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00:00:02:07 जो ईश्वर का अवतार है वो माया से मुक्त है। जी ठीक है ये एक नोटिस यानी अभी हमारे पास में ये बहुत ही चलिए इतनी बातचीत होते इतनी क्लेरिटी स्पष्ट हो चुकी है अवतारवाद में कि अवतारवाद की धारणा क्या धारणा ये है कि भैया जैसे जीव कर रहा है वो कर्मों के बंधन से कर रहा है ठीक है और वो अविद्या ग्रस्त है जीव अविद्या ग्रस्त है जो जीव है वो अविद्या गग्र ग्रस्त जीव जो है जीव अपने मन से नहीं कर रहा है जीव जो है बद्ध है इसलिए हो रहा है उसका और उसका कंट्रोलर कोई और है और जो ईश्वर है वो स्वयं से कर रहा है स्वयं से कर रहा है ठीक बहुत बढ़िया बढ़िया बात है। तो यानी इतना स्पष्ट है कि वो भी शरीर धारण करता है। चलिए ठीक है। अब अवतारवाद की धारणा पे हम आ चुके हैं। इतना क्लेरिटी आ चुका है। बढ़ते हैं कि

00:00:44:02 अवतार का लक्षण क्या है? जैसे जैसे समझिएगा कि मेरे सामने राम जी खड़े हैं। मेरे सामने रामपाल खड़ा है। ठीक है? दोनों में से ईश्वर का अवतार क्योंकि जीव और ईश्वर को तो मैं देख नहीं सकता। वो तो निराकार है। ठीक है? जो मुझे दिख रहा है वो शरीर है। तो इसमें लक्षण क्या है कि राम जी या रामपाल दोनों में से

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00:01:05:06 ईश्वर का अवतार है कौन? यह मैं कैसे पता करूं? इसमें इसमें इसमें शब्द ही प्रमाण है। इसमें क्या लिखा है? इसमें मां सद्गमया का जवाब दिया। जिसने हमारे जो अंदर की जो क्या कहते हैं जो वास्तविक उत्कंठाएं जिज्ञासाएं अपने को जानने की उसने जो ज्ञान दिया उसके बारे में सही सही डेफिनेशन बनाई उसके द्वारा निर्धारित किया जाएगा कि इसमें से कौन ईश्वर का स्वरूप है ईश्वर का अवतार है और कौन नहीं इसमें शब्द प्रमाण है। जैसे

00:01:36:09 कि जैसे कि अगर ईश्वर सर्वव्यापक है तो सब जगह ईश्वर है और दुनिया में सारी दुनिया सारे स्वर ईश्वर के ही है। ईश्वर कहीं से भी कहीं किसी से अलग नहीं है। तो ऐसे में हमने केवल एक प्रणव को ही उसका दतक क्यों माना? प्रणव को ही उसका वो क्यों माना? प्रतीकात्मक तो इसका निर्णय आएगा गूंगा भी बोल सकता है। वो तो एक अलग चीज हो गई। मगर ये कोई सिद्धांत थोड़ी ना गूंगा।

00:02:09:08 अगर कोई अगर कोई और ऐसा शब्द हुआ जो बोल सकता हो तो बोल सकते है अथो इति शब्द भी तो ईश्वर का है अथ भी तो इसी का है ईश्वर का ही है ना वेदों में आया क्यों नहीं उपनिषदों में अगर और अगर और कोई शब्द होगा जो गूंगा भी बोल सकता होगा तो उसको भी ईश्वर ईश्वर का वो मान लोगे क्या उसको प्रणव की जगह अरे शंकर भाष में मानो क्या बात कर रहे हो आप मैं वो नहीं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं अगर केवल इस तर्क से हम मानेंगे कि भैया वो गूंगा भी बोल सकता है इसलिए वो ईश्वर का देवता है उससे ईश्वर को वो वो लीजिए तो फिर हमें वहां पर ये जो भी शब्द गूंगा बोल सकता होगा जो भी ध्वनिया वो कर सकता होगा उसको भी अपनी पूजा में लेना पड़ेगा मगर वहां पर शब्द प्रमाण वहां पर हमारा शब्द प्रमाण मैं बात पूरी कर शब्द की बात नहीं है आपने ये बोला कि ओम को इतनाेंस क्यों दिया तो वो बात जो भी शब्द की बात नहीं है नहीं बात मैं बता रहा हूं आपने उसको तर्क दिया ना उसके पक्ष में उदाहरण के रूप में आपने प्रणव के पक्ष में अरे भाई मेरी बात पूरी हुई नहीं। आपने प्रणव के पक्ष में एक तर्क दिया है क्योंकि उसको गूंगा भी बोल सकता है। तो मैंने उसको बताया कि गूंगा और भी धनिया निकाल सकता है। फिर प्रणव ही क्यों तो उसके बारे में यही है कि उसमें शब्द प्रमाण है। तो फिर रामपाल के बगल

00:03:24:09 में श्री राम जी खड़े हैं। इसमें से कौन सा ईश्वर का अवतार है? कौन सा नहीं है? तो इसके लिए शब्द प्रमाण अच्छा इसमें जैसे मुझे समझना है कि जैसे किसी जैसे किसी ने कॉपी में लिख के दिया मुझे ठीक है आपने मेरे को WhatsApp पे मान लो मैसेज भेजा कि दिल्ली में आप यहां हो यहां पे एक व्यक्ति है वो खड़ा है आप उसे ये डॉक्यूमेंट ले लो ठीक है आपने मुझे बता दिया उसका डिस्क्रिप्शन दे दिया कि फलाना फलाना ऐसा व्यक्ति है पुलिस की वर्दी में खड़ा है ऐसा ऐसा है ठीक अब मैं जब जाऊंगा उसके पास में तो मैं वेरीफाई तो करूंगा ना कि जिसका आपने लिखा है ये वही है या कोई और है करूंगा। तो जिन पैरामीटर से मैं वेरीफाई करूंगा वही पैरामीटर उसके लक्षण है। किताब में ठीक है। किताब में किसी व्यक्ति की बात की गई है। किताब में उसी व्यक्ति की बात की जा रही है। वो जिन मा जिन पैरामीटर से चेक होगा। ठीक है? उदाहरण के लिए मैं आपको समझाता हूं। किताब में तो ये भी लिखा है कि ईश्वर है। है ना? किताब में ये भी लिखा है कि ईश्वर सृष्टि करता है। नास्तिक को सिद्ध करने के लिए लक्षण बताते हैं ना। नास्तिक को सिद्ध करने के लिए तर्क देते हैं ना। प्रमाण देते हैं। क्यों देते हैं? क्योंकि पॉइंट है। उसी प्रकार से क्योंकि सामने वाला व्यक्ति ईश्वर को मान नहीं रहा है। तो जैसे ही सामने वाला व्यक्ति जब अवतार को नहीं मान रहा तो उसको बता समझने के लिए। ठीक है? इन ऑर्डर टू अंडरस्टैंड दोज़ थिंग्स। तो हमें क्या करना है? हमें बताना है कि लक्षण क्या है कि भैया मेरे सामने अगर अवतार

00:04:39:13 खड़े हो कि ये वही है। जैसे कृष्ण जी के समय में भी उनका एक डुप्लीकेट आया था। कुछ पंड्रिक कुंड्रिक कुछ नाम था उसका। बोल रहा हूं मैं। तो वो भी आया था। वो भी वासुदेव पुत्र और बनके और वो मोर पंख लगा के चार हाथ लगा के घूमता था। उसने भी अपने नकली भाई बलराम सब तो उसमें भी पहचान को लेकर के उसमें उसके भी बहुत चेले क्योंकि बहुत लोग भ्रमित हुए थे। उसके बहुत भक्त बने थे। युद्ध हुआ था उसमें वो मारा गया था। शायद भागवत में आता नहीं था। तो बात वही है कि जो यहां शब्द में लिखा हुआ है शास्त्र में लिखा हुआ है तो मैं वेरीफाई तो करूंगा ना तो मैं किन पैरामीटर से वेरीफाई करूंगा? वो जो लक्षण है वो है क्या? वो स्पष्ट कर। देखिए इसमें मैं बता दूं एक कुछ पैराटर्स ऐसे हो सकते हैं कि भाई वो जैसे हमने मान लिया कि भाई तुम ये कर सकते हो पहाड़ उठा सकते हो या तुम यहां पे खड़े हो तुम दिल्ली में प्रकट हो सकते हो क्योंकि सर्वशक्तिमान है तो ऐसे हम लोग कह सकते हैं मगर अगर हम ये कहे कि भाई तुम सर्वव्यापक हो ये सिद्ध करो हम तुम सर्व्यापक हो ये सिद्ध करो हमें दिखाओ सर्व्यापक तो उसमें वो जो पैरामीटर है ना वो हमारे व्यवहार का विषय नहीं है पूरा का पूरा हम उसे जांच नहीं सकते इसलिए वहां पर हमें शब्द प्रमाण ही रुकना पड़ेगा।

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00:05:48:02 तो आप आप जैसे पैरामीटर बता दोगे दो चार क्या है? ऐसा ऐसा है वो बता दो किन पैरामीटर से वो अवतार सिद्ध होगा तुम्हें फिर उसमें जवाब दूं। नहीं मैं तो मानता ही नहीं ना। नहीं नहीं आप बताओ क्या वो ये क्या आप ये आप अपनी वो बताओ ना। क्या ऐसा हो सकता है? क्या ऐसा हो सकता है? तो मैं जवाब दूं उसका। देखो मैं अपनी धारणा।

00:06:09:25 किसी को ईश्वर मानने का एक किसी को ईश्वर मान लेने का एक ही पैरामीटर है। अगर लक्षण की बात करें कि वो सर्वशक्तिमान हो। मैं आपकी बात समझ गया। मैं हूं उत्तर इसका। अब देखो पॉइंट इसके अंदर क्या है? कि जहां तक आपने बोला कि कुछ चीजें जैसे पहाड़ उठा सकता है इत्यादि इत्यादि कुछ ऐसे पॉइंट है जिसको हम उसके लक्षणों में घटा सकते हैं। ठीक है? उदाहरण के रूप में कोई बद्ध जीव है। जीव तो बद्ध ही होता है। है ना? लेकिन कोई ऐसा जीव है जो बहुत कई जन्मों से तपस्या कर रहा है, तपश्चर्या कर रहा है और वो मुक्ति के कगार पे है। ठीक है? उसमें और जो एक डाकू चोर लुटेरा उनकी मनोस्थिति में ठीक है कुछ तो अंतर होगा। कुछ तो गुणों में अंतर उनके व्यवहार में उनके ज्ञान में कुछ तो अंतर होगा। है ना? तो हमें तो जब हम किसी व्यक्ति से सिद्ध कोटि के व्यक्ति से बात करते हैं तो हमें अच्छा अनुभव होता है। हमें समझ में आता है कि यार ये व्यक्ति वो उसके लफंगे जैसा नहीं है। हमें समझ में आता है। ठीक है? तो उसी प्रकार से जैसे आपने बोला कि अवतार के विषय में सारी चीजें तो नहीं जैसे सर्व्यापकता को नहीं किया जा सकता लेकिन कुछ कुछ चीजें लक्षण बताए जा सकते हैं। वो दो चार लक्षण जो भी आपको समझ में आया आप वो मुझे बता दो। ठीक है? एक पॉइंट दूसरा पॉइंट आपने एक और लाइन बोला था कि आपको क्या समझ में आ रहा है? आप बता दो। मुझे क्या समझ में आ रहा है? मैं बता देता हूं। मेरे दृष्टिकोण से मेरे

00:07:24:26 दृष्टिकोण से मेरे सामने कोई मनुष्यधारी है। ठीक है? हम मेरे को मैं सोच ही नहीं पा रहा कोई ऐसा पॉइंट कि जिससे मैं डिफरेंशिएट कर दूं कि फलाना व्यक्ति इंसान नहीं है ईश्वर है। मेरे दिमाग में कोई आ ही नहीं रहा पॉइंट। मेरे इसीलिए मैंने आपसे पूछा था। हां तो मैंने वो लक्षण बता दिया सर्वशक्तिमान। अभी हम अंडरस्टैंडिंग की तरफ ही है। वी आर अभी हम अंडरस्टैंडिंग हम अवतार को समझ रहे हैं। अवतार की धारा शरीर धारण। मैंने वो लक्षण बता दिया सर्वशक्तिमान। यानी वो कुछ भी कर सकता है तो ही माना जाएगा कि वो है ना? यानी अगर मेरे सामने कोई ऐसा व्यक्ति है जो कुछ भी कर दे तो हम मान लूंगा कि वो ईश्वर है। अगर कुछ भी नहीं कर पा रहा कहीं अटक जा रहा है तो ठीक है। तो कुछ भी कर सकने की बात जिसकी शब्द प्रमाण से मानी जा रही हो। बात दिक्कत ये है कि कई चीजें करने के लिए वो मनुष्य उसका साक्षी नहीं हो सकता। कई चीजें ऐसी है वो करने को कह दिया जाए तो मनुष्य उसका साक्षी नहीं हो सकता। तो जब उसका साक्षी नहीं हो

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00:08:23:27 सकता तो फस रहे हैं ना। यही तो फस रहे। हां। पॉइंट क्या है? जब हम लक्षण की बात कर रहे हैं तो अभी जैसे आपने बोल दिया सर्वशक्तिमान ठीक है कुछ भी कर सकता है। उदाहरण के रूप में मैं बोल दूं अच्छा आप ये मानते हैं मैं आपसे एक नॉर्मल सा प्रश्न बोल रहा हूं। ये कोई बहुत इंपॉर्टेंट प्रश्न नहीं है। नॉर्मल है कि क्या राम जी जो है ईश्वर जो है जिसे आप जिन्हें आप ईश्वर आप अवतार मानते हैं तो मैं आपको उसी हिसाब में बात कर रहा हूं कि क्या ईश्वर राम के रूप में अधर्म कर सकता है? आप मानते हैं इस चीज को? हां कर सकता है। क्यों नहीं कर सकता? ठीक है। क्या ईश्वर बिना श्री राम का शरीर धारण किए हुए सीता माता से शादी कर सकता है? बिना सीता माता से शादी शादी कहते किसे हैं? इस पे जाइए पहले। वही पॉइंट है ना? नहीं कर सकता। अटक रहा है वहां पे। शादी तो शरीर नहीं नहीं आप आप उसको सिद्ध करिए ना कि बिना शरीर के वो शादी होती है कि नहीं। तब तो मैं उस पे जाऊं। वही तो यहां कर सकता है। हो ही नहीं सकती। आर्यन अटक रहा है ना काम। कि बिना शरीर के जैसे समझो इस चीज को। जैसे मैंने एक ऐसा काम दे दिया जिसको बिना शरीर के द्वारा नहीं किया जा सकता। तो मैं यह अगर वह सर्वशक्तिमान है तो क्या बिना शरीर के कर सकता है? मैंने यही काम ही मैंने जानबूझ के काम दिया है। तो मैं पूछ रहा हूं नार्मल इसमें इसमें एक लॉजिक आ जाता है। मैं बता देता हूं आपको। ठीक है? जिसमें शरीर की आवश्यकता है। क्या इसको लॉजिकल फैलेसी कहते हैं शायद अंग्रेजी वाले

00:09:39:06 लोग इस तरह की चीजों को क्या वो दो और दो पांच कर सकता है। लॉजिकल फैलेसी थोड़ा मुझे समझाइए। इसमें इसमें एक वो आ जाता है कि अंतत गत्वा अगर हम अविद्या के उसको स्वीकार करते हैं अस्तित्व को माया के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं तो हमें ये मानना पड़ेगा कि ईश्वर हमें वही इंफॉर्मेशन प्राप्त करवा रहा है जो इंफॉर्मेशन सत्य नहीं है। है ना बोलिए पूरा वही इंफॉर्मेशन दे रहा है ना जो सत्य नहीं है। आप पूरा बोलिए। मैं मतभेद रखता हूं इसलिए मैं हामी नहीं भर रहा हूं। पूरा बोलिए। हां अंतत गतवा अविद्या को तो कहीं ना कहीं आपने भी माना है। तो अंतत गत्वा जो है हमें ऐसी इंफॉर्मेशन प्राप्त हो रही है जो रियल नहीं है।

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00:10:23:27 तो अगर ऐसी कोई चीज अटक जाएगी ना जो इसमें आ जाएगी जो हो ही नहीं सकता है। तो उसके पास अविद्या शक्ति है। वो आपको इंफॉर्मेशन देगा केवल कि हो गया।

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00:10:33:08 हो गया सर। हमारी रियल में नहीं हुआ। हमारी जो हां रियल में नहीं हुआ। परमार्थ में नहीं हुआ। मैं रियल की कह रहा हूं। हां रियल में नहीं हूं। बिल्कुल। मगर वो रियल में आप पहुंचे कैसे? एक मिनट। रियल में आप पहुंचे कैसे? उसका साक्षी कौन है? रियल में वो व्यक्ति पहुंचा कैसे? कैसे पहुंचा रियलिटी में? तब उसको पहले यहां किसी को तब उसको पहले यहां पे किसी ईश्वर की सत्ता को मानना पड़ेगा। और ईश्वर की सत्ता को सिद्ध करने के लिए फिर वहां पर उसका जो है अवतार ले सकने वाला शक्तिमान इत्यादि। हां। सिद्धांतिक रूप से कहने का मतलब यह है ईश्वर जो अवतार लेता है तो क्या ईश्वर सैद्धांतिक रूप से कार्य कर सकता है बिना शरीर के तो नहीं कर सकता मैंने कहा ना कि ईश्वर हमको ऐसी इंफॉर्मेशन दे सकता है जो इंफॉर्मेशन रियल नहीं है और जो पूरा स्ट्रक्चर है एक एक मिनट जो जो अद्वैत का स्ट्रक्चर है उसमें तो एक ही तत्व है दूसरा तो तत्व ही नहीं है मगर हमको बहुत सारे तत्व दिख रहे हैं अविद्या के कारण तो एक एक अविद्या और दे देगा एक अवध एक अविद्या वो और दे देगा कि भैया बिना शरीर के उसने वो कर लिया विवाह कर लिया मगर बात यह है कि अगर हम ये कहने लगेंगे कि रियल

00:11:48:12 में ऐसा नहीं हुआ है और यहां पर हुआ है मगर रियल में नहीं हुआ है तो हमें मानना पड़ेगा कि भाई वो रियल की दुनिया आपको प्राप्त कैसे उसका साक्षी कौन है हमने जो कहा है कि ईश्वर अवतार लेता है हमने जो कहा है कि ईश्वर अवतार लेता है वो मनुष्यों का ईश्वर है प्राणियों का ईश्वर है देहधारी प्राणियों का हमने कभी नहीं कहा कि जो व्यक्ति मुक्त है जो रियल की दुनिया में उसका ईश्वर अवतार लेता है। हमने कहा कि जो यहां पे जो फंसा हुआ बद्ध जीव है अविद्या ग्रस्त है उसका उसके लिए ईश्वर उसका जो ईश्वर है वो अवतार लेता है। ठीक है। अब मैं आपको बताता हूं इसमें पॉइंट क्या है। देखिए आपने कहा कि कौन से स्तर पर

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00:12:24:02 जैसे मैं बोलूं क्या ईश्वर दो और दो को पांच कर सकता है? तो आप बोलोगे हां कर सकता है। मैं पूछूंगा कैसे कर सकता है? तो हमें बेवकूफ बना देगा।

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00:12:29:25 दिमाग भ्रम डाल देगा कि नहीं दो और दो पांच हो गया। मैं ये नहीं कह रहा। मैं मैं ईश्वर को ये नहीं कह रहा कि आ ईश्वर मेरे को बेवकूफ बना कि दो और दो पांच हो गए। मैं ये नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं उसको ऐसे कर दो। मैथमेटिकली कर दो। पूछेगा तो ईश्वर पूछेगा भाई तू ही बता दे कैसे करूं। तो मैं ईश्वर को बोलूंगा कि आप मैथमेटिकली कर दो। ठीक है? उसी प्रकार से उसी प्रकार से अब मैं ईश्वर को मैंने ईश्वर को यह बोला कि जब मैंने बोला ना कि बिना शरीर के तुम सीता जी से शादी करो तो ईश्वर बोलेगा भाई बिना शरीर के तो हो नहीं सकता तो बोलो कैसे करूं उन्होंने सिद्धांत बात मैंने आपको पहले ही बता दिया कि आपको

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00:12:59:08 उसने बेवकूफ बनाया है इसका साक्षी कौन होगा ये बताइए वो सिद्ध कैसे करोगे कि उसने बेवकूफ बनाया वही

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00:13:06:00 तो मैं कह रहा हूं अगर वो हां मैं उसका उत्तर दे दे रहा हूं अगर वो मैथमेटिकली होगा तो मैथमेटिकल कैलकुलेशन रूल्स के अकॉर्डिंग होगा ना अगर वो उसके अकॉर्डिंग नहीं है वैसा कुछ रूल नहीं दिख रहा डायरेक्ट हमें भास उसके माइंड में उसके माइंड में वो मैथमेटिकल रूल्स डाले किसने? बिना मैथमेटिक्स के डाले ना अगर मैथमेटिकल के अकॉर्डिंग हो सकता जो रूल्स है जिनके अकॉर्डिंग सिद्ध होगा। जो रूल्स है वो रूल्स कहां से आए? रूल्स है ही तो नहीं। यही तो पॉइंट है। अरे मैथ के जो रूल्स है कि दो और दो पांच नहीं हो सकता है। वो कहां से आए? न्यूमरोलॉजी से आए हैं। और न्यूमरोलॉजी ईश्वर से आई है कि नहीं आई? पढ़े हैं आपने? होते हैं। देखिए अब आप जो है खामखा भटका रहे हैं मामले को मैं पॉइंट पे आ गया हूं तो भटका रहे हो आप। मैं बता रहा हूं वो जो मैं भी आपसे बोल सकता हूं ना वो आपके पास वो जो वो जो रूल्स भाई साहब वो जो रूल्स है वो जो रूल्स है वो जो

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00:14:00:21 रूल्स है वो ईश्वर से ही आए हैं ना। अरे ईश्वर से कैसे आ जाएंगे? ईश्वर ने अरे भाई आपको ये कहां से पता लगा है कि दो और दो पांच और चार होते हैं।

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00:14:10:14 अच्छा मैं आपको बता देता हूं ना इसी का उत्तर सुन लीजिए। हां प्रिंस एपिया और मैथमेटिका नाम सुना है कभी? मुझे पता है आप क्या कर रहे हो? आप जहां पे फंस रहे हो आप खामखा एक वो अपनी मैं बता रहा हूं अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए जिन क्षेत्रों में आप विशेषज्ञ हो उसको यहां प्रकट कर रहे हो। और क्या है? इंग्लिश बोल लो और आपने मैथमेटिक्स पढ़ी है तो उसको या बहुत ज्यादा विवेचना कर दो उससे पॉइंट नहीं बदलेगा आपके पास आपके पास देखिए आप देखिए जो जो मेरे पास उत्तर है मैं बता तो रहा हूं जो अंतत गत अंतत गतवा जो आपके पास जो ज्ञान है वो ईश्वर से आया है कि नहीं आया है ईश्वर के बाहर की बात हो रही है कि अभी की बात हो रही है तो अभी मैं अंतत गतवा की बात बता रहा हूं ना अंतत की मैं आपको मैं आपको मैं आपको अंततवा की बात बता रहा हूं। भाई साहब मैं आपको अंत अंततवा की बात बता रहा हूं। सुनिए तो लीजिए आप सुन लीजिए। नहीं देखिए जो मूर्ख की बात है वो मैं आपको बता रहा हूं। अंतत गत्वा की बात कि जो दो और दो

00:15:22:21 चार कैसे हुआ आपको मालूम है आप यहां फसोगे तो आपको बात होने ही नहीं दोगे। आपको मालूम है बीच में आए हो मैं बोल रहा था तो आप फसोगे नहीं मैं मेरे बीच में आप आए हो वो बाधित नहीं है और और जो कुछ ऐसी लॉजिकल फैलेसी अगर आप लाएंगे कि भैया क्या वो बिना शरीर के विवाह कर सकते हैं दो और दो पांच कर सकते हैं तो उसमें मेरी जो ईश्वर की अविद्या शक्ति होगी वो काम करेगी आपको जो है इंफॉर्मेशन डालेगी जैसे अच्छा वो आप कह रहे हो कि मैथमेटिकली होना चाहिए मैं इसको बता दूं

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00:15:55:03 मैथमेटिकल के जो रूल्स है ना वो भी ईश्वर नियंत्रित कर सकता है कि आपके मन से कब हटाया

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00:15:59:20 जाए, कब ना हटाया जाए तो हटा देगा। वो ऐसे रूल्स डालेगा जिससे कि वो आपको लॉजिकल लगने लगेगा। बस देखो अभी मैं उस पे जाऊंगा ना मैथमेटिक्स पे तो बोलोगे कि ऐसे वैसे तो मैं अगर मैं इसको और पूरा कर दूं और अगर आप ये कहते हो कि भैया प्रूव कैसे होगा तो मैं प्रूफ की बात बता दूं। हमारे लिए जो प्रूव होता है इसी पे रहो। मैं आपसे रिक्वेस्ट कर रहा हूं। आप इसी पे रहो। मैं आपसे रिक्वेस्ट कर रहा हूं। आप इसी पे रहो। किस पे? जो अभी जो लक्षण पर बात चल रही है ना फिलहाल इस जो आप मैथमेटिक्स वग उधर जा रहे हो उससे आ चुके मैं उस बात को पूरी कर रहा हूं मैं उस बात को मैं उस बात को पूरी मैं उस बात को मैं उस बात को पूरी कर रहा हूं वो मैथमेटिक्स ही छोड़ दो कोई भी ऐसी लॉजिकल फैलेसी कि बंदा के पुत्र हो सकता है ये जो इस तरह की जो चीजें हैं जो घटित नहीं हो सकती व्यवहार

00:16:46:24 कौन सी लॉजिकल फैलेसी है ये कह रहा हूं कौन अरे भाई जो जो कार्य जो कार्य हो ही नहीं सकता। कुल मिलाकर के कहने का मतलब यह है। अब बात यह है कि वो क्यों नाम है पूरी लिस्ट है। तो उनमें से अब वो कार्य थोड़ा सा मुझे बता दीजिए। अब वो कार्य क्यों नहीं हो सकता? मैं वो बता रहा हूं। वो कार्य कैसे हो सकता है? क्यों नहीं हो सकता है कि संबंध में बात ये है कि हमको किसी ने बताया है कि वध्या कौन

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00:17:11:10 छोड़ दीजिए। मैं चाहता हूं टॉपिक पे रहे ताकि हमारी बात थोड़ी जल्दी हो। वही टॉपिक को ही तो पूरा कर रहा हूं क्योंकि आप उसमें फंस रहे हो तो आप दूसरी बात करोगे। देखो मैं फंस रहा हूं ना। चलो कोई बात नहीं मैं मैं स्वीकार कर लूंगा मैं फंस रहा हूं ना चलो कोई बात नहीं मैं मैं स्वीकार कर लूंगा मैं फंस रहा हूं ना चलो कोई बात नहीं मैं मैं स्वीकार कर लूंगा मैं फंस रहा हूं ना चलो कोई बात नहीं मैं मैं स्वीकार कर लूंगा मैं फंस रहा हूं लेकिन मैं ये चाहता हूं आप विषय पे रहो ठीक है तो विषय तो है आपने पूछा आपने पूछा कि मुझे तो मैथमेटिकली प्रूफ करके दिखाओ तो मैं उस बात का जवाब

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00:17:35:10 दे रहा हूं अभी मैंने आपसे ये पूछा अभी नहीं पूछा पहले तो पूछा था ना तो पहले वहां पे क्लियर बढ़ चुके है ना वहां पे आगे कैसे बढ़ गए वहां बीच में कूदने कूदने की बात आ गई आगे क्यों बढ़ गए आपने पूछा था मुझे तो मैथमेटिकली बताओ मैं उसका जवाब दे रहा हूं सुनिए सुनिए मेरी बात सुनिए वो विषय से बहुत संबंधित नहीं है। ठीक है सुनिए मेरी बात सुनिए वो विषय से बहुत संबंधित नहीं है। सुनिए मेरी बात सुनिए वो विषय से कल बहुत संबंधित नहीं है। ठीक है हमारी बात काफी बढ़ चुकी है। अब आप मुख्य विषय आना नहीं चाहते हो तो आप इधर उधर आपको जो है यहां पे क्योंकि आपको ऐसा लग रहा है कि यहां जो है इनका सिद्धांत सिद्ध हो जाएगा। इसलिए उस बात को मुझे बोलने नहीं देना चाहते हो। भैया विषय पर आ जाओ। विषय पर लक्षण पे बात कर रहे थे। लक्षण पे आ जाओ। इधर उधर का क्या बात ये हो रही थी कि मैथमेटिकली बात ये हो रही थी कि मुझे तो मैथमेटिकली प्रूव करके दिखाओ। मैं आपको बता रहा हूं वो बात उसको सुनो। टाइम ले लो। सुनो आप टाइम ले लो। जितना आपको टाइम लेना है एक

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00:18:27:27 बार आप बोल दो। उसके बाद जहां से मैंने बात शुरू किया था ना मैं वापस लक्षण पे आ जाऊंगा। ठीक है? क्यों भाई आपको जो मैं दूंगा इसको काटना पड़ेगा

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00:18:34:14 ना आपको जो मैं दूंगा। आप वहां क्यों जाओगे पीछे? क्योंकि बात क्लियर होने वाली है निर्भय। मेरी बात समझिए। यहां पे बात क्लियर होने वाली है। इसलिए मैं कह रहा हूं इसको मत छोड़ो। आप सही जगह आ गए हो। क्यों जा रहे हो तुम दोबारा पीछे मैं बता देता हूं क्यों जाऊंगा मैं बता देता हूं क्योंकि अभी हमारा पहला क्लियर हुआ धारणा का दूसरा हमारा अर्थ था इसमें अवतार के लक्षण पे अब मैं आपसे मैथमेटिकल वाला जो बोला गलत बोला मैं बोल दूं पूरा बोल दूं या बीच में फिर आप बीच में इंटरप्ट करोगे ठीक है बात ये है कि अब अब मैंने ये पूछा कि भैया इसका लक्षण क्या है तो आपने बोल दिया कि सर्वशक्तिमान अब मैं सर्वशक्तिमान पे आपसे जा रहा हूं कि ठीक है इसको समझना कि अच्छा सर्वशक्तिमान है यानी अगर राम जी अवतार हैं तो उनमें सर्वशक्तिमत्ता दिखनी चाहिए। कोई भी कार्य करते हुए बाधित नहीं होने चाहिए वो। ठीक है? अब हम उस विषय पर हैं। अब इसके बाद हम डायरेक्ट जाएंगे हेतु की ओर कि आप जो ईश्वर का अवतार ले रहे हो शरीर धारण करना उसका हेतु क्या है? हम उसकी तरफ जाएंगे डायरेक्ट सिद्धि की ओर। ठीक है? अब इसके अंदर हम ये तो सीक्वेंस बहुत सही चल रहा है। इसमें कोई इशू नहीं है। अब आप बीच में मैथमेटिक्स में ऐसे परिवर्तन कर सकता है। दिमाग में भ्रम डाल सकता है इत्यादि इत्यादि बात है। ठीक है? उसमें कोई इशू नहीं है। तो बात ये है कि उधर उधर वो कब आएगा? वो इशू कब आएगा? वो पॉइंट कब आएगा? समझो चीज़। जब हम बात करेंगे एक्सैक्ट सिद्धि पर। ठीक है? जब हम बात करेंगे जब मैं

00:19:49:15 आपको बोलूंगा ना आप सिद्धि करो। उस सिद्धि में अगर आप वो पॉइंट रखोगे तो ज्यादा बेटर है। वो उसका टेली करेगा। अभी हम बात कर रहे हैं। आपने बोल लिया। मैं बोल रहा हूं। मैं बोल रहा हूं। ठीक है। अब इसमें स्पष्ट इतना ही है कि अगर आपने ये मान लिया कि एक मात्र आपने ये मान लिया कि सर्वसक्तिमान है। ठीक है? इसमें मेरे को एक और बता दो कि अगर वो सर्वशक्तिमान है तो यानी राम जी या कृष्ण जी कोई भी कार्य करते हुए उनको बाधा नहीं आनी चाहिए। ठीक है? एक पॉइंट सही हो गया। दूसरा पॉइंट ये है कि अच्छा मैं आपसे सामने से ये पूछ रहा हूं कि क्या जो अवतार होता है ईश्वर का वो सर्वज्य भी होता है या नहीं होता? बिल्कुल होता है। ठीक है। यानी उसकी सर्व अल्पज्जता कहीं भी प्रकट नहीं होनी चाहिए। यानी ऐसा कुछ भाई वो सर्वशक्तिमान तभी हो पाएगा जब वो सर्वज्ञ भी हो। ठीक है? ये सब चीजें आपस में अलग-अलग नहीं हो सकती ना। और जैसे एक बात हुई थी जैसे एक बात हुई थी कि जो श्री राम है श्री राम के रूप में ईश्वर ऐसा कर सकता है पूरा धर्म कर सकता है तो उसका जवाब यही है कि श्री राम के रूप में जब ईश्वर ऐसा कुछ करता है तो वो श्री राम के रूप में ही कर रहा है मगर उसको हम श्री राम स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि शब्द प्रमाण उसमें साथ में नहीं है शब्द प्रमाण ने कहा है अगर ऐसा ऐसा हो तो वो राम है ऐसा वैसा हो तो वो कृष्ण है शब्द प्रमाण उसमें साथ में सपोर्ट नहीं करेगा जैसे कि फॉर एग्जांपल बता दूं दर्शकों के लिए आवश्यक है ये बात दर्शकों के लिए आवश्यक है जैसे

00:21:04:28 काम कर सकते हो कि जैसे ना उसमें आप बोल सकते हो वाला पॉइंट वो बात रह जाएगी ना एक मिनट लगेगा हनुमान जी ब्रह्मचारी है शब्द प्रमाण के अनुसार अब भैया क्या ईश्वर क्या हनुमान जी के रूप में ईश्वर विवाह कर सकता है तो हमारा जो हमारा जो कांसेप्ट है उसमें भगवान ने जब विराट स्वरूप लिया तो उन्होंने उसका जो विराट स्वरूप था तो उन्होंने अपने कई रूप दिखाए तो उसमें से एक रूप हनुमान जी का भी था यानी कि हनुमान जी ने कृष्ण के रूप में विवाह भी किए। ठीक है? मगर हमने उस रूप को हनुमान जी नहीं माना क्योंकि शब्द प्रमाण वहां सपोर्ट में नहीं है। तो ये बात मैं क्लियर करना था। अब आप बताइए अपनी बात। ठीक है। ठीक है। अब इसमें बात ये आती है

00:21:45:03 कि अब हमें लक्षण जो है वो स्पष्ट हो चुके हैं कि यानी कहीं पर भी ईश्वर की अल्पता नहीं दिखनी चाहिए। कहीं पर भी उसके सर्वशक्तिता में बाधा नहीं आनी चाहिए। ठीक है? उसकी अपनी मर्यादा दिखनी चाहिए। नहीं दिखनी चाहिए। नहीं दिखनी चाहिए वो अलग बात है। होना नहीं चाहिए। होता है कि नहीं हुआ दिखने को तो कुछ भी दिख सकता है वो अच्छा कुछ भी दिख सकता है तो वो चीज हुई या नहीं हुई कैसे पता चलेगा शब्द प्रमाण शब्द प्रमाण से नहीं जैसे मैं ये अच्छा शब्द प्रमाण जैसे राम जी ने जीवन में क्या-क्या किया वो तो हमें शब्द प्रमाण से पता चलेगा ठीक है मैं ये कह रहा हूं जैसे राम जी जैसे राम जी नित बात थोड़ी सी हां बताइए थोड़ी सी बात बताइए बताइए जैसे राम राम जी ने राम जी के जीवन में क्या-क्या घटा वो हमें उनके शब्द प्रमाण रामायण से पता है ठीक है तो पॉइंट इसके अंदर यह है कि अगर उसी में वहीं पर लिखा हुआ है कि राम जी को नहीं पता था कि सीता जी कहां है। राम जी असहाय हो गए इत्यादि इत्यादि बातें राम जी पहचान नहीं पाएंगे कि सुग्रीव और बाली कौन इत्यादि इत्यादि बातें जो हमें सर्वजता में बाधा नजर आती है। तो क्या हम एट दैट केस पॉइंट ये है कि आप तो कह रहे हो कि ये वही राम जी और ईश्वर के अवतार हैं। लेकिन जो लक्षण बताएं वो मैच नहीं कर रहे हैं। उस केस में क्या होगा? हम उन्हें अवतार मानेंगे या नहीं मानेंगे? इसका थोड़ा सा स्पष्टीकरण दे दीजिए। मैं स्पष्टीकरण

⬜ Not used yet · 00:22:56:00 – 00:25:44:21 (2:49)

00:22:56:00 देता हूं। मगर मैं बात अपनी पीछे से शुरू करूंगा। जहां पर मैथमेटिकल वाली बात आ रही थी तो मैथमेटिक वाली बात ऐसी है कि दो और दो पांच नहीं होते हैं। ये हमने जाना है। किसी ने हमको इंफॉर्मेशन दी है। और अगर एट दी एंड चले जाए तो वो इंफॉर्मेशन हमको ईश्वर से ही आ रही है। अगर कोई हमारा व्यवहार में कोई टीचर है, कोई हमारे परिजन है, हमारे जो है अभिभावक है वो हमको इंफॉर्मेशन देते हैं। दो और दो चार होते हैं। उसको चार कहा जाता है या इतना इतना ऐसेसे गिना जाता है। कुछ भी कांसेप्ट हो वो कांसेप्ट हमको हमारा कोई ना कोई गुरु देता है जो शिक्षा गुरु जिसे हम कह सकते हैं। अगर गुरु ना भी दे तो भाई वो जो कांसेप्ट है हो सकता है अंदर से ही उद्भाषित हो जाए। कई लोग भाई सिद्ध जन्म ले सकते हैं तो अंदर से हो जाए। तो उसमें कुल मिलाकर के बात है कि वो इंफॉर्मेशन आ रही होती है ईश्वर से। तो ईश्वर अगर चाहे तो हमारी उस इंफॉर्मेशन को बदल सकता है कि भैया ऐसे से ऐसे चार होते नहीं अब उसने इंफॉर्मेशन बदल दी और अब वो ऐसे से ऐसे पांच होते अब दिक्कत ये आती है कि रियल में तो ऐसा हुआ नहीं है रियल में तो ईश्वर ने कासेप्ट जो कासेप्ट के अनुसार तो ये सब किया नहीं है उसने तो अपना जो अविद्या के अविद्या शक्ति के कारण हमको मगर बात ये है कि उसको सिद्ध कैसे करोगे क्योंकि हमें कोई

00:24:11:03 ना गवाह मिलेगा ना शब्द प्रमाण मिलेगा अच्छा अब बात आती है रियल वो वो रियल दुनिया हमने जानी कैसे? वो रियल दुनिया है या एक्सिस्ट करती है ये कैसे पता चलेगा? हमने तो तुम्हारे मुंह से कहलवा दिया कि दो और दो पांच होते हैं। हमने तो सबके मुंह से दुनिया के एक एक व्यक्ति के मुंह से कहलवा दिया कि दो और दो पांच होते हैं। अब भैया ये बेवकूफ बनाया गया है। ये सिद्ध कैसे होगा? तो सिद्ध करने के लिए पहले हमको किसी को ईश्वर मानना पड़ेगा। परमार्थ तब पहुंचेंगे। वो वाला बात है। और दूसरी बात यह है कि उसका साक्षी कौन हुआ? अगर किसी ने बेवकूफ बनाया तो बात यही है कि ईश्वर हमको ऐसी ही चीजें दिखा रहा है ऑलरेडी जो रियल नहीं है तो वो एक चीज और दिखा देगा। अगर सर्व व्यक्ति मत्ता की बात में ऐसी चीजों से बाधा आ रही है। अब दूसरी बात आपने कहा कि जो शब्द प्रमाण है वो अब कुल मिलाकर के अब बात आ गई शब्द प्रमाण में कि भाई वो जो उसमें सर्वजता भी लिखा हुआ है और ये भी लिखा हुआ है। लक्षण पे बात है। हां वो लक्षण जो है शब्द प्रमाण से कट रहे हैं ना। उस पर आ गई ये बात मतलब उसमें उसमें विरोध हो रहा है। हां शब्द उसमें आप ही ने तो कहा आप ही ने तो कहा कि भाई वही वहीं पे लिखा है कि वो रो रहे थे या वो सर्वजता में बाधा आ रही है ये सब आपने कहा ना तो शब्द प्रमाण

00:25:26:12 से दिक्कत आ रही है ना कि जिन शब्द प्रमाणों से हमको जिन शब्द प्रमाणों से जिन शब्द प्रमाणों से हमें ये पता चल रहा है कि भैया राम जी सर्वशक्तिमान है उन्हीं शब्द प्रमाणों से हमें राम जी के सर्वशक्तिमान होने में बाधा दिखाई दे रही है। यही बात है ना हम

00:25:44:21 यही कारण है ना जिस जिसके कारण रावण नहीं समझ पाया कि वह अवतार हैं। जिसके कारण कंस नहीं समझ पाया कि वह भगवान ही है। जिसके कारण उस समय के जो लोग थे उनकी ही समय धारा में वो तुरंत उनको देखते ही मुक्त नहीं हो पाए। क्योंकि उन्होंने उनको भगवान माना ही नहीं। भगवत गीता में भी भगवान ने कहा कि जो लोग मनुष्य देह में देख के मनुष्य देह में देख के मेरे ब्रह्म भाव को नहीं ध्यान नहीं जान पा रहे हैं वो मूर्ख लोग हैं। मगर जब उनके बारे में हमको दिव्य दृष्टि से बातें पता चली दिव्य दृष्टि के द्वारा फिर गुरु परंपरा के द्वारा हमको पता चली तो हमें पता चला कि हां ये अवतार हैं। ये अवतार ही थे जो भगवान के आए थे। और उस समय भी जो दिव्य दृष्टि रखते थे उनकी समय धारा में उन्होंने उनको अवतार माना। वो जानते हैं वहां पर ये जानते हैं कि यह सर्वज्ञ हैं। उनको सब वो शब्द प्रमाण से नहीं अपनी दिव्य दृष्टि से जानते हैं। ये शब्द प्रमाण से ही हमें पता चलता है कि वो है तो नित्य शुद्ध बुद्ध मुक्त मगर वो ये जो है रोल कर रहे हैं लीला कर रहे हैं। वो उनहीं शब्द प्रमाण बात को क्लियर करते हैं। उसको वो क्लियर करते हैं। यानी कि वो मुक्त होते हुए भी ऐसा दिखाते हैं कि मैं मुक्त नहीं हूं। जिससे कि आप उनके साथ ज्यादा कनेक्ट हो पाओ। इसमें एक पॉइंट है। इसमें छोटा सा पॉइंट यह है कि इसमें

00:27:00:00 लक्षण वाली बात कट गई ना कैसे कट गई मैं समझा देता हूं थोड़ा सा। जैसे समझिए जैसे आपने बोला कि अवतार का लक्षण है कि वो सर्वज्य है। सर्वशक्तिमान है। लेकिन जब हम अवतार की जीवनी देख रहे हैं। उसकी जीवनी में हमें सर्वजता नजर नहीं आती। सर्वशक्तिमत्ता नजर नहीं आती। ठीक है? यानी उसका लक्षण घट नहीं रहा है। नजर आती है। आती है। पूरा पूरा बोल देता हूं। पूरा बोल दो। पूरा बोल देता हूं। पूरा बोलता हूं। अब उसमें पॉइंट ये आ जाता है कि जब हम जिस पॉइंट पे पकड़ लेते हैं कि नहीं यहां पे तो देखिए यहां पे तो सर्वजिता नजर नहीं आई। यहां पे तो अल्पजता आई तो उस केस में आप कहते हो कि नहीं यहां पर ये जानबूझ के अपनी अल्पजिता प्रकट कर रहे हैं। यानी ठीक है उस उस केस में तो यानी उसी केस में कह रहा हूं कि उस एक पॉइंट पे उनका जो लक्षण है जिससे वो वो उनका अवतार होना सिद्ध हो रहा है। ठीक है? क्योंकि फिलहाल हम जो मैंने ये किया ना वो हम इस पे नहीं कह रहे। हम शब्द प्रमाण पे बात नहीं कर रहे हैं कि रामायण में या रामचरितमानस में लिखा है कि राम जी अवतार है। अभी हम उसको मान नहीं रहे हैं। शब्द प्रमाण पे नहीं है हम। ठीक है? अभी वो साध्य कोटि का बात है। सिद्ध कोटि की बात नहीं है। पॉइंट इसके अंदर ये है कि अगर वहां पे एक पॉइंट में उनकी जीवनी में कहीं ना कहीं पे ये आ गया कि फलाना चीज के बारे में ना नॉलेज उन्हें नहीं पता था कि सुग्रीव और बाली में से कौन है? इन दोनों में से दो आपस में लड़ रहे हैं। इनमें से बाली कौन है? उनको नहीं पता। तो वहां पे जो उनको उनकी

00:28:15:06 जो अल्पजिता वहां पे प्रकट हो रही है। ठीक है? उस केस में आप कह रहे हो कि नहीं ये जानबूझ करके वहां पर अल्पजता प्रकट कर रहे हैं। यानी अगर आप जानबूझ के भी बोलो ठीक है उस केस में ये होगा कि वहां पे उस केस में ये हो रहा है कि उनका लक्षण तो प्रकट हो नहीं रहा अवतार का तो वहां पे तो वो अवतार नहीं है ये सिद्ध हो रहा है ना लक्षणों से शब्द प्रमाण से नहीं शब्द प्रमाण में तो चलो लिखा है वो हम मान नहीं रहे नहीं मान रहे अलग विषय है उसप मैं नहीं जा रहा हूं लेकिन जब हम लक्षणों की बात लक्षणों से ये सिद्ध हो रहा है कि वो नहीं है ये है मेरा पॉइंट इसको थोड़ा सा इबोरेट कर दीजिए जरा जैसे कि जैसे कि अगर ईश्वर सर्व व्यापक है तो सब जगह ईश्वर है और दुनिया में सारी दुनिया सारे स्वर ईश्वर के ही है। ईश्वर कहीं से भी कहीं किसी से अलग नहीं है। तो ऐसे में हमने केवल एक प्रणव को ही उसका दतक क्यों माना? प्रणव को ही उसका वो क्यों माना? प्रतीकात्मक तो इसका निर्णय आएगा कि गूंगा भी बोल सकता है। वो तो एक अलग चीज हो गई। मगर यह कोई सिद्धांत थोड़ी ना

00:29:20:02 कोई अगर कोई अगर कोई अगर कोई और ऐसा शब्द हुआ जो बोल सकता हो तो बोल सकते हैं अथो इति शब्द भी तो ईश्वर का है अथ भी तो इसी का है ईश्वर का ही है ना वेदों में आया क्यों नहीं आया उपनिषदों में अगर और वेदों में आया क्यों नहीं आया उपनिषदों में अगर और वेदों में आया क्यों नहीं आया उपनिषदों में अगर और अगर और कोई शब्द होगा जो गूंगा भी बोल सकता होगा तो उसको भी ईश्वर ईश्वर का वो मान लोगे क्या उसको प्रणव की जगह अरे शंकर भाष में मानो क्या बात कर रहे हो आप मैं वो नहीं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं अगर केवल इस तर्क से हम मानेंगे कि भैया वो गूंगा भी बोल सकता है इसलिए वो ईश्वर का देवता है उससे ईश्वर को वो वो लीजिए तो फिर हमें वहां पर ये जो भी शब्द गूंगा बोल सकता होगा जो भी ध्वनिया वो कर सकता होगा उसको भी अपनी पूजा में लेना पड़ेगा मगर वहां पर शब्द प्रमाण वहां पर हमारा शब्द प्रमाण मैं बात पूरी कर शब्द की बात नहीं है आपने ये बोला कि ओम को इतना ेंस क्यों दिया तो वो बात है वहां जोगी शब्द की बात नहीं है नहीं बात मैं बता रहा हूं आपने उसको तर्क दिया ना उसके पक्ष में उदाहरण के रूप में आपने आपने प्रणव के पक्ष आपने प्रणव के अरे भाई मेरी बात तो पूरी हुई नहीं आपने प्रणव के पक्ष में एक तर्क दिया है क्योंकि उसको गूंगा भी बोल सकता है तो मैंने उसको बताया कि गूंगा

00:30:35:06 और भी ध्वनिया निकाल सकता है फिर प्रणव ही क्यों तो उसके बारे में यही है कि उसमें शब्द प्रमाण है तो फिर रामपाल के बगल में श्री राम जी खड़े हैं। इसमें से कौन सा ईश्वर का अवतार है? कौन सा नहीं है। तो इसके लिए शब्द प्रमाण जैसे आपने कहा आपको लक्षण नहीं दिख रहे तो ऐसा भी हो सकता है कि आप अंधे हो। अगर हम कहे कि ईश्वर चिल्ला के दिखाया। ऐसा भी हो सकता है कि हम बह रहे हो। तो हमें वहां पर शब्द प्रमाण से यह पता चल रहा है ना कि वो रोल कर रहे थे। अगर हमको विश्वास नहीं शब्द प्रमाण में तो बात अलग है। मगर जब हमको शब्द प्रमाण से पता चल रहा है कि वो वहां पर रोल कर रहे थे। वास्तविकता में सर्वज्ञ ही थे। वो वहां पर दुखी होने का रोल कर रहे थे। वास्तविकता में वो आनंदित ही थे। वास्तविकता में वो सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म का व्यवहारिक रूप ही थे। तो हम हम उस पर विश्वास कर लेते हैं। आप मत करो। आप ये मत मानो कि ये वाला ही अवतार है। ये वाला नहीं है। आप ये कहना तो शुरू करो कि अवतार ले सकता

⬜ Not used yet · 00:31:31:01 – 00:33:56:21 (2:26)

00:31:31:01 है ईश्वर। आप यह तो कहो अब आप यह बताइए ईश्वर को एक रस मानते हैं कि नहीं? एक रस मानते कहीं भी ना ज्यादा है ना कम है। ठीक है? ना पूरा बोलिए। तो अब बात ये है कि जो एक रस ईश्वर है जैसे मान लीजिए मेरे सामने यहां टेबल है जिसप रख के इस ट्राईपॉड को मैं आपसे बात कर रहा हूं। ठीक है? इस पर कई सारे डब्बे रखे हुए हैं। कई सारे डब्बे इस पर रखे हुए हैं। कोई बड़े हैं, कोई छोटे हैं और कहीं-कहीं पर है ही नहीं। अगर मैं एक रस हूं सब जगह तो जब मैं हरकत करूंगा तो सारे डब्बे एक साथ नीचे गिरेंगे। इवन जो खाली जगह है जहां पर डब्बा नहीं भी होगा वहां पे मेरी वो फोर्स लगेगी। मगर यदि मेरे पास रेगुलेट कर सकने की स्वयं को शक्ति है कि मैं जहां चाहूं वहां के डब्बे में मेरा धक्का लगे और जहां चाहूं वहां ना लगे। यदि मेरे पास ये शक्ति है तो क्या कहते हैं? मैं ऐसा कर सकता हूं कि जिस डब्बे को मैं गिराना चाहूं वो गिरेगा और जिस डब्बे को गिराना ना चाहूं वो नहीं गिरेगा और जो खाली जगह है वहां मेरी शक्ति काम ही नहीं करेगी। यह

00:32:46:07 मेरे पास शक्ति है। मगर प्रॉब्लम क्या है कि शक्ति के रूप में भी मैं ही हूं। शक्ति के रूप में शक्ति कोई अलग से तो है नहीं भाई। तीन आपने तीन तत्व माने हैं एक तरीके से जीव, प्रकृति और ब्रह्म। तीन तत्व माने ना आपने तो शक्ति कोई ब्रह्म की शक्ति तो अलग से कोई ब्रह्म ही शक्ति के रूप में है। तो जब वो शक्ति के रूप में अपने आप को कम ज्यादा कर रहा है तो वहां पर उसकी एक रास्ता भंग हो रही है। तो फिर उसको ईश्वर क्यों कह रहे हैं? कहने का मतलब है अगर आपका ये सिद्धांत मान लेंगे कि वहां शब्द प्रमाण से हम नहीं पा रहे। तो आप हमको यह कहना पड़ेगा कि इस ईश्वर की जो जो सृष्टि रचना है वह ईश्वर ने नहीं की है क्योंकि ईश्वर तो एक रस है और ईश्वर तो यहां पे कम ज्यादा हो रहा है। पहली बात तो वो सगुण निराकार जो है वो भी एक अवतार ही है। अगर आप जो है सगुण साकार का अवतार नहीं मानोगे तो मैं सिद्ध कर दूंगा कि सगुण निराकार का भी अवतार नहीं होता। बताइए

00:33:44:12 ये अगर जरूरी नहीं तो इसको स्किप करते हैं। मूल विषय पर रहते हैं। नहीं आपने ये लास्ट में जो बातें बोली है मेरे अब आपको नहीं करना है उसको तो काउंटर मत करिए।

00:33:56:21 कुल मिलाकर के मैं एक एंडिंग स्टेटमेंट इस बारे में दे दूं कि भाई कौन कौन अवतार है कौन नहीं इस विषय में शब्द ही प्रमाण हो सकता है क्योंकि हम उसको काउंटर नहीं कर सकते क्योंकि कई विषयों में हम शब्द को ही प्रमाण मान रहे हैं उनके होने के विषय में भी हम इतिहास को ले रहे हैं वो इतिहास भी एक शब्द प्रमाण है उनका होना एक्सिस्टेंस उनका अस्तित्व वो भी शब्द प्रमाण से ले रहे हैं तो फिर हम वहां जाके काउंटर नहीं कर सकते जिन शब्द प्रमाणों से हमको ये मिल रहा है कि वो थे उन्हीं शब्द प्रमाणों से जब हमें ये मिल रहा है कि वो एक्टिंग कर रहे थे तो हम कह नहीं वो एक्टिंग नहीं कर रहे थे वो तो उनका वहां पे ये हो रहा था। हम आपकी बात नहीं मान सकते। इसमें पॉइंट यहां पे ये आ जाता है कि हमें दो बातों की क्लेरिटी मिल चुकी है। पहला ठीक है फ्लोकी जी आप भी है तो थोड़ा ध्यान दीजिएगा इन विषयों पर। है ना? तो पहली बात तो हमारी इस विषय पे आया था कि अवतार की धारणा क्या है? तो हमें जो क्लेरिटी वहां से मिली थी वो ये मिली थी कि जैसे जीव शरीर धारण करता है वैसे ही ईश्वर भी शरीर धारण करता है। लेकिन अंतर ये होता है कि जीव जो होता है वो बद्ध होता है और जो ईश्वर जो जिस शरीर को धारण करता है जिसे हम अवतार कहते हैं वो मुक्त होता है। ठीक है? के स्वभाव से वो मुक्त होता है। ये एक पॉइंट आया था। तो हमें पता चला कि अवतारवाद की धारणा क्या है? अच्छा इसका स्पष्टीकरण हो गया। उसके बाद पॉइंट ये था कि अवतार का लक्षण क्या है कि अगर मेरे सामने राम जी या रामपाल खड़े हो जाए तो दोनों में से ईश्वर का अवतार कौन है? कैसे पता चलेगा? तो उसमें पॉइंट ये था कि उसमें सामान्य लोग नहीं जान सकते कि ये ईश्वर के अवतार हैं।

00:35:11:27 उसमें जो विशेष दिव्य दृष्टि रखने वाले गुरुजन हैं सिद्ध लोग हैं वही पहचान सकते हैं कि ये ईश्वर हैं। क्योंकि व्यवहारिक जो लक्षण है वो उसमें उस टाइप से नहीं होते। है ना? पता नहीं चलते हैं। तो जो जो उस टाइप का ज्ञानी जो उस टाइप का व्यक्ति है सिद्ध व्यक्ति वो पहचान करके फिर वो अपने शिष्यों को बताएगा तब शिष्य जान पाएंगे कि हां ये जो है ये राजा जो है ये अवतार है वास्तव में। है ना? इत्यादि बातें निकल कर के आती है। तो

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00:35:37:08 हमें ये दो चीजों की क्लेरिटी हो चुकी है कि अवतारवाद की धारणा क्या है? अवतारवाद का लक्षण तो खैर चलिए हमें नहीं पता चला। वो तो शब्द प्रमाण के ही है। लेकिन उसको हम स्वीकार करते हैं। आगे बढ़ते हैं। क्योंकि अच्छी तीसरी बात आपने छोड़ दी है वो मैं ध्यान दिला रहा हूं। जी जी बता दीजिए। ऐसा कैसे कर सकता है? तो अविद्या शक्ति से वो सब कुछ कर सकता है। एक ये पॉइंट आया था ना कि ऐसा कैसे कर सकता है? तो अविद्या शक्ति का आलंबन लेकर के वो सब कुछ कर सकता है क्योंकि वो हमको वही चीजें एट द एंड दिखा रहा है जो है नहीं जो अनरियल है। ठीक है? [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 36:20 · 01 Jan 2026

भगवान की माया शक्ति से परास्त हुआ अलंकारी | अवतार सिद्धि | the final cut

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A · Live क्या ईश्वर अवतार ले सकता है? | Most Awaited Discussion with Nirbhay Ar...
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A · Video कैसे एक अलंकारी अवतार के समक्ष हुआ नतमस्तक | अवतार सिद्धि भाग 1
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