिए।
00:42:00:02 शिव पुराण की अध्याय छक और ये है अध्याय छ का संध्या की भक्ति वाला प्रसंग मिल गया है। और इसमें है नम से 63वा श्लोक एक सेकंड जी सही आपके संस्करण के अनुसार संदर्भ ग्रंथ शिव महापुराणिता खंड अध्याय छ श्लोक 163 अंतिम प्रमाण के श्लोक संस्कृत पाठ भी देख ताकि शराय नमः मंत्र और भगवान शिव के स्वरूप के संबंध में छठवा नहीं है पांचवा है पांचवा अध्याय पांचवा है ऊपर जाइए हां इसी में और ऊपर बस बस बस बस बस सबसे ऊपर की लाइन देखिए ग्रंथ में संदर्भ शिव महाप्रभु ये देखिए क्या लिखा है इसको वो कर सकते हैं अंडरलाइन बड़ा कर सकते है इसको जो धर्म अर्थ काम और मोक्ष के आदि कारण तथा अद्भुत है उन्हीं संसार के एकमात्र आदि कारण पुरुषोत्तम भी हो गए वो छर अक्षर और पुरुषोत्तम करता है ना ये रामपाल पुरुषोत्तम है ना? तुम इस मंत्र से देवेश्वर शंभू का भजन करो।
00:43:15:06 उससे तुम्हें समस्त पदार्थों की प्राप्ति हो जाएगी। इसमें संदेह नहीं है। और फिर आगे ओम नमः शंकराय मंत्र से मौन होकर इस प्रकार तपस्या का प्रारंभ करो। ठीक? तो आदि कारण अद्वैत स्वरूप धर्म अर्थ काम मोक्ष के आदि कारण एकमात्र संस्कार के संसार के एकमात्र कारण इसको अभी हम लोग जो हमारे पास जो क्या क्रमानुसार भी है पर अभी हम लोग वो खेल बता रहे हैं ना कितना आसान है रामपाल की बातों का जवाब देना वो बता रहे हैं तो अब हम चलते हैं अब हमें मिल गया कि भैया शिव पुराण के अनुसार सृष्टि रचना किसने की है शिव जी ने की है और वही शिवजी जो जटा में गंगा धारण करते हैं इसमें कोई इफेंट बट ना हो पाए। हटा दीजिए बस इतना
00:44:21:10 हो सकता है कोई नेटवर्क प्रॉब्लम हो रहा हो तो आप सभी देखिए कितना बढ़िया खंडन चल रहा है इस लाइव स्ट्रीम को अधिक से अधिक शेयर करें और जिस तक पहुंचा सकते हैं ताकि इस खंडन का उपयोग हो सके ताकि ये लोग आपको भ्रमित ना कर सके रामपाल वाले तो ये सब प्रमाण आप अपने पास रख लीजिए। आज उसकी पूरी धुलाई होगी। ठीक है? उसके एक एक जो कुतर्क है ना रामपाल के उन सभी का एक एक करके खंडन होगा। ठीक है? तो नेटवर्क प्रॉब्लम हुआ है संभवता भैया को तो जब तक वो जुड़ रहे हैं तो आपने देखा ही अभी कि रामपाल का खंडन करना कितना सहज है मात्र चैट जीपीटी से पूछ लीजिए और खंडन हो गया ठीक है चैट जीपीटी से आप पूछ लेंगे तो कितने सारे खंडन हो जाएंगे उसके शास्त्र के प्रमाण सहित वो बता रहा है चैट जीपीटी अभी आप देख रहे हैं ना तो उन सभी प्रमाण को एक एक-एक करके जब हम यहां पे आपके सामने रख रहे हैं तो वो मिल भी रहे हैं। ठीक है? सही। हो सकता है कभी आगे पीछे हो जाए। तो
00:45:36:16 अभी तो मुझे देखने को नहीं मिला तो देख लिया जाएगा। है ना? तो आप सभी लाइव स्ट्रीम को अधिक से अधिक शेयर करें। ठीक है? लिंक अभी नहीं दिया जाएगा। भैया अभी पूरा कंप्लीट कर ले पहले उनको जो जो दिखाना है जो प्रमाण है उनके पास बहुत सारे है ना तो आप सभी बने रहे जल्द से जल्द लाइव स्ट्रीम को शेयर करें ठीक है भगवान शिव के विषय में भगवान विष्णु के विषय में पुराणों से उनके ईश्वरत्व के लिए कई सारे प्रमाण आपके सामने अभी रखे गए हैं। अभी और भी रखे जाएंगे। अभी तो शुरुआत है तो शुरुआत तो दमदार दिख रही है और मजा आने वाला है। है ना? तो आप लोग अपना सहयोग बना के रखें चैनल के साथ। ठीक है?
00:47:10:02 कुछ नेटवर्क प्रॉब्लम हो गया था पता नहीं आजकल हो रहा है तो जी आप सभी देखते रहिए कभी और प्रमाण आपको दिखाएंगे। है ना? यह जो प्रमाण है आपके सामने यहां पर क्या कहा गया था कि वो वही है वो जो शिव है वही शंकर है। ठीक है? उनहीं हे शुभानने तुम इस मंत्र से देवेश्वर शंभू का भजन करो। उससे तुम्हें समस्त पदार्थों की प्राप्ति हो जाएगी। इसमें संदेह नहीं है। ठीक है?
00:47:52:19 यहां पर यह सब कहा गया है। जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के आदि कारण तथा अद्वैत स्वरूप हैं। उन्हीं संसार के एकमात्र आदि कारण पुरुषोत्तम का भजन करो। यह कहा गया है। ठीक है? तो वह पुरुषोत्तम कौन है? तो यहां पर आगे बताया गया है कि वह शंकर है। शंभू ठीक है। फिर उनका मंत्र बताया गया है। ठीक है? तो सभी आप देख सकते हैं यह प्रमाण बहुत ही महत्वपूर्ण है। है ना?
00:48:32:12 जय श्री राम। जय श्री राम। सभी को जय श्री राम। अभी-अभी आनंद आना शुरू हुआ है। अभी आनंद बहुत आएंगे। तो भैया यहां पर थोड़ा सा साधनों का अभाव है तो उसको आपको सहन करना पड़ेगा। हमारे पास इन्वर्टर नहीं है तो ऐसा हो जाता है कि कभी-कभी विद्युत का प्रवाह बाधित हो जाता है तो उस कारण से होता है। तो भगवान शिव के बारे में हमने चैट जीपीटी से पूछ लिया। शिव पुराण के अनुसार मूल कारण श्लोक सहित प्रमाण सहित उसने बता दिया। अभी हम आगे आपको बताएंगे जो हमारे पास नोटेड है उससे भी बताएंगे। फिलहाल आप चैट जीपीटी क्या कहता है उससे पूछते जाइए। कितना सरल है रामपाल की चीजों का प्रतिकार करना वो मैं आपको बता रहा हूं। वह कहता है ना सृष्टि रचना सृष्टि रचना यह देख तेरे छमचम वेद की क्या हो रहा है तो हमने यह पता कर लिया कि ये वही यह जो शिव है जो सृष्टि का मूल कारण बताए जा रहे हैं वही शिव है जो जटाम गंगा और त्रिशूल धारण करते हैं चंद्रमा धारण करते हैं। ये सब श्लोक हैं शिव पुराण में और यह वही शिव है जिनको शंकर
00:49:47:15 भी कहा जाता है। महेश्वर भी कहा जाता है। शंभू भी कहा जाता है। फिर यह वही शिव है जो उमापति हैं। गिरजापति हैं। देखिए कैसे है ना? अलग नहीं कर पाओगे आप। उमापति भी यही है। ये अलग अलग कुछ नहीं है। फिर मैं आप में इसमें रहस्य बताऊंगा कि ये अलग-अलग क्यों हो रहा है कि शिवजी के द्वारा बन रही है सृष्टि। फिर वो हो रहा है और इसमें रामपाल के भी चीजों को लूंगा जिससे तुम आप लोग समझ पाओ। है ना? अब चलते हैं आगे भैया। [गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़]
00:50:26:09 हां और एक चीज और अजर अमर अविनाशी पुरुषोत्तम ये सारे शब्द शिव जी के लिए आ गए अभी तक के जो चर्चा की है हम लोगों ने। [गला साफ़ करने की आवाज़] अच्छा ये बताइए कि क्या शिव पुराण में जो भगवान शिव है उन्हें कहीं पर अंबिका का पति गिरजा का पति बताया गया है? एक सेकंड देखता हूं। जी हां शिव पुराण में शिव को अंबिकापति गौरी पति और मुकेश पति तीनों नामों से संबोधित किया गया है और समझिए कि एक ही श्लोक में उन्हें संसार की उत्पत्ति स्थिति और लय का एकमात्र कारण भी बताया गया है। तो हां शिव पुराण में ये तीनों संबोधन मिलते हैं और खासकर गौरी पति वाला श्लोक उसी रुद्र संगीिता सृष्टि खंड अध्याय एक में मिलता है। आप तीनों का बता दीजिए कहांहां पर क्या-क्या है। गौरी पति उमापति गिरजापति अंबिकापति सॉरी
00:51:28:26 एक सेकंड जरा मैं देखता हूँ अभी चेक कर रहा हूं जी शिव पुराण में तीनों संदर्भों का उल्लेख है गौरी पति ग्रंथ शिवपुराण रुद्र संहिता सृष्टि खंड अध्याय एक श्लोक एक में शिव को गौरी पति कहा गया है तो अंबिकापति शिव महापुराण विदेश्वर संहिता अध्याय सात श्लोक छ में मिलता है जहां शिव को अंबिका का पति कहा गया तीन गिरजापति शिव पुराण की रुद्र साहिबा पार्वती खंड अध्याय 43 में ओम गिरजापतिय नमः नाम रूप में मिलता है। मेरा सुझाव है कि आप अपने शिव पुराण संस्करण में वो अध्याय और श्लोक मिलान कर ले ताकि किसी भी अनुवाद भिन्नता से बचा जा सके। नहीं नहीं मैंने तो देखा हुआ है। मैं तो मेरे सामान्य दर्शक हैं जिनको रामपाल जैसा एक पाखंडी है जो झूठ बोला करता है। तो उनको मैं बता रहा हूं कि रामपाल से लड़ना रामपाल का प्रतिकार करना कितना सरल है। यह मैं उनको समझाना चाह रहा हूं। इसलिए मैं आपसे सुन रहा हूं। समझिए आप क्या कहना चाह रहे हैं। जी और अगर आप जनता को ये दिखाना चाहते हैं कि रामपाल जैसे दावों की तुलना में शिव पुराण में शिव को गौरी पति, अंबिकापति या गिरजापति कहा गया है और इसे मूल श्लोकों के साथ दिखाया जा सकता है। तो सबसे असरदार तरीका यही होगा कि श्लोक
00:52:44:07 को शब्दश पढ़कर अर्थ सरल भाषा में समझाया जाए। फिर बताया जाए कि शंकराय नमः जैसे मंत्र उपासना के हैं और इन प्रसंगों में शिव को सृष्टि के कारण के रूप में बताया गया है। चाहे तो मैं श्लोक को सरल शब्दों में तोड़कर नहीं वो हमारे पास है। वो हमारे पास है। अब मेरा अगला प्रश्न यह है कि क्या शिव जी की भक्ति करने से जन्म और मरण से मुक्ति मिलती है? जन्म और मरण का पर रोक लग जाती है? यह कहीं लिखा है? एक सेकंड। शिव पुराण में भक्ति ज्ञान और मुक्ति का प्रसंग आता है। लेकिन जन्म मरण से परोक मुक्ति को लेकर कथन परंपराओं और शास्त्रीय व्याख्याओं में अलग-अलग मिल सकते हैं। कुछ सीधेसीधे जन्म और मरण से मुक्ति शब्द आया है शिव पुराण में।
00:53:35:01 एक सेकंड जरा मैं चेक करता हूं। हम हम जी हां शिव पुराण में स्पष्ट रूप से श्रद्धा से शिवलिंग की पूजा करने और जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त होने की बात कही गई है। जैसे वित्तेश्वर संहिता अध्याय 16 में जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त होने के लिए श्रद्धा से शिवलिंग का पूजन करना चाहिए लिखा है और एक और स्थान पर निष्काम भाव से पूजन करने वाले को मुक्ति मिलने की बात आई है। हालांकि श्लोक संहिता शब्द विभाजन आपके संस्करण पर निर्भर करेंगे। हां हां मेरे पास है। मेरे पास है। एक एक प्रमाण और है मेरे पास। मैं चाहता हूं आप उसे बता दें। अह शिव जी की भक्ति
00:54:20:07 एक सेकंड एक मिनट एक मिनट एक शिव जी की शिव जी की भक्ति करने वाले एक सेकंड चेक कर लो। देखिए अभी मोक्ष विदेश समिता का तो आपने बता दिया। अभी ये जो ये वाक्य आया था ना ये सृष्टि खंड वाला रुद्र समिता सृष्टि खंड सती खंड सती खंड कहां आया था? पांचवा संस्कार सृष्टि
00:55:08:07 अत्याचार में को संसार के और मोक्ष की प्राप्ति का उपाय बताया मन और पूजन का बहुत बढ़िया अच्छा एक जगह और है जहां पर इनकी भक्ति से जन्म और मरण से निरोध बताया गया है मतलब रोक लग जाती है ना वो कहां पर है शायद वाया भी संता में भी है चलिए आपकी बात का प्रमाण शिव पुराण की संहिता के अध्याय 45 में मिलता है इसके अलावा
00:55:51:08 शिव ज्ञान और जानने से जन्म मरण के पथों से मुक्ति प्राप्त होने का वर्णन अगर सीधे प्रमाण दिखाना है तो अपने संस्करण और अच्छा मैं देख लेता हूं भाई दिखाना ये वाला प्रमाण दिखा दो ये वायवी समिता में इन्होंने बताया है दोबारा बता दीजिए कहां पर बताया था आपने वायरी संता में शिव पुराण संहिता और दूसरा शिव पुराण की रुद्र संहिता के सृष्टि खंड अध्याय चार दोनों जगह शिव संसार से पहले तो अध्याय चार पहले अध्याय चार देख लेता हूं मैं
00:56:42:04 शिव पुराण सृष्टि वायावी असमता वाला सृष्टि खंड वाला वो क्या है प्रमाण दोबारा बताइए जरा अध्याय चार दो अलग-अलग
00:57:15:13 अध्याय तीन श्लोक अनेक जन्म की मुक्ति का उल्लेख है और इसी अध्याय में दो श्लोक विशेष रूप से श्लोक शिव होने पर और श्लोक 50 कहता है प्रसाद शिव योग से परम ठीक है ठीक है ठीक है ठीक है देख लेते है जरा भाई इन्होंने जो है
00:57:53:06 शिव पुराण वायवीय समिता का पूर्व खंड अध्याय ये तो आपने इस समय षष्ठी खंड खोला है ना ठीक है षष्ठी खंड का अध्याय चार देख लेते हैं [गला साफ़ करने की आवाज़] षष्ठी खंड अध्याय चार में बताइए कहां पर है श्लोक कौन सा है षष्ठी खंड अध्याय चार में श्लोक कौन सा है शिव पुराण संिता सृष्टि खंड अध्याय चार श्लोक 28 में शिव भक्ति से मोक्ष की बात कही गई है। श्लोक में कहा गया है जिसकी भगवान शब्द में अंदर है और अटल भक्ति है उसी के लिए मोक्ष सुदा इसमें जन्म मरण के विरोध का शब्द और
00:58:46:19 अच्छा जन्म और अच्छा यहां पर एक चीज मैं बता देता हूं। आप एक काम करो ठीक है भाई आप जो है पष्ठ संख्या निकालिए इसकी 214 इस ऑर्गेनिक लाइव का लाइव आपको देखना इसलिए आवश्यक है कि पहली बात तो यह है कि कैसे किस तरीके से रामपाल के दावे ध्वस्त होते हैं। दूसरी बात यह भी है कि रामपाल जो लाइव कर रहा है जिसको वह लाइव नाम दे रहा है वह रिकॉर्डेड है एडिटेड है पहले से उसमें तैयारी है कट पिट है कट पेस्ट वगैरह और एआई भी है जो बातें रामपाल प्रभा से नहीं बोल सकता है क्या अनपढ़ है वो तो वो जो बातें प्रभा से नहीं बोल सकता है वो बातें उसमें उस तरह से लगा दी गई है सीधेसीधे एआई के द्वारा तो अब ये संस्कृत पढ़ने की भी कुछ लोग बात कह रहे हैं वो भी पढ़ेंगे वैसे हम तो पढ़ेंगे बाकी रामपाल ने कब कब संस्कृत पढ़ी है वो भी बता देना जरा कितना उच्चारण दिया संस्कृत का हम तो अभी दिखाएंगे बाकी मैं एक पेज दिखा रहा हूं 214 इसमें देखिए लिखा है जो मनुष्य नित्य अच्छा यहां पर शंकर भी कहा
01:00:01:22 गया है भगवान को ठीक है ना 60 वाले में 60 श्लोक में देखिए भगवान को शंकर कहा गया है। संस्कृत वाला दिखाइए इनको 60 हां ये ये देखिए शंकर नाम आ रहा है भगवान के लिए उसी को उन्होंने बाद में अनुवादक ने शिव कह दिया है वहां अनुवाद करते समय क्योंकि हमारे लिए तो शंकर और शिव में अंतर नहीं है। अनपढ़ गवारों के लिए है। खैर आगे देखिए भस्म के लिए क्या कहा जा रहा है? यह देखिए भस्म के लिए वैसे पूरा चैप्टर है वो मैं जब अपनी एक बुक है वह कंप्लीट कर रहा हूं आपको बताऊंगा बाकी पूरा चैप्टर है भस्म के लिए मगर अभी देखिए जो मनुष्य नित्य अपने शरीर को भस्म से पवित्र कर शिव की पूजा में लगा रहता है वह महान कष्ट देने वाले संसार रूपी अपार सागर को निश्चित ही पार कर जाता है। ठीक है?
01:00:59:20 पार कर जाता है। लिखा है ना? और देखिए आगे क्या लिखा है? संपूर्ण वेदों का अवलोकन करके तीसरा पैरा इसी में एक पैराग्राफ छोड़कर आ जाइए। अगला संपूर्ण वेदों का अवलोकन करके पूर्ववर्ती विद्वानों ने निश्चय किया है कि भगवान शिव की ही पूजा संसार बंधन के नाश का उपाय है। ठीक है? देखते चलना। सूट बूट में आया कन्हैया बैंड बजाने को। तो यहां तक हमने यह जान लिया कि सृष्टि की रचना वही शिव पुराण के अनुसार जो है वो शिव जी के द्वारा हुई है। इसी प्रकार से सृष्टि की रचना देवी भागवत में कृष्ण जी के द्वारा बताई जा रही है। है ना? और अनेक अलग-अलग जगहों पर सृष्टि रचना करने वाले के रूप में परम तत्व के रूप में ब्रह्मा जी को भी ज्ञापित किया गया। अलग-अलग पुराणों में गणेश जी को भी रखा गया। मगर अभी हम सारी चीजें चैट जीपीटी से बात करते चलेंगे। पांचों देवताओं के बारे में दिखाएंगे प्रमाण तो लंबी हो जाएगी। आपको उदाहरणार्थ शिव जी और विष्णु जी का बता दिया गया। ठीक है? अब ये वाली बात तो हो गई। अब बात आती है कि भाई ये अलग-अलग सृष्टि रचना क्यों हो रही? तो ये सब अपने
01:02:14:24 आप में बहुत बड़ा खंडन है। रामपाल का। बहुत बड़ा खंडन है। रामपाल के अनुसार स्वयं जो काल है वो जन्म और मरण उसका होता है। ठीक है? हां एक एक चीज और देख लेते हैं। ये भी देख लेते हैं। जन्म जन्म तो होता है अविनाशी तो है मगर वो फिर वहां जन्म क्यों लिखा है? उसका भी देख लेते हैं। हालांकि ये सब प्रमाण हमारे पास नोटेड है। पर हम इसका इससे पूछ लेते हैं चैट जीपीटी से। क्या शिव पुराण में भगवान के जन्म जन्म इत्यादि को केवल लीला कहा गया है?
01:02:53:25 एक सेकंड मैं शिव पुराण के संदर्भ देख लेता हूं। शिवपुरा में शिव की सृष्टि और कोला कहा गया है। जैसे रुद्र संहिता सृष्टि के अध्याय सात श्लोक नौ भ्रमा शिव ने लीला से किया और संहिता अध्याय 10 श्लोक 10 में आता है लीला जगत सृष्टि ईश्वर जगत की सृष्टि लेकिन भगवान के जन्म मात्र है ऐसा कोई शब्द श्लोक मुझे नहीं मिला चलिए कोई बात नहीं भागवत भागवत में एक जगह आया है भागवत में कि भगवान का जन्म जन्म वास्तविकता में लीला मात्र है।
01:03:37:27 आपको श्रीमद् भागवत महापुराण का कोई खास हां मुझे यही वाला बताइए कहां पर मिलता है भागवत ठीक है मैं चेक करता हूं भागवत में आपके प्रश्न का बहुत सीधा प्रमाण श्रीमद् भागवत महापुराण प्रथम स्कंध अध्याय आठ श्लोक में मिलता है वहां माता कुंती भगवान के जन्म कर्म को की लीला बताती है इसके अतिरिक्त ततीय स्कंध अध्याय दो श्लोक 15 16 में भी भगवान के अजमा होते हुए वसुदेव जी के यहां जन्म लेने की लीला का वर्णन है। सही संदर्भ एक है। एक 89 नहीं ऐसे बताया गया कि वास्तविकता में तो ये उनकी लीला है भगवान का जन्म। मैं चेक करता हूं। एक सेकंड एक सेकंड हां मैं समझ गया। आप जोर दे रहे हैं कि बात सिर्फ अजन्मा होने की नहीं। यह कि उनका जन्म वास्तव में लीला है। श्रीमद् भागवत में इसका नजदीकी संदर्भ द्वितीय स्कंध अध्याय दो श्लोक 15 16 है। श्लोक 15 में कहा गया है जो जाो भगवान यथा अग्नि अर्थात अजन्मा होते हुए भी वे प्रकट होते हैं। जैसे अग्नि प्रकट होती है। लेकिन अगर आप उनका जन्म केवल लीला है वह सबसे सटीक प्रमाण के रूप में रखना चाहते हैं तो प्रथम स्कंद अध्याय
01:04:52:28 तीन में आगे बहुत साफ शब्दों में आता है कि जो वास्तव में जन्म रहित और कर्म रहित है उनके प्राकृत जन्म और कर्मों का वर्णन उसी तरह करते हैं। यही खंड आपके तर्क के लिए सबसे उपयुक्त है। एक एक और है वास्तविकता में भगवान का जन्म जो लीला है मैं आपको बता देता हूं। हां बिल्कुल बताइए मैं सुन रहा हूं। ये
01:06:12:04 सीधेसीधे एक लाइन आई है एक पंक्ति आई है भागवत में कि वास्तविकता में उनका जन्म नहीं होता भगवान श्री कृष्ण के लिए वो लाइन आप बताएंगे कहां पर है चेक करता हूं एक सेकंड श्रीमद् भागवत महापुराण में इसका संदर्भ प्रथम अध्याय तीन श्लोक 35 में मिलता है। मूल संस्कृत श्लोक में भगवान को अनास कहा गया है यानी जन्म रहित इसमें शब्द शब्द केवल लीला ये शब्द नहीं है लेकिन यह बहुत साफ रूप से बताता है कि वह जन्म रहित है और उनके ततीय जन्म और कर्मों का वर्णन किया जाता है।
01:06:59:01 अविनाशी नहीं है। अच्छा देखिए ये एक एक मिनट मैं जो बता रहा हूं मैं जो बता रहा हूं वो सुन लीजिए। जी बताइए हां हम पहला स्कंध तीसरा अध्याय और 35वा श्लोक इसमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि भगवान श्री कृष्ण मतलब भगवान के जन्म और कर्म केवल लीला मात्र है। एक सेकंड चेक करता हूं। हां अब आपकी बात स्पष्ट है। आप श्रीमद् भागवत महापुराण प्रथम स्कंद अध्याय तीन श्लोक 35 को प्रमाण मान रहे हैं। मूल श्लोक में अजनस्य शब्द है जिसका अर्थ है जन्म रहित लेकिन जन्म और कर्म केवल लीला मात्र है। यह शब्द उसी श्लोक में सीधे नहीं है। ये उसकी व्याख्या है। मतलब श्लोक जन्म रहित भगवान के जन्म और कर्मों का वर्णन करने की बात कहता है। केवल लीला वाले शब्द उसी में नहीं है। अच्छा लीला मात्र कहां पर कहा गया है?
01:08:06:07 देखता हूं एक सेकंड श्रीमद् भागवत में दो स्पष्ट संदर्भ एक द्वितीय स्कंध अध्याय दो श्लोक 16 जहां अजस जन्म कहा गया है यानी जन्म रहित भगवान का जन्म लेना और सेकंड दशम स्कंध अध्याय सात श्लोक दो में कहा गया है कि जो भगवान अपनी लीला से संसार की रचना पालन और सुन करते हैं वही धर्म की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। इसका अर्थ यह माना जाए कि जन्म शब्द आ जाने से भगवान का जन्म शब्द आ जाने से भगवान की उत्पत्ति और नाश यह नहीं माना जा सकता क्योंकि उनकी लीला मात्र है। भगवान तो सदा से थे हैं और रहेंगे। वो तो शाश्वत है। है ना?
01:08:48:02 चेक करता हूं। जी हां। वैष्णव दर्शन के अनुसार आपका निष्कर्ष पूर्णता सही है। लेकिन शास्त्रीय प्रमाण हां। तो अब हमने यह देख लिया कि एक मिनट आपको मैं पॉज करता हूं। अब हमने ये देख लिया। अच्छा इसमें एक यजुर्वेद का बहुत अच्छा वो है यजुर्वेद का वो क्या है? 319 यजुर्वेद 31 19 में कहा गया है कि वह यद्यपि वह अजन्मा है। यजुर्वेद हो तो दिखा दीजिए आपके पास। यद्यपि वह अजन्मा है। परंतु फिर भी अपनी माया के द्वारा वह विभिन्न रूपों में प्रकट होता है। जन्म लेता है। यद्यपि वह अजन्मा है तो अजन्मा जब शब्द आ गया तो आगे जो है अजन्मा होते हुए भी वो जन्म लेता है। तो वो उसकी लीला हो गई। कैसे जन्म लेता है? माया के द्वारा। तो ये सब जो चीजें हैं भर भर के इन सब शास्त्रों में आपको सनातन शास्त्रों में मिल जाएगी। अब हम आगे चलते हैं द्वितीय चरण की ओर। अब इसमें एक प्रश्न आ जाता है कि भाई जो अंबिका है उसको अगर उनहीं के जो पति
01:10:03:08 है शंकर पहली बात तो ये हो गया कि शंकर से उत्पत्ति करने वाला वो कबीर अभीर कोई अलग नहीं है। शंकर और शिव ही उत्पत्ति कर रहे हैं। जैसे विष्णु पुराण में विष्णु भगवान उत्पत्ति कर रहे हैं सृष्टि की। कोई अलग नहीं। अब यह प्रश्न आ जाता है कि भाई त्रिदेव अंबिका को अगर उधर भगवान शिव को अंबिका पति कहा जा रहा है तो उधर जो है त्रिदेव जननी कहा जा रहा है। है ना? तो ये क्या चक्कर तो इसके लिए सबसे पहले इस बात को समझ लीजिए। क्या बात है? कि भगवान की अलग-अलग अलग-अलग प्रकार की शक्ति भी है। जैसे भगवान स्वयं ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश के रूप में प्रकट होते हैं। इस रूप से वो सृष्टि की रचना करते हैं। फिर इनहीं नामों से जो उनकी अमुक अमुक शक्ति अमुक अमुक शक्तियां होती है जो सृष्टि की उत्पत्ति स्थिति संहार में नियामक होती है। तो उस नाम से भी वो जाने जाते हैं। जैसे कि जो
01:11:02:12 सृष्टि करने वाली जो शक्ति है उसको ब्रह्मा कहते हैं। तो ब्रह्मा रूप से वो उस तत्व में भी है। परम तत्व के रूप में भी विराजमान है। फिर अपनी एक पर्टिकुलर केवल सृष्टि करने वाली शक्ति के रूप में वो ब्रह्मा है। तो एक ब्रह्मा हो गया जो सृष्टि के हो जाने पर उत्पन्न हो रहा है और एक ब्रह्मा हो गया जिससे सब कुछ उत्पन्न हो रहा है। इसी प्रकार से विष्णु भगवान एक विष्णु हो गए जिनसे सब कुछ उत्पन्न हो रहा है और उसके बाद एक विष्णु हो गए जो सब कुछ उत्पन्न होने के बाद पालन करने वाली जो भगवान की शक्ति है उसको विष्णु कहा जा रहा है। तो ये जो ये शक्ति के रूप में जब प्रकट हो रहे हैं इसको आप देवता भी कह सकते हैं। इस रूप को देवता का देवता की उपाधि देते हुए अह बताया जाता है कि भाई क्योंकि यह प्रकट और प्रकट होती है शक्ति संसार बनने के बाद तो इस कारण से इसी के लिए जन्म और मरण हमारी भी मृत्यु होती है। ये जो शक्ति के रूप में पर्टिकुलर एक विशेष नियामक शक्ति के रूप में जब भगवान प्रकट होते हैं तो उसको कहा जाता है कि भाई इनका जन्म हो गया मरण हो गया। हालांकि वो जन्म और मरण भी उसका नहीं है। वो जिससे सब कुछ निकल
01:12:17:15 रहा है जिससे सब कुछ उत्पन्न हो रहा है उस परम तत्व का नहीं है। वो जब लीला रूप में सृष्टि रचने के बाद अपनी ही सृष्टि के अंदर किसी एक पर्टिकुलर विशेष रूप में प्रकट होते हैं। उसके लिए वो कह रहे हैं उस देवता का रूप धारण करते हैं। और बस भ्रांति क्यों होती है? क्योंकि वहां पर भी वो विष्णु नाम से ही होते हैं। तो जो पालन करने वाली शक्ति है यानी देवता है विष्णु नाम से तो इसलिए वो कह रहे हैं मेरा हालांकि उनका भी प्रकट और अप्रकट होता है। जन्म मरण कुछ नहीं है क्योंकि शक्ति तो भगवान के अंदर सदा रहेगी पालन करने वाली तो वो नष्ट थोड़ी ना हो गई जब वो वहां पर रूप ले रहे हैं रूप धारण कर रहे हैं तो वो कह रहे हैं कि मेरा जन्म मरण होता है। अब वो त्रिदेव जननी क्यों कहा गया अंबिका को? इसलिए कहा गया क्योंकि ये जो शक्ति के रूप में प्रकट होने वाली बात है पर्टिकुलर एक तो रचनात्मक शक्ति तो ब्रह्मा हो गए स्थिति की शक्ति तो हो गए विष्णु संहार की शक्ति तो हो गए शिव तो पर्टिकुलर केवल संहार करने वाली शक्ति के रूप में जब वो प्रकट होते हैं अपनी बनाई हुई सृष्टि के अंदर तो सृष्टि के अंदर उत्पन्न होने के कारण त्रिदेव जननी कहा गया है ब्रह्मा विष्णु महेश वो देवता की उपाधि प्राप्त जब भगवान की जो शक्तियां उस रूप में जब वो प्रकट होते हैं तो क्यों कहां
01:13:32:16 होते हैं? कहां पर प्रकटोंगी वो शक्तियां? सृष्टि में तो सृष्टि कहां होगी? यानी प्रकृति में संसार बनने के बाद तो इसलिए यहां पर कोई बायोलॉजिकली उत्पन्न नहीं होते ब्रह्मा विष्णु महेश अंबिका से है ना ये भी मैं बताऊंगा बायोलॉजिकली कैसे उत्पन्न हो रहे हैं तो तो बायोलॉजिकली उत्पन्न नहीं होते हैं मगर उनके उस पर्टिकुलर शक्ति के रूप में उत्पन्न होने के लिए ब्रह्मा विष्णु महेश के उत्पन्न होने के लिए जो शक्ति की अनिवार्यता है प्रकृति की अनिवार्यता है अंबिका की अनिवार्यता है उसके कारण कहा गया कि यह त्रिदेव जननी इसी के कारण हम प्रकट हुए हैं। समझ में आया? संसार में प्रकट होना है भगवान को तो उसके लिए संसार चाहिए। वो संसार ही अंबिका है। जगत ही अंबिका है। ठीक है? प्रकृति है। इसलिए प्रकृति को वो जो देवता को प्रकट करने वाली जो शक्ति है वो कहा गया। उसके लिए उसको त्रिदेव जननी कहा गया। अब इसको भी समझ लीजिए कि अगर वास्तविकता में देखा जाए तो यह जो शिव पुराण के अनुसार जो शिव पुराण का संदर्भ ले लेते हैं। कहां से प्रकट हो रहे हैं भगवान? क्या वो अंबिका के गर्भ से जन्म ले रहे हैं? कहां से ले रहे हैं? अच्छा सबसे पहले सबसे जरूरी बात कि सृष्टि
01:14:47:27 रचना ये अपने अनुसार बताता है। जबकि यहां पर शिव पुराण की अगर सृष्टि रचना देखेंगे तो क्या है कि भगवान से ही भगवान की स्वरूप भूता शक्ति प्रकट हो रही है। जो जगदंबा है जो अंबिका है और फिर उन उस स वो प्रकट हो जाने के बाद यानी कि प्रकृति यानी स्पेस स्पेस बन जाने के बाद उसमें अब संसार बनाना है। सूर्य, चंद्रमा इत्यादि और फिर उसमें जीव इत्यादि उत्पन्न होने वो मामला है। स्पेस का नाम क्या है? माता जगदंबा तो उस स्पेस के क्रिएट हो जाने पर यह हुआ कि जो परम तत्व है यानी शिव पुराण में जिनको शिव कहा गया शंकर वही जटा में गंगा और गरे में डारे फिर रहे सांप जिनको ये कहा गया उनहीं के उन्हीं के स्वरूप भूता उनके वाम अंग से उनके शरीर से निकलती है। पहली बात जबकि वहां पर प्रकृति कौन है? इनकी सृष्टि रचना वाली प्रकृति कौन है? वो तो कबीर से उत्पन्न हो रही है। उसको उत्पन्न नहीं किया इसने। जो वहां का वो है जिसको सदा शिव कहते हैं, काल कहते हैं। ठीक है? तो अब चैट जीपीडी से पूछते चलते हैं कि भाई तुम क्या
01:16:02:28 कह रहे हो? [खांसने की आवाज़] हां। शिव पुराण के अनुसार जो अंबिका है जिन्हें त्रिदेव जननी भी कहा गया है शक्ति वो किसके द्वारा उत्पन्न हुई है कहां से उत्पन्न हुई है इनके उत्पन्न होने का वर्णन शास्त्रों में अलग-अलग रूप नहीं मुझे शिव पुराण का बताइए आप शिव पुराण में देवी को ब्रह्मांडीय शक्ति माना गया है जो स्वयं अनादि और नित्य है उन्हें किसी एक पुरुष देव की तरह उत्पन्न नहीं बताया गया है बल्कि वे मूल शक्ति है जो शिव के साथ अभिन्न रूप से विद्यमान है। कभी-क ग्रंथों में उन्हें जगन्न माता कहा गया है जिसका अर्थ है कि सारी सृष्टि उन्हीं से प्रकट होती है और उन्हीं में विलीन होती है। अगर आप किसने उत्पन्न किया पूछे तो शिव पुराण का स्वर यही कहेगा कि देवी को किसी एक द्वारा नहीं बनाया गया है। शिव पुराण के शिव पुराण के प्रारंभिक खंड में संभवत रुद्रसम्यता सृष्टि खंड में भगवान शिव अपनी स्वरूप भूता शक्ति को प्रकट करते हैं। कहां लिखा है ये? हाँ
01:17:18:04 बिल्कुल शिव पुराण में शिव पुराण के रूद्र संहिता सृष्टि खंड में ये आता है कि भगवान शिव अपने ही स्वरूप पूता शक्ति को प्रकट करते हैं। सटीक अध्याय और श्लोक नंबर बताने के लिए पाठ के संस्करण के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। अगर आपके पास कोई खास पाठ या संस्करण है तो मैं ठीक ठीक अध्याय और श्लोक निकाल कर बता दूंगा। बस सामान्य रूप से सृष्टि खंड में यही बताया गया है कि शक्ति शिव से अभिन्न है और सृष्टि के आदि कारणों में मानी गई है। ठीक है मैं आपको बता देता हूं फिर आप बता दो।
01:18:41:08 ये है शिव पुराण रुद्र समिता षष्ठी खंड छठवा अध्याय निकालो भाई आप जिस प्रमाण की बात कर रहे हैं वह शिव इसमें और
01:19:18:28 माया 19 में स्पष्ट रूप से 19 से लेकर 22 तक है शायद 19 से 21 तक और चाहे तो मैं इन श्लोकों का संस्कृत अनुवाद हां जी दे दीजिए दे दीजिए अध्याय श्लोक 19 ये रहे श्लोक 19
01:19:56:07 स्वर्विग्रह स्वयं स्वरा अर्थात सदाशिव ने स्वेच्छा से विचरण करते हुए अपने ही विग्रह से अविनाशी शक्ति को प्रकट किया श्लोक 30 प्रधानम प्रकृति मायावती परा बुद्ध तत्वस जननी मा उस पर शक्ति को प्रधान प्रकृति मायावती परमवती और बुद्ध तत्व की जननी कहा गया जो विकास रहित है बहुत अंबिका प्रकृति सकलेश्वरी त्रिदेव जननी मिथ्या मूल कारण हां ये देखिए त्रिदेव जननी वाला भी आ गया तो अब त्रिदेव जननी वाले मामले को भी समझ गए आप त्रिदेव जननी क्यों कहा जा रहा है क्योंकि संसार बनने के बाद जब भगवान स्वयं उस संसार में पुनः किसी विशेष नियामक शक्ति के रूप में प्रकट होते हैं तो उस उस शक्ति के रूप में प्रकट होने पर भी वह जैसे उत्पत्ति स्थिति समार निग्रह अनुग्रह पांच शक्तियों में से किसी एक कार्य के नियामक होते हैं तो वहां सृष्टि में उत्पन्न होने के कारण उसको कहा जाता है कि भाई त्रिदेव जननी है।
01:21:12:07 ठीक है? क्योंकि संसार के बिना उत्पन्न कहां पर होंगे? जब संसार होगा वही तो उत्पन्न होंगे। संसार में उत्पन्न होने के कारण उनको त्रिदेव जननी कहा जाता है। बाकी जो परम तत्व है वही अंबिका पति है वही गिरजापति है उमापति है। ये सब हमने प्रमाण फिलहाल अभी तक एआई से समझ लिया। अब इसमें एक बात आती है कि जो कल्प भेद की बात है जिसके कारण यह वाला यह वाली चीज हो रही है कि शिव पुराण में विष्णु से सृष्टि हो रही है। शिव पुराण में शिव जी से सृष्टि हो रही है। विष्णु पुराण में विष्णु से हो रही है। और इसी तरीके से अलग-अलग पुराणों के अनुसार जो उनका जो आराध्य देवता है उससे सृष्टि प्रारंभ हो रही है। तो कल्प वेद से ये होता है कि कभी विष्णु के रूप से होती है। सृष्टि विष्णु रूप से होती है। कभी विष्णु से सब कुछ उत्पन्न होता है। कभी शिव से सब कुछ उत्पन्न होता है। तो यह वाला जो प्रश्न है कि कौन है ब्रह्मा का पिता? कौन है? विष्णु का पिता कौन है महेश का पिता? तो उनका पिता कोई है नहीं। वह स्वयं परम तत्व हैं। वह क्रमश ब्रह्मा विष्णु महेश इत्यादि रूपों को धारण करते हुए सृष्टि की रचना करते हैं। सृष्टि रचना करने के लिए सर्वप्रथम अपनी शक्ति रूपी स्वरूप भूता जो शक्ति होती है
01:22:27:08 देवी अगर भगवान विष्णु है तो वहां पर लक्ष्मी होती है। अगर भगवान शिव है तो वहां पर पार्वती होती है। अगर भगवान ब्रह्मा है तो वहां पर सरस्वती होती है। इस प्रकार से अपनी शक्ति को एक से दो होते हैं। वो परम तत्व जो होता है वो एक से दो होता है। अब पुरुष और प्रकृति के रूप में हो जाता है। फिर यह पुरुष और प्रकृति के द्वारा फिर संसार की रचना हो जाती है। संसार की रचना में पुनः वही पुरुष फिर अमुक एक नियामक शक्ति के रूप में प्रकट होता है। इस प्रकार से ये क्रम जो है बदलता रहता है। तो पहली बात इनका कोई पिता नहीं है। इनकी कोई माता नहीं है। क्योंकि मूल रूप से यही परम तत्व है। ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश। अब हम कल्पवेद का प्रमाण देखेंगे। हम डायरेक्ट यहां तो दिखाएंगे ही मगर हम एआई से भी पूछेंगे क्योंकि रामपाल का खंडन तो एआई ही कर देगा। ये जो मैं कर रहा हूं इसकी आवश्यकता यही है कि रामपाल का प्रतिकार कितना आसान है। कितना चूर्ण देता है वो अपने लोगों को। देखिए हमने तो उसका संकलन किया ही है। मगर सोच ये कि एआई तक ये चीजें जानता है। ठीक है? तो अब कल्प वेद का आपको मुझे प्रमाण देना है। भैया आप कल्प वेद का चैप्टर खोलिए। वही वाला
01:23:53:08 एक मिनट। इससे पहले मैं आपको एक बात क्लियर कर दूं। अनेक शक्तियों के रूप में प्रकट होने के कारण ही भगवान के कई नाम रूप हो जाते हैं। जिस कारण से कहा गया शास्त्रों में एकम स विप्रदा वती क्योंकि अनेक शक्तियों के रूप में प्रकट होने के कारण भगवान के बहुत सारे नाम हो गए। ठीक है? पालन जो कृत है पालन नाम का उसकी नियामक शक्ति विष्णु हो गए। वहां पर वो देवता जैसे हो गए। बाकी कर वही रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश बन के। ठीक है? तो अब जो है वो इनको कल्प भेद वाला दिखाइए चैप्टर। मैं एआई से पूछता हूं। क्या उसको मालूम है कि नहीं? ए आई से क्यों पूछ रहा हूं? इसलिए नहीं हमें एआई से मालूम करना है। हमारे पास तो पहले से ही पूरा सब कुछ है। एआई से इसलिए पूछना है कि कितना सरल है। एआई तक जवाब दे देगा रामपाल के। ठीक है? तो देखिए भैया उधर ये आपके सामने खुला 13वा अध्याय है। कल्प वेद से त्रिदेव विष्णु के एक दूसरे से प्रादुर्भाव का वर्णन। अब बताइए यह कहता है कौन है ब्रह्मा का पिता? कौन है विष्णु का पिता? कौन है? महेश का पिता। यह कहता है ना यहां तो ब्रह्मा विष्णु महेश कल्प वेद से एक दूसरे के द्वारा उत्पन्न हो रहे हैं। कोई किसी का पिता नहीं है क्योंकि वह स्वयं
01:25:08:19 सबके पिता हैं। देखिए कैसे क्या शिव पुराण में कहीं पर कल्प भेद का वर्णन दिया गया है? मैं अच्छा करता हूं। शिव पुराण में कल्प भेद का उल्लेख होता है। जैसे रुद्र संगीिता सृष्टि खंड अध्याय 16 में कल्प भेद में भी शब्द आता है जो कल्प के भेद के अनुसार व्यवस्था बताता है। इसके अलावा शिव पुराण के एक और प्रसंग में अलग-अलग कल्पों में ब्रह्मा विष्णु और महेश की उत्पत्ति का क्रम बताया गया है। जैसे ऋषि उनकी उत्पत्ति अब मैं श्रेष्ठता समझाने के लिए बताते हैं। बोलिए बोलिए। अब यहां पर यह बात आती है। पहली बात आती है कि जो यह अलग-अलग हो रहा है ना जैसे कहीं पर एक कल्प में विष्णु से उत्पत्ति हुई दूसरे कल्प में शिव से उत्पत्ति हुई तो ये वाली चीज आपको क्लियर हो गई। कल्प वेद से ये जो घटनाक्रम है कि विष्णु से सब लोग निकले। ये घटनाक्रम बदलते हैं। अब रामपाल की सृष्टि रचना की मौत क्यों है? क्योंकि रामपाल एक ही सृष्टि रचना जानता है। एक ही क्रम जानता है। बस जो भी है। जबकि वह भी यह कहता है काल जन्मता मरता है। पॉइंट क्या है?
01:26:24:28 जो आज का मूल विषय क्या है? रामपाल की सृष्टि रचना की मौत। रामपाल के अनुसार भी जो काल है वो जन्मता मरता है जिसके कारण सृष्टि होती है। ठीक है? जो कुछ खुराफात कर देता है जिसके कारण फिर आगे सृष्टि का विस्तार हो जाता है। तो रामपाल के पास केवल यही एक कहानी है। जबकि हमारे शास्त्र कह रहे हैं कि नहीं कई घटनाक्रम है। तो क्या है घटनाक्रम देखिए चैट जीपीडी से वो एग्जैक्ट
01:27:00:09 आप ब्रह्मा विष्णु महेश का एक दूसरे से प्रादुर्भाव वाला जो मामला है उसके संबंध में जो प्रमाण है वह आप दे दीजिए। कल्प वेद से जो एक दूसरे से उत्पन्न होते हैं शिव पुराण में एक सेकंड देखता हूं। शिव पुराण में ब्रह्मा, विष्णु, महेश के एक दूसरे से प्रादुर्भाव का स्पष्ट संदर्भ मिलता है। इसमें कहा गया है कि अलग-अलग कल्पों में इन तीनों देवताओं की उत्पत्ति का क्रम अलग-अलग बताया गया है। ये चीज आप पूछ रहे थे। है ना? जी। ये रहा पहला प्रमाण। कल्पे से त्रिदेवों की एक दूसरे से प्रादुर्भाव का वर्णन आता है। जब आप इसका उल्लेख करें तो अपने संस्करण का अध्याय और श्लोक क्रमांक जरूर मिला ले क्योंकि अलग-अलग संहिताओं में क्रमांक बदल सकते हैं। ठीक है। अभी मैं इसको पढ़ के बता देता हूं आप लोगों को। हां लाइए वो वाला जरा वो वाला पैराग्राफ लाइए कल्प भेद वाला। ये रामपाल की जो षष्ठी रचना है ना उसकी मौत है। ये क्यों मौत है? रामपाल के पास सृष्टि रचना की एक ही कहानी है। एक ही कथा है। जबकि यहां कहा जा रहा है कि हर बार कथा थोड़ी थोड़ी चेंज होती है कल्प भेद से और कल्प भेद उसके यहां भी मानना पड़ेगा क्योंकि वहां पर भी उसकी मौत होती है काल की।
01:28:15:18 हालांकि उसमें बहुत सारे प्रश्न है उसकी सृष्टि रचना कि मौत अगर कल काल के कारण हुआ है। एक गलती से उत्पन्न हुई है। जैसे इस्लामिक स्टोरी है ना उसने फल नहीं खाने फल खा लिए वही चिपका दी गई है आपको रामपाल के द्वारा और आप लोग ठोको ताली ठोको ताली कर रहे हो तो यह देख लो भैया यह कह रहा है एक तरह की एक घटनाक्रम नहीं है सृष्टि रचना का क्या है मैं आपको पढ़ के बता देता हूं 13वा अध्याय है शायद वय समिता का है ये है ना
01:28:52:02 इसका अर्थ क्या हो रहा है ब्रह्मा विष्णु महेश बार-बार प्रकट ट हो रहे हैं। आविरो भाव हो रहा है। प्रादुर्भाव हो रहा है जिसको ये लोग जन्म और मृत्यु करते हैं। जन्म और मृत्यु बार-बार ये लोग कर रहे हैं। इसमें भी एक वो है सवाल। हालांकि हमने ये सिद्ध कर लिया कि जो भगवान का जन्म है वो लीला मात्र है। बहुत सारे प्रमाण हमने एकत्रित कर रखे हैं। पर आज मैंने केवल चैट जीपीटी और इनके कॉल सेंटर पर बात करने के लिए आज को छोड़ा था। तो ये कौन सा है जरा बताएंगे? वायवीय समिता है ना? वायवीय समता पूर्व खंड 771
01:29:28:21 ये आ गया भाई ये है ना अब देखिए आप ये देखिए ऑर्गेनिक कितना है मेरा मामला कि मैं आपके सामने ही निशान लगा रहा हूं। मैंने निशान लगा के नहीं रखे इन लोगों की तरह। आपके सामने निशान लगा रहा हूं। ये देखिए।
01:30:03:03 ठीक है भाई। ऐसे ही करते हैं हाईलाइट से चिलवे भगत। क्या है? उन परमेष्ठी की पूर्ण रूप से प्रसन्नता प्राप्त कर पूर्व कल्प में रुद्र ने ब्रह्मा और नारायण को उत्पन्न किया। किसने उत्पन्न किया? रुद्र ने। अच्छा। पुनः किसी दूसरे कल्प में जगन में ब्रह्मा ने रुद्र और विष्णु को उत्पन्न किया। इसी प्रकार किसी कल्प में भगवान विष्णु ने रुद्र और ब्रह्मा को उत्पन्न किया। पुनः किसी कल्प में ब्रह्मा नारायण को किसी कल्प में रुद्र देव ने ब्रह्मा को उत्पन्न किया। इसी प्रकार में ब्रह्मा विष्णु तथा महेश्वर परस्पर हित करने की इच्छा से एक दूसरे के द्वारा उत्पन्न होते रहते हैं। ठीक है? दूसरी बात यह आती है कि अगर भगवान के इन उत्पन्न होने को हम लोग जन्म और मरण माने और लीला ना माने। हालांकि इसमें बता भी दिया गया प्रमाण हमने देख लिया। मगर प्रश्न ये उठता है कि तो फिर भगवान ने इनकी मुक्ति करने का उपाय क्या रखा है? ये आ गया द क्वेश्चन ऑफ आवान। आान के जो क्वेश्चन होते हैं ना निकल के आते एकदम से टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चैन वाले
01:31:18:09 है ना कि भाई ये शास्त्र अगर निषेध कर रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति का तो वो शास्त्र कौन से है जिसमें भक्ति बताई गई है ये ये है क्वेश्चन रे बाय आन ये हमारी क्वालिटी के क्वेश्चन जिसमें टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चिन अर्थात तू थोड़ी बंद हो जाना तो बात ये आती है कि जीवो की तो मुक्ति हो सकती है तो क्या रामपाल ये कहेगा अगर यह सब बद्ध है ब्रह्मा विष्णु महेश बद्ध है ठीक है अगर ब्रह्मा विष्णु महेश बद्ध है तो फिर इनकी मुक्ति कब होगी और अगर ये भी जीव है और वो भी मुक्ति नहीं हो रही है तो किस रूप में इनको भगवान भगवान कहता है तू सोचने वाली बात क्या इनके लिए अलग से वो है मंत्र इत्यादि हम तो ये सब सोचने वाली बातें हैं अब हम यह तो हमने देख लिया ब्रह्मा विष्णु महेश एक दूसरे से उत्पन्न होते रहते हैं। शिव पुराण में प्रमाण देखिए ये इस तरह के पुराण इस तरह के प्रमाण भरे पड़े हैं हमारे पास ये आए तो सही सामने कोई गंजा कर दिया जाएगा गंजा प्रमाण दे दे के दे दे और कुछ नहीं करना अब क्या होता है
01:32:33:10 कि जैसे ब्रह सर्वप्रथम भगवान ने एक कल्प में शिव और पार्वती के रूप में फिर आगे सृष्टि की सृष्टि में फिर वो ब्रह्मा विष्णु भवती गणेश के रूप में नियामक शक्ति के रूप में उत्पन्न हुए। ये क्रम देख लिया। अब क्या होता है कि जिस जो कल्प चल रहा है मतलब जिस जिसकी प्रधानता से सृष्टि बन रही है तो उस नाम से उस रूप से जब वो उत्पन्न होते हैं नियामक शक्ति के रूप में तो वहां पर भी उसको विशेष कहा जाता है कि भैया ये तो पूर्ण रूप से रुद्र ही आए हैं इस रूप में। कैसे कहा जाता है शिव पुराण में? देखिए शिव पुराण का
01:33:19:00 [गला साफ़ करने की आवाज़] षष्ठी खंड निकालिए शिव पुराण का षष्ठी सृष्टि खंड रुद्र समिता सृष्टि खंड
01:34:20:02 देखिए रुद्र समिता सृष्टि खंड अध्याय पांच हां अध्याय पांच निकालिए। [गला साफ़ करने की आवाज़] अध्याय पांच में श्लोक है 30
01:35:10:02 अब देखिए यहां पर मैंने आपको एक बात बताई कि भगवान भगवान स्वयं पुनः अपने द्वारा बनाई गई जो उसकी जो माया शक्ति है यानी भगवती है उस शक्ति के द्वारा जो संसार बना उसमें फिर वो नियामक शक्ति के रूप में प्रकट होते हैं। तो स्वयं वही प्रकट हो रहे हैं। तो यहां पर क्या कहा जा रहा है? ब्रह्मा, विष्णु और महेश ये तीनों देव यहां देव हो गए वो। परमात्मा होकर के सृष्टि रचना की। फिर किसी एक नियामक शक्ति के रूप में फिर वो देवता की उपाधि को प्राप्त हो गए। तो ये तीनों देव शिव के ही अंश है। किसके अंश है? शिव के। और यह शिव कोई अलग शिव नहीं है। वही शिव है। त्रिशूल धारण करने वाले, जटा में गंगा धारण करने वाले वही शिव है जिनकी हम पूजा करते हैं। जिनकी पूजा शिवलिंग से होती है। ये सारे प्रमाण मैंने आज आपको दिए नहीं। इस पर मेरा ग्रंथ कंप्लीट होने के कगार पर है। कुछ ही दिनों में ग्रंथ आपको मिलने वाला है। उसमें सारे बिल्कुल क्रमानुसार सारी जानकारियां आपको मिल जाएगी। पर फिर भी मैं आपको यह बताना चाह रहा हूं कि चैट जीपीटी पर्याप्त है। गूगल पर्याप्त है रामपाल जैसों को मुंह तोड़ उत्तर देने के लिए और किसी की तो आवश्यकता छोड़िए। इसलिए मैं इतना ऑर्गेनिकली ये वीडियो बना रहा हूं। नहीं तो चाहता तो मैं भी एक प्रोफेशनल YouTube पर काम करने वाले की तरह सारा संकलन रखता और आपको धड़ाधड़ धड़ाधड़ यही पर बता देता। मगर मैं आपको दिखाना चाहता हूं वास्तविकता
01:36:25:13 कितनी आसान है। तो इसमें क्या कहा गया है? अब जैसे भगवान शिव के द्वारा सृष्टि प्रारंभ हो रही है। ठीक है? तो जब ब्रह्मा, विष्णु, महेश ये तीनों इनके ही अंश है। ठीक है? मगर उनमें पूर्ण अंश और स्वयं में परात शिव है। ठीक है? महेश यह समझे आप बात कि तीनों देवताओं के रूप में प्रकट होते हैं। पर प्रकट होने पर भी जो जिस धारा में जिस देवता की श्रेष्ठता का वर्णन है उस कल्प में उस पुराण में भगवान के भगवान का जो वो रूप होता है उसको पूर्ण ही कहा जाता है। कि ब्रह्मा विष्णु महेश तो उनहीं के अंश है जिससे सृष्टि प्रारंभ हो रही है जिसमें कि महेश जो है क्योंकि शिव से ही सृष्टि प्रारंभ हुई तो महेश उनका पूर्ण अंश वो पूर्ण है। ठीक है तो ये सारी चीजें हो गई बाकी बहुत सारी चीजें थी। अब हम लगाएंगे इनके कॉल सेंटर पे फोन। ठीक है भाई? तो हमने क्या-क्या जान लिया? ब्रह्मा विष्णु महेश का कोई पिता नहीं है। वह स्वयं ही लीला पूर्वक एक दूसरे से प्रकट होते रहते हैं। अच्छा एक चीज और बता दूं। जैसे ये बोलता है कि ब्रह्मा जी को ब्रह्मा जी किससे प्रकट हुए हैं? वो क्या कहते हैं? मां भगवती के गर्भ से
01:37:40:16 बताने की प्रयास करता है। फिर वो उसमें बहुत सारी अश्लील चीजें जोड़ता है। शिव पुराण में तो ब्रह्मा जी क्या कहते हैं? दाहिने अंग से और विष्णु जी वाम अंग से प्रकट हो रहे हैं। दिखा दो इनको प्रमाण। भाई दिखा दो। पष्ठ क्रमांक 225 और इसी प्रकार से आगे ये षष्ठी क्रम बदलता है। मैंने बता दिया कल्प भेद से बदलता है। 225 निकालिए प्रश्न क्रमांक
01:38:37:03 तत्पश्चात कल्याणकारी परमेश्वर सा सदा शिव ने पूर्ववत प्रयत्न करके मुझे अपने दाहिने अंग से उत्पन्न किया। कहां से उत्पन्न किया? दाहिने अंग से। इसमें कोई बायोलॉजिकल उत्पन्न नहीं हो रहा है। वहां तो क्या हो रहा है? मैं अपने गर्भ से निकाल दूंगी। यह हो रहा है। यह सृष्टि रचना की मौत है रामपाल की। ठीक है? इसको कहते हैं मौत। और इसी प्रकार से वाम अंग से भगवान विष्णु प्रकट हुए हैं। ये देखिए ये इसी अध्याय इसी अध्याय का है क्या? नहीं। इससे पहले वाले अध्याय का 37वा श्लोक पष्ठ क्रमांक 222
01:39:19:08 तो भगवान ब्रह्मा जी और विष्णु जी किसी स्त्री से प्रकट नहीं हो रहे हैं। भगवान के वाम और दाहिने अंग से प्रकट हो रहे हैं। 37वा श्लोक दिखाइए इसका। इससे पहले वाला 37वा वो 38 है। ऐसा निश्चय करके शक्ति सहित सर्वव्यापी परमेश्वर शिव ने अपने वाम अंग से दसवे अंग पर अमृत का सिंचन किया। ठीक है? अब नीचे देखिए वाम अंग पे अमृत का सिंचन किया। कोई बायोलॉजिकल वो है क्या जो बता रहे हो वहां संभोग हुआ बलात्कार हुआ यही सब रोता रहता है तुम लोगों के साथ इसीलिए यही सब बताया करते हो ठीक है तो वाम भाग से प्रकट हुए अगले श्लोक का बता दीजिए वहां उसी समय एक पुरुष प्रकट हुआ जो तीनों लोकों में सबसे अधिक सुंदर था वह शांत था ठीक है यह विष्णु जी का प्रकटीकरण है फिर बाद में रुद्र भी आते हैं रुद्र के रूप में भी भगवान स्वयं शिव आते और शिव कोई अलग नहीं है। वो काल काल का पूरा चैप्टर है। अलग से बताऊंगा।
01:40:35:10 पर फिलहाल आप लोगों को थोड़ी वो दे दूं। उसको क्या कहते हैं भाई? [गला साफ़ करने की आवाज़] ये एंटरटेन दे दूं आपको। ये अभी तक तो अध्ययन हो गया। थोड़ा सा आपको वो दे देता हूं। मनोरंजन तो मनोरंजन क्या है? मनोरंजन है इनके फोन लगाना कॉल सेंटर पे। अब षष्ठी रचना पूछेंगे।
01:41:11:07 [खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] तो आज के बाद आपको सर्व तो खत्म हो गया ना। कौन ये ब्रह्मा का पिता कौन है? विष्णु का पिता कौन है? प्रमाण सहित आपको उत्तर मिल गया। इतना ही पर्याप्त है। कि परम तत्व कौन है? अगर आप शिव को लेकर के भी चल लो तो शिव जी और कौन से शिव जी जो अंबिका के पति हैं जो त्रिशूल धारण करते हैं जिनकी पूजा होती है मूर्ति से शिवलिंग से होती है। प्रमाण है फिर अभी बात लंबा होता चला जाएगा। ठीक है? शिवलिंग से मूर्ति शिवलिंग से जिनकी पूजा होती है और वो मोक्षदायक है। त्रिशूल धारण करते हैं। जटा में गंगा धारण करते हैं। वही शंकर वही जिन्हें शंकर कहा जाता है। जिन्हें शंभू कहा जाता है। वही शिव अंबिका के पति हैं। वही अंबिका के द्वारा सा सदा शिव जगत का निर्माण करते हैं। फिर उसमें पर्टिकुलर एक एक नियामक शक्ति के रूप में स्वयं प्रकट हो जाते हैं। इनमें ब्रह्मा विष्णु महेश का कोई पिता अलग से नहीं है। ठीक। अब इनके कॉल सेंटर में फोन करते हैं।
01:42:19:13 अच्छा मैंने आज कुछ नोट किया था। उमा के प्रति विनाशी है। मोक्ष दायक है। छर अक्षर से परे पुरुषोत्तम पुरुषोत्तम [हंसी] बता दिया। छर अक्षर से परे किसी और दिन बता देंगे। परात्पर परमात्मा की रज सत्व और तमोगुण के योग से क्रमश ब्रह्मा विष्णु महेश तथा महेश्वर नामक तीन मूर्तियां यानी तीन शक्तियां कही गई वही देव देवता वाला रूप यह तीनों विग्रह परस्पर एक दूसरे में अनुरूप तथा एक दूसरे के उपजीवी यानी एक दूसरे से आश्रित भी है। यह तीनों परमेश्वर है और लीलावश एक दूसरे को प्रणाम करते हैं। ये भी हो गया। ठीक है? तो इनमें आप ये नहीं कह सकते कि वो उससे उत्पन्न हो रहा है। भाई वो बड़ा है वो छोटा है। क्योंकि एक ही परमात्मा के सृष्टि को चलाने के निमित्त अलग-अलग रूप है। ये है आपका श्लोक है 89 से 90 और इनको वो भी दिखा दीजिए। चैप्टर कौन सा है ये?
01:43:30:02 यह कुर् पुराण है। ठीक है? और अब तो क्योंकि एआई आ गया तो आपको इस तरह से संदर्भ ढूंढने में बहुत ज्यादा परेशानी नहीं है। आप चैट जीपीटी को बोलो। पूर्व पुराण में कहां पर है वो निकाल के दे देगा। पूर्व पुराण में अध्याय कौन सा है? दिखाइए उनको हम पूर्ण पुराण ये है आपका दूसरा अध्याय पूर्व भाग दूसरा अध्याय
01:44:09:13 ठीक है और श्लोक है श्लोक क्रमांक दिखा दीजिए परात परमात्मा रज सत्व एवं तमो ये ये जो श्लोक है विभिन्न शक्तियों के रूप में प्रकट होना ये भी भर भर के है। ठीक है? तो रामपाल का जवाब देना रामपाल का उत्तर देना कितना सरल है। चाहे जीपीटी से बातें करते जाइए सारे आपको प्रमाण मिलते जाएंगे। क्या ब्रह्मा विष्णु महेश को अविनाशी कहा है? अजन्मा कहा है? उनके जन्म को लीला कहा है। अजन्मा होते हुए भी जन्म जन्म लेने वाला कहा है। क्या ब्रह्मा विष्णु महेश को परमेश्वर कहा है? मोक्ष देने वाला कहा है। जन्म और मरण से मुक्ति कर्म दिलाने वाला कहा है। सब आपको वही मिल जाएगा। कहीं जाने की आवश्यकता नहीं। ठीक है? बस इनके छमछम वेद पे जाओ। ये सारे प्रमाण वगैरह हटा दो। कहीं से निषेध कुछ मिल जाए। जैसे पितृ पक्ष का निषेध मिला उसके आधार पर इसको गलत मान लो इसको छोड़ दो वहां चले जाओ वेद को छोड़ दो वहां चले जाओ ठीक है अब दो एक दो
01:45:24:16 कॉल कर लेते हैं इनके यहां सृष्टि रचना के ऊपर ही बात करेंगे आज ठीक है [गला साफ़ करने की आवाज़] कहां इनके नंबर नंबर है कि नहीं कुछ उड़ा दिए सब या 8285वाला में आपका स्वागत है। संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना करने और प्रार्थना का आदेश पता करने के लिए एक दबाएं। संत रामपाल जी महाराज के नाम दीक्षा की जानकारी के लिए कृपया दो दबाएं। संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक संबंधी जानकारी के लिए कृपया तीन दबाएं। संत रामपाल जी महाराज की ज्ञान से संबंधित किसी भी प्रकार की शंका समाधान के लिए कृपया चार दबाएं। संत रामपाल जी महाराज जी से संबंधित किसी भी प्रकार की अन्य जानकारी के लिए हमारी प्रतिनिधि से बात करने के लिए नौ दबाएं। अन्य जानकारी के लिए
01:46:39:22 आप शंका समाधान के लिए जगत गुरु कृपया लाइव पर बने रह आपका कॉल हमारे लिए महत्वपूर्ण है। जल्दी हमारी प्रतिनिधि आपसे बात करेंगे। [संगीत]
01:47:27:10 सत जी जी जय श्री राम हां जी बोलिए सत साहेब ये रामपाल जी सृष्टि रचना बता रहे थे तो उसमें बहुत सारी चीजें हैं जो हमें सनातन शास्त्रों से बाहर दिख दिख रही है तो उसमें आप बताएंगे थोड़ा अपने चैनल पे बताओ चैनल पे ही बता रहा हूं लाइव चल रहा है नहीं तो आप अपने चैनल में अपनी बात रखो ना वही बात ही तो रख रहा हूं मैं आपको सामने रख के बतानी थी वो बता दी आपको सामने रख के इसलिए बात रख रहा हूं जिससे कि कम से कम सुनो बात सुनो एक बार जो संत रामपाल जी महाराज जी ने उस वीडियो में बोला था उसी वीडियो को दोबारा दोहराता हूं संत रामपाल जी ने आज साधना चैनल पर अपनी बात रख दी है चार किस्तों में अब आपको अगर वो बात कुछ गलत लग रही है तो शास्त्रों से प्रमाणित करके अपने शास्त्रों से प्रमाणित करके रख रहा हूं आगे होगा क्या यह तो बताइए अरे तो हमसे क्यों बात कर रहे हो आप अरे तो भाई आप उनके प्रतिनिधि हो ना इस पर लिखा इस पर आया था जब मैंने कॉल मिलाया था आपको कि आप उनके प्रति भाग गया
01:48:29:13 अच्छा देखिए अभी व्यूअर बढ़ जा रहे हैं 174 हो गए इसलिए हो गए क्योंकि लोगों को भी मालूम है कि यह जो रामपाल की जो खंडन है वह तो चलते बिरिया में कोई भी कर देगा। आनंद तो इन चीजों का लेना है। क्यों भाई? है ना? छमम छमम वेद का आनंद लेना है। चलो भाई फिर से लगाते हैं। अब यहां से दौड़ शुरू। इधर दौड़ है। उधर दौड़ है। ये रामपाल यारों दौड़ है। [हंसी] बचने की है दौड़ कहीं। चोरी करने की दौड़ कहीं। दौड़ दमादम दौड़ अब ये दौड़ लगाएंगे ठीक है तो भाई चलो ठीक है तुम डाल डाल हम पातपात
01:49:23:15 बेचारे [हंसी] कैसे रो रहे हैं कि मैं फिर वही बात दोहरा देता हूं अरे भाई मैं लाइव ही तो कर रहा हूं अपनी बात रख तो रहा हूं अब इसका होना क्या है करो इसका फैसला 82 क्या था नंबर8054 हां भाई लगाओ भाई कॉल हमारा डायल किया गया नंबर
01:50:03:01 82 80542 आश्रम बरवाला में आपका स्वागत है। संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना करने और प्रार्थना का आदेश पता करने के लिए एक दबाएं। संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा की जानकारी के लिए कृपया दो दबाएं। कृपया लाइव पर बने रहे। आपका कॉल हमारे लिए महत्वपूर्ण है। जल्द ही हमारे प्रतिनिधि आपसे बात करेंगे।
01:50:45:01 [संगीत] एक लोग पूछ रहे हैं नंबर क्या है? ये इनकी किताबों में लिखा है ना वेबसाइट पर लिखा है। [संगीत] है ना? हेलो हां जी जय श्री राम। श्री राम राम जी। जी मैं ये पूछ रहा था। ये रामपाल जी अपनी षष्ठी रचना में बता रहे हैं कि काल का भी जन्म और मरण होता है। ज्ञान चर्चा करनी है भैया तो आप नंबर लिखो। उससे बात करो। अच्छा आप शंका समाधान नहीं करेंगे। ज्ञान चर्चा करनी है आपको। वो वो वो भी यही कह देते हैं ना ज्ञान की बातें कर रहे हो। हां तो ये शंका समाधान नहीं है। चर्चा के लिए नंबर दे रहे है ना। नंबर लिखो। शंका समाधान भी तो ज्ञान की बातें ही है। भाई साहब आपको कितनी बार बताया जाए वो ज्ञान तो शंका समाधान भक्तों की शंका के लिए है। उसमें ऐसा बोलते नहीं है ना। आप उसको चेंज नंबर दिया जा रहा है तो नंबर लिखो ना। आप उसको चेंज कर दो ना उसमें लिखो ये भक्तों की शंका समाधान के नीचे खैर नंबर बोल दो नंबर बोल दो नंबर बोल दो नंबर बोल दो नंबर नंबर बोल दो नंबर बोल दो
01:52:01:15 देखो हम 9810 5250 हां क्या बोला लास्ट में ठीक है। अच्छा इस पर अगर जैसे कोई नहीं उठाएगा या जवाब नहीं देगा तो क्या करें? जवाब देंगे ना? नहीं जैसे हो जाता है कभी-कभी कॉल नहीं लग रहा है या फिर कहते हैं कि आप वीडियो बना दो। नहीं नहीं लगता तो आप अपना नंबर बताएं। आप पहले बात तो करो। मेरा नंबर है ना? ले लो। मेरा नंबर ले लो। 7408301869
01:52:48:04 एक मिनट एक मिनट वेट करिए हां ज्ञान चर्चा करनी है ना हम आपको पहले आप इनसे कॉल करिए अगर नहीं लगता है तो बताइएगा ठीक है हम ऊपर उनसे बात कर लेंगे ठीक है ठीक है अगर वो आपको बात नहीं करते आपसे फिर हम बता देंगे आपको उनको ठीक वो बात नहीं कर रहे है ठीक [गहरी सांस लेने की आवाज़] विशेषज्ञ का नंबर मिला है शायद कोई विशेषज्ञ होगा भाई
01:53:31:10 कौन कट किया था कैसे ठीक है जी यह तो इस व्यक्ति से बात हो चुकी है हालांकि अब बात करते हैं दोबारा से बेचारे सोच रहे होंगे हर तरह से तैयार रहता है ये तो आप अपना नंबर दे दो
01:54:12:00 हेलो हां जी जय श्री राम [नाक से की जाने वाली आवाज़] नमस्कार सर बताइए ये रामपाल जी ने जो चैलेंज के अनुसार एक अपने दो दिन की जो पिछली एक तीन और चार तारीख को षष्ठी रचना बताई तो रामपाल जी बताते हैं जो काल है उसका भी जन्म और मरण होता है हेलो बोलो सर बोलो हां बताओ बताओ सर तो जन्म और मरण होता है तो यह काल जब मर जाता है तब वो जो सृष्टि होती है उसका क्या होता है?
01:54:50:02 काल जो सृष्टि होती है उसका क्या होता है? हां उसको बीज रूप में उठा के साइड में रख दिया जाता है। बीज मतलब ये मुक्त हो जाते हैं क्या? प्राणी जो है कोई मुक्त नहीं होता। एज इट इज रहती है। जैसे पेड़ का जो बीज होता है ना जिस तरीके से कितना सूक्ष्म होता है इस तरीके से सूक्ष्म रूप में ये जो ब्रह्मांड है इसको उठा के एक बीज रूप में उठा के रख दिया जाता है। काल जब मरता है तो कुछ लोग जीवित रहते हैं। उस समय की सब मर चुके होते हैं। कोई नहीं जीवित रहता। पूरे पूरे जो यहां पर जितने भी वो होते हैं सारे के सारे विनाश को प्राप्त हो जाते हैं और वो बीज रूप में उठा के रख दिया जाता है। और रखता कौन है? कौन रखता है? सिस्टम है सारा कभी चलो ठीक है। चलो ठीक है। कोई रखता होगा। तो बात यह है दोबारा काल जन्म लेता है हां जी तो दोबारा से जो वो जो सृष्टि रचना का क्रम है हर बार बिल्कुल एक जैसा रहता है बिल्कुल ऐसा ही रहता है यानी दोबारा से वो तपस्या करता है और उससे अट्रैक्ट हो जाती है
01:56:05:22 आत्माएं और उसमें से एक आत्मा होती है जो प्रकृति बनती है जब तक मुक्ति प्राप्त नहीं जब तक ये सारे के सारे सतलोक में नहीं जाएंगे जीवात्मा नहीं मैं ये नहीं कह रहा मैं सृष्टि मैं अभी सृष्टि रचना की बात कर रहा हूं सृष्टि रचना सृष्टि रचना की बात कर रहा हूं कि जब काल दोबारा जन्म लेता है तो आपने कहा कि दोबारा बिल्कुल पैटर्न जो सृष्टि का है वो एक जैसा रहता है तो काल जब दोबारा जन्म लेता है तो दोबारा से वही होता है कि जो जो जीवात्मा है उसके के साथ जाना चाहती है वो वो हाथ खड़ा करती है। उनमें से जो पहली जीवात्मा होती है वो प्रकृति होती है। ऐसा है क्या? हां जी। यानी कि जिसकी इच्छा होती है वो काल के साथ आता है। फिर संसार में अगली बार क्या होता है जिसका? जिसकी इच्छा होती है जो स्वेच्छा से आता है। हां जो स्वेच्छा से आता है वो वही आता है। मतलब काल से अट्रैक्ट हो के आता है। तो यह जो तो यह जो बीज रूप में जो थे लेकिन उसमें शिफ्ट कर दिए जाते हैं। एक्चुअल क्या होता है कि जैसे जो परमात्मा देते हैं तो वो सूक्ष्म रूप में वो पहले से ही भगत होते हैं।
01:57:20:28 जो पहले से ही अपनी इच्छा प्रकट कर चुके थे और उनके कर्म इसी प्रकार के होते हैं। वो उसी आत्मा में ही होते हैं। वो रूप में जैसे एज इट इज होता है। नहीं नहीं मेरा कहने का मतलब है कि जैसे अभी यहां का कोई व्यक्ति है जो सारी सृष्टि का विनाश हो चुका है। उसके बाद काल का विनाश होता है। ठीक है? तो जो सारी सृष्टि का विनाश हो चुका है उसमें सबको तो मुक्ति मिल नहीं गई है कि मुक्ति मिल गई है। उसके बाद होता है काल का विनाश। हां जी। हां। क्या कह रहे हो? काल का विनाश काल का काल की जो मृत्यु होती है वो सारे लोगों के मर जाने के बाद होती है ना। नहीं ऐसा नहीं है। हां। देखो पर होती है। कई तरीके की पर होती है। हां। एक होती है पर। ब्रह्मांड में ही है ना आग लग जाती है। ब्रह्मांड में ही बहुत भयंकर विनाश हो जाता है। और एक होती है आंशिक प्रलय एक होती है महाप्रलय। इस तरीके से पल का भी अमेंजमेंट टाइप है। वो ठीक है। मुझे आप ये बताइए जो क्या होता है कि एक बार एक पूरे जिसमें तीनों लोक समाप्त होते हैं। इसमें तो जो है ना जो है मतलब अलग-अलग तरीके की होती है। जैसे ब्रह्मा का जो दिन होता है ब्रह्मा की
01:58:36:02 नहीं मैं मैं मैं समझ रहा हूं आप जो अलग-अलग प्रकार मैं ये पूछ रहा हूं कि ये वाली कौन सी प्रलय है जब ये मरता है काल महाप्रलय होती है। महाप्रलय होती है तो काल के कारण ही तो व्यक्ति बंधन में है या और कोई कारण है इस जो इस ब्रह्मांड की जो तीन टाइप की प्रलय होती है ना उसमें उसमें ये महाप्रलय होती है आंशिक होती है लेकिन आंशिक के बाद अक्षर पुरुष के जब नाश होते हैं तो उसको महाप्रलय कहते हैं। मैं ये पूछ रहा हूं कि जो जीव जो है बंधन में है वो काल के कारण है ना। हां जी हां जी। तो जब काल मर गया तो जीव बंधन में कैसे रहा फिर? वो जो शिक्षा होती है वो एज इट इज रहती है। जो हमारा जो सेब खराब है वो पूरी की पूरी उसको ये बाहर चला जाता है। यानी कि काल यानी कि काल बंधन का कारण नहीं है और कुछ है? अगर ऐसा होता तो काल को काल खत्म हो जाता है। सारा खत्म हो जाता है। तो वही तो वही तो मैं पूछ रहा हूं कि काल खत्म होने पर बंधन में क्यों है? हम उस परमात्मा को जो पाप जो हम उस परमात्मा को जो छोड़ के आए हैं जो दोष है यानी जो यानी चित्त में जो विकार आया तब तक हम अपने घर नहीं जाते यानी कि चित्त में जो विकार आया अज्ञानता जो
01:59:52:26 अपने भगवान को छोड़ के हम विचार हो गए परमात्मा को मतलब जो है परमात्मा छोड़ के किसी और पर आत हो गए वो वो बीमारी हमारे अंदर जो घर है वो जब तक नहीं निकलेगी जब तक हम अपने सतलोक में नहीं जा सकते यानी यानी जो पाप हम लोगों का जो हम लोगों का आने का कारण होता है जीवो का आने का कारण वो पाप है। मूल कारण वो काल नहीं है कि काल ने आपको बंधन में डाल रखा है। सुनो पाप का मतलब परमात्मा को छोड़ के हम दूसरे पर मतलब अव्यभचारणी जब भक्ति करते हैं तब ये काम होता है। अव्यभचारणी नहीं व्यभचारणी व्यभचार अपने आप में पाप है। हां विचार में जो भी है मतलब इसमें हम जो परमात्मा को छोड़ के हम किसी दूसरे की भक्ति करते हैं तो मेरा कहने का भाव है कि जब हम परमात्मा को छोड़ के दूसरे के ऊपर आश्रित हो गए तो परमात्मा के उस से हम गिर जाते हैं तो हमारे को जो हमारे को ये वो पाप है जो ये जो अपराध है ना हरासमेंट है इस वजह से हम यहां पर हां तो ये ये चीज हो गई कि मतलब केवल काल के बंधन में नहीं है हम लोग केवल काल के बंधन में ही तो है हम तो काल मर गया फिर बंधन नहीं होना चाहिए ना काल के
02:01:08:02 ऊपर आश्रित हो गए अब हम पूर्ण परमात्मा की भक्ति दोबारा करेंगे अब इसको हम दोबारा नहीं सपने में भी नहीं झांकेंगे नहीं वो भी किसी और की भक्ति वो तो खैर अलग वो अलग अलग बात है। मैं मैं ये पूछ रहा हूं कि जैसे काल काल के कारण काल ने हमें बंधन में डाल रखा है। डाल रखा है ना? हां जी। काल ने हमें बंधन में डाल रखा है तो काल जब मर गया रुकावट काल एक रुकावट कर रहा है एक्चुअल हम उस परमात्मा के पद से गिर चुके हैं यानी कि बंधन में डाला हुआ परमात्मा नहीं है ना एक तरीके से फिर मतलब क्या बंधन में डाला हुआ है काल ने बंधन में डाल रखा है काल काल ने बंधन में डाला है तो काल मर गया तो बंधन खत्म होना चाहिए फिर नहीं नहीं ऐसा नहीं तो यानी परमात्मा व्यवस्था कर रहा है बंधन की ना परमात्मा नहीं कर रहा तो कौन कर रहा है परमात्मा अपने नियम से बना हुआ है कि जो गलत जो परमात्मा को छोड़कर और जो भक्ति दूसरी करेगा उसको परमात्मा के होते 100 वर्ष सतगुरु की पूजा एक दिन आ उपासी वो अपराधी आत्मा कब पड़े काल की फांसी आपने सच्चे भक्ति 100 वर्ष कर ली एक दिन आ उपासना कर ली तो आपको वो परमात्मा मतलब कोसों दूर हो जाएगा आपसे कहने का मतलब यह है कि दो चीजें हैं इसमें
02:02:23:15 एक हम परमात्मा के पद को छोड़कर हम किसी और की भक्ति कर रहे हैं। सबसे बड़ा अपराध जो आत्माना कहते हैं देश को वो उसकी वजह से हम उस शलोक से दूर हुए और अपने पास रोक के रखने के लिए काल ने जो व्यवस्था करी वो अपने को रोकने के लिए कर रहा है। अब वो अगर वो मर भी जाता है मान लो तो वो हमारे अंदर जो गिरावट है वो गिरावट पूरी नहीं हुई और जब तक वो गिरावट ठीक नहीं होएगी तब तक हम सतलोक नहीं जा सकते। हमको अभी तक काल रोक रहा था जाने से। काल जब मर गया तो कौन रोक रहा है? और हमारे अंदर जो बता तो दिया कि हमारे अंदर क्या जो गिरावट है वो गिरावट जब तक ठीक नहीं रहेगी जब तक काम नहीं तो यानी इस गिरावट की कोई देखरेख करता है ना कोई काल के अलावा मैनेजिंग है ना व्यवस्था कोई सिस्टम जो ये देख रहा है कि भैया जब काल हट गया फिर भी ये वहीं रहने चाहिए ऐसा ना हो यहां आ जाए वो तो आत्मा से परमात्मा का कनेक्शन है वो तो है ही है आप मेरी बात समझ नहीं रहे आप मेरी बात पहली बात तो हम उसी से ही बाहर नहीं निकल पाते ना आप मैं मैं मेरा प्रश्न कोई मेरा प्रश्न थोड़ा सा अलग है। मैं मैं ये पूछ रहा हूं कि काल हमें रोक रहा है वास्तविक परमेश्वर तक पहुंचने से परमेश्वर के लोग पहुंचने से। ठीक है? मगर जब वो मर
02:03:38:19 जाता है तो कौन रोक रहा है? अब हमारे कर्म रोक रहे हमारे जो जो हमने किए हुए हैं जिसकी वजह से परमात्मा से हम दूर हुए वो अभी तक हमारे यानी कि परमात्मा के अलावा एक कर्मों वाला कोई सिस्टम है जो यह तय करता है कि अगर किसी ने बुराई कर्म किया है और उसको रोकने वाला जो काल नामक वो शैतान है एंटिटी जो है वो अगर मर भी गया देखो क्या होता है कि परमात्मा एक मिनट भाई साहब मैं मैं प्रश्न प्रश्न को रख तो लेने दीजिए पूरी होगी पहले मेरी सुन लो आपका प्रश्न हो जाएगा प्रश्न को रख मेरे प्रश्न को रख लेने दीजिए एक मिनट मेरी सुनो आप अरे प्रश्न को मैंने आपका प्रश्न सुना है मेरे को एक बार सुन लो आप अरे नहीं मेरा प्रश्न ये वाला आपने नहीं सुना जो मैं कह रहा हूं जो मैं कह रहा हूं उसमें ये है कि अ क्या कहते हैं जो काल है वो तो मर गया अब जो इनको इनके कर्मों का फल एक तरीके से क्योंकि इन्होंने कर्म किया है व्यभचारी भक्ति ठीक है? तो उस कर्म का फल देने के निमित्त इनको जो है सतलोक नहीं पहुंचने देना है। भले ही काल मर गया काल के वो 21 ब्रह्मांड भी खत्म हो गए। है ना? काल मर गया तो 21 ब्रह्मांड भी खत्म हो गए। तो वो तो ये जो जीवात्माएं
02:04:54:00 हैं वो कहां कहीं ना कहीं तो रहेंग। तो 21 ब्रह्मांड पहले उनका एक मिनट। 21 ब्रह्मांड पहले उनका रहने की रहने का स्थान था। वो हो गया नष्ट। तो कहां रहेंग यह तो कोई एक अलग से एक और शक्ति है जो व्यवस्था देखती है। वो व्यवस्था क्या देखती है? किस तरीके से प्रधानमंत्री है मान लो वो मर गया तो क्या होता है जो संविधान होता है उसके हिसाब से परमात्मा ने परमात्मा अपने लोक में रहता है। उसने कानून बना के छोड़ दिए हैं। ऑटोमेटिकली उस सिस्टम से चलता है। मान लो ये जो पृथ्वी घूम रही है इसके अंदर क्या है? परमात्मा का वो वचन काम कर रहा है। तो वो वचन के हिसाब से ये ऑटोमेटिकली चल रही है। इसमें पेट्रोल डालने वाला कोई मैकेनिक नहीं है। पेट्रोल ले डालना भूल गया तो वो बंद हो जाएगी। क्या होता है कि परमात्मा ने जो सिस्टम बना दिया कि जिस प्रकार से इस चीज के लिए यह सिस्टम बनेगा वो बीज रूप में अपने आप शिफ्ट होके वही रखा रह जाता है। ऐसे अरबों खरबों ब्रह्मांड है परमात्मा वो जाता नहीं है देखने के लिए चेक करने के लिए चल रही है या नहीं चल रही। अरे मैं यह नहीं कह रहा हूं कि मैं यह पूछ रहा हूं जाता नहीं है यानी कि परमात्मा ने अपनी एक शक्ति इस काम पे लगा रखी है। सीधी बात है ना
02:06:10:00 परमात्मा की एक वो शक्ति का नाम क्या है? ऑटोमेटिकली चल रही है। वो शक्ति का नाम क्या है? जो लगा रखी है इस काम पे। परमात्मा का वचन है। भगवान के वचन से परमात्मा ने किसी को बिठा थोड़ी रखा है। शक्ति कहां है? अभी पृथ्वी घूम रही है जो यानी एक मिनट एक मिनट मैं समझ गया मैं समझ गया। मैं समझ गया हां वो उसमें भगवान की शक्ति है मैं समझ गया भगवान की एक वचन वचन है कि भैया अगर कोई व्यक्ति विभचारी भक्ति करेगा तो भले ही उसको काल रोके या ना रोके मगर उसको सतलोक नहीं आने देना उसकी व्यवस्था तुमको करनी है कहां रहना है क्या करना है ठीक है सतलोक आने के लिए परमात्मा ने नियम बना रखे है अलग नियम क्या है वो वो नियम ही शक्ति के रूप में सब जगह है वो निर्णय कर लेते हैं किस आत्मा को कहा रखना है ठीक है वो परमात्मा जब इस सतलोक से बाहर जाता है कभी भी नीचे के लोकों में अंतर पुरुष परम काल के लोक में आएगा तो उस परमात्मा का एक नियम है वो स्वयं परमात्मा उसको लेने के लिए जाता है यदि वो उस भक्ति को एक्सेप्ट करता है तो ही वो इस लोक में आ सकता है नहीं तो वो वही पड़े रहेंगे मैं समझ गया मतलब भगवान ने अपनी एक अपनी एक वचन शक्ति कर रखी है शब्द शक्ति जो यह देखती है कि जिसने अभी तक सही
02:07:25:06 कर्म नहीं किए सतलोक आने आने लायक उसको ना आने दिया जाए। अगर अगर नियम अलग है भाई साहब इसका नियम अलग है। वो नियम मैं नहीं कह रहा हूं। मैं नियम नहीं कह रहा हूं। मैं यह कह रहा हूं कि कोई एक शक्ति है जो यह व्यवस्था देखती है कि सतलोक आने योग्य जो नहीं हुआ है उसको अभी सतलोक नहीं आने देना है। भले ही काल और काल के लोक मर जाए, खत्म हो जाए। पूर्ण परमात्मा खुद होता है दायरे से बाहर यानी सतलोक से नीचे वाले लोकों में यदि वो गिर चुका है तो स्वयं पूर्ण परमात्मा को उसको लेने के लिए समझाने के लिए साथ में लाने का हकदार वो पूर्ण परमात्मा है उसको वहां से पकड़ के ला भाई साहब मैं पूछ क्या रहा हूं मैं मेरा प्रश्न ये था कि जब काल के लोग खत्म हो गए काल खत्म हो गया तो सबसे पहली बात तो यह है कि वो आत्माएं रहेंगी कहां पर कौन से लोक में रहेंगी रूप में रहेंग व आप एक बात बताओ जो समुंदर में एक बहुत बड़ा जो है ना तूफान आ गया तो तूफान आने से मछली मर गई वो व जो मरे हुए वही पड़े रहेंगे एज इट यानी कि यानी कि ये जो ये जो प्रलय होती है जो काल की जो काल की प्रलय होती है इसमें पृथ्वी वगैरह का सर्वनाश नहीं होता है। हो जाता है कंप्लीट बिल्कुल जैसे ये जो है ना आपस में
02:08:40:09 पूरी घुल मिल के खत्म हो जाते हैं तो धारक तत्व कौन सा है फिर कहां पर एक्सिस्ट करेगी वो आत्मा जो है कौन सी आत्मा आत्मा कोई मरती थोड़ी आत्मा तो अरे मैं कहा कह रहा हूं मरती है भाई साहब मेरा प्रश्न ये है कि जब पहले उसका रूप में रह जाती है कहां पे रहती है वो उसी जैसे बीज रूप में कहां रहती है वही रहती है आप तो कह रहे हो पृथ्वी नष्ट हो गई पृथ्वी पे रहती तो ठीक भी था कहां रहती है आकाश इसका बहुत सूक्ष्म रूप हो जाता है। छोटा हो जाता है। आकाश में रहती है या भगवान में रहती है या दिव्य उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। 21 ब्रह्मांड 21 ब्रह्मांड कहा चल रहा है आपको पता है? अंतरिक्ष में चल रहा है। सृष्टि के अंदर चल रहा है। तो सृष्टि 21 ब्रह्मांड जो है ये कहां पर है? ये बताओ इसकी व्यवस्था कहां पर है? सब कुछ भगवान के अंदर ही है। सियाराम में सब जगह जाना।
02:09:33:08 सियाराम कहां है? यार आपने कहा तो आप आप तो मुझे अपनी बात बता दो ना। आप मेरी बात मत मानो। मैं कहां कह रहा हूं कि मेरी बात मानो। मैं आपसे अपनी आपकी बात पूछ रहा हूं। मेरी बात हां देखिए देखिए मैं सुनिए चर्चा बहुत अच्छी जा रही है। दो चीजें पहले जो मैटर चल रहे हैं दो क्लियर है। सारे मैटर सॉल्व कर दूंगा। सुनिए तो क्लियर तो हो जाए। क्लियर हो जाए। मैटर हैं। करूंगा मैं एक-एक बात क्लियर करूंगा। हां हां करिए। आप सुनते नहीं हो आप बीच में। नहीं नहीं ऐसा है ना आप मेरे प्रश्न का जवाब देने की बजाय दो चार बातें अपनी और बोल करके विस्तार कर देते हो जवाब दूंगा तभी दूंगा हां हां तो मेरे को पहले एक हेडलाइन हेडलाइन हेडलाइन क्लियर कर देने दो सबसे पहली बात तो ये है कि हां
02:10:23:03 सुनो एक वोट होता है ना अरे भाई मैं पहले हेडलाइन क्लियर कर दूं काल जैसे मरता है तो अपनी मौत मरता है कोई उसे मारता है यह बताइए जी भैया सुनो मेरी बात मैं कल सुबह कॉल करना मैं एक्चुअली ना गाड़ी चला रहा हूं हाईवे पे मैं अच्छा अच्छा केवल इतना बता दो आप ये सृष्टि रचना लिखी कहां पर है आपकी जो आपकी सृष्टि रचना है ये इसके लिए भाग एक भाग दो भाग तीन और आठ भाग भाई साहब आपसे आपसे फोन क्यों लगाया वो तो मैं देख चुका हूं वो मैं देख चुका हूं मुझे अपने पुराण अपने पुराण मैंने पढ़ लिए अपने पुराण सारे पढ़ाएंगे आपको अरे भैया तुम नाम बताओ ना अध्याय कौन कौन सा आपकी सृष्टि रचना का? अरे भाई साहब समझ में नहीं आई। अरे आप ज्ञान चर्चा ज्ञान चर्चा आप करने के लिए आपका नंबर दिया गया है। तो आप मुझे केवल आज भाग चार सुना दी आप ये भाग कंप्लीट सुनो फिर बात करेंगे। अरे भैया एक और दो मतलब ये कहां का नियम है? एक और
02:11:23:22 राउंड राउंड घुमाने के बाद ये तो मैं थोड़ा सा व्यक्ति के साथ थोड़ा और खेल लेता हूं थोड़ा सा नहीं तो जैसे ही वो आया ना टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चेन हो गया तो अब मैं कहता हूं भाई उसको फोन लगा करके वह तो कह रहा हाईवे पर गाड़ी चला रहा है वह भी बात नहीं कर पाएगा [गला साफ़ करने की आवाज़] जो भी आ रहा है मन में बोल दे रहे हैं। कह रहा हूं काल के कारण बंधन में काल खत्म तो कौन किसके बंधन में वचन के बंधन में यानी कोई वचन व्यवस्था है जो देखती है कि भैया यह काल सतलोक नहीं पहुंचेगा। यह अब यहां रहेगा यानी कोई शक्ति है। अकाल मरा कैसे? यानी कोई शक्ति है। तो यह जो मरा मरना और कहीं पर रहना और वहां ना जाना इसके लिए कर्म फल व्यवस्था है। अब जो कर्म फल व्यवस्था है वो अपने आप में कोई अलग से सिस्टम तो है नहीं जिसकी अपनी बुद्धि हो या तो एक और सत्ता माननी पड़ेगी। अब वो सत्ता अगर हो गई और वो यह सब कर पा रही है तो उसको सर्व नियंता मानना पड़ेगा। सर्वशक्तिमान मानना पड़ेगा। मुक्त मानना पड़ेगा तो दो भगवान हो जाएंगे।
02:12:40:09 दो भगवान हो जाएंगे। इस ओर ले जा रहा था। या तो यह मानना पड़ेगा कि भगवान ही यह व्यवस्था स्वयं देखते हैं। तो फिर मानना पड़ेगा कि भगवान के ही बंधन में है। फिर मानना पड़ेगा माया। ये सब बहुत ऊंचे लेवल की बातें हैं। खैर अब इनसे प्रमाण ही पूछेंगे सीधे सृष्टि रचना का। ऐसे ही इनकी बैंड बजाएंगे। आश्रम बरवाला प्रतिदिन स्वागत है। संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना करने और प्रार्थना का आदेश पता करने के लिए एक दबाएं। संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा की जानकारी के लिए कृपया दो दबाएं। संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक
02:13:34:12 कृपया ना आपका कॉल हमारे लिए महत्वपूर्ण है। जल्द ही हमारे प्रतिनिधि आपसे बात करेंगे। हाईवे पे गाड़ी चला रहा है। कहीं से जय श्री राम। हां जी। भाई साहब मैंने वहां फोन लगाया। मैंने षष्ठी रचना का प्रमाण मांगा। कि रामपाल जी जो षष्ठी रचना बता रहे हैं अपने वीडियोस में वह षष्ठी रचना का प्रमाण कहां है? तो उन्होंने यही कहा कि भाई मैं हाईवे पर गाड़ी चला रहा हूं फिर बात करूंगा मैं आपसे।
02:14:13:25 जय श्री राम। जय जय श्री राम। हो गया। चलो दूसरा मिलाते हैं। 8280 इसको कहते हैं सृष्टि रचना की रामपाली सृष्टि रचना की मौत संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना करने के लिए ई दबाएं आराम से नाम दीक्षा की चाल
02:15:03:18 कृपया लाइव पर बने रह कॉल हमारे लिए महत्वपूर्ण है जल्द ही हमारे प्रतिनिधि आपसे बात करेंगे अभी तक हम इस पर आ गए हैं कि काल के बंधन में नहीं है व्यक्ति क्योंकि काल मर रहा है तब भी वो बंधन में है हेलो हां जी ये जो रामपाल जी सृष्टि रचना बता रहे हैं अपने वीडियोस में तीन तीन और चार तारीख को और आगे इसके प्रमाण कहां पर है सृष्टि रचना के संत रामपाल जी महाराज वीडियो में बता रहे वहां जा नहीं नहीं प्रमाण नहीं दिया उन्होंने अपने जो उनकी जो सृष्टि रचना उसका प्रमाण नहीं है वो काल का उत्पन्न होना फिर वो दुर्गा का दुर्गा ये प्रकृति का हाथ उठाना काल की ओर अट्रैक्ट होना इसका प्रमाण कहां इसका कोई भाग है ना जो फर्स्ट भाग है ना है ना उसी में बता रखा है ठीक है जी नहीं प्रमाण नहीं है ना मैं बोल तो आप बता दो ना बता रखा है तो आप बता दो मुझे मेरे को तो नहीं मिला देखो प्रमाण सहित वहां पे बताया गया अरे भाई साहब आप उनके शिष्य हो ना देखो आप अपने लाइव प्रमाण यानी कि वो
02:16:18:21 वीडियो भी चला सकते हो। अरे भाई साहब मैं पूछ रहा हूं आप उनके शिष्य हो कि नहीं? अरे सुनो भैया बता तो रहे हैं आपको आप अपने चाहो तो लाइव तो आप ये क्यों बता रहे हो आप तो वो प्रमाण बता दो ये वाला ग्रंथ है ये अध्याय ये श्लोक है यहां लिखा है देखो दुर्गा ने हाथ उठाया हम भी देख रहे है आप तो बैठे-बैठे आप वीडियो चलाओ जरा कौन सा वीडियो विडियो चला दो अरे मैं क्यों चलाऊं भाई आप अपना वीडियो चला के मुझे प्रमाण दे दो ना ताकि सारे लोग देखेंगे हकीकत इसलिए चलाओ आप आप मुझे मैं नहीं चला सकता भाई मेरे पर कॉपीराइट क्लेम भेज चुके हो आप लोग और बोलो अरे वो तो YouTube भेजेगा ना मैं क्यों भेजूंगा आपको अरे तो आप किसके व्यक्ति हो किससे बात कर रहा हूं मैं सतलोक आश्रम के प्रतिनिधि से ना तो सतलोक आश्रम वाले कॉपीराइट भेज चुके हैं मुझे सतलोक आश्रम के प्रतिनिधि आपको बता रहे हैं कि संत रामपाल जी महाराज जी ने प्रमाण दे रखा है आप चलाने की बात पे जोर दे रहे हो तो मैंने कहा कॉपीराइट भेजते हैं मैं नहीं चलाऊंगा अपने पे आप मुझे ये बता दीजिए बहुत सारे लाइव बहुत सारे चैनलों पे लाइव चल रहा है। उनको तो कॉपीराइट नहीं आया। तो इससे मैं क्या करूं? पता नहीं कौन उनका जानी दुश्मन हो किसको भेज दे। भाई अगर बहुत सारे लोग बिना टिकट के यात्रा करते हैं इसका मतलब ये नहीं
02:17:33:22 कि टिकट बिना टिकट यात्रा करना वैध हो जाएगा। ठीक है? अब आप मुझे बताइए कि सृष्टि रचना का प्रमाण कहां है? जहां पर वो जहां पर षष्ठी रचना का प्रमाण जहां पर दुर्गा ने हाथ उठाया प्रकृति ने हाथ उठाया और वो जो काल है वो 21 ब्रह्मांडों का वो मालिक है और उसने जो है जबरदस्ती की ये सब ये इनके श्लोक क्रमांक बताइए मुझे कहां पर है आपको जो भी प्रमाण चाहिए आप वीडियो चला यानी आपको नहीं पता है शंका समाधान करने वालों को नहीं है पता
02:18:12:00 शंका समाधान करने वालों को नहीं पता है ना हो गया इनका। अरे भाई बोलिए दावे करते हो आप लोग। भाई हां तो ऐसे बोलो ना कि मैं बता रहा हूं। अरे
02:19:43:22 कब तक लाइन पर रखोगे? लाइन पर रहो। बेचारों की बड़ी बुरी दशा है। बाबा ने कहां फंसा दिया? अच्छा बाबा ने भी नहीं फंसाया है। मैंने देखा कि एआई के वीडियोस हैं। उसमें एआई की भी आवाज आ रही है। क्योंकि रामपाल ऐसे धारा प्रवाह बोलता ही नहीं है। और दूसरी बात है तो अभी इतना एआई इतना एडवांस नहीं हुआ। बिल्कुल उसमें भाव आ जाए मनुष्यत्व वाले। तो रामपाल जब बोलता है तो मनुष्य वाले भाव आते हैं उसमें कि हां भाई कोई मनुष्य बोल रहा है वो रामपाल की आवाज जब वह एआई वाली होती है तो सीधे जैसे कोई रीड करता है ना चीजों को ऐसे बोल रहा है वो आपको समझ में आएगा
02:20:56:04 भैया कब तक लाइन पे रखना है हेलो स्कूल से लाइन पर रहो आप कब तक रहना है लाइन पे भाई साहब सुबह तक रखोगे क्या एक टाइम आपसे बात नहीं हो जा रही है तब तक एक टाइम बता दो आप पांच मिनट 10 मिनट या तो 15 मिनट 15 मिनट तक लाइन पर रहो आप 15 मिनट तक लाइन पर चलो ठीक है आज 15 मिनट तक रहते हैं दो घंटे 21 हो रहे हैं। ठीक है भाई ढूंढ लो आप
02:21:28:14 तब तक हम लोग एक कार्य करते हैं छर और अक्षर वाली बात देख लेते हैं रामपाल की बहुत सी चीजें तो वैसे देख चुके हैं हालांकि मैं बहुत देर से बोल रहा हूं और आज उपवास भी है तो उपवास थोड़ा सा शरीर में ऊर्जा का स्तर घटता हुआ दिखाई दे रहा है। खैर अ
02:22:03:18 खैर अक्षर वाली बात करते हैं। उसको कहते हैं रामपाली सृष्टि रचना की मौत। तो भैया रामपाल का एक दावा है कि 15व अध्याय के शायद 15 से 17 श्लोक में जो तीन तरह के भगवान की बात हुई है। छर पुरुष, अक्षर पुरुष और फिर इन सबसे परे है पुरुषोत्तम पुरुष। इसमें जो सीधी बात है कि पुरुष यहां पर पुरुष जो शब्द है वह ब्रह्म का देवतक है। तो ब्रह्म जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में प्रकट होता है। तो उसी को बताया गया जीव यानी अक्षर पुरुष जो है तो अविनाशी परंतु जो जगदीश्वर है उसकी तरह मुक्त ना होने के कारण उससे थोड़ा उसका स्तर नीचे है। तो जीव हो गया अक्षर पुरुष कभी ना नष्ट होने वाला और जगदीश्वर वो तो है ही है पुरुषोत्तम और क्षर पुरुष हो गया यानी प्रकृति ये मैंने आज से कई
02:23:19:03 बहुत समय पहले ये आपको प्रमाण दे दिया था अब मैं इसका प्रमाण शिव पुराण से देता हूं कि छर अक्षर क्या है और इनसे परे कौन है को रखा है कृपया की और
02:23:57:01 बात कर रही है तो भैया आप निकालिए अब शिव पुराण वायवीय समिता पूर्व खंड 51 16 निकालिए और
02:24:36:21 आप से रखा है बनी रहे और आप से बात कर रहे हैं उनके कॉल को पर रखा है कृपया पर है
02:25:16:05 [हंसी] को रखा है लाइव पर बने रहिए सोचिए कौन हो [हंसी] पर रखा है हां ये देखिए क्या लिखा है प्रकृति को ही क्षर कहा गया मैंने क्या कहा जीव जगत और जगदीश्वर बन के प्रकट होते हैं प्रकृति को ही क्षर कहा गया है पुरुष उस जीव को अक्षर कहते हैं। और जिन जो इन दोनों से परे है वह अक्षर और अक्षर दोनों से भिन्न तत्व ही परमेश्वर है। अब ये परमेश्वर कौन है यह भी समझ लीजिए कौन है परमेश्वर।
02:26:08:00 तो पांचवे अध्याय के ही 11व और 13 वे श्लोक को निकालिए। यह देखिए बहुत बढ़िया श्लोक है और यह उन लोगों के लिए भी है ये श्लोक जो पशुपतिनाथ होने के कारण पशुपतिनाथ होने के कारण कुत्ते को भी ले जा रहे हैं मंदिर में आने वाले समय में उन मूर्खों की बात कर रहा हूं मैं कि अरे वो तो पशुपतिनाथ है तो कुत्ता भी ले जाओ फिर आने वाले टाइम में सूअर को भी अंदर अंदर ले जाना, गधों को अंदर ले जाना और वहां पर सब शुद्धिकरण करवाना वहां का तुम जैसे लोग अपने धर्म का इस प्रकार से अपमान करते हैं ना तब इन जैसे लोगों का जन्म होता है। हमारा प्रमाद ही ये रामपाल है। जिस दिन हम सुधर गए रामपाल जैसे लोग गायब हो जाएंगे। तो सुनो ये लो भाई इसने काट दिया। काट दिया भाई इसने भाग गया। भाग गया। काट के भाग गया। इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में। कोई
02:27:23:08 नहीं है टक्कर में। ठीक है? लगभग 9 मिनट 49 नहीं 12 मिनट 18 सेकंड हमारा कॉल चला और भाग गया। खैर तो भैया इनसे हमने सृष्टि रचना का प्रमाण पूछा। एक मिनट एक मिनट बड़ी कर दीजिए स्क्रीन तो इनसे हमने सृष्टि रचना का प्रमाण पूछा है। यह कहता है कि हम शास्त्रों से सृष्टि रचना बता रहे हैं। शास्त्रों में सृष्टि रचना का एक घटनाक्रम है ही नहीं। और इसका हमने आपको प्रमाण दे दिया। शिव पुराण में बताया गया है कि कल्प कल्प भेद से जो ब्रह्मा विष्णु महेश है वह एक दूसरे से उत्पन्न होते रहते हैं। वस्तुतः ये तीनों एक ही है। एक ही परम तत्व के तीन रूप है। जिसकी प्रधानता का वर्णन जिस कल्प में होता है, वह इन तीनों में से एक के रूप में स्वयं अपने जैसे शिव जी की प्रधानता का वर्णन है शिव पुराण वाले कल्प में तो जब ब्रह्मा, विष्णु, महेश उत्पन्न होंगे तो उसमें स्वयं शिव जी महेश के रूप में आएंगे। तो इस तरीके से यह देवता का किसी एक नियामक शक्ति के रूप में देवता का देवता की भूमिका भी निभाते हैं।
02:28:38:12 लीला करते हैं और लीला पूर्वक वहां पर तो है ही परम सत्य के रूप में। ठीक है? ब्रह्मा विष्णु को अपने ही अंग से प्रकट करते हैं। अंबिका को अपने ही अंग से प्रकट करते हैं। और क्या चाहिए आप लोगों को? खैर तो इससे हमने जब प्रमाण पूछा रामपाल जो बकवास कर रहा है अपने उसमें इससे हमने जब प्रमाण पूछा कि रामपाल जो अपने वीडियो में ये थोथाम थोथा चना वाला जो ड्रामा कर रहा है डम डम डिगा डिगा का उसमें जो वो सृष्टि रचना बता रहा है उसका प्रमाण का है तो ये भाग गए एक बोला मैं हाईवे पे गाड़ी चला रहा हूं कल बात करूंगा और दूसरा होल्ड करके रख के भाग गया। पर बात ऐसी है कि सृष्टि रचना अगर ये जो रामपाल कहता है अगर उसको मान ले तो हमारे सारे शास्त्र झूठे हो जाएंगे। क्योंकि शास्त्र कह रहे हैं कल्पांतर से सृष्टि रचना का जो क्रम होता है घटनाक्रम होते हैं वो बदलते हैं थोड़े-थोड़े। कई कभी रुद्र से ब्रह्मा विष्णु की उत्पन्न उत्पत्ति होती है। कभी ब्रह्मा से रुद्र और विष्णु की उत्पत्ति होती है। कभी विष्णु से इन दोनों की उत्पत्ति होती है। चल बदलता रहता है। और जिस रूप से यह क्रम प्रारंभ
02:29:53:13 होता है जैसे विष्णु रूप से जो सृष्टि का प्रारंभ होगा, कल्प का प्रारंभ होगा तो फिर वहां पर उनकी शक्ति के रूप में लक्ष्मी आएंगी। फिर आगे का प्रवाह चलेगा। इसी प्रकार से जब शिव रूप से जब प्रारंभ होगा कल्प का तो उनकी शक्ति के रूप में कौन आएंगी? अंबिका तो इस तरीके से वो शिव की पत्नी भी हुई और क्योंकि अंबिका के आने के बाद संसार का निर्मित होना फिर उसमें ब्रह्मा विष्णु महेश नामक नियामक शक्ति के रूप में भगवान का स्वयं फिर से अपनी सृष्टि में प्रकट होना लीला रूप में तो उस रूप में वो त्रिदेव जननी भी कहलाती है। ठीक है ना? उनको प्रकट करने वाली होने के रूप में और भगवान का जन्म और कर्म दिव्य है। तो गीता में भी लिखा है। मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी अपनी योग माया को अपने अधीन करके योग माया को अपने अधीन करके यानी कि ये भगवान की शक्ति उनके साथ में है। उनकी स्वरूप भूता उनको अधीन करके फिर प्रकट होते हैं। उसी संसार में कितना सरल है। बेकार में आप लोगों ने जटिल बना रखा है। खैर इसको समझ लेते हैं छर अक्षर वाले को। तो [गला साफ़ करने की आवाज़] छर और अक्षर कौन क्या है? करिए खोलिए उसको छर और अक्षर क्या है?
02:31:09:20 तो 11 से 13 में देखिए क्या है? मैं मैं भी खोल लेता हूं यहां पर। [गला साफ़ करने की आवाज़] कौन सा प्रश्न है ये? अध्याय पांच 736 ये आ गया अक्षर ही पशु कहा गया है। 13वा 13वा श्लोक अक्षर ही पशु कहा गया। तो जो लोग पशुपतिनाथ नाम होने के कारण शिव मंदिरों में कुत्ते को सूअर इत्यादि को ले जाने की बातें कर रहे हैं। क्योंकि आज कह रहे हैं कि भाई कुत्तों को ले जाओ। कल को सूअरों को भी ले जाओगे। उनके लिए मुंह पर तमाचा है और अक्षर अक्षर और अक्षर से परे भगवान शिव ही है पूर्ण पुरुषोत्तम है ना उनको पुरुषोत्तम ना मानने वालों और अक्षर और अक्षर और परम ब्रह्म इन तीन भगवानों की बात करने वाले रामपालियों जैसे के मुंह पर भी यह तमाचा है तो क्या है अक्षर ही पशु कहा गया है यानी जीव अक्षर क्या है जीव उसको पशु कहा गया है क्यों कहा गया जीव को पशु क्योंकि वो पास में फस जाता है। पाश क्या है? छर। पास क्या है?
02:32:24:24 छर। जो नाशवान है। अक्षर क्या है? जो नाशवान नहीं है। तो छर रूपी पास में जो जीव है वो फस जाता है। इसलिए पास में फंसने वाले को पशु कहा गया। और जो इनके सर्व नियंता इनके नियामक हैं। इनके उद्धारक हैं भगवान शिव। वो हो गए पशुपति। साफ साफ लिखा हुआ है। तो आज के बाद जो लोग यह बोलते हैं ना पशुपतिनाथ है कुत्तों को ले जाओ शिवलिंग में स्पर्श करवाओ। उनको ये प्रमाण दिखाना कि पशुपतिनाथ का अर्थ क्या है? ठीक है? तो 13वा 13वा देखिए क्या है? अक्षर ही पशु कहा गया है। क्षर तत्व ही क्षर तत्व का ही नाम पास है। तथा क्षर और अक्षर दोनों से परे जो परम तत्व है उसी को पति या पशुपति कहते हैं। फिर एक श्लोक छोड़ के फिर देखिए वायुदेव क्या बोल रहे हैं। पशु प्रकृति को ही छर कहा गया है। मैंने कहा था जीव जगत और जगदीश्वर प्रकृति को ही छर कहा गया है। हम वायुदेव क्या बोले उसका याद आ जाता है राघव दास का
02:33:40:21 पादुर्भाव प्रकृति को ही छर कहा गया है पुरुष को अक्षर कहते हैं जो इन दोनों को प्रेरित करता है वह क्षर और अक्षर से दोनों से भिन्न तत्व परमेश्वर कहा गया है अब वो परमेश्वर कौन है ये भी यही आसपास के श्लोकों में हमें प्राप्त हो जाता है कौन परमेश्वर है पशुपतिनाथ तो मिल ही गया हमको ठीक ठीक है तो वो परमेश्वर कौन है वो गिरजा का पति जो अभी हमने पहले श्लोक जो बताए थे बता रहा हूं आपको
02:34:38:14 शिव पुराण यही वायवीय समिता पूर्व खंड छ 23 छ 23 हां देखिए यहां पर साफ देखिए हां ये वाला भी देख लीजिए पुरुष प्रेरक पुरुष वाला कि इनके के जो प्रेरक पुरुष है वह कौन है? शिव। शिव ही इनके प्रेरक पुरुष है। वह तो यहीं पे आ गया। छर और अक्षर से परे कौन है? ठीक है? अब आगे हम देख लेते हैं। शिव पुराण वायवी समिता और पूर्व खंड
02:35:18:00 छ 23 ये देखिए 6 23 में इनको परम पुरुष कहा जा रहा है। ठीक है? पुरुषोत्तम का अलग से दे देंगे प्रमाण। छ 23 में इनको परम पुरुष कहा जा रहा है। देखिए संस्कृत दिखा दीजिए इनको। इन्हें परम पुरुष कहते हैं। संस्कृत में भी देख लीजिए। पुरुषम परम। ठीक है? और अब नीचे आ जाइए। एक श्लोक छोड़ के नीचे आइए। मैं उस जरा रहित सर्वव्यापी तथा सर्वज्ञ पुराण पुरुष को जानता हूं जिनके ध्यान से जन्म मरण आदि का निरोध हो जाता है। यह देखिए जिनके ध्यान से जन्म मरण आदि का निरोध हो जाता है। वे अकेले महेश्वर ही सर्वप्रथम अपनी शक्ति के साथ मिलकर बहुत प्रकार से इन तीनों लोकों की सृष्टि करते हैं और अंत में उसका संहार भी करते हैं। ठीक है? इसीलिए कहते हैं मत
02:36:33:01 पड़ो चक्कर में और देख लीजिए इधर इससे जस्ट पहले वाले पष्ठ पर आ जाइए 141 श्लोक निकालिए सृष्टि के आरंभ में एक ही रुद्र देव विद्यमान रहते हैं। दूसरा कोई नहीं होता। वे ही इस जगत की सृष्टि करके इसकी रक्षा करते हैं और अंत में सबका संहार कर डालते हैं। यह जो शास्त्र है ना पुराण वेद में थोड़ा आपको ढूंढना पड़ेगा। ठीक है? मगर जब जैसे आप शिव पुराण खोलोगे तो शिव की महिमा है। प्रचंड रूप से और रामपाल कहता है इन शास्त्रों में शिव का निषेध है। पूर्ण ब्रह्म कहा है। सृष्टि के आरंभ में एक रुद्र देव विद्यमान रहते हैं। दूसरा कोई नहीं।
02:37:29:13 यही सृष्टि करते हैं। फिर रक्षा करते हैं। अंत में सबका संहार कर डालते हैं। ये समार वाले तत्व से याद आया कि समार अगर उसको माना जाए महाप्रलय को तो कबीर ही करेगा। अंत तो कबीर को आना पड़ेगा समार के लिए। वो मान नहीं रहा था। वचन से होता है। वचन के रूप में कबीर ही है। फस जाता अभी वह ज्यादा देर बात करता तो अच्छा हुआ उसे पादुर भाव याद आ गया। हायवे याद आ गया। ठीक है। हर्ष शास्त्रवाद जी आप आइए। फिर हम विराम देते हैं आज की चर्चा को।
02:38:12:07 तो आज हमने क्या जान लिया है कि यह जो छरोक्षर वाली गु्थी है ना सबसे बड़ी बात तो इसमें भगवान स्वयं के लिए कह रहे हैं मैं ही पुरुषोत्तम हूं और वहां छर अक्षर वो तीन प्रकार के भगवान की बात नहीं हो रही है जीव जगत जगदीश्वर की बात हो रही है ये प्रमाण देख लिया हमने और अगर मान लो उनसे परे पुरुषोत्तम है भी तो भगवान श्री कृष्ण स्वयं है उनके लिए पुरुषोत्तम बहुत बार आया है शिव जी के लिए पुरुषोत्तम हमने आपको दिखा दिया पुरुषोत्तम शब्द शिव जी के लिए हमने आपको दिखा दिया। एक बार और दिखा दीजिए। एक एक दो में दिखा दीजिए। भरे पड़े हैं। जहां से शुरू करोगे वही प्रमाण मिल जाएगा। एक एक दो ये है एक एक दो रुद्र समिता षष्ठी खंड। कितने प्रमाण दे भाई? प्रमाण लेते लेते थक जाओगे। गिनते गिनते थक जाओगे।
02:39:07:01 इनके पास कोई शास्त्रोक्त खंडन तो है नहीं। यह शिवश सिर्फ वीडियो में क्यूआर कोड लगाकर यह है वो है। हां इसमें आइए एक एक से दो सृष्टि खंड एक एक से दो यानी पहला अध्याय बच नहीं पाएगा रामपाल जिस दिन आ गया ना ज्ञानार्थक दृष्टि से वो क्या है
02:39:47:03 गला पकड़ ले जब पापी का हो सांस वही थम जाए वो वाली बात है तो [गला साफ़ करने की आवाज़] क्या लिखा है मैं स्वभाव से उन शांत स्वरूप अनादि पुरुषोत्तम शिव की वंदना करता हूं। पुरुषोत्तम हो गए शिव हो गए और ये वही शिव है जो गिरजा के पति हैं। इससे पहले वाला श्लोक दिखा दो भैया। ये वही शिव है। ये वही शिव है जो जटा में गंगा और गरे में डारे फिर रहे सांप। जिनकी शिवलिंग से पूजा होती है। जिनकी भक्ति से अभी हमने देखा जन्म और मरण से मुक्ति होती है। गिरिराज कुमारी युमा के पति तत्वज्ञ। ठीक है। बस करिए आज के लिए बच्चों की पढ़ाई बहुत है रामपालियों की। बाकी फिर कभी कृपा करेंगे उनके ऊपर।
02:40:45:13 हां जी शास्त्रवाद जी आपने कुछ विचार रखे फिर हम लोग काफी लंबी हो गई। आज विराम देंगे। जबरदस्त है। आज तो जबरदस्त हुआ। एक एक पोल पट्टी खुल गई। कल से अगली बार चैट जीपीटी का उपयोग करेंगे हम लोग ये दिखाने के लिए कि कितना सरल है रामपाल फड़ की बातों का खंडन मगर अगली बार जो है ना कोई स्पीकर डिवाइस रख लेंगे तो उसको लगा के जिससे आवाज जो उसकी उसका स्वर बहुत तेज आए ध्वनि बढ़ जाए है ना जो आज थोड़ा सा लोगों को परेशानी हो रही हो आवाज ठीक है और कैमरे का स्टैंड का एक एक मुख्य पार्ट था वो कहीं खो गया है तो अगर कोई सहायता करना चाहता हूं। कैमरे स्टैंड की जरूरत है हमें। वह संपर्क कर सकता है। हां जी शास्त्रवाद जी। आज तो जबरदस्त हुआ भैया। इसकी पोल पट्टी अच्छे से खुल गई है और आपने कॉल लगा के भी उसको धो दिया। शास्त्रवाद जी संभवत उपलब्ध नहीं है। आवाज नहीं आ रही। तो ठीक है। इतना पर्याप्त है। काफी लंबी चर्चा हुई है। आप लोगों को काफी कुछ मालूम भी पड़ा। फिर मिलेंगे इनकी बैंड बजाने के लिए। है ना? धोती
02:42:00:19 अचला में आया शिवश बैंड बजाने को। आवाज नहीं आ रहा क्या? हेलो तो इनकी डमडंग डिगा करेंगे। और बाकी किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के लिए वीडियो के अंत में दिए गए नंबर पर संपर्क करें 7408301869 और जिसकी मां ने उसको निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो। वह आकर के रामपाल के बातों को फड़ बातों को डम डम डिगा डिगा बातों को सही सिद्ध करें। अगर वह रामपाल के किसी
02:42:35:22 बड़े YouTube चैनल अगर वह हमें कहीं बीच की जगह पर चर्चा के लिए बुलाना चाहता है किसी न्यूट्रल स्थान पर तो उसे अपने नाम को घोषित करवाना होगा रामपाल के किसी बड़े चैनल के द्वारा जिसके फॉलोअर्स एक डेढ़ लाख से ऊपर हो उसके द्वारा वो घोषणा करें जैसे अभी अभिषेक फैक्ट बाय अभिषेक है वो वो कहे कि हमारी ओर से ये आ रहा है अगर अगर हमें बीच के स्थान पर बुलाना है तो तो किसी बड़े चैनल से घोषणा करवा लो अपना नाम नहीं तो रामपाल से घोषणा करवा लो अपना नाम नहीं तो हमारे चैनल पर आ जाओ क्योंकि तुम्हें ऐसे व्यक्ति भी होने चाहिए ना जिसके लिए मैं अपना समय निकालू और फिर जो है किसी बीच के स्थान को ढूंढू ये सब करूं इसलिए ऐसे व्यक्ति होने चाहिए बाकी अगर आप नगण्य व्यक्ति हो तो हमारे चैनल पर आपका स्वागत है आ जाओ हो जाए बाकी एक जो व्यक्तिगत मेरा परामर्श है मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं चक्कर में जय श्री राम जय श्री राम सभी को जय श्री राम
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रामपाली सृष्टि-रचना की मौत!
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