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00:00:00:04 करना है। किस कौन सा मेन मैटर है जिस चीज पे हम आज डिस्कस करने जा रहे हैं।
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00:00:06:09 जी मैं थोड़ी सी मैं अपनी जानकारी में बता दूं मेन मैटर मेरे जानकारी में क्या है? जी जी बिल्कुल बिल्कुल मेरी जानकारी में मेन मैटर ये है कि अभी मुक्तेश्वरनंद जी महाराज है जो उनकी कोई बात आपको ऐसी लगी जो कि धर्म के विरुद्ध जाती हुई दिख रही है आपको। है ना? तो आपने वहां पर एक कोई वीडियो बनाया और आप मैंने अभी देखा नहीं है वो पहला वीडियो आपने कैसे बनाया पर आपका यह कहना है कि वो मर्यादा में रह के आपने बनाया है ना उसके बाद उनका फेवर करने वाला जो पक्ष है उन्होंने आप पर व्यक्तिगत कटाक्ष इत्यादि शुरू किए और रिप्लाई में रेप्लिकेशन में आपने भी ऐसा नहीं है कि बियों्ड द बिल्कुल वो चले गए मगर मतलब आपने भी फिर उनको उन्हीं की भाषा में समझाया और उसमें आपने भी जो मुक्तेश्वर जी महाराज उनके लिए भी आपने चीजें कुछ बोली है ना व्यक्तिगत कटाक्ष उन पर भी कर दिए अच्छा दूसरी बात मेरी जो जानकारी में है इसी बीच उन्होंने क्या किया कि आपका पक्ष आप पर व्यक्तिगत कटाक्ष करने के लिए उन्होंने कुछ शास्त्रों का सहारा लेने का प्रयास किया और उसमें शास्त्रों का सहारा लेने का प्रयास किया और उसमें सहारा लेने का जो प्रयास किया था वो जो अभी तक मुझे
00:01:21:10 मूल रूप से पता है वो आपका जो विदेश गमन है विदेश में आप रह रहे हो उसको आधार बनाते हुए उन्होंने आपको शास्त्र के विरुद्ध घोषित करते हुए आपका जो है आपके बारे में अनापशनाप जो है बोलने का उन्होंने आधार बनाया। अब इस पर क्या हुआ कि दो चीजें हैं। एक तो आपने जो अभिक्तेश्वर जी पर इनके करने से जो पर्सनल अटैक आपने किया उनके ऊपर वो हमारे और आपके बीच का डिस्कशन है पर वो सेकेंडरी है। वो सेकेंडरी नहीं उस उस मैडम विदेश गमन के बाद मैंने शंकरा अभी मुक्तेश्वरानंद जी पे कोई टिप्पणी नहीं किया। मैंने पर्सनली उस शिष्य पे नहीं मैं मैं नहीं कह रहा हूं। मैं नहीं कह रहा हूं। मैं नहीं कह रहा हूं। जो जो वो है वो मैं नहीं कह रहा हूं। अब क्या है कि जो उन्होंने क्या किया कि आप पर व्यक्तिगत कटाक्ष करने के चक्कर में वो एक ऐसी अप्रासंगिक चीजें कहेंगे कि विदेश गमन को ला के आपसे बात करने का कोई आधार नहीं था वहां पर। पर वो लाए। अब जब लाए तो वह एक बात अलग है कि वह अप्रासंगिक है कि नहीं है। मगर वह जो सिद्धांत है कि विदेश गमन वाला जो सिद्धांत है कि विदेश गमन के बारे में शंकराचार्य परंपरा का क्या कहना है। पर आपने वहां पर यह प्रस्तुत किया कि नहीं विदेश गमन के बारे में जो बताया जा रहा है वो गलत बताया जा रहा है। ऐसा नहीं है। विदेश गमन की यात्रा का कोई निषेध
00:02:36:12 नहीं है। ऐसा आपने प्रस्तुत किया। है ना? तो मेरा एक पक्ष यह है कि जो हमारा परंपरा का और जितने भी प्रामाणिक आचार्य हैं परंपरा प्राप्त चाहे वो रामानुजाचार्य हो चाहे वो शंकराचार्य हो चाहे वो मधवाचार्य जी हो वो कोई भी अगर परंपरा प्राप्त आचार्य है तो वो विदेश गमन की यात्रा का वो निषेध माना है सभी ने अच्छा एक मत तो अब मेरा एक तो पक्ष ये है कि मैं ये जो विदेश गमन वाली बात है इस पर बात करूं और इसमें भी एक जो मैंने कहा कि शंकराचार्य परंपरा प्राप्त आचार्यों का विरोध करने वाला स्वयं को सनातनी कैसे कहेगा वह भी एक बात आ जाती है यहीं से निकल कर के और तीसरी बात यह आ जाती है कि जब यह चीजें हो जाती है तो इस क्रम में फिर आगे आपका उनका आप पर वो तो मैं दोषी मान ही रहा हूं कि उन्होंने जो है आपके व्यक्तिगत उस पर जाकर के वो किया फिर आपका जो है इसके जवाब में आपका जाना मुक्तेश्वर जी पर व्यक्तिगत ये सब चीजों पे फिर ये थर्ड हमारा आप साबित करिए कि मैं व्यक्तिगत तौर पे मुक्तेश्वरानंद जी पे मेरे मेरे विदेश गमन को लेकर गई हूं। मैंने अभी मुक्तेश्वरंद जी का उस वीडियो विदेश गमन को लेकर नहीं विदेश गमन को लेकर नहीं मैं कह रहा हूं कि जब आपने कोई भी विरोध किया उनका तो उन्होंने आपका आपके आप पर व्यक्तिगत कटाक्ष
00:03:51:27 प्रश्न पूछना विरोध नहीं होता। पहली बात आप भी इस बात को मानते होंगे। मैं मानता हूं। ये हमारा तीसरा पक्ष है कि आपने प्रश्न पूछा है विरोध किया वो हम उस समय डिस्कस कर लेंगे। ठीक है? अब भी है तो वो मेरा व्यक्तिगत प्रश्न नहीं है। वो इस वजह से है कि मुझे उनकी कोई बात ऐसी बुरी लगी। ठीक है। ठीक। वो ठीक है। अब क्या है? आपको पता है मैंने आपको डिटेल दिया हुआ है। कौन-कौन सी बात बुरी लगी उसको मैं अभी स्क्रीन पे दिखाकर भी प्रमाणित कर सकती हूं। वो हमारा सेकेंडरी टॉपिक है। मेन मेरा आने की वजह है। नहीं नहीं वही हमारा प्राइमरी है। शिवश जी आई एम सॉरी टू से। वही हमारा प्राइमरी है। मेरी आने की मूल वजह मैं जो बता रहा हूं वो एक बार मुझे कह लेने दीजिए। मेरे आने की मूल वजह है कि उन्होंने आप अप्रासंगिक था। यहां पर कहने की कोई आवश्यकता नहीं थी कि भाई आप विदेश आप प्रश्न पूछ रही हो उनको आपको प्रश्न का उत्तर देना है। मगर उन्होंने अप्रासंगिक चीज को लाए तो सही मगर वहां पर क्या हो रहा है कि जब आप विदेश गमन का पक्ष ले रही हैं तो जितनी भी प्रामाणिक परंपराएं हैं उनके द्वारा निर्गत उनके द्वारा स्वीकार्य जो सिद्धांत है उनका विरोध हो रहा है। तो इसलिए मैं फिर प्रामाणिक आचार्यों की ओर से फिर मैं वहां पर मुझे सामने आना पड़ा है कि नहीं सिद्धांतिक विरोध मत करिए। जो व्यक्ति जिस व्यक्ति का पर्सनल आपका विरोध है वो करिए। तो सिद्धांतिक पक्ष को सिद्धांतिक विरोध किस चीज का है
00:05:07:01 मैं बताती हूं। सिद्धांतिक विरोध जो है वो इस चीज का है कि जो उन्होंने रेफरेंस दिया था अगर तो वो मुझे सही रेफरेंस देते। देखिए आपको मेरी बात उस चीज पर माननी पड़ेगी कि एक उन्होंने रेफरेंस दिया था फॉर एग्जांपल मनुस्मृति 3.148 ठीक है? मैंने उसको वेरीफाई किया। वहां पे वो चीज नहीं लिखा होता। सिमिलर सिमिलर श्लोक मुझे मिला 1.58 3.158 [खांसने की आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़] में जिसको कि मैंने अपने वीडियो में भी एक्सप्लेन किया है। बट इट वास नॉट लाइक कि सिर्फ समुद्र यात्रा करने से कोई अपवित्र हो जाता है। उसमें जो मेधा तिथि का जो कमेंट्री है आप आई डोंट नो आप लोग मानते हो कि नहीं मानते हो। मेधा तिथि मेधा तिथि हमारे यहां की प्रामाणिक कमेंट्री है। हां तो मेधा की कमेंट्री को मैंने दिखाया जिसको ये लोग विकपीडिया कह रहे हैं पर वो विकपीडिया नहीं है। हां मेधा तिथि की जो कमेंट्री है वो इंग्लिश और वो भी [गला साफ़ करने की आवाज़] कोनियल इंग्लिश है जो कि लोगों को समझने में प्रॉब्लम होती है। उसके लिए मैंने जरूर हिंदी में ट्रांसलेट करके उसको अच्छे से हिंदी में शब्दा शब्द बाय शब्द ट्रांसलेट करके उसको नीचे लिखा है। तो अब पता नहीं शायद उसको वो विकपीडिया कह रहे हैं या किस चीज को विकपीडिया कह रहे हैं। आई रियली डोंट नो। लेकिन मैंने मेधा तिथि का क्योंकि मुझे पहले ही पता था कि आप आप लोग आर्य समाज वाले विशुद्ध मनुस्मृति को नहीं मानते हो तो मैंने सोचा कि जो मानते हो चलो मैं
00:06:22:04 उसी से प्रमाण दिखाती हूं। उसमें मेधाथि ने बहुत अच्छे से एक्सप्लेन किया है कि वो किसके लिए ऐसे धर्म का निषेध है। विदेश यात्रा की बात तो उसमें है ही नहीं। समुद्र पार करने का है। कुल मिला के आपको कुल मिला के आपको शास्त्रों से रेफरेंस चाहिए तो आप मानेंगे कि वो क्या कहते हैं? नहीं मुझे शास्त्रों से भी रेफरेंस नहीं चाहिए। शास्त्रों से भी रेफरेंस नहीं चाहिए। मुझे शास्त्रों से ऐसा रेफरेंस भी है। वेदों के अनुसार मैंने अपने वीडियो में शास्त्रों के अनुसार भी ऐसा रेफरेंस दिया है जो कि आप भले नहीं माने लेकिन मुझे नहीं लगता कि वेद कभी प्रकृति विरुद्ध हो सकते हैं। और दूसरा चीज अगर आप शास्त्र से इस बात को प्रमाणित करेंगे तो फिर आपको मेरी उस बात को भी प्रमाणित करना पड़ेगा कि जब आपके विदेशों में रहने वाले बहुत सारे शिष्य अगर मैं सारी मैं सारी चीजें सारी चीजें आएंगी। अभी तो हम केवल टॉपिक क्लियर कर रहे हैं ना। आप सारी चीजें यहीं पे रख दे रहे हो। अभी तो हम केवल टॉपिक क्लियर कर रहे हैं ना। फिर आपको वो भी प्रमाणित करना पड़ेगा कि उन
00:07:19:06 मैं सारी चीजें मैं सारी चीजें करूंगा। अब यहां से हम शुरू कर रहे हैं कि हम जो है दो सनातनी है और सनातन के अर्थ को लेकर के आपका कुछ और अर्थ हो रहा है। विदेश गमन को लेकर के मेरा कुछ और अर्थ हो रहा है। है ना? यही है ना? जी और और दूसरी चीज दूसरी दूसरी एक और बात है आपको यह भी क्लेरफाई करना पड़ेगा क्योंकि इसमें मुझे तीन प्रकार के जवाब मिले हैं इस मामले में जो मैंने बोला था कि भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज जिनको मैं मानती हूं एस पर रिकॉर्ड कि आदि गुरु शंकराचार्य के बाद जिन्होंने धर्म के प्रचार प्रसार के लिए जो सनातन के दर्शन के लिए और फिलोसफी के लिए जिन्होंने सबसे ज्यादा भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज जगतगुरु श लूंगा ना मैं ये सारी चीजें आपकी उसमें इंक्लूडेड है अभी हमने चैप्टर क्लियर किए वो सारी ऑडियंस को भी तो जानना चाहिए ना ऑडियंस को भी वो वो आप वो आपके पॉइंट्स है ना जो आप जब मैं कुछ कहूंगा तो उसके काउंटर में आप ये सब दोगी मुझे जैसे कि भारतीय होगा आपको इजी होगा मैं पहले से बता दे रही हूं आपको इजी होगा कि मेरा प्रश्न क्या क्या था उस चीज में अदरवाइज कहीं ऐसा नहीं हो कि आपका डिस्कशन क्योंकि मेरे मेन पॉइंट्स जानना जरूरी है ना कि आपके ऐसा नहीं कि आपका डिस्कशन लंबा
00:08:34:12 हो जाए कि हमारे पास फिर समय ही ना बचे कि हम बाकी मैं बता वो मेन पॉइंट्स आपके तब आ रहे हैं ना जब आपको कोई काउंटर किया गया है तो मैंने तो अभी काउंटर किया ही नहीं है शुरू वो मेन पॉइंट्स तब आए सामने जब मैं काउंटर करूं कोई तब आप उनको रख दीजिए इससे क्या होगा एक सिस्टमेटिकली एक स्ट्रक्चरल वे में हमारी डिस्कशन जा सकती है कि अब हमने टॉपिक डिसाइड कर लिया कि वेद वेद गमन को लेकर के क्या पक्ष है सनातन का धर्म का अब जो है आगे मैं उसमें आप अपना पक्ष रखूं फिर आप अपना पक्ष रखिए फिर आपकी कोई आपके पास कोई ऐसा तथ्य है जिससे कि मेरा सिद्धांत कट रहा है तो फिर आप वो रखिए। जैसे आपने कहा कि वेद में प्रमाण है और जैसे आपने कहा भारती कृष्ण तीर्थ जी या जैसे आपने कहा डोनेशन या फिर आपने कहा कि वहां पर जो है विदेशों में अपना वो सेंटर बना रहे हैं। है ना सिंगरी मठ वाली ये सब चीजें उसके काउंटर में होनी चाहिए जब मैं विदेश गमन का पक्ष लूं। ठीक है? ठीक है। चलिए ठीक है। [गला साफ़ करने की आवाज़] अब हम क्योंकि दोनों सनातनी है तो मैं यह मान के चल रहा हूं आप सनातनी है। पक्की सनातन धर्मी है। इसमें तो कोई दो राय नहीं है। नहीं आप तो कल मेरे मानव होने पे भी डाउट कर रहे थे। हम लोग बात शुरू करें। ये भी ये भी आप उसप पॉइंट रखिएगा आगे जब आए। तो आप एक सनातन धर्मी है। वो मान के मैं चल रहा हूं। तो आपके लिए परम प्रमाण वेद
00:09:49:22 है। हम एस पर मनुस्मृति 12.3 13 2.3 13 हां तो अब मुझे आप ये बता दीजिए कि आपके पास वेद कैसे आए? वेद कैसे आए? अब हमारे पास ईश्वर परंपरा से आए वेद ये कह सकते हैं आप आपको आपने किसके वेद को पढ़ा? मैंने कौन से वेद देखो वेदों के कई अर्थ जो वेद अवेलेबल होगा वही तो पढ़ा जाएगा ना। जो वेद अवेलेबल होगा वही तो पढ़ा जाएगा ना? और शब्द आठ शब्द भाई शब्द एक मिनट सॉरी वेद के वेद के रूप में आप किसी किताब को कब मानेंगे ये वेद ही है एक मिनट [गला साफ़ करने की आवाज़] वेद को कैसे मानूंगी कि जैसे आप मानते हैं हम तो गुरु परंपरा से मानते हैं हमारे गुरु है परंपरा मैं ईश्वर परंपरा से मानती हूं अब अगर इंटरनेट मिल रहे हैं इंटरनेट आर्काइव पे मुझे वेद मिल रहे हैं आज मैंने आपको शयानाचार्य जी का भाष्य का जो बता रही थी तो वो आप कैसे मानेंगे कि वो वेद ही है क्योंकि कॉलोनियल बीच में कॉलोनियल मैंने आपको वो भी प्रमाण दिया था कि अंग्रेजों ने अंग्रेजों ने हमारे धर्म शास्त्रों में मिलावट की है। वो इस बात को प्राउडली एक्सेप्ट करते हैं उनके लेटर्स में मैकुले बेबिंग के लेटर भी मैक्स मुलर के
00:11:04:24 इंटरनेट पे कोई भी चीज वेद नाम से आ जाएगी तो आप उसको वेद मान लेंगे। कोई भी चीज कैसे वेद मान लेंगे? तो कैसे नहीं तो आपके पास क्या वेदव्यास जी का मैनुस्क्रिप्ट है? वेदव्यास जी ने जिसको वेद दिए उसने जिसको वेद दिए उसने जिसको वेद दिए उसने जिसको वेद दिए ऐसे करके हमारे पास वेद आ रहे हैं। उसी तरह वेद देते देते उसी तरह वो इंटरनेट पे आया। तो इंटरनेट पे आया मगर इंटरनेट पे कौन सी चीज वेद है कौन सी नहीं है इसको जस्टिफाई इसको वेरीफाई करने के लिए हमारे पास परंपरा प्राप्त आचार्य है ना। तो वो जिनका मैं वो भी आचार्य ही है। कोई ऐसे सड़क छाप कोई मेरे जैसा तो कोई 10थ पास जो 10थ तक संस्कृत पढ़ा है वैसा किसी ने भाषण नहीं किया है। वो भी किसी परंपरा से ही आते हैं। अब आप उस परंपरा को नहीं मानते हैं तो आपकी वो वो आपके किस परंपरा से किस परंपरा से आते? आप परंपरा बताइए तो किस परंपरा से आते मैं तो शब्दार्थ के साथ जाती हूं कि उस शब्दों में क्या लिखा अरे भाई आपके आपको कोई भी वेद नाम से पुस्तक दे रहा है तो आप उसको बिना वेरिफिकेशन के मान लेंगे ये वेद नहीं तो आप आपसे तो मैंने बताया था अब इसी इसी बात के लिए मैं कह रही थी कि पहले आप जो मेरा प्रश्न है उस पे सिर्फ जवाब दीजिए वेदों पे ही हम जाएंगे लेकिन बाद में जाएंगे और आपके लिए
00:12:20:19 आपके लिए वेद प्रमाण कैसे मैं वो मैं आपके लिए यह सवाल होना ही नहीं चाहिए कि मेरे लिए वेद प्रमाण कैसे है अगर मैं मैं आपको वेद का वो वर्ष दिखाती हूं और आप उसको प्रमाणित कर दे कि ये गलत है जो मैं वेद के वर्सेस आपको दिखा रही हूं। अगर मैं यजुर्वेद से कोई वर्स आपको दिखा रही हूं और आप मुझसे ये सवाल नहीं करेंगे क्योंकि आप आचार्य परंपरा से आते हैं तो आपको ये क्लियर करना पड़ेगा कि क्या मैं जो भाष्य दिखा रही हूं वो गलत है या सही है। उसके जो शब्द बाय शब्द अर्थ है क्योंकि संस्कृत में मेरी जानकारी शून्य नहीं है। तो मैं भी इस शब्दों के अर्थ को समझती हूं। तो आपको यह बताना पड़ेगा कि क्या मैं जो वर्ड्स आपको दिखा रही हूं वो सही है या गलत है। मैं ये बात मैं ये बात मैं ये बात इसलिए नमाजी से ग्रहण किया है या मैं मैं ये बात मैं ये बात इसलिए कह रहा हूं। मैं ये बात इसलिए कह रहा हूं क्योंकि वेदों में कई शब्द ऐसे होते हैं जिनके कई अर्थ होते हैं। अनेकार्थक होते हैं। ठीक है? उसमें अब जैसे एक ही एक ही शब्द के कई अर्थ निकल रहे हैं। अब इसमें से कौन सा अर्थ मानना है यह हमको जाकर के उससे जानना पड़ेगा जिसने हमको वेद दिए हैं। मैं मैं एक एक मिनट एक मैं क्लेरिफाई करूं। मैं बता रहा हूं ना क्या बात है हम तो बात ये है कि
00:13:36:12 जिससे हमने वेद लिए जिससे हमारा वेद लेना सिद्ध हो रहा है उसका यदि हम उसके अर्थ पर विश्वास नहीं करते तो हमें उसके वेद पर भी विश्वास नहीं होना चाहिए और जिससे हम वेद जिसके हम अर्थ पर विश्वास करते हैं अगर जिसके हम अर्थ पर विश्वास नहीं करते तो उसके वेद पर विश्वास नहीं होना चाहिए और जिसके वेद पर विश्वास है तो उसके अर्थ पर विश्वास ना होना सिद्ध नहीं होता है। इसका मतलब आपका कहने का मतलब यह है कि अगर हमारे पास वेद के कुछ मंत्र हैं जो जिसके संस्कृत की शब्दावली का हमें अर्थ पता है फिर भी उस गुरु की बात मानेंगे या किसी परंपरा प्राप्त गुरु की बात मानेंगे जो उसको डिफाइन करना है राइट हमें अपनी बुद्धि नहीं लगानी है मतलब अकल लगानी है लगानी है लगानी नहीं नहीं नहीं लगानी है गुरु गोविंद और ग्रंथ केवल ग्रंथ नहीं केवल गुरु नहीं केवल गोविंद नहीं गुरु गोविंद और ग्रंथ तीनों के मिक्सचर से होना चाहिए। यानी कि ग्रंथ का आलंबन भी हो गुरु के उसमें शब्द प्रमाण भी हो और गोविंद भी हो। उससे प्राप्त होने वाला गोविंद हो। और ये मैं नहीं ये मैं नहीं कह रहा हूं। ये मैं नहीं कह रहा ये मैं नहीं कह रहा हूं। अब जैसे आप आप जब आप जब आर्य समाज की बात करती हैं तो आर्य समाज कई मामलों में उसी शब्द का वो अर्थ
00:14:51:15 लेता है जो परंपरा प्राप्त आचार्य नहीं लेते। और उसके दोनों अर्थ निकल रहे हैं जैसे प्रतिमा। अर्थ ही लेता है ये तो डिपेंड करता है श्लोक पे सॉरी मंत्र डिपेंड करता है मंत्र पे तो जब मैं आपके सामने मंत्र प्रस्तुत करूंगी और आपको लगेगा कि इस मंत्र में कोई शब्द ऐसा है जिसका अर्थ यह नहीं है तब आप मुझे काट सकते हैं आपके लिए वेद प्रमाण है तो आपने जिससे वेद लिए वो प्रमाण होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए बताइए मुझे मुझे वेद मिले हैं एक ऐसी ईश्वरीय परंपरा से या प्राकृतिक परंपरा से कह लीजिए क्योंकि मेरे पास बुद्धि मेरे पास पढ़ने की क्षमता है और मैं यह डिफरशिएट कर सकती हूं अपने कॉमन सेंस से भी कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ बोल रहा है। नहीं नहीं यह जैसे भूभु जैसे भूभु स्वाहा से क्या कहते हैं मुक्ति मिलेगी यह आप कैसे कैसे तर्क से आपने सिद्ध कर रही है इसको आपने वेद क्यों माना मुझे सिद्ध करना ही नहीं वो सिद्ध तो आपको करना है आपने कहने कहने का मतलब यह है कि अगर स्वयं को सनातनी कहना है वैदिक कहना है तो हमको परंपरा प्राप्त आचार्य पर अपना विश्वास रखना सिद्ध करना होगा प्रकट करना होगा पहले मैं यह चाहता हूं कि आप यह अपना क्लियर कर दीजिए जिससे कि मैं आपको प्रमाण दे सकूं।
00:16:08:19 आप [गला साफ़ करने की आवाज़] मुझे प्रमाण नहीं देंगे। आपकि आप देखिए आपके और मेरे बीच तो कोई कन्वर्सेशन भी नहीं था। आप तो बीच में खुद से आए हैं मेरे खिलाफ वीडियो बनाकर या मेरे सपोर्ट में वीडियो बना मतलब आप मतलब आपका कहने का मतलब है मतलब आपका कहने का मतलब है कि कहीं से भी कुछ भी हमें वेद के नाम से मिल जाए तो हम उसे स्वीकार कर ले इंटरनेट। नहीं कहीं से कुछ भी नहीं जो मानवता और प्रकृति के अनुकूल हो वो अच्छा आपकी मानवता कहां से डिफाइन होती है भाई वेद तो आपको अभी जस्टिफाई करने है तो यानी मानवता आपको पहले से पता है वो कहां से डिफाइन होगी हमारी मानवता तो वेद से डिफाइन होती है अच्छा तो आपकी मानवता वेद से अगर डिफाइन होती है तो जितने भी परंपरा प्राप्त शिष्य हैं और जो खुद को क्लेम करते हैं परंपरा प्राप्त शिष्य तो कुछ चीजों को तो मैं खुद भी कर सकती हूं जैसे कि फॉर एग्जांपल आपने बोल को आप विषय हो रहा है विषयांतर नहीं हो रहा है विषयंतर नहीं हो रहा है उदाहरण विषयांतर नहीं होता है ठीक है उदा उदाहरण का मतलब होता है
00:17:10:14 शिष्य मुझे क्योंकि मैं मनुस्मृति को तो अच्छे से पढ़ी हूं वेदों में मेरी जानकारी कम है मैंने आपको पहले ही क्लेरिफाई किया मैंने आपसे पूछा है मनुस्मृति आपके पास आई कहां से किसने दी भैया ईश्वर ने दिया ईश्वर ने यहां क्या तीन लोग करेंगे क्या कन्वर्सेशन? प्लीज मैं रिक्वेस्ट करती हूं मुझे अगर कोई डॉक्यूमेंट्स का जरूरत होगा तो मुझे प्रोवाइड करना। हम हां जी ठीक है हम जी तो अ क्या बोल रही थी मैम? हां तो मैं उदाहरण दे रही हूं तो उदाहरण उस चीज का पार्ट हो सकता है। क्यों नहीं हो सकता है? उदाहरण इस चीज का पार्ट मैंने मैंने मैंने कह दी मान लिया आपकी बात। आप उदाहरण दीजिए। आप उदाहरण दीजिए। नहीं नहीं नहीं अगर माननीय आप उदाहरण दीजिए अगर आप उदाहरण दीजिए माता जी उदाहरण माननीय आप उदाहरण दीजिए आपके परंपरा प्राप्त शिष्यों ने अगर मनुस्मृति को खंडित करके जिसका जिसका कि मैंने आई थिंक परसों के श्लोक में परसों के वीडियो में जो मैंने मेंशन किया था कि मनुस्मृति का गलत शब्दार्थ करके हाफ वर्ड निकाल के आप पोस्ट बना देते हो और पोस्ट कर देते हो कि समुद्र जो क्रॉप करता है वो मले
00:18:25:18 है वो विधर्मी है वो अधर्मी है इस टाइप का अगर आप पोस्ट बना के डाल देते हो तो आप भी तो गुरु परंपरा से आ रहे हो और आप ये क्लेम करते हो कि परंपरा से हूं इसलिए सही है दूसरा चीज भारती तीर्थ जी महाराज का हम आपको हम आप देखिए आप ना इसमें क्या कर रही हैं कि जब आपके पास उत्तर नहीं है तो आप इतना लंबा इमोशनल अटैक कर रही हैं कि हम मैं उसको मेरी मजबूरी हो जाए मेरी मेरी मज मेरी मजबूरी हो जाएगी कि मैं अपने इस विषय को छोड़ के आपके उनका क्लेरिफिकेशन देने जाऊं। अभी आपने कहा भाई भाई शिवा भाई शिवाश भाई आई एम सॉरी टू से लेकिन ये आप जो कर रहे हैं ना इसको मतलब मैं क्या बोली न्याय संगत नहीं बोला जाएगा क्योंकि आपकी वैदिकता सिद्ध करिए माता जी आपकी वैदिकता सिद्ध करें जा सकता है आपके मैं सिद्ध कर रहा हूं ना जिससे आपने वेद लिए है उस पर आपको भरोसा है कि नहीं या तो आप अवैध हो जाइए या तो आप सुनिए शिवश जी आपको यह सवाल ही नहीं करना चाहिए कि मुझे वेद किसने दिया है क्यों क्योंकि क्योंकि जिस मैटर पे हम डिस्कस करने आए हैं आप जिन अपने गुरु भाई बहनों के बचाव में आए हैं उनके साथ मेरा इस बात को लेकर कोई झगड़ा नहीं था
00:19:40:24 मैंने अभी मुक्तेश्वर मैं आपको यह बता रहा हूं कि यदि आप परंपरा को लेकर नहीं मैं आपको यह बता रहा हूं कि आप परंपरा प्राप्त आचार्य की शरण में नहीं है तो आप स्वयं मैम को वैदिक सिद्ध नहीं कर सकती सनातनी सिद्ध नहीं कर सकती धार्मिक सिद्ध नहीं कर सकती मानवता सिद्ध नहीं कर सकती मुझे नहीं मानो सनातन मुझे नहीं मानो वैदिक आई डोंट मानो नहीं मानो नहीं आप अपनी वैदिकता सिद्ध करिए या तो क्लेम या तो ये क्लेम कर दीजिए कि मैं सनातनी नहीं हूं मत मानो मैं तो कह रही हूं आप मत मानो मैं कह रही हूं कि आप मानो मैं कह रही हूं आप मानो आप तो फिलहाल आप सनातनी नहीं है आज के मैं फिलहाल फिलहाल आप सनातनी है कि नहीं फिर मैं आप फिर मैं अब चली जाऊंगी उस चीज पर जहां पे आपके लोग कहीं भी जाइए मैं आपको ले जाऊंगी कहां पे आपके लोग और मैं प्रमाण दिखाऊंगी कल के चैट का आप ही के गुरु भाइयों के साथ जो लोग गौ बलि को सही मानते हैं फिर तो यह बात हो गई सारे जवाब है मेरे पास सारे जवाब है एक तरफ गौ बलि को देखिए आप आप अगर आप अगर बदतमीजी पे जाएंगी और अपमानजनक भाषा पे जाएगी मुझे जाना पड़ेगा मैं आपको प्रतिर नहीं दे सकता इन चीजों का डिस्कस कर तो आप अगर इस तरह से नाम लेंग जो जो मेरे लिए प्रणम्य है जो मेरे लिए सम्मानीय है
00:20:55:25 अगर आप उनके लिए इस तरह से बात करेंग सीधेसीधे नाम लेकर के मुझे छोड़नी पड़ेगी लाइव आप अपनी चीजों पे रहिए तो मैं उनका कुछ और नाम ले उनका नाम अभी उनके नाम उनके उनके नाम के आगे जी लगाइए जी हां तो मैं कब जी नहीं लगाया इस पूरे वीडियो में ये वीडियो अभी आपने बोला बिना जी अभी आपने बोला बिना जी के अभी बोला रिवाइंड करके देख लीजिए किसके किसके बारे में मैंने बोला जी के लिए आपने अभी अभी बिना जी के बोला है। सुनिए ये वीडियो बाद में पोस्ट होगा। भाई सब लोग देख लेना मैंने जी बोला है कि नहीं बोला है। मैं बिना जी लगाए नहीं बोलती [गला साफ़ करने की आवाज़] हूं। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। अगर मुझे आपके शंकरा चलिए अब अब आप अब आप जी अब आप अब आप जी लगा। अब आप जी लगाएंगी ना। अब आप जी लगाएंगी। मैं हमेशा लगाती हूं। ठीक है। मैं हमेशा लगाती हूं। और मैं मुझे नहीं लगता है कि मैंने जी नहीं लगाया था। स्लिप ऑफ नहीं आपने भयंकर आचार और ना जाने क्या-क्या कहा है कमेंट्स में जाकर के। भयंकराचार्य कहा है मैंने भयंकराचार्य एंड उस कमेंट को किस चीज पर रिप्लाई किया मैंने वो भी आपको दिखाना चाहिए
00:21:58:24 टारगेट करते हैं कि वो दिखाते कुछ और है मतलब ये हाथी के दांत खाने के कुछ और दिखाने के कुछ और तो अगर आप बात ये चल रही है कि आप वैदिक कैसे हैं यदि आप परंपरा प्राप्त आचार्य का विरोध कर रही है तो आप वैदिकता बताइए मैं इसलिए नहीं मैं वैदिक हूं कि नहीं हूं फिर आप अगर इस चीज पे प्रश्न आप वैदिक नहीं है तो मान लीजिए फिलहाल फिलहाल मैं हूं कह लीजिए फिर आप भी मान लीजिए कि आप वेद मैं बोल तो रहा हूं मेरे मैं वेद के उस अर्थ को ग्रहण करूंगा जो मुझे परंपरा प्राप्त प्रमाणिक आचार्य ने दिया होगा और वो और वो तार्किक भी है वो तार्किक भी है मैं सिद्ध करूंगा मैं आप कितना भी आप पर्सनल पे जाइए आप मुझे मालूम है आपके पास [हंसी] यही बात है मैं कहां जा रहा हूं मैंने आपसे पूछा आपकी आप आप यदि है आप तो सारी चीजें खोल दो आप सारी चीजें ले आओ पर ये मत बताना मैं वैदिक कैसे हूं इंटरनेट पे मिलने वाली किसी चीज को आप वैदिक मान लेंगी मैं उस भारतवर्ष की भूमि पर जन्म ली हूं भारतवर्ष की भूमि पर जन्म ली हूं और मैं उसी वैदिक सनातन परंपरा को फॉलो करती हूं जो मुझे मेरे कौन सी परंपरा परंपरा बताइए ना अपनी कौन सी परंपरा मुंडकोनिषद में ऋषि बता रहे हैं अपनी परंपरा गुरु से
00:23:13:25 दीक्षित थे तो मैं उन्हीं की परंपरा को फॉलो कर रही हूं कौन सी परंपरा बताइए कौन सी परंपरा? वैष्णव परंपरा को हम लोग फॉलो करते हैं। नाम बताइए वैष्णव कौन सी परंपरा? नाम बताइए। रामानुज रामानुज परंपरा विदेश यात्रा मान रामानुज परंपरा को प्रमाण मानती है फिर आप उनके विरोध में तो नहीं जाएंगी। सुनिए सुनिए सुनिए। विदेश यात्रा की बात विदेश यात्रा रामानुज रामानुज परंपरा को प्रमाण मानती है कि नहीं? ये पूछ रहा हूं मैं। मैंने उनकी सारी बुक्स को थोड़ी पढ़ा हुआ है। मेरे सामने तो यानी कि आपको धर्म को जान यानी कि आपको धर्म को जानने से पहले पता है कि मेरा धर्म क्या है? आपको पहले ही पता है। पता है मैं जब आप यानी कि वेद वेद वेद की आवश्यकता ही नहीं है। एक बात बताइए सुनिए पहले मेरी एक बात बताइए। आप ब्राह्मण है। जन्म से ब्राह्मण है। बोलिए आप जन्म से कि नहीं है? देखिए इन बातों का आप मुझे इसका रिलेशन रिलेशन सिद्ध करिए। रिलेशन सिद्ध करिए मैं बताऊंगा रिलेशन सिद्ध करिए बताऊंगा रिलेशन सिद्ध करिए बताऊंगा किस कौन सा रिलेशन सिद्ध कर इस टॉपिक से इस प्रश्न का रिलेशन सिद्ध करिए हां है इस टॉपिक से इस प्रश्न का रिलेशन नहीं है क्योंकि आप मुझे साबित करने को कह रहे हैं कि मुझे वेद किस परंपरा से प्राप्त है मैं वैदिक हूं भी कि नहीं हूं कहने का मतलब यह
00:24:29:01 है कि कहने का मतलब यह है जिससे हम वेद लेंगे यदि हमें उसके अर्थ पर विश्वास नहीं है तो हमें उसके वेद पर भी विश्वास नहीं है विश्वास है लेकिन मैं रामानुज परंपरा के विरुद्ध तो नहीं जाएंगी आप रामानुज पर मैं वही कह रहा हूं मैं रामानुज रामानुज परंपरा आपके लिए प्रमाण होनी चाहिए यदि आप उनसे वेद ले रही है तो मैंने उनसे वेद कहां लिया उन्होंने वेद का भाष्य किया है तो फिर आप बताइए आप बताइए वेद कहां से आ रहे हैं आपके पास सपने में आके दिए भगवान ने मैं मैं बोल रही हूं मैं ईश्वर परंपरा से मेरे पास बुद्धि अरे वो ईश्वर परंपरा में नाम होंगे ना कि आपको किसने भेद दिए उनको उनको दिए और ईश्वर परंपरा से हां तो आपको किसने दिए ईश्वर परंपरा से इंटरनेट पे इसका मतलब इंटरनेट आपका प्रमाण है इंटरनेट आपका प्रमाण है इंटरनेट आपका प्रमाण है इंटरनेट नहीं इंटरनेट पे तो भी है तो प्रमाण तो फिर उसको क्यों मैं कह रहा हूं जिससे आपने लिए बेवकूफ से आप शंकराचार्य मैं आपको बता रहा हूं शस्त्र तुम शस्त्र नहीं बिल्कुल निशस्त्र दिख रहे हो अरे यही तो ब्रह्मास्त्र है यही ये इलॉजिकल चीजें हैं तो
00:25:44:04 आप अपने उनको बता दीजिएगा ये वीडियो डाल दीजिएगा आप इलॉजिकल चीजें हो तो जिसके वेद जिसके अर्थ पर हमें विश्वास नहीं है उसके वेद पर हमारा के लिए आए थे आपके बेहूदा मैं यहां पर मैं आप लोग जो गुरु परंपरा प्राप्त मैं आपको मेरे पास आपकी हर बात का उत्तर है मेरे पास आपकी हर बात का उत्तर है। मेरे पास आपकी हर बात का उत्तर है। पर उससे पहले अरे उससे पहले उससे पहले आपका आप उससे पहले आपके लिए प्रमाण क्या है? सुनिए जिसका कोई नहीं जिस जो किसी एक को नहीं मानता वो किसी का नहीं होता। तो इसलिए मैं जानना चाह रहा हूं मैं जानना चाह रहा हूं आपके लिए प्रमाण क्या तब मैं वहां से प्रमाण दूंगा ना। आपका प्रमाण ही आप नहीं बता रहे हो। ठीक है। मैं वैदिक स्क्रिप्चर डॉटin पे तीन चार ऋषियों का प्रमाण है। ब्रह्म मुनि का प्रमाण है। वैदिक स्क्रिप्चर ड.in को वेद कहां से मिले वो बताइए। कहां से मिले उसको वेद? अरे मैं बता दूं शिवश जी भाई साहब आप आप कर लीजिए या तो इनहीं से बात कर लीजिए आप। एक मिनट दीजिए मुझे एक मिनट। बात कर लीजिए आप। तीसरा व्यक्ति बोलेगा मैं छोड़ दूंगा। आप बात करिए मुझसे। और भाई साहब हेलो आर्यन जी आपको जब आना हो तो आप मेरे साथ
00:26:59:08 लाइव पे अलग से आइएगा। ठीक है। नंबर नोट कर लीजिए। 7408301869 WhatsApp करिए, फॉर्म भरिए, लाइव आइए। मैं फ्री हूं। मैं यहां पे किसी भी चीज को एक्सेप्ट करने के लिए फ्री हूं जो मुझे मानव जाति के कल्याण के लिए लगेगा। और वही वेद वैदिक आपको कैसे पता यह कल्याण है? वेद के बिना आपको कैसे पता यह कल्याण है? बताइए। जब वेद वाणी यह कहती है कि वेदों की वेदों की जो कल्याण वेद वेद वाणी का प्रमाण कैसे दे रहे हो आप वेद वाणी का प्रमाण पूछ लिया तो आपको मेरी बात सुननी पड़ेगी जी ठीक है सुन रहा हूं सुन रहा हूं क्षमा करिए सुन रहा हूं सुन रहा हूं जब जो वेदवाणी कहेगी कि प्रत्येक मनुष्य पृथ्वी पर एक है एक समान है वेदवाणी कह रही है कि प्रत्येक मनुष्य चाहे वो किसी भी वर्ण से हो किसी भी देश से हो कहीं से भी हो क्योंकि अगर आपके जगत गुरु गुरु शंकराचार्य की पदवी ले रहे हैं जगतगुरु तो वो जगतगुरु सिर्फ एक देश के लिए नहीं हो सकता वो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए देखिए बहुत एक्सप्लेनेशन बताने की जरूरत नहीं है टू द पॉइंट आप बात करिए टू द पॉइंट प्लीज अब जब आपने सवाल पूछा है तो मेरा आंसर एलबोरेटेड
00:28:15:10 बहुत श भी होती एबोरेटिव में आप क्या करती है ऐसी चीजों पर जाती है जो मेरे लिए सेंसिटिव होती है मुझे टॉपिक छोड़ के उनका क्लेरिफिकेशन देना पड़ेगा इसलिए ऐसा एलबोरेटिव करिए जिसमें मेरी सेंसिटिव चीजें हो आप गुरु गुरु प्राप्त आप गुरु परंपरा प्राप्त शिष्य है। आपको लोग शंकराचार्य का शस्त्र कहते हैं। तो आप में इतनी शक्ति नहीं है कि आप उसको शुद्ध मेरे में शक्ति है। मगर यहां से टॉपिक टॉपिक नहीं छोड़ रही हूं मैं टॉपिक पे ही हूं। हां तो आप सेंसिटिव चीजें मत लाइए मुझे छोड़ छोड़ के उनका क्लेरिफिकेशन मैं दूंगा। मैं सब आप जितनी चीजें हैं सब नोट कर लीजिए। मैं हर एक चीज का जवाब दूंगा। सुनिए आपने एक्सेप्ट किया कि आप चायनाचार्य के भाष्य को मानते हैं। राइट? आपने एक्सेप्ट किया था कि नहीं किया? मैं ये पूछ रहा हूं कि यदि आप अपने आप को वैदिक सनातनी कह रही है तो आप किसके किसके द्वारा वेद को प्राप्त करने पर मान रही है कि मैं वैदिक सनातनी हूं। इंटरनेट को मानती है तो मैं इंटरनेट की प्रमाणिकता पूछूंगा। ये पूछूंगा कि इंटरनेट के विरुद्ध तो नहीं शंकर सर्व्याप्त ईश्वर ने यहां मेरे भेजे में बुद्धि दी हुई है जिससे कि मैं पढ़ सकता हूं। आपको वेद वेद डायरेक्ट वेद डायरेक्ट मिले है या किसी ग्रंथ के रूप में मिले हैं आपको? ग्रंथ के भगवान शंकर ने ग्रंथ के रूप में मिले हैं। इसका मतलब भगवान ने डायरेक्ट आपको नहीं दिए हैं। किसी और के द्वारा आपको मिले हैं।
00:29:30:16 भगवान ने डायरेक्ट नहीं दिए ना तो मैं मैं बता मुझे मैं बता तो रहा हूं जिससे मुझे वेद मिले हैं उसके भाष्य पर मुझे विश्वास है। आपको विश्वास है कि नहीं? मुझे विश्वास है। वही बात तो मैं कह रही हूं। तो मुझे बताइए किससे मिले उस व्यक्ति का नाम बताइए किससे मिले? ब्रह्म मुनि के भाष से मैंने जो आप देखिए पीछे से मत आइए। इधर से चलिए इधर से बताइए आपको इंटरनेट से मिले कोई आपने वेबसाइट बताई है वहां से मिले ठीक है ठीक है उसमें बता रही हूं ना किसके भाष मैंने आज आपको सयानाचार्य के भाष्य के बारे में भी बताया तो वो भी तो मुझे इंटरनेट आर्काइव से ही मिले अब वो इंटरनेट पे होते हुए भी आप मानेंगे या नहीं मानेंगे वो इसलिए मानूंगा क्योंकि मैं इसलिए मानूंगा क्योंकि मेरे परंपरा प्राप्त आचार्य उसपे ठप्पा लगा रहे हैं कि ये वेद है तो आप परंपरा प्राप्त आचार्य ठप्पा लगा रहे हैं ना मैं उस परंपरा में विश्वास नहीं कर सकती नहीं रखती तो आप किस में तो आप तो आप किस में रखती हैं? देखा ये बचने का तरीका है गौ बलि गौ बलि जा वो वर्णाश्रम जन्मना ये सब लाना आपके गुरु भाई बहन ये सब लाना मैं पूछ रहा हूं आपको अगर वेद पे विश्वास है तो किसके द्वारा आप भी तो हो बात कुछ और थी टॉपिक कुछ और स्टार्ट हो गया भाई मैं मैं आपने क्या लिखा है टॉपिक का टॉपिक का नाम क्या लिखा है बताइए टॉपिक क्या लिखा हुआ है
00:30:45:20 आपके वहां टॉपिक है आपका कंट्राडिक्टरी टाइटल में क्या लिखा है टाइटल में टाइटल में लिखा हुआ है कंट्राडिक्टरी कंडक्ट ऑफ शंकराचार्य संप्रदाय संप्रदाय संप्रदाय संप्रदाय आया ना नाम आया ना संप्रदाय बात हो रही है तो मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या संप्रदाय के विरुद्ध सुनिए कंट्राडिक्टरी कंडक्ट मैंने अरे भाई मैं आपसे ये पूछ रहा हूं यदि आप अपने आप को संप्रदाय विहीन बता रही है तो आपका वैदिक होना कैसे सिद्ध हो रहा है शास्त्रों को मानने वाला कैसे सिद्ध हो रहा है सनातनी होना कैसे सिद्ध हो रहा है मानव होना कैसे सिद्ध हो रहा है धर्म ना पशु भी समाना जिसका गुरु नहीं वो पशु है। गुरु गीता में लिखा हुआ है। आपको कैसे पता है कि मेरा गुरु नहीं है। मेरे पास है गुरु तो आप उसका नाम बताइए ना भाई। उसका नाम बताइए। तो मैं आदि गुरु शंकराचार्य को अपना गुरु मानती हूं। बोलिए मैं उनके ही गुरु अष्टम का तो आदि गुरु शंकराचार्य की बुक आपको कैसे मिली? आदि गुरु आदि गुरु शंकराचार्य की बुक आपको कैसे मिली? मैं पूछ रहा हूं। आदि गुरु शंकराचार्य की बुक आपको कैसे मिली? आदि गुरु शंकराचार्य से मिली। डायरेक्ट दिए उन्होंने। शंकराचार्य से मिली। आदि गुरु शंकराचार्य दी उसने
00:32:00:21 उसने किसी को दी। उसने उसको इंटरनेट और मैंने उसको उस बुक को खरीदा। इंटरनेट इंटरनेट पर डाली गई चीज तब तक हमारे लिए सत्य नहीं है जब तक उसको उस गुरु परंपरा के किसी प्रामाणिक आचार्य ने सत्यापित ना किया हो। जिससे उन्होंने फिर आप शयनाचार्य को कैसे फिर आप शनाचार्य के इंटरनेट आर्काइव को कैसे मान गए? अरे क्योंकि हमारे गुरु ने उसे सत्यापित किया ना हमारे हमारे पास हमारे पास हमारे गुरु के द्वारा सत्यापित बुक्स है अगर इससे मैच खा रहा है इंटरनेट वाला मार मार के दिया तू इसी बुक को मानना चाहे उस बुक उस प्रकाशन की चौखंबा प्रकाशन से चाहे एक ही सपोज अगर चौ चौखंबा प्रकाशन की रामायण है 100 रामायण है उसमें से एक बुक पे स्टैंप मार के दिया हुआ है आपके गुरु ने तो आप बाकी सारी बुक को कूड़ेदान में फेंक देना उस एक बुक को मानना राइट नहीं नहीं नहीं नहीं ऐसे नहीं ऐसे मानेंगे परंपरा प्राप्त आचार्य के द्वारा दिए गए परंपरा प्राप्त नहीं बता रहा हूं ना परंपरा प्राप्त नहीं थे ब्रह्म मुनि ब्रह्म मुनि की टाइमलाइन बताइए पहले तो इसी टाइम लाइन के अपनी टाइम लाइन के नहीं आप आप बताइए ब्रह्म मुनि प्राप्त नहीं थे नहीं पूछ रहा हूं थे कि नहीं थे अरे भाई पहले उनके बारे में बताइए तो कौन सी परंपरा से थे ईश्वर से लिए थे उन्होंने वेद कहां पे एक्सिस्ट कर रहे हैं वो तो बताइए थे ब्रह्मा मुनि उन उनहीं के समकालीन
00:33:16:04 थे जब आपके शयनाचार्य हुए तो उनके उनके उनके आसपास के थे। उनकी परंपरा क्या थी? उन्होंने किससे लिए थे? आपने ही मुझे बताया कि आर्य समाजी थे। ब्रह्म मुनि के बारे में नहीं बताया। मैंने तो मैंने तो उनके बारे में बताया था जिनके नाम के अंत में अलंकार आता है। मैंने उनका भी बोला था। मैंने बोला था कि मैंने जो मैंने मैंने अलंकार मैंने आर्य समाजी होना। अलंकार वालों के लिए साहब आपने ब्रह्म मुनि को एक्सेप्ट किया होगा। नहीं ब्रह्म मुनि के बारे में बताइए। तो वो कौन सी परंपरा से हैं? बताइए कौन सी परंपरा से हैं? मैं केवल इतना कहना चाह रहा हूं। मैं थोड़ा सा बता दूं कि किसी परंपरा प्रामाणिक परंपरा को माने बिना किसी का वैदिक सनातनी धर्म धार्मिक और मनुष्य होना भी सिद्ध नहीं होता। क्योंकि शास्त्रों के अनुसार जिसके पास धर्म नहीं है वो मनुष्य नहीं है। दूसरी बात ये है कि मुंडकोपनिषद में जिसके पास जिसके पास धर्म नहीं है वो मनुष्य नहीं है। ठीक है। हां तो मैं आपके पास धर्म ना होना सिद्ध कर रहा हूं ना। मैं आपके पास धर्म ना होना सिद्ध कर रहा हूं ना। जिसके पास गुरु नहीं वो धर्म नहीं उसके पास। आपको कैसे पता मेरे पास गुरु नहीं है भाई गुरु अरे तो बताइए अरे तो बताइए आप बताइए ना माननीय आगे बढ़ जाएगी एक मिनट लेट मी स्पीक शिवश जी आप इस तरह से गुंडागर्दी टाइप से बात नहीं कर सकते
00:34:31:06 आपको सुनना भी पड़ेगा ठीक है आपको सुनना भी पड़ेगा गुंडागर्दी नहीं गुंडागर्दी नहीं गुंडागर्दी नहीं है आपको बोलने का मौका नहीं दे रहे और तर्क पे नहीं जा रहे हैं आप सिर्फ बोले शास्त्र शास्त्र शास्त्र नहीं नहीं ऐसा नहीं है तर्क ही तो दे रहा हूं मैं लॉजिक अभी तो मैंने शास्त्र खोला ही नहीं मुंडको मुंडकोपनिषद में ऋषि बता रहे हैं कि मुझे ये जो वैदिक शिक्षा है कहां से मिली वो अपने गुरुओं के नाम बता रहे हैं। आप अपने गुरुओं के नाम बताइए। मेरे पास सृष्टि के प्रारंभ से होना चाहते सार्वजनिक। मैं उनका नाम नहीं बता सकती। मेरे गुरु अभी संसार के परंपरा बताइए। परंपरा परंपरा बताइए। परंपरा परंपरा बताइए। वैष्णव परंपरा है उनका। कौन सी परंपरा? वैष्णव है मधवाचार परंपरा है श्री संप्रदाय रामानुज है क्योंकि वो लोग त्रिदंड धारण करते हैं तो या तो वो रामानुज यानी कि ठीक है रामानुज रामानुज परंपरा आपके लिए प्रमाण है उसके विरुद्ध तो नहीं किताबें तो नहीं पढ़ रही हूं ना जो मेरे पास अरे भैया तो ये ये कैसा गुरु हुआ गुरु का मतलब होता है जिसप हम प्रमाण जिसको हम प्रमाण माने क्योंकि अगर आप उनको प्रमाण नहीं शिवश जी शिवश जी हम इस डिस्कशन के लिए आए ही नहीं थे पहली बात तो प्राय विहीन होने पर ही तो बात हो रही है। आप संप्रदाय विहीन होते हुए हिंदू सिद्ध नहीं
00:35:46:12 होती है ना। वैदिक सिद्ध मेरे हिंदू होने से आप मुझे हिंदू नहीं मानिए। मैं यह कह रही हूं। आप मुझे मुसलमान आप फिलहाल ये मान लीजिए कि मैं हिंदू नहीं हूं फिलहाल। मान लिया मैं तो नहीं मानूंगी क्योंकि मुझे भारत की भारत की नहीं मुझे भारत की आपका संप्रदाय आपका संप्रदाय माने या ना माने मुझे मुझे भारत का कानून मुझे दुनिया का दुनिया में जितने भी यानी कि आपके लिए धर्म से धर्म से आगे धर्म धर्म से आगे कानून आ गया धर्म से आगे कानून है भाई धर्म से आगे कानून है हां क्यों आप कानून नहीं मानते क्या आप भारत में रह के भारत का कानून नहीं मानते क्या कानून कानून मानूंगा मगर जहां पर धर्म जहां पर धर्म क्रॉस हो रहा है वहां पर कानून के प्रति आस्था नहीं रहेगी। हां हम ये कोशिश करेंगे मानेंगे मानेंगे कि नहीं मानेंगे डजंट मैटर आपकी आस्था है कि नहीं है मानेंगे कि नहीं मानेंगे उतनी सीमा में उतनी उतनी सीमा में जितना मेरा धर्म क्रॉस नहीं कर रहा मगर आप समलैंगिकता को मानती है नहीं मानती समलैंगिकता को मानती है तो वो कानून का मेरे ऊपर कंपशन नहीं है लेकिन बस ऐसे ही बस ऐसे ही बस ऐसे ही मानते हैं हम भी कानून को ऐसे ही मानते आप कानून को ऐसे मानते हैं तो उस हिसाब से आपको कानून जो है कानून कभी भी हमारा परम प्रमाण
00:37:01:13 नहीं है मेरे मेरे खानदान में कोई वर्ण शंकर नहीं रहा है तो इस हिसाब से मुझे वैदिक हिंदू माना जाएगा। कैसे आप देखिए मैं आपको समझा ये किताब मान लीजिए वेद है। ठीक है? ये वेद है। अब ये किताब मैंने किसी से ली। अब मैं ये कह रहा हूं कि जिससे मैंने ली उस पर मुझे भरोसा नहीं है। वो क्या बोल रहा है। सच बोला जो ईश्वर पे विश्वास नहीं करते। आप ईश्वर पे विश्वास ये आप कह रही है। ये आप कह रही मैं तो आपका उदाहरण दे रहा हूं। कह रही हूं कि मैं ईश्वर पे विश्वास करती हूं। अब अब वो तो ईश्वर ने जो ज्ञान दिया है वेदों के रूप में वो दी और उस इंटरनेट पे यानी कि अपने मन से आप किसी भी चीज को वेद मान लेंगी किसी भी चीज को कैसे वेद मान लूंगी भाई वो क्या आधार है किसी चीज को किसी चीज को हां ऑथेंटिक किसने किया उसे कैसे ऑथेंटिक है यानी कि आप उस वेबसाइट के विरुद्ध नहीं जाएंगे आप आर्य समाज को ऑथेंटिक नहीं मानते उन्होंने कौन सा अपराध किया जो आप उनको ऑथेंटिक नहीं मानते ये हमारी चर्चा का विषय नहीं है। क्यों? ओ माय गॉड। मतलब जहां अच्छे से जाओ वो आपकी चर्चा का विषय नहीं है। ठीक है। ठीक है। मैं बता रहा हूं। आर्य समाज के पास वेद कहां से आए? बताइए। उनके गुरु से आए। उनके गुरु परंपरा से आए। नाम बताइए। नाम दयानंद सरस्वती कुछ तो अच्छा किया होगा। उनको देके मारा या श्रद्धानंद
00:38:17:08 में चले हम कुछ तो अच्छा किया होगा। कुछ अच्छा किया होगा। गोली मारा आपका लॉजिक है सरस्वती आप अगर इस तरीके से आरोप लगाने के लिएंगी आप अपनी वैदिकता सिद्ध करें कृपा करके वैदिकता नहीं हम यहां आए ही नहीं आप मुझे तो आप आप संप्रदाय पर आरोप लगा रही हैं। आप संप्रदाय विहीन होते हुए स्वयं को सनातनी हिंदू वैदिक आर्य किसको सिद्ध कर दीजिए आपने संप्रदाय का विरोध किया है ना आप जिनको मातृ शक्ति कह रहे हो जिन चार आपने संप्रदाय का विरोध किया है ना वो गलत है जिन्होंने ऐसा किया है वो गलत है तो हिंदू है वो वैदिक हिंदू हैं उनको वेदों का ज्ञान है सपोर्ट में आप लोग डाल रहे थे जिनसे जिनका सपोर्ट ले रहे थे वो वैदिक है
00:39:13:08 शास्त्रों का ज्ञान मुझे है। मैं ठीक है। मैं एक चीज बता दूं आपको थोड़ा काम डाउन हो जाइए। ठीक है। आप भी हो आप भी आप भी मस्कारी मत कीजिए प्लीज। मैं आपसे विनती करती हूं। आप शंकराचार्य संप्रदाय से आप इस तरह के आप इस समय इस तरह के शब्दों का प्रयोग करेंगे। शब्दों का प्रयोग क्योंकि आपने मुझे धोखा दिया है। अभी मुझे जाना पड़ेगा आप मुझे जाना पड़ेगा। डिस्कशन जिस चीज पर होनी थी जो
⬜ Not used yet · 00:39:40:21 – 02:09:09:00 (1:29:28)
00:39:40:21 शब्द के लिए आप वापस ले लीजिए आप अगरेंग तो मुझे जाना पड़ेगा नहीं लूंगी मैं बिल्कुल नहीं लूंगी इसलिए क्योंकि आप आधार पर डिस्कशन ठीक है सभी को जय श्री राम आप लोगों ने देखा इन माननीय के साथ हमारी चर्चा हुई और हमने इनसे इन्होंने शंकराचार्य परंपरा पर जो है विरोध करना स्वीकार किया था तो हमारा एक छोटा सा प्रश्न है यदि आप संप्रदाय विहीन हैं। यदि आप संप्रदाय विहीन हैं तो आप किस प्रकार से वैदिक सनातनी आर्य हिंदू सिद्ध होते हैं। ठीक है? कि जिससे कि हम आपको प्रमाण दे पाए। जैसे रामानुज को भी मानने वाली हो रही तो मैं रामानुज से ही प्रमाण दे दूं भाई कि रामानुज क्या मानते हैं इस विषय में कि विदेश गमन करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। अच्छा [गला साफ़ करने की आवाज़] दूसरी बात यह है कि अभी आ रही है किसी और की आवाज अच्छा दूसरी बात यह है कि अब मैं प्रमाण यहां पर दे देता हूं वहां पर वहां से तो प्रमाण वो मैं बताना चाह रहा था बार-बार अब मैं देता हूं प्रमाण थोड़े से मुंडकोपनिषद में एक एक से ले चार तक ऋषि मुनि ये बता रहे हैं कि हमारे पास ब्रह्म विद्या वैदिक विद्या कहां से आई
00:40:56:07 ठीक है ऋषि मुनि बता रहे हैं मेरा गुरु कौन है मगर आज का एक सामान्य व्यक्ति जो शंकराचार्य का विरोध करने चला है उसको वो नहीं बताएगा कि उसका गुरु कौन है बिना गुरु के आपका वैदिक होना ही सिद्ध नहीं होगा। वैदिक ना बिना हुए मानवता कैसे सिद्ध हो जाएगी? मैं मानव हूं। आ गए ना मानवता संविधान को ले आया ना बीच में। ठीक है? अच्छा और अगर इन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य जी से मैंने वेद लिए हैं। हालांकि आदि शंकराचार्य की किताबें इन तक कैसे आई वो भी सिद्ध नहीं हो रहा है। फिर भी आदि शंकराचार्य जी अपनी भगवत गीता के भाष्य के 13 वे अध्याय के दूसरे श्लोक में लिख रहे हैं। संप्रदाय विहीन व्यक्ति कितना भी विद्वान हो उसको त्याग दो। तो आर्य समाज को कैसे जो है अपना प्रमाण मान रही है। अच्छा आर्य समाज स्वतंत्र रूप से आर्य समाज से पूछ लो वेद कहां से आया? तो आज तक उनके पास जवाब नहीं है। वह घूम घूमते फिर रहे हैं। अच्छा अब उनको अगर प्रमाण मानती हैं। यह उनको अगर प्रमाण मानती हैं तो इनके वो जरा दिखा दीजिए। नवीन जी मैंने एक आपको अभी भेजा है कि जो मूर्ति पूजा है वह क्या कहते हैं? वो है अधर्म। यह लिखा है। रामलीला देखने
00:42:11:15 पर आप 100 वर्षों तक जो अश्वमेध यज्ञ करते हो ना उतना पाप आपको लगता है। मूर्ति पूजा अधर्म है। ये हर हर महादेव कहती है ना हर हर महादेव कहती है ना दयानंद जी ने क्या लिखा है शिव जी के बारे में कि अगर शिव जी कैलाश में रहते हैं तो वो जो वहां पर जो शिवजी है वो क्या हिज उनका शिवलिंग यहां पर है तो जो कैलाश में शिव वो है वो क्या हिजड़े हो गए ये इनके प्रमाण है दयानंद जी पूछ रही थी ना क्या अपराध किया मैं केवल इसलिए नहीं बोल रहा हूं केवल इसलिए कि टॉपिक को मुझे बचाना है जो टॉपिक है मूल प्रश्न संप्रदाय का विरोध होते हुए संप्रदाय विहीन होते हुए आप कैसे खुद को सनातनी क्लेम कर सकते हैं? वैदिक सिद्ध कर सकते हैं या शंकराचार्यों को ना मानते हुए आप स्वयं को कैसे आदि शंकराचार्य को मानने वाला सिद्ध कर सकते हैं? आप हमारे बारे में देख लीजिएगा। माननीय हिस्ट्री देख लीजिएगा। हर व्यक्ति इनहीं सब सवालों से परेशान है। लगा कि रामपाल हो या ब्रह्मा कुमारी हो यान हो या आर्य समाज हो सब परेशान है। बंटी और बबली देखी है क्या आपने? बंटी और बबली में रात को अमिताभ बच्चन जो खटिया पर उठ उठ के खड़ा हो जाता था ना सपनों में आते थे उसके बंटी बबली ऐसे ही आहान सपनों में आता है इन अप्रामाणिक लोगों के और
00:43:26:16 रात में उठ उठ के खड़े होते हैं जाना चाहिए था आपको आपको अरे आप थोड़ी देर और रुकते हैं ना वो हो गया था उनका आपको हटना नहीं चाहिए था वहां से आप समझ नहीं रहे देखिए मैं उनके जवाब अब मक्कारी से मैं मक्कारी बोल गया अब वो आगे पता नहीं क्या बात कह जो मुझे सुन के आना पड़े हैं तो मैं भाई जो व्यक्ति जिसके पास धर्म नहीं है जिसके पास क्वेश्चन में ही वो हो गया था उनका काम जब मैंने क्या कहा था मैंने मैंने रील क्या रील में क्या कहा था पांच मिनट कहा था ना आबा हो गया आबा बाबा हो गया ना इसीलिए कहते हैं मत हां ठीक है नहीं हो इसीलिए कहते हैं मत पढ़ो चक्कर में भाई मत पढ़ो मत पढ़ो और इन इन माननीय को मैंने अभी कल कल रात को चैट में बहुत देर तक समझाने का प्रयास किया। ठीक है? मुझे कोई अच्छा नहीं लगा कि भाई मुझे मैं इनकी इस तरह से इनकी चीजें बाहर लाऊं। है ना? संप्रदाय का विरोध करते हुए संप्रदाय विहीन होते हुए ना तो आपका वैदिक होना सिद्ध होगा फिर ना आपका सनातनी होना सिद्ध होगा। सनातन के बाहर जाते ही आप जो कह रही थी ना मैं मुसलमान हूं। मुसलमान हूं। सनातन के बाहर जाते ही आपको ईश्वर को मान ना मानने वाला सिद्ध करेंगे हम। अभी आप समझ नहीं पाओ हम कौन है।
00:44:42:27 [हंसी] आखरी विकल्प है शंकराचार्य। फिर हम जब आप मुसलमान बनोगे ना आपने कहा मैं मुसलमान हूं। जब आप मुसलमान बनोगे तब हम आपका सिद्ध करेंगे। आप ईश्वर को नहीं मानते। जब आप ईश्वर को ना मानने वाले सिद्ध होगे तब हम सिद्ध करेंगे कि आप धर्म को नहीं मानते। धर्म नहीं है आपका कुछ भी। कुछ भी कर सकते हो। अरे जब ही नहीं बीच में बीच उन्होंने क्या किया था? उन्होंने आर्य समाज का भी लिया था। लाठी पकड़ी थी एक बार कि मैं तो उसको बस गुरु परंपरा पूछी तो खत्म [हंसी]
00:45:14:19 आर्य समाज आर्य समाज नहीं बता पा रहे हैं जब वो नहीं बता पा रहे हैं हमारी गुरु परंपरा क्या है तो आप क्या बताएंगी आरकाव इनका प्रमाण है अब मैं कुछ प्रमाण दे दूं लगातार देखिए मैं प्रमाण दे भगवत गीता चार दो भगवान कह रहे हैं परंपरा से ज्ञान आ रहा है ठीक है भगवत गीता 36 उसमें जो परंपरा सृष्टि के परंपरा चक्र से जो चला आ रहा है ज्ञान है उसका विरोध करने वाले को मोक्ष नहीं मिलता। तीसरा मुंडकोपनिषद का मैंने दे ही दिया। निरुक्त का निरुक्त का हम देते रहते हैं। निरुक्त में भी आचार्य यास्क ने श्रुति परंपरा श्रुति का मतलब ही परंपरा। श्रुति परंपरा किससे सुना भाई? कोई आका कोई आकाइव पे इंटरनेट पर डाल लेगा तो आप उसको वेद मान लोगे। आप उस पे किसी से ठप्पा लगवाओगे। ये वेद है। और जिससे ठप्पा लगवाओगे उस उसको आप झूठा नहीं कह सकते। अज्ञानी नहीं कह सकते। क्योंकि जो आपको झूठ बोल सकता है अर्थ के रूप में, जो आपको अज्ञानता परोस सकता है अर्थ के रूप में, वो आपको वैदिक नाम पे गलत मंत्र भी दे सकता है। यह बहुत बड़ा युद्ध है। इसको समझिए। जिस दिन जाकिर नायक के सामने खड़े होगे, किसी मुसलमान के सामने खड़े होगे और वो आपको आपके वेदों का अर्थ बता रहा होगा। एक ही शब्द के दो अर्थ निकल रहे होंगे। तब आपके पास अकाट उत्तर नहीं होगा उसको चुप कराने का कि प्रतिमा का अर्थ क्यों क्यों ना माना जाए?
00:46:29:22 मूर्ति अकाट उत्तर नहीं होगा। हुआ जो तुमको मानना है वो मान लो जो हमको मानना होगा हमारे पास अकाट उत्तर होगा अकाट्य निरत्तर करेंगे हम सामने वाले को इसको कहते हैं मैं सोच रहा हूं अंतिम मैं चला जाता हूं लाइव उनसे जरा इसी बात पे बात ही कर लेता हूं परंपरा बता दो बस एक बार आपकी क्या है गुरु कौन है वो असल में देखो वो तैयार हो के आई हैं कि हम जब बिगड़ने लगेगा तो हमारे पास अभद्र भाषा शैली अमेरिका में बैठी है क्या कर लेंगे यहां पर किसी विदेश में बैठी हुई है यहां क्या कर लेंगे भाई एफआईआर कराते घूमेंगे कि इन्होंने हमें यह कह दिया वो को कह दिया। अच्छा हमारे पास तो इतना बल है नहीं कि हम गाली का जवाब गाली से दें। हां गाली के पीछे गोली जरूर चल जाती है। गाली के पीछे गोली जरूर चल जाती है। मगर हमें गोली तक जाना ही क्यों है? वहां से हट जाओ भाई दूर हट जाओ। वो कह वो डायलॉग था ना हम बीड़ में रहते हैं। गाली के पीछे गोली चल जाती है। पान सिंह तोमर [हंसी] हम बीड़ के बागी हैं। तो कहने का अर्थ यह है प्रमाण मैं दे रहा था। आदि शंकराचार्य को यदि आप मानते हो तो 13व अध्याय के दूसरे श्लोक में उन्होंने कहा है संप्रदाय विहीन को त्याग देना चाहिए जो यह आपके है ना जिनका आप नाम ले रहे हो अलंकार और ये सब ये सब संप्रदाय विहीन है विद्वान भी हो तब भी त्याग दो आदि शंकराचार्य को यदि मानते हो तब बात कर रहे हो फिर भी आपका आदि शंकराचार्य जी को मानने
00:47:44:28 वाला सिद्ध नहीं होता क्योंकि उनके जो प्रामाणिक शिष्य हैं उन उन पर आपका भरोसा नहीं है ये बात हो गई लॉजिक लेके तो हम चल रहे हैं ना भाई आप हो इलॉजिकल बिना गुरु का झंडा उठाए हो के हम बहुत बड़े हिंदू है सनातनी बताइए गलत बात है ना फिर आप जब फंस रहे हो तो आप मक्कारी पे जा रहे हो गौ व पे जा रहे हो ये कर रहे हो वो कर रहे हो सबके जवाब हैं पर पहले आप ये निश्चित करिए कि हमको वेदों से प्रमाण देना है कि नहीं देना वेदों से देना है तो क्यों देना है वेद आप अगर वेद को प्रमाण मानना है तो क्यों मानना है ना तो फिर वेदों से हम जाएंगे और उसके बाद भी जब आपने ये मान लिया कि शंकर परंपरा से आपको वेद मिले हैं। रामानुजाचार्य परंपरा से आपको वेद मिले हैं। यदि आपने यह मान लिया तो उसके बाद मानने के बाद आपको छंदोग उपनिषद के अनुसार शरणागत होकर के आना है। शरणागत सर झुका के तब प्रश्नों का जवाब दिया जाएगा। सर झुका के जाना है। वरना पहले ही खत्म कर देंगे मानवता आपकी। बताइए। अब जब वो फंसने लगी तो क्या करने लगी? तुम गौली और तुम स्वरूपानंद और जो है तुम जो है तुम्हारे गुरु भाई बहन और जो है आदि शंकराचार्य से मिला है इनको ज्ञान डायरेक्ट हां शिव पहले शिव जी अच्छा मैं थोड़ा मैं थोड़ा सा उसमें कॉमेडी में आने वाला था वो कहने
00:49:00:04 वो जब ये कह रही थी शिवजी है मेरे गुरु तो मुझे लगा अब ये ये कह दे वो ये कह दे वो ये कह दे कि मुझे डायरेक्ट शिवजी से मिला है अगर ये कह देती तो वो बाबा जी जैसा हाल होता भैया सुना सुनाइए द ऋग्वेद के दसवे मंडल का 192 सूत्र था अच्छा एक एक खंबा लेके आई थी वो आर्य समाज का मुझे मालूम था किसी को लाएंगी मगर हम तो घर से था हां तीसरा व्यक्ति आर्यन वहां पे था ना हां अच्छा अच्छा वो कोई आर्य समाजी को लेके आई थी अपने उसमें सुरक्षा में तो भाई हम तो घर से निकले ही थे बांध कर सर पे कफन जहां हथेली पर लिए लो बढ़ चले एक कदम जिंदगी तो अपनी महमा मौत की महफिल में सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है ठीक है अब हमारे दिल में है थोड़ा सा इतिहास क्लास देखिए उठा के कि क्या है किसके सामने जा रहे इसीलिए कहा था इसीलिए कहा था मैं मेरा व्यक्तिगत आपके आपको परामर्श है 5 मिनट 510 मिनट से ज्यादा टिकनी पर दूर दूर रहिए अच्छा है बढ़िया 188000 फॉलोवर्स का आपने बना रखा है बढ़िया उसमें मगन रहिए डॉक्टरी करिए खामखा शंकराचार्य के सैनिकों से ना भिड़िए हां मैं उनकी निंदा अवश्य करता हूं जिन्होंने इन्होंने जब क्वेश्चन उठाया अगर मर्यादित शैली में उठाया और वो अमर्यादित हुए और यदि अमर्यादित शैली में भी इन्होंने क्वेश्चन
00:50:15:10 उठाया तो यह अमर्यादित हो गए। यह भी गलत है। यह भी गलत है। तुम नीच लोग हो। तुम नीच लोग हो जो शंकराचार्य का नाम डुबो रहे हो। जो ऐसा कर रहे हो शंकराचार्य का नाम लेकर के वहां जाकर के एक महिला ने अगर कुछ बोल दिया तो उसको तुम भी उसी की तरह बोलने लगे। ये नीचता है धर्म नहीं है। ये राम ने सिखाया है तुमको। राम ने सिखाया है। गिरो मगर उस झरने की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता खोने नहीं देता। मर जाओ। धर्म का साथ मत छोड़ो।
00:50:48:07 मगर नहीं हम बहुत बड़े गुरु के शिष्य हैं। बहुत बड़े गुरु के शिष्य हैं। अब हम किसी को भी कुछ भी कह देंगे। नीच लोग हो तुम लोग। तुम्हारी वजह से इस तरह के वातावरण निर्मित होते हैं। तुम्हारी वजह से शंकराचार्यों को कहीं पर खामखा की लड़ाई मोल लेनी पड़ती है। तुम्हारी वजह से 10 महत्वपूर्ण काम छोड़कर के ऐसे व्यर्थ के कामों में आना पड़ता है। अरे भैया बौद्धों के लिए बोल रही है। मुस्लिमों के लिए बोल रही है। ठीक है। कुछ अगर मर्यादा में रह के बोल दिया किसी तो चलेगा बस तुमने हाउ डेयर यू? हाउ डेयर यू कोई काम ना धाम जाके बौद्धों से भिड़ो ना। दिन भर शंकराचार्य को गाली दे रहे हैं। वही भागवतानंद का हाल है। जो रामभद्राचार्य जी ने तुम्हारे गुरु को ये कह दिया वो कह दिया तो तुम क्यों नहीं जा रहे? अरे भैया तुमने इतने भयानक भयानक वक्तव्य देने वाले दिन भर वो साइंस जर्नी कितनी गाली देता है। क्या कर लिया तुमने उसका? सब कुछ छोड़ के इसके पीछे लग गए। तुम जैसे लोगों की वजह से यह जो वातावरण है ना यह विप्लवकारी यह उत्पन्न होता है। दो हिंदू हिंदू आपस में लड़ रहे हैं भैया। अब मुझे उसे समझाना पड़ रहा है उन्हें। इसी बात के लिए एक बार ब्रह्मचारी जी महा महाग से बात हो रही थी। चर्चा हो रही थी एकांत में ही। तो बड़ा गुस्सा हो रहे थे। इसी बात को लेकर। उन्होंने कहा था कमेंट
00:52:03:18 लोग आदि लोग अपने आप को शंकराचार्य का गुरुदेव का शिष्य बताकर ऐसी ऐसी बातें करने लगते हैं। कहते मन करता है कि मतलब इनका तो भगवती का कुछ भुगवा दूं इनके ऊपर मैं मतलब इतना गुस्सा हो गए थे वो लोग वो ब्रह्मचारी जी इतना गुस्सा हो गए थे कहते भगवा ना खाना खा पाए ठीक से ना बाहर निकाल पाए ठीक से ये इन लोगों ने ज्यादा फफूंद मचा रखी है हाउ डेयर यू तुमने कैसे बोल दिया बस इनको यही दिखा और कुछ दिखा ही नहीं जी ओशो वाले दिनों रात गाली दिया करते हैं बुद्ध वाले दिनों गाली दिया करते कोई नहीं दिख रहा तुमको एकमात्र शक्ति मिल गई उसको उसको जाकर के वो किसी संप्रदाय वगैरह से है नहीं अपना जो ठीक है वो अपने जो भी उसको समझ में आ रहा है अपना कर रही है भिड़ गए उससे जाके खामखा अरे आओ ना भैया रामपाल का विरोध करो आके लखनऊ में हैं जाओ जा के हाई कोर्ट में केस करो रामपाल के विरुद्ध तुम्हारी मां को गाली दी है दुर्गा मां को नहीं वो नहीं होगा केवल कीबोर्ड वॉरियर बनेंगे कीबोर्ड वॉरियर तुम्हारे लिए धर्म कुछ नहीं है भगवान कुछ नहीं है केवल तुम्हारा अपना जो वर्चस्व है ना उसकी रक्षा करते हो तुम इस तरह हम और तुम जैसे नीच लोगों की वजह से हम जैसे लोगों को जूझना पड़ता है इन परिस्थितियों से।
00:53:16:21 स्वाता सुख के लिए खाली बस मैं कीबोर्ड पे लिख दूंगा और कूल बन जाऊंगा। यही है। गलत ये तो है। अगर उसने अमर्यादित आचरण किया भी है तब भी वहां आप अमर्यादित नहीं हो सकते। जाके रिपोर्ट लिखाओ। धर्म की लड़ाई लड़ो। सनातनी हो तुम मत भूलो शंकराचार्य के शिष्य हो मत भूलो और क्रोध को पालना सीखो उस क्रोध को डायरेक्शन देना सीखो कहां पे सारा क्रोध एक प्रश्न में आ गया परंपरा क्या है आपकी बताइए लो हो गया व्यक्ति वा पूछ रहा हूं रामानुजाचार्य पर है लेकिन आपने उनको बहुत बोलने का समय दिया है कई बार इतना आप देते नहीं है
00:54:06:14 आपने उनको बोलने का काफी समय दिया उन्हें। एक भाई साहब अवनीश जी पूछ रहे हैं किया किसने है ये? एक तो ये माउस इतनी तेज चलता है मेरा। ऐसा है अवनीश जी मैं आपको थोड़ा सा वृतांत बता देता हूं। हालांकि उसमें भी वृतांत बताया है। ये संप्रदाय विहीन हिंदू हैं। मूल में इनके संप्रदाय है नहीं कोई। क्योंकि इनके लिए यदि कोई संप्रदाय होगा तो उसको इन्हें प्रमाण मानना पड़ेगा। प्रमाण मानना पड़ेगा। तो उसने जो भी अर्थ किया होगा उसके विरुद्ध नहीं जा पाएंगी वेद शास्त्रों का क्योंकि विरुद्ध तो फिर प्रमाण सिद्ध नहीं होगा वेदों को मानना तो ये संप्रदाय विहीन हिंदू हैं। है ना जिसको हम लोगों ने यह नहीं इनके लिए नहीं कह रहा हूं मगर इस तरह के हिंदुओं को हमने Honda हिंदू नामकरण दिया है। Honda हिंदू कुछ पता नहीं है धर्म क्या है? कहां से निकल रहा है? कहां से हो रहा है? अभी आकर के बोल देगा कोई संस्कृतक बन जाएगा मुसलमान हो। वो कहेगा मैं करूंगा तुम्हारे वेदों का भाष्य। तुम क्यों करोगे? हम क्यों नहीं करेंगे? दो अर्थ निकल रहे हैं। कई मंत्रों के दो अर्थ निकल रहे हैं। तो मैं करूंगा भाष्य। तुम क्यों नहीं करोगे? तो तुम क्या कहोगे वहां पे? है तुम्हारे पास परंपरा नहीं है। हम कहेंगे वहां पर तब हमारी जरूरत पड़ेगी। तुम तुम लोगों को इतनी सी बात समझ में नहीं आ रही। वेदों का प्रमाण
00:55:21:22 शंकराचार्य हैं। परंपरा प्राप्त आचार्य है वेदों का प्रमाण। तो आपका धर्म जो भी है परंपरा प्राप्त आचार्यों की सीमा के अंदर है। अब आप यह शरणागत होकर के विनम्र भाव से प्रश्न कर सकते हो कि महाराज जी गुरु जी गुरुदेव मुझे यह चीज समझ में नहीं आ रही है। एक तरफ तो जो है यह बताया जा रहा है कि गाय के विषय में यह बताया जा रहा है और वहां पर गाय शब्द भी आ रहा है जिसका कुछ अर्थ का अनर्थ सा दिखाई दे रहा है। अच्छा वो क्या कहने लगी कि मानवता मेरा पैरामीटर है। मानवता आपका पैरामीटर कैसे हो गया भाई? आपका पैरामीटर धर्म का वेद है। शास्त्र है। तेरे लिए कर्तव्य और कर्तव्य के विषय में। शास्त्र प्रमाण है। मानवता मानवता उद्भाषित वहां से होती है। अगर आपको धर्म नहीं मिलेगा आपके माता-पिता जो कि आपने बताया वैष्णवाचार्य से दीक्षित थे। अगर आपको धर्म नहीं मिलेगा तो आप पशु हो। धर्म ही ना पशु भी समाना तो वेद के बिना अपने आप को इंसान कैसे कहोगे? और लॉजिकल वे से अगर चलें तो आपने कहा मैं सनातनी नहीं मुसलमान हूं। ये देखिए इसको कहते हैं लोहा शंकराचार्य। इसको कहते हैं लोहा। सामने वालों को कहना पड़ रहा है मैं जो है मुसलमान हूं। क्या करूं? फड़फड़ा फड़फड़ा रहा हूं। जिनसे
00:56:37:03 आजीवन लोहा लेते आए। आजीवन आज वही बनना पड़ रहा है। क्यों? क्योंकि संप्रदाय का विरोध कर रहे हो ना? परंपरा का विरोध कर रहे हो ना? इसलिए भाई जान लो वेद आपके पास परंपरा से आते हैं। तो आपको किसी ना किसी परंपरा के सानिध्य में खड़ा होना पड़ेगा। अब वह बात बाद बात की है कि उन्होंने विदेश गमन को क्या माना है। कोई भी प्रामाणिक आचार्य ऐसे नहीं है जिन्होंने विदेश गमन को निषेध ना किया हो। ठीक है? तो आप सिद्धांतिक विरोध मत करिए। अब रह जाती है बात कि आपके कुछ कटाक्ष है उनको लेकर के उनके सवाल हैं। तो सबसे पहली बात संप्रदाय का विरोध मत करिए। संप्रदाय के सिद्धांतों का विरोध मत करिए। आप श्रृंगेरी के शंकराचार्य को लेकर के बता रही वहां चंदा होता है मगर इतना चंदा आता है फिर भी तुम जैसे झुंझुनों को भेजा इसका मतलब आप संप्रंगेरी पीठ पर भी सवाल उठा रही हैं विदेश यात्रा का विरोध विदेश यात्रा गमन का निषेध का विरोध करके आप जो है पूरी पीठ चारों पीठों का आप जो है उठा रही हैं तो फिर आपसे पूछना पड़ेगा ना जब आप आपका कोई प्रमाण है ही नहीं इनमें से जिस दिन सनातन पर वार होगा ना उस दिन आखिरी आखिरी उपाय होगा शंकराचार्य ध्यान रखना कुछ काम नहीं आएगा ये Instagram पर रील्स बनाना ये क्या हुआ? कुछ भी काम नहीं आएगा उसमें Instagram पे
00:57:52:07 रील बनाना। तो अब मैं वो लॉजिकल वे में थोड़ा सा बता दूं। इन्होंने जैसे माना कि भाई मुझे मुसलमान मान लीजिए। तो मुसलमान है तो फिर हम आपको नास्तिक सिद्ध करेंगे। ईश्वर को ना मानने वाला सिद्ध करेंगे। जब आप ईश्वर को ना मानने वाले सिद्ध होंगे तब हम आपको सिद्ध करेंगे। जब आप ईश्वर को नहीं मानते तो आपके पास धर्म नहीं है। ठीक है? जब आपके पास धर्म नहीं है तो सामने खड़े हुए तीन पुरुष क्योंकि आप मातृ शक्ति हैं। जब आप ईश्वर को मानने वाले नहीं है तो सामने खड़े हुए तीन पुरुष पिता भाई और पति में अंतर करने का आधार क्या होगा? हो गए पशु इसलिए कहा था कि आपको अपने मानव होने पर भी भ्रमित जो भ्रम है वो टूट जाएगा। संप्रदाय के बाहर जाकर के नहीं आप संशय करिए। गुरु वही जो संशय दूर कर गए। गुरु गु का मतलब गुरु गु का मतलब अंधकार रू का मतलब निकालने वाला अद्वैत का उपनिषद आपको निकाला जाएगा अंधकार से मगर ये जो ये जो ये जो विरोध करने की भावना है ना मैं बाहर खड़ी हूं संप्रदाय के बाहर छोड़ के आइए अंदर हर बात का जवाब है जो [गला साफ़ करने की आवाज़] लोग ऐसा कर रहे हैं अच्छा सनातनी ऐसा कर रहे हैं तो पूरे सनातन को गाली दोगे क्या शंकराचार्य के शिष्य अगर गलत कर रहे हैं तो तुमने
00:59:07:10 कहा कि मैं शंकराचार्य को गाली दूंगी या अमर्याद ित आचरण करूंगी तो सनातनी ऐसा कर रहे तो सनातन को गाली दोगे तुम यही है तुम्हारा सिद्धांत ये तो उनका सिद्धांत है 9 पांच खत्म कर दो पवित्र महीना खत्म होते ही ये तो उनका सिद्धांत है सनातन में कैसे आ गया और हम रेप्लिकेशन में दे रहे हालांकि उन्होंने गलत किया है। रेप्लिकेशन में भी आपका देना सिद्ध नहीं होता। राम ने मंदोदरी का हरण करना नहीं सिखाया है। सीता के हरण के विरुद्ध रावण का वध करना सिखाया है राम ने। मंदोदरी का हरण नहीं।
00:59:46:24 [गला साफ़ करने की आवाज़] और फिर आखिर में आप देखिए पहला वर्ड पहला वर्ड किस तरह से इन्होंने आप मक्कारी मत करिए। देखा यह इनकी तमीज है। इसीलिए कहते हैं धर्म ना पशु पशु समाना। इसीलिए कहते हैं जिसके पास धर्म नहीं है उसके उससे क्या अपेक्षा करोगे आप कि वो इंसानियत दिखाएगा। हम आपके चैनल पर आए हैं। हम कोई बदतमीजी कर नहीं रहे हैं। हम अपने लॉजिकल प्रश्न रख रहे हैं। आप प्रश्नों के उत्तर अगर कुतर्क है तो भाई कुतर्क सिद्ध करो उसे। वो भी नहीं कर रहे हो। मक्कारी मत करिए। यानी कि आप अपने मन से एक टैग दे रहे हैं। अच्छा मक्कारी है कहां से सिद्ध होगा? तेरे लिए कर्तव्य अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है। अपने आप को सनातनी कहते हो ना तो तुमको वेद वैदिक अपने आप को मानव कहते हो ना मनुष्य तो पहले तुमको वेद की शरण में आना होगा। ठीक है। वेद की शरण में आओगे तब तुमको परंपरा की शरण में आना होगा।
01:00:46:28 जी [गला साफ़ करने की आवाज़] श्वेतांग जी और सीना और डंके डंके की चोट पे कह भी रही है कि नहीं नहीं मैं वापस नहीं लूंगी क्योंकि उनका चैनल है भाई वो तुर्रम खान है ना तुर्रम खान हो ना भाई तुम कुछ भी बोलोगे मैं वापस नहीं लूंगी किसने सेट किया मैंने सेट किया शास्त्र को तो मैं मानती हूं उतना मानती हूं जितना जहां जो अच्छा लगता है मान लेती हूं तुम्हारे जो दयानंद जी है जो तुम्हारे लिए वैसे तो दयानंद जी भी तुम्हारे लिए प्रमाण नहीं है। हालांकि मुझे मालूम है तुम वहां से भी क्विट करोगे। तुम अगर वैसे तो ये संप्रदाय नहीं है। मगर जब मैं संप्रदाय के रूप में इसको दुर्जन तोष न्याय से प्रस्तुत करूंगा यहां से ही भाग जाओगे आप। देखो कैसे हां आपने अपनी उसमें क्या कहा था? अपनी रील में क्या कहा था? स्त्री कभी अपवित्र नहीं होती। कहा था ना? यह देखो दयानंद जी क्या लिख रहे हैं। [खांसने की आवाज़] जिन नीच स्त्रियों को छूना नहीं उनको कुछ लोग अपवित्र मानते हैं। यह देखो अपवित्र मानने का अपवित्र मानने का विरोध कर रहे हैं। आपके भैया क्या इसका पेज इसका पेज नंबर बता दीजिए। वो मैं ज़ूम नहीं हो रहा है ना? मैं मैं बता रहा हूं। उसका पेज नंबर है। समुल्लास वगैरह बता दीजिए।
01:02:02:19 एकादश समुल्लास है। और एकादश समुल्लास में ये पेज नंबर 231 है। थोड़ा बहुत तो आगे पीछे होगा। आप दिखाइए। ठीक ठीक अब यहां से ही भाग जाना फिर कौन है तुम्हारा प्रमाण भाई भागोगे आप दयानंद जी की सीमा में रह के भी अपना सनातन सिद्ध नहीं कर पाओगे यद्यपि दयानंद जी का सनातन सिद्ध नहीं है ठीक है इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर मत पड़ो मत पड़ो मैंने आज इनको दिन में भी समझाया भाई एक कैसे जो है कि भाई इनको फीलिंग आ जाए नहीं लाइव में आओ लाइव में भैया काफी चैट हुई है काफी बातचीत हुई है इनसे
01:02:43:15 यह शेड्यूल उन्होंने की थी। हमारे पर भी यह लाइव चल रही थी। शेड्यूल उन्होंने की थी। इनका प्रूफ वो है आर्काइव इंटरनेट परंपरा प्रूफ है। इंटरनेट [हंसी] ये देखिए। वो ये कहना चाह रही थी कि मैं साइड भाषा का ले आऊंगी। आप उसको भी नहीं मानोगे। तो बोला मानेंगे। हमारे आचार्य गण ने बोला है तो मानेंगे। भाई दो पहले बताइए दो आपने दो दो सनातनियों के बीच में जब बात हो रही है और एक सनातनी कह रहा है कि भाई अगर तुम परंपराओं को नहीं मानते हो तो पहले सबसे पहले अपना सनातनी होना सिद्ध कर दो आपका क्लेम है ना मैं सनातनी तो इससे बाहर निकलो फिर हम आपको लेके आएंगे अपने ईश्वर से फिर हम आपको पहले नास्तिक बनाएंगे फिर नास्तिकता से आपको ईश्वर सिद्ध करेंगे अपना ईश्वर सिद्ध करेंगे फिर शंकराचार्य की शरण में ले आएंगे फिर ले आएंगे वहीं जहां से अभी आप गए हो पता नहीं [गला साफ़ करने की आवाज़] चले आते हां वो खोला आपने एक एकादश उल्लास हां [गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है उनको जो है वह अभी भी लाइव है एक लोग बता रहे हैं वो गलतसलत कह रही है ठीक है तो वो उनकी स्वतंत्रता है वो कुछ भी कह सकती है हमें जो करना था हम करके चले आए हैं
01:04:00:24 एक तो मेरा माउस 231 नंबर सेंसिटिविटी कम कर दीजिए उसकी कैसे कम होती है? अब अभी बताता हूं थोड़ी देर में। अवनीश जी कह रहे हैं पीडीएफ परंपरा से हैं। [हंसी] बार-ब मैं वैष्णव वैष्णव परंपरा से कौन सी परंपरा भाई जिससे हम देख जब उन्होंने बोला कि मैं जब उन्होंने बोला कि वैष्णव परंपरा से तो थोड़ी देर सोचने लग गई थी कि अब मैं क्या बोलूं? अच्छा इसके आगे भी होता है कुछ वो वो भी याद है आपको? कौन से ब्राह्मण हो? कौन सा वेद है? क्या गोत्र है? वैसे ही वैष्णव परंपरा अच्छा कौन सी वैष्णव [हंसी] परंपरा रामानुज परंपरा अब उनको ये भी डाउट है कि इन्हने त्रिदंड सन्यास लिया होगा तो कोई वैष्णव परंपरा होगी हां हां तो रामानुज परंपरा है तो रामानुज को प्रमाण मान लो ना भाई रामानुजा तो रामानुज फिर नहीं तो अगर इतनी इतना ज्यादा उन्होंने नहीं अगर रामानुज को रामानुजा परंपरा में ही अगर पढ़ा होता कुछ किया होता तो तुरंत चट से निकलता कि रामानुज परंपरा से वैष्णव परंपरा नहीं निकलती तब।
01:05:16:02 ठीक है। हम तो अपनी ईश्वर से लेके यहां तक की परंपरा बता रहे हैं। आप अपने पीछे के दो गुरुओं के नाम नहीं बता पा रहे। भाई पेज खोलो आप उनका 231 ना हम देखो मैं शेयर कर रहा हूं स्क्रीन नारायण नारायण नारायण या शेयर स्क्रीन फिर इसके बाद एंटायर स्क्रीन यह देखिए क्या 200 ये ऑपरेटर जी हटा दीजिए स्क्रीन से अवनीश जी का वक्तव्य है जो हटा देता हूं 231 ये है क्या हां यही इसमें देखिए जो हां बस बस बस ये जो श्लोक श्लोक लिखे है ना दो तीन चार इन श्लोकों के नीचे जो हां ये ये वाला बड़ा करिए यही पैराग्राफ जिस पे हां ये देखिए ये दयानंद जी मान रहे हैं कि स्त्रियां पवित्र होती है और उनको को अपवित्र मानने का विरोध कर रहे हैं। देखिए जिन नीच स्त्रियों को छूना नहीं उनको अपवित्र अति पवित्र उन्होंने माना है। ये क्रिटिसाइज कर रहे हैं वाम मार्गियों को। ठीक है? वाम मार्गी है उनको क्रिटिसाइज कर रहे हैं यहां पर। और यहां पर फिर आगे कह रहे जैसे शास्त्रों
01:06:31:03 में रजसला आदि स्त्रियों के स्पर्श का निषेध है। लो स्पर्श का निषेध है। आप रजला से अपना वो मान रही है ना पवित्रता। ऐसे नहीं करते। ऐसे नहीं करते चीटिंग। अब बताओ कहां जाओगे इसको आप या तो मान लो मान लो कल गलत बोला था भाई बात ऐसी है 145 वा अध्याय इसका निराकरण कर दूं आपके संशय का 145वा अध्याय 52वा श्लोक मत्स पुराण समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा साधु सम्मत धर्म है विपरीतार्थक कहीं पे कुछ मिल रहा तो एक जगह का थोड़ी ना उठाओगे अर्ध को कुट करोगे क्या न्याय है
01:07:10:04 कि एक ही बात व्यक्ति की ये चीज मानेंगे ये चीज नहीं मानेंगे ऐसे ही यही तो वही है वेद मानेंगे वेद का कोट करके सामने वाले को दबाएंगे सामने वाला जिससे वेद लिए उसको कोट करके आपको नहीं दबा सकता वेद का कोट करके सामने वाले को दबाएंगे सामने वाला जिससे वेद लिए उसका कोट करके भैया तुम अर्थ गलत बता रहे हो मैं सही बता रहा हूं उसका कोट करके आपको ना दबाए ये आपके दयानंद स्त्रियों को पवित्र अति पवित्र मानने का विरोध कर रहे हैं कुछ स्थितियों में और नीच तक कह रहे हैं नीच समझ रहे हो? ऐसे ही वर्ड्स का उपयोग करते हो ना वो सेंटीमेंटल और सेंसिटिव चीजों का उपयोग करके अब इनकी कई और भी चीजें हैं कुछ जैसे
01:07:53:20 अच्छा मैंने ऐसा तो है नहीं कि स्वतंत्र रूप से इनसे परंपरा पूछी है। मैं शास्त्रों का प्रमाण दे रहा हूं। शास्त्र कह रहे हैं परंपरा में जाने को। शिव पुराण में लिखा है परंपरा में जाने को। निरुक्त मेंस काचार्य कह रहे हैं परंपरा में जाने को। गीता कह रही है परंपरा में जाने को। मुंडकोपनिषद कह रहा है परंपरा में जाने को। लॉजिक कह रहा है परंपरा में जाने को। आप परंपरा बताइए अपनी। अब इन्ह इनके कुछ आरोप है स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज पर एक वो है। उनका एक फोटो नहीं आता जिसमें जो है एक पादरी पादरी का क्या था वो सर पे हाथ रख के वो फोटो धोखे से खिंचवा ली गई है। उसको वायरल कर दिया गया है। बैठे थे उनको पता ही नहीं था ये होने वाला है। उन्होंने कर दिया। फोटो खचवा। इसका एक्सप्लेनेशन उन्होंने दिया है। अब यदि उन पर विश्वास नहीं है तो वेद पर प्रमाण कैसे? फिर फसोगे। फिर फसोगे। उन्होंने एक्सप्लेनेशन दे दिया। अगर उन पर विश्वास नहीं है वेद प्रमाण कैसे बताओ? फस जाओगे। इसीलिए कहते हैं परंपरा सर्वशक्तिमान ईश्वर, परम स्वतंत्र, मोक्ष, शाश्वत धर्म तीन चीजें बस इसी के इर्दगिर्द फसोगे बस और कुछ नहीं। अच्छा फिर ये कहती है कि सीएए का विरोध क्या किया? मुक्तेश्वर जी के लिए वो सीएए में प्रशासन का विरोध का किया। अब मुक्तेश्वर जी ने क्या कहा कि भाई जैसे पुरी
01:09:08:21 के शंकराचार्य जी से भी पूछा गया कि भाई जो पिछली बार कुंभ का मेला लगा था तो पूछा गया कि क्या मुसलमानों को आने दिया जाए? तो पुर के शंकराचार्य जी ने हमारे सनातन धर्म की उदारता क्या है? कि भाई रसखान जैसे को जैसों को ना रोका जाए। रसखान जैसों को ना रोका जाए। जो इतने बड़े भक्त हुए रसखान जैसे लोग उनको भी रोक दोगे क्या? ठीक है? तो जो मुक्तेश्वर जी महाराज जी हैं उनकी अगर शंकराचार्य पद को लेकर के एक संदिग्ध स्थिति है या आपकी नजर में वो नहीं है किसी की नजर में है तो इसका मतलब यह है कि वो जो भी बात करेंगे वो गलत हो गई उन्होंने भी तो यही कहा जो अच्छा हो उसको आने दो अच्छा ना हो मत आने दो और अच्छा चेक करने को किसको बोल रहे हैं सरकार को ना आने दे अगर वो मुसलमान मुसलमान का मतलब आप ये मान रहे हो इस्लाम का मतलब कि वो हिंदू विरोधी है और हिंदू विरोधी का मतलब धार्मिक है। तो यदि कोई अपने सिद्धांतों को छोड़ के नहीं आ पा रहा है। उसको गाय खानी ही है तो मत आने देना उसको अंदर। उसको हिंदू का विरोध करना ही है तो मत आने देना। कह तो रहे हैं। और क्या कहे या शास्त्रों में लिखी हुई बात का भी विरोध कर दे। मत आने दो ना भाई। जो अपने ऐसे सिद्धांतों को छोड़कर अंदर नहीं आ पा रहा है। जो हिंदू विरोधी सिद्धांत है तो उनको मत आने दो। कह तो रहे हैं।
01:10:28:12 करेक्ट शंगेरी मट पूर्वाचार्य महाभाग उन्होंने पूर्वाचार्य महा के लिए कृष्ण भारती कृष्ण तीर्थ जी के लिए बोला हां उनके लिए बोला विदेश गए तो विदेश गए तो वो शंकराचार्य के पद को छोड़ रहे हैं। अपनी उस विदेश गमन को शास्त्रीय सिद्ध नहीं कर रहे बल्कि बता रहे हैं अशास्त्रीय है। हां अगर आप पर्सनली उनके द्वारा किया जाने वाला जो कार्य है उसका आप जो है वो करें कि वो सही था कि गलत था। तो समष्टि का धर्म जब आ जाता है तो व्यष्टि के धर्म का त्याग हो जाता है। बड़े भाई की आज्ञा मानना धर्म है। कुंभकरण ने मानी मगर दोषी है। क्यों? समष्टि के धर्म का विरोध हो गया। पिता की आज्ञा मानना धर्म है। पिता की आज्ञा मानना धर्म है। मगर प्रह्लाद जी ने नहीं मानी। मगर वो हमारे आदर्श सिद्ध हुए। क्यों? क्योंकि उन्होंने समष्टि के धर्म को चुना। करेक्ट। राजगद्दी के प्रति राजगद्दी के प्रति जो आपने प्रतिज्ञा की हुई है उसका पालन करना धर्म है। परंतु उसका पालन करने के बावजूद भीष्म पितामह दोषियों में गिने गए। गिने गए ना। क्यों गिने गए? क्योंकि उन्होंने व्यष्टि प्रतिज्ञा के धर्म जब क्रॉस कर रहा था समष्टि
01:11:43:18 के धर्म को न्याय अन्याय को तो उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा को आगे कर दिया। इसी प्रकार से समष्टि के लिए वैदिक मैथमेटिक्स के प्रचार के लिए अगर वह चले भी गए तो उन्होंने यह नहीं कहा कि मेरा जाना सही है इसका अनुकरण करो। रामो विग्रह धर्म भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज विग्रहान धर्म नहीं कहा उन्होंने कि मैं विग्रहान धर्म हूं। शास्त्रों [गला साफ़ करने की आवाज़] ने राम को विग्रहान धर्म कहा है। उन्होंने कभी इस बात का विरोध नहीं किया है। तो जितने अंश में जो राम जी के साथ है उसका अनुकरण करो। जो राम जी की सीमा के बाहर है उसका अनुकरण मत करो। यह हमारा धर्म। ठीक है? और क्या है इनका आरोप? हां। कि भाई वहां पर क्यों खुलवाए जा रहे हैं? क्यों भाई? मनुस्मति पढ़ो जिनका पक्ष ले रही हो। लुटेरों के द्वारा लूटा हुआ धन लेके भी यदि धर्म की रक्षा होती है तो करो। पढ़ो जाके मनुस्मति। तो क्या गलत कर रहे हैं? अगर धर्म की रक्षा के लिए अगर वहां पर एक खुल रहा है तो इस जैसी संस्थाएं क्रिश्चियन बना रही हैं।
01:12:47:01 इस जैसी संस्थाएं लोगों को क्रिश्चियन बना रही है। विदेशी वह दिखा दिखा के झंडा वहां पर विदेशियों के द्वारा ही वहां पर सेंटर अगर खुलवाया जा रहा है जो पतित हो चुके उन्हीं के उन्हीं के पतित पतित लोगों को ही वहां सेट किया जा रहा है। कहीं से भी आदर्श स्थापित नहीं किया जा रहा तो उसमें आपको क्या आपत्ति है? वहां क्या कोई श्रोत ब्राह्मण जा रहा है क्या? और यदि एट द एंड भाई कोई सवाल आ रहा है तो तुम भूबाकी करोगे Instagram पे
01:13:18:19 भूबाकी करोगे क्या Instagram पे जाके जाओ शरणागत हो के पूछो क्योंकि वो तुम्हारे वेद के प्रमाण हैं। वरना छोड़ दो ये कहना कि हम वैदिक हैं। बन जाओ। बाइबल लिख दो। कुरान लिख दो एक नई। मेरे पास मानवता आई। मैं इंसान हूं। लिख दो फिर आएंगे हम। फिर आएंगे तुम्हारी मानवता को टटोलने है ना फिर आएंगे बाहर फिर आएंगे वह बाहरों के मौसम जहां और भी है सितारों के आगे तो सितारों के आगे वाला जो जहां है ना वो शुरू होता है जहां पर शंकराचार्य आते हैं वहां
01:13:58:04 आपके कुछ लाख फॉलोवर्स हो गए तो समझने लगे हम धर्म के निर्णायक हो गए भाई नहीं हो आप धर्म के निर्णायक जाओ जा के अपनी वैदिकता तलाशो उनको लग उनको लग रहा था कि हां ठीक है बहुत फॉलोवर्स है ये है वो है मैंने जो पढ़ा है वही सत्य है क्यों क्योंकि वो मिला है ना मुझे vacom से आकाइव से हम ये धर्म मिला है इनको यही तो हम इन सनातनियों की सबसे बड़ी कमजोरी है नहीं मैं इसमें एक बात कहना चाहूंगा एक्चुअली मतलब ये ना हंसने की बात नहीं है वैसे बहुत दुखद है क्योंकि ये कौन है इस तरह के लोग सिंह जी आ रहे हैं आ रहे हैं जा रहे हैं कैमरा कैमरा ऑन कर लीजिए तो मैं आपको ले लूं जी बताइए तो दुखद इसलिए है क्योंकि इनकी प्रायोरिटी धर्म रक्षा नहीं है ये कंटेंट बनाना है आप इसको समझिए ये बहुत ये बहुत जरूरी है और ये बहुत घातक है ये ये ये सब चीजें श्वेता जी उनके ऊपर ये सब चीजें उनके ऊपर छोड़ दीजिए हम वही बात बोलते हैं जो अकाट हो छोड़िए हम क्यों बोले भाई नहीं आप अरे आप आप आप ये नहीं लगता कि आपको ये ऐसा है आप सिर्फ उनकी बात नहीं कर रहा मैं इन जनरल सब की
01:15:13:06 बात कर रहा हूं प्रातिक चीजों पे हम क्यों बात करें हमारे पास अकाट्य चीजें प्रातिक चीजों पे हम बात नहीं करते हैं उनकी तरह बन जाएंगे ना प्रातिक चीजों पे बात करेंगे हम कांटे की नोक की बात करेंगे बिल्कुल तस ना मस्त अब उन्होंने कहा मक्कारी कर रहे हो मक्कारी सिद्ध सिद्ध करने कहां जाओगे या तो उन्हीं को प्रमाण मान लो दिक्कत ये है ना हां हां बिल्कुल बिल्कुल ये तो तो ऐसी चीजें ना ऐसी चीजों पे हमें जाना है। हमारे पास खंबे हैं। बिल्कुल कुदाली लो भैया बता दो। लेकिन आपको थोड़ी थोड़ी देर और रुकना चाहिए था। मक्कार और दो चार बार मक्कार सुनता। [हंसी] कम से कम नहीं मुझे उस टाइम उस टाइम आप कृष्ण बन जाते। [हंसी] ठीक है। उस टाइम आप कृष्ण बन जाते। तो रुक जाते थोड़ी देर और और हो जाता मतलब पता है वो क्योंकि देखिए वो आप दूसरे टॉपिक पे आ जाना चाहिए था ये टॉपिक तो उनका हो गया था खत्म उन्होंने स्वीकार लिया था कि भाई मैं मुसलमान हूं बस नहीं वो वो खत्म नहीं कर रही थी वो क्या कर रही थी सेंसिटिव चीजें ला रही थी जिससे कि मैं वहां पे बोलने लगूं और परंपरा वाली बात भूल जाए लोग समझ जैसे भागवतानंद ने किया था जैसे भागवतानंद ने किया था ठीक है दूसरे सेंसिटिव टॉपिक उखाड़ दो हां जी राम कुमार जी
01:16:28:26 मैं कुछ कह रहा था बहुत जरूरी बात कह रहा था मैं भूल गया हल्का सा पीछे रिवाइंड रिवाइंड कर दीजिए हल्का सा दो तीन मिनट का जय श्री राम राम महाजन जी जय श्री राम जय श्री राम शिवश भैया जय श्री राम कोई नहीं है टक्कर में काहे पड़े हो चक्कर में [हंसी] अरे यार लोगों को परंपरा अपनी प्राप्त नहीं है डिबेट करने चले आ रहे हैं उस चैनल पे क्या यार क्या कैसे उस समय उस समय उनका फेस देखने लायक था जब आ कर रही थी अरे क्या बताऊं मैं आपको क्या बताऊं मैं सब देख रहा था मैं एक्चुअल बाइक [गला साफ़ करने की आवाज़] में उसके बाद मैं फिर उसमें था फिर जब ये खत्म हुआ तो फिर मैंने कहा कि शिवश भैया से बात किया जाए अभी जस्ट बाइक से उतरा था थोड़ी देर पहले तो मैंने कहा ये जो ये जो ये जो बहन जी है ये जो बहन जी है जी ये रामपाल का विरोध करती है। ठीक है? ये हर उस व्यक्ति का विरोध करती है। हां। अब आप बताइए जब ये कहीं से भी वेद ले लेने को प्रमाणिक कहती चली जाएंगी तो फिर किसी के भी अर्थ को मानना पड़ जाएगा ना हमारे को। नहीं नहीं
01:17:44:09 किसी तब तो मैक्स मूलर ने भी अपना एक मैक्स मूलर ने भी छाप रखा है तो बात और रही और अगर रही बात ये कि भैया किसके किसके व्याकरण से सिद्ध होंगे तो व्याकरण का आना भी तो सिद्ध करोगे किसके व्याकरण के नियम मान्य होंगे किसके नहीं होंगे बिल्कुल ठीक बात कह रहे बिल्कुल ठीक बात कह रहे हैं ये तो मतलब बहुत दिक्कत है लोग कहा गया विद्या पशु ही समाना विद्या से मनुष्य पशु के समान नहीं है और पशु के समान है और जिसके पास आचार्य बल नहीं है फिर वो विद्या को कैसे सार्थक सिद्ध कर सकता है अच्छा हां इनको इनको और बता दूं अच्छा याद दिला दिया आपने छंदो उपनिषद में लिखा हुआ है चार नौ तीन जाके देख लो क्या लिखा है विद्या वही जो आचार्य से प्राप्त विद्या ही आपको मोक्ष दिलाएगी आचार्य से प्राप्त आर्काइव से प्राप्त नहीं इंटरनेट से प्राप्त नहीं। ठीक है। नहीं नहीं तो आवश्यक है। नहीं नहीं किताब तो नहीं किताब तो हमारे पास पूरी की पूरी बचपन में जब हम कुछ पढ़ लिख लेते हैं तो हमारे पास सारी बुक्स तो पड़ी हुई रहती है। तो फिर क्या जरूरत पड़ती है हमें किसी टीचर
01:18:59:10 से जाकर के पढ़ने की? भाई एक क्लासीय शिक्षा लेने के लिए एक जो नैतिक शिक्षा है जो सामाजिक प्रचलन में जो शिक्षा चल रही है मैकाले शिक्षा पद्धति उसके लिए तो गुरु चूज कर लेते हैं लोग और जिससे जीवन मुक्त होना है जीवन की महत्ता समझ में आएगी जीवन के बाद का क्या है हिसाब किताब और जीवन व्यतीत कैसे करना है उसके लिए गुरु की आवश्यकता नहीं है ये कैसे संभव है भाई एक नहीं फिर आप अपने होने का खेल छोड़ दो ना फिर क्यों ढिरा तो कहीं आप अगर आपने आज तक भी अगर किसी को गुरु नहीं बनाया है तथापि आप अपने आप को वैदिक अगर कहते हो तो कहीं ना कहीं से आचार्य का आलंबन आपको लेना ही पड़ेगा और आज के डेट में भी जो जितने जितने भी लोग हैं संप्रदाय हैं वो सारे किसी न किसी संप्रदाय से तो जुड़े हैं। कोई रामानंद संप्रदाय से जुड़ा है। कोई रामानंद संप्रदाय से जुड़ा है। कोई आदि गुरु भगवान शंकर के संप्रदाय से जुड़ा पड़ा है। कोई रामानंदी है। कोई माधवाचार्य संप्रदाय से जुड़ा हुआ है। गय संप्रदाय से है। वो लोग उस संप्रदाय को छोड़ के बात तो नहीं करता।
01:20:14:26 शास्त्रवाद जी को ऐड कर दीजिए। ऊपर ऑपरेटर जी आप थोड़ा सा वो जो मैं अभी कह रहा था ना दो मिनट का उससे पीछे का रिवाइंड करके दिखा दीजिए। जब मैंने इनको ऊपर लिया है राम मनोहर जी को जी जी [गला साफ़ करने की आवाज़] हां हां शास्त्रवाद जी बताइए जय श्री राम आपका प्रश्न जय श्री राम कौन सा प्रश्न है आपका कौन सा प्रश्न है
01:20:50:26 बताइए कौन सा प्रश्न है हमारे गणेश भगवान की प्रतिमा कहां गई उनका दर्शन हो तो चैनल पर आना अधूरा सा लगता है। वो ऊपर रखी है। थोड़ा सा ऊपर रखी है वो भी [हंसी] वो केवल दर्शनार्थ है। मन में भैया शिवश भैया एक छोटी सी बात आपको बताता हूं जो मेरे साथ घटित हुई है जो मैं बता देता हूं आपको। होता क्या था कि जब मैं पढ़ाई लिखाई जब कर रहा था तो एग्जाम के समय में अपने मन में ही स्वास्तिक वचन मैं गाता हुआ निकलता था। जैसे रूम से निकला ना तो स्वास्तिक वचन शुरू करते हुए मैं चला जाता था सेंटर तक। अचानक क्या हुआ कि जैसे मैंने पढ़ना शुरू किया। मुझे वो याद आ गया। मुझे वो याद मुझे वो याद आ गया। आप अपनी बात को याद रखिए। मुझे वो याद आ गया। इस क्वेश्चन को भी अभी ऑपरेटर जी इस क्वेश्चन को आप अपनी बात को याद रखिएगा। मुझे वो याद आ गया। हां। अब बात ये आती है कि आप अगर यह कहना चाहते हो कि परंपरा प्राप्त सारे आचार्य बिगड़ चुके हैं। सब विकृति आ चुकी है। अगर एक ये अंतिम बात आती है तो तो फिर उनकी अगर वो बिगड़ गए तो उनकी बात मान ले क्या? मत मानो।
01:22:07:03 आप यह क्लेम मत करो कि उनसे प्राप्त होने वाले वेदों को हम मानते हैं। सिंपल स्वतंत्र अपना शास्त्र लाओ और स्वतंत्र रूप से सनातनी बनो। दिखाओ सनातनी बन के। वो जो वेद है जो आपको परंपरा से प्राप्त हो रहे हैं उस पर क्लेम मत करो। जब आपने स्वतंत्र शास्त्र छोड़े तो उसी को कहते हैं इस्लाम। उसी को कहते हैं बाइबल। कुरान। समझ रहे हैं? कुरान और बाइबल वाले कम से कम इस मामले में तो अच्छे होते हैं कि जिस पर विश्वास नहीं है उससे मिलने वाली किताब पर भी विश्वास नहीं है। यहां तो एक दोगलापन है। किताब पर विश्वास है उसके अर्थ पर विश्वास नहीं है जो दे रहा है। ठीक है? ये मुझे कहना बाकी रह गया। तो ये समस्या का हल है जो ये कहते हैं। अरे अगर गुरु गलत हो गया हो तो क्या करें? तो छोड़ दो वैदिकता। निकलो बाहर। घोषित करो गैर सनातनी स्वयं को ढोरा पीटना बंद करो। भगवान ने कहा जब खत्म होने वाला होगा तब हम आएंगे। कैसे तुम क्लेम कर रहे हो? खत्म हो गया धर्म। पूर्ण रूप से आचारत्व समाप्त होने का अर्थ है धर्म नष्ट हो गया। साधु भक्तों के उद्धार के लिए भगवान आते हैं।
01:23:15:10 ढिंढोरा पीटना बंद करो। फिर मैं सनातनी मैं सनातनी मैं सनातन की रक्षा कर रहा हूं। घोषित करो गैर सनातनी। फिर हम आएंगे। छोड़ेंगे फिर भी नहीं। फिर आएंगे। जब गैर सनातनी हो जाओगे फिर बता पूछेंगे ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं? शाश्वत धर्म है कि नहीं? नास्तिक तो नहीं हो? फिर पूछेंगे फिर घुमा फिरा के कान पकड़ के फिर यही ले आएंगे। अब इस बार जब आओगे मान इनको शंकराचार्य को इसको कहते हैं आवाान। समझे? वो उस समय पर लिंक मिल नहीं रहा था ना तो मैं वेट कर रहा था कि लिंक जैसे आए तो मैं जुड़ जाऊं आपसे। एक भाई साहब कह रहे हैं यानी कि सब्सक्रिप्शन जरूरी है। जैसे जैसे अगर आप किसी से प्राप्त होने वाली किताब पर विश्वास कर रहे हैं तो उसके प्रति अविश्वास करेंगे तो आपका किताब पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होगा। आप किताब पर विश्वास प्रकट मत करिए। ठीक है? आप जो है जैसे Netflix को सब्सक्रिप्शन लाने ना लेने की स्थिति में छोड़ देते। छोड़ दीजिए। आप अगर उससे तुलना कर रहे हैं तो जब आप ऐसा करेंगे तो आपकी मानवता धर्म आपकी आस्तिकता ही सिद्ध नहीं हो पाएगी। घूम फिर के आपको फिर आना पड़ेगा। इस बार आपको सांप्रदायिक होना पड़ेगा। सांप्रदायिक होना कोई बुरी बात नहीं है। इसको लोगों ने खराब किया है सांप्रदायिक नाम।
01:24:30:28 बहुत पवित्र शब्द है सांप्रदायिक। ठीक है? बहुत जो अब वो जो क्या कहते हैं? एक एक मिनट। अब वह जो भाई साहब थे जो अब कमेंट कर रहे थे अह क्या कहते हैं यह? हां, मेरा एक क्वेश्चन है। यह मेरा एक क्वेश्चन है। यह जिज्ञासा के लिए है। कम टू लाइव मत बोलिएगा। जब आप गुरु परंपरा के मिले शास्त्र को बोलते हैं तो आपका तात्पर्य क्या? प्रामाणिक भाष्य दीक्षा सिर्फ लेना या सारे शब्द पूछना। आपका प्रश्न क्लियर करिए। प्रश्न ही क्लियर नहीं है। मैं बता देता हूं क्या है। मैं यह कहता हूं कि यदि आप हम पर भेदों का अर्थ बताते हुए कुछ मानने का दबाव डाल रहे हैं। अगर आप देखिए तर्क से अगर बात करेंगे तो हम तर्क से आपसे बात करते रहेंगे। ठीक है? हम तर्क से कर करके आपको शंकराचार्य की शरण में लाएंगे। उसके बाद उनकी बात आपको माननी पड़ेगी। तर्क से लाएंगे। यदि आप शुरू में हमारे ऊपर वेदों का कोई वो डालोगे कि भाई यहां पे ऐसा कहा है, वहां पर वो कहा है। आप इस बात को मान लीजिए। तो आप हमारे पर दबाव डाल रहे हो ना जैसे आपने कहा Netflix का सब्सक्रिप्शन की तरह तो ऐसे आप वेदों को भी तोल लीजिए आप अपने आप का सब्सक्रिप्शन ले रहे हो ना वेदों में वेदों का सब्सक्रिप्शन तो ले रहे हो कि मैं वेद को प्रमाण मानता हूं
01:25:46:19 मगर वेद [गला साफ़ करने की आवाज़] दिए हैं उसका सब्सक्रिप्शन नहीं लोगे इसको कहते हैं अर्ध कुकुट न्याय तो कहने का अर्थ यह है कहने का अर्थ यह है कि जिसके वेद पर विश्वास है उसके अर्थ पर भी विश्वास होना चाहिए। जिसके अर्थ पर विश्वास नहीं उसके वेद पर भी विश्वास नहीं होना चाहिए। आप स्वतंत्र हो जाओ वेद से बाहर चले जाओ। हम जब आप हमारा Netflix छोड़ दोगे ना तब हम आपको ले आएंगे पकड़ के। Netflix को माने बिना काम चल नहीं पाएगा आपका। मगर तब मैं और अब में अंतर ये होगा कि तब आप प्रामाणिक हिंदू होंगे। वास्तव में हिंदू होंगे। अभी आप भटके हिंदू हो। हुंडा हिंदू हो। ठीक है? अच्छा हां अब आप बोलिए राम मनोहर जी तो मैं जो कंक्लूजन दे रहा था वो यह है क्या कंक्लूजन है कि अगर आप ये मानते हो कि परंपराओं में विकृति आ गई है सब खत्म हो गया है कोई आचार्य बचा नहीं है तो उनके वेदों पर विश्वास मत करो स्वतंत्र रूप से वेद ले आओ और उसको करो भैया उनके वेदों पर विश्वास मत करो जो वेद उनसे आए हैं उनको अपना बता करके उसके नाम पर लोगों पर दबाव मत डालो देखो मैं यहां यह बता रहा हूं धर्म ने यह कहा है वेद ने यह कहा है अपने शास्त्र
01:27:01:27 लाइए स्वतंत्र रूप से फिर हम उन शास्त्रों को चेक करेंगे। हो सकती है आपकी दीक्षा। क्यों नहीं हो सकती? भाई हैं आप हमारे। बिल्कुल दीक्षा बिल्कुल दीक्षा हो सकती है और साधारण जो सनातनी लोग हैं उनके समझने के लिए एक बहुत छोटी सी बात है जो आज भी सनातन की परंपरा को फॉलो करते हैं उन्हें ये समझना चाहिए कि हमारे यहां दशा अवतार की जो शिक्षा दी गई है जिसमें एक अवतार गुरुदेव भी कहा करते हैं कि जो दशावतार में जो यश सिंह जी कह रहे हैं कि ये आ नहीं पा रहे हैं ऊपर सर क्या कह रहे हैं? क्यों क्या दिक्कत आ गई इनको? नहीं तो होगा ही। यश सिंह जी इससे आपके धर्म और ब्रह्म पर क्या असर पड़ रहा है वो बताइए। इस सवाल से आपका जीवन कैसे प्रभावित हो रहा है वो बताइए। ये जो सवाल आप हमसे पूछ रहे हैं। यह रिलेटिव भी तो होना होगा ना। आप अचानक से अगर हमसे कहेंगे कि Axis बैंक में किसके अकाउंट में क्या कितना पैसा जमा है तो हम पूछेंगे ना उसका जवाब ना दे पाने की स्थिति में। में भैया यह सवाल हमारी चीजों से रिलेट कैसे कर रहा है? ठीक है? धर्म और ब्रह्म की व्याख्या उनकी वही
01:28:16:28 है जो धर्म और ब्रह्म की व्याख्या शंगेरी के शंकराचार्य देते हैं। जो धर्म की व्याख्या जो धर्म और ब्रह्म की व्याख्या पूरी के शंकराचार्य देते हैं। हां अब आप बोले शास्त्रवाद जी जी भैया जय श्री राम जय श्री राम मैंने अभी [गला साफ़ करने की आवाज़] देखा था आपका पूरा चर्चा एक भी प्रश्न का वो उत्तर नहीं दे पाई खाली घुमाते रहे आपने पूछा रामानुजा रामानुजाचार्य पर भी विश्वास नहीं था उनको पहले रामानुजाचार्य पे गई बाद में फिर शंकराचार्य पे भी आगे लास्ट में लेकिन आदि गुरु शंकराचार्य थे आप देखते थे एक को भी नहीं मानी
01:29:16:00 अगर वो थोड़ा सा थोड़ा पर्सनल ना होती ना ये सेंसिटिव चीजों को बीच में लाने का प्रयास ना करती तो मैं उनको मना पाता कि यदि आप आदि शंकराचार्य जी पर भी बिलीव करते हैं तो देखिए आदि शंकराचार्य जी 13व अध्याय के दूसरे उसमें कर रहे हैं कि असंप्रदाय विहीन आपको धर्म नहीं सिखा सकता छंदोग उपनिषद कह रहे हैं कि आपको परंपरा प्राप्त आचार्य से ही विद्या सीखनी होगी। विपिन चौहान जी शास्त्रवाद जी जी विपिन जी जय श्री राम
01:29:49:18 जी जय श्री राम भैया हां कैसे हैं आप? हां जी ठीक है हां जी हां जी हां जी बढ़िया हो गई संतुष्टि हो गई संतुष्टि हो गई कि नहीं हो गई हां जी हां जी हां जी हो गई वो तो पहले प्रश्न में ही ढेर हो गई वो तो बहुत तो मैं कह के आया था ना मैं कह के आया था पांच 10 मिनट उनका वहां पर हो गया खत्म बस अभी अब वो कि मैं इस पर बात ही नहीं करना चाह रही थी उनका तो वही है ज्ञान ही इंटरनेट से उन्होंने बना रखा है ये ये उनकी ये उनकी जनता पूछा करेगी अब पूछा करेगी जो जनता उनकी फॉलोअ होगी भी ना यह चर्चा अगर उन्होंने हटाई नहीं अपनी आईडी से तो जनता उनसे पूछेगी कि इंटरनेट आपका प्रमाण है इसका क्या जवाब होगा पूछेंगी और मैं उनका स्वागत करता हूं उनके उनके विरोध में जो भी जो भी अमर्यादित चीजें कर रहा है कोई पहली बात वो कोई शंकराचार्य से पूछ के नहीं कर रहा है जिस तरह से सनातन धर्म से पूछ के नहीं कर रहा है और यदि आप किसी के कहने से उसकी पूरी कम्युनिटी को आप कुछ कहेंग तो आप फिर सनातन धर्म को भी कहने वाली बनेगी क्या ये प्रश्न होगा। दूसरी बात यह है मैं उनका विरोध करता हूं। आप मुझे बताइए। मैंने कुछ लोगों के नाम नोट किए। मैं मुक्तेश्वर जी महाराज जी के पास इस चीज को पहुंचाऊंगा। जरूर पहुंचाऊंगा। इसमें मैं आपके साथ हूं। मगर आप जब संप्रदाय का
01:31:04:19 विरोध करेंगी के मठ में ये हो रहा है। वहां पर ये हो रहा है। तो हम पूछेंगे भैया संप्रदाय के बिना तुम हिंदू कैसे? वह तो यह तक अपने उनमें कहती थी कि यह जो शंकराचार्य हैं तुम तुम लोग इतना वो नहीं करते हो हिंदुओं को जागृत जितना मैं करती हूं मैं मुसलमानों से और अंबेडकर वालों से इनसे मैं दिन रात भैती घमंड सुरक्षित बैठी ये घमंड है इनका सुरक्षित बैठी हुई है विदेश में ठीक है और यहां के बारे में बोल रही है सुरक्षित बैठी हुई है विदेश में हां Instagram पे यहां के बारे में बोल रही है जैसे वो ध्रुव राठी बोलता है। ठीक है? यहां पे सीने पर गोली खाने वाले लोग हैं। सीने पे मां के लिए किससे बात कर रही हो? और यह तो ये तो एक निमित्त मात्र व्यक्ति है शंकराचार्य का। ना जाने कैसे ऐसे कितनों ने अपना बलिदान दे दिया। सुरक्षित कमरे में बैठ के लाखों रुपए वहां पा रही हो। डॉक्टरी की कमाई कर रही हो। सुरक्षित कमरे में बैठकर के भाषण बाजी कर लेती हो। उससे कहती हो मैंने बहुत कुछ कर लिया। फिर खुद ही बता रही हूं मैं। छोड़िए हटाओ क्या बता रही है यह आपका झूठा घमंड है लड़ रहे हैं राम मंदिर के मुकदमे गवाही क्यों
01:32:19:25 दे रहे हैं मुक्तेश्वर जी अरे भैया अगर वो मुसलमान के पक्षधर है क्यों गवाही दे रहे हैं राम मंदिर के मुकदमे में स्कंद पुराण की ये नहीं है कुछ भी कांग्रेसी है तो क्यों कह रहे हैं राहुल गांधी को कि तुम हिंदू धर्म से आओ और तुम्हें कोई प्रश्न आ रहा है तुम्हें बनाना है वीडियो कंटेंट बनाना है बनाओ ना भाई भाई मर्यादा में रह के और फिर तुम किसी एक व्यक्ति के द्वारा की गई गलती के चक्कर में पूरे संप्रदाय को घसीट रहे हो तो फिर आएगा ना कोई ना कोई आएगा ना कोई आ गया जी विपिन जी अभी वो अपने चैनल पे वो कर रही थी मतलब उन्हें इतना भी भेद ये नहीं पता कि कि शिवश जी वहां क्यों आए उसे यह नहीं पता कि जब तुम पूरे शंकराचार्य सारे सभी शंकराचार्य को तुम लपेट ोगे तो जब सबको लपेटा है तो सबके शिष्य तो कहेंगे अब उसे लग रहा है कि जो यह शंकराचार्य शिष्य चैनल है उसने मुझे कहा है उसके पक्ष में यह सभी लोग आ रहे हैं मतलब उसे यह भी नहीं पता कि क्या देखिए ऐसा है भगवत गीता में लिखा हुआ है मैं बताता हूं भगवत गीता हम लोग शास्त्र से बात करते हैं भगवत गीता में लिखा है कि आप जिस चीज का चिंतन करेंगे उसके प्रति
01:33:34:26 उत्पन्न होती है आसक्ति पहला स्टेप क्या होती है आसक्ति तो चिंतन किसका चल रहा है इनके मन में? Instagram, फॉलोवर्स, साख, साख, प्रेस्टीज। तो अब इन सब चीजों के प्रति जागृत हुई आसक्ति। अब इनको वो प्रेस्टीज बन कैसे रही है कि भाई कुछ ना कुछ ये बोल रही है, विरोध कर रही है जो भी कर रही हैं। फिर किसी ने आकर के इनके विरोध से परेशान होकर के वहां पर जो है कुछ इनको कह दिया। इनकी प्रेस्टीज पर बात आ गई। अब क्या हुआ? जब वो आसक्ति जिस चीज के लिए है, जब वह पूर्ति नहीं हो रही होती है, तो उत्पन्न होता है क्रोध। तो क्या आया? अगला स्टेप आसक्ति के बाद क्रोध। क्रोध। अब क्रोध आया। अब क्रोध का सिद्धांत है कि वो जहां से उत्पन्न होता है सबसे पहले उसी जगह को जलाता है। अग्नि की तरह। क्रोध एक अग्नि है। माचिस की तीली जब जलेगी तभी अग्नि प्रकट होगी। ठीक है? तो क्रोध जब आता है तो वह प्रज्ञा शक्ति को जला के आता है। तो भगवत गीता में लिखा है आपकी स्मरण शक्ति प्रभावित होती है क्रोध आने से। लिखा है भगवत गीता में तो स्मरण शक्ति प्रज्ञा शक्ति निर्णय शक्ति आपकी प्रभावित हो जाती है। उस समय फिर आप ये जज करना लॉजिक लॉजिकल वे से देखना और तर्क बुद्धि से
01:34:50:02 चीजों को समझने का प्रयास करना सकारात्मकता सब खत्म होने लगती है। अब उनके अंदर क्रोध हावी हो रहा है। क्रोध हावी हो रहा है। वो समझ ही नहीं पा रही। शिवांश नारायण द्विवेदी ने वीडियो क्यों बनाया? भाई तुम सबको क्यों घसीट रहे हो? तुम विदेश गमन यात्रा का पता कर लो। शंकराचार्य ने क्या कहा है? अगर उन्होंने कहा हो कि निषेध है तो मत बोलो उस पर। फिर तुम शंगेरी शंकराचार्य को भी घसीट रही हो। फिर किसी एक व्यक्ति के कहने पर तुम्हें कुछ उल्टा सीधा कह देने पर तुम मुक्तिशान जी को भयंकराचार्य उल्टा सीधा बोल रही हो। ये भी मत बोलो। उनकी समीक्षा करने का अधिकार शंकराचार्यों को है। वो करेंगे। ये भी आदि शंकराचार्य ने लिखा है। ठीक है? और वो रहे हैं कौन तुम रही हो? सन्यासी हैं। तुम हो सब श्रेष्ठतम जो वो है क्या कहते हैं? आश्रम सन्यास है। धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बनाए। सन्यासी वो जिसका ब्रह्मचर्य सिद्ध है। ठीक है? मनुस्मति 12वा अध्याय 112 से 114 पढ़ लो जाकर के। अब बात आ जाती है कि भाई वह सन्यासी नहीं है कि क्रोध करते हैं। वहां यह नहीं लिखा है कि जो सन्यासी क्रोध करेगा उसका सन्यासत्व खत्म। यह स्वाता परम अपने कल्याण के लिए है। इसको भी समझ लो। जो सन्यासी क्रोध
01:36:05:13 करे उसका सन्यासत्व नष्ट नहीं मान लिया गया। वो क्रोध करके ही वो चिल्ला रहा है या वैसे ही चिल्ला रहा है। यह कैसे पता आपको? उसके मन में क्रोध है कि नहीं है? मैं तेज आवाज में बोल रहा हूं। एंपायर आउट दैट बोलता है। बॉलर बोलता है अंपायर आउट दैट चिल्ला के बोलता है। क्रोधित होता है क्या अंपायर पे वो नहीं होता। इसका मतलब किसी के चिल्लाने से हम जज नहीं कर सकते वो क्रोधित हो रहे हैं कि नहीं। यानी कि क्रोधित होना मेरा अंदर अपना निर्णय है। इसका मतलब यह बात किसके लिए कि भाई सन्यासी हो तो क्रोधित मत होना। मन से किसी के प्रति द्वेष भावना मत लाना मन से। मगर आपको व्यवहार तो करना पड़ेगा ना। पाकिस्तानी अटैक करेंगे, मुस्लिम अटैक करेंगे। तुम्हारे ऊपर अटैक करेंगे वहां अब मुक्तेश्वर जी खड़े होंगे तो डंडा ना मारे उनको
01:36:54:16 ना मारे उनको और मारेंगे तो उनका सन्यासी होना खत्म हो जाएगा दूर रहो भाई आप दूर रहिए नहीं मालूम है दूर रहिए अपने वो नन्हे मुन्ने जो चिल्लांटू हैं वो क्या नाम है बौद्धों को पकड़िए इस्लाम को पकड़िए उनको करिए ना हम साथ हैं आपके दूर रहिए खामखा वो व्यर्थ का जो एक भार है वो क्यों अपने उसमें उठा रहे हैं? शंकराचार्यों से लड़ने चले आए। अरे भैया जिसके ऊपर जिसके ऊपर आई हो उसका उसके बारे में नहीं पता वो तक तो कुछ कर नहीं पा रहे हैं।
01:37:37:22 जी विपिन जी बोल। जी अभी उनहीं के ही उसमें मतलब उनके कुछ तर्क चल रहे थे तो मैंने चीज भी देखी है कि ऐसे जो भी तत्व होते हैं ना इनको आर्य समाजी सोचते हैं अब हम इन्हें अपने लपेटे में शरण शरण देते हैं आर्य समाजी मूर्ति पूजा को आर्य समाजी मूर्ति पूजा को अधर्म मानते हैं। ये कल रील बना दें इनके फॉलोअ देखना क्या होगा फिर आर्य समाजी आर्य आर्य समाजी रामलीला को देखने को जो है 100 अस्मद यज्ञ के बराबर पाप मानते हैं जितना उससे पुण्य मिलता है उतना पाप देखना हर हर महादेव करती हैं हां आर्य समाजी कहे शिव जी को तक बोल दिया उन्होंने बताइए
01:38:28:28 इसको कहते हैं फिर मैं वही फिर अब ये मक्कारी बोल रही है डंके की चोट पर बोल रही हैं कि भैया मैं जो है मक्कारी का शब्द का उपयोग करूंगी तो मैं आपका क्या गुलाम हूं क्या? शंकराचार्य का शिष्य हूं मैं। राम का भक्त हूं। तुम्हारा गुलाम हूं क्या मैं? यहां पे मैं मक्कारी शब्द का उपयोग सुनूंगा तुमसे मेरे लिए। जय श्री राम। चीथड़े उड़ जाएंगे सिद्धांतों के। जय श्री राम। चीथड़े उड़ जाएंगे जैसे अभी उड़े हैं। इस क्रम में आगे बढ़ोगे ना जिस दिन इसलिए कह रहे हैं दूर रहो। बार-बार कह रहा हूं। बार-बार कह रहा हूं। मक्कारी शब्द का उपयोग करूंगी। वाह मैं तो ऐसी भाषा बोलूंगी। वाह कौन हो? डॉन हो तुम।
01:39:16:04 अभद्रता कर रही थी वो। हां। बोल हो रही थी भैया। लेकिन आपको आपको कह रही थी कि आप अभद्रता ना करें। आप उसको वो नहीं करें। जो फिकर हो वो रही थी। ये अभद्रता है। ये अभद्रता परंपरा पूछना तुम्हारा प्रमाण क्या है? ये पूछना अभद्रता है। ये कहो कि हमारे फंसने वाली बातें मत करो तुम। मीठा रोने लगी थी। बस वो तो वो तो वो तो आर्य समाज के आर्य समाज कभी परंपरा बताने लग गई थी। हां वो आर्य समाज के अर्थ अच्छा इनको यही नहीं पता कि भैया आर्य समाज वाले ना तो अवतार को मानते हैं ना तो वो मूर्ति पूजा को मानते हैं और तुम आर्य समाज के किसी आचार्य को प्रमाणिक बोल रही हो अच्छा खुद बोल रहे हो कि मैं रामानुजा संप्रदाय कहीं से उन्होंने बताया कि मैं उस संप्रदाय से हूं भाई और पीडीएफ से YouTube से वो सायनाचार्य का जो आर्काइव से इन्होंने वो वहां से पीडीएफ डाउनलोड कर लिया मतलब मिक्स मिक्स बातें कर रही थी भाई कहीं से तो आपको बताना पड़ेगा कि भाई आप कौन सी पर्टिकुलर चीज को मान रहे हो? तीन संप्रदाय बताया उन्होंने [हंसी]
01:40:29:13 यश जी जो प्रश्न कर रहे हैं यश सिंह जी हमारा नंबर सार्वजनिक है 7408301869 नोट कर लो और जितने भी आपको वैचारिक मतभेद है आप लेके फॉर्म भर दो आ जाओ बदतमीजी से बात नहीं करोगे तब तक बात होगी विषयांतर नहीं करोगे बात होगी ठीक है विषयंतर मत करो बदतमीजी मत करो पर्सनल अटैक्स मत मत करो। ओके भैया हटा दो ये ऑपरेटर महोदय इसको हटा दो स्क्रीन से। फॉर्म भर देना फॉर्म वो मुन्ना भाई मुन्ना भाई एमबीबीएस का डायलॉग याद आया। फॉर्म भरा क्या? [हंसी]
01:41:07:15 फॉर्म भरा क्या? [हंसी] मेरा भी फॉर्म भर देना। मेरा मेरा भी फॉर्म। [हंसी] हां राम। ये बढ़िया। तीन तीन तीन तीन संप्रदाय बता दिए। जी तीन तीन बता दीजिए जी तीनतीन संप्रदाय उन्होंने बताया [हंसी] उसमें आद शंकराचार्य संप्रदाय भी लास्ट में बता दिया उन्होंने हम कह रहे हैं भाई कोई एक ही पकड़ के चलो ना भाई
01:41:41:27 मतलब खुद कन्फ्यूज हो भाषनाचार्य की और कभी पता लग रहा है कि कभी रामानंदी संप्रदाय बता बता रही है कभी रामानुज संप्रदाय कभी आर्य समाज अंत में तो ऊट मतलब कद बांध के किसी तरीके से जो है आदि गुरु शंकराचार्य का सिद्धांत भी बताने लग गए कि हम भाई तुम जहां बैठे हो उसी के प्रतिपादक लोग बैठे उनके तुच्छ धूल के बराबर के लोग भी नहीं बैठे यहां पे और उनके सामने भी तुम ऐसी बातें कर रहे हो ये तो मेरे मैं तो कुछ समझ ही नहीं पाया उस समय मैं खुद कंफ्यूज हो गया उस [हंसी] बात से
01:42:26:02 वेद के अतिरिक्त स्वता प्रमाण कुछ नहीं है और फिर भी आज भी गुरु के शरण में आने के बाद ही हम वेद को प्रमाणित मानते हैं। जब तक गुरु ना कह दे कि ये चीज सही है तो सही है गलत है तो गलत है। हम स्वत प्रमाण मान लिया। अरे अरे जो जो बात उनके मन के अकॉर्डिंग सही होगी चाहे वो कोई भी परंपरा के आचार्य बोले वो उस तरफ में चल जाएगी। हां हटा दी हटा दी। ये पढ़िए ये कमेंट कितना बढ़िया है ये देखिए कभी मैं आदि गुरु शंकराचार्य जी को मानता हूं कभी रामानुजाचार्य को मानता हूं कभी आर्य समाज को मानता हूं। [हंसी] हम जी ऐसे ही लोग जी ऐसे ही लोग ये आपने बहुत अच्छा किया और मैं काफी समय से ये सोच रहा था कि ऐसे बहुत सारे यूबर हैं जो कि मनमुखी ज्ञान दे रहे हैं। मतलब शंकराचार्य आदि गुरु शंकराचार्य जी ने जो कहा वो उनकी परंपरा के जो आज के चार शंकराचार्य हैं वो नहीं बताएंगे। है ना? वो कौन बताएंगे? ये यूट्यूबर बताएंगे। ये बोलेंगे मुझे ज्ञान डायरेक्ट उनसे मिल गया। अच्छा इन्होंने इन्होंने एक रील और बनाई थी जब मैंने एक रील बना दी कि बहन जो आपसे व्यक्तिगत कटाक्ष किए गए हैं मैं क्षमा प्रार्थी हूं और यदि इस सब के बाद भी आप जो है वो
01:43:41:18 यदि इस सब के बाद भी आप चैलेंज वाली भावना आपके अंदर है तो आपका स्वागत है मगर मेरा व्यक्तिगत सजेशन है कि आप ऐसी किसी भी चर्चा से दूर रहिए कि 510 मिनट से ज्यादा टिक नहीं पाएंगी शंकराचार्य का विरोध करते हुए अपने आपको मनुष्य भी सिद्ध नहीं कर पाएंगे और ये अगर अगर ये पर्सनल अटैक ना करें। इनकी मनुष्यता पे इनकी मनुष्यता पर सवाल आ जाता है। अभी तो लाइफ पूरी हो गई। एक बोल नहीं पाती मनुष्य कैसे ठीक है। हम बिल्कुल बिल्कुल हां बिल्कुल तो इन्होंने ये जब मैंने रील बनाई है ना उसके बाद जो है इन्होंने एक रील बनाई उसमें बताया शंगेरी मटके शंकराचार्य वहां से डोनेशन ले रहे हैं। डोनेशन ले रहे हैं। तो अभी पहलगांव जब अटैक हुआ था ना पता कर लेना। जितने लोग प्रभावित हुए थे सबके घर में दो लाख दिए थे। सबके घर में श्रृंगेरी वालों ने और ना जाने कितने कितने प्रकल्प चल रहे हैं पता है तुमको राम सेतु के लिए कौन-कौन लड़ा था जाके पता करो
01:44:37:25 राम मंदिर है अच्छा लास्ट में उसमें इन्होंने उसमें उन्होंने लास्ट में ये बात और कही थोड़ी फिल्मी स्टाइल में तथकिम तथ्य किम तथ्यम तथ्य किम इस तरह से कि देखो मैंने इतनी तगड़ी बात बता दी आज। अब इसका तो कोई जवाब है ही नहीं। अरे भैया जिसकी बात बता रही हो लॉजिकल प्रश्न ये है उसके शास्त्र आए कहां से आपके पास? प्रमाण यह है कि वो खुद कह रहा है भगवत गीता में संप्रदाय विहीन व्यक्ति को त्याग दो लात मार दो लात। चलो ततक्यम ले। संप्रदाय विहीन व्यक्ति नहीं चाहिए। कितना भी ततकिम कर रहा हो वो। ठीक है? तो आप यह ड्रामा ड्रामेटाइजेशन करके मत आइए। आप सकारात्मक बुद्धि ले आइए। एक एक प्रश्न का जवाब है। एक एक प्रश्न का जवाब खाली नहीं बैठे हैं। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल मैं बोलूं अगर टू द पॉइंट अगर वो बात करती तो उन्हें अच्छे से समझ में आ जाता। लेकिन वो बात करने के उसमें थी ही नहीं कि भैया मुझे समझना है इस चीज को। वो यह मान के बैठी हुई हैं कि विदेश में बैठी हुई हूं और जो ज्ञान मैंने लिया है मुझे शंकराचार्यों से भी ज्यादा ज्ञान है। मतलब अगर आप हमारे आचार्यों की किसी भी बात के ऊपर अपनी बात रख रही हैं यानी कि आप यह दावा कर रही हैं कि
01:45:53:03 आपका जो ज्ञान है वो हमारे आचार्यों से भी बड़ा ज्ञान है। जिन्होंने पूरा सन्यास ले रखा है। उनकी पूरा एज हो जाती है व्यक्ति की। सन्यास सन्यास सन्यास वो बड़ा है कि नहीं वो वो एक बात अलग है मगर मेरा जो मेरा जो ज्ञान है मैं जो प्रस्तुत कर रही हूं वो किसी भी आचार्य परंपरा से स्वतंत्र होते हुए भी प्रामाणिक है क्योंकि मैंने माना है क्योंकि समझ रहे हैं भाई हम आर्काइव को प्रमाण कैसे मान ले आर्काइव हमारे लिए प्रमाण नहीं है आपके लिए प्रमाण है ये क्या कह रहे हैं अक्षय अक्षय करके कोई आए हैं मोक्ष कह रहे हैं ये क्या कह रहे भाई भाई किसी को अब वैचारिक मतभेद के निमित्त जो चर्चा करनी हो तो वह वो कर दे। क्या कहते हैं WhatsApp करें 740830 पट्टी चला दीजिए। पट्टी ठीक है। ठीक है। [गला साफ़ करने की आवाज़] चल गई पट्टी चल गई। मुझे आ गया भाई पट्टी चलानी। ये पट्टी [हंसी] ये पट्टी जो है ना ये पट्टी साइक्लिक है और इसी इसी साइकिल में सबको आना है। एक दिन ये साइक्लिक है। आप देखिए डंके की चोट पर कितने ज्यादा स्पष्ट होते हुए हम लोग अपनी बात कहते हैं। कहते
01:47:08:12 हैं कि नहीं कहते? जैसे मेरे पास आया बात मेरे पास आई बात तुरंत बोला भाई मेरे पास यहां से आ रहा है। उसने सवाल उठाया ना तुम्हारे पास कहां से? मैंने बोला और आज तक ना जाने कितनी बार मैंने स्पष्ट बोला होगा। जब भी मेरा सिद्धांत पूछा जाएगा। जब भी किसी विषय में मेरी मान्यता क्या है? वो पूछी जाएगी। मेरा गुरु कौन है? परंपरा कौन है? मैं वहां पर अपनी चीजों को स्पष्ट रखूंगा। उसमें गोलमोल बातें नहीं करूंगा। ब्रह्मा कुमारी की तरह। अरे आप इनका नाम ले लिए आपने। [हंसी] अरे तो वही बवाल है इनका। जी बताएं। मतलब प्रणाम। हां जी। पहले आपसे पहले बात हो चुकी है। दोनों से थोड़ी-थोड़ी बात हुई है। पहले मैं समझना चाह रहा था फर्ज करें जो आज के जमाने में अगर हम बात करते हैं। अगर अगर हम शंकराचार्य मत से अगर हम अगर हम नहीं मानते हैं तो उसके अलावा हम और किसका हम ये दे सकते और किसका हम प्रमाण दे सकते हैं? देखिए मूल में मूल मूल में तो शंकराचार्य जी ही बैठे हैं सबके बाकी रामानुजाचार्य जी की परंपरा में आप जा सकते हैं मधवाचार्य परंपरा में जा सकते हैं प्रामाणिक परंपराएं जो हैं उनकी आप जा सकते हैं क्योंकि क्योंकि
01:48:23:22 वहां पर संप्रदाय में ब्रह्म को लेकर के तो मान्यता अलग-अलग है। मगर जो मोटे-मोटे हमारा धर्म धर्म के जो सिद्धांत है उसमें एकत्व है। तो हमारे को हमारे भाइयों की जरूरत सनातनियों की जरूरत कहां पर है? उनका उनका भ्रम अगर थोड़ा बहुत अलग है तो उसमें हमारा व्यवहार में कोई उसमें आपत्ति नहीं होनी है। तो इन सबका धर्म जो है प्रामाणिक परंपराओं का एक है। जैसे विदेश गमन को ले एक ही है और वैदिक जो भी आचार विचार हैं, शौचाचार हैं वर्णाश्रम धर्म इत्यादि लेकर के सब में एक है। तो आप उसमें से किसी तो इसको इस प्रकार से अगर कहे तो क्या सपोज लिंगायत को हम एक प्रमाणिक संप्रदाय मान सकते हैं? ये ये एक अलग विषय हो जाए वस्तुनिष्ठ नाम ले ले के प्रमाणिक मैंने मोटा मोटा बता दिया मुझे ये कौन-कौन से संप्रदाय कौन-कौन से संप्रदाय इस कौन कौन-कौन से संप्रदाय वैदिक माने गए हैं प्रामाणिक माने गए हैं हम बोलेंगे तो हम वो शंकराचार्य की दृष्टि में बोलेंगे उनकी सीमा में बोलेंगे तो हमें वो वस्तुनिष्ठता के साथ वो अलग से हम प्रस्तुत कर देंगे वो एक अलग प्रश्न मोटे मोटे कुछ उदाहरण मैंने आपको दे दिए जैसे कि सुद्धा परंपरा है इनकी वल्लभाचार्य जी की मान्य है गड वैष्णव भी मान्य है
01:49:38:24 प्रामाणिक और क्या कहते हैं मधवाचार्य मान्य है रामानुजाचार्य मान्य है और क्या कहते हैं रामानंदाचार्य मान्य है तो ये कुछ मोटी मोटी आपको शंकर परंपराएं आपके समक्ष है बाकी जो और कितने सारे नाम इसमें शामिल हो सकते हैं प्रामाणिकता में तो उस पर हम अलग से विध्चुअली लाएंगे कंटेंट लाने का प्रयास कर रहे इस पर अगर कभी बात हो तो तो मैं आई वांट टू मतलब इस पे मुझे एक्चुअली खास करके समझना है क्योंकि क्या प्रमाणिक क्या है और क्या-क्या नहीं है क्योंकि बहुत मार्केट में तो नकली भी आपके इस कान टाइप के भी चीजें देखिए मूल में मैंने आपको जब मूल में बता दिया शंकराचार्य की दृष्टि से कि शंकराचार्य की सीमा में रहकर आप चले शंकराचार्य ने बता दिया हां शंकराचार्य की सीमा में रहकर आप चले क्योंकि हमें वेद वहीं से वेद का आना हमारा वहीं से सिद्ध हो रहा है उन्होंने बता दिया कि आप रामानुजाचार्य परंपरा में भी जा सकते बिल्कुल जा सकते हैं रामानुजाचार्य भगवान की परंपरा में जाए रामानंदाचार्य वो स्वीकार करते हैं। ठीक है? तो जब हमारा मूल हमें मिल गया तो हमें फिर चाहे जो हो जाए जैसे हमें मालूम पड़ गया वेद की सीमा में रहना है। किसी भी शास्त्र को मानने और ना मानने के लिए वेद की सीमा में रहना है। तो जो जितने भी शास्त्र वेद की सीमा का उल्लंघन नहीं करेंगे वो सारे शास्त्र हम स्वीकार कर सकते हैं। उल्लंघन करेंगे स्वीकार नहीं करेंगे। वेद विरोधी नास्तिक हां
01:50:54:24 बहुत सही है। जी सनातन शंकर जी जी बिल्कुल बिल्कुल आपने बिल्कुल सही कहा। धर्म और ब्रह्म हमारा एक है। संप्रदायों के अलग-अलग धर्म धर्म धर्म एक है। ब्रह्म को ले मान्यता है। थोड़ी-थोड़ी थोड़ी-थोड़ी अलग है। उसमें भी उसमें भी गुरुदेव कहते हैं वो सत्य की क्रमिक अभिव्यक्ति है कि उस स्टेज में भी व्यक्ति पहुंचेगा तो वहां से भी मुक्ति जो है ये अपने संप्रदायिक भेद के अनुसार मैं बता रहा हूं। तो वो वहां पर चल जाए क्योंकि हमारा धर्म एक है। मूर्ति पूजा वर्णाश्रम मोटी मोटी ये चीजें हमारी एक हो गई। यज्ञ को ले हमारी जो मान्यता है वही रामानुजाचार्य जी की है वही रामानंदाचार्य जी की तो उसमें ज्यादा वो नहीं है स्पेस नहीं है डिफरेंसेस नहीं है और हमारे को दूसरे हिंदू की आवश्यकता कहां है धरती पे धर्म के विषय में क्योंकि हम जब मूर्ति पूजा के लिए लड़ने जाएंगे तो हमारा बगल वाला हिंदू आ रहा है कि नहीं आ रहा है उसे बचाने के लिए आर्य समाज ही होगा नहीं आएगा नहीं आएगा आ जाए तो वो आ जाएगा तो वो आर्य समाज के विरोध में आएगा वो आर्य समाज छोड़ के आएगा ना तो कह मूर्ति पूजा आर्य समाज तो कह रहा है अधर्म है मूर्ति पूजा तो जो आ रहा है वो वो अधर्म करेगा अगर वो आर्य समाज है तो वो उसके अनुसार अधर्म करेगा और इस वाले नहीं अगर अगर वहां शिव की प्रतिमा होगी तो इस वाले नहीं आएंगे
01:52:10:14 इस वाले वर्णाश्रम के लिए नहीं आएंगे वर्णाश्रम के लिए नहीं आएंगे और जहां पे ईश्वर अल्लाह को एक कहने का विरोध किया जा रहा होगा वहां इस नहीं आएगा ब्रह्मा कुमारी नहीं आएगा ब्रह्मा कुमारी भी नहीं आएगा मूर्ति में भी नहीं आएगा ब्रह्मा कुमारी हमने एक एक रोड पे स्टेज पर प्ले किया था। करीब करीब हो गए होंगे चारप साल। बहुत पीछे हमारी लिस्ट में जाएंगे वो मिल जाएगा आपको। बहुत साधारण सा प्ले था। नाटक था नुक्कड़ नाटक वो किया था हमने इसी डिफरेंसेस और ओपिनियंस पे काफी सराहा गया था क्रिटिक्स के द्वारा। हालांकि बहुत ही अल्प संसाधनों के साथ वो हुआ था। है ना? जी जी जी बिल्कुल नहीं बहुत बहुत महत्वपूर्ण जितनी भी चर्चा हुई आपकी उनके साथ वो लास्ट में जो उन्होंने बात की उन्हें नहीं करनी चाहिए थी पर जितनी भी हुई उतनी से काफी वैल्यूुएबल सवाल अभी ले लेंगे अभी सनातन शंकर जी बोल रहे हैं फिर ले लेंगे इसको हटा दीजिए जी तो जितनी भी चर्चा आपकी उनसे हुई है अगर कोई तार्किक रूप से उस चर्चा को सुनेगा तो मेरा यह मानना है कि उसे कहीं ना कहीं ऐसा जरूर पता चल जाएगा कि प्रमाणिकता की कितनी ज्यादा आवश्यकता है। हमारे शास्त्रों की प्रमाणिकता हमारे आचार्यों से
01:53:25:18 ही होगी। कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि यह मैंने वेद मंत्र ले लिया। अब इसका अर्थ जो है वो मैं अपने आप कहीं से कर लूंगा और क्योंकि मुझे संस्कृत आती है तो मैं संस्कृत के आधार पर उसका अर्थ कर लूंगा। भाई संस्कृत में एक ही शब्द के बहुत सारे अर्थ भी होते हैं। तो कौन सा अर्थ लेना है यह हमें आचार्य बताएंगे। यहां पर जो है बहुत सारे लोग चूक कर जाते हैं और वह यह समझते हैं कि क्योंकि हमने इंटरनेट से ले लिया तो वो मान्य एक एक मैं इस तरह का एक कुछ बनाने की सोच रहा हूं। अगर कोई हमें सुन रहा है और वो इन्वेस्टमेंट कर सकता है तो मैं एक छोटी सी एक शॉर्ट फिल्म बनाना चाहता हूं जिसमें कि उसका प्रारूप यह होगा कि भाई नॉर्मल दिखाया जाएगा कि यह है वेद और यह है वेदार्थ। अब एक गुरु ने अपने शिष्य को दिए। अब वह ले चला उसने जगह-जगह जो है बांटना शुरू किया वेद वेदार्थ वेद वेदार्थ बार-बार दे रहे देते हुए दिखाया जाएगा उसके बाद फिर एक किसी के अंदर आया वेद तो पकड़ा वेदार्थ को फेंक दिया वेद को पकड़ा वेदार्थ को फेंक दिया अब वो अब वो वेद बांट रहा है वेद बांट रहा है और अपना उसमें अगली बुक में अपना वेदार्थ मेरी आवाज आ रही है हेलो मेरे को तो आ रही है हां जी आप केवल आपकी आवाज
01:54:40:21 आ रही है शिवश भैया की आवाज नहीं आ काफी देर से मेरी आवाज नहीं आ रही और उनको भी नहीं आ रही थी जो दूसरी आ रही है वो भी मेरे को तो आ रही है आ रही है मैं एक बार दोबारा जॉइ करता हूं हां कहीं आपके में कनेक्शन में दिक्कत हो गई फिर हम उसमें अच्छा ठीक है हां फिर मैं फिर मैं उसमें ये दिखाना चाहूंगा आ रही है आवाज सभी लोग कह रहे हैं फिर मैं उसमें ये दिखाना चाहूंगा कि हमने शुरुआत कहां से हुई थी जिसने वेद दिए उसी ने वेदार्थ भी दिया ठीक है अब वो बांटा कई लोगों को बांटा उसके बाद फिर उसने एक कोई ऐसा आया एक कोई ऐसा आया जिसने क्या किया वेद लिया और कुछ ऐसे एक्सप्रेशन दिखाए जाएंगे द्वेष वाले और जो है वेदार्थ को उसने फेंक दिया अब उसने वेद बांटना शुरू किया और वेद के साथ में अपना वेदार्थ लगा के देना शुरू किया उसने शुरू किया अब फिर ऐसे लोग पैदा होने लगे वो उसकी देखा देखी जैसे उसने किया था फिर लोग पैदा होने लगे उसने क्या उसका भी वेदार्थ फेंक दिया। अब अपना वेदार्थ सब अपना अपना वेदार्थ वो वेद वही लिए हुए अब एक दिन कोई घचू टाइप का रामपाली टाइप का वो आकर के शंकरा जिसने शुरू में वेद दिए थे ना वेद और वेदार्थ उसके सामने खड़ा हो गया तुम गलत
01:55:56:00 कर रहे हो कैसे वेद में लिखा है वेद में लिखा है अच्छा और वेदार्थ मेरा मेरा वेदार्थ मेरा वेदार्थ वेद तेरे अरे भाई ये वेद तो मेरे से ही लेके गया हट उससे नहीं लेके गया था ये तो मुझे उसने दिए हैं। थॉमस अलवा एडिसन के द्वारा बनाया गया बल्ब यदि आपको परचून की दुकान से मिल रहा है तो थॉमस अलवा एडिसन से आपका कोई रिश्ता नहीं है। परचून की दुकान से लिए है ना ये हम उस थ्रेट उस नाटक में हम ये दिखाएंगे। जिससे वेद लिए घूम फिर के अपना सब करके माथा मथैया उसी के सामने आकर खड़े हो गए। तुम गलत हो। कैसे की वेद में लिखा है। अरे वेद में लिखा है। वेद तो मुझी से लेके गया। अरे तुमसे नहीं मैंने तो उससे लिया है यार। तुम कौन हो? यह दिखाऊंगा मैं उसमें। मेरे पास थोड़ा सा धन की आवश्यकता है। इसमें मुझे लगता है जब मैंने नमः शिवम की शूटिंग की थी तो लगभग 90 हजार से ले एक लाख तक खर्चा आ गया था। क्योंकि बहुत सारे वो जो डांसर्स थे उनको जो नृतक थे ना नृत्य करते उसमें नमः शिवम में तो लगभग मुझे लगता है कि इसमें 60 से 70 हजार का लागत है इसमें आ जाएगी। तो अगर कोई मदद करना चाहता है, मदद
01:57:11:03 कर सकता है तो हमें यह शॉर्ट फिल्म बनानी है। इसके लिए हमारी मदद करें। लोगों को सच्चाई दिखाएं कि देखो रियलिटी जब इस तरह से शॉर्ट फिल्म के रूप में ये चीजें सामने आएंगी ना तब जो है समझ में आएगा लोगों को। शिवश हां ये प्रश्न है। मोक्ष परम सत्य है तो विदेश में जो रहता है उसने क्या बिगाड़ा है? आप इसके विषय में पढ़िए। आप पूर्व जन्म को मानने वाले हैं कि नहीं?
01:57:51:18 उसने कुछ ऐसा किया है कि उसको ऐसी धरती पर जन्म मिला है। जहां से जो वैदिक ज्ञान विज्ञान है वो दूर है। फिर भी उनको मना नहीं किया गया है। वो यथाशक्ति प्रयास करके आए और मोक्ष के लिए प्रयासरत हो जाए। जैसे स्टीव जॉब्स आए मार्क जुकरबर्ग आए आए ना आए ना भारतीय धरती पे आए ना हां आ जाओ मना थोड़ी ना किया है दिया जाएगा आपको मोक्ष का ज्ञान विज्ञान और पहुंचाया भी जा रहा है कोशिश की जा रही है देखो वो सेंटर खोल रहे हैं ना वहां के भले भला करने के लिए ये सब बकवास चलिए लेकिन मन मनमानी नहीं चलेगी मनमानी नहीं चलेगी जो मनमानी ये कर रहे हैं वो नहीं चलेगी मनमानी चले मनमानी करोगे तो कोई ना कोई आ जाएगा तुम्हारे रास्ते में। अरे मैं मैं चला जाऊंगा तो और आएंगे। सैकड़ों आएंगे। आज मैं एक हूं। सनातन शंकर जी आ गए। शास्त्रवाद जी आ गए। कितने लोग हो गए खड़े? हो गए ना? हम जाएंगे तो और आएंगे। अनिकेत जी हैं। अनिकेत जी भी आए हैं। अनिकेत जी भी आ गए हैं। काफी लोग आ रहे हैं। और एक हमारा चैनल शुरू हुआ है। वो भी प्रामाणिक चीजें बता रहा है। शंकराचार्य की ओर से क्या कहते हैं? अ श्रुति मार्ग चैनल का नाम है। श्रुति मार्ग
01:59:06:26 उस पे रामशरण झा जी हैं। वो शंकराचार्य परंपरा से ही हैं और चीजें बता रहे हैं। अच्छी बता रहे हैं। तो एक एक आम बोगे लाखों आम पाओगे। आज हम एक हम कुछ लोग आहान कर रहे हैं। बहुत आएंगे फिर और यह जो जितना सनातनाभास का चोला ओढ़ के लोग दिगभ्रमित कर रहे हैं हिंदुओं को उन सबका उन सबका लय होगा। खत्म नहीं करना है। उन सबका लय होगा। परंपराओं का और जब लय होगा जब लय होगा तो मेरी घर की मातृशक्ति पर आंख उठाने वाला कोई पैदा नहीं होगा दुनिया में विधर्मी कोई क्योंकि हम एकत्र हो जाएंगे। हाथी बन जाएंगे। किसी कुत्ते में भकने की किसी कुत्ते में भौकने का साहस नहीं होगा तब क्योंकि हम हाथी बनकर बैठेंगे तब हम अलग-अलग नहीं रहेंगे। बिल्कुल बिल्कुल
02:00:03:22 बहुत बढ़िया। जी शास्त्र जी कुछ बोलेंगे? जी भैया बहुत बढ़िया बोला आपने। ये होना ही चाहिए। सब एक साथ होने चाहिए। क्यों इस पे लोग विरोध करेंगे? मूर्ति पूजा पुराणों का विरोध और भी गुरु परंपरा का आचार्य परंपरा का सबका विरोध क्यों करना है? अरे ज्ञान जहां से मिला है उसका सम्मान करो। उसको उसके चीज को समझो और अपना मार्ग प्रशस्त करो। लेकिन लोग अपने स्वार्थवश अलग-अलग हो के और अपना मिथ्या अहंकार में जी करके और कुछ भी फैला रहे हैं वो नहीं होना चाहिए। और आपने बहुत अच्छा बोला कि उद्देश्य नष्ट करना नहीं है। उनको अपने में मिलाना है। अर्थात उनको पुनः सही मार्ग पे लाना है। बिल्कुल जी बिल्कुल जी मृगराज मृगराज जी जय श्री राम। जय श्री राम भैया जी। जय श्री राम। बताइए जी तो भैया जी इनकी जो बात थी उस वो चम्म्या मिशन से थोड़ी मेल खाती है। कुछ समय पूर्व चिन्या मिशन का भी एक बहुत ही वरिष्ठ सन्यासी जी
02:01:18:26 थे। वो भी कुछ ऐसा ही कह रहे थे कि पुस्तक पढ़ने पर जो है पुस्तक का लेखक आपके गुरु तुल्य हो जाते हैं या गुरु ही हो जाते हैं। तो कहीं ना कहीं पर ऐसे जो वरिष्ठ जन हैं वो कुछ ना कुछ ऐसा प्रभाव डाल के जो है माहौल बिगाड़ रहे हैं। वो चिन्मय मिशन वालों के पास वेद कहां से आए? [हंसी] जी जी वही बात है वो डिवाइन लाइफ ट्रस्ट सोसाइटी तक जाएंगे शिवंद सरस्वती तक जाएंगे उससे पहले का वो जा ही नहीं पाएंगे अच्छा दूसरी बात वो गुरु हो जाते हैं तो फिर उनकी चीजें हम खोल के दिखाएंगे मना मत करना उनकी ऐसी चीजें निकल आएंगी तुमको मना करना पड़ेगा इसका मतलब वो आपके गुरु सिद्ध नहीं हो रहे क्योंकि गुरु वो है जो आपका शब्द प्रमाण है जैसे वेद शब्द प्रमाण है तो जिससे वेद लिया वो भी शब्द प्रमाण है उसका विरोध मत करिए फिर ये जो दयानंद जी दयांद जी आपका शब्द प्रमाण है तो दयानंद जी को मान लीजिए कि जो जो कह रहे हैं वो सही है तो हर हर महादेव बोलना बंद करो क्यों बोल रहे हर हर महादेव ये जो भस्म लगा के टीका लगाया बंद करो दयानंद जी धर्म बता रहे बंद करो और आप खुद ही अपनी रील में कह रहे हो स्त्रियां जो है पवित्र नहीं होती कभी भी फिर दयानंद जी लिख रहे हैं अपवित्र स्त्रियां जिनको ऐसी नीच
02:02:34:00 स्त्रियां जिनको छूना मना है उनको भी परम पवित्र कह रहे विरोध कर रहे हैं पवित्र कहने का तो जान लो थोड़ा उसके बाद उड़ो और उड़ो फिर उनके सामने उड़ो ये जो प्रामाणिक परंपराओं का विरोध ना करते हो जितना उड़ना है उड़ो सब साथ में है आपके भाई मगर प्रामाणिक परंपरा का ईगो नहीं हर्ट करने का हम [हंसी] इनसे लड़ो बौद्धों से और इन ईसाइयों इन ईसाइयों से और इन इस्लाम से लाइफ में कुछ भी करने का लाइफ में कुछ भी करने का पर जयकांत सिगरे के ईगो को हर्ट नहीं करने का बिल्कुल [हंसी] अब ये जो ऐसे डायलॉग्स है ना ये जो ऐसे डायलॉग्स है ना मत पढ़ो चक्कर में ये आर्य समाजियों की इस की रातों की खटिया से नींद उड़ चुकी है। अरे यार ये तो एक तो ये मजाक उड़ उड़ाता है। एकदम निरत्तर करता है। उसके बाद मजाक उड़ उड़ाता है। ये आपके उन कटाक्षों का जवाब है जो कटाक्ष आप कर रहे हो ना ये मक्कारी भयंकराचार्य ये सब आप हम ये सब नहीं कर पा रहे हैं। विवश है। तो इस तरह से आपको हम जवाब दे रहे हैं। यह भी मर्यादा में रहते हुए हैं। है ना? यह जवाब दे रहे हैं। आपने कहा ना? कहा इसलिए बंटी बबली का सीन याद दिलाया आपको और इन्होंने मक्कार
02:03:49:01 और भयंकराचार्य और काफी कुछ कह रही हैं। ये तू तड़ाक बोलती हैं। इसलिए याद दिलाया कि लाइफ में कुछ भी करने का जयकांत सिगरे के इको को हर्ट नहीं करने का। हां मृगराज जी क्या कह रहे थे आप? बोले जी ठीक है काफी देर की वो हो गई है चौपाल [हंसी] नहीं बढ़िया बहुत बढ़िया ये आपने बहुत बढ़िया अभी मैं मेरा भी ऐसे ही नंबर फ्लैश होने वाला है मैंने भी अभी अपना सेटअप बना लिया है तो हां आप ही की तर्ज पर वन टू वन डिस्कशन के लिए मैं भी ऐसे ही इनको इसमें क्या होता है ना कि जो हमारी चीजों को काउंटर कर रहे हैं उनके साथ
02:04:43:15 वह स्वीकार कर चुकी वो सनातनी नहीं है। हां तो फिर हम पूछेंगे इंसान कैसे हो? बताओ चलो आओ इंसान कैसे [नाक से की जाने वाली आवाज़] हो? धर्म सिद्ध करो सनातन के बिना अपना ईश्वर को ईश्वर सिद्ध करो। सनातन के बाहर जाके। क्या है तुम्हारा सनातन? [हंसी] जहां पर वो फंस रही थी वहीं पे वो दूसरे दूसरी चीजें लेके आने लग गई थी। जहां फंस रही थी। ऐसे चल नहीं पाएगा। चलो ठीक है। का उत्तर नहीं दे पाई। एक भी प्रश्न भैया हम बता रहे एक भी प्रश्न का उत्तर कहां था उनके पास? नहीं नहीं दे पाएंगे। बस सवालों से सवालों से बचने के लिए बस वो अपने वो पहले ही वो पहले अपने साथ उसको ले आई थी एक बैसाखी को साथ में आर्यन मैं जानता था कोई ना कोई आएगा। मैंने कहा तुम इन वो उधर स्क्रीन में उनको जवाब दे रहा था। आपने देखा हो बीच-बीच वो पढ़ रही थी जवाब इधर इधर देख रही थी वो वो कुछ जवाब दे रहा था। तो क्या कहते ठीक है आप वहां स्क्रीन में देख करके खूब उनसे जवाब ले लो वो भी कौन खेत की मूली है भाई वो जो है वो कौन खेत की मूली हाल बस ये होगा कि यहां से अभी टॉपिक डायवर्ट होने लगेंगे है ना तो आप जब स्वतंत्र
02:05:58:19 हो के वहां रील बना रही हो तब किसी को साथ में क्यों नहीं ले रही हो उसको साथ में लो भाई तब रील बनाओ फिर हम दोनों से एक साथ बात करेंगे तुम 50 एक साथ आप ये कह रही थी भीड़ लेके आना भीड़ इन्होंने उन्होंने डायलॉग मारा था तुम अपनी भीड़ ले आना। मैं तो भीड़ नहीं लाया। सिंगल मैन वन मैन आर्मी मास आर्मी मास मामा मास [हंसी] ये बुरा लगता है। ये लोगों को बुरा लगेगा। मास कहता है अपने आप को। कोई नहीं है चक्कर में। मत पड़ो। [हंसी] कोई नहीं है। चक्कर में बुरा लगेगा। जयकांत शीघ्र बनता है। ये सब बुरा लगता है इन लोगों को। क्या करें भाई? कैसे कैसे आप लोगों को रिटेलिएट करें? कैसे आप लोगों को काउंटर करें आपकी बदतमीजी को हम आपने घोषित कर लिया मैं तो ऐसे ही करूंगी आपने अपने को घोषित कर लिया स्वयंभू [गला साफ़ करने की आवाज़] और वही सिद्धांत ये जो इन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई कर रखी है वहां पर भी यही सिद्धांत लागू किए थे क्या इन्होंने जो ये सिद्धांत वेदों के ऊपर लागू कर रही है कि कभी आर्य समाज का पकड़ लिया कभी इधर से पकड़ लिया तो क्या अरे ये सब ये सब प्रश्न तो मुझे पूछने ही नहीं दिए गए हां क्या आपने डॉक्टरी कहां से करी ये मैं करता मैं मैं खोल खोल रहा था ना चैप्टर्स खोल रहा था भाई आपने आप डॉक्टर खुद को कह रही हो तो किसी
02:07:13:20 ने आपको सर्टिफाइड किया तब कह रही हो ना कहीं से आप सर्टिफाइड हो कोई आपका प्रमाण है डॉक्टरी के विषय में और डॉक्टर में तो चलो कुछ प्रैक्टिकल उदाहरण होते हैं जिससे कि हम पीछे से नया कुछ कर सकते हैं मगर जिसमें शब्द ही प्रमाण है उसमें पीछे वालों को कैसे काउंटर करोगे हैं जी ओ गो और डी ओ डू इसमें शब्द प्रमाण है। इसमें कुछ नहीं कर सकते। जहां से आपने इंग्लिश सीखी है उसी को मानना पड़ेगा। उसी को मानना पड़ेगा।
02:07:47:03 जहां पर ये ये जो धर्म है ये अती्द्रिय विषय है। इसमें हमारे शास्त्र प्रमाण है। इसमें हम कहे हमारे आंखें देख हमारी आंखें देखेंगे हमारे कान देखेंगे तो रंग के विषय में कान प्रमाण नहीं हो सकते। उसी तरह से धर्म के विषय में हमारा हमारा जो व्यक्तिगत अनुभव है वो प्रमाण नहीं हो सकता। हां व्यक्तिगत अनुभव के साथ वेद वेद स्वयं का वह व्यक्तिगत अनुभव जो वेद के साथ सामंजस्य बैठा है वो आपका उपयोगी है ठीक है नहीं तो निठारी कह देगा मेरा व्यक्तिगत अनुभव है मांस खाना बच्चों का कुकर उबाल के मैं भी मानव हूं हो गई धर्म की सिद्धि फिर तो फिर जिनसे लड़ रही हो उनसे क्यों लड़ रही हो उनका व्यक्तिगत अनुभव है सब बात ही खत्म चलिए जय श्री राम जय श्री राम राम जी जय श्री राम जय श्री राम भैया जय श्री राम जय श्री राम
02:08:43:15 ये कुछ कह तो नहीं रहे हम ठीक है सभी को जय श्री राम नारायण समारंभाम शंकराचार्य मध्यमाम अस्मदाचार्य परताम वंदे गुरु परंपरा जय श्री राम
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