⬜ Not used yet · 00:00:03:15 – 02:03:40:00 (2:03:36)
00:00:03:15 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और सभी को शुभकामनाएं। ढेर सारी हमारे दो बड़े वरिष्ठ आचार्य गण राघवाचार्य जी महाराज और शंकराचार्य जी महाराज दोनों एक पटल पर हमें दिखाई दिए। हमारी ऐसी आशा है कि आगे भविष्य में भी परंपरा प्राप्त जो आचार्य गण हैं संप्रदाय हैं उनमें अ हमें एकता दिखाई देगी व्यवहारिक रूप से। अभी जो मुख्य विषय है बात करने का वह एक सुपर क्वालिटी के कुछ कायर और गीदड़ों से मेरा सामना हुआ है। जिंदगी में मुझे लगता है कि वो आयु में काफी छोटे होंगे। विवेक भी ठीक से उनका काम नहीं कर रहा है। तो इन लोगों ने क्या है एक नई विधा निकाली शिवश नारायण द्विवेदी से
00:01:19:01 सामना तो कर नहीं पाएंगे। क्यों नहीं कर पाएंगे? क्योंकि शिवश नारायण द्विवेदी पटकेगा। बात बातबात में पटकेगा। तो इसलिए सामना नहीं करेंगे। पहले कोशिश किया अछल पूर्वक बात करने का। बात की भी भागवतानंद के एक समर्थक ने भागते हुए मुझे फोन किया और फोन करके वह उसी विषय पर कि पीएन मिश्र वाले विषय में आप चुप क्यों हैं उसी विषय पर उसने चर्चा चढ़ी तो हम जो इस संबंध में जो बातें हम कह चुके हैं कई बार तो वह बातें हमने बता दिया अपना पक्ष कई बार बता दिया और जब सामने बात आएगी तो बताएंगे भी आगे भी बताएंगे। अब हुआ क्या कि क्योंकि मैं उस समय पूरी पहुंच रहा था। उस समय इनका इस व्यक्ति का फोन आया था। तो शायद नेटवर्क का इशू रहा होगा जिसकी वजह से उसको मेरी बात ठीक से सुनाई नहीं दे रही थी। तो ये कहते हुए फोन समाप्त हो गया कि भाई
00:02:27:06 क्या कहते हैं? जब किसी सही गंतव्य स्थान पर पहुंच जाएंगे स्थिरता आ जाएगी नेटवर्क इत्यादि में तब बात करेंगे और उसके बाद वहां बहुत सारी गतिविधियां है ना इसका कॉल मेरे पास आया इस व्यक्ति का ना ही मैं इससे बात कर पाया अपनी ओर से फोन लगा करके क्योंकि मुझे इससे प्रथम बात करके प्रथमत यही लगा था कि भाई कोई व्यक्ति है जो इस विषय में हमारा पक्ष जानना चाह रहा है वो न्यूट्रल है उसका कोई माइंड मेकअप नहीं है वो समर्थक नहीं है मगर वो एक न्यायपूर्ण व्यक्ति है जो सत्य को जानना चाह रहा है कि इस बारे में हमारा पक्ष है यद्यपि हम अपना पक्ष काफी बार लेख इत्यादि के माध्यम से और अन्य विषयों पर बनाए गए वीडियो या सामग्री में इस विषय को हम बता चुके हैं रख चुके हैं। फिर भी मैंने उसको न्यूट्रल समझते हुए न्याय प्रिय समझते हुए मैंने वहां पर फोन पर कोशिश की कि मैं उसको उसका जो संशय है या फिर उसकी जो चीजें हैं उसका मैं निराकरण उसको कर दूं। समस्या हो यह बात होते हुए खत्म हुई कि भाई
00:03:30:24 जब नेटवर्क ठीक जगह में पहुंच जाऊंगा जहां नेटवर्क होगा तो बात होगी। अब इन लोगों ने क्या किया कि वो जो बात थी जो मेरी ओर से संतुष्टिजनक मैंने उत्तर दे दिए थे। मेरी जानकारी में उसमें ऐसी कोई बात नहीं थी जिसको काटा जा सके। है ना? मगर फिर भी उसकी कुछ चीजें थी जो उसको बोलनी थी मगर नेटवर्क ना होने के कारण बात बाद में होगी। ऐसा कहा गया। अब इस व्यक्ति ने क्या किया कि वो जो रिकॉर्डिंग थी वो अपने किसी अमुक अमुक चैनल से निर्गत कर दी कि देखो देखो सुभाष नारायण द्विवेदी ने क्या बहाने लगाए। जब मैंने यह देखा कि भाई इन्होंने वह रिकॉर्डिंग डाल दी। जबकि मैंने तो अपनी ओर से बिल्कुल सटीक उत्तर दिए हैं। और अंत में अगर आपकी कुछ अन्य जिज्ञासा भी है उसमें आगे कुछ प्रश्न भी है तो आगे वार्ता होने के नाम से वो कॉल डिस्कनेक्ट हुआ था। परंतु फिर इसने
00:04:35:06 परंतु फिर इसने अपने आप को अपने पक्ष को या मतलब उस समय तो इसने ये भी नहीं बताया था कि वो मेरा विरोधी है। कौन कर रहा है तो छल पूर्वक कर रहा है। ऐसे ही कायर निर्मित होते हैं शंकराचार्य के विरोधियों के यहां पर वो भले ही आर्य समाज हो भले ही स्कन हो वो भले ही ये भागवत आनंद हो थसिकल सोसाइटी का परंपरागत एजेंट वो आज आपने श देख लिया होगा हमारे मेन चैनल पे तो इसने अपने आप को भागवतानंद का समर्थक और मेरा विरोधी वहां पर नहीं बताया था। इसने एक न्यूट्रल बताया था और संभवत हमारी क्लासेस वाले जो ग्रुप है उसमें जुड़ा हुआ है। इसका नाम वहां पर अभिषेक दिखा रहा है जो जहां से मैसेजेस मुझे आ रहे हैं। अभिषेक पाठक करके कोई जुड़ा हुआ। तो मुझे लगा कि कोई न्यूट्रल व्यक्ति है जो जानना चाह रहा है हमारे पक्ष। तो इसने वहां पर अपनी पहचान नहीं बताई और इसके हिसाब से मैंने इसके उत्तर नहीं दिए थे। मेरे हिसाब से दे दिए थे। पर मैंने ये कहा था भाई कहीं स्थिरता आ जाएगी जहां नेटवर्क में वहां बात होगी। इसने उस रिकॉर्डिंग को यह कहते हुए कि भाई मेरा पक्ष जो है गलत है और इसका पक्ष सही है। निर्णायक जबकि बात अभी अधूरी है। इसने खुद उस रिकॉर्डिंग में ये कहा था कि आप जब कहीं
00:05:50:09 गंतव्य तक पहुंच जाए तब आप बात करेंगे हम लोग। तो फिर इसने यह कहते हुए कि मैं जीत गया है। मेरा निर्णायक होते हुए वीडियो कैसे डाल दिया? ये सारी कायरता छल पूर्वक फोन करना। फिर जो इसके हिसाब से अभी हमारी चर्चा बाकी है। फिर भी निर्णायक बन जाना। उतने पर ही जबकि मैंने तो मना नहीं किया था कि नहीं मैं बात नहीं करूंगा फिर भी इसने वो इस रूप में ऑडियो निर्गत कर दिया तो जब मैंने यह देखा कि भाई इसने ऑडियो निर्गत कर दिया है एक बार पोस्टर लगा दीजिए मैं कह रहा हूं मेरा नाम शिवश नारायण द्विवेदी है ठीक है और इस वीडियो को कट करके कहीं पर डाल दीजिए उसमें थंबनेल लगा दीजिए कि शिवश नारायण द्विवेदी ने बताया कि उसका नाम शिवश नारायण द्विवेदी नहीं है तो क्या अंदर का वो जो कंटेंट है बदल जाएगा। वही इन्होंने किया था। कंटेंट में कहीं भी मैं गलत दिखाई नहीं दे रहा हूं। उसको आप सुनेंगे। मगर उसको इस रूप में डाला गया थंबनेल लगा के। देखो देखो इसने क्या प्रलाप किया है शिवश ने। खैर फिर हमने उसका सही थंबनेल लगा के अपने मेन चैनल पर डाल दिया कि चलो ठीक है। तो अब ये भाई साहब क्या हुआ कि अब इनके सामर्थ नहीं है कि फोन करें दोबारा। और शायद मैं करता भी तो वहां अभी आप जानते ही थे। पूरी गया हुआ था तो वहां पर
00:07:05:15 बहुत सारे कार्य भी थे। राघवाचार्य जी महाराज भी वहां पर आए थे। उसके बाद हमने वहां निगमानंद के मठ में जाकर के भी चर्चा इत्यादि की। तो वहां पर व्यस्तता थी तो मैं शायद करता भी मगर उससे पहले इसने क्या एक नया नुस्खा निकाला कि अब शिवश नारायण द्विवेदी ये जान गया है कि मैं उसका विरोधी हूं तो मैं फोन ना करूं। तो अब क्या करूं? अब मैं अपना ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड कर करके भेज दूं। तो ऑडियो रिकॉर्ड कर करके इसने मुझे भेजे दो तीन। मैंने वो भी रख ली। मैं उस पर कुछ प्रतिक्रिया दे ही नहीं पाया। फिर यह अपने ऑडियो मैसेज खुद ही उसमें बोल बोल करके और अपना वही ऑडियो मैसेजेस वीडियो के रूप में बनाकर और वहां डालते रहे कि देखो देखो हम शिवाश नरेंद्र द्विवेदी को जवाब तो पहली बात तो यह है कि भाई जब तुमने छल क्यों किया? अपनी पहचान क्यों छुपाई कि तुम उसके समर्थक हो और मेरे विरोधी हो। ये डर क्यों है? वैसे ही डर अच्छा होता है। तुम जैसे विरोधियों के मन में सनातन धर्म के विरोधियों के मन में सार्वभौम सनातन सिद्धांतों के प्रचारकों का धर्म रक्षकों का डर अच्छा है। दूसरी बात यह है कि जब दोबारा बात करने को कहते हुए बात खत्म हुई है तो दोबारा बात करे बिना आप निर्णायक कैसे बने? तीसरी बात ये है कि
00:08:20:28 जब तुम सब हमसे ये चाहते हो अभी वो वीडियो रिकॉर्डिंग सुनाई जाएगी। तो जब तुम हमसे यह चाहते हो कि हम सामना करें जो कि हमने सबके लिए द्वार खोल रखे हैं। तुम तुम अपने अंधे कुएं में गिरे हुए हो तो क्या करें? जब वहां पर जो एक सीरीज शुरू हुई थी भागवतानंद का हमारे ऊपर आक्षेप करना हमको उसका उत्तर देना उस सीरीज के अंत में ही हमने कह दिया था भागवत आनंद आप प्रत्यक्ष सामना करो। हमने अभी भी एक दो दिन तीन चार दिन पहले पोस्ट में और वीडियो के माध्यम से कहा है कि विद्यानंद पूज्य विद्या भास्कर जी महाराज के यहां पर आकर के तुम उनको समक्ष रखते हुए बात कर लो आकर के तो भाग कौन रहा है और भागता कौन है कैसे सिद्ध होता है ये सब दिखाई देगा मगर तुम क्या कह रहे हो तुम क्या छल कर रहे हो हमसे कह रहे हो कि हम जो है हम कायर है जो डंके की चोट पर जाकर के सनातन विरोधियों से लड़ते हैं जिसको जान से मारने की धमकी आती है उसके परिवार परिवार को जान से मारने की धमकी आती है। फिर भी वो टिका रहता है। लड़ता है। अखबारों में न्यूज़ छपती है कि ऐसा ऐसासा हो रहा है इसके साथ। ह बड़े-बड़े गैंग से सामना कर रहे हैं और तुम हमको सिखा रहे हो आ के कल के छोरे। खैर खैर तो इनका सबसे पहले संदर्भ
00:09:36:19 जिससे कि क्लियर हो जाए। सबसे पहले जो मेरी और उसकी बात हुई है जो अधूरी रही थी उसके हिसाब से। मेरे हिसाब से पूरी थी। पर उसके हिसाब से अधूरी थी वो बात तो वह वाला आप ऑडियो इनको सुना दीजिए सभी को और अभी भी यहां पर आने से पहले मैंने उस व्यक्ति को मैसेज भेजा है कि भाई निष्ठा पूर्वक माताजी ने बचपन में दूध पिलाया है तो प्रत्यक्ष वार्ता करने का साहस प्रकट करो ना
00:10:10:04 उसको दिया है लिंक अगर आना चाहे तो आएगा ये सुनिए जय श्री राम जय श्री राम हां प्रश्न भैया वही था कि पीएन मिश्रा जी का कुछ कुछ तो अनावश्यक लगा हमें जो उन्होंने कहा है वर्ण व्यवस्था को लेकर के शंकराचार्य जी को और करात्री जी को लेकर के आदि ये सब जो है अभी कुछ दिनों पहले एक ब्राह्मण विरोधी फिल्म बनाई थी अनुराग कश्यप ने अच्छा उसने उसने बहुत पूरे वर्णाश्रम जो धर्म होता है उसकी धड्डियां उड़ाई थी। उसमें कोई किसी कोई विचारक थे। उनकी पुस्तक का आधार लेकर के फिल्म बनाई थी। काफी चर्चा हुई थी। उसका विरोध भी किया था। ब्राह्मण विरोधी फिल्म या वर्णाश्रम विरोधी फिल्म इस तरह से। तो हम उसका भी तो विरोध नहीं कर पाए हैं। हाइपरस्ट हाइपरस्ट के चैनल पर धर्म सम्राट नाम से अपने आप को विख्यापित करता है। जो कहता है वो ऋषि वाच गया। वहां पर उसने खूब उल्टी की जहर उबला हम लोग उसे भी समय नहीं दे पाए। विज्ञान दर्शन भी हाइपर क्वेस्ट पर जाकर के उल्टियां कर चुका है। करपात्री जी को अगर सिंगल पॉइंट तरीके से देखा जाए तो कलयुगी योगी नाम का एक व्यक्ति जो हमारे चैनल पर कई
00:11:25:08 बार आ चुका है। दो एक बार आ चुका है। उसने जो है बहुत गिरे हुए स्तर से जो है कृपात्री जी के बारे में बात करते हुए रील बनाई। वक्तव्य दिए। वहां भी कुछ नहीं कर पाए। और इसके साथ ही साथ एक फेमस चेहरा है नित्यानंद मिश्रा जिसने करपात्री जी के ऊपर उंगली उठाई थी वो पृथ्वी गोल है वाले मामले पर पृथ्वी घूमती है वाले मामले पर और अलोपनिषद पर भी उठाई थी यद्यपि अलोपनिषद वाले मामले को हमने बहुत उसको ही केंद्रित करते हुए नहीं मगर एक जवाब दे दिया था इसमें उसका संदर्भ भी था मगर ये नहीं बताया था लोगों को कि भाई हम इस वीडियो में उसको जवाब दे रहे हैं तो इतने सारे लोग हैं और भी ना जाने कितने लोग हैं जो कि पीएन मिश्र जी से बहुत ज्यादा आगे ख्याति प्राप्त है और वो बोलते हैं और जैसे ये बताया जा रहा है कि इनकी ही जानकारी के अनुसार ये शंकर परंपरा के विरोध में बोलते हैं क्योंकि हमने ज्यादा उनके चीजों को सुना नहीं है मगर उससे भी ज्यादा घृणात्मक तरीके से निम्न दृष्टि से ख्यापित करते हुए बहुत लोग बोले हैं तो हमने उनके लिए भी तो कुछ नहीं किया है तो ऐसे में यही प्रश्न क्योंकि पीएन मिश्र जी के विरोध में आपने क्यों नहीं बोला अभी प्रमुख मुद्दा तो वही बना हुआ है ना यह प्रमुख मुद्दा तय कौन कर रहा ये प्रमुख है। आप आप देखिए प्रमुख
00:12:40:14 मुद्दा तय कौन करेगा? यह प्रमुख है। अभी इसी पे अधिक विवाद छिड़ा हुआ था ना इसलिए किस पे अधिक विवाद छिड़ा था? पीए मिनट रुकिए। इसको पॉज करिए। देखिए व्यक्ति कह रहा है प्रमुख मुद्दा एक छिड़ा हुआ है। यह क्या है ना कि जो लोग धरातल पर उतरते नहीं है अपनी मां के सम्मान की रक्षा करने के लिए उनको और जिन्होंने अपने कुएं के बाहर के दुनिया संसार देखा नहीं होता है। उनको ऐसा ही लगता है कि हम जो देख रहे हैं हम जो सोच रहे हैं बस उतना ही है। वही वाली बात है। अब इसने घोषणा कर दी। यह प्रमुख मुद्दा है। इसमें विवाद छिड़ा हुआ है। भाई तेरे कहने से मान लिया जाएगा कि विवाद छिड़ा हुआ है। अरे विवाद छिड़ा हुआ है। हाई कोर्ट में आरोप प्रत्यारोप लग रहे हैं हाई कोर्ट में। केस चल रहे हैं उस पर। यह प्रमुख मुद्दा नहीं है। मगर पीएन मिश्र जी ने भागवतानंद के ऊपर कुछ कटाक्ष किया। ये तुम्हारे जैसों के लिए प्रमुख मुद्दा है।
00:13:44:19 तुम्हारी मां के साथ बलात्कार हुआ। यह कोई व्यक्ति किताबें छाप छाप करके दुनिया भर में प्रचारित कर रहा है। ये तुम्हारे लिए प्रमुख मुद्दा नहीं है। और तुम दूसरों से अपेक्षा कर रहे हो कि तुम्हें जो चीज बुरी लग रही है जिस समय जिस देश काल परिस्थिति में उसी देश काल परिस्थिति में आदमी जुड़ जाए तुम्हारे अनुसार। प्रमुख मुद्दा है। यह प्रमुख मुद्दा अगर तुम इस आधार पर तय कर रहे हो जो भी तुमने आधार अभी आगे दिए होंगे वही पर काटेंगे वो आधार फिर तुम्हें शास्त्रों से देने होंगे मन मुखी बातें नहीं तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य की स्थिति में शास्त्र प्रमाण है। शास्त्र से लाओ मुझे लगता है कि हाई कोर्ट में जो इस समय चल रहा है वो प्रमुख मुद्दा है। मुझे लगता है कि कोई मां है जिसने अपनी 10 10 बुक छाप रखी है। उसकी बेटी को किडनैप कर लिया गया एक तरीके से। ये ब्रह्मा कुमारी जैसी संस्था है कोई जो ब्रह्मा कुमारी जैसे सिद्धांत प्रचारित करती है। अमोल को केके नाम का कोई आदमी है जो अपने आप को भगवान बनाने में तुला हुआ है। और ये बेचारी इसकी बेटी
00:14:59:25 फंसी हुई है वहां पर। ब्रेन वाश करके वहां पर कैद किया हुआ है एक तरीके से और यह सारी कहानी इस्मा ने अपनी इस बुक में लिखी है। इसकी लड़ाई लड़ना प्रमुख मुद्दा नहीं है। मगर पीएन मिश्र जी जैसे ऐसे व्यक्ति जिनका कि कोई धार्मिक व्यक्तित्व नहीं है। उन्होंने मेरी जानकारी में क्या कहा मैं अभी भी नहीं जानता। मगर उन्होंने यदि कुछ कह दिया जो कि भागवतानंद उसकी भागवतानंद की विरोध में थी वो बात तो प्रमुखता हो गया। इसको कहते हैं अंधभक्ति। यह मां रोरो के पागल है। रोज फोन करती है मुझे कि मेरी मदद करिए। मगर ये प्रमुख मुद्दा नहीं है तुम जैसों के लिए। पक्षपाती कभी देख लो दर्पण में अपने आप को। प्रमुख मुद्दा इस मां से पूछो जाकर के क्या मुद्दा है प्रमुख? जिसकी बेटी को उससे छीन लिया गया।
00:16:00:24 जान से मारने की चाकूओं से वोट डालने की धमकी आ रही है। हाई कोर्ट से हम सिक्योरिटी मांग रहे हैं। ये प्रमुख मुद्दे नहीं है। ये प्रमुख मुद्दे हैं तुम्हारे लिए। चले आए दिखाने। प्रमुख मुद्दा चलाओ। भयंकर विवाद छिड़ा अनुराग कश्यप की मूवी पे। नरसिम्हा में जो नरसिम्हा में जो देखिए आप तो व्यष्टि की बात कर रहे हैं। मैं समस्ती की बात कर रहा हूं। पूरे वर्णाश्रम धर्म की ही धज्जियां उड़ा दी गई है। यहां तो पीएन मिश्र पर्टिकुलर किसी एक गुरु परंपरा के विरोध में बोल रहे हैं ना। एक मिनट पॉज करो। तो पूरे धर्म पर ही उंगली उठा दी गई है। और अभी उस फिल्म का मुझे याद नाम याद नहीं आ रहा। जितने भी लेफ्टिस्ट वाले जो चैनल है जो सनातन धर्म में कमियां ढूंढते हैं उन सारे चैनल्स पर उस फिल्म के पक्ष में जो है वीडियोस बने थे और लाखों की संख्या में व्यूज थे और मैंने देखा था मैंने उसको नोट किया था अपनी डायरी में कि इसको मुझे उत्तर देना है नहीं दे पाया पर इस जैसे व्यक्ति के अनुसार जो है प्रमुख मुद्दा वो है पीएन मिश्र वाला चलो प्ले करो
00:17:18:28 नरसिम्हा भूमि में पूरे शिव जी का अपमान किया गया है कि वो वो राक्षसों के देवता है। हम उसको भी नहीं समय दे पाए। मेरा कहने का अर्थ यह है कि जब हम किसी का विरोध करते हैं तो हमें यह देखना होता है। किसी का प्रतिकार करते हैं तो हमें यह देखना होता है कि प्रतिकार करने से कितना लाभ मिलेगा और प्रतिकार ना करने से उसी समय किसी दूसरे का प्रतिकार करने से कितनी हानि बच पाएगी। हानि होगी या लाभ होगा। दूसरे से लाभ होगा या हानि होगी। सिर्फ यह नहीं कि क्योंकि किसी ने हमारा नाम लेकर के बोल दिया तो हम उसका तुरंत वीडियो बना दें। यह कार्य तो हमारा नहीं है। हम तो ऐसे किसी तंत्र व्यक्तित्व इत्यादि को पकड़ते हैं जिसका जो एक कल्ट के रूप में ख्यापित हो रहा हो जिससे कि एक बड़ा जन समूह जुड़ चुका हो और उसकी विचारधारा जो है फैल रही हो। पीएन मिश्र जी का व्यक्तित्व क्या है धार्मिक क्षेत्र में? पॉज करिए। उस प्रकार से तो नहीं है कुछ कहते। तो हमें क्या जब ये व्यक्ति खुद मान रहा है कि पीएन मिश्र जी को धर्म के विषय में सुनने वाले कोई बहुत लोग नहीं है तो उनका नाम लेकर के खंडन करने की आवश्यकता क्यों पड़ी है? क्योंकि वह इस समय भागवत आनंद का विरोध कर रहे हैं। केवल इसलिए इस व्यक्ति की मानसिकता है। इसको कहते हैं अंधापन और जिस चैनल के द्वारा यह कह रहा है कि भाई
00:18:34:09 करपात्री जी का विरोध हुआ है या आगे इसने कहा है इसकी रिकॉर्डिंग में करपात्री जी का विरोध हुआ है। शंकराचार्य का विरोध हुआ है। क्या उस चैनल पर पहले सिद्धांतिक विरोध नहीं हुआ है क्या? अरे उससे पहले संदीप देव ने इतने वीडियोस बनाए हैं। पूरी शंकर पूरी शंकराचार्य जी का शिष्य नाम है। संदीप देव ने इतने वीडियो बनाए हैं पूरी शंकराचार्य जी को लेकर के उस विषय में जब वो मुक्तेश्वर जी महाराज को नहीं मानते हैं। तो तब तुमने क्यों नहीं पूछा कि इस विषय में तुम क्यों नहीं बोल रहे हो?
00:19:11:20 क्यों पीएन मिश्र जी जब जब यह कह रहे हैं यह वाला जो मामला है ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी और पूरी शंकराचार्य जी दोनों दोनों के बीच में ये वाला जो मामला है मानना और ना मानना इस विषय में पीएन मिश्र जी के मेरे गुरु के विरोधी नहीं है मैंने कभी कोई नाम लेकर के वीडियो बनाया क्या संदीप देव जी के ऊपर वीडियो बनाया क्या और तो और वो सब छोड़ो भागवतंद ये जो मामला चालू हुआ कब चालू हुआ ये वाला मामला शायद मार्च अप्रैल में कुंभ के बाद तो ये जो भागवतानंद वाला मामला क्या भागवतानंद इससे पहले जाने कब से शंकराचार्यों के ऊपर विशेष रूप से पूरी पीठ के आचार्यों के ऊपर अपने कुतर्कों के द्वारा जो है टिप्पणी करता आ रहा था। मैंने तो नहीं बनाया उसको लेकर के वीडियो।
00:20:13:06 फिर आज केवल पीएन मिश्र जी क्योंकि विरोध में खड़े हुए हैं भागवतानंद के तो तुम ये कैसे मुझसे अपेक्षा कर रहे हो कि मैं इसको प्रमुख मुद्दा समझते हुए सब काम छोड़ के पीएन मिश्र जी के पीछे लग जाऊं। क्योंकि भागवतानंद ने कहा है। तुम लोगों के पास बात करने का केवल एक आधार है। जिस किसी भी माई के लाल को उसकी माई ने दूध पिलाया वो आ जाना। केवल एक ही आधार निकलेगा। तुम्हारी सब बातों के पीछे क्योंकि भागवतानंद ने कहा है चलाइए
00:20:45:25 अगर ना कोई एक व्यक्ति अगर कुछ बोल भी रहा है डेली इतने वीडियोस बनते हैं शंकराचार्य की विचारधारा के विरोध में जबकि उनका अपना एक उनका अपना एक भी है थोड़ा पीछे से उस प्रकार से तो नहीं है कुछ ख्याति उनकी तो हमें क्या करना है कोई एक व्यक्ति ये वाली बात है ये वाली जिसका एक्ट के रूप में ख्यापित हो रहा हो जिससे कि एक बड़ा जन समूह जुड़ चुका हो और उसकी विचारधारा जो है फैल रही हो। पीएन मिश्र जी का व्यक्तित्व क्या है धार्मिक क्षेत्र में? उस प्रकार से तो नहीं है कुछ ख्याति उनकी। तो हमें क्या करना? कोई एक व्यक्ति अगर कुछ बोल भी रहा है। डेली इतने वीडियोस बनते हैं शंकराचार्य की विचारधारा के विरोध में। जबकि उनका अपना एक उनका अपना एक कल्ट भी है। तो हम पीएन मिश्र जी पर अपनी एनर्जी और समय क्यों नष्ट करें? सबसे पहली बात। दूसरी बात यह है कि दूसरी बात यह है कि जो व्यक्ति ख्यापित नहीं है उसको हम अपने चैनल से ख्यापित क्यों करवा दें? भाई पीएन मिश्र जी का सामाजिक पर्सनालिटी के रूप में, धार्मिक पर्सनालिटी के रूप में क्या व्यक्तित्व है? अगर उनको संदीप देव जी अपने चैनल पर ना बोलने को बुलाएं। उनका अपना क्या स्टेटस है जो हम उनका खंडन करें। कितने उनके दीक्षा प्राप्त शिष्य हैं या कितने उनके फॉलोअर्स हैं जिससे कि वो कुछ बात बोल देंगे तो उनको दिक्कत हो जाएगी। दिक्कत यह है कि पीएन मिश्र जी ने दिक्कत यह है कि पीएन मिश्र जी इस समय
00:22:00:28 भागवतानंद के विरोध में खड़े हुए हैं। तो इसलिए सवाल उठ रहा है कि भाई भागवत आनंद के विरोध में जो खड़ा हुआ व्यक्ति है वो जो ऐसी बात बोल रहा है जो आपके भी एक मिनट वो जो आपकी आवाज अब आ रही है आ रही है। हां तो बात मुद्दे की ये है विषय ये है लोग हमसे सवाल क्यों पूछ रहे हैं कि पीएन मिश्र जी का विरोध क्यों नहीं किया है? इसलिए नहीं पूछ रहे हैं कि शंकर के सिद्धांत का खंडन हो रहा है। धर्म का खंडन हो रहा है। क्योंकि धर्म का खंडन होने वाली बात होती तो हमको नित्यानंद मिश्र में भी परेशान करते। हाइपरकस्ट में भी परेशान करते। विज्ञान दर्शन में भी परेशान करते। तो जो लोग ये सवाल पूछ रहे हैं कि पीएन मिश्र पे क्यों नहीं बोला है वो इससे उनको मतलब है कि कौन सा ऐसा व्यक्ति है जिसने भागवतानंद का भी विरोध किया है और जिसने शंकर परंपरा का भी विरोध किया उसके खिलाफ शिवा नारायण द्विवेदी क्यों नहीं बोल रहे? तो हमारे काम करने की एक स्ट्रेटजी होती है। सबसे पहली बात यह है हम हर हर किसी के वक्तव्य का उत्तर देने नहीं जुड़ जाते कि भैया बस किसी राह चलते व्यक्ति ने भी अगर कुछ बोल दिया तो उसने शंकर परंपरा के खिलाफ बोला है तो हम उसका उत्तर देने लग जाए। अपनी एनर्जी उसमें लगाने लग जाए। हमें ये देखना होता है। एक मिनट एक मिनट हमें यह देखना होता है कि उस व्यक्ति की क्रेडिबिलिटी कितनी है। उस व्यक्ति का को फॉलो करने वाले लोग कितने हैं। आज तक ज्यादातर हमने कल्ट्स को पकड़ा है। जो अपने आप को एक संस्था एक तंत्र के रूप में उद्भाषित कर रहे हैं। हम उनको पकड़ते हैं। जिनकी अपनी एक विचारधारा छप चुकी है। किताबें छप चुकी है। उसी के उसी के समर्थन में जो वो
00:23:16:00 गलत बातें फैला रहा है। ऐसी कोई धार्मिक छवि तो इनकी नहीं है। ये कहीं के वक्ता हो, कहीं प्रवचन करता हो, इनके बहुत सारे शिष्य हो और ये फिर सनातन धर्म के विरोध में बातें कर रहे हो। दूसरी बात यह भी देखना पड़ता है कि यह तो यह तो यह बात रही कि भाई इनकी कोई धार्मिक छवि नहीं। दूसरी बात यह भी है कि जो व्यक्ति फेमस नहीं है जिस व्यक्ति को लोग नहीं जानते हैं उस व्यक्ति पर वीडियो बना करके हम उसको उत्तर दे के नाम देकर के फेमस क्यों करें? भाई अभी तक तो उसको लिमिटेड लोग जानते हैं ना जो जो इस संदर्भों से जुड़े हुए हैं। फिर वो भी जानेंगे इस वाले भी जानेंगे। देखो पीएन मिश्र पीएन मिश्र जो है इस वाले भी जानेंगे। आर्य समाज भी जानेंगे कि पीएन मिश्र खुद वर्ण व्यवस्था का वो कर रहे हैं समर्थन फिर वो हमसे आकर के तर्क करेंगे हम क्यों जनवाए उन्हें हालांकि जब जान जाएंगे तो उसका उत्तर देना भी होगा उसका उत्तर भी है हमारे पास मगर हम अपनी एनर्जी क्यों वेस्ट करें ऐसी चीज में जब हमारे पास रामपाल है स्कन है आर्य समाज है ब्रह्मा कुमारी है तो हम क्यों ऐसी निरर्थक अपनी एनर्जी वेस्ट करें क्योंकि भागवतानंद का उसने विरोध किया है इसलिए लोग ये कहेंगे कि तुमने इसका विरोध क्यों नहीं किया अच्छा दूसरी बात ये है कि अब जैसे ये अमुक आचार्य जी की ही बात है रामभद्राचार्य जी ने इतनी सारी बातें कही तो बात आ रही शिवा नारायण द्विवेदी क्यों नहीं बोल रहा है
00:24:31:06 तो क्या हर व्यक्ति के विरोध में हमारा ही बोलना जरूरी है ये कैसे तय हो रहा है और क्या भागवतानंद ने हर सनातन विरोधी आज तक जो भी वक्तव्य आया उसने सबके बारे में बोल लिया है इसका मतलब कहीं ना कहीं सामर्थ्य की सीमा होगी ना बोलने की और फिर जब जब रामभद्राचार्य जी के विरोध में इतने सारे लोग ऑलरेडी बोल रहे हैं वक्तव्य आ रहे हैं वो भी प्रामाणिक आचार्यों के आ रहे हैं। आ रहे हैं कि नहीं? ज्योतिषी वाले महाराज का आया और सभी एक तरफ से जब बोल रहे हैं और हमने बिना नाम लिए हुए भी कई ऐसी बातें दिखा दी अपने पेज से जिसमें कि उनका जो उन्होंने जो भी वक्तव्य दिया है उसका प्रतिकार हो गया। मगर ये जो इसको जो विषय बनाया जा रहा है कि तुमने उनका नाम ले क्यों नहीं बोला? तुमने पीएम मिश्र जी का क्यों नहीं बोला? भाई हमको हम लोग धरातल पर लड़ने वाले लोग हैं। आप लोग लड़ नहीं रहे हो धरातल पे। आप केवल क्वेश्चन कर रहे हो। जिसको धरातल पर लड़ाई लड़नी होती है उसको यह तय करना होता है कि कितना बोलना है किससे बोलना है कब बोलना है अभी बोलना है बाद में बोलना है बहुत सारी चीजें बोलनी होती है अब हमारा मान लीजिए रामपाल का केस चल रहा है हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है कुछ लेख जिस चैनल की ये लोग बात कर रहे हैं कि तुम विरोध क्यों नहीं कर रहे हो उसी चैनल पे संदीप देव जी के चैनल पे ही संदीप देव जी स्वयं करपात्री जी पर बोल चुके हैं सद्धांतिक विरोध प्रकट कर चुके हैं
00:25:46:07 तो क्यों नहीं आए थे कल इससे पहले पूछने क्यों नहीं बोल रहे हो और तुम्हारा वो भागवतानंद क्यों जाता था वहां पर तुमको कब पता चला ये लोग आज लोग इतनी अभद्र बातें बोल रहे हैं संदीप देव जी के लिए अश्लील बातें बोल रहे हैं इनको कब पता चला संदीप देव जी के सिद्धांत वो है सैद्धांतिक उनका पक्ष जो है ऐसा ऐसा है भागवतानंद से बात होते ही इनको पता चल गया कि संदीप देव जी का सैद्धांतिक पक्ष ये है जिस पर ये अभद्र बातें कर रहे हैं। यही है दोगलापन तो दोगलेपन को आचार बना के बैठोगे तो वहां से दोगलापन ही तो सीखोगे और क्या सीख सकते हो भाई जो कायरता का पोषण हुआ है बचपन से माता जी का दूध नहीं मिला तो ऐसी फैक्ट्री से और ऐसी फैक्ट्री में जाने वाले ऐसे कायरों से वही दोगलापन ही तो प्राप्त होगा। पक्षपात विहीनता थोड़ी ना प्राप्त हो जाएगी। अच्छा प्ले करिए प्ले करिए आगे आगे प्ले करिए
00:26:54:14 उसी समय हाइपर क्वेस्ट चैनल पे धर्म सम्राट नाम से जो अपने आप को कह रहा है पहले ऋषि विवाद किया कहता था वो गया और उसने जो है बहुत एक डेढ़ घंटे उन लोगों ने जो है जहर उगल लिया अब हम जो है वो हाई कोर्ट के लिए जो लिखना है वो छोड़ के उसका खंडन बनाने लग जाए नहीं तो तुम क्यों नहीं बोल रहे हालांकि ये पूछा नहीं गया है पूछना चाहिए था ना हमारा मन था अनुराग कश्यप का विरोध करने का नहीं कर पाए हमारा मन था नरसिम्हा का विरोध करने का नहीं कर पाए क्योंकि दो गलत रास्तों में से कम गलत और दो सही रास्तों में से ज्यादा सही चुनना पड़ता है। पीएन मिश्र जी का विरोध करने से पीएन मिश्र जी की और प्रसिद्धि होगी। उन्होंने क्या कहा है क्या नहीं कहा है। यदि वो गलत है तो उनकी और प्रसिद्धि होगी। जवाला वाले जवाला में करणा वर्ण व्यवस्था इत्यादि सभी मामलों में हम अपना बहुत सीधा साफ सुथरा पक्ष प्रस्तुत कर ही चुके हैं। उसमें नाम लेके ही खंडन करने की आवश्यकता क्यों है? ख्यापित करने के लिए, प्रसिद्ध करने के लिए और दूसरी बात कि जब हम अपनी ओर से और ज्यादा मान लीजिए वह पहले से ही सार्वजनिक है वो बातें मगर हम उसको और ज्यादा सार्वजनिक क्यों करें ये सारी बातें मैंने अपने वीडियो में कही है ना भाई कोई चीज कितनी भी खराब हो गई हो उसको और खराब करेंगे क्या करपात्री जी ने एक बात कही थी कि गर्मी पड़ रही है बहुत भयंकर तो हम क्या गर्मी और पड़ने देंगे हम तो उपाय करेंगे गर्मी ना लगे हमें कि नियत होकर बैठ जाएंगे नहीं साहब गर्मी पड़ रही है अब हम ना पंखा चलाएंगे ना कूलर चलाएंगे लेकिन एक बात तो ये भी है ना कि संदीप देव जी का जो चैनल है वो तो थापित
00:28:09:27 है ना और उसमें भी तो व्यूज जा ही रहे हैं तो मैंने मैंने क्या कहा हम उसको और क्यों इनक्रीस करें हम उसको और क्यों इनक्रीस करें क्या मतलब है चाहे जितना देखेंगे ना इस व्यक्ति को समझ में नहीं आया तो उदाहरण उदाहरण ले लीजिए एक बालक है जो पूरे वर्ष जिसने पढ़ाई नहीं की है पूरे वर्ष उसने पढ़ाई नहीं की है परीक्षा के दिनों में जब वो पढ़ने बैठता है तो उसकी माता जी उससे कहती है कि जाके दूध ले आओ या परचून की दुकान से सामान ले आओ। अब वो बालक अगर यह कहता है कि भाई मेरे परीक्षा के दिन पास में आ गए और मुझे पढ़ना है तो क्या माता का यह कहना सही होगा वहां पर कि हां पूरे वर्ष तो पढ़ा नहीं। अब पढ़ के क्या कर लेगा? वो भले ही उसने पूरे वर्ष पढ़ाई ना की हो। फिर भी यदि वो पढ़ रहा है परीक्षा की तैयारी के लिए तो उसका पढ़ना ही उचित है। इसी प्रकार से वो कितना भी ख्यापित हो गया हो मगर हमारे द्वारा अकारण उसको और ख्यापित करने का प्रयास उचित नहीं है।
00:29:17:08 ठीक है? जैसे कि भले ही कितनी भी गर्मी पड़ रही हो फिर भी हमें गर्मी से बचने का प्रयास करना ही हमारा उचित है। कितना भी ताले वाले घर में चोरी भी हो जाती हो फिर भी घर से ताला लगाकर निकलना ही उचित है। समझ गए? चलो भैया उनका पर्टिकुलर उनका व्यक्तित्व क्या है? पीएम विश्व जी का उनका व्यक्तित्व क्या है? उनकी सामाजिक छवि क्या है? उनके फॉलोअर्स धर्म के धर्म के क्षेत्र में क्या वो एक क्या वो उनको ऐसे देखा जाता है कि वो एक निर्णायक व्यक्ति है या उन्हें किसी आचार्य के रूप में देखा जाता है धार्मिक गुरु के रूप में देखा जाता है एक व्यक्ति है वो अधिवक्ता है वरिष्ठ उस रूप में उनको देखा जाता है कोई नहीं उनसे दीक्षा लेने जा रहा है हर कोई उनकी बात को सुनने के बाद यदि वो वर्णाश्रमी होगा तो अपने गुरुओं से बोलेगा कि ये बात सही कह रहा है और अगर वो वो होगा आर्य समाज उसको नहीं तो वो उनसे लेगा निर्देश दूसरी बात ये है कि हम इस लड़ाई को अपने मंच से भी दिखा करके और ज्यादा लोगों को क्यों बताएं कि भैया देखो शंकर परंपरा का ही अनुयाई ये कह रहा है किता है क्यों बता ये सब इतने गिरे हुए लोग हैं करिए जरा ये सब इतने गिरे हुए लोग हैं इनको इससे मतलब नहीं है बिल्कुल भी कि धर्म स्थापना धर्म रक्षा क्या होती है का खगा भाई नहीं मालूम होगा
00:30:33:25 बस इन्हें इससे मतलब है कि जिसमें इनकी वो है आस्था उसके खिलाफ कोई क्यों बोल रहा है भाई मैं पूरी के शंकराचार्य जी से दीक्षित हूं शिष्य हूं उनका और उनके बारे में इतने लोग बोलते हैं मगर फिर भी हम लोग फिल्टर करके बात करते हैं किस किसको हम समय दे किस पर एनर्जी वेस्ट करें एक बहुत पहले नास्तिक आया था मेरे ही चैनल पर क्या नाम था प्रेमजीत सिरोही वो अभी भी कुछ ना कुछ प्रलाप किया करता है अब मैं उसको भी जवाब दूं क्यों नहीं दे रहे भाई नहीं दे रहे तो तुम वो हो ये हो मगर यदि मैं नहीं दे रहा हूं तो तुम उसके लिए क्यों नहीं बोल रहे हो आ के वो जो भव्य था इस वाला उसने बहुत गंदा गंदा बोला था यहां से जाकर के मेरे बारे में भी गुरुदेव के बारे में भी कोई कार्य नहीं कर पाए हम समय ही नहीं निकाल पाए अरे भाई आर्य समाजियों ने बाकायदा एक पूरी पडकास्ट की थी मेरे जो व्यक्तिगत जो चित्र इत्यादि है साधना मार्ग में आने से पहले के वो साझा करके उसकी हंसी उड़ा रहे हैं। मेरे घर की स्त्रियों को वहां पर जो है हंसी उड़ा रहे हैं वहां पर उनकी छवियां दिखा करके मैं उनके विरोध में कार्य नहीं कर पाया कोई खास जो कर सकता
00:31:48:28 था कानूनी कारवाई आज भी वो वीडियो डला हुआ है तो उस पर तुमने क्यों नहीं बात ये सोचा कि भाई तुम क्यों नहीं कर रहे हो ऐसा ऐसा क्योंकि यह देखना पड़ता है कि हमें पहले क्या करना है यह देखना पड़ता है कि दो गलत कार्यों में से कम गलत और दो सही रास्तों में से ज्यादा ज्यादा सही क्या है? और यदि यह विवेक आपके पास नहीं है तो घर बैठिए और यदि आपको लगता है कि हम जो कर रहे हैं वो गलत कर रहे हैं तो आके निरत्तर करिए सामने से। ये क्या कायरपन है भाई? लगता है हड्डियों में पानी भरा हुआ है। हां। चलो प्ले करो।
00:32:28:28 ठीक है। वो आगे हमसे प्रश्न करेंगे। हम उनको उत्तर देंगे। मगर हमने अपना काम बढ़ाया ना खुद ही। हम क्यों बढ़ाएं? और दूसरी बात ये है कि पीन मिश्री है कौन? हैं। मान लीजिए कि वो राम मंदिर अयोध्या केस में साथ दे रहे हैं। रामपाल वाले केस में साथ दे रहे हैं और अन्य केसों में साथ दे रहे हैं। हम खामखा उनका नाम लेकर के विरोध करके और इन सब बड़े अभियानों को रोक दें क्योंकि भागतानंद का जिसने विरोध किया उसका नाम लेकर के विरोध करना आवश्यक है। अनुराग कश्यप का विरोधक नहीं है। करने वाले बड़े अभियानों से एक बात याद आई भागतानंद का मंतव्य देखो कि अगर शिवश नारायण द्विवेदी उससे लड़ रहा है और कोर्ट में केस चल रहा है और शिवश नारायण द्विवेदी प्रखर हो के लड़ रहा है वहां पर तो भागतानंद चलो साथ नहीं दे सकता तो कम से कम मौन तो रह सकता है मगर क्योंकि शिवश नारायण द्विवेदी उसके विरोध में खड़ा है तो रामपाल वालों के द्वारा जो एक षड्यंत्र पूर्वक मेरे एक लेख को प्रचारित किया गया था। जो मैंने यह कहते हुए लिखा था कि हम लोगों ने जब वहां पर जाकर के विरोध किया था रामपाल के बुक स्टॉल पर तो मुझे पुलिस के साथ जाना चाहिए था। पुलिस के साथ ना जाने का मुझे दुख है। तो उसको मैंने जो लिखा था कि जो वहां मेले में हुआ उस बात का मुझे दुख है। इसकी पुनरावत्ति नहीं होगी। क्षमा
00:33:44:04 भी नहीं बोल। तो उस बात को रामपाल वाले मेरा पक्ष कमजोर करने के लिए अधिकारियों को दिखाते हैं कि देखिए व्यक्ति हमसे माफी मांग चुका है और फिर भी हमारा विरोध कर रहा है और मैंने बकायदा अपने बयान जो दिए हैं इस केस में उस केस में उस टिप्पणी को लिखा है जिससे कि आगे चलकर के वो मेरे लिए मतलब परेशानी का विषय ना बने पहले ही व्यक्ति को पता रहे कि अगर यह लोग यह वाला लेख आ के मेरा दिखाएं उसका गलत मतलब बताएं तो भैया यह उसका जवाब है इस भागतानंद ने क्या किया इस भागतानंद ने धर्म की रक्षा को मां के अपमान को पीछे करते हुए उसी भगवती के अपमान उसी भगवती को पीछे करते हुए जिसके लिए दावा करता है कि मुझे पढ़ाने आती है। अपनी मां के अपमान को भी इसने पीछे कर दिया केवल इस वजह से कि शिवश नारायण द्विवेदी मेरा विरोध है। विरोधी है और उसने वहां पर डाल दिया। पोस्ट कर दिया कि देखो यह क्या लिखा है? यह जो है रामपाल से माफी मांग रहे हैं। उनहीं की शैली में और कर दिया पोस्ट। क्यों किया? इसलिए क्योंकि धर्म उसके लिए मायने नहीं रखता है। उसके लिए मायने क्या रखता है कि शिवश नारायण द्विवेदी को परेशान या किसी भी तरीके से बहुत बड़ी बात नहीं है कि रामपाल से भी हाथ मिला लेगा। इतना नीच व्यक्ति है। बात नहीं है।
00:34:59:15 ठीक है। बाकी हमें इस बात का कोई भय नहीं है कि 50 कायर और 50 नीच आपस में जो है वो हो जाए। एक हो जाए विरोध करने लगे। हम तो वही लड़ेंगे क्योंकि हमने बचपन में वो श्लोक सुन लिया कर्मवादी कारस्ते मा फले सुदा ठीक है चला है या ये क्या कहते हैं ये हाइपर पोस्ट इत्यादि बड़े-बड़े चैनल्स है ये भी तो ख्यापित है अभी तक कुल मिलाकर के संदीप देव जी के चैनल पर जितने व्यूज आए होंगे टोटल सारे वीडियोस को मिला के उससे ज्यादा व्यूज हैं जिसमें वो हाइपर के चैनल पर वो गया है धर्म सम्राट वाला आप आपकी आवाज जा रही है बार-बार मैं कह रहा हूं कि कुल मिला मिलाकर अभी जितने वीडियोस बनाए गए हैं संदीप देव जी के चैनल पर पीएन मिश्र वाले विषय में जब से यह विरोध हुआ है। ठीक है? जब से वो हुआ है तब से इतने वीडियोस बनाए गए हैं। जितने उसमें टोटल व्यूज आए हैं उससे ज्यादा व्यूज मिलेंगे आपको हाइपरस्ट में जाकर के। अगर आपका यह कहना है कि वो पहले से ख्यापित है तो मैं पहले हाइपरस्ट वाले का विरोध करूं तब काम छोड़छाड़ के। पर हम वहां पर इसलिए ही चुप है कि पहली बात तो हाइपरस्ट की कोई धार्मिक छवि नहीं है जो हर बात का उसका उत्तर दे। वो अपने आप में ही मिक्स। दूसरी बात यह कि जो वहां पर जो बोल के आया उसके उसका अपना उसके अपने व्यक्तिगत तौर पर हम खूब खंडन उसका कर चुके।
00:36:14:16 आगे हमें जैसे ही समय मिलेगा हम फिर करेंगे। हमने इसलिए नहीं किया भाई। उसको तवज्जो नहीं दी। तो यह निर्णय होता है कि जो व्यक्ति धरातल पर खड़ा होता है तो उसको एक स्ट्रेटजी के तहत कार्य करना होता है कि किसका विरोध नाम लेकर के करना है, किसका नहीं करना है, किसका बाद में करना है, किसका अभी करना है। आप जब कोई काम करने निकलोगे घर से बाहर पुलिस थाना कोर्ट कचहरी जाओगे तब आपको यह पता लगेगा कि भाई पुलिस वाले से क्या बोलना है, वकील से क्या बोलना है, किसको साथ में लेकर चलना है? किसकी कुछ बातों को सहन करना है? इस बात को उन्होंने भी बोला है। ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी ने। उनके कल के वक्तव्य में है यह बात। कल परसों के वक्तव्य में हेलो हां उनके उनके कल परसों के वक्तव्य में है ज्योतिष वीर वाले महाराज जी की वो कह रहे हैं कि लोग आरोप लगाते रहते हैं हम लोग हम लोगों को कई बार सहना पड़ जाता है जिससे कि विधर्मियों को या विरोधियों को वो ना मिल जाए तो कई कारण होते हैं हां तो कई कारण हो सकते हैं किसी का विरोध ना करने के भी और अगर बात यही है कि इसका विरोध क्यों नहीं किया तो मैं आपको पीएन मिश्र जी से ज्यादा खतरनाक चीजें आपको मैं बता रहा हूं सारी आपका प्रश्न होना चाहिए आपने इनका जो है ना बहुत ज्यादा आपकी आवाज बहुत ज्यादा कट रही है आप यदि प्रेम में होंगे तो हां तो ये सवाल गलत है कि आपने पीएम मिश्रा जी का विरोध क्यों नहीं किया नाम लेकर विरोध करना आवश्यक नहीं है ना कोई वो
00:37:29:18 आवश्यक नहीं है जो इसके बाद वो हिस्सा हम लोगों ने वीडियो में दिखाया नहीं था हमारे पास रिकॉर्डिंग सेव है जिसमें इस व्यक्ति ने ये कहा था कि आप जब कहीं पहुंच जाइएगा जहां जा रहे हैं फिर बात करिएगा वो रिकॉर्डिंग िंग हो तो ढूंढ लो आप उसको सुना देना अंत में उसका। खैर तो हमने क्या-क्या कारण बताए पीएन मिश्र जी का नाम लेकर इस पक्ष को रखने में कि भाई जवाला को अपने पति का नाम नहीं मालूम था या वो क्या कहते हैं देह दे इत्यादि के रूप में व्यभचारणी थी इत्यादि विषय में यह सब झूठी अफवाएं हैं। जबाला जो क्या कहते हैं जवाला वाले विषय में जो आचार प्रशांत की जो थ्योरी है उसका हमने आचार्य प्रशांत के यहां जाकर के वीडियो बना करके आचार्य प्रशांत के लोगों के सामने जाकर के इस थ्योरी पर उनका प्रतिकार किया था। ठीक कर चुके हैं और ये बता चुके हैं कि वो केवल उनको अपने गोत्र नहीं याद था। वहां पर सत्यकाम जमाला की जो मां थी उनको अपना गोत्र उनको गोत्र नहीं याद था। वहां ऐसी बात नहीं है कि उनको अपने पति का नाम नहीं याद था। तो उसको गलत तरीके से
00:38:44:21 पोर्ट्रे करके बताया जा रहा है। तो यदि पीएन मिश्र जी भी ऐसा कर रहे हैं तो यह हमारा पक्ष है। देख लीजिए जाकर के पुराने वीडियो डले हुए हैं। और दूसरा विषय एक और है कोई यदि पीएन मिश्र जी कर्मणा कर्म के अनुसार क्या कहते हैं? इसको वर्ण के बदलने को स्वीकार करते हैं। तो हमने इस बारे में बता रखा है कि कर्म से जो है वर्ण नहीं बदलता है। जिसका जो वर्ण है जन्म से वही रहता है। हमने कई वीडियो बनाए देख सकते हैं आप लोग जाकर के। मगर प्रॉपर उनके पीछे पड़ जाना उनका नाम लेकर के उनका खंडन करना यदि वो ऐसा कर रहे हैं। मुझे अभी तक ये क्लियर ही नहीं है कि वो ऐसा कर रहे हैं। कुछ उड़ती उड़ती चीजें बहुत समय नहीं है। रामपाल वालों ने काउंटर रामपाल वालों रामपाल वाले अपना वोट बंद करके गायब हो गए। वहां से सारी किताबें इत्यादि हटा दी अपने सेंटर। वहां पुलिस जा रही है तो उनको किताबें नहीं मिल रही है। सरकार ने काउंटर लगाया हाई कोर्ट में कि भाई कोई किताब मिली नहीं। अब हमें वहां जवाब लिखना है कि धड़ल्ले से इनकी किताबें मिल रही है। YouTube पे इतना प्रचार प्रसार चल रहा है और आप लोग कह रहे हो हमें किताबें नहीं मिल रही। इनके चैनल बंद करवाइए। चैनल पे जो बोल रहा है हमसे किताब लीजिए। उसको पकड़िए।
00:40:02:14 हम ये सब ना करके पीएन मिश्र जी का नाम ले ले के वीडियो बना के जाए। क्यों? क्योंकि भागवत आनंद ने कहा है। अब इनका अगला अगली जो इन्होंने रिकॉर्डिंग भेजी जब यह रिकॉर्डिंग हमने अपनी ओर से पहले नहीं डाली थी YouTube पर। पहले इन लोगों ने डाली ये दिखाते हुए कि देखिए देखिए शिवंशु नारायण के पास उत्तर नहीं था जब हमने फोन किया तो जबकि खुद ही ये कह रहा है व्यक्ति कि भैया कहीं आप पहुंच जाइए तो दोबारा बात होगी। तो दोबारा बात जब हुई नहीं तो तुम निर्णायक कैसे बन गए? और यदि दोबारा और यदि बात होनी थी तो वही उत्तर देते और अगर उत्तर तुम्हारे पास थे और अगली बार बात होना शेष था तो निर्णायक ना बनते इसको कहते दोगलापन कायरता चलिए अब इनके जो आगे कुछ ऑडियो मैसेजेस हमको फिर आए क्योंकि हमारे पास तो यही कार्य है ना भाई कि कोई भागानंद का कायर और नीच बुद्धि का कोई चेला है वो हमको मैसेज करता रहे और हम उसको उत्तर देते रहे नहीं देंगे तो हम गलत है चलिए
00:41:11:18 सुनाइए पहला तीन ऑडियो उनमें से पहला शिवश जी जरा हमें ये बताइए कि आपने हमें उत्तर क्या दिया? बहुत करिए। हमने पीएन मिश्रा के जब उत्तर नहीं आपको मिला था तो उत्तर देना मिलना बाकी था ना अगली बार बात होनी थी ना तो क्यों जाके वहां पर वीडियो डाल दिया क्योंकि तुम्हारे मन में छल आ गया था कि हम इसी वीडियो इसी कंटेंट को जो है और इस नाम से डालते देखो देखो उत्तर नहीं दिया खुश हो जाते हैं तो अंत का है अरे उत्तर नहीं मिला था तो दोबारा बात होनी बाकी थी ना मैंने बात करने से मना किया था क्या चलो चलो
00:42:08:02 चलाइए को वो ना मिल जाए तो हैं। हम लोग आप लोगों को कई बार बहुत ज्यादा कट रही है। आप एक काम करें आप अपने डेस्टिनेशन पे पहुंच जाइए। उसके बाद ये देखिए ये वो पहली वाली कॉल रिकॉर्डिंग है। क्या कह रहा है ये व्यक्ति? आपकी आवाज बहुत ज्यादा कट रही है। आप अपनी डेस्टिनेशन पे पहुंच जाइए। आप अपने डेस्टिनेशन पे पहुंच जाइए। उसके बाद बात जब बात करना इस व्यक्ति के लिए शेष था तो ये निर्णायक बन के इसने वीडियो क्यों डाला
00:42:50:26 हम ये है चल ये है दोगलापन है कायरता ये है दूध की कमी पोषक तत्वों की कमी शरीर में चलिए अरे कि आप सीधा बॉलीवुड में घुस गए कि भैया हम बॉलीवुड के इन पिक्चरों का विरोध नहीं कर पाए ऋषिवाच का ये नहीं कर पाए तो हाइपरकस्ट का नहीं कर पाए तो नित्यानंद का नहीं कर पाए पीछे करो पीछे करो वहीं से सुनाओ जहां से शिवश जी आपने हमें उत्तर क्या दिया शिवश जी जरा हमें ये बताइए कि आपने हमें उत्तर क्या दिया
00:43:29:22 हमने हमने आपको उत्तर दिया कि किसी का विरोध करने के लिए समय उसकी प्रसिद्धि और उसकी छवि प्रसिद्धि अलग चीज है। छवि अलग चीज है। और प्राथमिकता महत्ता के अनुसार प्राथमिकता और दो गलत रास्तों में से कम गलत और ज्यादा दो सही रास्तों में से ज्यादा सही इत्यादि परिमाप होते हैं ये निर्णय करने के लिए कि किस किसका विरोध करना है और किसका नहीं करना है। यह उत्तर हमने आपको दिया और ऐसे कई कारण आपको उसी रिकॉर्डिंग में सुनाए जिसके कारण पी एन मिश्र जी का नाम लेकर के यदि पी एन मिश्र जी कोई ऐसी बातें कर रहे हैं करुणा वर्ण व्यवस्था और जवाला इत्यादि के बारे में तब उनका विरोध करना क्यों क्यों उचित नहीं ठहरता और हमने क्यों उसको प्राथमिकता नहीं दी हमने ये सारे उत्तर आपको दिए तो आपका ये पूछना बेवकूफी है निरी कि आपने हमें उत्तर क्या दिया अब चलाइए प्ले करिए पी एन मिश्र के बारे में आपसे वार्ता की। आप सीधा बॉलीवुड में घुस गए कि भैया हम बॉलीवुड के इन पिक्चरों
00:44:44:24 का विरोध नहीं कर पाए। करिए। पहुंच करिए। अपने जिन्नोपासक का वीडियो जाकर के देख लो। उसने जो वो वाला बनाया है जिसमें उसने कहा है कि मेरे विरोधी किस-किस प्रकार से कॉमेडी करते हैं। वो अभी दो चार दिन पहले का ही वीडियो है। उसमें उसने खुद स्वीकार किया है कि जो फिल्में होती हैं वो समाज का आईना होती है। समाज में क्या हो रहा है वो उसकी छवि प्रस्तुत करती है। इस प्रकार की बातें उसने खुद कही है। जाके देख लो अपने चिन्होपासक को।
00:45:16:21 किसी चीज से कितनी जनसंख्या प्रभावित हो रही है इसको देखेंगे कि नहीं? अगर आज की जनता बॉलीवुड से ज्यादा प्रभावित है बजाय हमारे आचार्यों से या बजाय आचार्यों को फॉलो करने वाले अमुक अमुक अधिवक्ताओं से तो हम पहले बॉलीवुड को देखेंगे ना जाकर के। अब हम अब हमने सपा का वो जो अभी राजनीतिक वो हुआ था मामला जिसमें वो बाल उतारे गए थे उस मामले में हम घुसे तो तुम कह दो तुम राजनीति में घुस गए। अब कुल मिलाकर के तुम तय करोगे कि हमें कहां घुसना है, कहां नहीं घुसना है। यह मां जो अपनी बिटिया को देख रही है, ढूंढ रही है, यह तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण नहीं है। हाई कोर्ट में रामपाल का रामपाल को सजा मिले। उसकी किताबें बिकना बंद हो। तुम्हारी मां का जिसमें अपमान हो रहा है। धूर्त व्यक्तियों उसकी किताबें बिकना बंद हो। इससे तुम्हारा कोई मतलब नहीं है। तुम्हारा मतलब किससे है? कि भागवतानंद का विरोध करने वाले का विरोध यदि श्री नारायण द्विवेदी कर सकता है तो क्यों नहीं कर रहा तुम्हारा मतलब इससे इसे दोगलापन कहते हैं चलो
00:46:28:02 तो हाइपरकस्ट का नहीं कर पाए तो नित्यानंद का नहीं कर पाए क्या वो सब शंकर परंपरा के थे हां पॉज करो जो शंकर परंपरा का कुल मिलाकर के क्या बात है। इसने एक तर्क दिया है कि भाई उनसे ज्यादा महत्वपूर्ण क्या कहते हैं? पीएन मिश्र जी का इसलिए अधिक है क्योंकि वो शंकर परंपरा के हैं। नहीं पहली बात तो अगर तुम ये चाहते हो कि इस बात को मान लिया जाए कि शंकर परंपरा को होकर के कोई कोई बिल्कुल अज्ञात व्यक्ति भी अगर शंकर परंपरा से दीक्षित है और वो शंकर परंपरा के सिद्धांतों के विरोध में बोलेगा तो उसका नाम लेकर के तुरंत उस पर वीडियो बनना चाहिए। उसका प्रतिकार होना चाहिए या उसका खंडन होना चाहिए। यह क्या कोई सनातन सिद्धांत है? मूर्ख व्यक्ति कुतर्क कर रहा है। शंकर परंपरा से दीक्षित मुझे लोग पता है जो आज उनके विरोध में बोल रहे हैं। दीक्षित लोग
00:47:32:26 एक व्यक्ति है जो खुद को विगन कहता है। सुधीर चौधरी जिसकी इसने फोटो लगाई थी ना मैं किसी दिन बात करूंगा। उसने मठ के परिकों पर आरोप लगाया था कि भैया इन्होंने मुझे मारा। अच्छा हुआ मारा। जूतों से मारना चाहिए था उस व्यक्ति को। शंकर परंपरा का शिष्य होकर के बीगन बीगन क्यों लिख रहा है? गौवंश की उपयोगिता तुझे नष्ट करनी है ना। और जो व्यक्ति गौवंश की उपयोगिता को नष्ट करने पर तुला हुआ है उस व्यक्ति का अगर विरोध शंकर शंकराचार्य के मठ में हुआ तो यह व्यक्ति उसको सपोर्ट कर रहा है। ये विगन आचार्य प्रशांत वाले जो धारणा वाला व्यक्ति है ये व्यक्ति ये भागवतानंद उसका सपोर्ट कर रहा है कि उसने देखिए शंकर मठ में पूरी के शंकराचार्य जी के मठ में एक व्यक्ति को पीटा गया। अच्छा हुआ मैं वहां नहीं था नहीं तो मैं और पीटता उसको अब वो विरोध कर रहा है मैं उसका नाम लेकर के वीडियो बनाने लगूं कि भैया वो तो शंकर परंपरा का है वो कैसे विघन लिख रहा है अपने आप को
00:48:37:15 ऑडियो मैसेज बनाते रहो छाती चौड़ी करके जाओ वीरों की तरह लड़ो जाकर के एक आध संस्था से ऐसी जो अधर्म कर रही हो तब आना बात करने समझे चले हमको बताने साहस क्या होता है। घर में घुसकर मारने वालों में से हैं। आवश्यकता पड़ जाए तुम्हारी तरह नहीं है। ऑडियो वॉरियर। खैर फिर भी फिर भी जो कायरों की फौज तैयार कर रहा है ना भागताना उसमें तुम तो शिखर पे हो। कम से कम। कम से कम ऑडियो ले तो आए।
00:49:21:22 संदीप रामायण का उत्तरकांड नहीं मानते। यह जानते हुए भी उसके चैनल पर भागवतानंद उसके चैनल पर इंटरव्यू देने इंटरव्यू देने क्यों गया बताओ? उत्तरकांड नहीं मानता संदीप देव ऐसा भागवतानंद ने कहा था। और मुझे जहां तक मेरी जानकारी संदीप देव जी नहीं जानते हैं उत्तर नहीं मानते उत्तरकांड। तो यह भागवतानंद क्यों गया था उसके चैनल पर? क्योंकि वहां से इसके समर्थन में कारण हो रहा था। इसको धर्म की चिंता नहीं है।
00:49:57:18 फिर नाम लेके इसने क्यों नहीं वीडियो बना दिया? उस समय तक अपने ही सिद्धांतों का खुद ही खंडन कर रहे हो। है जो अपने संप्रदाय के विरुद्ध बात कर रहा है ऑनलाइन बैठ के ये बच्चों के ये बच्चों वाली बातें करते हैं यदि तुम्हारे को भाई हमारे जो तर्क है इस संबंध में कि हमने क्यों नहीं किया पीएन मिश्र जी का सामने आकर के विरोध उनका नाम लेकर के विरोध यदि वह तर्क तुम्हें गलत लग रहे हैं और अपने तर्क तुम्हें सही लग रहे हैं तो अपने तर्क सही लगवाने के माने जाने के संबंध में उनके सिद्ध सही सिद्ध करने के संबंध में तुम्हें फिर शास्त्र लाना होगा। हम तो तुम्हें बता रहे हैं कि हमने क्यों क्यों नहीं किया? हमने इसलिए भी नहीं किया कि पीएन मिश्र जी का विरोध करने से हमारा इस रामपाल वाला अभियान का जो पक्ष है वो भी कमजोर पड़ सकता है। तो हम क्यों करें? तुम हमसे प्रश्न कर रहे हो। तुमने विरोध क्यों नहीं किया? मुक्तेश्वर जी महाराज जी से जाकर के प्रश्न क्यों नहीं कर रहे हो? और तुम्हारा ये भागानंद क्यों नहीं कर रहा उनसे प्रश्न? अरे शंकर परंपरा का अनुयाई छोड़ो।
00:51:12:19 वो तो डायरेक्ट उनके उसी उसी पीठ के शिष्य है ना। क्यों नहीं कर रहे उनका नाम लेकर के? वीडियो क्यों नहीं बना रहे? और अगर नहीं बना रहे तो ये क्यों नहीं वीडियो बना रहा उनके ऊपर? वहां मौन क्यों है ये? और इसके पिता इतनी इतनी अमुक अमुक शास्त्री बातें करते हैं तब यह क्यों मौन हो जाता है कि हमारे पिता की प्रतिष्ठा हमें अपने आप से ज्यादा प्रिय है। ये दोगला दोगला दोगलापंथी कहां गई? इसका मतलब है जो महाराज जी ने बोला था ज्योति पीठ वाले महाराज जी ने उस पर आपको चिंतन करना पड़ेगा कि कई बार हमें सह लेना पड़ता है। कुछ बातों को सह लेना पड़ता है। अभियान की रक्षा के लिए धर्म की रक्षा के लिए प्राथमिकता देनी पड़ती है। चुनाव करना पड़ता है। अगर कष्ट हो तो उसको सहना पड़ता है। यह सब बातें वो सोच सकते हैं जो धरातल पर उतरे हो। वो कभी नहीं सोच सकता जो अपने कमरे से बाहर नहीं निकला है। चूचू का मुरब्बा उसने केवल किया है। बस और कुछ नहीं।
00:52:13:03 चलो क्या कहता है मालूम है? रहा है। एक मिनट भागवतानंद अभी जो लास्ट वीडियो जो उसके छाती पर सांप लूटा जो रागवाचार्य जी महाराज वहां पहुंचे तो उसमें बोल रहा है कि मेरा मेरी वजह से चलो पहुंच गए। तेरी वजह से क्या? अरे भैया तेरे तेरे माता पिता की वजह से हो गए ना फिर तो तेरी वजह से नहीं हुआ। राघवाचार्य जी तेरी वजह से वहां नहीं पहुंचे। तेरे वो माता पिता की वजह से पहुंचे। अगर उन्होंने तुमको जन्म ही नहीं दिया होता तो क्या होता? ना तू ऐसा बोलता ना राघवाचार्य जी वहां जाते। और उनके माता पिता की वजह से भी क्यों? उनके माता-पिता ऐसे पीछे चलता चला जा।
00:52:54:12 हर चीज का क्रेडिट उस व्यक्ति को खुद को देना है। हर चीज का क्रेडिट। राघवाचार्य जी महाराज अगर शंकराचार्य के मठ में जा रहे हैं तो इसका इसका कारण है वह अगर इस का विरोध हो रहा है आज तो उसका कारण मैं जानता तक नहीं था ये कौन है व्यक्ति जब मैं पहली बार लखनऊ के इस मंदिर में गया था मगर इस व्यक्ति ने अपनी पोस्ट डाली मेरा वीडियो लेते हुए और ये कहा कि देखिए हमारे बोलने की वजह से सब बोल रहे हैं। यह दोगलापन लालच लोकेशना का भूखा और तब भी मैं शांत रहा था यह देख कर के और मैंने उस उस पोस्ट को इसकी जो इसके लोग कहते हैं तुमने कभी समर्थन क्यों नहीं किया है जाके देख Facebook पे उसको लाइक दिया है मैंने और अपनी लाइव चर्चा में बताया भी है जब ये यही आरोप ये बता रहा था कि मेरी अच्छी बातों का तुमने समर्थन क्यों नहीं किया है
00:53:45:10 समर्थन किया है जहां अच्छी चीज दिखी है कोई अगर तो उसको लाइक किया है, पसंद किया है। मैंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया। उसको छोड़ दिया। ठीक है भाई क्रेडिट लेना चाहते हो ले लो क्रेडिट। हम नहीं जानते थे तुम कौन से भागतानंद हो। कौन से आचार्य हो लुप्त संप्रदाय के। कुछ नहीं पता था हमें तुम्हारे बारे में। और तुम कह रहे हो कि तुम्हारी वजह से हम इस के पीछे पड़े हैं। फिर राघवाचार्य जी महाराज क्यों आए? क्योंकि भारतानंद की को हमें नीचा दिखाना था। ऐसा कुछ नहीं है। हमें समाज को ये सच्चाई दिखानी थी कि तुम जो ये प्रलाप कर रहे हो ना कि वहां पर मठ में मिलने नहीं दिया जाता है वैदिक आचार्यों से वरिष्ठ जनों से वो सच्चाई समाज को दिखानी थी और जो वैष्णव संप्रदाय है वो एक मंच पर आए शंकर संप्रदाय तो अच्छी बात है सभी सनातनियों के लिए और हम भी तो इसीलिए गए थे राघवाचार्य जी महाराज के पास कुंभ में इंटरव्यू लेने उनका
00:54:47:20 तो क्या यह कुतर्क है कि वो उनहीं का अनुय है। लाइव आकर ऐसा कर रहा है। भाई लाइव आकर बहुत से लोग बहुत कुछ कर रहे हैं। हम शब्द नहीं दे सकते। हमें चुनना होगा कि किसको पहले करें और हम ये भी देखना होगा कि किसको करने से हमारा जो बड़ा अभियान है वो नष्ट ना हो जाए। ये सब बातें हमने आपको बताई। ये उत्तर दिया और उसके बाद भी यदि तुम्हारे भूसे के ढेर में कुछ तुम्हें मिल नहीं रहा है तो चर्चा शेष रही तो फिर तुमने कैसे निर्णायक बन गए? चलो आगे बढ़ो।
00:55:26:26 जिसके विषय में आप भी जानते हैं कि कर्मणा वर्ण व्यवस्था मानता है और आप तो जो है भैया अनेकों से वर्ण व्यवस्था पर जो है डिबेट कर ही चुके हैं। जिन जो प्रतिष्ठित नहीं भी हैं। आपके लाइव में कितने लोग हैं जो प्रतिष्ठित हैं। आपने कितने प्रतिष्ठित लोगों से जो है डिबेट किया है लाइव में। हमने तो देखा है कि कोई भी आरा गरा नथूरा उठ के लाइव में आ जाता है तो उसी से डिबेट करने लग जाते हैं महाशय आप। पॉज करिए। जो प्रतिष्ठित नहीं भी हैं उनसे भी हमने चर्चा की है क्योंकि जब हम ऐसे लोगों से आमने सामने से बात करते हैं तो वो वीडियोस ज्यादा देखे जाते हैं और हमने कोई मना नहीं किया है। अगर संदीप देव जी हमारे वर्ण व्यवस्था को लेकर के या पी. एन. मिश्र जी वर्ण व्यवस्था को लेकर के या जबाला वाले विषय को लेकर के हमसे वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करना चाहते तो हमने कहीं लिख के डाला क्या? हम हर वीडियो में कहते हैं किसी प्रकार के वैचारिक मतभेद के लिए आप यहां WhatsApp करें। अगर इस तरीके से वो सामने आना चाहते हैं यद्यपि हम नहीं चाहते। मगर यदि वह सामने
00:56:42:00 आना चाहते तो हमने कोई मना भी नहीं किया है। हमने कहीं लिखा है क्या पीए मिश्र जी यदि सामने आ के इस चीज में चर्चा करेंगे हमसे विरोध विरोध के निमित्त तो हम मना कर देंगे। भाई हम जितना ऐसी असहज स्थितियों से बच सकते हैं बचेंगे। परंतु यदि बात आ ही जाएगी तो फिर पीछे नहीं हटेंगे। भाई जानबूझ के क्यों अपने लिए वह चीजें तैयार करें? अपने से क्यों तैयार करें? जितना हो सकता है हम बचेंगे कि हमें जो है पढ़ाई से ना उठना पड़े परीक्षा के दिनों में।
00:57:25:06 मगर हम अपनी ओर से ये क्यों करें कि नहीं पूरे साल नहीं पढ़े तो इसलिए आप उठ जाओ। अब मत पड़ो। जितना हो सकता है हम अपनी ओर से प्रयास करेंगे कि ताला लगाने वाले घर में चोरी ना हो। अपने आप हो ही जाए तो बात अलग है। मगर हम तो ताला लगाएंगे ना और मन में यही अपेक्षा रखेंगे ना कि चोरी ना हो। किस भावना के साथ ताला लगाएं कि चोरी हो जाए। प्रलापी धूर्तपन करना है। कहने को जो है चलिए चलाइए। प्रतिष्ठित नहीं है। हम उस जो है धर्म क्षेत्र में हम उसका विरोध क्यों करने जाए? एक एक व्यक्ति का विरोध क्यों करने जाए? उस समय क्यों कर रहे थे और जब वो लाइव में आ के आपसे उत्तर दे दिया है उस समय क्यों कर रहे थे उस समय क्यों कर रहे थे क्योंकि वो साहस पूर्ण तरीके से अपने चेहरे के साथ सामने आकर के कर्मणा वर्ण व्यवस्था पर चर्चा करते हैं और क्योंकि वो कोई स्क्रिप्टेड नहीं होती है तो सामने से आने वाले जो काउंटर्स होते हैं कर्मणा वर्ण व्यवस्था या किसी भी विषय में जो काउंटर्स होते हैं वो अनएक्सेक्टेड होते हैं तो इसलिए वही के वही उनका उनका निदान करने से समाज में जागरूकता आती है उन विषयों को लेकर के
00:58:40:12 इसलिए हर व्यक्ति को हमने टाइम दिया और अभी भी देंगे तुम आ जाओ तुमको दे तो रहे हैं भागतानंद को दे रहे हैं एक हद तक हमने बचाने का प्रयास किया था कि भाई भागतानंद के साथ जो हमारा युद्ध जैसा वो है वातावरण बन गया है वो समाज को ना दिखाई दे आर्य समाज वाले उसका और मेरा उपयोग करते हुए और मेरा और उसका विरोध ना करना सीख मगर जब उसने कर दिया और हमारे पास कोई और नहीं रहा तो फिर हमने कह भी दिया कि आ जाओ भैया ठीक है अब जब जिस चीज को हम बचा रहे हैं वो चीज नष्ट हो ही गई तो ठीक है आ जाओ मैदान में आमने सामने तब से ले आज तक कह रहे हैं तुम्हारा भागता भाग ही रहा है और केवल हमसे ही नहीं भाग रहा है हर व्यक्ति को लिए बहाने बनाता है गुरु चरण दास क्योंकि वो वैदिक नहीं है इसलिए नहीं जाऊंगा पी एन मिश्र जी क्योंकि वो अपने गुरु को नहीं मान रहा इसलिए नहीं जाऊंगा अरे भाई तुम सामने जाकर तुम्हें यही तो सिद्ध करना है कि तुम अपने गुरु को नहीं मान रहे हो सिद्ध कर दो जाके इसी चीज के निमित्त तो शास्त्रार्थ है और यदि दो क्या दो क्या दो परफेक्ट लोकों में शास्त्रार्थ होता है क्या किसी एक का पक्ष तो सदव वो रहता है ना गलत और किसी एक का पक्ष सही तभी तो शास्त्रार्थ
00:59:55:27 होता है कौन सा ऐसा शास्त्रार्थी है जो यह सोच के जाता है कि सामने वाला सही है फिर भी मैं उसे परास्त करूंगा शास्त्रार्थ में अगर तुम ऐसा सोचते हो कि ऐसे ऐसे होते हैं शास्त्र तो तुम मूर्ख हो निरे कुए के मेंढक चलो सीधा उसे मना भी कर सकते थे कि तुम धर्म चैतन्य के प्रतिष्ठित नहीं हो तो हम तुम्हारे साथ डिबेट नहीं करेंगे क्यों आपने ही कहा था ना कि एक एक व्यक्ति का तो हम विरोध नहीं करते चलेंगे एक व्यक्ति का एक व्यक्ति का विरोध भी नहीं कर पाएंगे और अगर कोई सामने से आकर के चर्चा करना ही चाहता है तो उसका स्वागत है आप जाके बोल दो कौन आना चाहता है? तुम आना चाहते हो। भागानंद आना चाहता है। जो आ जाएगा उससे चर्चा करेंगे। भाई आ जाओ कब आ रहे हो? हम उसको समय देंगे निकालेंगे और और उसको समय हम अपने हिसाब से देते हैं। जो जो व्यक्ति फॉर्म भरता है चर्चा के निमित्त उसको हम अपने हिसाब से समय देते हैं। कब देना है कब नहीं देना है। कुछ लोगों का तो नंबर दो दो महीने बाद आया है। तो इसका कंपैरिजन तुम कैसे कर लोगे? तुम्हारे भागतानंद ने खुद कहा है कमेंट में जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा के मैं सबका उत्तर नहीं दे सकता चाहिए क्या तुम्हारे हिसाब से वैसे
01:01:12:02 भागतानंद के पास तो बहुत समय है वो कमेंट में भी खेल जाएगा उसको कुछ नहीं मिलेगा कंटेंट तो वो कमेंट में भी एक दो चीज कमेंट उठा करके उस पर ही दोद घंटे का वीडियो बना लेगा अभी राजेश बनवाल जी ने एक पोस्ट डाली थी बड़ी हास्यास्पद बहुत हंसी आई थी मुझे उसको देख कर के उसमें क्या दिखाया गया था कि भागतानंद को स्वप्न में अ दीक्षा मिली परिसाधना के द्वारा और उसके बाद जो है उसने एक एक जो है गलत सिद्धांत उसने प्रतिपादित किया तो आदि शंकराचार्य जी ने उसके थप्पड़ लगवाया ये चित्र जो कॉमिक्स की स्टाइल में उन्होंने व्यंग चित्र के रूप में ये पोस्ट डाली थी आदि शंकराचार्य जी ने एक थप्पड़ लगवाया तो भागतानंद कहता है कि कौन है कौन है कौन मार रहा है मुझे तो फिर अगले अगले अगले श में कहता है कि कौन है निग्रह कर दूंगा तीन घंटे का वीडियो बना दूंगा तो यह है उसके पास समय समय है भाई कुछ करना धरना है नहीं वीडियो बना दूंगा अभी कह रहा था दो दो घंटे जो राघवाचार्य जी महाराज वाले दिन जब क्रेडिट लेने के लिए उसने वीडियो बनाया था कि देखो देखो मेरी वजह से ऐसा हो रहा है। अ तो उस दिन शाम उसने क्या बात बोली थी किसी व्यक्ति के लिए कि वो तो
01:02:27:03 इसकी किस्मत अच्छी है नहीं तो मैं अभी वीडियो बना देता इसके लिए। आप सोचिए कि ये किसी व्यक्ति को पनिश करने के लिए या उसके जीवन के प्रभाव को अपने वीडियो बनाने से तुलना करता है। अरे भैया अगर तेरे वीडियो से इतना प्रभाव पड़ रहा है तो तू बना दे रामपालियों पर वीडियो मुसलमानों पर वीडियो बना दे और कर दे उनका खत्म नाश। जो क्या कहते हैं जो विध विधर्म के द्वारा फैलाई जाने वाली सनातन विरोधी चीजें हैं इन पर तू वीडियो बना दे एक एक करके खत्म हो जाए जिससे सारी समस्याएं क्योंकि तेरे वीडियो इतने इंपॉर्टेंट है ना कि तू वीडियो बना देगा नहीं तो उसकी किस्मत बुरी हो जाए वो अगर तूने वीडियो नहीं बनाया तो बच जाएगा उसकी किस्मत अच्छी मानी जाएगी जो तू वीडियो नहीं बना पाया तो भैया इन पे बनाना तू वीडियो इस्लाम पे क्रिश्चियनिटी पे हर समाजियों पे एक एक वीडियो लाइन से बना दे सब पे वो वो वाला जिससे पोस्टमार्टम हो जाए और उनकी किस्मत जो है जो अच्छी किस्मत है वो उसमें दुर्भाग्य में बदल जाए। कब बनाएगा भाई? चलिए प्ले करिए।
01:03:35:27 कुछ प्रिंसिपल्स उनके लिए होते हैं कि किस-किस प्रकार से किनको चुनना है? किनका खंडन करना है, किनका नहीं करना है। तो आपके लाइफ में जो बच्चे बच्चे आ के आपसे जो है डिबेट करके चले गए क्या वो धर्म क्षेत्र में प्रतिष्ठित थे? तुम भी आ जाओ तुम भी आ जाओ तुम्हारे तुमको मना किया क्या भाई स्थिति ये है कि होना ही है और हां ये बात सही है कि भागतानंद ने भी जब हमको पहली बार जब अटेमप्ट किया था कि हम चर्चा करना चाहते हैं तो इसी इसी कारण से कि इस चर्चा होने वाली इस प्रकार की चर्चा का दुष्प्रभाव ज्यादा पड़ेगा तो हम पीछे हटे थे क्यों क्योंकि उसने कहा था भारतानंद ने जब तुम के पास जा सकते हो चर्चा करने के लिए तो मेरे पास क्यों नहीं आ सकते? क्योंकि तुम्हारे पास आने का मतलब है कि हम तुम्हारे पास आएंगे तो खंडन करे बिना नहीं रह सकते और समाज को हम ये दिखाना नहीं चाहते कि हम तुम्हारा खंडन कर रहे हैं। ये बात होती है। इसी प्रकार से अन्य कई लोग ऐसे होते हैं जिसके पास जाना जाना जिसके साथ चर्चा करनी है तो भैया उसका जो सैद्धांतिक विरोध है करना पड़ेगा और कई बार हम समाज को ये नहीं दिखाना चाहते कि हम इसका विरोधी है हम दोनों जिससे कि सामने वाला लाभ उठाए जैसा
01:04:50:28 कि मुक्तेश्वर जी महाराज ने कहा ज्योतिष पीठ वाले उन्होंने कहा कि कई बार सह लेना पड़ता है नहीं तो विधर्मी जो है उसका फायदा उठाएंगे और तुमने सुना भी है तो फिर तुमसे क्यों सोच रहे हो के पीएन मिश्र जी का हम वैसे ही अक्षरस विरोध करें। कई ऐसे स्थितियां होती है जिसमें हमको सह लेना पड़ता है। कोई अगर गलत बात कही जा रही है बहुत सी अन्य चीजों को महत्व देना पड़ता है। उसको पीछे करना पड़ता है। और क्यों करना पड़ता है? जिससे कि विरोधी हमारा फायदा ना उठाएं। हम दो लकीर के इस तरफ वाले लोगों का फायदा लकीर के उस तरफ वाले लोग ना उठाएं। इतनी सी बात भेजे में नहीं घुस रही। और नहीं घुस रही तो फिर तू यह बता सिद्धांत तो मैंने बता दिया फिर नहीं घुस रही तो फिर तू यह बता कि मुक्तेश्वरानंद जी पीए मिश्र जी का विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं अगर नहीं कर रहे हैं तो भारतानंद कब उनके विरोध में वीडियो बनाने वाला है आत्म मुग्धता पक्षपाती और मठ के अपने मोह में अपने शिष्यों के मोह में ये सब टाइटल दे दे के कब वीडियो बनाने वाला तुम्हारा भागता
01:06:01:27 उससे जब वो अपनी शंका का निवारण नहीं कर पाए तो आपके वक्तव्यों से कर लेंगे। यह आप कैसे सुनिश्चित कर रहे हैं? क्या नहीं कर पागचार्य जी को पीछे करना जरा महाशय और कहने को जो है जो प्रतिष्ठित नहीं है हम उस जो है धर्म क्षेत्र में हम उसका विरोध क्यों करने जाए एक एक व्यक्ति का विरोध क्यों करने जाए तो उस समय क्यों कर रहे थे और जब वो लाइव में आ करके आपसे डिबेट करना चाह रहा था तो आप सीधा उसे मना भी कर सकते थे कि तुम धर्म क्षेत्र में प्रतिष्ठित नहीं हो तो हम तुम्हारे साथ डिबेट नहीं करेंगे क्यों आपने ही कहा था ना कि एक एक व्यक्ति का तो हम विरोध नहीं करते चलेंगे। धरातल पर उतारे व्यक्ति की कुछ नीति होती है। कुछ प्रिंसिपल्स उनके लिए होते हैं कि किस-किस प्रकार से किनको चुनना है। किनका बिल्कुल एक मिनट थोड़ा एक मिनट। इसका अर्थ ये है कि हमने ये देखा कि किसके साथ लाइव चर्चा करने से कोई दिक्कत नहीं आएगी। और यह बात सत्य है कि पीएन मिश्र जी जैसे लोग अगर वह ऐसी चीजें कर रहे हैं कि शंकराचार्य जी द्वारा निर्गत सिद्धांतों के वो विरोध में है और वो उसी के लिए उसी को लेकर चर्चा करेंगे तो आत्मा से यही आवाज निकलेगी ये चर्चा जो है सामाजिक ना हो ना देख और यही बात हमने भागवतानंद के लिए भी कही थी और
01:07:16:28 जिसका उसने चवा उड़ाया जिसको बदल करके उसने प्रस्तुत किया हमारे मन से यही आवाज निकली थी कि नहीं ये चर्चा अगर हमारे बीच में वैचारिक मतभेद है भी तो इसको जन सामान्य ना देखे। मगर जब उसने कोई रास्ता नहीं छोड़ा तो हमने कह दिया आ जाओ अब कब आ रहे हो। तब से ले आज तक तुम्हारा भागानंद भाग रहा है। और जिन लोगों से हमने ऐसे करके डिबेट की है जो लोग आए हैं वो ज्यादातर इस वाले पक्ष से आए हैं। आर्य समाजियों के पक्ष से आए हैं। तो हमने वहां लिखा है मोटा-मोटा आर्य समाज जो इधर ही के पाले के होते हैं। हम नहीं चाहते कि उनसे आमनासामना हो। अब क्या हम श्री संप्रदाय वालों से लड़ेंगे जाकर के सैद्धांतिक विरोध में कि मधु संप्रदाय वालों से लड़े हैं क्या तुम्हारे हिसाब से लड़ना चाहिए उससे धर्म को बहुत फायदा होगा
01:08:07:01 बेवकूफ दो कौड़ी की अकल नहीं है दो कौड़ी की तूती बंधु कामना होगा जब चलो बच्चे आकर के आपसे जो है डिबेट करके चले गए क्या वो धर्म क्षेत्र में प्रतिष्ठित थे और यदि उनको उनकी शंका का निवारण आप कर रहे थे तो आपने तो अनेक वीडियो बनाया था। फिर पॉज करो शंका का निवारण दो इनको उत्तर दो। हम उनकी शंका का निवारण नहीं कर रहे थे। हम जानते हैं कि इट्स बेटर टू केयर देन क्योर। ठीक है? जो एक बार चला गया उसको वापस लाना बहुत मुश्किल है। मगर वो जो जिस जिसज आधार पर अपनी मान्यताएं बनाकर बैठे हैं। जो सामने आया वो कभी अपनी मान्यता को चेंज नहीं करेगा। मगर उसको जो सुन रहा है और जो बिल्कुल वैसे ही आधार बनाकर अपनी उसने मान्यताएं बनाई है उसके मन में जरूर परिवर्तन होता है और हमने बहुत सारे लोगों को वापस पाया है आर्य समाज से इस से और रामपाल से ये है रिजल्ट तुमने क्या किया है क्या किया तुमने कौन हो तुम तुच्छा ही की है तुमने केवल और तुम्हारे भागतानंद ने केवल पोस्टमार्टम करूंगा उसकी किस्मत अच्छी थी जो मैं वीडियो नहीं बना पाया भाई। वीडियो
01:09:22:04 बनाने से उसको दिल का दौरा पड़ जाएगा। एक लुक्का चला ससुराल वो ससुराल लुक्का चला ससुराल लुक्का वीडियो बना देगा तो भैया किसी की जिंदगी तहसनहस हो जाएगी। जीवन उसका तहसनहस हो जाएगा। हाय बड़े। चलो उससे जब वो अपनी शंका का निवारण नहीं कर पाए तो आपके वक्तव्यों से कर लेंगे। ये आप कैसे सुनिश्चित कर रहे हैं? इसका जवाब दे दिया है। और आप का निवारण नहीं करते हैं। जन सामान्य को दिखाते हैं कि देखो जो जो सनातन सिद्धांतों के विरोध में जो जो कुतर्क किए गए उनको कैसे उनको मिट्टी में मिलाया जाता है। कोई शंका का निवारण नहीं करते हैं। मगर उन चर्चाओं उन चर्चाओं को देखकर प्रभाव पड़ता है जन सामान्य में इसलिए करते हैं। हम तुम्हें क्या लगता है कौन हम जाते हैं? एक मिनट के पास हम जो इंटरव्यू लेने गए थे इसलिए कहते हैं कि उसकी शंकाओं का निवारण हो जाए। वो जो है ये कहना छोड़ दे कि मैं जो है शंकराचार्य या हम आज तक जब भी इस में गए हैं किसी उसके ब्रह्मचारी से बात किए हैं या मंदिर के अध्यक्ष से बात किए तो ये सोच के गए कि आज से अपना पद छोड़ देगा इस की नौकरी को त्याग देगा क्या बेवकूफी है ये उसके मत को वहां सामने से नेस्तो
01:10:37:08 नाभूत वहां पर उसकी विचारधारा का शोधन इत्यादि प्रकट करने के लिए हम लोग बात करते हैं जिसको देख के जन सामान्य अगर वो बिगड़ रहा है तो बचे और यदि दूर है तो दूर ही रहे। चलिए कह के संबोधित कर रहे हैं। आप पहले जाइए अपने गुरु जी के पास और कहिए कि जो है निद्राचार्य जी को हम भागदानंद कह रहे हैं इस आधार पे कि एक जो है शंकर परंपरा के ही एक प्रियन मिश्र नामक एक व्यक्ति हैं। अधिवक्ता हैं। उन्होंने अपने ही संप्रदाय के विरुद्ध सिद्धांतों को रखा है। जन्मना के जगह करना वर्ण अरे मेरे भाई इतनी बार इस बारे में बात हो चुकी है। अरे पीएन मिश्र जी गलत है तो तू साबित करना कोई पीएन मिश्र जी को सजा देने के लिए नहीं बुलाया जा रहा तुझे जो तू यहां बक रहा है अपने को सही बताने के पक्ष में वही बकना है ना तो सामने जाकर बकने से क्यों पीछे हट रहा है बात ये है इसलिए भागता नंद कहा गया है हर व्यक्ति जिसने भी इसको कभी ललकारा ये वहां से पीछे भागा है गुरु चरण दास ने ललकारा तो क्या कहा कि वो वेदों को नहीं मानता मैं क्यों जाऊं अरे भैया जो तुम्हारे
01:11:52:16 मत को मानता होगा उससे शास्त्रार्थ होता है क्या कभी और अगर गुरु को ना मानने वाली बात है तो सबके गुरु व्यास है और सबके हिसाब से सामने वाली पार्टी ने अपने गुरु को नहीं माना है अगर ब्रह्म तत्व तत्व तात्विक विषय कहा जाए तो श्री संप्रदाय के अनुसार शंकराचार्य जी ने अपने गुरु का विरोध किया कहीं ना कहीं शंकराचार्य जी के अनुसार श्री संप्रदाय ने विरोध किया कहीं ना कहीं यह कोई आधार नहीं होता है शास्त्रार्थ से पीछे हटने का कि वो अपने गुरु को ही नहीं मानता हम क्यों मान हम क्यों जाए और अगर यह आधार है तो फिर ले आओ फिर सनातन सिद्धांत हमने तो तुम्हें बता दिया दोनों के गुरु एक है व्यास फिर दोनों के गुरु नारायण श्रीमन नारायण दोनों परंपरा वही से चल रही है तो शंकराचार्य शंकराचार्य परंपरा में और रामानुजाचार्य परंपरा में कभी कोई विरोध होना ही नहीं था। शास्त्रार्थ होना ही नहीं था। और इस्लाम की बात कर लो। यह सनातनी परंपराएं हो गई। इस्लाम की बात कर लो। इस्लाम में भी तो कहीं ना कहीं कोई ऐसा समय रहा है ना जब अपने से पूर्व वाले की बात का खंडन करते हुए अपने मत
01:13:07:18 को पुष्ट किया गया। प्रचारित किया गया। पीछे कहीं भी जाओगे तो मूल में तो कहीं ना कहीं कोई सही बात बोलने वाला मिल जाएगा ना। जिसको अनसुना किया गया और अपना सिद्धांत गढ़ा गया। रामपाल भी अपने गुरु का विरोध में किया है। पहले हनुमान जी का उपासक था रामपाल। आर्य समाजी भी रह चुका है। फिर वो अपना बना है। तो इसलिए रामपाल का खंडन ना किया जाए क्योंकि उसने तो भाई आर्य समाज का वो यही बात तो तुझे सिद्ध करनी है जाकर के। तो शास्त्रार्थ ना करने का यह कारण नहीं होता कि वह इस मामले में गलत है। उस वो गलत है। यही तुम्हें सिद्ध करना है। तुम घोषित मत करो। ये घोषित मत करो। निर्णायक मत बनो। वहां जाओ और सामने से जाकर के सिद्ध करो। उसके लिए शास्त्रार्थ है। समझे?
01:14:07:15 ये है आप ही अपने गुरु जी को ये भी कहिएगा कि गुरु जी गुरु जी आपके जो गुरु जी थे कृपात्रेय स्वामी उनको जो है शंकराचार्य बनाने की फैक्ट्री उन्होंने कह दिया है लेकिन वहां जो है गुरु जी मेरी ऐसा कहा है नकली शंकराचार्य बनाने की फैक्ट्री या शाप ब्राह्मण नहीं होते हैं या जबाला वाले वाले मामले के अनुसार जो है कर्मणा वर्ण व्यवस्था है तो ये गलत है। गलत कहा उन्होंने और अगर इस पर हमारी कोई वैचारिक चर्चा होगी तो वो करेंगे अवश्य ही और हम नहीं चाहते कि इस तरह की चर्चा हमारे और उनके बीच में हो तो वो सार्वजनिक रूप से हो जैसा कि हम भागतानंद के केस में भी नहीं चाहते थे। मगर भागतानंद ने तो हमें विवश किया सामना करने के लिए और इसी तरीके से सामना करने के लिए विवश किया तो कर रहे हैं।
01:14:56:21 मगर अब तुम ये पूछो भागतानंद से कि वो कब जाएगा ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी के पास और कब पोस्टमार्टम करेगा कि क्यों नहीं बोल रहे हो पीएन मिश्र जी के विरोध में पूछो तो वहां आंसर वही आएगा जो ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी ने कहा था कि कई मामलों में हमें सहना पड़ता है। अपने बड़े अभियान को बचाने के लिए हमें अपनी जो ये छोटी मोटी ये जो प्रहार हो रहे हैं इनको सह लेना पड़ता है। और अगर तुम्हारे इतनी बुद्धि नहीं है तो जाओ कभी घर से बाहर निकलो दो पैसे का काम करो मुंह चलाना आसान है जिस दिन निकलोगे ना बाहर थाना कोर्ट कचहरी इत्यादि के चक्कर काटने पड़ेंगे एफआईआर हो रही होंगी तुम्हारे विरुद्ध पता चल जाएगा आटे दाल का भाव क्या होता है जेब में नहीं है टल्ला टिल्ला मांग रहे हैं लाल किल्ला चलो मैं अपने संप्रदाय के लोगों का विरोध नहीं कर सकता उनसे द्वेष नहीं कर सकता हूं भले वो हमारे संप्रदाय अरे भैया टोमू व्यक्ति भागतानंद का जो मठ है ना निगमानंद
01:16:06:02 क्या लिख के गए हैं निगमंद अपने ग्रंथों में गौरांग यानी चैतन्य महाप्रभु और ये ईसा ईसा बाइबल का प्रचार करने वाला कुरान का प्रचार करने वाला वाले मोहम्मद ये सब लोग और कौन बुद्ध ये सब गौतम ऋषि के देह से उत्पन्न है और धर्म की संस्थापना के लिए आए थे भाई क्या बात कर रहे हो कब कर रहा है तुम्हारा भागतानंद अपने निगमानंद का खंडन कहा था मत छेड़ कहा था कि इस इस बात को मत छेड़ नहीं तो तू अपनी जो थोड़ा बहुत जो तूने अपने ताश के पत्तों का ढेर बनाया आया है ना ये खड़ा करके Facebook पे कैरी मिनाटी बनके वो नष्ट होने लगेगा सच्चे धर्म रक्षक से टकराएगा तो दिक्कत आ जाएगी कहा था पर इसको चाहिए थे व्यूज इसको चाहिए कंटेंट निग्रह कर दूंगा वीडियो बना दूंगा बना भैया वीडियो कर वो सन्यासी का खंडन करे निगमानंद मटके
01:17:22:02 निगमानंद मठ सन्यासी का खंडन करे बोला है ना जिसने एनी बेसेंट थियोसफिकल सोसाइटी की फाउंडर और किसकी शिष्य शिष्या सुमेरू दास की सुमेरू दास का शिष्य कौन है निगमानंद गुरु भाई बहन दोनों निगमंद और एनी बेसेंट ये है कलेक्शन फ्री मैशन का एक व्यक्ति किसी अमुक अपने टाइम में वो ना जानते हुए एक दिन के लिए उसका अध्यक्ष का फोटो हो गया बस हो गया वो फ्री मैशन का और ये तुम्हारे अरे गुरु घंटाल क्या कर रहे हैं उनप अब बोल बना वीडियो इसी दिन ये तमाशा मुस्कुरा कर हम भी देखेंगे दिखा तमाशा खैर अभी पूरा वीडियो बाकी है चालू करो इसका लेकिन मैं नहीं करूंगा गुरु जी क्योंकि वो तो अपने संप्रदाय के है ना हमें तो व्यक्तिगत द्वेष निग्रचार जी से करनी है सिद्धांत जाए भाड़ में गुरु जी सिद्धांत क्या होता है हमें तो व्यक्तिगत संबंध बनाना है ना सबके साथ हमें ये देखना है कि किसके गलत बोलने से ज्यादा जनसंख्या प्रभावित हो रही है। तो हमें जब जैसा समय मिलेगा अनुकूल लगेगा वहां पर हम उसका प्रतिकार करेंगे। अगर तुम्हें लगता है कि हमारा प्रतिकार करने का जो आधार है यह चयन
01:18:37:15 करने का कि किसका करना है किसका नहीं करना है। चयन तो तुम्हारे निग्गू ने भी किया है। परंतु और उसने स्पष्ट रूप से पक्षपात के रूप में किया है। क्योंकि उसके लिए तो कोई विषय है नहीं। भाई वो वो क्यों नहीं बोल रहा है प्रखर हो के मुक्तेश्वर जी के लिए यह जो सवाल जितने तुम हमसे कर रहे हो पीए मिश्रा जी के विषय में यही पीएन मिश्र जी के विषय में सारे सवाल उनसे करो क्यों नहीं हो रहे हैं क्योंकि यहां पर चयन तुम भी कर रहे हो मगर तुम्हारे चयन करने का आधार है अपनी अनुकूलता और हमारे चयन करने का आधार है धर्म की अनुकूलता धर्म रक्षा की अनुकूलता अभियान की अनुकूलता व्यक्तिगत अनुकूलता नहीं चलो
01:19:24:26 एक बार यदि आपकी इतनी ही हैसियत थी तो जाकर के एक बार आप जिन निगमानंद जी पे आक्षेप लगा रहे हैं जाकर के अपने गुरुदेव से क्यों नहीं पूछ लेते हैं कि आप क्यों निगमंद जी के वार्षिक उत्सव पर जाते थे पॉज करो जाते थे कि गए थे पहले तो ये इस पर आ जाओ अच्छा क्या भागता नंद मठ में नहीं रहा है तो भागतानंद क्योंकि मठ में रहा है तो इसलिए मान लिया जाए कि भागतानंद पूरी शंकराचार्य जी के विरोध में करपात्री जी के विरोध में जो भी विष्ठा निकालता है मुंह से वो सब विष्ठा उनको स्वीकार रहे।
01:20:04:28 पूरी के शंकराचार्य जी कहते हैं कि जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर और उसको प्राप्त करने के निमित्त बताई जाने वाली विधि का नाम धर्म है और ये लोग कह रहे हैं कि कुरान और बाइबल भी धर्म है और ऐसे ही धर्म की स्थापना के लिए आते हैं भैया वहां वो अवतार लेते हैं आचार्य ऋषि मुनि हमारे वो अवतार है मोहम्मद और ये बाइबल वाले ईसा हम तो तुम्हारे हिसाब से पूरी शंकराचार्य जी ये कुरान की फिलोसफी को मानते हैं क्योंकि वो क्योंकि वहां गए थे और भागतानंद की फिलोसफी को भी मानते हैं निग्रह कर दूंगा वाली पोस्टमार्टम तीन घंटे का वीडियो क्योंकि वो वहां गए थे भागतानंद उनके वहां साथ में फोटो है भागतानंद की उनको प्रशय मिला वहां पर वो तो जब भागतानंद जो है अपने लिए कुछ विशेष वहां चाह रहा होगा तो भगाया गया है जूतों ही जूतों उसको वहां से और तब उसने मोर्चा खोला भगा दिया गया जब उसको तो थोड़ा काम करो घर बैठे बात करना मुंह चलाना तूती
01:21:20:09 चलाना बहुत सरल होता है जी चलिए प्ले करिए क्या उनकी गति है धर्म क्षेत्र में क्या थे नहीं थे क्यों नहीं बस चर्चा कर लिए क्यों नहीं निग्र आचार्य जी के विषय को लेकर के आप अपने गुरु जी के पास जाकर के एक सार्वजनिक वक्तव्य निर्गत किया बताइए आपके पास क्यों नहीं क्यों क्यों नहीं किया क्यों नहीं किया हमने हमें जो पूछना है हमने पूछ लिया किस वीडियो को डालना है किसको नहीं डालना है कौन सा वीडियो बना भी है कौन सा नहीं बना है जब उन्होंने एक बार स्पष्ट कह दिया निग्रहचार कोई हो ही नहीं सकता और निग्रह निकासिका में हमने कम से कम कुछ नहीं तो 50 कारण दिए होंगे उसकी अप्रामाणिकता के और अभी जितना वो जूझता जाएगा जितना वो करता जाएगा उतना ही ज्यादा और क्रिस्टल क्लियर चीज है आपको। अब वो तो हमने सवाल तो खड़े कर दिए। अब उनकी उनके समर्थन में अब चीजें आपको मिलती जाएंगी। आने वाला है कल वीडियो मिल जाएगा देख लेना। ठीक है? निगमंद जिसको वो अपने परंपरा परंपरा प्रामाणिक आचार्य बता रहे हैं वो उनके बारे में देख लेना। क्या है लखनऊ से तो कहने का अर्थ क्या है? कि हमने जब अपने गुरु का वक्तव्य प्राप्त कर लिया और हमें हमारे गुरु के सिद्धांत प्राप्त हो गए हैं तो हम क्यों भैया अलग से एनर्जी वेस्ट करें तुम्हारे
01:22:35:20 हिसाब से कि तुम एक एक व्यक्ति आता जाए हम सब कुछ कर चुके हैं मगर वही वाली बात फिर आया तुमने ये तो किया ही नहीं हम वीडियो बना चुके हैं हम सब कुछ डाल चुके हैं सब कुछ बता चुके हैं मगर क्योंकि एक नया व्यक्ति आया तो फिर वीडियो बनाए तो ये सब काम तुम्हारे पास है छिछोरे लोगों के पास है क्योंकि तुम्हारे पास टाइम है हमारे पास समय नहीं है भाई हमें तो लड़ना है धरातल पे चलो के लिए पैसे हैं समय है लेकिन वही लखनऊ से कामाख्या जाकर के और वहां पे निग्रचार जी के समकक्ष बैठ के और वहां से लाइव प्रसारण करने के लिए आपके पास समय पॉज करो ये आपके सिद्धांत में पॉज करो नहीं उसकी बात पूरी हो जाने दो क्या कह रहा है आपके सिद्धांत में क्या है का परायक देता है
01:23:26:00 हो गया हो गया ना ये वाला ठीक तो क्या कह रहा है कि जब आप जोधपुर जा सकते हो तो कामाख्या क्यों नहीं गए भाई कामाख्या वाला जब हमको ये पहले से पता है कि वो हमसे चर्चा नहीं करना चाहता है तो हम कामाख्या क्यों जाए जब हमको ज्ञात है कि जो व्यक्ति है वो हमारा विरोधी है तो हम क्यों मुंह उठा के सीधे चले जाए अपना समय बर्बाद करें हमको जब यह ज्ञात है कि सामने वाला हमको समय देने के लिए तैयार नहीं है तो हम क्यों जाए और जहां वह है वो कहां है उसके उसका अता पता क्या उसने सार्वजनिक कर रखा था हमें क्या पता कहां है वो कभी वो कामाखक्क्या का शिखर पकड़ के जने दिखाने लगता है कभी रेलवे स्टेशन पे दिखता है हमें क्या पता भाई जो हम चले जाए
01:24:15:13 और कहां जाना है कहां नहीं जाना है ये तय कर ये तय हम करेंगे ना भाई अगर तुमको लगता है कि हमारा वहां जाना गलत था। वहां जाना सही था। तो तुम शास्त्र लाओ। फिर शास्त्र की बात आ जाएगी। नहीं तो अपनी बुद्धि विवेक से जहां पर जिसको जो अनुकूलता लगी वो करेगा व्यक्ति। जब वस्तुनिष्ठता के साथ उस संबंध में तुम्हारे पास यदि शास्त्र का प्रमाण हो तो वो ले आओ। कोई व्यक्ति गड्ढे से बच के निकल रहा है। उसने ब्रेक लगाई वो इधर से निकला। और कोई व्यक्ति गड्ढे से बच के निकल रहा है। वो इधर से निकला। अब तुम कहो इधर से निकलने वाले तुम इधर से निकले इधर से क्यों नहीं निकले? तुम इधर से निकले थे। इधर से क्यों नहीं निकले? ये पागलपन है और कुछ नहीं है। ईश्वर तत्व को सदैव पुरुष लिंग से ही संबोधित किया जाता है। जबकि स्त्रीलिंग से क्यों नहीं हो सकता? मगर बात ये है कि जब स्त्रीलिंग तत्व से भी संबोधित कर दिया जाएगा तो क्वेश्चन ये आएगा कि नहीं पुल्लिंग से क्यों नहीं? तो किसी एक का चुनाव कर लिया गया। अब वो उसी में प्रासंगिक हो गया कि ईश्वर ऐसा करता है। ईश्वर ऐसा करता है। यह कभी नहीं कहा जाता ईश्वर ऐसा करती है। जबकि भगवती को भी ईश्वर का ही स्वरूप कहा गया है।
01:25:30:12 किसी भी एक को चुनोगे आप तो दूसरे का खंडन तुम कह रहे हो। खंडन हो गया उस विधा का। और हमने तुम्हें बताया कामाख्या का उसने क्या अपना अता पता सार्वजनिक कर रखा था जो हम चले जाए। हमें जिसके बारे में ज्ञान प्राप्त हो गया। संज्ञान में आ गया कि भैया ये यहां पर हैं। हम वहां चले गए। कोई विरोधी हमसे मिलना नहीं चाहता मगर उससे मिलने के लिए अपने घर से 1000 किलोमीटर दूर कामाख्या चले जाए। वाह गम व्यक्ति वो भी तब जो वो जो व्यक्ति लाइव में नहीं आ सकता है। दूर बैठ के ऑनलाइन नहीं जुड़ सकता है। उस व्यक्ति से मिलने के लिए हम कामाख्या चले जाए। अरे भैया हमने उससे व्यक्तिगत चर्चा के लिए कहा था। उसने मना कर दिया। इसीलिए कहा था कि समाज को हम यह विरोध नहीं दिखाना चाहते हैं। जबकि वह गुरुदेव का खंडन बहुत पहले से कर रहा था। करपात्री जी का खंडन बहुत पहले कर चुका था। खंडन का प्रयास खंडन क्या होता है वो हमने दिखाया निग्रह निकासिका में देख लेना। वाक्य स्कलन वाक्य स्कलन। ठीक है? चलो अगला चलाओ। हेमंत पालीवाल के पास जाकर के क्या सिद्ध कर दिया आपने? उसमें भी 18 मिनट के आसपास में आपने कट लगाया है। पता नहीं क्या बीच
01:26:45:13 में घपला किया है आपने। अरे ऑडियो को भी साबित हेमंत पालीवाल को इसने 100 करोड़ का नोटिस भेजा था। हेमंत पालीवाल का क्या उत्तर आया तुम्हारे इस भगोड़ानंद ने? क्यों नहीं दिखाया समाज को? क्यों नहीं दिखाया? पता है पूछना उससे। तुम किसी से यह कह रहे हो अगर कि भैया मैंने तुम्हारे यहां से यौन रोग का यौन रोग की चिकित्सा नहीं कराई तो जब कोई तुमसे आकर पूछ रहा है कि कराई कि नहीं कराई तो तुम ये क्यों कह रहे हो कि मैं बता नहीं सकता ये क्यों नहीं कह रहे हो कि नहीं कराई तो ऐसा हो सकता है ना कि डॉक्टर ये कहे कि भाई तुमने कराई तो है मेरे यहां से यौन चिकित्सा तो मैं झूठ तो नहीं बोल सकता हूं मेरा धर्म नहीं है झूठ बोलना इसलिए मैं मौन रहूंगा के इस विषय में मैं कुछ बता नहीं सकता मैं झूठ क्यों बोलू अपना धर्म का त्याग क्यों करूं मैं झूठ बोल करके कि नहीं कराई कराई है क्योंकि तुमने ये हो सकता है ना कि उन्होंने उत्तर दिया हो उसमें 100 करोड़ के नोटिस के प्रतिकार स्वरूप क्यों नहीं है तो वैसे तो हर चीज को दिखाता है देखो ये नोटिस आया ये हुआ है वो हुआ है क्यों नहीं दिखाया इसने वो नोटिस नोटिस का जवाब क्या आया कब दिखाएगा हेमंत पालीवाल ने इसके नोटिस के जवाब में क्या दिया था जवाब क्यों नहीं दिखाया
01:28:01:10 तुम्हें ऐसा लग रहा है ना कि सिद्ध कुछ नहीं हुआ तो क्यों इसने हमको 100 करोड़ का नोटिस भेजा है जब उससे सिद्ध कुछ नहीं हो रहा 100 करोड़ का नोटिस इस व्यक्ति ने धूर्त व्यक्ति ने क्यों भेजा पूछा पूछो जाके हेमंत पालीवाल का क्या उत्तर आया था तुम्हारे नोटिस के जवाब में चितड़े उड़ जाएंगे तब तुम्हारे भागतानंद के पूछो क्या जवाब दिया हेमंत पालीवाल जी ने और जब सिद्ध नहीं हो रहा है तो क्यों परेशान हुए क्यों नोटिस भेजा था जब उससे कुछ हो ही नहीं रहा है तो बेवकूफ पक्षपाती देखा करो तो कभी-कभी दर्पण चलो कर दीजिएगा उत्तर देते हुए के साथ करिएगा ठीक है और बोलिए तो मैं आपको अपना चेहरा भी भेज देता हूं एआई के रिलेटेड या कोई भी खैरागरा नथूरा इंसान का जो है चेहरा उठा के मेरे इसमें तो मत ही लगाइए ठीक है अच्छा हुआ कि अभी हमने किसी अच्छा हुआ कि अभी किसी पशु का चेहरा नहीं लगाया है क्योंकि कार्य तुम्हारे वही है और अगर कोई ऐसा ऐसा जज्बा है सत्य का पक्ष रखने का तो सामने आके बात करो समझे हेमंत पालीवाल ने
01:29:16:14 बहुत बढ़िया जवाब लिख के दिया है हमें अंदर की खबर है बहुत अच्छा उत्तर दिया उन्होंने इनके सांप सूंघ गया है तब से इनसे कहो अपना वो निर्गत करें हेमंत पालीवाल ने जो नोटिस में उत्तर कर दिया है पता चल जाएगा दूध का दूध और पानी पानी हम चले हैं किसी और पर आक्षेप करने जिन भागवतानंद जी को आप भागवतानंद कह करके संबोधित कर रहे हैं अरे क्या पीएल मिश्र की औकात थी वहां पे कि अपने संप्रदाय के ही सिद्धांतों को ले जा के और भागवतानंद जी के समक्ष बैठ के उसे शास्त्रार्थ करें वो तो अपने ही संप्रदाय के सिद्धांतों के विरुद्ध जा के जो है वक्तव्यव निर्गत कर रहा था दे रहा था संदीप देव के पास और संदीप देव की भाषा भागतानंद कह करके आप उन्हें संबोधित कर रहे हैं जो संदीप देव जो है अरे निग जी छोड़िए ना संदीप देव ने क्या अभद्र टिप्पणियां नहीं की है सनी सनी योनि और किन-किन वैश्याओं का नाम लेकर के उसकी भाषा तो आपको इतनी सौहार्द लगी कि आप उनकी ही भाषा बोलने लग गए भाषा एक मिनट हमने इस उत्तर का इस बात का उत्तर पहले ही दे दिया है संदीप देव जी कब से कर रहे हैं जो तुम उनका ये सब कर रहे हो प्रतिकार तुम्हारा ये निग्गू क्या कर रहा था वहां जाकर के भागतानंद क्या कर रहा था उनके चैनल पर बैठ बैठ समर्थन प्राप्त हो रहा था
01:30:31:15 इस दोगले को तब हमने आज तक कभी ना संदीप देव जी के विरोध में कोई वीडियो बनाया ना पक्ष में बनाया बनाया क्या तुम्हारा जा के वहां पब्लिसिटी पाने के लिए जा रहा था ना उत्तरकांड प्रक्षिप्तता सुनने के बाद भी आज तुम लोगों को पता लग रहा है कि ओशोवादी थे वो हमने कभी समर्थन दिया क्या ना हमने समर्थन दिया और ना ही कभी हमने उनका विरोध किया और विरोध क्यों नहीं किया हमने फिर बताया तुमको सब पीछे सुन लेना क्यों नहीं विरोध किया चलो प्ले करो
01:31:07:13 वहां पे आपको भद्रता नहीं दिखी तुम्हारे को दिखीता चलो प्ले करो क्या नाम है उसका ओशो रजनीश ओशो उसका शिष्य बना बैठा है देखो कितने का ले उसी की कितने दूर है रजनीश ओशो का शिष्य वो कब बना है जब पीएन मिश्री जी ने वो वक्तव्य दे दिया उसके बाद बना है पहले से है कैसे धूर्त लोग हो यार तुम शर्म भी नहीं आती तुम लोगों को कुतर्क करते समय तुमसे तो अच्छे ही है ना कि अपने धर्म धर्म रक्षा अभियानों को और उनहीं लोगों की जो ऐसी गलत बातें कर रहे हैं इन लोगों की अन्य कुछ अच्छी बातों के कारण हम कम से कम मौन तो है समर्थन देने तो नहीं जा रहे उनको मंच पे तुम लोग तो राम राम श्याम श्याम कर रहे हो आप अगर इतना ही दिक्कत है तो भैया वो पीएन मिश्र जी के वक्तव्य से पहले से है ना अगर है तो
01:32:10:27 [संगीत] चलो आलंबन लेकर के आप जो है स्वयं को दिखा रहे हैं कि देखो हमने निग्रचार जी का विरोध कर दिया वाह रे किसका आलंबन लेकर के अरे महाशय जिस व्यक्ति को शकले और शाकदपी ब्राह्मणों ठीक है प्ले करो बकवास है और कुछ नहीं का संदर्भ ही नहीं पता है इधर उधर से उठा पर लाभ कर दे रहा है और अपना मंतव्य सिद्ध करने के लिए पुराणों को ही प्रक्ष बता दे रहा है अरे मूर्ख व्यक्ति जब तू इतना मुंह चला सकता है तो क्यों नहीं करने जाता जब तू यह मुंह चला सकता है तेरा पक्ष मजबूत है तो सामना करना हम तो इस बार हम यह विरोध नहीं कर रहे हैं कि नहीं भागतांद के मामले में संदीप देव जी के माम पीए मिश्र के मामले में अमुक अमुक सही है और अमुक अमुक गलत है। हम ये कह रहे हैं भागता भाग क्यों रहा है? जब उसका पक्ष मजबूत है तो सामने से जाके करे ना।
01:33:09:22 क्यों नहीं कर रहा है सामना? यही जो शान की तरीके से बोल रहे हो यही तो बोलना है वहां पर। बस यहां पीठ पीछे भक लो। स्वान की तरह जाओ जाके सामना करो। हमें जो गलत लगता है वो हम सामने जाकर के बोल देते हैं। कहां जाना है बताओ? बोले हम हम जिस चीज में भी लड़ रहे हैं हम पीठ पीछे नहीं लड़ रहे हैं। सामना करके सामने से ठीक है। पीठ पीछे खाना फूंसी वाली चीजें रिकॉर्डिंग भेज देना। ये सब वो लोग करते हैं जिनकी हड्डियों में पानी भरा होता है। चलो चलो।
01:33:55:01 प्रयोग में ला के और क्या साबित करना चाहते हैं कि आप बहुत बड़े सिद्धांतवादी है आप ही के सिद्धांत के अनुकूल आपका ही गुरु भाई नहीं चल रहा है उस वहां तो आपकी हैसियत नहीं हुई विरोध करने की आ गए हैं निग्रचार जी का विरोध बता दिया बता दिया आगे बढ़ाओ विधवा विलाप बार-बार उसी बात का खंडन नहीं कर पाएंगे नई चीज आएगी तो बोल बढ़ाओ चलाओ ना पूरा पूरा होने दो उसको रिकॉर्डिंग पूरी होने दीजिए
01:34:30:00 हम निग्रचार का विस्फोटक साक्षात्कार ये भी तो इन दोनों ने किया था हमने क्या इसके विरोध में बनाया था वीडियो बेवकूफ मूर्ख व्यक्ति टूटी बंद हो जाएगी सामने आ गए तो एक साल पहले क्या कर रहा था भागवतानंद यहां पे तब नहीं पता था उत्तरकांड प्रक्षिप्त कहा कर पात्री जी का विरोध किया है ओशोवादी है बस जिस व्यक्ति से विरोध हो जाए उसकी हिस्ट्री खंगाने लगो उल्टे सीधे अभद्रता से उसके लिए शब्द बोलने लगो बाकी आइए जी आइए जी पहले आप पहले आप
01:35:26:14 इधर उधर घूमने के लिए तो आपके पास बहुत पैसे हैं चलिए वो रिकॉर्डिंग चलाइए फटाफट बहुत लंबा हो जाएगा नहीं तो चलाइए
01:36:09:22 जिस समय आप हेमंत पालीवाल के पास गए उससे तो अच्छा था कि आप जाकर रामा चले जाते वहां पे निग्रचार जी ने भी कहां जाते्या में और कहां जाते कामाख्या में स्टेशन पे जाकर के हेलो टाटा बाय-ब बोल के वापस आ जाते अरे कुछ बोलने से पहले विष्ठा निकालने से पहले सोच तो लिया करो क्या बोल रहे हो कुछ तर्कपूर्ण बात है हमें पता है सामने वाला मिलना नहीं चाहता हमें उसका एड्रेस नहीं पता है हम कामाख्या का टिकट कटा ले चले जाए कामाख्या क्यों जाए और जब वो सौहार्दपूर्ण चर्चा कोई सामंजस्य वाली भावना रखता नहीं हमारे लिए क्यों चले जाए तुम आ जाओ यहां पर या ऑडियो मैसेज भेजने की बजाय आओगे चलो टिकट के पैसे भी मैं दे दूंगा तुम कहोगे कि टिकट नहीं है पैसे नहीं है ₹000 ज्यादा दे दूंगा चलो आओगे आ जाओ नहीं आओगे क्यों नहीं आओगे कहीं शिवश हमको पीट ना दे खैर मैं पिटने इत्यादि की वजह से नहीं ऐसा किया था मैंने कामाख्या में जाता जब मुझे ऐसा लगता कि वो चर्चा में विश्वास रखता है। ठीक है? वो भड़काऊ चीजें करके अपने फॉलोवरर्स, अपने व्यूज पाना चाहता था।
01:37:24:24 जो हमें लगा कि जब वो चर्चा इत्यादि को लेकर के नकारात्मक है तो हम क्यों जाए भाई? सामने वाला का सामने वाले का ही आत्मसम्मान है। हमारा आत्मसम्मान नहीं है। सामने वाला मना कर रहा है कि हमें नहीं करनी है। अब तुम हो कौन? जब वो ये बना रहा है वीडियो। तुम हो कौन? क्यों करें तुम? जो दो दिन पहले हमसे कह रहा है हमसे चर्चा कर लीजिए और फिर दो-तीन दिन बाद जब उसने देखा कि आक्रामक भी हो सकता है तो कह रहा तुम हो कौन उसके पास हम क्यों जाए भाई चलो प्ले करो
01:37:58:19 तो निग्रचार्य जी तो आ नहीं सकते थे उनका अपना जो है साधन जो उनका चलता है वो चल रहा था और वो सब वो वो सनातन सिद्धांत है भागतानंद जो करता है वो सब सनातन सिद्धांत है बहुत बढ़िया से टॉफी चॉकलेट खोल लो खा अकेले अकेले खुश हो जा। बहुत बढ़िया मिठाई हमने परोस दी। प्ले करो। महाशय कि आपके पास जो है निघाचार्य जी के पास जाने के लिए समय नहीं है। लेकिन व्यर्थ के लोगों के पास जाने के लिए समय है। व्यर्थ के लोग नहीं थे। आचार्य कोटि के व्यर्थ के लोग नहीं थे। जितने लोगों को हमने समय दिया है वो सब बहुत परिणाम स्वरूप है। निग्राचार्य जरूर ये तुम जिसको निग्राचार्य कह रहे हो भागतानंद। भागतानंद जरूर व्यर्थ का व्यक्ति है। जिसका ना कोई अड़ा है ना पिछाड़ा है। एक नंबर का व्यर्थ व्यक्ति जो कहता है कि मुझे मैं अगर शास्त्रार्थ से निग्रह नहीं होगा तो मैं शस्त्र से करूंगा और ना वो शास्त्रार्थ करता है ना शास्त्र करता है वो तो वीडियो बनाता है। पोस्टमार्टम कहता है उस वीडियो बनाने को। यह है व्यर्थ का व्यक्ति जिसकी अपनी परंपरा वो कहता है निगमंद से आती है और जिस फ्रीशन थिसफिकल सोसाइटी का वो विरोध करता है वही उसी की परंपरा उसी में घुस जाती है जाकर के चलो
01:39:14:02 व्यक्तियों को नहीं गिन रहे है यदि सिद्धांत बल है आप में धरातल पर उतरे हुए व्यक्ति है धर्म के लिए जाइए ग्रहचार्य जी के पास क्यों नहीं एक बार जा के जो है स्पष्ट रूप से लाइव आ जाइए उनके समक्ष बैठ के और कर लीजिए जो करना है आपको डिबेट देख लेते हैं कितना सिद्धांतवादी है और कितने अपने शंकर परंपरा के सिद्धांतों के अनुकूल चलने वाले हैं औरंद से अभी हमने अपने लास्ट वीडियो में भी कहा है अभी भी कह रहे हैं पोस्ट में कहा है कि भागतानंद को जब भी अनुकूल लगे अभी नहीं तो 15 दिन बाद एक महीने बाद तो वो आ जाए विद्या भास्कर जी महाराज के सामने बैठकर के कर ले हमसे चर्चा हम क्यों जाए भाई वो कोई हमसे वरिष्ठ है क्या जो हम चले जाए उसके पास जो मना मना कर रहा है कि हमें चर्चा नहीं करनी हम फिर भी अरे प्लीज हमसे चर्चा कर लीजिए है कौन वो तुर्रम खान है कोई अगर उस तरीके से देखा जाए तो वो तो जैसे कोई नाजायज औलाद होती है जिसको हराम कहा जाता है उसमें ऐसे ही धर्म के क्षेत्र में उसकी छवि है जिसका कोई पिता नहीं है अर्थात जिसका कोई गुरु नहीं है और उसने जो अपनी नकली परंपरा बताई है उसकी धज्जिया भी उड़ रही है देखिए उड़
01:40:30:04 रही है। उड़ा दी। आगे भी उड़ेगी। तो धर्म के क्षेत्र में तो वह एक वैसा व्यक्ति है ना जिसको कहेंगे अवैध संतान किसी की। जिसको अपने पिता का नाम नहीं मालूम होता है। ऐसे व्यक्ति के मना करने के बाद भी हम उसके चक्कर काटे कि हम आपसे चर्चा करना चाहते हैं। और हम ये अपेक्षा करें ऐसे दोगले व्यक्ति से कि हम वहां जब जाएं तो हमारे बड़े अनुकूल रहे। सारा वातावरण वहां का। चले जाएं हम मुंह उठा के। चलो
01:41:05:06 जी के भी विषयों को रखिएगा और निगमंद जी के बारे में भी पूछ करके आइएगा और उस विषय को सार्वजनिक करिएगा और ये एक बात और है एक बात और है पॉज करो इस तुम्हारे इस धूर्त व्यक्ति ने ही कहा है कि जब ये वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी चर्चा हो सकती है तो क्यों भाई आने का आने का ही आने की अनिवार्यता हो तो मैं तो दूर से पूछ रहा हूं। तू ये चाहता है कि मैं कामाख्या जाऊं, यहां जाऊं, वहां जाऊं। हैं? और तेरा जो ये भागतांद है ना अभी पुलिस को बयान देने के लिए आया था लखनऊ। अगर इसने मुझे बता दिया होता तो हो जाती चर्चा। मगर चोरों की तरह आया और चोरों की तरह चला गया। पूछ जाकर के वहां क्यों नहीं शिवन से संपर्क किया था। आप गए तो थे वहां पर। तूने अभी कहा ना कि वो तो नहीं आ सकते। निग्रचार्य जी तो नहीं आ सकते। पूछ निग्राचार उन्नाव तक आया था कि नहीं भागता भागता पूछ अपने निग्राचार से पूछ बयान देके गया कि नहीं पुलिस की मार की बात ही है निराली गूंगा भी गाय कब वाली
01:42:08:14 आए थे तुम्हारे वो जो साधनाएं चल रही तुम्हारा वो सनातन सिद्धांत टूट गया पांच मिनट पहले तुमने सनातन सिद्धांत बताया निग्रचार जी तो आ नहीं सकते आए थे यहां तुम्हें मिलाते हुए बयान देके गए हैं फिर आएंगे फिर आएंगे कोर्ट में वो वो अभी केस खत्म थोड़ी ना हुआ है। चार्जशीट दाखिल होगी। आएंगे तुम्हारे बाबूजी हम तब मन जारी होगा। आना पड़ेगा न्यायालय। आएंगे तुम्हारे बाबूजी। तो ये कहना छोड़ दो कि वो आ नहीं सकते। हां मगर उसने हमें बताया होता तो हम उससे जरूर मिल लेते जा के। अगर वो ये दिखाता कि हां भाई मैं इंटरेस्टेड हूं। वरना वो अगर किसी कमरे के अंदर है और हम बाहर जाके कहे कि भागवतानंद हमें तुमसे चर्चा करनी है। वो कह दे हमें नहीं करनी। तो हम ऐसा अपमान क्यों करवाए अपना?
01:42:56:00 चलो आनंद बीच में जो है कुत्ते की पूछ जैसे जो है बीच में ना आ जाए टेढ़ी हो के क्या बोल रहा है यहां पे आपको भाषा कठोर लगेगी चलो खैर वो कठोर नहीं कर सकते हैं अपने वाचिक क्रिया से आप हमें वहां धूत बोल सकते हैं वहां मूर्ख बोल सकते हैं इस जगह पे जो कि आप बोलिएगा ही बोलिएगा ठीक है यह भी आप बोल ही दीजिएगा कि निग्र आचार्य जी ने तुम्हें क्या सिखाया है अरे भैया भैया क्या सिखाया है नहीं सिखाया है वो छोड़िए ना हम उनके पास बैठ के कभी पढ़े नहीं है कि वो हमको सिखाएंगे ठीक है देखो इस व्यक्ति ने किया अपना अनुमान लगा के एक समस्या वो समस्या को जन्म दिया कि तुम हमसे पूछ सकते हो और हमको हम भले ही हम पूछने में इंटरेस्टेड नहीं है मगर अपने आप के तुम हमसे पूछोगे जन्म दे के अब उसका उत्तर दे रहा है बेवकूफ अरे हमें इंटरेस्ट नहीं है तुम्हें तुमने निग्राचार्य से क्या सीखा है हमें मालूम है क्या सीखा क्या नहीं सीखा है जबरदस्ती जैसे कि गायत्री मंत्र बहुत आवश्यक है। प्रत्येक मनुष्य को पढ़ना आवश्यक है। बहुत प्रत्येक मनुष्य पहले अब उड़ा दो गायत्री मंत्र से ही मोक्ष मिलेगा केवल। नाम जप से मोक्ष नहीं मिलेगा। केवल गायत्री मंत्र से। उसके बाद कहो कि तुम्हारे जो आचार्य गण
01:44:11:06 है ना वो तुमको शूद्रों को गायत्री मंत्र पढ़ना नहीं पढ़ने नहीं देना चाहते। मतलब जो समस्या थी ही नहीं उसको पहले जन्म दो और उस समस्या का नाम लेकर के उसको फिर चिपका दो उसके आधार पर अपने मंतव्य की सिद्धि करो वही तुम कर रहे हो यहां पर चलोगे आगे बढ़ो ये पढ़े होते और तब आप अगर ये शब्द हमारे लिए प्रयोग में लाते तो भले वो कुछ सेंस रखता वहां पे कि हम निग्रचार्य जी के समक्ष बैठ के पढ़े हैं तो निग्रहचार्य जी ने हमें भाषा की मर्यादा नहीं सिखाई। अब यहां भी आप उल्टा प्रणाम मत कर दीजिएगा कि निग्रचार जी को भी भाषा की मर्यादा नहीं पता है। आपको यदि कुछ भी आक्षेप लगाना है या कुछ भी अपना प्रश्न रखना है या जो भी करना है आपको हम आपको चैलेंज देते हैं। आप जाइए निग्रचार जी के पास और जाकर के उनके समक्ष बैठ के जो करना है करिए। अरे कहां चले जाए? पहले अपने भगोनंद से कहो ना कि हां वो चर्चा करना चाहता है। हो कौन तुम? तुम्हारा अपना खुद का अस्तित्व ही नहीं है। कुछ काले चोर की तरीके से किसी की अवैध संतान की तरीके से तो तुम ऑडियो भेज रहे हो। जैसे तुमको तुम्हारे घर वालों ने या तुम्हारे जीवन में कुछ ऐसा घट गया है जिसके कारण तुम मुंह दिखाने के लायक नहीं बचे हो। होता है ना घटनाएं घटित हो जाती है। लड़कों के साथ भी हो जाती है। तो मुंह दिखाने के लायक जब कोई नहीं बचता है वो इस तरीके से चोरी करता है। मुंह को छुपाता फिरता है। हम कैसे मान ले कि तुम ये जो तुम जो कह रहे हो कि
01:45:26:09 भागता के यहां चले जाओ तो तुम्हारे कह देने से हम अगर चले जाएंगे तो वो हमें समय देगा। और वो जब यहां लखनऊ आता है जबकि वो कह चुका है कि मैं चर्चा नहीं करूंगा। और यदि वह तैयार भी है तो यह हमें अधिकार है चुनाव करने का कि हम जाए या ना जाए या फिर उसको बीच की जगह पर बुलाए ना उसकी हो ना हमारी हो रामपाल वाले भी कहते हैं धना आश्रम चले जाओ धनाना आश्रम चले जाओ कभी वहां से रामपाल के यहां से अधिकृत लोगों द्वारा फोन नहीं आता है सब भक्त ये जो उसके जो भक्त हैं तथाकथित सो कॉल्ड बेवकूफ वो कहते रहते धना आश्रम चले जाओ हम चले जाए मुंह उठा के भले ही धना आश्रम में मुंह छुपा रहे हैं वो लोग। मगर एक बात मैं कहूंगा कि भागतानंद और इस जैसे आर्य समाज वालों से बात करने इत्यादि में
01:46:20:07 बात करने में और व्यवहार कुशलता में ये स्कॉन और रामपाल के लोग बहुत सही है। ये लोग नीचता पे नहीं आते हैं। ये वाली पे तुच्छ वाली भाषा पे जैसे भागतानंद आता है। गिरी हुई बातें करने लगता। उसके फॉलोअर्स करने लगते हैं। आर्य समाज भी करते हैं इस तरीके से। आर्य समाजी भी इस तरीके से बात करने लगते हैं। मगर ये मैंने देखा कि रामपाल के जो वो होंगे वो रामपाल की कही हुई जो चीजें हैं उसका बहुत पालन करने का प्रयास करते हैं। जैसे अब इसने कहा कि भागतानंद ऐसा करता है। अब ये मत कहने लगना। क्यों ना कहे? अरे भाई तुम राम को मानने का दावा करते हो ना तो राम ने सिखाया है क्या गाली देना? तो वो गाली देगा तो हम प्रश्न करेंगे ना तू दे उत्तर तू आया उसकी तरफ से तो
01:47:12:16 चलो और नहीं कर सकते हैं तो अपनी कपोल बुद्धि के साथ जो है ना ये जो बड़बड़ बड़बड़ करते रहते हैं इसको बंद रखिए हम आपके सिद्धांत में कनिक भी तेज नहीं है पूरा निश्चय ही सिद्धांत है आपका हम आदि शंकराचार्य जी का नहीं आपका आपके भीतर जो व्याप्त सिद्धांत है उसका हम नारायण और भी भी कोई रिकॉर्डिंग है तो ये इनके वो है ये निर्णय देके चले गए इस पर तो हम क्या ही बोले भाई वो तो तुम अपना निर्णय करने के लिए स्वतंत्र हो किसके सिद्धांत में दम है कि नहीं तर्क दोगे तो हम उसका वो देंगे उत्तर अपने सिद्धांत के पक्ष में जो तुमने निर्णय दिया है लास्ट में उसके पक्ष में जो तुमने तर्क दिए वो सब कुतर्क है और सामने आओगे तो बता रहा हूं मैं उसकी तरह भागता नंद की तरह नहीं बात अपना जनेऊ निकालिए मेरा जनेऊ मैं गंगा में उतर गया हूं। मैं शिव पुराण का शपथ ले रहा हूं। ये सब मेरे पास नहीं है। ठीक है? सामने आओगे तो त्रुटि बंद हो जाएगी। हम हो के एकदम आवेश में आ के आपके समक्ष जो है और प्रलाप करने के अब यह मत कह दीजिएगा कि हम जो है अग्रेसिव होकर के एकदम आवेश में आकर के आपके समक्ष जो है और प्रलाप करने के लिए
01:48:27:22 प्रस्तुत हो गए। हां यही हो रहा है। रखा है। यही हो ही रहा है। कई बार ऐसा होता है। सुनो कई बार कुछ लोग क्या होता है एक बार एक मेरा कार का ड्राइवर था। बहुत पहले की बात है। सात आठ साल पहले की तो वो कार का ड्राइवर था। वो किसी को परेशान कर रहा था। तो मुझे उस तरफ से फोन आया। वो किसी कन्या को परेशान कर रहा था। तो मैं अपने वो मुझे बहुत मानता था बड़े भाई की तरह। तो मैं अपने दो चार साथियों को लेकर के गया कि आज मैं जो है इसको बहुत मार लगाऊंगा। यह जो है कन्या को परेशान कर रहा है। तो मैं गया तो जैसे ही उसने मुझे देखा कि भैया आ चुके हैं। वैसे ही पहले से बोलने लगा भैया मारो मुझे मारो मारो भैया मुझे मारो। मतलब वो ये बताने लगा दो वो ये दिखाने लगा ऐसा भाव प्रस्तुत करने का। देखो मैंने तो कहा ही था ये मारेंगे। तो देखो मार रहे देखा मतलब अपनी मार के समय भी अपने आप को लोगों की नजरों में सही सिद्ध करने का एक प्रयास होता है जब एक्सपेक्टेड है कि गाली देने पर तुम ऐसा कह सकते हो तो कहा जाएगा तो तुम पहले से ही बता दो अब ये ना कहने लगना कि गाली क्यों
01:49:42:26 दी है ना क्यों ना कहा जाए भाई गाली देना गलत है और ऐसा कहा इसलिए जाता है भविष्य जो है भविष्य को व्यक्त इसलिए कहा करा जाता है जिससे कि वो गाली को लेकर के जो खंडन होने वाला है। उसमें कुछ ना उससे जो होने वाली उससे होने वाला जो अपमान है उसमें थोड़ा तो कुछ कमी आ जाए वैसा ही यहां कर रहे हो। यह मत कहने लगना वो मत कहने लगना। और जब मैं कहूं तो भैया मैंने तो पहले ही कहा था ये कहेंगे देखा तो व्यक्ति इस बात पे ध्यान देने की बजाय देखो इसने गाली दी। देखो इसने कन्या को परेशान किया। इसलिए इसके मार लग रही है। बल्कि इससे ज्यादा प्रभाव देव का उसने कहा था वही हुआ। ये कोई बात है क्या? जो गलत है उसको गलत कहा जाएगा। तुम पहले से ही बता दोगे गलत कहेंगे तो उससे वो गलत का प्रभाव कम हो जाएगा क्या? चलो प्ले करो। उत्तर देना है दीजिए नहीं देना है मत दीजिए। उससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। फर्क नहीं पड़ता तभी तो अवैध संतान की तरीके से भेज रहे हो। तेजस्वीता है तो जाकर के निग्रहचार्य जी के समक्ष बैठ के उनसे दे दिया भैया आगे बढ़ाओ। तेज कर दो ना। से निग्रहचार्य जी के सामने जाकर के बैठिए। कौन है निग्राचार्य भाई पहले तू सिद्ध बता तो दे मुझे चल यही बता दे कब आ रहा है बता दे कौन है निग्राचार्य मैं मान जाऊंगा
01:50:57:27 तुझे कब आ रहा है निगराचार्य ही सिद्ध कर दे उसे जो तू बार-बार निग्राचार्य बोल रहा है कि यदि शास्त्रार्थ में भाग ना लेने के कारण आप निग्रचार्य जी को भागानंद कह करके संबोधित कर रहे हैं तो जाकर के पहले पीएल मिश्र को से कहिए कि आप अपने सिद्धांत के अनुकूल चलिए और फिर जाकर के जो है उनसे शास्त्र अरे मेरे भाई वो अपने सिद्धांत के अनुकूल चल रहे हैं कि नहीं चल रहे यही शास्त्रार्थ में सिद्ध करना जाकर के तू जो भी व्यक्ति दुनिया में किसी भी सामने वाले दार्शनिक या धार्मिक पक्ष के अनुकूल नहीं है उसके अनुसार वो उसके अनुसार अपने सिद्धांत के अनुसार नहीं चल रहा है। एट द एंड जो अपने को मानव कह रहा है कि मैं मनुष्य हूं। मनुष्य का सिद्धांत है सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में अंतर करना। और अंतर करने का आधार है सच्चिदानंद स्वरूप ईश्वर। तो जो भी व्यक्ति सच्चिदानंद स्वरूप ईश्वर को सर्वशक्तिमान नहीं मान रहा है वो किसी ना किसी एन केन प्रकार ने अपने मनुष्य होने का खंडन कर रहा है। तो बस कहीं दुनिया में अब शास्त्रार्थ होगा ही नहीं। भले ही वो बाधित ईश्वर को माने या ना माने। क्या बेवकूफी है। चलो
01:52:11:01 कर लिया। ठीक है। तुम अरे तुम जो मुंह चला रहे हो स्वान की भांति जो ये मुंह चला रहे हो यही मुंह चलाओ ना वहां जाकर के तुम वीडियो बना रहे हो तीनती घंटे के जंगल में जाकर के नारनिया के जंगल दिखा रहे हो वहां जाकर टहल टहल करके वीडियो बना रहे हो अपनी वो पिशाचनी को ढूंढ रहे होगे परना में वो मिलने आई होगी तो वही जंगलों में अपना जा रहे हो अपना खैर वो तुम ये सब कर रहे हो तुम क्यों नहीं जाकर के वही तर्क वही प्रमाण जो तुम वीडियो में दे रहे हो वो सामने से इसको कायरता कहते हैं मेरे भाई और ये तुमको नहीं दिखेगा जिनके मुख से विठा निकलती है उनको आचार्य मानने वालों को ये नहीं दिखेगा ये दिखेगा जो थोड़ा प्रबुद्ध वर्ग होगा उसको तुम्हें भी दिख सकता होगा दिखता होगा ऐसा मैंने समझा था जब तुम्हारा प्रथम कॉल आया था चलिए चलाई चलाई ना हो अपने संप्रदाय से हो वो क्या शास्त्रार्थ करेगा जी हां क्या रामानुज संप्रदाय और जब शंकर संप्रदाय का शास्त्रार्थ होता था पूर्व में कभी हुआ होगा तब क्या रामानुज संप्रदायों ने अपने सिद्धांत के विरुद्ध जाकर के कोई भाषण किया क्या या शंकर परंपरा के आचार्य ने कभी शंकर परंपरा के सिद्धांत के विरुद्ध जा के जो है शास्त्रार्थ किया था क्या ये बेवकूफ कैसा व्यक्ति
01:53:26:02 है बार-बार वही विरुद्ध जाकर के कितना तर्क दे चुका है तेरे को एक ही बात को रिपीट कर किया है इसने देखो तो इसका प्रलापन वाले चैतन्य महाप्रभु के विरोध में ही कर रहे हैं हमारे अनुसार कार्य तो इस वाले वालों से बात करना बंद कर दें। मधवा संप्रदाय के विरोध में जाकर के ही कार्य कर रहे हैं। वर्ण व्यवस्था को मानता है मधुवा संप्रदाय। तो अब इस वालों से बात करना बंद कर दें। क्या बेवकूफी है? बच्चे हैं दूध मुंह में। हम अरे जो व्यक्ति अपने ही सिद्धांत के अनुकूल नहीं है वो शास्त्रार्थ करने की हैसियत ही नहीं रखता है। ठीक है। अगर तुझे यही लगता है तेरा यही मानना है मैंने तो अपना पक्ष बता दिया भाई। अब तेरा अगर यही मानना है कि शास्त्रार्थ उसी से होगा जो अपने सिद्धांत को मानने वाला होगा। तो पहले तो तुझे यह सिद्ध करना होगा कि वो अपने सिद्धांत को ना मानने वाला है और फिर तुझे यह सिद्ध करना होगा कि क्या कहते हैं कि ये सनातन सिद्धांत है कि जो अपने सिद्धांत को मानता होगा उसी शास्त्रार्थ होगा। अब ये वाली जो बात है कि वो अपने सिद्धांत को मानता है कि नहीं मानता है। इसको एक तरफा रूप से तो सिद्ध नहीं किया जाएगा। जब तुम यह आरोप लगा रहेगे कि अपने सिद्धांत को ना मानने
01:54:41:08 वाला व्यक्ति है तो सामने वाले पक्ष का उसी समय वहां पर उत्तर देने के लिए मौजूद होना आवश्यक है। वही शास्त्रार्थ है तो तुम शास्त्रार्थ से पहले निर्णायक नहीं हो सकते कि वो अपने ही सिद्धांत को नहीं मानता है। वो व्यास जी को नहीं मानता है। चलो पढ़ाओ और इसके लिए आप उन्हें भागतानंद के संबोधित कर रहे हैं। तो यदि आपको वो भागतानंद लग रहे हैं तो जाकर के भाई आप भागने वाले नहीं है ना। आप तो रणभूमि में उतरे हुए जो है महाशय है महावीर है धरातल पर उतरे हुए महावीर है आप क्यों नहीं धरातल पर तो निग्रचार जी भी है वहां पर स्थित जाइए ना जा के समक्ष बैठ के एक बार शास्त्रार्थ कर लीजिए उनहीं से शास्त्रार्थ ना कर पाए तो एकदम मतलब सरल रूप से संवाद ही कर लीजिए जा के बैठ के लाइव आ के कर लीजिएगा देख लेते हैं ना भागानंद से कब आ रहा है लाइव वो क्यों नहीं आ जाता लाइव हम तो कब से कह रहे हैं विद्या भास्कर जी के यहां आ जाए देखो तुम्हारे ये ये कितने बकवास बातें हैं जो तुम ये कह रहे हो कि उनसे जाकर के कर ले। पहली बात तो वो तैयार है कि नहीं हमसे चर्चा करने के लिए पहली बात। दूसरी बात यदि वो तैयार है भी तो हमारा निर्णय होगा कि भैया हम वहां जाए या उसको यहां बुलाए या बीच में रहे। आप यह तय करने वाले कोई नहीं है कि आप वहां चले जाओ।
01:55:56:12 निग्राचार्य जी नहीं आएंगे। चोर है हमारी नजरों में वो हम क्यों जाए भैया उसके लिए वहां पर दूसरी बात हमारा निर्णय होगा कि हम वहां जाए कि उसको यहां बुलाए। दूसरी बात एक बहुत अच्छी जगह विद्या भास्कर जी महाराज के यहां आ जाए। वहां बैठकर के चर्चा कर ले वो व्यक्ति हमसे और तो और नहीं आना चाहता है तो लाइव आ जाए। सबसे बढ़िया बात मगर नहीं। हमने तो कब से कह रखा है तुम्हारा भागता नहीं भाग रहा है तुम्हें पता नहीं है अन्गल प्रलाप के सीधा आपको यह बोलता हूं कि जिस परिसाधना और जिस किसी भी प्रलाप के द्वारा अपने ग्रह आचार्य जी पे आक्षेप करते हैं उसे ऐसा सिद्ध करिए सर्वप्रथम कि निग्रहचार्य जी के पास कोई उत्तर ना रहे अपने में नहीं कर सकते हैं तो एकदम भीगी बिल्ली बन करके कोने में जाकर के दर के सो जाइए और यदि आपकी भागतानंद के पास कोई उत्तर ना रहे। भाई मैंने मैंने किसी का किसी चोर को रंगे हाथों पकड़ा दिया। ये देखो ये चोरी करता हुआ पकड़ लिया। वीडियो दिखा दिया सब कर दिया। वो कहे नहीं मैंने चोरी नहीं की। वही उत्तर तो अभी भी है उसके पास। वो तो लोगों को देखना पड़ेगा ना उसके उत्तर वो सही है कि
01:57:11:13 नहीं, तार्किक है कि नहीं? प्रामाणिक है कि नहीं? वो तो मुंह चलाएगा ही। यह कोई सेंस है तुम्हारी इन बातों का कि उनके पास कोई उत्तर ना दो उत्तर ना हो और जो कुतर्क कर रहा है अपने बचाव में यह कालिया जिन वाली बातों में कर ले चर्चा आ के लाइव बोल कब आ रहा है तेरा भागवत आनंद तू आजा तुझे तो पता है उसका पूरा पक्ष तुझे पता है ना उसका पूरा पक्ष भागंद का तू आजा तुझे तो पता है ना उसने क्या-क्या उत्तर दिए हैं ये परिधना इत्यादि में तू आजा कब आएगा अवैध संताने होंगी यदि यदि अवैध संतान तो कैसे आओगे गुरुद के या अवैध संतान नहींगे तो तुम्हारे जीवन में अगर ऐसा कुछ घटित हो गया होगा वही जिससे कि किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचे होंगे तो कैसे आओगे शब्द लिखे हैं उसके आधार पे कह रहा हूं और भागदानंद कहने से पहले आप जा के एक बार अपने गुरुदेव से क्यों नहीं बा कर लेते और इतना ही और भागा कौन है भाई इसको इसको
01:58:14:00 है नहीं अपनी नपुंसकता तुम तो जिनके नाम जो अधिक प्रेम में तुम उनका बोध करते हो ना सिद्धांत बल है तो करेंगे बिल्कुल करेंगे तुम ही जो है जी से दूर ही भागे थे कामाख्या चले गए राजस्थान हो गया यही वाली अभी सारी सुनी है ना ठीक है फिर कुछ और हो तो चलो अभी नहीं आ पाए हो अगर यह व्यक्ति सुन रहा है और आना चाहता है विद थोपड़ा विद फेस कायरता में नहीं आना चाहता है तो आ जाए दे दो लिंक और यदि अभी अनुकूलता नहीं है समय इत्यादि की तो हमसे संपर्क कर लेना हमने नंबर इस व्यक्ति का ब्लॉक ब्लॉक कर दिया है तो हमसे संपर्क कर ले और दिन तारीख समय सुनिश्चित कर ले फिर हम इसको समय दे देंगे और तब बात हो जाएगी ठीक है
01:59:12:04 दे दो भाग का कोई आना चाहे चेला चपाटी तो लिंक दे दो। देखें कितने माई के लाल जन्म माई के लाल ऐसे हैं भागतांद को फॉलो करने वाले जिनकी मां ने उन्हें निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है। ये ले भाई देख रहा है तो आजा जिसमें है दम तो फक्त है बाजीराव सिंघम
01:59:51:01 बॉलीवुड में घुस गए। बॉलीवुड हमारे धर्म में घुस रहा है ना। नरसिम्हा भूमि में इस द्वारा फंडेड विचारधारा को वहां परोसा गया है और लाखों करोड़ों लोग उसे देख रहे हैं। पीएन मिश्र जी का ये वीडियो मेरे ख्याल से अभी तक जितनी भी चर्चाएं हुई है सब मिलाकर के दो लाख व्यूज हुए होंगे। उसको करोड़ों लोग देख चुके हैं। फिर भी हम उसको ताक में रख दे और इनके पीछे पड़ जाए। चलो नहीं आ रहा कोई। ठीक है भाई। तो बचपन में माता जी ने अगर आपको लगता है कि आप सत्य के पक्षधर हैं और बचपन में माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो यह कायरता पूर्ण तरीके से ऑडियो मैसेज भेजना बंद करो और प्रत्यक्ष सामना करो। ठीक है? और दिन तारीख के लिए हमसे संपर्क कर लेना। पीएन मिश्र जी के विषय में हमने बता दिया कि हम हमने उनका जो है नाम लेकर के विरोध क्यों नहीं किया है और यदि वह ऐसा कह रहे हैं तो कहां-कहां पर सात
02:01:06:09 भौम सिद्धांतों का उन्होंने खंडन किया है गलत है वो वहां पर उनका प्रतिकार और दूसरा कि तुम्हारा भागतानंद भागा है चर्चाओं से बहुत सारी चर्चाओं से वो भागा है उसने सदैव भाग भागा है वो चर्चाओं से इसलिए उसका नाम भागतानंद उपयुक्त लगा है और अच्छा नाम है वो उसके लिए और दूसरी बात है कि वो दोगला है तुम्हारी ही तरह जैसे कि वो हमसे प्रश्न कर रहा है कि शंकराचार्यों से पूरी शंकराचार्य जी के अमुक अमुक शिष्य ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं वैसा क्यों नहीं कर रहे पर जहां से उसको प्रशय प्राप्त है वहां पर वो मौन है वहां पोस्टमार्टम नहीं कर रहा है उनकी किस्मत अच्छी है अकॉर्डिंग टू भागतानंद क्योंकि इसके पोस्टमार्टम करने से किस्मत बुरी हो जाती है दुर्भाग्य चालू हो जाता है व्यक्ति का ठीक ठीक है आ जाना जय श्री राम सभी को और हां निगमानंद का विरोध करवाइए निगमानंद के बारे में निगमानंद ने अपने ग्रंथों में बहुत सारी ऐसी बातें की है जो हमारे सार्वभौम सनातन सिद्धांतों के विरोध में है अपनी निगमानंद की मूर्ति होकर मूर्ति बनकर के पूजा होती है उनके सभी मंदिरों में वहीं पे हमारे रामकृष्ण इत्यादि जो है वही नीचे छोटी-छोटी मूर्तियां लगी होती है और साईं बाबा इत्यादि
02:02:21:18 के प्रकरण में हमारा यही तर्क है कि जहां पर हमारे राम कृष्ण है वहां भगवान के रूप में साईं बाबा को ख्यापित क्यों किया गया है? पहली बात। दूसरी बात निगमानंद की पत्नी के रूप में जगदंबा को जगदंबा मां भगवती तारा को प्रकट किया जाता है। कर्मणा वर्ण व्यवस्था को फॉलो किया जाता है। और ये इनको ईश्वर अल्लाह एक वाली धारणा इस वाली सारी चीजें वहां चलती है। है ना? तो ये सब देख लीजिए। और यदि वह कहते हैं मैं शंकर संप्रदाय से शिक्षित हुआ हूं, गौ संप्रदाय से दीक्षित हूं या यह हूं या वो हूं तो इसमें फिर बात आएगी क्या आप वहां के प्रामाणिक उत्तराधिकारी हैं, वक्ता हैं, कुछ है आपको आपकी इन गलत बातों को वहां से समर्थन प्राप्त है। अरे इस मामले में तो इस कौन इनसे अच्छे हैं? निगनंद वालों से क्यों? वो कम से कम अपनी पूजा तो नहीं करा रहे हैं मूर्ति पर लगा के। मां भगवती को अपनी पत्नी तो नहीं कह रहे हैं किसी व्यक्ति विशेष की। और ऐसे व्यक्ति को अपनी परंपरा में आचार बताने वाले और आकर के हमसे बात करते हैं मुंह उठा के चुप बड़े जय श्री राम
02:03:38:15 [संगीत]
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
Live: Required tasks are not set on the Rules page yet.
-
⬜Hindi SRT
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
भागतानंद के भागते चेलों का प्रलाप
% not set🔗 This video is made from parts of these videos
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮