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00:00:01:18 जैसे मैंने पहला बोला ना नेत बहुत स्पेसिफिक है उससे ठीक है इंटेलिजेंट है मान लिया ठीक है भगवान बहुत इंटेलिजेंट है और अगर भगवान बहुत इंटेलिजेंट है तो इन्होंने इस पूरे यूनिवर्स को किसी पर्पस से बनाया ठीक है ठीक है यानी कि भगवान का कारण है उसको बनाने का संसार को बनाने का यानी संसार को उनका बनाने का कुछ कारण है क्यों भगवान को आवश्यकता है संसार बनाने हां भगवान को आवश्यकता है संसार बनाने की ये सच है और वो आवश्यकता मतलब वो पूर्ण नहीं है वो पूर्ण नहीं है भगवान पूर्ण होते हुए भी आवश्यक है क्योंकि जो पूर्ण है इस पूर्ण जो पूर्ण है उसको किसी चीज का अभाव नहीं होता ना हां लेकिन जो पूर्ण है वो अपनी पूर्णता के अंदर ही यानी वो अपनी पूर्णता को अपने अंदर ही पूर्ण कर सकता है ना फॉर एग्जांपल कि अगर भगवान पूर्ण है ठीक है उनको बाहर से किसी एक्सटर्नल चीज की नहीं जरूरत। इसका मतलब है पूर्ण होने का मतलब वो अपने अंदर ही वो सेल्फ सेटिस्फाइड जिसको कहते हैं। बाहर से एक्सटर्नल किसी चीज को नहीं जरूरत। ये पूर्ण का शब्द का मतलब है। लेकिन खुद के अंदर तो वो सेटिस्फाइड ही है ना। यानी वो अपनी ही एनर्जी बनाते

00:01:16:24 हैं। ये जो वर्ड है दुनिया बनाने दुनिया बनाए बिना वो सेल्फ सेटिस्फाइड है कि नहीं? है लेकिन दुनिया बनाने में दुनिया बनाने में कोई एक्सटर्नल चीज इन्वॉल्व नहीं थी। उनके अंदर से ही दुनिया निकली और वो उनके अंदर से दुनिया निकल के उन्हीं की सेवा कर रही है। ठीक है? इसीलिए मैं कह रहा हूं आवश्यकता थी कि नहीं। मैं ये पूछ रहा हूं आवश्यकता है कि नहीं? आप कंधे से वो हाथ डाल लीजिए भाई साहब बगल वाले। हां दोबारा आप ये बता रहे हैं कि भगवान की आवश्यकता है कि नहीं? हां हां बिल्कुल है क्योंकि भगवान ने हमें भी किसी कारण से बनाया क्योंकि वो इंटेलिजेंट है बिना कारण के तो कुछ करते नहीं ठीक है उन्होंने अगर हमें किसी कारण से पूछ रहा हूं मैंने आपसे पूछा आपने कहा सृष्टि बनाए बिना उनको सेटिस्फाइड थे तो फिर सृष्टि बनाने का कारण क्या रह गया या तो वो सेटिस्फाइड नहीं है अगर हम ये अस्यूम करें कि भगवान सारा काम करके

00:02:17:25 अगर हम ये अस्यूम कि भगवान को सृष्टि बनाने की जरूरत नहीं है सेटिस्फाई होने की तो ये भी भगवान के अंदर एक कमी हो जाएगी। क्यों?

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00:02:28:14 ये ध्यान से सुनिएगा। क्योंकि हम ये उन पर एक अवरोध लगा रहे हैं और वो मैंने नहीं कहा। मैंने नहीं कहा कि वो बनाएंगे ही नहीं। अवरोध नहीं लगा रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं सृष्टि के बिना यदि वो पूर्ण है वो संतुष्ट है तो वो सृष्टि बना क्यों रहे हैं? मेरे पास इसका उत्तर है। आपके पास है कि नहीं? कभी नहीं बनाते। मेरे पास भी इसका उत्तर है। वो कभी मैं कहां कह रहा हूं? मैं कह रहा हूं बना क्यों रहे हैं? आवश्यकता क्यों कह रहे हैं आप? आवश्यकता पे ही तो बुद्ध ने खंडन किया है। आपको पता है बुद्ध ने किस आधार पर खंडन किया है? सनातन का। किस आधार पे? जो हमने ये कहा कि आवश्यकता है जो आपने ये फैलाया आवश्यकता है। ईश्वर को यदि आवश्यकता हो जाएगी तो ईश्वर सच्चिदानंद कहां से रह जाएगा भाई?

00:03:14:21 लेकिन ईश्वर को अगर आवश्यकता नहीं रहेगी यहां पर है कि ईश्वर में कोई कमी नहीं है। ये आप मानते हैं ना ईश्वर में कभी कोई कमी नहीं हो सकती। इसका तो कोई खंडन नहीं है। अगर मैं ये

00:03:24:26 मानू कि भगवान ऐसी कोई चीज ही नहीं है पूरी दुनिया में जिसकी भगवान को आवश्यकता नहीं है। तो भी ये भी तो एक कमी हुई। ध्यान से सुनिएगा। अगर ये मानू कि ऐसी कोई चीज ही नहीं है पूरी दुनिया में जिसकी भगवान को आवश्यकता नहीं है। ये भी तो एक कमी हुई।

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00:03:39:18 कमी ये कमी कहां है? ये कमी कहां है भाई? मैं स्वयं ही स्वयं में वो हूं। स्थित प्रज्ञ हूं। ये कमी कहां है? पहली बात तो ये है। पहली बात तो ये है कि आपको अगर किसी चीज की जरूरत है। आप ये मान रहे हैं। आप ये मान रहे तो आप कहो ना कि हां आवश्यकता है। आप ये मानो ना आवश्यकता है। यदि आवश्यकता मान रहे हो तो फिर उसको पूर्ण कैसे कह रहे हो? यानी कि भगवान से डिफरेंट क्वालिटीज वाली कोई चीज एक्सिस्ट करती है। ओबियसली एक मिनट और भगवान को उसकी आवश्यकता है वो क्वालिटी भगवान से ही आ रही है ना भगवान से भगवान को उसकी आवश्यकता है भगवान को उसकी आवश्यकता है और नहीं भी है दोनों एक साथ ट्रू है अगर आप ये कहते हैं कि आवश्यकता यानी कि भगवान भगवान यानी कि भगवान है और नहीं भी है। दोनों ही बातें हैं। नहीं भगवान भगवान है भी और नहीं भी है। और क्या भगवान सुनिए जब

00:04:38:16 हम कहेंगे भगवान को आवश्यकता नहीं है तो वह सच्चिदानंद है। जब हम कहेंगे भगवान को आवश्यकता है तो वह सच्चिदानंद नहीं है। तो यानी कि भगवान भगवान नहीं भी है और है भी है।

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00:04:48:07 क्या फिलॉसफी है? हां तो बताइए भगवान भगवान भगवान सच्चिदानंद है कि नहीं? भगवान हर मोमेंट पर सच्चिदानंद है। ऐसी कोई मोमेंट नहीं है। यानी कि जब उसको आवश्यकता है, जब उसको आवश्यकता है तो वो सच्चिदानंद है कि नहीं? ये आपने बोला कि आपने आवश्यकता को सच्चिदानंद से जोड़ा। मैं यह कह रहा हूं कि भगवान कंप्लीट है। उसमें है और नहीं है। दोनों है लेकिन मैं मैं यही बात है। सच्चिदानंद

00:05:19:13 को आवश्यकता से नहीं जोड़ना है। इसलिए यह नहीं कहना है कि भगवान ने किसी कारण से दुनिया बनाई है। भगवान ने अकारण ये दुनिया बनाई है। हमको ये मानना पड़ेगा कि ये जो दुनिया है वो भगवान की शक्ति का परिणाम मात्र है। हां

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00:05:36:12 तो गलत क्या है। भगवान को कोई आवश्यकता नहीं है। संसार बनाने की मगर आप कह रहे हो भगवान को आवश्यकता है कारण है नहीं नहीं भी है तो जब जब आप कहोगे जब आप कहोगे तो फिर भगवान सिर्फ जब नहीं भी वाले में जाओगे तभी भगवान सच्चिदानंद सिद्ध होगा ऐसा क्यों जब आवश्यकता है तभी अरे जिसको आवश्यकता होती है वही तो सच्चिदानंद नहीं है। ये ये रूल ये रूल गलत है। इस रूल को आप लिख लीजिए कि ये रूल गलत है। तो इसका मतलब आप यह कह रहे हैं कि जिसको आवश्यकता है भी कोई वो भी सच्चिदानंद है। यानी कि जिसके अंदर किसी चीज का जिसके पास किसी चीज का अभाव है वो भी सच्चिदानंद है। जिसके पास किसी चीज का अभाव है वो भी सच्चिदानंद हो सकता है। क्योंकि क्योंकि उसके पास जिस चीज का अभाव है वो उसी से पूर्ण हो रही है। अगर मेरे पास पेन का अभाव है मैं तब भी सच्चिदानंद हो सकता हूं अगर यह पेन मेरे ही शरीर से निकला है और मैं इसको यूज कर रहा हूं। हालांकि अभी नहीं हुआ बट फॉर एग्जांपल ये हाथ हाथ तो मेरा ही है ना तो क्योंकि वो मेरे से ही पूर्ण हो रही है। मगर मगर मगर मगर

00:06:51:18 वो जो क्रिया हो रही है ना वो जो क्रिया हो रही है उस क्रिया का अभाव है। वो जो तत्व निकल रहा है आपके अंदर से वो जो तत्व आपके अंदर से निकल रहा है वो मान लिया कि वो आपका ही पार्ट है। ठीक है जीव और प्रकृति मान लिया ठीक है मगर वो जो क्रिया हो रही है उसका तो अभाव था ना कि वो मैनिफेस्ट हो रही है दुनिया बन रही है लोग आ रहे हैं जा रहे हैं जीव हो रहा है ये हो रहा है ये ड्रामा चल रहा है ये जो क्रिया है मैं तत्व की बात नहीं कर रहा जो क्रिया है उसका तो अभाव मानना पड़ेगा ना हां क्रिया का अभाव जो है मैं बताता हूं कैसे है और कैसे नहीं है मैं बताता हूं ये भी डायग्राम से एक्सप्लेन करूं तो समझ आएगा ये है टाइम मैंने टाइम जो है ऐसे लिख लिया।

00:07:40:19 ठीक है? ये है टाइम और भगवान जो है

00:07:43:27 टाइम क्योंकि भगवान ने बनाया भगवान टाइम के अंदर भी है और भगवान टाइम के बाहर भी है।

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00:07:48:21 क्योंकि भगवान भगवान ने टाइम को बनाया इसलिए भगवान इस आउट ऑफ टाइम। लेकिन भगवान ने टाइम को बनाया तो भगवान टाइम के अंदर भी है। तो अगर गॉड को मैं डिफाइन करूं तो गॉड इज आउट ऑफ टाइम्स एंड इन ऑफ टाइम आल्सो। ठीक है? तो दो चीजें हो गई। एक हो गया इन टाइम गॉड और एक हो गया आउट ऑफ टाइम गॉड। जब आउट ऑफ टाइम गॉड को लेते हैं तो उनको क्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती। लेकिन जब क्यों? क्योंकि टाइम के बाहर में क्रिया होती नहीं है। क्रिया सारी टाइम के अंदर में होती है। भगवान का जो सबसे परम रूप है वो इन टाइम वाला है कि आउट ऑफ टाइम वाला है? वो आउट ऑफ टाइम वाला है। ठीक है? तो जो ये संसार बनता है वो इन टाइम में बनता है कि आउट ऑफ टाइम में बनता है? ऑबियसली यहां पर तो इन टाइम है। हम समय के अंदर है। हम अभी समय के बाहर नहीं है। सिंपल तो यानी वो जो जो संसार बनाने वाले भगवान कृष्ण है वो इन टाइम वाले हैं। संसार बनाने वाले जो कृष्ण है वो आउट ऑफ कृष्ण आउट ऑफ टाइम है। कृष्ण से विष्णु आते हैं। गर्भोधक्षा विष्णु एस पर पूछ रहा हूं उनको आवश्यकता क्या है? क्या आवश्यकता है? आवश्यकता है रस। यानी रस नहीं था ना उनके

00:09:04:00 पास। रस जो चीज है ना रस चीज को अगर आप समझेंगे ना रस चीज का मतलब होता है मैं भाई साहब मैं सोच रहा हूं रस था कि नहीं था। भैया देखो दो घंटे 28 मिनट हो चुके हैं दो मुझे बिना रस नहीं आ सकता तो नहीं है ना अरे मेरे भाई तो ये मान लो ना कि रस नहीं था मैं पूछ क्या रहा हूं रस था कि नहीं था आप कह रहे हो कि नहीं था सब कुछ था मगर रस नहीं था मगर फिर भी वो सच्चिदानंद था आप कहो ना अभाव था

00:09:36:21 रस का अभाव था था अभाव हो गया ना भगवान में किसी चीज का अभाव नहीं है। ये भी तो एक इनकंप्लीटनेस हो गई ना।

00:09:46:21 भगवान में ऐसी कोई चीज नहीं है दुनिया में जिसका भगवान में अभाव नहीं है। ये भगवान को इनकंप्लीट बनाता है।

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00:09:52:04 ऐसी एक नहीं बनाता है। नहीं बनाता है। क्योंकि भगवान है ही वही जो भगवान है ही वही सुनिए भगवान की धारणा ही यही से शुरू होती है कि जो इनकंप्लीट जिसमें किसी चीज का अभाव ना हो। सच्चिदानंद अगर उसमें अगर उसमें रस का अभाव मान लेंगे ना तो उसके आनंद में बाध्यता आ जाएगी। नहीं नहीं आनंद है रस नहीं है। आनंद जो है वो रस से अलग है। ठीक है? सच्चिदानंद में जो चीज है ना वो आनंद ये रस शब्द ही अलग है। ठीक है? इन तीनों को आप मिक्स मत करिएगा। आनंद में अभाव कभी नहीं आता। रस में अभाव कभी आता है। कभी नहीं आता। रस का अभाव था ना उनके पास। रस से क्या आता है भाई साहब? रस रस से क्या आता? रिलेशनशिप के अंदर एक्सचेंजेस। रथ से भी एक आनंद ही आता है ना? लेकिन यह वाला आनंद है ये ब्रह्मानंद तो रथ से आने वाले आनंद का आनंद का अभाव था ना प्लेजर ड्यू टू रिलेशनशिप अभाव था अभाव था तो जब अभाव था तो उसका आनंद बाधित है ना

00:10:56:12 उनका आनंद बाधित है हां लेकिन उनको एक्सटर्नल सोर्स की जरूरत नहीं पड़ी ना बाधित शब्द का मतलब क्या होता है अरे भाई मैं कह रहा हूं अगर मेरे को खुजली करने की जरूरत पड़ गई अगर और एक्सटर्नल से वो नहीं मैंने खुद ही खुजली को खुजा लिया तो इसका मतलब मैं भगवान हूं। जी क्या भाई मुझे खुजली नहीं होनी चाहिए [हंसी] समझ नहीं आया कोई बात नहीं अच्छा था। [हंसी] देखो गॉड जो है उनको अपनी प्रेजेंस को फिल करने के लिए और किसी की नीड नहीं है। ठीक है? बाहर से किसी चीज की नीड नहीं है। बात ये नहीं है। मैं मैं तत्व की बात नहीं कर रहा हूं कि उनको पास तत्व का अभाव है कि नहीं। मैं जान रहा हूं आप कहां जा रहे हो। मैं सामग्री की बात नहीं कर रहा हूं। मैं क्रिया की बात कर रहा हूं। किसी क्रिया की आवश्यकता थी ना उनको। सामग्री की आवश्यकता नहीं थी। क्रिया की आवश्यकता थी ना? तो

00:11:57:10 उससे साबित क्या होता है? अगर आवश्यकता थी तो। उससे साबित यह होता है कि आपकी फिलॉसफी के अनुसार भगवान सच्चिदानंद सिद्ध नहीं हो रहे। आपने कहा था अकाट है हमारी।

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00:12:06:14 हम काट रहे हैं उसको जिसको क्रिया की आवश्यकता है वो सच्चिदानंद नहीं है। इसमें कोई रिलेशनशिप ही नहीं है। बिल्कुल रिलेशनशिप है। जिस क्रिया का मेरे अंदर अभाव है, जिस क्रिया के परिणाम का मेरे अंदर अभाव है और मैं मेरे को उस क्रिया की आवश्यकता है तो उसका अभाव मेरे अंदर मानना पड़ेगा तो मेरे आनंद की नित्यता सिद्ध नहीं होगी। भले ही मैं अपने से ही खुजा लूं। मैं ये देखो मैं ऐसे बोल रहा हूं कि भगवान जो है वो दो पाथ से आनंद ले रहे हैं क्योंकि वो दोनों पाथ से आनंद ले रहे हैं ना एक एक आनंद वाला है रस वाला आनंद एक आनंद वाला है रस वाला आनंद भाई साहब मैं कह रहा हूं रस वाले आनंद की उनको जरूरत है कि नहीं हां तो जरूरत होने से उनका भगवान साबित होना कैसे हटता है अभाव है ना दुनिया में कुछ ऐसा तत्व है जो उनके पास नहीं है जो उनके आनंद में है। भगवान के अंदर अभाव होना ये उनकी पूर्णता है।

00:13:06:16 वाह बहुत बढ़िया। भगवान के अंदर अभाव होना है। भगवान के

00:13:11:25 अंदर अभाव होना वो उनकी पूर्णता है। वाह बहुत बढ़िया। बहुत अच्छा। बहुत बढ़िया। बहुत अच्छी बात। ये बिल्कुल सही है। अब आप ये बता दीजिए कि भगवान के अंदर अभाव होना ये उनकी पूर्ण, एक मिनट, एक मिनट। अब आप अब आप ये मैं बता रहा हूं मैं पूछ रहा हूं। भगवान के अंदर अभाव होना ये उनकी पूर्णता है। ये शास्त्र में कहां लिखा है? भगवान के अंदर ये जो पूर्ण वाला श्लोक था एक बार निकालिएगा। निकालता हूं। एक मिनट रुकिए। बहुत ज्यादा टाइम हो गया सर। मैं

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00:13:40:14 चल जाता हूं। बहुत कुटाई होगी। सॉरी। हां। ठीक है। कल आ जाना। और भगवान में अभाव होना ये भी भगवान की कंप्लीटनेस है। आप इसको समझिए। भगवान में अभाव होना यानी भगवान का भगवान ना होना यह उसकी कंप्लीटनेस है। एक्चुअली हां अब बिल्कुल भगवान का भगवान ना होना भगवान की कंप्लीटनेस है। हां तो पूर्ण वाला श्लोक एक्चुअली ये प्रूफ कर रहा है कि भगवान कंप्लीट है और कंप्लीट भगवान कंप्लीट है तो भगवान कंप्लीट है तो वो तब कंप्लीट है जब वो कंप्लीट है। आप कह रहे हो इनकंप्लीट होंगे तब वो कंप्लीट होंगे। इनकंप्लीट होना भी उनकी कंप्लीटनेस को एक्चुअली ग्लोरिफाई करता है। तो भगवान अगर वो भगवान ना होकर भगवान सुनिए सुनिए सुनिए मैं आपको बता रहा हूं। मान लीजिए मान लीजिए ये भगवान है। इधर देखिए इधर देखिए ये

00:14:33:01 मान लीजिए भगवान है। अब इन्होंने अपने इस स्वरूप को नष्ट कर दिया। ये दिखा दिया मैं नष्ट भी होता हूं। टाइम के बाहर कुछ नष्ट नहीं होता। मैंने टाइम बताया ना टाइम यानी कि वो रूप शाश्वत है ऑब्वियसली वो अनित्यता नहीं है उसमें अच्छा चलो ठीक है वो नष्ट नहीं होता एक मिनट एक मिनट नष्ट ना होने का भाव है एक मिनट फिर नष्ट ना होने का भाव है आपके लॉजिक को ले ले तो बाहर है इसलिए पर नष्ट यानी कि भगवान में जो चेंजेस आ रहे हैं वो अंदर आ रहे हैं। उनका जो परम रूप है वो बना हुआ है लगातार टाइम के बाहर तो भूख तो वही हो गई उसी को मैं लीला कह रहा हूं उसी को टाइम टाइम के बाहर टाइमिंग कर रहे हो उसी को तो मैं लीला कह रहा हूं भाई। हां मैं भी उसी को उसी को आप टाइम के बाहर टाइमिंग कर रहे हो। कृष्ण का रूप शाश्वत है। क्या दिक्कत है? शाश्वत है। हो गया। परम रूप शाश्वत है। हो गया। क्लियर है? बदलता नहीं है। बदलता नहीं है।

⬜ Not used yet · 00:15:29:18 – 00:16:19:01 (0:49)

00:15:29:18 किसी चीज की आवश्यकता नहीं है। यहां दो चीजें लेना। टाइम भाई साहब देखिए। मैं मैं बार-बार आप ना खिचड़ी पका रहे हैं। बहुत टाइम हो चुका है। प्लीज नहीं पका रहा। आप समझे नहीं मैं इसलिए समझा रहा हूं। मैं समय आप जो है चार तरह की बातें करते भाई। अभी टाइम के अभी सुनिए अभी टाइम के बाहर वाला रूप शाश्वत है। टाइम के अंदर वो चेंज होता है ना? टाइम के बाहर वाला शाश्वत है। ठीक है? टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता है। टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता है। टाइम के अंदर ट्रांसफॉर्मेशन होता है। ये क्यों? क्योंकि टाइम के बाहर में क्रिया होती नहीं है। क्रिया सारी टाइम के अंदर में होती है। टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता है। टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता है। क्यों? क्योंकि टाइम के बाहर में क्रिया होती नहीं है। टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता है। टाइम के बाहर एक्सपेंशन होता है। शब्द लीजिएगा प्लीज। ये ठीक है? एक्सपेंशन होता

00:16:19:01 है। एक्सपेंशन होता है। मगर वो एक्सपेंशन होते समय भी एक्सपेंशन होते समय भी वो अपने आप में पूर्ण शाश्वत है। है। हां।

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00:16:29:20 उसमें यह वाली कमी नहीं है कि वो उसमें अनितता नहीं है। नहीं तो वह कंप्लीट नहीं होगा। लेकिन फिर एक्सपेंशन किया ही क्यों? एक्सपेंशन किया। वो मैं आऊंगा ना। वो मैं आऊंगा। वो मैं आऊंगा। जब वो शाश्वत है उसके दुख में बाधा नहीं आती है। हां नहीं आती

00:16:46:04 है। वो स्वरूप से चेंज नहीं होता है। हां। तो भगवान ना होने वाली स्टेज में नहीं जाता है। वो हां। ऐसा कोई स्टेज ही नहीं है कि भगवान। ठीक है नहीं जाता है तो अब बात ये आ गई अगर वो भगवान ना होने वाली स्टेज में नहीं जाता है वो सच्चिदानंद है तो उसको संसार बनाने की आवश्यकता आप क्यों कह रहे

⬜ Not used yet · 00:17:06:16 – 00:25:29:03 (8:23)

00:17:06:16 हैं क्योंकि उनके अंदर आनंद है ना उस आनंद को वो 100 वो हमेशा वृद्धि करना चाहते हैं देखो अगर मैं कहूं कि भगवान भगवान बाधित नहीं है ना भगवान सच्चिदानंद है आप आप एक काम करो पहले तो इस से मुझे दिखा दो जो आप कह रहे हो देखो कम तो होता नहीं है और आप आप देखिए मैं अपना मगजमारी बेकार में करूंगा। पहले आप अपनी स्कन से मुझे रेफरेंस दिखा दो जो आप कह रहे हो। कम से कम ये पता तो चले भगवान में अभाव है शुरू करना। हां हां ये जो 18 पॉइंट पहले तो कल शद्र संभवा दिखा रहा था। स्कंद पुराण नहीं वो मत दिखाइए। वो वो वो मैं देखूंगा। अभी आप अभाव दिखाइए। अभाव भगवान में अभाव होना चाहिए। भगवान में अभाव होना चाहिए। ये जो पूर्ण वाला श्लोक है ना मैं पूर्ण वाले भाई साहब इस पूर्ण वाले श्लोक की व्याख्या आपके इस को ने की है कहीं जहां लिखा हो भाव अभाव गुस्सा मत नहीं इसलिए आप देर कर रहे है ना हां जी मैंने पूछा है स्पॉन का आप जो क्लेम कर रहे हैं वो स्पॉन का ही क्लेम है वो पहले बता दीजिए तब तो मैं उसप टाइम अपना खर्च कर ना उपनिषद से है ना ये वाला जो है और वृधारणिक उपनिषद से भी है दो जगह भाई साहब इस

00:18:21:20 की बुक का नाम बताइए जिसमें अभाव माना हो उसमें भगवान में पूर्णता मानी है भाई साहब मैं पूछ रहा हूं अभाव कहां माना है मैं कैसे मान लू आप जो व्याख्या कर रहे हो उस कौन की व्याख्या है अच्छा हां ये ये वाला रस वाला जो है एक कांसेप्ट आपका क्वेश्चन एन ओ डी में है एन ओडी में एनओडी में हां एन ओडी में है और भगवान को रस क्यों चाहिए ये वाला आप जेमिनाई पे सर्च करिएगा तो उनको वर्ड्स भी बता देंगे कर दीजिएगा तो भी बता देंगे भगवान को रस क्यों चाहिए आनंद की वृद्धि के लिए आनंद नहीं है ऐसा कोई स्टेज नहीं है पर आनंद की वृद्धि होती रहे इस चीज के इसी चीज को रस कहते है भगवान आनंद कम तो होता नहीं है आनंद की वृद्धि होती रहे कंटीन्यूसली और कभी कम ना हो लेकिन हमेशा आनंद बढ़ता रहे बढ़ता रहे बढ़ता रहे बढ़ता रहे बढ़ता रहे मैं कह रहा हूं भगवान के अंदर भी अभाव होना चाहिए तभी भगवान सिद्ध होगा ये बताइए भगवान में अभाव होना आवश्यक है। पहले ये बताइए उनके कहने का मतलब है आनंद स्टेबल नहीं है ना। आनंद भी बढ़ रहा है ना? क्यों बढ़ रहा है? स्टेबल होना चाहिए। आनंद स्टेबल आनंद बढ़ क्यों रहा है? वो वो मैं बाद में प्रश्न करूंगा। पहले आप इस का क्लेम बता दीजिए। अभाव है।

00:19:40:00 भगवान में अभाव है। भगवान पूर्ण है। भगवान में अभाव होना। ये भगवान की पूर्णता है। ये हां ये ये दिखाइए। भगवान में अभाव होना भी भगवान की पूर्णता का है। ये बहुत अच्छी चीज मिल गई। आज इस ने अगर ऐसा कहा है तो मुझे नहीं पता था। अरे क्योंकि पूर्णता है और वो ऐसे है कि अभाव है एक भी अभाव नहीं है। ये भी तो अपूर्णता हुई ना। मैं भाई साहब मैं आपसे क्या पूछ रहा हूं? रेफरेंस रेफरेंस आप जो बोल रहे हैं वो स्कॉन मानता है कि नहीं मानता वो बता दीजिए।

00:20:27:15 मैं अभी शास्त्र का आपसे नहीं मांग रहा हूं। अभी मैं आपका स्कॉन का ही मांग रहा हूं। नेक्टर ऑफ डिवोशन में है। ये नेक्टर ऑफ डिवोशन में एको हम बहुस्याम ये श्लोक पर्टिकुलर आता है। मैं इसको वर्ड्स भी बता देता हूं। एक को हम रेफरेंस इसपनिषद में है। ऑल फैसिलिटीज आर गिवन टू स्माल कंप्लीट यूनिट ट्रांसलेशन ऑल फैसिलिटीज आर गिवन ऑल फैसिलिटीज आर मैं ले आया मैं ले आया मैं मेरे पास है। जी वो जो अगर आप फर्स्ट लाइन ही पढ़े बिकॉज़ ही इस कंप्लीट होल। मैं इंग्लिश में पढ़ने की आदत की वजह से बोल रहा हूं। आप समझ पाएंगे बहुत ज्यादा मुश्किल नहीं है। ठीक है? बिकॉज़ ही इज कंप्लीट होल इवन दो सो मेनी कंप्लीट यूनिट्स एमिनेट फ्रॉम हिम ही रिमेंस कंप्लीट होल ये लाइन को ज्यादा ध्यान से पढ़िएगा ठीक है अरे ही रिमलीट ही रिमेंस कंप्लीट रहा ना वो वो इनकंप्लीट नहीं हुआ ना हां इनकंप्लीट नहीं हुआ तो जब वो नहीं हुआ तो आप क्यों कह रहे हो कि वो जो है इनकंप्लीट हो जाता है उसमें इनकंप्लीटनेस ना होना भी उसका वो आप अभाव

00:21:42:16 शब्द को एब्सेंस बोलते हैं। अभाव शब्द मतलब एब्सेंस किसी चीज की एब्सेंस है ना? तो भगवान में हां जी भगवान में भगवान पूर्ण है। अपने आप में कंप्लीट होल है। ठीक है? तो वो उनके अंदर से पार्शियल कंप्लीट यूनिट निकलते हैं। एक्सपंड अरे मेरे भाई पार्शियल कंप्लीट यूनिट की बात नहीं हो रही है। भगवान आनंदित है कि नहीं? विचार की बात हो रही है। यहां ज्ञान की बात हो रही है। यहां यहां सामग्री की बात ही नहीं हो रही है। आप तत्व के आधार पर कहते हैं कि तत्व उनसे निकलता है इनकंप्लीट। मगर वो फिर भी पूर्ण है। वो नहीं कह रहा हूं। वो अपने आप में सदा आनंदित है कि नहीं? या उनमें कोई अभाव है। रस रस का होना चाहिए ना। वो आनंद वृद्धि होने को ही रस कहते हैं। भाई साहब इसमें अभी आपने एक कोट किया था कि भगवान में अभाव नहीं होगा तो भगवान नहीं होगा। वो मुझे बताइए कहां लिखा है अभाव है आनंद की वृद्धि का अभाव हो गया ना तभी तो आनंद की वृद्धि करनी पड़ी ये इसमें कहां लिखा है आनंद की वृद्धि का अभाव है भगवान में तभी वरना अच्छा ये एक मिनट भाई साहब आप समय वेस्ट करते हैं रेफरेंस मैं मांग रहा हूं भगवान में अभाव होना माना

00:22:57:22 है कि नहीं इस कौन ने आप मुझे रेफरेंस दे रहे हो कि भगवान से इनकंप्लीट जो है अभाव युक्त स्मॉल पूर्ण चीजें निकल गलती है। ये क्या बात है? और फिर कह रहे हो मुझे देर हो रही है। सॉरी ठीक है। ठीक है। ठीक है। खुद ही तो खुद ही तो घुमा रहे हो। खुद ही तो खिचड़ी बना रहे हो। फिर कह रहे हो मैं कुछ समझ नहीं रहा हूं। मैंने मांगा आपसे क्या है कि क्या इस ने माना है भगवान में अभाव नहीं होगा तो भगवान नहीं कहलाएंगे। इस ने यह माना है कि भगवान का जो प्रेम है या भगवान का जो आनंद है वो कंटीन्यूस इनक्रीस होता है। यह भाई साहब सुनिए आपकी जो व्याख्या है वो इस की ही व्याख्या है या हम कैसे माने हम तब तो आपके साथ अपना समय वेस्ट करें। जब बात आएगी प्रमाण की तो आपको प्रमाण देना होगा। अभी मैं इससे सहमत नहीं हूं कि अभाव होगा तभी भगवान अभाव होगा। फिर तो हम ये कह देंगे भगवान अपने आप को नष्ट नहीं कर सकता। यह भी अभाव है उसमें। कोई आके कह देगा ये तो उन्होंने ये तो उन्होंने लीला में कहा है। आप कहोगे कि रियल में कहा है। अल्टीमेट रियलिटी वाली बात कही है। दूसरा आकर के कह देगा दूसरा आकर के कह देगा ये तो उन्होंने लीला में कहा है। हम कैसे मान ले? इसलिए वो सिद्धांत जो है ना कि भगवान में अभाव होना चाहिए। अगर अभाव नहीं होगा तब

00:24:12:28 भी वो पूर्ण नहीं है। अभी आपने कितना टाइम वेस्ट कराया इसको खोल के? कितना टाइम वेस्ट कराया? वो जो क्या निकला मैं पूछ रहा हूं अभाव है कि नहीं आप इसको खुलवा रहे हो फिर आप कह रहे हो याद आ गया मर्स ऑफ गड की वजह से इसका मतलब आपने ये वेस्ट खुलवाया था आपको याद नहीं आ रहा इसमें टाइम वेस्ट करा रहे थे इसका जो मीनिंग है वो मीनिंग आप भाई साहब इसमें कहीं भी प्रभुपाद जी ने ये नहीं माना है कि भगवान में अभाव नहीं होगा तो हम भगवान को भगवान कैसे कहेंगे मैं दोबारा दोबारा पढ़वाता हूं अगर भगवान में कोई कमी हुई तो भगवान को पूर्ण नहीं कहा जा सकता। भगवान में कुछ वो कुछ इस शब्द को कुछ ये पहले ही बता दो ये भगवान में कौन से वाले स्तर की बात कर रहे हो? अंतिम प्रमाण ना अंतिम अंतिम जो स्वरूप है भगवान का वो ना हां हां अंतिम स्वरूप में यदि कुछ भी कमी नहीं हुई तो वो भगवान नहीं है। अंतिम स्वरूप एक कमी होनी चाहिए। कम से कम होनी चाहिए। कोई कमी नहीं होनी चाहिए। कम से कम एक ये कौन तय करेगा यार ये कौन तय करेगा मैं बताता हूं ये कौन तय करेगा मैं बताता हूं और भी हो सकती है पर

00:25:28:02 मैं बताता हूं क्यों

00:25:29:03 क्योंकि अगर एक भी कमी नहीं है ये भी तो अपने आप में कमी है ये

⬜ Not used yet · 00:25:32:19 – 00:26:04:00 (0:31)

00:25:32:19 ध्यान तो आप परम रूप जो उसका सर पर जो इनका जो परम रूप है परम उसमें भी आप कमी मानते हो ना एक कमी है जब आउट ऑफ टाइम गड को लेते हैं तो उनको क्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती। एक कमी है क्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती। एक कमी है क्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती। एक कमी है क्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती।

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 26:18 · 10 Mar 2026

इस्कॉन की यह बातें सुनकर किसी को भी चक्कर आ सकते हैं ईश्वर भी अभावग्रस्त है? Live Discussion

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