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00:00:07:08 सहारनपुर में दिव्य शक्ति अखाड़े के हम आचार्य महामंडलेश्वर हैं। और 157 बार के अरक्त दादा हैं। महाराज जी ये आपने कहा कि आप महामंडलेश्वर हैं और आज दिव्य शक्ति अखाड़े से हैं। तो आपकी गुरु परंपरा आपके गुरु कौन है? हमारे गुरु परमपिता परमात्मा शिव और माता पार्वती ही हमारे गुरु हैं। क्योंकि लौकिक में हमें कोई ऐसा गुरु नहीं मिला जिसे हम समझ सके या वो हमें समझा सके ज्ञान की भाषा दे सके। अच्छा तो महाराज जी आप वैदिक हैं। वेदों को मानने वाले मतलब वेद को प्रमाण मानते हैं। वेद पर वेद को लेकर के मतलब मिलाजुला सा मामला है। जैसे आपने कहा ना धर्म और आप चोले से भी आप सनातनी दिख रहे हैं। तो क्या हम ये मान सकते हैं कि आप वेदों को प्रमाण मानते हैं? वास्तव में वेद ही प्रमाण है। वेद जोवेद, ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद ये चार इसमें प्रकट है। फिर उनके ब्राह्मण ग्रंथ है, उपनिषद हैं। जी जी

00:01:22:21 मैं असल में ये जानना चाह रहा था कि जैसे आपने कहा कि हम वेद को परम प्रमाण मानते हैं। तो वेद के अनुसार जो तात्विक व्याख्या है परमेश्वर की वो आपके पास शिवजी ने आपको कहा है कि वो दी है। तो वेद के किस भाष्य में उपनिषद के किस भाष्य के रूप में वो आपको प्राप्त है या आपने अपनी कोई छापी है जो शिव जी ने आपको पढ़ाई है वो एक ग्रंथ के रूप जैसे ब्रह्मसूत्र पर भाष्य किया है हमारे आचार्यों ने तो आप किसके भाष्य पर आधारित है या आप हम किसी के भाष्य पर आधारित नहीं है हम सिर्फ एक बात जानते हैं सिर्फ एक बात मानवता सबसे बड़ा बड़ा धर्म है। मैं ये पूछना चाह रहा हूं। आपने कहा कि आपके लिए वेद ही परम प्रमाण है। तो वेदों के कई प्रकार के अर्थ हमें प्राप्त है। अगर वेदों का निचोड़ देख ले ईश्वर तत्व के विषय में तो उपनिषद और फिर उपनिषद के बाद ब्रह्मसूत्र के रूप में हमें प्राप्त है। तो क्या आप ब्रह्म सूत्र की किसी व्याख्या पर विश्वास रखते हैं या अपनी स्वतंत्र व्याख्या है ईश्वर तत्व के विषय में? यह सब कुछ अपने सोचने पर निर्भर करता है। देख आदमी किस तरफ से रहा है।

00:02:38:04 किस दृष्टिकोण से देख रहा है। वो उस हिसाब से अपनी व्याख्या गण लेता है। मैं वही पूछ रहा हूं कि भगवान शिव से मिलने वाला अलग से ईश्वर तत्व के विषय में कोई ग्रंथ है आपके पास या आप ग्रंथ के रूप में इन्हीं पर निर्भर करते हैं। वेद उपनिषद और गीता की गीता के ऊपर। गीता सभी को पढ़ता हूं। सभी को पढ़ता हूं। सभी को भाई साहब मेरा प्रश्न निर्भर मेरा प्रश्न निर्भर करते हैं या अपने पास आपका स्वतंत्र कोई ग्रंथ है? मेरी स्वतंत्र सोच है। कोई ग्रंथ नहीं है मेरा अपना मेरी स्वतंत्र सोच है। अच्छा तो आपकी एक स्वतंत्र सोच है जो आपको शिव पार्वती जी से मिली है और वो स्वतंत्र सोच जो है वेद उपनिषद और गीता से मेल खाती है इसलिए आप ऐसा कह रहे हैं कि मैं वैदिक भी हूं। हां उसी का सार है ये जो मेरे पास आया है। उसी का सार मेरे पास है। जी अभी मैं करेक्ट अभी करेक्ट हो गया। अब बात ये आती है कि आपने कैसे पता किया कि आपको जो दिव्य तरीके से जो ज्ञान विज्ञान मिला है वो वेदों का ही अर्थ है ये कैसे पता चला? देखिए वेद कहते हैं कि एक ब्रह्म है द्वितीय कोई तो है ही नहीं। दूसरा कोई है नहीं। आप मेरी बात समझिए। मेरा क्वेश्चन ये है कि आपको

00:03:53:20 दिव्य तरीके से कुछ ज्ञान विज्ञान प्राप्त होता है। आपने कैसे कंफर्म किया कि ये जो ज्ञान विज्ञान मेरे पास आया है ये वैदिक है। प्रैक्टिकली वो क्या किया था? वैदिक क्या होता है? भाई साहब वैदिक क्या होता है? वैदिक वही तो होता है ना जो वेदों से आया हुआ हो। ठीक है ना? वेद क्या है? आपने कोई बुक लेते हैं। यानी कि वेद नाम यानी कि वेद नाम से छपी हुई किसी ग्रंथ को आपने लिया और उसमें देख के वेरीफाई किया कि मेरे स्वप्न में आया हुआ या मेरे को दिव्य तरीके से जो प्राप्त हुआ है शिव पार्वती के द्वारा जो ज्ञान प्राप्त हुआ है वो वैदिक है। ठीक है ना? हां मैंने स्वयं में अनुभव किया। अनुभव किया उसे। ठीक। मैं आपको एक छोटी सी उदाहरण दूं इस बारे में। मैं एक्चुअली मेरा प्रश्न मेरा प्रश्न किसी और दिशा में है। दिशा मैं अभी आपको बता रहा हूं। जैसे आपने कहा कि मैंने वेद से वेरीफाई किया कि मेरे पास जो ज्ञान आया है दिव्य दिव्य योजना के द्वारा वो वैदिक ही है। तो आपने ये जो वेरीफाई किया है ये किसी पुस्तक से किया है। है ना? पुस्तक से किया ना? से नहीं किया है।

00:05:09:06 नहीं पुस्तकों से नहीं किया है। पुस्तकों का ज्ञान तो सिर्फ वैसा ही होगा जैसे एक कोई किताब पढ़ ले 200 अभी आपने बताया था अभी आपने बताया था ना वेद जो अथर्ववेद ऋग्वेद सामवेद बाद में जोड़ा अथर्ववेद और था तो ये जो आपने वेरीफाई किया ये आपने कहीं से छपी हुई पुस्तक ला के किया या अपने से आपने वेद अपने रट रखे हैं और आपने उसे वेरीफाई कर लिया कैसे मैं वही तो आपसे कहना चाह रहा हूं जी वेद एक प्रामाणिक पुस्तक है ठीक है उसमें जो लिखा है वो कहा जाता है कि वेद प्रामाणिक है। ठीक है? जब तक व्यक्ति के जीवन में वो नहीं उतरते तो वे खाली पुस्तक रह जाएंगे या नहीं रह जाएंगे? भाई साहब मैं जीवन में उतरने की बात बाद में करूंगा। मैं अभी पूछ रहा हूं। आपने वेरीफाई कैसे किया था? प्रैक्टिकल क्या था उसका कि मैंने वेरीफाई तो अनुभव से होगा ना। आप गूंगे से पूछ रहे हो कि गुड का स्वाद कैसा है? अनुभव को अनुभव को क्या शब्दों में बयान करूंगा मैं? नहीं कर सकता। ठीक है। ठीक है मैं अभी बता रहा हूं। आपने कहा कि अनुभव से वेरीफाई किया। मतलब आप ये कंफर्म नहीं कह सकते कि मेरे को जो ज्ञान प्राप्त हुआ है वो वेद नाम से छपी हुई जो पुस्तकें हैं ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद उसमें भी लिखा है। ये आप कंफर्म नहीं कह सकते। आपने अनुभव कर लिया। क्यों नहीं कह सकते? क्यों नहीं कह सकते? किताब से वेदों को पहले वेदों

00:06:24:07 को पहले पढ़ा ना हमने। पढ़ने के बाद उनकी अनुभूतियां। अनुभूति इसका मतलब वेद प्रमाणिक है या नहीं है यानी कि वेद नाम से छपी हुई पुस्तक को आपने पढ़ा ना हां हम कहते हैं वो प्रमाणिक है बिल्कुल है लेकिन पढ़ने के बाद पढ़ने के बाद उस पर चिंतन भी आवश्यक है मनन करना भी आवश्यक है मैंने भाई साहब पूछा आपने पढ़ा ना उसको वेद नाम से छपी हुई पुस्तक को ना पढ़ा तो वो कौन वो कौन से पब्लिकेशन से थी वो कौन से थोड़ा सा उसका विवरण बता दीजिए। कौन सी पुस्तक पढ़ी थी आपने? वेदनाथ से छपी हुई। हां हमने गायत्री परिवार वालों की जो पुस्तक है आदर अच्छा अच्छा शर्मा आचार्य अच्छा अच्छा अच्छा गीत गायत्री परिवार जो हरि बार गायत्री परिवार वाले हैं उनकी पुस्तकें हमने मंगाई पढ़ी। उन्होंने उन्होंने तो चारों पर भाष्य नहीं किया है मेरे हिसाब से। उन्होंने उन्होंने खाली उसका ट्रांसलेशन दिया है। हां। तो उसी को किया उसी को हमने पढ़ा और पढ़ने के बाद अपने जीवन में ढाला एक सूत्र ढाल लिया तो बात खत्म हो जाती है। जी हां ठीक अब अब सवाल ये आता है कि आपको

00:07:39:13 कैसे विश्वास है क्योंकि श्री राम शर्मा जो आचार्य हैं वो आपके गुरु तो है नहीं क्योंकि आपने कहा गुरु तो मेरे शिव और पार्वती है नहीं है है ना हां तो जब वो आपके गुरु नहीं है तो आपको कैसे पता कि जो अरबों साल पहले जो वेद मंत्र आए हैं वही वेद मंत्र श्री राम शर्मा आचार्य ने उनका अर्थ किया है और किताबें छापी है। यह कैसे कंफर्म किया आपने? हमने अर्थ देखा, अर्थ देखा, श्लोक पढ़ा। उस अर्थ को अपने भीतर अनुभव किया, मनन किया तब हमें लगा कि ये बिल्कुल ठीक है। नहीं नहीं भाई साहब। हमने माना कि प्रमाणिक है। आपने अनुभव जो किया वो तो एक अलग बात हो गई। मैं ये कह रहा हूं कि वेद के नाम पर जो मंत्र उसमें मंत्र होते हैं, श्लोक नहीं होते हैं वेद में। तो वेद के नाम पर जो मंत्र आप कह रहे हैं जिनको आपने पढ़ा और फिर मनन किया। आप यह कैसे कंफर्म किया आपने कि यह वही मंत्र है जिन्हें ईश्वर ने दिया था सृष्टि के प्रारंभ में।

00:08:38:28 ये वेदों में भी लिखा है कि वेद ईश्वर की वाणी है। जैसे मुझे ये विश्वास करना पड़ता है। सुन लीजिए। जैसे ये मुझे विश्वास करना पड़ता है। मेरी मां मुझे बताती है कि तुम्हारा पिता है तो मुझे मानना पड़ता है ना कि मेरा पिता है। इसी तरह से जब मां को हम गुरु कहते हैं ना आपका गुरु तो है नहीं। श्री राम शर्मा आचार्य आपके गुरु तो वो जो लेकिन उन्होंने लेकिन उन्होंने वेदों को संकलित तो किया है। अगर कोई संकलन करता है तो कोई गलत काम तो नहीं करता ना वो। नहीं तो संकलन करने के नाम पर तो कोई भ्रष्ट धूत व्यक्ति भी संकलित कर सकता है। हो सकता है कि वेद के मंत्र कुछ और हो। आपको झूठ बोल दे। आपको देखिए ऐसा है मेरा कहने का तात्पर्य यह है कि जिससे हम वेद मंत्र ले रहे हैं उसके प्रति हमको परमान्य बुद्धि रखनी पड़ेगी। यह हमारा गुरु है। अगर नहीं रखेंगे तो फिर हमें उसके वेद मंत्र पर विश्वास कैसे?

00:09:34:07 उन्होंने वेदों का संकलन किया। हमने उन वेदों को पढ़ा। हमने अपने जीवन में उतार के देखा। हमने अपने जीवन में उतार के देखा कि बिल्कुल सही है। तो हमारे लिए सही है। प्रमाणिकता सिद्ध हो गई। प्रमाणिकता सिद्ध करने के लिए क्या किसी का सर्टिफिकेट थोड़ी लेना पड़ेगा? जैसे जैसे मान लीजिए मान लीजिए कि मेरे को जो है किसी व्यक्ति को एहसास हो कि भाई मुझे जो है चोरी करने में खुशी मिल रही है। ठीक है? अब किसी व्यक्ति ने कहा हो अपनी किताब एक छापी हो और उसमें लिखा हो कि भगवान ने किताब छापी है। इसमें लिखा है चोरी करने से खुशी मिलती है और मैंने उसको पढ़ लिया और मुझे अनुभव भी हो रहा है चोरी करने से खुशी मिल रही है। तो मैं मान लूं और सबसे बड़ी बात सबसे बड़ी बात तो ये है कि राम शर्मा आचार्य जी आपके गुरु नहीं है। यानी कि राम शर्मा आचार्य जी झूठ भी बोल सकते हैं। गलत भी लिख सकते हैं। वो गलत लिख सकते हैं। चलिए मान लेता हूं। आपकी बात ऊपर रख देता हूं। लेकिन सवाल ये उठता है कि उन्होंने जो वेदों के मंत्र लिखे हैं वो तो गलत नहीं हो सकते ना। वो तो गलत नहीं हो सकते। मैं वही कह रहा हूं। ये कैसे तय किया आपने? वो गलत नहीं हो सकते। तय किया। बार-बार आपसे कह रहा हूं कि मैंने उन्हें अपने अनुभव में उतारा और उनसे तय कर लिया। मुझे जो

00:10:49:27 एक मंत्र का एक मंत्र का वो बताइए। फॉर एग्जांपल कैसे आपने तय किया? मैं आपको बता देता हूं। साधारण सी बात है। साधारण सी बात है। जैसे वेदों का सार आ जाता है उपनिषदों में। फिर आ जाता है अपने पुराण। अभी आप वेद अभी आप वेद से ही बताइए ना कोई आप सुन तो ले पहले सुनेंगे तभी तो बताऊंगा आपको। जी न बंधो अस्ति न मोक्ष अस्ति ब्रह्म वास्त निरामयं नमस्त सचितम विजते ठीक एक तो ये क्योंकि कहां का है ये? पहले सुनने की थोड़ी सी आदत डालेंगे तो बड़ा अच्छा होगा क्या मैं ना आपको समझा वरना क्या हमारी जो बातचीत हो रही है ना आपस में वो खिचड़ी बन के रह जाएगी बिल्कुल एक्चुअली मेरे पास ग्रंथ रखे हैं तो मैं खोलता उसको आप जो बता रहे है इसलिए पूछा था मैंने हां हां

00:11:49:22 अब ना बंधन है ना मोक्ष सभी का सार आ गया गीता में ठीक मानव को ना इधर का रहना चाहिए ना उधर का रहना चाहिए। बीच में आ जाना चाहिए। यही शब्द संत का भी अर्थ होता है। सम अंत हर चीज के दो सिरे होते हैं। हर्ष और शोक दुख और सुख लाभ हानि यश अपयश मान अपमान हर चीज के दो सिरे होते हैं जीवन में। और उन दो सिरों के बीच में जो आ जाता है ना उसे दुख का अनुभव होता है ना सुख का अनुभव होता है ना हर्ष का होता है ना शोक का होता है ना मान का अपमान का यश अपयश जो इनमें बराबर आ जाता है यानी ज्ञान यज्ञ में चला जाता है उसके लिए सारे कर्म जो हैं वो गौण हो जाते हैं। सारे उसी तरह से भस्म हो जाते हैं जैसे लकड़ी भस्म हो जाती है। यह भगवान श्रीकृष्ण गीता के चौथे अध्याय में पहले से शुरुआत करते हुए दसवें श्लोक तक चले जाते हैं। मैं एक्चुअली मैं आपसे किसी श्लोक की व्याख्या नहीं पूछ रहा हूं। मैं एक आपसे आपने कहा वेद मंत्र आपने पढ़े हैं। श्री रामचार की व्याख्या बताई है। वेदों की ही व्याख्या बताई है। ये

00:13:05:20 हमारी बात अभी चल रही थी कि वेद मंत्र आपने श्री राम शर्मा आचार्य के पढ़े और फिर उसको अनुभव किया वेद मंत्रों को। तो वो मंत्र कोई एक बताइए। थोड़ा सा फिर उसका कैसे अनुभव किया वो बता दीजिए मुझे। मैं आपको अनुभव तो बता सकता हूं। इस समय मंत्र बोलने की बोलिए बोलिए कोई मंत्र नहीं वेद शुरुआत ही अग्निवीर से हो जाती है। अग्नि क्या? मैं आपको एक शब्द से ले लूंगा तो आप बोलेंगे कि लंबी व्याख्या हो जाएगी। अग्नि अग्नि क्या? क्या भीतर की अग्नि मंत्र पूछ रहा हूं। भाई साहब मैं मंत्र पूछ रहा हूं। कोई एक मंत्र कोट करिए जिससे मैं बोल सकूं। सर आवश्यकता नहीं है। मेरे पास भी पड़ी है। मैं आपको दिखा देता हूं। नहीं नहीं दिखाने की नहीं कह रहा हूं मैं।

00:13:59:22 मैं भी आपको दिखा रहा हूं। मैं दिखाने के लिए नहीं कह रहा हूं। आपने कहा आपने कहा कोई मंत्र बता दीजिए। तो मैंने आपको बोला ओम अग्नि नीले। बोला ना अग्नि मिले। ओम अग्नि मिनीले मैं यही पहले इसी को पहले इसी को तो समझ ले। ओम क्या है और अग्निवीले क्या है तभी तो बाकी को पढूंगा मैं ओम अग्निवीर तो पढ़ लू क्या है किस अग्नि देव की स्तुति करने जा रहे हैं ओम का अर्थ क्या है जब तक ये नहीं जान लेते तो बाकी वेद का जानना बेकार हो गया ना ये तो पूरी पुस्तक कह रहा हूं देखिए जैसे कि वेद ने एक जगह मंत्र मुझे पढ़ के सुना दीजिए मंत्र बता दीजिए किस मंत्र ने आपको मंत्र मैं पूछ रहा हूं वेद ने वेद ने एक जगह कोट किया है कि वेद के अलावा कोई भी और मोक्ष का मार्ग नहीं है। ठीक है? ठीक है? मान ली आपकी बात। आप किताब की बात कर रहे हैं। मैं कह रहा हूं विद धातु की ज्ञान की बात कर रहा हूं। आप सिर्फ किताबों में किताब की बात कर रहे हैं ना। आप श्री राम शर्माचार्य जी का पढ़ा ना आपने। किताब पढ़ने के बाद आगे भी तो चलना ही या किताब पे ही उलझा रह जाना है। अगर मैं कहूं अगर मैं कहूं कि मील का पत्थर है। अभी अभी मैं कहूं ये मील का पत्थर है और यहां से 200 किलोमीटर दूर दिल्ली है और मील का पत्थर पकड़ के

00:15:14:26 बैठ जाएंगे तो दिल्ली कब पहुंचेंगे। देखिए बैठने की बात नहीं जब तक क्लियर नहीं होगी तब तक हम आगे कैसे चले जाए। हमें जाना कानपुर है और हम चले जाए सीतापुर। इसीलिए तो कह रहा हूं। इसीलिए तो आपसे कह रहा हूं। पहले वो भी बता देता हूं। अब अभी अब अभी वेद की बात मैं कर रहा हूं। आपने कहा कि आपने वेद मंत्र पढ़े हैं श्री राम शर्माचार्य के। श्री राम शर्माचार्य श्री राम शर्मा आचार्य के नहीं ऋग्वेद के मंत्र पढ़े हैं। श्री राम आचार्य ने वो संकलित किए हैं। बदलिए आप भाषा को बदलिए प्लीज। वो वो किताब आपको कहां से मिली थी? खरीदी हमने परचेस की है भाई। अरे भाई तो किसकी छपी हुई किताब थी वो। वो किसकी छपी हुई किताब थी भाई साहब? ये छपी हुई है वहां पे गायत्री परिवार वालों ने छापी है। हां तो गायत्री परिवार वालों से आपने वेद के मंत्र लिए हैं ना वो शिव और पार्वती ने नहीं दिए ना आपको वेद के मंत्र

00:16:13:22 भाई साहब आपको मैं समझा नहीं पाऊंगा क्योंकि मुझे लगता है कि आप अभी उस स्तर पे नहीं आ पा रहे हैं जिस स्तर पे मैं बात करना चाह रहा हूं। नहीं आप उस चाहते हैं कि आपसे प्रश्न ना किया जाए। नहीं आप समझना नहीं चाह रहे आप समझना नहीं चाह रहे आप एक ही बात पे खड़े हुए हैं आप मेरा कहने का अर्थ है कहना चाह रहा हूं मैं कहना चाह रहा हूं मैं कहना यह चाह रहा हूं कि यदि आपको राम शर्मा जी पर विश्वास नहीं है एज ए गुरु आप उनको स्वीकार नहीं करते तो फिर उनके द्वारा दिए गए वेद मंत्र पर आपको विश्वास कैसे है यह कह रहा हूं मैं तो आपसे बार-बार कह रहा हूं आपको आप अपने आप अपनी हमारी बातों को पहले ध्यान से सुने। हमने ये कब कहा कि श्री रामचर्या ने श्री राम शर्मा आचार्य ने ये वो वेद मंत्र दिए हैं। हमने ये तो कभी कहा ही नहीं। हमने कहा कि ये मंत्र है। रुगद के मंत्र ये वेद के ही मंत्र है। आपने कैसे इसको वो किया? वेरीफाई। वेरीफाई अपने अनुभव से किया। बार-बार आपसे कह रहा हूं। अपने अनुभव से किया। जैसे पहला ही मंत्र आपने पढ़ा। भाई साहब ये बताइए वेद से मुक्ति मिलती है ये अनुभव आपने कैसे कर लिया बताइए मुक्ति मिल गई आपको मुक्त

00:17:28:26 हो चुके हैं क्योंकि मुक्ति मिल चुकी है आपको मुक्त हो चुके आप अब मैं आपकी ओर अगर अगर आपकी ओर कोई वार करेगा तो आपकी पलक तो नहीं झपकेगी वो तो स्वाभाविकता है ना यानी मुक्त नहीं हुए ना यानी मुक्त नहीं हुए ना अगर पलक झपक जाए तो इसका मतलब आदमी मुक्त नहीं हुआ ये आपकी दृष्टि है आपका दृष्टिकोण है मेरा दृष्टिकोण नहीं अच्छा चलिए पलक झपकना किस बात का प्रमाण है बताइए शरीर को शरीर को आत्मा को आप दोनों को इकट्ठा कर रहे हैं अरे तो यहां प्रपंच रूपी संसार में है जो मुक्त नहीं हुआ वही तो संसार में है आप कह रहे हैं आप मुक्त हो गए आप मुक्त हो गए तो आपको भूख लगती है ना आप सोच जाते होंगे तो फिर आप ऐसा करें आप ऐसा करें थोड़ा सा गीता का अध्ययन कर ले चौथा अध्याय पढ़ ले आदमी किस तरह से मुक्त होता है ज्ञान मार्ग में चलने वाला व्यक्ति और कर्म मार्ग करने वाला व्यक्ति कर्म क्या है? पांच इंद्रियां करती है। पांच ज्ञानेंद्रियां करती है। साथ में एक मन कार्य करता है। ये 11 चीजें काम करती है। लेकिन इनसे कर्म किया हुआ इनसे कर्म किया हुआ उससे श्रेष्ठ कौन है? जो व्यक्ति ज्ञान यज्ञ में चला जाता है और ज्ञान यज्ञ में गया हुआ व्यक्ति वैसे ही जिस तरह से ईंधन अग्नि में भस्म हो जाता है। उसी प्रकार

00:18:44:09 वो बिल्कुल ही मुक्त हो जाता है। क्यों? नहीं होता। ऐसे व्यक्ति को पथिक कहा जाता है कि वो मुक्ति के मुमुक्षु है बट वो मुक्त नहीं है। मुक्त तो तभी है जब वो मुक्त हुआ जब उसको बोध हो गया। आत्म स्वरूप हो गया। जिसकी पलक ना झप या तो पलक या तो पलक जो त्रिविध ताप है जो भौतिक दैविक ताप में अगर कोई पलक झपकना छोड़ दे तो इसका मतलब वो मुक्त हो गया। और भी चीजें हैं उसको ना भूख लगी। किसी चीज की आवश्यकता नहीं होगी। वो स्थिर प्रज्ञ हो जाएगा। स्थिति प्रज्ञ हो जाएगा। आप उस स्तर पे बात नहीं कर पा रहे हैं जिस स्तर पे हम करना चाहते हैं। आप थोड़ा और ऊंचा उठे अच्छा लगे। ऐसा नहीं है भाई साहब आपके पास जवाब नहीं है इसलिए आप ऐसी बातें कर रहे हैं। जवाब जवाब हम आपको देना चाहते आप सुनना नहीं चाहते। हम बार-ब कह रहे हमने पूछा जब आपको राम शर्माचार्य जी पर आपको जब राम शर्माचार्य जी पर विश्वास नहीं है तो आपको यह विश्वास कैसे है कि उन्होंने जो मंत्र वही मंत्र है जो वही है विश्वास नहीं है लेकिन हम तो बार-बार कह रहे हैं कि हमें ये ऋग्वेद पर विश्वास है ऋग्वेद को हमने पढ़ा नहीं मालूम किया वही आपको बताना अनुभव से किया आप अनुभव करो ना मेरे साथ बैठ के अनुभव आपने मुक्ति कर लिया भाई साहब

00:20:00:12 आपने अनुभव मुक्ति का कर लिया कर लिया तो आप बोलिए ना तो आपका स्वास्थ्य खराब होता होगा ना ही आपका जो है आपको भूख लगती होगी स्वास्थ्य स्वास्थ्य शरीर की बात है तो शरीर से भी आप शरीर से आप जुड़े हुए है ना जब ईश्वर भी पृथ्वी पर आता है तो उसके शरीर को भी भूख लगती है वो भी विवशता नहीं होती उसकी जी यही अंतर है। वो अपनी इच्छा से करता है। हमारी व्यवस्था है। आपकी व्यवस्था है भोजन करने की। ईश्वर की व्यवस्था नहीं है। ईश्वर चाहे तो 14 कितने दिन तक लक्ष्मण लक्ष्मण जी ही देख लीजिए कितने दिन तक वो बिना रात में सोए जगे समय अवधि काट दी थी उन्होंने।

00:20:49:13 वो भी बात है मेरा कहने का अर्थ यह है महाराज जी कि यदि हम किसी से वेद के मंत्र ले रहे हैं तो हमें उसके प्रति प्रमाण बुद्धि दिखानी पड़ेगी किसी से भी ले क्योंकि हमको डायरेक्ट या तो हमको डायरेक्ट मिल गए हो शिव पार्वती जी ने डायरेक्ट हमें दे दिए हो गए आप डायरेक्ट मिल गए आपको लगता है कि आप सुनिए मान लीजिए कि यहां से किसी ने मुंबई जाना है मुंबई जाना है कोई तो साइकिल से जा रहा है, कोई पैदल जा रहा है, कोई कार पे जा रहा है, कोई बस पे जा रहा है, कोई ट्रेन पे जा रहा है, कोई बाय एयर जा रहा है। रास्ते अलग-अलग है। है ना? तो साधु सन्यासी क्या करते हैं? उनको डायरेक्ट मिल जाता है। हमें डायरेक्ट मिल गया। मिल गया तो चाहिए। आपको डायरेक्ट मिला है। वेद का मंत्र वगैरह सब मिला है। हमें मिल गया। अब कुछ पाने की चाह नहीं। कुछ पाने की चाह नहीं। कुछ पाने की गायत्री परिवार से लिया है। फिर आप क्यों कह रहे अरे हमने आपसे कहा कि गायत्री परिवार का हमने ये लिखा हुआ पढ़ा। आप को घुमा रहे हैं। हम कह रहे पढ़ा क्या क्या किसी किताब को पढ़ना आपने किसी आपके पीछे इतनी सारी किताबें दिख रही है तो क्या आपने वो पढ़ी है ना? है ना? पढ़ी है ना इसी तरह से हमने भी किताबों को पढ़ा है। को पढ़ा है। तो वेद

00:22:04:19 मंत्र आपको स्वतंत्र रूप से मिले हां स्वतंत्र मिले हैं क्योंकि ग्रंथों में हमने देखा स्वतंत्र रूप से आपको वेद दिए हमने ग्रंथों को पढ़ा ग्रंथों को पढ़ा उनप मनन किया चिंतन किया और इन चीजों से परे हट गए हम ठीक है सारे वेद दे सारे वेद दे दिए हैं ना उन्होंने आपको शिव पार्वती सब कुछ दे दिया है जो हमें चाहिए था वो हमें मिल गया है इसके अलावा हमें और कुछ नहीं चाहिए हमें कुछ पाना ही नहीं है मंडल का दसवे मंडल का 192वा सूक्त सुना सकते हैं वेद का है ही नहीं नहीं सवाल है आप ये क्लेम कर रहे हैं कि आपको स्वप्न में या दिव्य योजना से वेद के मंत्र प्राप्त हुए हैं। मारने की बात जानना चाह रहा हूं आप विषय से विषय से आप भटक रहे हैं ना भटके मैं विषय पे ही हूं। मैं आपकी प्रामाणिकता मैं आपकी प्रामाणिकता पर प्रश्न उठा रहा हूं। आपने कहा कि मुझे सिर्फ देखिए देखिए ऐसा है ऐसा है देखिए ऐसा है भगवान ने मोहिनी का रूप धारण करके ठल भी किया है भगवान ने बुद्ध का रूप धारण करके जो वैदिक यज्ञ है उनका खंडन भी किया है इसका अर्थ है कि भगवान ऐसा रूप ऐसा कृत कर सकते हैं जो वेदों के विरुद्ध हो

00:23:20:00 तो इसलिए यदि आप यह कह रहे हैं कि शिव पार्वती ने मुझे ज्ञान दिया है तो मुझे उसकी प्रमाणिकता जांच रहा हूं कि भाई वो वही है कि नहीं। तो सुनिए सुनिए प्रमाणिकता तो वो जानेगा ना जो स्वयं परमात्मा को जान चुका हो। आप तो एक साधारण मानव है। आप कैसे हमारी प्रमाणिकता जानेंगे? मैं परमात्मा को जानने की प्रमाणिकता नहीं जांच रहा हूं। मैं सामने वाले की प्रमाणिकता जांच रहा हूं। नहीं नहीं नहीं आप आप प्रमाणिकता जान रहे हैं। इसलिए कि सामने वाले के अंदर कितना ज्ञान है। ये जानना चाह रहे हैं आप। ना ना ज्ञान नहीं ज्ञान ज्ञान नहीं ज्ञान नहीं ज्ञान तो आप में मुझसे बहुत ज्यादा है मैं जान रहा हूं मैं ज्ञान नहीं वो ज्ञान प्रमाणिक है वैदिक है कि नहीं मेरा बस इतना है आपके पास बहुत ज्ञान हो सकता है सब कुछ हो सकता है वो ज्ञान वैदिक है कि नहीं सवाल ये चल रहा है वैदिक वो वैदिक जो हमें परंपराओं से प्राप्त होने वाले के द्वारा जो ज्ञान विज्ञान प्राप्त होता है रामानुजाचार्य शंकराचार्य परंपराओं से प्राप्त होता है आपका जो ज्ञान विज्ञान है वो वही उन्ही परंपराओं का है कि नहीं आप मुझे वैदिक अर्थ बता दे चलिए कहानी खत्म गेम ओवर बताइए भाई साहब अभी बात ये चल रही है आपने कहा आपको स्वतंत्र रूप से मुझसे पूछ रहे हैं आप मुझे ये बता दीजिए कि वैदिक

00:24:35:06 का अर्थ क्या है बस इतना बता दीजिए बाकी कुछ नहीं हमारे परम प्रमाण है सनातनियों के श्रुति शास्त्र जो कल्प के प्रारंभ में ब्रह्मा जी को स्वास रूप में प्राप्त होते हैं नारायण के द्वारा वो जो ग्रंथ है कालांतर में जब लिपिबद्ध किए जाते आचार्यों के द्वारा व्यास जी के द्वारा उनहीं ग्रंथों को हम वेद के नाम से जानते हैं। यद्यपि वेद का अर्थ ज्ञान भी है। वेद का अर्थ ज्ञान भी है। पर यहां पर वेद ग्रंथों की बात हो रही है जिस पर विश्वास करने वाले को सनातनी कहा जाता है। अब आपने कहा कि ये जो वेद के मंत्र हैं लिपिबद्ध होते हुए जो वेद के मंत्र है यह आपको शिव जी और पार्वती जी से प्राप्त हुए हैं और स्वतंत्र रूप से आपको किसी किताब की जरूरत नहीं पड़ी। तो मैं आपसे बस इतना कहना हां ठीक है तो आप मुझे केवल दव मंडल का 192वा सूक्त जरा सुना दीजिए कोई आवश्यकता नहीं है मुझे मैं आपसे एक छोटा सा प्रश्न आपकी ये बात जो है ये आप जो परीक्षा लेना चाहते हैं ना हम आपकी परीक्षा में नहीं बैठना चाहते मैं परीक्षा नहीं ले रहा हूं फिर आपको ये कहना चाहिए मैं वैदिक हूं मैंने पूछा था पहले जब हमसे पूछा था आपने कि वेद का कोई मंत्र बताइए तो हम शुरुआत ऋग्वेद से करने वाले थे। लेकिन उसके बाद आपने आगे

00:25:50:16 बढ़ गए। सीधा द मंडल में चले जाते हैं आप। अब पहले का पहले श्लोक का ही यानी पहले जो मंत्र का है उसका अर्थ तो आप मुझे बता दें। मैं आपको वेद पढ़ने नहीं बैठा हूं ना। यहां पर आप एक क्लेम कर रहे हैं कि आप ब्रह्मकुमारी का समर्थन करते हैं तो फिर सबसे पहले ब्रह्मा कुमारी का समर्थन करने वाले का समर्थन हो रहा है कि नहीं हो रहा है? ये देख रहा हूं मैं। मैं तो ब्रह्माकुमारी का समर्थन करता हूं। हां तो इसीलिए मैं आपकी प्रमाणिकता पूछ रहा हूं। इसीलिए मैंने आपकी प्रमाणिकता पूछी। आपको बता रहे हैं परंपरा है। आप मेरी प्रमाणिकता ना पूछ के आप पूछ रहे हैं कि मेरा ज्ञान कितना है? मुझे कितना फलाने कहा है कि वेद के मंत्र मुझे योजना से प्राप्त हुए हैं तो मैं जानना चाहता हूं। प्राप्त हुए भी है कि ये एक बात है केवल एक। क्यों जानना चाहते? क्यों जानना चाहते हैं आप? क्यों जानना चाहते हैं? और आप मुझे एक बात आप एक अप्रामाणिक संस्था का समर्थन कर रहे हैं ना भाई साहब इसलिए आपकी प्रमाणिकता जान रहा हूं मैं तो उस संस्था के बारे में आप बात कर ले मुझसे वेदों की प्रमाणिकता छोड़ दे आपकी प्रमाणिकता के बारे में ना पूछू आपसे ना क्यों पूछेंगे आप जब क्योंकि आप प्रमाण पहले तो ये है ना कि आप वेदों को जानिए आपको वैदिक का अर्थ पूरा मालूम नहीं है अच्छा ये बताइए जब

00:27:08:26 कक्षा का एक कक्षा का विद्यार्थी एक एमए और पीएचडी वाले का एग्जाम देने के लिए सामने बैठा हो तो कैसे कोई एग्जाम दे देगा? ये ये तय कौन कर रहा है यहां पर? किसने तय किया? तय हम कर रहे हैं ना। पहले आप तय कर रहे थे हम कक्षा के विद्यार्थी हैं। यानी कि आप स्वयं को एक अथॉरिटी के रूप में यहां प्रस्तुत कर रहे हैं ना। मानते हैं क्योंकि हमें कुछ नहीं भाई साहब महाभारत में एक सिद्धांत लिखा है भीष्म जी का वाक्य है कि अन्यों के साथ वही व्यवहार करिए जो स्वयं के साथ स्वीकार्य हो तो आप जब स्वयं को अथॉरिटी के रूप में प्रस्तुत यहां कर रहे हैं तो मैं ये नहीं कह रहा मुझे भी अथॉरिटी कम से कम अपनी अथॉरिटी के बारे में मुझे प्रश्न तो करने दीजिए बिल्कुल आपने प्रश्न कर लिया लेकिन सवाल ये है कि मेरा जवाब आपको संतुष्ट कर ही नहीं पा रहा है नहीं मैंने क्योंकि आप अपने विद्यार्थी आप कह रहे हैं मैंने कहा

00:28:07:22 आपको समस्त वेद जो है वो शिव पार्वती जी के द्वारा डायरेक्ट प्राप्त हुए हैं। आपका कोई गुरु नहीं है। है ना? उन्होंने ही दिए हैं। उन्होंने ही ग्रंथ आपको ऋग्वेद का दसवे मंडल का 192वा सूक्त बताने में क्या दिक्कत है? पहले मैं वही तो वही तो कह रहा हूं कि आप ऋग्वेद के दव मंडल पे अटक गए हैं। श्लोक पे उसके मंत्र पे अटक गए। लेकिन नौवा मंडल बता दीजिए। नौवा पहले वाला तो आपको पहले वाला पता नहीं चलेगा। भाई साहब नौवा मंडल बता दीजिए। पहले वाला हमें पता नहीं और दसवं पे चल दिए। शुरुआत तो पहले कर ले। अरे मैं वेद पढ़ने नहीं बैठा हूं। मैं केवल ये मैं मेरी ये जिज्ञासा है कि आप जो क्लेम कर रहे हैं कि मुझे स्वप्न में मिला है वो वास्तविकता है या केवल एक बात है। मैं जानना चाह रहा हूं। आपके पास आपके पास यदि कोई दिव्यता है तो मैं जैसे अर्जुन ने भी भगवान से कहा था जब भगवान ने कहा था मैं ही भगवान हूं। अर्जुन ने कहा कि आप अपना विराट स्वरूप दिखा दीजिए। उन्होंने दिखा दिया। ऐसे ही मेरी आपके प्रति जिज्ञासा है कि यदि आपके पास दिव्यता है तो उसका दिव्यता का सबूत दे दीजिए मुझे। तो पहले आप उसी तरह से अर्जुन बनकर आइए हमारे पास। फिर बात करेंगे। ठीक है। तो पहले हम आपको सारा देंगे। हां। ठीक है। कुल मिला

00:29:22:26 के आपको ऋग्वेद नहीं बताना है। चलिए ठीक है। अब मुझे बता दीजिए आपके अनुसार धर्म क्या है? ऋग्वेद के ऋग्वेद के अगर पहले वाले से शुरू करते हैं। प्रथम मंडल से सूत्र नंबर एक से शुरू मेरे आचार्यों से मुझे मेरे आचार्यों से पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य जी का मैं शिष्य हूं। जो आध्यात्म के विषय में मेरी जो जिज्ञासाएं होती है मैं उनसे शांत कर लेता हूं। अपनी जिज्ञासाओं को मैं आपके पास यहां पर कक्षा लेने के लिए नहीं बैठा हूं। मुझे ये बताया गया था कि आप ब्रह्मा कुमारीज का समर्थन करते हैं। और अपने आप को महामंडलेश्वर भी कहते हैं। यद्यपि महामंडलेश्वर कहने के विषय में भी एक अच्छी खासी एक बात हो जाएगी। मगर वो अभी हमारा मुख्य विषय नहीं है। तो उसको जाने देता हूं। फिलहाल मैं आपसे ब्रह्मा कुमारी पर बात करने के लिए अब आगे बढ़ता हूं। ठीक है। हां जी। हां ठीक है। आइए। हां। अब मुझे बता दीजिए। आपके अनुसार धर्म किसे कहते हैं?

00:30:14:07 किसी भी गुणों को धारण करना। जितने भी गुण है उन को धारण करना वही धर्म कहलाता है और वह मानवता के अंतर्गत आता है। तो मानवता की कोई सुनिश्चित नियमावली है आपके पास? मानवता के जो गुण है जैसे प्रेम है, शुद्ध आचरण है, स्पष्ट वादिता है, सच्चाई है, ज्ञान का सागर है। यह जो परमात्मा के गुण बताए गए हैं। उनहीं गुणों को यदि व्यक्ति अपने जीवन में धारण करता है तो कहते हैं कि गुण धारण कर लिए उसने और वह धर्म के मार्ग पर चल रहा है। तो जो धारण किया जाए वह धर्म है। ठीक है? धारक तत्व को धर्म कहते हैं। इसकी उपयोगिता क्या है? आवश्यकता क्या है इसकी?

00:31:12:00 मानव के जीवन में उसके भीतर ही दो शक्तियां चलती हैं। एक शक्ति होती है रचनात्मक, एक होती है नकारात्मक। जब रचनात्मक शक्ति कम हो जाती है और नकारात्मक शक्तियां उभर जाती है तो उस समय एक आत्मा और बुद्धि बुद्धि ये कहती है कि यह गलत है बुद्धि ये कहती है कि ये सही है बुद्धि तोलती है तराजू की तरह तोलती है और उस समय जो निर्णय सही है बुद्धि का निर्णय जो सही है उस मार्ग पर चलना श्रेयस्कर कहलाता है वो श्रेय मार्ग है

00:31:53:01 बुद्धि जो कहती है उस मार्ग पर चलना श्रेयस्कर कहलाता है। वो धर्म है। बुद्धि जो कहेगी उस समय उस मार्ग पर चलना उस समय ये नहीं कि नकारात्मक सोच वाले मार्ग पे नहीं जाना। जी आपने अभी एक बात कही कि जो धारण किए जाए जिन गुणों को वही धर्म है। इसलिए कोई चोर है वो चोरी करने के गुण को धारण करता है तो चोरी करना धर्म है। लेकिन उसे ये भी तो होता है ना कि मैं चोरी कर रहा हूं तो गलत कर रहा हूं। हां तो ये गलत और सही ये जो गलत और सही है इसका इसका आधार क्या है क्या गलत है क्या ये निर्णय ही बुद्धि करवाती है बुद्धि करवाती है कि ये ठीक है या नहीं है करनी आपो अपनी के ने के दूर जिन इनाम आया गए मशकत काल नानक ते उजले केती छुट्टी नाल दिवस रातया खेला जगत सुनिए दिवस रात दादाया खेला सकल जगत ये जगत जो है दिवस रात दिवस और रात यानी अंधेरे और उजाले के भीतर नकारात्मक और सकारात्मक विचारों के बीच में झूल रहा है। कर रहा है। निर्णय आपको करना है। आपके हाथ में चाकू दे दिया है। चाहे तो सेब काट ले, सब्जी काट ले या किसी के पेट में घूप दे। तो अब यहां से दो प्रश्न आते हैं। दो प्रश्न आते हैं। एक कि ये जो मेरी आवाज आ रही है, ये बुद्धि से नहीं आ रही है।

00:33:08:14 बल्कि मन से आ रही है। बुद्धि के अलावा मन है ना? तो बुद्धि से नहीं आ रही है। एक बुद्धि से नहीं आ रही है। मन से आ रही है। पहला सवाल यह निश्चित कैसे होगा? बुद्धि की आवाज सुननी है और मन की नहीं सुननी है। ये निश्चित कैसे होगा? भाई मैं मेरे ही अंदर से दोनों आवाजें आ रही हैं। तो मेरे को कैसे पता चलेगा? जैसे कोई व्यक्ति है वो बिना कपड़ों के बाहर जाना चाहता है। है ना? कोई व्यक्ति है जो ऐसी स्त्री के साथ संबंध बनाना चाहता है जो उसके जिसके लिए वो अधिकारी योग्य नहीं है। अनाधिकृत रूप से व्यभचार। तो यह जो आवाज आ रही है गलत करने वाली यह उसके मन मतलब बुद्धि से नहीं आ रही है बल्कि मन से आ रही है। यह निर्णय वो कैसे करेगा? पहली बात। दूसरी बात यदि वो दूसरी बात यदि वो कर भी लेगा तो इससे उसे फायदा क्या होगा? मैंने पूछा उपयोगिता क्या है? आवश्यकता क्या है धर्म की? दो बातें। जी

00:34:01:06 ये जो दो आवाजें आ रही है ना आपने कहा। ये एक ही स्थान से दो आवाजें आ रही है। जब तक शरीर के भीतर आत्मा है तभी तक तो आवाज आएगी। नहीं तो क्या होगा? शरीर के सारे अंग पांच कर्मेंद्रियां, पांच ज्ञानेंद्रियां यूं के यूं जमीन पर पड़ी हुई होंगी, आंखें भी होंगी, नाक भी होगा। होठ भी होंगे, कान भी होंगे, त्वचा भी होगी, सारे के सारे अंग होंगे। और अगर इसमें से आत्मा यानी रथी जो चला रहा है इस शरीर को रथी निकल गया तो कह दिया जाएगा यह अरथी हो गई या कह दिया जाएगा निधन हो गया ऐसा कहां इतना लंबा जा रहे हैं मैंने आपसे पूछा है कि मन और बुद्धि में अंतर कैसे करें कि ये आवाज मेरी बुद्धि की आवाज नहीं है ये अंतर कैसे करें और दूसरी बात की यदि अंतर कर भी लिया तो इससे मुझे फायदा क्या होगा स्वयं के स्वयं के भीतर ये आवाज उठती है स्वयं के भीतर ये आवाज उठती है ये गलत है लेकिन क्या होता है कि उसे उसे दबा दिया जाता है। मन दबा लेता है। नहीं कोई बात नहीं चल बाद में देख लेंगे। कोई बात नहीं चल बाद में देख लेंगे फिर कर लेंगे। और जैसे जैसे स्वयं के भीतर से ही आवाजों को इसीलिए तो हम जब स्वयं के भीतर से ही जब दबा सकते हैं तो हमें कोई बाह्य बल चाहिए ना निश्चित करने के लिए क्या सही है क्या गलत है इसीलिए भगवान ने कहा तेरे लिए कर्तव

00:35:16:12 कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है तो बुद्धि के ऊपर डिपेंड इसलिए नहीं हो सकते कि वहां हम निर्णय नहीं कर पाएंगे कि कौन सी आवाज बुद्धि से कौन सी मन से जैसे निठारी वालों को निठारी हत्याकांड में बच्चों का मांस कुकर में उबाल के खाना ही धर्म लग रहा है वहां उनकी बुद्धि से आवाज आ रही होगी। उन्होंने दबा दी। उन्होंने सोचा जो मना कर रहा है वो गलत है और जो कह रहा है खा ले वो सही है। उन्होंने आवाज दबा दी ना लेकिन आवाज तो आई थी। ये हम सिद्ध कैसे करेंगे? ये हम सिद्ध कैसे करेंगे? उनके अंदर ज्ञान और अभ्यास की कमी थी। क्या हम सामने वाले को यह सिद्ध कैसे करेंगे कि यह जो आवाज आ रही है तुम्हारे अंदर से गलत आवाज है। तुम गलत डायरेक्शन में जा रहे हो। सिद्ध कैसे करेंगे उसको? हम बाहर से सिद्ध नहीं कर सकते। उसके भीतर ही आवाज आती है और वही वही हो रहा है। इसका मतलब उससे ये नहीं कह सकते निठारी वाले से कि तुम अधर्म कर रहे हो। आप कहे उससे अधर्म कर रहे हो। कह सकते हैं? कह सकते हैं लेकिन उसके भीतर की आवाज भी तो आती है ना उसके अंदर से और उसके लिए सत्संग की आवश्यकता होती है। उसके लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है। क्योंकि अगर किसी को सुधार कैसे होगा वो एक अलग

00:36:31:15 बात है। सुधार कैसे होगा अलग बात है। मैं पूछ रहा हूं कि जो व्यक्ति एक नॉर्मल खड़ा हुआ है उसके अंदर दोनों तरह की आवाजें हैं। तो उसमें से किस आवाज किस उसमें से जो सकारात्मकता वाली आवाज है उसको सुनना है और नकारात्मकता वाली आवाज है उसको नहीं सुनना है। उसको हम किस आधार पर सिद्ध करवाएंगे कि ये नकारात्मक है। इसको नहीं सुनना है। ये सकारात्मक है। इसको सुनना है। मेरे मेरा कहना है कि उसको शास्त्र दिए जाएंगे। भाई शास्त्र में लिखा है बहन के साथ विवाह नहीं करना है तो नहीं करना है। ये वाली दूसरी आवाज को दबा दो। ठीक है। कह रहे हैं कि अंदर से ही अंदर से ही निर्णय होगा। तो अंदर से निर्णय लेने के नाम पे तो व्यक्ति कुछ भी करता रहेगा। केवल शास्त्र देने से काम चलेगा या शास्त्र पढ़ने के बाद उस पर अमल करने से उसका अभ्यास करने से काम चलेगा? अरे वो तो आगे की बात है ना भाई साहब आप दूसरे डायरेक्शन में क्यों जा रहे हैं इसका मतलब उस व्यक्ति ने निठारी कांड वाले व्यक्ति ने अभ्यास नहीं किया उसने शास्त्रों को नहीं जाना बार बार अगर शास्त्रों को जाना होता पढ़ा होता सत्संग किया होता तो ये नौबत ही नहीं आती हां हां शास्त्र से मतलब शास्त्र से तय होगा क्या गलत है क्या सही मैं ये कहना चाह रहा हूं अब मुझे ये बता दीजिए इसका फायदा के ज्ञान से शास्त्र एक माध्यम है शास्त्र के ज्ञान से अरे ऐसे भाई साहब बातों

00:37:46:21 के लक्ष्य बनाने तो मैं भी कह दूं शास्त्र के ज्ञान से नहीं ईश्वर प्राप्ति से प्राप्त होगा और बोलो ईश्वर की शरण में जाने से प्राप्त होगा और बोलो ऐसे बातों के लक्ष्य नहीं बनाने ईश्वर की शरण में वही तो जाएगा जिस व्यक्ति ने उस सकारात्मक ज्ञान को समझ लिया और अपने जीवन के ढाल लिया इसी तरीके से सकारात्मक ज्ञान वही तो प्राप्त करेगा जो शास्त्र के अधीन हो जाएगा बातों के लक्ष्य क्यों बनाने हैं वही बात मैं कह रहा हूं वही बात आपको लगता है लक्ष्य तो ठीक है लेकिन हमने जो अपनी बात कहनी थी वो कह दीजिए। अच्छा ठीक है। अभी मुझे बताइए सही गलत का चुनाव करने का फायदा क्या है? क्यों किया जाए?

00:38:27:27 क्योंकि इससे एक आत्मिक शांति की अनुभूति होती है। आत्मिक शांति की अनुभूति का पहला जो तरीका है जो मैंने अनुभव किया है कि रात को कोई सपना नहीं आता। मन में विचार नहीं चलते फालतू के। व्यक्ति के विचार जो होते हैं बड़ी मुश्किल से चार ही रह जाते हैं। 40 नहीं चलते सिर्फ चार रह जाते हैं। और कई लोग तो ऐसे होते हैं जो विचारों से शून्य हो जाते हैं। अच्छा तो इसका अर्थ है कि ये जो ज्ञान विज्ञान है इसका सब कुछ जो लय है वो है परम कल्याण यानी कि मोक्ष में।

00:39:11:06 जी जब उसको किसी भी जब उसके पास किसी भी प्रकार का अभाव ना रह जाए अभाव रहित हो जाए हां उसे किसी चीज की इच्छा ही ना रह जाए कि मुझे ये पाना है जो परमात्मा ने दिया है जो ईश्वर ने दिया है काफी है हे प्रभु तेरा शुक्रिया हम तूने जो दिया है हम तेरी संतान है तूने पहले ही बहुत कुछ दिया है हमें और इतना कुछ दे रखा है उसने देखिए मैं छोटी सी अगर आप एक मिनट दे तो मैं आपसे अपनी बात पूरी कर लूं। ईश्वर ने हमें यानी वो परमपिता जिसे हम कहते हैं उस परमपिता ने परमात्मा शिव और माता पार्वती ने हमें ये पृथ्वी दी है। ठीक है? पृथ्वी में उसने जो पेड़ दिए हैं अगर उनको पत्थर भी मारे तो वो भी क्या करते हैं? हमें फल देते हैं। सूर्य कभी भी ये नहीं देखता कि मैं मुसलमान के यहां चमकू या हिंदू के यहां चमकू या उसके यहां ना चमकू, उसके यहां ना चमकू। हो सकता है कि हम लोग आपस में बांट ले। हम लोग बांट ले कि ठीक है ईद पे तेरा चंद्रमा है और करवा चौथ पे मेरा चंद्रमा है। हम बांट सकते हैं लेकिन चंद्रमा को तो मालूम ही नहीं है। इसी तरह से जो हवाएं चलती है मुझे छूकर किसी दूसरे के पास चली जाती है। फिर तीसरे के पास चली जाती है। तो कोई धर्म भ्रष्ट किसी का नहीं होता। यहां ये धर्म नहीं है। धर्म भ्रष्ट होता ही नहीं किसी का।

00:40:26:12 इसी तरह से पृथ्वी रात भर अन्न उगाती रहती है। उसको पानी दो, बीज को और बीजों को भी पता है कि उगना है और परमात्मा ने तो यहां तक कर रखा है कि सबसे ऊपर गेहूं की बाली लगती है। उससे नीचे पहले भूसा लग जाता है। जानवरों के लिए भी उसने बंदोबस्त कर रखा है। तो ये जो परमात्मा का जब किसी से भेदभाव नहीं करता है। हम मनुष्य क्यों भेदभाव करें? सबसे बड़ा एक मेरा सवाल कुछ है। आप थोड़ा सा ट्रैक उसमें खो जाते हैं। आप मैं पूछ रहा हूं। कि जब हम यह फॉलो करेंगे कि यह करना है और यह नहीं करना है। अंत में सबसे महत्वपूर्ण चीज हमें जो मिलने वाली है वो है मोक्ष। ठीक है? यही है ना? तो यही हां यही हम कहना चाह रहे हैं। फिर वो जो स्मृति आ जाती है व्यक्ति की जो स्मृति आ जाती है मोक्ष यानी कि जब मेरे को कुछ भी और प्राप्त करना शेष ना रह जाए। जैसे कि गीता में लिखा हुआ है। है ना? हां। बिल्कुल बिल्कुल हां। तो वो यानी कि जो जो मोक्ष है मोक्ष है उसको अगर हम लोग थोड़ी सी शास्त्री भाषा में कहे तो सच्चिदानंद की प्राप्ति ही मोक्ष है बिल्कुल है ना सच्चिदानंद की प्राप्ति एक मिनट मैंने सच्चिदानंद

00:41:41:20 की प्राप्ति सतित आनंद की प्राप्ति यानी कि अनंत अबाध्य स्वरूप से स्थित और आनंद में मग्न जी है ना बिल्कुल बिल्कुल अब बात आती है कि ब्रह्मा कुमारी ब्रह्मा कुमारी वाले ये कहते हैं कि इस्लाम भी धर्म है। ठीक है। हां हां बोलिए। तो क्या यानी कि कुरान में बताया गया जो ज्ञान विज्ञान है वो भी धर्म है। हां जी। ठीक है। पहली बात तो ये है कि इस्लाम कोई धर्म ही नहीं है। इस्लाम धर्म नहीं है। नहीं है। इस्लाम एक एक मिनट एक मिनट इस्लाम धर्म नहीं है और बाइबल ईसाई वो भी कोई धर्म नहीं है। हां ठीक है। तो यानी ब्रह्मा कुमारी जो ये क्लेम कर रही है कि इस्लाम धर्म है और बाइबल धर्म है ये गलत कर रही है। उन्होंने कहीं क्लेम नहीं किया है। हमसे विदियों की बात हो रही है। मैं आपको वीडियो दिखा दूं। वीडियो दिखा दूं आपको कि परमात्मा ने सबसे पहले सृष्टि की शुरुआत की हां। तो जिस धर्म की स्थापना की हम वो है देवी देवता धर्म। देवता धर्म

00:42:57:03 के बाद अब्राहम आया जिसने अपनी आत्मिक बल से पवित्रता की शक्ति से इस्लाम धर्म स्थापन किया। तो अगर अगर ब्रह्मा कुमारी वाले यह कह रहे हैं कि इस्लाम भी धर्म है और ये ईसाई भी धर्म है तो इतने अंश में आप फिर समर्थक नहीं है ना ब्रह्मा कुमारी के किस बात का समर्थक नहीं हूं। अरे भाई समर्थक नहीं हूं मैं। ठीक है। अगर कोई सुनिए अगर कोई अगर कोई खुद को प्रमाणिक कह रहा है कि मैं प्रामाणिक हूं और उसमें एक रत्ती भर भी हमें ये लग रहा है कि ये झूठ बोल रहा है यहां पे गलत बोल रहा है तो उसकी अप्रामाणिक वो प्रामाणिकता तो भंग हो गई ना वहां तो उनसे बात की जा सकती है इस बारे में। देखिए बौद्ध कोई धर्म है तो तो जब तक बात नहीं होती जब जब तक बात नहीं होती तब तक तो अप्रामाणिक ही कहलाएंगे ना। हां अब अब हम आपको बताते हैं कि हम है संत व्यक्ति। हम जहां भी जाते हैं वहां देखते हैं कि गुण ले लेते हैं। अवगुण छोड़ देते हैं। हमें अवगुण से कोई मतलब ही नहीं। भाई साहब जब आप

00:44:14:14 ये आप तब कह पा रहे हैं ना जब फोर्स लगी हुई है सरहदों पे। आपकी कोई रक्षा कर रहा है खाकी वर्दी पहन करके डंडा लेकर के। तब आप कह रहे हैं हमें कोई मतलब नहीं है। अभी आपको डकैती करने आपके आसपास कोई आएगा। आपको जान से मारने आएगा। आपको नहीं आपके परिजनों को मारने आएगा आपके प्रियजनों को मारने आएगा या कहीं पर भी कुछ आएगा तब आपको लगेगा नहीं इसको रोकना जरूरी इसके गुण नहीं लेने इसको रोकना है एट द टाइम हां तो उस समय रोका जाएगा ना परिस्थिति मतलब अपने आसपास जब गलत हो तो वहां पर रोकना पड़ता है ये नहीं कि उसके गुण ले ले अगर किसी के घर में अगर जैसे कोई कहे कि भाई दुनिया भर में वैश्यावत्त हो रही है तो हमें कोई मतलब नहीं है हम तो उसके गुण लेंगे जब ब्रह्मा कुमारी वाले किसी पे आक्रामक नहीं हो रहे हैं। किसी पे हमला भी नहीं कर रहे हैं। वो वैचारिक तौर पर आक्रामक हो रहे हैं ना। वैचारिक तौर पर हिंदुओं को दिशाहीन बना रहे हैं ना। उन्होंने तो कभी नहीं कहा कि दिशाहीन हो जाओ। कभी नहीं कहा उन्होंने। अरे भाई जब वो ये क्लेम कर रहे हैं। आप कह रहे हो कि इस्लाम और ईसाइयत धर्म नहीं है और वो कह रहे हैं कि धर्म है। तो इतने मुझे मानना पड़ेगा ना कि कर रहे हैं। मुझे देखिए जो मेरा अपना अनुभव है मुझे नहीं लगा कि अभी उन्होंने इस तरह की कोई बात हमसे की हो। तो आपको पता करना चाहिए था वीडियो दिखा दूंगा आपको वीडियो दिखा दूंगा

00:45:33:22 आपको समर्थन तब करना चाहिए ना ब्रह्मा कुमारी का जब आप पता कर लो मैं आपको 10 वीडियो दिखा दूंगा उनके टॉप लीडर्स के द्वारा ये क्लेम किया जा रहा है कि इस्लाम और ईसाइयत भी धर्म है हमें क्या पड़ी है उनका विरोध करने की यदि वो इस तरह की बातें ना करें तो मेरी बात को थोड़ा ध्यान से समझने की कोशिश कीजिए कि जो भी धर्म है जो भी धर्म है धर्म तो एक है सनातन और ब्रह्मा कुमारी सनातन धर्म को ही मानती है वो मैं अभी उसप भी आ रहा हूं मैं ब्रह्मा कुमारी की अपनी फिलोसफी पे भी आ रहा हूं पर पहले इस्लाम वाली बात क्लियर कर लूं इस्लाम और ईसाइयत धर्म नहीं है वो लोग ये क्लेम कर रहे हैं मैं 10 वीडियो आपको दिखा दूंगा अब आप मुझे वचन दे दीजिए आप नहीं मानते कि वो ऐसा क्लेम कर रही है और पता लगा तो आप क्षमा मांगेंगे सार्वजनिक रूप से कि मैंने ब्रह्मा कुमारी का समर्थन किया हमने हमने इस बात का समर्थन नहीं किया है। हमने ब्रह्मा कुमारी के गुणों का समर्थन भाई साहब जब हम किसी को यह कह रहे हैं ये जो थाली है झूठी नहीं है। उसमें एक और भी झूठा डाल दिया जाएगा तो थाली झूठी हो गई। झूठी थाली और एक मानव की मानवता में बहुत फर्क होता है। इंसान में बहुत फर्क होता है। भाई साहब जब हम किसी से आध्यात्म का विषय लेने जाते हैं। ठीक है? अध्यात्म

00:46:49:03 के विषय में हम ज्ञान लेने जाते हैं तो जिससे हम लेने जा रहे हैं उसको झूठ बोलने वाला गलत बोलने वाला नहीं होना चाहिए। जितना पता है उतना बोले कम से कम झूठ तो ना बोले आप अपनी जगह पे आप ही ने आप ही ने क्लेम कर दिया तो मैं आप ही पे सवाल कर रहा हूं। आपने पता ही नहीं किया कि ब्रह्मा कुमारी ये क्लेम करती है और आप उनका समर्थन लेते फिर रहे है ये तो गलत बात है। आप पता करिए ब्रह्मा कुमारी ब्रह्मा कुमारी के आपने पोस्टर देखे हैं कभी? ब्रह्मा कुमारी के आपने पोस्टर देखे कभी? देखे हैं। देखे हैं। देखे हैं। उसमें वो ईसा नहीं होते हैं। उसमें मोहम्मद नहीं होते हैं। हां होते हैं। हां। तो क्या क्या दिखाना चाह रहे हैं उस? उसमें गुरु नानक लेकिन वो महापुरुष है। महापुरुष वो फोटो लगाए हुए हैं उन्होंने। यानी कि मोहम्मद आपके हिसाब से मोहम्मद जी भी आदर्श है ना। महापुरुष आदर्श हो गए। तो वो उन्होंने फोटो लगा रखे हैं। ठीक है। वो उनका भाई साहब महापुरुष आदर्श होते हैं कि नहीं भगवत गीता का वो ध्यान है कि नहीं आपको मनुष्य हमेशा श्रेष्ठ को फॉलो करता है आपने अभी मोहम्मद जी को महापुरुष कहा है मोहम्मद को महापुरुष कहा है ना आपने ये तो फिर भविष्य पुराण खोल के देखेंगे उसमें भी मोहम्मद का नाम आया है तो क्या उसमें से भी उड़ा देंगे काट देंगे आप भाई साहब मैंने

00:48:04:19 तो उसका ना उसका नाम इस बात में आया है कि वो जो आदर्श है वहां तो हमारे आदर्शों के साथ चित्रण कर रहे है ना उनका उसमें उसमें उसमें ये दिया है कि ये भी पृथ्वी पर अवतार लेंगे। भविष्य पुराण में लिखा है महाम के रूप में उनके वो आने के बारे में है। हम कहते हैं कि ये हो सकता है कि महापुरुषों के फोटो उन्होंने लगा रखे हैं। ठीक है लगा दिए। उनके लिए महापुरुष है। आप मोहम्मद को आप मोहम्मद को महापुरुष मानते हैं कि नहीं मानते। मैं आपसे पूछ रहा हूं। हम मोहम्मद को ना महापुरुष मानते हैं। ना ही उसको ये ठीक है कि वो मोहम्मद कौन था, क्या नहीं था? हमें नहीं मालूम ना हम जानना चाहते हैं। हमें अपने से मतलब है कि हम क्या है। भाई साहब अभी बात ये चल रही है। आपने उसको महापुरुष बोला है थोड़ी देर पहले। अभी नहीं बोला है। हमने कहा कि उन्होंने दोबारा महापुरुषों के चित्र हमने कहा कि उन्होंने उन महापुरुषों के चित्र लगा रखे हैं। ठीक है ना? तो आपने पोस्टर की बात की वो महापुरुष है आपने ये कहा चित्र लगा रखे हैं नहीं कहा है

00:49:08:26 वो महापुरुष है महापुरुषों को फोटो लगाए हुए हैं उन्होंने वो महापुरुष है महापुरुषों को फोटो लगाए हुए हैं उन्होंने मोहम्मद ने अपना एक धर्म चलाया हर आदमी एक अपने अपने पीछे लोग चला लोग चल पड़ते हैं किसी के पीछे भी चल पड़ते हैं तो वो लोग चल गए उसके पीछे उन्होंने वहां चलाया ना नहीं जानना चाह रहा हूं। मैं मोहम्मद का इतिहास नहीं जानना चाह रहा हूं। मैं यह कह रहा हूं आप उसे उन्हें महापुरुष मानते हैं कि नहीं मानते? बस ये बताइए। कुछ बातें कुरान में अच्छी लिखी है तो हम अच्छी मानते हैं जो नहीं ठीक लगती हमें नहीं मानते। आगे बोलिए। मोहम्मद महापुरुष है कि नहीं? ये पूछा है मैंने। हां मैं बताता हूं। अब सूर अल फातिहा पहली सूरह जो है वो वो बिल्कुल अपने गायत्री मंत्र मैं पूछ रहा हूं कंक्लूजन क्या है? महापुरुष है कि नहीं है? कंक्लूजन ये है कि कुरान में भी मिक्सचर हो गया। कुरान में भी मिक्सचर हो गया। वरना कुरान में भी बहुत सारी अच्छी-अच्छी बातें भी तो लिखी है। तो बोलो ना कि महापुरुष है। फिर उनकी लिखी किताब में मिक्सचर हो गया है। ये बोलो ना मिक्सचर हो गया। महापुरुष है। ऐसा ऐसा मान ले किताबों में मिक्सचर हो गया है। हमारे में भी मिक्सचर हुआ है। महापुरुष है। ठीक है। अच्छा है। तो इसका मतलब उन्होंने जो धर्म दिया था वो सनातन

00:50:24:09 ही था। वो पहले सारे सनातनी ही थे। नहीं महा मोहम्मद ने जो बताया वो सनातन था। ये तो मानना महापुरुष मान रहे हो टोटल महापुरुष तो मानना ही पड़ेगा सनातन था। तो मोहम्मद ने मोहम्मद ने भी जो कुछ लिया है वो भी वेदों से ही लिया है। क्योंकि कह रहा हूं मैं पूछ कह रहा हूं भाई साहब कि मोहम्मद ने सनातन ही बताया था ना टोटल बाद में मिक्सचर हो गया उनके नाम पे। मिक्सचर हो गया। हां ठीक है। तो यानी वो सनातन ही था।

00:50:57:15 वहां का रहने वाला वहां का रहने वाला पहले जब उसके परिवार के लोग सारे के सारे पुजारी थे तो पुजारी आखिरकार तो सनातनी थे या नहीं थे। भाई साहब मैं कह रहा हूं कि मोहम्मद ने जो दिया विरोध पूर्वक 300 मूर्तियों को तोड़ के वो सनातन दिया था कि नहीं दिया था? वो मोहम्मद का दृष्टिकोण अलग था गलत था। मूर्तियां यानी कि वो महापुरुष नहीं था। महापुरुष भी दो तरह के हो सकते हैं ना। एक नेगेटिव थिंकिंग वाले, एक पॉजिटिव थिंकिंग वाले। अच्छा मतलब खलनायक मगर बड़ा गजब का खलनायक। ऐसा उन्होंने उन्होंने नेगेटिव रास्ता अपना लिया। मूर्तियां तोड़ दी। 360 मूर्तियां थी तोड़ दी। ठीक है कि नहीं? तो लेकिन जो अच्छी बातें हैं वो तो ले लेनी चाहिए ना। बुराई पर बुराइयां छोड़ देनी चाहिए। अच्छी बातें तो हमारे वेदों में ही है। हमें कहीं क्यों जाना लेने के लिए? वहां भी तो है। कई जगह लिखा हुआ है। अच्छी बातें लिखी हुई है। ऐसी कोई बात बता दीजिए जो वेद के बाहर हो। बताइए। वेद के बाहर कोई भी बात नहीं है। तो फिर हम कुरान फिर हम क्या करेंगे कुरान से? कुरान का क्या करें? फिर हम क्यों जाए कुरान के पास? ना जाइए। आपको कौन कह रहा है कि जाइए? अरे ब्रह्मा कुमारी

00:52:12:16 वाले कह रहे हैं ना कि भैया हमारे रामचंद्र जी के साथ शिव जी के साथ खड़ा कर रहे हैं ना मोहम्मद को क्यों कर रहे हैं भाई जब हमारे शिव जी के पास सब कुछ है राम के पास सब कुछ है तो क्यों ला रहे हो मोहम्मद को जिसमें वेद वेद की कॉपी होने के साथसाथ वेद के वेद का विरोध भी है वेद विरोधी को मनुस्मृति में नास्तिक कहा गया है ठीक है तो आप इस बात को जांच आप इस बात को जांच लीजिएगा कि ब्रह्मा कुमारी वाले ये क्लेम करते हैं कि इस्लाम और ईसाइयत भी धर्म है।

00:52:44:24 ये सिर्फ हमारी दृष्टि में एक संप्रदाय है। ये जैसे बौद्ध एक संप्रदाय है। सिख एक संप्रदाय है। ये सारे के सारे संप्रदाय हैं। जैन एक संप्रदाय है। ये संप्रदाय है। लेकिन सभी का एक ही मूल है। पंथ शब्द उपयुक्त है। पंथ भी कह सकते हैं। पंथ भी कह सकते हैं। इनको वैदिक दिखाना वैदिक प्रतीक चिन्हों के साथ खड़ा करना यह संशय पूर्ण स्थिति फैलाने के जैसा है। क्यों है? क्योंकि हमारा धर्म सिखा रहा है कि रकुल रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई। और 33 चार में कुरान ये कह रही है कि यदि आपने किसी को मुख से मां बहन इत्यादि जैसा कुछ मान लिया है तो भी उसके उलट आप उससे विवाह कर सकते हो। हमारा धर्म सिखा रहा है। अपने वचन के पक्के हो जाओ। और वहां पर सिखाया जा रहा है कि आपने माता बहन कुछ बोल दिया तब भी उससे विवाह कर लो या विवाह के बिना भी जो कुछ किया जा सकता है वो भी कर लो। नहीं मेरे ख्याल से तो 33 चार में बात नहीं लिखी है। खोलिए जरा। रुकिए जरा एक मिनट। हां एक मिनट रुकिए जरा।

00:53:58:26 हम सूर अलहजाब हम ठीक है जी। तो इसमें लिखा है अल्लाह ने किसी के सीने में दो दिल नहीं दिए। हम और ना तुम्हारी बीवियों को जिनसे तुम जिहार करते हो तुम्हारी मां बनाया और ना तुम्हारे मुंह बोले बेटों को तुम्हारा बेटा बना दिया हम ठीक है ये सब तुम्हारे अपने मुंह की बातें हैं मुंह की बातों को कैंसिल कर दिया ना हम सुनो मुंह की बातें हैं और अल्लाह ए हक की बात करता है और सीधा रास्ता दिखाता है मुंह मोले बेटों को उनके बापों की निस्सीत से पुकारो मुंह मोले बेटों को मुंह की बातों का यहां पे डिनाई कर रहे हैं ना। मुंह बोले रिश्तों को डिनाई किया ना यहां पे। ना ना ये थोड़ा समझ का फर्क आ गया। मुंह भोले बेटों को उनके बापों को से पुकारो। अल्लाह के नजदीक तुम्हारा मुंसना बात है। फिर अगर तुम उनके बाप को ना जानो तो तुम्हारे दीनी भाई हैं। ठीक है। मतलब मतलब हम भाई नहीं बना सकते। मुंह बोल मुंह बोला है। बोला भाई

00:55:10:21 और इसी में भी है। मुझे जिहारत का जिहार का अर्थ बता दीजिए जरा। देख लेते हैं जरा। कुरान उतारना है जरा ऊपर। हरी वाली। हां। तलाक देने की सूरत सुनिए। तलाक देने की सूरत जिसमें शौहर अपनी बीवी से कहता था कि तुम मेरे लिए मां की पीठ की तरह हो। यानी जैसे हम मौसी कहते हैं कि तुम मेरी मां जैसी हो। यह माना है यहां पे। जिहार का मतलब किसको कहता था? हां ये देखिए बताता हूं। दोबारा बताता हूं। तलाक देने की एक सूरत तलाक देने की एक सूरत जिसमें शौहर अपनी बीवी से कहता है कि तुम मेरे लिए मां की पीठ की तरह हो। जब उसने तलाक दे दिया तो फिर उसके साथ जो व्यवहार करेगा वो मां की तरह करेगा। अरे भाई साहब थोड़ा सा जान लीजिए कुरान के बारे में। ये जिहार वहां पर होता था। लोग अपनी पत्नी को मां कह के तलाक दे देते थे। तो उस संबंध में एक आयत आई जिसमें यह कहा गया कि तुम ये मुंह बोले रिश्ते तुम्हारे मायने नहीं रखते। ये मुंह से मां कह देना, मुंह से बेटा कह देना ये सब गलत है। और उसके बाद से उनके यहां पर गोद लेने का जो है बंद हो गया।

00:56:26:04 मना कर दिया गया टोटल। जो मेरी दृष्टि में आया वो भी मैंने आपको बताया। हां। तो आप पहले समझ लीजिए कि क्या कहा जा रहा है वहां पे। एक मिनट। हां देख ले आप भी। देखिए इसमें लिखा है ऐ ईमान वालों उन मुंह बोले बेटों को उनके सगे बापों के नाम से बुलाया करो। यही बात अल्लाह के नजदीक जियाद है। ठीक है? पर अगर तुम उनको उनके बाप का नाम मालूम ना हो मुंह बोले बेटे का। ठीक है? तो वो तुम्हारे दीनी भाई हैं। दीनी दोस्त हैं। पर तुमसे इसमें भूल चूक हो जाए तो इसमें तुम पर कुछ पाप नहीं। यानी कि जो मुंह बोले रिश्ते इत्यादि है उसमें अगर रिश्तों के विरुद्ध जाते हुए तुमसे कुछ उल्टा व्यवहार हो जाए तो तुम पर कोई पाप नहीं क्योंकि वो मुंह बोले ये सब आपने कहा ना ये सब तुम्हारे मुंह की बातें हैं मुंह की बातों की अवहेलना हुई ना और हमारे यहां मुंह की बात का वो हो रहा है सम्मान रखुरी सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई क्योंकि ये सब तुम्हारे मुंह की बातें हैं

00:57:41:08 और यह जो जिहारत है इसी के कारण ये वाली बात उतरी और ऐसी एक चीज नहीं है कुरान में केवल एक ही पंक्ति है। दूसरी बात एक ये है कि जब आप कुरान में कुरान को जस्टिफाई करने बैठे हैं तो इसका मतलब सबसे पहले तो हम ये मान रहे हैं मैं हम जस्टिफाई नहीं करने बैठे हैं। हमने तो ये कहा है कि जिस तरह से इनकी सूरह अल फातिहा जो पहली सूरह है कुरान की वो गायत्री मंत्र से ली गई है। सब तारीफ हमें मतलब क्या है जब हमारे पास गायत्री मंत्र है मेरा कहने का अर्थ यह है कि दुनिया में कहीं भी यदि कोई थोड़ी बहुत भी चमक है तो हमारे वेदों के कारण है जिस प्रकार से दुनिया में कहीं भी कोई बल्ब जल रहा है तो हम ये थोड़ी ना कह सकते ये जो है स्वतंत्र रूप से थॉमस अलवा एडिसन के बिना जल रहा है। जो बात आप कह रहे हैं मैं दूसरे तरीके से कह रहा हूं। इस्लाम धर्म जो जिसको मानते हैं ये धर्म कहते हैं। इस्लाम कितने साल पुराना है 14 1500 साल वेद कितना पुराना है पुराने है यह सभी के सभी गूगल भी खोल के देखते हैं तो लिखा जाता है कि वेद बहुत प्राचीन है तो इसका मतलब वेदों से कॉपी पेस्ट किया हुआ है मैं यही तो बात हम भी कहना चाह रहे उसमें एक दिक्कत कर दी ना

00:58:57:06 पहले जितनी भी किताबें आई है उसमें मिलावट हो गई है इसलिए मैं सबकी वो करूंगी सत्यापन यह कर दिया उसने विरोध ना करती तो सब चला लेते काम विरोध एक मिनट जैसे आपने बताया था ना पानी का गिलास पानी के गिलास की बात बताई थी। समर्थन इस बात का समर्थन हम भी नहीं करते हैं। हम तो ये कह रहे हैं कि ये जो कुरान किताब आई ऐसे में ऐसे में हमें ये कुरान के द्वारा ऐसे में ऐसे में हमें ये कहना पड़ेगा कि कुरान के द्वारा बताया गया जो नियमावली है वो मोक्ष प्राप्त कराने में सहायक नहीं है। वेदों में पहले से ही है। सही है। मैं कह रहा हूं कि कुरान को अगर हम एज इट इज माने कुरान क्योंकि कुरान तो यह नहीं कह रही ना कि जितना वेद वेद से मैच करे उतना ही लेना। कुरान ये कह रही है मैं ही हूं टोटल। तो जब वो ये कह रही है कि मैं ही हूं टोटल। तो उसकी इन गलत चीजों को भी हमें मानना पड़ेगा। ये भी कुरान कह रही है। और जब यह मानना पड़ेगा तो एट द एंड हमें ये मानना पड़ेगा कि कुरान से कुरान में जो नियमावली दी गई है उससे हमें सच्चित आनंद प्राप्त नहीं होगा क्योंकि वेद नहीं

01:00:12:16 हो सकता। इसका मतलब कुरान में बताया गया धर्म धर्म नहीं है। हम तो पहले ही कह चुके हैं कि कुरान में बताया गया धर्म धर्म नहीं है। वो सिर्फ एक तो इसका मतलब इसका मतलब ब्रह्मा कुमारी वालों का ये कहना कि कुरान बाइबल ये सब धर्म है। ये कहना गलत है। इस्लाम धर्म है। ये गलत है। ये एक पुस्तक है जिसको वो लोग अपनी पवित्र पुस्तक मानते हैं तो मानते रहे। ठीक है ना? मानते रह। हम कह रहे हैं कि ब्रह्मा हम कह रहे हैं कि ब्रह्मा कुमारी का यह कहना कि इस्लाम धर्म है और ये क्रिश्चियनिटी धर्म है। ये कहना गलत है ना?

01:00:54:07 आपकी बात से हम सहमत है और कई बार क्या होता है कि बच्चे को कहना पड़ता है का से कबूतर। ख से खरगोश है ना? ए से एप्पल, बी से बैट, सी से कैट। तो क्या सारे अक्षर ए से एप्पल ही होते हैं या बी से बैट ही होते हैं? सी से कैट ही होते हैं? का से कबूतर होते हैं, ख से खरगोश ही होते हैं या गा से गाय होता है। नहीं ना? तो कई बार क्या होता है जो कुछ लोगों को समझाने के लिए उन्होंने ये कहा कि ये धर्म है लेकिन जब आदमी अंदर धीरेधी आता चला जाता है दीदियों के साथ या उनके साथ राजयोग की अवस्था में जाता है तो अलग ही उसकी आभा निकल जाती है वो सब एक

01:01:30:19 परमात्मा किसी तरीके से वो कन्वेंस करने के लिए कहना पड़ता है कि ये भी धर्म है कन्वस करने के लिए तो आपने जो तर्क दिया है कि ए से ए फॉर एप्पल बी फॉर बॉय ये कहा जाता है क्या सिर्फ ए से एप्पल ही होता है तो जब हम ए से एप्पल कहते हैं ए से जब हम एप्पल कहते हैं तो हम ये नहीं कहते कि ए से कुछ और हो ही नहीं सकता हम फॉर एग्जांपल ले चलते हैं जैसे ए से एप्पल जैसे बी से बॉय वहां पे कहीं भी लिमिट नहीं लगाई जीत इसका मतलब ये लिमिट नहीं है वहां पे कि नहीं दूसरा हो ही नहीं सकता मगर हम किसी ऐसी चीज को ले रहे हैं जो ये कह रही है कि नहीं ए से एप्पल ही होगा। दूसरा कुछ नहीं हो सकता। जो यह कह रही है उसको हम कह रहे हैं सही पढ़ाई है। उसको हमारी नहीं कहा जाता क्योंकि हमारी बड़ी बहनों बड़ी वीडियो से बात होती रहती है। वीडियो के वीडियो मैं आपके कथन के साथ लगा दूंगा और मैं आपको भेज भी दूंगा। तो आप आ के फिर दोबारा से इस बारे में चर्चा कर लीजिएगा। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है जी।

01:02:50:06 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 1:02:52 · 15 Mar 2026

तथाकथित महामंडलेश्वर ‌ना स्वयं को बचा सके ना ब्रह्माकुमारी को

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