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00:00:00:14 आप जो वीडियो अभी देखने जा रहे हैं इन वीडियोस में आहान के द्वारा आयोजित की जाने वाली जो ऑनलाइन मीटिंग्स हैं उसमें आने वाले लर्नर्स के भाव भी व्यक्त किए गए हैं। तो इन वीडियोस को स्वाविवेक के द्वारा ही देखें। कही जाने वाली किसी भी बात को आह्वान के द्वारा निर्गत बात समझकर ही ना देखें। यह देखें कि उस मीटिंग में वह बात किसके द्वारा कही जा रही है। क्या मेरे द्वारा कही जा रही है या फिर वहां मीटिंग से जुड़ने वाले किसी ऐसे व्यक्ति के द्वारा कही जा रही है जो अभी केवल लर्नर है जो अभी-अभी जुड़ा है या फिर जिसे अभी सार्वभौम सिद्धांतों में जिसकी बहुत ज्यादा गति नहीं है। तो इन वीडियोस को आप प्रेरणा के लिए अवश्य देखें। परंतु कही जाने वाली सभी बातों को प्रमाण्य बुद्धि से ना देखें। उसमें देखें कि कौन सी बात आवाहान के द्वारा कही जा रही है और कौन सी बात वहां पर जुड़ने वाले किसी सामान्य व्यक्ति के द्वारा कही जा रही है। इन वीडियोस में सामान्य चर्चाएं हैं जिनको बिना किसी फिल्ट्रेशन के आप तक पहुंचाया जा रहा है जिससे कि उन्हें देखकर के जन सामान्य प्रेरित हो और उन अभियानों से जुड़े जिनसे जुड़कर के सामान्य जन आत्म कल्याण व धर्म उत्थान में दोनों में अपनी भूमिका प्रस्तुत कर सकता है। जय श्री
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00:01:13:20 राम। वाले थे वो आ गए हैं। प्रारंभ करते हैं। फिर है नहीं इसको प्रारंभ करते हैं। ठीक है। एक भगवत नाम का स्मरण फिर से कर लेता हूं मैं। श्रीमते रामचंद्राय नमः ओम नमः परम हंसा स्वादित चरण कमल जन्म करंदाय भक्त जनमान मानस निवासाय श्री रामचंद्राय श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम जय राम धर्म की
00:02:11:18 अधर्म का प्राणियों में सद्भावना हो विश्व का हो कल्याण हो गौ माता की कल्याण हो गौ हत्या बंद हो भारत अखंड हो हर हिंदू सेना हो हर हिंदू
00:02:45:10 अब भारत भव्य बनाएंगे हिंदू राष्ट्र बनाएंगे राष्ट्र बनाएंगे हिंदू राष्ट्र भारतवर्ष की जय हो जय हो हिंदू राष्ट्र भारतवर्ष की ऋग्वेदीय पूर्वामनाय श्री गोवर्धन पुरी पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित श्रीमद् जगतगुरु शंकराचार्य गुरुदेव भगवान की जय हो प्रातः स्मरणीय ब्रह्म विभूत परम तपस्वी अभिनव शंकराचार्य पदवाक्य प्रमाण पारावरीण अदुष्य वैदुष्य संपन्न यति चक्र चूड़ामणि धर्म सम्राट स्वामी श्री कृपात्री जी महाराज की जय हो पंच परमेश्वर ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश की जय सब बोलिए हाथ उठाकर नमः पार्वती पतय हर हर महादेव [प्रशंसा]
00:03:43:01 चलिए तो कैसे प्रारंभ करना है जी से हां बहुत ही उत्तम जो है यहां पे मंगलाचरण करवा दिया गया श्वेतांग जी के द्वारा तो अब हम यहां से अपना सत्र जो है इसको प्रारंभ करेंगे। सर्वप्रथम जैसे कि पहले सत्र में हुआ था वैसे ही हम उसी विधा से चलेंगे। यहां पे सबसे पहले मैं सभी सदस्यों को सूचित कर दूं कि हमारे यहां पे प्रशासनिक समिति के व्यवस्थापन के जो भी बैकग्राउंड में काम करने वाले यहां के सदस्य हैं सभी उपस्थित हैं और मैं एक-एक करके सभी से परिचय भी करवाऊंगा। लेकिन उससे पहले मैं चाहूंगा कि यहां पर श्वेतांग जी उपस्थित है तो कुछ दो शब्द जो है कहे इस पर जो है अपना परिचय देते हुए नाम और नाम अभियान पर इन सब पे कुछ बोले कोई मैं तो अल्पज्ञ क्या बोलूं मैं लेकिन कोशिश करता हूं देखिए जैसा कि आप सब जानते हैं कि मेरा नाम श्वेतांग शशिकांत पांडे है। मैं सामवेदीय गौतम शाखाध्याय से ब्राह्मण वर्ण से आता हूं और मैं पूरी पीठाधीश्वर श्रीमद् जगदगुरु शंकराचार्य गुरुदेव भगवान का एक बहुत
00:04:58:09 ही मतलब चींटी से भी छोटा अल्पज्ञ शिष्य हूं उनका और जो भी उनके और भगवत पाद आदि गुरु शंकराचार्य भगवान से लेकर गुरुदेव तक की परंपरा तक जो भी ज्ञान जो मिल रहा है मुझे बस मैं उनको फॉलो करने की अपनी तरह से पूरी कोशिश करता हूं। मैंने अपनी पूरी पढ़ाई जो है वो क्या बोलते हैं अंग्रेजी माध्यम से ही की है और लेकिन भगवत कृपा से और माता-पिता के आशीर्वाद से उनके संस्कार से क्या बोलते हैं मैं जितना हो सकता है अपने रूट्स से जुड़ने की कोशिश करता रहता हूं और उसी के उसी को चलते-चलते जब मैंने गुरुदेव को फॉलो करना शुरू किया था तो उसके बाद ही मैं एक आध वीडियोस वगैरह जब मैं गुरुदेव के क्योंकि गुरुदेव के तो जो भी क्वेश्चंस मेरे माइंड में होते थे तो मैं बस वो सर्च करता था गुरुदेव का नाम डालकर या पूरी का मतलब मठ का नाम डालकर और मुझे वो मोस्ट 99% सिनेरियो में मुझे मेरे जो जितने भी फिलॉसफिकल जो मेरे पॉइंट ऑफ व्यूज थे या फिर जो मेरे क्वेश्चंस थे वो क्या बोलते हैं उसके मुझे सशंस मिल जाते थे। लेकिन ऐसे चलते-चलते मैं मेरे पास एक दो रिकमेंडेशन आई थी आह्वान की भी और उसके बाद से क्या बोलते हैं
00:06:13:13 मैं आहान से एक तरह से जुड़ गया। तो तो यह एक छोटी सी जर्नी रही है मेरी। रही बात नाम की तो क्या है कि देखिए भगवान यह मेरे मन में ना मतलब बात डाली गई है कूट-कूट कर कि भगवान के नाम का जप जो है वो करते रहना चाहिए और यह चीज ऐसा है कि मेरे ध्यान में हमेशा हर समय क्या बोलते हैं भगवान भगवान के नाम का जप या फिर उनका नाम का जो उच्चारण है वह होता ही रहता है होता ही रहता है एक मिनट दीजिएगा
00:06:48:21 हम तो होता ऐसा है कि दिमाग में क्या बोलते हैं जब जबभी भी है ना जब भी समय मिलता है मुझे तो भगवान के नाम चलता रहता है वो आदत कैसे बनी वो आदत ऐसे बनी कि मेरी माता जी मुझे बचपन में बैठा के ना नाम जप करवाती थी ठीक है और वो क्या करती थी कि मुझे देती थी बादाम हो गया या मूंगफली हो गई या चने हो गए ठीक है वो वो देकर मुझे एक कटोरी में दे देती थी और बोलती थी ये नाम लो और इसको इधर रखो इधर रखो तो उस बहाने खेल भी होता था मेरा मेरे साथ लेकिन और मुझे बढ़िया भी लगता था और उस समय भगवान के नाम का उच्चारण भी होता था ऐसे करते करते जब चीजें बढ़ती गई बढ़ती गई बढ़ती गई तो फिर बाद में जब माला पकड़ाई तो माला पे करने बैठ गए उससे पहले कर माला पे सीख सीखा और ये सब चीजें करते-करते आज के समय भगवत कृपा से मैं कोशिश करता हूं कि कम से कम 16 माला भगवान के नाम का जप कर सकूं अपना जो भी गुरु गुरु प्रदत्त मंत्र उसके अलावा तो उसकी वजह से यह होता है कि अब भगवान का नाम जो है वो हर समय चलता रहता है। जब से मेरा विवाह हुआ है तब से मेरी जो धर्मपत्नी है वो भी अब क्या बोलते हैं मेरे साथ-साथ नाम लेने लग गई हैं। कभी-कभी ऐसा होता है कि मैं जोर-जोर से बोल-बोल के नाम लेता हूं। तो पीछे से वो चाहे किचन में
00:08:03:22 होंगी या इधर-उधर कहीं होंगी अपना कुछ कार्य कर रही होंगी तो वो भी पीछे से बोलने लग जाती हैं। तो तो उसकी वजह से एक अच्छा यह रह गया। माहौल बना रहता है कि भगवान का जो नाम का है वह जप चलता रहे। अब इसका नाम काेंस इतना ज्यादा इसलिए है क्योंकि हम जिस कलिकाल में हम रह रहे हैं ना उस समय हम क्या होते हैं कि शास्त्र सम्मत अपनी जीवन शत प्रतिशत तो कर ही नहीं सकते मतलब हम अपने जीवन में बस हम कोशिश करते हैं लेकिन लेकिन एक बात है कि हमें हमें हमेशा कोशिश अवश्य करती रहनी चाहिए कि कि हम जितना शास्त्र संवत जीवन जो है वो जी सके लेकिन उसके बाद भी त्रुटियां हो जाती है ना उसके लिए भी बहुत सारी चीजें होती हैं अपने अपने वर्णाश्रम अनुसार मतलब मतलब जैसे होता है कभी-कभी होता है जैसे गायत्री जप हुआ ये सब हुआ कुछ भी प्रायश्चित हुआ तो उसके लिए गायत्री जप हो गया या फलाना फलाना बहुत सारी ऐसी चीजें विधियां होती हैं लेकिन क्या होता है उसको भी करने के लिए भी अपनी एक विधि होती है तो उन सबको और छोटा और छोटा और छोटा बनाकर महादेव की कृपा से कलयुग के लिए बस ये बोल ये हमें बताया गया कि कुछ ना हो तो कम से कम भगवान के नाम का जप तो अवश्य हो। ठीक है? गुरुदेव यह बात अवश्य बोलते हैं कि मान लीजिए जब जब गुरुदेव मंत्र देते दिया था जब उन्होंने तब हमें यह कहा था कि जब
00:09:19:06 कभी इस समय नहीं कर पाए या सूतक पातक पड़ जाए ऑफ कोर्स उस समय आप ये सब चीजें नहीं कर सकते तो भगवान के नाम का जप उस समय भी चलते रहना चाहिए और इसकी इतनी अच्छी बात है मतलब ये इतना ई ऑफ लाइफ है आपके लिए कि आप हर अवस्था में इसको किसी भी अवस्था में भगवान के नाम का जप कर सकते हैं किसी भी अवस्था में चाहे आप घर में हो घर से बाहर हो इधर हो उधर कुछ भी कैसा भी कार्य कर रहे हो आप हमेशा हरनिश भगवान के नाम का जप कर सकते हैं। ठीक है? मतलब ऐसा उसमें कुछ मतलब बीज नहीं कोई प्रणव नहीं कुछ नहीं। केवल नाम आपका जो भी ईस्ट है राम कृष्ण शिव सांभ सदा शिव कुछ भी है हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण जो भी जपना है आप वो जपिए लेकिन भगवान के नाम का जप जो है वो चलता रहे। अब उससे अच्छी बात ये क्या है कि जो मेरे लिए जो पर्सनली अगर मैं बोलूं तो मेरा गोल क्या है? मेरा गोल है वो ज्ञान की प्राप्ति करना या वो चीज को प्राप्त करना जिससे सच्चिदानंद वाला जो एसेंस है वो मुझे प्राप्त हो जाए मिल जाए। ठीक है? तो उसके लिए एक बार मैंने मुझे अभी आचार्य का नाम नहीं याद आ रहा है। हमारे ही परंपरा के थे। उनके बहुत अच्छे-अच्छे ग्रंथ भी है। अष्टावक्र गीता पे भी उन्होंने बहुत अच्छा लेक्चर दिया था। मुझे
00:10:34:12 उनका अभी नाम बिल्कुल ध्यान नहीं आ रहा है। मेरे दिमाग से उतर गया है। तो उन्होंने बहुत अच्छा बहुत अच्छी एक बात कही थी जब उनसे किसी ने प्रश्न पूछा था कि क्या भगवान के नाम का नाम लेने से सारे पाप मुक्त हो जाते हैं और आदमी जो व्यक्ति है वो मुक्त हो जाता है? तो उन्होंने बोला था कि हां बिल्कुल हो जाता है। लेकिन उसमें बस एक छोटा सा मतलब करेक्शन है। यह है कि आपके नाम लेने के बाद और आपकी मृत्यु तक कोई भी जी परमानंद जी जी बिल्कुल सही कह रहे हैं आप तो आपके नाम लेने के बाद और आपकी मृत्यु तक कोई भी पाप ना हो ऐसा हो नहीं सकता। यह बात गुरुदेव ने भी बताई थी कि अभी आपने राम का नाम ले लिया। आपके सारे सारे जीवन मतलब आप मुक्त हो गए। बिल्कुल आपकी आपने सारे जो पाप हैं वो आपने काट दिए। लेकिन अब से लेकर अभी तक जो भी आपने श्वास लिया या कुछ भी लिया तो उसकी वजह से आपसे अनजाने अनजाने में बहुत सारे पाप हो जाते हैं। बहुत सारी जीव हत्याएं हो जाती हैं। चाहे वो शरीर के अंदर ही सही। ठीक है? तो ऐसा तो ऑलमोस्ट 99.99% प्रोबेबिलिटी है कि ऐसी कि आपसे पाप होगा ही होगा जाने अनजाने में भी। तो इसलिए फिर आप इस कर्म के चक्कर में बंधे रहते हैं। जन्म और कर्म के चक्कर में बंधे रहते हैं। तो उन्होंने बोला था कि एक ही तरीका है और वो है कि
00:11:49:15 जैसे ही आपकी मृत्यु हो रही हो मृत्यु होने और आप भगवान के नाम लेने के बीच का में कोई भी पाप ना हो तो मुक्ति हो जाएगी। अब यह होगी कैसे? इसका अर्थ यह हुआ कि बिल्कुल फ्रैक्शन ऑफ सेकंड में ही आपके भग मृत्यु होने से पहले कोई पाप हो ना हो और उससे पहले नाम निकल जाए। ठीक है? और जो नेक्स्ट इंपॉसिबल होता है। इसीलिए हम क्या करते हैं? करत करत अभ्यासते जड़ मत होत सुजान रसरी आवत जात सिल पर निशान। यानी कि हम अभ्यास करते रहते हैं नाम के जप करने का। इतना जप करते हैं, इतना नाम के जप करते हैं, इतना अभ्यास करते हैं। इतना अभ्यास करते हैं कि उस समय भी जाने अनजाने में गलती से ही सही एक बार भगवान के नाम का नाम का उच्चारण हो जाए या उनका उनका नाम निकल जाए और क्या पता क्या पता प्रोबेबबली कि क्या पता कि उसके बीच में कोई पाप ना हो और चांस हो जाए तो हम क्या बोलते हैं मुक्त हो जाएं। ठीक है? तो अब इसके अब इसको देखने के दो तरीके हैं। पहला यह है कि ऐसा तो होगा ही नहीं। अगर आप यह भी सोच सकते हैं कि भाई अब तो पाप तो होना ही है। अब जब आप कह रहे हो कि फ्रैक्शन ऑफ सेकंड में पाप हो जाता है। सांस ले रहे हैं। बहुत सारी चीजें हो रही हैं। ठीक है? हमारे आसपास हमारे किसी और कारण की वजह से पाप हो गया। जैसे कि मान लीजिए मेरे ही किसी कर्म के कारण उससे प्रभावित होकर
00:13:04:16 अब क्या बोलते हैं कोई कष्ट में हो गया उस समय किसी दुनिया के दूसरे कोने में तो भी वो मेरे पाप में मैं भागी हो जाऊंगा उसका। ऐसा भी हो सकता है। तो तो ऐसे तो फिर पॉसिबल ही नहीं है। तो देखिए इसका उत्तर ये होता है कि अगर आपने कोशिश नहीं की तब तो गारंटी है कि क्या बोलते हैं आप मुक्त नहीं होंगे। अगर आप कोशिश कर रहे हैं तो कम से कम कुछ तो चांस है ना कि मतलब कि हो सकता है कि आप मुक्त हो जाएं। जब आप कर ही नहीं रहे हैं तो फिर तो 100% आप नहीं होंगे। लेकिन अगर 1% ही सही लेकिन 1% चांस तो है ना। तो उसी तरह से अगर आप भगवान के नाम का जप जो है वह हर्नेस करते रहेंगे। और यह मैं नहीं कह रहा हूं। यह ऐसा मतलब मैंने बहुत बड़े-बड़े संतों को सुना है। ठीक है? एक बार मैं राजेंद्र दास जी महाभाग को सुन रहा था और वो कल ही करपात्र स्वामी भगवान की जयंती थी। उनका प्राकट्य उत्सव था। तो उसके उपलक्ष में मतलब मैं उससे पहले ही मैं वीडियो उनके सुनता रहता हूं। उनके लेक्चर देखता रहता हूं। उनकी कथाएं सुनता रहता हूं। तो मैं उनको सुना रहा था। उन्होंने बोला था कि करपात्र स्वामी महाभाग अहरणिस राम के नाम का जप करते रहते हैं। अहरिस अहरिस का अर्थ समझते हैं हर समय हर अवस्था में राम के नाम का जप करते रहते
00:14:19:18 हैं। राम राम कुछ भी बोलो राम श्री राम जय राम जय जय राम और जो भी जयघोष आपने सुना है जो ये पूरा हिंदू समाज जो ये गाता है आप किसी मंदिर में आज चले जाइए हर मंदिर की आरती के बाद धर्म की जय हो धर्म का नाश हो या घोष होगा ही होगा ये भी उन्हीं का दिया हुआ है ठीक है तो वो इतने एनग्रेव्ड हो चुके हैं हमारे मतलब कि ब्लड लाइन के रूट्स में एक धार्मिक ब्लड लाइन के रूट्स में कि मतलब कि आप उनको अलग नहीं कर सकते ठीक है। करपात्री जी महाभाग की बात कर रहा हूं मैं। तो उनसे उनसे भी मैंने सीखा बहुत कुछ तो वो भी बहुत नाम जप करते थे। ठीक है। गुरुदेव तो बोलते ही हैं राम की महिमा है। उन्होंने बहुत सारी बहुत सारी बताई ही हैं। मेरे माता-पिता जी रामानंद संप्रदाय से दीक्षित हैं। वृंदावन से वो माता जी मेरी बताती हैं कि राम की कितनी राम के नाम का ही जप करती रहती हैं। वह हमेशा और उनकी कृपा से मैं भी राम के नाम का जप अब करता रहता हूं। कब जब निकले नारायण नारायण निकलता रहता है या श्री राम जय राम जय जय राम निकलता रहता है। जो तो इस तरह से चलता रहता है। तो उसके बाद तो और बस मेरी कोशिश यही होती है जो मैंने आपको थोड़ी देर पहले बताया कि कि मुझे भी मुक्त
00:15:34:24 होना है। तो मुक्त होने के लिए मैं बस एक कोशिश कर रहा हूं। अब ठीक है? मैं इस प्रैक्टिस को इतना इनहेरिट कर रहा हूं अपने जीवन में कि मैं जितना नाम जप करूं इतना नाम जप करूं कि अभी नहीं तो अगले कुछ सैकड़ों जन्मों में तो मुक्ति मिल ही जाए। ठीक है? और क्या पता गलती से ही सही अगर भगवान की कृपा रही तो क्या पता अंतिम समय में मेरे भी भगवान मेरे भी मुख से राम का नाम निकल जाए। तो मुझे भी महादेव तारक मंत्र दे दे। ठीक है तो इसी से इसी को बोल के मैं अपने आप को विश्राम देता हूं। ठीक है ना बहुत उत्तम बहुत ही सुंदर शतांग भैया बहुत अच्छा लगा अब मैं आग्रह करूंगा माननीय दीक्षित जी से कि वे भी कुछ अपनी ओर से कहें यहां पर उपस्थित है दीक्षित जी हमारे बहुत ही विशेष सदस्य हैं कर्मकांड आदि विषयों में इनकी अच्छी पहुंच है जानकारी है और जितने भी कर्मकांड संबंधी हमारे प्रश्न शंकाएं अभी आते रहते हैं उनका समाधान दीक्षित जी के द्वारा ही किया जाता है तो एक बार मैं उनसे आग्रह करूंगा कि अपनी ओर से जो भी वो कहना चाहे सभी को जय जगन्नाथ जी गुरुदेव के श्री चरणों में प्रणाम करते हुए जी आपकी
00:16:50:00 आवाज थोड़ी सी कम आ रही है आप कृपया एक सेकंड ये बात क्या मैं घर से बाहर हूं उसमें प्रयाग आया हूं तो ये एक प्रकार से अपने गुरु भाई है उसको ऑफ करिए अब आ रही होगी आवाज साहब हां जी आ रही है अब आ रही है साहब यहां पर जहां मैं रुका हूं ये बहुत ही अच्छे साधक हैं अपने गुरु भाई हैं तो उनके कक्ष में हूं तो कूलर चल रहा है छोटा सा वही आवाज कर रहा था तो विषय को आगे बढ़ाते हुए
00:17:31:13 बहुत अच्छा विचार रखा जो है श्वेता जी ने और उसी को हम आगे बढ़ाना चाहेंगे कि नाम जप से क्या हम मुक्त हो जाएंगे? क्या हमारे पाप जो भी हमने अभी तक पाप किए हैं सब नष्ट हो जाएंगे? एक बहुत अच्छा प्रसंग हमको याद आ गया कि पुराणों में या जो भी हमारे आचार्य गण हैं महापुरुष हैं। वह एक बात बोलते हैं मतलब लगभग सभी यह बात बोलते हैं कि भगवान के नाम लेने से मतलब भगवान के नाम लेने से 1000 एक लाख ऐसा मतलब लाखों पाप कट जाते हैं एक नाम लेने से तो इसके पीछे जो कारण है वो बहुत बड़ा एक कारण है वो तो अलग दीक्षित जी मैं दीक्षित जी मैं कह रहा था कि आप ईयरफोन है ना उसको हटा के बोलेंगे तो शायद ज्यादा बेहतर अब आ रही है आवाज आवाज जी बिल्कुल बिल्कुल तो हुआ यह कि एक बंधु हैं। उन्होंने ऐसे प्रश्न किया कि भाई अगर ऐसी बात है तो हमारे पाप तो मतलब हम तो हजारों बार नाम ले चुके
00:18:47:01 तो हजार को मल्टीप्लाई करिए लाख से तो इतने पाप तो हमारे कट ही गए तो हमको तो मुक्त हो जाना चाहिए। लेकिन गुरुदेव एक बात कहते हैं कि अगर हमें ऐसा अवसर मिले कि हमारे द्वारा जो छोड़े गए शरीर हैं अब तक उनको देखने का अवसर मिल जाए तो यह पृथ्वी नहीं यह लोक नहीं कोटि-कोटि मतलब न जाने कितने करोड़ यह जो लोक हैं पट जाए हमारे शरीर से यानी जो हमने शरीर त्यागे हैं हमारे त्यागे गए शरीरों से तो इतने शरीर हमने त्याग दिए उन शरीरों उससे न जाने कितने पाप हुए होंगे क्योंकि अंतःकरण तो पूरा पूरा हमें हर जीव का अंतःकरण जो होता है वो पूरा ट्रांसफर यानी पूरा मतलब पिछले जन्म से लेके और उसके पहले से पूरा वो तो वही है ना वो तो नहीं बदलता। यह जो स्थूल शरीर है यह बदल जाता है। तो अब उसी हिसाब से पाप का आकलन हम कर सकते हैं। तो ऐसे में अगर भगवान के एक नाम से लाखों पाप कटते हो तो 10 रे टू फाइव यानी 10 में पांच की पावर है। लेकिन पाप में जो 10 की पावर है वह
00:20:02:02 न जाने कितनी है। इसलिए इसीलिए निरंतर नाम जप चलता रहे। इसीलिए कहा गया है कि नाम जप चलता ही रहे। अब सबके पापों का की संख्या अलग-अलग है। तो मैं जो कहना चाह रहा हूं आप लोग समझ पाए होंगे कि यह प्रश्न अक्सर लोग कर देते हैं कि भाई पुराणों में लिखा है कि एक नाम लेने से 1000 पाप कटते हैं। 1 लाख पाप कटते हैं। तो क्या हमने इतने पाप कर दिए? हम तो हजार बार नाम ले चुके हैं। तो भैया पाप भी तो उतने हिसाब उसी हिसाब से हुए हैं हमसे। हमारे इस अंतःकरण से माने जो हमारा सूक्ष्म शरीर है वो उसका पूरा प्रमाण है ना। तो खैर एक ये विषय था। दूसरा काफी कुछ रख दिया सुतांग जी ने विषय और दूसरा एक बात और है कि राम के नाम में कितनी शक्ति है। भगवान के एक तो नाम हो गया नाम को हम उच्चारण करें। दूसरा जैसे भगवान राम का ही नाम है तो गुरुदेव एक युक्ति बताते हैं कि दीर्घ स्वर से यानी दीर्घ उच्चारण एक होता है जैसे राकार को बढ़ा दिया हमने तो इस प्रकार के कई विधाओं से हम नाम
00:21:17:06 लें अगर भगवान का तो अंत में इसी शरीर में जैसे अभी बोला सुधांग जी ने कि यह प्रयास करना चाहिए कि जो फ्रैक्शन ऑफ टाइम है मतलब उसमें जो पाप होता है। मतलब पाप तो कभी भी हो सकता है शरीर से श्वास ले रहे हैं, बोल रहे हैं। बोलने से भी जीव कुछ मर जाते हैं। तो नाम जप चलता रहे तो ऐसी भी अवस्था आ जाती है कि आप जीवन मुक्त मतलब इसी शरीर के रहते आप जीवन मुक्त हो सकते हैं। नाम जप में ऐसी शक्ति है। मतलब आप एकदम जो कहते हैं ना कि एकात्म हो गए ईश्वर से एकदम। इस शरीर से यह संभव है नाम जप के द्वारा। ऐसे एक एक संत हैं। वह गुरुदेव उनका प्रसंग सुनाते हैं कि समुद्र के किनारे वो लेटे थे सायम में संध्या के समय में तो कोई साधक गया वो कहा कैसा ये व्यक्ति है कि लेटा है संध्या के समय में और पता नहीं कैसा व्यक्ति है। क्या इसके दिमाग में चल रहा है। इसको बैठ के साधना करनी चाहिए। लग तो रहा है कि साधक है। तो क्योंकि वो क्या था कि अब यह सब यम नियम तो हमारे लिए है ना। अब जो ईश्वर से एकात्म
00:22:32:09 जिसका पूरा हो गया जो जिसका अंतःकरण ईश्वर से जाकर मिल गया कहते हैं लीन हो जाना ब्रह्म लीन ब्रह्म में जाकर लीन हो गया तो अब उसके लिए क्या सायम क्या प्रातः तो वो लेटे हुए थे तो जब वो साधक पास में गए उन महात्मा के जो समुद्र के किनारे लेटे थे तो और कान लगाया तो उनके रोम रोम से राम राम राम ऐसा उच्चारण सुनाई पड़ा उनको तो नाम जप में ऐसी महिमा है यानी नाम को अलग-अलग विधा से लेने का भी विधान है। सतगुरु देव की कृपा से ऐसा हमें जो है ऐसी दीक्षा मिल सकती है। देते हैं दीक्षा मतलब राम या कोई भी नाम उसको किस प्रकार से हम और भी ले सकते हैं। उसके उच्चारण की विधा अलग-अलग प्रकार से अगर हम जप करें। गुरुदेव तो बता चुके हैं राम के नाम के द्वारा किस प्रकार से लेना है। भगवान राम का नाम कि हम इस शरीर के रहते जीवन मुक्त हो जाए। ऐसा भी उपाय है और क्योंकि मन से ही मनुष्य बनता है तो मन को साधने का मन बुद्धि चित्त अहंकार ये सूक्ष्म शरीर के जो घटक हैं इन सभी को साधने के लिए अलग-अलग प्रकार के उपाय हैं। तो मन को साधने के लिए नाम
00:23:47:13 जप ही एक मात्र उपाय है और मन ही जो है हमको नरक ले जाता है और यही मन हमको भगवान से मिला भी देता है। भगवान के श्री चरणों की प्राप्ति भी करा देता है। तो मन तो ऐसा है कि एक बहुत अच्छा मतलब कहते हैं ना कि यह हमारा सबसे बड़ा वैरी भी है और सबसे बड़ा मित्र भी है। दोनों है ये। अब इससे हम क्या कर लें? भाई मित्रता कर लें तो भगवान के पास जाकर छोड़ देगा और वर कर लें। वर का मतलब कि इसको बेलगाम एकदम छोड़ दें। तो फिर यह क्या करेगा? वह तो सबको पता ही है। कितने कितने पाप करा देता है यह। तो मन को साधने का एकमात्र विकल्प सिर्फ भगवान का नाम है। नाम जप है। और इतना ही कह के मैं अपनी वाणी को विराम दूंगा। बाकी वक्ताओं को भी समय मिले। नारायण जय श्री जगन्नाथ। धन्यवाद दीक्षित जी। बहुत ही सुंदर वक्तव्य है। बहुत ही अच्छा लगा। अब मैं माननीय शिवश भैया से आग्रह करूंगा कि वह अपना वक्तव्य यहां प्रदान करें।
00:24:56:24 तो सभी को जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। सभी जय श्री राम। और सभी को यहां देख के बहुत अच्छा लग रहा है। सबसे पहले तो मैं इस आयोजन के बारे में थोड़ा सा बात कर लूं। यह जो आयोजन है जो आह्वान की जो कार्यकारिणी जो टीम है तो उसकी अथक प्रयासों के बाद इस तरह का एक आयोजन है जो हम लोग कर रहे हैं और सबसे पहली बात तो कि लगन के साथ इसका आयोजन किया गया है और काफी परिश्रम किया है हमारे प्रथम प्रताप सिंह जी ने। इसके साथ ही साथ अन्य महानुभाव भी हैं जो इसमें गुप्त अथवा प्रकट रूप से जुड़े हुए हैं और नामास्त्र इस तरह से आगे बढ़ रहा है। एक क्रांति के रूप में उद्भाषित हो रहा है धीरे-धीरे और इसमें जुड़ने वाले जितने भी यहां पर महानुभाव है उनको भी मैं आदर उनके प्रति प्रकट करता हूं कि आपने अपने लिए इस सत्र के लिए समय निकाला अपना बहुमूल्य समय दिया और साथ ही साथ क्योंकि यह आप सबका दायित्व भी है कि किस तरीके
00:26:11:25 से सनातन समाज को संगठित किया जाए और उस उसमें आपने अपनी अग्रणी भूमिका निभाई तो इसके लिए भी आपका आपका अभिवादन है। आपका अभिनंदन है। जैसे अभी यहां पर मेरे दो गुरु भाइयों ने अभी जो अपनी बातें अपने विचार नाम के नाम के विषय में प्रस्तुत किए और यद्यपि एक सेशन हो चुका है परिचय सत्र का जिसमें कि अ काफी संख्या में लोग एकजुट हुए थे वहां पर भी और उसमें भी काफी कुछ जानने को मुझे भी मिला था और वहां जुड़ने वाले प्रत्येक व्यक्ति को कुछ ना कुछ वहां से सीख देखने को जानने को मिला। तो उसी के बाद यह सोचा गया कि क्यों ना फिर इसको एक और थोड़ा सा भव्य रूप देकर के एक बार और आयोजित किया जाए और अन्यों को भी प्रेरित किया जाए और इसको थोड़ा सा लोगों तक पहुंचाया जाए कि नामास्त्र क्या है? नाम नाम जप की क्या महिमा है और किस तरह से हम नाम जप के द्वारा अपने जीवन के प्रत्येक अ कष्ट से मुक्ति पा सकते हैं निवारण पा सकते हैं। तो ये सारी चीजें हैं। इसके लिए सबका मैं हृदय
00:27:27:03 से अभिनंदन करता हूं। सबका स्वागत भी करता हूं। जो भी किसी भी मत पंथ संप्रदाय से हैं। मैं जानता हूं कि इसमें बहुत से ऐसे भी लोग हैं हमारे नामास्त्र में नाम जप जो करते हैं। कोई इस से भी है। कोई आर्य समाज से भी है। कोई मेरे ख्याल से रामपाली भी है जो नाम जप करने के लिए जुड़ा हुआ है। जिसके मन में कहीं ना कहीं राम की महिमा जागृत हो गई है। कोई आर्य समाजी भी है जिसके मन में नाम की महिमा जागृत हो गई है। और कोई इस कौन से भी है जो ठीक है श्री कृष्ण भगवान का ही नाम जप करना है तो कहीं भी करो तो उसने भी सहयोग दिया तो इसके लिए भी सबका ऐसे जो लोग हैं जो कि अभी वैचारिक मतभेद रखते भी हैं कहीं कहीं कुछ कुछ अंशों में या नहीं भी रखते हैं वो भी जुड़े तो उसके लिए भी उन सबका भी स्वागत और उनका भी अभिनंदन क्योंकि सनातन समाज को वैदिक समाज को एकजुट करने की इस मुहिम इस अभियान में आपने भूमिका निभाई इसके लिए आपका सम्म सम्मान अब नाम जप मेरे दो गुरु भाइयों ने बहुत अच्छी सी व्याख्या कर ही दी है तो मेरे पास कुछ बचता नहीं है बताने को हां पर कुछ अंश जो मुझे लगता है कि जो जो
00:28:42:09 प्रासंगिक भाषा में बताना आवश्यक है प्रासंगिक रूप में बताना आवश्यक है तो वो मैं थोड़ा सा बता देता हूं जैसे मेरे मेरी जानकारी में अभी तक नाम जप की जो व्याख्या हुई है वह आधिदैविक आध्यात्मिक रूप से जो व्याख्या होती है वह दोनों हो गई। तो अब थोड़ी सी वैज्ञानिक व्याख्या भी कर ले। यद्यपि मैंने पिछली बार भी वैज्ञानिक व्याख्या पर ही जोर दिया था। मुझे ऐसा कुछ स्मरण आ रहा है। तो परंतु फिर भी अभी जो जुड़े हुए महानुभाव है एक बार और संभवत जिनको उस समय ठीक से जिन्होंने नहीं सुन पाए होंगे तो उनको उनके लिए रिपीट हो जाएगा और जिनका पहली बार है उनके लिए तो है ही। तो सबसे पहली बात यह समझ लीजिए कि अगर हम नाम जप को ऐसे समझना चाहिए कि इट्स ऑल अबाउट योर कॉन्शियसनेस। आपकी कॉन्शियसनेस जो कि बंधन में है जो कि प्रपंच रूपी संसार को देख रही है। उससे बंधी हुई है। उससे मुक्ति दिलाने का एक साधन है नाम जप। अब नाम जप के लिए कुछ चीजें बताई गई है। जैसे कि एक बात अभी कही कि
00:29:57:10 शरीर छोड़ते समय यदि आपको भगवान का स्मरण हो गया तो उसके कारण आप मुक्त हो जाते हैं। मगर शरीर छोड़ते समय आपको नाम याद आ जाए भगवान का। ये बहुत टेढ़ी थी। क्योंकि जिस समय व्यक्ति कष्ट में होता है या फिर द्वैत भाव को प्राप्त होता है या फिर प्रपंच रूपी संसार से ग्रसित होता है तो वो क्या करता है जब वो जा रहा होता है कि मेरी पत्नी का क्या होगा मेरे बच्चों का क्या होगा वो मकान बेचना था वो चाय की केटली खुली रखी है वो फैल ना जाए वो फन ना जाए मैं गैस पर रख के आया था हम तो यह सब चीजें भी होती है और यह भी कहा जाता है कि मरते समय जिस मृत्यु के समय जिसका आप ध्यान करोगे उसी का आपको शरीर मिल जाएगा अगले जन्म में। तो सबसे पहली बात तो है कि जो नाम जप है वह आपकी कॉन्शियसनेस में रोम रोम में आपके हर छिद्र में प्रत्येक अंश में शरीर के हर अंश में नाम जप यदि आप लगातार करते जा रहे हैं तो वो आपके अंदर भगवान का स्मरण व्याप्त करा देता है। अर्थात आप कुछ भी कर रहे हैं मगर आप भगवान का ही ध्यान कर रहे हैं। लगातार आपके मन में राम की कुछ
00:31:13:08 चिंतन चल रहा है। शिव का चिंतन चल रहा है। कृष्ण का चिंतन कर चल रहा है। तो यह नाम जप से होता है और कंटिन्यू आप जब उसमें प्रैक्टिस करते रहते हैं। लगातार नाम जप करते ही रहते हैं। करते ही रहते हैं। सवा घंटे आपने यदि रियली करना चालू किया तो यहां से आपकी जर्नी स्टार्ट हो जाती है। क्योंकि आपका शरीर ही आपको इस प्रपंच रूपी संसार से जोड़ता है। शरीर शरीर की जो इंद्रियां है वह और मन उसको स्टोर कर लेता है सारी सूचनाओं को और आपको बता देता है और संसार आपको हर क्षण प्रत्येक क्षण यही बताने में जुटा हुआ है कि संसार में कोई मोक्ष नाम की चीज नहीं है। संसार में कोई सत स्वरूप नहीं है। कोई सच्चिदानंद नहीं है। वह यही बताने में जुटा हुआ है आपको। परंतु फिर भी आपके अंदर की जो सच्चिदानंद स्वरूप की अंश आपकी आत्मा है जो स्वयं सच्चिदानंद है वो आपको याद दिला रही है मा सदगमया तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्यमया वो आपको खींच रही है वो आपको कह रही है कुछ है जो
00:32:28:12 तेरा बाकी है तू इस टीवी को तू इस फ्रिज को तू इस मोटरसाइकिल को तू इस कार को तू इस बिल्डिंग को तू इस भवन को तू इस महल को तू इस एरोप्लेन को हेलीकॉप्टर को हाथी को चीते को बाघ को शेर को इसको अंत मत समझ इसके परे एक सत स्वरूप है जो व्यवहार में हमारा भगवान है ईश्वर है हमारे जिनका भजन करके जिनका नाम जप करके हमारी वो जो कॉन्शियसनेस है जो बंधन में है वो मुक्त हो सकती है तो यह एक प्रणाली होती है कि आपके मस्तिष्क में आपके मन में फिर आपके शरीर में आपके शरीर के रोम रोम में हर हर अंश में हर टुकड़े में जीवन के हर क्षेत्र में कहीं ना कहीं राम को कृष्ण को शिव को मां जगदंबा को भगवती को गणेश को भगवान सूर्य को स्थापित कर दे आपके जीवन में आपके शरीर में तो अभी जो एक बात कही जा रही थी कि समुद्र के किनारे कोई महानुभाव कोई महापुरुष थे जो लेटे हुए थे संत तो क्या हुआ उनके रोम रोम से उनके हर कण से हर अंश से राम की आवाजें भगवान का चिंतन की अनुभूति
00:33:43:20 हो रही थी तो वो कैसे हुआ क्योंकि उन्होंने वो नाम जप या अपना जिस प्रकार से भी उन्होंने भक्ति की भगवान की उसका परिणाम था वो अच्छा इसमें यहां पर क्योंकि बात आई है तो एक भ्रामक तथ्य भी यहां से हो सकता है तो उसको मैं क्लियर करता चलूं कि वो जो महानुभाव वहां पर लेटे हैं समुद्र के किनारे जो जो करना चाहिए शास्त्रों के अनुसार वो नहीं कर रहे हैं। यदि उनसे भी पूछा जाएगा कि आप यहां शास्त्रों के अनुसार आपको इस समय यह करना चाहिए। मगर आप तो यहां लेटे तो वो ये कहेंगे मेरे मुझे फॉलो मत करो। शास्त्र को फॉलो करो। शास्त्र सही कह रहे हैं। तो सामर्थ्य के कारण जो हमारे सामर्थ्यवान महापुरुष होते हैं यदि सामर्थ्य के कारण वो शास्त्रों के परे चले भी जाते हैं तो उनको फॉलो नहीं किया जाता है। ये वो स्वयं कहते हैं। सामर्थ्य के कारण वो परे चले गए। तो इस इन बातों का फायदा उठा के अरे जिसके पास भगवान का भजन आ गया वो तो अब कुछ भी करे। कुछ भी करे का क्या मतलब है? क्या बहन से विवाह करने लगे? नहीं कर सकते ना। तो जब भी यह पूछा जिसको अनुभूति होगी वो पूछने
00:34:58:28 नहीं जाएगा कि आप ये कैसे कर रहे हो? जिसको अनुभूति होगी जिसके अंदर सामर्थ्य आ जाएगा वो इन बातों में नहीं पड़ेगा कि वो ये कैसे कर रहा है? वो वो कैसे कर रहा है। ठीक है? पूछने कौन जा रहा है? जो अभी साधक है जो अभी पहुंचा नहीं है गंतव्य तक। और किससे पूछने जा रहा है? जो गंतव्य तक पहुंच चुका है तो उनका अनुसरण उनका अनुकरण उनका अनुसरण किया जाता है वहां पर अनुकरण नहीं किया जाता है कि अगर वो संध्या काल में वो लेटे तो हम भी उनका नाम लेकर के संध्या काल में हम भी समुद्र के किनारे लेट जाए हम भी महापुरुष हो गए ठीक है यह बात वो स्वयं बोलेंगे जो वहां लेटे इस बात का ध्यान रखें इसका एक गलत उदाहरण लेकर के अपने जीवन में अप्लाई ना कर दे कि हम भी महापुरुष हो गए ठीक है। महापुरुष बना नहीं जाता है। महापुरुष बनने के लिए प्रयास नहीं किया जाता है। महापुरुष स्वतः व्यक्ति कोई बन जाता है। कोई उसके लिए जैसे सन्यास सन्यास या अन्य कई अध्यात्म की जो अध्यात्म का जो अध्ययन होता है उसमें कई बार ऐसा है कई ऐसे वो है पर पॉइंट्स जिसमें कि आपको उस
00:36:14:00 चीज के लिए प्रयास नहीं करना है। वो तो स्वतः मिलने वाली चीजें हैं। जैसे जैसे कि आपको चाहिए कैलोरी आपकी इंटेस्टाइन जो है आते हैं जो आपकी अंतड़ियां उनकी जो फूंख है वो कौन शांत कर सकता है वो शांत करने वाले तत्व का नाम है कैलोरी साइंटिफिक भाषा में तो क्या कैलोरी को प्राप्त करने आप घर से बाहर निकलते हैं क्या घर में लाकर के कहते हैं मुझे इतनी कैलोरी दे दो मां से पिता पिता से, पत्नी से, कभी भी घर के किसी व्यक्ति से कहते हैं कि मुझे इतनी कैलोरी चाहिए। क्या कहते हैं? मुझे इतनी रोटी चाहिए। मुझे इतना चावल चाहिए। तो चावल क्या है? साधन। और कैलोरी क्या है? स्वतः मिल जाने वाली चीजें। तो ये जो वैराग्य है जीवन में और जो क्या कहते हैं? ये वैराग्य हो गया या फिर आपका ये महापुरुष वाली जो स्थितियां हो गई इन सब के लिए प्रयास नहीं किया जाता है। यह सारी स्थितियां आपको स्वतः मिलने वाली होती है। ऐसी ही स्थितियों के कारण भगवान श्री कृष्ण ने
00:37:29:13 अपने महान गीत में कहा था। अपने महान गीत में कहा था अर्जुन को क्या कहा था? कर्मण्यवादी कारस्ते मा फलेशु कदाचना। मेरे पास भी मैं अपनी ग्रस्त जीवन का ही उदाहरण दे दूं। तो जब एक साधारण जीवन से एक भटके हुए दिशाहीन हिंदू वाले जीवन से जब मैं शंकराचार्य और प्रामाणिक गुरु शिष्य परंपरा के सानिध्य में उसके अध्ययन की ओर बढ़ने लगा था तो जीवन में आने वाले बदलावों के कारण जो मेरी जीवन संगनी है भार्या है ये बात आज मैं पहली बार बता रहा हूं। उन्होंने मुझसे कहा था कि अब तुम कहीं वो घर बार छोड़ने तो वाले नहीं हो। यह उनका ये उनकी शंका थी। आजकल जो जो शंकर परंपरा के अंतर्गत या प्रामाणिक परंपराओं के अंतर्गत रहने वाले जो भी द्विज है वो जब संध्या करते हैं तो एक साधारण सामान्य शहरी जीवन नगरीय जीवन अथवा ग्रामीण जीवन जो परंपराओं से दूर है उन लोगों की दृष्टि से देखें तो एकदम से उनको लगता है यहां क्या सन्यास तो नहीं है कुछ। यह व्यक्ति तो सन्यासी लग रहा है। संध्या वंदन वाला गेटअप कैसा होता है?
00:38:44:28 अगर सामान्य जनजीवन की दृष्टि से देख तो सन्यासियों वाला गेटअप ही होता है। उनको नहीं मालूम है वो सन्यासियों का गेटअप कैसा होता है? क्या नहीं? क्या अंतर है इस व्यक्ति में जो संध्या कर रहा है और सन्यासी में ठीक है। तो ऐसा ही प्रश्न वैसे इस नाव पे इस नाव पे मैं भी बैठ चुका हूं। हां। तो जब मेरा ये रूप देखा धोती बांध के और लंगोट धारण करके और धोती बांध के और अचला लेकर के और त्रिपुण लगा के और बैठ के और विधि विधान से संध्या वंदन करते हुए देखना शुरू किया। जब उन्होंने जब मुझे देखा तो उन्होंने
00:39:24:02 मतलब उनके मन में शंका उत्पन्न हो गई कि तुम कहीं वो सन्यासी तो नहीं बनने वाले हो। तो मेरे पास क्या उत्तर था? और मुझे लगता है कि जो भी व्यक्ति संध्या वंदन कर रहा होगा आज के दिन वर्तमान में और वो यदि गस्त गृहस्थ होगा तो उसकी पत्नी ने उसकी भार्या ने कहीं ना कहीं कभी ना कभी उनसे प्रश्न कर दिया होगा या फिर वो नाम जप ही बहुत ज्यादा कर रहा होगा नाम जप भी अगर वो कर रहा होगा तो उसके घर में उसकी पत्नी ने यह सवाल कर दिया होगा कहा होगा कि कहीं तुम बैरागी तो नहीं बनने वाले बाबा तो नहीं बनने वाले परेशान चिंता जताई हो बता दो हम अपनी बुद्धि गोभी से थोड़ा प्रिपेयर तो कर ले अचानक से झटका दोगे क्या है ना तो मेरे पास उस समय क्या उत्तर होना चाहिए था आप लोगों के अनुसार क्या उत्तर होगा मैंने उनसे यही कहा था भाई मुझे नहीं मालूम मैं वैरागी बनूंगा कि नहीं बनूंगा मुझे नहीं मालूम कि मैं सन्यास आश्रम लूंगा कि नहीं लूंगा मुझे यह मालूम है कि कर्मवादी कार माले सुदाना भगवान ने कहा है संध्या वंदन कर तो मैं करता रहूंगा भगवान ने कहा है कि ऐसे ऐसे तुझे विधि विधानों का पालन करना है। मैं करता रहूंगा। तुझे सन्यास देना है कि नहीं देना है? और सन्यास देते समय
00:40:39:08 तेरे घर की कैसी व्यवस्था करनी है? क्या सोचना है तेरे विषय में? वो मेरा काम है। क्योंकि तू मेरी शरण में आ जा। तेरी प्राप्ति की रक्षा और आप प्राप्ति की चिंता मैं करूंगा। यह दो अच्छा मेरी एक जो है उनके साथ एक अंडरस्टैंडिंग ठीक रहती है कि यदि मैं शास्त्रों का संदर्भ दे के उनको कोई सिद्धांत जब बता देता हूं तो उसके बाद फिर उनकी ओर से कोई भी आपत्ति नहीं आती वहां पर तो ये एक सपोर्टिव हो जाता है। मुझे एक उनकी तरफ से सामंजस्य मिल जाता है। तो इसके लिए मैं उनका आभारी हूं कि वो फिर शास्त्रों को शास्त्र हमारे लिए अंतिम प्रमाण है। हमारे परिवार में इस बात का जो है इस बात के लिए मैं उनके लिए आभारी हूं क्योंकि आजकल तो ऐसा है ना वातावरण कि शास्त्र भी आपने अरे ये सब किताबी बातें हैं। अब नगर नगरीय क्षेत्र में या ग्रामीण क्षेत्र में तो शास्त्र पढ़ना बताना बहुत मुश्किल है। ज्यादातर लोगों को पहले कनेक्ट करना पड़ेगा शास्त्र और सारी चीजों से। मगर तो आजकल एक वातावरण ऐसा भी बन गया है कि शास्त्रों के प्रति कोई निष्ठा नहीं है। व्यक्ति चिल्ला रहा है हिंदू हिंदू हिंदू तो वो निष्ठा नहीं है। मगर इतना मुझे उनसे मिलता है
00:41:55:01 कि जब भी कभी इस तरह से कोई शास्त्र का सिद्धांत यदि रख के बात करते हैं तो उसमें हमें जो है फिर सहमति अवश्य मिल जाती है। अब इससे अगर बात चल ही रही है तो मैं आप लोगों के क्या कहते हैं प्रेरणा के लिए प्रोत्साहन के लिए एक वाक्य और बता देता हूं छोटा सा संभव हो सकता है कि किसी को कुछ मिल जाए यहां से तो क्या हुआ एक बार दीपावली मनानी थी दीपावली हमारे हमारे माता-पिता हमसे दूर कहीं पर उस समय निवास कर रहे थे और हमारे भाई भी हैं जो दीपावली पर वहां पहुंचने वाले थे तो माता-पिता ने कहा कि बेटा आप सब यहीं आ जाओ यहीं पर आकर के दीपावली मना ली जाए तो मैंने अपनी भार्या से कहा कि भाई चलना है माता-पिता के पास वही चलकर के दीपावली मनाएंगे तो जो आजकल का वातावरण है उसके अनुसार सोचिए कि एक जो गणी है उसका क्या जवाब आएगा साधारण वो जवाब यही आएगा ज्यादातर जो सामान्य है जो अभी बहुत ज्यादा शास्त्रों को नहीं जानती, परंपरा के सिद्धांतों को नहीं जानती, उनका जवाब आएगा कि भैया अपना घर छोड़ के अपने यहां दीपक
00:43:10:09 ना जलाएं। अपने मंदिर में पूजा ना करें और वहां चले जाए। यहां पर भी दीपक जलना जरूरी है। लक्ष्मी माता कैसे आएंगी फिर अंदर? अब मैं परेशान हो गया इस बात को लेकर के। तो क्या करूं? तो फिर उसमें यही हुआ। मुझे वो वो याद आया सिद्धांत। मैंने कहा तुमको याद है। कि गणेश जी और कार्तिकेय भगवान में एक बार प्रतियोगिता हुई थी कि हां हुई थी क्या प्रतियोगिता थी कि कौन इस संसार का पूरा चक्कर एक बार में लगा देगा जो जल्दी लगा देगा वो विजेता होगा उसको फल क्या मिलेगा उस पर मत जाइए मगर विजेता कौन होगा जो पूरे संसार का चक्कर एक बार में लगा देगा बोले हां सही बात है तो मैंने कहा फिर गणेश जी ने वो प्रतियोगिता कैसे जीती थी कि कैसे कि उन्होंने अपने माता पिता का चक्कर ही लगा दिया था केवल और माता पिता संसार है तो वहां संसार है। तो इस प्रकार से यदि हम अपने माता-पिता के पास जाकर के दीपावली मनाएंगे तो पूरे संसार के द्वारे पर दीप जला देंगे तो क्या बेहतर है? अब वो सिद्धांत आ गया, शास्त्र आ गए, भगवान आ गए तो उन्होंने फिर सहमति दे दी अपनी। तो इस तरह से जो शास्त्र होते हैं वो हमारे जीवन में शांति भी लाते हैं। इसीलिए शास्त्रों
00:44:25:22 की आवश्यकता है। नहीं तो विप्लव है संसार में। जहां शास्त्र नहीं है वहीं विप्लव है और जहां शास्त्र है वहां शांति है। एट द एंड एनी हाउ ग्रह क्लेश वगैरह सब खत्म हो जाएंगे। यदि वहां के लोग शास्त्र निष्ठ होंगे क्योंकि शास्त्र की लिखी हुई बातों को सब मानेंगे। फिर वैचारिक मतभेद मिट जाएगा। इसीलिए ज्यादा से ज्यादा शास्त्रों का प्रचार करना चाहिए जिससे कि एक छत्र हो समाज एक छत्र एक निष्ठ हो के समाज रहना सीखे। अच्छा अब नाम से जुड़ी हुई एक बात और है और उसको बता करके मैं विराम दूंगा कि कर्पात्री जी महाराज ने जैसे अभी शतांग जी ने भी बहुत अच्छा व्याख्यान दिया और विजय दीक्षित जी ने भी एक दृष्टिकोण बताया उसमें एक भाव कहीं आप लोगों को परेशान ना कर दे कि मुक्ति मिलेगी कि नहीं मिलेगी। ये जो चिंता है ना ये चिंता आपको परेशान ना कर दे तो उसको मैं उसका समाधान करके अपनी वाणी को विराम दूंगा। तो देखिए यहां पर भी वही लॉ लागू होता है। कर्मवादी कारस्ते मा फले सुदा भगवान शंकराचार्य ने अपनी भगवत गीता में इस श्लोक का अर्थ करते हुए यही लिखा है कि तुम अपने आप को ये भी मत कहो कि मैं मुक्ति के लिए कर रहा हूं। ये ना मैं क्यों
00:45:40:24 कर रहा हूं? भगवान ने कहा है, शास्त्र ने कहा है। यह सोचने में जो आनंद है और यह सोचते हुए जो आपकी परफॉर्मेंस है अपनी लाइफ में यदि आप तेंदुलकर हैं तो क्रिकेट की पिच पर यदि आप और कोई हैं यदि आप अमुक अमुक किसी भी कार्य क्षेत्र में है और जब आपकी भावना में यह है कि मैं सिर्फ इसलिए कर रहा हूं कि शास्त्र ने कहा है तो आपका परफॉर्मेंस, आपकी लाइफ, आपका जीवन, आपके जीवन का हर क्षेत्र इतना इजी हो जाएगा। इतना सरल हो जाएगा, इतना सुखमय हो जाएगा, सुखद हो जाएगा जिसकी आप अभी कल्पना नहीं कर सकते। यदि आप इस भाव के साथ नहीं चल रहे तो इस भाव के साथ चलना सीखिए। मैं कोई भी कार्य जो कर रहा हूं वो इसलिए कर रहा हूं क्योंकि शास्त्र ने कहा है। इसलिए कर रहा हूं क्योंकि ईश्वर ने कहा है। ये अपने मन को बताते रहिए। मन जो है ना बार-बार आपको भटकाता है। कई बार ऐसा होता है कि हम लोग जब जाप कर रहे होते हैं तो आपका मन आपको बता रहा होता है। अरे उसका WhatsApp मैसेज आया होगा। अरे उसको फोन करना है। उससे पैसे लेने हैं। 500 10 5000 अरे उसका फोन उसको फोन करना है। जल्दी नाम जब पूरा हो तो आप उस समय अपने मन को हराइए। वहां क्या है? क्षणिक विचार हार का क्षण में तू वो छांट दे।
00:46:56:09 क्षणिक विचार हार का क्षण में तू वो छांट दे। बाधा बना वो वृक्ष है जड़ से तू उखाड़ दे अपने मन को ही हराना है आपको घातक तो तू ही जय को तेरा नाश चाहिए घातक तो तू ही जय को तेरा नाश चाहिए मुझे तेरा अंतिम वही प्रयास चाहिए कोमल जी म्यूट कर लीजिए म्यूट कर लीजिए किसी की आवाज रिपीट आ रही है तो बैरी
✅ This part is already used · 00:47:30:07 – 00:47:38:07 (0:08)
→ Used in: B · Video पराई स्त्री के प्रति आकर्षण पर नियंत्रण कैसे करें? Dasbodh Session 10 at 31:55 ↗
00:47:30:07 बड़ा तू आपका तू शीश धड़ से काट दे क्षणिक विचार हार का है क्षण में तू वह छाट दे डाल डाल पात पात वन घना
⬜ Not used yet · 00:47:38:07 – 02:45:13:18 (1:57:35)
00:47:38:07 है पाट दे बाधा बनाना वृक्ष है जड़ से तू उखाड़ दे घातक तो तू ही जय को तेरा नाश चाहिए मुझे तेरा अंतिम वही प्रयास चाहिए तो सबसे पहली बात तो है नाम जप करते समय भगवान का चिंतन करते समय आपका मन जो आपको बार-बार हराने आता है उसको आपको हराना है और उसको हराना बहुत सरल होता बहुत ही सरलतम उपाय होता है। बस उस सरलत सरलतम उपाय को स्मरण रख पाना कठिन होता है। उपाय बहुत सरल है। केवल जब भी आपको कोई दुर्वसन याद कर रहा है, दुर्वसन अपनी ओर खींच रहा है। आपको कोई बुराई आपकी अच्छाई की ओर खींच रही है। है ना? आपकी बुराई अच्छाई से दूर आपको खींच रही है। तो केवल दो मिनट शांति से अपनी मन से बात कर लीजिए। यह कहिए अपने मन को कि तू मुझे हराने आया है। जैसे ही आप अपने मन को थोड़ा समय दे देंगे वह हार जाएगा। जो प्रपंच रूपी संसार से जो आपको आ रही है ना बुलावे वो हार जाएंगे और आप वहां टिक पाएंगे। अपनी अच्छाई पर, अपनी सच्चाई पर, अपने सत्य पर आप टिक पाएंगे। अपने मन से बातें करना सीखिए। छोटी छोटी सी जीवन में आदतें होंगी जो आपको बार-बार खींचती होंगी। किसी का प्याज लहसुन नहीं छूट
00:48:53:08 रहा होगा तो वह खींचता होगा और किसी के कुछ वसन होंगे तो वह खींचते होंगे तो वहां पर अपने अपने आप को टाइम देना शुरू करिए चिंतन कर लीजिए बस जैसे आपको मान लीजिए किसी को कोई अल्कोहलिक है और मदिरा पान उसको बार-बार बुला रहा है तो जैसे ही उसने मदिरा का वो देखा केंद्र वैसे ही उसने क्या किया उसकी ओर ललायित हुआ जब वो जाए थोड़ा सा बात करें अपने मन में कि तुमने क्या निर्णय लिया था मदिरा को लेकर आप देखना कि आपकी विजय अवश्य होगी। ठीक है? तो यह नाम जप नाम जप में यह कुछ बाधाएं आती तो इससे आप ऐसे निकले और जो चिंता है कि हमें मुक्ति मिलेगी नहीं मिलेगी कि नहीं? तो आप मुक्ति के लिए नाम जप मत करिए। आप इसलिए करिए क्योंकि आप ईश्वर से प्रेम करते हैं। आप इसलिए करिए कि ईश्वर ने कहा है तो वो चिंता से भी मुक्त हो जाएंगे। और भगवान ने तो कहा ही है कि तू मेरी शरण में आजा। तेरी प्राप्ति की रक्षा और अप्राप्ति की चिंता मैं करूंगा। तू दिमाग चलाना बंद कर दे मेरे भाई। भगवान ने यही तो कहा है तो चिंता भी आपके उसमें बाधाक आएगी। इसलिए चिंता भी नहीं होनी चाहिए। और सुख क्या है? कृपात्री जी महाराज भक्ति सुधा में बताते हैं कि नाम जप भगवान का नाम
00:50:08:09 स्मरण चिंतन मनन करते ही आपको सुख मिलने लगता है। मोक्ष जैसा बिल्कुल सुख मिलने लगता है। समत्व पुरुष बनने को कहा था ना भगवान ने। वो समत्व पुरुष क्या है? मुक्त पुरुष ही तो है। जीवन जीते जीते भी आप वहां पर मुक्ति का अनुभव करने लगते हैं। समत्वता आ जाती है आप में। समत्व पुरुष कौन है? है ना? समत्व पुरुष वही तो है जो जीत हार में भेद ना करे। राग द्वेष में भेद ना करे। जो अच्छे बुरे में परेशान ना हो, विचलित ना हो, वही तो है समत्व पुरुष। और पूरी भगवत गीता भगवान ने वही बनने को कहा है अर्जुन को। तो आप समत्व पुरुष की ओर आगे बढ़ेंगे। जब आप शास्त्र को पीछे रखेंगे, ईश्वर को पीछे रखेंगे, नाम जप का साधन लेंगे, नामास्त्र का साधन लेंगे तो अपने जीवन की बुराइयों को हराते जाएंगे। उनकी पराजय होती रहेगी। भक्ति सुधा में कृपात्री जी महाराज यही लिखते हैं कि नाम जप ऐसे है जैसे किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एकत्रित किया जाने वाला धन। कैसे? नाम जप आपको सुख कैसे देने लगता है? जैसे कि मान लीजिए आपको एक कार खरीदनी है नई कोई नई कार आ रही हो तो उसका अगर चिंतन हो किसी के मस्तिष्क में तो उसका वर्ण मतलब उसका स्मरण कर लीजिए तो आपको एक
00:51:23:15 कार लेनी है या और कोई धन से जुड़ी हुई जो कोई आवश्यकता हो जो धन के कारण बाधित हो अब मान लीजिए आपको कोई कार लेनी है अमुक अमुक कुछ भौतिक संसाधन लेना है आपके पास धन नहीं है उसको लेने का तो जब आप धन ले जब अब आपका क्या टारगेट है? आपका टारगेट कार लेना नहीं है। जैसे आपका टारगेट कैलोरी लेना नहीं है। आपका टारगेट रोटी, चावल, अनाज यह सब लेना है। उसी प्रकार से आपका टारगेट कार लेना नहीं। आपका टारगेट है धन एकत्रित करना कार का। जिस दिन वह धन एकत्रित हो जाता है। यानी कि अगर कार लाख की है और आपके पास लाख आ गए तो आप आराम से जिस कार के लिए आप व्याकुल थे दोद तीन मतलब हर सुबह उठते ही आप डेली उसी का चिंतन कर रहे थे तो वो धन आने के बाद आप ये सोच आप ठहर भी सकते हो धन आने के बाद आप इतने संतुष्ट हो जाते हो कि चलो ठीक है धन आ गया कार हम दो दिन बाद उठा लेंगे तीन दिन बाद उठा लेंगे धन आ जाए यदि उसी प्रकार से भगवान की भक्ति है भगवान का नाम जप
00:52:38:28 यदि आपने इसको पकड़ लिया तो आपके पास वो सुख आ जाता है कि अच्छा ये हमारे पास आ गया नाम जप भक्ति आ गई भगवान तो मिल ही जाएंगे वो स्वतः सिद्ध बात है उसके लिए चिंतन नहीं करना है उसके लिए आपको परेशान नहीं होना है और आप जितना नाम जप करते हैं उससे आपके रक्त में संचित जो पाप कर्म है उनका शोधन होता है तीर्थ इत्यादि में स्नान करने से भी वही होता है। आपके आपके रक्त में संचित आपके जो संस्कार है गलत गलत वाले संस्कार उनका शुद्धिकरण होना चालू होता है। आपकी कॉन्शियसनेस तीव्र होती जाती है। आपकी निर्णायक क्षमता तीव्र होती जाती है। आप मोटरसाइकिल चलाते समय सही निर्णय लेते हैं कि मुझे गड्ढे से किस प्रकार से बचना है। और जिसकी प्रज्ञा शक्ति वीक होती जाती है इन संचित कर्मों की वजह से वही निर्णय नहीं ले पाता है कि मैं कहां ले जाऊं अपनी गाड़ी को। नहीं तो जिसका भी आज तक कभी मोटरसाइकिल वगैरह का एक्सीडेंट हुआ हो छोटा-मोटा या बड़ा जो भी है वो कितना भी लोगों को बताए कि मेरी गलती नहीं थी मगर वो एक बार जरूर ये सोचता है कि लास्ट मोमेंट पर मैंने इधर किया होता तो मैं बच जाता। तो हमारे जीवन में जितनी भी घटनाएं घटित हो रही है वो हमारे गलत निर्णय हमारी कॉन्शसनेस की कमी हमारी प्रज्ञा शक्ति की कमी के कारण हो रही है। और यह प्रज्ञा
00:53:54:02 शक्ति बढ़ती है तो हमारी निर्णायक क्षमता बढ़ती है। हमारे कार्य सब कुछ सटीक होने लगते हैं। यह वैज्ञानिक जो विवरण है उसका तो प्रज्ञा शक्ति के ऊपर आधारित है। प्रज्ञा शक्ति के ऊपर इसी कारण से प्रज्ञा शक्ति के अनुसार हमें बुद्धि मिलती है अच्छी और बुद्धि प्राप्त होने की वजह से हमारे निर्णय अच्छे होते हैं। तो जीवन में भी सुख ही सुख होता है। तो आपकी प्रज्ञा शक्ति बहुत मैटर करती है। तो ये कुछ चीजें हैं जो मुझे आपको बतानी थी। बाकी आप सबका बहुत-बहुत आभार कि आप सब लोग नाम नामास्त्र में जुड़कर के और इसके इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और एक इतिहास रच रहे हैं। सभी को जय श्री राम। अब मैं श्रोता बन के आप लोगों के वक्तव्यों को सुनूंगा। अन्यों को सुना जाए। वाणी को विराम देता हूं।
00:54:45:13 धन्यवाद भैया। बहुत ही बहुत ही सुंदर वक्तव्य इस बार आपने दिया। भाई वैज्ञानिक दृष्टि से हमें लगता है उचित ही रहता है क्योंकि आजकल वैसे भी सब विज्ञान संबंधित ही हो गया है। थोड़ा सा हम विज्ञान जहां कहीं भी जोड़ दें व्यक्ति थोड़ा सा उसको चीज को मानने लग जाता है। समझने लग जाता है। जैसा कि एक बार आपने समझाया था कि तीन दृष्टिकोण होते हैं किसी भी चीज को देखने के तो उसमें एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी होता है। दर्शन और जो व्यवहार है वो तो दृष्टिकोण रहते ही हैं। परंतु वैज्ञानिक दृष्टिकोण इसमें बहुत आवश्यक होता है। आपने कहा कि जो भी संध्या आदि करने लगे, पूजन करने लगे तो बड़ा ही इन सब बातों के विषय में बहुत ही कम जानकारी आज हिंदू समाज में है। तो नाम जप जो अभियान है हमारा माध्यम है कि कम से कम नाम से व्यक्ति जुड़े। इस ग्रुप में व्यक्ति जुड़ता है, आता है, नाम जप करता है, परस्पर संवाद होता है। आगे चलकर उसको धीरे-धीरे और भी बातें पता चलती है। शास्त्र के बारे में ज्ञान होता है। उसका चित्त जब अपने आप शुद्ध होता है तो धीरे-धीरे उसका मन उसका चित्त उसी चीज की ओर आकृष्ट होता है जहां होना चाहिए था। चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की ओर और उसको हर साधन प्राप्त होने लगते हैं जिसके माध्यम से वह उन तक पहुंच सके।
00:56:01:10 अब मैं यहां पर सत्र को आगे बढ़ाऊंगा और सर्वप्रथम मैं एक बार यहां पर जितने भी सदस्य प्रथम बार आ रहे हैं पहले हमसे नहीं जुड़े हैं या कोई सत्स उन्होंने नहीं किया है या कभी भी हमसे नहीं जुड़े हैं और वीडियो आदि देखते थे तो उनको मैं सबसे पहले यह सूचित कर दूं कि नामास्त्र अभियान है क्या किस माध्यम से कैसे एक मैं संक्षिप्त सा परिचय दूंगा यहां पर नामास्त्र अभियान पिछले वर्ष शारदीय नवरात्रि में आरंभ के साथ शुरू किया गया था और इसमें हम पांच सत्र आयोजित करते हैं 15-15 मिनट के जो कि जैसे गुरुदेव ने निर्देशित किया है कि सवा घंटे की भक्ति प्रत्येक हिंदू को करनी चाहिए और दिन में पांच बार ही सही 15-15 मिनट करके वो कर लें और एक जो हमारा विशेष सत्र होता है सवा घंटे का इसको अगर किसी को लगातार करना हो तो वह सुबह 5:00 बजे से होता है। तो ये ग्रुप है हमारा इसमें हमारे सत्र संचालक हैं। इनके द्वारा सत्र संचालित किए जाते हैं। सर्वप्रथम सवा घंटे का सत्र होता है जो कि 5:00 बजे आरंभ होता है। इस सत्र में अपनेप ईस्ट के नाम का जाप होता है। तत्पश्चात 6:00 बजे से हम अपने 15 मिनट वाले सत्र आरंभ
00:57:16:14 करते हैं। इसमें जो 6:00 बजे वाला सत्र है जो प्रथम सत्र है दिन का उसमें भगवान श्रीमन नारायण का स्मरण किया जाता है। तत्पश्चात दूसरा जो सत्र होता है उसमें श्री गणेश जी का स्मरण होता है। तत्पश्चात दोपहर 2:00 बजे वाले में भगवान श्री सूर्यनारायण जी का स्मरण होता है। शाम को 6:00 बजे मां दुर्गा माता का स्मरण होता है और रात्रि को 10:00 बजे शिव जी के साथ सत्र का समापन हम दिन का समापन करते हैं। अपना 10:00 बजे ये सत्र होता है शिव जी का। तो यहां पर हमारे क्षेत्र संचालक आदि और अन्य भी प्रबंधन समिति आदि के सदस्य उपस्थित हैं। मैं उन सभी से आपका एक बार परिचय अवश्य करवा दूं। यहां पर आशतोष धर द्विवेदी जी उपस्थित होंगे। मैं आग्रह करूंगा कि एक बार अपना परिचय सभी को दे दें और कुछ भी उनको कहना हो तो अवश्य आशुतोष द्विवेदी
00:58:13:06 सभी को जय श्री राम। जय श्री राम जी जी सबको प्रणाम करता हूं और थोड़ा विनम से आने के लिए क्षमा चाहता हूं। कुछ देखिए नामास्त्र सत्र ओरिएंटेशन सत्र जो है वहां पे यहां पे हम लोग सभी लोग उपस्थित हैं। तो सबसे पहले यही कहना चाहूंगा कि हम लोगों का ये परम सौभाग्य है कि यहां पर हम लोग आवाज कट गई आशुतोष जी कुछ आवाज में समस्या हो आवाज आ रही है? जी जी बोलिए बोलिए अशोक जी आवाज आ रही है बहुत जी सबसे पहले मैं यहां पे हमारे बड़े भाई शिवश भैया हैं उनका धन्यवाद करना चाहूंगा क्योंकि आज यहां पे हम लोग जितने लोग भी उपस्थित हैं वो उनका ही कारण है कह सकते हैं कि हमारा प्रारब्ध भी उसके पीछे है परंतु व्यवहारिक दृष्टिकोण से उनका ही ये सब कुछ है और पूज्य गुरुदेव का दिया हुआ सब कुछ है जो है क्योंकि मैं अपने बारे में सबको बताना चाहता हूं कि मैं कोई ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जिसके
00:59:28:12 घर में परंपरा से कोई वैदिक वांगमय की शिक्षा या फिर अपना जो सनातन सिद्धांत है उसकी शिक्षा दी गई हो या इस तरह के कार्यों को हम लोगों को सिखाया गया हो ये जरूर था कि प्रारब्ध वसात जो है अपना उपनयन जो है वह समय पर हुआ 11 वर्ष की आयु पर हुआ कुछ ऐसे संस्कार तो बहुत अच्छे नहीं मिल पाए लेकिन इतना जरूर है कि भैया के वजह से जीवन में बहुत ही बहुत बदलाव हुआ। अभी बहुत कमियां है अपने अंदर और इसके साथ प्रयास होता है। और भैया से जुड़ने का जो सबसे बड़ा सौभाग्य हमको प्राप्त हुआ वो समझिए कि YouTube पे एक वीडियो देख रहे थे। पूज्य संत थे अमुक नाम नहीं लूंगा। पूज्य संत थे। उन्होंने कहा नाम जब करना चाहिए हमको कुछ समस्या थी। समस्या यह थी कि हम एक बीमारी से जूझ रहे थे जिसको एंजाइटटी नाम की बीमारी कही जाती है। चंद्रमा जो है उससे संबंधित बीमारी होती है। उस बीमारी से जूझते जूझते हमने आज से ढाई वर्ष पूर्व नाम जब शुरू किया दो वर्ष पहली बात तो ये मैं यहां स्पष्ट करना चाहता हूं कि नाम की महिमा को मैं बता नहीं पाऊंगा। लेकिन जितना मैं
01:00:43:15 समझ पाया हूं वो मैं बता रहा हूं आप लोगों से कि दो वर्ष जब बीत गया दो महीने जब बीत गए नाम जप करते हुए तो अपने जीवन में एक बार YouTube चैनल पर आवाहन कॉल ऑफ धर्मा नामक एक चैनल था जिस पर भैया थे और एक शब्द गुरुदेव से पूछते थे कि गुरुदेव आपकी हिंदी बहुत जटिल है तो उसको लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए इस प्रकार का कुछ था वीडियो जो मुझे आज भी याद है और मैंने देखा मुझको कुछ आकर्षण महसूस हुआ और फिर मैं उनके वीडियोस देखने लगा आर्य समाज और यह तमाम जो समाज है और तमाम पंथ संप्रदाय हैं इनके खंडन का तो मुझे लगा कि कहीं ना कहीं कुछ कमी है लोगों में मतलब कुछ समस्याएं हैं और मतलब भैया के आशीर्वाद से और पूज्य गुरुदेव की कृपा से आज मतलब मैं यह कहना चाहूंगा कि मतलब यह मेरा घमंड नहीं है और जो भी थोड़ा बहुत थोड़ा बहुत जो भी पांच सिद्धांत जो हमने पकड़ा है भैया के आशीर्वाद से वो उसके वजह से हम मतलब सामने बैठे किसी का भी खंडन कर सकते हैं। मतलब मैं अपने लिए बता रहा हूं कि मैं पर्याप्त हूं। इतना तो है कि मैं पर्याप्त मैं ही उनका खंडन कर
01:01:58:16 लेता हूं। भैया की आवश्यकता पड़ती ही नहीं है वहां। और बाकी नाम की महिमा बहुत है। अनंत है। पूज्य संतों का सानिध्य नाम के ही बल पर प्रार प्राप्त होता है। गुरुदेव जो है सदगुरुदेव भगवान जीवन में वो नाम के ही बल पर प्राप्त होते हैं। जीवन में कुछ भी बुरा घटित होता है या अच्छा घटित होता है। हम लोग गृहस्थ हैं तो हमको इसका भी लालच होता है कि हमारे साथ सब कुछ बुरा क्यों हो रहा है? सब कुछ अच्छा क्यों हो रहा है? तो अच्छा जो है वो तो सब कोई प्राप्त करना चाहता है लेकिन जो बुरा प्रारब्ध है उसको सभी काटना चाहते हैं। तो बुरे प्रारब्ध को काटने के लिए भी हम नाम का ही सहारा लेते हैं। और अंतत इतना ही कहना चाहेंगे कि नाम के बिना जीवन में कुछ भी नहीं है। नाम से भी मतलब नाम के बराबर और भी कुछ साधन है। लेकिन अपने लिए वो सुलभ नहीं है। इसलिए अपने लिए सबसे सुंदर कार्य नाम है। और एक बार अंतिम में यही कहना चाहूंगा कि यह कोई शिवश भैया का अपना व्यक्तिगत प्रकल्प नहीं है। ये यहां पर उपस्थित जितने भी 100 150 200 250 लोग हैं ये पूरे हिंदू समाज का
01:03:13:20 अपना प्रकल्प है। यह पूज्य गुरुदेव का प्रकल्प है और पूज्य गुरुदेव के माध्यम से शिवश भैया को दिया हुआ जो प्रकल्प चल रहा है वो समझिए कि हमारे परम पूज्य गुरुदेव करपात्री जी महाराज धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज ही करा कर रहे हैं। लोगों के मन में बैठकर के ऐसी भावना हमको रखनी चाहिए। सबको प्रणाम करता हूं। भैया को भी प्रणाम करता हूं। जय श्री राम। एक एक बात मैं बस कहूंगा। बहुत अच्छा बोला आशुतोष जी ने। बहुत बढ़िया बोला। आशुतोष जी के वक्तव्य में जो आशुतोष जी ने कहा है उस उसमें जो उन्होंने खंडन शब्द का उपयोग किया है उसका अर्थ इसमें ले कोई भी कि इन्होंने ये ये कहना चाहते हैं कि सामने वाले सामने बैठे किसी भी व्यक्ति के का सामने बैठे किसी भी व्यक्ति के किसी व्यक्ति को मैं नीचा दिखा सकता हूं। खंडन का अर्थ केवल स्वमत की पुष्टि में है। यदि कोई व्यक्ति हमारे सार्वभौम सिद्धांतों पर आघात कर रहा है तो वहां पर किया जाने वाला जो वाचिक प्रतिकार है उसको यहां पर खंडन के रूप में आशुतोष जी ने उपयोग में लिया है। इसको अन्यथा इस रूप में ना देखें कि अपनी वर्चस्वता के लिए की जाने वाली कोई लड़ाई को खंडन के रूप में प्रस्तुत
01:04:28:28 किया गया है। है ना? जी भैया बिल्कुल यही मैं कह रहा हूं कि व्यक्तिगत अपना कुछ नहीं जो है सब शास्त्रों का और सिद्धांत का जी जी बस अपने मत की पुष्टि जिसमें हो रही है सिद्धांत की रक्षा के लिए कही गई बात उसको ही इन्होंने यहां पर खंडन कहा है और बहुत अच्छा वक्तव्य दिया अनुज है हमारे बहुत प्रेरणादाई आपके शब्द रहे आपका अभिनंदन एक हमारे एक महत्वपूर्ण सदस्य और हैं दिनेश शर्मा जी जो अभी संभवतः मीटिंग में थे और मैं चाहता था कि उनको भी सुने हम लोग पर वो संभवत छोड़ अभी किसी कारण से लेफ्ट हुए हैं। तो यदि कोई उनसे जुड़े हो तो उनको मैसेज कर दें कि वो भी यहां पर जुड़े रहे। उनका अभिवादन बहुत महत्वपूर्ण है हमारे लिए। वो भी अत्यंत प्रेरणादाई कार्य कर रहे हैं आह्वान के लिए। तो दिनेश शर्मा जी को किसी प्रकार से अगर संपर्क स्थापित किया जा सके तो अवश्य करें। जी प्रथम जी आप जी भैया हम एक बार उनको मैसेज कर रहे हैं। जी बाकी आप सत्र को आगे संचालित करें।
01:05:37:08 तो आशुतोष भैया ने यहां पे बहुत ही उत्तम जो है वक्तव्य दिया। बहुत ही अच्छा लगा। तत्पश्चात हम आगे बढ़ते हैं। हमारे एक और बहुत महत्वपूर्ण सदस्य हैं। नामास्त्र का इस समय अधिकतर कार्यभार उन्हीं के ऊपर है। समय पे सारा कार्य पूर्ण कर देते हैं। हमको कहीं शिकायत का अवसर नहीं मिलता। गौतम पांडे जी से मैं चाहूंगा कि यदि उनका नेटवर्क इस समय सही हो तो अवश्य अपना परिचय दें। नहीं कोई बात नहीं है। बहुत उनके नेटवर्क की समस्या है। कुछ अभी उन्होंने मैसेज किया है। बारिश बहुत हो रही है। इस कारण वहां समस्या है। और गौतम भैया के बारे में बता दूं कि कभी-कभी ऐसा होता है कि नेटवर्क आदि की समस्या होती है। तो घर पे ना रुक करके क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं। तो घर पे ना रह के ये बाहर कहीं खेत में भी चले जाते हैं। रात भी रात हो रही है तब भी चले जाते हैं नेटवर्क के लिए केवल कि वहां पर टावर पास में है हमारे खेत में तो वहां पे नेटवर्क आएगा। हम इनसे जुड़ सकेंगे। इसलिए अवश्य वो जुड़ जाते हैं। तो बहुत ऐसे कर्मठ हमारे कर्मठ बहुत जुड़े हुए हैं। यदि गौतम भैया आपको संभव हो तो अवश्य आप एक बार परिचय अपना दे दे बहुत अच्छा लगेगा। कि गौतम पांडे जी मेरी जानकारी में कर्मठता का अह विग्रह है। कर्मठता का विग्रह
01:06:52:19 अगर आपको देखना है तो गौतम पांडे जी को देखिए। क्योंकि मैं उनको ऑब्सेर्व करता हूं। मेरी जानकारी है ना जी गौतम भैया भैया मुझे लगता है सह नहीं जुड़ पाएंगे उनका हमें लगता है नेटवर्क वाला प्रॉब्लम जा रहा है कुछ सुनाई दे रहा है कि नहीं उनके जो अथक प्रयास हैं नामास्त्र को संचालित करने में एक बैकबोन की तरह वो कार्यरत हैं और हम सभी मिलकर के उनका अभिवादन करते हैं। सब की तरफ से मैं अभिवादन करता हूं आपका सम्मान आपको आपकी निष्ठा को आपकी कर्मठता को आपने बहुत अच्छा कार्य किया है और आगे भी हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं प्रभु श्री राम से प्रार्थना करते हैं कि आप उत्तरोत्तर प्रगति करें अपने मार्ग में
01:07:41:08 अब आगे बढ़ते हुए मैं अपने एक और बहुत हमारे महत्वपूर्ण सदस्य हैं बैकग्राउंड में उनका वर्क बहुत रहता है। अधिकतर कार्य बैकग्राउंड का ही उनका रहता है और बहुत अच्छा कार्य रहता है। अनिरुद्ध तिवारी जी यहां पे उपस्थित हैं। अनिरुद्ध भैया यदि आवाज आपको आ रही हो तो अपना एक बार परिचय अवश्य दें और कुछ भी जो आप कहना चाहे यहां पे अनिरुद्ध भैया अनिरुद्ध जी आवाज आ रही है आपको? भैया मेरी आवाज आपको तो आ रही है? जी आ रही है आ रही है बिल्कुल आ रही है अनुज जी संभता उनको आवाज नहीं जा पा रही है हमें लगता है अनु भैया कुछ भी आप मैसेज करें या कुछ रिएक्शन यदि आवाज आ रहा हो आपको
01:08:31:13 दिनेश आवाज दिनेश जी आ गए हैं दिनेश शर्मा जी मेरे ख्याल से जुड़ रहे हैं जय श्री राम सभी को जय जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जी दिनेश जी आप अपना परिचय दें सब अपना परिचय देते हुए थोड़ा सा अपना जो अनुभव है वो हमारे साथ साझा करें जिससे कि हम और अन्य कुछ प्रेरणा प्राप्त कर सकें जी मेरा जुड़े और पूरा जो है एक बार जी जी मेरा नाम दिनेश शर्मा है मैं हरियाणा से रहने वाला हूं तो मैं शिव मैं गुरुदेव देव के साथ जुड़ा हुआ था पहले अपने गुरु भाइयों के साथ चर्चा में रहता था और जो धर्म की जो ख्याति हो रही थी उसके खिलाफ मेरे दिल में बड़ी विचलित तरह के मेरे दिल में बड़ा रोष था उसके खिलाफ लेकिन उस समय पर कोई समझने वाला नहीं था इस चीज को तो जब मैं गुरुदेव से जुड़ा गुरुदेव ने मेरे सारे प्रश्नों का उत्तर दिया उसके बाद मैंने जब देखा शिवश भैया को तो शिवश जी की मैंने वीडियोस देखी मैंने कहा कि यार यह जो ये हमारे गुरु भाई हैं ये किस तरह से लड़ रहे हैं मतलब बगैर डर के
01:09:47:01 गुरु जी को गुरुदेव के आशीर्वाद से किस तरह से लड़ रहे हैं धर्म के विरुद्ध उससे हमें प्रेरणा मिली और उसी से मैं नामास्त्र अभियान में जुड़ा जब मुझे नामास्त्र अभियान में जुड़े हुए मेरे ख्याल से दो ढाई साल हो चुके हैं जिस पर हम लोग सुबह का सेशन लिया करते थे पहले डेढ़ और पहले तो हम जो है एक घंटे फिर डेढ़ घंटे पे भी आए तो शिवश भैया ने हमें बताया कि नम नाम जप करने के क्या-क्या क्या-क्या फायदे होते हैं और जीवन में बहुत ज्यादा परिवर्तन हुआ। जैसे कि शुरुआत में जो एक तो शुरुआत में जो है मतलब आपकी जो वृद्धि है वो बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। आपकी निष्ठा बढ़ जाती है भगवान में। प्रीति आपकी बढ़ जाती है भगवान में। तो जो जो एक गैप था जो मेरे दिल में एक गैप था वो नाम जप भगवान का नाम जप करते करते पूर्ण हो गया। बस मैं यही कहना चाहूंगा कि आप सभी लोगों को भी कि आप लोग भी नामास्त्र सेशन में जुड़े और और जो है और जो है बस बस इतना ही कहना चाहूंगा मैं आपसे सभी लोगों को। बहुत बढ़िया। जी बहुत ही उत्तम बहुत उत्तम दिनेश भैया
01:11:02:04 ने इतना अच्छा वक्तव्य दिया। अब इसी के साथ हम आगे बढ़ते हुए यहां पे नरेंद्र सिंह जी से अनुरोध करेंगे कि अपना वो परिचय दें। नरेंद्र भैया भी बैकग्राउंड आदि का बहुत कार्य करते हैं। सत्र आदि भी उनके द्वारा संचालित किए जाते रहते हैं और उनकी एक विशेष बात जो मैं हर बार साझा करता हूं। आज भी करूंगा वो यह है कि कर्मठता का परिचय इस प्रकार से वो देते हैं कि ड्राइव करते हुए भी वह हमारे मीटिंग हो सत्र हो कुछ आवश्यक कार्य हो अवश्य जुड़ जाते हैं। वो तो एक बहुत बड़ी बात है कि जब व्यक्ति कोई जो आलस करना होता है वो हजारों बहाने बनाता है। यहां पे एक व्यक्ति ऐसा भी है जो कार चला रहा है और बाइक चला रहा है जो भी है तो उसने जो है तभी भी हमसे जुड़ा हुआ है। एक बार हम आग्रह करते हैं नरेंद्र भैया आपको आवाज आ रही है तो अपना परिचय अवश्य दे दे।
01:11:53:13 जी नरेंद्र भैया आप बोलिए मुझे लगता है कोई टेक्निकल इशू आ रहा है हां आवाज आई है आवाज आई बोलिए बोलिए जय श्री बोलिए जय श्री राम इंटरनेट खत्म हो रखा है मेरे पास आज अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अभी इस वक्त आप अभी इस समय आप कहां पर है मैं हूं तो घर अच्छा अच्छा अच्छा जी छोटा सा दे दीजिए एक मिनट नरेंद्र भैया एक छोटा सा एक वक्तव्य दे दे अगर संभव हो तो नहीं तो कोई बात नहीं है। यदि आप नहीं उनके यहां नेट नेट की प्रॉब्लम आ रही है। तो नरेंद्र जी आपकी धर्मनिष्ठता के लिए आपका सम्मान हम सब करते हैं। आहान की ओर से मैं आपका सम्मान करता हूं। दिनेश जी ने भी बहुत अच्छे प्रेरणादाई शब्द बोले। आपका भी बहुत सम्मान और धर्म के प्रति जो आपकी लगन है नरेंद्र जी जिस तरह से प्रथम जी ने बताया कि आप चलते फिरते भी मतलब किसी भी तरह से जितना भी आप कर सकते हैं यथा सामर्थ्य करते हैं। तो यह गुरुदेव के वो वचन है जो संभवत गुरु गुरुदेव के
01:13:08:26 सानिध्य में आने से पहले। गुरुदेव का सानिध्य तो हम लोगों को तभी से प्राप्त है जब से हम जीव भाव को प्राप्त है। तो ईश्वर के रूप में हमें वह गुरु प्राप्त है। तो गुरुदेव का सानिध्य हमें सदा से है। गुरुदेव का सानिध्य जो है वो सनातन है हम सभी के लिए। बस यह है कि उसको कौन स्वीकार कर रहा है, कौन स्वीकार नहीं कर रहा है। इतनी सी बात है। जैसे वह है ना कि प्रत्येक नास्तिक भी स्वयं को नास्तिक कहने वाला भी सच्चिदानंद स्वरूप को ही ढूंढ रहा है। बस वो वाणी से स्वीकार नहीं करता है। तो गुरुदेव का सानिध्य में आते समय जो व्यवहारिक रूप से लक्षण है उस समय आते समय जो मैंने गुरुदेव के कुछ वचन सुने थे कि यदि हिंदू जब उनसे किसी ने पूछा था कि अमुक अमुक वर्ग के लोगों को अगर हमने नहीं मारा तो हमें मार देंगे। तो गुरुदेव ने उस समय कहा था यदि हिंदू यथा सामर्थ्य अपने धर्म का पालन करने लग जाए। यथासामर्थ अपने धर्म का पालन कर जाए तो जितने भी हिंदू विरोधी तंत्र हैं उन तंत्रों में ही ऐसे क्रांतिकारी उत्पन्न हो जाएंगे जो अपने तंत्रों का शोधन कर देंगे। बहुत महत्वपूर्ण पंक्ति थी ये। तो ऐसा
01:14:24:02 ही कुछ आपको देखकर के हमें प्रेरणा मिलती है। बहुत आभार आपका। इसी के साथ हम पुनः सत्र को आगे बढ़ाते हैं। यहां पर प्रतीक साहू जी उपस्थित हैं। प्रतीक साहू जी हमारे नामास्त्र के जो सत्र हैं उनके संचालन में सहयोग करते हैं। सत्र चलाते हैं और अपना भी उद्धार कर ही रहे हैं। दूसरों को भी इसमें जो है जुड़े हुए हैं। साथ में उनके लोग तो उनका भी नाम जप के प्रति प्रोत्साहन बढ़ा रहे हैं। उनके कार्यकारी सामाजिक आदि वृत्तों में तो प्रतीक साहू जी एक बार आप अगर आवाज जा रही हो आप तक तो अपना परिचय अवश्य प्रक जी भैया जी आवाज आ रही है क्लियर हां अवश्य अवश्य स्पष्ट आवाज आ रही है जय श्री राम सभी को जय श्री राम जी जी मैं प्रतीक सा हूं छत लोकेशन तो मना किया बताने के लिए मैं करीब बोल कोई बात नहीं आप बोलिए
01:15:25:08 राज्य बता देंगे तो कोई जान नहीं पाएगा छत्तीसगढ़ है बहुत बड़ा राज्य है बहुत बड़ा राज्य है इतने लोग नहीं है वहां वहां ढूंढ नहीं पाएंगे आपको जी बोलिए बोलिए प्रदीप जी बहुत अच्छा बोलिए हां करीब छ महीने से ज्यादा हो गया मुझे भी झेल लेंगे क्षमा चाहते हैं हां कहिए कहिए छ महीने से जी 6 महीने से अधिक समय हो गया होगा आहान से जुड़े स्टार्टिंग में तो पूरी वाले शंकराचार्य जी को सुनते थे YouTube पर फिर आगे चलकर शिवश भैया जी से भी जुड़ना हुआ YouTube पे उनके वीडियो देखते थे फिर
01:16:12:09 उस समय आवाान का इच्छा हुई कि नहीं ग्रुप में नाम जप करने चाहिए क्योंकि उससे डिसिप्लिन भी आता है और एक कहते हैं ना अच्छे लोगों का संग मिलता है सत्संग टाइप का तो प्रेरणा हुई फिर उसको जॉइ किया इससे मुझे मुझे मदद यह मिला है कि निरंतरता आ रही है थोड़ी कि नहीं कम से कम एक या दो दो में तो जुड़ना ही है अभी भले प्रत्यक्ष रूप से जुड़ नहीं पाता नेटवर्क के कारण लेकिन खुद से तो कर ही लेता हूं
01:16:52:14 जी आवाज क्लियर है मेरी? जी जी हां बस स्पष्ट और जो गुरुदेव भगवान ने जो अलग-अलग आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान किया हम लोग को उससे जो जीवन में कष्ट आते हैं, प्रॉब्लम्स आते हैं उसके प्रति दृष्टिकोण ही बदल गया है। काफी सहजता से निपट जाते हैं सभी चीजें। और जो उद्देश्य होना चाहिए हमारा कि नहीं करना क्या है जीवन में क्या लक्ष्य होना चाहिए हम हमारी खोज का स्वरूप क्या है दार्शनिक दृष्टि से वो काफी क्लियर हो गया है तो इससे इससे जो है क्लेरिटी है कि नहीं क्यों करना है नाम जब उसका भी उद्देश्य क्या है वो सब शंकराचार्य जी की कृपा से समझ में आने लगा है अब। तो इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आह्वान ने तो काफी शोधन किया इस क्षेत्र में, क्योंकि काफी कई तरीके के लोग हैं। इसमें डाइवर्ट भी कर देते हैं लोगों को। लेकिन आह्वान आह्वान से हमें जो है
01:18:07:18 नई दिशा प्राप्त हो रही है। हो रही है जो कि एकदम ऑथेंटिक है। जी भैया धन्यवाद। जी जी बहुत ही सुंदर सुंदर बहुत अच्छा वक्तव्य अब आगे बढ़ते हुए गौतम पांडे जी और आप ने जैसा बताया कि परिस्थितियां विपरीत है परंतु संघर्षत होते हुए भी आप यथा सामर्थ्य कार्य कर रहे हैं और नरेंद्र इंदु जी भी उसी तरह से चल रहे हैं तो कुछ पंक्तियां थी कुछ मैंने लिखी थी जो मुझे स्मरण हो रही है कि परम तत्व द्वारा निर्मित तुझ में हर भाव है परम तत्व द्वारा निर्मित तुझ में हर भाव है अहम क्रोध मोह प्रेम आदि तेरा चुनाव है बल मारुति से ले तू ऋण निहित जो छल हो कृष्ण का रख राम की मर्यादा को कर अंत तू और शत्रु का है युद्ध में जो रह रहा है युद्ध में जो रह रहा पराजित भी तू ही श्रेष्ठ है आकाश कह रहा हे भक्त तू ही श्रेष्ठ है। है युद्ध में जो रह रहा पराजित भी तू ही श्रेष्ठ है। है
01:19:22:19 आकाश कह रहा ए भक्त तू ही श्रेष्ठ है। बहुत सुंदर भैया। फिर से हम अपने सत्र को वापस आते हुए हम आगे बढ़ाएंगे। यहां पे प्रवीण कोहली जी उपस्थित हैं। रात्रि का सत्र नियमित रूप से शिव जी की आराधना करते हैं। तो प्रवीण जी से मैं कहूंगा कि एक बार अपना परिचय अवश्य दें। एक विशेष बात उनके बारे में यह है कि इतना अब उनका अभ्यास हो चुका है नाम का कि हमें ऐसा सुनने में आया कि प्रवीण जी ने बताया कि रात्रि का सत्र ना ले तो उनको नींद नहीं आती है। उनको लगता है कि हम सो नहीं पाएंगे। तो प्रवीण भैया आप तक आवाज जा रही हो तो एक बार अवश्य जो है अपना परिचय यहां पर देने का कष्ट करें। जी जय श्री राम सभी को नारायण। जय श्री राम जय श्री राम। मैं प्रवीण महाराष्ट्र का निवासी हूं मैं। जी तो भगवान की कृपा से मैं दो समय का सत्र ले पा रहा हूं और आवाहन धर्म रक्षा समिति को अपना समय दे पा रहा हूं और मुझे बहुत खुशी है कि मैं अपना कार्य अच्छी तरह से निभा रहा हूं और ज्यादातर हमारा भगवत के भगवत प्राप्ति की और हमारा जो कार्य
01:20:37:20 है वो अच्छी तरह से निभा पा रहे हैं तो यही अच्छा है मेरे लिए तो कि जो हमारे हमारे भगवान है जो हमारे शिव है विष्णु है ब्रह्मा विष्णु शिव महेश जो भी है वो हमारे भगवान है तो उनके प्रति हमारी आस्था महत्वपूर्ण है इसलिए नामस्त्र के माध्यम से हम जुड़े हैं आपके साथ और नाम जप कर पा रहे हैं और हमारे जो गुरु भगवान है जो गुरुदेव है उनके प्रति हमारी आस्था अतिशय महत्वपूर्ण बढ़ती रहती है नाम जप के माध्यम से जो हमारे नाम जप करते हैं मन की शांति और पापों का नाश और आध्यात्मिक धार्मिक और उन्नति बहुत हमारा जो कार्य है वो के प्रति करना अति आवश्यक है। इसी कारण
01:21:38:19 है कि नाम सत्र में जुड़ने का प्रयास करें। सभी लोग लोग धन्यवाद आवाज में कुछ समस्या है प्रवीण जी के नहीं नहीं वो यही बोलना चाह रहे थे कि सब लोग भी इस नाम जप में जुड़ने का प्रयास करें अंत में है ना जी तो और वो उसकी महिमा बता रहे थे तो ठीक है मैं समझने का प्रयास कर रमेश सैनी जी कुछ बोलना चाह रहे हैं रमेश सैनी जी का अगला नंबर है। अभी बोलना चाह रहे हैं। बोलिए रमेश भैया। रमेश भैया भी हमारे जो है बैकग्राउंड के कार्यकर्ता हैं। और यश नाम है इनका अकाउंट जो है छोटी सी बात में ध्यान दिलाता चलूं। जैसे अभी एक बात हो रही है कि आहान से जुड़ा या आहान धर्म रक्षार्थ सेवा समिति को समय दिया। तो इसका भी एक अपार्थ निकाला जा सकता है। तो इसका अपार्थ ना निकाला जाए तो हमें ध्यान रखना चाहिए कि हम कौन है। हमारी सबसे बड़ी पहचान जो हो सकती है सबसे अच्छी पहचान वो यही है कि हम श्रीमद जगुरु शंकराचार्य पूरी पीठाधीश्वर जी के शिष्य हैं और प्रभु श्री राम के अपने ईष्ट के साधारण भक्त हैं। और यह जो
01:22:53:22 सारे प्रकल्प दिख रहे हैं आहान के द्वारा आहान के नाम से जो संचालित हो रहे हैं यह जो गुरुदेव भगवान की जो सेना है आदित्य वाहिनी ये उसके ही प्रकल्प है बस आप ऐसा मान सकते हैं कि निर्गुण निराकार रूप में जो आदित्य वाहिनी सेना है उसका सगुण साकार स्वरूप इस तरह से आपको भिन्न-भिन्न प्रकल्पों के माध्यम से प्राप्त हो रहा है। परंतु एट द एंड ये सारी सेना इस सारे अभियान का पर्यावसान किस में है? जिस दिन हमारी आदित्य वाहिनी सेना आदित्य वाहिनी के सेनापति आदित्य वाहिनी के महामहिम शंकराचार्य अथवा उनके द्वारा नियुक्त सेनापति आहान करें हमारी सेना का इस अभियान का इन सारे अभियानों का इन सारे प्रकल्पों का पर्यावसान एकमात्र उसी में है कि शंकराचार्य जी के लिए जैसे कि एक बार जो हमारे पूज्य ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी महाराज है उन्होंने कहा कि जिस दिन इस देश का 100 करोड़ हिंदू
01:23:57:27 यह समझने लगेगा, यह कहने लगेगा कि शंकराचार्य की आवाज इस देश के 100 करोड़ हिंदुओं की आवाज है। उस दिन एक उस दिन एक दिन के अंदर पूरी भारत की पूरे सनातन समाज की सारी समस्याएं सब कुछ सही हो जाएंगी। तो बस वही दिन है। हमें वही दिन लाना है कि जिस दिन हमारे शंकराचार्य हमारे जो श्रीमद जगुरु शंकराचार्य हैं वो आहान करें अपनी सेना का तो उस दिन वहां हम उनको रिपोर्ट सके कि हम आपकी सेवा में आपके निर्देश निर्देश अनुसार हर यथा सामर्थ स्थिति में खड़े हुए हैं। है ना? तो इन सारी चीजों का परसान एकमात्र उसी में है। इस बात का ध्यान रखें। धर्म और ईश्वर के साथ हम लोग जुड़ रहे हैं और किसी व्यक्ति विशेष का कोई अपना कोई ऐसा प्रकल्प नहीं है। किसी कोई यह एक औपचारिक आवश्यकताएं हैं जो नाम रखना पड़ रहा है। इन सब में कहीं ना कहीं राम है। इन सब में कहीं ना कहीं शंकराचार्य हैं। जी
01:24:59:20 बहुत सुंदर भैया बहुत ही अच्छा। आगे जो है हम रमेश भैया तक आवाज जा रही हो तो हम आग्रह करेंगे। यश भैया इनका नाम है रमेश तो ये अकाउंट पर जो है इस पर लिखा रहता है एक उद्बोधन कर रहा था एक उद्बोधन कर रहा था मैं किसी सभा में उसमें भी मैंने कहा था वही आज भी कह रहा हूं हर वो व्यक्ति आदित्य वाहिनी का सैनिक है हर वो व्यक्ति शंकराचार्य का सैनिक है जो अपने सार्वभौम सिद्धांतों की रक्षा के लिए चिंतन करता है चिंतित हर वो व्यक्ति शंकराचार्य का सैनिक है इस बात को कभी ना भूलें
01:25:39:15 जी रमेश जी सभी को जय श्री राम जय श्री राम तो जय श्री राम हम बोलिए जय श्री राम बोलिए तो पिछले आठ सात महीने से हम आवान के प्रकल्प से जुड़े हुए हैं और भगवान की कृपा से और जगतगुरु शंकराचार्य महावाक की कृपा से जो आह्वान से जुड़ने के बाद जीवन जो परिवर्तन आया है उसका हम शब्दों के शब्दों में नहीं बयान कर सकते उस चीज को वो चीज हमने अनुभव किया है और जब से आवाहन से जुड़े हैं तो एक
01:26:35:03 मिली जीवन को देश के लिए करने के लिए एक उत्साह और देश में कुछ एक सच्ची दीक्षा और एक सच्चा मार्गदर्शन यहां पर कभी विश्वासघात हो ही नहीं सकता क्योंकि यहां पर धर्म और ईश्वर और गुरुदेव की कृपा से हर चीज होती है। गुरु ग्रंथ और गोविंद के आधार पर ये पूरे प्रकल्प चलते हैं तो इनमें विश्वासघात कुछ हो ही नहीं सकता। हम पिछ दो तीन साल से राजीव दीक्षित जी को सुना और देश के प्रति कुछ करने का भाव भी जगाता और बहुत सारे संगठनों से भी जुड़े और थोड़ा बहुत मतलब थोड़ा बहुत कुछ किया हमने या फिर ना किया वो बात है लेकिन इतने संगठन जुड़ने के बाद सब में बस एक यही चीज थी कि आखिरी में जाके वहां पे विश्वास होता है दिशाहीन हो जाते हैं क्योंकि गुरु ग्रंथ और गोविंद से विमुख होते हैं वो सब सिद्धांत से विमुख होते हैं गुरु से विमुख होते हैं और यहां ये जो प्रकल्प है यह गुरु और गोविंद के आधार पर चलता है। इसलिए भगवत कृपा से यही है कि यह प्रकल्प कभी खत्म हो ही नहीं सकता। इसका
01:27:50:12 कभी हो ही नहीं सकता। इसी सिद्धांत को आगे चलाते हुए भगवत कृपा से हम जुड़े हैं और अब यह मन में निष्ठा है और भैया का कार्य देख के मन में बहुत उत्साह रहता है कि अब परमार्थ में और आलस्य में जीवन को नहीं बिताना है। अब देश के लिए और धर्म के लिए और गुरुदेव के इस प्रकल्प को आगे बढ़ाने के लिए जीवन को समर्पित करना है और ज्यादा से ज्यादा धर्म का प्रचार करना है। अपने को ज्यादा से ज्यादा धर्म में कितना अपने लिए कुछ भी नहीं करना। सारा सब कुछ देश के लिए और धर्म के लिए समर्पित करना है। क्योंकि अपना तो कुछ है ही नहीं ना। तो इसी बात को लेते हुए सभी का धन्यवाद। जय श्री राम। जय श्री राम। रमेश भैया जय श्री राम। बहुत ही अच्छा बहुत सुंदर वक्तव्य है। थोड़ा सा बीच में नेटवर्क का समस्या हुआ लेकिन यदि कोई सदस्य ना सुन पाए हो तो रमेश जी का वक्तव्यव यही था कि उनको जुड़कर अच्छा लगा और आगे जो है वह कार्य भी करेंगे करना भी चाहेंगे सभी को उन्होंने प्रोत्साहित भी किया कि सभी सदस्य धर्म के कार्य करें धर्मार्थ कार्य करें और यहां पे मैं ये कहूंगा कि रमेश तो अकाउंट का नाम है यश जी नाम है जो बोल रहे थे यश सैनी जी उनका नाम है और पीछे से इनके भ्राता श्री है गौरव भैया उनकी भी आवाज आ रही थी वो पीछे से प्रोत्साहन देते रहते हैं
01:29:05:13 और बताते रहते हैं कैसे क्या बोलना है तो वो भी बहुत अच्छा लगता लगता है दोनों भाई लोग साथ मिलके कार्य करते हैं। बहुत उत्तम लगता है। तो बहुत ही अच्छा। इसके बाद मैं आग्रह करूंगा अभिषेक अवस्थी जी से। अभिषेक अवस्थी जी यहां पे उपलब्ध हो। आवाज आ रही हो तो अपना परिचय एक बार अवश्य दें। अभिषेक भैया जी सुना हमने रमेश जी। और एक बात और सुनी हमने आपकी रमेश जी कि जहां गुरु गोविंद ग्रंथ होता है वहां पर विश्वासघात नहीं होता है और विश्वासघात होने का अर्थ है कि वहां पर कहीं ना कहीं गुरु ग्रंथ अथवा गोविंद में से कोई ना कोई एक घटक जो है या तीनों ही घटक का अभाव है। जैसे जहां रोशनी होती है वहां अंधेरा नहीं हो सकता। जहां अंधेरा है तो उसका अर्थ है कि वहां रोशनी नहीं है। आपने ये बात बहुत अच्छी कही है। इस बात से संबंधित बात ही आपने संभता शुरू में जो मैंने कुछ बोला था कि गुरु ग्रंथ और गोविंद जिस घर में होते हैं वहां पर जो चीजें होती है बहुत ज्यादा अटकती नहीं है। क्लश नहीं होते हैं। ग्रह क्लेश नहीं होते हैं। क्या हुआ भाई? ये मतभेद हो रहा है। ठीक है? भगवत गीता में क्या लिखा है देख लेते हैं। तो
01:30:20:16 वो गुरु ग्रंथ और गोविंद जहां पर होते हैं वहां पर ये मतभेद नहीं आते। भाइयों में पति पत्नी में माता पुत्री में पिता पुत्र में जो ये क्लेश इत्यादि है इनका कारण है कि वहां पर शास्त्र नहीं है। गुरु गोविंद ग्रंथ नहीं है। बिल्कुल सही बात कही आपने। जी जी अभिषेक भैया से जी। माइक अपना ऑफ कर कोई सदस्य जो इनका माइक अभिषेक भैया से मैं आग्रह करूंगा आवाज जा रही हो तो अपना परिचय कर दें। अभिषेक भैया
01:31:03:06 संभलता उनका आवाज नहीं जा रही। तत्पश्चात यहां पर आदित्य चतुर्वेदी जी उपस्थित है। मैं उनसे आग्रह करूंगा एक बार कि वे अपना परिचय दें। चतुर्वेदी जी हमारे बहुत ही कर्मठ और पुराने सदस्य हैं। अनेक कार्यों में सहयोग करवाते हैं और लेखन से लेकर के बहुत से अन्य प्रकल्पों में हमारे इनका सहयोग हमें प्राप्त होता रहता है। आदित्य चतुर्वेदी जी यदि आपको आवाज जा रही हो तो एक बार अपना परिचय सभी के सदस्यों को दे दें और जो भी आपको कहना हो अपना अनुभव कुछ साझा करना हो अवश्य यहां पे बोले। जी हर जी भैया सभी को जय श्री राम। सभी जय श्री राम। जय श्री राम। नाम जप की महिमा के बारे में तो पहले ही सब महानुभाव बता चुके हैं। नाम जप की महिमा कितनी अनंत है और सुभाष भैया ने भी बताया उसका वैज्ञानिक जो रूप है स्वरूप है वो भी बताया आशतोष भैया बाकी अन्य महानुभावों ने भी नाम जाप की महिमा के बारे में सब बता दिया है बाकी नाम जाप तो सभी जीवों का हित करने वाला है। कल्याण करने वाला है। यह तो सबको पता ही है। इसके अतिरिक्त जो हमारे गुरुदेव हैं वह आदेश करते हैं कि प्रत्येक हिंदू को सवा घंटे भजन का बल आवश्यक
01:32:18:09 है। और इसके साथ साथ वह एक और चीज कहते हैं कि उनको कई बार कहते हुए सुना गया है कि आगे भविष्य में एक भीषण युद्ध की घाटी है जो हमारी प्रतीक्षा कर रही है। तो उसके लिए हिंदुओं को तैयार होने के लिए भी वो जोर देते हैं और सैन्य प्रशिक्षण के लिए तो वो कहते ही हैं। लेकिन उसके अतिरिक्त उनका मानना है कि प्रत्येक हिंदू के पास आध्यात्मिक बल आध्यात्मिक ऊर्जा अवश्य होनी चाहिए और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति के लिए सबसे अधिक जरूरी है नाम जाप और उसी के लिए उन्होंने ऐसा आदेश किया है कि प्रत्येक हिंदू कम से कम कम से कम एक दिन में सवा घंटे भजन करें। नाम का जाप करें जिससे कि प्रत्येक हिंदू आध्यात्मिक ऊर्जा को आध्यात्मिक बल को प्राप्त कर पाए। तो उसी कड़ी में मेरा सभी से निवेदन है कि सभी नाम जाप करते रह और अपना हित भी करें सामाजिक हित भी करें जो गुरुदेव का प्रकल्प है राष्ट्रत्कर्ष अभियान है जो उनका स्वप्न है गौ हत्या को बंद करने का गौ रक्षा का अखंड हिंदू राष्ट्र भारत का जो स्वप्न है उसको पूर्ण करने के लिए हम सभी हिंदू भाई एक साथ जब जुट जाएंगे और नाम जाप का इतना आध्यात्मिक
01:33:33:18 बल हमारे पास होगा तो गुरुदेव कहते हैं कि केवल 40 लाख हिंदू भी नाम जाप करके और हिंदू राष्ट्र के लिए गौ माता के लिए समर्पित कर देंगे तो ईश्वर उनकी अवश्य सुनेगा। तो मेरा सभी से आग्रह है, विनती है कि सभी हिंदू भाई एकजुट हो और आगे इस नाम जप को अपने तक सीमित ना रखें बल्कि एक ऐसे अन्य हिंदू को भी जोड़ने का प्रयास करें इस नामास्त्र से अभियान से कि जैसे इस नामास्त्र के बारे में नाम जाप के बारे में या हमारे प्रकल्प के बारे में या गुरुदेव के बारे में गुरु गोविंद ग्रंथ से जो दूर है जैसा अभी गुरु गोविंद ग्रंथ की बात चल रही थी। ऐसे भी हिंदू भाई हैं जो दूर हैं उनको भी जोड़ने का प्रयास करें ताकि अधिक से अधिक संख्या में हिंदू भाई हमारे एकत्रित हो सके जागृत हो सके बस मेरी इतनी ही प्रार्थना है और सभी को जय श्री राम जय श्री राम बहुत सुंदर व्याख्यान दिया आदित्य जी हमारे प्रिय अनुज हैं और यद्यपि कई बार इनकी जो दिल हृदय को छू लेने वाली जो इनकी अपनी एक आपबीती है अचुत नमः अनताय नमः गोविंदाय नमः के जप के द्वारा ही एक बहुत बड़ी लालाज
01:34:50:16 जो इनको बीमारी थी उससे वापस लौटकर हमारे बीच में आज हमें प्राप्त है और ये कहीं ना कहीं गुरु गोविंद ग्रंथ की कृपा ही है। तो यह भी एक जो जोरदार तमाचा है जो हमारे सनातन सिद्धांतों के द्वारा प्राप्त होने वाले जो भगवत स्वरूप है भगवान नाम है उनका जो मजाक उड़ाते हैं तो आप कभी वृतांत सुनेंगे अगर आदित्य जी का तो आपकी ऐसे लोगों को उत्तर देने के लिए बहुत सारी सामग्री आपको अवश्य प्राप्त हो जाएगी। तो
01:35:26:07 अत्यंत प्रेरणादाई इनकी जो कहानी है वो पिछले सत्रों में हम सुन सुन भी चुके हैं तो आप लोग उससे प्रेरणा ले सकते हैं। बहुत अच्छा व्याख्यान धन्यवाद। गुरुदेव का ही आशीर्वाद है। ईश्वर की ही कृपा है। हम सबके ऊपर मेरे ऊपर जो हम यहां उपस्थित हैं आज बहुत-बत धन्यवाद। जय श्री राम। प्रथम जी
01:36:10:14 आवाज आ रही है आपको प्रथम जी प्रथम जी आपकी आवाज नहीं आ रही हमारे पास आवाज नहीं आ रही है आपकी आपका म्यूट है शायद। यहां से म्यूट हो गया क्या? नहीं नहीं वो शायद डिस्कनेक्ट हो गए हैं क्या? आवाज नहीं आ रही है उनकी। है तो सही। म्यूट है। म्यूट है। म्यूट अब आ रही है भैया। हां अब आ रही है। अब आ रही है। अरे वो कुछ नहीं यहां पे गलती से कॉल लग गया था लेकिन उसमें डिस्कनेक्ट भी नहीं हुआ और वो भी बीच में कुछ अटक गया। कुछ ग्लच हो गया उसका टेक्निकल। तो मैं वही कह रहा था कि आदित्य भैया हमारे साथ आज जुड़े और उन्होंने इतना सुंदर वक्तव्य दिया। बहुत ही अच्छा लगा। आदित्य भैया का मैंने देखा है अधिकतर कोई भी मीटिंग हो कोई कार्य हो तो छोड़ते नहीं है पूर्ण करने का प्रयास करते हैं जुड़ने का उसमें प्रयास करते हैं उसमें जहां भी बुलाया जाता है जिस भी आयोजन में अवश्य आते हैं तो बहुत ही अच्छा लगता है ये बात ऐसे ही हमारे कर्मठ सदस्य जिनके द्वारा इतना बड़ा हम प्रकल्प संचालित कर पा रहे हैं आज चला पा रहे हैं आज
01:37:25:22 और ये सब हमको भगवत कृपा से सुलभ है तब मुझे तो यही प्रतीत होता है कि सब भगवत कृपा से ही सुलभ है यहां पे और हमारे कोई अन्य सदस्य यहां पे उपस्थित हो तो क्योंकि मैंने तो सबके नाम अभी यहां पे चेक किए ऐसा मुझे नहीं ध्यान आ रहा कि कोई और कई है जो विलंब के कारण लेफ्ट भी हुए हैं। तो मतलब हम यही प्रार्थना करते हैं कभी ना कभी उनका जो है वक्तव्य इत्यादि दृष्टिकोण में प्राप्त हो जाएगा। तो अभी आयुष जी आप कुछ कहे जिससे कि प्रेरणा मिले। आयुष जी
01:38:00:12 जय श्री राम भैया नारायण। भैया मेरी वॉइस आ रही है क्या? जी आ रही है। भैया मैं ज्यादा तो कुछ नहीं कहूंगा। मैं ज्यादा तो कुछ नहीं कहूंगा। मैं बस ये कहूंगा मैं ज्यादा तो कुछ नहीं कहूंगा। मैं बस ये कहूंगा कि आप के थ्रू मतलब आपके चैनल के थ्रू और पूरी शंकराचार्य जी के थ्रू मतलब जब थोड़ा बहुत जाना है कि सिद्धांत क्या-क्या होते हैं उससे जीवन में बहुत चेंजेस आए और पिछले भी सत्र में मैंने आपको बताया था कि मैं पूर्णत तो पालन नहीं कर पाता हूं और मुख्यत तो मैं अभी मतलब अभी मैं पतित हूं तो उस वजह से कोशिश यह करता हूं कि आपको ज्यादा से ज्यादा स्लू। शंकराचार्य भगवान को ज्यादा से ज्यादा स्लू और नाम जप इत्यादि के मतलब प्रभाव से भगवत कृपा से अगर हो सके तो मतलब हमें भी सद्गति मिले और मतलब गुरुदेव का आशीर्वाद मिले। तो मतलब उसके बाद जो है अच्छे से संध्या इत्यादि हम भी कर सके। तो अभी तो भैया ये है थोड़ा
01:39:16:04 बहुत आपकी लाइफ में कुछ चेंजेस आपने बताए थे यदि संभव हो आपके पास समय हो तो वो भी थोड़ा सा क्योंकि आज काफी लोग हैं जो पहली बार जुड़ रहे हैं तो जी भैया मैंने जैसे जब आपके साथ लाइव पे भी चर्चा हुई थी तो मैंने बताया था आपको कि मैं इससे पहले इस इत्यादि से जुड़ा हुआ था और उसके बाद जैसे नाम जब वहां पे भी मैं करता तो मुझे कोई दिक्कत नहीं होती थी 16 माला जपने में। तो जब से जैसे आपके थ्रू सिद्धांत को जाना और मतलब पूरी शंकराचार्य जी के वक्तव्य को सुना तो ये पता चला कि जैसे मतलब अंधों की तरह एक तरह से बस भेड़ चाल में हम जप रहे थे। आपकी आवाज बीच-बीच में थोड़ी सी गायब हो रही है। जी जी कुछ आवाज आपका धीमी हो जाती है फिर वैसा कुछ नेटवर्क का जी भैया भैया वो वाईफाई दिक्कत है या तो कोई हेडफोन वगेरा लगाया हो तो उसको एक बार हटा के देख लीजिए एक मिनट भैया [संगीत]
01:40:28:12 जी भैया अब आ रही है वॉइस बिल्कुल क्लियर है जी भैया यही कह रहा था कि जैसे उस समय मैं इस से जुड़ा था तो इतना सिद्धांत के बारे में मुझे ज्ञान नहीं था और इंजीनियरिंग कॉलेज में रहने के बाद यह था कि कोई गाइडेंस भी नहीं हुआ मुझे कि कैसे-कैसे धर्म का पालन करना है। पर जोश तो था दिल में कि हां कुछ सही रास्ते पर चलना है। तो उसके बाद ये था कि नाम जप इत्यादि तो मैं करता था बट जैसे सिद्धांत की जहां बात आती थी वहां पे मेरा नेल बट्टे सन्नाटा हो जाता था तो तो पर आपकी सबसे पहली वीडियो ही मैंने देखी कि जब आप इस लखनऊ के शायद दो चार प्रभु जी थे तो उनसे आप चर्चा कर रहे थे भगवत गीता के ऊपर तो उसको सुना और उससे पहले जैसे पूरी शंकराचार्य जी की एक वीडियो आई थी मेरे सामने तो उसमें मुझे ज्ञात नहीं था तो मैंने उन्हें थोड़ा ऊटपटांग शब्दों से मतलब बोल दिया तो
01:41:43:22 उसको लेकर के अभी भी मैं बहुत ज्यादा ग्लानी महसूस करता हूं और जब से ही मैं मतलब धर्म का पालन कर रहा हूं तो उससे यह है कि थोड़ी मतलब शांति एक तरह से बहुत ज्यादा महसूस होती है क्योंकि अथक प्रयास करने के बावजूद भी फेलियर्स बहुत ज्यादा हाथ लग रहे थे। तो मुझे यह लगा कि यह सब जो धर्म कर्म की चीजें हैं ये सब बेकार है। तो मैं थोड़ा डिप्रेशन टाइप में चला गया था। और जब से जैसे थोड़ा बहुत नाम जप किया और सिद्धांतों को जाना तो मतलब मटेरियलिस्टिकली भी यह हुआ कि मुझे बिना किसी मतलब जैसे आप कहते हैं कि स्वत ही सारी चीजें पूर्ण होने लगती हैं। तो बिना किसी ज्यादा प्रयास के ही वो सारी चीजें धीरे धीरे धीरे-धीरे मुझे मिलती चली गई और आज के डेट में मैं एक मल्टीीनेशनल कंपनी में हैदराबाद में जॉब करता हूं भैया। बहुत जी तो जब जैसे आपसे जिस समय मेरी बात हुई थी तो आपको मैंने बताया भी था कि उस लाइव वाले दिन ही मेरा अपॉइंटमेंट लेटर मेरे पास आया था। तो वो
01:42:59:01 वो दिन एक एक तरह से मेरे लिए बहुत मतलब महत्वपूर्ण दिन बन गया मेरे जीवन का। जी जी भैया बस यहीं पे विराम देना चाहूंगा। बिल्कुल बहुत ही बहुत सुंदर आयुष भैया आपने दिया बहुत अच्छा और इसमें यही बात है कि देखिए कितनी बड़ी गुरुदेव की कृपा ऐसे रामचरितमानस में कहा गया है कि संत का स्वभाव यही है कि कोई उसका बुरा भी चाहे तो वो उसका अच्छा ही चाहते हैं। तो आप देखिए कैसे कहीं आपने भूलवश कभी आपने गुरुदेव के प्रति कुछ ऐसे शब्द जाहिर कर दिए तो आज आप देखिए उन्हीं की शरण में आ गए आप वो जो है वह आपका ही भला चाहते हैं। आपका भला जैसे भी होगा वो उस साधन पर ही आपको ला के छोड़ जाएंगे। है नहीं? तो बात ऐसी है कि समस्याएं सभी के जीवन में आती हैं। बहुत कुछ होता है तो रोज ही होता है। तो ऐसा हम समझे कि यदि इसमें भगवान का दोष है तो ये तो हमारी जो है संकीर्ण विचारधारा है। हमें ये समझना चाहिए कि हो सकता है ये हमारी परीक्षा ली जा रही हो और इस परीक्षा में हम क्या खरे उतर पा रहे हैं कि नहीं। कि एक बार ये विचार हम मन में करेंगे तो शायद हम आगे बढ़ने की शक्ति हमको मिलेगी और हम आगे बढ़ेंगे अवश्य बढ़ेंगे। नाम जप
01:44:14:07 के माध्यम से आप सभी यहां जुड़े हुए हैं। इतने अच्छे-अच्छे आप सभी लोग अपने प्रसंग यहां पे बता रहे हैं। ये कितना अच्छा प्रकल्प यहां पे चल रहा है। आप समझिए इसको। तो इसी में हम आगे बढ़ते हुए आप सभी से हम यहां कहेंगे कि देखिए यहां पे सदस्यों की संख्या कम हो गई है। ये इसलिए कम हो जाती है कि थोड़ा सा हम परिचय मांग लेते हैं तो लोग कुछ हड़बड़ा जाते हैं। मैं चाहूंगा ऐसा ना हो। अपना अपना परिचय अवश्य दें। वीडियो ऑन करने की आवश्यकता नहीं है। कोई बहुत विशेष यहां पे कुछ ऐसा नहीं कहा जा रहा है। अपना एक छोटा सा परिचय केवल दे दे। उतना जो है परिचय में घर द्वार का पता नहीं देना जिससे रामपाली मां डंडा ले। रामपाली अगर किसी को इस प्रकार का वो हो उसके लिए उसके लिए अंडर कवर एजेंट है अंडर कवर एजेंट है हमारे देखिए ये अनिरुद्ध भैया इस समय परिचय नहीं दे रहे हैं इनके पास भी कुछ समस्या है समस्या है तो कोई बात नहीं आप लोग सभी लोग संदेश में अवश्य सूचित कर दें इन कॉल मैसेजेस की सुविधा हमें प्राप्त है वहां पर बता दें कि कोई समस्या है जिस कारण से आप नहीं बोल पाएंगे नहीं तो मैं अभी चाहूंगा कि यहां पे जितने भी सदस्य उपस्थित हैं सभी अपना अपना एक संक्षिप्त सा परिचय देने का प्रयास करें थोड़ा हमें लगता है समय भी ज्यादा हो हो गया। अभी 11:00 बज रहा है तो सभी को कहीं ना कहीं जाना होगा और ये सब है। बिल्कुल बिलकुल इसको
01:45:29:10 आज जो रह जाएंगे और अगले इस सत्र से और अगले सत्र के बीच में जो नए नवीन सदस्य जुड़ेंगे तो उनको लेकर के अगले सत्र में भी उनका प्राप्त किया जा सकेगा और संभवत जो आज किसी कारणवश नहीं बोल पाए हैं नहीं बोल पाएंगे अथवा विलंब के कारण या किसी समस्या के कारण वो पहले हट गए तो उन वो भी जब आज के इस डिस्कशन को देखेंगे सत्र को देखेंगे तो संभवत अगली बार उनके अंदर बोल बोलने का साहस या अपनी चीजें रखने का रखने की प्रेरणा इत्यादि ये सब
01:46:04:02 जी तो यहां पे हम आरंभ करेंगे व्सल भट्ट जी को बोलने देते हैं अच्छा जी को बोलने देते हैं बोलिए व्सल भैया बोलिए जय श्री राम शिवश भैया जय श्री राम प्रद भैया जय श्री राम जय श्री राम भैया आपको अगर याद हो तो पिछले सत्र में मैंने आपको बताया था कि मैं एक मतलब मेरा जो एक्सपीर अनुभव है वो मतलब आपके साथ शेयर करना चाहता हूं। आप कर लीजिए सर मतलब उसके रिलेटेड ही मैं भी मतलब मैंने आपको पिछली बार बताया था कि ये मतलब जो राजनीतिक दल लोग उसमें ज्यादा बिलीव करता था जो हमारे प्रामाणिक आचार्य गण है उनप तो मतलब मैंने वहां पर कदम ही नहीं रखा था वो उस बेस पे तो फिर मतलब जब जब आगे आगे बड़ा मेरा जो स्टार्ट हुआ था तब मैं प्रेमानंद जी महाराज वृंदावन एक प्रसिद्ध संत है। उनके वक्तव्य में बहुत सुनता था। तब अब अगर बोले कि भक्ति की शुरुआत हुई तो गलत नहीं होगा। और करते करते मैं पूरी शंकराचार्य जी तक मतलब पहुंचा हूं और उनसे ही मतलब उनसे ही तब मतलब प्रेरणा
01:47:19:10 मिलती और उनके कुछ बात होती है जो समझ में नहीं आती। लेकिन शिवंत भैया की जो भी मतलब वीडियोस देखते हैं तो एक जोश आ जाता है कि भाई नहीं वो हो जाएगा हो जाएगा नीचे नहीं पीछे नहीं हटना है पीछे नहीं हटना है शिव भैया आपको शायद याद होगा कि मतलब ऐसी परिस्थिति बहुत आई है कि मैंने मतलब कॉल किया है आपको कहीं-कहीं बात जैसे आप भी इस व्यूअर्स से अपने कार्य में मेरा मन भी बुरा वो विकसित हो गया था तो भी सबको मैं ये बता दूं कि मतलब भैया ने मेरी बहुत मदद से बहुत ही बहुत अगर भैया नहीं होते ना तभी आज कोई ऐसा स्त्रिय कार्य मैंने कर दिया होता कि मैं सबके सामने यह डिस्क्लोज कर भैया ने अपना समय निकाल कर मेरी मदद की और मेरे मतलब मन को राह दिखाई और एक अनुभव दूसरा ये था भैया कि एक मेरा दोस्त है और वो जो दोस्त है ना भैया वो मेरा मतलब वो ये ऑनलाइन गेमिंग और उससे बहुत जुड़ा हूं तो उसके कोई उसके उसके पापा का ही मतलब एक गेम टोन चलता था। अभी तो नहीं चलता है। और वो व्यक्ति मतलब बहुत ज्यादा बोले ना कि माया में रथ रहता है। वो वो टाइप का था। मतलब तब मतलब उनसे हम ये बात एक्सपेक्ट ही नहीं कर
01:48:34:12 सके कि वो भगवान की भक्ति करें या सुने। तो मतलब अभी तो क्या है कि वो पढ़ाई कर रहे हैं और वो सब तो उसकी भी मतलब मेरे जैसी मतलब वो थी कि उन उसने भी श्री प्रेमानंद जी महाराज के वक्तव्य सुनकर ही उनका ये उसका ये सब शुरू हुआ था। तो एक मतलब मैं तो बहुत टाइम से जुड़ा आान से वो तो अभी थोड़ा ही टाइम हुआ उसको आान आहान से जुड़े हुए तो मतलब मैंने है ना मैं अक्सर स्टोरी में शायद आपको याद होगा कि मैं आपको मेंशन करता हूं पूरी शंकराचार्य जी के कोई कोट होते हैं या कुछ होते हैं उनके फोटो या कुछ उनके मतलब वक्तव्य होते तो एक दिन उसने अचानक सामने से बोला कि भाई ये कौन है और मतलब उसने शंकराचार्य जी का परिचय मुझसे मांगा और धीरे धीरे-धीरे बात होती रही होती रही। फिर मैंने उसको बताया कि ये ये है मतलब भैया मतलब आप भगवान की ये देखिए कि जो व्यक्ति मतलब इसको हम सोच नहीं सकते कि ये व्यक्ति भी संत के चरण का आश्रय लेगा। शंकराचार्य जी के चरण का आश्रय लेगा वो व्यक्ति भी मतलब ये मतलब मतलब उनका आश्रय ले रहा है। अभी तो मतलब उसके घर में तो जो संप्रदाय है वल्लभाचार्य जी महाभारत का उसका मतलब फॉलो होता है। लेकिन उसको भी उसमें ही जाना है वल्लभ संप्रदाय
01:49:49:20 में। लेकिन ये मतलब जो क्लेरिटी उसको चाहिए थी हमारे धर्म के बारे में वो उसको शंकराचार्य जी से बहुत अच्छी तरह से प्राप्त और आपके वीडियो से भी बहुत अच्छी तरह से हम अक्सर जब भी भैया मैं आपको बता दूं कि हमारी बात होती है ना तो उसमें एक तो कोई टॉपिक ऐसा निकलता ही है हम पूरी जी की कोई बात का मतलब डिस्कशन कर रहे हैं या कोई एक बात तो आपकी होती भैया की बात हो हमारे में क्या आपके कोई बात को लेके हम टॉपिक पे बात करते हैं। जो आपका ये केस चल रहा है रंजना दीदी वाला और हरिशंकर जैन जी वाला मतलब उसमें उसकी भी बात मैंने उससे की अभी रिसेंटली कल या परसों ही बात की थी उसके बारे में तो मतलब भैया आपने जो कार्य किया है ना मुझे लगता है कि मेरे मेरी नजर में मतलब मैं बोल नहीं सकता हूं मतलब हृदय में बहुत है वो है कि मतलब क्या बोलूं समझ रहे है ना भैया आप मतलब एक भाव बहुत वो है कि मैं समझ रहा हूं मगर करने वाले हम नहीं है। पीछे हैं गुरु गोविंद ग्रंथ। जी जी भैया लेकिन यही सब करवा रहे हैं
01:51:05:06 और भैया मतलब अभी क्या हुआ कि अक्सर अभी एक मैं कॉलेज में पढ़ पढ़ता हूं अभी और कॉलेज में अक्सर ऐसे मतलब जो लोग होते हैं ना भैया वो जो ये कार्ल मार्क्स हो गया और अन्य जो मतलब वेस्टर्न फिलोस वेस्टर्न थिंकर्स हो गए उसको ज्यादा मतलब डीप में पढ़ा होता है कुछ लोगों ने और वो लोग ज्यादातर एथिस्ट नास्तिक ही होते हैं। तो मतलब ऐसे लोग भी बहुत सारे भटके कि ये मतलब सेुलर लोग भी और अलग-अलग लोग ऐसे भटकते थे मुझे। तब मेरे पास कोई आंसर नहीं था उनके पास तो हृदय में एक पीड़ा सी होती थी कि भाई क्या करें? क्या करें? फिर मैंने शायद आपको कॉल करके ये बात पूछी थी और आपने बताया था कि भजन बल बढ़ाओ। सवा घंटा का भजन करो। तब मैंने सवा घंटे का भजन प्रारंभ किया और तभी से भैया मेरा अनुभव मैं बता रहा हूं कि मतलब जो जो लोग जो खंडनार्थ और वो सब होता है ना अब ऐसे लोग आजू-बाजू भी नहीं मतलब फरकते मेरे सब मतलब वो चल रहे हैं दूर मतलब चलिए बहुत अच्छा बहुत अच्छा उत्तम जी प्रथम जी आप आगे बहुत बढ़िया जय श्री राम भैया
01:52:16:21 जी बहुत ही उत्तम बहुत सुंदर उत्तर दिया बहुत ही अच्छा आपने वक्तव्य दिया। अब आगे बढ़ते हुए मैं यहां पे आशतोष शर्मा जी उपस्थित हैं। मैं उनसे आग्रह करूंगा कि वे कृपया यहां पे अपना वक्तव्य प्रदान करें। अपना परिचय प्रदान करें। आशतोष शर्मा जी नमस्कार मैं शर्मा छत्तीसगढ़ से बोल रहा हूं। आशतोष जी अगर आप हेडफोन से बात कर रहे हो तो हेडफोन हटा के एक बार ट्राई करें। आपका आपकी आवाज बहुत कम आ रही है।
01:52:55:03 हो गई है। हेलो जी अब आवाज ठीक आ गई है। जी जी थोड़ी सी बढ़ी है। अभी आप एक बार फिर से कुछ प्रयास करिए कि बढ़ गई आवाज आपकी। अब बोले हां बोलिए बोलिए। जी मैं आशुतोष शर्मा छत्तीसगढ़ से। जी मैं जगतगुरु पूरी पीठाधीश्वर का शिष्य हूं और आपसे पहली बार जुड़ा हूं। मैंने आपकी YouTube में कुछ वीडियोस देखी हैं। आपके नामास्त्र के बारे में मुझे पहले से पता तो था पर जुड़ा मैं अभी ही हूं। अच्छा अच्छा बहुत सुंदर जी। बहुत सुंदर। बाकी तो ज्यादा कुछ बता नहीं पाऊंगा। बस वही गुरुदेव द्वारा गदत मंत्र जपते हैं और नाम का जप करते हैं। अरे आप गुरुदेव की शरण में है तो जो है इस युद्ध के एक योद्धा है। जी जी जी आगे बढ़ते हुए यहां पे अमित गिल्डियाल जी उपस्थित हैं। मैं उनसे आग्रह करूंगा एक बार अपना परिचय और कुछ भी वो बताना चाहे तो प्रयास
01:54:10:09 करें संक्षिप्त ही रखें क्योंकि और भी सदस्य हैं हम चाहेंगे कि आज सबका हो जाए। बहुत लोग नहीं है यहां पे और पिछली बार जिन्होंने अपना परिचय ऐसा दिया हो कुछ तो उनको हम थोड़ा बाद में रखेंगे यदि समय नहीं होगा तो उनका अगली बार भी बात हो सकेगा अनुभव उनके साझा हो सकेंगे जो लोग नए हो वे पहले अपने हाथ यहां पे रेज कर ले एक बार मैं आग्रह करूंगा जो लोग प्रथम बार यहां पे आए हो अपने अपने हैंड एक बार रेज कर ले जिससे कि मुझे ज्ञात हो जाए और मैं उनको पहले ही उनका नाम ले लूंगा जी बहुत अच्छा सभी लोग अपने हैंड रेज कर ले जो भी पहली बार आ रहे हैं। जी गिल्डियाल जी एक बार आप आपसे कहा ही गया बाकी आपसे ही जी बोलिए जी जय श्री राम भैया जी मेरी आवाज आ रही है जय श्री राम हाँ आ रही है बहुत कम आ रही है किसी और का माइक बंद हो तो अपना माइक कुछ और कर ले किसी और का माइक बंद खुला हुआ हो तो उसको बंद कर ले एक बैकग्राउंड नॉइस आ रहा है अच्छा अभी ठीक है। अभी कम आ रहा होगा शायद। हां जी। हां जी। तो उमेश जी मैं भी पहले जैसे आप जिसको कह सकते हैं ना सेुलर
01:55:25:18 हिंदू टाइप सेुलर ही बोलता हूं मैं उनको मैं वैसा ही था जिसको मतलब जो नाम के हिंदू और धर्म कर्म से कुछ ज्यादा लेना देना नहीं और ऐसा तो बाद में मेरा धर्म की ओर झुकाव बढ़ा। इसका श्रेय भी धर्म विद्रोहियों को ही जाता है। जिन्होंने मुझसे मतलब मेरे धर्म के बारे में ही उल्टा सीधा बोलना शुरू किया और मेरे पास उसका कुछ भी जवाब नहीं होता था। लेकिन मैं यह जरूर कहता था कि मैं अपने धर्म के बारे में तुम्हारी बात क्यों सुनूं? मैं खुद ढूंढूंगा और खुद जाके सीखूंगा। तुम कौन होते हो मुझे बताने वाला है। तो उसके बाद मैंने धीरे-धीरे करके थोड़ा पढ़ना शुरू किया। थोड़ा देखना शुरू किया और इसी क्रम में ढूंढते-ढूंढते मैं आह्वान से जुड़ गया और जुड़ा तो मैं आहान से मार्च से हूं नामास्त्र अभियान से लेकिन मेरे मतलब जो काम है उसकी टाइमिंग कुछ एकदम ही अलग है तो इस वजह से मैं सारे सत्र जॉइ नहीं कर पाता। दिन में एक दो ज्वाइन कर लेता हूं। लेकिन कोशिश करता हूं कि अपनी भक्ति का जो टारगेट है सवा घंटे का वह पूरा कर सकूं। तो बस संक्षिप्त ही रखूंगा भैया जी। धन्यवाद बहुत बहुत ही सुंदर मैं आगे आग्रह करूंगा
01:56:40:21 यहां पे ऋषु राज जी है अपना परिचय और कुछ भी जो कहना चाहे ऋषु राज जी जय श्री राम भैया सब सभी को जय श्री राम जय श्री राम जी मैं मेरा परिचय तो बेसिकली मैं बिहार से हूं और मेरा ये शिवश भैया से जुड़ना पिछले साल हुआ था और मैं मेरा परिचय मतलब मैसेज देना चाहेंगे कि बेसिकली जो हिंदुत्व के सिद्धांत थे जैसे जो भी हिंदुत्व के सिद्धांत रहे शास्त्रों का पढ़ना बचपन से हुआ क्योंकि ब्राह्मण परिवार में जन्म हुआ तो शास्त्रों का पढ़ना राम कथा महाभारत वगैरह का तो बचपन से श्रवण या पठन हुआ। उसके बाद फिर मैंने समय के साथ-साथ मैंने ओसो को भी पढ़ना शुरू किया। एक क्यूरोसिटी थी कि जानने की कि क्या है क्या नहीं है। उस क्रम में मैंने बहुत सारे ग्रंथों को बहुत सारे लोगों को सुना पढ़ा। फिर जैसे जैसे मैं मतलब आगे बढ़ता गया तो बहुत सारे मत मतंतर से मेरा मतलब मत मतंतर के लोगों से जो उनसे जुड़े लोगों जैसे आर्य समाज इस वगैरह हो ब्रह्मकुमारी वगैरह हो या जितने भी तथाकथित मतंतर उनके लोगों से जुड़ना सामना हुआ तो वो लोग आकर के
01:57:55:25 मुझे मैनिपुलेट करने की कोशिश करते थे कि मतलब तुम उनसे जुड़ जाओ उनसे जुड़ जाओ ये करो तो उनका खंडन तो मैं उस वक्त कर दिया करता था मतलब मेरे पास कुछ बेसिक बेसिक सिद्धांत मेरे पास रहते थे। जैसे इस वालों को मैं कह दिया करता था कि वाले आके कहते थे कि मतलब कृष्ण शिव ये सब ये सब में भेद है। तो हम बोलते थे कि भाई इतने सारे ऋषि मुनि कर्मकांड या ये सब क्यों किया आखिर मतलब या राम जी शिव जी की पूजा नमामि शमी ये सब क्यों रचना किए थे। दूसरी बात आर्य समाज वग लोगों को मैं ये कह दिया करता था कि मतलब बोलते थे कि मूर्ति पूजा ये सब गलत है तो बोलते थे कि तुम इतने मंदिर मतलब जो चल रहे हैं वो सब मतलब गलत है और जो लोग इतने पूजा करा रहे है सब चीज तो बचपन से मानते है तो यह सब चीजें चलती आई थी तो उनको उनका खंडन मैं इस तरह से मतलब करते जा रहा था फिर सबसे बड़ी बात ये थे कि मैं उस समय मेरे पास कोई गुरु नहीं थे कि मतलब कोई जिनसे मैं उनके खंडन करते करते मैं कई बार खुद फ्रस्टेटेड या मतलब परेशान हो जाए कहता था कि आखिर सही क्या है क्योंकि इतने लोग ये भी मान रहे हैं एक्चुअली एक्चुअली में हिंदुत्व का मतलब जो रियलिटी में मतलब है वो क्या है क्योंकि गुरु असल में जो हिंदुत्व के गुरु वो मिल नहीं पा रहे थे कि मुझे लगता था कि जैसे इस कोन में आर्य समाज में यही जगह पे एक्चुअली में
01:59:11:03 हिंदुत्व के बारे में ज्ञान मिलता है। बाकी कहीं जगह होगा नहीं। लेकिन अंदर से एक बेचैनी थी कि मतलब ऐसा नहीं हो सकता है। कुछ ना कुछ तो जरूर होगा ऐसा। तो इसी क्रम में मतलब उनका खंडन तो करते जा रहा था। फिर मतलब कुछ और इस तरह से मिल नहीं पा रहा था कि फिर क्या हुआ? फिर मुझे लगता था कि नहीं ये वो सारे लोग कुछ कुछ बात तो बोल रहे हैं। कुछ कुछ सही बात तो बोलते बोल रहे हैं। सभी लोग मतलब सही कुछ ना कुछ सही बोल रहे हैं। पर फिर भी इनमें आपस में ही क्यों लड़ाई? जैसे आर्य समाज और इसको में भी आपस में मत मतंतर भेद था। मतलब उनकी आपस में लड़ाई थी। बहुत सारे लोगों में तो या फिर जो अन्य आचार्य प्रशांत हो गए हैं। अभी जो जो स्पिरिचुअल बातें जो जो बोलते हैं वो आपस में ही मतभेद क्यों करते हैं? आखिर उनमें ऐसा मतलब क्या है? अगर सब स्पिरिचुअल बातें कर रहे हैं तो एक जैसी बातें बोलनी चाहिए। एक मंच पर बैठ के सभी लोग साझा कर ले कि आखिर क्या बात है और फिर इसी बात हम लोग को बताएं हम इतने कंफ्यूज क्यों है आखिर तो इसी क्रम में जब शिवश है वीडियो मैंने देखा कि ये एक क्रम से जितने भी मतमतांतर है उन सबका खंडन करने वो कर किए और वो कोई अपना मतमतांतर मतलब अपना कोई एक नया बाकी सारे जितने में खंडन करते थे लेकिन वो कुछ अपना सिद्धांत दिया करते थे जैसे अपना तो ये देखा है कि नहीं हिंदुत्व
02:00:26:21 का एक्चुअली शास्त्र ग्रंथों को लेकर के मतलब उनका खंडन किया तो उनसे जो मतलब ये हुआ कि नहीं मतलब अगर बाकी सारे लोगों में अगर जुड़े इस में आर्य समाज में तो मुझे वहां पर अपना परिचय बदलना पड़ेगा कि मतलब मैं किसवादी हूं या मैं आर्य समाजी हूं मैं ये नहीं मानता मैं वो नहीं मानता पर अगर मैं शिवश भैया ने मुझे पहली बार शंकराचार्य के बारे में जब बताया उसके बाद मुझे पता चला कि नहीं मतलब ये अपने ही सिद्धांतों के बारे में बता रहे हैं मुझे कुछ भी नहीं बदलना मेरा नाम मेरा परिचय वो तो और उल्टा करें कि तुम्हारे जो अपने सिद्धांत है उन्हीं का पालन करो। तो इससे मैं धीरे-धीरे आवाहन भी जुड़ा। फिर भैया से मैंने सर भी भैया से मैंने भी कुछ कुछ प्रश्न किया ये जानने के लिए कि मतलब मेरे जैसा मैं इसका आंसर सोच रहा हूं वैसा है भैया देते हैं तो 95% जैसा मेरा एक्सपेक्टेड आंसर था भैया ने वैसा ही दिया और मुझे मतलब लगा कि नहीं ये मतलब सही जगह फिर धीरे-धीरे जुड़ता आया कि नाम जप वगैरह और अब मेरे जीवन मतलब स्पिरिचुअलिटी मतलब काफी जो परेशानियां रहती थी कि मतलब ओवरथिंकि क्या सही क्या गलत है धीरे धीरे धीरे महादेव की कृपा से सब कुछ ठीक है तो यही मेरा परिचय था उत्तम बहुत ही बहुत ही सुंदर जो है आपने वक्तव्य
02:01:42:02 दिया ऋषु जी अब मैं आगे आग्रह करूंगा यहां पे यहां मनीष बदोला जी हैं मनीष बदोला जी हमसे कई समय से कुछ बहुत समय से जुड़े हुए हैं यहां पे और जिन्होंने स्वयं के कार्यकारी वृत्त में भी एक अपना एक ग्रुप बना करके हमारे वीडियो आदि और हमारे संदेश आदि करते रहते हैं जो बड़ा अच्छा लगता मनीष भैया एक बार अपना परिचय जय श्री राम सभी को जी जय श्री राम जी मतलब पहले क्या था कि हम जैसे हमारे गली में काफी आमपालीय लोग रहते हैं उस टाइम तो मैं इतना शास्त्र वगैरह कोई पढ़ता नहीं था उस टाइम पूजा पाठ भी इतना वगैरह मैं नहीं करता था तो ये मन में हमेशा संदेह रहता था जब वो बोलते थे कुछ तो हमारे पास जवाब नहीं होता था तो फिर धीरे-धीरे फिर हम क्या करते थे कि कहीं की भी किसी की भी बात सुन के जैसे सोशल मीडिया पे हम सुनते ही हैं तो वही उस उनको बोल देते थे तो लेकिन फिर भी मन में अपने संदेह रहता था कि यार ये सही है सही बोला है कि नहीं बोला तो जब से हम आवाहन से जुड़े हैं तो अब ये लगता है कि मन में कोई संदेह नहीं है। हम जो सुन रहे हैं वो हमें अपने अंदर से यकीन होता है कि हां ये सत्य है। तो बस यही चीजें हैं। बाकी तो ज्यादा कुछ
02:02:57:08 नहीं है। बहुत बढ़िया। उत्सव बहुत ही अच्छा लगा मनीष भैया यहां पे विवेक जी हमारे साथ आज उपस्थित है विवेक भैया आपसे आग्रह है कुछ अपनी सबसे बोले परिचय दे दीजिएगा अपना आपको जो बताना जी आप भी थोड़ा सा मैं कहूंगा कि हेडफोन हटा के बोले कुछ गड़बड़ आ रही है आपकी भी आवाज अभी अभी सही आ रही है भैया अभी बोले जी आप बोलिए
02:03:30:21 विकास विवेक जी बोले विवेक जी बोले जी जय जगन्नाथ जय श्री जगन्नाथ जय श्री जगन्नाथ सभी भाइयों को सभी को प्रणाम सभी को नमस्कार अभी मैं अपना परिचय क्या दूं आप एक से एक मुरधन्य यहां पर व्यक्तित्व उपस्थित है उनके बीच मुझे तो लगता है कि मैं बहुत गॉड हूं यही लगता था कि कहीं जैसे नहीं भगवान शंकराचार्य को सुना और एक जो कभी-कभी जो पीड़ा थी उनकी कि अपने को जो भगवान शंकराचार्य की सेना का सैनिक मानते हैं वैसे हमें लोग चाहिए तो मैं अपने अंदर वह योग्यता तो नहीं देखता पर जो उनकी प्रेरणा है जो कॉज उसमें मेरा जो भी भगवत कृपा से जो भी मेरी मैं कर सकूंगा मैं सोचता हूं कि करूं। अभी तो वस्तुतः यह कहने में भी वो लगता है कि
02:04:46:04 कि कैसे अपनी बात को रखूं। पर अभी एक भैया बता रहे थे कि यह एकमात्र वह बात यह मत लगा जहां हमें अपनी पहचान नहीं बदल बदलती हुई दिखाई दी तो मैं इस समय से आगे अभी क्या बोलूं और भी लोग हैं जी जय श्री राम अच्छा लगा विवेक जी जय श्री राम और आपने कहा कि मैं अपने अंदर कोई योग्यता नहीं देखता परंतु जो हमारे सिद्धांत है वो यह कहते हैं कि स्वयं के अंदर योग्यता ना देखना ही सबसे बड़ी योग्यता है। यह अचीव कर पाना बहुत मुश्किल होता है। कर्तापन कर्तापन से मुक्त होने की बात ही तो कही है भगवान ने। मैं करता हूं। यानी कि मेरे अंदर कुछ करने की योग्यता को मैं देख रहा हूं। और जब व्यक्ति यह कहने लग जाए कि मेरे अंदर कुछ करने की योग्यता ही नहीं है। मैं कुछ कर ही नहीं सकता। तो यह सबसे बड़ी योग्यता है। तो आप तो गुरु भाई भी हैं। और एक वो जो बात है ना कि कैसे गुरुदेव का वो जो वचन है ना कि जो भगवत गीता का सारांश बताते हुए गुरुदेव कहते हैं कि मत हो जा निमित्त। तेरे बस की बात है क्या? जिसके जन्म का जो प्रयोजन
02:06:01:15 है अन्यों की तो बात क्या वो स्वयं भी चाहे तो उस प्रयोजन को टाल नहीं सकता। तो जिसकी जहां उपयोगिता होती है वह करा ही लेते हैं। हम हो या आप है ना जी बहुत बहुत ही बहुत ही सुंदर बहुत ही अच्छा लगा। इसमें भैया के बीचबीच में हमको जो इनपुट प्राप्त हो रहे हैं इतने सुंदर वक्तव्य प्राप्त हो रहे हैं। ये सब कल को प्रसारित होंगे और लोगों को मध्य जाएंगे वो लोग देखेंगे तो धर्म का ही प्रचार प्रसार होगा। भगवान की भक्ति का ही प्रचार प्रसार होगा। अन्य किसी पीयूष जी कुछ कहना चाह रहे थे। पीयूष जी कुछ पीयूष जी कुछ कहना चाह रहे थे। बस पीयूष भैया आप अवश्य बोले। मुझे लगता है जितने नए लोग थे उन सभी का हो गया। उन्होंने हैंड रे किए थे। हम पीयूष भैया से करते हैं। जय श्री राम। सभी गुरु भाइयों को मेरा प्रणाम। जय श्री राम। शिवश भैया अभी थोड़ा टाइम पहले काफी दुखद एक वो पढ़ा था मैंने न्यूज़। अभी क्रिकेट तो हम सब खेलते ही आ रहे हैं बचपन से। तो क्रिकेट की जो गेंदे हैं इसमें गाय के चमड़े का इस्तेमाल होता है और व्यक्तिगत व्यक्तिगत अनुसंधान मैंने
02:07:16:26 नहीं किया है परंतु राजेंद्र दास जी महाराज जी ने भी इसी शैली में कहा था कि सुनने में आ रहा है तो व्यक्तिगत रूप से अनुसंधान नहीं किया है। परंतु यदि उसमें प्रयोग हो रहा है गाय गौ माता का तो बिल्कुल हमारे ओर से उसे त्याग देना चाहिए। किसी भी प्रकार से उसका प्रमोशन, किसी भी प्रकार से उसका प्रोत्साहन हमारे द्वारा नहीं होना चाहिए। यदि हम स्वयं को सनातन वैदिक आर्य हिंदू कहते हैं। लेकिन अब हमारे ही घरों के छोटे-छोटे बच्चे भी खेलते ही हैं जाके क्रिकेट और गेंदे तो वही इस्तेमाल होती है सारी। नहीं बच्चे लेदर की बॉल से नहीं खेलते। देखिए सब गेंदों में नहीं होता। से खेलते हैं। जी जो जो क्रिकेट की गेंदे अलग होती है समस्या वो नहीं है। समस्या उनके खेलने से नहीं है। समस्या क्रिकेट के प्रोत्साहन से है। तो ऐसा वातावरण बनाए जिससे कि क्रिकेट के प्रति उनकी रुचि कम हो और ऐसा वातावरण बनाने के लिए स्वयं को ऐसा बनाएं कि आप ऐसा वातावरण बना पाने के योग्य हो पाए और स्वयं को ऐसा बनाने के लिए गुरुदेव का मार्ग है नाम जप। नाम जप करेंगे तो प्राप्ति की रक्षा और अप्राप्ति की चिंता
02:08:32:00 भगवान करेंगे। है ना? बहुत-बत धन्यवाद भैया बस यही जी अब इसमें बात ऐसी है कि गुरुदेव कहते हैं कि समस्याएं बहुत है समाधान ये है कि मूल जो है हमें उस पर ध्यान देना है। एक भेड़ है यदि उस भेड़ को हमें काटना है तो उनको जड़ के प्रहार करना होगा ना कि उसकी शाखाओं पर आप शाखाएं काटते रहिए। आप तना यदि काट देंगे तो वहां से भी वो पुनः उगा आएगा। लेकिन आपको जो है जड़ के प्रहार करना होगा। आपको वहीं से आपको हटाना पड़ेगा। तो यह समस्याएं एक्सिस्ट बहुत प्रकार की करती है। क्रिकेट की बॉल से लेकर के मंदिरों में होने वाली वीआईपी व्यवस्था तक और इसी से मुझे ध्यान आता है कि आज मुझे लगता है बहुत बड़ी दुर्घटना हो गई है। देवभूमि हरिद्वार में मनसा देवी जी में आठ श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गई है। जो कि भगदड़ की वजह से हुआ है। तो मैं चाहूंगा कि थोड़ा सा सुभाष भैया आप जो है कुछ शांति पाठ है ऐसा कुछ यहां पे अवश्य हमें इस बारे में तो अभी आप ही के द्वारा जानकारी प्राप्त हो रही है हमें दोपहर में दोपहर में हमको भी जानकारी हुई थी अपने मित्र के द्वारा उसने मुझे बताया देहरादून में रहता है तो उसने जानकारी दी मुझे तो
02:09:47:03 मुझे अभी अचानक से याद आ गया इन सब बातों से तो मैंने कहा कि एक बार जो है आठ लोगों का अभी मैंने अभी चेक किया है आठ लोगों की इसमें मृत्यु का बहुत दुखद है ऐसा होना मंदिर प्रांगण में ऐसा होना श्रद्धालुओं के साथ ऐसा होना बहुत दुखद है पीड़ादायक है बिल्कुल भी ऐसा नहीं होना चाहिए था और यदि कोई व्यक्ति वस्तु स्थिति इसके लिए जिम्मेदार है जिसके कारण किसी के लोभ के कारण स्वार्थ के कारण ऐसी कोई घटना घटित हुई है तो उसको भगवान का श्राप अवश्य लगेगा उसको दंड अवश्य मिले अवश्य ही मिलेगा और यह तो आपने बहुत कहूंगा कि हृदय को विदर्ण कर देने वाली आपने जानकारी दी अभी-अभी मंदिर प्रांगण में श्रद्धालु ये सोच कर जा रहा है कि वो अपने ईष्ट के दर्शन करेगा और वहां पर ऐसी भक्तदड़ ऐसी अवस्था हो जाना ये बिल्कुल भी अह
02:10:56:16 ग्रहण करने योग्य बिल्कुल भी सहन करने योग्य स्थिति नहीं है और सभी जितने भी लोग वहां पर प्रभावित हुए हैं उस जगह से उस घटना से जितने भी लोग प्रभावित हुए हैं हम सब की भावनाएं हम सबकी प्रार्थनाएं उनके साथ हैं। ईश्वर प्रभु श्री राम से हम प्रार्थना करेंगे कि वो इस कष्टप्रद और कठिन स्थिति से अ संघर्ष करने का बल उस घटना से प्रभावित परिवारों को दें और जितनी भी पुण्य आत्माएं हैं जो वहां पर जिनका स्वर्गवास हुआ है या जिन्होंने अपनी देह का त्याग किया है वहां पर उन सभी को प्रभु श्री राम अपने श्री चरणों में स्थान दे ऐसी हम उनके लिए प्रार्थना करते हैं।
02:11:53:18 और सभी से मेरी निवेदन है आप अपने नाम जप नाम नाम जप वाले सत्र में भी उन ग्रुप्स में भी डाल दीजिएगा कि कल प्रातः काल का जो पहला सत्र हो नाम जप का वो वहां पे जो श्रद्धालुओं के साथ जो दुर्घटना घटित हुई है उनको सद्गति प्रदान करने की भावना से कल सुबह का पहला सत्र करें। गौतम भैया गौतम भैया उपस्थित है। उन्होंने बात ये नोट कर ली है। गौतम भैया ने बात लिया उचित है। तो यही बहुत ही हृदय विदारक घटना जो है वहां पे घटित हो गई। इसकी जानकारी मुझे भी मिली तो मुझे भी बड़ा धक्का सा लगा और बड़ी मुझे भी वैसी बात लगी कि पता नहीं क्यों कल अचानक से मुझे पहली में जो बांध बना है उसके विषय में कुछ बात करते अचानक से मनसा देवी माता का स्मरण हो आया था। और मुझे याद आ गया मैं बहुत पहले गया था वहां और इस प्रकार से और पता नहीं क्या आज ऐसी घटना सुनने को मिल गई जो बड़ा ही खराब लगा इसको सुनकर के और आठ श्रद्धालुओं की मृत्यु बताई जा रही है और ऐसा आशंका है कि हो सकता है ये बढ़ जाए तो क्योंकि मैं नहीं चाहूंगा कि बढ़े और किसी और को भी पीड़ा पहुंचे तो आठ श्रद्धालु नहीं ये आठ परिवार है आप एक बार सोच करके देखिए
02:13:08:24 एक परिवार में जब कोई मृत्यु होती है तो क्या होता है तो आठ परिवारों के बहुत बड़ी बात तो जी इस कमलेश जी मैं संभता पहली बार देख रहा हूं इन्हें हमारे बीच में या इन्हें सुन चुके हैं नहीं कमलेश भैया मुझे लगता है आए कमलेश जी आप पिछली बार आ चुके हैं अच्छा अच्छा अगर कुछ वक्तव्य देना चाहे कमलेश जी अथवा कमलेश भैया जी सभी को मेरा नमस्कार मेरी आवाज आपको सुनाई दे रही है जी आ रही है आ रही है। बहुत बहुत अच्छे से आ रही है। जी मैं कमलेश कुमार झा हूं। मैं मिसल से ओरिजिनली बिलोंग करता हूं। अभी फिलहाल मैं देहरादून में स्थित हूं। लास्ट सेशन में मैं आया था। तो अपने को भाग्यशाली समझता हूं कि इतने अच्छे ग्रुप के साथ मेरा जुड़ाव हो सका। ये अवश्य ही मैंने कुछ सात कर्म किए होंगे जिसकी वजह से मुझे यह लाभ मिल रहा है।
02:14:18:07 ये ये बहुत लंबी यात्रा है मेरे लिए। अ मैं धर्म कर्म के मार्ग पे वैसे तो ब्राह्मण परिवार से बिलोंग करता हूं। तो धार्मिक कर्म वगैरह होते रहते थे हमारे घर घरों में। लेकिन उसका जो क्या औचित्य है उसका क्या अहमियत है मतलब हमारे जीवन के साथ उसका क्या लेना देना है ये ताना बुना बुना जो है हमें कभी मतलब एहसास नहीं हुआ लेकिन
02:15:01:01 ये हमेशा से क्वेश्चन दिमाग में रहा है और जैसे इस ग्रुप के साथ जुड़ना हुआ है तो मुझे इस बात का बहुत यकीन है और ये ये जुराब भी बहुत लंबी यात्रा के बाद हुआ है। शंकरा शंकराचार्य जी को मैं बहुत दिनों से उनके वीडियोस वगैरह देखता रहा हूं। उससे पहले भी उनसे उनके वीडियो देखने से पहले भी मैंने कई और
02:15:35:10 जैसे एक जग्गी वासुदेव जी है सद्गुरु कहते हैं अपने आप को उनसे भी जुड़ाव हुआ है। उनके भी वचनों को सुनके लेकिन उनके वचनों में और शंकराचार्य जी के वचनों में इतना अंतर है कि हमेशा ये शास्त्र को प्रमाण देते हैं और उनके वचनों में यह रहता है कि नहीं वो उनका जो भी है पिछले जन्मों से उनको इतना ज्ञान था ये वो करके लेकिन अता ये है कि हमें अपने आप को जानने की जो प्रवृत्ति है उसको जागृत रखनी है और इस क्रम में यह मेरा एक बहुत अच्छा जुड़ा हुआ है इस ग्रुप से और इसके लिए मैं सबको धन्यवाद देना चाहता हूं। धन्यवाद। बहुत ही बहुत ही सुंदर
02:16:36:00 अब मैं आग्रह करूंगा यहां विश्वजीत जी उपस्थित है। एक बार यदि सुन रहे हो तो अवश्य अपना परिचय दे। जी भैया नमस्ते राम राम। नमस्ते राम राम जय श्री राम। विश्वजीत का नंबर आपने काफी लास्ट में डाल दिया। हां बहुत देर से जो है बोल रहे थे जुट चुका था भैया लेकिन जो मैं कहना चाहता था तब तक आप चले गए थे फिर भी मैंने कोई बात नहीं कोई बात नहीं आप धन्यवाद कहना चाहता हूं क्योंकि जब से मैं जुड़ा हूं गुरुदेव के जो वचन है उनको सरल भाषा में हम लोगों को समझा देते हैं तो उस दिन यही कहना चाहते थे भैया और जब से आह्वान से जुड़े भैया हमको बहुत कुछ सीखने को मिला और उसके बाद नाम जाप में सुबह के समय 5:30 बजे पहला शिव जी का तो उस समय भैया सवा घंटे का चलता है तो उसमें भी भैया मेरे जिंदगी में बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा है जब से मैं जुड़ा हूं नाम जप अभियान से और भैया मैं भी कोशिश कर रहा हूं कि मैं भी दीक्षा ले लूं गुरुदेव से तो जितना जल्दी हो सके और भैया बस अंत में यही कहूंगा आपसे बहुत कुछ सीखने के लिए मिला मिला है और
02:17:51:03 जो भी मेरे जिंदगी में अच्छा प्रभाव पड़ेगा वह आपके और गुरु जी के वजह से ही पड़ेगा। धन्यवाद भैया। बहुत बढ़िया। बहुत सुंदर है। बहुत ही बहुत ही उत्तम भैया। बहुत अच्छा कविता भी आप लिख लेते हैं। हमने ये भी पता चला हमको टैलेंट है। हां मेरे मेरी जानकारी में दो तीन अच्छी-अच्छी कविताएं मैंने पढ़ी। बड़ी प्रेरणादायक और बड़ा गदगद भी किया उन पंक्तियों ने। आपका आभार बहुत-बहुत सम्मान आपका। नहीं अच्छा है। अवश्य ऐसा टैलेंट होना चाहिए। कविता कविता जब लिखते है ना भैया तो वहां पे तू या फिर तुम शब्द का उपयोग करने से हम देखते नहीं भैया है तो उनके लिए आप शब्द लिखेंगे चाहे कविता सोच समझ के जितना भी लिखते भैया
02:18:41:25 आगे बढ़ते हुए हम देखेंगे यहां मनीष दुबे जी उपस्थित है। मनीष दुबे जी आपका आवाज आ रही है तो प्लीज आप मनीष दुबे जी भी हैं और संभवत अभिषेक जी भी हैं। हां अभिषेक गौर जी भी यहां पर उपस्थित है हमारे साथ दो लोग ये बचे हुए हैं। आप दोनों में पहले मनीष जी अगर आवाज जा रही हो तो परिचय दे दें। अभी समस्या हो तो अभिषेक जी आप अगर कुछ बोलना चाहे जी जी मेरा नाम अभिषेक कौर है। मैं वाराणसी का रहने वाला हूं। अभी मैं प्रथम भैया के से जुड़ा हुआ हूं। तो अभी मैं अभी मेरा पहला दिन है तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा कि यहां धर्म के बारे में अच्छी-अच्छी बातें होती हैं। गाय गाय रक्षक भी होते हैं। ऐसे चीजें और मुझे बहुत दुख की बात से कहना पड़ रहा है कि कुछ हम ही लोग जैसे हिंदू हैं जो अपना ग्रंथ नहीं पढ़ते हैं।
02:19:41:20 जी जैसे मैं मतलब अभी मतलब अभी मैं मतलब तीन-चार दिन से मैं पूजा कर रहा हूं। वजह से मैं प्रथम भैया से भी जुड़ा हुआ हूं मैं मतलब तो अभी प्रथम भैया मुझे मतलब गाइड कर रहे हैं एक सहयोग की वजह से तो मैं आजकल मैं पूजा पाठ कर रहा हूं भगवान के मंत्र स्टेप कर रहा हूं तो मुझे बहुत अच्छा फीलिंग हो रहा है बहुत बढ़िया सब भैया आपका ही प्रभाव है कि मित्र हैं हमारे अभिषेक जी मित्र हैं यहां पे हमारे साथ में है तो आपका ही प्रभाव है कि इसे गुरुदेव कहते हैं कि मनोवादी जहां एक पहुंच पहुंच जाता है। वो चारों तरफ अपना प्रभाव बिखेर देता है क्योंकि उसके आगे कोई भी जो है नतमस्तक हुए बिना नहीं रहेगा। यदि कोई सच्चा मनुवादी होगा। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि धर्म जो है सब चीजों का सार वही है। सब चीजों को सभी चीजों का जो मूल तत्व वही है। यदि कहीं पर कुछ भी भव्य है दिव्य है तो धर्म के कारण है। धर्म के गुणों के कारण जैसे एक अग्नि की चिंगारी भी छोटी सी चिंगारी होती है। जंगलों में जंगल के जंगल राख कर देती है। तो ऐसे ही धर्म भी होता है। एक भी गुणधर्म का हमें जो है भव्यता और दिव्यता का अनुभव करा देता। यदि आज बुद्धिस्ट लोग और बौद्ध
02:20:56:26 लोगों का जो बहुत हमने देखा इतना नाम है इतना बेस्ट में इतना उनका जो है प्रभाव क्यों है क्योंकि उन्होंने कुछ नहीं बस महर्षि पतंजलि के योग दर्शन में जो नियम और यम की जो बात हुई है उसमें से पांच वो नियम उठा लिए अहिंसा शौच सत्य परिग्रह वाले इस कारण से उनका इतना प्रभाव ये देखा ये इस छोटी सी चिंगारी के कारण वहां पे इतना उनका प्रभाव जहां पे भी कहीं भी जापान में बड़ों की बहुत सेवा की जाती है बड़ों को बहुत आदर दिया जाता हमारे यहां भी वृद्ध जनों को धर्म का ये गुण है। तो इसलिए जापान का जो है थोड़ा उसके कल्चर को लेकर के वेस्ट में बहुत जो है सम्मान होता है। बहुत मान होता है। तो जहां कहीं भी धर्म का छोटा सा भी गुण होगा। इसमें वत्सल जी उस समय कह रहे थे कि कम्युनिस्ट होते हैं ये सब होते हैं। तो ये सब भी कुछ नहीं है। ये सब भी मात्र आकर्षण इसीलिए है। वो दिव्यता वहां पर इसीलिए है क्योंकि वहां धर्म का एक छोटा सा है। कार्ल मार्क्स जो थे अपने जमाने के एक परोपकारी व्यक्ति थे। उनके मन में यह विचार आया कि यह देखकर कि फैक्ट्री में जो बच्चे काम करते हैं बड़े उनके समस्या होती है उनको प्रकार की यातनाएं झेलनी पड़ती है तो इस कारण उन्होंने बहुत कुछ लिखा इसलिए मुझे भैया का एक बहुत पुराना वक्तव्य याद आ गया कि चार्ल्स डार्विन जी भैया ने बोला था कि बाइबल को पढ़ करके उनका मन बड़ा उछड़ गया धर्म आदि से और उन्होंने अपना जो पूरा सिद्धांत अभी प्रकाशित किया बाद में जो
02:22:11:27 बहुत प्रसिद्ध भी हुआ तो भैया का इसपे ये कहना था कि यदि चार्ल्स डार्विन ने एक बार सात सिद्धांत को जाना होता जो कि आज उस तरीके से प्रसारित प्रसारित नहीं हो पाए आ रहा है और जो हम करना चाहते हैं जो हमारा लक्ष्य है तो शायद वो ऐसा ना करें। एक बार मैं भैया से कहूंगा कि एक बार फिर से आप जो है उसको थोड़ा सा विस्तृत रूप से समझा दें कि आपने क्या कहा था वो एक सिद्धांत था। चार्ल्स डार्विन ने ईश्वर के अस्तित्व का खंडन कर दिया था। और जहां पर ये हुआ वहां पर ऐसा हो गया था। था। यद्यपि हमारे जो प्रथम चैप्टर है ना जो आहान का कोर्स है उसमें पहले चैप्टर में यही है। तो चार्ल्स डार्विन ने जब खंडन कर दिया था तो क्या हुआ था कि चर्च बंद होने लगे वहां के। भाई नास्तिकता से बेहतर तो है ना कि चर्च जहां पे नियम तो जब चर्च ही बंद होने लगे तो यह होने लगा कि सारे रिश्ते सारी मर्यादाएं सब कलंकित होने लगी। ना कोई मां है ना कोई बहन है ना कोई पत्नी है कुछ नहीं है कुछ तो जब ऐसा हुआ था तो चार्ल्स डार्विन ने ईश्वर का खंडन किया क्यों था चार्ल्स डार्विन ने ईश्वर का खंडन इसीलिए किया था क्योंकि उसके
02:23:27:10 पास समय रहते सनातन सिद्धांत पहुंचे ही नहीं थे उसने बाइबल के अनुसार ईश्वर को जानने की प्रयास किया था बाइबल की जो चीजें हैं सृष्टि रचना इत्यादि वो सब उसको मजाक लगी तो उसने खंडन जो के आधार पर हमारी जो व्याख्या है यदि उसने पढ़ ली होती और आज भी जितने भी नास्तिक बने हैं वो नास्तिक या तो पहले बन चुके हैं तब शंकराचार्य को जान रहे हैं तब सनातन के सिद्धांतों को जान रहे हैं तो पहले से अपनी एक मेंटालिटी है कि मैं नास्तिक हूं मैं तो सुनूंगा ही नहीं वरना कोई भी व्यक्ति जो जो शंकराचार्य को न्यूट्रल होकर के सुन ले न्यूट्रल हो के मेंटालिटी अपनी पहली ना पहले ना लेकर के वो ईश्वर के अस्तित्व को धर्म को माने बिना नहीं रह सकता। आप देख लो आर्य समाज के गर्भ से दिव्य क्या नाम है उनका? आईएस कोचिंग वाले क्या नाम है?
02:24:28:19 समाज के गर्भ से दिव्य कीर्ति निकलते हैं। बताओ कितने शंकराचार्य के अनुगत रहने वाले कितने घर है जहां पे नास्तिक हो गया व्यक्ति? बताइए। है कोई जवाब वहां से एक कदम आगे भक्ति और ज्ञान और वैराग्य सब निकलेगा दिव्य कीर्ति जैसे नहीं जन्म लेंगे वहां ठीक है तो यहां बात क्या है पूरे संसार में केवल सनातन सिद्धांत के पहुंचने की देर है अखिलेश यादव तब तक सनातन का खंडन कर रहे हैं जब तक वह किसी सनातनी से मनुवादी से बैठकर बात नहीं कर रहे हैं। अन्यथा मुंह में बिल्कुल जो शब्द होंगे मुख से वो उड़ जाएंगे। वो केवल बात नहीं हो रही है। वो वहां पर मीडिया में बयानबाजी हो रही है। यहां से हो रही है। अभी असतो मा सद्गमया तमसो मागया मृत मृतम गमया से बात करना तो अभी या तो वो ये बोलने लग जाएंगे कि हां राजनीति में भी धर्म है। ठीक है? या तो उन्हें यह मानना पड़ जाएगा कि वह सनातन को मानने वाले नहीं है। या उन्हें यह मानना पड़ जाएगा जब वो सनातन को ना मानने वाले हो जाएंगे
02:25:43:22 तो उन्हें यह मानना पड़ जाएगा कि वो जो है ईश्वर को मानने वाले नहीं है। और यदि वो या फिर और एक स्टेप आगे जब वो ईश्वर को ना मानने वाले सिद्ध हो जाएंगे तो थोड़ी देर बाद वो नास्तिक होते हुए स्वयं को मनुष्य भी सिद्ध नहीं कर पाएंगे। अगर सैद्धांतिक तौर पर विवेचना की जाएगी तो और यह सब उनके ही मुख से होगा। हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे। हम तो केवल उनके समक्ष वस्तु स्थिति को रखेंगे और फिर वो या तो निरुत्तर होंगे और या बोलेंगे कि हां इस हिसाब से तो मैं मनुष्य सिद्ध नहीं होता। या वो बोलेंगे इस हिसाब से तो मैं नास्तिक सिद्ध ईश्वर को मानने वाला सिद्ध नहीं होता। या वो बोलेंगे इस हिसाब से तो मैं सनातनी सिद्ध नहीं होता। हिंदू सिद्ध नहीं होता। या वो बोलेंगे कि इस हिसाब से तो मैं जो है एक मनुष्य भी सिद्ध नहीं हो सकता वस्तु स्थिति रख देने से तो ये केवल सनातन सिद्धांत के पहुंचने मात्र की देर है जिस दिन पहुंच गया अब ये क्या करते हैं आर्य समाजियों को देख लीजिए शास्त्रार्थ शास्त्रार्थ करके व्यक्ति की आवाज को दबाने का प्रयास करेंगे है ना शास्त्रार्थ कर लो मैं तुम्हें चुनौती देता हूं शास्त्रार्थ की अरे भैया पूछा जा रहा है
02:26:59:01 ईश्वर अवतार क्यों नहीं ले सकता और अगर नहीं ले सकता तो उसके सामने से अनंत सामर्थन का टैग लगा लो तो व्यक्ति को भाई सामान्य व्यक्ति है उसको कहीं शास्त्रार्थ के लिए बुलाता हूं मैं तुम्हारा चुनौती देता हूं व्यक्ति एक बार को सोचे यार कहीं मेरे लेखन ना हो जाए लेना ना देना दो तो उनको इससे मतलब नहीं है कि संशय कैसे संशय का निवारण क्या हो इस प्रश्न का उत्तर क्या हो अरे ये जो कह रहा है ना सर्वशक्तिमान ईश्वर इसको हमने शास्त्रार्थ के लिए तीनतीन बार चुनौती दी। अरे भैया तुम्हारे यहां पर पता नहीं क्या क्या होता रहता है। रामपाल जैसे लोग तुम्हारे गर्भ से निकले हैं। और क्या क्या हुआ है क्या क्या नहीं हुआ है। तो तुम जब भी कहो बस मुंह उठा के चल दे आपके कहने पर। जाओ जाके वहां के एसपी डीआईजी से लेटर लिखवा करके हमें संतुष्ट करो। हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करो। आएंगे आपके कहने पर। हम ऐसे कैसे चले आए भाई? और या फिर हम अपने जीवन का एक समय निकाले फिर आपके बारे में पता करें कि आप कहां बुला रहे हो वहां क्या है क्या नहीं है इतना समय होगा तो करेंगे अन्यथा आप आ सकते हैं ना आवश्यक क्यों है कि हम ही आए आप आ जाइए नहीं हमने शास्त्रार्थ के लिए इस सवाल का जवाब नहीं
02:28:14:02 दिया हमने और जब शास्त्रार्थ के लिए होने लगा डिसाइड तो क्या हुआ कि नहीं ईश्वर सर्वशक्तिमान पर बात नहीं होगी जो मूल चाह का विषय है उस पर बात ही नहीं होगी दूसरे विषयों में बात होगी क्योंकि हमारा प्रयोजन धर्म को सिद्ध करना नहीं है। हमारा प्रयोजन आर्य समाज का विरोध करने आर्य समाज की कुछ चीजों का विरोध करने वाले किसी व्यक्ति का व्यक्ति की आवाज को दबाना है। हमारा प्रयोजन ये नहीं हमारा उद्देश्य ये नहीं धर्म की स्थापना हो। ईश्वर का अस्तित्व की स्थापना हो। तो क्या हुआ कि जो मैसेज जिस जहां पर सिद्धांत के पहुंचने की बात थी वो पहुंचने ही नहीं दिया गया कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है इस बात पर बात ही नहीं करेंगे हम तो शास्त्रार्थ का चौआ करेंगे अच्छा एक व्यक्ति ने फोन किया शास्त्रार्थ कर लो मीडिया बुलाएंगे ये करेंगे इतना तामझाम बता दो व्यक्ति को कि वो साधारण सा जो प्रश्न है वो गायब ही हो जाए दुनिया से इतना बड़ा चोला उड़ा दो उसको शास्त्रार्थ के रूप में और हां आज्ञा मिली होती तो अवश्य कर लेते है ना कुछ पीछे से व्यवस्थाएं हैं
02:29:29:15 इसलिए तो खैर हमने सभी चीजें यहां प्रस्तुत कर दी और मेरे ख्याल से सबके वक्तव्य हो गए हैं और मैं इस तरह से कार्यक्रम को थोड़ा सा विराम दूंगा अंत में प्रथम जी बात करेंगे है ना पर सबसे पहले लास्ट वाला जो लास्ट वाला कार्य है वो कर लिया जाए। यहां आशुतोष शर्मा जी कुछ पूछना चाह रहे थे एक बारे। मैं मैं एक बात कह दूं इसके बाद फिर मैं वाणी को विराम ही दूंगा प्रॉपर कि गुरुदेव ने एक बात कही थी कि भाई अ स्वयं को स्वयं के अंदर आत्म का बल जो है सवा घंटे की भक्ति का बल जो है अर्जित करें और उसके माध्यम से संघ का बल अर्जित करें और एक एक व्यक्ति ऐसा तैयार हो जो अन्य 10 को तैयार कर सके और देखिए मेरे जीवन का मैंने कई बार बताया कि मेरे जीवन का कोई उद्देश्य बचा नहीं है। कार, मकान, गाड़ी ऐसा ऐसा नहीं कि मैंने वो प्राप्त कर लिया। मतलब मुझे अपने जीवन में कोई उद्देश्य नहीं मिलता है। मुझे गुरुदेव की वाणी, हिंदू राष्ट्र धर्म स्थापना, भगवान श्री कृष्ण के वचन और प्रभु श्री राम की मर्यादा ये सब मेरे जीवन के उद्देश्य
02:30:44:28 हैं। तो जो आज मैंने देखा कि आज कुछ लोगों ने कहा कि मैं जो है उनके जीवन में आने वाले परिवर्तन के परिवर्तन में या उनकी शंकराचार्य भगवान तक पहुंचने की यात्रा में आह्वान का निमित्त मात्र भी उन्होंने नाम लिया तो इससे ऐसा लग रहा है कि आज मेरा जीवन सार्थक हुआ और जो गुरुदेव भगवान ने एक आदेश दिया था कि अन्य द अन्य द को योग्य बनाइए बस एक एक व्यक्ति में इतना वो हो जो अन्य द लोगों को योग्य बनाए और आज मेरे सामने इतने सारे योग्य व्यक्ति है जो आज यहां पर बता रहे हैं कि उन्होंने अन्य को भी योग्य बनाया। आज कितने सारे आप सब के रूप में मैं शिवश को ही देख रहा हूं। अभी मैं अपने चेहरे को देख कर के जब मैं ये आप लोगों से वीडियो कॉन्फ्रेंस में बात कर रहा हूं। तो मुझे मेरा चेहरा भी दिख रहा है ना। तो मैं अपने चेहरे को देख कर के एक समय पर यह अभी इसी मीटिंग के दौरान ये चिंता कर रहा था कि आज ये चेहरा है। आज ये चेहरा है। किसी शत्रु के गढ़ में घुसकर जो है आक्रमण करने के लिए आज ये चेहरा उपस्थित है। कल क्या होगा? कल कौन लाउडस्कर लेकर के आहान करेगा? कल कौन करेगा?
02:32:00:14 कौन करेगा? कल तब मुझे तब मुझे ध्यान आया गुरुदेव का वो वक्तव्य और इतने सारे चेहरे जो मेरे सामने हैं। ये करेंगे आहान। ये हाथ में लेंगे लाउडस्कर। है ना? जब यह चेहरा नहीं होगा तो आवाान का आप लोगों आप लोग आहान के चेहरे होगे तो वो मुझे दिखाई दिया अभी अभी मैं उस चिंता में पड़ा था तो वो आहान सबकी ओर से है आप लोगों के रूप में आहान ही है और मेरे रूप में आप सब है भगवत गीता का 435 वाला श्लोक है कि शंकराचार्य भगवान से ज्ञान क्या प्राप्त हुआ 434 में क्या कहा भगवान ने उस तत्वदर्शी के पास जा वो क्या ज्ञान देगा आपको? तत्वदर्शी संत वो ज्ञान ऐसा ज्ञान होगा जिसके कारण पहले तू समस्त संसार को स्वयं में और पीछे मुझ में देखेगा भगवान और वही आज हो रहा है। देखिए एक इस मीटिंग के चलते चलते ही ये मुझे चिंता आई कि कल कौन होगा जो घर में घुसकर लोगों के निडर होकर के निर्भीकता के साथ पहुंचेगा आहान करने के लिए उठाएगा लाउडस्कर सड़क पर उतरेगा कौन होगा कल अगला तो मैंने देखा इतने
02:33:15:27 इतने सारे आहान तो आज ही खड़े हो चुके हैं। अभी खड़े हैं। इतने सारे आहान तो मुझे चिंता करने की क्या आवश्यकता है? गुरुदेव का वचन सार्थक हो रहा है। तो इसी के साथ वाणी को विराम दूंगा। जी जी आशुतोष भैया आप प्रश्न कुछ पूछना चाह रहे हैं। वैसे पूछ नहीं मैं अपना अनुभव बताना चाह रहा हूं। जैसा शिवंश भाई ने अभी बताया मैं भी अपने जीवन के लंबे समय के लिए तो था नास्तिक ही तब आहान चैनल नहीं था तो मैं जाकर सीधा भिड़ गया था गुरुदेव से अच्छा और जैसे ये लोग बोलते हैं कि शास्त्रार्थ के लिए आ जाओ गुरुदेव एक 12 साल 13 साल 14 साल के बच्चे का भी पूरी तरह से जवाब देते हैं उसका भी एक-एक शब्द सुनते हैं इनमें अगर हिम्मत हो तो यह जाके सीधा वहां
02:34:15:10 जी बस इतना बोलना चाहता था धन्यवाद वहां जाके ना वहां शक्ति खींच जाती है बाली वाला जुकाम नहीं होता था वो हो जाता है वहां जाते वहां कोई नहीं है केवल यद्यपि उन लोगों ने छात्र की चुनौतियां भेजी है हमने कहा भी है कि ठीक है आपके वहां आने का हमारे पास समय नहीं है तो आप यहां आ जाइए आपके ज्यादा वो चिंगारी फड़की हुई है उनके बस तरीके हैं। आप ऐसा कुछ हम जब नीति की बात करेंगे समझाएंगे तो यहां जब यहां आने का तय हो गया लखनऊ में व्यवस्थित होने का तय हो गया सब हो गया तो वो कह रहे हैं कि ईश्वर पर बात नहीं होगी दूसरी चीजों पर बात होगी अरे भाई दूसरी ऐसी कौन सी चीज है जिसका खंडन हो जाने के बाद अब आप हमारी सारी चीजें मान भैया वहां पर पैसों पे बात होगा पैसों पे है ना हां जी तो दूसरी एकमात्र ईश्वर ऐसी चीज है जिसको आप सिद्ध कर दो जिसके पास ईश्वर है उसके पास धर्म है। आप हमें ले चलो। ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दो। ले चलो। कहां कहां चल के नारे लगाने निराकार ईश्वर के? बताइए।
02:35:24:24 तो खैर वो उन्हें इससे मतलब नहीं है। धर्म संस्थापना और ईश्वर के चर्चा देख रहे थे। उसमें जो सवाल आपने पूछा था एक व्यक्ति से उसका जवाब ना देकर के कुछ और ही जवाब दे रहे थे। उसके बाद जब उन्होंने सवाल किया तो आपका एक जवाब आया अंगूर। उस समय भैया हमको बहुत अच्छा लगा था कि जैसे ही जवाब देना चाहिए। वो वीडियो बहुत बढ़िया और भैया जैसे आपने कहा ना कि वो लोग शास्त्रार्थ के लिए बुलाते हैं। पहले मीडिया आएगा ये आएगा। अरे आपके पास है उतना क्षमता तो आप दो सवालों के जवाब दे दीजिए ना। दुनिया भी देखेगा और किसी के साथ दुर्व्यवहार आडंबर करना है। पहले आडंबर से दबाना है। पहले तो भटकाएंगे ये लोग कि किसी भी दूसरे टॉपिक पे भटका देते हैं। और भैया अभी तो ऐसा प्रतीत होता है ना कि ये लोग हार चुके हैं। बस दुनिया में मीडिया बुला ली चाहिए। YouTube लाइव पर चर्चा होगा भैया। किसी के जान के साथ दुर्व्यवहार भी नहीं होगा। सेफ्टी भी रहेगा सबका। यह सब नहीं देख के इन लोगों को व्यवस्था पहले करना है। वो इसीलिए करना है कि व्यक्ति उसमें जो है भय खाए आने से लोग इसीलिए दूसरी बात है और चिंता की बात नहीं है। बात ये भी है कि समय भी तो होना चाहिए। हम आपकी जांच कर सके
02:36:39:27 कैसे क्या है मामला व्यवस्था या फिर ये लेटर जब भेजते हैं तो वहां के डीएम से वहां के एसपी से जो वहां के वो हो जिनका नेतृत्व हो जिनके ऊपर दायित्व हो वहां का वहां से लिखवाए क्या आपकी सुरक्षा हम सुनिश्चित करते हैं आप आइए यहां हम क्यों चल भाई एक चीज और देखते हैं आप इतने सारे ब्रांच जो होते हैं इतने सारे शाखा होते हैं सभी शाखा में चाहे ईॉन के हो चाहे आर्य समाज के हो हर जगह आप गए तो वहां पे तो इन लोगों आपको विद्वान व्यक्ति को ही उस पद पर बैठाना चाहिए ना। जब चर्चा कर लेते हैं ना आप तो फिर यह विदुषी हो चाहे विद्वान हो उसका मुंह बंद हुआ। फिर उसके बाद आप उसको विद्वान नहीं कह रहे। कहना क्या चाहते? और अगर उसका मुंह बंद नहीं हुआ था तो फिर आप शास्त्रार्थ किस आधार पर कर रहे हैं? किस आधार पे? इसका मतलब है वो, या तो वो विद्वान नहीं था और या फिर उसका मुंह बंद हुआ। आप लोगों ने या तो वो लोग मूर्खों को बैठा के रखा है उस पद पे। दो आज के इस
02:37:38:19 क्या कहते हैं ये जी संकल्प वाला कार्य करा दे फिर इसको संपन्न करते हैं दो मिनट का कार्य उसको करा दीजिए सबसे पहले मैं बस एक अंतिम मैं पूछना चाहूंगा किसी से नाम शास्त्र को लेकर के अभियान को लेकर के कोई भी शंका किसी की हो कोई प्रश्न हो अभी तत्काल पूछ ले नहीं तो हम इसको आगे बढ़ाते अभी किसी का कोई भी प्रश्न हो अपने अनुभव आदि कुछ ना साझा करें मैं कहूंगा बहुत लंबा गया है। प्रशांत जी का बहुत-बहुत सम्मान, बहुत-बहुत आभार। वो भी यहां पर उपस्थित हैं और उनकी जी भी आए हैं। जी पिछली बार भी आए थे। अपना परिचय भी दिया था उन्होंने। प्रशांत भैया ने उनकी उपस्थिति हमारे लिए सदैव अतुलनीय है। सदैव सम्माननीय है। सभी लोगों को जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। भैया जय श्री राम भैया।
02:38:28:02 जी जो है मुझे लगता है किसी की कोई शंका ऐसी है नहीं। मैंने सूचित कर ही दिया है कि पांच सत्र होते हैं भगवान श्रीमन नारायण तत्पश्चात गणेश जी फिर सूर्य भगवान दुर्गा माता और शिव जी का उसमें नाम स्मरण होता है इनकी लिंक ग्रुप में समयसमय पर साझा हो जाती है आधे घंटे पहले एक घंटे पहले और पांच मिनट पहले जाइन करना होता है पांच मिनट तक प्रतीक्षा आदि होती है कि सभी लोग आ जाए और तत्पश्चात उसको आरंभ करके 15 मिनट का वो सत्र संचालित होता है कभी कभी उसमें सत्र के समाप्ति के बाद परस्पर संवाद भी हो जाता है अभी के लिए सत्र बहुत अच्छे से उतना भव्य रूप से नहीं संचालित हो रहे हैं पर आगे हमारे बहुत से उसमें प्रयास हम उसमें करने का करेंगे और इसी के साथ मैं चाहूंगा कि आप सभी लोग जो भी यहां पे उपस्थित हैं और आगे नए लोग भी जो आए हैं पहले जो आए होंगे उन्होंने तो लिया ही होगा जो नए लोग आगे आज आए हैं और वो आगे नामास्त्र में जुड़ेंगे और नाम जप करेंगे वो कुछ संकल्प एक ले ले कि वो अवश्य जो है यह कार्य करेंगे यहां पर गौतम भैया उपस्थित है मुझे लगता है गौतम भैया आप सभी के स्क्रीनशॉट ले लीजिएगा आप लोग अपना नाम और नंबर इन कॉल मैसेजेस में डाल दीजिए। जो लोग आज संकल्प ले रहे हैं आप सभी को सर्टिफिकेट शीघ्र जारी कर दिए जाएंगे। तो जो भी यहां नवीन सदस्य उपलब्ध हो वो मेरे साथ यहां पे संकल्प
02:39:43:08 को दोहराएंगे। ध्यान दें संकल्प में आपको संकल्प संकल्प का जो मीटिंग है आप एक अलग से छोटी सी एक अलग मीटिंग रख ले संकल्प की तो मेरे ख्याल से ज्यादा उचित रहेगा। अथवा WhatsApp कॉल इत्यादि के माध्यम से रख ले। दो ही मिनट लगेगा भैया मुझे लगता है तो ज्यादा लंबा नहीं खींचेगा। फिर उसके बाद समापन है। जैसा आप कह दो दो मिनट बस लगेगा। नहीं संकल्प किस भाषा में है? हिंदी में हिंदी में भैया। अच्छा अच्छा अच्छा ठीक है। ठीक करिए। जी जी। तो मैं यहां सभी सदस्यों से जो है आग्रह करता हूं कि जो नवीन सदस्य जो भी संकल्प लेना चाहते हैं वो संकल्प ले ले। संकल्प में एक बात ध्यान रखें कि आपको यथाशक्ति नामास्त्र में जुड़ना और उसके नाम जप उसके माध्यम से करने का संकल्प लेना है और मिनिमम या तो आप किसी भी एक दिन सवा घंटे का कोई जाप करें अथवा आप आठ 15 मिनट वाले सत्र करें। महीने में एक महीने का मैं बता रहा हूं। ये आपका मिनिमम है। न्यूनतम इतना आपका होना चाहिए। मुझे लगता है इतना सभी के लिए संभव है कि महीने के आठ सत्र 15 मिनट की मात्रा आप कर सकते हैं। नहीं तो आप केवल सवा घंटे वाला कोई एक सत्र तो कर ही सकते हैं। संडे तो चार होते हैं महीने में।
02:40:58:14 उन चार में से किसी एक को आप कर सकते हैं। सवा घंटे वाला सत्र नहीं तो आठ सत्र भी आपके पास उपलब्ध है। उन आठ में से आप कोई कर सकते हैं। महीने में बहुत सत्र होते हैं। तो मैं चाहूंगा जो मैं बोल रहा हूं आप सभी लोग पीछे पीछे दोहराए। मैं आप सभी अपना अपना नाम लेंगे। यह संकल्प लेता हूं या लेती हूं। यह संकल्प लेता हूं। मैं नाम जप सत्रों में नामों में नियमित रूप से सहभागी बनूंगा या बनूंगी बन बनूंगी नियमित रूप से सहभागी बनूंगा बनूंगा मैंने यह संकल्प पूर्ण श्रद्धा एवं निष्ठा से लिया है कि मैंने यह संकल्प पूर्ण श्रद्धा निष्ठा से लिया है कि मैं यथाशक्ति नाम जप करूंगा या करूंगी मैं
02:42:00:12 यदि मुझसे कभी भूलवश नाम जप नहीं हो पाएगा तो मैं बाद में प्रायश्चित स्वरूप यदि मुझसे कभी नाम नहीं हो पाएगा तो स्वरूप उस जप को पूर्ण करने का प्रयास करूंगा या करूंगी उस करूंगा इसके अतिरिक्त इसके अतिरिक्त इसके अतिरिक्त मैं नाम जप को मैं नाम को आध्यात्मिक आध्यात्मिक आध्यात्मिक तथा धार्मिक विकास का माध्यम मानूंगा या मानूंगी तथा धार्मिक विकास का माध्यमिक
02:42:45:01 मैंने यहां संकल्प केवल अपने लिए नहीं मैंने संकल्पित सर्वजन कल्याण सर्व कल्याण उत्थान सृष्टि में शांति सृष्टि में सृष्टि में शांति तथा पूज्य गुरुदेव भगवान के तथा पूज्य गुरुदेव भगवान के सनातन वेद शास्त्र सम्मत सनातन वेद शास्त्र हिंदू राष्ट्र
02:43:20:09 के स्वप्न को पूर्ण करने के लिए लिया है। श्लोकों को करने के लिए लिया है। अद मैं इस नाम साधना को मैं इस नाम साधना को अपने जीवन का अपने जीवन का जीवन का अभिन्न अंग बनाने का अभिन्न अंग बनाने का अखंड संकल्प लेता हूं या लेती हूं। दृढ़ संकल्प लेता हूं। धन्यवाद आप सभी यहां आए उपस्थित हुए बहुत अच्छा लगा आपने संकल्प लिया बहुत सुंदर जी और ये जी का लिखा हुआ संकल्प है थोड़ा सा मैंने इसमें अपनी ओर से भाषा का परिवर्तन अभी किया है संकल्प है बहुत-बहुत बधाई हो आप सभी को जिसज महानुभाव ने भी अभी-अभी संकल्प लिया है आपका बहुत-बहुत अभिनंदन स्वागत और बधाई आप शुभकामनाओं के पात्र हैं आप सम्मान के पात्र हमारी ओर से और अत्यंत ऊर्जावान आपने संकल्प दिलवाया प्रथम जी आपको भी इसके लिए आपका बहुत-बहुत अभिनंदन और सम्मान भैया छोटा सा मंगलाचरण करा के संपन्न करवा दीजिए ठीक है श्री
02:44:35:15 राम जय राम जय जय राम श्री राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम धर्म की जय हो अधर्म का हो प्राणियों में
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→ Used in: A · Video रामपाल बहिष्कार आंदोलन | यह तो संघर्ष प्रारंभ है | Damanaastra at 19:42 ↗
02:45:13:18 विश्व का हो गौ माता माता की जय हो गौ हत्या हो भारत हो भारत
⬜ Not used yet · 02:45:28:21 – 02:46:29:00 (1:00)
02:45:28:21 अखंड हर हिंदू सेना हो हर हिंदू सनातनी हो हर हिंदू [संगीत] हम भारत भव्य बनाए [संगीत] भारत भव्य बनाएंगे अखंड हिंदू राष्ट्र भारतवर्ष की जय हो अखंड हिंदू राष्ट्र भारतवर्ष की
02:46:07:18 नमः पार्वती पतय हर महादेव सभी का आने के ढेर सारा साधुवाद और आभार जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम भैया [संगीत]
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