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00:00:01:18 आपने जब हमारा फॉर्म भरा होगा तो उसमें यह चीज लिख के आई होगी कि हम चर्चा उसी के साथ करते हैं जो वीडियो के साथ आता है। ओके ओके आई एम है ठीक है बहुत बढ़िया तो सभी को जय श्री राम और ईश्वर के को लेकर के ईश्वर के अस्तित्व को लेकर के हमारी आज चर्चा है हर्षित जी के साथ तो जी हर्षित जी आप ईश्वर को नहीं मानते हां

00:00:35:03 एक्चुअली मैं थोड़ा इसको क्रिएट कर लूंगा मैं फोन को रख लेते रख बोलो सर आप हां जी हां जी तो ईश्वर के ईश्वर को आप नहीं मानते कि ईश्वर है हां मैं ऐसा मतलब नहीं मानता कि अभी कोई पर्टिकुलर कोई ईश्वर है कहीं ना कहीं पे अच्छा आपने कभी ये जानने का प्रयास किया है कि हम ईश्वर कहते किसे हैं? कौन है ईश्वर हम ईश्वर एक्चुअली भावना होती है ये बात है ईश्वर मैंने मैंने जैसे जाना है मैं मैं आपकी वो नहीं पूछ रहा आपकी मान्यता हम लोग जिससे आप बात करने आए हैं सनातनी हम तो हम लोगों के अकॉर्डिंगली ईश्वर क्या है ईश्वर तत्व हम किसे कहते हैं आपने कभी जानने का प्रयास किया है हम क्या है आप सच्चिदानंद को मानते हो सच्चिदानंद को प्राप्त करना चाहते हो आप हम और सच्चिदानंद क्या है ये आप सच्चिदानंद क्या है ये भी आप जानते हो हां

00:01:51:06 अच्छा तो सबके लिए नहीं बट सबके लिए मेरे भाषण हो अलग-अलग डेफिनेशन है सबके लिए ये बात है सच्चिदानंद ये बात है सचित आनंद सत्य यानी सत्य अब जो आस्तिक होता है। उसके लिए सत्य थोड़ा कुछ अलग होता है। नास्तिक के लिए सत्य कुछ अलग होता है। आस्तिक है वो सत्य किसी भी चीज को मान सकता है। ये बात है। और नास्तिक जो है वो सत्य को जानता है। ठीक है ठीक है। मैं बता रहा हूं। सत्य को अब आप मुझे बता दीजिए कि अपनी माता बहन और पत्नी में अंतर किस आधार पर करते हैं। अब मेरी बात सुनिए। आप ले दे के आप इस बात पे आते हो। मैं आपको आज क्लियर कर देता हूं। ठीक है ना? देखो एक बात तो सुनो पहले तो ले दे के और इस तरह के जो ऐसी भाषा यूज़ करोगे तो फिर मुझे भी थोड़ा सा कठोर होना पड़ेगा वो आपको ठीक नहीं लगेगा तो नहीं सर मैं नहीं ले दे के आप ऐसा करते हो आप वैसा करते हो ये तो मैं भी कह सकता हूं ले दे के आप ईश्वर को ना मानने की बात पे ही आते हैं सारे के सारे है ना तो मैंने तो आपको व्यक्तिगत कटाक्ष नहीं किया है ना किया है क्या बस भाई जो परिभाषा जो तर्क जो उत्तर नास्तिकों के लिए बनाए गए हैं हमें प्राप्त है वही हम आपको देंगे ना

00:03:06:14 कि हम नई किताबें खोल दे। सही बात है। अब ईश्वर के विषय में यदि हमको बताया गया है हम ईश्वर उसे मानते हैं कि सच्चिदानंद है जो वही ईश्वर है तो हम आपको ये कह दे कि जो माया मोह स्वरूप है वो ईश्वर है। हम अपनी डेफिनेशन बदलेंगे नहीं ना। तो अब मैं पूछ रहा हूं आपसे जो मोरल वैल्यूस है उनका आधार क्या है? मोरल वैल्यू नहीं आप वापस पहले आपके उस टॉपिक पे आओ या बात है वो माता की माता को नजर से बहन को बहन की नजर से उसी को मैंने दूसरे रूप में कहा है वही है ये मोरल वैल्यू नैतिकता नहीं बट मैं फिर भी आपको एक बात मैं क्लियर कर दूं मेरी बात सुनो क्या आप थोड़ा ऐसे बैठिए कि थोड़ा सा चेहरावरा ठीक से दिखाई दे थोड़ा अभी उसके लिए उसके लिए मैं एक मिनट के लिए कर सेटिंग कर लीजिए। हां मैं उसके लिए तो सॉरी बोलता हूं आपसे।

00:04:18:12 फिर भी चेहरा क्लियर नहीं आया मेरा। नहीं ठीक है। ठीक है। चलिए बताइए। हां हां तो सर मैं ये बोल रहा नहीं मैं ये बोल रहा था धर्म अपन को बहुत अच्छी-अच्छी बातें बताता है। ये बातें हम धर्म अपन को बहुत अच्छी-अच्छी बातें बताता है। सर है ना? नहीं वो ठीक है। मैं कह रहा हूं जब आप ईश्वर के धर्म क्या है मालूम है। हां मैं मैं जानता हूं धर्म क्या है? क्या है? ये जो मोरलिटीज होती है ना वो उन्हीं को धर्म बोलते हैं। बातें मतलब अपने कुछ कोई भी वो काम होते हैं अपने कार्य उन्हीं को धर्म बोला जाता है कि इसका कार्य ये है। धर्म का उद्देश्य क्या है? धर्म का उद्देश्य होता है देखो एक्चुअली देखा जाए तो जो समाज है ना समाज को बिल्कुल एकता में समाज में एकता बनाए रखना और पवित्रता बनाए रखना समाज में ये तो धर्म का एक रूप हो गया धर्म का एक घटक हो गया धर्म का जो मूल उद्देश्य है वो है सच्चिदानंद को प्राप्त कराने वाले नियम हां ठीक है धर्म का जो मूल उद्देश्य है वो है भगवान को प्राप्त कराने वाले नियम। अब

00:05:33:15 यदि आप ये कहते हैं कि मैं ईश्वर को नहीं मानता, धर्म को मानता हूं तो आपका धर्म को मानना सिद्ध ही नहीं होगा क्योंकि आप ईश्वर को मानते नहीं है। तो वो धर्म आपके लिए अस्तित्व में आना सिद्ध नहीं होगा। तो अब आपके पास धर्म यानी कि ईश्वर को प्राप्त कराने वाली नियमावली से स्वतंत्र होकर माता बहन और पत्नी में अंतर कराने का आधार क्या है? करने का आधार क्या है? मोरल वैल्यूस को मानने का आधार क्या है? इन मोरल वैल्यूस को मानने का आधार तो मेरी बात सुनो। देखो ये तो नॉर्मल सामाजिक चीजें हैं। जब से ये मानव समाज में आया समाज में अच्छी-अच्छी बातें होने लगी तो मोरलिटीज बनने लगी। ये बात है। और ये मोरलिटी जो होती है वही यानी कई लोगों ने कई लोगों ने मिलकर के जो मान लिया उसको आप मान रहे हो। नहीं कई लोगों ने मान लिया वो वो वो बात नहीं तो क्या बात है

00:06:34:19 पहले आप आप उस टॉपिक पे वापस आओ आओ आप उस टॉपिक पे ही तो है आपने कहा था ना माता बहन और पत्नी पे मैं बताऊंगा आज आपको क्लियर आप ले देके यही ले आते हो हां तो मैं बोल रहा हूं नहीं हम ये जो बात है ना क्या धर्म ये भी बताता है कि किसी का मर्डर करना चाहिए नहीं करना चाहिए चाहिए कि भाई नहीं करना चाहिए। अच्छी बात है। बिलकुल बताता है। नहीं करना चाहिए। कब करना चाहिए? किस स्थिति में करना चाहिए? बिलकुल बताता है। है ना? हां।

00:07:07:27 आप बिना किसी से निकलना चाहिए। बिना बिना हिले बात करिए। बिना हिले मत थोड़ा सा। नहीं उसके लिए मैं सॉरी बोलता हूं। थोड़ा एक्चुअली क्या थोड़ा थक थक गया मैं ये बात है। मैं रेडी नहीं था इस डिबेट के लिए। अच्छा अच्छा रेडी नहीं थे। अच्छा तो फोन क्यों हो रहा आप? रेडी नहीं थे तो। नहीं मैंने नहीं आप वापस टॉपिक पे आओ यह बात है तो यह टॉपिक में आपके पास जवाब नहीं है कि आप माता को माता की दृष्टि से क्यों देखते हैं क्यों देखते हैं इसमें धर्म जरूरी थोड़ी जोड़ना इसको ये बात ये तो तो मुझे मुझे बताओ ना मुझे आप बताओ ना क्यों देखते हो आपने अभी शुरुआत में एक बात कही थी कि मैं सत्य को उसको सत्य मानता हूं जिसको मैं जानता हूं तो यहां पे क्या जाना आपने माता को माता की दृष्टि से देखने के लिए आपने क्या जाना? क्या साइंटिफिक जान लिया आपने? बहन को बहन की दृष्टि से देखने के लिए क्या जान लिया आपने? उसमें कोई साइंटिफिक उसकी जरूरत नहीं है। ये बात है उसके लिए। साइंटिफिक जरूरत नहीं है। मतलब जैसे भी जैसे भी बहुत से जरूरी नहीं है कि भाई कोई साइंटिफिकली ऐसे कुछ माना जाए। मोरलिटीज होती है। यहां पे ये बातें सब सभ्य समाज में रहते हैं तो सभ्य समाज है। बिल्कुल ये सब नहीं होता। ये बात है

00:08:23:01 कोई नहीं देखता तो यानी कि यानी कि आप इस नियम को मान रहे हो ना कि बहुत सारे लोग मानते हैं इसलिए मैं मान रहा हूं तब्य समाज से आपने ले लिया उसको हां तो बहुत सारे लोग ही तो ईश्वर को भी मान रहे हैं तो मान सकता है वो जो बहुत सारे लोग मान रहे हैं वो ईश्वर को ही मान रहे हैं। इसीलिए उनके पास मोरल्टीज है। नहीं तो वो बहुत सारे लोगों ने उसका पैरामीटर क्या था ये मानने का उन बहुत सारे लोगों को आप जानो ना क्वेश्चन करो ना उन बहुत सारे लोगों से पैरामीटर क्या है कि झूठ मत बोलो सच बोलो पैरामीटर क्या है कि बहन के साथ विवाह मत करो पैरामीटर क्या है कि माता की ओर कुदृष्टि मत डालो इसका पैरामीटर क्या है क्यों ना डाली जाए क्यों सच बोला जाए क्यों अन्याय ना किया जाए जब एक बालक जब एक जब एक बालक एक शिशु का जन्म होता है तो वो उसको केवल अपना कंजशन दिखाई दे रहा होता है। जैसे शास्त्रों की भाषा में बोला गया है धर्म वो आहार निद्रा भय मैथुन उसमें ये चार चीजें होती है। उसको कोई मतलब नहीं है मैं किसी का अच्छा कर रहा हूं कि बुरा कर रहा हूं। आहार निद्रा भय मैथुन ये होता है उसके अंदर और आप देख लो हां जो जो शान

00:09:38:12 इत्यादि है अभी सर्दियों के दिनों में बहुत सारे जो मादाएं हैं उन्होंने कई शिशुओं को जन्म दिया है। आने वाले समय में वो उनहीं के साथ जो है रमण करके दोबारा से नए शिशुओं की उत्पत्ति कर देंगी। हम हां मैं जानता हूं ये मनुष्य तो ऐसा नहीं कर तो वो जो होते हैं इन्हें एक मिनट इसे अपवाद अपवाद बोलते हैं। ये अपवाद होते हैं। बहुत से जानवर ऐसे भी होते हैं जो बिल्कुल नहीं करते। इंटरब्रीडिंग ये बात है। प्रकृति में इंटरब्रीडिंग बिल्कुल भी नहीं होती। प्रकृति खुद इंटरब्रीडिंग के खिलाफ होती है नेचर क्योंकि अगर मेरी बात सुनो इंटरब्रीडिंग होगी तो मतलब कौन से जानवर हैं जो ऐसा नहीं करते हैं कौन से जानवर हैं जो ऐसा नहीं करते शेर होते हैं चिंपांजी शेर होते हैं इस बारे में प्रमाण क्या है चिंपांजी चिंपांजी होते हैं डॉग होते हैं प्रेरडॉग मेरी बात सुनो नहीं मेरी बात सुनो सर आप डॉग होते हैं ना के विषय में प्रमाण है आपके पास कोई हां मेरे पास प्रमाण है। बताइए मेरी बात सुनो। तो प्रेरी डॉग आप सर्च करना प्रेरी डॉग जो होते हैं ना अरे एक एक किस्म के मतलब डॉग्स

00:10:53:18 होते हैं ये तो ये इनको मतलब साइंटिस्टों ने इन पे वो किया रिसर्च किया साइंटिस्टों ने तो उन्होंने पता किया कि जो जब इनके ब्रीडिंग का समय आता है जब करते हैं वो ब्रीडिंग का समय आता है तो जो बहनें होती है ना अपने भाइयों को अवॉयड करती है ये बात है वो वो दूसरे ग्रुप में जाना पसंद करती है वो शेयर जो होते हैं ना अवॉयड भाई साहब सुनिए अवॉयड करना और ना करने में अंतर है। आप इसी तरह से हो क्या कि अवॉइड करते हो अपनी बहन को मगर अगर काम नहीं चलेगा तो फिर वहां आप ऐसे हो तो उससे तुलना क्यों कर रहे हो? हां तो उससे तुलना मत करो। अब सीधी बात आओ आप आप बोल रहे थे ना कभी जानवर अब शेर भी नहीं करते। अरे भैया एक यही चीज नहीं है। चलो इसमें तुम्हारे पास अपवाद है। और भी बहुत सी चीजें है। दूसरे छीन के नहीं खाना है। हां छीन के नहीं खाना ये बात है। अब ये भी सभ्य समाज की वो हां तो वो सभ्य समाज की मोरल बात है। मोरल बात है। मैंने आपसे क्या कहा भाई साहब? वो सभ्य समाज की वो रजिस्टर्ड कोई बुक है जहां लिखा हो। सभ्य समाज ये करेगा। सभ्य समाज ये नहीं करेगा। वो रजिस्टर्ड बुक है क्या कोई नियमावली की?

00:12:06:02 नियमावली की ऐसे बुक थोड़ी होती है वो तो जो भी रहता है उसमें तो नॉर्मल बात समाज क्या मानता है और क्या नहीं मानता है इस विषय में निर्णय कैसे करोगे आधा समाज कहेगा समलैंगिक होना सही है आधा समाज कहेगा समलैंगिक होना कोई दिक्कत नहीं है आधा समाज कहेगा कि बहन से विवाह कर सकते हैं आधा समाज कहेगा नहीं कर सकते हैं आधा समाज कहेगा कि एपिस्टन फाइल जो एपिस्टन फाइल ओपन हुई है वह अच्छा है क्यों उसमें समाज के ही लोग तो जा रहे हैं और आधा समाज कहेगा नहीं गलत है तो कोई निश्चित नियमावली माननी पड़ेगी ना कि भैया यह समाज की वो है। वही निश्चित नियमावली धर्म है। नहीं तो ऐसे समाज के नाम पर कोई भी कुछ भी करेगा। निश्चितता क्या है? निश्चितता कि ये होगा या नहीं होगा। उसी का नाम धर्म है। और दूसरी बात कि आपने जब लोगों के मानने के कारण ये माना कि बहन से विवाह नहीं करना है तो फिर लोगों के मानने के कारण ये भी मानिए ईश्वर है। क्योंकि जिन लोगों ने माना है उनके उनका भी आधार ईश्वर ही है। नहीं तो उनके पास भी ये सवाल आ जाएगा। उन्होंने ऐसा क्यों माना? ठीक है। जरूरत थोड़ी तो मानना है। धर्म का तो नहीं मानते तो बताओ

00:13:21:10 ना कि माता बहन पत्नी में अंतर किस आधार पे करते हो? बताओ। ये तो मोरल बात है ना। अरे कहां रजिस्टर मोरल बात है। भाई साहब दूसरे टॉपिक पे आओ आप। यानी कि आप एक्सेप्ट करो ना। इसका मेरे पास उत्तर नहीं है। हां हां नहीं नहीं ये तो इस चीज को मैं आपको नेक्स्ट डिबेट में क्लियर करूंगा करते रहोगे तब तक मैं उसको खींचता रहूंगा

00:14:04:02 नहीं मैं बोल रहा हूं आपसे मैं क्लियर कर रहा हूं कि इस चीज को मैं बिल्कुल फिक्स नेक्स्ट डिबेट में क्लियर करूंगा आपसे नहीं नहीं ये नहीं अभी आप यह बताइए आपके पास उत्तर है कि नहीं वो बाद की बात बाद में देखी जाएगी आपके पास उत्तर है माता बहन और पत्नी में अंतर करने का आधार नहीं नहीं अब इसमें एक बात है कि अगर मैं गहनता में जाऊं तो यानी कि आज आपके पास एक ठोस नियम नहीं है कि मैं इसलिए माता बहन और पत्नी में अंतर करता हूं। नहीं है ना?

00:14:45:25 हां हां तो आज की डेट में आप जब आगे रिसर्च करके आएंगे तो बात अलग है। मगर आज की डेट में ये अंतर करने का जब आपके पास ठोस आधार नहीं है तो आप ही ने कहा कि आप वही करते हैं वही मानते हैं जो आप जान लेते हैं। यानी कि आज ऐसा संभव हो सकता है क्या कि इस नियम को आप ना माने? ऐसी संभावना है जब आपके पास ठोस आधार तो है नहीं। आपने जाना है नहीं अभी तक तो आप नहीं जानते हैं ना तो इस नियम को ना मानने की संभावना शेष है क्या अभी नहीं है हम शेष नहीं है यानी पक्का है आज से लेकर के आज से लेकर के और जब तक आप वो नई रिसर्च नहीं कर लेंगे तब तक भी आपका इस नियम को मानने के लिए आप प्रतिबद्ध हैं। है ना? हां है ना तो फिर यहां पर तो ये मानना ही पड़ेगा ना कि धर्म है आपका आधार यहां से ले आपकी रिसर्च आने तक तब तक क्यों मानोगे इस नियम को नहीं ऐसी बात नहीं है ये तो मानता आ रहा हूं जरूरी नहीं है धर्म आपके हिंदू हिंदू धर्म नहीं बाकी फिर खींचेगा

00:16:00:26 मामला आपने कहा था ना टॉपिक बदल दो अब फिर खींचेगा आप जस्टिफाई करोगे मैं तह तक जाऊंगा चलो दूसरे धर्म में भी नहीं होता। यह बात है। क्या सिस्टर के साथ विवाह? दूसरे धर्म में भी नहीं होता। तो दूसरे धर्म आए कहां से? पहले तो हमने ये डिसाइड ये किया है कि धर्म है क्या? तो जब आप कह रहे हो दूसरा धर्म तो उसको फिर आपको धर्म सिद्ध करना पड़ेगा कि वह भी धर्म है और इसके लिए वहां पर जो ईश्वर है जिससे उस धर्म के द्वारा वो प्राप्त होने वाली जो मुख्य तत्व है उसको आपको ईश्वर सिद्ध करना पड़ेगा और हम उसे सिद्ध करेंगे वो अनश्वर है वो ईश्वर है ही नहीं करने के लिए तैयार हो टॉपिक चेंज करो आप हां तो अभी से लेकर के वहां तक तो कम से कम आपके पास माता बहनों पत्नी में अंतर ना करने का आधार धर्म ही है ना यही मानना पड़ेगा ना आज से लेके नई रिसर्च आने तक हैं हां हां फिलहाल आप भी ईश्वर के अस्तित्व को मानने वाले हैं आज से ले अगली रिसर्च आने तक अस्तित्व अलग बात है और ये मानना अलग बात है ये बातें अस्तित्व

00:17:16:07 अलग बात है कि भ कोई पर्टिकुलर चीज कोई बैठी हुई है कहीं ब्रह्मांड में से वगैरह कहीं मैं आपकी बात को समझना चाह रहा हूं आप ये तो नहीं कह रहे कहीं कि भाई अस्तित्व अलग बात है कि वो तत्व है। अब मैं उसकी पूजा करूंगा कि नहीं करूंगा वो एक अलग बात है। आप यह कह रहे हैं क्या? हां हां तो आप ये कह रहे हैं मतलब ईश्वर को आप मान रहे हैं मगर मैं उसके प्रति श्रद्धावान नहीं हूं। ईश्वर का अस्तित्व है। अभी तो मैंने माना अगली चर्चा आने तक। हां मैं मैं नहीं मानता ये बात ऐसे। तो क्या मानते हैं फिर बताइए अब से ले और आपकी रिसर्च आने तक आपका आधार क्या होगा माता बहन पत्नी में अंतर करने का धर्म ही है ये तो नॉर्मल बात है तो नॉर्मल है तो नॉर्मल को एक्सेप्ट कर लो ना धर्म है तो नॉर्मल बात है तो हां क्या ये कोई कह के मर गया था जो बात नॉर्मल हो उसको एक्सेप्ट मत करना

00:18:18:16 नहीं आप टॉपिक चेंज करो आप इस बात पे आओ आप दूसरी बात मैं चेंज मैं चेंज करूंगा मैं चेंज करूंगा मगर अनश्वरवादी हो आए हो ईश्वर का खंडन करते हो और जो ईश्वर को मानते हैं उनसे आर्ग्यू आर्गुममेंट करते हो तुम्हें थोड़ा टटोल तो ले कितना अपने उस मान्यता को लेकर के कितना मजबूत पक्ष है आपका हां अबे ऐसा थोड़ी ना होगा कि कोई व्यक्ति आए और हमारे ईश्वर को कह के चला जाए हम नहीं मानते और हम सुन सुन के बैठ जाए ऐसे थोड़ी ना नहीं ऐसे तो मैं भी हिंदू धर्म का ही ये बात है। मैं भी ब्राह्मण ब्राह्मणियों में हर्ष शर्मा नाम है मेरा। भाई साहब भाई साहब देखिए दो तरीके के धार्मिक होते हैं। एक जो उस अमुक कुल परंपरा में जन्म लेते हैं जहां धर्म को माना जा रहा है। और दूसरे जो उस अमुक कुल परंपरा में जन्म लेने के बाद उसके जो निर्धारित चीजें हैं उस धर्म की उसको मानते भी हैं। जैसे कि देखा जाए तो दुनिया में सनातनी शब्द है। सब है क्योंकि जीव मात्र की प्यास है। असतो मा सद्गमया तसो मा ज्योतिगमया मृत्यु मतमया तो इस दृष्टि से हम कह सकते हैं कि दुनिया

00:19:33:18 में कोई है ही नहीं जो सनातनी ना हो मगर जब हम कहते हैं कि कोई मुसलमान है कोई बाइबल वाला है कोई बुद्ध वाला है तो फिर एक तरफ तो ये कह रहे हैं सब सनातनी है फिर एक तरफ ये कहते तो जब हम व्यवहार की दृष्टि से देखते हैं तो तात्विक विवेचना हो गई जब हम व्यवहार की दृष्टि से देखते हैं तो हम ये देखते हैं कि असतो सदगमया को मानने वाला कौन है तब वहां पर वो वो अलग हो जाता है। हम तो भैया असतो मां सर्गमाया को नहीं मानेंगे। हम तो भैया उसको मानेंगे 433 को कि मुंह बोली रिश्तों की जहां पर मुंह ये सब मुंह की बातें हैं। अगर किसी ने आपको माता बहन और ये सब कह दिया है मुंह से तो आप इससे पलट सकते हैं। तो ये फिर अंतर आ जाता है। कुरान में कहा गया है सब। ठीक है? तो यह अंतर आ जाता है कि तात्विक रूप से हम सभी क्या ढूंढ रहे हैं उसके आधार पर हम ईश्वर की सिद्धि करते हैं। हम सिद्ध कर देंगे तुम भी सनातनी हो। जैसे अभी मैंने सिद्ध किया। ठीक है? मगर वो फिर व्यवहार की दृष्टि से क्या तुम उसको मान रहे हो कि नहीं मान रहे हो? ततही स्तर पर उस चीज को मान रहे हो कि नहीं मान रहे हो? फॉलो कर रहे हो कि नहीं कर रहे हो? एम्प्लीफाई कर रहे हो कि नहीं कर रहे

00:20:48:19 हो? स्वयं को उन नियमों के नीचे मान रहे हो कि नहीं मान रहे हो? फॉलो तो क्या कर पाएगा कोई? कम से कम स्वयं के ऊपर एक लॉ को तुम स्वीकार कर रहे हो कि नहीं कर रहे हो? जिस धर्म कुल परंपरा में आपका जन्म हुआ है। तब आप हिंदू कहलाएंगे। जिस हिंदू की हमें आवश्यकता है मैं फॉलो की जिस हिंदू की समाज को आवश्यकता है वो हिंदूवाद तब कहलाएंगे जब स्वयं को हिंदू धर्म के धर्म शास्त्रों के द्वारा बताए गए जो नियम इत्यादि है उनके नीचे स्वयं को खड़ा पाएंगे और यदि आप उनकी आधीनता स्वीकार नहीं कर रहे हैं तो आपके ऐसे हिंदुत्व से किसी को कोई सरोकार नहीं है। इससे अच्छा तो वो जो हिंदू धर्म शास्त्रों की जो लॉ है उसको स्वीकार नहीं कर रहा है मान लो नियमों को तो उसके उसमें दिक्कत क्या आएगी मालूम है उससे अच्छा वो मुसलमान है जिसने अपनी कुरान को अपने ऊपर लागू कर रखा है मैं बताता हूं क्यों उससे अच्छा वो बाइबल वाला है जिसने अपनी बाइबल को अपने ऊपर लागू कर रखा है उससे अच्छा वो बुद्ध वाला है जिसने वो बुद्ध के द्वारा बताए गए जो सिद्धांत है उनको अपने ऊपर लागू कर रखा है क्यों क्यों? क्योंकि जिसने किसी भी लॉ को अपने ऊपर लागू नहीं

00:22:03:20 कर रखा है, उसके कंपैरेटिवली जिसने कर रखा है, उसके प्रति हम सुनिश्चित तो हो सकते हैं कि भैया इतनी बातें तो यह भी मानता है। उससे हम ज्यादा अपेक्षा कर सकते हैं कि इसका मन नहीं बदलेगा। और जो अपने आप को किसी भी नियमावली के नीचे ही नहीं मानता है वह भले ही किसी को कितना भी मां मां कहे भले ही किसी को कितना भी बहन बहन कहे मगर उससे हम ये अपेक्षा कैसे करें कि अमुक घड़ी में अमुक स्थान पर इंद्रियों के वशीभूत हो के यह व्यक्ति इस मानने का विरोध भी कर सकता है। नहीं चलो ठीक है क्या हो गया कोई भगवान है ही नहीं तो हम क्यों माने इस सिद्धांत को तो जो व्यक्ति अपने आप को नियम धर्म शास्त्रों के नीचे नहीं मानता उसकी स्थिति ये है कि गलती से वो ऐसे एकांत वातावरण में पहुंच गया अपनी बहन के साथ ही तो उसके अंदर आने ये वाला दूसरा वाला जो भाव है वो आने की संभावना हम ज्यादा एक्सपेक्ट कर सकते हैं बजाय इसके कि जिस जिसने ऐसी किताब को ऐसे धर्म शास्त्रों को ऐसे नियमों को स्वीकार कर रखा है जिसमें कि पर्टिकुलरली वो चीज तो कम से कम मानी गई है कि नहीं इसके साथ तुम्हें

00:23:18:24 रमण नहीं करना तो जो ये नास्तिक व्यक्ति है इसका तो कोई सिद्धांत ही नहीं है। क्यों? और सिद्धांत नहीं है इसके कारण इससे हम अपेक्षा नहीं कर सकते कि इसके साथ इसको इसी की बहन के साथ अकेला छोड़ा जाए। ठीक है? वहां पर अपेक्षा नहीं की जाती क्योंकि उसके पास कोई ठोस सिद्धांत नहीं है। अच्छा दूसरी बात आपने एक बात कही कि धर्म के अन्य धर्मों में भी माना जाता है। तो वो जो अन्य धर्मों में जितने भी जहां पर भी इंसानियत यानी कि मोरल्टीज दिखाई दे रही है हम आपको सिद्ध कर सकते हैं कि वो सारी मोरल्टीज यहां से ही कॉपी की गई है। जैसे कि आप ये कहो कि मैं थॉमस अलवा एडिसन को नहीं मानता नहीं जानता मगर आपके घर में बल्ब उसी का जल रहा है। ठीक है? जानता हूं मैं उसको। हां। तो ऐसे ही कुरान वाला बाइबल वाला वेद को नहीं जानता नहीं मानता मगर उसके कुरान में उसके बाइबल में जो ज्ञान का प्रकाश थोड़ा बहुत है वो कहां से जल रहा है वेद से जल रहा है अब वो उसको एक्सेप्ट नहीं कर रहा है जैसे आपने दुकान से लिया अब मैं तो दुकान से लाया हूं थॉमस अलवा एडिसन ने बल्ब थोड़ी ना दिया मुझे मगर मूल में क्या है मूल में थॉमस अलवा

00:24:34:02 एडिसन ठीक है बल देने वाला उसी प्रकार से दूसरी बात अगर आप कहो कि वेद के विरुद्ध जाकर के स्वतंत्र रूप से हमने जो है इसको पाया है तो थॉमस अलवा एडिसन के विरुद्ध विरुद्ध जाकर के विरुद्ध थॉमस अलवा एडिसन के विरुद्ध जाकर के हमने बल्ब को जलाया है विरुद्ध जाकर के है ना तो वहां तो एक बार को पॉसिबल हो भी सकता है कि कोई नई प्रक्रिया से बल्ब जल जाए है ना परंतु यहां पे आपको सिद्ध करना होगा कि अगर आप वेद के विरोधी हैं सनातन के विरोधी हैं तो आप सिद्ध करिए आपका परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म और सर्वशक्तिमान ईश्वर। ठीक है? तो इतनी बात तो हमारी हो गई क्लियर। अब आ जाते हैं सच्चिदानंद पे जिसके बारे में आपने शायद तैयारी की है। इसीलिए आप कह रहे हो कि उस टॉपिक पे आओ उस टॉपिक पे आओ। नहीं मैं मैं तो मैं तो नहीं बोल रहा। मैंने कोई तैयारी नहीं ऐसे नहीं की। वो तो हम लोग ये मान रहे हैं कि हमारे हर्षित भट्ट जी हैं। वो ईश्वर को मानने वाले हैं। अगली रिसर्च आने तक इनकी। फिलहाल तो हमें यही मानना है ना क्योंकि आप धर्म को तो मानेंगे। इस बीच जब आप रिसर्च करेंगे उस बीच अपनी जो घर की स्त्रियां है उनके प्रति अमुक अमुक जो आचरण है उनका निर्वाह तो करेंगे ना रिसर्च जब कर रहे होंगे तो उस बीच रिसर्च पूरी

00:25:49:06 होने तक तो आप मानेंगे ना कि हम ईश्वर को मानते हैं। तभी आप मान पाएंगे अन्यथा सिद्ध नहीं होगा। तो हम यह मानेंगे कि आपकी अगली रिसर्च आने तक जो आपने कहा है तब तक तो आप कम से कम सनातनी है। ईश्वर में विश्वास रखने वाले हैं और धर्म को मानने वाले हैं। फिलहाल अभी तक यहां पे पहुंचे हम लोग है ना। अब वो अगली रिसर्च आप ला पाए यदि कभी जीवन में वैसे तो संभव है नहीं। है ना? मगर यदि आपके हिसाब से दुर्जन तोष न्याय से कभी लाभ पाए तो तब हम देखेंगे कि भाई हम अच्छा अब ये अब हमारा वो आर्ग्यू वो ले लो आर्ग्यू जो हम कह रहे हैं कि जो सच्चिदानंद है हम सत्य किसे कहते हैं पहले उसको समझ लो जो कभी भी कन्वर्ट नहीं होता है वो सत्य है जो एज इट इज रहता है चित मतलब अखंड ज्ञान उसमें ब्रेक ना लगे ज्ञान में ठीक है और आनंद मतलब एंडलेस जॉय उसमें ब्रेक नहीं आना चाहिए तो एक नास्तिक व्यक्ति भी नास्तिक व्यक्ति क्या प्राणी मात्र भी सतचित आनंद को ढूंढ रहा है तो हमारी ऐसी जितनी भी इनबिल्ट इच्छाएं हैं जिनको

00:27:04:09 हम चाहते हुए भी अपने से दूर नहीं कर पा रहे हैं। है ना? उन सबके विषय का अस्तित्व है दुनिया में। जैसे हमारे अंदर प्यास है तो उससे पानी का अस्तित्व सिद्ध हो जाता है। हमारे अंदर भूख है तो उससे भोजन का अस्तित्व सिद्ध होता है। तो जिस प्रकार से एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी प्यास से पानी का अस्तित्व सिद्ध होता है। भूख से भोजन का अस्तित्व सिद्ध होता है। उसी प्रकार आपके अंदर व्याप्त जो सच्चिदानंद की चाह है। उसी से सिद्ध होता है कि इस दुनिया में सच्चिदानंद कोई है। उसी को हम दूसरे शब्दों में ईश्वर और भगवान कहते हैं। और उसी को प्राप्त करने के निमित्त हमारे पास एक नियमावली होती है। वेदा आदि शास्त्रों द्वारा जो वर्णित होती है। उसी नियमावली को फॉलो करके हम उस तक पहुंच सकते जो हमारी मूल चाह है। ठीक है? अब आप इसका करिए। आप बताइए क्या आपके अंदर नहीं है ये चाह? आप सच्चिदानंद को नहीं ढूंढ रहे।

00:28:02:07 सच्चिदानंद को नहीं परम सबके लिए अलग-अलग है। सच्चिदानंद एक्चुअली ये बात है। अरे भैया जो मैंने सच्चिदानंद मैंने क्या कहा आप केवल एक मिनट भाई साहब एक मिनट मैं आपको एक चीज बता मैंने जो सच्चिदानंद बताया है। मैंने जो सच्चिदानंद बताया है क्या आप उसको ढूंढ रहे हैं कि नहीं ढूंढ रहे? मैं ये मैं ये पूछ रहा हूं। आपका वाला अलग होगा। आपका वाला अलग होगा। जो मेरा वाला है जो मैंने जो व्याख्या बताई है उसको आप ढूंढ रहे हैं कि नहीं ढूंढ रहे हैं?

00:28:36:09 सभी ढूंढ रहे हैं उसको तो उसको तो सभी ढूंढ रहे हैं बात है। अगर इनडायरेक्टली देखा जाए तो सभी ढूंढ रहे हैं इनडायरेक्टली पर डायरेक्टली ऐसा हो नहीं सकता ये बात है। अगर मेरे अंदर स्पाइडरमैन को देखने की इच्छा मौजूद है। तो जरूरी नहीं स्पाइडरमैन भी मौजूद ही है। इसका मतलब इसका मतलब आप ऐसी चीज को ढूंढ रहे हो जिसका अस्तित्व है ही नहीं। हां आप भी तो ऐसे चीज को ढूंढ रहे हो। अरे भाई मैं तो मान रहा हूं ना कि वो चीज है। आप कह रहे हो वो चीज नहीं है। आपके अनुसार मैं पूछ रहा हूं। आपके अनुसार आप ऐसी चीज को ढूंढ रहे हो जो कि आपके ही अनुसार अस्तित्व में नहीं है। आप खुद कह रहे हो कि वो नहीं है। पर मैं उसी को ढूंढ रहा हूं।

00:29:20:02 तो ऐसे अस्तित्व में कैसे हो सकता है कोई? सच्चिदानंद वास्तविकता अरे भाई मैं मैंने सवाल क्या किया है मैंने सवाल क्या किया है हां मैंने प्रश्न क्या किया है कि आप किसी ऐसी एंटिटी को ऐसे तत्व को ढूंढ रहे हो जिसके लिए आप खुद कह रहे हो कि वो है नहीं यानी जैसे मान लीजिए कि आप खुद कह रहे हैं कि यहां पे पांच का सिक्का नहीं है इस कमरे के अंदर और फिर आप उसी पांच के सिक्के को उसी कमरे में ढूंढ रहे हैं

00:29:56:04 तो ऐसे व्यक्ति को क्या कहेंगे आप? वो बात आपको फॉर्म नहीं भरना चाहिए था। बहुत ही या तो आपके अंदर जो है ना जो वास्तविक सनातनी है ना वो उसके कारण आप जो है आर्ग्यू नहीं कर पा रहे हैं। जो आपके अंदर वास्तव में एक धर्मज्ञ व्यक्ति है ना ब्राह्मण कुल में उत्पन्न हुआ है। पूर्वजों से बाप दादाओं से धर्म मिला है आपको। आपको तो ब्राह्मण कुल में जन्म मिला है तो आपको उसका पोषण करना चाहिए। और आप कहां ईश्वर के अस्तित्व को नकारने चले आए और वह भी सरफेरे लोगों की सभा में। नहीं मैं एक्चुअली नहीं एक्चुअली मेरी बात सुनो सर। मैं धर्म के खिलाफ नहीं हूं। ये बात है। धर्म तो बिल्कुल अच्छी बात है। मैं मानता हूं धर्म धर्म अजीब चीज है। मैं मानता हूं ये बात। ईश्वर के अस्तित्व का खंडन करना सुनिए। ईश्वर के अस्तित्व का खंडन करना धर्म के खिलाफ होना ही है। ठीक है? जैसे जैसे कि मैं मैं बता रहा हूं। जैसे कि मैं मैं बता रहा हूं। जैसे कि मैं कहूं कि भैया जो है मैं काम करने के आजीव को पार्जन जो बिजनेस इत्यादि जो चल रहे हैं जॉब है इत्यादि ये

00:31:11:06 सब जो चल रहा है मैं इसके खिलाफ नहीं। ये तो बहुत अच्छी चीज है जो चल रहा है। पर मैं पैसे के अस्तित्व को नहीं मानता हूं। तो जब तुमने पैसे का अस्तित्व ही नकार दिया तो ये जॉब का अस्तित्व कैसे रह जाएगा? जॉब का पर्यावसान किस में है? हां, पैसे में ही है। तुमने कहा पैसे का पैसा दुनिया में है ही नहीं तो कोई आदमी क्यों जाएगा जॉब करने? क्योंकि पैसा मैंने देख रखा है। ये बात है। पैसा मैंने देख रखा है इसलिए। बात ये हो रही है कि जिस चीज की आप जो दोहरी बात कह रहे हैं ना कि मैं धर्म को तो मानता हूं पर मैं ईश्वर को नहीं मानता हूं। अच्छा देखने वाली बात है तो आपने ऐसा क्या देख लिया जो आप बहन को बहन के साथ बहन वाला व्यवहार करते हैं? क्या देख लिया?

00:31:57:06 धर्म एक्चुअली मान्यता ये बात है। हां भाई तो यानी कि आप कुछ ऐसी चीज मान रहे हैं ना जो आपने देखी नहीं है। एक मिनट। यानी कि आप कुछ ऐसी चीज मान रहे हैं ना जो आपने देखी नहीं है। तो उस विषय में जहां पर जो आपको सबसे इंपॉर्टेंट चीज लग रही है धर्म जो सबसे इंपॉर्टेंट चीज आपको लग रही है धर्म उसके उसको आचरण में लाने के भाव से ही आपके ही द्वारा ईश्वर की सिद्धि हो रही है। और अभी मैंने एक चीज पूछी थी कि आपने पांच का सिक्का देखा नहीं है। ठीक है? और आप खुद कह रहे हो यहां पर पांच का सिक्का नहीं है। या तो आप यह हो जाओ कि नहीं हो सकता है। मैंने अभी देखा नहीं है। हो सकता है। मैं ये नहीं कह सकता नहीं है। अच्छा मैं ढूंढ रहा हूं तो होगा ही। ढूंढोगे थोड़ी ना। ढूंढोगे तो तभी ना जब होगा जब आप ये मानोगे कि यहां कमरे में पांच का सिक्का है तभी तो ढूंढोगे।

00:32:55:20 अच्छा जो ये कह रहा है कि पांच का सिक्का है ही नहीं। वो ढूंढ रहा है फिर भी पांच के सिक्के को। उस व्यक्ति को आप कहोगे क्या? एक बार बता तो दो। मूर्ख हैं। क्या कहोगे? चलो ठीक है हर्षित जी आए आप अच्छा लगा और जो है आप रिसर्च करिए और रिसर्च होने तक हम मान रहे हैं कि हर्षित जी जो है अ

00:33:28:02 हर्षित जी जो है फिलहाल धार्मिक व्यक्ति हैं और ईश्वर के अस्तित्व को विश्वास रखने वाले हैं। हां ये हो सकता है कि इनके घर में जो माता-पिता इत्यादि पूर्वज है इनके उन्होंने इनको वो स्ट्रांग वजह नहीं दी कि ईश्वर इसलिए है और इन्होंने भी कभी इस तरह से आत्मचिंतन नहीं किया कि मैं बहन को बहन क्यों मानता हूं आज से और रिसर्च पूरी होने तक अपने आप से केवल एक ही सवाल करिए कि मैं माता को माता क्यों मानू और मैं बहन को बहन क्यों मानू बस उसी में आप पहुंच जाएंगे ईश्वर तक ठीक है और सच्चिदानंद की बात तो आपको पता ही कि मैं क्यों चाहता हूं जब साइंस ये कह रही है कि भैया आप कभी आप अभी साइंस ने घोषित नहीं किया कि आप नहीं मरोगे कभी भी। फिर भी मैं मृत्यु का भाव आने पर ही चिंतित हो जाता हूं। अपने प्रियजनों के बारे में अगर मैं सुन लूं कि वो दिन कैसा होगा जब वो आखरी सासे ले रहे होंगे तो आप दुखी हो जाते हो। क्यों मृत्यु से भाग रहे हो? मृत्यु तो सत्य है। आपके हिसाब से मृत्यु से भाग रहे हो आप तो नहीं भागना चाहिए। ये सारी बातें आप ले जाओ। और भी कुछ लोग आ गए। मुझे लगता है उनसे उनको हम ले लें। आप आए अच्छा लगा और अपनी रिसर्च तैयार करके लाओ। हां। ठीक है।

00:34:44:07 जय श्री राम। जय श्री राम सर। हम जय श्री राम का अर्थ भी सुन लीजिए। हर्षित जी। जय श्री राम का अर्थ सुनते हैं। भाई हां सुनाओ। जय श्री राम। कभी-कभी कुछ लोग टोक देते हैं कि जय श्री राम क्यों बोले? तो हां श्री राम को धर्म कहा गया है। श्री राम कौन है? जो जिन जो धर्म के विक्रहवान स्वरूप है। और धर्म क्या है? वह नियम जो हमें माता बहनों पत्नी में अंतर करना सिखाते हैं। उन नियमों को धर्म कहते हैं। यानी कि वह नियम जो हमें जानवर से मनुष्य बनाते हैं। मनुष्य और जानवर के बीच में अंतर करते हैं। तो जब भी हम कहते हैं कि जय श्री राम तो उसका अर्थ होता है उन नियमों की जय। जो नियम हमें मनुष्य बना रहे हैं। तो इसलिए कभी भी जय श्री राम बोलने में किसी को भी लज्जा का भाव नहीं आना चाहिए। यदि आ रहा है तो इसका मतलब है वह पशुता का पोषण करना चाहता है राम के विरुद्ध जाकर। ठीक है? चलिए जय श्री राम। जय श्री राम सर। धन्यवाद। नेक्स्ट टाइम मिलता हूं आपको। बिल्कुल।

00:36:00:28 पंडित जी कैसे हैं? जय श्री राम। ले दे के आप भी फिर जय श्री राम। क्यों नहीं जबरदस्त हम क्या मतलब पूरी स्टोरी जो है पूरी रख दी है शुरू से लेकर अंत तक हम लगभग सभी टॉपिक जो थे मुख्य मुख्य वो सारे टॉपिक कवर कर दिए उसमें नहीं मुख्यमुख्य नहीं वो उससे पूरा समझ में आ जाएगा कहानी कुछ छूटा ही नहीं है ऐसा है जी तो वो काफी बढ़िया था और वो तो रिलीज होते ही देख लिया था मैंने। हम आपने पहले ही देख लिया। आज एक वीडियो रिलीज किया गया है जिसमें भागवतानंद और हमारे बीच में जो कंट्रोवर्सी है उसका पूरा आपको समझ में आ जाएगा। शुरुआत कैसे हुई? शुरुआत में कौन किस प्रकार से बातें कर रहा था? क्योंकि यह भी सुनने में आता है कि भाई तुम कैसे बात करते हो हमारे जगतगुरु करणा जगत गुरु से हैं। बात करने का बात करने की सभ्यता नहीं है। तो यह सब चीजें भी है। मतलब मेरा पर्सनल रेकमेंडेशन है। यह ऐसी वीडियोस है जो मस्ट वाच है और वो एक बार सबको देखनी चाहिए। तो उसमें शुरुआत में आप देख सकते

00:37:16:00 हैं कि हमने शुरू में कैसे बोलना प्रारंभ किया था। कैसे उदारता दिखाई थी। पर उदारता को लोगों ने कायरता समझ लिया है ना गुरुदेव कहते हैं ना कि उदा कि हिंदुओं की उदारता को कायरता समझना भूल है। हां बिल्कुल तो वही हुआ सामने वाले ने हमारी उदारता को कायरता समझ लिया। अच्छा उदारता इसलिए थी कि जो सनातन मान हिंदुओं के लिए ठोस कारवाईया है उनमें बाधा ना पड़े और उसने ऐसी भाव को उसकी क्योंकि उसका वो नहीं था। उसका मुख्य उद्देश्य यह नहीं था। दमन सनातन विरुद्ध विचारधाराओं का दमन उसका मुख्य उद्देश्य नहीं था। उसको किसी तरीके से रोटी सेकना उसका उद्देश्य था। तो कोई है क्या इस समय

00:38:06:24 कुछ लोग डिस्कशन कमेंट्स पे कर रहे हैं। अगर ये प्रश्न है आपके तो आप लेकर पूछ सकते हैं। है ना? हम आ जाइए लाइव। हां चेहरा लेकर आइएगा। उससे फायदा यह होता है कि वो जो मैसेज है वो ज्यादा से ज्यादा फैलता है। उसकी रीच बढ़ जाती है और हमारे पास जब वो सुविधा है चेहरा देख के आमने सामने से बात करने की तो फिर हम नहीं तो अगर केवल आवाज में ही बात करनी थी तो फोन कर लेते ना एक दूसरे को या लाइव स्ट्रीम में आने की आवश्यकता क्या थी? सही बात है। देखिए ये तो मैं ये पहले पांच मिनट में ही हो गया था इनका काम। हर्षित जी का लेकिन फिर भी आपने ऑलमोस्ट 35 40 मिनट इनको समय दे दिया है। अच्छा है मतलब ठीक है इनको भी थोड़ा कांसेप्ट इनका क्लियर होगा। और जो कुछ इंटेलेक्चुअल नास्तिक जो इस वीडियो को देखते हैं मैं देखता हूं कई बार वो बाद में मैंने जो चीजें क्लियर नहीं की होती है तो बाद में उन उन विषयों को लेकर के वो कुछ ना कुछ कुछ ना लंबे-लंबे मैसेज कर देते हैं। बिल्कुल। तो इसलिए मैंने कहा एक पूरा एक पैटर्न में एक अपना बता दो जिससे कि जो भी ऐसा कोई इंटेलेक्चुअल पर्सन आ जाए तो वो उन छूटे

00:39:22:04 हुए टॉपिक्स को आधार बना के खामखा मगजमारी ना करे कमेंट में। यद्यपि हमारी सबसे जो मुख्य बात है वो तो अंत में आ ही जाएगी वीडियो के। यदि आपको कोई भी किसी प्रकार का वैचारिक मतभेद है तो दिए गए नंबर पर WhatsApp करें। [हंसी] अच्छा एक बात और है आपको पता है मैंने आज एआई से और पूछा था कि किसी को यदि स्वप्न में स्वप्न में किसी ने दीक्षा दे दी है आकर के मंत्र आ गया है उसके पास अच्छा हां या फिर कोई ऐसा व्यक्ति है जो अपने आप संस्कृत पढ़पुढ़ा के जो है दयानंद जी टाइप का वो संस्कृतज्ञ बन करके जो है वो स्वयं को आचार्य गिनने या गिनवाना चाहता है। हां तो उसके पक्ष की ओर से आप मुझसे तर्क रखिए। क्या क्या रख वो तैयार हो गया। हां ठीक है रख देता हूं। मैंने कहा ठीक शुरू करो। फिर हुआ शुरू फिर उसने तर्क रखे तो जितने तर्क रखे मैंने सबको वो वो उसका वो बना के लड्डू आपका पूरा आपका पूरा वार्म अप होता रहता है उसमें। है ना? एक तरह से तैयारी हो जाती है आपकी। तर्क ले दुनिया भर की। भागवतानंद स्वयं आ नहीं

00:40:37:08 रहा है। अरुण पांडे जी आए थे तो मुझे लगा था कि थोड़ा भोजन मिलेगा। अब अरुण पांडे जी जब आए थे तो मुझे लगा था कि भाई भागवतानंद की ओर से कोई ऐसा व्यक्ति आ रहा है जिसको जिसके निरुत्तर होने पर भागवतानंद को चोट पहुंचेगी। हालांकि वो उसमें भी कह देता हम हम थोड़ी ना निरुत्तर हुए अरुण पांडे जी वो तुरंत अलग हो जाता मगर फिर भी अरुण पांडे जब इनकी परंपरा को सिद्ध ना कर पाते वहां पर आमनेसामने में तो कुछ प्रभाव पड़ता भागवत अनंत पर तो मुझे कोई मिला था क्योंकि मैं ढूंढ रहा हूं भाई कोई आए उसके पक्ष से और सामने से मैं निरोत्तर करूं कोई मिलता ही नहीं है अच्छा मिलते हैं तो उसके कुछ बिल्कुल अभी नववीत फॉलोवर्स इत्यादि मिलते हैं तो उससे कोई काम है नहीं भाई वो अज्ञानी हो सकते हैं उनको पता नहीं हो चीजों के बारे में तो फॉलोअर्स का मुंह बंद करने से कोई ऐसा खास हां ये ये हम कर सकते हैं कि ज्यादातर फॉलोअर्स कैसे हैं उनका स्तर क्या है भागवतानंद को आचार्य मानने के संबंध में उनके पास क्या है तो आपने देखा ही है आज के वीडियो में नहीं ये बात ये बात अच्छा है कि आप मतलब कभी अगर कोई भागवत आनंद को लेकर अगर कोई भी उनके आगे जो आचार्य आदि जो शब्द लगाता है ना आप

00:41:52:09 पहले ही रोक देते हैं उसको शुरुआत वैसे करते [हंसी] हैं। क्यों क्यों माने आपने कैसे बोल दिया गुरुदेव ने गुरुदेव ने एक बार बात कही थी कि निग्रहचार्य जो है वो केवल भगवान उसमें कारण है ना उसमें कारण ये है और उसमें भी अगर मैं एक बात जोड़ दूं तो भगवती के स्वरूप में वो ब्रह्म जो है वो निग्रह करते हैं। हां। उसका कारण यह है कि आपको पहले जितने भी जो संप्रदाय हैं जो स्वयं के वैदिक होने का दावा कर रहे हैं सभी संप्रदाय। ठीक है? तो पहले तो आपको उन उन संप्रदायों के यहां पर जाकर के उनकी शिक्षा उनकी परंपरा से प्राप्त करनी पड़ेगी। ठीक है? और यदि शिक्षा को आपने उनकी परंपरा में जाकर के प्राप्त नहीं किया तो आपके द्वारा उन उस अमुक अमुक परंपरा के संबंध में कहे जाने वाले वक्तव्य प्रामाणिक कैसे होंगे? प्रामाणिक क्यों माने जाएंगे? जब आपने प्रामाणिक रीति से अध्ययन नहीं किया तो प्रामाणिक आपके वक्तव्य होंगे नहीं। जैसे अभी अपया दीक्षित जी का मामला था। अपया दीक्षित जी ने वहां पर शबरी पे फोकस ही नहीं था। उनका फोकस था वो उन्हें यह बताना था कि जन्मांतर से

00:43:07:27 यदि आपने पूर्व जन्म में पुण्य कर्म किए हैं जिनका लाभ आपको इस जन्म में मिला है तो इस कारण से शद्र शद्र का शरीर प्राप्त होने पर भी आप मुक्ति पथ में आगे बढ़ सकते हैं। आपका कल्याण हो सकता है। तो इसलिए उन्होंने वो धर्मव्याद वाला उदाहरण लिया वहां से विष्णु धर्म पुराण से। अब वो एक बाय डिफॉल्ट था। बाय प्रोडक्ट था कि साथ में वहां शबरी जी का भी नाम आ गया कि धर्मव्याद जी को मुक्ति वैसे ही मिली जैसे शबरी जी को मिली। ठीक है? अब यहां पे धर्मव्याद जी को धर्मव्याद शूद्र को मुक्ति ऐसे मिली जैसे शबरी शद्र को मिली। ये नहीं लिखा है श्लोक में। धर्मव्यास जी को वैसी ही मुक्ति मिली जैसी शबरी को। तो कौन सी मुक्ति मिली थी? तो शबरी जी का जो मुक्ति का विवरण है उस विवरण का चित्तांकन करने के लिए कहा गया विष्णु धर्म पुराण में कि धर्म व्याद को वैसे मुक्ति मिली जैसे शबरी जी को मिली थी। कैसे मिली थी? तो उनका वो सीन है रामायण में ऐसे मिली थी। उस सीन के कारण विष्णु धर्म पुराण में उनका नाम आया शबरी जी का और वहां पे धर्म व्याद के साथ नाम आ जाने के कारण अपया दीक्षित जी ने किया। इन दोनों में से ना तो विष्णु धर्म पुराण और ना ही अपया दीक्षित जी वाला जो मामला है दोनों ही जगह पर शबरी

00:44:23:06 की जाति के निर्णय की बात ही नहीं हो रही थी। विष्णु धर्म पुराण में योग की महिमा बताई जा रही थी और यहां पर वो एक एक सिद्धांत की सिद्धि कर रहे थे कि जन्मांतर से प्राप्त पुण्य कर्मों के फल के कारण आपको शूद्र शरीर में भी मुक्ति पथ में आप आगे कल्याणक मार्ग पर जा सकते हैं। दोनों का उद्देश्य अलग कहीं पे भी शबरी जी के जाति का निर्णय है ही नहीं। तो अब इन्होंने क्या किया नहीं देखो अपया दीक्षित जी ने मान तो क्या हुआ प्रामाणिक रीति से आपने उनका अध्ययन तो किया नहीं अब आपने खुद से उनके शब्दों को पढ़ लिया तो यही तो आर्य समाज कहते हैं आर्य समाज हमसे आके कहने लगते हैं शंकराचार्य ने तो वो लिखा है क्या कहते हैं परा परा भक्ति हम तो उसमें तो उन्होंने निराकार माना है। अरे भैया शंकराचार्य जी का आप गीता भाष्य उठा के देख लीजिए उसमें जाने कितनी जगह उन्होंने जो है सगुण साकार की बात भी की और पुराणों के उदाहरण दिए पुराणों के जब उदाहरण दे रहे हैं तो पुराणों को मान रहे हैं और पुराणों को मान रहे हैं तो पुराणों में तो सगुण साकार का सचित्र चित्रण है हम भरभ के हां बिल्कुल तो अब वो लोग कहते हैं कि हम शंकराचार्य जी को तुमसे ज्यादा जानते हैं तो हम उनसे पूछते हैं कि शंकराचार्य जी की किताब

00:45:39:01 परा भक्ति या जो भी है वो आपके पास आई कैसे आएगा और हम ही को झूठा कह रहे हैं। हां तो यह है कि सबसे पहली बात तो उस अमुक अमुक संप्रदाय में सब में आपको प्रामाणिक रीति से अध्ययन करना पड़ेगा जो संभव नहीं है मनुष्य दृष्टि से कि सभी जितनी भी परंपरा है चलो कर भी लिया तो अद्वैत को प्रमाण मानने वाले के रूप में आपको अन्यों को अप्रमाण मानना पड़ेगा। अब क्या है कि शंकराचार्य जी का सिद्धांत तो यह नहीं था कि भैया जो एज इट धर्म का शास्त्रों के निर्णय को ना मान रहा हो उसके साथ शास्त्रार्थ करना ही करना है। अगर वो धर्म को मान लिया तो ब्रह्म को नहीं भी मान रहा है तब भी जो है वो एक्सेप्टेबल मगर आपका तो ऐसा नहीं है। आपको तो शास्त्र के अर्थ में जरा सी भी छेड़छाड़ होगी तो आपको तो निग्रह करना है। तो आपको फिर यदि आप अद्वैत को मानने वाले हैं तो आपको विशिष्टाद्वैत का निग्रह करना है। आपको द्वैताद्वैत का निग्रह करना है। शुद्ध्वत का निग्रह करना है। सबका निग्रह करना है। सबका निग्रह करने का मतलब कि सब लोग अद्वैत को मानने लगे। तो जब सब लोग अद्वैत को मानने लगेंगे तो निग्रचार कहां से करेंगे? उसका निग्रह करेंगे। [हंसी] तो वो

00:46:54:07 खत्म ही हो जाएगा। और यदि निग्रह नहीं करेंगे तो अपना निग्रह का ठप्पा हटाओ। कि हम निग्रचार है तो इसलिए ईश्वर ही निग्रचार हो सकते हैं। निग्रह करने वाले आचार्य ईश्वर ही होते जो सब जगह पर अपनी भूमिका निभा के आ जाए। हां सूर्यवंशी क्या कह रहे हैं? उनसे जी आप लाइव आ जाइए ना। सूर्यवंशी जी आपको अगर ईश्वर पर विश्वास नहीं है तो आप लाइव आ सकते हैं। ईश्वर की असिद्धि आप सिद्ध कर दीजिए। मैंने वो उनके साथ जो बातचीत थी वो इसलिए बढ़ाई थी कि व्यक्ति क्या है? ईश्वर और धर्म को जब हल्के में लेता है तो मुझे बड़ा हृदय को चोट पहुंचती है। तो कभी मिल जाए मुझे तो फिर मैं जल्दी छोड़ता नहीं हूं। नहीं ठीक है क्योंकि उससे क्या है कि दर्शकों को थोड़ा ना बार-बार ये एक तरह से रिहाइ्रेशन हो जाता है मतलब इसको ये समझ में आ जाती है कि भाई धर्म और ईश्वर कैसे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और जब आप धर्म को ईश्वर को नहीं स्वीकारेंगे तो ऑफ कोर्स आप धर्म को भी नहीं स्वीकारेंगे ये बाय डिफॉल्ट मुझे लगता है और कोई आने वाला

00:48:09:08 नहीं है तो आप लोग वो जो वीडियो आज डाला गया है मेन चैनल पे आवाान पे उसको जरूर देख लें उसमें पूरी कंट्रोवर्सी आपको एक ही वीडियो में दिख जाएगी। कहां से क्या प्रारंभ था, किसने अपनी आचरण को बदला, किसके किसके क्या सवाल थे, किसके क्या जवाब थे? और उसमें हमने जवाब भी बहुत अच्छे से उपलब्ध कराए हैं। बिल्कुल व्यक्ति तस ना हो। केवल अपनी व्याख्या ही नहीं दी है जवाब में। भागवतानंद के द्वारा ही उसका जवाब दिलवाया है कई जगह। भागवतानंद ने सवाल उठाया तो उसका निराकरण भागवतानंद ही कर रहा है। है ना? तो यह बहुत अच्छे से उसको बनाया गया है। आप उसको देख सकते हैं। ठीक है पंडित जी आ नहीं रहा है कोई फिर हम लोग तुषार के अलावा जी आसार प्रशांत को आजकल इसलिए सुनता हूं क्योंकि उस पर आईआईटी का ठप्पा लगा है। तो आईआईटी का ठप्पा लगा है तो आप जाके उनसे आईआईटी का ज्ञान लीजिए ना टेक्निकल ज्ञान लीजिए। धर्म का कौन सा ठप्पा लगा है उनके ऊपर? क्या परंपरा है उनकी? कौन गुरु है? आईआईटी में उपनिषद पढ़ाए गए थे क्या? ये तो आपने बहुत अच्छा कर दिया कि आईआईटी का ठप्पा बना। यानी कि आप ठप्पे वाले गुरु के से ही पढ़ेंगे तो ठप्पे वाले गुरु से आप फिर वो ठप्पा फिर धर्म का ज्ञान का

00:49:24:09 ठप्पा कहां है उसके पास? और क्या ऐसे तो हम भी आयाम से पढ़े हैं। तो ये थोड़ी ना हुआ कि हम बस धर्म का ज्ञान भी देने लग जाएंगे। जहां का ठप्पा लिया वहां का देंगे। आप एक काम करिएगा। आपके घर में अब जब कोई बीमार पड़ जाए ऑपरेशन होना हो तो उसको मोबाइल सही करने वाले के पास ले जाइएगा। डॉक्टर के पास मत ले जाइएगा। अच्छा हो उसने अच्छे जगह सर्टिफिकेशन किया हो, इंजीनियर हो, उसके पास ले जाइएगा। तब पता चल जाएगा। वहां टस से मस नहीं करेंगे। धर्म के साथ खिलवाड़ करेंगे। है ना? जो सबसे मुख्य तत्व है उसी के साथ खिलवाड़ करना है। और वहां कि नहीं नहीं मेरे को कुत्ते को कुत्ते को दिखाना है। नहीं नहीं मैं तो सर्टिफाइड डॉक्टर के पास जाऊंगा। मुझे तो बाजा बजाना सीखना है। अरे देखो ना कोई सर्टिफाइड ट्रेनर मिल जाए तो बाजा बजाने के लिए भी सर्टिफाइड चाहिए। मगर धर्म के लिए रास्ते में

00:50:20:19 वो आलू ले लो। सुबह से ना एक आलू बिका है ना ही बिका है

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00:50:24:21 आधा काधा वो कहीं से भी खरीद लेंगे। चलिए जय श्री राम। सभी चलिए ठीक है। जय श्री राम। जय श्री कृष्णा। हर हर महादेव। हर हर महादेव।

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 50:53 · 08 Mar 2026

ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण क्या है? Discussion with Atheist Harshit

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