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00:00:03:10 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। आने में विलंब भी हुआ है। जो स्कॉन के फॉलोअर हैं जो इस समय हमारे साथ आने वाले हैं चर्चा में। उनके मोबाइल में भी कुछ दिक्कत थी और कुछ आप जानते ही हैं। ठीक है? तो हम उनको ले लेते हैं सबसे पहले स्टेज पे। जय श्री राम। प्रदीप जी जय श्री प्रदीप जी आपकी आवाज थोड़ी सी थोड़ी साफ नहीं आ रही हरे कृष्णा आवाज साफ है अभी हां ठीक है ठीक है ठीक है प्रदीप जी आप कहां से जुड़े हुए हैं इस से मैं इस द्वारका से कनेक्ट हुआ था द्वारका अच्छा मतलब आप गुजरात से दमनदीप से नहीं नहीं दिल्ली दिल्ली द्वार का जो है अच्छा दिल्ली द्वार जी जी ठीक है तो थोड़ा सा अपने अपना कुछ अगर परिचय देना चाहे तो वो दे दीजिए जी मैं इस के थ्रू कनेक्टेड
00:01:18:19 वैसे हुआ था आपने कहा था ना आपको प्रार्थना करनी है इसलिए मैंने आपको कहा है अच्छा ओम जन शलाक चक्षुरिम तस्मै श्री गुरुवे नम श्री चैतन्य मनोषम स्थापितम येन भूतले स्वयं रूप कदाम ददाति पदंतिकम वंदे श्री गुरु श्रीत पद कमलम श्री गुरु वैष्णव श्री रूपम साजम सहगण रघुनाथम तम सजीव साद्वैतम सावधूतम परिजन सहितम कृष्ण चैतन्य देवम श्री राधा कृष्ण पाद ललिता श्री हे कृष्ण करुणा सिंधु दीन बंधु जगत गोपेश गोपिका कांत राधा कांत नमोस्तुते तप्त कांचन गौरांगी राधे वृंदावनेश्वरी वृषभानुते प्रणमाम हरि प्रशा कल्पतर कृपा सिंधु पत नाम पावने वैष्णवे नमो नम जय श्री कृष्ण थोड़ा थोड़ा प्रार्थना संक्षिप्त में रख प्रार्थना वैसे आपने आज मुझे आशा है कि आप जो अपनी नित्य जो वंदना करते हैं भगवान की वो आपने की होगी और अभी भी इसके बाद भी आप करेंगे तो
00:02:33:20 वहां पर आप करिए यहां पे आप प्रार्थना जो एक अपने गुरुओं को आप जिन्हें गुरु मानते हैं उनके प्रति आप अपना भाव प्रकट करते हुए थोड़ा सा पॉइंट पे आए क्योंकि ये वो जगह नहीं है जहां पर हम लोग अपनी प्रार्थना का शो ऑफ करें। जी ठीक है अच्छा कुछ अगर रह गया हो तो मतलब जो कुछ आवश्यक रह गया हो तो उसको आप कर लीजिए करो पम कृपा श्री गुरु दी बस इतना ही था जी तो ठीक है अभी स्पॉन से रिलेटेड चीजें हैं जिस पर हम लोग डिस्कस करने वाले हैं तो सबसे पहले मुझे ये थोड़ा सा बता दीजिए क्या आप मानते हैं कि स्पॉन परंपरा प्राप्त और प्रामाणिक संस्थान है।
00:03:22:12 जी विदाउट एनी डाउट इस जो है वो परंपरा प्राप्त है और प्रमाणिक संस्था है। इनफ जो श्री भगवत गीता प्रभुपाद ने दी है वो वो सामग्री के बारे में हम लोग बात करेंगे। थोड़ा सा क्या है ना टू द पॉइंट टू द पॉइंट बात करते हैं तो ठीक रहता है। जी हम आपने बिल्कुल मान लिया कि वो प्रामाणिक अब सबसे पहली बात ये आती है कि वर्तमान में इस का अंतिम निर्णायक कौन है?
00:03:55:13 जी वर्तमान में इस का जो अंतिम निर्णायक है वो कोई एक व्यक्ति नहीं है क्योंकि जब एक व्यक्ति कोई सेल्फ रियलाइज सोल अगर आती है वो एक पूरे संस्था का स्थापना करती है तो तो एक व्यक्ति अगर हम किसी को रख देते हैं ना तो उसमें दिक्कत होती है और वो दिक्कत ये होती है कि अगर वो एक व्यक्ति करप्ट हो गया तो तो पूरी संस्था तो यहां पर बात आ रही है कि इस पे जो प्रमाणिक लोग हैं वो है मेनली मैनेजेरियल तरीके से जीबीसी और जीबीसी ही अपॉइंट करती है सन्यासी को जो दीक्षा भी दे सकते हैं वो अपॉइंट करती है कौन आगे दीक्षा देगा एंड सो ऑन तो एक क्षत्रिय है ये वैष्णवों की इसको अंब्रेला कह सकते हैं आपको नाम पता है कि जीबीसी में कौन-कौन है? जी कई कई सारे लोगों के नाम पता है सारे लोगों के सब लोगों के तो मैं नहीं कह सकता बट बहुत सारे डिवोटीज के नाम और मैं एक क्वेश्चन इसलिए कर रहा हूं जी जी कि मैं एक परंपरा से जुड़ा हुआ हूं। ठीक है जी जी मुझे मालूम है मेरा अंतिम निर्णायक कौन है जी आपको नहीं मालूम है नहीं जो मुख्य निर्णायक
00:05:10:14 है वो ऐसे कई पर्सनालिटीज रहे हैं जिनसे मेरा भी बहुत आकर्षण रहा है और मैंने कहा आपने कहा जीबीसी में कई मेंबर्स हैं जीबीसी अंतिम निर्णायक है और जीबीसी में कई ऐसे मेंबर्स भी हैं जिनसे आपका धर्म प्रभावित हो सकता है आपका ब्रह्म प्रभावित हो सकता है परंतु आपको मालूम ही नहीं है कि वह कौन मुख्यत मैं जीबीसी से आकर्षित की बात नहीं हो रही है। बात हो रही है 2 प्लस टू इक्व 4 ये धर्म है ना प्लस इक्व 4 यहां दो चीजें हैं। मुख्य निर्णायक जब आप कह रहे हैं कि जो मुख्य निर्णायक है आपके आपके जो संप्रदाय है उनके आपको जानते हैं कि वो कौन है। यहां पर आप कह रहे हैं स्पिरिचुअल पर्सनालिटी की। मैं यहां बात कर रहा हूं दो के अंदर जो मैं बता रहा हूं इस के जो फैसले हैं इस को क्या कहना है भक्तों से इस को प्रभुपाद जी की किताब का क्या अर्थ बताना है क्या नहीं बताना है ये फैसला पहले से किया हुआ है बस प्रभुपाद जी को कंट्राडिक्ट नहीं करना है यानी उनको विरोधाभास नहीं करना ये मैं मैं बता रहा हूं कंट्राडिक्ट नहीं करने वाली बात मैं बता रहा हूं जी ये फैसला अंतिम
00:06:25:15 रूप से कौन लेगा कहने का मतलब ये है जैसे आपने हमने कहा कि प्रभुपाद जी को कंट्राडिक्ट नहीं करना है। प्रभुपाद जी ने मान लीजिए कह दिया कि भैया श्री कृष्ण जी तो रास्कल थे। ठीक है? श्री कृष्ण जी सबसे बड़े रास्कल थे। मान लीजिए प्रभुपाद जी ने कहा। अब इसका एक अर्थ तो यह निकाला जा सकता है कि वह अंतिम रूप से बता रहे हैं कि भैया अगर इस दुनिया में रास्कलडम का अस्तित्व है तो हमें मानना पड़ेगा कि उसके भी मूल में कृष्ण ही है। इसमें कोई बुरी बात नहीं है। दुनिया में यत्र तत्र सर्वत्र मैं ही मैं हूं। भगवान ही है। हर चीज की पराकाष्ठा में मूल में वही बैठे हैं। है ना? भगवान है मैं नहीं है भगवान है अलग-अलग है मैंने वही कहा इस समय भगवान का के द्वारा बोला गया वचन ही यहां पर रिपीट कर रहा हूं ठीक है मैं भगवान के द्वारा बोला गया वचन ही रिपीट कर रहा हूं जी जी जी हां अभी मैं अपने वो जो अद्वैत और द्वैत की वो जो अंतर है उसको नहीं ला रहा हूं मैं भगवान ने जो कहा है वो मैं आपको बता रहा हूं जैसे भगवान ने कहा तू मेरी शरण में आ जा है ना तो यहां पे उसी तरीके से उनके बोले बोले हुए कथन को मैंने रिसाइट किया है। ठीक। जी। अब बात ये है कि जब हर चीज के मूल में ही वो हैं
00:07:40:21 तो उनके कही हुई बात का अर्थ ये निकल रहा है। हां भाई मूल रूप से देखा जाए तो भैया अगर दुनिया में रास्कलडम है तो इसका मतलब रास्कलडम भी होना चाहिए। उनके अंदर वो क्वालिटी भी होनी चाहिए। उसके भी अधिष्ठाता उसके भी अधिष्ठान वो होने चाहिए। तो ये तो हो गया एक अर्थ। दूसरा अर्थ दूसरा निकलेगा। वो कहेगा कि नहीं नहीं कृष्ण कृष्ण जी तो वही वाले रास्कल है जो बुरा माना जाता है सांसारिक दृष्टिकोण से। अब यहां पर दो अर्थ निकल रहे हैं और मैं आपको उदाहरण दे देता हूं। तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। इसमें बेर शब्द दो बार आ गया। ठीक है? लिखने वाला लिख के आप कहना चाहते हैं कि एक ही शब्द के बहुत सारे अर्थ हो सकते हैं। तो जब एक मिनट जब लिखने वाला प्रेजेंट नहीं है हमारे बीच में तो उसका अर्थ बताने वाला निर्णायक कौन है? यह जानना आवश्यक है। हो सकता है प्रभुपाद जी ने उसी शब्द का दूसरे कॉन्टेक्स्ट में कुछ कहा हो और हम दूसरे कॉन्टेक्स्ट में निकाले। तो इसलिए प्रभु प्रभुपाद जी की ओर से एक प्रामाणिक व्यक्ति होना चाहिए जो ये बताया कि प्रभुपाद जी ने ये कहा है और वो भी उसकी प्रामाणिकता सिद्ध हो जिससे कि हम उसकी बात मान सके कि हां ये जो बात बोलेगा वो प्रभुपाद जी से ही बोलेगा। हमें
00:08:58:14 आप कहां गए? स्क्रीन पे कुछ लगा था। स्क्रीन पे कुछ लगा था तो वो क्लीन कर कर दीजिए कर दीजिए। तो हमें तो जब प्रभुपाद जी की ओर से हम एक निर्णायक व्यक्ति को स्वीकार करेंगे तो वो बताएगा कि प्रभुपाद जी की कहीं पे भी कोई भी चीजें अगर आ रही है जो समझ में नहीं आ रही संशय हो रहा है तो हम उसमें कुछ सन्यासी का नाम ले सकता हूं जैसे किस गोपाल कृष्ण मुख्य देखिए जब आपने जब आपने ये कह दिया कि मैं कुछ लोगों का नाम नहीं जानता हूं और फिर आपने एक स्टेटमेंट और दिया है कि हम प्रभुपाद जी के अगेंस्ट नहीं जाने चाहिए। ठीक है? तो इसको अब मुझे एक्सप्लेन करने दीजिए कि यह आवश्यक क्यों है जानना। ठीक है? आपने स्टेटमेंट एक दे दिया है कि भाई हम प्रभुपाद जी के अगेंस्ट नहीं जाएंगे। अब यदि बात ऐसी है कि प्रभुपाद जी के अगेंस्ट नहीं जाना है तो ऐसे तो कोई कह सकता है कि भैया उसकी बात मानो जो वेद के साथ है। वेद के विरोध में नहीं जाएंगे तो प्रभुपाद जी की भी आवश्यकता नहीं थी। अच्छा और और बाद में आ जाओ कि हम व्यास जी के विरोध में नहीं जाएंगे तब भी प्रभुपाद जी की आवश्यकता नहीं थी और बाद में आ जाओ मधवाचार्य जी के विरोध में नहीं जाएंगे तब भी प्रभुपाद जी की आवश्यकता नहीं थी और बाद में आ जाओ चैतन्य महाप्रभु के विरोध में नहीं जाना है तब भी प्रभुपाद जी की आवश्यकता नहीं है मगर प्रभुपाद जी की आवश्यकता मानने का अर्थ यही है कि प्रभुपाद जी
00:10:13:18 के एब्सेंट में हमें प्रभुपाद जी का उत्तराधिकारी चाहिए। उनकी ओर से बोलने वाला निर्णायक अब आपने कहा कि वो निर्णायक जीबीसी है। मेरा मेरा हो रहा है क्या? एक मिनट नहीं नहीं कोई दिक्कत नहीं है। मुझे थोड़ा नहीं मेरा कुछ रुक रुक के आ रहा था क्या मेरा अभी? बीच में हुआ था बट ठीक है। अभी ठीक है। ठीक है। तो अभी क्या है कि आपने कहा कि वो जीबीसी अंतिम निर्णायक। अब मैंने आपसे पूछा कि जीबीसी यदि है तो उसके सभी मेंबर्स का आपको पता है क्योंकि आप अगर प्रभुपाद जी को अपने धर्म ब्रह्म का निर्णायक मान रहे हैं तो आपको पता होना चाहिए कि पता होना प्रैक्टिकल नहीं है। एक्चुअली अगर आप देख सन्यासी की लिस्ट में सभी मेंबर्स का होना पता होना सबके नाम जबानी याद रहना प्रैक्टिकल नहीं है क्योंकि आप देखिए 400 से 500 ऐसे मेंबर्स हैं कई कई कंट्रीज में हैंडल करते हैं जिसको काफी बड़ी ऑर्गेनाइजेशन है। तो प्रैक्टिकिटी में अगर देखा जाए प्रैक्टिकिटी नहीं है तो फिर यह वाली जो व्यवस्था है जिसमें शिष्य को अपने अंतिम निर्णायक गुरु का नाम नहीं पता है ये व्यवस्था शास्त्रोक्त कैसे
00:11:26:21 राम जी को अपने गुरु का नाम पता है मेरे गुरु वशिष्ठ है मुझे मेरे गुरु का नाम पता है मेरे गुरु जगुरु शंकराचार्य पूरी पीठाधीश्वर है मधवाचार्य वालों को पता है मेरे मेरे गुरु अंतिम निर्णायक फलाने तीर्थ है श्री संप्रदाय वालों वालों को पता है कि मेरे गुरु विद्या भास्कर जी महाराज है या फिर राघवाचार्य जी महाराज है। आपको नहीं पता है 400 लोगों होने की वजह से तो यहां पे दो बातें आ गई। यहां पे दो बातें आ गई। एक मिनट एक कि अगर पॉसिबल नहीं है तो इसका अर्थ ये नहीं है कि गलत चीज को हम सही मान लें। दूसरी कि ये जो इंपॉसिबल वाली विधि है इसका वर्णन कहां पे है? जब मधवाचार्य जी जाते हैं तो वह अपना उत्तराधिकारी बनाते हैं। फिर वह जाते हैं तो वह अपना उत्तराधिकारी बनाते हैं। चैतन्य जहां से वो डिटच हुआ है जहां से मधुवा वालों ने माना कि ये हमारे यहां का नहीं है। मगर आप लोग कहते हो नहीं वहीं का है। ठीक है। तो जहां से आप लोग ये मान रहे हो कि वो वहीं का है। वहां से उत्तराधिकारी वाली चीज तो खत्म ही हो गई। है ना? बता सकता हूं इसका वर्णन कहां पर है? अब आप बताइए जी आपका प्राइमरी क्वेश्चन है जो फर्स्ट क्वेश्चन आपका रहा है वो ये है कि गुरु परंपरा एक एक्सिस्ट
00:12:42:07 करती है तो मल्टीपल लोग कहां से आए ऐसा ही कुछ है मैं सही पकड़ रहा हूं इस का अंतिम निर्णायक मैं मैं मैं बता देता हूं इस का अंतिम निर्णायक कौन है यदि एक से ज्यादा लोग हैं तो क्या यह शास्त्रोक्त है और यदि एक से ज्यादा लोग हैं तो वो एक से ज्यादा लोग आपको मालूम होने चाहिए क्योंकि वो आपके अंतिम गुरु हैं। क्योंकि वो प्रभुपाद जी के उत्तराधिकारी हैं। तो आपको मालूम तो होना ही पड़ेगा। वो 500 हो चाहे हजार हो ये आपकी प्रॉब्लम है। और अगर आपको मालूम ही नहीं मेरा गुरु कौन है तो इसका मतलब यह है कि आप उन किताबों को मान रहे हो। उस सिस्टम को मान रहे हो जिस सिस्टम को आप सोच रहे हो कि प्रामाणिक है। मगर आपको पता ही नहीं है कि इसको चला कौन रहा है। नहीं आपको आक्षेप नहीं करना चाहिए। पहले मैं जवाब देता हूं। से देखते हैं। नहीं मैंने आक्षेप नहीं किया है। मैंने मैंने क्या है संभावनाएं व्यक्त की है कि अगर ऐसा है तो ऐसा होगा। ऐसा है तो ऐसा होगा। ऐसा है तो ऐसा होगा। मैंने अभी वो आरोप नहीं लगाया। मैंने संभावनाएं व्यक्त की है। ठीक है। ठीक है। मुझे मालूम है। और सबसे पहला जो आपने क्वेश्चन पूछा वो है कि मल्टीपल गुरु है। मल्टीपल गुरु शास्त्रों में कहां है? यही यही है। मल्टीपल गुरु होना। गुरु परंपरा में गुरु परंपरा में अंतिम शास्त्रों
00:13:57:20 में एवं परंपरा प्राप्त 4.2 गुरु परंपरा में जो हमारा जो सिस्टम है मधवाचार्य जी की परंपरा का आपने कहा आपने एक एक चीज और दी अच्छा हुआ आपने याद दिला दिया एक चीज और है आपने कहा कि यदि एक ही व्यक्ति पर हम लोग वो करेंगे डिपेंड हो जाएंगे तो उसमें विकृति आ सकती है इसलिए वो उचित नहीं है तो इसका मतलब मधवाचार्य उचित नहीं थे। मधवाचार्य के बाद वाले उचित नहीं थे। मधवाचार्य के आज तक वाले उचित नहीं है। जी और अपने और और सुनिए और सुनिए अपने टाइम में प्रभुपाद जी भी उचित नहीं है। फिर तो क्योंकि अपने टाइम में तो वो भी सिंगल थे। मैं अब बोलूं एक व्यक्ति जो है वो बोलने के लिए क्वालिफाइड होता है तब जब आचार्य होते हैं ना वो कृष्ण के द्वारा या भगवान के द्वारा एमावर्ड होते हैं। जो एमावर्ड आचार्य होते हैं उनका कुछ स्पेशल केस होता है। ठीक है? वो एमावर्ड आचार्य जो है वो वो लोग हैं जिनका फॉल डाउन नहीं होता। यानी वो अपने स्तर से कभी गिरते नहीं है। अगर शास्त्रों के नजरिए से देखा जाए तो इन लोगों को उत्तम अधिकारी कहते हैं। ठीक है? उत्तम अधिकारी कभी अपने स्तर से गिरेगा नहीं। लेकिन विवरण भी दे दीजिए।
00:15:13:10 शास्त्रोक्त विवरण भी दे दीजिए। शास्त्रोक्त विवरण ये श्रीमद् भागवतम है। जस्ट मैं इसके श्लोकास टू टू थ्री मिनट्स में अभी कोड कर सकता हूं। थोड़ा सा रिट्रीव करने पड़ेंगे मुझे। श्रीमद् भागवतम हां आप केवल मुझे नंबर बता दीजिए मैं निकाल लेता हूं। एक बार चेक कर लीजिएगा श्रीमद् भागवतम के अंदर श्रीमद् भागवतम के अंदर कनिष्ठ मध्यम और उत्तम अधिकारी का रेफरेंस नहीं
00:15:51:22 कनिष् मध्यम और उत्तम अधिकारी का जो रेफरेंस है इनकी डेफिनेशन दी है क्लियर कि सह मध्यमा सह कनिष्ठ अधिकारी सह उत्तम ऐसे दे दीजिए देख जरा जी स्टार्ट कैसे करें इसको यहां पर चैट आ जाएगी कोई दिक्कत नहीं कनिष्ठ मध्यम एंड उत्तम मध्यम एंड रेफरेंसेस इन श्रीमद् भागवतम अधिकारी हां अधिकारी रेफरेंसेस इन श्रीमद् भागवतम इन भागवत पुराण हां भागवत लिख सकते हैं
00:16:38:07 जस्ट ए मिनट जी ये आ रहा है 11 एंटो में चैप्टर टू में आ रहा है 11वा स्कंध दूसरा चैप्टर ओके कौन सा चैप्टर?
00:17:36:14 11th स्कंध 11वा स्कंध सेकंड चैप्टर 45 श्लोक ये उत्तम अधिकारी की 11थ 11th कैंटो श्रीमद् भागवतम 11th कैंटो 11.2.45 अब समझ 11.2.45 हां 11वा स्कंध दूसरा अध्याय 45 श्लोक जी तो
00:18:12:19 इंग्लिश ट्रांसलेशन ट्रांसलेट मैं बता रहा हूं मैं बता अच्छा ठीक है उसी में कर दीजिए इसमें आपने बताया 45 जी 11.2.45 हां तो इसमें लिखा हुआ है 45 में इस प्रकार जो प्रतििक्षण एक एक व्यक्ति के द्वारा भगवान के चरण कमलों का ही भजन करता है उसे भगवान के प्रति प्रेममय भक्ति संसार के प्रति वैराग्य और अपने प्रियतम भगवान के स्वरूप की स्फूर्ति यह सब अवश्य ही प्राप्त होते हैं वह भागवत हो जाता है और जब ये सब प्राप्त हो जाते हैं तब वह स्वयं परम शांति का अनुभव करने लगता है। इसमें क्या है? इसमें अगर ओरिजिनल श्लोका देखें तो
00:19:12:19 श्री हवा सर्वभूते पश्च भगवत भाव आत्म भूतानी भगवती आत्म ए भागवतो अगर मैं इंग्लिश में पढू तो कोई दिक्कत तो नहीं है इसमें वैसे ट्रांसलेशन की इंग्लिश मत पढ़िए आप हिंदी बताइए अच्छा ठीक है ठीक है ठीक है मुझे लग रहा है ये राजू जो बात है क्या ये श्री हवीर ने कहा हवीर जी तो एकादश स्कंध है दूसरा अध्याय है और 45वा श्लोक है सबसे उन्नत भक्त प्रत्येक वस्तु में समस्त आत्माओं की आत्मा परमेश्वर श्री कृष्ण को देखता है फल स्वरूप वह सब कुछ परमेश्वर के संदर्भ में देखता है और समझता है कि जो कुछ भी विद्यमान है शाश्वत रूप से परमेश्वर में ही स्थित है और साथ में इसी के जस्ट नेक्स्ट श्लोक में मध्यम अधिकारी और कनिष्ठ अधिकारी भी दिया है। जस्ट अगले ही श्लोक में अगर आप देखो सिक्स जो भगवान से प्रेम उनके
00:20:21:01 जो भगवान से प्रेम उनके भक्तों से मित्रता दुखी मध्यम अधिकारी का तो मुझे याद भी है। इसके चार सिम्टम्स है ओवर इसमें मध्यम शब्द आ रहा है क्या? मध्यम और उत्तम और ये आ रहा है भागवत उत्तम ये तो नहीं है ये वाला फिफ्थ 45 श्लोक है इसमें उत्तमा उत्तमा वाला वर्ड आ रहा है 46 में मध्यमा आ रहा है और 47 में कनिष् आ रहा है हां भागवत उत्तम आ रहा है मध्यमा आ रहा है कनिष् भी आ रहा है ठीक है ओके तो उत्तम कनिष्ठ और मध्यमा आ रहा है इसमें ये वाली बात कहां पे आ रही है कि वो गिरता नहीं है फॉल डाउन नहीं होता देखिए जो उत्तम अधिकारी है ना उत्तम अधिकारी वो हर तरफ भगवान को देख पा रहा है। यानी वो हमेशा हर सेकंड भगवान का स्मरण कर पा रहा है। वो भगवान को एक भी क्षण के लिए भूल भूलता नहीं है। ये चीज है। लेकिन मध्यम अधिकारी जो है अगर आप उसके कैरेक्टरिस्टिक्स में देख तो चार चीजें आप एक बात समझिए। देखिए ऐसे अगर हम अपने मन से निकालेंगे मन से नहीं निकाल रहा। आप एक्सक्ट पढ़ सकते हैं। कोई दिक्कत नहीं। एक एक मिनट एक मिनट। मैं जो है ना ये श्रीधरी टीका निकाल लेता हूं तो हमारा वो नहीं होगा ना श्रीधरी टीका तो मानना है ना आपको
00:21:36:19 जी श्रीधरी टीका के अंदर आपका जो ट्रांसलिट्रेशन है मैं उसको 100% नहीं मानूंगा वो मुझे देखना पड़ेगा तो आपको फिर श्री आपको फिर श्रीधरी की प्रमाणिकता सिद्ध करनी होगी अपने कि आप जो श्रीधर स्वामी जी की ओर से बोलेंगे वो प्रमाणिक क्यों माना जाए क्योंकि आप तो श्रीधर स्वामी को अपनी परंपरा में गिनते नहीं क्यों नहीं गिनते हैं? कहां गिनते हो? यहां पर मैं आपको करेक्ट करूंगा। फॉर एक एग्जांपल देकर। अच्छा एक एक काम कर लेते हैं। पहले देख लेते हैं कि इन्होंने क्या लिखा है। ठीक है। मैं ये वाली इसमें देखिए अगर आप देखिए अगर ये वाली बात है ना कि मैं उनका ट्रांसलेशन नहीं मानूंगा। तो फिर मैं आपका ट्रांसलेशन क्यों मानू? जब इसमें गिरने की बात नहीं लिखी है और आपने जो तर्क दिया है कि उनको जो है भगवान ही दिखते हैं तो आपको मैं बता दूं कि अकॉर्डिंग टू डायरेक्टली वो भी लिखा है मैम ओके ओके हां सॉरी मैम बीच में काट दिया मुझे माफ करिएगा गिरने की बात डायरेक्टली वो गिरने वाली बात लिखी है तो बताइए हां गिरने की बात नहीं है लेकिन दूसरों से व्यवहार कैसा होता है व्यवहार वही मैं बता रहा हूं वही मैं बता रहा हूं जब यहां की तो बात छोड़िए यहां
00:22:51:20 तो तब भी हमें पांच इंद्रियां प्राप्त है। कर्मेंद्रियां प्राप्त है। ज्ञानेंद्रियां प्राप्त है। है ना? 11 प्रकार की इंद्रियां हमें प्राप्त है। तो फिर भी जब हम मुक्त थे भगवान की ही शरण में थे तब भी हमारा फॉल डाउन हो गया। तो यहां पर आप ये कह रहे हैं उसका फॉल डाउन हो नहीं सकता। ये लिखा है यहां पर। तो ये बात तो मैच ही नहीं कर रही है। ये मैं एज अ क्वेश्चन एक और लिख लेता हूं। मैं इस पे भी आऊंगा। अभी हम एक एक करके चलते हैं। पहली चीज हमारी जो बात हुई वो हुई कनिष्ठ मध्यम और उत्तम का बिहेवियर कैसा होता है और साथ में वो फॉल डाउन वाली चीज कहां लिखी है ये चीज है ना नहीं तो हम लोग तो फॉल डाउन के लिए आए हैं ना मैंने कनिष्ठ मध्यम उत्तम मैंने किया ही नहीं आपने शुरू किया वो तो अब आपने कहा वो फॉल डाउन नहीं होता जो उत्तम भक्त होता है पहली चीज तो उसका फॉल डाउन फॉल डाउन ना होना यहां नहीं लिखा है और मैं आपको बता दूं यहां पे जो भी आया है वो फॉल डाउन होकर ही आया है और वो बहुत अच्छी उसमें था यह तो कुछ भी नहीं है। उत्तम भक्त होने के ठीक है। ठीक है। वो अच्छी स्थिति में था लेकिन वो उत्तम भक्त से भी उत्तम भक्त से भी अच्छी स्थिति में था। मुक्त था वो। ये तो अच्छा ये मैं एग्री नहीं करता हूं। तो अच्छा तो बताइए यहां पर ये जो उत्तम अधिकारी की बात हो रही है ना ये बात हो रही
00:24:06:24 है कि उत्तम अधिकारी इस भगवान की पर्सनल फॉर्म को रियलाइज कर चुका व्यक्ति। ठीक है? भगवान की जो अगर अगर आप देख भगवान के तीन लेवल्स हम बांट सकते हैं। भगवान की पर्सनल फॉर्म को भगवान की पर्सनल फॉर्म को उसने रियलाइज कर लिया है। ठीक है? मगर वो फॉल डाउन नहीं हो सकता। ये यहां पर मेंशन नहीं है। और अगर ऐसी बात अगर हम कहे तो जो व्यक्ति बैकुंठ में है उसका भी फॉल डाउन हुआ है। वो भी भगवान की पर्सनल उसको रियलाइज कर चुका है। उसका भी फॉल डाउन हुआ है। में है उसका फॉल डाउन नहीं होता। किसका? ये भगवत गीता में लिखा है। ये भगवत गीता में लिखा है जो वैुंठ में है तम परम यत न निवते ये तो आप ही तो कह रहे हो वही से आए हम लोग आप ही तो कह रहे हो वही से आए हम लोग हां हम दो देखो वहां पर भी ना स्टेजेस है लेवल्स है हम ऐसे नहीं कह सकते अरे फॉल डाउन हुआ कि नहीं हुआ वहां से नहीं वैुंठ से नहीं हुआ वैुंठ के नीचे भी एक स्टैंडर्ड है वैुंठ के नीचे यानी हम लोग वैकुंठ में नहीं थे जी हम लोग वैुंठ में नहीं थे हम नित्य बद्ध जीव है और जो वैुंठ में है वो नित्य सिद्ध जीव है। यानी कि हम कभी भी मुक्त
00:25:22:12 थे ही नहीं। हम जो नित्य सिद्ध जीव है उसके जो नीचे वाला लेवल है। ठीक है? नित्य सिद्ध वो नित्य सिद्ध जीव जो है वो वहां पर भक्ति करके पहुंचे हैं ना। हां वो भक्ति करके पहुंचे हैं। लेकिन हम भक्ति कभी किए नहीं। हम हम भक्ति नहीं किए क्योंकि भक्ति मतलब सेवा और हम सेवा से विरोध करके यहां भोग की वृत्ति कर रहे हैं इसलिए हम यहां है तो ये जो यहां पे जो यहां पे जो भक्त है वो यहां पे जो यहां पे जो उत्तम भक्त है वो वो वाले लेवल पे भगवान को देख रहा है जो जिस लेवल पे जीव था ही नहीं। नहीं यहां पर उत्तम भक्त जो है यह वहां पर भगवान को देख रहे हैं जहां पर भगवान जीव सब है भगवान का एक अलग धाम है उत्तम भक्त उन जहां से हम लोग आए नहीं है जहां से हम लोग आए नहीं है वहां से हम आए नहीं है क्योंकि वहां से तो होता ही नहीं जितने भी लोग जितने भी लोग वहां भगवान के लोक में है वो वो पहले नीचे वाले लेवल पर थे या वो भगवान के लोक में भी कुछ नित्य लोग हैं और भी भगवान के भगवान के वर्ल्ड में भी कुछ नित्य पार्षद है। नीचे में भी कुछ नित्य पार्षद है और
00:26:37:13 यहां पे भी कभी-कभी कुछ नित्य होते हैं लोग जो बहुत ज्यादा ऑफेंसिव मेंटालिटी वाले होते हैं। तो जो लोग शुरुआत से ही नित्य हैं जो लोग शुरुआत से ही नित्य हैं तो ये तो तत्व ज्यादा हो जाएंगे। फिर जो लोग शुरुआत से ही नित्य है। नहीं तत्व ज्यादा नहीं है। यहां लेकिन एक ही तत्व के अंदर कैटेगरीज नहीं हो सकती। इसमें तो कोई दिक्कत है नहीं। एक ही है जीव तत्व और जीव तत्व का मतलब होता है मार्जिनल पोटेंसी या आसान शब्दों में बोलूं तटस्थ शक्ति। तटस्थ शक्ति के पास चॉइस होती है। हालांकि आपकी ये वाली जो बात है ना कि वो लोग नित्य थे मतलब वो जो है वो मुक्ति में थे ही नहीं। ये वाली जो आपकी बात है मुक्ति की पांच कैटेगरी है। और वो पांच लिस्ट करता हूं। पहली होती है सबसे नीचे। अरे तो मुक्ति मुक्ति में थे ना मुक्ति में थे मैं ये कह रहा हूं भक्ति से फॉल डाउन नहीं होता मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं कि मुक्ति में थे कि नहीं थे मुक्ति से भी फॉल डाउन हो सकता है मैंने मैंने अभी क्या पूछा देखिए भाई साहब थोड़ा सा मैं प्लीज आप बहुत अच्छा बहुत अच्छे से चल रहा है मैं पूछ रहा हूं कि वो मुक्ति में थे कि नहीं थे कौन आप नित्य सिद्धों
00:27:52:19 की बात जो अभी यहां पे आके उत्तम भक्त बन रहे हैं जो यहां पर आके उत्तम भक्त बनने वाले जो है उनकी दो केटेगरी है जो ऊपर से आ रहे हैं और पहले से ही उत्तम थे। ठीक है और कहां से आ रहे हैं? कहां से आ रहे हैं? भगवान के धाम से ही आ रहे हैं और पहले से ही मुक्त थे। नित्य सिद्ध जीव कहते हैं। नित्य यानी इटरनल सिद्ध हमेशा। तो ये वाले जो जो मधवाचार्य जी है और प्रभुपाद जी है ये डायरेक्ट भगवान के उससे आए हैं। ये आप कह रहे हैं और इसके रेफरेंसेस मैं दे सकता हूं। इसके रेफरेंस मैं दे सकता हूं। अब अब ये ये बात आ गई क्लियर हो गया। अच्छा अब अब थोड़ा सा हो गया कि कुल मिलाकर के उत्तम भक्त जो है वो डायरेक्ट वहां से आया है। जो सबसे पराकाष्ठा वाला लोक है। एक और कैटेगरी है जो यहां से उत्तम बनते हैं। पहले मैंने भाई साहब अभी आपसे क्लियर क्या पूछा? ये जो ये वाले जो है प्रभुपाद जी प्रभुपाद जी वाले लोग हैं ये ऊपर वाले लोक से आए हैं। प्रभुपाद जी उत्तम अधिकारी है लेकिन उत्तम अधिकारी ऊपर से भी आ सकते हैं और नीचे से कोई मैंने क्या पूछा ये भाई साहब ये कहां से आए हैं? आप ये बताओ ना ऊपर वाले से आए हैं ना मेन वाले से आए हैं ना और हम यहां से भाई साहब भाई साहब मैं मैं जो पूछ रहा हूं क्लियर है
00:29:07:22 हां मेन वाले से प्रभुपाद जी आए हैं ना जी जी जी हां हां हां जी बिल्कुल हां मेन जहां इसके बाद कहीं नहीं जाना है उस वाले से आए है ना हां ठीक है तो ये फॉल डाउन नहीं है नहीं ये फॉल डाउन नहीं है क्योंकि वो वो परमिशन ले आए हैं और हमारा उद्धार करने के लिए आए हैं। अच्छा ठीक। मतलब वो वो परमिशन लेकर के आए हैं और हमारा उद्धार करने के लिए आए हैं। है ना? अब मुझे प्रभुपाद जी के संबंध में आप प्रमाण दे दीजिए कि वो बैकुंठ से आए थे। जी दे सकता हूं। ये यहां पर पहली चीज आती है कि जब हम प्रमाण देते हैं तो इसमें लॉजिकल रीजनिंग के भी कुछ रूल्स लग सकते हैं। वो वो आप दीजिए। मैं मैं देखूंगा कि उसमें लॉजिक से कट सकता है कि नहीं। नहीं कटेगा तो मैं उसको मानूंगा। जी पहला प्रमाण ये पहले मैं ये एस्टब्लिश करना पसंद करूंगा कि श्री चैतन्य महाप्रभु साक्षात कृष्ण है। उसकी क्या आवश्यकता है? ये एस्टब्लिश करने की वजह से प्रभुपाद जी की एस्टब्लिशमेंट हो पाएगी। मतलब आपके पास शास्त्रीय वो नहीं है। आपके जो सेक्ट के द्वारा लिखे गए वो है ग्रंथ उनको आप फिर प्रस्तुत करना चाहते हैं। ग्रंथ
00:30:23:01 नहीं है। मैं प्रूफ कर सकता हूं कैसे नहीं है। नहीं वो आप वो आप जो ग्रंथ है जिनको आप प्रूफ कर वो ग्रंथ नहीं है। और एक्चुअली सेक्टेरियन नहीं है। मैं नहीं कह रहा वो सेक्टेरियन है। जिनको आप प्रस्तुत करना चाहते हैं शास्त्र जिनमें प्रभुपाद जी का बैकुंठ से आना लिखा है। अपनी मर्जी से आना लिखा है वो आप मुझे बता दीजिए। ठीक है। एक तो दिव्य प्रबंध में है। दिव्य प्रबंध रामचार्य जी के संप्रदाय का है। वहां पर एक पर्टिकुलर लाइन आती है कि अहो अहो मतलब बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया और अब कोई नर्क नहीं जाएगा। कोई नर्क नहीं जाएगा। क्योंकि पाश्चात्य देश में वेस्टर्न कंट्रीज में भी सारे लोग भगवान का नाम ऊंचे सुर में कीर्तन करते हुए ले रहे हैं। और अब कोई नर्क नहीं जाएगा। ये डिस्क्रिप्शन आता है। एक दिव्य प्रबंधन में आता है। ठीक है? दूसरा डिस्क्रिप्शन मिलता है आप इसको मान रहे हैं। मैं प्रूफ कर लिखी है कि ये जो जो लोग कीर्तन कर रहे हैं उनको कीर्तन कराने वाला व्यक्ति जो है वो बैकुंठ से आया है।
00:31:30:00 जो लोग कीर्तन कर रहे हैं उनको हम लोग ये जांच कर रहे हैं कि इनका प्रमाण कैसे मिलता है। प्रभुपाद जी जो है वही से आए ऊपर वाले से जी भविष्यवाणी के नजरिए से देखा जाए तो मिल सकता है लेकिन अगर आप उसको सेक्टेरियन मानेंगे तो फिर कोई फायदा नहीं होगा। मैं एक तरीके से मैं आप अपना पक्ष प्रस्तुत करिए। कर्मवादी कार माले कदाचना पर विश्वास रखिए। ठीक है। ठीक है। मैं एक तो दिव्य प्रबंध एक लिस्ट कर सकते हैं आप। दूसरा श्रीमद् भागवतम में भी आता है कि श्रीमद् भागवतम कलयुग में वेस्टर्न कंट्रीज यानी पाश्चात्य देश में जाएगा। आप देख सकते हैं रेफरेंस का श्रीमद् भागवतम कलयुग श्रीमद् भागवतम कलयुग में नारद मुनि ने ऐसा बोला था कि श्रीमद् भागवतम कलयुग में पाश्चात्य देश में जाएगा। तो इनफ जब प्रभुपाद जी से पूछा गया कि आपने इतनी सारी प्रीचिंग कर दी तो प्रभुपाद जी कहते थे ये भागवतम मुझे लेके जा रहा है ऑबियसली विनम्रता वश वो भी ये कहां लिखा है पहले तो ये बता दीजिए थोड़ा सा भागवत पुराण में भविष्यवाणी की श्रीमद् भागवतम कंट्री से बाहर जाएगा भारतवर्ष से बाहर जाएगा
00:32:42:19 बताइए जी जस्ट मिनट जी हम मतलब ये कन्वर्सेशन ऐसी चल रही थी कि नारद मुनि भक्ति देवी से बात कर रहे थे और भक्ति
00:33:57:27 देवी ने कहा था कि मैं कहां पे है वो बता दीजिए मैं खोल लूं। जी जी जस्ट अ मिनट उनकी मर्जी याद दिला दीजिए कोई बात नहीं कोई बात नहीं कोई बात नहीं वैसे एक बात आपको बता दू कर सकते है वैसे एक बात मैं आपको बता दू आप ये बता दीजिए मगर हमें मूल ये देखना है। यदि वो यह कह रहा है कि भागवत यहां से बाहर जाएगा तो उसको ले जाने वाला वही होगा जो बैकुंठ से आया है। मुक्त धाम से परम मुक्त धाम से। जी। इसके जो कोटेशंस है इस कोटेशंस के लिए ही मुझे श्री चैतन्य महाप्रभु की स्थापना करने की जरूरत थी। क्योंकि अगर आप श्री चैतन्य महाप्रभु को शास्त्रों में एक्सेप्ट करेंगे तो श्री चैतन्य महाप्रभु के पर्सनल सर्वेंट्स यानी उनके परंपरा में आने वाले जो ग्रंथ हैं उनके उनकी स्थापना ऑटोमेटिकली हो जाएगी। उनके पर्सनल शिष्य अगर हम ऐसे अगर करें कि श्री चैतन्य महाप्रभु भगवान है इसलिए उनके द्वारा कही गई बातों को मानना पड़ेगा। ठीक है? तो और उनके द्वारा कही गई बातों को जो है आप ही प्रस्तुत करेंगे तो फिर
00:35:12:28 हमें यहां बैठने की जरूरत ही नहीं है। चैतन महाप्रभु को भगवान मान लिया। चैतन महाप्रभु को भगवान मान लिया। उसके बाद उनके नाम से जितनी चीजें छपी हुई है आपके द्वारा प्रस्तुत की जाएंगी। मैं उनको सिरोधार कर लूं तो बात ही खत्म हो गई। फिर तो कुछ रह ही नहीं गया ना। हमें आठ ग्रंथों की आवश्यकता है। आप चैतन्य महाप्रभु को भगवान सिद्ध करके फिर उनके रेफरेंस से कि यह किताबें उनके ही प्रामाणिक शिष्यों के हमें यहां पर आपके ऊपर विश्वास करना होगा। ये आपके पर्सनलाइज ग्रंथ है। नहीं पर्सनलाइज नहीं है। मैं प्रूफ कर सकता हूं। ये प्रूफ कर तो आप वो जो है हमारे आर्ट्स ग्रंथों से प्रूफ करिए ना। अपनी परंपरा से जो भाष्य लिख के जो उनके शिष्यों ने उन्हीं पे तो चैलेंज है। उन्हीं को तो क्लेम कर रहा हूं। अभी उनकी प्रामाणिकता हमने एक्सेप्ट ही नहीं की। तो आप उसको एज ए प्रूफ कैसे रख सकते हो? ऐसे तो फिर मैं अपनी परंपरा की चीजों को रखूंगा तो आप मान लोगे क्या? और मैं प्रूफ कर दूंगा शंकराचार्य जो है भगवान शिव थे। जी शंकराचार्य जी भगवान शिव थे। इसमें मुझे भी कोई डाउट नहीं है। लेकिन और मैं ये भी प्रूफ करूंगा कि वो मायावाद वाला मामला जो आपने रस वो रायता फैला हुआ है उसको भी प्रूफ कर दूंगा। वैष्णव परंपरा के ही वैष्णव परंपरा का आपने कोट किया ना वैष्णव
00:36:28:04 परंपरा के प्रामाणिक आचार्य ने अपने उसमें लिखा है वो श्लोक प्रक्षिप्त है हमने प्रक्षिप्त नहीं कहा हमने कहा का पालिकों के लिए प्रक्षिप्त मतलब प्रक्षिप्त मतलब मिलावट वैष्णव परंपरा के प्रामाणिक आचार्य ने अभी आपने श्री संप्रदाय का कोट किया ना यानी श्री संप्रदाय के आचार्यों को आप प्रामाणिक मान रहे हो तभी तो कोट कर रहे तो वैष्णव संप्रदाय के प्रामाणिक आचार्य ने उस श्लोक को प्रक्षिप्त कहा है और हमने उसको कापालिकों के लिए कहा है जिनको दक्ष के दक्ष के यज्ञ के समय श्राप मिला था उनकी मुक्ति के लिए दोनों में से कोई भी बात मानी जा सकती है परंतु शंकर वो शंकराचार्य जी के ऊपर वो लागू इसलिए नहीं होता क्योंकि वो वैदिक थे और उसमें अवैदिक दर्शन की बात हो रही है उन्होंने जो दर्शन दिया है वेद के अर्थ में दिया है और वो वहां पर जो बात हो रही है वहां पर वेद के विरुद्ध भी बात हो रही है दर्शन की तो ऐसे बहुत सी चीजें हैं और उनके बारे में जहांजहां पर भविष्यवाण आ रही है जिससे वो शिव जी सिद्ध होते हैं शिव के अवतार सिद्ध होते हैं जिसको आप मान रहे पर्सनली बोला है तो अब कहीं ना कहीं तो देखो लिखना पड़ेगा ना देखो इतना तो हम कंट्राडिक्ट नहीं कर सकते कि श्री चैतन्य महाप्रभु तो आप आप फिर ये क्लेम मत करिए कि भाई वो
00:37:43:06 बैकुंठ से आए हैं। क्यों आए हैं? क्योंकि चैतन्य महाप्रभु भगवान है और उनके नाम से उनके शिष्यों ने कुछ लिखा है उसको मैं मान तो सब कुछ मान लेता हूं। स्वयं बोला स्वयं बोला और किसी ने सुना तो लिखेंगे ही ना वो प्रामाणिकता कैसे सिद्ध होगी अभी तो आपकी प्रामाणिकता सिद्ध नहीं हो रही है अभी मैं चैतन महाप्रभु से आपकी कनेक्टिविटी भी देखूंगा ना ओके ओके ओके क्वेश्चन ये है कि उन्होंने बोला और किसी ने लिखा ये प्रामाणिकता उन्होंने बोला और किसी ने लिखा प्रामाणिकता सिद्ध कैसे होगी अच्छा बताइए कि ड गोस्वामियों ने प्रभुपाद जी के लिए बोला है तू बैकुंठ के अवतार है। हां
00:38:26:28 बोला है। हां कहां पे बोला है? कृष्णदास गोस्वामी रघुनाथ दास गोस्वामी के डायरेक्ट डिसाइपल थे। रूप रघुनाथ पदे चैतन्य देखिए मैं बहुत ज्यादा नहीं मैं बहुत ज्यादा आपको नहीं बताऊंगा। मगर अगर ऐसा है कि सर गोस्वामी ने बोला है तो जो आज के टाइम के प्रामाणिक आचार्य हैं गिया वैष्णव संप्रदाय के वो विरोध क्यों कर रहे हैं? वो विरोध इसलिए कर रहे हैं देखिए विरोध करने यानी यानी कि चैतन्य महाप्रभु के शिष्य झूठ बोल सकते हैं ना नहीं आप कह तो रहे वो विरोध इसलिए कर रहे उनका जो विरोध है वो भी तो उनहीं के शिष्य है वो भी तो उनहीं के शिष्य है वो भी उनहीं के शिष्य है लेकिन उनके बारे में शास्त्रों में ये नहीं लिखा कि वो फ्यूचर में आएंगे लेकिन चैतन्य महाप्रभु ने ये नहीं तो उनके लिए भी उनके लिए मैं ये कह रहा हूं आप जिसके तरफ से वह प्रस्तुत कर रहे हैं उनके लिए भी तो नहीं लिखा है। एक बार दोबारा ये लाइन रिपीट करिएगा। जैसे कि आपने कहा कि भैया चैतन्य महाप्रभु जी के शिष्यों ने चैतन्य महाप्रभु की जी की वाणी को नोट किया। ठीक जी कोई उसके बाद उन्होंने वो वाणी अपने उसके बाद वो वाणी उन्होंने अपने उत्तराधिकारियों को दी। आगे परंपरा में
00:39:43:06 ठीक है। उसके बाद उन्होंने आगे परंपरा में दी। ऐसे करते करते वो वाणी आज आई है आप तक बीच में गौडिया वैष्णव संप्रदाय है तो गौडिया वैष्णव संप्रदाय के जो प्रमाणिक आचार्य गण है वो प्रभुपाद जी को नहीं मान रहे हैं जबकि उन्हीं से ड गोस्वामियों की वाणी आप तक आई है। ठीक है। वो प्रमाणिक आचार्य जो है आप किन की बात कर रहे हैं? रघुनाथ दास शास्त्री वृंदावन थोड़ा सा उनके बारे में वो आप हमारा वीडियो वो आप हमारा वो आप हमारा वीडियो शायद नित्यानंद परिवार के हैं वो हमारा वीडियो आप देख सकते हैं उन्होंने खुल के विरोध किया है अगर आप ये कहते हैं कि वो वो अगर आप ये कहते हैं कि वो जो जिस सीरीज में है उन्होंने और भी कई सारी बातें बताई है कि इस के पास जो है वो जो जो मुक्ति होती है ना तो अलग-अलग परिवारों के वो है कि वहां वहां पर क्या-क्या गहने होते हैं ऑर्नामेंट्स वगैरह उनके चित्र इत्यादि तो वो सब इस के पास वो डिटेलिंग नहीं है वो एक आचार्य के पास ही होती है जो परंपरा से होता है आचार्य ग वैष्णव उन्होंने और भी चीजें बताई ठीक है ठीक है वो मामला थोड़ा सा बदल जाएगा अब थोड़ा मूल विषय पे आ जाते हैं। मैं उनकी इस बात को एग्री नहीं करता हूं और मैं ये भी एग्री नहीं करता हूं कि नित्यानंद देखिए बात ये नहीं
00:40:58:07 है। बात ये बात ये नहीं है कि आप एग्री करते हैं कि मैं भी मैं भी इस बात को स्वीकार कर रहा हूं। आप मेरी बात आप मेरी बात समझ नहीं पा रहे। चैतन्य महाप्रभु के प्रामाणिक शिष्यों के में से किसी एक शिष्य की बात है। प्रमाणिक आपने उनको कैसे स्वीकार किया? किस बेसिस पे? प्रमाणिक बोलते हैं तो कोई बेसिस तो होना चाहिए ना। किसी को प्रमाणिक माने वो प्रमाणिक का मतलब है कि वो ठीक है। तो आप अप्रामाणिक कैसे है? अप्रामाणिक कैसे है? बताइए। अप्रमाणिक पहला डायरेक्ट कंफ्यूजन तो यह है कि अप्रमाणिक परिवार से आने वाला कोई भी व्यक्ति होता है इंजीनियर का बेटा इंजीनियर नहीं होता नहीं वो वो इंजीनियर नहीं है वो बाकायदा घोषित उत्तराधिकारी है वो बाकायदा पिछले सुनिए वो पिछले तो प्रमाणिक नहीं है कोई बात नहीं अब आप अपनी प्रामाणिकता मुझे सिद्ध कर दीजिए चलिए प्रभुपाद जी की प्रमाणिकता सिद्ध कर दीजिए प्रभुपाद जी की प्रमाणिकता एक तो दिव्य प्रबंध भागवतम के मैंने श्लोका कुछ तो कोट किए हैं। उसके अलावा श्री चैतन्य भागवत अभी मैं अभी मैं एक चीज क्लियर कर दूं। हां अभी इसकी जरूरत नहीं है। रहने दीजिए। अभी मत लगाइए। अभी
00:42:13:13 मैं एक चीज क्लियर कर दूं। हम लोग किस ओर जा रहे हैं। मैं वो थोड़ा सा जनता को बता दूं। पहली बात कि आप जब श्लोक दिखा रहे हैं कि वो बैकुंठ से आए तो आपके पास स्वतंत्र रूप से भागवत इत्यादि का ऐसा न्यूट्रल प्रमाण नहीं है जिससे कि वो सिद्ध हो सके। आपको अपनी परंपरा के द्वारा लिखे गए ग्रंथों को एज ए प्रमाण प्रस्तुत करना पड़ेगा। ठीक है? आप मेरी बात सुनेंगे। जी जी जी सॉरी रियली सॉरी तो पहली बात आपके पास आठ ग्रंथों से प्रमाण नहीं है। आपको जो है अपने
00:42:47:03 अपनी परंपरा के जो पर्टिकुलर जो ग्रंथ है उससे आपको ये उससे आपको जो है वो ये उसको एज ए प्रमाण आप प्रस्तुत कर रहे हो अपनी परंपरा के जो पर्सनलाइज आपके एक तरीके से जो परंपरा के लिए पर्सनलाइज ग्रंथ है। ठीक है? पहली बात। दूसरी बात ये है कि अब जब हम ये भी मान ले कि अब हम थोड़ी देर के लिए दुर्जन तोष न्याय पे जा रहे हैं और तब ये देख रहे हैं कि चैतन्य महाप्रभु से आपके जो प्रभुपाद जी है वो प्रमाणिक कैसे हैं? यदि आप ये कह रहे हो कि उनके चैतन महाप्रभु ने क्या लिखा क्या नहीं लिखा इस विषय में उनके शिष्य जो बताएंगे वो प्रमाण होगा क्योंकि आप चैतन महाप्रभु को एज ए प्रमाण वहां पर रखना चाह रहे हो तो अब वही बात आ रही है भाई साहब मैं कुछ बोलना चाहता हूं ना फिर वो प्रवाह टूट जाता है तो फिर चैतन्य महाप्रभु के ही एस ए शिष्य अपने आप को क्लेम करने वाले एक लोग कह रहे हैं कि जो प्रभुपाद जी हैं वो प्रामाणिक नहीं है वो अपने मन की बातें बोलते हैं ठीक ठीक है और दूसरे लोग शायद है जो आपके अनुसार वो मान रहे हैं कि नहीं प्रभुपाद जी वही है वो तो बात ऐसी है कि जब हम चैतन्य महाप्रभु के शिष्य होने के नाते किसी की बात को प्रमाण मान सकते हैं तो चैतन्य महाप्रभु के शिष्य होने के नाते ही दूसरे की
00:44:02:04 बात को अप्रण क्यों माने और जब वो जो जो स्थिति क्लियर नहीं है तो फिर उसको हम एज ए प्रमाण क्यों स्वीकार करें कह रहे या तो दोनों को ही स्वीकार करो या दोनों को ही मत करो ऐसा कहना चाहते और क्योंकि दोनों में कंट्राडिक्शन हो रहा है तो वहां पर उस जो चीज है ना जिसको हम लेना चाह रहे हैं प्रमाण वो ली नहीं जा सकती एक और प्रमाण है भक्ति देवी वाला जो शायद मैं बोल रहा था वो वाला आ गया ये ब्रह्म पुराण से है अच्छा नहीं श्री भागवत महात्म से भागवत महात्म से ये है भागवत महात्म 1.5 और 1.50 1.50 और इसमें है भक्ति देवी जी कह रहे हैं कि इदम स्थानम परित्यज विदेशम गमताया यानी ये स्थान छोड़ के मैं विदेश जाऊंगी। ऐसा भक्ति देवी ने प्रमाण दिया है। ऑबियसली आप इसमें ये इसमें इसमें ये कहां लिखा है कि उसको ले जाने वाला बैकुंठ से आने वाला जो उत्तम भागवत उत्तम वाला होगा जो फॉल डाउन नहीं होता है। जो अपनी मर्जी से आया है।
00:45:08:24 तो देखो ठीक है। यहां पर मैं एक रेफरेंस बस एक मिनट और लूंगा एक रेफरेंस के लिए और वो रेफरेंस है कि भक्ति देवी का देख जरा एक मिनट भक्ति देवी वाला देख ले कौन सा बताया आपने भागवत महात्म 1.50 उत्तराखंड श्रीमद् भागवत महात्म 1.50 श्रीमद् भागवत महात्म ये आप क्या उसमें अंदर जाके भागवत श्रीमद् भागवतम के अंदर जा रहे हो क्या तब महात्म में जा रहे हो ये पद्म पुराण का है भागवत महात्म पद्म पुराण के अंदर है ठीक है। ठीक है। तो इसका कौन सा चैप्टर बताया आपने? उत्तर उत्तरखंड और श्रीमद् भागवत। अरे उत्तराखंड मत बोलो आप सीधे चैप्टर बोलो ना। वो भागवत महात्म तो अपने आप में ही एक वो अलग कट के आ गया ना। चैप्टर बोलो आप। 1.50 1.5
00:46:04:00 चैप्टर पहले ओके। क्या लिखा है उसमें इदम स्थान परित्यज गमते विदेशम गमतेदम स्थानम परित्यज विदेशम गमते मया अब मैं स्थान छोड़कर अन्यत्र जाना चाहती हूं तो ये तो ये बोल रहा है कि किंतु सामने पड़े हुए दोनों मेरे पुत्र थके बांधे दुखी हो रहे अब मैं यह स्थान छोड़कर अन्यत्र जाना चाहती हूं। पर वो वृंदावन में थे। वृंदावन छोड़ के वो कहां जाते हैं? एक्चुअली इसका मतलब है कि वो अन्य जाना चाहती हूं। नहीं जाऊंगी। जाऊंगी।
00:47:04:09 यहां तो लिखा है जाना चाहती हूं। गमते गमते अगर हम गमते शब्द को अगर हम तो ठीक है ठीक है जाऊंगी मान लीजिए या जाना चाहती हूं मान लीजिए पर इससे ये नहीं सिद्ध होता है कि उसको ले जाने वाला जो होगा वो वही बैक से आने वाला मुक्त होगा आपका लॉजिक बिल्कुल ठीक है मैं इसमें कंट्राडिक्ट नहीं करूंगा मैं जस्ट एक मिनट लूंगा इसका रेफरेंस निकालने का टू
00:47:56:09 ठीक है? एक रेफरेंस आप देख सकते हैं। वो है श्रीमद् भागवतम 1.5.37 श्रीमद् भागवतम 1.5.37 97 क्या लिखा है वहां? जी जस्ट मिनट 1.5.375.37 आप टाइप कर सकते हैं।
00:48:31:15 लेते जी आई थिंक नहीं है इसमें लिखा है 377 में कि प्रद्युम्न अनिरुद्ध और संकर्षण को भी नमस्कार है। इस प्रकार आई थिंक यह वाला नहीं है। जस्ट मैं एक मिनट कन्फर्म करता हूं। हम आप कहना क्या चाहते हैं वह पहले बता दीजिए। हां जस्ट मैं एक मिनट एक मिनट। यहां पर एक श्लोक मैं रेफरेंस चेक कर रहा था कि
00:49:14:24 वो प्रूफ एक्सिस्ट करता है जिसमें एक दूसरा वर्ड्स है। आई थिंक ये वाला जो है इसमें आचार्यों की टीका से था। इसलिए मैं इसको नहीं उठाऊंगा। जस्ट एक मिनट दीजिएगा। ये आपने स्क्रीन शेयर की है क्या? नहीं मैंने तो नहीं की। अच्छा ये उनका टीका है शायद सीधा स्वामी जी का। अच्छा नहीं इसके इसके टीका में आता है लेकिन डायरेक्ट वर्ड यहां नहीं आता। एक्चुअली
00:49:58:02 एक मिनट बस एक मिनट रुकिए ना जस्ट वन मिनट हम आप ना जो समय इसमें नष्ट कर रहे हैं अगर आप थोड़ा सा मुझे ये बता दे कि आप दिखाने क्या वाले हैं तो मैं आपको बता दूंगा कि उसकी आवश्यकता है कि नहीं। जी उसकी आवश्यकता बिल्कुल है। मुझे वो वो क्लेम बता दीजिए वहां से क्या आप दिखाना
00:51:13:10 चाहो क्लेम है कि नित्य सिद्ध वैष्णव वो धरती पर आते हैं प्रीचिंग करने के लिए। भगवान भी धरती पर आते हैं। इसका तो कोई डाउट नहीं है। भगवत गीता वो डायरेक्टली प्रूफ ही करती है। उसके तो बहुत सारे रेफरेंसेस मिल जाएंगे। यह वाला पर्टिकुलर जो क्लेम है नित्य सिद्ध वैष्णव वो भी भगवान के कार्य को पूरे करने के लिए धरती पर आते हैं। यह डायरेक्टली प्रूफ कर पाएगा कि अगर भगवान भाई साहब भाई साहब एक बात बताइए कि अब मैंने कहीं पे शास्त्रों से यह निकाल लिया कि भैया कहीं पे भगवान को गाली देने वालों से झगड़ा होगा और यह हो गया झगड़ा होगा और जो है लड़ाई होगी वैष्णवों के द्वारा लड़ाई होगी और मैंने दूसरी जगह से निकाल लिया कि वैष्णव नित्य सिद्ध वैष्णव जो है भगवान के धर्म की रक्षा करने के लिए वो भी आते हैं। ठीक है? तो मैं यह क्लेम कर दूं कि भाई मैं भी उनका नृत्य सिद्ध वही हूं। कैसे? मैंने कहा कि अगर मैंने कहीं से रेफरेंस मैंने कहा कि रेफरेंस मैंने ये निकाला। मैंने कहा कि रेफरेंस ये निकाला भक्ति विदेश जाएगी। ठीक है? पहली बात तो अगर इसी को ले लूं तो भैया मैंने भी विदेश में भक्ति को भेजा है। मैं कोई मेरे कारण भी वहां पर भक्ति कर रहा है विदेश में। ठीक है? और उसके बाद नित्य सिद्ध वैष्णव
00:52:28:12 आते हैं बैकुंठ से भक्ति को भेजने वाले आप दोनों को कनेक्ट कर रहे हैं तो फिर मेरे को भी आप नित सिद्ध वैष्णव मान लेंगे नहीं वैसे मैं इससे तो एग्री नहीं करता कि आपने भक्ति ले गए हैं लेकिन क्योंकि नहीं तो फिर फिर मैं एग्री कैसे करूंगा आप आपके भक्ति ले जाने को फिर हम हमारा दूसरा चैप्टर खुल जाएगा सर्वशक्तिमान है कि नहीं क्योंकि भक्ति तो ईश्वर की होगी और ईश्वर पहले फिर वो सिद्ध हो ईश्वर और मैं अभी जाना नहीं चाहता हूं वो सर्वशक्तिमान वाले पार्ट में क्योंकि वहां पे व्हाट टू स्टॉप द ट्रेन थोड़ा सा पुल द चैन हो जाता है।
00:53:08:14 हां ये मुझे मिल गया ये तो ट्राई कर सकते हैं आप श्रीमद् भागवतम 10.1.25 नहीं ये वाला जो लॉजिक है आपने बिल्कुल ठीक दिया है कि मैं हो सकता है ये आप एक बात को समझिए देखिए आप एक बात को समझिएगा मैं आपको मैं उसको दूसरा उदाहरण दे रहा हूं जिससे आप उसको समस्या को समझ पाए जी जी जी रामपाल ने कहा कि भैया वेदों में कहीं पे कबीर शब्द आया मान लो कबीर नहीं आया रुद्र आ गया और रामपाल वो जो वो जो थे कबीर उनका नाम रुद्र है। ठीक है? तो रुद्र शब्द तो वेदों में आ गया मान लो। ठीक है? एक्सप्लेन एक मिनट मैं बता सकता हूं कि आप क्या कहना चाह रहे हैं। मैं बता दूं एक मिनट। रुद्र शब्द वेदों में आ गया। फिर रामपाल ने कहा कि वो जो है गरीबों की मदद करेगा और ऐसी भविष्यवाण मिल जाएगी हमारे शास्त्रों में कि गरीबों की मदद करेगा और ये भी नहीं कि रुद्र ही करेगा। ये भी अलग-अलग दोनों मगर वो भी वहां पर किसी ना किसी तरीके से भगवत भागवत कार्य करने वाला है। ये भी वहां इस आधार पर रामपाल रामपाल कबीर को भगवान घोषित कर लेता है। तो हमें एग्जजेक्टली हमें जब किसी को एज ए टू द पॉइंट एज ए प्रमाण सिद्ध करना है ना तो उसके लिए साफ सुथरे प्रमाण चाहिए। इस तरीके से अपने द्वारा
00:54:23:20 की गई व्याख्या को कनेक्ट करते हुए और जो है प्रभुपाद जी पर लागू हो जाए तो यह सब स्वीकार्य नहीं है। यहां दो चीजें आती है। पहला तो ये कि जनरली हम आप लोग ये कंसीडर करते हैं। आप लोग को ये लगता है कि जो हम प्रमाण देते हैं वो जो है रेफरेंस के साथ नहीं होता। बट जो चैतन्य चरितामृत पर्टिकुलरली ग्रंथ है जनरली जिनको लोग जिनको वो भागवतम से सेक्टेरियन बोल दिया जाता है अलग कर दिया जाता है चैतन्य चरितामृत एक्चुअली स्क्रिप्चर्स के अंदर ही काउंट होगा क्योंकि भागवत या शास्त्र की डेफिनेशन है शास्त्र सम्मत शास्त्र कि शास्त्र सम्मत जो टेक्स्ट होता है यानी जो शास्त्र को कंट्राडिक्ट नहीं कर रहा होता वो शास्त्र भी शास्त्र में काउंट होता है। ठीक है? ठीक है? तो ये आपका ये आपका चैतन चरितामृत को शास्त्र प्रूव करने के लिए है। अब आपने उसको शास्त्र प्रूव कर दिया है। आपकी सारी बातें सिद्ध हो गई। बात खत्म। खत्म हो गया सारा डिफरेंसेस ऑफ ओपिनियंस क्योंकि आपने उसको शास्त्र कह दिया और शास्त्र कौन है? जो शास्त्र के अनुसार चले। और शास्त्र के अनुसार कैसे चलेगा? हमने शास्त्रों की जो व्याख्या की है वो व्याख्या ही मान्य है। दूसरी व्याख्या मान्य
00:55:38:24 नहीं है। शास्त्रों के अनुसार चलना मतलब जो भी आप बताइए आप सभी संप्रदाय को प्रामाणिक मानते हैं। आप ये बताइए मैं मैं पूछ रहा हूं। मैं आपकी बात को काउंटर कर रहा हूं। एक पिछला पॉइंट मिस हो जाएगा। एक पॉइंट को मिस करके फिर हम दूसरे पे जाएंगे ना। तो मैं कहां जा रहा हूं? आप आप जब आपके पास प्रभुपाद जी को वो जो मिनट भाई साहब आपने एक आरोप लगाया है। अब मैं उसको मुझे जवाब देने दीजिए। प्लीज आपने आरोप लगाया मैं दूसरा खोल रहा हूं। दूसरा आप खोल रहे हैं। आपको प्रभुपाद को उस वाले ऊपर वाले बैकुंठ से आना सिद्ध करना था प्रभुपाद जी को। मगर आप नहीं जब कर पा रहे तो अब आप चैतन्य चरितामृत को एज ए शास्त्र यहां पर रख रहे हैं। फिर मैं कहूंगा क्या वल्लभ संप्रदाय आपके द्वारा प्रामाणिक माना जाने वाला संप्रदाय जो है वो चैतन्य चरितामृत को प्रामाणिक मानता है। एज ए संप्रदाय मानता एज ए शास्त्र मानता है। प्रामाणिक शास्त्र मानता है। फिर मैं कहूंगा क्या श्री संप्रदाय मानता है। आप ही अपने ही उसमें फंस जाओगे। मेरे तक तो आना ही नहीं पड़ेगा। इसलिए ऐसी चीजें ना करिए जो अकाट्य ना हो। वही चीजों पे चलिए जो देख सकते हैं आप देखिए मैं आपकी बातें समझ रहा हूं आपने अपनी चीजें तोड़ आपने अपनी चीजें इकट्ठा करके उनके
00:56:53:25 ऐसा लग रहा है मैं मैंने उस शब्द को हटा दिया जब मेरे मुंह से तोड़ निकला उसके बाद मैंने तुरंत रिटर्न गया अपने वाक्य को सुधारते हुए फिर आया ठीक है तो मुझे थोड़ा जब मैं एक एक जो है एक क्या कहते हैं एक एक प्रभा में एक बात बोलने जा रहा होता हूं तो प्लीज आप वहां पे अगर वो कर देंगे ना बीच में क्या कहते हैं उसको अब कर दूंगा बीच में रोक दूंगा कंट्राडिक्ट कर दूंगा कंट्राडिक्ट नहीं उसको कुछ और शब्द कहते हैं मुझे याद नहीं आ रहा है छोड़िए उसको अंग्रेजी में भाड़ में तो मैं ये कह रहा था कि अरे यार हां जब मैं कोई एक सूत्रात्मक शैली में कोई बात बोल रहा हूं तो उसमें आप कोशिश करिए उससे क्या होगा ना हमारी चर्चा थोड़ी सी लोगों समझ में आएगी। हां इंटरप्ट हां इंटरप्ट ये सब लेकिन पीछे ऐसा भी हुआ है ना जिसमें आप भी बीच में टोक देते थे तो उस वजह से वो सूत्रात्मक शैली में आपका क्लेम नहीं होता है वो वो आप कोई जैसे आप मान लीजिए आप कह रहे हो कि मैं भागवतम का एक श्लोक कोट कर रहा हूं। अब मैंने आपसे पूछा कि कौन सा किस मामले में कर रहे हैं? उसकी आवश्यकता है कि नहीं? मुझे बता तो दीजिए। अब आपने कहा कि भक्ति जाएगी। उसमें भक्ति भक्ति जाने का श्लोक जो
00:58:08:26 है प्रस्तुत करने की कोई बात ही नहीं क्योंकि हमें ये प्रूव करना है भक्ति को लेके बैकुंठ वाला जाएगा। तो बैकुंठ जाने वाला वैकुंठ अच्छा भक्ति को ले जाने वाला कोई वैुंठ से गिरता है या नहीं ये प्राइमरी टॉपिक था। हां तो उसके बाद उसके बाद उसके बाद हम प्रमाण पे हम क्यों आए प्रमाण पे इसलिए हम आए थे क्योंकि प्रभुपाद जी वो वाले वो है कि नहीं जो नित्य सिद्ध है और वो जो है अवतरित हुए हैं यहां पर जो है भक्ति को ले जाने वाले के रूप में तो वहां पर भक्ति को ले जाने वाला बैकुंठ से आने वाला नहीं है ठीक है और दूसरा भी आपने रेफरेंस दिया है वो भी प्रभुपाद जी से कनेक्ट नहीं हो रहा फिर जब कनेक्ट जब कनेक्ट नहीं हो रहा है तो आप चैतन्य रेफरेंस है ये वाला रेफरेंस है यही वाला देने वाला था मैं कि आने वाला वैकुंठ पहले मैं बोल रहा था कि पांच टाइप की मुक्ति होती है सारूप्य सालोक्य सानिध्य भाई साहब वो मुक्ति कौन सी है? पहले आप अपनी चीजों को थोड़ा क्लियर कर दीजिए। आप पहले तो ये बता दीजिए वो मुक्ति कौन सी है जो परम है आपके यहां परम टोटल जो मैक्सिमम परम वाली जो मुक्ति है वो है कि भगवान की सेवा भाई साहब नाम बताइए अभी आपने बताया ना मुक्ति कई प्रकार की होती है उसमें से नाम बताइए कौन सी मुक्ति है वो टॉप मोस्ट जो है वो सष्टि जितना एस एस आई
00:59:23:27 रिमेंबर सष्टि बट जो सष्टि सृष्टि भगवान का शास्त्र में शास्त्र में नाम है ये वाली मुक्ति का हां है। हां। ठीक है। अब ये वाली मुक्ति परम मान ली। ठीक है। हां। अब इस इस मुक्ति से अपनी इच्छा के कारण वो आए हैं। प्रभुपाद जी आपके अनुसार प्रपाद जी अपनी इच्छा से आए हैं। वो उनका फॉल डाउन नहीं हुआ। ठीक है। अब आप वो अब आप अब आप मैंने पूछा कि प्रभुपाद जी आए हैं तो इस विषय में शास्त्र का प्रमाण क्या है? तो आप सांकेतिक चीजों को प्रमाण में यूज़ कर रहे हैं। वहां संकेत है। सांकेतिक मान रहे हैं क्योंकि आपने मेरा जो लॉजिकल कॉन्टेक्स्ट था आपने उसको एग्री नहीं किया। एक चीज को तो लॉजिकल कॉन्टेक्स्ट बताइए क्या है आपका? लॉजिकल कॉन्टक्स्ट बताइए आपका। लॉजिकल कॉन्टेक्स्ट ये है कि श्री चैतन्य महाप्रभु हर जगह एस गॉड एक्सेप्टेड है। इसमें कोई डाउट नहीं है। महाभारत में भी एक्सेप्टेड है एस ग और श्री भागवतम में जब आप जब आप चैतन्य महाप्रभु को एज ए प्रूफ रखेंगे तो फिर वहां दिक्कत आएगी कि चैतन महाप्रभु हमारे बीच में नहीं है। उनकी ओर से बोलने वाले दूसरे लोग हैं। जो आपसे भी पहले के हैं उनमें से कई लोग आपको मना कर रहे हैं।
01:00:39:06 वो आपकी बातों का विरोध कर रहे हैं। ठीक है? जो आपसे पहले के हैं गिया वैष्णव इस गडिया वैष्णव से निकला है ना? कर रहे हो अगर तो कर रहे तो इसका मतलब ये है कि चैतन महाप्रभु के रेफरेंस से एक मिनट भाई साहब इसका मतलब ये है कि चैतन महाप्रभु के रेफरेंस से बात करने वाले लोगों में आप यह मान रहे हो कि वो झूठ बोल सकते हैं तो जब एक परिवार कोई झूठ बोल सकता है तो जो आपके पक्ष का है वो भी झूठ बोल सकता है। कहने का मतलब यह है कि वो लोग जो ड गोस्वामी का पालन नहीं कर रहे हैं वो सब झूठ बोल रहे हैं। ड गोस्वामी के सारे गोस्वामी का ज्ञान आपके पास डायरेक्ट आया है क्या? तो आप इससे क्या स्थापित करना चाहते हैं? अगर डायरेक्ट नहीं आया। परंपरा से आया है ना? हां। हां। तो बीच में जो परंपरा से आया है तो बीच वाले जो लोग हैं जिस परंपरा से आपके पास वो आया है उसमें से कुछ लोग आपके भाष्य को मना कर रहे हैं। आपकी चीजों को मना कर रहे हैं। वो जो है पुंडरीिक जी को जानते हैं। पुंडरीिक जी प्रामाणिक है कि अप्रामाणिक है? जनरली हम उनको गोपाल भट्ट गोस्वामी जी की लीन एज में
01:01:54:07 काउंट करते हैं। तो उस नहीं मैं पूछ रहा हूं कि वो स गोस्वामियों की ओर से आया हुआ ज्ञान कोई भी व्यक्ति 100% यस या 100% नो नहीं होता तो कोई फिर धर्म का निर्णय कैसे होगा? क्योंकि एक व्यक्ति को आप नहीं बोल सकते मैं बता रहा हूं ना मैं बता रहा हूं। नहीं होता है तो जो जो व्यक्ति आपको क्लेम कर रहा है जो जिसको जिसको आप सपोर्ट कर रहे हो जिसको आप प्रामाणिक कह रहे हो फिर उसको जाकर के क्लेम करो कि आप ये कैसे कह रहे हो? आप उनका विरोध करो। हम करते हैं। हम करते हैं। कहां कर रहे हो? नहीं अकेले मैंने नहीं बहुत सारे लोगों ने दूसरी बात यह भी आ जाती है कि जो दूसरी बात दूसरी बात ये भी आ जाती है कि पुंडरीिक जी को अप्रामाणिक कुछ बातों में किसने माना है आपके यहां देखो कोई भी व्यक्ति 100% यस मैंने क्या कहा कुछ बातों मैंने क्या कहा मैंने कुछ बातें कहा ना मैंने कहा कुछ बातों में पुंडरीिक जी को अप्रामाणिक किसने माना है आपके यहां
01:03:00:14 कुछ बातों में अप्रमाणिक नहीं मुझे नाम परिकुलर नाम नहीं पता कि किसने माना है बस मैं इतना बता सकता हूं कि जो व्यक्ति रूप गोस्वामी या ड गोस्वामी मेरी बात आप समझ नहीं रहे अगर आप परंपरा प्राप्त प्रमाणिक आचार्य गद्दी पर जो बैठे हैं उनमें भी दोष शास्त्र गद्दी शास्त्र नहीं होती ना मैं गद्दी पर बैठा हूं कोई भी गद्दी पर बैठ सकता है गद्दी शास्त्र ठीक है। शास्त्र शास्त्र है। उसकी प्रमाणिकता कैसे सिद्ध होगी? शास्त्र जो है वो वेदव्यास जी से आ रहे हैं और वेदव्यास जी भगवान के इंकार्नेशन। अरे आपको किसने बताया कि जो छपा हुआ शास्त्र आप पढ़ रहे हो ये शास्त्र अभी चैतन्य महाप्रभु जी की बात कर लेते हैं। चैतन्य महाप्रभु जी को आपने भगवान सिद्ध किया। उसके बाद उनकी कही हुई बातों को उनके शिष्यों ने लिखा और वो वो जो बातें हैं वो आपके पास परंपरा से आ रही है। ठीक है? ठीक है। जी। जी अब जो आप कह रहे हो कि जो गद्दी है वो जरूरी नहीं है 100% सही बात कर रही हो तो जो थोड़ी सी भी गलत बात कर सकती है वो थोड़ी सी भी गलत वाले गलत बात वाले शास्त्र को आपको दे सकती है
01:04:10:21 आपको प्रमाण बुद्धि रखनी होगी उसके प्रति जिससे आपने शास्त्र है सीधी बात और यदि ऐसा है यदि ऐसा है कि कोई भी व्यक्ति 100% नहीं होता है ठीक है तो जितने जीबीसी मेंबर्स है जो आपके धर्म का निर्णय कर रहे हैं। यहीं से बात शुरू हुई थी तो वो सारे नंबर 100% करेक्ट नहीं है। तो फिर इसका मतलब आपके पास 100% सही ज्ञान नहीं है धर्म का। नहीं है। यहां पर अब 100% सही ज्ञान है। मैं बताता हूं कैसे? जीबीसी जो है एक सेल्फ रियलाइज सोल जब सेल्फ रियलाइज नहीं होती है। उसके नीचे की स्टेजेस पे होती है। कोई सोल है जीव है। जब वो सेल्फ रियलाइज नहीं है। यानी उसने कृष्ण का साक्षात दर्शन नहीं किया। जब वो उसके नीचे के लेवल्स पर है तब यानी कनिष्ठ अधिकारी मध्यम अधिकारी उत्तम अधिकारी वाले लेवल्स पर है। उत्तम अधिकारी तो सेल्फ रियलाइज है। कनिष्ठ और मध्यम के लेवल्स पर है। ठीक है? सबसे पहली बात तो यहां पे दिक्कत ये है तब उसको अथॉरिटी नहीं काउंट किया जा सकता। तब उसको अथॉरिटी सबसे पहली बात तो ये है कि आप जो स्वता सुखाय वाली बातें हैं ना उनको सामाजिक समाज के लिए आप एज ए प्रमाण प्रस्तुत कर रहे हो। मैं आपसे कह रहा हूं मैंने जो है भगवान को देख लिया है पर्सनल वाले रूप को अब बताओ मान लोगे नहीं सिम्टम
01:05:25:27 से ये ये जो होता है ना भगवान को सुनो ये जो होता है ना कि भगवान को हमने पर्सनली समझ लिया ये कर लिया ये हमारे अपने इसका सुनिए सुनिए मेरी बात सुन लीजिए मेरे भाई मेरी बात सुन लीजिए मैं बता रहा हूं इसका जो पर्यावसान है वो मेरे आत्म कल्याण में है कि मैं अपने आप में ये जान रहा हूं कि मैंने भगवान को देख लिया या मैं भगवान को जान रहा हूं। इसका इसका यूज़ हम यहां नहीं कर सकते कि क्योंकि मैंने भगवान को देख लिया इसलिए तुम मेरी बात मान लो और मुझे आचार्य स्वीकार कर लो। प्रामाणिक अब मैं बताता हूं कैसे इसका भी समझ लीजिए। इसमें कई बार इसको भी ले आते हैं। इस वाली बात को भी ले आते हैं। जो ब्रह्म ज्ञानी हो गया वो ब्राह्मण हो गया। ठीक है? इसको कहते हैं कर्मणा व्यवस्था। ठीक है? अब दिक्कत यह है कि मैं आपसे यह कह रहा हूं कि मैंने भगवान को जो पर्सनलाइज जो दिखते हैं पर्सनालिटी उनकी जो पर्सनल है वह मैंने देख ली है। आपने तो नहीं देखी है। तभी तो मैं आपको आचार आपको मुझे आचार बनाना है। तो आप इस बात का निर्णय कैसे करेंगे कि मैंने भगवान की सही वाली पर्सनालिटी देखी है कि नहीं देखी है। मुझे पीछे से जब तक मुझे जब तक पीछे से ठप्पा नहीं मिलेगा ना मेरे किसी आचार्य का ऐसे जिसमें आपकी प्रमाण्य बुद्धि हो तब तक मैं ये चीज सिद्धि नहीं कर सकता
01:06:41:01 कि मैंने वही देखा है जो जिसके कारण आप मुझे प्रमाणिक मानोगे तो ये जो चीजें हैं कि मैंने ब्रह्म ज्ञान प्राप्त कर लिया है। इसके आधार पर मेरा स्वाता सुखा है। इसके आधार पर आचार्य नहीं बनता मैं। हां जब कोई गोस्वामी उन्होंने श्री चैतन जब कोई जब कोई शब्द प्रमाण है हमारा जैसे कि क्या कहते हैं अवतार ठीक है भगवान का अवतार है भगवान के अवतार लीला करते हैं बहुत सारी लीलाएं करते हैं मगर राक्षस भी करते हैं भगवान के राक्षस भी दूसरी चमत्कारिक चीजें कर देते तो हम फैसला कैसे करेंगे कि कौन अवतार है कौन नहीं है सीधी बात हमारी तो परंपरा हमारे जो परंपरा प्राप्त आचार्य हैं, शास्त्र है वह यह फैसला करेंगे कि हां भाई यह अवतार है। यह भगवान का अवतार है। ठीक है? वहां पे और कोई लॉजिक चलेगा ही नहीं। इसी प्रकार से मैंने दर्शन किया कि नहीं किया? ये वाली बात आप तय नहीं कर सकते हो क्योंकि आपने तो देखा ही नहीं है कि भगवान कैसे? तो आप कैसे पता लगाओगे कि मैं सच बोल रहा हूं कि झूठ बोल रहा हूं। बताइए। लेकिन जो ड गोस्वामी है ना ड गोस्वामी को श्री चैतन्य महाप्रभु ने एक्सेप्ट किया था एस देयर डिसाइपल अपने शिष्य के रूप में बात हो रही है कि आपके जीबीसी
01:07:56:04 मेंबर्स जो है उनमें भी दोष हो सकता है तो फिर आपका धर्म दोष दोष रहित कैसे जीबीसी मेंबर्स की बात हो रही है यहां जिसको फॉलो कर रहे हैं वो जिसको फॉलो कर रहे हैं वो दोष अरे भाई मैं भी कह रहा हूं मैं फॉलो कर रहा हूं लो मैं भी कह रहा हूं मैं फॉलो कर रहा हूं हां इट डिपेंड्स ऑन ऑफ़ योर फॉलोइंग किसी के कहने से नहीं होगा ना। दूसरी बात वो जिसको फॉलो कर रहे हैं फिर भी तो आप मान रहे हो उनके आचरण से दिखा है सालो कि वो एक भी सेकंड जो है 40 साल से सेवा से अलग नहीं हुए और 40 साल 50 साल से फॉलो कर रहे हैं तो वो अच्छा 40 50 साल से उनकी आपने वीडियो फिल्म देखी है क्या यार्राफी की लोगों ने देखा है अथॉरिटेटिवनेस उनकी भी अथॉरिटीज है उन्होंने भी मेंटोर किया है और बहुत सारे लोगों ने देखा है बहुत सारे लोग साक्षात प्रमाण है साक्षात प्रमाण के लिए जरूरत नहीं पड़ती है अलग से शास्त्र ढूंढने की जो लोग प्रत्यक्ष प्रमाण है वो बहुत सारे प्रत्यक्ष प्रमाण ने खुद देखा है कि ये जो व्यक्ति है 40 साल से स्क्रिप्चर्स को फॉलो कर रहा है अगेंस्ट नहीं गया इसीलिए उस पोजीशन पे बिठाया लेकिन ऐसा कभी भी क्लेम उस व्यक्ति ने भी नहीं किया कि भाई जो मैं बोलूंगा वो मानो वो व्यक्ति हमेशा यही कहेगा जो प्रभुपाद जी या जो शड गोस्वामी कह रहे हैं वो मानो और वो ऐसा क्यों कह रहे हैं वो अरे ये तो ये बात तो जाकिर नायक भी कहता है मेरे भाई एक मिनट एक मिनट
01:09:11:10 मैं पूरा कर लूं वो ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि क्योंकि श्री चैतन्य महाप्रभु के पर्सनल डिसाइपल्स है ड गोस्वामी। श्री चैतन्य महाप्रभु ने ड गोस्वामी की अथॉरिटी को ठप्पा लगाया है। श्री चैतन्य महाप्रभु ने ठप्पा लगाया श गोस्वामी की अथॉरिटी को और श्री चैतन्य महाप्रभु ने ही ठप्पा लगाया है। प्रभुपाद जी की भी अथॉरिटी मोर सेनापति भक्त जो है वो आएगा। देखिए अभी कई बातें हैं। पहली बात तो आपके जो प्रभुपाद जी हैं उनका शास्त्रों से शास्त्रों से जो हमारे आर्ष ग्रंथ है जिनको मैं भी मानू आप भी मानो जो हमारे आर्ष ग्रंथ है जिनमें जिनको लेकर के हम दोनों एक मत है कि हां भागवतम हमारा प्रामाणिक शास्त्र है उन शास्त्रों से आपने उनकी प्रामाणिकता सिद्ध नहीं की। आप पहले चैतन्य महाप्रभु और उनके जो शास्त्र है उनको उनको सिद्ध कर रहे हो। उसके बाद एक भाई साहब एक मिनट भाई साहब एक मिनट तो वो जब जब आप उनकी उसको प्रामाणिक सिद्ध कर रहे हो तो वैसे वो भी हमारे लिए प्रामाणिक स्वीकार करना है ही नहीं। वो इलॉजिकल बात है। फिर भी अगर दुर्जनोष न्याय से हम उसमें आगे फिर उसमें जब हम दुर्जनोष न्याय से आगे बढ़ते हैं। दुर्जनोष न्याय से जब हम आगे बढ़ते हैं तो दुर्जनोष न्याय से जैसे कोई ये कह रहा है कि मैंने
01:10:26:14 चोरी की तो मैंने अपने आप को बता दिया स्वतंत्र रूप से कि ठीक है भाई मैं इस तरह से चोरी नहीं की पर थोड़ी देर के लिए मान लेता हूं कि मैंने चोरी की है। फिर मैं उसके बाद अपनी आर्गुममेंट देता हूं चोरी ना करने के संबंध में। इसको कहते हैं दुर्जंतोष न्याय कि थोड़ी देर के लिए तुम्हारी बात जो मानने लायक नहीं है इलॉजिकल है पहले ही वो काउंटेबल है तो थोड़ी देर के लिए उस बात को भी मान के अब मैं आगे बढ़ रहा हूं तो ये आपकी वो वाली बात है कि अब थोड़ी देर के लिए मान लिया कि चलो चैतन्य महाप्रभु की आपने शास्त्रीयता सिद्ध कर ली और उनका जो चैतन्य चरितामृत शास्त्र है वो हमारे लिए भी प्रामाणिक हो गया जबकि वो आपके ही द्वारा प्रामाणिक माने जाने वाले अन्य संप्रदायों के द्वारा मान्य नहीं है। फिर भी मैंने अभी के लिए उसको मान लिया। फिर भी मैंने अभी के लिए उसको मान लिया फिलहाल। ठीक है? तो अब यह इसको कहते हैं दुर्जनंतोष न्याय कि मैं अब थोड़ी देर के लिए इसको मान के आगे बढ़ता हूं। तो फिर मैं आगे बढ़ता हूं कि ट गोस्वामी ने जो लिखा वो उनके शिष्यों को उन्होंने दिया और फिर उन्होंने जो उन्होंने उस चीज को आगे प्रोसीड किया। ऐसे करते करते आप तक भी आ गया। अब जब आप तक आया है तो आपसे पहले वाले जो लोग हैं पिछली पीढ़ी उसमें से कई लोग हैं जो इस को प्रमाणिक नहीं मान रहे हैं। कुछ लोग होंगे जो मान भी रहे हैं जिनका जिनको आप अपने साथ प्रस्तुत
01:11:41:15 करते हो सार्वजनिक रूप से जैसे कि पुंडरीिक जी वर्णाश्रम व्यवस्था को फॉलो कर रहे हैं। भाई साहब फॉलो करने का क्लेम कर रहे हैं आप। आप अब ये बताइए कि आपको श्रुति शास्त्रों से ये प्राप्त है। ये क्या कहते हैं विष्णु जी की परब्रह्मता आपके पास है श्रुति शास्त्र से? श्रुति शास्त्र वेदास वाले वेदास उपनिषद ब्राह्मण ओके आप नेक्स्ट पॉइंट पे आए हैं तो मैं मैं नेक्स्ट पॉइंट पे नहीं हूं मैं अभी आपको एक प्रैक्टिकल दिखाने वाला हूं आपके पास श्रुति शास्त्रों का कोई क्लेम है कि श्री विष्णु परम है या श्री कृष्ण परम है मेरे पास है पर मैं आपसे पूछ रहा हूँ अच्छा श्रुति शास्त्र का कोई मंत्र जानते हैं श्रुति शास्त्र के मंत्र जो है मैं कम जानता हूं और उसका एक कारण है कि कौन सा मंत्र जानते हैं? कम कम जानता हूं ना के बराबर ही जानता हूं। कोई एक मंत्र बताइए। उसे स्थापित क्या करना चाहते हैं आप? कुछ है मैं बताऊंगा आपको। कोई एक मंत्र बताइए मुझे जो आप जानते हैं। ओम पूर्णमद पूर्णमद
01:12:57:18 पूर्णम। अब ये बताइए श्रुति शास्त्रों में अधिकारी होने के लिए आपने जनेऊ कराया है। एक्सक्टली इसीलिए ज्यादा प्रेफरेंस देते हैं। हम जनेऊ नहीं जनेऊ दिखाइए। जनेऊ दिखाइए। नहीं कराया नहीं कराया। नहीं कराया तो आपने ये मंत्र आपने इसका मतलब अभी अभी शास्त्र विरुद्ध कार्य किया ना हां किया। ये मैं किया ना और ना जाने कितनी बार कर चुकेगे आज से पहले। एग्री बहुत बारी है ना इसका मतलब अभी अभी तक मैं यह देख रहा था कि आप किसी के आचरण से उसको पहचान रहे हैं जबकि आप अपने आचरण को लेकर के साफ सुथरे नहीं है। आपको मना करना था मेरे पास जनेऊ नहीं है। एक मिनट आपको मना करना था मेरे पास जनेऊ नहीं है। मैं नहीं पढ़ सकता। क्योंकि मैं उत्तम अधिकारी नहीं हूं इसलिए मुझसे गलती होती है। ये प्रूफ है। तो जब आपसे गलती होती है तो आपके द्वारा जिसको स्वीकार किया जा रहा है कि उससे गलती नहीं हो सकती। ये कैसे मान लें? एक मिनट एक भाई साहब एक मिनट जिसके प्रामाणिक होने के विषय में आप ही साक्ष्य हो जिसके प्रमाणिक होने के विषय में आप ही साक्ष्य हो साक्ष्य है अरे डीबीसी के मेंबर्स के लिए आप आप बता रहे थे
01:14:12:19 ना बहुत सारे लोग बोलते हैं वो बहुत सारे लोग मिट्टी से शौच करते हैं मालूम है आपको तो वो जो बहुत सारे लोग हैं देखो यहां परसेंटेज ऑफ अथॉरिटी कह सकते हैं। इसको सीधी सी बात है जो उत्तराधिकारी होगा ना उसको पिछले वाले पूर्वाचार्य ने ठूठा गाड़ के बताया हो ये है मेरा उत्तराधिकारी। इसके अलावा और कोई तरीका नहीं है। एक एक मिनट भाई साहब भाई साहब एक मुझे मुझे बोलने दीजिए। इसके अलावा आप ये आचरण वाले तरीके बताएंगे ना तो इसमें इतना तक जाना पड़ेगा कि मैं सोच में भी आपको उनके साथ भेजूंगा। चेक करके आओ चार बार मिट्टी से धो रहे हैं कि नहीं धो रहे हैं। एग्री फिर कर्मों के आधार पे आप कैसे किसी को जज कर सकते हैं? आज उसके कर्म अच्छे हैं। जब वो आपके सामने अच्छे कर्म है दो मिनट जाकर के उससे कोई गलती हो रही है। बताइए क्या कर लेंगे आप? उसकी उसकी लाइफ की कोई फिल्म देख रहे हैं आप तो इसलिए केवल कर्म के आधार पर केवल एक बार दोबारा बोलिए। केवल कर्म के आधार पे नहीं चल सकते। पीछे से क्लेम भी चाहिए कि यह है। उसके बाद उसके थोड़े बहुत जितने कर्म हम देख सकते हैं उनको देख के एक्सेप्टेबल प्रपाद जी ने क्लेम किया है कि जीबीसी ऑथराइज है। बिल्कुल
01:15:27:25 वैसे ही श्री चैतन्य महाप्रभु जो ईश्वर पुरी और ऊपर माधवेंद्र पुरी से आ रहे थे उन्होंने क्लेम किया है कि ये ट गोस्वामी ऑथराइज है। ट गोस्वामी ने क्लेम किया प्रभुपाद ऑथराइज है। तो क्लेम है ना कहां दिक्कत है? स गोस्वामी ने प्रपाद जी को ऑथराइज क्लेम किया है। क्या नाम ले क्या द्वारा स गोस्वामी ने प्रभुपाद जी को नाम ले ऑथराइज किया है। हां मोर सेनापति भक्त आयु तथा डायरेक्टली बोला है नाम लेके भाई साहब अभी आप जीबीसी को जीबीसी को जो कह रहे हैं ना कि जीबीसी जीबीसी को क्लेम किया है। एक व्यक्ति का पर्सनल नाम देना ये जनरली थोड़ा सा प्रैक्टिकल भी नहीं है। तो फिर आप जीबीसी को क्यों बता रहे हैं? जीबीसी का तो नाम लिया ना प्रभुपाद ने। अच्छा अच्छा इसमें एक बात और है। जीबीसी के किसी मेंबर का कभी भी आज तक आचरण बिगड़ा हुआ निकला है कि नहीं निकला है? हां जी दोबारा क्या? जीबीसी के किसी मेंबर का आचरण आज तक बिगड़ा हुआ निकला है कि नहीं निकला है? क्यों नहीं निकलेगा? क्यों? वो जो उत्तम अधिकारी है उसका निकल सकता है। जो उत्तम अधिकारी नहीं है उसका निकल सकता है। लेकिन यहां पर ऑथराइज करने का मतलब ये होता है कि इतने सालों की उसका ट्रस्ट मेंटेन हुआ है। वो ट्रस्ट के बेसिस पे अथॉरिटी क्योंकि उसके अलावा कोई मतलब इसका मतलब आप क्या आप क्या मानते हैं? ये बता दीजिए कि जीबीसी
01:16:43:06 के मेंबर्स आपको गलत मैं एक मिनट मैं पूछ क्या रहा हूं वो सुन लीजिए। डीबीसी के मेंबर्स आपको एज इट इज ज्ञान देंगे प्रभुपाद जी का कि नहीं देंगे? बिल्कुल 100% अपने वो अपने तरफ से 99% प्रयास पूरा करेंगे। लेकिन भाई साहब फिर आपका यही पे तो चूक हो रही है। धर्म में ये सब नहीं होता है ना। 99% नहीं होता है धर्म में। होता है। यही तो दिक्कत है। धर्म में ये सब नहीं होता कि 99% नहीं होता है। लेकिन अगर धर्म धर्म में 99% नहीं होता। पहले मैंने इसीलिए सबसे पहले उत्तम अधिकारी मध्यम अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी बताया क्योंकि उत्तम अधिकारी से गलती नहीं होती। लेकिन उत्तम अधिकारी साहब जीबीसी में उत्तम अधिकारी है क्या? आप मुझे ये आप बार-बार उत्तम उत्तम क्यों करते हैं? आप ये बताइए जीबीसी में कौन है? उत्तम है कि मध्यम है कि कनिष्ठ है? कौन है? मिक्स है उत्तम मध्यम और जो मध्यम को ठीक से फॉलो नहीं करेगा वो कनिष्ठ पे आ जाएगा सिम्टम्स के बेसिस पे तो आपका जो धर्म आ रहा है उत्तम मध्यम और वो कनिष्ठ सबसे मिल के आ रहा है जी और वो तो यानी की उसमें कनिष् की भावनाएं भी है क्या दोबारा एक बार कनिष्ठ की चीजें भी है ना हां है क्या दिक्कत है तो कनिष्ठ से तो गलती होना आप स्वीकार कर रहे हो ना होती है मेरे से भी हुई अभी मैंने
01:17:58:09 पांच मिनट पहले जस्ट एक तो हो सकती मैं तो हो सकती है तो यानी कि आपके पास जो बुक्स आ रही है उसमें गलती छपी हो सकती है ना गलती छपी हो सकती है अगर वो उत्तम अधिकारी के द्वारा नहीं लिखी हुई तब उत्तम अधिकारी आप ये बता दीजिए आप फिर ये क्लियर कर दीजिए कि भैया जीबीसी में ये ये उत्तम अधिकारी है इनसे फिल्टर होके ही कोई बात हम तक आएगी आप क्यों 500 पे जा रहे हैं आप वो 100 बता दीजिए कितने हैं उत्तम अधिकारी कितने हैं मैं कुछ उत्तम अधिकारियों के नाम लेता हूं कुछ नहीं उत्तम अधिकारी एक्सजेक्टली कितने हैं ये पता पता लगाना मुश्किल है क्योंकि
01:18:35:08 वैसे ही जैसे आप यह नहीं पता लगा सकते जैसे कृष्ण ने कृष्ण को किसने देखा है ये पता नहीं लगा सकते नहीं हो सकता तो आपको कैसे पता आपको कैसे पता एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट भाई साहब भाई साहब आप जब अपने धर्म ब्रह्म का निर्णय ले रहे हैं तो आपको कैसे पता कि जब आपको यही नहीं पता है कि उत्तम अधिकारी कौन है तो आपको यह कैसे पता कि वहां से आने वाली जो बात है वो उत्तम अधिकारी से फिल्टर होके आ रही है कि नहीं आ रही है। क्या कंफ्यूजिंग बातें हैं? हां, यहां कंफ्यूजिंग बात ये है कि वी ऑल एक्सेप्ट प्रभुपाद एस उत्तम अधिकारी। ठीक है। फिर वही बात हो गई। अभी प्रभुपाद जी आपके बीच में नहीं है। हां। प्रभुपाद जी के ही नाम से ऐसे लोग मिल जाएंगे जो इस का खंडन कर रहे हैं। हां। तो तो फिर तो प्रभुपाद जी के जो शिष्य हैं वो झूठ बोल सकते हैं। आप खुद मान रहे हो। एक बार दोबारा बोलना। आपने कहा प्रभुपाद जी उत्तम अधिकारी हैं। ठीक है? आपने कहा जीबीसी में 500 मेंबर्स हैं। मैं सबके नाम याद नहीं रख सकता। ठीक है? अब आपने कहा कि जो जीबीसी के मेंबर्स हैं उसमें कनिष्ठ कनिष्ठ अधिकारी भी हैं और मध्यम अधिकारी भी हैं। वह भी अपनी बात कहते हैं। मगर अंतिम
01:19:50:24 रूप से किताब में छपके वही बात आती है जो उत्तम अधिकारी से फ़िल्टर हुई हो। ठीक है? ठीक है? तो अब जब हम ये मान रहे हैं कि उत्तम अधिकारी से फिल्टर हो के ही कोई बात आ रही है तो हमारे पास उत्तम अधिकारी की सूची होनी चाहिए ना जो छपी हो इस की तरफ से पहली बात तो फिर बाद की बात है हम उसप क्लेम करेंगे। पहले आप वो लिस्ट तो बताइए कौन-कौन उत्तम अधिकारी है आपके यहां? हिजोरस गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज कितने पहले एक एक चीज पहले आप बड़े-बड़े क्लेम करिए। पहले कितने हैं ये बताइए। देखो कितने काउंट करना क्योंकि उत्तम अधिकारी के जो सिम्टम्स है ना अगर आप उनको नोटिस करोगे मैं भागवतम यानी कि आपको एक एक के साथ लाइफ बितानी होगी और फिर आप ये चेक करोगे उत्तम अधिकारी है और फिर आप ये चेक करोगे कि जीबीसी जीबीसी एक मिनट भाई साहब एक मिनट एक मिनट फिर आप ये चेक करोगे कि जीबीसी की जो किताबें हैं वो इनसे फिल्टर होके जा रही है कि नहीं जा रही है यस आईडियली तो यही है तो आपने कर लिया क्या जो आप कह रहे हैं आइडियल ही तो यही है। हां जीबीसी की किताबें जो है उत्तम आपने कर लिया आपने वहां के उत्तम अधिकारियों को जांच लिया कौन-कौन है और ये भी जांच लिया कि उनसे फिल्टर हो के किताबें
01:21:06:00 आ रही है कि नहीं आ रही है। बहुत सों को जाता है क्योंकि फिर बहुत सारे भाई साहब धर्म में ऐसा नहीं चलता है। ब्रह्म में अनिर्वचनी आ सकती है। ब्रह्म में अचिंत बातें आ सकती हैं। धर्म में नहीं आती है। नो का मतलब नो होता है। बहन का मतलब बहन होता है। यह धर्म है। धर्म क्लियर होता है। निश्चित होता है। रामो विग्रह धर्म ये मर्यादा लाइन है धर्म। इसके उधर नहीं जाना है। जैसे आप ही ने तो अभी बताया ना कृष्ण को किसने देखा ये पता लगाया नहीं जा सकता। उत्तम अधिकारी वही तो है। तो मैं ये कैसे पता अरे भैया जिस चीज को अच्छा चलो ठीक है। जिस चीज को पता नहीं लगाया जा सकता उसको आप प्रमाण के रूप में कैसे ले रहे हैं? हां सिम्टम्स के तौर पर। कौन से तो फिर सिम्टम्स के तौर पर आप वो सिम्टम्स के द्वारा चेक करके लिस्ट बना के आओ ना मेरे पास एक्सक्टली वो 26 26 डिवाइन क्वालिटीज भगवत गीता में है कुछ सिम्टम्स भागवतम में भी है 26 है डिवाइन इन टोटल डिवाइन क्वालिटीज की लिस्ट है वो भगवत गीता में है भागवतम में है तितवा कार भाई साहब आप आप ना आप गलत जा रहे है मैंने कहा कि जो भी नियमावली है उत्तम भक्त को जान जांचने की वो वो नियमावली अप्लाई करते हुए आपने
01:22:21:06 ये जांच कर ली है उनके साथ में लाइफ बिता के। ये इंडिविजुअल होता है। ये मैनेजमेंट का अधिकार नहीं है। मैं बताता हूं क्यों मैनेज इसका मतलब आपको नहीं पता चल सकता कि आप ये क्लेम नहीं कर सकते कि उत्तम अधिकारी से ही आपकी चीजें आपके पास आ रही है। प्रभुपाद जी की इसीलिए तो हम कर रहे हैं ना प्रभुपाद जी की बुक्स ही डिस्ट्रीब्यूट करते हैं ना मेजरली। यही कारण है हम इंडिविजुअल किसी एक सन्यासी की बुक्स नहीं देते। अक्सर नहीं देते। हम जनरली कोशिश करते हैं प्रभुपाद जी का जो सिद्धांत है वो दे और प्रभुपाद जी जो है अरे भाई साहब फिर आप वही पर जा रहे हो। जनरली हम यही कोशिश करते हैं। प्रभुपाद जी ने ये प्रभुपाद जी सुनिए प्रभुपाद जी ने क्या कहा है ये आपने खुद से नहीं सुना है। आपको उनका कोई शिष्य बता रहा है। प्रभुपाद जी ने ये कहा है। प्रपाद जी की ऑडियो है। अब ये ऑडियो प्रूफ तो है ना। प्रपाद जी की तो डायरेक्ट ऑडियो है। ये तो खुद से भी सुना है। अब ठीक है। उसका जो भाष्य इत्यादि है प्रभुपाद जी की बातों का वो ट्रांसक्रिप्शन है वो वो सब ट्रांसक्रिप्शन है। ट्रांसक्रिप्शन तो समझ सकते तो आप ये बताइए जो ऑडियो अवेलेबल है वो हरे कृष्णा वालों के पास भी है। सबके पास है। ठीक है। तो जब उसको है तो उस ऑडियो मैं
01:23:36:12 आपको यह प्रूफ करना चाह रहा हूं कि ऑडियो होने के बावजूद भी वो जो कहने वाला व्यक्ति है उसकी बातों का अर्थ निकालते समय उसमें मतभेद हो सकता है। उस आदमी की तो हो रहा है तो फिर हम निर्णय कैसे करेंगे? कहां मतभेद हो रहा है? ये पर्टिकुलर केस अरे हरे कृष्णा वालों की आपसे लड़ाई है कि नहीं है? मैं मैं आपको एक प्रायोरिटी देता हूं और मतभेद कैसे सेटल होगा मैं ये बताता हूं। प्रायोरिटी ये है कि देखिए देखिए मैं पहले आप ये बताइए मैं मैं पहले आप पहले आप ये चीज क्लेम करिए कि है कि नहीं है मतभेद ऑडियो होने के बावजूद भी मतभेद है ना मतभेद है और क्लियर कैसे प्रभुपाद जी के प्रामाणिक प्रभुपाद जी के प्रामाणिक शिष्यों के बीच मतभेद है ना ऑडियो होने के बावजूद भी है और क्लियर कैसे होगा ये भी बताता हूं ठीक है क्लियर है मैं उसको बाद की बात करूंगा ना क्लियर कैसे होगा वो ठीक है वो एक अलग बात है वो एक अलग मतभेद है ना मैं ये समझाना चाह रहा हूं देखिए मैं ये समझाना चाह रहा हूं सीधेसीधे दिक्कत ये है क्योंकि टाइम वेस्ट है उधर जाना उसकी आवश्यकता ही नहीं है मैं बता रहा हूं ना मैं बता रहा हूं सीधे-सीधे भगवान भगवान श्री कृष्ण के बोले हुए वचन हमारे पास लिखे
01:24:51:27 हैं जो आप भी मानते हो भगवान कृष्ण के शास्त्र के अंदर खुद मत भेद है शास्त्र के कई मीनिंग है और कई लीनिंग है और वो सब ऐसे ही जब ऐसे ही जब प्रभुपाद जी नहीं रह जाएंगे और उनका ऑडियो रह जाएगा उनकी कही बातों के भी कई मीनिंग है इसीलिए हरे कृष्णा है इसीलिए भी इस बोर है इसीलिए भी इस ये है आपका वाला लेकिन कुछ तो ग्लोबल करेक्ट है ग्लोबली करेक्ट है अरे आप बार-बार अपने पैराटर्स ही चेंज कर रहे हो अभी हम लोग यहां पे अभी हम लोग यहां पे आ चुके हैं मैं आपको दोबारा से वहां पे ले जाता हूं जीबीसी के मेंबर्स उत्तम अधिकारी हैं कि नहीं यह आपने कैसे तय किया और कितने उत्तम अधिकारी हैं और यह कैसे तय किया कि उनसे फिल्टर हो के चीजें आ रही है बताइए। देखो मैक्सिमम उत्तम अधिकारी है ये देखो जिस तरीके से पहले मैंने बताया कि ज्यादा लोग होते हैं तो गलतियां कम होती है। इसको एक मैनेजमेंट अच्छा ठीक है। ये भी ये भी आपका तर्क है जो ज्यादा लोग होते हैं इसको भी कितने ज्यादा लोग होंगे तो गलती गलती नहीं होगी। दो चीजों को अलग करूंगा। एक मिनट मैं कंप्लीट करता हूं। पहले मैं दो चीजों को अलग करूंगा। मैनेजमेंट अलग है। स्पिरिचुअली अपने लिए गुरु चुनना अलग है। इन दोनों को अलग-अलग रखना चाहिए। इसमें बाउंड्री रखनी चाहिए। मैनेजमेंट के
01:26:07:03 अधिकारी हम कोशिश ये पूरा प्रयास करते हैं कि वो स्पिरिचुअली एलिवेटेड हो। प्रयास पूरा रहता है। लेकिन हम ये 100% क्लेम भी नहीं करते। ना वो व्यक्ति एबीसी क्या है? स्पिरिचुअल अधिकारी है कि मैनेजमेंट वाले हैं? मैनेजमेंट अधिकारी। हां तो भैया इतना रायता फैला क्यों रहे हो? इतना रायता क्यों फैला रहे हो? आप आपसे मैंने क्या कहा था? आपका जो परंपरा प्राप्त जो आपका ज्ञान विज्ञान है आज के टाइम में इसका अंतिम निर्णायक कौन है? तो जीबीसी को क्यों लाए? उसको लाओ ना जो स्पिरिचुअल अधिकारी हो। स्पिरिचुअल और मैनेजमेंट स्पिरिचुअल अरे मैनेजमेंट स्पिरिचुअल ही होता है। लेकिन एक व्यक्ति करेगा तो गलती के ज्यादा चांसेस रहेंगे ना। और व्यक्ति हर बात बोल दो। जय गंगे मैया कर दो आप। हर बात बोल दो। पहले आप कह रहे हो कि नहीं जो स्पिरिचुअल अधिकारी है वो अलग है मैनेजमेंट वाले अलग है फिर मैंने कहा कि आप मैनेजमेंट वालों को क्यों लाए एक मिनट भाई साहब एक मिनट फिर मैंने बोला कि आप मैनेजमेंट वालों को क्यों लाए स्पिरिचुअल अधिकारी को क्यों नहीं लाए तो आपने कहा नहीं नहीं वो होते वही वही मैनेजमेंट वाले ही वो होते हैं मगर सब लोग सही नहीं हो सकते उसमें कुछ गलतियां हो सकती है इसलिए वो ज्यादा होने चाहिए हां ऑब्वियसली सही तो हर एक सोसाइटी में ये मैनेजमेंट करने का तरीका है ये इस वर्ल्ड के अंदर मैनेजमेंट करने का तरीका फॉर एग्जांपल
01:27:22:09 यूनिवर्सिटी क्यों होती है? क्योंकि यूनिवर्सिटी में कोई एक टीचर होता है। उसी मैं ज्यादा की बात अभी कर ही नहीं रहा हूं। आप उसको अभी वो तो मैं अभी लूंगा। वो भी आपका काउंटर योग्य है। जो आप ये बात कह रहे हो ना कितने मैं बता देता हूं। अच्छा ये बताइए ये बताइए कि कितने होंगे तो माना जाएगा गलती नहीं होगी। चलिए इसी को देख लेते हैं। 12 प्रभुपाद जी ने 12 बोले। आपके यहां तो 500 है। हां वो 500 वो 500 एक्चुअली गुरु की पदवी पर कौन है और कौन दीक्षा दे देते हैं वो उनके नाम है। वो जीबीसी ने ऑथराइज किए हैं इन टोटल पूरे ऑल ओवर वर्ल्ड 12 है। यानी कि जो आपके अंतिम निर्णायक है वो 12 है। हां। अभी तक आपको मालूम नहीं था ये बात। मुझसे बात करतेकरते पता चल गई। नहीं। तो आपको शुरू में कहना चाहिए था अंतिम निर्णायक 12 है। 500 जीबीसी मेंबर्स आप बोल रहे मुझे पता नहीं है इतने पॉसिबल नहीं है इतने नाम याद होना देखिए बातों को घुमाना पलटना ये सब चीजें हमारी चीजों को बिगाड़ेगा जी शुरू में आपने क्या कहा मैंने क्या कहा था अंतिम निर्णय कौन है आपने सुनिए अब आप सुन लीजिए जरा अपनी बातों से मुकरिए मत आपने शुरू में मैंने कहा अंतिम भाई साहब बीच में मत बोलिए सॉरी सॉरी शुरू में
01:28:37:10 आपने कहा था मैंने जब पूछा अंतिम निर्णायक कौन है आपने कहा जीबीसी तब आपने 12 नहीं बोला बोला। उसके बाद मैंने बोला जीबीसी में कितने मेंबर्स? तो आपने बोला 4500 मैंने कहा कितनों के नाम याद है? आपने कहा सबके नाम याद नहीं कुछ के नाम याद है। कहां कहां चले गए थे 12 मेंबर्स तब? इसमें आपको मैं मैं देखिए थोड़ा सा मेरी शायद वो पिच लाउड हो रही है। मैं आप बहुत सज्जन व्यक्ति हैं। इसके लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूं। मैं यह कह रहा हूं। आप अपने जो आप इस यह चीज सोच के मत चलिए कि मुझे प्रतीक को सही सिद्ध करना है ना। आपको ये सोच के चलना है कि आपको इस को सही सिद्ध करना है। आप इस के प्रति वो रहिए लॉयल जैसे एक भव्य राधा कृष्ण दास आया था। उसने 10 चीजें ऐसी बोली थी उसमें जो इस के विरोध में है। अभी भी बोलता है। अच्छा अभी भी वो करता है। तो वो इस के लिए लॉयल नहीं है। वो अपने उसको स्थापित करना चाहता है। मैं चुप नहीं हो सकता। आप इस पर मत जाइए कि मुझे किसी तरीके से अपनी बात को सेट करना है। जो फंडामेंटल्स है इस के यदि वो आपको मालूम है तो उनके ऊपर बात करिए रखिए नहीं तो आप टॉपिक चेंज करने को बोलिए। ऐसा मत करिए कि जब जो मन में आया बात को पुष्टि करने के लिए कुछ भी बोल दिया। ठीक है? जी जी मैं
01:29:52:21 अब आप अब दोबारा से हम अंतिम निर्णय की बात कर लेते हैं। अंतिम निर्णायक इस का कौन है? फिर से सवाल हां एक बार वो 12 की जस्ट लिस्ट निकाल रहे हैं। हां नहीं नहीं नहीं नहीं एक मिनट मैं लिस्ट पूछूंगा आपसे मैं लिस्ट पूछूंगा आपसे मैं पूछूंगा अभी मैं पूछ रहा हूं कि आप कह रहे हैं कि 12 मेंबर्स हैं ऐसे आप क्लेम कर रहे हैं 12 मेंबर्स ठीक है ये आपके धर्म अब ये तो इसमें तो स्पिरिचुअल मैनेजमेंट वाला लफड़ा नहीं आएगा ना स्पिरिचुअल धर्म के निर्णायक है ना ये आपके हां है ना अरे अरे अरे भाई कंफ्यूज हो क्या हां नहीं नहीं तो तो थोड़ा यार वैसे बोलो वो लक्ष्य मूवी देखी है ऋतिक रोशन की हां हां ठीक है ठीक है वो बोलते है ना धावा तो ऋतिक रोशन की बारी आती है ऋतिक रोशन कहता है दवा तो वो कहता क्या बात है बचपन में मां का दूध नहीं पिया क्या सीने में आग चाहिए आग ठीक है ठीक है कॉन्फिडेंटली अपनी बात बोलिए भाई कॉन्फिडेंटली हां हां हां जिससे की होता क्या है जब आप कॉन्फिडेंटली अपनी बात बोलते हैं तो हम बाद में उस बात को लेके चलते हैं कि ये बात मुकरेगा नहीं और आप लबड़ में कुछ बोलोगे तो उसमें हमें दिक्कत होती है कि अभी इसने ठीक से बाद में कह दे मैंने बोला ही नहीं था तो दिक्कत होती है उसको
01:31:07:27 लेने में। खैर तो मैं ये कह रहा हूं 12 मेंबर्स हैं। ठीक है। अच्छा अब ये बताइए कि आप अभी तक इस को फॉलो कर रहे थे? जी। ठीक है। आपके अंतिम निर्णायक जो 12 मेंबर्स हैं उनके नाम आज तक आपको नहीं पता है। तो आप किसको फॉलो कर रहे हैं? कभी-कभी कभी-कभी बीचबीच में चेंज होते रहते हैं। ठीक है? चेंज होते रहते हैं। ठीक है। मैं इस बात करूंगा। मैं इस पर बात करूंगा। जब आपने जाइन किया उस दिन से ले आज तक आपको पता थे जब तक चेंज नहीं हुए तब तक कि जनरली तो हमारा पहले आकर्षण जो होता है मेरा अगर मैं पर्सनली बताऊं कि जो आकर्षण है वो पहले श्रील प्रभुपाद जी से हुआ ऑब्वियसली प्रभुपाद जी की सोसाइटी है और इस में प्रभुपाद जी के प्रति बहुत फेथ है और जी आपको प्रक जी प्रक जी मैं आपको एक बात बताऊं दुनिया की हर सनातन का प्रचार करने वाली संस्था वो जिसके प्रति हमारी श्रद्धा पहले से है उसको ही ढाल बनाकर अपना रायता
01:32:23:03 परोस रही है। हां ये है। जैसे जैसे मेरी श्रद्धा वेद में है। ठीक है। तो भैया आ गए दयानंद जी। हम वेदों का अर्थ बताएंगे। परंपरा के विरुद्ध जाकर के बताएंगे। पर वेदों का बताएंगे जिससे कि हिंदू अट्रैक्ट हो जाए। फिर गायत्री परिवार वाले आ जाएंगे। हम वेदों का अर्थ बताएंगे। मगर परंपरा से विरुद्ध जाकर के बताएंगे। अरे भैया जिससे शास्त्र हैं जिससे शास्त्र हैं उस उसके अर्थ पर यदि विश्वास नहीं है तो उसके शास्त्र पर विश्वास कैसे और यदि उसके शास्त्र पर विश्वास है तो उसके अर्थ पर विश्वास क्यों नहीं सीधी सी बात खैर तो ये जो क्लेम होता है ये जो क्लेम है आपका ये जो क्लेम है आपका ये जो क्लेम है कि मेरा अट्रैक्शन प्रभुपाद जी की तरफ था वो हो सकता है ठीक है मगर फिर बिना जाने आपको ये नहीं मानना चाहिए था कि मैं प्रमाणिक मेरे साथ एक्चुअली हुआ था। मेरे साथ एक्चुअली हुआ था। ये मेरा पर्सनल है। हां पर्सनल ओपिनियन है ना? यही होने लगता है। यहां पे आने के बाद यही होता है। पर्सनल एक्सपीरियंस पर्सनल एक्सपीरियंस व्यक्ति कुछ कह देता है कि भाई ये मेरा पर्सनल है या का नहीं है। अच्छा जी बताइए। ये वाला ये मेरा पर्सनल एक्सपीरियंस है और वो ये
01:33:38:07 है कि मेरा फेथ प्रभुपाद जी पे था और मैं फिलोसोफिकली नहीं आया था। बस आकर्षण के नजरिए से आया था। लेकिन बाद में फिलोसफी बाद में मैं मेरा घुमा अभी अभी आपने क्लेम किया थोड़ी देर पहले जब इस चर्चा की शुरुआत हुई है आपने कहा बिल्कुल 100% मैं 100% कन्विक्स हुआ फिर मैंने फिलॉसफी पढ़ी तब मैं मैं भाई साहब वो आपकी बातें लूंगा ना मैं किधर जा रहा हूं आप दूसरी ओर जाकर के जवाब देते इसीलिए बीच में मुझे इंटक्ट करना पड़ता है मैं कभी भी विषय से हटता ही नहीं हूं आपको विषय से नहीं हटना पड़ेगा और अगर गलती से वाकलन हो गया। भगवती का वरदान नहीं है मुझे।
01:34:21:27 देखिए की अथॉरिटी पूछ रहे हैं। मैं भी तो ये पूछ सकता हूं ना कि आप लोगों की क्या अथॉरिटी है? मेरा भी तो अधिकार है। आप देखिए ये बात आप अगर शुरू में कहते तो मैं अवश्य इस पर बात करता क्योंकि अपने आप में एक बहुत लंबी चर्चा हो जाएगी। ठीक है? तो चर्चा के मध्य में आ के आप एक नया सवाल डाल के फिर मेरे विषय को जो है जानने का या तो आप शुरू में कहते मैं पूछूंगा आप कह देते कि मैं आपसे पूछने आया हूं ठीक है तो मैं आपसे बात करता हूं उस तरह से अब चर्चा का मध्य चल रहा है मैं मैं एक बात कह रहा था वो मैं पूरी कर लूं मैं एक फनी बात है वो पूरी कर लूं क्या है कि मुझे भगवती का वरदान नहीं प्राप्त है तो मेरे से वाकलन हो जाता है जैसे मैंने हल्का सा बोल दिया तोड़ मरोड़ के आपके लिए कि आप शास्त्रों में तो मैंने तोड़ बोला मुझे याद आया नहीं नहीं इस पे जो है दूसरी तरफ हम जा सकते हैं तोड़ मरोड़ने पे तो मैंने तुरंत पीछे से वो सेंटेंस चालू किया कि मुझे बिल्कुल भी विषय से हटना नहीं है ना कि फिर मुझे वो तोड़ना मरोड़ना सिद्ध करना पड़ जाएगा अगर मैंने बोल दिया तो है ना तो वो जो विषय चल रहा है उसको हां तो मैं इस बात का बहुत ध्यान रखता हूं इस बात का बहुत ध्यान रखता हूं कि हमारी चर्चा भटके ना क्योंकि भटकने
01:35:37:10 के चक्कर में ही दुनिया भर में निष्कर्ष नहीं प्राप्त हो पाते हैं। निष्कर्ष इतना भटक जाता है यहां से यहां यहां से। यहां जो आप दुर्जन तोषणी न्याय के बारे में बात कर रहे थे ना यहां मुख्य रूप से ना गलती उसकी वजह से है। मैं बताता हूं कैसे क्योंकि अब हम अपना क्लेम क्लेम ले आए। एक अपना क्लेम ले आए वापस तो थोड़ा सा प्रकाश आ जाए मामले पे क्या मामला चल रहा है। शुरू में जब मैंने कहा कि प्रारंभिक शुरू में जब मैंने कहा कि प्रारंभिक जब मैंने प्रारंभ में आपसे कहा कि अंतिम निर्णायक इस का कौन है? ठीक है आपने जीबीसी मेंबर्स का मैंने कहा कितने मेंबर्स आपको पता है चार 500 भी हो सकते हैं और गिने नहीं है और नाम सबके याद होना पॉसिबल नहीं है। एक्चुअली मेरे से ही गलती हुई है। वो गुरु चार 500 जो है गुरुज है और 12 जीबीसी मेंबर है। 12 जीबीसी मेंबर ये गुड। तो अब बात ये आती है कि अगर आपसे गलती हुई थी तो वहां पर जैसे आपने फिर ये बताया कि मेरा अट्रैक्शन तो प्रभुपाद जी की तरफ था। ठीक है? जी। ठीक है। उसके बाद फिलोसफी पढ़ी। हां ये भी देखिएगा। आपका अट्रैक्शन प्रभुपाद जी की तरफ था। फिर फिलोसफिकल पढ़ने से आपको ये वो सब हो गया। अब उसमें बात अब उसमें बात ये आती है कि
01:36:52:21 प्रभुपाद जी के जो ये 12 जीबीसी मेंबर्स हैं इनको आपने नहीं जाना था। अगर जानते होते तो शुरू में ही कहते ना कि मेरे अंतिम निर्णायक कौन है? क्या कहते? वैसे मैं हां जान तो मेरे अंतिम निर्णायक कौन है? वो जीबीसी में से किसी को बोलता है। ऐसा कह रहे हैं। आप कहते हैं मेरे अंतिम निर्णायक 12 जीबीसी मेंबर्स हैं। अच्छा अच्छा हां ठीक है। है ना? ये बात ये बात आपको अभी-अभी मालूम पड़ी है ना? हां फिलोसफी पढ़ने के बाद पढ़ी इस के बारे में। नहीं अभी ऑन गोइंग चर्चा में आपको 12 जीबीसी मेंबर्स के बारे में पता चला है कि आपके अंतिम निर्णायक वो है पता था पता था तो फिर आपने वहां क्यों नहीं बोला उनके बारे में मैं माफी चाहता हूं कि उस समय गुरु शब्द और जीबीसी मेंबर्स अच्छा मैंने क्या कहा अंतिम निर्णायक इसमें कौन सी चीज है जो आपको समझ में नहीं आ रही है जीबीसी ही है जीबीसी ही और जीबीसी जो है वो 12 है बाकी जो चार 500 है वो गुरु है और वो दीक्षा दे सकते हैं अब जो 12 है अब जो 12 है अब जो 12 है मैंने कहा कि इन 12 के बारे में आपने जांच पड़ताल के कौन है नहीं की तो आपने कहा कि मैंने इसलिए नहीं की क्योंकि मेरा अट्रैक्शन तो प्रभुपाद जी से
01:38:07:22 था मैंने इस विषय में ज्यादा जानकारी नहीं की यही है ना है ना नहीं मैं एग्री नहीं करूंगा बट मैं मेरा सभी से ही आकर्षण है सभी वालों से आकर्षण है बट पर्टिकुलरली अगर टाइम कंस्ट्रेंट भी देख सकते हैं ना कि मेरी बातों का गलत मतलब समझ रहे आपका फोकस जो था वो उनकी तरफ था। आपके लिए सभी ग्रह हैं। सभी रेस्पेक्टेबल है। मगर आपका फोकस जो है प्रभुपाद जी की ओर था। इस कारण से आपने इसमें रुचि नहीं जताई कि 12 जीबीसी मेंबर्स कौन है। जी ऐसा ही तो ठीक है। ठीक। जी। अब बात ये आती है कि जब आपको यह नहीं पता कि 12 जीबीसी मेंबर्स कौन है उनके नाम तक नहीं पता तो उनके आचरण इत्यादि मालूम होना तो बहुत दूर की बात हो गई। अच्छा ठीक है। अब जब आपको आचरण इत्यादि के बारे में नहीं पता तो आपको उनके नाम पता होने तक प्रभुपाद जी की शिक्षा के विषय में प्रमाण कौन है और वो प्रमाणिक शिक्षा है कि नहीं? ये आप किस आधार से क्लेम कर रहे थे? अभी तक आप अपने आप को प्रमाणिक कैसे मान रहे हैं? जब तक आपको 12 जीबीसी मेंबर्स के बारे में नहीं पता कि वह कौन है? उनके आचरण कैसे हैं।
01:39:24:09 अभी तक मैं प्रमाणिक कैसे मान रहा था? इस को मैं प्रभुपाद जी के बुक्स के बेसिस पर प्रमाणिक मान रहा था। अरे भैया तो आप ये बताइए वो जो बुक्स में लिखा हुआ है पूरा पूरा रिकॉर्ड है क्या ऑडियो में? पूरा पूरा है। क्या दिक्कत है? पूरा रिकॉर्ड भागवतम का पूरा भाष्य रिकॉर्डेड है। हां 12 कहां पे है बताइए? प्रभुपाद जी की श्रीमद् भागवतम का पूरा कमेंट्री है। प्रपाद जी ने इनफ वो ऑडियो रिकॉर्डेड है वो ऑडियो भी रिकॉर्डेड है और पूरा एक एक शब्द जो प्रभुपाद जी के नाम से छपा हुआ है वो सब रिकॉर्डेड है एक्चुअली गलत है श्रीमद् भागवतम के 10थ कैंो तक प्रपाद जी ने शरीर छोड़ दिया था 11 12 जो है वो दूसरा है वो किसी और ने इसका अर्थ है इसका अर्थ है कि आप प्रभुपाद जी के कहने के कारण किसी को प्रमाणिक नहीं मान सकते क्योंकि उनकी सारी सामग्री आपको प्राप्त नहीं है प्रत्यक्ष क्ष रूप से नहीं प्रभुपाद जी ने कहा इसलिए मैं बताता हूं क्यों प्रभुपाद जी ने कहा इसलिए क्योंकि उन्होंने ये नोटिस किया उन्होंने ये बहुत सालों तक ऑब्जर्व किया कि ये लोग शास्त्रों को यानी षड गोस्वामी को कंट्राडिक्ट नहीं कर रहे और मैं ड गोस्वामी
01:40:39:18 को कंट्राडिक्ट नहीं करता तो मैं ऐसे ही व्यक्ति को ट्रस्ट कर सकता हूं जो शड गोस्वामी को कंट्राडिक ना करे तो जो कमेंट्री लिख रहे हैं ना जो व्यक्ति जो दूसरे शिष्यों ने भी लिखी जो थोड़ा सा हेल्प किया ट्रांसलेशन में ट्रांसक्रिप्शन में वो भी इसीलिए किया ऐसे ही किया कि वो ड गोस्वामी की कमेंट्री के बेसिस पे लिख रहे हैं और क्योंकि वो उससे कंट्राडिक्ट नहीं करे अगर आप कंपेयर करेंगे तो हमें पता चलेगा कंट्राडिक्ट नहीं है बिल्कुल सेम है जो इधर लिखा है वही ये इधर लिखा है बस अलग लैंग्वेज में लिखा है ताकि लोगों को आसानी है समझ आ जाए इंग्लिश में लिखा है बस ऐसा क्योंकि यानी कि हम ये समझ सकते हैं एक मिनट हम ये समझ सकते हैं कि क्योंकि वो ड गोस्वामियों की कमेंट एंट्री एज इट इज करके दे रहे हैं। इसलिए आपको उन पर भरोसा है। अच्छा इसका मतलब है कि सड गोस्वामी होगा। यही तो वो बात है जो मैं सबको कहना चाहता हूं। जब हम किसी के ज्ञान के आधार पर जब हम किसी के ज्ञान के आधार पर उसकी प्रमाणिकता को जांचते हैं। ज्ञान के आधार पर पीछे से क्लेम नहीं है। ज्ञान के आधार पर। ठीक है? तो जब हम किसी के ज्ञान के आधार पर उसकी प्रमाणिकता की जांच करते हैं तो अगर हम किसी की परीक्षा ले रहे हैं इसका मतलब है कि जिस विषय में हम उसकी परीक्षा ले रहे हैं उस विषय में हम पारंगत हैं।
01:41:54:28 यानी कि षट गोस्वामियों ने क्या कहा है ये आपको पहले से पता होना चाहिए। तभी तो आप ये समझ पाएंगे कि उन्होंने ट गोस्वामियों का विरोध किया है कि नहीं किया है। देखिए बुक्स उनकी भी डायरेक्टली छपी हुई है। बुक्स भाई साहब बुक्स तो वेद भी है। मेरी बात सुनिए। बुक्स तो वेद भी है। आर्य समाज भी वेद का अर्थ कर रहा है। तो आर्य समाज को अपना लेंगे आप। क्या निकालना चाहते हैं आप इससे? ये निकालना चाहता हूं कि इस आधार पर तो हम किसी को प्रमाणिक मान ही नहीं सकते कि वो षट गोस्वामी के विरोध में नहीं जा रहा है। क्यों नहीं मान सकते? क्योंकि षट गोस्वामियों का अर्थ हमें स्वतंत्र रूप से मालूम नहीं है। हम तो उन्हीं के द्वारा उनहीं पे आश्रित है। ड गोस्वामियों के अर्थ जानने के लिए हम उनहीं पे आश्रित है। और फिर उनहीं वो षड गोस्वामियों के आधार पर हम उनको जज कर रहे हैं। हां मैं बहुत डीप में समझ गया। मैं बहुत डीप में समझ गया। मैं इसका आंसर देता हूं। इसका आंसर एक्चुअली है मैं आपका बहुत डीप में समझ गया। और ये बहुत एक्चुअली करेक्ट लॉजिक है। इसका आंसर है कि शास्त्रों में जब कंट्राडिक्शन होती है ना एक जगह और दूसरी जगह की तो वहां पर एक जगह ऐसी भी होती है उन्हीं शास्त्रों में जो हमें थोड़ा ढूंढना पड़ेगा। जहां पर प्रायोरिटी भी लिखी होती है कि दो से तीन चीजों में जब कंट्राडिक्शन हो तो इनमें से किसी को चूज करने के लिए वो रूल्स क्या है? वो
01:43:10:00 रूल्स एक प्रायोरिटी की लिस्ट होती है कि पहले इसको प्रायोरिटी मिलनी चाहिए फिर इसको फिर इसको फिर इसको जो उस प्रायोरिटी की लिस्ट को कंट्राडिक्ट करता है या तोड़ देता है या गलत कर देता है वो प्रायोरिटी की लिस्ट को तो वो गलत कंक्लूजन पे तो वो डेविएट हो जाता है एक्चुअल फिलोसफी से वो प्रायोरिटी कहांहां है मैं बताता हूं एग्जांपल्स देता हूं फॉर एग्जांपल जनरली लोग एक मिनट एक मिनट कंट्राडिक्शन की बात नहीं हो रही है हां बात हो रही है ना कंट्राडिक्शन की बात ही नहीं हो रही है। बात हो रही है। पहली बात तो यह जो आपने लॉजिक दिया है ना प्रायोरिटी वाला यह भी ध्वस्त हो जाएगा। ये भी ध्वस्त हो जाएगा। वो वो मैं करना नहीं चाहता। फिर विषय बदल जाएगा। अभी मैं दूसरी बात कर रहा हूं कि बात ये नहीं हो रही है कि कंट्राडिक्शन है कि नहीं शास्त्र में। बातें हो रही है कि यदि आप जो आपके जीबीसी मेंबर्स हैं वो ड गोस्वामियों को फॉलो कर रहे हैं कि नहीं कर रहे हैं। इस आधार पर उन्हें एक मिनट इस आधार पर उन्हें यदि आप प्रमाणिक समझ रहे हैं। इसका मतलब है कि षट गोस्वामियों का ज्ञान डायरेक्ट आपके पास है। आपने उनसे नहीं लिया है। ये आपके पास है और तब एक मिनट तब आप ये देख रहे हैं कि ये षट गोस्वामियों के आधार पर बोल रहे हैं कि नहीं
01:44:25:01 बोल रहे हैं। और जब स गोस्वामियों का ज्ञान आपके पास ऑलरेडी है उनकी जरूरत क्या है? जीबीसी मेंबर्स की जरूरत क्या है? से तो कोई भी शिष्य टीचर को कभी जज ही नहीं कर सकता। मैं किसी स्कूल में कभी जज ही नहीं कर सकता। नहीं कर सकता पॉइंट। दैट्स द पॉइंट। नहीं कर सकता। उसको पीछे से ठप्पा चाहिए। उसको पीछे से ठप्पा चाहिए। ये शंकराचार्य बनेगा। ये मधवाचार्य बनेगा। उसको पीछे से ठप्पा चाहिए। जज नहीं कर सकता। को दिया ना किसको? भक्ति सिद्धांत ठाकुर प्रपाद जी ने प्रभुपाद को दिया उनके गुरु गौरवी दास मैं मान लेता हूं इनको भी मान लेता हूं सब मान लेता हूं दुरजंतोष न्याय से मगर आपने कहा कि प्रभुपाद जी ने ये कहा कि सद गोस्वामियों के विरोध में जो नहीं जाएगा वो आपके लिए प्रामाणिक है ना या मैं एक चीज थोड़ी सी करेक्ट करूंगा कि मत मानिए आप एक्चुअल में फैक्ट देखिए फैक्ट उससे हमारी चर्चा का विषय विषय होता चला जाएगा ना उसमें टाइम जाएगा जो जो मूल एजेंडा चल रहा है यहां पे वो वो काफी दूर चले जाते हैं जैसे मान लीजिए कि हम लोगों को कश्मीर से कन्याकुमारी जाना है हिमसागर एक्सप्रेस में हिमसागर एक चलती है कश्मीर से कन्याकुमारी तक उसमें जाना
01:45:40:07 है रास्ते में गुजरात की तरफ मुड़ गई गाड़ी रास्ते में जो है उड़ीसा की तरफ मुड़ गई गाड़ी तो ये ठीक नहीं है उससे हमारी यात्रा वो जो जा रहे हैं ना हम लोग कन्याकुमारी की ओर वो जो है विषयंतर के कारण उसमें विलंब हो रहा है जो अभी भीष्ट फल है उसकी प्राप्ति में देर होगी। तो कहने का मतलब ये है कि प्रभुपाद जी ने यदि ये कहा है कि ड गोस्वामियों के विरोध में यदि ये नहीं जाए तो फिर आप ये मान लेना कि ये प्रामाणिक है। तो ये तो ये बहुत ही इलॉजिकल बात है। ठीक है? जी। क्योंकि षड गोस्वामियों के विरोध में कौन जा रहा है, कौन नहीं जा रहा है, यह फैसला आप कर ही नहीं सकते क्योंकि षड गोस्वामियों के ज्ञान के लिए आप स्वयं उन पर निर्भर है। जीबीसी के मेंबर्स पर मान लो 100% नहीं कर सकता। मान लो 100% नहीं कर सकता पर 100% तो कोई भी नहीं कर सकता। देखा जाए तो इसका नहीं देखिए दूसरे देखिए देखिए देखिए दूसरे के गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता आपने क्या कहा था मेरा जो है बिल्कुल प्रामाणिक ज्ञान है 100% 100% मेरे जितने आज तक मैंने अपनी पर्सनल एक्सपीरियंस से जितने आज तक एक-एक प्रूफ स्टडी किए हैं उन प्रूफ्स में मुझे आज तक एक भी कंट्राडिक्शन नहीं मिला। अरे मेरे
01:46:55:25 मेरे भैया समझ क्यों नहीं रहे हो स गोस्वामी मान लीजिए मैं मैं आपको एक उदाहरण देता हूं मैं उदाहरण देता हूं उससे समझ लेना ठीक है स गोस्वामी ने एक बात लिखी है नारायण मैं बात समझा दूं मैं एक बात समझ देखिए ज्ञान को देखिए आप समझे नहीं वो ये कहना चाह रहे हैं कि मान लीजिए आपको पता है कि 2 2 4 होता है पता है ये बात जानते हैं आपको इस बात का ज्ञान है ये मुझसे ज्ञान है ना मुझसे नहीं नहीं प्रक जी से कह रहा हूं। है ना? हां आपसे कह रहा हूं। तो अब मान लीजिए कि आपको ये टेस्ट करना है। शिवा जी को टेस्ट करना है कि उनको 2 2 आता है कि नहीं। ठीक है। तो मान लीजिए कि उन्होंने बोल दिया कि 2 2 3 होता है। बहुत अच्छा लॉजिक है। तो आप क्या कहेंगे? सही है कि गलत? हां। मैं इसका इसका एक्चुअली मेरे पास आंसर है ये। अभी अभी थोड़ा सा टू द पॉइंट आंसर दे दीजिए ना। उससे चीजें क्लियर हो जाएगी। वो सही बोल रहे हैं। जो चीजें मैं अरे आप ये आंसर दीजिए जब मैं आपको 2 2 3 बोलूंगा तो आप मना करोगे ना मुझे हां ऑब्वियसली क्योंकि उसकी क्योंकि आपको पता था 2 प्लस टू फोर है ठीक है अब जिस विषय में आपको पता
01:48:10:26 ही नहीं है कि 2 प्लस टू क्या होता है उस विषय में तो आप मेरे ऊपर डिपेंड करेंगे ना मेरा जज कैसे करेंगे नहीं पता है मान लो मुझे 20% पता है मान लो मुझे 30% क्योंकि मुझे 30% पता है। मैंने उस 30% को टेस्ट किया। इसीलिए मैंने वो 30% 100 वो 30% में 100% सही निकला। मैंने एक्सेप्ट किया मुझे मुझे मुझे मेरे पास है। अच्छा है। मैं इनहीं का 2 प्लस टू से दे देता हूं मैं। 2 2 3 है। आपको पता है आपको एडिशन आता है। ठीक है? सुनिए सुनिए। जी श्वेता जी आप जो है ना इनको मैथमेटिक का उदाहरण मत दीजिए। आप इनको ऐतिहासिक उदाहरण दीजिए के उसका नाम राम था। राम मतलब जिसमें सिर्फ शब्द प्रमाण होता है उसमें और कुछ नहीं होता गिनती भी नहीं इसलिए क्या है कि मैथ को मैथ को मैं इसलिए ला रहा हूं ताकि इनको समझने में आसान हो जाएगा और मतलब बहुत ही लॉजिकल बात चली जाएगी ठीक है अब आपको अब आपको पता है कि 2 2 4 होता है जानते हैं इसका मतलब आपको ज्ञान है कि दो नंबर को जोड़ना कैसे आता है। ठीक। ठीक है। मान लीजिए मान लीजिए कि आपको ये नहीं पता। सुन रहे हैं आप मेरी बात? हां हां। हां। मान लीजिए आपको मान लीजिए आपको ये नहीं पता
01:49:25:27 कि हम माइनस कैसे करते हैं या डिवाइड कैसे करते हैं। हां। ठीक। क्योंकि आपने टेस्ट कर लिया कि इनको 2 2 4 आता है शिवश को। तो अब मैं इनसे डिवीजन सीख सकता हूं। करेक्ट? हां। आया ना? ठीक है? अब मान लीजिए आपने इनसे हां आप मान लीजिए आपने इनसे पूछा 2 बाय टू क्या होता है? तो इन्होंने उत्तर दे दिया फाइव और असल में उसका उत्तर वन होना चाहिए। मेरी बात समझ में आई? तो अब आप ये कैसे डिसाइड करेंगे कि वो 30% ज्ञान से जो आपने टेस्ट किया था तो बाकी बच्चा हुआ 70% ज्ञान भी सही दे रहे हैं। हां मैं इसमें बताता हूं कैसे करूंगा। जी आपने बहुत बढ़िया पॉइंट बोला मगर मैं कहूंगा कि आप आप दर्शक ही देख नहीं तो लोगों को लगेगा कि भाई दोद लोग वो कर रहे हैं तो बिल्कुल सही क्वेश्चन बिल्कुल सही है मैं मेरे पास आंसर भी है इसका आंसर है जो लोग क्लेम कर रहे हैं ना जो लोग क्लेम कर रहे हैं कि मुझे आता है उन सबकी एक मैं लिस्ट बनाऊंगा ठीक है उन सबकी लिस्ट में से मैं वेरीफाई करूंगा कि मोस्ट ऑथराइज्ड कौन सा है यानी मोस्ट लॉजिकल रूल्स को एग्री एग्री करने वाला कौन सा है? मुझे अभी क्या पता है? मुझे अभी प्लस पता है। है ना? अब प्लस मान लो 10 लोग क्लेम
01:50:40:28 कर रहे हैं कि हमें प्लस देखो साबित कर दिया। सही है? तो अ मैं डिवीजन भी करके दिखाऊंगा। और 10 लोगों ने अलग-अलग आंसर निकाल दिए। तो अब मैं वो व्यक्ति जो उस डिवीजन को करने के लिए एग्जैक्ट आंसर बता रहा है कि मैंने ऐसा क्यों किया? उस क्यों किया को मैं जज करूंगा। उन 10 व्यक्तियों के क्यों को मैं जज करूंगा। और वो क्यों जो है उस क्यों वो जो क्यों लॉजिकली सबसे ज्यादा एप्रोप्रियट होगा उसको मैं चुन लूंगा और मैंने चुन लिया अब आप मत बोलिए अब आप मत बोलिए नहीं तो बहुत ज्यादा दूर लंबी दूर चली जाएगी सुनिए मुझे बोलने दो मेरे भाई जिन विषयों में शब्द ही प्रमाण है उन विषयों में आप अपने स्ववेक से निर्णय ले ही नहीं सकते अच्छा आपके पास ये जो धर्म है ना ब्रह्म को प्राप्त करना ये अती्द्रिय विषय होता है। इसमें आपका सुन मैं मैं बता रहा हूं कैसे है। मैं बता रहा हूं कैसे आप इसमें अपना सेल्फ लॉजिक लगाएंगे। आप अपना सेल्फ लॉजिक लगाएंगे और सेल्फ लॉजिक लगा करके उससे देखेंगे कि भैया कौन सी चीज मेरे को आत्म संतुष्टि पहुंचा रही है। वही सही होगा। ठीक है? तो एक यहां मैं एक डिसए्रीमेंट करता हूं। यहां अतींद्रियम के शब्द के मीनिंग पे डिसएग्रीमेंट है। आपका अतींद्रियम का जो मीनिंग है ना
01:51:56:00 वो ये है कि इंद्रियों के परे है तो इंद्रियों में आ ही नहीं सकता। मेरा अ्द्रम का मीनिंग वो नहीं है। हालांकि अरे भाई ये हमारा विषय है ही नहीं। मैं बता रहा हूं। ये हमारा विषय है ही नहीं। मैं बता रहा हूं। गायत्री मंत्र से मोक्ष मिलता है। अच्छा ये अती्द्रिय विषय है कि नहीं है? यानी इंद्रियों के परे अभी अभी मैंने एक्सपीरियंस नहीं किया। लेकिन जब मैं एक्सपीरियंस कर लूंगा। मोक्ष की जो स्थिति है उसमें केवल शब्द प्रमाण है मेरे भाई। हरे कृष्णा से मोक्ष मिलेगा। इसमें शब्द प्रमाण है। इसमें इंद्रियों की गति नहीं है। इसमें शास्त्र का शब्द ही प्रमाण है। और नहीं तो क्यों हम लोग वेदों पर वो मरे पड़े हैं सब लोग। धर्म जो है उसके कई चीजें अंद्रिय विषय है। उसमें आपने सेल्फ लॉजिक्स नहीं लगा सकते। एक हद तक कुछ चीजें कर सकते हैं मगर सेल्फ लॉजिक नहीं लगा सकते। तो जहां पे शब्द ही प्रमाण है। जैसे कि मैं आपको समझाने का प्रयास करता हूं। जैसे मेरी ये देख रहे हैं आप बगलबंदी। तो वैसे मैं आपको एक मिनट मैं मैं समझा रहा हूं आपको ये बगलबंदी देख रहे हैं बगलबंदी देख रहे है ना ये बगलबंदी ये रेड कलर ये अच्छा जी देख रहा हूं इसके कलर के विषय में
01:53:11:06 आंख ही प्रमाण है हां ठीक है अब मैं कहूं कि मैं भैया कान से पता लगाऊंगा इसका कलर क्या है वो पॉसिबल नहीं है तो वो वो ठीक बात है क्या इसी तरीके से जो ब्रह्म को प्राप्त कराने वाली नियमावली है हां हां इसमें शब्द ही प्रमाण है। इसमें हमारा अपना एक्सपीरियंस प्रमाण नहीं है। मैंने तो मना ही नहीं किया। तो आप कह रहे हो ना बात सुनिए तो मैं आपको बता रहा हूं। पूरा पूरा बता रहा हूं। आपने अब कहा कि मैं अपने लॉजिक से पता लगाऊंगा कौन किसकी बात ज्यादा सही बैठ रही है। आपने लॉजिक से अरे भैया तो शास्त्रों का मीनिंग तो आपको स्वयं से पता नहीं है ना। वो तो उसके लिए तो आप परंपरा पे डिपेंड कर रहे हो ना। अभी तो परंपरा पे आप जज कर रहे हो यहां दोनों का आपको शास्त्रों का जो मीनिंग आपको शास्त्रों का जो मीनिंग है वो स्वयं से ज्ञात नहीं हो सकता है वो किसी गुरु से ही प्राप्त हो सकता है ना मैं इसमें एक शब्द प्रयोग करूंगा वो है लीस्ट कंट्राडिक्टिव एक्सप्लेनेशन सबसे कम कंट्राडिक्शन लाने वाला यानी कंट्राडिक्शन तो खैर सबको पता ही होगा सबसे कम विरोधाभास लाने वाला जो एक्सप्लेनेशन है या ना
01:54:26:12 विरो विरोधाभास लाने वाला जो एक्सप्लेनेशन है मैं उसको सही मानूंगा दोबारा और ये कहां लिखा है ये प्रूव बाय कंट्राडिक्शन तो खैर मैथमेटिकल भी होता है और नहीं नहीं मैथमेटिकल नहीं अब इसमें भी शास्त्र प्रमाण दे दीजिए ना कि जिसमें सबसे ज्यादा कम कंट्राडिक्शन हां हां ये लीस्ट वाला हमारे पास तो है जब दो श्रुतियां आपसी विरोध में हो ना दोनों को मानो मनुस्मृति दो 14 बिल्कुल सही है लेकिन उसमें एक प्रायोरिटी होती है उसमें प्रायोरिटी कहां लिखी है? कहां लिखी है? बताता हूं। जैसे फॉर एग्जांपल चाणक्य नहीं अभी आप शास्त्र का प्रमाण दीजिए। कहां लिखा है आपकी ये जो डेफिनेशन है? लीस्ट क्या था? लीस्ट कंट्राडिक्शन क्या था? एक्सप्लेनेशन। लीस्ट कंट्राडिक्टिव एक्सप्लेनेशन। देखो ये तो खैर बहुत ज्यादा लॉजिकली है कि जिसके जिसके पास सबसे ज्यादा आंसर है और जिसके आंसर जो है वो आपस में विरोधाभास नहीं कर रहे।
01:55:23:13 यानी कि कुल मिलाकर के जिसके आंसर्स बहुत ज्यादा विरोधाभास नहीं कर रहे हैं। उस उसका आपको जो है वो उसको आप प्रमाणिक मानेंगे। ठीक है? इसको ले लो। ना के बराबर कर रहे हैं। हां ठीक है। ठीक है। एक तरीके से ये कर लिया। तो आपने देख लिया कि उनके जीबीसी मेंबर्स के कौन-कौन से लोग हैं जिनके बहुत ज्यादा वो नहीं कर रहे। ये जांच कर ली आपने। हां। तो इसके लिए आपने वेदाद शास्त्रों का अध्ययन करना पड़ेगा। मैं मान लो 100% नहीं कर पाया वही अगेन वही चीज आती है 30% अरे भैया तो जब आपने कुछ भी 100% किया ही नहीं है तो किसी को अपना 100% निर्णायक कैसे मान रहे हो ये क्या बात हुई सर इस तरीके से तो पूरी दुनिया में कोई भी निर्णायक नहीं हो सकता इस बिल्कुल है जब जब हम शब्द को जब अपने लॉजिक हटा के शब्द को प्रमाण मानेंगे तो बिल्कुल निर्णायक हो जाएगा शब्द को फिर आपने क्यों माना शब्द को इसलिए माना शब्द को इसलिए माना कि किसी ने हमको वो दी नास्तिक लोग तो यही कहते हैं कि उसी में लिखा है और आपने मान लिया। शब्द को इसलिए हमने माना क्योंकि उसमें जो चीज वेरीाईबल थी वो सही थी। जो चीज वेरीिफायबल नहीं थी वो वेरीाएबल वाली सही थी। इसलिए हमने शब्द को किस लिए माना पे अगर आप जाएंगे तो सबसे पहली
01:56:38:14 बात तो आप वेद के बाहर जा रहे हैं। पहले तो हम ये मान ले। नहीं शब्द प्रमाण खुद में लिखा है कि शब्द को हम क्यों मानते हैं? इसलिए मानते हैं क्योंकि हम वैदिक हैं। हमारा वैदिक होने का मतलब ही है कि हम वेदों को मानने वाले हैं। अगर आप इस पर क्लेम करेंगे तो आप वेदों पर क्लेम कर रहे हैं। हां हम वैदिक है लेकिन आप आप वेदों के विरुद्ध क्लेम कर रहे हैं ना वेदों को क्यों माने? पहले तो इस पे जाइए फिर हम आपको बताएंगे वेदों को क्यों माने? हां हम वैदिक हैं लेकिन शरीर से तो कोई होता नहीं है। मान लो कोई व्यक्ति कोई दूसरे मैं ये नहीं कह रहा। मैं आपको एक्सप्लेनेशन दूंगा। हमको वेद को क्यों मानना है? मैं आपको एक्सप्लेनेशन दूंगा। पर आपको पहले ये कहना पड़ेगा भैया फिर तो मैं वेदों को भी कह दूंगा कि वेद के हम विरोधी हैं। आपको ये कहना पड़ेगा। दोबारा
01:57:26:28 मैं नहीं बोल रहा हूं। एक्चुअली मैं इसलिए बोल चलिए मैं थोड़ा सा मैं थोड़ा सा और दोबारा क्लिटी पे ले आता हूं बात को। जैसे मान लीजिए कि आपके स गोस्वामी ने लिखा कि तीन बेर खाती थी वह तीन बेर खाती है। ठीक है? इसमें बेर शब्द दो बार आ रहा है। ठीक है? अच्छा। अब आपको यह नहीं पता है कि इन्होंने दोनों बार वेद शब्द का उपयोग किस अर्थ में किया है। ठीक है? तो जीबीसी के मेंबर आपको श गोस्वामी की इस बात का अर्थ सही बता रहे हैं कि नहीं बता रहे हैं। इसके लिए आपके पास लॉजिक ये है कि उन्होंने क्योंकि 70% अर्थ सही बताए हैं। 70% अर्थ उन्होंने हां। 70% अर्थ उन्होंने सही बताए हैं। इसलिए आप ये मान रहे हो। ठीक है? हां वो जो 70% जाएगी ना मेरी नॉलेज भी उधर तक ही जाएगी मान लो मेरी इंटेलिजेंस है उसकी भी एक लिमिटेशन है ना मैं मैं कह रहा हूं 70 मैं कह रहा हूं उन्होंने 70% क्योंकि सही बताए हैं इसलिए आप उनकी इस बात को मान लोगे जो भी वो बताएंगे बेर के बारे में ठीक है पहली बात तो ये है कि ये कहां लिखा हुआ है कि जो 70% बात सही करे उसकी बाकी की 30% बातें मान्य
01:58:42:09 हो जाएंगी दूसरी बात ये है दूसरी बात ये है कि वो जो 70% की आपने जांच की है कि उन्होंने सही बोला है कि नहीं बोला है वो जांच आपने किस आधार पे की है? हां जो दूसरी बात है मैं वो पहले बोलूं थोड़ा सा फनी लग रहा था लेकिन फिर भी जो दूसरी बात है वो पहले बोलूंगा कि जो 70% है उसकी जांच मैंने इस आधार पे की है कि कुछ एक्सेप्टेड फैक्ट्स होते हैं जो कभी कंट्राडिक्ट नहीं किए जा सकते दोबारा। कुछ एक्सेप्टेड फैक्ट्स होते हैं जिनको कभी कंट्राडिक्ट किया जा ही नहीं सकता। उनकी कोई कंट्राडिक्शन होती ही नहीं है वैलिड। ठीक है? उन जैसे फैक्ट की एक लिस्ट होती है। फॉर एग्जांपल मोरली मैं मोरली मैं अगर बोलूं जस्टिस राइट सनराइज इन द ईस्ट हां या सन राइज इन द ईस्ट ये एक्सेप्टेड फैक्ट है और इसमें कोई कंट्राडिक्शन किया ही नहीं जा सकता। ऐसे कुछ लिस्ट ऑफ एक्सेप्टेड फैक्ट्स होते हैं। या फॉर एग्जांपल अगर साइंटिफिकली बोला जाए स्पीड ऑफ़ लाइट इज़ 3 10 रे टू पावर 8 मीटर पर सेकंड। यह एक फैक्ट है और किसी ने और पांच छ लोगों ने इसको कैलकुलेशन किया अलग-अलग तरीकों से और पांच छह अलग-अलग लोग अलग-अलग जगह पर सेम रिजल्ट पे आए। इसीलिए ये एक्सेप्टेड
01:59:57:18 फैक्ट हमने एक्सेप्ट कर लिया। है लेकिन ये एक्सेप्टेड फैक्ट और ये एक्सेप्टेड फैक्ट एक बार मुझे पता चल गया तो अब मैं क्या बोलूंगा कि अब जो मुझे व्यक्ति बताएगा कि स्पीड ऑफ लाइट इसके अलावा कुछ है। मैं उसकी नहीं मानूंगा। क्यों? क्योंकि वो एक व्यक्ति है और मैंने 10 व्यक्ति जो अलग-अलग रिजल्ट कर रहे थे उन उनकी अथॉरिटी से एक्सेप्ट किया है। और लास्ट में मैं वैदिक स्ट्रिप्चर को क्यों मान रहा हूं? क्योंकि सेम रीज़न मुझे वैदिक स्ट्रिप्चर से मिलता है। अथर्ववेद में एच सी वर्मा मैंने मतलब 11थ में बुक पढ़ी थी। एच सी वर्मा में डायरेक्टली स्पेशल थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी के चैप्टर में लिखा है कि स्पीड ऑफ लाइट अथर्ववेद में वैल्यू लिखी हुई है।
02:00:38:02 हो गया। योजन की जो डेफिनेशन होती है वो होती है। हां जी। हम तो इसीलिए को एक्सेप्ट करते हैं। ठीक है? अभी सबसे पहली बात तो ये है कि जो एक्सेप्टेड फैक्ट्स आप बता रहे हैं ये आप मटेरियलिस्टिक चीजों के लिए बता रहे हैं जिसमें प्रत्यक्ष चीजें प्रमाण होती है। ठीक है? इनकी तुलना आप किन विषयों से कर रहे हैं? जैसे मैं जस्टिस मुझे प्यारा है। ठीक है? जस्टिस होना चाहिए। तो ये एक्सेप्टेड फैक्ट क्यों है? क्योंकि हमारी जो वैसे तो कई लोग इसको भी काउंटर कर देंगे मगर फिर भी चर्चा का वो ना बदले इसलिए मैं आपको फिलहाल जो है मान ले रहा हूं इस बात को कई लोग कह देंगे नहीं नहीं नहीं जिसकी लाठी उसकी भैंस भाड़ में गया अनजस्टिस बोलते हैं लोग हां बोलते हैं नहीं तो वो वो फिर चीज अलग हो जाएगी मगर मैं अभी फिलहाल आपको कह रहा हूं कि एक्सेप्टेड है आप आपकी अंतरात्मा क्योंकि एक्सेप्ट कर रही है तो आपने एक्सेप्टेड फैक्ट कुल मिला के बात यही है ना कि आपने जीबीसी के मेंबर्स को उस आधार पर जांचा जो आधार आपको खुद के ज्ञान से मालूम था। सभी खुद की नॉलेज दिक्कत ये
02:01:53:03 है कि वो आप पहले कह रहे थे कि शास्त्रों का अर्थ मैंने देखा कि वो 70% मैच नहीं कर मैच कर रहा था इसलिए मैंने 30% मान लिया। नहीं जब मैंने 70% शास्त्रों की बात करते करते अपने सेल्फ मटेरियलिस्टिक ऑब्जेक्ट उस पे आ गए। ऑब्जरवेशन मैंने शास्त्रों पे विश्वास इसलिए सुनिए मैं वही तो कह रहा हूं शास्त्रों का अर्थ शास्त्रों के अर्थ में जज आप नहीं कर सकते उनको क्योंकि शास्त्रों का अर्थ आपको उन्हीं से प्राप्त हो रहा है मेरे भाई शास्त्रों के अर्थ में आप उनको कंपेयर भी तो किया जितनी तक मेरी इंटेलिजेंस जाती थी मैंने कंपेयर भी तो किया अगर मैं एनालिस्ट करूं तो फॉर एग्जांपल अद्वैत फिलोसफी से आपने शंकराचार्य को शंकराचार्य को आपने कर लिया जितना मैक्सिमम मेरी इंटेलिजेंस आती थी उतना ऐसे नहीं होता है ना जितना मैक्सिमम अगर उसके बाद की चीज अगर उसके बाद की चीज से आपकी चीज कट गई तो एक्चुअली मैं बताता हूं ये क्या होता है ऐसे ही होता है कोई भी किसी चीज पे बिलीव करता है आपका बिलीव सिस्टम जो है वो एक कागज है। मेरा बिलीव सिस्टम वो एक कागज है। आपने अपने जितनी नॉलेज हो सकती थी उसके बेसिस पर उस कागज पे कुछ फैक्ट्स लिख दिए कि मैं मानता हूं मैं इसी को फॉलो करूंगा पूरी लाइफ और मैंने अपने पे लिख दिए। फिर हम दोनों मिले कभी और हमने एक
02:03:08:07 दूसरे से शेयर करे। अगर हम दोनों ऑनेस्ट है। अगर हम दोनों व्यक्ति ऑनेस्ट है तो आप में से और मुझ में से वो व्यक्ति एक्सेप्ट करेगा कि हां यार मेरा वाला जो है ना वो कम एक्यूरेट था। तुम्हारा वाला जो है ना वो इन रूल्स की वजह से ज्यादा एक्यूरेट है। फिर हम शेयर करेंगे। शेयर करने के बाद शास्त्रार्थ में ऐसे ही तो होता है। शेयर करने के बाद में पता चलेगा और हम उसी कंक्लूजन पे आ जाएंगे। मुझे आज तक अपने एक्सपीरियंस में कोई व्यक्ति बोला मिला ही नहीं जो प्रभुपाद जी को कंट्राडिक्ट कर पाया हो। उनके सारे शास्त्र एक्सप्लेनेशन के प्रभुपाद जी की प्रभुपाद जी की बुक्स जो आपको उनसे प्राप्त हुई है जीव गोस्वामी जीबीसी से जो प्राप्त हुई है उनको कोई कंट्राडिक्ट नहीं कर पाया इसलिए आप ये मान रहे हो कि भाई मेरे लिए वही प्रमाण है। फिर भी इसमें चूक हो सकती है कि वो हो सकता है गलत बोल रहे हो। इसमें स्पेस है कैसे वो अरे वो गलत जो चीजें मैं एक्सेप्ट करता था और वो कभी गलत नहीं हो सकती और उन्होंने भी गलत नहीं बोली और आपने कहा आज तक मुझे ऐसा नहीं मिला कोई जो उनको कंट्राडिक्ट कर सके यानी कि मिल जाएगा तो आप मान लोगे ना हां अगर मिलेगा तो मैं मानूंगा मगर आज तो मिला ही नहीं मैंने जितना को टेस्ट किया तो मिला ही नहीं तो अभी आपका फेथ क्या है फेथ क्या है आपका फेथ क्या
02:04:23:10 है प्रामाणिक है कि नहीं है मेरा फथ देखो मेरा फेथ 100% प्रमाणिक है लेकिन एक जीव की एक लिमिटेशन होती है। फॉर एक्स की मैं आपको बता रहा हूं। आपने कहा 100% आपका चीजें प्रामाणिक है। ठीक है? अब जो चीजें आपको मिल रही है मैं अभी इस पे नहीं जा रहा हूं कि वो वेद का अर्थ है कि नहीं। वो गीता का अर्थ है कि नहीं। मैं इस पे नहीं जा रहा हूं। मैं अभी जा रहा हूं कि प्रभुपाद जी ने बोला है जो ट गोस्वामियों के विरोध में नहीं जाएगा। वो प्रामाणिक है। ठीक है? ठीक है जो प्रपाद जी ने बोला कि प्रपाद जी ने बोला है जो ट गोस्वामियों के विरोध में नहीं जाएगा वो प्रामाणिक है ठीक है अच्छा अब जो ड गोस्वामियों के विरोध में नहीं जाएगा तो हमको ये कैसे पता लगेगा कि षट गोस्वामी ने बोला क्या है जिससे कि हम ये जज कर पाए कि वो ड गोस्वामी के विरोध में जा रहा है कि नहीं जा रहा है अब अब इसमें दिक्कत यह आती है अब आपने बताया कि मैं अपने सेल्फ रियलाइजेशन से पता करूंगा। ठीक है। ठीक है ना? अपने सेल्फ मेरे पास कुछ लिस्ट ऑफ़ फैक्ट्स हैं। आप अपने स्व विवेक से ये तय करेंगे कि स गोस्वामी ने बोला क्या था कि उसके विरोध में वो जा रहे हैं कि नहीं जा रहे हैं। ठीक है? मैथमेटिकल कैलकुलेशन भी दे सकता हूं मैं कि मेरे पास मान लो 10 फैक्ट्स है वो कभी गलत
02:05:38:12 नहीं होते और वो कोई एक भी व्यक्ति अगर मुझे मिल गया कि उन 10 में से कोई एक उसने गलत बोल दिया कि ये वाला गलत है और मुझे 100% पता है मैंने बहुत सारे सोर्सेस से पता किया है ये सही ही है और वो एक व्यक्ति गलत अच्छा अब आप ये बता दीजिए कि ये जो आप थ्योरी बता रहे हैं आपकी क्योंकि ये जो आपकी थ्योरी है मेरे विरुद्ध जा रही है तो मैं इसमें आपसे शास्त्रीय प्रमाण मांग रहा हूं ये दे दीजिए मुझे ये जो थ्योरी है इसको कहते कहते हैं असेंडिंग नॉलेज और डिसेंडिंग का प्रमाण ये है शास्त्रीय प्रमाण ये है कि शास्त्रीय कहते हैं वेद जो है वो हमारे मदर की तरह है वेद जो है वो हमारे मदर की तरह है और भगवान जो है श्री कृष्ण जो है वो हमारे फादर की तरह ठीक है तो हम वेदों को एक्सेप्ट इसलिए करते हैं क्योंकि वेदों की उत्पत्ति हमसे पहले हुई लेकिन यहां दिक्कत आती है अगर फिजिकली देखा जाए तो बहुत सारे लोगों की हमसे से पहले उत्पत्ति हुई तो हमें कंपैरिजन करना पड़ता है। ठीक है? समझ पा रहे हो ना? बहुत सारे लोगों की हमसे पहले उत्पत्ति हुई। अगर मैं इसी बॉडी के अंदर देखूं इसीलिए मुझे कंपैरिजन करना पड़ा। वैसे शास्त्र बोलते हैं कि उनको मदर की तरह मानो और मदर बोलती है कि फादर ये है तो आपको मानना पड़ेगा क्योंकि मदर ने देखा
02:06:53:15 है कि फादर कौन है। मदर को पता है कि फादर कौन है। हम तो जज नहीं कर सकते। मैं पास्ट में जा नहीं सकता। कैसे अब तो आपने मेरी बात कर दी। कि आपको पता ही नहीं है कि फादर कौन है। वह मदर ही बताएगी। तो फिर आप फादर वो सही बता रहा है। सामने वाला फादर सही बता रहा है कि नहीं बता रहा है। इस आधार पे उसको मदर कैसे मान सकते हो? मैं इसी जब आप जब आप जब आप फादर को जानने के विषय में मदर पर ही आश्रित हो तो फादर को जानने के आधार पर मदर को मदर कैसे मान रहे हो? मदर को मदर तो स्वतंत्र रूप से मानना पड़ेगा ना। फादर को जानने के आधार पे नहीं। आपको बताया ना मैं स्वतंत्र रूप से ही इस कंक्लूजन पे पहुंचा कि शास्त्र सही है और फिर इस कौन सही है कंपेयरिंग फिलोसफीस ऑफ अदर्स देन प्रभुपाद सही है उनकी सारी बुक्स में कभी कंट्राडिक्शन नहीं मिला देन जीबीसी मेंबर्स सही है देन जीबीसी मेंबर्स सही है क्योंकि श्रील प्रभुपाद ने बोला है कि जीबीसी मेंबर्स को मैं मानता हूं अथॉरिटी लेकिन प्रभुपाद ने कभी भी ये नहीं बोला कि जीबीसी मेंबर्स को कुछ जीबीसी मेंबर्स सन्यासी नहीं भी है पॉसिबल है तो तो ऐसे गृहस्थ है तो और कुछ मेंबर्स जो है वो गुरु अपने आप को नहीं एक्सेप्ट करते।
02:08:08:16 लेकिन इसका मतलब ये मैंने अभी देखिए मैंने अभी क्या कहा? हमारी अभी बात कहां से चल रही थी? हमारी बात ये चल रही है कि आप मुझे शास्त्र के प्रमाण देने वाले हैं इस विषय में कि उनको आप प्रमाणिक जो मान रहे हो अपनी जो आपने थ्योरी बताई है उसके आधार पे। तो वो थ्योरी का शास्त्रीय कुछ रेफरेंस मैं एक मिनट इसको इंग्लिश में इसका शब्द जानता हूं। असेंडिंग नॉलेज मैं इसका रेफरेंस 2 मिनट्स में आपको देता हूं। ठीक है? आप सही क्वेश्चन पे एक मिनट आ सकते हैं। इसको खोल दीजिएगा यार मम्मा वेट कर बोल दिया टेस्ट चल रहा है। अच्छा बाकी आज ऑडियो
02:08:56:16 नहीं है ओके। सेंडिंग नॉलेज शास्त्र प्रमाण एंड डिफरेंट टाइप्स ऑफ प्रूफ्स डिफरेंट टाइप्स ऑफ प्रमाण शास्त्र आप ये कर सकते हैं सर्च की कौन-कौन से टाइप ऑफ प्रमाण है शास्त्रों में तो वो सारे प्रमाणों की अगर आप लिस्ट देख तो उनमें से एक ये भी है जो असेंडिंग नॉलेज है मैं एक मिनट बस वो उसका शास्त्रीय प्रमाण भी लाता हूं जी असेंडिंग नॉलेज आपको मिल जाएगा। हां मैं वैदिक स्ट्रिप्चर के वो भी एक्चुअली रेफरेंस भी देख रहा था। भाई ये स्पिरिचुअल विंग्स वाले बहुत परेशान हो रहे हैं। ये तू तड़ाक में बोल भी रहे हैं। तो इनको मैं कह दूं भाई आपकी माताजी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है। तो आप अपना चेहरा लेकर के सामने आए। हमारा नंबर दिया गया है 740830
02:09:55:06 18869 पर आप WhatsApp करिए अपना थोपड़ा वहां पर भेजिए और फिर हम आपके साथ आमने सामने बैठकर के बात करेंगे वरना स्पिरिचुअल विंग्स की बजाय अपने लिए चिकन विंग्स लिख लीजिए नाम में और लोगों को लोगों का आहार बनिए ठीक है वैसे ये जो क्वेश्चन आया ना कि आप शास्त्र को क्यों एक्सेप्ट कर रहे हैं? यह वाला जो क्वेश्चन है पर्टिकुलर यह बिल्कुल उसी की तरह है जो आप कह रहे हैं कि आप इस को क्यों एक्सेप्ट कर रहे हैं? इस इन दोनों क्वेश्चंस को आप कंपेयर कीजिएगा। ठीक है? मैं अगर इस में ही पैदा हुआ होता जो कि मैं नहीं हुआ हूं। अगर मैं इस में ही किसी व्यक्ति के यहां देखिए मैं मैं दूसरी ओर जा रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं कि जिन जिस विषय में आप सामने वाले पर ही आधारित है आश्रित है। जैसे आपने कहा ना कि मदर मदर ये बताएगी पिता कौन है? अब आप कह रहे हो कि मैं मदर पिता का नाम सही बता रही है कि नहीं बता रही इस आधार पर मदर को मदर मान रहा हूं। आप खुद ही अपनी बात को ब्रेक कर रहे हो। मैं इस आधार पे नहीं मान रहा। मैं इस आधार पे मदर को मदर मान रहा हूं क्योंकि उन्होंने पूरी लाइफ मुझे पोषित किया है और मैं पूरी लाइफ उन्हीं पे ही निर्भर रहा हूं। अपने रिसोर्सेज के लिए ठीक है तो
02:11:10:09 आपके जीबीसी मेंबर्स जो है वो आपको पोषित करने वाले हैं पूरी एक्चुअली वो स्पिरिचुअली और फिलोसफिकली हमें पोषित कर रहे हैं मैनेजमेंट के नजरिए से पूरी जीबीसी में आपकी एक तरीके से आस्था है आपकी आस्था है आपके पास लॉजिक और नहीं है इसमें आस्था नहीं है इसमें फैक्ट है फैक्ट ये है कि मैनेजमेंट वाली जो जो जीबीसी है उन्होंने सेवा की है माता ने पुत्र की सेवा की है और वो सेवा ही अपने आप में सबूत है कि उस पुत्र ने माता की बात मानी। वो जो सेवा की अमाउंट है उन्होंने उनकी सेवा की है। उन्होंने उनकी सेवा की है इसलिए सिद्ध होता है। एक मिनट मैं जरा लिख लू इस बात को आप क्या क्लेम कर रहे हैं। एक मिनट
02:12:02:12 ये एक्चुअली ये वाला जो चैप्टर है इस चैप्टर पे बहुत विधिवत तरीके से कभी बात हुई नहीं। किसी व्यक्ति से अच्छा तो आपसे इसलिए हो रही है तो अब आनंद भी आ रहा है। हां थोड़ा लेट हो गया है। वैसे एक तो उन्होंने सेवक सेवा की है। ठीक है। एक ये है कि वो जो ज्ञान दे रहे हैं वो अकाट्य है। ठीक है? हां। जो ज्ञान दे रहे हैं वो अकाट्य है। आप आज तक देखा नहीं कि किसी ने उनके ज्ञान को काट दिया। खैर यह तो अकाट वाली बात तो मेरे लिए सबसे इजी है। खैर फिर भी अभी एक तो उन्होंने सेवा की है और दूसरा और क्या बताया आपने? आप जितने आर्गुममेंट्स देंगे मैं काट सकता हूं। हां हां सेवा की है और सेवा किस-किस सेंस में की है? सेवा अगला बताइए। सेवा छोड़ दीजिए। रिसोर्सेज मिले हैं। वो सेवा का ही एक्सपेंशन हो सकता है। मैं बताता हूं कैसे। नहीं नहीं सेवा की है इतना काफी है उसमें उसमें किसी भी तरह से सेवा की हो सेवा की है उन्होंने और कोई उनको प्रमाण मानने एक हां उन्होंने आपका पोषण किया है हां पोषण किया है आपका पोषण किया है और हां
02:13:18:16 इनमें से सबसे ज्यादा जो इंपॉर्टेंट वाला है वो नॉन कंट्राडिक्टिव ही है यानी कि वो अकाट्य वाला कारण अकाट वाला ठीक है ठीक है क्योंकि वो अकाट्य ज्ञान दे रहे हैं इसलिए इसलिए इसलिए वो दोनों की है इसलिए मैं सुन भी रहा हूं और अकाट है इसलिए मैं कंटिन्यूस फॉलो भी कर रहा हूं। ठीक है। ठीक है। वो अकाट है इसलिए आप वो कर रहे हैं। ठीक है। तो आपकी प्रमाणिकता की यही है कि कोई उसको चैलेंज नहीं कर पाया। बस क्योंकि ये जो बाकी के दो है सेवा की है और उन्होंने आपका पोषण किया है। इसको मैं काट सकता हूं तुरंत। इसको मैं काट सकता हूं तुरंत। ये बिल्कुल भी लॉजिकल चीज है। सेवा की है। यह कहीं नहीं लिखा है कि किसी ने किसी की अगर सेवा की है तो वो उसके द्वारा कही जाने वाले बातों को एज इट इज देगा। यह कहीं नहीं लिखा है। ठीक है। एक और बार अगर किसी ने किसी की सेवा की है तो उसके द्वारा कही गई बातों को वो व्यक्ति वैसा ही बताएगा जैसा उसने कहा था। कहीं नहीं लिखा है। ये भी ठीक है। हमारी मदद भी जो होती है वो उन्होंने हमारी सेवा की। लेकिन ये आपका अपना अपना उनको मानने के लिए अपने आप लॉजिक दे रहे हैं। मगर ये लॉजिक जो है ये वाला जो सेवा की है इसलिए वो प्रमाणिक है। इसलिए सेवा करने के
02:14:34:12 दूसरी बात आप जरा आप जरा इस प्रकाश डाल दीजिए कि उन्होंने आपका पोषण किया है। सेवा तो सेवा तो काट दिया ना कि सेवा को रखूं। इनमें सबसे ज्यादा जरूरी जो है वो अकाट्य और अकाट पे आ रहे हैं। अकाट पे आ रहे हैं कुल मिलाकर के। ठीक है? शब्द प्रमाण की बात खत्म हो गई क्योंकि शब्द प्रमाण वो है जो अकाट्य हो। ठीक है ना? हां। मैंने इसलिए प्रपाद जी को फॉलो किया क्योंकि आज तक मुझे कोई काट्य नहीं मिला। सिंपल। ठीक। ठीक। चलो अब ये थोड़ा सा पोषण वाले पे आप बता दो जरा मुझे क्या है? आप प्रकाश डाल दो अब। पोषण वाला ठीक है। कई बार अगर अगर मैं इस एग्जांपल की डीप में जाऊं तो कोई और भी पोषण करते हैं। लेकिन सत्य की जो प्रायोरिटी है वो पोषण से ज्यादा ही होती है। फॉर एग्जांपल अरे भाई मुझे थोड़ा सा बताओ आपने उनको उन्होंने आपको खिलाया पिलाया तब आपने उनको प्रमाणिक माना या प्रामाणिक मानने के बाद उन्होंने आपको खिलाया पिलाया? उन्होंने मुझे खिलाया पिलाया इसीलिए मैंने उनको सुना।
02:15:38:26 वरना वरना मैं उनको मिशनरी भी ऐसे ही करते हैं। वो आदमी व्यक्ति उनको सुनता है। हां फिर मैंने उनको सुना और क्योंकि मैंने उनको सुना और मुझे वो पता लगा कि वो अकाट है। हां और पता लगा कि वो अकाट है। इसीलिए एक्सेप्ट किया। अगर वो खिलाते जाते तो शायद मैं सुनता नहीं। ये भी एक है रीज़। ठीक है। ठीक है। अब आप मुझे बता दीजिए कि ईश्वर है एक सिद्ध कैसे होता है? बहुत इजी है। अरे सिंपल अगर मैं ईश्वर सिद्ध कैसे होते हैं? तो लॉजिक से अप्रोच करें तो सिद्ध लॉजिक से ही करना पड़ेगा ना क्योंकि शब्द शब्द तो वही मानना है जो अकाट से होगा। हां। तो नेचर के जो लॉस है बहुत स्पेसिफिक है। नेचर के लॉस बहुत स्पेसिफिक है। आप वैल्यूस देखो जो वैल्यूस हम एक्सेप्ट करते हैं। मैं उस ईश्वर की बात कर रहा हूं जो हमारा अंतिम गंतव्य है। अंतिम विकल्प है। मैं उनकी बात कर रहा हूं और केवल इस रूप में नहीं इस रूप में नहीं कि इस संसार को बनाया है तो इसलिए ईश्वर है तो अब उसकी पूजा करो। उसकी पूजा करना भी सिद्ध करना होगा कि उसकी पूजा करना आवश्यक है। उस तक पहुंचना आवश्यक है। हां
02:16:54:00 बिल्कुल आवश्यक है। देखो अच्छा तो जो ईश्वर है वो एक्सिस्ट करते हैं। इसका सबसे बड़ा प्रूफ है कि नेचर के लॉस बहुत स्पेसिफिक है। लॉस ऑफ नेचर आर वेरी स्पेसिफिक। अ और एक और प्रूफ है जिसको हम कहते हैं कॉज ऑफ कॉजेस आर्गुमेंट या कॉजलल आर्गुमेंट। बहुत फेमस सर्व कारणम ठीक है तो मैंने आपको क्या कहा मैंने आपको कहा कि अगर इस दुनिया में कोई एलन मस्क है जो बहुत अमीर व्यक्ति है यदि मेरा उससे कनेक्शन ये सिद्ध नहीं हो रहा है तो मेरा ईश्वर नहीं है कि मुझे उसको प्राप्त करना है उसकी पूजा करनी है उसको जाना है आपकी जो डेफिनेशन है ना ये वाली जो डेफिनेशन है इससे वो आपका गंतव्य सिद्ध नहीं हो रहा उसको गंतव्य के रूप में स्थापित करना है आपको अच्छा ये साबित करना है कि ईश्वर मेरा गंतव्य है। बहुत इजी है। देखो अगर भगवान ने भगवान ने नेचर के लॉस को बनाया इसका मतलब ये होता है कि भगवान इंटेलिजेंट है। इससे ये प्रूफ होता है। नेचर के लॉस बहुत स्पेसिफिक है। इससे ये प्रूफ होता है। जैसे
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02:18:07:18 मैंने पहला बोला ना नेचर के लॉस बहुत स्पेसिफिक है। उससे ठीक है। इंटेलिजेंट है। मान लिया। हां। भगवान बहुत इंटेलिजेंट है और अगर भगवान बहुत इंटेलिजेंट है तो इन्होंने इस पूरे यूनिवर्स को किसी पपस से बनाया। ठीक है? ठीक है? यानी कि भगवान का कारण है उसको बनाने का संसार को बनाने की। यानी हां संसार को उनका बनाने का कुछ कारण है। क्यों? भगवान को आवश्यकता है संसार बनाने की। हां भगवान को आवश्यकता है संसार बनाने की। ये सच है और वो आवश्यक है। मतलब वो पूर्ण नहीं है। वो पूर्ण नहीं है। भगवान पूर्ण होते हुए भी आवश्यक है क्योंकि जो पूर्ण है इस पूर्ण पूर्ण है उसको किसी चीज का अभाव नहीं होता ना। हां लेकिन जो पूर्ण है वो अपनी पूर्णता के अंदर ही यानी वो अपनी पूर्णता को अपने अंदर ही पूर्ण कर सकता है ना। फॉर एग्जांपल कि अगर भगवान पूर्ण है। ठीक है? उनको बाहर से किसी एक्सटर्नल चीज की नहीं जरूरत। इसका मतलब है पूर्ण होने का मतलब वो अपने अंदर ही वो सेल्फ सेटिस्फाइड जिसको कहते हैं। बाहर से एक्सटर्नल किसी चीज को नहीं जरूरत। यह पूर्ण का शब्द का मतलब है। लेकिन खुद के अंदर तो सेटिस्फाइड ही है ना। यानी वो अपनी ही एनर्जी बनाते हैं।
02:19:22:19 ये जो वर्ल्ड है दुनिया बनाने दुनिया बनाए बिना वो सेल्फ सेटिस्फाइड है कि नहीं? है। लेकिन दुनिया बनाने में दुनिया बनाने में कोई एक्सटर्नल चीज इनवॉल्व नहीं थी। उनके अंदर से ही दुनिया निकली और वो उनके अंदर से दुनिया निकल के उन्हीं की सेवा कर रही है। ठीक है? इसीलिए मैं कह रहा हूं आवश्यकता थी कि नहीं? मैं ये पूछ रहा हूं आवश्यकता है कि नहीं? आप कंधे से वो हाथ डाल लीजिए भाई साहब बगल वाले। हां दोबारा आप ये बता रहे हैं कि भगवान की आवश्यकता है कि नहीं? हां। हां बिल्कुल है। क्योंकि भगवान ने हमें भी किसी कारण से बनाया क्योंकि वो इंटेलिजेंट है। बिना कारण के तो कुछ करते नहीं। ठीक है? उन्होंने अगर हमें किसी मैं आपसे पूछ रहा हूं। मैंने आपसे पूछा आपने कहा सृष्टि बनाए बिना उनको सेटिस्फाइड थे तो फिर सृष्टि बनाने का कारण क्या रह गया? या तो वो सेटिस्फाइड नहीं है। अगर हम ये अस्यूम करें कि भगवान सारा काम करके अगर हम ये अस्यूम करें कि भगवान को सृष्टि बनाने की जरूरत नहीं है सेटिस्फाई होने की तो यह भी भगवान के अंदर एक कमी हो जाएगी। क्यों ये ध्यान से सुनिएगा क्योंकि हम ये उन पर एक अवरोध लगा
02:20:37:25 रहे हैं और वो मैंने नहीं कहा मैंने नहीं कहा कि वो बनाएंगे ही नहीं अवरोध नहीं लगा रहा हूं मैं पूछ रहा हूं सृष्टि के बिना यदि वो पूर्ण है वो संतुष्ट है तो वो सृष्टि बना क्यों रहे हैं मेरे पास इसका उत्तर है आपके पास है कि नहीं कभी नहीं बनाते मेरे पास भी इसका उत्तर है वो कभी मैं कहां कह रहा हूं मैं कह रहा हूं बना क्यों रहे हैं आवश्यकता क्यों कह रहे हैं आप आवश्यकता पे ही तो बुद्ध ने खंडन किया है आपको पता है बुद्ध ने किस आधार पे खंडन किया है सनातन का किस आधार पे जो हमने यह कहा कि आवश्यकता है जो आपने ये फैलाया आवश्यकता है ईश्वर को यदि आवश्यकता हो जाएगी तो ईश्वर सच्चिदानंद कहां से रह जाएगा भाई हां लेकिन ईश्वर को अगर आवश्यकता नहीं रहेगी यहां पर है कि ईश्वर में कोई कमी नहीं है ये आप मानते हैं ना ईश्वर में कभी कोई कमी नहीं हो सकती इसका तो कोई खंडन नहीं है अगर मैं ये मानू कि भगवान ऐसी कोई चीज नहीं है पूरी दुनिया में जिसकी भगवान को आवश्यकता नहीं है तो भी ये भी तो एक कमी हुई ध्यान से सुनिएगा अगर ये मानू ऐसी कोई चीज ही नहीं है पूरी दुनिया में जिसकी भगवान को आवश्यकता नहीं है ये भी तो एक कमी हुई कमी ये कमी कहां है ये कमी कहां है भाई मैं स्वयं ही स्वयं में वो हूं स्थित प्रज्ञ हूं ये कमी कहां है
02:21:53:08 पहली बात तो ये है पहली बात तो ये है कि आपको अगर किसी चीज की जरूरत है आप ये मान रहे हैं आप ये मान रहे तो आप कहो ना कि हां आवश्यकता है आप ये मानो ना
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02:22:04:28 एक्सटर्नल की है ना इसलिए है यदि आवश्यकता मान रहे हो तो फिर उसको पूर्ण कैसे कह रहे हो देखो मैं आपको डायग्राम से समझाता हूं कंप्लीट शब्द का मतलब क्या होता है कंप्लीट शब्द का मतलब होता है मतलब आप ये कह रहे हो कि कंप्लीट होते हुए भी उसको आवश्यकता है। हां मैं बताता हूं कैसे कंप्लीट शब्द का मतलब होता है कि उसमें आवश्यकता है और आवश्यकता नहीं है। ये दोनों ही चीजें आनी चाहिए तभी वो उसको कंप्लीट कह पाऊंगा। कंप्लीट शब्द उल्टा दिख रहा है। आवश्यकता है और आवश्यकता नहीं है। ये उस उन कंप्लीट शब्द का ये मतलब है कि है और नहीं है। दोनों एक साथ ट्रू होने चाहिए। तभी भगवान कंप्लीट है। आप ये बताइए कि जो चीजें भगवान से निकल के आ रही है वो नित्य है ना? वो तो वो वो तो नित्य है ना? भगवान से जो चीजें निकल के आ रही है वो नित्य है ना शाश्वत है ना नित्य है पर वो ट्रांसफॉर्म होती है मैं बताता हूं कैसे बदलने वाली नित्य है बदलने वाली नित्य कूटस्थ लक्षण कहते हैं अंदर ही अंदर उसमें लक्षण उसमें अपना स्वरूप चेंज होता है ठीक है बदलने वाली नित्य
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02:23:17:27 यानी कि भगवान से डिफरेंट क्वालिटीज वाली कोई चीज एक्सिस्ट करती है ऑब्वियसली एक मिनट और भगवान को उसकी आवश्यकता है वो क्वालिटी भगवान से ही आ रही है भगवान से भगवान को उसकी आवश्यकता है। भगवान को उसकी आवश्यकता है और नहीं भी है। दोनों एक साथ ट्रू है। अगर आप ये कहते हैं कि आवश्यकता यानी कि भगवान भगवान यानी कि भगवान है और नहीं भी है। दोनों ही बातें हैं। नहीं भगवान भगवान है भी और नहीं भी है। और क्या भगवान सुनिए जब हम कहेंगे भगवान को आवश्यकता नहीं है तो वो सच्चिदानंद है। जब हम कहेंगे भगवान को आवश्यकता है तो वो सच्चिदानंद नहीं है। तो यानी कि भगवान भगवान नहीं भी है और है भी है क्या फिलोसफी है हां तो बताइए भगवान भगवान भगवान सच्चिदानंद है कि नहीं भगवान हर मोमेंट पर सच्चिदानंद है ऐसी कोई मोमेंट नहीं है यानी कि जब उसको आवश्यकता है जब उसको आवश्यकता है तो वो सच्चिदानंद है कि नहीं ये आपने बोला कि आपने आवश्यकता को सच्चिदानंद से जोड़ा मैं ये कह रहा हूं कि भगवान कंप्लीट है उसमें है और नहीं है दोनों है लेकिन मैं मैं हां यही बात है। सच्चिदानंद को आवश्यकता से नहीं जोड़ना है। इसलिए
02:24:33:01 ये नहीं कहना है कि भगवान ने किसी कारण से ये दुनिया बनाई है। भगवान ने अकारण ये दुनिया बनाई है। हमको ये मानना पड़ेगा कि ये जो दुनिया है वो भगवान की शक्ति का परिणाम मात्र है। बात तो गलत क्या है। भगवान को कोई आवश्यकता नहीं है संसार बनाने की। मगर आप कह रहे हो भगवान को आवश्यकता है। कारण है नहीं नहीं भी है तो जब जब आप कहोगे जब आप कहोगे तो फिर भगवान सिर्फ जब नहीं भी वाले में जाओगे तभी भगवान सच्चिदानंद सिद्ध होगा।
02:25:08:21 ऐसा क्यों? जब आवश्यकता है तभी अरे जिसको आवश्यकता होती है वही तो सच्चिदानंद नहीं है। ये ये रूल ये रूल गलत है। इस रूल को आप लिख लीजिए कि ये रूल गलत है। तो इसका मतलब आप ये कह रहे हैं कि जिसको आवश्यकता है भी कोई वो भी सच्चिदानंद है। यानी कि जिसके अंदर किसी चीज का जिसके पास किसी चीज का अभाव है वो भी सच्चिदानंद है। जिसके पास किसी चीज का अभाव है वो भी सच्चिदानंद हो सकता है। क्योंकि क्योंकि उसके पास जिस चीज का अभाव है वो उसी से पूर्ण हो रही है। अगर मेरे पास पेन का अभाव है मैं तब भी सच्चिदानंद हो सकता हूं। अगर ये पेन मेरे ही शरीर से निकला है और मैं इसको यूज़ कर रहा हूं। हालांकि अभी नहीं हुआ बट फॉर एग्जांपल ये हाथ हाथ तो मेरा ही है ना तो मैं समझ गया क्योंकि वो मेरे से ही पूर्ण हो रही है मगर मगर मगर मगर वो जो क्रिया हो रही है ना वो जो क्रिया हो रही है उस क्रिया का अभाव है वो जो तत्व निकल रहा है आपके अंदर से वो जो तत्व आपके अंदर से निकल रहा है वो मान लिया कि वो आपका ही पार्ट है ठीक है जीव और प्रकृति मान लिया ठीक है मगर वो जो क्रिया हो रही है उसका
02:26:24:04 तो अभाव था ना कि वो मैनिफेस्ट हो रही है। दुनिया बन रही है। लोग आ रहे हैं, जा रहे हैं। जीव हो रहा है, यह हो रहा है। ये ड्रामा चल रहा है। ये जो क्रिया है, मैं तत्व की बात नहीं कर रहा। जो क्रिया है उसका तो अभाव मानना पड़ेगा ना। हां। क्रिया का अभाव जो है मैं बताता हूं कैसे है और कैसे नहीं है। मैं बताता हूं। ये भी डायग्राम से एक्सप्लेन करूं तो समझ आएगा। ये है टाइम। मैंने टाइम जो है ऐसे लिख लिया। ठीक है? ये है टाइम और भगवान जो है टाइम क्योंकि भगवान ने बनाया भगवान टाइम के अंदर भी है और भगवान टाइम के बाहर भी है। क्योंकि भगवान भगवान ने टाइम को बनाया इसलिए भगवान इस आउट ऑफ टाइम। लेकिन भगवान ने टाइम को बनाया तो भगवान टाइम के अंदर भी है। हम तो अगर गॉड को मैं डिफाइन करूं तो गॉड इज आउट ऑफ टाइम्स एंड इन ऑफ टाइम आल्सो। ठीक है? तो दो चीजें हो गई। एक हो गया इन टाइम गॉड और एक हो गया आउट ऑफ टाइम गॉड। जब आउट ऑफ टाइम गॉड वो लेते हैं तो उनको क्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती है। लेकिन जब क्यों? क्योंकि टाइम के बाहर में क्रिया होती नहीं है। क्रिया सारी टाइम के अंदर में होती है। भगवान का जो सबसे परम रूप है वो इन टाइम वाला है कि
02:27:39:10 आउट ऑफ टाइम वाला है? वो आउट ऑफ टाइम वाला
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02:27:42:14 है। आउट ऑफ टाइम वाला है। आउट ऑफ टाइम वाला है। वो कृष्ण का फॉर्म है। उसका रूप है। उसका रूप मैं अभी आपसे फॉर्म पे बात कर रहा हूं। क्या अभी मैं बात ये कर रहा हूं कि आपने कहा वो आउट ऑफ टाइम वाला है और वो सच्चिदानंद है। उसको संसारें वो इन टाइम में भी प्रेजेंट है और आउट ऑफ टाइम में भी प्रेजेंट है। फॉर एग्जांपल ठीक है?
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02:28:06:26 तो जो ये संसार बनता है वो इन टाइम में बनता है कि आउट ऑफ टाइम में बनता है? यहां पर तो इन टाइम है। हम समय के अंदर है। हम अभी समय के बाहर नहीं है। सिंपल तो यानी वो जो जो संसार बनाने वाले भगवान कृष्ण है वो इन टाइम वाले हैं। संसार बनाने वाले जो कृष्ण है वो आउट ऑफ कृष्ण आउट ऑफ टाइम है। कृष्ण से विष्णु आते हैं। गर्भोधक्षा विष्णु एस पर श्रीमद् भागवतम। गर्भोदक्षा विष्णु अरे भैया तो फिर आप फिर घूम के वहीं आ गए। मैं पूछ रहा हूं उनको आवश्यकता क्या है? क्या आवश्यकता है? आवश्यकता है रस। यानी रस नहीं था ना उनके पास।
02:28:45:25 रस जो चीज है ना रस चीज को अगर आप समझेंगे ना रस चीज का मतलब होता है मैं भाई साहब मैं सोच रहा हूं रस था कि नहीं था। भैया देखो दो घंटे 28 मिनट हो चुके हैं। मुझे रस नहीं आ सकता। दो लोग तो नहीं है ना? अरे मेरे भाई तो यह मान लो ना कि रस नहीं था। मैं पूछ क्या रहा हूं रस था कि नहीं था? आप कह रहे हो कि नहीं था सब कुछ था मगर रस नहीं था मगर फिर भी वो सच्चिदानंद था। आप कहो ना अभाव था। रस का भाव था हां था। था रस का अभाव हो गया ना? भगवान में किसी चीज का अभाव नहीं है। ये भी तो एक इनकंप्लीटनेस हो गई ना। भगवान में ऐसी कोई चीज नहीं है दुनिया में जिसका भगवान में अभाव नहीं है। यह भगवान को इनकंप्लीट बनाता है। ऐसी एक नहीं बनाता है। नहीं बनाता है क्योंकि भगवान है ही वही जो भगवान है ही वही सुनिए भगवान की धारणा ही यहीं से शुरू होती है कि जो इनकंप्लीट जिसमें किसी चीज का अभाव ना हो। सच्चिदानंद अगर उसमें अगर उसमें रस का अभाव मान लेंगे ना तो उसके आनंद में बाध्यता आ जाएगी। नहीं नहीं आनंद है रस नहीं है आनंद जो है वो रस से अलग है ठीक है सच्चिदानंद में जो चीज है ना वो आनंद ये रस शब्द ही अलग है ठीक है
02:30:00:28 इन तीनों को आप मिक्स मत करिएगा आनंद में अभाव कभी नहीं आता रस में अभाव कभी आता है कभी नहीं आता रस का अभाव था ना उनके पास रस से क्या आता है भाई साहब रस रस से क्या आता है रिलेशनशिप के अंदर एक्सचेंजेस रस से भी एक आनंद ही आता है ना हां लेकिन यह वाला आनंद है यह ब्रह्मानंद तो रथ से आने वाले आनंद का आनंद का अभाव था ना हां प्लेजर ड्यू टू रिलेशनशिप अभाव था अभाव था तो जब अभाव था तो उसका आनंद बाधित है ना
02:30:35:15 उनका आनंद बाधित है हां लेकिन उनको एक्सटर्नल सोर्स की जरूरत नहीं पड़ी ना बाधित शब्द का मतलब क्या होता है अरे भाई एक्सटर्नल मैं कह रहा हूं अगर मेरे को खुजली करने की जरूरत पड़ गई अगर और एक्सटर्नल से वो नहीं मैंने खुद ही खुजली को खुजा लिया तो इसका मतलब मैं भगवान हूं। नहीं क्या भाई मुझे खुजली नहीं होनी चाहिए समझ नहीं आया कोई बात नहीं अच्छा था
02:31:09:27 देखो गॉड जो है उनको अपनी प्रेजेंस को फिल करने के लिए और किसी की नीड नहीं है। ठीक है? बाहर से किसी चीज की नीड नहीं है। बात ये नहीं है। मैं मैं तत्व की बात नहीं कर रहा हूं कि उनको पास तत्व का अभाव है कि नहीं। मैं जान रहा हूं आप कहां जा रहे हो। मैं सामग्री की बात नहीं कर रहा हूं। मैं क्रिया की बात कर रहा हूं। किसी क्रिया की आवश्यकता थी ना उनको। सामग्री की आवश्यकता नहीं थी। क्रिया की आवश्यकता थी ना। तो उससे साबित क्या होता है? अगर आवश्यकता थी तो। उससे साबित यह होता है कि आपकी फिलोसफी के अनुसार भगवान सच्चिदानंद सिद्ध नहीं हो रहे। आपने कहा था अकाट है हमारी। हम काट रहे हैं उसको जिसको क्रिया की आवश्यकता है वो सच्चिदानंद नहीं है। इसमें कोई रिलेशनशिप ही नहीं है। बिल्कुल रिलेशनशिप है। जिस क्रिया का मेरे अंदर अभाव है, जिस क्रिया के परिणाम का मेरे अंदर अभाव है और मैं मेरे को उस क्रिया की आवश्यकता है तो उसका अभाव मेरे अंदर मानना पड़ेगा तो मेरे आनंद की नित्यता सिद्ध नहीं होगी। भले ही मैं अपने से ही खुजा लूं। मैं ये देखो मैं ऐसे बोल रहा हूं कि भगवान जो है वो दो पाथ से आनंद ले रहे हैं क्योंकि वो दोनों पाथ से आनंद ले रहे हैं ना एक एक आनंद वाला है रस वाला आनंद एक आनंद वाला है रस वाला आनंद मैं कह रहा हूं रस वाले आनंद
02:32:24:28 की उनको जरूरत है कि नहीं हां तो जरूरत होने से उनका भगवान साबित होना कैसे हटता है अभाव है ना दुनिया में कुछ ऐसा तत्व है जो उनके पास नहीं है जो उनके आनंद में है। भगवान के अंदर अभाव होना यह उनकी पूर्णता है। वाह बहुत बढ़िया। भगवान के अंदर अभाव होना है। भगवान के अंदर अभाव होना वो उनकी पूर्णता है। वाह बहुत बढ़िया। बहुत अच्छा। बहुत बढ़िया। बहुत अच्छी बात। बिल्कुल सही है। अब आप ये बता दीजिए कि भगवान के अंदर अभाव होना ये उनकी एक मिनट। एक मिनट। अब आप अब आप ये मैं बता रहा मैं पूछ रहा हूं। भगवान के अंदर अभाव होना यह उनकी पूर्णता है। यह शास्त्र में कहां लिखा है? भगवान के अंदर ये जो पूर्ण वाला श्लोक था एक बार निकालिएगा। निकालता हूं। एक मिनट रुकिए। बहुत ज्यादा टाइम हो गया सर। मैं जल जाता हूं। बहुत कुटाई होगी। सॉरी। हां ठीक है। कल आ जाना।
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02:33:24:19 कल क्या मतलब जब दोबारा हमको जब भी मौका मिलेगा क्योंकि कुछ और लोगों के भी शेड्यूल है। मिनट लेकिन इसमें एग्री करते हैं कि आज तक फिलॉसफी में कोई डिफिट नहीं हुआ है। इसीलिए दो हो तो रहे हो यार। तुमने ये कह दिया भगवान के अंदर अभाव है। बताओ तो अभाव होने का मतलब ये थोड़ी भगवान पहले तो ये बता दो कि आपने लिखा कहां पे है? कहां लिखा? पहले तुम्हें ये मालूम आप अपना ओपिनियन दे रहे हो कि आपके आगे इस का क्लेम है। भगवान के अंदर अभाव हां भगवान के अंदर अभाव होना भगवान की पूर्णता है। तो वो वो आप पहले तो मैं कंफर्म कर लूं इस का क्लेम है कि नहीं? आप इस का क्लेम दिखा दो। ये पहले तो ये कन्फर्म कर फिर शास्त्र में देखेंगे। जो मैंने पूर्णम वाला श्लोक कोट करा था जिसको मैं शुरू नहीं करूंगा क्योंकि वो फिर से आप बोलेंगे कि आपने जने नहीं पहना है। ठीक है मैं ब्राह्मण नहीं हूं। कोई बात नहीं। लेकिन नहीं तो आप आप मुझे नंबर बता दो। उसका आपको पता है तो एक बार नंबर बताइए। एक मिनट बहुत लेट हो गया वैसे। आपको एक इंफॉर्मेशन दे दूं। केवल ब्राह्मणी वेद पढ़ सकता है। ये गलत है। जो वैश्य होते हैं और जो क्षत्रिय होते हैं वो भी पढ़ सकते हैं। अच्छा दैट्स ग्रेट। शद्र नहीं पढ़ सकता। और कलयुग में सारे शद्र है। कलयुग शद्र संभव कलयुग
02:34:40:04 में सभी स्त्रियां व्यभचारणी हो जाएंगी। तो क्या आप अपनी माताओं और बहनों को मानते हैं? व्यभचारी कलयुग में सारी स्त्रियां स्त्रियां व्यभचारणी हो जाएंगी। पराय पुरुषों से बातें किया करेंग रामायण महत्व में लिखा हुआ है यहां कलयुग के यहां हो जाएंगी बोला है होंगी बोला है यहां कलयुग केसेट यानी के स्टार्ट से बोला है कलयुग स्टार्ट हुआ था 5000 साल पहले जब कृष्ण ने लीला विराम करी थी उसी मोमेंट पे जैसे राम जी ने विराम की तो त्रेता युग स्टार्ट हुआ स्टार्ट हुआ आपने है कहां पे लिखा है जरा दिखाइए है सारे सूत्र है संभव का जो अ वाला पार्ट है ना मैं कह रहा हूं लिखा कहां पे पहले ये बता दो आप सारे शद्र है सारेद्र है
02:35:29:22 इसके साथ संभव वाला ये भागवतम का श्लोक है कल शद्र कलयुग में सारे शद्र है ये भागवतम मैं साथ में वो पूर्ण वाला पहले कोट कर पहले वो कोट कर हां पहले वो पूर्णम कोट कर लेता हूं उसके बाद मैं शायद जा सकूं ऑब्वियसली मैं रिसाइट ना करूं तो शायद ठीक है। इसका नंबर कैसे बताते? अरे पूर्णम पूर्णिम में आप बता रहे हो अभाव होता है भगवान में। मैं कह रहा हूं पूर्ण में अभाव लिखा है भगवान में।
02:36:09:03 एक मिनट एक मिनट। हां इसमें इसमें एक्चुअली ये लिखा है। पूर्णस मैं पूरा नहीं पढ़ रहा। आधा पढ़ रहा हूं। ऑफेंस। अरे भाई आप हिंदी पढ़ो ना उसकी। अच्छा मतलब पूर्ण का पूर्ण में से चला जाएगा तो पूर्ण बचेगा ये है ये है मैं बताता हूं ये कहां लिखा है भाई भगवान में भी अभाव होता है पूर्ण से पूर्ण चला जाएगा तो पूर्ण बचेगा भाई साहब पूर्ण करिए आप एक काम करिए कल ये ले आइएगा कि कलयुग में सभी शद्र है और आता हूं ये तो बहुत छोटा नहीं नहीं अब क्योंकि फिर उसमें एक लंबी चर्चा ख जाएगी। मेन मुद्दा क्या है कि भगवान में अभाव है। भगवान में अभाव होता है। ये तो लॉजिकली भी प्रूवेबल है। लॉजिकली प्रूवेबल है ही नहीं क्योंकि आप आप किसी भी तरीके से भगवान को सिद्धि नहीं कर पाओगे। 7.9.10 है श्रीमद् भागवतम में 7.9 ये लिख सकते हैं 7.9.10 कल शद्र संभवा इसमें है और
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02:37:19:10 भगवान में अभाव होना ये भी भगवान की कंप्लीटनेस है। आप इसको समझिए। भगवान में अभाव होना यानी भगवान का भगवान ना होना यह उसकी कंप्लीटनेस है। एक्चुअली हां अब बिल्कुल भगवान का भगवान ना होना भगवान की कंप्लीटनेस है। हां
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02:37:37:20 कि यानी थोड़ी देर के लिए यानी भगवान में अनित्यता ना होना भगवान की कंप्लीटनेस है। हां मैं बताता हूं कैसे मैं बताता हूं। कैसे जैसे मैंने ये डायग्राम ये डायग्राम बनाया ना मैंने भगवान इन टाइम भी है और आउट ऑफ टाइम भी है। अगर वो इन टाइम है तो वो कभी मरते हैं यानी वो नित्य नहीं है। मरते हैं इन द सेंस आप उसको शाश्वत वाले वे में मत लीजिएगा कि कभी मरते हैं जैसे हम मर रहे हैं वैसे नहीं। मतलब मगर मेरे भाई मेरे भाई जब वो एंड टाइम में है तब भी वो वहां पर हैं जब वो एंड टाइम में है तो तो वहां पर हमको लेना ये पड़ेगा कि वो उनकी लीला मात्र है दोबारा क्या हां तब हमको लेना पड़ेगा जो एंड टाइम वाली बात है वो लीला मात्र है। हम अगर उनको स्वरूप से ही बदलने वाला मान लेंगे। उनके स्वरूप में ही यह मान लेंगे कि वह जो है क्या कहते हैं यह वो जो है भगवान होने को छोड़ रहे हैं। स्वरूप को ही मान लेंगे। वो उनकी लीला नहीं मानेंगे। वास्तविकता में अपने स्वरूप से बदलने वाला मान लेंगे तो फिर तो उनकी भगवान की शाश्वतता ही भंग हो जाएगी। भगवान तत्व सबसे पहले आप ये समझ लीजिए। सबसे पहले आप ये समझ लीजिए कि भगवान है कौन? जो शाश्वत सनातन है
02:38:52:26 वो भगवान है। अब आप कह रहे हैं कि अगर उसमें अगर उसमें जो है अगर उसमें अशाश्वतता नहीं है तो भगवान कैसे वो उसका स्वरूप भूत लक्षण है भाई। वो उनका स्वरूप बोध लक्षण है। हां सच्चिदानंद उनका स्वरूप भूत लक्षण है। अगर उसको ही आप उससे छीन लोगे कि थोड़ी देर के लिए वास्तविकता में वो बदल जाते हैं। इन टाइम में वो लीला कर लेते बात अलग है। मगर उनका बदलना भी उनके अंदर कोई कमी नहीं है। ये साबित कर रहा है। मैं ये कह रहा हूं। भगवान का नाम बदलना। इसका मतलब उनका स्वरूप नित्य नहीं है। होकर भी नहीं है। और ज्यादा इन दोनों में ज्यादा ज्यादा सही वाला जो है वो ये है कि नित्य है। लेकिन अगर मैं ये बोलूं कि भगवान का ऐसा कोई स्वरूप ही नहीं है जो कभी नित्य नहीं जो नॉन नित्य है। यानी भगवान में कमी हो गई कि भगवान में कोई नॉन नित्य स्वरूप नहीं है। तो भगवान में एक नॉन नित्य स्वरूप है और वो है जो गर्भदक्षा विष्णु वाली जो फॉर्म्स है और नित्य स्वरूप भी है। कृष्ण वाली जो तो इसका मतलब आप जिसे भगवान मानते हैं वो बदलता भी है। वो बदलता है लेकिन वो शाश्वत नहीं है। हम जिसे भगवान मानते हैं
02:40:08:00 वो शाश्वत है लेकिन उससे बदलने वाली चीजें आती है। तो आप आप पहले डिसाइड कर लो बोलना क्या है? वो बदलता है कि नहीं बदलता कि उससे बदलने वाली चीजें आती है। हां जी। आप 10 बातें बोल देते हो। हमको एक भी समझ नहीं आई यार यार इतनी देर अब मुझे जाना पड़ेगा यार क्या हमको एक भी समझ नहीं आई यार मुझे एक भी समझ में नहीं आई यार डायग्राम बना के दिखा दिया यार ये यार यार मत करिए आप प्लीज हां ये आपकी जो फिर मैं ऐसा कहूंगा फिर आपको बुरा लगेगा अच्छा चल रहा है हां सर सॉरी सॉरी ये आपकी असफलता का द्योतक है कि आप किसी तरीके से हंस के यार करके जो है ये प्रूफ करना चाह रहे हैं कि आपने समझाया बहुत अच्छा मगर सामने वाला समझ नहीं पाया। आप कह रहे हैं कि भगवान होना तब सिद्ध होगा किसी का जब वो भगवान ना होके दिखा दे। वाह भगवान होना तब सिद्ध होगा जब वो भगवान है और नहीं है एक साथ हो सके। दोबारा भगवान होना तब सिद्ध होगा जब वो भगवान है और नहीं है एक तो जिस समय वो भगवान नहीं होगा अगर वो भगवान नहीं होने वाली स्टेज में जाता है
02:41:23:06 अगर वो भगवान नहीं होने वाली स्टेज में जा रहा है जिस समय जैसा कि आप मान रहे हैं तो उस समय भगवान उस समय भगवान रह जाएगा कि नहीं रह जाएगा मैं बताता हूं ना कैसे नहीं रहेगा और कैसे रहेगा ये भी क्वालिटेटिवली और क्वांटिटेटिवली क्वालिटेटिवली रह जाएगा। क्वांटिटेटिवली नहीं रहेगा। बताइए खोल के बताइए इसको खोलिए जरा। खोलिए। हां। क्वालिटेटिवली फॉर एग्जांपल समुद्र की जो बूंद होती है वो भी साल्टी होती है। साल्टी जो है टेस्ट की चीज है। है ना? अरे तो वही तो मैं कह रहा हूं कि वो अपने स्वरूप से जो सच्चिदानंद स्वरूप है शाश्वत उसमें रहते ही है। वो लीला पूर्वक जो है उसमें रहते हुए भी वो लीला पूर्वक ऐसे रूप धारण करते हैं जो प्रकट और अप्रकट होते हैं। तब तो ठीक है। मगर आप कहते उनका मगर जो आप अगर यह क्लेम करेंगे कि जो उनका परम लक्ष्य जो हमारा परम लक्ष्य स्वरूप है वो भी अपने भगवान होने से बदल जाता है सच्चिदानंद से बदल जाता है जो स्वयं की संतुष्टि से बाहर निकलता है असंतुष्ट भी हो जाता है वो तो फिर हमें मानना पड़ेगा कि उसमें नित्यता नहीं है उसमें शाश्वत नहीं है वो फिर हमारा परम लक्ष्य सिद्ध नहीं होगा क्योंकि अगर आप ये मानते हैं कि भगवान कभी असंतुष्ट नहीं होते तो फिर आपको
02:42:38:09 यह मानना पड़ेगा कि भगवान में कोई कमी है और वो कमी है कि भगवान कभी असंतुष्ट नहीं होते। अरे भैया ऐसा भगवान किसको चाहिए जो भगवान ना होके दिखाए? ये आप किसको चाहिए की बात कर रहे हैं। मैं पूर्ण वाला श्लोक करूं
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02:42:53:22 तो पूर्ण वाला श्लोक एक्चुअली ये प्रूफ कर रहा है कि भगवान कंप्लीट है और कंप्लीट भगवान कंप्लीट है तो भगवान कंप्लीट है तो वो तब कंप्लीट है जब वो कंप्लीट है। आप कह रहे हो वो इनकंप्लीट होंगे तब वो कंप्लीट होंगे। इनकंप्लीट होना भी उनकी कंप्लीटनेस को एक्चुअली ग्लोरिफाई करता है। तो भगवान अगर वो भगवान ना होकर भगवान सुनिए सुनिए सुनिए मैं आपको बता रहा हूं। मान लीजिए मान लीजिए ये भगवान है। इधर देखिए इधर देखिए ये मान लीजिए भगवान है। अब इन्होंने अपने इस स्वरूप को नष्ट कर दिया। ये दिखा दिया मैं नष्ट भी होता हूं। टाइम के बाहर कुछ नष्ट नहीं होता। भाई मैंने टाइम बताया ना टाइम यानी कि वो रूप सात्वत है वो अनित्यता नहीं है उसमें अच्छा चलो ठीक है वो नष्ट नहीं होता एक मिनट एक मिनट नष्ट ना होने का भाव है एक मिनट फिर नष्ट ना होने का भाव है आपके लॉजिक को ले तो बाहर है इसलिए पर नष्ट यानी कि भगवान में जो चेंजेस आ रहे हैं वो अंदर आ रहे हैं। उनका जो परम रूप है वो बना हुआ है लगातार टाइम के बाहर तो भूख तो वही हो गई। उसी को मैं लीला कह रहा हूं। उसी को टाइम टाइम के बाहर टाइमिंग कर रहे हो। उसी को तो मैं लीला कह रहा हूं भाई। हां मैं भी उसी को उसी को आप टाइम के बाहर टाइमिंग कर रहे हो। कृष्ण का
02:44:08:24 रूप शाश्वत है। क्या दिक्कत है? शाश्वत है। हो गया। परम रूप शाश्वत है। हो गया। क्लियर है? बदलता नहीं है। बदलता नहीं है। किसी चीज की आवश्यकता नहीं है। यहां दो चीजें लेना। टाइम भाई साहब देखिए मैं मैं बार-बार आप ना खिचड़ी पका रहे हैं। बहुत टाइम हो चुका है। प्लीज नहीं पका रहा। आप समझे नहीं मैं इसलिए समझा रहा हूं। मैं समय आप जो है चार तरह की बातें करते भाई अभी टाइम के अभी सुनिए अभी टाइम के बाहर वाला रूप शाश्वत है टाइम के अंदर वो चेंज होता है ना है टाइम के बाहर वाला शाश्वत है ठीक है टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता है टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता है टाइम के अंदर ट्रांसफॉर्मेशन होता है ये शब्द लीजिएगा प्लीज ये ठीक है एक्सपेंशन होता है एक्सपेंशन होता है मगर वो एक्सपेंशन होते समय भी एक्सपेंशन होते समय भी वो अपने आप में पूर्ण शाश्वत है। हां हां उसमें ये वाली कमी नहीं है कि वो उसमें अनितता नहीं है। नहीं तो वो कंप्लीट नहीं होगा। लेकिन फिर एक्सपेंशन किया ही क्यों? एक्सपेंशन किया। वो वो मैं आऊंगा ना। वो मैं आऊंगा। वो मैं आऊंगा। जब वो शाश्वत है। उसके दुख में बाधा नहीं आती है। हां। नहीं आती है। वो स्वरूप से चेंज नहीं होता है। हां।
02:45:24:14 तो भगवान ना होने वाली स्टेज में नहीं जाता है वो। हां ऐसा कोई स्टेज ही नहीं है कि भगवान ठीक है नहीं जाता है। तो अब बात ये आ गई अगर वो भगवान ना होने वाली स्टेज में नहीं जाता है वो सच्चिदानंद है तो उसको संसार बनाने की आवश्यकता आप क्यों कह रहे हैं? क्योंकि उनके अंदर आनंद है ना उस आनंद को वो 100 वो हमेशा वृद्धि करना चाहते हैं। देखो अगर मैं कहूं कि भगवान भगवान बाधित नहीं है ना। भगवान सच्चिदानंद है। आप एक काम करो पहले तो स्क से मुझे दिखा दो जो आप कह रहे हो। देखो कम तो होता नहीं है और आप पहले आप आप देखिए मैं अपना मगजमारी बेकार में करूंगा। पहले आप अपनी स्कन से मुझे रेफरेंस दिखा दो जो आप कह रहे हो। कम से कम ये पता तो चले भगवान में अभाव है शुरू करना। हां बेटा ये जो 18 पॉइंट पहले तो कल शद्र संभवा दिखा रहा था। स्कंद पुराण नहीं वो मत दिखाइए वो वो मैं देखूंगा। अभी आप अभाव दिखाइए अभाव भगवान में अभाव होना चाहिए। भगवान में अभाव होना चाहिए। ये जो पूर्ण वाला श्लोक है ना मैं पूर्ण वाले पूर्ण वाले श्लोक की व्याख्या आपके इस ने की है कहीं जहां लिखा हो भाव अभाव गुस्सा मत नहीं इसलिए आप देर
02:46:39:25 कर रहे है ना हां जी मैंने पूछा स्कॉन का आप जो क्लेम कर रहे हैं वो स्कॉन का ही क्लेम है वो पहले बता दीजिए तब तो मैं उस टाइम अपना खर्च कर ना से है ना ये वाला और वृधारण उपनिषद से भी है दो जगह भाई साहब इस की बुक का नाम बताइए जिसमें अभाव माना हो उसने भगवान में पूर्णता मानी है भाई साहब मैं पूछ रहा हूं अभाव कहां माना है मैं कैसे मान लू आप जो व्याख्या कर रहे हो उस कौन की व्याख्या है अच्छा हां ये ये वाला रस वाला जो है एक कासेप्ट आपका क्वेश्चन एन ओ डी में है एन ओ डी में एनओडी में हां एन ओ डी में है और भगवान को रस क्यों क्यों चाहिए ये वाला आपना पे सर्च करिएगा तो हमको वर्ड्स भी बता देंगे जेमिनाई पे कर दीजिएगा तो वर्ड्स भी बता देंगे भगवान को रस क्यों चाहिए आनंद की वृद्धि के लिए आनंद नहीं है ऐसा कोई स्टेज नहीं है पर आनंद की वृद्धि होती रहे इस चीज के इसी चीज को रस कहते है भगवान आनंद कम तो होता नहीं है आनंद की वृद्धि होती रहे कंटीन्यूसली और कभी कम ना हो लेकिन हमेशा आनंद बढ़ता रहे बढ़ता रहे बढ़ता रहे बढ़ता रहे बढ़ता रहे भगवान के अंदर भी अभाव होना चाहिए। तभी भगवान सिद्ध होगा। यह बताइए। भगवान
02:47:55:06 में अभाव होना आवश्यक है। पहले यह बताइए। उनके कहने का मतलब है आनंद स्टेबल नहीं है ना। आनंद भी बढ़ रहा है ना। क्यों बढ़ रहा है? स्टेबल होना चाहिए। आनंद स्टेबल आनंद बढ़ क्यों रहा? वो वो मैं बाद में प्रश्न करूंगा। पहले आप इस का क्लेम बता दीजिए। अभाव है। एक बार भगवान में अभाव है। भगवान पूर्ण है। भगवान में अभाव होना भी भगवान की पूर्णता है। हां ये ये दिखाइए। भगवान में अभाव होना भी भगवान की पूर्णता का है। ये बहुत अच्छी चीज मिल गई। आज इस ने अगर ऐसा कहा है तो मुझे नहीं पता था।
02:48:39:03 क्योंकि पूर्णता है और वो ऐसे है कि अभाव है एक भी अभाव नहीं है ये भी तो अपूर्णता हुई ना मैं भाई साहब आपसे मैं आपसे क्या पूछ रहा हूं रेफरेंस रेफरेंस आप जो बोल रहे हैं वो स्कॉन मानता है कि नहीं मानता वो बता दीजिए मैं अभी शास्त्र का आपसे नहीं मांग रहा हूं अभी मैं आपका स्कॉन का मांग रहा हूं। नेक्टर ऑफ डिवोशन में है ये। नेक्टर ऑफ डिवोशन में एक हम बहुस्याम ये श्लोक पर्टिकुलर आता है। मैं इसको वर्ड्स भी बता देता हूं।
⬜ Not used yet · 02:49:17:15 – 02:52:50:28 (3:33)
02:49:17:15 एक बहुस्याम मैं एक हूं। चार एक मिनट स्ट्रक्चर वाला अभी करना सॉरी ये है नेक्टर ऑफ डिवोशन में है और नेक्टर ऑफ डिवोशन में उन्होंने चांडोक्य उपनिषद से कोट किया छंडोग्य उपनिषद से कोट किया है और वो है छंडोग्य नहीं होता है छंदोग्य होता है आपकी हिंदी कमजोर है क्या आई थिंक हां क्यों हां हिंदी भाषी नहीं है आप प्रयास कर रहा हूं नहीं नहीं आप मतलब हिंदी भाषी नहीं है क्या मदर टंग आपकी क्या है हिंदी है बट जो स्कूल कॉलेज में जनरली इंग्लिश पढ़ाई जाती थी तो उस समय मैंने टेस्ट नहीं किया अभी मैं प्रयास कर रहा हूं अच्छी होगी धीरेधी बताइए छंदो उपनिषद 6.2.3
02:50:27:20 भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं इस की बुक इसमें कि उन्होंने कहा हो भगवान में अभाव होना चाहिए ये श्याम वाला जो बुक है ना अच्छा आप प्रभुपाद जी की कोटेशन चाहते हैं क्या हां ठीक है अनिकेत जी मजा आ गया आज खुजली वाला अच्छा था वो बीइंग स्पिरिट सोल वाला बनाएगा खुजली एडिटिंग इतना सा लेगा और बना
02:51:10:16 प्रभु जी आप इस का कोई अगर जैसा नेक्टर ऑफ डिवोशन बता रहे हैं ना तो आप बोलिए कि ये तो नेक्टर ऑफ तो इस का गौ का ही बुक है ना नहीं लेकिन ये चांदो उपनिषद से कोट किया है ना उन्होंने कोट भले ही किया हो आप पहले बुक तो बताइए देखिए चांदो उपनिषद के भाष कई सारे है अभी मैं ये देख रहा हूं कि क्या इस ने वो बात मानी है कि नहीं जो आप मान रहे हो कि भगवान में अभाव होना भगवान में अभाव नहीं होगा तो वो भी तो माना जाएगा ऐसे तो फिर ये भी कहना पड़ेगा भगवान यदि नष्ट नहीं होगा प्रभु जी का लेक्चर चलेगा क्या एक लेक्चर में भी सुना अमोग लीला प्रभु जी के लोग ही दिल्ली वाले कहते हैं वो जो मूर्ख है बताइए अमोग लीला प्रभु जी की बात को कैसे मान लेंगे क्लेम अमोग लीला प्रभु जी की बात को वहां के जो क्या कहते हैं कई अभी जो मैं गया था ईस्टर क्या नाम है उसका दिल्ली का ईस्ट ऑफ कैलाश जी जहां मैं गया था वो कह रहे थे वो कई मूर्खता पूर्ण बात कर देते हैं भाई मैं क्या करूं उनके बारे में मूर्ख नहीं बोलना चाहिए हां एक्चुअली होता ये है कि होता ये है कि किसी कांसेप्ट को कोई किसी वे में ले लेता है। किसी का किसी वे में ले लेता है और इसमें कोई गलती नहीं है। वो अपनी बातें सिद्ध करने के लिए
02:52:25:20 कोई भी कुछ भी कुछ भी बोल देता है। कुछ भी बोल देता है। अभी बीइंग अभी मैं देख रहा था खूब क्या कहते हैं? खूब ढिंढोरा पीटा जा रहा था। देखो देखो मरवा वालों ने हमें मान लिया। हमें प्रामाणिक मान लिया। हमें मान लिया। अभी उसका मोहन प्रभु उनका क्या कहते हैं? क्या नाम? मोहन प्रभु नाम है उनका गया। मैंने नहीं देखा सॉरी मैं रेफरेंस देता हूं रेफरेंस रेफरेंस दे दीजिए आप
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02:52:50:28 रेफरेंस इसपनिषद में है ऑल फैसिलिटीज आर गिवन टू स्मॉल कंप्लीट यूनिट ट्रांसलेशन ऑल फैसिलिटीज आर गिवन ऑल फैसिलिटीज आर गिवन
⬜ Not used yet · 02:53:04:04 – 02:58:46:14 (5:42)
02:53:04:04 टू स्मॉल कंप्लीट यूनिट्स नेमली द लिविंग एंटिटीज यानी जीवो को सारी फैसिलिटी दी जाती है जो स्माल कंप्लीट यूनिट है यानी हम लोग जीव स्माल कंप्लीट यूनिट ठीक है टू इनेबल देम टू रियलाइज्लीट हो तो अजीब सागा ना एक्चुअल तो बेटर है अरे रुको मेरे भाईनिषद का भाष है उनका रुको मैं निकाल दूं अरे बहुत बढ़िया श्लोक संख्या बता दीजिए आप प्रक प्रभु मुझे जाना पड़ेगा अभी थोड़ा लेट हो गया है आप श्लोक संख्या बता दीजिए श्लोक संख्या बता दीजिए
02:53:46:00 1.1 में ही परपट में है। 1.1 में ही परपट में है। ऑल फॉर्म्स ऑफ इनकंप्लीटनेस आर ड्यू टू द इनकंप्लीट नॉलेज ऑफ़ द कंप्लीट हो। और ट्रांसलेशन में क्या है? ये ये परपट्स में ट्रांसलेशन में ट्रांसलेशन है नहीं उसमें। भाष्य में भाष्य में भाष्य में हां वो समझ गया भाष्य में। अनुवाद में क्या है? अनुवाद में अनुवाद में भी देख लेता हूं। एक मिनट मेरे पास क्योंकि अभी इस का प्रूफ मांग रहे थे ना तो इस का अगर प्रूफ मांगेंगे तो भाष्य जनरली रेफर करते हैं। अनुवाद तो तब आएंगे जब वैदिक स्क्रिप्चर की बात अनुवाद तो किया होगा ना। अरे भाई श्लोक है तो उसका अनुवाद तो किया होगा ना। जी जी ट्रांसलेशन की बात कर ट्रांसलेशन में है।
02:54:38:07 द पर्सनालिटी ऑफ़ गॉड इज परफेक्ट एंड कंप्लीट बिकॉज़ ही इज कंप्लीटली परफेक्ट ऑल एमिनेशन फ्रॉम हिम सच एस ह फिनोमिनल वर्ल्ड मैं ले आया मैं ले आया मैं मेरे पास है जी बहुत थैंक यू अच्छा ठीक है अच्छा अब आप बताइए कौन सा मंत्र है 1.1 हां 1.1 जी ये पूर्ण पूर्णम का ही है क्या हां हां उसी के में है परम पूर्ण या सर्वोपरि परम सत्य पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान है निर्विशेष ब्रह्म या परमात्मा की अनुभूति परम पूर्ण की अधूरी अनुभूति है पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान तो सच्चिदानंद विग्रह है। ठीक है? सच्चिदानंद अपने आप में ही किसी भी चीज के अभाव को कैंसिल कर देता है। ठीक है? हां। विग्रह है और निर्विशेष ब्रह्म की अनुभूति उनके सत पहलू या उनके शाश्वत होने की अनुभूति है तथा परमात्मा की अनुभूति उनके सत तथा चित पहलुओं की अनुभूति है जो उनकी शाश्वतता तथा ज्ञान को सूचित करते हैं किंतु भगवान की अनुभूति सारे दिव्य स्वरूपों सतित तथा आनंद की
02:55:53:10 अनुभूति है। जब किसी को परम पुरुष की अनुभूति होती है तो वह परम सत्य के इन पहलुओं का भी पूर्ण रूप में अनुभव करता है। विग्रह का अर्थ है रूप। अतः परम सत्य रूप विहीन निराकार नहीं है। यदि वह रूप विहीन होते या यदि वह अपनी सृष्टि की अपेक्षा किसी भी तरह कम होते किसी भी तरह कम होते अपनी सृष्टि की तरह किसी भी तरह कम होते तो वह पूर्ण नहीं हो सकते थे। लो ये तो उल्टा बोल रहे हैं। अगर वो कम होते हां ठीक है। परम पूर्ण में हमारे अनुभव के भीतर तथा बाहर की प्रत्येक वस्तु होनी चाहिए। अन्यथा वह पूर्ण नहीं हो सकती। परम पूर्ण भगवान में अनंत शक्तियां होती है। वह सब की सब उनहीं के समान पूर्ण होती है। इस तरह यह दृश्य भौतिक जगत भी अपने में पूर्ण है। यह 24 तत्व जिनका यह भौतिक ब्रह्मांडस्थाई प्राकट्य है। इस तरह व्यवस्थित किए गए इस ब्रह्मांड के पालन तथा भरण के लिए आवश्यक प्रत्येक वस्तु उत्पन्न कर सके। ब्रह्मांड का पालन करने के लिए इसकी किसी अन्य इकाई को बाह्य प्रयास की आवश्यकता नहीं है। ब्रह्मांड अपने निजी कालमाप के अनुसार कार्य करता है और परम पूर्ण की शक्ति द्वारा निश्चित किया गया है और जब वह कालावधि पूरी हो जाती है तो यह अस्थाई
02:57:08:12 अभिव्यक्ति परम पूर्ण की संपूर्ण व्यवस्था से विनष्ट हो जाती है। छोटी छोटी पूर्ण इकाइयों को सारी प्रदान की जाती है जिससे कि वे पूर्ण परम पूर्ण की अनुभूति कर सके। परम पूर्ण के अधूरे ज्ञान के कारण ही विभिन्न प्रकार की अपूर्णताओं का अनुभव होता है। परम पूर्ण के अधूरे ज्ञान के कारण ही विभिन्न प्रकार की अपूर्णताओं का अनुभव होता है। मनुष्य जीवन की मनुष्य जीवन जीव की चेतना का पूर्ण प्राकट्य है। और यह चेतना जन्म और मृत्यु के चक्र में 84 लाख योनियों से विकसित होने के बाद मिलती है। यदि जीव अपनी पूर्ण चेतना युक्त इस मानव जीवन में परम पूर्ण से संबंधित अपनी पूर्णता की अनुभूति नहीं करता तो वह अपनी पूर्णता की अनुभूति करने का अवसर खो देता है। और भौतिक प्रकृति के नियम द्वारा विकास चक्र में डाल दिया जाता है। क्योंकि हम यह नहीं जानते कि हमारे पालन के लिए प्रकृति में पूर्ण व्यवस्था है। अत हम इंद्रिय भोग के तथाकथित पूर्ण जीवन की सृष्टि करने के लिए प्रकृति के साधनों का उपयोग करने का प्रयास करते हैं। क्योंकि जीव परम पूर्ण से संबद्ध हुए बिना इंद्रिय जीवन का भोग नहीं कर सकता। अत इंद्रिय
02:58:23:13 भोग का भ्रम युक्त जीवन मोह माना जाता है। शरीर का हाथ तभी तक पूर्ण इकाई है जब तक वह संपूर्ण शरीर से जुड़ा हुआ रहता है। एक मिनट बस सॉरी मैं टोक रहा हूं बीच में। अरे मैं पूरा पढ़ लूं ना इसमें अभाव कहीं पर कमी भगवान में मानी इन्होंने पूरा पढ़ लूं मैं बताता हूं कहे आपने पढ़ चुके हैं इसीलिए मैं टोक रहा था हां बताइए
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02:58:46:14 जो अगर आप फर्स्ट लाइन ही पढ़े बिकॉज़ ही इस कंप्लीट होल मैं इंग्लिश में पढ़ने की आदत की वजह से बोल रहा हूं आप समझ पाएंगे बहुत ज्यादा मुश्किल नहीं है। ठीक है? बिकॉज़ ही इज कंप्लीट होल इवन दो सो मेनी कंप्लीट यूनिट्स एमिनेट फ्रॉम हिम ही रिमेंस कंप्लीट होल। ये लाइन को ज्यादा ध्यान से पढ़िएगा। ठीक है? अरे ही रिमलीट ही रिमेंस कंप्लीट रहा ना वो वो इनकंप्लीट नहीं हुआ ना? हां इनकंप्लीट नहीं हुआ। तो जब वो नहीं हुआ तो आप क्यों कह रहे हो वो जो है इनकंप्लीट हो जाता है। उसमें इनकंप्लीटनेस ना होना भी उसका वो है। आप अभाव शब्द को एब्सेंस बोलते हैं। अभाव शब्द मतलब एब्सेंस किसी चीज की एब्सेंस है ना? तो भगवान में हां जी। भगवान में भगवान पूर्ण है। अपने आप में कंप्लीट होल है। ठीक है? तो वो उनके अंदर से पार्शियल कंप्लीट यूनिट निकलते हैं। एक्सपैंड होते हैं। अरे भाई पार्शियल कंप्लीट यूनिट की बात नहीं हो रही है। भगवान आनंदित है कि नहीं? विचार की बात हो रही है। यहां ज्ञान की बात हो रही है यहां। यहां सामग्री की बात ही नहीं हो रही है। आप तत्व के आधार पर कहते हैं कि तत्व उनसे निकलता है इनकंप्लीट।
03:00:02:02 मगर वो फिर भी पूर्ण है। वो नहीं कह रहा हूं। वो अपने आप में सदा आनंदित है कि नहीं? या उनमें कोई अभाव है रस? रस रस का होना चाहिए ना। वो आनंद वृद्धि होने को ही रस कहते हैं। नहीं साहब इसमें अभी आपने एक कोट किया था कि भगवान में अभाव नहीं होगा तो भगवान नहीं होगा वो। वो मुझे बताइए कहां लिखा है? अभाव है। आनंद की वृद्धि का अभाव हो गया ना? तभी तो आनंद की वृद्धि करनी पड़ी। ये इसमें कहां लिखा है? आनंद की वृद्धि का अभाव है भगवान में। तभी वरना अच्छा ये एक मिनट। ये भाई साहब आप समय वेस्ट करते हैं। रेफरेंस मैं मांग रहा हूं। भगवान में अभाव होना माना है कि नहीं? इस ने आप मुझे रेफरेंस दे रहे हो कि भगवान से इनकंप्लीट जो है अभाव युक्त स्मॉल पूर्ण चीजें निकलती है। ये क्या बात है? और फिर कह रहे हो मुझे देर हो रही है। सॉरी ठीक है। ठीक है। खुद ही तो खुद ही तो घुमा रहे हो। खुद ही तो खिचड़ी बना रहे हो। फिर कह रहे हो मैं कुछ समझ नहीं रहा हूं। मैंने मांगा आपसे क्या है कि क्या इस ने माना है भगवान में अभाव नहीं होगा तो भगवान नहीं कहलाएंगे। इस ने यह जरूर माना है कि भगवान का जो प्रेम है या भगवान का जो आनंद है वो कंटीन्यूस इनक्रीस होता है। यह
03:01:18:12 भाई साहब सुनिए आपकी जो व्याख्या है वो इस की ही व्याख्या है या हम कैसे माने हम तब तो आपके साथ अपना समय वेस्ट करें। जब बात आएगी प्रमाण की तो आपको प्रमाण देना होगा। अभी मैं इससे सहमत नहीं हूं कि अभाव होगा तभी भगवान अभाव होगा। फिर तो हम ये कह देंगे भगवान अपने आप को नष्ट नहीं कर सकता। ये भी अभाव है उसमें।
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03:01:42:09 क्यों नहीं कर सकते? कर सकते। अरे अभी फिर मैं कहूंगा अभी आप बच्चे हो। अभी आप बच्चे हो। वो लीला में आकर करते हैं। आप स्वरूप से भगवान अपने आप को ये आप कह रहे हैं। ये आप कह रहे हैं कि भगवान की लीला में जो आप भाई साहब आप एक काम करिए। आप मुझे अभाव का वो दिखाइए। प्रमाण इस से वो दिखाइए। जी हां। लेकिन ये प्रमाण चल जाएगा ना कि भगवान का प्रेम जो है वो कंटीन्यूसली इनक्रीस होता रहेगा। नहीं ये नहीं चलेगा। आप पहले आपको ये बताना आप ये ये दिखाना होगा अगर भगवान में अभाव नहीं होगा ये सिद्धांत है। ये सिद्धांत है। अगर वो वृद्धि मान रहे है ना रस की वृद्धि रस की वृद्धि कोई
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03:02:23:13 आके कह देगा ये तो उन्होंने ये तो उन्होंने लीला में कहा है। आप कहोगे कि रियल में कहा है। अल्टीमेट रियलिटी वाली बात कही है। दूसरा आ के कह देगा। दूसरा आकर के कह देगा ये तो उन्होंने लीला में कहा है। हम कैसे मान ले? इसलिए वो सिद्धांत जो है ना कि भगवान में अभाव होना चाहिए। अगर अभाव नहीं होगा तब भी वो पूर्ण नहीं
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03:02:40:24 है। भगवान में यदि अभाव नहीं होगा तब भी वो पूर्ण नहीं है। ये होगा सिद्धांत का सिद्धांत है कि नहीं? चैतन्य चरितामृत के अंदर जो थ्री रीज़ लिखे हैं इंटरनल रीज़ चैतन्य महाप्रभु के आने के उसके अंदर ये है। मुझे याद आ गया भगवान की मर्सी है कि भगवान ने मुझे रिमेंबेंस दी। चैतन्य महाप्रभु के थ्री इंटरनल रीजंस लिखे हैं कि वो क्यों आते हैं। उसके अंदर थर्ड वाला जो रीजन है वो है कि भगवान श्रीमती राधा रानी के मूड को टेस्ट करना चाहते हैं। अब भगवान श्रीमती राधा रानी के मूड को क्यों टेस्ट करना चाहते हैं? क्योंकि उनके अंदर ये भाई साहब भाई साहब आप पहले अपने किसी व्यक्ति से पूछ कर आइए। मैं ये क्लेम कर रहा हूं कि भगवान में अभाव नहीं होगा तो वो भगवान नहीं होंगे। ये आप पूछ के आइए। हम हम इस से क्यों कह रहे हैं? आप समझिए। इस से दिक्कत क्या है? ठीक है? जैसे ने कहा मैं बता रहा हूं। मैं मैं बता रहा हूं इस से दिक्कत क्या है? फिलोसफिकल दिक्कत बता रहा हूं अभी आपकी। जैसे आपने कहा कि वो टेस्ट लेने के लिए आते हैं। ठीक है? तो हमारा अरे भाई मैं कुछ और बता रहा हूं। सुन लो। मैं कुछ और कह रहा हूं। मैं कुछ और बता रहा हूं आपको।
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03:03:51:22 अभी आपने कितना टाइम वेस्ट कराया इसको खोल के? कितना टाइम वेस्ट कराया? वो जो अरे उसमें क्या निकला मैं पूछ रहा हूं अभाव है कि नहीं आप इसको खुलवा रहे हो फिर आप कह रहे हो याद आ गया मर्स ऑफ गड की वजह से इसका मतलब आपने ये वेस्ट खुलवाया था आपको याद नहीं आ रहा इसमें टाइम वेस्ट करा रहे थे इसका जो मीनिंग है वो मीनिंग भाई साहब इसमें कहीं भी प्रभुपाद जी ने यह
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03:04:14:16 नहीं माना है कि भगवान में अभाव नहीं होगा तो हम भगवान को भगवान कैसे कहेंगे ठीक है अब दूसरी बात ये है कि आप जो चैतन्य चरतामृत के आधार पर यह मान रहे हो कि भगवान में अभाव होना मान रहे हैं वो तो इसको ऐसे है कि हम यह क्लेम करते हैं कि यदि आप यह कहते हैं कि भगवान में अभाव हो ही नहीं सकता पूर्णम के आधार पे तो फिर आप ये एक तरफ कैसे कह सकते हैं कि भगवान रस लेने के लिए आते हैं। ये हमारा उनके ही सिद्धांत पर वार है कि भैया आपकी दोनों बातें आपस में कंट्राडिक्ट एक मिनट भाई साहब भाई साहब ये आपस में आपकी दो चीजें कंट्राडिक्ट हो रही है। ये हमारा उनप क्लेम होता है। आप बाद वाली चीज से पहली वाली चीज को दुरुस्त कर रहे हो कि क्योंकि यहां पर रस माना है तो इसका मतलब प्रभुपाद जी ये मान रहे हैं कि अभाव है। पहले हमको दिखाओ कि प्रभुपाद जी ने अभाव होना आवश्यक माना है भगवान में। ये दिखाओ एक मिनट दीजिए। हम
03:05:15:18 आप ऐसा करिए। आप ऐसा करिए। अब कल आइए। आपको भी लेट हो गया और 11:30 बज रहे हैं। तीन घंटे की हो गई है। फिर भी मैं कहूंगा कि एक इंटेलेक्चुअल पर्सन आया भाई काफी लंबी चर्चा हुई और अधिकांश इतनी देर तक जो अच्छा ये भी बात है मैं सच कहूं तो जो मेरी जो सीधी सीधी कुछ चीजें हैं वो मैंने नहीं ली क्योंकि वही देख देख करके और सीखने को कुछ मिलेगा नहीं। इसीलिए मैंने ऐसी चीजें जो रखी है जिन टॉपिक्स पे हमने कभी भी डीपली बात की ही नहीं किसी से। इसलिए बहुत सम्यक रूप से एक लंबी सी चर्चा भी लोगों को देखने को मिली होगी। काफी कुछ सीखने को मिला होगा और प्रक जी आपने घुमाया बहुत है। यह ध्यान रखिए। अरे यार मत कहिए यार यार मत कहिए। यार मत कहिए आपने घुमाया बहुत है। घुमाया कैसे है? जब मैं पूछ रहा हूं कि जीबीसी आपका अंतिम निर्णायक कौन है? धर्म और धर्म का तो आप कह रहे हो जीबीसी। जीबीसी के 500 मेंबर्स। एक घंटे बाद आप आकर के कहते हो कि नहीं वो 12 मेंबर्स हैं। ठीक है? उसके बाद आप जो है अंतिम प्रमाण आ जाता है कि भाई जिसकी बातें अकाट होंगी वही मेरे लिए प्रमाण है। ठीक है? मैं भी एक क्वेश्चन पूछ के फिर एंड करूंगा। ठीक है? एक एक मिनट एक मिनट ठीक है। चलो अब हम अकाट पे आ गए। आपसे
03:06:31:01 मैंने खूब देर से कह रहा था कि अभाव कहां पे माना है कि भगवान में अभाव होना चाहिए। सिद्धांत प्रभुपाद जी ने माना है कि नहीं माना? फिर मैं काउंटर करूंगा कि शास्त्र से सिद्ध करो इस बात। ठीक है? प्रभुपाद जी ने माना है कि नहीं माना? वो तो बाद की बात है। अच्छा दूसरी बात का नाम भी लिया था कि चैतन्य महाप्रभु के इंटरनल जो रीज़ है चैतन चिरतामृत में नहीं आप ये आप जो है प्रभुपाद जी की कही हुई किसी बात से अंदाजा मत बताइए कि उन्होंने सिद्धांत ये माना है। उनका मुझे सिद्धांत चाहिए कि उन्होंने माना है कि नहीं माना या सगवाियों ने माना हो। कि भगवान में अभाव नहीं होगा तो भगवान भगवान सिद्ध नहीं होंगे। फिर हम दूसरे दूसरे दिन तर्क और प्रमाण पर इस पर बात करेंगे। आपने घुमाया आपने ईशोपनिषद में कहीं नहीं लिखा है भगवान में अभाव नहीं होगा तो भगवान भगवान सिद्ध नहीं होंगे। इस तरह की कोई बात है ही नहीं। बल्कि वहां तो वो ये कह रहे हैं कि भगवान में अगर कोई कमी हो जाएगी। ये देखो। अब आपको तो मना कर रहे हैं वो। ये देखो। लेकिन आज तक इस एक भी मोमेंट में ये कब साबित हुआ कि इस कौन की फिलोसोफी गलत है? साबित हो ही नहीं रहा है। आदत सही है। कहीं साबित
03:07:46:14 नहीं हुआ। गलत साबित ये हो रही है ना कि आप कह रहे हो भगवान को आवश्यकता है संसार बनाने की और मैं कह रहा हूं आवश्यकता नहीं है। खत्म हो रही है इसकी फिलोसफी। आप आवश्यकता सिद्ध करने में लगे हुए हो। आप आवश्यकता सिद्ध करने में लगे हुए हो। उसके लिए एक मिनट भाई साहब एक मिनट आप आवश्यकता सिद्ध करने में लगे हुए हो। हालांकि तार्किक रूप से तो वो छिन्नभिन्न हो ही रहा है। साथ ही साथ आप अपने आप अपने शास्त्रों से भी उसको नहीं सिद्ध कर पा रहे हो। ठीक है? आप अपने शास्त्रों से भी उसको सिद्ध नहीं कर पा रहे हो। अच्छा अभी मैं बता दू आपके अभी मैं बता दू आपके प्रभुपाद जी ने क्या कहा है? मैं बता दूं। यहां पे वो कह रहे हैं प्रभुपाद जी कह रहे हैं यहां पे अद्वत कैसे यदि वह रूप विहीन होते यदि वह अपनी सृष्टि की अपेक्षा किसी भी तरह किसी भी तरह कम होते तो वह एक मिनट तो वह पूर्ण नहीं हो सकते थे। किसी भी तरह कम होते तो वह पूर्ण नहीं हो सकते थे। यहां प्रपाद जी इसी लाइन इसी लाइन को पकड़ रखिएगा। इसी लाइन को पकड़े रखिएगा। किसी भी तरीके से एक बार दोबारा बोलिएगा। किसी भी तरीके से किसी भी तरह
03:09:01:15 कम होते तो वह पूर्ण नहीं हो सकते थे। हां तो ये बोलना कि कुछ है जो भगवान में नहीं है। ये कम होना हो गया ना उनको कम आंकना हो गया ना। कुछ है जो भगवान में नहीं है। आप भी तो यही कह रहे थे दिल से। यानी कि हम ये कहे कि क्योंकि भगवान स्वयं को नष्ट नहीं कर सकते पारमार्थिक रूप से इसलिए वो भगवान नहीं है और यदि या फिर हम ये मान ले अपने आप को नष्ट कर सकते हैं थोड़ी बहुत देर के लिए किसने कहा नहीं कर सकते भगवान अपनी भगवतता को नष्ट करते हैं जब वो श्री चैतन्य महाप्रभु के रूप आप कल आइए अपने रेफरेंस लेकर के आइए जय श्री राम मैं एक ये वाला कंप्लीट कर लो उसके बाद कल भी आऊंगा नहीं ये वाला अभी मुझे मुझे अभी आप कंप्लीट मत करिए आप उल्टा सीधा बोल रहे हैं। आप इस की चीजों को रख के बोलिए। इस की चीजों को रख के बोलिए। और क्योंकि आप आंसर नहीं दे पा रहे तो आपको शायद ऐसा लग रहा होगा। सॉरी कहां रखा आपने इस की चीजों को? कहां रखा बताइए? आप एक सेकंड का टाइम दीजिए। फिर दो मिनट बस और रुक दीजिए। हां। अच्छा एक एक मिनट एक मिनट एक मिनट। एक मिनट एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट। आपने कहा आप आंसर नहीं दे पा रहे इसलिए आप
03:10:16:26 वो कर रहे हैं। ठीक है? अब मैंने कहा कि आपने कहां रखा इस की चीजों को तो आप कह रहे हैं एक मिनट दीजिए। यानी कि अभी तक आपने इस की चीज नहीं रखी है। आपको एक मिनट क्यों चाहिए? मैं आपको मैं पूछ रहा हूं आपको एक मिनट क्यों चाहिए? आप तो रख चुके हैं ना। आप रख चुके हैं की चीज़ कि नहीं रख चुके हैं? भाई साहब मैं पूछ रहा हूं रख चुके हैं कि नहीं रख चुके? रख चुके हैं कि नहीं रख चुके? रख चुका हूं। ये जो चुके हैं तो फिर आपको एक मिनट जो चाहिए वही उसी चीज में बोलो जिस चीज का मैं आंसर नहीं दे पा रहा हूं। जिस चीज का मैं आंसर नहीं दे पा रहा हूं उसी को आधार बना करके मुझे जो है निरुत्तर करिए। आप नई चीज मत लाइए या फिर एक्सेप्ट करिए। आपने बात गलत बोली मैं उसी को आधार बना रहा हूं। अभी आपने वो कम वाली लाइन बोली ना आपने कम वाली लाइन बोली उसका जवाब नहीं दे पाए। उसका क्या बोलेंगे आप? इसमें क्या जवाब मांगा आपने? वो कह रहे हैं कि यदि वो किसी भी तरह कम होते तो वह पूर्ण नहीं हो सकते थे। इसमें आपने क्या क्या एक मिनट इसमें आपने कहां पे सिद्ध कर लिया कि प्रभुपाद जी ये कह रहे हैं कि उनके अंदर अभाव होना चाहिए तभी वो भगवान होंगे। अभाव नहीं होगा तो भगवान नहीं होंगे। ये कहां से सिद्ध हो गया? अभाव शब्द का मतलब बताइए। अरे अभाव छोड़ो। अभाव का द्योतक कुछ आ जाए। दक अभाव का प्रतीति आ जाए।
03:11:32:00 अभाव की प्रतीति आ जाए फिर वही बात मैं कह रहा हूं अभाव की मैं कह रहा हूं अभाव की प्रतीति आ जाए अभाव अभाव की प्रतीति आ जाए प्रतीति मतलब यहां पे उसको प्रकट करने वाली कोई पंक्ति आ जाए कोई शब्द आ जाए दूसरे शब्दों में वो बात आ जाए बस उससे वो आशय निकल आए वो भाव निकल आए कि भगवान में यदि किसी तरह का अभाव नहीं होगा तब भी यह भी एक अभाव है और इसलिए भगवान सिद्ध नहीं होंगे ऐसा प्रभुपाद जी ने इस श्लोक में कहा माना ये जो माना जो आपने लाइन बोली ना जो जिस लाइन को आप पॉइंट कर रहे थे ना उसी लाइन में ही प्रभुपाद जी माना है हां बताइए क्या माना है बताइए बताइए समझाइए समझाइए आप कह रहे हो ना मैं उत्तर नहीं दे पा रहा समझाइए उसी लाइन को आप ध्यान से एक बार और पढ़िएगा बस वही मोमेंट को एक बार एक लास्ट बात आप पढ़ लीजिए ना मैं पढ़ देता हूं क्योंकि मैं बता एक मिनट
03:12:37:10 हां यदि वह रूप विहीन होते या यदि वह अपनी सृष्टि की अपेक्षा किसी भी तरह कम होते तो वह पूर्ण नहीं हो सकते थे। किसी भी तरह कम होते तो किसी भी तरह जो कम होते हैं ना उस किसी भी तरह कम होते में भगवान में अभाव भी होना चाहिए, भाव भी होना चाहिए। भगवान में फॉर्म भी होना चाहिए, फॉर्मलेस भी होना चाहिए। भगवान में मैं कह रहा हूं इसका मतलब आप उस भगवान को मानते हैं जो थोड़ी बहुत देर के लिए नष्ट भी हो सकता है। भगवान का एक्सपेंशन नष्ट हो सकता है लेकिन भगवान नष्ट नहीं हो सकता। अरे तो भैया मैं मैं आपसे भगवान के अंतिम स्वरूप की बात कर रहा हूं। फिर आप एक्सपेंशन पे आते हैं। बताइए मैं कह रहा हूं अंतिम स्वरूप अंतिम स्वरूप में किसी तरह का मैं बात कर रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं भाई साहब भगवान का अंतिम स्वरूप भगवान के अंतिम स्वरूप में आप अभाव मानते हैं कि नहीं मानते हैं? आप बोलिए नहीं मानते। अंतिम स्वरूप है ना भगवान का अंतिम स्वरूप है ना वो भेद अभेद है। भेद अभेद का मतलब होता है उस वो एक होने के बाद भी उसके अंदर भेद है। एक और अलग दोनों एक साथ है।
03:13:52:26 जब मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे ये पूछ रहा हूं भगवान का जो अंतिम स्वरूप है भगवान का जो अंतिम स्वरूप है उसमें आप अभाव मानते हैं किसी प्रकार का कि नहीं मानते अगर आप कहेंगे कि उससे वो जो अचिंत भेदाभेद वाले जीव बाहर आते हैं जिनमें अभाव है उससे उनमें अभाव होना सिद्ध नहीं होगा उससे उनमें अभाव होना सिद्ध नहीं होगा परम भगवान में कोई दिक्कत नहीं है कोई अभाव हां तो भैया इतनी देर से आप आप क्यों भगवान के जो एक्सपेंशन है उनके आधार पर बात कर रहे हो। मैं तो अंतिम स्वरूप की बात कर रहा हूं ना और मैं भी तो क्वालिटेटिवली गड ही हूं। किटेटिवली मैं क्वांटिटेटिवली गॉड नहीं हूं। मैं भी किटेटिवली गड हूं और मेरे अंदर अभाव है तो भगवान के अंदर अभाव हुआ ना क्योंकि मैं किटेटिवली तो सेम हूं। अगर मैं किटेटिवली सेम हूं और मेरे अंदर अभाव है और क्वांटिटेटिवली और किटेटिवली दोनों वाले में अभाव नहीं है तो दोनों चीजें एक साथ ट्रू हो गई ना। नहीं आपली आप देखिए आप क्वालिटेटिवली अभाव हो मगर जो हमारे जो भगवान है वो यही तो क्लेम कर रहे हैं कि मेरे से अगर कुछ निकल भी जाएगा तब भी मैं अपने आप में पूर्ण हूं तो आप निकलने पर ये क्यों सिद्ध करना
03:15:07:27 चाहते हैं कि क्योंकि मैं निकला हूं इसलिए वो अपूर्ण भी है। ये कहां से सिद्ध हो रहा है? यही तो वो क्लेम कर रहे हैं कि मेरे से कुछ निकल भी जाएगा तब भी मैं पूर्ण हूं। आप अपने अभाव के आधार पर भगवान को ही अपूर्ण सिद्ध कर रहे हैं कि देखो मैं क्योंकि उनसे निकला हूं तो इससे सिद्ध हो रहा है। भगवान में अभाव भी है। इसका रेफरेंस है यहां पर इसी वाले श्लोक में एक बार निकालता हूं। अब आप कल आइए भाई साहब रेफरेंसेस लेकर के। ठीक है। ओके। अरे यार गुस्सा मत होइए। गुस्सा आप हो रहे हो। और उसको आप हंसी में दिखा रहे हैं। मैं जो अंदर भाव होता है उसको बाहर करता हूं। दोहरा नेचर नहीं है ना दो बातें बोलता हूं। बातों से पलटता नहीं हूं। आप पलटे अपनी बात से आप पलटे आपने जीबीसी वाले में पलटा पलटी मारी। हां मैं पर मैंने माना भी है। वो मेरे अरे भाई पलटे कि नहीं पलटे? भैया तुम इतनी जल्दी टॉपिक चेंज करते हो। बात हो रही पलटे कि नहीं पलटे? तो मैंने माना भी पलटे थे ना। साबित ही होता है। मेरा ही सिद्धांत साबित होता है। वैष्णव सिद्धांत ही साबित होता है कि मैं कहां साबित हो रहा है भाई? भाई कहां साबित हो रहा है? अभी तो हम अभी तो हम इसमें है कि इस कौन वो बात मानता
03:16:22:28 है कि नहीं जो आप आप बोल रहे हो। सिद्धांत तो साबित होना दूर की बात है। सिद्धांत तो साबित हो गया। मैं उत्तम अधिकारी नहीं हूं और मेरे अंदर गलती है। ये सिद्धांत साबित तो हो गया। अगर मैं उत्तम अधिकारी होता तो मेरे अंदर एक भी गलती ना होती। तो ये इसपे हमारा विवाद था क्या? इस पे हमारा विवाद है क्या? इस पर हमारा विवाद है। विवाद इस बात पर था। विवाद इस बात पर था। सुनिए विवाद इस बात पर था कि आपका अंतिम निर्णायक कौन है? आपने कहा पहले जीबीसी सुन लीजिए संक्षिप्त विवरण आपका। ठीक है? अब जीबीसी में मैंने आपसे पूछा कि जीबीसी में कितने मेंबर है? आपको टोटल नहीं पता। आपको उनके नाम नहीं पता। आपने इमॉसिबिलिटी दिखा दी। ठीक है? हालांकि आप जब ये क्लेम कर रहे हैं कि भैया ज्यादा लोग होंगे तो निर्णय होगा। तो फिर यह भी चीज दिक्कत आएगी तेरे लिए कर्तव्य कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है तो फिर ये कैसे डिसाइड हुआ कि 500 पे विकृति नहीं आएगी 1000 पे क्यों नहीं आएगी 250 पे क्यों आएगी तभी तो कलयुग शुरू होगा ना घोर कलयुग आ सकती इसका मतलब आप कंफर्म नहीं हो अपने धर्म में आएगी घोर कलयुग कैसे शुरू होगा इसका मतलब ये चीज फिक्स नहीं है कि 500 लोग होंगे तो बिल्कुल सही चीज देंगे घोर कलयुग उससे आगे चलते हैं। उससे आगे समरी सुन लीजिए। समरी
03:17:38:09 सुन लीजिए। उसके बाद उसके बाद बात इस पे आ गई कि भैया क्योंकि उन्होंने कहा है कि जो षट गोस्वामियों के विपरीत नहीं जाएगा वो जो है प्रमाणिक होगा। ठीक है? क्योंकि प्रभुपाद जी ने ये कहा है तो इसलिए क्योंकि जीबीसी मेंबर षट गोस्वामियों के विपरीत नहीं जाते। इसलिए वो मेरे लिए प्रमाणिक है। फिर मैंने कहा कि षड गोस्वामियों का ज्ञान आपको जब है ही नहीं तो आप ये कैसे पता लगाओगे कि उनके विपरीत जाते हैं कि नहीं जाते हैं? तो अंत में बात आ गई कि उनका क्योंकि सिद्धांत अकाट है इसलिए मेरे मेरे को उन पर विश्वास है। वो जो सेवा इत्यादि वाले दिए थे उस पर आपने खुद कह दिया वो जो है साइड की चीजें हैं। सेवा और पोषण इत्यादि ठीक है तो अकाट पे बात आ गई तो तो जब आप बात अकाट पे आ गई अकाट पे अभी भी चल रही है। और जब आपने अपनी कोई बात बोली है उसमें मैं कह रहा हूं कि इस ने ये बात बोली है कि नहीं यही सिद्ध कर दो। शास्त्र ने बोली है कि नहीं बोली वो बाद में देखेंगे और फिर वो तार्किकता पे कितनी खरी उतरती है वो भी बाद में देखेंगे। इस ने बोली कि नहीं? तो जब आपकी बात अका चल ही रही है आप इस का रेफरेंस तक नहीं दे पा रहे हैं मुझे तो आपने वो उत्तम अरे भैया कहां दे दिया ठीक है वो जनता जनता ने दे दिया आप दे दिया आपने दे दिया आपने दे दिया आप संतुष्ट है ठीक है ठीक है तो अब आपको आने की जरूरत तो है नहीं दोबारा
03:18:54:28 नहीं आप समझे नहीं ना तो आने की जरूरत होनी चाहिए आप समझेंगे तो फिर मैं नहीं भाई साहब आपको आप आप संतुष्ट है कि नहीं है? मैं तो कल भी नहीं समझूंगा। मुझे मालूम मैं क्यों नहीं समझूंगा। मेरे पास उसके लिए बहुत सारे लॉजिक रीजनिंग है। मैं इसके एक बस एक छोटी सी चीज बोलू। एक लास्ट थी। आप एक बात बताइए। आपने अपनी ओर से जो 100% था वो दे दिया है। मैंने पूरा प्रयास किया पर आपने मुझे सिर्फ बोलने का मौका दिया। पूछने का मौका कहां दिया? अगर मैं पूछने पे आया तो फिर आप आपको भी मैं 100% वाले पे एक्सपेक्ट करूंगा। मगर अभी तो मैंने यही मैं आपको पूछने पूछने का मौका मैं देता आप आप शुरू में कह देते अभी तो हमारी चर्चा ऑन गोइंग है ना? हां अभी तो हमारी चर्चा ऑन गोइंग है ना? तो आप क्या चाहते हैं? मैं अभी तीन घंटे के बाद अब एक नई चर्चा शुरू करूं रात भर। नहीं नहीं कोई बात नहीं। हां। तो फिर अभी पूछने का मौका नहीं दिया। ये बात एक अलग जा रही है। बात क्या हो रही है? देखो टॉपिक कैसे चेंज होता है कि आपने मुझे पूछने का मौका नहीं दिया। टॉपिक क्या आपने पूछा था मेरी फिलोसफी तो सिद्ध हो गई। मैं आपको समराइज करते हुए लाया। मैं आपको समराइज करते हुए लाया कि अभी बात इस पे अटक रही है कि आप जो क्लेम कर रहे हो वो इस कौन करता है कि नहीं करता है? ये
03:20:10:00 आप सिद्ध नहीं कर पा रहे हो। और आप कह रहे हो मैंने कर दिया। नहीं कर दिया। आप समझ नहीं पाए। ये आपकी कमी है। ये कहां लिखा है? इसमें क्या भाव माना है उन्होंने प्रभुपाद ने। अरे यार लिखा तो है यार कहां लिखा
✅ This part is already used · 03:20:27:15 – 03:21:28:19 (1:01)
→ Used in: A · Video इस्कॉन की यह बातें सुनकर किसी को भी चक्कर आ सकते हैं ईश्वर भी अभावग्रस्त है? Liv... at 24:44 ↗
→ Used in: B · Video क्या इस्कॉन में इसी प्रकार युवाओं का ब्रेनवाश हो रहा है? at 3:25 ↗
03:20:27:15 मैं दोबारा दोबारा पढ़वाता हूं अगर भगवान में कोई कमी हुई तो भगवान को पूर्ण नहीं कहा जा सकता भगवान में कुछ वो कुछ इस शब्द को कुछ ये पहले ही बता दो ये भगवान में कौन से वाले स्तर की बात कर रहे हो अंतिम प्रमाण ना अंतिम अंतिम जो स्वरूप है भगवान का वो ना हां हां अंतिम स्वरूप में यदि की कुछ भी कमी नहीं हुई तो वो भगवान नहीं है। अंतिम स्वरूप एक कमी होनी चाहिए। कम से कम होनी चाहिए। कोई कमी नहीं होनी चाहिए। कम से कम एक ये कौन तय करेगा यार? ये कौन तय करेगा? मैं बताता हूं। ये कौन तय करेगा? मैं बताता हूं और भी हो सकती है। पर मैं बताता हूं क्यों? क्योंकि अगर एक भी कमी नहीं है। ये भी तो अपने आप में कमी है। ये ध्यान रखिए। तो आप परम रूप जो उसका क्या कहते हैं जो जो उनका जो परम रूप है परम उसमें भी आप कमी मानते हो ना एक कमी है अरे
⬜ Not used yet · 03:21:28:19 – 03:26:48:00 (5:19)
03:21:28:19 यार मैं बोल रहा हूं कि मानते हो हां कि ना तो तुम एक कमी है क्यों बोल रहे हो हां बोलो ना हे कल बात करना जाओ जय श्री राम ओके सॉरी यही वाला हाल वही भव्य राधा कृष्ण में भी हुआ था और एक्चुअली जो अपने पैरामीटर जो वो वाले सेट है ना सर्वशक्तिमान परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म ये सब जो सेट है जो चीजें हैं उसप बात जब करते हैं तो उसमें वो जल्दी रिजल्ट आता है मगर हमको केवल एक यही काम नहीं करना है ना है ना कई तरह की जो उसमें चीजें हैं उनको लेकर के चलना है तो जैसे वैसे इस विषय पर मैंने बहुत ज्यादा डीपली किसी से बात नहीं की थी तो यह बात करनी भी आवश्यक थी कि इस कौन का अंतिम निर्णायक कौन है है ना अब बात दिक्कत दिक्कत क्या है कि पूछो कुछ व्यक्ति बोलता कुछ है चार घंटे घुमाता कुछ है और फिर है आपको समझ में नहीं आ रहा है हैं बेमतलब का अपना इतना लंबा
03:22:43:25 खींच मतलब यहां लिखा है कि उनमें किसी भी तरह की कमी नहीं हो सकती इसलिए उनमें कमी है। वाह क्या लॉजिक है और ये बात प्रपाद ने लिखी है। मतलब यहां अचिंत हां फिर अचिंत पे आ गए। फिर वो फिर वो क्या कह रहे है? क्योंकि उससे जीव निकले हैं। जीवो में कमी है इसलिए उसमें कमी थी। भाई जीवो में निकलने पर कमी दिख रही है। और यहां तो वो अद्वैत जैसी बात कर रहे हैं। क्या कह रहे हैं वो? देखो प्रभुपाद जी अद्वत जैसी भाषा बोल रहे हैं। यहां पर क्या कह रहे हैं देखो
03:23:22:14 यहां क्या कह रहे हैं। तो वह अपनी पूर्णता की अनुभूति करने का अवसर खो देता है। यानी कि पूर्णता की अनुभूति मात्र करनी है। पूर्ण बनना नहीं है। समझ गए? एक तो पहली बात तो एक पूर्ण जीव बन सकता है। जीव के लिए कह रहे हैं। यदि जीव अपनी पूर्ण चेतना युक्त इस मानव जीवन में परम पूर्ण से संबंधित अपनी पूर्णता की अनुभूति नहीं करता। ठीक है? यानी कि वो पूर्ण हो सकता है। ठीक है? पहली बात। दूसरी बात पूर्णता की अनुभूति करनी है। अनुभूति मात्र करनी है। यानी अपूर्ण वो है ही नहीं। है ही नहीं। आ गया ना? और ये बंदा उसको सिद्ध करने पे। हां। अच्छा एक जगह उसने ये भी कहा था ये क्लेम कर रहा है कि जीव ये क्लेम कर रहे हैं कि जीव क्योंकि उनसे निकले अपूर्ण है इसलिए मानना पड़ेगा वो भी अपूर्ण है यहां पे प्रपाद जी कह रहे हैं वो पूर्ण है केवल अनुभूति करना बाकी है लो दोनों की बातें एकदम ऑोजिट जा रही है सबसे बड़ी बात है अगर आप यहां पे ये लिखा है कि उनमें किसी भी तरह की कमी होती तो वो भगवान नहीं हो सकते थे पूर्ण नहीं हो सकते तो ये बंदा ये कह रहा है कि किसी भी तरह की कमी होती अब मैं बता रहा हूं ये वाली कमी होती ये वाली कमी क्यों मान लोगे कि उनमें कमी नहीं है। वाह
03:24:38:12 यानी कि भगवान भी भगवान ना होने की स्टेज में जा सकते हैं। परम रूप में लीला में नहीं कह रहा हूं। लीला में भगवान अपने शरीर को नष्ट करके दिखा सकते हैं। सब कुछ दिखा सकते हैं। मगर अभी पारमार्थिक धरातल की बात यदि हो रही है तो वहां पे ये बोल रहे हैं कि भैया भगवान भी अपनी जो उसको भगवतता से है वो उससे अलग हो सकते हैं। भगवत से अरे भैया भगवान जब भगवतता से अलग हो जाएंगे सृष्टि का अस्तित्व कैसे रह जाएगा? हर चीज का कारण वही है। हां। नहीं तो देखिए मैंने एक एक चीज और लिखा था भैया इसमें और इनहीं सब कंट्राडिक्शन की वजह से तो इस की फिलोसफी फेल है।
03:25:24:26 सही नहीं एक्चुअली क्या हो जाता है? अब कंट्राडिक्शन अब वो इन कंट्राडिक्शन से एक कंट्राडिक्शन से पहले वाले कंट्राडिक्शन को प्रूफ कर रहे हैं। जो कंट्राडिक्शन पैदा हो रहा है कि भगवान पूर्ण है तो उसको रस की आवश्यकता क्या है? ये कंट्राडिक्शन है। ठीक है? तो वो कह रहे हैं कि रस की आवश्यकता रस की आवश्यकता ये सिद्ध करती है भगवान में अभाव भी है और तब भी भगवान है ये सच्चिदानंद है इनका सच्चिदानंद कौन है जो सच्चिदानंद नहीं है वाह क्यों क्योंकि सच्चिदानंद सच्चिदानंद ना होने का अभाव आ जाएगा ना उनमें फिर ये सच्चिदानंद है क्या माया है अविद्या है ये क्या है क्या भाई चलिए मायावाद है चलिए ठीक है। आशा करता हूं लोगों को काफी कुछ सीखने को मिला हो। काफी देर तक बात हुई। फिर भी प्रतीक को कहूंगा जेंटल व्यक्ति है। मगर जहां पर फंस रहे हैं तो वो घुमा भी रहे हैं बात को और तीन घंटे हो चुके हैं। मैं पूछ रहा हूं कि अभाव है कि नहीं है। परम वाले रूप में तो हां कि ना बोलने की बजाय क्या बोल रहे हैं? एक एक चीज का अभाव है कि नहीं है? फिर लोग कहते हैं गुस्सा
03:26:40:04 क्यों आता है? चलो ठीक है जय श्री राम राम जय श्री राम
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