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00:00:01:16 [संगीत] सभी को जय श्री राम और एस यूजुअल अब हम लोग लगता है आदत हो गई देर से आने की आज बहुत ही महत्त्वपूर्ण विषयों पर हम लोग चर्चा करने वाले हैं जिसमें कि आज पता चलेगा कि संत राम बाल जो तथाकथित स्वयं को संत बोलते हैं यह कितने सनातनी है कितने वैदिक हैं कितने गीता को मानने वाले हैं यह सारी चर्चाएं आज हम लोग जानने वाले हैं अब तक हमने अने अलग अलग तरीके से जो है समझने का प्रयास किया कि क्या कहती है संत रामपाल जो तथाकथित है सो कॉल्ड सं इनकी विज्ञान इनका क्या है क्या है ये सारी चीजें

00:01:04:02 हैं शुरू करने से पहले मैं कुछ चीजें याद दिला दूं हमको माउंट आबू से आर्य समाज की ओर से एक लेटर प्राप्त हुआ है पूरी तरीके से मुझे स्मरण नहीं है कि उसमें क्याक लिखा है तो उसमें उन्होंने हमें आमंत्रित किया था शास्त्रार्थ के लिए तो हमने उनको उनका निमंत्रण जो है स्वीकार करते हुए ने कहा कि आप शास्त्र कर लीजिए लखनऊ आ कर के तो उन्होंने हमें समय दिया है छ से न तारीख के बीच तो डेट हम आपको बता देंगे कौन सी उचित रहेगी न या उन्होंने कुछ एक दो दिन और याद दिलाए तो डेट हम आपको बता देंगे आपका आप यहां आ सकते हैं उन तारीखों में जो आपने कही है और हम लोग चर्चा करेंगे उसे चर्चा का नाम दे शास्त्रार्थ का नाम ना दे हम चर्चा कर सकते हैं सामान्य चर्चा जो होती है धर्म और ईश्वर के संबंध में और हां आपने एक बात और कही थी कि आपका जो विषय है वह आपका विषय है कि किसकी परंपरा मान्य किसकी परंपरा श्रेष्ठ या किसकी परंपरा प्रमाणिक तो इस विषय पर थोड़ा ध्यान दीजिए यह विषय अस्तित्व

00:02:19:19 में ही नहीं है क्यों क्योंकि आज तक आपने अपनी परंपरा को बताया ही नहीं है परंपरा को जब आप बता देंगे उसके बाद उस विषय पर बात होगी कि आपकी मान्य क्यों नहीं है हमारी मान्य क्यों है हमारी मान्य क्यों नहीं आपकी मान्य क्यों है आपने सामने से वो रखा ही नहीं है कि भाई आपकी कोई परंपरा भी है तो पहले आप उसका अस्तित्व बताइए कि वीडियो साफ नहीं दिख रहा है ओ अब दिख रहा है वीडियो मेरा

00:03:05:02 दिख रहा है कि नहीं दिख रहा अभी मेरा वीडियो ठीक दिख रहा है या रुक रुक के चल रहा है तो मैं अभी भी साफ नहीं है तो मैं एक बार वापस जाके आऊ [संगीत]

00:03:56:06 अभी साफ दिख रहा है मेरा वीडियो अच्छा ठीक है तो मैं आपको बता रहा था मैं माउंट आबू एक माउंट आबू में आर समाज नाम की एक संस्था है वहां से इनवाइट किया गया था अ डिबेट के लिए शास्त्रार्थ के लिए तो हमने उनका वो जो निमंत्रण है स्वीकार किया है आप हमने उनसे कहा था कि आप लखनऊ आ जाइए और हमारे और आपके बीच में जो है बात हो जाएगी जो भी वैचारिक मतभेद है उसके निमित्त तो उन्होंने उसको भी स्वीकार कर लिया वो लखनऊ आने की बात स्वीकार कर तो आप आ जाइए जो आपने दिनांक दिए हैं उनमें से किसी एक दिन आप आ जाइए और जो फिक्स है वो मैं आपको अपडेट कर देंगे हम लोग उस पर मुझे थोड़ा सा देखना है कि उन दिनों हमारा कोई आवश्यक कार्य तो नहीं है पहली बात तो यह हो गई कि आप आज आ सकते हैं बात बात हो सकती है दूसरी बात यह है कि आपने जो विषय चुना है उसको थोड़ा सा करेक्शन की जरूरत है आपने विषय दिया है कि किसकी परंपरा श या किसकी परंपरा मान्य तो यह जो कंपैरेटिव सिचुएशन है तब आ सकती है जब आप अपनी परंपरा का अस्तित्व प्रकट करें

00:05:11:28 हमने कभी भी यह कहा ही नहीं है कि आपकी परंपरा मान्य नहीं है हमने प्रश्न पूछा है कि आपकी परंपरा क्या है तो वोह आपने आज तक बताया नहीं है तो पहले आप अपनी परंपरा बताए तो फिर उस विषय पर बात हो सकती बाकी धर्म और ईश्वर के विषय में आप आ करर के चर्चा करें और धर्म और ईश्वर में बात करते समय बीच में उसका एक अंग हो सकता है कि भाई हां भाई परंपरा वेद मंत्र कैसे आए यह है वो है तो वो एक वो मुख्य बिंदु नहीं हो सकता वो उसका एक पहलू हो सकता है इसके साथ ही साथ मैं फिर कहूंगा इसको शास्त्रार्थ का नाम ना दे हमने आज तक अपनी किसी भी चर्चा को शास्त्रार्थ नहीं कहा है डिस्कशन कहे डिस्कशन हम लोग कर सकते हैं हम और आप शास्त्रार्थ नहीं हम कोई आचार्य नहीं है कोई प्रामाणिक गुरु नहीं है जो हम आपके साथ शास्त्रार्थ करने बैठे आप अपनी नजरों में हो सकते हमारे दृष्टिकोण में आप भी नहीं है हम तो है ही नहीं और आप भी नहीं है खैर दूसरी बात यह है कि अगर आप आचार्य स्वयं को कह भी रहे हैं तो हमें कोई उससे आपत्ति नहीं मगर बात यही है कि हम आपके साथ चर्चा करेंगे शास्त्रार्थ

00:06:19:07 और एक विषय यह भी है कि जब आप यह देख रहे हैं कि आपने जो है शिवांश नारायण द्विवेदी से चर्चा या आपके भाषा में क तो श के लिए कहा है तो आप इतने पत्र भेज चुके हैं आपने अपने तरफ के किसी व्यक्ति का नाम उधत नहीं किया है तो ये सोचने का विषय महत्त्वपूर्ण विषय है आपको भी उसको प्रकट करना चाहिए हमें कोई प्रभाव नहीं पड़ता है आप किसको रखेंगे किसको नहीं मगर इसका कारण क्या है जो आप अपने पक्षकार को बता ही नहीं रहे कि हमारी चर्चा होनी किसके साथ उसको भी आप दिखाइए उसका फोटो दिखाइए जिससे कि उसकी बातें हो न्यूज जाए लोगों तक है ना ज्यादा से ज्यादा लोग लोग

00:07:01:21 ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उस होने वाली चर्चा के बारे में समाचार पहुंच सके इसके अलावा आपने एक बात और कही है कि आपके सारे खर्चे हम उठाएंगे लखनऊ आक के हमारे खर्चे उठाने की आपको आवश्यकता नहीं है आप स्वयं का उठा लीजिए बस आप आ जा चर्चा हो जाएगी और यह था संदेश हा इस बीच मुझे एक बात और याद आई एक वो जो कलयुग का नीच व्यक्ति है जो सनातन शास्त्रों को बदलने की बात करता है और स्वयं को कलयुग का योगी कहता है और वह किसी भी सिद्धांत को तब मानता है जब वह उसे अपने व्यवहारिक जीवन में एमप्लीफाई ना कर ले तो हमने जब उस पर यह उसकी सच्चाई उसको दिखा दिया ना उसको दिखा दिया तो उसने कुछ अजीब से कुतर को भरी एक वीडियो बनाई हमारे ऊपर जो हमारे संज्ञान में आई है उस वीडियो में उसका कहना कि मेरे गुरु स्वयं श्री कृष्ण तो मेरे भाई आप हमारे वीडियोस को अगर स्क्रॉल करेंगे ना तो आपके इस कथन का भी आपको उत्तर मिल जाएगा हम दे चुके पहली बात तो यह है कि जो ईश्वर

00:08:16:24 है ना उसको वो एक जटिल एक उस तक पहुंचना एक संघर्ष का कार्य है उस पर ध्यान लगाना संघर्ष का कार्य है और इस कार्य में ही मदद करने के लिए गुरु होता है ठीक है तो यदि आपने उस जो आपका गंतव्य है उसी को ही अपना क्या कहते हैं उसी को अपना गति का आलंबन लेने के योग्य साधन बना लिया तो फिर वह जो साधन जो आपके कार्य को सरल करने के लिए आया वह साधन आपने ऑलरेडी कठिन बना लिया तो फिर अब अब आपको फिर से सरलता के लिए किसी और को आलंबन बनाना होगा वो बात अलग है कि उसको आप गुरु ना कहो फॉर एग्जांपल जब आप यह कहते हैं कि मेरे गुरु स्वयं श्री कृष्ण है तो आपको ये भगवत गीता या वेद या इनकी इनको पढ़ने के लिए बुक्स की जरूरत क्यों है जो आपकी फोटो में पीछे दिखाई देती जब स्वयं श्री कृष्ण आपके गुरु है तो वो तो आपको कान में आकर के सारे मंत्र दे ही देंगे आपको पता भी लग जाएगा दूसरी बात यह है कि ये जो बुक्स आपने पीछे रख रखी है तो इन बुक्स में यदि कोई प्रेस वाला यदि आपको डायरेक्ट इन्हीं पर विश्वास है यदि कोई प्रेस वाला इनमें एक दो श्लोक मिला देगा या कम कर देगा तो आपको कैसे पता चलेगा कि ये श्लोक मिलाए

00:09:32:02 गए नहीं और दूसरी बात ये है कि जो श्री कृष्ण जो आपको आकर के डायरेक्ट ज्ञान दे रहे हैं जैसा कि आप बोल रहे हैं तो वो श्री कृष्ण सही बोल रहे हैं आपको कैसे पता लगेगा क्योंकि इधर आप आप आपके लिए जो बुक्स है इनका आधार श्री कृष्ण दिखने वाले जबकि श्री कृष्ण का आधार होते हैं हमारे शास्त्र अगर बुद्ध के रूप में भगवान आएंगे तो हम उनको नहीं मानते क्योंकि वेदों का खंडन करते हैं भले ही यज्ञों की रक्षा के लिए करें है ना वही सनातनी है तो थोड़ा ध्यान दो इन सब चीजों पर क्या बोल रहे हो आपके तर्क बहुत वीक होते जा रहे हैं है ना अगर आपकी ही इंद्रियों के द्वारा बनाया गया ईश्वरी ईश्वरीय प्रतिबिंब है और वह आकर के आपको बोल रहा है कि ऐसा करो ऐसा ना करो आपको धर्म और धर्म का निर्णय कैसे करेंगे आप तो केवल गुरु नहीं केवल गोविंद नहीं केवल क्या कहते हैं गुरु गोविंद और ग्रंथ इन तीनों को मिलाकर के धर्म प्राप्त हो होता है अगर इसमें से एक भी पायदान आप खींचें ये तीनों इंटरडिपेंडेंट है ये हो सकता है कि किसी के जीवन में आचार्य पहले आ जाए किसी के जीवन में ग्रंथ पहले आ जाए मगर ये तीनों इंटरडिपेंडेंट है तो आप ये नहीं कह सकते कि हमारे पास सीधे श्री कृष्ण आते हैं श्री कृष्ण आते हैं तो उनकी पहचान कैसे करोगे

00:10:47:03 पहचान अगर आप शास्त्र से कर रहे हैं तो शास्त्र को लिखने वाला आपका गुरु है है ना क्योंकि शास्त्र के जो नियम है उनके आधार पर आप देख रहे हो कि ये श्री कृष्ण है कि नहीं इनके मोर का पंख है या इनका कैसा है कैसे दिखते हैं ये सब शास्त्र की चीज है ना तो यानी कि आपके पास गुरु है श्री कृष्ण को पहचानने के लिए बस आप कह नहीं रहे हो प्रतिमा दिख रही है आपको हमारे पीछे ही है गणेश जी

00:11:19:19 और फिर इसमें इन्होंने एक बात कही कि अगर हमको य वीडियो से कोई न्यूज पता चल रही है तो हम उस न्यूज पर ध्यान देंगे ना की वो जहां से प्राप्त हो रही है उस साधन पर तो यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि जिस साधन पर हम भरोसा कर रहे होते हैं उसकी बात को इसलिए मान रहे होते हैं कि उसकी बात को वेरीफाई करने के लिए भी हमारे पास कोई अंततोगत्वा कोई प्रामाणिक साधन है वही गुरु है यदि आपको शास्त्र से कोई बात प्राप्त हो रही है तो उस शास्त्र को प्रामाणिक मानना है कि नहीं मानना उसमें मिलावट है कि नहीं उसके लिए ही गुरु है अन्यथा कल को हर वो व्यक्ति आपके धर्म को बदल सकता है जो आप आप जिन किताबों को पढ़ रहे हैं उनको छाप रहा है समझ गए पहली और एक लास्ट बात आपने और कही धर्म परिवर्तन की बात कि आपके ये विधि निषेध इत्यादि से छुआछूत की वजह से पहली बात तो आपको समग्र रूप से आपने अध्ययन किया नहीं है इन चीजों का परंपरा प्राप्त आचार्यों की शरण में जाकर के और परंपरा प्राप्त आचार्यों के शिष्य केवल ब्राह्मण नहीं होते हैं शूद्र भी होते हैं ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र सब होते हैं हमारे शूद्र जो भाई होंगे गुरु भाई वो आप लोगों की संख्या से बहुत ज्यादा होंगे है ना तो पहले तो इसको समझो

00:12:34:24 दूसरी बात यह है कि आपका कहना छुआछूत की वजह से धर्म परिवर्तन हो रहा है भाई धर्म परिवर्तन तो तब भी होगा जब हम एलजीबीटी क्य को नहीं अपनाएंगे जब हम लिविन रिलेशनशिप को नहीं अपनाएंगे क्योंकि धर्म जो है ना वो लगाम लगाता है मनुष्य जो जन्मा है भोग भोग की प्रवृत्ति के साथ जन्मा है और धर्म व है जो उस पर लगाम लगाएगा तो जहां उसको भोग मिलने लगेगा उधर भागेगा और रही बात आप ये जो जिन लोगों का पक्ष ले हरियाणा पंजाब आपने वहां पर वर्ण व्यवस्था परंपरा प्राप्त आचार्य शिष्य ये सब छोड़ दिया तो वहां का वो देखो आप क्या हाल है आज क्या हालेलुया होता है वहां पर कितनी तेजी से कन्वर्जन हो रहा है और यह जो यह टूटे हैं ना य आपके रामपाल वाले लोग यह भी वही आर समाज से वहां आर समाज का एक और रूप है है ना अब ये लोग भी आज मैं बता रहा हूं आपको ये लोग भी थोड़े दिन बाद आपको पूर्णत अभी थोड़े बहुत वेद विरुद्ध है थोड़ दिन बाद आपको ईसाई दिखाई देंगे तो आप ये बात तो करो ही मत कि आपकी व से कन्वर्जन हो रहा है अगर धर्म के कारण अगर कन्वर्जन होने के व्यक्ति छोड़ छोड़ के भाग रहा है इस कारण से हम अपने धर्म को बदलने लगेंगे तो धर्म का अस्तित्व क्या रह जाएगा और अंत तो गवा भाई तुमने

00:13:49:28 इतनी सारी जो सब चीजें अपने वो वीडियो में दे दी है आप मुझे एक बात बताओ आपने बोला कृष्ण मेरे हैं कृष्ण कौन है बताइए आपको बताना पड़ेगा शास्त्र का नाम लेना पड़ेगा जैसे ही शास्त्र का नाम लिया तो शास्त्र आप तक आए कैसे अगर जहां से आ रहे हैं उस पर आपको विश्वास नहीं है तो फिर आपका शास्त्रों पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता है और यदि शास्त्रों पर विश्वास है तो जहां से आ रहे उस पर विश्वास ना होना सिद्ध नहीं कर पाओगे इसीलिए कहता हूं मत पड़ा करो चक्कर में है ना अभी छोटे हो थोड़ा और अनुभव प्राप्त करो और थोड़े से लॉजिस लाओ उसके बाद निकलना राजू श्रीवास्तव का एक चुटकला याद आ गया कि मोमबत्ती होती है ना जब आंधी चलती है तो ऐसे ऐसे करती है ऐसे ऐसे यूं य जैसे कोई मात शक्ति हो और जब मोम बत्ता होता है जो बड़ा वो जब आधी चलती है तो ऐसे ऐसे करता है टकराता है वो राजू श्रीवास्तव का एक गुर था तो अभी आप ममत्ती वाली स्टेज में है बेकार में आंधियों से उलझने का प्रयास ना करें है ना तो एक ये दो चीज हो गई अब हम आते हैं हमारे मुख्य बिंदु पर आज का जो है तत्व ज्ञानी काल ब्रह्म

00:15:06:09 भगवान तो सबसे पहली बात है कि हम आज एक मुख्य विषय लेकर के आए हैं कि भाई जो काल है इनका रामपाल वालों का जो काल है वो क्या कह रहा है वो क्या कर रहा है उसका वास्तविक अस्तित्व क्या है इस पर भी हम सीरीज अब चलाएंगे तो आज हम लोग बात कर रहे हैं कि यह जो है काल को भगवान भी कहते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान भी कहते हैं इससे पहले मैं आपको बता दूं कि भगवत गीता नवे अध्याय के 33 में श्लोक में भगवान ने फिर कहा था श्री कृष्ण जी ने कि तू मुझको भज तू मुझको मेरा जाप कर और ऐसे बहुत सारे श्लोक है भगवत गीता में जैसा कि हमने पिछली बार बताया था और ये लोग ये कहते हैं ना जो उल्टे उल्टे पेड़ के रूप में सही सही व्याख्या कर दे ये देख लीजिए भगवत गीता का ही है ये उल्टे के रूप में व्याख्या की इसको इसके जो लेखक है उन्हे आप तर्शी मान लेंगे शायद या नहीं मानेंगे कुछ उतरक करेंगे तो यह तो एक बात रही मगर हमने अपने पिछले वीडियो में बताया कि जो भगवान श्री कृष्ण उन्होंने कई बार स्वयं को भजने की बात की है तो आज ऐसा सनसनी खेज खुलासा होने वाला है ना ऐसा सनसनी खेज जो अभी

00:16:21:15 तक आपने कभी नहीं सुना होगा मेरे रोंगटे खड़े हो गए ऐसी ऐसी चीज मुझे आज पता चली है और यह भी ऊपरी ऊपरी जो जो अध्ययन किया है मैंने इनकी चीजों का तब है ना तो अब ये बात आती है कि अ मैंने जो मैंने ये बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने कई श्लोकों में यह कहा है कि तू मुझको भज तू मुझको भज तो इन्होंने वहां पर कई श्लोकों में जैसे कि नौवे अध्याय अध्याय का जो 33 वा श्लोक है उसमें भगवान कह रहे हैं कि तू मुझको भज तो इन्होंने वहां पर मुझको भजने की बज उस कर दिया है उस परमेश्वर को बज ऐसे कई जगह इन्होने किया है सबसे पहली बात यहां पर यह आती है कि जब उस आ जाता है उस तो माम की सं मतलब मुझ मुझे भज मुझे भज की संस्कृत तो वहां पर दिख रही है माम ठीक है मगर उस की संस्कृत वहां पर उन श्लोकों में नहीं है जहां पर इन्होने उस उस कर दिया उस उस उस ये उस नहीं है वहा पर संस्कृत में तो ऐसा इन्होने बहुत बार किया है अब आ जाते हैं यह लोग काल को भगवान भी कहते हैं तो यह सबसे बड़ी एक दिक्कत वाली बात है कि भाई आप इतना बड़ा झूठ

00:17:36:27 क्यों बोलते हैं और मैं जानता हूं क्यों बोलते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश भी भगवान है काल ब्रह्म भी भगवान है और फिर कहते हैं कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है अब या तो ये तय कर ले कि काल भगवान नहीं है और तब कहे वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है मगर खुद ही कहते हैं कहीं कहीं काल जो है भगवान जैसे इन्होंने अपनी गीता में कई जगह काल को भगवान कहा है गरिमा गीता की तो आज हम इनका य दोहरा चरित्र बाहर लाएंगे यह जो दोहरी बातें बोलते हैं और इन्हीं के ज्ञान से इन्हीं का ज्ञान कटेगा यह लोग बहुत कहते हैं ना भगवत गीता के ज्ञान से भगवत गीता का ज्ञान कटेगा तो आज इन्हीं के ज्ञान से इन्हीं का ही ज्ञान कटेगा तो क्या है सबसे पहले हम यह देखते हैं कि इन्होंने काल को भगवान क्यों कहा और यदि काल भगवान है तो इन्होंने झूठ लिखा है तत्व दर्शी संत नहीं है ये क्यों नहीं है मैं बताता हूं तो सबसे पहली बात है कि भगवान कहते किसे हैं यह परिभाषा हमें मिलती है विष्णु [संगीत]

00:18:47:14 पुराण विष्णु पुराण यह वही वाला विष्णु पुराण है जो इन्होंने अपने कई वीडियोस में उद्र किया है तो विष्णु पुराण में खोल रहा हूं छठवां अंश पांचवां अध्याय तो इसमें भगवान की जो व्याख्या है सीधे-सीधे भगवान शब्द भगवत शब्द की व्याख्या भी है और भगवान शब्द की व्याख्या भी है तो भगवान शब्द की क्या व्याख्या है संपूर्ण ऐश्वर्य संपूर्ण ध्यान रखिएगा संपूर्ण ऐश्वर्य धर्म यश श्री ज्ञान और वैराग्य इन छह का नाम भग है भग ठीक है

00:19:45:28 और जो व इसमें जो भगवान में व अक्षर जो आ रहा है व उसका क्या अर्थ है उस अखिल भूत गण उस अखिल भूतात्मा में समस्त भूत गण निवास करते हैं और स्वयं भी समस्त भूतों में विराजमान है इसलिए वह अव्यय परमात्मा ही वकार का अर्थ है यानी कि जो वो अव्यय परमात्मा है वह जो व आया है उसका अर्थ है अव्यय परमात्मा भग का मतलब अ संपूर्ण ऐश्वर्य धर्म यश श्री ज्ञान और वैराग्य और इस प्रकार यह महान भगवान शब्द परम ब्रह्म स्वरूप श्री वासुदेव का ही वाचक है तो पहली बात तो जिसको हम भगवान कह रहे हैं वोह मुख्य रूप से वह उसका अगर सही उपयोग है तो वह परम ब्रह्म के लिए ही है यह विष्णु पुराण में आ गया इसको आप देख लीजिए इन्होंने क्याक बताया क्याक होना चाहिए फिर हम आगे

00:20:53:02 बढ़ेंगे उंगली रख देता हूं यह संपूर्ण ऐश्वर्य से पढ़िए दिख रहा संपूर्ण ऐश्वर्य धर्म यश श्री वैराग्य तो अब इनका दोगलापन देखेंगे कि इन्होंने काल को भगवान क्यों कहा तो पहली बात तो यह है कि जब हम भगवान कह रहे हैं काल को तो यह गुण उसमें होने चाहिए तभी तो तत्वदर्शी संत की वाणी जो है सत्य सिद्ध होगी कि वो अगर काल को भगवान कह रहे हैं ब्रह्म को भगवान कह रहे हैं तो भ क्या उन्होंने ब्रह्म में वो सारे गुण माने जिसके कारण किसी को भगवान कहा जाता है तो सबसे पहली बात है क्या धर्म क्या जो इनके ये रामपाल के अनुसार ही क्या जो काल है वह धर्म की स्थापना करता है अब धर्म क्या होता है सत्य बोलना और बुलवाना है ना ज्ञान के अनुसार आचरण करना और करवाना यह सब सत्य है और क्या

00:22:07:07 है जो मतलब कुल मिलाकर के जितनी भी अच्छी अच्छी चीजें हैं अहिंसा अलो दया क्षमा है ना वह सब धर्म है तो अब देखते हैं कि उन्होंने क्या कहा है काल के बारे में जगह जगह पर तो भाई इनकी गीता का पेज नंबर आप निकालिए चवा पेज नंबर 14 गरिमा गीता की जीजी के हां इसको बड़ा

00:22:46:20 करिए यह इनका देखिए दोगलापन क्या है कि यह कहते हैं कि हम सनातन धर्म का प्रचार प्रसार कर रहे हैं उसकी रक्षा कर रहे हैं अब सबसे पहले सनातन धर्म को बांच वाले जो लोग उनके बारे में इनके क्या विचार है उनको य भगवान तो कहते हैं मगर भगवान होते हुए भी इसमें आप अगर और बड़ा हो सकता है क्याय मोबाइल पला तो इसमें यह साफसाफ लिखा है कि गीता का जो ज्ञान वेदों और इन्होंने कह दिया यहां पर सूक्ष्म वेद ये अपने मन से है इस पर भी आगे विश्लेषण है अच्छा खासा वेदों के जो विरुद्ध है सच्चिदानंद गन ब्रह्म

00:23:31:26 अर्थात सत्य पुरुष ने अपने मुख कमल से तत्व ज्ञान बोला है उससे मेल नहीं करता

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00:23:37:21 यह ध्यान दीजिएगा वे जो गीता का जो ज्ञान वेदों से मेल नहीं खाएगा वह ज्ञान व्यर्थ है और वह ज्ञान जो है यहां पर इन्होंने लिखा है वह ज्ञान इन्होंने अपने मन से दे दिया है इसका 132 पेज नंबर भी निकालिए 132 132 तो इनकी दोहरी बातें क्या है कि एक तरफ यह कह रहे हैं भगवत गीता में काल कह रल इनके अनुसार जो इनका काल है वह यह कह रहा है कि मैं धर्म की संस्थापन करता हूं स्थापना करता हूं यदा यदा धर्म भवती भारता तो उसमें इन्होंने भी मान लिया दो लाइन लिख दी कि वो धर्म की स्थापना करता है मगर क्या वो वास्तविकता में इनके अनुसार धर्म की स्थापना इन्होंने मानी है काल द्वारा तो सबसे पहली बात है कि वह भटका रहा है वोह अपने मत का ज्ञान दे रहा है 132 आ गया हम इसमें क्या है युद्ध नहीं करूंगा इसमें आखिर में देखिए यहां पर

00:24:50:08 वो यहां पर वह जो है ये देखिए यहां पे इन्होंने भगवान शब्द का उपयोग भी किया है काल के लिए जो आप लोग ये कहे कि कहां किया है तो भगवान जो है यह भगवान भी कहते हैं काल को और उसके बाद उस भगवान की धज्जियां भी उड़ाते हैं कहां कहा उड़ाते हैं व मैं आपको बता रहा हूं इसमें थोड़ा और नीचे जाए विरोधाभास यह 10 से 15 में और नीचे जाइए हां बस बस बस बस बस बस बस बस बस बस बस बस इस अध्याय यह जो इन्होंने लिखा है गीता छ श्लोक 10 से 15 में इसके विपरीत अपना मत काल जाल में रखने का विधान बताया है अब देखिए काल जाल में रखने का विधान यह धर्म नहीं है ना मगर बताया काल ने तो इसका मतलब काल में धर्म नहीं है वोह लोगों को भटका रहा है कहा है कि साधक यानी योगी अपने मन इंद्रियों सहित शरीर को वश में रखना रखने वाला आशा रहित तंग रहित अकेला ही एकांत स्थान में और ये वो इस तरीके से आगे चला आसन बहुत ऊंचा हो उस पर बैठकर इंद्रियों को अच्छा शुद्धि के लिए हो बस कर फिर श्लोक 131 तक स्पष्ट किया है कि ऐसे ऐसे कर उससे मुझ में रहने

00:26:05:20 वाली शांति को प्राप्त होता है देखिए यहां पर झूठ है इनके अनुसार यहां पर काल झूठ बोल रहा है क्यों क्योंकि काल कह रहा है कि अगर वो ऐसे चलेंगे लोग इसके कहे अनुसार तो उनको शांति प्राप्त होगी मगर वास्तविकता में इन्होंने क्या लिखा है बाद में यानी मुझ काल के जाल में फसा रहेगा यानी काल यहां झूठ बोल रहा है इनके अनुसार काल यहां पर सत्य नहीं बोल रहा है वो वास्तविकता में यहां पर जो व्यक्ति उसके अनुसार चलेगा वह उसके जाल में फस जाएगा तो इसका मतलब काल जो है काल के अंदर धर्म नहीं है यानी भगवान में जो हमने छह गुण देखे थे ऐश्वर्य वान ऐश्वर्य वान तो वही नहीं पूर्ण ऐश्वर्य वान तो कौन है कबीर संपूर्ण ऐश्वर्य वान कबीर है काल नहीं है और उसके बाद अब इन्होंने जब यह कह दिया कि तुम मुझको शांति को प्राप्त होगे मुझ में रहने वाली शांति तुम्हें मिल जाएगी वह शांति शांति नहीं है वास्तविकता में वह तो अशांति है क्योंकि वह काल का जाल है तो यहां पर काल ने झूठ बोल दिया इसके बाद आपको सभी को पता है कि इन्होंने सृष्टि रचना के समय काल के बारे में क्या लिखा है कि वह दुर्गा माता के साथ अब उनकी कोई अलग दुर्गा हमारी

00:27:20:24 व दुर्गा माता नहीं है हम कभी नहीं कहेंगे मगर इसने वहां पर मर्यादा को लांगाह ंगने वाला धर्म कहां से हो गया और जब धर्म नहीं है तो भगवान कहां से हो गया क्योंकि भगवान का पहला लक्षण हमने विष्णु पुराण में पढ़ा कि धर्म होना चाहिए ऐश्वर्य होना चाहिए फिर धर्म होना चाहिए अभी हटाइए नहीं अभी हटाइए नहीं अच्छा श्रीमद् भागवत में पहले स्कंद के दूसरे अध्याय के नौवे श्लोक में लिखा हुआ है कि भक्ति का जो जो धर्म का लय है मतलब धर्म का जो वास्तविक प्रतिपाद्य विषय है वोह क्या है वो है मोक्ष तो काल का जो वास्तविक प्रतिपाद्य विषय व मोक्ष नहीं है वह क्या है अपनी जो जाल है उसमें फसा करके रखना तो काल जो है काल के अंदर किसी भी प्रकार से एन केन प्रकार आप देख लीजिए व भटका रहा है वो झूठ बोल रहा है वह मोक्ष देने वाली बातें नहीं कर रहा है वो शांति बोल कर के अपनी अशांति दे रहा है सामने वाले को तो क्या है ये उसके अंदर धर्म नहीं है एक आज बहुत एक कंक्लूजन लाइन मैं आपको बताऊंगा वीडियो के एंड में सूत्रा क्मक शैली आपको याद रहेगी

00:28:36:04 हमेशा और उसको सुनना आप लोग ध्यान से तो श्रीमद् भागवत के अनुसार जो धर्म का लय है जो भी जिस भी ज्ञान को हम धर्म का ज्ञान मानते उसका जो परवन है वह मोक्ष में होना चाहिए अगर मोक्ष में नहीं हो रहा है उसका परवन तो वह धर्म नहीं है धर्म के बाहर की चीज है तो काल जो भी बता रहा है वो बता रहा है जिससे कि मोक्ष प्राप्त नहीं होगा इसको भी हम सिद्ध कर लेंगे तो इसके अलावा दया क्षमा सत्य अहिंसा यह सब धर्म है यह कहां लिखा है महाभारत अनुशासन पर्व 162 वा अध्याय 23 वा श्लोक फिर महाभारत शांति पर्व 100 62 वा अध्याय और 21वां श्लोक फिर मत्स पुराण 143 वा अध्याय 31 32 श्लोक इन सब के अनुसार अलो काल को लोभ है जीवों को खाने का अपने जाल में फसाने का धर्म क्या है अलो जहा लोभ ना हो मनवाणी और क्रिया द्वारा किसी भी प्राणियों के द्रोह नहीं करना मगर यह दिन भर क्या करता है जो काल है इनका प्राणियों के खाने का इंतजाम करता है कैसे प्राणी हमारे चंगुल में फसे यह सारी बातें वह करता है तो इसका मतलब क्या हुआ कि काल को भगवान कहना बिल्कुल भी तत्वदर्शी तत्त बात

00:29:51:16 सच नहीं है तो क्या हुआ इसका अर्थ क्या हुआ कि तत्वदर्शी से गलती हो गई यहां पर भगवान जो कह दिया काल को ठीक है अच्छा हां उसने प्रतिज्ञा की है ये ये ये चैप्टर हम लोग लाएंगे बाद में लाएंगे एक अगला एक अगला सेशन और बनाएंगे कि काल निराकार है या साकार है इस पर अलग से बात होगी अभी हम केवल ये बता रहे हैं कि काल को भगवान कहना उचित है कि दोगलापन है अभी ये कहते क्यों है काल को क्योंकि ये काल से ब्रह्मा विष्णु महेश को जोड़ते हैं क्योंकि ये दुर्गा माता को जोड़ते हैं काल से तो इसलिए काल को भी भगवान कहते रहे भले ही उसके बारे में खुद ही बोलेंगे कि वो घटिया है अभी देखिए क्या है अब इन्होंने पेज नंबर 95 पर यह भी कह दिया है कि काल को तत्व से जानना पूर्ण ज्ञान है तो ये बात के लिए रखेंगे काल को तत्व से जानना ही पूर्ण ज्ञान है म काल को जो तत्व से जान गया वो तत्वदर्शी है इसका मतलब इनके अनुसार जो यह बोला जाता है कि परमात्मा को तत्व से जानना पूर्ण ज्ञानी है तो वो जो है यह गलत हो रहा है तो इसका मतलब रामपाल

00:31:06:24 जी को किसी काल नामक एंटिटी ने बुलवाया है गलत छप गया इनकी गरमा गीता की में अच्छा अब बात आती ज्ञान की कि क्या काल जो है यश की बात आती यश तो जो गीता ज्ञान दाता कि घिनौनी वास्तविकता को जानकर उसकी भक्ति ना करके रामपाल की भक्ति करते हैं वही मोक्ष को प्राप्त करते हैं यह वाली बात हम बाद में लेंगे मगर अभी बात करते हैं जो दूसरी चीज हमने पढ़ी ऐश्वर्य वान नहीं है काल धर्म नहीं है काल के पास अब बात आती है श्री यानी लक्ष्मी तो पेज नंबर 10 निकालिए इनकी गरमा गीता की का पेज नंबर 10 आज हम देखिए के दोगले पन को इतना क्रिस्टल क्लियर करेंगे कि दोगलापन भी घबरा जाएगा कि भाई वो वो शर्म से जाकर के वो छुप जाएगा कहीं पर इतना ज्यादा अंत तक आते आते आपको जो है पता चलेगा तो भाई देखिए खोलिए इनका जो है पेज नंबर 10 जो दूसरा भगवान का जो तीसरा गुण है

00:32:22:00 वो है श्री ठीक है और हम सभी लोग जानते हैं श्री का अर्थ है लक्ष्मी और पेज नंबर 10 पर उन्होंने यह कहा है कि जब तक वह विष्णु रूप में रहता रहता है काल तब तक तो वह लक्ष्मी के साथ रहता है मगर जब वह लक्ष्मी से अलग हो जाता है यह देखिए उसका परम रूप काल है ऊपर से थोड़ा लाइए ऊपर से अंडरलाइन करिए भगवान विष्णु हां जो काल है है वो भगवान विष्णु महाविष्णु के रूप में काल रहता है काल का प्रथम रूप है प्रभु जैसा परंतु उसका परम रूप काल है जब भगवान विष्णु काल जो महाविष्णु के रूप में ब्रह्मलोक में रहता है तथा प्रकृति अर्थात दुर्गा को अपनी पत्नी महालक्ष्मी के रूप में रखता है अपनी प्रकृति दुर्गा से अलग हो जाता है जब काल दुर्गा दुर्गा कौन है जो महालक्ष्मी के रूप में उनके साथ विष्णु रूप में रह रही है तो दुर्गा से जब वो अलग हो जाता है तब काल के रूप में प्रकट होता है यानी कि जब वो काल बना तो वो दुर्गा से यानी वो लक्ष्मी से अलग है ठीक है जब वो काल बना तो लक्ष्मी से अलग है तो

00:33:37:02 यानी कि उसके पास श्री भी नहीं है श्री लक्ष्मी जी का दूसरा नाम है श्री यह भी शास्त्रों में है ठीक है तो काल के पास ना तो संपूर्ण ऐश्वर्य है ना ही उसके पास धर्म है ना ही उसके पास श्री है है ना अब आगे क्या है और क्या है उसके पास अब बात होती है यस की तो हम सभी जानते हैं कई जगह उन्होंने कहा है वो ला दीजिए सा 24 सा 24 ला दीजिए भगवत गीता का सा 24 मैंने पेज नंबर इसका नोट नहीं कर पाया हूं इसमें देखना

00:34:18:15 पड़ेगा भगवत गीता का सा 24 उसमें इन्होंने काल को घटिया कहा है यह मेरा घटिया भाव है मेरे घटिया नियम है अविनाशी घटिया नियम है वो सब हम बाद में बात करेंगे अविनाशी और यह साकार निराकार वाली बातें मगर यस की जब बात करते हैं तो इसका मतलब पेज नंबर हमें नहीं मालूम है आपको देखना पड़ेगा सातवा अध्याय निकालना है र काल को इन्होंने अपनी जो गीता गर्मा की है उसमें जीजी के में उसमें इन्होंने काल को घटिया स्वीकार किया है तो अगर उसका जो यश फैल भी रहा है तो घटिया पन का यश है उसको यश नहीं कहते उसको अपकीर्ति कहते हैं या फिर उसको जो है कुख्यात कहते हैं वह कभी भी विख्यात में नहीं आता है तो यश नहीं है वो घटिया भाव वाला अनुत्तम भाव वाला यह सब इनकी जीजी के में लिखा हुआ है यानी कि ना उसके पास संपूर्ण ऐश्वर्य है ना उसके पास लक्ष्मी है ना उसके पास यश है ना उसके पास यश में क्या क्यों क्यों यश नहीं है तो व घटिया है उसका भाव टिया है वो बलात्कारी है वह अज्ञानी है अज्ञानी कहां

00:35:33:18 पर कहा है वो भी पढ़ लीजिए 39 नंबर पेज निकालिए इनका हाय ये आ गया सातवा अध्याय हा इसमें 24 वा निकालिए 24 में श्लोक की व्याख्या कहां हो रही है हालांकि इन्होंने घटिया और अनुत्तम यह सब गंदी गंदी बातें काल के लिए बहुत कई है इनका काल हमारा काल नहीं जो इन्होंने तथाकथित काल्पनिक काल डेवलप किया है और डेवलप करने के के बाद भी वह जो है क्या कहता है कि वह भगवान है है ना तो देवी दुर्गा के पति ब्रह्मा विष्णु महेश साथ अब और आगे और आगे और आगे हां पी प ऊपर जा ऊपर जा ऊपर चलिए ऊपर चलिए कुछ निकला था अभी घटिया शब्द देखा था और थोड़ा और

00:36:26:16 थोड़ा नहीं नहीं वो बिल्कुल निचला पहला पैराग्राफ था ऊपर जाइए ऊपर हां हां देखिए मेरा ये इन्होंने काल ने इनके अनुसार 24 से 25 में स्पष्ट किया है कि मेरा अविनाशी अनुत्तम विधान है अनुत्तम और इसको य घटिया कहते हैं बार-बार ऊपर जाइए थोड़ा भैया ऊपर जाइए और ऊपर पिछला पेज पेज प आ जाइए पिछले धीरे धीरे हां ये ये ये गीता ज्ञान देने वाले ने अपनी भक्ति से होने वाली गति को अनुत्तम यानी घटिया अपने भाव को घटिया कहा है प्राप्त होने वाली गति को घटिया कहा है तोय कैसा कैसा भगवान है जो आप भगवान कह रहे हो काल को ना तो उसके पास ऐश्वर्य है ना उसके पास श्री है ना यश है बलात्कारी है धर्म भी नहीं है सत्य नहीं है है ना लालच है उसके अंदर और और जीवों के लिए द्वेष है उसके अंदर तो फिर आप उसको कैसे कह रहे हो कि वोह भगवान है लोगों को भ्रमित करने के लिए क्योंकि अगर आप शुरू में यह कह दोगे कि हम उसे गीता के ज्ञान को देने वाले को भगवान

00:37:41:22 नहीं मानते तो आपके पास कोई फटके का नहीं ठीक है तो गीता ज्ञान दाता जो है अज्ञानी भी है तो उसके पास ज्ञान भी नहीं है है क्या बचा क्या क्यों नहीं है उसके पास ज्ञान पहली बात तो इन्होने 39 नंबर पेज निकालो भैया आप देखिए सनातन के नाम पर यह लोग क्या क्या कर रहे हैं अंत तक होते होते आपके आंसू आ जाएंगे मैंने खून का घूंट पी पी करके आज जो इनकी पड़ी है और यह सरसरी निगाहों से है यह सरसरी निगाहों से है तो ये जो ये इसमें साफ कह रहे हैं क्या कह रहे हैं

00:38:34:04 भाई इसमें इन्होंने यहां कहीं कहा है कि जो वेदों को बोलने वाला है काल वह अज्ञानी है और नीचे आइए एक मिनट एक मिनट उस परमात्मा पूर्ण य ये यह 39 नंबर वाला पेज ही है ना कि और कोई है हां 39 निमित उपरोक्त गीता अध्याय य है यह है विधान यज्ञ आदि करने भक्ति का विधान बताया है ब्रह्म कहा परम अक्षर ब्रह्म कहा है परम भक्ति करो हा नीचे आइए और और नीचे आइए

00:39:12:26 पवित्र वेदों को बोलने वाले ब्रह्म ने कहा कि पूर्ण परमात्मा के विषय में कोई तो कहता है कि व अवतार रूप में उत्पन्न होता है और अंतत गत्वा उस पूर्ण परमात्मा का तत्व ज्ञान तो तत्वदर्शी के पास है वास्तव में कि पूर्ण परमात्मा का शरीर कैसे हुआ एक मिनट एक मिनट यहीं पर वह कैसे प्रकट होता है पूर्ण परमात्मा की पूरी जानकारी तत्वदर्शी से सुने मैं वेद का मैं वेद ज्ञान देने वाला ब्रह्म भी नहीं जानता

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00:39:43:19 ठीक है यह अज्ञानी भी है और वह भी कौन है अज्ञानी ब्रह्म का ज्ञान भी इसी ने दिया है काल नहीं वो वेदों का ज्ञान भी इसी ने दिया है और गीता का ज्ञान भी इसी ने दिया है यह अज्ञानी भी है मतलब जिसने वेद दिए हैं वो अज्ञानी है और वह जो है गीता गीता का ज्ञान जो दिया वो भी अज्ञानी वो नहीं जानता है ठीक है उसका ज्ञान है यह जिसके आधार पर ये लोग सिद्ध कर रहे हैं कि कबीर भगवान है अब यदि कबीर भगवान यह कहते कि वेदों के आधार पर है तो वेद तो किसी अज्ञानी ने बोले हैं इन्हीं के अनुसार तो अज्ञानी की बोली हुई है कबीर वाली बात सत्य कैसे हो जाएगी वो भी झूठ है वो भी अज्ञानता है इसको हम बिल्कुल अभी निचोड़ लेंगे अभी आगे चलते हैं तो यह परमात्मा वो ज्ञानी भी नहीं है अब बा जाती है वैराग्य तो हम जानते ही है क्या काल में वैराग्य है क्या वह खाने के लिए फिरता है लोगों को वह बलात्कारी है भोगी है लालची है क्या इसको वैराग्य मानेंगे आप तो वो उसके अंदर ना तो ऐश्वर्य है ना ही उसके अंदर धर्म है ना ही उसके पास श्री है यानी लक्ष्मी जी है ना ही उसके पास जो है क्या

00:40:58:28 कहते हैं वह यश उसका यश है और ना ही उसके पास ज्ञान है और ना ही उसके पास वैराग्य है तो तुम लोग उसको भगवान किस आधार पर बोल रहे हो डो गलो है कोई जवाब अभी लिंक देंगे बताना किस आधार पर तुम लोग उसको बोलते हो भगवान झूठ का महल खड़ा कर रखा है किला बना दिया है झूठों का काल भगवान है और और इनके लिए भी यही सब बातें लिख रखी है ब्रह्मा विष्णु महेश ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान तो है मगर अज्ञानी है दिखाइए भैया इनका वीडियो अज्ञानी वाला ब्रह्मा विष्णु महेश ना तो ब्रह्मा विष्णु महेश के पास ऐश्वर्य है ना वह ज्ञानी है और क्योंकि वह समय समय पर कामुकता के वशीभूत हो जाते हैं तो वो जो है उनके पास ना वैराग्य है ना उनका यश है क्योंकि तुम तो उनकी बुराई कर रहे हो ना उनका यश है ना उनकी पास कीर्ति है कुछ नहीं है केवल तुमने नाम के लिए उनको माना है वरना यह विष्णु पुराण की परिभाषा के अनुसार सिद्ध कर दो कि काल को तुम भगवान कैसे मानते हो तुम्हारी बात तुम्हारी बात सेही कट रही है

00:42:16:00 ना समझ ना सार रहे अज्ञानी ये सारे ज्ञानी थे ब्रह्मा विष्णु महेश दुर्गा और इनका पिता सर पुरुष और योग्य ब्राह्मण ये सारे पढ

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→ Used in: A · Video रामपाल के ठोस बुद्धि भक्त #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj at 6:49 ↗

00:42:36:21 जो प्राणी समझे ना सार रहे अज्ञानी ये सारे ज्ञानी थे ब्रह्मा विष्णु महेश दुर्गा और ब्रह्म इनका पिता सर पुरुष और

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00:42:52:12 सतयुग के ब्राह्मण ये सारे अज्ञानी थे ठीक है अज्ञानी अभी और भी पोल खुलने बाकी है तो यह दोगलापन आपने देखा कि यह काल को भगवान कहते हैं काल भगवान काल भगवान ब्रह्म भगवान ब्रह्म भगवान मगर क्या उसमें एक भी पॉइंट इन्होंने स्वीकार किया है कि कोई भगवान वाला बात भगवान वाली बात है नहीं और आगे हम लोग यह भी करेंगे कि वह अविनाशी है तो अविनाशी कैसे नहीं है यह भी तोड़ेंगे हम आगे अगली सीरीज में जो ये कहते हैं वो जन्म वो जन्म लेता नहीं है मरता नहीं है वो आकार नहीं है ये है वो है जैसे कि एक जगह इन्होंने ये माना है मैं आपको थोड़ी सी हिंट दे दूं उसके बारे में इन्होंने एक जगह यह माना है कि अर्जुन से काल कह रहा है कि अर्जुन मैं बड़ा हुआ ब्रह्म वो बड़ा हुआ काल हूं ठीक है अब ये लोग मानते हैं जो श्री कृष्ण चंद्र है वो दो भुजाओं वाले हैं उनके शरीर से काल बोल रहा है तो जब वो बढ़ा हुआ शरीर है तो वो बढा हुआ शरीर जो है वो अर्जुन का नहीं है वो बढ़ा हुआ शरीर शरीर जो है वो काल का है तो अब बात ये आई कि अगर काल दिखाई नहीं दे रहा है तो क्या बढ़े हुए के रूप में काल दिखाई दे रहा है तो इनकी बात कट जाएगी क्योंकि इन्होंने कहा काल अव्यक्त है योग माया से छिपा के छिपा रहता है मगर यहां तो काल दिखाई दे रहा

00:44:07:19 है और अगर यह कहते हैं कि श्री कृष्ण का ही शरीर जो है बड़ा हुआ है उसी के चार भुजा निकल आई तो फिर ये इनको मानना पड़ेगा कि श्री कृष्ण का ही बड़ा हुआ शरीर रूप है वो वो अलग कोई शरीर नहीं है तो यह सब बातें हम लोग अगले उसम करेंगे अभी थोड़ा अभी सिस्टमिकली चले तो इनके अनुसार ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और यह जो इनका तथाकथित काल है ब्रह्म है यह जो है भगवान नहीं है यह केवल औपचारिकता के लिए हिंदुओं को बरगलाने के लिए जिससे कि हिंदू प्राथमिकता जब सुने कि अरे य तो ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान कह रहे हैं दुर्गा माता को भगवान कह रहे हैं भगवती कह रहे हैं तो इसलिए ये लोग कहते हैं कि भगवान है वरना इनकी नजरों में इनसे गया भीता कोई नहीं है ठीक है हिंदुओ सुन लो और ये कितने बड़े सनातनी है ना और कितने बड़े दोगले हैं ये भी आज पता चलेगा चलिए अब मैं आपको दिखाता हूं कि विष्णु पुराण में ब्रह्म के बारे में क्या लिखा है क्या कहता है पहले ब्रह्म का चैप्टर हम पूरा कर ले फिर हम बात

00:45:18:06 करेंगे तो यहां पर परिभाषा दी गई है जो यह है छठवां अध्याय व छठवां अंश पांचवा अध्याय और 66 से 68 श्लोक क्या लिखा है जो अव्यक्त अजर अचिंत अज अव्यय अनिर्देश अरूप पाणी पादा दि शून्य व्यापक सर्व गत नित्य भूतों का आदि कारण स्वयं कारण हीन स्वयं कारण हीन इसका और कोई कारण नहीं है स्वयं कारण हीन जिससे संपूर्ण व्याप और व्यापक प्रकट हुआ है और जिसे पंडित जन देखते हैं वह परम धान ज्ञान नेत्रों से देखते हैं पंडित जन वह परम धाम ही ब्रह्म है तो ब्रह्म का वास्तविक स्वरूप हमारा क्या है जिसका और कोई कारण ना हो परम अंतिम जो बिंदु है वही ब्रह्म है उसी को कहीं कहीं परम ब्र कह दिया जाता है ठीक है इसी कारण से हमारे यहां पर ब्रह्म सूत्र

00:46:33:08 लिखा गया है परम ब्रह्म सूत्र नहीं लिखा वेदव्यास जी ने जिन शास्त्रों के आधार पर आप अपने आप को सनातनी मानते हो ठीक है उन्होंने ब्रह्म सूत्र लिखा परम ब्रह्म सूत्र नहीं लिखा और बताऊंगा अभी और क्या है तो य देखते हैं मुमुक्षु को उसी का ध्यान करना चाहिए और वही भगवान विष्णु का वेद वचनों से प्रतिपादित अति सूक्ष्म परम पद है परम पद कौन सा है विष्णु भगवान ठीक है तो यह हो गया परम पद वाला मामला कि हमारा ब्रह्म कौन है हमारा और इसी ब्रह्म की आगे व्याख्या की गई है इसमें य भगवान वाली बात आई है कि भगवान किसे कह सकते हैं भगवत किसे कह सकते हैं ठीक है भगवान की हमने व्याख्या पढ़ ली ब्रह्म हमारा कौन है अब बात आती है कि वेदों में ब्रह्मचारी की बात हुई है ब्रह्मचारी आचार्य बनता है वेद में ठीक है वेद में वेद के अनुसार ब्रह्मचारी आचार्य बनता है इन्होंने अभी क्या दिखाया था इन्होंने अभी बताया था

00:47:44:25 कि गीता का वह ज्ञान गीता का जो ज्ञान वेद से मेल ना करे वह व्यर्थ है दिखा द 14 नंबर पेज दिखाइए इनको गीता का जो ज्ञान वेद से मेल ना करे वह व्यर्थ है 14 नंबर 14 हा यह इसमें है गीता का जो ज्ञान वेदों से मैच ना करे वह व्यर्थ है ठीक है वह गीता का व ज्ञान व्यर्थ है

00:48:28:12 उससे मेल नहीं करता वह ज्ञान वो गलत ज्ञान है ठीक है यह हमने ले लिया 130 नंबर पेज और निकाल दीजिए जरा अभी हम थोड़ी देर में व देने वाले हैं लिंक आज के जो विषय है उन पर हम लोग बात करेंगे आज सबको फ्री में भंडारा मिल रहा होगा इसलिए आज आएंगे नहीं हां यहां पर भी ने कहीं लिखा है कि वेद के विरु वेद के सम्मत जो वो है वेदों के अनुसार साधना साधन ना करने वाला पूर्ण मुक्त नहीं होता हां हां हा ये ये नीचे नीचे गीता अध्याय 17 पाछ में एक मिनट एक मिनट मिनट मुझे परमात्मा को कंस करने वाला है उन अ ज्ञानियों को तक भी वेद ज्ञान है इस इस अध्याय छ में हमें वेद का ज्ञान ग्रहण करना चाहिए और इसमें एक जगह यहां पर इसमें कहीं पर ये वाली पंक्ति भी आई है कि इसमें एक जगह यहां पर ये वाली पंक्ति भी आई है कि

00:49:43:18 वेदों के अनुसार साधना ना करने वाला जो है पूर्ण मुक्त नहीं होता यह भी आया है इसको पढ़ लेते हैं थोड़ा सा पता चल जाएगा इसको पढ़ते हैं एक मिनट रोक दीजिए अई घंटे 130 है ना हा टी सुनी पल साधक कहता है हा ऊपर ऊपर करिए थोड़ा और ऊपर करिए

00:50:20:14 थोड़ा हा नीचे चलिए नीचे एक मिनट एक मिनट यानी य यह लिखा है स्वास अमृत यानी ब्रह्म शरीर के हां देखिए इन श्लोकों में गीता ज्ञान दाता ने अपना बताया जो वेद विरुद्ध है और इसलिए जो है यह जो है गलत है ठीक है और वह पूर्ण मुक्त नहीं है ये लाइन स्पष्ट इसमें लिखी हुई है कहीं ना कहीं तो इसका मतलब यह है कि वेद के बाहर आप जब भी जाएंगे तो वो जो है अ वेदों के विरोध में अगर आप जाएंगे तो वह ग्रहण करने योग्य नहीं है वह गलत है तो अब बात आती है कि हमारे पास अथर्व वेद में लिखा हुआ

00:51:13:09 है अथर्ववेद में हमारे पास लिखा है कि अथर वेद गवा कांड और पांचवा स ये इस सूक्त का नाम है ब्रह्मचारी ब्रह्मचर्य सूक्त दिखा देता हूं ठीक है अब सबसे पहली बात तो यह है कि वेदों ने कहीं पर भी परम ब्रह्म सूत्र की बात नहीं की है प्र परम ब्रह्मचर्य की बात नहीं की है ब्रह्मचर्य की बात की है क्योंकि उनके लिए वे वेद के अनुसार शास्त्र के अनुसार ब्रह्म और परम ब्रह्म में कोई अंतर नहीं ठीक है मगर कहीं कहीं पर लोगों को समझाने की दृष्टि से परम ब्रह्म को अलग से इंगित कर दिया कि भाई अब तुम जो भी और भी परम सोच सकते हो ना तो परम ब्रम शब्द लिख दिया है मगर वस्तुतः ब्रह्म ही तत्व की आखिरी अंतिम जो स्थिति है वह स्वीकार की गई है तो इन्होंने कहीं पर भी परम ब्रह्मचर्य स्वीकार नहीं किया ब्रह्मचर्य का अगर एक भावार्थ निकाले तो ब्रह्म के लिए आचरण करने वाला सिखाने वाला यह ब्रह्मचारी होता है ब्रह्म के लिए ब्रह्म की प्राप्ति की

00:52:28:19 तो अब जो है ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है यह वेद कह रहे हैं और जो तत्वदर्शी है वह कौन है वो ब्रह्म के लिए आचरण नहीं करता है ना सिखाता है इनके अनुसार वो परम ब्रह्म के लिए आचरण करता है वेद कह रहे हैं ब्रह्म के लिए आचरण करने वाला आचार्य है गीता कह रही है कौन गीता कह रही है 15 एक में कि जो इनके अनुसार पूर्ण ब्रह्म के लिए जो आचरण करेगा वो तत्वदर्शी वो आचार्य है तो किसकी बात मानोगे यहां तो गीता विरोध कर रही है वेद का वेद कह रहे ब्रह्म के लिए आचरण करने वाला ही तत्वदर्शी आचार्य है संत है जो आपको पढ़ाए देखिए क्या क्या लिखा है ब्रह्मचारी पृथ्वी और सूर्य दोनों को पुनः पुनः अनुकूल बनाता हुआ विचर है यह पहला मंत्र उस ब्रह्मचारी में देवता गण अनुकूल मन के साथ रहते हैं वह ब्रह्मचारी पृथ्वी और लोक को लोक को धारण कर है वह तब से आचार्य को परिपूर्ण बनाता है ठीक है और क्या लिखा है इसमें आगे ब्रह्मचर्य ब्रह्मचारी की बात हो रही है और ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है सोवे में स्पष्ट है आचार्य कौ बनेगा जो ब्रह्म प्राप्ति के लिए

00:53:43:19 आचरण करे परम ब्रह्म प्राप्ति के लिए नहीं तुमको तुम्हारी बातों से पकड़ेंगे आचार कौन बनेगा जो परम ब्रह्म प्राप्ति की बात ना करे ब्रह्म प्राप्ति की बात करे तो ये ब्रह्म प्राप्ति की बात ये कर रहे ब्रह्मचर्य सूक्त इसमें कहीं पर भी वेदों में परम ब्रह्म सूक्त नहीं है तो गीता की जो बात आपने कही कि जो क्योंकि ब्रह्म को तो आप प्राप्त करने योग्य नहीं मानते हो आपका ब्रह्म ही कुछ नया है तो क्या हुआ कि गीता की जो बात उन्होंने आप ये मानते हो कि गीता में परम ब्रह्म को प्राप्त करने की बात की जा रही वो तत्वदर्शी है नहीं आपकी ही बात से आपकी बात कट रही है क्यों क्योंकि आपने एक जगह यह कहा है कि गीता का जो ज्ञान वेदों से मेल नहीं खाता है वो ज्ञान जो है ग्रहण करने योग्य नहीं है वेदों के बाहर ठीक है कोई उत्तर नहीं है आगे चलते हैं तो अब इसमें एक बात आ जाती है कि जैसे इन्होंने ये कह दिया एक जगह ये कहते हैं कि परमात्मा को पूर्ण तरीके से जानना जो है वो पूर्ण ज्ञानी है मगर इन्होंने 95 नंबर के पेज में कहा है कि काल को तत्व से पूर्ण तरीके से जान लिया वो पूर्ण ज्ञान है तो काल को यदि

00:54:58:20 पूर्ण ज्ञान अगर इनकी यह बात मानी जाए कि काल को तत्व से जानने वाला पूर्ण ज्ञानी है तो काल को काल को इन्हीं के अनुसार जो है वेदों से गीता से जाना जा रहा है ठीक है और वोह कौन है जो ब्रह्मचारी परम ब्रह्मचारी नहीं ब्रह्मचारी तो जब तो जब ब्रह्मचारी की बात हो रही है तो तत्व ज्ञानी कौन सिद्ध हुआ जो काल को इनके द्वारा खड़े हुए काल को जो पूर्ण तरीके से जानता है जिनकी बात वेदों में हुई है जिनकी बात जिसकी बात गीता में हुई है वो जो जानता है वह तत्वदर्शी है वह प्रामाणिक आचार्य वेदों के अनुसार ठीक है

00:55:37:16 अच्छा एक बात इसमें और कही गई है 95 नंबर के पेज पर कि जो गीता ज्ञानदाता की घिनौनी वास्तविकता को जानकर य 95 नंबर का पेज निकाल दीजिए जो इनके इन्होंने क्या क्या घटिया बटिया बोला है उसके बारे में अपने काल के बारे में वो दिख जाएगा 95 में देखिए लिखा है इनके जो काल को तत्व से जान लेता है वह पूर्ण ज्ञानी पुनर्जन्म को प्राप्त नहीं होता तो लो अब जो है परमात्मा को भी तत्व से नहीं जानना है इनके ही अनुसार ब्रह्म को तत्व से जानने वाला पूर्ण ज्ञानी है और पूर्ण पुनर्जन्म को प्राप्त नहीं यानी कि तत्वदर्शी इन्हीं के अनुसार तत्वदर्शी कौन है जो काल को ब्रह्म को जानता है और ब्रह्मचारी की पहचान अथर्ववेद में दी गई है 11 पा 16 उल्टे वृक्ष की अगर बात करो तो गीता में उल्टा वृक्ष भी दिया गया है मगर अभी उसकी आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि आपके अनुसार तत्वदर्शी जो है वह ब्रह्म को प्राप्त करने की नहीं बल्कि परम ब्रह्म को प्राप्त करने की शिक्षा देता है तो वेदों वेदों के अनुसार जो आचार्य है प्रामाणिक वह कौन है जो ब्रह्म को प्राप्त करने की शिक्षा दे

00:56:52:25 ठीक अब इसमें एक चीज और है जो गीता ज्ञानदाता की घिनौनी वास्तविकता वो लगाइए जरा भाई 95 नंबर पेज उसी में घिनौनी वास्तविकता शब्द आया है ऊपर जाइए हां बस बस बस गीता के अध्याय एक मिनट काल ब्रह्म कह रहा है अर्जुन मेरी जन्म मृति होती है इसे तू नहीं जानता यही प्रमाण यह है यह है ब्रह्मा विष्णु महाविष्णु महाशिव में रहता है इसकी इतनी इतनी प्रलय की जानकारी है मेरे जन्म कर्म है तत्व से नहीं जान लेता वह शरीर त्याग कर मेरे जाल में फसा रह जाता है तो बारबार काल इसमें स्वयं को तत्व से जानने की बात कर रहा है ठीक है और वेदों में भी काल यानी ब्रह्म को जानने वाले को ब्रह्मचारी को ही आचार्य कहा है रुक जाओ रुक जाओ जो एक मिनट घटिया शब्द ढूंढना है हमें पैदा करता है उनमें स्वयं प्रवेश करके गुप्त रूप से अपना उल्लू सीधा करता है तथा अपने आप को आकार में प्रकट नहीं करता य ध्यान देखिए ये लोग एक जगह कह रहे हैं कि वो बढ़ा हुआ काल है बढ़ा हुआ आकार हो गया जब बढ़ा हुआ है तो आकार हो गया उसका और यहां पर कह रहे हैं कि वह अपने आप

00:58:07:25 को आकार में प्रकट नहीं करता इसका यह अटल अविनाशी नियम है कि वह अपने वास्तविक रूप को प्रकट नहीं करता है और यहीं पर इनके लिए इनके इन्होंने अपने तथाकथित काल के लिए घटिया शब्द का उपयोग भी बहुत अच्छे से किया है खर अब हम इसमें थोड़ा नीचे आइए नीचे काल अपने भक्त को महा स्वर्ग काल अपने भक्त को महा सर्ग यानी ब्रह्म लोक में भेजकर कुछ लंबे समय तक यह है पु क्योंकि वह भक्त पू तत्व भक्ति करे अद्भुत है जो मुझे इस प्रकार जान लेता ब्र विष्णु म को छोड़कर मेरा मेरे ही तो इनका जो है अविनाशी भाव है घटिया भाव है और वो कभी खत्म नहीं होगा वो अविनाशी है ठीक है पूर्ण ज्ञानी काल के जाल में नहीं रहते ठीक है तो अब क्या है अब सबसे जरूरी बातें अब आपको बहुत ज्यादा बहुत बड़ा आज पर्दाफाश होने वाला है वह क्या पर्दाफाश है कि एक तरफ यह कहते हैं कि गीता का जो ज्ञान वेदों से मेल ना कर मेल ना खाए या जो भी ऐसा ज्ञान हो जो वेदों से मैच ना करे वो व्यर्थ है

00:59:23:12 वेदों के अनुसार साधना ना करने वाला पूर्ण नहीं पूर्ण मुक्त नहीं है यह दो चीजें इन्होंने वेद के लिए कह दी तो पहली बात तो जो ब्रह्मचारी जो वेदों में वर्णित है ब्रह्मचारी आचार्य बनता है उसका आलंबन ला लेके गीता के तत्वदर्शी का आलंबन लेगा तोव वेद विरोधी है इसलिए इन्हीं के अनुसार उसको नहीं माना जाना चाहिए दूसरी बात अब ये वेदों के विरोध में क्या कहते हैं ये विरोध में यह कहते हैं वेदों के विरोध में 34 नंबर पेज निकालिए जरा

01:00:05:06 34 यह जीजी के चल रही जीजी के आशा करता हूं आज आप लोगों को काफी अच्छा लग रहा होगा देखो वेदना वेदों में वर्णित साधना से विधि के विकार नहीं मिटते और इसमें इन्होंने यह कहा है कि 34 हो गया इसी में इन्होंने लिखा है कि वेदों में वर्णित पूजा का तरीका ब्रह्म प्राप्ति का नहीं है यानी कि एक तरफ ये कह रहे हैं कि मतलब परम ब्रह्म प्राप्ति का नहीं है इसी में इन्होंने यहां पर कहीं कहा है इस पेज पर ही कि कुटिया में रहते थे जो नीचे जाइए नीचे जाइए और नीचे चलिए हम और नीचे चलिए पूर्ण ब्रह्म की साधना के अतिरिक्त परम ब्रह्म ब्रह्म अन्य श्री ब्रह्मा जी विष्णु जी जैसा कर्म किया वैसा फल मिलता है और अगला पेज आ जाइए अगले पेज प

01:01:06:19 आइए तो यहां पर इन्होंने देखिए यह नीचे आई वेदों व गीता जी का ज्ञान तो श्रेष्ठ है काम यह सब परंतु भक्ति की साधना केवल काल की प्राप्ति की है तो इन्होंने क्या बता दिया कि गीता के अनुसार ज्ञान देने वाला जो है तत्वदर्शी नहीं हो सकता क्योंकि गीता और वेद के अनुसार जो प्राप्त हो सकता है वह काल हो सकता है केवल केवल काल और दूसरी एक बात यह भी है कि हां देखिए यह जो प्रणव है है ना प्रणव नाम का ज जप

01:01:53:02 तथा पांचों यज्ञ तथा घोर तप ठीक है ही पूर्ण ब्रह्म की साधना मान लिया परंतु यह साधना केवल ब्रह्म तक की है

⬜ Not used yet · 01:02:01:19 – 01:20:37:21 (18:36)

01:02:01:19 इसी में यह लाइन स्पष्ट है कि कि वेदों का जो ज्ञान है वह पूर्ण ब्रह्म की प्राप्ति का नहीं है ठीक है यह भी आप चेक कर लीजिएगा और गीता द्वारा मुक्ति नहीं मिलती है 35 नंबर पेज निकालिए यह देखिए ब्रह्म साधना ब्रह्म यह ब्रह्म साधना घटिया है तो अब जो है तत्वदर्शी जो है जो भगवान नहीं है उसका मंत्र क्यों दे रहा है जो भगवान नहीं है उसको भगवान के रूप में क्यों कह रहा है उसका मंत्र दे रहा है प्रणव कह रहा है ना व वो प्रणव तत्सत और दूसरी बात कि गीता के अनुसार जो तत्वदर्शी है एक मिनट रुक जाइए गीता के अनुसार जो तत्वदर्शी है तो गीता के अनुसार तत्वदर्शी जो है उसके द्वारा आपको मुक्ति प्राप्त नहीं होगी यह इन्होंने ही डिक्लेयर कर दिया तो इनकी बातें आपस में ही कितना कट रही है पहले तो गीता के आधार पर किसी को तत्वदर्शी बनाओ और फिर यह कह दो कि गीता में गीता के अनुसार जो है आपको ब्रह्म की प्राप्ति होगी ही नहीं अच्छा दूसरी बात यह कह रहे हो कि वेदों के विरुद्ध जो भी बात होगी वह ग्रहण करने योग्य नहीं है तो आप यहां पर जब यह कह रहे हो कि वेदों द्वारा परम ब्रह्म की प्राप्ति नहीं हो सकती तो आप यहां वेदों का विरोध कर रहे हो जब आप यह कह

01:03:16:20 रहे हो कि वेदों में क्या यह बात कहीं वेदों में लिखी है क्या वेदों के द्वारा परम ब्रह्म की प्राप्ति नहीं होगी तो आप यहां पर विरोध कर रहे हो वेदों का इस बात को काट दो तो की इतनी खिचड़ी इन्होंने पकाई है इसमें अच्छा वेद कहने वाले को ब्रह्म ज्ञान नहीं है लो लगाइए भैया ये 39 नंबर का पेज निकालिए 39 थोड़ा सा बुक नहीं है ना मेरे पास इनकी पीडीएफ से दिखाना पड़ रहा है तो दिक्कत आ रही है 39 नंबर पेज और इसमें एकांत में पवित्र गीता अध्याय आठ फिर अध्याय जिसका

01:04:01:02 विन साधक परमात्मा नीचे करिए नीचे चलिए ये देखिए यहां पर देखिए पवित्र वेदों को बोलने वाले ब्रह्म ने कहा कि पूर्ण परमात्मा के विषय में ये है ऐसे करके और लास्ट में उसने कहा मैं वेद का ज्ञान देने वाला ब्रह्म भी परम परम परम ब्रह्म के बारे में नहीं जानता तो भैया देखिए सनातनी कौन है हिंदू कौन है जो यह मानता है कि वेद आदि जो शास्त्र है उनके द्वारा हमें मुक्ति मिलती है उनके द्वारा हमें मोक्ष मिलता है उसे हिंदू माना जाता है उसे सनातनी माना जाता है यह क्या कह रहे हैं कि वेदों के द्वारा पहली बात तो वेदों को बोलने वाला ही अज्ञानी है ठीक है और दूसरी बात यह है कि वेदों के द्वारा मुक्ति नहीं है यह भी इन्होंने मान लिया और अब इनके तत्वदर्शी को भी तबाह करते चले पूरी तरीके से एक एक तरीके से तो हमने क्या तवा किया तत्वदर्शी को कि तत्वदर्शी कोई काम का नहीं है क्योंकि वह जो ज्ञान है वह परम ब्रह्म के लिए इनके अनुसार और वेद में ब्रह्म ब्रह्मचारी को ब्रह्म के लिए आचरण करने वाले को प्रामाणिक आचार्य कहा है ठीक है तो आपके तत्वदर्शी की आवश्यकता

01:05:16:12 नहीं है आप ही के अनुसार क्योंकि गीता का जो ज्ञान वेदों के विरोध में हो वो ज्ञान स्वीकार करने योग्य नहीं है यह आप ही ने लिखा है तो आप पहले सोच के आओ करना क्या है आपको अब इनका पेज नंबर दिखाओ इनको 40 अब इनका तत्वदर्शी भी निकाल ले बिल्कुल आज तत्वदर्शी का तो एंड है यह मान लीजिए हां नीचे

01:05:51:07 चलिए देखिए देखिए देखिए देखिए देखिए यग के द्वारा देखता हू और नीचे चलिए ऊपर ऊपर चलिए ऊपर ऊपर चलिए हेडिंग दिखाइए इस पेज की हेडिंग क्या है और ऊपर चलिए हां हां हां नीचे जा नीचे जा नीचे जा नीचे जाइए डिंग निकल गई ना और नीचे जाइए और नीचे जाइए बा यज्ञों का लाभ मुक्ति नहीं है क्या है यज्ञों का लाभ यानी यज्ञ करने से मुक्ति नहीं है यज्ञ से मुक्ति नहीं मिलेगी अब इनका तत्वदर्शी का देखिए कैसे तेल निकलेगा अब आप चलिए भैया इनका वो मुझे पेज नंबर नहीं मालूम है आप चार 433 लगाइए 433 433 लगाइए इन्होंने यहां पर ये मान लिया यज्ञ से मुक्ति नहीं है ठीक अब इनके तत्वदर्शी की सच्चाई देखिए 4 34 प जाना है चौथा अध्याय 34 वा श्लोक उसका पेज नंबर

01:07:06:10 नहीं र चौथा अध्याय च सवा श्लोक नहीं नहीं वो अध्याय ऊपर लिखा होना चाहिए 14

01:07:41:06 हां मैं आपको इससे बता दे रहा हूं इसमें देर लग जाएगी भगवत गीता में क्या लिखा हुआ है हिंदी वो बता दे रहा हूं रहने दीजिए हटा दीजिए चौथा अध्याय इनका जो तत्वदर्शी है ना वो इनको पता चलेगा आज क्या है इन्होंने माना कि यज्ञों से मुक्ति नहीं होगी ठीक है और चौथे अध्याय के यह जो 34 वा श्लोक है ना इसमें कहते तत्वदर्शी के पास जा तो क्यों जा वो 33 में बताया है यहां पूरे चैप्टर में शुरू से यज्ञ की बात ही चल रही है तो यहां पर भगवान ने कहा है कि फलाने यज्ञ से ज्यादा अच्छा फलाना यज्ञ होता है अब 33 में कहा कि फलाना यज्ञ श्रेष्ठ है अब 34 में कहा कि उस यज्ञ का यानी उस ज्ञान का कौन सा ज्ञान यज्ञ का ज्ञान यज्ञ का ज्ञान लेने के लिए तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जा तो तत्वदर्शी जो होगा वह आपका आपको क्या देने वाला है यज्ञ का ज्ञान और इन्होंने क्या लिखा है यज्ञ के ज्ञान से मुक्ति

01:08:56:18 नहीं है तो देखा कितनी बड़ी सटर घोट इन्होने की है अभी इनकी जो बुक्स है ना ठीक से आई नहीं है हाथों में यह लोग जो यह करते ना ज्ञान से ज्ञान को काटेंगे अब इनसे पूछिए यज्ञों से मुक्ति नहीं है यज्ञों का ज्ञान देने ज्ञान प्राप्त करने के लिए तत्वदर्शी के पास जाना है तो जब उससे मुक्ति नहीं है तो तत्वदर्शी के पास जाने से आपको मुक्ति नहीं मिल ने वाली और जो अगर इस इस बात को एक साइड कर दो दूसरी बात ले लो वो क्या है कि गीता का वो ज्ञान जो वेदों से मेल ना खाए वो ज्ञान ग्रहण करने योग्य नहीं है तो तो वेद कह रहे हैं ब्रह्मचारी वो मुक्ति दिलाएंगे उसम मुक्ति शब्द भी आया है गवे मंडल के गवे कांड के पांचवे सूक्त के जो सूक्त है पूरा ब्रह्मचर्य सूक्त पहली बात तोय परम ब्रह्म सूक्त क्यों नहीं है परम ब्रह्मचर्य यह सूक्त क्यों नहीं है ब्रह्मचर्य क्यों है क्योंकि ब्रह्म ही अल्टीमेट वो है उसमें परम लगा के कहीं कहीं भावों को व्यक्त किया जाता है अंत तो गत्वा हर जगह हमने प्रमाण कई सारे दे दिए ब्र ब्रह्म और परम ब्रह्म एक ही है ठीक है

01:10:12:15 अब वेद कह रहे हैं ब्रह्मचर्य करो ब्रह्मचारी के पास जाओ ब्रह्मचारी को आचार्य बनाओ गुरु बनाओ और गीता कह रही है कि आपके अनुसार गीता कह रही है ब्रह्म से अलग कोई परम ब्रह्म है अगर वो परम ब्रह्म ब्रम एक ही है तो तो कोई बात नहीं मगर वो यदि ब्रह्म से अलग कोई परम ब्रह्म है तो गीता यदि उसके पास जाने को कह रही ज्ञान लेने के लिए तो गलत है क्योंकि व वेद के विरुद्ध है और ऐसे भी वेद के विरुद्ध है कि आपने कहा कि जो यज्ञ है उनसे मुक्ति नहीं मिलती मगर आप जो है तत्वदर्शी उसी को कह रहे हो जो यज्ञ का ज्ञान दे ठीक है आप ही की बात अब दूसरी बात एकय आती है कि जब ये यह कह रहे हैं कि वेद जो है पूर्ण ब्रह्म की बात नहीं करते वेद को कहने वाला वह ज्ञानी नहीं है तो इसका मतलब अगर यह यह कहते हैं कि उसमें कबीर की बात की है तो वोह कबीर जो है वह परमेश्वर नहीं है क्योंकि यही कह रहे हैं कि वेदों के द्वारा पूर्ण ब्रह्म की प्राप्ति नहीं है पूर्ण ब्रह्म की बात ही नहीं है उसमें वेद और गीता में इतना सारा दुराचार करके

01:11:27:16 रखा है शास्त्रों का हम वेद को मानते हैं मगर वेद के द्वारा मोक्ष नहीं है हम वेद के यज्ञ को मानते हैं मगर यज्ञ के द्वारा मोक्ष नहीं है हम गीता को मानते हैं मगर गीता के द्वारा भी मोक्ष नहीं है हम वेद को मानते हैं मगर उसके द्वारा परम ब्रह्म को जाना नहीं जा सकता हम वेद को मानते हैं मगर उसको कहने वाला उसको बताने वाला अज्ञानी है मूर्ख है हम काल को भगवान मानते हैं मगर वह झूठा है लालची है बलात्कारी है व्यभिचारी है उसके पास ऐश्वर्य नहीं है उसके पास कुछ नहीं है तो कंक्लूजन सर अगर मैं दूं कि यह जो मुखौटा पहनते हैं कि हम वेदों के वेदों के अनुकूल भक्ति बताते हैं शास्त्रों के अनुकूल भक्ति बताते हैं यह जो चित्र छपते हैं इस नाम पर यह आपको अंदर यह बताते हैं यह शास्त्र क्यों क्यों गलत है समझ में आया कुछ यह जिसका नाम लेकर के आपको अपने पास बुलाते हैं ना यह अंदर किताब के अंदर यही बताते हैं कि ये जिनका नाम देखकर तू हमारे पास आया है यह लोग तो गलत लोग है जिन शास्त्रों को देखकर तू हमारे पास आया है

01:12:42:18 य शास्त्र तो गलत शास्त्र है अधूरे हैं अपूर्ण है गलत है इसलिए यह कहते हैं कि हम जो है शास्त्रों के अनुकूल भक्ति बताते हैं क्योंकि य उन शास्त्रों की बुराई करते हैं उसके अंदर बुराई अब मान ना समझे वेदों को जो ना माने वेदों का खंडन कर दे तुमने बात जो लिख दी है ये वेदों में वर्णित साधना जो है वो मुक्ति नहीं मिलती उससे यज्ञ से मुक्ति नहीं मिलती या वो उसमें पूर्ण परम ब्रह्म तक पहुंचाने वाली बात नहीं है यह कहीं लिखी है वेदों में बात अब तुम कहोगे तत्वदर्शी तो बता रहा है तो तत्वदर्शी को तत्वदर्शी से सिद्ध करो अब सिद्ध कहां से करोगे तो सिद्ध हो ही नहीं रहा क्योंकि तुम पहले ही कह चुके कि उनके अंदर पूर्ण ज्ञान है ही नहीं अज्ञानी ने कहा है वो सब अज्ञानी की बात पर भरोसा कैसे करोगे तो अज्ञानी के अनुसार यदि किसी को तुमने तत्वदर्शी कलवा भी दिया तो वो तत्वदर्शी कैसे

01:13:42:21 होगा पूरा इन्होंने बवंडर मचा रखा है तो यह जो कहते हैं ना शास्त्र अनुकूल भक्ति इसका अर्थ ये होता है ये जब आप इनके शास्त्रों को पढ़ोगे तो उसमें आपको यह पता लगेगा कि इन शास्त्रों में क्या लिखा हुआ है इन शास्त्रों की इन शास्त्रों को लिखने वाले की इन शास्त्रों को देने वाले की बुराई और फिर इनको छोड़ कर के क्रिश्चन की तरह आप धीरे से इनके दूसरा जो उन्होंने अपने आप अपने मन से जो कुछ बना लिया है जो भी है उस पर चले जाओ अब कोई आ जाए भाई यह जो इतना सारा तुम्हारा है तुम वेदों को मानने वाले सिद्ध नहीं होगे तुम काल को भगवान मानने वाले सिद्ध नहीं होंग तुम ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान मानने वाले सिद्ध नहीं हो गे तुम गीता को गीता को प्रामाणिक मानने वाले सिद्ध नहीं होंगे उन श्लोकों के बाद जो जिन श्लोकों को तुम कहते हो कि काल ने बोल दिया है अपने मन से एक दिन की बात है ये जिस दिन पीछे पड़ गए ना ऐसी चिंदी में हिंदी एक एक निकाल के रख देंगे ना कि खंडन भी एक बार को सोचेगा कि कहां मैं छुप जाकर

01:14:52:15 के और जो कंक्लूजन लाइन है वो पता है क्या है य आपको बुलाते हैं कि आओ आओ वेदों में प्रमाण है गीता में प्रमाण है ये है वो हैय सब करके आपको बुलाते तो हैं मगर इनके अकॉर्डिंग गीता और वेद में पता है क्या बताया है जो आपको नहीं करना है ये इन्होंने स्वीकार भी किया है आपको क्या नहीं करना है ब्रह्म की भक्ति नहीं करनी है तो इनका ज्ञान कहां तक सीमित है वेद गीता का ज्ञान ब्रह्म तक पूर्ण ब्रह्म तक नहीं है वो लाइन दिखा इनका ज्ञान जो है पूर्ण ब्रह्म तक नहीं

01:15:40:25 है शायद 34 नंबर पेज पर है वेदों में वर्णित जो पूजा है साधना नहीं मरते नीचे जाइए नीचे जाइए और नीचे पूर्ण ब्रह्म की साधना के अतिरिक्त परम ब्रह्म ये है यहीं पर कहीं पर लिखा हुआ है हम अगली बार कभी दे देंगे आपको पढ़ा था आज हमने तो वेदों में वर्णित जो ज्ञान है यज्ञ है ये सब वो त वहां तक नहीं है पूर्ण ब्रह्म तक नहीं है वो ब्रह्म तक रह जाता है ब्रह्म तक सीमित है वो परम ब्रह्म तक नहीं है तो इसका मतलब क्या हुआ ये ये कह रहे हैं कि हम वेदों को गीता को मानने वाले हैं क्योंकि हम उसके आधार पर आपको यह बताते हैं कि वेद और गीता को क्यों ना मानू बस वेद और गीता को क्यों नहीं मानना है इसलिए और तो और उसमें इनकी एक चोरी यह फस जाती है कि फिर भी य उन्हीं के उन्हीं में कहीं पर अपना कबीर भी ढूंढ लेते हैं तो इन्हीं की बात से इन्हीं की बात कर जाती है जब वेदों का ज्ञान ब्रह्म तक सीमित है पूर्ण ब्रह्म तक नहीं है इनका वाला पूर्ण ब्रह्म हमारा तो पूर्ण ब्रह्म वही है ब्रह्मी है मगर इनका ब्रम अलग है

01:16:56:01 ठीक है तो जब ये यह कह देते कि वेदों का ज्ञान जो ब्रह्म तक सीमित है और उसी में फिर कबीर को ढूंढ देते तो वह कबीर भी पूर्ण ब्रह्म सिद्ध नहीं होगा ठीक है तो कंक्लूजन लाइन यही है कि वेद और गीता के मानने का दावा करने वाले जो य लोग हैं हा वेदों के अनुसार अब यहां पर देखिए क्या दोहरी बात बोल रहे वेदों के अनुसार साधन ना करने वाले पूर्ण मुक्त नहीं है और दूसरी जगह वेदों के अनुसार वेदों का जो वो पूर्ण नहीं है उनको मुक्ति नहीं मिलेगी ठीक है अभी हमने पहले दिखा दिया है वो वाली लाइन वो पीछे है जहां पर लिखा है कि जो वेदों का ज्ञान है वह वही ब्रह्म तक सीमित है यह वाला निकालिए गीता का जो ज्ञान है

01:17:50:18 यह वह है तो पूर्ण जो गीता ज्ञान दाता गिनोना है अभी एक ब एक जगह आया था ना गीता और वेद का ज्ञान है वो है तो अच्छा ज्ञान मगर वो ब्रह्म तक सीमित है तो ब्रह्म तक यदि उनका ज्ञान सीमित है तो तत्वदर्शी अगर जो गीता के अनुसार है व आपको ब्रह्म का ज्ञान देने वाला है मुक्ति का ज्ञान देने वाला नहीं है और यदि उसके अंदर वेदों के अंदर कबीर है तो वो पूर्ण ब्रह्म नहीं है इनके अनुसार वो ब्रह्म तक ही सीमित है क्योंकि वेद और गीता तो यह सारी इनकी पल थी और मेरे को जो खून का घूंट पीना पड़ा वह लाइन भी मैं आपको दिखा देता हूं हां यह देखिए वेदों का ज्ञान तो श्रेष्ठ है परंतु भक्ति की साधना केवल काल ब्रह्म की प्राप्ति की है ठीक है तो परम ब्रह्म की और एक जगह बिल्कुल स्पष्ट आया वो ब्रह्म तक सीमित है वो लाइन भी आई है तो अभी हम लोग ये बात कर रहे थे कि मेरा जो आज पढ़ते पढ़ते जो है मैंने खून का घूंट क्यों पिया मैं वो भी आपको दिखाऊंगा अब इधर देखिए कैसे जहर गोलते हैं हमारी

01:19:06:10 माता के बारे में हमारे मन में वो देखिए 89 नंबर पेज दिखाइए जरा हां देखिए इन्होंने कितनी चालाकी से उनके बारे में कितनी घृणा योग्य बातें की है जब वह रामचंद्र जी भाव हील हो रहे थे माता सीता के लिए तो वह प्रकरण है जिसमें कि जो मां पार्वती उनकी परीक्षा लेने जाती है तो देखिए ये जो लाइन है ना बीच में आ जाइए बीच में उमा गौरी बोली भगवान कभी रोते क्यों नहीं मैं तो इनकी परीक्षा लूंगी अब देखिए परीक्षा लेने का तो बहाना चालू हुआ इनके अनुसार कौन है जिसने तब इसको प्रम एक मिनट मिट ज्यादा नीचे क्यों जा रहे हैं बीच का पैराग्राफ है थोड़ा ऊपर जाइए हा ये उमा गौरी उमा गौरी से शुरू हो रहा है सेकंड पैराग्राफ हा उमा गौरी बोली भगवान कभी रोते

01:20:21:13 हैं क्या मैं तो इनकी परीक्षा लूंगी तब इसको प्रणाम करूंगी भगवान शिव बोले कि परीक्षा मत लेना मगर उन्होंने कहा मैं तो इनकी परीक्षा लूंगी देखो इन्होंने कितना घिनौना लिखा है इसके बाद कि परंतु शिव जी के

01:20:37:21 दूर जाते ही छिपकर सीता जी का रूप बनाकर यह बोलकर कि मुझे सीता जानकर प्यार व संतोष करेगा समझ

⬜ Not used yet · 01:20:48:04 – 01:47:41:13 (26:53)

01:20:48:04 गए यह कैसे जहर घोला जा रहा है आपकी मां के बारे में कैसे जहर घोला जा रहा है आपके भाइयों के मन में पढ़ लो उन्होंने क्या सोचा था क्या सोचा उन्होंने कि मुझे सीता जानकर प्यार और संतोष करेंगे किस ओर ले जा रहे हैं यह धर्म के नाम पर आपको जितना क्रोध प्रकट किया जाए उतना कम है मगर हिंदुओं अब भी तुम्हारी आंखें अगर ना खुले ना तो शर्म है

01:21:27:00 दे दो भाई लिंक किसी को आना हो तो आ जाए शास्त्रों के साथ दुराचार करने वाले लोग हैं दुराचार हम शास्त्र को मानते हैं क्यों क्योंकि हम यह बताते हैं उन शास्त्रों के अर्थ में कि इन शास्त्रों को क्यों ना माना जाए यह है कंक्लूजन यह है रामपाल एंड कंपनी हम ब्रह्म को भगवान मानते हैं और ब्रह्म को भगवान मान हुए यह बताते कि ब्रह्म कितना घटिया है कितना अनुत्तम

01:22:03:26 है दे दो भैया लिंक दे दो इनको अब चेहरा लेकर जो आए वही आए बिना चेहरे के नहीं बात की जाएगी सात्विक जी कैमरा ऑन कर लीजिए

01:22:44:27 अपना रौनक जी कैमरा ऑन कर लीजिए अरे भाई उनका कोई हमारे पास संपर्क सूत्र नहीं है आप लोग कहते हो लाइव में हम बात करेंगे कोई संपर्क सूत्र नहीं है उनका हमारे पास जोगेंदर जी ऊपर आ जाइए आपका भांडा फोड़ देंगे आपका भी आपके तर्ष दर्शी संत का

01:23:34:00 भी बैठ के बात करें आवाज आ रही है आपको अरे भाई वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है मगर वेद तो परम ब्रह्म की बात नहीं करते आपके ही अनुसार रछ दर्शी की बात नहीं मानोगे क्या वेद तो ब्रह्म तक की बात करते हैं

01:24:16:27 बस देखो क्या बोल रहे हैं भगवान भी है और कसाई भी है पढ़ लो यह सिखाया तुम्हारे भाइयों को तुम लोग कहते हो ना तुम सबकी पोल क्यों खोलते हो इसलिए खोलनी पड़ती है कोई है नहीं क्या सब भंडारा खाने गए हैं क्या महादेव महादेव सात्विक जी आप कैमरा ऑन

01:25:14:24 कर हा एक बात मैं और याद दिला दूं कि काल को श्राप मिला था कि वो पता नहीं कितने जीव को डेली खाएगा तो वो साकार निराकार उसकी जन्म और मृत्यु होती है कि नहीं ये अगला चैप्टर हम लोग उसम बात करेंगे मगर अभी मैं एक बात बताऊं कि यदि किसी व्यक्ति ने कोई पाप किया उस व्यक्ति को सजा य दी गई तू एक एक लाख जीवों को रोज खाएगा और उसका जीवों को खाना बुरा कार्य है आपके अनुसार तो उसको यह जो श्राप दिया है कि उसको खाना है वो बुरा नहीं

01:25:51:22 है कहीं से ये जो आज जो पता चला है ना आप लोगों के बारे में आप लोग कहीं से मुंह दिखाने लायक नहीं हो पूरी दुनिया से कहीं पर भी राम रामपाल को मानने वाला हो तो व आ जाए सामने अभी हर हर महादेव शिवान से भाई हर हर महादेव पा नमस्कार भैया जय श्री राम मतलब आज पूरा खोल के रख दिया इनका हां प्रस कर रहा हूं कि इनके जो दो चार मोटी मोटी इनकी जो जरूरी जो मेन मेन पुस्तक है ना मेरे पास आ जाए अभी तो पीडीएफ से पढ़ा है तो ये निकला है अभी तो ये लोग माने नहीं ना तो फिर मैं एक एक जो गीता का इन्होने जो एक एक बात बोली है ना एक एक लेंस लेकर के बैठेंगे इसम सबसे बड़ा सरद क्या पता है इनकी गरमा गीता की पढ़ोगे आप भाई जैसे मैंने कुछ भी पढ़ा कुछ भी कहीं से भी पढ़ लो व तुरंत अरे इसका तो ये तो गलत लिखा है अब जब मैं उसको गलत सोचूंगा तो उसके लिए जानकारी प्रमाण वगैरह नोट करने चला जाऊंगा हा जितनी बार में उसके लिए प्रमाण निकालने जाऊंगा जहां जाऊंगा वहां पर फिर दूसरी नई बात यह भी गलत है

01:27:07:21 आप ये सोचने लगोगे कि मैं शुरू करूं तो कहां से करूं यह दिक्कत हो जाती है पूरी खिचड़ी बना रखी है मतलब पूरा बिल्कुल सटर भाई अगर आप गीता के आधार पर वो वेदों के आधार पर गीता को नहीं मानते हो तो आप बाद में वेदों का भी खंडन कर रहे हो वेदों को भी लिख रहे हो अच्छा आपने ये बात कैसे बोल दी कि वेदों में पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान नहीं है यह कहीं लिखी है क्या गीता में पुराण में उपनिषद में वेद में कहीं लिखी है क्या कहीं नहीं लिखा है अच्छा अब ये बात तत्वदर्शी कह रहा है अच्छा तत्वदर्शी कौन है जो गीता गीता में तो पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान है ही नहीं तो उसका ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी हमारे काम का कहां से हो जाएगा ब्रह्म का ज्ञान देने वाले को ब्रह्मचारी कह रहे हैं जो गीता में जो बात आई है वह ब्रह्मचारी के विरुद्ध आई है वो तो परम ब्रह्मचारी है इनके अनुसार जो गीता का ज्ञान जो गीता का तत्वदर्शी है वह परम ब्रह्मचारी है और वेद क रहे ब्रह्मचारी तो वेद के विरुद्ध इन्होने कहा कि वेद के विरुद्ध गीता की कोई बात मान नहीं पागल कर दिया इन्होने मुझे जीजी के पागल लोग

01:28:23:06 निकालेंगे पागल कर दिया पागल कर दिया मैं तो आपकी हिम्मत की दात देता हूं कि इतनी कॉमेडी बुक आपने पढ़ी और बिना हसे पढ़ी आपने अरे मुझे रोना आ गया वो ये वाली जो लाइन थी ना ये पढ़ के दिमाग खराब हो गया ऐसा लगा जैसे हां कुछ बहुत गंदी बातें लिखी है शब्द नहीं है इतना बुरा लगा मुझे वो पढ़ के भैया मैं कुछ बात बोलना चाहूंगा जी अब जैसे यह जो रामपाल वाले हैं यह भगवान श्री कृष्ण को काल बताते हैं और द्वापर युग में यह बताते कि मुनंदर नाम से कबीर जी आए थे और वोह भगवान थे तो मुनंदर जी थे वो खुद ने ज्ञान क्यों नहीं दिया इनको काल का ही ज्ञान क्यों देना है फिर वो भी तो खुद भी तो ज्ञान देना चाहिए था ना उसको वो खुद ज्ञान क्यों नहीं दिया वो खुद अपने ग्रंथ बनाता खुद उसकी परिपाटी चलाता कह दिया वेद का ज्ञान बोलने वाला जो है वह अज्ञानी है तो यह कहां से सनातनी हो गए

01:29:34:00 बताइए जो यह कह दे कि वेद का ज्ञान देने वाला ज्ञानी है गीता का ज्ञान देने वाला ज्ञानी है वो सनातनी कहां से हो गया गता वेद में मुक्ति नहीं है वो सनातनी क से हो गया मुनि ऋषि थे वो क्या रंग रंग लिए बनाने आए थे क्या य पर द्वापर युग में नहीं ऐसी बात नहीं है ऐसी मटिया मेट करके रखी है शास्त्रों की इन्होंने ऐसी मटिया मेंट के अरे भाई आ जाओ किसी ने माता जी का निष्ठा पूर्वक पिलाया हो पिया हो आ जाए जल्दी जल्दी आए दयाल दास

01:30:14:20 जी य आवाज कहां से आई य सात्विक जी बोले कौन बोले सात्विक जी बोलिए जी कोई कमेंट में थे दयाल दास जी वो बड़ा ज्ञान बगार रहे थे बुलाई उन्हे हा कहां है दयाल दास नहीं आएंगे कोई ये लोगों का कैसे बात करेंगे जो बात बोलेंगे उसका खंडन हो गया य गीता का प्रमाण देंगे देख गीतो का गीता का ज्ञान परम ब्रम प्राप्ति का नहीं है ले कैसे खंडन कैसे प्रमाण दे रहा गीता से नहीं वो क रहे वेद का प्रमाण देंगे तो ले वेदों का ज्ञान तो परम ब्रम है ही नहीं पुराणों में मिलावट हो रखी है मैंने पूछा जिस पूर्ण ब्रम की केवल बात हुई

01:31:07:02 हो इनका हमारे जो शास्त्र है ना वो इसलिए नहीं पढ़ते कि हमें उनसे ज्ञान लेना है आ जाओ य प माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो तो आइए आ जाइए इतना समझ में आया कि हमारे जो शास्त्र है जितने भी ग्रंथ हैं वह इस मकसद से नहीं पढ़ते हैं कि हमें इससे ज्ञान लेना है वो इस हिसाब से पढ़ते हैं कि हमने कबीर दास जी को बड़ा साबित करना है और जो नहीं हमें इस शास्त्र को गलत कैसे सिद्ध करना है हा यही है इनका प्रावधान इनका कंक्लूजन क्या है कि एंड द एंड जो वेद है उनसे मुक्ति नहीं है वेद है उसमें पूर्ण ब्रह्म नहीं है वेद है उनको कहने वाला ज्ञानी है इसी प्रकार गीता है एट द एंड यही है निचोड़ और फिर भी यह वेदों को मानने वाले हैं फिर भी यह गीता को मानने वाले हैं यह छुपे हुए ये छुपे हुए अब्राम लोग है अब्राम लोग है य लोग छुपे हुए इनका धीरे धीरे कन्वर्जन तो इनको पता चल जाएगा कि भैया एक मिनट एक मिनट जी तत्वदर्शी दयाल दास जी कृपया

01:32:22:07 आ जाइए आप बड़े ज्ञान दे रहे थे आप कमेंट में ये कमेंट वीर है अरे कमेंट भीर नहीं है ऐसे ऐसे कमेंट कर रहे नहीं है इस तरह के लोग कमेंट के नीच होते हैं अरे मतलब मैंने पूछा कि आपको कैसे पता चला पुराणों में मिलावट हो गई है तो मतलब अभद्र कमेंट कर रहे हैं हर कुछ लिख रहे हैं भाई तुम्हारे भगवान ने ऐसा क्यों किया भगवान ने ऐसा क्यों किया अरे भाई तो तुम्हारी माता जी ने तुम्हें पैदा करने के लिए तुम भी नकार दो तुम्हारी माता जी ने तुम्हे पैदा करने के लिए विवाह क्यों कि क्यों करते हो कि नहीं वेद में प्रमाण है ओ फ नाटक री माता जी ने तो सीधी बात है ना तुम्हारी माता जी ने तुम्हें पैदा करने के लिए विवाह क्यों किया ऐसे भी तो हो सकते

01:33:17:07 थे हां भैया कोई आने वाला है क्या नहीं जो रामपाल दास हुआ है मामला सब जेल धाम में गए हुए हैं ना अब कोई कोई बंदा अपने आंखों से कोई कोई चीज देखे सामने चलो कबीर दास जी हुए व तो एक इतिहास है भाई साब कह रहे वैभव जी कि यह जो है रामपाल दास जी के जो फॉलोअर्स होते हैं वो बिना विवाह के ही पैदा हुए हैं यानी अवैध संताने हैं मगर एक तरीके से देख तो इनकी बात तार्किक भी सिद्ध होती है क्यों

01:34:00:06 क्योंकि जो अगर इनका ज्ञान यह कहता है कि अभी तक जो इनके जो पूर्वज जो करते आ रहे थे वह शास्त्र सम्मत भक्ति नहीं कर रहे थे शास्त्र सम्मत जो चीजें हैं वह नहीं कर रहे थे इनके इनका जो विवाह का तरीका है वह विवाह का तरीका अभी रामपाल दास जी इत्यादि ने अभी कुछ इसी पीढ़ी में प्रदान किया है तो मतलब इससे पहले जो विवाह हुए थे वो सही नहीं हुए थे वो विवाह थे ही नहीं क्योंकि रामपाल दास जी तो मना करते हैं उन विवाहों का खंडन करते हैं तो इसका मतलब क्या है कि उससे उत्पन्न संतान ये खुद कह रहे हैं कि हम जो है कौन है वो आप लोग सब समझ जाओ मैंने अपनी लाइफ में पहले ऐसे देखे जो उनके पूर्वजों को कोई गाली दे रहा हो और वहां पर बैठ के वो ताली बजा रहे हो उनकी जय जयकार कर रहे हो जिस जो उनके पूर्वजों को गाली दे रहा अज्ञानी कह रहा हो कि उनको ज्ञान नहीं था और वो बैठ के ताली बजा रहे ये लोग जितना नकली इनका जो दोहरा दोगलापन है ना वोह कैसे जब अपनी बात कहती हो गीता ज्ञान दाता में व काल भगवान यह कह रहे य कह रहे आज इनकी जो असलियत सामने आ गई तो अब यह बन गए विधर्मी अरे तुम्हारे तो वेदों में य लिखा है तुम्हारे तो

01:35:15:08 पुराणों में य लिखा है अभी तक इनके भी थे अब इनकी सच्चाई सामने आ गई तो उसम ये लिखा है वो लिखा है इनके भगवान है ना इनके जो भगवान है वह सिर्फ इनके हिसाब से कार्य करें य ऐसा चाहते हैं अपने हिसाब से वह कुछ भी नहीं कर सकते भ कहां है भाई जितेंद्र दास आज मैं बहुत भूखा हूं जल्दी आ जाइए आप मैं भी काल हुआ हूं बड़ा

01:35:48:25 हुआ मैं भी बड़ा हुआ काल हूं आ जाइए लाइव में भाई आप आउट ऑफ कोर्स का जो क्वेश्चन पूछ लेते हो ना वो उसी में अटक जाते हैं वो इनका जो रटा टाया ज्ञान है जो गीता का पुराणों का जो दो चार लाइन जो पढ़ रखी है उनके ऊपर ही आप डिस्कस करोगे तो ये लोग करेंगे पर वो भी आधा अधूरा है इनका नहीं पता है क्या होता है अब जैसे कोई बात कर रहे हैं उस बात करने के लिए बोलते हैं कि हम इसका जवाब देंगे फिर वो लाइव में आते हैं लाइव में आते यदि उनको फिर क्वेश्चन दूसरा पूछ लेते हैं ना फिर वो फिर आ जाते हैं वो फिर उनकी हड़बड़ी मत जाती है अभी जो लास्ट वाला हुआ था बाबू राम यादव फटक के नहीं अब बाबूराम यादव अब जो है गुरु द्रोही व पटक नहीं अरे वो अमित दास से आपके हुआ नहीं था एक दिन आपकी चर्चा हुई थी आपको आपने उनको काल और श्री कृष्ण भगवान एक ही है क आपने उनको भर भर के आपने प्रमाण दिए व दूसरे दिन जाकर आपकी कटिंग निकाल के वीडियो बना रहा है कि की शिवांश द्विवेदी और रामपाल के फ्लवर

01:37:04:24 जो रामपाल के शिष्य उनके बीच तगड़ी बहस हुई अरे व तो गंजा जो गंजा है व अपने व तत्वदर्शी का भी सगा नहीं है उसके लोग उसको मना कर रहे मत जाया करो शिवांश द्वेदी की लाइव में तुम्हारा मुह नहीं अच्छा है व फिर भी इसलिए उसको यहां से कंटेंट मिले कंटेंट के चैनल चला कौन है भाई कुछ 94 चेहरा दिखाए अभी जस्ट एक वीडियो देख रहा था वहा पर एक पदम पुराण में है कि हां वो ऋषि मुनि की एक वार्तालाप आती है उसमें भी इनको आधा अधूरा दिखा के भ्रमित किया है अब जो षि मुनि थे उनके जो पित आते हैं तो उनने विवाह नहीं किया होता ऋषि मुनि ने तो पि आक उनसे बोलते हैं कि जो तुम ये जो पुण्य काम रह गया है ये विवाह का तुमने किया नहीं उसको तो रुचि मुनि ने कहा कि क्या हु जितेंद्र दास जी आप आप जो है आप आइए ऊपर आइए ऊपर आकर बात करिए ना क्या हुआ बचपन में माता जी ने

01:38:19:27 निष्ठा पूर्वक पान नहीं कराया क्या आपको या फिर आपके जो न संत उन्होंने आपको सीधी कोई बात नहीं बताई जिसके कारण आप आ सके सामना कर सके क्यों मंडल जी सुबह से लाइव करना अगर आपको शास्त्र का प्रमाण चाहिए सुब अभी नहीं है ना अभी तक है नहीं ना उनके पास प्रमाण तो अभी बोल क्यों रहे हो फम भरो सुबह भी कर लेंगे फम भरो 740 नंबर नोट करो 14369 फॉर्म भरो आपके अनुसार भी टाइमिंग रखेंगे सुबह बोलो सुबह शाम बोलो शाम एनी टाइम एनी वेयर एनीबडी आई एम

01:39:10:24 रेडी भाई एक आखिरी चोट तब मारनी पड़ेगी ना जब एक ऐसा मंच ढूंढा जाए जहां मतलब की एक व्यापक रूप से हमारी बात पहुंच सके यह कौन आया सुंदर सिंह सुंदर सिंह जी चेहरा दिखाए शदा बी इससे ज्यादा बड़ी और कौन सी बात हम लोग ढूंढे जब यह लोग यह कह रहे हैं कि वेदों में पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान है ही नहीं मुक्ति का ज्ञान है ही नहीं गीता में पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान है ही नहीं मुक्ति का ज्ञान है ही नहीं अब इससे ज्यादा और बात ला को

01:39:56:06 गल तुम गीता का प्रमाण क्यों दिखा रहे ये क्यों बोल तुम गीता दिखाकर हमको यह बताना चाहते हो कि गीता गलत क्यों है तो सीधे कहो ना गीता को मत नहीं म मत माना करो हमारी अब्राम करण इस्लामीकरण क्रिश्चन क्रिश्चियनिटी इन सब चीजों को अपना लो स्लोली स्लोली कन्वर्जन हो चुका बहु का हो चुका है और ये यह जो कन्वर्जन है ना यह देखिए आप हरियाणा हरियाणा पंजाब क्यों हो रहा है यह लोग जो कहते ना वर्ण व्यवस्था को नहीं मानेंगे और मूर्ति पूजा को नहीं मानेंगे देख लो वही की वही का जन्म हैय जहां इनका इनका सबसे बड़ा गढ़ है जो यह आर समाज का यह जो सबसे बड़ी जो वर्ण व्यवस्था पर जो पानी फेरा गया कोई भी अपने आप को आचार्य कह रहा है उसका नतीजा प्रणाम है उसका जो आज इन्होने ऐसा ऐसी भ्रष्ट की है और आर्थ समाज को तो फुर्सत है नहीं ना जो रामपाल वालों के ऊपर बात करे वो तो दयानंद सरस्वती के लिए कुछ कह दिया रामपाल ने कमेंट कर दिया तो भिड़ गए सही

01:41:11:24 कहा देखो रामपाल ने क्या किया वह हर एक चीज करने को मना किया जो तुम्हें सनातन से जोड़ती हो बस हर अंत तो गत्वा उसने वेद को मना कर दिया भाई अंत तो उसने गीता को भी मना कर दिया राखी में रक्षा बंधन हमारी होती है उसम क्या लॉजिक दिया रामपाल ने की इस दिन बहुत से बहनों की या भाइयों भाइयों की हाथ सुनी रह जाती क्योंकि इस दिन एक्सीडेंट ज्यादा होते हैं य कोई लॉजिक

01:41:52:07 है करते टाइम हुआ था जब ये कोर्ट में हाजिर नहीं हुए थे मारे गए थे लोग अरे कहां हो भाई और दिन भी तो एक्सीडेंट होते हैं वेर आर द फॉलोअर्स ऑफ रामपाल सर उन्होंने निष्ठा पूर्वक नहीं स नहीं पिया नहीं पिया है जिसका गु दयालदास जी आइए आइए दयालदास जी ना ये जो फैक्ट भाई अभिषेक बताते हैं ना इनमें से किसी ने नहीं पान किया है क्यों अरे भाई इतना तुम्हारे 35 36 हज फॉलोअर्स है यह देखिए जेल में बाबा रामपाल के दर्शन को जा रहे थे हादसे में 13 की मौत यह देख लो भैया काल खा गया काल काल खा गया

01:42:50:22 हा राधिका अधिकार पाद मैं आऊ राम पाली की तरफ से उनसे तो बढ़िया मैं प्रमाण दे दूंगा आप वास्तविकता में उनके फॉलोअर हो तो आए कितना दोगलापन है कितना दोगलापन है कि हम आपको वेद समत भक्ति बताएंगे हम आपको गीता समत भक्ति बताएंगे फिर उसका अर्थ करते समय हम आपको यह बताएंगे गीता को क्यों नहीं मानना है वेद को क्यों नहीं मानना है चोड़ है ये कंक्लूजन सर है रामपाल के तमाम सटर घोट का कंक्लूजन सर कि वेद का वेद का मतलब बताते हुए गीता का मतलब बताते हुए आपको यह बताया जाएगा कि वेद को क्यों नहीं मानना चाहिए गीता को क्यों नहीं मानना

01:43:44:01 चाहिए बन ये क्या कह रहे हैं ये रामपाल कहते हैं आवान चैनल पर शिवांश नाम का काल है है पहले उसे हटाओ हम फिर फिर आएंगे क्या हुआ मृत्यु का सही अर्थ नहीं पता है इनको मृत्यु का सही अर्थ नहीं पता है इसीलिए नहीं आ रहे सही अर्थ पता होता तो आ जाते कायर ना बनते अर्ध ज्ञानी है ज्ञानी पूरा नहीं है तो कहां से पढ़ाई पूरा नहीं है अरे अर्ध ज्ञानी भी नहीं है ऐसी बातें है ना ये यह तो एक दो दिन मैंने जरा सरसरी निगाहों से मैंने इनका देखा ये कह क्या रहे हैं यह तो ऐसी बात है यह अगर आपने शुरू में कर दी ना यह बात जैसे सर्वशक्तिमान यह बात अगर शुरू में आपने कर दी तो वही पर खत्म हो गई बहस वही पर चर्चा पूरी हो गई उससे आगे क्या करोगे श भाई आपकी बातों का जवाब दे ही नहीं पाएंगे क्योंकि यह वहां यह चीज बताई नहीं गई है इनको रटा गया है फलाना अध्याय फलाना श्लोक फलाना

01:44:59:04 वेद फलाना सूक्त फलाना मंत्र बस पैसे दे दे पैसे पैसे ले लेकर गए थे ज्ञान लेने ये लोग वहां पे और आपको एक आवश्यक बात मैं बताऊ कि इन्होंने गपला एक और किया है अभी मैंने उस पर तो बात की नहीं है इन्होंने क्या किया अपने मन से हर जगह अपना एक कारण लिख दिया कि ऐसा है इसलिए ऐसा है कारण का कहीं कोई संस्कृत वो नहीं है अपने मन से लिख दिया हर जगह कारण कि ऐसा इसलिए किया काल ने ऐसा इसलिए अपने चंगल में फसाने के लिए वो अपने जैसे काल ने कहा कि मेरी मेरे अंदर की शांति को प्राप्त होगा काल ने यह कहा आगे लिख दिया काल के अंदर की शांति का मतलब क्या है काल के जाल में फस कर रहेगा लो साहब शांति का अर्थ शांति होता है काल का जाल कहा से आ गया अभी इनके एक कारण का और खंडन कर यह कारण बताते हैं क्योंकि मैं इतना जानकार नहीं हूं यह अपन बोलते कि परमात्मा साकार भी और निराकार भी है हम बोलते हैं ना तो पता है क्या बोलते हैं कि अंधा भी है और दिखता भी है य उदाहरण देते हैं तो मान रहे इनका इनका जोकट था

01:46:14:07 पहले निराकार था मान तो निराकार था व प्रकट हुआ तो ये तो का मानता है रामपाल तो खुद बैठता है नहीं आकार तो कोई था ही नहीं साकार है अभी ये मान लेंगे हमसे जैसे जैसे बात होती जाएगी मान लेंगे सब मान लेंगे ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान मान लेंगे यह धीरे धीरे सब मान लेंगे उस दिन एक ने मान लिया था ना गायत्री मंत्र को जो तिरछा दर्शी संत है जेल धाम में वो गायत्री मंत्र का जाप करते ब्रह्मा मां भगवती की निरंतर पूजा करते हैं मान तो लिया व कल कल परसों बाबूदास नहीं फस गया था वो

01:46:53:28 अभी इन्होंने हमारे क्षेत्र में क्या किया लोगों को लोगों सुनलो लोगों को पैसे दे दे के पास कोई मत जाना और इनका ज्ञान पढ़ो जाकर के उसम काल का ज्ञान मिलेगा आपको तत्वदर्शी जो त्रा दर्शी जो तत्वदर्शी बनके जेल धाम में बैठे हैं उनके पास जाना जेल धाम में वहा अच्छे से स्वागत होगा आपका अभी यह वेदों का खंडन यहां से भी करते हैं मार्क पुराण में जो रुचि रुचि मुनि की जो कहानी है ना इसमें बता रखा है तो रुचि मुनि ने मुनि ने अपने जो पित्र थे उनसे पूछा वेदों में

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→ Used in: A · Live रामपाल के पूर्वज नरकगामी ? #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj at 1:10:13 ↗

01:47:41:13 कर्म मार्ग को अविद्या कहा गया है फिर क्यों आप लोग मुझे उस मार्ग पर लगाते हो यह लाइन दिखाई उने यह सत्य है कि कर्म को अविद्या ही कहा गया है इसमें तनि मिथ्या नहीं है इतना ही दिखाते हैं व आगे और बहुत कुछ बोल रखा आगे क्या बोला उन्होने फिर भी इतना तो निश्चित है कि उस विद्या की प्राप्ति में कर्म ही कारण है यह

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01:48:03:08 नहीं बताया उस विद्या की प्राप्ति में कर्म ही कारण है विहित कर्म का पालन ना करने से जो अधम मनुष्य जो अधम मनुष्य संयम करते हैं वह संयम अंत में मोक्ष की प्राप्ति नहीं करता साहिल किरोड़ीवाल अगर वेदों के अनुसार कबीर भगवान है तो कबीर परम ब्रह्म नहीं है समझ गए क्योंकि वेदों की जो बात है वह परम ब्रह्म की नहीं है ब्रह्म की बात है वे वेदों के अनुसार तो कबीर काल है और सुनो और सुन लो अगर कबीर तत्वदर्शी के द्वारा बताया गया कबीर है तत्वदर्शी संत के द्वारा बताया गया कबीर है तो वह भी तुम्हारे पूर्ण ज्ञान का विषय नहीं है मोक्ष का विषय नहीं है क्यों क्योंकि जो तत्वदर्शी है गीता के आधार पर गीता का यह जो तत्वदर्शी वाला मामला है वह ब्रह्मचारी वेद के विरोध में है तो गीता को नहीं मान सकते गीता को ना मानने के कई कारण है क्योंकि वह वेद का विरोध कर रही है आपके अनुसार तो ना मानो और क्योंकि तुम खुद कह रहे हो कि गीता में पूर्ण मुक्ति का ज्ञान नहीं है तो ना मानो बात खत्म अब जब आपने यह कह दिया कि गीता में वेद में मुक्ति का मुक्ति का पूर्ण मुक्ति का इंतजाम

01:49:18:18 नहीं है तो उसमें आने वाला जो आपके अनुसार कबीर है वो भी पूर्ण मुक्ति वाला नहीं रहा कितनी तरह की बातें करोगे मेरे भाई कितनी तरह की बातें करोगे चलिए फिर ओवर करते हैं आज की लाइव को ठीक है नहीं है कोई लगता है सब भंडारे में है सब आना भैया किसी ने किसी की माता जी ने निष्ठा पूर्वक पान कराया हो तो और काफी रोचक रहा आज का आ करते नीचे पता है लड़का क्या लिख रहा है कि दयाल दास की माने दयाल दास को कुवारी गाय का दूध नहीं [हंसी]

01:50:11:28 पिला कोई एक ऐसा मंच ढूंढो जहां से मतलब की हमारी जो आपकी जो बात है वोह व्यापक रूप से फैले और इनके जैसे बीच का रास्ता जैसे आप ढूंढ रहे थे कोई क्योंकि यह लोग तो आएंगे नहीं ये उनको पता चल गया पोल खुलने वाली लोग तो आएंगे नहीं अब हम ही लोगों को जाना पड़ेगा और व्यापक रूप से इनको दिखाना पड़ेगा लोगों को इनकी सच्चाई क्योंकि यहां पर हम यहां पर कुछ ही लोग आते हैं आ हज 15 हज 20 हज लोगों ने देखा और अगर पूरे उसमें फेलेग आपकी बात नहीं लोग सम में आएगा उनको मैं बता दू मैं बहुत जल्द किसी तगड़े व्यक्ति के साथ जो आपके अनुसार तगड़ा हो उनके साथ में जाने जा जाने उनके पास में जाने वाला हूं बिल्कुल तब इनको सरप्राइज होगा और अपने अपने शहरों में फोन लगाकर बता देना कि शिवांश आ तो पंगा मत लेना क्योंकि मैं पहुंचने वाला हूं और यह लाइव चलाना बिल्कुल आप बिल्कुल बिल्कुल हो सके तो टीम के साथ लाइव चलाना तब मजा

01:51:29:01 आएगा लोगों को पता चले आज एक बिटिया है उसने भी बताया कि उसकी जो मम्मी माता जी मम्मी कहती है माता जी जो फसी हुई थी रामपाल के जाल में वो भी जो है मुक्त हो गई है उन्होंने कह दिया डिक्लेयर कर दिया मैं नहीं मानती अब बिल्कुल है मेरे भी है तीन लोगों को मैंने निकाला पर उन्होने कहा कि नाम मत लेना बताना मत क्योंकि मुझे लग रहा है कुछ अंदर से भी कुछ चीजें है इनकी शायद ऐसी कुछ मुझे लग रहा

01:52:13:24 है अब इन्होंने पता है वहां पर क्या किया लोगों को अपने उसमें लाने के लिए सब तरफ बैनर लगा रखे हैं हम हम हम हम हम लोग जो है दहेज मुक्त विवाह कराते हैं मुफत विवा नाम दीक्षा फ्री फ्री फ्री आंखों की जाच फ्री फ्री फ्री दांतों की जाच फ्री फ्री फ्री और एकज और क्या था भंडारा फ्री फ्री फ्री याद है कुछ याद आया फ्री

01:52:47:14 फी नहीं अभी अभी इनके भंडारे चालू है इधर हमारे साइड तो अभी इन्होने रैली निकाली थी रामपाल जी के नाम से है ना तो रैली निकाल के जब रैली रैली निकालने के बाद जब रैली खत्म हुई तो उसके बाद इन्होंने एक पालना मंगवाया और रामपाल जी की फोटो पालने में रख के झुलाई है आधे घंटे तक अरे वाह अच्छा लड्डू गोपाल जी बता के भाई ये हमारे लड्डू गोपाल जी और भजन गाए है अच्छा इनके लोग भी इनके लोग भी हस रहे थे तो वो तो वृद्ध है वो तो बैठे हुए हैं जेल में उन्हीं को जुला ले

01:53:25:13 जाके वो तो अभी प्राप्त है ना उनका शरीर तो चले जाते जेल जेल में अलाउ नहीं तो वो तो तत्वदर्शी है अवतार है कबीर के परम ब्रह्म के पूर्ण ब्रह्म के वह जेल में होने से पता चल जाता है हां भाई अरे भैया चेहरा दिखाओगे कि जाओगे चेहरा दिखाओ चेहरा चेहरा दिखाना है

01:54:00:01 आपको अरे हां ना बोल दो फिर चले जाओ चेहरा दिखाना है अरे कबीर साहेब जी चेहरा दिखा दीजिए य आवाज किसकी आ रही है पीछे से ये महके जी के वहां से आ रही है चले गए जिन्ने जल्दी थी वो चले गए ये हमारे जो शंकराचार्य है या और भी जो गुरु हैं उनसे कहते आ जाओ उनसे कहते रहते कि गुंडे में बोलो दिनेश

01:54:39:19 दास बोलो राम राम जी राम राम बोलो कैसे हो भा जी जी बताओ अभी सभी हमारे जो भगत भाई हैं वो सभी आश्रमों में भंडारा चल रहा है भाई साहब देखिए काम की बात करिए अगर नहीं करनी है तो फिर दोबारा आइए जब करनी हो हम यहां पर आपके प्रचारक नहीं बैठे हैं जो आपके मैसेजेस लोगों तक पहुंचाए हैं आपकी आपकी महिमा का गान करवाए ठीक है कोई और बात करनी है आपको सर ला के

01:55:32:04 बताइए नहीं सर इला के बताइए े जो विवेचन चल रहा है विषय से संबंधित कोई बात करनी है रामपाल तत्वदर्शी है सिद्ध करेंगे आप हां या ना हां या ना ऐसे कर बतासे क्या अरे तो आपका शिस थोड़ी ऐसे करो वैसे करो क्या पूछना वो बताइए गन बोको लड़ना है इनको कुछ करना नहीं है भैया इनको मत खोला करो बिना इनको हटाइए ये यहां पर केवल विघ्न डालने आ रहे हैं इनको अपना मत नहीं रखना इनके पास कुछ है नहीं रखने के लिए जब इनको बोलने को कहा गया तो क्या बोल रहे हैं रामपाल दास के सभी भगत जी ये वो अरे भाई ये सब बातें यहां से क्यों बता रहे हो जाओ अपने चैनल पर जाओ जाके वहां बताओ आपने इस लक छोड़ा ही नहीं उनको कि कुछ बोल सके वो बोलना है

01:56:38:18 कुछ जो टॉपिक चल रहा है दिनेश जी उस पर बात की रामपाल तत्वदर्शी है गुस्स बहुत जल्दी हो जाते हो आप फिर देखो देख रहे हो पॉइंट की बात नहीं करो क्योंकि है नहीं प पॉइंट की बात करेंगे पहले शांत हो जाओ थोड़ चलो शांत है भाई मैं आपसे पूछ रहा र् है हा तत्वदर्शी है व तत्वदर्शी संत है और क्या बता रहे तत्वदर्शी संत कैसे है बताइए बताइए क्या पूछ त किसे माना है आपने देखिए सभी शास्त्रों का भेद खोलकर उन्होने बता दिया हिंदू धर्म से छोड़ सभी शास्त्रों का लकर हमें किस चीज का ज्ञान प्राप्त होता है ये बताएंगे आप परमात्मा की वास्तविक जो परमात्मा है जो जो वास्तव में परमात्मा है पूर्ण ब्रम है उसकी जानकारी पूर्ण ब हा उसकी जानकारी संत रामपाल जी महाराज तत्वदर्शी की ये जो व्याख्या है इसका गीता का कोई आधार है अपने मन से बोल रहे हैं गीता के आधार से ही बताया है गीता में कहां पर लिखी है जानकारी तत्वदर्शी

01:57:54:26 की लिखी है ना अध्याय के पहले 15 अध्याय के एक से चार तक देखिए आप अ पहले शलोक एक से चार में ये लिखा है कि तत्वदर्शी जो है वह पूर्ण ब्रम की पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान देता है ठीक है यह नहीं लिखा है उसम लिखा है कि जो संसार रूपी उल्टे लटके हुए पीपल के वृक्ष के सारे विभागों भिन्न भिन्न तरीके से बता देगा वह वेदों के जानने वाला होगा तो उसका अर्थ नीचे दिया हुआ है जान के होगा क्या क्या मिलेगा आपको तत्वदर्शी से मिलेगा क्या भगवान की जानकारी मुक्ति की जानकारी हम क्यों पैदा होते हैं ज लेते की जानकारी मिलेगी अच्छ पूर्ण ब्रम ब्रम से अलग है या ब्रम ही है नहीं बहुत सारे ब्रम हो गए इसलिए ब्र लगाना पड़ता है ब्रह्म पर्याप्त है लेकिन बहुत सारे ब्रह्म हो गए तो इसलिए ब्र ब्र लगाना पड़ता है ये कहा लिखा है क्या लिखा है देख इसलिए पूर्ण लगाना पड़ता है आप सुन लीजिए कोई

01:59:10:06 हनुमान जी को भी भगवान कोई शंकर जी को भी भगवान कहता है ये जो नियम है बहुत सारे ब्रम हो गए इसलिए पूर्ण लगाना पड़ता है यह नियम कहा लिखा है भाई साहब गीता जी में लिखा उसने लिखा है कि तीन ब्रम है ओ तीन भगवान बताए उसम भी आप खुद देख लीजिएगा य काल है जो भगवान है नहीं आपका है य हमारा नहीं काल आपका भगवान नहीं है ना

01:59:54:00 काल का मंत्र नहीं जपते काल का मंत्र जपते हैं लेकिन भक्ति नहीं करते साधना करते उसकी उसके लोक से निकलने के लिए काल का मतलब काल भगवान नहीं है कुल मिलाकर के मगर उसका मंत्र उसके लोक से निकलने के लिए जते हो य देखलो को भगवान दिखाए आपकी गीता में बताइए बताइए काल को भगवान कहा है दिखा दो भैया वाला पेज अभी शुरू में दिखाया आपके त्र दर्शी तत्वदर्शी संत ने हा तो कहा है ना भगवान तो कृष्ण जी को भी कहा है विष्णु जी को भी कहा है और क्या बोलते हैं शंकर जी को भी कहा है लेकिन लेवल के भगवान रहने दो र लेवल के भगवान है वहा पर वो भी कहा है वो भी देखिए नाय कहो ना कि उस लेवल के नहीं है आप कह रहे हो भगवान नहीं मानते उ आपने उदाहरण दिया संत रामपाल जी जी का कि उन्होंने भगवान कहा है लेकिन आगे की लाइन नहीं पढ़ी आपने कि कितने लेवल के भगवान बताया भ है वो यहां से शुरू हुई थी कि मैंने आपसे पूछा था आप काल को भगवान नहीं मानते आपने कहा नहीं मानते आपने यह नहीं कहा कि मैं उस लेवल का भगवान नहीं मानता हूं आपने कहा मैं

02:01:09:01 भगवान ही नहीं मानता हूं नहीं नहीं मैंने हद है ऐसा नहीं है वो जिस लेवल के है अरे हम भी जिस लेवल के इंसान है उस लेवल के हर व्यक्ति का भी पद होता है ऐसे उनका भील प है मुझे बताओ ठीक है मैं समझ गया आपकी बात कि आपके वो स्तर के वाले भगवान पूर्ण भगवान नहीं है पर भगवान है अब मुझे एक ब बताओ कि 700 में से कितने श्लोक वो वाले श्लोक कौन से हैं जो काल ने अपने मन से बोल दिए हैं 35 श्लोक कौन से जो वेदों से मैच नहीं करता ना ज्ञान वो कौन ककन से शलोक वो कौन अब वो देख के बताया जाएगा ना ऐसे थोड़ी ऐसे मख थोड़ी बता देंगे एकदम पता है उसम देख के बताएंगे पूरी खोलनी पड़ेगी दिखाए जी ने कहीं लिखा है क्या ये कौन-कौन से श्लोक है वो दर्सी जी ने सारा बता रखा सारा खोल के बता रखा लिखा है कुछ पता है क्या सब बताया है कहां लिखा है सारी डिटेल पूछोगे तो फिर मेरे को देखना पड़ेगा खोलनी पड़ेगी बहुत टाइम लगेगा अच्छा अब मैं मूल प्रश्न प आ जाता जी जी आपने

02:02:24:02 कहा कि गीता के अनुसार तत्वदर्शी है और तत्वदर्शी से हमें मिलता क्या है पूर्ण ब्रह्म की प्राप्ति ब्रह्म की प्राप्ति तो नहीं मिलती ना सारा ज्ञान टोटल ज्ञान ए टू जेड ज्ञान मिलता है तो टोटल जन मल है पूर्ण ब्रह्म क्या टोटल ज्ञान से अलग है क्या टोटल में पूर्ण ब्रह्म भी आ गया आत्म ज्ञान भी आ गया परमा ज्ञान भी आ गया जन टोटल ज्ञान आ अगर आपने पूर्ण ब्रह्म कह दिया तो उससे बाहर कुछ बचा ही नहीं कुछ भी ठीक है तो तत्वदर्शी जो है वो पूर्ण तत्वदर्शी तत्वदर्शी इसलिए क्योंकि वो पूर्ण ब्रह्म की पूर्ण ज्ञान की जानकारी आपको देता है ठीक है जी जी अच्छा वेदों में जो सूक्त है ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है उसको प्रामाणिक आचार्य कहा गया है वेदों में जी जी वहा पर पूर्ण ब्रह्मचारी नहीं कहा गया ब्रह्म अलग है ना पूर्ण ब्रह्म से तो गीता कह रही है पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान देने वाला प्रामाणिक है आचार्य गुरु और वेद कह रहे ब्रह्म का ज्ञान देने वाला प्रामाणिक है आचार्य गुरु और तत्वदर्शी संत आपके

02:03:39:07 कह रहे हैं कि जो चीज वेदों से मेल नहीं खाती गीता की वो मान्य नहीं है तो यह जो चीज है कि पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान देने वाला प्रामाणिक गुरु है ये वेदों से मैच नहीं खा रही है क्योंकि वेद में लिखा है कि ब्रह्म का ज्ञान देने वाला प्रामाणिक गुरु है ब्रह्म का ज्ञान देने वाला हा तो ठीक है ना ब्रह्म का ज्ञान भगवान नहीं तो ब्रह्म जो है पूर्ण ब्रम पूर्ण ब्रम कह लीजिए उसको लेकिन ब्रह्म पर्याप्त है भगवान के संबोधन के लिए ब्रम मा भगवान होता है आपके पूरे में कहां लिखा है कि ब्रह्म पर्याप्त है रामपाल ने कहां माना है यह बताओ कहां पर लिखा है देखिएगा उनके हजारों सने कहा ये लोग धीरे धीरे हमारी सब बातें मान लेंगे अब ये ब्रह्म पर आ गए कि हा ब्रह्म और पूर्ण ब्रह्म एक ही है अय इस पर आ गए जी जी भा ब्रम तो अलग है

02:04:43:28 ना तो गीता जी ने क्यों कहा है ब्रम सर्र गता का ता गीता का वो ज्ञान जो वेदों से मैच नहीं खाता वो गलत है हा तत्वदर्शी जो है वो पूर्ण ब्रम की जानकारी देने वाला है और वेद कह रहे हैं कि प्रामाणिक गुरु वो है जो ब्रह्म की जानकारी दे हम ठीक है तो क्या दोबारा बोलो दोबारा बोलो क्या बताया आपने दोबारा बोलू नहीं नहीं हसो मत दोबारा बोलो कोई दिक्कत नहीं समझ में नहीं आया दिक्कत नहीं है तो क्या कुछ करोगे क्या हमारा अभी बात जो बोली है वो बताई

02:05:31:28 क्या हां सुनो हां बताओ गीता कह रही है कि पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान देने वाला प्रामाणिक गुरु है जिसको आप तत्वदर्शी कहते हैं ठीक है वेद कह रहे हैं ब्रह्म का ज्ञान देने वाला प्रामाणिक गुरु है ठीक है हमम तो गीता की य जो बात है यह वेद से मैच नहीं खा रही तो इसको मत मानो नहीं ऐसा नहीं है कि एक श्लोक आपने पढ़ा तो उसम एक लोक में एक ही बात लिखी हुई

02:06:06:18 है गीता जी है गीता जी जो है वो वेदों का सारांश तो है ऐसा तो नहीं है कि वेदों का सारा जन से मैच नहीं खाता वो मान्य नहीं है मैच करवाओ इसको इसको मैच करवाओ वेद से इसको मैच करवाए हा ठीक है तो इसको भी मैच करके बता देंगे चलिए आपने आपने इसीलिए आए टाइम खोटी बच करके बता देंगे पढ़ के बता

02:06:43:18 देंगे यह व्यक्ति कम से कम 10 बार आ चुका है अब तक जय श्री कृष्ण शिवांश भाई क क रहा है वो नाक में हाथ डाल डाल करके नाक में नाक में उंगली कर कर के वो क्या कह रहा है ये कि भाई जय श्री राम अरे जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम मैं कह रहा था मुझे मैं तो बताता उसको आज बताता हूं 10 दिन आ गया एक ही बात रट के आ रहा है कभी उसकी अलग बात है वही बात घूम फिर करके अरे मूर्खो केरे मूर्खो कितना दिमाग खराब कराओ ग कितने मूर्ख है वो वही बात बात बने सुनो य य यय यह बताने आए हैं कि हम बता देंगे अरे कब बताएंगे कब बताएंगे जिंदगी चले जाएगी तुम्हारी आज तब बताएंगे जब मेरे से एक दिन मेरे से बोलने दिया करो मैं बो कितने दिन बताओगे तुम तुम पाखंडी को असली बता रहे असली को नकली बता रहे तो भला कहां से होने वाला आप लोगों का दिमाग ने खराब कराने आ रहे हो क्या यहां ंग पाखंड फैला रखा है इन्होंने वही बात इनकी वही बात वही बात वो हम कह रहे दो दना चार होता व क दो दना पा होता हम क दो द चार होता व क दो द पा होता वही बात उसकी है

02:07:58:19 वही कितने भी आ जाए व अपनी बात रखेंगे उनको शास्त्र से कोई लेना देना नहीं ना उनको गीता का ज्ञान है ना वेद का ज्ञान है आप कही स मिलवा लो वो बकल अनी र् उसको खुल कर जेल दर्शी कहा करो पहाड़ी जी अब तोय कुछ भी बात बोलेंगे ना इनकी किताब से उसका अगर से प्रमाण देंगे तो हम कहेंगे वेद में पूरा ज्ञान है ही नहीं व ज्ञानी ने बोला उसकी बात क्यों माने आप उस ज्ञान गंगा में देखो कितना उल्टा सुटा लिखा है इन्होने कहा अर्थ का अनर्थ क्या है उस ज्ञान गंगा में हा बताइए रामचरित मानस से जी जय हो प्रभु के दर्शन जय श्री राम पंडित जी आपको भी प्रणाम सभी को मेरा जय श्री राम

02:08:51:21 में प्रमाण दिखाने से पहले ये टियर पहाड़ी जी आपका नाम क्या है आप भी अंधेरे में क्यों बैठे रहते हैं मैं लाइट ऑफ है कोई नहीं अच्छा ये कहीं पर बाहर है ना य विदेश विदेश में है कहीं पर अच्छा वाह बात है वहा रात का समय मतलब व अंधेरे का समय आपके य सुबह होने वाली होगी शायद हा हा एक बज रहे रात के त बजे अच्छा मैं कुछ प्रमाण दिखाऊं उससे पहले आज सुबह मैंने आपको एक चीज एक दो फोटोस डीएम की थी आपने देखी हां आर समाज वाली हां हनुमान हां देखा उन्होंने क्या कर दिया उसमें वो ऐसे ही क्या बो आप इस पर क्या बोलेंगे मतलब अरे वो देखिए जो वानर जो भगवान जो हनुमान जी थे वो एक ऐसी प्रजाति अभी भी पाई जाती है जिनके जो है भी जो यह जो जो वानरों के गुण होते हैं वो होते हैं शरीर में शारीरिक उसमें होता है तो वो वो प्रजाति थी उसका साइंस में भी प्रमाण होमो सेपियंस हा

02:10:07:28 इसकी जानकारी इन्होने दी है जो ये है ना जो होमो इरेक्टस क्यों क्यों क्यों वाला ग्रंथ है ना जो उसमें दी है जानकारी माधवाचार्य जी जैसे आप ये ग्रंथ जानते ही होंगे ये मेरे हाथ जो देख रहे हैं आप हनुमान इसको आप पढ़ेंगे ना ये बहुत लाभ काई पुस्तक होगी मैं आपको भा बाकी रह गया है दिनेश दास आज उनसे मैं बात करूं आज मैं बात करूं इनसे प्लीज सुन कर शाबाश करिए आप बात तब हम करते अरे भाई तुम जब कुछ बता ही नहीं रहे हो तुम जब ये बोल रहे हो कि मैं जो है बताऊंगा दे दूंगा तो आए क्यों तभी आओ कंटेंट लेने आ दे दूंगा दि राम राम अनुसार साधना का परिणाम मुक्ति नहीं है पढ़ लो यह कहां लिखा है वेद में तु र् जो बोल रहे हैं तुम वेदों का गीता का अर्थ करके यह बताते हो दुनिया को कि वेद क्यों गलत है गीता क्यों गलत है गीता को बोलने वाला क्यों गलत तुम यह बताते

02:11:22:28 हो बस डोंगी दोगले नहीं डोंगी नहीं लि महा स्व की प्राप्ति महा स्वर्ग में जाने के बादरा सही बात है मुक्ति नहीं है चार वेदों की है नहीं जेल जेल जेल में है भक्ति अबे भैया जब तुम वेद को मुक्ति मुक्ति देने वाला एक मिनट मुझे बात करने दीजिए एक मिनट जब तुम वेद को मुक्ति देने वाला मानते नहीं हो तो तुम कौन से हिसाब से कहते हो कि हम वेद को मानते हैं बिल्कुल वेद में मुक्ति का ज्ञान नहीं है ना सारा ज्ञान वेद में होता तो फिर आज आज तक किसने मुक्ति पाई बताओ ये कहां लिखा है वेद में ज्ञान नहीं है मुक्ति का ये बताओ है किसी ने पाई मुक्ति को बताइए उदाहरण दीजिए किसी ने मुक्ति पा

02:12:28:24 तो शास्त्र से प्रमाण वेद में मुक्ति नहीं है मैं शास्त्र की ही बात कर रहा हूं आप यह बता दीजिए एक को उदाहरण बता दीजिए जिसने मुक्ति पाई हो गीता जी को पढ़ कर के या वेदों को पढ़ कर के जिसने मुक्ति प्राप्त की हो केवल स्वर्ग छोड़ कर के स् प्राप्ति हो सने सुखदेव जीने प्रा की मुक्ति नहीं तो वो मुक्ति जो है स्वर्ग प्राप्ति को ही कहते हैं स्वर्ग प्राप्ति को ही मुक्ति

02:13:05:08 बोलते बनेले मुक्ति स्वर्ग को कहते हैं अरे साफ लिखा गीता जी में स्वर्ग प्राप्ती है बकवास करते ब सा लिखा हुआ है अबे भैया यह क्यों आए देख लिया देख लिया इनके पास कहने को कुछ नहीं है अरे आज इनके सामने इन कुछ छूट का खंडन करने वाला था रामचरित मानस में आपने उनको हटा क्यों दिया अब इनको मत लेना भाई य बदतमीजी करने आए हैं बस चलिए मैं खंडन करूं हां तुम करो अपना तो जै श्रीम यह वेदों को मानने वाली नई नस्ल है जो ये कहती है कि वेदों में मुक्ति नहीं है अच्छा वेदों में जब मुक्ति नहीं है तो वेदों में धर्म कहां रहा क्यों क्योंकि महाभारत से लो प्रमाण यह रामपाल के चेले नहीं है रामपाल के दल्ले है ये बिल्कुल दलाल है मल से अपने को मुक्त कर नहीं पा रहा रामपाल तो अपने को जेल से मुक्त नहीं कर पा रहा इनको क्या मुक्ति दिलाएगा इनको कुछ ज्ञान है लिखा है लिखा है ंगो पांग को

02:14:20:08 कभी पढ़ा नहीं एकांकी शब्दों को ढूंढ करके लाते देख इनकी वास्तविकता कैसे आती है सामने इनकी वास्तविकता कैसे सामने आती है देख रहे आपने हटाना नहीं था मैं जरा आज बताता इसको रामपाल केत बताता मैं इसको देखिए बात आप समझ नहीं रहे हैं सूरज जी हम लोगों का एक जो एक तरीका है ना बस उसी पर रहे नहीं तो हम लोग करने को बहुत कुछ कर सकते हैं क्या करें भाई जी जैसे को तैसा होना पड़ता है क्या कर हमारे गुरुदेव शकरा समाचार यही तो कहा है बाद में साम दाम दंड और

02:15:03:12 भेद सुनि गीता क्या बता गीता में लिखा गीता मुक्ति नहीं है मुक्ति तुम्हारे बोलने से हो जाएगा रामपाल खुद अन पूछ आओ दिनेश दास यह बताओ गीता धार्मिक ग्रंथ है नहीं अब मुझे ये बताओ कि स्वर्ग जाने के बाद मुक्ति प्राप्त हो जाती है नहीं है मैं पूछ रहा हूं गीता और वेद में मुक्ति नहीं है तुमने ये कहा अब ये बताओ क्या गीता और वेद धार्मिक ग्रंथ है धार्मिक है जहां तक के हैं वहां तक धार्मिक है उससे ऊपर का ज्ञान नहीं है धार्मिक है धार्मिक है धर्म क्या है धार्मिक है धर्म क्या है धर्म क्या है नहीं मुझे मुझे तो सिर्फ आप यह बता दीजिए स्वर्ग प्राप्ति के बाद मुक्ति प्राप्त हो जाती है देख रहे हो यह खेलने आए हैं खेलने इनके पास कुछ है नहीं आप बोल लीजिए वो बदतमीज व्यक्ति है उससे बात मत करिए आप बोलिए अपनी बात अरे तुम मुझे इतना बता दो कि जेल में जाने वाला व्यक्ति तत्वदर्शी हो सकता है क्या

02:16:30:03 सुनो यह जो मुक्ति की बात बात आ रही है ना धर्म धर्म क्या है उसको समझ लो धर्म क्या है धर्म मुक्ति है अगर किसी शास्त्र में मुक्ति नहीं है तो उसको धर्म नहीं माना जा सकता तो वो धार्मिक ग्रंथ नहीं है अगर मुक्ति की बात वो नहीं कर रहा है कैसे यह भी हम प्रमाण देंगे महाभारत [संगीत] से कोई रजीत सिंह बोल रहे मुझको ऊपर ले लो मैं कबीर परमात्मा की खोज कर चुका

02:17:09:00 हूं आप दिखा दीजिए फिर उसके बाद मैं बोलू फिर मेरे को काम होता है आप बहुत अच्छे मौके पर संदीप भद्रा जी जय श्री राम बड़ा बहुत ब सभी को जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम शम अरे हम कुछ बताना चाहते हैं जरा सुनेंगे आप लोग नेती नेती हेलो हा हा जी हम कुछ बताना चाहते हैं जरा ये रामपाल जी के लोगों को जरा आप लोग अगर बोले का जो यहां का इनके सुनो अरे सुनो ना इनके जो कवि शब्द जो लिए गए हैं उसके बारे में हमने स्टडी किया उसको हमने निकाला है तो कवि का मतलब पहले इनको बता दे कवि का मतलब हम बता दे महाभारत के जो है छठे खंड में जो है अनुशासन पर्व जो है उसमें विष्णु सहस्त्र नाम स्तोत्र है और विष्णु सहस्त्र नाम स्तोत्र में जो 27 वा

02:18:24:01 श्लोक है उसमें कवि शब्द से भगवान विष्णु को संबोधित किया गया है अब इनसे जरा कोई पूछेगा कि यह विष्णु भगवान को जब कवि के नाम से संबोधित किया जा रहा है तो यह कबीर देव के नाम से कबीर को कैसे संबोधित कर रहे हैं अगर आपके पास हो शिवांश भाई तो जरा महाभारत के छठे खंड का जो है अनुशासन पर्व खोलो 149 अध्याय उसमें अरे वो है कवि कवि के नाम से बहुतों को संबोधित कवि नाम से जो है वाल्मीक जी को भी क नाम से संबोधित

02:18:58:26 हुआ हा वही और उसम क्या कवि एक पदवी है कवि एक पदवी है लेकिन यहां पर सीधे विष्णु सहस्त्रनाम गुण है कवि एक गुण है सर्वज्ञ जो सर्वज्ञ उसको कवि कहा जाता है और कविता करने वाले को भी कवि इसलिए कहा जाता है क्योंकि क करने वाले की कोई सीमा नहीं होती वो कहीं के बारे में भी सोच सकता लिख सकता है इसलिए उसको भी ककार कहा गया और कवि के कई सारे और भी अर्थ हमने जो है देखे थे उसमें दो तीन और अर्थ दिख रहे थे और ये कबीर देव कबीर देव करके हां भाई रंजीत जी जो ये गीता जी है ना ये ऑलरेडी महाकाव्य है मतलब मतलब कविताओं का मतलब पिता या माता जो मर्जी बोल दो तो इससे ऊपर कोई बकुल भाई बिल्कुल बिल्कुल बता तो रहे हैं ये जो हैनो अभी कल हम रिक्वेस्ट कर रहे थे आप एक जरूरी बात धर्म का वास्तव परव किसम है मोक्ष में धर्म क्या है मोक्ष तो यदि किसी शास्त्र में धर्म की बात नहीं हो रही है तो व धार्मिक शास्त्र नहीं है मोक्ष की बात नहीं हो रही है बिल्कुल सही बात है कितना मतलब उलझा के रख दिया है अब देखो आज इस व्यक्ति का रोल देखा

02:20:14:01 आपने आज ये वेदों का खंडन कर रहा है बैठ के नहीं है गीता में लिखा है अ सुनो कल कल परसों हम आपसे रिक्वेस्ट कर रहे थे हमको ऊपर लो ऊपर लो आप लिए नहीं नहीं तो हम बताते हैं ये जो है वो भगवान विष्णु के महाकाल स्वरूप के बारे में तमाम अटकले लगा रहे थे तो उसमें सात या आठ श्लोक आगे अर्जुन ने उनको जब कहा है कि मैं आपके इस विकराल रूप को देखकर हर्षित हो रहा हूं लेकिन मेरा मन भय से काप रहा है कृपया मुझे उस चतुर्भुज रूप में ही दर्शन दीजिए विष्णु के चतुर्भुज रूप में जब वो काल है तो फिर वो विष्णु के चतुर्भुज रूप की दर्शन की मांग क्यों कर रहे हैं अर्जुन

02:20:53:01 एक बात और है जब धर्मदास जी ने जब कबीर के दर्शन किए थे वो भी चक्कर खा गए थे वो दिखा दी जरा प्रमाण और जरा इनको ले लीजिए ऊपर अरे यार कबीर तो खुद कहते हैं साई इतना दीजिए जाम कुटुंब समाए मैं भी भूखा ना रहू साधु ना भूखा जाए तो हमको ये बताओ कबीर किस साई से मांग रहे जब वो परब्रह्म परमात्मा है इनके अनुसार चलो मान लिए तोव किस साई से फिर मांग रहे हैं अच्छा व्यक्ति देखो दो दो मिनट में अपनी बात कैसे बदल रहा है काल भगवान नहीं है अरे उनको लो

02:21:30:02 उनको अरे वो कंटेंट लेने आया मतलब इलिए तो गुस्सा आ रहा है जरा इनको बोलने दो बहुत देर से बचारे कुछ बोलना चाह रहे विशाल बोलिए बता उस दिन की दो हते प की ब फिर से आ गए अमित दास वो रामायण का दिखाए थे वह 145 वा पेज नंबर इसमें वह चक्कर खिला दिए थे वह मैं समझ गया था किसकी बात कर थे रामचरित महास की उनको खुद नहीं पता तो यह देखिए नेती नेती वो बोल रहे थे ना तो अब ये देखिए अब ये रामायण का यह प्रसंग इसमें दिखाते हैं जब मनु और शतरूपा तपस्या करते हैं भगवान को पुत्र रूप में पाने के लिए तो यह एक द्वादश आक्ष मंत्र तो आता है उसमें एक चौपाई आती है ये चौपाई इसका ये लोग बहुत यूज कर रहे हैं मैं सुनाता हूं ये चौपाई नेति नेती जेही वेद निरूपा निजा ंद निरूपा अनूपा संभु रंच विष्णु भगवाना उपज जासु अंसते नाना ये थोड़ी स्क्रीन में बड़ी कर देंगे आप अब इसका अर्थ ये बताते हैं जिन्हें वेद नेति नेति यानी यह भी नहीं यह भी नहीं कहकर निरूपण करते हैं जो आनंद स्वरूप उपाधि रहित और अनुपम है एवं जिनके अंश से अनेको शिव ब्रह्मा और विष्णु भगवान प्रकट होते हैं ऐसे महान

02:22:45:06 प्रभु के क्या लिखा है जिनको वेद नेति नेति कहते हैं और जिनके अंश से को शिव ब्रह्मा और विष्णु भगवान प्रकट होते हैं तो अब यहां पर इनका मानना है कि वो कबीर जी थे लेकिन वो राम जी थे मैं दो दो जगह से आपको राम चित मानस में प्रूफ करके दिखाऊंगा ठीक है मैं पहला प्रमाण आपको दे रहा हूं ये रामचरित मानस का जब भगवान शिव का सती के साथ विवाह होता है माता सती के साथ तो वो त्रेता युग का समय था तब तो जब वो देखते हैं कि भगवान श्री राम और लक्ष्मण सीता जी के लिए विलाप कर रहे हैं तो भगवान शिव उनको नमस्कार करते हैं शिव जी तो वो सती जी थो जा परमात्मा कैसे हो गए जो स्त्री के लिए ऐसा इतना वो कर रहे हैं तो वो कह रहे हैं कि तुम अगर तुमको यकीन नहीं है तो तुम एक बार परीक्षा लेने चली जाओ भगवान शिव ने कहा और फिर उसी के उसी के प्रसंग में वो सबसे वर्ड फेमस चौपाई आती है होई ही सोई जो राम रज राखा को करी तरक बढ़ाव साखा ठीक है तो जब वो परीक्षा लेने गई वो सीता जी का उन्होंने रूप धारण किया तो अब पहले प्रभु ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया फिर कहा कि भगवान शिव कहां है फिर यह सब जब उन्होंने देखा कि श्री राम जी ने मुझे पहचान लिया व उन्होंने सोचा मैं शकर कर कहा

02:24:00:07 न माना निज अज्ञान राम पर आना कि मैंने शंकर जी का काल भी आया है मैंने शंकर जी का कहा ना माना और अपनी अज्ञान का श्री रामचंद्र जी पर आरोप कर दिया फिर पता है क्या देखा भगवान श्री राम ने उनको अपना ऐश्वर्य शली रूप दिखाया अब ये देखिए इसमें क्या आया तब उन्होंने पीछे की ओर फिर के देखा फिर चितवा पासे प्रभु देखा सहित बंधु सय सुंदर बेखा जह चित वही तह प्रभु आ सना सेवई सिद्ध मुनी से प्रबीना देखे शिव विधि विष्णु अनेका अमित प्रभाव एकते एका बंद चरण करत प्रभु सेवा विविध ख देखे सब देवा तब उन्होंने यानी सती मैया ने पीछे की ओर फिर करर देखा तो वहां भी भाई लक्ष्मण जी और सीता जी के साथ श्री रामचंद्र जी सुंदर वेश में दिखाई दिए वे जिधर देखती हैं उधर ही प्रभु श्री रामचंद्र जी विराजमान है और सचर सिद्ध मुनीश्वर उनकी सेवा करते हैं सती जी ने अनेक शिव ब्रह्मा और विष्णु देखे जो एक से बढ़कर एक असीम प्रभाव वाले थे उन्होंने देखा कि भाति भाति के वेष धारण किए सभी देवता श्री रामचंद्र जी की चरण वंदना और सेवा कर रहे हैं अब ये हो गया पहला प्रमाण ठीक है अब मैं दूसरा प्रमाण आपको दिखाने वाला हूं

02:25:15:12 और वो जो मनु शत्रु का का जो प्रसंग है ना उसमें लिखा हुआ है कि पहले ब्रह्मा लिएन ये किसम है किसम बाल रामायण के बालकांड में कौन सा बालकांड में कौन सा दोहा नंबर दो चपा नबर ये पहले 145 पर जाइएगा ठीक है जो य मनुष्य का प्रसंग है 145 स

02:25:47:04 नहीं बालकांड दोहा ये सॉरी 143 143 जी य श्रीराम जी के लिए बात हो रही है इन्होने वहा भी का घुसा दिया चक देखिए मैं दूसरा प्रमाण दिखा रहा हूं आपको बता दीजिए संग चली जननी भवानी ज कु उन्होने यही कह दिया किय जो सनातन धर्म के जो हमारे शास्त्र है उनमें मुक्ति नहीं है मोक्ष नहीं है बात खत्म हो गई धार्मिक शास्त्र नहीं है उनको कहने ज्ञानी है जो हमारे शास्त्रों में लोक बताए गए ना वोह भी सारे के सारे मतलब वो कुछ भी नहीं है उससे ऊपर एक और लोक है जो कबीर का है ये यह मानते हैं और जितने भी हमारे भगवान है वो सारे के सारे काल है ये स्पष्ट बोलते नहीं ब बोलते यही है इनकी किताबों में यही लिखा है अंत में आंसर यही आएगा कि जो हमारी जो ग्रंथ है उसमें धर्म नहीं है उसमें मोक्ष नहीं है और उनमें जितने भी कैरेक्टर है जितने भी ईश्वर के रूप दिखाए गए हैं वो सब ईश्वर नहीं है ईश्वर उससे अलग है और वो कौन है वो इनके वो जो इनका जो कोई एक इन्होंने सूक्ष्म वेद बना रखा

02:27:02:09 है अपने मन से वो है उसमें लिखा है इन्होने तो इन्होने तो कबीर दास कात ये आती है कि जितने सारे क्लेम्म वेद में लिखे हैं क्या ये क्लेम गीता में लिखे हैं तो फिर इनकी जो बात है वो कहते हैं कि हम शास्त्र सम्मत भक्ति बताते हैं वो कहां चली गई कोई शास्त्र सम अगर ये क तत्वदर्शी अब इनका जन्म निकल जाएगा य वेदय गीता के अनुसार तत्वदर्शी नहीं कह पाएंगे क्यों क्योंकि गीता का जो तत्वदर्शी है व वेद विरुद्ध य खुद कहते गीता की वो बात नहीं मानी जा सकती जो वेद के विरुद्ध लो मैं बोलू भाई हमारा तत्वदर्शी तो ब्रह्मचर्य आश्रम ब्रह्मचर्य सूक्त है 11 पा अवे ब्रह्मचर्य परम ब्रह्मचर्य नहीं है पूर्ण ब्रह्मचर्य नहीं है ब्रमर अब तुम कह रहे हो कि वो ब्रह्म से अलग हम लोग जो पूर्ण ब्रह्म की बात कर रहे तो वो मेल नहीं खा रहा वेद से तुमने कहा जो वे से मेल नहीं खाएगा वो गलत है तो तुम जो है कभी यह नहीं कह सकते कि गीता के आधार पर हमारे पास जो है जेल धाम निवासी तत्वदर्शी

02:28:11:21 है क्या लेके आएंगे अय जो इधर का तीन पाच किया करते उसने उधर क्या बोला क्या बोलेंगे अभी कुछ भी बोलेंगे वो इन्ही की बात से जाएगा कुछ भी बोलेंगे यह कहेंगे वेद में ये लिखा है तो ले ले भाई तत्वदर्शी कह रहे वेद में पूर्ण ज्ञान है ही नहीं तत्वदर्शी कह रहे कि वेद को कहने वाला अज्ञानी है अब बता वेद की बात क्यों मानी जाए अगर यह कहेंगे वेद में कबीर है तो तुम तुम्हारे वेद कह रहे हैं कि वेद में परम ब्रह्म का ज्ञान है ही नहीं तो इसका मतलब तुमर कबीर को कह रहे हो वो परम ब्रम नहीं है क्योंकि वो तो वेद में दिखा रहे हो में तो परम ब्रम नहीं है

02:28:54:21 ना पकड़ सही आपने सही सही प ऐसी खिचड़ी पई है इन्होने जहां से छू लो इनकी जीजी के वही पर आपका दिमाग खराब हो जाए जो पन्ना खोल लो उसी पन्ने में आप फस जाओगे काल के जाल में आपको ना एक बात बताता बड़ी शानदार अभी पीछे ना किसी दास से बहस हो रही थी मैंने कहा कबीर दास जी ने बोला के चार बुजा के भजन में भूरी पर सब संत कबीरा पूजे तासु को जाके बुजा अनंत अब जिसकी बुझाई अनंत है कबीर दास जी उसी की तो पूजा करेंगे अब गीता जी के अध्याय 11 श्लोक 19 के अंदर लिखा हुआ है जो अनंत भुजा है व श्री हरि विष्णु जी है यह कहते अनंत बुजा कैसे हैते उनकी तो हजार बुजा थी मैं क अनंत का मतलब पहले समझ लो क्या होता है मैं अनंत का मतलब हो जिसका अंत नहीं होता भुजाओ का ये उसको गिन रहे हैं ऐसे तो मूर्ख है मल आप मेरी बात उसम लिखा हुआ है स भुजा एक शब्द आया इन्होने उसको पकड़ लिया लेकिन सस्त्र

02:29:59:08 भुजा खा हैवे में ब में लिखा हुआ है कि उनकी अनंत भुजा उनकी भुजाओ का कोई अंत नहीं है कोई अंत नहीं पा सकता तो कबीर भन बाबूराम क अभी ला नहीं में अरा रखा लाइट उनकी जेल धाम में चली गई है हेलो सुनिए मैं बस मेरा टाइम हो रहा है मैं बस दूसरा दिखा दू आप अपनी बात कर लीजिए भाटिया जी भाटिया जी जी मिनट जा रहा हूं आप इनकी बात सुनिए टिया जी की बात सुन लीजिए मैं दूसरा प्रमाण आपको दिखा रहा हूं ब्रह्मा विष्णु महेश का मैंने एक बाल कांड से दिखाया मैं शिवांशी आपको जितने भी लोग है सबया 143 में वो तो नेति नेति थ था ना हा हा तो उसका उत्तर कहा से दिखाया था आपने तो तो मैंने यही दिखा रहा हं ना कि वो राम जी है जिससे प्रकट हुए वो कबीर क्लेम कर रहे हैं नहीं वो वही पर लिखा है उसका उत्तर भी उत्तर कहीं और से दिखाया था

02:31:13:14 आपने वही प वो सती उसम भी मैंने दिखाया पहले श्रीराम जी के बारे में बात हो रही उसे पहले पेज ठीक मेरी स्क्रीन थोड़ी बड़ी कर देंगे य यह देखिए य सुंदर कांड है राम चित मानस का इसमें इसमें पढ़िए क्या लिखा इसम जब हनुमान जी रावण के पास जाते हैं ना रावण की सभा में

02:31:47:10 तो अब मेरे पास ये थोड़ा मझले सा इसका है ये आप दोहा बोलिए अरे मेरे पास यही वाला है मेरे पास यही वाला है आप बताइए ये दोहा नंबर 20 नं कौन सा बोला दोहा शुरू करिए यहां पर हनुमान जी अपना इंट्रोडक्शन इस प्रकार से दे रहे हैं सुन रावण ब्रह्मांड निकाया पाई जा सुबल बिर जति माया जा के बल बरं हरी सा पाल हरत द बिल्कुल बहुत सुंदर हे रावण सुन हनुमान जी बोल रहे हैं हे रावण सुन जिनका बल पाकर माया संपूर्ण ब्रह्मांड के समूह की रचना करती है दूसरी लाइन जिनके बल से हे दशानन जिनके बल से ब्रह्मा विष्णु महेश सृष्टि का सृजन पालन और संघार करते हैं देखिए जिनके बल से ब्रह्मा विष्णु महेश सृष्टि का सृजन पालन और संघार करते हैं जिनके बल से सहस्त्र फण वाले शेष जी पर्वत और वन सहित समस्त ब्रह्मांड को सिर पर धारण करते हैं जो देवताओं की रक्षा के लिए नाना प्रकार के देह धारण करते ते हैं और जो तुम्हारे जैसे मूर्खों को शिक्षा देने वाले हैं जिन्होंने शिव जी के कठोर धनुष को तोड़ डाला और उसी के साथ राजाओं के समूह का गर्व चूर्ण कर दिया जिन्होंने खर दूषण तिसरा और बाली बाली जैसों

02:33:02:18 को मार डाला जो सब के सब अतुलनीय बलवान थे जिनके लेश मात्र बल से तुमने समस्त चराचर जगत को जीत लिया और जिनकी प्रिय पत्नी को तुम चोरी से हर लाए हो मैं उन्हीं का दूत हूं जा के बल लवलेस ते जिते चराचर झार सास दूत जा करी हरि आने प्रिय तो य प देखिए ये वो हनुमान जी इनका खंडन कर रहे हैं जिनकी चौपाई दिखाकर बोलते हैं प्रात लीज नाम हमारा ते दिन ईना मिले आरा वो हनुमान जी कह रहे कर इनका खंडन बहुत सुंदर जी ने बड़ा अच्छा दिया था वो जो इन्होने दिखाया था ना यही सेम की थी वो जो रामपाल अपने बारे में बोलता बड़ा अच्छा दिखाया था इन्होने अरे इसी तरह तो उसम भी तो है श्रीमद भागवत गीता के अध्याय न में श्लोक नंबर 16 16 1 में भगवान श्री कृष्ण ने भी उस विराट स्वरूप अपने क्या कहते है निराकार स्वरूप के बारे में बताया हैय वाल्मीकि रामायण हैय मेरे पास अब य देखि वाल्मीकि रामायण का स्कंद पुराण में इसम देखिए मैं क्या पढ़ रहा हूं य स्कंद पुराण का महात्म है वाल्मिक रामायण लिखा है ब्रहम वण शरीर विश्व पामा देव परम मा

02:34:21:03 ये ये जो स्कंद पुराण में रामायण का महात्म है ये उसके पहले अध्याय का ये ये 29 वा श्लोक है अब इसमें लिखा है जो ब्रह्मा रुद्र और विष्णु नामक भिन्न भिन्न रूप धारण करके विश्व की सृष्टि संहार और पालन करते हैं उन आदिदेव परमो कृष्ण परमात्मा श्री रामचंद्र जी को अपने हृदय मंदिर में स्थापित करके मनुष्य मोक्ष का भागी होता है देखो क्या कह रहे हैं जो ब्रह्मा रुद्र और विष्णु नामक भिन्न भिन्न रूप धारण करके विश्व की सृष्टि संहार और पालन करते हैं उन आदिदेव परमो कृष्ट परमा श्रीराम जी को अपने हदय मंदिर में स्थापित करके मनुष्य मोक्ष का भाग होता है

02:34:58:21 देखिए बहुत बढ़िया चलिए आज की पूरा कर सबसे ज्यादा विश्वास करते श्रीमद भागवत श्रीराम आज हम लोग पूरा करते हैं इसको फिर किसी दिन हम लोग आएंगे थोड़ा मुझे कहीं निकलना भी है और वाले भंडारे में भी गए कोई उपलब्ध नहीं है य पर जो हमारी खुराक बन सके सियावर रामचंद्र की जयन की जय नम पार्वती पते हर हर महादेव सभी को जय श्रीराम मद के लिए आप संपर्क कर सकते हैं हमारा नंबर है 74836 और अगर धर्म रक्षा अभियान में साथ देना चाहते हैं तो भी आप आ सकते हैं हमें जवाइन कर सकते हैं इसी नंबर पर ट करेंगे और यदि हमारी क्लासेस जवाइन करना चाहते हैं तो आप आ सकते हैं और यदि

02:36:06:12 आप नामा स्त्र जो नाम जप चल रहा है उसमें हमें जवाइन करना चाहते हैं साथ में एक साथ मिलकर भगवान के नाम का जप करना चाहते हैं तो आप ना मास्त्र के द्वारा हमसे जुड़ सकते एक ही नंबर है सभी प्रकार के संदेश के लिए 7408 30169 आपके मन में आने वाले जो प्रश्न होते हैं उनके लिए गोवर्धन मट का ऑफिशियल चैनल है अपने प्रश्न को डाले पूरी शंकराचार्य डाले गोवर्धन मठ के जो वीडियोस है उनके द्वारा आपको आपके ज्यादातर उत्तर प्राप्त हो जाएंगे और एक प्रश्न और आ रहा था अभी सामने कि ब्रह्मा जी जो हैं वोह ऐसा कुछ नहीं ब्रह्मा जी का युवा स्वरूप भी हमें प्राप्त है ब्रह्मा जी जो है अजर नहीं है वह ईश्वर की इच्छा है कि वह अजर बनक आपको दिखना चाहता है मगर वहां पर ईश्वर के स्वरूप को शाश्वत नहीं कहेंगे अगर वह आपको दिखना चाहता है तो आप शाश्वत भी कहते हो दिखते भी हो ठीक है यह आपके प्रश्न का उत्तर था एक प्रश्न बारबार आ रहा था य वाला और वेदों में प्रमाण नहीं है कबीर भगवान

02:37:21:21 नहीं है क्योंकि वेदों में पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान ही नहीं है तो अगर वेदों में पूर्ण ब्रह्म का ज्ञान नहीं है तो वेदों में पूर्ण ब्रह्म कबीर के बारे में कुछ नहीं लिखा है अगर कबीर पूर्ण ब्रह्म है तो ठीक है इनकी बात से इनकी बातें आज बहुत सारी हमने जानी और विधि निषेध इत्यादि की जानकारी के लिए आचार्य राम शंकर शुक्ल जी का चैनल है उसको आप जवाइन करें उसको देखें फॉलो करें जो आपको अपने यज्ञ पवित के विषय संध्या के विषय में क्या करना है क्या नहीं करना इन सब बातों के विषय में विधि विषयक जो प्रश्न उनके उत्तर आपको वहां पर मिलेंगे सभी को जय श्री राम धर्म सम्राट श्रीमत करपात्री जी महाराज की जय

02:38:03:22 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 2:38:10 · 14 Nov 2024

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A · Live रामपाल की भक्ति मनमुखी या शास्त्र सम्मत
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A · Live शैतान ने Rampal Das के अंदर प्रवेश कर गीता का किया गलत अनुवाद #rampal...
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