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00:00:07:18 रेनुधर जी मैं ये थोड़ा सा सीधे विषय पे आना चाहूंगा आप जैसे ब्रह्मा कुमारीज वाले जब किसी को अपने से जोड़ते हैं कि भाई हम आपको स्पिरिचुअलिटी देने देना चाहते हैं तो आप ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार किसी व्यक्ति को स्पिरिचुअल िटी से या धर्म से या ईश्वर से क्यों जुड़ना चाहिए? क्या कारण है? क्या आवश्यकता है आ्यात्म की या धर्म की या ईश्वर की? वो जी अच्छा सबसे पहली बात तो मैं अगर अपनी बात कहूं [गला साफ़ करने की आवाज़] मेरे को कोई जोड़ने के लिए नहीं कहा था। मैं स्वयं ही खोज में था। पहले भक्ति करता था। जैसे गीता अपना हनुमान चालीसा दुर्गा चालीसा मेरे मुखस्थ है। अभी भी मैं हनुमान चालीसा पूरा कहता कह सकता हूं। और यही भक्ति चलता था फौज में भी फिर आया तो टीवी में बहुत सारे संतों को मैंने सुना। मुझे आध्यात्म के प्रति एक रुचि आने लगी। तो मैं सुना दो तीन जो अच्छे लगे। मैं थोड़ा सा क्लियर कर दूं। फिर हां तो आप बोले कि वहां पे मैं खुद ही गया था। मेरा कहने का मतलब मैं खुद ही वहां पहुंचा था। ढूंढ के ब्रह्मा मैं वो नहीं कह रहा हूं।
00:01:22:21 मैं कह रहा हूं कि हमें ब्रह्मा कुमारी जो स्पिरिचुअलिटी दे रहा है, बता रहा है, सिखा रहा है जो भी जो भी ज्ञान जो वहां पर मिल रहा है और जो जिस ईश्वर की बात की जा रही है तो उसकी आवश्यकता क्यों है? मतलब एक व्यक्ति को ब्रह्मा के बाद क्यों आना चाहिए? जी हां मेरे समझ में आवश्यकता यही लगा है 13 साल में कि अगर मुझे स्वयं को बदलना है स्वयं के अंदर की कमी कमजोरी को दूर करना है तो खाली ब्रह्मा कुमारी में नहीं कहता कोई भी आदमी किसी भी स्पिरिचुअल जो भी उसको अच्छा लगे वहां जाए तो अपने आप को बदल सकता है। यही मेरा विचार है। और मैंने ब्रह्मा कुमारी को चुना और मैं उसमें अपने आप को बदला हूं। कम से कम अगर कहूं तो 90% मैं अपने आप को बदल चुका हूं। उसका उदाहरण आप पूछेंगे तो मैं दे सकता हूं। मैं पूछ रहा हूं कि क्यों बदलना है? कारण क्या है? हमारा अंत में कारण यही है। कारण यही कारण यही है कि जो हमारी कमी कमजोरी ही हमें दुखी करता था। उसी कमी कमजोरी को दूर करने से हमें सुख की प्राप्ति हुई, आनंद की प्राप्ति हुई, अती्द्रिय सुख की प्राप्ति होने लगी। और हमारे अंदर की कमी ही हमें दुखी कर रहा था। ये मेरे विचार है। ठीक ठीक ठीक। इसका मतलब
00:02:38:02 हमें दुख के निवारण के लिए अध्यात्म, धर्म और ईश्वर से जुड़ना चाहिए। जुड़ना चाहिए कहीं भी जो जहां इच्छा लगे। ठीक ठीक। ठीक। अब इसमें एक एक चीज ये आती है कि दुख का निवारण यानी कि सुख। सुख की प्राप्ति तो हमें सिनेमा जाकर भी होती है। सुख की प्राप्ति हमें घूमने फिरने से भी होती है। जो अन्य बहुत सारी चीजें हैं प्रपंच रूपी संसार में जहां से हमें सुख मिलता है। तो फिर मंदिर में जाने से भी मिलता है। हां मंदिर जाने से तो फिर हम मंदिर को या ब्रह्मा कुमारी को आवश्यकता के रूप में क्यों ले? जब हमें मिठाई की दुकान पे मिठाई खा के सुख मिल रहा है और टीवी देख के सुख मिल रहा है, मनोरंजन मिल रहा है। बहुत सी ऐसी इंद्रिय विषय से हमें सुख मिलता है। तो फिर ब्रह्मा कुमारीज वाला सुख आवश्यक क्यों? देखिए दुनिया में कोई भी आदमी किसी भी ऑर्गेनाइजेशन में जाता है, कोई भी धार्मिक संस्था में जाता है। सबका कुछ ना कुछ खोज होता है। तो मेरे तरफ से मैं कहूंगा कि क्यों जाना चाहिए ब्रह्मा कुमारी में? तो मैं स्पेशली इसलिए कहूंगा कि और जगह जाकर मैंने जो देखा कि वो क्षणिक सुख था। जैसे मैंने पिक्चर देखा बहुत शौकीन था। जैसे कि मैं
00:03:53:06 क्रिकेट का बहुत शौकीन था। तो उसमें क्षणिक सुख मिलता था मुझे। उसके बाद फिर जैसे के तैसे हो जाते थे। तो क्षणिक सुख से मेरे को ऊपर जाने के लिए मेरे शायद परमात्मा ने मुझे वहां पर लिया खींच के लिया तो मैं गया तो वहां से मेरे को अभी अनवरत सुख मिलता है। रात्रि दो रात को 2:00 बजे भी उठता हूं तो मैं अपने आप को डांस करता हूं। अच्छा तो इसका मतलब कि कभी ना खत्म होने वाला सुख हमें मिलता है अध्यात्म में जाकर के। इसलिए हमें अध्यात्म के मार्ग पर जाना चाहिए। जाना चाहिए। जी अविनाशी सुख मिलता है। अविनाशी सुख तो ब्रह्मा कुमारी ये क्लेम कर रहा है। ब्रह्मा कुमारी ये मानता है कि अविनाशी सुख नाम की कोई चीज है दुनिया में? बिल्कुल मानता है। नहीं मानता।
00:04:44:28 अभी कल ही हमारी एक चर्चा हुई है जिसमें उन्होंने कहा है कि जब व्यक्ति जो ब्रह्मा कुमारी को फॉलो करेगा यदि तो वो अगले नेक्स्ट जन्म में देवत्व को प्राप्त करेगा देवी देवता बन जाएगा और वहां पर एक निश्चित समय तक निश्चित समय तक सुख भोगने के बाद वो फिर से डाउन होगा ये पांच वो तो वो तो फिर नहीं वो तो आप पूरी सृष्टि चक्र की बात कर दिया अगर वो पूछेंगे तो तो मैं उसका जवाब दूंगा। ये तो मैं इस जन्म की बात कर रहा हूं। मैं इसी जन्म की बात कर रहा हूं। इस जन्म में आपको अविनाशी सुख मिल गया। मिल गया। मिल गया। गृहस्थ में रहते हुए अभी मैं थोड़ा सा क्लियर कर रहा हूं आपको। अभी आपने मुझे बताया था। आपने मुझे बताया था कि मुझे जब मैं आपसे बोला था कि आपके शरीर का नीचे का पोर्शन ज्यादा दिख रहा है तो ऐसे ही अपनी सिंग अरेंजमेंट ऐसी सिंग अरेंजमेंट कर लीजिए कि आपका हाफ पोर्शन ही दिखाई दे पैरों का हिस्सा वो थोड़ा सा ऑड ऑड लग रहा है। तो आपने प्रॉब्लम आपने अपनी एक प्रॉब्लम बताई थी कि मेरे कुछ स्पाइन में प्रॉब्लम है जिसकी वजह से बहुत ज्यादा एक एक
00:06:00:02 मिनट भाई साहब मुझे पूरा तो बोलने दो हां हां बोलिए हां आपने अपनी एक प्रॉब्लम बताई थी कि मैं बहुत ज्यादा नीचे नहीं बैठ सकता क्योंकि मुझे स्पाइन का प्रॉब्लम [गला साफ़ करने की आवाज़] है ना हां मैं बैठ सकता हूं अगर आप बोलोगे तो मैं मैं आप अगर बोल दूं तो मैं बैठ जाऊंगा मैं ये नहीं कह रहा आप बोल दूं मैं बैठ जाऊंगा आप नीचे भी बैठ जाऊंगा क्योंकि वो तो जी वेनुधर जी मुझे बोलने तो दीजिए हां बोलिए मैं कह रहा हूं आपने कहा ना कि आपको प्रॉब्लम है स्पाइन का? हां है। प्रॉब्लम है। शरीर का है तो शरीर में हूं तो प्रॉब्लम है। हां इसका मतलब आपका जो सुख है वो बाधित हो रहा है। बाधित नहीं हो रहा है। उस सुख उस उस जो दुख से मैं ऊपर हूं। दुख मेरे को वो दुख नहीं दे सकता मेरे को। मैं उससे ऊपर हूं। क्योंकि मेरे को तकलीफ नहीं है। मेरे को जो बोला ना मेरे को जो बोला मेरे शरीर में तकलीफ बोला। मैंने मेरे को नहीं बोला। आप मेरे को बात को ध्यान से सुनिए। मैंने क्या किया? मेरे शरीर में यानी मेरे बॉडी में स्पाइन का प्रॉब्लम है। बॉडी में है। मेरे में नहीं है। मेरे में नहीं है। आप उस चीज को समझिए। मैं क्या बोल रहा हूं? मेरे में नहीं है। मेरे बॉडी में प्रॉब्लम है। मैं समझ गया। मैं समझ गया। में प्रॉब्लम है। आप में नहीं है। तो आप
00:07:15:03 अपने आप को बॉडी से अलग मान रहे हो। है ना? हां। ठीक है। तो अभी आप तो अभी आपने बताया था कि आप रोज रात के 2:00 बजे जब जागते हो तो आप नाचते हो। तो नाचने का किसको मिल रहा है? बॉडी को मिल रहा है कि आपको मिल रहा है? बॉडी के जरिए ही नाच रहा हूं ना। बॉडी तो साधन है ना इंस्ट्रूमेंट है ना बॉडी मेरा। तो बॉडी बॉडी जो कर रही है, बॉडी जो जो आचरण हो रहे हैं जो भी बॉडी संपर्क जो सूचनाएं आदान प्रदान कर रही है वो आपको मिल रहा है। उसी से आपका सुख है। बाहर है बॉडी। नहीं दुख नहीं है। दुख से ऊपर हूं। तो आपको जब क्योंकि मैं बता देता हूं क्योंकि मेरी स्थिति मेरी स्थिति उससे ऊपर है। भाई साहब एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट आप कह रहे हो कि बॉडी से मैं नाच रहा हूं तो बॉडी से नाचने से जो सुख प्राप्त होता है वो मुझे हो रहा है। मगर बॉडी मैं अगर बॉडी हां हां मैंने ऐसा कहा क्या कहा कि बॉडी से नाचने से सुख मिलता है। मैं कहां मैं नाचता हूं? बॉडी से नाचने मैं ऐसे बैठे-बैठे भी मैं मन से भी नाच सकता हूं। मन से बैठे-बैठे भी मैं नाच सकता हूं। मन से भी नाचना होता है। मन से हां मन से मन से नाच सकता है आदमी। तो आप रात के 2:00
00:08:30:07 बजे जब उठते हैं तो मन से नाचते हैं। बॉडी से नहीं नाचते हैं। हां मन खुश होता है। तो बॉडी है तो बॉडी है करके नाच लेते हैं। और जिस दिन मैं बेड में अगर मान लो कर मैं बेड रिटर्न हो जाऊं। मान लो मान लो मैं बेड रिटर्न हो गया नाच तो नहीं सकता। लेकिन मैं वो शक्ति को आज संचय कर रहा हूं ताकि मैं बेड में पड़े पड़े भी मैं नाच सकूं। यानी मन से नाच सकूं और मेरे को कोई दुख ना हो। मैं उसका पुरुषार्थ कर रहा हूं। वहां तक नहीं पहुंचा हूं। मैं पुरुषार्थ कर रहा हूं। आप ये बताइए कि जैसे जब देवी देवता बन गए और वापस पतन होगा। [गला साफ़ करने की आवाज़] वापस पतन होगा। यानी कि जन्म जन्मांतर में आपको अविनाशी सुख नहीं है। इस जन्म में आपको अविनाशी सुख है। देखिए जन्म जन्मांतर का सुख के लिए अभी है जो हम कर सकते हैं। हमारे हाथ में अभी है। हम अभी जो कमाई करेंगे जितना करेंगे मैंने आपसे ये पूछा। मैं वही कह रहा हूं। वही कह रहा हूं ना। मैं अगर अभी मैं अगर उतना पुरुषार्थ करूंगा तो जैसे आप सतयुग बोल रहे हो। देवी देवता देवी देवता 21 जन्म हम बोलते हैं भाई साहब सुनिए तो मैं पहले आप ना जैसे मैंने आपसे पूछा है कि जन्म जन्मांतर में अविनाशी सुख है या नहीं तो आप पहले हां या ना बताइए उसके बाद एक्सप्लेन
00:09:45:10 कर नहीं जन्म जन्मांतर जन्म जन्मांतर के बाद मैं कैसे बोल दूं अभी मैं जन्म जन्मांतर की बात कैसे कह सकता हूं वो तो वो तो परमात्मा कह सकता है तो परमात्मा ने आपको नहीं बताया कि जन्म भैया मैं अगले जन्म की बात अगले जन्म के जो परमात्मा ने बताया मैं उसकी पुरुषार्थ कर रहा हूं। मुरली के रूप में बता रहे हैं ना भाई साहब परमात्मा हां बिल्कुल बता रहे हैं। बिल्कुल बिल्कुल बता रहे हैं। बिल्कुल बता रहे हैं। परमात्मा ये बता रहा है कि नहीं बता रहा है कि आपको जन्म जन्मांतर में अविनाशी सुख मिलेगा या विनाश वाला सुख मिलेगा। परमात्मा बता रहे हैं कि अभी संगम पर ही जो जिस समय मैं धरा पे आया हूं। मैं तुम्हें ज्ञान देके तुमसे पुरुषार्थ करा रहा हूं। तुम्हें ज्ञान योग धारणा सेवा करा रहा हूं। तो तुम्हें जो राजयोग हमारे यहां राजयोग कहते हैं हम राजयोग सीख रहे हैं। तो जो राजयोग परमात्मा सिखा रहे हैं उसमें वो कह रहे हैं कि तुम अभी जितना कमाई कर सकते हो कर लो। वो तुम्हारी कमाई के हिसाब से तुम वहां जाकर सुख भोगोगे यहां पद मिलेगा। मैं आपसे ये पूछ रहा हूं क्या परमात्मा ने ये बताया है कि अविनाशी सुख मिलेगा जन्म जन्मांतर में या नहीं मिलेगा। मैं ये पूछ रहा हूं। ना ऐसा नहीं कहा उसने। मैं नहीं मैं ये नहीं पूछ रहा हूं। कैसे मिलेगा? नहीं वो कहा 21 जन्म सतयुग का जो सतयुग जो कहते हैं सत्य और त्रेता वहां कोई दुख नहीं होगा। इसलिए
00:11:00:14 यह कहा परमात्मा ने उसके बाद तो फिर दुख है ही है। वो वो दुख वहां दुख नहीं होगा पक्का नहीं होगा। नहीं होगा। अच्छा तो ये जो क्योंकि देवी देवताओं को हम जैसे आपने शुरू में कहा था कि अध्यात्म के रास्ते पे इसलिए जाना चाहिए क्योंकि हमें जो सुख मिलता है वो बाधित सुख होता है और अध्यात्म के रास्ते पर जाकर के वो कभी ना खत्म होने वाला सुख मिल जाता है। ठीक है? हां जी। हम तो यानी कि जैसे हमारे अंदर एक दुख है कि हम मरेंगे। एक दुख है मृत्यु होगी या हमारे अपनों की मृत्यु होगी। तो इस कारण से हम दुख दुखी होते हैं। जब तक हम अध्यात्म से नहीं जुड़ते हैं। जो वास्तविक अध्यात्म है उससे जब तक नहीं जुड़ते तो हम तब तक दुखी होते हैं कि हम मरेंगे हमारे प्रियजन मरेंगे। है ना? तो ये जो मरने वाली बात है जिससे हम दुखी होते हैं। ये वो देवी देवता का जब हम रूप धारण कर लेंगे सतयुग में तब ये मरने वाली बात हमारे मन में होगी कि नहीं होगी? उस समय दुख नहीं होगी मरने का। क्योंकि वहां अमर बोलते हैं ना देवी देवता अमर बोलते हैं ना वास्तव में अमर नहीं है वो भी मरते हैं लेकिन वहां मृत्यु नहीं कहा जाता है ना मरते हैं ना मरते हैं लेकिन लेकिन उनको उनका
00:12:15:22 मृत्यु नहीं होता है उसको मृत्यु नहीं कहा जाता है वो देह का त्याग करते हैं हंसते हंसते वो अपने अगले बचपन को देखते हैं उनको पता रहता है कि मैं एक नया वस्त्र धारण कर रहा हूं वहां से वहां सिर्फ वस्त्र का परिवर्तन होता है देह का त्याग करते हैं देह का त्याग पहली बात तो उनका उनको भैया भैया सुनिए सुनिए मेरी मेरी बात थोड़ा सुन लीजिए। पहली बात तो देवी देवता को देह का भान ही नहीं होता है। वो देह के भान ही खत्म है। उनका नहीं रहता है। वो आत्मभान में रहते हैं। उनको ये रहता है कि मैं ये वस्त्र खाली चेंज कर रहा हूं। मेरा जो वस्त्र है आत्मा के ऊपर जो वस्त्र है वो शरीर है। वो वस्त्र को मैं परिवर्तन करूं। जैसे सांप का मिसाल देते हैं ना सांप क्या करता है? अपना पुराना खाल छोड़ देता है। बहुत मैं आपकी बात समझ गया। मैं आपकी बात समझ गया। आपकी बात शॉर्ट में समझ लेता हूं। तो जब देह का त्याग जो देवी देवता होते हैं देवी देवता वाला सतयुग होता है उसके बाद वो देह छोड़ते हैं और वो अगली चीज अगली जो एंटिटी बनते हैं जो अगला जन्म होता है उसमें उनके अंदर वो मरने का दुख होता है कि नहीं अगले में किनके अंदर किनके अंदर जब जब सतयुग से वो अगले युग में ट्रांसफर होते हां सतयुग के बाद मैं समझ गया आप बोल रहे हो सतयुग के बाद यानी द्वापर से जो जन्म
00:13:30:26 हां यही पूछ रहे हैं। द्वापर से जो जन्म होगा तो वो जन्म होगा हमारा 22वा जन्म। हमारे हिसाब से बता रहा हूं। आप उसको बात समझिए। भाई साहब मेरी बात आप मुझे ना मुझे आंकड़े मत बताइए। मुझे बताइए कि उस जन्म में मृत्यु की सूचना होती है कि नहीं कि हम मरेंगे। जैसे आज हमें मृत्यु की सूचना है कलयुग में। नहीं उस समय नहीं होती। उस समय फिर उस समय फिर हां अकाल त्रेता भी नहीं होती। त्रेता में भी नहीं होती। नहीं त्रेता सत्य और त्रेता में जो है देवभान नहीं होगा जैसे कि सत्य में सत्य में सत्य में हो मैं समझ गया मैं समझ गया द्वापर से द्वापर से क्या होगा देवभान में आ जाता है आत्मा तो द्वापर देवभान क्योंकि द्वापर में हमारे मन में सूचना आ जाएगी कि हम मरेंगे और हमें दुख होगा हां दुख होगा उसमें दुख होगा कि मैं मर जाऊंगा मेरे घर से कोई मर जाएगा यानी यानी कि देवत्व को प्राप्त करने के बाद हमें द्वापर में पहुंचने के बाद यह पता लगेगा कि हम मरेंगे हमें दुख होना चालू हो जाएगा। बिल्कुल बिल्कुल होगा। हां ये विधि का विधान है। जब तो जब हम सतयुग में होंगे तो हमें यह मालूम होगा कि नहीं कि हम द्वापर में वो वहां पहुंचेंगे। नहीं होगा। इसीलिए तो इसीलिए वो सुखी है। इसीलिए देवता सुखी है।
00:14:45:27 मैं मैं समझ गया। इसका मतलब कि जो आपके अनुसार ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो मुक्ति बताई जा रही है वो वास्तव में व्यक्ति को बेवकूफ बनाया जा रहा है क्योंकि उसको पता ही नहीं है कि उसके साथ आगे क्या होने वाला है क्योंकि उसको मैं मैं आपको आप पूछिए आप आप सवाल पूछिए मैं हां पूछिए मैं मैं बता मैं पूछ तो रहा हूं क्योंकि उसको आप बोल रहे हो कि बेवकूफ बना रहे हैं तो मैं उसको मैं बैठा हूं ना आपको बताऊंगा भाई साहब मैं मैं बोल तो रहा हूं सुनिए तो आप देखो आप लैंग्वेज लैंग्वेज आप गलत इस्तेमाल कर रहे हो ना भैया कि बेवकूफ बना रहे हैं। ये गलत बात आप बोला कि नहीं? मैं उसको मैं आपको बोल दूं कि आप मेरे को बेवकूफ बना रहे हैं। आपको अच्छा लगेगा कर रहा हूं। नहीं नहीं आप ये वर्ड को चेंज करें। आप वर्ड गलत शब्द को इस्तेमाल कर शब्दों के ऊपर होता है। अगर देखिए एक शब्द एक शब्द देखिए भैया। देखिए भैया देखिए आप मेरा भाई भाई हम चर्चा कर रहे हैं। एक शब्द के ऊपर ना महाभारत हो गया। एक शब्द के ऊपर महाभारत हो गया था। पता है भाई साहब एक्स्ट्रा मत बोलिए। मैं मैं यह एक्स्ट्रा क्या आप ऐसा शब्द का इस्तेमाल मत करिए प्लीज। मैं मैं अभी समझा रहा हूं ना आपको बेवकूफ बनाने जैसा क्यों लग रहा है? मैंने क्यों कहा? हां तो बोलिए एग्जांपल दीजिए। हां दे रहा हूं। एग्जांपल दीजिए। मैं मैं जवाब दूंगा। जवाब सुनना
00:16:01:03 पड़ेगा। जो जो देवता हैं वो सबसे उत्कृष्ट स्थिति है किसी भी प्राणी की। आपके हिसाब से। ठीक है? हम ठीक है। उस समय उससे यह बात छिपाई जा रही है कि तुमको द्वापर में जाना है और वहां जाके दुख भोगना है। यह छिपाई जा रही है ना बात? छुपाई क्यों जा रही है? तो छुपाई क्यों जा रही है? छुपा रहा है। उनको मालूम होगा। उनको मालूम होगा मैं दुख भोगूंगा। तो आप भैया आपको अगले जन्म का पता आपको अगले जन्म का पता है क्या? भाई साहब हमें आप बता तो रहे हो। आप बता तो रहे हो मुझे अगले जन्म में तो इसीलिए तो कह रहा हूं कि देवी देवता सत्य त्रेता में सुख ही सुख होगा वहां पे दुख का उनको एहसास ही नहीं होगा क्योंकि वो देहभान में नहीं है वो आत्मा अभिमानी है वही मैं वही तो पूछ रहा हूं कि उनको ये मालूम होगा कि नहीं कि जाएंगे कि नहीं जाएंगे नहीं होगा इसीलिए क्योंकि वो आत्म अभिमानी है कोई बेवकूफ नहीं बना रहा है वो आत्म अभिमानी है मैं उनको देह का भान नहीं है बस मेरा प्रश्न क्या है मेरा प्रश्न क्या है कि द्वापर में जाने पर दुख मिलना निश्चित है। आज वो देवी देवता बन के और सुख भोग रहे हैं। मगर उनकी आगे की कंडीशन ये आनी है कि उनको दुख मिलना
00:17:16:04 है। अगर वो उनको पता चल जाए तो अगर उनको पता चल गया तो वो वहीं पे दुखी हो जाएंगे। इसका मतलब इसीलिए देवी देवता को दुख नहीं होगा। इसका मतलब वहां पे उनसे सच्चाई छिपाई जा रही है ना। ये आप कैसे सिद्ध करो कौन छुपा रहा है मेरे को? ये तो बताओ कौन छुपा रहा है? छुपाने वाला कौन है वहां? अरे आप ही तो बता रहे हो उनको यह पता नहीं होता है। कोई भी छुपाए। हम थोड़ी बता रहे हैं भैया। हम नहीं बता रहे हैं। ये आपके गीता आपके गीता में सब आप जो जो बातें कर रहे हो सब गीता में है। गीता आप पढ़ रहे हो। गीता से देख लो। गीता का ही ज्ञान है। देखो देखो ऐसा है। गीता पे आएंगे। प्रमाण पे आएंगे। हां गीता में अभी बात ये हो रही है अभी बात ये हो रही है कि जब व्यक्ति देवता होगा तो उसको ये उसको ये मालूम होगा कि नहीं आगे चलकर के मुझे द्वापर में जाना है दुख भोगना है फिर उसके बाद कलयुग में जाना है दुख भोगना है जब कलयुग जब कलयुग के व्यक्ति को यह मालूम है कि उसको पहले देवता बनना है और देवता के बाद उसको जो है त्रेता में जाना है त्रेता के बाद उसको द्वापर में दुख भोगना है जब कलयुग के व्यक्ति को मालूम है तो देवता को नहीं मालूम होगा तो श्रेष्ठ कौन हुआ कलयुग अरे भैया कलयुग कलयुग को मालूम नहीं है कलयुग
00:18:31:10 के बाद ये संगम युग चल रहा है जो संगम युग में है जिनको परमात्मा का ज्ञान मिल रहा है उन्हें परमात्मा गीता का ज्ञान दे रहे है गीता ज्ञान दाता कौन है आप बता सकते हैं तो गीता ज्ञान दाता कौन है गीता का ज्ञान किसका है भाई साहब विषयांतर मत करिए विषयांतर मत करिए इसी नहीं नहीं आप गीता की बात कर रहे भैया यही तो बात है आप अपनी बात नहीं सुन रहे हो गीता गीता मैंने गीता की बात नहीं की है भाई साहब तो गीता का ज्ञान यही कह रहा है ना आप वेद की बात करते तो मैं वेद की बात कर रहा हूं आप दिन में आए थे जब क्या बोला था भाई साहब मैं शास्त्र नहीं बीके क्या कहती है बताऊंगा अभी आप बीके तो बीके बीके गीता का ज्ञान कहती है हमारा ये गीता ज्ञान यज्ञ है ये ब्रह्मा कुमारी में क्या होता है बता देता हूं यहां गीता आप देखिए जो परिचय चल रहा है उसको बताइए भाई साहब जो विषय चल रहा है वो बताइए तो हमारा तो मैं तो वही बोल रहा हूं कि हमारे यहां गीता ज्ञान यज्ञ चलता है। आज कलयुग में कलयुग में व्यक्ति को ये पता है कि वो देवता बनेगा। देवता बनने के बाद वो त्रेता में भी सुख भोगेगा और सुख और त्रेता में सुख भोगने के बाद जो है वो फिर से पतित होगा। वो द्वापर में जाएगा और कलयुग में जाएगा। आज कलयुग के सभी को मालूम है। मगर जब वो त्रेता में सुख [गला साफ़ करने की आवाज़] जब वो सतयुग
00:19:46:24 में सुख भोगेगा तब उसको यह नहीं पता होगा। क्योंकि अभी जो ज्ञान है ना यह ज्ञान अभी मिल रहा है। सत्य देवताओं को ज्ञान की फिर जरूरत नहीं पड़ेगी। ना ये ज्ञान सुनेंगे वो वहां उनके ज्ञान की भी जरूरत नहीं है। यानी कि देवता के पास ज्ञान नहीं है वो जो कलयुग में जो व्यक्ति के पास ज्ञान है। हां वो ज्ञान उनको लोप हो जाता है। ये ज्ञान उनको फिर नहीं उनको जरूरत ही नहीं पड़ती। आप जैसे आप पढ़ाई किया आप आप आईएस बन गए। आप आपने पढ़ाई किया आईएएस बन गए तो आपको और पढ़ाई की जरूरत है क्या? आप नौकरी करेंगे तनख्वाह लेंगे। हां तो अभी जो अभी अभी के अभी के कर्मों का जो फल है ना आईएएस बनने के लिए जो पढ़ाई की है वो भूल थोड़ी ना गया। नहीं तो आईएएस की नौकरी कैसे करूंगा? आईएस थोड़ी ना इस जन्म में तो अगले जन्म में थोड़ी ना उसको आईएएस का याद रहेगा। तो फिर आईएस से तुलना तो आईएस से तुलना क्यों कर रहे हो फिर? क्यों नहीं करूंगा भाई? यही तुलना है कि यहां हम जो कर रहे हैं वो मिलेगा। आईएस के बाद आईएएस बनने के बाद आईएस बनने से पहले के जीवन का आईएस को याद रहता है। मगर आप कह रहे हो कि देवता
00:21:02:00 बनने के बाद देवता बनने से पहले का जीवन याद नहीं रहेगा। तो फिर आईएस से तुलना क्यों कर रहे हो देवता की? भैया आईएस को पहले का जीवन याद रहता है। है ना? तो देवताओं को भी उस जन्म का उनको याद रहेगा पहले का। पिछले जन्म का थोड़ी ना याद रहेगा किसी को किस जन्म का याद रहेगा पिछले जन्म का ना याद रहेगा ना बाद के जन्म का याद रहेगा खाली उनको इतना होगा कि भाई ये देह नहीं मैं वस्त्र छोड़ रहा हूं तो फिर आईएएस से तुलना नहीं हो सकती ना आईएएस बनने से पहले आईएएस को जो ज्ञान होता है वो आईएएस बनने के बाद भी रहता है तभी वो आईएएस की नौकरी करता है आईएएस तुलना इसी जन्म के लिए रहता है इसी जन्म में रहता है अगले जन्म में नहीं रहता मैं ये कह रहा हूं तो अगले जन्म में वो देवताओं को भी नहीं देता अगले जन्म में वही तो बात कह रहा हूं। हां तो यहां वो ज्ञान मिल रहा है ना। ज्ञान तो यहां मिल रहा है ना तो आप ये अभी ना आईएस बनने के बाद भी उसे और और ज्ञान की जरूरत है कि नहीं? भैया देखो वो आईएएस बनता है। एक एक जन्म के लिए पढ़ता है वो। ठीक है। वो एक जन्म के लिए आईएएस पढ़ता है। और हम यहां आपको बोलते हैं कि मैं यहां से आपको अथॉरिटी के साथ बोल रहा हूं कि मैं यहां 21 जन्म की पढ़ाई पढ़ रहा हूं। बस मैं यहां 21 जन्म के नहीं पढ़ रहा हूं। मैं पॉइंट पर आ जाता हूं कि कुल मिलाकर
00:22:17:03 के देवी देवता बनने में भी जो आपका सुख है वो बाधित है। किसको बाधित है? देवी देवता बनने पर भी एक दिन उस सुख से बाहर निकलोगे ना आप तो आना पड़ेगा बोल रहा हूं ना कोई चीज नहीं रहता परिवर्तन परिवर्तन का नियम है परिवर्तन इसका मतलब सनातन नहीं है बीके का ज्ञान सनातन सुख कैसे नहीं है आप बताइए सनातन क्या है आप बताइए ना सनातन क्या है मुझे ओके भाई साहब बोल नहीं आप नहीं है बोल रहे तो मैं पूछ रहा हूं सनातन का व्याख्या करिए तो मैं व्याख्या कर रहा हूं ब्रह्मा कुमारी ब्रह्मा कुमारी प्योर सनातन है। मैं व्याख्या कर रहा हूं। देखिए देखिए आप एग्रेसिव मत होइए। अग्रेसिव मत होइए। डिस्कशन व्याख्या मुझे व्याख्या कर रहा हूं। मुझे करने दीजिए भाई साहब। अग्रेसिव इसलिए करता हूं क्योंकि आप ओवरलैपिंग करते हैं। तब मुझे अग्रेशन आएगा। ठीक है? अधर्म का जहां पर अधर्म हो रहा होगा तो वहां अग्रेशन आ सकता है। तो या तो ओवरलैपिंग आपने एक बार कह दिया कि सनातन की व्याख्या करिए। उसके बाद आप सुनिए। मैं व्याख्या करूंगा सनातन की। ठीक है?
00:23:31:01 हमें नहीं आता। आप करिए सनातन का। मैं आपसे सुनना चाहता हूं। हां। मैं करिए। अब आप हां कर रहा हूं। चुप रहिए आप। फिर मेरा भी सुन रहा हूं बाद में। हां। हां। हां। हां। एक मिनट। ठीक है। दूसरे का नहीं सुनते। ये प्रॉब्लम है। आप दूसरे का भी सुन लो। देखा? नहीं सुनना है आपको। सुनाओ। नहीं आप दूसरे का भी सुनो मेरा भी सुनो ये कह रहा हूं मैं आप बोलो फिर मेरा सुनो ये कहने का ये मेरा रिक्वेस्ट है आपसे ये मेरा रिक्वेस्ट है आपसे ठीक है ठीक है सुनूंगा अब मैं बोलूं हां हां ठीक है अभी जब आपसे बातों की शुरुआत हुई थी तो आपने ये कहा था कि वहां का जो सुख होता है वो खत्म हो जाता है और जो मुझे ये यहां से ब्रह्मा कुमारी से जो सुख मिलता है वो खत्म नहीं होता है। फिर मैंने आपसे जब पूछा कि भाई वो जन्मांतर में वह तो खत्म होने वाला सुख है तो आपने यह बताया कि जन्मांतर वाला सुख तो खत्म होगा मगर इसी जन्म वाला सुख खत्म नहीं होगा जबकि हां भाई साहब बीच में मत बोलिए प्लीज हां बीच में मत बोलिए ठीक है हां जबकि इस जन्म वाला सुख भी जो है आपका बाधित है आपकी ओर कोई हाथ घुमाएगा मारने के लिए
00:24:46:02 तो आपकी पलकें झपकेंग कि नहीं हां यही प्रश्न आपने और किसी को भी पूछा था मुझे याद आया। ये आप देह की बात पूछ रहे हैं। ये देह की बात पूछ रहे हैं आप। पहली बात आपको बता दो शिवश भाई प्रॉब्लम क्या है? प्रॉब्लम क्या है? बता दो। आपके प्रश्न देखो भैया देखो आपके प्रश्न ही गलत है। प्रश्न ही गलत है तो मैं क्या उत्तर दूं? ठीक है। ठीक है। आप प्रश्न तो सही पूछो मेरे भाई। आप देखो एक तरफ देह में जा रहे हो। एक तरफ देह में जा रहे हो। एक तरफ विदेह में जा रहे हो। आप लोगों को मिस कर दे रहे हो। आप इस समय देह से नहीं जुड़े हुए। अरे भैया तो देह की बात कर रहे हो तो देह पे रहो। फिर आत्मा की बात कर रहे हो तो आत्मा में रहो। मैं पूछ हमें यहां जो पढ़ाई मिलता है देखिए मैं क्या कहा? मैंने शुरू में क्या कहा कि भाई साहब अभी आपकी आवाज कोई सुन नहीं पा रहा है। आप म्यूट पे हो। मेरा प्रश्न समझ लो। मेरा प्रश्न यह है कि क्या आप देह से जुड़े हुए हैं अभी कि नहीं? आप देह से जुड़े हुए हैं। आत्मा आपकी देह से जुड़ी हुई है या देह से मुक्त है। अभी फिलहाल अभी मैं आपको वो कर रहा हूं। अनम्यूट आप अपना जवाब बोले। बोलिए। देह से मैं देह में होते हुए मैं देह से न्यारा हूं।
00:26:01:13 ठीक है। वो मैं आत्मा हूं। वो मैं आत्मा हूं। देह में देह में देह से जुड़े हुए हो कि नहीं जुड़े हुए हो? देह से आने वाले देह के अंदर देह मेरा रथ है। ये देह मेरा रथ है। उसी में हूं। एक मिनट भाई साहब मैं फिर से आपको अभी आप अनम्यूट अभी आप म्यूट है मैं आपको अपना प्रश्न फिर से बता दूं। देह से आने वाली जो सूचनाएं हैं वो आत्मा उससे प्रभावित हो रही है कि नहीं हो रही है ये मैं पूछ रहा हूं। जो देह से आने वाली सूचनाएं हैं कष्ट सुख और दुख की सूचनाएं वो आपको आपकी आत्मा को प्रभावित कर रही है कि नहीं कर रही है। पूछ रहा हूं। अभी मैं आपको अनम्यूट करूंगा तब बोलिए आप। बिल्कुल जी बिल्कुल होती है क्योंकि कान से जो सुनता है तो आत्मा उसको सुन रहा है। यानी से जो बोल रहा है यानी कि यानी कि आत्मा प्रभावित हो रही है ना आत्मा को प्रभावित हो रही है। हां हो रही है। क्यों नहीं हो रहा? यानी कि आत्मा को दुख हो रहा है। दुख कैसे हुआ इसमें? दुख कैसे हुआ भाई? ये कौन सी बात हुई? दुख हो रहा है। जबरदस्ती बोल रहा हूं। दुख हो रहा है। मैंने बोल रहा हूं कि मैं बोल रहा हूं। मैं बोल रहा हूं कि मेरा यह एक मिनट अभी आप अभी आप फिर से म्यूट है। मैं आपको अपना प्रश्न समझा दूं।
00:27:16:19 शरीर को दुख पहुंच रहा है। टांग टूट रही है। आंख आंख फूट फूट रही है। आपके स्पाइन में प्रॉब्लम है। आप शरीर को आपके शरीर को दुख हो रहा है। ठीक है। ठीक है ना। अब ये जो दुख हो रहा है। आत्मा इससे दुख से प्रभावित हो रही है कि नहीं हो रही है? अन म्यूट कर रहा हूं। जो भी शरीर में होता है आत्मा को इंफॉर्मेशन जाता है। प्रभावी जिसको बोल रहे हो उसको हम कहते हैं इंफॉर्मेशन जा रहा है। यानी मेरे टांग में दर्द है। उसका इंफॉर्मेशन आत्मा को आएगा क्योंकि स्नायु शक्ति के जरिए वो आत्मा में आता है। आत्मा में जो आता है आत्मा पहली बात तो मैं बताऊं शिवश आत्मा क्या आपको मालूम नहीं है। पहले तो आप सीधा जा रहे हो कहां चले? भटकाओगे तो मुझे आपको म्यूट करना पड़ेगा। भाई साहब भटकाओगे तो म्यूट करना पड़ेगा प्लीज। आप अपनी बात कहिए। आत्मा मालूम है कि नहीं मालूम है वह अलग बात है। अलग चैप्टर है। अभी बात हो रही है। आपको दुख होगा कि नहीं होगा? ठीक है। हां। आप अपने आप को हार मान रहे हो। आप अपने आप को हार मान रहे हो। फिर आप फिर आप फालतू की बात बोल रहे हो। आप चैप्टर अगर अच्छा कैसे फालतू? अच्छा आप आपने बोल दिया ब्रह्मा कुमार आप जा सकते हैं। भाई साहब मैं फिर आपसे निवेदन कर रहा हूं। आप
00:28:32:00 जब आप विषय मत बदलिए। विषय मत बदलिए। मैं आपसे निवेदन पूर्वक बात कर रहा हूं। मैं आपसे निवेदन पूर्वक बात कर रहा हूं। विषय मत बदलिए। अनम्यूट करूं आपको? अनम्यूट करूं? अनम्यूट करूं? विषय मत बदलिए। भाई साहब विषय यह चल रहा है कि जो शरीर के माध्यम से हमें सूचनाएं प्रदान आदान प्रदान हो रही हैं तो उसके कारण आपको दुख कष्ट पहुंच रहा है कि नहीं पहुंच रहा है इस समय अविनाशी दुख है या अविनाशी सुख है आपको क्या है आप अगर इधर-उधर की बातें करेंगे कि आपको आपको जो है वो नहीं पता है आत्मा नहीं पता है आप ये कहेंगे आप अगर यह कहेंगे आपको कोई सुन नहीं पा रहा है मैं भी नहीं सुन रहा हूं आप आप म्यूट है इस समय इस समय म्यूट है। इसलिए म्यूट है क्योंकि आप विषयांतर कर रहे हैं। विषयांतर करने से निष्कर्ष पूर्ण चर्चा नहीं होती है। ठीक है? ठीक है? नहीं करनी है आपको चर्चा। मैं मैं आपसे लास्ट बार पूछ रहा हूं। आपको करनी है कि नहीं करनी है। करनी है तो विषय पर रहिए। हां या ना बता दीजिए मुझे। विषय पर रहकर करनी है चर्चा। विषय पर मैं हां या ना बताइए। विषय पर रहेंगे।
00:29:47:20 यह सब मत यह सब मत करिए। आप विषय पर रहेंगे? विषय पर रहकर बात करेंगे। भाई साहब निवेदन है मेरा। हां ठीक है। विषय पर रहिएगा। गुड हां तो मेरा प्रश्न ये है। आप क्यों भाग रहे हैं? हां। मेरा प्रश्न ये है। भाई साहब अब आपने एक भी बार ये सब बोला ना भाग। आपको मैंने बोला था ना कि आपको मैंने बोला था ना भैया कि कट नहीं करना वीडियो को। तो आप कट कर आप जा सकते हैं भाई साहब लिंक दे दीजिए कोई और आना हो तो आ सकता है किसी और को आना हो तो
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बीमारी शरीर को है पर मैं रात 2बजे नाचने का सुख लेता हूँ क्या ब्रह्मा कुमारी की मुरली का यही ज्ञान है
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