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00:00:01:25 सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। धनतेरस की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं और दीप मलिकोत्सव की भी आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। एक भाई साहब का आज हमारे पास कॉल आया था। अ उनका प्रारंभिक कथन यही था कि हम उनके द्वारा जो उनके वो बहुत बड़े कोई विद्वान हैं जिनका नाम महेंद्रपाल आर्य है उनके साथ जो है चर्चा करें और उनको बड़ा विश्वास था। हालांकि हमने जब बाद में उन्होंने वीडियो भेजा तो कुछ और चीजें नजर आई जो मैं अभी आपको बताऊंगा पर उन्हें बड़ा विश्वास था कि हमारे जो महेंद्र पाल आर्य जी हैं बहुत ही तर्कसंगत और बहुत ही युक्ति युक्त और प्रामाणिक बातें करते हैं।

00:01:03:10 तो उनकी महिमा का गान करते समय वह जो महानुभाव थे उन्होंने यह भी कहा कि महेंद्रपाल आर्य पूर्व में जो है मौलाना थे कहीं कोई और उसके बाद जो है उनका मतांतरण हुआ और उन्होंने अभी तक 36,000 मुसलमानों को हिंदू बना दिया है 36,000 और इसके साथ ही साथ उन्होंने यह भी बताया कि 5000 करोड़ करोड़ का उन्हें प्रलोभन मिला था सनातन विरोधी तत्वों के द्वारा और 5000 करोड़ का प्रलोभन भी उन्होंने स्वीकार नहीं किया तो यह उनका दावा था और अटूट विश्वास था महेंद्र पाल आर जी के ऊपर तो हमने कहा कि ठीक है आप जो है उनसे चर्चा करा सकते हैं आप हमारी आप चाहते हैं कि हम उनसे चर्चा करें तो आप करवा दीजिए आयोजन करवा दीजिए इस बात का तो फिर भी मैंने कहा ये जो 500 करोड़ वाली जो बात है इस संबंध में क्या प्रमाण है? तो बोले कि वीडियो है उनको कॉल आया था। कॉल क्या ऑडियो आया था। मुझे ऐसा लगा कि उन्होंने कहा कि कॉल आया था।

00:02:19:08 मैंने कहा तो भेज दीजिए वो वीडियो जरा उसको। हम अपने दृष्टि से भी देख ले क्या है। तो वो वीडियो जब आया तो उसमें उनके जो महेंद्र पाल आर जी थे वह किसी की ऑडियो उसने अपनी ऑडियो रिकॉर्ड करके भेजी थी और उसको वह सुना रहे हैं। देखिए मुझे यह ऑडियो कॉल आया है। ऑडियो रिकॉर्ड आई वॉइस रिकॉर्डिंग आई है WhatsApp में जिसको मैं आपको सुना रहा हूं और जिसमें जो है देखिए मुझे प्रलोभन दिया जा रहा है ₹00 करोड़ रुपए का। अब जब मैंने वह वीडियो देखा और उसमें रिकॉर्डिंग सुनी तो पहली बात तो यह नजर आया कि पढ़ने वाला जो है वो किसी कागज को सामने रख के पढ़ रहा है। उसे कहते हैं ना उस रिकॉर्डिंग में उस व्यक्ति ने यह कहा महेंद्र पाल आर्य जी से कि आप जो है हमारी ओर आ जाओ और हम जो स्क्रिप्ट लिख के देंगे वो स्क्रिप्ट आप बोलो। तो हम इस बात के लिए आपको चाइना के जो क्या कहते हैं? युयान कहते हैं जो वहां का जो मुद्रा है वो किस रूप में जानी जाती है कुछ है तो चाइना के हम आपको करोड़ देंगे चाइना के अनुसार यूयान क्या है वो 5 करोड़ तो जो कि भारत में 500 करोड़ के रूप में मतलब माना जाता है रूप में परिवर्तित

00:03:34:16 हो के आपको मिल जाएगा 500 करोड़ ये उसने कहा था तो जैसे कि वो यह कह रहा है ना कि महेंद्र पाल आर्य जी को एक स्क्रिप्ट दी जाएगी वो सनातन विरोधी तत्व के द्वारा वो वो उसको बुद्ध के रूप में बता रहा है बोलने वाला तो वो जब महेंद्र पाल आर जी तो बहुत अच्छे से किसी बात को समझ के मेरा ऐसा मानना है कि पढ़ सकते हैं बोल सकते हैं वक्ता के रूप में तो जब वो किसी विधिवत रूप से स्क्रिप्टेड चीज को पढ़ेंगे भी तब भी उसको पकड़ पाना बहुत मुश्किल होगा कि स्क्रिप्टेड बोल रहे हैं या अपने मन से बोल रहे हैं। हां यू युवान हां जी तो क्या पहली बात तो यह आई क्या चाइना के 5 करोड़ युवान 500 करोड़ होते हैं क्या भारत के तो मुझे इस पर संदेह था मुझे इस बात की पुष्टि नहीं हुई है अब वो पता नहीं क्या बात है हो सकता है मैं इस मामले में गलत हूं कि क्या वहां पर एग्जैक्ट वो रकम के बारे में कहा गया है पर वह मुख्य विषय नहीं है मुख्य विषय यह है कि अगर महेंद्र पाल आर्य जी स्वयं यह पढ़ेंगे स्क्रिप्टेड किसी पत्र को तो वह इतने अच्छे से पढ़ देंगे कि उनको पकड़ पाना मुश्किल होगा कि वो स्क्रिप्टेड पढ़ रहे हैं कि अपने मन से बोल रहे

00:04:49:18 हैं। मगर यह जो व्यक्ति की जो वॉइस रिकॉर्डिंग सुनाई जा रही है उसमें स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि वो व्यक्ति अह जो है एक लिखी हुई चीज को पढ़ पढ़ के बोलता चला जा रहा है। और कोशिश कर रहा है कि उसमें भाव आ जाए परंतु वो ओवर एक्टिंग लग रही है। मेरे दृष्टि में तो ऐसा ही है। अब बात यह है कि 36,000 लोगों की यदि घर वापसी हुई है तो वो 36,000 लोगों की लिस्ट होगी आपके पास फिर कोई जब आप काउंट कर रहे हैं तो तो कृपया कर वो संपर्क सूत्र के साथ 36,000 लोगों की वो घर वापसी की लिस्ट आप प्रोवाइड करा दें। और इसमें कोई बुराई नहीं है कि आप जो है अगर घर वापसी करा रहे हैं तो इस पर हमें कोई आपत्ति है। हां यदि आप उन्हें सदा सनातन सिद्धांतों के नाम पर कुछ कचरा सिद्धांत इत्यादि देंगे। सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म देने की बजाय यदि आप उसको तथाकथित इस्लाम से ही मिलता जुलता कुछ देंगे तो आपके उन सिद्धांतों पर हम अवश्य अगर हमारे सामने आएगा और हमें लगेगा कि आपका प्रतिकार करने से करना आवश्यक है क्योंकि आपसे जनता प्रभावित हो रही है तो हम वहां करेंगे। मगर बैक टू द पॉइंट एक यू

00:06:04:28 बराबर 12 इंडियन रुपए तो करोड़ 12 कितना हुआ 50 करोड़ 12 से करेंगे तो 60 करोड़ हुआ तो वो 500 करोड़ कैसे हो गया तो तो खैर बैक टू द पॉइंट यह लियो लियो जी हैं जो बता रहे हैं कि एक युवान बराबर होता है 12 इंडियन रुपए। तो उस हिसाब से 60 करोड़ हो गया। मगर वो बता रहा है कि हम आपको 5 करोड़ चाइना के देंगे और वो आपके वहां आकर के 500 करोड़ तो थोड़ा सा कार्टूनिस्ट पन दिखाई दे रहा है वहां पर। खैर तो 36,000 लोगों की कोई लिस्ट तो इन्होंने जारी की नहीं है। और हमारी आपत्ति घर वापसी पे तो है नहीं। हमारी आपत्ति तो इस बात पर है कि सनातन के नाम पर इस्लाम से मिलती जुलती धारणाएं इस्लाम से मिलती जुलती चीजें क्यों परोसी जा रही है जबकि पास जबकि हमारे पास सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म है।

00:07:16:21 अच्छा अब इसके बाद वो भाई साहब जो है जो इस बात को लेकर के आए थे कि हमें हमारे महेंद्र पाल आर्य जो है वह बहुत ही विद्वान है और आप उनसे चर्चा कर लीजिए। सर्वशक्तिमान ईश्वर पर ही चर्चा होनी थी और आपको एक बात और बता दूं निकट भविष्य में वो जो निर्भय आर्य करके हैं उन्होंने हमें संपर्क किया था और उनके साथ जो है एक चर्चा आपको दिखाई दे सकती है। वो अपनी कुछ तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोक्ष को लेकर के मैंने आपके वीडियोस नहीं सुने हैं तो उसमें वो तैयारी कर रहे हैं और जल्दी आपको वो चर्चा आपके समक्ष आ सकती है। उनको जो अपने स्वयं को रैशन आर्य के नाम से भी बताते हैं और उसके रिगार्डिंग जो हमारी और उनकी बातचीत हुई है वो हमने YouTube पर प्रसारित कर दी आज सुबह जिसने ना देखी हो मेन चैनल है जो आान वहां पर तो फिर वो व्यक्ति जो है आगे करके कुछ बोलने लगा तो वहां पर एक बात उखड़ आई कि भाई क्योंकि मेरे मन में ये चल ही रहा था कि पौराणिक अलंकारिक क्योंकि वो चर्चा जिसने सुनी होगी वो जानता होगा तो

00:08:27:01 इसी बारे में पौराणिक और अलंकारिक के बारे में जो है चालू हो गई बात तो उसमें उस व्यक्ति ने हनुमान जी पर आपत्ति जताई पूछ होने पर और मैंने भी कुछ आपत्ति जताई तो वो आपको रिकॉर्डिंग अ सुनाई देगी अभी मगर कुल मिलाकर के बात क्या है कि उस व्यक्ति ने अंत में मुझसे कहा कि मैं आपसे यह जो हनुमान जी की पूछ वाला मामला है चमत्कार को मानना अथवा ना मानना इस वाले वाले मामले पर आकर के मैं आपसे अभी के अभी चर्चा करना चाहता हूं। वो बहुत उत्सुक हो गया क्योंकि मैंने शायद संभव था मेरी दृष्टि में मैंने उसको निरत्तर कर दिया। तो इस कारण से बहुत उत्सुक हो गए और बोले कि अभी के अभी चर्चा कर लो। तो भाई हमारे यहां भी त्यौहार है और और भी कई दायित्व होते हैं। तो मैंने कहा कि अभी तुरंत तो नहीं कर सकता। मगर उसके बहुत कहने पर फिर मैंने कहा कि चलो 2:00 बजे आ जाओ लाइव आ कर के बात कर लेते हैं। वह फोन पर ही करना चाहता था। तो फिर मैंने उसको कहा कि भाई लाइव में ही करेंगे तो आप अपनी फोटो भेज दीजिए। फोटो भेजने के नाम पर उसने कहा ठीक है मगर उसके बाद काफी देर तक फोटो नहीं भेजी तो जो फिर मैंने फोन किया कि फोटो क्यों नहीं भेज रहे हो? अगर करनी है तो बताओ नहीं करनी है तो हम अपना कार्य करें। तो फिर वो

00:09:42:07 बोला कि नहीं करनी है। फिर मतलब थोड़ा सा मुझे लगा कि आनाानी कर रहा था। मगर फिर तैयार हो गया तो उसने अपनी फोटो भेज दी। फाइनली थोड़ा सा पलट पलट रहा था अपनी बात से। फोटो भेज दी। मैंने अलंकारियों में देखा है। कि वह लोग अपनी बात से पलट जाते हैं क्योंकि उनके यहां यह सब मर्यादाएं कोई खास मायने नहीं रखती। कुछ भी बोल देते हैं। फिर कह देंगे मैं तो हूं ही नहीं। खैर अ क्या कहते हैं ये? जैसे वह एक था ना यह क्या नाम था जो हम पर जो पारिवारिक मेरी पारिवारिक जानकारियां एकत्रित करते हुए जो कटाक्ष करने कटाक्ष किया उपवास उड़ाया वो एक मीटिंग हुई थी ना उसमें वो आया था क्या नाम था उसका बड़ा फ्रेश फ्रेश सा एक लड़का है ना क्या नाम था उसका न्यू कमर है जो विज्ञान दर्शन नाम से है ना उसका चैनल मोहित गड मोहित गड तो वो भी यही कहता है कि भाई मैं जो है आर्य समाजी हूं ही नहीं आर्य समाजी ना होना क्यों क्योंकि आप जिसका पक्ष लेने आ रहे हो यदि आपकी बात सिद्ध हो जाती है तो उसका पक्ष सिद्ध हो जाए परंतु

00:10:57:10 यदि उसका दोष सिद्ध हो रहा हो तो उसकी बाध्यता में आप बाधित ना हो जाए मोहित गौर तो ऐसा दिखाई देता है अच्छा तो फिर उसने अपना दे दिया फोटो वोटोो दे दिया तो वही हमने फोटो लगाया कि भाई आ जाओ चमत्कार को मानने ना मानने के विषय में क्या चर्चा हो सकती है तो इस बात को लेकर के यह चर्चा आयोजित हुई है तो भाई इनको जरा वो ऑडियो सुना दो एक नंबर दो नंबर और तीन नंबर वाला वही आप आवश्यक है वो आप सुना दीजिए और मैंने उनको लिंक दे दिया है अब अगर वह नहीं आते हैं तो उनकी कायरता का हीक होगा यहां पर

00:11:42:19 हां कोई बात नहीं है आप पहले नंबर वाला सुना दीजिए कोई बात नहीं तो सनातनी जस्ट जी अच्छा मैं मेरे कुछ समर्थक हैं मैं जब तक ऑडियो रिकॉर्डिंग चालू हो रही है एक-एक करके जरा मैं पूछना चाहता हूं कि आप लोगों ने अपना जो नाम जो यह रखा है वह किस क्यों रखा है जैसे सनातनी जिस से मैं पूछूंगा कि क्या आधार है? जय श्री राम आपको जय श्री राम। थोड़ा सा तब तक एक समय

00:12:19:18 का सदुपयोग हो जाएगा। थोड़ा सा जो डिफरेंट नाम वाले लोग हैं वो अपना अगर नाम क्यों रखा है ये बताना चाहे तो बता सकते हैं। लिखकर बता दें तो हम यहां प्रदर्शित कर देंगे। सनातनी जस्ट जी अगर हैं सुन रहे हैं तो हां तोताराम जी आ चुके हैं। एंटर हो चुके हैं। तो हमारी जो अभी जो वो होने वाली थी वो नाम का अर्थ बताने की वो फिर किसी दिन कर लेंगे। तो तोताराम जी को ले लें स्टेज पर।

00:13:05:27 तोताराम जी अपना कैमरा ऑन कर लीजिए आप। थोड़ा फेस साफ दिखाई नहीं दे रहा आपका। एक तो कैमरा पहले कपड़े से साफ कर लीजिए। बहुत धुंधला आ रहा है चेहरा। तो एक बार हम लोग वो रिकॉर्डिंग सुन ले क्या जिससे कि हमारी पृष्ठभूमि तैयार हो जाए चर्चा करने की

00:13:58:18 [संगीत] हां तोताराम जी जी जी एक बार वो वो रिकॉर्डिंग सुन लेना जिससे हमारी वो पृष्ठभूमि तैयार हो जाए जी जी बोलिए रिकॉर्डिंग हम लोग एक बार सुन लेते हैं जिससे कि वो पृष्ठभूमि तैयार चलिए खैर रिकॉर्डिंग हम बाद में अलग से डाल देंगे। हमारे और आपके बीच में यहां पहुंचने तक क्या बात हुई? चलिए सीधे आते हैं कि आपका कहना है कि पौराणिक लोग वो हैं जो चमत्कार में विश्वास रखते हैं। और आर्य समाजी वो हैं जो चमत्कार में विश्वास नहीं रखते। चमत्कार को मानने पर आपत्ति मानते हुए आप उनको वेद विरोधी के रूप में पौराणिक रूप में प्रस्तुत करते हो। पौराणिक कहते हो तो हमने इस पर आपत्ति जताई तो आपका कहना था कि भाई आप लोग बंदर वो हनुमान जी के पूछ मानते हो। पूंछ कैसे हो सकती है बंदर हनुमान जी के है ना? तो फिर मेरा आपको कहना था कि भाई अमैथुनी सृष्टि की रचना कैसे हो सकती है? तिब्बत की धरती से

00:15:14:04 बिना माता के गर्भ से बिना माता के गर्भ धारण किए कोई मनुष्य कैसे उत्पन्न हो रहा है और भी ढेर सारी चमत्कारिक बातें तो आप पहले अपना पक्ष स्पष्ट कर दीजिए कि आप आर्य समाज चमत्कार को स्वीकार करता है कि नहीं करता है या केवल उन बातों को ही स्वीकार करता है जो वैज्ञानिक धरातल पर स्वीकार की जा चुकी है। देखिए ईश्वर जो है विज्ञान क्या है और ईश्वर क्या है? इसके बारे में जानना पड़ेगा हमारे लिए। ठीक है? ईश्वर ने क्या है? सिद्धांत दिया हमारे लिए। सृष्टि का निर्माण किया। जो सृष्टि का जो निर्माण किया पहले आप अपना पक्ष क्लियर कर दीजिए। वो सृष्टि के निर्माण पे हम लोग आएंगे बाद में। आप पहले अपना पक्ष क्लियर कर दीजिए कि आप चमत्कार को मानते हैं या सिर्फ उस बात को मानते हैं जो वैज्ञानिक दृष्टि से स्वीकार कर ली गई है आज के समाज के द्वारा या फिर ऐसा भी मानते हैं कि कुछ ऐसे भी कार्य होते हैं जो कि वैज्ञानिक तौर पर सिद्ध नहीं किए जा पाए हैं। स्वीकार नहीं कर पाए हैं। हो सकता है निकट भविष्य में ऐसा हो जाए कि वो उन बातों को भी स्वीकार कर ले। तो आप इनमें से कौन सी बात को

00:16:29:06 मानते हैं? दोनों दोनों में विश्वास तो दोनों को मानते हैं तो आपने ये जो कह रहे हैं कि हनुमान जी के पूछ कैसे हो सकती है तो इसको चमत्कार के रूप में स्वीकार क्यों नहीं करते इसको चमत्कार के रूप में स्वीकार इसलिए नहीं करते क्योंकि पूरे संसार में अगर हम किसी भी मानव की सर्वे करें तो कभी भी देखने को हमें पूछ नहीं मिलेगी। पूछ तो मिल जाएगी। व्यक्ति की पूछ तो होती है लेकिन पूछ नहीं होती है। इसलिए हम पूछ मिल जाएगी पर पूछ नहीं होती है। मतलब पूछ का जैसे आप है आपकी एक आपके कर्मों से क्या है? आपकी पूछ है। आपकी कर्मों से क्या है? आपकी पूछ है। लोग आपको पूछते हैं कि आप ये बताइए कि आपको किस तरीके ये काम जो है वो पूछ वो पूछ के भाई वो कहां है? वो कौन है? वो वाली बात किसी को जानना जी जी ये है तो कहने का तात्पर्य यही है ना कि आप उनहीं बातों को स्वीकार करते हैं जिनके प्रत्यक्ष प्रमाण मिलते हैं। आप कह रहे हैं पूरी दुनिया में कोई भी ऐसा मनुष्य नहीं है जो जिसके पूछ हो तो यानी कि आप प्रत्यक्ष प्रमाण जिसका है आप उसी को स्वीकार करते हैं कि हां ये पॉसिबल है। जी जी

00:17:46:28 इसीलिए क्योंकि हनुमान जी की जो पूछ थी कि नहीं थी तो वो नहीं मिलते हैं प्रत्यक्ष प्रमाण तो इसलिए आप जो है उसको स्वीकार नहीं करते हैं। जी हां संसार में अगर आप सर्वे करेंगे तो व्यक्ति काला गोरा लंबा चौड़ा ठीक है ये तो अरे भाई इतना लंबा नहीं है ना देखो आपके यहां पता नहीं त्यौहार मनाया जाता है कि नहीं मेरे यहां मनाया जाता है थोड़ा सा आप कृपा करिए खामखा की बातें बोलने का क्या मतलब है टू द पॉइंट हम लोग चल रहे हैं समझ रहे है ना जब मैं आपसे क्लियर पूछ लिया आपका पक्ष तो अब मुझे उस पर बोलने दीजिए आपका पक्ष क्लियर हो गया कि भाई जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण हमारे पास अवेलेबल है उसको मानते पहली बात तो यह है कि मेरे पास अभी वह सामग्री नहीं है जिसमें बता पाऊं कि उस प्रजाति को क्या कहा जाता था। पर बाली जो देश है उसमें ऐसी प्रजाति को का होना स्वीकार किया गया है जिनको कि जंगली मनुष्य भी कहा जाता था। कारण था कि उनके 6 इंच तक की पूंछ होती थी। सुन लीजिए सुन लीजिए। सुन लीजिए। मैंने आपको पूरा सुना ना? पूरा सुना ना? मैंने मुंडी तो नहीं हिलाई। मुंडी हिलाई क्या मैंने? मुंडी हिलाई थी क्या भाई साहब? मैंने हेलो हां हां बोलिए। मैंने मुंडी हिलाई क्या? मैंने मुंडी हिलाई क्या?

00:19:03:22 मैंने मुंडी हिलाई क्या भाई साहब? आप आगे बढ़िए। आगे बढ़िए। भाई साहब आप आपने ये जो किया ना इरिटेटिंग था। मत करिए ना ऐसा कुछ कि वो चर्चा से वो दूसरी ओर चले जाए हम लोग। ठीक है। मैं आगे बढ़ता हूं। ठीक है। तो पहली बात तो ऐसा स्वीकार किया गया है कि बाली में ऐसे भी प्राणी माने गए हैं जिनको कि जंगली पुरुष कहा जा सकता है। मनुष्यों की अपेक्षाकृत उनके रोम बहुत अधिक होते थे और क्या कहते थे बंदरों की अपेक्षाकृत वो ज्यादा बुद्धिमान माने जाते थे। उनके छ इंच तक की पूछ होती थी। ऐसी जानकारी हमें प्राप्त है। मगर अभी उसके कोई ठोस प्रमाण इत्यादि मेरे पास अवेलेबल नहीं है। इसलिए उसी बात पर हम ठहरेंगे नहीं। हम आगे बढ़ेंगे। अब आप एक बात बताइए कि गायत्री मंत्र को पढ़ने से क्या होता है? गायत्री मंत्र को पढ़ने से उसमें सद्बुद्धि की कामना की जाती है ईश्वर से। आप कुछ फल प्राप्त होता है कि नहीं होता है? बिल्कुल प्राप्त होता है। अच्छा। तो ये कहां पूरी दुनिया में सिद्ध है कि कोई मंत्र पढ़ देने से कोई फल प्राप्त हो जाएगा?

00:20:18:28 फल प्राप्त तो हमें ध्यान लगाना पड़ता है ना उसके लिए मतलब कहां से सिद्ध है ये कहां से सिद्ध है पूरी दुनिया में अपने अपने आत्मिक ज्ञान से अपने आत्मिक भाई साहब मैं वैज्ञानिक धरातल पर आपसे पूछ रहा हूं कहां से सिद्ध है जैसे आप प्रत्यक्ष रूप से मांग रहे हैं कि पूरी दुनिया में ऐसा कोई वानर नहीं है। आपने एक चीज और कही थी वानर ना होने के संबंध में कि अगर वो थे किसी समय पे तो आप कहां गए? तो डायनासोर थे किसी मैंने आपको कहा डायनासोर थे तो आप कहां गए? तो आपने यह भी जवाब दिया था वहां पर कि जो भगवान जो एक बार सिद्धांत बना देता उसको बार-बार नहीं बदलता है। तो अगर मैंने आपसे यह भी पूछा था कि भैया अमैतुनी सृष्टि कैसे बन सकती है तो आपका उसमें कहना था कि अमैतुनी सृष्टि बन बना दी उसके बाद फिर वो उसका सिद्धांत है कि वो माता के गर्भ से जन्म लेगा। यह सब बातें आपने की थी। खैर मैं वो बातों पर अभी आऊंगा। वो बातों पर मैं अभी आऊंगा। वो मैं बातों पर मैं अभी आऊंगा। अभी अभी अभी मैं पूछ रहा हूं आपसे कि गायत्री मंत्र को पढ़ने से सद्बुद्धि मिलती है। ये कौन सी वैज्ञानिक धरातल की कसौटी पर कसा गया है ये सिद्धांत

00:21:35:03 इसको महसूस किया जाता है। इसको कोई कोई विज्ञान की कसौटी पर नहीं इसको आप तर्क कसौटी पर कसेंगे उसके बाद यहां एक विचार निकल के आएगा। ये व्यक्ति स्वयं क्या निकल के आएगा बताइए? मतलब मतलब इसके प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। मतलब इसके प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। अरे भाई साहब अनुभव तो हमारा भी है ना। हमारा अनुभव कह रहा है कि हां थे। हनुमान जी थे जिनके पूछ थी। जी अनुभव तो हमारा भी कुछ कह रहा है ना कि क्या क्या हम लोग हम लोग हम लोगों का अनुभव भाड़ में जाए।

00:22:12:12 नहीं ये तो प्रेजेंट का है ना। ये तो हम प्रेजेंट में बता रहे हैं कि हम जब हम ओम या संध्या करेंगे ठीक है उसका मानसिक डेवलपमेंट के लिए ठीक है और भाई साहब आपने यहां पर ऐसी चीज को स्वीकार किया है जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है फिर आप हमारे प्रत्यक्ष प्रमाण के अभाव में हमारी चीजों पर आपत्ति क्यों जता रहे हैं आप नहीं मानो तो मत मानो मगर उसको आपत्ति क्यों जता रहे हो जब आप अपने प्रत्यक्ष प्रमाण के अभाव में अपनी चीजों को मान ले रहे हो हमें भी महसूस होता है हां हनुमान जी थे

00:22:47:15 महसूस होने के नाम पे हम नहीं चल सकते ना। नहीं तो प्रत्यक्ष प्रमाण की अगर बात है तो प्रत्यक्ष प्रमाण की अगर बात है तो प्रत्यक्ष प्रमाण की बात करिए। प्रत्यक्ष प्रमाण कहां है? गायत्री मंत्र से सद्बुद्धि आएगी। ये तो हमारा बिलीव है। ये हमारा बिलीव है। बिल्कुल। हम बताइए कौन से साइंटिस्ट ने कहां पे सिद्ध किया? पूरा पूरा विश्वास है तो ऐसे ही पूरा विश्वास हमें है। यानी कि प्रत्यक्ष प्रमाण के अभाव में भी आर्य समाज ने कई चीजें स्वीकार कर रखी है। टू द पॉइंट ये है। पॉइंट की बात यह है कि प्रत्यक्ष प्रमाण के अभाव में भी आर्य समाज ने कई चीजों को स्वीकार किया है। और बताइए बिना माता के गर्भ में पूरी दुनिया में बिना माता के गर्भ से पूरी दुनिया में कहां पर संतान उत्पत्ति होती है बताइए।

00:23:39:08 तो ये ईश्वर का उसको सृष्टि की रचना कैसे होगी? देखिए यही चीज़ तो यानी कि ईश्वर चाहे ईश्वर चाहे एक मिनट एक मिनट ईश्वर चाहे तो प्रत्यक्ष प्रमाण जिसका प्राप्त नहीं है या जो वैज्ञानिक कसौटी पर कसा नहीं जा पा रहा है ऐसे कार्य भी कर सकता है जिनको हम चमत्कार कहते हैं। सीधी बात वो ऐसे ऐसा मनुष्य बना सकता है जिसने कि वो माता के गर्भ के बिना भी मनुष्यों को बना सकता है। यानी कि वो ऐसा वानर भी बना सकता है जो मनुष्यों की तरह बात करता हो। मनुष्यों की तरह विद्वान हो या फिर ऐसा मनुष्य भी बना सकता है जिसके शरीर की आकृति वानरों से मिलती जुलती हो।

00:24:35:10 बानों से मिलती जुलती हो हम वानरों से मिलती जुलती तो होगी लेकिन पूछ कैसे बना देगा? अरे भाई बिना माता के गर्भ के इंसान कैसे पैदा कर देगा? बताओ। अरे तो सृष्टि का निर्माण करना है। ठीक है। यानी कि अपमान ईश्वर चमत्कार कर सकता है। जो वैज्ञानिक धरातल पर कसा नहीं जा सकता है वो काम भी वो कर सकता है। तो विज्ञान विज्ञान क्या है? पहले तो इसको क्लियर करना ना विज्ञान क्या है? आप बताइए विज्ञान क्या है? ना कि जो प्रत्यक्ष प्रमाण जिसके अवेलेबल नहीं है उसको हम नहीं मानते। तो जब माता के गर्भ के बिना जन्म लेने वाले इंसान के प्रत्यक्ष प्रमाण आपके पास नहीं है तो आप उसको क्यों मानते हैं? दिखाओ एक इंसान माता के गर्भ के बिना जन्म ले रहा हो जो एक विज्ञान विज्ञान यही है कि एक जीव किसी जीव से जन्म लेता है। ये विज्ञान है। अब ये इसके लिए ये विज्ञान आया कहां से? विज्ञान हमें ईश्वर ने दिया। वही तो भैया वही तो हम भी कह रहे हैं कि भैया जहां साइंस खत्म हो जाती जिसके बाउंड्री के बाहर साइंस नहीं जा पाती है वहीं पर स्पिरिचुअलिटी आती है। मगर आप अपनी बातों को रखने के लिए तो जो

00:25:50:12 विज्ञान के बाहर की चीजें भी है वो स्वीकार करते हो। मगर सामने वाले की चीजों पर कटाक्ष करते हो। टिप्पणी करते हो। नहीं मेरी आप सुनिए। मेरा कहने देखो टू द पॉइंट मेरी मेरी बात इतनी है उसको समझ लो आप कि आप भी ऐसी कई चीजें स्वीकार करते हैं जिसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है वहां पर बिलीफ है आपका इसी प्रकार से हम भी करते हैं तो फिर आपको हमारे करने पर आपत्ति ये क्यों हो जाती है कि भैया पूरी दुनिया में कोई भी ऐसा वानर नहीं है या कोई भी दुनिया पूरी दुनिया में ऐसा मनुष्य नहीं है जिसके पूंछ हो फिर आप यहां तर्क करने आ जाते हैं और फिर हम आपसे पूछते हैं कि माता गर्भ के बिना इतना मनुष्य जन्म कैसे ले रहा है? यहां इतने हिस्से में तो आपने भी विज्ञान के बाहर जाकर चमत्कार को स्वीकार कर लिया।

00:26:37:08 नहीं तो हमें ये चमत्कार नहीं दिखाई देता ना कि कोई आसमान से आज टपक रहा है कोई व्यक्ति। ये चमत्कार हमें दिखाई नहीं देता। ये आपकी प्रॉब्लम है। आप चमत्कार तो स्वीकार कर रहे हैं। वरना प्रत्यक्ष प्रमाण एक एक मिनट भाई साहब एक मिनट आप प्रत्यक्ष प्रमाण दिखाइए। माता के गर्भ से जन्म लेने वाली बात का। बिना माता के गर्भ से कौन जन्म लेता है? प्रत्यक्ष प्रमाण दिखाओ। और अगर नहीं है तो फिर चमत्कार कहते किसको है यह बताओ माता के तो सृष्टि के सृष्टि के सृष्टि के आदि में हुआ था जब सृष्टि का निर्माण किया तब तब मनुष्य युवा अवस्था में ईश्वर ने मनुष्य की रचना की युवा अवस्था में अच्छा आप ये बताइए क्या ऐसा कोई प्रमाण है जिसमें भगवान ने ये कहा हो कि ये ये कार्य मैंने अभी कर दिया दोबारा नहीं करूंगा

00:27:27:18 जी ऐसा कोई कार्य ऐसा कोई प्रमाण है जिसमें भगवान ने कहा हो यह कार्य मैंने अभी कर दिए दोबारा नहीं करूंगा यही प्रमाण साक्षात दिख रहा है मतलब प्रमाण नहीं है इस विषय में वो सृष्टि के प्रारंभ में जो करता है बाद में नहीं कर सकता जी बिल्कुल नहीं तो फिर आप ये क्यों कह रहे हो तो सृष्टि के प्रारंभ में किया था अब थोड़ी ना मिलेगा प्रमाण दिखाओ मुझे भाई भाई मुझे दिखाओ ना कहां पर बिना माता के गर्भ के जन्म हो रहा है। ये प्रमाण आप हमें दिखाओ ना। किस बात का? हम तो ये कह रहे हैं कि बिना माता को बिना ये विज्ञान है ना हम तो विज्ञान को लेकर चल रहे हैं और ईश्वर को साथ लेकर चल रहे हैं क्योंकि ईश्वर ने सृष्टि का रचना किया। उसमें युवा अवस्था में मनुष्य की रचना कर दी और उसके बाद में उसका विधान बता दिया। मनुष्य क्या बात स्वीकार किया है कि डायरेक्ट युवा अवस्था में ही मनुष्य जीवन स्टार्ट हुआ है। जी बिल्कुल नहीं गलत बिल्कुल राइट साइंस ने माना है धीरेधीरे परिवर्तन हुआ है सीधे युवा अवस्था का वो नहीं माना है साइंस ने आप मानते हो साइंस की बात नहीं साइंस की बात

00:28:42:26 जो जो तर्क की कसौटी पर फिट बैठती है उसको मानते हैं तो हमने तर्क की कसौटी आपसे पूछ तो ली सद्बुद्धि कैसे आ रही मंत्र पढ़ने से तर्क की कसौटी पर उतारो उसको खरा यह आपका बिलीफ है बिलीव नहीं है। यह बिलीव नहीं है। यह खुद को महसूस करेंगे तब आपको पता चलेगा। आप करिए ना। आप तो खुद करते हैं। यानी कि आप यह चाहते हैं ना कि हम ये बात माने कि आपको जो महसूस हो रहा है वो सही बात है। जी बिल्कुल। तो बस ऐसे ही हमें महसूस हो रहा है कि भैया वो थे। उनके पूछ थी।

00:29:16:19 पूछ थी तो हमें दिखाओ ना। ये चीज महसूस ही तो कर रहे हैं आप इस चीज को। अरे तो आप मुझे दिखाओ ना। आप भी तो महसूस ही कर रहे हो। सद्बुद्धि के आने का प्रमाण दिखाओ तो इसके लिए आप तो कर रहे हो अगर इस चीज का मतलब इस चीज को आप अध्ययन करिए ना फिर आपको पता चलेगा बैठकर संध्या करिए तो इस चीज का आप अध्ययन करिए आपको पता चलेगा ये बात तो मैं भी कह सकता हूं तो ये चीज तो हमें तो दिखनी चाहिए ना आप देखिए आप क्या है आगे बढ़ते जा रहे हैं आपने जब मुझसे ये कहा कि भैया अगर तुमको महसूस हो रहा है तो उसका प्रमाण भी तो दिखाओ तो मैंने जब आपसे कहा कि आपको महसूस हो रहा है आप भी प्रमाण दिखाओ तो आपने ने क्या कहा? प्रमाण नहीं आप अध्ययन करो। ये क्या है? आपके अगले स्टेप पर चले जा रहे हो। मैंने आपसे क्या कहा? आपके पास बिना माता के गर्भ के मनुष्य के जन्म लेने के संबंध में कोई प्रमाण है वो भी युवा अवस्था में। कोई प्रमाण है प्रत्यक्ष प्रमाण तो वहां पर आपका बिलीव यही है। वहां पर आपका महसूस करना ही है।

00:30:20:02 तो प्रमाण तो आपके पास ही आपके पास है प्रमाण बताओ। मेरे पास तो प्रमाण है मेरा बिलीव है मुझे मुझे जो गुरु वचनों से जो परंपरा से प्राप्त हुआ है उसके अनुसार मुझे विश्वास है कि हनुमान जी थे नहीं तो ये उसी प्रकार जिस प्रकार जिस प्रकार आपको गुरु वचनों से आपको शास्त्र वचनों से जो ये प्राप्त हो रहा है कि भैया क्या कहते हैं कि गायत्री मंत्र पढ़ने से सद्बुद्धि मिलती है। हम भी मानते हैं सद्बुद्धि मिलती है। मगर हम आपको यह याद दिला रहे हैं कि आर्य समाज भी ऐसी कई चीजें मानता है जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं होता। मगर वो अपने प्रतिद्वंदी पर या उसके हिसाब से जो उसका शत्रु है उस पर कटाक्ष करने के लिए उनकी उसकी उन चीजों पर कटाक्ष करता है। उसका हास्य करता है। उसका उपहास बनाता है जो चीजें अभी विज्ञान के द्वारा जो आधुनिक विज्ञान है इसके द्वारा जो चीजें स्वीकार नहीं की गई है। अपनी कई ऐसी चीजें मानता है जो आधुनिक विज्ञान के द्वारा स्वीकार नहीं की गई है। मगर सामने वाले की इसी प्रकार की चीजों पर कटाक्ष करता है। उपहास उड़ाता है। तो यह तो अन्याय है ना। या तो आप बिल्कुल खड़े हो जाओ कि नहीं हम आधुनिक विज्ञान के द्वारा स्वीकार चीजों को ही हम स्वीकार करेंगे अन्यथा नहीं करेंगे। मगर आप तो कई बार करते हैं

00:31:35:03 उसके बिना जैसे मैंने आपको कहा जैसे मैंने आपको कहा कि युवा अवस्था में बिना माता के गर्भ के एक आपने पहला क्या कहा था कि पूरी दुनिया मुझे दिखा दो। कहीं किसी के पूछो पूरी दुनिया मुझे दिखा दो। कहीं बिना माता गर्भ के और वो जो है युवा अवस्था में पैदा हो रहा हो। अमैथुनी सृष्टि का मतलब ही है विज्ञान के बाहर जाकर के जो है जन वो सृष्टि का प्रारंभ होना। वहीं से चमत्कार शुरू है। भैया जहां साइंस की बाउंड्री है वहीं से भगवान शुरू होते हैं। नहीं तो यही सब कुछ सच्चिदानंद मिल जाता है व्यक्ति को।

00:32:13:22 आया कहां से? साइंस तो ईश्वर ने दिया। उसका विधि तो भाई मैं आपसे पूछ तो रहा हूं आप इतनी बातें क्यों बदल रहे हो आप मुझसे प्रत्यक्ष प्रमाण मांगते हो जब मैं मांगता हूं तो कहते हो अध्ययन करो क्या बात है ये कहां गए तोताराम जी साइंस है क्या? साइंस ये है जो बहुत सारे होने वाले घटनाक्रमों को देख के आपको रिजल्ट दे देती है कि ऐसे से ऐसा होता है। ठीक है? बस उसी को साइंस का नाम दे दिया। जो जो साइंस की समझ में आता जाता है वो एक समीकरण निकाल लेती है कि अगर ऐसा होगा तो ऐसा होगा ऐसा होगा तो ऐसा होगा वो सिद्धांत वो दे देती है उसी का नाम साइंस है अब जैसे जैसे वो ये पकड़ पाएगी कि भैया ऐसे वानर भी हो सकते हैं ऐसे वानर भी पाए जा सकते यद्यपि ऐसा कहीं कहीं संदर्भ मिलता है कि बाली में ऐसी प्रजाति थी जिनके मनुष्यों की अपेक्षागत रोम ज्यादा होते थे और वो

00:33:30:24 वानर बंदरों की अपेक्षागत अधिक सामाजिक थे अधिक बुद्धिमान थे ऐसे संदर्भ में मिलते हैं। 9 लाख वर्ष पूर्व की प्रजाति बताई गई। अब लुप्त हो गई है। मगर मामला यह नहीं है। मामला यह है कि आप अपनी कई चीजें ऐसी जब मानते हैं जो साइंस की कसौटी पर खरी नहीं उतरती है। कसी नहीं गई है। तो फिर सामने वाले की ऐसी चीजों पर आप उपास क्यों बनाते हो? सामने वाले की ऐसी चीजों पर आपत्ति क्यों जताते हो? फिर वहां पर शब्द प्रमाण के रूप में स्वीकार करो बस। और अभी अगर इनकी बातें अगर खोल के देखेंगे इनकी इनकी किताबें पढ़ेंगे तमाम सारी ऐसे उदाहरण निकल आएंगे जहां साइंस की कसौटी पर खरा नहीं उतरा है ये तो मैंने अभी ये दो बातें की है तो ये बात सुना दीजिए वो रिकॉर्डिंग सुना दीजिए इनकी

00:34:21:01 चले गए भाई साहब ऑपरेटर जी रिकॉर्डिंग सुना दीजिए। अरे यहां भी सुना दीजिए मेन पर भी डाल देंगे। तो बंद कर दें फिर।

00:35:02:14 नहीं सुनानी है तो बताइए फिर बंद कर दें। तोताराम जी चले गए। जी ये मैंने आपसे भेजा है। हां आपने कौन सा पेज नंबर भेजा है? ये नहीं है। दूसरी है। पहली वाली सुनाइए। अपनी चीजें महसूस होती है। महसूस होने पर मान लो। अनुमान पे मान लो। शब्द प्रमाण मान लो। सामने वाले की चीजों पर कटाक्ष करो। जो निर्भय आर्य आने वाले उनका एक वह था कि भाई जब मैंने आपको जोकर का आपने मुझे अलंकारी कह लिया तो बात बराबर हो गई। नहीं अलंकारी आपके जोकर कहने के प्रतिकार स्वरूप नहीं कहा गया। अलंकारी जो आप एक शब्द यूज़ करते हो पौराणिक और वो भी आपके द्वारा यूज़ किया जा रहा है तो उसका पर्यावसान किस में होता है? वेद विरोधी के रूप में। वेद विरोधी इसलिए

00:36:17:20 वैदिक ही अपने आप को भले ही कहते हो वैदिक काट दो पौराणिक रूप में प्रस्तुत करो तो आपके द्वारा भले ही हमारे द्वारा वही शब्द यूज़ में आता भी हो मगर आपके द्वारा जब वही शब्द यूज़ होता है तो उसमें आपके द्वारा हीन भावना उस शब्द के द्वारा प्रकट होती है। तो पौराणिक जो शब्द इस रूप में वेद विरोधी होने के रूप में प्रयोग में लिया जाता है उसके प्रतिकार स्वरूप हमने आपको अलंकार कहा। अब यदि पौराणिक शब्द में ऐसा कोई अवमानना नहीं है तो अलंकारी में भी अवमानना नहीं है। यदि पौराणिक हमारे यहां के कुछ लोगों के पोस्टर पर लिखा रहता है तो अलंकारी भी आपके यहां पर आपके यहां के लोगों के नाम से जुड़ा रहता है। दूसरी बात कि उन्होंने तो अपने को व्यक्तिगत कहा है। क्या कहते हैं? उन्होंने स्वयं को व्यक्तिगत कहा है। और व्यक्तिगत किसी व्यक्ति ने अपने नाम में निष्ठा विद्या अलंकार लगा लिया। व्यक्तिगत लगाया। कम्य कम्युनिटी पर तो नहीं लगाया। तो मतलब कहने का यह है कि आप हमारे विरोध में कोई कार्य करोगे तो हम आपके द्वारा निर्धारित कार्य के अनुपात में ही आपके विरोध में हम कार्य करेंगे। भाई आपने हमसे हमारे विरोध में यह वर्ड ख्यापित करने से पहले अनुमति थोड़ी ना ली थी कि हम ऐसा करने जा रहे हैं। आप

00:37:32:21 भी ऐसा ही करना अगर हमारा विरोध करना तो जब आपने एक जो स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है जब उसको ब्रेक कर दिया तो फिर स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल को ब्रेक करके दूसरी चीज की जा रही है। ठीक है? और दूसरी बात क्या है? कुल मिलाकर के क्रम है। आपने पौराणिक से हमें वेद विरोधी सिद्ध करने का प्रयास किया। तो हमने आपकी ऐसी छवि बताई आपको कि आप अलंकारी हो। और जब आप वहां पर आए तो आपने जो है मंच का अपमान किया। वहां पर कुछ ऐसी चीजें की जो कि ठीक नहीं थी जो आपने स्वीकारा भी उसके लिए आप आपका जो है अभिनंदन है उस बात के लिए। परंतु जो अवमानना हुई उसके कारण हमने तू तड़ा की भाषा बोली। मगर जब आपने उस पर भी जाकर के आगे जोकर बोला या आप हो सकता है गाली भी दे देते क्योंकि ऐसे वीडियोस भी सामने आए हैं जिसमें ये कोई इनकी मीटिंग चल रही है। हालांकि सबके चेहरे नहीं दिख रहे हैं मगर उसमें जो है ये दिखाई दे रहा है कि गाली गलौज भी इनके यहां हो रही है। तो अगर आप गाली भी देते थे तो भी हम मौन हो जाते। हमारे लिए जोकर ही पर्याप्त था कि भाई अब जोकर जब इसने बोल दिया इस व्यक्ति ने तो अब यहां से आगे चर्चा का स्पेस खत्म हो गया। तो आप पौराणिक के बदले में अलंकारी

00:38:47:27 मंच का अपमान मंच पर आकर के कुछ ऐसी चीजें करने में जो कि ठीक नहीं थी उनके स्वर उनके बदले में तू ततड़ाक जो आपका इनका कहना था निर्भय का और क्या कहते हैं उसके बाद जब इन्होंने वहां से जाने के बाद जोकर शब्द का उपयोग किया तो उसके बदले में हमने ये कह दिया फिर आप क्षमा मांगो उसके बाद आगे होगा तो इन्होंने क्षमा मांग ली है उसमें ऑडियो कॉल करके और मैं कहूंगा कि और अन्य जो समाजी हैं अलंकारी उनसे कहीं अपेक्षाकृत ये जो निर्भय है इनका क्या कहते हैं जो मतलब बुद्धि बल अधिक है और थोड़ा सा वाक पटता है चीजों को समझने के लिए प्रयासरत है तो इस रूप में इनका अभिनंदन भी होना चाहिए परंतु वो बात एक स्पष्ट है कि जब आप किसी के अनुमति के विरुद्ध या इच्छा के विरुद्ध जाकर के उसकी एक पहचान उस पर चिपकाने का प्रयास करते हो तो फिर आपको इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। जब आपकी इच्छा के विरुद्ध आपकी पहचान को ख्यापित करने का प्रयास जब सामने वाला करे इस बात को लेकर के फिर उस बात को फिर आगे बढ़ाना फिर जोकर पर चले जाना। फिर जोकर का भी अगर यद्यपि हमने जोकर का

00:40:02:28 जवाब दिया नहीं है। मगर अगर हम कहते कि जोकर जोकर पर भी हम कुछ तंज कर दे तो उस पर फिर गाली पर चले जाना तो एक जोकर जब बात आ गई तो वहां पर बात स्पेस खत्म हो जाता है। जब ये ऋषिवाच ने तेरी परंपरा के चितड़े उड़ा देंगे। ये सब कर दिया था तो वहां स्पेस खत्म हो गया। चर्चा का स्पेस खत्म हो गया। वहां जब मोहित गड ने वहां आकर के व्यक्तिगत उपहास उड़ाया सबके साथ मिल बैठकर तो उसके बाद यह लिखना बेकार था ना। कि भैया मुझसे आप चर्चा कर लो। आप पहले स्रांत तरीके से कांटेक्ट करते और मोहित गौर के घमंड की एक बात और बताऊं आपने। मोहित गौर ने कभी मुझसे Instagram पर संपर्क किया था। मुझे क्या मालूम कौन है भाई? बोला मैंने पूछा कि आपका परिचय तो बोले कि मेरा मेरा पेज ही मेरा परिचय है। वो चाहते थे कि मैं उनका पेज देख के आऊं कि उनका महिमा गान कितना बड़ा है। मैंने वो पेज कभी देखा ही नहीं। नहीं मैंने फिर आगे फिर उसमें इंटरेस्ट जताया तो मोहित गौर को लगता रहा कि यह व्यक्ति मुझे जानता है फिर भी इसने मुझसे चर्चा स्वीकार नहीं की। मुझे मालूम ही नहीं था मोहित गौर ये जो दिखने वाला लड़का है आर समाजी है यही वो है विज्ञान दर्शन के नाम से इसका पेज है। तो ये सारा किस कारण से हुआ? यह हुआ

00:41:19:08 क्या कहते हैं? अहंकार के कारण। ठीक है? एक मिनट। तो अगर किसी को वो निर्भय आर्य वाली बात में अगर समझ में ना आया हो तो वो समझ ले पौराणिक अलंकारी मंच की अवमानना उखड़ के बात करना जिसमें कि तुम आपकी बजाय तू तड़ाक जैसे शब्दों का उपयोग होना मुझे बिल्कुल एग्जैक्टली तो याद नहीं है क्या से क्या हुआ था। उसके बाद जोकर कह देना हमारा शांत हो जाना। यह क्रम है। और कभी भी या कोई भी संसार में कोई भी जो आज इतने सारे सेक्स हो गए हैं। कोई भी जब यह बात उठाएगा ना कि आपने हमारे लिए ऐसा कहा तो उसको ये ध्यान रखना चाहिए कि सबसे पहले जहां पर बुराई शुरू करने का नाम आता है ना कि किसने बुराई शुरू की, किसने कटाक्ष करना शुरू किए। तो उसमें सबसे पहले नाम आता है कि शंकराचार्य की बुराई शुरू की गई। हमने आर्य समाज तो था ही नहीं अस्तित्व में जो हम उस पर कटाक्ष करते उसका उपास उड़ाते सबसे पहले तो आर्य समाज आया अस्तित्व में तब उसने किया

00:42:35:10 हम तो ये वाली बातें करने से पहले झांक ले कि आपके इतिहास में शुरू कहां से हो रही है ये सब बातें खैर आ जाते हैं कोई आए हैं यहां पर चले भी गए हैं क्या हुआ वह चेहरा नहीं दिखाना चाह रहे थे क्या बोगस इरफान पता नहीं कहना क्या चाहते हैं मगर

00:43:20:28 अ एक ही मैसेज बार-बार कर रहे हो। इसका मतलब है कि आपके अंदर आपके पास ज्यादा मटेरियल नहीं है। हमारे विरोध में एक ही मैसेज करोगे तो बैन कर दिया जाएगा। विरोध भी करो विरोध भी करो मगर दमदारी के साथ विरोध भी करो। निर्भय आर्य की तरह विरोध करो जिसका सम्मान किया जा सके समय आने पर हैं। उस दम लगनी चाहिए ना उसमें विरोध में भी गिरो गिरो। मगर उस झरने की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता खोने नहीं देता। यह क्या है? एक मैसेज पकड़ लिया उसको कॉपी पेस्ट करते चले जा रहे हो मतलब उसमें भी चंदी चोरी

00:43:59:18 ठीक है तोताराम जी चले गए हैं 9 दो 11 हो गए हैं और क्या कहें तोते उड़ गए चलिए खैर ठीक है फिर सभी को जय श्री राम। आप सब त्यौहार मनाएं और बहुत जल्द वो चर्चा होगी। निर्भय हमसे संपर्क करेंगे पुनः और

00:44:35:13 ये बोल देखिए आप मैं इसमें थोड़ा सा अपने भाइयों को कहूंगा ये इस प्रकार की बातों से प्रभावित मत ना हो। इस कारण से अपने जीवन में साधना का बल बढ़ाएं। यह इस प्रकार की बातें विचलित करने वाली नहीं है। हमें समत्व जितना प्राप्त होगा ना समत्व उतना ही हमारा जो परफॉर्मेंस है बहुत अच्छा होगा। सचिन जो है 90 के 90 के आसपास जाकर के बहुत बार आउट हो जाता था। उसका कारण था कि वो नर्वस हो जाता था। उसको कहा जाता था नर्वस 90। तो हम लोग यदि विचलित ना होना सीख ले जीत का लालच हार का भय ना हो शत्रु प्रतिकार करो तो हमारा सबसे अच्छी वो आएगी आउटपुट हम ज्यादा अच्छा निकाल सकते हैं तो आप इन बातों से विचलित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। कोई अगर इस तरह से मुंह चला देगा आपके सामने हमारा कुछ नहीं बिगड़ रहा है। हम सैद्धांतिक रूप से बहुत बलिष्ठ हैं और अपना सिद्धांत का बल, शास्त्र का बल, गुरु का बल, गोविंद का बल और साधना का बल एकत्र करें। साधना के बल एकत्र हो जाने से क्या होता है? इस प्रकार की चीजें सामने होती हैं। तो उसका हम बहुत मुंहत उत्तर देने के योग्य

00:45:50:19 होते हैं। विचलित ना होने के कारण। बहुत मुंहत उत्तर देते हैं। विचलित ना होने के कारण समत्व को प्राप्त करने का प्रयास करिए और प्राप्त होता है। भक्ति से भगवान की भक्ति करें। खूब भक्ति करें। उससे बल प्राप्त होगा। जब ऐसी विरोधी चीजें आएंगी ना हमारे सामने। इतनी बुरी बुरी चीजें कहींंगी तो हम मुस्कुराएंगे। क्योंकि भगवान जैसे मुस्कुराते हैं ना बैठे सब कुछ जिनके पास चक्र है सुदर्शन चक्र। जैसे वो मुस्कुराते हैं वैसे ही मुस्कुराएंगे। मुसीबतों में मुस्कुराएंगे। तो आप लोग ऐसे समत्व स्थिति को प्राप्त करने का प्रयास करें। वो होगा साधना के बल से। साधना का। साधना का बल बहुत कर दीजिए। आप देखिएगा यह सारी स्थितियां आप यूं चुटकियां बजाते हुए सह लेंगे। मुझे पता है पीड़ा होती होगी जब कोई ऐसा कहता होगा। है ना? पहाड़ी जी जुड़ गए हैं। क्या बात है? एंटी रामपाली स्क्वाड आ गई क्या?

00:46:51:01 एंटी रामपाल स्क्वाड आ गई पूरी की पूरी। हां ए आर एस नहीं भैया। जय श्री राम। बताइए पांडी जी बताइए आप ही बता दीजिए शास्त्रवाद जी तब तक जी भैया अभी का वीडियो जो देख रहे थे लाइव अभी तोताराम जी क्या-क्या बोल रहे बोल रहे थे हनुमान जी के पूछ के विषय में जो आप जो आजकल लाइफ का विषय था जब खुद पे आ गया बात तो

00:47:38:12 जी भैया जब खुद पे बात आ गया तो उनके पास कोई प्रमाण ही नहीं और दूसरों पे आ गए आक्षेप करने के लिए। इसीलिए मैं मैं यह चाहता हूं कि हम लोग एक और बहुत प्रयास करें। अपने स्वयं को ऐसा बनाए ना कि हर स्थिति में हम किसी का सामना कर सके। सनातन विरोधी तत्व का स्वयं को ऐसा बनाएं। हम लोग अगर हम इस पर ध्यान दें कि अगर शास्त्र में ये कहा गया है कहीं पर ये लिखा है। क्यों लिखा है? अब पूरा वैदिक वांग में हमने पढ़ा हो नहीं तो कोई भी व्यक्ति कहीं से भी प्रश्न कर सकता है। इसलिए पांच सिद्धांतों को याद करिए। स्वाध्यन करिए मगर पांच सिद्धांतों को पकड़ के रखिए। यदि ये आपके पास होंगे आप कभी भी डगमगा नहीं सकते। पांच सिद्धांत सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म को ख्यापित करने वाले पांच सिद्धांत। तो आपकी स्थिति ऐसी हो जाएगी कि आप रास्ते में जा रहे हैं, मूंगफली लेने जा रहे हैं। मगर वहां कोई सनातन विरोधी मिल गया उसको वही चुप करा दिया। ऐसे हो जाएंगे आप। बिल्कुल। हम लोग इसमें अगर ध्यान देंगे ना कि हमको सारे शास्त्र पढ़े होने चाहिए। कहां क्या लिखा है?

00:48:53:15 श्लोक क्रमांक शास्त्र के कौन से चैप्टर में ये बात लिखी है। अगर इस पर इस पर ही निर्भर हो जाएंगे तो कभी भी हम वो नहीं होंगे। क्या कहते हैं जिसको परास्त नहीं किया जा सकता है कोई एक शब्द है ना अजय कभी भी हम अजय नहीं हो पाएंगे क्योंकि हम कभी भी पूरे शास्त्र तो पढ़ नहीं पाएंगे तो वो संभावना बनी रहेगी कि पता नहीं उस शास्त्र में कहां पर क्या बात कही गई हो जिसके कारण कोई एक प्रश्न सामने आ जाए तो आप स्वा अध्ययन करते रहिए शास्त्रों के मर्मज्ञ बनने का पूरा प्रयास करिए स्वा अध्ययन पूरे पूरा करिए मगर पांच सिद्धांत वो आप हमेशा पहले याद कर लीजिए सदैव के लिए वो पांच सिद्धांत जिसके पास होंगे वो रास्ता चलते अपने अपनी संतान को खिलौना दिलाने भी जा रहा होगा ना और उस समय भी अगर कोई कुछ कह देगा सनातन के बारे में तो वहां पर भी उसकी वो उसको काउंटर कर पाएगा वहां पर भी उसको वो निरुत्तर कर देगा क्योंकि आफ्टर ऑल सब बातें एक तरफ जब शास्त्र की बात आएगी तो आपके पास क्या होगा परंपरा अगर शास्त्र का कोई ऐसा संदर्भ आ भी आपके सामने जिसके बारे में आपने जानकारी नहीं की है तो आपके पास क्या है फिर वहां पर परंपरा

00:50:10:19 जी भैया परंपरा ही तो एक ऐसा अस्त्र है मतलब एक ऐसा महा अस्त्र है जिसके सामने कोई नहीं टिक पाएगा कितना भी कोई भी आ जाए अपने स्व को लेकर के कोई नहीं कोई सीख ही नहीं पाएगा अभी कुछ दिन पहले गुरुदेव इसीलिए कहते हैं कि इतने इतने लाख वर्ष पूर्व से हमारी परंपरा है। साक्षात हरिहर के तेज से हमारी नियुक्ति होती है। इसीलिए तो कहते हैं उसकी बहुत वैल्यू है। आज देखो कहीं ना कहीं परंपरा के नाम से हलचल है समाज में। नहीं तो कुछ दिनों पहले तक लोग जानते नहीं थे परंपरा के महत्व को। आज परंपरा के महत्व को जानते होते तो क्या फंसते हैं रामपाली गैंग में गैंग के चक्कर में लोग हमारे

00:51:07:22 तो शास्त्रों शास्त्रों के ज्ञान को तो पहुंचाना ही है वो ये जो पांच सिद्धांत है ये भी शास्त्रीय ज्ञान है मगर सबसे पहले इन पांच सिद्धांतों की स्थापना समाज में बहुत प्रखरता से होनी चाहिए जी परंपरा पांच सिद्धांत क्या है? इस पर मैंने वीडियो बनाया है और बहुत जल्द और भी वीडियो बनाऊंगा। ठीक है। मुझे लगता नहीं है और कोई आएगा।

00:51:40:19 ठीक है। फिर सभी को जय श्री राम। मेरे ख्याल से कोई आए भाई। रूल है बिना रूल नहीं कर सकते हैं। आान ब्रो आई कांट रिवील फेस। मेरे को लाइव में लाओ। देखिए वैचारिक मतभेद के निमित्त अगर चर्चा है तो हम बिना फेस के नहीं लेते हैं और अगर आप हमें जानते हैं जानने वाले हैं तो आप संपर्क करें अगली लाइव में हम आपको ले लेंगे अगर वैचारिक मतभेद नहीं है तो ठीक है सभी को जय श्री राम जय श्री राम शास्त्रवाद जी जय श्री राम जय श्री

00:52:19:27 [संगीत]

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 52:27 · 18 Oct 2025

हनुमान जी के पूछ कैसे हो सकती है? Discussion With Arya Samaji

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