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00:00:03:20 जय श्री राम संजय जी जय श्री राम शंशु जी बहुत-बहुत नमस्कार भाई को जय श्री राम और संजय जी थोड़ा सा आप अपना परिचय मतलब जो आध्यात्मिक बैकग्राउंड है ना आपका जो जो भी कुछ है जो चीजें हैं छोटा सा एक श में थोड़ा संक्षिप्त सा वह दर्शकों को थोड़ा सा दे दीजिए सर बेसिकली मैं आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय

00:00:36:04 और आम दुनिया जिसको ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के नाम से जानती है। अच्छा जो आपने मेरे बारे में सुना या जो पहचान आपको मिली ये पहचान मुझे ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय और आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय के आधार पर मिली। अच्छा बेसिकली ये लोग 12 साल तकरीबन मैंने इनका अध्ययन किया। हम 12 साल के बाद जब निष्कर्ष निकला कि भगवान तो ऐसे ही आते हैं। भगवान भगवान के बारे में भगवान ऐसे ही आते हैं जैसे ये लोग बता रहे हैं। अच्छा भगवान से मिलने की बड़ी तमन्ना थी बचपन से। तो आध्यात्मिकता का शौक था और आध्यात्मिकता का शौक वहां तक लेकर के पहुंचा और 12 साल तकरीबन अध्ययन करने के बाद आज दुनिया के सामने गीता ज्ञान के आधार पर यह बात प्रमाणित सिद्ध हो जाती है कि भगवान कब आते कैसे आते उसका नाम रूप देश काल सब क्लियर हो जाता है

00:01:40:26 छोटा सा हमारा तो संक्षिप्त परिचय है कि परमा परमपिता परमात्मा आकर के जो ज्ञान देते हैं उसकी उस ज्ञान को ही तीसरा नेत्र कहते हैं और वो प्राप्त हुआ हमें उसके आधार पे अब ये भी जान गए कि राम कौन है जिनको जय जय श्री राम बोलते हैं महादेव देव बोलते हैं। तो अपना सनातन धर्म के लिए तो बहुत खुशी की बात है आज कि तकरीबन 12 साल अध्ययन मैंने इनका किया। गीता का अध्ययन किया और उसके बाद आप बहुत अच्छा मिलन है आप चिदंशु जी आपके साथ कि पूरी दुनिया जितने भी भाई आपको जानते हैं पहचानते हैं उन सबको भी समझने को मिलेगा। जी तो इसमें थोड़ा सा आपने हमें ये भी बताया था कि आपका अभी वर्तमान में ब्रह्मा कुमारी संस्था से और जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम से संस्था चल रही उससे थोड़ा सा कुछ विरोध भी है। वो कैसा विरोध है? क्या है? वो मामला सारा सा इतना सा है कि भगवान गीता में लिखते हैं प्रविष्ट

00:02:47:20 और ये प्रवेशम शब्द को जो है गलत तरीके से आइडेंटिफाई कर रहे थे जिस बात पर डिस्प्यूट हुआ और मतलब देखिए बात मुझे थोड़ा सा थोड़ा सा बात बिल्कुल क्लियर समझाऊंगा मैं एक्चुअली एक चीज है ब्रह्मा कुमारी और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में भी एक डिस्प्यूट है और फिर इन दोनों से आपका डिस्प्यूट है तो इसलिए वो डिस्प्यूट समझाते हुए अपना डिस्प्यूट समझाएं जी जी देखो ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शुरू हुआ 1947 से हां जी और आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय शुरू हुआ 1976 से अच्छा वो भी यह दावा करते हैं कि भगवान आया है। वो कहते हैं दादा लेखराज में भगवान आया है। आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय कहता है कि जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित है उसमें शिव आया है। भगवान मतलब शिव को भगवान अलग से कहते हैं। मेरा डिस्प्यूट इनके साथ यह है कि तुम कहते हो वो प्रवेश करता है। मैं कहता हूं वो प्रवेश नहीं करता। वो शाश्वत सत्य है। गीता में लिखा है कि सत्य का कभी नाश्ते विद्यते भावो

00:04:02:21 ना भाव विद्यते सत। सत्ता का कभी विनाश नहीं होता है। सत्य इस दुनिया में सदा कायम है। लेकिन यहां से उनकी और मेरी दोनों की आपस में खटकती है। आपकी ब्रह्मा कुमारी से आपकी वीरेंद्र दीक्षित जी से दोनों से ही खटकती है। अब तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित से नहीं खटकती है। अच्छा मतलब वहां जो वहां बैठे जो वहां बैठे जो वहां बैठकर के ज्ञान को अज्ञान बना रहे हैं ना उनसे खटकती है। बाबा ने तो जो सुनाया बहुत एग्जैक्ट सुनाया ब्रह्मा बाबा ने सुनाया फिर बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने सुनाया 40 साल बहुत अच्छा समझाया मतलब दादा जो लेखराज जी है उनसे भी नहीं खटकता है और जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी से भी नहीं खटकता है जी बिल्कुल भी नहीं वो तो मेरे बाप और दादा ये जो शब्द यूज़ करते हैं ना बाप और दादा तो राम बाप को कहते हैं कृष्ण बच्चे को कहते हैं ऐसा पढ़ाई जब हमने पढ़ी तो उस पढ़ाई में आया तो राम बाप जिसको को दुनिया राम श्री राम जय जय श्री राम बोलते हैं। इस पढ़ाई के अनुसार तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ही श्री राम है। अच्छा वीरेंद्र दीक्षित जी श्री राम जो पढ़ाई यहां पढ़ाई गई है वो पढ़ाई स्पष्ट बोलती है। वो वो एक अलग चीज है।

00:05:18:00 मैं ये पूछ रहा था कि जो वीरेंद्र दीक्षित जी हैं जैसे उन्होंने कहा कि ईश्वर प्रवेश नहीं करता है। ईश्वर तो सदा से है। है ना? यह बात मैं वो नहीं कह रहे। मैं कह रहा हूं। वो तो कहते प्रवेश तुम वो कहते हैं मैं नहीं कह रहा मैं मैं तो इस बात का पक्षधर हूं कि ईश्वर सदा सत्य है वो बीज रूप है रचयता है इतने अंश में आपका विरोध है विदेव दीक्षित जी से बिल्कुल जैसे जैसे सिद्धांशु जी जो सत्य सनातन धर्म है मेरा नाम शिव मेरा नाम शिवश शिवशु जी जी शिवशु जी हमारा टोटल नौ धर्म है हमारी सृष्टि में आज इस दुनिया उसमें से अगर देखा जाए तो एक सनातन धर्म मूर्ति पूजा को मानता है। बाकी सब धर्म मूर्ति पूजा का खंडन करते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] और एक मैं दूसरी बात मैं दूसरी बात पूछ रहा हूं कि वीरेंद्र दीक्षित जी जो है वो जो यह बात कह रहे हैं कि प्रवेश करता है इतनी जो चीज है वो क्या कहते हैं आप नहीं मानते हैं कि है जी बिल्कुल भी नहीं बिल्कुल नहीं भगवान को प्रवेश करने की क्या परिज वो शाश्वत है सदा सत्य है तो वो प्रवेश क्यों करेगा वो दूसरों

00:06:33:03 में प्रवेश करेगा या कोई उसमें प्रवेश करेगा अच्छा एक बात बताओ इनके जो चित्र हैं इनके चार चित्र हैं। नहीं मैं प्रॉब्लम यह है कि जैसे आपके यहां पर मुरली आती है कोई दिव्य वाणी आती है मुरली के रूप में तो वो ऐसा माना जाता है कि लेखराज जी के पास भी आती थी पहले और फिर बाद में वीरेंद्र दीक्षित जी के पास भी आई है ना अब मुझे ये बताओ अब मुझे ये बताओ हां हां जब जब वेदव्यास जी सृष्टि रचने लगे तो वेदव्यास जी बोलते थे और गणेश जी लिखते थे मेरा प्रश्न अलग है मेरा प्रश्न अलग सुनिए सुनिए तो हालांकि ब्रह्मा कुमारीज वाले जो है वो यह बात नहीं मानते कि वीरेंद्र देव दीक्षित के पास भी मुरली आई। ये थोड़ा सा कांसेप्ट मुरली वाला ठीक कर दीजिए कि अ वो क्या कैसे लिखवाते हैं क्या करते हैं वो थोड़ा सा क्लियर कर दीजिए। जी हां वो मैं आपको क्लियर करता हूं। हमारे हमारे भारतीय इतिहास में जब वेदव्यास जी बोलते गए और गणेश जी लिखते आप सुनिएम असल में क्या है हमारा मेन डिस्कशन

00:07:48:04 कुछ और है तो अभी आप फैक्ट बता दीजिए कि ये फैक्ट है उसके सपोर्ट में जो उसके सपोर्ट में उदाहरण सुनिए तो उसके सपोर्ट में उदाहरण या फिर दृष्टांत वगैरह वो तब दीजिए जब मैं समझ समझ ना पाऊं क्योंकि हमारा मेन टॉपिक है नहीं। मेन टॉपिक आगे बढ़ रहा है। इसलिए कह रहा हूं केवल फैक्ट बता दीजिए कि ऐसे होता है। यह दादा लेखराज जी के पास आती थी दिव्य वाणी वो लिखवाते थे। वो कहते थे वो बोलते थे। ऐसे कुछ फैक्ट बता दीजिए। उसके सपोर्टिव जो दृष्टांत है वो या तो तब बताइए जब मैं आपसे समझ ना पाऊं आपकी बात को और या फिर मेन टॉपिक क्योंकि आगे है। अभी इसको बहुत ज्यादा विस्तार में करने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। तो थोड़ा सा ये बता दीजिए फैक्ट क्या है? जी फैक्ट यह है कि यह जो ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय इससे पहले 1936 में ये विद्यालय शुरू हुए हैं। ओरिजिनली जो ओम मंडली के नाम से जाना जाता है। अच्छा तो 1936 में जो आज बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित है इनको उस समय सेवक राम के नाम से जाना जा रहा है जो हमें पढ़ाया गया है वहां पर। असली जो शुरुआत है इन संस्थानों की दोनों ओम मंडली से चले हैं 1936 से 1936 में सेवक राम जी गीता सुनाते

00:09:03:06 थे पढ़ के आपको इस बात का ना पता हो तो ये बात बता दें कि ओरिजिनली जो ओरिजिनल है ओरिजिन जो हुआ इन संस्थाओं का वो ओम मंडली से हुआ 1936 से आप फिर थोड़ा सा ट्रैक बदल रहा है हमें मुरली को जानना है मुरली का क्या होता था कि आता मुरली क्या है? मुरली वही तो है कि जो गीता ज्ञान दिया गया है उसके बाद मुरली दादा लेखराज ब्रह्मा वाली आत्मा है। ब्रह्मा के हाथ में वेद शास्त्र दिखाए जाते हैं। तो उसमें शास्त्र ब्रह्मा जी ब्रह्मा वाली जो आत्मा है आपके अनुसार वो लेखराज जी के शरीर में प्रवेश करती थी। वो बोलते थे लिखते थे। वो कुछ नहीं करते थे। वो सुबह 2 बजे उठकर के अमृतवेले लिखते थे। फिर उसी को पढ़ाते थे। मतलब जो जो ब्रह्मा वाली आत्मा है वो उनको सुनाती थी वो लिखते थे ऐसा था कौन कौन किसको सुनाता था कोई किसी को नहीं सुनाता था बाबा बैठ के खुद लिखते थे अच्छा वो स्वयं ब्रह्मा ही थे इसलिए बिल्कुल वेद शास्त्र किसने लिखा नाम क्या दिया वेद वाणी बोला है मैं मैं वही कह रहा हूं मैं सपोर्टिव नहीं पूछ रहा हूं अभी मैं आपकी बात सिद्ध कैसे होती है ये नहीं पूछ रहा मैं आपकी मान्यता पूछ रहा हूं आपका जो आप मानते हो है मान्यता ये है कि ब्रह्मा बाबा

00:10:18:12 सुबह 2 बजे उठकर के लिखते थे। ये प्रविष्ट शब्द ही गलत। हां जी। वो लिखते थे फिर बच्चों को पढ़ाते थे दिन में। अच्छा तो जो प्रविष्टम शब्द है वो भी उन्होंने लिखा था। प्रविष्टुम शब्द उन्होंने इसलिए लिखा कि मेरे अंदर शिव भगवान प्रवेश करते हैं क्योंकि मगर करते नहीं है। नहीं लेकिन है कुछ नहीं है ऐसा। अच्छा एक चीज इसमें और नहीं समझ में आ रही। अच्छा शिव जी प्रवेश कर रहे हैं मतलब उनका कहना था कि शिव जी प्रवेश कर रहे हैं ब्रह्मा के अंदर और ब्रह्मा वो स्वयं थे है ना वो स्वयं वाली आत्मा है जी और ब्रह्मा वाली ब्रह्मा वाली आत्मा है शरीर नहीं है शरीर तो शरीर तो भौतिक है शरीर तो भौतिक है शरीर देखो जो शरीर है ब्रह्मा बाबा है जो मुरली है उस मुरली का नाम है वेदवाणी मुरली तो हम कह रहे हैं ओरिजिनल नाम है वेदवाणी नहीं वो ठीक है वो वो अभी हम आगे आएंगे वेद वेद पर आएंगे वेदव्यास पर भी आएंगे और राम जी पर भी आएंगे कृष्ण जी पर भी आएंगे मतलब अभी ये तथ्यात्मक बात ये है कि सुबह 2 बजे उठकर के जो लेखराज जी हैं वो ब्रह्मा वाली आत्मा का शरीर था लेखराज जी के नाम से जाने जाना जाने वाला है ना तो वो जो है वो

00:11:34:00 मुरली लिखता था और जो शिवजी उनका कहना था कि शिव परमात्मा जो है वो उनके अंदर प्रवेश करके लिखवा रहे हैं। है ना? ये उनका कहना था। अब ये उनका अब इसके बाद वीरेंद्र देव दीक्षित जी का क्या कहना है? वीरेंद्र देव दीक्षित जी का कहना ये है कि ब्रह्मा जो लिखते थे जो उन्होंने पढ़ाया 1947 से लेकर के 1969 तक वो जीवित रहे। 1969 में शरीर छोड़ा ना ब्रह्मा बाबा ने। ठीक है? तो उस समय तक उन्होंने जो लिखा उस लिखे हुए का बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी जो है सरलार्थ उसका अर्थ करके समझाते हैं जिसके कारण वो गीता में आया ना जो कि सह आख्या परिपन यानी कि उस व्याख्या सहित उस वेद वाणी की व्याख्या करते हैं वो उनको आप बाबा ने अलग से कोई मुरली नहीं चलाई है वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने जो गणना के मुख से निकला उस वेद वाणी का क्लेरिफिकेशन किया उन्होंने उन्होंने क्लेरिफिकेशन अब इस क्लेरिफिकेशन को जहां तक है ब्रह्मा कुमारी वाले मानते नहीं होंगे। जी वो बिल्कुल नहीं मानते। अच्छा ये इस बारे में इनका क्लेम क्या था वीरेंद्र देव दीक्षित जी का कि वो उनका भी क्लेम

00:12:49:06 कुछ ऐसा ही था कि मेरे अंदर जो है शिव आते हैं या वो बस ब्रह्मा ही थे। ब्रह्मा क्या दूसरी बॉडी थी। जैसे पहली बॉडी देख रहा है दूसरी बॉडी ये लेकिन मुरली कहती है कि वो आया नहीं आया यह कोई विषय नहीं है। नहीं नहीं मैं यह नहीं कह रहा मैं कह रहा हूं उनका क्लेम क्या था वो क्या कहते जैसे जैसे लेखराज जी के बारे में हमने समझ लिया कि वो ब्रह्मा वाली आत्मा की बॉडी थी लेखराज जी की है ना तो वो स्वयं ब्रह्मा ही हो गए जी और उन्होंने क्लेम किया कि शिव जी मेरे अंदर आते हैं और मैं लिखता हूं ये क्लेम था उनका उसके बाद ये क्लेम करते हैं कि उसके अंदर शिव भगवान आते हैं और वो लिखवा वो बोलते हैं अंदर अंदर यानी उसके बुद्धि में आता है और वो लिखते रहते हैं। यानी वो वो नहीं यानी कि वो नहीं लिखते थे। मतलब उन्होंने ऐसा नहीं कहा था कि मेरे अंदर शिव आते हैं बल्कि उनको मानने वाले ऐसा कहते हैं। उसको मानने वाले ऐसा कहते हैं कि शिव उसमें प्रवेश करते हैं और वो लिखवाते हैं और वो लिख लिखता जाता है। अब अब इसमें जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी है इनका क्या कहना था। वीरेंद्र देव दीक्षित जी कहते हैं कि मतलब शिव क्या है? शिव के बारे में समझाते हैं।

00:14:05:03 नहीं नहीं नहीं इस बारे में क्या क्या कहना था कि मेरे अंदर आते हैं उनका कहना यह था कि जो ब्रह्मा बाबा के मुख से जितनी मुरलियां चली है ना तो ब्रह्मा ज्ञान को समझ पाया ना ब्रह्मा कुमारी ज्ञान को समझ पाई तो मैं समझाऊंगा अब इस ज्ञान को तो उनके हिसाब से उनके हिसाब से लेखराज जी है जो वो ज्ञान को समझ नहीं पाए समझ नहीं पाए तो जैसे कृष्ण के हाथ में मुरली दिखाते हैं वो काट की मुरली है तो कठ बुद्धि बता दिया उनको अच्छा तो अब इनका क्या क्लेम है कि मैं कौन हूं? इनका क्या क्लेम था? वीरेंद्र दीक्षित जी का? वीरेंद्र देव दीक्षित जी का क्लेम है कि जैसे ब्रह्मा के चार पुत्र दिखाए जाते हैं। हां। तो यहां ब्रह्मा कुमारी में ये चार कुमार इकट्ठे गए थे। दशरथ पटेल और चार थे ये लोग इकट्ठे भठी करके आए थे। अच्छा तो चारों ने भठी की तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित उनमें सबसे छोटे थे। भठी क्या होती है? भठी होती है जैसे सात दिन का कोर्स करवाते हैं पहले हम हम सात दिन का कोर्स करने के बाद फिर भठी के लिए जाते हैं यानी कि भ्ठी जैसे भट्ठे में ईंट पकाते हैं हम माना जैसे 10 20 लोग इकट्ठे हो गए जो पहले कोर्स करवाते हैं हफ्ता 10 दिन तक आए कोर्स किया फिर उसके बाद

00:15:20:04 भठी भी भेजा जाता है पक्का करने के लिए कि हां हमें ज्ञान समझ में आ गया अच्छा तो जैसे अपना उनका नाम पड़ा सनत कुमार जो इतिहास बनता है हमारा तो जो ज्ञान और योग में तीखे चले गए। तो ये जो मुरली हमें पढ़ाई गई इस मुरली के आधार पर बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जो है सनत कुमार साबित हो जाते हैं कि ये ब्रह्मा का चौथा पुत्र साबित हो गया। जो योग में से आगे निकल गया। ठीक है। ठीक है। समझ गया। तो ये सनत कुमार है वीरेंद्र देव दीक्षित जो है वो सनत कुमार है वो ना तो ब्रह्मा है ना ही वो शंकर है ना शिव है वो सनत कुमार इस समय वो ब्रह्मा का चौथा पुत्र सनत कुमार है अच्छा इस समय मतलब पहले कुछ और थे पहले तो आम आदमी था 40 साल तक तो अपने घर पे ही थी पीएचडी कर रखी है संस्कृत में उन्होंने अच्छा ये बात और वो वो टॉपिक लेके आए एक सुनो एक सुनो हां एक बात और बताएं आपको तो वो पीएचडी के दौरान उनका टॉपिक था इस सृष्टि का आदि पुरुष कौन? बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी जब पीएचडी कर रहे हैं उस समय उनका टॉपिक है इस सृष्टि का आदि पुरुष कौन? तो उस सर्च में वो यहां पहुंचे हैं। ठीक है?

00:16:35:22 इसमें एक चीज समझ में नहीं आई कि जैसे जो वीरेंद्र दीक्षित है उनका यह कहना है कि जो लेखराज है वह ज्ञान को समझ नहीं पाए। जी और अच्छा उनका यह कहना तो नहीं था कि शिव जी से ज्ञान लिया है उन्होंने। मतलब वीरेंद्र दीक्षित जी का इस बारे में क्या कहना था? उनका तो सीधा सा एक ही कहना है कि जो शिव जिसको ये मानते हैं देखो पहली बात तो प्रविष्टुम जो है वो हमारा शब्द नहीं है सनातन धर्म का। देखिए अभी आप कह रहे वो भी मानते हैं तो मुझे अभी उनका उनका कहना क्या था वो जानना है वो तो इस बात को मानते थे कि ब्रह्मा के मुख से जो भगवान ने बोला है ब्रह्मा ने जो ज्ञान दिया है ब्रह्मा के मुख से जो वेद वाणी निकली है उस वेद वाणी को कोई नहीं समझ पाया तो वो वेद शास्त्रों का सार बैठकर के स्वयं वो समझाते हैं बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी जो मुरली मतलब वीरेंद्र देव दीक्षित जी ये नहीं मानते थे शिव जी उनके अंदर आए। उनका तो सीधा सा मानना है कि जो यह ज्ञान है इस ज्ञान को नहीं समझ पा रहे। इस ज्ञान के द्वारा भगवान की पहचान समझने की बात नहीं कर रहा हूं। मैं ये पूछ रहा हूं कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी इस बारे में क्या मानते थे कि शिवजी अंदर आके बोल रहे हैं या बता

00:17:50:28 रहे हैं और फिर वो लिख रहे हैं। वो जितने भी मान्यताएं सारी गलत है। ऐसा मानते थे। मतलब वो आते नहीं है। अंदर नहीं आते हैं। ये मानते थे। कोई कोई नहीं आता है। कोई नहीं जाता है। भाई साहब ये तो आपका क्लेम है ना। मैं वीरेंद्र देव दीक्षित जी का स्पष्ट करना चाह रहा हूं। की तरफ से मैं बोल रहा हूं। हां ठीक। अभी तो अभी थोड़ी देर पहले तो आप कह रहे थे ना कि प्रविष्ट ये भी मानते थे। प्रविष्ट ये लोग ब्रह्मा कुमारी मानते हैं। अच्छा ये वीरेंद्र दीक्षित जी ने नहीं माना प्रविष्टम। प्रविष्ट वो तो इस बात का क्लेम नहीं करते। वो तो एक सीधा सा करते हैं। भगवान ने जो ज्ञान दिया जैसे भी ब्रह्मा ने जो ज्ञान दिया है इस ब्रह्मा के मुख से जो ज्ञान निकला है इसका तंत्र नहीं समझ पा रहे तुम लोग सब ठीक है ठीक है अब अब्मा के मुख से ज्ञान निकला है ठीक है ठीक है जो के मुख से जो ज्ञान निकला है इस ज्ञान के अंदर भगवान की पहचान भगवान को कोई नहीं पहचान रहा ठीक है अब ये जो वीरेंद्र दीक्षित से आपका तो कोई विरोध नहीं है फिर इस हिसाब से क्योंकि उन्होंने भी प्रविष्टम को नहीं माना कि है मेरा विरोध मेरा विरोध नहीं है मेरा सिर्फ एक आकलन है जो निष्कर्ष निकला है इस सब को पढ़ने के बाद मैं नहीं हूं। मेरे साथ और भी 1400 लोग और भी है जिनका सब ये निष्कर्ष है। सबका ये निर्णय निकला हुआ है। वो क्या निर्णय है?

00:19:06:28 वो निर्णय ये निकला हुआ है कि किसी ने 10 साल, किसी ने 15 साल, किसी ने 20 साल इस ज्ञान को सुना, समझा। और फिर उसको गीता ज्ञान से टेली किया और टेली करने के बाद निष्कर्ष निकला कि बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित श्री राम है सनत कुमार है शिवलिंग है महादेव है नहीं नहीं भाई साहब भाई साहब आप गलत गलत जा रहे हैं मैं पूछ रहा हूं विरोध क्या है वो क्या है विरोध इस बात का है कि इस परिवेश को और शिव को न समझने के कारण सारे ज्ञान का अज्ञान बनाया जा रहा है। नहीं नहीं वीरेंद्र देव दीक्षित भी तो यही कह रहे हैं। उनसे कोई विरोध है क्या आप लोगों का? नहीं किसी से विरोध इस बात का नहीं है। सिद्धांशु जी आप समझिए इस बात को। हां हां ये विरोध नहीं है बल्कि इस ज्ञान के अंदर 100% सच्चाई है। बाबा वीरेंद्र बात समझे नहीं। मैं कुछ और पूछ रहा हूं। वीरेंद्र देव दीक्षित जी के द्वारा कही गई कोई बात कोई भी बात ऐसी है जो आप स्वीकार ना करते हो। बिल्कुल उनकी तो एक-एक बात स्वीकार्य है। अच्छा वो थोड़ी देर पहले शायद मैं कुछ समझ नहीं पाया। मुझे लगा कि आप वीरेंद्र देव दीक्षित के भी किसी आंशिक रूप से विरोध में हैं। आपने बिल्कुल एक एक सेकंड का भी विरोध नहीं है। बल्कि उनके कुल मिलाकर के आप

00:20:22:02 वीरेंद्र देव दीक्षित में फेथ रखते हैं पूरी तरीके से वो आपके लिए प्रमाण है। जी दिलौर जैन से अच्छा अब एक सवाल यह आता है कि वीरेंद्र दीक्षित जी ने कहा कि जो लेखराज जी थे उन्होंने शिव का ज्ञान लिखा समझ नहीं पाए। इसका मतलब वीरेंद्र देव दीक्षित को जो उनकी योग्यता है लेखराज जी की योग्यता उस पर कहीं ना कहीं डाउट है। हां जी हां जी बिल्कुल डाउट था। हां जी तो इनकी जो मुरली है मुरली में आया राम बाप को कहते हैं कृष्ण बच्चे को कहते हैं तो वो कृष्ण बच्चा था।

00:21:04:28 अ मैं ये कह रहा हूं अभी हम राम और कृष्ण की बातों पे अभी जाएंगे। है ना? अगला पार्ट वही है राम और कृष्ण वाला उस पर हम जाएंगे क्योंकि हमारी कुछ मान्यताएं अलग है ना तो आप अगर राम बाप को कहते हैं, राम कृष्ण को कहते हैं तो वो थोड़ा सा अभी ना करें क्योंकि हमारी मान्यताएं कुछ और है। फिर वो आपस में एक वैचारिक टकराव होने लगेगा। अभी हम दूसरी चीजें देख रहे हैं। आगे अगले चैप्टर में हम लोग बातें करेंगे इन विषयों में। है ना? जी। तो क्या कहते हैं? ये ये उनको उनकी योग्यता पर डाउट था कि वो अर्थ सही से बता नहीं पाए मुरली का। लेखराज सही बात है। जी हां तो जैसे फिर दो चीजें हो गई कि लेखराज जी ने अर्थ भी बताया है और मुरली भी लिखवाई है। या सिर्फ मुरली लिखवाई है। दादा लेखराज ने जो लिखा सुबह उठ के 2:00 बजे जो लिखा वही बच्चों को पढ़ा दिया। एज इट क्लास में हां एज इट इज लेकिन उसका अर्थ नहीं समझा पाए। अच्छा तो अब यहां पर एक प्रॉब्लम आती है कि यदि हमें दादा लेखराज पर आपके जो दादा हैं उन पर यदि हमें भरोसा है कि वो जो है शिव का ज्ञान हमें लिखवा रहे

00:22:20:02 हैं। शिव जो बोल रहे हैं वो हमें लिखवा रहे हैं तो यदि आपको भरोसा है तो फिर जब उनसे गलती हो सकती है जब आप मान रहे हैं कि अर्थ को लिखवाने में उनसे गलती हुई अर्थ को बताने में गलती हुई तो मुरली सुनने और लिख लिखने में भी तो गलती हो सकती है। मुरली सुनने और लिखने में गलती हो सकती है कहीं ना कहीं हम तो फिर हमें उसकी उनकी मुरलियों पर विश्वास कैसे उनकी मुरली पर विश्वास ऐसे कि जब उनके मुख से मुरली निकली तो उससे पहले तो ये ज्ञान 1936 से था जो ज्ञान दिया गया था 1936 का तो किसी को याद नहीं है कि 1936 में क्या ज्ञान दिया तो 1947 से जब वो ब्रह्मा बाबा के मुख से मुरली निकली तो जो नया ज्ञान था ना दुनिया के लिए तो एकदम से वो उसमें एक सीधा सा सेंटेंस आता था कि रूहानी बाप बैठकर के रूहानी बच्चों को पढ़ाते हैं। तो एक अट्रैक्शन क्योंकि वो ऐसा नया ज्ञान एकदम से दुनिया के सामने आना तो दुनिया खींची ना उनकी तरफ और ब्रह्मा बाबा जो है नष्टों को वहां होकर के बड़े अच्छे से दुनियादारी छोड़ के एकदम नए तरीके से लेकर के आए और वो मां का ब्रह्मा माने मां होती है। वो मां का स्वरूप था। नहीं नहीं

00:23:35:22 यह वो मैं पूछ रहा हूं कि जब हमें मालूम पड़ गया कि जो लेखराज जी हैं उनसे किसी किसी पॉइंट पर गलती हुई है। गलती हुई है इसका मतलब कहीं ना कहीं उनका मस्तिष्क वो प्रज्ञा शक्ति नहीं है कि ईश्वर के ज्ञान को समझ पाए। तो जब वो प्रज्ञा शक्ति नहीं है तो मुरली को जो सुन रहे हैं और उसको लिखवा रहे हैं। उसमें भी तो वो कमी आ सकती है। हो सकता है दो चार शब्द मुरली में भी गलत लिखवा दिए हो जो उन्होंने कुछ और कहा हो शिव जी ने उन्होंने गलत लिखवा दिया हो। कहने का मतलब यह है। कहने का मतलब यह है कि जैसे लेख जैसे कि आपके लिए जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी प्रमाण है। प्रमाण का मतलब इन्होंने जो कहा बिल्कुल सही कहा है। अगर मैंने एक भी बात इसकी गलत कह दी कि ये बात गलत कही है। तो फिर इनकी किसी भी इनकी किसी भी इनकी किसी भी बात पर मेरा भरोसा होना सिद्ध नहीं होता। एक न्याय न्याय है। एक अर्ध कुकुट न्याय कहते हैं। अर्ध कुकुट न्याय का मतलब कि मान रहे हो तो पूरा मानो। नहीं मान रहे हो तो बिल्कुल मत मानो। मानना है तो पूरा मानो क्योंकि क्योंकि जब हम किसी को प्रमाण कहते हो प्रमाण का मतलब होता है कि उसको मानने के पीछे हमारे पास और कोई आधार नहीं है। वो आधार है सबका और यदि हम उसमें खोजबीन कर रहे हैं कि इसमें ये हो सकता है, ये हो सकता है। इसका मतलब हमारा प्रमाण कोई और

00:24:50:28 है। उसके आधार पर हम इसको जांच रहे हैं कि इसने क्या सही कहा है, क्या गलत कहा है। मगर यहां पर मुरलियों के लिए यहां पर मुरलियों के लिए वीरेंद्र देव दीक्षित जी के पास केवल एक ही आधार था लेखराज और लेखराज पर ये डाउट कर रहे हैं कि वो गलत लिखवा रहे हैं। वो गलत ज्ञान दे रहे हैं। तो जब लेखराज पर डाउट है तो लेख मेरे कहने का मतलब लेख जब लेखराज के अर्थ पर डाउट है तो लेखराज की मुरली पर डाउट क्यों नहीं और यदि लेखराज की मुरली पर डाउट नहीं है तो लेखराज के अर्थ पर डाउट कैसे इसमें एक सीधी सी बात है कि जो ब्रह्मा के मुख से जितनी मुरली निकली है ब्रह्मम वाक्यमति जनार्दनम ब्रह्मा के जो मुख से जो बात निकली है उस बात का अर्थ इस दुनिया में कोई नहीं समझ पाया और वह बाबा देव दीक्षित भी हमें तो मौका दो जी हमें तो दो बोलिए बोलिए आप इतना लंबा क्वेश्चन दे रहे हैं अभी बोलने का मौका दो हां पहली बात यहां बात डिस्प्यूट की नहीं है। यहां बात भगवान को समझने की चल रही है। पहली बात तो मुख्य पॉइंट के अंदर नोट करिए आप बात का इस ज्ञान से ब्रह्मा कुमारी हो चाहे आध्यात्मिक स्तरीय विश्वविद्यालय हो

00:26:06:00 डिस्प्यूट इस बात का है कि इन्होंने भगवान को अभी तक पहचाना क्यों नहीं [गला साफ़ करने की आवाज़] ये सारांश चला वापस इस बात का और ब्रह्मा के मुख से अगर बात इधर से उधर हुई है तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने उस बात को टोटली क्लेरिफाई कर दिया क्योंकि ओरिजिनल ज्ञान दाता तो ये बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ही है इस ज्ञान का जो ब्रह्मा के मुख से आया वो ज्ञान भी उसी की देन है। जो ब्रह्मा के मुख से जो ज्ञान निकल रहा है वो ज्ञान बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित द्वारा ही दिया गया है। इससे पहले जन्म में ये मुरली बता रही है।

00:26:43:18 आपने जवाब दे दिया। जी मैं पूछ सकता हूं। जी हां इन्होंने ही पिछले जन्म में इनको ज्ञान दिया था। जी है ना और यही जो है बिल्कुल यानी कि शिव ने ज्ञान नहीं दिया है लेखराज को लेखराज को ज्ञान इन्होंने दिया था शिव को समझ ही नहीं पा रहे ना ब्रह्मा कुमारी समझ पा रही ना आध्यात्मिक समझ मैं समझने की बात नहीं कर रहा हूं भाई साहब मैं आपकी चीजों को समझना चाह रहा हूं कि मुरली जो मुरली जो लिखवा रहे हैं लेखराज जी मुरली लिखवा रहे हैं जो वो शिव ने दी है लेखराज जी को या इन्होंने पिछले जन्म में दी है लेखराज जी को किसने किसको दी पिछले जन्म में 1936 से ज्ञान शुरू हुआ है तो 1936 में शिव कहो शिव बाबा बोलते हैं हम उसको शिव बाबा ने 1936 से दी ब्रह्मा बाबा को सुनाई समझाया ज्ञान तो फिर लेखराज क्यों कह रहे हैं कि मैं पिछले जन्म में मैंने ही दिया था कौन बोल रहे हैं लेखराज ये वो वीरेंद्र देव दीक्षित जी ये क्यों बोल रहे हैं मैंने ही पिछले जन्म में दिया था क्योंकि ये यज्ञ 1936 से शुरू हुआ है और जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित है 1942 में शरीर

00:27:58:21 छोड़ के गए थे और इनका भी मर्डर हुआ था। वीरेंद्र देव दीक्षित जी 1942 में शरीर छोड़कर में थे उस समय तब हां मतलब लेखराज जी के सेवादार नहीं है। ब्रह्मा जी के पुत्र नहीं है। ये सनत कुमार नहीं है। ये कोई और सनत ये सनत कुमार तो सन से बात को समझो आप। हां सनत कुमार कह रहे हैं 1969 के बाद में हम बात अब जो बात चल रही है वो 1942 की चल रही है जो ये तो आप बोल रहे हैं कि वो मर गए उनका मर्डर हुआ था तो अभी दोबारा जन्म ले आए तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित उससे पहले सेवक राम के नाम से था अच्छा वो सेवक राम के नाम से वो थे तब 1942 में उनका मर्डर हुआ और फिर वह आए वीरेंद्र देव दीक्षित जी के रूप में मगर है तो वह सनत कुमार ही जी 19 सनत कुमार कहेंगे 40 साल का होने के बाद जब ब्रह्मा कुमारी आश्रम में आए ज्ञान लिया ज्ञान समझा और ज्ञान को दूसरों को समझाने लगे मतलब दूसरे वाले जन्म में दूसरे वाले जन्म में पहले वाले जन्म में ये लेखराज के पास

00:29:14:02 थे और सेवक राम के दादा लेखराज के जीजा थे बहनोई थे अच्छा लेखराज के जीजा थे बहनोई और इन्होंने लेखराज जी को मुरली सुनाई थी। इन्होंने दादा लेखराज को दादा लेखराज को साक्षात्कार हुए थे विनाश के और नई दुनिया की स्थापना के। नहीं नहीं भाई साहब देखिए मैं पूछ रहा हूं कि मुरली उन्हें आप सही सुनिए तो अभी मैंने 10 मिनट पहले आपसे एक प्रश्न पूछा कि मुरली उन्हें इन्होंने सुनाई है। पिछले जन्म में सेवक राम नाम से जो जिनका जन्म था इन्होंने सुनाई। देखो अब यहां से तथ्य क्लियर करो आप। दादा लेखराज को 1936 में साक्षात्कार हुए। ठीक है? किसके? सेवक सेवक राम ने उनको उनके साक्षात्कारों का अर्थ समझाया और गीता बैठकर के 1936 से 1942 तक सेवक राम ने यज्ञ चलाया है पहले। और उस समय ये लेखराज क्या करते थे? लेखराज सुनते थे, शिष्य थे। उनको साक्षात्कार हुए थे तो वो ज्ञान सुनते थे। गीता ज्ञान दिया जाता था 1936 से 1942 यानी कि सेवक राम जी से वो ज्ञान सुनते थे लेखराज जी अपने जीजा से जी अपने अपने जीजा

00:30:29:06 से सुनते थे ओके ओके ओके यानी कि तो फिर ये वाली बात कैसे आ रही कि मुरली जो है इनको आती थी ये अब भाई वो तो वो तो सेवक राम जी से सुनते थे ना सज्ञान अब पॉइंट पे आ गए अब देखो अब आपको बात समझाते हैं 1936 में 1936 3 में दादा लेखराज को जो हीरों का व्यापारी था कोलकाता में हम इनको साक्षात्कार हुए भगत भगत प्रकार की जो आत्मा होती है ना शुद्ध भक्ति करते हैं जो लोग तो उनको चतुर्भुजी विष्णु के साक्षात्कार हुए फिर नई दुनिया के हुए विनाश के हुए तो वो जो है ना पूछते घूम रहे थे दुनिया में कि ये है क्या मुझे कैसा दिखाई दे रहा है ये सब ठीक है तो जो उन्होंने जो भक्ति मार्ग के गुरु किए हुए थे उन सब के पीछे इधर उधर गए पूछा समझा लेकिन नहीं समझ पाए हम तत सेवक राम के पास पहुंचे। दादा लेखराज की तो बड़ी हीरो की दुकान थी। लेकिन सेवक राम की जो इसका बहनोई था उसकी भी एक छोटी सी दुकान थी उसी बाजार में। अच्छा तो सेवक राम जी के पास आया। वो सेवक राम की जो पत्नी हुई वो दादा लेखराज की बहन है। बिल्कुल। आप ज्ञान के अनुसार यहां पर एक नई बात बताऊं आपके लिए भी बड़ी जानकारी की बात है। वो जो दादा

00:31:44:09 जो सेवक राम की पत्नी है वही लक्ष्मी और भारत माता है और ये सेवक राम ही भारत है। ये ज्ञान से बाद में पता चल रहा है 90 साल के बाद। चलो ये तो बाद की बातें हैं कौन क्या है। चलो वहां सेवक राम जो है सेवक राम ने गीता के आधार पर उस समय नाम रखा गया। ओम मंडली और सत्संग होता था। ये ओम मंडली। ठीक है। सेवक राम की शरण में आ गए। लेखराज जिनको अभी चतुर्भुजी भगवान के दर्शन विष्णु के दर्शन हुए हैं और सृष्टि का नाश और वो सब देखा है उन्होंने है ना ऐसा जी जी बिल्कुल सेवक अब एक तरीके सेक राम गुरु है इस समय जी बिल्कुल सेवक राम की असली और उनका उनके उनके द्वारा जो ये जो ये अभियान चल रहा है इसका नाम है मंडली प्रणवक्षर जो है मंडली ठीक है बोलिए तो ओम मंडली 1936 से 1942 तक चलती रही। जी। वहां पे कुछ पवित्रता के नाम पर झगड़ा हुआ जिसके कारण ब्रह्मा बाबा यज्ञ छोड़ के भाग लिए। हम यज्ञ छोड़ के भागे तो कराची होते हुए धीरे-धीरे ये माउंट आबू पहुंचे बाद में। और जब उस समय सेवक राम को वहां जो सिंधी थे कराची में उधर

00:32:59:20 पाकिस्तान में रह रहे उस समय जो आज पाकिस्तान का भाग है तो वहां सेवक राम जी को तो मार दिया गया था। ठीक है? और 1942 में ही भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ। हम तो जब वो मारकाट हुई तो मारकाट के समय ब्रह्मा बाबा कुछ कन्याओं माताओं के साथ वहां से दौड़ गए थे। चले गए हम और दादा जो सेवक राम जी थे उनको मार मूर के कहीं दीवार में जैसे आप ये सारे मिले हैं सारे इनके यहां से कि दीवार में दिया उनका उनकी हत्या कर दी गई ठीक है सेवक राम जी तो दो माताएं यज्ञ में बताई जाती है नहीं नहीं माताएं छोड़िए मैं मुझे वो बताइए कि इनकी मुरली आना कहां से शुरू हुई है इनकी 1947 हां तो उसी तो बता रहा है 1942 के बाद मुरली कहां चली 1942 से 1947 का पांच साल का नहीं जानोगे क्या करना मुरली पे ध्यान है ना हमारा तो वो उनकी हिस्ट्री थोड़ी ना जाननी है कि चीज अरे सेवक राम ने पहले गीता ज्ञान सुनाया पूरी मुरली चलाई उसके बाद दो माताएं हैं वो मुरली चलाती है फिर 1947 से लेख दादा लेकरा चलाता है अच्छा दो माताएं जो जो उन्हीं की शिष्या थी सेवक राम जी की जो सेवक तो सेवक राम की पत्नी हो गई खुद में हम

00:34:14:28 और एक एक और थी जो अपनी पत्नी के एब्सेंस में लेके आया था जो 18 20 साल की लड़की की थी। एक और शादी की थी सेवक राम ने बाद में। दो शादियां थी। दो शादियां थी तो दो माताएं थी। अच्छा अच्छा सेवक राम जी की उस समय आयु क्या थी जब लेखराज जी उनसे ज्ञान ले रहे थे। 60 साल और लेखराज जी की बहन से विवाह भी था। मतलब इनका सेवक बहुत वो तो पहले से ही था। घर गृहस्थ चल रहा था पहले से ही। तो क्या आयु रही होगी वो? अब उनका लगा लो चार पांच साल तो छोटी होती ही है अपने यहां धना अपने धर्म में तो उसकी 60 होगी तो उनकी 55 के करीब लगा 52 55 तो जब लेखराज जी उनसे ज्ञान ले रहे हैं उस समय सेवक राम जी की आयु थी लगभग 60 साल जी उस समय वो उन्होंने एक और विवाह भी किया था 20 साल की युवती से उसका कारण क्या था कि जो दादा लेखराज है वो सत्संग करते थे ठीक है ठीक है छोड़िए उसका कारण नहीं जानना। आगे चलते हैं। तो जब 1942 में इनकी हत्या कर दी गई अ क्या कहते हैं ये जो सेवक राम जी की इसके बाद अ जो लेखराज जी हैं वो जो दो उनकी बहन स्वरूपी हुई।

00:35:30:04 एक बहन है तो दूसरी भी बहन ही हुई। बिल्कुल दोनों बहने हो गई। दोनों हो गई। तो वो दोनों बहने इनके साथ आई। फिर वो प्रवचन करती रहीं। 5 साल फिर 1947 से इन्होंने मुरली देना शुरू किया है। जी कराची में थे उस समय कराची से मुरली 1947 में ब्रह्मा बाबा के मुख से निकलने लगी। अच्छा तो अब यहां पर पॉइंट यह आता है कि जो मुरली उनके मुख से निकल रही है उनको शिव जी दे रहे हैं या फिर जो उन्होंने सेवक राम जी से ज्ञान लिया हुआ था वही उसको मुरली के रूप में दे रहे हैं। जो सेवक राम से उन्होंने सुना वही ज्ञान उनकी बुद्धि में उपज रहा है और वही सुना रहे हैं। अच्छा तो उन्होंने ये क्लेम गलत किया है कि हमें शिव बाबा आकर के ज्ञान देते हैं। ये क्लेम उनका गलत है। भगवान जो है वो दूसरों में प्रवेश करेगा या भगवान में कोई और प्रवेश करेगा। भगवान कौन है? यही तो सबसे बड़ा विषय चल रहा है इस ज्ञान में भगवान को मैं ये नहीं कह रहा मैं ये नहीं कह रहा भगवान वो मैं मैं अभी क्लेम पूछ रहा हूं उन्होंने ये क्लेम एक तरीके से झूठा किया था कि मुझे जो है शिव जी मेरे अंदर आके लिखवाते ये टोटल गलत क्लेम है कि शिव जी प्रवेश करते हैं एक चीज यहां पे एक छोटी सी चीज और रह जाती है कि इस जन्म में तो वीरेंद्र देव दीक्षित जी का जो बाद वाला जन्म है उसमें तो उनकी दिव्यता आपने बता दी कि वो सनत कुमार है।

00:36:45:22 है ना? अब इस समय 1966 की जब आप सनत कुमार कह रहे हैं तो उस समय 1969 में आ जाइए आप। हां हां मैं समझ गया जो पहले वाला जन्म है उसकी दिव्यता क्या थी? उसकी दिव्यता यह थी उसकी दिव्यता सुनो। जो 1936 में [गला साफ़ करने की आवाज़] जिसको भगवान हम कहते हैं जो सृष्टि पर सदा कायम है उसकी दिव्यता वो पहचान हो गई कि उसने ज्ञान देकर के ये सिद्ध कर दिया कि वो ज्ञान का अकूट भंडार गीता ज्ञान दाता वो सेवक राम है अच्छा नहीं मतलब वो शिव थे वो शिव शिव है जी तो ये तो जब शिवजी यानी शिवजी जो है स्वयं इनके रूप में है सेवक राम जी के रूप के रूप में सेवक राम जी के रूप शिव जी स्वयं सेवक राम जी के रूप में जिन्होंने शिष्यत्व प्रदान किया इनको अपना अब आप ये बताइए आप शिव किसको शिव मानते हैं नहीं वो बाद की बात है भाई साहब वो बाद की बात है अभी मैं आपकी केवल मान्यता मान्यता क्लियर कर रहा हूं 1936 में हां तो वो क्या कहते हैं लेखराज जी को स्वयं शिव जी जो है जो ये जो ये जो शरीर है सेवक राम जी वाला इसके द्वारा वो ज्ञान

00:38:00:24 देते हैं। उसके बाद उनकी हत्या कर दी। उस शरीर को नाश कर दिया जाता है। और उसके बाद जो उनकी जो दो पत्नियां थी एक युवती थी 20 साल की और एक जो है वृद्धा थी 55 साल की। ये दोनों पांच साल तक वही ज्ञान आगे बढ़ाती हैं। उसके बाद 1947 से जो है ये जो क्या कहते हैं? लेखराज जी हैं 1947 से यह ज्ञान देना शुरू करते हैं और यह कहते हैं कि यह ज्ञान मुझे शिव जी स्वयं दे रहे हैं। ये ये नहीं बताते कि सेवक राम जी से जो ज्ञान लिया है उनकी पत्नियों से जो ज्ञान लिया है ये वो ज्ञान है। वो ये नहीं बताते। अगर शिव देखो बिल्कुल सही बात है। अगर शिव जी ज्ञान देते तो मैं आपके किसी भी मान्यता को अभी चैलेंज नहीं कर रहा हूं। आप चिंता मत करिए। जब आप अभी उसको आप अभी उसको सिद्ध करने में व्यर्थ वो ना करें। मतलब मैं अभी क्लेम चैलेंज नहीं कर रहा हूं। समझ रहे हैं? मैं तो अभी आगे कहानी वहां पे आना चाह रहा हूं जो कुछ मुख्य पॉइंट है। तो आप अपनी जिज्ञासा पूरी करो। हां वो जो तथ्य जब जान ले तब तो हम आपके किसी को काउंटर कर पाएंगे। है ना? वो काउंटर करना भी है कि नहीं करना है वो जरूरी नहीं है। वो बाद की बात है। तो अब यहां पे दिक्कत ये है कि इन्होंने जबकि ज्ञान लिया था सेवक राम

00:39:16:00 जी से। मूल ज्ञान सेवक राम जी से लिया था जो स्वयं शिव जी ही थे। है ना? इन्होंने ज्ञान लिया था उनसे और ये अपने नाम से बताने लगे कि शिवजी जो है मुझे प्रकट हो के या मेरे अंदर आकर के लिखवा रहे हैं जो कि गलत बात है। ठीक है। अब बात गलत बात है। हां टोटली गलत बात। अब आगे की बात ये आती है कि जो हां जब ये स्वयं शिव जी थे सेवक राम जी तो इस जन्म में सनत कुमार क्यों है? क्योंकि कोई भी जब [गला साफ़ करने की आवाज़] आता है आत्मा एक शरीर छोड़ के दूसरा जन्म तो लेगी ही लेगी प्रकृति का नियम तो नहीं टूटेगा तो वो आत्मा थोड़ी ना थी वो तो ये बात ये बात एक्सप्लेन करनी पड़ेगी इस बात का डायरेक्ट अंतर नहीं होता ये एक्सप्लेन करनी पड़ेगी ये बात ठीक ठीक करिए करिए करिए जब पहले पहले ज्ञान आता है फिर ज्ञान दाता आता है कोई भी नियम है नौ धर्म है कोई पहले ज्ञान आता है फिर ज्ञान दाता की पहचान होती है तो 1936 36 में पहले ज्ञान आया। ज्ञान से ही तो जानते हैं कि इस सृष्टि का मालिक कौन है? उस ज्ञान माना जानकारी किसकी? सत्य की। कि इस दुनिया में सत्य कौन है? जिस सत्यनारायण की घर-घर में कथा सुनाई जाती है। तो पहले वो सत्य आकर के ज्ञान देता है। उस ज्ञान से हमें जानकारी

00:40:31:08 मिलनी है कि वो सत्य कौन है। तो सेवक राम के रूप में हम पहचान नहीं पाए कि यही वो ओरिजिनल इस सृष्टि का सत्यनारायण है। तो 1976 से फिर वही आकर के अपनी जानकारी स्वयं देता है। 1976 से बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ब्रह्मा का चौथा पुत्र बन के वह ज्ञान को क्लेरिफाई कर देता है। इसके सारे ज्ञान को जो ब्रह्मा के मुख से निकला है। इसका पूरा टुकड़ा करके शुरू किया। यहां प्रॉब्लम यह हो रही है कि अगर पुत्र पुत्र बनने की बात की जाए तो वो तो वीरेंद्र देव दीक्षित किसी के पुत्र के रूप में पहले से ही एक उपाधि को प्राप्त है। तो फिर पहले आप समझो रियल रियल उपाधि रियल उपाधि यदि एक मिनट रियल उपाधि यदि उनकी सनत कुमार की है तो फिर वो शिवजी कैसे हुए? अगर सनत कुमार की रियल उपाधि है या तो ये कहेंगे कि शिवजी और सनत कुमार एक ही तत्व है। हां पॉइंट पे आ गए आप सही पकड़ रहे हो। बिल्कुल सही पकड़ रहे हो। बिल्कुल सही पकड़े आप। आपको प्रणाम करता हूं भाई जी। आप एक सेकंड में बात को पकड़ गए। प्रणाम आप जैसी शुद्ध आत्मा को। बहुत शुद्ध प्योर आत्मा है आप। एक सेकंड में ज्ञान पकड़ गए आप। बिल्कुल। तो शिव जी

00:41:46:12 और सनत कुमार एक ही तत्व है। बस यहां पर वो जो है ऐसा रोल निभाते हैं सनत कुमार वाला कि हम ब्रह्मा जी से ज्ञान ले रहे हैं। चौथे पुत्र के रूप में है। जी है ना? वो अहंकार ब्रह्मा का अहंकार तोड़ने के लिए क्योंकि ब्रह्मा को अहंकार हो गया था। ये गीता का भगवान प्रैक्टिकल में इस दुनिया का मालिक मैं हूं। इसलिए ब्रह्मा बाबा को ब्रह्मा बाबा हार्ट अटैक हो के मरे। अहंकार तोड़ने के लिए तो अहंकार तोड़ने के लिए उनका शिष्य क्यों बने? उनको उनके गुरु बन के दिखाते। लेकिन देखो यहां ज्ञान के जन्म की बात है। एक तो जैसे मेरा जन्म मेरे माता पिता से हुआ उस जन्म की वो एक अलग जन्म की बात है। ज्ञान के जन्म की बात चल रही है। यहां पर ज्ञान के अनुसार जो जन्म होता है ना उस जन्म की बात चल रही है। अब दूसरा शरीर लेकर के आवेगा तो आवेगा तो ज्ञान में ही ना। ज्ञान में आवेगा तो किसी के तो अंडर में आना पड़ेगा ना एक बार। तो ये दोनों राम और ये दोनों आपस में दोनों आत्मा एक दूसरे के सहयोगी है। नहीं नहीं वो ठीक है सहयोगी है। तो फिर दिक्कत ये आ रही है कि अ फिर ये जो वाली बात है ना घमंड तोड़ने घमंड कैसे टूट रहा है वो बताइए। घमंड इस प्रकार से टूट रहा है कि ब्रह्मा इस बात को भूल गया कि तुझे ज्ञान देने वाला सेवक राम था। उसको तो भूल गया। ठीक है? तो इन्होंने जब ये शिष्य बन के गए हैं। जब ये

00:43:01:13 शिष्य बन के गए हैं लेखनाथ जी के पास तो उससे तो और वो पुष्टि हो जाएगी। मतलब शिष्य बन के गए तो उससे घमंड कैसे टूटेगा? वो कह रहा हूं मैं। उससे घमंड इस प्रकार से टूटा कि उसके ज्ञान को सारे को समझा के उसका मंथन करके सार निकाल के दे दिया कि इसके इस मनुष्य सृष्टि का बाप कौन है? ये बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने ही हमें समझाया कि इस ज्ञान जो ब्रह्मा के मुख से इतना ज्ञान है। जी इस बार जब लेखराज जी के पास शिष्य के रूप में गए हैं तब भी वो ज्ञान ही दे रहे हैं। उन्हें तो वो गुरु के रूप में ही गए। हां तो था तो देखो था तो सनत कुमार लेकिन बाद में ज्ञान ज्ञानेश्वर और योग योगेश्वर कहा जाता है सनत कुमारी फिर

00:43:44:07 मतलब वो सनत कुमार के रूप में गए हैं मगर उसके बाद जो है वो और भी एक नया रूप लेते हैं जो योगी योगेश्वर और फिर वो गुरु बन जाते हैं लेखराज जी के लेखराज जी उनको एज गुरु स्वीकार करते हैं दादा लेखराज जी को स्वीकार करते हैं लेकिन ज्ञान और योग के कारण उनसे आगे निकल गए। नहीं नहीं नहीं मैं ये नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं जो लेखराज जी है उन्होंने ये कहा कि मेरा गुरु है ये दादा लेखराज जी ने उस समय नहीं स्वीकार किया। जीवित रहते उन्होंने स्वीकार नहीं किया। तो घमंड कैसे टूटा? फिर शरीर छूटने के बाद अकाले मौत जैसे वेद शास्त्रों में गणेश जैसे अपने सनातन धर्म में गणेश जी का सिर नहीं काट दिया था। वो आपको वेद शास्त्रों से सारा ज्ञान जोड़कर समझाऊंगा धीरेधी आपको। आप तो बहुत अच्छे इंसान है। बहुत अच्छी आत्मा है भाई जी। आप बहुत अच्छे से ज्ञान को समझ रहे हो। जो है ना हमारी मुरली कह रही है। हमारी मुरली कह रही है। क्योंकि क्योंकि उनका मैं एक क्योंकि उनका अकाल मृत्यु हुई। इससे उनका घमंड टूटा। घमंड तो जीते जी टूटना चाहिए था ना। मृत्यु के बाद क्या जीते जी आपको इस चीज की यादगार शिवलिंग के मंदिर में रखी हुई है। बैल और सामने शिवलिंग।

00:44:59:10 आपको ज्ञान बहुत अच्छे से समझोगे आप एक दिन बहुत अच्छा समझोगे आप और निष्कर्ष पर निकलोगे दो चार इंटरव्यू निकलवा दो मेरे साथ आप आपके आप समझ जाओगे उनको समझाना मुश्किल हो रहा है लेकिन आप समझ जाओगे उनसे जल्दी तो तो इस सृष्टि रूपी रंग मंच पर ये दोनों शेर है एक जावेगा दूसरा आवेगा ये नियम है इनका खाली नहीं रहेगी सृष्टि वो शरीर छोड़ेगा तो वो मैदान में आ जावेगा वो शरीर छोड़ेगा तो वो मैदान में आ जावेगा दादा लेखराज कोई छोटी चीज नहीं है। सतयुग का पहला राजकुमार है और दलाल से जो था वो है ये। ठीक है। तो ब्रह्मा जो ये जो लेखराज जी हैं घमंड टूटने वाली बात मुझे क्लेरिफाई नहीं हो पाई। खैर छोड़िए वो ठीक है। आपकी मान्यता है कि वो क्योंकि करेंगे करेंगे भाई जी। करेंगे बिल्कुल करेंगे आपको। बहुत अच्छे से हो जाएगी। चलते जाओ। बहुत बड़ा पॉइंट नहीं है। वो बहुत बड़ा पॉइंट भी नहीं है। तो हम लोग आगे चलते हैं। तो अब कुल मिलाकर के कि 1936 में सेवक राम जी से शिष्य बनते हैं। ज्ञान लेते हैं लेखराज जी। उसके बाद 1942 में दंगों में मारे जाते हैं सेवक राम जी। उसके बाद पांच साल उनकी जो दो पत्नियां थी जो बहन स्वरूप थी लेखराज जी की वो प्रवचन देती है मुरलियों का ज्ञान

00:46:14:14 देती है उसके बाद उनके भी जाने के बाद जो लेखराज जी हैं वो स्वयं मुरली सुनाने लगते हैं 1947 से मगर यह कहते हुए कि ये मुरली जो मैं सुना रहा हूं ये स्वयं शिव जी मुझको सुनवा मेरे शरीर में आकर के सुना रहे हैं ये जो है मैंने किसी से ज्ञान नहीं लिया है उसके बाद उसके बाद फिर फिर यह दोबारा कब आते हैं वीरेंद्र दीक्षित जी के रूप में कब आते हैं 1969 में 69 में ये मतलब कहीं पर जन्म हो चुका होगा मगर वो व्यस्क हो के आए होंगे लेखराज जी के पास वो जन्म वो जन्म बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी का वो जन्म हुआ अहमदगंज जो है जो यूपी में पड़ता है फर्रुखाबाद जिले में अहमदगंज में जन्म हुआ अच्छा तो वो वो जब जन्म ले 40 साल के हो गए तब यहां आए होंगे लेखराज जी के पास हां जी हां जी तो उसकी जीवन कहानी है पूरी बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी की जब 40 साल के करीब है

00:47:11:18 उसके बाद आदि पुरुष को टॉपिक ले आए उसके बाद उसके बाद वो इनकी शरण में आ गए मतलब एक घमंड तोड़ने के लिए एक लीला के रूप में आ गए इनकी शरण में उस समय उस समय के लिए नहीं कहेंगे उस समय के लिए नहीं कहेंगे 1969 में जब आए हैं तो उस समय 76 तक तो 76 तक तो शिष्य के रूप में ही रहे सनत कुमार के रूप में ही रहे 1969 में आए आए। अब यहां समझो एक सेकंड की बात है समझने का। 1969 में आ गए। हां। आकर के वहां सात दिन का कोर्स ले लिया। ठीक है। जिस माता से कोर्स लिया ये वही माता कोर्स करवा रही है जो सेवक राम की पत्नी थी। अभी भी जी। वो भी तो दोबारा जन्म ले आ गई ना। कुछ सालों के बाद उसने भी शरीर छोड़ दिया। वो दोनों पत्नियां जो एक चीज करिएगा जब किसी का शरीर जन्म जब किसी का शरीर छोड़ना हो दूसरा शरीर धारण करना हो तो आप इसको कहते चलिएगा क्योंकि आपकी जब आप बिना ये बताए कि जन्मांतर हो चुका है ये बताए आगे बढ़ते हैं तो समझ नहीं पाता हूं समझ रहे हैं ये चीज बताते चलिएगा कि अब जो वो स्त्री थी वो दूसरा जन्म ले आ चुकी थी जी अब जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जब ब्रह्मा कुमारी में पहुंचा

00:48:28:26 हां ज्ञान लेने के लिए जब ज्ञान लेने के लिए पहुंचा तो यज्ञ के आदि में जो दो माताएं थी जो आपने देखा ना पांच साल तो उन्होंने मुरलियां चलाई दो पत्नियां थी ना सेवक राम की समझ गया वो पत्नियां वो पत्नियों में से कोई एक ही जन्मांतर भेद से दोबारा आ चुकी है अब वो जो है इनको सेवक राम का जो दूसरा जन्म है जिसमें वो सनद कुमार की भूमिका निभा रहे हैं अब वो उनको ज्ञान दे रही है अब वो ज्ञान दे रही है बहुत अच्छे बहुत अच्छी आत्मा है आप एक सेकंड में बात को पकड़ते हैं और उनका नाम है वेदांती। हम अच्छा समझ गए आप? उनका नाम है वेदांती जो माता जी थी। जी। अब उनका नाम है वेदती। वो बहन कहते हैं। हमको वेदती माता कहते हैं। और हमारी मान्यता है यही भारत माता है। यही लक्ष्मी। ठीक है। अब इससे आगे चलते हैं। फिर 1976 से यहां से यहां से समझो बात को। ज्ञान ले लिया बाबा ने। ज्ञान नहीं ज्ञान लेने का ड्रामा किया। ज्ञान तो था ही ना नहीं नहीं लेकिन सब गुप्त रहता है ना प्रत्यक्ष नहीं करते भगवान अपने लीला की वो तो स्वयं शिव थे ना लेकिन यहां 1969 से 76 तक का पांच साल का नहीं थोड़ा सा जानोगे

00:49:47:18 1976 में अलग आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय शुरू हुआ 1976 में अलग से हां नहीं तो उन्होंने माताजी से ज्ञान लेने का ड्रामा किया कि रियल रियल में अभी उसको प्रैक्टिकल में समझो जो कुछ हुआ प्रैक्टिकल में हुआ उस बात को अलग छोड़ दो अभी आप भी तो ड्रामा ही तो है वो लीला है एक तरीके से ईश्वर की हां वो लीला है वो लीला है उस प्रभु की लीला है वो तो ज्ञानी थे ही स्वयं से है ना वो तो इस वो तो जानन जानन ही हार है अब 1976 वाला जो मामला आ जाता है वहां से उन्होंने अपना विश्वविद्यालय शुरू कर लिया क्यों शुरू किया क्योंकि उन्होंने ये बताया कि भाई ये लेखराज जी जो है इनके अंदर नहीं आते थे कोई इनके के पास जो ज्ञान था मैंने दिया था इनको सेवक राम जी के रूप में सेवक राम जी के रूप में वो ज्ञान दिया था अब अब यहां से पांच साल की स्टोरी थोड़ा सा बता दूं एक थोड़ी सी अब अगर आप इजाजत दें तो 1969 से 76 तक का थोड़ा सा बता दे आपको कोई आवश्यकता नहीं हो वो तो फिर आगे चले हम लोग लेकिन आपके आपके नॉलेज के लिए जरूरी है आप एक बड़े बड़े शुद्ध आत्मा है आप बताइए बताइए 1969 में जब सात दिन का कोर्स कर लिया भठी कर ली तो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित इनकी मुरली ियों को काटने लगे कि तुम कुछ और कह रहे हो। मुरली कुछ और कह रही है। अच्छा

00:51:03:01 यहां से झगड़ा शुरू हुआ। झगड़े का कारण नहीं जानोगे? हां ये बताइए। ये बताइए। हां तो झगड़े का कारण तो यहां से शुरू हुआ ना? 73 से। 1969 से। अच्छा 69 कोर्स तो सात दिन का कोर्स है। कोर्स हो गया। बात को समझ गए। ज्यादा दिन तक उन्होंने वो शरण नहीं ली है। बस दो हफ्ते दो हफ्ते में ही बगावत कर बगावत कर दी कि मुरली का मुरली कुछ और कह रही है तुम कुछ और कह रहे हो अच्छा तो यहां से झगड़ा शुरू हो गया तो फिर बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के साथ इन्होंने जो किया उसका सेंटर आना बंद कर दिया धक्के मारे वो बेइज्जती की

00:51:47:18 अच्छा इसमें एक एक ट्विस्ट और है एक छोटा सा प्रश्न और है कि जब स्वयं परमात्मा ही है जो शिव बाबा स्वयं मतलब सर्वशक्तिमान ईश्वर तो वह धक्के मारे हैं और ये बेबस कैसे हो रहा है? वहां हत्या हो गई। उसकी दीवार में चुन दिया गया। यह क्या है? इसलिए इसलिए हो रहा है कि जो विधि विधान के अनुसार जो नियम कानून कायदा इस सृष्टि का बना है ईश्वरीय कानून कायदा है इस सृष्टि का। हां। सृष्टि चल रही है। ये ईश्वरीय कानून कायदे से चल रही है। और ईश्वरीय यानी यानी सृष्टि में जो नियम है वो ईश्वर ने बनाए हैं। ईश्वर ने बनाए और ईश माना शासनकर्ता वर माना श्रेष्ठ श्रेष्ठ जो इस दुनिया का शासन करता है उसने कानून कायदा बनाया सारा का सारा तो यानी कि वो जो अपने जो शासन कायदा कानून बनाया उसको फॉलो कर रहा है। उसको तोड़ता नहीं है। मैं भी वो कहता है गीता में भी कहता है ना कि मैं भी इसलिए कानून कायदे में बंधा हुआ हूं। मैं प्रकृति के नियम या कोई कानून कायदा नहीं तोड़ता हूं। मैं भी कानून कायदे में बंधा हुआ हूं। नहीं गीता में तो उन्होंने ये भी कहा है ना करतुम अकर्तुम अन्यथा करतुम मतलब करतुम अकर्तुम का मतलब क्या है? मतलब उन्होंने यह कहा है कि मैं यह भी कर सकता हूं। वो भी जो

00:53:02:19 नहीं करने वाली चीजें वो भी कर सकता हूं और और भी बहुत कुछ कर सब कुछ कर सकता हूं। लेकिन लेकिन वह किसी की कार्य में किसी के किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करते हैं। सब अपना जो कर्म करता है जो जैसा कर्म कर रहा है वैसा फल पाता है। नहीं करते नहीं है वो बात अलग है। वाली बात अलग है। यहां से यहां से नया एपिसोड ये शुरू होता है। सनत कुमार के रूप में वो सनातन धर्म की स्थापना करने के लिए दर-दर घूमता है। कोई ज्ञान समझ लो, कोई ज्ञान समझ लो। बीके के यहां भी गया। लोगों के पास गया गलीगली में कि भाई मेरे पास ज्ञान है। मैं ज्ञान समझा सकता हूं। तो जैसे एक धर्म की स्थापना करनी चाहिए। धर्म स्थापना के लिए जो है वो दरदर जाते हैं। जैसे एक धर्म पिता धर्म की स्थापना करती तो सनत कुमार के रूप में वो सनातन सनातन सत्य सनातन धर्म की स्थापना करते हैं। और यहां से आपको एक सिर्फ एक मिनट आप मुझे सुनेंगे। सत्य सनातन धर्म कहा जाता है। अनादि अनादि सत्य सनातन देवी देवता स्क्रीन है ना शायद आपका फोन गरम हो गया है। आपकी स्क्रीन शायद जो है ना चिपक रही है। अब मतलब आपके वीडियो आपका रुक गया है। फ्रीज हो गया है। ठीक है। फोन आपका गरम तो

00:54:17:22 नहीं हो गया? नहीं फोन गरम नहीं हुआ है। मे बी नेटवर्क प्रॉब्लम हो सकती है और बाकी कुछ भी। नहीं देखिए वाईफाई वगैरह कनेक्ट कर लीजिए। ये है पूरी कहानी वीरेंद्र देव दीक्षित जी की और जो है लेखराज जी की। ओके। आवाज आ रही है अभी भी? हां आवाज आ रही है। मगर आपका जो वो है ना क्या कहते हैं? अ स्पेस मूवमेंट वगैरह वो हां अब ठीक है। ठीक है। चलिए। अब चल रहा है। हां अब चल रहा है। अब जैसे सनत कुमार हो गया ना ये सनत कुमार के रूप में सत्य सनातन धर्म की स्थापना के लिए निकलता है। इन्होंने तो धक्के मार के निकाल दिया बाबा को वहां से। हां हां उसके बाद ये सत्य सनातन धर्म की स्थापना के लिए चलता है। तो हम सनातनियों को ये समझना चाहिए कि हमारा धर्म अनादि है तो हमारा धर्म पिता भी अनादि है। हम हम ये बात मुझे दुनिया को समझानी है। अब आप निमित्त बनो। कौन सहयोग करेगा? कोई ना कोई तो अच्छे लोग आवेंगे सामने। अब मतलब वो 76 से फिर चालू कर देते हैं अपना आध्यात्मिक विश्वविद्यालय। जी आध्यात्म पहले नाम रखा प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय नाम रखा

00:55:32:28 पहले उन्होंने। अच्छा ये तो बाद का नाम आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय बाद का नाम है। पहले नाम था प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय। अच्छा जी। और फिर बाद में उन्होंने क्या रखा है नाम? आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय। आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय तो अभी जो ये आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम से चल रहे हैं वो अलग है। जी वो बिल्कुल वो अपने आप को सूर्यवंशी कहो या रुद्राक्ष कहो क्योंकि सत्य सनातन धर्म देवी देवता धर्म है ना एक जगह यानी कि बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित तो जो आध्यात्मिक ईश्वर विश्वविद्यालय वो अपन को कहता है सूर्यवंशी और ब्रह्मा कुमारियों को समझते हैं चंद्रवंशी और चंद्रवंशी और सूर्यवंशी मिलकर के नर से नारायण नारी से लक्ष्मी बनने का ज्ञान दिया जाता है। यानी अभी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के रूप में ख्यापित हो रहा है। जैसे अभी दिल्ली में भी हम गए वहां पे कोई अमोल कोकने है जी उसके उसके अंडर में जो है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय चल रहा है किसने कहा ये किसने कहा आपको कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय चल रहा है नहीं वहां बोर्ड लगा हुआ है और वो अपने आप को वीरेंद्र से का अनुयाय मानते हैं।

00:56:48:16 क्या अनुयाय मानते हैं वो एक अलग बात है लेकिन ये तो नहीं कह सकते ना कि आध्यात्मिक ईश्वरी विश्वविद्यालय चला रहे हैं। नहीं वो यह कह रहे हैं कि हम जो है उनहीं का सेंटर चला रहे हैं। आध्यात्मिक नहीं अब मैं कहने लगू मैं उनका मैं उनकी गद्दी पे बैठा हूं। ऐसा नहीं होता है। भगवान भगवान होता है। सब भगवान नहीं हो सकते। मतलब अमोल कोकने जी का यह दावा गलत है। ये सब साहब गलत है। सब अपनी मनमत कर रहे हैं। अच्छा ठीक है। अब वापस आ जाते हैं। अब यहां पे एक दिक्कत ये आती है कि जैसे इन्होंने कहा कि भाई मुरली जो है मैंने ही दी थी और जो मुरली का सही अर्थ है वो मैं बता रहा हूं। तो यहां पे एक दिक्कत है कि अगर वो मुरली का सही अर्थ बता रहे हैं। यहां पे मैं आपको एक बात और बता दूं। भगवान अपने को कभी भगवान नहीं कहता है। जो सत्य है वह अपने को सत्य नहीं कहता है। सत्य स्वयं स्वयं प्रकाशित होता है। यानी कि बाद में ये 40 50 साल ज्ञान लेने के बाद वो अपने को भगवान भगवान कह रहे हैं ना वो मैं ही हूं सनातन बीज। गीता में कहता हूं मैं ही हूं सनातन बीज। एक बात बताइए अब नाम क्या अकेला सनत कुमार है? क्या अकेला महादेव है? राम कहो, हनुमान कहो, महादेव कहो, शिव कहो, शंकर कहो, नाम तो उसके हजारों हैं। नहीं

00:58:03:18 नहीं मेरा जो प्रश्न है वह अलग है। मैं यह कह रहा हूं कि क्या कहते हैं ये जो उन्होंने जो मुरली के नाम से यह बताना चालू किया कि भाई जो मुरली के नाम मुरली जो आ रही है वो सही है। लेखराज जी अच्छा लेखराज जी की मृत्यु हो चुकी है क्या? अभी 76 से पहले मतलब 76 में 1969 में 1969 में हो गई ना? 18 जनवरी 1969 को तो इन्होंने जो ज्ञान लिया था लेखराज से डायरेक्ट नहीं लिया था। उनकी वो जो वहां पर सेविका थी जो उनका जन्मांतर थी। हां तो यहां डायरेक्ट ज्ञान कोई नहीं लेता है। मधुबन में जो बहने बैठी है उन्हीं से लिया जाता है। नियमित बहनों से लिया जाता है। समझ गए समझ गए समझ गए समझ गए। तो कुल मिलाकर के इन्होंने ये कहा 76 में कि जो लेखराज जी ने जो मुरली दी है शिव बाबा के द्वारा उसका देखो उन्होंने मैं बता रहा हूं। भाई साहब मैं बता रहा हूं। सुन लीजिए। दो बातें उन्होंने कही दो क्लेम किए। एक तो शिव बाबा ने मुरली नहीं सुनाई। वह मुरली जो है जो है वह सेवक राम के रूप में मैंने ही सुनाई थी या भेद ये वाला बाद में खुला होगा कि इन्होंने ही सुनाई थी। हो सकता है। उन्होंने कहा ना हो। ये ये बात हम कह रहे हैं अपनी तरफ से। ये बात आपने अपनी खोज की है। उससे कह रहे हैं आप। जी जी। अच्छा ये ये उन्होंने नहीं कहा। बाबा

00:59:18:19 वीरेंद्र देव दीक्षित ने अपने को भगवान कभी नहीं कहा। ये तो हम कह रहे हैं कि वो भगवान है। वो सनद कुमार है। हमारे वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने अपने आप को भगवान कभी क्लेम नहीं किया। बिल्कुल कभी नहीं किया। ये तो हम अपनी रिसर्च से कह रहे हैं। आपकी रिसर्च है। तो वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने अपनी पहचान स्वयं के द्वारा क्या बताई थी? कि स्वम की पहचान यह बताई कि जो यह मुरली है इस मुरली का सही अर्थ नहीं निकला है। वो मंथन करके उस मंथन करके उसमें से भगवान की पहचान बता देते हैं। तो उन्होंने उन्होंने अपनी कुछ किसी प्रकार की कोई दिव्यता नहीं बताई थी। वो कुछ नहीं बताया। बिल्कुल एक साधारण पूर्ण जैसे गीता में बताया ना कि जड़मति शरद कुमार भी नहीं कहा था। कुछ नहीं कहा। ये तो हम अपनी रिसर्च बता रहे हैं। वो तो एक जस्ट मतलब आपने तीन चीजें बताई है। एक लेखराज जी की मान्यता क्या है और फिर उसके बाद वी देव दीक्षित जी की मान्यता क्या है और उसके बाद थोड़ी सी इत आपकी क्या मान्यता है? ये आप आप बता रहे हैं। जो कुछ मैं बता रहा हूं वो अपने अपना अपना आधार बता रहा हूं। जो मैंने अभी 12 साल उनको पढ़ा है समझा है। गीता ज्ञान भी लिया। यहां पे एक चीज और है कि उन्होंने अपनी पहचान कुछ और बताई है

01:00:33:22 और आप मानते कुछ और हो। इतने अंश में आप वीरेंद्र दीक्षित जी की बात के इत जाते हो। बिल्कुल एक एक बात मैंने उनकी समझी सुनी पूरा ज्ञान को समझा। बहुत बढ़िया। अब आता है एक पहला पॉइंट जो थोड़ा सा एक एक प्रश्न है क्योंकि वो क्या कहते हैं? विरुद्ध विरुद्ध में समझ लीजिए। पहला पॉइंट पहला प्रश्न है कि लेखराज जी की मुरली का ज्ञान सही से दे रहे हैं वीरेंद्र देव दीक्षित जी ठीक है तो अब देखो एक मिनट प्रश्न तो किया ही नहीं प्रश्न तो किया ही नहीं भाई साहब प्रश्न तो करने दीजिए तो प्रश्न ये है कि लेखराज जी की मुरली का सही अर्थ बता रहे हैं ये और उनका कहना है कि वो मुरली तो सही बता रहे हैं जो ईश्वर से ली गई है मतलब जो ईश्वर की बात है ईश्वर की बात क्या अच्छा इस एक मिनट यहां पे एक पॉइंट है आपका मानना है कि सेवक राम जी के रूप में उन्होंने ही ज्ञान दिया था लेखराज जी को ये आपका मानना है मगर लेखराज जी ने इस बारे में क्या कहा कि वो जो मुरली लिखवाते हैं वो कौन लिखवा रहा है इस बारे में क्या कहा वीरेंद्र जी वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने ये बताया कि शिव है शिव भगवान है मैं भगवान नहीं हूं शिव भगवान है

01:01:48:24 वो उसमें मेरे में भी मतलब वो राम और कृष्ण वाली आत्माओं में उन्होंने कैसे क्लेरिफाई किया बड़े चतुराई से क्लेरिफाई किया इस बात को बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने बड़ी चतुराई से क्लियर किया दो बार बोल रहे आप मेन बात बोलिए ना कि वो क्या मानते थे शिव जी ने ज्ञान दिया था लेखराज जी को कि नहीं दिया था वो ये मानते थे कि इसमें जो प्रवेश करके वो लिखवाते हैं ये लिखता है लेकिन समझ नहीं पा रहा है। अच्छा तो यह वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने क्लेम किया था कि क्या कहते हैं मतलब यह वो मानते थे कि शिव जी ने ही उनके अंदर घुस के ज्ञान दिया है तो अभी तो आप कह रहे थे कि वो नहीं मानते थे प्रवेश तुम अब आप कह रहे मानते थे प्रवेश तुम अरे भाई जी ये कह रहे हैं कि मानना एक अलग बात है लेकिन जो प्रैक्टिकल बात है यह कोई प्रवेश नहीं हम वो जो मैं पूछ रहा हूं उन्होंने कहा क्या था वो तो उन्होंने सीधी सी बात कही उन्होंने एक सीधी सी बात कही कि इसको मुरली का ना तो अर्थ समझ में आया लेकिन जो बच्चा बुद्धि है लिखता है और सुना देता है। मैं इस बारे में क्या कहा था कि शिवजी ने ज्ञान दिया है कि नहीं दिया है? घुस के दिया है कि बाहर से दिया है? शिवजी का अर्थ आप भी समझिए। पहले शिवजी को ही समझना पड़ेगा। बाबा जी

01:03:04:09 उन्होंने सेंटेंस कहा है। भाई साहब ऐसा है ना कि अभी अगर मैं अर्थ समझने लगूंगा तो जो हमारा मेन टॉपिक है वो रह जाएगा। उन्होंने कहा क्या था बस ये बता दीजिए। वह यह मान उन्होंने यह कहा उन्होंने एक मिनट भाई साहब एक मिनट उन्होंने उन्होंने उन्होंने यह कहा था कि शिवजी ने उनके अंदर प्रवेश करके ज्ञान दिया है या उन्होंने यह कहा था कि शिवजी वहां पर आते हैं और लिखवाते हैं। उन्होंने कहा था उन्होंने उन्होंने [गला साफ़ करने की आवाज़] ये कहा था कि शिव उसमें प्रवेश करता है। ज्ञान देता है। लेकिन ये समझ नहीं पा रहा है कि शिव प्रवेश करके ज्ञान दे रहा है। ये शिव है कौन? वो समझ नहीं पाया। मतलब उन्होंने यह कहा था ना कि शिवजी प्रवेश करते हैं लेखराज जी के अंदर। आप यह बात उनकी डिकोड आपने उनकी बात की है। आपने उनकी ये बात डिकोड कर ली है। कहा तो लेकिन उस बात का अर्थ दूसरा है। मैं मान रहा हूं। आपने उनकी बात को डिकोड कर लिया है। उनके इशारों को समझ लिया है। क्यों? मैंने बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के इशारे को समझ लिया कि बाबा क्या बात समझना चाहता है। मैं उस बात मैं मैं आपकी चीजों को क्लेम नहीं कर रहा हूं। मैं अभी उन्होंने कहा क्या था वो पूछ रहा हूं। तो उन्होंने छोटी सी बात कही। उन्होंने सीधा सा क्लेम किया

01:04:19:18 कि यह जो ज्ञान कहां से आ रहा है यह समझ ही नहीं पा रहा है। अरे भाई उन्होंने ये माना उन्होंने ये कहा ना अपनी वाणी के द्वारा ये कहा ना कि शिव जी प्रवेश करते हैं और मुरली लिखता है। मगर वो मुरली को समझ नहीं पा रहा है। यही ना? जी। हां। हां। ठीक है। अब अब आगे चलते हैं। अब आ जाते हैं वहां पर जब ये मुरली का सही अर्थ बता रहे हैं। वीरेंद्र देव दीक्षित जी। अब ये नहीं कह रहे कि मैं जो है भगवान हूं। यह नहीं कह रहे ना ही यह कह रहे हैं कि भगवान मेरे पास आते हैं। मेरे अंदर प्रवेश करते हैं और मैं लिखवाता हूं। है ना? जी जी। अच्छा अच्छा ये शुरू करने से पहले एक छोटा सा उत्तर और मतलब एक जानकारी और दे दीजिए। इस समय वीरेंद्र देव दीक्षित जी मतलब है शिव जी आपके हिसाब से और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के हिसाब से दोनों में से क्या बात है? मतलब अभी है राइट नाउ पृथ्वी पर। इस समय आध्यात्मिक ईश्वरी विश्वविद्यालय कह रहा है शरीर छोड़ गए। शरीर छोड़ गए। अच्छा तो वो जो वीरेंद्र वो शरीर का अंत कैसे हुआ ये भी तो बता रहा होगा। अब पूरी तो बात सुनो। हां। अब आध्यात्मिक हिशोरी विश्वविद्यालय कह रहा है कि वो शरीर छोड़ गए। हां। हां

01:05:35:13 लेकिन इस बात को मैं और मेरे पास कम से कम 100 150 ऐसे ₹1 के मानते बात अलग है ईश्वरीय विश्वविद्यालय क्या कह रहा है वो बता दो आप अभी उनकी भी दो मत है कोई दोनों मत एक मत नहीं है एक मत नहीं है आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय अच्छा दो मत है कोई प्रमाण प्रूफ नहीं कोई प्रमाण प्रूफ नहीं है कोई डेथ सर्टिफिकेट नहीं है मत क्या है भाई साहब मत क्या है कैसे मृत्यु हुई वो तो पता पता नहीं क्या-क्या कह रहे हैं लेकिन अभी फाइनल नहीं डेथ सर्टिफिकेट तो आवे पहले जो दो मत है वो दोनों मान रहे हैं मृत्यु हो गई हां नहीं एक मान रहा है एक मना कर रहा है एक मना कर रहा है आप क्या कर रहे हो आपका आप 200 लोगों का क्या कहना है हमारे लिए हमारे लिए तो वो महाकाल है वो कभी नहीं मर सकता अब जब तक युग परिवर्तन नहीं शरीर नहीं मर सकता या फिर वो परमात्मा जो शरीर शरीर मतलब शरीर धारण करता है महाकाल का मतलब क्या होता है महाकाल का मतलब होता है काल तो शरीर को ही खाता है ना हर जन्म में तो एक तरीके से वीरेंद्र देव दीक्षित जी कहीं पर है मगर अभी वो समाज के समक्ष नहीं है ऐसा है हां कहीं ना कहीं जहां भी है कहीं ना कहीं है वो शरीर नहीं छोड़ सकते अभी अच्छा ये आपकी मान्यता है वो शरीर में ही है और अभी शरीर

01:06:50:19 छोड़ नहीं सकते जैसे सेवक तो नहीं तो आप एक तरफ कह रहे हैं कि वो कभी वो नहीं हो सकता है मगर वहां पर सेवक राम जी का शरीर छोड़ना तो मान रहे हैं आप वहां छोड़ है लेकिन अब जो कल्प का अंत सामने खड़ा हुआ है। कल्प महाकाल वाली बात नहीं है। बात ये है कि कल्प का अंत है इसलिए शरीर नहीं छोड़ सकता। महाकाल वाली बात नहीं है। महाकाल तो शरीर छोड़ रहा है ना सेवक राम का। सेवक राम का शरीर तो छोड़ ही रहा है। उस चीज पे आपको समझना पड़ेगा। अभी उस चीज के लिए आप ज्ञान जाके समझिए प्रॉपर्ली। पहले आप कोर्स करिए आप भी अच्छे से पहले जाके समझिए पूरा का पूरा। अच्छा ठीक है। ठीक। अब यहां पे अब आपको तो आता है ना कोर्स। आपने तो किया है ना? बिल्कुल बहुत अच्छे से किया समझा जाना तभी आपके सामने बैठा हूं। पूरी दुनिया के सामने भी बैठूंगा। तो आप मुझे इसका जवाब नहीं देंगे जब आप यहां पे उनका शरीर छोड़ना स्वीकार नहीं कर रही ये कह के कि वो महाकाल है। तो वहां पे सेवक राम के रूप में शरीर छोड़ना स्वीकार क्यों कर रहे हैं? वहां भी तो वो महाकाल ही है। हां। तो महाकाल का मतलब आप हर जन्म में लगाओगे या अंतिम समय जब एटम मिाइलें फटेंग पूरा दुनिया का विनाश थाने। उस समय की बात है वो। कुल मिला के बात ये है कि क्योंकि यहां कल्प का अंत है इसलिए यहां पर महाकाल शरीर छोड़ के नहीं जाएगा वरना महाकाल अन्य जन्मों में अन्य शरीरों में जन्म शरीर छोड़ के जा सकता है।

01:08:05:22 है ना? जी ये बात पहले भी क्लियर हो गई है कि प्रकृति के नियम कानून कायदे नहीं छोड़ता। जो गायन है वो अब कल के अंत के समय का है। इस अंतिम समय का है। ठीक है भाई साहब मैं क्लियर हो गया। अब दूसरा प्रश्न आता है। अच्छा आपके हिसाब से वो कहीं पे हैं जो समाज के समक्ष प्रकट नहीं है। अभी समय आने पे वो आ जाएंगे। एक क्लेम ये कह रहे हैं कि वो शरीर छोड़ गए हैं तो जाहिर सी बात है वो ये कह रहे होंगे कि अब दूसरा शरीर आने वाला है या आ चुका होगा वो बता नहीं रहे होंगे ये क्या कहना है जो लोग जो लोग ये कह रहे हैं कि शरीर छोड़ गए उन लोगों का इस बारे में क्या कहना है कि वो जन्म ले चुका है दूसरा शरीर आ चुका है या नहीं आया है क्या है उनके अनुसार 2022 में शरीर छोड़ गया और तकरीबन तीन साल का हो गया होगा फिर अच्छा तो उन्होंने मान लिया ना कि आ चुका है वो हां तो कुछ लोग मान रहे हैं कुछ लोग मान रहे हैं कुछ मना कर रहे हैं। अच्छा तो और मैं भी मना करने वाला हूं। मैं भी से हूं कि नहीं छोड़ जो लोग जो लोग ये मान रहे हैं कि आ चुका है तो उन लोगों ने ये बताया कि कहां पे आ चुका है। नहीं कोई प्रूफ नहीं है। मृत्यु का सबूत उनके पास नहीं जन्म का नहीं कुछ भी नहीं है। साहब अफवाह हैं। ओके ओके ओके ठीक है। अब क्लियर हो गया। अब अब आते हैं वो जो एक तार्किक प्रश्न था वो ये था

01:09:21:06 कि जब लेखराज की दी गई लेखराज जी के द्वारा दी गई जो मुरलियां हैं वो उनका सही अर्थ बता रहे हैं कौन वीरेंद्र देव दीक्षित जी दीक्षित जिसके कारण उनको कपिल मुनि कहा जाता है जिसके कारण सांख्य कर रहा हूं आप मुझे बीच में काट देते मैं प्रश्न पूछ रहा हूं अभी पूरा तो होने दो लेकिन प्रश्न का उत्तर तो जो ज्ञान लिया उसके अनुसार देना पड़ेगा। तो आप जब मेरा प्रश्न सुन लो तब देना ना। हम प्रश्न बताओ पूरा। हां लेखराज जी के द्वारा दी गई जो मुरलियां हैं उनको डिकोड कर रहे हैं ये और इनका कहना है कि लेखराज जी ने मुरलियां तो ईश्वर से ली हुई दी है मगर जी। उनका अर्थ सही से नहीं किया। वो मैं कर रहा हूं। ठीक है? जी। और उनका यह भी कहना है कि मैं कोई दिव्य आत्मा नहीं हूं। जी साधारण पुरुष हूं मगर मैं सही ज्ञान दे रहा हूं। ठीक है? अब यहां ये दिक्कत आती है दीक्षित जी के द्वारा कहे गए कथन में कि क्या उन्हें सारी मुरलियां रटी हुई थी?

01:10:29:01 मुरलियों के लिए मुरलियों के लिए उनके पास स्त्रोत क्या है? स्त्रोत तो ले रहे हैं उन्हीं को किनको? लेखराज जी बिल्कुल। आधार यानी कि मुरली में मिलावट नहीं है। ये वो मानते थे। जी वेदव्यास वेद वाणी जो ब्रह्मा के मुख से निकली उसी का क्लेरिफिकेशन करते थे और कोई मिलावट नहीं करते थे उस बात की। नहीं नहीं मैं वो नहीं कह रहा। मैं ये कह रहा हूं कि अगर उनको ये वीरेंद्र दीक्षित जी को ब्रह ये लेखराज जी की मुरली पर विश्वास है तो उसके अर्थ पर विश्वास ना होना सिद्ध नहीं होता। और अगर विश्वास नहीं है अर्थ पर तो उनकी मुरली पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता। समझ रहे? जैसे मैं अगर एक बात भी गलत बोल सकता हूं तो मेरी किसी भी बात पर डाउट किया जा सकता है। फिर हम ये नहीं कह सकते ये जो है ईश्वर के द्वारा कहा गया वचन है। समझ रहे हैं? जैसे मैं कह रहा हूं कि मेरे पास ईश्वर आते हैं और वो लिखवाते हैं और आप मान रहे हो। मगर फिर आप कह रहे हो कि मैं दूसरी बात जो बोल रहा हूं। मैं दूसरी बात जो बोल रहा हूं वो मैं गलत बोल रहा हूं। अगर मैं गलत बोल सकता हूं तो मैं ये भी गलत बोल सकता हूं कि जो मुरली आ रही है वो ईश्वर ने दी है या फिर ये भी कर सकता हूं कि उसमें कुछ मुरलियां ईश्वर की दे दूं कुछ अपने मन की दे दूं तो या तो हमें मानना पड़ेगा लेखराज जी को

01:11:44:04 तो पूरा अन्यथा अधूरा तो इस संबंध में फिर कैसे माने क्या करें इस संबंध में इतना सा सार निकालो अब इस बात का कि ब्रह्मा के मुख से जो मुरली निकली है उस मुरली में भगवान का नाम रूप देश काल लिखा हुआ उस मुरली के अंदर जो कोई नहीं समझ पाया जो बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने निकाल के दे दिया। आप समझे नहीं मेरा प्रश्न क्या है? अगर उनको उनकी योग्यता पे या फिर मंसूबों पर डाउट है तो वो मुरली भी तो झूठी दे सकते हैं। अगर वो अर्थ अगर वो अर्थ गलत दे सकते हैं तो मुरली भी तो झूठी दे सकते हैं। झूठ लिख दो इसमें। एक बात एक बात पहले आप सुनो। तो मुरली झूठी है ना उसका क्लेरिफिकेशन झूठा है। दोनों चीजें सत्य है। लेखराज जी ने जो क्लेरिफिकेशन किया वो झूठा था ना। गलत था ना जो दादा लेखरा ने उन्होंने क्लेरिफिकेशन तो किया ही नहीं उन्होंने तो जो पढ़ी जो पढ़ के पढ़ के सुना दी उन बच्चों को तो बच्चे जो क्लेरिफिकेशन कर रहे हैं वो गलत है लेखराज गलत नहीं कर रहे बच्चे भी गलत नहीं कर रहे ना वो गलत कर रहे लेकिन उस मुरली का जो तंत्र निकलना चाहिए भगवान की पहचान वो नहीं हो पा रही जो आपकी जो स्क्रीन है वो फिर से पॉज हो गई है नेट खत्म हो गया शायद डलवा लीजिए नेट नेट पैक

01:12:59:10 डलवा दीजिए हम डलवा दे इधर से अभी क्या करें अभी एक मिनट दूसरे दोनों फोन का खत्म हो गया शायद ना हां तो आप नंबर बता दीजिए तो आशा करते हैं आप लोग सुन रहे होंगे क्योंकि यह जो हिस्ट्री है ना यह समझना बहुत आवश्यक है आगे यह जो संस्थाएं हैं इनसे बात करने के लिए और यह सब चीजें समझना आवश्यक था आप लोग भी देखें किस तरीके से क्या-क्या दावे किए जा रहे हैं। क्या-क्या कहा जा रहा है। और अगर 5 मिनट में भाई साहब वापस आ जाते हैं तो हम फिर आज ही कंटिन्यू करेंगे। नहीं तो फिर हम दोबारा कंटिन्यू कर लेंगे। जब अगली बार ये भाई साहब आएंगे।

01:13:46:07 जी जय श्री राम। संजय जी। जय श्री राम। शिवांशु जी। मैं आपको सुन रहा था अभी। आप तो हमारे लिए धर्म आप तो हमारे लिए धर्मराज का काम कर रहे हैं कि दूध का दूध और पानी का पानी दुनिया के सामने करने में बड़ा सहयोग करेंगे। अब तो बहुत अच्छा थोड़ा सा मुझे लगता है कि मेरी हां थोड़ा सा मुझे ऐसा लगता है कि मुझे विचारों को यथावत रखने में मतलब निपुणता शायद बहुत अच्छा रखा। नहीं धन्यवाद है। बहुत प्यारे से रखा। बहुत प्यारे से रखा। आप बात को समझ रहे हैं। हां एक संक्षिपकरण मैंने दे दिया। जी जी बहुत बहुत अच्छा दिया है और सबसे पहले तो आपके चैनल के जितने भी दर्शक हैं उन सभी को जय श्री राम हर हर महादेव जी और पहले एक छोटा सा संदेश दे दूं आपके चैनल के माध्यम से पूरी दुनिया को जो भी आपके दर्शक हैं आम भारतीय खास भारतीय एक एक शब्द की वैल्यू है जो हम बच्चों के मुख से निकलेगा क्योंकि सत्य सनातन धर्म की पुनरत्थान होता है। सत्य सनातन धर्म कभी खत्म नहीं होता है। तो पूरे भारतवासियों के लिए खुशी की बात बता रहा हूं कि हमारे धर्म का पुनरुत्थान करने के लिए यदा यदा ही धर्मस ग्लानि भवती भारत जब धर्म और कर्म की ग्लानी होती

01:15:01:10 है तो भगवान स्वयं अपना परिचय देते हैं आना एक अलग बात आना नहीं होता है परिचय देते हैं अपना मैं कौन हूं कैसा हूं किस स्वरूप में पार्ट बजा रहा हूं तो मेरे पूरे भारतवासियों को शिवशियों के चैनल के माध्यम से बहुत अच्छा ये कार्य कर रहे हैं इन भाई को भी प्रणाम करता हूं कि भगवान के प्रति इनकी की आस्था और विश्वास श्रद्धा वानम लभते ज्ञानम इनका श्रद्धा और विश्वास प्यार से देखो और हमारा उनका मिलन देखो कहां के बिछड़े कहां आ के मिले हैं इनका नाम ही है शिवान शिव शिव का अंश है इनके अंदर और ज्ञान की भगवान की जो जानकारी है वो भगवान के सिवाय कोई नहीं दे सकता क्योंकि भगवान कौन है कैसा है घरघर सत्यनारायण की कथा तो गाते हैं लेकिन जानते नहीं है मंदिर जाते हैं लेकिन उसकी जीवन कहानी नहीं जानते तो पूरी दुनिया को आपके चैनल के माध्यम से फिर एक बार बता दूं कि ब्रह्मा कुमारी और आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय में चार वर्ण और नौ कुड़ी के ब्राह्मण तैयार हो रहे हैं। यानी कि सृष्टि का नवनीकरण हो रहा है यहां। लेकिन जिसको जितना ज्ञान समझ में आता है वो उतनी कुड़ी का ब्राह्मण बनता है। बड़ी खुशी की बात है। नवनीकरण हो रहा है। जो इस दुनिया की मुख्य आत्माएं है यह पुरुषोत्तम संगम युग चल रहा है। यहां की ज्ञान

01:16:16:19 के अनुसार और मैं इस बात से सहमत हूं। और दोनों परिवारों का आपसी जो मतभेद नहीं है यह मतभेद यह है कि कम कुड़ी के ब्राह्मण ज्ञान की कमी है। ज्ञान तो पूरा भगवान ने दे दिया लेकिन समझने का फर्क पड़ता है। उस समझ के आधार पर सूर्य वंश, चंद्र वंश, इस्लामी बौद्ध ये सब यहीं से तैयार होता है। और वो सब आत्मा दुनिया में प्रत्यक्ष। अब हम थोड़ा सा मुख्य विषय की ओर आएंगे। तो हमने सब कुछ कर लिया था। एक जिज्ञासा वहां पर जागृत हुई थी। एक प्रश्न खड़ा हुआ था। जी जैसे आपका कहना है आप यह मानते हैं कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने यह माना था कि ब्रह्मा जी को मतलब ब्रह्मा लेखराज जी को है ना लेखराज जी को शिव जी ने आकर के मुरली दी और उन्होंने मुरली लिखी परंतु मुरली का अर्थ किसी को बताया नहीं बताया वह नहीं पता मगर अब जो मुरली का अर्थ बताया जा रहा है वह गलत बताया जा रहा है ना मुरली वीरेंद्र जी का कहना जी शिवांशु जी आज एक तो मैं आपसे प्रार्थना करूंगा कि जो क्वेश्चन पूछे हैं उसका जवाब हमें क्लेरिफाई करने दे क्योंकि भगवान का विषय है और

01:17:31:25 आप आप हमारे आप हमारे लिए आप हमारे लिए वो प्रदर्शक बन रहे हैं दुनिया के लिए अपने भारत के लिए सनातन धर्म के लिए आप बहुत अच्छा कार्य कर रहे हो जो आम दर्शक है हम इतने आसानी से बतावेंगे शिवशु भाई इतना प्यार से समझावेंगे कि आम आदमी को समझ में आवे तब तो फायदा है। इसलिए जो भी आप क्वेश्चन पूछे मुझे थोड़ा सा उसको थोड़ा सा उसको यूं बताने दे कि आम आदमी मगर मगर धारा में क्या होता है हम लोग कभी-कभी जब बोलना चालू करते हैं ना तो अपनी धारा में ऐसे बहते हैं कि जो मुख्य जिसका जवाब देना है वो तो आ नहीं पाया और हमने काफी देर तक कुछ कह दिया तो इस बात का आप थोड़ा ध्यान रखिएगा कि आप समझ लीजिए परंतु जो प्रश्न किया गया है उसका उत्तर उसमें आना अवश्य चाहिए है ना में आएगा। जी। सबसे पहला प्रश्न यही है कि वीरेंद्र दीक्षित जी जब यह दावा कर रहे हैं कि लेख जो मुरली है उनको जिनसे मिल रही है यानी कि पहले शिवजी से मिली लेखराज जी को फिर लेखराज जी से मिली। उनकी शिष्याओं को और उनकी शिष्याओं से मिली इनको क्या कहते हैं?

01:18:45:13 एक मिनट आप समझ शिव जी कौन? आप जो शिवजी शिवजी करते हैं पहले शिव जी को समझना चाहिए। मैं वो नहीं कह रहा हूं। मैं कह रहा हूं उनका जो क्लेम मैं [गला साफ़ करने की आवाज़] जो कह रहा हूं उनका क्लेम क्या है? मैं अभी इस तरफ अभी हम शिवजी को समझने पे आएंगे। वो एक अलग चैप्टर है। अभी हम इसमें है कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी जिससे मुरली ले रहे हैं। वीरेंद्र देव दीक्षित जी जिससे मुरली ले रहे हैं तो उसके अर्थ पर विश्वास क्यों नहीं है? और जिसका अर्थ नहीं ले रहे हैं। उसकी मुरली क्यों ले रहे हैं? ये बात ये मुझे थोड़ा सा क्लियर सीधा सा सीधा सा इसका जवाब सुनो आप इसका सीधा सा जवाब है कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी ही इस सृष्टि का आदि पुरुष है और वो उन मुरलियों का जो अर्थ ब्रह्मा बाबा नहीं समझ पाए दादा लेखराज जिसको हम कह रहे हैं वो नहीं समझा पाए कि इस सृष्टि का जो मालिक है जिसको आप शिवजी कह रहे हो वो कौन है तो वो बात वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने समझा दी इसलिए वो एग्री नहीं हो रहे हैं उसको काटते नहीं है मुरली को काटते नहीं है उसका अर्थ समझाते हैं। मैं वही मैं वही कह रहा हूं। उनके हिसाब से उनको जो मुरली मिली थी प्रैक्टिकली वो मिली थी लेखराज जी की जो शिष्याएं थी जिन जो उनको कोर्स करा रही थी। जी बिल्कुल जो लेखराज जी की लेखराज जी के द्वारा लिखी गई जो मुरलियां

01:20:00:21 थी वो मुरलियां वीरेंद्र देव दीक्षित जी को मिली थी। किससे? कि जो बीच की जो शिष्यां थी उन्होंने कहा ये मुरलियां है उनकी लेखराज जी ने जो लिखी है अब बात ये है कि अगर हम इनके द्वारा मिलने वाली मुरली पर विश्वास कर रहे हैं शिष्याओं के द्वारा शिष्याओं के द्वारा शिष्याओं शिष्याओं के द्वारा दिए गए अर्थ पर विश्वास नहीं है। अब अगर हमें उनके अर्थ पर विश्वास नहीं है उसके दो कारण हो सकते हैं। अर्थ पर विश्वास ना होने के दो कारण हो सकते हैं। एक कारण हो सकता है कि भाई हमें लग रहा हो कि ये जो है जानबूझ के किसी कारणवश लालच वश द्वेष वश भयवश ये जानबूझ के गलत अर्थ बता रही है या तो ये कारण हम मान सकते हैं हम या फिर अज्ञानता या फिर अज्ञानता या फिर अज्ञानता के इनको समझ में नहीं आ रहा है दोनों ही सूरतों में एक मिनट दोनों ही एक मिनट दोनों ही सूरतों में हम सामने वाले की द्वारा दी गई जो चीजें हैं उसमें डाउट कर रहे हैं। तो जब जब हमें अर्थ पर डाउट हो रहा है तो मुरली पर डाउट क्यों नहीं मुरली पर डाउट नहीं हो रहा है तो अर्थ पर डाउट क्यों यह बात आती है जैसे अगर हम किसी पर विश्वास करेंगे तो पूरा करेंगे

01:21:16:00 नहीं तो बिल्कुल नहीं करेंगे जी जी देखिए अब अर्थ जो समझाया गया वो अज्ञानता वश है और अज्ञानता होने के कारण यह नहीं समझ पाए कि ये ज्ञान कहां से आ रहा है ये ज्ञान दाता कौन है ये सबसे बड़ी अज्ञान इस ज्ञान की वो बात बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने उनहीं मुरलियों को क्लेरिफाई करके निकाल के बंद कर दिया। भाई साहब वो आगे की बात है कि उन्होंने फिर उनको डिकोड करके क्या बताया वो आगे की बात है। अगर वो अज्ञानी है। अगर वो अज्ञानी है तो वो मुरली को आप तक एज इट इज कैसे पहुंचा रहे हैं? और वो अज्ञानी है। जब वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने ये बताया कि तुमसे ये गलतियां हुई तो क्या उन्होंने माना कि वो अज्ञानी है? अगर नहीं माना तो उनकी नियत में भी खोट आ जाएगा। खोट मानना पड़ेगा। वो नियत अगर नहीं अगर मैं जैसे मैं सच मैं सच बता रहा हूं आपको। आपको खोल के दिखा दिया। प्रूफ के साथ बता दिया। फिर भी आप कह रहे हो नहीं मैं मैं सही बोल रहा हूं। तो वहां पे उनकी नियत में भी खोट आ गया। तो जिसकी नियत में खोट है। जिसकी नियत में खोट है वो आपको गलत मुरलियां क्यों नहीं दे सकता? बात ये देखिए अब नियत में खोट स्पष्ट नजर

01:22:31:06 आ रहा है। कैसे कि आज भी भगवान को न समझने के कारण आराम से मधुबन खुल रहे हैं। जोनल इंचार्ज बन रहे बैठे हैं। लेकिन दुनिया के सामने 90 साल में ये क्लियर नहीं हुआ कि वास्तविकता क्या है इस ज्ञान की। सच्चाई में वो भगवान मैं समझ गया। उनकी नियत में हमें खोट है। अब नियत में यदि खोट है तो आपको नियत में यदि खोट है। हां नियत में यदि खोट है तो वो आपको मुरली सही क्यों देंगी? मुरली भी तो बदल सकती हैं। ये बात मुरलियां बदल मुरलियां बदल तो दी। 12 पेज की मुरली थी वो दो पेज की मुरली रह गई। 10 पेज गायब हो गए उससे। तो यानी नहीं जो दी भी है जो दो मुरलियां ये तो गायब की है मगर जो दी है जो मुरली दी है वो हो सकता है अपने मन से कुछ लिख दिया हो उसमें हां बिल्कुल सब कुछ सब कुछ बदल दिया उसमें से जैसे जैसे मैं आपको बताऊंगा किसी धर्म में लिखा है कि आप जीव हत्या करो बकरा काटो मुर्गा काटो जीव हत्या किसी धर्म में लिखा है उसी प्रकार से इन्होंने जो काम की बातें उसमें से हटा दी और मनमत मिक्स कर दिया इसमें अब तो फिर हम यह कैसे कह सकते हैं कि मुरली मुरली को ही अर्थ मुरली का ही अर्थ कर रहे हैं। हम ये कहेंगे कि हम तो अपने ज्ञान को दे

01:23:46:07 रहे हैं। हम ये क्यों कहेंगे लेखराज जी ने जो मुरली दी थी हम उसी का अर्थ कर रहे हैं। लेखराज जी ने जो मुरली दी थी उसी का मतलब हम ये नहीं कह सकते शिवशु जी आप सही कह रहे हैं। सही कह रहे हैं। एक बात जवाब देने दो। जो दादा लेखराज के मुख से जो ज्ञान निकला था उस ज्ञान का तो इन्होंने खत्म कर दिया। बिल्कुल अब तो मात्र दिखावा रह गया। पत्थर के शिवलिंग के साथ सात फेरे ले रहे हैं। डीजे बजा रहे हैं। अरे भगवान आया भगवान आया। मेरा मेरा कहने का मतलब मैं दूसरा विषय पूछ रहा हूं। वो सही कह रहे हैं आप। उन्होंने बदल दिया। तो फिर इसका मतलब हम यह माने कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने जो ज्ञान दिया वो मुरली का अर्थ नहीं बताया। अपने से बताया जो बताया लेकिन उस समय जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी के पास मुरली थी वो ओरिजिनल थी। जो ब्रह्मा के मुख से निकली थी। वो बात 1966 है। 2025 चल रहा है। वो कहां से आई थी? ब्रह्मा कुमारी से आई। ब्रह्मा कुमारी से आई। लेकिन उस समय फिर भी 101 पेज थे। आठ 10 पेज फिर भी बचे थे। मतलब थे ना वो ब्रह्मा कुमारी से जो आई थी वो लेखराज जी की शिष्याओं ने दी थी उन्हें। हां जी बिल्कुल चोरी चोरी करके दे दी। और उनकी नियत में खोट था। जी इस खोट को कैसे साबित करें?

01:25:02:04 मैं बता तो रहा हूं। खोट ऐसे ही साबित है कि जब वो अज्ञानी सिद्ध हो रहे हैं फिर भी नहीं मान रहे कि अज्ञानी है तो खोट है। जी है ना और जब उनकी नियत में मेरा मेरा कहने का अर्थ है जिसकी नियत में खोट है वो आपको लेखराज जी की मुरली जो भी दे रहा है वो 10 पेज दे रहा है 12 पेज दे रहा है जो भी दे रहा है वो ज्यों की त्यों क्यों देगा जी बिल्कुल लेकिन लेकिन जिस समय दी गई ना बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित को वो वेदांती माता ने दी जिसके कारण वेदांती माता उस समय अहमदाबाद में थी आज वो साउथ अफ्रीका उनको बैठा दिया गया है यानी कि वो भारत माता है। यह हम बता रहे हैं अपनी तरफ से। वो ठीक है।

01:25:44:19 पूरा जी वही तो लक्ष्मी है। अरे वही तो लक्ष्मी है। शिवांशु वही लक्ष्मी है हमारी भारत माता है। मेरा मेरा आप नाम शिवश लीजिए। शिवशु नहीं शिवश जी शिवशु के सामने रखना पड़ेगा। मेरी बुद्धि बाबा की तरफ चली जाती है। बोलते हैं ना बाबा है कि जो माता जी थी उन पर वीरेंद्र देव दीक्षित जी को पूरा विश्वास था। अरे बिल्कुल 100% वो लक्ष्मी है वर तो वर शंभू वर वर कुंवारी तो तो जब उनप उन्हें पूरा विश्वास था फिर उनके द्वारा दिए गए अर्थ पर विश्वास क्यों नहीं हुआ? माताजी को हो गया।

01:26:24:24 उन माताजी को विश्वास हो गया था। क्या? जो वेदांती माता है बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जो सुना रहे थे उसके ऊपर वेदांती माता को विश्वास हो गया था कि हां ये सही कह रहे हैं और उसी विश्वास के कारण हम सब ब्रह्मा कुमारी से ही तो आध्यात्मिक ईश्वर विश्वविद्यालय में आए हैं। हमने हम सब ने ब्रह्मा कुमारी माता दीक्षित वो भी मतलब वो भी जानते हैं हम मतलब जो वेदांती माता थी उन्होंने ही लेखराज जी की मुरली इनको दी वीरेंद्र देव दीक्षित जी को अरे महाराज आप कहीं आप क्या बात है आप में बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी प्रवेश कर गए क्या एक एक सच्चाई को जानते हो आप थोड़ा सा थोड़ा सा इधरउधर की ओर सरकाज्म या फिर विनोद इससे बचे जिससे कि हमारा जो गंभीरता है ना विषय की वो बनी रहे है ना बार-बार आपने एक बार मेरी तारीफ कर दी मैं आपका स्वागत करता हूं मगर बार-बार हमारी जो गंभीरता है ना वो धारा प्रवाह वो टूटेगा अगर हम दूसरी चीजें करेंगे तो तो वेदांत माता ने वेदांती माता ने ओरिजिनल स्ट्रोक रखा हुआ था माता जी ने वो मुरलियों का स्ट्रोक बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित को दे दिया जिसकी उनको सजा मिली

01:27:39:25 उनको अहमदाबाद से निकाल दिया गया वेदती माता [गला साफ़ करने की आवाज़] अब वो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के साथ है या बीके के ही साथ है? बिल्कुल नहीं अभी भी साथ है और बड़ी बिल्कुल बहुत आज भी किसके साथ ब्रह्मा कुमारी के साथ ब्रह्मा कुमारी के साथ तो इसका मतलब उन्होंने ये इनका वीरेंद्र देव दीक्षित जी का ज्ञान नहीं माना ना ज्ञान माना लेकिन बाहर नहीं आए वही बैठे रहे वही तो राजा दक्ष की पुत्री है तो बात ये है ज्ञान यदि माना भाई साहब देखिए ये आप ये आप कह रहे हो ये आपका क्लेम है उन्होंने तो नहीं कहा ना कि मैंने ज्ञान मान लिया शिव शिव शिवशं ठीक है ना एक बार नाम शिवशी बोलो ना आपको शिवश जी शिवश जी इतिहास गवाह है हम मेरो जान सदा शिव जोगी अज अनद अकाम अभोगी ये किसने कहा है किसने कहा है ये डायलॉग किसका है किसने कहा भक्ति मार्ग आप भी जानते हैं मैं भी जानता हूं किसने कहा है ये डायलॉग आप बताइए ना आप बताइए ये डायलॉग लक्ष्मी माता वरू तो वरु शू वरू लक्ष्मी माता ने कहा है ये अब ये गुप्त ज्ञान है। गुप्त रहस्य जो सामने आकर के खुलेगा। तो अभी इस बात को आप मैं अपनी तरफ से खोल रहा हूं कि मैं दुनिया

01:28:55:01 के सामने छाती ठोक के कह रहा हूं कि वो भारत माता है और बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित है। देखिए भाई साहब अभी हम मैं आपकी क्लेम पे भी आऊंगा। जो जो आप क्लेम कर रहे हैं ना मैं आऊंगा उन पे। अभी थोड़ी सी तार्किक रूप से हम लोग यह समझने का प्रयास कर रहे हैं। आपका कहना है कि वो वहां पर बीके के साथ अभी भी है। मगर वो झूठ बोल रही हैं। मन से वो आध्यात्मिक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के ज्ञान को ही मानती है। बंदर से बिल्कुल मानती है और वहां से 16,000 और भी उसके साथ इस बात का प्रमाण क्या माने? मुरलियां अब जो दादा लेखराज ने गुलजार दादी के तन में जो अव्यक्त वाणी बोली वो सबूत है उसमें बहुत देखिए हां जी मैं बताऊं जो माता जी हैं वो कह रही है कि नहीं बी के सही है आप कह रहे हो कि वो ये मानती है कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय सही है। ठीक है? इसका मतलब माता जी इसका मतलब माताजी किसी कारणवश झूठ बोल रही हैं। बोल रही है ना? झूठ नहीं बोल रही है। हां बिल्कुल कुछ समय के लिए बोल रही है। कुछ समय के लिए किसी कारणवश झूठ बोल रही है। जो व्यक्ति जरा सा भी झूठ बोल सकता है उसको हम अपने धर्म का प्रमाण कैसे मान सकते हैं? जो व्यक्ति जरा

01:30:10:09 सा भी झूठ मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं इसलिए कि हम मुरलियां लेखराज जी की किससे ले रहे हैं? माता जी से और माता जी तो झूठी है। तो जब वो यहां झूठ बोल सकती हैं एक मिनट। माता जी जब एक बार भी झूठ बोल सकती है तो मुनियों में भी मिलावट कर सकती है। जी एक मिनट अब आप सुनो अब आपको सुनना चाहिए। देखिए हम उनको झूठा नहीं कह सकते और आप आपसे मैं कल भी रिक्वेस्ट किया था आज भी करता हूं। एक बार हमारा चाहे बीके का सुनो चाहे पीके का ज्ञान एक ही है। बात है उसके लेवल को उठाने की गहराई से समझने की। दूसरी बात माता जी है जो नर से नारी नर से नारायण नारी से लक्ष्मी वह अपना रोल अदा कर रही है नारियों को लक्ष्मी बनाने की शिक्षा दे रही है चुपचाप इधर से बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी नर से नारायण बनाने का ज्ञान दे रहे हैं सत्य सनातन धर्म की प्रवृत्ति मार्ग की स्थापना हो रही है तो इसलिए उनको झूठा मत कहो आप ये अंदर की बात है आप ही कह रहे हो अब आप ये कह सकते हो अभी आप ये कहो कि हम उस बात को जैसे वो जस्टिफाई करनी चाहिए ऐसे तो नहीं करेंगे। कोर्ट कचहरी तक का बहुत लंबा मैटर है। अभी नहीं नहीं आप ही तो कह रहे हो कि वह मन से आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के साथ है मगर

01:31:25:10 तन से बीके के साथ है। अरे इसका मतलब झूठ बोल रही है ना वो तो इतिहास गवाह है। वो जन्म जन्मांतर उसी के साथ है। नहीं तो मिथ्याचारी सिद्ध हो रही है ना उसी के साथ रहती है। अरे भाई शरीर आप शरीर का मिलन देख रहे हैं। आत्म ज्ञान दिया जाता है। आत्मा का ज्ञान है। वो हमारे लिए आप कह रहे हो ना वो तो नहीं कह रही ना कि उनका आत्मज्ञान क्या है? नहीं ना आप शरीर को देख रहे हो ना मुझे सुनिए तो मुझे जैसे प्यास लग रही है मैं कहूं भाई मुझे प्यास लग रही है आप कहोगे नहीं नहीं इसको तो भूख लग रही है तो किसकी बात मानी जाएगी बात अब हाल आत्म ज्ञान दिया जाता है या आत्मज्ञान की बात करिए आप शरीरों को मत देखिए आत्मा को देखिए मैं शरीर की बात नहीं कर रहा हूं वहां पर वो अपना आत्मज्ञान यही कह रही मेरा आत्मज्ञान बीके के साथ है आप कह रहे हो आपके साथ है। एक आप यहां बैठे हो यहां बैठ के किसी को याद कर सकते हो कि नहीं जिसको जानते हो कर सकते हैं। कर सकते हैं। कर सकते हैं। तो वो वहां बैठकर के याद नहीं कर सकते मन बुद्धि से क्या तो उन्होंने ऐसा कहा है कि मैं आध्यात्मिक विश्वविद्यालय को याद करती हूं। मैं उसी की हूं। ऐसा कहा है उन्होंने? एक बात बताइए। कहना जरूरी है क्या? सारी बात दुनिया को दिखाना जरूरी है। जब आपने मुझसे पूछा था जब आपने मुझसे पूछा

01:32:40:16 था कि आप याद कर सकते हो क्या उसमें मेरा कहना या इशारा करना जरूरी था ना? आपको कैसे पता चलता मैं याद कर सकता हूं? एक मिनट आपको कैसे पता चलता है कि मैं याद कर सकता हूं कि नहीं? आपको मेरा इशारा मेरा कहना जरूरी था ना। आपको कैसे पता चलेगा मैं याद कर रहा हूं कि नहीं कर रहा हूं। इसलिए कहेंगे कि ब्रह्मा बाबा शरीर छोड़ने के बाद गुलजार दादी में प्रवेश करता है। ठीक है और प्रवेश करके कहता है प्रवेश करके कहता है कि के क्या करो वैजंती माला विजय माला का आह्वान करो एक डायलॉग दिया गया था ब्रह्मा बाबा के द्वारा विजय माला का मतलब जो तुम्हें विजय पहनाएगी इस ज्ञान का पूरा तंत्र निकाल देगी भारत माता शिव शक्ति अवतारा अंत का यही नारा है तो ये वाक्य दादा लेखराज के द्वारा बोला गया गुलजार दादी के तन से ठीक है तो तो वहां यहां से हमें फिर इशारा मिल गया कि उसका आह्वान करो वो आवेगी तो प्रवृत्ति मार्ग का धर्म स्थापन हो रहा है तो सूर्यवंश और चंद्र वंश दोनों मिलकर के एक हो तो राजधानी स्थापन इशारों पे इशारों पे सुनिश्चितता नहीं होती है कांटे की नोक पे होती है देखिए सुनिए धर्म धर्म सुनिए जो सुनिए तो धर्म का जो बात होती

01:33:55:18 है धर्म की बात होती है वो ऐसे इशारों पे नहीं होती इशारों पे हमने तय कर लिया इशारा है बस इशारा उसमें प्रमाण भी होता है अब जब हम किसी को ये कह रहे कि इसने हमको मुरली दी ज्यों की त्यों। फिर हम यह कह रहे हैं कि यह अपने मन की बात नहीं बता रही है ज की त्यों। तो इसका मतलब फिर उस पर हम विश्वास नहीं कर सकते। उसने मिलावट कर दी हो मुरली में या फिर आपको चीजें प्रोवाइड कराने में मिलावट कर दी हो। ये एक चीज बची रह रही है। बस इसमें अंत में थोड़ा सा बात करेंगे। फिर हम आगे बढ़ते हैं। इसके लिए मैं आपके चैनल के माध्यम से आपको भी और पूरे भारतवासियों को और जो भी सुन रहे हैं जो धर्म प्रेमी हैं उनको कहूंगा कि जाकर के एक बार हमारे विश्वविद्यालय में जावे चाहे कोई से भी चले जाए दोनों हमारे जाकर के एक बार कोर्स करें अच्छे से समझे एक एक बात समझ में आ जाएगी। आत्मज्ञान दिया जाएगा। आपको मैं कहूं कि आपकी पूरी धारणा झूठी है और मैं कहूं कि आप जो है हमारे क्या कहते हैं बहुत सारे आचार्य हैं वैष्णवाचार्य हैं शंकराचार्य हैं इनके आचार्यों के मठ हैं। आप एक काम करिए आपकी पूरी जो चीजें हैं वो सब झूठी है। पाखंड है और आप जाइए इनमें जाकर के और जाके आप जो है एक एक घंटे के प्रवचन सुन लीजिए बस तो चलेगा। हां बिल्कुल जाना पड़ेगा। कोई चीज की गहराई

01:35:10:26 में तो जाना पड़ेगा। जानना चाहते तो फिर अभी कोई बात करने का मतलब ही नहीं है। दोनों जाएंगे अब हां तो जाना चाहिए सबको तो फिर तो फिर हमें चर्चा ही नहीं करनी चाहिए उस हिसाब से ओपन चैलेंज भी नहीं करना चाहिए जब तक आप वहां जाकर के ज्ञान नहीं लेंगे तो आप भी जो क्वेश्चन पूछोगे उसका आंसर आपको कैसे पता चलेगा कि आप सही ले रहे हैं अरे आपने लिया है ना जहां आप मुझे भेज रहे हो वहां का ज्ञान आपने लिया है सुनिए विश्वास देखिए जो चर्चा होती है वो चर्चा इसलिए होती है आपने आप मुझे जहां भेज रहे हो वहां का ज्ञान आपने लिया है। मैं आपको जहां भेज रहा हूं वहां का ज्ञान मैंने लिया है। तो सुनिए मेरी चीजों के लिए जो क्वेश्चन आपके मन में आएंगे उनका जवाब मैं दूंगा। आपकी चीजों के लिए जो जो क्वेश्चन मेरे मन में आएंगे उनका जवाब आप देंगे। अब जब मैं क्वेश्चन पूछूंगा तो आप ये कह देंगे जाओ मेरा कोर्स करके आओ। ये ठीक नहीं है। ये तार्किक नहीं है यहां पे। हम तार्किक आपके ज्ञान में और हमारे ज्ञान में अंतर है। हम ये भी ज्ञान है सुनिए ये भी एक तर्क है। ये भी एक तर्क है। ये भी एक तर्क है। तो जब आप तर्क मानना ही नहीं है तो फिर कोई भी तर्क नहीं मानेंगे। फिर बिल्कुल भी नहीं। इस दुनिया का तर्क जो है इस दुनिया में जो ढाई हजार साल से आप

01:36:25:27 वेस्ट ही तर्क बोल रहे हैं। चलिए कह रहा हूं। आगे चलते हैं। अब कहने का मतलब यह है यहां पे इस बात से बात काम नहीं चलेगा कि आप हमारा कोर्स कर लीजिए। जहां पे भी प्रश्न का उत्तर ना हो उसका यह जवाब नहीं चलेगा कि आप कोर्स कर लीजिए। आप कह दीजिए भाई इस पर हम इतना ही बता सकते हैं। फिर हम आगे चलते हैं। चौथी बात है ना कोर्स अगर करना ही है फिर हम आपसे बात ही क्या कर रहे हैं। हमें तो कोर्स ही करना है क्योंकि हर सवाल के जवाब में यही मिलेगा। दूसरी बात आपने दूसरी दूसरी बात आपने तो कोर्स किया है। सुनिए तो भगवान के ज्ञान सवाल का जवाब दिया गया आपने तो कोर्स किया है तो फिर आप जवाब 12 साल लगाए मेरे तो 12 कोर्स करने भेज रहे हो ना हां तो 12 साल मैंने लगाए तो आप भी मेरे पे विश्वास करो ना मैं जो कह रहा हूं अपने अनुभव के आधार पर विश्वास की नहीं बात पूछ रहा हूं मेरे मन में जो जिज्ञासा आ रही है वो पूछ रहा हूं मैं ऐसे तो मैं आपको बता दूं ढाई हजार साल की परंपरा है आपने 12 साल लगाए हैं सुनिए जो आचार्य है ढाई ढाई हजार साल परंपरा है और एज इट इज वही ज्ञान चल रहा है। आप फिर उन पर विश्वास कर लो। कहने का मतलब है मेरा कहने का मतलब है ऐसे काम नहीं चलेगा

01:37:41:06 कि आप कोर्स करके आइए। आपके पास जवाब नहीं है तो आप कह दो भैया मैं इतना ही बोल सकता हूं। अगला विषय चलाइए। ना ना ना बिल्कुल गलत बात। गलत बात है। गलत बात नहीं। आपके पास जवाब है तो आप मुझे कोर्स करने क्यों भेज रहे जवाब जवाब पिछले ढाई हजार साल से जो आप बता रहे हो साल जवाब है तो कोर्स की बात क्यों करते हैं आप मुझसे के कोर्स करने चले जाओ कोर्स तो करना पड़ेगा अगर आपको भगवान से जवाब है करना चाहते हैं भाई साहब जवाब है कि नहीं आपके पास हर चीज का जवाब ऐसी कोई बात ही नहीं है सृष्टि की जो भगवान जवाब ना फिर आप क्यों कह रहे हैं कि आप कोर्स करो इसका जवाब आपको वहां मिलेगा करना जरूरी है क्योंकि आपके पास जो ज्ञान है मैं पूछ रहा हूं अगर मेरे मेरे प्रश्न का जवाब आपके पास है तो मुझे दूसरी जगह क्यों भेज रहे हो? हर प्रश्न का जवाब है लेकिन आपका क्वेश्चन ठीक नहीं है। अच्छा और ये कहां लिखा है? कौन सा क्वेश्चन ठीक है? कौन सा क्वेश्चन ठीक नहीं है? ये मुरली में है। ये मुरली में लिखा हुआ है। कहां लिखा है? बताइए। कौन सी एक मिनट सुनो। भगवान आते हैं तो आत्मा का ज्ञान देते हैं। परमात्मा की जानकारी देते हैं। भाई साहब कोई भी जो कोई भी जो चीज है कोई भी जो चीज है ज्ञान जो शुरू होगा वो व्यवहार से ही तो शुरू

01:38:56:07 होगा। आत्मा तक हम पहुंचेंगे जीभ से प्रश्न पूछेंगे कि नहीं? एक प्रश्न पूछेंगे। जब पूछेंगे जब किसी चीज के बारे में आपको बेसिक नॉलेज हो। आपको हमारे ज्ञान के बारे में बेसिक नॉलेज भी नहीं है। नहीं आप आप नहीं तो बेसिक नॉलेज दोगे ना। आपने दी तो है बेसिक नॉलेज। लेकिन प्रश्न उत्तर ऐसे थोड़ी ना होगा। हमारे चार चित्र हैं। कोर्स है वो आपको लेना पड़ेगा। फिर आप फिर आप क्या जवाब दोगे? बात वही आ रही है कि साप्ताहिक कोर्स करो। तो अगर बात सुनिए अगर सा्ताहिक कोर्स से उत्तर मिलना है तो यह मानना पड़ेगा ना कि आपके पास उत्तर नहीं है। हां तो आगे चलते हैं। छोड़िए। मैंने डॉक्टर के बारे में आगे चलते हैं। हां क्या क्या नहीं क्या पढ़ाई क्या कह रहे हैं मैं कह रहा हूं कि आपने वकील की पढ़ाई पढ़ी मैंने डॉक्टर की पढ़ाई पढ़ी तो दोनों पढ़ाई में अंतर है ना तो आप आप मुझे मैं आपसे डॉक्टरी का प्रश्न पूछ रहा हूं ना कि वकील का पूछ रहा हूं तो अब प्रश्न पूछ रहा हूं ना दोनों का सेम दोनों का प्रोफेशन सेम होना चाहिए देखिए आपने जो अभी उदाहरण दिया है इससे दो बातें निकलती है अगर मैं वकील वकील की पढ़ाई पढ़ी आपने डॉक्टरी की

01:40:11:15 या तो यह निकलती है कि मैं वकालत का सवाल पूछ रहा हूं तो मेरे सवाल का जवाब आपके पास इसलिए नहीं क्योंकि आप डॉक्टर हैं। तो घुमा फिरा के बात यही हुई कि मेरे सवाल का जवाब आपके पास नहीं है। और अगर यह बात है कि मैं अगर आपसे डॉक्टरी का ही सवाल पूछ रहा हूं तो फिर आपको जवाब देना चाहिए। ये तो आपने मेरी बात कह दी। या तो ये बात मानी जाए कि मैं क्योंकि वकालत के प्रश्न पूछ रहा हूं और उसका उत्तर आपके पास नहीं है क्योंकि आप डॉक्टर हैं। तो इसका मतलब आपके पास जवाब नहीं है। फिर ये कहना गलत है मेरे पास जवाब है। अब मैं आपसे आपसे एक बात मैं पूछना चाहता हूं। हां आपको आप जो क्वेश्चन पूछ रहे हैं बहुत अच्छी बात कर रहे हैं। जी लेकिन मैं आपका भी एजेंडा क्लियर करना चाहता हूं कि दूसरों को चैनल पे बुला के अपने को सुप्रीम दिखाना है या भगवान को भी चैलेंज करना है। आपका एजेंडा क्या है? मेरा एजेंडा है वास्तविकता की खोज। सत्य क्या है? क्या ब्रह्मा कुमारी सत्य बोल रही है? क्या ब्रह्मा कुमारी सत्य बोल रही है? या आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वाले सत्य बोल रहे हैं या आप सत्य बोल रहे हैं। यह एजेंडा है इनका। ठीक है। लेकिन जो [गला साफ़ करने की आवाज़] एक एक शिवश बहुत अच्छी बात आपने कही। जो वास्तविक सत्य है उस सत्य को जानने के लिए ज्ञान का तीसरा नेत्र चाहिए। आपके पास है

01:41:26:16 तो मैं जो बोल रहा हूं तो ज्ञान उस ज्ञान के नेत्र के आधार पर बोल रहा हूं जो आपकी समझ से बाहर है तो भाई साहब फिर फिर वही बात फिर तो ऐसे कोई है ही नहीं जिसके पास तीसरा नेत्र नहीं होगा वो समझेगा नहीं तो फिर समझाने का फायदा नहीं है कोई इसलिए उसको वहां जाकर के कोर्स करना तो अनिवार्य है कोर्स कोर्स से तीसरा नेत्र आएगा बिल्कुल आएगा आप एक विभाग को आज नहीं पूरे विश्व को यह कोर्स तो करना पड़ेगा क्योंकि इसमें सृष्टि पूछ रहा हूं ये ये कहां लिखा है कि वहां कोर्स करने से तीसरा नेत्र आ जाएगा और आपके तीसरे नेत्र के विषय में प्रमाण क्या है ये प्रमाण ये है कि हमारा खुला हुआ हमने भगवान को पहचान लिया सत्यनारायण को पहचान लिया को पहचान लिया आपने पहचान आपने पहचान लिया है ये कहां लिखा है कि जिसने पहचान लिया उसका पास तीसरा नेत्र है और आपने पहचान लिया इसका प्रमाण क्या है यह प्रमाण आपकी आंखों के समान सामने धीरेधी आ जाएगा। पूरी दुनिया के सामने आ जाएगा। मिला के अभी जवाब नहीं है। आ जाएगा कोर्स कर लेना तब आ जाएगा। अभी जवाब नहीं है। चलिए ठीक है। किसी चीज किसी चीज के बारे में अगले अब हम अगले चैप्टर में बढ़ते हैं भाई साहब। नहीं नहीं। एक

01:42:41:22 जब तक आप वहां जाकर के बैठोगे वह ईश्वरीय पढ़ाई है। पढ़ाई पढ़ाई जा रही है। कुल मिला के मैं समझ रहा हूं कि मेरे इस प्रश्न का जवाब आपके पास नहीं है। वो मुझे कोर्स करने पर ही मिलेगा। आपका दुनिया का कोई ऐसा प्रश्न नहीं है जो भगवान आ के उसका उत्तर ना देते हो। वो कप पास तो नहीं है ना भाई साहब? हेलो कहां चले गए?

01:43:28:07 मैं जरा देखता हूं कहां गए। जैसे तो अब हम उस प्रश्न से आगे बढ़ जाते हैं। अगर आपकी संतुष्टि हो गई है तो आगे बढ़ो। मुख्य नहीं संतुष्टि तो नहीं हुई इसमें। आपने ये कहा ना कि कोर्ट आपने कहा कोर्स वो कोर्स ले लीजिए। कोर्स तो लेना पड़ेगा। वो सबको लेना पड़ेगा क्योंकि देखो देखिए कोर्स कोर्स की दो चीज को जब जानते हो ना देखो एक मेरी भी सलाह सुनो। मैं भी पढ़ा लिखा हूं। दो रोटी में भी खाता हूं। जी जब तक जब तक हम दोनों एक चीज को ना पढ़े हो, एक चैप्टर पढ़े और उसके बारे में डिस्कस करें तो अच्छा रहता है। उसका निर्णय निकलता है। ठीक है? जब तक आप भी एक चीज को पढ़े, मैं भी एक चीज को पढूं और फिर उसके बाद डिस्कस करें तो उसका आंसर निकलेगा। सागर मंथन इसी को सागर मंथन कहते हैं कि पहले ज्ञान सागर को पढ़ा जाए, समझा जाए। ठीक है? मैं मैं इसमें अपनी बात कह दूं। देखिए भाई साहब कि जैसे आपने कहा कि सात दिन का कोर्स कोई बात नहीं। जैसे अभी मुझे कोई व्यक्ति मिलता है और वो यह कहता है मैं ईश्वर हूं। मैं कहूंगा क्यों? वो कहेगा कोर्स कर ले। वो सात दिन का नहीं वो 50 दिन का कहेगा। फिर तीसरा व्यक्ति कहेगा तीसरा व्यक्ति कहेगा कि मैं ईश्वर हूं। और फिर मैं उससे पूछूं क्यों? कि नहीं मेरा 150

01:44:43:15 दिन का कोर्स कर ले। अगर भाई तुम जो कोर्स मुझे दे रहे हो और उसमें वो ज्ञान मेरे क्वेश्चन का आंसर है उस उस कोर्स में तो वो आंसर मुझे अभी दो जिससे मैं उस कोर्स के लिए अट्रैक्ट हो जाऊं। दूसरी बात आपने शायद ये चैलेंज भी मेरे दो मेरे दो उत्तर है ना मेरे दो उत्तर है दूसरा उत्तर ये है कि आपने जैसे चैलेंज किया हुआ है ना ओपन चैलेंज के कोर्ट में आके भी सिद्ध कर दो कोई बिल्कुल सिद्ध होगा तो ये जो आपने चैलेंज किया है जब कोर्ट कहेगी आप अपनी बातों को सिद्ध करिए यहां ये बातें समझ में नहीं आ रही तो आप कहोगे कोर्ट कोर्ट वालों से कि कोर्स करो हमारा जाके बिल्कुल बिल्कुल कहेंगे एसआईटी की गठित करो और एक बार इस सारे ज्ञान का पूरा आकलन करवाया जाए। बिल्कुल कहेंगे। क्यों नहीं कहेंगे? अगर उस कोर्स को अगर उस ज्ञान को समझे तो टाइम भी आपसे जब पूछताछ होगी तो कोर्स करने की थोड़ी ना कहोगे आप। आप तो उस कोर्स में बिल्कुल। ठीक है। तो कुल मिला के कुल मिला के इस प्रश्न का अभी आपके पास जवाब नहीं है। फिलहाल नहीं बिल्कुल हर बात का जवाब है। अब आपको समझ नहीं आ रहा उसमें मैं कुछ नहीं कर सकता। चलिए आगे बढ़ते हैं। अब मुझे ये बताइए कि आप ईश्वर को मानते हैं। है ना?

01:45:58:16 जी बिल्कुल। तो ईश्वर है। यह सिद्ध कैसे होता है? मतलब कैसे विश्वास हुआ? कैसे विश्वास करें कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है? इस दुनिया में कोई ईश्वर है तो ये गीता ने फाइनल बताया। इन मुरलियों ने फाइनल बताया। गीता क्या कहते हैं? नास्त भावो ना भाव विधते सत। कि ईश्वर इस मुरली ने बताया। शिव बाबा ही सृष्टि पर सदा कायम है और फिर गीता ने बताया ये बात तो उसके लिए है जो गीता पर विश्वास करता हो अभी वो जो व्यक्ति जीरो पे खड़ा है पहले आप बताओ आप अपनी बताओ आप गीता पर विश्वास करते हो कि नहीं मैं न्यूट्रल व्यक्ति की ओर से आपसे प्रश्न कर रहा हूं कि क्या आपके यहां जो ज्ञान दिया गया आप पहले आप अपना पक्ष क्लियर करो आप जय श्री राम बोल रहे हैं तो आप गीता पाठी हो कि नहीं हो गीता पाठी हूं बिल्कुल हूं मतलब गीता हो तो गीता में गीता में आया कि नहीं आया

01:46:58:28 कि [गला साफ़ करने की आवाज़] नास्ते विद्यते भावो ना भावो विद्यते सत गीता में आया कि नहीं आया आया सत्य का इस दुनिया में कभी विनाश नहीं होता सत्य सदाकाल होता है उसी सत्यनारायण की कथा घरघर गाई जाती है इस बात को मानते हो अरे भाई साहब मैं मानता हूं मैं जो मेरा जो प्रश्न है वो क्या है कि कोई नास्तिक व्यक्ति कोई नास्तिक व्यक्ति जो अभी तक भगवान है ना अभी तक वो रामायण को मानता है उसके समक्ष ये कैसे सिद्ध करें उसको कैसे विश्वास दिलाएं कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है क्या इस बारे में कोई विवेचना है अपने आत्म विज्ञान में जैसे हम कह रहे हैं जैसे मैं और क्लियर कर जैसे हम कह रहे हैं ये ईश्वर है ये ईश्वर है इसकी पूजा वो कहेगा कि भाई ईश्वर होता कौन है मैं क्यों मानू कोई ईश्वर है मैं क्यों पूजा तो वहां से पूछ रहा हूं क्या आपके यहां पर क्या आपके यहां पर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में वीरेंद्र देव वीरेंद्र देव दीक्षित जी द्वारा या फिर ब्रह्मा कुमारी लेखराज जी से आई हुई मुरलियों के द्वारा क्या इस बात पर विवेचना है कि हम किसी व्यक्ति को जो कि अभी ना तो वैदिक है ना अभी मुरलियों में विश्वास रखने वाला है ना गीता में विश्वास रखने वाला न्यूट्रल खड़ा हुआ है

01:48:14:02 वो समझना चाहता है कि मैं कैसे मानू इस दुनिया में कोई ईश्वर तो हमारे हमारे पास क्या थ्योरी है उसके लिए? उसके लिए एक थ्योरी सीधी सी है। जिसको आप नास्तिक समझ रहे हैं ना वो सबसे बड़ा आस्तिक होता है। जिसको आप बोल रहे हो कि नास्तिक है, न्यूट्रल है। वो सब वो प्रैक्टिकल में चीज को जानना चाहता है। आप उसको नास्तिक कह रहे हैं। हमारी परिभाषा के अंदर वो सबसे बड़ा आस्तिक है। वो प्रैक्टिकल बात को जानना चाहता है। तो फिर नास्तिक कौन? भगवान और नास्तिक वो हुआ जो सच्चाई को जानते हुए भी पीछे हट जाता है कि नहीं? आत्मा और परमात्मा का ज्ञान हमें नहीं चाहिए। या तो आत्मा को मानता हो या परमात्मा को मानता हो। देखिए नास्तिक शब्द की अगर विवेचना करेंगे तो ये आएगी कि जिसमें जो आस्तिक नहीं है नास्तिक यानी कि जो भगवान के अस्तित्व पर विश्वास वो भगवान के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करता। मगर जो जानते हुए मुकरता है तो उसको तो कुछ और कहेंगे। उसको कुछ झूठ बोलने वाला कहेंगे क्योंकि वो मन में तो विश्वास कर रहा है मगर वो हां ऊपर से मना कर रहा है कोई बात नहीं तो जब देखो कर्म अकर्म विकर्म जब उसके कर्मों का पाप कर्म बढ़ेगा तो क्या उस भोजा नहीं होगा भोजा होगा तो उसको परेशानी आएगी फिजिकली बीमारी आएगी या कोई दिक्कत

01:49:29:08 आएगी तो दुख में तो याद करता है ना फिर सब प्यार से नहीं करते तो दुख में करते हैं तब भगवान से याद आ जाता है नहीं नहीं बात ये है कि अभी आपसे एक सामान्य व्यक्ति पूछ एक नवयुवक पूछ रहा है मान लो मैं मुझे समझ लो कि भगवान है यह मैं कैसे मानूं इस बारे में क्या ज्ञान विज्ञान दिया गया है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में वो दुख आएगा तब मैं मानूंगा उसमें वही बात हो गई मैं उस समय क्या मानूंगा क्या नहीं मानूंगा ये मैं अभी मान लूं ये वाली बात है ना तो तो मैं ईश्वर है ये विश्वास कैसे करूं मतलब मैं आपके पीछे पीछे चलना शुरू करूं कि भाई वीरेंद्र दीक्षित जी भगवान है या बीके के पीछे चलना शुरू करूं कि लेखराज जी भगवान है या उनके द्वारा बताया गया कि शिव बाबा भगवान है तो मैं इनके के पीछे चलूं तो मैं पहले ये तो सेटिस्फाइड हूं कि हां भगवान है या तो ये पृथ्वी अपने आप मतलब जो प्रकृति वगैरह अपने आप काम कर रही दुनिया में कोई भगवान नहीं है। जी आप ही बोलते रहेंगे या बोलने का मौका भी मिलेगा। असल में बोलने का मौका जब मिलता है तो आप मेरे प्रश्न का जवाब ना दे के सीधे अपने फेथ को लाते हो कि मान लो दुख में तो याद करते रुको शिवम अब नहीं ऐसा नहीं होता

01:50:44:09 है। यह चर्चा नहीं होती। आप आप बोलते जाएंगे चर्चा थोड़ी ना होती है। और चर्चा चर्च घर में होती है। आप सनातनी हो कि चर्च घर में रहने वाले हो। आप आप जो है मैं अब चुप हो रहा हूं। अब आप बोले जी बोलने तो देते ही नहीं हूं। आप कोई आंसर तो आप ले ही नहीं रहे हो। भाई साहब मैं फिर से अपनी बात बता रहा हूं। मैं फिर से मैं चुप हो रहा हूं। आप क्वेश्चन जितना छोटा करोगे क्वेश्चन जितना छोटा करोगे तो आंसर भी स्पष्ट मिले। आंसर तो ले ही नहीं रहे ना। इसका मतलब कहीं आप मुझे डिमोरलाइज तो नहीं करना चाहते हो? नहीं नहीं नहीं देखिए मैं मैं अपने क्वेश्चन को इसलिए एक्सप्लेन करता हूं क्योंकि जब मैंने छोटा पूछा था तो आंसर भी तो आंसर भी तो देने का मौका दो ना। आपने ये कह दिया ना कि दुख में तो याद करता है ना। किसको करता है? वेद शास्त्र में वेद शास्त्र ये बातें वेद शास्त्र में नहीं आई क्या? दुख में सब याद करते हैं। सुख में कोई नहीं याद करता। भैया जो उसके लिए है ना जो वेद शास्त्र में विश्वास करता हो। अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं जो व्यक्ति खड़ा है। न्यूट्रल जो खड़ा है जब दुख तो उसके ऊपर भी आते होंगे। प्रकृति उसको भी प्रभावित करती होगी। दुख सुख उसमें भी आते हैं कि नहीं आते हैं? तो आते हैं तो बड़े

01:52:00:26 इससे भगवान का होना यह सिद्ध हुआ कि एक दिन उसको भी अकल आ जाती है। विश्व पिता कहा जाता है। विश्व पिता तभी कहा जाता है जब इस पूरी दुनिया उसको अपना बाप मान तभी वो विश्व पिता या जगन्नाथ कहा जाता है। नहीं नहीं कईयों को अकल नहीं आई है। कई मना करते हैं। बेशक उसका भी बात नहीं। देखो शिवशंश अगर नहीं मानते तो उसका वो अनाड़ी पना लेकिन वो भी टूट जाता है एक दिन। मतलब हमें उसको समझाने के लिए कुछ नहीं है। समझाने के लिए आप जब एक बात बताइए आपको मैं कहने लग हूं कि हां वहां भगवान आया। भगवान की पढ़ाई पढ़ाई जा रही है। आप मान गए क्या एकदम से? नहीं माने। आप अपने तर्क वितर्क में फस गए। अर्जुन क्या एक दिन में मान गया था भगवान के कहने से कि मैं भगवान हूं। 18 दिन की पूजा सुनानी पड़ी मैं रुका हुआ हूं क्योंकि आप अपनी ओर से बोल लीजिए। मैं रुका हुआ हूं। फिर मैं आपका आपकी बातों का उत्तर दूंगा। जी बोलिए। जी। तो फिर जैसे आप पूछ रहे हो कि मैं कैसे मानूं? जब आप पैदा हुए जब समझदार हुए तो आपकी मां ने ही तो बताया होगा कि तू कौन है? मैं तेरी मां हूं। ये तेरा पिता है तो ठीक और गलत का फैसला हमें भगवान ने बुद्धि दी है हर बात को जानने की पहचानने की और रही बात ज्ञान की सागर मंथन सागर ज्ञान का सागर है तो ज्ञान का सागर कौन है पहले तो

01:53:16:00 उसको जानो फिर मंथन करो तो मंथन देवता भी करते हैं दानव भी करते हैं तो यह ब्रह्मा कुमारी और आध्यात्मिक ईश्वरी विश्वविद्यालय इतना छोटी चीज ना लगाओ आप देवी और देवता तैयार हो रहे हैं सत्य सनातन धर्म की स्थापना हो रही है यहां तो आप जो क्वेश्चन जितना कर रहे हैं आप पता किस थ्योरी पर ले चल रहे हैं। सत्य सनातन धर्म को अच्छे से जानते हैं कि नहीं जानते हैं मुझे नहीं समझ में आती ये बातें। और किसी चीज को जब तक आप चख के नहीं देखोगे बगैर चखे आप खट्टा मीठा कैसे बताओगे? क्या चीज है ये? [गला साफ़ करने की आवाज़] सत्य सनातन धर्म कब स्थापन हुआ? कब भगवान आते हैं? ईश्वर का मतलब क्या है? भगवान का मतलब क्या है? हरि का मतलब क्या है? हर शब्द का अर्थ है लेकिन उलझा के खड़ा कर रही है दुनिया ना सुलझने तो देती नहीं है भगवान तो सीधा साधा सहज ज्ञान सहज राजयोग सिखाता है आ के बड़ी सहजता से ज्ञान सुनाता है लेकिन ये उलझाया किसने ये दुनिया ये दुनिया उलझाने वाली तो बैठी है इतने चारों तरफ बैठे हैं धर्म के मामले में और ये भारत भाई साहब आप मेरी बात का जवाब नहीं दे रहे अगर मुझे कोई नास्तिक मिले तो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की ओर से मैं उसको क्या उत्तर दूं कि जब तू दुखी होगा तब देख लियो जा मुझसे हाथ जोड़ लो ये उत्तर दूंगा हां बिल्कुल है और क्या करोगे और क्या करोगे इसके सिवा क्या यही उत्तर

01:54:31:08 है मेरे पास तो है उत्तर मैं जानना चाहता हूं कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी के पास है कि नहीं आज से लगभग ढाई तीन हजार वर्ष सुनिए अब अब देखिए आपको मैंने सुना ना आपने उत्तर नहीं दिया अब मैं आपसे बता रहा हूं आज से ढाई 3000 के बारे में जानते ही कुछ नहीं ब्रह्मा बाबा के बारे में कुछ नहीं जानते बताओ ना मैं आपसे पूछ तो रहा हूं गीता जो कहती है श्रद्धावानंम अगर श्रद्धा और विश्वास ही नहीं है तो उसे बातें ही क्या करनी है? श्रद्धा और विश्वास उसे बात ही नहीं करनी है। ये बताइए आपके अंदर बचपन से बचपन से श्रद्धा थी। हां जी बिल्कुल थी। पैदा होते ही श्रद्धा है आपके अंदर। तो जब से होश संभाला तब से श्रद्धा थी। भगवान को जानना पहचानना। कोई एक पॉइंट है ना जहां आपको जहां आपको बताया गया जहां पर श्रद्धा नहीं थी। कोई एक पॉइंट है ना जहां श्रद्धा नहीं फिर भी बताया गया ये सब की अपनी अंदर की ये अंदर का ज्ञान है। आप पर चिंतन करते हो मैं स्वचिंतन करता हूं। चिंतन से मैं कैसे फील करूं कि इस दुनिया में ईश्वर है बताइए। तो बगैर ईश्वर के आप ये दुनिया वैसे ही बन गई क्या? यानी कि चलो अब एक मिनट रुको। एक बात बोली है ये दुनिया बनाने

01:55:46:09 वाला ईश्वर है। अब आपने एक बात बोली है तो इतनी दिक्कतों के बाद आपने बिल्कुल भी आप गीता हम किसी नास्तिक को क्या जवाब देंगे? क्या वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने बताया है? अब आपने एक बात है क्या सृष्टि ऐसे ही बन गई। यह है जवाब। सृष्टि बनाने वाला ईश्वर है। यही तो है। सृष्टि बनाने वाला ईश्वर है। बिल्कुल। मनुष्य सृष्टि का भी बीज रूप बाप है। जिसने पूरी सृष्टि को रचा हुआ है। बाप बगैर बच्चे पैदा होते हैं क्या? ईश्वर। ठीक है। क्योंकि ईश्वर का मतलब क्या होता है? ईश्वर का मतलब क्या होता है? ईश माने शासन करता। वर माने श्रेष्ठ श्रेष्ठ। जो इस दुनिया पे प्यार से शासन करता है उसको ईश्वर कहते हैं। मतलब आपका कहना है कि जिसने सृष्टि बनाई है वो ईश्वर है। जी जो बहुत प्यार से ईश्वर का ईश माना शासन करता है। श्रेष्ठ से श्रेष्ठ शासन करता है। इसलिए उसी ने गीता लिखी है। श्रीमद् भगवत गीता सर्वस्त्र शिरोमणि शासन बहुत मैं इस बात से मैं सहमत हूं। आपने अब एक मैंने जो क्वेश्चन किया है नास्तिक को क्या जवाब

01:57:01:10 दें? उससे रिलेटेबल बात आपने ये बोली है कि जिसने सृष्टि बनाई है वो ईश्वर है। सृष्टि बनाई है मतलब ये सूर्य चंद्रमा इत्यादि सब उसी ने बनाया है। बिल्कुल बिल्कुल देखो इस बारे में तो क्या कहते है अल्लाह ताला ने जन्नत बनाई आसमा बनाया पर वो अल्लाह ताला को कोई नहीं जानता नहीं वो जानने वाली बात आगे की है आप अभी यहां पे है ना कि उसने सृष्टि बनाई है यहीं पे है ना जी उसको उस रचयता को जानना है उसको जानना है उस नास्तिक का नास्तिक का नास्तिक का जो अगला अगला प्रश्न होता है वो ये होता है कि मैं कैसे मान लूं कि कोई एक शक्ति है जिसने इसको बनाया है वो मानना अब एक बात बताइए समय होता है हर चीज का अभी आप किसी चीज को नहीं समझ पा रहे हैं एक दवाई काम नहीं करेगी दूसरी करेगी तीसरी करेगी इस दुनिया में जब पतित पावन कहते हो दुख हर्ता सुखकर्ता कहते हो तो क्यों कहते हो दुखों का पहाड़ टूटेगा इसका मतलब तभी तो दुख हर्ता सुख्ता कहा यानी कि अगर समय का नाम लेकर के यानी कि भाई साहब कुल मिला के एक ही बात हो रही है कि समय या कोर्स का नाम लेकर के हम कोई बात बोल सकते हैं। यानी कि कोई आप ही आप ही मेरे सामने खड़े हो। मैंने कहा मैंने कह दिया मान लो मान लो मैंने

01:58:16:12 कह दिया कि आपकी सारी बातें झूठी है। आप कहोगे कैसे? मैं कहूंगा समय आने पता लग जाएगा। ये कोई बात है क्या? हां। तो और एक बात बताइए क्या आप समय सृष्टि का कौन सा समय चल रहा है? कल्पांत चल रहा है? कल्पांत का जो आप वेद शास्त्र जो पढ़ रहे हैं वो कल्पांत के समय के हैं सारे के सारे आपको यह भी नहीं पता क्या मतलब भाई साहब मैं कह रहा हूं नास्तिक ये बोलेगा मैं कैसे मान लूं ये सृष्टि किसी ने बनाई है प्रकृति है थी धीरज धर वनवा जब समय पड़ता है बड़े-बड़े मान जाते हैं प्यार से कौन मानता है इसका मतलब मैं फिलहाल आपसे ये कह सकता हूं कि आपकी सारी बातें झूठी है धीरज धरो आपको समय आने पता चल जाएगा जी जी मैं कह सकता हूं हां तो सत्य को ही दबाया जाता है इस दुनिया में झूठा ही साबित मेरा कहना अनुचित मान रहे हैं। जिस तर्क के आधार पे आप अपना कहना उचित बता रहे हैं उसी तर्क के आधार पे मेरा कहना अनुचित बता रहे हैं। आपको मेरा विरोध नहीं करना चाहिए। मैं भी वही बात बोल रहा हूं जो आप बोल रहे हैं। आप कह रहा हूं मैं समझ जाऊंगा। मैं कह रहा हूं आप समझ जाओगे। धर्म की बात कर रहे हो ना कर्म की बात कर रहे हो। पता नहीं कहां धर्म की बात ऐसे होती है। सुनिए मैं बता रहा हूं। धर्म की बात क्या कर रहा हूं। सुनिए। धर्म की बात ऐसी होती है जब तक हम ईश्वर का अस्तित्व ही सिद्ध नहीं करेंगे जब तक हम ईश्वर को

01:59:31:25 ईश्वर का अस्तित्व ही सिद्ध नहीं करेंगे तब तक कोई क्यों ईश्वर के नाम से बताई गई बातों को धर्म मानेगा जब धर्म की बात करनी हो गीता हाथ में लेकर के आया करो गीता के एक एक श्लोक में भगवान के अस्तित्व को बताया गया गीता पढ़ो आप एक बार आराम से भाई साहब मैं गीता पे भी आऊंगा अभी मैं पूछ रहा हूं मैं गीता से ही बोलूंगा अभी मैं अस्तित्व को सिद्ध करूंगा ना मैं उपनिषद से बोलूंगा मैं उपनिषद से बोलूंगा जब मैं भगवान का अस्तित्व सिद्ध करूंगा जब मैं भगवान का अस्तित्व सिद्ध करूंगा मैं उपनिषद से बोलूंगा आपके पास है वीरेंद्र जी के द्वारा दिया गया ऐसा कुछ नास्तिक का मुंह बंद करने का है चुनौती दे रहे हो आप चैलेंज दे रहे हो दुनिया को नास्तिक को चुप करा पाओगे सब चुप हो जाएंगे बड़े-बड़े चुप हो जाएंगे तो कैसे होंगे ऐसे ही चुप होंगे कोर्स कर लेना समय आने पे चुप हो जाओगे ऐसे होंगे चुप भाई एक तो सीधी सी बात है या तो ज्ञान से समझेगा या फिर हालात खराब होंगे तब समझेगा ज्ञान दो ना मुझे ये क्यों कह रहे हो गीता लेके आओ तब बात करना ज्ञान दो मुझे हां तो फिर जाओ ना हमारे मधुबनों के दरवाजे खुले हुए दिन रात जाके लो ना जा आपके पास नहीं है बताने को कुछ अरे जो बता रहे हो वो तुम्हें सहज नहीं हो रहा तुम कौन सा ज्ञान लेना चाहते हो एक लाइन बताई है कि सृष्टि उसने बनाई तो मैं मैं पूछ रहा हूं ये कैसे सिद्ध होता है कि सृष्टि उसने बताई बनाई

02:00:46:26 है इस बारे में आप बोलिए क्या ब्रह्मा ने सृष्टि नहीं रची फिर वही बात आप वो बात बोल रहे हो कि मेरा फट किसी किताब पे है तो मैं उस किताब के आधार पर मान लूं। मैं कह रहा हूं एक न्यूट्रल व्यक्ति नास्तिकता का जवाब क्या है? हमारे शास्त्रों में दिया है। उपनिषद में दिया गया है। वो मैं पूछ रहा हूं क्या आप जिसे भगवान कह रहे हो उसने आपको बताया कि नहीं बताया? ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध किए बिना आत्म ज्ञान क्या हो सकता? क्या आपको खुद समझ में आ रहा है? ईश्वर की परिभाषा आप खुद जानते हो। बिलकुल भाई साहब मैं जब बोलूंगा तब आपको समझ में आ जाएगा आप उसको काट नहीं पाएंगे 1 इंच मात्र जब मैं बोलूंगा तब आप उसको 1 इंच मात्र काट नहीं पाएंगे हां तो आप तो भगवान से भी बड़े हो गए इससे क्या मतलब है से बड़े हो गए भाई साहब जो पॉइंट ये है क्या आपके आप जिसे भगवान कह रहे हो उसने आपको नास्तिकता का खंडन बताया है कि नहीं नास्तिक आपके सामने खड़ा है वो मैं क्यों तुम्हारे धर्म को मैं क्यों तुम्हारे ज्ञान को तुम मुझे पहले सिद्ध करोगे ईश्वर है। मैं कर सकता हूं। आप कर सकते हो क्या? आप कर रहे हो। आप करो सिद्धेश्वर को। पहले आप करो। हां ठीक। ठीक है। पर फिलहाल अभी तो ये मान ले किता मैं कर देता हूं।

02:02:01:27 मैं कर देता हूं। मैं कर रहा हूं। मैं कर रहा हूं। मैं कर रहा हूं। फिलहाल अभी ये मान ले आप सिद्ध नहीं कर सकते। हां आप ये मानिए हम सिद्ध नहीं कर सकते। आप सिद्ध करिए ईश्वर को। हां चलिए अब ये बात है। मैं कर रहा हूं। हां से दुनिया देख रही। चलो आप चुप हो जाओ तो मैं कर आप थोड़ा मौन रहिए तो मैं करदार उपनिषद बहारण्य उपनिषद एक तीन 28 असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिरमय मृत्यु मांगमया इसी को क्लियर कर दो बस अरे भैया इसी को क्लियर करता हूं आप प्लीज थोड़ी देर शांत रहिए मैं अगर सिद्ध ना कर पाऊं तो आप बताना और मेरी बात को काट के दिखाना आप चुप रहिए थोड़ी देर प्लीज हां उपनिषद वाक्य है प्राणी के भाई साहब प्लीज प्लीज इंटरप्ट मत करिए अब मैं आपको बता रहा हूं नास्तिकता का खंडन ठीक है उपनिषद का यह वाक्य हमें बताता है प्राणी मात्र के विषय में कभी ना मरने की और अनंत ज्ञान को प्राप्त कर लेने की और सदा आनंदित रहने की प्यास विद्यमान है। इसको कहते हैं सत प्राणी मात्र में

02:03:17:08 प्राणी मात्र में एक नास्तिक के अंदर भी यह तीन तरह की प्यास सदा विद्यमान है। कौन-कौन सी प्यास है? पहली प्यास है सत की प्यास। मैं सत हो जाऊं। अमरता की प्यास। दूसरी प्यास है ज्ञान की प्यास। मैं मूर्खता रहित हो जाऊं। ऐसा कुछ ना हो जो मुझे ना पता हो। एक मिनट। बीचबीच में आप बीच-बीच में बोलिए मत। प्लीज मैं पूरा खाना भरू। अच्छा ठीक है। ठीक ठीक है। आप आप करिए। हम ही भरिए। तीसरी प्यास है सदा आनंदित रहने की प्यास। मैं कभी भी दुखी ना हूं। ये तीन तरह की जो प्यास है ये तीन तरह की जो प्यास है सतित आनंद। ये तीन तरह की प्यास नास्तिक के अंदर भी है। एक नास्तिक भी कई बार सोचता है बारिश ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। यानी कि वो मौसम को भी कंट्रोल कर लेने की भावना उसके मन में कई बार आती है। कल इंडिया पाकिस्तान में कौन जीतेगा? तो काश हमारा भारत जीत जाए। इसका मतलब उसके मन में भी भविष्य को देख लेने की और भविष्य को कंट्रोल कर लेने की चाह मन में आती है। ठीक है? एक नियम है कि हमारे मन में जिस जिस चाह

02:04:33:03 का जो जो चाह विद्यमान है उस चाह का विषय इस दुनिया में मौजूद है। जैसे कि हमारे अंदर प्यास है तो हमारे अंदर प्यास होने से सिद्ध हो जाता है कि इस दुनिया में पानी है। हमारे अंदर भूख है तो हमारे अंदर भूख होने से यह सिद्ध हो जाता है कि इस दुनिया में भोजन है। हमारे पास देखने की क्षमता है। तो उससे सिद्ध होता है कि दुनिया में दृश्य है। हमारे पास सुनने की क्षमता है। तो उससे सिद्ध होता है कि दुनिया में आवाज है। तो जिस प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त है ना देखने की विषय से दृश्य सिद्ध होता है। देखने की चाह से दृश्य सिद्ध होता है। भूख से भोजन सिद्ध होता है। प्यास से पानी सिद्ध होता है। उसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त सतित आनंद की चाह से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है। अच्छा अन्यथा

02:05:32:04 नहीं मानेगा नास्तिक तो वो बोल दे कि वो जो है वो मरना चाहता है। मैं क्वेश्चन पूछूं एक मिनट मैं पूरा कर लूं। मैं पूरा कर लूं। फिर क्वेश्चन पूछिए। पूरा भी नास्तिक व्यक्ति भी कभी दुखी नहीं होना चाहता। वह भी यह सोचता है मेरे पिता कभी ना मरे। मैं बूढ़ा कभी ना हूं। मैं यह सब ना करूं। तो यह सब उसके अंदर भी घटित होता है। अगर वो मुंह से कह भी दे वो मुंह से कह भी दे कि भैया मैं तो मरना चाहता हूं। उसके और जब घुमाएंगे ना घूसा या लपाड़ा तो उसकी पलक झपक जाएगी। इसका मतलब वो भले ही मुंह से कह रहा है। मगर जो उसकी जो आंख है वो बता रही है मरना नहीं चाहता है। सर्वाइवल है उसके अंदर। वो सर्वाइव करना चाहते कितना लंबा छोटा सा जो बात पूछने की थी वो क्लियर करो भाषण नहीं चाहिए सार में टिका हुआ अब आप प्रश्न पूछिए प्रश्न ये है परमेश्वर किसे कहते हैं भाई साहब अभी बात ये हो रही है आप विषयांतर ना करें अगर आप एस ए नास्तिक काउंटर करना चाहते हैं मुझे तो काउंटर करिए आपका जो आपके पास नास्तिकता का खंडन नहीं था मैंने अभी नास्तिकता का खंडन किया है आपके पास है नास्तिकता के खंडन अरे भाई शिवशु

02:06:47:22 सारा दिन मैं कोई बच्चा थोड़ा ना हूं। मैंने दुनिया देखी है यार ऐसे ना करिए भाई साहब ये सब बातें ना करिए जो विषय चल रहा है बात करनी है तो ये बताइए वो सत्य चित्त आनंद स्वरूप कौन है परमात्मा कौन है ये बताइए परमेश्वर कौन है ये बताइए की बताइए आएंगे अभी विषय ये चल रहा है कि ईश्वर है कि नहीं पहले इसी बात पे आइए अस्तो सद्गम तम भाई साहब सत्यम सुनिए सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह ये परिभाषा है तैतनिषद दो एक सत्यम ज्ञानम अनंतम जो है जो ज्ञान है जो अनंत है वही ईश्वर है जो सर्वशक्तिमान है वही ईश्वर है ये हमने उसकी उसके बारे में आपको बता दिया थोड़ा थोड़ा ब्रेक भी ले लिया कर थोड़ा ब्रेक भी ले लिया सर्वशक्तिमान का मतलब क्या होता है मैं बताऊंगा अभी आप पहले नास्तिकता पे आइए।

02:07:48:21 अरे आप मुझे तोड़िए ना पहले नास्तिकता पे तोड़िए आप मुझे। आपको मेरी परिभाषा स्वीकार है कि नहीं नास्तिकता की? कुछ भी नहीं आ रहा आपको। एक भी बात नहीं डिस्क्राइब कर पा रहे हो। नास्तिक नास्तिक को लेकर बैठ गए हो। और दुनिया इतनी नास्तिकों की भरी पड़ी हुई है। उनके लिए कुछ बोलोगे? एज ए नास्तिक क्वेश्चन करो। एज ए नास्तिक क्वेश्चन करो आप। नहीं सिवान साहब गलत ट्रैक जा रहे हैं। आप पहले यह बताइए सत्य की परिभाषा बताइए। सत्य किसे कहते हैं? जो शाश्वत हो जो उसको कैसे सिद्ध अरे रुको भाई उसको सिद्ध कैसे करोगे कैसे ऐसे करेंगे कि भैया नास्तिक के मन में भी नास्तिक के मन में भी चाहेंगे सत्य हो जाने वो भावना की बात है बात में ट्रैक से मत जाओ शाश्वत का मतलब होता है प्रैक्टिकल में हमारे सामने हो शाश्वत का मतलब जो आंखों से देखूं और पहचानू जानू कि हां ये सत्य है चलो ये कहां लिखा है कहां लिखा है सामने वही हो इसका मतलब इसका मतलब हवा को नहीं मानेगा आदमी जो जो चीज नहीं दिख रही है उसको नहीं मानेगा एक मिनट रुक जा भाई रुक जा इस भाषण को कहीं और दे दियो पागल भाई देख भाई तू सड़ा पे बात करनी है तो बात नहीं हो पाएगी भाई बहुत देर हो गई मैंने सुन लिया लेकिन बात से भागो भाई तू बात करनी है तो निकल जा भाई तू जा सकता है भाई तेरे

02:09:04:02 पास ना ज्ञान है ना कुछ है तू जा सकता है भाई कुछ नहीं है कुछ भी नहीं है आपके पास चल निकल चल निकल ये कोई कुछ नहीं है बस केवल पाखंड कुछ नहीं है इन लोगों के पास नाटक कंपनी खोल रखी है ये आ रहा है वो आ रहा है ये जाएंगे वहां धर्म की स्थापना करने के लिए

02:09:38:07 तू तड़ाक पर आ गए रुक जा भाई यह भाई वो भाई आ गए यह है असलियत इनकी विश्वविद्यालय वालों की और बीके वालों के विरुद्ध है हालांकि उनकी भी यही पोल पट्टी है जब हम इस तरह से सिद्ध करेंगे ना तो इनका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा क्यों नहीं सिद्ध होगा कि जिसने सृष्टि बनाई उसने पूरी सृष्टि बनाई ना पहली बात तो इनके यहां माना ही नहीं जाता सृष्टि बनाई है ईश्वर ने जब ये पूरा नाटक है तो बनी बनाई है सृष्टि काहे की काहे की सृष्टि बनाई फिर झूठ बोल रहे हैं खुद ही अगर सृष्टि बनाना मान लो बनाने की बात मान लो तो वो पूरी सृष्टि बनाई कि नहीं बनाई पूरी सृष्टि का कंट्रोल है कि नहीं है सबका शासन करने वाला है हम सबका शासन इनके हाथ में है कि नहीं है इनके ईश्वर के हाथ में तो ईश्वर के हाथ में सबका शासन है तो कैसे है वो तो एक जगह वो तो सर्व्यापी है ही नहीं। वो तो एक जगह है ना। तो भाई उसकी शक्ति सर्व्यापी है। यानी कि वो यहां पे है। उसकी शक्ति पूरे में है। अब उसमें और उसकी शक्ति में अंतर है। क्योंकि

02:10:53:13 वो तो यहां पे है ना। वो पूरे में नहीं है। अब उसमें और उसकी शक्ति में अंतर है। तो अंतर है तो कहीं ना कहीं जो शक्ति है वह कम है। तो जब कम है शक्ति जब शक्ति कम है तो क्या मतलब है उसका? कि ईश्वर का कंट्रोल सब जगह शाश्वत रूप से नहीं है। यहां ज्यादा यहां कम है। शाश्वतता भंग हो गई। ये ईश्वर नहीं है। कंट्रोल पूरी जगह होना चाहिए बराबर। तो क्या मानना पड़ेगा? शक्ति भी वही है। मगर ये तो मानते नहीं। इनका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा। दूसरी बात अगर उसने सृष्टि बनाई है तो कोई 5 किलोमीटर के एरिया की सृष्टि तो बनाई नहीं है। पूरी लंबी चौड़ी सृष्टि बनाई है। उसमें कहीं पर कुछ हो रहा है, कहीं पर कुछ हो रहा है। अगर उसने सृष्टि बनाई है मान लीजिए कि पांच अगर ऐसा मान ले कि उसने 5 किलोमीटर की सृष्टि बनाई है। तो 5 किलोमीटर की सृष्टि बनाई है और बगल के 5 किलोमीटर की सृष्टि नहीं बनाई है। लीजिए सपोज करिए तो क्या दिक्कत आएगी कि बगल वाले में ज्वालामुखी फट रहा है और मैंने जो सृष्टि बनाई है उसमें मुझे गड्ढा नहीं होने देना है अभी हम तो बगल में ज्वालामुखी अगर फट गया उसका यहां पर आया प्रभाव तो गड्ढा हो

02:12:08:19 जाएगा तो ये जरूरी है कि जिसने ये 5 किलोमीटर बनाया हो उसी ने ये भी 5 किलोमीटर बनाया हो अब ये भी जरूरी है कि हर 5 किलोमीटर के एरिया में क्या-क्या घटित होने वाला है मुझे पता हो तो इस तरीके से मैं सर्वज्ञ हो गया सृष्टि का निर्माता अगर बनूंगा तो मैं सर्वज्ञ होना पड़ेगा। उसके बाद क्या जरूरी है कि जो पूरी दुनिया में जो भी कुछ घटित हो रहा है उसको मैं रोक सकूं। अगर मेरे अनुसार मुझे चलाना है सृष्टि को तो फिर मुझे सर्वशक्तिमान होना पड़ेगा। अब सर्वशक्तिमान होने का मतलब क्या हो गया? देश कृत काल कृत परिस्थिति कृत किसी भी प्रकार की बाधा से मुक्त हो तो ये तो अवतार मानते नहीं है हम तो इनका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा नास्तिकता का खंडन कौन सा ईश्वर करता है जो सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म वो ईश्वर जो अबाध्य है हमारी व्यवहारिक भूख क्या है कहां से पता चलता है कि हमारे मूल में जो है सच्चिदानंद की प्यास है व्यवहार से व्यवहारिक भूख भी है ना व्यवहारिक भूख भूख क्या है? बारिश ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए। यहां से हम इसके अंदर जाते हैं। मूल में पहुंचते हैं। तो जब व्यवहारिक भूख है तो व्यवहारिक भूख का विषय भी है जो सब कुछ कर सकता है। सर्वशक्तिमान ईश्वर और जब

02:13:23:20 इसके मूल में जाएंगे तो सच्चिदानंद है तो उसके भी मूल में जाएंगे तो सच्चिदानंद है। कनेक्शन हो गया। हम तो ये तो है ईश्वर। अब इनसे हमने पूछा भैया ईश्वर की प्राप्त ईश्वर की सिद्धि कैसे होती है? तो ये बोल रहे हैं गीता हाथ में ले बात करो। फिर बोल रहे हैं तुम तुम बता दो तो इनको कुछ आता जाता नहीं जो इन्होंने रट्टा मार लिया है केवल इनके पास वही है और ये चुनौती देते फिर रहे हैं कोई व्यक्ति आ जाता है मनुवादी हैं तो इनके ये हाल होते हैं ना इनको ये पता है उस पर विश्वास कैसे किया जाए पीछे से और उल्टा ये तो और दो कदम आगे है वे वीरेंद्र देव दीक्षित जी के द्वारा कही गई बातों पर भी अविश्वास है इसका मतलब कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी का ज्ञान नहीं दे रहे हैं क्यों क्योंकि वीरेंद्र देव दीक्षित जी तो झूठ बोल सकते हैं। क्यों बोल सकते हैं? क्योंकि उनके मन में मालूम था मैं भगवान हूं। मगर वो कहे कुछ और रहे थे। मैं भगवान नहीं वो भगवान है। हम तो वो तो झूठ बोल रहे थे इनके अनुसार।

02:14:23:06 नहीं तो इनकी वाणी प्रमाण मानी जाए माननी पड़ेगी। ये हमारे ऋषि मुनि हो गए। इनकी वाणी को प्रमाण मान लो भाई। है कि नहीं? क्यों माना जाए? क्योंकि इन्होंने एमए कर रखा है इंग्लिश से और ये कोर्ट में जाने की चुनौती देते हैं लोगों को और चुनौती देकर कोर्ट में क्या कहेंगे हाई कोर्ट में कोर्स कर लो मेरा सात दिन का समय आने पता लग जाएगा ये कहेंगे वहां ये चुनौती है इनकी हम देख रहे हो ये थी इनकी मुरली की कहानी जो मैं सुन सुन के यहां तक लाया हूं ये चुनौती दे रहे हैं कोर्ट में जाके जब कोर्ट पूछे हां भाई आपकी चीज एक कैसे सिद्ध होती है कोर्स कर लो समय आने पता लग जाएगा जज साहब इसलिए मेरा फैसला अभी कर दो। अच्छा छ साल में पता नहीं लगा जज साहब को फिर सुनवाई हुई भैया अभी तक तो पता नहीं लगा क्या करें? अरे समय आने पता लग जाएगा ज साहब

02:15:18:04 [गला साफ़ करने की आवाज़] कौन है भाई? कौन है? जी टी एफ बी एन एन कौन है यह? अपना चेहरा दिखाएं। एक कोई है वह कह रहे हैं कि तुम्हें कितना पता है भगवान के बारे में जितना पता है तुम जैसों के लिए पर्याप्त है हमें जितना पता है वो तुम जैसों के लिए पर्याप्त है पाखंडियों के लिए और जो विधर्मी लोग हैं उनके लिए पर्याप्त है ना कभी आ जाना कभी ये जो भाई हम चुनौती देते थोड़ी ना फिर रहे हैं तुमने चुनौती दी है ना आ जाओ सिद्ध कर दो कोर्ट में आ जाओ ये कर दो वो कर दो अपनी फेंटसी की दुनिया से बाहर आ जाओ जाओ जिस दिन मनवादी से पाला पड़ गया सामना हो गया गिग्गी बंध जाएगी

02:16:10:02 हाय बड़े तुम्हें कितना पता है नास्तिकता का तोड़ नहीं है चले हैं धर्म की चीजें बताने धर्म की शुरुआत होती है नास्तिकता के अंत से बिना नास्तिकता के अंत से कहां से धर्म काहे का धर्म इसीलिए कहते हैं बता दी परिभाषा तो तू ततक पे आ गया व्यक्ति देखो ये है सच रुक जा ये ये नहीं है वो नहीं है

02:16:47:27 खुद ज्ञान ज्ञानी बनके कौन बैठा है ये बैठा है प्रश्न मैं पूछ रहा हूं सवाल का उत्तर नहीं है फिर क्या पूछा परमेश्वर कौन है परमेश्वर कौन है ये रामपाल हो गया यहां पे कबीर को परम नहीं कहा जाएगा तो मैं जो है मना कर दूंगा। इस पर आ गया एक ही परम तत्व जो सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रह वाला जो परम तत्व है जो अध्य है जो सृष्टि का रचयिता है वो पांच रूपों में प्रकट होता है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश कालांतर से कल्प वेद से यही पांच रूपों में से कभी विष्णु भगवान भगवान की प्रधानता के साथ महिमा गाई जाती है और कभी शिव जी की प्रधानता के साथ और कभी दुर्गा माता कभी गणेश जी कभी ब्रह्मा जी इस कारण से अलग-अलग जब भगवान के अलग-अलग रूपों में उनकी महिमा का गान हुआ तो उस रूप में पुराण रचे गए हैं। इसमें इनमें पांचों में कोई भेद नहीं है। तात्विक

02:17:45:13 लीला भेद है। लीला [खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] हम ये है परमेश्वर की पहचान। और जब आप खुद कह रहे हो कि परमेश्वर झूठ बोल सकता है तो उसने तुम्हें जो ज्ञान दिया है कि मैं यह था, मैं वह था, वह वो था, सब झूठा हो सकता है। इसलिए अपुरुष ग्रंथ अपौरुषय जो भगवान ने भी नहीं रचे। ऐसे ग्रंथ क्योंकि भगवान की सत्ता के अंदर ही दुनिया में सब कुछ है। है ना? विद्याद सब कुछ भगवान के उसमें है। यह भी गीता में लिखा है। सबका स्त्रोत भगवान ही है। यह भी गीता में लिखा है। हम तो जब सबका स्त्रोत झूठ और सच दोनों का स्त्रोत भगवान ही है तो फिर उनके द्वारा कही गई बात पर विश्वास कैसे अपौरुषय ग्रंथों पर विश्वास है और फिर उसके बाद जो ग्रंथ उनके अनुसार चलेंगे

02:18:46:09 उसके बाद उनके उस अपौरुषय ग्रंथ यानी वेदा आदि शास्त्रों के अनुसार जो ग्रंथ आगे चलेंगे वो ग्रंथ हमारे लिए स्वीकार्य होंगे जैसे कि गीता पुराण स्मृति ग्रंथ महाभारत रामायण ये सब हमारे लिए प्रमाण इसलिए है क्योंकि वेदों के अनुसार चले आ [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 2:19:21 · 05 Jan 2026

Sanjay Parashar Discussion | आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का दावा

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