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00:00:02:18 तो सभी को जय श्री राम काफी दिनों बाद मैं आप लोगों के समक्ष लाइव जुड़ा हूं आशा करता हूं आप सभी लोग कुशल मंगल होंगे और छोटों को बहुत सारा प्यार आशीर्वाद जो बराबर के हैं उनको आभार यथोचित उनका भी अभिवादन और जो बड़े हैं उनको प्रणाम तो आप लोग कह रहे होंगे कहानी में ट्विस्ट कैसे आ गया अचानक से रामपाल के ऊपर लगातार चल रहा था मामला

00:00:45:06 तो एक सैनिक होता है भाई तो उसके सामने तो जो भी बात आएगी सामना आएगी सामने आएगी तो उसका उसे करना ही पड़ेगा किसी भी रूप में अगर धर्म का खंडन हो रहा होगा प्रतिकार करना पड़ेगा उसे तो हमारे साथ में एक स्कन के सज्जन है वह आज बात करने वाले हैंक अभी जो लेटेस्ट मामला चल रहा है वण व्यवस्था का चल रहा है ठीक है हम उनको जोड़ लेते

00:01:24:09 हैं जय श्री राम जय श्री राम शिवा जी हरे कृष्णा जी आप कहीं पर स्थाई रूप से थोड़ा बैठ जाए बैठ कर के बात करें चलते फिरते हा हा कोई नहीं मैं एक जगह बैठ जाता हूं एक [संगीत] सेकंड जय श जय श्री कृष्ण नरेश दोराया जी जन्मा जी श्री गोपाल पांडे जी सभी को जय श्री कृष् जय श्री राम हां अजय शर्मा जी जी हां हम कर सकते हैं बात जी बैठ गए ना हा जीी हा जीी बैठ ग तो सर्व प्रथम आप हमारे दर्शकों को थोड़ा सा अपने बारे में अपना परिचय दे दे कि आपका नाम और आपका जो स्पिरिचुअल ब बैकग्राउंड है वह क्या है मतलब आपके स्पिरिचुअल गुरु कौन है कहां से जुड़े हुए ये

00:02:28:13 सब मेरा अजय शर्मा है और मैं चंडीगढ़ में रहता हूं और मैं मेरा जो पूरा परिवार है वो स्टार्टिंग से श्री वैष्णव थे हमारे परिवार है व श्री वैष्णव है रामानुजाचार्य के संप्रदाय में पर जब मैं कॉलेज वगैरह जाना चालू किया फिर उसके बाद मैं गडिया वैष्णव संप्रदाय जो है गडिया मठन इन सबके साथ में परिचित हुआ तो उसके बाद मैंने मेरे गुरु भीन के जो संस्थापक आचार्य श प्रभुपाद उनके अनु ही मेरे गुरु है तो मैं इस कौन से ह वैष्ण परंपरा डायरेक्टली आप स्कन से जुड़े हुए हैं जी हा कह सकते स्न से जुड़ा ठीक है तो हमको वर्ण व्यवस्था पर बात करनी है या पहले थोड़ा सा प्रीफिक्स ले ले सफिक्स ले ले या डायरेक्ट डायरेक्ट वर्ण व्यवस्था पर आ जाए आ सकते हैं वैसे तो हम थोड़ा लंबा डिस्कशन कर लेंगे तो ठीक रहेगा हम मैं आपके शंकर सिद्धांत पर भी काफी चीजें हम डिस्कस करना चाहते हैं जो मेरे तरफ से जो डाउट है वो पूछ सकते हैं या जो भी मेरा राय है जितना मैंने पढ़ा है वो शंकर सिद्धांत मेरे को कई हिसाब से उसमें बहुत सारी कमियां है जो हमारे वैष्णव आचार्यों ने निकाला उसके बारे में डिस्कस करना चाहूंगा आपसे आप ऐसा करिएगा कि जो शंकर

00:03:43:19 सिद्धांत का जो सिद्धांत आपको समझ में नहीं आ रहा है उसके विरोध में आपका जो सिद्धांत है है ना उसके विरोध में कुछ ना कुछ होगा वो रखिएगा तो फिर हम अपने दोनों का वो करेंगे क्लेरिफाई ठीक है ठीक है ठीक है अभी हम वर्ण व्यवस्था से चालू करते हैं हां वर्ण व्यवस्था से ही चालू करना है या थोड़ा सा ग्राउंड बना ले हम लोग कि वर्ण व्यवस्था कैसे आती है या वर्ण व्यवस्था डायरेक्ट कर हां मतलब कर सकते हैं ग्राउंड बना सकते हैं कोई कोई दिक्कत नहीं

00:04:17:24 है या रहने देते हैं वो खामा खा दूसरा टॉपिक एक आ जाएगा उसमें काफी देर लग जाएगी चलिए ठीक है वव ठीक वर्ण व्यवस्था प ठीक है जी आपके अनुसार जो तो आपकी जानकारी में शास्त्रों के अनुसार जो वर्ण व्यवस्था है वो कर्म आधारित है या जन्म आधारित है देखिए सबसे पहले मैं आपको बताना चाहूंगा कि मेरे में कोई ऐसी काबिलियत नहीं कि मैं शास्त्र को समझ सकूं हमारे जो वैष्णव आचार्यों ने सिद्धांत प्रस्तुत किया है रामानुजाचार्य हो गए मधवा चार्य हो गए निंबार्काचार्य हो गए विष्णु स्वामी हो गए हमारे वैष्णव आचार्य चैतन्य महाप्रभु ने जो सिद्धांत स्थापित किया है उसके आधार आपने जिससे अध्ययन किया आप उससे बात बोलिए क्योंकि आप अगर रामानुजाचार्य जी का नाम लेंगे तो रामानुजाचार्य की जो प्रामाणिक जो परंपरा है उस पर बैठने वाले जो सन्यासी है जो आचार्य है वहां के वह स्पष्ट कहते हैं कि जन्म से वर्ण होता है जिसका शरीर ब्राह्मण जन्म में है उसी को करने आप एक दो किसी पंडित को उठा के आप उसको कोट करके बोलेंगे ये बोलते हैं एक दो पंडित एक दो पंडित नहीं जो उसके जगतगुरु की गद्दी पर बैठे हैं परंपरा से समझ रहे

00:05:32:24 हैं चलो आप चलो हम गौड़ वैष्णव प आ जाते हैं चलो अभी बाकी संप्रदाय को छोड़ते हैं जने रामानुज का नाम लिया ना रामानुज को अपने से मत जोड़िए रामानुज पर राघवाचार्य जी महाराज है और जो और भी अन्य जो जगतगुरु है वहां के उन्होंने स्पष्ट कहा है कि वर्ण व्यवस्था जो है जन्म से है मेरे पास रामो जाचार्य की गीता भी रखी है नहीं नहीं आप देखिए रामानुजाचार्य ने खुद एक शूद्र जो वर्ण से शूद्र थे उनको दीक्षा देके आचार्य बनाया है देखिए बागा कैसे मैं एक चीज क्लियर कर दूं आपने यदि रामानुजाचार्य जी का अध्ययन परंपरा से किया है तो क्लेम करिए कि रामानुजाचार्य ने यह लिखा अगर आपने उनका उनके परंपरागत आचार्यों से ठप्पा लगवा लिया है तो उनकी बुक्स में क्या लिखा है बुक्स से आप नहीं समझ सकते यह आपका भी सिद्धांत है यह मेरा सिद्धांत नहीं है आप भी इसको मानते हैं कि भले ही बुक आपके पास हो मगर परंपरा प्राप्त आचार्य के पास उसको समझना है तो यदि आप यह क्लेम कर रहे हैं कि रामन चार परंपरा का यह सिद्धांत है तो आपको उस पर ठप्पा लगवाना होगा उस परंपरा के किसी आचार्य का तो आपने किससे ठप्पा लगवाया मुझे बता दीजिए चलो आप चलो गौड़ वैष्णव के परिपेक्ष में देखो नेने

00:06:47:26 किससे ठप्पा लगवाया मैं आपको बता दू मैं समता जी है नहीं मैं रामानुजाचार्य के सिद्धांत की बात कर रहा हूं अभी तो मैंने अगर मैं क्लेम कर रहा हूं कि वो जन्म से मानते तो मैंने उस पर ठप्पा लगवाया कहां से जो जगतगुरु स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज उन्होंने ठोक के कहा बिल्कुल स्पष्ट बताया कि जिसका शरीर ब्राह्मण है उसी को ब्राह्मण उचित कर्म करने का अधिकार चलो ठीक है तो इसलिए आप ब्राह्मण चार परंपरा को क्लेम मत करिए कि उन्होंने तो य लिखा था फिर मैं पूछूंगा आपने उसके किस परंपरा प्राप्त आचार से वो शिक्षा ग्रहण की है आप आप अपना क्लेम करिए जिसके परंपरा प्राप्त आचार्य से आपने शिक्षा ली है ठीक है मैं गडिया वैष्णव परंपरा के परिपेक्ष में बोलना चाहूंगा फिर उसी के सिद्धांत को मैं स्थापित करना चाहूंगा कि जो जन्म के आधार पर कोई भी ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शुद्र नहीं होता है वो सब अपने कर्म और गुण पर आधारित है य मैं सिद्धांत स्थापित करना चाहूंगा ठीक है आपने बताया कि आपकी जानकारी में जो वर्ण व्यवस्था है वो कर्म के ऊपर आधारित है अब मुझे बताइए सबसे पहला जो विषय आता है

00:08:03:13 कि इसकी उपयोगिता क्या है आप देखिए उपयोगिता वर्ण व्यवस्था का मैं आपको बताता हूं ऐसे वैसे शास्त्र में बोला गया कि जिसका जैसा गुण है उसी हिसाब का उसको कार्य करना चाहिए किसी के अंदर ब्राह्मण का गुण है तो उसको ब्राह्मण उचित कार्य करने चाहिए अगर किसी में क्षत्रिय का गुण है तो उसको क्षत्रिय वाले कार्य कर आप समझे नहीं मेरी बात मैंने आपसे पूछा है कि अगर हमने डिक्लेयर कर दिया कि यह ब्राह्मण है यह क्षत्रिय है डिक्लेयर हो गया गुण कर्म के हिसाब से आपने डिक्लेयर कर दिया आपके अनुसार कि यह ब्राह्मण है यह क्षत्रिय है ये जो है वैश्य है ये शूद्र है आपने डिक्लेयर कर दिया ठीक है हा जी हाज हा क्लेयर कर अब ये बताइए कि यह जो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र आपने डिक्लेयर किया है इसकी उपयोगिता क्या है सबसे बड़ी उपयोगिता तो मैं आपको अभी बताता हूं जो आप लोगों का जो सिद्धांत है कि जन्म के आधार पर कोई ब्राह्मण है उसने जो हिंदू धर्म का जितना विनाश किया है आज के समय में भाई साब देखिए अगर आप व की बात करेंगे मुझे चर्चा को स्टॉप करना पड़ेगा मेरे पास इतना व्यर्थ समय नहीं है मैंने आपसे पूछा उपयोगिता क्या है आप अपनी उपयोगिता बताइए वो जो उसम वो उसने विनाश किया है अब मैं मैं हर चीज का फर शास्त्रो प्रमाण पूछूंगा वो आप

00:09:18:14 बता नहीं पाओगे बताओ बताओ य तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एक मात्र शास्त्र प्रमाण है अब मुझे बताओ कि मानने वालो ने विनाश किया है यह कहा लिखा है शास्त्र में बताओ यह तो दृश्य है जन्मन शास्त्र सेय तो दृश्य इतने सारे द लोग हिंदू धर्म को छोड़ के बाहर निकल रहे इतने जो आप खबर दे रहे हो व वही खबर एट सत्य है उस पर ठप्पा कौन लगाएगा ऐसी

00:09:50:12 बाय आप कह रहे हो भाई साब अभी मैं सिद्ध करूंगा कि आपने बिगाड़ा फिर इसलिए इसलिए मैं यह कह रहा हूं ऐसे क्लेम करने से बचे जिनको आप शास्त्र से सिद्ध ना कर पाए हम लोग यहां पर हम लोग यहां पर कोर्ट में नहीं खड़े हैं कि इसने खून किया कि नहीं किया कि वो नंगा पकड़ा गया था कि नहीं पकड़ा गया था इस कन का कोई व्यक्ति हम लोग ये करने के लिए नहीं खड़े हैं ठीक है जी जी जी इसकन में किसी को ब्राह्मण बना दिया गया वो नंगा पकड़ा गया यह सब करने के लिए नहीं खड़े हम लोग य शास्त्र पर बात करने आए हैं जी ठीक है मैं समझ गया आपके जो नकली शंकराचार्य बन के बैठे उनका भी सब बाही पता है देश में जो नकली शंकराचार्य बनके आप पूरी में बैठे हैं जो उनका सब बता मैंने क्या कहा मैंने क्या कहा हम लोग शास्त्र से बात करें जी ठीक है शास्त्र से बात करते जिससे कि वो जो एक जो आप जो क्लेम कर रहे हो ना उसको मैं मान सकू आपने कुछ बोला तो उसको मैं मान सकूं मैंने कुछ बोला तो उसको आप मान सको ना मानने की सूरत में या फिर निरर्थक उसका भाव बदलने की सूरत में जनता ये देखेगी कि भैया ये जो है क्या कहते हैं इसका आधार गलत है या मेरा या आपका दोनों में से किसी एक का ठीक है तो शास्त्र को बीच में रख कर के जो बात बोली जा सकती है वो बोलिए तो ठीक है तो अभी

00:11:05:18 आपसे पूछ रहा हूं सवाल दोबारा कहते हैं कि आपकी जो कर्मण से वर्ण व्यवस्था है आपने घोषित कर दिया कि ब्राह्मण है ये शूद्र है ये वैश्य क्षत्रिय है ये जो है इसकी उपयोगिता क्या है इसकी उपयोगिता यह है शिवांश देखिए मान लो कोई व्यक्ति है अगर कोई व्यक्ति वैश्य परिवार में उत्पन्न हुआ पैदा हुआ वो पर उसका स्वभाव ब्राह्मणों वाले है यजन यान पठन पाठन में उसका स्वाभाविक रुचि है तो मैं उसको ब्राह्मण कहने से क्यों हिकू यही तो उसका सबसे बड़ा फायदा होगा आप उसको ब्राह्मण कह रहे हैं अब आगे की बात तो करिए अब उसकी उपयोगिता बताइए मुझे उपयोगिता ये है कि उसका जो स्वाभाविक उसका जो स्वभाव है उसका जो नेचुरल स्वभाव है उसके उसके हिसाब से वो ब्राह्मणों के कार्य करेगा वो यज्ञ यजन पठन पाठन करेगा उसके स्वभाव के अनुसार कार्य करेगा तो तभी वो आगे समाज में कुछ अच्छा कर पाएगा ना अगर उसका स्व ब मैं अपना सवाल समझा नहीं पा रहा हूं मैं आपको बताता हूं क्लियर करता हूं कि मान लीजिए कि मेरे चार पुत्र हुए या 10 पुत्र हुए ठीक है जी अभी मैंने सबके नाम अलग अलग रख दिए क्यों रखते हैं दो अल

00:12:20:22 क्लासिफिकेशन क्यों करते हैं कि यह शिवांश है ये अजय है यह राम है यह लक्ष्मण है यह भरत यह शत्रुगन है यह क्लासिफिकेशन क्यों करते हैं क्योंकि दोनों अलग अलग पर्सनालिटी है इसलिए नाम अलग कर रहे हैं उसके उसका कोई फायदा नहीं होता है क्लासिफिकेशन का नहीं होता है उसकी पहचान कर सकते हैं हम अलग से आइडेंटिफिकेशन कर पहचान का क्या फायदा होता है उस अगर हम किसी को पहचानते हैं कि य राम है तो फायदा क्या होगा जब हमें राम को बुलाना होगा जब हमें लक्ष्मण से होगा जब हमें वैश्य से कार्य होगा जब हमें अजय से कार्य होगा तो हम जल्दी से जल्दी अजय तक पहुंच पाएंगे जी और अगर सबको हमने एक जैसा ही कर दिया तो हमें जब अजय से कार्य होगा तो हम अगर मान लो सबका नाम अजय रख देंगे या कोई नाम जो क्लासिफिकेशन जो कर रहे वो नहीं करेंगे तो हम अजय तक जल्दी नहीं पहुंच पाएंगे देखिए देखिए शिवांश जी आप मेरी बात भी सुनिए थोड़ा मैं आपके बात का खंडन कर रहा हूं आप ऐसा कोई सिद्धांत मैंने प्रस्तुत नहीं किया है जिसम मैंने ये बोला कि सब एक मैं मानता हूं कि चारों वर्ण ब्राह्मण क्षत्रिय शूद्र सब अलग है देखिए आप दो कदम आगे बढ़ जाते हैं

00:13:35:28 आप अपने आप वो लगा रहे हैं कयास मैंने कहां कहा कि आपने य क्लेम किया है मैंने आपको बता दिया कि क्लासिफिकेशन का यूज ऐसे करते हैं कि अगर वो हिरो अंडा स्प्लेंडर है वो पैशन है वो पल्सर है वो बुलेट है तो जब मुझे बुलेट की लिए जाऊ तो बुलेट मुझे जल्दी मिले ऐसा ना हो कि मैंने कहा मोटरसाइकिल तो भैया ये वाली ये वाली ये वाली ये वाली तो क्लासिफिकेशन से हम लोग उस चीज तक जल्दी पहुंचते हैं और इसी को कहते हैं व्यवस्था क्लासिफिकेशन से क्या आती है व्यवस्था ठीक है ठीक है तो अब बात ये आती है कि आपने जो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश और सूत्र बनाए हैं क्या यह जो क्लासिफिकेशन आपने किया है क्या इसकी उपयोगिता वही है या कुछ और है वो बताइए वही है वही है वही है यही है कि जब हम ब्राह्मण से कार्य हो तो हम ब्राह्मण तक जल्दी पहुंचे जल्दी पहुंचे जी बिल्कुल और हमें हमें जब शूद्र से जब हमें शूद्र से कार्य हो तो हम शूद्र तक जल्दी पहुंचे जी जी जी ठीक है तो यह जो आपकी जो कर्म के अनुसार वर्ण व्यवस्था है इसमें कोई ऐसा नियम है कि व्यक्ति के कर्म और जो आपका गुण है उसके अनुसार एक ही बार

00:14:51:01 जो है जो वर्ण तय हो जाएगा या जिंदगी में कभी भी कितनी भी बार बदल सकते हैं नहीं बदलने वाला ऐसा नहीं है अगर बदल होता है बदलना यली ऐसा नहीं होता एक ही वण पूरा जीवन रहता है क्यक जो संस्कार होते हैं वरा व एक ही रहता है उसका तो व दोबारा संस्कार नहीं कर सकता अगर कोई का किसी का स्वाभाविक है वह वैश्य है अगर उसका नेचर वैश्य वाला है तो ब्रहण क्यों बनेगा भाई साब कर सकता है कि नहीं क्यों उसको खींच रहे करने को कर सकता कर सकता है यानी कि आपने जो व्यवस्था बनाई है उसके अनुसार ब खड़ा हुआ है क्षत्रिय खड़ा हुआ है जब ब्राह्मण की आवश्यकता होगी तो मैं ब्राह्मण जो पहले से घोषित है उसके पास जाऊंगा मगर हो सकता है कि वो उस समय ब्राह्मण ना हो व क्षत्रिय बन चुका हो जी बिल्कुल हो सकता है बिल्कुल हो सकता है तो य वस्था क हुई आप थोड़ा ध्यान से समझिए आप उसको व्यवस्था की तरफ लेकर जा रहे मैं बोल रहा हूं आप मेरा सिद्धांत सुनिए मैं बोल रहा हूं अभी आपने कहा कि आपके द्वारा जो क्लासिफिकेशन हुआ है उसकी उपयोगिता बिल्कुल वही है जरत पड़ने पर हमें ब्राह्मण की आवश्यकता पड़े तो ब्राह्मण मिल जाए व की एक मिनट अभी आपने कहा कि व

00:16:06:08 की आवश्यकता पड़े तो वैश मिल जाए मगर आपकी जो व्यवस्था है व आपकी इस उपयोगिता को तोड़ रही है क्योंकि जब के पास जाऊंगा जब मैं ब्राह्मण के पास जाऊंगा तो व यह कह सकता है मैं छत्रिय के पास जाऊंगा आपकी मुझे आवश्यकता है छत्रिय कह सकता है बस अभी पाच मिनट पहले मैंने गायत्री मंत्र पढ़कर ब्राह्मण हो गया हूं कैसे हो गया आप ऐसे सो बातें नहीं कर कैसे हो गया गाय उसका स्वभाव क्षत्रिय वाला है वो युद्ध में है है ना वो उसका क्षत्रिय स् ब्रहण ऐसा हाइपोथेटिकल एक मिनट एक मिनट मिनट यानी कि जब भी आपकी व्यवस्था यह है कि जब भी हम कहीं जाएंगे भले ही वो पहले से ब्राह्मण घोषित हो क्षत्रिय घोष तो मगर उसके बाद भी हम उसको जीरो से चेक करना शुरू

00:16:52:04 करेंगे किस प्रकार आप बताना चाह रहे जीरो से किस तरह चेक करेंगे स्वभाव है क्या जैसा उस कर्म है क्या क्षत्रिय सा ये है वो है ये सब आपने बताया ना तो फिर उसका पहले से ब्राह्मण घोषित होने का कोई फायदा ही नहीं है नहीं उसका स्वभावी क्त्र तो ब्रहण क्यों घोषित करेंगे उसको टाइम उसको पूरा का पूरा चेक ही करना है तो फिर उसका पहले से ब्राह्मण घोषित होना कोई आवश्यक ही नहीं है नहीं है जन्म ना जाते शुद्र संस्कार द उते वेद पठ ब्र ब्र कर रहा जो बात चल रही है उसका उत्तर दीजिए मैं आपको शास्त्र प्रमाण बता रहा था आप तो अभी न्याय में लग गए हैं मैं थोड़ा शास्त्र के हिसाब से आपको बता रहा था आपसे यह पूछ रहा हूं मैं आपसे यह पूछ रहा हूं कि जो आपकी व्यवस्था आपने बताई कि हम ब्राह्मण तक जल्दी पहुंच सके हम शूद्र तक जल्दी पहुंच सके हम क्षत्रिय तक जल्दी पहुंच सके मगर अभी आप कह रहे हो कि वो जो है कितनी बार बदल सकता है तो हम जा रहे ब्राह्मण समझ के और वो बदला हुआ है फ ऐसा नहीं मैंने ऐसा नहीं बोला कि कितनी बार भी ब सकता है जिस व्यक्ति का स्वभाव क्षत्रिय है मैं बोल रहा हू कि क्यों उसका स्वभाव कभी परिवर्तित नहीं होता देखिए आप एक बात सुनिए थोड़ा सा स्वभाव परिवर्तित आपने

00:18:07:27 थोड़ी पहले कहा था बदल सकता है कहा था कि नहीं बदल सकने को बहुत मुश्किल होता है स्वभाव को बदलना परंतु अगर बदल सकता है बदल सकता है पर ऐसा नहीं होता 99.99% केसेस में ऐसा नहीं होता है तो भाई साहब अब मुझे आप दो तीन चीज प्रमाण दिखा दीजिए कि यह कहा लिखा है कि जो आपने एक ब जो वो वर्ण धारण कर लिया उसके बाद आप उसको बदल नहीं सकते क्योंकि भाई साब वो हमारा स्वभाव है स्वभाव कैसे बदलता हैई साब आप मुझे वर्ण बदल नहीं सकता वो अपने वर्ण को बदल नहीं सकता ये मुझे बताइए क्योंकि उसका स्वभाव नहीं बदलता क्योंकि उसका जो स्वाभाविक नेचर है वो नहीं बदलता इसलिए वर्ण नहीं बदलता अगर बदल जाता है अगर वो भक्ति करके कुछ का स्वभाव मनुष्य का स्वभाव और गुण बदल नहीं सकता बदल सकता बहुत मुश्किल है बहुत मुश्किल है नेक्स्ट टू पॉसिबल अग को एक फिक्स चीज बताइए ना हम धर्म की बात कर रहे हैं मर्यादा की मर्यादा वो बताइए फिक्स क्या है हम हर चीज को एक्स्ट्रीम नहीं ले सकते शिवम जी देखिए बदलने को बदल सकता है पर यूजुअली ऐसा नहीं होता मैंने बोला 99.99% केसेस में ऐसा नहीं होता तो यानी कि आपकी जो व्यवस्था है उसमें यह दिक्कत है कि जब हम लेने जाएंगे ब्राह्मण को तो उसमें वो बदल बदला हुआ हो सकता है हो सकता है बट

00:19:23:03 इट इज नेक्स्ट टू इंपॉसिबल ये भी मैंने बोला है बहुत कहीं कहीं केसेस में ऐसा होता है सकता है बस बट इट इज नेक्स्ट टू इ पॉसिबल ये कौन सी बात है भाई आप देखिए मैं भगवत गीता का प्रमाण दे बता र सिद्धांत बता रहे हैं या ये जो प्रासंगिक लोग होते बातें करते जो दोनों तरह की बातें करते वो कर रहे हैं आप सुनिए मेरी बात सुनिए भगवत गीता से आपको बताऊंगा देखो मैं कुछ नहीं जो भगवान कृष्ण मेरे जो इष्टदेव है उनके हिसाब से मैं बताना चाहूंगा देखो भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण बोलते बताइएगा देखिए प्रमाण मेरे पास भी है भाई साहब प्रमाण मेरे पास भी है मैं अभी आपसे पहले एक वो ले रहा हूं क्या स्टेटमेंट बदल सकता है वर्ण को नहीं बदल सकता है ये बताइए जी बदल सकता है पर ऐसा फ्रीक्वेंसी

00:20:17:02 में जाते थे क्षत्रिय राजा तो बाद में तो फिर तो फिर तो फिर जब ऐसा हो सकता है तो फिर इस व्यवस्था की उपयोगिता जो आपने बताई थी वो क्या रह गई देखिए सबसे बड़ी उपयोगिता तो यह है कि जो पहले क्षत्रिय था वो वो ऐसा नहीं कि हमेशा ही वो ब्राह्मण बन जाएगा अचानक से वस्तुत ऐसा होता कि कैसे बनेगा कैसे बनेगा अरे मैंने बोला कि वो ब्राह्मण अगर पहले कोई क्षत्रिय है तो वो ब्राह्मण मान लो कोई व्यक्ति है आप सुनिए अगर किसी में अगर वो कोई गुरु के पहले के समय में क्या होता था जो आप जाति व्यवस्था को आपने वर्ण व्यवस्था के साथ जोड़ दिया है ऐसा बिल्कुल भी नहीं है जैसे पहले के समय में होता था एक बच्चा है जो जन्म से तो उसको देखिए देखिए भाई साब देखिए ऐसा है थोड़ा सा पॉइंट प बात करिए आप ये बताइए कि उसकी उपयोगिता क्या है क्योंकि आपने जो उपयोगिता बताई थी वो खंडन हो चुका उसका अब आप उसकी दूसरी उपयोगिता बताइए क्लासिफिकेशन की दूसरी उपयोगिता यह है मान लो कोई व्यक्ति है अगर वो ब्राह्मण कुल में पैदा हुआ है सुनिए मैं उपयोगिता बता रहा हूं आप समझने का कोशिश करिए अगर कोई ब्राह्मण परिवार में उत्पन्न हुआ है पर उसका स्वभाव ब्राह्मण वाला नहीं है उसका स्वभाव शूद्र वाला है तो जब मेरे को शूद्र को ढूंढना होगा तो मैं बोलूंगा यह देखो

00:21:32:02 यह जो द्विवेदी का पुत्र है यह शूद्र है इसको बुला के लाओ इसकी सेवा करवानी है तो मैं यह कर सकता हूं यह सबसे बड़ी उपयोगिता है पर आपने किसी को ब्राह्मण के कुल में पैदा उसको ब्राह्मण समझ लिया और उसको ब्राह्मण उचित कार्य दे दिया और वो उसको अच्छे से नहीं कर पाता है तो आपका ही नुक्सान है हाइपर मत होइए मैं अब एक बार और समझा दीजिए उपयोगिता क्या है क्या बताया आपने यही उपत कि ऐसे बहुत सारे दृश्य हमें देखने को मिलते हैं जिसमें कोई ब्राह्मण के कुल में पैदा हुआ है तो उस के पास गुण ब्राह्मणों वाले नहीं है तो इसका उपयोगिता ये है कि मैं उसको शूद्र बोलूंगा और मैं जब शूद्र को ढूंढने जाऊंगा तो उसको पहचानू ये जो शूद्र है इसके स्वभाव से य ये पैदा तो ब्राह्मण के घर में हुआ पर ये इसका स्वभाव शूद्र का है तो शूद्र उसको लाके मैं अपना कार्य करवा पाऊंगा ये मेरा आप उसे कितनी देर तक वच करने के बाद तय करेंगे कि ये शूद्र है या ब्राह्मण है आप देखिए ये जो है उसका जो व्यक्ति है उसका जो नेचुरल स्वभाव है उसका गुरु पहचानता है पहले के समय में क्या होता था कि सारे गुरुकुल जाते थे और गुरु उसके वर्ण को तय करता था किय किस वर्ण में जाएगा गुरु तय करता था मतलब की आप नहीं करेंगे वो सिर्फ गुरु करेगा गुरु करेगा जी यानी कि अभी दो तीन चीज निकल के आ गई कि वर्ण को डिसाइड केवल गुरु करेगा और वर्ण जो है कई बार भी बदला जा सकता है मगर वो

00:22:47:04 थोड़ा कठिन होता है पर बदला जा सकता है बदला जा सकता है बदला जाता है हा और दूसरी बात यह कह रहे है कि जो गुरु है वो देखेगा और उसको बदल देगा गुरु डिसाइड करेगा हां बदल देगा नहीं बोला उसका जो स्वभाव है उसके अनुसार उसको घोषित करेगा कि ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र है या पंचम है अच्छा तो यह जो डेडलाइन है कि उम्र के किस पड़ाव तक ऐसा हो जाना चाहिए जिसके बाद नहीं होगा या ऐसा कुछ नहीं है वस्तुत 25 साल तक ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं ब्रह्मचारी बनना सबको सबको होता है तो 25 साल की उम्र तक गुरु बता देता है कि व किस वर्ण में जाएगा मतलब कि 25 साल के बाद वर्ण नहीं बदला जा सकता अब उसका जो स्वभाव गुरु ने पहचान लि तो कैसे बदलेगा वो कैसे ऐसे रातो रात थोड़ी क्षत्रीय बन जाएगा भाई इसका मतलब ये कह रहे कि 25 साल के बाद गुरु भी वर्ण को नहीं बदल सकता नहीं बदल सकता उसका स्वभाव अब वही है ना निग्रह किम करिती उसका जो स्वभाव है वो कैसे बदल सकता है बताइए अगर वो भगवान की ऐसी तीव्र भक्ति करेगा कहने का मतलब य है स्वभाव व्यक्ति का नहीं बदल सकता बहुत मुश्किल होता है नहीं बदलता है निग्रह किम करि भगवान भगवत गीता में बोलते है मलब कोई व्यक्ति अगर स्वभाव से हिंसक है तो भगवान की भक्ति

00:24:02:10 कर करके कर करके उसका वो हिंसक का स्वभाव नहीं बदल सकता अब वो ब बहुत मुश्किल कार्य भगवान की शुद्ध भक्ति करना कोई आसान बात तो नहीं है ना यह बहुत मुश्किल कार्य है वस्तु तो हम आत्मा है हमारा स्वरूप कभी नहीं बदलता स्वभाव बदल सकता है मैं ऐसा नहीं बोल रहा कि नहीं बदलता अब आप मुझे इसका प्रमाण दे दीजिए कि कितने वर्ष की आयु से पहले तक उसका घोषित हो सकता है उसके बाद नहीं होगा देख मैं आपको इस चीज का प्रमाण दे सकता हूं कि कोई ब्राह्मण के परिवार में पैदा हुआ तो वो शुद्र हो सकता है और कोई शूद्र के परिवार में पैदा तो जैसे कोई संस्कार होता है ना संस्कार इत्यादि होते उनकी चीज डिसाइड होती है इस उम्र तक य होगा इस उम्र तक य होगा होती है कि नहीं होती है जी जी होती है तो वो आपने जैसे बताया 25 साल से पहले तक नहीं होता है इसका प्रमाण है आपके पास 25 साल के बाद नहीं होगा नहीं मैंने ऐसे नहीं बोला 25 साल के बाद होगा पर उसका स्वभाव नहीं आप उसको संस्कार के साथ क्यों देख रहे उसका स्वभाव है उसके साथ देखिए ना मदा बदलेगा कि नहीं बदलेगा दोनों तरह की बातें मत करिए बदलेगा कि नहीं बदलेगा 25 साल के बाद बदलेगा जी बदलेगा बदलेगा मान लो ऐसी भक्ति करता है कि वो अब मुझे तो वो कोई आयु सीमा है

00:25:17:16 कि इसके बाद नहीं बदलेगा नहीं ऐसा कोई आयु सीमा नहीं है गुरु जो 25 साल जब वो ब्रह्मचारी आश्रम में रहता है तो गुरु उसका डिसाइड करता क्या है वैसे सीमा कोई बा जब वो चला गया उसके बाद ब सकता है हां चला गया अगर वो गृहस्थ में चला गया ग्रस्त में जाक वो ऐसे आचरण डेवलप कर लेता है तो बदल सकता है बदल सकता है बिल्कुल ऐसा फगा फिर गुरु के पास आएगा हां गुरु पहचान लेगा उसका आसपास के आप उसके स्वभाव को देखिए उसको कोई भी आइडेंटिफिकेशन गुरु घोषित करता है अब आप कह रहे हो अरे गुरु घोषित करता है क्योंकि 25 साल तक ब्रह्मचारी जिसके आश्रय में रहा है वो जानता है उसके स्वभाव को इसलिए घोषित करता कोई यानी कि कोई भी घोषित कर सकता है कोई भी घोषित कर सकता है इसमें क्या हो गया ओके अभी आपने मैंने आपसे पूछा था ये व्यक्ति ब्राह्मण या क्षत्रिय वैश्य या शूद्र है तो इसको आप जो घोषित करेंगे तो कितनी देर वच कर तो आपने कहा नहीं मैं नहीं गुरु करेगा हा क्योंकि गुरु उसके साथ मैक्सिमम

00:26:32:26 समय बताता सुनि अब आपने कहा अब आपने कहा कि नहीं कोई भी घोषित कर सकता है चलो फिर से आ जाते हैं तो अब आप ये बताइए कि जो कोई भी घोषित कर सकता है किसी को देख कर के उसको उसे कितनी देर वच करना है अरे जब तक उसका स्वभाव उसके सामने निखर के नहीं आता इसमें हम टाइम लिमिट कैसे लगा सकते दो दिन देखना है दो महीना देखना उसका स्वभाव निक के आने का पैरामीटर होगा ना कुछ एक घंटा देखना है एक साल देखना है छ महीने देखना है क्या पैरामीटर है उसका उसका पैरामीटर आप देखि उसका कोई स्वभाव है व एक जैसा ही रहता है हमेशा तो इसलिए हम लोग शास्त्र पर चलने वाले लोग है तेरे लिए कर्तव्य अ कर्तव्य में शास्त्र प्रमाण है आप मुझे बताइए कितनी देर देखने पर यह मान लेना चाहिए कि क्षत्रिय वैश्य शूद्र ब्राह्मण है जब मान लीजिए कि मैं रास्ते में जा रहा हूं सपोज करिए मैं रास्ते में जा रहा हूं और मुझे किसी कन्या के लिए के लिए उत्तम वर्ग की जरूरत है ठीक है तो मैं ऐसे देखता हुआ जा रहा हूं बस मैंने अब वो मुझे पैरामीटर बताइए कि क्या देख लू क्या कर रहा हो वो क्या कर रहा हो जिससे तय हो जाए और वो कितनी देर तक उसको मैं जाचू परखू ये पैरामीटर बताइए जो मैं उसको पकड़ के ले आऊ चल भाई तू

00:27:48:00 ठीक है तू ब्राह्मण है तू क्षत्रिय है ठीक है उसके साथ बैठिए वो देखिए उसका आचरण कैसा है क्या वो सत्व गुणी है रजोगुण है तमोगुण है गुण को पहचानना कोई ज्यादा मुश्किल बात नहीं मतलब स मतलब सड़क पर नहीं हो सकती बैठना पड़ेगा हो स नहीं हो स बैठना पड़ेगा उसके गुण को पहचानना पड़ेगा किस गुण से ज्यादा प्रभावित है व सतोगुण है रग तमग घर से बैठने के लिए निकलूंगा तो निकलने का पैरामीटर क्या होगा अरे घर से निकल के उस व्यक्ति का आप आप संग कर उस व्यक्ति का जब संग करेंगे तो देखेंगे कि कौन सा गुण में सग है मुझे इस व्यक्ति को ही चेक करना हैई मैं जब घर से निकलूंगा तो दुनिया में लाखों करोड़ों लोग है तो उन लाखों करोड़ों लोगों में से मुझे किस व्यक्ति को चेक करना है इसका पैरामीटर क्या होगा अरे जिसके साथ मेरा मेरी जरूरत है अगर किसी को अपनी बेटी की शादी जिससे करवानी दे तो घर से निकल रहा हूं कि मुझे एक ब्राह्मण चाहिए कन्या के लिए वर चाहिए तो मेरा पैरार क्या होगा कि मैं कहां से अपनी खोज शुरू करूं जिनके साथ वो परिचित है उनसे कर जिनको जानता ही नहीं उसके साथ संबंध कैसे स्थापित करेगा वो तो जिनके जिनको पहले से जानता हो उसके आसपास के जो लोग हैं जिनको जान पहले जानता हूं जिनको मैं पहले से जानता हूं यानी कि मेरे नाते रिश्तेदारों

00:29:03:08 के यहां पर रिश्तेदार नहीं बोला मैंने पड़ोसी हो सकता है कोई दूर का हो सकता है कुछ भी हो सकता है जानना मतलब ये थोड़ी कि रिश्तेदारी होना चाहिए जिनको मैं पहले से जानता हूं तो यहां पर तो जन्मना आ रहा है फिर तो अरे आप कैसे आ रहे पहले कैसे आ रहा है जिनको मैं पहले से जानता हूं आवश्यक नहीं कि उनके यहां का व्यक्ति भी वही निकले तो यहां तो जन्मना रहा है देखो जन्मना इस कंटेस्ट में तो नहीं बोल रहा जैसे आपको एक उदाहरण दे बताता बो मैं उदाहरण देके बताता हूं आपकी बा आप बात को घुमा रहे हैं जान बूझ के घुमा रहे मैं समझ रहा हूं आप देखिए ऐसा कुछ नहीं है ऐसा कुछ नहीं मैं आपको प्रैक्टिकली वहां पहुंचाना चाहता हूं कि जो जन्मना वर्ण व्यवस्था उसकी उपयोगिता क्या है मैं आपको प्र व पहुंचाना चाहता हूं देखि प्रैक्टिकली तो देखो मैं शास्त्र को ही प्रमाण मानता हूं भगवत गीता भागवत इससे होता है प्रमा आप से माने हर बार आपने आगे बढ़ा दी बात प्रमाण मेरे पास बहुत सारे है सुनिए ब्राह्मण का जने कितनी उम्र तक हो जाना चाहिए ब्राह्मण उचित तरीके से बताइए कहां लिखा है आपकी जानकारी उसका जब उप जब उसका उपनयन संस्कार होता तब होता है ना कौन स आयु तक हो जाना चाहिए आपने

00:30:18:10 कहा 25 वर्ष तक हो जाना चाहिए गलत काहा गलत का बताइए कहां लिखा है ये अब इसका कोई स्पेसिफिक प्रूफ तो नहीं दिखा स ऐ छोटी छोटी चीज स्पेसिफिक प्रूफ मेरे पास है ना मनुस्मृति में लि प्रमाण शत्र प्रमाण बोल रहा हूं आ से 12 वर्ष के बीच में उपनयन हो जाना चाहिए ब्राह्मण का 11 से 22 वर्ष के बीच में उपनयन हो जाना चाहिए क्षत्रिय का 16 से 24 वर्ष की आयु के बीच में हो जाना चाहिए वैश्य का तो यह जो आयु आपने बताई है 25 वर्ष ये तो गलत बताइए आप क रहे आप शास्त्र प्रमाण को मानते हैं नहीं संस्कार की बात अरे उपन संस्कार की बात क क रहा उसके वर्ण को पहचानने की धारा आप ऐसा नहीं उप संस्कार करके आप बारबार ठे प क्यों जाते श जी बता अच्छा ण को पहचानने की बात बता द उसम लिखा है कि ब्राह्मण का जनेऊ आ से 12 तक में हो जाना चाहिए तो यहां तो उपनयन कैसे हो रहा है ब्राह्मण को पहचान केही तो हो रहा है जो ब्राह्मण होने जा रहा है उसी का तो उपन आ से 12 के बीच में कराएंगे नहीं नहीं देखिए ऐसा मैं क नहीं मान लो किसी का साल की उम तक उप ने शास्त्र प्रमाण

00:31:33:12 जानता हूं आप शास्त्र को नहीं मानते मगर क्योंकि आपने कहा है तो मैं आपको शास्त्र रख रहा हूं सामने जी आप शास्त्र किसको कोट कर रहे व भी देखि रजोगुण तमोगुण पुराण है मनुम मनुस्मृति को रख रहे ठीक है मैं मानता हूं आपकी बात मैं भागवत को प्रमाण मानता हूं भगवत गीता को प्रमाण मानता हूं और वहा से आपको दिखा द साल की आयु तक हो जाना चाहिए ब्रहण भागवत खा आप चीज को आप चीज को डेविट कर रहे हैं आप चीज को ना अलग डायरेक्शन में ले जा रहे जी मेरे भाई अगर फेरे पढ़ रहे हैं तो यहां पर कौन सा मंत्र बोला जाएगा यह सारे मंत्र भागवत में नहीं है अगर फेरे पढ़ रहे हैं तो कौन सा मंत्र बोला जाएगा सारे मंत्र जो भगवत गीता में नहीं है इसलिए हमारे पास जो वैदिक वांगम बहुत बड़ा है जी तो ये वाला जो संस्कार है कि भाई यहां पर क्या होगा क्या नहीं होगा यह संस्कार मनुस्मृति में दिया गया अब आप भागवत को ला रहे तो भागवत को अगर ला रहे हो तो प्रमाण दो आप देखिए मैं आपसे एक प्रश्न पूछता हूं मान लो किसी का उपनयन संस्कार अभी आपके पास प्रमाण है क्या 25 वर्ष वाला भागवत से आप देखिए ऐसा प्रमाण मेरे पास भागवत प नहीं है पर मनुस्मृति के जिस वर्ष को आप कोट करके बोल रहे हैं अगर

00:32:48:12 किसी का स्वभाव ब्राह्मण है तो उसका आज से आठ से 12 साल के बीच में उपन संस्कार करा दो इस बात को आप यर्स ल यानी कि उसम ये बताया गया ब्राह्मण जो घोषित होगा वो 12 वर्ष की आयु तक हो जाएगा मगर आप कह रहे 25 वर्ष तक हो सकता है वो कहां लिखा है सवाल यह नहीं है क्या करना वो अगला स्टेप है आप मुझे बताइए 25 वर्ष तक ब्राह्मण घोषित हो जाएगा कहां लिखा है देखिए अब ऐसा कोई 25 वर्ष का मेरे पास कोई वर्ष नहीं है पर मेरे पास ऐसे बहुत सारे श्लोक है जि दिखा दूंगा इसीलिए कह रहा था जो आपकी वो लाइन है हम तो प्रमाणों पर चलते हैं शास्त्रों पर चलते हैं उसको थोड़ा साइड में रखिए ठीक है अभी हम लोग तर्क प ही बात कर लेते हैं कर करिए तर्क प बात करिए आपका प्रश्न था कहां पे था आपका प्रश्न हां प्रश्न यही है कि मैं घर से अगर निकल रहा हूं तो क्या किस पैरामीटर को मन में लेकर के निकलू कि मुझे कहां जाना है जहां से मुझे अपनी खोज शुरू करनी है ब्राह्मण अथवा क्षत्रिय अथवा ये वैश अथवा शूद्र के लिए हां उसके नॉलेज में पहले से उसके स्वभाव से वो पहले से ही परिचित होना चाहिए अब मैं आपको एक उदाहरण देके बताता हूं मान लो मेरे को अपने घर में आपका जो परिचित होना चाहिए ना इसी में सारी बात है यही हम भी कहते हैं ये जो परिचित

00:34:03:12 है ये जो जन्मना वर्ण व्यवस्था है ये यही है कि वो पहले से परिचित होना चाहिए अब मैं बताता ह हा जन्मना वर्ण व्यवस्था का मतलब है कि भाई हम जब ब्राह्मण को ढूंढने निकलेंगे तो ऐसे तो बहुत टाइम लगेगा तो क्या करें ब्राह्मण के घर जाते हैं जो नोन ब्राह्मण हो उसके घर जाते हैं तो वहां पर ज्यादा चांसेस है कि उसका बेटा भी ब्राह्मण जैसे कर्मों वाला निकल आए मगर नहीं निकला तो उसको तिरस्कार करेंगे यही जन्मना वस्था है की ब्रा हो तिरस्कार तिरस्कार करने के बाद उसको ब्राह्मण मानते य प्रश्न है ब्राह्मणो चित कर्मों से तिरस्कृत किया जाएगा मगर उसका जो टैग है जो उसको शरीर प्राप्त है ब्राह्मण का वो टैग नहीं हटेगा वो पथ ब्रहण

00:34:49:06 है मत भाई साब मैं अभी हसा था क्या मैं भी हसा था आप प्रमाण कहीं नहीं दे पा रहे मैं हसा आपके ऊपर मैरिटी के साथ आपसे बात कर रहा हूं अगर मैं मैच्योरिटी के साथ आपसे बात कर रहा हूं तो बचकाना बिहेवियर मत करिए हा जी आप क्या रहे उसको ब्राह्मण ही मानूंगा कैसे मानेंगे ब्रा प्रमा द मैंने क्या कहा अगर मैरिटी के साथ आपके साथ पेश आ रहा हूं तो आप बचकाना बिहेवियर मत करिए ठीक है जी जी बोलिए बोलिए आपको लग रहा बचकाना मेरे को हसी आ ग आपकी बात सुनके बचकाना नहीं है फिर भाई बात उसी को बचकाना कह रहा हूं मत करिए व मुझे भी आ रही थ मैं आपका अपमान नहीं करना चाहता यहां पर इसलिए हां जीी हां जी हा ठीक है हा हां जी हां जी तो क्या कहते हैं ये हम ये कहां थे हां तो आपने जो कहा ना कि वो पहले से परिचित होना चाहिए यह जो लाइन है ना यही जन्मना लाइन है इसी में जन्मना का भाव छुपा है क्यों क्योंकि वो परिचित पहले से होना चाहिए क्या ये आवश्यक है कि परिचित का जो बेटा होगा वो सही होगा नहीं मगर एक शुरुआती पैरामीटर है कि खोज चालू करें तो कहां से करें

00:36:04:06 जैसे कि घर से निकलते समय हम जो ताला लगाते हैं ना क अपने घर में यह आवश्यक नहीं है कि वहां पर चोरी नहीं होगी मगर व सुरक्षा का एक शुरुआती पैरामीटर है एक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है इस इसी प्रकार से जो जन्मना वर्ण व्यवस्था है वो केवल इतनी मात्र है यदि हमको खोज स्टार्ट करनी है तो हम सड़क पर नहीं निकल जाए कि कॉलर पकड़ पकड़ के तू बता तेरे कर्म दिखा हमको कर्म चेक करने के लिए भी एक शुरुआती पैरामीटर चाहिए तो क्या है वो पैरामीटर कि भाई किसी ऐसे खानदान को ढूंढते हैं जो खानदान ब्राह्मण अगर हम ब्राह्मण को ढूंढने जा रहे हैं यही जन्मना वर्ण वस्था है अगर वहां पर वो ब्राह्मणो चित कर्म नहीं कर रहा होगा तो वो पतित ब्राह्मण है वो कर्म शंकर है वो कर्महीन है और यदि वो ब्राह्मण उचित कार्य कर रहा होगा तो वो हमारे लिए उपयोगी है जैसे गाय अगर दूध देना बंद कर देगी तो ऐसा नहीं है कि गाय को हम गाय नहीं कहेंगे ठीक है उसी प्रकार से उसी प्रकार से जो टैग है वो वही रहेगा बस व पतित हो जाएगा वकत हो जाएगा हिकत हो जाएगा ठीक है मेरे को कुछ बोलने दीजिए

00:37:19:13 जी इसी परिपेक्ष में आपको बताता हूं सुनिए इसी का उदाहरण दे बताता हूं मान लो मेरे को पता है कि आम की जो आम का जो फल है वम की मिलेगा ठीक है मैं परिचित हूं कि मेरे को आम का फल आम की मंडी में मिलेगा ठीक है तो मैं मैं इससे परिचित हूं तो मैं आम की मंडी में जाऊंगा पर अगर मेरे को आम का फल कई और मिल रहा जो आम की मंडी में नहीं सब्जी मंडी में मिलता है मान लो तो क्या मेरे को सब्जी मंडी से आम प्राप्त नहीं हो सकता मेरा प्रय क्या हो सकता है हो सकता है मगर आप जो फल की सब्जी मंडी है वहां पर तब जाओगे जब आम की सब्जी मंडी आपके लिए सुलभ ना हो आपके जितना सुलभ सुलभ आपके पास अगर आम की मंडी है तो आपका जो स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है कि आम की मंडी में पहले जाए और अगर आम की मंडी आपके लिए सुलभ नहीं है यानी कि अगर इसको अपने उदाहरण से मिलाए अगर ब्राह्मण मर गए सारे दुनिया के तो फिर अब हरघर में जाकर के आप चेक करो कौन सा सही वर है मगर अभी ऐसात नहीं आ सुन लीजिए मेरी बात सुन लीजिए आपातकालीन धर्म को स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के रूप में यूज नहीं कर सकते अगर आप फल की सब्जी फल की मंडी में आप अगर जाएंगे तो तब जाएंगे जब आपके पास फल जो आम की मंडी

00:38:34:20 है व सुलभ ना हो अन्यथा आपका प्राथमिकता यही होगी कि मैं भैया सीधे आम में जाऊ क्योंकि फल वाले में मुझे ढूंढना पड़ेगा देर लगेगी पहुंचना वहा तो आम ही आम है ठीक है तो यही यही जो है सुन लीजिए यही यहां पर भी है जो आप कह रहे हो व आपातकालीन स्थिति का है कि जब मेरे पास पास आम की मंडी है ही नहीं तो मैं घर से निकला और फल सब्जी मंडी में घुस गया और वहां पर मैं ढूंढने लगा हमम कहां है मगर अभी ऐसा नहीं है अभी ब्राह्मण है जीवित है क्षत्रिय है जीवित है परंपरा प्राप्त वैश जीवित है ठीक है और सुनिए इसमें एक बात और आती है कि चलो मान लो कि हमने फल में जाना शुरू कर दिया फल सब्जी मंडी में जाना शुरू कर दिया क्योंकि हमारी मजबूरी है या हमारी कोई व्यवस्था है हम लोग असमर्थ है आम तक जाने में आम की सब्जी मंडी थोड़ा दुर्लभ है और फल की मंडी थोड़ा सुलभ है तो हम क्या करेंगे जो स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है वो नहीं मना करेंगे जैसे कि किसी व्यक्ति को उसकी इंद्रियों के वशीभूत होकर के मद्रास पान करना पड़ रहा है मगर उसके पिता ने यही सिखाया है कि नहीं बेटा मदरा पान मत करना तो

00:39:49:20 वशीभूत होने के कारण अगर उसको मदरा पान करना पड़ रहा है मगर वो प्रमाण बुद्धि है जो पिता की बात में उसको जब तक मना नहीं करेगा तो पिता के लिए वो जो पुत्र धर्म वाला कहलाएगा क्योंकि उसकी प्रमाण बुद्धि उसी में है जैसे महाभारत में एक श्लोक आया है कि हीन आचरण वाला श्रद्धावन हीन आचरण वाला श्रद्धा वान उससे बेहतर है जो अच्छे आचरण वाला अ श्रद्धा वान है उससे बेहतर है क्यों क्योंकि जो हीन आचरण कर रहा है उसकी प्रमाण बुद्धि किसम है उसको मालो है मैं जो कर रहा हूं ये गलत कर रहा हूं तो इसी प्रकार से जब आप अपनी असमर्थता जो आपका जो दोष है कि आप वहां नहीं जा रहे वो उपलब्ध नहीं जा रहे आप अपनी सुलभता के लिए यहां जा रहे हैं तो फिर इस बात को आप स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के रूप में खपत नहीं कर सकते कि हम यही सही है बगल में जाना ही सही है मेहनत करना सही नहीं है वो आपका चुनाव हो सकता है उसको आप सिद्धांत के रूप में प्रतिपादित नहीं कर सकते जी बिल्कुल अब मैं अपना तक र शिवा जी आपने बहुत अच्छा समझाया मेरे को समझ आया बहुत अच्छी चीज आपने बोला आपके तर्क के अनुसार ठीक है महा जहां तक मैं आपके

00:41:04:20 तर्क को समझ पाया हूं आपका मतलब यह है कि अगर मैं सब्जी मंडी में जाकर आम के फल के खरी दू तो वह भी मैं कर सकता हूं वह तज नहीं है मैं ऐसा नहीं कि सब्जी मंडी से कभी आम खरीद ही नहीं सकता ऐसा आप मानते शास्त्रों के अनुसार तब है जब आपातकालीन स्थिति हो शास्त्रों के अनुसार वो स्थिति की अनुमति है मगर आप कालीन की है के जब ब्राह्मण नहीं मिल रहा है तो किसी क्षत्रिय क्षत्रिय को ढूंढा गया कौन है भाई ब्राह्मण के लिए उपयोगी हो सकता है ठीक है तो वह आपातकालीन स्थिति है जैसे की हमको एक एजाम ले की मान लीजिए हमको जो है फैक्ट्री की सुरक्षा चाहिए ठीक है अब फैक्ट्री की सुरक्षा करने के लिए जो ब्रीड है वह ज्यादा उपयोग में आती है रट वेलर ठीक है अब रट वेलर हमको नहीं मिल रहा है तो हम क्या करें रोड वेलर खत्म हो गए इस दुनिया से तो हम क्या करें हम पास में लेब्राडोर वाली लेब्राडोर दूसरा है दूसरी ब्रीड अवेलेबल है डोर अब हम व देख जी पहले तो आप मुझे बोलने नहीं देते ऊपर से आपका तर्क बहुत घुमा फिरा जलेबी की तरह घुमा रहे आप देखिए अगर मेरे पास रट वलर नहीं है तो मैं लेरा के पास जा

00:42:19:24 रहा छोड़ दीजिए क्योंकि आप बोल रहे थे वो बोलिए अभी इसको बाद में ले देखिए मैं इससे बड़ा प्रसन्न हुआ जब आपने बोला कि भाई अगर मेरे को आम मेरे को सब्जी फल की मंडी से नहीं खरीदना है तो मैं सब्जी मंडी से भी खरीद सकता हूं ये आप मानते हैं ठीक है खरीदना नहीं है गलत बात बोल रहे हैं जब वो सुलभ नहीं है जब वो सुलभ नहीं है मतलब वो अवेलेबल नहीं है तब आप ऐसा कर सकते हैं शास्त्रों के अनुसार फिर भी अगर आप शास्त्रों के विरुद्ध जाकर के कर भी रहे हैं जबक वो अवेलेबल है तो फिर आपको यह कहना होगा कि भाई देखो शास्त्र तो यह कहते हैं मगर मैं अपनी मजबूरी में ऐसा कर रहा हूं जी नहीं ऐसा नहीं ऐसा नहीं है ऐसा नहीं है देखिए अग अगर मेरे को सब्जी मंडी में बढ़िया आम मिलता है और फल की मंडी में खराब आम मिलता है भाई साहब तो मैं सब्जी मंडी से ही खरीदूंगा सब्जी मंडी से ही खरीदूंगा आप दोबारा आ जाते हैं दोबारा आ जाते हैं आप जब घर से बाहर निकलेंगे आपके पास आपको अभी नहीं पता है कि कहां पर जो है आम बढ़िया है आप चेक करेंगे ना जाकर के हां मैं चेक करूंगा कहां बढ़िया बिल्कुल दोनों जगह चेक करेंगे ना तो बिल्कुल करेंगे सामने आम भी है और फल जो मिश्रित फल की सब्जी मंडी दोनों है प्राथमिकता किसे देंगे

00:43:35:03 प्राथमिक एक केवल आम की मंडी है और एक मिश्रित है किसको प्राथमिकता देंगे जो मेरे घर के पास होगा उसको दूंगा प्राथमिकता यानी सुलभ यानी अपना आराम देखेंगे हां अपना आराम देखूंगा और मैं जब कह रहा हूं दोनों बराबर की दूरी पर है तब प्राथमिकता किसको देंगे प्राथमिकता में वो फल की मंडी को दूंगा फिर फल की मंडी को देंगे आम की मंडी को नहीं देंगे पर हो सकता है कि वहां पर मेरे को सही आम ना मिले शिवांश जी देखिए मैं फिर आप ये तो फल में हो सकता है ना ये फल में नहीं हो [संगीत] सकता फल की मंडी में मैं बोल रहा हूं कि वहां पर सही आम क्या पता मुझे ना मिले तो मैं सब्जी मंडी से ले लूंगा मैं आपसे ये पूछ रहा हूं भाई साहब कि आपके सामने अब चलो तीन ले लेते हैं एक सब्जी मंडी है बराबर दूरी पर एक फल मंडी है बराबर दूरी पे एक आम की मंडी है बराबर दूरी प आप आम लेने के लिए प्राथमिकता किसको दोगे मैं आम की मंडी को दूंगा यही जन् बना है अगर वहां नहीं मिलता है तोब आप जो है सब्जी में जाएंगे वहां नहीं मिलता है फल में जा वो फल में जाएंगे या जो भी एक्स वाई जड जो आपका प्रोसेस करें मगर वहां पर प्राथमिक इसी प्राथमिकता को जन्मना वर्ण व्यवस्था कहते हैं

00:44:50:06 जिस दिन सारे ब्राह्मण मर जाए जिस दिन सारे ब्राह्मण लुप्त हो जाए जन्म से और कर्म से दोनों जन्म और कर्म दोनों से यानी कि वो जन्म से भी ब्राह्मण हो और कर्महीन भी ना हो जिस दिन ऐसा हो जाए उस दिन ये प्रोटोकॉल लागू होगा यह आपातकालीन धर्म है इस आपातकालीन धर्म को आप जो है सामान्य स्थिति में लागू नहीं कर सकते और दूसरी बात आपको प्रचार तो यही करना होगा कि भाई वास्तविक धर्म क्या है हमको उस स्थिति को वापस लाना है जब जन्म से ब्राह्मण मिलने लगे जैसे कि गर्मी के महीने में हमको मालूम कि बहुत गर्मी लगने वाली है सर्दी के महीनों में हमको मालूम है कि बहुत सर्दी होने वाली है फिर भी हम सर्दी और गर्मी से बचने का उपाय करना बंद नहीं करते इसी प्रकार से आपातकालीन स्थिति में जो आपातकालीन धर्म आप अपना रहे हैं उसको अपनाते हुए भी वापस अपनी जो सही स्थिति है उसको लाने के लिए प्रयास करना बंद नहीं करते ठीक है शिवा जी आप सुनिए आपके हिसाब से मतलब अगर मैं सब्जी मंडी से खरीदता हूं तो मैं अपराधी हूं मैं धर्म के विपरीत कार्य कर आपका कहने का मतलब यही है मतलब मैं खरी नहीं सकता अगर कोई मे को गर्दन द

00:46:05:25 आप अगर आपने खुद कहा है कि मैं जो है आम की उसम जाऊंगा मेरी प्राथमिकता ये है तो आप तो हमारी साइड आ गए आप पहले बोलो तो आपकी आपकी जो ये जो वो है ना क्या कहते कुत इसको दुनिया देखे पहले आप पहले बोलो के बराबर दूरी पर फल सब्जी और आम तीनों है मगर मैं फल में जाऊंगा मैं नहीं जाऊंगा ये बोलो दुनिया को दिखाओ दिखाओ बोलो कि मैं मैं फल में जाऊंगा क्योंकि मुझे अपनी बात को ऊंचा रखना है मैं आम में नहीं जाऊंगा इस दुनिया को दिखाइए बोलिए अरे भाई साहब मैं ये बोल रहा हूं कि मैं आम आपने बोला था कि मैं आम में जाऊंगा यही स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है नहीं मेरे को आम में ही जाना पड़ेगा इसका कोई अनिवार्यता है मुझे आम में ही जाना इसकी कोई अनिवार्यता है वैसे मैं आम में जाऊंगा पर अगर मैं सब्जी मंडी में जाकर आम खरीदता हूं तो इसमें क्या गलत है ये बताइए मुझे बता रहा हू मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं इसकी अनिवार्यता क्यों है वर्ण के आगे अगला शब्द क्या लगा हुआ है जिस टॉपिक पर हम बात कर रहे हैं आश्रम वन व्यवस्था व्यवस्था तो जब एक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल जो हमें मिला हुआ है और हमारे पास फल की जो आम

00:47:20:25 की जो मंडी है वो अवेलेबल है ठीक है उसके बावजूद भी यदि हम जानबूझकर उसमें जाएंगे सब्जी मंडी में और फल मंडी में तो हमारा टाइम पहले से निर्धारित है ज्यादा चांसेस है कि ज्यादा खर्च होगा हमारा समय हमारा श्रम ज्यादा खर्च होगा तो क्या होगा या आप मानते कि वहा से भी आ मिल सकता है मैं बहुत खुश हूं मानते अपनी लाइन पूरी करने दीजिए मुझे अपनी लाइन पूरी करने दीजिए तो जब ज्यादा खर्च होगा तो जो हम व्यवस्था बनाना चाहते हैं ना राम राज्य वाली हवा उतनी ही चलनी चाहिए जितनी हवा उतनी ही चलती थी जितनी चलनी चाहिए पढ़ी आपने रामायण नहीं पढ़ी होगी मुझे मालूम है ज्यादातर आपके य भागवत और वो ब्रह्म समता और गीता य ये पाठ ज्यादा रामायण नहीं पढ़ते आप लोग कम पढ़ते हैं पड़ी होगी थोड़ी बहुत तो जो राम राज्य है ना हवा उतनी ही चलनी उतनी ही चलती थी जितनी चलनी चाहिए यह सिस्टम आपके यह जो बचकानी हरकत करोगे कि आम की मंडी अवेलेबल है फिर भी हमारे मन कर रहा है क्य हमें तो उसको तोड़ना है व्यवस्था को उसी उसी विप्लव

00:48:36:07 का नाम है आज का जो य अधर्म फैल रहा है उसी विपलव का नाम है जो गे सेक्स मैरिज हो रही है जो नास्तिक हो रहे हैं लोग उसी विप्लव का नाम है उसी के कारण क्योंकि मुझे फल की मंडी मगर मुझे उसका विरोध करना है वो स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल प्राप्त है मगर उसको मुझे ब्रेक करना है उसी को विप्लव कहते हैं तब प्रलय आती है सुनामी आती है रामराज नहीं होता अगर मैं बोलू अगर मैं बोलू शिवांश सुनिए अगर मैं बोलू कि फल के मंडी में बीमारी फैल गई है फल के मंडी में मेरे को आम मिल ही नहीं रहा है वहा सारे आम खराब है कचड़े हो गए ये बात तो मैंने भी कहा कि जब मंडी बीमारी फैल गई यानी आम लुप्त हो गा आम लुप्त हो गया य पर य बात अभी ऐसे अभी ऐसा ही है समझ लीजिए अभी अभी का जो परिपेक्ष है वो ऐसा ही है ऐसा ही है आप मान लीजिए अच्छा अभी का जो परिपेक्ष है वो ऐसा ही है कि जन्म से कोई ब्राह्मण ही नहीं है ही नहीं सब शुद्र है सब शूद्र य राघवाचार्य जी कौन है आप राघवाचार्य जी को कोई प्रमाण नहीं मानता मैं राघवाचार्य

00:49:41:24 कोने पूछा आपसे जन्म से सब शूद्र है जन्म से सभी शूद्र है ज उस अच्छा यह बताइए कृष्ण भगवान जन्म से क्या थे अरे भगवान को हमारे साथ जोड़ेंगे तो ऐसे कैसे चलेगा भाई साहब भगवान तो नित्य मुक्त व्यक्ति है और हम नित्य बध है तो आप भगवान को मत लाइए भगवान का कटेक्स मत दीजिए भगवान चलो ठीक है राम को लाएंगे रामो विग्रहवां धर्म राम ने जैसा किया वैसा हमें करना है अब राम कौन थे राम कौन थे राम परम भगवान है परम भगवान है वो और कौन है अरे भाई राम ने जैसा जैसा किया हमको करना है यानी कि राम ने मानव रूप में मर्यादा की स्थापना की मनुष्य रूप में कर तो राम जी का तो हम लोग जीवन देखेंगे ना उदाहरण के लिए हा देख सकते हैं देख सकते हैं हा तो बताइए राम कौन थे जन्म से राम जन्म से क्षत्रिय परिवार में पैदा हुए थे वो क्षत्रिय थे गु भी उन बोलो उनको

00:50:49:14 अरे शूद्र होते हैं अरे मैं अभी कलयुग की बात कर रहा हूं आप बात कर रहे हैं सतयुग की आप देखिए मैं कलयुगी अभी अभी के कांटेस्ट में बात करें ना आप या तो भगवान प ले जाते एक्स्ट्रीम चले जाते बकुल एक् च जाते मान कलयुग में जो राम ने सिखाया वो नहीं करना राम का उदाहरण नहीं लेना है नहीं ऐसा तो नहीं बोला मैंने पर राम ने कहीं नहीं सिखाया कि कोई ब के घर में पैदा ना क्यों कर रहे हो पर राम जी ने ऐसा कहीं नहीं सिखाया कि जहां पर ब्राह्मण जो मान लो कोई वैश्य परिवार में कोई पैदा हुआ उसको ब्राह्मण नहीं क्या है कोई एक बात चल रही होती आप खुक जाते दूसरे टॉपिक पर प्लीज मैं आपसे पूछा राम जी जन्म से कौन थे बोलिए राम जी जन्म थे राम जी वैसे तो राम जी परम भगवान है उनको हम अपने साथ कंपेयर नहीं कर सकते लीला के लिए वो क्षत्रिय थे लीला के लिए ली िक स्वरूप है वो उनका आध्यात्मिक स्वरूप है मानवो चित मानव दृष्टि से राम कौन थे जन्म से लीला के मानव मत बोलिए लीला की दृष्टि से वो क्षत्रिय थे लीला की दृष्टि से अब आपको पता कि जो मनुष्य लीला मनुष्य लीला भगवान कैसे मनुष्य हो जिसका हमें अनुकरण करना है जिसका हमें अनुकरण करना है ठीक है

00:52:04:20 जी जी भगवान राम का जो शरीर है भगवान राम का जो शरीर है सच्चिदानंद है तो लीला के हिसाब से चलो आप बोल देते वो क्षत्रिय थे ठीक है क्त्र यानी की जन्म से सब लोग शूद्र नहीं होते अरे आप भगवान के कांटेस्ट में अभी कलयुग की बात कर रहा हूं न उनकी बात कर रहा हूं जिनके अनुसार हमें जीवन जीना है रामो विग्रहवां धर्म वो हमारे लिए एग्जांपल है अभी आप मुझे बताइए वो जन्म से शूद्र थे कि नहीं थे नहीं थे हा तो य जो जन्म शूद्र वाला लोक है इसका अर्थ यह होता है कि जो जन्म से होता है वो शूद्र वत होता है शूद्र ही नहीं होता सुन लीजिए सुन लीजिए सुन लीजिए जो जन्म से होता है वो शूद्र वत होता है वो शूद्र ही नहीं होता जैसे की जैसे किसी व्यक्ति ने पशु पशु वाला कार्य किया ठीक है रमना पशु भी समाना और जिसका गुरु नहीं वह पशु है यह शास्त्र में लिखा है तो क्या उसकी योनि भी पशु की हो गई नहीं वह पशु वत है पशु वत उसकी योनि मनुष्य की ही रहेगी इसी प्रकार से जन्म से सभी

00:53:19:25 लोग शूद्र वत होते हैं जो उसकी योनि है जो उसका शरीर है वो वही रहेगा अच्छा शिवा जी आप तो तर्क तो आपने बहुत सारे दे दिए देखो आप कोई एक मटेरियल एजाम को लेकर सिद्धांत को स्थापित नहीं कर सकते आम का एपल लेले सिद्धांत को स्थापित कर रहे हमने आपसे बहुत सारे प्रमाण मांगे आपकी जोरी कल्पना है उसके लिए आपने प्रमाण नहीं दिया हमने प्रमाण दिए आपने आपने बताया 2 साल की आयु तक ब्राह्मण को घोषित किया जा सकता है जबक प्रमाण य कहता है से की आयु के बाद ब्राह्मण घोषित नहीं किया जाएगा आप होने का है और उसके बाद और तो और आप तो कह रहे हो आगे भी बदल सकता है वो प्रमाण दिखाइए हमारे पास प्रमाण है कि आ से 12 के बाद कुछ नहीं जी प्रमाण में दिखाता हूं ठीक है प्रमाण आपसे आप चलो अब बात आ बहुत हो गया तर्क और बहुत हो गया यह सब न्याय चीज आप देखिए अब हम प्रमाण पर आते हैं पर प्रमाण लाने से पहले मैं आपसे एक प्रश्न पूछता हूं आप ध्यान से सुनिए प्रश्न को दे दीजिए मेरे को आज कोई व्यक्ति मिलता है जो म परिवार में पैदा हुआ है शूद्र भी छोड़ दीजिए मल परिवार में पैदा हुआ है है ना अगर वो म ठीक है पर उसका गुण ब्राह्मणों वाला है उसका

00:54:35:00 आदर्श उसका जो उसका जो करने का तरीका है वो ब्राह्मणों वाला है तो क्या मैं उसको गुरु बना सकता हूं मैं आपसे मैं आपसे इसीलिए पूछ रहा हूं कि कितनी देर तक किसी को वच करने के बाद यह तय करेंगे कि हा इसको हम लोग ब्राह्मण मान सकते हैं बताइए मैं देखूंगा अरे आप करेंगे हो सकता है वो जाकिर नायक जैसा कोई दल बदलू हो पया हो जो आपको मूर्ख बनाने आया है तो आप मुझे बताइए कि उसके गुण और कर्म और स्वभाव को आप कितनी देर तक वच करेंगे जिसके बाद ये डिसाइड हो जाएगा कि हां इसको जो है ब्राह्मण माना जा सकता है वो जितना मेरे को कविंस होने में लगेगा जितना टाइम मुझे कविंस होने में लगेगा मतलब इसमें कोई शास्त्र प्रमाण नहीं है जो आप कह रहे हैं इसका शास्त्र प्रमाण है कि वो गुरु बन सकता है वो ब्राह्मण सुनिए पहली बात किसी का जो ण है व कोई भी घोषित कर सकता है इसका कोई शास्त्र प्रमाण नहीं

00:55:36:21 दूसरी मिनट दूसरी बात उसका वण जो है किस आयु तक घोषित हो सकता है इसका कोई वो नहीं अब तीसरी बात आपके पास इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि अगर व्यक्ति की अपनी इच्छा है उसको 10 मिनट देखे या एक घंटा दे यही तो होता है विपलव का कारण आप आपने मन चाहा आपको कोई भा गया कि भैया मैंने तोसे 15 मिनट देखा 15 मिनट में मुझे छत्रिया की फीलिंग आ गई मैंने सेसे एक घंटा देखा मेरे को जो ब्राह्मण की फीलिंग आ गई मैंने उसको 15 मिनट देखा शूद्र की फीलिंग आ गई आपकी फीलिंग के अनुसार धर्म चलता है है ना शास्त्र पर नहीं चलता है अच्छा आप धर्म को ऐसे डिसाइड करेंगे अरे आप तो एक ऐसा हाइपोथेटिकल केसने प्रश्न का उत्तर नहीं दिया आपने मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दिया

00:56:27:01 किनी देर तक एक मिनट कितनी देर तक किसी को वच करने के बाद ये डिसाइड हो जाएगा कि वो ब्राह्मण है और फिर ब्राह्मण उचित कर्म भी करना है जैसे आपको देखना है तो ब्राह्मणो चित फर आप ब्राह्मणो चित कर्म भी उसका करवाएंगे हां अब ऐसा कोई टाइम देके थोड़ी बता सकते हैं इसमें कि कितने देर तक देखना भाई साहब आप कैसे यहां प ऐसा हाइपोथेटिकल सा केस लेके आप बात करें मैं शास्त्र प्रमाण दिखाने के तैयार हूं मैंने आपसे प्रश्न पूछा उसका उत्तर नहीं दिया एक मिनट रुक जाइए रुक जाइए एक मिनट एक मिनट रुक जाइए विराम ले लीजिए थोड़ा सा एक मिनट हां जी हां

00:57:29:20 बोलिए हा जी मैंने पहली बात तो आपसे जो प्रश्न पूछा उतर नहीं दिया प्रश्न के परर एक और प्रश्न दे दिया मेरे को वा ठीक है प्र मैं समझ श जी आपकी बात को प्रमाने उदाहरण दिया था उसम आपने यह नहीं बताया कि मैं अगर किसी को एक घंटा डिसाइड करने के बाद एक साल डिसाइड करने के बाद पूरा जन्म डिसाइड करने के बाद अगर किसी को गुरु बनाना चाह तो बना सकता हूं कि नहीं आपने मुझे ये चीज नहीं बताई ये मिसिंग है जब ये बताएंगे तो मैं आपको बताऊंगा आप कारण बताइए उसका आप उसको ब्राह्मण जो मान रहे हैं वो कितनी देर तक उसके बाद मान रहे हैं अरे जब तक मेरे को उसम ब्राह्मण के गुण नहीं दिख रहे वहां प जो अगर ब्राह्मण के गुण है तो वो स्वाभाविक दिखाएगा ना तो इसका मतलब कौन ब्राह्मण है कौन वैश्य है कौन क्षत्रिय पर्टिकुलर अलग-अलग लोगों की फीलिंग के आधार पर तय होगा किसको किस ब अरे ब्राह्मण के क्या कर्तव्य है क्षत्रिय के क्या कर्तव्य है वश्य का क्या कर्तव्य है शूद्र का क्या कर्तव्य है भगवत गीता में लिखा है जो व्यक्ति जिस कर्तव्य को कर रहा है वो कर्तव्य कितनी देर तक देखने पड़ेंगे उन

00:58:44:24 कर्तव्यों को कितनी देर तक देखना पड़ेगा अगर कोई व्यक्ति आपके सामने ब्राह्मण बनना चाहता है नकली वो किसी फ्रॉड करने आया है तो वो एक घंटे तक ब्राह्मण ऐसे कर्म कर सकता है आपके सामने दो घंटे तक भी कर सकता है आपके सामने एक दिन तक भी कर सकता है आपके सामने तो निश्चित पैरामीटर बताइए कि किसी के कर्तव्य या आचरण कितनी देर तक देखने हैं प्रमाण बताइए आप आप देखिए इसका अ स्पेसिफिक प्रमाण मेरे पास नहीं होगा जब तक मैं कन्विंस्ड नहीं होता जब तक देखता नहीं उसके आचरण में ना भाई साहब इसमें जब तक उसके आचरण में नहीं देखता मैं उसके आचरण देखे जैसे मान लो कि हमने कहा कि वो राम बोलता हो अब वो दवे फ्रड करने आया है मैं आया हूं आपके पास फ्रड करने देखि आप तो ऐ बात को

00:59:40:04 ले पू डिस आपकी बात समझ रही है पूरी डियस ऐसे बेतक वाली बात कर रहे हैं किसी एक चीज को बना के बस वही बताइए वही बताइए वही बताइए वही बता क्या समझ रही है भाई साहब सुनिए ऑडियंस क्या समझ रही है क्या नहीं समझ रही वो तय कर लेगी आप अपनी बात बताइए आप प्रमाण दिखाइए कि 25 साल की आयु के बाद भी ब्राह्मण कोई व्यक्ति बन सकता है 25 साल तक मैंने आपको प्रमाण मनुप से दे दिया आप मेरे को प्रमाण दिखाइए आप मेरे को प्रमाण दिखाइ कोई शूद्र घर में पैदा हुआ है तो व ब्राह्मण से श्रेष्ठ हो सकता है कि नहीं हो सकता है मैं बोल रहा हूं हो सकता है हो सकता है बकल बिल्कुल अगर वो भगवत भक्त है तो व श्रेष्ठ हो सकता है उसकी उपयोगिता ज्यादा हो सकती है समाज में अगर एक ब्राह्मण है जो अपने कर्मों से हीन हो गया और एक शूद्र है जो अपने क को यथावत कर रहा है भगवत भक्त भी है तो व श्रेष्ठ क्यों नहीं माना जाए मगर उसको ब्राह्मण वाले क्या वो गुरु दीक्षा दे सकता है अगर कोई शूद्र परिवार में पैदा हुआ पर उसके गुण ब्राह्मणों वाले हैं भगवत भक्त क्या व गुरु बन के ब्राह्मणों को दीक्षा दे सकता है इसका आसर नहीं देंगे इसका उत्तर नहीं देने वाले इसका उतर नहीं आपको इसका उत्तर दूंगा ना मैं आपको इसका उत्तर दूंगा मगर मुझे आप ये बताइए कि उसके जो कर्म है वो ब्राह्मणों वाले है ये हम कितनी देर तक देखने के बाद डिसाइड

01:00:55:04 करेंगे और इसका एक ही चीज केना आप एक ही पूछ को लेके बैठ गए बस पहले ये बताइए ये बता कर रहे हो जो आपने सवाल किया था मैंने तभी जवाब दिया था आप मुझे निश्चित पैरामीटर तो बताओ भाई मेरे को अगर किसी को कोई शूद्र घर में जन्मा है और उसको ब्राह्मण के रूप में स्वीकार करना है तो मैं उसको कितनी देर तक चेक करूंगा आपने बोला कि अगर कोई भगवत भक्त शूद्र के घर में पैदा होता तो आप कितनी देर तक चेक करेंगे भगवत भक्त है आप बता सकते श जी कितनी देर तक चेक करेंगे कि वो भगवत भक्त है कितने देत चक कर भगत हो सता ह कृष्ण हरे कृष्ण कर रहा है जैसे अगर वो हरे कृष्ण हरे कृष्ण कर रहा है तो हा वो भगवत भक्त है इसलिए यहां पर इसलिए तुरंत कर लिया क्योंकि हमें उसको सेंसिटिव मैटर्स में उपयोग में नहीं लेना है वो भगवत भक्त है उसके स्वांता सुखाय के लिए वो भगवत भक्त है अपने मोक्ष के लिए अपने उधार के लिए हमें उसको अपने किसी सेंसिटिव मैटर्स में इवॉल्व नहीं करना है इसलिए हम तुरंत मान लेंगे हां भगवत भक्त है जैसे कि आज भी राष्ट्रपति इत्यादि की जो सिक्योरिटी होती है व यह देख कर के देखी जाती है कि इसके दूर दूर रिश्तेदारी में कोई कभी जेल ना गया

01:02:10:09 हो एक मिनट भाई साहब अब अगर किसी के खानदान में कोई जेल चला गया इसका मतलब य क्या वो क्रिमिनल है ऐसा नहीं बोला मगर मगर जब सेंसिटिव मैटर्स में जब सेंसिटिव मैटर्स में किसी को इवॉल्व करना होता है तो हम उसको अच्छे से चेक करेंगे और अगर सेंसिटिव मैटर्स में इवॉल्व नहीं करना है तो हम कोई दिक्कत नहीं है भगवत है जा आपके कहने का मतलब हमें पता नहीं हम नहीं जानते तो हमें क्या करना हम नहीं जानते तो हमें क्या करना मैं यही बोल रहा हूं अगर आप ये मानते हैं कि वो भगत भक्त है वो भक्ति करके मुक्त हो सकता है तो इसमें क्या दिक्कत है वो जनू पहन के संन्यास धारण करे उसमें क्या दिक्कत है आप बताइए ना क्या दिक्कत हैम दिक्कत ये है कि जब हम उसका भगवत भक्त जब हम उसको भगवत भक्त के रूप में स्वीकार कर रहे हैं मगर पिक पार्टिकुलरली अपने य की जो ऑथराइज सीट है या ऑथराइज जो हमारी जगह है वो उसके हवाले नहीं कर रहे हैं तो हम उसको क्या कहते प्रायोरिटी से मान सकते बक्त है मगर जब उसको इवॉल्व करना होगा तो हम उसे अच्छे से चेक करना होगा कि जाकिर यक जो है हरे कृष्ण का जाप कर करके सेद लगाने तो नहीं आया है अब मैं आपको प्रमाण दिखाता हूं चलो आइए प्रमाण प आते हैं प्रमाण प आ बात आई अल्टीमेटली प्रमाण प ही आई है ना अल्टीमेटली तो प्रमाण प आ गया आपके सारे तक

01:03:25:12 जो है सि हो गए औरक आपका गलत है आप गलमा कितनी बार मना किया आप अपनी मना कपित दुनिया को शिवांश जी मैं प्रमाण दिखाने को तैयार हूं

01:03:51:28 कोई शूद्र में घर में पैदा हुआ तो ब्राह्मण को दीक्षा दे सकता है सन्यास धारण कर सता है मैं प्रमाण दिखाने को तैयार हूं दिखाइए

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01:03:58:15 दिखाइए ठीक है जी अब देखिए मैं स्क्रीन शेयर कर पा कर सकता हूं य पर शिवांश जी अगर आपको कोई ऑप्शन दिख रहा हो तो [संगीत] करिए य पर रिकॉर्डिंग आ रहा है नहीं आ रहा स्क्रीन का कोई शेयर नहीं आ रहा है आप मुझे बता दीजिए कहां पर लिखा है अब देखिए क्योंकि मैं गड़िया वैष्णव हूं ठीक है आप देखिए प्रमाण दिखाइएगा अपनी मान्यता नहीं शास्त्र काही प्रमाण दिखा रहा हं चैतन्य तामृत को शास्त्र प्रमाण मानता चैत चरता मत सरियन ग्रंथ है गीता भागवत पुराण यह सब दिखाइए अच्छा शिव पुराण भी तो वैसे शक् है फिर जो गणेश पुराण है क्योंकि शिव पुराण की प्रामाणिकता भागवत पुराण में भी दी गई है देवी भागवत में भी दी गई है चैत की प्रमाणिकता कहा दी गई है बताइए अगर आप अगर आप प्रमाणिकता की बात करते हैं तो ऐसे शास्त्र में बोला गया कि शिव पुराण तो तमोगुण पुराण है तो ऐसे मनुष्य के लिए जो रण करते हैं शास्त्र में प्रमाण दिखा सकता हूं जिसम बोला गया है देखो हम वैष्णव लोग हम शिव पुराण को प्रमाण नहीं मानते

01:05:13:20 हम व िव पुराण को प्रमाण नहीं मानते शास्त्र में विष्णु भगवान वाले जो वो है उनको भी वो बोला गया है आप अपनी जो परंपरा से अपने आचार्यों के द्वारा लिखे गए ग्रंथ है वो मत दिखाइए ग्रंथ से हमको दीजिए आ ग्रंथ ठीक है जी आप चैतन्य तामृत में वैसे सीधा लिखा है कि आप अगर चैतन्य प्रमाण नहीं चाहिए भाई साहब उसम मिलावट भी कहते हैं बहुत सारे जो लोग है अभी स्वामीनारायण वाले आ जाएंगे कि मैं स्वामी नारायण का हूं तो मैं स्वामी नारायण का लिखा हुआ मानूंगा आर्य समाज वाला आ जाएगा वो कहेगा कि भाई मैं दयानंद जी से जुड़ा हुआ ह तो मैं दयानंद जी का मानूंगा तो आप मानेंगे क्या उनके उन प्रमाणों को

01:05:56:24 आप आप उन ग्रंथों से दिखाइए जो ग्रंथ आपके और मेरे दोनों के लिए मान्य हो ठीक है चलो ठीक है मैं आप सुनिए अब श्रीमद् भागवत श्रीमद् भागवत तीसरा स्कंध 3 वा अध्याय श्लोक संख्या सात यहां पर क्या बोला गया है आप सुनिए एक बार अहो तम सो पतो गरिया यवाग वर्तते नाम तुभयम ते पुप जरार बणा च गण ब्रहमान चू गणय इस बोल र अरे क्या आश्चर्य की बात है स पतो गरिया अगर कोई ऐसे परिवार में पैदा जो कुत्ते का मास खाता है य तो शूद्र से भी गुर है स्प परिवार में पैदा हुआ है य फिल्मी शूटिंग नहीं कर रहा हूं आप सीधे सधे अपनी बात बोलिए उसम से एक्टिंग को हटा दीजिए नहीं एक्टिंग को क्या आप देखिए सुन लीजिए सुन ली य फिल्म नहीं चल रही है आप बिल्कुल अपनी बात को सहजता के साथ सीधे सधे बोलिए उसम से एक्टिंग जो है ना और गायन वादन इसको एक साइड रख दीजिए वव लोग श्रीमद भागवत ते हम लोग माते तो अपने मंच पर जाइए गाने के लिए भाई साब हाज अरेने के

01:07:11:24 लिए अरे मंच श्रीमद भागवत के श्लोक को गाया जाता है मायावादी मर्ख लोग जो नहीं गा पाते उसके बाद भी आपकी एक्टिंग जारी है ठीक है उसम बोला गया है वर्तते नाम अहो बता सो पतो गरिया य बताया आपने 3 अध्याय खोलिए 3 अध्याय खोलिए लोक संख्या सा आप इसका ट्रांसलेशन भी नहीं बताने दे रहे मेरे को आपका प्लेटम

01:07:47:14 [संगीत] चवा अध्याय चवा अध्याय [संगीत] नहीं तीसरे स्कंद का 33 वा अध्याय श्लोक संख्या सात [संगीत]

01:08:26:06 आप अनुवाद बताइए तब तक हां अनुवाद बता रहे हैं इसमें बोला गया है

01:08:32:00 कि अहो बता सो पतो गरिया अगर कोई स्प परिवार में भी पैदा होता है जहां पर कुत्ते का मास खाया जाता है यवा अग्र वर्तते नाम तुगर जीव के अग्र भाग से भगवान का नाम लेता है आगे सुनिए ते पुस तपस ज शरार ब्रह्माणु चरणाम गरण उसने सारी तपस्या कर ली है ज उसने सारे यज्ञ कर लिए हैं जो ब्राह्मणों के कार्य होते हैं सारे यज्ञ कर लिए हैं सारे पवित्र नदियों में स्नान कर लिया है और सारे वेद को वो बिल्कुल अच्छे तरीके से समझ चुका है तो क्या ये ब्राह्मण वाले गुण उसने कर लिए कि नहीं कर लिए तो

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01:09:05:24 वो ब्राह्मण है भाई तो ये तो ये जो तपस्या उसने जो कर ली है ये तो उसके अपने स्वांता उद्धार के लिए उसकी उपयोगिता ब्राह्मण के रूप में ली जा सकती है यह प्रमाण दिखाइए भाई साहब शिवांस जी मतलब आप क्या रहे कि उसका खुद का उद्धार हो गया तो लोगों का उद्धार नहीं कर सकता आपसे मैं एक्सपेक्ट नहीं बिल्कुल बिलकुल जो कबीर दास थे जो ये वो थे ये कभी भी आचार गद्दी प नहीं बैठे अरे आप क बा सुन लीजिए सुन लीजिए ये लोग भगवत भक्त बने क्या कहते हैं ये रसखान और ये ये सब आचार गति पर नहीं बैठे कभी होप फुली आप सु सुनिए आपका कहने का मतलब है डिस जो समझ रहे एक मिनट एक मिनट सी प्रामाणिक जो परंपरा है उसमें ये रसखान और यह सब जो भक्त हुए हैं यह कभी भी आचार्य गद्दी पर नहीं बैठे हैं ये भगवत भक्त हुए मान और अपना मोक्ष प्राप्त किया वो आदर्श के रूप में स्थापित सुनो आदर्श के रूप में स्थापित हुए उनके कर्म अगर सही थे जो परंपरा प्राप्त आचार्यों की सीमा में थे तो उनको फॉलो भी किया मगर प्रमाण के रूप में उनको ब्राह्मण के रूप में उनको यज्ञ

01:10:20:26 करने वाले ब्राह्मण के रूप में या आचार्य गद्दी पर बैठने वाले ब्राह्मण के रूप में या राज करने वाले क्षत्रिय के रूप में स्वीकार नहीं किया गया शिवांश जी आपने जिस हिसाब का मेरे सामने तर्क प्रस्तुत किया कब तक हो जाएगा या बारबार होता रहेगा इसका प्रमाण दिखाए मैंने आपको प्रमाण बता दिया मनु अनक से कर अनक उधर चले गए अरे जो तर्क चल रहा था आपका क अभी तक जो आप तक जी सुनिए एक बार सुनिए मेरे हिसाब से सारी डियस भी समझ पा रही है समझ पा रही है मेरे हिसाब से डि फिर आप ऑडियंस की बात ले रहे हैं वो बात बोलो देखिए आप में और मुझ में एक अंतर बता दूं मैं बात वही बोलता हूं जो कि आपके और मेरे बीच में दोनों तरफ से मान्य हो सके आप अपने मन कल्पित पूर्वाग्रह भी थोपते हैं जैसे मैंने आपसे मैंने आपसे पूछा आपने मेरे सामने तक रखा था जी सुनि आपने मेरे सामने तक र थाब एक मिनट एक मिनट मैंने आपसे सबसे पहले पूछा था कि आपके द्वारा स्वीकार की वर्ण व्यवस्था है उसकी उपयोगिता क्या है आपने कोई उपयोगिता उसकी अभी तक सिद्ध की क्या नहीं की उपयोग मैंने आपसे पूछा मैंने आपसे पूछा कि

01:11:35:26 जब आपके पास तीनों अवेलेबल होंगे फल सब्जी और क्या कहते हैं आम तो आपकी प्राथमिकता क्या होगी आपने कहा फल ठीक है यही था ना आपका के दवारा से पूछा कि ब्राह्मण का जनय किस उम्र तक हो जाना चाहिए इसका प्रमाण क्या है अगर बदला जाएगा तो इसका प्रमाण क्या है अगर गुरु घोषित करेगा तो केवल इसका प्रमाण क्या है और अगर और अगर राह चलते कोई भी घोषित करेगा तो इसका प्रमाण क्या है कोई प्रमाण नहीं है उसके बाद फिर मैंने पूछा कि चलो राह चलते मान लिया जाए दुर्जन तोष न्याय से कि राह चलते कोई भी घोषित कर सकता है तो उसको कितनी देर तक उस व्यक्ति को जांचना पखना होगा उसका प्रमाण क्या है आप देखिए अब सुनिए आप ऐसा हाइपोथेटिकल केस लेकर बोल रहे हैं अभी आपने जो तर्क में स्थापित किया जो बात बोली जिसने अपना उधार कर लिया व लोगों का उधार नहीं कर सकता य आपका बता कैसा तक है मान लो कोई व्यक्ति डॉक्टर है तो व खुद का ही इलाज कर सकता इला नहीं कर सकता बात कर

01:12:48:20 रहे उ कर ठीक आप बोल रहे ुद का उ सता व सबका उद्धार कर सकता है यह आप इसके लिए प्रमाण दीजिए चलिए तेरे कर्तव्य और कर्तव्य की उसमें शास्त्र प्रमाण है मुझे शास्त्र से दीजिए अपनी बातें चले ग चलिए आज की चर्चा काफी देर हुई

01:13:40:24 और आशा करता हूं आप लोगों को कुछ समझ में आया हो जो सकारात्मकता से सुनेंगे समझने की कोशिश करेंगे उनको जरूर समझ में आएगा यह कोई उसकी बात नहीं है कि हमें जो है उस पर रहना है यह बात है व्यवस्था की हमको चाहिए क्या हमको राम राज्य जैसी व्यवस्था चाहिए चाहे जितना कलयुग आ जाए हमको राम राज्य के लिए प्रयत्नशील होना है ठीक है और डॉक्टर स्वयं का इलाज नहीं कर सकता है जो दूसरों का इलाज कर सकता है वह स्वयं का नहीं कर सकता है और जो स्वयं इलाज जिसका हो रहा है वह जरूरी नहीं कि सबकी चिकित्सा कर सके

01:14:25:24 हरे कृष्णा माफ कीजिए इंटरनेट चला गया था हा जी बोलिए हां तो जैसा आप बोल रहे हैं कि भाई अगर कोई डॉक्टर है कौन सा बताया आपने श्लोक संख्या [संगीत] साथ ये आश्चर्य की की बात है कि जिसके जीवा के अग्र भाग में आपका नाम विद्यमान है व चांडाल महान है जो लोग आपके नामों का उच्चारण करते हैं उन लोगों ने ही तप किया है होम किया है और तीर्थों में जाकर स्नान किया है उन्ही पू तो लोगों से भी करवा सकते हैं शवा जी लोगों से भी करवा सकते हैं क्या लोगों से भी करवा सकते हैं मतलब लोगों से करवा सकता सुनिए मेरी बात सुनिए इसमें ब्राह्मण के रूप में उपयोग करने वा कोई बात नहीं लिखी हुई है दूसरी बात मैं आपसे बार-बार पूछ रहा हूं कि जो संस्कार आदि नियम होते हैं उनके कुछ सिद्धांत होते हैं सब हमारे पास ग्रंथ है उसमें लिखे हुए हैं आप अपना वो ग्रंथ निकालिए कि ब्राह्मण का जनेह कौन सी आयु तक होगा

01:15:41:02 या बारबार होगा तो वह कहां लिखा है या राह चलता व्यक्ति घोषित कर देगा तो वह कहां लिखा है आप मनुस्मृति को मानते हैं कि नहीं मानते हैं बिल्कुल मानता हूं जी मानते हैं तो उसमें लिखा हुआ है ब्राह्मण का जन आ से 12 वर्ष की आयु के बीच में हो जाना चाहिए इसका क्या करेंगे मान लो कोई ब्राह्मण है ब्राह्मण है उसका जन हुआ तो को मानते हो कि नहीं विरोध कर रहे हो नहीं शीम भागत को मानते आप श्रीमद भागवत को मानते आयु लिखी है क्या भागवत में आयु का प्रमाण लाओ आप आयु को लेके बैठ गए आयु की पूछ पक आपको आयु बता रहा हूं जब मैं आपको मनुस्मृति से आयु बता रहा हूं और आपको वो नहीं मानना है तो भागवत से आपको आयु देनी होगी ना और दूसरी बात सबसे पहले तो आप यह स्वीकार करिए कि मनुस्मृति को मैं नहीं मान रहा हूं अरे किसने बोला नहीं मान रहा हूं मनुष मानता मनु का सामना भागवत से क्यों करा रहे हो फिर जब मनुस्मृति कह रही है कि ब्राह्मण का जने आ से 12 में होना है तो आप फिर क्यों कह रहे हो भगवा तुमको ला रहा हूं मैं यानी कि मनुस्मृति को नहीं मानते अगर मैं आ से 12 के बीच

01:16:56:06 में ब को प्रमाण मानते हो कि नहीं मानता हूं हा तो उसमें दिया गया है आयु ब्राह्मण का जने आ से 12 वर्ष की आयु में हो जाना चाहिए अब इसके इसको आप मानोगे कि नहीं मानोगे ठीक है मानने में क्या दिक्कत है मान लेंगे इसमें क्या है तो फिर आप बए जो आप 25 और 12 बार बदलने वाली बातें कर रहे हो वो आयु कहां पर लिखी हुई है आप उस बात को लेकर बैठ गए मान लिया मैंने इससे क्या साबित होता शास्त्र को ही तो लेके बैठना है और किसको लेके बैठे आपको लेके बैठू शास्त्र को शास्त्र को इसमें कहीं नहीं लिखा है उसका उपयोग ब्राह्मण के लिए हो सकता

01:17:45:12 है ठीक है इसमें भक्त की मानता बताई जा रही है कि कोई अगर भक्त हो गया तो वो कितना महान है ठीक है की महानता जैसे कि अगर

01:17:57:27 कोई स्त्री है वह भी भगवत भक्त हो गई आपके य स्त्रियों का भी जन हो जाता है क्या नहीं होता नहीं होता नहीं होता तो उसकी जीवा पर भगवान का नाम आ गया उसने वेदों का पाठ नहीं किया क्या उसको ब्राह्मण उसको जने क्यों नहीं करा रहे हो अच्छा

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01:18:16:02 शिवांश जी अगर मैं आपको यह बोलू का ज मिनट अभी मैंने आपसे पूछा कि स्त्री का जनेऊ क्यों नहीं करा रहे हो अगर उसकी नाम पर भगवान उसकी जीवा पर भगवान का नाम है इसका मतलब जिसकी जीवा प भगवान का नाम हो जरूरी नहीं उसका भी यज्ञ पवित हो हो गया अच्छा नहीं नहीं ऐसा नहीं है हा अब मैं आपसे वापस पूछ रहा हूं मनुस्मृति कह रही है से 12 के बाद ब्राह्मण का जने नहीं होगा आप कह रहे हो कि 25 तक होगा आप कह रहे हो कि बार बार होगा तो यह सारे प्रमाण कहां

01:19:08:10 है चलिए अब मैं अब मैं आपको एक और आधार दे देता हूं सोचने का सोचिए विचार करिए यह बताइए जब कर्म और गुण सेको सलेक्शन करना है का कौन ब्राह्मण होगा और कौन क्षत्रिय होगा कौन व होगा कौन शद होगा तो इसका मतलब है हम लोग जो इलेक्शन होता है उस व्यवस्था को मान रहे हैं आप इलेक्शन चुनावी प्रक्रिया राजा कौन बनेगा क्योंकि भाई राजा कौन बनेगा तो इसका चुनाव करेंगे ना गुण कर्म देखेंगे सबके जांचें प्रतियोगिता कराई जाएगी कौन कूदा कौन फंदा उसको ही जो है राजा बनाया जाएगा ऐसा कुछ है ना जी जी जी जी तो आप इलेक्शन वाली व्यवस्था को मान रहे हैं ना जी जो आज जो लागू है उस व्यवस्था को मान रहे हैं आप इलेक्शन राजा कौन बनेगा इलेक्शन से होगा क्योंकि गुण कर्म सबके चेक होंगे चार पांच लोगों के उनमें से जो योग्य होगा जो ज्यादा श्रेष्ठ होगा उसको राजा बनाया

01:20:13:06 जाएगा जी देखिए अरे मैं पूछ रहा बता दीजिए मान रहे हैं ना नहीं आज के डेमोक्रेसी को मैं नहीं मानता हूं मैं मोनार्की हूं जो वैदिक सिस्टम है जो राजा हुआ करते थे उ को ही मानता हूं ठीक है तो वैदिक तो वैदिक सिस्टम ये है कि आप ये बताइए कि श्री राम को राजा बनाने से पहले उनके कौन सी प्रतियोगिता हुई थी कौन सा जांचा गया था कि भैया ऐसा तो नहीं कि सब वो जो फल मंडी है उसमें कोई और बढ़िया आम निकल आए या सब्जी मंडी है उसमें कोई और बढ़िया राम निकल आए जांचा गया था या सीधे घोषित किया था मेरा बेटा है क्षत्रिय है वो बनेगा राजा अच्छा ऐसा कोई उदाहरण मैं पेश कर दूं अगर आप सामने जिस क् नहीं

01:20:59:21 था अगर राम के जीवन में कोई अगर एक चीज हो रही है अगर उसके अलावा ऐसे तो भवान कैसे लोग हो तुम लोग कितने निकट तरीके से देखते हो राम जी कोसे करज हो रही है व हो रहा है ऐसे करते हो राम जी के लिए मायावादी लोग जो भगवान राम के शरीर को भौतिक मानते ऐसे तु मायावादी ऐसे शास्त्र बोते तुमसे मावा बाय बाय और किसी दिन इस बात पर चर्चा करनी हो ना तो आ जाना ठीक है अभी आप जा सकते

01:21:42:16 हो तो ठीक है आशा करते हैं आज कीय जो वह है अगले कुछ क्वेश्चन आने वाले थे जो एक एक करके मैं लाने वाला था मगर वो जानते ही आप कि ये लोग गाली गलोज प आ जाते गाली बाज है हमने अभी थोड़े दिन पहले एक वीडियो डाला है उसमें आप देख सकते हैं इनकी गालियां तो वो आ गया उस पर तुच्छ मायावादी ये है वो है इसपे आ गया वो अच्छा यह जो है इसमें ये लोग एक उतरक कर सकते हैं कि तुमने भी तो उसको निकृष्ट उससे देखा निकृष्ट बोला तो इसका जवाब मैं देता जाऊं कि मैंने उसको अभी राइट नाउ वो जो कर रहा है उसके लिए बोला कि जितनी बार राम की बातें आ रही मनुस्मृति की बातें आ रही वो सब हल्की है फालतू है क्योंकि इनके पास भागवत और वो भी भागवत का वो भाष्य जो क्या कहते हैं उनको जो हमारे पूज्या आचार्य श्री हैं सीदर स्वामी जी उनके विरुद्ध भी जो भाष्य लिखा गया भले ही डंका बजाते चेतन महाप्रभु को मानते मगर चेतन महाप्रभु को मानते नहीं क्योंकि जो श्रीधर स्वामी जी का भाष्य है व नहीं मानते तो श्रीधर स्वामी जी के भाष्य के विरुद्ध जाकर के जो इनका जो भगवतम भाष्य लिख दिया गया या जो भगवत गीता का ट्रांसलेशन इनके जो इनके स्कोन द्वारा कर दिया गया

01:22:57:16 वो जरूरी नहीं है प्रभुपाद जी ने किया हो किसने कौन कर रहा है वो वही जाने कोई आजकल सुनने में ज्यादा आ रहा है मलेच्छ राज कर रहा है निगरा चार्य जी बता रहे हैं अपने वीडियोस में है ना तो य ये मलेच्छ राज की साजिश है वो सब कुछ नहीं पता मगर जब मनुस्मृति की बात आती तो ये लोग मानता हूं मगर उस उसको कांटे की नोक पर स्वीकार करने में दिक्कत है यह मानते हैं और मानेंगे किसको जो अपने हिसाब से मैंने जो मैनिपुलेटिव टाइप से जो ये श्लोका जो कर रखे हैं उसको मानेंगे और उसमें भी अपने मन मन माना कहीं भी कुछ भी निकाल लेंगे अब जब इन्होंने बताया कि जिसकी जीवा के अग्र भाग में राम का नाम हो या भगवान का नाम हो वोह जो है सारे यज्ञ कर चुका है तो इस हिसाब से तो स्त्रिया भी कर चुकी है हरे कृष्ण हरे राम इन क्या कर रही है फ उनको क्यों नहीं जने पहना रहे थोड़ा बहुत धर्म बच गया है थोड़ा बहुत धर्म बच गया है है ना वो भी थोड़े दिनों में नष्ट होगा वो जो गे सेक्स मैरिजस हो रही है इधर उधर सबको अलाउ करते जा रहे हैं वो भी नष्ट होगा थोड़े बहुत

01:24:06:02 दिनों अगला सवाल यह था कि आज तक आपने शूद्र कितने घोषित किए इस कन ने है ना अच्छा सवाल था ना पर उससे पहले ही उन्होंने अपने आप को अयोग्य कर लिया ठीक है तो अब हम लोग फिर किसी दिन बात करते हैं एक कोई बोल रहे थे कि मेरा क्वेश्चन ले लीजिए वह कौन थे रावण वर्ण शंकर नहीं था द्वापर तक जो है ब्राह्मण जो है क्षत्रिय से क्षत्रिय वैश्य से वैश्य जो है अपने से दूसरे उसमें जो है वर्ण में विवाह कर सते थे मगर प्रज्ञा शक्ति जो है उस समय इतनी ज्यादा थी कि वह जो बीज था ना बच जाता था और जैसे जैसे वो युग बदल रहे हैं जो कलयुग का वो है उसमें ये चीज भी बैन हो गई है कि ब्राह्मण ज जब जो महिला होगी वो मान लीजिए ब्राह्मण है और जो पुरुष है वह मान लीजिए क्षत्रिय वैश्य है तब तो वर्ण शंकर ही है मगर यदि पिता जो है ब्राह्मण है और

01:25:21:24 क्या कहते हैं जो माता है वो जो है किसी और वर्ण से आई है तो उसमें उस समय तक प्रज्ञा शक्ति इतनी थी जो बच जाता था बीज मगर कलयुग में तो वो भी नहीं है ठीक है तो रावण जो है वह ब्राह्मण ही था अगर वर्ण शंकर बोल रहे हो तो फिर बताओ कहां पर लिखा है वर्ण शंकर रावण के लिए ठीक है द्रोणाचार्य अभी वो राघवाचार्य जी महाराज जी का वीडियो आएगा उसमें देखिएगा उन्होंने खूब धारा प्रवाह बोला ये सब द्रोणा जी को कहां माना गया कहीं पर भी ब्राह्मण सो क्षत्रिय संबोधित किया गया क्या क्योंकि उनका शरीर उन्हें प्राप्त था ब्राह्मण का तो ब्राह्मण ही रहे हालांकि उन्होंने कुछ कार्य ऐसे किए जो कि ब्राह्मण उचित नहीं थे आपातकालीन स्थिति में भी उन्होंने कहीं ना कहीं वह जैसे अश्वथामा थे उन्होंने तो पांच पुत्रों को मार डाला था तब भी द्रौपदी ने कहा कि नहीं वो ब्राह्मण के पुत्र है वो जो हमारे लिए पूजनीय है य सब बोला राघवाचार्य जी महाराज जी ने अभी सुनिए आने वाले टाइम

01:26:29:18 में ठीक है तो आज की चर्चा सार्थक रही मेरे जानकारी में और भी कुछ चीजें थी जो हो सकती थी उनसे बातें हो सकती थी और यह मायावादी हो सकती थी मगर क्या कहते हैं यह उन्होंने इस तरह की बातें शुरू कर दी कि बात खत्म हो ग ठीक है चलिए सभी को जय श्री राम यह हमारा संडे को आने वाला है आवान कॉल ऑफ धर्म पर आप देखिए इसमें राघवाचार्य जी महाराज जी ने इनकी बातें कितनी बार खंडित हुई है शुरू में अपने आप को रामानुजाचार्य जी से जोड़ रहे थे वहां इनको मुकी खानी पड़ी प्रमाण प्रमाण के लिए कई बार पूछा गया वहां इनको मुकी खानी पड़ी हर बात को छोड़ छोड़ करके इनको इनकी जो है जो यह जो कर्मणा वण व्यवस्था उसकी कोई उपयोगिता ही नहीं है क्लासिफिकेशन करा लिए जाता है कि क्लासिफिकेशन के अनुसार व्यवस्था बन पाए समय बच पाए श्रम बच पाए अर्थ बच पाए तो यहां कोई क्लासिफिकेशन की उपयोगिता ही नहीं है किसी को भी कभी भी कुछ भी मान लो भगवान श्री कृष्ण तर्क हीन बात करने वाले इनके

01:27:44:19 अनुसार क्यों क्योंकि वह किसी क्षत्रिय को कह रहे हैं कि हे अर्जुन तेरा धर्म है युद्ध लड़ना युद्ध लड़ भाई जो धर्म बदला जा सकता उसके लिए हम बाद नहीं कर सकते किसी को अगर कोई किसी का पुत्र है तो यह चीज बदल नहीं सकती है कि वो उसका पुत्र नहीं है तो हम उससे कह सकते हैं कि भाई तू उनका पुत्र है तेरा धर्म है उनकी सेवा करना है उनके लिए उनकी आज्ञा का पालन करना तो धर्म है ही इसलिए कि किसी को उसका धर्म याद दिला कर के बाध्य किया जाए उसको मानवता के दारे में लाया जाए शास्त्र शास्त्र सतता के दायरे में लाया जाए तो जब कोई जो वर्ण है वर्णो चित जो वो है व बदल सकता है तो वहां पर उसको बाध्य थोड़ी ना कर सकते फिर यहां पर श्री कृष्ण भगवान अर्जुन को बाध्य कैसे कर रहे हैं और करें तो करें अर्जुन भी तो तर्क के साथ कह सकता है वो तो बहुत सारे प्रश्न पूछ रहे थे अर्जुन वो कह सकता है कि मैं जो है वो जा रहा हूं मैंने राम बोल दिया य सारे यज्ञ कर दिए मैंने हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे य इसी से मानेंगे ये राम से नहीं मानेंगे वो सारी तपस्या वगैरह यसे ही मानेंगे केवल मंत्र भी बोल देंगे वो उससे भी नहीं मानेंगे भले ही श्री कृष्ण भगवान ने कहा हो कि छंदों

01:28:59:25 में मैं गायत्री हूं वो नहीं मानेंगे हर जगह आप देखिए कि प्रमाण की जब बात आती है तो मजबूत प्रमाण जब इनके आगे रखे जाते हैं तो कैसे अपनी बातों को बदलते हैं कैसे भागते हैं ठीक है तो सभी को जय श्री राम जिसका जिने समय पर नहीं हुआ है उसके लिए वो व्रत दोष तो आ गया है जो बिल्कुल जो उत्कृष्ट श्रेणी के ब्राह्मण वाले जो वो हैं उनमें उसको शामिल नहीं किया जाएगा मगर वह अपने स्वतः उद्धार के लिए वह अपना जीवन व्यतीत कर सकता है प्रश्चित पूर्वक जो है गुरु मुख से आप जो है नाम सुन कर के उसका एक निश्चित सीमा में नाम जप किया जाता है और अभी हमारा जो हंस तीर्थ क्षेत्र है उस पर जो है माफियाओं ने कब्जा कर रखा है अन्यथा वहां पर जो जो वट वृक्ष है और जो वहां पर जो हंस कूप है उसमें स्नान कर लेने से व्राप्त दोष से मुक्ति मानी जाती है है ना तो यह सब चीजें हैं तो उसके लिए भी आवाज उठाए आप लोग हंस तीर्थ क्षेत्र को मुक्त कराने के लिए उस पर जो है भू माफियाओं ने कब्जा कर रखा

01:30:15:02 है सभी को जय श्री राम

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 1:30:24 · 14 Feb 2025

इस्कॉन की वर्ण व्यवस्था Discussion with iskcon follower-Ajay Sharma #iskcon

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