⬜ Not used yet · 00:00:01:20 – 00:25:42:00 (25:40)
00:00:01:20 कहने का मतलब मेरा यह था कि आप किसी भी फिलॉसफी को जब टटोलेंगे जो आप कह रहे हैं ना कि बहुत सारे बिलीव्स हैं उनसे हमें क्या मतलब मगर आप किसी भी फिलॉसोफी को टटोलेंगे उस फिलॉसोफी में उनके द्वारा दिलाई जा रही चीज वो है ही नहीं जो वो दावा कर रहे हैं। मतलब इसमें बात ये है ना कि मुझे ये लगता है कि समाज का जो कोर प्रॉब्लम है वो ये चीजें नहीं है। समाज का जो कोर प्रॉब्लम है जैसे हम लोग अपने दैनंदिन जीवन में जिन समस्याओं को झेलते हैं। जैसे व्यक्तिगत तौर पे हमारी ah सबकी एक आस्था होती है। एक बिलीफ सिस्टम होता है। एक धर्म होता है। लोग महलते हैं, पूजा-पाठ करते हैं। तमाम सारी चीजें करते हैं। लेकिन रोज बरोज जीवन जीते हुए जिन समस्याओं से हम जूझते हैं वो ये सारी समस्याएं नहीं होती। हम सुबह उठते हैं। तो हमारे दिमाग में पहला ख्याल क्या आता है? काम पर जाना है। बच्चे हैं घर में उसको खाना खिलाना है। बच्चों की पढ़ाई है। है ना? [गला साफ़ करने की आवाज़] जरूरत हैं, दवाई है, शिक्षा है, तमाम सारी चीजें हैं। तो हमारे जीवन के जो कोर जो केंद्र है वो इससे निर्धारित होता है। मैं वही इसीलिए कह रहा हूं। मैं इस पे हम हम लगता है मैं आपकी बात से असहमत नहीं हूं। आप क्या है इसको कोर कह रहे हैं ना। बस मैं आपका ध्यान यहां लाना चाह रहा हूं। ये कोर नहीं है। ये उसके द्वारा निकलने वाले बाय प्रोडक्ट्स हैं। जब हम एक मत होंगे। उसका अच्छा, मेरा अच्छा, उसका बुरा, मेरा बुरा।
00:01:17:03 तो हमारे बीच में जो सिस्टम्स तैयार होंगे पैसा कमाने को लेकर के, स्वास्थ्य को लेकर के, शिक्षा को लेकर के एक इंटरेस्ट करना चाहूंगा क्योंकि मुझे लगता है ना कि जैसे जब भारत में इस्लाम नहीं था तो क्या इसका मतलब भारत में गरीबी, भुखमरी या समस्याएं मौजूद नहीं थी? नहीं थी। मैं बताता हूं कब नहीं मैं बता रहा हूं। नहीं रामायण पढ़िए। एक नहीं रामायण में क्या समस्याएं? बता रहा हूं ना मैं आपको। हां बता रहा हूं। जब राम राज्य हुआ तब की बात सुनिए। हम्। हवा उतनी ही चलती थी जितनी चलनी चाहिए। यह तो देखनी पड़ी। यह क्या नहीं, यह क्या है? यह तो एक एक यह एक आस्था और बिलीफ़ का सवाल हो गया है ना? क्योंकि कहीं पर लिखा हुआ है। ठीक है। तो, इतिहास अच्छा ठीक है। उसप मैं जाना ही नहीं चाह रहा हूं। ये आपने कैसे माना कि हमारे यहां प्रॉब्लम्स थी? नहीं। प्रॉब्लम्स थे क्योंकि उसके प्रमाण है। उसके दस्तावेज है। जैसे बुद्धा बुद्ध के समय तो इस्लाम नहीं था। दस्तावेज में क्या किसी का शब्द ही है ना? नहीं। बुद्ध के समय तो इस्लाम धर्म नहीं था ना। आप आप जो अपनी इंडियन हिस्ट्री में ये मान रहे हैं कि मुसलमान जब नहीं थे तब भी प्रॉब्लम्स थी। ठीक है? तो यानी आपको शब्द प्रमाण से प्राप्त है ना कि आपने देखा है? नहीं बकायदा उसके शिलालेख है। तो शिलालेख तो रामायण के भी हैं। नहीं रामायण के शिला क्या शिलालेख कहां पे उससे पुराने मिल जाएंगे। शिलालेख जहां पे लिखा हो कि हवाएं इतनी चलती क्या किसी शिलालेख पे मिलेंगे? भाई रामायण की रामायण को प्रमाणित करने वाली बहुत से एविडेंसेस
00:02:32:16 मिल जाएंगे। वो तो जैसे वो डोमेन ही दूसरा हो गया। मैं क्या बता मैं बता रहा हूं। इसको इसको इसको भी हम ऐसे सिद्ध करते हैं। इसको ऐसे मैं कह रहा हूं जैसे इतिहास का जो ऐसा है ना हम लोग ऐसा है मैं मैं मुद्दा थोड़ा मैं बता रहा हूं मैं इसको मैं क्लियर कर रहा हूं ऐसा हो रहा है कि हम अपने शब्द प्रमाण को तो चाहते हैं कि वो माना जाए मगर दूसरे का शब्द प्रमाण ना माना जाए। अब इसमें शब्द प्रमाण किस आधार पर माना जाएगा। इसमें भी चलिए इसको छोड़ दीजिए। मैं बात सुनिए तो सुनिए तो अब इसमें क्या है? शब्द प्रमाण को मानने का एक सीधा सा तरीका है। कि आप अगर वैदिक नहीं है आप अगर सनातनी नहीं है तो आप सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है ये अंतर नहीं कर सकती नहीं ये तो गलत बात हां तो इसको आप जैसे अगर मैं इसको आप जैसे मैं अपनी बात बता रहा हूं मैं तो जैसे आप जिससे एसोसिएट खुद को करते हैं मैं नहीं करता हूं ठीक है लेकिन क्या आप जो कह रहे हैं क्या उसको मैं मान आप वही मैं मानता हूं तो आप मुझे बताइए मुझे बताइए आपकी नैतिकता का आधार क्या है मेरी नैतिकता का आधार मानवता है इंसानियत है कहां से वो निश्चित हो रही है कि ये वो निश्चित वो निश्चित एक मानवीय आंतरिक स्वभाव है यानी उससे निश्चित हो। ठीक है? तो इसका मतलब यह है कि मानवीय आंतरिक स्वभाव से जो बात निकल के आए वो उसकी नैतिकता होती है। नहीं केवल आंतरिक जैसे समाज का एक पूरा एक ऐसी व्यवस्था है उसमें बहुत सारी चीजें
00:03:47:18 हैं। वो कहां से निश्चित हो रही है? नहीं उससे निश्चित जैसे सवाल ये है ना कि जैसे इंसान की जो पूरी समाज और एक पूरी इंसानियत तो कोई एक ऑथॉरिटेटिव रहेगा कि नहीं? मानने की जैसे मुझे लगता है जरूरत नहीं। तो फिर इसका आधार तो यही हुआ ना कि अंदर से जो निकल के आया वो मोरल है नहीं केवल अंदर से नहीं बहुत सारे जैसे उसमें लॉजिक है उसमें साइंस है उसमें तमाम तयत ये तय कौन करेगा नहीं जैसे भगत सिंह की जो नैतिकता है आप आपने अभी अपनी बताई ना तो ये तय कौन करेगा कि जैसे आपने बोला मेरी नैतिकता ये है कि मैं जो है क्या कहते हैं चचेरी बहन से विवाह ना करूं दूसरा बोल रहा है मेरी नैतिकता अंदर से निकल के आ रहा है मैं चचेरी बहन से विवाह करूं तो इसमें सब नहीं बोल रहे जैसे उसमें भी बात हमें थोड़ा समझना पड़ेगा ना जैसे जो भगत भगत सिंह की नैतिकता है। वो कहां से आ रही है? नहीं वो भी यहीं से आ रही है। देखिए मैं बताता हूं। मैं बता रहा हूं। मैं मैं बता रहा हूं। मैं भगत सिंह तो जिस चीज का मैं उसको क्लियर कर रहा हूं। ये बताइए यहां पे जो बल्ब लगा हुआ है ये कहां से आया? ये बल्ब का जाहिर सी बात है आविष्कार किया गया है। थॉमस अल्व एडिसन जो है आया है ना। मगर मगर चलिए किसी ने भी किया हो। मगर ये किसी वैज्ञानिक ने किया। वहां से आया। मगर हम लोग क्या कहते? हम तो परचून की दुकान से ला रहे हैं। उसी तरीके से यह जो नैतिकता थोड़ी बहुत कहीं भी किसी में भी दिखाई दे रही है। भले ही वह वैदिक नहीं है। भले ही वह कह रहा है कि मैं सनातनी नहीं हूं। मगर वो जो थॉमस अल्व एडिसन का बल पूरी दुनिया
00:05:02:19 में पहुंचा हुआ है ना और उसको लग रहा है मैंने तो परचून की दुकान से खरीदा है। उसको मालूम ही नहीं थॉमस अल्व एडिसन। यही बात है। इसीलिए मैं कह रहा हूं ना कि आप जब तक वैदिक नहीं होंगे तो यह सिद्ध नहीं कर पाएंगे कि मेरे पास मजबूत आधार क्या है? सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है? कौन बहन है? कौन पत्नी करने मजबूत आधार विज्ञान है? बताइए। साइंस इस बात को साबित करती है। जब कजन सिस्टर में साइंस ने साबित किया है ना कि आप करते हैं तो बीमारियां से लेकर तमाम चीजें पैदा होती है। ये तो विज्ञान है। मैं कहता हूं। इसका मतलब गोद ली हुई बहन के साथ आपका विचार बदल सकता है। नहीं क्यों बदल सकता? वहां तो साइंस अप्लाइड नहीं होता। नहीं जैसे वहां भी जैसे सवाल ये है कि समाज नहीं एक बात पे जैसे आपने कहा साइंस है तो यानी गोद ली हुई बहन के साथ आप दूसरी दृष्टि कर सकते हैं कर सकते हैं तो फिर वहां साइंस तो नहीं है जैसे ह्यूमन इमोशंस काम करते हैं ना यानी कि साइंस नहीं है उसमें ह्यूमन इमोशंस रिलजन से नहीं आते हैं क्योंकि ह्यूमन ह्यूमन इमोशंस मौजूद थे मैं बता रहा हूं आपको मैं आपसे ठोस आधार देखिए ह्यूमन इमोशंस आधार है तो ह्यूमन इमोशंस कह रहे हैं कि बच्चों को कुकर में डाल के उबाल के खाओ नहीं कह रहे उसके कह रहे हैं ना नहीं वो ह्यूमन इमोशंस नहीं तो ये आप उस पे थोप थोड़ी समाज के 99% का इमोशन इसका मतलब इसका मतलब जो ज्यादा संख्या में कहेंगे वो माना जाएगा। ज्यादा संख्या की बात नहीं आम तौर पर जो इमोशन है वही प्रिवेलेंट होगा। आप मुझे एक मजबूत आधार दीजिए ना। मजबूत आधार वही है कि जब
00:06:17:22 समाज में रिलीजन नहीं था तब भी ये ह्यूमन इमोशन कब नहीं था? आज से 6000 साल पहले का इतिहास तुम्हें कहीं नहीं मिलता है। कब नहीं था? 6000 साल पहले का लिखित इतिहास कहीं नहीं मिलता दुनिया में। ये साबित है। नहीं। तो इससे ये हो गया कि उस समय रिलीजन था नहीं। तो लिखित इतिहास नहीं है तो आप कैसे कह सकते हैं कि रिलीजन था? नहीं। नहीं भाई हमारे तो इतिहास कह रहा है कि 2 करोड़ वर्ष पहले का भी इतिहास तो लिखित है ना पद्म पुराण में लिखा है साल पहले का कोई लिखित ग्रंथ नहीं भाई साहब मैं पद्म पुराण कह रहा हूं ना आपको एक ग्रंथ में लिखा हुआ है तो एविडेंस आप फिर वही बात है ना कि आपने जापान नहीं देखा से देखते हैं ऐसे कैसे ठीक है तो आप मुझे सिद्ध करिए ना कि आपकी कोर फिलॉसफी क्या है नहीं मैं वही बात कह रहा हूं जैसे यानी कि आप कह रहे हैं अंदर से आता है। ठीक है। आप बिना कपड़ों के पहली बार माता-पिता के कहने पे गए थे बाहर। मतलब जैसे जब बिना कपड़ों के बच्चा बाहर जा रहा होता है, मां समझाती है कि मत जाओ। तो ये अंदर से क्यों नहीं आता है? तो केवल रिलीजन का मसला नहीं है। तो आप ह्यूमन इमोशंस अंदर से आते हैं ना। ह्यूमन इमोशन जैसे ह्यूमन इमोशंस केवल रिलीजन से नहीं बनते हैं ना। मैं ये कह रहा हूं कि आपके पास ये जो नैतिकता है, इसका आधार क्या है? नैतिकता वही तो मैं कह रहा हूं। जैसे कोई अगर देखिए आपने मैं आपको चार पांच चीजें बताऊं। आपने एक बात कही ह्यूमन इमोशंस तो ह्यूमन इमोशंस निठारी के कुछ और हैं। आपने माने नहीं एक मिनट एक मिनट इमोशन मैं आपको चार पांच चीजें बता दूं। फिर दूसरी बात आपने
00:07:32:28 कही संख्या कि वो 99% एक एक मिनट 1 मिनट भाई साहब संख्या 99% तो मैंने कहा जो सब लोग मानेंगे वो मानना पड़ेगा। तो आपने उसमें भी सहमत नहीं हुए। फिर आपने तीसरी बात कही विज्ञान तो मैंने कहा गोद ली हुई बहन के साथ क्या होगा? आपने कहा वहां भी मेरा है। तो आप कोई एक चीज लेके नहीं चल रहे हो कि यह मेरा कोर है। क्योंकि मानवल्टी का ह्यूमन इमोशंस को प्रिवेलेंट तभी समाज में किया जाता है वो इमोशंस जो मानव कौन करता है? कौन करता है? ये कोई एक दो व्यक्ति नहीं करता है। ये कौन करता है? समुदाय करता है। तो हम हम ऐतिहासिक रूप से तय करता है। हम क्या लेके चले कि भाई इसने जो बताया है ह्यूमन इमोशंस वो ह्यूमन इमोशंस है। जैसे राहुल सांकृतन की किताब है वो से गंगा की तरफ। वो से गंगा की ओर यानी कि उसके ह्यूमन इमोशंस ह्यूमन इमोशंस हैं। नहीं आप मैं इस बात को आप सुनिएगा। राहुल संतन बहुत महापंडित कहे जाते हैं। बहुत बड़े विद्वान हैं। उन्होंने एक किताब लिखी है बोलगा से गंगा तक। बकायदा उसमें उन्होंने लिखा है कि कैसे जब समाज बहुत शुरुआती दिनों में था तो आपस में शादियां विवाह होती थी एक ही परिवार में और बहुत ज्यादा डिफरेंशिएट चीजों में नहीं था। बकायदा उन्होंने घटनाओं के माध्यम से यानी कि आप ये मानते हैं कि ये ठीक ये चीज ठीक है। नहीं। लेकिन सवाल है कि उस दौर में चीज़ें होती थी और मानवता ने उस दौर से वह निकल कर यहां तक आई है तो कि आपकी ये चीज़ बदल
00:08:48:00 सकती है कल को? नहीं तो समाज के लिए जो सबसे बेहतर होता जाता है। मानवता ह्यूमन उसको चुनता है ना। जो गलत होता जाता है उसको छोड़ता चला जाता है। जो बेहतर होता जाता है उसको चुनता चला जाता है। आप वही मैं कह रहा हूं। मैं कहां से चुनूं अपनी चीज़ वो सांस हम देखते हैं जो निश्चित कहां है? जो डाटा कौन सा डाटा है? डाटा जैसे दो तरह के डाटा होते हैं। एक तो जो विज्ञान सम नहीं मुझे आप नाम लेके बताइए ना मैं उसको सर्च करूं खोलूं डेटा को कि भाई यहां से मुझे अपनी ह्यूमन साइकोलॉजी मिलेगी नहीं जैसे सवाल है कि जैसे विज्ञान में मस्तिष्क के ऊपर काम होता है विज्ञान में नहीं तो वो देखिए जब आप जब आप बिना नाम के बोल रहे हैं तो वहां पे क्या हो रहा है? बहुत सारे मस्तिष्क हैं। किस मस्तिष्क के आधार पे मैं अपनी वो डिसाइड करूंगा मोरालिटी? क्योंकि हम बहुत जैसे मोरालिटी की जो बात आ रही है ना जैसे मैं क्या बात कह रहा हूं? मैं ये बात कह रहा हूं कि आज की जो हमारे देश में समस्याएं हैं, जो नैतिकता का सवाल है, है ना? वो सवाल आज के समाज से जुड़ता है। आज से 5000 पहले मैं ये नहीं कह रहा हूं। मैं आज के ही इस टाइम में कह रहा हूं कि मेरी नैतिकता कहां से सिद्ध होगी? अगर मैं वैदिक नहीं हूं, ईश्वर को मानने वाला नहीं हूं तो। तो आप वही सब बताइए कि जैसे जब वैदिक धर्म नहीं था तब की नैतिकता कहां से सिद्ध हो? वैदिक धर्म था हमेशा से आप हमारे शब्द प्रमाण को मान नहीं रहे। शब्द प्रमाण कैसे माना जाएगा? तो शब्द प्रमाण आप मनवा तो रहे हो। नहीं मैं शब्द चलिए चलिए भगत सिंह थे कैसे सिद्ध हुआ भगत सिंह थे ये तो
00:10:03:03 बकायदा फोटो हैं बकायदा शब्द प्रमाण है भाई साहब वो भगत सिंह ही थे वो कैसे बताइए शब्द प्रमाण केवल नहीं है भगत सिंह के परिवार वाले अभी वो शब्द वो शब्द हुआ ना कैसे शब्द वो कह रहे हैं कि भगत सिंह थे लड़े थे वो दिखा रहे हैं वो फोटो भगत सिंह के अरे भैया फोटोस वो भगत सिंह क्रांतिकारी था इस विषय में क्या प्रमाण है तो आप नाम छोड़ दीजिए वो व्यक्ति यानी कि हमने मैं एक बात क्लियर कर दूं यानी कि कहने कहने का मतलब है हमें कहीं ना कहीं शब्द प्रमाण पे भरोसा करना पड़ता है। की बात नहीं है। तुम मैं तुम तो चलिए भगत सिंह के तो चलिए अभी 150 साल है। 500 बुद्ध का क्या शब्द प्रमाण है? तो जैसे जैसे इतिहास में तीन चीजें होती हैं। जैसे आपको मैं समझाता हूं। सबसे पहले एविडेंसेस दिखे जाते हैं जो शिलालेखों मैं तो इस पे भी क्वेश्चन करूंगा कि जो तीन एविडेंस आप एविडेंस मार रहे हैं। देखिए आप क्वेश्चन करेंगे ना। जैसे सवाल उसे उसे आपको वो करना चाहिए ना। जैसे सुनिए मेरे उसको जवाब सबसे मिलते हैं जैसे सबसे पुराना जो लिखित प्रमाण मिलता है वो 6000 साल पहले का मिलता है जो मेसोपोटामिया की सभ्यता थी वहां पर उसके शिलालेख में बकायदा लिखे हुए मैं दिखा देता हूं आपको खोलिए मेसोपोटामिया की सभ्यता आप सर्च कीजिए 6000 साल पहले लिखित कार्बन डेटिंग के द्वारा सिद्ध किया गया है। ठीक है। बकायदा सिद्ध किया। उससे क्या सिद्ध रहा है? कार्बन डेटिंग
00:11:18:07 यही तो प्रक्रिया होती है जिससे सिद्ध करते हैं कि कोई चीज कितनी पुरानी है। तो पुरानी होने से वो यह किया था वो किया था। पुरानी चीज आप लाएंगे ना लिखित तक। मैं मैं ये नहीं कह रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं कि उसने ये किया था कि नहीं किया था? ये कैसे? पुरानी चीज आप लाइए। अरे भाई साहब मैं पूछ ये रहा हूं कि वहां पे बहन को बहन माना था कि नहीं माना? सवाल ही अलग है। तो सवाल तो यही हो रहा है ना। क्या कह रहा हूं? जब धर्म नहीं थे क्या तब नैतिकता नहीं थी? नैतिकता नहीं है धर्म के बिना ना? नहीं सवाल वही तो मैं कह रहा हूं कि जब धर्म नहीं थे तब नैतिकता थी। वही आप मुझे जैसे मान लीजिए मेसोपोटामिया की सभ्यता है। ठीक है? आपको उसके अवशेष मिल गए। मगर यह कैसे मिला कि उन्होंने बहन को बहन नहीं माना था या उससे पहले बहन को तो अलग डोमेन की बात है। आप ये कह रहे हो ना कि जब जब धर्म नहीं था तब जो है सभ्यता थी कि नहीं थी? वो तो आज भी मैं तो वही प्रमाण तो किसी के अवशेष मैं कह रहा हूं। साउथ इंडियन सुनिए। जैसे साउथ इंडियन से आप बात करेंगे तो वो कहेगा कि हम इस चीज़ को नहीं मानते हैं। तो वो अपने धर्म वैसे तो निठारी से आप बात करेंगे वो कहेगा मैं नहीं मानता कि मांस ना खाया जाए। नहीं तो जैसे ये निठारी क्या किसी के मानने समाज है जो निठारी को सपोर्ट तो वो जो एक पूरा समाज है जो जो समाज कहता है वो माने तो समाज सपोर्ट उसको जो समाज कहता है वो माने समाज में एक अधिकतर जोता होती है उसको अधिकतर जो कहते हैं वो माने सवाल है कि वो आप हर चीज से आप हर चीज से मूव कर रहे हो मैं मूव नहीं कर रहा और क्या मैं मूव नहीं आप आपने देखिए निठारी को
00:12:33:10 जब मैं निठारी को आपने आपने अपनी बात को रखने के लिए लाए तमिलियन फैमिली ठीक है पहली बात तो मेसोपोटाम क्लियर करूं। आपने कहा मेसोपोटामिया के अवशेष मिलेंगे। मेसोपोटामिया के अवशेष मिलने से यह थोड़ी ना सिद्ध हो रहा है कि वहां पर नैतिकता थी कि नहीं थी कि धर्म के विषय में क्या बिलीव था? नहीं कह भी नहीं सकते कि नहीं तो फिर उसके अस्तित्व होने ना होने से क्या फर्क पड़ रहा है? फिर वही बात है ना कि ये चीज़ क्लियर नहीं हो रही ना कि नैतिकता केवल धर्म से आ रहा है। तो क्लियर तो मैं सिद्ध कर रहा हूं ना। आप मुझे बता दो कहां से आ रहा है? कह रहा हूं ना कि जब धर्म है तभी आप मैं कह रहा हूं सब छोड़ दो। आप बता दो आपके पास कहां से आ रहा है? नहीं दो बात है। हां। जैसे इसमें मुद्दा थोड़ा हम लोग भटक रहे हैं। जहां से सवाल मैं अभी भी यह कह रहा हूं कि समाज आपने देखिए आपने क्या कहा आपने आप समाज में मैं आपके साथ ही था वहां तक आपने ये बात कही कि भाई जहां पे हम लोग जा नहीं सकते गति नहीं हो सकती कि भाई 6000 पहले क्या था वो कुछ कह नहीं जा सकता। आपने उसको उदाहरण दे दिया। अब मैं कह रहा हूं सबसे अच्छी चीज है आप मेरे सामने साक्षात बैठे हुए हैं। आप मुझे बता दो सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में माता बहन पत्नी में अंतर करने का मूल आधार आपके पास क्या है? कौन सी किताब है या कौन सा व्यक्ति है या क्या है? जैसे हम रोज-बरोज जीते हैं समाज में। यानी कि हमारे अंदर जो हमें अच्छा लगेगा वो हम करेंगे। क्या है? ह्यूमन इमोशंस जैसे
00:13:48:19 ह्यूमन ह्यूमन इमोशंस भाई साहब भाई साहब ह्यूमन इमोशंस का एग्जैक्ट आधार क्या एक्सैक्ट आधार ह्यूमन के मस्तिष्क में तमाम तरीके के हॉर्मोनस तो भैया फिर निठारी का मानना पड़ जाएगा ना जेल को भेजेंगे नहीं जैसे दो बातें यहां हां बताइए ह्यूमन इमोशन या तो ये कहिए कि हम बलशाली है तो उसको भेज देंगे वो बलशाली तो हमें खा जाएगा मानवता के आम हित में है उसी को समाज प्रवेश वो हित तय कौन करेगा वो हित मानव समाज मिलके तय करेगा कोई एक इसका मतलब जनसंख्या ज्यादा होगी वो मानव जाएगा संख्या नहीं मानव समाज करेगा समाज मानव समाज की डेफिनेशन क्या दे रहे हैं आप ये बताइए समाज जो आपस में दैनंदिन जीवन में जो मानव है इंसानियत कितने लोगों के मानने पर आप मान लोगे कि यह मानव समाज जो चीज़ प्रिवेंट है तो हित में है तो यानी ज्यादा समाज ज्यादा लोग जो कह रहे हैं जैसे जो तार्किक होगा आम तौर पे आ रहे हैं अब आप तार्किकता पे जा रहे हैं मानव समाज तर्क को खोजता है ना तर्क को खोजता है ठीक है तो मैं आपसे तर्क ही तो पूछ रहा हूं कि आप मुझे बताइए माता बहनों पत्नी में अंतर करने का आधार तो आप सुनिए आधार में विज्ञान देखा विज्ञान आपने छोड़ दिया गोद ली हुई बहन के मामले में नहीं हां छोड़ तो दिया नहीं छोड़ा हां नहीं छोड़ा क्या छोड़ा बताइए क्योंकि दो बात है जैसे विज्ञान हमें बताता आता है हम [गला साफ़ करने की आवाज़] कि हम एक पर्टिकुलर सामाजिक व्यवस्था में जीते हैं। है ना? और विज्ञान भाई साहब विज्ञान गोद ली हुई बहन के लिए क्या बोल रहा है? विज्ञान केवल नेचुरल प्राकृतिक विज्ञान नहीं होता। विज्ञान सामाजिक
00:15:03:27 विज्ञान भी होता है। तो सामाजिक देखिए आप देखिए क्या हो रहा है? एक लूप में फंसे हुए हैं। मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं। लूप में कैसे फंस रहे हैं? आपने कहा कि समाज फिर मैं जब समाज में पूछने गया तो आपने उसमें कहा विज्ञान कि तर्क भी है। एक मिनट 1 मिनट। तो अब जब मैं तर्क पूछ रहा हूं तो आप समाज दे समाज बोलना। मैं जब समाज के लिए पूछ रहा हूं तो तर्क तो विज्ञान पूछ रहे हैं। इसमें बात ये है ना कि विज्ञान ये लूप हो गया ना समाज विज्ञान समाज विज्ञान समाज विज्ञान ये सामाजिक विज्ञान का भी क्षेत्र होता है और प्राकृतिक विज्ञान का भी क्षेत्र होता है। तो आप मुझे वो तर्क बता दीजिए ना किस तर्क के आधार पे आप तय कर रहे हैं। सामाजिक विज्ञान हमें ये बताता है कि एक सामाजिक व्यवस्था वो सामाजिक तर्क क्या है? विज्ञान वो क्या तर्क ये है कि अगर हम एक समाज में एक निश्चित चीजों के लिए निश्चित नियम तय नहीं करेंगे तो समाज टूटेगा। यानी हमने नियम तय किए हैं ना। नियम केवल धर्म से तय नहीं होते। मैं नहीं कह रहा। आपने नियम तय किए हैं। कहां से किए हैं? वो धर्म से नहीं। मैं मैं नहीं कह रहा धर्म से करो। आपने कहां से किए पूछ रहा हूं। तो मानवता के ओवर अरे भाई तो आपने अपने नियम तय किए हैं उसकी का भी नियम तो किसी ने तय किया। आपका कोई स्वरूप है? नियम का मैं पूछ रहा हूं। नियम का कोई स्वरूप है आपका? बिल्कुल स्वरूप है ना। वो क्या है? तो वो जैसे सवाल ये है कि जैसे जहां से धर्म का नियम कैसे तय होता है? हमारा वेद से तय होता है। तो वेद मनुष्य इंसान ने लिखे हैं ना। ना अबौरुष है। अब ये तो आपका मत है। तो वो भी
00:16:18:28 आपका मत है। नहीं तो सवाल वही है ना कि फिर किस तो इसीलिए इसीलिए आप आप मैं ये नहीं कह रहा आप मेरे को गलत सिद्ध करो। आप अपनी बात बताओ ना। मैं तो अपनी बात सीधी बता रहा हूं कि इंसानियत के हित में है मानव समाज जो तय करता है। तो मानव समाज के लिए आपसे पूछ रहा हूं ना कि उसके तर्क क्या होते हैं मानव समाज के? होते हैं कि मानव समाज के जो आम हित में चीज़ तो भाई साहब आप मुझे तर्क बता दो ना। माता बहनों पत्नी में अंतर करने का तर्क क्यों नहीं बता रहे? वही है कि देखो आप आप क्या कह रहे हो बार-बार कि सोर्स ऑफ़ इनेशन पे चले जाओ। मगर उस सोर्स ऑफ़ इनेशन का कारण क्या था कुछ करने का वो आप नहीं बता रहे हो। आप जिस पर बात जैसे आपने कहा विज्ञान जैसे जैसे आप आपने कहा सुनिए तो जैसे आपने कहा कि विज्ञान पे चले जाओ। विज्ञान पे गए तो समाज पे चले जाओ। समाज पे गए तो विज्ञान पे जुड़ी हुई है ना? नहीं मैं जोड़ी हुई नहीं कह रहा। उसमें वो वो तर्क तो बताइए। जैसे चीज़ एक दूसरे पे जानी पड़ेगी। मैं ये नहीं कह रहा मैं ये नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं उसके पास वो विज्ञान क्या था समाज के पास? नहीं, जैसे मैं जैसे समाज ने निर्णय लिया कि कजन सिस्टर से विवाह नहीं करना है तो उसके पास कारण क्या था? तो समाज में परिस्थिति जैसे दो बात है जैसे एक दौर में समाज मैटरनल सोसाइटी थी। उसमें माताएं प्रिवेलेंट मान लेते आपकी बात उसमें उसमें माताएं प्रिवेलेंट थी और उसमें अह पिता बच्चों के पिता कौन होंगे? ये क्लियर नहीं होता था।
00:17:34:02 चलिए एक एक चीज़ एक चीज़ एक ये आप मानते हैं एक चीज़ ये मान लेते हैं। एक मैं इसको कंप्लीट कर दूं मैं इसको कंप्लीट कर दूं क्योंकि फिर तो फिर मानव समाज ने चीजों को देखा और परिस्थितियों के अनुसार चीज़ें बदली पिता पितृसत्तात्मक सोसाइटी आई। है ना? फिर एकल विवाह का आया। बहुत विवाह पहले था। फिर एकल विवाह का आया। तो समाज में परिस्थिति बदलती गई ना। तो परिस्थितियों के हिसाब से मानव समाज को जब जो चीज सबसे सही उस दौर के हिसाब से लगा उसको मानव समाज ने अपना आप मेरा प्रश्न नहीं समझ रहे प्रश्न यही है आपने आपने कहा परिस्थिति परिस्थिति के अनुसार बदला वो परिस्थिति में क्या कारण थे जो बदला और आज आपके क्या कारण है जो आप जो है ये मान रहे हो ये बताओ तो जैसे आज तो हमारे पास बहुत स्पष्ट तौर पर वो क्या हां वो बहुत स्पष्ट तौर पर कारण है कि एक तो जो सिबलिंग्स का मसला है वो तो मैंने बता दिया नहीं तो उसमें गोद गोद वाले में सिबलिंग चला बच्ची में ये होगा हां हां कि जैसे जो मदर फादर मैंने आपसे पूछा इसका सुनिए मदर फादर आपने आपने अभी पांच मिनट बोला था मुझे मुझे एक बात बोलनी थी इसको कंप्लीट एक मैं इसको दोबारा पूछूंगा शुरू दोबारा आपने ये बोला था कि जो है परिस्थिति के अनुसार बदलता रहता है। तो पहली बात तो क्या मैं ये मान लूं कि जो बहन के साथ विवाह ना करने की बात आज लागू है वो आपकी
00:18:49:08 कल बदल सकती है। नहीं क्यों बदली? आपने जैसे बदला ना परिस्थिति के अनुसार जैसे जैसे विज्ञान 1 मिनट 1 मिनट 1 मिनट विज्ञान हर दिन तरक्की कर रहा है। कई बार ये होता है कि आज जो खोज की है कल उसने नियम दिया कि भैया ऐसे ऐसा हो गया है। उसके बाद अगले दिन नहीं वो खोज गलत थी। अब ये मानना है ये विज्ञान की क्वालिटी है। ठीक है? तो अब आपने कहा कि इस तरह से परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग वैज्ञानिक धारणाओं के अनुसार बदल रहा है। तो क्या मैं ये मानूं कि माता के साथ विवाह ना करना, बहन के साथ विवाह करना आपका बदल जाएगा आगे जाकर। नहीं क्यों बदलेगा? जैसे सूरज है है ना? तो क्योंकि विज्ञान बदलता है ना समाज बदलता है। नहीं नहीं हर चीज नहीं बदल जाती है ना। सूरज है। है ना? यानी कि बदलाव नहीं है। बदलाव नहीं है। यानी पूरी बात सुनिए। सूरज है। सूरज से प्रकाश की किरणें निकलती है। है ना? हम सूरज में एनर्जी पैदा होता है। ठीक है? यह बात विज्ञान सम्मत सिद्ध है। आज हम तो यह बात सिद्ध है। यह बात कल को बदल नहीं जाएगी। विज्ञान कितना भी तरक्की कर लेगा तो ये बात नहीं बदल जाएगी क्योंकि ये जो चीज यानी आप ये कह रहे हो ये बहन से विवाह ना करने वाली बात सिद्ध है। कहां सिद्ध है बताइए दिखाइए। क्योंकि मैं आपको बता दूं। मैं आपको मैं फॉर योर काइंड इनफार्मेशन मैं आपको बता दूं। दोनों तरह की वैज्ञानिक अवधारणाएं आज भी अरे नहीं कह रहे हो। आप अपनी बात कर रहे हो
00:20:04:09 दिखाना पड़ेगा फिर। आप दिखाओ Google पे तो आप थ्योरी दिखाओ दिखाओ सर्च करना पड़ेगा ठीक है दिखाओ आप सर्च करिए जेनेटिक कारण है जेनेटिक स्वास्थ्य जोखिम है विज्ञान यह साबित करता है और ऐसे विवाहों से पैदा होने वाले बच्चों में गंभीर बीमारियों की संभावना बहुत अधिक होती है तो ये जेनेटिक्स क्लियर है यानी कि इतने समय इस्लाम का पूरा खंडन है एक तरीके से नहीं इस्लाम मानने लायक नहीं है नहीं जैसे उसमें जो गलत विचार है उसको नहीं मानिए इसमें मैं तो ये नहीं कह रहा हूं कि किसी चीज को मानने ना मानने की जरूरत है कि दो जैसे जो गलत है उसको नहीं मान एक बात समझिए हां जो धार्मिक विचारधाराएं हैं ना वो क्लेम करती हैं कि हम तुम्हें सत्य बता रहे हैं। एक एक सुनिए अक्षरस सत्य बता रहे हैं। अगर आपने उसका एक भी अक्षर ये कहा ना कि ये गलत है आंशिक रूप से तो आपने उसका ओवरऑल खंडन किया वो सत्य की बात हो रही है। दूसरी बात मैं ये कह रहा हूं। इसमें आपने क्या सर्च किया है? विज्ञान के वो प्रमाण जो भाई-बहन में भी विवाह का समर्थन करते हैं। कुछ अनुसंधान और अध्ययनों में कजिन मैरिज के समर्थन में निम्नलिखित वैज्ञानिक और सामाजिक तर्क दिए गए हैं। यानी वैज्ञानिक जो बकायदा वैज्ञानिक और सामाजिक तंत्र तो एविडेंस विज्ञान जैसे मैंने जेनेटिक्स का एविडेंस बताया ना तो ऐसा एविडेंस बताइए जो बकायदा कहता है कि नहीं जेनेटिक्स का जो एविडेंस है यह सही नहीं है ये एविडेंस मिला है और यह सही तो मेरे भाई यहां देखिए कह देने से विज्ञान कोई विज्ञान का इस्तेमाल
00:21:20:12 यहां पे भी तो वैज्ञानिक ही मैंने यहां देखिए हमारी जो जो बताई उसमें केवल विज्ञान शब्द का मैं बता रहा हूं कायदा क्या है मैं बता रहा हूं बता रहा हूं हमारी जो बात शुरू हुई थी वो यहां से हुई थी कि मैंने यह आपको काउंटर किया कि कुछ वैज्ञानिक ऐसे भी हैं जो यह कहते हैं कि भाई बहन में विवाह संभव है। 1 मिनट भाई साहब फिर आपने कहा ऐसा कोई वैज्ञानिक नहीं है। तो मैंने आपको बताया कि ऐसा नहीं कि अब मैं मूल विषय पे दोबारा से आ जाता हूं। ये बात को हल्की करने वाले पॉइंट है। मूल विषय क्या है कि यानी कि आपका आधार जो है आपने ये विज्ञान जान लिया था। आप किस किस उम्र में जो है आपने निर्णय लिया था। मैं वैज्ञानिक तौर पर ये जो है भाई और बहन के विवाह को नहीं मानूंगा। मतलब जैसे मैंने क्या कहा क्या कहा ना कि विज्ञान एक प्राकृतिक विज्ञान एक सामाजिक विज्ञान होता है तो सामाजिक विज्ञान समाज के जो आपका निर्णय अपना समाज का है ना कि विज्ञान से लिया है तो जाहिर सी बात है एक निर्णय तो पहले समाज का ही है यानी आप वो विज्ञान उसको बकायदा सिद्ध देखिए उसका आधार क्या है तो समाज वही तो मैंने कहा ना कि जो सामाजिक विज्ञान है वो समाज में जब इंसान लंबे समय से जीवन यापन करता है परिस्थितियों को जीता है तो उस परिस्थितियों से वो एक चीज को फॉर्मूलेट करता है वो गोद ली हुई बहन के लिए क्या है? वो भी एक फॉर्मुलेट करता है। वो क्या है? उसका क्या वो भी
00:22:35:13 सामाजिक प्रमाण क्या है? सामाजिक विज्ञान प्रमाण है। नहीं भाई वैज्ञानिक प्रमाण क्या है? जैसे आपने सामाजिक विज्ञान का आधुनिक विज्ञान प्रमाण बता सकता है ना वो जेनेटिक्स का मसला वहां पर तो नहीं बता सकता तो फिर आधारिक विज्ञान समाज ने वो आधार क्या बताया है? वही तो मैं कह रहा हूं कि समाज लंबे समय से एक प्रक्रिया में जब चलता आता है तो वो समय-समय पर भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं समाज का वर्तमान में गोद ली हुई बहन से विवाह ना करने का आधार क्या है? वही तो मैं बता रहा हूं। पूरी बात आप सुनिए ना। आप लंबे समय से बता रहे हैं। तो वही हर चीज़ तय होती है। जैसे एक आप यह बता रहे हैं कि परिवर्तन कब-कब होता है, कैसे होता है? आप यह नहीं बताते क्यों हो रहा है? जैसे जब तक समाज को नहीं पता था तब तक होते थे शादी में होती थी। तो आप क्या मानते हैं सही क्या है? होना चाहिए कि नहीं? तो समाज को तो उसका आधार क्या है? समाज समाज को पता चल गया। हां, पता चला। बहन से विवाह नहीं करना है। क्यों? तो समाज को पता ये चला आधार इसका बहुत सारी चीजों से लिया जा सकता है। अब बहुत सारी चीज़ हो गई। अरे तो एक ज्ञान पहुंच नहीं सकता तो कौन सा आधार चीज डिफाइन नहीं होता ना कौन सी चीज़ बताइए मैं कह रहा हूं कि जो मानव समाज के आम हित में जो चीजें होती है अरे भाई आम हित तय कौन कर रहा है इंसान तय करते हैं कौन से इंसान वो एक इंसान नहीं तय करते हैं ना अरे तो कुछ तो उसका पैरामीटर बताओ अमुक अमुक करेगा जैसे एक जैसे इसको कैसे तय किया जाता है लंबे समय से इंसान को ये समझदारी डेवलप्ड होती है
00:23:50:16 कि भाई हम ये चीज करते आ रहे हैं मेरे भाई सुनिए पहले अभी आपने कहा कि इंसान तय करते हैं तो उन इंसानों की पहचान क्या होगी? नहीं पूरी बात तो सुन लीजिए। आप थ्योरी कर रहे हैं कि भाई आप यह कह रहे हैं पूरी बात आप कंप्लीट मैं आप विषय बदल रहे हैं ना नहीं बदल रहा हूं। आप मैं बता रहा हूं। अभी बात ये हो रही है कि इंसान कौन होगा जो तय करेगा वो कैसे तय होगा। नहीं पूरी पूरी बात होने आप ये कह रहे आप ये कह रहे आप आप मेथड बता रहे हैं कि 2 2 करके फोर आ जाएगा। ये मेथड हो गया। ये 2 2 कौन करेगा? वो बताइए। तो पूरी बात तो पूरी होने दीजिए। जी बताइए। मैं जैसे पूरी बात आप सुनेंगे तभी हो पाएगी। जैसे मुद्दा यहां पर यह है हम कि जैसे एक समय में समाज में जैसे जाति की जो व्यवस्था है, है ना? एक समय में समाज में बहुत क्लियर रूप से प्रिवेलेंट थे। है ना? फिर वही बात पूरी बात होने दीजिए। पूरी बात नहीं कर अरे भाई आप बार-बार इतिहास के आधार पर ये सिद्ध करने से प्रश्न पूछ रहे हैं। मैंने प्रश्न ये पूछा है कि आज के टाइम में आपने आज के टाइम मान लिया है। इंसान आज नहीं पैदा हुए हैं। अरे भाई आप आप लाखों साल पहले आप आज ये मान रहे हो ना कि गोल ली हुई बहन से विवाह नहीं करना है। हजारों सालों की सारी समझ है। इसमें तर्क क्या है? तर्क बता रहा हूं। यानी हजारों सालों की जो चीज है वो मान लेनी चाहिए। पहले समझ पूरी बात नहीं होने दे। आप बात विषयंतर कर
00:25:05:20 रहे हो। यह तो आपका मत है। हजारों हजारों साल की जो समझ है वो मान लेनी चाहिए बिना तर्क के। मेरी पूरी बात ही नहीं होने दे रहे। अरे भाई तो आप तर्क बताइए ना। मैं बता रहा हूं लेकिन आप कहां तर्क बता रहे हैं आप हजारों साल की बात बता रहे हैं बोल रहा हूं उसके बाद आप ठीक है बोलिए बोलिए [संगीत]
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