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00:00:01:28 [घंटी की आवाज़] अब थोड़ा सा मूल विषयों पर आ जाते हैं कि इस कौन शिव जी को भगवान क्यों नहीं मानता है? मतलब अच्छा अच्छा अब मैं इसको क्लियर कर दूं कि शिवजी को भगवान नहीं मानता है और दूसरी तरफ कृष्ण और क्राइस्ट को कृष्ण यहोवा को कृष्ण और अल्लाह को एक करता है और शिव जी को भगवान नहीं मानता है। तो सबसे पहले तो इस संबंध में अ एक युक्ति दी जाती है। जिस प्रकार दूध से दही बनता है उसी प्रकार जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार अ क्या कहते हैं शिव श्री कृष्ण से शिव तो बन सकते हैं मगर शिव जी से वापस कृष्ण नहीं बन सकते तो क्या ये युक्ति आपको सही लगती है तो यह जो श्लोक है ये ब्रह्म संहिता का श्लोक और इसका जो तात्पर्य है वो हमारे महान आचार्य श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर जो जो गौ परंपरा के एक एक महान आचार्य हुए तो उन्होंने इस श्लोक का जो सार्थ दर्शनी जो टीका हुआ है मतलब उन्होंने जो अभी लिखा है उन श्लोक में वो उन्होंने इस श्लोक का बहुत बड़ा करके इनका जो व्याख्यान किया है और और
00:01:17:06 अक्सर हम लोग जो जो मतलब कि ये श्लोक का जैसा अर्थ हम समझते हैं वैसा उन टीिका में नहीं लिखा हुआ है। अच्छा कृष्ण भगवान कृष्ण भगवान में और शिव जी में अंतर है और अंतर कैसे बताया जा रहा है कि कृष्ण भगवान तो शिव बन सकते हैं और शिव जी जो है कृष्ण नहीं बन सकते अब आप मुझे बता दीजिए शिव जी कृष्ण बन सकते हैं एज इट इज जो वाकई में कृष्ण है परम तत्व कि नहीं बन सकते बस ये बताइए कृष्ण भी शिव जी नहीं बन सकते ठीक है और शिव जी भी कभी कृष्ण नहीं बन सकते यही हां यही यही यही यही तो सिद्धांत है आप तो आप देखिए वहां पर क्या कहा गया है खीरंग यथा ददी विकार विशेष जोगा मतलब जैसे कि दूध के साथ आप आप अम्ल का जोड़ दें तो वो एक जो दही में रूपांतरित हो जाता है लेकिन भगवान में क्या विकार आ सकता है क्या कृष्णा में क्या कोई माया का कोई विकार आ गया और वो शिव जी बन गए ऐसा कभी हो सकता है क्या आप बोलिए ऐसा कभी हो सकता इसीलिए तो इसीलिए तो व्यवहार की सारी घटनाएं माया मात्र है प्रपंच
00:02:32:07 मात्र है और क्यों है अद्वैत इसीलिए ईश्वर को सच्चिदानंद सर्वशक्तिमान सर्व नियंता सर्वाधार सिद्ध करने के लिए फिर ये मानना पड़ेगा कि भाई ये जो संसार है जितना भी व्यवहार जगत है ये माया मात्र है। ये बात होती है। खैर अब ये आप ये आपने मेरे से पूछा था तो मैंने अपनी चीजें बता दी। अब मैं वापस उस पे आता हूं जो विशेष मुद्दा चल रहा है। तो मैं यह कह रहा था कि इस के कई सारे प्रामाणिक रिप्रेजेंटेटिव ऐसे हैं जो यह जो श्लोक है दूध दही वाला इसकी हिंदी करते हुए यही बोलते हैं कि शिव और कृष्ण में वैसा ही भेद है जैसा कि दूध और दही में दूध तो दही बन सकता है पर दही दूध नहीं बन सकता। तो अब आप बताइए कि जो ऑथेंटिक लोग हैं वह श्लोक का जो अर्थ दे रहे हैं कि इस श्लोक का यही अर्थ है कि शिव तो कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर शिव जी कृष्ण नहीं बन सकते। यही ये अर्थ सही है या अर्थ गलत है? हां मैं तो हां आप मुझे बता कि जो भगवान श्री कृष्ण का जो प्रकाश है वो है बलदेव और उन बलदेव से आते हैं जो संकर्षण उन संकर्षण के जो जो प्रकाश है उसे कहते हैं कि
00:03:47:08 आगे जो रुद्र कहते हैं और हां और और श्री भगवान के जो अंश के रूप में जो मतलब कि जिनको हम सदाशिव कहते वो वो साक्षात विष्णु तत्व है। मतलब वो जो सदा शिव जो अप्राकृत कैलाश धाम में है वो वो तो स्वयं ही विष्णु है। और वही इस इस अवतार में श्री अद्वैत आचार्य प्रभु के रूप में आए हैं जिसको इस भी पूजा करता है और और उनके चरणों में तुलसी पत्र भी अर्पण करता है। तो वो कौन है? स्वयं सदाशिव है। तो इस सदा शिव के चरण में तुलसी पत्र अर्पण कर रहा है। ये भी आपको देखना पड़ेगा। इस के आप आप जिस किसी भी आप आप मंदिर में जाइए और और आप जिज्ञासा कीजिए कि ये जो अद्वैत आचार्य है ये कौन है? तो आपको इसका उत्तर आपको ही मिल जाएगा। अद्वैत आचार्य ये हमारे जो जो गौर परंपरा के अनुसार गौ परंपरा के अनुसार कोई कोई वैष्णव यदि यदि शिवरात्रि यदि पालन नहीं करता तो तो उसे वैष्णव नहीं माना जाता। प्लीज प्लीज आप मुझे उस मंत्र का वो श्लोक का अर्थ आप श्लोक का अर्थ
00:05:02:09 बताइए मुझे। हां हां हां तो हां तो वैसे तो अभी तक आपने अभी तक अभी तक आपने जो कहा है उसका मतलब ये है कि जो सदा शिव है और विष्णु है वो एक ही है। ऑब्वियसली हां सदा शिव विष्णु है ये तो हां ये तो शास्त्र का ये तो कोटेशन है। ठीक है। आप ठीक है आप बताइए। अरे भैया आप अपना दूध दही का अर्थ बताइए दूध दही का बताइए मेरे भाई प्रभु का है मेरे भाई दूध दूध दूध दही का अर्थ बताओ हां हां दूध और दही अच्छा अच्छा तो दूध जो है वो है मूल सारभ वस्तु वस्तुत दूध और दही में कोई अंतर नहीं है वस्तुत दूध और दही में कोई अंतर नहीं है किसका अंतर है केवल गुण का मतलब वो गुणगत जो भेद है उसी को मतलब कह रहे हैं गुणगत जो भेद मतलब भगवान के एक एक स्वरूप का जो गुण का जो भेद होता है सतगुण रजोगुण भेद है भेद है भी और अभेद है अभेद क्या है हां अभेद अभेद ही है कि वो शिव भगवान से अभिन्न है और वो चिन्मय
00:06:17:18 है मतलब शिव जी कोई कोई ऐसा कोई वो जो मानने वाला कोई देव देवी ऐसा नहीं है। मतलब कि वो वो जन्म मृत्यु के अधीन है। ऐसा कोई बात नहीं है। ये इस भी ये मानता है कि शिव जी पूछ रहा हूं। मैं ये पूछ रहा हूं अभेद क्या है? ये आपका अभेद का मतलब होता है जहां पर भेद ना हो। अच्छा तो अचिंत भेदभेद ये कहां से आ गया? ये तो महाप्रभु ने दिया है ना ये तो आप बता अचिंत भेदाभेद तत्व का वर्णन ये जो पहले दिया इसका जो मतलब
00:06:58:19 मैं सुनो सुनो सुनो सुनो ये बताओ अगर इस तरीके से देखेंगे कि उनमें भेद है भी और नहीं भी ठीक है तो है भी और नहीं भी वाली बात है भी और नहीं भी वाली बात अगर है कि शिव जी में और कृष्ण जी में भेद है भी और नहीं भी। अब भेद है क्यों? भेद है क्यों? क्योंकि उनमें वह सारे गुण नहीं है जो सारे गुण कृष्ण जी में है। ठीक है? यही बात है नहीं। वो जो है गुना है। मतलब की अवतार होता है और एक होता है अवतारी। सारे गुण है उसमें। शिवजी में सारे गुण है। जीव गोस्वामी पाद ने अपने जो जो संदर्भ के अंतर यही कहा है कि कि विष्णु जी में 60 गुण है और और यानी कि सारे गुण नहीं है ना यार आप लोग पता नहीं क्यों देर करते हो सारे गुण नहीं है और शिव जी में जो 55 गुण होते हैं और श्री कृष्ण में 64 गुणावली होती है मैंने गोस्वामी मैंने क्या पूछा है मैंने आपसे क्या सारे गुण है कि नहीं ये बोल रहा हूं कि ये इसको नहीं बता रहा है ये शीला जीव गोस्वामी बात बोल रहा है मैंने आपसे पूछा सारे गुण है कि नहीं नहीं है और ये
00:08:14:07 नहीं बोला है ये ये एक अलग विषय है कि ये आपके पूर्वाचार्य बोल रहे हैं कि कौन बोल रहा है जब आपकी बात हो रही है तो आपको अपनी बात को सही सिद्ध करना है सारे गुण नहीं है सारे गुण नहीं है शिव जी आए कहां से है शिव जी आए तो वो तो भगवान से ही है और हम भी आए भगवान ठीक है तो पूर्ण से जब कोई चीज निकलती है तो पूर्ण होती है ना पूर्ण होती है लेकिन वो पूर्णता का प्रकाश नहीं करते हैं। यही तो है मजा। मतलब उनके अंदर तो है लेकिन वो वो मतलब कि उनके जो जो स्वरूप का जो जो एक संभ्रम होता है उस उस संभ्रम को बजाए रखने के लिए उन्होंने ये ये गुण उन्होंने प्रकट किया है। देखिए माया के मैं समझ रहा हूं। एक मिनट यानी कि कृष्ण से जब शिव आए तो शिव जी पूर्ण है। बस वो दिखा नहीं रहे पूर्ण हूं। दिखा नहीं रहे मैं पूर्ण है ना? यानी तत्व से वो वही है। यानी तत्व से वो कृष्ण ही है। वो है कृष्ण तत्व और यह भी तत्व और यह तत्व। मैंने
00:09:29:08 पूछा तत्व से वो पूर्ण है कि नहीं? वो दिखा नहीं रहे। मगर वास्तविकता में वह पूर्ण है कि नहीं? वास्तविकता में पूर्ण का सभी अंश ही पूर्ण बनेगा। यह तो इसपनिषद का वाक्य है। यानी कि यानी कि तत्व से शिवजी और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। तत्वगतिक से नहीं वो तो विष्णु है। क्योंकि हां आप देखिए तत्व का मतलब क्या होता है? हां जो जो अंतिम सत्य है ना वो उस तत्व की बात कर रहा हूं। अंतिम सत्य जिसके बाद और कुछ बाकी नहीं रह जाता है। उस तत्व की दृष्टि से बात कर रहा हूं मैं। हां तो जी तो हां बोलिए। मैंने पूछा शिव जी और विष्णु जी में कोई भेद नहीं है। ये अभिकोण है। मैं पूछ रहा हूं। तत्व से कोई तत्व से कृष्ण भगवान और शिव भगवान में कोई भेद नहीं है ना? तत्व के दृष्टि से नहीं है। वैसे लेकिन गुण के दृष्टि से है। अरे वो तो यहां लीला में है ना फिर वो दिखा नहीं रहे। उनके अंदर गुण है। उनके अंदर भी है
00:10:44:14 गुण मगर वो दिखा नहीं रहे। आपने ही कहा ना प्रकाशित नहीं करते। होता सब कुछ है। होता ही नहीं है। हेलो हां हां आप मुझे थोड़ा सा बोलने दीजिए मैं क्या बोल सकता हूं बोलो हां तो हां तो भगवान से मतलब की जो जो पूर्ण तत्व [हंसी] है उनसे जो कुछ भी निकलता है वो सब पूर्ण है लेकिन वो वो तत्वगत रूप में मतलब कि सेम है और और जो गुणगत रूप में वो वो अवैध है मतलब जो जो भगवान का क्वालिटी है और और उनसे सृष्ट जो कुछ भी है सबका क्वालिटी तो सेम है लेकिन वो जो क्वांटिटी है वो सेम नहीं है यानी कि शिवजी उनसे निकले हैं तो वो पूर्ण है कि नहीं हर तरह से हां क्वालिटी है यही तो है भेदाभेद मैं पूछ रहा हूं क्वांटिटिवली मैं पूछ रहा हूं क्वांटिटिवली कमी है हां क्वांटिटिवली वो दिखाते हैं कि वो जो हां जो कमी है लेकिन दिखाते
00:11:59:25 हैं। दिखाते हैं। एक्चुअली कमी नहीं है पर वो दिखाते हैं। हां क्योंकि देखिए मतलब मतलब उनमें कमी देखना माया मात्र है। उनकी लीला मात्र है। देखिए कमी देखना माया मात्र नहीं है। उन्होंने मुझे नहीं उन्होंने अपने आप को ऐसा ही प्रकाश कराया है। हमारे सामने ठीक है। अगर वो खुश है खुश हैं। हां बोलिए मगर तत्व से वो पूर्ण है ना हां तत्व से तो सभी पूर्ण है तो उनके अंदर सारे तो उनके अंदर जितने भी गुण है सारे गुण है लेकिन वो मैंने बार-बार मैं बोल रहा हूं भाई साहब अब अब जरा अब जरा जरा मुझे बोल लेने दीजिए ठीक है ईश्वर सर्व्यापक है हां हां भगवान सर्व्यापक हां ठीक है। मगर भगवान अपने आप को एक कुरुक्षेत्र में खड़ा दिखा रहे हैं कि नहीं दिखा रहे हैं? हां वो हमें दिख रहे हैं। एक मिनट दिख रहे हैं। एक मिनट एक एक मिनट फिर भी हम ये मान रहे हैं सर्व्यापक है। जबकि वो हमें दिखा रहे हैं मैं रथ में खड़ा हुआ हूं। सारथी
00:13:16:07 इसोपनिषद में ऐसा लिखा है कि भगवान मैं ये कह रहा हूं कि श्री कृष्ण भगवान किसी एक देश काल परिस्थिति में हमें दिख रहे हैं। फिर भी हम ये कह रहे हैं स्पष्ट कि ये सर्व्यापक है तत्व से क्योंकि हम जानते हैं उसी तरीके से भगवान है। यही भगवान का तो मैं पूछ रहा हूं। उसी प्रकार से भगवान शिव हमको आपकी जानकारी के अनुसार या आपकी थ्योरी के अनुसार भगवान शिव हमको कुछ कम गुणों से परिपूर्ण अपने आप को प्रस्तुत कर रहे हैं। ठीक है? सेवक का भाव से का भाव ठीक है मगर मगर वो तत्व से मगर वो मगर वो तत्व से पूर्ण है जैसे वो अभी बात करेंगे भाई साहब वो अभी बात करेंगे ठीक है अभी बात चल रही है शिव जी की कि जैसे भगवान कृष्ण कहीं पर कुरुक्षेत्र में महाभारत के रण में दिखाई दे रहे हैं किसी एक स्थान पर सारथी बन के बैठे फिर भी वो सर्वत्र व्याप्त है। है ना? है ना? सर्व्यापी हां तो हम उनको
00:14:32:12 हां तो इसी तरीके तो हम श्री कृष्ण भगवान को सारथी बने बैठा देखकर ये नहीं मान लेते कि जो सारथी है हम कहते हैं कि नहीं तत्व से तत्व से सर्व्यापक है। पूर्ण है। ठीक है? इसी तरीके से आप इसी तरीके से आपकी थ्योरी के अनुसार शिव जी जो है अपने आप को थोड़े कम गुणों वाला प्रदर्शित कर रहे हैं। तो हम लीला में ये मान लेंगे व्यवहार में मान लेंगे तो हम लीला में ये मान लेंगे कि शिवजी जो है कम गुणों वाले हैं क्योंकि वो अपने आप को ऐसा प्रस्तुत कर रहे हैं। तो यहां पर व्यवहार में हमने ये मान लिया जैसा वो दिखाना चाह रहे हैं। मगर तत्व से वो वही है। तत्व से शिवजी पूर्ण है। तत्व से उनके अंदर कोई अभाव नहीं है। नहीं कोई अभाव नहीं तत्व से शिव और कृष्ण एक ही है।
00:15:22:00 चली गई क्या आपकी? हां हां इसी को तो अभेद कहते हैं। मैंने कहा मैंने कहा तत्व से शिव और कृष्ण एक है। हां ऑब्वियसली एक है। मैं मैं आपसे सुनना चाह रहा हूं। आप बोल दीजिए। तत्व से शिव और कृष्ण एक है। एक है। शिव और कृष्ण एक है। मैंने बोल दिया। हां ठीक है। अब आप अब आप मुझे इस की किस प्रामाणिक पुस्तक में ये बात लिखी हुई है बता दीजिए। हां शिव और ये ये थोड़ा मुझे क्लियर करने दीजिए कि शिव और कृष्ण एक है। ये जो हमारे जो जो गौरी आचार्य है उनके लिखे हुए जो ग्रंथ है वो मुझे मुझे मुझे मुझे मुझे इस से दिक्कत है। मुझे इस से आप बताइए कहां लिखा है? आप जो भक्ति वेद जो जो लाइब्रेरी है वहां पर आप जाके आप आप स्वयं मुझे मुझे मुझे जीबीसी के द्वारा छापी जाने वाली किताबें बताइए कहां लिखा है क्या लिखा है कि
00:16:24:16 हां यहां पर हां यहां पर मैं आपको श्रीमद् भागवतम से आपको दिखा सकता हूं और और वो इस के ही है इस के वेबसाइट से मैं आपको दिखा सकता हूं ठीक है बताइए बताइए तो हां तो हां तो मैं क्या आउट हो सकता हूं अभी थोड़ा आप मुझे बताइए मेरे पास वो है श्रीमद् भागवतम है अच्छा अच्छा तो मैं थोड़ा सर्च करके मैं आपको दे रहा हूं एक म एक बाद मैं आ रहा हूं थोड़ी देर बाद मैं मैं आपको दे रहा हूं वो अभी मतलब कि मेरे पास वो गन था तो अभी तो नहीं है ऑफलाइन में तो तो मैं आपको जो ऑनलाइन है मैं वही से आपको मैं आपको दिखाना चाहता हूं। ऐसा जाइए। ठीक है। ठीक है। जय श्री राम। हां।
00:17:20:04 [गला साफ़ करने की आवाज़] हां। तो हां अब मैं बोलना। हां। आपके जो WhatsApp नंबर है मैं मैं वहां पर जो ईयर ट्री का जो एक लिखा है मतलब वो इस के ही भक्त के द्वारा दिया गया है तो वो आप देख सकते हैं अपने मैं उसका लिंक भी शेयर किया है और और उसका जो मैं पॉइंट आउट भी किया है लॉर्ड शिवा एक्चुअली नॉट डिफरेंट देन मैं आपसे एक बार और क्लियर कर लूं शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। तत्व से वास्तविक जो रियलिटी है रियलिटी में शास्त्रों में कहा गया है कि हां मैं मैं पहले बोल लूं ये शास्त्र श्लोक है कि कि जो व्यक्ति भगवान नारायण के साथ भगवान रुद्र और और ब्रह्मा को समान मानता है वो एक पाषांडी है। तो ये पूर्ण रूप से तो ये नहीं है। लेकिन अभेद भी है और भेद भी है। यही तो मैं कहना चाहता हूं। देखिए बात ऐसी है
00:18:37:15 बात ऐसी है कि अगर हमने कहा कि तत्व से भगवान शिव में और विष्णु में कोई भेद नहीं है। ठीक है? अब आपने कहा कि शास्त्र का एक वचन है कि शिव और विष्णु को एक कोई मानता है तो वो पाखंडी है। ब्रह्मा और और बाकी सब देवता को मैं आपको क्या वो श्लोक दूं? अभी भाई साहब मुझे मेरी बात आप करने देंगे कि नहीं करने देंगे? अच्छा अच्छा बोल लीजिए। आपने कहा तत्व से शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। ठीक है। तो इस बात को हम माने कि ना माने? अभेद है और भेद भी है। इसको हमें मानना पड़ेगा। मैंने कहा इस बात को माने कि ना माने क्या है ये? पूर्ण रूप से तो अभेद भी नहीं है। मतलब पूर्ण रूप से तो एक भी नहीं है लेकिन एक है भी। मैं बता रहा हूं क्या है? ऐसा है कि व्यवहार की दृष्टि से राम जी कौशल्या माता से जन्म लेते हैं। और तत्व की दृष्टि से वो उससे प्रकट होते हैं। जन्म नहीं लेते। तो हमें तत्व से ये मानना पड़ेगा। तत्व से हमें मानना पड़ेगा कि शिव और विष्णु एक हैं। और व्यवहार से आप ये कह रहे
00:19:52:16 हैं कि हमारे पास एक श्लोक है जिसमें कि उनको व्यवहार में शिव और विष्णु को अभेद शिव और विष्णु को अभेद मानने वाले पाखंडी है। ठीक है? हां हां तत्व से तत्व से शिव और विष्णु में रियलिटी में जो वास्तविक जो अंतिम रियलिटी है ट्रुथ उसमें शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है और जो ये संसार भौतिक दृष्टि है इसमें आपके पास एक श्लोक है जिसके कारण आप ये मानने के लिए वो है कि व्यवहार में हम शिव और विष्णु में भेद मानते हैं। ठीक है? इसका मतलब केवल शास्त्र का ही एक शास्त्र वो शास्त्र ने जो चिन्हित किया है आपके अनुसार जो आपने शास्त्रों का अर्थ किया है उसके अनुसार शिव और विष्णु में भेद मानना मैंने मांगा है क्या आपसे जब मैं मांगूंगा तब दे दीजिएगा ना भाई मैंने जो मांगा था आपने दिया मैंने लिया आप जितनी बार मैं बोलता हूं बीचबीच में मैं मैं श्लोक दूं मैं श्लोक दूं ठीक है ठीक है आप बोलिए
00:20:50:14 तो व्यवहार में आप ना मानने के लिए इसलिए मजबूर हैं क्योंकि आपको शास्त्र का एक वचन प्राप्त है जिसमें कि इनको अभेद मानने वाले पाखंड कुल मिलाकर के शास्त्र के एक वाक्य के कारण जो है आप मान रहे बाकी तत्व से आप भी शिव और कृष्ण को एक मानते हैं। हां ये तो हां ये तो है। ये तो वास्तव यानी यानी कि तत्व से शिव जी कोई अलग से दूसरा तत्व नहीं है। कृष्ण ही है। हां कृष्ण का प्रकाश है। कृष्ण का प्रकाश और यार [हंसी] अंतर है कि मैं पूछ रहा हूं अंतर है कि नहीं जरा सा भी प्रकाश जब जब आप प्रकाश लाओगे तो अंतर अंतर है तत्व से कह रहा हूं तत्व से कह रहा हूं तत्व से जरा सा तो अंतर है तत्व से कह रहा हूं तत्व से कह रहा हूं हां जरा सा तो अंतर है यानी तत्व से भी अंतर है जरा सा है अरे जरा आयए है ना भाई? हां हां पता नहीं क्यों आप लोग अपनी फिलॉसफी को स्वीकार करने में भी डरते हो यार। अच्छा ठीक है ठीक है। आप अब आप अपना आप अपना बोलो। बोलो बोलो बोलो। शर्म आती है क्या जो चीज गुरुओं ने सिखाई
00:22:05:22 है जिनको आप गुरु कहते हो वो बातें एज इट इज बोलने में। नहीं जब आप अपनी चीजों को जब आप अपनी चीजों को अपनी मान्यताओं को एज इट इज बोलोगे नहीं तो हम बात किस पे करेंगे बताइए? जब मेरी बारी आई थी मैंने फट से बोला। भले ही आप बाद में कटाक्ष कर दो। मैंने फट से बोला ना। ठीक है। ठीक है। आप अपना बोलिए। बोलिए बोलिए। एक एक फ्लो में आप चर्चा करने की वो नियत रखते ही नहीं हो कि भाई हम सत्य की खोज करने बैठे हैं। ऐसे बोलो ऐसा उसमें दिमाग लगाओ कहीं हमारी पटकनी ना हो जाए। ये ध्यान है।
00:22:42:09 नहीं नहीं आप बोलिए। भाई जो आपको बताया आपके गुरुओं ने जो आपने पढ़ा है जो आप मानते हो जो आप जानते उसको बोलो ना यार डंके की चोट पे वो गलत है सही है बाद में सिद्ध होगा वो उसी को अभी कह रहे थे तत्व से भेद नहीं है अब कह रहे हो जरा सा है अब मैं बार अब मैं बार-बार कह रहा हूं तत्व से भी तत्व से भी भेद है तत्व से भेद है
00:23:15:03 है लेकिन वो जरा सा है वो हमें दिखाई दे रहा है वो हमें दिखाई दे रहा है लेकिन वास्तविक में वो नहीं है हो गया आप आप जाइए अब हो गया ठीक है अच्छा लगा आपकी बात कर जय श्री राम सही बात है भैया इसमें पहले बोला था कि कोई भेद नहीं है फिर उसके बाद मानने लगा जरा जरा सा भेद है जरा सा मतलब वो खुद क्लियर नहीं कर पा रहा खुद में इतना डाउट में है कि आखिर भेद है कि नहीं है उपनिषद का वो वाक्य वो माने कि नहीं माने
00:23:58:24 क्या है इनका फिलसफी कुछ भी नहीं पता तथागत जी तथागत जी आप समझ लीजिए तत्व से अभेद है तत्व से अद्वैत है और व्यवहार में द्वैत है यही तो हम भी मानते जो आप मान रहे हो यही हम मानते हैं मगर क्या हुआ है कि आपको अवमानना करनी है शंकराचार्य की अपना घरौदा बसाना है आपको नहीं मतलब जिसको आप मान रहे हो उस तंत्र को तो इसलिए जरूरी है कि भैया हमको वो शब्द स्वीकार नहीं करना है उसी शब्द को शब्दांतर से शब्दांतर भेद से हम जो है उसी शब्द को दूसरे तरीके से स्वीकार करके कह देंगे हमारी फिलोसफी तो द्वैत है
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महादेव से किस बात की शत्रुता है #iskcon
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