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00:00:02:28 सभी को जय श्री राम और आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। आज एक बहु प्रतीक्षित वार्ता होने जा रही है निर्भय जी के साथ इनके साथ जब ये गुप्त रूप से आए थे हमारे चैनल पर तब आपने हमारी और इनकी वार्ता थोड़ी सी देखी है। हालांकि उस वो कुछ निष्कर्ष पूर्वक पूर्ण वार्तालाप नहीं थी पर देखी होगी। उसके बाद फिर आपने जो हमारा इंटरेक्शन है वैसे दूर रह के तो काफी बातचीत होती रही। पर इंटरेक्शन आपने देखा होगा जो हमारा एक जो कॉल रिकॉर्डिंग आपने सुनी होगी उनके भी चैनल पर और हमारे भी चैनल पर यद्यपि हमारे बीच में कई सारे वो है वैचारिक मतभेद जैसे कि वर्णाश्रम को लेकर के है फिर इन्होंने अपनी पहचान को भी बताया कि भाई मैं मुझे आप आर्य समाजी नहीं हां दयानंद जी का फॉलोअर कहिए तो यह इंगित करता है परंपरा को लेकर के बात करना परंप परंपरा का विषय भी हमारे बीच में है और मगर आज मुख्य रूप से जो हमारा सबसे बड़ा एक सिद्धांत है ईश्वर अवतार ले सकता है और उसको लेकर के कई सारी हमारी चर्चाएं हो चुकी

00:01:18:00 है आर्य समाजियों के साथ इवन मुसलमानों के साथ तो उसी बात को लेकर के उसी विषय पर आज हमारी मुख्य रूप से चर्चा होनी है। अच्छा एक बात और है कि हमेशा की तरह मैं आज भी थोड़ा सा लेट ही आया हूं। मुझे लगता है 5 सात मिनट 8 मिनट लेट है। तो मैं थोड़ा सा अपडेट भी दे दूं आप लोगों को कि आने से पहले जस्ट पहले पुलिस की ओर से रामपाल वाला जो प्रकरण चल रहा है उस प्रकरण में हाई कोर्ट को एक जवाब दिया गया है जिसमें पुलिस का यह कहना है कि हमने हमारे द्वारा बताए गए जो चिन्हित जो जगह हैं वहां वहां पर जो है जांच पड़ताल कर ली है। परंतु वहां पर वो जो विवादास्पद सामग्री है वो प्राप्त नहीं हुई जिसको लेकर के हमें आपत्ति है। मतलब हमने इनको मुख्य रूप से एफआईआर में दो चीजें बताई थी। एक जो पता दिल्ली वाला इसमें लिखा हुआ है इनकी किताब में वह और एक जो रामपाल का एड्रेस यहां लखनऊ वाला है वो हमने उसमें एफआईआर में बताई थी और बयान में बाकी सारा पूरा इनका दिया था डिटेल्स। तो पुलिस का कहना है कि इन्होंने जो एफआईआर में हमें जो चीजें दी हैं वहां पर हम गए और हमें कुछ प्राप्त नहीं हुआ। तो एक जवाब

00:02:33:06 तैयार करना था कि आपको कहां-कहां से प्राप्त हो सकता है। बड़े आसानी से इनकी पुस्तकें जैसे कि उत्तर प्रदेश में सीतापुर, शामली इत्यादि में डंके की चोट पर सब चल रहा है तो वहां आप जाएं और फिर पूरे देश भर में चल रहा है वहां आप जाएं। तो ये सारे इस तरह के कई सारे पॉइंट्स थे जो हमने जवाब तैयार करना आवश्यक था और आज देना भी है वो। हालांकि तैयार हो गया। तैयार होते मुझे देर हो गई आने में। यहां से जब ये चर्चा पूरी होगी या बंद होगी जब भी होगी तो उसके बाद हम वहां पहुंचेंगे वो जवाब देंगे कि अब जैसे हमने जिन लोगों का नाम लिया है एफआईआर इत्यादि में तो वो उन लोगों से भी अभी पुलिस ने सख्ती से पूछताछ नहीं की है और वो लोग क्या कर रहे हैं कि हमारे ऊपर केस लगाने की कोशिश कर रहे हैं तरह-तरह के कोर्ट में जाकर के हमको डेली एक दो दिन में एक नया संबंध आ जाता है कोर्ट की ओर से। तो ठीक है अब आ जाते हैं मुख्य विषय पर। हम निर्भय जी को ले लेते हैं। और अभी

00:03:35:15 निर्भय जी अपना कैमरा ऑन कर लें। आपका स्वागत है। जय श्री राम। आपकी आवाज नहीं आ रही निर्भय जी। जी नमस्ते मेरी आवाज आ रही है? जी जी नमस्ते जय श्री राम। नमस्ते जय श्री राम। आवाज आपकी आ रही है और मैं एक बात की आपकी प्रशंसा करना चाहूंगा सभी के समक्ष कि एक तो आपने धैर्य रखा काफी लंबी हमारी बातचीत शुरू हुई थी लगता है हो गए होंगे आज से दो-ती साल हो गए होंगे जब पहले पहली बार हम मेरी आपकी बात हुई थी फोन पर लगभग मेरे ख्याल दो साल हो गए हैं हां तो तब पहली बार बातचीत हुई थी और उसके बाद से आज तक आपने जो धैर्य रखा और मामले को किसी तरह से चर्चा के पटल पर लेकर के आए तो इसमें आपने बहुत अच्छी भूमिका निभाई भाई और इसके लिए आपका अभिवादन है और कई बार ऐसी वाइब्स आती है आपकी ओर से कि एक छोटे भाई जैसा फील होता है कि कुछ थोड़ा सा मतलब साथ में एक टीम वाली बात होती तो एक अलग रहता और हो सकता है भगवान ने चाहा तो होगी भी। पूर्वांचल के लोगों का आपस में थोड़ा सा ऐसा टैली होता है। अच्छा तो एक्चुअली मेरा जो बैकग्राउंड

00:04:50:28 है ना वो पूर्वांचल प्रॉपर नहीं कहेंगे क्योंकि वो थोड़ा सा इधर ये जो यूपी का ये वाला हिस्सा है ना कानपुर इटावा अच्छा अच्छा ये सेंटर टाइप का है। मैं बनारसी रूप से अगर आप जो है उधर दिल्ली की ओर चले जाएंगे तो उधर से तो पूर्वांचल ही लगेगा वो मैं आगरा मैं मुख्य रूप से वाराणसी से हूं। वाराणसी हां तो हम लोग मतलब काफी पास ही हो गए फिर वो गंगा किनारे वाले तो अच्छा लगा आपने जो है प्रयास किया और जो है वो जो पिछला कॉल भी किया था सम्मान पूर्वक उसमें अपनी बात को रखा तो चीजें ठीक है क्योंकि सौहार्दपूर्ण वार्तालाप से ही परिवर्तन आ सकता है जिसके लिए हम भी प्रयासरत है हालांकि कभी-कभी अपने मंतव्य की रक्षा के लिए उसके दृष्टिकोण अलग होने की वजह से लोग उसका गलत अर्थ भी निकाल लेते हैं। और ठीक है। हमारे एक मॉडरेटर को मैंने कहा था कि वो आएंगे पर अभी तक आए नहीं है। चलिए कोई इशू नहीं है। हम दोनों मैनेज कर लेंगे। हां। ठीक। ठीक है। तो सबसे पहले मैं शुरुआत करना चाहूंगा। हां जी। तो वैदिक मंगलाचरण से ओम विश्वा देव सवितानी परासुआ य भद्रम तनासुआ। ओम

00:06:09:25 सभी दर्शकों को सादर नमस्ते। तो जैसा कि सारे लोग लाइव देख रहे हैं। लाइव देख रहे हैं तो कुछ बातें मैं पहले स्पष्ट कर देना चाहूंगा। कमेंट में बहुत सारे लोग होंगे जो एकदम विरोधाभासी होंगे। कुछ मेरे पक्ष के होंगे, कुछ शिवाश जी के पक्ष के होंगे। दोनों ही पक्ष के लोगों को मैं आग्रह करना चाहूंगा। ठीक है? जो मेरा सम्मान करते हैं उनको खास करके आग्रह पूर्वक और अधिकार पूर्वक कहना चाहूंगा कि किसी भी तरह के गलत शब्द का प्रयोग ना करें। ठीक? इस बात का सभी लोग ध्यान रखें। दूसरी बात कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्हें मैंने नोटिस किया है जो यह चाहते हैं कि दोनों पक्षों में समन्वय बैठे। कुछ तो चाहते हैं कि अच्छे से एकदम सामने वाला मुझे पटके मैं सामने वाले को पटकू। कुछ लोग तो यही चाहते हैं। कुछ लोग ये भी चाहते हैं कि समन्वय बैठे। ऐसे लोगों को ऐसे लोगों की जो बातें मुझे भी ठीक लगी बुद्धि पूर्वक लगी। ठीक है? क्योंकि जहां तक एक दूसरे को पटका पटकी वाली बात है उसका कोई अंत नहीं है क्योंकि व्यक्ति मानेगा नहीं कोई फायदा नहीं है। समन्वय बैठे तो हमारे पूर्वाचार्य ठीक है। चाहे अगर शंकराचार्य जी ने बौद्धों के साथ में भी शास्त्रार्थ किया तो उनका उद्देश्य बौद्धों को मार देना खत्म कर देना नहीं था। उनका उद्देश्य था ये भी हमारे ही भाई हैं। ये भी वही ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र ही है। इनको अपने मत में ले आओ। मत में एक के हो जाएगा। मत एक्य हो जाएगा। यही काम महर्षि दयानंद जी ने भी किया। ठीक है? शास्त्रार्थ का एक ही शास्त्र चर्चा जो हम करते हैं किसी पक्ष पर जब हम वाद करते हैं। अच्छा

00:07:25:01 एक बात मैं क्लेरिटी दे देता हूं जो हम चर्चा कर रहे हैं ये जलप्प नहीं है। ठीक है दर्शकों को पता होगा जो क्योंकि जब हम कोई भी चर्चा करते हैं तो शास्त्रों के अनुकूल ही चर्चा होती है और जो चर्चा से संबंधित जो हमारे पास एक शास्त्र अवेलेबल है वो है न्याय दर्शन। न्याय दर्शन को आर्य समाज भी स्वीकार करता है। महर्षि दंत तो मानते ही मानते थे और वेदांत जो अद्वैत वेदांत है उसकी परंपरा में भी चलता है। करपात्री जी तो अच्छे खासे विद्वान थे। मीमांसा के मीमांसक तो थे ही वो और न्याय के भी अच्छे खासे विद्वान थे। तो न्याय में जो इस प्रकार की सौहार्दपूर्ण जो चर्चा होती है उसे कहते हैं वाद। ठीक है? एक होता है वादी दूसरा होता है प्रतिवादी। अच्छा एक और तरह का होता है जिसे बोलते हैं जल्प जिसमें हार और जीत निश्चित होती है कि भैया यह सामने वाले को हराओ ऐसे करके और दूसरा पक्ष जीतेगा तो हम यहां पे जल्प नहीं कर रहे यहां पे हारजीत वाला विषय नहीं है यहां पे वाद चल रहा है समझने वाला हां बाकी जो चीजेंगी वाद के नियम के अनुसार ही होंगी ऐसा नहीं कि हम बिना नियम के कुछ भी कोई कुछ बोलेगा नियम हो गया न्याय दर्शन के अनुसार ही होगा वाद के अनुसार ही होगा क्योंकि और कोई चर्चा कोई विधान है नहीं शास्त्रों में वाद है जल है वितंडा है तीन है तो तीन में से ना हम वितंडा कर रहे हैं ठीक है हम अपना-अपना पक्ष क्लियर कर रहे हैं। जल्प कर नहीं रहे। हमें हारजीत कोई मुझे कोई आवश्यकता है नहीं अपना कुछ जीता हुआ सिद्ध करने का ना मुझे कोई आवश्यकता है सामने वाले को हरा के

00:08:40:02 मेडल लेने का। तो हम बात करने जा रहे हैं। और जो विषय है वो बहुत ही क्लियर है। और क्लेरिटी थोड़ी सी मैं इस विषय में दे देता हूं। अब आते हैं डायरेक्ट मुख्य विषय पर। हम जो विषय है वो है अवतारवाद। ठीक है? अवतारवाद का क्या इसमें पर्सेक्टिव है? पर्सेक्टिव ये है कि मैं मानता हूं महर्षि दयानंद को। ठीक है? हम आप महर्षि दयानंद मानते हैं वेदों को वो वेदों को जो मुख्य विषय स्टार्ट होने से पहले एक छोटी सी चीज मैं ऐड कर दूं आपने जो बताया है ऐसा है कि कई बार लोग ये समझते हैं कि मुझे कोई क्या कहते हैं ये आर्य समाज से या स्पॉन से या रामपाल से रामपाल को तो खैर स्कॉन आर्य समाज के समक्ष नहीं खड़ा करना चाहिए पर क्योंकि वो मेरे विरोधी के रूप में तो दिखते ही हैं तो कई बार ऐसा होता है कि अ क्या कहते हैं जो आर्य समाज से अगर मेरी कोई चर्चा हुई हालांकि जो भी चर्चा आप लोगों ने देखी होगी जो ग्राउंड पे हुई है उसमें कभी भी कोई आपने झगड़े जैसी चीज या चिल्ला या चिल्लाहट या ऐसा होना नहीं देखा होगा एक बैलेंस चर्चाएं देखी होंगी आपने और इस के साथ भी ऐसा ही है तो कई बार लोग ये लगा लेते हैं कि भाई मेरा उद्देश्य इनको नष्ट करना

00:09:55:03 है जैसे अभी आपने कहा ना कि पुत्र नष्ट हो जाए बिल्कुल सही बात कही उसी के पक्ष में मैं कह रहा हूं कि मेरा उद्देश्य ऐसा नहीं होता है कि आर्य समाज को मुझे नष्ट करना है या उसके ताला लग जाए या इस में ताला लग जाए। मेरा उद्देश्य जैसे अभी आपने दो दिन पहले एक चर्चा देखी है ना जो दो चार दिन पहले आपने एक चर्चा देखी होगी ललन टॉप वाली मेरा उद्देश्य ये रहता है कि हम क्या हम विधर्मी के लिए तैयार हैं कि नहीं जिन सिद्धांतों का हम प्रचार कर रहे हैं वो विधर्मी में कितना लागू मतलब विधर्मी को किस तरह से काट पाएंगे तो इस कारण से मुझे उन सिद्धांतों का रक्षा करने का मंतव्य रहता है कि हम विधर्मियों से जब लड़ने जाएंगे तो वहां जो है क्लीन बोल्ड कर सके वहां इफ एंड बट की बात रहे तो जो जो ऐसे सिद्धांत मिलते हैं उनके साथ बहुत अच्छा सौहार्दपूर्ण वो रहता है मगर यदि कोई उनको उनको ही काट रहा है तो फिर वहां हम लोग हल्के होते हैं और हुआ भी है मेरे साथ मैं मुक्ति के पास सामने था एक समय पे तब मैं अध्ययन में बहुत प्रारंभिक स्तर पर ही था और मुक्ति ने कह दिया जब मैंने कहा कि आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो मुक्ति ने कह दिया आर्य समाज भी तो नहीं मानता है अच्छा मुक्ति ने उस समय इस की गीता का भी एक संदर्भ लिया हालांकि फिर मैंने वहां पर डिपेंड नहीं किया मगर उनको मतलब हम ही ऐसे सिद्धांत परोस के दें जो विधर्मी

00:11:10:16 के काम आए हमारे विरोध में तो इस कारण बस ये सिंगल पॉइंट एजेंडा है इसमें ऐसा कभी नहीं है कि भाई मुझे जो है आर्य समाज में ताला लगाना है मेरा उद्देश्य है कि हम विधर्मियों से कैसे विधर्मियों को अकाट वो सिद्धांत कौन से कि विधर्मियों अब जैसे कई बार हम लोग देखते हैं कि जैसे हम बहुत सारे चैनल्स हैं बहुत सारे जो विधर्मियों में ये अच्छाई हो रही है ये बुराई हो रही इन सब विषयों में बात करते हैं। जैसे हलाला हलाला बुरा है, ट्रिपल तलाक बुरा है। इन सब विषयों पर बात करते रहते हैं। जबकि इसमें दिक्कत क्या है कि जब हम इन विषयों को लेकर के विधर्मी को हराएंगे तो दयानंद जी ने भी अपनी सत्यार्थ प्रकाश में एक बात कही नियोग के समय उन्होंने पूर्व पक्ष में नियोग में लिखा कि भाई जब व्यक्ति ने पूर्व पक्ष में कहा कि भाई ये नियोग तो व्यभचार जैसा दिखता है। तो दयानंद जी ने वहां पर कहा उत्तर पक्ष में कि भाई वो जो यह बताओ कि विवाह व्यभचार नहीं है यह कहां से तय हुआ या फिर कई मतलब बिना किसी विधि विधान के और किसी किसी के साथ भोग करना ये करना यह व्यभचार है ये कैसे तय हुआ जब शास्त्र से वो चीज तय हुई है ईश्वर की वाणी से वो चीज तय हुई है अच्छी या बुरी तो फिर जब ईश्वर की वाणी कह रही है कि नियोग बुरा नहीं है तो फिर

00:12:25:22 उसमें आपको हस्तक्षेप क्यों है तो जब उन्होंने यह बात कही तो मैंने बात तो तर्क तो बिल्कुल सही है। तो कहने का मतलब यह है कि हम अगर यह कहते रहेंगे कि तुम्हारे यहां पर ये चीज गलत है तो वो तो यह कहते हैं ना कि हमारे ईश्वर ने कही है। उसमें वहां पर आप तर्क बहुत ज्यादा अंत तक नहीं जा सकते। मगर जब हम उनकी जड़ पे ही वार करेंगे कि आप जो संविधान कह रहे हैं कि ईश्वर ने दिया वो ईश्वर है ही नहीं। उसकी ईश्वर की एलिजिबिलिटी ही नहीं है। तब हम उसका जो है रूट्स जो है उखाड़ सकते हैं। तो यह कुछ चीजें थी। उद्देश्य को समझे मन में ऐसा कोई द्वेष ना पाले ना मेरे लिए ना निर्भय के लिए। ठीक है? तो आपने एक बात यहां पे वो जो आप नियोग वाला बता रहे थे शिवशी जी उसमें ये है ना कि उसमें दोनों पक्ष है। पक्ष ये है कि पूरा जो नियोग प्रकरण है उसमें महर्षि ने केवल एक बार ये कहा है कि भाई ये इसका प्रमाण वेद में भी है और वो कब आया है इसलिए इस संदर्भ में दिया है कि नहीं मेरा वहां पर तार्किक रूप से ही सिद्ध किया है। मैं नियोग को गलत ठहराने के लिए नहीं बोल मगर उन्होंने समझिए समझिए मैं आपकी स्टेटमेंट का विरोध नहीं कर रहा हूं। तक मैंने आज तक सुनिए सुनिए मैंने आज तक कभी भी नियोग के विषय में कोई एक वीडियो बनाया हो तो बताइए आप कभी भी बनाया इसीलिए इसीलिए मैं आपके इसलिए नहीं बनाया

00:13:40:28 इसलिए नहीं बनाया क्योंकि हम देखिए अगर उसमें ऐड ऑन करूंगा तो आपको भी अच्छा लगेगा ना कि देखिए एक बात मेरी तरफ से ऐड ऑन हो गई है ना मैं बस ऐड ऑन कर रहा हूं ठीक है वो देखिए एक्चुअली क्या है कि उसमें फिर ये बात आ जाएगी कि अगर आप ये कहेंगे कि वो सही थे तो मुझे देखना पड़ेगा कि उस बारे में फिर अध्ययन करना पड़ेगा कि वो सही थे इस विषय में कि नहीं सही थे वो तो वो तो बिना अध्ययन के कोई कुछ बोल नहीं सकता। अगर मैं कोई यहां अभी वो नहीं चाहेंगे ना मैं अध्ययन करके ही बोलूं। यहां अभी वो विषय ना लाया जाए ना जिस बारे में मेरा पक्ष उसमें क्या है क्या नहीं है। फिर आपका ही वो की बात तो मैं तो लाया नहीं नहीं नियोग की मैंने नियोग को गलत नहीं कहा है। मैंने कहा है कि वहां पर नियोग के पक्ष में उन्होंने जो तर्क दिया बहुत सही तर्क था। जब आप दुनिया में अच्छाई और बुराई के लिए शास्त्र का चश्मा लगा रहे हो तो फिर वो शास्त्र क्योंकि ईश्वर की वाणी है इसलिए लगा रहे हो तो सामने वाले को ये क्यों कह रहे हो कि तुम्हारे यहां जो ईश्वर की वाणी है वो गलत है आप उसके ईश्वर को ही जो है असिद्ध कर दो ना उसके ईश्वर को ही असिद्ध कर दो कि वो शास्त्र लिखने वाला एलिजिबल नहीं मेरा कहने मैं यहां पे उनके पक्ष में हूं कि उन्होंने जो तर्क दिया है बिल्कुल सही दिया है यदि शास्त्र कह रहा है अच्छा शास्त्र प्रमाण हां और वो अच्छा है या बुरा है उसमें मेरा कोई क्लेम नहीं है। अभी मैं उसमें कोई न्यूट्रल हूं। वो गलत कहा उन्होंने

00:14:56:07 सही कहा मैं न्यूट्रल हूं। उसमें कुछ मेरा अभी वो नहीं है। गति नहीं है अभी उसमें नियोग वाले मामले में और ना ही मैं कभी मुझे नहीं लगता कि मैं उस पक्ष में जाऊंगा क्योंकि मैं हमेशा कहता हूं सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म ये तीन चीजें आप दोगे तो मैं आपके द्वारा कहा हुआ ये भी मान लूंगा कि भैया सनातन को हिंदू मत कहो या हिंदू को सनातन मत कहो। जैसे अभी आपने देखा होगा आर्य समाज की ओर से लेटर आ रहा है हमसे हिंदू हिंदू शब्द पर शास्त्रार्थ उससे क्या क्या परिवर्तन आएगा हिंदू शब्द पर शास्त्रार्थ से क्या परिवर्तन आएगा ज्यादा से ज्यादा आपकी जीत मेरी हार हो जाएगी या मेरी जीत आपकी हार हो जाएगी मगर मूलभूत विषय जो है सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म जब तक इनको एक मत मतेक्य के अनुसार नहीं माना जाएगा तब तक परिवर्तन नहीं आएगा तो इन पर बात पूरा विश्वास है कि आज इन विषयों पर मतक्य हो जाएगा जहां तक मुझे पूर्ण विश्वास है हां चलिए चलिए तो ठीक है तो ईश्वर विषय पे थोड़ा सा जो हम शुरू कर रहे थे तो उसप मैं बता देता हूं कि मेरा अवतारवाद है मतभेद क्या है इसको मैं स्पष्ट कर देता हूं नहीं पहले पहले पहले हमें कहां से शुरू करना है ये आप स्पष्ट कर देते कि इस बात से शुरू करना है क्या मैं स्टेप बता देता हूं आर्य समाज का ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं यहां से शुरू करना है या फिर यहां से शुरू करना है कि आप ईश्वर को नहीं मानते अवतार को नहीं मानते अवतार से ही शुरू

00:16:11:13 करते हैं आप अवतार को नहीं मानते ठीक हम शुरुआत भी यही आप बताइए आपकी जिज्ञासाएं क्या-क्या है अवतार को लेकर? अब देखिए सबसे पहला तो यह आता है कि हम जैसे ईश्वर का जो वैदिक स्वरूप मानते हैं। ठीक है? उसमें बहुत हद तक मिलते जुलते स्वरूप आप भी मानते ही हैं और और भी कुछ कुछ मत वाले लोग हैं वह भी मानते हैं। तो ऐसा नहीं कि एकदम ही नित पूरा अलग-अलग है। जैसे अगर कोई भी मत मतांतर का व्यक्ति कोई भी अपने को आस्तिक क्लेम करता है वो ईश्वर को सृष्टि करता मानता ही मानता है। तो क्या है निर्भय जी अगर थोड़ा वॉइस का वॉल्यूम बढ़ा सके तो क्योंकि अच्छा मेरी निर्भय जी का वॉइस निर्भय जी का सही आ रहा है। नहीं आपका पहले भी सही आ रहा था। अच्छा पॉइंट इसके अंदर यही है कि अब जैसे बहुत मायनों पर तो हमारा मतलब एक है। ठीक है? अब जैसे ईश्वर को जो हम वैदिक स्वरूप मानते हैं क्या मानते हैं भाई? ईश्वर सर्वव्यापक है। सृष्टि करता है। अनादि अनंत नित्य है। ठीक है? सर्वशक्तिमान है इत्यादि इत्यादि। ये जो ईश्वर का वैदिक स्वरूप हम माने बैठे हैं। इस वैदिक स्वरूप में अवतारवाद कहीं फिट नहीं होता। हमारा यह कहना है, मेरा यह कहना है कि अवतारवाद कहीं फिट नहीं होता। जो कोई व्यक्ति अवतारवाद इन स्वरूप के साथ ही फिट कर दे तब तो हम मान लें। इसमें देखिए दो तरह से पॉइंट होगा। या तो आप

00:17:26:16 इसी स्वरूप के अंदर ही अवतारवाद को फिट कर दो तो मान लेंगे। या तो आप ये क्लेम करो कि मैं ईश्वर के इस स्वरूप को मानता ही नहीं हूं। तब वाद विवाद चलेगा कि भाई फिर ईश्वर को स्वरूप है क्या? सर्व्यापक नहीं है तो एक देश ही है। सृष्टि करता नहीं है तो क्या है? तो एक वो आ जाएगा। तो जहां तक मुझे लग रहा है जो मैंने चर्चाएं देखी हैं तो मुख्य मुख्य्य विषय तो आप भी ईश्वर का वैदिक स्वरूप वही मान रहे हो जो हम मान रहे हैं। सर्वशक्तिमान आप भी मान रहे हो सर्वशक्तिमान ठीक है हम भी मान रहे हैं। मेरी आवाज आ रही थी कि कट गई थी? जी जी मेरी ठीक है। तो बात यही है। तो अगर हम वो भी मान रहे तो उसके अंदर अवतारवाद फिट नहीं हो रहा। जो कोई फिट कर दे तो हम मान ले। ठीक है? इसमें आपका पक्ष क्या है? वो एक बार स्पष्ट कर दो। उसके बाद फिर हम स्टेप बाय स्टेप शुरू करते हैं। ऐसा है कि दो पर्सेक्टिव से ईश्वर की व्याख्या है। एक कि वह सर्वव्यापक है, सर्वशक्तिमान है, अजन्मा है, अविनाशी है। ठीक है? और फिर दूसरी जो व्याख्या है कि वह प्रकट होता है भांति भांति के रूप धारण करता है या ऐसा करता है या वैसा करता है मतलब वो व्यवहारिक एक व्याख्या और है तो होता क्या है कि जो ईश्वर को लेकर के जितने भी दर्शन है या विचार है जैसे आर्य समाज

00:18:41:18 और अभी हम अपनी बात करते हैं तो मैंने ये देखा है कि आर्य समाज कई जगह पर व्यवहारिक और पारमार्थिक दोनों चीजें मान लेता है मगर कहीं-कहीं पर बाउंड कर देता है पारमार्थिक के आधार पर व्यवहार की खंडन करने लगता है। इतनी सी बात इतनी सी बात जैसे कि फॉर एग्जांपल जैसे कि फॉर एग्जांपल आर्य समाज ये कहता है कि उसको आवश्यकता क्या है करने की? ठीक है? उस पर हम आएंगे बाद में आएंगे। ईश्वर नहीं मैं एक एग्जांपल के साथ में समझा दे रहा हूं। जैसे कि आवश्यकता क्या है? तो भाई ईश्वर को तो पेड़ों का रंग हरा करने की आवश्यकता नहीं है। पीला ही कर दे। पीला करने की आवश्यकता है। वैसे प्रमाण सहित उत्तर दूंगा। आवश्यकता आप भी मानेंगे। वैसे तो जी जी तो कहने का अर्थ ये है कि

00:19:30:02 ईश्वर को आवश्यकता क्या है? ये कह करके वो जो है पारमार्थिक धरातल को आधार बना के और व्यवहारिक धरातल का खंडन कर देते हैं। जबकि ईश्वर के दोनों पर्सपेक्टिव है व्यवहार और परमार्थ। व्यवहार में सब कुछ कर सकता है। जब उस ईश्वर को हम जानते हैं तब परमार्थ की बात आती है। जी अब आप बताएं। ठीक है। एक बात मैं क्लेरिटी दे देता हूं यहां पे कि जब भी मैं ईश्वर की बात करूंगा तो व्यवहार में जिसे आप निराकार ईश्वर कहते हो, निराकार सर्व्यापक सृष्टि करता ईश्वर जिसे आप मानते हो व्यवहार में मैं जब भी ईश्वर शब्द बोलूंगा मैं हमेशा उसी ईश्वर की बात करूंगा। ठीक है? क्योंकि हम लोग उसी ईश्वर को ही मानते हैं। शायद आप उसे सगुण निराकार कहते हो। अब अब वो जो है प्रकट हो सकता है कि नहीं इस पर बात है। वो एक अलग विषय है। वो एक अलग विषय है। ठीक है? लेकिन जब मैं जब मैं परमार्थिक अगर मुझे परमार्थिक को मेरे को ले जाना होगा जिसे आप परमार्थिक कहते हो तब मैं अलग से शब्द प्रयोग कर दूं कि हां मैं परमार्थिक की बात कर रहा हूं आपके दृष्टिकोण से नहीं मेरे दृष्टिकोण से क्या है जो जिसे आप निराकार सगुण कहते हो वही मेरे लिए व्यवहारिक परमार्थिक वो सारा ईश्वर वही है ठीक है वो मतलब आपके अनुसार सगुण निराकार और निर्गुण निराकार में कोई अंतर नहीं है नहीं है नहीं है बिल्कुल एक ही है हम बिल्कुल बिल्कुल ठीक है इसके बारे में भी वैसे सत्यार्थ प्रकाश प्रश्न है और बाकी

00:20:45:10 जो बात महर्षि अंध इसके विषय में इस पर मैं समझना चाहूंगा थोड़ा सा कि निर्गुण निराकार तो हो गया जो व्यवहार में नहीं आ सकता और सगुण निराकार हो गया जो व्यवहार में आ सकता है। इसमें क्या होता है ना इसमें केवल डिफरेंस आता है शब्दों में। ठीक है? अगर आप शास्त्रों को उठा के देखोगे तो शास्त्रों में अलग से कहीं ऐसा डिस्क्रिप्शन नहीं मिलता कि व्यवहारिक अलग है, परमार्थिक अलग है। इस टाइप से नहीं मिलता। शास्त्रों में वो लोह के लो के भाष्यों का अलग वो एक अलग बात है। कि किसी आचार्य ने अपने भाष्य में उसकी क्या व्याख्या कर रखी एक अलग विषय है। मूल रूप से शास्त्रों में ये नहीं मिलता। मूल रूप से शास्त्रों में मतलब आपका कहने का मतलब है जो मतलब जो आपका कहने का मतलब सगुण से पीछे कोई अल्टीमेट ट्रुथ है ही नहीं। सगुण ही अल्टीमेट ट्रुथ है। सगुण निराकार हूं क्या मैं बता देता हूं क्या? अब शास्त्रों में दो शब्द मिलते हैं सगुण और निर्गुण। ठीक है? अब होता क्या है? जब हम इसको समझेंगे तो हमें ये पता चलता है। इस पे जो मैं बोल रहा हूं इसपे मैंने आचार्य शंकर का भी पढ़ा हुआ है। सेम स्टेटमेंट्स। ठीक है? क्योंकि मैंने आचार्य शंकर के लगभग सारे उपनिषद भाष्य पढ़े हुए हैं। मैं एक मैं एक चीज कोट कर दूं निर्भय जी मैं एक चीज कोट कर दूं कि अगर हम लोग प्रमाण को ज्यादा बीच में लाएंगे चर्चा में तो फिर हमारी चर्चा का विषय परंपरा पे आ जाएगा। बिल्कुल परंपरा की बात करूंगा आज। उसकी अगर हम अगर हम स्टेटमेंट इस पे लाएंगे तो परंपरा पे जैसे आप मान लीजिए जैसे मान लीजिए मैं कोई बात

00:22:00:14 बोल रहा हूं। आप कह रहे हो कि शंकराचार्य ने तो ये लिखा है। ठीक है? हम तो मैं कहूंगा शंकराचार्य का ग्रंथ आपको कहां से प्राप्त हुआ है? हम हम बोल दूंगा आपके वहां से प्राप्त हुआ है। तो क्या उन्होंने जो व्याख्या बताई है आपको अपने मुंह से जो व्याख्या आप कह रहे हो क्या वो व्याख्या जो पूरी मटके यहां से जो प्रकाशित होती है वो व्याख्या अगर आप स्वीकार करते हो कि वो वही व्याख्या है तो मैं भी उसी की बात कर रहा हूं। नहीं तो उसमें भी जब जब जो व्यक्ति जो लिखता है वो उसमें क्या समझाना चाह रहा है तो डायरेक्टली वर्बली जो उसका अगर भाष्य अगर मैं कहूंगा मैं उनका मैं उनका शिष्य हूं और मैं उनसे जाकर के समझाऊं इस बात का उन्होंने ये मतलब लिखा है तो फिर आपको मेरी बात माननी होगी क्योंकि मैं उनका शिष्य हूं। ठीक है चलिए मैं चलिए मैं उस विषय में आपकी बात मान लूंगा। अगर मैंने कोई प्रमाण आपको आचार्य शंकर का दिखाया। ठीक है? नहीं आचार्य शंकर का नहीं फिर आचार्य शंकर आचार्य शंकर का ही नहीं जैसे हम शास्त्रों को बार-बार जैसे बीच में लाए मुझे ऐसा लगता था कि रैशन वाली बात होती है वरना विषय परंपरा में चला जाएगा पूरा बदल ही जाएगा पूरा आपको मैं आपको बता देता हूं देखिए मैं आपको बता देता हूं होगा क्या हम तर्क वितर्क पे ही बात करेंगे ठीक है उसमें समस्या जब जब शब्द प्रमाण की बात आएगी ठीक है उसमें दो चीज होगा या तो मैं चाहूं तो अपने अपनी परंपरा भी सिद्ध कर सकता हूं चाहूं तो अभी सिद्ध कर दूं बड़ी आराम से कोई बड़ी बात नहीं है ठीक है लेकिन मैंने इसको बाद के लिए छोड़ा हुआ है कि इसको मैं लास्ट में करूंगा। मुझे

00:23:15:15 कोई जल्दी नहीं है क्योंकि मुझे पता है कि मुझे सिद्ध करना है। आज आज जो है मैंने जैसे अभी आपने सुना होगा मुझे जाना भी है। देखिए मुझे मुश्किल से पांच मिनट लगे हैं परंपरा सिद्ध करने में। अगर आप चाहे आपकी परमिशन से ही करूंगा मैं। मुझे कोई अगर आप नहीं मानेंगे मुझे कोई दिक्कत नहीं है। ठीक है?

✅ This part is already used · 00:23:30:16 – 00:24:53:10 (1:23)

→ Used in: A · Video एक सवाल : दुनिया भर के पाखंडी परेशान | परंपरा at 10:53 ↗

00:23:30:16 जो मैं आपको प्रमाण दिखाऊंगा शब्द प्रमाण वो मैं आप ही के आचार्य को दिखाऊंगा। तो कोई मतलब भेद भी नहीं होगा। जैसे परंपरा की बात कब आएगी? जब मैं बोलूंगा कि भाई आग नहीं यहां पे आग का मतलब पानी है। इंद्र का मतलब ईश्वर नहीं। मतलब बिजली है तो आप बोलेंगे नहीं मेरे आचार्य तो कुछ और कह रहे हैं तो मैं आप ही के आचार्य का दिखाऊंगा कोई समस्या नहीं है इसमें ठीक है आचार्य का दिखाएंगे पर देखो ऐसा है जैसे कि बैरन बांस की बांसुरिया गिरजा मुख चूमत बनवारी ये किसी ने बात कही अब इसमें आचार्य अगर वो किसी का अगर आप मान लो कि ये मेरे आचार्य है जिन्होंने लिखा बैरन बांस की बांसुरिया गिरजा मुख चूमत बनवारी ठीक है आपने कहा ये आपके आचार्य ने लिखा है अब इसमें गिरजा मुख चूमत बनवारी मतलब गिरजा यानी पार्वती सी मुख चूम रही है बनवारी का। पार्वती इसका अर्थ निकल रहा है कि मुख चूम रही है पार्वती। अब आप कहोगे देखिए आपके आचार्य ने लिखा है कि पार्वती माता ने भगवान श्री कृष्ण का मुख चूमा। ठीक है? तो मैं बताऊंगा कि भाई मेरे आचार्य ने तो यहां पर ये कहा था कि जो गोपियां है वो कह रही है बैरन बांस की बांसुरिया यानी जो बांसुरी है पांच की ये बैरी है मेरी और ये गिर जा। ये पार्वती नहीं है गिरजा। यह गिर जाए जो बनवारी का मुख चूम रही है। बनवारी का जो मुख चूम रही है तो इसलिए इसलिए वहां पे मेरी बात को मानना

00:24:45:18 पड़ेगा क्योंकि क्योंकि मैं उनका शिष्य हूं। मैंने उनकी बात को उनसे समझा है। कोई इशू नहीं है। जी मुझे कोई इशू नहीं

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00:24:53:10 है। आप ही मानिएगा शब्द पर मैं इतना स्पष्ट दूंगा कि उसमें से एक इंच का भी अंतर नहीं होगा। ना आप ही कर पाए। मतलब अभी कर ही नहीं पाएंगे। जो चीज लिखी आप अपनी बात शुरू करिए फिर देखते हैं क्योंकि मैं तो अभी मैं तो अभी मतलब मैं अपने शब्द प्रमाण इत्यादि को ले नहीं पहुंचा हूं। हालांकि ज्यादा नहीं अगर कोई अगर कोई बात आएगी तो फिर मैं निकालूंगा टाइम लगेगा। ठीक है। मैं तो अभी जो है आप जो तर्क वगैरह करते हैं ना अवतार के विरोध में उनको ही सोच करके आया था। मैंने मतलब शब्द वगैरह शब्द प्रमाण वगैरह मुझे लेने पड़ेंगे निकालने पड़ेंगे तो थोड़ा अवस्थित हो सकता है और कोई बात नहीं। कोई कोई इशू नहीं कोई इशू नहीं मैं तार्किक चर्चा ही रखूंगा शब्द प्रमाण जाऊंगा भी नहीं उसकी आप निश्चिंत रहिए ठीक है अब आते हैं बात कि जैसा मैंने बताया कि जब भी मैं ईश्वर की बात करूंगा तो मैं आपके वो जो निराकार सगुण ईश्वर है उसकी बात करूंगा ठीक है

00:25:40:16 अब आते हैं अवतार वाले विषय पर तो अवतार वाले विषय में जैसा कि मैंने आपको बता ही दिया है कि हम जैसे मैंने बताया कि अवतार फिट नहीं होता इसीलिए ठीक है अब अवतारवाद की चर्चा हम शुरू करते हैं सबसे पहले तो एक तो अब ये करना है कि मैं अवतार मान नहीं रहा हूं क्योंकि मैं जो ईश्वर की व्याख्या मान रहा हूं उसके अकॉर्डिंग फिट नहीं हो रहा अब अवतार मानते हो आपके अकॉर्डिंग वहां पे फिट हो रहा है। अगर मैं सही समझ पा रहा हूं तो मुझे लग रहा है कि स्वरूप में कोई विशेष मतभेद नहीं है। आप क्योंकि व्यवहारिक वाले को आप स्वीकार कर रहे हो। व्यवहारिक वाले को मैं मैं मान ही रहा हूं। उसमें कोई इशू नहीं है। आप उसी व्यवहारिक के द्वारा अवतार लेना सिद्ध कर रहे हो। मैं उसी व्यवहारिक के द्वारा पूछ रहा हूं कि कैसे सिद्ध हो रहा है। मुझे करवा दो मैं मान लूंगा। मेरा इतना ही आग्रह है। ठीक है। अब उसमें पॉइंट ये है कि अब सिद्ध करना है आपको। अच्छा सिद्ध करने से पहले जो अवतार सिद्धि का पॉइंट आता है वो करने से पहले मुझे थोड़ा अवतारवाद की धारणा स्पष्ट कर दीजिए कि अवतार से मैं समझूं क्या जिसे आप सिद्ध करना चाहते हैं मुझे पता हो कि वो धारणा है क्या वैष्णव भी है उसी में बहुत सारे मत मतांतर है जिस प्रकार एक परम शक्ति जिस प्रकार एक परम शक्ति जो है जीव जगत और जगदीश्वर बनके प्रकट होती है सृष्टि का निर्माण करती है व्यवहारिक जगत का निर्माण होता है जिस प्रकार तो वही शक्ति अपने जो अचिंत शक्ति है उसकी उसके द्वारा अपने आप को मनुष्य की आंखों का विषय बनाती है।

00:26:56:28 यही उसका अवतार होता है उस शक्ति का। कैसे कर मतलब कैसे? फॉर एग्जांपल जैसे कि अ जैसे कि आपने आजकल एप्लीकेशनेशंस वगैरह देखी होंगी। क्या कहते हैं ये कंप्यूटर इत्यादि में आती है जो एक्सिस बैंक की होती है जी या या फिर ये रेलवे इंक्वायरी की भी होती है। हेलो आई एम ईला करके आती है। है ना? तो ये एप्लीकेशन क्या है? ये पूरे जगत में फैली हुई है इंटरनेट के द्वारा। उसमें जो इंफॉर्मेशन दे रही है ना आपको वो जो जो एक कार्टून कररेक्टर आता है और आपसे बात करता है वो कररेक्टर। तो वो कहने का तो ये है कि वो केवल कंप्यूटर की किसी एक जगह पे दिखाई दे रहा है। है ना? मगर वो मगर उसमें वो सारी क्वालिटीज हैं। वो सारी क्वालिटीज है जो पूरे जगत में है। मतलब आप उसको कहोगे कि जो इस समय जो इंफॉर्मेशन अमेरिका में हो तो वो वहां पर दे देगी। मतलब जो भी वो रिलेटेड जो वो सिस्टम जो काम कर सकता है वो सारा काम वो लीला से कहोगे तो वो कर देगी। यही उस सिस्टम का अवतार है। ये कैसे होता है? थोड़ा सा इसको यही धारणा जो है ना ये कैसे होता है? इसको थोड़ा स्पष्ट कर दीजिए। दो तीन मैंने शब्द सुने हुए हैं आपसे कि

00:28:12:09 एक तो आप बोलते हो कि चीरा लगा देता है जैसे पर्दे में कुछ दिखता है एक वो बोलते हो अच्छा एक बार आपने बोला था कि स्वयं का सृजन कर लेता है एक बार आपने बोला था शरीर धारण कर लेता है तो मुझे थोड़ा स्पष्ट कर दीजिए कि ये जो आप उसको रूप का विषय कह रहे हो तो वो रूप का विषय कैसे बन रहा है क्या उसमें जैसे प्रकृति ही जैसे जैसे जैसे वो पृथ्वी सूर्य इत्यादि बनाते समय लोगों के व्यवहार का विषय बनता है ना वहां धक्का का लगता है ना मिट्टी उठाई गई दिखाई नहीं देता लेकिन लेकिन दिखाई नहीं देता मगर मगर जो स्पर्श इंद्रिय है इत्यादि का तो विषय बनता है ना वहां

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00:28:50:24 तभी तो मिट्टी एक कौन बनता है स्पर्श का विषय ईश्वर स्पर्श का विषय बनता है ईश्वर स्पर्श का विषय बनता है तो कौन मेरा फोन है ये मेरा फोन है इसको मैंने टच किया तो अभी मैं ईश्वर को टच कर रहा हूं कि मैं प्रकृति को टच कर रहा हूं चलो प्रकृति प्रकृति का विषय बनता है प्रकृति बनती है प्रकृति स्पर्श का विषय बनती है। प्रकृति स्पर्श का विषय बनती है। यानी कि प्रकृति अलग है। और यानी कि प्रकृति अलग है। जो ये जो मिट्टी इत्यादि कण है ये अलग है। मैंने कब कहा? तो तो मिट्टी इत्यादि कण प्रकृति है या प्रकृति वो है जो जो क्या कहते हैं उसको धक्का दे रही है। आपने बोला आपने बोला कि जब जैसे जब जैसे मान लो पृथ्वी बन रही है। ठीक है? मैं पृथ्वी पे चल रहा हूं। आपने बोला ईश्वर का स्पर्श हुआ। मिट्टी के साथ हमारा स्पर्श मिट्टी के साथ तो मैं कह तो रहा हूं कि आप प्रमाण मैं वहां पर कह तो रहा हूं कि ईश्वर का स्पर्श नहीं मान रहे तो किसका मान रहे आपने कहा प्रकृति का तो जब प्रकृति का स्पर्श मान रहे हो यानी कि मिट्टी अलग है मिट्टी किससे बनी है देखो प्रकृति वो मूलभूत तत्व है जिससे सारा ब्रह्मांड बना हुआ है मटेरियल कॉज ऑफ द यूनिवर्स ठीक है उसी से बना हुआ है ये प्रकृति है प्रकृति के अंदर है स्पर्श गुण तो आप जो कह रहे हो कि मैंने किसे टच किया मैंने ईश्वर को टच किया या मैंने प्रकृति को टच

00:30:06:19 तो मैं वही तो कह रहा हूं कि जैसे

00:30:08:21 मिट्टी है। मिट्टी के कण चारों ओर फैले हुए हैं। अब ये प्रकृति तो फैली हुई है। हम अब प्रकृति खुद से खुद से होती है इकट्ठा। यानी मिट्टी कण खुद से इकट्ठा होते हैं। ईश्वर का धक्का ईश्वर है। उसका निमित्त ईश्वर है। तो ईश्वर का धक्का लगा ना। हम ठीक है। तो ईश्वर का धक्का लगा तो जैसे ईश्वर धक्के का विषय बन रहा है ऐसे ही ऐसे ही ईश्वर नेत्रों का विषय बनता है। कैसे बनता है? तो कैसे धक्के का विषय कैसे बनता है? अपने बल से बनता है। अपने बल से बनता है। हम तो आंखों का विषय कैसे बनता है? अपने बल से आपने कहा ना बल से तो बल से तो ये वस्तु यहां से यहां जाएगी ना। आंखों का विषय

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00:30:53:03 कैसे बन रहा है? बल से बल से वो धक्के का विषय बना ना स्पर्श का विषय बना ना पृथ्वी वो मिट्टी है पॉइंट समझो आप पॉइंट समझो जैसे ईश्वर द्वारा वेदों का ज्ञान देना आप भी मानते हैं मैं भी मानता हूं सिद्ध है ठीक है ईश्वर द्वारा सृष्टि निर्माण करना सुनिए पहले पूरी बात सुनिए जी जी बताइए एक बार सुनिए तो सही पूरी बात तो सुनिए बताइए ईश्वर द्वारा सृष्टि निर्माण करना ठीक है आप भी मानते हैं मैं ही मानता हूं ये भी सिद्ध है साध्य क्या है साध्य ये है कि ईश्वर जो है वो आंखों का विषय बन जाता है। यह साध्य है। अब पॉइंट यह है। आप मुझे क्या कह रहे हो? आप कह रहे हो क्योंकि यह यह कर ले रहा है इसलिए यह भी कर लेगा। वो तो ऑलरेडी वो उसे मैं बता रहा हूं ना। मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। पहले सुनिए मैं आपकी बात सुनूंगा। एक बार मैं पूरा सुनिए सुनाइए। सुनाइए सुनिए। अब देखिए पॉइंट ये है कि अब जो कि वो पहले से सिद्ध है। उसमें तो कोई मतभेद है ही नहीं। इस साध्य को सिद्ध करना है तो इस साध्य को सिद्ध करने के लिए हेतु देना होगा। ठीक है? खैर वैसे भी अभी हम हेतु पे बात नहीं कर रहे। अभी हम खाली इस बात करेंगे धारणा की मैं बोल दूं अब जी जी जी धारणा मुझे स्पष्ट जैसे

00:31:59:03 जैसे वहां पर एक अचिंत शक्ति काम कर रही है कि वो जो है धक्के का विषय नहीं था धक्के का विषय बन रहा है एक अचिंत शक्ति को आपने माना ठीक है तो वैसे ही मैं बता रहा हूं कि यहां पे भी अचिंत शक्ति को मान लीजिए

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00:32:12:02 तो अचिंत शक्ति से आंखों का विषय बन रहा है फिर वहां आप कैसे क्यों पूछ रहे हो जब वहां अच यही मैंने कहा था ना कि कई जगह आर्य समाज व्यवहार और परमार्थ दोनों में चीजों को मान लेता है कई एक एक मिनट एक मिनट कई बार आर्य समाज क्या करता है? पारमार्थिक धरातल के आधार पे व्यवहारिक चीजों का खंडन करता है। तो मैंने अभी आपने जैसे शुरुआत में आपने तो ये मना ही कर दिया कि वो ईश्वर नहीं प्रकृति कर रहा है। जब मैंने उसको थोड़ा खोला तो आपने इसमें ना उसमें फॉल्ट है। उसमें फॉल्ट ये है जब पहले आपने बोला एक मिनट मैं पूरा कर एक मिनट मैं बताऊंगा आपको बोलने के लिए। हम तो पहले तो आपने मना ही कर दिया ईश्वर नहीं ईश्वर नहीं होता है फिर आपने माना है तो मान लिया अच्छी बात है मगर उसके बाद जब आप जब आप उसका धक्के का विषय बनना और वहां पे ये स्वीकार कर रहे हो कि उसकी एक अचिंत शक्ति होती है उसको समझाया जा ही नहीं सकता है अचिंत शक्ति के द्वारा ही वो ये कर रहा है जब आपने एक जगह अचिंत शक्ति मानी है तो दूसरी जगह अचिंत शक्ति मानने में क्या दिक्कत है यही मेरा कहना है अब बात आएगी अगर प्रमाण की तो फिर प्रमाण से चले जाएंगे परंपरा पे ये दिक्कत आता हूं उसप आता हूं देखिए अब मैं आपको बताता हूं क्या एफर्ट है। पहले जब आपने बोला था ना स्पर्श वाला विषय तब आपने पहले यह शब्द प्रयोग किए थे कि मैं ईश्वर का स्पर्श कर रहा हूं। मैंने उस पे विरोध किया था। मैंने कहा था भैया हम ईश्वर पे विरोध ईश्वर का स्पर्श नहीं कर

00:33:27:03 रहे हैं। हां ईश्वर अपने बल से ये तो एक अलग व्याख्या हो जाएगी कि आप आप ये मानते हैं कि नहीं आपका फोन जो है वो ईश्वर है कि नहीं। वो एक अलग व्याख्या हो जाएगी। मैं वही कह रहा हूं। वो एक अलग व्याख्या वो एक अलग कि थोड़ा शब्दों का शब्दों का उसमें ऊपर नीचे था। बाकी यह नहीं कि मैं यह कह रहा हूं क्योंकि अगर अगर मेरी यह धारणा यह होती कि ईश्वर निमित्त नहीं है तो मैं इस बात को बोलता ही नहीं। ठीक है? तो उसमें शब्दों का थोड़ा ऊपर नीचे हेरफेर हो सकता है। बाकी अब नहीं शब्दों का जरा मुझे समझाइए जब मैंने कहा जब मैंने कहा कि ईश्वर जो है धक्के का विषय बनता है प्रकृति के लिए। तो आपने कहा कि नहीं प्रकृति धक्के का विषय बनती है। फिर मैंने पूछा प्रकृति तो मिट्टी है। दोनों में अंतर है। दोनों में अंतर है। दोनों में अंतर है। दोनों में अंतर ये है कि एक होता है कि वस्तु को मैं स्पर्श कर रहा हूं। ठीक है? जैसे मैंने चुंबक को स्पर्श किया। क्योंकि उसमें स्पर्श गुण है। इसलिए मैंने उसको स्पर्श किया। लेकिन जब चुंबक किसी लोहे की वस्तु को आकर्षित करता है। ठीक है? वो उसे अपने बल से आकर्षित करता है। वो उसे स्पर्श नहीं करता। वो जब वस्तु आके लोहे की क्लिप उसकी चिपक जाती है तब वो स्पर्श होता है उससे। ठीक है? तो दोनों में बात नहीं है। सुनिए जो टॉपिक है वो चेंज हो रहा है। मैं बता रहा हूं क्या है। बात ये है कि वहां पे प्रकृति ने मिट्टी को धक्का लगाया वो वो छू के लगाया या बिना छुए लगाया? प्रकृति ने लगाया

00:34:42:04 कि ईश्वर ने लगाया? तो आपने मना किया ईश्वर ने नहीं प्रकृति ने लगाया। तो मैंने कहा प्रकृति तो स्वयं मिट्टी है। तब आपने माना कि हां ईश्वर ने लगाया। आपने ये बोला था कि आपने ये बोला था कि हमने ईश्वर को छुआ तब मैंने उस विरोध किया था। मैंने हमने नहीं कहा मैंने कहा सूर्य चंद्रमा इत्यादि बनाते समय वो स्पर्श का विषय बनता है उनके लिए मिट्टी के कणों के लिए वही तो कह रहा हूं मैं वही कह रहा हूं कि ये जो बात है तो आपको आपको वहां पे ये कहना चाहिए था आपको वहां पे ये कहना चाहिए था कि वो स्पर्श का विषय नहीं वो धक्के का विषय बनता है या आकर्षण का विषय बनता है या व्यवहार का विषय बनता है उसमें बल है बल का एक आपका खिंचाव का मगर आपने तो मना ही कर दिया ना कि ईश्वर नहीं वहां पर प्रकृति प्रकृति जो है वो काम कर रही है लेकिन बोला कि नहीं बोला मैंने ये बात बोला ईश्वर निमित्त कारण है सृष्टि का बोला ना ये बात जब मैंने आपको ये रखा ना कि भाई मिट्टी जो है मिट्टी तो स्वयं प्रकृति तो क्या अलग से प्रकृति आ के उसमें काम कर रही मिट्टी में तब आपने कहा इस टॉपिक को मैं बड़ा आराम से स्ट्रीट लाइन कर देता हूं आपने जब पहले बोला तो मुझे ये समझ में आया कि आप ये बोल रहे हो कि मैंने ईश्वर को छुआ तब मैंने इसका विरोध किया लेकिन जब आपने मैंने मैंने मैंने मेरा शब्द तो यूज़ ही नहीं किया। खैर चलिए आगे चलते हैं। बताइए आगे। अब आते हैं अब आगे अब जैसे बात ये है कि जैसे मैंने वो चुंबक वाले का उदाहरण दिया। अब पॉइंट

00:35:54:04 इसके अंदर ये आता है कि अभी खाली हम हेतु पे बात ही नहीं कर रहे हैं। अभी हम जा रहे हैं इसके ऊपर किसके धारणा के ऊपर ठीक है। अवतारवाद की धारणा क्या है? अब धारणा में हमें यह समझना है कि कोई वस्तु मेरी आंखों का विषय बन रही है। अगर कोई वस्तु मेरी आंखों का विषय बन रही है अर्थात उसके अंदर रूप गुण है। रूप गुण है तभी तो वो आंखों का विषय बन रही है। अच्छा रूप गुण जो हमें पता है वो तो रूप गुण जिसमें है वो तो प्रकृति में है। जैसे सारा ब्रह्मांड। ठीक है? प्रकृति से बना हुआ है। इसके अंदर रूप गुण है। हम इसे आंखों से देख भी पाते हैं। ठीक है? तो पॉइंट यह है कि अब मुझे थोड़ा सा यह समझा दीजिए क्योंकि अभी मैं धारणा पे ही हूं। अभी मैं समझ रहा हूं कि अवतारवाद है क्या? ठीक है? यह जो रूप गुण है यह ईश्वर के अंदर आप मान रहे हो। निराकार सगुण ईश्वर के अंदर रूप गुण मान रहे हो। या फिर आप यह कह रहे हो कि ईश्वर क्या करता है? स्वयं की रचना कर लेता है। स्वयं का सृजन कर लेता है। या फिर आप ये कह रहे हो कि ईश्वर ये जिस प्रकृति में रूप गुण है उसी प्रकृति से अपने लिए शरीर निर्मित करता है। आप ये कह रहे हो। क्या कह रहे हो? थोड़ा सा इसको स्पष्ट कर दो।

00:36:54:07 जो परम तत्व है वो ऐसा प्रभाव उत्पन्न करता है प्रकृति के अंदर एक जगह पर जहां पर आप जो है प्रकृति की जो बाकी चीजें दिख रही है वो ना दिख के जहां प्रकृति ना दिखे जहां जो एक तरीके से जो सत्य का वो परम तत्व है मतलब एक तरीके से वो ऐसा प्रभाव उत्पन्न करे जिससे कि आपकी आंखें जो उसके आरपार देख सकती है प्रकृति को वो आरपार ना देख के एक तत्व आपको बीच में टकरा जाए वहीं से आपको जो है उसके दर्शन प्राप्त हो जाए तो

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00:37:26:16 वो ऐसा तभी संभव है ना जब संयोग होगा किसके साथ जैसे समझाता हूं जैसे घर में धूल मिट्टी होती है नॉर्मली आंखों से नहीं दिखती झाड़ू मारते हैं तो धूल इकट्ठा हो जाता है ना थोड़ा सा तब दिखता है क्यों दिखा कारण ये है कि अभी वो फैला हुआ है बिखरा हुआ है हमने उसको आपस में इकट्ठा कर दिया झाड़ू मार के तो क्या हुआ वो संयोग हो गया संयोग होने से जो सूक्ष्मकार था वो स्थूल कूलाकार हो गया संयोग विषय से। इसीलिए वो नेत्रों का विषय स्पष्ट रूप से बन गया। ऐसा नहीं कि उसमें पहले रूप गुण नहीं था। पहले भी था जब वो कण-कण-कण में बिखरा रहा होता। लेकिन वो वियोग रूप में था। जब हमने उसे इकट्ठा कर दिया संयोग विशेष अवस्था में आया तो हमें दिख रहा है। तो अगर आप ये कह

00:38:04:26 रहे हो कि प्रकृति जो सामने है। ठीक है? जैसे मेरे सामने वायु है। नहीं दिख रहा। मान लो मेरे सामने ऑक्सीजन है नहीं दिख रहा। मैंने उसको कंडेंस कर दिया लिक्विड में आ गया। वो कंडेंस लिक्विड ऑक्सीजन होता है। वो मेरे को दिख रहा है। क्या आप ये कह रहे हो कि ईश्वर भी इसी प्रकार से ऐसे सामने होता है। बिखरा होता है और वो अपने आप को संयोग कर लेता है। कंडेंस कर लेता है। फिर वहां का विषय क्या आप ये कह रहे हो? मैं ये कह रहा हूं कि जो परम सत्य है वो अविद्या के कारण माया के कारण छिपा हुआ है। अविद्या माया प्रकृति। हां। तो ईश्वर एक ईश्वर एक जगह ऐसा प्रभाव उत्पन्न करता है जहां पर आपकी आंखें प्रकृति को प्रकृति आपकी आंखों के सामने से हट जाती है एक स्ट्रक्चर में वो ईश्वर का अवतार होता है। यानी आप यही कह रहे हो देखो इस चीज को समझो क्योंकि मैं इस चीज को समझना चाहता हूं रियल में। है ना? यानी अब मेरे सामने ये कह रहे हो कि मान लो धूल मिट्टी उड़ रही है और धूल मिट्टी में से एक बीच में एक कोई गैप ऐसा कुछ बन गया। मान लो बुध के आकार का कुछ बन गया। तो ये जो बुध के आकार का बन रहा है उसमें भले ही मेरे को आउटलाइन दिख रही है। आंखें नाक वहां कुछ नहीं दिख फिर आउटलाइन दिख रही है। तो ये जो बीच में हल्का सा हवा की वजह से किसी गैप है यही अवतार है। भले उसमें कुछ दिखे ना वो यही यही अवतार है। परंतु वो इस पर ऐसी कवरिंग करते हैं कि आपको जो है उसके प्रति वो पूरा वैसा ही मनुष्य रूप वाला चीजें दिखाई दे। कवरिंग

00:39:20:02 किस चीज की होती है? वो अपनी माया शक्ति अचिंत शक्ति। नहीं माया का मतलब तो प्रकृति होता है ना। पूरी शंकराचार्य का तो वीडियो है इसके ऊपर। पूरी शंकराचार्य ने बोला हुआ है ना इसके ऊपर कि माया का मतलब प्रकृति होता है। प्रगति वही जिससे संसार बना हुआ है। ये ब्रह्मांड बना हुआ है। अचंत माया का मतलब अचंत शक्ति भी है। ये भी पूरी शंकराचार्य ने बोला है। वो है लेकिन जब हम उससे किसी वस्तु का बनना बताते हैं। कार्य रूप क्या है? मैं बताऊं आपको बात क्या है? मैं सरल शब्दों में आपको बताऊं कि कोई व्यक्ति अभी देख रहा है कि मेरे सामने आसमान है। ठीक है? अब भगवान ने क्या किया? ईश्वर ने क्या किया? यहां पे एक क्या कहते हैं? कैरेक्टर बनाया जो हमारी आंखों का विषय है। उसके पार हम नहीं देख सकते। उस आसमान को नहीं देख सकते। वो हमारी आंखों के रास्ते में आ रहा है ऑन द वे। ठीक है? वो उसने अपनी अचिंत शक्ति से बनाया। जैसे उसने पूरा संसार अचिंत शक्ति से बनाया ऐसे उसने वो कररेक्टर बनाया। उस कैरेक्टर के माध्यम से वो कररेक्टर वो कररेक्टर जो है जैसे क्या कहते हैं ये जो श्रवण इंद्री होती है उसका अभिवंजक होता है ना कान का ये चमड़ा तो ऐसे ही वो जो कररेक्टर होता है वो इस सर्वशक्तिमान जो व्यापक ईश्वर है उसका अभिवंजक संस्थान होता है। देखिए इसमें

00:40:35:15 जो मैं नहीं समझ पा रहा हूं वो क्या है पॉइंट यही है कि जैसे ईश्वर है ठीक है आपने बोला अचिंत शक्ति से बनाया ये जो अचिंत शक्ति है ये क्या है ये संसार का निमित्त है जो उपादान है वो क्या है वो माया शक्ति है ठीक है उपादान माया शक्ति है और जो जिसे आप अचिंत शक्ति कह रहे हैं वो उसका निमित्त रूप होता है। ठीक है? अब इसके अंदर पॉइंट क्या आता है? पॉइंट ये आ रहा है कि जिसे मैं देख रहा हूं जो मेरी आंखों का विषय बन रहा है। ठीक है? लौकिक दृष्टांत अब जैसे समझिए इस चीज को कि लौकिक दृष्टांत में मैं तो देखने की वस्तु किसे जानूंगा? देखने की वस्तु मैं उसे जानूंगा जैसे अगर मैं किसी इंसान को देखने की बात कर रहा हूं या मैं किसी जानवर को देखने की बात कर रहा हूं। अल्टीमेटली मैं उस जीव को देखने की बात नहीं कर रहा हूं। मैं उसके शरीर को देखने की बात कर रहा हूं। है ना? मैं ये बोलता हूं कि भाई मैं मैंने शिवश जी को देखा। ठीक है? मैं अपनी फोटो देख रहा हूं। तो मैं अपनी फोटो में अपने जीव को थोड़ी देख रहा हूं। मैं तो आंख नाक मुंह देख रहा हूं। अगले जन्म में मैं कोई और बनूंगा। मेरे आंख ना मुंह चेंज हो जाएंगे। है ना? मैं शरीर को देख रहा हूं। तो जो मैं ईश्वर को देख रहा हूं या अवतार मान लो अवतार मेरे सामने है। मैं उस अवतार को देख रहा हूं। तो जिस अवतार को मैं देख रहा हूं क्या ये ऐसा शरीर धारण करता है या क्या है? वो मैं बता रहा हूं। देखिए ये जो शरीर है ये भौतिक शरीर है सारे सारे के सारे। ठीक है?

00:41:50:28 वो जो शरीर है वो परम क्योंकि जहां जहां पूरे में आपको जो भौतिकता दिख रही है ना जहां पे भौतिकता नहीं दिख रही वहां आपको क्या दिखेगा जहां पे भौतिकता नहीं दिख रही वहां आपको क्या कुछ जहां भौतिकता नहीं दिख रही है वहां आपको क्या दिखेगा वहां परम तत्व दिखेगा नहीं क्यों दिखेगा परम तत्व में कुछ कुछ तब नहीं दिखेगा जब पूरे में ही भौतिकता ना दिखे मगर जब आसपास बगल में भौतिकता दिख रही होगी तब आपको क्या दिखेगा जैसे कि हम आकाश को अगर खुले में देखें तो आकाश का कोई स्ट्रक्चर नहीं दिखेगा। परंतु जब हम बंद कमरे से देखेंगे खिड़की खोल के तो बंद जो आकाश का एक स्ट्रक्चर दिखेगा चौकोर वो आकाश का अवकार नहीं दिखेगा दिखेगा ना मैं बताता हूं कैसे नहीं दिखेगा मैं बताता हूं आपने जो देखा आपने आकाश का आकार नहीं देखा क्यों क्योंकि आकाश में रूप गुण है ही नहीं इसको समझिएगा दार्शनिक चर्चा है थोड़ी बहुत दर्शन के टर्मिनोलॉजीस मैं यूज़ करूंगा आप कोशिश करना अगर आप शंकराचार्य के शिष्य हो आपको समस्या नहीं होगी इसमें अब बात आती है कि आकाश में रूप गुण है ही नहीं ठीक है? चाहे मैं उसको टेलीिस्कोप से देखूं, माइक्रोस्कोप से देखूं, खिड़की से देखूं, बंगले से देखूं, कहीं से देखूं, उसमें रूप नहीं वो नहीं दिखाई देगा। एक बात। ठीक है? अब जो मुझे चौकोर दिख रहा है वो क्या दिख रहा है? वो खिड़की दिख रही है। खिड़की की आउटलाइन दिख रही है। उस खिड़की की आउटलाइन से जो मैं देख रहा हूं ना वो रियल में क्या है?

00:43:06:09 वो मेरे को बादल दिख रहा है। वो मेरे को बाहर का स्ट्रक्चर दिख रहा है। है ना? वो जो मुझे है ना? वो स्पेस वो स्पेस दिख ही नहीं रहा। ये मत बोलिए कि स्पेस दिख रहा है। स्पेस दिखता ही नहीं है। स्पेस आंखों का विषय नहीं है। जो मुझे दिख रहा है वो क्या दिख रहा है? वो मुझे क्या दिख रहा है? वो जो लाइट टकरा रही है, रिफ्रेक्शन हो रहा है, वो रिफ्रेक्शन की वजह से मुझे कलर दिख रहा है। है ना? स्पेस नहीं दिख रहा, आकाश नहीं दिख रहा। क्योंकि उसमें रूप गुण नहीं है। उसी प्रकार अगर ईश्वर में रूपगुण नहीं है, रूपगुण प्रकृति में है। ठीक है? इतना स्ट्रक्चर बना लो ईश्वर तो फिर भी नहीं दिखेगा ना। दिखेगा क्या आपको? आपको वो दिखेगा जो आउटलाइन आपने प्रकृति से बनाई है। तो वो जो वो जो है ना वो जो वो आप तत्व से उसे जो भी माने मगर जहां पर प्रकृति है चारों ओर और उसमें बीच में एक स्ट्रक्चर से जो हमें दिखाई दे रहा है मनुष्य जैसा वही ईश्वर का अवतार है। उसको आप उसको क्या है व्यवहार अब जैसे पृथ्वी भी वास्तव में तो गोल है। मगर हमें चपटी भी दिख रही है और हमारा व्यवहार भी उसके साथ चपटे जैसा है। तो ऐसे ही व्यवहारिक रूप से जो ये जो हमें आकाश दिख रहा है कि नहीं दिख रहा है वो तात्विक व्याख्या है कि वो रूप रंग मैं पृथ्वी वाले देता हूं आपको। एक एक मिनट एक मिनट एक मिनट। तो जो आप जो खाली स्पेस है ना वो जो जहां से नहीं दिख रहा है मगर बंद कमरे की खिड़की से जो हमें एक स्ट्रक्चर में वो व्यवहारिक जो क्या कहते है बाहर का आसमान दिख रहा है प्रतीत हो रहा है वही

00:44:21:10 ईश्वर का अवतार है। प्रतीत होना ईश्वर प्रकट हो गया।

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00:44:25:13 जैसे हमारे ठीक है लेकिन रूप का विषय जो आप बोल रहे हो ना मैं उसको मगर तात्विक तात्विक यही है कि हां ईश्वर ईश्वर पूरा का पूरा वहां प्रकट नहीं हो गया क्योंकि पूरा का पूरा प्रकट तो ईश्वर हो ही नहीं सकता तात्विक विषय तो यही है मैं मैं इतना समझ रहा हूं कि आप उसको सर्व्यापक मानते हुए भी उसका अवतार मान रहे हो इतना मुझे समझ में आ रहा है इसमें मुझे दिक्कत नहीं है जहां मैं समझना चाह रहा हूं मैं ये समझना चाह रहा हूं कि जब आप ये वर्ड यूज़ कर रहे हो ना कि वो आंखों का विषय बन रहा है। ठीक है? इसका क्लियर मतलब क्या हुआ? आंखों का विषय कैसे बन सकता है कोई वस्तु जिसमें रूप आंखों का देखिए मैं मैं और इसको क्लियर कर दूं वो एक मान लीजिए एक ऐसा कररेक्टर डेवलप कर रहा है इस पूरे भौतिक संसार के बीच में जिसके द्वारा वो आपको आसानी आसानी कर देता हूं मैं इसमें थोड़ी सी जैसे इसको ये ले लीजिए अगर मैं ये बोलता हूं कि निराकार सर्व्यापक ईश्वर में ऑलरेडी रूप गुण है बस वो हमें दिख नहीं रहा एनी कॉज ड्यू टू एनी कॉज किसी भी कारण की वजह से नहीं दिख रहा ठीक है लेकिन उसके अंदर रूप गुण पहले से ही अगर मैं ये अजम्शन लेकर के चलता हूं। ठीक है? अव्यू नहीं नहीं रूप गुण क्यों मानेंगे उसमें? अजंप्शन क्यों मानेंगे? अच्छा ठीक है। चलिए रूप गुण हटा देते हैं। तो जब उसमें कुल मिला के देखिए ये

00:45:30:19 जो अवतार दिख रहा है ना आप ये कह सकते हैं कि हां भाई वो क्या कहते हैं वो आकाश नहीं दिख रहा है क्योंकि आकाश तो है ही ऐसा। मगर जो आकाश को ना आकाश को देखने में उस बंद कमरे की वजह से जो बाधा आ रही है उसके कारण व्यवहारिक रूप से जो खिड़की के द्वारा हमें आकाश दिखाई दे रहा है वही आकाश खिड़की आकाश वो हमें जो है वार्ता व्यवहार में कहना पड़ेगा ना मैं अभी आपसे भी कहलवा सकता हूं कई चीजों में कई चीजों में व्यवहार में आप भी कहते हैं वही मैं कह रहा हूं ना व्यवहारिक सत्य को जो है आप पारमार्थिक सत्य के आधार पर काटते हैं आर्य समाज के देखिए अभी जैसे अगर आपको जैसे मैं बताऊं जैसे मैं बताऊं जैसे जैसे मैं बताऊं जैसे मैं बताऊं मैं आपको उदाहरण दे रहा हूं ना उदाहरण दे रहा हूं ये बताइए ईश्वर सर्वव्यापक है हम ठीक है अब ईश्वर सर्व्यापक है तो इसका मतलब उसका ज्ञान भी सर्वव्यापक है हां जी हां जी बिल्कुल ठीक है तो फिर वो किसी देश काल परिस्थिति में क्या उसके अंदर आया ऋषि के अंदर ऋषियों के अंदर अंतकरण नहीं दयानंद जी ने तो लिखा कि आया आता है ज्ञान देता है ईश्वर

⬜ Not used yet · 00:46:34:21 – 00:48:17:06 (1:42)

00:46:34:21 अच्छा इसमें एक बात आती ज्ञान देता है किस सेंस में आपने पढ़ा आधा अधूरा पढ़ लिया उसको पूरा समझा देता हूं क्या चलिए बात ये है अब देखिए पॉइंट ये है कि ईश्वर है ईश्वर ने अपना ज्ञान सबके लिए प्रकाशित कर रखा है ठीक है वेद में भी एक मंत्र आता है जिसका अर्थ यही आता है कि जो ईश्वर का जो ज्ञान वेद रूप है वो सबके मन में पहले से ही है ठीक है उदाहरण मैं समझा देता हूं मान लो कोई खुला मैदान है ठीक है वहां धूप पड़ रही है वहां पे दो आदमी एक अंधा है एक स्वस्थ नेत्रों वाला है ठीक है अब जो सूर्य का प्रकाश जा रहा है वो अंधे की आंख में भी जा रहा और वो स्वस्थ नेत्र वाले के आंख में भी जा रहा है। ठीक है? लेकिन जो अंधा है वो नहीं देख पा रहा। जो स्वस्थ नेत्र वाला है वो देख ले रहा है। अब इसमें ये कहना कि नहीं जो ज्ञान है वो प्रकाश जो है वो है ही नहीं। ऐसे नहीं है। गड़बड़ी कहां है? गड़बड़ी रिसीवर में है। अब पॉइंट इसका है कि उसमें वो पूरा सुनिए। गलत जा रहा है। गलत जवाब दूसरे मुझे जवाब दे रहे हैं। दूसरे प्रश्न का आप मुझे करेक्ट कर दीजिएगा। एक बार मैं पूरा देता हूं उत्तर। अब इसमें पॉइंट क्या है? पॉइंट ये है क्योंकि वो ज्ञान मेरे मन में ऑलरेडी है। ज्ञान मेरे मन में भी ऑलरेडी है। आपके मन में भी ऑलरेडी है। ठीक है? लेकिन अब मेरे जो अंधकार है, ठीक है? अंधकार रूपी जो मेरे मन में अंधकार है, उसको मैंने तपस्या से दूर किया तो वो ज्ञान मैंने ग्रहण नहीं किया। अब पॉइंट ये है कि ईश्वर में ज्ञान था तो उसने दिया। अगर आप इस चीज को रिलेट

00:47:49:22 करते हो कि उसी प्रकार जैसे तपस्या करने से ज्ञान ग्रहण हो गया। वैसे तपस्या करने से रूप दिख जाता है। अगर आप ये बोलते हो। तो आपको मानना पड़ेगा कि उसके अंदर रूप गुण है। भाई जैसे ज्ञान उसके अंदर था उसने प्रकट किया। हमने एक्सेस कर लिया। वैसे आपको ये मानना पड़ेगा कि रूप गुण उसमें था। उसे प्रकट ऑलरेडी प्रकट किया मैंने आप दूसरे प्रश्न का उत्तर दे दूसरे प्रश्न का उत्तर दे रहे हो आप देखिए जो आपने तात्विक व्याख्या कही है ना ज्ञान के प्राप्त होने की अथवा ना प्राप्त होने की वो तो मैं भी मान रहा हूं कि हां बिल्कुल सही बात है मगर

00:48:17:06 वहां पर क्यों कहा कि भैया आता है ज्ञान होता है ये क्यों कहा जब ज्ञान था तो जब ज्ञान से कोई जगह रिक्त है ही नहीं तो फिर ज्ञान का आना जाना होना ये किसी विशेषत्ल परिस्थिति में तो मैं मैं यही तो कह रहा हूं कि मैं यही कह रहा हूं जब आया अरे आप आप फिर आप ही बोल रहे हो जब मैं बोल रहा हूं तो बोलने दो ना मेरा प्रश्न ये है कि जब ज्ञान आया गया नहीं तो उसके लिए आने जाने वाले शब्दों का व्यवहारिक प्रयोग क्यों हो रहा है होता है पहली बात तो ग्रंथों में भी होता है ठीक है मैं बोल देता हूं पहली बात तो ज्ञान होने की बात है ज्ञान के आने जाने की बात नहीं

⬜ Not used yet · 00:48:58:21 – 00:49:53:06 (0:54)

00:48:58:21 होती आने आने जाने का भी हो रहा है आने जाने का भी हो रहा है। शब्दों का ज्ञान इसी को अब वो प्रमाण मैं आपको दे दूंगा। आपको प्रमाण स्वीकार करो ना। देखो उस चीज को मैंने पढ़ा है। मैं उसका ठीक है तो रुको तो रुको अभी मैं दिखा देता हूं। ज्ञान होता है। ठीक है मैं दिखा देता हूं। वेट करो आप। आना जाना सिद्ध करो। ज्ञान का आना जाना सिद्ध करो आप। चलो ज्ञान होना क्यों हो रहा है? यही बता दो व्यवहार। बताओ। ज्ञान होने में आना जाना कहां आ गया? तो आना जाना कैंसिल कर दो। अभी मैं पूछ रहा हूं होना क्यों हो रहा है जब वो जब वो जब वो पहले से ही है जब वो पहले से ही है तो हो क्यों रहा है

00:49:41:03 एक सेकंड रुको हम हां बताओ अब पॉइंट यही है जब जब वो जब वो जब वो पहले से

00:49:53:06 ही है तो किसी विशेष देश काल परिस्थिति में वो हो क्यों रहा है वो तो है व्यक्ति ज्ञान ही होना चाहिए क्यों हो अब

⬜ Not used yet · 00:50:01:03 – 00:53:46:00 (3:45)

00:50:01:03 पॉइंट इसके अंदर देखो इसका पॉइंट ये है समझा देता हूं ना मूल जो विषय था आपका आना जाना वो तो कट चुका है ऑलरेडी कट चुका है नहीं आना जाना आने जाने कोई आप आप देखिए जैसे आपने जो मेरी बात आप समझ नहीं पाए थे ना जैसे अभी शुरू में मेरी बात नहीं समझ पाए थे ना कि वो स्पर्श का विषय है और फिर आपने कहा कि मैं प्रकृति हूं मिट्टी मिट्टी को पहले आपने कर दिया था सुनिए मैं वैसे नहीं कर रहा हूं आप आप मेरी बात को समझ नहीं पाए कि आने जाने का मतलब मैं वही कह रहा हूं ना मैं वही कह रहा हूं आप बोलोगे जो जो आप शब्द उस शब्द को लेकर के ही आप तो मैं उसको क्लियर कर रहा हूं तो मैं उसको क्लियर कर रहा हूं और बाकी मैं आपके लोगों के द्वारा गलत बोला नहीं आपके लोगों के द्वारा वो स्वीकार रहे आपकी किताब के द्वारा स्वीकार है किताब आप टाइम दोगे मैं दिखा दूंगा दिखाओ ना मेरे को दिखाओ कहां स्वीकार्य है तो ठीक है रुको अभी मैं दिखाता हूं दिखाओ

00:50:50:16 दिखाओ कहां लिखा है ज्ञान आ रहा है और जा रहा है अरे ज्ञान नहीं तो मैं कुछ ना कुछ ऐसा जरूर दिखा दूंगा जो पहले से था और ज्ञान का दिखाओ जिसका क्लेम किया उसका दिखाओ। देखो ऐसा नहीं हो रहा है। बात यह है कि जो चीज आज आ नहीं रही है उसका आना जाना मैं दिखा दूंगा आपको। दिखा दूंगा। आपने हमारा सिद्धांत क्या है? किस चीज पे बहस हो रही है? कौन है? बहस बहस यहां पे मामला अटका हुआ है कि जो चीज पहले से है उसका आना जाना। दिखाओ। मैं दिखा दूंगा आपको। आना जाना। दिखाऊं? क्या कह रहे हो? दोबारा बोलो। एक बार मैं सुन नहीं पाया था। जो चीज पहले से है उसका आना जाना मैं आपके आपकी किताब में दिखा दूंगा। आपने ज्ञान की बात की जिसका क्लेम किया उस अरे भाई ज्ञान की बात क्यों कही है? ज्ञान की बात क्यों कही है? ज्ञान तो एक उदाहरण है। मैं तो आपको ये सिद्धांत समझा रहा हूं जो पहले से था उसका किसी विशेष देश काल परिस्थिति में क्यों हो रहा है वो ज्ञान किसी को? अच्छा यानी जो सिद्धांत में ज्ञान ज्ञान और सिद्धांत का एक उदाहरण है। अब आपको खामखा उसमें बड़ा बड़ी छोटी बात करनी हो बात एक अलग है। ज्ञान तो उस सिद्धांत का एक उदाहरण है। आवाज आ रही है मेरी? हेलो हम्म हम्म हम्म कह रहे हो ये बात शुरू कहां से हुई थी? बात शुरू ये हुई थी कि जब ज्ञान पहले से है और आपने अंधे वाला उदाहरण ये वाली बात कहां से शुरू हुई थी? कौन

00:52:05:20 सी? ये ज्ञान वाली बात कहां से शुरू हुई थी? किस पॉइंट को सिद्ध करने के लिए वाली बात शुरू हुई थी? जब हम लोग ये बाते कर रहे थे कि क्या कहते है वो? ये अवतार एक जगह कैसे दिखाई दे सकता है? हां तो पॉइंट ये है ना कि अवतार ये जगह कैसे दिखाई दे रहा है? तो इसमें मेन पॉइंट यही है। मेन पॉइंट इसके अंदर यही है कि इसमें यहां जो ये जो दो कन्फ्यूजन इसके अंदर आ रहा है कि या तो प्रकृति दिखाई दे रही है। हां मैं बताऊं कैसे हो रहा है। जब मैंने उसमें आसमान का उदाहरण दिया था ना मैं मैं मुझे याद आ गया। मैंने जब उसमें आसमान का उदाहरण दिया था तो उसको आसमान को देखने वाली बात को आपने कहा था भाई हम उसे आसमान को नहीं देखते हैं। वहां पर तो हम खिड़की देख रहे होते हैं। खिड़की के कारण जो बाधा उत्पन्न हो रही है वहां दीवारों से उसके कारण ऐसा लगता है कि हमने आसमान को देखा। आसमान को तो देखा नहीं। ठीक है? तो मैंने आपको बताया कि आपके यहां भी व्यवहारिक रूप से ऐसी बातें होती है कि जो चीज पहले से थी हैं। सब जगह उसके विषय में भी व्यवहारिक रूप से ऐसे शब्द उपयोग में लिए जाते हैं कि आया और गया। अब उसमें मैंने उदाहरण आपको ज्ञान का दे दिया। मगर ऐसी और भी बहुत सी चीजें हैं जो थी पहले से ही और उसके बारे में लिखा होगा। हो सकता है हो सकता है ज्ञान के बारे में भी लिखा हो। मैंने अभी देखा नहीं है। मैं उसके लिए प्रिपेयर नहीं था। हो सकता है ज्ञान के बारे में लिखा हो। मगर ऐसे तत्व

00:53:20:21 जो पहले से हैं उनके बारे में आपके यहां पर व्यवहार में उनका प्राप्त होना, उनका होना इत्यादि इसी को मैं आना जाना कह रहा हूं। और उनका आना जाना हुआ है। ठीक है। ठीक है। अब इसका पॉइंट डिस्कस करते हैं। पॉइंट ये है कि पॉइंट पॉइंट ये है। मेन पॉइंट सुनो ना। एक मिनट एक मिनट मैं पॉइंट आपको याद दिला दूं। पॉइंट ये है कि जब वो पहले से था तो उसका होना क्यों लिखा हुआ है? ये बताइए। पॉइंट ये

00:53:46:00 नहीं है। पॉइंट ये नहीं है। पॉइंट मैं समझा देता हूं। क्या है? पॉइंट ये है पॉइंट ये है इसके अंदर कि वो रूप का विषय कैसे बन रहा है? बात चली ना अवतार की धारणा के ऊपर। अब सुनना पूरा सुनना बीच में ठोकना नहीं पॉइंट ये है पॉइंट सुनिए सुनिए पॉइंट ये है सुनिए सुनिए सुनिए नहीं आप आप कैसे मना कर सकते हो काम करो आप ही बोल लो आप कैसे मना कर सकते हो भाई पॉइंट आपने एक पॉइंट बताया पॉइंट ये है कि वो क्या कहा आपने आंखों का विषय कैसे बन सकता है ना ये कहा ना आपने जबकि पॉइंट ये है कि क्या हम व्यवहार में वो तात्विक उसके द्वारा तात्विक परिभाषा के कारण क्या हमारे व्यवहारिक शब्द दूसरे आते हैं कि नहीं व्यवहार में उसी को हम दूसरी चीजें बोलते हैं कि नहीं। जैसे कि मैंने फिर वहां पर उदाहरण दिया जैसे कि ज्ञान पहले मैं इसको आगे

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00:54:35:20 बढ़ाओ। इसको आगे बढ़ाओ आप रुको। नहीं आप क्योंकि वहां पर उस पॉइंट को बदल रहे हैं ना। आप अभी ये आपको अभी ये बताना है कि वो जो आप मेरी बात सुनोगे तब तो पता चलेगा कि मैं क्या कह रहा हूं। बिना सुने आपने पॉइंट आप पॉइंट दूसरा ला रहे हो। आपने कहा आंखों का विषय कैसे बनता है। अभी हम अगर मैं दूसरा पॉइंट लाऊंगा फिर आप बात करना। तो मैं पॉइंट क्लियर कर दूं दोबारा से। फिर आप बताइएगा। ऑलरेडी बहुत आप बोल चुके। नहीं पॉइंट क्लियर आपने जब पॉइंट गलत बताया तो मैं उसमें क्लियर करके पॉइंट आपने कुछ बोला है मेरे को उसका रिसोंस देने दो आप रिसोंस दीजिए ना आपने जो आपने अभी जो रिसोंस दिया था उसकी शुरुआत में आपने हेडलाइन आपने हेडलाइन बदल दी मेरी मेरी हेडलाइन है बस एक एक पंक्ति की हेडलाइन है रुके थे आप बोल के रुके थे जब मैं उत्तर दे रहा था मेरे बीच में कूद गए आप तो मेरे को तो आप भाई आप हेडलाइन बदल के उत्तर दे रहे हो ना हेडलाइन बदल के कर देना ना आप आप करेक्ट कर देना अगर मैं गलत बोल रहा हूं उत्तर देना आ रहा है तो जो उतनी देर में आप जो चीज़ बोल दोगे उनका क्या करूंगा फिर मैं उनका खंडन करूंगा फिर विषय ऐसे ही बहुत कुछ आप भी तो बहुत कुछ बहुत से ऐसी बातें बोल जिससे कोई रेलेवेंट नहीं है आप अभी भी तो बहुत कुछ बोल रहे हो मैं टोलेट कर रहा हूं आप मुझे बताओ कौन सी चीज बोली जो आपने पूरा जो आपने चार बार रिपीट किया वो यूज़लेस है कोई मतलब नहीं क्योंकि वो सेंसिंग क्योंकि वो हमारे कंटेंट से रिलेटेड बात नहीं थी वो बताइए वो चार बार उसका रिपीटेशन अलग बात है और जो हमारे

00:55:50:21 संदर्भित ना हो वो अलग बात है अभी जो आपने जितना पूरा बोला ना उसका रेलेवेंस नहीं कैसे नहीं था? बताइए कैसे नहीं था? बताइए। हां। तो भैया उसका उसका रिपीट उसका उसका रिपीटेशन रेलेवेंट मत बताइए। वो रेलेवेंट नहीं था ये बताइए। हम अब मैं समझा दे रहा हूं। समझो अब जितना बार-बार कह रहा हूं ना आना जाना आना जाना। ठीक है? मैं कह रहा हूं आने जाने का विषय ही नहीं है।

00:56:13:03 पॉइंट यहां पे कहां अटक रहा है? पॉइंट इस पे अटक रहा है। अभी हमारी बात इस पे चल रही है कि अवतारवाद की धारणा क्या है? ठीक है। नहीं मैं बता फिर आप फिर आप चेंज कर रहे हो। फिर आप इसको बोलने नहीं। उस धारणा उस विषय के अंतर्गत बात करते करते हम एक जगह आकर के अटके हैं। मैं आगे खिड़की हूं। मेरे को सुन लो। मैं आगे

⬜ Not used yet · 00:56:32:12 – 00:57:14:14 (0:42)

00:56:32:12 चलिए चलिए बताइए आगे बढ़िए आगे बढ़िए आप क्या बोल रहे हो? मेरे को मेरे दो ना मेरे बढ़िया ठीक है। पढ़िए। पॉइंट इसके अंदर ये है कि जब हम बात कर रहे है की अवतारवाद की धारणा क्या है? अवतारवाद की धारणा के अंदर इंपॉर्टेंट पॉइंट इसके अंदर ये आ जाता है कि हम तो आपने बोला कि वो अपने आप को आंखों का विषय बना लेता है। अब मैंने आपसे पूछा कि आंखों का विषय कैसे बनाता है? ठीक है? तो इसमें दो पॉइंट आते हैं कि मैंने ये एजम्पशन लेने का कोशिश किया कि एक बार को हम मान लेते हैं कि चलो उसके अंदर रूपगुण है तो वो रुगण क्या करता है वो किसी कारण से रुग गुण दिखता नहीं बाद में हमें दिखा देता है तो वो कैसे दिखा देता है उसको एक्सप्लेन कर दो ठीक है वो प्रोसीजर क्या है वो आप समझा दो तो आपने मना कर दिया कि नहीं नहीं हम ये एजम्पशन नहीं लेंगे हम हमारे सिद्धांत नहीं है आपने ये मान लिया ठीक है फुल्ली एक्सेप्टेड कोई इशू नहीं है तो सेकंड क्या पॉइंट आ जाता है सेकंड जो मैं समझ पा रहा हूं सेकंड क्या ये आ जाता है

00:57:14:14 कि ईश्वर क्या करता है शरीर धारण करता है ठीक है जैसे जीव शरीर धारण करता है एक वीडियो में आपने एक लाइव में बोला भी था एक लाइव लाइव में आपने मेरे से बोला भी था कि भाई अगर जीव शरीर धारण कर सकता है तो ईश्वर सर्वशक्तिमान होके शरीर धारण क्यों नहीं कर सकता? एक लाइव में आपने ये बात बोला भी था जो आपके सर्वशक्तिमान वाले चैनल पे डाला हुआ है। है ना? अच्छा और जो गीता से आप प्रमाण देते हो कि सजाम्यामि जो मैं अपने आप का सृजन करता हूं। ठीक है? तो उसमें पॉइंट कि अगर अपने आप का सृजन करेगा तो उसमें फंस जाओगे। भाई जो जिसका सृजन जो सृजित अभी-अभी बना है यानी बनने से पूर्व नहीं था। तो जो सृजित शरीर हुआ निराकार रूप में था साकार रूप में सृजित हुआ नया नया खुद को बनाया तो फिर वो अनादि स्वरूप नहीं रहेगा। तो अनादि नहीं रहा तो अनंत भी नहीं रहा अनंत नहीं रहा तो फिर नित्य नहीं रहा तो नित्य स्वरूप नहीं ईश्वर का ही स्वरूप नहीं है ईश्वर क्यों बोल रहे हो कुर्सी बोल दो उसे कुर्सी बोलते हो ना अभी बनी है नष्ट हो जाएगी कल परसों उसमें उसमें नित्य वाला दे दूर नित्य वाला उत्तर दे दूं मैं मैं पूरा कर देता

⬜ Not used yet · 00:58:03:27 – 00:59:50:28 (1:47)

00:58:03:27 हूं अब इसमें बात क्या है तो हमें ये मानना तो ये थोड़ा सा ज्यादा लॉजिकल हो जाता है आपने अभी जो बात मैं एक बात आपको बता दूं आपने अभी जो बात कही ना ईश्वर के लिए कि वो पहले नहीं था हां ये बात सत्य है कि वो पहले नहीं था अब मैं इस पर उत्तर दे दूंगा कि ऐसे ईश्वर कहते हैं। आप मुझे यहां लाना चाह रहे थे क्या कि मैं उसको ये कह दूं कि वो नित्य नहीं है। यही लाना चाह रहे थे। नहीं नहीं जो कह रहा हूं देखो आप कह लीजिए मैं मैं आपको बता दूं कि हम भी ये मानते हैं कि वो रूप धारण करता उससे पहले वो रूप नहीं था। हम भी यही मानते हैं। मैं आपको बता रहा हूं। चलिए। ठीक है। अब इसमें अब जो इसमें ज्यादा लॉजिकल एप्रोच समझ में आता है वो ये समझ में आता है कि ईश्वर शरीर धारण करता है। ठीक है? अब जो उसने क्या किया? अब शरीर धारण कर रहा है। ठीक? अब वो उसको कुछ भी काम करना तो उसने अपने लिए एक शरीर बना लिया और शरीर को धारण करके वो अपना चलाता वलाता है जो भी करता है। ठीक है? एक हम ये अप्रोच लेके चलते हैं। तो जो हमें जो आंखों का विषय बनेगा वो शरीर हमें आंखों का विषय बनेगा। ठीक है? अब जैसे आपने वो बोला ना कि खिड़की वाला है ना कि खिड़की वो हमें ऐसा भास हो रहा है कि हम आकाश को देख रहे हैं। रियल में नहीं देख रहे हैं। उसी प्रकार से जैसे मैं आपको देख रहा हूं। ठीक है? आप क्या हो? आप तो जीव हो। भाई मैं आपको थोड़ी देख रहा हूं। मैं तो आपके शरीर को देख रहा हूं ना। तो उसी प्रकार से हम यह भी बोल सकते हैं कि हम

00:59:19:08 कि मैं एक शरीर को देख रहा हूं। कृष्ण जी का, राम जी का जिन्हें आप अवतार कहते हो उनको मैं शरीर देख रहा हूं। इनडायरेक्टली मैं उन्हें या ईश्वर को देख रहा हूं। अगर ये मेरी जो मैंने भी समझा है अगर एज इट इज अवतार यही है तो आप हां बोल दो। फिर हम आगे बढ़ते हैं। नहीं है तो आप इस आप अपनी व्याख्या कर दो। शरीर देख रहा हूं। और ईश्वर को नहीं देख रहा हूं। इनडायरेक्टली ईश्वर को देख रहा हूं। हम जैसे इनडायरेक्टली मैं जीव आप जीव हो ना तो इनडायरेक्टली मैं आप ही से व्यवहार कर रहा हूं। लेकिन कहने का मतलब ये कह सकते हैं कि

00:59:50:28 ईश्वर का आभास हो रहा है। ईश्वर का आभास हो रहा है। सीधे ईश्वर को ही नहीं देख रहे हैं। ये कह सकते हैं। जैसे जैसे जीव वाले में हो रहा है। हां। जैसे जीव में हो रहा है। जैसे आसमान में हो रहा है। जैसे सब में हो रहा है। जैसे जीव निराकार है ना। जैसे जीव आप निराकार हो। जीव आप जीव हो। जीव निराकार है। ठीक है? तो मैं भाई आपका रूप नहीं है। मैं कैसे देखूंगा? मैं आपको देख रहा हूं यानी आपके शरीर को देख रहा हूं। उस क्या जो अवतार की इस धारणा को जो मैंने समझा है जैसे एग्जांपल कहते हैं राम कृष्ण अवतार है तो मैंने राम कृष्ण में क्या देखा भाई रामकृष्ण का शरीर देखा जैसे मान ये रामायण में रामायण में वर्ण है ना शरीर सब लिखा हुआ है ना जीव और ईश्वर के रूप में केवल इतना अंतर है कि जीव जो है अविद्या से ढका हुआ शरीर है और जो ईश्वर है वो अविद्या से हटा मगर माया के संयोग के बिना कोई नहीं बनता है माया के माया के संयोग के बिना वो नहीं बना है। माया के संयोग से ही वो भी बना है। क्योंकि अगर अगल-बगल माया नहीं होगी तो हमें उसका स्ट्रक्चर नहीं दिखेगा। समझ रहे हैं ना? यानी माया इक्व टू प्रकृति। प्रकृति नहीं होगी तो स्ट्रक्चर नहीं दिखेगा। जो दिख रही है वो माया है। है ना? यानी यानी अगर हम इसे सामान्य भाषा में बोले इसे ज्यादा कॉम्प्लेक्स ना बनाए। ठीक है?

01:01:06:19 अल्टीमेटली कहने का अर्थ यह है कि जैसे जीव शरीर धारण करता है वैसे ईश्वर भी शरीर धारण करता है। उसी को अवतार बोलते हैं। बस इतना है कि वो माया से बद्ध है। जीव और वो माया से मुक्त है। जो ईश्वर का अवतार है। जो ईश्वर का अवतार है वो माया से मुक्त है। जी। ठीक है। ये एक नोटिसबल। यानी अभी हमारे पास में ये बहुत ही चलिए। इतनी बातचीत होते इतनी क्लेरिटी स्पष्ट हो चुकी है। अवतारवाद में कि अवतारवाद की धारणा क्या? धारणा ये है कि भैया जैसे जीव धारण कर रहा है तो वो कर्मों के बंधन से कर रहा है। ठीक है? और वो अविद्या ग्रस्त है। जीव अविद्या ग्रस्त है। जो ईश्वर है वो अविद्या गग्रस्त है। जीव जो है जीव अपने मन से नहीं कर रहा है। जीव जो है बद्ध है इसलिए हो रहा है उसका और उसका कंट्रोलर कोई और है और जो ईश्वर है वो स्वयं से कर रहा है। स्वयं से कर रहा है। ठीक। बहुत बढ़िया बात। तो यानी इतना स्पष्ट है कि वो भी शरीर धारण करता है। चलिए ठीक है। अब अवतारवाद की धारणा पे हम आ चुके हैं। इतना क्लेरिटी आ चुका है। अच्छा अब हम सेकंड स्टेप पे अगले स्टेप पे बढ़ते हैं कि अवतार का लक्षण क्या है? जैसे जैसे समझिएगा कि मेरे सामने राम जी खड़े हैं। मेरे सामने रामपाल खड़ा है। ठीक है? दोनों में से ईश्वर का अवतार क्योंकि जीव और ईश्वर को तो मैं देख नहीं सकता। वो तो निराकार है। ठीक है? जो मुझे दिख रहा है वो शरीर है। तो इसमें लक्षण क्या

01:02:21:20 है कि राम जी या रामपाल दोनों में से ईश्वर का अवतार है कौन? यह मैं कैसे पता करूं? इसमें इसमें इसमें शब्द ही प्रमाण है। इसमें शब्द क्या लिखा है? इसमें असतो मा सद्गमया का जवाब दिया। जिसने हमारे जो अंदर की जो क्या कहते हैं जो वास्तविक उत्कंठाएं जिज्ञासाएं अपने को जानने की उसने जो ज्ञान दिया उसके बारे में सही सही डेफिनेशन बनाई उसके द्वारा निर्धारित किया जाएगा कि इसमें से कौन ईश्वर का स्वरूप है ईश्वर का अवतार है और कौन नहीं इसमें शब्द प्रमाण है जैसे कि जैसे कि अगर ईश्वर सर्वव्यापक है तो सब जगह ईश्वर है और दुनिया में सारी दुनिया सारे स्वर ईश्वर के ही है। ईश्वर कहीं से भी कहीं किसी से अलग नहीं है। तो ऐसे में हमने केवल एक प्रणव को ही उसका दतक क्यों माना? प्रणव को ही उसका वो क्यों माना? प्रतीकात्मक तो इसका निर्णय आएगा गूंगा भी बोल सकता है। वो तो एक अलग चीज हो गई। मगर ये कोई सिद्धांत थोड़ी ना गूंगा।

01:03:28:19 अगर कोई अगर कोई और ऐसा शब्द हुआ जो बोल सकता हो तो बोल सकते है अथो इति शब्द भी तो ईश्वर का है अथ भी तो इसी का है ईश्वर का ही है ना वेदों में आया क्यों नहीं उपनिषदों में अगर और अगर और कोई शब्द होगा जो गूंगा भी बोल सकता होगा तो उसको भी ईश्वर ईश्वर का वो मान लोगे क्या उसको प्रणव की जगह अरे शंकर भाष में मानो क्या बात कर रहे हो आप मैं वो नहीं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं अगर केवल एक तर्क से हम मानेंगे कि भैया वो गूंगा भी बोल सकता है इसलिए वो ईश्वर का देवता है उससे ईश्वर को वो वो लीजिए तो फिर हमें वहां पर ये जो भी शब्द गूंगा बोल सकता होगा जो भी ध्वनिया वो कर सकता होगा उसको भी अपनी पूजा में लेना पड़ेगा मगर वहां पर शब्द प्रमाण वहां पर हमारा शब्द प्रमाण मैं बात पूरी कर लो जो भी शब्द की बात नहीं है आपने ये बोला कि ओम को इतनाेंस क्यों दिया तो वो बात जो भी शब्द की बात नहीं है नहीं बात मैं बता रहा हूं आपने उसको तर्क दिया ना उसके पक्ष में उदाहरण के रूप में आपने प्रणव के पक्ष में अरे भाई मेरी बात पूरी हुई नहीं। आपने प्रणव के पक्ष में एक तर्क दिया है क्योंकि उसको गूंगा भी बोल सकता है। तो मैंने उसको बताया कि गूंगा और भी धनिया निकाल सकता है। फिर प्रणव ही क्यों तो उसके बारे में यही है कि उसमें शब्द प्रमाण है। तो फिर रामपाल के बगल

01:04:43:22 में श्री राम जी खड़े हैं। इसमें से कौन सा ईश्वर का अवतार है? कौन सा नहीं है? तो इसके लिए शब्द प्रमाण। अच्छा इसमें जैसे मुझे समझना है कि जैसे किसी जैसे किसी ने कॉपी में लिख के दिया मुझे। ठीक है? आपने मेरे को WhatsApp पे मान लो मैसेज भेजा कि दिल्ली में आप यहां हो। यहां पे एक व्यक्ति है। वो खड़ा है। आप उससे ये डॉक्यूमेंट ले लो। ठीक है? आपने मुझे बता दिया। उसका डिस्क्रिप्शन दे दिया कि फलाना फलाना ऐसा व्यक्ति है। पुलिस की वर्दी में खड़ा है। ऐसा-सा है। ठीक? अब मैं जब जाऊंगा उसके पास में तो मैं वेरीफाई तो करूंगा ना कि जिसका आपने लिखा है यह वही है या कोई और है। करूंगा तो जिन पैरामीटर से मैं वेरीफाई करूंगा वही पैरामीटर उसके लक्षण है। किताब में ठीक है। किताब में किसी व्यक्ति की बात की गई है। किताब में उसी व्यक्ति की बात की जा रही है। वो जिन मा जिन पैरामीटर से चेक होगा। ठीक है? उदाहरण के लिए मैं आपको समझाता हूं। किताब में तो यह भी लिखा है कि ईश्वर है। है ना? किताब में यह भी लिखा है कि ईश्वर सृष्टि करता है। नास्तिक को सिद्ध करने के लिए लक्षण बताते हैं ना? नास्तिक को सिद्ध करने के लिए तर्क देते हैं ना प्रमाण देते हैं। क्यों देते हैं? क्योंकि पॉइंट है उसी प्रकार से क्योंकि सामने वाला व्यक्ति ईश्वर को मान नहीं रहा है। तो जैसे ही सामने वाला व्यक्ति जब अवतार को नहीं मान रहा तो उसको बता समझने के लिए। ठीक है? इन ऑर्डर टू अंडरस्टैंड दोज़ थिंग्स। तो हमें क्या करना है? हमें बताना है कि लक्षण क्या है कि भैया मेरे सामने अगर अवतार

01:05:58:26 खड़े हो कि ये वही है। जैसे कृष्ण जी के समय में भी उनका एक डुप्लीकेट आया था। कुछ पंड्रिक कुंड्रिक कुछ नाम था उसका बोल रहा हूं मैं। तो वो भी आया था। वो भी वासुदेव पुत्र और बनके और वो मोर पंख लगा के चार हाथ ला के घूमता था। उसने भी अपने नकली भाई बलराम सब तो उसमें भी पहचान को लेकर के उसमें उसके भी बहुत चेले क्योंकि बहुत लोग भ्रमित हुए थे। उसके बहुत भक्त बने थे। युद्ध हुआ था उसमें वो मारा गया था। शायद भागवत में आता था। तो बात वही है कि जो यहां शब्द में लिखा हुआ है, शास्त्र में लिखा हुआ है तो वहां मैं वेरीफाई तो करूंगा ना तो मैं किन पैरामीटर से वेरीफाई करूंगा? वो जो लक्षण है वो है क्या? वो स्पष्ट कर। देखिए इसमें मैं बता दूं। एक कुछ पैराटर्स ऐसे हो सकते हैं कि भाई वो जैसे हमने मान लिया कि भाई तुम ये कर सकते हो पहाड़ उठा सकते हो या तुम यहां पर खड़े हो तुम दिल्ली में प्रकट हो सकते हो क्योंकि सर्वशक्तिमान है तो ऐसे हम लोग कह सकते हैं मगर अगर हम ये कहे कि भाई तुम सर्वव्यापक हो ये सिद्ध करो हम तुम सर्व्यापक हो ये सिद्ध करो हमें दिखाओ सर्व्यापक तो उसमें वो जो पैरामीटर है ना वो हमारे व्यवहार का विषय नहीं है पूरा का पूरा हम उसे जांच नहीं सकते इसलिए वहां पे हमें शब्द प्रमाण पे ही रुकना पड़ेगा तो आप आप जैसे पैरामीटर बता दो कि दो चार क्या है ऐसा ऐसा है वो बता दो किन पैरामीटर

01:07:14:09 से वो अवतार सिद्ध होगा तो मैं फिर उसमें जवाब दूं नहीं मैं तो मानता ही नहीं ना नहीं नहीं आप बताओ क्या वो ये क्या आप ये आप अपनी वो बताओ ना क्या ऐसा हो सकता है क्या ऐसा हो सकता है तो मैं जवाब दूं उसका देखो मैं अपनी किसी को ईश्वर मानने का एक किसी को ईश्वर मान लेने का एक ही पैरामीटर है अगर लक्षण की बात करें वो सर्वशक्तिमान हूं। मैं आपकी बात समझ गया। मैं देता हूं उत्तर इसका। अब देखो पॉइंट इसके अंदर क्या है कि जहां तक आपने बोला कि कुछ चीजें जैसे पहाड़ उठा सकता है इत्यादि इत्यादि कुछ ऐसे पॉइंट है जिसको हम उसके लक्षणों में घटा सकते हैं।

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01:07:50:04 ठीक है? क्योंकि सीधी बात है कि अगर जीव ने शरीर धारण किया है। ठीक है? एक है बद्ध जीव, एक है मुक्त जीव जिसकी मुक्ति के कगार पे है। दोनों के लक्षण जीव नहीं है। मुक्त ईश्वर है। जो मैंने बोला कि मुक्ति के कगार पे होगा। मैंने ये शब्द बोला। ठीक है? मुक्ति के जो कगार पे होगा ठीक है नहीं नहीं मुक्ति के कगार पे नहीं ईश्वर जो मुक्त है वो अवतार ले रहा है नहीं मैं क्या कह रहा हूं उसको समझिए मैं उदाहरण दे रहा हूं आप तत्व कह लीजिए एक है बद्ध तत्व और एक है मुक्त तत्व ऐसे कह लीजिए नहीं नहीं आपको क्योंकि आपके सिद्धांतों के विपरीत ना जाना पड़े तो आप उस तरह से कह लीजिए एक है मुक्त तत्व और एक है बद्ध तत्व अभी तो आप मेरी मेरी परिभाषा को कह ही नहीं रहा हूं आपने मुक्त जीव कहा ना मैं समझा देता हूं मैं क्या मेरे को बोलने तो दीजिए जी मैं ये कह रहा हूं कि जैसे उदाहरण के रूप में उदाहरण के

01:08:42:09 रूप में कोई बद्ध जीव है जीव तो बद्ध ही होता है है ना लेकिन कोई ऐसा जीव है जो बहुत कई जन्मों से तपस्या कर रहा है तपश्चर्या कर रहा है और वो मुक्ति के कगार पे है ठीक है उसमें और जो एक डाकू चोर लुटेरा उनकी मनस्थिति में ठीक है कुछ तो अंतर होगा कुछ तो गुणों में अंतर उनके व्यवहार में उनके ज्ञान में कुछ तो अंतर होगा। है ना? तो हमें तो जब हम किसी व्यक्ति से सिद्ध कोटि के व्यक्ति से बात करते हैं तो हमें एक अच्छा अनुभव होता है। हमें समझ में आता है कि यार ये व्यक्ति वो उसके लफंगे जैसा नहीं है। हमें समझ में आता है। ठीक है? तो उसी प्रकार से जैसे आपने बोला कि अवतार के विषय में सारी चीजें तो नहीं जैसे सर्वव्यापकता को नहीं किया जा सकता। लेकिन कुछ-कुछ चीजें लक्षण बताए जा सकते हैं। वो दो चार लक्षण जो भी आपको समझ में आए आप वो मुझे बता दो। ठीक है? एक पॉइंट। दूसरा पॉइंट आपने एक और लाइन बोला था कि आपको क्या समझ में आ रहा है? आप बता दो। मुझे क्या समझ में आ रहा है? मैं बता देता हूं। मेरे दृष्टिकोण से मेरे दृष्टिकोण से मेरे सामने कोई मनुष्यधारी है। ठीक है? मेरे को मैं सोच ही नहीं पा रहा कोई ऐसा पॉइंट कि जिससे मैं डिफरेंशिएट कर दूं कि फलाना व्यक्ति इंसान नहीं है। ईश्वर है। मेरे दिमाग में कोई आ ही नहीं रहा पॉइंट। मेरे इसीलिए मैंने आपसे पूछा। हां तो मैंने वो लक्षण बता दिया सर्वशक्तिमान। अभी हम अंडरस्टैंडिंग की तरफ ही है। वी

01:09:57:13 आर अभी हम अंडरस्टैंडिंग हम अवतार को समझ रहे हैं। अवतार की धारा शरीर धारण मैंने लक्षण बता दिया सर्वशक्तिमान यानी वो कुछ भी कर सकता है तो ही माना जाएगा कि वो है ना यानी अगर मेरे सामने कोई ऐसा व्यक्ति है जो कुछ भी कर दे तो हम मैं मान लूंगा कि वो ईश्वर है। अगर कुछ भी नहीं कर पा रहा कहीं अटक जा रहा है तो ठीक है। जो कुछ भी कर सकने की बात जिसकी शब्द प्रमाण से मानी जा रही हो। बात दिक्कत ये है कि कई चीजें करने के लिए वो मनुष्य उसका गवा साक्षी नहीं हो सकता। कई चीजें ऐसी है वो करने को कह दिया जाए तो मनुष्य उसका साक्षी नहीं हो सकता। तो जब उसका साक्षी नहीं हो सकता तो इसीलिए तो फंस रहे हैं ना यही तो फंस रहे हैं। हां पॉइंट क्या है? जब हम लक्षण की बात कर रहे हैं तो अब अभी जैसे आपने बोल दिया सर्वशक्तिमान ठीक है। कुछ भी कर सकता है। उदाहरण के रूप में मैं बोल दूं। अच्छा आप ये मानते हैं मैं आपसे एक नॉर्मल सा प्रश्न बोल रहा हूं। ये कोई बहुत इंपॉर्टेंट प्रश्न नहीं है। नॉर्मल है कि क्या राम जी जो है ईश्वर जो है जिसे आप जिन्हें आप ईश्वर आप अवतार मानते हो तो मैं आपको उसी हिसाब में बात कर रहा हूं कि क्या ईश्वर राम के रूप में अधर्म कर सकता है? आप मानते हैं इस चीज को? हां कर सकता है। क्यों नहीं कर सकता? ठीक है। क्या ईश्वर बिना श्री राम का शरीर धारण किए हुए सीता माता से शादी कर सकता है। बिना सीता माता

01:11:12:21 से शादी शादी कहते किसे हैं? इस पे जाइए पहले। वही पॉइंट है ना? नहीं कर सकता। अटक रहा है वहां पे। यह शादी तो शरीर नहीं नहीं आप आप उसको सिद्ध करिए ना कि बिना शरीर के वो शादी होती है कि नहीं तब तो मैं उस पे जाऊं मैं वही तो यहां कर सकता है हो ही नहीं सकती आ रहा है अटक रहा है ना काम कि बिना शरीर के जैसे समझो इस चीज को जैसे मैंने एक ऐसा काम दे दिया जिसको बिना शरीर के द्वारा नहीं किया जा सकता तो मैं ये अगर वो सर्वशक्तिमान है तो क्या बिना शरीर के कर सकता है मैंने यही काम ही मैंने जानबूझ के काम दिया है तो मैं पूछ रहा हूं नार्मल इसमें इसमें एक लॉजिक आ जाता है मैं बता देता हूं आपको जी ठीक है जिसमें शरीर की आवश्यकता है क्या इसको लॉजिकल पैलेस कहते हैं शायद अंग्रेजी वाले लोग इस तरह की चीजों को क्या वो दो और दो पांच कर सकता है थोड़ा मुझे समझाइए इसमें इसमें एक वो आ जाता है कि अंतत गत्वा अगर हम अविद्या के उसको स्वीकार करते हैं अस्तित्व को माया के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं तो हमें ये मानना पड़ेगा कि ईश्वर हमें वही इंफॉर्मेशन प्राप्त करवा रहा है जो इंफॉर्मेशन सत्य नहीं है। है ना? बोलिए पूरा वही इन दे रहा है ना जो सत्य नहीं है। हां पूरा बोलिए। मैं मतभेद रखता हूं इसलिए मैं हामी नहीं भर रहा हूं। पूरा बोलिए। हां अंतत गत्वा अविद्या को तो कहीं ना कहीं आपने भी

01:12:27:22 माना है। तो अंतत गत्वा जो है हमें ऐसी इंफॉर्मेशन प्राप्त हो रही है जो रियल नहीं है। तो अगर ऐसी कोई चीज अटक जाएगी ना जो इसमें आ जाएगी जो हो ही नहीं सकता है। तो उसके पास अविद्या शक्ति है। वो आपको इंफॉर्मेशन देगा केवल कि हो गया। हो गया सर हमारी रियल में नहीं हुआ हमारी जो हां रियल में नहीं हुआ परमार्थ में नहीं हुआ मैं रियल की कह रहा हूं हां रियल में नहीं हुआ बिल्कुल मगर वो रियल में आप पहुंचे कैसे एक मिनट रियल में आप पहुंचे कैसे उसका साक्षी कौन है रियल में वो व्यक्ति पहुंचा कैसे पहुंचा रियलिटी में तब उसको पहले यहां किसी को तब उसको पहले यहां पे किसी ईश्वर की सत्ता को मानना पड़ेगा और ईश्वर की सत्ता को सिद्ध करने के लिए फिर वहां पर उसका जो है अवतार इत्यादि सिद्धांतिक रूप से कहने का मतलब ये है ईश्वर जो अवतार लेता है तो क्या ईश्वर सैद्धांतिक रूप से ये कार्य कर सकता है बिना शरीर के तो नहीं कर सकता मैंने कहा ना कि ईश्वर हमको ऐसी इंफॉर्मेशन दे सकता है जो इंफॉर्मेशन रियल नहीं है और जो पूरा स्ट्रक्चर है एक एक मिनट जो जो अद्वैत का स्ट्रक्चर है उसमें तो एक ही तत्व है दूसरा तो तत्व ही नहीं मगर हमको

01:13:43:13 बहुत सारे तत्व दिख रहे हैं अविद्या के कारण तो एक एक अविद्या वो और दे देगा। एक अव एक अविद्या वो और दे देगा कि भैया बिना शरीर के उसने वो कर लिया विवाह कर लिया। मगर बात ये है कि अगर हम ये कहने लगेंगे कि रियल में ऐसा नहीं हुआ है और यहां पर हुआ है। मगर रियल में नहीं हुआ है। तो हमें ये मानना पड़ेगा कि भाई वो रियल की दुनिया आपको प्राप्त कैसे उसका साक्षी कौन है? हमने जो कहा है कि ईश्वर अवतार लेता है। हमने जो कहा है कि ईश्वर अवतार लेता है वो मनुष्यों का ईश्वर है। प्राणियों का ईश्वर है। देहधारी प्राणियों का हमने कभी नहीं कहा कि जो व्यक्ति मुक्त है जो रियल की दुनिया में है उसका ईश्वर अवतार लेता है। हमने कहा कि जो यहां पे जो फंसा हुआ बद्ध जीव है अविद्या ग्रस्त है उसका उसके लिए ईश्वर उसका जो ईश्वर है वो अवतार लेता है। ठीक है? मैं आपको बताता हूं इसमें पॉइंट क्या है। देखिए आपने कहा कि कौन से स्तर पे जैसे मैं बोलूं कि क्या ईश्वर दो और दो को पांच कर सकता है? तो आप बोलोगे हां कर सकता है। मैं पूछूं कैसे कर सकता है? तो हमें बेवकूफ बना देगा। दिमाग भ्रम डाल देगा कि नहीं दो और दो पांच हो गया। मैं ये नहीं कह रहा। मैं मैं ईश्वर को ये नहीं कह रहा कि आ ईश्वर मेरे को बेवकूफ बना कि दो और दो पांच हो गए। मैं ये नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं उसको ऐसे कर दो। मैथमेटिकली कर दो। पूछे तो ईश्वर पूछेगा भाई तू ही बता दे कैसे करूं? तो मैं ईश्वर को बोलूंगा कि आप मैथमेटिकली कर दो। ठीक है? उसी प्रकार से उसी प्रकार से अब

01:14:58:16 मैं ईश्वर को मैंने ईश्वर को यह बोला कि जब मैंने बोला ना कि बिना शरीर के तुम सीता जी से शादी करो तो ईश्वर बोलेगा भाई बिना शरीर के तो हो नहीं सकता तो बोलो कैसे

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01:15:06:09 करूंगा सिद्धांत देखिए देखिए मैं आपको एक बात बताऊं यहां मैं आपको क्रॉस करूंगा आपके उदाहरण विवाह संभोग इत्यादि से अलग हटके भी हो सकते हैं तो ऐसी कोशिश करिए ऐसी कोशिश ऐसी कोशिश करिए ऐसे उदाहरण दीजिए जो कि क्या कहते हैं जो जो नैतिक मर्यादा है उसको तोड़ने के करीब ना पहली बात दूसरी दूसरी बात दूसरी बात भाई साहब मुझे मुझे बोलने दीजिए मुझे बोलने दीजिए एक बार दूसरी बात

01:15:33:10 मैंने आपको पहले ही बता दिया कि आपको उसने बेवकूफ बनाया है इसका साक्षी कौन होगा ये बताइए वो सिद्ध कैसे करोगे कि उसने बेवकूफ बनाया वही तो मैं कह रहा हूं अगर वो हां मैं उसका उत्तर दे दे रहा हूं अगर वो मैथमेटिकली होगा तो मैथमेटिकल कैलकुलेशन रूल्स के अकॉर्डिंग होगा ना अगर वो उसके अकॉर्डिंग नहीं है वैसा कुछ रूल नहीं दिख रहा डायरेक्ट हमें भास हो गया उसके माइंड में उसके माइंड में वो मैथमेटिकल रूल्स डाले किसने ने बिना मैथमेटिक्स के डाले ना अगर मैथमेटिकल के अकॉर्डिंग हो सकता जो रूल्स है जिनके अकॉर्डिंग सिद्ध होगा जो रूल्स है वो रूल्स कहां से आए रूल्स है ही तो नहीं यही तो पॉइंट है अरे मैथ के जो रूल्स है कि दो और दो पांच नहीं हो सकता है वो कहां से आए न्यूमरोलॉजी से आए और न्यूमरोलॉजी ईश्वर से आई है कि नहीं आई पढ़े हैं आपने थ्री होते हैं देखिए अब आप खास जो है खामखा खामखा भटका रहे हैं मामले को मैं पॉइंट पे आ गया हूं तो भटका रहे हो आप। मैं बता रहा हूं वो जो रूल्स मैं भी आपसे बोल सकता हूं ना वो आपके पास वो जो वो जो रूल भाई साहब वो जो रूल्स है वो जो रूल्स है वो जो रूल्स है वो ईश्वर से ही आए हैं ना। अरे ईश्वर से कैसे आ जाएंगे? ईश्वर ने अरे भाई आपको ये कहां से पता लगा है कि दो और दो पांच और चार होते हैं। अच्छा मैं आपको बता देता हूं ना। इसी का

01:16:48:12 उत्तर सुन लीजिए। हां। प्रिंसेस एपिया और मैथमेटिका नाम सुना है कभी? मुझे पता है आप क्या कर रहे हो। आप जहां पर फस रहे हो आप खामखा एक वो अपनी जिसको कहते हैं मैं बता रहा हूं अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए जिन क्षेत्रों में विशेषज्ञ हो उसको यहां प्रकट कर रहे हो और क्या है इंग्लिश बोल लो और आपने मैथमेटिक्स पढ़ी है तो उसको यहां बहुत ज्यादा विवेचना कर दो उससे पॉइंट नहीं बदलेगा आपके पास आपके पास देखिए आप देखिए जो जो मेरे पास उत्तर है मैं बता तो रहा हूं जो अंतवा अंतत गतवा जो आपके पास जो ज्ञान है वो ईश्वर से आया है कि नहीं आया है कि ईश्वर के बाहर किसी की बात हो रही है कि अभी की बात हो रही है तो अभी मैं अंतत गतवा की बात बता रहा हूं ना अंतत की बात मैं अंतत की मैं आपको मैं आपको मैं आपको अंततवा की बात बता रहा हूं भाई साहब मैं आपको अंत अंततवा की बात बता रहा हूं सुनिए तो आप सुन लीजिए नहीं देखिए जो मूर्ख की बात है वो मैं आपको बता रहा हूं अंतत गतवा की बात कि जो दो और दो

01:17:58:04 और दो चार कैसे हुआ आपको मालूम है आप हसोगे तो आपको बात होने ही नहीं दोगे आपको मालूम है आपसोगे

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01:18:06:04 मैं बोल रहा था तो आप फसोगे ही नहीं मैं आपको बोल रहे मेरे बीच में आप आए हो अच्छा आप बोल लीजिए बोल लीजिए आपको जो बोलना है बोल लीजिए अब अपना प्रभाव आप छोड़ लीजिए बीच में आप कूदोगे तो रोकना ही पड़ेगा ना बीच में मत कदो ठीक है आप बोल लीजिए मैं कूद कूद नहीं रहा हूं। मेरा कूदना सिद्ध करिए आप। चलिए बीच में आप कूदना नहीं कर रहे हो। आपने कहा कूद रहा हूं। कूदना सिद्ध करो। अच्छा इसे टॉपिक डायवर्ट करना है ना। ऐसे ही टॉपिक डायवर्ट नहीं आप ये जो कटाक्ष पूर्ण वाली भाषा ले रहे हो ना इस पे मैं प्रहार कर रहा हूं। आपको वहां पे आपको मेरा वहां पे आसमान दिखाई देने से दिक्कत है। यहां मेरा कूदना कह रहे हो। ये भी आपने व्यवहार में कहा ना आप कूदना सिद्ध करो। आप तात्विक व्याख्या में अरे भैया कूदना सिद्ध करो। मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं मेरा जंप लेना सिद्ध करो आप नहीं तो आपने उसके लिए वापस क्षमा मांगो भाई मैंने बोला कि आपने प्रैक्टिकली जंप किया आपने कहा कि कूद कूद रहे हो आप मेरे बीच में कूदना मेरा सिद्ध करो मैंने बोला ना कि आप मेरे मैं बोल रहा हूं मेरे बोलने के बीच में कूद रहे हो मैंने ये बोला ना वो तो कर ही रहे हो आप मेरे बीच में कूद रहे हो इसलिए इसलिए मैं कह रहा हूं ऐसी भाषा का उपयोग मत करो जो आप हल्की सी जो रहे हो मैं अच्छा मन लेकर के बैठा हुआ हूं आपके साथ बात करने के लिए ठीक आप उस तरह से रहिए आप कटाक्षों में

01:19:21:06 मत जाइए या फिर इनडायरेक्ट में हम सामने वाले को नीचा दिखाएंगे या हंसी उड़ा लेंगे फिर बाद में क्लिप काट करके उसका वो बनाएंगे शॉट बनाएंगे ये सब आप मत करिए करना है तो अच्छी बात नहीं है ठीक है टॉपिक आप डाइवर्ट आपको कूदने जैसी भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए अपने से बड़े के लिए आप मत करो बोल रहा हूं मेरे पीछे मत बोलिए आपने अभी इससे आपने आपने कूदना कहा ना कूदना शब्द उपयोग में नहीं आएगा जिसका आप सम्मान करते हैं उसके लिए कर दूं मैं एक्सप्लेन कर दूं मैं एक्सप्लेन कर दूं कर दूं। अब आप इसको एक्सप्लेन कर लेना। अब आप इसको एक्सप्लेन करो। आपने क्यों बोला? आपने कहा भले ही था। आपने कहा भले ही था कि मत एक के लिए आया हूं। मगर आप सामने वाले को केवल उसकी कोई भी एक बात को गलत साबित करने आए। देखो मैंने द्विवेदी की ये बात गलत साबित कर दी। जब मैं सुनिए सुनिए जब मैं फ्रस्टेट मत होइए। शांत रहिए। फ्रस्टेट मत होइए। जरूरत नहीं फ्रस्टेट होने की शांत रहिए। अरे भैया मैंने थोड़ी ना आपके लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया है जो मैं जो आप फ्रस्टेट होंगे आप आप जो अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हो आप कूद रहे हो मेरे बीच में मैं कोई चिलटू बच्चा हूं क्या कोई दो दो साल का आपसे मैं छोटा हूं क्या जो आप ऐसे बोलोगे अरे अगर मैंने आपको कुछ अभद्र बोला उसके लिए हाथ जोड़ लिया ठीक है अगर नहीं अगर नहीं बोला ही है अगर नहीं है चलो ठीक है चलो ठीक है मैंने बोला है मैंने आपको बहुत कुछ अपशब्द बोल दिया ठीक

01:20:36:16 ये भी गलत है जो है वो रियल बोलो कि मैंने कूदना बोल के नहीं भाई बस मिल गई शांति आगे बढ़े ऐसे नहीं ऐसे नहीं ऐसे नहीं आप कुछ मत करिए बस दोबारा आप आप कुछ मत करिए आप आपकी ये जो चीजें हैं कुछ मत करिए बस आप आगे इसको दोहराइएगा नहीं विषय पर मैं क्या कह रहा हूं इसको आप इसको एक्सेप्ट करिए मैं दोहराऊंगा नहीं प्रयास कर रहा हूं छोडूंगा नहीं देखा आप जो आप जो क्षमा भी मांगे तो ऐसे मैंने क्षमादान दे दिया एहसान कर दिया मैं यह कह रहा हूं कि आप जो है हरकत को दोहराइए गा नहीं आप मैंने यहां पे बोला क्लियरली मैंने बोला कि मैं यह थोड़ी कह रहा हूं कि आप बिल्डिंग से कूद गए इत्यादि तो आप कह रहे हो नहीं मेरे को ऐसा कूदना सिद्ध करो मैंने क्या कहा आप कूदने शब्द का इस्तेमाल मत करिएगा दोबारा मेरे लिए की बातें कर रहे हो बताओ मैंने बोला क्या वैसे इसका मतलब आप दोबारा करोगे ये बात मैंने बोला कि मैं दोबारा कर रहा हूं तो फिर कह दो कि नहीं करूंगा दोबारा आप आप हाथ जोड़ लोगे सब कर लोगे ये नहीं कहोगे आप उतना शब्द दोबारा नहीं करूंगा मैं उपयोग आपको अपने मन से असम्पशन लगाना है आप लगाओ ना मेरा क्या जा अरे तो आप क्लियर कर दो ना बहुत देर लगेगी क्या आप परंपरा क्लियर 5 मिनट में कर सकते हो मगर आप यह नहीं क्लियर कर पा रहे कि मैं आगे इस चर्चा में आपके लिए पूछना शब्द का उपयोग करूंगा कि नहीं करूंगा आधे घंटे आपको आधे घंटे

01:21:51:22 इस पर बहस करनी है मूल विषय पे नहीं आना आपको देखा आप हाथ जोड़ आप हाथ जोड़ लोगे सब कर लोगे मगर ये जो अभद्र आचरण है उसको क्लियर कट स्वीकार नहीं करोगे कि मुझे कूदना शब्द नहीं बोलना चाहिए था एक तरफ आप कहते हो कि आप बड़े हो आप ये हो वो सम्मान की बात करते हो मैं मैं अपने मन को मैं अपने मन को मनाता क्यों हां भाई ठीक है वो ठीक है जो भी है व्यक्ति सामने से आया तो उसके साथ जो है बूंद चर्चा करो हेलो हेलो हेलो हेलो आवाज आ रही है ये सब देखिए इस तरह की चीजों में जाएंगे मैं चर्चा आपसे आगे नहीं बढ़ा पाऊंगा ये जो हेलो हेलो हेलो ये सब कर रहे हो ना ये अपने लौंडे लपाड़ियों के साथ आप जाके करो जिनके साथ बैठ के आप जो करते हो वो आप उनके साथ करो यहां मेरे साथ ये सब नहीं चलेगा ठीक है कह रहा हूं ना मैं नहीं बोलूंगा अगर सौहार्दपूर्ण बात करनी है तो सौहार्दपूर्ण करो और ये जो ये जो हंसी ठट्टा करना है अपने लौंडे लपाड़ियों वाला मवालियों वाला वहां जाओ आप उनके साथ बैठ के करो ठीक आवाज आ रही है हेलो बताइए कूदने शब्द का उपयोग दोबारा करेंगे या नहीं ठीक है कूदने शब्द का उपयोग दोबारा नहीं करूंगा हो गया हां अब बताइए ठीक है अब आगे बढ़ाते तो अब जो बात हो रही है ना लक्षण पे तो चलो अब मेरे को लक्षण बता दो अवतार के लक्षण क्या है जल्दी से अब पीछे रिवाइंड कर लो

01:23:07:18 थोड़ी देर लगेगी बता दो ना देखो ऐसा है कि आपने मेरे को इतना कुछ बात कर रहे हो आप अपना पक्ष रखो आप मेरा आप मेरा इंटरव्यू मत लो आप अपना पक्ष रखो मैंने जो बोला है मैंने कहा है पीछे कहा भी है आप उसके संबंध में मेरे को देखिए मैं उसी पे ही बात कर रहा हूं मेरे को जानना सुनना तो पड़ेगा ना कि अवतार बिना लक्षण के जिस चीज के लक्षण उसकी सिद्धि कैसे होगी तो मेरे को समझना तो पड़ेगा लक्षण क्या है सर्वशक्तिमान लक्षण सर्वशक्तिमत्ता का लक्षण उसके अंदर मिलना चाहिए है ना यानी किसी भी पॉइंट पे वो बाधित नहीं होना चाहिए तो मैं बता बता तो रहा हूं वो बाधित

01:23:39:03 नहीं है और और जो कुछ ऐसी लॉजिकल फैलेसी अगर आप लाएंगे कि भैया क्या वो बिना शरीर के विवाह कर सकते हैं दो और दो पांच कर सकते हैं तो उसमें मेरी जो ईश्वर की अविद्या शक्ति होगी वो काम करेगी आपको जो है इंफॉर्मेशन डालेगी जैसे अच्छा वो आप कह रहे हो कि मैथमेटिकल ही होना चाहिए मैं इसको बता दूं मैथमेटिकल के जो रूल्स है ना वो भी ईश्वर नियंत्रित कर सकता है कि आपके मन से कब हटाए जाए कब ना हटाए जाए तो हटा देगा वो ऐसे रूल्स डालेगा जिससे कि वो आपको लॉजिकल लगने लगेगा बस देखो अभी मैं उस पे जाऊंगा मैथमेटिक्स पे तो फिर बोलोगे कि ऐसे वैसे तो मैं अगर मैं इसको और पूरा कर दूं और अगर आप यह कहते हो कि भैया प्रूव कैसे होगा तो मैं प्रूफ की बात बता दूं हमारे लिए जो प्रूव होता है इसी पे रहो मैं आपसे रिक्वेस्ट कर रहा हूं आप इसी पे रहो मैं आपसे रिक्वेस्ट कर रहा हूं आप इसी पे रहो किस पे जो अभी जो लक्षण पे बात चल रही है ना फिलहाल इस जो आप मैथमेटिक्स वगैरह उधर जा रहे हो उस टाइम आ चुके मैं उस बात को पूरी कर रहा हूं मैं उस बात को मैं उस बात को पूरी मैं उस बात को मैं उस बात को पूरी कर रहा हूं वो मैथमेटिक्स ही छोड़ दो कोई भी ऐसी लॉजिकल फैलेसी कि बंदा के पुत्र हो सकता है। ये जो इस तरह की जो चीजें हैं जो घटित नहीं हो सकती है कौन सी लॉजिकलसी है ये कह रहा हूं कौन सी अरे भाई जो जो कार्य जो कार्य हो ही नहीं

01:24:54:04 सकता कुल मिलाकर के कहने का मतलब ये है अब बात ये है कि पूरी लिस्ट है तो उनमें से अब वो कार्य अब वो कार्य क्यों नहीं हो सकता मैं वो बता रहा हूं वो कार्य कैसे हो सकता है क्यों नहीं हो सकता है कि संबंध में बात यह है कि हमको किसी ने बताया है कि वध्या कौन होगी छोड़ दीजिए मैं चाहता हूं टॉपिक पर रहे ताकि हमारी बात थोड़ी जल्दी हो वो टॉपिक को ही तो पूरा कर रहा हूं क्योंकि आप उसमें फंस रहे हो तो आप दूसरी बात करोगे देखो मैं फंस रहा हूं ना चलो कोई बात नहीं मैं मैं स्वीकार कर लूंगा मैं फंस रहा हूं लेकिन मैं ये चाहता हूं आप विषय पे रहो ठीक है तो विषय ही तो है आपने पूछा आपने पूछा कि मुझे तो मैथमेटिकली प्रूफ करके दिखाओ तो मैं उस बात का जवाब दे रहा हूं अभी मैंने आपसे ये पूछा अभी नहीं पूछा पहले तो पूछा था ना तो पहले बढ़ चुके है ना वहां पे आगे कैसे बढ़ गए वहां बीच में कूदने कूदने की बात आ गई आगे क्यों बढ़ गए आपने पूछा था मुझे तो मैथमेटिकली बताओ मैं उसका जवाब दे रहा हूं सुनिए सुनिए मेरी बात सुनिए विषय से कोई बहुत संबंधित नहीं है ठीक है हमारी बात काफी बढ़ चुकी है अब आप मुख्य विषय आना नहीं चाहते हो तो आप इधर उधर आपको जो है यहां पे क्योंकि आपको ऐसा लग रहा है कि यहां जो है इनका सिद्धांत सिद्ध हो जाएगा इसलिए उस बात को मुझे बोलने नहीं देना चाहते हो मैं

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01:26:00:12 दिक्कत लास्ट तक देख लूंगा सुनिए मैं आपको लास्ट तक का चांस दूंगा चर्चा हो रही है ना अगर सर आप मेरे को अपना सिद्धांत स्वीकार करवा दो। देखिए मैं किसी को मैं किसी को अपना सुनिए मैं किसी को अपना सिद्धांतो मैं किसी को अपना सिद्धांत उसके मुख से बुलवा नहीं सकता। मैं सामने वाले को निरुत्तर और निराधार कर सकता हूं। वही वो जनता तय करेगी। वो वो जो देखने वाले हैं वो तय करेंगे कि भैया किसका सिद्धांत सिद्ध हुआ। क्योंकि ना तो आप मानने वाले हो मेरी बात अगर मान अगर सिद्ध भी हो जाए तो ना आप मानने वाले हो और ना मैं मानने वाला हूं। विषय

01:26:33:27 विषय पर लक्षण पे बात कर रहे थे। लक्षण पे आ जाओ। इधर-उधर का क्या बात ये हो रही थी कि मैथमेटिकली बात ये हो रही थी कि मुझे तो मैथमेटिकली प्रूव करके दिखाओ। मैं आपको बता रहा हूं वो बात। उसको सुनो। आप टाइम ले लो। सुनो आप टाइम ले लो। जितना आपको टाइम लेना है एक बार आप बोल दो। उसके बाद जहां से मैंने बात शुरू किया था ना मैं वापस लक्षण पे आ जाऊंगा। ठीक है? भाई आपको जो मैं दूंगा इसको काटना पड़ेगा ना आपको जो मैं दूंगा। आप वहां क्यों जाओगे पीछे? क्योंकि बात क्लियर होने वाली है। निर्भय मेरी बात समझिए। तो यहां पे बात क्लियर होने वाली है इसलिए मैं कह रहा हूं इसको मत छोड़ो आप सही जगह आ गए हो क्यों जा रहे हो दोबारा पीछे मैं बता देता हूं क्यों जाऊंगा मैं बता देता हूं क्योंकि अभी हमारा पहला क्लियर हुआ धारणा का दूसरा हमारा अर्थ था इसपे अवतार के लक्षण पे अब मैं आपसे आपने मैथमेटिकल वाला जो बोला गलत बोला मैं बोल दूं पूरा बोल दूं या बीच में फिर आप बीच में इंटरप्ट करोगे ठीक है बात ये है कि अब अब मैंने ये पूछा कि भैया इसका लक्षण क्या है तो जब आपने बोल दिया कि सर्वशक्तिमान अब मैं सर्वशक्तिमान पे आपसे जा रहा हूं कि ठीक है इसको समझना कि अच्छा सर्वशक्तिमान है। यानी अगर राम जी अवतार हैं तो उनमें सर्वशक्तिमत्ता दिखनी चाहिए। कोई भी कार्य करते हुए बाधित नहीं होने चाहिए वो। ठीक है? अब हम उस विषय पर हैं। अब इसके बाद हम डायरेक्ट जाएंगे हेतु की ओर कि आप जो ईश्वर का अवतार ले रहे हो शरीर धारण करना उसका

01:27:49:01 हेतु क्या? हम उसकी तरफ जाएंगे डायरेक्ट सिद्धि की ओर। ठीक है? अब इसके अंदर हम ये तो सीक्वेंस बहुत सही चल रहा है। इसमें कोई इशू नहीं है। अब आप बीच में मैथमेटिक्स में ऐसे परिवर्तन कर सकता है। दिमाग में भ्रम डाल सकता है इत्यादि। ठीक है? उसमें कोई इशू नहीं है। तो बात ये है कि उधर उधर वो कब आएगा? वो इशू कब आएगा? वो पॉइंट कब आएगा? समझो चीज़। जब हम बात करेंगे एक्सैक्ट सिद्धि पर। ठीक है? जब हम बात करेंगे जब मैं आपको बोलूंगा ना आप सिद्धि करो। उस सिद्धि में अगर आप वो पॉइंट रखो तो ज्यादा बेटर है। वो उसका टेली करेगा। अभी आप बात कर रहे हैं। आपने बोल लिया। मैं बोल रहा हूं। मैं बोल रहा हूं। ठीक है। अब इसमें स्पष्ट इतना ही है कि अगर आपने ये मान लिया कि एक मात्र आपने ये मान लिया कि सर्वसक्तिमान है। ठीक है? इसमें मेरे को एक और बता दो कि अगर वो सरसक्तिमान है तो यानी राम जी या कृष्ण जी कोई भी कार्य करते हुए उनको बाधा नहीं आनी चाहिए। ठीक है? एक पॉइंट सही हो गया। दूसरा पॉइंट है कि अच्छा मैं आपसे सामने से ये पूछ रहा हूं कि क्या जो अवतार होता है ईश्वर का वो सर्वज्य भी होता है या नहीं होता? बिल्कुल होता है। ठीक है। यानी उसकी सर्वज अल्पज्जता कहीं भी प्रकट नहीं होनी चाहिए। यानी ऐसा कुछ भाई वो सर्वशक्तिमान तभी हो पाएगा जब वो सर्वज्ञ भी हो। ठीक है? ये सब चीजें आपस में अलग-अलग नहीं हो सकती ना। और जैसे एक बात हुई थी जैसे एक बात हुई थी कि जो श्री राम है श्री राम के रूप में ईश्वर ऐसा कर सकता है पूरा धर्म कर सकता है तो उसका जवाब यही है कि श्री राम के रूप में जब

01:29:04:07 ईश्वर ऐसा कुछ करता है तो वो श्री राम के रूप में ही कर रहा है मगर उसको हम श्री राम स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि शब्द प्रमाण उसमें साथ में नहीं है शब्द प्रमाण ने कहा है अगर ऐसा ऐसा हो तो वो राम है ऐसा वैसा हो तो वो कृष्ण है शब्द प्रमाण उसमें साथ में सपोर्ट नहीं करेगा जैसे कि फॉर एग्जांपल बता दूं दर्शकों के लिए आवश्यक है ये बात दर्शकों के लिए आवश्यक है जैसे काम कर सकते हो कि जैसे ना उसमें आप बोल सकते हो वाला पॉइंट वो बात रह जाएगी ना एक मिनट लगेगा हनुमान जी ब्रह्मचारी है शब्द प्रमाण के अनुसार अब भैया क्या ईश्वर क्या हनुमान जी के रूप में ईश्वर विवाह कर सकता है तो हमारा जो हमारा जो कांसेप्ट है उसमें भगवान ने जब विराट स्वरूप लिया तो उन्होंने उसका जो विराट स्वरूप था तो उन्होंने अपने कई रूप दिखाए तो उसमें से एक रूप हनुमान जी का भी था यानी कि हनुमान जी ने कृष्ण के रूप में विवाह भी किए। ठीक है? मगर हमने उस रूप को हनुमान जी नहीं माना क्योंकि शब्द प्रमाण वहां सपोर्ट में नहीं है। तो ये बात मैं क्लियर करना था। अब आप बताइए अपनी बात। ठीक है। ठीक है। अब इसमें बात ये आती है कि अब हमें लक्षण जो है वो स्पष्ट हो चुके हैं कि यानी कहीं पर भी ईश्वर की अल्पता नहीं दिखनी चाहिए। कहीं पर भी उसके सर्वशक्तिता में बाधा नहीं आनी चाहिए। ठीक है? उसकी अपनी मर्यादा दिखनी चाहिए। नहीं दिखनी चाहिए। नहीं दिखनी चाहिए वो अलग बात

01:30:19:08 है। होना नहीं चाहिए। होता है कि नहीं? हुआ दिखने को तो कुछ भी दिख सकता है। अच्छा कुछ भी दिख सकता है तो वो चीज हुई या नहीं हुई कैसे पता चलेगा? शब्द प्रमाण शब्द प्रमाण से नहीं जैसे मैं ये अच्छा शब्द प्रमाण से जैसे राम जी ने जीवन में क्या-क्या किया वो तो हमें शब्द प्रमाण से पता चलेगा। ठीक है। मैं ये कह रहा हूं जैसे राम जी जैसे राम जी नित बात थोड़ी सी हां बताइए थोड़ी सी बात बताइए बताइए। जैसे राम राम जी ने राम जी के जीवन में क्या-क्या घटा वो हमें उनके शब्द प्रमाण रामायण से पता है। ठीक है? तो पॉइंट इसके अंदर ये कि अगर उसी में वहीं पे लिखा हुआ है कि राम जी को नहीं पता था कि सीता जी कहां हैं? राम जी असहाय हो गए इत्यादि इत्यादि बातें राम जी पहचान नहीं पाए कि सुग्रीव और बाली कौन इत्यादि इत्यादि बातें जो हमें सर्वजता में बाधा नजर आती है। तो क्या हम एट दैट केस पॉइंट ये है कि आप तो कह रहे हो कि ये वही राम जी और ईश्वर के अवतार हैं। लेकिन जो लक्षण बताएं वो मैच नहीं कर रहे हैं। उस केस में क्या होगा? हम उन्हें अवतार मानेंगे या नहीं मानेंगे? इसका थोड़ा सा स्पष्टीकरण दे दीजिए। मैं स्पष्टीकरण देता हूं। मगर मैं बात अपनी पीछे से शुरू करूंगा। जहां पर मैथमेटिकल वाली बात आ रही थी। तो मैथमेटिक वाली बात ऐसी है कि दो और दो पांच नहीं होते हैं। यह हमने जाना है। किसी ने हमको इंफॉर्मेशन दी है। और अगर एट दी एंड चले जाए तो वो इंफॉर्मेशन

01:31:34:21 हमको ईश्वर से ही आ रही है। अगर कोई हमारा व्यवहार में कोई टीचर है, कोई हमारे परिजन है, हमारे जो है अभिभावक है वो हमको इंफॉर्मेशन देते हैं। दो और दो चार होते हैं। उसको चार कहा जाता है या इतना इतना ऐसे ऐसे गिना जाता है। कुछ भी कांसेप्ट हो वो कांसेप्ट हमको हमारा कोई ना कोई गुरु देता है। शिक्षा गुरु जिसे हम कह सकते हैं। अगर गुरु ना भी दे तो भाई वो जो कांसेप्ट है हो सकता है अंदर से ही उद्भाषित हो जाए। कई लोग भाई सिद्ध जन्म ले सकते हैं तो अंदर से हो जाए। तो उसमें कुल मिलाकर के बात है कि वो इंफॉर्मेशन आ रही होती है ईश्वर से। तो ईश्वर अगर चाहे तो हमारी उस इंफॉर्मेशन को बदल सकता है कि भैया ऐसे से ऐसे चार होते नहीं अब उसने इंफॉर्मेशन बदल दी और अब वो ऐसे से ऐसे पांच होते अब दिक्कत ये आती है कि रियल में तो ऐसा हुआ नहीं है रियल में तो ईश्वर ने का्सप्ट जो कासेप्ट के अनुसार तो ये सब किया नहीं है उसने तो अपना जो अविद्या के अविद्या शक्ति के कारण हमको मगर बात ये है कि उसको सिद्ध कैसे करोगे क्योंकि हमें कोई ना गवाह मिलेगा ना शब्द प्रमाण मिलेगा अच्छा अब बात आती है रियल वो वो रियल दुनिया हमने जानी कैसे? वो रियल दुनिया है या एक्सिस्ट करती है ये कैसे पता चलेगा? हमने तो तुम्हारे मुंह से कहलवा दिया कि दो और दो पांच होते हैं। हमने तो सबके मुंह से दुनिया के एक एक व्यक्ति के मुंह से कहलवा दिया कि दो और दो पांच होते

01:32:49:25 हैं। अब भैया ये बेवकूफ बनाया गया है। ये सिद्ध कैसे होगा? तो सिद्ध करने के लिए पहले हमको किसी को ईश्वर मानना पड़ेगा। परमार्थ तब पहुंचेंगे। वो वाला बात है। और दूसरी बात यह है कि उसका साक्षी कौन हुआ? अगर किसी ने बेवकूफ बनाया तो बात यही है कि ईश्वर हमको ऐसी ही चीजें दिखा रहा है ऑलरेडी जो रियल नहीं है तो वो एक चीज और दिखा देगा। अगर सर्व व्यक्ति मत्ता की बात में ऐसी चीजों से बाधा आ रही है। अब दूसरी बात आपने कहा कि जो शब्द प्रमाण है वो अब कुल मिलाकर के अब बात आ गई शब्द प्रमाण में कि भाई वो जो उसमें सर्वजता भी लिखा हुआ है और ये भी लिखा हुआ है। लक्षण पे बात है। हां वो लक्षण जो है शब्द प्रमाण से कट रहे हैं ना। उस पर आ गई बात मतलब उसमें उसमें विरोध हो रहा है। हां शब्द आप ही ने तो कहा आप ही ने तो कहा कि भाई वही वहीं पे लिखा है कि वो रो रहे थे या वो सर्वजता में बाधा आ रही है। ये सब आपने कहा ना तो शब्द प्रमाण से दिक्कत आ रही है ना कि जिन शब्द प्रमाणों से हमको जिन शब्द प्रमाणों से जिन शब्द प्रमाणों से हमें यह पता चल रहा है कि भैया राम जी सर्वशक्तिमान है। उनहीं शब्द प्रमाणों से हमें राम जी के सर्वशक्तिमान होने में बाधा दिखाई दे रही है। यही बात है ना? हम

01:34:05:18 हां। तो उसमें शब्द प्रमाण से ही हमें पता चलता है कि वो है तो नित्य शुद्ध बुद्ध मुक्त मगर वो ये जो है रोल कर रहे हैं। लीला कर रहे हैं। वो उनहीं शब्द प्रमाण बात को क्लियर करते हैं। उसको क्लियर करते हैं। यानी कि वो मुक्त होते हुए भी ऐसा दिखाते हैं कि मैं मुक्त नहीं हूं। जिससे कि आप उनके साथ ज्यादा कनेक्ट हो पाओ। हम इसमें एक पॉइंट है। इसमें छोटा सा पॉइंट ये है कि इसमें अगर लक्षण वाली बात कट गई ना कैसे कट गई मैं समझा देता हूं थोड़ा सा। जैसे समझिए जैसे आपने बोला कि अवतार का लक्षण है कि वो सर्वज्य है। सर्वशक्तिमान है। लेकिन जब हम अवतार की जीवनी देख रहे हैं। उसकी जीवनी में हमें सर्वजता नजर नहीं आती। सर्वशक्तिमत्ता नजर नहीं आती। ठीक है? यानी उसका लक्षण घट नहीं रहा है। नजर आती है। नजर आती है। मैं पूरा बोल देता हूं। पूरा बोल। पूरा बोल देता हूं। पूरा बोलता अब उसमें पॉइंट ये आ जाता है कि जब हम जिस पॉइंट पे पकड़ लेते हैं कि नहीं यहां पे तो देखिए यहां पे तो सर्वजिता नजर नहीं आई। यहां पे तो अल्पज्जता आई तो उस केस में आप कहते हो कि नहीं यहां पर ये जानबूझ के अपनी अल्पजता प्रकट कर रहे हैं। यानी ठीक है उस उस केस में तो यानी उसी केस में कह रहा हूं कि उस एक पॉइंट पे उनका जो लक्षण है जिससे वो वो उनका अवतार होना सिद्ध हो रहा है। ठीक है? क्योंकि फिलहाल हम जो मैंने ये किया है ना वो हम इस

01:35:20:19 पे नहीं कह रहे। हम शब्द प्रमाण पे बात नहीं कर रहे हैं कि रामायण में या रामचरितमानस में लिखा है राम जी अवतार है। अभी हम उसको मान नहीं रहे हैं। शब्द प्रमाण पे नहीं है हम। ठीक है? अभी वो साध्य कोटि का बात है। सिद्ध कोटि की बात नहीं है। पॉइंट इसके अंदर ये है कि अगर वहां पे एक पॉइंट में उनकी जीवनी में कहीं ना कहीं पे ये आ गया कि फलाना चीज के बारे में ना नॉलेज उन्हें नहीं पता था कि सुग्रीव और बाली में से कौन है? इन दोनों में से दो आपस में लड़ रहे हैं। इनमें से बाली कौन है? उनको नहीं पता। तो वहां पे जो उनको उनकी जो अल्पजिता वहां पे प्रकट हो रही है। ठीक है? उस केस में आप कह रहे हो कि नहीं ये जानबूझ के वहां पर अल्पजिता प्रकट कर रहे हैं। यानी अगर आप जानबूझ के भी बोलो ठीक है उस केस में ये होगा कि वहां पे उस केस में ये हो रहा है कि उनका लक्षण तो प्रकट हो नहीं रहा अवतार का तो वहां पे तो वो अवतार नहीं है ये सिद्ध हो रहा है ना लक्षणों से शब्द प्रमाण से नहीं शब्द प्रमाण में तो चलो लिखा है वो हम मान नहीं रहे नहीं मान रहे अलग विषय है उसप मैं नहीं जा रहा हूं लेकिन जब हम लक्षणों की बात लक्षणों से ये सिद्ध हो रहा है कि वो नहीं है ये है मेरा पॉइंट इसको थोड़ा सा इबोरेट कर दीजिए जरा इसको ऐसे इबेट करेंगे यही कारण है ना जिस जिसके कारण रावण नहीं समझ पाया कि वह अवतार है। जिसके कारण कंस नहीं समझ पाया कि भगवान ही है। जिसके कारण उस समय के जो लोग थे उनकी ही समय धारा में वो तुरंत उनको देखते ही मुक्त नहीं हो पाए। क्योंकि उन्होंने उनको भगवान माना ही नहीं। भगवत गीता

01:36:35:22 में भी भगवान ने कहा कि जो लोग मनुष्य देह में देख के मनुष्य देह में देख के मेरे ब्रह्म भाव को नहीं ध्यान नहीं जान पा रहे हैं वो मूर्ख लोग हैं। मगर जब उनके बारे में हमको दिव्य दृष्टि से बातें पता चली दिव्य दृष्टि के द्वारा फिर गुरु परंपरा के द्वारा हमको पता चली तो हमें पता चला कि हां ये अवतार हैं। ये अवतार ही थे जो भगवान के आए थे। और उस समय भी जो दिव्य दृष्टि रखते थे उनकी समय धारा में उन्होंने उनको अवतार माना। वो जानते हैं वहां पर ये जानते हैं कि यह सर्वज्ञ है। उनको सब शब्द प्रमाण से नहीं अपनी दिव्य दृष्टि से जानते हैं।

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01:37:10:24 वो उनके आचरण से नहीं वो अपने शब्द प्रमाण से जानते हैं। जैसे कि जैसे कि वाल्मीकि रामायण में ब्रह्मा जी ने कहा तुम नित्य शुद्ध बुद्ध मुक्त हो वो परम ब्रह्म हो। और भी कई लोगों ने कहा कि तुम सर्वशक्तिमान हो। तो पॉइंट तो कहने का अर्थ ये है कि इसीलिए जो बात आप कह रहे हो बिल्कुल सही बात है क्योंकि भगवान ऐसा रोल सीधी सिंपल सी बात है जो सर्वव्यापक है। वो एक जगह आ रहा है। उसका वो लक्षण तो कट ही रहा है ना। सबसे पहले तो सबसे पहले वो लक्षण मैं वो नहीं कह रहा। मैं वो नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं कि चलो वो तो एक बहुत थोड़ी सी दूर की बात है। मगर जब ईश्वर सर्वस व्यापक है तो वो एक जगह दिख रहा है तो उसको हम कैसे स्वीकार कर ले अवतार के रूप में। इसी कारण से तो यह रावण और कंस इत्यादि नहीं जान पा रहे हैं ना कि वो ईश्वर है। यानी कि या और भी सामान्य लोग नहीं जान पा रहे हैं। यानी कि यानी कि राम जी कृष्ण जी को जो हम अवतार मान रहे हैं वो हम शब्द प्रमाण मान रहे हैं। हमारे पास में लाक्षणिक सिद्धांत नहीं है। वी कैन नॉट प्रूफ कि राम जी ईश्वर के अवतार हैं। हमें शब्द प्रमाण डिपेंड होना पड़ेगा। बात हमारी बात हम हां हमें शब्द प्रमाण पे ही डिपेंड होना पड़ेगा कि कौन ईश्वर है कौन नहीं है इस बात के लिए ईश्वर अवतार ले सकता है कि नहीं ये एक अलग चैप्टर है कौन ईश्वर है कौन नहीं है ये एक अलग चैप्टर है इसके लिए तो शब्द प्रमाण जाना पड़ेगा कैसे है मैं

01:38:25:25 समझा देता हूं हां हां बताइए लिंक ऐसे है कि जब हम बात करेंगे कि ईश्वर अवतार ले सकता है या नहीं ले सकता केवल बात इतनी ही नहीं है कि ले सकता है या नहीं ले सकता बात पूरे अवतारवाद पर है हमने आपने टाइटल लिखा अवतारवाद केवल इतना नहीं लिखा कि क्या वो ले सकता है? बस इसको प्रूफ कर दो। बाकी बात खत्म। बाकी छोड़ दो। इतना नहीं है। नहीं मैंने ऐसा नहीं कहा कि बाकी छोड़ दो। मगर ये चैप्टर अलग है। वो ले सकता है कि नहीं ले सकता है? एक अलग बात है। और किसको ईश्वर मानना है, किसको नहीं मानना एक अलग बात है। अभी हम उसप बात नहीं कर रहे। क्यों ले सकता है कि नहीं ले सकता? अवतार अवतार से अवतार से ईश्वर के समस्त लक्षणों मैं एक बात एक टैगलाइन देखूं। अवतार से ईश्वर के समस्त अवतार से ईश्वर के समस्त लक्षणों की आप जो है वाचन दृष्टि से वाचिक रूप से आप सिद्धि कर ही नहीं पाओगे क्योंकि बात मैं इसका आप पहले अपनी बात पूरी कर लो तब मैं एक उदाहरण दूंगा अच्छा सा बात पूरी करो देखो पॉइंट इसके अंदर यही है ना कि यानी आपने अभी हम इस पे चर्चा नहीं कर रहे कि वो कर सकता है या नहीं कर सकता ईश्वर है ना अभी हम जैसा कि आपने मेरे से शुरू में पूछा था ना कि हम क्या पहले इस पे चर्चा करें कि ईश्वर कुछ भी कर सकता है या हम पहले अवतार पे चर्चा करें मैंने ये बोला था कि पहले हम इस पे चर्चा करेंगे कि अवतार पे सब कुछ कर रास्ता नहीं कर सकता उस हम उसके बाद चर्चा करेंगे है ना तो अभी पॉइंट ये नहीं है कि अवतार ले सकता है या नहीं ले सकता वो फलाना काम

01:39:40:28 अभी इस पे चर्चा नहीं है अभी चर्चा किस पे अवतार पे चर्चा हुई तो है आप बोल लो बोल लो बोल लो तो पॉइंट इसके अंदर क्या रहता है कि अभी हम अवतार पे चर्चा कर रहे हैं अब जब अब बात ये है कि अगर मेरे सामने अवतार मैंने अब हमने समझ लिया कि भैया अवतार क्या होता है उसकी धारणा क्या है अवतार मेरे सामने है मैंने पूछा था राम और रामपाल में भेद कैसे करेंगे तो पॉइंट यही है कि मान लो कोई मेरे को शब्द प्रमाण लाके जैसे वो कबीर शब्द से कबीर शब्द सिद्ध करते हैं कबीर को सिद्ध करते हैं है तो वो भी अपना खैर उसके अंदर गुरु परंपरा वाली बात आती है लेकिन फिर भी सामने वाला भी कुछ ना कुछ एक कर रहा है तो उसके अंदर जो इंपॉर्टेंट क्योंकि नास्तिक के सामने ये चीजें सिद्ध नहीं हो सकती जैसे आप कहते हो ना मैं नास्तिक के सामने सिद्ध कर दूंगा उसमें पॉइंट ये आता है कि नास्तिक के सामने एक पॉइंट ये आता है कि मैं ईश्वर को भी क्यों मानूं तो फिर हम बोलते हैं ना भाई ईश्वर के लक्षण है बोलेंगे सृष्टि करता है कौन अपने आप कैसे बन गई सृष्टि वो विषय आ जाता है ठीक ज्ञान अपने आप कैसे हो गया हो गया तो आदिवासियों को क्यों नहीं हुआ आज तक तो ऐसे जो विषय आते हैं तो उसमें पॉइंट ये आता है कि लक्षणों वाली ठीक है कि ज्ञान प्रकट करता है बल तो स्वाभाविक ज्ञान या स्वाभाविक बल। ठीक है? लक्षणों की हमारे यहां बात आ जाती है। उसी प्रकार से अवतार की जब हम बात करते हैं तो यानी आपने स्वीकार कर लिया कि अवतार का कोई लक्षण नहीं है। वस्तुता नहीं है। लक्षणों के माध्यम से अवतार को पहचान नहीं सकते। मेरे सामने राम जी भी खड़े होंगे तो भी जैसा आपने खुद स्वीकार कर लिया कि बहुत लोग नहीं पहचान पाए कि राम जी

01:40:56:12 अवतार हैं या नहीं है। है ना? तो ये पॉइंट है। यानी आपने मान लिया कि लक्षण अवतार के नहीं होते। उसको हम नहीं स्वीकार कर सकते। क्योंकि आपने जो पॉइंट बोला था कि वो सर्वजिता आदि लक्षण स्वीकार नहीं कर सकते। नहीं बोला है स्वीकार नहीं कर सकते बोला है डिफाइन नहीं कर सकते ये बोला है डिफाइन नहीं कर सकते ये बोला है लक्षण वहां पे हम व्यवहारिक रूप से हम उसको डिफाइन नहीं कर सकते पॉइंट हां पॉइंट देखिए पॉइंट पॉइंट इसके अंदर वही है ना कि जैसे मेरे सामने कोई पुलिस वाला खड़ा है तो मैं बोलूंगा ना कि पुलिस की वर्दी है पुलिस का आई कार्ड इत्यादि इत्यादि तो हमारे पास पहचान है पहचान तो लक्षण क्या होता है पहचान होता है आत्मानुलिंगात लिंगात अर्थात लिंग अर्थात लक्षण लक्षण अर्थात पहचान ठीक है तो किसी चीज की पहचान किससे हो रही है? तो अवतार की पहचान लक्षण मतलब पहचान ही होता है। तो उसकी पहचान क्या है? है ना? तो बात वही है कि मेरे सामने अगर अवतार खड़ा है तो मैं पहचानूंगा कैसे? तो आपने बोला भैया चेक करो कि सर्वज्य है कि नहीं है। तो चेक किया तो नहीं है। बहुत बातें नहीं पता। चेक करो सर्वस के मानने कि नहीं है। तो नहीं वो तो दूसरों के ऊपर डिपेंड हो रहा है। ठीक है? तो ऐसे पॉइंट आ रहे हैं। तो यानी जो आपने लक्षण बताए वो नहीं घटित हो रहे। तो आप मुझे कुछ ऐसे लक्षण बताओ जो घटित हो जिससे मैं पैरामीटर से चेक कर सकूं। तो आप मुझे वो लक्षण बताओ। क्योंकि जो आपने बताए वो मैच नहीं हो रहे। देखिए अब मैं थोड़ा सा टाइम लूंगा। मुझे बोलने दीजिएगा। इंटरप्ट मत करिएगा। पहले तो मैं एक उदाहरण दे दूं

01:42:12:21 कि मान लीजिए कि कहीं पर भाई बहन विवाह कर रहे हैं और कोई नवक्पित जो तंत्र है रामपाल इत्यादि तरीके का वो भाई और बहन का विवाह करा रहे हैं कि भैया जो है हमारे पास एक ईश्वर का नया कांसेप्ट है और उसके अनुसार हमें अमुक अमुक तरीके से पता चला है कि भाई बहन भी विवाह कर सकते हैं। एक ही माता-पिता से जने लोग विवाह कर सकते हैं। अब उसमें क्या होगा कि नहीं भैया तुम गलत कह रहे हो। जो है आप जो है ये कैसे कह रहे हो गलत भैया वेद में लिखा है नहीं भेद तो मिलावट हो गई ये हो गई वो हो गई मनुस्मृति में लिखा है कि नहीं भैया मिलावट हो गई अच्छा भैया अब ईश्वर जो है यहां पे मान लीजिए परेशान हुए मान के चलिए वाली बात है अब वो ईश्वर ने कहा कि कैसे बताऊं ईश्वर स्वयं एक रूप धारण करके चले आए मैं ईश्वर हूं मैं बता रहा हूं भैया ये जो तुम कर रहे हो गलत है तुम ईश्वर कैसे हो सकते हो तुम ईश्वर कैसे हो सकते हो तुम तो सर्व्यापक हो तुम कैसे सकते हो? अब सोचो कि वो सर्व्यापक जब तक दिखेगा नहीं तब तक वो किसी की बात मानेंगे नहीं और दिख गया तो उसकी ईश्वरता भंग हो गई। समझ रहे हैं आप मेरी बात? जो मैं जिस ओर संकेत कर रहा हूं पहली बात। दूसरी बात ये है कि जिस प्रकार से अब आप ये

01:43:24:12 बताइए ईश्वर को एक रस मानते हैं कि नहीं? एक रस मानते हैं। कहीं भी ना ज्यादा है ना कम है। ठीक है? पूरा बोलिए। तो अब बात ये है कि जो एक रस ईश्वर है जैसे मान लीजिए मेरे सामने यहां टेबल है इस पर रख के इस ट्राईपॉड को मैं आपसे बात कर रहा हूं। ठीक है? इस पे कई सारे डब्बे रखे हुए हैं। कई सारे डब्बे इस पर रखे हुए हैं। कोई बड़े हैं, कोई छोटे हैं और कहीं-कहीं पर है ही नहीं। अब

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01:43:59:25 मुझे जो एक रस ईश्वर है, एक रस वो ईश्वर जो है क्या कहते हैं यह? जब मैं चाहूं कि यहां से मुझे डब्बे नीचे गिराने हैं।

01:44:14:28 अगर मैं एक रस हूं सब जगह तो जब मैं हरकत करूंगा तो सारे डब्बे एक साथ नीचे गिरेंगे। इवन जो खाली जगह है जहां पे डब्बा नहीं भी होगा वहां पे मेरी वो फोर्स लगेगी। मगर यदि मेरे पास रेगुलेट कर सकने की स्वयं को शक्ति है कि मैं जहां चाहूं वहां के डब्बे में मेरा धक्का लगे और जहां चाहूं वहां ना लगे। यदि मेरे पास यह शक्ति है तो क्या कहते हैं? मैं ऐसा कर सकता हूं कि जिस डब्बे को मैं गिराना चाहूं वो गिरेगा और जिस डब्बे को गिराना ना चाहूं वो नहीं गिरेगा और जो खाली जगह है वहां मेरी शक्ति काम ही नहीं करेगी। ये मेरे पास शक्ति है। मगर प्रॉब्लम क्या है कि शक्ति के रूप में भी मैं ही हूं। शक्ति के रूप में शक्ति कोई अलग से तो है नहीं। भाई तीन आपने तीन तत्व माने हैं एक तरीके से जीव प्रकृति और ब्रह्म तीन तत्व माने ना आपने तो शक्ति कोई ब्रह्म की शक्ति तो अलग से कोई ब्रह्म ही शक्ति के रूप में है तो जब वो शक्ति के रूप में अपने आप को कम ज्यादा कर रहा है तो वहां पर उसकी एक रास्ता भंग हो रही है तो फिर उसको ईश्वर क्यों कह रहे हैं कहने का मतलब है अगर आपका ये सिद्धांत मान लेंगे कि वहां शब्द प्रमाण से हम नहीं पा रहे तो आप हमको यह कहना पड़ेगा कि इस ईश्वर की स जो सृष्टि

01:45:30:07 रचना है वो ईश्वर ने नहीं की है क्योंकि ईश्वर तो एक रस है और ईश्वर तो यहां पे कम ज्यादा हो

⬜ Not used yet · 01:45:36:09 – 01:59:57:13 (14:21)

01:45:36:09 रहा है। अच्छा हो गया। हां एक बात और थी मैं भूल गया रिवाइंड करना पड़ेगा। हां जी बताइए। हो सकता है मैं बोलूं तो आपको याद आ जाए। मैं बोलता हूं शुरू करता हूं। तो बात थी लक्षणों पे। हां नास्तिक नास्तिकों के लिए नास्तिकों के लिए आपने कहा था। नास्तिकों के लिए तो नास्तिकों को जो बता रहा है ना जो चीजें बता रहा है कसतो सद्गम तमसोर्गम है ना सबसे पहली बात ये है कि ईश्वर एकिस्ट करता है कि नहीं करता ये वाली बात उसको बतानी है एकिस्टेंस है कि नहीं नास्तिक के लिए सबसे पहले तो ये जरूरी है वो तो फिर बाद की बात है कि अगर उसने एक्सिस्टेंस उसका मान लिया तो फिर भी उसकी श्रद्धा है कि वो जिसने उसको सिद्ध किया उसी की बात माने या फिर अपना नया ईश्वर खोजने चला जाए वो तो उसकी बात मगर हम उसके समक्ष यह सिद्ध करते हैं कि हां एक सत्ता है। अब उसके बाद हमारे पास और भी तार्किक चीजें हैं जिसके कारण तुम वैदिक स्क्रिप्चर का अनुगमन करो। मगर वो ये कह दे कि अगर ईश्वर सब कुछ कर सकता है तो यही दिखाओ। तो बात तो वहीं से शुरू हो गई। जहां से वो कह रहे थे। जहां से शुरू हुई थी बात। बहुत इसका स्पष्ट सीधा सा सिंपल सा उत्तर है। आप नास्तिक के सामने बात करोगे तो मैंने ये नहीं कहा कि नास्तिक को सिद्ध कर दो। फिर उसके बाद बात करो। कहने का मतलब

01:46:51:15 ये कहने का मतलब ये है कि हमें वहां अपने कहने का मतलब ये है कि हमें वहां अपने सिद्धांत बताने हैं। वहां हमें उनको करके नहीं दिखाना है कि ये कर दिया लो। एक एक चीज हमें वहां सिद्धांत बताने है। ये सिद्धांत है जो तार्किक रूप से बिल्कुल सिद्ध होते हैं। जैसे ईश्वर अवतार ले सकता है। सिद्ध होता है। अब वो ईश्वर के लक्षण उसमें हमको शब्द प्रमाण से मिल रहे हैं कि नहीं मिल रहे वो तो बाद की बात है। ईश्वर ले सकता है कि नहीं बात इसकी तो ले सकता है। वो हमने सिद्ध कर दिया। फिर आगे दूसरा चैप्टर है वो क्या कहते हो शब्द प्रमाण वाली बात जी अब आप बताइए ठीक है अभी बीच में मत बोलना ना जैसे अभी आप बीच में बोल गए ना बताइए बताइए बताइए अब बात ये है अब जैसे आपने नास्तिक वाला पॉइंट छेड़ा ठीक है नास्तिक वाले पॉइंट में पॉइंट ये आता है जैसे क्योंकि मूल विषय चल रहा था लक्षणों वाला अब जैसे आप जब आप नास्तिक के सामने ईश्वर को सिद्ध करते हो तो आप क्या बोलते हो कि सचित आनंद की जो चाह है ठीक है वहां पे जो आप ईश्वर का लक्षण ब्रह्म का लक्षण करते हो क्या करते हो सतित और आनंद उसका लक्षण ये करते हो। ठीक है? इसके अलावा आप एक बात बोलते हो सत्यम जान अनंतम ब्रह्म। सत्यम जान अनंतम ब्रह्म में जब आप शंकर भाष्य पढ़ोगे तो शंकर भाष्य में आचार्य शंकर ने लिखा है सत्यम, जानम और अनंतम ये तीन ब्रह्म के लक्षण है। ये लिखा हुआ है। ठीक है? अच्छा। यानी हम ब्रह्म

01:48:06:24 का भी लक्षण कर रहे हैं। ईश्वर जो आप सच्चिदानंद उसका हम लक्षण कर ही रहे हैं। नास्तिक के सामने हम उसका लक्षण नहीं तो नास्तिक को बोलोगे क्या कि मैं किसकी बात कर रहा हूं? किसकी बात कर रहा हूं? नहीं पता चलेगा। तो बताने के लिए उसका लक्षण करना पड़ेगा। है ना? आ जाता है पॉइंट। तो जब आप यह बोलोगे कि मैं अवतार की बात कर रहा हूं। ठीक है? बिल्कुल वैसे ही जैसे आपने वो रामपाल वाला उदाहरण दिया कि रामपाल ने कुछ हरकतें कर दी और बीच में कोई आया। ठीक है? मान लो ईश्वर वैसे तो ईश्वर मुक्त है तो वो परेशान तो होगा नहीं। ईश्वर मुक्त है तो परेशान तो होने से रहा वो। है ना? कि परेशान हो जाए कि ईश्वर अरे ये ऐसे ऐसे शादी क्यों कर रहे हैं? ये तो कुछ नहीं होगा। अपनी बात का जवाब देने की आवश्यकता नहीं है। मगर आप बोल दीजिए। ठीक है? अब इसमें पॉइंट क्या आता है कि अब अब जब इसमें यह आ जाएगा। ठीक है? अब ईश्वर मान के चलते हैं। अब ईश्वर को ये रूप ले के इत्यादि उनके सामने प्रकट हुआ। और ईश्वर बोले कि भैया ये जो कर रहे हो गलत कर रहे हो मत करो। सीधी सी बात है। अगर मेरे सामने ईश्वर आ के कुछ बोले। ठीक है? ईश्वर तो रियल में तो पहली बात तो मैं वेरीफाई जैसे उदाहरण इसको समझ लो कि जैसे कुरान है। ठीक है? सो कॉल्ड बोला जाता है कि भाई यह गॉड की बुक है। आप उसको वेरीफाई तो करोगे ना कि गॉड की बुक है कि नहीं है। करोगे ऐसा तो नहीं कि क्योंकि वो बोल रहा है कि मैं हूं। इसीलिए आप चुपचाप मान लोगे। है

01:49:22:00 ना? तब जैसा आपने बोला ना कि आपने तो ईश्वर को कटघरे में आपने तो अवतार को कटघरे में खड़ा कर दिया कि प्रूफ करो कि तुम अवतार हो। उसी प्रकार से ये बात जैसे जैसे हम खोलते हैं ना कुराण को कि भ कुरान में जो लिखा हम चुपचाप क्यों मान लें? तो पहले प्रूफ करो कि ये रियल में ठीक है? तो ईश्वर की किताब है। इसको प्रूफ करो। करना पड़ता है यह पॉइंट है ना वैसे ही अगर कोई मॉनिटर बनके आ जाता है तो हमें प्रूफ करना पड़ेगा कि भैया आप रियल में मॉनिटर हो कि नहीं हो जज बनके आया तो हो जज कि नहीं हो है ना वेरीफाई करेंगे बिना वेरीफाई किए तो हमें कम से कम पता तो चले कि ये है कि नहीं है पुलिस वाला आया है तो भैया वर्दी दिख रही है आई कार्ड दिख रहा है पता तो चल रहा है बैचवच है कुछ है ना तो जो चीज ये जो जो उसकी पहचान है उसी को लक्षण बोलते हैं। तो बात है इसी लक्षण के ऊपर मूल विषय जो है वो इस लक्षण के ऊपर ही है कि आपने जो दो लक्षण मुझे बताएं ठीक है आपने कहा कि मान लेते हैं सर्व्यापकता सिद्ध नहीं होगी जो पॉइंट उसके आप नहीं सिद्ध कर सकते मुझे कोई दिक्कत नहीं है मुझे कोई दिक्कत ही नहीं है आपने सर्व्यापकता मना कर दिया तो मैं कहा नहीं जा सकता ये बात है मैं समझ रहा हूं मैं समझ रहा हूं मेरी मेरी बारे में मैं आपने मेरे को बोला था ना चुप रहने को मैं चुप था है ना मेरे बारे में आप दो बार बोल चुके ये तीसरी बार आपने इंटरप्ट कर दिया मत करिए प्लीज है ना तो अब बात क्या आती है कि अब वही पॉइंट है ना कि जब हम अवतार के लक्षण की बात कर रहे हैं। है ना? तो आपने बोला आप ये जो बार-बार बीचबीच

01:50:37:03 में है ना हैना बोल रहे हैं ना ये हैना मत बोलिए नहीं तो मुझे वहां पर जवाब देना पड़ेगा। मैं मैं क्यों बोल रहा हूं इंटरप्ट जैसे अभी एक एक आध बार अपने मन से भी किया होगा मगर जैसे आपने अभी भी कहा ना एक एक मिनट आपने कहा ना बार-बार मत बोलिए तो वो इसलिए बोलना पड़ता है आप ऐसी बात बोल रहे हैं जिसमें ऐसा लग रहा है कि आप मुझसे पूछ रहे हैं। है ना? है ना? अच्छा मतलब आप सोच के पूछ रहे हैं कि आप यही समझते हैं या कुछ और समझते हैं तो मैं जो कुछ और समझता हूं वो आपको बता दिया नहीं नहीं बहुत सही किया आपने मेरे को बता दिया सही किया जी बिल्कुल बिल्कुल अब इसमें पॉइंट ये आ जाता है कि जब हम अवतार के लक्षण की बात कर रहे हैं तो सर्व्यापकता वाला पॉइंट क्लियर नहीं हो सकता इसको मैंने स्वीकार कर लिया आपने दो और पॉइंट दिए इसके अलावा जो आपने बोला कि हां ये हो सकता है क्या सर्वशक्तिमत्ता और सर्वजता लेकिन जब मैं उसे अवतार में घटाता हूं तो वो प्रूफ नहीं हो पा रहा है उस केस में अब वो मेरी थोड़ी है ना मेरी बोलने की आदत है आप थोड़ा एडजस्ट कर सकते हैं। मैं भी उसको कंट्रोल कर रहा हूं अपनी साइड से। मैं भी मैं भी कोशिश करूंगा। कोशिश कर अब इसमें पॉइंट यही आ जाता है कि जब मैंने उसको वेरीफाई किया तो वो लक्षण उसमें घट नहीं रहे। तो लक्षणों के बिहाफ पे मैं उसे अवतार नहीं मान सकता। लक्षणों के बिहाफ पे। जैसे लक्षण जैसे सच्चित आनंद वो लक्षण के बिहाफ पे मैं उसको ब्रह्म मान रहा हूं। उसी प्रकार सर्वजता सर्वशक्तिमत्ता के जो लक्षण उसमें घटित

01:51:52:09 हो ही नहीं रहे हैं तो उस बिहाफ पर मैं उसका अवतार नहीं मान सकता। एक पॉइंट यहां आ जाता है। हां उस पॉइंट पे आप ये क्लेम करोगे कि नहीं मेरे पास शब्द प्रमाण है इसलिए आप मान लो। शब्द और शुरू में आपने मेरे से बोला था कि नहीं शब्द प्रमाण हम फ़िलहाल बात नहीं करेंगे। मैंने भी बोला था कि आप चिंता मत करिए। शब्द प्रमाण हम बात नहीं करेंगे। हम शब्द प्रमाण जब तक ज़रूरत ना हो एकदम लास्ट हम नहीं जाएंगे। बात यही आ जाती है कि किस पे बात आ जाती है? यही तार्किक चर्चा पे। तो तार्किक चर्चा में तो बिना लक्षणों के तो तार्किक चर्चा हो ही नहीं सकती। भाई किस वस्तु के विषय में बात कर रहे हो पता ही नहीं होगा बिना लक्षणों से। तो वो पॉइंट है। है ना? तो मैंने आपसे ये पूछा कि आप मुझे सर्वशक्तिमत्ता और सर्वजता ये दो पॉइंट तो फेल हो गए। तो मुझे कोई ऐसा लक्षण बता दीजिए जिससे मैं पहचान कर सकूं अवतार की। फिर हम सिद्धि की ओर जाएंगे। जी कुल मिलाकर के आपने जो बातें बोली है उसमें यह है कि आप शब्द से नहीं शब्द प्रमाण से नहीं ईश्वर के अवतार को स्वीकार करोगे उसके किसी आचरण से उसी किसी क्रिया से गतिविधि इत्यादि से यही बात है ना अन्यथा ईश्वर ईश्वर अवतार क्यों है ये वाला अवतार क्यों है ये आप जो है इस पे आपका क्वेश्चन है मैं किसी को अवतार क्यों मानू ये क्वेश्चन है अवतार ले सकता है कि नहीं ले सकता ये चैप्टर अभी क्लोज हो गया है मैथमेटिक वाली बात

01:53:07:13 नहीं अभी फिलहाल के लिए थमा हुआ है मैं वहां तक आई थी बात अविद्या तक अविद्या तक जब चीजें चल रही थी तब तक वो बात आई नहीं हुआ है उसप हम वो कंक्लूड नहीं है मगर अभी फिलहाल थमा हुआ है ना ये तो मानना पड़ेगा ना कि वो अविद्या वाली बात जहां पे आई है वहां पे वो रुका हुआ है मतलब वो है बिल्कुल कोई अच्छा अब बात आ रही है अब आपने कहा है कि आपने कहा कि शब्द प्रमाण से आप मान लो मतलब शब्द प्रमाण आपको स्वीकार नहीं कुछ तो उसमें लक्षण क्या कहते हैं जो आपने कहा कि ये कट गया वो कट गया ये फेल हो गए दो फेल हो गए तो आपने कहा कि शब्द प्रमाण तो हम किसी को अगर प्रूफ करेंगे तो शब्द से हमें प्रूफ करना होगा कि भैया ऐसा ऐसा है तो अब बात ऐसी है कि जैसे कि बहन के साथ विवाह नहीं करना है। यह हम किसी नास्तिक को बता रहे हैं। बहन के साथ विवाह नहीं करना है। अब वो कहेगा प्रूफ करो। तो हम कैसे कर सकते हैं? क्योंकि शब्द के शब्द प्रमाण तो हटा देना है। कैसे करेंगे प्रूफ? बताइए। जानवरों में भी जब तक उन्हें अपने पार्टनर की अवेलेबिलिटी नहीं होती। ठीक है? तो जानवर भी आपस में कंसेंट नहीं करते हैं। तो हम पशु आपस मतलब एक ही मां से एक ही मां से पैदा हुए वाले एक ही मां से पैदा हुए कंसेंट नहीं करते हैं। हां जब तक ऐसा ना हो कि जब तक उन्हें कोई मीटिंग करने के लिए कोई पार्टनर मिल नहीं

01:54:22:14 रहा हो। कुत्तों में बड़ा कॉमन है। इसके ऊपर बहुत रिसर्च हो रखी है। आप इजीली अवेलेबल चेक कर सकते हो। एक बात। दूसरी बात ये कि हम चीजें देख सकते हैं। जैसे ऐसे लोग जो आपस में कंसेंट करते हैं। ठीक है? उनके बच्चे वीक पैदा होते हैं। ठीक? नहीं तो सामने वाला घुमा करके प्रश्न कर देगा कि अगर आपकी किताब में लिखा हो लेट सपोज ठीक है अगर आपकी किताब में लिखा हो क्योंकि जैसे आपने लेट सपोज ही लिया है ना कि अगर मान लो नहीं पता हो कि भाई बहन के साथ करना चाहिए नहीं करना चाहिए अगर नहीं रियल में तो हमें पता है भाई इससे नुकसान होता है हमें पता है अगर नहीं पता हो तो आपने जैसे अगर वाला प्रश्न किया ना तो नास्तिक भी अगर वाला प्रश्न कर दे कि अगर आपकी किताब में लिखा हो कि माता और बहन के साथ में करना चाहिए तो क्या आप कर लोगे क्योंकि आप तो शब्द प्रमाण को आंख बंद करके फॉलो कर रहे हो तो अगर लिखा हो तो कर लोगे तो सामने वाला ये भी ये प्रश्न कर अच्छा बाकी ऐसी बात नहीं है कि शब्द प्रमाण अब देखो आपने इस चीज को कैसे लिया समझो इस चीज को आपने कैसे आपने जब मुझसे भाई बहन वाला पॉइंट पूछा ना तो आपने क्यों पूछा आप मुझसे अभी ये मनवाना चाहते हो कि शब्द प्रमाण भी जरूरी है आपको शब्द प्रमाण को स्वीकार करना पड़ेगा ठीक है यही मनवाने के लिए आपने मेरे से पॉइंट बोला है मैंने अपनी तरफ से इसको रिजेक्ट नहीं किया मैंने अपनी तरफ से ये बोला ही नहीं कि मैं शब्द प्रमाण को नहीं मानता है ना जैसे एग्जांपल के रूप में मैंने बोला सत्यम जान अनंतम ब्रह्म मैंने कहां से पढ़ा मैंने शब्द प्रमाण ही पढ़ा है। सीधी बात है। उपनिषद से पढ़ा मैंने। पॉइंट इसके अंदर

01:55:37:15 इतना है। डिस्कशन की स्टार्ट बस इसको स्वीकार करना है। विरोध नहीं है। शब्द प्रमाण का विरोध नहीं है। इसको बस आपको स्वीकार करना है अपने मुंह से कि हां अवतार की सिद्धि शब्द प्रमाण से हो सकती है और नहीं हो सकती। आपको बस अपने मुंह से स्वीकार करना है। मुझे उसमें कोई दिक्कत नहीं है। ये पॉइंट है। लेकिन आप जब आप बोलते हो कि नहीं मैं पूरा बोल दूं? पूरा बोल दूं मैं। आप जब ये बोलते हो कि नहीं शब्द प्रमाण तो है ही है। इसके अलावा हम तो इसे तर्क से स्वीकार सिद्ध कर देंगे। वहां पे कमी आ जाती है ना। कमी ये आ जाती है कि आप जब उस चीज का लक्षण नहीं कर पा रहे तो सिद्ध करना तो बहुत कोसों दूर की बात है। है ना? तो वही पॉइंट है कि जब तक लक्षण जैसे सच्चिद जैसे आप पॉइंट वही है ना कि किताब में तो ये भी लिखा है कि ईश्वर है। लिखा है ईश्वर ने सृष्टि बनाई लिखा है। क्यों नास्तिक को सिद्ध करते हो? बोल दो किताब में लिखा है मानो चुपचाप। नहीं बोलते ना सिद्ध करते हो। सिद्ध करते हैं हम। तो पॉइंट इसके अंदर यही आ जाता है कि जब हम सिद्ध करते हैं तो उसे लक्षण बताते हैं। लक्षण बताए बिना पता नहीं चलेगा हम किसकी बात कर रहे हैं। उसी प्रकार हम किसी को अवतार सिद्ध करें तो अवतार का लक्षण बताना पड़ेगा। उसके बिना पता ही नहीं चलेगा कि हम किसकी बात कर रहे हैं। उसी प्रकार से तो वो लक्षण नहीं सिद्ध हो पा रहे। यानी केवल शब्द प्रमाण सिद्ध होगा। आपको बस इसे स्वीकार करना है। फिर हम आगे बढ़ते हैं। हां मैं आगे बढ़ता हूं। मैं बता देता हूं। पहली बात तो एक ये थी ना कि

01:56:47:03 अ तो इतनी सारी बातें हो जाती कि कौन सी बात उठानी भूल जाते हैं। एक आपने बात कही थी ना कि मुक्त है तो परेशान क्यों होंगे? ये बात कही थी। तो वो मैंने ये नहीं कहा कि वो परेशान हो के आए। यूं ही जैसे यू ही वो सृष्टि की रचना करते हैं। जैसे ही किसी जैसे यूं ही वो किसी पेड़ को हरा और किसी पेड़ को पीला बनाते हैं। यूं ही इसके पीछे रीजनिंग नहीं होती है। वो अपने मन से यूं ही यूं ही करते हैं। ऐसे ही उनका यूं ही मन हुआ कि भैया हम यहां जा रहे हैं तो जाते हैं। ये करने पहली बात मैं इसमें बस थोड़ा सा पहले मुझे बोलने दीजिए। यही होता है ना। आपने बहुत सारे पॉइंट बोले तो उसमें से कई पॉइंट मेरे रह गए। वही होता है। मैं आपसे पूछ रहा हूं। इसमें मैं आपसे पूछ रहा हूं। अगर आप ऑर्डर आगे आते हैं तो फिर मैं थोड़ा सा एक लाइन नहीं मैं मैं आ गया नहीं। अभी मैं थोड़ी अपनी सारी बातें कर लूं। अब दूसरी बात आपने ये कही कि कुत्तों में एक चीज होती है कि क्या कहते हैं वो जब तक वो ना मिले तब तक ऐसा नहीं करते हैं। यानी कि हमें ये बात माननी चाहिए कि जब तक ना मिले तब तक ना करें। बाद में जो है कर ले अगर ना मिले तो ऐसा है। दूसरी बात ये है कि शब्द प्रमाण को आपने ठुकराया नहीं है। बस मुझे ये बात माननी है। आपने कहा मैंने ये बात जो कही थी वो इसलिए कही थी कि हम ये चर्चा कर रहे हैं। वो अवतार ले सकता है कि नहीं। मुझे नहीं मालूम था कि अगर चर्चा मुझे ये बात मालूम होती कि वो अवतार

01:58:02:19 यह वाला है यह वाला नहीं है। यह डिसाइड कैसे होगा? तो उसके लिए तो मैं कहता हां इस बारे में शब्द प्रमाण है। मैंने जो ये लाइन कही थी उसकी हमको अभी शब्द प्रमाण पे नहीं तार्किकता पे है कि ले सकता है कि नहीं ले सकता। ठीक है? और दूसरी बात कि कौन होगा कौन नहीं होगा ये तो बाद की बात है। वो तो ले सकता ही मना कर रहा है ना। पहले इसको तो स्वीकार करो आप। तब मैं इसको स्वीकार करने पे आऊंगा कि भैया शब्द प्रमाण ही है इसके बारे में। पहले आप यह स्वीकार करो जब ले सकता है कि नहीं ले सकता मैं तो ले सकता है तो वो जो आर्य समाज का कांसेप्ट है कि नहीं ले सकता है वो बात कट रही है। दूसरी बात अब यह है कि आपने कहा कि हम किसी नास्तिक को ही नहीं कहेंगे। तो मैंने आपको उसके बारे में बताया है कि हम कई चीजों में जो क्या कहते हैं कई चीजें हैं जो शब्द प्रमाण से ही मानते हैं और मान लीजिए कि चलिए आपने कहा कि जब तक उनको मिलता नहीं है तब तक वो अपने अपने ही परिवार में इंटिमेट नहीं होते हैं। मैं कह रहा हूं गोद ली हुई बहन के साथ तो हमारे यहां मर्यादा है ना जो हमारी जेनेटिकली हमारे परिवार की वंशज नहीं है। फिर उसके साथ भोग करने में क्यों मन वो हो रहा है? फिर उसको आप सिद्ध कैसे करोगे? गोद ली हुई और यह एक बात नहीं है। ऐसी हजारों बातें हैं जो हमने शब्द प्रमाण से मैंने और आपने मानी हुई है। ठीक है? ये

01:59:17:25 तो एक उदाहरण मात्र है। अगर हम बात करेंगे तो ऐसी हजारों बातें होंगी जो हमने शब्द प्रमाण उसका एक मात्र है। अब उसमें अगर नास्तिक नहीं मान रहा है तो वहां पर हम कुछ नहीं। मगर नास्तिक के सामने ये प्रूफ कर सकते हैं कि हां सत्ता है। अब वो जाना चाहता है उसके बावजूद भी ये जो नियमावली है उसको फॉलो नहीं कर सकता है। तो वहां पर हम उसको वो नहीं कर। मगर वो जो ये कह रहा है कि ईश्वर का अस्तित्व ही नहीं है उसमें हम उसको निरुत्तर कर देंगे। अब उसके बाद वो आगे की डिबेट है कि उसको किस कौन सी वो माननी उसमें भी हम उसको निरुत्तर कर देंगे कि वो कौन सी नियमावली को मानेगा। ठीक है? वो एक अलग विषय हो जाएगा। अच्छा दूसरी एक बात ये है कि लक्षण की बात आखरी है। लक्षण लक्षण की बात ये है कि

01:59:57:13 जैसे आपने कहा आपको लक्षण नहीं दिख रहे। तो ऐसा भी हो सकता है कि आप अंधे हो। अगर हम कहें कि ईश्वर चिल्ला के दिखाया ऐसा भी हो सकता है कि हम बह रहे हो तो हमें वहां पर शब्द प्रमाण से यह पता चल रहा है ना कि वो रोल कर रहे थे। अगर हमको विश्वास नहीं शब्द प्रमाण में तो बात अलग है। मगर जब हमको शब्द प्रमाण से पता चल रहा है कि वो वहां पर रोल कर रहे थे। वास्तविकता में सर्वज्ञ ही थे। वो वहां पर दुखी होने का रोल कर रहे थे। वास्तविकता में वो आनंदित ही थे। वास्तविकता में वो सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म का व्यवहारिक रूप ही थे। तो हम हम उस पर विश्वास कर लेते हैं। आप मत करो। आप यह मत मानो कि यह वाला अवतार है। यह वाला नहीं है। आप यह कहना तो शुरू करो कि अवतार ले सकता है ईश्वर। आप

⬜ Not used yet · 02:00:40:26 – 02:16:20:07 (15:39)

02:00:40:26 ये तो कहो हो गया। हां बताइए। ठीक है। तो यानी आपने स्वीकार कर लिया इस बात को मोटा-म मोटी क्योंकि जैसा मैंने पहले ही बताया कि कि आपने जो देखिए आप अगर देखिए अगर आप शब्दों का खेल है तो मैं भी ये कह सकता हूं आपने यानी आपने स्वीकार कर लिया मोटा-मोटा कि ईश्वर अवतार ले सकता है। देखिए वो तो जनता डिसाइड कर ले कोई इशू नहीं है। लेकिन फिलहाल मैं बोलूंगा तो वो भी जनता ही डिसाइड करेगी। फिर वो क्यों बोल रहे हैं? वो भी जनता ही डिसाइड करेगी। मेरी आप बात सुने देखो आपने सुना भी नहीं कि मैंने किस चीज को स्वीकार करने के बारे में बोला। आप निर्णायक आप निर्णायक आप निर्णायक वक्तव्य जब दे रहे हैं तो मैं उसको क्रॉस कर रहा हूं। निर्णायक वक्तव्य मत दीजिए कि आपने यह कर लिया। मैं उसको क्रॉस कर रहा हूं। निर्णायक मत अपनी आप विवेचना दीजिए। आप अपना पक्ष बताइए। आप निर्णायक मत बनिए। वो जनता निर्णायक है उसका। निर्णय सुना रहे हैं ना आपने स्वीकार कर लिया। कितना बोलते हैं मुझे भी बोलने दीजिए। कितना अभी खत्म ही नहीं हुआ क्या आपका? चलिए चलिए बोलिए बोलिए बोलिए। खत्म ही नहीं होता। अच्छा ऐसा नहीं सुनिए। पॉइंट ये है कि मैंने जब बोला ना इस बात को कि आपने इस चीज को स्वीकार कर लिया। आपने सुना भी नहीं कि मैं किस चीज को स्वीकार करने की बात कर रहा हूं। आप बीच में आप इंटरप्ट करना चालू हो कि नहीं कैसे कैसे कैसे चलिए कर देता हूं। आपने आपने इस चीज को माना कि ये जो शब्द प्रमाण से पता चलेगा कि ये अवतार

02:01:56:04 है ये अवतार है। बाकी उसका लक्षण नहीं घटेगा। आपने मान लिया इस चीज को। मानते हैं ना इस चीज को एक्सेप्ट करते हैं। मैंने यही चीज बोली। लक्षण नहीं घटेगा। ये मैं कहां कह रहा हूं? लक्षण घटेगा मगर उसके हम गवाह नहीं बन सकते। ओवरऑल एट द एंड। लक्षण नहीं घटेगा। मैं कहां कह रहा हूं? मैं ये थोड़ी ना कह रहा हूं कि हम ईश्वर से कहे अगर तुम बात सुनिए जी चलिए ठीक है बताइए लक्षण नहीं घटेगा नोट कर लेता हूं मुझे समझ में नहीं आता कि मैं आपकी बात आप जो मैंने कहा है वो बोलिए ना आप आप जब वो बता रहे हैं पैराग्राफ मैंने कोई ऐसी बात कही जो आपने नहीं बोली है बताइए मेरे को बोल मैंने कोई ऐसी बात कही है कूद के मुझे बोलेंगे क्या तो कैसे बोलूं भाई आप आप अगर दो चार चीजें वो बोल आप दो चार चीजें गलत बता देंगे आप दो चार चीज़ मुझे गलत बता देंगे। अभी मेरे पहले के भी कई पॉइंट रह गए हैं जो मैं बोल नहीं पाया। अभी मैं बोल लूं। आप वो आप वो बोलिए। आप वो बोलिए जो कि मैंने बोला है। अगर मेरे अगर मेरे संदर्भ से बोल रहे हैं तो आप वो एज इट इज बोलिए जो मैंने बोला है। मैंने इनहीं का लक्षण नहीं घटेंगे। हम उसके साक्षी नहीं बन सकते हैं। वो व्यवहार में आएगा तो कहीं ना कहीं हमको ये होगा कि यहां पे दिख रहा है यहां नहीं दिख रहा। बोल लेने दीजिए। मैं सुन चुका हूं। मैंने क्या कहा? मैंने क्या कहा? जो मैंने बोला है वही आप बोलिए। मेरे संदर्भ से अपने संदर्भ

02:03:11:10 से कुछ भी बोलिए। मेरे संदर्भ से जब आप बोल रहे यानी आपने मान लिया कि उसके लक्षण नहीं घटेंगे तो ये बात मैंने कहीं नहीं बोली है। आप रिवाइज करके दिखा दीजिए। मैंने कहा बोली कि उसके लक्षण नहीं घट सकते। मैं सुन चुका हूं। 10 बार और तो आप उसको आप उसको स्वीकार करिए ना। मुझे क्या पता आप दोबारा ऐसा करने वाले हैं कि नहीं। फिर मैं इंटरप्ट करूंगा। फिर आप कहोगे कि कूदेंगे। आप उसको स्वीकार करिए ना। फिर आगे बढ़। मेरे भाई जब आप मुझे बोलने दोगे तब तो मैं कुछ बोलूंगा। बोलो रेगुलर रेगुलर रेगुलर लगे पड़े पता नहीं क्या अचीव करना चाहिए। अरे भाई जब आप देखो दूसरी बातें बोलोगे पर ये नहीं बोलोगे कि हां मैं नहीं करूंगा ऐसा आपके संदर्भ से जो चीजें आपने बोली वही बोलूंगा शांत हो जाओ मेरे को मेरी बारे में बोलने दो शांत हो जाओ हां बोलिए माइक आप म्यूट कर लो ठीक है पॉइंट ये ये आप तय मत करिए मैं क्या करूं क्या ना करूं आप ऐसे तय मत करिए मत बोलिए ना आप ये आप देखिए आप क्या कर रहे हैं मैंने जो चीजें बोली नहीं वो आप एक निर्णायक रूप में बोल रहे हैं कि मैंने ये बोला अब उसके बाद क्या होगा कि जो 10 चीजें और बता 10 चीजें और बता देंगे। उसके बाद मेरी एक चीज वो छूट जाएगी। मैंने बोला कि नहीं बोला। तो आप मेरे रेफरेंस से वही बात बोलिए जो बात आपने जो बात मैंने बोली है। दूसरी बात आपने दोबारा से आपने अभी कहा था कि आप कूदो शब्द का इस्तेमाल नहीं करेंगे। आपने फिर कर दिया। हां मैं माफी मांगता हूं। इसके लिए मेरे

02:04:26:14 से गलती हो गई। ठीक। अबकी बार ऐसा ना हो। नहीं तो हमको ये जो है जो चर्चा है यहीं पर रोकनी पड़ जाएगी। अबकी बार ऐसा ना करिए। हां। ठीक है। अब पॉइंट इसके अंदर ये आ जाता है हम आ जाते हैं मूल विषय पर कि जब हम लक्षण की बात कर रहे हैं तो आपने जो लक्षण दो लक्षण आपने बताए थे अब वो दोनों लक्षण जब हम जीवनी से चेक करते हैं तो कटते हैं। दोनों लक्षण वहां पे कटते हैं। पॉइंट इसके अंदर ये आ जाता है कि तब आपने इस चीज को स्वीकार किया। आपने बोला कि हां जब हम अवतार पे कि यह अवतार है या नहीं है इस विषय में हम शब्द प्रमाण पर ही निर्भर हैं। जो मैंने आपसे पूछा था वो मैंने पूछा था कि अगर हमें लक्षण पता हो तो हम लक्षण के द्वारा चेक कर सकते हैं कि फलाना व्यक्ति शब्द पर ये अवतार है। जैसे मैंने उदाहरण दिया था कि राम जी और रामपाल है ना। तो हम लक्षण पता हो तो हम चेक कर सकते हैं कि अगर वो रामपाल में लक्षण घट रहे होंगे तो रामपाल अवतार हो जाएगा। राम जी में घट रहे हो तो राम जी अवतार हो जाएंगे। वो लक्षण तो जो आपने लक्षण बताए वो जब हमने उसे राम जी के कॉन्टेक्स्ट में चेक किया तो वो कट रहे थे वहां पे। अच्छा तो जब राम जी के कॉन्टेक्स्ट में जरा मैं अपनी बारे में बोल लीजिएगा कोई। हां बोलिए बोलिए बोलिए है ना तो जब राम जी के कान्टेक्स्ट में जब हमें सिद्ध हो रहा है कि वो सर्वज्य नहीं है। ऐसे जगह आ रहे हैं जहां पे वो दिख रहा है कि नहीं वो उन्हें चीजों के बारे में नहीं पता। कृष्ण

02:05:41:20 जी के विषय में जब वो कृष्ण जब वो दत क्रीड़ा होती है कृष्ण जी युद्ध लड़ के वापस आते हैं। पांडवों से कहते हैं कि नहीं मैं तो था ही नहीं। मैं तो युद्ध लड़ रहा था। मुझे पता ही नहीं था कि यहां ये सब हो गया। मैं होता तो मैं ये होने नहीं देता। मैं तो दूध क्रीड़ा होने उन्होंने यह शब्द ये तक शब्द बोला कि अगर मैं होता और ये लोग नहीं मानते तो मैं सबका वध करके भी इसको रोकता। उन्होंने बोला था। वो कहते हैं कि मुझे नहीं पता था कि ऐसा कुछ यहां पे हो रहा है। मैं तो युद्ध में बिजी था। उन्होंने ये बात बोला। यानी वहां पे भी वो अपने अल्पजीता प्रकट करते। सर्वजिता वहां खत्म हो जाती है। तो अर्थात वहां पे लक्षण जो है वो नहीं मेरा मेरी एक रिक्वेस्ट है आपसे। मेरी एक रिक्वेस्ट मेरी एक रिक्वेस्ट है मैं थोड़ा सा इंटरप्ट करना मजबूरी है मेरी कि आप जो यह उदाहरण दे रहे हैं ना जिसमें कि उन्होंने ऐसा किया अगर ये उदाहरण देंगे तो हमें हमारी जो एक चर्चा व्यर्थ में एक ओर जाएगी मुझे फिर उसका भी खंडन करना पड़ेगा अगर वो आपने एक उदाहरण दिया आप अपनी एक बात रखिए कि हां उनकी सर्वजता प्रकट नहीं होती ऐसी कई चीजें मगर आप उसमें वस्तुनिष्ठता के साथ कोई संदर्भ दे देंगे और फिर मुझे लगेगा ये बहुत इंपॉर्टेंट है ऐसा ना हो कि यहां पर इससे लोग यही संदेश संदेश प्राप्त करके रह जाए कि उन्होंने अपने आप को यही कहा था। फिर मुझे वहां पर उसका खंडन करने के लिए दूसरा पूरा चैप्टर एक नया खोलना पड़ेगा। फिर हो सकता है उसमें आपको इंटरप्शन हो जाए तो फिर आप उसका खंडन करो। फिर मुझे उसमें इंटरप्शन हो जाता। तो उन चीजों से बचिए जिनसे कि हमारी जो चर्चा है भटक सकती है।

02:06:56:21 तो इसलिए आप अगर केवल सिद्धांत कह देंगे उससे भी काम चल जाएगा। उसमें आपको यह संदर्भ देने की आवश्यकता नहीं है कि उस समय ऐसा हुआ था। दे रहा था फिर मुझे उसमें फिर मुझे उसमें निराकरण भी प्रस्तुत करना पड़ेगा क्योंकि उसमें हमारे सिद्धांत की वो हो रही है ना अकीर्ति तो उसमें मुझे निराकरण प्रस्तुत करना पड़ेगा खामखा हमारी चर्चा बदलती चली जाएगी ट्रैक बदलता चला जाएगा ठीक है ठीक है ठीक है अब देखिए पॉइंट यानी इतना जो है दर्शकों को भी क्लियर हो चुका है आपको भी क्लियर हो चुका है कि हमें वहां पे कट रहा है अच्छा इस चीज में आपने ये कहा था जहां तक मैं समझ पा रहा हूं क्योंकि बहुत सारे पॉइंट मिसिंग भी होते हैं दिमाग से ठीक है जहां तक मुझे ध्यान आ रहा है आपने ये बात कहा था कि जो ईश्वर है मतलब वो कौन कौन सा जो अवतार है वो ईश्वर ने कौन-कौन से अवतार लिए ये हमें इसके लिए हम शब्द प्रमाण पे ही डिपेंड है। हम लक्षणों के माध्यम से हम वो चीज को क्या पता हम वेरीफाई ना कर पाए क्योंकि हो सकता है वो उसको दिखा ही ना रहा हो। एक पॉइंट आपने बोला था क्या पता वो लीला कर रहा हो तो दिखा ना रहा हो। है ना? इस पॉइंट में हम ये आ जाते हैं कि अगर हम ये लेके भी चलते हैं। वैसे तो लक्षण एक ऐसी चीज है जो कि अप्रकट नहीं होती प्रकट ही होती है। जब भी क्रिया होती है तो लक्षण प्रकट होते हैं। उसी को ही लक्षण बोले जाते हैं पहचान। ठीक है? कि अगर मैं वर्दी पहनूंगा तो वर्दी तो रहेगी ही रहेगी ना। वर्दी पहन के भी वर्दी ना रहे तो वो फिर वही बात है ना कि जैसे शादी होगा तो वो शरीर के साथ ही होगा। वो आ जाती है पॉइंट। अब उसी प्रकार से यह भी है कि अगर कार्य हो रहा है तो लक्षण तो सीधी

02:08:11:27 बात प्रकट हो गई होगी। है ना? अब इसके अंदर वही बात है। अब आप कह रहे हो कि नहीं लक्षण के माध्यम से तो हम वो पॉइंट वहां पे कट रहे हैं तो हम उसे ठीक-ठीक जांच नहीं कर पाएंगे कि रामपाल और उसमें क्या है। तो हमें शब्द प्रमाण निर्भर होना पड़ेगा। क्योंकि शब्द प्रमाण के आधार पे रामपाल अवतार नहीं है। राम जी अवतार हैं। तो इसलिए आप मान रहे हो। एक वाला पॉइंट यहां पे ये आ गया। यानी हमारे पास में मोटा-मोटी तौर पर यही है कि लक्षण जो है वहां पर मिसमैच नहीं हो पा रहे। फिर मैंने आपसे पूछा था कि मुझे कोई लक्षण दे दीजिए। दो लक्षण तो मिसमैच हो गए। मुझे कोई और तीसरा लक्षण दे दीजिए। तो वो आपने तीसरा लक्षण नहीं दिया मुझे कोई और आपने यही बोला कि नहीं शब्द प्रमाण ही है। उसी से ही हम इस चीज को स्वीकार करेंगे। चलिए ठीक है। कोई इशू नहीं है। इसको भी हम मान लेते हैं। अब हम आगे बढ़ते हैं सिद्धि की तरफ। अवतार सिद्धि की तरफ। अब जो मुख्य विषय जो आपने अवतार सिद्धि पे कर ले। अब इस जो आपने बोला इसप दे दूं आपको। शुद्धि की तरफ आगे बढ़ते हैं। ये जो आपने बोला अभी तक लक्षण वाला मैं बोल दूं इसलिए अगर हम इसको रिवाइज कर दे थोड़ा सा कि मैं आपसे पूछूं कि वो जो है ये लक्षण उनके कट रहे हैं। ये आपको कहां से प्राप्त हुआ? तो इस संबंध में आपके पास क्या प्रमाण है? सिवाय शब्द के। जीवनी है। ऐतिहास प्रमाण है। यही तो शब्द है। इसी शब्द की तो बात कह रहा हूं मैं। आप उनके लक्षण कटने के संबंध में भी तो शब्द प्रमाण ही दे रहे हैं।

02:09:27:25 इसको मैंने रिवाइज कर दिया केवल। आपने कहा कि उनके लक्षणों के संबंध में क्या प्रमाण है? तो मैंने कहा शब्द अब मैंने कहा उनके लक्षण कटने के संबंध में क्या प्रमाण है? तो आपने कहा शब्द तो हम तो दोनों एक ही मंच पे हैं। बस ये है कि आप शब्द एक मिनट एक मिनट भाई पूरा पूरा ले लो पूरा बता दूं। तो उसमें क्या है कि आप जो है शब्द प्रमाण थोड़ा मान रहे हो वो आपकी मान्यता के अनुसार और बाद वाला या उसी उसी चैप्टर में अगले पेज पे क्या दिया वो नहीं मान जैसे कि वाल्मीकि रामायण में लिखा हुआ है कि तुम सर्वज्ञ हो तुम ये लीला रूप कर रहे हो तुम परम ब्रह्म हो ये सब लिखा हुआ है उसी में तो हम शब्द प्रमाण को मान तो रहे हैं लक्षण कटने के लिए तो मान रहे हैं मगर लक्षण घटित होने के लिए नहीं मान रहे शब्द प्रमाण ठीक है मैं इसको समझा देता हूं मैं समझ मैं आपको समझा देता हूं कि मैंने ऐसा क्यों बोला मैं अपनी पूरी बात पूरी बात बोल दूं तो जी कहने का अर्थ ये है कि इस संबंध में इसलिए भी वो शब्द प्रमाण है क्योंकि यदि उनके होने के संबंध में यदि उनके ना होने के संबंध में आप शब्द प्रमाण को ले रहे हैं तो उनके होने के संबंध में भी शब्द प्रमाण को ही लेना पड़ेगा। पूरे शब्द को लेना पड़ेगा। पूरी जीवनी को लेना पड़ेगा। पूरा शब्द लेना पड़ेगा। यहां तक कि राम जी और कृष्ण जी थे। इस संबंध में भी शब्द प्रमाण है अंतोगत और

02:10:43:01 मैं आपको बताऊं और आपने एक बात और कही है लक्षण प्रकट होते हैं। बिल्कुल होते हैं। मगर कई लक्षण व्यवहारिक रूप से प्रकट नहीं कर सकते। ईश्वर एक रस है। ये प्रकट करेंगे तो ईश्वर की सृष्टि ही नहीं कर पाएंगे हम। प्रकट नहीं केवल प्राप्तव्य का विषय ये वाला लक्षण। ठीक है? अब जैसे लक्षण प्रकट होते हैं। ईश्वर ने सृष्टि बनाई। वैदिक ईश्वर ने ही बनाई। कैसे सिद्ध होता है? वैदिक ईश्वर नहीं देने बताइए लक्षण बताइए। वो थोड़ा सा विषय भटक जाएगा। अब तक जो बोला मैं पहले उस बोलना चाहूंगा। कहने का मतलब ये है लक्षण प्रकट होते बिल्कुल है। मगर कई लक्षण ऐसे हैं जो प्राप्तव्य का विषय है। वो व्यवहार में आ सकने वाले या फिर वाणी का निर्वाचन का विषय नहीं है। जैसे सच्चिदानंद लक्षण है ना आता है पॉइंट। मैम अब जो आपने मोटा मोटी मूल पॉइंट बोला उसको मैं एड्रेस कर देता हूं कि क्यों क्यों हम जहां राम जी को किसी बात के बारे में जानकारी नहीं है उस वाले पॉइंट को तो हम पकड़ रहे हैं लेकिन उस वाले पॉइंट को हम छोड़ दें जहां वहां लिखा है कि वो सर्वजन सरस्वती है। उस वाले पॉइंट को छोड़ कि ऐसा क्यों कर रहे हैं? रीज़न मैं बता देता हूं। रीज़न इसको उदाहरण देके समझाता हूं। बड़ा इजी है। समझिएगा इस चीज को। जैसे कुरान में

02:11:58:02 लिखा है कि जो अल्लाह है वो सर्वशक्तिमान है। कुरान में लिखा है कि अल्लाह ऑल नोइंग है। ठीक है? फिर भी हम उस पर तर्क करते हैं। है ना? वो तर्क में फंस जाते हैं। सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होते। अच्छा उसी प्रकार जैसे कुरान में लिखा है कि जो अल्लाह है वो ऑल नोइंग है। और एक जगह पे दूसरे जगह पे क्या कर रहा है? उसकी अल्पज्जता प्रकट हो रही है। दूसरे जगह पे वो उसे किसी बात की जानकारी नहीं है। तो हम वहां फंसाते हैं ना सामने वाले को फसाते हैं। कैसे फंसाते हैं? कि भैया अगर यह सर्वज्य है तो यहां पे ये कैसे अल्पज्ज्य हो रहा है। कैसे फंस रहा है पॉइंट पे? यानी कि कहने का अर्थ यह है कि शब्द रूप में तो आप इस चीज को मुंह से तो बोल रहे हो। नहीं जैसे उदाहरण समझिए जैसे मेरे सामने कोई व्यक्ति है। मैं मुंह से तो बोल रहा हूं कि नहीं बहुत महान बहुत बढ़िया आप तो गजब हो एकदम है ना हरकतें उसकी लुच्चों वाली है। तो क्या समझ में आया कि रियल में तो ऐसा नहीं है। लेकिन मैंने झूठ बोला या जो भी मैंने जो भी मेरा कारण था मैंने उसको या किसी उसके किसी चेले ने या लीवापोती करने वाले जिसने भी उसने उसको महान बताया। ठीक है? एक पॉइंट आ जाएगा। ये मैंने उदाहरण दिया खाली समझने के लिए बात है ना? इसके अंदर तो यही उसी प्रकार से अब जैसे मैंने वो कुरान वाला भी उदाहरण दे दिया उसी प्रकार से अगर कोई व्यक्ति ठीक है किसी ने अब जैसे किसी ने लिखा है रामायण में किसी ने लिखा कि राम जी जो है वो सर्वसक्तिमान है सर्वज्य हैं ठीक है आपने किसी

02:13:13:08 ने ब्रह्मा के मुंह से बुलवाना लिखा है या इंद्र के मुंह से किसके मुंह से बुलवाना लिख दिया ठीक लेकिन क्या जो वहां पे मुंह से यहां जो लिखा है वो चीज रियल में घटित हो रही है इतिहास के रूप में इतिहास के रूप में एक तो होता है सैद्धांतिक पक्ष एक होता है ऐतिहासिक पक्ष इसीलिए न्यायदर्शन में जो आठ प्रमाण है ना उसमें से दो प्रमाण आते हैं। एक होता है शब्द प्रमाण, एक होता है इतिहास प्रमाण। ऐतिह ठीक है? ऐतिहास प्रमाण। इतिहास प्रमाण में सैद्धांतिक बातें नहीं आती। घटनाक्रम आता है। है ना? सिद्धांतिक बातें जो होती है उसके लिए आप वचन प्रमाण होता है। वो शब्द प्रमाण के अंदर काउंट होता है। शब्द प्रमाण दो प्रकार के होते हैं। ठीक? तो ये आ जाती है चीजें। उसी प्रकार से उसी प्रकार से अब हमने यहां पे बात कर ली। तो यानी कि जब वो कह रहे हैं ब्रह्मा जी अगर कह रहे हैं कि सरस्वती है, सर्वज है। लेकिन जब हम उसको वेरीफाई करने के लिए उनकी जीव नहीं देख रहे तो वहां पर वो चीज हमें पता नहीं चल रही वो लक्षण घटित नहीं हो रही। तो पॉइंट वही है ना कि या तो इधर गलत है या तो इधर गलत है। भाई या तो ब्रह्मा जी का ब्रह्मा जी के मुंह से जिसने बुलवाना लिखा है वो गलत लिखा है। जिस किसी ने भी लिखा है। ठीक है? वो गलत लिखा है या तो एक या तो ये पॉइंट हो जाएगा। ठीक है? या फिर अगर वो सही लिखा है। अगर वो चीज पॉइंट सही है तो उनके द्वारा किसी विषय की जानकारी ना होना। वो जो घटनाक्रम लिखा है वो गड़बड़ घटनाक्रम है। उसमें हेरफेर की गई है। यानी दोनों में से कुछ तो कटेगा क्योंकि दोनों में विरोध हो रहा है। लिखा है सर्वज लेकिन सर्वजिता प्रकट नहीं हो

02:14:28:09 रही। तो उधर विरोध हो रहा है। ये पॉइंट है। हो गया। सबसे पहली बात एक आपकी चीज मैं जानकारी दुरुस्त कर दूं। जैसे राम जी का दुखी होना। है ना? उसमें लिखा है या राम जी या कृष्ण जी का अल्पज्ञता होना उसमें लिखा है कि उनको मालूम नहीं था। उनको मालूम नहीं था। है ना आप भी है ना है ना बोल रहे हैं उसको थोड़ा कंट्रोल करिए नहीं तो मैंने तो आपसे नहीं कहा ना कि बीच-बीच में जरा जरा सी बात में इंटरप्ट मत करिएगा आपने उस समय कहा था मुझको तो मैंने आपको बताया था कि आपने मैं जब आपसे मैं जब आपसे ये कहूं कि आप मुझे इंटरप्ट मत करना अगली बार जब ये कहूं तब आप कहो कि है ना मत कहो समझ रहे हो आप आप तो कर ही रहे हो मैंने आपको मैंने आपको ऐसा नहीं कहा कि अब अगली बार मेरे बीच में मत बोलना क्योंकि मैं समझता हूं यह स्वाभाविक एक बात है कहीं पे कोई बात हमें ठीक नहीं लग रही होगी और मैं है ना मैं है ना कहूंगा तो आप उसमें बीच में कर सकते हो। मैं उस आपको आपत्ति नहीं जता रहा हूं कि आप क्यों बोल रहे हो मेरे बीच में अबकी बार मत कूदना ये मत करना। मैं अगर बोलूंगा तो मुझे रोकते हो ना तो मैं वही बोल रहा हूं कि आप तो मैं ऐसे रोकता हूं कि मुझे बोलने दो। मैं आपका ये नहीं कहता अबकी बार मत करना ऐसा आप मतलब उस व्यवहार पर उस व्यवहार से आपत्ति प्रकट नहीं करता हूं। मैं आपको ध्यान दिलाता हूं। मुझे बोल लेने दो। आपत्ति प्रकट नहीं करता हूं। आपने गलती कर दी। ये नहीं जब करना पड़ता है जब बहुत ज्यादा अति हो जाती है तब

02:15:43:10 अति भी प्रकट करनी पड़ती है वो अति फिर वो फिर पैरामीटर आएगा कि भैया कौन डिसाइड करेगा आप वो भरा हुआ है उस आपत्तियों से वैसे तो चलिए वो देखिए कमेंट सेक्शन की अगर बात करेंगे तो फिर वही बात आ जाएगी कि भैया किसका कमेंट सेक्शन है किसने प्रचार किसने प्रचार किया है किसने नहीं किया है कौन अपने Instagram पे भी डाल रहा है यहां भी डाल रहा है वहां भी डाल रहा है किसको आवश्यकता थी एक दिन पहले से प्रचार करने की ये सब बातें भी आ जाएगी किसके लोगों को मालूम है? किसके लोगों को दूसरी बात दूसरी बात दूसरी बात दूसरी बात और मैं बता दूं और दूसरी बात और मैं बता दूं जुगनू और

02:16:20:07 उल्लू सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित नहीं होते हैं। वो टिमटिमाते हुए दिए की ओर आकर्षित होते हैं। तो जुगनू और उल्लू का सूर्य की ओर आकर्षित ना होने में जुगनू और उल्लू की असामर्थता का दोष है। सूर्य की सामर्थता का नहीं।

⬜ Not used yet · 02:16:36:19 – 02:32:16:16 (15:40)

02:16:36:19 और कंक्लूजन क्या निकला कि प्रकाश के विषय में जुगनू और उल्लू प्रमाण नहीं होते। ये कंफ ठीक है? अब मैं जो बातें आपने जो बातें आपने कही है जो बातें आपने कही है उनको मैं जरा बता दूं। ठीक है? जो बातें मूल विषय था बता दूं। हम हां वो ये है पहली बात आपने कही कि उनकी सर्वज्ञता प्रकट नहीं हो रही थी। ठीक है? तो जैसे हमने माना कि उनको नहीं पता था। यह किसी घटनाक्रम से माना या फिर एक वाक्य से माना कि मैं भूल गया हूं। भगवान श्री कृष्ण से के वाक्य से माना ना किससे माना? राम जी की बात चली। राम जी की घटनाक्रम से पता चला। भगवान श्री कृष्ण की बात आपने की ना कि मैं वो जो ज्ञान दिया था मैं भूल गया। की ना अभी मैंने नहीं अभी मैं अभी मैं कृष्ण जी का उदाहरण आपसे पूछ रहा हूं कि आपने भगवान श्री कृष्ण की बात बोलने से माना या फिर कोई दृश्य से माना कि वो नहीं जानते थे उनका उनकी अल्पज्ञता उनकी अल्पज्ञता को आपने किससे माना है उदाहरण तो आप अच्छा आचरण आचरण से भी गतिविधि से भी उनके बोलने से भी तो बोलने वाली बात तो कट गई क्योंकि वो तो शब्द ही है अगर

02:17:51:20 वो ये कह रहे हैं अगर वो ये मैं बता रहा हूं अगर वो ये कह रहे हैं कि मैं भूल गया तो वो ये भी कह रहे हैं मैं मैं सर्व नियंता हूं। सर्वज्ञ हूं। वो ये सब भी कह रहे हैं। कट गए। वो झूठ बोल रहे थे उस टाइम पे। मैं बता दूंगा क्या बोल रहे थे। एक है उनका व्यवहारिक पक्ष जहां वो रोल निभा रहे हैं। एक है उनका पारमार्थिक पक्ष सत्य का पक्ष जो वास्तविक नहीं तो वो अपनी चीज अपनी चीजों को बता रहे हैं ना। व्यवहार में रह के वो अपनी वो एक एक तरफ वो एक वो एक तरफ साधारण मनुष्य का रोल निभाने का प्रयास कर रहे हैं और एक तरफ अपने झूठ नहीं बोल रहे। एक तरफ अपने पारमार्थिक सत्य को बता रहे हैं। व्यवहारिक सत्य होता है ना। जैसे आपने जैसे आपने जैसे आपने जब जैसे आपने जब किसी से ये कहा ना कि उधर चले जाओ तो ये झूठ नहीं है। व्यवहारिक सत्य हमारा यही है कि हमने उसको सही रास्ता बताया है। नहीं तो कहना तो यूं चाहिए यूं गोल चले जाओ। पहली बात। अच्छा ये भी गलत पॉइंट है। वैसे तो मैं उसको बाद में कर दूंगा अपनी बारी में। चलिए ठीक ठीक मैं बताता हूं। मैं बताता हूं अब। मैं मेरी बात पूरी कर लूं। हम अब आपने एक उदाहरण दिया कि भाई उनकी गतिविधियों से भी यह सिद्ध होता है कि वो नहीं जानते थे। कुल मिलाकर के आप आपका कहना यह है कि

02:19:05:27 शास्त्रों में क्योंकि उनके अल्पज्ञता वाली बातें लिखी हुई है जिन ऐसी गतिविधियां ऐसे स्मृति ऐसे इतिहास प्राप्त है जिससे वो अल्पज्ञ सिद्ध हो रहे हैं तो हम अगर दूसरी ओर ये कोई कह देगा शास्त्रों में कह देगा घटना नहीं कह कहने मात्र से हम कैसे मान लेंगे तो इसका निवारण ये है कि हमारे शास्त्रों में उनके द्वारा ऐसी कई चीजें ऐसी कई घटनाएं सिर्फ कहना नहीं घटनाएं प्राप्त है जिससे उनकी सर्वशक्तिमत्ता सिद्ध हो रही है जो असाधारण चीजें हैं जो उन्होंने की जैसे विराट स्वरूप दिखाना जैसे विराट स्वरूप दिखाना ये असाधारण चीज थी जो उन्होंने की और ऐसे कई असाधारण जो शास्त्र हैं शास्त्रों में वर्णित घटनाएं हैं जो हमें शब्द प्रमाण के द्वारा हमें प्राप्त है जो घटनाएं हैं इतिहास है जो अब उस इतिहास को आप ना मानो वो बात एक अलग है मगर वहां शब्द नहीं होगी नहीं ठीक है मैं मैं अभी मैं कर लूंगा। मैं कर लूंगा मैं सिद्ध कर लूंगा। दूसरी बात यह है आपने अल्लाह का उदाहरण दिया कि अल्लाह एक जगह कहता है सर्वशक्तिमान हूं। दूसरी जगह कहता है कि क्या कहते हैं वो उसकी वो उसके ऊपर घटित नहीं हो रही है। तो बात ऐसी है कि अल्लाह ने कहीं भी ये नहीं कहा है। एक जगह ये कहा है कि अगर मेरी संतान नहीं हो सकती तो कहीं ये नहीं कह दिया है कि संतान हो सकती है। उसके बाद उसके जो प्रामाणिक

02:20:21:08 लोग हैं उन्होंने कंक्लूजन ये नहीं दिया है कि नहीं वो अवतार ले सकता है। इसलिए हम उससे काउंटर करते हैं उसकी बात का। और हमारा क्या है कि व्यवहार और परमार्थिक दृष्टि से शास्त्रों में दोनों तरीके की बातें चली है। इसलिए हम कंक्लूजन लेने गुरुओं के पास जाते हैं। शब्द प्रमाण के पास जाते हैं जो हमें बताते हैं। नहीं भैया राम जी अंतत गतवा जो है परम सत्य का ही स्वरूप थे। अवतार हो गया। हां अब बोलिए। ठीक है। अब इसमें जो एक बात आ जाती है बात इसके अंदर ये आ जाती है जो आपने इसमें पॉइंट रखा था कि इसमें क्या बोलते हैं? हां कि अभी जो हमने उनके सर्वशक्तिमत्ता कुछ कुछ उदाहरण मिलते हैं सर्वजता का कुछ-कुछ उनके दृष्टांत मिलते हैं। अब इसमें पॉइंट यहां पे ये कटेगा इसमें पॉइंट ये कटेगा कि आपने आपकी एक व्यक्ति के साथ में चर्चा हुई थी। ठीक है? और वो चर्चा थी हनुमान जी के बंदर पूछ इत्यादि कुछ ऐसा कुछ विषय था। वो चर्चा उसमें आपने उस व्यक्ति को एक बात बोला था कि अगर कोई व्यक्ति सत्यनिष्ट है तो उसका झूठ बोलना सिद्ध नहीं होता। झूठ बोल रहा है तो सत्यनिष्ट होना सिद्ध नहीं होता। इस उदाहरण के बाद आपने बोला था कि उसी प्रकार अगर सर्वशक्तिमान है तो बाधित होना सिद्ध नहीं होता। बाधित है तो सर्वशक्तिमान होना सिद्ध नहीं होता। उसी प्रकार से अगर आप मुझे राम जी के दृष्टांत की बात कर रहे हो। एक भी पॉइंट पे उनकी अगर बाध्यता सिद्ध हो

02:21:36:09 गई तो सर्वशक्तिमान होना सिद्ध नहीं होता। और अगर वो सर्वशक्तिमान है तो बाधित होना सिद्ध नहीं होता। ठीक? तो यहां से आप वाला आप ही के पॉइंट से आप ही का जो पॉइंट है वो यहां पे उसमें विरोध आ रहा है। कट रहा है। विरोध इसलिए नहीं आ रहा है कि वो बात मैंने कही थी व्यवहार में। केवल व्यवहार में और यहां पर मैं यह बता रहा हूं कि उनके पारमार्थिक सत्य है कि वो सर्वज्ञ है और व्यवहार में उन्होंने ऐसा रोल प्ले उन्होंने ऐसा रोल प्ले लक्षण की बात है ना समझिए इस चीज को तो लक्षण की बात तो मैंने बता तो दिया आपको कि भैया उसमें शब्द प्रमाण है और आप और आपने भी माना कि कई चीजों में हम शब्द प्रमाण को ही मानते हैं और उनके उनके उनके सुनिए उनके उनके जो क्या कहते हैं उनके लक्षण कटने के विषय में भी आपने शब्द प्रमाण ही रखे हैं। नहीं तो आप दीजिए दूसरा लक्षण कटने के विषय में क्या प्रमाण है? ना ना देखिए हमारी हमारी बातचीत कैसे चली? इस चीज को फिर से रिवाइंड करूंगा। मैं समझ जाएंगे आप। बात हमारी ऐसे चली कि जब मैंने ये बोला कि वो जैसे जब हमने बात की लक्षणों की तो आपने बोला सर्वजिता और सर्वशक्तिमत्ता ये उनके लक्षण है। तो मैंने ये बोला कि वो ऐसे और जो फिर आपने बोला कि मैंने ये पॉइंट रखा था कि ये लक्षणता जो उन्हें है सिद्ध नहीं हो रही राम जी में। ठीक है? तो आपने बोला कि नहीं ब्रह्मा जी ने तो आपने मुझसे पूछा कि ये पॉइंट आप कैसे बोल दो कि सिद्ध नहीं हो रहा? शब्द प्रमाण से बोल रहे हो। मैंने कहा ठीक है। तो आपने बोला

02:22:51:10 कि उसी शब्द प्रमाण से भी तो ब्रह्मा जी बोल तो रहे हैं कि सर्वज सरस्वती मानो तो तो मैंने उसमें विरोध बताया कि ये कैसे विरोध आ रहा है। विरोध ऐसे आ रहा है कि ब्रह्मा जी क्लेम तो कर रहे हैं लेकिन मैं बीच में नहीं बीच में नहीं बीच में नहीं। पॉइंट ये हां अच्छी बात है। अच्छी बात है। तो पॉइंट ये कि ब्रह्मा जी जो है अगर वो क्लेम कर रहे हैं। ब्रह्मा जी कह रहे हैं कि हां इसमें जो है सरस्वती मान है और बाद में क्या हो रहा है कि उनकी सर्वजिता और सरस्वती माता दृष्टांतों में वो अभिव्यक्ति उसकी नहीं होगी। की कम हो गई है। हेलो मेरी आवाज सही है? मेरी आवाज सही है? कम आ रही है। कम कैसे आ रही सब कुछ तो सही है। रुकिए एक सेकंड अभी जो आ रही थी वो आपको आवाज कम आ रही है पंडित जी? जय श्री राम। जय श्री राम। हां कम आ रही है। मेरी आवाज कैसी आ रही है? अब ठीक आ रही है। सही आ रही है? मेरी आवाज सही आ रही है अभी। अब फिर कम हो गई? नहीं आ रही है अभी आ रही है वही सही फ्लोकी जी को आ रही है नहीं आ रही है मगर पहले जितनी बुलंद आ रही थी उतनी नहीं आ रही अभी आ रही है क्या अभी आ रही है बुलंद आवाज काम चल जाएगा मगर वैसे नहीं आ रही है खुल के जैसे पहले आ रही थी चलिए कोई बात नहीं पता नहीं शायद मेरे आई कोई दिक्कत हो

02:24:06:24 अगर अगर नहीं हो सकता है एक बार मेरे को कोई कमेंट सेक्शन में नीचे बता दो कि मेरी आवाज कमेंट सेक्शन में बता दो भैया इनकी आवाज कम हुई है क्या अगर मेरी आवाज सही आ रही है आपकी आवाज मेरे लिए कंफर्टेबल है सुनने लायक मगर जो बुलंद आ रही थी थोड़ा सा उसमें कम हुआ है। ठीक है। शिवश जी के लिए कंफर्टेबल है। थोड़ा ऑडियंस के लिए एक बार मुझे कंफर्मेशन चाहिए। आवाज पहले आवाज पहले जैसी सही है। हां ठीक है। मतलब मेरी आवाज वैसी ही है। आपकी साइड से शायद मेरे फोन में कोई दिक्कत होगी। बताइए। हम ठीक है। तो वही जो मैं पॉइंट रख रहा था। अच्छा फ्लोकी जी वैसे नमस्ते। तो पॉइंट जो मैं वही रख रहा था कि अब हमने बात यही किया था ना कि शब्द प्रमाण से जो शब्द प्रमाण टकरा रहा है तो आपने वही दृष्टांत और सिद्धांत वाली बात आई थी कि हां दृष्टांतों में जब वो कार्य कर रहे हैं तो उसमें वो उनकी सर्वजता और सर्वशक्तिमत्ता प्रकट नहीं हो रही है। तो जब तो अब अब जब मैंने आपसे पूछा तो आपने बोला नहीं नहीं मैं तो परमार्थ की बात करें तो परमार्थिक रियल में देखिए जब हम अवतार की बात करें तो अवतारिक एक व्यवहारिक विषय है। भाई साहब आपने मेरे को एक मेरा संदर्भ बताया। सुनिए आपने क्या बताया आपकी उस दिन भू पूछ की बात हो रही थी ध्यान रखिए मैंने उसके बारे में बोला है कि मैं वहां पे किस बारे में बात कर रहा था मैं यहां पे बात नहीं कर रहा हूं आपने मेरा एक संदर्भ लाए उस व्यक्ति से जिससे मेरी चर्चा हो गई मैंने उसके बारे में बोला व्यवहार

02:25:21:25 परमार्थ वाली बात आप उसको यहां पे कनेक्ट करके ये मत करिए कि आपकी बात यहां व्यवहार में हो रही है तो व्यवहार की बात करिए नहीं नहीं मैं आपसे ये पूछ रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं कि जो आप उस दिन सर्वशक्तिमत्ता की बात कर रहे थे कि अगर बाधित सिद्ध हो रहा है तो सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होगा सर्वशक्तिमान है तो बाधित नहीं होता यह बात आपने परमार्थ के कही थी कि व्यवहार के लिए कही थी पहले मैं उसको सुनूंगा देखना पड़ेगा मुझे उसको सुनना समझना पड़ेगा मैं क्या कह रहा हूं शब्दश याद है आपने क्या बोला था शब्दश याद अरे वही तो मैं पीछे से लूंगा ना प्रीफिक्स क्या चल रहा है आगे क्या मैं क्या सोच रहा था आपने शब्दश बताया मैं मुझे सुनना पड़ेगा देखिए वो आप सिद्धांतिक बात करिए ना आपने वहां पे क्या बोला था क्यों बोला था इसको करेंगे तो मैं वहां जाना पड़ेगा किस लिए बोला है मैंने मैंने किस लिए बोला है मैं वो समझा देता हूं किस लिए बोला है वो मैंने इसीलिए मैंने यही बोला आप राइट नाउ मैं जो बोल रहा हूं उसको काटिए। राइट नाउ मैं जो बोल रहा हूं उसको काटिए। मैं यही बात बोल रहा हूं। मैं यही बात बोल रहा हूं कि अगर राम जी कहीं पे बाधित सिद्ध हो रहे हैं। कहीं पे अल्पज सिद्ध हो रहे हैं। अगर बाधित सिद्ध हो रहे हैं तो उनका सर्वज सर्वशक्तिमान सिद्ध होना सिद्ध नहीं होता। है ना? पॉइंट ये आ जाती है। अगर वो अल्पज्ज्य हैं तो उनका सर्वज्य होना सिद्ध नहीं होता। जैसे ये मैंने किस पॉइंट पे बोला? उस पॉइंट पे बोला जहां पे आप ये कह रहे हो कि कुछ दृष्टांत तो मिलते हैं जहां वो सर्वशक्तिमान है। कुछ-कुछ फलाना-फाना काम कर दे। कुछ दृष्टांत ऐसे हैं जहां पे वो वाद सिद्ध हो रहे हैं। उन्हीं दृष्टांतों को

02:26:36:28 ही मैंने बात बोला कि हम उस केस में हम यही मान सकते हैं कि जो जो केस उनके बारे में लिखा है। ठीक है? संभावित रूप से अभी मैं उसको स्वीकार नहीं कर रहा हूं। आपके मैं मतलब दुर्जन ने ऐसे ले रहा हूं। संभावित रूप से हनुमान जी पहाड़ उठा सकते थे। उसके अलावा नहीं कर सकते थे कोई और कार्य। संभावित रूप से। लेकिन इससे ये कहना कि क्योंकि पहाड़ उठा सकते थे इसलिए सब कुछ कर सकते थे। तो हम उस केस में इसलिए नहीं मानते क्योंकि कई केस में उनकी या राम जी की कई केसेस में बाध्यता सिद्ध हो रही है। सर्वशक्तिमत्ता सिद्ध नहीं हो रही। तो जिस-जिस केस में उनके द्वारा जो जो कार्य करना सिद्ध हो रहा है उसको तो स्वीकार किया जा सकता है। लेकिन जो जो बातें सिद्ध नहीं हो रही उसको स्वीकार नहीं किया जा सकता। ये एक पॉइंट आता है। बाकी इसका अर्थ ये नहीं कि मैंने सारी चीजें उसके एज़ इट इज़ स्वीकार कर ली। वो एक आर्य समाज या हमारा एक अलग मत है। उसको भी फिलहाल में दुर्जन ने ऐसे चीजों को लेके यहां पे मैंने रखा है। है ना? ये पॉइंट आ जाता है। बाकी आपने एक अच्छा पॉइंट इसके अंदर ये बोल दिया कि जहां तक बात है अवतार के लक्षणों वाली पॉइंट है तो आपने बोला कि नहीं वो हम शब्द प्रमाण से ही मान रहे हैं उसको शब्द प्रमाण है ना पॉइंट शब्द प्रमाण तो ये शब्द प्रमाण शब्द प्रमाण के अगेंस्ट जा रहा था तो आपने ये बात बोला कि नहीं जो हम लेंगे वो पूरा शब्द प्रमाण लेंगे शब्द प्रमाण के आधार पे ही उसको लेंगे चलिए ठीक है मैं आपको इस बात को मानता हूं है ना अब अगर आपको कोई पॉइंट है ठीक है मैं एक्सपेक्ट ये कर रहा हूं कि फ्लोकी जी हमारे बीच है शायद मॉडरेटर अकेले ही उसी चर्चा के हिसाब से जी जी है

02:27:52:00 ना तो अगर अभी तक इस पॉइंट में हो चुका है और कोई अब तो वैसे हम लोग इतना थोड़ा सा एक दूसरे को झेल चुके हैं पंडित जी आप इतनी लेट आए हैं कि हम मुझे ऐसा लग रहा है हम ही लोग संभाल लेंगे अब तो आप दर्शक बने वो ज्यादा उचित है क्योंकि अब दोबारा से दोबारा से एक नई धारा शुरू हो जाएगी कि भैया मॉडरेटर का यूज करना है कि नहीं करना है कि मॉडरेटर के चेहरे के हावभाव किसी एक व्यक्ति के पक्ष में जाएंगे तो उसका मनोबल बढ़ जाए तो इससे अच्छा है कि मैं मैं मेरा तो यही है कि आप आप लोग से मेरे हिसाब से अगर फ्लोकीज अगर मतलब मतलब एज अ मॉडरेटर करेंगे तो मैं अच्छी बात समझूंगा। ठीक है? फ्लोकी जी भी मुझसे अगर जैसे आपको असहज ना हो इनका इनका जो क्योंकि अगर शुरुआत से होते तो हम लोग फिर शायद अभी तक की चर्चा में कुछ थोड़ा बहुत अंतर रहा होता। अब वो अब आए हैं। अब हम लोग थोड़ा सा समझ गए हमको किस तरीके से बात करनी है और उसके लिए हैबिट भी डाल रहे हैं। अब उसमें दोबारा से एक नए सिरे से शुरू करना और फिर उसमें भी फिर ये आए हैं और मान लीजिए इनका हम उपयोग नहीं करते हैं एज ए मॉडरेटर। अब वो यहां पर दिखाई दे रहे हैं तो अब उनका हंसना या देखना या कुछ करना कोई हरकत जो आपके खामखा कहीं से आपको हां नहीं बाकी आपको दिक्कत नहीं है और और फ्लोकी

02:29:07:03 जी रहना चाहते तो रहे पर मेरा सुझाव ये था कि मैं तो देखिए मैं चाहता हूं मैं लेट हो गया आने में लेकिन मैं बैक स्टेज हो जाता हूं आप लोग क्योंकि अभी जो दो जो चर्चा चल रही है वो बिल्कुल बीच मध्य में है तो बीच में है तो आप लोगों को कंटिन्यू रखना हां कुछ थोड़ा सा उससे जो है विघ्न विघ्न टाइप का हो सकता है कामका निर्भय का जो है कि मतलब नहीं नहीं मैं आपके सामने स्टेटमेंट चाहिए मैं क्लियर स्टेटमेंट दे दे रहा हूं मैं खुद चाहता हूं मॉडरेटर बनके मैं चाह रहा था कोई मॉडरेटर हो अच्छी बात है फ्लोकीजा जाके फ्लोकी जा मॉडरेट करिए आई एम हैप्पी विद यू ठीक बढ़िया बढ़िया बढ़िया ठीक है आप फिर अब बहुमत हो गया आप रहिए फिर भैया आप आए भी हो गया बहुमत क्या हुआ है 50-50 हुआ है ना आप मुझे काउंट मत करिए नहीं नहीं आप आए हो तो ये आपकी वो आए ही थे मॉडरेटर बनने तो आप आए हो तो आपकी इच्छा वो वो वोट हो गया और निर्भय ने कह दिया। ठीक है? अब बात ये आती है जी। मैं आपने जो बात कही उस मैं अपनी बात कह दूंगी। देखिए सबसे पहली बात तो ये है कि बार-बार बात यही हो रही है कि उनके आचरण थे कि नहीं थे। ठीक है? तो हमने ऐसे आचरण बता दी बता दिए जो असाधारण थे वो भी हमें प्राप्त है। और ऐसे भी आचरण बता दिए जो साधारण थे वो भी हमें प्राप्त है। ठीक है? पहली बात।

02:30:22:07 अब दूसरी बात यह है कि असाधारण वाले जो आचरण थे उन पर आपको डाउट है। यानी कि आप शब्द प्रमाण बात बार-बार बात यही हो रही है कि शब्द प्रमाण के आधार पे आप क्वेश्चनिंग कर रहे हो कि अवतार कौन अवतार है, कौन नहीं है? इसको कैसे स्वीकार किया जाए? वो अवतार सिद्ध होता है कि नहीं होता? वो एक अलग विषय है। कौन अवतार है, कौन नहीं है? इस विषय में आप शब्द प्रमाण को काउंटर कर रहे हो। ये बात कह करके कि उनकी गतिविधि ऐसी थी। ठीक है? मतलब तो चाहिए होते हैं किसी भी चीज गतिविधि गतिविधि ऐसे होने के कारण आप जो है शब्द प्रमाण काउंटर कर रहे हो कि ऐसेसे हम कैसे मान ले दूसरी बात से भी लक्षण ले तो पता तो होना चाहिए क्योंकि हम व्यवहारिक वस्तु की बात नहीं शब्द से देखिए दो तरह की बातें हो गई एक कि शास्त्र में उन्होंने ये कहा कि मैं भूल गया एक तो ये शब्द प्रमाण है एक हमारे शब्द प्रमाण ने हमको बताया कि उन्होंने ये कहा एक तो श्री कृष्ण का स्वयं का शब्द जो ऐतिहासिक है समझ रहे हैं जो उन्होंने कहा कि मैं भूल गया। अब यह भी तो एक शब्द ही है जो वहां उन्होंने कहा दृष्टांत वाली भी तो बात दी है ना और एक एक जो हमारे गुरुजनों ने हमारे शास्त्रों ने बताया कि श्री कृष्ण ने ये कहा तो मैं ये वाला जो शब्द प्रमाण है ना जिससे हमें शास्त्र मिल रहा है जिससे हमको श्री कृष्ण का यह कहना प्राप्त हो रहा है

02:31:37:08 कि क्या कहते हैं कि मैं भूल गया या राम जी का दुखी होना प्राप्त हो रहा है। इस वाले शब्द प्रमाण से ही यह बता रहा हूं कि राम जी जो है दुखी नहीं थे। उन्होंने केवल लीला की थी, एक्टिंग की थी दुखी होने की। उन्होंने केवल भूल जाने की एक्टिंग की थी और क्या कहते हैं? ये भी उन्होंने एक्टिंग की थी कि वो रावण को रोक नहीं पा रहे या जो भी अमुक अमुक जो चीजें वो एक्टिंग थी। ये भी हमको प्राप्त हो रहा है। कहां से? उसी शब्द प्रमाण से। पहली बात। दूसरी बात यह है कि अगर हम बार-बार इसको काउंटर कर ही रहे हैं तो क्यों ना यह बात जांच ली जाए कि भैया यह कैसे सिद्ध होता है कि वैदिक ईश्वर ने ही सगुण निराकार का रूप लिया है। पहली बात तो सगुण

02:32:16:16 निराकार जो है वो भी एक अवतार ही है। अगर आप जो है सगुण साकार का अवतार नहीं मानोगे तो मैं सिद्ध कर दूंगा कि सगुण निराकार का भी अवतार नहीं होता।

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02:32:24:14 तो फिर ये दुनिया बनने के बाद ईश्वर से सिद्ध नहीं हो पाएगी। मगर फिर भी अभी अगर हम ये मान के चल रहे हैं कि ईश्वर ये जो सृष्टि बनाई है वो सगुण निराकार ईश्वर ने बनाई है तो सगुण निराकार ईश्वर ने अगर सृष्टि बनाई है तो ये सिद्ध कैसे होता है तो वैदिक ईश्वर ने ही बनाई है बताइए कि अगर जरूरी नहीं है तो

02:32:45:10 इसको स्किप करते हैं मूल विषय रहते हैं नहीं आपने ये लास्ट में जो बातें बोली है मेरे अब आपको नहीं करना है उसको तो काउंटर मत करिए कुल मिलाकर के एक एंडिंग स्टेटमेंट इस बारे में दे दूं कि भाई कौन कौन अवतार है कौन नहीं इस विषय में शब्द ही प्रमाण हो सकता है क्योंकि हम उसको काउंटर नहीं कर सकते क्योंकि कई विषयों में हम शब्द को ही प्रमाण मान रहे हैं उनके होने के विषय में भी हम इतिहास को ले रहे हैं वो इतिहास भी एक शब्द प्रमाण है उनका होना एक्सिस्टेंस उनका अस्तित्व वो भी शब्द प्रमाण से ले रहे हैं तो फिर हम वहां जाके काउंटर नहीं कर सकते जिन शब्द प्रमाणों से हमको ये मिल रहा है कि वो थे उनहीं शब्द प्रमाणों से जब हमें ये मिल रहा है कि वो एक्टिंग कर रहे थे तो हम कह नहीं वो एक्टिंग नहीं कर रहे थे वो तो उनका उनका वहां पे ये हो रहा था। हम आपकी बात नहीं मान सकते।

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02:33:30:14 तो वो विरोधाभास चलिए यानी आप ये कह रहे हो मोटा-म मोटी आप ये कह रहे हो जो मैं समझ पाया हूं। आपने ये बोला है ठीक है कि जब राम जी और कृष्ण जी हुए तो दिव्य दृष्टि या किसी भी अन्य प्रकार से जो साधु जन थे जो आपके गुरु परंपरा के जो आचार्य लोग थे उन्होंने जाना कि ये अवतार हैं। लौकिक दृष्टिकोण से पता नहीं चल पा रहा था कि वो अवतार हैं। लेकिन जो भी उनका जो भी माध्यम रहा होगा उस माध्यम से उन्होंने पहचाना कि ये अवतार है। ठीक? फिर उसको पहचान करके उन्होंने शब्द रूप में उसको आगे बढ़ाया। शब्द परंपरा से या आप यही कह रहे हैं मैं ये समझ पा रहा हूं। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल इसी कारण से तो उस समय जो कंस अगर ये सब जान जाते इनसे मुझे मोक्ष मिलेगा या अन्य जो बात नहीं है हां अगर वो जानते होता है ना कि अगर मेन पॉइंट क्लियर हो जाए तो ज्यादा इधर उधर जाके टाइम बिल्कुल बिल्कुल कोई इशू नहीं बनता है ना बिल्कुल बहुत बढ़िया एक चीज एक चीज बहुत अच्छी है मैं एक चीज कहूंगा कि भैया आज की जो चर्चा है थोड़े बहुत अप एंड डाउन हुए मगर फिर भी मुझे लगता है लोगों को पसंद आ रही होगी और बहुत अच्छे से जा रही है एक गंतव्य की ओर जी जी अब इसके अंदर मैं बस एक एक बात बोलना चाहूंगा बीच में मैं एक बार आया था देखने और लाइव देख रहा था मैं तो थोड़ा सा लाइट कर रहा हूं मोमेंट मैं बस ये पूछ रहा हूं शिव जी इसके बाद कूदे कि नहीं आप

02:34:46:21 [हंसी] कंटिन्यू करिए अच्छा एक चीज और है कि थोड़ा सा समय की मर्यादा को थोड़ा सा देख ले एक बना ले क्योंकि मुझे जो है वो मैंने बताया था ना चर्चा की शुरुआत में एसीपी को वो प्रमाण जो उपलब्ध कराने है ना उसके लिए जाना है तो अच्छा मुझे लगता है शाम के टाइम थोड़ी अभी आपके पास में है अभी एक डेढ़ घंटा हम कर सकते हैं हां 5:00 बजे मतलब ऐसा है ना अंधेरे जब शाम होती है तो वो उनकी ड्यूटी हो जाती है इधर उधर रनिंग में मूविंग बिल्कुल सही बात है तो फिर उनसे मिल पाना थोड़ा सा मुश्किल हो जाता है और देना भी बहुत आवश्यक है क्योंकि एकद दिन में ही वो हियरिंग शायद हो सकती है तो वहां पे हमको हाई कोर्ट को वहां पे हमें हाई कोर्ट को ही दिखाना हुआ कि भैया हमने पुलिस को ये चीजें उपलब्ध करा दी है। उसके बावजूद भी पुलिस ढिलाई कर रही है। हमको ये वहां पर थोड़ा सा बताना है। है ना? क्योंकि पुलिस ने ये लिख के दे दिया है ना कि भैया हमें वो मिल ही नहीं रही। डंके की चोट पे सब जगह काम हो रहे हैं मगर उनको कुछ मिल ही नहीं रहा है। समझ रहे? ठीक है। अब मूल विषय पे आते हैं। जी ठीक है। अब

02:35:51:22 इसमें पॉइंट यहां पे ये आ जाता है कि हमें दो बातों की क्लेरिटी मिल चुकी है। पहला ठीक है। फ्लोकी जी आप भी है तो थोड़ा ध्यान दीजिएगा इन विषयों पर। है ना? तो पहली बात तो हमारी इस विषय पर आया था कि अवतार की धारणा क्या है? तो हमें जो क्लेरिटी वहां से मिली थी वह यह मिली थी कि जैसे जीव शरीर धारण करता है वैसे ईश्वर भी शहीद धारण करता है। लेकिन अंतर ये होता है कि जीव जो होता है वो बद्ध होता है और जो ईश्वर जो जिस शरीर को धारण करता है जिसे हम अवतार कहते हैं वो मुक्त होता है। ठीक है? स्वभाव से वो मुक्त होता है। ये एक पॉइंट आया था। तो हमें पता चला कि अवतारवाद की धारणा क्या है? अच्छा इसका स्पष्टीकरण हो गया। उसके बाद पॉइंट ये था कि अवतार का लक्षण क्या है कि अगर मेरे सामने राम जी या रामपाल खड़े हो जाए तो दोनों में से ईश्वर का अवतार कौन है? कैसे पता चलेगा? तो उसमें पॉइंट यह था कि उसमें सामान्य लोग नहीं जान सकते कि ये ईश्वर के अवतार हैं। उसमें जो विशेष दिव्य दृष्टि रखने वाले गुरुजन हैं, सिद्ध लोग हैं, वही पहचान सकते हैं कि ये ईश्वर है। क्योंकि व्यवहारिक जो लक्षण है वो उसमें उस टाइप से नहीं होते। है ना? पता नहीं चलते हैं। तो जो जो उस टाइप का ज्ञानी जो उस टाइप का व्यक्ति है सिद्ध व्यक्ति वो पहचान करके फिर वो अपने शिष्यों को बताएगा। तब शिष्य जान पाएंगे कि हां ये जो है ये राजा जो है ये अवतार हैं वास्तव में। है ना? इत्यादि बातें निकल कर के आती है। तो हमें दो चीजों की क्लेरिटी हो चुकी है कि अवतारवाद की धारणा क्या है? अवतारवाद का लक्षण तो खैर चलिए हमें नहीं पता चला। वो तो शब्द प्रमाण के ही है। लेकिन उसको हम स्वीकार करते

02:37:06:24 हैं। आगे बढ़ते हैं। क्योंकि तीसरी बात आपने छोड़ दी है वो मैं ध्यान दे रहा हूं। जी जी बता दीजिए। कि ऐसा कैसे कर सकता है? तो अविद्या शक्ति से वो सब कुछ कर सकता है। एक ये पॉइंट आया था ना कि ऐसा कैसे कर सकता है। तो अविद्या शक्ति का आलंबन लेकर के वो सब कुछ कर सकता है। क्योंकि वो हमको वही चीजें एट द एंड दिखा रहा है जो है नहीं जो अनरियल है। ठीक है?

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02:37:26:19 हां। तो कोई इशू नहीं है। मतलब अभी जो हमें बात पता चली है कुछ बातें कि जैसे राम जी औरते लेकिन वाली बातें आई है यहां पे कुछ कुछ तो ठीक है। एक चीज एक चीज और है वो वही व्यवहार परमार्थ से आ रही है ना व्यवहार परमार्थ से आ रही है कि भाई ये जो हम जिसको देख रहे हैं ये हो तो दुखी रहा है मगर ये जो है अंतत गतवा तो अंतत गतवा क्या है अंतत गतवा जो परम सत्य है उसी ने रूप को धारण किया है और ये लीला तो ये क्या है ये दिव्य दृष्टि हो गई जो योगी जन होते हैं और इस चीज को मैंने एक चीज से और एक चीज से और एक चीज और तर्क दे के प्रस्तुत किया कि जो सगुण निराकार ईश्वर है वो सृष्टि बना रहा है वो ठीक है मगर वो वैदिक ही है ये कैसे सिद्ध करेंगे हम सगुण निराकार वैदिक ईश्वर ने सृष्टि की ये कैसे सिद्ध करेंगे हो सकता है वेद विरोधी ईश्वर ने की हो देखिए पॉइंट इसके अंदर ये आ जाते है ना कि जब हम ईश्वर सिद्धि की बात करते हैं तो ऐसा नहीं कि वैदिक ईश्वर कोई अलग है और पुराण वाला ईश्वर कोई अलग ईश्वर तो वही एक ही है। है ना? हम ये हम ईश्वर को समझना शुरू करते हैं। जब हम जैसा हम थोड़ा बहुत ईश्वर को समझते हैं उसके अकॉर्डिंग ये मैच करते हैं कि ये इस मैचिंग के अकॉर्डिंग कौन सी किताब में बातें मिल रही है नहीं मिल रही। वो इसको इसको ऐसे मगर मगर

02:38:41:27 अंत अंत में तो वहां शब्द प्रमाण को ही स्वीकार करते हैं ना कि वैदिक ईश्वर है। वैदिक सुनिए वैदिक ईश्वर है। मगर वो मगर वो प्रणव से ही मिलेगा। वो हवन से ही मिलेगा। इसमें हम शब्द प्रमाण ही लेते हैं अंत में। उसमें उसमें ठीक है। लेकिन जैसे आपने वैदिक ईश्वर वाली बात बोली ना मैं कह रहा था कि इसका उत्तर मेरे पास है। मैं बस इधर जाना नहीं चाहता क्योंकि इधर टॉपिक डाइवर्ट होगा। मैं वही बोल रहा हूं। अब आप चाहते हैं उत्तर तो फिर मैं भी छोटे से में खत्म कर दे रहा हूं। पॉइंट इसके अंदर यही है कि पहले भी हमें वेरिफिकेशन करने के लिए कि कुरान में जिस अल्लाह की बात की गई वास्तव में वही ईश्वर है जिसने दुनिया बनाई। तो पहले हमें पता तो होना चाहिए ना कि किसी ने दुनिया बनाई है। अच्छा जिसने दुनिया बनाई वो सर्वज है, अल्पज्ज है। सर्वशक्तिमान है, अल्पशक्तिमान है। सर्वव्यापक है, एक देश है। इत्यादि बातों का जब हम निर्णय कर लेंगे फिर हम वेरिफिकेशन करेंगे। नहीं पता चला कि यार यहां पे तो ये देश ही लिखा है। यहां पे तो चौथे आसमान पे इधर उधर बैठा है। इत्यादि बातों से मतलब जब पता चलता है कि अच्छा ये वो ईश्वर नहीं जो रियल वाला है। उसमें भी काउंटर आ जाएगा निर्भय जी उसमें भी आ जाएगा काउंटर दे दूं। उस काउंटर का हां करिए आप करिए दीजिए दीजिए। उसमें उसमें काउंटर ये आ जाएगा कि भाई सृष्टि जब वैदिक ईश्वर नहीं बनाई है सब कुछ बनाया है तो फिर ये जो कुरान है वो अपने आप बन गई क्या? नहीं जीव ने बनाई जीव स्वतंत्र कर्म करने में द्वैत है ना अरे

02:39:56:28 भैया वहां सत्ता नहीं है क्या ईश्वर की ईश्वर की सत्ता नहीं है क्या वहां है ईश्वर की सत्ता के बाहर बन गई वो नहीं नहीं बनी है उसकी तो दिक्कत क्या आ रहा है इसमें तो दिक्कत ये आ रहा है जब वो ईश्वर की सत्ता के अंदर ही बनी है तो काउंटर ये आ जाएगा फिर ईश्वर इसका मतलब यहां पर जो है गलत चीजों को भी दे रहा है हमें तो फिर हम तो उसको प्राप्त उसको सुनिए उसको प्राप्त करने वाली जो वैदिक नियमावली है उसको ही क्यों माने हो सकता है कोई और नियमावली रही हो जो है ही नहीं वास्तविक थी जो इसका भी उत्तर ले लीजिए आपने यही बोला ना अगर ईश्वर है तो फिर गलत काम क्यों हो रहे हैं मूल प्रश्न इसका यही है मूल प्रश्न नहीं यही होता है हमको गलत इंफॉर्मेशन क्यों दी जा रही है ईश्वर है तो गलत ज्ञान क्यों दिया जा रहा है एक ही बात है गलत ज्ञान गलत काम में ही आ गया ना वो जी गलत मैं भी वही कह रहा हूं बताइए बताइए बताइए बताइए तो पॉइंट पॉइंट इसके अंदर यही है कि गलत ज्ञान देना यानी गलत काम करना क्यों हो रहा है? ईश्वर है तो भी। इसमें पॉइंट ये आ जाता है कि पहली बात तो द्वैत है। ठीक है? जीव अलग, ईश्वर अलग, जीव अविद्या ग्रस्त है। ईश्वर सर्वज्य है। ठीक है? इसमें पॉइंट ये आ जाता है। अब इसमें विशेष बात आती है कि जीव जो है वो चेतन है। कर्म करने में स्वतंत्र है। अपना कर्म करता है। है ना? अब पॉइंट ये है कि ईश्वर उसको रोक

02:41:12:02 क्यों नहीं रहा? जब वो कर्म कर रहा है। क्योंकि ईश्वर न्यायकारी है। उदाहरण के रूप में मैं समझाता हूं। मैं बहुत अच्छे से समझाता हूं। ईश्वर को पता है कि मैं शेर बनाऊंगा तो शेर हिरण को मार के खाएगा। उसको पहले से पता है। इंसान को भी पता है कि वह शेर बनाएगा। भी शेर क्यों बना रहा है? शेर क्योंकि ईश्वर अपनी मर्जी से शेर नहीं बना रहा है। ईश्वर क्योंकि न्यायकारी है। अपने स्वरूप उसका स्वरूप ही है कि न्यायकारी है। इसीलिए वो अपने क्योंकि भाई सामने वाले ने कर्म वैसे करे तो उसको फल देना ही पड़ेगा। उसे नाट नहीं सकता। मना नहीं कर सकता कि भाई निंदू का फल नहीं बनाऊंगा। बेचारे तुम हिरण को मार दोगे। क्योंकि वो न्यायकारी है। इसीलिए वो कर्म का फल देगा ही देगा। इस शेर को बनाएगा ही बनाएगा। और शेर अपनी प्रवृत्ति के अनुकूल मार के खाएगा ही खाएगा। यह वाला पॉइंट है क्योंकि ईश्वर न्यायकारी है। न्यायकारी होने से वाली बात जो है आप जो कह रहे थे वो कट जाता है। बोलिए इसमें एक दिक्कत है कि आपने अपनी मान्यता को तर्क के रूप में प्रस्तुत किया है। आपने अपनी मान्यता को तर्क नहीं मानते ईश्वर को। मैं मैं बता रहा हूं। न्यायकारी की बात नहीं है। वो जो कर्म फल में वो जो उसमें हस्तक्षेप करता है कि कर सकता है कि फल वाला को न्यायकारी से रिलेट किया मैंने। सुनिए मैं मैं जो बात कह रहा हूं वो सुनिए। इसका मतलब यह है कि अंतत गत्वा जो ईश्वर है वह सही कर रहा होता है। कुल मिलाकर के आप यह कह रहे हैं। मैं भी वही मानता हूं। अंतत गतवा ईश्वर सही कर रहा होता है। मगर हमको ये दिख सकता

02:42:27:06 है व्यवहारिक रूप से जब तक हम लोग उसको जो आपकी जो वो है ना मान्यता आपके जो सैद्धांतिक मान्यता है जो ये सब है जब तक हम उसको स्वीकार नहीं करते तब तक हम यही मान मतलब हमको ऐसा दिख सकता है कि ईश्वर ने यहां यहां गलत किया। ये तो तात्विक यानी आपने मान ये तो तात्विक विवेचना हो गई ना मान लिया तात्विक विवेचना ये जो तात्विक विवेचना है ये तब हम लेंगे ना आपकी व्यवहार में तो हमको ऐसा दिख सकता है छोटा बच्चा हुआ और जो सुनामी आ गई मर गया ये क्यों मार दिया ईश्वर ने तो उसके पीछे का एक उसके पीछे का एक कारण है उसके पीछे का एक तात्विक कारण है जो आप बता रहे हैं ठीक है कि वो क्यों मरा मगर हमको ऐसा लग सकता है ईश्वर ईश्वर अंतत कथवा तो सही कर रहा है। मगर हमको ऐसे कार्य ईश्वर के दिख सकते हैं जो कि गलत है। हमको ऐसे कार्य ईश्वर के दिख सकते हैं। ये तो मानेंगे ना। उसमें बात ही नहीं है ना कि दिख सकते हैं। जब तक ईश्वर को तत्व से नहीं जानेंगे तब तक हमें उसको हां पॉइंट पॉइंट मैं बता रहा हूं। पॉइंट मैं बता रहा हूं। अब देखिए पॉइंट मैं बता रहा हूं आपको। मैं मैं पॉइंट बता रहा हूं। मैं आप बता चुके हैं। मैं एक बार उत्तर दे देता हूं। हम ठीक है। अब पॉइंट इसके अंदर यही है। यानी आप

02:43:42:12 जब कह रहे हैं कि आपने अभी स्टेटमेंट दिया स्टेटमेंट आपने ये दिया कि यानी हम यह मान सकते हैं दोनों लोग ये मान सकते हैं कि ईश्वर जो भी करता है गलत नहीं करता है। किसी को गलती से गलत लग सकता है। अपनी अज्ञानता के कारण गलत लग सकता है। ब्रह्मवास उसको ऐसा लगा कि मैं पूरा बोल देता हूं। मैं पूरा बोल देता हूं। यानी आपने इस चीज को स्वीकार कर लिया कि जब ईश्वर जब कोई व्यक्ति कुरान बनाता है और ईश्वर उसको हस्तक्षेप करके नहीं रोकता है तो ईश्वर सही करता है। गलत नहीं करता। आपने इस चीज को स्वीकार कर लिया। अच्छा। यानी जो मूल विषय जो मैंने मैंने बोला था ना अल्टीमेटली वही था। यही हो गया। आपने खुद स्वीकार कर लिया। आप समझे नहीं मेरी बात। यह आपने तात्विक विवेचना की है। यह तात्विक विवेचना है। व्यवहारिक तत्व तो यह है कि ईश्वर ऐसे कार्य करना चाहूंगा। सुनिए मैं बताऊं। जैसे जैसे मैं उदाहरण दे दूं आपको जैसे राम जी जो है व्यवहार में दिख रहे हैं बाधित होते हुए। कृष्ण जी जो है व्यवहार में दिख रहे हैं बाधित होते हुए। मगर हमारी तात्विक विवेचना से हमने कहा कि नहीं वो सर्वशक्तिमान ईश्वर का ही स्वरूप है। मगर वहां आपने कहा कि वो शब्द प्रमाण से हम नहीं मानेंगे। यहां पर भी मैं वही कह रहा हूं कि ईश्वर व्यवहार में दिख रहा है गलत करता हुआ। मगर हमने शब्द प्रमाण से माना है कि ऐसे से ऐसे इसलिए वो ऐसा करता है। उसमें भी बहुत सारी लंबी बहस हो सकती है। मगर शब्द प्रमाण से हमने माना है कि वो गलत करता हुआ दिख रहा है। मगर इसके पीछे भी उसकी रीजनिंग है। और वो जो रीजनिंग है ना वो हमने शब्द प्रमाण से मानी

02:44:57:13 है। उसमें पॉइंट पता है कहां आएगा? ये शब्द प्रमाण से माना। ये चीज आप तब क्लेम करेंगे जब आप बोलेंगे कि न्यायकारी ईश्वर है। ये मैंने शब्द प्रमाण से माना। अगर आपने ये क्लेम कर दिया कि ईश्वर न्यायकारी पूरी बात सुनिएगा। अगर आपने यह क्लेम कर दिया कि ईश्वर न्यायकारी मैंने शब्द प्रमाण से माना है तब तो आपकी बात ठीक है लेकिन अगर आप किसी प्रकार से ये प्रकार अगर आप इसको तर्क वितर्क से सिद्ध अन्य प्रमाणों से जैसे अष्ट प्रमाण है अष्ट में केवल शब्द तो एक ही है सप्तर चलिए मैं आपसे पूछ लेता हूं तो उन ईश्वर का न्यायकारी होना सिद्ध कैसे हो मुझे बोलने देंगे नहीं बोलने देंगे मेरी पूरी बात सुन बोलिए बोलिए बोलिए बोलिए है ना अब बात ये है कि मैं समझा क्या आ रहा हूं आप मुझे उसकी दिशा मोड़ देंगे अगर मैंने बोला है कि नहीं फलानी चीज ऐसे तो आप बोलेंगे नहीं अब ये करो मैं बोलूं मुझे कराटे आते हैं बोलो मार के दिखाओ फिर वो दिशा भटक जाएगी समझ रहे हो तो कटाक्ष करने के लिए ओवर एक्टिंग अगर करेंगे मैं इंटरप्ट कर दूंगा तुरंत आप अगर कटाक्ष करने के लिए कटाक्ष करने के लिए मैंने ओवर एक्टिंग नहीं की आप ये कराटे वगैरह वाली बातें जो लेके आते हो ये आपकी फितरत मैं शुरू से देख रहा हूं अभी से नहीं अभी से नहीं जब जब जब आप चर्चा में आए हो जैसे आप जब जैसे आप जब चबा चबा के जैसे आप जब चबा चबा करके खाना खा रहे थे मंच पर आ के खाना खाते हुए बात कर रहे वह अभद्र लग रहा था देखने में सुनिए सुनिए मगर फिर भी आपने

02:46:12:16 नहीं बोल सकते आप मैं निवेदन है मेरा आप इससे स्वयं को बचाएं मॉड्रेटर जी थोड़ा सा करिए आप देख लीजिए कंट्रोल करिए सिचुएशन मैं अच्छी बात है अभी देखिए वापस आते हैं टॉपिक पे बस मैं इसलिए चाहता था ना कि मॉडरेटर रहे मेरे को पता था ये चीजें होंगी नहीं तो इनकी ये बात ये कटाक्ष पूर्वक जो विनोद कर रहे हैं ये अलग से कि जो एक हल्का सा कटाक्ष देते आप मुझसे कराटे खेलने कहोगे हमने इनको एक बार भी इस तरह बनाने की कोशिश नहीं की है। भाई आपने आपने दर्शकों को क्या वो टोंट मारा था ना दर्शकों को कि सूर्य का दीपक नहीं कौन सा आपने वो व्यंग मारा था दर्शकों को लेकर मैंने आप मैंने आपने आपने दर्शकों को बीच में लाए थे। आपने आप दर्शकों को बीच में लाए थे। आप दर्शकों को बीच में लाए थे और और वो जो दर्शक थे ना वो जो दर्शक थे कमेंट उसमें गालियां फट गई। ये सब शब्द भी लिखे हुए थे। अगर आप चाहते हैं कि ऐसे दर्शकों का मैं कटाक्ष ना करूं तो यहां पर भी आप गलत है। हेलो मॉडरेटर जी मेरी आवाज आ रही है? आ रही है। आपकी आवाज आ रही है। हां थोड़ा सामने वाले को रोकिए मैं बोलना चाहता हूं। ठीक है। आप अपनी बात मॉडरेटर जी इनकी बात मानेंगे ना इसीलिए तो आए हैं। नहीं है ना कि जब मैं जब मैं आपको बोलता हूं तो आप रुकते नहीं हो। तो मैं तो मॉडरेटर के पास

02:47:27:18 ही जाऊंगा ना। नहीं अभी मैं एक विषय समझा दूं। मैं एक विषय समझा दूं। इन्होंने मुझ पर मैं उत्तर दूंगा। विषय बाद में समझेंगे। नहीं वो दे दीजिएगा। दे दीजिएगा। मैं एक बात मुझे बोल दूं कि आपने जो कराटे वाला टाइप का उदाहरण दिया कूदने वाला उदाहरण दिया ये सब एक छोटा सा एक लाइट सा एक कटाक्ष होता है सामने वाले पर। ऐसा करने से बचिए। अब आपने अपने पक्ष के लिए वो सूर्य और दीपक वाला उदाहरण लेकर के आए जो मैंने ऐसे लोगों के लिए कहा था जो गालियां तक दे रहे थे कमेंट में और उनका आप कह रहे हैं कि आप जो है ऐसे लोगों पर कटाक्ष मत करिए। अच्छा ये आपने आप क्यों गलत झूठ क्यों बोल रहे हो मैं समझा देता हूं। क्यों झूठ बोल रहे मैं समझा देता हूं। मैं मैं इसमें झूठ क्या है? नहीं मैं जी मैं फ्लोकी जी आपको समझाता हूं मैं क्या कैसे झूठ है ये पॉइंट मैंने इनको ये बोला था इन्होंने मुझे बोला था कि मैंने जब वो कौन बीच में इंटरप्ट कर रहा है वो वाला पॉइंट था है ना बोलने नहीं दे रहे बोलने नहीं दे रहे तो मैंने बोला था कि आप मेरे को बोलने नहीं दे रहे बात तो ठीक है तो उन्होंने बोला निर्णय कौन करेगा तो मैंने बोला दर्शक देख लो मैंने बोला दर्शकों के ऐसे कमेंट बहुत सारे भरे पड़े हैं जिनमें वो लोग दर्शक खुद कह रहे हैं कि भाई आवाहन जी जो हैं वो मेरे को बोलने नहीं दे रहे ये बात दर्शकों तो मैंने इनसे ये बात बोली यानी मैं किन लोगों की बात कर रहा हूं मैं उन लोगों की बात कर रहा हूं जो कमेंट वो कर रहे हैं कि बोलने नहीं दे रहे अब इन्होंने ने कैसे उस चीज को पलटा कि नहीं मैं नहीं मैं तो मैंने तो उसके लिए बोला था कि गाली भाई गाली की बात नहीं चली तो आप उसकी कैसे बोल दोगे ठीक है यहां पे यहां पे दो बात

02:48:42:28 हां तो दो अब मेरा पक्ष सुन लीजिए इस बारे में एक सत्य से पर्दा उठा दूं मैं पहले यहां क्या होता है सच के आसपास वाला झूठ होता है ना वो उसको पकड़ना बड़ा मुश्किल होता है सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए तो सुनिए सच के आसपास वाला झूठ क्या है सच के आसपास वाला झूठ क्या है कि इन्होंने कहा कि भाई इन्होंने कहा था कि इन्होंने मुझसे कहा कि मॉडरेटर वो जो दर्शक है वो निर्णय कर लेंगे बात क्या थी? इन्होंने कही कि भाई मैं बोलने नहीं दे रहा हूं और आप जो है बोलना चाहते हो। मैं इनको बोलने नहीं दे रहा हूं। इस बात का निर्णय दर्शक नहीं। आप रिवाइंड करके देख लीजिए। वहां बात यह हो रही थी कि चर्चा किसके पक्ष में जा रही है। इसका निर्णय दर्शक कर रहे हैं। तब इन्होंने बोला था। वो तो दर्शक देख रहे हैं। दर्शकों के आप कमेंट देख लीजिए। यानी कि ये कंक्लूजन पे दर्शकों को गवाही मान रहे थे। कंक्लूजन की अवतार के संबंध में जो इनका पक्ष है यह चर्चा उस ओर जा रही है और इसके लिए इन्होंने प्रमाण के रूप में दर्शकों का नाम लिया था। अभी क्या कह रहे हैं कि मैं इनको बोलने नहीं दे रहा हूं। इस संबंध में दर्शक प्रमाण है। ये है सच के आसपास। अभी भी इस बात पे तटस्थ हूं। मैं अभी भी इसी बात पेट हूं। आपको रिवाइंड करके दिखाते हैं। रुक जाइए। वो ऑपरेटर जी रिमाइंड करके कर रहा हूं ना बाद में कर लेना। जब आपको करना हो तो आप कर लेना। नहीं आप आप यह बात मान रहे हैं कि नहीं मान रहे? आपने कारण दूसरा बताया है। नहीं मैंने भाई मैं नहीं मान रहा। मैं बोल रहा हूं जब इसकी जांच कर बाद में कर लेना फिलहाल विषय दर्शकों

02:49:58:04 का प्रमाण जो आपने कहा था ना वो इस विषय में कहा था कि चर्चा किसके निर्णय में जा रही है निर्णय कि अवतार के पत्र और डाल दूंगा आप अपनी तरफ से कट करके डाल देना फैसला हो जाएगा फिलहाल अभी चलिए अब आप बात करेंगे अभी हां अभी के लिए क्या करते हैं अभी बहुत सारी चीजें ऐसे ओवरलैप हो जाएंगी और कभी-कभी क्या होता है कि जब हम कम्युनिकेट कम्युनिकेट आदत पे लगाम लगानी चाहिए ना जो इनके अंदर एक ये कटाक्ष करने की आदत को भी नहीं बोलने दे रहे इस जो इनको लगाम लगानी चाहिए मत बोलिए मत बोलिए कराटे वाली बात मॉडरेटर भी नहीं बोलेंगे अब तो वाह बहुत सही यही किसी चीज को टोक रहे थे को टोक रहे थे ये भी एक्स्ट्रा था यही यही आपकी जो फितरत है ना ये ये गलत है ये जो आप ओवर एक्टिंग कर रहे हैं ना वाह ये कूदो मत हल्का सा हल्का सा मिस बिहेव हल्का सा अपमान जो कर रहे हैं सॉफ्ट तरीके से यही इसी पे मैं उंगली उठा रहा हूं ये मत करिए आप अगली तो हमारी चर्चा समाप्त होगी करते हैं

02:51:00:19 वो कूदने वाला प्रसंग देखा था मैंने के रूप में दो बार इन्होंने किया फिर अभी कराटे वाली बात बोली मुझे लेकिन एक बार ये केवल इतना भी कह सकते थे कि आप जो जो कहते जाओ कहते जाओगे मैं करता नहीं फिर आप मुझे कराटे करने को कहोगे मैं कराटे करके दिखाऊं ऐसा तो नहीं हूं मतलब यह उदाहरण का व्यंग नहीं था यह उदाहरण था वो वो देखिए वो वो समझ में आ रहा है कि वो व्यंग था कि नहीं था इसमें शब्द फिर वही शब्द प्रमाण की बात आ जाएगी। व्यंग था कि नहीं था। अभी के लिए क्या करते हैं? अभी सेम पेज पे ऑन करते हैं। ठीक है। हां ठीक है। शांत आप तो कह दोगे जोकर भी व्यंग नहीं है। वो भी बहुत सम्मानित शब्द है। जैसे अपने पिता को भी आप जोकर कहते हैं। नहीं आप अपने पिता को आपको अच्छा लगा? बोलो। अपने पिता को बोलो। आपको मजा आ रहा है अपने। मैंने मैंने तो नहीं कहा जोकर सम्मानित शब्द है। आप कह रहे हैं जोकर तो सही चीज है। क्या मैंने बोला? आप आप उस दिन लड़ रहे थे ना कि जोकर शब्द गलत कहां से हो गया? मैंने आपको सम्मान देने के लिए जोकर नहीं बोला था। जिस बोला था उसी जोकर के कटाक था ना यानी आप आप मुझे कुछ ऐसा बोलना चाह रहे थे जो चुबे फिर उसके पक्ष में आप बता रहे थे मैंने तो आप तो जो कहते हो वही तो कह रहा हूं यानी पॉइंट ये है ना कि सामने वाला मैंने कौन सा शब्द किस भाव से बोला मैं बताऊं कि आप अपने मन से सुनोगे तो आप उसमें यही तो बता रहे थे कि ये गलत कहां से हो गया वो गलत था कि नहीं था जोकर हां तो अब देखो चालाकी क्या कर रहे हो अभी बात कुछ और हो रही है ठीक

02:52:15:20 है अब अभी अरे ठीक है मैं अभी आपसे फिर से एक अंतिम बार निवेदन कर रहा हूं आप जो है अपने कटाक्ष वाले से बचिए और मूल विषय पे आ जाइए। मैं भी यही कब से रिक्वेस्ट कर रहा हूं मूल विषय पे क्योंकि मैंने यह सब सीखा नहीं है। इस तरह से करना मतलब सामने कोई व्यक्ति आए और उसका अपमान करूं ऐसे बिठा के जबकि वो व्यक्ति सौहार्दपूर्ण चर्चा के लिए आया है। ठीक है। ठीक है। तो अभी कंटिन्यू करते हैं वापस। ठीक है। वापस कंटिन्यू करते हैं। दोनों लोग हां दोनों बस बस हो गया। ठीक है। अ हम तो आप बोल रहे थे ना निर्भय जी बस बोलिए। हां। तो मैं ये कह रहा था कि अब दो बातों पे जो है क्लेरिटी आ चुकी है। ठीक है? धारणा के ऊपर और लक्षण वाला तो खैर क्या ही है। अब जो आता है बात वो सिद्धि पे आ जाता है कि हां जो धारणा लक्षण तो चलिए वो जो दिव्य सिद्ध व्यक्ति है वही जान पाएगा। नॉर्मल व्यक्ति तो नहीं जान पाएगा। तो मैं तो नहीं जान सकता। है ना? जबकि वो अलग बात है कि ईश्वर के लक्षण पता चल जा रहे हैं। अवतार के लक्षण नहीं पता चल रहे हैं। वो एक अलग पॉइंट है। अ तो अब हम बात करते हैं सिद्धि पे। तो जैसा कि मैंने बताया था कि दो धारणाएं बोलिए मैं इसको फिर क्लियर कर दूं फिर सिद्धि पे जाइए फिर क्लियर कर दूं ठीक है बोलिए सगुण निराकार द्वारा सगुण निराकार द्वारा भी सगुण निराकार

02:53:30:28 द्वारा वैदिक ईश्वर वो न्यायकारी ईश्वर के द्वारा भी जो ईश्वर की वो सृष्टि का निर्माण है या फिर बहुत सी चीजें हैं जो सिद्ध नहीं हो रही है उसमें शब्द ही प्रमाण है। ठीक है? बहुत सी ऐसी चीजें सगुण निराकार की भी और लक्षण की बात है तो अगर हम लक्षणों के लिए अगर हम राम और कृष्ण के अस्तित्व के लिए अगर हम अपने ग्रंथों के लिए शब्द आश्रित है तो फिर उनकी पूरी बात को मानना होगा। पूरे शब्द को मानना होगा और उनकी कंक्लूजन के रूप में कही गई बात को मानना होगा जिससे सिद्ध है कि वो जो है ईश्वर का अवतार ही थे। अन्य शब्द प्रमाण है हमारे पास में तर्क नहीं है। ठीक है। आगे बढ़ते हैं। हां तो तर्क तर्क इस बारे में भी नहीं है ना कि वैदिक ईश्वर ने सृष्टि बनाई है। इसमें भी नहीं है। उसप मैंने उसप पॉइंट रखे थे। आपको याद नहीं होंगे आप रिवाइंड करके देख लेना। लेकिन हम मूल जाते हैं फिलहाल। नहीं नहीं थे उसमें। वो वो सारे एक बार इन्होंने एक पॉइंट बोला था। इन्होंने एक पॉइंट बोला था कि हम ऐसे से ऐसे देखेंगे उसमें। शिवश जी इनको आप एक बार फिर से पॉइंट ये रख दीजिए। जल्दी रख दीजिए पॉइंट। देखिए फ्लोकी जी बात यह है बात यह है ना कि अभी जितनी बार मैं बोल रहा हूं कि मूल विषय पे आते हैं उतनी बार वो फिर पीछे से उठा करके फिर कोई बात नहीं आप आगे आप इस बार बोल दीजिए है ना मैं रिक्वेस्ट मैं मेरे को आगे बढ़ना है मेरा बहुत मेरा बहुत 4:00 बज चुके हैं बहुत समय बीत चुका है इनका क्या हुआ कुछ इशू हुआ है

02:54:46:00 क्या इनका नहीं नहीं नहीं मेरी आवाज आ रही है वो कुछ अच्छा नहीं आपका स्क्रीन गायब हो गया हां हां अब बोलिए बोलिए ठीक है मैं ये कह रहा हूं कि अब आते हैं मूल विषय पर तो जैसा मैंने बोला इन इन्होंने कहा कि मुझे कुछ बात बोलनी है उन्होंने वो बोल भी दी कि शब्द परमाण पे निर्भर होते हैं चलिए ठीक है उस पे मैं हान बोलूंगा ना ही ना बोलूंगा क्योंकि मैं उस चीज को स्वीकार नहीं करता। आगे बढ़ते हैं। लेकिन मूल विषय उस पे नहीं है तो मैं उधर जाऊंगा भी नहीं। ठीक। ठीक है आप आप मूल विषय पे आ जाइए। बोलिए। अब मूल विषय पे आ जाती है अवतार सिद्धि की। अब जब बात आती है अवतार सिद्धि की तो थोड़ा सा इस पे वन वे वन थोड़ा सा चलना चाहूंगा। श्लोकी जी मैं चाहूंगा आप थोड़ा उसको मॉडरेट भी करिएगा ताकि वन वे वन की जगह वो बहुत एक्सटेंडेड और विवाद के रूप में ना बड़े। ठीक है? जैसा हमारे बीच में बीच-बीच में हो रहा है। मैं कोशिश करूंगा कि ओवरलैप ना हो। बाकी हां जी। बिलकुल जो कि मैं अंदर से नहीं चाहता कि विवाद हो क्योंकि एटलीस्ट हम लॉजिक पे आ ही रहे हैं तो फिर झगड़ के ही क्यों लॉजिक किसी से भी लॉजिक पे आ सकता है है ना तो शिवश जी मुझे एक बात बताइए कि ये जैसे आप कह रहे हो ईश्वर अवतार ले सकता है अर्थात ईश्वर एक शरीर धारण कर सकता है जैसे जीव शरीर धारण कर सकता है वैसे ईश्वर शरीर धारण कर सकता है ठीक है तो इसके पीछे हेतु क्या है अर्थात ईश्वर जो अवतार ले सकता है जिसकी व्याख्या हमने की इसका हेतु क्या है इसकी सिद्धि के

02:56:02:26 अवतार लेने की सिद्धि इसका हेतु क्या है? प्रश्न याद रखिएगा हेतु क्या है? हेतु मतलब क्यों लेगा? हां। क्यों ले रहा है अवतार? नहीं क्यों ले रहे? नहीं है क्यों? क्यों दूसरा हो गया? अच्छा फ्लोकी जी आपने न्याय दर्शन पढ़ा है? जी पढ़ा है। अरे आप अपने अपनी बात बताइए। आप इस तरह से मत किसी क्वालिफिकेशन मत जाइए। नहीं नहीं अपनी बात बताइए। वो कंफर्टेबल नहीं नहीं ये सवाल ही गलत है। नया दर्शन पड़ा है। आप अपनी बात रखिए भाई शिवश जी मैं मॉडरेटर से बात अच्छा आप सुनिए सुनिए आप क्यों बीच में देखिए मैं देखिए आप लोग सुनिए एक बात बता जी एक मिनट मैं एक बात क्लियर कर दूं निर्भय हम यहां पर बिल्कुल अपने सत्य के साथ आए हैं। कोई मन में राग द्वेष इस तरह का नहीं है कि हमें आपकी अपमानना करनी है या फिर छोटा दिखाना है। आपके आचरण से हमको ऐसा लग रहा है कि आपके अंदर है तो आप उन चीजों से बचिए। जैसे कि किसी से किसी से ये पूछना उससे क्या मतलब है? अगर हम उसको डिनाई करें आपकी कही हुई बात को तब आप कहिए कि आपने पढ़ा है कि नहीं पढ़ा है? बल्कि आप तो प्रमाण दिखा दीजिए यहां पे लिखा हुआ है। आप किसी की आप किसी की क्वालिफिकेशन पे बात मत करिए। आपने क्या किया?

02:57:17:27 आप क्या इसलिए बोलना पड़ रहा है मुझे तेज? क्योंकि आप बीच में बोल रहे हैं मेरी बात को। क्यों कूद रहे हैं? नारायण नारायण ठीक है। मैंने आप बता दीजिए किेंगे अवतार लेने का हेतु क्या है? इस एक बार इसको थोड़ा एक्सप्लेन कर दीजिए ताकि शिवान जी को भी समझ में आ जाए। बाकी जनता को समझ मुझे भी समझ में आ जाए। ठीक है? मान लीजिए मैं नहीं समझ पा रहा हूं तो अब समझा दीजिए हेतु से क्या अर्थ है? नहीं मेरी आवाज आ रही है? मैंने मैंने हां आ रही है आ रही है। मैंने आपसे यह पूछा था न्याय दर्शन के विषय में ताकि मैं इस बात की श्योरिटी हो सकूं कि पंचाय के बारे में आपको अगर आपने न्याय दर्शन पढ़ा होगा तो 100% आपको पंचायत का छोड़ दीजिए न्याय दर्शन को आप हेतु का अर्थ बताइए। छोड़ो मैं वही मैं उसी पे ही आ रहा हूं। मैं उसी पे ही आ रहा हूं। कि चर्चा जो होती है वाद में वाद में क्या होता है? जब हम दो चीज एक तो होता है प्रत्यक्ष अनुमान। ठीक है? हेतु ईशु मैं वही कह रहा हूं। मेरे को एक बार पूरा देखिए एक होता है ना एक ही डायरेक्ट शब्द में नहीं थोड़ा समझाना पड़ता है। ये ये क्या हो रहा है मैं बता दूं आपको बता दूं मैं बता दूं इनको बोलिए मुकदमा जब शुरू होता है सुनो मुकदमा जब शुरू होता है सामने वाला व्यक्ति जो है कटघरे में खड़ा हुआ है एक मिनट भैया मैं बोल दूं आप आप जो कर रहे हो उसको मैं बता दूं आपको क्या है सामने वाला व्यक्ति कटघरे में खड़ा हुआ है अब जो है उसप आरोप लगा है नहीं दिया जा रहा गलत बात मैं आपको बता दूं आप

02:58:33:03 क्या कर रहे हैं यहां पे बार-बार ये वाली बात कि न्याय दर्शन ये उसका पहला यह लिखा है दूसरा यह लिखा है भाई हम हम जो है जो एक्स्ट्रा चीजें आप शास्त्र में लिखी हुई क्यों बता रहे हैं? आप सीधे वो पॉइंट बताइए। नया दर्शन के आधार पे ये बात है। मैं क्या मगर आप जी से आप श्वेता जी से पूछ रहे हो कि आपने पढ़ा है कि नहीं पढ़ा है? आपने न्यूमोलॉजी न्यूमरोलॉजी पढ़ी है कि नहीं पढ़ी है? ये सब बातें आपने की। ठीक है। अब मैं बता रहा हूं इसको क्या कहते हैं? इसको समझ लीजिए क्या चीज है। श्वेता जी आप भी सुन लीजिए। व्यक्ति पर आरोप लगा है कि उसने मर्डर किया है। सुन लीजिए सुन लीजिए। पूरा आपने पूछा हेतु समझाओ मैं हेतु समझा रहा हूं मेरे को बोलने नहीं दिया आप आप हेतु नहीं उनको इंटरप्ट करना पड़ा ना आपको उनको इंटरप्ट करना पड़ा आपको सुनिए वो बोलेंगे आप कौन होते हैं बोलने वाले बीच में भाई मॉडरेट मेरे सामने अन्याय हो रहा है और मनुस्मृति में लिखा है मौन रहने से अच्छा है सत्य बोलना जो ना जो व्यक्ति को अधिकृत है जो अधिकृत है वो बोलेगा क्या बोलोगे तो मैं तो अपनी भावना व्यक्त कर रहा हूं ना मैं उनकी थोड़ी ना व्यक्त कर रहा हूं समय में करो ना अब अपने समय में करो ना मेरी भावना ये है कि यहां अन्याय हो रहा है मैं इसमें अपने समय पे क्या करूं अरे भाई अपने समय अरे शिवाजी एक बार मैं श्वेता जी मुझे वो उदाहरण प्लीज मुझे वो उदाहरण बोलने दीजिए वो उदाहरण क्या है जिससे जनता को समझ में आ जाए अपने समय में यह बार-बार ऐसा क्यों कर रहे हैं मुझे उदाहरण बोलने दीजिए मेरे को भाई

02:59:48:04 मेरे को बोल लेने दो क्या हो रहा है कुछ भी हो रहा है मतलब मैं बोल मेरे बीच में कूद करके हम चालू बताइए क्या मतलब मैं फिर कूदने शब्द का उपयोग किया इन्होंने देख लो देख रहे हो ये इसीलिए आए हैं या तो बाद में डंडा करके या तो बात खत्म हो जाए किसी तरीके से इनको निकाल दिया जाए तो ये हो जाएगा मुझे बोलने और या फिर यहां पर यह बदतमीजी करेंगे या फिर यहां पर यह बदतमीजी करेंगे आप अपनी बातमीजी आप बार-बार कूदने कूदने शब्द का इस्तेमाल कर रहे हो कटाक्ष कर रहे हो दूसरे दूसरे कराटे सीखने को मैं क्यों बोलूंगा कराटे करके दिखाओ क्यों दिया वो उदाहरणारी आप आप जो है मेरे ऊपर वो सिद्ध करके दिखाओ कि मैं आपको कराटे कूदने का उदाहरण दूंगा ये सिद्ध कैसे होता है बोलने क्यों नहीं दे रहे बोलने क्यों नहीं दे रहे मेरे को इसलिए नहीं बोलने दे रहा कि आप गलत बातें कर रहे हो तो अपने बारे में बताओगे ना अपने समय में बताओगे ना कि मैंने क्या गलती की मेरा भाई मैं कोई गलत बात होने के बाद इंतजार करूंगा क्या कि आप यहां पे जो जो वितंडा करनी है जो उल्टी करनी है वो कर दो उसके बाद मैं बोलूं आपने ये किया और फिर आप कह दो अब नहीं करूंगा आप कुछ भी कर दो उसके बाद मैं कहूं कि नहीं किया अपनी उल्टी अपने समय में करो अभी मुझे मुझे मुझे इससे मतलब है कि आप जो है अगर मेरे सामने कोई गलत कार्य हो रहा है मैं बोलूंगा मैं रोकूंगा मेरी सामर्थ के अनुसार जो मैं कर सकता हूं करूंगा आपको नहीं करनी है चर्चा आप

03:01:03:08 बता दीजिए आप जा सकते अरे मेरे भाई मैं चर्चा कर दो ना चर्चा तो अब मुझे वो बात बताने दो कि ये क्या कर रहे हैं अब मुझे वो बात बताने दो कि ये क्या कर रहे हैं बात बोल लेना मेरा जो विषय अब मुझे वो बात बताने दो क्योंकि ये बार-बार कर रहे हैं ना बिना बात ये है कि जब हम जब हम हेतु रखते हैं जब हम हेतु की बात करते हैं तो ये आपको ऐसे बात करनी चाहिए थी हेतु के बारे में जो आप ये कर रहे हैं आपने न्याय में ऊपर ये लिखा है वो लिखा है ये क्या होता है वो मैं बताऊंगा मेरी बारे में चलिए बताइए मुझे मत सिखाओ। मुझे से बात करनी खुद सीखो। खुद सीखो। मुझे बात करनी है। निर्भय जी आप ऐसा है भाई साहब अगर आप यह सब बातें करेंगे दोबारा आपने यहां माफी मांगी है तो सीखना आपको है। आपने माफ़ मांगी मैंने माफ़ी नहीं मांगी है। अब आइए आपकी आवाज है। आपने माफी मांगी है। आप हेतु का अर्थ बताएं। आपने माफी मांगी है। मैंने नहीं मांगी है माफ़ी। क्षमा आपने मांगी है। आपको सीखना होगा। WhatsApp मैसेज दिखा दूं। माफ़ी मांगी। हां तो उसमें उसमें मैं सीखूंगा जहां मैंने माफी मांगी है जहां नहीं मांगी है वहां मुझे मत कहो सीखने को ठीक ठीक ठीक मेरे को मत अभी आप जो है माफी मांग रहे हो ना कि मैं कूदो नहीं बोलूंगा फिर बोल रहे हो कूदो शिव जी थोड़ा सा जाइए कोई बात नहीं तो भैया आप जो है जो शब्द का मना कर रहे हो कि मैं नहीं मैं

03:02:18:12 नहीं बोलूंगा तो आप बार-बार उसप बदल रहे हो मैंने जिस बात के लिए आपको WhatsApp में कहा था वो मेरा उदार भाव था कि भैया मैंने आपको एक दिन पहले क्यों नहीं बताया उसमें कोई सनातन सिद्धांत नहीं था कि मुझे आपको एक दिन पहले ही बताना है। उसको आप कह रहे मैं WhatsApp दिखाऊंगा आपको। क्यों गलत व्यवहार किया आपने? क्यों बोला? आदमी सामने वाला सामने वाला कहां गलत शब्द बोला? चलो गलत शब्द सिद्ध करो उसे। शब्द गलत शब्द सिद्ध करो। उल्टी क्यों बोला? उल्टी क्यों बोला? उल्टी कब बोला? अभी बोला है। WhatsApp में बोला है। अरे अभी अभी लाइव में बोला है। अभी लाइव में बोला है। कब बोला? कब बोला? पांच मिनट पहले बोला। इसलिए बोला इसलिए बोला क्योंकि आप बार-बार ये गलत बातें करते चले जा रहे हो। फिर कह रहे हैं अपनी बारी अपनी बारी आए तब बोलना झूठ की हद है भाई ऐसे क्या बोलते हैं इस कन्वर्सेशन जो है इसका एंड नहीं उसका ये कभी खत्म नहीं होगा गए डर गए देखिए अरे डर क्यों रहे हो यार ये आवश्यकता नहीं है बोलने की मैं आखरी बार आपसे कह रहा हूं आप अगर आप अगर इस तरह से बदतमीजियां करोगे मुझे आपसे चर्चा नहीं करनी है ठीक है आप मेरे को पंचामे दे दो और सिद्धि आपने कूद कूद करके मना कर कर के बार-बार कूदना बोला आप जब मुझसे यह कहने लगे आप जब मुझसे यह कहने लगे आप जब ये आप जब आप जब आप जब मुझसे यह कहने लगे कि भैया मैं जब अपनी

03:03:33:18 बारी आए तब बोलना तब मैंने कहा तुम जब उल्टी कर दोगे उसके बाद मैं बोलूंगा क्या सीधा नहीं हो सकता मैं पंचा दे रहा हूं तारवा नहीं होता अभी चलो जाइए भाई मुझे मालूम था हैंड बताने बताने बताने देते ना हेतु का अर्थ बताने देते व्यवहार और जा रहा है लगातार वो पता है क्या चाहता है श्वेता जी सुन लीजिए वो व्यक्ति क्या चाहता वो यह चाहता है कि वो जो कुछ बोलना चाहता है ना बुरी बातें हमारे विषय में या कटाक्ष वाली बातें वो बोल दे वो रह जाए और उसके बाद उनका मिसयज हो बस इनका यही काम है अच्छे से चर्चा हो रही है मगर उसमें ऐसे ऐसे जो सॉफ्ट से मजाक करना कि भैया वो कराटे करने ही कह दोगे मैंने इनके साथ किया क्या ऐसा कोई अब बद्दी बात बोली फिर ये कह रहे हैं कि अपनी बारी आए तब काउंटर करना मतलब तुम जो उल्टी मैंने ये कहा तुम जो उल्टी करना चाह रहे हो वो कर दोगे उसके बाद उसको मैंने सुना मैंने सुना मैंने सुना अब मैं यहीं पे था सुनिए मैं कह रहा हूं कि उनको डायरेक्ट हेतु का अर्थ बता दीजिए और टू द पॉइंट बात कर मैं मैं टोक दूंगा ना अगर मैं भी तो यही कह रहा था भाई मैं अपने घर में अपने माता-पिता से उनको भी इस चर्चा के बारे में मालूम है मैं उनसे ये कह के आ रहा हूं मेरा ईश्वर साक्षी है ये व्यक्ति जो आ रहा है ना ये बात तो सुनो मैंने क्या कहा है अपने माता पिता से ये व्यक्ति जो आज आ रहा है चर्चा

03:04:48:26 करने अच्छा व्यक्ति है ये व्यक्ति टू द पॉइंट बात करने वाला व्यक्ति ये बातों घुमाएगा नहीं इधर उधर की बातें नहीं करेगा ये मैंने उनसे से कहा है मगर ये मुझे ही वहां पर वो सिद्ध कर रहे हैं ना इस तरह की बातें करके मैं तो अच्छे भाव से ही आया था सत्य के साथ कोई कटाक्ष नहीं कुछ नहीं कोई द्वेष भावना नहीं किसी को नीचा नहीं दिखाना अब वापस और ये अपने युवा युवा उसमें जो अब मैं क्या कहूं फिर वो कहेगा एक और कटाक्ष कर दिया ये अपने उस खमार में अपने भटके हुए दिशाहीनता के कारण वो सब आचरण जो अपने दोस्तों यारों में करते होंगे वो मेरे साथ कर रहे हैं हम वो लेने के लिए वो एक्सेप्टेबल नहीं है मेरे लिए आपके दोस्तों के लिए आपके घर के लिए होगा लाइव है दूसरी बात अब मैं वो वो जो फोटो वाली बात है वो बता के रहूंगा उसके बिना आगे नहीं क्योंकि इन्होंने इन्होंने इतनी चीजें कर दी है कि मुझे वो बताना बहुत आवश्यक है आप वो बता दीजिए इसके बाद हम इनका हेतु का जो प्रसंग है वो आगे ले लेते या इसको ऐसे कर सकते हैं कि पहले हेतु वाला ले ले बाद नहीं पहले वही होगा आपने कर दिया ना कूदो कूदो और वो आपको झूठो कराटे आपको

03:05:55:22 ऊपर ये लिखा है इसमें मेरा पॉइंट ये है इसमें मेरा पॉइंट ये है कि कम से कम जो मूल विषय है ये हो जाए बाकी जो मूल विषय पे मैं आऊंगा लेके ना मूल विषय भटकने नहीं देंगे चाहे जो हो जाए वो खोल लेंगे दोबारा वो मूल विषय भटकने नहीं देंगे नहीं ना वो ठीक है मेरी बात सुन लीजिए मैं कह रहा हूं मूल विषय पे एक बार कंप्लीट कर लेते हैं तो यह आपको सोचना चाहिए कराटे वाला उदाहरण देने से पहले श्वेतांगी से पूछने से पहले कि आपने नया दर्शन पढ़ा है मुझसे पूछने से पहले क्या आपने न्यूमरोलॉजी पढ़ी है क्या ऐसा ना हो ऐसा ना हो ऐसा ना हो कि इन सब बातों के चक्कर में जो मूल विषय है वो रह जाए है ना मूल विषय मूल तो ये बात ये बात आपको भी सोचनी चाहिए ना निर्भय जी ये बात आपको भी सोचनी चाहिए कुछ बोल रहे हैं ना आप भी तो मैंने अलग से आपके आपके लिए अलग से प्रथम कि मैंने आपको जवाब में नहीं बल्कि अपनी ओर से क्या कहा है बताइए गलत अगर आप सही होते अगर अगर आप जैसे जैसे अगर आप सही होते तो अपनी तरफ से कुछ नहीं बोलते ना बोला ना आपने उल्टी इत्यादि शब्द बोला ना नहीं मैंने उसको प्रतिकार स्वरूप बोला है आपने बोला प्रतिकार स्वरूप बोला है प्रतिकार स्वरूप वो गलत नहीं है मैंने आपको जो जो चीजें सुनिए जो चीजें निषेध है जो चीजें निषेध है वो नहीं की है मैंने प्रतिकार स्वरूप जिनकी आज्ञा है वो किया है जैसे किसी पे जैसे किसी पे किसी के साथ अहिंसा करना गलत है मगर धर्म की रक्षा के लिए करना

03:07:10:24 उचित है सिद्धि पे आना चाहता हूं मेरे से अवतार सिद्ध भी बात कर आप अवतार सिद्ध पे आइएगा पहले मैं वो बात बोलूंगा कि आप यहां कर क्या रहे थे अपने आप अपने नहीं मैं मैं नहीं रोकूंगा भाई आपने इतना सब कर दिया है ना कि मुझे बताना है लोगों को ठीक है मैं आपको म्यूट करके बता देता हूं मैं आपको रोक अचुदाय नमता नम सुनिए ये क्या कर रहे थे ये ये कर रहे हैं कि एक व्यक्ति खड़ा हुआ है कटघरे में उस पर आरोप लगा है कि उसने हत्या की है ठीक है अब हत्या करने का जब वो केस केस चालू हुआ मुकदमा चालू होता है तो व्यक्ति क्या करता है यह देखिए उसमें फोटो में कितनी बेरहमी से हत्या हुई है ये दिखा रहा है उसका कोई मतलब नहीं है कि उससे सिद्ध हो रहा है कि नहीं हो रहा है कि वो हत्यारा ही है ये हत्या उसी ने की है। मगर वो खामखा अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए ये सब ऐसी फोटोज दिखा रहा है। देखिए कितना ब्रूटल मर्डर केस है, कितना ये है, कितना वो है जिससे लोगों के मन में एक प्रभाव उत्पन्न हो जाए कि देखो ऐसे इस वाले करते हैं। इस वाले जो है श्लोक गान करने लगते हैं तो मुझे उन्हें टोकना पड़ता है। भैया श्लोक गान यहां मत करो। गाना गाने लगते हैं वो। भैया टू द पॉइंट रहो। अपनी बात टू द पॉइंट रखो। जिन बातों के बिना काम चल सकता है वो बातें

03:08:26:00 मत करो। ठीक है निर्भय जी। हो गई। अब आप निर्भय जी अपना हेतु वाला जो है बात उसको कंटिन्यू करिए और हम अब हम ट्रैक पे रहेंगे। अगर कोई भी इधर-उधर जाएगा तो मैं क्षमा करिएगा मैं टोक दूंगा। नारायण शुरू करिए। अब आप हेतु काट एक बात और कि हां एक बात और कि बीच में इंटरप्शन ना हो। थोड़ा सा ध्यान दीजिएगा। बस फिर ये सब आप ठीक है। अब आप नहीं हुआ है तो मैं आपको बोलूंगा ना। ठीक है। देखो इसमें मैं भी मैं कुछ बोल बोल दूं बीच में इंटरप्शन ना होने पे। इसीलिए मैं इसीलिए कह रहा था कि ये रिक्वेस्ट है आपकी मेरी तो मॉडरेटर से रिक्वेस्ट है कि आप ध्यान रखें कोई बीच में ना बोले। हां हां ध्यान रखा जाएगा। आप आप कृपया हेतु का आप ये चाहते हैं। ठीक है। सुनिए डिस्कशन रीस्टार्ट होने से पहले जैसे वो अपनी कुछ मांग कर रहे हैं। मैं भी एक मांग मांग या जो कुछ है कुछ अपना पक्ष आपको बताना चाहता हूं। बता दूं? हां। वो ये है कि इंटरप्शन क्या कहते हैं इन्होंने कहा कि देखिएगा कोई इंटरप्ट ना करे। ठीक है? अब क्या होता जैसे मैंने अभी ठीक है बोला ना ठीक है बोला जैसे अभी तो सामने वाले को ये लगने लगता है कई बार कि भैया यहां पे मुझसे अब मेरा पक्ष जो है पूछ रहा है कुछ ना कुछ तो ऐसी स्थिति में जैसे इनसे

03:09:41:01 स्वाभाविक ये निकल सकता है कि ठीक है ना या मुझसे स्वाभाविक रूप से निकल सकता है कि ठीक है ना वैसे ही किसी व्यक्ति की किसी व्यक्ति के सिद्धांत पर कोई बात हो रही है कुछ हो रहा है तो वो कोशिश कर रहा है कि ऐसा ना करूं मैं फिर भी उससे स्वाभाविक रूप से वहां पर इंटरप्शन हो सकता है मगर यदि सामने वाले को ध्यान दिलाया जाए भाई बोल अभी मेरी बारी चल रही है वो रुके ना तो उसको अन्याय माना जाए ठीक है वो रुके ना जब है ना और ऐसे में ना माना जाए कि मेरे मुंह नहीं ऐसा नहीं ये गलत कह रहे हो फिर अरे भाई मेरी बारी चल रही है बस ये देखा मैंने कहा था ना इंटरप्ट नहीं करेगा तो ऐसे में इन्होंने भी स्वीकार किया भाई मेरी आदत है आप स्वीकार कर लो है ना है ना मैं कहता हूं पूछता हूं ठीक है ठीक है पूछता हूं तो ठीक है ठीक है पूछते हो तो इन्होंने फिर मेरे स्वीकार किया था कि भाई मेरा इंटरप्शन उस स्थिति में इनको स्वीकार फिर बाद में जब मैंने ठीक है ठीक है कहा तो उन्होंने कहा जैसे आप ठीक है ठीक बोल रहे हो ऐसे मैं भी ठीक है ठीक बोल रहा था तो फिर मैंने याद दिलाया कि ठीक है ठीक है बोलने पर जब आपने रिप्लाई किया तो मैंने आपत्ति प्रकट नहीं की मैं वो समझ गया जी समझ गए ना मैं वो समझाऊं कि आप किसके बारे में चलिए बोलिए निर्भय जी बोलिए नारायण हम अच्छा ठीक तो अब आते [हंसी] हैं सिद्धि पर ठीक है अब आते हैं सिद्धि पर बोलिए बोलिए

03:10:56:14 तो जब हम अवतार की सिद्धि पर बात करते हैं तो पॉइंट आ जाता है हेतु। अब हेतु क्या है कि जब हम किसी बात को अनुमान प्रमाण से सिद्ध करते हैं क्योंकि ईश्वर जो हमारे सामने प्रत्यक्ष रूप से अवतार नहीं ले रहा तो ये जो विषय है ये परोक्ष विषय है। तो इसकी सिद्धि अनुमान प्रमाण से होती है। ठीक है? अब जब अनुमान प्रमाण से जब किसी चीज की सिद्धि होती है तो अकॉर्डिंग टू न्याय दर्शन अकॉर्डिंग टू जो परंपरा से जो ज्ञान चलाता है वो न्याय दर्शन में स्वामी करपात्री जी अनुष्ठान जी सारे लोग ही मानते हैं इस चीज को। बताएं तो उसमें जब अनुमान प्रमाण से किसी बात की सिद्धि की जाती है तो वो पंचाव्या द्वारा की जाती है। ठीक है? पंचाव में पांच अवयव होते हैं। प्रतिज नहीं नहीं हेतु आप हेतु हां बस वो हेतु बता दीजिए कि हेतु का क्या कहना चाह रहे हैं आप उसको बाकी जी मैं वो वो थोड़ा सा अच्छा टीम बाकी छोड़ देता हूं आपको नहीं बैकग्राउंड की आवश्यकता नहीं है वो बहुत लोग सारी बहुत सारे दर्शक समझ नहीं पाएंगे उसको है ना आप केवल हां हां अब इसमें जैसे मान लीजिए कि मैंने कोई प्रतिज दी कि ईश्वर जो है वो शरीर धारण कर सकता है। ठीक है? शरीर धारण करके मुख्य निमित्त रूप में क्रियाकलाप जैसे मेरा शरीर तो ईश्वर ने ऑलरेडी धारण किया ही हुआ है तो हम इसको नहीं कह रहे अवतार ये कह रहे हैं कि ईश्वर मुख्य निमित्त रूप में शरीर धारण करके क्रियाकलाप कर सकता है तो जब हम पूछते हैं कि इसका हेतु क्या है अर्थात हम ये पूछ रहे हैं कि ये वो किस कारणवश यानी ऐसा कौन सी चीज है कौन

03:12:11:15 सा सामर्थ्य या कौन सा गुण क्या है जिसके कारण वो ये काम है उसका है ना एक तो होता है क्यों कर पा रहा है तो क्यों कर पा रहा है तो मुझे रक्षा करनी है ये करना है वो वो नहीं पूछा जा रहा पूछा जा रहा है कि वो किस कारण से यह कार्य कर पा रहा है। करने में समर्थ है। वो जो चीज होती है उसको बोलते हैं हेतु। ठीक है? अब इसमें मैं जो कह रहा हूं यही लाइन आप अगर स्टार्टिंग में ही फर्स्ट में ही बोल देते तो भी समझ जाता। क्यों? मैंने क्यों नहीं बोला? क्यों नहीं बोला? क्यों मैं बता देता हूं ना क्यों नहीं बोला? क्योंकि मुझे केवल हेतु नहीं बोला था ना। आपने जैसे मैं जैसे मैं सीक्वेंस में बोल मुझे कई बातें बोलनी थी। उस कई बातों में एक शब्द हेतु था। आपने हेतु को पकड़ लिया। अब आप कह रहे हो कि बाकी बातें मत बोलो। मेरी इच्छा है ना मैं बोलूं। आप मुझे मना देखिए ऐसा है कि मतलब मैं मैं थोड़ा सा थोड़ा सा आगे बढ़ जाता हूं वो हेतु का ही अर्थ पूछना था अगर आप मैं आपको जैसे बता रहा हूं कि आपने बहुत अच्छी सारी बहुत सारी बातें बताई जो अच्छी थी ठीक है उसमें कोई खराब नहीं है लेकिन अगर आप केवल ये होती वाली जो बात है ना ये भी काफी सफिशिएंट थी अगर आप बताते ना तो समझ जाता व्यक्ति नहीं कोई कोई दिक्कत नहीं कोई दिक्कत नहीं अब जो आप समझ गए शिव जी हेतु का जो इनका अर्थ है वो मूल है बाकी मूल में क्या है थोड़ी बातें मैं पूरी कर देता हूं एक तरीके से निमित्त कारण क्या है? यही तो है तो पूरा पूरा नहीं अब नहीं बोल दीजिए अगर हम कह रहे हैं वो गलत हो जाएगा थोड़ा वो ठीक है ठीक है आप जब मैं जवाब दूं और वो आपका जवाब

03:13:26:24 ना हो तो आप बताइएगा अभी निमित्त कारण ध्यान मत दीजिए जी जी बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल तो पॉइंट यही है कि अब मुझे ये बता दीजिए कि जैसे अवतार सिद्धि में आपकी प्रतिज है कि ईश्वर जो है मुख्य निमित्त रूप में शरीर धारण करके क्रियाकलाप कर सकता है। थोड़ा सा वॉल्यूम कट कर दीजिए क्योंकि दर्शकों को भी नहीं समझ आ रहा। मुझे भी थोड़ा सा कम आ रहा है। सॉरी क्या क्या है? कम आ रही कि वॉल्यूम आपका वॉल्यूम आवाज जी थोड़ी सी कम आ रही है मतलब पहले से कम आ रही है ठीक है मैं कह रहा अभी सही आ रही है अभी सही आ रही है हां अभी अभी सही तो मैं मैं कह रहा हूं कि प्रतिज ये है श्रीमानस जी की कि ईश्वर मुख्य निमित्त रूप में शरीर धारण करके मुख्य निमित्त रूप में क्रियाकलाप कर सकता है उस शरीर के द्वारा जिसे हम अवतार कह रहे हैं मैं कह रहा हूं इसका मुझे पंचाव दे दीजिए क्योंकि अनुमान प्रमाण से सिद्धि हो रही है शब्द हम ले नहीं रहे तो इसका मुझे आप वो दे दीजिए क्या बोलते हैं पंचाव पंचाय हेतु तो एक अधूरा पॉइंट हो गया ना समझिए इस चीज इसको पंचाव अगर मैं हेतु बोलूं हेतु से कोई बात प्रूव नहीं होती हेतु से कोई बात प्रूव हेतु इज़ अ पार्ट हेतु पंचाव में से पांच अवयव में से केवल एक पार्ट है पांच में से ठीक है नहींकि आपने पहले हेतु ही मांगा ना नहीं मैंने क्या बोला मैंने मैंने देखिए मैंने वो मैंने बोला कि जब आप हेतु बोला कि ये हेतु है तो मैं बोलूंगा कि अच्छा ये हेतु इसका मुझे पंचाम दे दीजिए वो मेरी आगे की लाइन थी लेकिन आपने बोला कि नहीं हेतु का अर्थ वो उसमें समस्या आई थी तो वही बात आपने हेतु का अर्थ समझा दिया है

03:14:41:25 डायरेक्टली आपने हेतु का अर्थ समझा हां अब मैं वो आगे की बात भी मैं बोल दे रहा हूं साथ के साथ कि जो भी आपका पॉइंट है हेतु उसके साथ में मुझे पूरा जो पंचावे होते हैं क्योंकि न्याय जो अनुमान से बात सिद्ध करते तो पंचावे सिद्ध करते हैं तो मुझे वो पंचा बोल रहे हैं आपने बात पहले खत्म कर दी थी इनके जवाब लेने से पहले चलिए हां मैं वही रिपीट मैं वही बोल दे रहा हूं ठीक है मैं बोल रहा हूं कि पंचावे जो है आप मुझे वो दे दीजिए और एक और रिक्वेस्ट थी मेरी छोटी सी कि मेरी स्क्रीन मैंने लगाई हुई है उसको शेयर कर दीजिए उसप चीजें लिखी हुई है थोड़ी सी कोई फोटोोटो नहीं है जी देखिए फिर वही बात आ रही है फोटो उनको दिखाने का जो जिसका कोई मतलब नहीं जबरदस्ती उसको प्रभाव उत्पन्न किया जा रहा है। मैं फिर वही इंटरप्ट करूंगा ऑब्जेक्शन बिलो वाला इन फोटो से सिद्ध नहीं होता कि ये इसने हत्या की है। आपकी बात को जब मैं काउंटर करूं कि ऐसा नहीं लिखा है तो आप प्रमाण दिखाइए ना स्क्रीन पे। मैंने काउंटर किया है। वो प्रमाण नहीं है। आप उसे स्क्रीन शेयर करेंगे तब तो पता चलेगा क्या है। आप एक बार लगाइए। नहीं तो आप पहले बताइए ना स्क्रीन शेयर करवाने से पहले। किस संदर्भ में वो पंचाव ही लिखा हुआ है मैंने तो क्यों लिखा है क्यों दिखा रहे हैं हमने मना किया आप गलत कह रहे हो हमने कहा कि आप गलत कह रहे हो ये नहीं लिखा हुआ है अपने पक्ष के लिए दिखाना है मुझे अपने पक्ष के लिए दिखाना है तो आपने बोल तो दिया

03:15:55:22 ये वही वाली बात है अभी उसकी आवश्यकता नहीं करनी क्योंकि प्रभाव उत्पन्न करना है क्योंकि कैसे एक्सप्लेन करना है बताना है तो हम आपको अवश्य करने व्यंग मारा की प्रभाव हल्का हो रहा है आपने ने किया ना गलत किया ना यह काम मॉडरेटर के इसलिए किया क्योंकि आप चार पांच बार अपनी मर्यादा को लांग चुके हैं तो अब आपको लाइसेंस मिल गया मर्यादा लांगने का लाइसेंस नहीं मिला है फिर क्यों आपने मगर एक आध बार तो पनिशमेंट के रूप में बोल सकते हैं ना क्यों बोल सकते हैं चलिए क्योंकि आपने गलत किया नहीं लाइसेंस क्या क्यों क्योंकि आपने गलत किया फिर वही डायवर्शन हो रहा है तो आप वही ना जब मैंने आपसे रिक्वेस्ट किया था कि मैंने बोला था किसी न्यूट्रल भाई साहब देखिए मैंने भी आपसे रिक्वेस्ट की थी कि आप व्यर्थ के विनोद पूर्ण उपास पूर्वक जो उदाहरण दे रहे हैं उनको देने से तो मैं मैं आहत हूं भाई मुझे उसका कोई न्याय नहीं मिल गया है। ये मेरी उदारता है कि मैंने आपको वापस ले लिया है। ये मेरी उदारता है कि आपको वापस ले लिया है। आहत होने ये मेरी उदारता है कि आपको मैंने वापस लिया है। ठीक है। अच्छा ठीक है। आप उदारता है आप आप मुझसे बोलो कि देखिए मैं अब नहीं करूंगा तो आप भी मत करिए। आप ये मत बोलो आपने कैसे कर दिया? ये मत बोलो। आप आप पहले एक निवेदन करो इस समय मुझसे। कोई मर्यादा की बात करके मर्यादा तोड़ेगा तो मैं पूछूंगा ना कि आप तो मर्यादा मैंने मर्यादा नहीं तोड़ी है। मैंने मर्यादा नहीं तोड़ी

03:17:10:28 है। अगर अहिंसा लिखा हुआ है तो धर्म की रक्षा के लिए हिंसा भी लिखा हुआ है। ऐसा नहीं है। मर्यादा नहीं तोड़ी। ठीक है। आपने मर्यादा तोड़ी अभी व्यूंग नहीं। मूल विषय पे बात करनी है। मैं तो चाहता हूं लेकिन बिना व्यंग के व्यंग मत करना। हां तो मैंने मैंने मैंने व्यंग इसलिए किया आपने पांच छह बार व्यंग किया। पांच-छह बार क्योंकि वही बात और निर्णय भी सुना दिया था एक बार तो। अब आपका चैनल है। अब मैं व्यंग करूंगा मुझे निकाल दो। देखिए मैं कह रहा हूं इनकी ये सब बातें है ना इनको केवल कंटेंट चाहिए वहां निकाल के यहां से मैं बहुत पहले मुझे कंटेंट नहीं चाहिए मुझे देखिए स्क्रीन शेयरिंग की अभी आवश्यकता नहीं है अगर किसी को बैठा होता हटानी होती मुझे चर्चा करनी है अब या तो इनकी बातें सुनके काउंटर बिना किए आगे बढ़े तो ये कंटेंट निकालेंगे और अगर काउंटर करेंगे तो फिर एक कंटेंट के लिए दूसरी बात बोलेंगे

03:18:02:24 पंचाय में पूछा है मैंने फ्लोकी जी पंचाव पूछा है मैंने उसमें से पहले आप हेतु से शुरू कर दीजिए दूसरा बता दीजिए आप पहले हेतु से बताइए कि क्या है पांचों होते हैं वो पंचाव एक अधूरा नहीं होता मुझे पता है भाई दर्शकों को नहीं पता ना अब उनको पंचाव एक्सप्लेन करना पड़ेगा आप समझ नहीं रहे हो तो उसमें से आप कॉज वाला बात बताइए देखिए एक मिनट योगी जी एक मिनट इन्होंने अभी ये बोल दिया है कि आप मुझे पंचाय बताइए यही बोला है ना इसका मतलब मेरी बारी है ना बोलने की बोलिए आप बोलिए आपकी हां अब इन्होंने क्या किया है एक बार मैंने भी देखा था हमारी साइड का कोई लर्नर होगा बिगिनर टाइप का वो जो भव्य राधा कृष्ण दास है ना उसके वहां पर पहुंचा भव्य राधा कृष्ण दास ने उसने बोल दिया कि भाई वो जो माया है या प्रकृति है वो बदलती है ये भी तो सनातन है तो इससे वो भी उसका भी लक्षण सनातन सिद्ध हो गया अब यहां वो अटक गया है ना यहां पूछना ये था फिर जो है अगर बदलने वाली चीज को भी शाश्वत कह रहे हो तुम बदलने के कारण तो फिर उसको क्या वो चीज किसको कहोगे कि जो परिवर्तनशील है जो शाश्वत नहीं है वो किसको मानोगे वहां कहना ये था मगर

03:19:18:00 वो व्यक्ति कंफ्यूज हो गया वो क्या कहने लगा क्या कहते हैं शास्त्रों के ऐसे शब्द जो सरलता से किसी की समझ में ना आए ऐसे शब्द निकाल करके और वहां बोलने लगा और भव्य राधा कृष्ण दास वहां अटक गए वो व्यक्ति थोड़ी देर फिर ये सब बोलबाल के कहा मैं अभी थोड़ी देर में आता हूं। ऐसे बोल के चला गया। ठीक है? अभी इन्होंने क्या किया है कि अब ये उसको एक्सप्लोर नहीं करेंगे। अब ये कहेंगे कि भैया ये जो मैं बोल रहा हूं ये जो मैं बोल रहा हूं आप इस रूप में मुझे बताइए। अब ये ऐसा सोच करके कि इन्होंने इस तरह के शास्त्रों तैयारी नहीं की होगी। ये कोई बड़ी बात नहीं है। शास्त्रों तैयारी करके आपसे बात करना। अगर हम सिद्धि के विषय में बात कर रहे हैं। ठीक है? सिद्धि के विषय में। दूसरी बात यह है इन्होंने कहा करपात्री जी करपात्री जी तो हमें केवल आपको यही बताना है ना कि कृपात्री जी अवतार को मानते हैं कि नहीं जब आप हमें कृपात्री जी का शब्द प्रमाण दे रहे हैं कि इसको मान लो इस चीज को तो हम कितनी जगह बताएं कि कृपात्री जी ने अवतार माना है। ठीक है? अब आप अब आप उसको एक्सप्लोर करिए जो आप बोल रहे हैं कि भैया आपको क्या चाहिए। जैसे आपने हेतु को एक्सप्लोर किया ना कि कौन सा कारण था जिससे वो बना? वो कौन सा कारण था जिससे वो बना क्यों बना ये नहीं किससे वो बना वो कौन सा कारण

03:20:33:01 वो हेतु ऐसे ही बाकी की चीजों को एक्सप्लोर करिए एक्सप्लेन कर दीजिए अब इसमें पॉइंट ये आ जाता है ना कि जो मैंने कर्पात्री जी वाला जो पॉइंट बोला था है ना वो इस दृष्टिकोण से बोला कि वो बात मैं भी स्वीकार कर रहा हूं वो बात आप भी स्वीकार कर रहे हो आप किस भी कर सकते हो हां मैंने क्यों करपात्री जी भी करते जी अब आप मुझे इंटरप्ट कर रहे हो मैं थोड़ा सा पूरा कर दूं बताएं बताएं जी मैं अपनी बात पूरी बोलूंगा ना स्पष्ट हो जाएगी दिक्कत नहीं आपको बीच में रोने जी बात यह है कि जब मैंने कर्पात्री जी वाली बात बोली तो वह मैंने इसी दृष्टिकोण से बोला यही बात समझाने के लिए बोला कि न्याय को करपात्री जी भी स्वीकार करते हैं। इसलिए आप भी इसको आपकी वो उसमें परंपरा से आ रही है तो उसमें ऐसा कुछ नहीं कि मैंने कोई ऐसी बात बोल दी जो केवल मैं मानता हूं आप नहीं मानते। आपकी परंपरा में स्वीकार किया जाता है। वो मैंने इस इस बात को समझाने के लिए बोला। अच्छा अब आते हैं बात करते हैं पछावे पे। ठीक है? जब हम न्याय दर्शन पढ़ते हैं। न्याय दर्शन के अंदर जैसा मैंने बताया जब मैं पहले समझा रहा था आपने मुझे रोक दिया था प्रोजिंग मत समझाओ। केवल हेतु समझाओ। अब आप मेरे से पूछ क्योंकि क्योंकि इसमें मुझे बोलने दीजिए भैया ये जो है ना यह कुछ नहीं है। ये अपना कंटेंट ही बना रहे हैं। मैं इस मैं इस ऑब्जेक्शन करूंगा। इन्होंने शुरू में सुनिए इन्होंने शुरू में क्या किया था? इन्होंने कहा इनको रोक। ये जो है अपना कंटेंट तैयार कर रहे हैं। मैं बता रहा हूं आपको। मैं पहले यही कर रहा था। इन्होंने सबसे पहले हेतु पूछ के चुप हो गए थे। ये कुछ नहीं बता रहे थे उसके

03:21:48:07 आगे पीछे। जब हमने हेतु बात करना शुरू की तो मैं ये भी पूछ रहा था। वो भी पूछ रहा था इन्हें मैंने टोक दिया मैंने उसके लिए मैंने उसके लिए ऑलरेडी वो टोक दिया था मैंने इसीलिए आपको स्पेसिफिकली शिव जी बोला कि आप केवल कारण वाला पार्ट अभी बता दीजिए बाकी के चार हम उसके बाद लेंगे एक साथ क्योंकि अगर आप पांचों बताएंगे तो फिर टाइम लगेगा बहुत ज्यादा ठीक है बाकी तो एक-एक करके इनसे सुन लेंगे ना आप केवल अभी हेतु वाला बता दीजिए कि कारण क्या है उसको अवतार ले सिंपल सी बात है ईश्वर को अवतार लेने का कारण क्या है इसका इसका अर्थ बताइए मुझे लोकी जी ये मुझसे नहीं पूछ रहे अभी उनको दिक्कत है वो पूछेंगे कुछ हां बताइए बताइए निर्वा जी क्या बोल रहे जी इसमें बात ये आ जाती है कि मैं पंचावे का अर्थ क्यों बताऊं ये भाई साहब आप जा सकते हैं ठीक है जाइए सुनिए हो गया वो मैं जान रहा हूं ना वो आदमी क्यों आया यार वो वो दिख रहा है वो कोई शास्त्र की ऐसी चीज जो उसने तैयारी की उसने पढ़ी है मैंने नहीं पढ़ी है इस बात का ले मैं पंचायत का अर्थ क्यों बताऊं अब मुझसे फोन करके बोलता है तर्क पे बात होगी प्रमाण पे नहीं सुनिए मुझसे फोन पे बात फोन पे जब ये बोलता है बोलता है तर्क पे बात होगी प्रमाण पे बात नहीं होगी ये सबसे पहला कॉल बता रहा हूं आपको इसका रैशन आर के नाम से दूसरी बात अब ये है कि ये पंचा का अर्थ क्यों नहीं

03:23:03:08 बताएंगे जब इन्होंने मुझसे शुरू में पूछा कि शब्द प्रमाण होता है जिससे वो होता है तो इन्होंने कहा आप नास्तिक को समझाएंगे ना ऐसे होता है वैसे होता है नहीं नहीं वो बता रहे थे पांचों का अर्थ क्योंकि वो समय ले रहे थे वो कह रहे हैं कि नहीं इसी में खींचेंगे कि इसको ये नहीं पता था आप समझ नहीं रहे इनके पास केवल इनको संस्कृत आती है या इनको फलाना पड़ा हुआ है। इनके पास नहीं है कि अवतार को असिद्ध कर पाए। अब भैया मैं अपनी बुक लेकर के आ जाऊंगा। दोबारा आ जाना। ठीक है दोबारा आ जाना। मैं आ जाऊंगा बुक लेकर के। मैंने अभी वो तैयारी की नहीं है कि नया दर्शन में क्या कह रहे पंचव जो लिखे नहीं वही कंटेंट ले रहा है कि मैं क्यों समझाऊं पंचाव? अब देखिए ईश्वर को असिद्ध सिद्ध नहीं कर पा रहे। वो जो अविद्या वाली वो थी ना वो छोड़ दी। मैथमेटिकल क्वेश्चन पूछा था ना कि मुझे तो मैथमेटिकल से प्रूव करके दिखाओ। जैसे ही मैं प्रूफ करने लगा इनको समझ में आ गया अरे अविद्या आ गई भैया भगवान की सुपर पावर आ गई यार तो भागो यहां से। ये सब होने लगा। अब ये यहां ये जाकर के वहां पर ये दिखाना चाहते हैं कि देखो शिवश नारायण द्विवेदी को जब पंचाव्य बोला गया तो उसको समझ में नहीं आया पंचाव्य क्या है। ये इनका मतलब इससे नहीं है कि ईश्वर सिद्ध हो सकता है कि नहीं। भाई आपको उसका अर्थ सुनिए अगर आपको पंचाव्य पता हो या ना पता हो उससे फर्क ही नहीं पड़ता क्योंकि

03:24:18:09 आपको उसके पांचों के उत्तर आपको पता है। बस तो हमको आप खोल खोल के बता दीजिए किस में क्या है मगर अब अब मत लो उसको वो हो गया अब मत लो उसकी मंशा समझ में आ रही है वो वो अब हार चुका है निर्भय आर्य जो है अब निर्भय आर्य जो है हार चुका है इसलिए अब वो इसमें आ रहा है मैं पंचाव का अर्थ क्यों बताऊं भैया अब जो है अब ये शास्त्र उसमें आ गया शास्त्रीय प्रमाण मैंने मैंने उनको टोक दिया था शुरू में मैंने उनको मना कर दिया था कि आप केवल हेतु बताइए इसलिए नहीं वो व्यक्ति शुरू में हेतु ही पूछ रहा था मगर जैसे जैसे उसको वो वो मिलती जा रही है ना उसकी जो क्वेश्चनिंग का आंसर मिलता जा रहा है वैसे वैसे वो लपक के दूसरे उस पे आ रहा है जैसे कि जब ये मैथमेटिकल वाली बात पे अटका था तो मैंने इसको उत्तर दे दिया था कि उसमें साक्षी कौन होगा आप रिवाइंड करके देख लीजिएगा तुरंत अच्छा अब ये बताइए किसको ईश्वर समझेंगे किसको नहीं और जब जब इसने निर्णय सुनाया तो दो बातें बताई एक शुरू में कि ईश्वर के एक तो शुरू वाली बात थी कि ईश्वर वो मैंने वहां पर उसको ठीक भी किया कि नहीं तीसरी बात और ईश्वर की सिद्धि कैसे हुई वो हमने कर ली बात फिर इसने दोबारा वो बात पकड़ी नहीं तब से वो बात पकड़ी नहीं अविद्या शक्ति वाली बात पकड़ी नहीं क्योंकि वहां फंस रहा है व्यक्ति इसने दोबारा वो बात नहीं पकड़ी है वहां से अब अब क्या लाए ईश्वर सिद्धि के लिए

03:25:33:10 कि भैया पंचाय अब शास्त्रीय प्रमाणों पे चलते हैं तो शास्त्रीय प्रमाणों पे भी है देखिए ऐसा है कि अगर पहली बात तो इसका कुछ हार्ड एंड फास्ट कोई रूल नहीं होना चाहिए वो यूजुअली न्याय दर्शन के हिसाब से ही होता है कि पांच जो आप जब आप उत्तर देंगे ना आपने जो जब आप पूरा उत्तर अगर ईश्वर के अरे वो यह कह रहा है मैं आप समझिए वो यह कह रहा है कि मैं पंचा अगला स्टेटमेंट उसका ये होगा आपने पंचाय पढ़ा नहीं है आपको न्याय दर्शन पता नहीं है ये सब उसके स्टेटमेंट जाएंगे और ये कंटेंट लेकर के वो अपने लोगों को दिखाएगा देखो देखो यहां उसके पास उत्तर नहीं था वो ईश्वर को असिद्ध नहीं कर सकता उस बारे में उसका कोई विवेचन नहीं है

03:26:15:15 अरे सीधा सीधा कारण ही डाल जान लो ना हेतु डाल लो उसके बात उसमें ऐसे बहुत से वचन है जो इसने भी पढ़े नहीं होंगे मगर मैं इस मंशा से नहीं आया मुझे इसको नीचा सिद्ध करना है मुझे अवतार को सिद्ध करना है कि अवतार ईश्वर ले सकता है मुझे ये करना है अब आपको अगर कोई शब्द है क्या कहते शास्त्र का वो आप शब्द आप लेकर के आपने उसको पढ़ा है हमें परंपरा से प्राप्त उन्ही आचार्यों ने जिन्होंने उसको पढ़ा भी है समझा भी है विवेचना भी की है उन्होंने सिद्धांत बताए खोल खोल करके हमने वो सिद्धांत ग्रहण भी किए उनको बताया भी है समाज को। आप जो है उन सिद्धांतों को काटिए। आप मेरी परीक्षा क्यों ले रहे हैं कि मुझे पंचा क्यों बताना पड़ रहा है? आप मेरी परीक्षा क्यों ले रहे? आवश्यकता नहीं है। मैं यही कहना चाहूंगा इसकी आवश्यकता नहीं है। आप इस समय किससे? आप किससे बात कर रहे? मुझसे कि उससे आपसे बात कर रहा हूं मैं। मैं ये कह रहा हूं कि आपको पंचाबे से ही सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है। आप समझ नहीं रहे। वो जब यह बोल रहा है कि मैं पंचाव्य का अर्थ क्यों बताऊं? तो इसमें मेरा आंसर क्या होगा?

03:27:23:15 क्या होगा? यही होगा ना कि पंचाव की आवश्यकता नहीं है। फिर वो कहेगा नहीं पंचा पंचा है। पंचा की आवश्यकता है। नर्शन में लिखा है। फिर मैं फिर आप क्यों नहीं बता रहे हो? बात इस पे ही अटकी रहेगी और वो ये कहेगा देखो देखो पंचा नहीं आता भाई। अभी मैंने पंचा नहीं पढ़ा है। तुम्हारे पास अगर ईश्वर को सिद्ध करने का और कोई तर्क हो कुछ हो तो ले आओ। हमारे परंपरा प्राप्त आचार्यों ने बताया है ईश्वर अवतार ले सकता है और तर्क से मैंने इसी उसमें चर्चा में सिद्ध भी किया है। जब सिद्ध होने लगा तो आप जो है पुदक के लक्षण पे चले गए। वहां भी मैंने सिद्ध किया है कि इन विषयों में केवल शब्द ही प्रमाण है। जैसे आपका जो प्रणव है हमारा भी है जो हमारा प्रणव है उसके लिए आपका शब्द प्रमाण है। और भी ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिसमें हम किसी को प्रैक्टिकली प्रूफ नहीं कर पा कर सकते कि ऐसा ही होगा। ऐसा ही होता है। उसमें हमारे लिए शब्द प्रमाण है। ठीक है? जो अती्द्रिय विषय होते हैं इंद्रियों का विषय नहीं हो सकते उसमें शब्द ही प्रमाण होता है। जब हम इंद्रियों से जिन विषयों को जान सकते हैं उसमें शब्द प्रमाण नहीं होता है। इसको किसने लिया है वापस? हटा दो इसको। मैंने तो नहीं हो गया है। चर्चा हो गई। डर गए क्या?

03:28:33:06 देखिए चर्चा किसने लिया इसको? मेरी आज्ञा के बिना किसने लिया? मैं एडमिन नहीं हूं भाई। ठीक है। तो देखिए ऐसा है कि जो वो जो भी वह पांचों पॉइंट्स जो मांगना चाह रहे थे उसकी आवश्यकता नहीं है ईश्वर की उसको वो क्योंकि उसकी अपनी मैं ऑपरेटर को भी बता रहा हूं आपको भी बता रहा हूं उसको नहीं लेना है वो वो यही सब करने आया अभी क्या बोल रहा था डर गए ना डर गए ना ये सब करने आया था वो हार चुका है वहां हार चुका है जब उसने कहा था मैथमेटिकल वो मुझे दो मैथमेटिकल वही अविद्या से हरा दिया भगवान की जो अविद्या शक्ति है उससे तुम कभी नहीं जीत सकते यह बात है सत्य उससे तुम भागोगे माया शक्ति से और उसका जो अस्तित्व तुमने भी स्वीकार कर रखा है। अब एक बात बताओ लॉजिकल बात समझो जब भगवान एक रस है। ठीक है वो हो गया वो आज की चर्चा हो गई। वो गए निर्भय जी गए। ठीक है? जब भगवान एक रस है हम तो एक रस है तो मैंने इस मैंने बताया कि भाई वो सब एक रस है तो वो कुछ कर नहीं रहा है कुछ नहीं कर रहा है भगवान को कुछ भी करने के लिए क्रियावान होने के लिए अपने

03:29:48:09 में कम ज्यादा रूप धारण करना ही पड़ेगा उसी को हम लोग सगुण निराकार कहते हैं जो कुछ करता है पहली बार तो ये अवतार नहीं है क्या अच्छा जब उसने सगुण निराकार रूप धारण किया पृथ्वी को बनाने के तो क्या उसका वो एक रस वाला रूप था खत्म हो गया क्या बताइए वो होते हुए भी उसने एक और डायमेंशन में एक और अवतार ले लिया अब वो सगुण निराकार है अब वो जहां चाहे वहां धक्के का विषय बनेगा जहां चाहे वहां नहीं बनेगा जहां चाहेगा वहां ग्रेविटी के अगेंस्ट काम कर सकने वाला है जहां चाहेगा वहां नहीं भी है निष्क्रिय है सगुण निराकार रूप भी तो अवतार ही है एक रस भगवान का तो एक रस होते हुए भी जब वो जो रस में उसके भेद आ सकता है। सगुण निराकार हो सकता है। निर्गुण होते हुए भी तो निर्गुण वो सगुण निराकार से वो सगुण साकार भी हो सकता है। जैसे उसने कहीं पे अपने आप को धक्के का विषय बनाया। कहीं पे नहीं बनाया। वैसे ही उसने आपको कहीं पर दृष्टि का विषय बनाया, कहीं पे नहीं बनाया। व्यवहार का विषय बनाने वाली बात है ना। ये बात हो गई। दूसरी बात कि अब जो सर्वशक्तिमान है क्या वो सब कुछ कर सकता है? तो हां भैया कर सकता है। तो भैया क्या वो बंध्या पुत्र कर सकता है? तो यहां पर मैंने जो ऐसी लॉजिकल फैलेसी फसाने के प्रयास करते हैं उसमें भगवान की अविद्या शक्ति पर्याप्त

03:31:03:13 है। आपके मन की इंफॉर्मेशन बदलनी है ना उसको और इंफॉर्मेशन ही बदली गई है। आप भी मानते हो जो जीव है वो अज्ञानी है। जो फंसा हुआ है। जो मुक्त है वो अज्ञानी नहीं है। ये तो ये भी मानते हैं ना। अविद्या तो इन्होंने भी मानी है ना। अब वो क्या कर रहा है? ये सारी चीजें हो गई क्लियर। उसके बाद एक एक चीज केवल रह गई थी कि राम जी है रामपाल नहीं है इस विषय में क्या शब्द प्रमाण है कौन भगवान का अवतार है कौन नहीं है इसमें शब्द और शब्द प्रमाण केवल यही नहीं है गुरु गोविंद और ग्रंथ केवल गुरु नहीं केवल गोविंद नहीं गुरु गोविंद और ग्रंथ उस संबंध में हमको शास्त्र भी प्राप्त है पर्याप्त उस संबंध में परंपरा प्राप्त आचार्य भी प्राप्त है और वो गोविंद प्रकटित हो रहे हैं वो चीजें

03:31:51:10 ठीक है? तो अब वह वाली बात भी हो गई कि भैया जिस विषय में इंद्रियां वो हो ही नहीं सकती वो जो चीज है कि वही सर्वशक्तिमान जो सत्ता है वही हमारे सामने खड़ी हुई है। इसमें इंद्रियां प्रमाण हो ही नहीं सकती। अती्द्रिय विषय है कि वो सर्वशक्तिमान सत्ता आई है कि नहीं आई है। इस रूप में जो हम कह रहे हैं। तो जो अती्द्रिय विषय होते हैं उसमें तो शब्द ही प्रमाण है। तुम भी लेते हो शब्द प्रमाण। गोद ली हुई बहन के साथ जो है भोग करना है कि नहीं करना है? इस विषय में क्या प्रमाण है? शब्द प्रमाण है नहीं करना है। हां भाई जी। अब जैसे वन टू प्लस टू बोला साफसाफ सबको पता है टू और टू ये ज्ञान है। ये ईश्वर का है। वहां बात पलट दी। हां। अब प्रकृति है। प्रकृति में कई वो वहां पर फस गया था। उसने तुरंत आप समझिए उसने विषय बदला था वहां से लक्षण पे आ गया था और मैं कह रहा था मैथमेटिक वाली बात और लास्ट में जब वो सिद्धि पे आया तो उसने वो बात नहीं उठाई मैथमेटिक वाली जहां वो फंस रहा था वो तैयार नहीं था ना इन चीजों उसने कौन सी बात उठाई कि भैया मुझे पंचाव दो अभी मैसेज में लिख रहा था पंचाव दो उसकी आवश्यकता नहीं है तो यहां पे निर्भय अरे तुम एक बात समझने की कोशिश करो तुम हो सकता है कि भैया ये सिद्ध कर दो

03:33:06:14 के शिवश नारायण द्विवेदी पंचाव्य का अर्थ नहीं जानता सिद्ध कर दो मगर ईश्वर के अवतार का खंडन नहीं कर पाओगे। यही करो बस व्याकरण ले आओ कि भैया किसी ने वो वहां पर वो शब्द पूछा उसका अर्थ नहीं लो शुरू में मैंने कहा था ना हिंदू का हिंदू शब्द सनातनियों का है कि नहीं इससे करके हम क्या कर लेंगे बताइए परिवर्तन ला देंगे इससे इसमें एक व्यक्ति शास्त्रार्थ आ जाएगा मैं आपसे कोई व्याकरण का शास्त्रार्थ करने आया हूं क्या ईश्वर को असिद्ध करोगे वो अवतार नहीं ले सकता और वो यहां पर ये ये जब वो उनके पास और कुछ बचा नहीं तो पंचा दो पंचा का अर्थ क्यों बता रहा हूं मैं बताऊ मैं लो अब हम कहे कि क्यों का अर्थ क्यों बताऊं मैं लो

03:33:56:14 मैं हर शब्द की व्याख्या पूछने लगू उससे ये करने आया है ये ये धर्म स्थापना के लिए प्रयासरत लोग नहीं है इनको सत्य से मतलब नहीं है किस सिद्धांत से सनातन की रक्षा होगी उससे मतलब नहीं है इनको ये है कि इसने मेरे दयानंद जी के इन सिद्धांतों का खंडन क्यों किया? तो मैं जो है इसको किसी तरीके से यह दिखाऊंगा कि ये चीज इसको मैं सर्वज्ञ थोड़ी ना हूं भाई। नहीं आती बहुत सी चीजें मुझे। हां मगर ईश्वर सर्वशक्तिमान के विषय में मैं तुम जैसे लोगों के लिए पर्याप्त हूं। ठीक है। बताइए बताइए। शर्मा जी बोलिए। अबकी जी अब देखिए रामायण का तर्क दे रहे जहां तक अपनी बात पकड़नी है वो तो बोल दिया और जो हमारी है वो छोड़ देते नहीं मैं अगर होता तो उस टाइम इसी बात पे टोक देता कि रीकिंग अलाउड नहीं है या तो आप पूरा मानो नहीं तो फिर उसको मत मानो राइट तो मैं उसको मैं उसको आखिर तक ले गया ना मैं उसको ले गया उसने बात को खत्म नहीं होने दिया शिव जी चालाकी देख के भाई शब्द बोल दिया उसने कि राम जी कमजोर है वो है पर वो चार पांच तर्क

03:35:11:18 ऐसे दे रहे है मतलब तर्क नहीं बातें बता रहा है वो बातें बताने की जरूरत क्यों है हां वही तो मैंने उस भी काउंटर किया कि भाई तुम क्यों बता रहे हो जिससे कि तुम कहीं ना कहीं खामखा अपना प्रभाव उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हो कि कृष्ण जी ने कहा था कि वह सर्वज्ञ नहीं है ये अब मैं उसका खंडन करने बैठू उसको चैप्टर को खोलू और मैं आया था टू द पॉइंट बात करने। भाई टू द पॉइंट आ रहे हैं। नहीं तो श्री कृष्ण जी कहां था ये उसको कहां से प्राप्त हुआ? कहां से प्राप्त महाभारत से प्राप्त हुआ होगा सर्वज्ञ नहीं है। उसी महाभारत में लिखा है कि श्री कृष्ण ब्रह्म है। फिर नहीं बात नहीं होगी फिर इसमें। फिर वो कहेगा उसको क्यों? मैं कह रहा हूं कि अगर चल तू उसको नहीं मान पा रहा तो उसको भी मत मान कि वो सर्वज्ञ नहीं है। उसको क्यों मान ले रहा है? जैसे जी

03:36:05:27 एक निष्कर्ष तो आया ना तार्किक धरातल पे यक्तिक धरातल पे सिद्ध नहीं कर पाएगा ईश्वर अवतार नहीं ले सकता है बने रशन फिरते हैं जैसे जी कुरान पे नाम रख रखा है रैशन आर्य और आ गए पंचाव दो देख रहे हो समझ रहे हो नाम क्या है रैशन आर्य और मांग रहे है पंचाव्य मैं मैं यहां पर चर्चा करने कैसे आया हूं पता है? चर्चा करने कैसे आया हूं मैं? ऐसे नहीं आया कि मैं बैठा था सुबह से हाय हाय आज चर्चा करनी है। जैसे इन्होंने वक्त मांगा था कि मैं तीन दिन और अध्ययन कर दूं तो एक महीने बाद मुझे फोन किया कि भैया मैं तैयार हूं। तब तक मैं कहीं बिजी हो गया था तो और एक महीना लग गया। मैं ऐसे नहीं आया था। मैं भाई सुबह से लिख रहा हूं रामपाल के बारे में। फोटोकॉपी करा रहा हूं। ये सब कर रहा हूं। फिर अरे अरे देर हो गई 1:00 बज गया। चलो पहुंचो पहुंचो जल्दी। ऐसे आके बैठ गया। फोन किया था आपको जब मैंने तब भाग हां तो मैंने क्या कहा था अभी पहुंच रहा हूं पहुंच रहा हूं पांच मिनट पांच मिनट यही कहा था ना मैंने हां हां इनको लगा इनको ये भाई साहब पूरा वो तैयार करके आए थे कि मैं आखिर में कोई ना कोई ऐसा शब्द होगा अरे भाई बहुत से शब्द है मुझे नहीं पता है बहुत सी चीजें नहीं पता है सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र हो ना पता हो लेकिन आपके तर्क मेरे हिसाब से सफिशिएंट है जिसमें पंचाव्य

03:37:21:08 आदि की जो ये जो पांचों की आवश्यकता नहीं है और वह सुनिए आवश्यकता यह नहीं है जानना लेकिन जब आप जो तर्क देंगे ना उसमें ऑटोमेटिक ये पांचों आंगी। मैं एक बात जानता हूं। आपको एक बात बताऊं आपको एक बात बताऊं। बस एक एक बात और सुन लीजिए। हाइपोथेटिकली मान लीजिए मान लीजिए कि आप केवल हेतु का ही अर्थ बताते हैं ना। हेतु का ही उसका अभी रीज़ बता रहे होते। मैं ये बात जानता हूं क्योंकि 50 बार सुन चुका हूं मैं ये चीज। तो आप वो पांचों पॉइंट अपने ऑटोमेटिकली वो पांचों के पांचों पॉइंट कर चुके हो। डाल चुके होते अपने अंदर। आपको नहीं पता होता लेकिन आप ऑलरेडी डाल चुके थे क्योंकि ज्ञान ही ऐसा मिला है परंपरा से हमें। ठीक है? मैं यह बात जानता हूं। आप बोलिए बात।

03:38:00:04 ऐसा था कि क्या कहते हैं ये इन्होंने मैं इस चर्चा का एंड कैसे समझ रहा था? बिल्कुल वो जो भगवान भगवत प्रेरणा से जो मेरे दिमाग में था कि ऐसे होगी ये चर्चा का अंत वैसे ही हुआ है। कैसे हुआ है कि भाई बात यह है कि वो आया है अपने पक्ष को सिद्ध करने। मैं आया हूं अपने पक्ष को सिद्ध करने। मैं इस भाव से आया हूं। मेरे पास केवल सत्य है। मेरे पास बातें घुमाने के लिए चीजें करने के लिए कुछ नहीं है। और अगर मैं कुछ स्पेशली कुछ बोला हूं उदाहरण तो जब मैं छक गया तब मुझे एक उदाहरण देना पड़ा अपने सिद्धांत के पक्ष में। उसमें भी किसी के ऊपर कटाक्ष नहीं था। ठीक है? हां। कटाक्ष के उत्तर में कटाक्ष जरूर दिया मैंने। तो यह भाई साहब मैंने क्या सोचा था यह अंत कैसे होगा इस चर्चा का मैंने यह सोचा था कि हम लोग बैटिंग बिंग बैटिंग बिंग होगी बहुत लंबी चलेगी और अंत में जब ये व्यक्ति फेल होने लगेगा तो व्यक्ति जो है विघ्नकारी चीजें करनी शुरू करेगा जिससे कि हमें यह वो हो जाए हम विवश हो जाए या तो इसकी विघ्नकारी बातों को सुनते हुए भी आगे बढ़े

03:39:15:10 इसकी गलत बातों को सुनते हुए भी आगे बढ़े अन्यथा हमको विवश हो हम इसको हटा दें और फिर ये बाद में मुझे हटा दिया गया था। इसकी हार वहां पर हो चुकी थी मैथमेटिकल वाले क्वेश्चन पे मैं उत्तर दे रहा था। इसने उत्तर नहीं सुना लक्षण पे आ गया बस और दोबारा इसने एक घंटा हो गया वो टॉपिक दोबारा नहीं उठाया। अरे भैया जब वो टॉपिक नहीं था तो तूने खोला क्यों था? ये जो ये वाले जो क्वेश्चन है तू क्यों लाया था कि बिना शरीर के विवाह कर सकते हैं। इसका मतलब वो तुम्हारी लिस्ट में था। मगर उसका इतनी जल्दी ताबड़तोड़ वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर तेंदुलकर की बैटिंग की तरह उसका इतनी जल्दी वो हुआ शॉर्ट ही शॉट पड़े उस पे क्या तुमने कहा इस पर ज्यादा देर नहीं टिकना है अविद्या कहां से आ गई समझ रहे हो भगवान की जो माया शक्ति है ना अच्छे बहुत आए बहुत गए ठीक है जो शक्ति है भगवान की उसका खंडन नहीं कर सकते और माया शक्ति के अस्तित्व को स्वीकारे बिना बहुत से ऐसे पक्ष जैसे वो अभी कह रहा था ना मुल्ला जो वहां पर मौलवी इत्यादि थे। कौन-कौन थे? वो कह रहे थे कि अरे दुख क्यों हो दुख क्यों है संसार में? अख्तर जावेद अख्तर जी कह रहे थे ना मुल्ला नहीं थे सॉरी वो मुस्लिम है ना तो क्या कह रहे थे वो

03:40:31:10 वो कह रहे थे कि भाई वो जो भगवान है तो यह सब कैसे कर सकता है? जब तक तुम अविद्या को नहीं साधोगे ना भगवान की अविद्या शक्ति को तब तक तुम इन चीजों को क्लेरिफाई कर ही नहीं पाओगे। और अविद्या शक्ति को सृष्टि निर्माण इत्यादि सब करने के लिए तुम्हें साधना पड़ेगा। नहीं तो एक रस वाला ईश्वर जो है कम ज्यादा क्यों हो रहा है सगुण साकार में? सगुण निराकार में ये सब बातें हैं। जी खैर फिर भी मुझे मुझे ऐसा लगता है आज लोगों को काफी कुछ जानने को मिल गया होगा।

03:41:07:13 हां बताइए शर्मा जी बोलिए पंडित जी मैं तो ये बोल रहा हूं वो जब तर्कों से सिद्ध कर दिया शिवा जी ने अवतार ले सकते हैं बाद में आए शब्द प्रमाण तो वो शब्द प्रमाण भी हमारे ही ले रहे हैं रामायण हमारी है उसी की और फिर पूरा नहीं मान रहे अच्छा टू और टू फाइव और उसमें अभी बायो और क्या साइंस फिर प्रकृति बनाते हैं और वो जो ज्ञान मिलता है उसमें भी अनु परमाणु सब कुछ हो जाएगा अच्छा एक बात इसमें मैं ये कहूंगा जब मैंने ये वाली बात कही थी ना ये ज्ञान ईश्वर देता है तो एक बार का बोला ईश्वर नहीं देता न्यूमरोलॉजी देती है न्यूरोलॉजी [हंसी] अच्छा वही तो तो वो न्यूोलॉजी कहां से आई? हां वही तो मैं कह रहा हूं

03:42:07:18 हम बंदर थे ना और बंदर से फिर वो पत्थर वो जला के आग फिर वो थ्योरी आ जाती कहां से आया हां यही तो दिक्कत है प्रॉब्लम ये है देखिए दो चीजें है एक एक तो इनका मंतव्य ये नहीं है कि धर्म की रक्षा हो सिद्धांत सिद्ध हो अकाट्य सिद्धांत हमारे लोग जाने इनकी एक तो ये नहीं इनका ये है कि दयानंद जी अगर कह गए हैं किसी प्रकार से उनके पल्ले को भारी प्रतीत करवाना है लोगों बस एनी हाउ अब जैसे मैंने शुरू में ही कहा था ना हिंदू शब्द पे मुझे हरा भी दोगे तो क्या निर्णय आ जाएगा उससे क्या उससे सर्वशक्तिमान ईश्वर प्राप्त हो जाएगा क्या उससे परम स्वतंत्र मोक्ष प्राप्त हो जाएगा शाश्वत धर्म प्राप्त हो जाएगा नहीं होगा तीन चीजें तो वही चीजें लास्ट में करने लगा ना हिंदू शब्द की वजह दूसरी जगह पंचाव आ गया हम पहली बात तो ये दूसरी बात क्या है कि इनका एक तो उद्देश्य यह नहीं था और दूसरी बात यह थी कि इनका जो है ये ईश्वर ईश्वर अवतार ले सकता है कि नहीं ले सकता इसकी सिद्धि वही हो गई थी अविद्या वाली जगह पे जहां पे ये बात चल रही थी बस इसने वहां पे ये वहां पे ज्यादा देर ठहरा नहीं लक्षण पे आ गया क्यों

03:43:23:08 क्यों नहीं ठहरे हैं अभी से अविद्या सही इनका लिंक दे दो कोई चेहरे के साथ अगर बात करना चाहे तो कर सकता है। अब जो है डिबेट नहीं है। कोई विचार अपने प्रकट करना चाहे विरोधा विरोध वाला व्यक्ति नहीं चाहिए। कोई ऐसा समर्थक हो जो जानता है हमको अगर वो आकर के कुछ कहना चाहे इस चर्चा को देख के कह सकता है। ठीक है? और अगर किसी को कोई दिक्कत है चर्चा करनी है निर्भय इसकी तरह नहीं निर्भय की तरह नहीं। इसकी तरह नहीं अगर किसी को निष्पक्षता के साथ चर्चा करनी है तो वह आ सकता है। यहां पर नंबर आपको दिया गया है। शुरू में भी दिया गया होगा ना। क्यों शर्मा जी? शुरू में नंबर दिया है ना लाइव के शुरू में दिया गया है। डिस्क्रिप्शन में है। अंत में भी आपको मिल जाएगा। ठीक है? दे दीजिए भैया लिंक। पंडित जी आप दे दीजिए। अब तक वहां लाइव चालू हो गई होगी।

03:44:26:00 लाईचारी हो गई होगी दूसरे वाले में। अच्छा क्या क्या बोल रहे हैं शिवास द्विवेदी जी? क्या बोल रहे हैं? अच्छी बात है भाई। अच्छी बात है। [हंसी] ऐसे ही ऐसे ही जीत के खुशियां मनाओ। बढ़िया। अपने पर्चे छपवा देना। अपने पर्चे भी छपवा देना। वो जैसे दयानंद जी ने चपए थे ना काशी शास्त्रार्थ के बाद मैं जीता था मैं जीता था मैं जीता था वहां स्मृति स्थली बना दो जहां पर हारे थे इतना मामा आ गए मामा आ गए चिल्लाओ इतना चिल्लाओ मामा आ गए मामा आ गए कि लोग ये ध्यान देना भूल ही जाए कि यहां कुछ शरारत भी हो रही है मामा आ गए मामा आ गए

03:45:13:20 जी बोलिए ब्रह्मचारी जी आए कोई जगदीश स्वरूप ब्रह्मचारी जी जय जगन्नाथ नमो नारायण नमो नारायण जी मैंने आपको बताया था कि ये पौराणिक हर तीर्थ के बारे में भी ये लोग काफी आपके पीछे बोल रहे थे ये लोग आप अपना थोड़ा सा परिचय मैं ऋषिकेश कैलाश आश्रम का विद्यार्थी हूं

03:45:49:22 तो क्या शंकर परंपरा से ही जी जी जी बताएं आपसे मिला हुकुम मेला में मिला था मैं आपसे अरे वाह मिले मिले मिले नारायण आवाज सुनी सुनाई लग रही थी पौराणिक हंस तीर्थ के बारे में ऋषि मंतव्य इनका चैनल है उन्होंने कुछ लिखा था उसके बारे में उन्होंने आपत्ति जताई थी मैं आपको कमेंट भी लिखा था लेकिन ये मुद्दा आया नहीं उस पे हम लोग हंस तीर्थ के बारे में भी काफी जूसी में कुछ कार्य कर रहे हैं इन्होंने कुछ पौराणिक के ले लेके भी काफी पोस्ट और काफी कंटेंट बनाया था। ऋषि मंतव्य चैनल है आर्य समाज का संदीपन रॉय जी का। आपको Facebook पे मैंने आपको संज्ञान के बारे में इसको अब वो संदीपन रॉय का नहीं रहा। ऐसा सुनने में आया कि दूसरे लोगों से चला रहे हैं। हो भी सकता है। कह नहीं सकते। मगर ऐसी हरकतें होती है जो संदीपन रॉय नहीं करते थे। ऐसी हरकतें भी वहां से होती हैं। संदीपन रॉय जो है बड़े मरदित व्यक्ति हैं। वो थोड़ा लड़कपन वाला इस तरह का थोड़ा सा अब क्या कहे वो शब्द आएंगे तो फिर और बुरा निकलेगा। है ना? जी जी इस तरह का आपने कोई इंटरव्यू आपने किया था व्यास मुनि जी का जूसी में शिव

03:47:04:28 गंगा आश्रम में मैं बताऊं मैं मैं बताऊं? जी जी कृपया बताइए। जी जी इन्होंने मुझको इन्होंने हम पर प्रश्न उठाया देखिए इनके बारे में पहले है क्या इनके बारे में जैसे ये उपस पूर्वक हमें बोलते हैं ना पौराणिक पौराणिक पौराणिक जब ये बोलते हैं उसका अर्थ ये होता है कि हम वैदिक नहीं है ठीक है हम अपने को वैदिक है वैदिक हम अपने आप को वैदिक पौराणिक बोलते हैं अगर गौण रूप से उसको नहीं भी बोल रहे हैं अगर उसको ये भी नहीं बोल रहे हैं कि वैदिक पौराणिक मगर फिर भी जब हम अपने आप को पुराणों को मानने वाला बोलते हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि हम वेदों को नहीं मानते तो उसमें वेदों को मानना भी गण रूप से छुपा हुआ है। तो कई जगह पर सीधे सीधे पौराणिक अगर किसी ने बोल भी दिया तो उससे अवैदिक होना सिद्ध नहीं होता है। मगर इसी बात को चतुराई से जो ये समाजी लोग हैं ये जो है इसी बात का फायदा उठाकर के पुराणों को मानने वाले तो इनको पौराणिक कहो। पौराणिक कहो पौराणिक पौराणिक कहते हैं। अब मैं जब इस मैं आया था ना इन चीजों में कि भैया यह करना है ऐसे ऐसे सेट करना है तो मैंने कहा कि इनके लिए लोग एक शब्द बोलते थे नमाजी नमाजी ठीक है आर्य नमाजी नमाजी नमाजी आया है ये बोलते थे मुझे ये खराब लगा

03:48:20:02 नहीं हमारे भाई है हम उनको नमाजी क्यों बोले तो मैंने कहा कि फिर भी जो ये पौराणिक पौराणिक हमको बोल रहे हैं उसका उत्तर तो चाहिए होगा कुछ ना कुछ अगर ये पौराणिक हमको कह रहे हैं अवैदिक के रूप में तो हम क्या करें नमाजी तो गलत है तो मैंने ने उस चीज को सेट करने के लिए नमाजी हटाया और इनके लिए अलंकारी शब्द ढूंढा के लो तुम पौराणिक कहोगे तो हम अलंकारी कहेंगे। अब जैसे हम हम क्योंकि पुराण को मानते हैं तो तुमने हमें पौराणिक कहा है तो तुम अलंकार को मानते हो। जहां ईश्वर का अवतार दिखाई दे रहा है उसके इतने हाथ है वेद में। विराट स्वरूप है वो है तो वहां अलंकार कह देते हैं अलंकार अलंकार अलंकार जहां वो शर्मा नाम की जो शर्मा नाम की स्वान है मादा स्ान वो आकर के जहां मंत्र बोल रही है अलंकार अलंकार कबूतर मंत्र बोल रहा है अलंकार अलंकार तो जहां आप जो है अपनी चीजों को सेट करने के लिए अलंकार का यूज़ करते हो मैंने उसको ले लिया अलंकारी ठीक तो इसमें इन्होंने बहुत सारी विवेचना की तो इसमें इन्होंने क्या किया इन्होंने मुझको प्रूफ देने के लिए आप अपने आप को पौराणिक कहते हो तो मेरी एक जो इनके साथ चर्चा हुई थी जिसमें पौराणिक हंस तीर्थ मंदिर क्षेत्र लिखा हुआ है वो चर्चा मुझे दिखा रहे हैं और हम लोग कितना संघर्ष कर रहे हैं हंस तीर्थ के लिए ये तो आपको मालूम ही है

03:49:35:22 तो उस चर्चा को ये दिखा रहे हैं कि भैया देखो तुमने अपने आप को पौराणिक कहा है तो हम पौराणिक कह रहे हैं तो क्या दिक्कत हो गई तो मैंने कहा सीधी सिंपल सी बात है कि तुमने हमारी इच्छा के विपरीत हमको पौराणिक कहा है तुम भी जानते हो तुम्हारे पौराणिक कहने में हमारा हमारा वैदिक होना छिपा हुआ है और हमारे स्वयं को पौराणिक कह देने में हमारा वैदिक होना छुपा हुआ है क्योंकि हमारा तो मतलब ही है कि पुराण जो है वेद के अर्थ अब आपने कुछ ऐसा किया जो हमें पसंद नहीं है। हम कुछ ऐसा कर रहे हैं जो आपको पसंद नहीं है। उसमें आपको दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि उसमें हमने मर्यादा को भंग नहीं कर दिया आपको अलंकारी कह के निष्ठा विद्या अलंकार क्यों लगा रहे समाजी अलंकार शब्द अपने में अलंकारी हो इसलिए तो लगा रहे हो चलिए जी बताइए

03:50:26:00 आपकी आवाज नहीं हां तो यही यही मुद्दा था कि जो हंस तीर्थ के बारे में कि आपका तो पुराण में ईश्वर है वगैरह तो जो जो पुराण में जो पुराण में श्रुति जो पौराणिक वाक्य श्रुति को समर्थन करते हैं वो हम स्वीकार करते हैं तो उसमें क्या आपत्ति है क्योंकि ये वेद में आप देखो ना वेद में जो ब्राह ब्राह्मण वाक्य है। काफी उपनिषद में दिक उपनिषद ब्राह्मण वाक्य भी है। एक मंत्र वाक्य है एक ब्राह्मण वाक्य है। ब्राह्मण वाक्य को आर्य समाज स्वीकारेगा नहीं। पहले भले आप तो आप चलो पुनः वेदों की ओर फिर उसमें ब्रैकेट में लिखा ब्रैकेट में

03:51:10:21 आवाज चली गई आपकी। पुनः वेद की ओर क्यों लिखते हो? हां। तो पुनः वेद की ओर क्यों लिखते हो वो लोग? अगर आप वेद में ब्राह्मण के सेक्शन को आप मानते ही नहीं हो तो आप वैदिक तो हुए नहीं ना। भाई ब्राह्मण जो है ब्राह्मण मंत्र की व्याख्या रूप ब्राह्मण लिखे गए। भाई किसी को भी पहचान क्लियर किए बिना स्टेज मत दीजिएगा। ठीक है? पहचान क्लियर हुए बिना किसी को स्टेज मत दीजिएगा। हां। तो ये ठीक बात ऐसी है ये ठीक बात ऐसी है पुराण को मानने वालों के कारण पुराण को मानने के कारण अगर आप हमें पौराणिक कह रहे हैं और जिसमें गौ रूप से आपका ये छुपा हुआ है कि आप कटाक्ष पूर्वक कह रहे हैं कि हम वेद को नहीं मानते तो हम भी ऐसे ही कह रहे हैं अलंकारी उसमें गौ रूप में छिपा हुआ है कि आप जो वेदों का खंडन करते हैं अलंकार के द्वारा हम जहां चाह वहां अलंकार अब ये पूछ रहे हैं ना हेतु हेतु अंत में यही आ जाएंगे क्यों लेता है फिर मैं पूछूंगा मंत्र क्यों बनाता है? ईश्वर ज्ञान मंत्र के रूप में क्यों देता है? सीधे स्मृति बोध करा दे बस वो मुक्त हो जाएगा। तुरंत मंत्र के रूप में क्यों देता है? हां बिल्कुल

03:52:26:02 तो वो तो मुक्त हो जाएंगे प्राणी। मंत्र के रूप में क्यों देता है? जिससे कहानी चल सके, किस्सा चल सके। है ना? ये जो जिस कारण से इनका तो कारण है कि इनका जो ईश्वर है वो तो बौद्धों के जैसा है। अगर उसको ईश्वर ना कह के प्रकृति कह दोगे तो क्या हो गया? ना तो वो उसका उसको तो करना ही है सृष्टि का निर्माण उसको करना है और करने के बाद क्या करना है कि वो किसी में हस्तक्षेप नहीं कर सकता कुछ नहीं कर सकता मशीन की तरह काम करने वाला है इनका ईश्वर तो जब वो उसका कुछ वो हस्तक्षेप नहीं कुछ नहीं है ना वो मांगने से देगा ना वो प्रार्थना से देगा तो उसको क्यों नहीं क्यों ईश्वर कहा जाए उसको केवल एक सिस्टम क्यों ना कहा कह दिया जाए सिस्टम है जो काम कर रहा है अपना बस उससे हमारी भावनाएं कैसे जुड़ सकती है वेदों में तत्वचार महावाक्य है। वह महावाक्य को भी स्वीकार नहीं करते। हम ब्रह्मास्मि को भी स्वीकार नहीं करते। हम लोग ईश्वर कैसे हो सकते हैं? अगर समाधि में लगाते तो हम लोग ईश्वर हो सकते हैं। क्यों नहीं? वो अलग विषय है।

03:53:26:14 जी जी अलग विषय हो जाएगा। तो ये क्या कहते हैं? जी शास्त्रवाद जी बोले जय श्री राम। जय श्री राम भैया। कैसी लगी चर्चा? चर्चा तो बहुत बढ़िया थी आज की। एकदम धीरे-धीरे एकदम सॉफ्टली सब चर्चा हो रहा था। लेकिन अंत आते आते तक सब वो तो वो होना ही वो होना ही था। क्योंकि वो व्यक्ति ऐसे जाने वाला तो था नहीं कि चुप होके जाए। समझ रहे हैं? जिसके अंदर सत्य को ग्रहण करने का भाव होगा वो ऐसा करेगा। मगर आप ऐसी उम्मीद ऐसी अपेक्षा समाधियों से अलंकारियों से कैसे कर सकते हैं? जी अरे वो अपनी जो ज्ञान है ना उसको दिखाने के चलते हमें अपने आप को ज्यादा विद्वान समझने के नहीं वो थोड़ा सा हां आभास हो रहा था होता है मतलब वो कभी-कभी बीच-बीच में एक बार तो मेरी भी हंसी छूट गई थी जब वो जब वापस हमने जब ट्रैक पे आ गए थे फिर भी उसने थोड़ा वेस्ट करा था शिव जी भी मुस्कुरा दिए थे मेरे को तो हंसी आ गई थी मैं समझ गया था कि वो फिर से वही फोक करने वाली

03:54:41:20 चीज है लेकिन ठीक है फिर कंट्रोल हो गया था उस टाइम पे इस टाइम शिवा जी ने कुछ रिएक्ट नहीं करा था और मैं हंस के टाल दिया था फिर वो मूव ऑन कर लेकिन फिर वापस वो उस पे आ गया वो रहता है थोड़ा सा कभी-कभी ऐसा हो वो वो कहीं-कहीं पे जहांजहां पे पक्ष कमजोर हो रहा था वो पो कर रहा था जैसे कि यही लेना कि बिना शरीर के सीता माता से विवाह कर सकते हैं ये भी ऐसा विषय है इसकी बजाय कोई और उदाहरण नहीं मिला था कई उदाहरण है जो वही ईश्वर पत्थर एक उदाहरण है बहुत सी चीजें हैं ना सब मालूम है इन्हें मगर ऐसा ही उदाहरण करेंगे जिसमें हमारी भावनाएं आहत हो क्योंकि इनको साथ में छेड़ते भी चलना है और हम बैठे हैं अपने सत्य के साथ कि भाई हमें कोई अन्याय नहीं है मन में कोई राग द्वेष नहीं है व्यक्ति सामने से क्वेश्चन करता जाएगा लॉजिकल मैं उसका जवाब देता जाऊंगा लॉजिकल अच्छा मैं आपको बताना चाहता हूं तो मैं बताऊंगा यहां लॉजिकल नहीं है अच्छा शिवश भाई ये अपना ऋषि मंतव्य चैनल पे आपका मतलब शिवश की धुलाई अभी लाइव चल रहा उनका ये बहुत गलत कर रहे हैं ये लोग मतलब उनका पूर्व विचार के लेकर के वो तो मैंने अभी अभी बताया ना आपको वहां लाइव शुरू हो गया वो पहले से तैयार होगा ये लोग पूरा पूर्वाग्रह ले आते हैं कि

03:55:56:21 इनको मतलब बेेजज्जती करनी है जो प्लानिंग प्लॉटिंग के साथ सनातन सिद्धांत सनातन सिद्धांत धर्म रक्षा इत्यादि इनके विषय नहीं है। कितनी बार गए हैं निर्भया आर्य लड़ने के लिए बाहर ग्राउंड पर क्या किया इन्होंने और जितने जितने चर्चा कर रहे हैं बैठकर के इन्होंने क्या धरातल पर काम किया है नथिंग केवल ऑनलाइन शेयर है धर्म अनुष्ठान इनके शून्य है बस धर्मांतरण करना है सबको आर्य नमाजी बनाना है तभी तो आर्य नमाजी इनको बोला गया है जैसे कि मुसलमान को धर्म अनुष्ठान ना बोले नमाजी ना बोले जी जी जी इनका लक्ष्य धर्म अनुष्ठान है ही नहीं ना धरातल में धरातल में काम करना इनको इतनी अच्छाई तो समाजियों में है ना कि वो कट्टर विरोध करते हैं। इस्लाम का विरोध करते हैं। इतनी बात अप्रिशिएट करने वाली है भाई। इसमें कोई दो राय नहीं है। कट्टर विरोधी है। हालांकि सिद्धांत उन्हीं के दे देते हैं। मूर्ति पूजा नहीं हो सकती। जो वो चाहते हैं मूर्ति पूजा बंद करना उसमें सहायता कर देते। वो एक पक्ष अलग है। मगर वाचिक प्रतिकार तो करते ही हैं। और ऑनलाइन के शेर भी तो यह काम कर ही रहे हैं ना। इधर-उधर चेहरा छुपा के गाली गलौज करना ये सब कर रहे हैं। तो कट्टर

03:57:11:25 विरोध तो दिखता है। हालांकि ये मर्यादा को उल्लंघन करके नहीं करना चाहिए। तो नमाजी कहना उचित नहीं है। भटके हुए अपने ही भाई है। ठीक है। जी जी पर काफी यज्ञ पवित्र संस्कार के बारे में भी काफी ये लोग उटांग चारों वर्ण एक ही है। कोई भी नया अंतत आता है चौथा वर्ण वाला बोले बेटा क्या बनना चाहेगा? क्षत्रिय बनना चाहेगा या ब्राह्मण बनना चाहेगा? वो डर के मारे क्षत्रिय बोल देता है नहीं नहीं हम लोग क्षत्रिय बनेंगे। उसको डांटते हैं। एक बात याद आई इनके विवाह पद्धति से रिलेटेड एक बात आई बस ज्यादा समय नहीं लेंगे। चार घंटे होने वाले हैं। इनकी विवाह पद्धति से एक बात याद आई कि जो आर्य समाजी है उसका विवाह वहां पर हो रहा है। तो वो तो ठीक है। यह बात अटकी थी ना एक बार चर्चा में। अब इनके लोग कहते हैं विवाह करने के लिए संपर्क करें। वो चलता है विवाह कराते हैं ये और एक तरफ को ये कट्टर विरोधी बनते हैं जिहाद के। अब बात वहां पर यह आती है दिक्कत कि जो व्यक्ति अभी अभी इनके यहां पहुंचा क्या वो इसका उसका जनेऊ करा करके विवाह कराते हैं जनेऊ धारी का विवाह होता है जनेऊ करा के कराते हैं कराते हैं तो उसके पैराटर्स क्या होते हैं क्या क्या समझते हैं वहां आचरण से ज्ञान से कैसे समझते हैं कि ये ब्राह्मण है कि नहीं और अगर जनेऊ करा के नहीं कराते

03:58:27:03 तो क्या वो वहां पर ये मेंशन करते हैं ये शूद्र का विवाह हमारे यहां हुआ है क्योंकि जनेऊ नहीं तो शद्र है ना तो यानी कि माना जाएगा जितने भी भागे भागे भागने वाले लोग और इनके यहां करते हैं तो अगर सैद्धांतिक धरातल पे देखा जाए तो सब के सब शूद्र होते हैं क्योंकि मुझे नहीं लगता है किसी का जनेऊ कराते होंगे अगर जनेऊ कराते हैं तो फिर वहां पे भी दिक्कत है कि कैसे करा रहे हैं भैया आपने उसी समय देख लिया कि इसके आचरण कैसे सब कुछ देख लिया एक दिन के अंदर अंदर ब्याह हो जाता है आज जाके फॉर्म भरो कल ब्याह कर लो आज भी भर सकते हो

03:59:03:20 और मैंने इनके रायपुर वाले मंदिर में देखा वहां आदि शंकराचार्य जी विवेकानंद जी इनकी भी फोटो लगी है। क्या है भाई? चलिए कहीं का रोड़ा कहीं का ईटा भानुमती ने कुबा जोड़ा यही चल रहा है। चलिए वो हर्ष जी आपको और कुछ कहना है? ये कह रहे थे हम कि यह जो बिना शरीर का विवाह वाला जो बात वो हो रहा था ना राम जी का तो इस तो ये व्यवहार का विषय है ना विवाह जो है व्यवहार का विषय है और जब व्यवहार का विषय है तो संसार में आएगा मैंने मैंने बोली थी मैंने बोली थी ये बात मैंने बोली थी विवाह होता क्या है ये बता दो तो तो उसने कह दिया कि हां वो आप मानते हो ना नहीं हो सकता हां हां सही बात है नहीं हो सकता भाई विवाह को अगर एक्सप्लोर करोगे तो यही तो आएगा कि दो स्त्री और पुरुष आपस में विवाह करते हैं तो पहले आप विवाह को तो आपने विवाह में उसको पूछा नहीं बोला नहीं कि पहले तुम ये बताओ विवाह कहते किसे हैं हां पूछा था वो जब वो आगे बढ़ना चाहता था कि मतलब ऐसा कुछ है ना जो वो जो वो दिखा नहीं सकता मतलब पॉइंट्स उसको क्लियर करना पड़ेगा ना उसी में ही उसको मिल जाता है व्यवहार उसमें

04:00:19:01 मैंने पूछा था विवाह कहते किसे हैं आप यही बताओ पहले तो वो ये बोला वो ये बोल के आगे आगे बढ़ गया कि भाई यानी कि आप यह मान रहे हो ना कि कुछ ऐसी चीजें हैं जो वो दिखा नहीं कर सिद्ध नहीं मतलब वो आपको व्यवहारिक रूप से नहीं दिखा सकता है प्रकट नहीं कर सकता ये उत्तर नहीं है इसका ये उत्तर नहीं है मैंने मैंने कुछ ऐसी चीजें जब बोला वो तो मैंने कहा दूसरी कुछ ऐसी तो है विवाह तो बनता ही नहीं पहले तुम विवाह को सिद्ध करो विवाह होता किस में है क्या बिना शरीरधारी में और शरीरधारी में विवाह होता है क्या हां बस वही पहले तुम उसको सिद्ध करो वही आर्गुमेंट खत्म हो जाता है ना ये वाला वही फिर भी कुछ चीजें तो ऐसी है ना जो लॉजिकल उसमें आ जाती है कि आपको घुमा के रख देगी वही पे हमारी कि अगर उसको अगर ये व्यवहार और परमार्थ का जो डिस्टिंशन है समझ में आ नहीं उठते ना उसको समझना नहीं है उसको उसको जो है ये नहीं है कि सत्य की रक्षा करनी है उसको ये है कि भाई कोई आर्य समाज के बारे में दयानंद जी के बारे में बोला था मैंने जो है ध्यान देखो इतनी चीज में उसको ये जो है उसको पंचा पूछा ये नहीं आता उसको वही भव्य राधा कृष्ण दास वाली बात बताई थी वो भी यही था वो हमारी साइड का व्यक्ति था। मगर भव्य राधा कृष्ण दास ने वहां पर तर्क दिया। अच्छा लगा। मगर वहां से वो व्यक्ति जो है वो बात ना करनी उसको शब्द जाल में फसा रहा है। भ

04:01:34:04 राधा कृष्ण दास ने ये वाला शास्त्र नहीं पढ़ा होगा। तो यहां के शब्द उठा के दे। अरे भैया ऐसे बहुत कुछ चीजें हो सकती है जो तुमने नहीं पढ़ी। हमने पढ़ी होंगी। हम यहां ये करने नहीं आए ना कि तुमने क्या पढ़ा है, क्या नहीं पढ़ा है। आपको उसका जो अर्थ प्राप्त हुआ है वो हमें बताओ। हम आपको बताएंगे। चलिए ठीक है सभी को जय श्री राम। बहुत अच्छा लगा आप लोग जुड़े और आशा करते हैं आप लोगों ने काफी कुछ सीखा होगा और वो जो धुलाई कर रहे हैं ऑनलाइन धुलाई उसको भी वो सिद्ध कर दे धुलाई है क्या उसको वो धुलाई सिद्ध कर पाई ही नहीं क्या जो लिख रहे हैं धुलाई व्यवहार एक और बात है भैया नहीं नहीं वो बहुत ही अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा है यार मैं मैं तो छोड़ो मुझे लोगों ने बताइए आप यहां मंच मंच पे मत बोलिए वो सब बातें वो क्या कर रहे हैं बताइए हां नहीं नहीं मुझे बताया किसी ने मतलब मैं देखा नहीं है मैंने अभी देखूंगा तो पूछूंगा अच्छी बात अरे करने दो ना करने दो करने दो अभी हमारे पास काफी चीजें हैं उनकी पहचान है वो कौन है शास्त्रवाद चैनल वो चलाते हैं इन सब बातों में प्रमाण है हमारे पास उनके है ना तो एक बार सावधान कोई कोई

04:02:49:08 सुन रहा है कोई अगर जिसने बताया व्यक्ति एक बार उनको सावधान कर दे क्योंकि वो अच्छी शब्द के प्रयोग नहीं हो रहे हैं वहां पर। ठीक है। मुझे सुनने में शास्त्रवाद जी आप अपनी बात बोले। जी भैया कह रहे थे कि ये जो ये लोग मानते हैं ना कि अगर ईश्वर साकार हो गया तो फिर उसका सर्व व्यापकता पे प्रश्न चिन्ह आ जाता है। तो इसका उत्तर तो आप बहुत अच्छा से दिए थे वो खिड़की और आकाश वाला। लेकिन उसको भी वो प्रकृति वाला मान करके खिड़की का ही आकार बता करके वह उसको डिनाई कर रहा था कि उसका आकार नहीं आया। वो व्यक्ति को दिख रहा है। है ना? तो बात यही है कि अगर ईश्वर सर्वशक्तिमान है वो वीडियो आई थिंक नेटवर्क इशू है कुछ चले गए हैं वो जब वो अवसर ले सकता है हां जब वो जब वो जो है सर्वव्यापक है तो फिर वो कहीं पर भी प्रकट हो सकता है ना सभी रूपों में तो वही है ना तो वो कहीं भी प्रकट हो सकता है और अपनी सर्वशक्ति मत्ता से वो किसी का हाथों का विषय भी बन सकता है तो फिर ये इसमें प्राकृतिक नियम जो व्यक्ति सामान्य व्यक्ति पर लागू होते हैं कि हम नहीं देख सकते या वह नहीं देख सकते तो वह आंखों का विषय ना होते हुए भी आंखों का विषय बन सकने का सामर्थ प्रदान करके

04:04:04:16 अपने आप को दिखवा भी सकते हैं। तो यह सामर्थ्यता पर जब बात आती है तो फिर वह कहने लगता है कि यह प्रकृति का जो है हम लोग देखेंगे कैसे जब वो निराकार देखेगी कैसे प्रकार की बातें है ना बात ये है कि हमने जब उसको मैं बताऊं उसका वीक पॉइंट क्या था मुझे लगता है कि उसने अविद्या शक्ति वाली बात की तैयारी नहीं की थी और तैयारी हो भी नहीं सकती करेंगे क्या मगर की ही नहीं थी इसलिए जल्दी थोड़ी बहुत की होती तो थोड़ा बहुत वहां रुकता मगर उसने बिल्कुल की ही नहीं थी तो तुरंत जंप मार के उसमें आ गया लक्षण बताइए कौन वो है कौन नहीं है ठीक है तो अविद्या शक्ति की तैयारी उसने नहीं की और अविद्या शक्ति इन सब चीजों में काम आती है कि एक रस ईश्वर सगुण कैसे हो रहा है निर्गुण ईश्वर सगुण कैसे हो रहा है और जैसे ही आप निर्गुण का अवतार सगुण मानोगे तो फिर सगुण का अवतार मानने में आगे क्या दिक्कत है और रही बात शब्द प्रमाण की भर भर के हमारे पास फिर परंपरा की बात आ जाएगी

04:05:06:19 तो फिर भैया जो राम कृष्ण आदि जो रूप है ईश्वर के इन्हें जो कहा जाता है नित्य भी है कई शास्त्रों में इन्हें नित्य कहा गया है वो है ही ईश्वर तो नित्य है कि वो ब्रह्म स्वरूप में सदा विद्यमान है राम और कृष्ण के रूप में लेकिन उनका जो उनका स्वरूप है हो गए ड्रॉप हो गए नारायण चलिए काफी देर हो चुकी है कहां चले गए ड्रॉप हो गए। ठीक है। फिर चलिए ठीक है। फिर जुड़ेंगे हर जी की कोई बात थी वो रह गई है। चलिए सब चर्चा से जुड़ने के लिए सभी का आभार और सभी को आज इस चर्चा से काफी कुछ सीखने को मिला होगा। मुझे लगा था कि ये बात तो मुझे थी। बहुत अनुमानित था यह चर्चा एंड कैसे होगी। चाहे जितना सौहार्दपूर्ण चले। एंड जो है उसी तरह से होगी कि जो है ये क्या कहते हैं? एंड उसी तरह से होगी कि भाई वो आखिर में कुछ ऐसी चीजें होगी कि हमें उसे निकालना पड़ेगा। ये हमें मालूम था। ठीक है। चलिए ठीक है। जय श्री राम पीतांग जी जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। ब्रह्मचारी जी।

04:06:29:12 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 4:06:33 · 29 Dec 2025

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