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00:00:03:10 जैसे आपके यहां कहा जाता है कि पुनर्जन्म तो आपके यहां माना नहीं जाता ना। पुनर्जन्म आखिरत के में जो होगा ना वो माना जाता है। आखिर रात में फैसला होगा जो आया है उसका दोबारा यहां यहां पे जन्म नहीं होना है। हां नहीं उनका नहीं होना है। तो जैसे इस विषय में इस्लाम द्वारा क्या बताया जाता है कि जो जैसे जिस दिन वो आखिरी रात होगी उससे जस्ट पहले कोई बच्चा जो जन्मा होगा और जो अभी कुरान को जान भी नहीं पाया होगा और जो है फिर कयामत आ जाएगी और उसके बाद आखिर रात में उसका फैसला किस आधार पर होगा? इस विषय में क्या बताया इस्लाम ने? इस्लाम ने इसके बारे में बताया है कि एक लफ्ज आया है कुरान में नसूर नश्र करना इसका मतलब होता है रिलीज करना यानी दोबारा रिलीज करना जैसे सेवन अर्थ और सेवन ही आसमान सेवन डायमेंशन ये बताया गया है और उनके अंदर मुख्तलिफ तरीके से इंसान का जीवन जो है वहां बीत रहा है।

00:01:19:18 सूर फरकान की आयत नंबर तीन पढ़ेंगे ना नहीं तो मैं यही कह रहा हूं कि उनका जो फैसला है ना जो कयामत से एक दो दिन पहले जन्मे होंगे या कोई एक पर्टिकुलर टाइम होगा जब जन्म होना बंद हो जाएगा बच्चों का है ना कुछ या फिर कयामत से जो एक दो दिन पहले जो जन्मे होंगे बच्चे तो उनका फैसला किस आधार पर होगा क्या होगा उनका हां तो कयामत से कोई एक दो दिन पहले वैसे जन्मेगा नहीं ये लिखा है आपके नहीं आपने एक दो दिन पहले कयामत से जो जन्मेंगे ये बहुत टाइम पीरियड पहले ही बंद हो जाएंगे बच्चे होना। जिनको

00:02:02:00 क्या चीज ये लिखा है आपके कयामत से इतने दिन पहले तक बंद हो जाएंगे बच्चे जन्म लेना पहले नहीं इसमें यू लिखा है कि कयामत से पहले औलादें होना बच्चे होना जो है वो बंद हो जाएंगे कितने दिन पहले दिन पहले नहीं कोई दिन मुकरर नहीं किया है बल्कि ये जरूर बताया गया है कि कयामत से पहले तो तो ये एक निशानी हो जाएगी जब है ना बच्चे होना बंद होंगे तो वो घटना और इसमें एक चीज ये और आती है कि अ क्या कहते हैं ये जैसे जो जानवर इत्यादि है [गला साफ़ करने की आवाज़] इनका फैसला कैसे होगा? जानवर इत्यादि जो है पहली चीज इनको अल्लाह ने यानी जो ईश्वर है उसने अपनी इबादत के लिए नहीं बनाया। ईश्वर ने जानवरों को अपनी इबादत के लिए नहीं बनाया। भक्ति के लिए नहीं बनाया। ठीक है? कुरान की एक आयत है खल जिन्ना कि हमने इंसान और जिन्नात को अपनी ताबेदारी के लिए बनाया है। यानी ईश्वर के जो एहकामात है जो ऑर्डर्स है उनको उनके ताबे होने

00:03:17:01 के लिए बनाया है। तकलीक किया है। मतलब कहने का मतलब है कि इनकी टेस्टिंग नहीं चल रही है। जानवरों की टेस्टिंग नहीं है। तो जैसे कयामत आ जाएगी और ये मर जाएंगे तो ये भी दोबारा वहां जीवित होंगे जहां आखिर रात है क्या है ना वो तो फिर स्वर्ग नरक जैसे जन्नत जहन्नुम बोलते हैं ना तो जन्नत के अंदर तमाम खुश तमाम खुशनुमा चीजेंगी तमाम खुशनुमा चीजें जन्नत के अंदर होंगी। इंसान का नफ्स जो चाहेगा वहां उसे वो चीज मिलेगी। मान लीजिए कोई शख्स जन्नत में नहीं ये जो ये जो जानवर है जानवर जानवर का यहां पर जानवर को कर्म के लिए नहीं बनाया कि वो यहां कर्म नहीं कर्म के लिए नहीं बनाया वो कोई बात नहीं मगर यहां जब डेथ हुई तो उसके बाद जानवर वहां पे जिंदा होगा क्या होगा कि नहीं होगा इसमें इस्लाम कहता क्या है अभी मैं काउंटर नहीं कर रहा हूं केवल मैं जिज्ञासा जानना चाहता हूं इस्लाम ने कहा क्या है कुरान जानवरों के बारे में यही कहता है कुल्लू अल फान लेकिन जब हर श को फना होना है हर एक को कुल्लू मन अल फान हर एक जो चीज

00:04:32:02 है उस पर फना होगा यानी वो खत्म होगा अब जानवर जो है कयामत का दिन होगा मोहम्मद रसूल्लाह की एक हदीस मिलती है जिसमें बताया गया है कि अल्लाह ताला कयामत के दिन सींग वाली बकरी को जिसने किसी बिना सींग वाली बकरी को मारा होगा तो उनको भी लाएगा और लाकर इंसाफ करवाएगा कि तेने इस सींग वाली बकरी ने बिना सींग वाली बकरी को जो मारा था उसका इंसाफ करवाएगा उसको सींग देगा और ताकि वो वापस उसका बदला ले ले कि उसको क्यों बिना गलती के मारा तो ये इंसाफ बताने के लिए कि अल्लाह जो है वो इंसाफ वाला है। ऐसा नहीं है कि यहां अगर किसी के साथ नाइंसाफा नाइंसाफी हो गई तो ऐसा नहीं है कि कयामत के दिन भी नाइंसाफी होगी। वहां नहीं होगी कि वहां फैसला करने वाला नहीं मैं वो नहीं पूछ रहा हूं। मैं अगर इंसाफ होगा तो उसका स्वरूप क्या होगा? किस सूरत में इंसाफ होगा? अगर इंसाफ जैसे अगर किसी जैसे जानवर का कर्म तो चेक किया नहीं जा रहा है तो वहां पर जानवर होंगे नहीं होंगे या होंगे तो किस आधार पर कहां होंगे ये मैं पूछ रहा हूं। नहीं वहां नफ्स होगा। नफ्स नफ्स समझते हैं आप बता। नस मतलब

00:05:47:13 नस मतलब आपकी बॉडी के अंदर जो आपकी साइकी है ना आपकी बॉडी आपकी है और आपकी साइकी को जब मौत आएगी तो आपकी बॉडी जो है वो उसे मृत घोषित कर दिया जाएगा तो आपका जो नफ्स है ना जिस नब्स से हम ऑर्डर लेते हैं यानी कोई भी ख्वाहिश हम करते हैं या कुछ भी करते हैं न्स जैसे कि हम जिसे हम आत्मा कहते हैं वो जिसे हम आत्मा कहते हैं नहीं आत्मा नहीं आत्मा नहीं आत्मा को तो हम रूह बोलते रूह न बॉडी ये तीन कासेप्ट को समझने की जरूरत है। रूह, नफ्स, बॉडी अब नफ्स जो है कुरान में आया [हंसी] कुल्लू न्स मौत। हां तो मैं ये कह रहा था कि नफ्स के बारे में जैसे कुरान ने जो नफ्स के बारे में कहा है उसके बारे में मैं बताना। न्स का मतलब आप नफ्स का मतलब आप कहीं चेतना से तो नहीं कह रहे जो उसकी जो उसके अंदर जो कॉन्शियसनेस होती है। हां कॉन्शसनेस। कॉन्शसनेस जो होती है ना हमारी सही की कॉन्शसनेस जो होती है उसी के बारे में बोल रहा हूं तो कुल न्स जा अब ये जो कॉन्शसनेस के बारे में इसको भी समझने की जरूरत है सिर्फ कॉन्शसनेस ही नहीं क्योंकि जानवरों के अंदर भी अकल तो होती है अकल तो होती है ना लेकिन उनके पास है तो तो कॉन्शियसनेस क्या है माम उनकी कॉन्शियसनेस

00:07:02:26 को क्या मिलेगा मतलब वो जो एक वो है वो एक है ना कि कब्र में से उनके पास नफ्स नहीं है उनके पास पास नफ्स नहीं है तो क्या है? वो जीव है। जीव है। मैं बस मैं मैं इसमें ये नहीं कह रहा हूं कि आप गलत है कि सही है। मैं इसमें ये जानना चाह रहा हूं कि अगर वो मरा है तो यहीं रह जाएगा। उसका वहां पर कोई काम नहीं है। वो एक क्या कहते हैं? एक नकली प्रतिबिंब जैसा है। वो यही मर के खत्म हो जाएगा। ऐसा है उसकी या फिर या फिर या फिर वो भी एक मिनट या फिर वो भी किसी लोक में परलोक में या आपके हिसाब से जो जन्नत हो या कुछ हो वहां पे वो भी दोबारा से वहां खड़ा होगा कुछ करेगा ये मैं पूछ रहा हूं हां तो वही मैं कह रहा हूं जानवरों का कोई हिसाब किताब नहीं होगा हिसाब किताब समझ रहे हैं यानी जो भी आप और हम जो हमारी इंद्रियों का इस्तेमाल कर रहे हैं ना मैं ये नहीं कह रहा मैं ये नहीं कह रहा मतलब कि वहां वो होंगे ही नहीं ये माना जाए वहां वो होंगे ही नहीं वो होंगे लेकिन जैसे मान लो आज मैंने

00:08:18:24 जैसे जैसे यहां है वैसे ही वहां होंगे ना वहां नहीं वहां ऐसे नहीं होंगे कैसे होंगे वहां ऐसे वहां ऐसे नहीं होंगे जैसे मान लो कोई जानवर है मेरे सामने अगर वो मर गया तो अब हम अगर ये सोचे कि जिस तरह से यहां जीवन व्यतीत कर रहा था ये जानवर तो स्वर्ग में भी ऐसे ही होगा या नर्क में भी ऐसे होता है तो स्वर्ग नर्क का कासेप्ट उनके लिए नहीं है क्योंकि ये जितनी भी चीजें है ना ये इंसान के लिए ईश्वर ने मैं समझ गया तो मैं आप जो नहीं है वो मत बताइए आप जो वो बताइए जो है समझ रहे हैं जैसे मैंने पूछा किसी से कि स्वस्थ रहने के लिए क्या-क्या क्या खाना चाहिए तो मैं उसको गिना रहा हूं देख तुझे मूली नहीं खानी है तुझे आलू नहीं खाना है या तुझे पिज़्ज़ा नहीं खाना है बर्गर नहीं खाना मगर ये नहीं बता रहा हूं कि तुझे खाना क्या है समझ रहे हैं तो मैं मुझे थोड़ा सा वो बताइए मुझे बता दीजिए उनका होगा क्या? जी उनका कोई हिसाब किताब नहीं होगा। ये दो वर्ड में मैंने समझाया कि उनका कोई हिसाब नहीं होगा। आप नहीं होगा बता रहे हैं भाई। अगर वो वहां होंगे तो अगर हम चाहेंगे जैसे मुझे घोड़े की सवारी करनी है। ठीक है? मुझे घोड़े की सवारी करनी है। मुझे उड़ने वाले घोड़े की

00:09:33:25 सवारी करनी है। तो ईश्वर मेरे लिए वो अवेलेबल करेगा। अगर मुझे उड़ने वाले घोड़े की सवारी करनी है या मुझे चलने वाले घोड़े की तेज स्पीड में लाइट की स्पीड में चलने वाले घोड़े की सवारी करनी है तो ईश्वर मेरे लिए अवेलेबल करेगा स्वर्ग में अच्छा तो उन चीजों के लिए वो वहां पर होंगे हां हम चाहेंगे तो अच्छा जैसे मतलब जिन जिनके बारे में इंसानों को पता ही नहीं है कुछ ऐसे जैसे प्रजातियां जीव है उनका क्या होना जैसे कई प्रजातियां जैसे कई प्रजातियां ऐसी है जिनके बारे में लोगों को पता ही नहीं है उनका क्या होगा हमको तो पता है हां तो तो वहां ईश्वर हमें ऑप्शन देगा कि तुम्हें इनमें से कौन सी चीज चाहिए ना ऑप्शन वगैरह नहीं देगा ऑप्शन वगैरह नहीं देगा ये जितना ज्ञान होगा जितनी सोचने की बसीरत होगी जैसे आज साइंस ने मान लो डायनासोर अब्सॉर्ब किया कि डायनासोर भी किसी टाइम में रहते थे इस पृथ्वी के ऊपर फिर वो विलुप्त हो गई प्रजाति तो आज साइंस ने क्या किया उसको जान लिया तो साइंस

00:10:49:06 ने किस तरीके से जाना उन्होंने जमीन की खुदाई की और उनको फसल्स मिले और फसल्स मिले तो उन्होंने उससे जाना कि इसकी आकार ये होगा और ये होगा इस तरह से उन्होंने एक रूप दिया कि इस तरह से दिखता होगा डायनासोर तो हमने भी जान लिया कि भाई डायनासोर ऐसा दिखता होगा हमारे साइंटिस्टों ने काफी रिसर्च करके मालूमात की तो ऐसे ही हम भी मालूमात जब हासिल करते हैं ना तो मालूमात से हमें बहुत सारी चीजें पता चलती है। जैसे हमें फरिश्तों के बारे में पता चलता है कि उनके एक से ज्यादा पंख होते हैं। थोड़ा थोड़ा सा काफी है। थोड़ा सा काफी है। जैसे कि आपने कहा कि जैसे वहां पे वहां पे जाकर के जैसे हमारी इच्छा हुई कि वो जो है जो घोड़े हैं, कुत्ता है, बिल्ली है हमें जिस रूप में उसकी आवश्यकता होगी तो वो हमारे लिए अवेलेबल हो जाएगा। तो इसमें बहुत सारी चीजें हैं। फिर क्वेश्चन पे क्वेश्चन जैसे एक बात ये आती है कि वो अवेलेबल हो जाएगा तो वो जिस समय अवेलेबल होगा उससे पहले कहां पे रहेगा? पहले उससे पहले यहां तो कयामत आ गई। यहां तो कयामत आ गई। फिर आपने बताया कि एक सेकंड कयामत को आपने क्या समझा है? [गला साफ़ करने की आवाज़] कयामत के बाद खत्म हो गई ना

00:12:05:15 दुनिया खत्म हो गई ना दुनिया तो खत्म हो गई लेकिन दुनिया कोई एक ही दुनिया है अच्छा तो दूसरी दुनिया से वो आएंगे तो ये आपसे ये जानना चाह रहा हूं कि कयामत के बारे में आप क्या जानते हैं जैसे कयामत एक अरबी वर्ड है ना जिसका मतलब ये बताइए अभी मैं आपको काउंटर नहीं कर रहा हूं अभी मैं जान रहा हूं केवल बिल्कुल मैं भी बताना ये चाह रहा हूं कयामत लफ्ज का मतलब मतलब होता है खड़ा कर देना। बिल्कुल सीधा खड़ा कर देना। जिस तरह से जैसे हम पहले भी जो मर चुके हैं जो भी मर रहे हैं जो आगे आएंगे वो मरेंगे सब मर के इस इस दुनिया से इस दुनिया से तो गए है ना। अब उन सबको जो है खड़ा कर देगा अल्लाह ताला वापिस। तो उसको कयामत बोलते हैं। सबको खड़ा कर देगा मरे हुए को और जो भी उन्होंने कर्म किए होंगे अपनी बॉडी के साथ उन कर्म के आधार पर उनके फैसला होगा। तो कयामत ये है। बाकी सूर इब्राहिम जब हम पढ़ेंगे तो उसमें आया है कि और उस दिन इस जमीन को बदल दिया जाएगा दूसरी जमीन में। मतलब इसी जमीन को दूसरी जमीन में बदल दिया जाएगा। तो जमीन तो रहेगी ना। जन्नत भी अगर होगी तो

00:13:20:24 किसी जमीन पर ही होगी ना। भाई उसके अंदर भी पांव रखने के लिए जमीन तो होगी। ऐसा तो नहीं होगा कि हवा में लटके होंगे। यानी यानी कि वो जो वो जो जानवर होंगे वो दूसरी जमीन पर पहुंच जाएंगे। दूसरे ग्रह दूसरी तो दुनिया उसमें पहुंच जाएंगे। जानवर की बात नहीं कर रहे हैं। जानवर तो देखो मैंने अभी आपको बताया था हमारे लिए अवेलेबल हो जाएंगे। जैसे अगर मेरी चाहत हो रही है। मैं वही कह रहा हूं कि यहां ये दुनिया खत्म हुई तो हम पहुंचे आखिर रात में तो आखिर रात में वो जानवर कहां से आए? दूसरी दुनिया से आए हैं या वहां पर कोई एक स्टोर है जहां पर जानवरों को रखा जाएगा वहां से अवेलेबल होंगे वो क्या है वो तो ये चल ही रहा है ना अल्लाह की जो कायनात है मुख्तलिफ डायमेंशन जो है मुख्तलिफ डायमेंशन जो है उनके अंदर चल ही रहा है मामला डायमेंशन देखो भविष्य हमारे लिए तो भूतकाल भविष्य काल वर्तमान काल है ना डायनासोर जब थे अगर ईश्वर तो रिवाइंड कर सकता है वापस पीछे मतलब फॉरवर्ड कर सकता है, बैकवर्ड कर सकता है। ईश्वर के लिए तो कोई इमॉसिबल कोई चीज है नहीं। भाई साहब मैं बस भाई साहब मेरा सवाल दूसरा है। मैं बस ये कह रहा हूं कि जो ये जानवर हैं ये दूसरी दुनिया में

00:14:35:25 जाएंगे। दूसरे डायमेंशन में जाएंगे और हमारे लिए आखिर रात इत्यादि में बोलने पर वहां उपलब्ध करा दिए जाएंगे। ना ना आप शायद समझ नहीं पा रहे हैं या मैं समझा नहीं पा रहा हूं। मैं ये कहना चाह रहा हूं। अभी मैंने बताया था कि डायनासोर मान लो छ करोड़ साल पहले थे। है ना? तो वो हमारे लिए तो छ करोड़ साल पहले थे। है ना? अब ईश्वर के लिए तो नहीं कह सकते ना कि छ ईश्वर के लिए भी छ करोड़ साल पहले थे। ईश्वर की निगाह में तो भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्य काल तीनों एक ही एक ही वक्त में एक्सिस्ट कर रहा है। भाई हमारे लिए हमारे क्योंकि हमारा ज्ञान महदूद है एक हद तक है तो हमारे लिए आने वाला कल जो होगा वो होगा मैं तो समझ गया उसको उसको आप उसको उसको मत बताइए। वो बताइए कि वो क्या करेगा कि जानवर जो मर गए हैं उनको पीछे से उठा के वापस ले आएगा हमारे सामने। ऐसे है ना वो या ना ले आएगा वो तो वहां जब जाएंगे ना हम और जब हम खिश करेंगे तब देखो हम वो बात कर [हंसी] रहे हैं नहीं पता है अभी हमको अभी हमको नहीं पता जानवरों का क्या सिस्टम है कुल मिला के बात ये जो आयत बताई ना वहां नफ्स

00:15:50:28 के लिए हर वो चीज होगी जो वो चाहेगा। अगर मान लो मेरा नफ्स चाहेगा कि मुझे किसी उड़ने वाले घोड़े की सवारी करनी है तो मेरे लिए ईश्वर उड़ने वाला घोड़ा अवेलेबल कर देगा। देखिए वो उड़ने वाला घोड़ा तो ईश्वर अपने आप से बना सकता है ना नया मैं पूछ रहा हूं यहां के जानवरों का क्या होगा कुछ नहीं होगा यहां मतलब वो मर के यही रह जाएंगे खत्म हो जाएगा उनका शरीर जमीन बदल जाएगी दूसरे ग्रह पे जाएंगे क्या होगा बहुत सारी प्रजातियां विलुप्त हो गई अब तो नहीं है ना अब तो नहीं है जो सर्वाइव कर सकी जो प्रजाति सर्वाइव कर सकी वो भाई साहब तो ये ये आप शुरू में ही कह रहे थे कि वो यही खत्म हो जाएंगे उनकी आगे की कोई कहानी नहीं है। आप ये समझाना चाहता न्स नफ्स इसीलिए समझा रहा था लेकिन आप नफ्स को समझे नहीं। नफ्स समझा रहा था मैं कि नफ्स उनके अंदर नफ्स नहीं है। नब्स नहीं नब्स का मतलब है कि उनके अंदर जो है कॉन्शियसनेस नहीं है। ना ये नब्स कॉन्शियसनेस आप कह रहे हैं नफ्स मतलब वो दर्द वो दर्द सहन वो दर्द सहन कर रहे हैं। वो चिल्ला रहे हैं। वो बचना चाहते हैं। वो जीना चाहते हैं। वो खाना चाहते हैं। वो पीना चाहते हैं। तो कौन सी चीज नहीं है उनके? मतलब नब्स की बात कर रहा हूं। नब्स आप समझिएगा बात को। न्स

00:17:06:09 जैसे आपकी बॉडी के अंदर आप हैं। है ना? और आप स्वाद में समझते हैं। जायके के अंदर समझते हैं। आपको अगर सब्जी दी जाए तो उसमें अच्छा मसाला वगैरह लगा के आप खाएंगे और जानवर के सामने जब रखी जाएगी तो वो सीधा उसको चारा समझ के खा जाएगा। उसका भोजन समझ के खा जाएगा। लेकिन हम मनुष्य हमारे पास नफ्स है तो हम उसको हमारे स्वाद अनुसार करते हैं। तो अब ये चीज उनमें नहीं है कि किसी जानवर के कभी कोई शेर जब मांस खाता है तो आपने देखा कि नमक मिर्ची लगा के बढ़िया तलवल के खाए ना कोई शाकाहारी जानवर को देखा कभी कि वो अच्छे से तेलवेल में तल के खाए नहीं तो वो नब्स जो ये हमारे से डिमांड इसको हम ये भी इसको हम इसको हम इसको हम ये भी कह सकते हैं कि हमारे पास चीज है उनके पास हमारे पास चीज एक ही है। हमारे पास ज्यादा है। हमारे पास ज्यादा उनके पास कम है। मगर है ही नहीं। सुनिए तो है ही नहीं। अगर यह कह देंगे कि है ही नहीं तो फिर यह मानना पड़ेगा जैसे शेर है वो कोई प्रकार के मांस को ज्यादा प्रभ करता है। कुत्ता है वो कोई किसी प्रकार के भोजन को ज्यादा अच्छा लगता है उसे और कोई प्रकार का भोजन उसे कम मतलब वो स्वाद में सेलेक्टिव है। स्वाद में सिलेक्टिव है मगर उसको अपने और स्वादिष्ट कैसे बनाया

00:18:21:15 जाए इतनी बुद्धिमता उसके अंदर नहीं है। अब अगर ऐसी बात की जाए तो सुनिए तो ऐसी बात की जाए तो कई इंसान ऐसे होते हैं जो आगे बुद्धि वाला व्यक्ति समझ पा रहा है, सीख पा रहा है, कर पा रहा है मगर वो इंसान नहीं कर पा रहा है। जैसे कि रिजल्ट आता है, क्लासेस होती है, फाइट होता है तो उसमें कई लोग कम नंबर लाते हैं, कई लोग ज्यादा नंबर लाते हैं। इसी में और पीछे चलते चले जाए और पीछे चलते चले जाए तो जानवर हो जाएगा व्यक्ति। मतलब मैं कह रहा हूं इससे इससे उसका स्वाद स्वादिष्ट ना बना पाना। इससे ये तो सिद्ध होता है कि जो है उसके पास हमसे कम बुद्धि है। मगर यह सिद्ध नहीं होता कि बुद्धि है ही नहीं क्योंकि वो बचने का प्रयास कर रहा है। वो सारी चीजें कर रहा है। वो जीना चाहता है। आहार निद्रा भय मिथुन वो सब है उसमें। बस उसके शरीर के उसको जो शरीर प्राप्त है उसका हमारी हमारी जानकारी में उसके शरीर का परम कल्याण उसको जो शरीर मिला है उससे सद्गति कैसे प्राप्त करनी है जो मोक्ष है वो कैसे प्राप्त करनी है वो क्या कहते हैं तो इतनी बुद्धि नहीं है कि वो धर्म को समझ पाए कि मोक्ष कैसे प्राप्त करना है ये हमारी मगर आप अगर कह रहे हैं कि वो जो है

00:19:36:24 क्योंकि वो खाने को स्वादिष्ट नहीं बना सकता इसलिए हम उसमें किसी चीज की कमी मान रहे हैं। जिस चीज को आप नब्स कह रहे हैं। मैं ये नहीं कह रहा हूं। आप मैं वही कह रहा हूं। आप जो बोले चले जा रहे हैं। मैं ये कह रहा हूं कि नब्ज़ और बुद्धि बुद्धि और नब्ज़ इनको आप एक साथ मिला दे रहे हो। नब्ज़ या तो आप जो है ना वो आप वो कर दो। आप डिफाइन कर दो। नब्स आप क्या किसे कह रहे हो जो इंसान में नहीं है। फिर मैं देखूंगा कि जो चीज आप कह रहे हो वो इंसान में है कि नहीं। ठीक है। मैं नब्स को डिफाइन करता हूं। नफ्स एक अरबी लफ्ज है और इस लफ्ज का मतलब होता है एक ऐसी हवा एक ऐसी हवा जो हमारी बॉडी को लगती है। है ना? जो हमारी बॉडी में है। है ना? तो हमारी बॉडी के जिस भी ऑर्गन्स को लगती है, इंद्रियों को लगती है। तो वो इंद्रियां एक्टिव होती है और वो इंद्रियां बॉडी के अनुकूल ख्वाहिशित करती है। है ना? और बुद्धि करती है कि ये जो नफ्स ने यानी जो ये हवा हमारे ऑर्ग्स को लगी है और जो डिमांड हमसे ये करवा रही है ये बॉडी से जो डिमांड करवा रही है इसको असल में जब देखा जाएगा क्या इस डिमांड का आदेश ईश्वर ने दिया है या ना दिया है ये चीज चेक चेक करेगा

00:20:51:27 माइंड और नफ्स यानी वो हवा जो हमारी बॉडी को अंदर लगी है हमारे ऑर्गन्स के टच हुई है हमारे ऑर्गन्स में जो है लग रही है और हमसे ख्वाहिश करवा रही चाहत करवा रही है तो वो हवा जो होती है ना हवा हवा समझ लो हमारी बॉडी में ऑक्सीजन है ना पानी है सब कुछ है तो वो जो हवा के स्वरूप जो हमारे अंदर नफ्स है न्स हवा के स्वरूप तो हमारे बॉडी के अनुकूल ही और जैसे आपने मिसाल दी एक ऐसे व्यक्ति की जिसका माइंड थोड़ा ज्यादा ग्रोथ किया हुआ है और एक का कम किया हुआ है तो जिसका कम किया हुआ है वो भी स्वाद स्वाद में तो समझता है। ऐसा नहीं है कि वो स्वाद में नहीं समझता है। स्वाद में वो भी समझता है। समझ रहा है ना? जानवर समझता है। तो आप एक काम कीजिए। हम तो बंदर क्या जान अदरक का स्वाद और ये सारी चीजें हम बोलते हैं। लेकिन आप एक काम कीजिए। किसी भी जानवर को आप इतना इवोल्व करके बताइए। इवॉल्व करके बताइए। उसके मेंटालिटी से ही इवोल्व करके बताइए कि वो भी इंसानों की तरह। जैसे इंसान भी एक टाइम था इंसानों के बराबर की बात नहीं कर रहा हूं। मगर स्वाद में वो सेलेक्टिव होता है। मेरे मैं नहीं देखा था। मेरे मित्र के यहां पर एक स्वान था जिसे कुत्ता कहते हैं।

00:22:06:28 सुनिए उसको आप अगर फलाना वाला भोजन देता था वो तो वो अरुचि से खाता था। नहीं खाता था। मगर कुछ भोजन ऐसे थे जिनको वो तुरंत चाप जाता था। पूरा उसकी बॉडी शेर जो है ना खाता है बॉडी का जो ठीक है ठीक है दूसरा इसमें एक दूसरी जानकारी वो है कि जैसे जो कुत्ता है उसके मन में भी ये है कि मैं मरू नहीं मुझे चोट ना लगे मैं मरू नहीं वो उसके मन में भी ये भाव है ये तो मानते हैं ना आप चाहता है जीना चाहता किसी कुत्ते से ये कहते हुए सुना होगा ना आपने भी जीना जब आप उसे मारने का प्रयास करते हैं तो वो भागता है ना अब भागेगा वो तो क्योंकि उसको दर्द होगा भाई कोई भी चीज हो काटने को भी यही सिद्ध यही सिद्ध करता है कि उसके अंदर सर्वाइवल वो है डिजायर कि वो सर्वाइव करना चाहता है बचना चाहता है चाहता है सही है हां उसी को मैं कह रहा हूं जीना चाहता है। अब क्या है कि उसने

00:23:22:28 ऐसा कुछ नहीं किया कि उसको वो जो मांग रहा है वो ना दिया जाए तो ये उसके साथ अन्याय जैसा नहीं होगा। फिर तो वो क्या मांग रहा है आप बताओ? वो हमेशा जीना जीना चाहता है ना हमेशा मगर उसको मार दिया गया। जबकि उसने कुछ लिया नहीं था। आप हमेशा जीना तो इंसान भी चाहता है लेकिन मौत एक अटल सत्य है वो आनी है। हां मौत मौत एक अटल इंतजाम है ना उसके लिए इंतजाम किया है ना ऊपर वाले ने कि तुम यहां पे पहुंच के अपना सेटलमेंट कर सकते हो। मार कौन रहा है? भाई कोई नहीं मार रहा हो। अपनी मौत मर रहा हूं। मैं कह रहा हूं इंसान के लिए तो इंतजाम किया है ना। यही तो उसूल है। यही तो उसूल है कि हमें ईश्वर ने कौन सी चीजें बताई है जो हमारे लिए लाभदायक है और कौन सी चीजें हैं जो हमारे लिए हानिकारक है। कौन सी चीजें खाने योग्य है और कौन सी चीजें खाने योग्य नहीं है। तो ये ज्ञान के आधार पे ही तो हमें पता चलेगा ना। मान लीजिए एक व्यक्ति मैं वो नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं जो कुत्ते की जो आशा है कि मैं जिंदा रहना चाहता हूं। मगर उसको बिना बात के मार दिया। मर गया वो प्राकृतिक आपदा से मर गया। कैसे भी मर गया मर गया वो उसकी जो ख्वाहिश है वो उसके उसके बारे में कोई विचार कोई चिंतन नहीं

00:24:38:07 तो उसके साथ एक अन्याय नहीं हुआ कि वो पूरे जीवन चाहता था कि उसको भी अमरता प्राप्त हो जाए वो सर्वाइव करे पर वो मर गया तो ये आपको किसने बताया कुत्ता भी मोक्ष पाना चाहता है हां हां ये कुत्ता जो है मोक्ष पाना चाहता है ये आपको किसने बताया अरे भैया अभी आपने माना ना कि वो जो है बचना बचना चाहता है मैं मोक्ष अभी मोक्ष का वो मत लाइए बीच में उसके अंदर एक इंस्ट है कि वो सर्वाइव करना चाहता है हर हाल में बचना चाहता है भागता है मुझे मारते हैं तो इसका मतलब तो मरना ही है अंतते तो उसे भी मरना ही है चाहे वो मगर मगर उसके मरने के विषय में उसके मरने के विषय में जैसे इंसानों के लिए उन्होंने चिंतन मनन किया आपके अनुसार जो ईश्वर है उन्होंने चिंतन मनन किया वैसा ऐसा चिंतन मनन जानवरों के लिए नहीं किया। जबकि दर्द उन्हें भी हो रहा है। मौत से वो भी डर रहे हैं। सुख वो भी प्राप्त करना चाहते हैं। आनंद वो भी प्राप्त करना चाहते हैं। मगर उनके लिए नहीं किया कुछ भी।

00:25:44:24 किसने? ईश्वर ने नहीं किया। मैं पूछ रहा हूं। हम जहां रह रहे हैं ना जहां रह रहे हैं। भूलोक में जो रह रहे हैं। हम जमीन पर जो रह रहे हैं। जमीन से ऊपर आसमान है। है ना? तो आसमानों की जिंदगी अलग है और जमीन की जिंदगी अलग है। और एक जिंदगी मरने के बाद जिसको हम बोलते हैं आलम बरजक। आलम बर्जक बोलते हैं जिंदगी को उस वो जिंदगी अलग है। मतलब हम टॉपिक पे अभी तक आए नहीं। हां। तो बस इसको इसको यहां पे मतलब फुल स्टॉप मान ले कि नहीं ईश्वर ने जो है उनकी ये जो चीज है कि वो जीना चाहते हैं वो सुखी होना चाहते हैं इससे ईश्वर को कोई मतलब नहीं है इस्लाम के अनुसार क्योंकि उसने उसको बनाया ही ऐसे मतलब कैसे नहीं देखो हम इंसानों को जो ईश्वर ने बनाया ना तो हम ही उनकी देखरेख करेंगे जैसे मान लो एक कुत्ता मेरे मोहल्ले में रहता है ना और वो जीना भी चाहता है है ना और मैं देख रहा हूं के उसके पास जो है भोजन की कमी है। तो ये मेरी जिम्मेवारी बनती है कि उस कुत्ते तक भोजन मैं पहुंचाऊं क्योंकि मैं उसका ख्याल रखूं। ये [गला साफ़ करने की आवाज़] मेरी जिम्मेदारी

00:27:00:00 बनती है। ईश्वर ने मुझे जिम्मेदारी दी है कि मैं अल्लाह की ईश्वर की बनाई हुई हर एक चीज के ऊपर मैं क्या करूं? ध्यान दूं। भाई साहब आप आप यहां मेरा मैं सवाल मैं मेरे से शायद कोई गलती हो रही है। मैं आपको शायद अपना सवाल समझा नहीं पा रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं कि एक दिन कुत्ते को मरना है। एक दिन इंसान को भी मरना है। इंसान के लिए मौत के आगे की चीजें इंसान को सर्वदा सुखी रखने के लिए यदि वो इस्लाम के अनुसार चलता है तो उसके लिए इंतजाम ईश्वर ने किया है। मगर कुत्ते इत्यादि जो हैं है ना? उनके लिए कोई इंतजाम नहीं किया। जबकि उनके अंदर भी ख्वाहिश है कि मैं जीऊं, मैं सुखी रहूं। तो वो उस वो जो अंतिम सुख है इंसान उसे दे सकता है। पल भर के लिए राग दे सकता है। एक दिन का भोजन दे सकता है। मरते दम तक का भोजन दे सकता है। परंतु उसे वो जो अनंत सुख उसको चाहिए कुत्ते को। मैं कभी दुखी ही ना हूं। वो जो अनंत सुख चाहिए। आप ये कहना चाह रहे हो कि कुत्ता ये चाहे कि मैं भी इंसानों जैसे जिंदगी गुजारू। यही कहना चाह रहे हो। कुत्ता ये नहीं

00:28:15:01 चाहता है। कुत्ता सुखी रहना चाहता है। वो इंसानों को नहीं वो ये नहीं जानता इंसानों का जीवन सुखी है कि नहीं है। वो अपनी बात जानता है कि भैया मैं मरू नहीं। मुझे कोई दुख नहीं होना चाहिए। उसप उसप उसप इस्लाम के अनुसार जो ईश्वर है उसने कोई बात की है उन लोगों की कि नहीं की? बस इतना बता दीजिए हम लोग विषय पर आ जाए। की है बात कि नहीं की है? इस्लाम ने जानवरों के प्रति जो कुछ उनके लिए जमीन में रखा है वो सब वो खा रहे हैं और खुसुखी है। नहीं जैसे देखिए जो आप बात कर रहे हैं कुरान से हमें मिलता कुरान से कुरान से हमें मिलता क्या है? जैसे जो हमारे अंदर मौत का खौफ है वो मौत का खौफ दूर होगा। भाई अगर तुम कुरान को फॉलो करोगे तो तुम्हारे लिए मौत के बाद भी एक बहुत वैसी जीवन आपके लिए सुरक्षित है। अगर कुरान को फॉलो करोगे तो अभी के लिए मान लेते हैं अनंत आनंदमय है। है ना? यहां पर मतलब आपको आपके लिए हर चीज सकारात्मक है। कोई भी चीज ऐसी नहीं जो आपको बुरी लग सके। ठीक है? तो आपकी जो इच्छाएं हैं उनकी पूर्ति करने के लिए इस्लाम के अनुसार जो ईश्वर है उसने इंतजाम किया है। पर ये जो जानवर इत्यादि है इनकी इच्छाओं की कोई

00:29:31:15 मतलब कोई इंतजाम नहीं है। जिस कारण से जो कुत्ते का जो वो है एंड वो उसके साथ ही अधूरा है। अतृप्त मतलब कि वो जो सदा सुखी रहना चाहता था सदा आनंदमय रहना चाहता था वो उसका नहीं सुना गया। इंसान का सुना गया इंसान का सुना गया और कुत्ते का नहीं सुना गया। कुत्ता भी मांग रहा है कि मुझे सुख चाहिए, मुझे आनंद चाहिए, मुझे अमरता चाहिए। वो मैं कह रहा हूं। नहीं आपको बताया किस कुत्ते ने आपको बताया कि मुझे आनंद चाहिए, मुझे सुख चाहिए और मुझे भी स्वर्ग चाहिए। मुझे भी नर्क चाहिए और मुझे भी जो भाई साहब अभी मैंने अभी मैंने नरक इत्यादि नहीं बोला है। मैंने बोला है कि वो कभी मरना नहीं चाहता है। वो कभी मरना नहीं चाहता है। वो ऐसी वो ऐसी वो ऐसी कोई चीज नहीं चाहता है जो उसे ठीक ना लग रही हो। वो ऐसी कोई चीज नहीं चाहता। देखिए आप आप ख्वाहिश करवा रहे हैं कुत्ते से। कुत्ते से आप ख्वाहिश करवा रहे हैं। मैं अभी आप अभी मैं ख्वाहिश नहीं करवा रहा। मैं अभी मैं अभी आप आपने खुद बोला ना वो भी जीना चाहता है तो कुत्ता अगर कुछ सोचता है तो ये बात के भाई साहब अभी आपने माना कि वो जीना चाहता है अभी आपने माना हर कोई जीना चाहता है हर कोई जीना चाहता है तो वही तो मैं

00:30:46:19 कह रहा हूं कि इंसानों के लिए जीवन के बाद भी एक सुखी संसार की व्यवस्था है। जानवरों के लिए क्या है? तो आप यह या तो यह कह दीजिए कि हां पार्शियलिटी है कि जानवरों के लिए कुछ नहीं है। बता रहा हूं कि जानवरों के लिए क्योंकि जानवर के अंदर वो रूह मैं अब रूह की बात आएगी। जानवरों के अंदर वो रूह नहीं है कि जिस रूह की वजह से इंसान को बसीरत मिली, फवाद मिला और तीसरी चीज समात मिली। समात समझ रहे हैं? तीनों चीजें इसका कुत्ता इस दुख के यानी कि कुत्ता इस दुख के साथ ही उसका अंत हो जाएगा कि भैया मैं जो है जो चाहता था मुझे नहीं मिला। मैं वही तो कह रहा हूं उसको नहीं है। वो कह रहा हूं के बारे में आप बता रहे हैं तो ये कुत्ते ने आपको बताया क्या? देखो हमारी इस गुफ्तगू से कोई मतलब नहीं निकलेगा। हम टॉपिक पे आएंगे ठीक रहेगा क्योंकि कुत्ते के बारे में विषय में हम बात करने नहीं बैठे।

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