⬜ Not used yet · 00:00:01:10 – 01:12:46:00 (1:12:45)
00:00:01:10 सभी को जय श्री राम और आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। सभी छोटे भाइयों को ढेर सारा स्नेह, प्रेम, आशीर्वाद और जो बड़े हैं उनका यथोचित सम्मान। आज का जो विषय है वो काफी अ हास्यास्पद है। आपने टाइटल देख ही लिया होगा कि एक महानुभाव हैं जिनसे आजकल हमारा 36 का आंकड़ा चल रहा है। तो अब वो जो है विधवा विलाप पर आ गए हैं। हालांकि जैसे ही हमने अपना थोड़ा सा ऑफेंसिव रूप दिखाया था आक्रामक रूप। तो उसके बाद ही अगले ही दिन से वह उसमें आ गए थे विधवा विलाप में। तो अभी क्या है वो सब ज्यादा कर रहे हैं तो उसको भी हम लोग लेंगे एक-ए
00:01:07:26 करके सबसे पहले आज आप लोगों ने एक कॉमेडी शो देखा होगा टिकट फॉर टैट वाला कॉल रिकॉर्डिंग सुनी होगी जिसमें कि जो तथाकथित स्वषित लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य हैं उनके बारे में कुछ लोग बातें कर रहे हैं। मेरे बारे में भी कर रहे हैं। उनके बारे में भी कर रहे हैं। और कुछ ऐसे मध्यस्थ हैं जिनके बारे में भी उसमें नाम लिया गया। तो अब क्या है यहीं से शुरू करते हैं। जिसने वह कॉल रिकॉर्डिंग ना सुनी हो तो हमारा जो आहान वाला चैनल है आान कॉल ऑफ D उस पर वो कॉल रिकॉर्डिंग अवेलेबल है। जिसने ना देखी हो वो देख आए। ठीक है?
00:02:03:25 अब बात आती है सबसे पहली कि कई लोग उसमें उसमें इनके बारे में बातें हुई है कि ये जो खुद को निगराचार्य कहने वाले हैं भगवतानंद इनकी कुछ पर्सनल लाइफ पर आक्षेप लगाए गए हैं कि ये ऐसा चल रहा है या वैसा चल रहा है और अ कुछ और भी बात है कि इनका प्रेम प्रसंग चला था जो इन्होंने जिसके बारे में वहां बताया है। अ क्या कहते हैं अपनी बुक में? तो सबसे पहली बात है कुछ लोग ये आरोप लगा रहे हैं कि वो जो रिकॉर्डिंग है वो स्क्रिप्टेड है। स्क्रिप्ट करके बनाई गई है। और जो वो स्क्रिप्टेड है ये किस प्रकार से है? इसका आधार दो हो सकते हैं कि क्या कहते हैं? उसमें जो बोल बात करने वाले जो लोग हैं वो शायद ऐसा लग रहा है सुनने वालों को कि वो एक्टिंग कर रहे हैं। ठीक है? तो एक एक
00:03:07:02 मिनट तो क्या है कि वैसे मैं प्रयास करता हूं बार-बार कि भाई मैं अपने कैमरे के द्वारा लाइव आऊं। कैमरे से लाइव ना आकर के मोबाइल से ही आना पड़ता है क्योंकि कैमरे की कुछ टेक्निकल चीजें हैं। वह अभी मैं सीख नहीं पाया हूं ठीक से। साथ वाले भी हैं तो वह भी अह उनका भी स्तर कुछ हमारे ही जैसा है। तो प्रयास करते हैं कि कैमरे से आ जाए लाइव तो मोबाइल का उपयोग हो सके उतनी देर मगर आ नहीं पा रहे। भविष्य में कभी होता तो आएंगे। तो ये जो लेट होने वाली प्रक्रिया आजकल जो चल रही है 7:00 बजे जाना 7:15 बजे तो वो कैमरे से कैमरे के कारण ही चल रही है। कैमरे से लाइव होने लगते हैं फिर उसमें कुछ टेक्निकल आ जाते हैं। तो आप सभी को मेरी आवाज वगैरह अगर स्पष्ट सुनाई ना दे रही हो तो वो मुझे बता दीजिए। अब बात आती है कि हमने कुछ कॉल रिकॉर्डिंग डाली जिसमें कि
00:04:01:00 यह बातें हो रही हैं जिसमें भगतानंद के बारे में बातें हो रही है कि वो जो राजस्थान जाता है इलाज कराने के लिए और बहुत सी चीजें अब कुछ लोगों का कहना है कि वो स्क्रिप्टेड है। तो सबसे पहली बात तो ये आती है कि स्क्रिप्टेड है। इसका आधार क्या है? दो आधार हो सकते हैं। या तो आपको भगवतानंद पर बहुत विश्वास है इसलिए और या फिर आपको जो है यह क्या कहते हैं? वह जो एक्टिंग है उससे ऐसा लग रहा है कि बात स्क्रिप्टेड है। तो अगर भगवतानंद पर आपको विश्वास है तो ये आपकी अपनी चीजें हैं। ये सनातन सिद्धांत नहीं है कि सभी को भगवतानंद पर विश्वास होना चाहिए। भगवतानंद जो बोल देगा वही सत्य है और बाकी सब असत्य है। इस पर हम लोग आगे बात करेंगे। और दूसरी बात अब बात आती है कि भाई वह एक्टिंग आपको ऐसी लग रही है तो इसका मतलब यह है कि आपको और अच्छी एक्टिंग करके अगर दिखाया जाए और अच्छी एक्टिंग करके कोई ये प्रस्तुत प्रस्तुतीकरण और बढ़िया अच्छे से हो जाए तो फिर आप लोग भगवत आनंद को भी गाली देने लगोगे है ना अगर वो व्यक्ति जो बोलने वाला है वह अपनी पहचान ना बताए उसकी केवल आप आवाज सुन रहे हो वह और आपके अनुसार अच्छी एक्टिंग नहीं हुई है तो इसका मतलब यह है कि जब वो और अच्छी एक्टिंग करने लगेगा तो आप भगवानंद के भी दुश्मन बन जाओगे हमने अपने शायद एक
00:05:16:13 दो दो तीन लाइव पहले जो बात बताई थी भगवतानंद के बारे में ऐसी ऐसी बातें सुनाई दे रही है तो उसमें भी हमने ये कहा था कि अगर उसको हस्तमैथुन का रोग है हमने ये नहीं कहा था उसको है हमने यही कहा था कि अगर अगर उसका जो आधार है चीजों को मानने का उसका आधार क्या है इसने कहा उसने कहा ये कहा वो कहा उसकी कॉल रिकॉर्डिंग आई उसका WhatsApp मैसेज आया वो मैंने नाम छुपा करके दिखा दिया अगर ये सब आधार है तो ऐसे अगर वो 100 दिखाएगा तो हम 500 दिखाएंगे। आने वाले टाइम में दिखाएंगे। अगर वो 100 दिखाएगा तो हम 500 दिखा सकते हैं। भाई ये आधार नहीं होते। हम कहते रहे पर वो नहीं माना। वो कॉल रिकॉर्डिंग डालता रहा। है ना? तो कॉल रिकॉर्डिंग अगर तुम डालोगे और कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर तुम ये सिद्ध करना चाहोगे कि पूरी मठ में ये हो रहा है, वो हो रहा है। तो कॉल रिकॉर्डिंग आज तुम्हारे विरोध में भी डल गई। तो क्या इसको तुम मानोगे? और यही हमने पूछा था कि तुम्हारे बारे में भी हमें ऐसी सामग्रियां प्राप्त हो रही है जिसमें बताया जा रहा है कि तुमको अस्तमैथुन कर अस्तमैथुन की इतनी इतने प्रचंड आदत है कि विवाह के बाद भी उसकी आपूर्ति तुम्हें अलग से करनी पड़ रही है और उससे छुटकारा पाने के लिए तुम्हें जो है राजस्थान इत्यादि जाना पड़ रहा है डॉक्टरों के यहां प्रत्येक शुक्रवार तो हमारा प्रश्न यही था और आज भी है कि यदि इस प्रकार
00:06:31:18 की जो सुनी सुनाई बातें हैं इस प्रकार की रिकॉर्डिंग्स है इस प्रकार के मैसेजेस है अगर इनको आधार मान करके हम किसी भी तथ्य को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं तो क्या इस तथ्य को भी स्वीकार करना गलत वो सही है कि तुम्हें हस्तमैथुन का करोगे तुम्हारे प्रेम प्रसंग हो चुके तुम गिर गए थे किसी के प्यार के उसमें नहीं तुम्हारे अनुसार अब जब तुम्हारे ऊपर बात आई तो तुम कहोगे नहीं नहीं इस आधार पे तो नहीं माना जा सकता फिर तुम उसमें एक्सप्लेनेशन पे जाओगे तो तुम दूसरों के एक्सप्लेनेशन पे क्यों नहीं गए ये सुनी सुनाई बातें जब दूसरों के लिए आई तो तुमने एज इट इज स्वीकार क्यों क्यों कर ली और रही बात अगर तुमको वो एक्टिंग आपके अनुसार वो एक्टिंग गड़बड़ हो रही है तो भविष्य में अच्छी एक्टिंग आ जाएगी तो मान लोगे क्या और अच्छी एक्टिंग आएगी अच्छा थाने में कई बार झूठी रिपोर्ट लिखाने जाते हैं लोग लड़ते हैं ये होता है वो होता है बाद में तथ्य निकल के आता है तो पूरी एक्टिंग कर रहा था तो फिर आपके हिसाब से वो सब चीजें सही मान लेनी चाहिए प्रारंभिक स्तर पर ही जो एक्टिंग करते हैं जाकर के तो ये आधार नहीं होता है कि हमने किसी से कॉल रिकॉर्डिंग सुन ली और हमने जो है मान लिया कि उस कॉल रिकॉर्ड िंग में जो बोला जा रहा है वो संदर्भ दिए जा रहे हैं वो सब कुछ सही है और अगर ऐसा आधार मान करके किया जा सकता है तो फिर तुम्हारी एक्सप्लेनेशन
00:07:47:03 क्यों सुनी जाए जब तुम पर आरोप लग रहा है तो यह क्यों सुना जाए कि तुम उस आरोप को खंडन करने के लिए क्या-क्या कहते हो तुमने अन्य को मौका दिया था आरोप लगाने से पहले तुमने भी तो सुनी सुनाई बातों के आधार पर ही आरोप लगाया था हम भी अपने WhatsApp में मैसेजेस करवाएंगे या हो सकता है आ जाएंगे और नाम छुपा के आपको दिखा देंगे ये देखो हमारे पास मैसेज आए। यह प्रमाण होता है। तो सबसे पहली बात है कि जिनको जो इसको स्क्रिप्टेड कह रहे हैं, जो उस ऑडियो रिकॉर्डिंग को स्क्रिप्टेड कह रहे हैं तो उनसे मेरा प्रश्न है कि क्या और अच्छी एक्टिंग और अच्छी स्क्रिप्ट लिखवाई जा सकती है कि नहीं? हो सकती है कि नहीं? और हो जाएगी तो क्या वो यह मानने लगेंगे कि भगवत आनंद को यह फलानी चीजें भगवत आनंद के सच है उसमें बहुत सी जानकारियां सच्ची भी है जो जिनको आप भी मानते हो ठीक है कुछ कुछ जानकारियां ऐसी है जो विवादास्पद है जिन पर संशय है जिन पर प्रश्न है मगर भगवत आनंद के अकॉर्डिंग तो क्या है कि आपके पास अगर इस तरह की कोई सूचना आई है कोई रिकॉर्डिंग आई है तो अकॉर्डिंग टू भगवतानंद का सिद्धांत उसको मान लो फिर उसमें कोई एक्सप्लेनेशन की जगह नहीं बचती है किसी के और ये तो उन उन लोगों के लिए जिन्होंने आंखों पर पट्टी बांध ली है। अच्छा हम लोग उस रिकॉर्डिंग को हम लोग खुद
00:09:02:16 ऐसे नहीं ले रहे थे। देखो इंपॉर्टेंट मगर हमें दिखाना जरूरी है। हमें ये दिखाना था यह चीज महसूस करवानी थी सामने वाले को कि क्या केवल सुनी सुनाई बातों को आधार मान करके आप निर्णय ले सकते हैं। गंभीर बड़े निर्णय। तो अब सामने वाला खुद एक्सप्लेनेशन देने पर आ रहा है। तो जब एक्सप्लेनेशन के अभाव में तुम किसी भी तथ्य को स्वीकार नहीं करते हो तो तुमने अन्यों के लिए जो चीजें की है जो आरोप लगाए हैं उसमें तुमने अन्यों का एक्सप्लेनेशन क्यों नहीं सुना था? क्यों नहीं उनसे पूछा था कि भाई ये तुम्हारी स्क्रीन रिकॉर्डिंग आई है। इसमें तुम क्या कहना चाहते हो? क्यों उनको अवसर नहीं दिया था? उससे पहले अपना मंतव्य अपना निर्णय क्यों सिद्ध कर दिया था? यहां पर तुम्हारा अन्याय पूर्ण होना सिद्ध होता है। तुम्हारा दोगलापन सिद्ध होता है कि दूसरों के साथ जब तुम कर रहे हो तो बिना एक्सप्लेनेशन जो हम हमको हम अपने हम अपनी श्रेष्ठता के लिए वर्चस्वता के लिए जो कहना चाहते हैं वो हम कहेंगे और उसको ही निर्णय के रूप में स्वीकार करेंगे। मगर जब हम पर आक्षेप आएगा तो हम उससे रिलेटेड एक्सप्लेनेशन डालेंगे। अभी मैं आगे देखूंगा जो तुमने एक्सप्लेनेशन दिए और उसमें भी बाल की खाल निकाली जाएगी। है ना? यह तो पहली बात है। तो इसमें क्या हुआ कि
00:10:17:20 महाभारत में एक सिद्धांत कहा गया है कि अन्यों के लिए जिस व्यवहार अन्यों से हम अपने लिए जिस व्यवहार की अपेक्षा करते हैं वही व्यवहार हमें अन्यों के साथ करना चाहिए वही धर्म होता है तो यहां भगवतानंद ने व्यवहार क्यों नहीं किया अन्यों के साथ और जो प्रबुद्ध लोग हैं जो न्याय को पहले रखते हैं धर्म को पहले रखते हैं जो व्यक्ति निष्ठ नहीं है जो शास्त्र निष्ठ है धर्मनिष्ठ है ईश्वर निष्ठ है मैं उनका ध्यान इस तरफ केंद्रित करना चाहता ूंगा कि यह जो ऑडियो रिकॉर्डिंग है यह सच है कि झूठ है स्क्रिप्टेड है। एक्टिंग अच्छी है कि बुरी है वो एक तरफ है ये सब बातें। मगर आपको जरूर सोचना है जो प्रबुद्ध लोग हैं जो न्याय को प्रिय जो न्याय से प्यार करते हैं, धर्म से प्यार करते हैं। यह एक उदाहरण नहीं है इस ओर कि ऐसे सुनी सुनाई बातों पर हमको विश्वास नहीं करना चाहिए। उसकी जांच करनी चाहिए। उसकी जांच के लिए जाना चाहिए। किसी ने हमको फोन पर कुछ कह दिया वो वो व्यक्ति खुद कितना क्रेडिबल है या यह है वह है यह जाने बिना ही बस मठ में ऐसी बातें हो रही है तो मान लो ऐसा है ये सिद्धांत है क्या और अगर है तो फिर ऐसी बातें हो रही है लो रिकॉर्डिंग मान लो और रिकॉर्डिंग आएंगी और दे देंगे
00:11:32:28 अभी इसमें आपको एक्टिंग अच्छी नहीं लग रही है आगे और अच्छी एक्टिंग मिल जाएगी स्क्रिप्ट अच्छी नहीं लग रही है और अच्छी स्क्रिप्ट मिल जाएगी क्या दुनिया में एक से बढ़कर एक एक्टर नहीं है से नहीं होता है। यह सिद्धांत गलत है। अच्छा दूसरी एक बात है और यही यही चीज हमने पूछी भी थी कि भाई तुम्हारे बारे में भी लोग ऐसा कह रहे हैं कि तुम हस्तमैथुन के इलाज के लिए प्रत्येक शुक्रवार यहां जाते हो वहां जाते हो तो तुमने आके सौगंध खा ली। वो हमारा अगला चैप्टर सौगंध वाला गंगा की सौगंध है ना सौगंध खाएंगे अब सब। तो वो ठीक है। सौगंध वाले पर हम आएंगे। मगर बात यह है कि
00:12:11:27 अच्छा एक लोग यह कह रहे हैं कि आपने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। स्पष्टीकरण क्यों दें? स्पष्टीकरण एक अलग। अच्छा स्पष्टीकरण दे देंगे तो मान लोगे। क्या उससे सिद्ध हो जाएगा? तुम्हारी सारी बातें गलत हो जाएंगी। भाई कैमरे में आकर के कोई व्यक्ति अगर यह कह देगा जिस पर आरोप लग रहा है कि मैंने ऐसा नहीं किया। बस इतना काफी है। ये कोई बात होती है क्या? कोई गली का कुत्ता कोई गली का कुत्ता जिसको खाज है वह अगर कोई आरोप लगाने लगेगा किसी के ऊपर एक सभ्रांत व्यक्ति के ऊपर तो हर गली के कुत्ते के लिए अगर उसने आवाज उठाई है तो वो आकर के स्पष्टीकरण दे क्यों दे भाई कोई ऐसा आधार तो हो कोई ऐसी ठोस बात तो हो जिसके लिए बोलने जाया जाए रामपाल ने भी तो शंकराचार्य को बुलाने का दिखावा किया था तब वहां पर क्यों नहीं बोलते हो जाकर के तब तो रामपाल के विरोध में शंकराचार्य का पक्ष लेते तो दोगलापन है ना रामपाल ने भी कहा है कि मैंने चारों शंकराचार्य को बुलाया पर यही सिद्धांत है कि हर गली को कुत्ते के भोकने पर हम नहीं जा सकते भैया स्पष्टीकरण देने तो क्योंकि शंकराचार्य ने स्पष्टीकरण नहीं दिया गए नहीं तो तुम मान लो रामपाल ने जो भी थ्योरी लिखी है वो सही है
00:13:27:13 मान लोगे तुम्हारे जैसे लोग जो है ना तुम्हारे जैसे लोगों के गाल पर तमाचा है तो मैं प्रबुद्ध लोगों से कुछ बातें कर रहा था। जो प्रबुद्ध लोग हैं जो समझदारी से ध्यान देते हैं बिंदुओं पर मैं उनसे यह कहना चाहता हूं कि आपको मैंने उदाहरण प्रस्तुत किया है। ये रिकॉर्डिंग स्क्रिप्टेड है वगैरह वगैरह जो भी चीजें हैं इसके बारे में वो सब बातें एक तरफ है। मगर हम इस और प्रभुत्व लोगों का जो न्यूट्रल है जो ये कहते हैं कि हम हमारे लिए शिवश भी अच्छा है और हमारे लिए निगराचार्य जी और जो ये कहते हैं कि क्या कहते हैं जो जो प्रमाद फैला हुआ है जल्दी से जल्दी जो यह चाहते हैं कि धर्म का उत्थान हो धर्म की रक्षा हो जिनके लिए धर्म पहले है जिनके लिए यह नहीं है कि मुझे भगवतानंद को बचाना है या जिनके लिए ये नहीं है कि मुझे शिवश नारायण द्विवेदी को बचाना है या मुझे मठ को बचाना है जिनके लिए ये नहीं या मुझे निग्रह संप्रदाय को बचाना है जिनके लिए नहीं है मुझे धर्म को बचाना है मुझे ईश्वर के अस्तित्व को बचाना है वेद को बचाना है जिनके लिए यह है मैं उनका उनका इस ओर ध्यान खींचना चाह रहा हूं कि विदाउट एक्सप्लेनेशन या जो भी चीजें यहां प्रस्तुत की जा रही है कि भैया मैसेज मैंने दिखा
00:14:42:14 दिया या फलाने ने ये मैसेज किया था फलाने ने मुझे ये किया था वो किया था क्या इनको आधार बना करके हम किसी पर गंभीर आरोप लगा सकते हैं हम जा करके उसकी जांच पड़ताल अवश्य कर सकते हैं उनके आधार पर वो भी हमारे ऊपर है कि हमारे पास समय है कि नहीं है मगर हम उसके आधार पर किसी को निर्णायक रूप में गलत तो नहीं कह सकते ठीक है और बाकी ये जो श्रंखला है इसमें और भी काफी सारी सामग्रियां हैं क्योंकि उनका सिद्धांत है कि कहीं से कोई भी सामग्री आती है तो उसके आधार पर सामने वाला आरोपी है तो उन्हीं के सिद्धांत को फॉलो करते हुए ये सब चीजें डाली जाएंगी और वो स्वीकार करते जाए अपने लिए है ना वरना वो इस चीज को स्वीकार करें कि ऐसे सुनी सुनाई बातों पर विश्वास नहीं किया जा सकता ठीक है अब दूसरी बात यह है कि जो लोग खुद को और इस बारे में मैंने वह भी इसी इसी चीज को वो करने के लिए मैंने बताया था कि कुछ लोग आपके बारे में कह रहे हैं तुम्हारे बारे में कह रहे हैं कि तुम हस्तमैथुन के आदतन वो हो शिकार और उसका इलाज करा रहे हो। तो क्या इस तरह की बातें हमें जो सुनाई दे रही है तो हम लोगों को क्या ये मान लेना चाहिए? कुछ लोग ऐसी बातें कह रहे हैं कि तुमने वो उसमें
00:15:57:22 बहुत ही वैसे आशिक थे सरफिरे टाइप के अपने उसमें पीछे की ऐज में या फिर या फिर हाइपर सेक्सुअलिटी थी तुम्हारे बारे में ऐसी बातें भी हो रही है और भी चीजें हैं और गाली तो तुमने खुद स्वीकार किया ही है कि तुम देते हो आगे उस पर बात करेंगे कि गाली तुम्हारा देना कहां तक सही है जो तुमने ताल ठोकी है गाली देने की और उसमें एक कुतर्क भी किया है तो यह तो बात एक ये उनके गाल पर तमाचा पड़ा कि ये तो बात एक रही कि उनके गाल पर तमाचा है जो ऐसी सुनी सुनाई बातों का आधार बना करके अपनी चीजें कहना चाहते हैं। और ये ये जो सामग्री है ये केवल हमारे पास नहीं आ रही है। ये चीजें ये बातें तुम्हारे Facebook के कमेंट्स में भी लोग कर रहे हैं। और जो लोग बुलाने की बात को नहीं जानते हैं जब हमने आक्रमण चालू किया जब पहले हम क्या कर रहे थे कि हम हाथ जोड़ रहे थे हम हाथ जोड़ रहे थे मत करो इसको मत खींचो मत एक भयंकर युद्ध को तुम आमंत्रित करो इशारा कर रहे थे मगर नहीं समझे तो ठीक है तुम्हें
00:17:13:03 युद्ध चाहिए तो युद्ध ही सही तो जब हमने ऐसा किया जब हमने ऐसा किया था तभी तभी हमने ये कह दिया था कि भगवत आनंद जिस दिन तुम्हारे अंदर सामर्थ्य हो उस दिन आप लाइव के लिए बता देना हमको कब करना है। ठीक है? तो लाइव के लिए हमने बोल चुके हैं भगवत आनंद कब बता रहे हैं आना चाहते हैं लाइव आप बताएं और करो लाइव पता चलेगा फिर दूध का दूध और पानी का पानी और कई बार कह चुके हैं आज भी कह रहे हैं दोबारा। ये तो रही ये बात। अब बात करते हैं कि कुछ कुतर्की गुरु द्रोही हैं। उनकी एक लिस्ट तैयार हो रही है अच्छे से जो जो गुरुद्रोही है जो हमारे संज्ञान में है और जो इंटरनेट के माध्यम से उपद्रव कर रहे हैं या जो भी कर रहे हैं उन सब पर भी कारवाई तो होगी होनी
00:18:10:18 है। फिलहाल बात यह है कि जो नीच गुरु द्रोही है जो भगवतानंद को पूज रहे उसके चरणों को पूज रहे यह कहते हुए की भगवतानंद शोधन कर रहा है मठ का भगवतानंद शोधन कैसे कर रहा है भाई भगवतानंद शंकराचार्य जो है पूरी के वो शास्त्रोक्त खंडन एक तरफ मगर पूरी के शंकराचार्य जी को भगवतानंद गुरु द्रोही सिद्ध कर चुका अशास्त्रीय सिद्ध कर चुका करपात्री जी महाराज को वो अपनी वाणी के द्वारा सिद्ध नहीं कर चुका। उसने वो जो गिलहरी प्रयास होते हैं ना वो किए हैं। वो प्रयास किए उसने। तो अपनी वाणी के द्वारा उसने ना जाने कितनी बार पूरी के शंकराचार्य जी जो है वर्तमान के उनको उसने अशास्त्रीय सिद्ध कर चुका। अशास्त्रीय का मतलब अधर्म। अशास्त्री का मतलब अधर्म कि उन्होंने वो कहीं-क पर अधर्मी भी है। करपात्री जी महाराज को गुरु द्रोही सिद्ध कह चुका है। करपात्री जी महाराज जैसे सर्वभूत हृदय धर्म सम्राट करपात्री
00:19:25:20 जी महाराज को भी यह जो है अधर्मी सिद्ध करने का प्रयास कर चुका है। कह चुका है कि भैया वो भी गुरु द्रोही किए गुरुद्रोह किए फलाने फलाने चीज को लेकर के और केवल उन विषयों में ही नहीं जो शास्त्र का कहीं पर वो हो रहा है। ये ध्यान रखिएगा अलग दूसरे विषयों में भी जिसका शास्त्र से कोई मतलब नहीं है। उसमें भी प्रयास कर चुका है कि ये गलत लोग हैं। शंकराचार्य गलत लोग हैं। शंकराचार्य की गद्दी पर यह कह रहा है ना कि मैं मठ की रक्षा कर रहा हूं। मठ का शोधन कर रहा हूं। अबे तू शंकराचार्य को भी तो गलत ही कह रहा है ना। तो काहे का शोधन है? यह शोधन है तेरा और ये नीच गुरु द्रोही ये अपने किराए के बाप से पूछे जाकर के ये मठ का शोधन किस प्रकार से है किस प्रकार से मटका शोधन है जिसमें तुम मठ का जो जो सबसे बड़ी गद्दी है उसी को तुम वो करना चाह रहे हो बदनाम कि ये भी अधर्म का आलंबन ले रही है कई जगह ठीक है अधर्मी अधर्मी कह रहे हो उसको को तुम तो कौन सा मठ? अच्छा ठीक है। पूरी के शंकराचार्य जी को तो कर ही रहे हैं। ज्योति मठ वाले जो हैं मुक्तेश्वर जी क्या उसके
00:20:40:24 विरुद्ध उसने नहीं बोला? उनके विरुद्ध उसने नहीं बोला। उस गद्दी के विरुद्ध उसने नहीं बोला। ज्योतिर मठ के विरुद्ध उसने नहीं बोला। वहां के परिकों के विरुद्ध उसने नहीं बोला। बोला है। तो पूरी की व्यवस्था गई और ज्योतिर्मठ की व्यवस्था गई। और मुझे पता नहीं है कि यह द्वारका वालों के लिए कुछ बोला है कि नहीं बोला है। मगर ऐसा नहीं है कि भविष्य में कभी बोलेगा भी नहीं। वो भी कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। बोल देगा और श्रृंगेरी के लिए भी बोल चुका है। तो इसका मतलब क्या है कि तुम ये सोच रहे हो कि धर्म की रक्षा कर रहा है। तुम ये सोच रहे हो पहले तो मठ पे आ जाओगे। पूरी मठ की रक्षा कर रहा है। तो पूरी मठ की रक्षा कर रहा है तो केवल परिकरों तक सीमित रहता ना। यह तो हम अनेकानेक जगह पर जगतुगुरु शंकराचार्य जो वर्तमान पूरी पीठाधीश्वर जिनके आगे इसकी दो ढेले की दो ढेले का कोई अस्तित्व नहीं है। दो कौड़ी का मगर ये उनकी उनकी भी अवमानना कर रहा है। उनका भी उपहास उड़ा रहा है। उनके बारे में भी चारों शंकराचार्यों के लिए बना रहा है। तो ये तो केवल मठ ही नहीं पूरी परंपरा को ही लुप्त कर देना चाहता है। तो नीच गुरु द्रोहियों तुम्हें यह दिखाई नहीं पड़ रहा
00:21:56:16 जो तुम इसको पूज रहे हो। तुम यह मानते हो ना कृपात्री जी गुरु द्रोही थे। तुम्हारा गुरु गुरु द्रोही था। क्योंकि ये तो यही बोल रहा है। तो ये सबसे बड़े नीच गुरु द्रोही है जो इसको इसका समर्थन करते हैं। इसको इसकी पूजा करते हैं। तुम इसका समर्थन कर रहे हो ना? जो है थोड़े बहुत पूरे मठ में जो कुछ एक दो% इसके प्रभाव में आकर के ऐसा कर रहे हैं क्योंकि इसके अपने तो शिष्य है नहीं ये बोलता है इसकी क्या मंडली है जिस दिन मंडली होगी और इसने सार्वजनिक कर दी सूचना उस दिन क्या होगा फिर वहीं पे इसका रोल इसकी फिल्म में जाकर के मैं निभाऊंगा जिस दिन ये अपना जीवन सार्वजनिक करेगा तो उस दिन जो है इसकी फिल्म में जाकर इसका रोल तो फिर मैं निभाऊंगा। तो ये बिल्कुल ठीक वही मैंने अभी पहले कहा ना ये बिल्कुल ठीक उसी तरीके से है जैसे कोई अपना बाप बदल लेता है। वैसे ही इन लोगों ने कहने को ये गुरु गुरु के वो है शिष्य हैं। मगर जो गुरु का खंडन मैं तो कह रहा हूं अपमान तो बाद की बात है। जो गुरु का खंडन कर रहा है तुम उसके पीछे कैसे हो सकते हो? उसके तुम अनुयाई कैसे हो सकते हो? समर्थन कैसे हो सकते हो? जो गुरु को यह
00:23:11:20 कह रहा है कि भैया तुम गुरु द्रोही हो। जो गुरु के गुरु को यह कह रहा है कि तुम गुरु द्रोही हो और ऐसा कहने वाले के जो समर्थक हैं और वो भी अपने आप को शिष्य कह रहे हैं अजीब है। आ जाना किसी दिन आमने सामने ऐसा कोई हो तो उस दिन बात हो जाएगी। तो यह सारी बातें एक तरफ ही हो गई। अब एक बात आती है कि मैं कुछ मैं कुछ दिनों से देख रहा हूं। कि भगवतानंद का जो वो था ना सिग्मा एटीट्यूड वो थोड़ा प्रभावित हो गया। थोड़ा बदला मैंने अपनी लास्ट लाइव में भी कहा था बहुत बढ़िया है। अच्छा अच्छा है। थोड़ा
00:24:00:02 थोड़ा डाउन हुआ मामला। ठीक है? तो अभी क्या है? मैंने अगर हम लोग एक सिनेरियो में देखें तो भगवतानंद ने विधवा विलाप कैसे किया है रोया कैसे वो देखो उसका एक सीन है जब बिल्कुल पॉइंट की बात आई थी ना कुछ चीजें ऐसी जो बिल्कुल अकाट थे उसमें कुछ कर ही नहीं सकते तो ऐसी एक नब्ज़ है भगवत आनंद इस पूरे सिनेरियो में वो नब्ज़ क्या है कि इसने बोला कि लास्ट में वीडियो के लास्ट में जो विजय श्री है वह देखिए किस तरीके से पूरी शंकराचार्य जी के मंच पर बैठी है। और आगे उसी क्रम में यह भी बोला है कि वह अपने व्यापार को बढ़ावा दे रही है। ठीक है? अब इसने अपने डिस्क्रिप्शन में बाद में शायद इसने उसको बदनाम करने के लिए कहा। विजय श्री को बदनाम करने के लिए कहा। अब उसके बाद इसने अपने डिस्क्रिप्शन में अपना सेफ साइड रखने के लिए यह भी लिख दिया कि भाई वह जो अंत में सब लोग उसको यह समझ रहे हैं वह यह नहीं है। वह वो है और वह हमने अशास्त्रीयता दिखाई है। ठीक है। हमने जो है मंच की अशास्त्रीयता दिखाई है। इसलिए जो है हमने उस वीडियो को लगाया है। वो बात और है कि उसको लगाते हुए उन्होंने उसने उसमें
00:25:15:08 बीच-बीच में क्लिम्स में विजय श्री के ही फोटो लगाए हैं। अब प्रॉब्लम क्या है? इसने बोला कि वो मैंने वाकलन से बोल दिया था बाद के वीडियोस में। तो वाकलन से बोला है। तो लोग समझ रहे हैं भैया डिस्क्रिप्शन में जो लिखा है वह बात सही है। तो यह उलझ गया। यह है ना कि जो रावण भी था उसकी भी एक चीज हो गई थी उससे। तो यह इस रावण की गलती है जिसमें ये फंसेगा और फंसा है। अब दूसरी बात ये आती है कि हंसी इस बात की है कि आप देखिएगा जब इसने इस पॉइंट पर बात की है वाक स्कलन वाली तो ये अटक रहा है। उसमें मतलब जो वो था ना उसका वो ओरा कि सबको सुनाता था। सबकी जो है निग्रह करने आया। वो ओरा देखिएगा। इसका देखिए कैसे चेंज हो रहा है। वह हमारा वाक स्कलन से हो गया था। ऐसा वैसा यह भी वाकलन से हो गया। यह होता है। तो वहां पर इसको देखना कि ये अटक रहा है। घबरा रहा है। और गलती है घबराएगा ये आदमी। तो उसको एक एट ए ग्लांस इन दो तीन सीन्स को आप रखिए कि उसको रखिए। और फिर दूसरा एक सीन रखिए। कौन सा? जिसमें हाथ जोड़ के कह रहा है कि मैं उस ध्वज का ध्वज की सौगंध खा रहा हूं। गंगा की सौगंध
00:26:30:14 मैं ध्वस्त की सौगंध खा रहा हूं। मैं जो है जनेऊ की सौगंध खा रहा हूं। मैं अपने पीछे कामाख्या मंदिर है उसकी सौगंध खा रहा हूं। मेरा कोई गुप्त रोग का उपचार नहीं चल रहा है। शिवश ठीक है। आप देखिए वो रावण अहंकारी वो कैसे उसका ओरा चेंज हो रहा है। फिर तीसरे वाले में क्या हो रहा है? तीसरे वाले में विधवा विलाप हो रहा है क्या आचार्य रामशंकर शुक्ल जी वो जो है मैं जो है शालिग्राम भगवान को हाथ में लेकर के शपथ खा लूंगा मेरे पास इससे ज्यादा और कुछ नहीं है तो इन तीन चार सीन्स को आप एक ग्लांस में देखेंगे ना ऑब्जर्व करेंगे एट ए ग्लांस तो वो सीन याद आ जाएगा घातक नाम की एक मूवी थी उसमें जब कातिया के सारे भाई खत्म हो जाते हैं। कुछ एक दो ही रह जाते हैं। तो कातिया एक डायलॉग मारता है कि सात भाई थे हम सात। सातों के साथ शेर थे शेर। कोई कुछ नहीं कर पाया। काशीनाथ पर तूने रुला दिया। पर तूने रुला दिया। तो ये जो रुला देने वाली नौबत है ना ये अब इनकी दिख रही
00:27:45:18 है। ए ग्लास ये एक जोक था। अब थोड़ा पॉइंट्स पर आ जाते हैं। तो पहली बात है कि उसने एक बात कही है रोतेरोते विधवा विलाप के समय कि आचार्य रामशंकर शुक्ल जो हैं वो हाथ में शालिग्राम को लेकर के ये पहले एक बात एक संक्षिप्त में मैं आपको जो भी व्यक्ति इसको देख रहा है लाइव को उसको मैं याद दिला दूं कि तुम्हारा जो अगर तुम ऐसा समझ रहे हो कि जो निग्रचार है वह शोधन की दृष्टि से कर रहा है जो कर रहा तो यह बहुत बड़ा तमाचा है ये सच्चाई तुम जैसे लोगों के मुंह पर क्योंकि वह शोधन की दृष्टि से अगर कर रहा होता तो वो केवल परिकरों तक सीमित रहता। उसने अनेकानेक जगह शंकराचार्यों को भी गलत सिद्ध किया है। सिद्ध करने का प्रयास किया है। उसने अनेकानेक जगह जो गुरु गद्दी पर बैठे हैं जो निर्णायक है धर्म और अधर्म के उनको भी उसने गलत कहा है। उनका भी उपहास उड़ाया है। अवमानना की है। अपमान किया है। तो अगर अवमानना अपमान तिरस्कार बहिष्कार इन सबको छोड़ भी दिया जाए।
00:29:00:21 फिर भी ऐसे आक्षेप लगाए हैं जो वापस नहीं हो सकते। करपात्री जी ने अगर भगवतानंद की जानकारी सही माने तो करपात्री जी ने अगर पांच पीठे कही तो शंकराचार्य जी गुरु द्रोही है क्योंकि वो चार पीठे कहते कहते ये इसकी जानकारी है वो उसका जो उदाहरण है उसका जो निराकरण है वो कई बार हम लोग दे चुके हैं मगर ये इसकी जानकारी तो ये केवल ये नहीं है कि मुझे पूरी मठ की चिंता है इसको अपने लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य के रूप में ख्यापित होना है तो इसलिए इसे अन्य जो सबसे स्ट्रांग जगह हैं उन सबको जो है बाहर करना है और वो कर रहा है और तुम इसके समर्थक होते हुए भी खुद को गुरु द्रोही या धर्मनिष्ठ सोच रहे हो तो ये तुम्हारी सबसे बड़ी बेवकूफी है अगर बात मठ के परिकों की होती तो मठ के परिकों तक सीमित रहता ना वो नहीं रहा उसने एन केन प्रकानन जगतगुरु शंकराचार्य को पूरी वाले हो या ज्योतिर मठ हो सबको गलत साबित किया है तो ना तो वो मठ का चिंतक है ना ही वो परंपरा का चिंतक ना ही वह परंपरा का चिंतक है और अंतत गत्वा जब वो परंपरा का चिंतक नहीं है तो वह धर्म का भी चिंतक नहीं है क्योंकि धर्म का चिंतक होता तो हमने उसको
00:30:16:12 अनेक प्रकार से कहा कि भाई इस तरह के जो वो है विषय इनको आप ऑनलाइन पर डिस्कस मत करो। ये किसी के निजी जीवन से जुड़ी हुई बातें हैं। आप जो है उसमें आ जाओ। तो इसने जो है उदारता को कायरता समझ लिया। इसको धर्म की चिंता होती तो आता ना यह। इसको तो मसाला चाहिए था। इसको व्यूज चाहिए थे। आज से कुछ समय पूर्व इसके जिन वरिष्ठ लोगों के साथ ये जीवन यापन करता था। अ उनमें से एक वो भी है क्या कहते थे प्रशांत मिश्र जी जिसका इन्होंने अपनी उसमें नाम लिया है। उनका उन्होंने बताया कि यह बोल रहा इनसे बोला गया किसी ने कि भाई तुम जो अपना पक्ष प्रस्तुत करते हो शास्त्र की बातों में वो जो पक्ष प्रस्तुत करते हो तो तुम एक काम किया करो किसी का नाम ले मत प्रस्तुत किया। मतलब खंडन जो करते हो किसी मिथ्या का तो तुम नाम ले मत किया करो। तुम जो है केवल अपना पक्ष प्रस्तुत कर दिया करो। ऐसा किसी ने कहा तो इसका जवाब था कि व्यूज नहीं आते। व्यूज नहीं आते। यह जवाब था इसका। तो इसका अर्थ क्या हुआ कि इसका जो ताना बना है यह धर्म का कैरी मिनाटी बनना चाहता है। और जो प्रबुद्ध जन है जो न्यूट्रल लोग हैं जो
00:31:31:15 निष्पक्ष दृष्टि से देखेंगे तो क्या होगा? उनको सच्चाई समझ में आएगी कि आज देख और भी आएंगी रिकॉर्डिंग्स और भी WhatsApp चैट इत्यादि आएंगे। तो ये सारी चीजें हैं। अब इसने एक बात कही कि भाई जो रोतेरोते एक बात कही है कि भाई वो जो आचार्य राम शंकर पहले तो यह बोला कि आज विश्वासघात विश्वासघात का मूर्तिमान जो वो है वो साक्षात वो देख लिया मूर्तिमान रूप देख लिया विश्वासघात का मैंने ये सब विधवा विलाप इसने किया अगर तेरे अनुसार ये विश्वासघात है और आचार्य रामशंकर शुक्ल जी जो है वो असत्य भाषण कर रहे हैं तो क्या तूने विश्वास विश्वासघात नहीं किया था पूरी मठ में जब तू शास्त्रज्ञ शाखा का मेंबर था तूने खुद कहा तो तूने जब पूरी म से तुझे निकाल दिया गया धक्के मार करके तो फिर तूने बाहर जाकर के ये चीज जो चीज तूने छिपाई थी शास्त्रज्ञ तेरे अनुसार तूने छिपाई थी ये चीज कि जो प्रश्नों के उत्तर है वो भाई और कोई नहीं देता जबकि ये सब झूठ है क्या है क्या नहीं है क्या आवश्यकता अपनी वर्चस्वता को स्थापित करने के लिए बोलता है कि पूरी मठ से होने वाले जो प्रश्न थे उनके के उत्तर में देता था। तो इस
00:32:46:16 बात को तू छुपाता था। दूर जाकर के तूने इस बात का ढेरा क्यों पीटा? तो ये विश्वासघात नहीं है क्या? तो विश्वासघात का मूर्तिमान रूप तू नहीं है क्या? तू भी है। अगर तेरे अनुसार हमारी हमारे अनुसार जो है आचार्य रामशंकर शुक्ल असत्य भाषण नहीं कर रहे हैं। असत्य भाषण नहीं कर सकते। मगर अगर तेरी जानकारी को तेरी जानकारी के अनुसार चला जाए तो तू खुद स्वयं मूर्तिमान विश्वासघात का रूप है। तो अब इसने कहा भाई कि अगर आचार्य रामशंकर शुक्ल जी जो हैं वो हाथ में शालिग्राम लेकर के और यह सौगंध खा लेंगे या शपथ ले लेंगे कि वो सत्य बोल रहे हैं तो मैं मान लूंगा। तो पहली तू यह बता कि विजय श्री फ्री मेंशनंस के लिए कार्यरत हैं। ठीक है? तूने जिसजिस को इसका आधार बनाया है उसको बुला। किसी को आधार बनाया ना किसी कहीं से साक्ष्य मिला ना उसको बुला और तू और वह दोनों मिलके हाथ में जल लेकर के शालिग्राम भगवान का वो लेकर के विग्रह लेकर के और यह शपथ ले
00:34:02:02 सौगंध खा कि हां विजय श्री जो है फ्री मेंशन के लिए कार्यरत है। बोल खाएगा खा और शपथ खा कि पीडीएफ वाले को बुला जिसने तुझे पीडीएफ भेजी है। पीडीएफ वाले को बुला और उसके साथ लेकर के हाथ में शालिग्राम भगवान लेकर के शपथ खा कि उसके और तेरे पास प्रमाण है जो आक्षेप उस पीडीएफ के द्वारा लगाए गए। बोल खाएगा शपथ और शपथ खा कि जिस तरह से तू फतिया कस रहा है मेरे और विजय श्री को लेकर के तू शपथ कहा हाथ में लेकर के और जो जहां जिनके आधार पर तू ये बोलता है चीजें क्योंकि तू तो वहां है नहीं ना तूने अपने तूने अपने एक वीडियो में ऐसा तर्क दिया ना अपने पिता पिताजी के लिए अपने पिताजी के लिए तूने एक तर्क दिया है कि ये भाई साहब 400 500 किलोमीटर दूर बैठे हैं ना ये ना वहां वहां कथा सुन रहे थे, ये कर रहे थे, वो कर रहे थे। मगर वकालत इनहीं को करनी सबसे ज्यादा। इस तरह का तर्क दिया है कि जो दूर बैठा हुआ आदमी है वो ना बोले, जो वहां पर हो वही बोले। ऐसा तर्क तूने दिया है।
00:35:17:21 तो तू तो दूर बैठा है इन मामलों में भी। तुझे कोई बता रहा है ना उनको साथ में ले। उनको साथ में ले और फिर शालिग्राम भगवान को हाथ में ले शपथ खा। कहां शपथ? कहां सौगंध? कि अवैध रिश्ता है या वो जो है मठ में जो है वह उनका कोई कुछ जो भी तूने आक्षेप लगाए अश्लील अभद्र नीचता वाले नीचता की पराकाष्ठा तो सब खा विजय श्री जो है व्यापारी है बोला व्यापार करने पहुंची है तो उसका भी तुझे कहीं से वो मिला है ना तू तो था नहीं तो वो जो मिला है तुझे वो उस व्यक्ति को मिला दोनों हाथ में शपथ खाओ और
00:36:11:24 जितने जितने जो ये झूठ तूने बोले हैं जितने उसमें लोगों के नाम मेंशन किए हैं ज्यादातर तो नाम मेंशन नहीं करता है तू मगर जितने लोगों के तूने नाम मेंशन किए ज्यादातर तो तेरे को नकार चुके हैं। आचार्य रामशंकर शुक्ल जी ने नकार ही दिया। जो प्रशांत मिश्रा जी का तूने नाम लिया था उन्होंने नकार दिया। कि मैं इस बात के फेवर में नहीं जो मेरे नाम से इसने यह चक्र चलाया है। और क्या था? और क्या था? मैंने यह बात लाइव में भी स्वीकार की है कि मैंने तेरी वेबसाइट देखी है और शुरुआत के उसमें जो तुझे रास नहीं आया वह सम्मान भी तुझे दिया था। फिर भी तूने क्या पोस्ट बना के डाली? तूने पोस्ट क्या बना के डाली? कि शिवश का कहना है कि मैं संस्कृत ज्ञान से हीन हूं। तू वही बच्चा है जो वर्चस्व का भूखा है। बस
00:37:27:13 बच्चे ने इज जिद पकड़ ली है ना जो कि मुझे जो है ये चाहिए वर्चस्वता चाहिए। वैसा ही एक बच्चा है। अब तू शपथ खा कि मैं तुझे संस्कृत ज्ञान से ही नहीं मानता हूं। खा शपथ जिन जिन लोगों के आधार पर तुझे चीजें मिल रही है उनके साथ मिलकर के शपथ खा। ये सारे जो आक्षेप तुझे प्राप्त हो रहे हैं। बोल किस-किस की शपथ खाने वाला है लाइन में? बता। अगर वैसे मेरी जानकारी में मैंने यह बात कही ही नहीं थी कि संस्कृत का ज्ञान नहीं है भगवत आनंद को फिर भी क्या है इसने आप ना देखा था कहीं की कहीं का रोड़ा भानुमती का क्योंकि इसको पब्लिसिटी चाहिए फेम चाहिए तो क्या करता है आधी अधूरी जानकारियों को लेकर के भी डाल देता है जैसे इसने क्या किया था ऋषिकेश ब्रह्मचारी के जी के नाम से एक फेक आईडी बनाई गई और कमेंट किया गया तो इसने क्या किया तुरंत वहां से स्क्रीनशॉट लिया बिना जानकारी ये वही है। आधी अधूरी जानकारी पर बात करने वाले आचार्य गण होते हैं। अरे कोई काफी लंबे समय से भी अगर वो जानकारी प्राप्त हो रही
00:38:42:14 हो तब भी बात है। आधी अधूरी जानकारी विजयश्री की फोटो विजय श्री वीडियो में नहीं है मगर हमने डाल दिया और फिर उसको कवर अप कर रहे हैं। ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी का वो आईडी नहीं है। फिर भी हमने स्क्रीनशॉट लिया और डाल दिया। फिर उसको मिटा दे रहे हैं। यह आचार्य होते हैं। यह आचार्य नहीं होते हैं। यह वो लोग होते हैं जो इलाज कराने के लिए जाते हैं। प्रत्येक शुक्रवार प्रज्ञा शक्ति मिट जाती है ना धातु निकल जाने से। वजन रुक जाता है। 47 किलो 50 किलो पे। इतने वजन इतने वजन वाले व्यक्ति को ऐसे हवा में उठा के टांग सकने वाला। इतना वजन बस थैले में डाल के ले जाओ कहीं। वो धातु के रुक जाने से ऐसा होता है। क्षीण हो जाने
00:39:35:04 से अगर मैंने मान लो किसी बात से मेरे किसी बात से अर्थ निकल भी सकता होगा तो वो उस उसी में उसका अर्थ लिया जा सकता है कि भाई तेरे से भी बड़े-बड़े जो है वो संस्कृतज्ञ हैं। अभी वृंदावन की बात मुझे बताई थी प्रशांत मिश्र जी ने कि कोई आचार्य थे उनका एक शिष्य आ गया था 13 वहां पर वह चल रहा था कथा चल रही थी और उसमें भगवतानंद से उस शिष्य ने एक सवाल पूछ लिया संस्कृत का जिसके पास उत्तर नहीं था तो ऐसा नहीं है कि तुम अंतिम हो ठीक है तो उस सापेक्ष में भी उसका अर्थ निकाला वैसे मेरी जानकारी में तो मैंने ऐसा बोला ही नहीं है जहां तक मुझे याद है कहीं किसी बात में अर्थ निकल सकता है जैसे वो मेरी एक बात थी ना कि विरोधाभासी वीडियो डाल दिया। तो इसका इसने क्या अर्थ निकाला? मैंने कहा विरोधाभासी वीडियो डाल दिया। तो इसने अर्थ निकाला कि इसने अभी 10 मिनट पहले कहा इसने वीडियो देखा ही नहीं। फिर इसको ये कैसे पता ये वीडियो विरोधाभासी है? मैं कह रहा हूं कि तूने मेरे विरोध में वीडियो क्यों डाला? और यह कह रहा है कि शिवश का यह कहना है कि मैंने ऐसा वीडियो डाला है जिसमें दो तरह की बातें हो रही
00:40:46:10 है। ये सब ये कल रात को जो विधवा विलाप इसने किया है सौगंध खा रहा हूं। खैर विधवा विलाप इसका पहले से ही चालू है। जैसे ही हमने आक्रामकता दिखाई है वहीं से इनका विधवा विलाप चालू हो गया। तो यह सब विधवा विलाप करने के बाद भी इसको रात में जब सपना चैन की नींद नहीं आई होगी तो सुबह उठते ही फिर एक वीडियो डाल दिया। फिर वीडियो डाला सुबह उठ के कुछ कहा होगा कि मैंने रात को सभी बातों का खंडन कर दिया। अरे तू कह रहा है कि आचार्य रामशंकर शुक्ल जी ने ये ये बात मेरे से कही। आचार्य रामशंकर शुक्ल जी कह रहे हैं नहीं कही। अब तू इसमें क्या खंडन करेगा? क्या खंडन करा तूने? रो रहा है तू। और उसके अलावा अपनी वजन को अपनी बात को वजन देने के लिए तूने जो है वो शबरी वाला मामला उठा लिया। शबरी वाला मामले से मुझे याद आया कि तूने अपनी वो पीडीएफ बना करके कहीं उपलब्ध कराया है क्या? अगर उपलब्ध कराया है तो उसको सार्वजनिक कर। बता जैसे बात में पोस्ट डालता है वैसे पोस्ट डाल। उसका लिंक डाल। भाई हमें पता तो चले कि तूने शबरी के विषय में ऐसा क्या कहा है जो तेरा दावा है कि हमने खंडन कर दिया। हम जवाब देंगे कहां से? जब हमें क्वेश्चन
00:42:01:18 तेरे क्वेश्चन का ही नहीं पता है। दोनों का पीडीएफ बना के डाल। बुद्ध वाले मामले का भी वो तेरी वेबसाइट के अलावा और कहीं नहीं मिला। तो जो इसके शुभचिंतक है उनको मैं कह रहा हूं या स्वयं भगवत आनंद सुन ले। तेरा कहना है ना कि तूने करपात्री जी का खंडन किया या जो पूज्य गुरुदेव पुरी के शंकराचार्य जी उनका खंडन किया तूने। इतनी दम है ना तेरी सॉरी इतनी औकात है ना तेरी ऐसे ही वर्ड्स तू यूज़ करता है ना ये वर्ड्स तेरे अनुसार सही है खैर मुझे ठीक नहीं लग रहा है मैं नहीं कहूंगा तो क्या है कि वो तू अपना जो थ्योरी है ना तेरी ये शबरी माता को लेकर और बुद्ध को लेकर ये सार्वजनिक तो कर तू जो डंका पीट रहा है जो तू ड्रम बजा रहा है क्योंकि अच्छे वाले जो ढोल है वो वो तो तुझे मिलेंगे नहीं तो तू ड्रम ही होंगे पानी के तो उनको ही बजाएगा तो जो जो तू ड्रम बजा रहा है तो वो इसलिए बजा पा रहा है कि तुझे करपात्री जी महाराज ने क्या कहा है वो पता है वो सार्वजनिक है अवेलेबल है तूने अपनी चीजें अवेलेबल कराई है क्या अगर कराई है तो उसको बता कहां
00:43:16:26 है शबरी वाला प्रकरण तो मैं ढूंढ ही रहा हूं कहीं कहीं मिल ही नहीं रहा कहां कौन से जगह पे तूने दो इसको सार्वजनिक कर फिर मिलेंगे शबरी माता वाले में और बुद्ध वाले में हालांकि शबरी वाले मामले में सनार्ग वाले तुझे बुला रहे हैं क्यों नहीं जाता वहां उनके सवालों का उत्तर देने दे दे उनको चैलेंज कि सनार्ग वाले मुझसे शास्त्रार्थ करें वो आ जाएंगे कर लेंगे तुझसे शास्त्रार्थ कब दे रहा है चैलेंज और बाकी उपलब्ध करा मैं जानू तो तूने कहा क्या है भाई तेरे जैसे जो छद्म वाले वो है इन सबके वो थोड़ी ना सुना करते हैं कि किसने क्या लिखा है, किसने क्या कह दिया है। तेरे जैसे जो आचार्य स्वषित आचार्य गली गली घूमते हैं। तो चल अब तेरे को अगर सुनना ही है कि भैया कृपात्री जी महाराज के बारे में तेरा कहना है कि तूने खंडन किया है और तुझे ये सुनना है कि हम कैसे तेरा खंडन करते हैं तो अपने वो लेख को सार्वजनिक तो कर। उसमें क्या लिखा है तूने? खैर
00:44:21:25 वैसे चलते रहेंगे। मेरा किसी ने जवाब नहीं दिया। जवाब नहीं दिया। और अपनी चीज छुपा के रखी है कि मेरा ये पक्ष है सबरी वाले मामले में या बुद्ध वाले मामले। बुद्ध वाले का तो शायद उसमें लिखा है। मगर वो पूरा है कि नहीं पूरा है ये भी तो सोचने की बात है। हम उसी पर वर्क करें कि बाकी भी है कुछ और। वहां क्या करता है? सन्मार्ग वालों के यहां जाता है। जब पक्ष कमजोर पड़ने लगता है तो वहां से अपने कमेंट डिलीट करके भागता है। यही यही जिसको प्यार से उसके समर्थक निकू कहते हैं।
00:45:01:10 जो भी दर्शक है ना वहां पर जाके जो जानना चाहते हैं कि इनका क्या पक्ष है जो आधा अधूरा वो वहां अगर वहां समय निकाले वहां सनार्ग वाले पेज पर जाए हम लोग अपने डिस्क्रिप्शन में और शायद कम्युनिटी पोस्ट में भी उसको डाल देंगे लिंक उनका पेज उनको सुने ओ इनको भगाया गया दौड़ा दौड़ा के वहां पीटा गया है शास्त्र उसमें व्याख्या तो क्यों भाग रहा है भाई? क्यों नहीं चुनौती दे रहा है उनको? शास्त्रार्थ की राघवाचार्य जी महाराज ने तेरे अनुसार राघवाचार्य जी महाराज ने तेरे अनुसार गलत किया है। शायद वो आरोप एक लगाया था कि बागेश्वर वालों के साथ में बैठकर के वो जो है भोजन कर लिया। अभक्ष का भक्ष कर लिया। ठीक है। तो तूने उनके साथ बैठने से पहले उनसे शपथ दिलाई क्या कि वह आगे भविष्य में ऐसा नहीं करेंगे। क्यों नहीं दिलाई? खेल शपथ शपथ खेल सौगंधन
00:46:24:03 सौगंध अब तेरा एक एक कहना और है आचार्य रामशंकर शुक्ल जी के बारे में कि मठ से उन्हें जो है धमकी मिली है इसलिए लिए उन्होंने अपना बयान दिया है वो वक्तव्य दिया है या उन्हें जो प्रताड़ित किया गया अब तू इस बारे में तू जो कह रहा है कि धमकी मिली है शपथ खा और जिसने तुझे बताया कि धमकी मिली है क्योंकि तू तो उनके साथ रह नहीं रहा है जिसने तुझे बताया है कि धमकी मिली है उनसे शपथ खिलवा तू और वो दोनों मिलकर के शपथ खाओ शालिग्राम भगवान को हाथ में लेकर के रो वही विधवा विलाप था ना कल पूरा उसमें वही था विधवा विलाप और कुछ नहीं था। रो रहे हैं। यह क्या हो गया? यह क्या हो गया? मेरा जो ताश के पत्तों का महल था उसको किसी ने छू दिया। वही है तुम्हारा। और अभी जिस दिन तुम परंपरा में बात करोगे उस दिन और मजा आएगा। लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य। तुमको मैंने सरलता से लिया। तुम्हारे प्रति उदारता दिखाई। तो तुम समझने लगे अपने आप को फन्ने
00:47:26:27 कहा। चौराया बनाया जाएगा तुम्हारे नाम का। बहुत जल्द लुप्त संप्रदाय के गुप्त आचार्य का चौराहा ऐसे बनेगा कोई वो अच्छा एक एक सोचने वाली बात और है कि उनको अगर मठ से प्रताड़ित किया जाता तो वो जाते क्या दोबारा वहां पर दिखते क्या वो तो अभी मंच पर बैठते जाकर के आदर सम्मान के साथ वहां बैठते हैं तो ये सब खोखली बातें हैं तेरी है ना और सुन मैं तुझसे से तू तड़ा कर भी सकता हूं। छोटा भी है मुझसे। आयु में भी और बुद्धि में भी। तेरी बुद्धि देख ली। बुद्धि की संकीर्णता देख ली तेरी। तो ये तू तड़ाक तेरे साथ बिल्कुल परफेक्ट
00:48:18:20 है। अच्छा अब एक एक चीज और बात आती है इस सब में कि भाई हमारे अनुसार आचार्य रामशंकर शुक्ल जी की बहुत वैल्यू है। बहुत वो असत्य भाषण नहीं करेंगे। ठीक है? अब बात यह आती है कि तेरे अनुसार शपथ के अभाव में उनकी बात मान्य नहीं है। तेरे अनुसार क्योंकि तू नहीं मान रहा है। तो अगर तेरे अनुसार वो असत्य भाषण कर सकते हैं और शपथ के अभाव में उनकी बातें मान्य नहीं है तो अगर तेरे अनुसार उन्होंने तुझसे कहा भी था तो तूने क्यों मटकी बदनामी की? क्यों तूने पूरी शंकराचार्य जी के परिकों के ऊपर उंगली उठाई? क्योंकि तेरा पूरी के शंकराचार्य का पूरी के शंकराचार्य जी के परिकरों का शोधन करना उद्देश्य है ही नहीं। मठ का शोधन करना उद्देश्य है ही नहीं। वरना तू सा तीन वर्ष हिंदू राष्ट्र के मामले में फक्तिया थोड़ी ना कसता। हास्यासत वक्तव्य थोड़ी ना देता। तू अपनी भागवत की कथा करते हुए अगर वहां पर नाच नचाया जाता है तो तू वहां पर पूरी शंकराचार्य जी को पूरी शंकराचार्य जी नहीं चारों शंकराचार्य को नीचा थोड़ी ना दिखाता।
00:49:28:21 अब तेरा कहना है तेरा कहना है कि भैया जब हमारे पास ताकत नहीं होती है इसलिए हम गाली दे देते हैं। इस पर भी बात करेंगे कि ताकत नहीं होती है तो उस पर गाली देना कितना सही है। मगर अभी मैं बता दूं कोई अगर यह कह दे कि हमारे पास ताकत नहीं है इसलिए हम एक करोड़ लेते हैं जिससे हम काम कर पाए। वो गलत है। तू जब अपना बहाना लगा के शास्त्रों से बाहर जाएगा तो कोई दिक्कत नहीं है। और दूसरा गया है कि नहीं गया है क्या है क्या नहीं है मगर उसको दिखा के शास्त्रों से बाहर गया यह गलत तेरे पंडित नहीं आएंगे तेरा वो नहीं होगा कौन सी ऐसी आकस्मिक स्थितियां हो जाएंगी तो तू खुद शादी के फेरे पढ़ लेगा फेरे के मंत्र पढ़ लेगा तो कोई दिक्कत नहीं है मगर वृंदावन में जहां पर वो लोग पले बड़े हैं वहां पर उनकी जो मातृ शक्तियां है जो मां समान है वहां पर वो उन पर अचानक से उनके साथ इस तरह से होली खेल लेंग तो उसका बड़ा राई का पहाड़ बनाएगा हम तो पहली बात यह है कि जो हम विषय पे चल रहे थे वो क्या था कि आचार्य रामशंकर शुक्ल जी की बात का शपथ के अभाव में मान्य नहीं है तो तूने उस समय शपथ क्यों नहीं खिलाई थी या खिलाई थी
00:50:43:22 बता तू शपथ खा के बता क्यों नहीं खिलाई थी तो ये तेरे दोगलेपन है दोगलापन जहां पे अपना काम हो रहा है वहां इस तरह से चलेंगे जहां काम नहीं हो रहा वहां यही तो दिखा रहे थे। यही दिखा रहा था मैं और तेरा दोगलापन दिखाता हूं। सुन तूने क्या कहा कि भाई मैंने जो है जब मैं विदेशगामी के साथ खड़ा हुआ था तो मैंने उसके विदेश गमन का वो नहीं किया था। पक्ष नहीं लिया था। हां वो क्योंकि एक अच्छे इंसान थे। वो ये थे वो फलाने थे तो उनका स्वागत स्वीकार किया था। अबे तो ये वाला कानून वहां क्यों नहीं लागू करता है? जब तू कहता है बागेश्वर वालों से क्यों मिल रहे हैं? जब तू कहता है फलाने से क्यों मिल रहे हैं शंकराचार्य वहां यह बात क्यों नहीं लागू करता है कि जो पक्ष जो जितने संदर्भ में वो वहां खड़े हैं बागेश्वर वाले वालों के साथ तो उतना पक्ष उनका वो वाला है जिसमें वो क्रिश्चियंस को हिंदू कर बना रहे हैं या घर वापसी करा रहे हैं या जो भी करा रहे हैं वो उसके उन बातों का वो नहीं करते समर्थन जो बातें अशास्त्रीय है वहां यह सिद्धांत कहां चला जाता है खुद के लिए जो सिद्धांत है वही सिद्धांत दूसरे के लिए नहीं है।
00:51:59:25 तो यह सब सोचने वाली बात है। इसके दोगलेपन को देखो और यहां पर शास्त्र का भी खंडन है। दोगलापन महाभारत का सिद्धांत है। अगर मैं आरएसएस वालों आरएसएस से जुड़े हुए लोग वो भी जिस समय वो मेरे साथ जा रहे हैं वो आरएसएस का बन के नहीं जा रहे हैं। वो एक सामान्य हिंदू बनके जा रहे हैं। अगर मैं उनका उस संदर्भ में कि वहां मां को गाली दी जा रही है और उनका साथ ले लेता हूं तो यह कैसे प्रस्तुत करता है आरएसएस का साथ लेने वाला आरएसएस का साथ लेने वाला अरे तो तू भी तो विदेशगामी का साथ लेने वाला तो तूने क्या जवाब दिया कि विदेश गमन का पक्ष नहीं लिया तो मैंने कहा आरएसएस के सिद्धांतों का पक्ष नहीं ले लिया मैंने जितने अंश में वो मेरे साथ गए हैं वहां रक्षा करने रामपाल का विरोध करने उतने अंश में साथ है और तू अपनी लिस्ट तो बता तेरे साथ है कौन-कौन फिर देखेंगे कौन कितने पानी में है भाई तूने मेरे बारे में जो ये बोला कि भाई तूने आरएसएस का साथ लिया तब बोला जब तुझे पता चला तो तू बता तो सही तेरे साथ है कौन अपनी अपनी लाइफ को थोड़ा प्रदर्शित तो कर सिवाय वो गुप्ताचार बनके घूमने से चोरों की
00:53:15:14 तरह ये जो सड़े हुए लोग कमेंट कर रहे हैं। आरएसएस का साथ लेने वाला मोहन भागवत का साथी है। नीचों पहली बात तो हो सकता है कोई वही हो बिना बाप के घूमते हैं जो हो सकता है समाजी हो सकता है इस वाले यहां भिड़ाने आए हैं। और पता नहीं कौन मगर यदि ये वास्तव में भगवतानंद के या पुरी शंकराचार्य जी के समर्थक है तो क्या है तो तुम्हारी मां को कोई गाली दे रहा है उसके साथ बलात्कार हुआ तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ना उन किताबों को हटाया गया नष्ट किया गया इन सब बातों से नहीं पड़ता होगा तुम लोग शायद अपनी मां के प्रति ऐसी भावना रखते होगे मैं नहीं रखता मैं तुम्हारी मां के लिए भी लडूंगा भगवतानंद की मां के लिए भी लडूंगा। ऐसे ही जैसे दुर्गा मां के लिए लड़ा। तुम लोग बनो ऐसे तो एक बात तो ये तुम्हारे दोगलेपन की हो गई। और क्या है?
00:54:23:19 अच्छा ये जितने भी दोगलापन क्या है? अपने पे बात आई तो शपथ खाओ। अरे जितने तेरे पास ऑडियो वाले आए ये WhatsApp मैसेजेस आए इन सब इन सब से तूने शपथ खिलवाई थी ये शपथ खा के बोलो जो भी बोलना है कब खिलवाई थी शपथ और कुछ ढूंढ लाना आगे यही ढूंढते रहना कि मेरे पास ये मैसेज आया उंगली रख के दिखाते रहना शपथ मत खिलवाना उनसे ला चैनल पर उनको सबके सामने और जितने लोग हैं जो उसका समर्थन करते हैं उनको खुला निमंत्रण है आ जाइए अपना मुंह काला करवाना हो तो और मैं तो कह ही रहा हूं कि तुम क्यों वीडियो वीडियो खेल रहे हो जब मैं तैयार हूं क्यों लाइव लाइव खेल रहे हो आ जाओ कर लो दो दो हाथ वाणी के द्वारा वैसे करना है तो वह भी बता देना भाई उसके लिए मैं आपको व्यक्तिगत तौर पर परामर्श नहीं दूंगा उपयुक्त नहीं है आप
00:55:30:00 है ना तो आ जाओ कोई समर्थक है जिनका मुंह काला होने से बच गया हो जो अपना मुंह दिखा सकते हो समर्थक है या वो स्वयं निक्गू जो उसको उसके चाहने वाले कहते हैं या भगवतानंद स्वयं आ जाए थोड़े दिन पहले मैंने बताया था एक जगह पे इसको उसको किसी ने कुछ बोल दिया था तो ये कोर्ट चला गया था और जबकि दूसरी तरफ क्या कहता है क्यों कोर्ट जाए क्योंकि दम नहीं ना बातों में तो कोर्ट कैसे जाएगा जहां दम दिखी वहां कोर्ट चला गया दूसरी तरफ कहता है क्यों कोर्ट जाए शासकों शासक बैठे हैं अरे भाई चलो यहां पूरी वाले शंकराचार्य जी से तुझे मिलने नहीं दिया जाता दोगले अन्यों से तो मिलता है ना वहां से करा लेता अपना फैसला क्यों कोर्ट गया
00:56:24:27 था इन सारे जो बातें हैं इसमें इस सब के बाद मैं अब एक बहुत मुख्य बात बोलने वाला हूं। सब लोग ध्यान से सुनो कि पूरी शंकराचार्य जी को खाने में मिलाकर कुछ ऐसे तत्व दिया जाता है, पदार्थ दिया जाता है जिससे कि उन पर वश किया जा रहा है। इस सारे बखेड़े में किसी ने इस ओर तो ध्यान ही नहीं दिया कि वो पदार्थ कौन सा है? दिव्य पदार्थ है या साइंटिफिक पदार्थ? साइंटिफिक रूप से तैयार किया गया पदार्थ है जो किसी को अपने वश में करने के लिए दिया जाता है या
00:57:09:02 फिर दिव्य पदार्थ है या मतलब यह जो अनुष्ठान इत्यादि से तंत्र इत्यादि से तैयार किया गया पदार्थ है या साइंटिफिक रूप से तैयार किया गया पदार्थ है वह क्या है? भाई जहर दिया जा रहा तो जहर तो दो साल से बात सुनी थी। जहर की बात इन्होंने सुनी तो दो साल से थी ना। हम तो वो पदार्थ है कौन सा जिसके बारे में बात कर रहे हो आचार्य रामशंकर शुक्ल जी ने रिकॉर्डिंग के ऊपर तुम लोग और मुख्य बात तो यही है कि रिकॉर्डिंग के आधार पर यदि तुम लोग यह मानते हो रिकॉर्डिंग के आधार पर यह मानते हो कि भैया रिकॉर्डिंग के आधार पर अगर कोई बात आई तो वह सत्य है। तो इसको भी मान लो जो आज रिकॉर्डिंग डाली है। कुछ लोग उसे स्क्रिप्टेड कह रहे हैं। कुछ लोग उसे कह रहे हैं कि वो प्रथम ने क्या कहते हैं? उसमें कोई प्रथम है। कोई हमारे साथ हमारे साथ वाला कोई व्यक्ति एक तो ये भी कह रहा था कि उसमें मैं ही बोल रहा हूं। इसीलिए कहते हैं बात वो करो जो अकाट हो अभी अकाट पर
00:58:24:02 भी आऊंगा। अकाट से मुझे कुछ याद आ रहा है। पर पहले उस पदार्थ की बात कर ले तो पदार्थ की बात क्या है? और ये लोग उसे पहचान गए हैं। कोई कह रहा है वो प्रथम है। कोई कह रहा है मैं हूं। ये पहचानने वाली बात भी कर रहे हैं। तो ऐसे बातें नहीं होती है। यही ध्यान दिलाने के लिए ही हमने वो एक रिकॉर्डिंग मुख्य रूप से डाली है। कि तुमको पता चले। तुम किस भाषा में बात कर रहे हो वह भाषा सुनो। कभी कभी कुछ लोग ऐसा होता है ना लातों के भूत बातों से नहीं मानते। सामने वाली पार्टी इस बार वही है तो ठीक है ऐसे ही सही। तो मैं कह रहा था कि भाई किसी ने ये जानने की कोशिश की कि वो पदार्थ है कौन
00:59:06:06 सा? वो पदार्थ कौन सा है? जो पूरी के शंकराचार्य जी को ऐसा मिलाकर कुछ दिया जा रहा है। तो अब इसमें मेरी एक घोषणा है। सुनो सब लोग। जिसकी मां ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो। आई रिपीट। जिसकी मां ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो वो ऐसा पदार्थ तैयार करे और मुझे खिला के अपने वश में करके दिखाए। पिलाया है किसी की मां ने ऐसा निष्ठा पूर्वक दूध? जिसकी मां ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो वह वश में करने वाला पदार्थ तैयार करे और मुझको खिलाए और मुझे अपने वश में करके दिखाए। कौन करेगा? भगवतानंद करेगा। अच्छा भगवतानंद ज्यादा सिद्ध व्यक्ति है कि पूरी पीठ के परिकर यह भी सोचने वाली बात है। अगर भगवत आनंद नहीं कर सकता तो उसे यह मानना पड़ेगा भाई पूरी पीठ के जो परिक्र है वह ज्यादा सिद्ध लोग हैं और या फिर तू कर तू कर ऐसा पदार्थ तैयार कर मुझे बता कि तैयार हो गया है फिर मिल और खिला मैं
01:00:22:13 खाऊंगा और कर तू मुझे वश में वश में होना चाहिए जैसे जो पूरी के शंकराचार्य जी है गर्व वश में मुझे मैं तो बहुत हल्के से हो जाऊंगा ना पूरी के शंकराचार्य जी तो सिद्ध व्यक्ति महापुरुष तो अगर तू कर सकता है जो ये दावा कर रहा है कि भैया वो पदार्थ मिला के खिलाया जा सकता है अगर तू कर सकता है तो मुझे वश में करना तो बहुत आसान होगा और अगर तू नहीं कर सकता तो सोच और नहीं कर पाया तो सोचने वाली बात है कि वो लोग तो तुझसे बहुत बड़े सिद्ध हो गए। उन्होंने तो शंकराचार्य को वश में किया है। कर ले। बता पोस्ट करके कब बता रहा है? तू कम्युनिटी पोस्ट बहुत जल्दी करता है। द एक्सपर्ट ऑफ कम्युनिटी पोस्ट मिस्टर भगवत आनंद एवरी फ्राइडे।
01:01:20:25 खैर अब आती है बात अकाट्य की। एक शब्द है अकाट्य। इसी पर आचार्य रामशंकर शुक्ल जी ने भी अभी बातें की थी उसमें कि आधी अधूरी बातों को ले बीड़ा नहीं बचाना चाहिए। अच्छा अकाट की बात आती है तो ये क्या करता है भगवतानंद विषय को बदलता है। अकाट्य की जब बात आती है और इसके लोग भी विषय को बदलने का प्रयास करते हैं। मेरे फोन करते हैं। जब मैं कहता हूं कि भाई अकाट्य वो दो प्रमाण। ठीक है? तो यह कहता है कि तुम्हारे पूरी के शंकराचार्य जी ने तीन वर्ष की भविष्यवाणी की थी वो अकाट है क्या? पहली बात यह है कि क्या पूरी के शंकराचार्य जी की वाणी अगर सही सिद्ध नहीं हुई या वो अकाट नहीं थी। इससे तुम जो भी बोल रहे हो वो सही सिद्ध हो गया। ये कहां से आई? ये बातें आती ही इसलिए क्योंकि इसको मालूम है मेरी चीजें जो है निराधार है। तो इसलिए मैं क्या करूंगा? बचने के लिए ये बोलूंगा पूरी के शंक अरे भाई पूरी के शंकराचार्य जी की वाणी थी कि नहीं थी इससे तेरी बात कैसे सही हो रही सिद्ध मतलब तू ये चाहता है और इसके लोग भी फोन करके बोलते हैं कि उन्होंने फलानी बात कही थी वो अकाट थी क्या वो किस आधार पर कही थी
01:02:36:02 फोन करके बोलते हैं मुझसे तो तुम लोगों का कहने का मतलब यह है कि अगर पूरी के शंकराचार्य जी की कोई वाणी है जो तुम्हारे अनुसार अकाट्य सिद्ध नहीं हो रही तो अब तुम कुछ भी बोलोगे वो हम लोग बिना सोचे समझे मान ले अकल से पैदल हो तुम लोग पैर ऊपर है तुम्हारे और वो हाथ नीचे हैं हाथ के बल चल रहे हो ऐसे मूर्ख हो तुम जो लोग ऐसे तर्क देते हैं और हिंदू राष्ट्र से मुझे एक बात याद आई हिंदू राष्ट्र की बात है जो लोग ये कहते हैं हिंदू राष्ट्र तीन साल ती तीन वर्ष जो है मैं हालांकि इस बारे में बोलना नहीं चाहता हूं क्योंकि ऐसी कुछ विषय ऐसे होते हैं जो संतों के मुख से ही निकले तभी वो अच्छे लगते हैं। उनका प्रभाव होता
01:03:24:06 है। हिंदू राष्ट्र कौन कह देगा जो मान लिया जाएगा? मोदी के कहने से मान लोगे हिंदू राष्ट्र हो गया। अच्छा मोदी अगर कह दे और वो इस और ध्यान ना दे कि मनुवाद का मनुवाद की स्थापना हो। मोदी अगर कह दे तो तुम लोगों को संतुष्ट केवल इतना बोल दे आज से हमारा हिंदू राष्ट्र हो गया। हो गया हिंदू राष्ट्र तो किसकी घोषणा ऐसी हो सकती है जो हिंदू राष्ट्र को हिंदू राष्ट्र माना जाए कि हां हिंदू राष्ट्र घोषित हो गया कभी सोचा है गुप्ता आचार्य के जो वो है फॉलोअर्स उन्होंने कभी सोचा है कि कौन सी ऐसी चीज होगी जैसे तुम लोगों ने अपने आप को स्वतंत्र मान लिया था मगर आज भी कई उसमें आप पूर्णतया स्वतंत्र नहीं हो देश का विभाजन हो ही रहा है तो हिंदू राष्ट्र तुम मानोगे कैसे कि घोषित हो गया तो बात आएगी कि जो सबसे वरिष्ठ पद होगा हिंदुओं का उसी की घोषणा करने से माना जाएगा ना कि हिंदू राष्ट्र घोषित हुआ कि किसी और के मेरे ख्याल से जो कुछ लोग हैं वो शायद जो हर फ्राइडे को अपना इलाज कराने
01:04:39:13 जाता है उस अपने सिद्धांतों के अनुसार तो उसके सिद्धांतों के अनुसार तो ये जानकारी सही है। अपने अनुसार जो प्रत्येक शुक्रवार को अपने गुप्त रोगों का इलाज कराने जाता है उसके कह देने से मानोगे ना हिंदू राष्ट्र घोषित हो गया। तो सबसे वरिष्ठ पद जो होगा उसके कहने से माना जाएगा। तो कौन है सबसे वरिष्ठ पद पर? सबसे वरिष्ठ पद पर है शंकराचार्य। और शंकराचार्य लगभग एक वर्ष पूर्व से अपने उसमें जो उनका जितने भी प्रव होते हैं शिविर प्रवचन जहां भी उनका पड़ाव होता है वहां पर वो इसको हिंदू राष्ट्र ही कह रहे हैं हमारे भारतवर्ष को पहली बात घोषणा की परिवर्तन की बात क्या है घोषित होगा अब जो कटनी छटनी होगी अब जो आगे की प्रक्रिया है वह द्वितीय चरण चालू हो चुका है नेपाल में क्या हो रहा है? जहां के लिए गुरुदेव ने बोला था नेपाल से शुरू होगा। हमारे आसपास के पर्यावरण को देखिए, वातावरण को देखिए, प्रकृति को देखिए तो आपको इस बात का एहसास हो जाएगा कि घोषणा के बाद का जो द्वितीय चरण है वो चालू हो चुका है। और केवल घोषणा की बात
01:05:54:16 है तो गुरुदेव ने जो माघ में माघ में उनका जो पट्टा अभिषेक वाला समारोह हुआ था वो राष्ट्रीय अधिवेशन कौन सा था वो नहीं मालूम है। मगर वहां से यह घोषित करना यह घोषणा कर दिया है। हिंदू राष्ट्र भारतवर्ष की जय। अब यह बोला जाता है तो घोषणा में अलग बात है और प्रैक्टिकली उसकालीफाई जो है व्यवहारिक रूप दिखना अलग बात है। तो ये दोनों ही चीजें जो उन्होंने तीन वर्ष वाली बात पे जो फक्तियां कसी जाती है वो हो चुकी है। हम नेपाल की उन्होंने घोषणा की है। नेपाल की भी घोषणा की थी। नेपाल में हो रहा है ना। तो अब बात आती है अकाट वाली बात मैं कर रहा था कि जब भी यह लोग इनकी बात कहीं फसती है इनसे तथ्य माना जाता है प्रमाण मांगा जाता है तो ये क्या करते हैं ये इस पर ले आते हैं कि तुमने वो बात बोली थी उसका क्या प्रमाण है तो ये तो आर्य समाजी भी तो यही करते हैं उनको इस बात पर नहीं जाना है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं वो आपसे प्रश्न पूछ लेंगे दूसरा दूसरे प्रश्न का उत्तर दिया जा सकता है उसमें जाया जा सकता है। मगर उसमें जाएंगे तो यह प्रश्न
01:07:09:22 छूट जाएगा। विषय छूट जाएगा। और जब उसमें जाएंगे और सामने वाला प्रश्न दूसरा करके विषय कर ही रहा है। तो जब उसमें जाएंगे उसमें भी यही करेगा। उसमें भी यही करेगा। फिर वो विषयांतर होगा। फिर विषयंतर होगा। यही विषय करते करते कभी निष्कर्ष पर पहुंचोगे ही नहीं। तो इनका कहने का मतलब होता है कि भाई उनकी यह बात भी तो गलत है। वहां क्यों नहीं तूने अकाट प्रमाण मांगा? तो पहली बात तो यही है कि भैया उससे जो तीन वर्ष की जो अवधि है उससे मेरा जो धर्म ब्रह्म है वह प्रभावित नहीं हो रहा है वो किसी के ऊपर कोई आक्षेप नहीं है कि किसी को किसी की अपमान हो रही हो या किसी के लिए वो जो है किसी की छवि बिगड़ रही हो मगर तुम तो ऐसे वक्तव्य दे रहे हो ना जो छवि बिगाड़ने वाले है तो उसके संबंध में तुमसे कुछ ना पूछा जाए और अगर छवि बिगाड़ने वाले वक्तव्यों की भी बात कर रहे और यह बात कर ले दुर्जन तोष न्याय से मान लिया जाए कि भाई मेरा वक्तव्य गलत है या पूरी के शंकराचार्य जी का वक्तव्य गलत है तो इसका अर्थ है कि अब तुम्हें अधिकार मिल गया है किसी के बारे में कुछ भी बोलने का तुमसे हम प्रश्न करेंगे तो तुम कहोगे तुम्हारी वो तीन वर्ष वाली बात भी तो वो
01:08:25:19 थी अगर तुम नहीं मानते हो उसकी जो एक्सप्लेनेशन वो दे रहे हैं हम दे रहे हैं उसको तुम नहीं मानते हो तो तुम एक तरीके से यही हुआ ना कि हमसे थोड़ी देर के लिए अगर मान भी ले कि हमसे कोई गलती हुई है। इसका मतलब अब तुम तुम कोई भी पाप करने के लिए छूट गए तो ऐसा नहीं होगा ना। ऐसा नहीं होगा। छूटे की हद तक और चोर के घर तक पीछे पड़े रहेंगे। तो अकाट्य प्रमाण वाली बात यही है कि जब भी इनसे बोला जाता है कि अकाट्य तो ये करते हिंदू राष्ट्र मधुमक्खी की सेना और ये और वो फलाना ढिमका। इनको भी तो बहुत सारे देवताओं ने दर्शन दिए हैं। इन्होंने क्या कर लिया? क्या कर लिया देश के लिए? मैं तो पूरी के शंकराचार्य जी की कई बातें गिनवा दू। करपात्री जी महाराज जी की कई बातें गिनवा दू। अपनी गिनवा दूं। तूने क्या कर लिया? बता कुछ व्यवहारिक रूप से कुछ तेरी चीज कोई पकड़ में आई हो तेरे को। बता क्या कर लिया तूने? बोला है तूने बस। उस बोलने के द्वारा क्या तूने उखाड़ लिया?
01:09:32:07 पूरी के शंकराचार्य जी ने बोला भी है और उनके द्वारा उनके नेतृत्व में बहुत सारी चीजें हुई है जो आज हमें प्राप्त हुई है। तो ये इनके कुतर्क होते हैं अकाट्य प्रमाण। अकाट्य प्रमाण। अकाट्य प्रमाण नहीं लाएंगे क्योंकि पूरी के शंकराचार्य जी ने कुछ ऐसी बात कही है जो इनकी समझ में नहीं आएगी। मगर ये अपने देवताओं के दर्शन लेने वाली बात समझ जाएंगे। दर्शन के बावजूद भी यह 16 की आयु में 18 की आयु में प्रेम में पड़ जाएंगे। है ना? देवताओं के द्वारा देवताओं का सानिध्य प्राप्त होने पर भी इनको बायपोलर जैसी बीमारियां हो जाएगी। ये सब हो जाएगा। वाक स्कलन भी हो जाएगा इनका। देवताओं की कृपा होने के बाद भी सब हो जाएगा इनके साथ।
01:10:26:18 मगर दूसरा व्यक्ति यदि कोई ऐसी बात बोल दे जो इनकी समझ में नहीं आ रही है इनको नहीं माननी उसके आधार पर ये अपने पाप को पुण्य सिद्ध करेंगे अब जरा कुल मिलाकर के अगर सीधी सीधी बात
01:11:05:02 देखोगे कुल मिलाकर के सीधी-सीधी बात देखोगे कोई भी अगर निष्पक्षता के साथ भगवतानंद के जो कृत उनको देख ले तो इसका और कोई काम नहीं है। इसको शंकराचार्य परंपरा को ही नष्ट करना है। और मैं तो यहां तक बता दूं कि ये सारे संप्रदायों को भी आपस में भिड़वाना है। और कोई चेला अगर आना चाहे भगवत आनंद स्वयं आना चाहे तो आ सकता है अभी और आगे भी मुझे बता सकता है वो कब आना चाहता है। लोग अभी भी कह रहे हैं तुमको मालूम ही नहीं है। तुम्हारे बॉस को हमने कब से इनवाइट कर रखा है। आओ भैया। अब तुम्हारा बॉस बचता फिर रहा है क्योंकि उसको यह एहसास नहीं था कि सामने वाला आक्रामक भी हो सकता है। उसको यह लगता था ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? मैं जाके सवाल करूंगा उत्तर दे देगा। मान लूंगा चला हूं ज्यादा से ज्यादा। मगर अभी उसको पता चला खेल अच्छा खेला है पर आदमी गलत चुन लिया है। अब इनका वो वीडियो लगाओ जरा इनके पिताजी वाला। वीडियो दिखाओ।
01:12:06:28 कहते हैं ना सूट बूट में आया कन्हैया बैंड बजाने को हम लगाओ वीडियो लगाओ वाला ये जो एक ही कमेंट बार-बार करे बहुत बार करे उसको जो है आप बैन कर दीजिए और किसी भी गुरु द्रोही को गुप्त आचार्य के समर्थक को प्रत्येक शुक्रवार डॉक्टर से मिलने वाले के समर्थकों को किसी प्रकार का कोई आपत्ति हो वह सामना कर सकता है। सीने
✅ This part is already used · 01:12:46:00 – 01:12:52:07 (0:06)
→ Used in: A · Live स्वयं को निर्भय कहने वालों में आह्वान का भय बौखलाहट अभद्रता और पलायन at 38:59 ↗
01:12:46:00 पर जो घाव है वो फूलों के गुच्छे हैं। हमें पागल ही रहने दो। हम पागल ही अच्छे हैं।
⬜ Not used yet · 01:12:52:07 – 01:15:46:12 (2:54)
01:12:52:07 आओ कौन है भाई सामना करने के लिए। कोई है सामना करने आए तो इनके पिताजी वाला वो लगाए वीडियो और हां भगवत आनंद जी के पिताजी के बारे में बात होने जा रही है तो इस बात का बहुत सख्ती से ध्यान रखें वह समर्थक हो विशेष रूप से मैं अपने समर्थकों को ही कहूंगा कि उनके लिए किसी प्रकार की कोई अपमानजनक बात गलती से भी ना लिखें गलती से भी ध्यान रखना
01:13:42:13 हम चलो इन लोगों के पक्ष में जाकर महिला कथा वाचिका का समर्थन किया और उन्होंने गलत अब देखिए पहला तो सीन ये है कि मेरे पिताजी ने भी इनका कहना है इस वीडियो में पहले चला दीजिए थोड़ा चला दीजिए इन लोगों के पक्ष में जाकर महिला कथा वाचिका का समर्थन किया। पॉज करिए। उन्होंने गलत किया। पॉज करिए। ये नहीं पॉज करिए। इनके पिताजी ने महिला कथावाचक का समर्थन किया। ठीक है?
01:14:25:20 इन्होंने नाम लेकर उनके लिए उनके संबंध में पतियां कसते हुए टांग खींचते हुए तू तड़ा की भाषा में जैसे सबका करते हैं। क्यों नहीं किया? ये तो निग्रह करने वाले हैं ना। एक जैसा ही करेंगे। सबके साथ व्यवहार या अलग-अलग करेंगे। क्यों नहीं किया? अपने पिताजी की जब बात आई तो यहां पर दोगलापन क्यों उनका बाकायदा नाम लिखते मैं किसके बारे में बात करने जा रहा हूं फोटो लगाते और तो और उसके बाद इनके पिताजी का क्या पक्ष है इस वीडियो के बाद वो पक्ष सुधर ना जाने पर बार-बार वीडियो बनाते क्यों नहीं बनाया पहली बार चलिए आगे बढ़ाइए
01:15:21:15 कि मेरे पिताजी है तो मेरे साथ समस्या ये हो जाती है कि जो धर्म के द्रोही है धर्म को बेच खाने वाले लोग हैं। मैं किसी आचार्य या पीठ को नहीं कह रहा हूं। पीठ के नाम पर उछलने वालों को कह रहा हूं। हम तो वे मेरे पिताजी को ही मेरे विरुद्ध करके उनके ही माध्यम से कुछ वक्तव्य निकलवाकर मेरे ही विरोध में मेरा ही दुष्प्रचार करते हैं।
✅ This part is already used · 01:15:46:12 – 01:15:51:27 (0:06)
→ Used in: A · Video धर्मरक्षक या अवसरवादी | @Swami Nigrahacharya (Shri Bhagavatananda Guru) की गुर... at 3:53 ↗
→ Used in: A · Video भागवतानंद के कुतर्क और पक्षपात की समीक्षा at 4:05 ↗
01:15:46:12 तो मैं तो ना पिता के विरोध में जा सकता हूं ना शास्त्र के विरोध में जा सकता हूं। हम
⬜ Not used yet · 01:15:51:27 – 01:20:32:09 (4:40)
01:15:51:27 पिता के विरोध में जाने पर ये लोग मुझे पितृद्रोही कहेंगे और शास्त्र के विरोध में जाने पर शास्त्रदोही कहेंगे। क्यों भाई और क्यों भाई पितृद्रोही पितृद्रोही क्यों कहेंगे? वहां पर तो समष्टि के रूप से देखा जाएगा ना। कहां गया सिद्धांत? समष्टि के रूप से देखा जाएगा ना। सम जब आपका व्यक्तिगत धर्म जो है जो सामाजिक रूप से दिखाई देने वाले धर्म के विरोध में हो गया तो वहां तो उसकी प्रधानता हो जाएगी ना। ऐसे तो प्रह्लाद जी को पितृ पितृ कहा जाएगा। पितृद्रोही प्रह्लाद जी ने क्या किया था? श्री राम जी ने क्या किया था? पत्नी द्रोही कहा जाएगा उन्हें अगर इस तरह से देखोगे तो अगर समष्टि के धर्म को देखना पड़ेगा ना यह सिद्धांत नहीं जानते क्या भगवत आनंद क्यों कहा जाएगा तुम्हें पितृ द्रोही तुम तो शास्त्र निष्ठा दिखाओगे वहां पर तो ये इनका अपने पिता के प्रति विरोध प्रकट करने का बहाना विरोध प्रकट ना करने का या धीमी आवाज में करने का मीठी आवाज में करने का कर्कस तरीके से ना करने का रोस्ट करते हुए ना करने का कैरी मिनाटी बनते हुए ना करने का बहाना ना यह है तुम्हारा दोगलापन भगवत आनंद
01:17:07:16 कहा मुझे अपनी प्रतिष्ठा के कक्षा उनकी प्रतिष्ठा अधिक प्रिय है किंतु अन्य मान्य जनों ने कहा और हमें सूचना मिली कि पिताजी का उत्तर था कि मठ और एक मिनट पॉज करो एक मिनट पॉज करो इससे मुझे एक बात याद आई भगवतानंद के जीवन में शब्द प्रमाण कौन है किसका इसका शब्द प्रमाण है भगवतानंद के जीवन का। ये जो इसने कहा ना मान्य लोग वो आधार क्या है मान्य लोगों का? ये आधार है कि वो भगवतानंद के समर्थन में कब तक बोलते रहेंगे? भगवतानंद को अच्छी लगने वाली बातें कब तक बोलते रहेंगे?
01:17:53:14 हम या यह आधार है कि उनका वो परंपरा से है कि नहीं। उनके लक्षण वो संबंध सन्यासी है कि नहीं वो प्रामाणिक आचार्य है कि नहीं तो क्या है मानने का वो क्या है क्योंकि तुमने तो किसी भी हमारी जानकारी में तुमने किसी भी प्रामाणिक आचार्य को प्रमाणिक माना ही नहीं है उसको शब्द प्रमाण माना नहीं है तो तुम्हारे जीवन का शब्द प्रमाण क्या है भाई शास्त्र प्रमाण है तो शास्त्र भी तो इस पर टिके हैं कि उसको गुरु परंपरा से कोई गुरु जो है वेरीफाई कर दे उसकी उसके भाई गुरु गोविंद और ग्रंथ इनमें सामंजसता होगी ना नहीं तो शास्त्र केवल शास्त्र कर दोगे बिना गुरु के तो शास्त्र कोई भी ले आएगा तो क्या है वो आपके शब्द वही तो ऐसा होगा ना जो साक्षी होगा आपके जीवन में वो है नहीं खैर चलो आगे चलो
01:18:51:03 के पीठों में जितनी संपदा है और जैसे लोग जुड़े हुए हैं एक मिनट वेठा के अपनी परंपरा अपनी परंपरा ये बताता नहीं है ठीक से स्पष्ट रूप से अपनी परंपरा के बारे में आज तक नहीं बोला और यह कहता है कि मैं निवेशिका लिखूंगा तो आज क्यों ताल ठोक रहा है मैं निग्र आचार्य हूं निग्र आचार्य हूं जब लिख ले तब बताना तू कौन है ठीक है तो भाई इसके जैसे इसने कहा कि तुम्हारे गुरु के तुम्हारे गुरु में इतनी औकात नहीं है ये है वो है ये सब इसने कहा तो इसके गुरु गुरु के बारे में कोई बात कहां से करे तो चोरों की तरह घूमता है अपनी चीजों को छुपा करके तो इसका वो गुरु कौन है जिस पर इसे अंतिम रूप से विश्वास हो के आए सच बोल रहा है ऐसा कोई है जीवन में इसके ये एक सोचने वाली बात है एक सवाल है ठीक है आगे बढ़िए पीठों में जितनी संपदा है और जैसे लोग पिताजी का उत्तर था कि मठ और आचार्य के पीठों में जितनी संपदा है और जैसे लोग जुड़े हुए हैं वे व्यक्ति निष्ठा के चक्कर में मेरे पुत्र का कुछ अहित ना कर दे यही कारण है कि मुझे अपने पुत्र के
01:20:06:07 विरोध में बयान देना पड़ता है तो पीछे करिए जरा पीछे करिए हल्का सा पीछे करिए पिताजी का ये इसको पता चला कि पिताजी ने ऐसा इसलिए कहा है जितनी संपदा प्रतिष्ठा के कक्षा उनकी प्रतिष्ठा अधिक प्रिय है पीछे करिए थोड़ा पिता के विरोध में जाने पर ये लोग मुझे पितोही चलने दीजिए और शास्त्र के विरोध में जाने पर शास्त्रदोही कहेंगे तो मैं थोड़ा फस जाता
✅ This part is already used · 01:20:32:09 – 01:20:37:08 (0:05)
→ Used in: A · Video भागवतानंद के कुतर्क और पक्षपात की समीक्षा at 4:11 ↗
01:20:32:09 हूं और मौन हो जाता हूं। मौन हो जाते हैं। कुछ नहीं कहा पिताजी को।
⬜ Not used yet · 01:20:37:08 – 01:30:48:00 (10:11)
01:20:37:08 एक मिनट ये आचार्यों के लिए बोलते समय मौन नहीं होते हैं। एक मिनट। यह आचार्यों के लिए प्रामाणिक आचार्यों के लिए बोलने के लिए मौन नहीं होते हैं। यह जिनके प्रति गुरु भाव रखते हैं, गुरु मानते हैं, उनके लिए बोलने के लिए मौन नहीं होते हैं। प्रमाणिक परंपराओं के बारे में बोलने के लिए मौन नहीं होते हैं। मगर अपने पिता के बारे में बोलते समय मौन हो जाते हैं। चलिए तो मैंने तो कुछ नहीं कहा पिताजी को। मुझे अपनी प्रतिष्ठा के कक्षा उनकी प्रतिष्ठा अधिक प्रिय है। किंतु अन्य मान्य जनों ने कहा और हमें सूचना मिली कि पिताजी का उत्तर था कि मठ और आचार्यों के पीठों में जितनी संपदा है और जैसे लोग इनको सूचना मिली कि पिताजी ने ये कहा है में मेरे पुत्र का कुछ अित एक मिनट इनके इनके इनको जो है सूचना मिली कि इनके पिताजी ने यह कहा है सूचना
01:21:42:28 इनको सूचना मिली है कि इनके पिताजी ने यह कहा है कि मठ के लोग मठ की प्रतिष्ठा के लिए कहीं मेरे बेटे का अहित ना कर दें। इसलिए इनके पिताजी ने यह कहा है। चलाइए। कारण है कि मुझे अपने पुत्र के विरोध में बयान देना पड़ता है। तो यदि पिताजी ने महिला कथा वाचिका का समर्थन किया है किसी आशंका से भयभीत होकर तो वो भी गलत है। धर्म निर्भयता से चलता है। आप कितनों से आशंकित होते रहेंगे? कितनों से डरते रहेंगे? मुगल काल में तोड़कर आपका माथा काट दिया।
01:22:49:15 तो देखिए प्रकरण क्या है पूरा वो मैं बता दूं। कुछ झलकियां आपने सुन ली है। प्रकरण पूरा यह है कि ज्योतिर मठ की ओर से कोई आयोजन हुआ होगा जहां पर संभवत कुछ ऐसा अर्थ निकल रहा है कि महिला कथावाचक को समर्थन मिला व्यास गद्दी का बैठने का। तो इन्होंने संभवत उस बात का विरोध किया हो, प्रतिकार किया हो ज्योतिर्मठ का और इनके पिताजी ने इनका विरोध करते हुए वक्तव्य दे दिया। उसके बाद इन्होंने कहा है कि सूचना मिलने पर हमें पता लगा कि पिताजी ने ऐसा क्यों कहा था? क्योंकि मठ के द्वारा इन पर दबाव डाला गया था और उनके पिताजी पर और वो कहीं इनका अहित ना कर दे इसलिए इनके पिताजी ने वो गलत बयान दिया। अब मैं पूछना चाहता हूं। अब मैं पूछना चाहता हूं जबकि उनके पिताजी का कोई मामला नहीं था वहां पर जो ज्योतिमठ में वो चीजें हुई जो बस उन्होंने केवल एक वक्तव्य दिया
01:24:11:02 संभवत इस ये सोचते हुए कि वहां के जो परिकरों द्वारा मठ के द्वारा इनके उनके पुत्र का इनका इसका भगवतानंद का अहित ना हो जाए तो अब इनका कहना है कि क्योंकि उन पर दबाव था अपने पुत्र को बचाने के लिए निगराचार्य का निग्राचार्य को नाम लेते
01:24:44:27 हुए तो अब इनका कहना है पूरा मामला यही है कि कहीं किसी प्रकार से जो ज्योतिर मठ है उनके वहां पर किसी प्रकार से ऐसा अर्थ प्रकट होता है कि महिला कथा वाचिका को समर्थन मिला और यह उसका विरोध करते हैं तो इनके पिता का इनके विरोध में एक वक्तव्य जाता है। उसके बाद जब ये पिताजी के इनको पता चलता है कि इनके पिताजी ने ऐसा वक्तव्य क्यों दिया है तो इनको पता चलता है कि भाई उन पर दबाव था इस बात का कि उनके पुत्र का जो है किसी प्रकार से अहित ना हो जाए। तो अब सबसे यहां पर बड़ी बात है क्या यह भगवतानंद ने अपने पिताजी से यह कहा था कि तुम शालिग्राम पर हाथ शालिग्राम को हाथ में लेकर के जो है शपथ लो कि तुम्हारे ऊपर दबाव आया है ज्योतिर मठ से मेरा विरोध करने का शपथ लो दबाव आया है कि नहीं क्या इसने ऐसा किया था और नहीं किया था तो क्यों नहीं किए किया है और अगर कर सकता है तो कब करेगा ऑनलाइन वीडियो बना कि मेरे पिताजी हाथ में शालिग्राम भगवान को लेकर ये
01:25:59:27 शपथ खाते हैं कि उन्होंने जो महिला कथावाचक का समर्थन कर दिया था ज्योतिर मठ के समर्थन में वो ज्योतिर्मठ द्वारा डाले गए दबाव के कारण किया था का शपथ शपथ वाला है ना तू गंगा की सौगंध वाला है ना तू खा और अगर किसी का शब्द प्रमाण हो सकता है तो फिर आचार्य रामशंकर शुक्ल जी का प्रमाण क्यों नहीं तो ये सब सोचने वाली बात है जो प्रबुद्ध जन है उनको जरूर समझ में आएंगी ये सब बातें और ये बताएं बहुत बड़े तीसार खान है जो पन्ने खान है बहुत बड़े वो हैं निग्र आचार्य तो ये बताएं कब खा रहे हैं शपथ अपने पिताजी को साथ में लेकर के कब शपथ दिखा रहे हैं? वीडियो फिल्म बनाएं उसकी उसको डालें शपथ खाते हुए कि मेरे ऊपर ज्योतिर मठ से दबाव डाला गया इसलिए मैंने महिला कथावाचक के समर्थन में वक्तव्य दिया था।
01:27:04:01 हम तो ये सब बातें हैं और यह पूरा जो वीडियो है पूरा प्रकरण है एफबी पर अपलोडेड भी है। वहां पर जाकर के आप देख सकते हैं। और यह पिता का विरोध इतना छुपा कर क्यों? इतना छुपा हुआ विरोध क्यों पिता का? तो यह दोगलापन है। जैसा व्यवहार हम अन्यों के साथ अन्यों से अपने लिए अपेक्षा करते हैं। वैसा ही व्यवहार हमें अन्यों के साथ करना चाहिए। यह है दोगलेपन की पराकाष्ठा। अपने पिता के लिए मीठी आवाज, धीमी आवाज और अन्यों के पिता के लिए अवमानना अपमान।
01:27:47:07 गाली अपने पिता से अपने पिता को कुछ नहीं कहा कि खाओ शालिग्राम भगवान को हाथ में ले सौगंध मगर अन्यों के पिता को ऐसे ललकारोगे उनका शब्द यही प्रमाण है उन्हें किसी टच्चे के लिए सौगंध खाने की आवश्यकता नहीं है और अगर खानी है ना तो खाकर बोल पहले जाकर के अभी मुक्तेश्वर जी के लिए ज्योतिर्मठ के लिए बोल इनके पिता से हमारा कोई द्वेष नहीं है। वो सच में विद्वान है। उनको सम्मान है। मगर यहां पर बात है प्रकरण की, सिद्धांत की दोगलापन
01:28:33:07 क्यों? ये स्वयं उनका सम्मान कम करवा रहे हैं। और अगर ये जो शपथ में शपथ हाथ में लेकर के बात कर शालिग्राम भगवान को हाथ में लेकर शपथ लेने वाली बात है तो मुझे बताएं भगवत आनंद कि वो अपने पिता के साथ शपथ लेते हुए वीडियो कब बना रहा है ज्योतिर मठ के बारे में जो ये मिथ्या प्रलाप किया है। अब मुक्तेश्वरानंद जी के लिए जो ये बोल रहा है कि वहां से समर्थन ये है वो है वो क्या संदर्भ है वो एक अलग बात है। मगर ज्योतिर मठ के बारे में जो मिथ्या प्रलाप किया गया है। मैं तो मिथ्या ही कहूंगा भाई कि भैया वह जो है उनसे दबाव डाला गया इन पर तब ऐसा वक्तव्य दिया है ना तो शपथ खा के बोलो ज्योति त्रिमठ के द्वारा दबाव डाला गया बुलवाओ अब हम इससे आगे अ थोड़ी देर बाद अभी उसको बता दिया जाएगा कितने बजे हम लोग दोबारा से लाइव होंगे और अब एक साथ लाइव करते हुए इनके वह सारे जितने वीडियोस अभी तक आए हैं कोशिश करेंगे उसकी संक्षिप्त में बात करने की उस सारे मामले पर और फिलहाल इस लाइव को स्थगित कर रहे हैं। अगर कोई सामना करना चाहता है किसी में दम हो
01:29:48:24 सामना करने की फिलहाल वो आ सकता है। अन्यथा लाइव को कुछ देर के लिए स्थगित करते हुए हम लोग दोबारा से लाइव शुरू करेंगे और क्या कहते हैं उसमें जितने भी अभी तक वो सब किया गया है ना ये प्रलाप विधवा विलाप इत्यादि उस सब पर बात करेंगे। कुछ देर बाद कोई आना चाहता है तो हम रुके हुए हैं। चलिए सभी को जय श्री राम। मतलब सब लोग ये समझ गए कि किसी को पड़ना नहीं है चक्कर में और कोई है नहीं टक्कर में। और हां बार-बार कह रहा हूं भगवत आनंद को मैंने कई बार बोल दिया है कि तुझे कब आना है यह बता सामना करने।
01:30:44:19 थोड़ी देर बाद मिलते हैं लाइव में। जय श्री राम।
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
Live: Required tasks are not set on the Rules page yet.
-
⬜Hindi SRT
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
लुप्त संप्रदाय और गुप्त आचार्य का सच
% not set🔗 This video is made from parts of these videos
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮