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00:00:02:19 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। और एक चौपाल लगाई गई है अभी हाल ही में कुछ अह मैंने अभी शाम को ही देखी और जो मानसिक रोग से ग्रस्त जो ये मातृशक्ति हैं जब से वो हमसे ऑनलाइन आमने सामने आकर के बैठी थी उसके बाद से थोड़ा सा उनका टेंपरामेंट हिला हुआ है। यद्यपि

00:00:35:08 क्या कहते हैं श्री राम जी के पास जब सुपनका आती है गलत मंतव्य से तो उस समय श्री राम जी थोड़ा सा विनोद भी करते हैं वहां पर सुपनका के साथ तो एक मर्यादा में रहते हुए एक सीमा के अंदर हमने अभी विनोद किया इन मातृशक्ति से वह तब जब इन्होंने व्यक्तिगत रूप से उल्टे सीधे शब्द हमको कहे और उल्टे सीधे शब्द कहना तो प्रारंभ इन्होंने ही किया उसके बाद से इन्होंने हमारा कुछ शायद आग तो लगी थी यहां से जब से गई थी जलन मछली की तरह सर पटक के रो रहा हूं कब से एक सर फिरा हूं मैं उस तरह का हालात था थोड़ा सा तो फिर इन्होंने एक अपने मानसिक रोग को प्रकट करते हुए एक और वीडियो बनाया जिसमें संडास के चित्र से हमें जोड़ते हुए और तरह-तरह की बातें अनर्गल प्रलाप जिस पर अभी विस्तृत बातें करेंगे फोटो में उल्टा सीधा करना तो यह जब व्यक्ति फोटो फोटो बिगाड़ करके प्रस्तुत करने लगे आपकी और या फिर आपको व्यक्तिगत ऐसी निराधार चीजों से जोड़ने लगे डायरिया ये वो इस तरह का तो यहां समझ लेना चाहिए कि उसके पास सैद्धांतिक पक्ष कमजोर है इसलिए उसे ऐसा करना पड़ रहा है। जब वो सिद्धांतों पर बात करने की बजाय इस तरह की चीजों का सहारा लेने लगे।

00:01:50:28 खैर तो अभी हमारे साथ हैं सनातन शंकर जी उनको ले लेते हैं और इच्छवाकु जी भी हैं। उनको ले लेते हैं। और जय श्री राम सबको जय श्री राम नमस्कार जय श्री राम और शास्त्रवाद जी भी है उनको भी ले लेते हैं जी तो आपने आप लोगों जय श्री राम तो आप लोगों ने देखी होगी मूर्खों की एक चौपाल आज लगी थी और उसमें जो है जुगलबंदी कर रहे थे कोशिश कर रहे थे वो दिखाने की जो वो है नहीं कुछ मानसिक रोगी थे कुछ अभागे थे कुछ जो है परेशान भी थे अपने निराकार परमात्मा से और कुछ तो

00:02:37:10 मूर्ख के लक्षण वाले थे ना कंफ्यूज्ड थे कंफ्यूज बहुत एक वहां पर एक वहां पर कोई ढोंगी भी आया था कि मैं गोवर्धन पीठ से जुड़ा हुआ हूं एक ढोंगी भी आया था कोई गुरुदेव पूरी के शंकराचार्य जी से दीक्षित हूं है ना अच्छा आया था अच्छा ठीक है। तो अभी सबसे पहले हम एक इनकी एक बात देखते हैं। भाई वो जरा सा वो दिखाएंगे कि इनका आज की लाइव का टाइटल क्या था वो जरा देखते हैं। इसको कहते हैं मूर्खों की चौपाल।

00:03:13:22 एक-एक करके जरा मीमांसा करेंगे। क्या-क्या बातें इन्होंने की है और टाइटल इनका जरा देख लेते हैं। इनका टाइटल एक बार दिखा देंगे क्या? ऑपरेटर उसका टाइटल है हिंदू यूनिटी। क्या है टाइटल? हिंदू यूनिटी और उसमें बैठा मुख्य प्रखर रूप से आयोजक कौन है? वह आर्य समाज की विचारधारा से प्रभावित है। क्योंकि भाई वर्णाश्रम व्यवस्था के विपरीत जाना, विदेश गमन के विपरीत जाना और विशेषतः जो ईश्वर का स्वरूप है मूर्ति पूजा अवतारवाद इनके विपरीत जाना। यह सारी जो चीजें हैं यह आर्य समाज से मिलती हैं। यह है भाई आज का टाइटल। तो अब यह जो मातृ शक्ति हैं जो थोड़ा सा विक्षिप्त हो गई हैं। जब से आमनासामना हुआ है वह ऐसा था ना वो जो जुरासिक पार्क में जो तार थे ना बिजली वाले तो डायनासोर्स में तो इतनी अकल होती थी कि वो जब तारों में बिजली बंद हो जाती थी वो तब अंदर आते थे। आप लोगों ने अगर ध्यान दिया हो तो वो जो तार थे बिजली के जिनके उस तरफ डायनासोर रहते थे टरेक्स वगैरह तो वो जब तारों में प्रवाह बंद हो जाता था विद्युत का तब वो इधर आते थे उनको उनके अंदर इतनी बौद्धिक क्षमता थी कि वह देख लेते थे कि अब इसमें बिजली नहीं है तो अब हम इसको छू सकते हैं। इन्होंने क्या किया? बिजली के प्रवाह के दौरान

00:04:28:26 ही तार को छू लिया दो-तीन दिन पहले है ना। तो जब तार को छुआ तो वो जो मुंगेरी लाल का एक सीन है ना राजपाल यादव का कि लड़के का नाम देके वो लड़की का नाम देके लड़के से भिड़वा देते हो। मार जब पड़ती है उसके बाद वह ऐसे काफी देर तक करता रहता है। तो कुछ ऐसी हालत इनकी हो गई थी। यहां से जाने के बाद दो-तीन दिन तक यह ट्रॉमा में रही होंगी। उसके बाद फिर इनको हमसे धुनके हुए धुनकाए गए पिटे हुए समाजियों ने और उधर से थोड़ा बहुत ज्यादा नहीं स्क ने भी थोड़ा सा कुछ परेशान लोगों ने सपोर्ट किया कि तुम ये करो तुम वो करो। फिर उभर के आई अच्छा क्या लेके आई? डायरिया और मतलब व्यक्तिगत कटाक्ष उसमें उसमें थे अग्रणी और सैद्धांतिक बातें कोशिश कर रही हैं थोड़ा बहुत सिद्धांत पर बात करने की मगर ठीक है व्यक्तिगत कटाक्ष डायरिया और ये सब थे उसमें अ तो इनका जो टाइटल अभी आपने देखा हिंदू यूनिटी ये जो मातृशक्ति है ये स्वयं आर्य समाज से प्रभावित है। हालांकि [गला साफ़ करने की आवाज़] मैं आर्य समाजी नहीं कहूंगा क्योंकि आर्य समाजियों की सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि उनके यहां परंपरा

00:05:43:27 तो है नहीं कोई। गुरु गद्दी है नहीं कोई। तो कोई भी व्यक्ति खुद को आर्य समाजी मानने के लिए और ना मानने के लिए कभी भी स्वतंत्र है। कुल मिलाकर के सिद्धांत विहीन शब्द अगर इनके लिए उपयोग में लाया जाए सिद्धांत विहीन। क्योंकि जो सबका होता है वह किसी का नहीं होता है। तो सिद्धांत विहीन वाली स्थिति इनकी होती है। अच्छा सिद्धांत विहीन का एक उदाहरण मुझे याद आता है। जब हम लोग बचपन में क्रिकेट खेलने जाते थे तो सदैव टीम में एक व्यक्ति ऐसा जरूर रखते थे कि नाली में गेंद चली जाए तो वो निकाल लाए। उसको जो है दिक्कत ना हो नाली में गेंद नाली से गेंद निकाल के लाने में। तो उसका कारण क्या था? क्योंकि वो जो हम इस कार्य के लिए हमको किसी सिद्धांत विहीन व्यक्ति को ढूंढना पड़ता था कि कौन है जो अपने उस पर ठोस ना रहे चीजों पर वैसे तो आज जो मूर्खों की चौपाल लगी है उसमें ज्यादातर सब के सब सिद्धांत विहीन ही थे जो खुद को गोवर्धन मठ से क्लेम कर रहा है वो भी सिद्धांत विहीन है और कैसे है ये तो हम अभी देखेंगे मगर इनका जो टाइटल है वो देखिए आप हिंदू हिंदू यूनिटी क्या मतलब है हिंदू का भाई आर्य समाज के अनुसार दयानंद का भाष्य क्या कहता है हिंदू हिंदू का मतलब है काफिर, चोर, लुटेरा, डाकू। जाओ पढ़ लो जाकर के। थोड़ी बहुत किताबें तो हमने भी पढ़ी है आर्य समाज की। फिर

00:06:59:03 तुम हिंदू यूनिटी की बात कर रहे हो। और हिंदू यूनिटी की बात अगर कर रहे हो तो भाई आर्य समाज को कहो ना कि राधा पर बोलना बंद करें। तुम कह रहे हो कि हम थोपना नहीं चाहिए। तुमने यह भी कहा अपनी लाइव में। मैंने सुना किसी ने कटिंग भेजी है। मैंने यह भी सुना। तुमने अपनी लाइव में यह भी कहा कि क्या कहते हैं यह हम लोग किसी के पर्सनल उसकी परंपरा में क्या होता है? वह वर्णाश्रम है, यह है वह है तो हम उस पर कटाक्ष नहीं करेंगे। हमारा तो व्यक्तिगत मामला है। अरे भाई तुम्हारा अगर व्यक्तिगत मामला था तो तुम विदेश यात्रा का विरोध क्यों कर रही हो? जहां वो लोग सिद्धांत ले आए आपके विरोध में। आप व्यक्तिगत लड़ रही होश्वर जी से। ठीक है? यद्यपि वह भी व्यक्तिगत मामला नहीं है। मैं बताऊंगा कैसे नहीं है। मगर जब आप यह समझ रही हो कि मुक्तेश्वर जी पर बोलना मेरा व्यक्तिगत मामला है तो उसमें शंगेरी की पीठ को क्यों ला रही हो बीच में? करपात्री जी के यजुर्वेद भाष्य को क्यों ला रही हो बीच में? और विदेश यात्रा पर यदि आप पर सवाल उठा दिया गया है तो वहां कोई और रास्ता निकालो। यह करने की बजाय कि उसका आप शास्त्र खंडन प्रस्तुत कर रही हो। फिर कह रही हो कि हमारी तो व्यक्तिगत लड़ाई है। कैसे व्यक्तिगत लड़ाई है? सिद्धांत का ही जब आपने विरोध कर दिया किसी परंपरा से जुड़े हुए तो फिर कहां से व्यक्तिगत

00:08:14:14 लड़ाई रह गई? तो पहली बात तो यह है कि यह व्यक्तिगत का ड्रामाबाजी बंद करो। जो चौपाल तुमने लगा के बैठी थी बैठी थी ना तुम उसमें केवल दो तीन हुक चुल्लुओं की कमी और थी। रामपाली आ जाता कोई और एक ये मीठी वाली दीदी ब्रह्मा कुमारी बस पूरा था। हम हम जो जितना कमेंट बॉक्स में रामपाल जी भी थे। कमेंट बॉक्स में मैंने देखा वहां पर रामपाल वाले भी थे और वो कह रहे थे कि हम सबको एक होना चाहिए। हिंदू यूनिटी अबव ऑल सबसे ऊपर हिंदू यूनिटी। हम तो ये एक तो ये बात हो गई कि भाई इन्होंने कहा हिंदू यूनिटी अबव ऑल और फिर तुम कह रही हो कि तुम जिस शिव को मानते हो वो ही है। इनका वो कमेंट है क्या आपके पास? वो कमेंट जरा शो कर देना इन्होंने लाइव लाइव में बोला था इन्होंने कि कुछ नहीं लाइव में बोला है कल इन्होंने किसी को कमेंट भी किया है उसका स्क्रीनशॉट मैंने अपनी स्टोरी पे लगाया Instagram स्टोरी पे इन्होंने किसी को कमेंट किया जाकर के कि जिसको तुम जिसको तुम पूजते हो वो जुड़ाई है ये बोला ये हिंदू यूनिटी है तुम्हारी और सबसे अच्छी बात ये के मामले में लाइफ में 40 मिनट में ही लड़ाई हो गई सबकी अरे

00:09:29:27 भाई किसी की ईंट किसी का रोना और भानुमती का कुवा जोड़ा वह वाला काम तुम कर रही हो जाके जड़ में जाओ ना जड़ में पत्तों पर पानी डालने से कुछ नहीं होगा अभी दो दिन पहले तुम खुद हिंदू यूनिट पे आक्रमण कर रही थी ना रामानुज स्वीकार है तुम्हें ना शंकराचार्य स्वीकार है तुम्हें ना मधवाचार्य स्वीकार है तुम्हें तब तो तुम अड़ी हुई थी कि नहीं आर्य समाज ब्रह्म मुनि आकाइव फलानी वेबसाइट उस पर अड़ी हुई थी तब तुम्हें हिंदू यूनिटी याद नहीं आ रही थी अभी तो वो तुमने वो मक्कारी वगैरह वाले शब्द बोल दिए। थोड़ा सा अगर तुम वहां पर यह जवाब देते हुए आगे बढ़ जाती ना कि ठीक है मेरी परंपरा नहीं है। इस मामले में आप ही मुझे थोड़ा सा प्रकाश डालिए। परंपरा से क्या है? क्या नहीं है? तो मैं आपको एक सकारात्मक बताते हुए आगे बढ़ता। ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं तुम्हारा? धर्म क्या है? भाई तुम जब धर्म के ऊपर बात करने आ रही हो तो तुम्हें पूछा जाएगा ना कि धर्म आपकी जानकारी में धर्म है क्या? किसी कबीले का नाम है क्या धर्म जिसका परवसान मोक्ष में हो वह विधि धर्म है थोड़ा पढ़ लो जाकर के ये तुम्हें प्रकृति की परंपरा से मिला नहीं क्या बुद्धि के साथ खैर

00:10:46:28 तो हिंदू यूनिटी की बात कर रहे हैं टाइटल डाला हिंदू यूनिटी बिठाया किसको है जिनके लिए हिंदू काफिर चोर लुटेरा डाकू है और वहां इंडियन पैक पता नहीं कौन बैठा हुआ है एक जो बहुत तर्कनिष्ठ व्यक्ति बन रहा है। तरह-तरह की बातें कर रहा है। उसकी बातें लेंगे यहां पे। मगर एक बात तो सर थोड़ा बहुत पुरुष बचा है कि नहीं बचा है भाई? वो महिला होकर के संपर्क कर रही है। हमने उसको जो है रील में जाकर के बोला और रील बना दी। उसने जो है महिला होकर के हमारा चैलेंज हम चैलेंज तो हमने दिया ही था। चैलेंज उसी ने दिया था। हमने तो कहा था चैलेंज वगैरह की भावना हटा दो। 510 मिनट से ज्यादा टिक नहीं पाओ। और परंपरा क्यों आवश्यक है पूछना और किसी भी चीज में परंपरा क्यों पूछी जाएगी मैं इस पर बात करूंगा। अरे भैया जब हम तीन बैरन वास की बांसुरिया गिरजा मुख चूमत बनवारी गिरजा का मतलब क्या है? पार्वती गिरजा मुख चूम मत बनवारी। इसका मतलब क्या हो गया? गिरजा पार्वती माता बनवारी का मुख चूम रही है। यह निकलेगा क्या अर्थ? किसका भाष्य मान रही हो? वो इसलिए जरूरी है कि जब भाष्य में अर्थ में विपरीतार्थक बोध होने लग जाए तो निर्णायक कौन होगा? तो जब आर्य आर्य समाज ने दूसरा अर्थ कर रखा है उनहीं शास्त्रों का तो हम आपसे पूछेंगे ना कि

00:12:02:04 आप आप यदि आर्य समाज के आधार पर विदेश यात्रा का समर्थन कर रही हैं या किसी भी सिद्धांत का समर्थन कर रही हैं आर्य समाज के आधार पर तो आर्य समाज की प्रमाणिकता हमें बता दो। जिस विषय में शब्द ही प्रमाण है उसमें आप कैसे खेल लोगे तर्क के बारे में जी तो एक तो ये वाली बात हो गई अभी सारे प्रश्न हम लोग लेंगे एक-एक करके और काफी हंसी की बातें भी थी उसमें उनमें आपस में भी उलझन ने जन्म ले लिया था। जी इबाकू जी आप बताएं। लाइव के पहले चार मिनट के अंतर्गत सबसे पहला स्टेटमेंट तो यह रखा गया कि अगर हम परंपरा से हो सकते हैं पर उस परंपरा का विरोध करें तो उससे ना हमारी परंपरा में कोई खोट आएगी ना हमारे गुरु शिष्य के रिलेशन में खोट आएगी। सबसे पहली बात तो इन्होने यही रखी थी चार मिनट के अंतर्गत कि परंपरा में हजारों अनुयाई होते हैं। अलग अलग आचार्य होते हैं। तो मतभेद होने से इसका मतलब ये नहीं है कि हम उस परंपरा के विरोधी हो गए। तो हम अपनी परंपरा में ही किसी का विरोध कर सकते हैं। सिद्धांतिक रूप से इसमें वो वाली बात भी जोड़ उपनिषद का वो वो जोड़ दीजिए इसमें वो जोड़ दीजिए मैं जवाब दे दूं फिर तैत उपनिषद का [हंसी] बोला है उन्होंने कोटिंग

00:13:17:10 में भूल गया लिखना कि तैत उपनिषद का आदेश है कि गलत आचरण वाले आचार्य एवं परंपरा को त्याग कर दे प्रकृति के नियम के अनुसार गुरु में भी दोष हो सकता है। इससे ये साबित नहीं होता कि परंपरा और गुरु का अपमान हो रहा है। अगर वो त्याग करना चाहे ये बात बोली है इन्होंने। चार मिनट के अंदर ही शुरुआत की। ठीक है। ठीक है। अभी यह बताइए कि जब हम किसी गुरु का विरोध कर रहे हैं। पहली बात तो ये जो तैत्री उपनिषद की ये जो श्रुति वाक्य है इसका अर्थ यदि हम यह ले लेंगे कि भैया गुरु पर अविश्वास प्रकट कर दो। अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तावित कर दो तो फिर वो आपका गुरु ही सिद्ध नहीं होगा। तो वहां पर कहा यह जा रहा है कि गुरुगम्य विद्या जो है गुरु गोविंद और ग्रंथ के द्वारा प्राप्त जो सिद्धांत है वो गुरु के आचरण में जब जहां जहां पर दिखाई ना दे वहां वहां पर गुरु का अनुसरण ना करें। जो गुरु गोविंद ग्रंथ के वो है सिद्धांत उनका आप आचरण करें। पहले तो इसका अर्थ ये लेना पड़ेगा। क्यों लेना पड़ेगा? क्योंकि यदि हमने गुरु पर ही यह लगा दिया तो वो गुरु आपका गुरु ही सिद्ध नहीं होगा। अद्वतारिका उपनिषद गुरु का मतलब अंधकार। रूह का मतलब निकालने वाला। गुरु वो है जिसने आपको अंधकार से निकाला। तो यदि आप यह क्लेम कर रहे हो कि क्या

00:14:32:12 कहते हैं? इतने हिस्सों में मैं गुरु को नहीं जानता। यानी कि आप स्वयं को स्वयं ही अंधकार से निकाल रहे हो वहां पर। इसका मतलब वहां पर आप गुरु से प्राप्त होने वाले वेदों पर डिपेंड नहीं हो। उस अच्छे बुरे की जानकारी के लिए जबकि तेरे लिए कर्तव्य अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है। आपका विवेक प्रमाण नहीं है। प्राथमिकता से शास्त्र प्रमाण है। क्योंकि अपने आप यह बात तो आर्य समाज भी स्वीकार करता है। अपने आप व्यक्ति सीख ही नहीं सकता। ईश्वर को आना ही पड़ेगा। अंतकरण में धर्म का बोध देने के लिए बताइए हम अपने आप कहां से आलोक अपने आप बोध हो ही नहीं सकता हां अपने आप आप पशु हैं। स्वयं से आप पशु हैं। जब तक कोई बाहरी बल आपको आ के मानवता की शिक्षा नहीं देगा। आप स्वयं से पशु हैं। मध्य मास मैथुन भागवत में वचन आया जो लोग ये मानते हैं भागवत को वहां भव्य राधा कृष्ण दास भी बैठा। फिलहाल आज मुझे जो है इन लोगों में भव्य राधा कृष्ण दास का तब भी मुझे एक भूमिका उसकी ठीक लगी कम से कम हालांकि उसके द्वारा स्वीकार सिद्धांतों का वहां इतना प्रचंड विरोध हो रहा था उसको जाना नहीं चाहिए था जाना था तो कम से कम काउंटर करना चाहिए था भाई परंपरा तो उसके भी ग्रंथों में लिखी हुई है परंपरा से

00:15:47:13 ही होना चाहिए अर्थ परंपरा से ही होना चाहिए तो परंपरा का जब खंडन हो रहा है चलो मगर मगर फिर भी उसने इतना तो वो दिखाया कि भाई अपने सिद्धांतों के विपरीत तो नहीं बोला कम से कम सुनता रहा चलो इतना तो देना पड़ेगा उस लड़के ने उस लड़के ने इतना तो दिखाया ना अपना अपने सिद्धांतों के प्रति और ये लोग कैसे हैं सिद्धांत विहीन वही वो लड़का वो लड़का जिसका कोई सिद्धांत नहीं वो कहीं भी हाथ डाल देगा उसके लिए कुछ भी है कोई सिद्धांत है ही नहीं नास्तिक भी ऐसे ही होते हैं सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है ये उनको नहीं मालूम उनके पास ठोस आधार नहीं है वो कभी भी कोई भी निर्णय ले सकते हैं लिबरल होने के नाम पर। ठीक है? तो अब आते हैं वापस वो जो प्रश्न चल रहा है गुरु का विरोध तो गुरु का विरोध कर सकते हैं। बिल्कुल कर सकते हैं। पहली बात तो जिसका विरोध कर रहे हो वो गुरु सिद्ध नहीं हो रहा है। दूसरी बात आपके पास अधिष्ठान होना पड़ेगा अधर्म का फिर भी। यानी कि मान लीजिए कि किसी की निष्ठा जो है अह मुक्तेश्वर आनंद जी में नहीं आ रही है। ठीक है? और उनके उनका वो विरोध कर रहा है। ठीक है। मगर उसका अधिष्ठान धर्म का कौन होगा? शंगेरी के शंकराचार्य पूरी के शंकराचार्य यानी कि अधिष्ठान आपका बेस होना चाहिए कि मैं इस बेस पर खड़ा

00:17:02:19 होकर के अब विरोध कर रहा हूं। अमुक गुरु का यदि आप सिरे से सभी परंपरा से प्राप्त प्रामाणिक आचार्यों को ठुकराते हुए किसी के विरुद्ध बोल रहे हैं तो वहां पर आपकी वैदिकता पर प्रश्न उठ जाएगा। वहां पर आपकी वैदिकता पर प्रश्न उठ जाएगा। भाई एक लड़का था इसमें सांवले का लड़का बिल्कुल नपुंसकता वाला व्यवहार भाई खुले चैनल में बोल रखा है 7408301869 तुम वहां पर ताल ठोक रहे हो कि मेरी डिबेट होगी ये होगा तो मैं पूछूंगा शिवश से ये करूंगा अरे भाई WhatsApp करो फॉर्म भरो लाइव आओ क्यों नहीं आ रहे हो क्योंकि नपुंसकता का व्यवहार है इसलिए नहीं आ रहे हो ना बातें ठुकवा लो बस एक मात्र शक्ति मिल गई जिसका जिसको ना सर का पता है ना पैर का पता है वो मंद बुद्धि पने से कार्य करती जा रही है उसके कंधे पर बंदूक रख के अपनीप गोलियां चला लो कि हम कुटे थे फलाने सन में शिवश के द्वारा तो हम भी अपना बदला ले लें इसके सहारे हम कुटे थे फलाने महीने में शिवश के द्वारा तो हम भी इसके [हंसी] सहारे इस महिला के सहारे जो है वो ले लें इसके 2 लाख सब्सक्राइबर हैं Instagram पर तो इसके जो इसको इसके 2 लाख में से 500 तो गाली देंगे ही शिवश को हमारे दिल को तसल्ली मिल जाएगी उसने हमारी रातों की नींद छीन ली है

00:18:17:23 [हंसी] वो वो पगलिया वो पागल बनके हां हां वो पगलिया की तरह और वो शिवश नारायण द्विवेदी डायरिया करके गए ये अरे भाई तुम्हारे पास इतने तर्क थे नियम नहीं है मध्यस्थ नहीं है परंपरा पे सवाल नहीं होना है ये सब तर्क मर गए थे क्या तब जब सामने बैठी थी अब्बा डब्बा चब्बा तर्क भी तर्क भी अगर हम छोड़े तर्क भी अगर हम छोड़े नैतिकता की बात करें इन्होंने ने बोला था कि शिवश जी के जो अनुयाई है या फिर शंकर परंपरा के जो इंटरनेट पर फॉलोअर हैं वो इनकी फोटो एडिट कर रहे थे। एआई से बना रहे थे। इनको गालियां दे रहे थे। तब अब इनकी नैतिकता कहां गई? जब इन्होंने रील में आपकी फोटो को यही करा आपके बारे में जो जो बुरा नाम बिगाड़ा तब इनकी नैतिकता कहां गई? जबकि आपने मेरे हिसाब से ऐसा कुछ नहीं कहा। मैंने पर्सनली इन पर ऐसा कोई अटैक नहीं किया है। ठीक है। और अभी भी ये पगलिया कहना, मंदबुद्धि कहना यह मर्यादा के अंदर है। संडास नहीं भेज दिया तुमको। ठीक है। शौचालय नहीं भेज दिया तुमको। भाई अश्लील शब्द अश्लील अश्लील चित्रण नहीं कर दिया तुम्हारा। नैतिकता बदल गई व पागल कहीं की इनका एक और इन्होंने पांचवे छठे मिनट में ही कहा था।

00:19:33:01 पागल ही हो गई। ऐसा करंट का झटका लगा उसको उस दिन से पागल ही हो गई है। जाने क्या-क्या बक रही है? अच्छा कोई भी कोई भी इंटेलेक्चुअल कोई भी प्रबुद्ध व्यक्ति देखेगा वो जो रील बनाई है उसमें वो संडास का सीन दिखा रही है ये धर्म का प्रचार कर रहे हो तुम लोग हसे बदला लेना हो रामपाल रामपाल गैंग ने यही किया है राक्षस का चेहरा बना दिया कॉमेडी का वही तुम कर रही हो यही यही है सिद्धांत तुम्हारे पास क्योंकि वो तो सिद्धांत है नहीं ना भाष ब्रह्म सूत्र का ना कुछ है अरे भैया धर्म क्या है जिस विधि का परवसान मोक्ष में हो तो तुम्हारा मोक्ष कौन सा है? अद्वैत है, द्वैत है, विशेषता द्वैत है। अगर नहीं है तो तुम्हारा धर्म कहां से सिद्ध होगा? जब तुम धर्म पे बात करने आओगी प्रबुद्ध जनों से जब बात करने चिलाटुओं को तुम पकड़ती हो और बात करती रहती हो। ठीक है? करती रहो। बौद्धों को करो जाकर के जितने उसमें भी किसी दिन कोई खड़ा हो जाएगा तो टाइट हो जाएगा सब मामला। अरे पहले अपना धर्म सुनिश्चित तो करो मेरा धर्म है क्या उस धर्म के आधार पर अपनी बात रखना शुरू करो ना तो तुमने यह तय किया कि त्रतवाद है आर्य समाज का ये भी मैंने जानता हूं तुमने इतना नहीं सोचा होगा बस लगे

00:20:48:07 फायर मामा आ गए मामा आ गए वाला तो मैं वो जरा पूरा कर लूं वो जो गुरु का विरोध हो सकता है गुरु का विरोध हो सकता है मगर तब जब हम अधिष्ठान के रूप में किसी और अन्य सामर्थ्यवान गुरु को पकड़े रहे परंपरा प्राप्त आचार्य का विरोध हो सकता है मगर तब जब हम किसी अन्य परंपरा प्राप्त आचार्य की शरण में हो। अगर हम स्वतंत्र होकर के परंपरा प्राप्त आचार्य का ही विरोध करेंगे कि हम स्वतंत्र है। हम किसी को नहीं मानते और हम इसका विरोध कर रहे हैं। यानी कि हम संप्रदाय परंपरा पर विश्वास नहीं कर रहे। जब परंपरा पर विश्वास नहीं कर रहे तो सुती परंपरा पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होगा। परखच्चे उड़ जाएंगे। परखच्चे जिस दिन सामने आओगे और परंपरा पर बात करना आवश्यक क्यों है? तुमको प्रमाण हम देने से पहले सुनिश्चित तो करें कि तुम प्रमाण मानती किसे हो? यही बातें हमारी उनसे होती है ब्रह्मा कुमारी वालों से देख लो जाकर के वीडियो यही बातें रामपालियों से होती है भाई तुम हमें एक शास्त्र का कोई वाक्य ला के उसके नीचे दबाने का प्रयास कर रहे हो तो वो शास्त्र आया कहां से है और उसका तुम अपना मनगढ़ंत अर्थ लेकर के और हम पर उसका दबाव डालना चाहती हो तो हम उसके स्त्रोत की बात करके यह सिद्ध करते हुए कि भैया इसका वही अर्थ मान्य होगा जो हम बताएंगे क्योंकि यह परंपरा से हमारे पास आए हैं।

00:22:05:18 अच्छा एक बात बताओ कि यह जो मातृशक्ति है जो इस समय मेंटल उसमें चली गई है विक्षिप्तता में तो ये कोई बात जो इसके रेफरेंस से मानी जाएगी वो यह बोलेगी तब मानी जाएगी या कोई भी बोल देगा तो मान ली जाएगी इन्हीं के रेफरेंस से मानी जाएगी मतलब नहीं नहीं इनका कहने का मतलब है कि इनके वाक्य का अर्थ कोई दूसरा बताएगा अभी मैं वहां गया था दिल्ली में पालम में आध्यात्मिक विश्वविद्यालय आप तो थे ना वहां सनातन शंकर जी है ना जी [गला साफ़ करने की आवाज़] जी वहां पे बाय प्रोडक्ट निकला हुआ है एक ब्रह्मा कुमारीज का ठीक है आध्यात्मिक अब वहां पे बाय प्रोडक्ट निकला है उसने कहा मैं भगवान हूं मैं भगवान हो चुका हूं भगवान मेरे अंदर आ चुका है और वहां पे करीब 20 25 50 लड़कियां जो है ब्रेन वाश करके वहां पर रह रही है अपने फैमिली से दूर आ गई फैमिली वाले हाई कोर्ट जा रहे हैं सुप्रीम सुम्री कोर्ट जा रहे हैं कि हमारी बच्चियों का ब्रेन वाश करके यहां रखा हुआ है। हम वहां गए तुम नहीं गए थे। केवल बातें झोंकते हो कमरे में बैठ के। जिस दिन बर्फ की सिल्ली पे लिटा के चार-चार डंडे पड़ेंगे ना उस दिन ये जो शौक चढ़ा है ना ये YouTube YouTube पे और जो है एक्शन पैक फिल्में

00:23:20:24 बनाने का। सब उतर जाएगा नशा। जिस दिन धरातल पर सामना होगा मुसीबतों से। हां। उन्होंने ये भी कहा था। इसमें उन्होंने ये भी कहा था अपनी लाइव में 30 मिनट के आसपास कि आपकी परंपरा यानी शिवश जी की परंपरा में ऐसा कोई भी एक व्यक्ति दिखा दीजिए जिसने उनसे ज्यादा नव बौद्ध और इस्लाम का खंडन किया हो उनसे ज्यादा मेहनत करी हो सैद्धांतिक खंडन में ये ये अभी लेते हैं ये अगला प्रश्न है तो जब मैं वहां गया यहां पर एक इस पॉइंट को याद रखिए

00:23:58:04 यहां यहां पे है कोई आजादी वादा करके जो कि वहां पे जुड़े थे वो यहां पे लिंक मांग रहे हैं कमेंट में। नहीं अभी ये जो चर्चा है ये कोई डिबेट वाली चर्चा नहीं है। ये उनको रिप्लाई है केवल कोई डिबेट हम हम यहां पे वो नहीं करते हैं कि भैया वो चार तरह के लोगों को बिठा लो आपस में वो चिल्लप होने लगे उनके बीच में ही जो उनके यहां हुआ है। आज उनके यहां हुआ है ना? नहीं नहीं हमारे ये हमारे साथ आज यही हुआ है। यही हुआ है। अच्छा तो दे दो उनसे कहो नंबर पर वो WhatsApp करें 748301869 वहां पर इनको वो दिया जाएगा क्या कहते हैं लिंक क्योंकि यहां डाल देंगे तो सबके पास आ जाएगा तो मैं ये कह रहा था जी आपको पता चल गया होगा हां तो मैं ये कह रहा था कि जब मैं वहां गया तो उसने क्या कहा कि हम वेदों को तो मानते हैं पर उसका अर्थ में सबने विकृति कर ली है भाई वेदों के अर्थ में यदि तुम्हें लग रहा है सबने विकृति कर ली तो तुम्हारे पास तो वेद नहीं आए ना तो वेदों की प्रामाणिकता कहां से सिद्ध हो रही है तुम छोड़ दो ना वेद का नाम लेना अगर गुरु गलत हो सकते हैं और तुम्हारी नजरों में सारे गुरु गलत हो सकते हैं कोई गुरु है ही नहीं जिस पर आप विश्वास

00:25:13:10 कर सको कि झूठ नहीं बोलेगा वेद का अर्थ बताते समय धर्म का अर्थ बताते समय उससे पौरुष दोष हो सकते हैं गुरु से वाकलन हो सकता है पौरुष दोष हो सकते हैं मगर एट द एंड उसके द्वारा धर्म की और ब्रह्म की व्याख्या करते समय यदि यदि आपको यह लग रहा है कि ये झूठ बोल सकता है अज्ञानता वश लोभवश मोह वश भय वश झूठ बोल सकता है तो तुम ऐसे किसी गुरु को ढूंढो जो परंपरा से हो जिससे जिसमें तुम्हारी प्रमाण्य बुद्धि हो जाए या तब तो वैदिक रह पाओगे और अगर नहीं ढूंढ पा रहे हो तो वेदों का नाम लेना बंद करो मैं ये नहीं कह रहा कि गुरु में दोष नहीं हो सकते मगर यदि हो सकते हैं तो वेदों में भी दोष हो सकता है यह बात क्यों छोड़ देते हो यदि गुरु में दोष हो सकता है तो दोष ही गुरु के द्वारा मिलने वाले वेद मंत्रों में भी दोष हो सकता है। वहां पर भी वो झूठ बोल सकता है। ये आधा न्याय क्यों कर रहे हो? अर्ध कुकुट न्याय क्यों कर रहे हो? कि जो गुरु झूठ बोल सकता है वो तुम्हें मंत्र सत्य देगा। 100% ये क्या है? प्रमाण बुद्धि खत्म करो। बाहर आओ। उन वेदों का नाम लेना छोड़ो जिन्हें हम वेद कहते हैं। तो क्या करोगे? नया ग्रंथ लिखो। अपनी तर्क शक्ति के आधार पर जो स्वतंत्र हो के तुम्हें सही लग रहा है धर्म के नाम से लिखो उसको

00:26:28:12 नाम दो क्या नाम देंगे अवेकनिंग अवेकनिंग शास्त्र या फिर वो क्या था इंडिया पैक शास्त्र है ना भव्य तो उस बात को मान नहीं रहा था वो मैंने देखा था शांत भव्य शांत था वहां भव्य का रोल आज बहुत डिसेंट रहा उसके सिद्धांतों के विरोध में बात हो रही थी वहां किसी ने उसने उसका किसी उसने किसी का बंदे ने पक्ष नहीं लिया मेरी जानकारी में नहीं लिया ले लिया हो तो बात अलग अलग है। मगर भव्य का रोल वहां बहुत ठीक था। कम से कम भाई सामर्थ्य है नहीं कि सबको हम काउंटर कर पाए तो कम से कम मौन रह लो। इतना तो किया उस बंदे ने। यही होता है सिद्धांत विहीन सिद्धांत सिद्धांतवादी व्यक्ति की ये जो इक्वलिटी होती है वो अपने सिद्धांतों की रक्षा करता है भाई। ये कैसा सिद्धांत है तुम्हारा जो आज तुम कह रहे हो हिंदू हिंदू यूनिटी कल तब तुम शंकर संप्रदाय रामा संप्रदाय सब पर उंगली उठा रही है विदेश गमन के मामले में। अरे मौन हो जाओ ना सम्मान कर लो उनका उन आचार्यों का भाई आचार्यों ने बात कही है इस बारे में काउंटर ना करके अलग तरीके से मुक्ति अगर तुम्हारी वो अपनी वो जो व्यक्तिगत दुश्मनी है उसप तब बात हो ना तुमने अपने आप को स्वतंत्र घोषित करके ही हमें यह मौका दिया है कि हम तुमसे पूछ सके यदि तुम स्वतंत्र हो तो तुम्हारी वैदिकता सिद्ध कैसे कर रही हो और अगर तुम आर्य समाज के द्वारा आओगी तो

00:27:43:15 ना तो आर्य समाज की प्रामाणिकता प्रामाणिकता से आर्य समाज सिद्ध होगा और ना ही वह यक्तिक धरातल पर सिद्ध होगा ना ही उसका धर्म धर्म सिद्ध होगा ना ही वह ब्रह्म सिद्ध होगा कहां से आओ क्या करोगे वो खुद ही अपना अस्तित्व तलाशता ढूंढ रहा है आज भी लोग आर्य समाज के नाम से कभी भी कहीं भी संस्था खोल सकते हैं और जिहादियों की शादी करवा रहे हैं अपने यहां क्या कर पा रहा है आर्य समाज मैं अभी अगर शंकराचार्य के नाम से गोवर्धन मठ के नाम से कोई गलत चीज बोलने लगूं तो गोवर्धन की ओर से मना कर दिया जाएगा ना ये हमारा आदमी नहीं है आर्य समाज ये नहीं कर पाएगा क्योंकि गुरु गद्दी है ही नहीं। गुरु परंपरा है ही नहीं। परंपरा पर तो खुद लात मारी ना हमने तो कोई भी अपने आप को आर्य समाजी कहने के लिए स्वतंत्र घूम रहा है। अभी देखो जाकर के कौन सी माता का मंदिर है वो? हां जहां पर वीडियो बनाया था आपने खड़ा होकर। मैंने वीडियो बनाया था पूजा भी हो रही है। वहां पे मूर्ति पूजा हो रही है। आर्य समाज मंदिर लिखा हुआ है। क्या कर पा रहे हैं तुम्हारे लोग? गोवर्धन मठ के नाम से तुम खुलवा दो। हम कम से कम हम उसप प्रयास तो कर सके। हमारे पास अधिकार तो है लड़ाई जीत इस पे संदीपन जी ने क्या कहा था संदीपन जी ने कहा था कि भाई जहां पर आर्य समाज मूर्ति पूजा कर रहा है वहां भी तुम हमारा विरोध कर रहे हो जहां पर मूर्ति पूजा नहीं कर रहा है वहां भी तुम हमारा विरोध

00:28:58:19 कर रहे हो [हंसी] तुमको हम याद दिला रहे हैं कि परंपरा को ना मानने की स्थिति में तुम्हारा अपना अस्तित्व किस हाल में है जिस दिन कभी मैं अपनी किताब लेकर के आ जाऊंगा तुम्हारे सामने खुद की छापी हुई सत्यार्थ प्रकाश मुझे कुछ तुम्हारे पास अकाट उत्तर नहीं होगा मुझे देने के मेरे पास होगा। समझ में आ रहा है? पहली बात तो इसीलिए इसीलिए निर्भय आर्य जैसे जो है ये कभी भी ये नहीं कहते हैं कि हमारे समाज की संस्था से जुड़े हुए हैं। ये कहते हैं कि हम दयानंद महर्षि दयानंद को मानते हैं और बस उन्हीं के सिद्धांतों पे बात कर कभी नहीं बोलेंगे कि हम अग्निवर्त नष्ट से जुड़े हैं या आर्य समाज दिल्ली सभा से जुड़े हुए हैं। कभी नहीं कहते क्योंकि उन्हें पता है इनका आपस में विरोध चल रहा है सबका। तो इसका मतलब जो आर्य समाज वर्तमान में है वह विश्वास के योग्य नहीं है। बिल्कुल बिल्कुल तो दयानंद जी ने अपनी किताब किसको दी है तुम में से बताओ किसी को भी नहीं दी थी फस जाओगे यार इसीलिए कहता हूं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में तुम्हें समझ में नहीं आता है वो स्त्री हो स्त्री वो पगला गई है उसको अब संडास डायरिया ये सब दिखाई देने लगा है धर्म की बातों में मुझे ये लगा आज की जो स्ट्रीम देखकर मुझे यह लगा कि वो अपना मानसिक तन संतुलन खो चुकी है कुछ भी बोल रही है अरे आप इंस्टा पे नहीं हो उसने बड़ी

00:30:13:22 कॉमेडी वाली रील बनाई उसको देख के समझ में आया कि वाकई में शौक लग गया उनको। बहुत बड़ा शौक लगा। और अरे मुझे तो जब जब मैं देख रहा था तो मुझे एक ही मन में विचार आया। मैंने कहा शिवास जी को बोलूंगा शिवास जी परंपरा नहीं पूछनी थी। परंपरा क्यों पूछी आपने? [हंसी] परंपरा इसलिए पूछी कि आपको पहले हम धर्म के अंदर तो लाए। फिर आपको बता देते हैं। आपने रामानुजाचार्य जी पर विश्वास किया। देखो रामानुजाचार्य विदेश गमन कर वो कर रहे हैं। मत खेलो ना यार। जब तुम्हारे अंदर उन चीजों से भिड़ने का सामर्थ्य नहीं है। दूर रहो। दूर रहो। दूर रहो ना। कुछ आता जाता है नहीं। नास्तिकता का खंडन है ना मोक्ष के बारे में कभी पता किया। धर्म की परिभाषा मालूम नहीं होगी। कुछ नहीं है। जीरो। बढ़ी नहीं। उस दिन आगे। पूछता मैं ब्रह्मसूत्र का भाष्य कौन? किसका मान रही हो भाई? अरे भैया तुमसे बात किस आधार पे करें? किस आधार पे बात करें हम तुमसे? अपनी कुछ वो तो बताओ बेस यह मेरा बेस है। अच्छा वह बेस जो तुम बताओगी अब तुमने बता दिया आर्काइव बेस है तो वह आका तुम्हारा बेस सिद्ध ही नहीं होगा। तुमको कोई रैशन बेस बताना होगा ना जिसको हम तुम्हारा बेस मान सके। तुम तो कह दो कुरान मेरा बेस है। एक लाइन जो

00:31:28:26 भी चीज मुझे प्रकृति के लिए अच्छी लगेगी मैं मान सकती हूं कि वो वेद है। यह तुम्हारी वेदों को वेद मानने की परिभाषा है कि मुझे जो अच्छा लगेगा वो मैं मान सकता हूं कि ये वेद का अर्थ है। वाह निठारी को अच्छा लगेगा। कुकर में उबाल के बच्चे खाओ। वो कह देगा ये भी वेद का अर्थ है। ह भाई मैच्योर लेडी हैं आप। घर गृहस्ती वाली हैं। थोड़ा सा मैच ये सब बच्चे हैं। लड़के हैं जो उकसा रहे हैं। आपको आपकी आयु होगी इनसे डबल। थोड़ा उसका ध्यान रखो अपने लेवल का मैच्योरिटी का। वो बच्चे उकसा रहे हैं। वो आगे कर रहे हैं। अच्छा मैं वो वो पहला चैप्टर पहला चैप्टर पूरा कर दूं। बार-ब रह जाता है। तो पहला चैप्टर क्या है कि गुरु का हम विरोध कर सकते हैं। मगर किसी अन्य परंपरा से प्रामाणिक गुरु के सानिध्य में रहते हुए यदि हमें वैदिकता की लाइन में रहना है और यदि हम स्वतंत्र होकर के कर रहे हैं कि नहीं हमें किसी पर विश्वास नहीं है तो हमें घोषित करना होगा कि फिर जो गुरु गलतियां कर सकता है गलत बोल सकता है वो वेद भी गलत दे सकता है। मान लो ना फिर वेद में प्रमाण बुद्धि नहीं रह जाएगी। ये बात है। तो ये इसका आंसर हो गया। दूसरी बात इन्होंने एक बात कही है कुरान वाली कि जितना मैंने खंडन नहीं किया। क्या खंडन है? ओपन चैलेंज दे रहा

00:32:43:27 हूं तुमको। मैं मुसलमान बन के बात करूंगा। टिक नहीं पाओगे 10 मिनट। और फिर तुम बनना जो बनना हो और मैं शंकराचार्य का शिष्य बन के बात करूंगा। पर कच्चे उड़ जाएंगे। बेवकूफ हो तुम और कुछ नहीं है। सिद्धांत विहीन हो। पागल हो चुकी हो। अंधे अंधी हो चुकी हो। जो तुम्हारे शास्त्रों को शास्त्र के ज्ञान को प्रिजर्व करके बैठे हुए हैं उनहीं पर उंगली उठा रही हो बेवकूफ

00:33:17:03 और यह करने के चक्कर में तुम अपना पल्ला विधर्मियों के सामने कमजोर करके प्रस्तुत कर रही हो और ये जो तुम्हारा दिखावा है कि हम परंपरा का विरोध नहीं कर रहे हैं। अरे भाई तो क्यों शंगेरी मठ के नाम पे तुमने बोला कि इतनी डोनेशन आती है फिर भी ये झुंझुन झुंझुनों को मेरे सामने भेजा है। तो वो तो हम मुक्तेश्वर जी से जुड़े हुए लोग थे ना तुम्हारी जानकारी में फिर क्यों शंगेरी वालों पर कटाक्ष किया और तुमको अगर कोई भी शंकराचार्य से जुड़ा हुआ कोई व्यक्ति कुछ कह देगा तो उस शंकराचार्य के जो दूसरे शिष्य होंगे वो उनसे जुड़ा हुआ माना जाएगा और वो उनके फेवर में माना जाएगा तो फिर जो शंकराचार्य का वो शिष्य तुम्हारे यहां क्या कर रहा है जो तुम्हारे यहां बैठा है वो उसके गुरु भाई बहन नहीं है क्या मेलोडी ड्रामा कर रखा है अजीब पंचरंगी वो गाना गा लो तुम हम पागल नहीं है भैया हमारा दिमाग खराब है। वो गाना गा लिया करो।

00:34:07:15 बोलिए। बातें भी बातें भी घुमा ही रही है। कहती है कि कल इन्होंने जो लाइव हुई थी आपकी और उनकी उसमें इन्होंने ये कहा था कि उनके पिता श्री माता श्री रामानुज जी परंपरा से हैं। वो नहीं है। उन्होंने ये कहा है और कहती है कि आपने बातें घुमाई है। आपने लगातार अग्रेसिव खेला है कि बर्डन ऑफ उन्होंने उन्होंने दोनों बातें कही है। उन्होंने कहा मेरे परिवार से जो मुझे मिलाया मैं उसी की हूं। हम और फिर जब मैंने कहा तो राम फिर मैंने जब ये कहा कि रामानुज रामानुज परंपरा प्रमाण है आपका प्रमाण मानती हैं आप अगर मानती हो तो मैं उनका आपको बताऊंगा ना कि रामानुजाचार्य क्या कह गए हैं विदेश यात्रा के बारे में और इसमें इन्होंने बात घुमाई है कि आपने ये नहीं कहा कि आप रामानुजय संप्रदाय को परम प्रमाण मानती है कि नहीं। उन्होंने ये कहा है आपके लिए बोला है कि शिवश जी ये कह रहे थे कि आपने सारी किताबें पढ़ी है कि नहीं रामानुज संप्रदाय की। ये दिखा दो मैं अपना चैनल ये दिखा दो मैं अपना चैनल डिलीट करता हूं। बोलो हो सत्य के पक्ष पहली बात तो थोड़ा सा भेजे में धर्म को डालो। कभी राम को जाना नहीं। कभी सीता को जाना नहीं। अरे भैया थोड़ी सत्यवादी तो बनो। सुनो क्या हुआ था वहां पे? एक बार बोल दूं इसका मैं रिप्लाई दे दूं। वहां पे क्या हुआ था? जब उनसे मैंने पूछा कि कौन सी परंपरा?

00:35:22:24 तो इन्होंने कहा जिसमें मेरे माता-पिता दीक्षित है उसी में मैं उसी की मैं मानी जाऊंगी। तो मैंने कहा ठीक है तो वो प्रमाण मान ले आपका तो क्योंकि सुनिए सुनिए सुनिए क्योंकि प्रमाण उनको मालूम है रामानुजाचार्य को भी प्रमाण मान लेंगे तो उनका धर्म धर्म तो एक ही है ना ब्रह्म भले ही अलग हो शंकराचार्य और रामानुजाचार्य जी का धर्म एक है मोटे तौर पर सारी मान्यताएं दोनों के यहां पर सेम है ठीक है तो तो विदेश यात्रा के मामले में दोनों एक मत है तो तो क्या घुमाया इन्होंने कि अरे मैंने उनसे वेद नहीं पढ़ने उनके सारे शास्त्र पढ़ेंगे ये सारे शास्त्र पढ़ने की बात तो इन्होंने बोली है। मेरे ऊपर डाल रही। मैं तो ये पूछ रहा हूं कि आपके लिए क्या वो प्रमाण है? तो मैं सीधी सिंपल सी बात उनकी व्याख्या आपको प्रस्तुत कर दूं। तो क्या आपके द्वारा रामानुजी होते हुए विदेश यात्रा का विरोध सिद्ध नहीं होगा। समझ रही है? हां। आपको आर्य समाजी बनना होगा। तो घोषित करो मैं आर्य समाजी हूं। तब तो तुम फिर आर्काइव समाजी बन रही हो। इंटरनेट समाजी बन रही हो। कम से कम ये तो घोषित करो तब हम तुमसे बात करें। चलो ठीक है आर्य समाज हूं मैं अब बताओ तो फिर हम तुमसे बात करें कि तुम्हारा ईश्वर सब शक्तिमान है क्या तुम्हारे पास वेद कहां से आए आर्य समाज के पास वेद कहां से आए वो भी पूछा जाएगा आर्य

00:36:37:27 समाज हमारे लिए कुछ नहीं नगण्य कुछ नहीं है उसका अपना अस्तित्व नहीं है कुछ केवल शादियां कराने पे भागे हुए जो माता-पिता की आज्ञा के बिना जिनको विवाह करना होता है जगह-जगह देख लो जाकर के पोस्टर लगे रहते हैं लव मैरिज करने के लिए लव मैरिज करने के लिए संपर्क करें इसी से इनका अस्तित्व है आर्य समाजियों का फिलहाल वर्तमान में लगभग लगभग कुछ है कुछ है जो प्रबुद्ध व्यक्ति हैं जो उसको उन सिद्धांतों को ढो रहे हैं मगर जो मूल अस्तित्व जो बचा हुआ है वो ये मंदिर जो खोल खोल के बैठे बैठे हुए हैं और उन मंदिरों में मैं गया हूं उन मंदिरों में आप देखो सिद्धांत का क्या चल रहा है कचरा विवेकानंद की भी फोटो है वहां पर शंकराचार्य की भी फोटो है वहां पर पीछे यहां हवन है यहां वो इनका कुंड है जिसके फेरे पड़ रहे हैं। पीछे शंकराचार्य और सारे आचार्यों का सारे आचार्यों का वहां फोटो है पीछे जैसे वो इनके आइडल हो। इस मामले में मुझे आर्य समाज ठीक लगता था कि जो भी सिद्धांत है उनके प्रति कट्टर रहता था। ये वहां माथा मतैया नहीं करता था। उसकी तरह जैसे अभी हम वहां गए थे। वो जो हंस भगवान की जन्मस्थली पर जो कब्जा

00:37:53:10 किए बैठे हैं उसने वहां जीसस क्राइस्ट और ये बुद्ध और सबका लगा रखा था। ये हाल है इनके मंदिरों के और इसीलिए जो प्रबुद्ध लोग हैं इनके ही यहां के ये जो क्या कहते हैं निर्भय जैसे और ये जो ऋषि मंतप वाले वो कौन? संदीपन आर्य संदीपन संदीपन हां ये लोग इसीलिए इन लोगों से दूर रहते हैं। मगर प्रॉब्लम यह है कि आपने अगर यदि अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया आपके यहां गुरु परंपरा नहीं है तो तुम दयानंद ने दयानंद जी ने क्या कहा वो तुम्हारी भी दिक्कत है वो एग्जैक्ट तुम भी नहीं फुल बोल सकते निर्णायक तरीके से तुम बात नहीं कर सकते दयानंद जी की ओर से दिक्कत यही है और तुम कहो जो ब्रह्मज्ञानी होगा जो व्याकरणी होगा यानी कि मुझे यह तय करने के लिए कि कौन दयानंद जी की तरफ से प्रामाणिक व्यक्ति है बोलने वाला मुझे पहले पूरा व्याकरणी खुद बनना पड़ेगा जब मैं उसमें पारंगत हो जाऊंगा तब जाकर करके चेक करूंगा दयानंद जी दयानंद जी ने क्या सिखाया अरे भैया जब मैं पारंगत हो गया तो मुझे क्या जरूरत है उनसे सीखने की कुछ उसमें पहले घोषणा होनी चाहिए शब्द प्रमाण से वो घोषित होगा ये है निर्णायक वहां से बोलने वाला फिर मैं उससे सीखूंगा चीजें कि दयानंद जी ने क्या कहा है थोड़ा जो इंटेलेक्चुअल लोग हैं थोड़े बहुत आर्य समाज के सोच के देखो भाई आत्म मंथन

00:39:08:19 तो करो शीशे में देख के अपने आप से बातें तो करो थोड़ी किसकी रक्षा कर रहे हो बिल्कुल दुश्मन नहीं तुम्हारा ज एक और ऋषि उवाच वाला तो कहता है कि जो व्याकरण पढ़कर वेद मंत्रों का अर्थ करता है वो ऋषि हो जाता है तो भैया अगर उस आधार पर व्याकरण पढ़ लो और ऋषि तो फिर कई हो जाएंगे तो फिर यानी मैं तो ये कह रहा हूं अगर किसी का किसी की प्रामाणिकता जांचने के लिए यदि हमें उस शास्त्रों को पूरा पहले खुद जानना है वो किससे जानेंगे क्योंकि हम प्रामाणिकता इसलिए ढूंढ रहे हैं किसी की कि हमको पढ़ाई किससे करनी है? हमको पढ़ाई किसके अनुगत रह के करनी है? किससे सिद्धांतों को समझना है? हम इसलिए पढ़ प्रमाणिकता पूछ रहे हैं। और वो कह रहा है कि भैया प्रमाणिक वो होगा जो अर्थ कर देगा। इसका मतलब हमें मालूम होना चाहिए कि अर्थ क्या है? तभी तो हम ये देख पाएंगे इसने अर्थ किया कि नहीं किया है। तो जब हमें मालूम ही है अर्थ क्या है? तो काहे की क्या आवश्यकता है प्रमाणिकता की? यही कर्म वर्ण व्यवस्था है। यही है कर्म वर्ण व्यवस्था कि जो ब्रह्म ज्ञानी होगा वही वही ब्राह्मण अरे भैया जब ब्रह्म ज्ञानी होगा ये हम पता लगा पा रहे हैं। इसका मतलब हमें ब्रह्म ज्ञान होना चाहिए तब तो हम किसी किसी का ब्रह्म ज्ञानी होना नाप सकते

00:40:23:22 हैं। तो जब हमने एक तो जो सूरज आर्य का बंदा है वहां पर बैठा हुआ था वो पता है क्या कह रहा था? कह रहा है अगर हर चीज के लिए गुरु के पास जाना पड़ रहा है तो फिर किताबें प्रिंट क्यों कर रखी है? इसको प्रिंट आउट मत करो। गीता प्रेस से मत छापवाओ किसी भी चीज को कि यार आपको हर चीज के लिए भी गुरु के पास ही जाना पड़ेगा। मतलब ऐसीसी बातें वहां पर करी गई जहां पर मतलब ये लोग सोचते नहीं है बिल्कुल तर्कहीन बातें हैं कि भैया [गला साफ़ करने की आवाज़] किताबें क्यों छपवाई अगर उसके लिए समझने के लिए आपको गुरु के पास जाना पड़ रहा है। अच्छा इनकी क्या है पता नहीं जानबूझ के मंदबुद्धि अपना जो तत्व प्रस्तुत करते हैं कि वास्तविकता में मैं कभी-कभी कंफ्यूज हो जाता हूं क्योंकि इनके यहां पर भी मैं एक समझदारी देखता हूं मगर कहीं पे ये अपनी समझदारी को अपने से हटा के खूंटी पर टांग देते हैं और वहां पर अपनी वर्चस्वता अपनी अंधी दौड़ उसको आगे कर देते हैं और जो अपनी तर्कनिष्ठता थी जो न्यायप्रियता थी उसको भंग कर देते हैं लोग और ये ये बात मैं निर्भय से भी कहूंगा और इनसे भी कहूंगा संदीपन रॉय से

00:41:26:28 परंपरा जो सिद्धांत है ना उसका विरोध करते हुए आपके आर्य समाज का अस्तित्व तक सिद्ध नहीं होगा कुछ नहीं कर पाओगे सब खाल खींच जाएगी एक मिनट में वो निर्भय जब निर्भय सारा हां निर्भय जब आए थे निर्भय जब आया था छोटा भाई है उस तरह से बात कर रहा हूं निर्भय जब आया था तो मैं बहुत उसको लेकर के हमंब्ल था। मुझे उससे कुछ वाइब्स आती हैं भाई जैसी छोटे भाई जैसी। तो मैं उस तरह से था। मैं उस मोड में था ही नहीं कि मुझे जो है इसको जो है ओवर एंड आउट करना है। उस मोड में मैं था ही नहीं। और मैं यह भी चाहता था कि भाई हम लोग कई बार एक ही टॉपिक कर चुके हैं कि सर्वशक्तिमान और वही तरीका अपना करने परंपरा और सब तो कुछ नया जानने को भी मिले लोगों को दो इंटेलेक्चुअल लोगों के बीच में कुछ बातें होंगी तो लोगों को कुछ सीखने को मिला नई चीजें उसको लेकर के और वो चर्चा इतनी लंबी खींच गई आखिर में जाते-जाते वो क्या कहते हैं मामला इतना गर्म हो गया कि एक दूसरे के मनोभाव को समझना मुश्किल हो गया वो हमारे को नहीं समझ पा रहा हम उसको नहीं समझ पा रहे हैं अच्छा उसमें जो टांग खींचना छीटाकसी करना यह निर्भय की ओर से हो रहा था।

00:42:42:04 उसने बाद में यह कहा है कि उसको इतना ज्यादा वो इस्लाम और इनको इनके साथ वो डिबेट करता है। इसलिए वो उसी पर्सेक्टिव से आया था कि यहां पे भी वैसा ही होगा। पर यहां नहीं था फिर भी उसने वही व्यवहार किया। तो कुल मिलाकर के वो स्थगित हुई है। अब उसको लोग अपने पाले में कि हमारा हमारा मत हो गया क्लियर हो गया। अच्छा मैंने जो अविद्या वाली बात कही मैंने जो अविद्या वाली बात कही और जो मैंने वहां पर कहा तो मैंने वहां पे यही तो जो इसने कहा हां ठीक है इतना क्लियर हो गया। यह इतना स्पष्ट हो गया कि ईश्वर अवतार लेता है। तो मैंने वही तो दिखाया मैंने उसमें क्या गलत कर दिया। अविद्या वाले में इन्होंने क्विट किया तो अविद्या वाला मैंने शॉर्ट बनाया। न्याय दर्शन में पंचाव्य या और कोई जो और कोई भी शब्द है वो कौन जानता है कौन नहीं जानता है इस विषय में शास्त्रार्थ नहीं था। डिबेट नहीं थी, डिस्कशन नहीं था। इस विषय में था कि समस्त प्रामाणिक और युक्तिक धरातल पर ईश्वर का अवतार सिद्ध होता है कि नहीं होता है। तो यदि मुझे आपका कोई शब्द समझ में नहीं आ रहा है तो आपका वहां कर्तव्य है कि आप मुझे शब्द समझा दीजिए क्योंकि यहां शब्दावली किसकी कैसी है? इस बात का कंपटीशन नहीं है। ठीक है? अभी मैं कोई शब्द पूछ दूंगा। शास्त्रों में अनेक शब्द है। कोई शब्द खोज के ला दूंगा। लो ये दे दो मुझे। क्या करोगे फिर? यह

00:43:57:25 और खैर मैंने मैंने देखा कि निर्भय जो है स्वयं से बातें नहीं बोलता। उसने शुरू में तो लाइव एक कर दी थी मगर उसके बाद हटा दी स्वयं से उसके साथ वाले बोल रहे मगर निर्भय को रोकना तो चाहिए। तो ये ये सब बातें हो गई। थोड़ा सा टॉपिक से हम लोग हट गए थे। हां इवाकु जी आपने क्या बताया था? इन्होंने यह बोला है बाद में कि वैसे वो लाइव वाली बात एक बार ले लेते हैं। इन्होंने जो ऋषि मानंतव्य के चैनल पर लाइव करी थी वो इन्होंने हाइड कर दी। अभी की लाइव भी हो जाएगी शायद कुछ समय में इनको पता नहीं क्या छुपाना है वैसे उस समय में और इन्होंने बाद में कहा है कि जो इनके फैमिली के गुरु जी है रामानुज परंपरा से उनका इनको नाम नहीं मालूम और उनको त्रिंदी स्वामी ही बुलाते थे तो उनका नाम इनके पिता भाई अगर आप आप ये कह रही हो कि मैं रामानुज परंपरा से हूं तो रामा मैं पूछ रहा हूं कि उसको प्रमाण मानोगी ना फिर तो बात वही टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चैन होगी ना रामानुजाचार्य परंपरा में विदेश गमन को निषेध माना गया है तो उन बातों को लेकर क्यों भिड़ रही हो? जिन बातों को लेकर तुम खुद उनहीं पर निर्भर कर रही हो। ऐसी बातों पर चलो मान लो तुम अगर यह भी करती हालांकि तुम हिंदू यूनिटी की बात कर रही हो तो तुम तुम्हें तो यह भी नहीं करना चाहिए कि रामानुजाचार्य जी के जो सिद्धांत शंकराचार्य जी से मेल नहीं खा रहे उनको लेकर के लड़ो। मगर तुम उनको

00:45:13:03 लेकर के भी लड़ती तब भी समझ में आता कि तुम किसी परंपरा प्राप्त गुरु के सानिध्य में हो और जो है उनके आधार पर तुम इस अमुक सिद्धांत का विरोध कर रही हो शंकराचार्य के। मगर यहां तो ऐसा सिद्धांत है जो दोनों परंपराओं में सेम है। उस पर तुम विरोध कर रही हो। तो ये मानना पड़ेगा ना कि तुम किसी की नहीं हो। यही मानने की बात है कि आप जितने और ये जो जितने चिलाटू तुमको जगह दे रहे हैं स्पेस दे रहे हैं बाबा बाबा वो अमा अर्ज किया है तो दूसरा वाह वाह वाह अब अम्मा शुरू तो करने दो वो वाला हाल है ये जितने चिलांटू आपको स्पेस दे रहे हैं ना वो दे रहे हैं मोटिवेशन ये सब किसी काम नहीं आएंगे ये मार खाए हुए हैं सब के सब एक तरफ से कूटे गए हैं जाके देख लो इनके रातों की नींद छीन ली गई है।

00:46:04:24 पता करो पहले भाई पता करो लेके बस घोड़ा ले घोड़ा ले चाबुक दौड़ाने लगे कोई बात ना जी ना धर्म का पता ना ना नास्तिकता का पता ना ईश्वर का साकार निराकार कौन से उसको व्याख्या को मानती हो कौन सी को नहीं मानती कुछ नहीं हम है जिंदाबाद बंटी और बबली की थी ना उसमें वो ताजमल को बेचना होता है जब बंटी और बबली ताजमल को जब बेचते हैं तो क्या करते हैं कि जो ताजमल की ऑफिसर थी उसके घर पर बेच देते हैं पब्लिक और वह उद्घोष करने के लिए नारेबाजी करने के लिए पब्लिक चली जाती है भाई उसके घर अब जब वहां ऑफिसर जो है उसके घर पर नारेबाजी हो रही है विरोध हो रहा है तो क्या होता है अ कि ये इसको फोन आता है ऑफिसर को कि भाई आपके घर पर विरोध विरोध हो रहा है तो यह ऑफिसर जल्दी से वहां जाती है कि क्यों मेरे घर पर भीड़ क्यों आई है क्यों विरोध हो उतनी देर में यहां पर यह जो है ऑफिसर बनके और ताजमल का किसी अंग्रेज के साथ वो करते हैं डील कि अब हम ऑफिसर है उतनी देर में। तो अब वो जो भीड़ वहां पर है वो जो भीड़ है जो वहां पर नारेबाजी करने गई है उसके पास कोई

00:47:19:25 आधार नहीं है नारेबाजी करने का। ठीक है? वो नारेबाजी कर रही है। उसको पैसे मिले हैं नारेबाजी करने के। तो वो क्या करते हैं? वो वहां पहुंचती है ऑफिसर। वो वहां चिल्ला रहे होते हैं। तानाशाही नहीं चलेगी नहीं चलेगी। तो वो जाके पूछती है भैया क्या बात है क्या प्रॉब्लम है तो चिल्लाते तानाशाही नहीं चलेगी वो कहती किसकी तानाशाही कौन कर रहा है तानाशाही नहीं कौन कर रहा है किसकी तानाशाही वो कहते है किसी की भी नहीं चलेगी पूरी करो हमारी मांगे पूरी करो हां हमारी मांगे पूरी करो तानाशाही नहीं चलेगी और फिर वो कहती है कि किसकी कि किसी की भी वो हाल है इनका [हंसी] वही हाल है तुम्हारा अरे भाई चाहिए क्या कहना क्या चाहते हो कुछ पता है कुछ नहीं। अच्छा अब देखो खुद के ही सिद्धांतों से कितना खिलवाड़ कि भैया परंपरा का विरोध भी कर बैठे गौ बलि को भी ले आए कि गौ बलि हो रही है इनके यहां गौ बलि हो रहे तो फिर क्यों ला रहे हो भाई करपात्री जी ने ये कहा है फिर मेरा तो व्यक्तिगत विरोध है अमुक्तेश्वर जी का और वहां पे एक ढोंगी बेवकूफ गोवर्धन पीठ से जुड़ा हुआ बहरूपिया वहां बोल रहा है कि मैं यह समझता हूं कि इनका व्यक्तिगत विरोध था। आता क्यों नहीं भाई तू सामने कौन सा मिश्र है फलाना देख

00:48:35:01 तो ले तू कितना बड़ा गोवर्धन पीठ से जुड़ा हुआ व्यक्ति है चोर कहीं का हां वहां जाके बोला है उसने कि शिवश का पर्सनल ओपिनियन है एंटी इंटरनेट वाला हमारे आचार्य जन और पूरी के महाभाग तो खुद ही प्रयास कर रहे हैं कि किताबें लिख लिख के उनकी स्कैन करके अपलोड करा जाए ताकि इंटरनेट पे रखे अरे भाई अपलोड करने से कोई परेशानी नहीं है वहां से लेने पे भी कोई परेशानी नहीं मगर उसको अंतिम रूप से स्वीकार कर लेने पर परेशानी है। फिर परंपरा का औचित्य क्या रह गया? और तुम कह रहे हो कि मैं गोवर्धन मठ से जुड़ा हुआ हूं। शंकराचार्य मठ से जुड़े हुए हो ना। शंकराचार्य तो कह रहे हैं ना 13 वे अध्याय के दूसरे श्लोक में कितना भी विद्वान हो संप्रदाय विहीन व्यक्ति को त्याग देना चाहिए। क्या करोगे इसका? अरे आ तो जाओ अपना थोड़ा मुंह लेकर के। वैसे इनकी डिबेट में अगर ये लाइव देख अगर ये लाइव देख रहे हो तो यहां पर कमेंट करो हां मैं हूं तुम्हें कमेंट दिलवाता हूं मैं आके यहां भूको कि तुम गोवर्धन मटके हो पहले तो मैं तुम्हें पता करूं कि तुम कैसे गोवर्धन मठ से जुड़े हुए हो और फिर शंकराचार्य से कैसे जुड़े हुए भाई जब शंकराचार्य स्वयं कह रहे हैं कि परंपरावीन व्यक्ति को त्याग देना चाहिए चाहे कितना भी बड़ा विद्वान

00:49:50:02 हो क्योंकि उसकी विद्वान जो विद्वान होना है उसके विद्वान के पैरामीटर के लिए हमें विद्वान होना पड़ेगा उसको जांचने के यही है। अगर स्वतंत्र रूप से किसी की विद्वता जाननी है, किसी को ये पता करना है कि इसको 10थ की पढ़ाई आती है कि नहीं तो जो पता करने वाला व्यक्ति है हर उस व्यक्ति को पहले उसको 10थ की पढ़ाई आती होगी। उसकी आवश्यकता क्या है? उसकी प्रमाणिकता जांचने की। इसलिए वो किसी ऐसी सोर्स के द्वारा घोषित होना चाहिए 10थ पास जिस सोर्स पे हमें यकीन हो। तो इंटरनेट पे आप डालिए। इंटरनेट से लीजिए मगर अंतिम प्रमाण वो नहीं है। हमें किसी पर डिपेंड रहना होगा। अगर उसमें डालने वाले में गड़बड़ी हो गई या किसी ने मिक्सचर कर दिया कुछ कर दिया तो हमारे पास सन्यासी आचार्य है। अथर्ववेद 11 5 16

00:50:38:00 ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। मनुस्मृति 12वा अध्याय 112 से 114 धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बनाएं।

⬜ Not used yet · 00:50:47:03 – 02:10:33:00 (1:19:46)

00:50:47:03 तत्वदर्शी की व्याख्या पढ़ो जाकर के गीता में क्या दी गई है? वैराग्य जो अपने वैराग्य रूपी हथियार से प्रपंच रूपी पेड़ को काट डालता है। सन्यास सन्यास सन्यास श्रेष्ठतम आश्रम सन्यास है। तो अंतिम निर्णायक कौन होगा? सन्यासी परंपरा से एवं परंपरा प्राप्तिम। तीन 16 जो अह क्या कहते हैं? प्रकृति का जो चक्र है उस उस चक्र के अनुसार नहीं बरतता है। वो मूर्ख है। मुंडकोपनिषद परंपरा की आवश्यकता बता देना तू आकर के जो वहां बैठकर के बोल रहा है मैं गोवर्धन मठ से हूं। कितने पैसे मिले हैं यूएस वाली दीदी से तुमको ये बोलने के। मैंने भी एक को बुलाया है। एक दो लोगों को बुलाया मैंने। उनको टाइम मिला तो शायद आ जाए। एक इस का बन के आएगा और एक जो है एक एक आर्य समाजी बन के आएगा और एक आएगा हिंदू बनके वो दीदी की नस्ल का होगा। वैसे इनकी डिबेट इनकी जो चर्चा हुई है अभी इसमें इन्होंने एक बात बहुत अच्छी रखी मेरे को बहुत अच्छी लगी। जब नास्तिकों से करते हैं डिबेट नास्तिकों की परंपरा क्यों नहीं पूछते हैं?

00:52:02:28 बताओ। ये सवाल रखा गया है कि नास्तिकों की परंपरा क्यों नहीं पूछते हैं? ये ये अच्छा सवाल नास्तिकों की छोड़ो इन्होंने कहा कि भैया तुम बौद्धों से डिबेट करने जाते हो उनकी परंपरा क्यों नहीं पूछते हो है ना [हंसी] तो भाई वो जो बौद्ध है और जो नास्तिक है वो वेदों के आधार पर हमें थोड़ी ना अपना पक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं स्वतंत्र होकर कर रहे है तुम भी करो वही तो मैं कह रहा हूं वही तो कह रहे हैं वही तो बात है वो स्वतंत्र होकर अपना पक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं ईश्वर नहीं है नहीं मानता जा क्या कर लेगा बता सिद्ध कर मुझे मैं सिद्ध करूंगा तुम नहीं कर पाओगी ढेले भर की अकल नहीं है। बस तुम्हें संडास संडास ये सब करती रहना। संडास डायरिया किसी ने पूछ लिया अरे भैया ईश्वर कैसे संडास किसी ने पूछ लिया अरे भैया ईश्वर सर्वशक्तिमान कैसे संडास डायरिया यही करना वहां और यही सिखाना अपने यहां पे यही आता है हमें इनसे पूछा गया आपने तो भैया हम बोलिए बोलिए बोलिए शास्त्रवाल जी जी भैया आपने तो आपने तो वहां पर लाइव में भी यही बात बोला था ना कि तुम अपने को नास्तिक बताओ फिर हम बताएंगे आपको नास्तिक माने ही नहीं अपने आप को मैंने बोला भाई वेद की सीमा से बाहर निकल जाओ फिर हम तुम्हें

00:53:18:07 विदेश यात्रा सिद्ध करेंगे वेद पर वेद पर आधार करके जो है हम पर दबाव बनाने की कोशिश मत करो क्योंकि उस विषय में हम ही तुम्हारे माध्यम है वेद को प्राप्त करने में भले ही मेरी परंपरा ना हो तो रामानुजाचार्य जी की परंपरा मधवाचार्य जी की परंपरा कोई ना कोई परंपरा माध्यम है वेद के लिए तो वेद पे क्लेम करके यह मत कहो विदेश यात्रा निषेध स्वतंत्र हो के कहो मैं नहीं मानता। फिर हम तुम्हें पहले तुम्हें वैदिक बनाएंगे और अगर वैदिक तुम नहीं हुए तो तुम्हें हम नास्तिक दिखाएंगे कि तुम नास्तिक हो। नास्तिक नहीं हुए तो हम तुम्हें दिखाएंगे कि तुम मनुष्य भी नहीं हो। ये बात है। तुमको ले आएंगे किसी ना किसी परंपरा में फिट कर देंगे और फिर कहेंगे अब मान इसको। अब मान इसको बहुत सी बात वही है किंत मनमुखी मनमुखी जो ज्ञान है वो इनको देना है इनको वो मतलब नहीं है शास्त्रों का जो अर्थ हम बोल रहे हैं वो मानो मतलब ये ये इनका ये दावा है वो मत मानो जो परंपरा से आचार्यों द्वारा अर्थ किया गया है। हां इनका ये दावा भी है कि शिवशंकर परंपरा थोप रहे हैं। कहते हैं कि शंकर थोप इसलिए रहे हैं ना क्योंकि वो इसलिए इनको लग रहा है थोप रहे हैं क्योंकि जो इनका अर्थ है वो अर्थ जो है वो हमारे से मैच नहीं हो रहा है। जो हमारे आचार्यों द्वारा किया गया है वह भिन्न किया गया है। यह बताओ मैं शंकर परंपरा

00:54:33:08 थोप रहा हूं। तुम वेद क्यों थोप रही हो? वेद थोपोगी तो शंकर परंपरा थोपूंगा। नहीं तो आ जाओ मैदान में। वेद मत थोपो। वेद थोपोगी तो परंपरा थोपूंगा। यही तो अर्ध कुकुट न्याय है। कि वेद तो हम थोपेंगे। मगर वेद जिससे मिल रहे हैं उससे बच के निकलेंगे। अब वो उसमें अपनी रील में अपनी रील में क्या कह रही है वो? मंद बुद्धि कि यह जो है वहां गए थे वेदों का वेदों का वो करके आ गए वेदों की जग असाई करके वेद निंदा सुन के आ गए कहां वो जो मुफ्ती की उसमें गया था लाइव में मैं ठीक है चार पांच लोग तो मुझसे बात करने वाले थे काउंटर करने वाले हां जिसका पल्ला हल्का होने लगता था दूसरा कोई निकाल के लाता था एक साथ हां एक साथ चार पांच और फिर भी मुफ्ती का तो मुंह बंद हो गया मुफ्ती से जब मैंने पूछा जब उसने कहा कि मैंने कहा कि भाई दुनिया में बुराई एक्सिस्ट कैसे कर रही है? किसने बनाया इसे? भाई बुराई का अधिष्ठाता भी अगर क्योंकि इनके यहां जो वो है ना ग्रंथ वो अपुरुषय नहीं है। इनके यहां का ग्रंथ अपुरुषय नहीं है। ये सीख लो थोड़ा काम आएगा तुम्हारे। पागल पागलों के सेनापति

00:55:48:14 सीख लो थोड़ा तुम्हारे काम आएगा। एक इन्होंने सफल और रखा था। सुनो सुनो सुनो सुनो इसको बोल तो मैंने कहा कि भाई आपके ग्रंथ वहां पर भी और हां जी मैं कह रहा हूं जिस डिबेट की बात कर रही है ना ये मुफ्ती के चैनल पर उसप कमेंट पढ़ लेना वहां पर सब ने ये कहा है कि अगर जो आपका आईडी था उस कुछ और नाम से था आपका आईडी तो कह रहे हैं अगर इनको बोलने दिया जाता तो ये भारी पड़ रहे थे उन सब पे अगर इनको बोलने दिया हां सुनो उस डिबेट की मैं समरी बता दूं जरा मैंने वैसे समरी डाली हुई है जाके देख लेना अब बाबा हो गया था मुफ्ती जी का हम ठीक है बस वहां बात इतनी थी मेरा चैनल नहीं था भाई चारचार लोग थे बोलने वाले हटा दिया गया म्यूट किया गया मुझे ठीक और किस बात पर मेरा वजन हल्का होता हुआ दिखाई दिया वो भी मैं बताऊंगा उसका काउंटर भी बताऊंगा जो मुझे बोलने नहीं दिया गया और वहां पर मेरा पक्ष हल्का किस आधार पर पड़ा था वो भी मैं बताऊंगा सुन लो पहली बात कि वेद के अपौषय होने के कारण उनके ग्रंथ पौरुषय होने के कारण वो कहते हैं कि उन्होंने रचे अल्लाह ने अब जब ईश्वर ने रचे उनका उनका ईश्वर है उसने रचे ईश्वर ने ही तो बुराई को भी जन्म दिया है

00:57:03:25 तो ईश्वर के द्वारा रचित होने वाली चीज में प्रमाण्य बुद्धि नहीं है क्योंकि ईश्वर ही तो कह रहा है भैया मैंने ही तो बुराई राक्षस किसने बनाया तो जब वो राक्षस को बना रहा है तो वो ये जो तुमको कुरान दे रहा है उस कुरान के जरिए वो सही बात ही बता रहा है तुम्हारी मुक्ति की बात बता रहा है ऐसा ऐसा तो नहीं कुरान में उसने में फसाने की बात बताई और वेद में उसने निकालने की बात बताई है हो गया तो अपषय ना होने के कारण मैंने काउंटर किया था जवाब नहीं था मुक्ति के पास मैंने कहा कि भाई ये बुराई है ये जन्म कैसे होती है कि बुराई को बनाता है मगर वो बुरा नहीं है बुराई को बनाना बुरा नहीं है ये बोला उसने तो उसका पक्ष कमजोर नहीं है ये बुराई को बनाना बुराई नहीं है लॉजिकल बात है क्या ये अगर बुराई को आप बुराई मान रहे हो तो बुराई को बनाने वाले को भी बुरा मानना ही पड़ेगा हां फिर आपके पास वो अंडरस्टैंडिंग होनी चाहिए कि बुराई को बनाने वाला किस किस तरह से बुरा सिद्ध नहीं होगा। तो वो जो तरीका है उसमें उनका ईश्वर फिट नहीं बैठेगा। हमारा ईश्वर फिट बैठेगा क्योंकि हमारे ईश्वर के अनुसार ये माया है। ये दुख नकली है। उनके ईश्वर के अनुसार हां मालूम है मुझे मालूम है। मालूम है। तो पहली पहला पॉइंट तो ये फिर मैंने पूछा ईश्वर सर्वशक्तिमान है क्या? बोले कि नहीं

00:58:18:26 ठीक है तो मैंने कहा फिर बोले कि ईश्वर अपने एक्सिस्टेंस से बाहर जा सकता है। मैंने कहा बिल्कुल जा सकता है। व्यवहार परमार्थ वाली डेफिनेशन दे दी। वहां भी वो चित्त हो गए। अब वो लोग लेकर आए क्या? सुनो तब तक मैंने दयानंद पर भी वीडियो नहीं बनाया था। ना दयानंद जी पर वीडियो बनाया था और ना मैंने इस पर वीडियो बनाया था। दो लोग मुझे वहां पर मेरे विरोध में खड़े दिखाई दिए थे। मेरे हिंदू समुदाय के जब मैं मुस्लिमों से बात कर रहा था। दो लोग एक थे दयानंद और एक थे प्रभुपाद। हम ठीक है। दयानंद का आधार दयानंद जी का आधार लेकर के वहां वो मुस्लिम मुझसे बोलते हैं अरे तुम्हारे यहां ज्ञार समाधि तो मानते नहीं। तुम लोग अपने का तो सुलझा लो। तुम अपना तो सुलझा लो। तब हमसे आकर कहना कि ईश्वर अवतार ले सकता है। ये था उनका काउंटर। तुम लोग उनको मौका देते हो। हमारे सिद्धांतों को कमजोर रूप में प्रस्तुत करके। इसलिए मैं तुमसे तुमको तुमसे बात करना चाहता हूं। तुम्हारा शोधन करना चाहता हूं। और तुमको मानना है जो मानो उसको इस तरह से धर्म की राह में रोना मत बनाओ चिल्ला चिल्ला करके और बनाओगे तो मुझे खड़ा पाओगे तुम्हारा सहारा लिया था वहां पे देख लेना वो तो मैंने अगर मेरे पास परम बड़े जोर से उन्होंने मतलब यही कही थी प्रखर हो के बात कि भैया दयानंद सरस्वती जी तो

00:59:34:00 नहीं मानते हैं तुम्हारे वो तो नहीं ये सब चीजें मानते हैं तो फिर आपने तब बोलना पड़ा था कि तब भी तब भी मेरे पास परंपरा थी मैंने वहां वहां भी काउंटर किया। दयानंद सरस्वती की कोई परंपरा नहीं है। क्या करूं भाई? तुमने मुझे मजबूर किया उनका विरोध करने के लिए। तुमने थाली में परोस के दिया है। उनको उनको जाके कहना पंचा सिद्ध करो। पंचाव से सिद्ध करो। तो मैंने वहां कहा दयानंद सरस्वती हमारे यहां के प्रामाणिक आचार्य वगैरह नहीं है। स्वोषित है और जितने भी परंपरा प्राप्त है वो जो है मानते हैं कि ईश्वर अवतार ले सकता है। तब इनके यहां का कोई व्यक्ति था जो लेके आया कि तुम्हारे विष्णु पुराण में लिखा है कि इतने इतने वर्ष से पहले मंत्र इतने थे और बाद में आज इतने रह गए हैं। तो गुरु परंपरा में यह गुरु परंपरा से अगर ज्ञान सुरक्षित रहता है तो यह कैसे कम हो गए? पहली बात मैंने इस पर वीडियो मुझे बोलने ही नहीं दिया गया ना। पहली बात मैंने वहां पर यही बोला कि जो जब सर्वव्यापी ईश्वर अवतरित होता है एक रूप में इसी प्रकार से जो व्यापक रूप से मंत्र इत्यादि है शास्त्र का ज्ञान है वह भी इतने में

01:00:49:01 सिमट के हमको प्राप्त भी हुआ है। और इस तरीके से इस तरीके से जो मंत्र कम हो रहे हैं तो उसमें दो तीन बातें और हैं। हमारे यहां पर जो विष्णु पुराण इत्यादि उनमें व्याख्या है कि इतने मंत्र जो है देवताओं के उसके हैं देवलोक के। फिर उसके बाद बचे हुए मंत्र यहां के हैं। इसके साथ ही साथ अंत तो कतवा यह भी मानना पड़ेगा कि प्रज्ञा शक्ति डाउन तो हो ही रही है। तो मंत्र का खो जाना और मंत्र के अर्थ में झूठ बोलना ये अलग-अलग बातें हैं। मंत्र का लुप्त हो जाना व का लुप्त हो जाना वो हमारी असामर्थता हो सकती है। मगर जानबूझ के मंत्र का अर्थ बदलना, झूठ बोलना यह नहीं। ठीक है? यह दोनों चीजों में अंतर है। हम किसी चीज में किसी चीज का भार उठाने लायक नहीं गिरती चली जा रही है। वह बात एक अलग है। मगर हम यह कह दे कि हमने जो है उसको बदल दिया। यह मंत्र मंत्र नहीं है। अर्थ तुम गलत बता रहे हो। तो यहां पर उनकी उनके प्रति जो व्यक्ति है जो व्यक्ति आपको प्रोवाइड करा रहा है वेदों का ज्ञान विज्ञान उस पर आपकी प्रमाण बुद्धि सिद्ध नहीं होगी। ये तीनों चारों बातें वहां पर मुझे बोलने ही नहीं दी गई। मुझे म्यूट कर दिया गया। अब अब यह बताओ ना तो इनके

01:02:04:04 वेद जो ग्रंथ है वह अपुरुष है जिससे कि उनके प्रति प्रमाण बुद्धि सिद्ध हो रही है ना इनका ईश्वर सर्वशक्तिमान सिद्ध हो रहा है और अपने ईश्वर की रक्षा करने के लिए इनको हमारे आर्य समाजियों के पास आना पड़ रहा है तो किसका पक्ष वहां पर हल्का हुआ दोबारा मैंने कहा तो है आ जाए भैया कोई आता ही नहीं है एक आया था वो चार घंटे तक अपनी वो शक्ति और शक्तिमान का भेद करता रहा परेशान रहा मौलवी जी ठीक है पंजाब पंजाब पे उसकी बात पे आ गया। नहीं नहीं वो आया था जो जो मुल्ला जी आए थे। अच्छा मुल्ला हां वो भी वो भी मुल्ला जो मुल्ला जी आए थे हां वो घुमाते रहे हां और अब आती है बात निर्भय की तो निर्भय के साथ जो बातचीत हुई है उसको मैंने पहले ही बता दिया उसप तो डिटेलिंग हो गई। जी शिवाकु जी बोले इन्होंने [गला साफ़ करने की आवाज़] एक बात और रखी है जहां पे लाइव में दो पॉइंट थे। अगर कोई व्यक्ति सभी संप्रदायों को प्रमाणिक माने और डिसाइड ना कर पाए कि कौन सी परंपरा सही है तो क्या वो हिंदू है कि नहीं है। सभी संप्रदाय को नहीं मैंने कल ही अभी पिछली लाइव में ये बात बोल दी थी। संप्रदाय विहीन होना हिंदू के हिंदू होने में बाधक नहीं है। आप संप्रदाय विहीन होते हुए भी मूर्ति पूजा को गाय के गाय

01:03:19:06 के संरक्षक हो। जो पूर्व पूर्व जन्म में विश्वास रखते हो पुनर्जन्म में विश्वास रखते हो। देवलोक में विश्वास रखते हो और क्या कहते हैं जो ओमकार है उसके प्रति प्रमाण्य बुद्धि रखते हो तो आप तब भी हिंदू हो। तो संप्रदाय विहीन होना हिंदू होने में बाधक नहीं है। संप्रदाय विहीन होना आचार्य होने में बाधक है। प्रामाणिक आचार्य होने में बाधक है। संप्रदाय विरोधी होना हिंदू होने में बाधक है। संप्रदाय विहीन होना हिंदू होने में बाधक नहीं है। आचार्य होने में बाधक है। संप्रदाय विरुद्ध होना कि हम सभी संप्रदायों का विरोध कर रहे हैं। भाड़ में जाए तो आपके वो वैदिकता वैदिक होने में बाधक है। ठीक है? वो अजातवाद जी आए हैं जो कर रहे थे। हां जी [गला साफ़ करने की आवाज़] अजातवाद जी बताइए नारायण भैया हम वहां पर देख रहे थे जब हम वो दीदी से चर्चा कर रहे थे तो बीच में एक गोवर्धन पीठ सो कॉल्ड जो दीक्षित है वो बीच-बीच में टोके जा रहे थे कोई दीक्षित दीक्षित नहीं है जगह-जगह से मार के भगाए गए होंगे वो कहीं का अपना कुछ पैसे वैसे लिए होंगे वहां आने के ऐसे लोगों का कोई धर्म नहीं होता है समय आने पे अपने घर की स्त्रियों को भी कर दें।

01:04:35:10 एक तो हम उनका खंडन कर रहे थे। ऊपर से वो जो मेरी साइड है मेरा ही खंडन करने की कोशिश कर रहे हैं बार-बार वो दीदी के सामने। वो समझ रहा हूं मैं। वो या तो वो उन्हीं के द्वारा प्लांटेड व्यक्ति था या वो अपनी दुश्मनी निकालने आया था। चारों पीठों से संप्रदाय से ही दुश्मनी निकालने आया था। मैंने कह तो रहा हूं। देखिए एक होता है अत्याचारी। एक होता है क्रांतिकारी। इतिहास जब लिखा जाता है ना तो दो तत्व आपको याद रहते हैं जो ना क्रांतिकारी होते हैं ना अत्याचारी होते हैं। कुछ नहीं उनका होता है। सिद्धांत विहीन व्यक्ति। ठीक है? तो जो सिद्धांत विहीन व्यक्ति है वो यदि आपका सगा भी है ना वो बेकार का है। मूर्ख है वो। 100 मूर्ख दोस्तों से अच्छा एक बुद्धिमान दुश्मन है वो वाली बात है। सिद्धांत विहीन जिसके पास सिद्धांत नहीं है कुछ वो क्या किसी का सगा होगा समय आने पर पता नहीं क्या कर दे वो अपने ही घर की मातृशक्तियों के साथ पता नहीं क्या कर दे सिद्धांत है ही नहीं कुछ ये मेरी मर्यादा है इसके उधर नहीं जाना है ही नहीं सिद्धांत तो ये वो सिद्धांत विहीन व्यक्ति होते हैं जो ये सब करते हैं और ये जो भगवतानंद की उसमें भी तो आया था एक जब आप भगवतानंद से

01:05:50:12 बात कर रहे थे तब भी तो आया था एक लास्ट में तो वो कहते हैं देखो देखो तुम्हारे ही गुरु भाई आए हैं ये ये भी प्रताड़ित पूरी मठ से ऐसा उन्होंने कहा था। बाद में उनका मेरे पास फोन आया था कि भैया भैया हम जाते जरूर है इधर उधर मगर हमारी वो हम तो उनहीं के मैंने बहुत सुनाया बहुत सुना है उसको कि किस-किस प्रकार से आप गुरु द्रोह कर रहे हैं। ऐसा है दो तरीके के लोग हैं सामर्थ्यवान गुरुओं से जुड़ने वाले। एक होते हैं जो संघर्ष पूर्वक जुड़े हैं। हमने संघर्ष किया। मेरे जीवन में सीधे गुरुदेव नहीं आए थे। मेरे जीवन में पहले संघर्ष आया था। सैद्धांतिक विरोध आया था मुसलमानों की तरफ से इस्लाम की तरफ से। और मैं परेशान हो गया था। रात दिन एक करके पढ़ते-पढ़ते ढूंढने लगा था कि भाई इस बात का जवाब क्या होगा कि तुम्हारा अर्थ गलत है। मेरा अर्थ सही है। यही फंस रही थी गाड़ी सारी। क्या होगा इसका जवाब? तब मुझे एक चीज मिली थी जिसका नाम था परंपरा। तब मुझे शंकराचार्य मिले थे। नहीं तो हर कोई व्यक्ति क्लेम करेगा ना तुम्हारा अर्थ क्यों माना जाए? तुम जीत नहीं पाओगे। ड्रॉ करके आओगे मैच। इस बात को जितना जल्दी हो

01:07:05:13 सके घुसेड़ लो अपने दिमाग में। ड्रॉ करके आओगे मैच। मैं जीत के आऊंगा वहां पे। अभी मुल्ला जी आए थे ना मुझे नातस प्रतिमा अस्ति का अर्थ बताने लगे थे। दिखा दिया था उनको आईना। तुरंत चुप हो गए। हां ठीक बात है। ठीक बात है। नहीं तो सुनते फिर मुझसे। कुरान के बारे में कुरान में क्या लिखा है? क्या नहीं लिखा है? तुम हमें बताओगे। हम उस विषय में प्रामाणिक नहीं है। वेद के बारे में हम बताएंगे उसको क्या लिखा है? क्या नहीं लिखा है? तुम कौन होते हो अर्थ करने वाले? बुक लोगे हमसे। और उसका अर्थ तुम बताओगे। अरे भैया जब तुम्हें मेरे अर्थ तुम्हें माना था उसने। उसने उस उस बात पे मान लिया था। अगर अच्छा हम ये कहते कि हां माना उसने अच्छा अगर हम ये कहे कि नहीं नहीं तुम्हारी किताब का अर्थ हम बताएंगे तो वो भी ये कहता कि तुम्हारे वेद का अर्थ फिर हम बताएंगे तो उसमें क्या फिर आप सिद्धांत पे लड़ ही नहीं पाओगे किसी से भी देखो ऐसा है माननीय तो माननीय अभी क्या कहूं आप हो चुकी है मेंटल और कल और बनाना अपने वो कमरे में जो है शुगर पाल लेना चार पांच उनको बना लेना उनको घोषित कर देना शिवश के ये हैं वो हैं ऐसे घोषित करते हुए शुगर पाल लेना, अपने घर में और उनके बीच में नाचना और खूब ड्रामेबाजी कर लेना, फिर रील बनाना। नहीं नहीं

01:08:22:02 मगर बात ऐसी है कि हम लोग चोरी पे नहीं लड़ते हैं। चोरी चकारी पे नहीं लड़ते हैं। हमारे सीधे साफ ऐसे सिद्धांत हैं। उसको आगे रख के लड़ते हैं। हमें सामने वाले के यहां क्या लिखा है? क्या नहीं लिखा है? क्या गंदगी है? हलाला वलाला इस पर हम बात नहीं। सीधे ईश्वर सिद्ध करो अपना। सीधे बिल्कुल मोक्ष सिद्ध करो सीधे खत्म बोल्ड ये सब देर फिर तुम हलाला बताओ फिर वो बताएं इसकी शादी यहां हुई इसका वो हुआ मनुस्मति में लिखा है ये है फिर फिर दयानंद जी के नियोग है ये ये सब चलता रहे ये सब हमारे पास नहीं है एंटरटेनमेंट बस एंटरटेनमेंट करते रहो बस हमारे पास ये सब हम वो सनसनी न्यूज़ वाले लोग नहीं है हम लोग सीधे ईश्वर सर्वशक्तिमान है क्या पूरा दिल धड़क जाता है सामने वाले का खत्म कांपने लगता है कांपने देख लेना जाके वो तुम्हारे मुफ्ती जी अब देखो एक चीज और देखो आप कि ये कहती हैं कि भैया हम जो है

01:09:36:28 हिंदुत्व के लिए लड़ रहे हैं। मगर अपने हिंदू भाई को शिकस्त दिखाने के लिए अपने हिंदू भाई की कहां गई है? मुल्लों के पास। कहां गई है? मटेरियल उठाने कहां गई है? ठीक है। ये है इनकी असलियत। अच्छा इन्होंने अपनी रील में ये भी कहा है कि भैया गौ भक्षकों के साथ जो है मिलकर के और गौ रक्षा कैसे होगी? कहां का सिद्धांत है कि अगर किसी समुदाय के व्यक्ति से हमारी लड़ाई है किसी समुदाय से तो उस समुदाय का कोई सही व्यक्ति हो जो हमारी मदद करना चाहता हो उसकी मदद नहीं लेनी है तो विभीषण की मदद गलत ले ली फिर राम जी ने नहीं लेनी चाहिए थी अरे पागल लोग हो तुम लोगों को बस चले ना रामायण में आग लगवा दो तुम लोग वो बैठ के वहां कह रहा है मैं किसी परंपरा पे नहीं मानता हूं मैं किसी का सगा नहीं हूं अरे बेवकूफ जब तुझे ना मनुस्मृति पे विश्वास है तो फिर ये सिद्ध कैसे होगा तुझे किसी गुरु पर विश्वास नहीं है। रामायण वही रामायण है। इसमें राम जी के लिए जो लिखा हुआ है वो रावण ऐसा तो नहीं वो रावण ने किया था। इसी आधार पे तो आचार प्रसार चल रहा है। तथाकथित

01:10:54:28 शब्द प्रमाण शब्द प्रमाण पे कुछ मनन है ही नहीं। और फिर मैं हिंदू हूं। मैं हिंदू हूं। हवा निकल जाएगी सारी हिंदू होने की। जिस ज्ञान के आधार पर तुम हिंदू हो वो ज्ञान ही नकार दो जो परंपरा से ज्ञान आया वही नकार दो तो कौन से हिंदू हो और जो और जो ये बात है ना कि थोपो मत थोपो मत सबसे पहली बात तो ये सुन लो थोपना शुरू किसने किया है सबके मूल में बैठे हुए हैं शंकराचार्य उससे पहले का अपना आचार सिद्ध कर दो किसने थोपा पहली बात तो ये आ गई दूसरी बात उनको कितना रोकती हो तुम जाकर के राधा राधा वैश्याव ये सब किया करते हैं जो शिवजी को किया करते हैं जो आर्य समाज के पास अपने प्रचार के लिए जो परंपरा प्राप्त सिद्धांत है और आचार्य है उनकी बुराई करने के अलावा और कोई सामग्री है क्या?

01:11:50:19 कुछ नहीं। और जब इनसे यह सवाल पूछा गया जो आपने अभी बात रखी है। इनसे जब यह सवाल पूछा गया इन्होंने कहा है कि मैं विरोध नहीं करती हूं आर्य समाज का। पर यहां पे कोई आर्य समाज बैठा था उनकी लाइव में कहते ये आपके जवाब ये आपके सवाल का जवाब आसानी से दे पाएंगे। उन्होंने ये क्वेश्चन सुनते ही पलट दिया। जवाब ही नहीं दिया इस चीज। हां मेरे सामने ही कहा था वो। हां। और फिर रामायण की मिलावट में ही मानती है ये कि रामायण मिलावटी है। तो यही तो मिलावटी है। तो उस पुस्तक का एक वो बोल रहे हैं कुछ बता रहे हैं उस पुस्तक का एक भी उस पुस्तक का एक भी जो अंश है वो उसप आपका विश्वास होना सिद्ध नहीं होता ना। या तो उसको प्रमाण मानो या ना मानो फिर बन जाओ रामपाली। 5% गीता का ज्ञान काल ने दिया है। अरे अपना स्तर तो दिखाओ। अपना घूंघट तो उठाओ। अपनी वास्तविकता से परिचित तो करवाओ सामने वालों को। छुपे बैठे हो धर्म के दुश्मन चोला ओढ़ के हम धर्म रक्षक हैं। हां जी। यही तो हुआ है भैया कि उन्होंने आज मनुस्मृति दो 13 से यह कहा कि वेद ही सर्वत्र प्रमाण है जिसके कारण उन्होंने विशुद्ध मनुस्मृति को मान्यता दी अपनी तरफ से आज और तभी प्रक्षिप्त

01:13:06:09 मान्यता मानी हम बाद में इन्होंने एक क्लेम और रखा बढ़िया ये मुस्लिम से जब ये मुस्लिम से जब भिड़ने जाएंगे तो वहां कहेंगे भैया वेद ही परम प्रमाण है। वेद मान लो उसके बाद हम तुम्हें बताएंगे कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। हमारे गायत्री मंत्री मोक्ष दिलाएगा। अभी इनका एक तर्क सुनिए आप इन्होंने ये कहा अपनी लाइव में इनके साथ कोई बैठे थे उन्होंने कहा कि इंडिक स्कॉलर से ले रिसर्च तक ने ये बोला है कि शास्त्रों शास्त्र कंट्राडिक्ट्री है शास्त्रों में वो विषांतर आ जाता है तो हम किस शास्त्र को सही माने किसको नहीं माने ये बात उनकी लाइफ में बोली गई है और इनसे उन्होंने एग्री करा है दूसरा इनकी लाइफ में इन्होंने कमेंट ऊपर शोकेस करा था जिसमें ये लिखा हुआ था कि परंपरा तो मान है जो ज्ञान सनातन है वो तो प्रकृति है तो ये इनका मैं मानता हूं इनका ओपिनियन है ये जिससे से वो एग्री करती हैं। अगर ऐसी ही बात है फिर ये परंपरावादियों को ले क्यों बैठी थी? जिनको ये परंपरावादी मानती हैं उनको लेके क्यों बैठी है? आज ये लाइफ में मेरे को तो समझ नहीं आता। पहली बात तो ये जो इंडेक्स विंडेक्स वाली बातें जो बोल रहा है ये वेद में कहां लिखा है? अगर वेद उसके लिए प्रमाण है तो वेद में कहां लिखा है कि इंडेक्स वाली बात माननी है। अगर भाई इस तरीके से स्वतंत्र व्याख्या करोगे तो हम फिर सीधे इस पर आ जाएंगे कि मनुष्य की वास्तविक चाह क्या है? छोड़ दो सारे ग्रंथ आ जाओ स्वतंत्र

01:14:21:18 हो के मैं उसके लिए भी तैयार हूं ना स्वतंत्र हो के आ जाओ मनुष्य की वास्तविक इच्छा क्या है फिर हम तुम्हें लाएंगे सर्वशक्तिमान ईश्वर पर फिर उसके बाद लाएंगे अपष ग्रंथ पर शाश्वत धर्म पर परम स्वतंत्र मोक्ष पर फिर बना देंगे तुम्हें वैदिक और फिर तुम्हें परंपरावादी बना देंगे तुम मिलो तो सही स्वतंत्र हो के दूर ही दूर से सांप और बिच्छू शेरों को काटा नहीं करते दूर ही दूर से रेंग कर निकल वो वाली बात है इनकी अब वो वो जो पागल हुई है तीन चार दिन पहले वाले शौक से अब वो क्या करेंगी उन्होंने पहले ही इतनी गाली गलौज कर दी इतना अपमानजनक व्यवहार कर दिया कहने को कह दिया मैं चैलेंज दे रही हूं आ जाना दिस इज द बिगिनिंग ऑफ योर एंड कहने को तो ये कह दिया और ऐसी चीजें खुद ही करके रख दी कि मैं उसमें जॉइ ही ना करूं कभी इनको शक्ल ना देखूं इनकी ज्ञानार्थक शक्ल ध्यान रखना ये सब पढ़ाई लिखाई तुम्हारे बस की बातें नहीं है तुम तो बस वो इंटरनेट से ईमेल उठाओ भोले बाबा ने मुझे इंटरनेट से दिए हैं और वहां से उठा के और रगड़ दो लोगों पे। अरे रगड़ो तो रगड़ो भाई। पानी में रह के मगर से बैर नहीं ध्यान रखो। वैदिक बनने वैदिक बन वैदिक बनके और परंपरा प्राप्त आचार्यों से विरोध मत करो।

01:15:37:08 ठीक है? अभी इन्होंने हाथ डालोगे जल जाओगे। आप जिस डिबेट की आप समरी दे रहे थे उसी की इन्होंने क्लिप की डाली है। अभी पांच मिनट छ मिनट। यही थे। अरे भैया यही थे जिन्होंने पूछा था कि शिवजी ने आपको ईमेल किया था कि नहीं किया था? जो है ना [हंसी] भले भाई साहब वो वो वो आप वहां पे आप ही पूछ रहे थे क्या कि वो जो है शिवश जी ने आपको परंपरा पे क्वेश्चन करने के लिए मना किया था। हां वो वो वो वो मुझे बता रही थी कि ईमेल कर दिया है। उनके दिमाग में डायरेक्ट डाल दिया है। ये ये सब बातें करती है। वो बताइए। ये प्रमाण है। अरे भाई डायरेक्ट मैं कह रहा हूं डायरेक्ट डाल दिया है तो सुना दो ना ऋग्वेद का द मंडल का 192 सूक्त का दूसरा मंत्र

01:16:24:07 वो गाना याद आता है बेवकूफिया [हंसी] इसी गाने से याद आता है। इन्होंने यह सवाल उठाया है कि अह मौर्य मौर्य साम्राज्य के कौटिल्य अर्थशास्त्र में चाणक्य ने तो किसी जगद्गुरु का मेंशन करा ही नहीं तो उस समय जगुरु हुआ ही नहीं करते थे। ये इनका तर्क है कि चाणक्य गुरु नहीं है। वही वाला तर्क वेद में डायनासोर की बात नहीं हुई। ये तो वेद बेकार है। वेद बेकार है। अरे भैया उस व्यक्ति को बात किस चीज पर करनी थी? उसने उस चीज पर बात की। उसका जो सब्जेक्ट है उस उसने अपने अनुसार बात की और चाणक्य हमारे अंतिम प्रमाण है यह कहां से सिद्ध होगा अंतिम प्रमाण हमारे वेद है और वेदों के लिए वेदोक्त परंपरा पर निर्भर होना होगा अगर हम अपने आप को सनातनी क्लेम करते हैं और यदि सनातन की सीमा से बाहर जाओगे तो हम पकड़ के तुम्हें पहले वो नास्तिक से आस्तिक बनाएंगे फिर वैदिक बनाएंगे फिर परंपरावादी बना देंगे इतना गुर्दा दिया है हमारे आचार्य हमको बस इतना है कि वो जो पूरी टाइमिंग है ना वो हमें मिलनी चाहिए। उसमें बीच में आप लोग अभद्रता कर दोगे मर्यादा कर दोगे कि भैया मेरा पक्ष कमजोर हो रहा है। मुझे क्या मतलब राम से कृष्ण से

01:17:39:15 शर्म आनी चाहिए तुम लोगों को। तुम्हारे अपने व्यक्तिगत तुम्हारे अपने व्यक्तिगत मंतव्यों के लिए तुम राम और कृष्ण के सिद्धांतों पे भी थूक देना चाहते हो। आग लगा देना चाहते हो। और फिर कहते हैं लोग कि गुस्सा क्यों आता है? बेकार है वह लोग फौजी जो बॉर्डर पर जाकर लड़ते हैं। सियापति रामचंद्र की कहते हुए जय और बेकार है जो हम रामपाल के काउंटर पर जाकर के लड़े थे। अमीर हमारी मां को गाली मत दो। हमारे वेदों को गाली मत दो। हमारे रामकृष्ण को गाली मत दो। बेकार है। क्योंकि जब वही क्रोध का सामना तुम्हें तुम्हारी गलती पर करना पड़ेगा तो तुम्हें आरोप लगाओगे। और जब क्रोध की भी बात आ जाएगी ना तो वह भी सिद्ध नहीं कर पाओगे। क्रोध हमारे आंतरिक विषय है कि क्रोध है तो मैं यह हूं ये मुझे समझना है। जैसे श्रद्धा हमारा आंतरिक विषय है। कोई व्यक्ति राम नाम का जप कर रहा है। इस आधार पर उसको अपॉर्चुनिटी नहीं दी जा सकती है। इस आधार पर उसको यह बताया जा सकता है कि तुम्हारी ऐसी ऐसी गति होगी। तुम ब्राह्मण हो गए। ब्राह्मण को जो चीजें मिलती है वो तुम्हें मिलेगी। यह तुम्हारा आंतरिक विषय है। तो मैं चिल्ला क्यों रहा हूं?

01:18:54:19 यह मैं जानता हूं। तो मेरे को उसको देखना है कि मुझे क्रोध आ रहा है कि नहीं आ रहा। सामने वाला ये डिसाइड नहीं कर सकता मुझे क्रोध आया। हम ठीक है। वो भी चिल्लाते हैं ना एलबीडब्ल्यू हाउ इज दैट? हां ये क्रोध आता है उन्हें अंपायर पे। काट डालूंगा एंपायर। हाउ इज दैट है। बिल्कुल बिल्कुल ये निर्णय तो वही व्यक्ति ही करेगा कि मेरे अंदर क्रोध था कि नहीं था। सामने वाला सिर्फ यह नहीं बोल सकता जोर से था तो क्रोध है। ये उसके आत्मिर्तन का विषय होता है कि क्रोध उसे नहीं करना है। और ये जितने भी परंपरा विहीन है ये आज धर्म नक्शा का जो नारा दे रहे हैं ना तो धर्म का जो आचरण ये करते नहीं है एक्चुअल में। और ये कहते हैं कि जी हमारी अपनी अंदर की जो बातें उनको छोड़ दो। पहले विधर्मियों से लड़ो। पहले इस्लाम ईसाइयत वालों से लड़ो। और ये कहते हैं कि अपने घर में हो रहे जो अधर्म है उस पर मौन रहो। उस पर कुछ मत होलो। राधा माता का अपमान हो रहा है तब चुप रहो। भगवान शिव को शिव का अपमान हो रहा है तब चुप रहो। परंपरा प्राप्त आचार्यों पर कीचड़ उछाला जा रहा है तब तुम चुप रहो। और पाखंडी जैसे रामपाल जैसे देवी देवताओं का अपमान कर रहे हैं। वहां पर देवी माता का अपमान कर रहे हैं। नकली ग्रंथ छाप रहे हैं और शास्त्रों को जो तोड़ मरोड़ प्रस्तुत कर रहे हैं। तो उन पर हम ना बोले भैया। है ना? तो इतनी इतनी निर्लज्ज स्त्री है ये। इतनी निर्लज्ज स्त्री है। आज

01:20:09:20 तक मुक्तेश्वर जी ने इस स्त्री से बात की है क्या? कुछ किया है क्या पर्सनली? हैं? इतना बुरा बुरा लिखती है उनके बारे में तू तड़ाक इतना सब और मुझसे कहती है फोन पर बातचीत के दौरान कि वो मेरे सामने आ जाएंगे तो मैं तो उनके पैर छूंगी क्या दोगलापन है हां जी बोला है हां जी बोला है कि हम तो पूरा सम्मान करते हैं सम्मान दिख रहा है और अपने अपने चैनल पर उनको उनके दुष्प्रचार कर रहे हो अरे तू तड़ाक हद होती है तू तड़ाक तू तड़ाक बोल रही है तू तड़ाक बोल रही है उनके लिए बताइए इतनी बड़ी हो गई तुम फन्ने का दो कौड़ी की अकल नहीं है। और अब आप यह सोचिए यह तो सिर्फ 3 घंटे में से 1 घंटे 22 मिनट तक की है जो मैंने देखी थी। इसके बाद जो यहां हमारे साथ बैठे हैं उन्होंने तो पूरा देखा है इसको। तो जो 3 घंटे में गंद मचाया है ये तो उसमें से एक घंटे का है। जिसने भी ये लड़ लिया आपस में जिसमें भी वहां जो जितने लोग बैठे थे आर्य समाज बैठे थे और बाकी बैठे थे वो आपस में लड़ लिए वहां पे भी उसने।

01:21:11:15 और वहां पर वही बातें उठाई गई। ये वही बातें उठाई गई है। वहां कहती है कि परंपरा की हम इज्जत करते हैं। सुनिए तो एक बार। वहां कहती है कि हम सब परंपराओं की इज्जत करते हैं। किसी परंपरा पे उंगली नहीं उठानी। हिंदू यूनिटी के लिए बैठे हैं और ठीक एक [हंसी] दिन पहले ठीक एक दिन पहले शंकराचार्य को प्रचंड बहुत सिद्ध करने में लगी हुई थी। जब उनको उसके एक दिन पहले ये बात पता चली कि ऐसा कुछ लिखा हुआ है कि तीन दिन की टाइम लाइन ही सिद्ध कर देंगी कि क्या क्या शास्त्री धूर्तता की पराकाष्ठा और अगर तुम धूर्त नहीं हो लालची नहीं हो लालचन नहीं हो और त्रया चरित्र नहीं हो तो तुम पागल हो चुकी हो क्या कह रही हो क्या नहीं कह रही हो अपनी बात को काट रही हो कुछ नहीं पता है तुम्हें और इतना तुमने अपने उसमें कूड़ा करके रखा है मैंने मैंने इस महिला को जब मैंने इस महिला की बातें सुनी थी तो मैंने केवल किसी ने बताया था उसने ये बातें कही है। तो मैंने एक लंबा सा मैसेज टाइप किया। इसने जितने भी पॉइंट रेज हुए थे मुझे किसी ने बताया सारे मैसेजेस इसको मैंने भेजे तुरंत भेज दिए और वो भी मरदित भाषा में। ठीक है? अभी वो सारे मैसेज क्लेम्स जो है वो ये बताएंगे शास्त्रवाद जी। तो मैंने उसके बाद जब इसकी रील देखी इस महिला की मैंने देखा तो उसमें इसने तो पूरा पूरा विष्ठा कर वहां

01:22:27:08 ज्ञानार्थक रूप से वहां प्रदर्शित कर रखा है वहां। मैंने कहा अब क्या मतलब है इससे इस तरीके से बात करने का भाई? जब तू तड़ा कर ही रही है डायरिया बोल ही रही है। छोड़िए एक लाइनें क्या कहती है कि जैसे क्षत्रिय महिलाओं पे जब भी लांछन उठा जब भी उनका अपमान हुआ वो परंपरा ध्वस्त हुई वैसे ही ये बोलती है ये कि मैं भी जन्मा क्षत्रिय हूं। जन्म से मैं भी क्षस्त्रीय हूं तो क्षत्रिय क्षत्रिय हूं। जन्म से मैं भी क्षत्रिय हूं। तो यही शिवशी आपकी परंपरा भी ढहेगी ये बोला है इन्होंने यही तो समाजियों की परंपरा इन्होंने क्या कहा था कह रहे शिवशं नहीं पहले बोला बाद में बोला परंपरा का भी बोला है कि परंपरा परंपरा का बोल के अब वो सही कर रही है अरे पहले तो ये जन्मना जाति को मानते ही नहीं है फिर जब जनना जाति को नहीं मानते हैं मैं मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं यही तो आर्य समाजियों की क्वालिटी होती है कि अपने आप को घोषित मत करो कुछ घोषित मत करो जिससे कि मुझे किसी नियम के नीचे दबना ना पड़े। समझ रहे हो? घोषित मत करो अपने आप को। फ्री के हिंदू बने रहो। फ्रीलांस वहीित भीित भी मेरी पट भी मेरी अं भी। अब क्या है कि अब ये आर्य समाजी है। आर्य समाजी कर्मणा मानता है।

01:23:42:16 यह वहां पर जो भी कर रही है वो क्षत्रिय तो है नहीं। या तो व्यापार में गिना जाएगा या शदत में गिना जाएगा। फिर कह रही मैं क्षत्रिय हूं। हां मैं आपसे कह रहा था क्या कहते हैं अजातवाद जी [गला साफ़ करने की आवाज़] वहां पर उन्होंने आपको एक जगह पर वहां पर आप आपको एक जगह पे उन लोगों ने झूठ पर फसाया था जब आप यह कहने लगे थे कि उन्होंने कहां पर कहा है कि परंपरा जो है उन्होंने दिखाओ कि परंपरा पर चर्चा नहीं होगी उन्होंने कहां कहा है तो वो आपको बोला उनका एमायती पक्षधर जो अपने आप को संकर पीठ का बोल रहा था। वो वहां आता है। बोलता है कि इन्होंने जब अपनी परंपरा बताई थी रामानुजाचार्य परंपरा तो शिवश ने पूछा तुमने उनके सारे शास्त्र पढ़े हैं क्या? याद है आप थे कोई और था वो जी जी मैं ही था मैं ही था। हां थोड़ा नेट का इशू है इसलिए तो ये जो बात है मैंने बोली नहीं है उनसे कि सारे शास्त्र पढ़े हैं क्या? मैंने बोला कि क्या रामानुजाचार्य आपके लिए प्रमाण है? नहीं है तो प्रमाण बताओ कौन है आपके लिए? इंटरनेट भी प्रमाण नहीं है। किताब छापने वाली प्रिंटिंग पर प्रमाण नहीं है तो कौन है आपका प्रमाण?

01:24:57:22 तो प्रमाण यह है कि मुझे क्या अच्छा लग रहा है? स्वतंत्र प्रमाण है। तो फिर हमें क्यों दबा रही हो? वेद की पंक्ति के नीचे। वहां पे उनको डर ये था कि अगर वो रामानुजाचार्य को मान लेते तो विदेश गमन को गलत मानना पड़ता। फिर उनका सिद्धांत ध्वस्त हो जाता वं पर। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। और मैंने ये बात नहीं कही है कि क्या तुमने सारे शास्त्र पढ़े हैं। ठीक है। उन्होंने कही मैंने उनके सारे शास्त्र नहीं पढ़ लिए तो मैं उनको प्रमाणिक कैसे मान लूं? अरे भैया प्रमाणिक पहले मानना है फिर उनसे विद्या ग्रहण करनी है। अगर विद्या ग्रहण करके तुम किसी को प्रमाणिकता उसकी जज करोगे तो उसकी प्रमाणिकता जज करने का फायदा क्या है? भाई प्रमाणिक स्कूल में एडमिशन ले पढ़ाई करोगे कि पढ़ाई करके स्कूल की प्रमाणिकता चेक करोगे कि अब मैं बड़ा हो गया। अब मैं पीएचडी कर ली। अब मैं घोषित कर रहा हूं प्रमाणिक स्कूल है। फायदा क्या है? तुम तो पढ़ चुके हो। और दूसरे को भी तुम पर विश्वास नहीं है। तुम्हारे अकॉर्डिंगली जिस ट्रेडिशन को तुम चालू कर रहे हो उसी उसी ट्रेडिशन से दूसरा भी पढ़ाई करेगा। तो पढ़ाई स्कूल के बाहर करनी है और पीएचडी करने के बाद घोषित करना है ये स्कूल जो है ये प्रमाणिक स्कूल है। फायदा क्या है उसका? क्या उपयोगिता है उसकी?

01:26:02:26 ये यहां पर सिद्धांत को भूल जा रहे हैं इसी चीज को। ये हम बार-बार यही कहते हैं कि अगर आपको वाकई में परंपरा को समझना है तो आप उसे आधुनिक पढ़ाई में लगा दो कि जब आप पहली क्लास में जाते हो, नर्सरी में जाते हो तब आप यह देखते हो कि स्कूल जो है वो कितना नॉलेज रखता है, कितना ज्ञान रखता है। आप ये देखते हो ये ऑथराइज है और वो भी आपके माता-पिता देखते हैं कि ये ऑथराइज है कि नहीं ऑथराइज है। क्या यहां से पढ़ाई करने के बाद आपको आगे सक्सेस मिलेगी या नहीं मिलेगी? तो भैया उसकी ऑथेंटिसिटी चेक कर होती है। तो वो वहां पर परंपरा आती है। शास्त्रों को छाप दो आप इंटरनेट पर डाल दो। उससे ज्ञान लेकर आप ज्ञानी नहीं कहे जाओगे। शास्त्र भी यही बात कहते हैं। वो व्यक्ति आपको वहां पर ढोंग वो व्यक्ति जो वहां पर ढोंग रच रहा है जो ये कह रहा है वो डाल रहे हैं उस पर उसने पूछा है क्या पूरी के शंकराचार्य जी से कि इंटरनेट पर डाल रहे हैं। वो ये कह रहे हैं अब आज के बाद जो है परंपरा की कोई आवश्यकता नहीं है। आचार्य की कोई आवश्यकता नहीं है। पूछा है उसने? कहीं बोला है? बिल्कुल। बेवकूफ नहीं तो। चले हैं ये धर्म की रक्षा करने। हां जी। जी इवाकू जी आपकी पूरे हुए पॉइंट्स पॉइंट तो यही है बात ये लिया है वहां पे ये लिया है कि जैमिनी जी और वेदव्यास जी में लड़ाई हुई तो उनकी परंपरा भंग नहीं हुई क्या फिर वो गढ़पाद आचार्य श्री वाला पॉइंट कि इनकी परंपरा में आप ट्रेस नहीं कर सकते इनके पीछे इनकी परंपरा खुद की टूटी हुई है इनको ज्ञान

01:27:18:02 नहीं है। पहली बात मेरे गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता। हम यह मानते हैं कि जो सुखदेव जी को मोक्ष मिल गया था वही सुखदेव जी प्रकट हुए गॉड पादाचार्य के समक्ष तो मोक्ष मिलना पारमार्थिक विषय है और किसी का प्रकट होना व्यवहारिक विषय है तो पारमार्थिक विषय के आधार पर आप व्यवहार को बदल नहीं सकते जैसे कि परमार्थ है कि अद्वैत है मगर हम नीचे व्यवहार में ये नहीं कर सकते माता बहन पत्नी सब एक है आप लोग आप लोग करते हैं क्या ऐसा अब जो लोग ऐसा मानसिक रोग फैला रहे हैं, डायरिया और शौचालय कर रहे हैं। उन पर तो प्रश्न चिन्ह उड़ सकता है कि संभवत उनके इस तरह की मर्यादा हो। धर्म है नहीं, ईश्वर की सिद्धि है नहीं, ईश्वर का स्वरूप है नहीं। बने लैंड बड़े फील्डर लगा बन रहे हैं। और तो और वो लोग बीच में भी लड़ पड़े थे। जब वो स्त्री जो है वो बोल रही थी कि हम हम ब्रह्मा कुमारी को सपोर्ट करते हैं तो आर्य समाज ही उसके विरोध में दो मिनट बोलने लग गए थे कि नहीं नहीं आपने कैसे बोल दिया ब्रह्मा कुमारी को भी लेंगे सपोर्ट में एक दूसरे से तो लड़ते हैं किनको लेना है किनको नहीं लेना है खुद नहीं पता वो वो लगता है ऐसे ही किसी मंदिर से आया होगा आर्य समाज के जहां पे ये जो संदीपन रॉय

01:28:33:10 और निर्भय आर्य नहीं जाते हैं और जहां पे सभी संप्रदायों की फोटो लगी रहती है विवाह के लिए ₹5100 की रसीद कटती और एक दिन में पांच 10 विवाह कराने का प्रयास किया जाता है और तुरंत वहां पर किसका विवाह होता है? अच्छा दो तीन बातें हैं। आर्य समाज के मंदिर क्या आर्य समाज का अस्तित्व कैसे बचा है मंदिर पे? तो मंदिर में जो अस्तित्व बचा हुआ है जो मंदिर है अब मंदिर में बात यह है कि जो व्यक्ति पहुंचता है क्या उसका जनेऊ करते हैं? तो जनेऊ नहीं करते तो वहां पर आर्य समाज में होने वाले सारे विवाह जो है वह शद्र हैं। शद्रों के विवाह हो रहे हैं। इतनी बात तो आर्य समाज के सिद्धांत के अकॉर्डिंगली भी है ना कि आर्य समाज में यदि जनेऊ के बिना वो करा रहे हैं विवाह तो सब शूद्रों के विवाह हो रहे हैं। शूद्र है वहां पर विवाह करने वाले सारे लोग। दूसरी बात यदि जनेऊ करा रहे हैं तो उसकी टेस्टिंग कैसे करी है इन्होंने? हमें आज विवाह करना है। हां लाओ तुम्हारा जनेऊ कर दे। हो गए भाई ब्राह्मण सीधे भर्ती सीधी भर्ती वो आती है ना नाविकों की नेवी में भर्ती आती है सीधी भर्ती

01:29:41:13 दसवीं से दसवीं फेल जो है वो ग्रेजुएशन करें पोस्ट ग्रेजुएशन करें वो आते बोर्ड लगे होते हैं ऐसे बाकी बात तो वही है बाकी बात तो ये ठीक है जिसको जैसा करना है करें जिनका समर्थ जिनका उनको वो लेना है क्या कहते हैं सपोर्ट लेना है ले और क्या ही कहा जा सकता है इनको मानने वाले में से तो है नहीं अब निर्भय आर्य के साथ जो चीजें हुई है उसका आधार लेकर के जो निर्भय आर्य और मेरे बीच की चीजों को सही से नहीं जानते हैं वो गलत तरीके से पोट्रे करके प्रस्तुत करते हैं। मैंने भी निर्भय आर्य को मैसेज किया कि निर्भय ऐसा है हमारे बीच में वो चीजें अधूरी रह गई है। आप पूरी कर लो आ के ले आओ पंचा आपका क्या है और वहां से शुरू करते हैं और पूरी कर लो भाई आ के तो अब अब देखिए अभी बीच में क्या हुआ था कि इन्होंने शायद अनाउंसमेंट किया था हालांकि वो भी मुझे अनैतिकता लगी जब इन्होंने ये कह दिया कांग्रेसी और ये ऐसे लोग आ सकते हैं है ना पार्टी वो राजनीति से जोड़ के खामखा यार सिद्धांत की बात करो ना क्यों ला रहे हो दूसरी चीजों को बीच में लाना है क्योंकि भाई अपनी पुष्टि हो नहीं पा रही सिद्धांत में कमी है ना तो दूसरी जगह से उसकी पूर्ति करेंगे

01:30:58:04 और हम नहीं जाते हैं मुसलमानों से भी यह कहने तुम्हारे हलाल है हम नहीं आते तुम्हारे पास ये कहने तुमने नियोग किया है ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करो तुम्हारा धर्म धर्म तुम्हारा ब्रह्म ब्रह्म तुम्हारा मोक्ष मोक्ष सिद्ध करो तीन चीजें सब मान लेंगे तुम्हारा वो नहीं राजनीति है ये है वो सब तरह की बातें करेंगे ऐसे इनका वो रिसीव हुआ है खैर पॉइंट की बात बता रहा था। तो निर्भय आर्य ने अभी अनाउंसमेंट किया था ₹1,000 दिए जाएंगे और भाई जब यह पब्लिकली अनाउंस कर रहे हैं तो उसमें मैं भी तो शामिल हूं कि नहीं हूं उसमें शामिल कि मैं इनके लिए कुछ अलग से कुछ या तो हूं तो अब जब ये पूरी तरीके से रेडी है ₹11,000 का अनाउंसमेंट कर रहे हैं। उसके बाद मैं हफ्ते 10 दिन के बाद इनको मैसेज कर रहा हूं कि निर्भय तुम्हारे लोग गलत चीजें फैला रहे हैं तुम्हारे नाम से। तुम्हारे तुम्हारे मेरे बीच की चीजों को अंडरस्टैंडिंग को समझ नहीं पा रहे और गलत बातें वो फैला रहे हैं। तो एक काम करते हैं पब्लिकली आ के सिद्धांत पर चर्चा कर लेते हैं। मैंने यह मैसेज किया था परसों रात को शायद कल ये मेरे पास जवाब आया कि मैं देखता हूं बताता हूं और अभी तक मेरे पास मैसेज दोबारा वापस आया नहीं का। क्यों? क्या

01:32:13:06 तैयारी करनी है शिवश नारायण द्विवेदी से भिड़ने के लिए। भाई तुम तो घोषणा कर चुके हो, कटाक्ष कर चुके हो राजनीतिक वाले गलत बात है ना निर्भय फिर यह नहीं करना चाहिए था तुम्हें और मैंने पहले ही जैसे जैसे अन्यों के साथ अन्यों के साथ वही व्यवहार करो जो अपने लिए अच्छा अच्छा लगे तुम्हारे लोग तुम्हारे लोग फैला रहे हैं कि नया दर्शन के चक्कर में मैं गया था। तुम खुद कह रहे हो कि नहीं वहां ब्लंडर हुआ था जिस कारण से वो स्थगित हुई तो अपने लोगों को मना करो ना ये गलत बात मत फैलाओ भाई सच्चाई पे रहो यार गिरो मगर उस झरने की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता नहीं खोने देता तुमसे उम्मीद नहीं है मुझे बिल्कुल और तुमसे बात करना भी इसीलिए मेरा कम हुआ तुम्हारे यहां वो चैनल है उस पर मेरी बात वही जो मैंने कोमा के बारे में बताया था रोको मत जाने दो मैंने कहा रोको मत जाने दो उसको तुम्हारा आदमी दिखा रहा है रोको मत जाने दो बदल गए मेरे भाव को बदल गए और तुम हो तुम कुछ कर नहीं रहे जबकि मैं तुम में रक्षक देखता हूं धर्म का

01:33:19:03 शुरुआत अपने से करनी होती है धर्म को धारण करना होता है खुद को जलाना पड़ता है पहले अग्नि में ये नहीं बस ढिंढोरा पीट दो इसको मनवा लूं उसको मनवा लूं धारण करो ना भाई सत्य को सिद्धांत की रक्षा के लिए संबंधों का त्याग करना पड़ता है। हां बोल रहे थे आप सनातन शंकर जी हां मैं यह कह रहा था जो पहली लाइन थी के कांग्रेसियों को और अखिलेश के समर्थकों को खुला चैलेंज अब जैसे पहली लाइन पढ़ी मैंने कहा यार ये चैलेंज तो उनके लिए है कांग्रेसियों के लिए और अखिलेश यादव की को मानने वालों के लिए तो मैं तो पहले वाली लाइन से समझ मैंने कहा भाई इसको तो एक्सेप्ट करने वाला व्यक्ति तो मूर्खी कहा जाएगा तो हमने तो उस पर बोला नहीं अच्छा उसने दूसरी बार फिर मेरे को टैग करके भी लिखा था कि भैया माता ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया। अच्छा वो डायलॉग जो है वो कहां से ले रहे हो तुम? वो भी तो शिवा नारायण द्विवेदी का डायलॉग ले रहे हो तुम। ठीक है? तो खैर मेरे तो और भी बातों को लेकर उससे क्लेरिफिकेशन चाहिए मुझे तभी वार्ता हो सकती है। क्योंकि मुझे मेरे आचार्यों का जो अपमान किया गया है एक वीडियो में और मुझे जिस व्यक्ति ने वो वीडियो दिया वो 100% शोर है। वो सामने नहीं आना चाहता

01:34:34:07 लेकिन वो कहता है ये आवाज इसी की है। तो अब मैं उस व्यक्ति के साथ कैसे वार्ता करूं जो कि हमारे आचार्यों को हमारे आराध्य को वहां पर अभद्र बातें बोल रहा है। तो पहले तो मुझे यह कंफर्म 100 उसके मुख से नहीं होगा कि ये भैया मेरी आवाज नहीं है। नहीं नहीं क्योंकि जो व्यक्ति प्रत्यक्षदर्शी है उसने तो कहा है कि वो वही है तो फिर ऐसे में बात नहीं हो सकती जहां पर हमारे सामने ऐसा व्यक्ति खड़ा है जिसने हमारे आराध्या को पहले तो उस पर क्षमा मांगनी पड़ेगी उसे तो मैंने उस पर कम्युनिटी पोस्ट भी करी थी जी ये जी हां गुरु जय श्री राम भैया ये गुरु शिष्य परंपरा के बारे में बताता हूं मैं एक मैं अपना अनुभव बताता हूं शायद शिवश भैया को याद होगा एक बार मैं फसा था कि मैंने रामचरितमानस गीता प्रेस गोरखपुर के रामचरितमानस में एक चौपाई पढ़ा था कि जन्म जन्म मुनि जतन कराई अंत राम क आवत ना उसमें उसकी व्याख्या दी है कि जन्म जन्म मुनि जन जतन कर लेते हैं लेकिन अंत में राम नहीं बोल पाते हैं और जब मैंने पूज्य महाराज जी का प्रेमानंद जी महाराज जी का वीडियो देखा था उनको जब ये क्वेश्चन गया तो उन्होंने क्या बोला इसको आप उल्टा क्यों ले रहे हो? इसका सही अर्थ यह है कि अंत राम कही और फिर आवत नहीं। अंत में राम बोला और आए

01:35:49:13 नहीं। तो मैंने भैया को फोन करके शिवा भैया को फोन करके पूछा कि ऐसा ऐसा ऐसा ऐसा हुआ है। उन्होंने बताया कि हां ये बात तो सही है। उसके आगे की चौपाई को कोट करके उन्होंने मुझे समझाया। तो देखिए लिखा क्या है? गीता प्रेस ऑथेंटिक है। लेकिन आदमी कंफ्यूज हो जाएगा कि जब मुनि जन जतन कर रहे हैं। उनके मुख से राम नहीं आ रहा है। तो मैं तो छोटा मोटा मेरे मुख से तो आएगा ही नहीं। इससे अच्छा भाई मत राम नाम मत जप करो। यह मेरे बुद्धि में आ सकता था। लेकिन जब मुझे डाउट हुआ तो मैंने क्या किया? पूछा परंपरागत तो मेरा डाउट क्लियर हुआ। है ना? तो यहां इसलिए परंपरा की जरूरत पड़ती है। अरे तो यह बात लिखी है गुरु गीता में यह बात लिखी स्पष्ट कि बिना गुरु के बिना आधिकारिक गुरु के। ये जो शास्त्र है वो हमारेित को भ्रांति में डालते हैं। डाल देंगे। गुरु गम विद्या है भाई पढ़ो ना चार नौ तीन छंदो उपनिषद गुरु गुरु गम विद्या ही मुक्ति दिलाएगी गुरु गम विद्या हां आधे लोग जो है आधे लोग जो है वो देखिए उस ग्रुप में जो जुड़ता है ना लाइव में आधे लोग पुराण को नहीं मानने वाले लोग हैं। आधे लोग वेद को नहीं मानने वाले लोग हैं। कुछ लोग अपनी परंपरा को मानने वाले ये सब मिलकर

01:37:04:19 के सोचिए एक सनातन समाज बना रहे हैं। आगे जाकर के क्या समाज बनेगा मालूम है? फिर यह आपस में लड़ेंगे। वही जो अभी अभी इतना आनंद आएगा आगे जाकर इतना आएगा ना जब आपस में इनका जब खिचड़ी पकेगा ना तो हमको सिर्फ आनंद लेना है बस। हां भैया आप बोल रहे थे। नहीं नहीं आपस में आपस में नहीं लड़ेंगे। पता है ये मैं बताऊं। आपस में नहीं लड़ेंगे। ये जब आर्य समाज वाला बोलेगा कि तुम्हारी राधा मां ये है। आचार्य ये है तो जो दूसरा मानने वाला व्यक्ति होगा रामपाल का बोलेंगे। बोलेंगे नहीं नहीं नहीं ऐसा है इनको बोलने दो रामपाल का खंडन करने दो रामपाल वाले बोलेंगे के भैया ऐसा है हम दयानंद सरस्वती ऐसे थे दयानंद सरस्वती वैसे थे तो आर्य समाज बोलेगा अरे अरे नहीं इनको बोलने दो कुछ भी नहीं हमें विधर्मियों से लड़ना है इनको बोलने दो इनको गालियां देने दो हमें जितनी दे रहे हैं ऐसे करेंगे ये लोग वहां पर कोई सिद्धांत नहीं होगा इनका और जो ज्ञान है वो मनमुखी रूप से ज्ञान ले लो अब जब विधर्मियों के साथ बात करने बैठेंगे बोलेंगे तुम्हारी कुरान में यह लिखा है वो बोलेगा तुम्हारे वेद में यह लिखा है फिर उधर से राम रामपाली बोलेगा नहीं नहीं वहां तो कबीर लिखा है तो इस तरह की खिचड़ी ये पकाना चाहते हैं। यह धर्म नहीं है बल्कि ये अधर्म है। हम जी बड़ी अभद्रता मेरे को एक चीज का और लगा था वो जो

01:38:21:08 महोदया जो हैं उन्होंने जो एक रील डाला है कि शिवा नारायण द्विवेदी आए थे कुछ करने के लिए और डायरिया करके चले गए और ये मुझसे हाथ जोड़ के ये कर रहे थे वो कर रहे भाई मर्यादा में आकर के अगर कोई बोल दे कि माता जी आपको प्रणाम। अब यह फोटो वो ले ले और डाल दे कि देखो देखो देखो शिवाय नारायण मेरे सामने नतमस्तक हो गए तो शिवाय नारायण द्विवेदी का और भी तो कुछ है रूप वो भी तो दिखा दो आप अधूरा चीज दिखा रही है। मैंने कमेंट में वही डाला है वो कहती लाइव आ के बात कर लीजिए रिप्लाई में। इसमें इसमें क्या है कि इन्होंने क्लेम किया अपनी रील में। उसमें कह रही हैं कि भाई इन्होंने मुझसे बहन बहन करके सारे प्रश्न जान लिए मेरे। भाई हम आपसे बहन बहन करके इसलिए बात कर रहे हैं और अभी भी इस चर्चा के अंत में भी आपके लिए शुभ संदेश है। बने रहिए। मगर बहन-बहन करके इसलिए बात कर रहे हैं कि जब आप सार्वजनिक रूप से हमारे सिद्धांतों के विरुद्ध खड़े होंगे तो हमें वहां पर आपके सिद्धांतों का सच्चाई समाज को दिखानी पड़ेगी। जो हम नहीं चाहते हैं, जो हम नहीं चाहते हैं कि आप समाज के सामने निरुत्तर

01:39:36:26 या फिर ऐसी स्थिति में दिखाई दें क्योंकि आपका एक फॉलोअर्स हैं। आपको लोग मानते हैं तो हम आपका वो अपमान दुर्गति से आपको बचाना चाहते हैं। इसलिए बहन-बहन करके आपको वही पर्सनल बात मतलब पर्सनल प्राइवेट चैट में और प्राइवेट कॉलिंग में आपको समझाना चाह रहे हैं। आपने जितने प्रश्न किए सबके मैंने उत्तर देने का वहां प्रयास किया था। यहां भी मैं करता मगर यहां पे क्योंकि आप आ रही हो परंपरा के विरुद्ध होते हुए तो आपको सबसे पहले मुझे यही बताना होगा। नहीं तो यह संदेश चला जाएगा समाज में कि परंपरा के विरुद्ध होते हुए भी कोई भी वैदिक खोने का क्लेम कर सकता है। नहीं कर सकता और यदि करेगा तो उस शिवश नारायण द्विवेदी को वहां मुस्लिमों के सामने कमजोर होना पड़ेगा जो अपने धर्म की रक्षा करना चाहता होगा। याद रखना संप्रदाय विरुद्ध होते हुए अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना है। वैदिक धर्म की रक्षा नहीं हो सकती। संप्रदाय विरुद्ध होते हुए संप्रदाय विहीन होते हुए आप हिंदू खुद को क्लेम कर सकते हो। ठीक वो ठीक है। विरुद्ध मत हो। विहीन रहो। ठीक है। मुझे पता नहीं है कहां क्या कहा जा रहा है। प्रणाम है आपको। ठीक है। मुझे नहीं पता है। मैं ऐसे ही सही हूं। और विरुद्ध

01:40:52:00 हो कि शंकराचार्य का क्या मतलब हां विरुद्ध हो गए शंकराचार्य ने कहा मैं नहीं मानूंगा ये कैसे हो सकता है वो कैसे हो सकता है तो फिर तो फिर तो पूछा जाएगा बिल्कुल बिल्कुल व्याख्या अगर करने लगोगे और आचार्यों के द्वारा जो कही गई बात है उससे विरुद्ध अगर बात करने लगोगे तब हम में पूछा जाएगा कि परंपरा है वैसे आप अपने आप को सनातनी कहते रहो धर्म के कार्य करते रहो गौ रक्षा आंदोलन में जुड़ते रहो हम आपको अच्छा ऐसी बात आप बोल रहे हो जो आचार्यों के मुख से कही गई बात से मेल मेल खा रही है तो वहां पर तो हम आपको कुछ बोल नहीं रहे हैं। हम तो कह रहे हैं हां भाई बात सही कह रहे हो। जहां पर वो मेल नहीं खा रही है वहीं पर तो हम बोल रहे हैं कि भैया यहां पर आपकी बात जो है वो विरुद्ध है। अच्छा उसमें आपकी बात नहीं मानी जाएगी क्योंकि आपने तो स्वाध्याय किया है और स्वाध्याय से जो आपने गलत अर्थ समझ लिया है वो नहीं माना जा सकता। बात अर्थ वही माना जाएगा जो हमारे आचार्य मुख से निकला हुआ अर्थ है। तो वहां पर हम विरोध कर रहे हैं। बाकी चीजों में थोड़ी विरोध कर रहे हैं। हम बिल्कुल जी

01:41:53:22 तो मूर्खों की चौपाल सही टाइटल दिया है आपने और वहां पर रामपाल जी वैसे कमेंट बॉक्स में थे। खाली यह नहीं था कि वहां पर डिस्कशन में नहीं थे पर कमेंट बॉक्स में काफी लोग थे जो ये कह रहे थे कि ब्रह्म कुमारी आर्य समाज ऐसे लोगों को एक साथ आना चाहिए। रामपालियों को भी एक साथ आना चाहिए। जैसे मैंने कमेंट में देखा है मेरे को स्क्रीनशॉट भी भेजा किसी ने कि देखो ये तो सब लोग मिलकर एक दूसरे का समर्थन करने के लिए आ रहे हैं क्योंकि शिवश नारायण द्विवेदी को हराना है परंपरा प्राप्त आचार्यों को हराना है तो सारे इकट्ठे हो जाओ भैया वो कांग्रेस और अभी चला परंपरा प्राप्त आचार्यों को तो क्या ही हराएंगे वो तो बात दूर की है मगर बात ये है कि परंपरा प्राप्त सिद्धांतों का विरोध करना है महागठबंधन और इनको ऐसा लगता है कि विरोध करके अपने पैरों अपना बहुत अच्छा कर रहे हैं अरे अरे पागलों यही काम आएंगे तुम्हें जब नास्तिकों को हराना होगा ना अंत में यही काम आएंगे सिद्ध ही नहीं कर पाओगे ईश्वर को कहां तुम धर्म की रक्षा कर लोगे

01:42:53:20 मूर्ख कहीं की जो तुम ये विरोध कर रही हो ना शंकराचार्य परंपरा प्रचंड बोध है ये सब जो तुम कर रही हो बैठ के आज तुम उस पर लीपापोती कर रही हो सिद्ध कर लोगी इनके विरुद्ध जाते हुए ईश्वर की ईश्वर के अस्तित्व को अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रही हो और फिर कह रहे हो मैं धर्म रक्षक हूं। आपके लिए धर्म मायने नहीं रखता है। ना अपनी मायने रखती है। वजूद, वर्चस्वता, घमंड, अहंकार मेरे दो लाख फॉलोअ भाई। 3 लाख फॉलोअ है भाई। हाउ डेयर? कोई मेरी बात को कैसे काट सकता है? कोई भी आचार्य हो। एक आध वीडियो देख लेना पूरी के शंकराचार्य जी का। समझ में नहीं आएगी। हिंदी ऐसी है संस्कृत निष्ठ समझे [हंसी]

01:43:44:00 बेवकूफ नहीं और गंदगी मचा रही हो अपने चैनल पे अरे भाई अगर तुम धर्म योद्धा हो तो चैनल पे थोड़ा धर्म का वो करो ना क्या कर रही हो ये डायरिया ये सब तुम्हें क्या लगता है इससे मुझे चोट पहुंचती है नहीं पहुंचती व्यक्तिगत नहीं पहुंचती सबसे चोट इस सब से चोट नहीं पहुंचती है बहुत पहले हो चुका है सबका काम खत्म। एक किलिंग मशीन की तरह हूं। किलिंग मशीन कुछ नहीं फर्क पड़ता तुम्हारी इन सब बातों से। हां, यह जरूर है कि व्यवहारिक उसमें मुझे देखना पड़ेगा कि यदि किसी ने गाली दी तो सिद्धांत ये है कि गाली के पीछे गोली चल जाती है। वहां चर्चा का कोई जगह नहीं बची। तुमने अमर्यादित बातें इतनी कर दी व्यक्तिगत रूप से। तुमसे क्या चर्चा करें? तुम्हारे इससे पता चलता है कि तुम्हारा चरित्र कैसा है। इस दोगलेपन से दोगली बातों से पता चलता है कि कितनी बड़ी त्रया चरित्र हो। ऐसे में तुम्हारे तुम्हारे साथ सद्भावना पूर्वक या फिर सौहार्द पूर्वक ऐसी कोई चर्चा कैसे करें जिसमें कि लड़ाई नहीं होनी है।

01:44:57:15 ठीक है। जी उसमें तो उसने तो गुरु परंपरा का विरोध करने के लिए अर्जुन का सहारा लिया था। की अर्जुन ने द्रोणाचार्य से युद्ध किया ना महाभारत में हां तो उसका सहारा लिया उन्होंने युद्ध किया ना अपने गुरु से [संगीत] तो हम भी कर सकते हैं उनका विरोध कर सकते हैं इस तरह से कुछ [हंसी] युधिष्ठिर ने गुरु का [गला साफ़ करने की आवाज़] विरोध किया था तो जब वो धर्म की साइड लड़े अच्छा वो अपने गुरु से थोड़ी लड़ रहे थे ये भी तो देखो वो किससे लड़ रहे थे वो तो कौरवों से लड़ रहे थे वो अपने गुरु युधिष्ठिर जो युधिष्ठिर जो है वो तो स्वयं वहां पर भीष्म जी से अ धर्म की व्याख्या वर्णाश्रम की व्याख्या पूछ रहे हैं। तो ऐसे में यदि उन्होंने कहा भी है पहले तो प्रकरण पूरा देखने वाली बात है। यदि उन्होंने कुछ ऐसे कहे भी है तो उनको जो है सिद्धांत के रूप में कैसे ग्रहण किया जाएगा? वो तो स्वयं इस विषय में शंका अपनी दूर कर रहे हैं ना भीष्म जी से और फिर वही बात कर्म से देखना है। वही वाली बात कि जो ब्रह्म ज्ञानी होगा वही ब्राह्मण है। अरे भैया जब ब्रह्म

01:46:12:24 ज्ञानी होगा तो हम उसके ब्रह्म ब्रह्म ज्ञान का पता कैसे करें उसके हमें ब्रह्म ज्ञानी होना पड़ेगा पहले। फिर फायदा क्या है आचार्य का? फिर वही बात कोई सिर ना पैर उपयोगिता क्या है उसकी भैया लेकिन इसमें इसमें इसमें जो है उत्तर तो ये हो सकता था ये भी हो सकता है कि जो अर्जुन था वो तो कोई धर्म के लिए तो लड़ाई नहीं कर रहा था ना मतलब कि धर्म व्याख्या के लिए तो लड़ाई नहीं कर रहा था शास्त्रों पे लड़ाई तो नहीं कर रहा था वो तो न्याय और अधिकार के लिए लड़ाई कर रहा था धर्म धर्म युद्ध है ना तो ये बात को इससे जोड़ा नहीं क्या चल रहा है वो देखने वाली बात है कि किस आधार पर कहा जा रहा है मगर भाई एक मोटा पॉइंट तो पकड़ो अगर कर्म के आधार पर तुम ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य घोषित ये वाली उसको लागू कर दोगे तो किसी को भी आचार्य के रूप में स्वीकार करने से पहले भाई अपना ब्राह्मण सिद्ध कर अच्छा कैसे सिद्ध होगा कि मुझे वेद आते हैं वेद मंत्र सारे हैं उनकी व्याख्या मेरी पूर्व अच्छा सुना भाई अब मैं कैसे पता करूं कि वो वेद मंत्र सुना रहा है मेरे को वेद मंत्र आते हैं मुझे व्याख्या मालूम हो तात्विक विवेचना आती हो मुझे फायदा क्या है फिर उसकी प्रमाणिकता का मैं उनसे

01:47:28:14 वेद का अर्थ जानने के लिए उनकी प्रमाणिकता जांच रहा हूं या फिर अपने वैदिक मंत्रों को जानने के बाद उनकी वेद की उनकी प्रमाणिकता जांच रहा हूं क्या है इसमें एग्जीक्यूशन भी तो देखो भाई इंप्लीमेंटेशन भी तो देखो उसका क्या होना है उसका उपयोग क्लासिफिकेशन होता क्यों है वर्गीकरण होता क्यों है जिससे कि चीजों को व्यवस्थित किया जा सके समाज को व्यवस्थित किया जा सके। एक दिशा में अब सुव्यवस्थित होकर के समाज अपना कार्य कर सके। मुख्य कार्य क्या है? मोक्ष। उसके लिए कार्य कर सके।

01:48:10:14 भाग गया। सुभाष भाग गया था। अच्छा ये कोई बता रहे हैं कि शंकराचार्यों को डिबेट का चैलेंज देते हुए विशुद्ध नास्तिक कह रहा है और आप उसको अपना छोटा भाई बोल रहे हैं तो यह तो करपात्री जी ने भी बोला था है ना ये करपात्री जी ने भी बोला था भटक चुके हैं भटके हुए हैं हम तो वापस लाएंगे हां सब मिल भी जाएंगे ना [गला साफ़ करने की आवाज़] सब मिल भी जाएंगे ना तो भी प्रश्न वही आएगा कि बताइए गुरु परंपरा सब लोग मिलके बता दो भाई इतने सारे लोगों का सिद्धांत मिल गया है और सब अपने सिद्धांत को उनके अकॉर्डिंग सब अपने सिद्धांत को टॉप का मानते हो परब्रह्म का मानते हो तो सब मिलकर दे दो ना उत्तर शिवाय नारायण द्विवेदी का उत्तर दे दो खत्म करो शिवाय नारायण द्विवेदी भाग जाएगा क्या हार जाएगा कभी नहीं आएगा पहले उत्तर तो दो सब मिलकर उत्तर नहीं दे पा रहे खाली आपस में मजाक बना रहे हैं भाग गया भाग गया नहीं मैं दावा कर देता हूं मैं चार्टर्ड अकाउंटेंट हूं सारे लोग मेरे से ऑडिट करवा लो और मेरे साइन जो है वह मान्य होंगे तो मान लोगे मेरे से यह नहीं पूछोगे भैया बताओ तुम कौन

01:49:25:20 से सीए इंस्टट्यूट दिल्ली से कहां से तुम पढ़े हो अपना सर्टिफिकेट तो दिखाओ ये नहीं बोलोगे क्या मेरे से इतनी सी बात तो इन्होंने कही जब आप दावा कर रहे हो वो दावा आपका वहां पर फेल हो जा रहा है कि भैया आपने दावा कर दिया मैं चार्टर्ड अकाउंटेंट हूं या मैं डॉक्टर हूं एमबीबीएस हूं भैया डॉक्टर एमबीबीएस हूं तो अपनी डिग्री बता दो ना तो यही तो पूछा जा रहा है परंपरा बता दो परंपरा ही तो आपकी डिग्री है और परंपरा में अगर आपने माना तो जो आचार्य द्वारा जो बात कही गई है फिर जो आपकी बात है वहां से मैच की जाएगी। यही तो सिद्धांत है। इतनी सी बात आपको समझ नहीं आ रही है। ये चीज मेरे को समझ में नहीं आई। ईश्वर परंपरा ईश्वर परंपरा डायरेक्ट पहले ईश्वर परंपरा डायरेक्ट आज दूसरा आचार्य। मतलब दो ही आचार्य दो ही आचार्य। रामानुज अच्छा रामानुज आचार्य हम रामानुज परंपरा से। तो ठीक है रामानुज परंपरा की बात को तो नहीं काटोगे ना। तब उन्होंने बात पलट दिया। क्यों? क्योंकि पता है अरे यार ये कहांहां पड़ चुका है। कहांहां से ले आके हमको ब्लास्ट करेगा। अभी अब ये जो मातृ अब ये जो मातृ शक्ति हैं ये ये बना रही है कि भाई ये खुशी मना रही है कि शिवश देखो यहां पे मान लो वैसे उसमें मेरा ही पक्ष सिद्ध है। वो मुफ्ती वाली डिबेट में मगर मान भी लिया जाए कि मेरा पक्ष असिद्ध है तो उसकी क्या खुशी मनानी चाहिए एस ए हिंदू

01:50:40:26 इनको। हां। दूसरी बात कि भाई मिल जाते हैं सारे रंग इसी मिट्टी के रंग में और गिरते हैं वीर जले ही मैदान जंग में। कभी घर से बाहर निकलो तो तब तो बता रही हूं मास्क लगा के आती हूं इंडिया। सीना तान के धर्म रक्षा करते हैं युद्ध के मैदान में खड़े होकर के और तुम्हारी भी करेंगे जिस दिन तुम पर हमारे सामने कोई आक्रमण हो रहा होगा। ये ध्यान रखना। ये नहीं है वहां पे कि उस दिन अरे इसने मेरे साथ ऐसा किया था तो हम आज इसकी रक्षा नहीं करेंगे। अगर मेरे सामने तुम्हारे ऊपर आक्रमण हो रहा होगा उस दिन भी तुम्हारा यह भाई खड़ा होगा वहां तुम्हारी रक्षा में समझे क्योंकि तुम तो हो पागल सुरमई अंखियों में वो हो जाती है ना पागल वो हाल है तुम्हारा

01:51:26:09 [हंसी] बिल्कुल सही कहा सदमा से आप जा रहे हैं पिछले दिन से आप जा रहे हैं हां पिछले आठ दिन से हम गाना बहुत गा रहे हैं। [हंसी] वीडियो में भी गा रहे हैं। रील में भी गा रहे हैं। चलो कुछ हुआ नहीं हुआ। कम से कम वो गाना कहां से आया पता है? वो तत्व वहां से आ रहा है वो गाना। इस मातृ शक्ति ने एक रील बनाई। उसमें क्या कहा कि मैं तुम्हें तुम्हारे शंकराचार्य जी का एक वो बता रही हूं। त्यम तक्यम बड़ा एक्टिंग करें ड्रामेटाइज और अपनी सारी रील्स जो बनाती है उसमें नाटक करती है। सारी रील्स में नाटक करती है। एक्टिंग एक्टिंग शिवाश नारायण द्विवेदी मतलब वही एक पैटर्न है प्रॉपर उसी पैटर्न में इनको बोलना है। हां तो भाई जो कुछ ठीक है तुम्हारी भेड़ तुम्हारी जो फौज है वो अंधी है। ठीक है। जो सारी चीजें ठीक है। अरे है ना? मगर जो कुछ प्रबुद्ध जन होंगे वो तो तुम्हारी चीजों को पकड़ेंगे ना। मेरा तो ये कहना है कि इस विषय को छोड़ ही देते हैं आज के बाद और इससे इंपॉर्टेंट चीजें रहेंग अपने पास बात करने को। ये है

01:52:41:18 हां ये तो बहुत छोटा विषय है। फालतू का विषय है बल्कि और बहुत आएंगे ऐसे। शास्त्रवाद जी कुछ रह गया हो पॉइंट्स तो आप बता दे। जी भैया उसने तो ये कहा था कि आप जो है हरामियों का विरोध इसलिए करते हैं ताकि वो जो है प्रोफेशन किताब अब ये तो ये ये मेंटलिज्म तो वही अपना मेंटल प्रस्तुत करें इसलिए करते हैं चौखंबा से बताते हैं इसलिए करते हैं क्योंकि उसमें हमारे देवी देवताओं के लिए जिस पर हमारी आस्था है हमारे आराध्यों के लिए हमारे आचार्यों के लिए इवन दयानंद सरस्वती जी के लिए भी बहुत अंट शंट बातें लिखी हुई है और वो एक नंबर के गवार है सब के सब फड़ कहीं के तो वो जब अपनी भाषा में बोलते हैं तो और ज्यादा गंदा लगता है वो ठीक है इसलिए विरोध करते हैं वेदों में प्रमाण है [हंसी] अब बाकी तो इनकी ईश्वरीय परंपरा इनको मुबारक मैं तो ये कहूंगा मैं कुछ इनको मैं कुछ बोल दूं कुछ मतलब कुछ क्वेश्चन है वो तो मैं पूछ लेता हूं ताकि मैं अपना बात रख सकूं एक था शंकराचार्य जी का शिष्य बन के वहां पे था वो बोल रहा था कि जो

01:53:56:19 ये बोल रही थी आपके विरोध में उस टाइम पर तो वो डिफेंसिव में थी इसलिए वो ज्यादा वीडियो बना दी और ज्यादातर ये सब कुछ बात बोल दी तो प्रश्न उठता है क्या डिफेंसिव में कोई कुछ भी बोल देगा किसी को भी मतलब किसी भी आचार्य को कुछ भी बोल दे या किसी भी सिद्धांत को खारिज कर देगा मैं हां पूछ रहा हूं और और एक बात मैंने देखी कि कोई व्यक्ति अपने आप को शंकराचार्य का शिष्य बोलते हुए इनका इनके साथ बै बैठा हुआ है। इनका विरोध नहीं कर रहा है तो वह उनसे जुड़ा हुआ नहीं है। किनसे जो इनको गाली दे चुके हैं। और यदि कोई व्यक्ति सिद्धांतों का पक्ष आकर के सिद्धांतिक पक्ष में इनके विरुद्ध खड़ा हुआ है शंकराचार्य का शिष्य तो वो उनसे जुड़ा हुआ है। यह कहां का शास्त्रीय सिद्धांत है? अरे झांको अपनी अंतरात्मा में। खिलवाड़ कर रही हो तुम इंसानियत और धर्म और वेद वेद वैदिक धर्म के साथ। इस नीच मानसिकता से बाहर आ जाओ।

01:54:54:26 अपने बच्चों को यही सिखाओगी अन्याय भेड़चाल में भागी जा रही हो अपने आप से पूछो तो सही कि मैं सच्चाई पे हूं क्या बोलिए शास्त्र जी हम जी भैया और वही शंकराचार्य जी का शिष्य पे बोलता है कि आपने जो परंपरा की बात लाई थी बीच में परंपरा की बात जो आप कर रहे थे वो इसलिए कर रहे थे क्योंकि आप जो व्यक्ति विशेष पे उसने सवाल उठाया था उस का आप उत्तर नहीं दे पाते। ठीक है? पहली बात तो मैं पहली बात तो मैं पहली बात तो मैं मैं समझ गया। पहली बात तो मैं इस मामले में आया ही इसलिए हूं क्योंकि अब यह बात व्यक्तिगत नहीं रह गई थी। यह बात अब सिद्धांत पर चली गई थी। ठीक है? भारती कृष्ण तीर्थ जी का उदाहरण लेकर के इन्होंने विदेश यात्रा का समर्थन करने का प्रयास किया था कि हम जो है शास्त्र का अर्थ बताएंगे सही तो वहां सिद्धांत पर बात गई थी परंपरा पे बात चली गई थी और केवल सांकर परंपरा पे नहीं समस्त प्रमाणिक परंपराओं पर क्योंकि सबका मत है कि जो क्या कहते हैं विदेश गमन निषेध है विदेश गमन संक्रमण काल है किसी ने

01:56:09:27 कर लिया तो उसको कोई अगर टारगेट कर रहा है व्यक्तिगत वो गलत है हम उसके विरोध में है मगर यह नहीं है कि उससे से रक्षा करने के चक्कर में आप जो सिद्धांत का ही खंडन करने लग जाओ। तो पहली बात तो मैं इसमें आया ही इसलिए ही हूं। ठीक है? दूसरी बात यह है कि अगर यह व्यक्तिगत बात थी। ठीक है? अगर यह व्यक्तिगत बात थी तो फिर आप क्यों ला रही हैं? शंगेरी पीठ में इतना डोनेशन आता है। और तुम जैसे झुनझुना बजाने वालों को भेज दिया है। कहां रह गई व्यक्तिगत? बताओ। फिर वो करपात्री जी ने यजुर्वेद के भाष्य में यह लिखा है। शय ने यह लिखा है। क्यों ला रही हो? मतलब अगर तुम्हारी किसी चीज पर कोई बात की जाएगी तुम ऐसा क्यों कर रही हो? तो तुम सारा इधर उधर का घसीट लाओगी और सामने वाला यदि परंपरा तुम्हारी पूछ ले तो तुम कहोगे ये व्यक्तिगत से बचने के लिए किया। अरे तुम व्यक्तिगत रहो ना फिर। तुम पूछो बार-बार मृत्यु जी ने ये वाला कमेंट क्यों किया है? हमारे पास हर कमेंट का जवाब है। और बोलो। पर तुम जब अपने आप को संप्रदाय विरोधी कह रही हो, फ्रीलांस कह रही हो तो पहले तुमको जमीन पर लाना पड़ेगा ना भाई। किसी एक आचार से जोड़ना पड़ेगा पहले। तो विदेश गमन का जो विरोध है या शवास का

01:57:24:28 जो विरोध है उन सब का जवाब हमें नहीं देना पड़ेगा। फिर वो तो खत्म हो गया। फिर सीधे कमेंट में बात आ जाएगी। यह है बात। ठीक है? तो सैद्धांतिक विरोध तुम्हारा खत्म करना पड़ेगा। तब उस पर आएगी ना बात। व्यक्तिगत वाली बात इसीलिए मैंने शुरू में बताया वह सेकेंडरी है व्यक्तिगत वाली बात और तुमने भी उस पर वो हुआ था शुरू में हम सैद्धांतिक बात पर आए थे तो सिद्धांत तो यहां से शुरू होगा कि तुम्हारे पास शास्त्र आए कहां से जिन शास्त्रों का आधार बना करके तुम ये क्लेम कर रही हो कि विदेश जाने का समर्थन कर रही हो वो शास्त्र तुम्हारे पास आए कहां से तुम हम पर शास्त्र का दबाव डाल रही हो हम वो शास्त्र तुम्हारे पास आए कहां से इस बात का दबाव डाल रहे है समझ गई तुमने शास्त्र का दबाव डाला है ना तुम्हारे पास शास्त्र तुमने इंटरनेट से शास्त्र पढ़े ठीक इसको समझो थोड़ा तार्किकता लाओ थोड़ी सोचने की स्टाइल में और इनकी एक जो एक ये क्लेम था क्या कहते हैं कि हां मैंने इनसे निवेदन किया था कि भाई चर्चा कहो इसको चर्चा कहने का निवेदन नहीं मैंने कहा चर्चा निष्पक्ष दिखाई दे इन्होंने सांवले कलर का मेरी नजरों में एक विलेन जैसा चेहरा बनाया था शंकर परंपरा की ओर से आ रहा है कोई और उसमें नाम क्या लिखा था कि ऑन देयर कंट्राडिक्टरी कुछ ऐसा कुछ नाम था तो चर्चा होने से पहले ही उसका नाम क्या मेरी निर्भय के साथ चर्चा हुई थी। क्या

01:58:40:02 शीर्षक है? आज भी देख लेना जाकर के। निष्पक्ष शीर्षक है उसमें चर्चा में। ठीक है? और तुमने ऐसा शीर्षक डाला कि पहले ही व्यक्ति ये सोचने लगे कि इसमें जो है उनके कंट्राडिक उनके अंदर का जो विरोधाभास है उस पर बात हो। तो मैंने यह निवेदन किया था कि इसका जो पोस्टर बनाओ वो ऐसा बनाओ जो निष्पक्ष दिखे। है ना? विदेश गमन पर चर्चा, सैद्धांतिक विषयों पर चर्चा ऐसा बनाओ पोस्टर। मैंने उनको सुझाव भी दिया था और रही बात यह कि वह चर्चा थी या डिबेट थी इसको भी सुन लो। चर्चा में जब मैंने आपसे पूछा कि आपकी परंपरा क्या है? बहुत विनम्रता से। पहली बार ऊंची आवाज किसकी हुई थी? अगर वो डिबेट थी तो उस चर्चा को डिबेट में बदलने वाला कौन था? पहली बार ऊंची आवाज तुम्हारी हुई थी। और व्यक्ति की ऊंची आवाज तब होती जब सामने वाला दबाना चाह रहा है। और हम दबने वाले नहीं है। गब्बर सिंह तुम एक मारोगे तो हम दो मारेंगे। ठीक है? तो यह कहना कि चर्चा के नाम पर डिबेट कर ली। ये फंसा दिया वो फसा दिया। ये सब जितने चिलांटू तुम्हारे साथ खड़े हुए हैं। एक तो किसी में दम नहीं है। तुम तो तब भी मुझे वो लगी। इस मामले में तो भाई शेरनी है।

01:59:55:06 ललकारा सामना किया। ह और वो लोग कौन है? नपुंसक जैसे जो तुम्हारे पीछे तुम्हारे कंधे पर वार कर रहे हैं। इंडिया पैक जैसा व्यक्ति और जो स्वयं को गोवर्धन पीठ से जुड़ा हुआ बता रहा है। उसने तो मुझे फोन तक नहीं किया। भाई मुझे तुम्हारे साथ चर्चा करनी है। तुम्हारे साथ बैठ के बातें झोंक रहे हैं। ये रात और ये दूरी तेरा मिलना है जरूरी। ये सब कर रहे हैं। अरे भैया बीए मैन फोन करो। चर्चा डिसाइड करो। आओ गोवर्धन पीठ से हो। तुम विदेश यात्रा का विरोध करो। पहले तो तुम्हें यही सिद्ध करना तुम गोवर्धन पीठ से कैसे हो?

02:00:38:28 मूर्ख कहीं के। हां जी बताइए शास्त्र जी कोई पॉइंट बचा? भैया था कि उन्होंने सारे देख लिए। आर्य समाजवादी आर्य समाजवादी था। उसने ये कहा था कि आगम जो है उसी से बनते हैं। तो शंकराचार्य जी ने अपने भाष्य में आगम का वेर विरोधी बोला है आगम को। तो फिर किस प्रकार से मंदिर का पथ लेते हैं। शंकराचार्य देवी भागवत में वचन दिया गया है कि आगम शास्त्र जो हैं उनमें कहीं-कहीं वो अवैदिक भी हो जाते हैं। तो जो वेद विरोधी अंश है वेद विरुद्ध अंश वो सर्वथा त्यागने योग्य है। ठीक है? वेद विरुद्ध जहां पर होगा जो भी आगम वो त्यागने योग्य है ही है। यह पुराणों का कोट है और शंकराचार्य पुराण को मानते थे।

02:01:33:08 जी भैया और आपने देखा भैया जो ने आपके ऊपर वीडियो बनाया अभी तक। ठीक है। बनाया होगा वो तो जवाब दिया ही जाएगा। आवाज कहां तक जानी चाहिए? लाहौर तक। [हंसी] वो तो बनाया ही जाएगा। [गला साफ़ करने की आवाज़] अच्छा एक तरफ ये सोचो कि जिन लोगों को मैं जानता नहीं हूं कि उन जिनों जिन्होंने इनको अपशब्द कहे। हालांकि शुरुआत इन्होंने ही की अपशब्दों की तू तड़ाक की फिर भी रिटर्न में जिन लोगों ने इनको अपशब्द कहे हैं कि वो उनको मैं पर्सनली नहीं जानता हूं और वो अब मुक्तेश्वर जी से शंकराचार्य से जुड़े हुए भी है कि नहीं ये भी मैं नहीं कंफर्म जानता फिर भी उनकी ओर से हंबल होकर के मैंने क्षमा कहा कि मुझे क्षमा भाई उनकी तरफ से मैं क्षमा मांगता हूं अगर आपके साथ कुछ अभद्र व्यवहार और एक तरफ ये है जो खुद मुझे टारगेट कर रही हैं और फिर भी अपेक्षा कर रही है कि मैं इनके साथ जो मंच साझा करूंगा

02:02:48:14 धिक्कार है तुम पर नारी होने के नाम पर धिक्कार है तुम पर जो ये सब कर रही हो अपनी सबसे बड़ी बात है तुम धर्म धर्म का चैनल अपना प्रस्तुत कर रही हो वहां पर तुम ये गंदगी फैला रही हो डायरिया और ये सब बताइए वहां पे मैंने देखा एक चित्र में जो एक कार्टून को वो शौच पर बैठा हुआ दिखा रही है ये गंदगी ये सिखाते हमारे परंपरा प्राप्त आचार्य ये तो दयानंद जी भी नहीं सिखाते यार इतनी चीजें इस स्तर की बातें दयानंद जी भी नहीं करते।

02:03:22:26 बिल्कुल पर्सनल लेवल पर अटैक करना [हंसी] हम और व्यक्ति को टारगेट करना ये वही करना। चर्चा तुम्हें करनी है जो चैलेंज चैलेंज की बात तुम कर रही थी। अब चर्चा तुम्हें करनी है। तुमने अपने चैनल पर हम तुम्हारे आए थे। तुमने मक्कार वगैरह तुमने कहा। हमने नहीं कहा। तुम तुम्हारे पास तर्क थे जो तुम्हें भूक रही हो। अपनी रील में यह हो सकता था वो होना था। तुम्हें तब वहां करने चाहिए थे। वहां अकल घास चरने चली गई थी क्या कि अब शौक लग गया था। अब बात यह है कि तुमने जब पहले अमर्यादित आचरण कर दिया है तुम्हें 100 बार गर्ज है और तुम्हारे अंदर है सामर्थ्य पहले क्षमा मांगो। इस रील को डिलीट करो। अपमानजनक में बनाई है और तब आओ हमारे चैनल पर। ठीक है?

02:04:08:22 [गला साफ़ करने की आवाज़] और बात कही थी। हां इसमें एक बात कही थी कि जो लोग भी गाली देते हैं वो सब शिवश के गुरु भाई है। ठीक है और और जो वहां बैठा है उसके गुरु भाई नहीं है। शंकराचार्य क्योंकि वो उनके पक्ष में बैठे हैं। और बाद में बाद में ये भी बोला कि इनकी दीक्षा भी नहीं हुई है तो भी गुरु भाई है। [हंसी] अरे उनमें से कई के तो चेहरे भी नहीं जानता हूं। भाई कौन है क्या है हां तो मैं एक बात कहूंगा लास्ट में जो मैंने कहा था ना शुभ संदेश है परामर्श है आपके लिए वो यही है कि आप अपने अंदर भी ये जानती है आपने स्वीकार भी किया शास्त्र इत्यादि का अध्ययन आपका बहुत नगण्य से लेवल लेवल का है उसमें आप जो धर्म विरोधियों को कुछ कर पा रही तो वो करती रहिए आपको यदि उसमें कुछ सहायता चाहिए अकाट्य सिद्धांतों के जो चिल्लांटू लोग हैं जो आपको पुश कर रहे हैं ना चलो चलो इनसे वो नहीं मिल पाएंगे आपको अकाट चीजों की जरूरत पड़े तो आप को हमसे उस क्षेत्र में मदद भी मिलेगी उसमें हम आपके साथ हैं। इस तरह से हम ही लोगों को चैलेंज करना जो हम लोग मतलब परमाणिक परंपराओं को चैलेंज करना धर्म के लिए बिल्कुल भी

02:05:24:04 अच्छा कार्य नहीं है। धर्म पर प्रहार है। प्रामाणिक परंपराओं का विरोध करना वो प्रहार है धर्म पर। आप अपने शब्द प्रमाण को खुद खत्म कर रहे हो। फिर हर व्यक्ति वेद का अर्थ करने वाला स्वयं को कहने लगेगा। तब आप उसको निरुत्तर नहीं कर पाओगे। आप कहोगे तुम्हें जो मानना है तुम मानो। हमें जो मानना है मत मानो। और जो तुम यह कह रही हो कि थोपो मत। ठीक है? तो भाई अगर मेरे घर के बगल में बहन भाई विवाह कर रहे होंगे तो मैं वहां रोकूंगा। क्योंकि आज अगर मैंने नहीं रोका तो कल को मेरे यहां के बच्चे जो है वह उससे सीख लेंगे। समझ में आ रहा है? तो हम रोकेंगे। हमारे घर के बगल में वैश्यालय खुल रहा होगा तो हम वहां रोकेंगे। नहीं खुलने देंगे। इसी बात की तो लड़ाई है। फिर क्यों रोक रही हो मुसलमानों को अंदर आने से? आने दो फिर थोपो मत।

02:06:12:16 अधर्म जहां पर होगा वहां पर रोकेंगे ना। और थोपने की बात यह है कि अगर तुम्हारी चीजें किसी मुसलमान से बात करते समय, किसी ईसाई से बात करते समय, किसी बुद्ध, बौद्ध से बात करते समय हमारे आड़े ना आए तो हम ना रोके। हम ना थोपे। हमें क्या मतलब है? थोपते तुम लोग हो। हरिहर में भेद करके स्कॉन वाले ले जाते हैं। बांट देते हैं। फिर वह प्रजापति ब्रह्मा वाले ब्रह्मा कुमारी वाले ले जाते हैं। मंदिर में हमारे तोड़फोड़ हो रही है। प्रजापति ब्रह्मा वालों को ब्रह्मा कुमारी वालों के हम जा रहे हैं। चलो भैया बचाने। नहीं नहीं नहीं हम तो वहां सेंटर जाते हैं मेडिटेशन सेंटर। हरे कृष्णा वाले कहेंगे अरे शिवजी तो भगवान है ही नहीं। हम क्यों जाए बचाने? आर्य समाज कहेगा शिवजी तो कैलाश में तो कैलाश में क्या शिवजी नपुंसक हो गए क्या? आर्य समाज यह कहेगा शिवलिंग यहां है तो और हिंदू कहेगा भाई पहले मुझे मेरे धर्म का पता तो लग जाने दो तब तो मैं चलूं कहां चलना है यह स्थिति है तुम जैसे लोगों ने जो बना के रखी है और इसलिए शोधन आवश्यक है वैचारिक क्रांति इसलिए आवश्यक है ऋग्वेद के दव मंडल के 192 सूक्त के दूसरे मंत्र में लिखा हुआ है एक मत हो के अध्यात्म के मार्ग पर चलो एक मत होना इसलिए जरूरी है कि हम सुरक्षित हो सके अपने

02:07:27:18 अस्तित्व और आदर्श की रक्षा रक्षा कर सके जो तुम जिसे थोपना कह रही हो वो एक शत्र करने के निमित्त किया जाने वाला प्रयास है और तुम तो बैठी हो वहां मंदिर है ही नहीं तो रक्षा किसकी करोगी तो यहां पे जिन जो रक्षा रक्षा के लिए कार्य हो रहे हैं उनमें टांग अड़ाओ इसलिए कह रहा हूं इस तरह की चैलेंजबाजी से दूर रहो धागे खुल जाएंगे धागे दोबारा आमनासामना दोबारा हो एक झटका मिले कि गई हो ना जो मेंटली डिसेबल्ड थोड़ा सा हो गई हो धागे खुल जाएंगे धागे आगे किसी के बहकावे में मत आओ। तुम्हारे कंधे पर बंदूक रख के चला रहे हैं वो लोग। खुद पिटे कुटे घूम रहे हैं। तो तुमको आगे कर रहे हैं कि लड़ो लड़ो हम तुम्हारे साथ हैं। नेता तुम संघर्ष करो। हम तुम्हारे साथ हैं। वो वाली बात है। कर लो तुम। और किसी दिन दोबारा फस गया मामला। फिर तुम्हारी ऐसे ही होगी फजीहत। कुछ नहीं कर पाओगी। प्रामाणिक सिद्धांतों का विरोध करते हुए अपने फजीते करा लोगी और कुछ नहीं है। वो जो बड़ा सा जानवर होता है ना बताया था हाथी वो हम है और वो वो तुम हो

02:08:40:09 ठीक है बहुत बढ़िया तो तो परामर्श मानो किसी के बहकावे मत आओ अपना वो जो Instagram instagramिंग वो जो चल रही है चलाओ विरोधियों से करो और प्रामाणिक आचार्यों से दूरी बना लो तुम्हें पसंद नहीं है मत अब तुम कह कह रही थोपो मत। अरे भाई तुम्हें पसंद नहीं आ रहा है मुक्तेश्वर जी तो थोप क्यों रही हो फिर अपनी नापसंद को? थोप तो तुम रही हो ना तू ततड़ा करके हम वही कार्य कर रहे तो थोपो मत। तुमको पसंद नहीं आ रहा है तुम मत करो फॉलो। मत लो उनसे दीक्षा। करो बौद्धों का खंडन। इस्लाम का खंडन। कौन थोप रहा है?

02:09:22:21 ठीक है आने इसी से बात याद आती है पूरी महाभाग की बात याद आती है वो उसका पडकास्ट आया था जो कहते हैं जितने मुंह उतनी बातें धर्म उतना ही फैलता जाएगा या फिर उतना ही बिगड़ेगा जितने मुंह उतनी बातें प्रमाणिक आचार्य को ही सुनना चाहिए प्रमाणिक वाणी को ही सुनना चाहिए वही बात है जी बिल्कुल बिल्कुल आपको और भी कुछ कहना है और कुछ नहीं बस करते हैं एंड करते हैं रात 12 भी हो गई है हां काफी लंबी चर्चा हो गई ठीक है। अनिकेत जी, सनातन शंकर जी, शास्त्रवाद जी आने के लिए सभी को आभार और जय श्री राम। जय श्री राम। हर हर महादेव। जय श्री राम। जय श्री राम। हर हर महादेव।

02:10:31:08 [संगीत]

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 2:10:34 · 26 Mar 2026

मूर्खों की चौपाल : केवल रामपालीयों की कमी रह गई

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B · Live सच के आसपास वाला झूठ भाग 3
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