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00:00:02:09 तो जय श्री राम सभी को। आशा करता हूं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और जैसा कि आप सबको पता है हमारी लाइव चर्चा निर्धारित हुई है आर्य समाजी आचार्य हैं जो अग्निव्रत जी के साथ। तो उस संबंध में भी हम कुछ बातें करेंगे और मुझे लगता है कि हमारी जब चर्चा सुनिश्चित हो गई है। उसके बाद शायद उनका एक वीडियो निर्गत हुआ है जिसमें उन्होंने कुछ चीजें कही हैं। हमने भी पहली बार उनका कोई वीडियो तभी देखा। वैसे देखा था कि वो हैं। यह कहीं ना कहीं दिख जाता था। उनका फोटो वगैरह आर्य समाज के किसी कार्यक्रम में कहीं पर YouTube पर स्क्रॉलिंग में आ जाता था सामने शायद। तो हम यह जानते थे कि यह आर्य समाजी आचार्य हैं। पर हमने कभी ऐसा कुछ सुनने का प्रयास नहीं किया था उनकी ओर से। तो फिर भाई हमको जैसे कि उनके एक संदेश में हमें प्राप्त हुआ था उनका एक संदेश WhatsApp के माध्यम से तो उस संदेश में उन्होंने बताया था कि उनके लोग हमारे

00:01:17:13 बारे में उन्हें बता रहे हैं। तो इसी प्रकार से उनके लोगों ने मतलब हमारे लोगों ने भी इनके बारे में हमको बताया। कुछ वीडियोस भेजे। तो जो इनका एक लेटेस्ट वीडियो है शायद चर्चा सुनिश्चित होने के बाद का ही है या शायद अ चर्चा सुनिश्चित होने से शायद एकद दिन पहले का होगा। उसमें भाव कुछ मिलेजुले से हैं। मतलब ऐसा भी लग रहा है कि चर्चा सुनिश्चित हो चुकी है और ऐसा भी लग रहा है कि चर्चा अभी सुनिश्चित नहीं हुई है। उससे पहले का जो उनके अंदर हमें लेकर के जो रोष है तो वह उसमें दिखाई दे रहा है कुल मिलाकर के। तो उसमें उन्होंने कुछ क्वेश्चंस उठाए हैं। कुछ यहां पर अभी सनातन शंकर जी भी जुड़ने वाले हैं और

00:02:08:07 अनिकेत जी भी जुड़ेंगे और यह लाइव चर्चा आपको सनातन शंकर जी के चैनल पर भी दिखेगी। संभवत कुछ सेटिंग्स वगैरह हो पाई है कि नहीं क्योंकि थोड़ा सा समय कम रहता है। तो तकनीकी हाथ कमजोर है। पहले से ही बता दूं मैं आपको। हां। तो [खांसने की आवाज़] अ एक मिनट

00:02:58:16 तो सबसे पहली बात उन्होंने मुझे जो मैंने हालांकि वो जो वीडियो है वो थोड़ी सरसरी निगाहों से देखा था तो उसमें मुझे एक सार जो समझ में आया वो कुछ दो तीन चीजें थी उनकी एक कि आर्य समाज पर प्रहार क्यों कर रहे हैं? आर्य समाज पर ही क्यों कर रहे हैं? और घुमा फिरा के शायद हमारी बात हो रही थी क्योंकि उन्होंने नाम लेकर के भी कहा कि गुरुदेव का नाम लिया था और फिर कहा कि उनके शिष्य जगह-जगह जाकर के इंटरव्यू कर रहे हैं और

00:03:33:27 क्या कहते हैं इसमें उन्होंने बताया कि आर्य समाज की अच्छाइयां भी तो देखो। आर्य समाज ने यह किया है, वह वो किया है। तो आप क्यों ऐसा कर रहे हैं? फिर उन्होंने बाद में कुछ चीजों को लेकर के दयानंद जी के मत को भी या दयानंद जी के नाम से जो वर्तमान में जो सत्यार्थ प्रकाश जो छप रही है उसको लेकर के भी उन्होंने कुछ आपत्तियां प्रकट की जो क्रम से हम

00:04:07:08 अभी लेने का प्रयास करेंगे। अनिकेत जी हमारे साथ जुड़ चुके हैं और अ उनका कहना था कि आर्य समाज ने बहुत सारे क्रांतिकारी दिए हैं। बहुत सी कुछ चीजें थी। मुझे लगता है कि मुझे इन बातों पर अपनी प्रतिक्रिया देनी आवश्यक है। इसलिए मैं उपस्थित हुआ हूं और वैसे भी क्योंकि हमारी चर्चा सुनिश्चित हो गई है। तो इस चर्चा को लेकर के जो दर्शक गण हैं उनमें भी एक कौतहल बना हुआ होगा कि भाई आज क्या होने वाला है तो कोई भी कार्य जो हम करते हैं निरर्थक नहीं होता है बहुत महत्वपूर्ण होता है और उसका बहुत सार अगर उसका सारगर्भित हम ध्यान दें तो बहुत ही जरूरी कार्य होता है तो वैसा ही एक ये वीडियो है अंत तक देखें बने रह और कुल मिलाकर के जो उन्होंने अपने वीडियोस में अपने वीडियो में यह वीडियो जिसमें उन्होंने इस तरह से नाम लिया कि पूरी शंकराचार्य जी का नाम लेकर के उन्होंने कहा कि उनके शिष्य जगह-जगह जाकर के आर्य समाज में इंटरव्यू ले रहे हैं और वीडियो का नाम डाला है आर्य समाज पर यह आक्रमण क्यों ये वीडियो भी स्क्रॉलिंग में

00:05:22:09 मेरे सामने आया था पर मैंने उसे देखना जरूरी नहीं समझा पर फिर मुझे मेरे परिचितों ने जब ये चर्चा सुनिश्चित हो गई उसके बाद उन्होंने ये मुझे इसकी कटिंग भेजी तब मैंने देखा कि अरे इसमें तो हमारी हमें हम ही को लेकर के क्वेश्चन किया गया कि आर्य समाज पर ही आक्रमण क्यों तो सबसे पहले तो आपका स्वागत है सनातन शंकर जी जय श्री राम अनिकेत जी जय श्री राम जय श्री राम जी जय श्री राम जी अच्छा [गला साफ़ करने की आवाज़] मैं ये सोच रहा था कि जब तक आपकी वो डिबेट ना हो जाती तब तक हम इस विषय पर कुछ नहीं बोलेंगे क्योंकि ये वीडियो मैंने देखा था पहले भी आपने इस विषय को आज उठा ही दिया है तो फिर अब हम भी अपने पॉइंट रख ही देंगे इसमें जी जी नहीं हम एक बात पहले ही क्लियर कर दे कि यहां पर जो है नकारात्मक रूप से ऐसा कुछ नहीं होने वाला बस एक जैसे उन्होंने अपना पक्ष रखा है तो उसी प्रकार से अपना पक्ष रखूंगा। पर सर्वप्रथम मैं एक बात कहना चाहूंगा कि जैसे मैंने उनको सुना और उनके कुछ वीडियोस देखे भी हैं अभी इन्हीं दो-तीन दिन में तो मैंने देखा कि इनकी शैली थोड़ी सी जो एक अपमानजनक शैली होती है आर्य समाजियों की यूजुअली है ना मूर्ति पूजकों के प्रति और क्योंकि वो जो एक आक्रामकता है सामान्य

00:06:37:25 आर्य समाजियों में जनरल तरीके से अगर देखें और जो YouTube पर वक्ता के रूप में उपस्थित होते हैं उनमें तो उनमें उनसे इनकी शैली जो है काफी भिन्न मुझे प्राप्त हुई। उस तरह से आक्रामकता और जो है भड़काऊ भाषण जो है मुझे नहीं देखने को मिला। शैली इनकी अ ठीक थी और दूसरी बात एक ये भी देखी मैंने इनकी शब्दों में अ एक सम्मान की भावना भी देखी। अवमानना बहुत ज्यादा लेकर के हमारी परंपराएं जो हैं उनको लेकर के या हमारी मान्यताएं जो हैं जो मौलिक सनातन धर्म के जो घटक हैं उनको लेकर के इनकी जो शैली थी उसमें कोई ऐसा विनम्रता ही दिखी मुझे तो मैंने देखा तो उस चीज को तो हम भाई उसका स्वागत करते हैं। अभिनंदन करते हैं ऐसी शैली अपनाने का और इस तरह से ही सौहार्दपूर्ण वातावरण बना करके हम एकजुट एक मंच पर हो भी सकते हैं। है ना बिल्कुल मैं इसमें इनका अभिनंदन करूंगा इनकी जो शैली है तो हम लोग इसमें दोनों भागों में बात करेंगे कि इन्होंने अपनी वीडियो में जो प्रश्न उठाए हैं हमें लेकर के उन पर और फिर कुछ और

00:07:52:28 जो तत्व हैं जो इनसे जुड़े हुए हैं इस वीडियो से या आने वाली उससे उससे पहले मैं चाहूंगा अगर सनातन शंकर जी कुछ अपनी बात रखना चाहे जो वीडियो में जो तथ्य हैं उन उनमें और उनके निराकरण में नहीं मगर एक अगर कुछ आप रखना चाहे शुरू करने से पहले तो आप रख दीजिए। जी जी बिल्कुल बिल्कुल और ये जो चर्चा आपकी होने वाली है काफी सौहार्दपूर्ण चर्चा हम देख रहे हैं इसको के एक अच्छी हमें चर्चा देखने को मिलेगी। बाकी उन्होंने जो वीडियो में बातें कही तो उन्होंने काफी जगह पर जो है जैसे गौ रक्षा आंदोलन की जो बात कही वहां पर उन्होंने कृपात्री जी महाराज जी का भी जो है वहां पर एक अच्छा ही पक्ष रखा है। हालांकि वो एक अलग बात है कि वह हर चीज में अपने पक्ष वालों को बीच में जरूर जोड़ते हैं। वो एक ठीक बात है क्योंकि हमें मिलकर ही चलना चाहिए बिना किसी का उपहास उड़ाए। जी बाकी और जो बातें हैं वो आगे हम बताएंगे इस वीडियो के माध्यम से रूप से चलेंग फिर अनिकेत जी आपको रखना चाहेंगे प्रीफिक्स के रूप में

00:09:08:00 हां एक कमेंट आ रहा है जी हां शिव शर्मा जी शिवश जी आपने उनको पूरा सुना नहीं उनकी भाषा भी वैसी ऐसी है जैसे अन्य आर्य समाजियों की पर बिल्कुल खराब नहीं है। बस बस वही कह रहा हूं मैं वही कह रहा हूं। शैली है विरोध देखिए जो हमारा हमारी जानकारी जो है कि जो सनातन परंपरा है ज्ञान विज्ञान की वैदिक ज्ञान विज्ञान की उसके विरोध पर ही आर्य समाज का अस्तित्व है। तो स्वरूप भूत लक्षण है विरोध कटाक्ष भड़काऊ बातें करना उन परंपराओं के प्रति। ठीक है? ठीक है? यह स्वरूपभूत लक्षण हमें प्राप्त होता है आर्य समाज का। फिर उसमें थोड़ा सा अगर कोई विनम्र हो रहा है या थोड़ा सा लाइट हो रहा है तो लगता है कि भाई यह तो बड़ी हालांकि उनकी शैली में भी विरोध है जगह-जगह घुमा फिरा करके है पर कंपैरेटिवली वो एक होता है ना कि हमने जब इतना देखा है तब कोई इतना सा भी अंतर मिलता है तो लगता है कि चलो भाई यहां पे थोड़ी शांति है वो वाली बात है तो ऐसा नहीं है बिल्कुल वो नहीं है और विरोध तो है ही ठीक है तो अनंकेत जी आप कुछ अपनी बात रखना चाहेंगे

00:10:23:01 या हम लोग शुरू करें ठीक है अनिकेत जी शायद अभी नहीं रख रहे हैं तो अभी जी आपकी आवाज नहीं आ रही है अंकित जी माइक देख लीजिए तो अभी जब यह चर्चा पूरी हो जाए मतलब हमारा जो मुख्य विषय है वो पूरा हो जाएगा तो थोड़ी देर के लिए हम कुछ लोगों को लेंगे भी विचार व्यक्त करने के लिए और कोई डिबेट वाला सीन नहीं है कि किसी को डिबेट के लिए आना है। उसके लिए किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त YouTube पर चर्चा लाइव चर्चा करने के हेतु WhatsApp नंबर पर वो इस वीडियो के अंत में दिए गए नंबर पर WhatsApp करें। जी अनकित जी

00:11:10:16 अनम्यूट कर भैया अभी आ रही है आवाज? हां अब आ रही है आवाज जी गुड आवाज आ रही है? आ रही है ना? बिल्कुल बिल्कुल आ रही है। हां तो हां तो यह है कि हमेशा लगभग सबका ऐसे ही रहता है कि जैसे इस हो गया ब्रह्मा कुमारी कुछ इंटरनेट का यह भी देखने मिलता है एक कुछ आपकी बात बीच में कट गई थी शुरू से ही बताइए आप कुछ नेट का दिक्कत चल रहा है आपके यहां हम हां शायद अभी आ रही है क्लियर अब आ रही है अब आ रही है कंटिन्यू आ रही है फ्लो में आ रही है

00:12:00:21 मैं कह रहा हूं कि तकरीबन यह भी देखने मिलता है कि ब्रह्मा कुमारी हो गए या फिर इस हो गए या फिर यही आर्य समाज या कोई भी ऐसे हैं ग्रामपाली हो गए ये सब देखने को मिलता है कि हमारे यहां आइए हमारे यहां पर केवल हमारे यहां पर ही ऑथेंटिक ज्ञान दिया जाता है। केवल ये दर्शाने का प्रयास करता है। बाकी अन्य परंपरा जो है कभी यह नहीं कहते कि केवल हमारे पास है। वो यह कहते कि आपकी जहां पर आपका परंपरागत आचार्य में मन लगे आप वहां पर जाए। हम जैसे भगवान श्री कृष्ण ने सारा गीता का ज्ञान देने के बाद अर्जुन को कहा कि अब तुम्हारी अपनी इच्छा है। सिद्धांत हमने बता दिया। अकाट्य उसके बाद आपकी जहां श्रद्धा हो पा रही है। जिस कार्य में जिस विधि में उसका आप आलंबन लीजिए। बिल्कुल ठीक बात। तो मैं [गला साफ़ करने की आवाज़] सबसे पहले

00:12:56:09 जो इनका वीडियो का जो टाइटल था आचार्य अग्निवत जी के वीडियो का उसमें टाइटल में था कि कि आर्य समाज पर ही आक्रमण क्यों? ठीक है? यह इनके वीडियो का टाइटल था। तो मतलब पहला प्रश्न यह आता है कि जो हम लोग हैं मैं हुआ आप हुए क्या अच्छा मूलत मेरी बात करें क्योंकि मैं जाता हूं इनके कई मंदिरों में जा चुका हूं और यदि आवश्यकता पड़ी तो आगे भी जाना जारी रहेगा और मुझे नहीं लगता आवश्यकता तो पड़ने ही वाली है तो आगे भी जाना जारी रहेगा अब वो बात अलग है कि इन्होंने अगर मेरे खिलाफ फतवा निकाल दिया है तो हो सकता है कि मेरे को वो इनके मंदिरों के बाहर एक जो है वांटेड टाइप से एक चेहरा [हंसी] दिखाई दे मेरा फोटो लगा हुआ कि इस आदमी के इस व्यक्ति के आते ही मंदिर में ताला लगा के भाग जाना। [हंसी] ये हो सकता है। खैर चलिए

00:13:59:01 [गला साफ़ करने की आवाज़] तो अग्निवत जी का ऐसा मानना है कि हम केवल आर्य समाज को ही प्रश्न करते हैं और आर्य समाज के मंदिरों में जाकर के ही अ ये जो धार्मिक चर्चा है करते हैं। तो ये आपकी गलतफहमी है। इसमें होता क्या है? प्रॉब्लम यह है कि हम लोग धर्म का प्रचार बहुत करते हैं। प्रचार बहुत करते हैं पर उसको धारण नहीं करते। यह सबसे बड़ी समस्या है धार्मिक प्रचारकों में। बहुत बड़ी समस्या है। पूरे तरीके से सामने वाले का पक्ष जाने बिना ही निर्णय कर लेना। किस आधार पर? कि हमको जो आधी अधूरी जो सूचनाएं दी जा रही है उस आधार पर। नहीं। आप सामने वाले का पक्ष तो सुनिए। क्या है? कहां-कहां गया है? आपको जिसने बता दिया कि वो आर्य समाज के मंदिरों में जाते हैं। आपने मान लिया आपने वक्तव्य निर्गत कर दिया। उसने आपको अधूरी जानकारी दी। हम इस के मंदिर में भी जाते हैं। हम ब्रह्मा कुमारी के यहां भी जाते हैं। रामपाल को तो खदेड़ रखा है। यह सब उसने आपको नहीं बताया। तो ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ आर्य समाज से ही प्रश्न कर रहे हैं। है ना? हम सनातन धर्म के नाम से जो जो व्यक्ति परंपरा प्राप्त सिद्धांतों का विरोध कर रहा है और जो जो एक किसी

00:15:14:04 सशक्त कल्ट के रूप में उद्भाषित हो गया है। अभी बहुत से कल्ट हमारी लिस्ट में क्या कहते हैं लिखे हुए हैं। उन पर अभी हम नहीं जा पाए हैं। मगर आगे भविष्य में निकट भविष्य में वहां भी जाने की बारी है। और आपको बता दूं कि आर्य समाज का नंबर तो बाद में आया था। पहले इस से शुरुआत हुई थी। तो आपका यह जो टाइटल है ना यही अपने आप में बहुत संशय पूर्ण है जो यह प्रस्तुत करता है कि आपको हमारे विरोध में भटकाया गया। नहीं उससे पहले मुफ्ती मुफ्ती जी से भी हुई थी आपकी शुरुआत सबसे पहली शुरुआत वहीं से हुई थी शायद। जी जी वो वो एक अगला चरण है। अगला चरण मैं उस पर आ रहा हूं। उनके द्वारा जो तथ्य दिया गया है। जी जी तो अब मैं सबसे पहले एक रीजनिंग बता दूं। क्या है कि इन्होंने जो लाइव का वो दिया था। ट्रेलर इन्होंने दिया है जो लाइव इनके चैनल पर सुनिश्चित हुई है। तो उन्होंने वहां पर ट्रेलर एक दिया है। ट्रेलर में कहा है कि हमने उनको जो है आमने सामने से कहा मगर उन्होंने कहा कि नहीं ऐसे ऑनलाइन में ऑनलाइन का ही प्रस्ताव दिया। तो इनकी ओर से मुझे WhatsApp पे मैसेज आया था पहले सर्वप्रथम। उस मैसेज में थोड़ी सी मेरे को लेकर के कटाक्ष भी थे। हालांकि वह यहां पर रह बात करने का उनका कोई मतलब नहीं है क्योंकि

00:16:29:10 वह कटाक्ष फिर जब मैंने आपत्ति प्रकट की कि जब आपको सैद्धांतिक चर्चा करनी है तो कटाक्षों से दूर ही बनाएं। तो कटाक्ष थे फिर उन्होंने उस मैसेज मैसेज को डिलीट कर दिया। फिर दूसरा मैसेज जो डाला मुझे वो एज इट इज इन्होंने ट्रेलर में लगाया है। वो जो कटाक्ष थे वो उसमें से गायब कर दिए। तो उस मैसेज में और यह जो ट्रेलर में लगाया इसमें एक सिमिलरिटी है यह दिखाने का हल्का सा प्रयास है कि मैं सामने से जब मुझे वहां बुलाया गया तो मैं नहीं गया और जो है मैंने लाइव लाइव मतलब उससे मैंने दूरी बनाई वो लाइव चर्चा के प्रति मैं हुआ और उसमें एक हेडलाइन थी कि ऐसा देखा गया है कि मैं आर्य समाज के मंदिरों में जाकर के शिवश नारायण द्विवेदी और हम प्रश्न करते हैं या चर्चा करते हैं या इंटरव्यू लेते हैं। तो अब इसमें दो बातें हैं। पहली बात है कि क्या मैं आर्य समाज के मंदिरों में जाकर के ही ऐसा करता हूं? नहीं मैं रामपाल के यहां पर पुलिस लेकर के गया हूं। वहां छापा डलवाया है। उसकी किताबें ढूंढी जा रही हैं। हाई कोर्ट में केस चल रहा है। ये सब चीजें जानिए। इन सब विषयों में हम और आप एक होंगे शायद। रामपाल जैसे से लड़ने में। ठीक है? दूसरी बात कि मैं अन्य कई ऐसे कल्ट्स बन चुके हैं, तंत्र

00:17:44:19 बन चुके हैं जो जिनके यहां जाकर के मैं सवाल कर रहा हूं। अब बात आती है कि वो जो दूरी बनाने वाली बात है उसमें एक बात आती है कि आपने मुझे जो है आमने सामने से चर्चा करने का प्रस्ताव रखा। अब मेरे पास एक कॉल आता है जिसमें कि कोई एक लड़का है। मुझे नहीं मालूम वह कौन है और मेरे पास 36 कॉल डेली आते हैं जिसमें कि मुझे गुमनाम कॉल होते हैं। अज्ञात होते हैं। वो किसी तरीके से भड़काऊ बातें करते हैं या वहीं पर मेंटली टॉर्चर करने का प्रयास कर प्रयास करते हैं। डिबेट करने का प्रयास करते हैं। आज भी आया था। आर्य समाज की ओर से भी आज आया था। तो ऐसा प्रतिदिन होता रहता है मेरे साथ। तो जब कोई व्यक्ति अचानक से कॉल करेगा और यह कहेगा कि भाई जो आचार्य अग्निव्रत से बात क्यों नहीं करते तो मैं कहूंगा कि भाई आचार्य अग्निव्रत से बात कराओ और मैं उसको भी सस्पेक्टेड ही समझूंगा। मैंने उस दिन भी वही किया। मैंने कहा आचार्य अग्निवृत जी से बात कराइए अगर अगर उन्होंने मुझसे संपर्क करवाया तो तो हालांकि वो आ गए तो मेरे लिए तो वो चीज एक अनएक्सेक्टेड चीज थी क्योंकि मेरे लिए वो जो कॉलर था वो फ्रॉड था मेरी जानकारी फ्रॉड था। पर चलिए

00:18:59:25 अग्निव्रत जी आ गए तो फिर उन्होंने जब मुझे बात कही कि आप राजस्थान आ जाइए तो मैंने अपने जितने शेड्यूल चल रहे हैं क्या-क्या होने वाला है कब कब होने वाला है उन सबको देख के या तो मैं उनको डेट बताऊं कि मैं कब आ सकता हूं दो महीने बाद आ सकता हूं भाई बीच में दिल्ली जाना है यहां जाना है तो उसको बताऊं और जबकि बहुत आसान सा रास्ता है कि हम लोग अभी इंटरनेट के जरिए आमने सामने बैठ जाए और बातें कर लें क्या गोली मारनी है एक दूसरे को तो जब एक सरल रास्ता हमें प्राप्त है तो उस पर कर लीजिए। बाकी मैंने यह भी कहा कि जब बाकी अगर नहीं हो सकता तो फिर आएंगे कभी उधर की ओर तो देखा जाएगा। अगर वहां पर वो ऑनलाइन के लिए नहीं मानते तो मैं मना थोड़ी ना करता। मैं कहता ठीक है मैं देखूंगा कब आ सकता हूं। और पहुंचता किसी ना किसी दिन मगर वो मैंने बताया उनको कि बहुत सरल रास्ता है। मैं कोई बात नहीं कर रहा हूं। अच्छा अब उसमें एक छोटी सी तर्कसंगत बातें हैं कि जब वो ये कह रहे हैं कि भाई लाइव चर्चा में तो चालाकी हो जाती है तो चालाकी सीधी सी बात है वो यही कह रहे हैं कि हमसे हो जाती है तो जब हमसे चालाकी वो अपेक्षा कर रहे हैं कि वो ऐसा आरोप हम पर लगा रहे हैं कि हम चालाकी कर सकते हैं तो फिर वो हमसे यह एक्सपेक्ट क्यों कर रहे हैं कि हम ऐसा ना सोचे कि आप

00:20:15:01 भी चालाकी कर सकते हो। यह महाभारत का जो सिद्धांत है मैंने कहा ना धर्म का प्रचार सब करते हैं मगर धारण कोई कोई करता है। धारण नहीं करता कि हमको किसी ने बता दिया कि वो आर्य समाज में जाकर के चर्चा करते हैं। बस इतना ही सत्य है। वो कहां-कहां किस-किस से लड़े हैं? कौन-कौन से युद्ध उन्होंने धरातल पर लड़े हैं? कुछ नहीं जानना है। आर्य समाज उनकी क्या पहचान है? आर्य समाज में जाकर के प्रश्न करते हैं। यह उनको बता दिया। उन्होंने मान लिया। उन्होंने बिल्कुल नहीं सोचा कि भाई इससे परे भी कोई सत्य हो सकता है। इसके इस सीमा के बाहर भी कुछ ऐसे तथ्य हो सकते हैं जो मुझे जानने जरूरी हो और उसी पर अपने कमेंटबाजी चालू कर दी। खैर इस पर आते हैं। आप सामने वाले से उसके समक्ष खड़े होकर के सीधे-सीधे बोल रहे हो कि भैया हमें तुम पर विश्वास नहीं है। और एट दी सेम टाइम उससे अपेक्षा कर रहे हो कि तुम हम पर विश्वास कर लो। मैंने कहा ना कि चालाकी तो राजस्थान में भी हो सकती है। तो बोले यहां नहीं होगी। मतलब हम आपके शब्द को प्रमाण मान लें और आप यह दिखाओ कि हम जो है धोखा देंगे। ऐसे नहीं चलेगा ना। यहीं पर धर्म को धारण करने वाली बात आती है। इस इस पर आपको विचार करना चाहिए। खैर ऐसी कोई बात नहीं थी कि हमारे मन में ऐसा कुछ था कि वहां आएंगे तो अब कुछ हो जाएगा और ना ही हमारे मन में कोई ऐसी बात थी कि आप हमारे चैनल पर आएंगे

00:21:30:02 तो हम कोई षड्यंत्र रच देंगे। हमको जब लगता है कि कोई व्यक्ति ऐसा है इस योग्य है जिसके स्थान पर जाया जा सकता है तो हम जाते हैं। वहां फिर हम ये ना भय दिखाते हैं वो चलिए उनकी बात नहीं करेंगे। छोड़िए बाद में कर लेंगे उनकी बात। हम भय नहीं दिखाते कि हम भैया आपके स्थान पर क्यों आए? क्या है क्या नहीं है। सीधे जाते हैं। तो जब ऐसी बात है आपके चैनल पर जाने को भी तैयार। तो यह वहां पर जो यह दिखाया गया कि सामना करने से बचने के लिए इंटरनेट आया तो ऐसा कुछ नहीं है। इंटरनेट पर भी आपके चैनल पर आपके समक्ष उपस्थित होना इसके लिए भी जो है कई लोग मना कर देंगे अगर बराबरी की बात है तो निष्पक्ष जगह आइए। हम तो आपके निसंकोच रूप से हमने आपको कहा कि आपके चैनल पर तो यह इस तरह से प्रदर्शित करना बेकार है। दूसरी बात यह है कि यह जो जाने का आरोप है कि प्रश्न करने के लिए जाते हैं। इसमें जो भूमिका आपके समक्ष हमारी बनाई गई है वो भूमिका गलत तरीके से बनाई गई है। हमारी जानकारी में और इसमें एक आगे तथ्य और आएगा। मस्जिद और चर्च में क्यों नहीं जाते? उस पर हम तभी बात करेंगे। मगर मैं एक मोटी मोटी बात बता दूं कि आपको ऐसा बताया गया है और आपकी जानकारी

00:22:45:13 में ऐसा है कि हमारा उद्देश्य आर्य समाज को नीचा दिखाना है ना नीचा दिखाना हमारा उद्देश्य नहीं है या आर्य समाज को नष्ट कर देना है ना यह उद्देश्य हमारा नहीं है मेरी आत्मा पीड़ित हो चुकी थी अपने सनातन धर्म का अपमान देखतेदे रोया हूं मैं रातरात भर बटे हुए सनातनी एक गली में एक नहीं है। एक गली में 10 घर जाओगे 10 घर बटे हुए हैं। कोई आर्य समाजी कोई ब्रह्मा कुमारी कोई स्कनी है। कोई मूर्ति पूजक है। कोई कबीर वाला है, कोई रामपाली है। कौन जाएगा मंदिर को बचाने? कौन जाएगा स्वामी प्रसाद मौर्या को रोकने? जब वो रामचरितमानस जलाएगा। कौन जाएगा उन निठल्ले लोगों को रोकने? जो मंच पर खड़े होकर के हमारे राम और सीता का मजाक उड़ाएंगे। कौन जाएगा? सब तो बटे हुए हैं। तो जब मैंने अपने जीवन का एक बहुत बड़ा भाग इस तरह से तड़प तड़प करके बिताया है ना उसके बाद बहुत प्रयास करके प्रयत्न करके और भगवत कृपा से भगवान की

00:24:00:14 कृपा से कुछ हथियार प्राप्त किए। वह हथियार हैं गुरु गोविंद और ग्रंथ सार्वभौम सनातन सिद्धांत राम यह सब मेरे हथियार हैं और इनको धारण करने के बाद वो चीजें जो हमें बांट के रख दे रही हैं वो धारणाएं वो विचार जो हमें बांट रहे हैं केवल उन विचारों का शोधन करने के लिए मैं जाता हूं चर्चा करने और जाता रहूंगा वास्तविक चेहरा बाहर लाने के लिए कि जिस सिद्धांत के द्वारा सनातन समाज को बांटा जा रहा है, वह सिद्धांत गलत है। ठीक नहीं है। हां, अगर सनातन धर्म अगर सनातन समाज उन सिद्धांतों के कारण बटे नहीं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। खूब चलाइए ब्रह्मा कुमारी। खूब चलाइए इस खूब चलाइए आर्य समाज। मगर बट रहा है। ब्रह्मा कुमारी वाले को कोई इंटरेस्ट नहीं है उसके घर के पास में जो शिव मंदिर है वहां पर आने का और लड़ने उसके लिए उसके लिए जो है प्रतिकार करने का जब मंदिर पर आक्रमण होगा यह स्थिति है। आर्य समाजी जो सिद्धांतवादी आर्य समाजी उसे कोई दिलचस्पी नहीं रह गई है कि वह जाकर के हमारे मंदिर मठ मंदिरों

00:25:15:22 की रक्षा करें। रामचरितमानस की रक्षा करें क्योंकि उनके मन में तो घुस ही दिया है ना। कि भैया वह रामचरितमानस तो फेक है और वह मंदिर तो मूर्ति पूजा तो अधर्म है। यह सब आपने किया है। आपने अर्थात आर्य समाज ने किया है। अब आप कह दोगे कुछ आर्य समाजी ऐसे होते हैं जो जाते हैं रक्षा करने के लिए। जितने अंश में कोई आर्य समाजी मूर्ति की रक्षा करने के लिए जा रहा है उतने अंश में वह आर्य समाज का विरोधी है। हम जिस प्रकार से कोई मुसलमान जिस प्रकार से कोई मुस्लिम कुरान में आस्था रखने वाला अगर कुछ ऐसी चीजों में इन्वॉल्व होने लगे जिसके लिए कुरान मना कर रही है तो उसके उतने में क्या मानेंगे? कुरान बहुत अच्छी है। हम यह मानेंगे कि उतने अंश में उस व्यक्ति ने कुरान का कुरान की सीमा का उल्लंघन किया है ना। क्या मानेंगे? कुरान का विरोध किया है। बिल्कुल। तो उसी प्रकार से आर्य समाज के जो सिद्धांत आपने दिए हैं जो विरोध भर रहे हैं और आपने ही नहीं ब्रह्मा कुमारी है, स्कॉन है बहुत सारे हो गए। कल्कि वाले हैं। तरह-तरह से वो लोग लोग जो है बट रहे हैं। तो इसलिए हम जाते हैं और हमारा उद्देश्य नष्ट करना नहीं

00:26:30:26 है। खत्म करना नहीं है। हमारा उद्देश्य है जिन धारणाओं को लेकर के बंटवारा हो रहा है वो धारणाएं शोधित हो जाए। वो धारणाएं धीरे-धीरे जो है उनसे ओवरकम किया जाए। या तो उनको लेकर के आप प्रचार मत करिए। अपना धारण कर रहे हैं। ठीक है करिए। मगर जब वह समाज का हिस्सा बन जाएगा तो आप रोक भी नहीं पाएंगे ना उसको। तो यह कारण होता है और इसी में [गला साफ़ करने की आवाज़] अब बढ़ते हुए क्रम में मैं आगे अगला वो ले लूं आपका। जैसे आप फिर वही बात कि पूरी जानकारी आपको दी नहीं गई हमारे बारे में। आपने कहा कि मस्जिद में क्यों नहीं जाते? चर्च में क्यों नहीं जाते? हां। तो मेरे भाई क्या आपको लगता है कि चर्च और मस्जिद में हम लोग जाएंगे और हम जो है इस तरह से वैचारिक क्रांति लाने का प्रयास करेंगे तो वह हमारा वेलकम करने वाले हैं। क्या लगता है आपको? यह जो विधर्मी तंत्र हैं, ये जो विधर्मी तत्व है और एक आपने बहुत अच्छा बीड़ा उठाया हुआ है वामपंथियों से लड़ने का। बिल्कुल अच्छा बीड़ा है जो नास्तिकवाद है इनसे हमारा कोई वैचारिक युद्ध नहीं है। इनसे

00:27:46:21 हमारा व्यवहारिक युद्ध है। वैचारिक युद्ध नहीं है। वैचारिक युद्ध तो शोधन के लिए हो सकता है। हम में और आप में मगर वहां व्यवहारिक युद्ध है। जिनके यहां जाने की आप बात कर रहे हैं। कैसे लडूंगा? कैसे जाऊंगा? ब्रह्मा कुमारी आर्य समाज इस कौन इनको ले जाऊंगा ये जाएंगे मेरे साथ मेरे भाई को तो मुझसे छीन लिया है ना मेरे छोटे भाई को बड़े भाई को मुझसे छीन लिया गया है कैसे लडू उन ताकतों से जो हमारे सनातन धर्म को नष्ट करना चाहती हैं। आपका उद्देश्य बहुत अच्छा है। बहुत अच्छा होगा। सनातन धर्म को बचाना है। वामपंथियों से लड़ना है। कैसे लड़ोगे? हमारे भाइयों को तो हमसे छीन लिया गया ना। तू चल मेरे साथ। लेखराज जी आएंगे। ब्रह्मा जी के शरीर में आएगा परमात्मा। रोज ज्ञान देगा। मुरली सुन चल मेरे साथ। तू चल मेरे साथ। शिव की भक्ति करने वाले अभक्त होते हैं। उनका संग भी नहीं करना चाहिए। उनका चेहरा भी देख लेगा तो वैसा ही है जैसे काफिर है वो। कैसे? एक भाई को छीन लिया गया। ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। जो कहेगा अवतार लेगा वो दुश्मन है।

00:29:03:08 हम जिन पूर्वजों से परंपरा से जो चीजें प्राप्त हुई उनको ही धिक्कारने लगा। वही भाई मेरा वो जो आप यह जो निर्भय की गालियों वाला सीन है निर्भय ने गालियां दी। केरला स्टोरी में जो लड़की अपने माता-पिता पर थूकती है ना निर्भय की गालियां वही थूक है। किसने छीना मेरे भाई को मुझसे? ऐसी विचारधाराओं ने छीना ना हम लगा था कि शोधित होने लगा है और जो है बातें हुई हमारे और उसके बीच में ठीक है मुझे लगा कि इससे शायद अब एक नई किरण मिली है और शायद हम कुछ अच्छा दे पाएंगे समाज को आने वाले समय में मगर क्या हुआ जो भड़काऊ तत्व थे हमारे बीच में एक वो कोई मातृशक्ति आई बाहर से ठीक है। उनसे हमारा किसी और बात को लेकर के विवाद हुआ। आपने तो देखा ही था सनातन शंकर जी किसी और बात को लेकर उस मातृ शक्ति से कुछ वैचारिक विवाद हुआ और उस मातृशक्ति के आने के कारण और यह जो

00:30:18:09 मेरे और निर्भय के बीच में जो थोड़ा बहुत वो एक क्या कहें? भ्रातत्व भाव का निर्माण हुआ था। आग लगा दी उसमें भड़काने वालों ने। पहले उसको प्रश दिया गया उसी के मंच से। मेरे मजाकिया वीडियोस बनाए गए मेरे उसी के मंच से। और जब मैंने इन बातों को लेकर के विरोध जताया। एक छोटे भाई होने के नाते उसने हाथ खड़े कर लिए। तो आग लगाने वाले वो कौन हैं? किन लोगों ने आग लगाई? मेरे भाई को मुझसे किसने छीना?

00:30:52:28 ऐसे बंटवारा करने वाले लोगों ने जो इस प्रकार का बंटवारा करके अपना फायदा ढूंढते हैं। उन्होंने देखा होगा भाई ये निर्भय तो कुछ काम का है ही नहीं। भड़काऊ बातें करनी पड़ेगी। भड़काऊ करो। किसी तरीके से इनका जो ये तालमेल जो बैठा है वो दूर करो। और फिर वो दूर हुआ तो ऐसा हुआ कि अब तो शायद राम ही जाने। खैर कम टू द पॉइंट कहीं और इसमें इसमें निर्भय वाले मैं बता दूं निर्भय काम का तो अभी भी नहीं रहा उसका वीडियो देखा लाइव स्ट्रीम मैंने भी तो तुम्हारे काम का तो वो अभी भी नहीं रहा है लेकिन तुमने भड़का तो दिया ना जहां पर उससे मित्रता की बात हो रही थी और वो सारी चीजें समझ रहा था वो तो वहां पर फूट डाल दी गई है उसके बावजूद भी की कहानी देख के मुझे सौदागर का वो सीन याद आता है जिसमें जब वह पकड़ लिया जाता है ना वहां पर वो ईलू ईलू वाला जो अभिनेता था उसको वह जब राजकुमार के यहां होता है राजू के यहां मतलब जो अमीर वाला मित्र था उसके यहां जब वो होता है और वो पकड़ लिया जाता है तो वो जाते-जाते एक बात कह के जाता है कि आपकी और दादा वीर की महाभारत का सबसे बड़ा शकुनी जो है ना वो यह चुनिया है।

00:32:09:25 तो हमारे बीच में यह मैं देख देख पा रहा हूं। कोई बुद्धिजीवी होगा देख किस तरीके से एक जो आग दोबारा से भड़काई गई। तो मैं दोबारा पॉइंट पर आ जाता हूं कि बैक टू द पॉइंट मेरे भाई को मुझसे छीन लिया गया है। मेरे भाइयों को मुझसे छीना गया है। यह कह करके मूर्ति पूजा अधर्म है। हैं और जो शिव की पूजा करने वाले अभक्त हैं। और इसी तरीके के कुछ डायलॉग इनके यहां है। रामपाल के यहां भी है। वहां पर चलता है वह जगत के लोग और भगत के लोग। जगत वाले हैं हम। रामपाल के यहां पर क्या है मालूम है? हम लोग जगत वाले हैं। और वो लोग जो है संगत वाले हैं। वो लोग संगत वाले हैं। हम लोग भगत वो जगत वाले हैं। ये रामपाल के यहां है। तो सबके यहां पर इस तरीके से इस इस पैमाने पर मेरे भाई को मुझसे छीना गया है। तो व्यवहारिक युद्ध कैसे लडूंगा? किसको साथ में लेकर लडूंगा? तो तब जाकर के मैंने कहा कि मैं अपने भाई को वापस लाऊंगा। मैं जाऊंगा आर्य समाज मैं वहां जाकर बात करूंगा जिस बात को लेकर के अलग हुआ है मेरा भाई उस बारे में बात करूंगा मैं जाऊंगा स्कॉन मैं जाऊंगा ब्रह्मा कुमारी मैं जाऊंगा रामपाल के यहां वहां बात करूंगा वहां पर वैचारिक क्रांति

00:33:25:01 लाऊंगा सार्वभौम सिद्धांतों को ले जाऊंगा कोई नीचा दिखाना मेरा मकसद नहीं है नीचा दिखाना वाला दिखाने वाला जो तत्व आता है वह आता है जब कोई व्यक्ति सामने से व्यक्तिगत कटाक्ष करता है और हम उसको को व्यक्तिगत कटाक्ष करते हैं तब चालू होता है। वह दिखाई देता है। हमारा मंतव्य कभी नहीं रहा। यदि इस तरह के कटाक्ष पूर्ण ऋषि वाचन चैनल से चालू ना किए गए होते तो हम कभी इस तरह के कटाक्ष करने भी नहीं वाले थे। जो कटाक्ष हुए यद्यपि हमने इस बात का ध्यान रखा कभी दयानंद जी के लिए कोई अपमानजनक कोई बात नहीं बोलनी तो नहीं बोलनी है। प्रभुपाद जी के लिए कोई अपमानजनक बात नहीं बोलनी नहीं बोलनी है। सैद्धांतिक विरोध है पर व्यक्तिगत कोई विरोध नहीं। रामायण में भगवान श्री राम ने लक्ष्मण जी को कहा था जब व्यक्ति देह त्याग कर देता है उसके बाद कोई दुश्मनी बाकी नहीं रह जाती और दुश्मनी तो हम में कभी थी नहीं ना हमारे भी तो वैचारिक चीजें हैं ना महाभारत का सिद्धांत हमारी आपस की बात है हम पांच वो 100 कोई बाहर का आ जाए तो 105 तो यह सबसे पहले जान लीजिए कि हम केवल आपके यहां नहीं गए और हमारे जाने का उद्देश्य क्या है और अब रही वो मस्जिद और चर्च वाली वाली बात तो पहली बात तो यह है कि मैं जाऊं

00:34:40:02 क्यों? दूसरी बात ऐसा है छोड़ते किसी को नहीं है। आप देखिए हमारे वीडियोस हैं। अगर कोई जो है इस्लाम को मानने वाला कोई वहां का कोई व्यक्ति हमसे टकराया तो हमने उससे चर्चा की है। आप जाके देखिए। अभी-अभी हमारा लेटेस्ट वीडियो चर्च में जाकर के। आपको अधूरी जानकारियां मिल रही है। आप निर्णय ले रहे हो, वक्तव्य दे रहे हो। ये गलत बात है। धर्म को धारण भी करिए। केवल प्रचार मत करिए। जितना मालूम है उतना धारण कर लीजिए। निर्भय का कहना एक और था। मुझे ज्ञात हुआ। उसने आरोप लगाया कि भैया हमने जो है वो जो उनके साथ जो मातृ शक्ति गई थी निर्भय के साथ तो उसको लेकर के मैंने गलत बोल दिया। और वैसे भाई मैंने गलत नहीं मैंने क्या बोला? क्या बोला मैंने? मैंने जो सामने चीजें हैं वो बोला ज्यों की त्यों। और भाई अगर गलत वो क्या कहते हैं उसको? नरेटिव गलत नैरेटिव तुम खुद बना रहे हो। पहला वीडियो मेरा देखोगे तो उसमें तो उस मातृ शक्ति के बारे में मैंने कोई बात ही नहीं की थी कि भाई मातृ शक्ति बारे में कोई बात नहीं की। जब मैंने निर्भय का वीडियो देख लिया उसमें देखा कि वो मातृशक्ति पूरी तरीके से इनवॉल्व हो रही है। तब उस मातृशक्ति के जो घटक वहां पर मुझे प्राप्त हुए थे। मैंने उससे पूछा था आप बहन

00:35:55:10 है इसकी। तीन चार बार पूछा मगर उन्होंने बात को डायवर्ट किया। बात को घुमाया। जवाब नहीं दिया कि नहीं मैं बहन हूं। तो मैं क्या करूं? यूं ही तुम्हारी बहन घोषित कर दूं उसको और बाद में कुछ और निकली तो वह पाप नहीं है। भाई अगर मैं बहन घोषित कर दूं और बाद में कुछ और निकले तो वो भी तो पाप लगा। हमारे यहां पर ध्यान रखना पड़ता है ना हमें शब्दों की मर्यादा हम आर्य समाजी नहीं ना भाई और दिखावे दिखावे वाले राम के अनुयाई भी नहीं है। हमारी कोशिश होती है कि हम वही बोले जो हम उस पर अग रहे तो इसलिए हमें कुछ ऐसा शब्द चाहिए था ना कि हम क्या बताएं उसको और वो इनवॉल्व तो थी ही तो उसके बारे में फिर बात करना आवश्यक हो गया था। तो यह सारी बातें हैं। तो चर्च में हमारा वीडियो अभी भी देख सकते हैं। अभी-अभी हाल ही का है और आगे भी बहुत सारी चर्चाएं आपको सुनाई देंगी। मुस्लिम्स के साथ हमारी चर्चाएं हो चुकी है काफी आगे भी सुनाई देगी। मगर फिर भी प्राथमिकता इनकी इसलिए नहीं है क्योंकि आपको मैंने बता दिया कि हमारा व्यवहारिक विरोध किससे है और वैचारिक शोधन की दृष्टि से विरोध किससे है। तो इस कारण से हम जाते थे जाते हैं और जाते रहेंगे। हमारा समाज सनातन समाज जब तक बटा रहेगा हम लोग प्रयास करते

00:37:10:16 रहेंगे उसको एक करने का और इस चर्चा में कोई हम बम बारूद ले नहीं जाते हैं ठीक है कि वहां कोई जो है हमें धमाका कर देना है वो आपके समक्ष हमारी भूमिका गलत तरीके से प्रस्तुत की गई तो हम क्या करें केवल अपने लोगों की बात सुनकर के आप निर्णय ले लो यही होता आया है यही होता है ऐसे ही भाई को छीना जाता है भाई से जी तो अभी तक आप जो है कुछ बोलना चाहते तो बोले आप जी [गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़] नहीं बिल्कुल अच्छा एक चीज और भैया आपका एक वीडियो था जिसमें एक वाला था

00:37:50:16 रुक जी का नेट का कुछ इशू है शायद हां रोड पर जो बेच रहा था वाला जो जो वीडियो आज भारत अजीत भारती के टाइम स्टैंप के साथ भेजा है। नहीं अभी मैंने आपका वीडियो नहीं देखा है। ऋषभ जी एक भाई साहब कह रहे हैं मूर्ति पूजा और मूर्त मूर्ति रक्षा में बहुत अंतर है। ये शायद आर्य समाज के पक्ष से कह रहे हैं क्या? भाई देखो सीधी सी बात है जिस चीज के लिए निष्ठा नहीं होगी उस चीज के लिए वह जो युद्ध की भावना दिखाना या वो सब फिर व्यंग मात्र है। जब आपने उसका अपमान ही कर दिया अधर्म है तो कोई व्यक्ति उसका साथ जब दे रहा होगा तो उसमें उसकी प्रायोरिटी यही होगी अंदरूनी रूप से अधर्म है अंतत गतवा वो उस निष्ठा से नहीं लड़ पाएगा उसकी रक्षा के लिए जिस निष्ठा से मैं लडूंगा ठीक है और फिर उद्देश्य यह भी तो होता है उसमें के मूर्ति रक्षा के नाम पर फिर बाद में उपहास भी तो उड़ाओगे बिल्कुल

00:39:06:07 जी आप बोले सनातन शंकर जी जी हां मैं बस यह कह रहा था कि अग्निव्रत जी का जो पूरा वीडियो था उसमें उन्होंने एक तरह से जो संबोधन किया है वो वही जो आम होता है इनका कि पौराणिक है ना और जब भी मैं यह शब्द सुनता हूं तो मुझे ऐसा लगता है जैसे आर्य समाज कहीं ना कहीं यह डिक्लेअ कर रहा है कि जो पौराणिक बोल के कि भाई इनका वेदों से कोई संबंध नहीं है और हम लोग वेदों पर अधिकार रखते हैं। हम ही अधिकृत हैं वेदों पर बोलने के लिए। इसलिए वह एक पौराणिक बोलकर कहीं ना कहीं आम सनातनियों को अलग कर रहे हैं। और दूसरा उन्होंने एक और बात बोली थी बीच में ही। बोला नहीं सनातनी नहीं बोलना चाहिए। वेद ही सनातन है। उन्होंने यह भी कहा था कि इनको सनातनी भी नहीं बोलना चाहिए। तो ये भी एक जो बात है वहां पर हमें विचार करनी चाहिए कि किस तरह से अलग किया जाता है और बाकी जो नहीं खैर आजादी की लड़ाई में जो नहीं वो वो घटक अभी आने वाले हैं वो अगला चरण है आजादी की लड़ाई वाला इसका एक मिनट हां

00:40:20:26 कबीर दास मूर्ति पूजक को मिटाना खैर इतनी बात हो गई और अब उसमें मैंने ये देखा कि जैसे वो खैर हम भी अलंकारी अलंकार समाज तो कहते ही हैं अलंकारी कहते ही हैं और उनको हमारी नजरों में वो वैदिक नहीं है। उनकी नजरों में हम वैदिक नहीं है इसलिए उन्हें हमारे लिए पौराणिक शब्द का उपयोग करना पड़ता है और हमारी नजरों में वो वैदिक नहीं है पूर्णतया और वेदों पर उन्होंने जो है अलंकार रूपी आवरण डाल के रखा है तो एक मिनट

00:41:05:10 वो भी है दूसरा शुरुआत किसने की यहां पर यह पॉइंट भी हमें विचार करना करना चाहिए कि सबसे पहले जो है कटाक्ष रूप में किसने यह बातें बोलना शुरू की थी। तो यह भी पॉइंट है उसमें। अच्छा कन्हैया जी कह रहे हैं लिंक दे दो निजदर्शन जी। आपकी आवाज नहीं आ रही है। आवाज आपकी चली गई शिवास जी। अच्छा अब इसमें एक बात आगे आती है कि अब इनका एक बात थी यह कहना कि भाई आर्य समाज ने क्या-क्या किया है बहुत चीजें गिनाई उसमें उन्होंने कि भाई आर्य समाज ने बहुत सारे क्रांतिकारी दिए हैं और ऐसा हुआ है वैसा हुआ है जिस समय ऐसा था वैसा था यह सब बातें हैं तो इसमें पहली बात आती है कि

00:42:06:07 जब सत्यार्थ प्रकाश में पंडे और पोप बोला जा रहा है परंपरा प्राप्त आचार्यों को मूर्ति पूजा को अधर्म बोला जा रहा है तब आपके लोगों ने या आपने सत्यार्थ प्रकाश छापने छापते टाइम प्रचार करते टाइम यह नहीं सोचा कि इन लोगों ने क्या किया कि क्या-क्या और सुंदर-सुंदर चीजें की है। उसी आप जो कह रहे हो वो तो आप बोल रहे हो इसलिए हम उसको दुर्जनोष न्याय से चलो इस अभी बात करने के लिए रख ले रहे हैं। मगर जिनका आप अपमान कर रहे हो उनके उनकी महिमा का गान तो आपके सत्यार्थ प्रकाश में ही हो रहा है और इधर-उधर जाने की आवश्यकता नहीं है। तो उतने अंश अगर किसी के किसी भी अच्छे कार्य के कारण उसके जो गलत कार्य हैं उनका विरोध नहीं होना चाहिए या उन पर बात ही नहीं होनी चाहिए तो फिर आपने क्या किया है?

00:42:56:16 भाट पौराणिक पोप पंडे सब क्या है क्या आवश्यकता थी इसकी सैद्धांतिक खंडन करते केवल हम ख्नस भरी थी क्या कोई ये सब सोचने वाली बात है कि ये एक बेकार की बात है फिर क्या व्यर्थ है ये व्यर्थ ही तो हो गया ये कि ये कहना कि भाई आर्य समाज ने कितना भाई आप जो जर्मनी से वेद ला रहे हो और उसको भी केरल में जाकर के प्रामाणिक करवा रहे हो। वेद जिनके ऊपर आज आप अपना ताना-बाना स्ट्रक्चर जिनके नाम से आपने खड़ा किया तो वो जो स्ट्रक्चर है वो आपको प्राप्त कैसे हुआ? उसको किसने प्रिजर्व करके रखा? तो तब आपको नहीं सोच ध्यान आया था कि हम पौराणिक को पंडित किसे कह रहे हैं? 1990 के दिनों का मेरे पास वीडियो आया अभी कुछ दिन पहले सड़क पर निकल कर के विरोध कर रहे हैं परंपरा प्राप्त आचार्यों का जुलूस निकाल रहे हैं आर शर्मा जी आजकल बंद हो गया है जुलूस निकल रहा है ये वैचारिक क्रांति अच्छा जो काशी शास्त्रार्थ स्मृति स्थल बनाया हुआ है बड़े दंभ के साथ

00:44:12:07 किसने बनवाया है और किसके साथ उसमें वैचारिक युद्ध दिखाया है मुसलमानों के साथ क्रिश्चियन के साथ ना वो जो एक शास्त्रार्थ हुआ था जिसमें दयानंद जी हार गए थे हारने के बाद अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे जिसके उपलक्ष में उन्होंने बाद में पर्चे छपवाना शुरू किए न्यूज़ में अपनी बातें डलवाना शुरू की अपने मन की और फिर बाद में जो है जहां सबसे बड़ी हार हुई थी वहीं पर जो है सबसे बड़ी जीत का एक स्मारक इसी तरीके से बनवा लिया बनवाया तो बनवाया यहां तो आपकी बात ही खंडित हो रही है किन के विरोध में जो आपको वेद प्रिजर्व करके दे रहे हैं किन के विरोध जिन्होंने अपने समय में सबने एक से बढ़कर एक बड़े क्रांतिकारी कार्य किए हैं और आज भी कर रहे हैं। राम मंदिर का सबसे बड़ा एक युद्ध माना जाता है हमारे देश में चलने वाला। किसने लड़ा है? आर्य समाज ने लड़ा है क्या? राम मंदिर का युद्ध। वहां जाकर के श्रेय तो सबने लिया है। लड़ा किसने?

00:45:13:10 तो यह सब बातें फिर व्यर्थ की हो जाती हैं। इस तरह की बातें करना कि भैया जो है उनकी अच्छाइयां भी तो हैं। दूसरी बात हम कोई आपका शटर बंद करने की बात नहीं कर रहे हैं। आप बिल्कुल गायब ही हो जाओ। अस्तित्व ही खत्म हो जाए। हम तो उन बातों पर बात कर रहे हैं जिन बातों के कारण समाज में बंटवारा हो रहा है। बंटवारा नहीं होगा हमें कोई मतलब नहीं है। आप अपने घर अच्छे हम अपने घर अच्छे हैं। होली दिवाली पर राम राम श्याम श्याम भी करिए। अभी भी करते हैं। मगर वह बंटवारा हो रहा है। हम बट रहे हैं। और यह खतरे की घंटी है। जब हम हाथी बन के बैठेंगे, इकट्ठा होकर के बैठेंगे, किसी माई के लाल में हिम्मत नहीं होगी हमारे खिलाफ बोलने की। क्यों बोल पा रहा है व्यक्ति? क्यों स्वतंत्र है? क्योंकि हम एकजुट नहीं है। एकजुट क्यों नहीं है? क्योंकि आप हमारा विरोध करना शुरू किए हो ना। हमने थोड़ी ना आपका विरोध शुरू किया। आपका तो अस्तित्व ही नहीं था। आपने खुद कहा आर्य समाज नहीं था। तो यह वाली बात है। दूसरी बात फिर यह कहते हैं कि आगे बढ़ते हैं, कहते हैं हमने यह क्रांतिकारी दिए, वो क्रांतिकारी दिए। तो पहली बात तो ये जो क्रांतिकारियों का श्रेय लिया जाता है इस श्रेय में भी बहुत सारा विवाद है। जितने क्रांतिकारियों का नाम लेंगे

00:46:28:16 उन सब की बात अगर की जाएगी तो उसमें से कई ऐसे क्रांतिकारी निकलेंगे जो एक सामान्य हिंदू मात्र थे। उन्होंने अभी डिसाइड ही नहीं किया था कि ईश्वर साकार है कि निराकार है कि मूर्ति पूजा अधर्म में है कि नहीं है। ठीक है? ये कह सकते हो कि किसी ने उस समय उनके समकालीन जो है अभी भी दुर्जंत ने ऐसे मान लेता हूं कि दयानंद जी ने कुछ ऐसी बातें कही जिससे प्रभावित हो गया। ठीक है? बहुत से लोग हो सकते हैं किसी से भी। मगर क्या दयानंद जी को स्वीकार कर लिया था? आर्य समाझी हो गए थे। जो उनके सिद्धांत है मोटे मोटे उनको जान करके मान लिया था। तो ऐसे आधे से ज्यादा जिनके आप नाम लेंगे वो पता चलेगा। उनको ये सब मालूम ही नहीं था आप क्या सोचते हैं क्या नहीं सोचते हैं। और दूसरी बात कि आप जितने भी नाम ले लो जितने भी 100 ले लोगे 500 ले लोगे 1000 ले लोगे। क्या केवल उन 1000 लोगों ने आजादी दिलवाई है? उस समय भी उन 1000 लोगों के अलावा जितने लोग बचते हैं जो आर्य समाजी नहीं थे वह कौन थे? मूर्ति पूजक थे जिन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी। यह तो मैं अभी आपकी बात को रख के बात कर रहा हूं। तब की बात है तर्कपूर्ण।

00:47:44:00 आप 10 नाम गिनाओगे, 20 नाम गिनाओगे, जो बच जाएंगे, वह क्रांतिकारी कौन सिद्धू है? जो आर्य समाजी नहीं था, मूर्ति पूजक था। यह सब तो थे ही नहीं। तब छुटैया लोग [हंसी] जो कालांतर में उद्भाषित हुए सब तो थे ही नहीं। तो सनातन धर्म के नाम से प्रचार करने वाली जो इकाइयां थी उनमें जो है आर्य समाज जो है उसके बाहर जो था वह सब मूर्ति पूजक थे। वर्णाश्रमी थे। यानी कहीं ना कहीं अपने परंपरा प्राप्त सिद्धांतों से जुड़े हुए थे। तो यह एक बहुत बड़ा भ्रम है कि आर्य समाज ने ही केवल स्वतंत्रता संग्राम लड़ने वाले क्रांतिकारी दिए। अच्छा दूसरी बात जैसे आपने पीछे भी कहा कि आर्य समाज की अच्छाइयां देखो क्या शंकराचार्य की अच्छाइयां नहीं है बौद्धों से जीत के सनातन धर्म की स्थापना करते हुए आपको वैदिक धर्म प्रदान किया वो शंकराचार्य की अच्छाई नहीं है फिर क्यों कहा अपने खून की होली खेल के जो लोग आकर को आकर के आपका वैदिक वांगमय आपको पकड़ा रहे हैं उनका अपमान क्यों सैद्धांतिक लड़ाई लड़ते हम तो सैद्धांतिक लड़ाई लड़ रहे हैं आज भी हमने तो व्यक्तिगत अपमान किया ही नहीं है। उसका किया जो सामने से आगे कर रहा है। हमने कभी नहीं किया दयानंद जी का जो है अपमान

00:49:00:14 व्यक्तिगत रूप से सैद्धांतिक विरोध जरूर किया। सैद्धांतिक कटाक्ष किए मगर कभी कोई अगर करता है तो उसको रोकते हैं। भागवतानंद ने दयानंद इनके लिए तू तड़ाक कहा था। दयानंद करके। दयानंद जी नहीं लगाया था। भागवतानंद इस तरह से बात कर रहा था तू तड़ाक करके। और इस मामले में मुझे भागवतानंद ठीक नहीं लगता। उसकी जो शैली है अमर्यादित शैली है। गुदा द्वार ये वो सब बातें कर देगा। सबसे जोड़ के सब तरह की बातें वो बोल देगा क्योंकि उसको जो है मसालेदार वीडियोस बनाने होते हैं। मगर वो यह भूल जाता है कि यदि वो स्वयं को आचार्य कह रहा है और आजकल तो जगत गुरु भी बन गए हैं। [हंसी] तो वो किस रूप में सनातन धर्म को प्रस्तुत कर रहा है समाज के समक्ष।

00:49:46:09 सब बातें कर देगा वो। प्रचार शैली जो है हर समाज की ले रखी है उन्होंने भी। अरे वो और भी ज्यादा दो कदम आगे वाली है। खैर तो मुद्दे पे आ जाते हैं। तो ये जो बुद्ध से जीत के वैदिक वांगमय आप तक कौन लाया? वही ना जिनका आप सड़कों में निकल के विरोध कर रहे थे। अच्छा और बाद में आ जाइए क्या शंकराचार्य परंपरा रामानुजाचार्य परंपरा अपने अपने समय पर सबने लोहा नहीं लिया नास्तिकों से विधर्मियों से सब सबने अपनेप जगह अपनीपनी जगह पर बहुत लड़ाईयां लड़ी है और आप आप शायद जानते होंगे क्योंकि मुझे लग रहा है कि आप मर्मज्ञ हो इतिहास इत्यादि के तो जानकर अनजान बन रहे हो तो ये गलत है धर्म को धारण करें ना पहले ये बात हो गई दूसरी बात यदि नहीं जानते तो बिना जाने आपको कहना नहीं चाहिए। तो जो आरोप अब आप हम पर लगा रहे हैं वह सबसे पहले तो उन बातों से आपका ही विरोध हो रहा है। यह विचारणीय है। अब आगे एक बात आती है हरिहर बुक्का को किसने खड़ा किया? मुसलमानों

00:51:02:00 के ही विरोध में ले लें जो मुगल साम्राज्य स्थापित हो रहा था। अब हरिहर बुक्का को किसने स्थापित किया? देश का जो सबसे स्वर्णिम इतिहास माना जाता है राजा कृष्णदेव राय अभी भी वहां पर जो हम्पी है वहां पर वो जो है उसको जो है विश्व धरोहर में गिना जाता है हम्पी पूरे विश्व की मार्केट वहां लगती थी हम्पी में राजा कृष्ण देवराय सबसे सुनहरा पीरियड माना जाता है वह एंपायर किसने खड़ा करवाया था विद्या स्वामी और आचार्य सायण के शिष्य थे हरियर बुक्का खड़े हुए उनहीं के क्रम में आगे चलकर के राजा कृष्ण देवराय वहां पर छत्रपति शिवाजी मूर्ति पूजक समर्थ रामदास जी के समर्थ रामदास जी के शिष्य थे बिल्कुल महाराणा प्रताप मूर्ति पूजक इन सबका बलिदान आपको ध्यान नहीं आता केवल एक आर्य समाज नहीं वो 101 आपके पास जो नाम है जो विवादित बस वही है अच्छा दूसरी बात यह है आपका एक कहना और था कि भाई उस समय अगर आर्य समाज था ही नहीं तो तब की बात क्यों करो अरे भैया इसमें दो बातें निकल के आई। इन्होंने कहा उस समय आर्य समाज था ही नहीं और एक तरफ कहते हैं कि हमारी बातें जो है वह परंपरा जो है जैमिनी

00:52:17:08 से आ रही है। इस समय इसका मतलब आर्य समाज के सिद्धांतों की पोषित करने वाला व्यक्ति था ना उस समय भी क्या कर रहा था? क्यों ना बात की जाए फिर उस समय और तुम आप खुद कह रहे हो कि उस समय था ही नहीं। यार समाज तो परंपरा टूटी है। इसका मतलब अपना है सब कुछ। कुछ वैदिक वांगमय का अर्थ जो कर रहे हो ये वाली बात भी आ गई और अगर आप थे नहीं और उस समय हमने कुछ किया है तो हम उसको बताएं ना उसको मत बताओ वो बताओ जो आर्य समाज के क्रिएशन के बाद का है बस हां अच्छा चलिए आर्य समाज के बाद की लड़ाईयां राम सेतु के लिए आप लड़े हैं क्या राम मंदिर के लिए आप लड़े हैं क्या हां वैदिक मैथमेटिक्स पूरे विश्व में किसने फैलाई है?

00:53:11:03 तो आप यह क्यों सोच रहे हो कि आप ही ने सब कुछ किया है। हमने तो नहीं कहा कि हमने ये किया है। हम तब यह कह रहे हैं जब आप यह कह रहे हैं कि हमने ये किया इसलिए हमें हमारे चीजों पर प्रश्न मत उठाओ। ऐसा नहीं होता है। दमयंती जो थी नल की पत्नी उसको जो अजगर था वो निगल जाने वाला था। एक शिकारी ने आकर के दमयंती के प्राणों की रक्षा की थी और प्राणों की रक्षा करने के बाद शिकारी की कुदृष्टि हो गई दमयंती पर अब दमंती क्या करें अरे शिकारी ने तो बहुत अच्छे काम किए हैं मेरे प्राणों की रक्षा की करने दो जो कर रहा है ये करना चाहिए नहीं श्राप देकर के प्राण हर लिए दमयंती के तो जितने अंश में आपके अच्छे कार्य बहुत प्रशंसा अभिनंदन है स्वागत है हम साथ भी हैं। मगर जितने अंश में आपके कार्यों से हमें बाधा आएगी, समाज में अव्यवस्था फैलेगी। हां, समाज के मंदिरों में देखिए क्या हो रहा है। ₹5100 ले ले के किसी से भी ब्याह हो सकता है। किसी का भी धरातल की सच्चाई यही है। कितना भी उससे मुंह फेर लीजिए। आर्य समाज मैरिज बन के बैठ गया है। देखिए आप अपने निर्भय आर का ही वीडियो उसने

00:54:26:09 खुद स्वीकारा है। यह धरातल की सच्चाई है। हम तो नहीं करवाते। हमारे आचार्य तो कह देते क्या कुत्ता बिल नहीं है क्या जो अपने मन से शादी करेंगे? ऐसे कह देते हैं। तो इन सब बातों पर विचार होना चाहिए और यह कहना गलत है कि केवल आर्य समाज ने ही किया। वर्तमान में भी लड़ाई जो है बहुत वायसराय आने वाले थे कौन सा पता नहीं कौन विदेशी वायसराय शंकराचार्य से कहा गया हम शंकराचार्य से बोला गया कि भैया जो है आप घोषणा कर दीजिए कि वायसराय जो आ रहे हैं उनका स्वागत वैसे ही होना चाहिए जैसे जो है किसी अवतार का स्वागत होता है। किसी अवतार का जिस तरह से स्वागत होता है हमारे यहां उस तरह से वायसराय का स्वागत होना चाहिए। तत्कालीन शंकराचार्य ने मना कर दिया। एक साल तक कारावास में रहे। अंग्रेजों के राज्य में यह विरोध नहीं है। अरे भैया जो धर्माचार्य हैं उनका सबसे बड़ा जो कार्य है ना महत्वपूर्ण वो धर्म को

00:55:41:13 धर्म को बचा के रखे रहना कि कोई अच्छा समय आ जाएगा तब जो है कर लेंगे जो करना होगा। सबसे जो जरूरी कार्य है ना धर्माचार्य का दायित्व सिद्धांत को बचा के रख लो भाई। असतो मा सद्गमया तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्यु मृतमया इसको बचा लो नहीं तो सारी मर्यादाएं कलंकित हो जाएंगी ये लुप्त हो गया तो नास्तिकता जीत जाएगी ये लुप्त हो गया तो हम उसके बाहर जाकर के भी धरातल पर विरोध कर रहे हैं। शासन प्रशासन से टकरा रहे हैं। विपरीत परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं। ये सब उनका काम नहीं है। वशिष्ठ जी क्या रावण से लड़ने जाते थे क्या युद्ध राम जी को भेजा था धर्माचार्य के कार्य नहीं है मगर वो गए विपरीत परिस्थितियों पर भी उतरे और आप कह रहे हैं कि भैया आप ही ने सब कुछ किया है ये सब विचारणीय है ऐसी चीजों को कहने से बचे जो सिद्ध ना हो पाए और तर्कपूर्ण भी नहीं है तो यह सारी बातें थी अभी तक जो इससे फिर आगे का पार्ट अलग है। आप अपने अपने पक्ष को रखें। जी सनातन शंकर जी स्वागत

00:56:56:24 है पंडित जी बड़े दिनों बाद। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम पंडित जी। कैसे हैं आप लोग? मैं तो बहुत मैं तो बस देख रहा था आप लोगों का लाइव। मेरी अभी ऑफर्स की कॉल खत्म हुई थी तो मैं सोचा कि अच्छा टॉपिक तो बहुत अच्छा है। वैसे आपका तो जिज्ञासा जो है वो समाधान उनका मिला कि नहीं दर्शकों को? भाई प्रयास तो किया है मैंने। [हंसी] आगे महादेव की इच्छा हम क्या है ना हम दम भी नहीं है ताल नहीं ठोकते हम कर्मन्यवादी कारस मा फलसु कदाचना केवल इसका प्रचार नहीं करते खून में है ये हमारे प्रचार नहीं करते केवल जी जी सुना शंकर जी आवाज मेरी ठीक आ रही है ना हां कुछ बोलना है तो बोल बताइए नहीं नहीं मैं बस आप लोगों को अभी सुनने आया हूं जी जी जी जी अच्छा शणाचार्य जी का भी उपहास उड़ाया उन्होंने अपने उस वीडियो में और शनाचार्य जी के भाष को लेकर उन्होंने बस वो बलि को लेकर और जो ये कहा कि वहां बहुत अश्लीलता ये सारी सैद्धांतिक बातें हैं हम लोग इनमें अभी सैद्धांतिक वो खंडन मंडन अभी नहीं करेंगे जो व्यवहारिक जो उनके आरोप थे ना सैद्धांतिक

00:58:11:25 खंडन मंडन ईश्वर साकार निराकार बलि ये वो सब जो चीजें हैं और वो एक अलग पक्ष हो जाएगा तो तो हम लोग जो है आज जो बात कर रहे हैं जो व्यवहारिक आक्षेप और वो चल रहा है ना ग्रंथ जो वो वाली बात है ना वेद का अर्थ उनका सही कि हमारा सही हम इस बात को छोड़ते हुए बस जो उन्होंने बात तो सही है वो तो है ही है चर्चा का विषय जी हम बाकी ये एक और चीज उन्होंने कही है इसमें एक चीज आप एक चीज आप सही कह रहे हैं इसमें एक चीज आपने सही कह रहे हैं जिस वीडियो में वो स्वयं ये कह रहे हैं एक हो जाओ जिस वीडियो में वो स्वयं ये कह रहे हैं कि इतने अच्छे-अच्छे काम किए ये नहीं दिखते आपको। तो भाई आपने क्या आंखों पर कौन सा ऐसा चश्मा लगाया? आप तो वैदिक फिजिक्स वाले हैं। पूरा इतना बड़ा एंपायर खड़ा हुआ है आपका। तो आपके यहां पर ऐसे कौन से डिजिटल चश्मे हैं जो आपको ये सब सत्यता देखने से रोक रहे हैं कि शंकराचार्य क्या कर रहे हैं? या वैष्णवाचार्य क्या कर रहे हैं? फिर तो यह तो गलत बात है। अच्छा हम इस तरह का आरोप लगाते ही नहीं कभी कि आर्य समाज ने जो है कुछ किया ही नहीं है। ये कभी आरोप लगाया? नहीं नहीं हमने तो ऐसा कुछ नहीं हमारा बस सिद्धांतिक ही होता है कि भाई टू द पॉइंट

00:59:26:26 इधर उधर की बात टू द पॉइंट हां बस बस व्यक्तिगत आक्षेप भी नहीं लगाते। अपन किसी व्यक्ति के ऊपर क्या है कि वो भी नहीं हम लगाते। है ना? इसने उसको हरा दिया। एक कोई प्रश्न पूछने गया कहता है जी मैं तो शंकराचार्यों को हरा दिया। प्रश्न पूछने से ही शंकराचार्यों को मतलब उसने हारा हुआ मान लिया। ऐसी चीजें तो हम नहीं करते हैं। अब उसके खुद के लोगों ने नहीं माना है। हम क्यों नहीं माना है? मान लिया होता तो अग्निवत जी का फोन कैसे आ जाता मेरे पास? अग्निव्रत इनको भी तो पीछे से काफी फोन कर रहे हैं ना। वो उन्होंने खुद ही लिखा है कि भ मेरे को काफी लोगों ने बताया कि शिवश जी तो ऐसे हैं। नहीं उस मामले से वह जनता संतुष्ट नहीं थी आर्य समाजी जनता इतना तो सिद्ध हो ही गया ना क्योंकि आर्य समाज जनता संतुष्ट नहीं थी तभी तो इन तक मेरी बात पहुंची कि भैया इसको आप उत्तर दो या इनको लगा उत्तर देना चाहिए इतना तो जी ये पॉइंट तो है कि इनके इनको आना पड़ा सामने ये भी बात है जी या फिर आपकी जो चर्चाएं हुए हैं। उससे यह इनको मतलब मजबूर हो गए ये बिल्कुल कि अब तो हमें

01:00:41:27 आना ही पड़ेगा। जी जी बोले बोले सिंह जी हां कन्हैया जी को [गला साफ़ करने की आवाज़] सुने क्या कन्हैया जी भी जुड़ गए हैं। हां ये काफी देर से कह रहे थे लिंक दो। मैंने इनको लिंक भी दिया था। जी कन्हैया जी जय श्री राम। स्वागत है। मेरा चेहरा ब्लर आ रहा है। साफ आ रहा है। मुझे लग रहा है ब्लर आ रहा है ना मेरा चेहरा। सही आ रहा है। साफ है। साफ है। साफ है। जी बोल। जी कन्हैया जी। चेहरे पे आज वो वो तेज नहीं है आपके। [हंसी] [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] नहीं तेज है। कैमरे ने ही कुछ किया होगा। ब्लर हां वही वही ब्लर इनका वो पीछे पीछे का वो ब्लर आता है सर बैकग्राउंड हां बैकग्राउंड तो ब्लर हो सकता है बैकग्राउंड तो ब्लर आता ही है इसमें कोई समस्या नहीं है हम वो भी फोकस कर रहा होगा ना कैमरा ये हट गया है वहां सर तो सब्जेक्ट हट गया है तो कैमरा फोकस नहीं कर पा रहा होगा हां कन्हैया जी बोलिए आप बोलिए बात बताइए अपनी हां मैं ये कह रहा हूं कि जो आपकी चर्चा होने वाली है अग्निवस्टिक जी से अंतत आपको सिर्फ निराशा ही मिलेगी कुछ नहीं मिलेगा आपको अच्छा अच्छा आपने पहले ही भविष्यवाणी कर दी। क्यों? मैं आपको

01:01:56:28 बता रहा हूं ना। हां मैं आपको बताता हूं। अभी देखो मेरा एक निवेदन है कन्हैया जी पांच मिनट का टाइम आप मुझे दीजिए। तब तक आप मेरे विषय से संबंधित ना बोले। मैं जरा इसको ब्लर है जो कर लूं तब तक आप कुछ और विषय जो आपका है वो आप रख लीजिए। कन्हैया जी मैं आपको देता हूं पॉइंट। मैं उसमें इन्वॉल्व हो पाऊंगा ना। आप जो बात करेंगे उसमें इन्वॉल्व हो पाऊंगा। जी जी जी अच्छा कन्हैया जी जो इन्होंने सत्यार्थ प्रकाश में जो मिलावट तो मानी है नेस्टिक जी ने अपने उस वीडियो में उन्होंने खुद ही कहा है कि इन्होंने क्या किया इन्होंने एक वीडियो बनाई थी कौन करेगा वेदों का सही भाष्य अच्छा हां तो इसका मतलब आर्य समाजियों का भाष्य ठीक नहीं है ये स्वयं मानते हैं भाई हम तो नहीं कह रहे ना इस चीज को हम नहीं इन्होंने कौन करेगा सही भाष इन्होंने वो एक पुस्तक लिखी थी ना उभरते प्रश्न गरजते उत्तर ऐसा कुछ था वो मैंने तो मैंने भेजी आपको भेजी तो थी आपको मैंने हां आप ही ने भेजी थी तो उसमें अच्छा इन्होंने क्या किया प्रकाश में जो चीजें नहीं आ पाई उनको उन्होंने वहां पर एक्सप्लेन किया है उन्होंने

01:03:10:26 तो मैं बस ये यहां पर अभी सोच रहा था कि शिवा जी कह रहे थे कि इनको ऐसी चीजें करनी चाहिए जिससे आपसी बने तो भैया आप उभरते प्रश्न गरजते उत्तर जो है हमारे जो बाकी शास्त्र के विषय में क्यों नहीं जब हमारे शास्त्रों के आक्षेप लगते हैं नकार क्यों देते हो वहां पर क्यों नहीं कहते हो कि भैया इनके भी हम गरजते उत्तर देंगे तो ये प्रश्न भी मेरे मन में आया जब मैंने इनको वो वीडियो देखा के आज हम भी तो उत्तर दे पा रहे हैं अगर कोई आक्षेप लगाता है तो हम उसको गरज कर उत्तर दे रहे हैं तो आप क्यों नहीं उसमें आते हो आप पीछे क्यों हट जाते हो उसको प्रक्षेपित मानकर क्यों पीछे हटने का जो आप इशारा करते हैं यह भी आपको नहीं करना चाहिए जबकि प्रश्न के उत्तर ऐसा नहीं है कि नहीं है जितने भी आक्षेप लगते हैं सब प्रश्नों के उत्तर हम देते ही हैं अपने माध्यम से जिस तरह से हम दे सकते हैं। चाहे वह जातिवाद का जो है आरोप हो, है ना? या शास्त्रों में जो ऐसी बातें आती हैं जिन जिनकी व्याख्या जो है हमारे आचार्य करते हैं। वो व्याख्या को ना मानकर अपनी अलग व्याख्या देना या उसको बिल्कुल नकार देना। तो वहां पर हमारे आचार्यों के द्वारा दी

01:04:26:00 हुई व्याख्या जो है वो हमें तो समझ में आती है। है ना? तो यह भी वहां पर बात है कि सत्यार्थ प्रकाश के ऊपर उठते हैं जब सवाल तब तो गरजते उत्तर दिए जाते हैं लेकिन बाकी चीजों पर गरजते उत्तर ना देकर उसको प्रक्षेपित बोल दिया जाता है यह नहीं करना आप सभी लोगों सभी लोगों को आप सभी लोगों को शायद एक इनकी प्रतिज्ञा याद नहीं है इन्होंने एक प्रतिज्ञा भी दी थी आपको पता है शायद कभी शायद कभी सुनी हो इनकी एक प्रतिज्ञा थी एक सार्वभौम प्रतिज्ञा थी इनकी पूरे विश्व स्तर पर उन्होंने ये कहा था कि मैं ईश्वर की सिद्धि कर दूंगा इतने समय तक। मुझे पूरा तरह से याद नहीं है क्योंकि एक्सैक्ट मैं नहीं बता पाऊंगा लेकिन शायद कुछ ऐसा ही ऐसा ही था कि मैं इतने समय तक ईश्वर की सिद्धि नहीं कर पाया या कुछ ऐसा कुछ ऐसा मैटर था तो मैं अपने प्राण त्याग दूंगा। ऐसा इन्होंने बोला था। अग्निव्रत जी ने हां हां मुझे नहीं पता टॉपिक क्या था लेकिन था कुछ ऐसा ही वो इधर दिखाओ हां शुरू में शुरू में जब ये नए-नए YouTube पे ज्ञापित हुए थे तब इन्होंने कुछ लेकर बिग बैंग को लेकर मैंने उनके कुछ वीडियो देखे थे हां हां कुछ तो ये मतलब हमेशा मरने

01:05:41:13 मारने की बातें क्यों करते हैं मुझे समझ नहीं आई मैंने तो हनुमान जी के लिए भी तो ये बात बोल दी थी ना कि हनुमान जी उठते हैं वो तो स्वीकार ते हैं शायद इस बात को और उनके ही ग्रुप में जो आदि जो उनके उनके जो है फ्रेंड्स उन्हें स्वीकारते हैं तो ये हां बहुत इस पर इस पर बहुत विरोध हुआ था। बहुत विरोध हुआ था इस चीज पर। हां। बहुत विरोध हुआ था। अग्निव्रत नष्टिक जी का बहुत विरोध हुआ था। इवन इवन मैं अपने बारे में भी बताना चाहता हूं आपको जब मैंने इनका एक वो वाला पढ़ा था ना मैंने इन्होंने सृष्टि कर्म रचना वगैरह इत्यादि सब किए थे तो मैं भी इनको बहुत सुनता था पहले बहुत मुझे कुछ बातें अच्छी लगती थी इनकी तो उस समय मेरे को मतलब ऐसा लगता था कि मतलब कुछ बातें लगता है कि शायद ये ठीक कह रहे हैं लेकिन जब बाद में मैंने जब उन्ही ग्रंथों को पढ़ के देखा तो उसमें ऐसा कुछ है ही नहीं समस्या वो निकली मेरे को मैंने कहा कि ग्रंथों को अपने हिसाब से मोल्ड करके बताना उस समय मैं संस्कृत थोड़ी कम जानता था मैं तो उनके मैं अर्थ जो करता था उतना कर नहीं पाता था मैं तो जब जब से मैंने संस्कृत जाना थोड़ा सीखा मैंने और फिर मैंने ग्रंथों में चेक किया तो मुझे वो ऐसा कोई डिफरेंस मिला ही नहीं जो बोलते थे तो मैंने अपने मन से तो कोई व्यक्ति कुछ भी बोल सकता है ना फिर सबसे ज्यादा मुझे थोड़ा गलत लगा ये कि

01:06:56:16 जो अपने मन से जो व्याख्या होती है वो गलत लगी मेरे को तो अब [गला साफ़ करने की आवाज़] दूसरी चीज दूसरी चीज शिव जी मैं आपसे ये कहना चाह रहा हूं कि अभी आपने कहा था ना कि जैसे इनका स्वभाव जो है थोड़ा सौभा भाद्र था या मतलब मीठा था। तो मैं आपको एक चीज बताना चाहता हूं कि हम जैसे कि एक वर्ग ऐसा है समाज में जो बहुत कटुता है। इसमें एक वर्ग ऐसा है जो बहुत मीठा है। तो आप ये मान के चलिए चलिए कि एक ज्यादा तीखा खाने वाले को बीपी हो जाता है और ज्यादा शुगर खाने वाले को ज्यादा मीठा खाने वाले को शुगर हो जाता है। लेकिन अल्टीमेटली होनी बीमारी ही है। [हंसी] समझे ना? तो मैं नहीं मानता कि देखो कि आपको कुछ भी हासिल होगा इन लोग इस आचार्य अग्निवर नेक्स्ट जी से मैं भी इनसे पहले प्रभावित था लेकिन बाद में जब मैंने जैसे जैसे जैसे जैसे हुआ तो फिर मेरा फिर इनसे मुंह भंग हो गया पहले मैं सुनता था वो वीडियो सुनता था मैं इनकी खैर मैं मैं इसमें एक बात ये कहना चाहूंगा कि देखिए बहुत अच्छा एक्सपीरियंस उनके लोगों का भी हमारे साथ नहीं रहा होगा भाई देखिए वो बाद की बात है कि हम दोनों में से सही कौन है ये तो अब अब चर्चा का विषय है ना चर्चा होने वाली है मगर वो बहुत अच्छा एक्सपीरियंस उनका भी मेरे साथ नहीं रहा होगा और जाहिर सी

01:08:11:20 बात है कि हमारा भी हमारे लोगों का भी कैसे रहेगा उनके साथ अच्छा एक्सपीरियंस इसीलिए तो हम लोग हम लोगों के बीच में कुछ दूरियां है वैचारिक दूरियां वो तो एक अलग विषय है पर आज उस पक्ष में कि भाई नैस्टिक जी का वो एक जो व्यक्तिगत समीक्षा केवल उस वीडियो को लेकर के जो बात है जो उस वीडियो में हमने देखा तो उसको लेकर के हम लोग बात करने बैठे थे अब वो पुराना उनका रिव्यु लेना फिर वही वाली बात हो जाएगी जो उन्होंने हमारे बारे में लिख दिया कह दिया वही वाली बात जो है देंगे मैं तो मैं तो शिवशी एक्सपीरियंस बता रहा हूं ना अपना खुद का मैं मैं ये नहीं कहता किसी का ये मेरा खुद का एक्सपीरियंस है मैं ये नहीं कहता किसी और का कैसा एक्सपीरियंस है मेरा खुद का रहा है एक एक्सपीरियंस मेरी एक आध बार चर्चा भी हुई है इनसे ऐसा नहीं है कि फोन पे चर्चा भी हुई है टेलीफोनिक चर्चा भी इनसे मेरी खुद पर्सनल इनसे ही चर्चा हुई है अच्छा ऐसा नहीं है लेकिन प्रॉब्लम ये है कि भाई भाई अल्टीमेटली आपको मिलना कुछ नहीं है। मैं ये कहना चाह रहा हूं जैसे मैंने नहीं बताया नहीं तो हम बहुत पहले इनसे संपर्क कर चुके होते। आपका कभी मौका मिला ही नहीं ना। हां उस तरह का वो ध्यान में नहीं आया। कभी नहीं आया। आप जब मैंने आपको देखा कि आपकी चर्चा इनसे होने वाली

01:09:26:24 है। तब मुझे आया मैंने आपको मिलना कुछ नहीं है। कुछ नहीं मिलना आपको। कर्मवादी कारसुदा। अरे वो तो देखते हैं कि अब क्या होता है वो तो तब का तभी पता लगेगा। देखिए ऐसा है ना कि ऐसा है कि जिस युद्ध में पहले से ही हमें यह परिणाम प्राप्त हो जाए कि हम ही जीतेंगे वो युद्ध युद्ध कैसा हालांकि ये युद्ध नहीं है मगर एक बात कह रहा हूं उदाहरणार्थ जिसमें आपकी जो चीज करने जा रहे उद्देश्य प्राप्ति होगी ही वो सुनिश्चित हो जाए वो युद्ध युद्ध कैसा उसमें तो आपका मोरल वैसे ही मान लीजिए आपको किसी चमत्कार के द्वारा बता दिया कि यह देख तू जीतेगा भाई इस काम में तुझे यहां सफलता प्राप्त हो जाएगी तो फिर उसमें संघर्ष का लेवल कितना डाउन हो जाएगा व्यक्ति केवल हाथ हिलाएगा उसको मालूम है कि भाई मैं तो जीतने ही वाला हूं तो क्या होगा हमारा उद्देश्य तो यह रहता है इस प्रकार की चर्चाओं से ऐसा कुछ नहीं रहता है कि सामने वाला जो है पराजित घोषित हो जाए या वो स्वयं स्वीकार कर ले कि मैं आज ही आर्य समाज को छोड़ रहा हूं वो तो अलग बात है मगर जब सामान्य जन इस वार्ता को देखते हैं तो उनके

01:10:42:09 बुद्धि में कुछ आता है। वो कुछ ग्रहण करते हैं और उससे शोधन होता है। ये हमारा देखो मैं बता रहा हूं आपको। मैं मैं एक्सपीरियंस बता रहा हूं। देखो आपको बता रहा हूं। मैं क्या अल्टीमेटली मैं बता देता हूं। आपको परिणाम बता देता हूं मैं। अल्टीमेटली आचार्य अग्निवत नष्टिक जी को सिर्फ बुराई मिलने वाली है और कुछ नहीं मिलने वाला। इसके बाद में मैं बता रहा हूं आपको। मैंने पहले ही बता दिया। मिलने वाली है। मैं बता उनका जो विरोध करेंगे उनके पक्ष वाले विरोध करेंगे वो तो वो तो मैं आपको बता दूं कि जैसे मैं आपको बताऊं होगा क्या जैसे अभी भी मैं देख रहा हूं कि कई लोग होंगे आर्य समाज के प्रामाणिक रूप से जो नैिक रूप से सैद्धांतिक रूप में पूरी तरह सहमत नहीं होंगे कि दयानंद जी का मत यही था जो ये बता रहे हैं। है ना? मैं मैं इस चीज को महसूस कर पा रहा हूं क्योंकि उनके जो कुछ वीडियोस देखे उसमें जो बातें कह रहे हैं वह कई जगह जाकर के अल्टर हो जा रहा है। जो दयानंद जी के नाम से प्रचारित चीजें हैं उनके बिल्कुल थोड़ा सा इधर जा रहा है। तो होगा क्या वही वही वही तो आपसे कह रहा हूं। इसमें होगा क्या कि जैसे मान लीजिए कि नैस्टिक जी का जो पक्ष है वो इसमें पुष्ट हो जाता है चर्चा में कि हां

01:11:57:10 भाई उनका पक्ष पुष्ट हो गया मेरे समक्ष। तो जो लोग इनके विरोध में थे कि नहीं नहीं यह दयानंद जी का मत नहीं है वह इस मत को स्वीकार कर लेंगे। [हंसी] अब यही दयानंद जी का मत है। और यदि वो पुष्ट नहीं हो पाया तो ये तो दयानंद जी का मत था ही नहीं। क्या कर लोगे? [हंसी] ये होने वाला है। ये होने वाला है। ये बहुत साधारण सा तरीका है। डिसोन कर दो व्यक्ति को। बस मैंने आपको कहा ना मैंने बस यही होगा जो आप आप मैंने जो समझाना चाह रहा था मैंने आपको बस आप समझ गए देखो मैं कह रहा हूं देखो वो अपने आप में अपने क्षेत्र में देखो सही व्यक्ति है यदि सिद्ध हो जाता मैं कहना चाह रहा हूं मैं मैं कुछ कहना चाह रहा हूं कि देखो वो अपने आप में अपना एक एक नंबर है जो भी है नम्र है काफी सौहार्दपूर्ण है रीजन क्या होगा कि कुछ नहीं होगा बस केवल क्या है कि मैं बस इनके इनका विरोध बढ़ने लग जाएगा बस कुछ नहीं होगा इससे ज्यादा बस हम ये हो सकता है बेकार किसी भी व्यक्ति हां मैं बता रहा हूं ना इनका देखो अभी जैसे उन्होंने हनुमान जी के ऊपर वीडियो बनाई उन्होंने बहुत सही बनाई वीडियो सही बनाई थी बिल्कुल क्योंकि योग दर्शन

01:13:12:14 के हिसाब से ये पॉसिबल है लेकिन उनका कितना विरोध हुआ बहुत ज्यादा विरोध हुआ उन्होंने कई टॉपिक्स ऐसे बनाए हां उन्होंने कई टॉपिक ऐसे बनाए थे जैसे हां उड़ सकते हैं उन्होंने बनाया था इस नहीं [गला साफ़ करने की आवाज़] उन्होंने योग दर्शन की बहुत सी ऐसी चीजों को उन्होंने बताया है कि जो व्यक्ति के लिए पॉसिबल है शरीर को बढ़ा बढ़ा भी सकता है, जल पर चल सकता है, कांटों पर चल सकता है। तो ये कई चीजें बनाई इन्होंने और वो योग दर्शन के हिसाब से ठीक भी थी। वो गलत नहीं थी। लेकिन फिर भी क्या मैं जो है इनका बहुत विरोध हुआ। इनके अपने ही लोगों के द्वारा इसलिए कह रहा हूं कि आप अष्ट सिद्धि जो कही जाती है ना कि वो अणिमा गणिमा जो उनकी मैं वही सूक्ष्म भी हो सकते हैं। वो विशाल भी हो सकते हैं। मैं मैं कह रहा हूं कि यह जो मामला है पहली बात तो परंपरा है नहीं तो कौन प्रामाणिक है कौन नहीं अपने आप में ही एक विषय है बहुत लंबी अच्छे से चर्चा हो सकती है परंपरा के है नहीं घोषित कौन करे कि आर्य समाज का वास्तविक सिद्धांत क्या है यही तो मैं कहता हूं कि आज अगर मैं एक सत्यार्थ प्रकाश छाप दूं तो इनमें से कोई उसको अप्रामाणिक नहीं कह पाएगा उसमें गिल्ली डंडा बता दूं गिल्ली डंडे से

01:14:27:15 मोक्ष है ना? तो परंपरा ना होने के स्थिति में यह हाल है। दूसरी बात कि अब परंपरा नहीं है। तो अब क्या है कि मैंने बताया आपको कि अगर इनके पक्ष की पुष्टि हो जाती है उस चर्चा में तो ज्यादातर लोग जो है उस पक्ष को स्वीकार कर लेंगे कि यही आर्य समाज जो पक्ष जीत के आएगा या जो पक्ष जो है सिद्ध हो जाएगा वही पक्ष हमारा है आर्य समाज के नाम से। और कल को कोई ऐसा आ जाएगा कि आर्य समाज के नाम से अद्वैत और यह सारे सिद्धांत थोड़े से शब्दों के हरफेर के साथ बताने लगेगा और [हंसी] वो भी वो उसको भी अपना लेंगे क्योंकि बात वहां व्यक्ति निष्ठता है। संस्था निष्ठता है। बात वहां सत्य निष्ठा नहीं है। है ना? आर्य समाज में जो ज्यादातर जो लोग हैं उनकी बात कर रहा हूं। आर्य समाज की जो मौलिक विचारधारा है उसकी बात कर रहा हूं। तो वहां पर सत्य निष्ठा की कमी है। व्यक्ति निष्ठ निष्ठता और संस्था निष्ठता की भावना ज्यादा है। तो कोई भी चीज जो आर्य समाज के नाम पर आएगी यदि वो जाकर के और वो कहीं पर अपना झंडा गाड़ ले रही है तो बस यही है हमारा और अगर विफल हो गया तो हमारा भी था उसको भी डिसऑन कर देंगे। हम नहीं जानते कौन है।

01:15:43:10 ये तो अंडर कवर कोई एजेंट था जो मारा गया वहां पे धुरंधर में। हम थोड़ी ना जानते हैं वो वाली बात है। तो यही ऐसा ऐसा हुआ था कि बात चर्चा मैंने चर्चा करी काफी वीडियो सुनी कुछ लिया तो फिर मैंने क्या किया पर इनकी तरफ मैंने इसलिए नहीं किया क्योंकि उम्र में बहुत बड़े हैं तो किसी भी व्यक्ति से किसी व्यक्ति से बहस करो तो उस लेवल के व्यक्ति से करो जो अपने से बराबर हो या जाओ। अब इतने बड़े उम्र के व्यक्ति से हम कोई बहस करें तो ये भी एक तरह से तरह से बड़ों का ना करिए। तो फिर मेरे कभी फिर मैंने ना इनके चैनल पे कभी कमेंट किया कभी ना कुछ किया मैंने कहा इनको अब जो कहना है कहने दो इनको फिर मैंने इनकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया क्योंकि भाई इतने उम्र में कितने बड़े व्यक्ति है हमसे तो इनसे अगर बहस करेंगे तो सही भी नहीं है इसीलिए मैंने बहस मुझे नहीं लगता हमारे बीच में कोई बहस का दृश्य आएगा मुझे लगता है कि एक दूसरे की बातों को समझने में ही पूरी चर्चा निपट जाएगी उसी में ही समझ में आ जाएगा तात्विक सार सार गर्भित बात क्या है है ना? ऐसा मुझे नहीं लग रहा कि कोई वैसा जो हीटेड डिबेट वाला सीन है मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ होने वाला है। नहीं हीटेड तो नहीं हुआ। ये तो पक्की है। ये तो पक्का है कि हीटेड नहीं होगा। हां मुझे भी लग

01:16:58:14 रहा है उनसे बात समझ में। मैं बता रहा हूं आपको। आपके हुआ क्या? अब होगा ये कि जब आप देखोगे कि भाई किल क्या है कि भाई ये उम्र में हमसे बड़े हैं तो ज्यादा बहस नहीं करनी चाहिए तो आप स्वयं ही स्वयं ही हट जाओगे देख लेना यही होगा और फिर इनका इनका विरोध शुरू हो जाएगा जैसे जैसे इन्होंने अपने आपके चैनल पे आएंगे आर्य समाज की तरफ से इनका विरोध शुरू हो जाएगा हमारे चैनल ये नहीं चाहते हम हम उनके चैनल पे उनके चैनल पे किसी चैनल पे हो किसी चैनल पे हो

01:17:33:18 किसी भी चैनल पे विरोध तो हुआ ही। ठीक है। अब थोड़ा सा आगे बात चालू कर लेते हैं। अब [गला साफ़ करने की आवाज़] अच्छा जो अभी आप बात कर रहे थे सनातन शंकर जी अनिकेत जी आप कुछ कहने वाले थे। हां मैं कह रहा था कि विरोध नहीं होगा शायद भैया क्योंकि कॉल रिकॉर्डिंग पे तो ऐसा लगा नहीं। बड़ा मृदभाषी कोई पहली बार मैंने कोई मृदभाषी दिखा मुझे उनमें कोई बात करने वाला। नहीं फिर एक आयु का भी वो रहता है ना कि भाई व्यक्ति ने इतनी लाइफ देख ली होता क्या है मैंने मैंने अपनी लाइफ में खुद खुद ये फील किया है हां कि जब मैं 17 18 का था तो नईनई बाइक जब मुझे मिली जी तो दे तेरी एक्सलरेटर दे तेरी एक्सलरेटर घुमा घुमा के उसके कान उमेट उमेट के और पूरा पिकअप और पूरा ये वो और गिरे भी गिरते भी हैं चोट भी लगती है। तो एक दिन पिताजी साथ में बैठे थे और उनको बैठा के मैंने वैसे ही वह पल्सर वो 220 थी मेरे पास उसका एक्सलरेटर ले लिया वो घुमक के तो जैसे ही पिकअप लिया तो पिताजी बोले बेटा

01:18:48:21 जिनको बड़ी-बड़ी रेस में दौड़ना होता है बड़ी-बड़ी वो छोटी-छोटी रेसों में रिस्क नहीं लेते। तो मुझे समझ में आया। खैर वो उस समय तो ठीक नहीं हुआ। उन्होंने एक कहानी और सुनाई सुनाई थी। मैं बता देता हूं। छोटी सी है। थोड़ा सा मूड सबका चेंज हो जाएगा। उन्होंने बताया उस समय कि उन्होंने एक मतलब कोई उनकी लाइफ में उन्होंने देखा होगा कोई कैरेक्टर था जिनका नाम था पांडे जी। उनको वो बोले पांडे जी। तो वो बड़े प्रसन्न था। प्रसन्न थे उस दिन। उन्होंने कहा पांडे जी बहुत प्रसन्न थे। क्यों? उस दिन उनके लड़के का फलदान था। लगन आने वाला फलदान होने वाला था। तो जिस दिन लड़के का फलदान होता है उस दिन लड़के वाले बड़े प्रसन्न होते हैं ना। क्यों प्रसन्न होते हैं? भाई उस दिन काफी कुछ आ रहा होता है और माहौल होता है। एक वातावरण होता है। खुशियों भरा तो जो लड़के का पक्ष होता है एक अलग ही तरंग होती है। वैसे वरवधु दोनों के यहां होती है। मगर वो एक तरंग तरंग होती है। भाई उत्सव जैसा वातावरण होता है। तो पांडे जी बड़े तरंग में थे और तरंग के कारण वो जो है एक्सलरेटर खूब घुमा रहे थे। मोटरसाइकिल का और शाम होते होते

01:20:03:27 एक अस्पताल का नाम बताया कानपुर के शाम होते होते पुरसला में भर्ती थे एक पैर में जो है पस्तर मधा हुआ था वो टंगा हुआ था पैर तो ये कुछ स्मृतियां है पिताजी के साथ वाली तो होता क्या है जब 17 18 की आयु का व्यक्ति होता है तो उसके अंदर एक अलग पिकअप रहता है पिकअप हर चीज में यह पिकअप आपको मिल जाएगा 171 से लेकर 25 26 तक। सही कहा आपने। और इस बीच क्या होता है कि 25 26 तक होते वह एक दो ऐसी चोट खा लेता है। जीवन में ऐसा उतार-चढ़ाव कुछ देख लेता है कि अब यहां 26 27 से हल्का सा ठहराव वाली चीजें चालू होती है। पिकअप जाता हुआ और ठहराव आता हुआ 35 होते उसकी चीजों में थोड़ी स्थिरता आने लगती है। मैच्योरिटी दिखाई देने लगती है। तो आयु उनकी जो है उसमें कितना ठहराव होगा यह तो दिखता ही है। इसमें क्या बात करें? खैर इसलिए मुझे नहीं लगता ऐसा कोई हीटेड डिबेट वाला माहौल बनेगा। कुल मिलाकर के अब थोड़ा सा हम आगे बढ़ते हैं तथ्यों पर। ये भी चीज जी जी एक चीज बताऊंगा

01:21:19:10 भैया। शुरू में जो बताने वाला था मैं जो आपने एक चीज कहा था कि भाई को भाई से अलग कर दिया गया वाला। ये चीज बहुत पहले आपने सड़क पर एक व्यक्ति इस का गीता बेच रहा था। तो उसमें आपने एक को पूछा कि इसमें प्रभुपाद जी के शब्द को बदल दिया गया है। तो उसने पीछे से कटाक्ष किया था जो ऑफिशियल था इस का उसने कहा कि ये अभक्त है इसको हटाओ छोड़ो। तो आपने कहा था कि बस यही हो गया है। भाई को भाई से अलग कर दिया है। हां। जबकि वो थोड़ा सा आपने उसको पूछा कि आपने अभी मुझे भैया कहा ना अब मेरी बात सुनो। और वो प्रेम पूर्वक सुन भी रहा था। लेकिन उसने खाली बोल दिया अभक्त है। भागो यहां से अभक्त है मतलब खा जाएगा कोई। अपराध लग जाएगा। पाप हो जाएगा तुमसे इसकी संगत में रहने से। हां जी। तो वही मैं कह रहा हूं ना मेरी आत्मा चितकारती है। मेरे भाई को मुझसे मेरे भाई को मुझसे छना गया है। जी तो अब हम थोड़ा सा आगे चलें।

01:22:25:06 सबसे पहली बात एक चीज यह है कि जो सिद्धांत वाली समानता वाली बात तो हमने कर ही ली और मैंने देखा कि अग्निव्रत जी ने स्वयं अपनी वीडियो में माना है सत्यार्थ प्रकाश को लेकर के वो कुछ चीजें हैं जो विवादास्पद है वह चाहते हैं कि वह चीजें उसमें बढ़ाई गई है। उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश की प्रामाणिकता पर भी आपत्ति जताई है। ऐसे में यह भी एक चर्चा का बहुत महत्वपूर्ण विषय बनता है कि आर्य समाज की ओर से सच बताने वाला व्यक्ति कौन है? अपने आप में एक प्रमाणिकता का विषय है और [गला साफ़ करने की आवाज़] वामपंथ से जो उनकी लड़ाई है वो उसका हम स्वागत करते हैं वो अच्छी चीज है और एक मंत्र शक्ति की जो बात है ना जो उन्होंने मंत्र की शक्ति को माना है जो मुझे इनके यहां लोप दिखाई देता है और मंत्र शक्ति को ही मानते हुए अगर हम आगे बढ़ेंगे इनकी जो बात है मंत्र शक्ति वाली उसको अगर बहुत ज्यादा आगे बढ़ जाएंगे तो उसमें मुझे बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि जो जो चीजें मंत्र शक्ति के नाम के उसमें में अर्थ में बता रहे हैं तो उसमें बिल्कुल हम लोग वर्णाश्रमी जो वर्णाश्रम हमारा है वही वर्णाश्रम इनका भी हो जाएगा। मंत्र शक्ति की बात है ऐसी तो मंत्र शक्ति की जो इनकी बातें हैं उसमें अगर हम और आगे चलते चले जाए तो उसमें आगे जाकर के आपको वर्णाश्रम भी प्राप्त हो जाएगा। मंत्र शक्ति

01:23:40:12 मंत्रों में देखिए वर्णाश्रम अगर हम इसमें लाएं कि कौन वेद पढ़े कौन ना पढ़े अगर इस चीज में लाएं तो वर्णाश्रम इस बात पर आधारित है कि मंत्रों में शक्ति है। अब जिसको मंत्रों में शक्ति दिखाई नहीं देती वो कहां से इस वर्णाश्रम के बारे में सोचेगा कि किसके मुख से मंत्र उच्चारित हो और किसके मुख से ना हो। जिसको मंत्र में शक्ति दिखाई देगी वो ये बात करेगा ना। अब जैसे विवाह हो रहा है। व्यक्ति ने कहा कि विवाह वेदोक्त रीति से ही होना चाहिए। कि भाई वेदोक्त रीति से होने से विवाह में क्या हो गया? क्यों उसको मान लिया कि उसमें कुछ गजब हो गया। भाई हिंदी में बोल दिया आज से तुम पति पत्नी हो गए। वो शपथ दिलवा दी। क्यों वहां पर मंत्रों की आवश्यकता है? अगर विशेष रूप से वैदिक मंत्रों की आवश्यकता है तो आपको ये मानना चाहिए ना कि उन मंत्रों में कुछ शक्ति है जिसके कारण वहां पर एक दय गठबंधन माना जा रहा है। नहीं तो उन्हीं मंत्रों की आवश्यकता क्यों है? तो ये जो लोग मंत्रों में शक्ति नहीं देख पाते उनके लिए वर्णाश्रम को समझना मुश्किल होता है और जो मंत्रों में शक्ति देखेगा उसके लिए वर्णाश्रम को समझना कठिन नहीं होगा तो इन्होंने जो मंत्रों में शक्तियों को स्वीकार किया उसका भी स्वागत करना चाहिए और बाकी तो सारी बातें मैंने कह ही दी आप अपनी बात रख लीजिए फिर अब जी नहीं बिल्कुल है बिल्कुल उन्होंने मैं एक और पॉइंट उठा रहा था जब कन्हैया जी थे कि उन्होंने वो लिखा था ना

01:24:55:15 कि उभरते प्रश्न गरजते उत्तर सर तो जब सत्यार्थ प्रकाश पर प्रश्न उठे तब तो उन्होंने गरजते उत्तर वाली बात सोची लेकिन जब हमारे जो मूल शास्त्र हैं वेदादि शास्त्र पुराण इतिहास इन पर जब कोई प्रश्न उठता है तब वो गरजते उत्तर क्यों नहीं सोच पाते हैं आर्यमा जी ये एक बड़ा विचारणीय प्रश्न है वहां पर है ना वहां पर फिर वो प्रक्षिप्त बोल के उसको नकार दो तो आप ये फिर सत्यार्थ प्रकाश के साथ भी यही कर रहे हैं भैया अच्छा वो मिलावटी है तो जब सूर्य के ऊपर प्रजा का प्रश्न आता है तब उन्होंने बड़ा उसमें विस्तार से उत्तर देने की कोशिश की है अपने शब्दों में तो यहां पर एक चीज यह भी आती है कि भाई दयानंद जी का जो वहां पर उत्तर था वो इनको संतोष संतोषजनक नहीं लगा होगा तो फिर उन्होंने अपनी व्याख्या बीच में जोड़ी और आगे ऐसा कितनी बार होगा ये बात है अगर हजार आर्य समाझी होंगे तो हजार तरह के फिर वो अनुवाद करेंगे मैंने मैंने एक चीज देखी दयानंद जी से विरोध रखते हैं कि नहीं रखते वो तो मैं स्पष्ट नहीं कह सकता मगर मगर इतना जरूर है कि वर्तमान जो वांगमय छप रहा है दयानंद जी के नाम का उससे जरूर असंतुष्ट है और उसको जरूर विशुद्ध कर रहे हैं। जैसे विशुद्ध उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश भी बनाई है। हम हम है ना ये सब चीजें मैंने लिखी।

01:26:10:16 जी बिल्कुल बिल्कुल तो बाकी तो सिद्धांतिक चीजें हैं सारी उन्होंने वीडियो में जो कही है। है ना? अच्छा अच्छा एक एक कहानी अक्सर ये सुनाते हैं अरे मां जी कि भाई एक क्रिश्चियन मिशनरी के साथ कोई पौराणिक बात कर रहा था। अच्छा वह शायन भाषा को लेकर आया तो वह जवाब नहीं दे पाए। फिर उस पौराणिक ने क्या किया? आर्य समाज जी को बोला कि तुम दयानंद जी का भाष्य लेकर आओ। तब जाके वो जान बची। ऐसा कुछ ये एक स्टोरी बनाते हैं। मैंने काफी बार ये सुनी हुई है। बहुत सारे आर्य यही बात अग्निव्रत जी ने उस वीडियो में भी कही। हम है ना? खैर आर्य समाज में अलंकार समाज में बहुत सारी स्टोरियां बनाई गई हैं। जैसे काशी शास्त्रार्थ स्मृति स्थली देख लीजिए आप बहुत सारी स्टोरी बनाई गई है। फिलहाल एक प्रामाणिक परंपरा प्राप्त आचार्य के द्वारा बताई गई स्टोरी मैं भी बता देता हूं। कि मुसलमान जो है आर्य समाज की खूब बैंड बजा रहे थे एक समय। हम है ना? बहुत खींच खींच के बैंड बजा रहे आर्य समाज के पास छुपने की जगह नहीं मिल रही थी आर्य समाज को तब करपात्री जी ने कलम उठाई थी और

01:27:25:20 करपात्री जी के आसपास के लोगों ने कहा था कि भाई आर्य समाज तो हमारी धज्जियां उड़ाते हैं ये करते हैं वो करते हैं हमारी मतलब हमारी अवमानना करते हैं तो आप उनके पक्ष में क्यों जा रहे हैं वो धज्जियां उड़ा रहे हैं मुसलमान तो उनको उड़ाने दो उनकी धज्जियां तो करपात्री जी ने कहा था नहीं आर्य समाजी वो हमारे घर के हैं हमारे उनकी अपनी बात है। हमारी अपनी बात है। मगर कोई बाहर का आकर के उन पर बोलेगा तो मैं जरूर जाऊंगा। हम और वहां पर उन्होंने वो सिद्धांत बताया था महाभारत का। ये भी जानना चाहिए। हम

01:28:05:22 एक बात और है। ये तो सच्ची घटना है। ये कोई वो नहीं है। एक वीडियो है। जी एक वीडियो और मैंने इनकी देखी थी। देखी तो मैंने बहुत सारी खैर इनकी लेकिन एक वीडियो देखी थी। इन्होंने इसमें वीडियो में बोला था कि बिना व्याकरण सीखे वेद भाष्य कैसे मतलब आचार्य अग्निवत नष्टिक जी हैं वो संस्कृत व्याकरण को नहीं जानते मतलब उन्होंने पढ़ा नहीं है अच्छा और इन्होंने हां और इन्होंने खुद स्वीकार किया है इनकी वीडियो है। उन्होंने ये कहा था कि निश्चित ही आचार्य सायन से बड़ा विद्वान कोई नहीं है। ये अपनी वीडियो में बोला है इन्होंने क्या निश्चित ही आचार्य सायंस थे ज्यादा विद्वान ओवट हुए इत्यादि जो पुराने विद्वान थे वो संस्कृत के बहुत बड़े विद्वान थे लेकिन उनसे गलतियां हो गई लेकिन अब सबसे बड़ी चीज मुझे क्या लगी कि स्वयं कह रहे हैं कि मैंने संस्कृत नहीं पढ़ा मुझे संस्कृत का ज्ञान नहीं है। कुछ विशेष ज्ञान नहीं है। लेकिन मैं वेद भाष मेरे जो वेद भाष्य है मेरे ब्राह्मण ग्रंथ का जो भाष्य है वो सर्वश्रेष्ठ है। सबसे अच्छा है। अब बताओ इस कैसे विश्वास किया जाए? [हंसी] ठीक है। ये सब बातें चर्चा का विषय है। हो सकता है कि बातें हो। है ना? ठीक है।

01:29:20:24 फिर मुझे लगता है सभी बातें पूरी हो चुकी है। अनिकेत जी आप अगर कुछ बताना कहना चाहे तो एक चीज रहता है हमेशा भैया कि ये जो कहते हैं कि भगवान कृष्ण को और भगवान रामचंद्र जी इत्यादि को महापुरुष महापुरुष कहते हैं। ठीक है? और जो महापुरुष जिनको ये महापुरुष कहते हैं वह महापुरुष तो अपने आप को भगवान कहते हैं। तो क्या महापुरुष झूठ भी कहते हैं क्या? और झूठ कहते तो महापुरुष कैसे हो जाते हैं? ये सारे सैद्धांतिक विषय हैं। समय है इनमें [हंसी] सारी चीजें अभी सारी चीजें अभी कर देंगे तो संडे रविवार को क्या करेंगे? 17 18 से 25 वाला वही कर दिया कान खींच के। [हंसी] इनका एक बच्चा गैंग अलंकार समाज का एक बच्चा गैंग है ना वो एक्सलरेटर दिए रहता है टांग टांग टांग टूटे चाहे कुछ टूटे [हंसी] लगभग ऐसे ही है नहीं पर अग्निव्रतज जी ठीक है बातचीत करने में काफी मतलब इनकी वाणी में बड़ा कंट्रोल होता मैंने वीडियो देखे तो मुझे ये समझ में आया कि मैच्योरिटी है और मैच्योर है काफी ज्ञान ज्ञान भी रखते हैं फिजिक्स के हैं तो फिजिक्स का भी ज्ञान रखते हैं

01:30:36:16 हालांकि ऐसे लोगों की जरूरत भी है कि जो कि साइंस के जरिए से हमारी चीजों को प्रस्तुत करें। सनातन धर्म को प्रस्तुत करें ज्यादा से ज्यादा जिससे कि और हमारे लोग भी करते ही हैं और इनका भी स्वागत है अगर इस तरह से कर रहे हैं और वामपंथ से लड़ाई है नास्तिक तो नास्तिकों से लड़ाई है तो हम कौन सा पीछे कदम से कदम मिला के खड़े हुए हैं नास्तिकों के लिए तो ठीक है तो बहुत बढ़िया आप लोगों ने समय दिया और कुछ गलतफहमियां अच्छा सभी लोग अच्छा सभी लोग सभी लोग एक एक जरूर बोलेंगे आचार्य अग्निव्रत जी को सभी लोग जाएंगे यहां से तो जय श्री राम बोलते हो जरूर जाना सभी नहीं बोलते हैं वो जय श्री राम तो बोला था उन्होंने जय जय श्री राम नहीं बोलते हैं इसीलिए तो अग्नि जी को जय श्री राम हम रविवार को इंतजार करेंगे उनका बहुत ही आदरणीय व्यक्ति है बहुत ही सम्मानीय व्यक्ति है उनका वेट करेंगे देखें कुछ निकलता है कि नहीं निकलता लेकिन मेरे हिसाब से मेरा हो सकता है अंदाजा गलत हो सकता है मैं तो भाई एक छोटा सा व्यक्ति हूं तो मेरा अंदाज गलत निकल सकता है हो सकता है कुछ बढ़िया परिणाम निकले बिल्कुल बिल्कुल निकलेगा। उम्मीद रखिए आप तो वही हमने प्रयास किया कि बहुत मर्यादा में रहते हुए क्योंकि उनकी आयु भी हमसे ज्यादा है और जाहिर सी बात है कि ज्ञान विज्ञान

01:31:51:20 में भी हमसे आगे ही हैं। है ना? मुझसे तो आगे ही है बड़े बिल्कुल बिल्कुल नहीं ज्ञान विज्ञान में तो है ही आगे भी नॉलेज में तो आगे है ही हमसे तो जो है वो बात अलग है कि सिद्धांत पीछे वो बैठे हैं ना गुरु गोविंद और ग्रंथ तो वो बात है कि वहां पे चीजें चर्चा का विषय है कि वहां क्या है क्या नहीं है मगर वो जो है कई चीजों में हमारे हमसे जो है वरिष्ठ है तो उसके लिए सम्मान रखते हुए और मर्यादा में रहते हुए प्रया प्रयास किया कि जो उनको गलतफहमियां हैं हमें लेकर के और हमारे बारे में जो आधी अधूरी सूचनाएं प्रदान की गई है उनके आधार पर निर्णय ना ले और कुछ ऐसी चीजें जो शायद जाने अनजाने में उनके द्वारा जो है तर्कपूर्ण मुझे दिखाई नहीं दी तो उनको मैंने मर्यादा में रहते हुए बताने का प्रयास किया ठीक है बाकी सभी को जय श्री राम और रविवार को है उनके चैनल पर चर्चा हमारे चैनल पर भी प्रदर्शित होने वाली है दोनों ही चैनल पर होगी तो आप आप लोग जुड़े उससे टाइमिंग 9 बजे है सुबह ना भैया सुबह 9 बजे है क्या मैंने देखा नहीं कल सुबह 9 कर 9 बजे सुबह 9 बजे जय श्री राम सभी को

01:33:06:28 जय श्री राम ठीक है जय श्री राम जय श्री राम सभी को जय श्री राम जय श्री राम सभी जय श्री राम

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 1:33:41 · 20 Jun 2026

केवल आर्य समाज पर ही प्रहार क्यों? अग्निव्रत जी की जिज्ञासा | हमारा समाधान

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