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00:00:03:18 सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और विगत कुछ दिनों से आप देख रहे होंगे हमने ब्रह्मा कुमारीज को लेकर के बहुत सारे जो वक्तव्य है वो भी प्रस्तुत किए और ब्रह्मा कुमारी से जुड़े हुए कई उनकी यहां की जो दीदी कही जाती है उनके साथ कई सारी चर्चाएं भी आपने देखी होंगी। तो बस इसी क्रम में आज हमारे बीच में एक संत जी हैं वो आए हुए हैं जो संभवत ब्रह्मा कुमारी को फॉलो नहीं करते बट उन्हें ब्रह्माकुमारी का को समर्थन जरूर देते हैं। तो वह ब्रह्माकुमारी का जो पक्ष है उनका कहना है कि वह पक्ष सामने आना चाहिए। तो उसी पक्ष को रखने के लिए वह यहां उपस्थित है हमारे बीच में। मैं उनको ऊपर ले लेता हूं।

00:01:06:28 जी जय श्री राम कमल किशोर जी जय श्री राम सभी दर्शकों को जय श्री राम जय प्रभु राम। जी तो सबसे पहले छोर जी थोड़ा सा अपना परिचय आप दर्शकों को बता दें कि आप कैसे क्या थोड़ा सा अपने बारे में एक संक्षिप्त सहारनपुर में दिव्य शक्ति अखाड़े के हम आचार्य महामंडलेश्वर हैं और 157 बार के अरक दादा हैं। समाज का कार्य करते हैं। अपने धर्म के लिए जीते हैं। समाज के लिए जीते हैं और साधु संतों के बीच में रहकर आध्यात्मिक चर्चा किया करते हैं। आध्यात्म का ज्ञान बांटते हैं। प्रेम की भाषा जानते हैं।

00:02:00:26 बहुत सुंदर बहुत सुंदर। तो अ महाराज

00:02:05:13 जी ये आपने कहा कि आप महामंडलेश्वर हैं और आज दिव्य शक्ति अखाड़े से हैं। तो आपकी गुरु परंपरा आपके गुरु कौन है? हमारे गुरु परमपिता परमात्मा शिव और माता पार्वती ही हमारे गुरु हैं। क्योंकि लौकिक में हमें कोई ऐसा गुरु नहीं मिला जिसे हम समझ सके या वो हमें समझा सके ज्ञान की भाषा दे सके। अच्छा तो महाराज जी आप वैदिक हैं। वेदों को मानने वाले मतलब वेद को प्रमाण मानते हैं। वेद पर वेद को लेकर के मतलब मिलाजुला सा मामला है। जैसे आपने कहा ना धर्म और आप चोले से भी आप सनातनी दिख रहे हैं। तो क्या हम ये मान सकते हैं कि आप वेदों को प्रमाण मानते हैं? वास्तव में वेद ही प्रमाण है। वेद जोवेद, ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद ये चार इसमें प्रकट है फिर उनके ब्राह्मण ग्रंथ है उपनिषद

⬜ Not used yet · 00:03:08:16 – 00:03:39:25 (0:31)

00:03:08:16 है जी जी तो इनको आप प्रमाण हुआ करते थे सुनिए पहले तीन ही वेद हुआ करते थे इसीलिए भगवान ने गीता में ये बात कही है कि वेद त्रई के नाम से उसे कहा है पहले तीन ही वेद हुआ करते थे बाद में सामवेद जोड़ा गया है और वेदों को बिल्कुल मानना चाहिए क्योंकि वेद शब्द विध धातु से आया है जिसका अर्थ होता है ज्ञान। ज्ञान जो प्रकाश से प्रकाश की ओर ले जाता है। जी

00:03:39:25 जी जी मैं असल में ये जानना चाह रहा था कि जैसे आपने कहा कि हम वेद को परम प्रमाण मानते हैं। तो वेद के अनुसार जो तात्विक व्याख्या है परमेश्वर की वह आपके पास शिव जी ने आपको कहा है कि बुद्धि है तो वेद के किस भाष्य में उपनिषद के किस भाष्य के रूप में वो आपको प्राप्त है या आपने अपनी कोई छापी है जो शिवजी ने आपको पढ़ाई है वो एक ग्रंथ के रूप जैसे ब्रह्मसूत्र पर भाष्य किया है हमारे आचार्यों ने तो आप किसके भाष्य पर आधारित है या आप भाष हम किसी के भाष्य पर आधारित नहीं है। हम सिर्फ एक बात जानते हैं। सिर्फ एक बात मानवता सबसे बड़ा

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00:04:23:15 धर्म है। मानव के लिए ये सारे वेद बने हैं। उपनिषद बने हैं। पुराण बने हैं। मानव की भलाई के लिए बने हैं। और अगर इस पृथ्वी पर मान लीजिए कि मानव ही ना रहा तो यह सारे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे या जितने भी धर्म बने हुए हैं जो वास्तव में धर्म नहीं है बने हुए हैं। यहां पर या तो कीड़े मकोड़े ठहर जाएंगे या मकड़ियां जाला लगा देंगी या ये जंगल बन जाएंगे। जी मैं समझ रहा हूं आपकी बात। मैं उसप आऊंगा। अभी असल में एक्चुअली मैं ये पूछना चाह रहा हूं।

00:04:59:03 आपने कहा कि आपके लिए वेद ही परम प्रमाण है। तो वेदों के कई प्रकार के अर्थ हमें प्राप्त हैं। अगर वेदों का निचोड़ देख ले ईश्वर तत्व के विषय में तो उपनिषद और फिर उपनिषद के बाद ब्रह्मसूत्र के रूप में हमें प्राप्त है। तो क्या आप ब्रह्म सूत्र की किसी व्याख्या पर विश्वास रखते हैं या अपनी स्वतंत्र व्याख्या है ईश्वर तत्व के विषय

⬜ Not used yet · 00:05:20:00 – 00:06:08:14 (0:48)

00:05:20:00 में? ईश्वर तत्व के विषय में व्याख्याएं कई है। त्रत है, द्वैत है, अद्वैत है। है ना? शुद्धत है, विशिष्टा द्वैत है। तो आप ईश्वर तत्व के विषय में कौन सी व्याख्या को प्रमाण मानते हैं कि यही व्याख्या एक्यूरेट है। ये कह रहा हूं। ये सब कुछ अपने सोचने पे निर्भर करता है। अब देखिए गिलास मैं पूछ रहा हूं। मैंने पूछा आप किसको मानते हैं? मैं सभी को मानता हूं। सभी को मानता हूं और उसी का प्रमाण देने जा रहा हूं आपको। एक गिलास है। उसमें आधा गिलास पानी है। आप पहले सुन ले। आधा गिलास पानी है। एक व्यक्ति देखकर कहता है कि उसमें आधा गिलास पानी है। दूसरा कहता है आधा गिलास खाली है। तीसरी व्याख्या मैं कर देता हूं कि गिलास पूरा भरा हुआ है। आधा हवा से भरा हुआ है। आधा पानी से भरा हुआ है।

00:06:08:14 देख आदमी किस तरफ से रहा है। किस दृष्टिकोण से देख रहा है। वो उस हिसाब से अपनी व्याख्या गण लेता है। जिस

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00:06:16:28 तरह से श्रीमद् भागवत गीता पे कम से कम भी 800 टिप्पणियां यानी टीकाएं जो है प्रकाशित हो चुकी है। हर व्यक्ति ने अपनी व्याख्या की है। अपनी अपनी समझ से व्याख्या की है। तो इसलिए उन व्याख्याओं को ना पढ़ के वास्तविकता क्या है जो मेरी समझ में आई है? मैं तो उसे जानता हूं। तो मैं वही कह रहा हूं कि आपके पास अपनी वास्तविकता वाला कोई भाष्य है ब्रह्म सूत्र पर या वह भी ब्रह्म सूत्र भी आप उसी में गिनते हैं कि वो अलग-अलग पर्सेक्टिव ओनली है। ब्रह्म सूत्र पर आपका अपना स्वतंत्र भाष्य कोई या फिर आप ब्रह्मत्र मेरा अपना कोई भाष्य नहीं है। मतलब जो अनुभव होता है जो आप मुझे अनुभव होता है भगवान शिव से जो मिला मुझे क्योंकि भगवान शिव वास्तविक गीता के भी प्रणेता वही है जितने भी ग्रंथ है हमारे वो किसके आपस में चर्चा किसकी है भगवान शिव माता पार्वती से बात करते हैं माता पार्वती भगवान शिव से बात करती है एक प्रश्न करता है दूसरा उत्तर देता

00:07:17:25 है मैं वही पूछ रहा हूं कि भगवान शिव से मिलने वाला अलग से ईश्वर तत्व के विषय में कोई ग्रंथ है आपके पास या आप ग्रंथ के रूप में इनहीं पर निर्भर करते हैं। वेद उपनिषद और गीता गीता के ऊपर गीता सभी को पढ़ता हूं सभी को पढ़ता हूं। सभी को भाई साहब मेरा प्रश्न निर्भरता मेरा प्रश्न निर्भर करते हैं या अपने पास आपका स्वतंत्र कोई ग्रंथ है? मेरी स्वतंत्र सोच है। कोई ग्रंथ नहीं है मेरा अपना। मेरी स्वतंत्र सोच है। अच्छा तो आपकी एक स्वतंत्र सोच है जो आपको शिव पार्वती जी से मिली है। और वो स्वतंत्र सोच जो है वेद उपनिषद और गीता से मेल खाती है इसलिए आप ऐसा कह रहे हैं कि मैं वैदिक भी हूं। हां। उसी का सार है ये जो मेरे पास आया है। उसी का सार मेरे पास है। जी। अभी मैं करेक्ट। अभी करेक्ट हो गया। अब बात ये आती है कि आपने कैसे पता किया कि आपको जो दिव्य तरीके से जो ज्ञान-विज्ञान मिला है वो वेदों का ही अर्थ है ये कैसे पता चला? देखिए वेद कहते हैं कि एक ब्रह्म है द्वितीय कोई तो है नहीं दूसरा कोई है नहीं।

⬜ Not used yet · 00:08:26:02 – 00:08:53:15 (0:27)

00:08:26:02 अब एक अगर एक है तो उसके टुकड़े कैसे किए जा सकते हैं? नहीं कर सकते ना। एक के टुकड़े करोगे तो दो हो जाएंगे। जब एक है तो उसका कोई टुकड़ा नहीं हो सकता। ब्रह्म एक है। वही शिवंद है। वही सबसे बड़ी शक्ति है। अब उस ब्रह्म को हमने जाना। भगवान शिव ने हमें ज्ञान समझ नहीं आप मेरी बात समझ लीजिए। मेरा क्वेश्चन ये

00:08:53:15 है कि आपको दिव्य तरीके से कुछ ज्ञान विज्ञान प्राप्त होता है। आपने कैसे कंफर्म किया कि ये जो ज्ञान विज्ञान मेरे पास आया है ये वैदिक है। प्रैक्टिकली वो क्या किया था? वैदिक क्या होता है? भाई साहब वैदिक क्या होता है? वैदिक वही तो होता है ना जो वेदों से आया हुआ हो। ठीक है ना? वेद क्या है? कोई बुक लेते हैं। यानी कि वेद नाम यानी कि वेद नाम से छपी हुई किसी ग्रंथ को आपने लिया और उसमें देख के वेरीफाई किया कि मेरे स्वप्न में आया हुआ या मेरे को दिव्य तरीके से जो प्राप्त हुआ है शिव पार्वती के द्वारा जो ज्ञान प्राप्त हुआ है वो वैदिक है। ठीक है ना? हां मैंने स्वयं में अनुभव किया। अनुभव किया उसे। ठीक। मैं आपको एक छोटी सी उदाहरण दूं इस बारे में। मैं एक्चुअली मेरा प्रश्न मेरा प्रश्न किसी और दिशा में है। दिशा मैं अभी आपको बता रहा हूं। जैसे आपने कहा कि मैंने वेद से वेरीफाई किया कि मेरे पास जो ज्ञान आया है दिव्य दिव्य योजना के द्वारा वो वैदिक ही है। तो आपने ये जो वेरीफाई किया है ये किसी पुस्तक से किया है। है ना?

00:10:08:16 पुस्तक से किया ना? नहीं पुस्तकों से नहीं किया है। पुस्तकों का ज्ञान तो सिर्फ वैसा ही होगा जैसे एक कोई किताब पढ़ ले 200 अभी आपने बताया था अभी आपने बताया था ना वेद जो अथर्ववेद ऋग्वेद सामवेद बाद में जोड़ा अथर्ववेद और था तो ये जो आपने वेरीफाई किया ये आपने कहीं से छपी हुई पुस्तक ला के किया या अपने से आपने वेद अपने रट रखे हैं और आपने उसे वेरीफाई कर लिया कैसे मैं वही तो आपसे कहना चाह रहा हूं जी वेद एक प्रामाणिक पुस्तक है ठीक है उसमें जो लिखा है वो कहा जाता है कि वेद प्रामाणिक है। ठीक है? जब तक व्यक्ति के जीवन में वो नहीं उतरते तो वह एक खाली पुस्तक रह जाएंगे या नहीं रह जाएंगे? भाई साहब मैं जीवन में उतरने की बात बाद में करूंगा। मैं अभी पूछ रहा हूं। आपने वेरीफाई कैसे किया था? प्रैक्टिकल क्या था उसका कि मैंने वेरीफाई तो अनुभव से होगा ना। आप गूंगे से पूछ रहे हो कि गुड का स्वाद कैसा है? अनुभव को अनुभव को क्या शब्दों में बयान करूंगा मैं? नहीं कर सकता। ठीक है। ठीक है मैं अभी बता रहा हूं। आपने कहा कि अनुभव से वेरीफाई किया। मतलब आप ये कंफर्म नहीं कह सकते कि मेरे को जो ज्ञान प्राप्त हुआ है वो वेद नाम से छपी हुई जो पुस्तकें हैं ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद उसमें भी लिखा है। ये आप कंफर्म नहीं कह सकते। आपने अनुभव कर लिया। क्यों नहीं कह सकते? क्यों नहीं कह सकते? वेदों

00:11:24:09 को पहले वेदों को पहले पढ़ा ना हमने। पढ़ने के बाद उनकी अनुभूति अनुभूति अनुभूति हमारे इसका मतलब वेद प्रमाणिक है या नहीं है यानी कि वेद नाम से छपी हुई पुस्तक को आपने पढ़ा ना हम कहते हैं वो प्रमाणिक है बिल्कुल है लेकिन पढ़ने के बाद पढ़ने के बाद उस पर चिंतन भी आवश्यक है मनन करना भी आवश्यक है मैंने भाई साहब पूछा आपने पढ़ा ना उसको वेद नाम से छपी हुई पुस्तक को पढ़ा ना पढ़ा तो वो कौन सी वो कौन सी पब्लिक एप्लीकेशन से थी वो कौन से थोड़ा सा उसका विवरण बता दीजिए कौन सी पुस्तक पढ़ी थी आपने वेदनाथ से छपी हुई हां हमने गायत्री परिवार वालों की जो पुस्तक है आदरणीय पंडित श्री राम शर्मा जी वाले हां नहीं पंडित श्री राम शर्मा जी ने जो लिखे हैं अच्छा अच्छा शर्मा आचार्य अच्छा अच्छा अच्छा गीत गायत्री परिवार जो हरिद्वार गायत्री परिवार वाले हैं उनकी पुस्तकें हमने मंगाई पढ़ी उन्होंने तो चारों का भाष्य नहीं किया है मेरे हिसाब से उन्होंने उन्होंने खाली उसका ट्रांसलेशन दिया है हां तो उसी को ट्रांसलेशन किया है संस्कृत से उसी को हमने पढ़ा और पढ़ने के

00:12:39:10 बाद अपने जीवन में ढाला एक सूत्र ढाल लिया तो बात खत्म हो जाती है जी हां ठीक अब अब सवाल ये आता है कि आपको कैसे विश्वास है क्योंकि श्री राम शर्मा जो आचार्य हैं वो आपके गुरु तो है नहीं क्योंकि आपने कहा गुरु तो मेरे शिव और पार्वती है नहीं है ना? हां। तो जब वो आपके गुरु नहीं है तो आपको कैसे पता कि जो अरबों साल पहले जो वेद मंत्र आए हैं वही वेद मंत्र श्री राम शर्मा आचार्य ने उनका अर्थ किया है और किताबें छापी है। ये कैसे कन्फर्म किया आपने? हमने अर्थ देखा अर्थ देखा श्लोक पढ़ा। उस अर्थ को अपने भीतर अनुभव किया मनन किया। तब हमें लगा कि ये बिल्कुल ठीक है। नहीं नहीं भाई साहब। प्रमाण आपने अनुभव जो किया है वो तो एक अलग बात हो गई। मैं ये कह रहा हूं कि वेद के नाम पर जो मंत्र उसमें मंत्र होते हैं श्लोक नहीं होते हैं वेद में। तो वेद के नाम पर जो मंत्र आप कह रहे हैं जिनको आपने पढ़ा और फिर मनन किया। आप ये कैसे कंफर्म किया आपने कि ये वही मंत्र है जिन्हें ईश्वर ने दिया था सृष्टि के प्रारंभ में।

00:13:46:19 ये वेदों में भी लिखा है कि वेद ईश्वर की वाणी है। जैसे मुझे यह विश्वास करना पड़ता है। सुन लीजिए जैसे यह मुझे विश्वास करना पड़ता है। मेरी मां मुझे बताती है कि तुम्हारा पिता है तो मुझे मानना पड़ता है ना कि मेरा पिता है। इसी तरह से जब आपकी मां को हम गुरु कहते हैं ना आपका गुरु तो है नहीं। श्री राम शर्मा आचार्य आपके गुरु तो वो जो लेकिन उन्होंने लेकिन उन्होंने वेदों को संकलित तो किया है। अगर कोई संकलन करता है तो कोई गलत काम तो नहीं करता ना वो। नहीं तो संकलन करने के नाम पर तो कोई भ्रष्ट धूत व्यक्ति भी संकलित कर सकता है। हो सकता है कि वेद के मंत्र कुछ और हो। वो आपको झूठ बोल दे। आपको देखिए ऐसा है। मेरा कहने का तात्पर्य यह है कि जिससे हम वेद मंत्र ले रहे हैं उसके प्रति हमको परमान्य बुद्धि रखनी पड़ेगी। यह हमारा गुरु है। अगर नहीं रखेंगे तो फिर हमें उसके वेद मंत्र पर विश्वास कैसे?

00:14:41:25 उन्होंने वेदों का संकलन किया। हमने उन वेदों को पढ़ा। हमने अपने जीवन में उतार के देखा। हमने अपने जीवन में उतार के देखा बिल्कुल सही है। तो हमारे लिए सही है। प्रमाणिकता सिद्ध हो गई। प्रमाणिकता सिद्ध करने के लिए क्या किसी सर्टिफिकेट थोड़ी लेना पड़ेगा? जैसे जैसे मान लीजिए मान लीजिए कि मेरे को जो है किसी व्यक्ति को एहसास हो कि भाई मुझे जो है चोरी करने में खुशी मिल रही है। ठीक है? अब किसी व्यक्ति ने कहा हो अपनी किताब एक छापी हो और उसमें लिखा हो कि भगवान ने किताब छापी है। इसमें लिखा है चोरी करने से खुशी मिलती है और मैंने उसको पढ़ लिया और मुझे अनुभव भी हो रहा है चोरी करने से खुशी मिल रही है। तो मैं मान लूं और सबसे बड़ी बात सबसे बड़ी बात तो ये है कि राम शर्मा आचार्य जी आपके गुरु नहीं है। यानी कि राम शर्मा आचार्य जी झूठ भी बोल सकते हैं, गलत भी लिख सकते हैं। वो गलत लिख सकते हैं। चलिए मान लेता हूं। आपकी बात ऊपर रख देता हूं। लेकिन सवाल ये उठता है कि उन्होंने जो वेदों के मंत्र लिखे हैं वो तो गलत नहीं हो सकते ना। वो तो गलत नहीं हो सकते। मैं वही कह रहा हूं। ये कैसे तय किया आपने? वो गलत नहीं हो सकते। तय किया। बार-बार आपसे कह रहा हूं कि मैंने अपने अनुभव में उतारा और उनसे तय कर लिया। मुझे जो मेरे

00:15:57:18 एक मंत्र का एक मंत्र का वो बताइए। फॉर एग्जांपल कैसे आपने तय किया? मैं आपको बता देता हूं। साधारण सी बात है। साधारण सी बात है। जैसे वेदों का सार आ जाता है उपनिषदों में फिर आ जाता है अपने पुराण अभी आप वेद अभी आप वेद से ही बताइए ना कोई आप सुन तो ले पहले सुनेंगे तभी तो बताऊंगा आपको जी न बंधो अस्ति न मोक्ष अस्त ब्रह्म वास्त निरामय नमस् सचित कारते ठीक एक तो ये क्योंकि सचित के कहां का है ये पहले सुनने की थोड़ी सी आदत डालेंगे तो बड़ा अच्छा होगा। वरना क्या मैं ना आपको समझाऊं वरना क्या हमारी जो बातचीत हो रही है ना आपस में वो खिचड़ी बन के रह जाएगी। बिल्कुल बिल्कुल एक्चुअली मेरे पास ग्रंथ रखे हैं तो मैं खोलता उसको आप जो बता रहे है इसलिए पूछा था मैंने। हां हां

00:16:57:13 अब ना बंधन है ना मोक्ष। सभी का सार आ गया गीता में। ठीक है? मानव को ना इधर का रहना चाहिए ना उधर का रहना चाहिए। बीच में आ जाना चाहिए। यही शब्द संत का भी अर्थ होता है। सम अंत हर चीज के दो सिरे होते हैं। हर्ष और शोक दुख और सुख लाभ हानि यश अपयश मान अपमान हर चीज के दो सिरे होते हैं जीवन में। और उन दो सिरों के बीच में जो आ जाता है ना उसे दुख का अनुभव होता है ना सुख का अनुभव होता है ना हर्ष का होता है ना शोक का होता है ना मान का अपमान का यश अपयश जो इनमें बराबर आ जाता है यानी ज्ञान यज्ञ में चला जाता है उसके लिए सारे कर्म जो है वो गौण हो जाते हैं। सारे उसी तरह से भस्म हो जाते हैं। जैसे लकड़ी भस्म हो जाती है। ये भगवान श्री कृष्ण गीता के चौथे अध्याय में पहले से शुरुआत करते हुए दसवे श्लोक तक चले जाते हैं। असल में क्या मेरे पास समय आप समय आपने कम रखा है आपको 7:00 बजे जाना है कहीं पे है ना आपने बताया था तो मैं एक्चुअली मैं आपसे किसी श्लोक की व्याख्या नहीं पूछ रहा हूं मैं एक आपसे

00:18:12:21 आपने कहा वेद मंत्र आपने पढ़े हैं व्याख्या बताई है वेदों की ही व्याख्या बताई है ये हमारी बात अभी चल रही थी कि वेद मंत्र आपने श्री राम शर्मा आचार्य के पढ़े और फिर उसको अनुभव किया वेद मंत्रों को तो वह मंत्र कोई एक बताइए थोड़ा सा फिर उसका कैसे अनुभव किया वह बता दीजिए मुझे मैं आपको अनुभव तो बता सकता हूं इस समय मंत्र बोलने की बोलिए बोलिए कोई मंत्र नहीं मैं वेद शुरुआत ही अग्निवीर से हो जाती है अग्नि क्या मैं आपको एक शब्द से ले लूंगा तो आप बोलेंगे की लंबी व्याख्या हो जाएगी अग्नि अग्नि क्या कभी भी अग्नि पूछ रहा हूं। भाई साहब मैं मंत्र पूछ रहा हूं। कोई एक मंत्र कोट करिए जिससे मैं बोल सकूं। सर आवश्यकता नहीं है। मेरे पास भी पड़े हैं। मैं आपको दिखा देता हूं। नहीं नहीं दिखाने की नहीं कह रहा हूं मैं।

00:19:17:08 मैं भी आपको दिखा रहा हूं। मैं दिखाने के लिए नहीं कह रहा हूं। आपने कहा आपने कहा कोई मंत्र बता दीजिए। तो मैंने आपको बोला ओम अग्नि नीले। बोला ना अग्निवीले ओम अग्निवीले मैं यही पहले इसी को पहले इसी को तो समझ ले ओम क्या है और अग्निवीले क्या है तभी तो बाकी को पढूंगा मैं ओम अग्नि मिले तो पढ़ लू क्या है किस अग्नि देव की स्तुति करने जा रहे हैं ओम का अर्थ क्या है जब तक ये नहीं जान लेते तो बाकी वेद का जानना बेकार हो गया ना ये तो पूरी पुस्तक हो गई देखिए जैसे कि वेद ने मंत्र मुझे पढ़ के सुना दीजिए मंत्र बता दीजिए किस मंत्र ने आपको मंत्र मैं आप मैं पूछ रहा हूं। वेद ने वेद ने एक जगह कोट किया है कि वेद के अलावा कोई भी और मोक्ष का मार्ग नहीं है। ठीक है? ठीक है? मान ली आपकी बात। आप किताब की बात कर रहे हैं। मैं कह रहा हूं विध धातु की ज्ञान की बात कर रहा हूं। आप सिर्फ किताबों में किताब की बात कर रहे हैं ना आप श्री राम शर्माचार्य जी का पढ़ा ना आपने। किताब पढ़ने के बाद आगे भी तो चलना ही या किताब पे ही उलझा रह जाना है। अगर मैं कहूं अगर मैं कहूं कि ये मील का पत्थर है। अभी मैं कहूं ये मील का पत्थर है और यहां से 200 किलोमीटर दूर दिल्ली है और मील का पत्थर पकड़ के

00:20:32:12 बैठ जाएंगे तो दिल्ली कब पहुंचेंगे। देखिए बैठने की बात नहीं जब तक क्लियर नहीं होगी तब तक हम आगे कैसे चले जाए। हमें जाना कानपुर है और हम चले जाए सीतापुर। इसीलिए तो कह रहा हूं। इसीलिए तो आपसे कह

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00:20:42:07 रहा हूं पहले ओम अग्नि मिले को तो क्लियर कर ले आपने जो गिलास वाला उदाहरण दिया था कि एक गिलास में पानी कम है और एक गिलास में आधा खाली है और आधा भरा हुआ है। कोई यह कहता है कोई कहता है आधी हवा है, आधा पानी है। उसमें यह भी कहा जा सकता है कि जब कोई यह कह देता है कि इस गिलास में आधा पानी भी नहीं है। ये गिलास तो पूरा खाली है। तो उसको क्या हम मानेंगे? या जो यह कह दे जो अपने पर्सेक्टिव बताते समय गिलास के बारे में अपना दृश्य दशकन मूल्यांकन बताते समय जो ये क्लेम कर दे कि मैं जो कह रहा हूं वो सही है दूसरा जो कह रहा है गलत है उसको क्या सही मानेंगे आप जैसे कि किसी ने कहा ईश्वर अवतार ले सकता है एक एक मिनट भाई साहब जैसे कि किसी ने कहा ईश्वर अवतार ले सकता है दूसरे ने कहा नहीं ले सकता ले ही नहीं सकता वो ईश्वर अवतार नहीं ले सकता बीच में नहीं आ सकता तो यहां पे इन दोनों दोनों में से अगर उन्होंने अपने ही मत को रखा होता केवल सामने वाले को मना नहीं किया होता तब हम ये कह सकते कि हां सबका सामंजस्य हो गया मगर जो ये कह दे कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता और और कई लोगों ने कहा है ले सकता है तो जिसने इन चारों का खंडन कर दिया उसका सामंजस्य कैसे बिठाएंगे आप ये तो ये रही गिलास वाली बात ये तो ये रही गिलास वाली बात

00:21:56:09 अब अभी अब अभी वेद की बात मैं कर रहा हूं आपने कहा कि आपने वेद मंत्र पढ़े हैं श्री राम शर्माचार्य के श्री राम शर्माचार्य श्री राम शर्मा आचार्य के नहीं ऋग्वेद के मंत्र पढ़े हैं। श्री राम आचार्य ने वो संकलित किए हैं। भाषा बदलिए आप भाषा को बदलिए प्लीज। वो वो किताब आपको कहां से मिली थी? खरीदी हमने परचेस की है भाई। अरे भाई तो किसकी छपी हुई किताब थी वो। वो किसकी छपी हुई किताब थी भाई साहब? ये छपी हुई है वहां पे गायत्री परिवार वालों ने छापी है। हां तो गायत्री परिवार वालों से आपने वेद के मंत्र लिए हैं ना वो शिव और पार्वती ने नहीं दिए ना आपको वेद के मंत्र

00:22:42:24 भाई साहब आपको मैं समझा नहीं पाऊंगा क्योंकि मुझे लगता है कि आप अभी उस स्तर पे नहीं आ पा रहे हैं जिस स्तर पे मैं बात करना चाह रहा हूं आप चाहते हैं कि आपसे प्रश्न ना किया जाए आप समझना नहीं चाह रहे आप समझना नहीं चाह रहे आप एक ही बात पे अड़े हुए हैं निश्चित हो गए हैं आप निश्चित हो गए हैं कि मेरा कहने का अर्थ है मैं कहना चाह रहा हूं भाई साहब मैं कहना ये रहा हूं मैं कहना ये चाह रहा हूं कि यदि आपको राम शर्मा जी पर विश्वास नहीं है एज ए गुरु आप उनको स्वीकार नहीं करते तो फिर उनके द्वारा दिए गए वेद मंत्र पर आपको विश्वास कैसे है ये कह रहा हूं मैं तो मैं तो आपसे बार-बार कह रहा हूं आपको आप अपने आप अपनी हमारी बातों को पहले ध्यान से सुने हमने ये कब कहा कि श्री रामचर्या ने श्री राम शर्मा आचार्य ने वेद मंत्र दिए हैं। हमने ये तो कभी कहा ही नहीं। हमने कहा मंत्र है। रुगद के ये वेद के ही मंत्र है। आपने कैसे इसको वो किया? वेरीफाई वेरीफाई अपने अनुभव से किया। बार-बार आपसे कह रहा हूं अपने अनुभव से किया। जैसे पहला ही मंत्र आपने पढ़ा। भाई साहब ये बताइए वेद से मुक्ति मिलती है। ये अनुभव आपने कैसे कर लिया? बताइए। मुक्ति मिल गई आपको? मुक्त

00:23:57:27 हो चुके हैं। क्योंकि मुक्ति हो चुके हैं आपको? मुक्त हो चुके आप। अब मैं आपकी ओर अगर आपकी ओर कोई वार करेगा तो आपकी पलक तो नहीं चपकेगी। वो तो स्वाभाविकता है ना? यानी मुक्त नहीं हुए ना? यानी मुक्त नहीं हुए ना? अगर पलक झपक जाए तो इसका मतलब आदमी मुक्त नहीं हुआ। ये आपकी दृष्टि है। आपका दृष्टिकोण है। मेरा दृष्टिकोण नहीं है। अच्छा चलिए पलक झपकना किस बात का प्रमाण है बताइए? आप शरीर को शरीर को आत्मा को आप दोनों को इकट्ठा कर रहे हैं। अरे तो प्रपंच रूपी संसार में है। जो मुक्त नहीं हुआ वही तो संसार में है। आप कह रहे हैं आप मुक्त हो गए। आप मुक्त हो गए तो आपको भूख लगती है ना आप सोच जाते होंगे। नहीं तो फिर आप ऐसा करें। आप ऐसा करें। थोड़ा सा गीता का अध्ययन कर ले। चौथा अध्याय पढ़ ले। आदमी किस तरह से मुक्त होता है। ज्ञान मार्ग में चलने वाला व्यक्ति और कर्म मार्ग में चलने वाला व्यक्ति। कर्म क्या है? पांच इंद्रियां करती है और पांच ज्ञानेंद्रियां करती है साथ में एक मन कार्य करता है ये 11 चीजें काम करती है लेकिन इनसे कर्म किया हुआ इनसे कर्म किया हुआ उससे श्रेष्ठ कौन है जो व्यक्ति ज्ञान यज्ञ में चला जाता है और ज्ञान यज्ञ में गया हुआ व्यक्ति वैसे ही जिस तरह से ईंधन अग्नि में भस्म हो जाता है उसी प्रकार

00:25:13:10 वो बिल्कुल ही मुक्त हो जाता है क्यों ऐसे व्यक्ति को पथिक कहा जाता है कि वो मुक्ति के मुमुक्षु है बट वो वो मुक्त नहीं है। मुक्त तो तभी है जब वो मुक्त हुआ जब उसको बोध हो गया। आत्म स्वरूप हो गया। जिसकी पलक ना झप या तो पलक या तो पलक जो त्रिव ताप है जो भौतिक में अगर कोई पलक झपकना छोड़ दे तो इसका मतलब वो मुक्त हो गया। और भी चीजें हैं। उसको ना भूख किसी चीज की आवश्यकता नहीं होगी। वो स्थित हो जाएगा। स्थित हो जाएगा। आप उस स्तर पे बात नहीं कर पा रहे हैं जिस स्तर पे हम करना चाहते हैं। आप थोड़ा और ऊंचा उठे अच्छा लगेगा। ऐसा नहीं है भाई साहब आपके पास जवाब नहीं है इसलिए आप ऐसी बातें कर रहे हैं। जवाब जवाब हम आपको देना चाहते आप सुनना नहीं चाहते। हम बार-ब मैंने पूछा जब आपको राम शर्माचार्य जी पर आपको जब राम शर्माचार्य जी पर विश्वास नहीं है तो आपको यह विश्वास कैसे है कि उन्होंने जो मंत्र दिए वही मंत्र है जो वही मंत्र विश्वास नहीं है लेकिन हम तो बार-बार कह रहे हैं कि हमें ये ऋग्वेद पर विश्वास है ऋग्वेद को हमने पढ़ा कैसे मालूम किया वही आपको बताना अनुभव से किया आप अनुभव करो ना मेरे साथ बैठ के अनुभव आपने मुक्ति कर लिया भाई साहब

00:26:29:13 आपने अनुभव मुक्ति का कर लिया कर लिया तो आप बोलिए ना तो आपका स्वास्थ्य खराब होता होगा ना ही आपका जो है आपको भूख लगती होगी स्वास्थ्य स्वास्थ्य शरीर की बात है तो शरीर से भी आप शरीर से आप जुड़े हुए हैं ना जब ईश्वर भी पृथ्वी पर आता है तो उसके शरीर को भी भूख लगती है वो भी पलकाता है विवशता नहीं होती उसकी जी यही अंतर है। वो अपनी इच्छा से करता है। हमारी व्यवस्था है। आपकी व्यवस्था है भोजन करने की। ईश्वर की व्यवस्था नहीं है। ईश्वर चाहे तो 14 कितने दिन तक लक्ष्मण लक्ष्मण जी ही देख लीजिए कितने दिन तक वो बिना रात में सोए जगे समय अवधि काट दी थी उन्होंने।

00:27:18:14 वो भी बात है। मेरा कहने का अर्थ यह है महाराज जी कि यदि हम किसी से वेद के मंत्र ले रहे हैं तो हमें उसके प्रति प्रमाण बुद्धि दिखानी पड़ेगी। किसी से भी ले क्योंकि हमको डायरेक्ट या तो हमको डायरेक्ट मिल गए हो। शिव पार्वती जी ने डायरेक्ट हमें दे दिए हो। हमें डायरेक्ट मिल गए। देखिए आपको लगता है कि आप सुनिए। मान लीजिए कि यहां से किसी ने मुंबई जाना है, मुंबई जाना है, कोई तो साइकिल से जा रहा है, कोई पैदल जा रहा है, कोई कार पे जा रहा है, कोई बस पे जा रहा है, कोई ट्रेन पे जा रहा है, कोई बाय एयर जा रहा है। रास्ते अलग-अलग है। है ना? तो साधु सन्यासी क्या करते हैं? उनको डायरेक्ट मिल जाता है। हमें डायरेक्ट मिल गया। मिल गया। तो चाहिए। आपको डायरेक्ट मिला है। वेद का मंत्र वगैरह सब मिला है। हमें मिल गया। अब कुछ पाने की चाह नहीं। कुछ पाने की चाह नहीं। कुछ परिवार से लिया है। फिर आप क्यों कह रहे थे? अरे हमने आपसे कहा कि गायत्री परिवार का हमने यह लिखा हुआ पढ़ा। आप घुमा हम कह रहे पढ़ा क्या क्या किसी किताब को पढ़ना आपने किसी आपके पीछे इतनी सारी किताबें दिख रही है तो क्या आपने वो पढ़ी है ना? है ना? पढ़ी है ना? इसी तरह से हमने भी किताबों को पढ़ा है। को पढ़ा है। वेद

00:28:33:20 मंत्र आपको स्वतंत्र रूप से मिले थे। हां स्वतंत्र मिले हैं क्योंकि ग्रंथों में स्वतंत्र रूप से आपको वेद दिए हैं। हमने ग्रंथों को पढ़ा ग्रंथों को पढ़ा उनप मनन किया चिंतन किया और इन चीजों से परे हट गए हम। ठीक है? सारे वेद दे सारे वेद दे दिए हैं ना उन्होंने आपको। शिव पार्वती सब कुछ दे दिया है। जो हमें चाहिए था वो हमें मिल गया है। इसके अलावा हमें और कुछ नहीं चाहिए। हमें कुछ पाना ही नहीं है। मंडल का दसवे मंडल का 192वा सूक्त सुना सकते हैं वेद का? सवाल ये है ही नहीं है। नहीं सवाल ही नहीं है। ये आप ये क्लेम कर रहे हैं कि आपको स्वप्न में या दिव्य योजना से वेद के मंत्र प्राप्त हुए हैं। मारने की बात

00:29:16:09 विषय से विषय से आप भटक रहे हैं ना भटके। मैं विषय पे ही हूं। मैं आपकी प्रामाणिकता मैं आपकी प्रामाणिकता पर प्रश्न उठा रहा हूं। आपने कहा कि मुझे देखिए देखिए ऐसा है ऐसा है देखिए ऐसा है भगवान ने मोहिनी का रूप धारण करके छल भी किया है भगवान ने बुद्ध का रूप धारण करके जो वैदिक यज्ञ है उनका खंडन भी किया है इसका अर्थ है कि भगवान ऐसा रूप ऐसा कृत कर सकते हैं जो वेदों के विरुद्ध हो तो इसलिए यदि आप यह कह रहे हैं कि शिव पार्वती ने मुझे ज्ञान दिया है तो मुझे उसकी प्रमाणिकता जांच रहा हूं कि भाई वो वही है कि नहीं। तो इसलिए सुनिए सुनिए प्रमाणिकता तो वो जानेगा ना जो स्वयं परमात्मा को जान चुका हो। आप तो एक साधारण मानव है। आप कैसे हमारी प्रमाणिकता जानेंगे? मैं परमात्मा को जानने की प्रमाणिकता नहीं जांच रहा हूं। मैं सामने वाले की प्रमाणिकता जांच रहा हूं। नहीं नहीं नहीं आप आप प्रमाणिकता जान रहे हैं। इसलिए कि सामने वाले के अंदर कितना ज्ञान है। ये जानना चाह रहे हैं आप। ना ना ज्ञान नहीं ज्ञान ज्ञान नहीं ज्ञान नहीं ज्ञान तो आप में मुझसे बहुत ज्यादा है मैं जान रहा हूं प्रमाणिकता मैं ज्ञान नहीं वो ज्ञान प्रामाणिक है वैदिक है कि नहीं मेरा बस इतना है आपके

00:30:31:20 पास बहुत ज्ञान हो सकता है सब कुछ हो सकता है वो ज्ञान वैदिक है कि नहीं सवाल ये चल रहा है वैदिक वो वैदिक जो हमें परंपराओं से प्राप्त होने वाले के द्वारा जो ज्ञान विज्ञान प्राप्त होता है रामानुजाचार्य शंकराचार्य परंपराओं से प्राप्त होता है आपका जो ज्ञान विज्ञान है वो वही उनहीं परंपराओं का है कि नहीं आप मुझे वैदिक अर्थ बता दे चलिए कहानी खत्म गेम ओवर बताइए भाई साहब अभी बात ये चल रही है आपने कहा आपको स्वतंत्र रूप से मुझसे पूछ रहे हैं आप मुझे ये बता दीजिए कि वैदिक का अर्थ क्या है बस इतना बता दीजिए बाकी कुछ नहीं हमारे परम प्रमाण है सनातनियों के श्रुति शास्त्र जो कल्प के प्रारंभ में ब्रह्मा जी को स्वास रूप में प्राप्त होते हैं नारायण के द्वारा वो जो ग्रंथ है कालांतर में जब लिपिबद्ध किए जाते हैं आचार्य के द्वारा व्यास जी के द्वारा उनहीं ग्रंथों को हम वेद के नाम से जानते हैं। यद्यपि वेद का अर्थ ज्ञान भी है। वेद का अर्थ ज्ञान भी है। पर यहां पर वेद ग्रंथों की बात हो रही है। जिस पर विश्वास करने वाले को सनातनी कहा जाता है। अब आपने कहा कि ये जो वेद के मंत्र हैं लिपिबद्ध होते हुए जो वेद के मंत्र है यह आपको शिव जी और पार्वती जी से प्राप्त हुए हैं और स्वतंत्र रूप से आपको किसी किताब की जरूरत नहीं पड़ी।

00:31:46:28 तो मैं आपसे बस इतना कहना चाहूंगा। हां ठीक है। तो आप मुझे केवल दव मंडल का 192वा सूक्त जरा सुना दीजिए। कोई आवश्यकता नहीं है। मुझे मैं आपसे एक छोटा सा प्रश्न फिर आपकी ये बात जो है ये आप जो परीक्षा लेना चाहते हैं ना हम आपकी परीक्षा में नहीं बैठना चाहते। मैं परीक्षा नहीं ले रहा हूं। फिर आपको ये कहना चाहिए कि मैं वैदिक हूं। पूछा था पहले जब हमसे पूछा था आपने कि वेद का कोई मंत्र बताइए तो हम शुरुआत ऋग्वेद से करने वाले थे। लेकिन उसके बाद आपने आगे बढ़ गए सीधा दव मंडल में चले जाते आप और पहले का पहले श्लोक का ही यानी पहले जो मंत्र का है उसका अर्थ तो आप मुझे बता दें आपको सारे आपसे वेद पढ़ने नहीं बैठा हूं ना यहां पर आप एक क्लेम कर रहे हैं कि आप ब्रह्म कुमारी का समर्थन करते हैं तो फिर सबसे पहले ब्रह्मा कुमारी का समर्थन करने वाले का समर्थन हो रहा है कि नहीं हो रहा है ये देख रहा हूं मैं मैं तो ब्रह्मा कुमारी का समर्थन करता हूं हां तो इसीलिए मैं की प्रमाणिकता पूछ रहा हूं इसीलिए मैंने आपकी प्रमाणिकता पूछी।

00:32:52:26 परंपरा आप मेरी प्रमाणिकता ना पूछ के आप पूछ रहे हैं कि मेरा ज्ञान कितना है? मुझे कितना फलाने की वेद के मंत्र मुझे जब से प्राप्त हुए हैं तो मैं जानना चाहता हूं प्राप्त हुए भी है कि ये एक बात है केवल एक। क्यों जानना चाहते? क्यों जानना चाहते हैं आप? क्यों जानना चाहते हैं? और आप मुझे एक बात आप एक अप्रामाणिक संस्था का समर्थन कर रहे हैं ना भाई साहब इसलिए आपकी प्रमाणिकता जान रहा हूं मैं तो उस संस्था के बारे में आप बात कर ले मुझसे वेदों की प्रमाणिकता छोड़ देते आपकी प्रमाणिकता के बारे में ना पूछू आपसे ना क्यों पूछेंगे आप जब क्यों आप प्रमाण तो ये है ना कि आप वेदों को जानिए आपको वैदिक का अर्थ पूरा मालूम नहीं है अच्छा ये बताइए जब

00:33:37:27 कक्षा का एक कक्षा का विद्यार्थी एक एमए और पीएचडी वाले ले एग्जाम देने के लिए सामने बैठा हो तो कैसे कोई एग्जाम दे देगा? ये ये तय कौन कर रहा है यहां पर? किसने तय किया? अब हम कर रहे हैं ना? पहले आप तय कर रहे थे। अब हम तय कर रहे हैं। आप कक्षा के विद्यार्थी यानी कि आप स्वयं को एक अथॉरिटी के रूप में यहां प्रस्तुत कर रहे हैं ना। क्योंकि हमें कुछ पाने के लिए नहीं। जब आप भाई साहब महाभारत में एक सिद्धांत लिखा है भीष्म जी का वाक्य है कि अन्यों के साथ वही व्यवहार करिए जो स्वयं के साथ स्वीकार्य हो तो आप जब स्वयं को अथॉरिटी के रूप में प्रस्तुत यहां कर रहे हैं तो मैं ये नहीं कह रहा मुझे भी अथॉरिटी कम से कम अपनी अथॉरिटी के बारे में मुझे प्रश्न तो करने दीजिए बिल्कुल आपने प्रश्न कर लिया लेकिन सवाल यह है कि मेरा जवाब आपको संतुष्ट कर ही नहीं पा रहा है नहीं मैंने आप विद्यार्थी ब्रह्मा कुमारी में आपको समस्त वेद जो है वो शिव पार्वती जी के द्वारा डायरेक्ट प्राप्त हुए हैं। आपका कोई गुरु नहीं है। है ना? उन्होंने ही दिए हैं। उन्होंने ही ग्रंथ आपको ऋग्वेद का दवे मंडल का 192वा सूक्त बताने में क्या दिक्कत है?

00:34:53:15 पहले वही तो वही तो कह रहा हूं कि आप ऋग्वेद के दवे मंडल पे अटक गए हैं। श्लोक पे उसके मंत्र पे अटक गए। लेकिन नौवा मंडल बता दीजिए। नौवा पहले वाला पहले वाला पता नहीं चलेगा। भाई साहब पहले बता दीजिए। पहले वाला हमें पता नहीं और दव पे चल दिए। शुरुआत तो पहले कर ले। अरे मैं वेद पढ़ने नहीं बैठा हूं। मैं केवल ये मेरी यह जिज्ञासा है कि आप जो क्लेम कर रहे हैं कि मुझे स्वप्न में मिला है वो वास्तविकता है या केवल एक बात है। मैं यह जानना चाह रहा हूं। आपके पास आपके पास यदि कोई दिव्यता है तो मैं जैसे अर्जुन ने भी भगवान से कहा था जब भगवान ने कहा था मैं ही भगवान हूं। अर्जुन ने कहा कि आप अपना विराट स्वरूप दिखा दीजिए। उन्होंने दिखा दिया। ऐसे ही मेरी आपके प्रति जिज्ञासा है की यदि आपके पास दिव्यता है तो उसका दिव्यता का सबूत दे दीजिए मुझे। तो पहले आप उसी तरह से अर्जुन बनकर आइए हमारे पास फिर बात करेंगे। [हंसी] ठीक है तो आपको नहीं लेना है हम आपको सारा देंगे ठीक है कुल मिला के आपको ऋग्वेद नहीं बताना है चलिए ठीक है अब मुझे बता दीजिए आपके अनुसार धर्म क्या है ऋग्वेद के ऋग्वेद के अगर पहले वाले से शुरू करते प्रथम मंडल से सूत्र नंबर एक से शुरू मेरे आचार्यों से मुझे मेरे आचार्यों से पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य जी का मैं शिष्य हूं जो अध्यात्म

00:36:09:01 के विषय में मेरी जो जिज्ञासाएं होती है मैं उनसे शांत कर लेता हूं अपनी जिज्ञासाओं को मैं आपके पास यहां पर कक्षा लेने के लिए नहीं बैठा हूं। मुझे बताया गया था कि आप ब्रह्मा कुमारी का समर्थन करते हैं और अपने आप को महामंडलेश्वर भी कहते हैं। यद्यपि महामंडलेश्वर कहने के विषय में भी एक अच्छी खासी एक बात हो जाएगी। मगर वो अभी हमारा मुख्य विषय नहीं है। तो उसको जाने देता हूं। फिलहाल मैं आपसे ब्रह्मा कुमारी पर बात करने के लिए अब आगे बढ़ता हूं। ठीक है। हां ठीक है। आइए। हां। अब मुझे बता दीजिए आपके अनुसार धर्म किसे कहते हैं?

00:36:43:06 किसी भी गुणों को धारण करना जितने भी गुण है उन को धारण करना वही धर्म कहलाता है और वो मानवता के अंतर्गत आता है तो मानवता की कोई सुनिश्चित नियमावली है आपके पास मानवता के जो गुण है जैसे प्रेम है शुद्ध आचरण है स्पष्ट वादिता है सच्चाई है, ज्ञान का सागर है। यह जो परमात्मा के गुण बताए गए हैं, उनहीं गुणों को यदि व्यक्ति अपने जीवन में धारण करता है तो कहते हैं कि गुण धारण कर लिए उसने और वो धर्म के मार्ग पर चल रहा है। तो जो धारण किया जाए वह धर्म है। ठीक है? धारक तत्व को धर्म कहते हैं। इसकी उपयोगिता क्या है? आवश्यकता क्या है इसकी?

00:37:40:26 मानव के जीवन में उसके भीतर ही दो शक्तियां चलती हैं। एक शक्ति होती है रचनात्मक, एक होती है नकारात्मक। जब रचनात्मक शक्ति कम हो जाती है और नकारात्मक शक्तियां उभर जाती है तो उस समय एक आत्मा और बुद्धि बुद्धि ये कहती है कि ये गलत है बुद्धि ये कहती है कि ये सही है बुद्धि तोलती है तराजू की तरह तोलती है और उस समय जो निर्णय सही है बुद्धि का निर्णय जो सही है उस मार्ग पर चलना श्रेयस्कर कहलाता है वो श्रेय मार्ग है

00:38:22:02 बुद्धि जो कहती है उस मार्ग पर चलना श्रेयस्कर कहलाता है वो धर्म है। बुद्धि जो कहेगी उस समय उस मार्ग पर चलना उस समय ये नहीं कि नकारात्मक सोच वाले मार्ग पे नहीं जाना।

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00:38:34:07 इसीलिए ये कहा है कि असतो मा सद्गमय हमें सत्य के मार्ग की ओर ले चलो। असत से और हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। हम तो फिर ये तो कहा गया ना ज्ञान से अज्ञान को मिटाकर ज्ञान की ओर ले चलो। हमें सही मार्ग दिखा परमात्मा कि हम तेरे दिखाए हुए सही मार्ग पर चल सके। हम तो ये ये बुद्धि निर्णय करती है। बुद्धि निर्णय करती है और फिर वो आत्मा पर संस्कार भी बनते चले जाते हैं। निर्णय बुद्धि करती है अच्छा क्या और बुरा क्या? अच्छा आपने अभी एक बात बताई

00:39:11:27 जी आपने अभी एक बात कही कि जो धारण किए जाए जिन गुणों को वही धर्म है जैसे कोई चोर है वो चोरी करने के गुण को धारण करता है तो चोरी करना धर्म है लेकिन उसे ये भी तो होता है ना कि मैं चोरी कर रहा हूं तो गलत कर रहा हूं हां तो ये गलत और सही ये जो गलत और सही है इसका इसका आधार क्या है क्या गलत है क्या ये निर्णय ही बुद्धि करवाती है बुद्धि करवाती है कि ये ठीक है या नहीं है कर्मी आप अपनी के ने के दूर जिन इनामया गए मशक्कत काल नानक ते उजले केती छुट्टी नाल दिवस रात जगत सुनिए दिवस रात दादा दाया खेला सगल जगत ये जगत जो है दिवस रात दिवस और रात यानी अंधेरे और उजाले के भीतर नकारात्मक और सकारात्मक विचारों के बीच में झूल रहा है कर रहा है निर्णय आपको करना है आपके हाथ में चाकू दे दिया है चाहे तो सेब काट ले सब्जी काट ले या किसी के पेट में घूप दे हम तो अब यहां से दो प्रश्न आते हैं। एक कि यह जो मेरी आवाज आ रही है, यह बुद्धि से नहीं आ रही है बल्कि मन से आ रही है। बुद्धि के अलावा मन है ना? तो बुद्धि से नहीं आ रही है। एक एक बुद्धि से नहीं आ रही है। मन से आ रही है। पहला सवाल ये निश्चित कैसे होगा? ये बुद्धि की आवाज सुननी है और मन की नहीं

00:40:26:28 सुननी है। ये निश्चित कैसे होगा? भाई मेरे ही अंदर से दोनों आवाजें आ रही हैं। तो मेरे को कैसे पता चलेगा? जैसे कोई व्यक्ति है वो बिना कपड़ों के बाहर जाना चाहता है। है ना? कोई व्यक्ति है जो ऐसी स्त्री के साथ संबंध बनाना चाहता है जो उसके जिसके लिए वो अधिकारी योग्य नहीं है। अनाधिकृत रूप से व्यभचार तो ये जो आवाज आ रही है गलत करने वाली ये उसके मन मतलब बुद्धि से नहीं आ रही है बल्कि मन से आ रही है। ये निर्णय वो कैसे करेगा? पहली बात। दूसरी बात यदि वो दूसरी बात यदि वो कर भी लेगा तो इससे उसे फायदा क्या होगा? मैंने पूछा उपयोगिता क्या है? आवश्यकता क्या है धर्म की? दो बातें। जी हम ये जो दो आवाजें आ रही है ना आपने कहा हम ये एक ही स्थान से दो आवाजें आ रही है जब तक शरीर के भीतर आत्मा है तभी तक तो आवाज आएगी नहीं तो क्या होगा शरीर के सारे अंग पांच कर्मेंद्रियां पांच ज्ञानेंद्रियां यू के यू जमीन पर पड़ी हुई होंगी आंखें भी होंगी नाक भी होगा भी होंगे कान भी होंगे त्वचा भी होगी सारे के सारे अंग होंगे और अगर इसमें से आत्मा यानी रथी जो चला रहा है इस शरीर को रथी निकल गया तो कह दिया जाएगा यह अरथी हो गई या

00:41:42:00 कह दिया जाएगा निधन हो गया ऐसा कहां इतना लंबा जा रहे हैं मैंने आपसे पूछा है कि मन और बुद्धि में अंतर कैसे करें कि ये आवाज मेरी बुद्धि की आवाज नहीं है ये अंतर कैसे करें और दूसरी बात की यदि अंतर कर भी लिया तो इससे मुझे फायदा क्या होगा स्वयं के स्वयं के भीतर ये आवाज उठती है स्वयं के भीतर ये आवाज उठती है ये गलत है लेकिन क्या होता है कि उसे उसे दबा दिया जाता है। मन दबा लेता है। नहीं कोई बात नहीं चल बाद में देख लेंगे। कोई बात नहीं चल बाद में देख लेंगे फिर कर लेंगे। और जैसे जैसे [हंसी] स्वयं के भीतर से ही आवाजों को इसीलिए तो हम जब स्वयं के भीतर से ही जब दबा सकते हैं तो हमें कोई बाह्य बल चाहिए ना निश्चित करने के लिए क्या सही है क्या गलत है इसीलिए भगवान ने कहा तेरे लिए कर्तव कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है तो बुद्धि के ऊपर डिपेंड इसलिए नहीं हो सकते कि वहां हम निर्णय नहीं कर पाएंगे कि कौन सी आवाज बुद्धि से कौन सी मन से जैसे निठारी वालों को निठारी हत्याकांड में बच्चों का मांस कुकर में उबाल के खाना ही धर्म लग रहा है वहां उनकी बुद्धि से आवाज आ रही होगी। उन्होंने दबा दी। उन्होंने सोचा जो मना कर रहा है वो गलत है और जो कह रहा है खा ले वो सही है। उन्होंने आवाज दबा दी ना लेकिन आवाज तो आई थी। ये हम सिद्ध कैसे करेंगे? ये हम सिद्ध कैसे करेंगे? उनके अंदर ज्ञान

00:42:57:01 और अभ्यास की कमी थी। क्या हम सामने वाले को यह सिद्ध कैसे करेंगे कि यह जो आवाज आ रही है तुम्हारे अंदर से गलत आवाज है। तुम गलत डायरेक्शन में जा रहे हो। सिद्ध कैसे करेंगे उसको? हम बाहर से सिद्ध नहीं कर सकते। उसके भीतर ही आवाज आती है और वही वही हो रहा है। इसका मतलब उससे ये नहीं कह सकते निठारी वाले से कि तुम अधर्म कर रहे हो। आप कहे उससे अधर्म कर रहे हो। कह सकते हैं? बिल्कुल कह सकते हैं लेकिन उसके भीतर की आवाज भी तो आती है ना उसके अंदर से और उसके लिए सत्संग की आवश्यकता होती है। उसके लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है। क्योंकि अगर किसी को सुधार कैसे होगा वो एक अलग बात है। सुधार कैसे होगा अलग बात है। मैं पूछ रहा हूं कि जो व्यक्ति एक नॉर्मल खड़ा हुआ है उसके अंदर दोनों तरह की आवाजें हैं। तो उसमें से किस आवाज किस उसमें से जो सकारात्मकता वाली आवाज है उसको सुनना है और नकारात्मकता वाली आवाज है उसको नहीं सुनना है। उसको हम किस आधार पर सिद्ध करवाएंगे कि ये नकारात्मक है। इसको नहीं सुनना है। ये सकारात्मक है। इसको सुनना है। मेरे मेरा कहना है कि उसको शास्त्र दिए जाएंगे। भाई शास्त्र में लिखा है बहन के साथ विवाह नहीं करना है तो नहीं करना है। ये वाली दूसरी आवाज को दबा दो। ठीक है। कह रहे हैं कि अंदर से ही अंदर से ही

00:44:12:02 निर्णय होगा। तो अंदर से निर्णय लेने के नाम पे तो व्यक्ति कुछ भी करता रहेगा। केवल शास्त्र देने से काम चलेगा या शास्त्र पढ़ने के बाद उस पर अमल करने से उसका अभ्यास करने से काम चलेगा? अरे वो तो आगे की बात है ना भाई साहब आप दूसरे डायरेक्शन में क्यों जा रहे उस व्यक्ति ने निठारी कांड वाले व्यक्ति ने अभ्यास नहीं किया उसने शास्त्रों को नहीं जाना बार बार अगर शास्त्रों को जाना होता पढ़ा होता गुणा होता सत्संग किया होता तो ये नौबत ही नहीं आती हां शास्त्र से मतलब शास्त्र से तय होगा क्या गलत है क्या सही मैं ये कहना चाह रहा हूं अब मुझे ये बता दीजिए इसका फायदा के ज्ञान से शास्त्र एक माध्यम है शास्त्र के ज्ञान से अरे ऐसे तो भाई साहब बातों के लक्ष्य बनाने तो मैं भी कह दू शास्त्र के ज्ञान से नहीं ईश्वर प्राप्ति से प्राप्त होगा और बोलो ईश्वर की शरण में जाने से प्राप्त होगा और बोलो ऐसे बातों के लक्ष्य नहीं बनाने ईश्वर की शरण में वही तो जाएगा जिस व्यक्ति ने उस सकारात्मक ज्ञान को समझ लिया और अपने जीवन के ढाल लिया इसी तरीके से सकारात्मक ज्ञान वही तो प्राप्त करेगा जो शास्त्र के अधीन हो जाएगा बातों के लक्ष्य क्यों बनाने हैं वही बात मैं कह रहा हूं आपको लगता है लक्ष्य तो ठीक है लेकिन हमने जो अपनी बात कहनी थी वो कह दीजिए। अच्छा ठीक है। अभी मुझे बताइए

00:45:27:06 सही गलत का चुनाव करने का फायदा क्या है? क्यों किया जाए? क्योंकि इससे एक आत्मिक शांति की अनुभूति होती है। आत्मिक शांति की अनुभूति का पहला जो तरीका है जो मैंने अनुभव किया है कि रात को कोई सपना नहीं आता। मन में विचार नहीं चलते फालतू के। व्यक्ति के विचार जो होते हैं बड़ी मुश्किल से चार ही रह जाते हैं। 40 नहीं चलते सिर्फ चार रह जाते हैं। और कई लोग तो ऐसे होते हैं जो विचारों से शून्य हो जाते हैं।

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00:46:06:00 उन्होंने भी ग्रंथ पढ़े। उससे ज्ञान लिया। ज्ञान को अपने जीवन में ढाला, सकारात्मक चिंतन किया और उसके बाद वो सकारात्मक चिंतन से भी परे निकल गए और मस्तिष्क में बिल्कुल कोई विचार नहीं रहा। विचार शून्य हो जाना। यह परिस्थिति जब आ जाती है तो समझिए पार हो गए।

00:46:24:12 अच्छा तो इसका अर्थ है कि यह जो ज्ञान विज्ञान है इसका सब कुछ जो लय है वो है परम कल्याण यानी कि मोक्ष में। जी जब उसको किसी भी जब उसके पास किसी भी प्रकार का अभाव ना रह जाए। अभाव रहित हो जाए। उसे किसी चीज की इच्छा ही ना रह जाए कि मुझे यह पाना है। जो परमात्मा ने दिया है जो ईश्वर ने दिया है काफी है। हे प्रभु तेरा शुक्रिया। हम तूने जो दिया है हम तेरे संतान है। तूने पहले बहुत कुछ दिया है हमें और इतना कुछ दे रखा है उसने। देखिए मैं छोटी सी अगर आप एक मिनट दे तो मैं आपसे अपनी बात पूरी कर लूं। ईश्वर ने हमें यानी वो परमपिता जिसे हम कहते हैं उस परमपिता ने परमात्मा शिव और माता पार्वती ने हमें ये पृथ्वी दी है। ठीक है? पृथ्वी में उसने जो पेड़ दिए हैं अगर उनको पत्थर भी मारे तो वो भी क्या करते हैं? हमें फल देते हैं। सूर्य कभी भी ये नहीं देखता कि मैं मुसलमान के यहां चमकूं या हिंदू के यहां चमकूं या उसके यहां ना चमकू उसके यहां ना चमकूं। हो सकता है कि हम लोग आपस में बांट ले। हम लोग बांट ले कि ठीक है ईद पर तेरा चंद्रमा है और करवा चौथ पर मेरा चंद्रमा है हम बांट

00:47:39:18 सकते हैं लेकिन चंद्रमा को तो मालूम ही नहीं है इसी तरह से जो हवाएं चलती है मुझे छूकर किसी दूसरे के पास चली जाती है फिर तीसरे के पास चली जाती है तो कोई धर्म भ्रष्ट किसी का नहीं होता यहां ये धर्म नहीं है धर्म भ्रष्ट होता ही नहीं किसी का इसी तरह से पृथ्वी रात भर अन्न उगाती रहती है उसको पानी दो बीज को और बीजों को भी पता है कि उगना है और परमात्मा ने तो यहां तक कर रखा है कि सबसे ऊपर गेहूं की बाली लगती है उससे नीचे से पहले भूसा लग जाता है। जानवरों के लिए भी उसने बंदोबस्त कर रखा है। तो ये जो परमात्मा का जब किसी से भेदभाव नहीं करता है। हम मनुष्य क्यों भेदभाव करें? सबसे बड़ा एक मैं मेरा सवाल कुछ है। आप थोड़ा सा ट्रैक उसमें खो जाते हैं। आप मैं पूछ रहा हूं कि जब हम ये फॉलो करेंगे कि ये करना है और ये नहीं करना है। अंत में सबसे महत्वपूर्ण चीज हमें जो मिलने वाली है वो है मोक्ष। ठीक है? यही है ना? तो हां यही हम कहना चाह रहे हैं। फिर वो जो स्मृति आ जाती है व्यक्ति की जो स्मृति आ जाती है मोक्ष यानी कि जब मेरे को कुछ भी और प्राप्त करना शेष ना रह जाए जैसे कि गीता में लिखा हुआ है। है ना? हां बिल्कुल बिल्कुल हां तो यानी कि जो मोक्ष है मोक्ष है उसको अगर हम लोग थोड़ी सी शास्त्रीय

00:48:54:24 भाषा में कहे तो सच्चितानंद की प्राप्ति ही मोक्ष है। बिल्कुल है ना? वो सच्चिदानंद की प्राप्ति एक मिनट सच्चिदानंद की प्राप्ति सतित आनंद की प्राप्ति यानी कि अनंत अबाध्य स्वरूप से स्थित और आनंद में मग्न जी है ना बिल्कुल अब बात ये आती है ब्रह्मा कुमारी ब्रह्मा कुमारी वाले ये कहते हैं कि इस्लाम भी धर्म है ठीक है हां हां बोलिए तो क्या यानी कि कुरान में बताया गया जो ज्ञान विज्ञान है वो भी धर्म है। हां जी। ठीक है। पहली बात तो ये है कि इस्लाम कोई धर्म ही नहीं है। इस्लाम धर्म नहीं है। नहीं है। इस्लाम इस्लाम धर्म नहीं है। और बाइबल ईसाई वो भी कोई धर्म नहीं है। हां। ठीक है। तो यानी ब्रह्मा कुमारी जो ये क्लेम कर रही है कि इस्लाम धर्म है और बाइबल धर्म है ये गलत कर रही है। उन्होंने कहीं क्लेम नहीं किया है। हमसे विदियों की बात हो रही है। मैं आपको वीडियो दिखा दूं?

00:50:09:27 वीडियो दिखा दूं आपको।

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00:50:11:27 हां दिखा दीजिएगा। ऐसा कुछ नहीं है। एक एक चीज करेंगे। हां मैं वीडियो दिखाता हूं आपको। ऑपरेटर हम लोग अभी आगे बात कर रहे हैं। ऑपरेटर है नहीं। कोई बात नहीं। फिर दिखा दीजिए। ठीक है?

00:50:28:04 तो अगर अगर ब्रह्मा कुमारी वाले ये कह रहे हैं कि इस्लाम भी धर्म है और ये ईसाई भी धर्म है तो इतने अंश में आप फिर समर्थक नहीं है ना ब्रह्मा कुमारी के। किस बात का समर्थक नहीं हूं। अरे भाई समर्थक नहीं हूं मैं। ठीक है। अगर कोई सुनिए अगर कोई अगर कोई खुद को प्रामाणिक कह रहा है कि मैं प्रामाणिक हूं और उसमें एक रत्ती भर भी हमें ये लग रहा है कि ये झूठ बोल रहा है यहां पे गलत बोल रहा है तो उसकी अप्रामाणिक वो प्रामाणिकता तो भंग हो गई ना वहां। तो उनसे बात की जा सकती है इस बारे में। देखिए बौद्ध कोई धर्म है। तो जब तक बात नहीं होती तो जब तक बात नहीं होती तब तक तो आप प्रामाणिक ही कहलाएंगे ना। अब अब अब हम आपको बताते हैं कि हम है संत व्यक्ति। हम जहां भी जाते हैं वहां देखते हैं कि गुण ले लेते हैं। अवगुण छोड़ देते हैं। हमें अवगुणों से कोई मतलब ही नहीं। भाई साहब जब आप ये आप तब कह पा रहे हैं ना जब फोर्स लगी हुई है सरहदों पे। आपकी कोई रक्षा कर रहा है खाकी वर्दी पहन के डंडा लेकर के। तब आप कह रहे हैं हमें कोई मतलब

00:51:43:06 नहीं है। अभी आपको डकैती करने आपके आसपास कोई आएगा। आपको जान से मारने आएगा। आपको नहीं आपके परिजनों को मारने आएगा आपके प्रियजनों को मारने आएगा या कहीं पर भी कुछ आएगा तब आपको लगेगा नहीं इसको रोकना जरूरी इसके गुण नहीं लेने इसको रोकना है एट द टाइम हां तो उस समय रोका जाएगा ना परिस्थिति तो अपने आसपास जब गलत हो तो वहां पर रोकना पड़ता है ये नहीं कि उसके गुण ले ले अगर किसी के घर में अगर जैसे कोई कहे कि भाई दुनिया भर में वैश्यावत्त हो रही है तो हमें कोई मतलब नहीं है हम तो उसके गुण लेंगे जब ब्रह्मा कुमारी वाले किसी पे आक्रामक नहीं हो रहे हैं। किसी पे हमला भी नहीं कर रहे हैं। वो वैचारिक तौर पर आक्रामक हो रहे हैं ना। वैचारिक तौर पर हिंदुओं को दिशाहीन बना रहे हैं ना। उन्होंने तो कभी नहीं कहा कि दिशाहीन हो जाओ। कभी नहीं कहा उन्होंने। अरे भाई जब वो ये क्लेम कर रहे हैं। आप कह रहे हो कि इस्लाम और ईसाइयत धर्म नहीं है और वो कह रहे हैं कि धर्म है। तो इतने मुझे मानना पड़ेगा ना कि दिशाहीन कर रहे हैं। मुझे देखिए जो मेरा अपना अनुभव है मुझे नहीं लगा कि अभी उन्होंने इस तरह की कोई बात हमसे की हो। तो आपको पता करना चाहिए था वीडियो दिखा दूंगा आपको मैं दिखा दूंगा

00:52:54:12 आपको फिर समर्थन तब करना चाहिए ना ब्रह्मा कुमारी का जब आप पता कर लो मैं आपको 10 वीडियो दिखा दूंगा उनके टॉप लीडर्स के द्वारा क्लेम किया जा रहा है कि इस्लाम और ईसाइयत भी धर्म है हमें क्या पड़ी है उनका विरोध करने की यदि वो इस तरह की बातें ना करें तो मेरी बात को थोड़ा ध्यान से समझने की कोशिश कीजिए कि जो भी धर्म है जो भी धर्म है धर्म तो एक है सनातन पर ब्रह्मा कुमारी सनातन धर्म को ही मानती है वो मैं अभी उस पे भी आ रहा हूं मैं ब्रह्मा कुमारी की अपनी फिलोसफी पे भी आ रहा हूं पर पहले इस्लाम वाली बात क्लियर कर लूं इस्लाम और ईसाईयत धर्म नहीं है वो लोग ये क्लेम कर रहे हैं मैं 10 वीडियो आपको दिखा दूंगा अब आप मुझे वचन दे दीजिए आप नहीं मानते कि वो ऐसा क्लेम कर रही है और पता लगा तो आप क्षमा मांगेंगे सार्वजनिक रूप से कि मैंने ब्रह्मा कुमारी का समर्थन किया हमने हमने इस बात का समर्थन नहीं किया है। हमने ब्रह्मा कुमारी के गुणों का भाई साहब जब हम किसी को यह कह रहे हैं ये जो थाली है झूठी नहीं है। उसमें एक और भी झूठा डाल दिया जाएगा तो थाली झूठी हो गई।

00:54:01:03 या तो हमने केवल ब्रह्मा कुमारी की उन बातों का समर्थन किया है जो जो ठीक है सभी बातों का नहीं किया है ये कह दो आप झूठी थाली और एक मानव की मानवता में बहुत फर्क होता है इंसान में बहुत फर्क होता है भाई साहब जब हम किसी से आध्यात्म का विषय लेने जाते हैं ठीक है अध्यात्म के विषय में हम ज्ञान लेने जाते हैं तो जिससे हम लेने जा रहे हैं उसको झूठ बोलने वाला गलत बोलने वाला नहीं होना चाहिए जितना पता है उतना बोले कम से कम झूठ तो ना बोले

00:54:32:28 आप अपनी जगह पे आप ही ने आप ही ने क्लेम कर दिया तो मैं आप ही पे सवाल कर रहा हूं आपने पता ही नहीं किया कि ब्रह्मा कुमारी ये क्लेम करती है और आप उनका समर्थन लेते फिर रहे हैं ये तो गलत बात है आप पता करिए ब्रह्मा कुमारी ब्रह्मा कुमारी के आपने पोस्टर देखे हैं कभी ब्रह्मा कुमारी के आपने पोस्टर देखे हैं कभी देखे हैं देखे हैं देखे उसमें वो ईसा नहीं होते हैं उसमें मोहम्मद नहीं होते हैं हां होते हैं हां तो क्या क्या दिखाना चाह रहे हैं उस वो महापुरुष है महापुरुष फोटो लगाए हुए हैं उन्होंने यानी कि मोहम्मद आपके हिसाब से मोहम्मद जी भी आदर्श है ना महापुरुष आदर्श हो गए तो वो उन्होंने फोटो लगा रखे हैं ठीक है वो उनका महापुरुष आदर्श होते हैं कि नहीं भगवत गीता का वो ध्यान है कि नहीं आपको मनुष्य हमेशा श्रेष्ठ को फॉलो करता है आपने अभी मोहम्मद जी को महापुरुष कहा है मोहम्मद को महापुरुष कहा ना आपने ये तो फिर भविष्य पुराण खोल के देखेंगे उसमें भी मोहम्मद का नाम आया है तो क्या उसमें से भी उड़ा देंगे काट देंगे आप भाई साहब मैंने तो उसका नाम उसका नाम इस बात में आया है कि वो जो आदर्श है वहां तो हमारे आदर्शों के साथ चित्रण कर रहे हैं ना उनका उसमें उसमें उसमें ये दिया है कि ये भी पर पृथ्वी पर अवतार लेंगे भविष्य

00:55:48:09 पुराण में लिखा है महाम के रूप में उनके वो आने के बारे में

⬜ Not used yet · 00:55:52:19 – 00:56:19:06 (0:27)

00:55:52:19 है और महामहिन आने के बारे मोहम्मद मोहम्मद होता है। ये कैसे सिद्ध होगा? तो ये भी तो लिखा है कि रेगिस्तान में वो आएगा। ये भी तो लिखा है कि लिंगो छेदन होगा। तो वो अपना नया धर्म चलाएगा। ये लिखा है कि चलाएगा। क्या उसको लिखा है? वहां लिखा है कि नया धर्म चलाएगा अपना आके। मैंने क्या पूछा? महापुरुष लिखा है। सवाल ये है। हम कहते

00:56:19:06 हैं कि ये हो सकता है कि महापुरुषों के फोटो उन्होंने लगा रखे है। ठीक है। लगा दिए। उनके लिए महापुरुष है। आप मोहम्मद को आप मोहम्मद को महापुरुष मानते हैं कि नहीं मानते? मैं आपसे पूछ रहा हूं। हम मोहम्मद को ना महापुरुष मानते हैं ना ही उसको ये ठीक है कि वो मोहम्मद कौन था क्या नहीं था। हमें नहीं मालूम ना हम जानना चाहते हैं। हमें अपने से मतलब है कि हम क्या है? भाई साहब अभी बात ये चल रही है। आपने उसको महापुरुष बोला है थोड़ी देर पहले। नहीं बोला है हमने कहा कि उन्होंने महापुरुषों के चित्र हमने कहा कि उन्होंने उन महापुरुषों के चित्र लगा रखे हैं ठीक है ना आपने पोस्टर की बात की महापुरुष है आपने ये कहा चित्र लगा रखे हैं नहीं कहा है

⬜ Not used yet · 00:57:04:00 – 00:57:40:14 (0:36)

00:57:04:00 भाई उन्होंने बुद्ध का भी चित्र लगा रखा है उन्होंने गुरु नानक का भी चित्र लगा रखा है तो क्या ये महापुरुष नहीं थे जितने अंश में वो सनातन के विरुद्ध नहीं है उतने अंश में थे और और जितने अंश में सनातन के विरुद्ध है उतने अंश में नहीं थे। और ये जो मोहम्मद जी हैं ये तो एब्सोल्यूट विरोधी हैं वैदिक धर्म के। कौन वैदिक धर्म के विरोधी हैं? मोहम्मद। कौन विरोधी हैं? मोहम्मद। हां।

00:57:40:14 मोहम्मद ने अपना एक धर्म चलाया। हर आदमी एक अपने अपने पीछे लोग चला लोग चल पड़ते हैं। किसी के पीछे भी चल पड़ते हैं। तो वो लोग जैसे उसके पीछे इतिहास नहीं जानना चाह रहा हूं। मैं मोहम्मद का इतिहास नहीं जानना चाह रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं आप उसे उन्हें महापुरुष मानते हैं कि नहीं मानते? बस ये बताइए। कुछ बातें कुरान में अच्छी लिखी है तो हम अच्छी मानते हैं जो नहीं ठीक लगती हमें नहीं मानते। आगे बोलिए। मोहम्मद महापुरुष है कि नहीं ये पूछा है मैंने। हां मैं बताता हूं। अब सूर अल फातिहा पहली सूर जो है वो वो बिल्कुल अपने गायत्री मंत्र मैं पूछ रहा हूं कंक्लूजन क्या है महापुरुष है कि नहीं है कंक्लूजन ये है कि कुरान में भी मिक्सचर हो गया कुरान में भी मिक्सचर हो गया वरना कुरान में भी बहुत सारी अच्छी-अच्छी बातें भी तो लिखी है तो बोलो ना कि महापुरुष है फिर उनकी लिखी किताब में मिक्सचर हो गया है ये बोलो ना मिक्सचर हो गया ऐसा मान ले किताबों में मिक्सचर हो गया है हमारे में भी मिक्स् हुआ है महापुरुष है ठीक है। अच्छा है तो इसका मतलब उन्होंने जो धर्म दिया था वो सनातन ही था। वो पहले सारे सनातनी ही थे। नहीं वहां मोहम्मद ने जो बताया वो सनातन था। ये

00:58:55:18 तो मानना महापुरुष मान रहे हो टोटल महापुरुष तो मानना ही पड़ेगा। सनातन था। तो मोहम्मद ने मोहम्मद ने भी जो कुछ लिया है वो भी वेदों से ही लिया है क्योंकि कह रहा हूं मैं कह रहा हूं भाई साहब कि मोहम्मद ने सनातन ही बताया था ना टोटल बाद में मिक्सचर हो गया उनके नाम पे मिक्सचर हो गया हां ठीक है तो यानी वो सनातन ही था वहां का रहने वाला वहां का रहने वाला पहले जब उसके परिवार के लोग सारे के सारे पुजारी थे तो पुजारी आखिरकार तो सनातनी थे या नहीं थे। भाई साहब मैं कह रहा हूं कि मोहम्मद ने जो दिया विरोध पूर्वक 300 मूर्तियों को तोड़ के वो सनातन दिया था कि नहीं दिया था? वो मोहम्मद का दृष्टिकोण अलग था गलत था। मूर्तियां यानी कि वो महापुरुष नहीं था।

00:59:48:04 महापुरुष भी दो तरह के हो सकते हैं ना। एक नेगेटिव थिंकिंग वाले, एक पॉजिटिव थिंकिंग वाले। अच्छा मतलब खलनायक मगर बड़ा गजब का खलनायक। ऐसा उन्होंने उन्होंने नेगेटिव रास्ता अपना लिया। मूर्तियां तोड़ दी। 360 मूर्तियां थी तोड़ दी। ठीक है कि नहीं? तो लेकिन जो अच्छी बातें हैं वो तो ले लेनी चाहिए ना। बुराई बुराइयां छोड़ देनी चाहिए। अच्छी बातें तो हमारे वेदों में ही है। हमें कहीं क्यों जाना लेने के लिए? वहां भी तो है। कई जगह लिखा हुआ है अच्छी बातें लिखी हुई है। ऐसी कोई बात बता दीजिए जो वेद के बाहर हो। बताइए। वेद के बाहर कोई भी बात नहीं है तो फिर हम जाए कुरान फिर हम क्या करेंगे कुरान से कुरान का क्या करें फिर हम क्यों जाए कुरान के पास ना जाइए आपको कौन कह रहा है कि जाइए अरे ब्रह्मा कुमारी वाले कह रहे है ना कि भैया हमारे रामचंद्र जी के साथ शिव जी के साथ खड़ा कर रहे है ना मोहम्मद को क्यों कर रहे हैं भाई जब हमारे शिव जी के पास सब कुछ है राम के पास सब कुछ है तो क्यों ला रहे हो मोहम्मद को जिसमें वेद वेद की कॉपी होने के साथ साथ वेद के वेद का विरोध भी है वेद विरोधी को मनुस्मृति में नस्तिक कहा गया है। ठीक है? तो आप इस बात को जांच आप इस बात को जांच लीजिएगा कि ब्रह्मा कुमारी वाले यह क्लेम करते हैं कि इस्लाम

01:01:03:10 और ईसाइयत भी धर्म है। ये सिर्फ हमारी दृष्टि में एक संप्रदाय है। ये जैसे बौद्ध एक संप्रदाय है। सिख एक संप्रदाय है। ये सारे के सारे संप्रदाय हैं। जैन एक संप्रदाय है। ये संप्रदाय हैं। लेकिन सभी का एक ही मूल है। इनके लिए पंथ शब्द पंथ शब्द उपयुक्त है। पंथ सिख पंथ भी कह सकते हैं पंथ भी कह सकते हैं संप्रदाय इनको इनको वैदिक दिखाना वैदिक प्रतीक चिन्हों के साथ खड़ा करना यह संशय पूर्ण स्थिति फैलाने के जैसा है क्यों है क्योंकि हमारा धर्म सिखा रहा है कि रकुल रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई और 33 चार में कुरान यह कह रही है कि यदि आपने किसी को मुख से मां बहन इत्यादि जैसा कुछ मान लिया है तो भी उसके उलट आप उससे विवाह कर सकते हो। हमारा धर्म सिखा रहा अपने वचन के पक्के हो जाओ और वहां पर सिखाया जा रहा है कि आपने माता बहन कुछ बोल दिया तब भी उससे विवाह कर लो या विवाह के बिना भी जो कुछ किया जा सकता हो वो भी कर लो। नहीं मेरे ख्याल से तो 334 में बात नहीं लिखी है। खोलिए जरा। रुकिए जरा एक मिनट। एक मिनट रुकिए

01:02:18:14 जरा।

⬜ Not used yet · 01:02:21:25 – 01:02:39:27 (0:18)

01:02:21:25 नवीन जी का नंबर है हमारे पास। हम सूरह अलहजाब

01:02:39:27 हम ठीक है जी तो इसमें लिखा है अल्लाह ने किसी के सीने में दो दिल नहीं दिए और ना तुम्हारी बीवियों को जिनसे तुम जिहाद करते हो तुम्हारी मां बनाया और ना तुम्हारे मुंह बोले बेटों को तुम्हारा बेटा बना दिया हम ठीक है ये सब तुम्हारे अपने मुंह की बातें हैं मुंह की बातों को कैंसिल कर दिया ना सुनो मुंह की बातें हैं और अल्लाह ए हक की बात करता है और सीधा रास्ता दिखाता है मुंह मोले बेटों को उनके बापों की निसयत से पुकारो मुंह मोले बेटों को मुंह की बातों का यहां पर डिनाई कर रहे हैं ना मुंह बोले रिश्तों को डिनाई किया ना यहां पे ना ना ये थोड़ा समझ का फर्क आ गया मुंह बोले बेटों को उनके बापों को से पुकारो अल्लाह के नजदीक तुम्हारा मुसिफाना बात है फिर अगर तुम उनके बाप को ना जानो तो तुम्हारे दीनी भाई हैं ठीक है मतलब मतलब हम भाई नहीं बना सकते मुंह बोल मुंह बोला

⬜ Not used yet · 01:03:44:09 – 01:04:36:07 (0:52)

01:03:44:09 बोला जिहार जिहार का मतलब बताइए भाई साहब जिहार इसमें ये दिया है हकीकी मां और जुबान से कही हुई मां या हकीकी बेटा और मुंह बेला बेटा दोनों की हैसियत बिल्कुल एक हो जानी चाहिए। क्या लिखा है? हकीकी मां और जुबान से कही हुई मां यानी असली मां और जुबान से कही हुई मां या हकीकी बेटा और मुंह बोला बेटा दोनों की हैसियत बिल्कुल एक है। ये ये कुरान में लिखा है। हां ये है अरबी का कुरान भी है। ये देखिए। और

01:04:36:07 इसी में भी है जिहारत का जिहार का अर्थ बता दीजिए जरा। देख लेते हैं जरा। कुरान उतारना है जरा ऊपर हरी वाली हां तलाक देने की सूरत सुनिए तलाक देने की सूरत जिसमें शौहर अपनी बीवी से कहता था कि तुम मेरे लिए मां की पीठ की तरह हो यानी जैसे हम मौसी कहते हैं कि तुम मेरी मां जैसी हो ये माना है यहां पे जिहार का मतलब किसको कहता था हां ये देखिए बताता हूं दोबारा बताता हूं तलाक देने की एक सूरत तलाक देने की एक सूरत जिसमें शौहर अपनी बीवी से कहता है कि तुम मेरे लिए मां की पीठ की तरह हो। जब उसने तलाक दे दिया तो फिर उसके साथ जो व्यवहार करेगा वो मां की तरह करेगा। अरे भाई साहब थोड़ा सा जान लीजिए कुरान के बारे में। ये जिहार वहां पर होता था। लोग अपनी पत्नी को मां कह के तलाक दे देते थे। तो उस संबंध में एक आयत आई जिसमें यह कहा गया कि तुम यह मुंह बोले रिश्ते तुम्हारे मायने नहीं रखते। यह मुंह से मां कह देना, मुंह से बेटा कह देना यह सब गलत है। और उसके बाद से उनके यहां पर गोद लेने का जो है बंद हो गया।

01:05:51:15 मना कर दिया गया टोटल। जो मेरी दृष्टि में आया वो भी मैंने आपको बताया। हां। तो आप पहले समझ लीजिए कि क्या कहा जा रहा है वहां पे। एक मिनट। हां देख ले आप भी। देखिए इसमें लिखा है ऐ ईमान वालों उन मुंह बोले बेटों को उनके सगे बापों के नाम से बुलाया करो यही बात अल्लाह के नजदीक जियाद है। ठीक है? पर अगर तुम उनको उनके बाप का नाम मालूम ना हो मुंह बोले बेटे का। ठीक है? तो वो तुम्हारे दीनी भाई हैं। दीनी दोस्त हैं। पर तुमसे इसमें भूल चूक हो जाए तो इसमें तुम पर कुछ पाप नहीं। यानी कि जो मुंह बोले रिश्ते इत्यादि है उसमें अगर रिश्तों के विरुद्ध जाते हुए तुमसे कुछ उल्टा व्यवहार हो जाए तो तुम पर कोई पाप नहीं क्योंकि वो मुंह बोले ये सब आपने कहा ना ये सब तुम्हारे मुंह की बातें हैं। मुंह की बातों की अवहेलना हुई ना और हमारे यहां मुंह की बात का वो हो रहा है सम्मान। रकुल री सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई क्योंकि यह सब तुम्हारे मुंह की बातें हैं

01:07:06:19 और ये जो जिहारत है इसी के कारण ये वाली बात उतरी है और ऐसी एक चीज नहीं है कुरान में केवल एक ही पंक्ति है दूसरी बात एक ये है कि जब आप कुरान में कुरान को जस्टिफाई करने बैठे हैं तो इसका मतलब सबसे पहले तो हम ये मान रहे हैं मैं हम जस्टिफाई नहीं करने बैठे हैं। हमने तो ये कहा है कि जिस तरह से इनकी सूर अल फातिहा जो पहली सूर है कुरान की वो गायत्री मंत्र से ली गई है। सब तारीफ की हमें मतलब क्या है? जब हमारे पास गायत्री मंत्र है। मेरा कहने का अर्थ यह है कि दुनिया में कहीं भी यदि कोई थोड़ी बहुत भी चमक है तो हमारे वेदों के कारण है। जिस प्रकार से दुनिया में कहीं भी कोई बल्ब जल रहा है तो हम ये थोड़ी ना कह सकते हैं ये जो है स्वतंत्र रूप से थॉमस अलवा एडिसन के बिना जल रहा है। जो बात आप कह रहे हैं मैं दूसरे तरीके से कह रहा हूं। इस्लाम धर्म जो जिसको मानते हैं ये धर्म कहते हैं। इस्लाम कितने साल पुराना है? 14 1500 साल। वेद कितना पुराना है? पुराने हैं। ये सभी के सभी गूगल भी खोल के देखते हैं तो लिखा जाता है कि वेद बहुत प्राचीन है। तो इसका मतलब वेदों से कॉपी पेस्ट किया हुआ है। मैं यही तो बात हम भी कहना चाह उसमें एक दिक्कत कर दी नाव

01:08:22:00 तुमसे पहले जितनी भी किताबें आई है उसमें मिलावट हो गई है। इसलिए मैं सबकी वो करूंगी सत्यापन। ये कर दिया उसने। विरोध ना करती तो सब चला लेते काम। विरोध एक मिनट। जैसे आपने बताया था ना पानी का गिलास पानी के गिलास की बात बताई थी ना समर्थन इस बात का समर्थन हम भी नहीं करते हैं हम तो ये कह रहे हैं कि ये जो कुरान किताब आई ऐसे में ऐसे में हमें ये कहेंगे कुरान के द्वारा ऐसे में ऐसे में हमें ये कहना पड़ेगा कि कुरान के द्वारा बताया गया जो नियमावली है वो मोक्ष प्राप्त कराने में सहायक नहीं है। वेदों में पहले से ही है। वो नहीं है। मैं कह रहा हूं कि कुरान को अगर हम एज इट इज माने कुरान क्योंकि कुरान तो ये नहीं कह रही ना कि जितना वेद वेद से मैच करे उतना ही लेना। कुरान ये कह रही है मैं ही हूं टोटल। तो जब वो ये कह रही है कि मैं ही हूं टोटल। तो उसकी इन गलत चीजों को भी हमें मानना पड़ेगा। ये भी कुरान कह रही है। और जब यह मानना पड़ेगा तो एट द एंड हमें ये मानना पड़ेगा कि कुरान से कुरान में जो नियमावली दी गई है उससे हमें सच्चित आनंद प्राप्त नहीं होगा क्योंकि नहीं

01:09:37:27 हो सकता। इसका मतलब कुरान में बताया गया धर्म धर्म नहीं है। हम तो पहले ही कह चुके हैं कि कुरान में बताया गया धर्म धर्म नहीं है। वो सिर्फ एक तो इसका मतलब इसका मतलब ब्रह्मा कुमारी वालों का ये कहना कि कुरान बाइबल ये सब धर्म है। ये कहना गलत है। इस्लाम धर्म है ये गलत है। ये एक पुस्तक है जिसको वो लोग अपनी पवित्र पुस्तक मानते हैं तो मानते रहे। ठीक है ना? मानते रह। हम कह रहे हैं कि ब्रह्मा हम कह रहे हैं कि ब्रह्मा कुमारी का यह कहना कि इस्लाम धर्म है और ये क्रिश्चियनिटी धर्म है। ये कहना गलत है ना?

01:10:19:18 आपकी बात से हम सहमत है और दूसरी बात आप ये समझ ले कि क्या होता है कि कई बार बहुत-ब धन्यवाद। सुन ले थोड़ा सुन ले। जी। कई बार क्या होता है कि बच्चे को कहना पड़ता है का से कबूतर ख से खरगोश। है ना? ए से एप्पल, बी से बैट, सी से कैट। तो क्या सारे अक्षर ए से एप्पल ही होते हैं? या बी से बैट ही होते हैं, सी से कैट ही होते हैं? का से कबूतर होते हैं? ख से खरगोश ही होते हैं या गा से गाय होता है? नहीं ना? तो कई बार क्या होता है कुछ लोगों को समझाने के लिए उन्होंने ये कहा कि ये धर्म है लेकिन जब आदमी अंदर धीरेधी आता चला जाता है दीदियों के साथ या उनके साथ राजयोग की अवस्था में जाता है तो अलग ही उसकी आभा निकल जाती है वो सिर्फ एक

01:11:03:03 परमात्मा किसी तरीके से वो कन्वेंस करने के लिए कहना पड़ता है ये भी धर्म है कन्वेंस करने के लिए तो आपने जो तर्क दिया है कि ए से ए फॉर एप्पल बी फॉर बॉय ये कहा जाता है क्या सिर्फ ए से एप्पल ही होता है तो जब हम ए से एप्पल कहते हैं ए से जब हम एप्पल कहते हैं तो हम ये नहीं कहते कि ए से कुछ और हो ही नहीं सकता। हम फॉर एग्जांपल ले चलते हैं। जैसे ए से एप्पल जैसे बी से बॉय वहां पे कहीं भी लिमिट नहीं लगाई। जी इसका मतलब इसका मतलब ये लिमिट नहीं है वहां पे कि नहीं दूसरा हो ही नहीं सकता। मगर हम किसी ऐसी चीज को ले रहे हैं जो ये कह रही है कि नहीं ए से एप्पल ही होगा। दूसरा कुछ नहीं हो सकता। जो ये कह रही है उसको हम कह रहे हैं सही पढ़ाई है। उसको हमारी नहीं कहा जाता क्योंकि हमारी बड़ी बहनों बड़ी वीडियो से बात होती है। वीडियो के वीडियो में आपके कथन के साथ लगा दूंगा और मैं आपको भेज भी दूंगा तो आप आ के फिर दोबारा से इस बारे में चर्चा कर लीजिएगा। ठीक है। ठीक है।

⬜ Not used yet · 01:12:07:08 – 01:30:15:00 (18:08)

01:12:07:08 ठीक है। ठीक है शिवश जी। अब दूसरी बात ये आती है आगे कि अब बात आ जाती है स्वतंत्र रूप से ब्रह्मा कुमारी के द्वारा बताया गया जो धर्म है वो धर्म है कि नहीं ठीक है जी तो ब्रह्मा कुमारी का कांसेप्ट क्या है कि उसको कैसे जीव को मुक्ति मिलने वाली है वो बता दीजिए मुक्ति क्या है ब्रह्मा कुमारी के हिसाब से ब्रह्माकुमारी का एक ही छोटा सा सूत्र है कि हमें सभी को समान भाव से देखना और प्रेम करना करना यानी गीता के चौथे अध्याय पे ही वो ज्यादा अधिक मुक्ति पूछ रहा हूं। मुक्ति की मुक्ति का विवरण बताइए ना आप क्या करना है वो बता रहे हैं। डूस एंड डोंट्स बता रहे हैं। मैं पूछ रहा हूं मुक्ति क्या है? मुक्ति का स्वरूप क्या है? ब्रह्मा कुमारी के अनुसार जैसे इस्लाम के अनुसार मुक्ति का स्वरूप है। मुक्ति का स्वरूप है आखिर रात। इस्लाम के अनुसार स्वरूप है आखी रात। वही मैं आपसे कहना चाह रहा हूं। जो शरीर है वो पंच तत्वों में विलीन हो जाएगा। लेकिन आत्मा को परमात्मा से मिलाना यानी उस आत्मा को परमात्मा से मिलाना

01:13:19:15 और आगे जैसे परमात्मा के बारे में कहा जाता है कि करोड़ों सूर्य का प्रकाश है वहां पे। नूर है बहुत ज्यादा। प्रकाश ही प्रकाश है वहां पे। आपका वीडियो रुक रुक के चल रहा है शायद। फोन आपका हीट हो गया शायद। सब ठीक चल रहा है नहीं हां तो क्या है कि इसी तरह से आत्मा एक ज्योतिर बिंदु स्वरूप है उनका ये कहना मानना है ज्योति बिंदु स्वरूप है आत्मा परमात्मा से मिलना चाहती है और वही मोक्ष है वही मुक्ति है और उस मुक्ति को पाने का मार्ग जो है और की एकता ही है वो प्रेम है और सेवा है हां परमात्मा और पाना ही मोक्ष हां बिल्कुल अच्छा और इसीलिए इसीलिए तो ये कहती है कि अभी ये जो है कलयुग चल कलयुग का अंत चल रहा है इस समय और आप जो है यदि ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार चलेंगे तो आप देवी देवता बन करके अगला जो सतयुग स्टार्ट होगा उसमें आएंगे। ये क्या है? हम

01:14:28:00 आप अगर हम पिछला इतिहास देखें अपना तो हमारे पास 5000 साल से ज्यादा का मतलब मैं स्पष्ट कर दूं कहने का मतलब मैं स्पष्ट कर दूं ब्रह्मा कुमारी के यहां सच्चिदानंद है ही नहीं मुक्ति में आप केवल यहां से श्रेष्ठ जीवन प्राप्त करोगे स्वर्ग जैसा और उसमें भी फिर पतन होगा फिर आप दोबारा से त्रेता वो आएगा और फिर उसके बाद त्रेता आएगा फिर द्वापर आएगा फिर कलयुग आएगा तो अभी आप कलयुग में हो तो आप देवता बनने की तैयारी कर सकते हो बस। तो देवता बनना तो सतयुग नहीं है वो। देवता बनना तो सच्चिदानंद नहीं है। ये ब्रह्मा कुमारी का मोक्ष है। बताइए थोड़ा और आगे बढ़े तो ये कहना है उनका कि दो चीजें हैं जीवन में। एक तो है प्रेम और एक है निस्वार्थ सेवा। अगर इसको हम अपना लेते हैं तो हमारी आत्मा परमात्मा के साथ जाकर विलीन हो जाती है। उसमें मिल जाती है। उसके ब्रह्मांड यानी जैसे सच खंड लोक में चली जाती है। जब सच खंड लोक में चली जाएगी तो वापस नहीं आपको ब्रह्मा कुमारी के बारे में जानने की और आवश्यकता है। मुझे लगता है आपने पंडित राम शर्माचार्य जी के बारे में अच्छे से जान लिया है। उनसे जो है आपने वेद के मंत्र भी प्राप्त किए

01:15:43:01 हैं। मैं जो है शिव पार्वती जी ने आपको आध्यात्मिक ज्ञान भी दिया होगा। बिल्कुल है। मगर आपको ब्रह्मा कुमारीज को जान लेना चाहिए। ब्रह्मा कुमारी ने कभी यह क्लेम नहीं किया कि जीव और ब्रह्म की एकता मोक्ष है। उनका मोक्ष है देवता का स्वरूप प्राप्त करना। जो भी इस समय ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार चलेंगे वो अभी जो युग परिवर्तन होने वाला है। अगले उसमें सतयुग आएगा उसमें देवी देवता बन जाएंगे। यह मोक्ष है। दैट्स इट। और कुछ नहीं है। आप पता कर लीजिए पहले आप इसको उन्होंने कभी मोक्ष नहीं कहा है। मोक्ष नहीं बताइए कि मोक्ष मोक्ष वाला वीडियो मुझे दे सकते हैं। बता सकते हैं। उन्होंने तो सिर्फ इतना ही कहा है कि यहां पर जो लोग हैं अच्छे कर्म करेंगे, कर्म करेंगे, अभ्यास करेंगे, निस्वार्थ सेवा करेंगे, प्रेम वाला जीवन जिएंगे। यानी दिव्य गुणों को धारण करेंगे तो भाई साहब क्या करते हैं जिस देवी ठीक है देवी देवता बनेंगे फिर देवी देवता बनेंगे ठीक है ना देवी देवता बनेंगे ठीक है उसके बाद उसके बाद भी आगे है और कई कई कई नहीं है भाई साहब नहीं है यही है ये 5000 साल का

01:16:58:07 ड्रामा बार-बार रिपीट होना है सुन लीजिए मैं आपको एक उदाहरण दे देता हूं छोटी सी इनहीं की दादी जानकी का नाम आपने सुना है 104 साल की दादी जानकी का नाम आपने सुना 104 साल की होकर उन्होंने अपना शरीर छोड़ा। कैलिफोर्निया में 1978 में 40 देशों के साइंटिस्ट डॉक्टर्स इकट्ठा हुए। उन्हें पता चला था कि भारतवर्ष में एक ऐसी लेडी है जो विचार शून्य हो जाती है। विचार जिसके मन में बिल्कुल नहीं चलते हैं ना बुद्धि में ना मन में चलते हैं। उन्होंने कहा ऐसा हो नहीं सकता। पॉसिबल नहीं है कि कोई भी हो सपने में भी विचार चलते हैं और जिसके अंदर विचार ना चलते हैं वो डेड बॉडी मानी जाती है। हम दादी जानकी को वहां बिठाया गया ईजी की मशीन लगाई गई 1978 की बात बता रहा हूं कैलिफोर्निया में और उस समय जब उन्होंने दादी को बोला दादी रेडी उन्होंने कहा रेडी जब उनका ग्राफ लिया गया तो ग्राफ बिल्कुल स्ट्रेट लाइन जा रहा था दे सेड ये तो डेड बॉडी का ग्राफ है। आधा घंटा चला और आधे घंटे के बाद जब उन्होंने देखा तो दादी तो बिल्कुल वैसे ही नॉर्मल बैठी है। एक वही आदमी विचार शून्यता में चला जाना विचार शून्यता में चला जाना मतलब क्या है विचार शून्यता में चला जाना मोक्ष को प्राप्त कर लेना विचारता

01:18:13:18 में चला जाना मोक्ष को प्राप्त कर लेना ठीक है मगर फिर भी आप जब तक प्रपंच रूपी संसार में है शरीर से जुड़े हुए हैं तो वहां पर क्या होता है जैसे सुशुप्ति की अवस्था होती है सुशुप्त सुशुप्ति में क्या होता है हम विचार शून्य ही होते हैं वहां परंतु वहां पर बीज बाकी होता माया रूपी संसार का और वो जैसे ही पनपता है दोबारा से आप फंसते हैं तब तक इसलिए सुसुक्ति की अवस्था मुक्ति के बहुत निकट तो मानी जाएगी परंतु मुक्ति नहीं मानी जाएगी। दूसरी बात वो रिसर्च पेपर हमें कैसे मिल सकता है? वो ग्राफ वाला 104 वाला 104 वाला ग्राफ वाला पेपर हमें कैसे मिल सकता है? तो आप मुझे अपना एड्रेस भेज दीजिए। मैं आपको नहीं आप WhatsApp कर दीजिएगा। WhatsApp WhatsApp कर दीजिएगा बस। मैं आपको पूरी की पूरी पुस्तक ही भेज दूंगा ना आपको। द मोस्ट स्टेबल माइंड इन द वर्ल्ड पॉजिटिव थॉट्स के नाम से बुक है उनकी इंग्लिश में। दूसरी बात ये आती है। दूसरी बात ये आती है कि अभी हम बात कर रहे हैं कि ब्रह्मा कुमारीज वालों ने कहीं पर ये क्लेम किया है कि जीव और ब्रह्म की एकता हो जाएगी। दोबारा जीव को वापस नहीं आना पड़ेगा। ये कहीं पर है कोई वीडियो में किसी में? ये जब पर्सनल हम दादी से बात

01:19:28:21 करते हैं तो वो ये बात कहती है कि हां ऐसा होता है कि जब पूरा सचंड लोक में चले जाएंगे पूर्ण रूप से हमको कहीं पर प्राप्त हो सकता है कि ये बात वो कहती है ये बात करके पूछ लेंगे उनसे भी हम बता देंगे आपको ठीक है ना तो थोड़ा सा ब्रह्मा जी हमारा भी ज्यादा होता है ठीक है। अब ब्रह्मा कुमारी वालों का भी यही क्लेम है कि वो वैदिक धर्म ही बता रही हैं। ब्रह्मा कुमारी वाले भी। ठीक है। बिल्कुल बिल्कुल उनका यही कहना है। वेदों में एक बात कही गई है कि जो हमारे श्रुति शास्त्र है जो हमारे आचार्य हैं वो जो है जनेऊ करा के ही आचार्य बनेंगे। और जनेऊ होने का एक तरीका होता है। प्रॉपर प्रोटोकॉल होता है। तो ब्रह्मा कुमारी के यहां पर जनेऊ हो रहा है आचार्य बनने के लिए।

01:20:31:25 अभी अभी मैंने आपसे ये कहा था थोड़ी देर पहले ही कि गीता में भगवान ने चौथे अध्याय में क्या कहा है? क्या कि ज्ञान कर्म जो है ज्ञान का जो वो हवन कर्म से श्रेष्ठ है। से या इसका मतलब है कि हमें जो दहिक धर्म बताया गया है वो हमें मानने की जरूरत नहीं यदि हम ज्ञान में चले गए तो जी यदि हम ज्ञान में चले गए तो दहिक धर्म मानने की आवश्यकता नहीं है। जिसको ज्ञान हो गया उसको जिसने पीएचडी कर ली उसको दसवीं के सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है। मैं मैं पूछ रहा हूं जो ज्ञान मार्ग में चला गया। ज्ञान हो गया नहीं। ज्ञान तो अंतिम वही है जब आपको ज्ञान हो जाए कि मैं हो गया मुक्त हो गया वही ज्ञान है। जब तक वो ज्ञान नहीं है तब तक वो ज्ञान ही नहीं है। वास्तविक जब तक जीव अपने स्वरूप में स्थित ना हो जाए स्वरूप भूत ना हो जाए। अंशीभूत ना हो जाए भगवान के तब तक उसका ज्ञानी होना भी सिद्ध नहीं होता। मगर अभी फिलहाल मैं ये कह रहा हूं कि दहिक धर्म को मानने की आवश्यकता नहीं है। यदि वो ज्ञान मार्ग में जा रहा है। सही कह रहे हैं आप? बिल्कुल।

01:21:47:18 अच्छा तो इसका मतलब है इसका मतलब है कि माता बहन पत्नी में अंतर करने की आवश्यकता भी नहीं रहेगी। नहीं देखिए लौकिक रूप से है। जैसे प्रभु राम ने किया यानी कि दैहिक धर्म को निभाना है ना। लौकिक रूप से तो आवश्यकता है लेकिन मानसिक रूप से यानी मानसिक स्तर पे ऊंचा उठ जाता है रूप से तो लौकिक रूप से जो लौकिक मर्यादाएं बताई गई है उनको निभाना है ना निभानी पड़ेगी वो सभी पूछता हूं अथर्ववेद में अथर्ववेद में 11 पांच 16 इत्यादि में 11 मंडल के और दवे सूक्त में बताया गया है आचार्य कौन बन सकता है और कैसे बन सकता है पूरा है तो ब्रह्मा कुमारी के यहां पर क्या आचार्य बनने के लिए ये बातें फॉलो की जा रही है अथर्ववेद की वो आचार्य बनाते ही नहीं है कौन होता है आचार्य कौन है बताइए

01:22:56:26 बात को मेरी पहले आप आचार्य नहीं बनाते एक मिनट आपने कहा आचार्य नहीं आचार्य वो है जो शास्त्रों में दिए गए आचरण को स्वयं में स्थापित करे और अपने शिष्यों में स्थापित करें। आचार्य तो आप कह रहे हो कि वो शास्त्रों में दिए गए आचरण को शिष्यों में स्थापित कर रहा है मगर वो आचार्य नहीं है। वो देखिए भगवान ने भी अलग-अलग तरह से रास्ते दिखाए। ठीक है ना? जैसे रास्ते में उन्होंने कहा द्रव्य में द्रव्य में यज्ञ की अपेक्षा। बोला है कि नहीं बोला उन्होंने? द्रव्य में यज्ञ की ज्ञान यज्ञ मैंने क्या कहा ज्ञान यज्ञ के

01:23:40:09 मैंने क्या पूछा भाई साहब ज्ञान यज्ञ के नाम पे क्या दहिक दैहिक उसको छोड़ देना है दहिक धर्म को ज्ञान यज्ञ के नाम पर छोड़ देना ठीक है कर्म करते हुए भी कर्मों में लिप्त ना होना यही तो ज्ञान है यही तो है मैं यही तो कह रहा हूं कि आप कर्म कर पास जाकर मैं यही तो कह रहा हूं कि आप कर्म करिए ना फिर तो वहां तो नहीं हो रहा है कर्म वेदों के अनुसार लेकिन कर्म करते हुए भी कर्म में लिप्त नहीं होना मैं लिप्त हो जाओ। मैं ये नहीं कह रहा लिप्त हो जाओ। मैं कह रहा हूं जो कर्म बताए गए हैं शास्त्र के अनुसार वो कर्म करो। उसमें लिप्त मत हो। मैं कहां कह रहा हूं? मगर वहां तो कर ही नहीं रहे ना। तो ये ये शरीर के कर्म है ना एक तरह से। तो भाई साहब मैं पूछ रहा हूं। आपसे शरीर का शरीर का धर्म मानना है कि नहीं मानना है? शरीर का जो जो शरीर की आवश्यकताएं हैं, भौतिक आवश्यकताएं हैं, उनको मानना है। बाकी नहीं

01:24:55:10 तो क्योंकि लिखा है या मनुस्मति में कौन से शास्त्र में लिखा है कि उनको मानना है उनको नहीं मानना है वहां तो सीधे सीधे भगवान ने कह दिया तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है तो आप डिफरशिएट कैसे कर रहे हैं कि इन वालों को मानना है इन वालों को नहीं मानना है ये तो मनमुखी व्याख्या हो गई मैं तो भाई साहब शिवश जी मैं तो आपसे ये कह रहा हूं कि चौथे अध्याय के 33 वे और 34 वे श्लोक में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से क्या कह कह रहे हैं द्रव्य में यज्ञ की अपेक्षा ज्ञान यज्ञ अत्यंत श्रेष्ठ है। पीएचडी करना श्रेष्ठ है। तो इसका मतलब ये नहीं कि नर्सरी में बताया गया है 2 2 4 ये छोड़ दो। अगर आप मैथमेटिशियन बहुत अच्छे बन रहे हैं इसका मतलब ये नहीं जो बेसिक नॉलेज है उसको ठुकरा दो। ठुकराना नहीं है उसी के आधार पे बन रहे हैं। तो

01:25:49:22 अगर आप मैं फिर पूछ रहा हूं भाई साहब मैं फिर पूछ रहा हूं। आप अगर यह कह रहे हैं कि लौकिक जो धर्म है उसकी आवश्यकता नहीं है तो क्या माता बहन और पत्नी में अंतर करना भी छोड़ दिया जाए और यदि वहां पे आप दैहिक धर्म को अपना रहे हो तो फिर जनेऊ कराना और वेदोक्त रीति और भी परंपराएं हैं और भी बहुत सारी विधि है उनका पालन क्यों नहीं हो रहा है तो सारी विधियों का तो पालन हो भी नहीं सकता ना श्री गुरु नानक देव जी ने कहा किया कबीर ने कहा किया तो इसीलिए तो भाई साहब इसीलिए तो श्री गुरु नानक देव जी ने जो कहा उसको हम वैदिक नहीं मानते। इसीलिए तो जो बुद्ध ने कहा उसको हम वैदिक नहीं मानते। भाई आप पहले अपने आप को वैदिक होने से बाहर कहो। उसके बाद हम देखेंगे कि वो सही है कि गलत है। ऐसा है हर व्यक्ति के अनुसार हर व्यक्ति के अनुसार चलना पड़ता है। कि कौन व्यक्ति कितनी समझ से कैसे समझेगा। इसीलिए भगवान श्री कृष्ण जब अर्जुन को समझाने जाते हैं तो हर तरह से समझाते हैं। कभी किसी तरह से कभी किस तरह से कभी ऐसे हर तरह से उसको समझाते हैं। मैं पूछ रहा हूं आप समझाइए मगर आचार समझाने वाले होने की योग्यता तो शास्त्रों के अनुसार

01:27:04:26 धारण करिए। चलो मैंने कहा कि दो लोग दो लोग 10 में से दो लोग ना कराएं। पूरे के पूरे ब्रह्मा कुमारी में कितने लोग हैं जो जनेऊ करा रहे हैं। बताइए यज्ञ पवित्र करा रहे हैं। और नहीं करा रहे तो वेदों को मानने वाला कैसे कह रहे हो अपने आप को? आपने तो कराया होगा। आप तो महामंडलेश्वर कह रहे हैं अपने आप को। हां बिल्कुल है। बिल्कुल है। धारण करते हैं वंदन करते हैं आप? हां बिल्कुल करते हैं। हम तो हम तो प्रातः काल उठ जाते हैं। प्रातः काल काम करते हैं। सारे काम करते हैं। जो भी हमें करने होते हैं। आप मुझे बता सकते हैं हमारे नहीं हम इस बारे में नहीं पढ़ना चाहते अभी क्योंकि देखिए अच्छा 7:16 हो चुके हैं। आने वाले लोग हैं। दरवाजे पे तो मैं क्षमा चाहूंगा अभी आपसे कि अपन जो बातचीत हो गई वो काफी एक घंटा 27 मिनट। ब्रह्मा कुमारी के बारे में पता लगाइएगा इस्लाम को धर्म क्यों बता रही है और वेदों होने पे अभी हमारी बात रह गई है कि वो अपना जो ज्ञान दे रही है वो वैदिक है कि नहीं उस पर बहुत सारी बातें हैं क्योंकि वो कह रही है कि हम तो मुरली को परम प्रमाण मानते हैं मगर हम वैदिक धर्म के बात बता रहे हैं वेदों के विरुद्ध वो बहुत सारी बातें बता रही है वो कह रही जो जो एक कल्प है जो वो वो

01:28:20:00 कह रही 5000 साल का है जबकि हमारे अनुसार तो ये अब तक दो अरब वर्ष बीत चुके हैं जो जो वेद वेदोक्त ज्ञान विज्ञान है उसके अनुसार दो वर्ष बीत चुके हैं। तो ब्रह्मा कुमारी ऐसी बहुत सी और उनकी मुक्ति मुक्ति के बारे में बात करिएगा आप ये थोड़ा सा पता लगा लीजिएगा और फिर एक बार मैं आशा करूंगा कि आप एक बार आए दोबारा से और जो बाकी की चीजें मैं भी वो वाली वो वीडियो दिखाऊंगा आपको जो दीदियों ने जिसमें बोला है कि इस्लाम धर्म है धर्म आपको थिंकिंग वाली जो 104 साल वाली दादी की किताब है वो भेज देते हैं। वो इतना वो इतना जरूरी नहीं है। वो इतना मेरे लिए आवश्यक नहीं है। चमत्कार दुनिया में बहुत हो रहे हैं। रावण भी चमत्कारी था। औरों की तो बात छोड़िए। कंस भी चमत्कारी था। है ना? तो आप एक बार आइए दोबारा से जो ये जो चर्चा है इसको पूरा पूरा करिए। मैं संध्या वंदन पे आपसे थोड़ा सा पूछ रहा था क्योंकि जो जनेऊ करता है वो संध्या वंदन संध्या करता है। पहले मुझे कुछ लोगों से मिलने दीजिए। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। जय जय श्री राम जय जय श्री राम जय जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राधे

01:29:49:18 चलिए ठीक है। आशा करता हूं आप लोगों को काफी कुछ जानने को मिला होगा और इसीलिए हम स्वप्न निर्मित आचार्यों को स्वीकार नहीं करते क्योंकि स्वीकार करेंगे तो देखकर देखा है ना कैसे किस तरह से लोग खड़े हो जाएंगे हम भी आचार्य हम भी आचार्य हैं समझिए अपने धर्म को ठीक है जय श्री राम वैसे मैं बता दूं कुरान हमारे पास भी है जय श्री राम

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 1:30:31 · 13 Mar 2026

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