Used:
SRT: ⬇ SRT ⬇ Original file

.srt or .vtt (Hindi). The old file is backed up. After that the match for this video is rebuilt (may take a few minutes, keep the page open).

⬜ Not used yet · 00:00:03:13 – 00:01:11:08 (1:08)

00:00:03:13 जय श्री राम सभी को। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और आप सभी ने हमारी चर्चा देखी होगी। कल एक बहुत अच्छी चर्चा हुई थी। अह समाजी थे। कई विषयों पर उनसे चर्चा हुई और अंत में पता नहीं किस कारण से जब मैं उनको प्रमाण पूछ रहा था कि कहां पर ये माना गया है कि ईश्वर की भक्ति करने से आनंद प्राप्त होता है। तो वो उन्होंने बस मैं प्रमाण लेने के लिए उठा और वापस आया तो वो नहीं थे। बहरहाल उनका फोन आया। आज शायद वो दोबारा किसी और विद्वान के साथ आने वाले हैं। तो आप अपडेटेड रहिएगा। हम लोग इनफॉर्म करेंगे आपको और अभी जो महानुभाव आ रहे हैं वह मैं ले लेता हूं। वो अपना परिचय आपको अच्छे से देंगे।

00:01:04:07 ठीक है मैं उन्हें ले लेता हूं।

✅ This part is already used · 00:01:11:08 – 01:14:52:21 (1:13:41)

→ Used in: A · Video Sanjay Parashar Discussion | आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का दावा at 0:04 ↗

00:01:11:08 जय श्री राम संजय जी। जय श्री राम शिधांशु जी। बहुत-बहुत नमस्कार भाई को। जय श्री राम। संजय जी थोड़ा सा आप अपना परिचय मतलब जो आध्यात्मिक बैकग्राउंड है ना आपका जो जो भी कुछ है जो चीजें हैं छोटा सा एक श में थोड़ा संक्षिप्त सा वो दर्शकों को थोड़ा सा दे दीजिए। सर बेसिकली मैं आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय

00:01:43:20 और आम दुनिया जिसको ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के नाम से जानती है। अच्छा जो आपने मेरे बारे में सुना या जो पहचान आपको मिली ये पहचान मुझे ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय और आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय के आधार पर मिली। अच्छा बेसिकली ये लोग 12 साल तकरीबन मैंने इनका अध्ययन किया। हम 12 साल के बाद जब निष्कर्ष निकला कि भगवान तो ऐसे ही आते हैं। भगवान भगवान के बारे में भगवान ऐसे ही आते हैं जैसे ये लोग बता रहे हैं। अच्छा भगवान से मिलने की बड़ी तमन्ना थी बचपन से। तो आध्यात्मिकता का शौक था और आध्यात्मिकता का शौक वहां तक लेकर के पहुंचा और 12 साल तकरीबन अध्ययन करने के बाद आज दुनिया के सामने गीता ज्ञान के आधार पर यह बात प्रमाणित सिद्ध हो जाती है कि भगवान कब आते हैं, कैसे आते, उसका नाम, रूप, देश काल सब क्लियर हो जाता है। अच्छा छोटा सा हमारा तो संक्षिप्त परिचय है कि परमा परमपिता परमात्मा आकर के जो ज्ञान देते हैं, उसकी उस ज्ञान को ही तीसरा नेत्र कहते हैं और वो प्राप्त हुआ हमें। उसके

00:02:59:03 आधार पर अब यह भी जान गए कि राम कौन है जिनको जय जय श्री राम बोलते हैं महादेव बोलते हैं तो अपना सनातन धर्म के लिए तो बहुत खुशी की बात है आज कि तकरीबन 12 साल अध्ययन मैंने इनका किया गीता का अध्ययन किया और उसके बाद आप बहुत अच्छा मिलन है आप चिदंशु जी आपके साथ कि पूरी दुनिया जितने भी भाई आपको जानते हैं पहचानते हैं उन सबको भी समझने को मिलेगा जी बाकी तो इसमें थोड़ा सा आपने हमें यह भी बताया था कि आपका अभी वर्तमान में ब्रह्माकुमारी संस्था से और जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम से संस्था चल रही उससे थोड़ा सा कुछ विरोध भी है। वो कैसा विरोध है? क्या है? वो मामला सारा सा इतना सा है कि भगवान गीता में लिखते हैं प्रविष्टुम।

00:03:55:06 और यह प्रवेश शब्द को जो है गलत तरीके से आइडेंटिफाई कर रहे थे जिस बात पर डिस्प्यूट हुआ और मतलब देखिए बात मुझे थोड़ा सा थोड़ा सा बात समझा बिल्कुल क्लियर समझाऊंगा मैं एक्चुअली एक चीज है ब्रह्मा कुमारी और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में भी एक डिस्प्यूट है और फिर इन दोनों से आपका डिस्प्यूट है तो इसलिए वो डिस्प्यूट समझाते हुए अपना डिस्प्यूट समझाएं जी जी देखो ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शुरू हुआ 1947 से हां जी और आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय शुरू हुआ 1976 से अच्छा वो भी यह दावा करते हैं कि भगवान आया है। वो कहते हैं दादा लेखराज में भगवान आया है। आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय कहता है कि जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित है उसमें शिव आया है भगवान मतलब शिव को भगवान अलग से कहते हैं। मेरा डिस्प्यूट इनके साथ यह है कि तुम कहते हो वो प्रवेश करता है। मैं कहता हूं वो प्रवेश नहीं करता। वो शाश्वत सत्य है। गीता में लिखा है कि सत्य का कभी नास्ते विद्यते भाव

00:05:10:07 ना भाव विद्यते सत। सत्य का कभी विनाश नहीं होता है। सत्य इस दुनिया में सदा कायम है। लेकिन यहां से उनकी और मेरी दोनों की आपस में खटकती है। आपकी ब्रह्मा कुमारी से आपकी वीरेंद्र दीक्षित जी से दोनों से ही खटकती है। अब तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित से नहीं खटकती है। अच्छा मतलब जो वहां बैठे जो वहां बैठकर के ज्ञान को अज्ञान बना रहे हैं ना उनसे खटकती है। बाबा ने तो जो सुनाया बहुत एग्जैक्ट सुनाया। ब्रह्मा बाबा ने सुनाया। फिर बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने सुनाया 40 साल बहुत अच्छा समझाया। दादा जो लेखराज जी है उनसे भी नहीं खटकता है और जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी से भी नहीं खटकता है। जी बिल्कुल भी नहीं। वो तो मेरे बाप और दादा ये जो शब्द यूज़ करते हैं ना बाप और दादा तो राम बाप को कहते हैं। कृष्ण बच्चे को कहते हैं ऐसा पढ़ाई जब हमने पढ़ी तो उस पढ़ाई में आया। तो रामबा जिसको दुनिया राम श्री राम जय जय श्री राम बोलते हैं इस पढ़ाई के अनुसार तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ही श्री राम है। अच्छा वीरेंद्र दीक्षित जी श्री राम जो पढ़ाई यहां पढ़ाई गई है वो पढ़ाई स्पष्ट बोलती है। वो वो एक अलग चीज है।

00:06:25:13 मैं ये पूछ रहा था कि जो वीरेंद्र दीक्षित जी हैं जैसे उन्होंने कहा कि ईश्वर प्रवेश नहीं करता है। ईश्वर तो सदा से है। है ना? ये बात मैं वो नहीं कह रहे। मैं कह रहा हूं वो तो कहते हैं प्रवेश तुम वो कहते हैं मैं नहीं कह रहा हूं मैं तो इस बात का पक्षधर हूं कि ईश्वर सदा सत्य है वो बीज रूप है रचयिता है दुनिया इतने अंश में आपका विरोध है विदेव दीक्षित जी से बिल्कुल जैसे जैसे सिद्धांशु जी जो सत्य सनातन धर्म है मेरा नाम शिव मेरा नाम शिवश शिवशु जी जी शिवशु जी हमारा टोटल नौ धर्म धर्म है हमारी सृष्टि में आज इस दुनिया में उसमें से अगर देखा जाए तो एक सनातन धर्म मूर्ति पूजा को मानता है बाकी सब धर्म मूर्ति पूजा का खंडन करते हैं और एक मैं दूसरी बात मैं दूसरी बात पूछ रहा हूं कि वीरेंद्र दीक्षित जी जो है वो जो ये बात कह रहे हैं कि प्रवेश करता है इतनी जो चीज है वो क्या कहते हैं आप नहीं मानते हैं कि है जी बिल्कुल भी नहीं बिल्कुल नहीं भगवान को प्रवेश करने की क्या पड़ी है? वह शाश्वत है, सदा सत्य है तो वह प्रवेश क्यों करेगा? वह दूसरों

00:07:40:19 में प्रवेश करेगा या कोई उसमें प्रवेश करेगा? अच्छा एक बात बताओ इनके जो चित्र हैं इनके चार चित्र हैं। नहीं मैं प्रॉब्लम यह है कि जैसे आपके यहां पर मुरली आती है कोई दिव्य वाणी आती है मुरली के रूप में तो वो ऐसा माना जाता है कि लेखराज जी के पास भी आती थी पहले और फिर बाद में वीरेंद्र दीक्षित जी के पास भी आई है ना अब मुझे ये बताओ अब मुझे ये बताओ हां हां जब जब वेदव्यास जी सृष्टि रचने लगे तो वेदव्यास जी बोलते थे और गणेश जी लिखते थे मेरा प्रश्न अलग है मेरा प्रश्न अलग

00:08:21:25 सुनिए तो हालांकि ब्रह्मा कुमारीज वाले जो है वो यह बात नहीं मानते कि वीरेंद्र देव दीक्षित के पास भी मुरली आई। ये थोड़ा सा कांसेप्ट मुरली वाला ठीक कर दीजिए कि अ वो क्या कैसे लिखवाते हैं क्या करते हैं वो थोड़ा सा क्लियर कर दीजिए। जी हां वो मैं आपको क्लियर करता हूं। देखो हमारे हमारे भारतीय इतिहास में जब वेदव्यास जी बोलते गए और गणेश जी लिखते आप उसको सिद्ध सुनिए असल में क्या है हमारा मेन डिस्कशन कुछ और है तो अभी आप फैक्ट बता दीजिए कि ये फैक्ट है उसके सपोर्ट में जो उसके सपोर्ट में उदाहरण सुनिए तो उसके सपोर्ट में उदाहरण या फिर दृष्टांत वगैरह वो तब दीजिए जब मैं समझ समझ ना पाऊं क्योंकि हमारा मेन टॉपिक है नहीं। मेन टॉपिक आगे बढ़ रहा है। इसलिए कह रहा हूं केवल फैक्ट बता दीजिए कि ऐसे होता है। यह दादा लेखराज जी के पास आती थी दिव्य वाणी वो लिखवाते थे। वो कहते थे वो बोलते थे। ऐसे कुछ फैक्ट बता दीजिए। उसके सपोर्टिव जो दृष्टांत है वो या तो तब बताइए जब मैं आपसे समझ ना पाऊं आपकी बात को और या फिर मेन टॉपिक क्योंकि आगे है। अभी इसको बहुत ज्यादा विस्तार में करने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। तो थोड़ा सा ये बता दीजिए फैक्ट क्या है?

00:09:37:06 जी फैक्ट यह है कि यह जो ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय इससे पहले 1936 में ये विद्यालय शुरू हुए हैं। ओरिजिनली जो ओम मंडली के नाम से जाना जाता है। अच्छा तो 1936 में जो आज बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित है इनको उस समय सेवक राम के नाम से जाना जा रहा है जो हमें पढ़ाया गया है वहां पर। असली जो शुरुआत है इन संस्थानों की दोनों ओम मंडली से चले हैं 1936 से 1936 में सेवक राम जी गीता सुनाते थे पढ़ के आपको इस बात का ना पता हो तो ये बात बता दें कि ओरिजिनली जो ओरिजिनल है ओरिजिन जो हुआ इन संस्थाओं का वो ओम मंडली से हुआ 1936 से आप फिर थोड़ा सा ट्रैक बदल रहा है हमें मुरली को जानना है मुरली का क्या होता था कि आता मुरली क्या है? मुरली वही तो है कि जो गीता ज्ञान दिया गया है उसके बाद मुरली दादा लेखराज ब्रह्मा वाली आत्मा है। ब्रह्मा के हाथ में वेद शास्त्र दिखाए जाते हैं। तो उसमें कह रहा हूं ब्रह्मा जी ब्रह्मा वाली जो आत्मा है आपके अनुसार वो लेखराज जी के शरीर में प्रवेश करती थी। वो बोलते थे थे। वो कुछ नहीं करते थे।

00:10:52:07 वो सुबह 2 बजे उठकर के अमृतवेले लिखते थे। फिर उसी को पढ़ाते थे। मतलब जो जो ब्रह्मा वाली आत्मा है वह उनको सुनाती थी वो लिखते थे ऐसा था कौन कौन किसको सुनाता था कोई किसी को नहीं सुनाता था बाबा बैठ के खुद लिखते थे अच्छा वो स्वयं ब्रह्मा ही थे इसलिए बिल्कुल वेद शास्त्र किसने लिखा नाम क्या दिया वेदवाणी बोला है मैं वही कह रहा हूं मैं सपोर्टिव नहीं पूछ रहा हूं अभी मैं आपकी बात सिद्ध कैसे होती है ये नहीं पूछ रहा मैं आपकी मान्यता पूछ रहा हूं आपका जो आप मानते हो मान्यता ये है कि ब्रह्मा बाबा सुबह 2 बजे उठकर के लिखते थे। ये प्रविष्ट शब्द ही गलत हां जी वो लिखते थे फिर बच्चों को पढ़ाते थे दिन में। अच्छा तो जो प्रविष्टम शब्द है वो भी उन्होंने लिखा था। प्रविष्टम शब्द उन्होंने इसलिए लिखा कि मेरे अंदर शिव भगवान प्रवेश करते हैं क्योंकि मगर करते नहीं है। नहीं लेकिन है कुछ नहीं है ऐसा। अच्छा एक चीज इसमें और नहीं समझ में आ रही। अच्छा शिव जी प्रवेश कर रहे हैं मतलब उनका कहना था कि शिव जी प्रवेश कर रहे हैं ब्रह्मा के अंदर और ब्रह्मा वो स्वयं थे है ना वो स्वयं वाली आत्मा है जी और ब्रह्मा वाली ब्रह्मा वाली आत्मा है शरीर नहीं है शरीर तो शरीर

00:12:07:08 तो भौतिक है शरीर तो भौतिक है शरीर देखो जो शरीर है ब्रह्मा बाबा है जो मुरली है उस मुरली का नाम है वेदवाणी मुरली तो हम कह रहे हैं ओरिजिनल नाम है वेदवाणी नहीं वो ठीक है वो वो अभी हम आगे आएंगे वेद वेद पर आएंगे वेद व्यास पर भी आएंगे और राम जी पर भी आएंगे कृष्ण जी पर भी आएंगे मतलब अभी ये तथ्यात्मक बात ये है कि सुबह 2 बजे उठकर के जो लेखराज जी हैं वो ब्रह्मा वाली आत्मा का शरीर था लेखराज जी के नाम से जाने जाना जाने वाला है ना तो वो जो है वो मुरली लिखता था और जो शिवजी उनका कहना था कि शिव परमात्मा जो है वो उनके अंदर प्रवेश करके लिखवा रहे हैं। है ना? ये उनका कहना था। अब ये उनका अब इसके बाद वीरेंद्र देव दीक्षित जी का क्या कहना है? वीरेंद्र देव दीक्षित जी का कहना ये है कि ब्रह्मा जो लिखते थे जो उन्होंने पढ़ाया 1947 से लेकर के 1969 तक वो जीवित रहे। 1969 में शरीर छोड़ा ना ब्रह्मा बाबा ने। ठीक है? तो उस समय तक उन्होंने जो लिखा उस लिखे हुए का बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी जो है सरलार्थ

00:13:22:19 उसका अर्थ करके समझाते हैं जिसके कारण वो गीता में आया ना जो कि सह आख्या परिपन यानी कि उस व्याख्या सहित उस वेद वाणी की व्याख्या करते हैं वो उनको आप बाबा ने अलग से कोई मुरली नहीं चलाई है वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने जो गणना के मुख से निकला उस वेद वाणी का क्लेरिफिकेशन किया उन्होंने उन्होंने क्लेरिफिकेशन अब इस क्लेरिफिकेशन को जहां तक है ब्रह्मा कुमारी वाले मानते नहीं होंगे। जी वो बिल्कुल नहीं मानते। अच्छा ये इस बारे में इनका क्लेम क्या था वीरेंद्र देव दीक्षित जी का कि वो उनका भी क्लेम कुछ ऐसा ही था कि मेरे अंदर जो है शिव आते हैं या वो बस ब्रह्मा ही थे। ब्रह्मा क्या दूसरी बॉडी थी? जैसे पहली बॉडी देख रहा है दूसरी बॉडी ये लेकिन मुरली कहती है कि वो आया नहीं आया यह कोई विषय नहीं है। नहीं नहीं मैं यह नहीं कह रहा मैं कह रहा हूं उनका क्लेम क्या था वो क्या कहते जैसे जैसे लेखराज जी के बारे में हमने समझ लिया कि वो ब्रह्मा वाली आत्मा की बॉडी थी लेखराज जी की है ना तो वो स्वयं ब्रह्मा ही हो गए जी और उन्होंने क्लेम किया कि शिव जी मेरे अंदर आते हैं और मैं लिखता हूं ये क्लेम था उनका उसके बाद ये क्लेम करते हैं

00:14:37:25 कि उसके अंदर शिव भगवान आते हैं और वो लिखवा वो बोलते हैं अंदर अंदर यानी उसके बुद्धि में आता है और वो लिखते रहते हैं। यानी वो वो नहीं यानी कि वो नहीं लिखते थे। मतलब उन्होंने ऐसा नहीं कहा था कि मेरे अंदर शिव आते हैं बल्कि उनको मानने वाले ऐसा कहते हैं। उसको मानने वाले ऐसा कहते हैं कि शिव उसमें प्रवेश करते हैं और वो लिखवाते हैं और वो लिख लिखता जाता है। अब अब इसमें जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी है इनका क्या कहना था। वीरेंद्र देव दीक्षित जी कहते हैं कि मतलब शिव क्या है? शिव के बारे में समझाते हैं। नहीं नहीं नहीं उस बारे में क्या क्या कहना था कि मेरे अंदर आते हैं कहना उनका कहना यह था कि जो ब्रह्मा बाबा के मुख से जितनी मुरलियां चली है ना तो ब्रह्मा ज्ञान को समझ पाया ना ब्रह्मा कुमारी ज्ञान को समझ पाई तो मैं समझाऊंगा अब इस ज्ञान को तो उनके हिसाब से उनके हिसाब से लेखराज जी है जो वो ज्ञान को समझ नहीं पाए समझ नहीं पाए तो जैसे कृष्ण के हाथ में मुरली दिखाते हैं वो काट की मुरली है तो कठ बुद्धि बता दिया उनको अच्छा तो अब इनका क्या क्लेम है कि मैं कौन हूं? इनका क्या क्लेम था वीरेंद्र देव दीक्षित जी का? वीरेंद्र देव दीक्षित जी का क्लेम है कि जैसे ब्रह्मा के चार पुत्र दिखाए जाते हैं।

00:15:53:08 हां तो यहां ब्रह्मा कुमारी में ये चार कुमार इकट्ठे गए थे। दशरथ पटेल और चार थे ये लोग इकट्ठे भठी करके आए थे। अच्छा तो चारों ने भठी की तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित उनमें सबसे छोटे थे। भठी क्या होती है? भठी होती है जैसे सात दिन का कोर्स करवाते हैं पहले हम हम सात दिन का कोर्स करने के बाद फिर भठी के लिए जाते हैं यानी कि भ्ठी जैसे भट्ठे में ईंट पकाते हैं हम माना जैसे 10 20 लोग इकट्ठे हो गए जो पहले कोर्स करवाते हैं हफ्ता 10 दिन तक आए कोर्स किया फिर उसके बाद भठी में भेजा जाता है पक्का करने के लिए कि हां हमें ज्ञान समझ में आ गया अच्छा तो जैसे अपना उनका नाम पड़ा सनत कुमार जो इतिहास बनता है हमारा तो जो ज्ञान और योग में तीखे चले गए। तो ये जो मुरली हमें पढ़ाई गई इस मुरली के आधार पर बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जो है सनत कुमार साबित हो जाते हैं कि ये ब्रह्मा का चौथा पुत्र साबित हो गया। योग से आगे निकल गया। ठीक है। ठीक है। समझ गया। तो ये सनत कुमार है वीरेंद्र देव दीक्षित जो है वो सनत कुमार है वो ना तो ब्रह्मा है ना ही वो शंकर है ना शिव है वो सनत कुमार इस समय वो ब्रह्मा का चौथा पुत्र सनत कुमार है अच्छा

00:17:08:21 इस समय मतलब पहले कुछ और थे पहले तो आम आदमी था 40 साल तक तो अपने घर पे ही थे पीएचडी कर रखी है संस्कृत में उन्होंने अच्छा ये बात और वो वो टॉपिक लेके आए एक सुनो एक सुनो हां एक बात और बताएं आपको तो वो पीएचडी के दौरान उनका टॉपिक था इस सृष्टि का आदि पुरुष कौन? बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी जब पीएचडी कर रहे हैं उस समय उनका टॉपिक है इस सृष्टि का आदि पुरुष कौन? तो उस सर्च में वो यहां पहुंचे हैं। ठीक है? इसमें एक चीज समझ में नहीं आई कि जैसे जो वीरेंद्र दीक्षित है उनका यह कहना है कि जो लेखराज है वो ज्ञान को समझ नहीं पाए। जी और अच्छा उनका यह कहना तो नहीं था कि शिव जी से ज्ञान लिया है उन्होंने। मतलब वीरेंद्र दीक्षित जी का इस बारे में क्या कहना था? उनका तो सीधा सा एक ही कहना है कि जो शिव जिसको ये मानते हैं देखो पहली बात तो प्रविष्टुम जो है वो हमारा शब्द नहीं है सनातन धर्म का। देखिए अभी आप कह रहे थे वो भी मानते हैं तो मुझे अभी उनका पर उनका कहना क्या था वो जानना है वो तो इस बात को मानते थे कि ब्रह्मा के मुख से जो भगवान ने बोला

00:18:23:27 है ब्रह्मा ने जो ज्ञान दिया है ब्रह्मा के मुख से जो वेद वाणी निकली है उस वेद वाणी को कोई नहीं समझ पाया तो वो वेद शास्त्रों का सार बैठकर के स्वयं वो समझाते हैं बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी जो मुरली मतलब वीरेंद्र देव दीक्षित जी ये नहीं मानते थे कि शिव जी उनके अंदर आए। उनका तो सीधा सा मानना है कि जो यह ज्ञान है इस ज्ञान को नहीं समझ पा रहे। इस ज्ञान के द्वारा भगवान की पहचान समझने की बात नहीं कर रहा हूं। मैं ये पूछ रहा हूं कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी इस बारे में क्या मानते थे कि शिवजी अंदर आके बोल रहे हैं या बता रहे हैं और फिर वो लिख रहे हैं। वो जितने भी मान्यताएं सारी गलत है। ऐसा मानते थे। मतलब वो आते नहीं है। अंदर नहीं आते हैं। ये मानते थे। कोई कोई नहीं आता है, कोई नहीं जाता है। भाई साहब ये तो आपका क्लेम है ना। मैं वीरेंद्र देव दीक्षित जी का स्पष्ट करना चाह रहा हूं। की तरफ से मैं बोल रहा हूं। हां ठीक। अभी तो अभी थोड़ी देर पहले तो आप कह रहे थे ना कि प्रविष्ट ये भी मानते थे। प्रविष्ट ये लोग ब्रह्मा कुमारी मानते हैं। अच्छा ये वीरेंद्र दीक्षित जी ने नहीं माना प्रविष्टम। प्रविष्ट वो तो इस बात का क्लेम भी नहीं करते। वो तो एक सीधा सा करते हैं। भगवान ने जो ज्ञान दिया जैसे भी ब्रह्मा ने जो ज्ञान दिया है इस ब्रह्मा के मुख से जो ज्ञान निकला है इसका तंत्र नहीं समझ पा

00:19:38:28 रहे तुम लोग सब ठीक है ठीक है अब अब्मा के मुख से ज्ञान निकला है ठीक है ठीक है जो ब्रह्मा के मुख से जो ज्ञान निकला है इस ज्ञान के अंदर भगवान की पहचान भगवान को कोई नहीं पहचान रहा ठीक है अब ये जो वीरेंद्र दीक्षित से आपका तो कोई विरोध नहीं है फिर इस हिसाब से क्योंकि उन्होंने भी प्रविष्टम को नहीं माना कि है मेरा विरोध मेरा विरोध नहीं है मेरा सिर्फ एक आकलन है जो निष्कर्ष निकला है इस सब को पढ़ने के बाद मैं नहीं हूं। मेरे साथ और भी 1400 लोग और भी है जिनका सब ये निष्कर्ष है। सबका ये निर्णय निकला हुआ है। वो क्या निर्णय है? वो निर्णय ये निकला हुआ है कि किसी ने 10 साल, किसी ने 15 साल, किसी ने 20 साल इस ज्ञान को सुना, समझा। और फिर उसको गीता ज्ञान से टेली किया और टेली करने के बाद निष्कर्ष निकला कि बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित श्री राम है सनत कुमार है शिवलिंग है महादेव है नहीं नहीं भाई साहब भाई साहब आप गलत गलत जा रहे हैं मैं पूछ रहा हूं विरोध क्या है वो क्या है विरोध इस बात का है कि इस पर शिव को न समझने के कारण सारे ज्ञान का अज्ञान बनाया जा रहा है। नहीं नहीं वीरेंद्र देव दीक्षित भी तो यही कह रहे हैं। उनसे कोई विरोध है क्या आप लोगों का? नहीं किसी से विरोध इस बात का नहीं है। सिद्धांशु जी आप समझिए इस बात को।

00:20:55:10 हां हां ये विरोध नहीं है बल्कि इस ज्ञान के अंदर 100% सच्चाई है। बाबा वीरेंद्र दीक्षित बात समझे नहीं। मैं कुछ और पूछ रहा हूं। वीरेंद्र देव दीक्षित जी के द्वारा कही गई कोई बात कोई भी बात ऐसी है जो आप स्वीकार ना करते हो। बिल्कुल उनकी तो एक-एक बात स्वीकार्य है। अच्छा वो थोड़ी देर पहले शायद मैं कुछ समझ नहीं पाया। मुझे लगा कि आप वीरेंद्र देव दीक्षित के भी किसी आंशिक रूप से विरोध में हैं। आपने बिल्कुल एक एक सेकंड का भी विरोध नहीं है। बल्कि उनके कुल मिलाकर के आप वीरेंद्र देव दीक्षित में फेथ रखते हैं पूरी तरीके से वो आपके लिए प्रमाण है। जी दिलौर जैन से। अच्छा अब एक सवाल यह आता है कि वीरेंद्र दीक्षित जी ने कहा कि जो लेखराज जी थे उन्होंने शिव का ज्ञान लिखा पर समझ नहीं पाए। इसका मतलब वीरेंद्र देव दीक्षित को जो उनकी योग्यता है लेखराज जी की योग्यता उस पर कहीं ना कहीं डाउट है। हां जी हां जी बिल्कुल डाउट था। हां जी तो इनकी जो मुरली है मुरली में आया राम बाप को कहते हैं कृष्ण बच्चे को कहते हैं तो वो कृष्ण बच्चा था।

00:22:12:14 अ मैं ये कह रहा हूं अभी हम राम और कृष्ण की बातों पे अभी जाएंगे। है ना? अगला पार्ट वही है राम और कृष्ण वाला। उस पर हम जाएंगे क्योंकि हमारी कुछ मान्यताएं अलग है ना। तो आप अगर राम बाप को कहते हैं, राम कृष्ण को कहते हैं तो वो थोड़ा सा अभी ना करें क्योंकि हमारी मान्यताएं कुछ और है। फिर वो आपस में एक वैचारिक टकराव होने लगेगा। अभी हम दूसरी चीजें देख रहे हैं। आगे अगले चैप्टर में हम लोग बातें करेंगे इन विषयों में। है ना? जी। तो क्या कहते हैं? ये ये उनको उनकी योग्यता पर डाउट था कि वो अर्थ सही से बता नहीं पाए मुरली का। लेखराज सही बात जी हां तो जैसे फिर दो चीजें हो गई कि लेखराज जी ने अर्थ भी बताया है और मुरली भी लिखवाई है। या सिर्फ मुरली लिखवाई है। दादा लेखराज ने जो लिखा सुबह उठ के 2:00 बजे जो लिखा वही बच्चों को पढ़ा दिया। एज इट इज क्लास में हां एज इट इज लेकिन उसका अर्थ नहीं समझा पाए। अच्छा तो अब यहां पर एक प्रॉब्लम आती है कि यदि हमें दादा लेखराज पर आपके जो दादा हैं उन पर यदि हमें भरोसा है कि वो जो है शिव का ज्ञान हमें लिखवा रहे

00:23:27:18 हैं। शिव जो बोल रहे हैं वो हमें लिखवा रहे हैं तो यदि आपको भरोसा है तो फिर जब उनसे गलती हो सकती है जब आप मान रहे हैं कि अर्थ को लिखवाने में उनसे गलती हुई अर्थ को बताने में गलती हुई तो मुरली सुनने और लिख लिखने में भी तो गलती हो सकती है। मुरली सुनने और लिखने में गलती हो सकती है कहीं ना कहीं हम तो फिर हमें उसकी उनकी मुरलियों पर विश्वास कैसे उनकी मुरली पर विश्वास ऐसे कि जब उनके मुख से मुरली निकली तो उससे पहले तो यह ज्ञान 1936 से था जो ज्ञान दिया गया था 1936 का तो किसी को याद नहीं है कि 1936 में क्या ज्ञान दिया तो 1947 से जब वो ब्रह्मा बाबा के मुख से मुरली निकली तो जो नया ज्ञान था ना दुनिया के लिए तो एकदम से वो उसमें एक सीधा सा सेंटेंस आता था कि रूहानी बाप बैठकर के रूहानी बच्चों को पढ़ाते हैं। तो एक अट्रैक्शन क्योंकि वो ऐसा नया ज्ञान एकदम से दुनिया के सामने आना तो दुनिया खींची ना उनकी तरफ और ब्रह्मा बाबा जो है नष्टों को वहां हो के बड़े अच्छे से दुनियादारी छोड़ के एकदम नए तरीके से लेकर के आए और वो मां का ब्रह्मा माने मां होती है। वो मां का स्वरूप था। नहीं नहीं

00:24:43:08 यह वो मैं पूछ रहा हूं कि जब हमें मालूम पड़ गया कि जो लेखराज जी हैं उनसे किसी किसी पॉइंट पर गलती हुई है। गलती हुई है इसका मतलब कहीं ना कहीं उनका मस्तिष्क वो प्रज्ञा शक्ति नहीं है कि ईश्वर के ज्ञान को समझ पाए। तो जब वो प्रज्ञा शक्ति नहीं है तो मुरली को जो सुन रहे हैं और उसको लिखवा रहे हैं। उसमें भी तो वो कमी आ सकती है। हो सकता है दो चार शब्द मुरली में भी गलत लिखवा दिए हो जो उन्होंने कुछ और कहा हो शिव जी ने उन्होंने गलत लिखवा दिया हो। कहने का मतलब यह है। कहने का मतलब यह है कि जैसे लेख जैसे कि आपके लिए जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी प्रमाण है। प्रमाण का मतलब इन्होंने जो कहा बिल्कुल सही कहा है। अगर मैंने एक भी बात इसकी गलत कह दी कि ये बात गलत कही है। तो फिर इनकी किसी भी इनकी किसी भी इनकी किसी भी बात पर मेरा भरोसा होना सिद्ध नहीं होता। एक न्याय न्याय है। एक अर्ध कुकुट न्याय कहते हैं। अर्ध कुकुट न्याय का मतलब कि मान रहे हो तो पूरा मानो। नहीं मान रहे हो तो बिल्कुल मत मानो। मानना है तो पूरा मानो क्योंकि क्योंकि जब हम किसी को प्रमाण कहते हो प्रमाण का मतलब होता है कि उसको मानने के पीछे हमारे पास और कोई आधार नहीं है। वो आधार है सबका और यदि हम उसमें खोजबीन कर रहे हैं कि इसमें ये हो सकता है, ये हो सकता है। इसका मतलब हमारा प्रमाण कोई और

00:25:58:14 है। उसके आधार पर हम इसको जांच रहे हैं कि इसने क्या सही कहा है, क्या गलत कहा है। मगर यहां पर मुरलियों के लिए यहां पर मुरलियों के लिए वीरेंद्र देव दीक्षित जी के पास केवल एक ही आधार था लेखराज और लेखराज पर ये डाउट कर रहे हैं कि वो गलत लिखवा रहे हैं। वो गलत ज्ञान दे रहे हैं। तो जब लेखराज पर डाउट है तो लेख मेरे कहने का मतलब है लेख जब लेखराज के अर्थ पर डाउट है तो लेखराज की मुरली पर डाउट क्यों नहीं और यदि लेखराज की मुरली पर डाउट नहीं है तो लेखराज के अर्थ पर डाउट कैसे इसमें एक सीधी सी बात है कि जो ब्रह्मा के मुख से जितनी मुरली निकली है ब्रह्मम वाक्यमति जनार्दनम ब्रह्मा के जो मुख से जो बात निकली है उस बात का अर्थ इस दुनिया में कोई नहीं समझ पाया और वो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित बैठ के समझ मुझे भी समझो हमें तो मौका दो जी हमें तो मौका दो बिल्कुल बोलिए बोलिए इतना लंबा क्वेश्चन दे रहे हैं अभी बोलने का मौका दो हां पहली बात यहां बात डिस्प्यूट की नहीं है यहां बात भगवान को समझने की चल रही है पहली बात तो मुख्य पॉइंट के अंदर नोट करिए आप बात का इस ज्ञान से ब्रह्मा कुमारी हो चाहे आध्यात्मिक स्तरीय विश्वविद्यालय हो

00:27:13:15 डिस्प्यूट इस बात का है कि इन्होंने भगवान को अभी तक पहचाना क्यों नहीं बात ये सारांश चला वापस इस बात का और ब्रह्मा के मुख से अगर बात इधर से उधर हुई है तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने उस बात को टोटली क्लेरिफाई कर दिया क्योंकि ओरिजिनल ज्ञान दाता तो ये बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ही है इस ज्ञान का जो ब्रह्मा के मुख से आया वो ज्ञान भी उसी की देन है जो ब्रह्मा के मुख से जो ज्ञान निकल रहा है वह ज्ञान बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित द्वारा ही दिया गया है। इससे पहले जन्म में ये मुरली बता रही है।

00:27:51:03 आपने जवाब दे दिया। जी मैं पूछ सकता हूं। जी हां इन्होंने ही पिछले जन्म में इनको ज्ञान दिया था। जी है ना? और यही है बिल्कुल यानी कि शिव ने ज्ञान नहीं दिया है लेखराज को लेखराज को ज्ञान इन्होंने दिया था शिव को समझ नहीं पा रहे ना ब्रह्मा कुमारी समझ पा रही ना आध्यात्मिक समझ पा मैं मैं समझने की बात नहीं कर रहा हूं भाई साहब मैं आपकी चीजों को समझना चाह रहा हूं कि जी जी मुरली जो मुरली जो लिखवा रहे हैं लेखराज जी मुरली लिखवा रहे हैं जो वो शिव ने दी है लेखराज जी को या इन्होंने पिछले जन्म में दी दी है लेखराज जी को किसने किसको दिया जन्म में 1936 से ज्ञान शुरू हुआ है तो 1936 में शिव कहो शिव बाबा बोलते हैं हम उसको शिव बाबा ने 1936 से दी ब्रह्मा बाबा को सुनाई समझाया ज्ञान तो फिर लेखराज क्यों कह रहे हैं कि मैं पिछले जन्म में मैंने ही दिया था कौन बोल रहे हैं लेखराज ये वो वीरेंद्र देव दीक्षित जी क्यों बोल रहे हैं मैंने ही पिछले जन्म में दिया था क्योंकि ये यज्ञ 1936 से शुरू हुआ है और जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित है 1942 में शरीर

00:29:06:07 छोड़ के गए थे और इनका भी मर्डर हुआ था। वीरेंद्र देव दीक्षित जी 1942 में शरीर छोड़कर हुआ कराची में थे उस समय तब हां मतलब लेखराज जी के सेवादार नहीं है। ब्रह्मा जी के पुत्र नहीं है। ये सनत कुमार नहीं है। ये कोई और सनत ये सनत कुमार तो सन से बात को समझो आप। हां सनत कुमार कह रहे हैं हम 1969 के बाद में हम बात अब जो बात चल रही है वो 1942 की चल रही है जो ये आप बोल रहे हैं कि वो मर गए उनका मर्डर हुआ था तो अभी दोबारा जन्म लेके आए तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित उससे पहले सेवक राम के नाम से था अच्छा वो सेवक राम के नाम से वो थे तब 1942 में उनका मर्डर हुआ और फिर वो आए वीरेंद्र देव दीक्षित जी के रूप में मगर है तो वह सनत कुमार ही जी 19 सनत कुमार कहेंगे 40 साल का होने के बाद जब ब्रह्मा कुमारी आश्रम में आए ज्ञान लिया ज्ञान समझा और ज्ञान को दूसरों को समझाने लगे मतलब दूसरे वाले जन्म में दूसरे वाले जन्म में पहले वाले जन्म में ये लेखराज के पास

00:30:21:15 थे और सेवक राम के दादा लेखराज के जीजा थे बहनोई थे अच्छा लेखराज के जीजा थे बहनोई और इन्होंने लेखराज जी को मुरली सुनाई थी। इन्होंने दादा लेखराज को दादा लेखराज को साक्षात्कार हुए थे विनाश के और नई दुनिया की स्थापना के। नहीं नहीं भाई साहब देखिए मैं पूछ रहा हूं कि मुरली उन्हें आप सही सुनिए तो अभी मैंने 10 मिनट पहले आपसे एक प्रश्न पूछा कि मुरली उन्हें इन्होंने सुनाई है। पिछले जन्म में सेवक राम नाम से जो जिनका जन्म था इन्होंने सुनाई। देखो अब यहां से तथ्य क्लियर करो आप। दादा लेखराज को 1936 में साक्षात्कार हुए। ठीक है? किसके? सेवक सेवक राम ने उनको उनके साक्षात्कारों का अर्थ समझाया और गीता बैठकर के 1936 से 1942 तक सेवक राम ने यज्ञ चलाया है पहले। और उस समय ये लेखराज क्या करते थे? लेखराज सुनते थे। शिष्य थे। उनको साक्षात्कार हुए थे तो वो ज्ञान सुनते थे। गीता ज्ञान दिया जाता था 1936 से 1942 यानी कि सेवक राम जी से वो ज्ञान सुनते थे लेखराज जी अपने जीजा से जी अपने अपने जीजा

00:31:36:21 से सुनते थे ओके ओके ओके यानी कि तो फिर ये वाली बात कैसे आ रही कि मुरली जो है इनको आती थी ये अब वो वीरेंद्र वो तो सेवक राम जी से सुनते थे ना सज्ञान अब पॉइंट पे आ गए अब देखो अब आपको बात समझाते हैं 1936 में 1936 3 में दादा लेखराज को जो हीरों का व्यापारी था कोलकाता में हम इनको साक्षात्कार हुए भगत भगत प्रकार की जो आत्मा होती है ना शुद्ध भक्ति करते हैं जो लोग तो उनको चतुर्भुजी विष्णु के साक्षात्कार हुए फिर नई दुनिया के हुए विनाश के हुए तो वो जो है ना पूछते घूम रहे थे दुनिया में कि भाई ये है क्या मुझे कैसा दिखाई दे रहा है ये सब ठीक है तो जो उन्होंने जो भक्ति मार्ग के गुरु किए हुए थे उन सब के पीछे इधर उधर गए पूछा समझा लेकिन नहीं समझ पाए हम तत सेवक राम के पास पहुंचे। दादा लेखराज की तो बड़ी हीरो की दुकान थी। लेकिन सेवक राम की जो इसका बहनोई था उसकी भी एक छोटी सी दुकान थी उसी बाजार में। अच्छा तो सेवक राम जी के पास आया। वो सेवक राम की जो पत्नी हुई वो दादा लेखराज की बहन है। बिल्कुल। ज्ञान के अनुसार यहां पर एक नई बात बताऊं आपके लिए भी बड़ी जानकारी की बात है। वो जो दादा

00:32:51:25 जो सेवक राम की पत्नी है वही लक्ष्मी और भारत माता है और ये सेवक राम ही भारत है। ये ज्ञान से बाद में पता चल रहा है 90 साल के बाद। चलो ये तो बाद की बातें हैं कौन क्या है। चलो वहां सेवक राम जो है सेवक राम ने गीता के आधार पर उस समय नाम रखा गया। ओम मंडली और सत्संग होता था। ये ओम मंडली। ठीक है। सेवक राम की शरण में आ गए लेखराज जिनको अभी चतुर्भुजी भगवान के दर्शन विष्णु के दर्शन हुए हैं और सृष्टि का नाश और वो सब देखा है उन्होंने है ना ऐसा जी जी बिल्कुल सेवक अब एक तरीके सेवक राम गुरु है इस समय जी बिल्कुल सेवक राम की असली और उनका उनके उनके द्वारा जो ये जो ये अभियान चल रहा है इसका नाम है मंडली प्रणव प्रणवाक्षर जो है मंडली ठीक है बोलिए तो ओम मंडली 1936 से 1942 तक चलती रही। जी वहां पे कुछ पवित्रता के नाम पर झगड़ा हुआ जिसके कारण ब्रह्मा बाबा यज्ञ छोड़ के भाग लिए। हम यज्ञ छोड़ के भागे तो कराची होते हुए धीरे-धीरे ये माउंट आबू पहुंचे बाद में। और जब उस समय सेवक राम को वहां जो सिंधी थे कराची में उधर

00:34:07:06 पाकिस्तान में रह रहे उस समय जो आज पाकिस्तान का भाग है तो वहां सेवक राम जी को तो मार दिया गया था। ठीक है? और 1942 में ही भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ। हम तो जब वो मारकाट हुई तो मारकाट के समय ब्रह्मा बाबा कुछ कन्याओं माताओं के साथ वहां से दौड़ गए थे। चले गए हम और दादा जो सेवक राम जी थे उनको मार मूर के कहीं दीवार में जैसे आप ये सारे मिले हैं सारे इनके यहां से कि दीवार में दिया उनका उनकी हत्या कर दी गई ठीक है सेवक राम जी तो दो माताएं यज्ञ में बताई जाती है नहीं नहीं माताएं छोड़िए मैं मुझे वो बताइए कि इनकी मुरली आना कहां से शुरू हुई है इनकी 1947 हां तो उसी तो बता रहा है 1942 के बाद मुरली कहां चली 1942 से 1947 का पांच साल का नहीं जानोगे क्या करना मुरली पे ध्यान है ना हमारा तो वो उनकी हिस्ट्री थोड़ी ना जाननी है कि चीज अरे सेवक राम ने पहले गीता ज्ञान सुनाया पूरी मुरली चलाई उसके बाद दो माताएं हैं वो मुरली चलाती है फिर 1947 से लेख दादा लेकरा चलाता है अच्छा दो माताएं जो जो उन्हीं की शिष्या थी सेवक राम जी की जो सेवक तो सेवक राम की पत्नी हो गई खुद में हम

00:35:22:14 और एक एक और थी जो अपनी पत्नी के एब्सेंस में लेके आया था जो 18 20 साल की लड़की की थी। एक और शादी की थी सेवक राम ने बाद में। दो शादियां थी। दो शादियां थी तो दो माताएं थी। अच्छा। अच्छा सेवक राम जी की उस समय आयु क्या थी जब लेखराज जी उनसे ज्ञान ले रहे थे। 60 साल और लेखराज जी की बहन से विवाह भी था। मतलब इनका सेवक बहुत वो तो पहले से ही था। घर गृहस्थ चल रहा था पहले से ही। तो क्या आयु रही होगी वो? अब उनका लगा लो चार पांच साल तो छोटी होती ही है अपने यहां अपने धर्म में तो उसकी 60 होगी तो उनकी 55 के करीब लगा 52 55 तो जब लेखराज जी उनसे ज्ञान ले रहे हैं उस समय सेवक राम जी की आयु थी लगभग 60 साल जी उस समय वो उन्होंने एक और विवाह भी किया था 20 साल की युवती से उसका कारण क्या था कि जो दादा लेखराज है वो सत्संग करते थे ठीक है ठीक है छोड़िए उसका कारण नहीं जानना। आगे चलते हैं। तो जब 1942 में इनकी हत्या कर दी गई अ क्या कहते हैं ये जो सेवक राम जी की इसके बाद अ जो लेखराज जी हैं वो जो दो उनकी बहन स्वरूपी हुई।

00:36:37:20 एक बहन है तो दूसरी भी बहन ही हुई। बिल्कुल दोनों बहने हो गई। दोनों हो गई। तो वो दोनों बहने इनके साथ आई। फिर वो प्रवचन करती रहीं। 5 साल फिर 1947 से इन्होंने मुरली देना शुरू किया है। जी कराची में थे उस समय कराची से मुरली 1947 में ब्रह्मा बाबा के मुख से निकलने लगी। अच्छा तो अब यहां पर पॉइंट यह आता है कि जो मुरली उनके मुख से निकल रही है उनको शिव जी दे रहे हैं या फिर जो उन्होंने सेवक राम जी से ज्ञान लिया हुआ था वही उसको मुरली के रूप में दे रहे हैं। जो सेवक राम से उन्होंने सुना वही ज्ञान उनकी बुद्धि में उपज रहा है और वही सुना रहे हैं। अच्छा तो उन्होंने ये क्लेम गलत किया है कि हमें शिव बाबा आकर के ज्ञान देते हैं। ये क्लेम उनका गलत है। भगवान जो है वो दूसरों में प्रवेश करेगा या भगवान में कोई और प्रवेश करेगा। भगवान कौन है? यही तो सबसे बड़ा विषय चल रहा है इस ज्ञान में भगवान को मैं ये नहीं कह रहा मैं ये नहीं कह रहा भगवान वो मैं अभी क्लेम पूछ रहा हूं उन्होंने ये क्लेम एक तरीके से झूठा किया था कि मुझे जो है शिव जी मेरे अंदर आके लिखवाते हैं ये टोटल गलत क्लेम है कि शिव जी प्रवेश करते हैं एक चीज यहां पे एक छोटी सी चीज और रह जाती है कि इस जन्म में तो वीरेंद्र देव दीक्षित जी का जो बाद वाला जन्म है उसमें तो उनकी दिव्यता आपने बता दी कि वो सनत कुमार है।

00:37:53:08 है ना? अब इस समय 1966 की जब आप सनत कुमार कह रहे हैं तो उस समय 1969 में आ जाइए आप। हां हां मैं समझ गया जो पहले वाला जन्म है उसकी दिव्यता क्या थी? उसकी दिव्यता यह थी उसकी दिव्यता सुनो। जो 1936 में जिसको भगवान हम कहते हैं जो सृष्टि पर सदा कायम है उसकी दिव्यता वो पहचान हो गई कि उसने ज्ञान देकर के ये सिद्ध कर दिया कि वो ज्ञान का कूट भंडार गीता ज्ञान दाता वो सेवक राम है अच्छा नहीं मतलब वो शिव थे वो शिव थे जी तो ये तो जब शिवजी यानी शिवजी जो है स्वयं इनके रूप में है सेवक राम जी के रूप के रूप में सेवक राम जी के रूप शिव जी स्वयं सेवक राम जी के रूप में जिन्होंने शिष्यत्व प्रदान किया इनको अपना अब आप ये बताइए आप शिव किसको शिव मानते हैं? नहीं वो बाद की बात है भाई साहब वो बाद की बात है। अभी मैं आपकी केवल मान्यता मान्यता क्लियर कर रहा हूं। 1936 में हां तो वो क्या कहते हैं लेखराज जी को स्वयं शिव जी जो है जो ये जो ये जो शरीर है सेवक राम जी वाला इसके द्वारा वो ज्ञान

00:39:08:09 देते हैं उसके बाद उनकी हत्या कर दी उस शरीर को नाश कर दिया जाता है और उसके बाद जो उनकी जो दो पत्नियां थी एक युवती थी 20 साल की और एक जो है वृद्धा थी 55 साल की ये दोनों पांच साल तक वही ज्ञान आगे बढ़ाती है उसके बाद 1947 से जो है यह जो क्या कहते हैं लेखराज जी हैं 1947 से यह ज्ञान देना शुरू करते हैं और यह कहते हैं कि ये ज्ञान मुझे शिवजी स्वयं दे रहे हैं। ये ये नहीं बताते कि सेवक राम जी से जो ज्ञान लिया है उनकी पत्नियों से जो ज्ञान लिया है ये वो ज्ञान है। वो ये नहीं बताते। ठीक है ना? अगर शिव देखो बिल्कुल सही बात है। अगर शिवजी ज्ञान देते तो मैं आपके किसी भी मान्यता को अभी चैलेंज नहीं कर रहा हूं। आप चिंता मत करिए जब आप आप अभी उसको आप अभी उसको सिद्ध करने में व्यर्थ वो ना करें मतलब मैं अभी क्लेम चैलेंज नहीं कर रहा हूं समझ रहे हैं मैं तो अभी आगे कहानी वहां पे आना चाह रहा हूं जो कुछ मुख्य पॉइंट है तो आप अपनी जिज्ञासा पूरी करो हां वो जो तथ्य जब जान ले तब तो हम आपके किसी को काउंटर कर पाएंगे है ना वो काउंटर करना भी है कि नहीं करना है वो जरूरी नहीं है वो बाद की बातें है तो अब यहां पे दिक्कत ये ये है कि इन्होंने जबकि ज्ञान लिया था सेवक

00:40:23:10 राम जी से मूल ज्ञान सेवक राम जी से लिया था जो स्वयं शिव जी ही थे है ना इन्होंने ज्ञान लिया था उनसे और ये अपने नाम से बताने लगे कि शिवजी जो है मुझे प्रकट हो के या मेरे अंदर आकर के लिखवा रहे हैं जो कि गलत बात है ठीक है अब बात गलत बात है हां टोटली गलत बात अब आगे की बात ये आती है कि जो हां जब ये स्वयं शिवजी जी थे सेवक राम जी तो इस जन्म में सनत कुमार क्यों है? क्योंकि कोई भी जब आता है आत्मा एक शरीर छोड़ के दूसरा जन्म तो लेगी ही लेगी। प्रकृति का नियम तो नहीं टूटेगा। तो वो आत्मा थोड़ी ना थी। वो तो देखो ये बात ये बात एक्सप्लेन करनी पड़ेगी। इस बात का डायरेक्ट अंतर नहीं होता। ये एक्सप्लेन करनी पड़ेगी ये बात। ठीक ठीक करिए। करिए करिए। जब पहले ज्ञान आता है फिर ज्ञान दाता आता है। कोई भी नियम है नौ धर्म है कोई पहले ज्ञान आता है फिर ज्ञान दाता की पहचान होती है। तो 1936 में पहले ज्ञान आया। ज्ञान से ही तो जानते हैं कि इस सृष्टि का मालिक कौन है? उस ज्ञान माना जानकारी किसकी? सत्य की। कि इस दुनिया में सत्य कौन है? जिस सत्यनारायण की घरघर में कथा सुनाई जाती है तो पहले वो सत्य आकर के ज्ञान देता है। उस ज्ञान से हमें

00:41:38:12 जानकारी मिलनी है कि वो सत्य कौन है? तो सेवक राम के रूप में हम पहचान नहीं पाए कि यही वह ओरिजिनल इस सृष्टि का सत्यनारायण है। तो 1976 से फिर वही आकर के अपनी जानकारी स्वयं देता है। 1976 से बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ब्रह्मा का चौथा पुत्र बन के वो ज्ञान को क्लेरिफाई कर देता है। इसके सारे ज्ञान को जो ब्रह्मा के मुख से निकला है। इसका पूरा टुकड़ा करके शुरू किया। यहां प्रॉब्लम यह हो रही है कि अगर पुत्र पुत्र बनने की बात की जाए तो वो तो वीरेंद्र देव दीक्षित किसी के पुत्र के रूप में पहले से ही एक उपाधि को प्राप्त है। तो फिर पहले आप समझो इस रियल उपाधि रियल उपाधि यदि एक मिनट रियल उपाधि यदि उनकी सनत कुमार की है तो फिर वो शिवजी कैसे हुए? अगर सनत कुमार की रियल उपाधि है या तो यह कहेंगे कि शिवजी और सनत कुमार एक ही तत्व है। हां पॉइंट पर आ गए आप सही पकड़ रहे हो। बिल्कुल सही पकड़ रहे हो। बिल्कुल सही पकड़े आप। आपको प्रणाम करता हूं भाई जी। आप एक सेकंड में बात को पकड़ गए। प्रणाम आप जैसी शुद्ध आत्मा को। बहुत शुद्ध प्योर आत्मा है आप। एक सेकंड में ज्ञान पकड़ गए आप। बिल्कुल। तो

00:42:53:13 शिव जी और सनत कुमार एक ही तत्व है। बस यहां पर वो जो है ऐसा रोल निभाते हैं सनत कुमार वाला कि हम ब्रह्मा जी से ज्ञान ले रहे हैं। चौथे पुत्र के रूप में है। जी है ना? वो अहंकार ब्रह्मा का अहंकार तोड़ने के लिए क्योंकि ब्रह्मा को अहंकार हो गया था। ये गीता का भगवान प्रैक्टिकल में इस दुनिया का मालिक मैं हूं। इसलिए ब्रह्मा बाबा को ब्रह्मा बाबा हार्ट अटैक हो के मरे। अहंकार तोड़ने के लिए तो अहंकार तोड़ने के लिए उनका शिष्य क्यों बने? उनको उनके गुरु बन के दिखाते। लेकिन देखो यहां ज्ञान के जन्म की बात है। एक तो जैसे मेरा जन्म मेरे माता पिता से हुआ उस जन्म की वो एक अलग जन्म की बात है। ज्ञान के जन्म की बात चल रही है। यहां पर ज्ञान के अनुसार जो जन्म होता है ना उस जन्म की बात चल रही है। दूसरा शरीर लेकर के आवेगा तो आवेगा तो ज्ञान में ही ना। ज्ञान में आवेगा तो किसी के तो अंडर में आना पड़ेगा ना एक बार। तो ये दोनों राम और ये दोनों आपस में दोनों आत्मा एक दूसरे के सहयोगी है। नहीं नहीं वो ठीक है सहयोगी है। तो फिर दिक्कत ये आ रही है कि अ फिर ये जो वाली बात है ना घमंड तोड़ने घमंड कैसे टूट रहा है वो बताइए। घमंड इस प्रकार से टूट रहा है कि ब्रह्मा इस बात को भूल गया कि तुझे ज्ञान देने वाला सेवक राम था। उसको तो भूल गया। ठीक है? तो इन्होंने जब ये शिष्य बन के गए हैं।

00:44:08:19 जब ये शिष्य बन के गए हैं लेखनाथ जी के पास तो उससे तो और वो पुष्टि हो जाएगी। मतलब शिष्य बन के गए तो उससे घमंड कैसे टूटेगा? वो कह रहा हूं मैं। उससे घमंड इस प्रकार से टूटा कि उसके ज्ञान को सारे को समझा के उसका मंथन करके सार निकाल के दे दिया कि इसके इस मनुष्य सृष्टि का बाप कौन है? ये बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने ही हमें समझाया कि इस ज्ञान जो ब्रह्मा के मुख से इतना जी इस बार जब लेखराज जी के पास शिष्य के रूप में गए हैं तब भी वो ज्ञान ही दे रहे हैं। उन्हें तो वो गुरु के रूप में ही गए। हां तो था तो देखो था तो सनत कुमार लेकिन बाद में ज्ञान ज्ञानेश्वर और योग योगेश्वर कहा जाता है सनत कुमारी फिर

00:44:51:22 मतलब वो सनत कुमार के रूप में गए हैं मगर उसके बाद जो है वो और भी एक नया रूप लेते हैं जो योगी योगेश्वर और फिर वो गुरु बन जाते हैं लेखराज जी के लेखराज जी उनको एज गुरु स्वीकार करते हैं दादा लेखराज जी को स्वीकार करते हैं लेकिन ज्ञान और योग के कारण उनसे आगे निकल गए। नहीं नहीं नहीं मैं ये नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं जो लेखराज जी है उन्होंने ये कहा कि मेरा गुरु है ये दादा लेखराज जी ने उस समय नहीं स्वीकार किया। जीवित रहते उन्होंने स्वीकार नहीं किया। तो घमंड कैसे टूटा फिर? शरीर छूटने के बाद अकाले मौत जैसे वेद शास्त्रों में गणेश जैसे अपने सनातन धर्म में गणेश जी का सिर नहीं काट दिया था। वो आपको वेद शास्त्रों से सारा ज्ञान जोड़ के समझाऊंगा धीरेधी आपको। आप तो बहुत अच्छे इंसान है। बहुत अच्छी आत्मा है भाई जी। आप बहुत अच्छे से ज्ञान को समझ रहे हो। मैं जो है ना हमारी मुरली कह रही है। हमारी मुरली कह रही है। क्योंकि क्योंकि उनका मैं एक क्योंकि उनका अकाल मृत्यु हुई। इससे उनका घमंड टूटा। घमंड तो जीते जी टूटना चाहिए था ना। मृत्यु के बाद क्या घमंड? जीते जी आपको इस चीज की यादगार शिवलिंग के मंदिर में रखी हुई है। बैल और सामने शिवलिंग।

00:46:06:24 आपको ज्ञान बहुत अच्छे से समझोगे आप एक दिन बहुत अच्छा समझोगे आप और निष्कर्ष पर निकलोगे दो चार इंटरव्यू निकलवा दो मेरे साथ आप आपके आप समझ जाओगे उनको समझाना मुश्किल हो रहा है लेकिन आप समझ जाओगे उनसे जल्दी तो तो इस सृष्टि रूपी रंग मंच पर ये दोनों शेर है एक जावेगा दूसरा आवेगा ये नियम है इनका खाली नहीं रहेगी सृष्टि वो शरीर छोड़ेगा तो वो मैदान में आ जावेगा वो शरीर छोड़ेगा तो वो मैदान में आ जावेगा दादा लेखराज कोई छोटी चीज नहीं है। सतयुग का पहला राजकुमार है और जो राजा था वो है तो ब्रह्मा जो ये जो लेखराज जी हैं घमंड टूटने वाली बात मुझे क्लेरिफाई नहीं हो पाई। खैर छोड़िए वो ठीक है आपकी मान्यता है कि वो क्योंकि करेंगे भाई जी करेंगे बिल्कुल करेंगे आपको बहुत अच्छे से हो जाएगी। बहुत बड़ा पॉइंट नहीं है। वो बहुत बड़ा पॉइंट भी नहीं है। तो हम लोग आगे चलते हैं। तो अब कुल मिलाकर के कि 1936 में सेवक राम जी से शिष्य बनते हैं। ज्ञान लेते हैं लेखराज जी। उसके बाद 1942 में दंगों में मारे जाते हैं सेवक राम जी। उसके बाद पांच साल उनकी जो दो पत्नियां थी जो बहन स्वरूप थी लेखराज जी की वो प्रवचन देती है मुरलियों का ज्ञान

00:47:22:00 देती है उसके बाद उनके भी जाने के बाद जो लेखराज जी हैं वो स्वयं मुरली सुनाने लगते हैं 1947 से मगर यह कहते हुए कि ये मुरली जो मैं सुना रहा हूं ये स्वयं शिव जी मुझको सुनवा मेरे शरीर में आकर के सुना रहे हैं ये जो है मैंने किसी से ज्ञान नहीं लिया है उसके बाद उसके बाद फिर फिर यह दोबारा कब आते हैं वीरेंद्र दीक्षित जी के रूप में कब आते हैं 1969 में 69 में ये मतलब कहीं पर जन्म हो चुका होगा मगर वो वस्क हो के आए होंगे लेखराज जी के पास वो जन्म वो जन्म बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी का वो जन्म हुआ अहमदगंज जो है जो यूपी में पड़ता है फर्रूखाबाद जिले में अहमदगढ़ में जन्म हुआ अच्छा तो वो जब जन्म ले 40 साल के हो गए तब यहां आए होंगे लेखराज जी के पास हां जी हां जी तो उसकी जीवन कहानी है पूरी बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी की जो 40 साल के करीब का पीएचडी का उसके बाद आदि पुरुष कौन ये टॉपिक ले आए उसके बाद उसके बाद वो इनकी शरण में आ गए मतलब एक घमंड तोड़ने के लिए एक लीला के रूप में आ गए इनकी शरण में उस समय उस समय के लिए नहीं कहेंगे उस समय के लिए नहीं कहेंगे 1969 में जब आए हैं तो उस समय

00:48:38:04 76 तक तो 76 तक तो शिष्य के रूप में ही रहे सनत कुमार के रूप में ही रहे 1969 में आए। अब यहां समझो एक सेकंड की बात है समझने का। 1969 में आ गए। हां। आकर के वहां सात दिन का कोर्स ले लिया। ठीक है। जिस माता से कोर्स लिया ये वही माता कोर्स करवा रही है जो सेवक राम की पत्नी थी। अभी भी जी। वो भी तो दोबारा जन्म ले आ गई ना। कुछ सालों के बाद उसने भी शरीर छोड़ दिया। वो दोनों पत्नियां एक चीज करिएगा जब किसी का शरीर जन्म जब किसी का शरीर छोड़ना हो दूसरा शरीर धारण करना हो तो आप इसको कहते चलिएगा क्योंकि आपकी जब आप बिना ये बताए कि जन्मांतर हो चुका है ये बताए आगे बढ़ते हैं तो समझ नहीं पाता हूं समझ रहे हैं ये चीज बताते चलिएगा कि अब जो वो स्त्री थी वो दूसरा जन्म ले आ चुकी थी जी अब जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जब ब्रह्मा कुमारी में पहुंचा

00:49:36:12 हां ज्ञान लेने के लिए जब ज्ञान लेने के लिए पहुंचा तो यज्ञ के आदि में जो दो माताएं थी जो आपने देखा ना पांच साल तो उन्होंने मुरलियां चलाई दो पत्नियां थी ना सेवक राम की समझ गया वो पत्नियां वो पत्नियों में से कोई एक ही जन्मांतर भेद से दोबारा आ चुकी है अब वो जो है इनको सेवक राम का जो दूसरा जन्म है जिसमें वो सनद कुमार की भूमिका निभा रहे हैं अब वो उनको ज्ञान दे रही है अब वो ज्ञान दे रही है बहुत अच्छे बहुत अच्छी आत्मा है आप एक सेकंड में बात को पकड़ते हैं और उनका नाम है वेदांती। हम अच्छा समझ गए आप? उनका नाम है वेदांती जो माता जी थी। जी। अब उनका नाम है वेदांती। वो बहन कहते हैं। हम उनको वेदती माता कहते हैं। और हमारी मान्यता है यही भारत माता है। यही लक्ष्मी। ठीक है। अब इससे आगे चलते हैं। फिर 1976 से यहां से यहां से समझो बात को। ज्ञान ले लिया बाबा ने। ज्ञान नहीं ज्ञान लेने का ड्रामा किया। ज्ञान तो था ही ना। नहीं नहीं लेकिन सब गुप्त रहता है ना प्रत्यक्ष नहीं करते भगवान अपने को लीला की वो तो स्वयं शिव थे ना लेकिन यहां 1969 से 76 तक का पांच साल का नहीं थोड़ा सा जानोगे

00:50:55:03 1976 में अलग आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय शुरू हुआ 1976 में अलग से हां नहीं तो उन्होंने माताजी से ज्ञान लेने का ड्रामा किया कि रियल में ज्ञान लिया क्योंकि ज्ञान अभी उसको प्रैक्टिकल में समझो जो कुछ हुआ प्रैक्टिकल में हुआ उस बात को अलग छोड़ दो अभी आप भी तो ड्रामा ही तो है वो लीला है एक तरीके से ईश्वर की हां वो लीला है वो लीला है उस प्रभु की लीला है वो तो ज्ञानी थे ही स्वयं से है ना वो तो इस वो तो जानन जानन ही हार है अब 1976 वाला जो मामला आ जाता है वहां से उन्होंने अपना विश्वविद्यालय शुरू कर लिया क्यों शुरू किया क्योंकि उन्होंने ये बताया कि भाई ये लेखराज जी जो है इनके अंदर नहीं आते थे कोई इनके पास जो ज्ञान था मैंने दिया इनको सेवक राम जी के रूप में सेवक राम जी के रूप में वो ज्ञान दिया था। अब अब यहां से पांच साल की स्टोरी थोड़ा सा बता दूं एक थोड़ी सी। अब अगर आप इजाजत दें तो 1969 से 76 तक का थोड़ा सा बता दे आपको। कोई आवश्यकता नहीं हो वो तो फिर आगे चले हम लोग। लेकिन आपके आपके नॉलेज के लिए जरूरी है। आप एक बड़े बड़े शुद्ध आत्मा है। आप बताइए बताइए। 1969 में जब सात दिन का कोर्स कर लिया भठी कर ली तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित इनकी मुरलियों को काटने लगे कि तुम कुछ और कह रहे हो मुरली कुछ और कह रही है अच्छा

00:52:10:16 यहां से झगड़ा शुरू हुआ झगड़े का कारण नहीं जानोगे हां ये बताइए ये बताइए हां तो झगड़े का कारण तो यहां से शुरू हुआ ना 73 से 1969 से अच्छा 69 कोर्स तो सात दिन का कोर्स है कोर्स हो गया बात को समझ गए तो 12 ज्यादा दिन तक उन्होंने वो शरण नहीं ली है। बस दो हफ्ते दो हफ्ते में ही बगावत कर बगावत कर दी कि मुरली का मुरली कुछ और कह रही है। तुम कुछ और कह रहे हो। अच्छा तो यहां से झगड़ा शुरू हो गया। तो फिर बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के साथ इन्होंने जो किया उसका सेंटर आना बंद कर दिया। धक्के मारे वो बेइज्जती की।

00:52:55:01 अच्छा इसमें एक एक ट्विस्ट और है। एक छोटा सा प्रश्न और है कि जब स्वयं परमात्मा ही है जो शिव बाबा स्वयं मतलब सर्वशक्तिमान ईश्वर तो वो धक्के मारे और ये बेबस कैसे हो रहा है? वहां हत्या हो गई उसकी दीवार में चुन दिया गया। ये क्या है? इसलिए इसलिए हो रहा है कि जो विधि विधान के अनुसार जो नियम कानून कायदा इस सृष्टि का बना है ईश्वरीय कानून कायदा है इस सृष्टि का। हां सृष्टि चल रही है। यह ईश्वरीय कानून कायदे से चल रही है। और ईश्वरीय यानी यानी सृष्टि में जो नियम है वो ईश्वर ने बनाए हैं। ईश्वर ने बनाए हैं और ईश माना शासन करता वर माना श्रेष्ठ श्रेष्ठ जो इस दुनिया का शासन करता है उसने कानून कायदा बनाया सारा का सारा। तो यानी कि वो जो अपने जो शासन कायदा कानून बनाया उसको फॉलो कर रहा है। उसको तोड़ता नहीं है। मैं भी वो कहता है गीता में भी कहता है ना कि मैं भी इसलिए कानून कायदे में बंधा हुआ हूं। मैं प्रकृति के नियम या कोई कानून कायदा नहीं तोड़ता हूं। मैं भी कानून कायदे में बंधा हुआ हूं। नहीं गीता में तो उन्होंने ये भी कहा है ना करतुम अकर्तुम अन्यथा करतुम मतलब करतुम अकर्तुम का मतलब क्या है? मतलब उन्होंने यह कहा है कि मैं यह भी कर सकता हूं। वह भी जो

00:54:10:04 नहीं करने वाली चीजें वह भी कर सकता हूं और और भी बहुत कुछ कर सब कुछ कर सकता हूं। लेकिन लेकिन वो किसी की कार्य में किसी के किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करते हैं। सब अपना जो कर्म करता है जो जैसा कर्म कर रहा है वैसा फल पाता है। नहीं करते नहीं है वो बात अलग है। चटता वाली बात अलग है। यहां से यहां से नया एपिसोड ये शुरू होता है। सनत कुमार के रूप में वो सनातन धर्म की स्थापना करने के लिए दर-दर घूमता है। कोई ज्ञान समझ लो, कोई ज्ञान समझ लो बीके के यहां भी गया। लोगों के पास गया गलीगली में कि भाई मेरे पास ज्ञान है मैं ज्ञान समझा सकता हूं तो जैसे एक धर्म की स्थापना करनी चाहिए धर्म स्थापना के लिए जो है वो दरदर जाते हैं जैसे एक धर्म पिता धर्म की स्थापना करती है तो सनत कुमार के रूप में वो सनातन सनातन सत्य सनातन धर्म की स्थापना करते हैं और यहां से आपको एक सिर्फ एक मिनट आप मुझे सुनेंगे अब सत्य सनातन धर्म कहा जाता है अनादि अनादि सत्य सनातन देवी देवता स्क्रीन है ना शायद आपका फोन फोन गरम हो गया है। आपकी स्क्रीन शायद जो है ना चिपक रही है। अब मतलब आपके वीडियो आपका रुक गया है। फ्रीज हो गया है। ठीक है। फोन आपका गरम तो

00:55:25:08 नहीं हो गया? नहीं फोन गरम नहीं हुआ है। मेबी नेटवर्क प्रॉब्लम हो सकती है और बाकी कुछ भी। नहीं देखिए। वाईफाई वगैरह कनेक्ट कर लीजिए। यह है पूरी कहानी वीरेंद्र देव दीक्षित जी की और जो है लेखराज जी की ओके आवाज आ रही है अभी भी हां आवाज आ रही है मगर आपका जो जो वो है ना क्या कहते हैं अ स्पेस मूवमेंट वगैरह वो हां अब ठीक है ठीक है चलिए अब चल रहा है हां अब चल रहा है अब जैसे सनत कुमार हो गया ना अब ये सनत कुमार के रूप में सत्य सनातन धर्म की स्थापना के लिए निकलता है। इन्होंने तो धक्के मार के निकाल दिया बाबा को वहां से। हां हां उसके बाद ये सत्य सनातन धर्म की स्थापना के लिए चलता है। तो हम सनातनियों को ये समझना चाहिए कि हमारा धर्म अनादि है तो हमारा धर्म पिता भी अनादि है। हम हम ये बात मुझे दुनिया को समझानी है। अब आप निमित्त बनो। कौन सहयोग करेगा? कोई ना कोई तो अच्छे लोग आवेंगे सामने। अब मतलब वो 76 से फिर चालू कर देते हैं अपना आध्यात्मिक विश्वविद्यालय। जी आध्या पहले नाम रखा प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय नाम रखा

00:56:40:14 पहले उन्होंने। अच्छा ये तो बाद का नाम आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय बाद का नाम है। पहले नाम था प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय। अच्छा जी। और फिर बाद में उन्होंने क्या रखा है नाम? आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय। आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय। तो अभी जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम से चल रहे हैं वो अलग है। जी वो बिल्कुल वो अपने आप को सूर्यवंशी कहो या रुद्राक्ष कहो क्योंकि सत्य सनातन धर्म देवी देवता धर्म है ना एक जगह यानी कि बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित तो जो आध्यात्मिक ईश्वर विश्वविद्यालय वो अपन को कहता है सूर्यवंशी। हां। और ब्रह्माकुमारियों को समझते हैं चंद्रवंशी। और चंद्रवंशी और सूर्यवंशी मिलकर के नर से नारायण नारी से लक्ष्मी बनने का ज्ञान दिया जाता है। यानी जो अभी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के रूप में ख्यापित हो रहा है। जैसे अभी दिल्ली में भी हम गए वहां पे कोई अमोल कोकने हैं। जी उसके उसके अंडर में जो है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय चल रहा है। किसने कहा? किसने ये किसने कहा आपको कि आध्यात्मिक ईश्वर विश्वविद्यालय चल रहा है नहीं वहां बोर्ड लगा हुआ है और वो अपने आप को वीरेंद्र से का अनुयाई मानते हैं।

00:57:56:02 क्या अनुयाई मानते हैं वो एक अलग बात है लेकिन ये तो नहीं कह सकते ना कि आध्यात्मिक ईश्वरी विश्वविद्यालय चला रहे हैं। नहीं वो ये कह रहे हैं कि हम जो है उन्हीं का सेंटर चला रहे हैं। आध्यात्मिक नहीं अब मैं कहने लगू मैं उनका मैं उनकी गद्दी पे बैठा हूं। ऐसा नहीं होता है। बाप भगवान भगवान होता है। सब भगवान नहीं हो सकते। मतलब अमोल कोकने जी का ये दावा गलत है। ये सब ये सब गलत है। सब अपनी मनमत कर रहे हैं। अच्छा ठीक है। अब वापस आ जाते हैं। अब यहां पे एक दिक्कत ये आती है कि जैसे इन्होंने कहा कि भाई मुरली जो है मैंने ही दी थी और जो मुरली का सही अर्थ है वो मैं बता रहा हूं। तो यहां पे एक दिक्कत है कि अगर वो मुरली का सही अर्थ बता रहे हैं। यहां पर मैं आपको एक बात और बता दूं। भगवान अपने को भगवान नहीं कहता है। जो सत्य है वह अपने को सत्य नहीं कहता। सत्य स्वयं प्रकाशित होता है। यानी कि बाद में अब ये 40 50 साल ज्ञान लेने के बाद वो अपने को भगवान ही कहता है। भगवान कह रहे हैं ना वो मैं ही हूं सनातन बीज। गीता में कहता हूं मैं ही हूं सनातन बीज। एक बात बताइए। अब नाम क्या अकेला सनत कुमार है? क्या अकेला महादेव है? राम कहो, हनुमान कहो, महादेव कहो, शिव कहो, शंकर कहो, नाम तो उसके हजारों हैं। नहीं नहीं

00:59:12:04 मेरा जो प्रश्न है वह अलग है। मैं यह कह रहा हूं कि क्या कहते हैं ये जो उन्होंने जो मुरली के नाम से यह बताना चालू किया कि भाई जो मुरली के नाम मुरली जो आ रही है वो सही है। लेखराज जी अच्छा लेखराज जी की मृत्यु हो चुकी है क्या? अभी 76 से पहले मतलब 76 में 1969 में 1969 में हो गई ना? 18 जनवरी 1969 को तो इन्होंने जो ज्ञान लिया था लेखराज से डायरेक्ट नहीं लिया था। उनकी वो जो वहां पर सेविका थी जो उनका जन्मांतर थी। हां तो यहां डायरेक्ट ज्ञान कोई नहीं लेता है। मधुबन में जो बहने बैठी है उन्हीं से लिया जाता है। निमित बहनों से लिया जाता है। समझ गए समझ गए समझ गए समझ गए। तो कुल मिलाकर के इन्होंने ये कहा 76 में कि जो लेखराज जी ने जो मुरली दी है शिव बाबा के द्वारा देखो उन्होंने मैं बता रहा हूं। भाई साहब मैं बता रहा हूं। सुन लीजिए। दो बातें उन्होंने कही दो क्लेम किए। एक तो शिव बाबा ने मुरली नहीं सुनाई। वह मुरली जो है जो है वह सेवक राम के रूप में मैंने ही सुनाई थी या भेद ये वाला बाद में खुला होगा कि इन्होंने ही सुनाई थी। हो सकता है। उन्होंने कहा ना हो। ये ये बात हम कह रहे हैं अपनी तरफ से। ये बात आपने अपनी खोज की है। उससे कह रहे हैं आप। जी जी। अच्छा ये ये उन्होंने नहीं कहा। बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने अपने

01:00:27:08 को भगवान कभी नहीं कहा। ये तो हम कह रहे हैं कि वो भगवान है। वो सन कुमार है। हमारे वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने अपने आप को भगवान कभी क्लेम नहीं किया। बिल्कुल कभी नहीं किया। ये तो हम अपनी रिसर्च से कह रहे हैं। आपकी रिसर्च है। तो वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने अपनी पहचान स्वयं के द्वारा क्या बताई थी? कि स्वम की पहचान यह बताई कि जो यह मुरली है इस मुरली का सही अर्थ नहीं निकला है। वो मंथन करके उस मंथन करके उसमें से भगवान की पहचान बता देते हैं। तो उन्होंने उन्होंने अपनी कुछ किसी प्रकार की कोई दिव्यता नहीं बताई थी। वो कुछ नहीं बताया। बिल्कुल एक साधारण पूर्ण जैसे गीता में बताया ना कि जड़मति साधारण आपको शन कुमार भी नहीं कहा था। कुछ नहीं कहा। यह तो हम अपनी रिसर्च बता रहे हैं। वह तो एक जस्ट मतलब आपने तीन चीजें बताई है। एक लेखराज जी की मान्यता क्या है? और फिर उसके बाद वीरेंद्र देव दीक्षित जी की मान्यता क्या है? और उसके बाद थोड़ी सी इत आपकी क्या मान्यता है? ये आप आप बता रहे हैं। जो कुछ मैं बता रहा हूं वो अपने अपना अपना आधार बता रहा हूं। जो मैंने अभी 12 साल इनको पढ़ा है, समझा है, गीता ज्ञान भी लिया। एक चीज और है कि उन्होंने अपनी पहचान कुछ और बताई है और आप मानते कुछ और

01:01:42:14 हो। इतने अंश में आप वीरेंद्र दीक्षित जी की बात के इतर जाते हो। बिल्कुल एक एक बात मैंने उनकी समझी सुनी पूरा ज्ञान समझा। बहुत बढ़िया। अब आता है एक पहला पॉइंट जो थोड़ा सा एक एक प्रश्न है क्योंकि वो क्या कहते हैं? विरुद्ध विरुद्ध में समझ लीजिए। पहला पॉइंट पहला प्रश्न है कि लेखराज जी की मुरली का ज्ञान सही से दे रहे हैं वीरेंद्र देव दीक्षित जी ठीक है तो अब देखो एक मिनट प्रश्न तो किया ही नहीं प्रश्न तो किया ही नहीं भाई साहब प्रश्न तो करने दीजिए तो प्रश्न ये है कि लेखराज जी की मुरली का सही अर्थ बता रहे हैं ये और उनका कहना है कि वो मुरली तो सही बता रहे हैं जो ईश्वर से ली गई है मतलब जो ईश्वर की बात है ईश्वर की बात क्या अच्छा इस एक मिनट यहां पे एक पॉइंट है आपका मानना है कि सेवक राम जी के रूप में उन्होंने ही ज्ञान दिया था लेखराज जी को ये आपका मानना है मगर लेखराज जी ने इस बारे में क्या कहा कि वो जो मुरली लिखवाते हैं वो कौन लिखवा रहा है इस बारे में क्या कहा वीरेंद्र जी वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने ये बताया कि शिव है शिव भगवान है मैं भगवान नहीं हूं शिव भगवान है वो उसमें मेरे में

01:02:57:15 भी मतलब वो राम और कृष्ण वाली आत्माओं में उन्होंने कैसे क्लेरिफाई किया बड़े चतुराई से क्लेरिफाई किया इस बात को बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने बड़ी चतुराई से क्लियर किया दो बार बोल रहे आप मेन बात बोलिए ना कि वो क्या मानते थे शिव जी ने ज्ञान दिया था लेखराज जी को कि नहीं दिया था वो ये मानते थे कि इसमें जो प्रवेश करके वो लिखवाते हैं ये लिखता है लेकिन समझ नहीं पा रहा है। अच्छा तो यह वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने क्लेम किया था कि क्या कहते हैं मतलब यह वो मानते थे कि शिव जी ने ही उनके अंदर घुस के ज्ञान दिया है तो अभी तो आप कह रहे थे कि वो नहीं मानते थे प्रवेश तुम अब आप कह रहे मानते थे तुम अरे भाई जी ये कह रहे हैं कि मानना एक अलग बात है लेकिन जो प्रैक्टिकल बात है यह कोई प्रवेश नहीं हम वो जो मैं पूछ रहा हूं उन्होंने कहा क्या था वो तो उन्होंने सीधी सी बात कही उन्होंने एक सीधी सी बात कही कि इसको मुरली का ना तो अर्थ समझ में आया लेकिन जो बच्चा बुद्धि है लिखता है और सुना देता है। मैं इस बारे में क्या कहा था कि शिवजी ने ज्ञान दिया है कि नहीं दिया है? घुस के दिया है कि बाहर से दिया है? शिवजी का अर्थ आप भी समझिए। पहले शिवजी को ही समझना पड़ेगा। बाबा जी उन्होंने सेंटेंस

01:04:12:26 कहा है। भाई साहब ऐसा है ना कि अभी अगर मैं अर्थ समझने लगूंगा तो जो हमारा मेन टॉपिक है वो रह जाएगा। उन्होंने कहा क्या था बस ये बता दीजिए। वो ये मान उन्होंने कहा उन्होंने एक मिनट भाई साहब एक मिनट उन्होंने उन्होंने उन्होंने यह कहा था कि शिवजी ने उनके अंदर प्रवेश करके ज्ञान दिया है या उन्होंने यह कहा था कि शिवजी वहां पर आते हैं और लिखवाते हैं। उन्होंने कहा था उन्होंने उन्होंने ये कहा था कि शिव उसमें प्रवेश करता है। ज्ञान देता है। लेकिन ये समझ नहीं पा रहा है कि शिव प्रवेश करके ज्ञान दे रहा है। ये शिव है कौन? वो समझ नहीं पाया। मतलब उन्होंने यह कहा था ना कि शिवजी प्रवेश करते हैं लेखराज जी के अंदर। आप यह बात उनकी डिकोड आपने उनकी बात की है। आपने उनकी ये बात डिकोड कर ली है। कहा तो लेकिन उस बात का अर्थ दूसरा है। मैं मान रहा हूं। आपने उनकी बात को डिकोड कर लिया है। उनके इशारों को समझ लिया है। क्यों? मैंने बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के इशारे को समझ लिया कि बाबा क्या बात समझना चाहता है। मैं उस बात मैं मैं आपकी चीजों को क्लेम नहीं कर रहा हूं। मैं अभी उन्होंने कहा क्या था वो पूछ रहा हूं। तो उन्होंने सी बात कही। उन्होंने सीधा सा क्लेम किया कि यह

01:05:27:27 जो ज्ञान कहां से आ रहा है यह समझ ही नहीं पा रहा है। अरे भाई उन्होंने यह माना। उन्होंने ये कहा ना अपनी वाणी के द्वारा यह कहा ना कि शिवजी प्रवेश करते हैं और मुरली लिखता है मगर वो मुरली को समझ नहीं पा रहा है। यही ना जी हां हां हां ठीक है। अब अब आगे चलते हैं। अब आ जाते हैं वहां पर जब ये मुरली का सही अर्थ बता रहे हैं। वीरेंद्र देव दीक्षित अब ये ये नहीं कह रहे कि मैं जो है भगवान हूं। ये नहीं कह रहे ना ही ये कह रहे हैं कि भगवान मेरे पास आते हैं। मेरे अंदर प्रवेश करते हैं और मैं लिखवाता हूं। है ना? जी जी। अच्छा अच्छा ये शुरू करने से पहले एक छोटा सा उत्तर और मतलब एक जानकारी और दे दीजिए। इस समय वीरेंद्र देव दीक्षित जी मतलब हैं शिव जी आपके हिसाब से और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के हिसाब से दोनों में से क्या बात है मतलब अभी है राइट नाउ पृथ्वी पर इस समय आध्यात्मिक ईश्वरी विश्वविद्यालय कह रहा है शरीर छोड़ गए शरीर छोड़ गए अच्छा तो वो जो वो शरीर का अंत कैसे हुआ ये भी तो बता रहा होगा अब पूरी तो बात सुनो हां अब वो आध्या आध्यात्मिक हिशोरी विश्वविद्यालय कह रहा है कि वो शरीर छोड़ गए। हां।

01:06:42:28 लेकिन इस बात को मैं और मेरे पास कम से कम 100 150 ऐसे ₹1 के नहीं मानते अलग है। ईश्वरीय विश्वविद्यालय क्या कह रहा है वो बता दो आप। अभी उनकी भी दो मत है। कोई मत एक मत नहीं है। एक मत नहीं है। आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय। अच्छा दो मत। कोई प्रमाण नहीं कोई प्रमाण प्रूफ नहीं है। कोई डेथ सर्टिफिकेट नहीं है। मत क्या है भाई साहब? मत क्या है? कैसे मृत्यु हुई? वो तो पता नहीं क्या-क्या कह रहे हैं लेकिन अभी फाइनल नहीं। डेथ सर्टिफिकेट तो आवे पहले जो दो मत है वो दोनों मान रहे हैं। मृत्यु हो गई। हां। नहीं एक मान रहा है एक मना कर रहा है। एक मना कर रहा है। आप क्या कर रहे हो? आपका आप 200 लोगों का क्या कहना है? हमारे लिए हमारे लिए तो वो महाकाल है। वो कभी नहीं मर सकता। जब तक युग परिवर्तन नहीं शरीर नहीं बन सकता या फिर वो परमात्मा जो शरीर शरीर मतलब शरीर धारण करता है महाकाल का मतलब क्या होता है महाकाल का मतलब होता है काल तो शरीर को ही खाता है ना हर जन्म में तो एक तरीके से वीरेंद्र देव दीक्षित जी कहीं पर है मगर अभी वो समाज के समक्ष नहीं है ऐसा है कहीं ना कहीं जहां भी है कहीं ना कहीं है वो शरीर नहीं छोड़ सकते अभी अच्छा ये आपकी मान्यता है वो शरीर में ही है और अभी शरीर

01:07:58:04 छोड़ नहीं सकते जैसे सेवक तो नहीं तो आप एक तरफ कह रहे हैं कि वो कभी वो नहीं हो सकता है। मगर वहां पर सेवक राम जी का शरीर छोड़ना तो मान रहे हैं आप। वहां छोड़ा है। लेकिन अब जो कल्प का अंत सामने खड़ा हुआ है। कल्प तो फिर महाकाल वाली बात नहीं है। बात ये है कि कल्प का अंत है इसलिए शरीर नहीं छोड़ सकता। महाकाल वाली बात नहीं है। महाकाल तो शरीर छोड़ रहा है ना सेवा ग्राम का। सेवा ग्राम का शरीर तो छोड़ ही रहा है। उस चीज पे आपको समझना पड़ेगा। अभी उस चीज के लिए आप ज्ञान जाके समझिए प्रॉपर्ली। पहले आप कोर्स करिए आप भी अच्छे से पहले जाके समझिए पूरा का पूरा अच्छा ठीक है ठीक अब यहां पे अब आपको तो आता है ना कोर्स आपने तो किया है ना बिल्कुल बहुत अच्छे से किया है समझा जाना तभी आपके सामने बैठा हूं पूरी दुनिया के सामने भी बैठूंगा तो आप आप मुझे इसका जवाब नहीं देंगे जब आप यहां पे उनका शरीर छोड़ना स्वीकार नहीं कर रही ये कह के कि वो महाकाल है तो वहां पे सेवक राम के रूप में शरीर छोड़ना स्वीकार क्यों कर रहे हैं वहां भी तो वो महाकाल ही है हां तो महाकाल का मतलब आप हर जन्म में लगाओगे या अंतिम समय जब एटम फटगी पूरा दुनिया का विनाश थाने उस समय की बात है वो उस समय का के बात ये है कि क्योंकि यहां कल्प का अंत है इसलिए यहां पर महाकाल शरीर छोड़ के नहीं जाएगा वरना महाकाल अन्य जन्मों में अन्य शरीरों में जन्म शरीर छोड़ के जा सकता

01:09:13:06 है ना जी ये बात पहले भी क्लियर हो गई है कि प्रकृति के नियम कानून कायदे नहीं छोड़ता जो गायन है वो अब कल के अंत के समय का इस अंतिम समय का है ठीक है भाई साहब मैं क्लियर हो गया अब दूसरा प्रश्न आता है अच्छा आपके हिसाब से वो कहीं पे हैं जो समाज के समक्ष प्रकट नहीं है। अभी समय आने पर वो आ जाएंगे। एक क्लेम यह कह रहे हैं कि वो शरीर छोड़ गए हैं। तो जाहिर सी बात है वो ये कह रहे होंगे कि अब दूसरा शरीर आने वाला है या आ चुका होगा वो बता नहीं रहे होंगे। ये क्या कहना है? जो लोग जो लोग ये कह रहे हैं कि शरीर छोड़ गए। उन लोगों का इस बारे में क्या कहना है कि वो जन्म ले चुका है। दूसरा शरीर आ चुका है या नहीं आया है। क्या है? उनके उनके अनुसार 2022 में शरीर छोड़ गया और तकरीबन तीन साल का हो गया होगा। फिर अच्छा तो उन्होंने मान लिया ना कि आ चुका है वो। हां तो कुछ लोग मान रहे हैं। कुछ लोग मान रहे हैं कुछ मना कर रहे हैं। अच्छा तो और मैं भी मना करने वाला हूं। मैं भी दिल्ली में से हूं कि नहीं छोड़ जो लोग जो लोग ये मान रहे हैं कि आ चुका है तो उन लोगों ने ये बताया कि कहां पे आ चुका है। नहीं कोई प्रूफ नहीं है। मृत्यु का सबूत उनके पास नहीं। जन्म का नहीं कुछ भी नहीं है। साहब अफवाएं हैं। ओके ओके ओके ठीक है। अब क्लियर हो गया। अब अब आते हैं वो जो अह जो अह एक अह तार्किक प्रश्न था वह यह था

01:10:28:19 कि जब लेखराज की दी गई लेखराज जी के द्वारा दी गई जो मुरलियां हैं वो उनका सही अर्थ बता रहे हैं कौन वीरेंद्र देव दीक्षित जी दीक्षित जिसके कारण उनको कपिल मुनि कहा जाता है जिसके कारण सांख्य कर रहा हूं आप मुझे बीच में काट देते मैं प्रश्न पूछ रहा हूं अभी पूरा तो होने दो लेकिन प्रश्न का उत्तर तो जो ज्ञान लिया उसके अनुसार देना पड़ेगा। तो आप जब मेरा प्रश्न सुन लो तब देना ना। हम प्रश्न बताओ पूरा। हां लेखराज जी के द्वारा दी गई जो मुरलियां हैं उनको डिकोड कर रहे हैं ये और इनका कहना है कि लेखराज जी ने मुरलियां तो ईश्वर से ली हुई दी है। मगर जी। उनका अर्थ सही से नहीं किया। वो मैं कर रहा हूं। ठीक है। जी। और उनका ये भी कहना है कि मैं कोई दिव्य आत्मा नहीं हूं। जी साधारण पुरुष हूं मगर मैं सही ज्ञान दे रहा हूं। ठीक है। अब यहां ये दिक्कत आती है वीरेंद्र दीक्षित जी के द्वारा कहे गए कथन में कि क्या उन्हें सारी मुरलियां रटी हुई थी?

01:11:36:16 मुरलियों के लिए मुरलियों के लिए उनके पास स्त्रोत क्या है? स्त्रोत तो ले रहे हैं उन्हीं को किनको? लेखराज जी बिल्कुल बिल्कुल वो आधार यानी कि मुरली में मिलावट नहीं है ये वो मानते थे जी वेदव्यास वेद वाणी जो ब्रह्मा के मुख से निकली उसी का क्लेरिफिकेशन करते थे और कोई मिलावट नहीं करते थे उस बात की नहीं नहीं मैं वो नहीं कह रहा मैं ये कह रहा हूं कि अगर उनको ये वीरेंद्र दीक्षित जी को ब्रह ये लेखराज जी की मुरली पर विश्वास है तो उसके अर्थ पर विश्वास ना होना सिद्ध नहीं होता और अगर विश्वास नहीं है अर्थ पर तो उनकी मुरली पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता। समझ रहे? जैसे मैं अगर एक बात भी गलत बोल सकता हूं तो मेरी किसी भी बात पर डाउट किया जा सकता है। फिर हम ये नहीं कह सकते ये जो है ईश्वर के द्वारा कहा गया वचन है। समझ रहे हैं? जैसे मैं कह रहा हूं कि मेरे पास ईश्वर आते हैं और वो लिखवाते हैं और आप मान रहे हो। मगर फिर आप कह रहे हो कि मैं दूसरी बात जो बोल रहा हूं। मैं दूसरी बात जो बोल रहा हूं वो मैं गलत बोल रहा हूं। अगर मैं गलत बोल सकता हूं तो मैं ये भी गलत बोल सकता हूं कि जो मुरली आ रही है वो ईश्वर ने दी है या फिर ये भी कर सकता हूं कि उसमें कुछ मुरलियां ईश्वर की दे दूं कुछ अपने मन की दे दूं तो या तो हमें मानना पड़ेगा लेखराज जी को

01:12:51:20 तो पूरा अन्यथा अधूरा तो इस संबंध में फिर कैसे माने क्या करें इस संबंध में इतना सा सार निकालो अब इस बात का कि ब्रह्मा के मुख से जो मुरली निकली है उस मुरली में भगवान का नाम रूप देश काल लिखा हुआ उस मुरली के अंदर जो कोई नहीं समझ पाया जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने निकाल के दे दिया। आप समझे नहीं मेरा प्रश्न क्या है? अगर उनको उनकी योग्यता पे या फिर मंसूबों पर डाउट है तो वो मुरली भी तो झूठी दे सकते हैं। अगर वो अर्थ अगर वो अर्थ गलत दे सकते हैं तो मुरली भी तो झूठी दे सकते हैं। झूठ लिख दो इसमें। एक बात एक बात पहले आप सुनो। तो मुरली झूठी है ना उसका क्लेरिफिकेशन झूठा है। दोनों चीजें सत्य है। लेखराज जी ने जो क्लेरिफिकेशन किया वो झूठा था ना। गलत था ना जो दादा लेखराज ने उन्होंने क्लेरिफिकेशन तो किया ही नहीं उन्होंने तो जो पढ़ी जो पढ़ के पढ़ के सुना दी उन बच्चों को तो बच्चे जो क्लेरिफिकेशन कर रहे हैं वो गलत है लेखराज गलत नहीं कर रहे बच्चे भी गलत नहीं कर रहे ना वो गलत कर रहे लेकिन उस मुरली का जो तंत्र निकलना चाहिए भगवान की पहचान वो नहीं हो पा रही जो आपकी जो स्क्रीन है वो फिर से पॉज हो गई है नेट खत्म हो गया शायद डलवा लीजिए नेट नेट पैक

01:14:06:26 डलवा दीजिए हम डलवा दे इधर से अभी क्या करें अभी एक मिनट दूसरे दोनों फोन का खत्म हो गया शायद ना हां तो आप नंबर बता दीजिए तो आशा करते हैं आप लोग सुन रहे होंगे क्योंकि यह जो हिस्ट्री है ना यह समझना बहुत आवश्यक है आगे यह जो संस्थाएं हैं इनसे बात करने के लिए और यह सब चीजें समझना आवश्यक था। आप लोग भी देखें किस तरीके से क्या-क्या दावे किए जा रहे हैं। क्या-क्या कहा जा रहा है। और अगर 5 मिनट में भाई साहब वापस आ जाते हैं तो हम फिर आज ही कंटिन्यू करेंगे। नहीं तो फिर हम दोबारा कंटिन्यू कर लेंगे। जब अगली बार ये भाई साहब आएंगे।

⬜ Not used yet · 01:14:52:21 – 01:31:04:00 (16:11)

01:14:52:21 हम लोग पांच मिनट वेट करते हैं। तब तक किसी का कोई प्रश्न है तो वह पूछ सकता है। क्या कमेंट्स कोई प्रश्न किसी का हो तो पूछे।

01:15:42:26 दोनों फोन का रिचार्ज खत्म हो गया। यह आपका प्रश्न है। देखते हैं क्या होता है। काफ आपका तो नाम भी जय श्री राम। शास्त्रवाद जी कैसी लगी आपकी आज की चर्चा? अभी आत्मा अविनाशी है तो नए लोग मा नए लोग मात्रा में पैदा क्यों हो रहे हैं?

01:16:18:04 इतनी मात्रा में पैदा क्यों हो रहे हैं? क्या जरूरत थी लेखराज की मुरली पढ़ने की? वो तो अभी भाई साहब अभी बताएंगे ना। बहुत बहुत ज्यादा उसमें गुत्तम गुप्त है। जन्मांतर भेद से भी लोग जो है आ जाते हैं और कब जो है बॉडी बदल जाती है वो पता नहीं चलता है। पंडित जी आप ज्वाइन कर लीजिए। थोड़ा मैं समझ रहे होंगे ना काफी लंबा समय हो गया मुरली समझते समझते तो हम चारप मिनट हो चुके हैं। भाई साहब का नेट पैक खत्म हो गया तो हमारी चर्चा अभी अधूरी हो सकता है हो

01:17:33:06 जाए। ऑपरेटर जी आप जो है पंडित सोकी जी आ गए। चलिए कुछ और कोई सत्संग कर लेते हैं तब तक अभी तक तो कुछ ऐसा ही रहा है पूरा एक घंटा 17 मिनट मेरे लिए हां जी पंडित जी जय श्री राम

01:18:06:12 हेलो कहां गए पंडित जी जय श्री राम आवाज आ रही है अरे मेरा इशू है अभी जय श्री राम जय श्री राम से आया हूं। तो पंडित जी एक मूवी आई थी अगर करना है तो करना है कि नहीं? कन्वर्सेशन बढ़िया चल रही थी इंटरेस्टिंग। अब बोलिए एक मूवी आई थी वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई। जी। उसमें एक डायलॉग था।

01:18:42:18 [हंसी] वो डायलॉग पता है क्या था? मुझे लग रहा है मुझे लग रहा है एक नाम बताइए ये कहा ये कहा जाता है जो कि वो भाई कुछ त्याग इत्यादि की बात होती है वहां पे कि भाई तुम इतना त्याग क्यों कर लेते हो तुम इतना क्यों अपने आप को रगड़वा रहे हो तुम अपने आप पे क्यों इतना अत्याचार कर रहे हो ऐसी एक बात आती है तो जो फिल्म का नायक था ना वो कहता है [हंसी] सबको ना सबको सुल्तान मिर्जा ना बनना पड़े इसलिए किसी ना किसी को तो बनना ही पड़ेगा। [हंसी] हां हां बिल्कुल लेकिन ठीक है वो नहीं जरूरी था भी था ये जो चल रहा था ना मतलब वो एक्चुअली मतलब हमने अभी क्या व्यवस्थित रूप से व्यवस्थित रूप से चीजों को समझाओ सबसे बड़ी बात है कि अभी तीसरा पक्ष तैयार है अभी वीरेंद्र देव दीक्षित जी दूसरा पक्ष अभी ब्रह्मा कुमारी के अगेंस्ट उसके बाद ब्रह्मा वीरेंद्र देव दीक्षित जी का जो वो मामला है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वो वो वो उनका ही है। उससे भी फूट करके कुछ लोग उसमें भी आपस में क्लैश और अभी एक

01:19:57:22 चौथा पक्ष मान लीजिए चौथा पक्ष भी तैयार है जो कह रहा है कि जो उन्होंने कहा था क्या कहते हैं इन्होंने ये वीरेंद्र दीक्षित जी ने कहा था जिन पे अभी मतलब मैंने कुछ कटिंग्स देखी अखबार की उनप काफी सारे चार्जेस थे और जेल वगैरह का भी कुछ सीन है। तो क्या कहते हैं वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने कहा था वह भी मैं समझाऊ समझ रहे हैं वीरेंद्र देव दीक्षित जी कह रहे हैं कि लेखराज जी ने जो कहा था वो भी वो समझ रहे है लेखराज जी नहीं समझ पाए और वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने कहा है वो वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने कोड वर्ड में कहा है वो मैं समझ रहा हूं उन्होंने किसी को नहीं समझाया अभी तक ये भी बात हां तो ये अपने आप में एक उपनिषद हो गया ना अरे भैया [हंसी] मतलब आप कितनी महान आत्माएं कि अद्वैत वेदांत जैसे जब मर्म को आप नहीं समझ पाए आप ये समझ गए [हंसी] मैं बीचबीच में तारे रमी का बच्चा बन गया था वो जब x² और y स्क्वायर नहीं x² y स्क्वायर वगैरह उसको मैथमेटिक्स की प्रॉब्लम्स अंतरिक्ष में नहीं दिखाई देती थी प्लेन उड़ाते हुए जब मैथ उसको पढ़ाई जाती थी तो वो उड़ता था आसमान में लेकिन मैं सही बताऊं तो अगर जो शास्त्रों का अध्ययन करता है ना

01:21:12:28 वो समझ जाएगा क्योंकि क्योंकि आप देखेंगे तो उसमें भी इंसेप्शन में इंसेप्शन होता है। ठीक है? नारद जी और शरत कुमार का संवाद हो रहा है कि भृगु जी कुछ ऋषियों को बता रहे हैं जो नारद जी बता रहे हैं जो बाद में ब्रह्मा जी बताते हैं किसी और को तो [हंसी] ये हो रहा है। मगर बॉडी कब बदल गई? बॉडी अचानक से कब बदल गई पता नहीं चला। और वो वही माता जी तो वो ये थोड़ा सा शॉकिंग हो जाता है। आश्चर्यचकित कर देने वाला हो जाता है। खैर कोई बात पूछिएगा उनसे हां खैर कोई बात नहीं अभी काफी हां कन्वर्सेशन बढ़िया जा रही थी मतलब कांसेप्ट बहुत सारे हम लोगों को समझ में आ रहा है बहुत सारी ऐसी चीजें है जो नई पता जानने को मिली है ना हां क्योंकि वो डिस्प्यूट है ना मामला हम किसी पर्टिकुलर एक चीज से सामना नहीं कर रहे हैं यहां पे ब्रह्मा कुमारी की मान्यता से भी सामना है वीरेंद्र देव दीक्षित जी की मान्यता से भी सामना है वीरेंद्र देव दीक्षित जी के जो दो पार्ट है उसमें जो दूसरा पार्ट नया पार्ट है उससे भी सामना है और फिर फिर ये जो तीसरा पार्ट है इससे भी सामना है। तो सामना हमारा तीन चार तरह

01:22:28:02 की मेंटालिटी से है यहां पर। तो इसलिए समझना इस बुद्धि को समझना बहुत वो था जरूरी और मुझे लगता है कि हमने जो प्रश्न किए ना ठीक तरीके से तो एक क्रमबद्धता से हम इन चीजों को समझ पाए। वरना वो इस मूड में नहीं थे। भाई साहब जो आए थे वो तो अपना वो दैविक पक्षी बताने वाले थे। मगर उनको उनकी उनको फिर जब ये समझ में आया ना कि मैं मैं क्या समझना चाहता हूं और क्या समझ रहा हूं तब उन्होंने समझाया भी उन्होंने इस बारे में ठीक किया अच्छे से फिर समझाया रहा हूं मैं जी जी मेरा आदर्श शो होगा कैसा लग रहा है आपको पहले ये बताइए वाला अच्छा है क्या जी बहुत अच्छा है ये जो याक के जो ऊन होते हैं ना या केसे बनाए। अच्छा बहुत बढ़िया बहुत अच्छे लग रहे हैं आप। बहुत एकदम डशिंग और प्रभावशा

01:23:36:00 है। तो मुझे लगता है नहीं वो आएंगे। हम लोग फिर उनको उनको अगर इस इसको करवाना है अगर उनसे पूछिए अगर रिचार्ज वगैरह करवाना हो तो आप एक काम थोड़ा सा यहां पे होस्ट करिए। मैं उनसे एक बार बात करके आता हूं। है ना? आप बात कर लीजिए। आप तो अकेले छोड़ के चले गए मुझे। प्रश्न उत्तरी ही करते हैं फिर। मैं एक काम करता हूं। मैं जग्गी वास वासुदेव जी बन जाता हूं और कोई कैसा भी प्रश्न करे उत्तर देने की कोशिश करूंगा।

01:24:24:00 चर्चा में वह बोल रहा था कि आप बहुत पवित्र आत्मा हो। बिल्कुल सही बात है। जैसे उनका झूठ पकड़ा जाए वैसे या दुष्ट आत्मा हो जाएंगे उनके लिए। चलिए वो तो देखते हैं। समय बताएगा कि क्या है झूठ क्या सच है वह तो हम अभी डिसाइड नहीं कर सकते ना। आपका प्रश्न दीजिए। क्या प्रश्न है? आपको ब्रह्मा बनना है। अगर आपको ब्रह्मा बनना है तो हां बिल्कुल ब्रह्मा भी एक पद भी है। भगवान से मांगिए। ऐसे पुरंदर नाम के जो व्यक्ति थे उन्होंने इंद्र की पद भी मान ली। ऐसे मांग ली वैसे इंद्र बन गए। इस कल्प के तो वैसे आप ही प्रभा बन सकते हैं अनेकों कल्पों के

01:25:16:00 राम राम गोयल जी आपका प्रश्न क्या है संदेश जी आपने बताया नहीं क्षमा करिएगा अगर मैं किसी का नाम गलत पढ़ दूं तो आत्मा विनाशी है तो नहीं आत्मा वो भी इतनी सारी मृत्यु लोक में मरने वाले काम पैदा होने वाले ज्यादा कैसे तो मृत्यु लोक यह आवश्यक नहीं है कि केवल एक इसी यूनिवर्स का हो ऐसे अनंत कोटि ब्रह्मांड हैं जिसके नायक है भगवान। ठीक है? और उसमें जीवन और मृत्यु का जो क्रम है वह चलता रहता है। तो यह आप डिसाइड नहीं कर पाएंगे डेथ्स इक्वल टू नंबर ऑफ बर्ड्स एटलीस्ट यहां पे है। क्योंकि हर लोक में जीवन है। जीव है और वो अलग-अलग बायोलॉजिकल और फिजिक्स के रूल्स के हिसाब से जीते हैं। तो यह आवश्यक ये आवश्यक नहीं है कि मृत्यु लोक में जो मर रहे हैं वो

01:26:31:01 वहां पर जी रहे हैं। पहली बात। दूसरी बात यह है जो आत्मा कभी नहीं मरती और तो ये नई आत्मा नहीं ये वही ब्रह्म के अंश हैं जो अनगिनत स्वरूप में है क्योंकि माया अनंत है तो वैसे ही इन आत्माओं ब्रह्म के स्वरूप भी अनंत हैं। उस जैसे वैसे उसके नाम भी अनंत है। है ना? जैसे भगवान का एक नाम है ना जो हम यूजली जपते हैं अचुत अनंत गोविंद। तो उसमें जो यह नाम अनंत है वह यह अनंत यही भाव दिखाता है कि ब्रह्म के जितने भी क्योंकि ब्रह्म जो है जगत बनता भी है और बनाता भी है तो जगत भी अनंत माया के रूप में रहता है और स्वयं तो है ही अनंत ठीक है आत्मा अविनाशी है तो नई आत्मा वो भी इतनी सारी मृत्यु लोक में मरने वाले काम उत्तर दे दिया इसका ठीक है महाराज जी एक प्रश्न था कैसा हम्म चलिए ठीक है मुझे लगता है वो आ नहीं रहे हैं और अ इस चर्चा को कंटिन्यू करेंगे अगर वो इच्छुक होंगे उनकी रुचि होगी आगे चीजों को बताने के लिए ठीक है तो आज के लिए इतना ही पर्याप्त है एक अच्छा साधक एक एक अच्छा गृहस्थ में कैसे बने

01:27:46:12 वर्ण आश्रम मर्यादा सबसे पहला फाउंडेशन है ठीक है वर्ण आश्रम को फॉलो करके ही आप एक अच्छे गृहस्थ एक अच्छे सन्यासी आदि सब बन सकते हैं या आपके आने वाली जनरेशन जो बन सकती है तो आश्रम भगवान की सवा घंटे की भक्ति बताई है गुरुदेव ने सवा घंटे का भजन का बल जरूर होना चाहिए अगर आप एक सनातनी बनना चाहते हैं हिंदू बनना चाहते हैं साधक बनना चाहते हैं कल्याण प्राप्त करना चाहते हैं स्वयं का और राष्ट्र की चिंता है परिवार की चिंता है परिवार में सुख समृद्ध वृद्धि की भी आवश्यकता है। वेलनेस की आवश्यकता है। हर चीज का निवारण एक ही है कि आपकी जो नित्य वंदना है भगवान के प्रति वो कम से कम सवा घंटे की क्रॉस हो जाए। इतना हो जाए फिर आगे तो फिर वो स्काई इज योर लिमिट। मगर सवा घंटे की भक्ति बहुत आवश्यक है। मिनिमम सवा घंटे तो बिल्कुल होना चाहिए। अब वो आप डिसाइड कर लीजिए। आपको सुबह, दोपहर, शाम कैसे-कैसे करना है। है ना? हम और भक्ति में आप भगवान के नाम का जप कर सकते हैं। अगर अगर अगर अगर आप उपनीत है तो संध्या वंदन करें। है ना? संध्या वंदन करते हुए जो है मंत्र जाप करें। गुरु गुरु से प्राप्त जो मंत्र है वो

01:29:01:15 जाप करें और नहीं तो नाम जप तो है ही। यदि अनाधिकारी हैं मंत्र इत्यादि में वैदिक मंत्रों में या गुरु से दीक्षा नहीं हो पाई है तो भगवान के नाम लीजिए। राम शिव राम राम राम राम शिव शिव शिव शिव डी के मुरली कैरी वाइल्ड माइंड बेंडिंग स्टोरी यू हैव गॉट द टू लेट देम फ्लूड इन योर ब्रेन ठीक है किसी दिन आप हमसे WhatsApp पर आप संपर्क करें इस विषय में ठीक है तो अभी वो भाई साहब अभी नहीं आ रहे हैं और हम इस चर्चा को यहीं पर विराम दे रहे हैं और जब हमारा वो पार्ट आया था ना तब तक काफी कुछ जानते जानते समय हो गया फिर भी इसमें काफी रोचक चीजें आपको जानने को मिली होंगी इनफेटिव वीडियो है कि आप समझ पाए हैं कि जो बीके का और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का और जो क्या कहते हैं अपने जो वीरेंद्र देव दीक्षित और लेखराज इनके बीच के क्लैश का भी जो है सारी जानकारी आपको मिली और फिर अगर वो भाई साहब आते हैं तो फिर आगे जो है इनके जो दार्शनिक विचार है या जो इनके क्लेम्स हैं उन पर हम लोग फिर बात करेंगे। कि वह कैसे किस प्रकार से अपनी बातों को सिद्ध

01:30:16:24 करते हैं। यह जो भाई साहब है इन्होंने भी ओपन चैलेंज वैसे शायद मेरे ख्याल से दे रखा है। संभवत इन इन चीजों को लेकर के जो दावे कर रहे हैं बिल्कुल ये सिद्ध कर सकते हैं। तो फिर जरूर है मिलेंगे इनसे भी। बाकी आप लोग सब भक्ति करते रह और आप जब भक्ति करते हैं भगवान की तो उसमें अपनी भावना क्या रखेंगे कि स्वयं का भी कल्याण कर कल्याण हो और राष्ट्र धर्म का भी कल्याण हो है ना चलिए सभी को जय श्री राम जय श्री राम जय श्री कृष्ण हर हर महादेव

01:31:02:22 [संगीत]

Plans for this video (0)

No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.

🤖 Ask AI for suggestions

AI reads the remaining (unused) parts of this video and gives ideas for new videos: from where to where, hook, and what to remove from the middle. Suggestions follow the RULES and appear here as "AI Suggestion". You can review, edit or approve them.

Live: Required tasks are not set on the Rules page yet.

  • ⬜
    Hindi SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).

B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 1:31:06 · 04 Jan 2026

Sanjay Parashar Discussion | आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का दावा | Brahma Kumaris Connection?

% not set
☁️ Drive Not in Drive yet

Notes

Description

(empty)

History

No changes yet.

✂️ Clip Cutter

⌨️ Keyboard shortcuts

Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop

▶

Start

End

🔍 zoom
Already used Plan clips
⚠️ () of this clip is already used in another video (green part). Fine if on purpose, otherwise change the times.
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)

Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".

Clips () · Total

Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.

Hook, full note for editor, status