⬜ Not used yet · 00:00:07:03 – 00:25:50:00 (25:43)
00:00:07:03 और एक अनाउंसमेंट और कर दूं मैं आपको बहुत जल्द देखिए बहुत सारे तरीके अपनाए जा रहे हैं रामपाल का जो उसे रोकने के लिए रामपाल की चीजों का प्रतिकार कर रहे हैं लोग अपनेप हिसाब से और आधिकारिक रूप से ऑफिशियली हमने भी कर रखा है हाई कोर्ट में केस अभी चल ही रहा है एफआईआर दर्ज है वो सब तो है पर अभी एक बहुत बड़ा धमाका हम लोग करने जा रहे हैं। है ना? आपको बहुत जल्द कुछ ही दिनों में एक बहुत सारी ऐसी चीजें मिलने वाली है कि आपको भी आनंद आ जाएगा रामपाल के उसमें कि हां अब कुछ हुआ है। जैसे हम जब करते हैं तो बिल्कुल 100 सुनार की एक लोहार की वाला काम करते हैं। कुछ वैसा ही है। अभी डिस्क्लोज नहीं कर रहे हैं। चालू कर देंगे तब आपको आनंदमई चीजें देंगे। और वो कहते हैं ना वो झूठे की हद तक और चोर के घर तक कुछ ऐसा ही है। इसमें जो भी होगा आपको बहुत आनंद आएगा। बढ़च के आप उसमें पार्टिसिपेट कर सकते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] इसके साथ ही साथ
00:01:20:04 ये जो वीडियोस होते हैं रामपाल से संबंधित अथवा हमारे चैनल पर जितने भी पड़े उसका आप जो बिना उसमें मतलब मिलावट के जैसे हमारे शब्दों को हमारे भाव को बदले बिना जहां भी आप यूज़ करना चाहते हैं कर सकते हैं। बस ऐसा ना हो कि मैंने बोला यस मैंने बोला यहां से मत जाना। तो आपने उसका मत काट दिया। यहां से जाना ऐसा नहीं करना। ठीक है? आप अपने अनुसार उनका उपयोग कर सकते हैं। और इसमें यह जो सीरीज है इसमें कभी-कभी बहुत जरूरी मैं ऐसी चीजें बताऊंगा। उसको कह सकते हैं की पॉइंट्स रामपाल के विषय में। तो वो की पॉइंट्स भी आप अगर एकत्रित करते रहेंगे ना तो वही पर्याप्त होगा रामपाल का मुंह धुआं कर देना। मुंह सूख जाए रामपाल। जैसे आज का मैं आपको की पॉइंट एक बताने वाला हूं।
00:02:10:24 आप चाहे तो यहां से इसको कट करके और रील के रूप में अपने Instagram वगैरह जो भी आपका सोशल मीडिया हैंडल हो उस पर आप डाल सकते हैं। और मुझे कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली है जिसमें ये लोग यही सब बातें कर रहे हैं कि आप इतने वीडियोस बनाइए। आप आप भगत जी आप इतना बनाइए। एक भगत जी को 10 वीडियोस बनाने हैं। इस तरह की रिकॉर्डिंग्स मेरे पास आई हैं। इनकी लीक हुई है रिकॉर्डिंग्स। तो यह इस तरह से काम करते हैं। एक-एक व्यक्ति को प्रेशराइज करते हैं अपने भगत को कि वीडियो बना वीडियो बना क्योंकि यह जो भी कुछ कर सकते हैं सोशल मीडिया पे ही कर सकते हैं। धरातल पर ये आपको अपने उस रूप में नहीं मिलेंगे कभी भी जिस रूप पर सोशल मीडिया पर धरातल पर ये आपको बकरी बकरी बन के मिलेंगे और सोशल मीडिया पर आपको ये शेर बन के मिलेंगे। ठीक है? तो ये प्रेशराइज करते हैं कि भाई वीडियो बनाओ वीडियो बनाओ। तो आप लोग भी वीडियो बनाइए। आप स्वयं नहीं बना सकते तो हम लोग हम लोगों के वीडियोस की कटिंग कर करके एक एक दोद मिनट के जो भी आपको पार्ट अच्छा लगता है वो करिए और अभी जो मैं बोलने जा रहा हूं उसको जरूर कट कर लीजिएगा ठीक है तो रामपाल के अनुसार रामपाल वेद गीता जो शास्त्र है शास्त्र सम्मत चीजें बताता है ज्ञान देता है
00:03:26:09 और रामपाल ने ही बताया है कि हमारे शास्त्रों में शिव शिव दुर्गा काली की पूजा को निषेध किया गया है। व्रत करने को निषेध किया गया है। या इस तरह के श्राद्ध इत्यादि कर्म है जो उनको निषेध किया गया है। है ना? या फिर और ऐसी जो भक्ति भक्ति विधि विषयक बातें हैं उसमें मना की गई। गीता का आधार लेकर के या जो भी आधार लेकर के वो बताता है। एक निचोड़ वाली बात आपको बता रहा हूं। बहुत पॉइंट की बात है। तो हमारे शास्त्रों ने जो जो चीजें हम कर रहे हैं उनको निषेध किया है। अगर हम ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा कर रहे हैं भगवान को उनको परमेश्वर के रूप में स्वीकार करके तो वो उसका निषेध करते हैं हमारे शास्त्र। तो हमारे शास्त्रों का निचोड़ है कि हम जो जो काम परंपरागत रूप से करते चले आ रहे हैं वह हमें नहीं करना। ठीक है? अब बात यह आती है कि यदि हमारे शास्त्र ही ऐसा कह रहे हैं यदि हमारे शास्त्र ही ऐसा कह रहे हैं तो फिर यह चीजें हमारे पास आई कहां से? हमने ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा करना चालू कहां से किया? कभी ये सोचा? जब गीता ही मना कर रही है कि कृष्ण जी भगवान नहीं है। जब गीता जी ही मना कर रही हैं कि वो इसका
00:04:41:15 रामपाल के अनुसार हमारे शास्त्रों में ज्यादातर इस बारे में बात की गई कि क्या-क्या नहीं करना है। समझ रहे हैं कि आपको ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति नहीं करनी है। आपको ये ये नहीं करना है। नहीं करना बात तब होती है जब कोई कर रहा है। तो क्यों कर रहे हैं? अब अगर आप यह कहेंगे कि आपने इनहीं शास्त्रों का गलत मतलब निकाल लिया था। इनहीं शास्त्रों का आपने गलत मतलब निकाल लिया था। यह शास्त्र तो मना कर रहे थे। गीता तो मना कर रही है। पुराण तो मना कर रहे हैं। वेद तो मना कर रहे हैं। तो अगर हमने गलत मतलब निकाल भी लिया और यह शास्त्र वो है जो मना कर रहे हैं। तो इससे पहले वह कौन से शास्त्र थे जिसमें इनकी पूजा बताई गई है? उसका प्रमाण क्या है? तुम्हारे हिसाब से इसमें इनकी पूजा नहीं बताई गई है। इसमें और भी चीजें हैं जो मना की गई है। यह सारे शास्त्र इसी से ओतप्रोत है। ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति नहीं करनी है या कृष्ण जी को परमेश्वर नहीं मानना है जो भी है निषेध किया है जो हमारे अकॉर्डिंगली वेद, गीता, पुराण इत्यादि जो धर्म शास्त्र है उनके अनुसार यह जो चीजें हैं जो हम कर रहे हैं वो बताई गई है। तुम्हारे अनुसार इनका नाम लेकर के मना किया गया है। यह यह नहीं
00:05:56:16 करना है। नाम लेकर के तो यह इन शास्त्रों का जो अस्तित्व है वह इस बात में है कि हमको ये ये नहीं करना है। तो यह सब चीजें हमारे पास आई कहां से? इसका प्रमाण क्या है? हमारे पास तो यह सब चीजें हैं। हमारे अनुसार तो इनहीं शास्त्रों से आई है। मगर इन शास्त्रों का सही अर्थ है कि यह शास्त्र इन शास्त्रों का आविर्भाव ही इसलिए हुआ है कि आपको यह बता सके कि कृष्ण की भक्ति नहीं करनी है। ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति नहीं करनी है। इसका मतलब है कि हम पहले से इन शास्त्रों के बाहर से हम लोग ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति कर रहे हैं। क्यों कर रहे थे? धर्म ही ना पशु भी समाना हमको यह ज्ञान मिला कहां से उस बात का प्रमाण कहां है अगर इन शास्त्रों ने इनकी पूजा निषेध की है तो इनकी पूजा का बताने वाला विधान वाला शास्त्र कहां है यहीं पर टफिस हो जाएगी पूरी
00:06:54:09 पूरा इनका जो स्ट्रक्चर है सब तबाह हो जाएगा केवल इसी बात से ये दिखाए अगर तुमने ये घोषित कर दिया कि जो हमारे सनातन शास्त्र हैं उनमें ये ये ये चीजें नाम ले मना की गई है और इसी रूप में इनका अस्तित्व है मना करने के रूप में। इसका मतलब वो चीजें पहले से एक्सिस्ट करती हैं जिसको हम जिसको हम फॉलो करते हैं। तो जय श्री राम। वो यहां पर पावर कट हो गया था। लाइव चल रहा है। मैं दिख रहा हूं ना सबको। पावर कट हो गया था। इन्वर्टर की एक जरूरत है। अगर कोई व्यवस्था कर सकता है इन्वर्टर की तो देखें। अच्छा तो मैं बात कर रहा था कि
00:07:39:08 सीधी बात यह है कि हमारे जो शास्त्र हैं जिनके आधार पर हम ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति करते हैं वो बहुत सी चीजें जो रामपाल मना करता है कि आपके शास्त्रों में इन चीजों को मना किया गया है। ठीक है मना किया गया है। इन शास्त्रों का स्वरूप ही ये है कि ये चीज मना कर रहे हैं। तो फिर वो कौन से शास्त्र थे जिनके कारण हमने इन चीज को अपनाया क्योंकि धर्मे हीना पशु भी समाना मनुष्य अपने आप धर्म नहीं सीखता है। यानी क्या करना है? क्या डूसज एंड डोंट्स उसके उसके पास अपने आप नहीं आते हैं। तो ये कहां से आए उसके पास? उसका प्रमाण क्या है? तो इस बारे में इनके मुंह पर लग जाएगा ताला। उसका कोई प्रमाण नहीं है। वेद शास्त्र इत्यादि से हटकर कौन से शास्त्र से जिनके कारण हम लोगों ने ब्रह्मा, विष्णु, महेश की पूजा करना शुरू किया। जबकि वेद इत्यादि तो वो मना कर रहे हैं। तो यह एक की पॉइंट है जो आप लोग नोट करिएगा और इस पर आप बहुत लंबी-लंबी बात कर सकते हैं। ठीक है? और भी है की पॉइंट तो अलग-अलग एपिसोड्स में मैं आपको बताता चलूंगा। जैसे पिछले वाले में तत्व ज्ञानी के बारे में बताया था। अच्छा कुछ लोग हैं जो यह कहते रहते हैं समाज सेवा के बहाने धर्मांतरण का आधार हां ये तो ठीक है। कुछ लोग यह कहते हैं कि
00:08:51:18 कुछ लोग यह कहते हैं कि रामपाल जो है वह धरातल पर मदद कर रहा है। लोगों की सेवा कर रहा है। इसलिए रामपाल अच्छा है। तो रामपाल लोगों को धरातल पर पाइप बना पाइप बांट रहा है। अनाकोंडा के बराबर लंबे-लंबे पाइप यदि वह बांट रहा है तो आप सब लोग अपने घर की मातृ शक्तियों को उसके पास भेज देंगे किसी भी तरह से उपयोग में लेने के लिए है ना यही है ना क्योंकि वो पाइप बांट रहा है इसलिए भेज दो अपने घर की मातृशक्तियों को तुम भेज सकते हो ये नपुंसकता आप लोग दिखा सकते हैं कट्टर मनुवादी कट्टर सनातनी नहीं चलिए अब हम लोग शुरू करते हैं जो पिछला वाला एपिसोड था उसका उसके बुलेट पॉइंट्स देख लेते फटाफट क्या थे? अ
00:09:38:24 बुलेट पॉइंट्स [गला साफ़ करने की आवाज़] सबसे पहली बात है हमने रामपाल की जो गरिमा गीता की पुस्तक है उसका 102 नंबर का पृष्ठ है। उसमें हमने बुलेट पॉइंट्स जो हम बता रहे हैं जिस पर पिछली लाइव में विस्तृत चर्चा हुई थी। तो उसमें बुलेट पॉइंट क्या-क्या निकले थे? सबसे पहला बुलेट पॉइंट निकला था कि 5 14 के अर्थ में रामपाल यह कहता है कि परमात्मा किसी के शुभ कर्मों का फल नहीं देता। और थोड़ी देर बाद उसी पैराग्राफ में यह भी कह देता है कि परमात्मा उसकी भक्ति। भक्ति यानी कि क्या है? शुभ कर्म। तो भक्ति करने को भक्ति करने पर जो रामपाल का ईश्वर है वह क्षमा कर देता है। तो इधर कह रहा है फल नहीं देता। इधर कह रहा है क्षमा कर देता है। यह दोहरी बातें दोगली बातें हैं। मूर्खता पूर्ण बातें हैं। दोगली क्या दोगलेपन के लिए दोगलापन करने के लिए भी अकल चाहिए होती है। मगर यहां तो फड़ता है। ठस बुद्धि है तो वहां अकल की भी जरूरत नहीं है। तो ये दोगली बातें हैं। वैसे भी रामपाल खुद ही दावा करता है। मैं जो है फलाने को करंट से बता बचा के आया। यह आया वो बात और है कि खुद ही जमानत के लिए रोता रहता हो। अपनी
00:10:54:14 ढलती हुई उम्र का वास्ता देकर के बाहर आता हो। लिखित में देता हो वह बात और है मगर वह दावे तो करता है ना कि मेरी भक्ति करने से यह हो जाएगा वह हो जाएगा मगर यहां पर वह खुद कह रहा है 5 14 में पृष्ठ क्रमांक 102 नंबर पृष्ठ पर कि परमात्मा किसी के शुभ कर्म का फल नहीं देता लो भाई इनका तत्व ज्ञान नहीं है इनका ज्ञान इनका ज्ञान है पंचर ज्ञान क्या ज्ञान है पंचर ज्ञान पांच 16 का अर्थ करते हुए आत्मज्ञान और परमात्म ज्ञान को तत्व ज्ञान कह रहा है अच्छी बात आत्मज्ञान, परमात्म ज्ञान, तत्व ज्ञान है। अच्छी बात है। मगर उस उसके बाद थोड़ी देर बाद ही उसी पैराग्राफ में कह रहा है कि उसका महिमा और नाम दीक्षा इत्यादि। उसकी महिमा गाना कि उसने यह किया है। उसने वहां फलाने गांव में यह हो गया था वो किया। वहां डेरा डाल दिया। वहां डेरे में भविता कांड हो गया। वहां पर यह निकला। इतने सारे वो निकले। सामग्रियां काम वासना को तृप्त करने में। संतान उत्पत्ति को रोकने के लिए जो सामग्री होती है ना आजकल जो वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई वो सब सामग्रियां एक किलो निकली ये निकली तो यह जो इसके ईश्वर की जो इनके ईश्वर की रामपालियों का ईश्वर रामपाल तो यह जो इसकी महिमा है तो इस महिमा का बखान करना ही तत्व
00:12:09:18 ज्ञान है तो पहले कह रहा है आत्मज्ञान और परमात्म ज्ञान तत्व ज्ञान है फिर जो इस तरह की चीजें हैं उसकी महिमा बखान करना जेल कैसे गया जेल में क्या-क्या हुआ उसके साथ उसने सफाई की शौचालय की या क्या किया बगीचा बगीचा संभाला या भंडारी बना वहां का। तो यह सब महिमा गान इसका जो है वो उसका तत्व ज्ञान है। तो अब एक ही पैराग्राफ में दो तरह की बातें फिर 57 में कह रहा है तत्व ज्ञान यानी नाम दीक्षा। मैंने पिछली लाइव में भी चैलेंज किया था। मैं इस लाइव में भी चैलेंज कर रहा हूं। जिसने भी अपनी मां का निष्ठा पूर्वक दूध पिया हो। जिसने भी अपनी मां का दूध पिया हो या जिसकी मां ने उसको निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो। वह पूरे सनातन शास्त्र वांगमय में वैदिक वांगमय से दिखा दे कि तत्व का अर्थ होता है नाम दीक्षा। दिखा ऐसी चीज बोलते हैं ना कि अकाट्य चीजों पर बात करते हैं। फालतू की बातें नहीं करते हैं। अकाट्य चीज व्यर्थ की बातें नहीं करते हम कि अरे तुम्हारा फोटो बिगाड़ दिया। कुत्ते जैसा मुंह बना दिया। उसकी आवश्यकता ही नहीं है। उसकी आवश्यकता है क्या? आप ही लोग बताओ। रामपाल का फोटो बिगाड़ करके उसको कुत्ते जैसा दिखा करके या और कोई प्राणी के रूप में दिखा दिखाने की आवश्यकता है।
00:13:25:03 आज मैंने एक वीडियो देखा था सुबह-सुबह उसका चेहरा देख लो तो वैसे ही दिन खराब हो जाता है। तो इस सब की हमें आवश्यकता नहीं है। कट अकाट बातें बोलते बिल्कुल अकाट उसमें जब बात आ जाएगी तो खत्म टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चिन। ठीक है? तो क्या है कि जिसने जिसकी भी मां ने उसको निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो वह यह बता दे मुझे सिद्ध कर दे शास्त्रों से सनातन शास्त्रों से कि तत्व का अर्थ होता है तुम्हारे वो जेल कट्टू रामपाल के द्वारा दी जाने वाली नाम दीक्षा। ठीक है? आगे चलते हैं। अच्छा अब जो है यह कहता है 51 18 में तत्वज्ञानी कि तत्वज्ञानी जो होता है वह समदर्शी होता है। यही तत्वज्ञानी कहता है कि ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा करने वाले नीच होते हैं। ये कैसा समदर्शी? समदर्शी मतलब सबको एक समान देखने वाला। मगर ये तो ऊंचानीचा कर रहा है। अगर हमारा सिद्धांत है तो उसमें व्यवहार और परमार्थ के भेद से परमार्थ की दृष्टि से देखें तो सब तत्व की दृष्टि से देखें तो सब उसमें समदर्शिता आ जाती है। और व्यवहार के जिसके साथ जो जैसा
00:14:40:09 व्यवहार कर रहा है उसके अनुसार व्यवहार हो जाता है। मगर तुम्हारे यहां तो एक ही एस्पेक्ट है। एक ही डायमेंशन है। पर व्यवहार परमार्थ का कोई भेद नहीं है। ये सब गढ़ विषय है। तुम्हारे बल्ले नहीं पड़गी। रामपालियों सीधी बात है कि तत्वज्ञानी वो होता है जो पांच 18 के अर्थ में ले तत्वज्ञानी जो होता है वो सब में एकता देख एक समान देखता है नहीं देखता भाई तू बबिता को अलग देखता है और तेरी बेटी जो आकर के तेरे पैरवैर छूती है उसको तू अलग देखता है अभी कुछ दिन पहले हुआ था कि सौम्य सौम्या माथुर ने क्या किया था कि वो समझ नहीं पाई थी कि वो इसकी बेटी क्योंकि इसके पास आकर के महिलाएं ऐसी चीजें करती हैं और इसका नाम ऐसा उड़ा हुआ है अखबारों के जरिए से बबीता इत्यादि के साथ तो वो इसकी जब स्वयं की सगी पुत्री ऐसा कर रही थी तो सौम्या माथुर को गलती हो गई। उसने कहा देखो देखो कि जो बूढ़ी है अधेड़ उम्र की औरत औरतें हैं उन पर महिलाएं हैं उन पर ये ध्यान नहीं दे रहा है। मगर जो बिल्कुल थोड़ा क्या कहते हैं युवावस्था में ज्यादा कम आयु वाली आई हैं तो उन पर ध्यान दे रहा है। इस तरह का कटाक्ष कर दिया था। बाद में सौम्या माथुर ने उसके लिए क्षमा भी मांगी थी उन्होंने कि मेरे से गलती हो गई। मैं जानती नहीं थी पुत्री हैं। तो बबिता में और अपनी पुत्री में अंतर करता है। फिर ये
00:15:55:13 बता कहां से किया तूने अंतर? इन सवालों का जवाब सिद्धांतवादी आचार्यों के पास होता है। है ना? तुम्हारे जैसे मूर्ख जेल कट्टू और खीर पिवैया खीर पिलाने वालों के पास नहीं होता है। जो अपनी खीर पिलाते हैं। वह खीर कहां-कहां से होकर के आती है? अखबारों के अनुसार अखबारों की बात यदि सत्य है तो रामपाल के नहाए हुए की खीर पीते हैं लोग। और वो खीर कहां-कहां से होते हो के आती है। जो अगर नहा रहा है कोई व्यक्ति तो आप सोच के देखिए शरीर के प्रत्येक अंग से वह जो दूध है वह बह करके आता है। अब प्रत्येक अंग में आंख, नाक, कान, गला उधर फिर गुदा द्वार सब आता है। मल त्याग का जो गुदा द्वार होता है वह भी आता है और वहां से आने वाला जो दूध है वो निकल के आता है और फिर जो है उसको भक्तगण ग्रहण करते हैं। जो अपने आप को भगत कहते हैं वो ग्रहण करते हैं। ऐसा अखबारों के अनुसार बताया गया है। अब बाकी उसमें कितनी सच्चाई है बाद की बात है। तो तो समदर्शी की बात हो गई। जिसका मन जो तत्वज्ञानी होता है वह
00:17:03:10 समदर्शी होता है। मगर यहां तो ये ऊंचनीच देख रहा है। भविता में अपनी पुत्री में अंतर कर रहा है। अच्छा और आगे चलते हैं। तो जिसका मन समदर्शी है वह पूर्ण ब्रह्म में स्थित है। अब ये पूर्ण ब्रह्म में स्थित होने वाली बात बता दे भाई। पूर्ण ब्रह्म में स्थित होने वाली बात तू बता पाएगा कभी? नहीं बता पाएगा। इसकी विवेचना ही नहीं कर पाएगा। पूर्ण ब्रह्म में स्थित होने की बात है कि जिसका मन रमा हुआ हो भगवान की भक्ति में जो अपने विचारों से अपनी आत्मा से भगवान में संलग्न हो भले ही उस शारीरिक रूप से वो इधर-उधर जाता हुआ दिखाई दे रहा हो पर मन से सदैव वो भगवान के साथ अटैच्ड हो। यह तो यह रही बात। मगर तुम जैसे मूर्ख तो यह कहते हो ना कि भगवान ने भगवान तो अर्जुन के पास ही खड़े थे। 1866 तुम तो वह मूर्ख हो ना जो कहते भगवान तो उसके पास ही खड़े थे। फिर वो कहां जाने को कह रहे हैं भगवान? अर्जुन से कहां जाने को कह रहे जब वो उसके पास में है स्वयं तो यानी कि तुम्हारे लिए क्रिया एक ही होती है। गत्यार्थक भौतिक रूप से ही तुम्हारे क्रिया होती है। मनन चिंतन वाली क्रिया नहीं होती है। ज्ञानार्थक होती नहीं है। क्योंकि
00:18:18:16 ये यहां पर ये ज्ञानार्थक क्रिया में लेंगे स्थित होना तो तो चल जाएगा। वरना कैसे स्थित हो रहा है? घुस रहा है क्या तुम्हारे परमेश्वर के कबीर के अंदर? तुम्हारे यहां तो अद्वैत भी नहीं है जो घुसने वाली बात हो। कबीर के अंदर घुस रहा है क्या? कि वही उसी वो जो खीर जहां से होकर आती है उसमें घुस रहा है। कहां घुस रहा है? यह सोचने वाली बात है। यह स्थित होने का अर्थ कर पाएंगे तुम्हारे बुऊ। इसी में फंस जाएंगे। दो-तीन जन्म लग जाएंगे। इसी में इसी में पकड़ लूंगा तो जीभ बिल्कुल सूख जाएगी। इसलिए अपनी खैर चाहते हो तो कभी भूल करके शिवश नारायण द्विवेदी के सामने आने की हिम्मत मत करना। ये रामपाल के लिए उसकी गैंग की तो बात दूं। है ना? मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में बस अपना वह कपड़े की दुकान जो चलाते हो ना काउंटर लगा के कपड़े की दुकान चलाते हो खड़े हो के जैसे आदमी नहीं यहां कौन सी दिखाऊं सिल्क दिखाऊं बनारसी दिखाऊं काजीवरम दिखाऊं इस तरह से खड़ा हो खड़ा हो जाता है काउंटर के बगल में वो इसका वो है प्रवचन पॉइंट वहां प्रवचन देता है तो जिसका मन समदती समदर्शी है वह ब्रह्म में स्थित है यहां पर ब्रह्म का अर्थ इसने सच्चिदानंद स्वरूप रोक लिया। जबकि यह ब्रह्म कहते हैं काल को। 520 में जो
00:19:33:18 सुखदख को परमात्मा की रजा समझता है। 5:20 में इसने मान लिया है कि तत्वज्ञानी को भी दुख होता है। जबकि यह दावा करते हैं अपने लोगों को बहकाने के लिए, अपनी खीर पिलाने के लिए कि जो अह उसकी शरण में आ जाएगा रामपाल की शरण में उसको दुख नहीं होगा। जबकि यहां पर क्या है? दुख तो होगा। मगर वो यह समझेगा कि यह तो सब भगवान की मर्जी है। है ना? तो प्रत्येक आस्तिक यही समझता है। जो भी आस्तिक है वही समझता है कि भगवान की मर्जी से ही हुआ जो हुआ है। और उसमें मेरे अपने कर्म है। तो दुख तो होगा। यह बात मान ली रामपाल ने। नोट कर लेना। ऊपर मान लिया कि परमात्मा किसी शुभ कर्म का फल नहीं देता। नीचे मान लिया 520 में कि सुखदख होता है। रामपालियों को भी होता तो है। वो मान रहा है यहां पर लिखित रूप से। वह तो होता ही है। सुबह संडास जाता ही होगा रामपाल। गैस बनती ही है उसके। दिख रहा है उसकी शक्ल से। है ना? पेट में दर्द, ऐंठन इत्यादि होती होगी रोते-रोते आंखों की बीमारी के लिए तमाम बुढ़ापा दिखाते हुए भीख मांग करके बाहर आया है। तो दुख तो होता है। अच्छा 524 अ ब्रह्म
00:20:48:21 का अर्थ इसने फिर से 52 24 में मान लिया। पूर्ण परमात्मा जबकि ये लोग कहते हैं ब्रह्म अलग है और सच्चिदानंद जो परमेश्वर है सच्चिदानंद स्वरूप सच्चिदानंद घन ब्रह्म वो अलग है। परम ब्रह्म अलग है। तो यहां ब्रह्म का अर्थ फिर मान लिया पूर्ण परमात्मा। अच्छा नाम दीक्षा से संशय कट जाते हैं। नाम दीक्षा मिलने से संशय कट जाते हैं। और इसी 5:25 में इसने कहा है नाम दीक्षा जिसको मिल जाती है उसके संशय कट जाते हैं। अब जरा सोच के देखो इनके जो सूखे हुए छुआारे जैसे चेहरे वाले लोग आते हैं चर्चा करने उनके संशय कट चुके हैं क्या? कि जो डडियल युवराज सिंह है और जो सचिन वगैरह हैं गंजा इन लोगों के संशय कट चुके हैं। क्यों नहीं आते पता है मेरे सामने? इनको मालूम है यह ऐसी ज्ञानार्थक कुटाई करेगा ना वह सब कोई काम नहीं आएगा पीछे गन मैन खड़े खड़े करना बिल्कुल ऐसी ज्ञानार्थक कुटाई कि रात में सोते समय भी मेरे सपने आएंगे कि वो कौन सा समय था बुरा जो मैंने ये सोच लिया कि मैं शिवाश नारायण द्विवेदी के सामने चला जाऊं वास्तविक सनातनी के उस सामने चला जाऊं इसलिए नहीं आते तो इनका संशय कट चुका है तुम्हारे पवन दास से बात हुई थी बत्ती सी बाहर आ आ गई
00:22:03:22 थी। संशय संशयात्मक प्रश्न है ना कि कबीर जब सृष्टि बना रहा है तो कहां खड़ा है? वो सृष्टि किसने बनाई तो फेल हो गए। फिर तो इस पर कहने लगे भैया ऐसा है आग लगा दूंगा उसमें देख लेंगे। जिसका परमेश्वर सत्य होगा वो यानी कि संशय नहीं कटे हैं। अब तो सीधे आस्था की बात है। संशय नहीं कटे तुम्हारे। ठीक है? तो तत्व ज्ञान की बात मत करो। तुम पंचल जोड़ो। पंच ज्ञान लोगों को दो अपना। तो यहां पर 5:25 में इसने कहा नाम दीक्षा से संशय कट जाते हैं। अच्छा इसी में इसने ये कहा है कि जो काल ब्रह्म है वो उग्र है। काल ब्रह्म तो उग्र उग्र है। उग्र। अच्छा ये उग्रता एक्सिस्ट कहां करती थी? काल ब्रह्म तो था नहीं इस दुनिया में। तो उग्रता भी नहीं थी। तो काल ब्रह्म निकल के कहां से आया है? किसने बनाया काल ब्रह्म को? काल ब्रह्म को किसने बनाया? कबीर ने। तो कबीर के पास काल ब्रह्म नहीं था। यानी कि काल ब्रह्म जो जो चीजें कर रहा है वह कबीर के पास नहीं थी। अच्छा वो छोड़ो। काल ब्रह्म को जो शक्ति दी है उग्रता वाली यह कहां था? यह कहां था? किसने बनाया? काल ब्रह्म के पास अपने आप कुछ आ गया। यानी काल ब्रह्म अपने आप स्वयंभू
00:23:18:24 है क्या? और उत्पत्ति, स्थिति और लय लय करने में उग्रता नहीं चाहिए। लय कैसे करोगे? प्रलय कैसे आएगी? सृष्टि समाप्त कैसे होगी? तुम्हारे यहां तो एक ही बार होती है। वह बात अलग है। काल ब्रह्म बार-बार बार-बार जन्म भी लेता रहता है। अरे भाई एक बार काल ब्रह्म ने जब गलती कर दी तो फिर क्यों बना रहे हो काल ब्रह्म को? कि 70 बार जब शिव जी शिव जी के प्राण छूट जाते हैं उसके बाद एक बार काल ब्रह्म का अंत होता है। तो फिर क्यों बनाता है कबीर? काल ब्रह्म और उसके मरने के बाद कहां ये लोग कहां जाते हैं? जो फंसे हुए हैं। उस बीच काल ब्रह्म के मरने से लेकर काल ब्रह्म के दोबारा जन्म होने के बीच में ये लोग कहां जाते हैं जो काल ब्रह्म ने फंसा रखे हैं। हम मुंह सूख जाएगा मुंह पांच 26 के अर्थ में इसने कहा है कि परमात्मा इसने मान लिया परमात्मा पहले मान लिया सर्वव्यापक है। उसके बाद कहता है यानी उसकी सत्ता सब जगह है। अब यहां पर वही वाला प्रश्न फस जाएगा वह अब्रामिक आईडियोलॉजी वाला कि सत्ता और उसमें अगर अंतर होगा तो एक रस नहीं कहलाएगा विकार वाला हो जाएगा
00:24:30:16 और उसकी यहां पे इसने चतुर ये तो एक अलग विषय मगर सत्ता जब मान ली तो उसने काल पर भी अपनी सत्ता मान ली 5 26 में काल पर कबीर की सत्ता यानी काल जो भी कर रहा है जो भी सोच रहा है कुछ भी हो रहा है उस पर सत्ता है उसकी यानी उसकी अनुमति के सीमा के अंदर है काल ब्रह्म का कुछ भी। ठीक है? और वहीं पे काल को जो है मन कहा गया है। और यह कहा गया कि काल जो मन को जो जीत लेता है वो पार लग जाता है। तो काल को जीतना है क्या? क्योंकि मन तो काल है। काल से जीतेंगे कैसे? काल का तो वैसा घटिया स्वरूप है। [हंसी]
00:25:17:25 फड़ पंचर ज्ञान पंचर करने वालों सीट की पेटी और कमर की बेल्ट बांध एक नंबर का फड़ ज्ञान है इस ज्ञान को सुनने समझने के लिए भी गुर्दा चाहिए गुर्दा अच्छा तो ये हो गई अभी तक अपनी मर्जी आगे चलते हैं अब जो है मेन कोर्स पे आ जाते हैं [गला साफ़ करने की आवाज़] तो इसकी गरिमा गीता का पष्ठ ये अभी तक बुलेट बुलेट पॉइंट्स हो गए। ठीक है? बुलेट पॉइंट्स आप लोग कट कर करके डाला करिए।
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वो एक सवाल, जिससे रामपालियों की बोलती बंद | (भाग 8-अध्याय 5) गीता के नाम पर रामपाल का अनर्थ
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