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00:00:05:06 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं कि आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और आज की जैसा आपने देखा होगा। आपको सूचना मिल गई होगी कि हमारी चर्चा किसके साथ होने वाली है और किस विषय पर होने वाली है। रामपाल के बहुत पुराने अ मतलब पुराने तो होंगे ही जो होंगे ही हमारे ओपोनेंट ओपोनेंट भी क्या कहें इनको मतलब आपने कई बार इनके साथ हमारी चर्चाएं देख ली है बाबू और कई बार यह जब निशब्द हुए हैं तो चर्चा से बिना बताए गोल भी हो गए हैं और एक बहुत अगर पिन पॉइंट की बात करूं तो एक जगह इनकी किताब में मैंने दिखा दिया कि अर्जुन को मुक्ति मिल गई। अर्जुन को मुक्ति कैसे मिल गई? जब वहां पर तत्वदर्शी नहीं था तो तो बाबू जो है चले गए थे बिना कुछ बताए। खैर अभी ले लेते हैं बाबू।
00:01:12:04 बाबू अपना कैमरा चालू कर लीजिए। जय श्री राम बाबू। हम क्या हुआ? नहीं आना है क्या? चले गए क्या? अभी तो हमने टेस्टिंग भी कर ली थी भाई।
00:01:54:07 हम क्या हुआ बाबू? अरे भाई अरे भाई बाबू अभी आप बड़े कॉन्फिडेंटली बैठे हुए थे। कहां चले गए? आप एक काम करिए दोबारा से जुड़ जाइए। मैं आपको हटा रहा हूं। ठीक है। मुझे लगता है कोई टेक्निकल इशू होगा।
00:02:31:13 बाबू राम एंटर्ड द स्टूडियो। अच्छा एंटर हो गए। हां बाबू पेस्ट लिखा है बाबू। अरे भाई इतना समय नहीं है। यह हाल है इनका
00:03:09:06 ऐसे होगी इनकी सिद्धि जेलधाम बाबा की काफी दिन हो गए ना वो भी क्या दिन थे हां आए दिन एक दो हर एक दो दिन छोड़ के रामपाल की ज्ञान गंगा अज्ञान गंगा पर चर्चा होती जी हम सारे अपने जो अ सिद्धांत निष्ठ भाई हैं या फिर रामपाल के रामपाल से पीड़ित जो भाई थे वो
00:03:47:03 हम रामपाल से पीड़ित थे वह सब यहां जुड़ते थे और लगभग काफी दिन तक वह दौर चला था। हां बाबू कैमरा ऑन करें। जेलधाम का वासी हूं मैं। हां, सही कह रहे हैं। कोई नहीं अभी अपने अस्तित्व पर भी इनको वो हो जाएगा।
00:04:27:18 यह कमेंट आया है जेल धाम का वासी हूं मैं रामपाल मेरा नाम आवान से हार गया हार के आएगा मेरा चेला बाबू राम कभी था आश्रम मंच माइक और भक्तों की भरमार अब गिनता हूं दीवार की ईंटें यही मेरा दरबार वाह वाह वाह वाह वाह वाह वैसे जो इसमें यदि कोई व्यक्ति इस शायरी में दोष भी ढूंढेगा ना कि बहुत निचले स्तर की है तो मेरे ख्याल से रामपाल जैसी शख्सियत के लिए ऐसी ही लाइनें अच्छी है। बहुत ज्यादा संस्कृत निष्ठ हिंदी या शुद्ध हिंदी में लाइनें लिखेंगे तो वह जो है अपमान हो जाएगा संस्कृत निष्ठ भाषा का तो ये अच्छा है उसके लिए स्तर भी तो होता है ना व्यक्ति का किस व्यक्ति के लिए किस स्तर पर बात की जाए
00:05:25:18 तो बाबू हमारे पास इतना समय नहीं है। लगता है तुम्हारे पास वेदों में प्रमाण नहीं है। कबीर भगवान है। हम लगता है बाबू के फोन में कुछ हो गया है। हां बाबू। जय श्री राम सभी को।
00:06:04:12 मुझे लगता है बाबू का मामला टाटा फिश हो गया आप लोगों को जो आज एक बढ़िया एंटरटेनमेंट मिलने वाला था। शायद नहीं मिलेगा। फोन आ गया होगा बाबू के पास। बाबू तुम गलत जगह जा रहे हो। मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में। अरे बाबू क्या हो गया? जबकि मैंने मंच पर मतलब ये लाइव स्टार्ट करने से पहले बाबू को स्टेज पर लिया था। बात की थी कि मेरी आवाज आ रही है कि नहीं आ रही। आपका कैमरा चालू है कि नहीं चालू है। और तब ये हाल है इस व्यक्ति का। पता नहीं क्या कर रहा है।
00:06:47:10 बाबूराम वापस आ रहे हैं तब तक मेरे प्रश्न का उत्तर दो। वर्ण व्यवस्था को कर्म के आधार पर जन्म के आधार पर बनाया गया। भाई आप जो है अपना फेस लेकर के आ जाइए। फॉर्म भरिए। आपके प्रश्नों का उत्तर दिया गया है और दिया भी जाएगा। एक भाई साहब कर्म के आधार पर कह रहे हैं। अच्छा कर्म के आधार पर आवश्यकता क्या है? नामकरण की कि ये ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र है। क्या आवश्यकता है? जब जो व्यक्ति जो कर्म कर रहा हो उसको वही मान लो। उसमें नामकरण की आवश्यकता क्या है? भाई कोई व्यक्ति सूत्र का कार्य कर रहा है तो उस समय उसका उपयोग वहां ले लो सेवा देने में। यदि कोई व्यक्ति सेवा दे रहा है तो जब कर्म के आधार है तो उसमें फिर नामकरण घोषित करने की आवश्यकता ही नहीं है। घोषित करने का तो मतलब ही है ना कि कहीं से उनको पहले से ठप्पा दिया जा रहा है। कर्म क्या क्योंकि कर्म तो व्यक्तिगत पलपल में बदल जाता है। चातुर वर्णमया सिस्टम भगवान कह रहे मैंने बनाया और जो लोग यह दावा करते हैं वो कहते हैं वो कि मनुष्यों के पास फ्री
00:08:02:12 विल है। फ्री विल है तो फिर भगवान का बनाया हुआ सिद्ध कहां हो रहा है? ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र वो तो निर्णय तो वो ले रहा है ना। कौन ले रहा है? मनुष्य। और मनुष्य जब तक निर्णय लेता रहेगा कि मैं कप्तान बनूंगा, मैं विकेटकीपर बनूंगा, मैं बॉलर बनूंगा, मैं बैट्समैन बनूंगा, तो उस टीम का क्या हाल होगा? लड़ाई होगी पद के चक्कर में। वही हो रही है। पद के लिए लड़ाई। टीम तो वह होती है ना जो मैदान के बाहर से तैयार होकर आती है और अपना काम करती है। समझ में आया? बाकी आप फॉर्म भरिए। आपका स्वागत है। आमने सामने बात करेंगे। वैसे भी काफी दिन हो गए वर्ण व्यवस्था पर बात नहीं हुई है
00:08:46:16 और मैंने सुना है वह कोई आर्य समाजी चैनल है नए प्रकार का अलंकार शुरू किया गया है भाई हम ₹10 का इनाम रखते हैं जीतने वाले के लिए मुझे नहीं लगता कोई विद्वत परिषद होगी मुझे मेरी जानकारी में नहीं कि दयानंद जी ने ऐसा कोई नाम रखा होगा विद्वान तो थे ही संप्रदा राय विहीन थे तो क्या हुआ विद्वान तो थे ना तो इस तरह की निम्न स्तर की बातें नहीं करनी चाहिए कि हम ₹100 देंगे ये है वो है ये तो वो करता है पवन दास रामपाल का ही एक बागी चेला जो रामपाल की जो मेन गैंग है उससे अलग वो आए दिन उसके वीडियोस देख लो जाकर कुछ चिल्लाया करेगा मैं ₹1 लाख दूंगा ये है वो है ये स्तर से घिरी हुई चीजें हैं ये नहीं करनी चाहिए कोई सिद्धांत निष्ठ व्यक्ति होगा क्या जो पैसों के लिए आएगा वहां पे हम
00:09:47:01 बाकी मैं आके कर देता एक बार कोई इच्छा तो हुई भाई जा के तुम्हें तुम्हारे सिद्धांतों का आईना दिखा दूं आप लोगों को और दिखाया भी है पर अब तुम वो जो विजय यह भी मन में आया कि वह जो विजय राशि है ना वह जो राशि को राशि प्राप्त होगी ₹100 उसका कहूंगा कि ये ले भाई दूध पी लेना नाग पंचमी के दिन ₹100 का ये सब चीजें थोड़ा स्तर विहीन चीजें हैं। इस पर ध्यान दें एक स्तर बना के चले हैं तो उसको बना के रखें। गिरो मगर उस झरने की तरह जो गिरकर भी अपनी सुंदरता को होने नहीं देता। रामपाली मत बनो।
00:10:37:22 बाबू बहुत देर हो गई अब 11वा मिनट चल रहा है कैमरा ऑन करो भाई वैसे आज मुझे मेरे घर से आदेश प्राप्त हुआ था कि चर्चा चर्चा जल्दी पूरी करना। तो चर्चा जल्दी पूरी करने का मतलब समझते हैं आप लोग? मैं चाहूं तो चर्चा जल्दी पूरी कर सकता हूं कि नहीं कर सकता हूं? आप ही आप ही लोग बताइए। बताइए अगर मैं चाहूं तो कोई भी चर्चा बहुत जल्दी पूरी हो जाए। खासतौर पर रामपालियों के समक्ष तो हो ही जाएगी। क्या तकनीक ऐसी हो सकती है? कि मेरे घर के द्वारा आदेश जो मिला है कि भाई जल्दी चर्चा पूरी करना तो उसके लिए कौन सी तकनीक आवश्यक हो सकती है?
00:11:51:18 बाबू ये आखिरी चांस है तुम्हारा। ठीक है। वैसे ही मुझे आदेश मिला हुआ है घर से। चर्चा आज की जल्दी पूरी करनी है। हां। अच्छा कोई है जो आहान का समर्थक है और वह मुझे बता सकता है कि मेरी मेरे मतलब हम लोग मेरा मैं क्या ऐसा करूं कि चर्चा तुरंत समाप्त कोई बता सकता है चलिए मैं एक भेद स्वरूप सम्मान स्वरूप एक जो है ग्रंथ गुरुदेव का एक ग्रंथ पहुंचाऊंगा। क्या बात है देखिए यह देखिए यह विजेता है।
00:12:33:22 जितने ही बात शुरू होगी टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चैन खत्म हो गया टाटा बाय बाय केवल मुझे सामने वाले से क्या पूछना है परंपरा शास्त्रों पर बात कर रहे हो परंपरा शास्त्र कैसे आए अगर मैं ये वाली बातें पहले ही रख दूं किसी चर्चा में जैसे वो प्रतीक आया था उस दिन बहुत देर तक चली है चर्चा तीन घंटे और मैं यह बात पहले ही रख दूं कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं चर्चा शुरू होते ही समाप्त हो गई दूध दही थ्योरी क्लियर बाबू मुझे ऐसा लग रहा है कुछ तकनीकी खराबी है तुम्हारे पास उसको शुद्ध सही कर लो और फिर जो है आप दोबारा आ जाइए और जो तो
00:13:34:02 अभी जिन्होंने उत्तर दिया था आर आर मिश्रा जी ये हमसे संपर्क करें। इनको आह्वान की ओर से घट ग्रंथ जो है भेंट स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इन्होंने उत्तर दिया था परंपरा। हां दूसरा उत्तर यही दूसरा तरीका यही है। चर्चा को जल्दी पूरा करना है तो क्या करना है? सीधी बात नो बकवास। परमार्थ पथ चर्चा को जल्दी पूरा करना है तो यह करना है
00:14:11:25 हम ठीक है बाबू तुम फिर आ जाओ तो परमार्थ पथ हमारे दूसरे विजेता है इनको भेंट प्राप्त होगी हमारी ओर से ग्रंथ के स्वरूप में आप भी हमसे संपर्क करें WhatsApp के द्वारा। ठीक है? ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं?
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00:14:39:25 हां भाई बाबू बहुत बढ़िया। आ गए करत करत अभ्यास जड़मती होत सुरान ररी आवत जात ते सिल पर निशान डडी डडीिकेशन तो मानना पड़ेगा बाबू तुम्हारा। मुझे मालूम था बाबू जी जो है फस गया बेचारा उस हां बाबू बताइए रामपाल जी का ज्ञान आपको क्यों वो लगता है प्रामाणिक
00:15:12:09 जी बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय हो बंदी छोड़ कबीर भगवान की जय हो सत साहेब राम राम आपके सभी दर्शकों को सत साहिब ये आपने अभी-अभी जो कबीर को भगवान और रामपाल को भगवान कहा है और बंदी छुड़वाने वाला कहा है। यह किस आधार पे कहा है? जी बताइए जिस आधार से छुड़ाया जाता है उसी आधार से जिस आधार से छुड़ाया जाता यानी कि यानी कि कबीर जो है वो ईश्वर है
00:15:51:06 जी जी सर्वशक्तिमान है तो देखिए हम आपसे बहुत कठिन से जुड़े हैं तो आपसे हम सर्वप्रथम हम एक दिक्कत है आप सिर्फ यहां पे अभी भगवान मत कहिए मेरे चैनल अपने शब्द वापस ले लीजिए या फिर भगवान सिद्ध करिए पहले। हमने हमने हमने जो बोला है तो हमने अपने गुरु को अपने भगवान को प्रणाम किया है। हमने तो आपको कुछ नहीं बोला। भगवान किसी का अलग नहीं हो सकता है। सबका भगवान एक ही हो सकता है। किसी का अलग नहीं हो सकता है। आप आप जिसको यहां भगवान कह रहे हैं भगवान के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। आप उसको भगवान सिद्ध करिए। या तो अपने शब्द वापस लीजिए। हमने अपने गुरु को अपने भगवान को प्रणाम किया। भाई मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं भगवान श्री राम की जय। और अगर तुम पूछोगे मैं श्री राम को भगवान सिद्ध कर दूंगा। सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दूंगा। अब तुम यदि सर्वशक्तिमान सिद्ध कर पा रहे हो कबीर को तो तुम कहो वरना अपना वापस ले लो। दूसरी बातें करो। और अपने घर पे खूब लो नाम। अपने घर पे जाके आप खूब नाम लीजिए उनका। अच्छा अच्छा कोई बात नहीं तो आपने श्री राम सिद्ध करेंगे ना सक्षम फिलहाल
00:17:06:28 आपने ये कहा है ना फिलहाल आपने ये माना है ना हम करेंगे सिद्ध फिलहाल आपने शुरुआत की है तो आपको सिद्ध करना है करेंगे ठीक नहीं हम हम उसको हम सिद्ध करेंगे लेकिन हम ये कह रहे हैं कि आपने बोला है कि हम सर्वशक्तिमान सिद्ध करेंगे श्री राम को ठीक है तो आप करिए लेकिन इस इस पर हम आपसे चर्चा करने से पहले हम कुछ बातें रखेंगे अपनी। इसके बाद हम आपसे चर्चा करेंगे। नहीं नहीं वो बातें आप तब रखिए जब अपने शब्द वापस लीजिए पहले। हां हम वापस ले लीजिए। देखिए हम संत रामपाल जी महाराज को अपना गुरु मानते हैं। कबीर साहब को परमात्मा मानते हैं। हम अपने लिए मानते हैं। हम अपनी बात को अपने पास रख रहे हैं। अपना वापस लेते हैं। आपसे हमारा उसमें कोई नहीं है। परमात्मा सिद्ध करिए ना। हमें यदि आप बता रहे हैं। आप मन में मानिए। आप यदि हमें बता रहे हैं हमारे सामने कोई असत्य बात करेंगे यदि आप तो हम टोकेंगे ना आपको आपके लिए भी वो परमात्मा नहीं है उसको हम हम सिद्ध करेंगे कि कबीर परमात्मा अभी अभी अगर आपने पहले वो पॉइंट नहीं उठाया होता तो हम कुछ ना कहते वो पॉइंट आपने उठाया हां ठीक है हमने मैंने आ के कोई क्लेम किया क्या मैंने आ के
00:18:22:02 कोई क्लेम किया क्या हम सिद्ध करने के लिए तैयार है बात आपको समझ आप कर दीजिए ना कर दीजिए बहुत देर थोड़ी ना लगेगी कर दीजिए फिर आगे बढ़िए चलिए ठीक है ठीक है करेंगे करेंगे थोड़ी रुक जाइए रुक जाइए शांत धैर्य बना करके देखिए नहीं तो आप आप वो शब्द वापस ले लीजिए आगे चलते हैं आप कह दीजिए अभी फिलहाल के लिए मैं इस बात को रख रहा हूं कि मैं उन्हें भगवान नहीं मानता फिर आगे चलिए नहीं तो अगर भगवान कहा है तो अब सिद्ध करो पहले मैंने कबीर भगवान 100% मानता हूं हां तो सिद्ध करो 100 100 में 99 भी नहीं है। 100% है कि मैं कबीर परमात्मा को मानता हूं। ठीक है? तो क्या वो सर्वशक्तिमान है? जी हम माता के गर्भ से जन्म ले सकता है? नहीं लेता है। तो वो तो सर्वशक्तिमान नहीं रहा। फिर
00:19:16:14 कैसे? अरे सर्वशक्तिमान का अर्थ क्या है? सर्वशक्तिमान का अर्थ है कि जो सब कुछ कर सकता है हम तो वो वो गर्भ से जन्म क्यों नहीं ले पा रहा है फिर वो गर्भ से जन्म उसको लेने की जरूरत क्या है वो तो अपने अपने नीचे अरे भैया फिर वही बात हो गई जरूरत ना होना वो थोड़ी ना है मैं कह रहा हूं ले सकता है कि नहीं कैपेबिलिटी है कि नहीं वो ले सकता है लेकिन लेता नहीं है क्योंकि उसने उत्पत्ति किया है उसने अपने समय से उत्पत्ति किया है वो लेता नहीं है इस बात इस मर्यादा को तोड़ सकता है कि नहीं? मर्यादा नहीं तोड़ता वो। वो सर्वशक्तिमान है इसलिए मर्यादा नहीं तोड़ता। अच्छा ये कहां पर लिखी है परिभाषा? कबीर सागर में लिखा है। वो सर्वशक्तिमान है। हां। सर्वशक्तिमान ठीक है। सर्वशक्तिमान भी मर्यादा किसके लिए होती है? मर्यादा का अर्थ क्या है? मर्यादा का अर्थ है कि वो इतने इतने के अंतर्गत वो कार्य को करेगा। मर्यादा मर्यादा की आवश्यकता क्या है? मर्यादा की आवश्यकता इसलिए है कि जो भी मतलब कार्य होगा एक नियम के आधार से होगा। अरे क्यों? क्यों
00:20:31:18 होगा नियम के हिसाब से बताइए? नियम के हिसाब से इसलिए होगा कि अगर नियम को अगर उल्लंघन करके अगर कोई अगर चल रहा है तो उसमें कुछ भी हानि हो सकती है। लेकिन अगर यानी कि यानी कि भगवान को भी हानि होगी। भगवान को भी भय है। भाई किसी भी चीज की नियम होती है। अगर नियम तोड़ेगा तो उसका हानि होगी। बाबू मैंने आपसे क्या पूछा है? भगवान को भी हानि होने का भय है। बिल्कुल 100% भाई अगर अगर नियम तोड़ेगा तो हानि तो होगा ही। उसमें कौन सी शक की बात है? तो क्या हानि होगी उसकी? जैसे जैसे हमने नियम तोड़ा तो हमें तो मोक्ष नहीं मिलेगा। नरक मिलेगा। उसने नियम तोड़ा तो उसको क्या मिलेगा? क्या हानि है? उसको उसको जो जिस कार्य को करेगा अगर वो नियम तोड़ के करेगा तो उसमें उसका हानि होगी। अरे हानि होगी तो उसको कष्ट होगा। जैसे हमारी हानि यही है कि हमें कष्ट होगा। एट द एंड उसको कष्ट होगा।
00:21:33:25 उसको कष्ट नहीं होगा क्योंकि उन्होंने सब चीजों को अपने शब्द से उत्पन्न किया है। मैंने क्या पूछ हानि सिद्ध करो ना भगवान की हानि कैसे होगी? सिद्ध करो फिर कैसे होगी? हानि ऐसी जैसे मान लीजिए कि भगवान ने अपने शब्द से उत्पन्न कर लिया। ठीक है? शब्द से शब्द से उत्पन्न करने के बाद अगर वो अपना रखा है अगर उसको अगर शब्द को अगर वापस ले लेता है उसने उसका विचार था कि सृष्टि रचे और सृष्टि ना रच करके अगर शब्द को पूरा वो तोड़ देता है तो उसका सृष्टि नहीं रची जाएगी। तो इसलिए इसका मतलब सृष्टि इसका मतलब सृष्टि रचना उसका लाभ है। सृष्टि रचना से उसे खुशी मिल रही है। बिल्कुल जब सारे ब्रह्मांडों को उसने उत्पन्न किया तो किसी रचना से उसे खुशी मिल रही है। बिल्कुल अच्छा और सृष्टि रचना नहीं होगी तो उसे दुख होगा। कौन सी आप कौन सी सृष्टि रचना कह रहे हैं? ये जो कोई भी कोई भी सृष्टि रचना अगर सृष्टि रचना नहीं की उसने नियमों के विरुद्ध जाने के कारण तो उसे दुख होना मान रहे हो आप। नहीं कि ये जो हम लोग यहां पर जो ये काल भगवान के 21 ब्रह्मांड के अंतर्गत जो सृष्टि रची जा रही है। उसकी
00:22:49:15 उसको कष्ट कैसे होगा ये बता दो। कष्ट होता है कि नहीं होता है? पहले ये बता दो। कबीर को कष्ट होता है ना जैसे जैसे कष्ट ऐसे होता है भगवान को भी दुख है भगवान को भी दुख हो सकता है भगवान को दुख ऐसे होता है कि जैसे हम लोग यहां पर दुखी होते हैं नरक में जाते हैं 84 में जाते हैं तो हम हम परमा हम हमने भगवान के अंश हैं तो हम लोग जब यहां पर नर्क में जाते हैं अगर यहां चिल रोते हैं चिल्लाते हैं तो उसको वहां दुख पहुंचता है कि हमारा यह पुत्र हमारा बच्चा यहां पर नर्क में आज भटक रहा है हमने जब सही मार्ग बताया इसने नहीं माना था तो इस बात यानी कि भगवान में भी अभाव है, दुख है, कमी है, पूर्ण नहीं है। फिर वो वो पूर्ण है। लेकिन उसकी संतान जब यहां पर दुखी है तो मेरे भाई जो दुखी है वो मुक्त कहां से हो गया? जो किसी भी कारण से दुखी हो सकता है वो मुक्त कैसे हो गया? अच्छा आप एक बात आप एक बात बताओ। ऐसे समझ लो। जैसे मान लो कि हम यहां से मुक्त हो के चले गए। तो कहां जाएंगे? भगवान के लोक में जाएंगे ना। भगवान के लोक में जाएंगे ना जी कबीर के लोक में जाएंगे ना तो वहां जाकर के उसके बाद क्या हमें किसी भी प्रकार का दुख हो सकता
00:24:04:19 है नहीं वहां नहीं होता अच्छा मतलब वहां पर भगवान को दुख हो सकता है हमें नहीं हो सकता वहां पर सत्यलोक में कोई दुख नहीं होता वहां पर भगवान को दुख जब आप भगवान का दुख होना स्वीकार कर रहे हो तो तो फिर हम तो जीव है ना। ये बताइए कि अगर किसी बाप का अगर बाप के सामने किसी बेटे को कोई मार रहा है तो क्या बाप को दुख नहीं होगा? बाप को दुख बाप सर्वशक्तिमान नहीं होता ना। जो बाप जिस बाप से आप तुलना कर रहे हो वो सर्वशक्तिमान नहीं है ना। आप सर्वशक्तिमान की तुलना एक हाड़ मास के पंच भौतिक शरीर से तुलना कर रहे हो आप भगवान की। इसीलिए कहते हैं चक्कर में एक मिनट आप आपका यह कहना है कि अगर कोई अगर बाप को अगर बेटे के दुख से अगर दुखी है तो वो सर्वशक्तिमान नहीं है। आप ये कहना चाहते हो? अरे भैया इसका मतलब जो बाप है वह सर्वशक्तिमान मान रहे हो उसे अगर बेटे के दुख से वो दुखी हो रहा है फिर भी भाई अब जो हमारा भगवान को सच्चिदानंद कहा गया है कि नहीं भगवान को सच्चिदानंद कहा गया है कि नहीं
00:25:21:15 सच्चिदानंद और सच्चिदानंद घन ब्रह्म में अंतर है। अब कौन से भगवान की बात घन मैं कह रहा हूं सच्चिदानंद घन ब्रह्म कहा गया है कि नहीं? चलो हां वो कहा गया क्या अर्थ है इसका उसका नाम है ये नाम का अर्थ नहीं होता सत कुछ नहीं पता है नाम का अर्थ नहीं होता चले आए नाम का अर्थ है इसका सुनो सत मतलब स्वरूप से सत कभी ना चेंज होने वाला चित मतलब अखंड ज्ञानी सतचित आनंद मतलब अनंत आनंद जिस आनंद में ब्रेक नहीं लग सकती वो है भगवान अगर उसके भी आनंद में ब्रेक लग सकती है तो वो सच्चिदानंद कहां से सिद्ध हुआ सच्चिदानंद घन ब्रह्म कहां से सिद्ध हुआ शिवश का शिवश का अर्थ करिए आप शिवांश का अर्थ क्या होता है शिवका अंश
00:26:23:03 शिवकांश हो गया अच्छा अच्छा अच्छा हां चलिए अब सुन लीजिए अब सुन लीजिए इसके बाद चर्चा करेंगे अब अब आपका हो गया। अब मेरी बात समझ लीजिए। अभी हम आपसे बोलना चाह रहे थे। आपने बोलने नहीं दे रहे थे। अभी हमारी बात पूरा नहीं हुई थी कि हमने जब आपके चैनल पर अभी ज्वाइन होना चाह रहा था। बहुत कोशिश किया तो पता नहीं क्यों हट जा रहे थे। आपके इस पर क्या लिखता है कि दिस दिस होस्ट हैज इनेबल लोकल रिकॉर्डिंग। मतलब इस पर लोकल रिकॉर्डिंग बोल रहा था कि आप ये लोकल रिकॉर्डिंग है। तो मैंने काफी कोशिश किया इस पर ज्वाइन नहीं हो पा रहे थे। अब दूसरी बात यह है कि ये बकवास बातें हमें ना बताइए। हम आपको बार-बार ऊपर ले रहे थे तब आपने जो है अपना कैमरा ऑन नहीं कर पा रहे थे। ठीक है? कोई बात नहीं। अब आप दोबारा उस पे आइए विषय पे। अब आप विषय पे आ जाइए। आपने कहा हमारा ईश्वर आपने कहा हमारा ईश्वर दुखी होता है तो दुखी होता है तो इसका मतलब उसका जो आनंद है वो अनंत आनंद नहीं है उसमें ब्रेक लग सकती है एक मिनट एक मिनट भाई साहब जब ब्रेक लग सकती है ब्रेक लग सकती है तो ऐसे आनंद की किसको जरूरत है शांति बना लीजिए आपके सारे प्रश्न का उत्तर देंगे हम ऐसे नहीं जाएंगे
00:27:38:04 उत्तर देके जाएंगे थोड़ी शांति बना लीजिए हमारा आपसे कहना है हमारा सर्वप्रथम हमारा यह कहना है कि आप हमें डिबेट से अपने से आप हटाओगे नहीं अगर मैं हट भी गया तो आपको जॉइ लेना होगा। नहीं हमारे पास हमारे पास व्यर्थ का समय नहीं है। अगर आप यहां पे आ के जेलधाम निवासी की जो लीलाएं हैं वो वाली जिनके कारण वो जेल में पड़ा हुआ है वो बातें आप यहां बताने लगोगे तो हमें हटाना पड़ेगा आपको। जी हम उसको नहीं बताएंगे आपको। हमारा प्रश्न कोई और ये मैंने केवल उदाहरण दिया आपको। अगर आप व्यर्थ की चीजें करेंगे तो हटाना पड़ेगा हमें आपको। हम यह आपके साथ वो नहीं और आप अपने मन से कई बार भागे भी हैं। आप अपना जवाब बाबू बाबू देखो मेरे पास बहुत ज्यादा समय नहीं है। आप मेरे लिए एक नगण्य व्यक्ति हैं। कोई इंपॉर्टेंट नहीं रखते आप। मैं मैं आपको तुरंत हटाऊंगा। फालतू की बातें अगर करोगे तो। सीधे जवाब दो। आपका आपका जिसको आपने अभी भगवान कहा है उसको दुख होता है। माना आपने। इसका मतलब वो सच्चिदानंद नहीं है। और आपने अभी एक बेवकूफी और की है कि सच्चिदानंद का कोई अर्थ नहीं है। यह भी बेवकूफी कर दी आपने। आप आप वो चीज दिखाइए कि भगवान को दुख नहीं होता। वो
00:28:53:08 दिखाइए आप कहां पर लिखा है? अरे सच्चिदानंद अपने आप में ही ये बात है ना। अच्छा ये बताओ भगवान को भी दुख भगवान को भी दुख होता है तो हमारे और भगवान में अंतर क्या रह गया बताओ? चलो नहीं मनगणित नहीं चलेगा। प्रमाण दीजिए कहां पर कि दुख नहीं होता है। दिखाइए प्रमाण। अरे यही प्रमाण है उसको उसको सच्चिदानंद कहना ही प्रमाण है। मन देखिए मन हम नहीं मानते। प्रमाण चलता है। संत रामपाल जी मान ठीक है। ठीक है। नहीं मानते। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। नहीं मानते तुम हमको ये बताओ। मैं मैं उत्तर मैं उत्तर दे रहा हूं। मैं उत्तर दे रहा हूं। मैं उत्तर दे रहा हूं। मेरा प्रश्न आप कह रहे हैं प्रमाण दिखाओ। आप कह रहे हैं प्रमाण दिखाओ। यही कह रहे हो ना? प्रमाण दिखाओ। कह रहे हो ना? क्लेम किसका है? किसी चीज के होने का प्रमाण चाहिए होता है ना होने का नहीं आप दिखाओ दुख दुख है भगवान को यह प्रमाण आपको दिखाना है दिखाओ नहीं आप कह रहे हैं कि दुख नहीं होता तो चीज दिखाइए ना कि कहां पर लिखा अरे भैया किसी चीज के ना होने का प्रमाण थोड़ी ना चाहिए होता है होने का चाहिए होता है कोई ये क्लेम कर रहा है ये चीज है उसका प्रमाण चाहिए जैसे मैंने कहा जैसे सुनो जैसे मैंने कहा कि यहां पर बाबू है तो मुझे प्रमाण देना है अगर बाबू नहीं
00:30:08:19 तो तुम अगर यहां पे नहीं हो ये अपने आप में एक प्रमाण है। इसके लिए मुझे कुछ ला के दिखाने की जरूरत नहीं है। वो वो हमारे पास प्रमाण है कि परमात्मा को दुख होता है। हमारे पास कबीर साहब का प्रमाण है। वो वो दिखाओ वो दिखाओ। दुख होता है। परमात्मा को दुख होता है वो दिखाओ। फिर हम उसको काटेंगे। वो चीज हमारे पास प्रमाण है। आप वो चीज दिखाइए कि परमात्मा को दुख नहीं होता है। आप कहां से प्रमाण मानोगे ये बताओ। किसको प्रमाण मानते हो ये बताओ। चलो। कबीर सा में लिखा है ना कबीर सागर को मैं दिखाऊं आपको कबीर सागर को दिखाऊं तो ये चिल्लाया करो जाके कबीर सागर में प्रमाण है और कबीर भगवान है वेद का नाम क्यों लेते हो
00:30:51:25 दुख नहीं होता दिखाइए कहां पर लिखा है अरे भैया जब तुम खुद कह रहे हो कि यहां से जो जीव मुक्त होता है उसको दुख नहीं होता तो तुम ये मान रहे हो कि मतलब जीव को दुख नहीं होगा परमात्मा को दुख होगा यहां पर जीव नरक में जाता है 8रा में जाता है तो परमात्मा होता है के भगवान के धाम चला जाएगा जहां भगवान बैठा है वहां पे जीव को वो दुख होगा कि नहीं होगा वहां पर दुख नहीं होता वहां पर परम शांति इसका मतलब तुम ये कह रहे हो कि जहां भगवान है वहां भगवान को तो दुख होगा मगर जो मुक्त जीव है वो उसको दुख नहीं होगा अरे यार हम क्या कह रहे है कि यार नरक में 84 में जब हम लोग घूमते हैं तब परमात्मा को दुख होता हम ये कह रहे हैं। अरे मैं मैं कह रहा हूं जब मैं कह रहा हूं जो जीव मुक्ति धाम चला गया जहां पर भगवान अच्छा जब परमात्मा को जब दुख होता है और जब मनुष्य जो है जीव जो है 84 लाख योनियों में होता है तो भगवान कहां पर होते हैं उस समय जहां उनको दुख होता है कहां होते हैं भगवान भगवान सनातन धर्मधाम रहते हैं अरे भैया उस लोक के उस लोक में जिस लोक में आप जाओगे मुक्त होने के बाद वहां
00:32:06:28 या उससे भी और अच्छे लोक में रहते हैं ना तो वहां पर वहां पर किसी की कोई दुख नहीं होती। परमात्मा कभी वहां दुख नहीं होता। लेकिन परमात्मा का कोई भी जीव सुनिए मैंने क्या है मैंने क्या अच्छा ये बताओ इस समय कुछ लोग मुक्त होंगे कि नहीं वहां पे जीव परमात्मा अकेला है? वहां बहुत बहुत मुक्त हैं। बहुत लोग हैं वहां पर। मुक्त हैं। तो क्या उनको दुख हो सकता है इस समय जो इस समय मुक्त है? वहां पर वहां पर नहीं होता नहीं होता तो वहीं पे जीव जो है वो मुक्त है उसको दुख नहीं हो रहा है भगवान को दुख होता है वहां पर भगवान को भी दुख नहीं होता जो यहां पर आत्माएं दुखी होती है उसके विपरीत में परमात्मा वहां दुखी होता है अरे किसी भी कारण से हो दुखी तो होता है ना बिल्कुल बिल्कुल दुख है ना तुम्हारे सतलोक में
00:33:02:09 अपने बाप बाप अपने पुत्र के लिए दुखी नहीं होगा फिर किस किसके लिए दुखी होगा? क्योंकि वो बाप यह जानता है कि यह जो लड़का है मेरा बेकार में दुखी हो रहा है। क्योंकि वो बाप जो है वो ये जानता है कि मैं सर्वशक्तिमान हूं। वो बाप साधारण बाप नहीं है। पंच भौतिक बाप नहीं है वो बाप। आपका ये कहना है कि मतलब परमात्मा दुखी नहीं होता। तो आप वो चीज हम परमा अरे भैया जब आप परमात्मा को ही दुखी करा दोगे। जब आप जब आप परमात्मा को ही दुखी करा दोगे तो हमको मुक्ति कौन देगा? कौन देगा मुक्ति? अरे तो परमा किसी भी कारण से सुनो बाबू सुन लो किसी भी कारण से यदि परमात्मा दुखी हो रहा है तो हमारे को मुक्ति वो देगा वो भी अनंत वाली अनंत दुख वाली। यह हम कैसे मानेंगे भाई जो खुद दुखी है किसी भी कारण से देखिए ये हाई लेवल का ज्ञान है इस ज्ञान को आप ऐसे नहीं समझ सकते पहले आप बातें करोगे मैं तुम्हें सच से निकाल दूंगा बहुत हो गया हाई लेवल लो लेवल हमें ना बताना देख रहा हूं तुम्हारा हाई लेवल कितना है आप प्रमाण क्या करें आप प्रमाण कौन बोल रहा है प्रमाण नहीं
00:34:17:10 है भाई मैं प्रमाण तब दिखाऊं ना जब प्रमाण प्रमाण हो अभी अभी आपसे मैंने पूछा प्रमाण किसे मानते हो आप मानते हो उसको कबीर सागर को तो मैं क्या दिखाऊं तुम्हें प्रमाण जाओ जाकर के कबीर सागर के नाम पे खूब ढिंढोरा पीटो के कबीर सागर में प्रमाण है और रामपाल भगवान है और मैं भगवान हूं और मेरे पिताजी भगवान है सब ढिंढोरा पीटो हमें क्या मतलब वेद से वेद को प्रमाण मानो वेद को प्रमाण मानना जब सिद्ध करोगे कि हां मेरे लिए वेद प्रमाण है गीता प्रमाण है तब मैं तुम्हें वो दूंगा तुम्हारे साथ क्या लाइव चर्चाएं की नहीं है क्या
00:34:50:24 खूब चर्चाएं कर चुके हैं तो हम उससे आगे की बात करेंगे ना जो हो चुकी है वही बात रिपीट करते रहे ठीक है ठीक है हम उस पर चर्चा करते हैं आप बताइए कि परमात्मा पहले है कौन तो उसको तो जान ले पहले अब परमात्मा किसको मान कर बैठे हैं विषयंतर मत करो तुमने जो आकर के बोला है उसको वापस लो कि अभी फिलहाल मैं यह मान रहा हूं कि जो कबीर है और रामपाल है भगवान नहीं है यह बोलो फिर आगे बढ़े हम 100% मानते हैं कि कबीर परमात्मा भगवान सारे सृष्टिने वाले अच्छा चलो ठीक है तुम्हारा भगवान दुखी होता है ठीक है दुखी होता है मान लिया मान लिया ना ठीक है अब तुम्हारा परमात्मा दुखी होता है तो दुखी होने वाला परमात्मा एकिस्ट करता है सिद्ध करो
00:35:44:07 सिद्ध करो चलो गीता अध्याय 15 श्लोक नंबर नंबर 17 अच्छा गीता को गीता क्या है बताओ जरा गीता तुम्हारे पास कैसे आई गीता आई हम आपके परंपरा के आधार से अच्छा तो गीता का अर्थ कौन बताएगा आप ही लोग तो अनुवाद किए हैं गीता पे जो भी लिखा आपके परंपरा वाले अनुवाद किए हैं उसको उन्होंने माना है कि कबीर भगवान है उन्होंने गीता मेरी परंपरा मेरी परंपरा वालों ने क्या माना है क्या कबीर भगवान है आपके परंपरा वाले गीता में बताई परम अचर ब्रह्म है परमात्मा अरे भाई मैंने क्या कहा कबीर को भगवान माना है क्या वो जो जिसने दोहे लिखे हैं बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर ये इनको प्रमाण माना है क्या जिस जो जिसे तुम्हारा रामपाल भगवान कहता है उसको हमारे आचार्यों ने भगवान माना है क्या अच्छा अगर तुम्हें उन पर विश्वास नहीं है उन आचार्यों पर तो उनके द्वारा दी जाने वाली किताब पर विश्वास कैसे? इसका मतलब तुम कबीर को उन किताबों के आधार पर परमेश्वर सिद्ध नहीं कर सकते
00:36:59:13 जो किताबें तुम्हें उन आचार्यों से मिली है जिन पर तुम्हें विश्वास नहीं है। ठीक है? तो कुल मिलाकर के तुम्हें स्वतंत्र रूप से सिद्धांत के द्वारा सिद्ध करना है। सिद्धांत के द्वारा हम हम उसको सिद्धांत के द्वारा सिद्ध कर रहे हैं। हम आपको ये भी सिद्ध करके दिखाएंगे कि आप अपने परंपरा वालों की बात को नहीं मानते। हमारे वो बात है। फिलहाल फिलहाल आप जो है कबीर को परमात्मा है ये सिद्ध करो। गीता गीता का प्रमाण मत दो। गीता का प्रमाण दो तो गीता देने वाले पर विश्वास करो। हमें विश्वास या तो कह दो या तो यह कह दो कि वो झूठे हैं, अज्ञानी है तो फिर गीता को मत मानो उनके द्वारा मिलने वाली फिर तुम सिद्ध कर दो। हम उसको बांध रहे हैं ना कि आपके जो परंपरा वाले हैं जो गीता का ज्ञान लिखे हैं वेदव्यास जी उनको जितना जानकारी मिली उतना लिख दिए। अब आगे की अरे भैया इतना जानकारी उतना नहीं वो सच बोलते हैं वो सही बात बताते हैं या वो झूठ बोलते हैं वो गलत बात भी बताते हैं क्या
00:38:10:16 वो जो गीता जो गीता का ज्ञान देने वाले भगवान ने बोला वेदव्यास ने दिव्य दृष्टि दिए थे संजय अली मैंने क्या कहा भाई साहब आपको आपको ये जो किताब है वेदव्यास जी ने नहीं दी है आपको ये किताब पिछले 100 साल में 50 साल पहले जो हमारे पूर्वाचार्य हुए हैं उन्होंने दिए। ठीक है? जी। तो आप वो जो पूर्वाचार्य हैं उन्होंने कबीर को भगवान माना है। अगर नहीं माना है और फिर भी आप कबीर को भगवान मान रहे हैं उनकी किताब के आधार पे तो इसका मतलब है कि आपको उनकी गुणवत्ता पर यकीन नहीं है। कि वो सच ही बोलेंगे। हम उसी चीज को तो जानना चाहते हैं पहले आपसे। आप हरे भाई अभी बात अभी बात ये चल रही है कि कबीर परमा कबीर अभी बात ये चल रही है कि जिसमें दुख है जिसमें दुख है उस भगवान का अस्तित्व कैसे सिद्ध होता है वो बताओ उसका तो आपके पास प्रमाण ही नहीं है लेकिन अब हम प्रश्न कर रहे हैं आपसे आप उत्तर फालतू की बात करोगे हम तुम्हें हटा देंगे हमारे पास सच्चिदानंद अपने आप में प्रमाण है उसमें प्रमाण देने की आवश्यकता ही नहीं और हम तुम्हें प्रमाण दे क्यों?
00:39:26:00 अरे मैं जो कह रहा हूं जब तुम प्रमाण उसको मानते ही नहीं हो। जब तुम जब तुम जैसे मैंने तुम्हें अगर ये बुक दी मान लो ये बुक मैं तुम्हें दे रहा हूं। अब इस बुक को तुम प्रमाण तब मानोगे जब तुम मुझे सच्चा मानोगे। अगर तुम मुझे झूठा मानते हो तो मैं झूठी किताब भी तुम्हें दे सकता हूं। तुम्हें कैसे पता है ये वेदव्यास जी वाली किताब है? ठीक। अब बता रहा हूं आपको। हां। कि आपके परंपरा से जो परंपरा से चलते आ रहा है जो वेद गीता संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान तो आज चालू हुआ है 1997 से इससे बातें मत करो पहले तुम ये बताओ दुख ही होने वाला है ईश्वर कैसे है ये सिद्ध करो पहले आप आप अभी तक हमें वो प्रमाण नहीं दिए हो प्रमाण दीजिए कि जो ईश्वर भागवत है कहां लिखा है दुखी नहीं होता वो प्रमाण हां ठीक है दे रहा हूं हालांकि देना नहीं चाहिए अपमान है वो प्रमाण का फिर भी दे रहा हूं वो जनता देखता आप प्रमाण दीजिए वाले के लिए कल ही खोला था ये प्रमाण तुम भी देख लो इस वाले के लिए खोला था ये प्रमाण भागवत का ठीक है आप प्रमाण दीजिए कि जनता दे रहा हूं दे रहा हूं
00:40:41:08 परमेश्वर ये देखो भागवत में लिखा हुआ है स्कंद सात अध्याय नौ देखो ये देख लो क्या लिखा है क्या लिखा है पढ़ो ये कौन सा ग्रंथ है भागवत पुराण भागवत अच्छा क्या लिखा है भागवत लिखा है ये इसका इसका कवर दिखाइए कवर कवर में क्या लिखा है
00:41:14:26 कवर दिखाइए इसका पहले तुम पढ़ लो फिर दिखाऊंगा ये कहां ऊपर से नीचे साइड? ऊपर से बीते। अच्छा अच्छा यहां लिखा है कि हल्का नीचे करिए। हल्का सा हल्का नीचे करिए। हां परम परमेश्वर अर्थात पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान सदैव आत्मा तष्टिक रहने वाले हैं। अत जब उन्हें कोई भेंट अर्पित की जाती है। हो गया हो गया हो गया। क्या लिखा है? और निकालो और भागवत और निकालो। हां। अभी क्या लिखा था? अभी अभी आपने परमेश्वर तो बता नहीं पा रहे हैं। परमेश्वर है कौन? वो तो बताइए। फालतू अब देखो तुमने की फालतू बात इसीलिए निकालता हूं। बात चल रही है कि परमेश्वर में दुख होता है। ये आपको सिद्ध करना है। आपने पूछा आप कह दो दुख नहीं होता। तो मैंने दिखा दिया परमेश्वर सदैव आत्म संतुष्ट रहता है। आत्म संतुष्ट उसको किसी चीज की जरूरत नहीं है। सदैव हमेशा नित्य स्थाई सनातन वो वो वो ज्ञान बोला किसने वो चीज दिखाइए। ऐसे कैसे हम मान लेंगे? वो ज्ञान बोला किसने? उसको अरे भाई किसी ने भी बोला परमेश्वर के लिए तो बोला गया।
00:42:30:21 वो तो उसके पास तत्व ज्ञान है। तुमसे बेकार है। अब तुम ये बता दो तुम्हारे पास किताबें आई कहां से? जिन किताबों का तुम वो कर रहे हो वो किताब आपके परंपरा वाला से आई है। सुनो सुनो तुम किताबों के आधार पर परमेश्वर सिद्ध कर रहे हो। सिद्धांत के द्वारा नहीं है तुम्हारे पास परमेश्वरत्व कबीर के पास उसी चीज को उसी चीज को जानना चाहता हूं। सिद्धांत क्या है मेरे भाई? सिद्धांत क्या है? मैं तुमसे पूछ रहा हूं। सिद्धांत क्या है? सिद्धांत क्या है? सिद्धांत सिद्धांत हमारा यह है कि जो आपके परंपरा वाले जो ये लिखे हैं परमेश्वर में दुख होता है कि नहीं ये बताओ ये सिद्धांत है तुम्हारा ईश्वर को दुख होता है कबीर सागर में प्रमाण है मेरे पास कबीर सागर हम नहीं मानते कबीर सागर वेद में वेद में गीता में ईश्वर को दुख ईश्वर को ईश्वर को दुख स्वरूप मानते हो
00:43:29:20 आप वेद और गीता को सही सही कैसे मानते हैं? किस आधार से? वेद और गीता को हम सही मानते हैं क्योंकि हमारे पास वो परंपरा से आया है। और सीधी बात है अगर सीधी बात है कि अगर आप यह मान रहे हो किसी भी किताब का अर्थ कि हमारा जो ईश्वर है उसको दुख होता है क्योंकि वो कुरान में लिखा है वो बाइबल में लिखा है वो कबीर सागर में लिखा है तो सीधी बात है कि उस ईश्वर की सिद्धि कर दो कि ऐसा कोई ईश्वर एकिस्ट करता है स्वतंत्र होकर किताब के आधार पे नहीं क्योंकि किताब को अब हम चैलेंज कर रहे हैं। किताब को अब हम चैलेंज कर रहे हैं कि ऐसे ईश्वर को ईश्वर सिद्ध कर दो। एक मिनट आपके ऐसे ईश्वर को ऐसे ईश्वर को
00:44:21:22 आपके जो परंपरा वाले हैं कि ग्रंथ में जो चीज लिखे हैं तो आप कैसे मान लीजिए वो सही लिखे हैं। क्योंकि वो परंपरा मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं क्योंकि वह परंपरा से है। पहली बात दूसरी बात देने वाला सन्यासी है। एक मिनट तीसरी बात वो समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देते हैं। चौथी बात कि वो मेरा संचय दूर करते हैं। जो मेरा प्रश्न होता है ईश्वर तत्व के विषय में जो तुम जैसे भोंदू लोग और तुम्हारे जैसे जो भोंदू गुरु के भोंदू चेले नहीं समझ पाते हैं वो तात्विक ज्ञान वो मुझे देते हैं। यानी कि परंपरा एक मिनट एक मिनट परम सुनो परंपरा से प्रामाणिकता लक्षण से सन्यासत्व और समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों का आलंबन और फल स्वरूप प्राप्त होने वाला तत्व ज्ञान वो देते हैं वो ज्ञान जिसको प्राप्त करने के बाद किसी और ज्ञान को पाने की आवश्यकता नहीं रह जाती। मेरी प्यास है कि भाई जब ईश्वर अगर सश शरीर है तो वो खड़ा है वो दुनिया किसने बनाई अब तुम कह देते हो भैया हमें नहीं पता अरे रुक जाइए रुक जाइए ऐसे जटिल जटिल सवालों का जवाब वो देते हैं अरे रुक तो जाइए देखिए आप
00:45:36:26 रुक लीजिए आपका भाषण सुनने हम नहीं आए हैं आप जो गाली दे रहे हैं बहुत आप जा सकते हैं आप जा सकते हैं चलिए निकलिए निकलिए
⬜ Not used yet · 00:45:44:14 – 01:07:45:00 (22:01)
00:45:44:14 हो गया ठीक है हां अंकित जी जय श्री राम चर्चा जल्दी खत्म हो गई ये इसके लोग बहुत बहुत बेकार निर्लज्ज लोग हैं फालतू की बातें कमेंट का कोई अर्थ नहीं है ये है मूर्खता सबसे बड़ा मूर्ख
00:46:19:22 इस लोग फालतू की बातें करते हैं कमेंट में ऐसे लोग तो नहीं लेना ही ठीक ठीक है। देखिए इतनी घटिया बात ये लोग करते हैं। यही शिक्षा इनको इनके गुरु से मिलती है। निर्लज्जों को। अरे जब गुरु के अड्डे से क्या-क्या प्राप्त हुआ था? आपने तो देखा ही होगा न्यूज़ में यहां कहने में भी लज्जा आती है। क्या-क्या प्राप्त हुआ था गुरु से? गुरु जहां से पकड़ा गया था। हां। धक्के मार मार के लातों जूते पीट पीट के किसको ले जाया गया था? बताइए। है ना? तो अभी हम विभिन्न धर्म ग्रंथों से विभिन्न धर्म ग्रंथों से भगवान के सच्चिदानंद होने का नाम के भगवान होने का प्रमाण भी देख लेते। ठीक है? हम ऐसे नहीं छोड़ते किसी को। हां अगर ये ये ना कहता ना तो शायद चर्चा और कुछ भी हो सकती थी थोड़ी बहुत। हालांकि ग्रंथ का नाम लेता तो मैं पहले प्रमाणिकता पूछूंगा भाई।
00:47:19:06 रामायण से प्रमाण देते हैं भगवान के सच्चिदानंद होने का। उसने पूछा था ना राम जी को भगवान सिद्ध कर दोगे क्या? ये देखो युद्ध कांड
00:48:06:24 शब्द तत शतम कितना 117 हो गया ना 117 में भगवान क्या कह रहे हैं भगवान को आप अविनाशी परम ब्रह्म है अविनाशी परम ब्रह्म 14वा श्लोक और पुरुषोत्तम का मतलब भी परम ब्रह्म ही है जगह जगह पुरुषोत्तम कहा जा रहा है
00:48:43:01 यह रामायण से दे दिया हमने और हमने एक बुक वो पीडीएफ बनाई थी ना एक बुक जो उसी में बहुत सारे प्रमाण थे भगवान के सच्चिदानंद होने के उसी को देख लेते हैं मांड उपनिषद एक एक छ भगवान नित्य है। नित्य का मतलब जिसमें चेंजेस ना आए।
00:49:17:25 कह रहा है कि सच्चिदानंद का अर्थ कुछ नहीं होता है। मतलब व्यक्ति यहां से जो जाएगा वो तो दुखी नहीं होगा। मगर जिसके पास जाएगा वो दुखी हो रहा है। [हंसी] वो दुखी है। अच्छा एक बात और है एक बात और है कि जो यहां से गया है जैसे वो जो उसके जैसे वो जो है ना ईश्वर ईश्वर दुनिया को देख रहा है कि उसके लोग फंस रहे हैं। ईश्वर दुनिया को देख रहा है कि उसके लोग फंस रहे हैं। ठीक है?
00:49:50:00 तो इसका मतलब है जो यहां से बाप दादा वगैरह जाएंगे जो मुक्त हो जाएंगे रामपाल की शरण में आकर के वो भी तो देख रहे हैं कि उसके पोते पोती फंस रहे हैं काल के जाल में उनको दुख नहीं होगा भगवान को दुख होगा ये देख लो देख लेना इस वालों जो इस को फॉलो करते हो ना यह देख लो तुम्हारी थ्योरी है यह ये कहना क्या चाहते हैं भाई साहब शंकर राय जी आप क्या कहना चाहते हैं स्पष्ट करें तो
00:50:34:00 नहीं मैं पीडीएफ बता रहा हूं वो भगवान के हमने प्रमाण दिए थे ना कि इसमें लिखा है कि जो है परमेश्वर देखो मैं अजन्मा अविनाशी अविनाशी होते हुए भी ईश्वर कौन है? अविनाशी जो स्वरूप से सत्य है। तो भगवान क्या कह रहे हैं? मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी अपनी प्रकृति को अधीन करके यानी कि इच्छा पूर्वक अपनी योग माया से प्रकट होता हूं। ठीक है? तो यह भी उनके
00:51:14:19 भगवान भगवतता को सिद्ध करता है। ब्रह्मा जी की परम ब्रह्मता ऋग्वेद एक 115 एक ऋग्वेद एक 164 दो शतपद ब्राह्मण 10 पांच दो एक इसमें शतपद ब्राह्मण इत्यादि के कुछ कहीं-कहीं पर कुछ क्रमांक आगे पीछे हो सकते हैं क्योंकि इसको संशोधित नहीं किया गया। शतपत ब्राह्मण 14 एक दो दो यह सब में आपको भगवान यह ब्रह्मा जी की भगवत मिलेगी और चांदोगपनिषद एक छ से सात ब्रह्म सूत्र एक एक 20 गायत्री के द्वारा इनहीं सर्व देव में आदित्य की स्तुति की गई है। वाल्मीकि रामायण युद्ध कांड आदित्य हृदय स्त्रोत स्त्रोत्र भगवान विष्णु की पारबह्मता ऋग्वेद एक बाय 17 से 23 भरी भरा पड़ा है भाई कहां कहां जाओगे
00:52:15:03 मैं ही परम ब्रह्म हूं शिव ही परमात्मा है शिव पुराण शिव महापुराण एक पांच 12 10 36 37 विद समिता आप ही परम ब्रह्म हो। वाणी का विषय शिव पुराण रुद्र समिता 41वा अध्याय ठीक है तो ऐसे बहुत सारे प्रमाण हैं। गणेश जी की परम ब्रह्मता संसार का बीज स्वेच्छा से निर्गुण सगुण ब्रह्म ब्रह्म वैवर पुराण गणपति खंड 13 43 से 53 पार्वती पुत्र गणेश साक्षात ईश्वर है कृष्ण है। देवी भागवत 91 147 से 48
00:53:13:15 देवी भगवती ही ब्रह्म और ब्रह्म की शक्ति है। और ब्रह्म कौन है? निरुक्त से हां ये लो ऋग्वेद 10 125 देवी परम ब्रह्म से भिन्न नहीं है पितु परमेश्वर परमात्मा नित्य सनातन सच्चिदानंद स्वरूप परम परम तत्व ही है ऐसे बेवकूफों से हम बात करें सच्चिदानंद है कि नहीं अब हमसे हमारा नाम का अर्थ पूछ रहा है नाम का अर्थ क्या है तो मैंने बता दिया तो इतना समूह हो गया [हंसी] अगर वो और पूछता ना कि शिव का अंश मतलब शिव कौन कल्याण कल्याणकारी जो कल्याणकारी हो। इसके बाद उसने क्या बोला मालूम है कि आपने बोला ना शिव का अंश तो बोलता तो उससे क्या सिद्ध होता है? [हंसी]
00:54:01:25 इससे क्या सिद्ध होता है? चलिए ठीक है। एक जन को कमेंट में एक जन को कमेंट में डिबेट करना है। डिबेट वाले बहुत बोल रहे हैं। उनको आप बता दीजिए खाली कि नंबर है। नंबर दिया गया है। अभी जब ये वीडियो पूरा होगा तो इसके लास्ट में नंबर मिलेगा 7408301869 आप वहां पर WhatsApp करें। फॉर्म भरे फोटो आपको देना होगा। एचपी में लोग आजकल ब्लर फोटो दे देते हैं तो फिर उनसे दोबारा समय खराब होता है सही फोटो मांगने के लिए तो अपना फोटो भी प्रदान करें एचडी क्वालिटी का जिससे कि हम एक व्यवस्थित सुनिश्चित चर्चा करें और यहां पर आते समय कान आंख सब सारे जितने भी आपके सूचना आदान प्रदान वाले जो इंद्रियां केंद्र है जो स्त्रोत्र है स्त्रोत है वो सब आप जो है खोल कर रखें सतर्क रहे वही बात बोले जो सत्य हो ऐसा ऐसा असत्य जिसको आप सिद्ध कर सके वरना ना बोले जिस विषय के लिए आए वो बोले ठीक है का से भगवान तो बोल दिया शुरू में काव से भगवान तो बोल दिया शुरू में वो ये भूल गया कि भाई जिसके सामने बैठा हूं अब वो सिद्ध करने बोल देगा तो मैं क्या जवाब दूंगा दुखी परमात्मा दुखी परमात्मा मेरा
00:55:16:26 परमात्मा नहीं वही अभाव अभाव वाला भगवान अभाव अभाव हां हां लगभग एक ही जैसा है। सही बोले आप एक ही जैसा है। खाली कहते है ना समानार्थी शब्द जैसा है। बस बस ये है कि वहां पे थोड़ा भगवान में अगर अभाव नहीं है ये भी भगवान ये थोड़ा सा स्टाइल अलग है। थोड़ा सा आपको थोड़ा अट्रैक्टिव लग सकता है ये वाला स्टाइल और जो बाबूराम का स्टाइल है। बाबूराम का स्टाइल है वो जो है ग्रामीण प्रवेश वालों को थोड़ा लग सकते हो उनके बहकावे में आने वाले दोनों ही तरफ जो लोग हैं भगवान में अगर अभाव नहीं है तो ये भी भगवान को इनकंप्लीट बनाते इनकंप्लीट एक्टिंग एक्टिंग से सिद्ध करना है [हंसी] मामा आ गए मामा आ देखिए अभी क्या है कि अब हमें चर्चा को आगे नहीं बढ़ाना है कुछ लोग अगर विचार प्रकट करने के उद्देश्य से यदि आए हैं और कोई अब वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा नहीं है तो जो लोग वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करने आए हैं वो दोबारा आए फॉर्म भर के और जो लोग अपने खाली विचार प्रकट करने आए हैं
00:56:32:04 वो कर सकते हैं जब वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा नहीं चाहिए हां मनोहर जी हैं और दो लोग हैं अक्षय करके क्लीनिंग करके वो अपना चेहरा नहीं दिखा रहे हैं। जय श्री रामता जय श्री राम राम मनोज नमस्कार पहचान आपसे बात हुई थी पहले इनसे आपसे नहीं शिवश जी से नहीं दूसरे से आपसे आपसे बात हुई थी जी जो दूसरे वाले हैं इनका नाम आप शायद सनातन शंकर उसप आए थे क्या हां उनके हां राइट राइट राइट उनके साथ राइट किस विषय में किस विषय में बात पिछले बार बात हो रही थी इनसे कि जो जो ग्लोबल जो चर्चा हो लंबी चर्चा हो जाएगी शुरू नहीं करेंगे दोबारा वो लंबी चर्चा हो जाएगी एक्चुअली वैचारिक मतभेद के निमित है ना नहीं नहीं मतलब वो मैं बता देता हूं मैं श में बता देता हूं टेक्नोलॉजी और साइंस और गॉड दोनों के अलग-अलग हिस्से मतलब मेरा मतलब था कि जो साइंस जो होता है वो भी
00:57:48:12 आपके जो पंथ की विचारधारा उसके ऊपर डिपेंड होता है। कि आप किसी को साइंस मानते हो किसी को साइंस नहीं मानते हैं। ये भी आपके रिलीजियस बैकग्राउंड के ऊपर डिपेंड करता है। पंथ के ऊपर डिपेंड करता है। नहीं नहीं हमारी आप आपत्ति किस चीज से है कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता है या कर्मणा वर्ण रखा है या इस तरह की अगर कोई बात है तो हां तो वो अगर आपको आपत्ति है तो आप जो है किसी भी बात से आपत्ति है तो आप जो है फॉर्म भरिए और आ जाइए। ठीक है? हां वो वो वो थोड़ा सा अगले बार करेंगे वो तो लेकिन मैं पिछले बार यही बात हो रही थी इसी के लिए मैं दोबारा यहां पर हां कि पिछले बार यही बात हम डिस्कशन कर रहे थे फॉर्म भर के आप आ जाइए। हां जो आपका फॉर्म भर के आप आ जाइए मैं फॉर्म भर के आप आ जाइए। हां कैसे हैं राम कुमार जी? जी जी राम मनोहर है राम मनोहर बात कर रहे हैं भैया राम जी थोड़ा जल्दी निकल गया का वरदान थोड़ा ज्यादा लंबा हो जाता जी जी लंबा हो जाता ना नाम तो इस वजह से जो है उसको थोड़ा श में कर रखा है बाकी बाकी जो है बता दू
00:59:04:24 रामपाल जो है वो कंफ्यूज रहेंगे एक ही परमात्मा एक ही परम परम तत्व पांच रूपों में स्वयं को प्रकट करता है। ब्रह्मा, विष्णु, महेश, भगवती और गणेश। सृष्टि की रचना एक बार नहीं हुई है। कई बार हो चुकी है। तो किसी कल्प में जो परम तत्व के रूप में विष्णु नाम से परम तत्व को ख्यापित करके अन्यों को उसके परिक इत्यादि के रूप में व्यक्त किया जाता है। और किसी कल्प में दूसरे जो अन्य भगवान के रूप है उनको परम तत्व के रूप में ख्यापित करते हुए बाकी शेष अन्य रूपों को उनके परिकर इत्यादि के रूप में बात की जाती है। समय-समय पर शास्त्रों में इन सबके एकत्व की बात भी प्राप्त होती है शास्त्रीय संदर्भ से और यह जो सिद्धांत है यह सिद्धांत हमारे परंपरा प्राप्त आचार्य के द्वारा दिया गया है जिन आचार्यों ने आपको ये ग्रंथ दिए तो आप जिन ग्रंथों के आधार पर ये सिद्ध करने में लगे हैं कि कबीर भगवान है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश भगवान नहीं है वो ग्रंथ आपको सपने में नहीं आए अभी रामपाल सामने नहीं बैठा था नहीं तो पूछ लेता तुम्हें ग्रंथ कहां से मिले कबीर नदी है क्या सुना फिर ऋग्वेद का 192वा सूक्त जैसे कल आए थे परसों बाबा जी हमको शिव पार्वती ने दिए
01:00:20:00 हैं ग्रंथ अरे मैं मैं शिवश भैया मैं लाइव लाइव में जुड़ा हुआ था मैं जुड़ा हुआ था सुन रहा था मुझे कसम से इतनी हंसी आ रही थी मतलब मुझे समझ में नहीं आता है कि वो कहते नहीं है कि हीरे की चोरी और कोयले कोयले पे थाप समझ वो स्थितियां हो गई है लोगों की गुरु है आपने एक बात आपने नोट की होगी कि हमारी जो बातें बड़ी साफ सुथरी रहती है कोई गोलगोल घुमाना नहीं सीधी बात करना है ना साफ बिल्कुल और ज्यादातर तो हमारे जो समर्थक हैं जो हमें देखते आ रहे हैं उनको पता होता है कि अब शिवश जी कौन सी बात बोलने वाले हैं
01:01:12:12 क्या बात होने वाली है? इसका मतलब क्या है कि हमारे विरोधियों को भी पता है मैं कौन सी बात बोलने वाला हूं। तब भी वो बेचारे तैयारी करके नहीं आ पाते। तब भी नहीं आ पाते और आजकल देख नहीं रहे कूदे हुए हैं मैदान में कि कोई आ जाए जो है कि विधर्मी आ जाए एक बारी मैदान में। अरे भाई ऐसी थोड़ी आएंगे। जो लोग चुनौती दे रहे हैं वो लोग तो आके आए भी और गए भी इसी चैनल पर चार घंटे की लाइव हुई थी और वो चुनौती देते फिर रहे हैं
01:01:46:28 धक्का कैसे देगा परमात्मा और धक्का देने के अंश में क्या बराबर शक्ति लग रही है या नहीं लग रही है यही समझ नहीं आ रहा था लोगों को भाई धक्का देने से ही ईश्वर का धक्का देने से ही ईश्वर का अवतार सिद्ध है और तो बात क्या करें? ईश्वर ने ईश्वर ने धक्का दे दिया। धक्का बन के दिया। धक्का बनने के रूप में ईश्वर का अवतार मानना पड़ जाएगा। 100%
01:02:19:20 जब ये बात जो हमारे गुरुदेव है उन्होंने कही हमें तो उन बन नहीं सकता। आर समाजियों का ईश्वर जगत बना सकता है बन नहीं सकता इस्लामिक ईश्वर जगत बना सकता है बन नहीं सकता और जो है बाइबल का ईश्वर जगत बना सकता है बन नहीं सकता साक्षात अवतार नहीं ले सकता फिर इनका ईश्वर जगत बनाता ही नहीं बनता भी है अब वो ये तो कह रहे हैं कि भैया धक्का लगा पर वो धक्का बना कौन धक्का कौन बना ईश्वर ही तो बना धक्का और जब वो धक्का बना तो सगुण हो गया एक अनस्थान निर्गुण थादी
01:03:12:12 शिवा नारायण द्विवेदी एक ऐसा व्यक्ति है जो एक ही तरह की बात करता है हर लाइव में फिर भी उसका कार्ड नहीं है [हंसी] अरे एक ही तरह की बात ही होगी भाई चलिए ठीक है मैं आज घर से आदेश भी मिला था थोड़ा जल्दी आइएगा तो कुछ ऐसा संयोग बन गया कि वो जो जी आप निखिल जी आए हैं शायद हां जी निखिल जी जय श्री राम जय श्री राम भैया जी
01:03:50:09 जी बोले निखिल जी एक एक बात मैंने नोटिस की कट रहा है लग रहा है नहीं नहीं कट नहीं रहा है मैंने मैंने एक मैंने एक बात नोटिस की जब आपने पूछा कि ग्रंथ कहां से प्राप्त है? तो बोल रहे हैं आपकी परंपरा से [हंसी] आपकी परंपरा से ग्रंथ प्राप्त है। ये मतलब कि अब इन लोगों को ये भी कहने में शर्म आ रही है कि हमारी कोई परंपरा नहीं है या हमारी परंपरा रामपाल बाबा कहीं से लाया नहीं है। आपकी परंपरा से अपनी परंपरा मानी है। मगर फिर बात क्या होगी मालूम है। फिर बात यह होगी क्या कबीर ने कभी वेद छुए?
01:04:33:27 फिर बात ये हो जाएगी दिक्कत है ना वहां पर कबीर ने वेद छुए क्या टच किए क्या टच भी नहीं किए कबीर ने वेदों की बातें की कहीं पर भी वैदिक मंत्र की व्याख्या की है क्या कबीर ने फिर ये रामपाल दुष्ट जो है हमारी परंपरा के कबीर दास जी हैं रामानंद परंपरा कितना अच्छा व्याख्यान हमारे आचार्य देते हैं उनके दोहों का चाहे उनकी वाणी का परंपरागत ये दुष्ट जो है इसने इतना गंदा प्रचार किया है अभी हमारे गुरुदेव महाराज कबीर चरित्र कह रहे हैं कथा में और सुन के लग रहा है कि कबीर जी है और ये रामपाल ने कैसा प्रचार किया से ये प्रमाण जो है कि भगवान दुखी नहीं होते यह प्रमाण अथा भरा पड़ा है अथा पर भैया तुम्हारा तो किताबों विश्वास ही नहीं है। अच्छा दूसरी बात ये है कि संयोग से अभी कल उसको दिखाने के लिए इस कोिस्ट को मैंने निकाला था भागवत में कि भगवान सदैव आत्म संतुष्ट रहते हैं। देखो अब कल वो तो आया नहीं भाग गया वो उसको पता चल गया
01:05:48:28 भाई कि यहां मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में बाबू का शिष्य अमोग लीला का शिष्य था वो चलिए ठीक है फिर फिर बात होती है। हां आप कुछ कह रहे थे पूरा कर लीजिए। मैं ये अभी कबीर चरित्र ही पढ़ रहे थे तो उसमें जो आचार्यों ने कबीर जी की वाणी का रामानंदाचार्य जी की परंपरा से कबीर जी और जो आचार्यों ने व्याख्यान किया है कि हां और कबीर जी का जो पर्सनल व्याख्यान है जो मूल है उसमें भी इसने मिलावट करके दी है। दोहे वगैरह यह खुद अपनी उसमें मानता है कि कबीर सागर भी प्रमाण नहीं है। उसमें भी मिलावट है। जब तुम मिलावट कह रहे हो ना किसी में इसका मतलब तुम्हें पता है कि वास्तविक धर्म क्या है। तो तुम जिस चीज में ढूंढ पा रहे हो कि यह चीज सही है ये चीज गलत है। वो चीज तुम इसलिए नहीं ढूंढ इसलिए वो वो चीज तुम्हारे जीवन में धर्म का निर्णय करने वाली चीज नहीं है। धर्म का निर्णय तो तुम कर चुके हो पहले ही। वो तो व्यर्थ है। उसका कोई आवश्यकता ही नहीं है। धर्म का निर्णय तो तुम कर चुके हो पहले ही। तभी तो तुम उसमें चेक कर पा रहे हो क्या मिलावट है क्या मिलावट नहीं है स्वतंत्र रूप से
01:07:04:00 आप धर्म का निर्णय कर पा रहे हैं जब किसी ग्रंथ के बाहर रह के इसका मतलब ग्रंथ आपके धर्म का निर्णय नहीं कर रहा है आपको मालूम है ऑलरेडी धर्म क्या है तो वो तो कागज का टुकड़ा है कूड़ा है वो तो अच्छा चलिए फिर फिर बात होती है हां जय श्री राम हर हर महादेव हर महादेव जय श्री राम राम मनोहर जी जय श्री राम
01:07:43:20 [संगीत]
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क्या आत्मा अनित्य है? Live stream रामपाल का अनन्य भक्त बाबुराम -14.3.2026
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