No part of this video is used anywhere yet.
SRT: ⬇ SRT ⬇ Original file

.srt or .vtt (Hindi). The old file is backed up. After that the match for this video is rebuilt (may take a few minutes, keep the page open).

⬜ Not used yet · 00:00:03:20 – 00:34:39:00 (34:35)

00:00:03:20 जो बात करता है ब्रह्मा कुमारी इसमें जैसे ब्रह्मा कुमारी कहता है कि सभी धर्मों की बात कहता है ब्रह्मा कुमारी तो धर्म क्या है ब्रह्मा कुमारी के अनुसार पहले मैं धर्म कहूं तो मैं कौन हम दो शब्द सुबह से लेकर के रात्रि तक संबोधित करते हैं। मैं और मेरा तो मैं कहने वाली सत्ता अलग है और मेरा अलग है। जैसे साड़ी अलग है और मैं अलग हूं। ऐसे ही शरीर को चलाने वाली सत्ता एक अति सूक्ष्म ज्योति बिंदु आत्मा है। एनर्जी है। जी जो इस शरीर को चलाती है। तो आत्मा

00:00:54:24 मेन एक पॉइंट है कि जो हम आज इसको भूले हुए हैं। आप देखेंगे शरीर के अंदर आत्मा नहीं है। आंखें हैं देख नहीं सकती। मुख है बोल नहीं सकता। कान है सुन नहीं सकते तो देखने सुनने बोलने हर कर्म करने वाली वह अति सूक्ष्म ज्योति बिंदु आत्मा ही है तो आत्मा की जो नॉलेज है वह यहां पर मैं जैसा अनुभव करती हूं और जैसे मैं जान पाई हूं 50 55 वर्षों में उस परमपिता परमात्मा ने ही नॉलेज दी है। आज दिन तक हमने शास्त्रों में सुना है थोड़ा आत्मा है। आत्मा यह करती है आत्मा। लेकिन एक्चुअली अभ्यास जो कराया जाता है, उसकी प्रैक्टिस जो कराई जाती है, वह हम यहां पर ना केवल मैं आने वाले विद्यार्थी जो भी यहां के रेगुलर विद्यार्थी हैं या जो भी हमारी दीदियां हैं, दादियां हैं, वरिष्ठ हैं, उन्होंने भी यह अभ्यास किया। इवन साकार प्रजापिता ब्रह्मा ने भी यह अभ्यास किया कि मैं आत्मा हूं और मेरा यह शरीर है। अगर इस शरीर के अंदर आत्मा नहीं तो शरीर जड़ है, डेड बॉडी है और इसको जाकर के जला दिया जाता है। आत्मा अजर है, अमर है, अविनाशी

00:02:10:16 है। जी जो कभी भी मरती नहीं है। जी। आत्मा के लिए कहा जाता है पर प्रैक्टिकल है। आत्मा को जल डुबो नहीं सकता। अग्नि जला नहीं सकती। जी ऐसे है ये आत्मा जो चोला चेंज करती रहती है पर अजर अमर अविनाशी है जी तो यहां पर यही एक मेन नॉलेज दी जाती है और अभ्यास भी साथ-साथ कराया जाता है। जी यहां सिर्फ यह नहीं है कि आए और सुना और चले गए। जी यह एक पाठशाला भी है, स्कूल है जहां पर हम परमात्मा के एक छोटे बच्चे हैं। पढ़ाई पढ़ते हैं, सीखते हैं। सीखते हैं, पढ़ाई पढ़ते हैं। और जैसे वहां एक पढ़ाई का लक्ष्य होता है जो बच्चे लोग पढ़ते हैं। जी। इंजीनियर बन जाएंगे, जज बन जाएंगे, वकील बन जाएंगे, डॉक्टर बन जाएंगे। वहां पे अपना आत्मस्वूप का बोध होना लक्ष्य है। बहुत जरूरी है। और उस आत्मा का लक्ष्य है मनुष्य से देवता बनना। सामने चित्र देख रहे हैं। कहते हैं ना नर ऐसी करनी करे नारायण बन जाए। जी नारी ऐसी करनी करे जो लक्ष्मी बन जाए। जी पर वो लक्ष्मी नारायण कैसे बनते वो लक्ष्य हमारा कौन

00:03:25:22 सा है? वो कौन दे सकता है? वो परमपिता परमात्मा ही दे सकता है। दीदी ये तो ठीक है। मतलब इसमें क्या है? जैसे हमने बात कही कि हम आत्मा हैं। वास्तविकता में तो ये तो वो स्थिति है जो हमें धर्म का पालन करने से प्राप्त होता है। धर्म की बात मैं बताने जा रही थी क्योंकि आत्मा का धर्म पहले हमें जानना है आत्मा का धर्म जी शांति है क्योंकि मानव जीवन में शांति चाहता है धर्म शांति है कर्म शांति है शांति देश से आत्मा आई है शांति दाता आत्मा का परमपिता परमात्मा है और विश्व में शांति स्थापन करना यह हमारा एक संदेश है लेकिन जब आत्मा मनुष्य से देवता बन जाती है तो वो धर्म है आदि सनातन देवी देवता धर्म। आदि मींस पुराने ते पुराना। सनातन मींस आदि मींस शुरू का और सनातन मींस पुराने से पुराना। का अर्थ तो वो है ना शाश्वत नित्य। शाश्वत ना खत्म होता है। लेकिन ये धर्म इसमें आदि लगा देंगे तो वो तो शुरू हो रहा है। हां। लेकिन आदि इसलिए हम लगाते हैं क्योंकि शुरुआत जो होती है वो यहां से होती है। यह जो समय चल रहा है। नहीं तो सनातन की तो शुरुआत नहीं हुई ना। अभी सनातन भी लगाया ना उसमें। आदि

00:04:41:13 सनातन ये मतलब आदि विरोध कर रहा है सनातन शुरू का शुरू से आदि का मींस शुरू से तो सनातन तो कभी शुरू नहीं हुआ तो नित्य है हां क्योंकि जब अभी देखो रात दिन का खेल है दुख सुख का खेल है हारजीत का खेल है वो तो वो तो नित्य समाप्त नहीं होती है सृष्टि भी तो शुरू फिर शुरू क्यों कह रहे हैं इसको आदि क्यों कह रहे हैं आदि इसीलिए कह रहे हैं क्योंकि वर्तमान समय जो पुरानी दुनिया है कलयुग घोर कलयुग है ऐसी दुनिया जब हो जाती है तब उस परमपिता परमात्मा को सृष्टि पर यह वाला जो राउंड शुरू हुआ है उसकी वजह से शुरुआत है वो सनातन ही है वो आदि की वैसे आवश्यकता नहीं मूल रूप से वो सनातन ही है तो कहने में आ जाता है क्योंकि शुरुआत यहां से होती है इस राउंड की लेकिन वो तो सदा है ही है हां वो सदा है वही सदा विरोध कर रहा है ना आदि हां आदि नहीं कह के आप समझ लीजिए कि सनातन कह लीजिए सनातन देवी देवता धर्म जी जी अच्छा तो दीदी इसमें जैसे से ये बात आई ना कि शांति उसका धर्म है आत्मा का आत्मा का तो एक्चुअली है क्या जितनी मेरी थोड़ी सी जानकारी है हम कि शांति तो हमारा गोल है हम जैसे नारायण बनकर के क्या प्राप्त होगा शांति गोल हैस लक्ष्मी बन के क्या प्राप्त होगा

00:05:56:14 शांति आत्मा अपने आत्म स्वरूप को जान के क्या प्राप्त होगा शांति शांति हमारा गोल है जी और क्या कहते हैं जैसे आपने कहा ऐसी करनी करिए जिससे नर नारायण होए हमने कहा तो यह जो करनी है इसमें मैं मतलब जो धर्म शब्द है वह ज्यादा लागू होता है कि धर्म क्या है? करना क्या है? करना नहीं क्या है? तो मतलब धर्म क्या है? ब्रह्मा आपके अनुसार ब्रह्मा कुमारी के अनुसार क्योंकि शांति तो हमारा लक्ष्य है। हां लक्ष्य मतलब उनका जब पालन करेंगे तो शांति मिलेगी। वो तो स्थिति है। जैसे देवता बन गए। जैसे मान लीजिए देवी देवता को देवत्व को प्राप्त कर लिया। देवी देवी को प्राप्त कर लिया तो ये तो हमें फिर उसके बाद धर्म की आवश्यकता है ही नहीं। पहुंच गया जहां पहुंचना तो यह जो पहुंचने वाली बात है इसका कैसे किया है धर्म क्या है नहीं इसका धर्म तो माना आत्मा का धर्म शांति हुआ और लक्ष्य हुआ देवता धर्म वही माना देखो अभी कोई धर्म पूछेंगे आप अनेकानेक धर्म है इस संसार में अनेकानेक धर्म वही मैं ऐसी किस चीज किसी मेंटालिटी को हम धर्म कब और किस आधार पर कह रहे वही पूछ रहा हूं धर्म माना जहां एकता हो एक भाषा, एक कुल, एक राज्य, सत्ता एक के हाथ में हो।

00:07:11:20 जहां कोई दुख का नाम निशान ना हो, लड़ाई ना हो, झगड़ा ना हो, घरघर में कोई मतभेद ना हो, भाषा भेद ना हो, जाति भेद ना हो, उसको हम धर्म कहते हैं। ये तो दीदी फिर से वही हो गया ना कि हम लोग जब ऐसा करेंगे तो हमें यह प्राप्त होगा कि लड़ाई नहीं होगी। हां। तो यही धर्म हो गया ना हमारा। वो फिर बोल हो गया। बोल हुआ हमारा शांति की प्राप्ति। क्योंकि उस युग में शांति होगी। क्यों होगी शांति? क्योंकि एकता होगी। जहां द्वेत है, अनेकता है, वहां अशांति है। क्योंकि जब अभी हम समझो दो जने हैं। मतलब जैसे किसी मेंटालिटी को धर्म कहा है। इसलिए कहा है कि वहां पर मतभेद नहीं है। जी। और जहां मतभेद है हम उसको धर्म नहीं कहते। अंडरस्टुड? तो फिर हम जैसे कई स्टेटमेंट जैसे आते हैं कि हिंदू मुस्लिम भी धर्म है तो जैसे इस्लाम है उसमें भी मतभेद हैं। तो हम फिर ये धर्म क्यों कह रहे हैं इसको? एक्चुअली हम इसको नहीं कहते। अगर मैं हूं मैंने मुस्लिम के परिवार में जन्म लिया। मैं मुस्लिम कहलाई। जी। कहीं मैं गुजरातियों के परिवार में पैदा हुई तो गुजराती कहलाई। जी और कहीं मैं

00:08:28:04 और किसी धर्म बुद्धिस्ट के यहां जन्म लिया तो मैं बुद्धिस्ट कहलाई। लेकिन वास्तव में ये धर्म है ही नहीं। अच्छा हम क्या कहते हैं? हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आपस में सब भाईाई। जब हम शरीर में प्रवेश करते हैं। धर्म हमने बनाए हैं। मनुष्य ने बनाए पर परमात्मा ने कोई धर्म नहीं बनाया। उस तरह का हम सभी आत्माएं एक ही पिता की संतान है। क्या कहते हैं? हे परमपिता परमात्मा हम सब हैं तेरी आत्मा। पापों का करो खात्मा हम सब बने धर्मात्मा। धर्म का अर्थ होता है धारणा। जो हमारे जीवन में धारणाएं हैं जैसे पोरिटी है, रॉयल्टी है। इसी तरह से जो हम जो व्यवहार हमें धारण करना है। वो वो धर्म है हमारा। जो हम अच्छाइयों को धारण करते हैं, दिव्यता को धारण करते हैं, पावनता को धारण करते हैं, अलौकिकता को धारण करते हैं। जिससे कि शांति प्राप्त जो गोल है फाइनली ऑटोमेटिकली होगी वो। जी वो जो गोल है, जो हमारा लक्ष्य है वो हमें ऑटोमेटिकली मिलेगा। तो कहना चाहिए अगर सनातन धर्म है हम उसे सनातन से जोड़ रहे हैं। यानी कि वो धारणाएं जिन्हें हम कभी जिन्हें हम लॉन्ग टाइम तक धारण कर पाए। ऐसी धारणाएं सनातन धर्म कहलाएंगी। वो

00:09:43:06 वो कहलाती है। वो धारणाएं जिन्हें हम हमेशा के लिए धारण नहीं कर सकते। जैसे मान लीजिए मनुष्य में मनुष्य रूप में हूं मैं तो मैं जिन धारणाओं को धारण नहीं कर सकता हूं। जी मान लीजिए कि मेरे अंदर कुछ गलत चीजें आ रही है। अन्य चीजें जो कि ह्यूमनिटी के विरुद्ध है। जाहिर सी बात है हम बहुत देर तक उसको धारण नहीं कर पाएंगे। जैसे कि व्यभचार, मांसाहार, झूठ बोलना, चोरी करना जितने जो पाप कर्म आदि हैं उनको हम धारण नहीं कर पाएंगे। इसलिए वो सब सनातन धर्म कहला है कि उसको जो है सस्टेन तरीके से हम धारण कर सकते हैं। जी हां। तो फिर जो ऐसी मेंटालिटीज हैं जो कि ऐसी चीजें बोल रही हैं जैसे आपने बौद्ध बुद्ध का नाम लिया हम तो बुद्ध वाले तो कहते हैं कि वो नास्तिक थे। बुद्ध तो ईश्वर को माना ही नहीं उन्होंने। हम और इस्लाम का भी कुछ ऐसी चीजें हैं जिनको हम धारण नहीं कर सकते। जैसे कि जैसे मैंने आपको दीदी बोला तो हमारे यहां पर क्या है भारतीय परंपरा के अनुसार कि दीदी अगर बोल दिया है तो आपको दूसरी दृष्टि से नहीं देखा जा सकता ये परंपरा है। मगर उस वहां पर कुछ ऐसा भी कहा गया है कि यदि आपने मुंह से कोई रिश्ता बनाया तो उसकी वैल्यू नहीं है। आपकी जब आप माता के गर्भ से जन्म होगा उसी के अनुसार जो रिश्ते हैं

00:10:58:12 वही उन्हीं की वैल्यू है और मुंह से कही हुई बातों के उलट आप व्यवहार कर सकते हो। जी तो जिन धारणाओं को हम लंबे समय तक धारण नहीं कर पा रहे उनको भी हम धर्म क्यों कह रहे हैं? नहीं तो मनुष्य जब धर्म भ्रष्ट कर्म भ्रष्ट हो जाता है खुद को भूल जाता है। परमात्मा को भूल जाता है तो ये सारी धारणाएं भी भूल जाता है क्योंकि कोई हमें सिखाने वाला नहीं है। ये कलयुगी दुनिया में ये सब होता है। नहीं मगर वहां तो मोहम्मद जी ने कहा है ना कि वो हां वो ये धर्म जो है ना राजा ये सारे हमारे आए हैं द्वापर युग से। नहीं लेकिन इसको फिर धर्म कहना उचित है इस्लाम को जो कह रहे हैं क्योंकि धर्म स्थापक तो है ना उन आत्माओं ने परमधाम से आकर के धर्म की स्थापना तो की ना धर्म तो हम उसे कह रहे हैं ना जिसको हम नहीं उनके हिसाब से तो कहेंगे ना हम नहीं कहे मान लो लेकिन वो जो आए हैं धर्म स्थापक उन्होंने अपने-अपने भिन्न भिन्न भिन्न-भिन्न धर्मों की स्थापना तो की नहीं मगर दीदी इससे ऐसा नहीं लगता कि जैसे कोई भी व्यक्ति जो आएगा और मान लीजिए उसका एक गुट बन जाए बहुत सारे लोग उसे मानने वाले हो जाए और वो कोई भी धारणा कहेगा धारणा को फैला रहा होगा उचित अनुचित ना देखते हुए वो अगर कह रहा है धर्म है तो हम उसको धर्म कह दें ऐसा नहीं हो जाएगा इससे नहीं हम नहीं भी कहेंगे

00:12:13:15 लेकिन वो तो कहेंगे ना हमारे ना कहने से तो वो मानेंगे ही नहीं वही मैं कह रहा हूं कि हमारे ये हो गए माने द्वापर से लेकर के कलयुग एंड तक अनेक धर्म आए जो सिर्फ धर्म स्थापक कहलाए तो वो तो धर्म है ही धर्म आत्मा कहलाए परमात्मा वो नहीं बन सकते हैं। परमात्मा जो आते हैं जब इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर ज्योति बिंदु परमात्मा वो एक धर्म की स्थापना करते हैं। अनेक को एकता में ले आते हैं। जो सनातन धर्म हम कह रहे हैं उसकी वो परमा परमात्मा आकर के स्थापना करते हैं। इंसान भिन्न-भिन्न अपना वो आप आए आपने धर्म स्थापन कर दिया। वो आए उन्होंने अपना कर लिया। आपने कहा ना कि बुद्ध जो है वो बौद्ध है। उनका मानना है कि दुनिया में कोई सनातन सत्ता है ही नहीं। हां वो फिर अपनेप उसका मानते हैं ना उनको हम जब वो ईश्वर को स्वीकार ही नहीं कर रहे तो हम उसे धर्म कैसे कह रहे हैं हम नहीं कह रहे हैं वो कह रहे हैं वो कह रहे हैं तो हमारे हिसाब से है या नहीं है वो हम उनको गलत नहीं कह रहे उनकी बात को उनके ऊपर हां अपमान भी नहीं कर रहे हैं क्योंकि परमात्मा ने हमें सिखाया किसी का भी निरादर अपमान किसी की कमी कमजोरी हमें नहीं देखने जो हैं जैसे हैं वो चल रहे हैं लेकिन हमें अपने जीवन को धारणा युक्त बनाने तो

00:13:28:16 दीदी धर्म अर्थात धारणा इस तरीके से जैसे नेपोलियन बोनापार्ट आए हिटलर आए जिन्हें एंटी क्राइस्ट तक कहा गया बहुत ज्यादा नशंसता की गईंगा बिल्ला आए या फिर आईएस आईएस जैसी जो खंखार आतंकवादी जो संस्थाएं हैं उनके हिसाब से वो जो कर रहे हैं वो भी ठीक है और धर्म की परिभाषा यही है जो करने में ठीक है वही धर्म है तो क्या समय आने पे ऐसा भी हो सकता है कि हमें आईएस आईएस यदि कहे कि ये धर्म है तो हम कहे कि हां ये धर्म है मतलब हमारा कोई क्राइटेरिया होना चाहिए ना धर्म को धर्म कहने का ये बात है क्योंकि जब ये कलयुग आता है ना तो कलयुग में अनेकता आती है हमारा एक है ये भी एक आप ऐसे खंकार लोग हैं ये सब है वो सब करके गए हैं तो ये कलयुग में माना एक मैं क्या कहूंगी कि होना जरूरी है क्योंकि जब रात हो जाती है ना अज्ञानता की अंधकार छा जाता है संसार में तो ये सब आते हैं अपना अपना कार्य क्योंकि सृष्टि एक नाटक है नाटक में हम सभी एक्टर हैं और नाटक में दुख सुख का हार जीत का रात दिन का नहीं वो आते तो हैं पर वो फिर ये जो खंकार है ये आए इनको हम धर्म कहें क्या कहें तो वो अपना धर्म मना अपना ये कार्य तो करते ही हैं ना मतलब एक तरीके से हम बस उस मामले में मौन है

00:14:43:25 साक्षी बस हम साक्षी हो के देखें जैसे ड्रामा को हम देखते हैं 3 घंटे का ड्रामा है उसमें कोई मर्डर भी कर रहा है कोई किसी को सुख भी दे रहा है कोई लड़ाई भी जैसे कि मान लीजिए मर्डर करना अधर्म अधर्म है। मगर कोई कह रहा है कि यह धर्म है। उसको मानने वाले लोग बहुत हैं। तो क्या हम उसे धर्म कहेंगे? नहीं, हम उसको धर्म नहीं कह सकते। वही तो यहां हो रहा है। मुंह बोली बहन से जैसे मुंह बोले स्टोक को हम मानते हैं कि ये धर्म है और उससे मुकरना अधर्म है। मगर हम फिर भी इस्लाम को कह रहे हैं कि वो धर्म है। ये एक्चुअली ये है ना क्योंकि वो आत्माएं आई हैं। वो कर रही हैं। हमको ये धारणा अपने मन में बना करके रखनी है। कि वो क्या है क्या नहीं। हम मन की धारणा तो रखेंगे मगर कह देंगे कि हां ये भी धर्म है। वो भी धर्म है। क्या क्या है? दुनिया कह रही है तो हमको कहने में अच्छा ठीक है। मैं समझती हूं कि क्या कह सकते हैं उसको हम? कोई नहीं कोई नहीं। बहुत अच्छे। अच्छा दीदी इसमें थोड़ा सा आगे चलें कि आजकल के युवाओं के द्वारा एक वो आता है। प्रश्न आता है कि ये ईश्वर है। इसको सिद्ध कैसे किया? मतलब ईश्वर है। इसको कैसे हम स्वीकार करें? ईश्वर नाम की कोई चीज भी है? यह तो 100% ईश्वर क्योंकि देखो जैसे इस संसार में चिड़िया

00:15:59:01 का बच्चा चिड़िया जैसा घोड़े का बच्चा घोड़े जैसा इंसान का बच्चा इंसान जैसा जो मैं आत्मा हूं देखने में नहीं आती कभी भी आत्मा ने गर्भ में प्रवेश किया किसी ने देखा जब आत्मा शरीर से निकल जाती है तब देखा आंख खुली रह गई कहा आंख से निकल गई मुंह खुला रह गया मुख से निकल गई कैसी है क्या है यह कोई नहीं देख पाता जी क्योंकि आत्मा अति सूक्ष्म ज्योति बिंदु है तो आत्मा का पिता है परमपिता परमात्मा हम आत्माओं का पिता परमपिता परमात्मा है वो परमपिता परमात्मा की हम संतान है तो आपने क्वेश्चन किया कि है ईश्वर है या नहीं ये सिद्ध सिद्ध कैसे होता है? मतलब कैसे मान ले कि ईश्वर है? हां, हम लोग तो यहां पर यह मानते हैं क्योंकि आत्मा का पिता परमपिता परमात्मा है। देखो जो नहीं मानता और उसको कुछ ऐसे हम बात करें कुछ भी कह रहे हैं वो नहीं उसका आंसर दे पा रहा है या नहीं वो कुछ कर पा रहा है तो क्या कहता है ईश्वर ईश्वर पर छोड़ दो। ऊपर वाला जाने वो मालिक जाने वो मालिक जाने उसके लिए ही कहते हैं

00:17:14:02 ना। तो इसलिए उसके बिना तो ये संसार चल ही नहीं सकता है। परमपिता परमात्मा चलना ही यह प्रमाण देता है कि इस सृष्टि को चलाने वाला कोई है। उसने ही कोई नई दुनिया स्थापना यह वाली दुनिया उसने नहीं बनाई जो हम कहे दुख सुख परमात्मा दे रहा है। कोई मर्डर कर रहा है। परमात्मा कर रहा है। कोई किसी को दुख दे रहा है। परमात्मा दे रहा है। नहीं परमात्मा ने जब यह सृष्टि बनाई थी नई सृष्टि बनाई थी। स्वर्ग बनाया था। पैराडाइज बनाया था। और बनाने वाला भी वही है क्योंकि सृष्टि का डायरेक्टर रचयिता हम कौन हो सकता है? परमात्मा ही हो सकता है ना। इतना सारा विश्व है इतनी सारी प्रकृति है। यानी कि क्योंकि बहुत सुंदर संसार बना इसलिए उसको बनाने वाला कोई एक हो सकता है। कोई होगा ना जिसकी रचना इसकी सुंदर वो कोई लॉजिकली आंसर नहीं है कि ईश्वर है ये कैसे ये लॉजिकली है क्योंकि जब मैं आत्मा हूं तो मेरा बाप भी होगा। क्या कहते हैं? तुम मात पिता हम बालक तेरे तुमरी कृपा ते सुख घनेरे हम ऐसे थोड़ी कहते हैं। हम तो अनुभव करते हैं। मतलब कोई चीज एक्सिस्ट कर रही तो इसका मतलब उसका कोई पिता होगा। अंडरस्टुड ऐसे तो ये ये एक्चुअली ये काउंटर आता है। वो ये कहते हैं कि अगर ये वाली बात मानेंगे तो फिर परमपिता

00:18:29:10 का भी कोई परमपिता होगा। नहीं यही है। यही यही बात है। मैं यही आना चाह रही जी जी देखो हर आत्मा धर्मात्मा हो सकता है और वो महात्मा हो सकता है लेकिन परमात्मा आप संसार में किसी को भी नहीं कह सकते परमात्मा का कोई पिता नहीं हो सकता है जितने भी देवी देवताएं हुए कहने का मतलब ये है कि परमात्मा है ही वो जिसका कोई पिता नहीं है हां जिसके कोई मात-पिता नहीं है सबका मात पिता है वो सर्व आत्माओं का पिता फिर बात वही आ जाती है ना कि सर्व आत्माओं का पिता किस रूप में है कि आत्माओं को उसने बनाया है। आत्माओं को नहीं बनाया। आत्माओं को आकर के परिवर्तन किया। पावन बनाया। आत्मा तो बनी बनाई है। आत्मा का कहा ना होना चाहिए। चिंता भी नहीं है। एक तरीके से देखा जाए तो मतलब जो हम कह रहे हैं किता तो है। नहीं जैसे हमने कहा कि हम है इससे पता लगता है कि हमें बनाने वाला कोई है। हां तो हम आत्म स्वरूप है। देखो आत्मा को बनाया नहीं जाता। परमात्मा को भी बनाया नहीं जाता। लेकिन आत्मा जब पतित बन जाती है, विकारी बन जाती है, दुखी हो जाती है, अशांत हो जाती है तो परमात्मा आकर के आत्माओं को पतित से पावन बनाता

00:19:44:19 है। यानी हमारे एक्सिस्टेंस से उसका सिद्ध नहीं हो रहा है। नहीं वो नहीं होता है। हम है तो इसलिए वो है। हां हम है तो इसलिए है ऐसा नहीं है। वो आकर के विश्व परिवर्तन करता है। ये तो हमारा क्लेम है दीदी। फिर हम कहे क्या मतलब कि कि ईश्वर है वो है वो है वो कोई कहे कि तुम्हारा बाप है मैं कैसे मानू मेरा पिताजी है ये है ना क्योंकि मुझे पैदा किया है लेकिन यहां पैदा वाली बात नहीं आती है क्योंकि परमात्मा पॉइंट ऑफ लाइट ज्योति बिंदु सर्वशक्तिमान ऑलमाइटी अथॉरिटी है जी तो दीदी ये बनाया नहीं जाता ना वो बनता जैसे ये वाली चीज है ना कि है तो मतलब कि मेरा बाप है तुम कहो मेरे पिता है तो है तो उसमें कहेंगे ठीक है तुम्हारे तुम्हारे पिता है। फिर आप ये क्यों कह रहे हो? वो तुम्हारे भी है। सबके हैं। हां नहीं क्योंकि वो आत्माओं का है। बॉडी का वो पिता नहीं है। वो हम बॉडी का नहीं है। बॉडी का मैंने आपको पहले ही बताया चिड़िया का बच्चा चिड़िया जैसा। घोड़े का बच्चा घोड़े जैसा। मनुष्य का बच्चा मनुष्य जैसा। आपके पिता अलग हैं। उनके अलग हैं। उनके अलग हैं। मेरे अलग हैं। लेकिन जिसको कहा जाता है सर्व आत्माओं का, सर्व धर्मात्माओं का, सर्व देवी देवताओं का वो पिता है। पॉइंट ऑफ लाइट ज्योति बिंदु वो सदा है। उसको सदा शिव कहते हैं। सदा शिव

00:20:59:27 है। आजकल बच्चे क्या है? लॉजिक मानते हैं कि हमको भाई हां। लेकिन यहां पर हमारे शिशु विश्वविद्यालय में जब हम ये एक दिन में तो नहीं समझा जाता है। सेवन डेज कोर्स होता है और सेवन डेज कोर्स में भी ये मैं सर्टेन नहीं कह सकती कि वो मान ही ले। कई लोग तो एकद दिन में मान लेते हैं। कहीं कैसे मानना मानना उसको रियलाइज करते हैं। मान लो अनुभव कर मानने की बात तो एक अलग है। मगर हमारे पास कुछ होना चाहिए ना थ्योरिकली कि हम उसको कुछ कहे। वो वो मात-पिता कह रहे हैं जी। वो तो है ही हमारे मात-पिता। वो परम बाप है, परम टीचर है, परम सतगुरु है जिसकी पालना में हम पल रहे हैं। 55 साल हो गए जीवन कन्या का हम लोग वो जी रहे हैं और उनकी बदौलत हमने तो अनुभव किया है। प्रैक्टिकल अनुभव किया है कि वो हमारा मात-पिता है। केवल मात-पिता ही नहीं वो परम टीचर भी है। वो परम सतगुरु भी है। वो हमारा साजन भी है। हम उसकी आत्मा रूप मैं ये कह रहा था जैसे हम ये कह रहे हैं कि जैसे प्रश्न किया लड़के ने मुझसे हां कि ईश्वर है ये मैं कैसे मान लूं तो मैं उससे जैसे उसने कहा कि मोटरसाइकिल है मैं कैसे मान लूं तो मैंने उसको कहना चालू किया कि मोटरसाइकिल के दो पहिए होते हैं। मोटरसाइकिल के हैंडल होता है। मोटरसाइकिल में सीट होती है। अभी उसको लड़के

00:22:15:01 को कुछ दिख नहीं रहा है। बस मैंने मगर ये उसका जो डिस्क्रिप्शन मैं दे रहा हूं कि वो ऐसा होता है। उससे उसका होना सिद्ध नहीं हो रहा है। अभी तो हम उसके और क्लेम्स करते जा रहे हैं कि वो कैसा कैसा है। तो कुछ इसी तरीके से जैसे यह वाली बात है कि ईश्वर है। मैं कैसे मान लूं तो वो गुरु है, वो माता-पिता है, वो निराकार है, वो सर्वशक्तिमान है। तो ये वो डिस्क्रिप्शन है। इस संबंध में इस दिशा में नहीं है कि ईश्वर है। ये सिद्ध कैसे होता है? नहीं। लेकिन मैं ये तो मानने वाली बात नहीं है। हम तो अनुभव कर रहे हैं प्रैक्टिकल में कि अनुभव कराएंगे आप। हां हम अनुभव कराएंगे जब वो आते हैं हम उनको अनुभव कराते हैं और लोगों को अनुभव होता है लाखों अभी तो मैं कहूंगी करोड़ों हो गए ऐसी मनुष्य आत्माएं जो अनुभव करती है और प्रैक्टिकल में वो उस जीवन को जी रही है परमात्मा एक एनर्जी है एक्चुअली राजे वो देखने वाली चीज नहीं है अनुभव अनुभव करने की चीज है ऐसा क्या अनुभव होता है जिससे हम ये मानते हैं कि वो ईश्वर को हम अनुभव कर रहे हैं क्या प्रत्यक्ष को प्रमाण किया है। मेरा जीवन देख लीजिए आप। नहीं जैसे पूरे माना हम अपने मित्र संबंधी आदि उन सबको छोड़ के यहां जो हम एक

00:23:30:09 जीवन जी रहे हैं और लाखों मनुष्य आत्माओं की सेवा कर रहे हैं और हमारा जीवन जो चल रहा है जी उसी की बदौलत आज हम यहां इस तरह से बैठे हम तो दिन रात अनुभव करते हैं। विरक्तता से ये सिद्ध होता है कि आपको आपने ईश्वर का अनुभव किया है। हम डेफिनेटली अनुभव मतलब मैं मैं एक्चुअली ये पूछ रहा था जैसे जैसे रसगुल्ला है तो रसगुल्ला खाने से हमें सुख का अनुभव हुआ मीठामीठा हुआ बिल्कुल हमने ये कहा कि मैंने अनुभव किया रसगुल्ले को है ना तो एक अनुभव था स्वाद के रूप में जी्हा से जो मेरे को आया जी तो ऐसे ही वो अनुभव होता है जिससे हम सिद्ध करते हैं ये जो है ईश्वर का अनुभव है वो क्या अनुभव होता है हां वही कहते हैं ना जहां ना पहुंचा रवि वहां पहुंचा कवि जहां ना पहुंचा अनुभवी अनुभव जीवन की बहुत बड़ी अथॉरिटी होती है। आज के विश्व में ऐसे संसार में रहते हुए जहां पर मानव धर्म भ्रष्ट कर्म भ्रष्ट बन चुका है। एकदम नास्तिक बन चुका है। जी मैं इसीलिए इस चीज को थोड़ा सा एलबोरेट कर रहा हूं। तो ऐसे संसार में आप रह रहे हैं। पनप रही है और मैं तो कह रहा हूं कि धर्म का चोला ओढ़ के भी कई लोग नास्तिकता फैला रहे हैं। एक्चुअली एक्चुअली राइट यू आर राइट। बिल्कुल राइट है। हां आज युवा ही नहीं

00:24:45:25 और भी मनुष्य बड़े नास्तिक बन गए। जब आप भी कह रहे हैं मैं बाबा हूं मैं भगवान हूं। मैं भी कह रही हूं मैं भगवान हूं। वो भी कह रहे हैं भगवान। ये भी कह रहे भगवान वो भी सब कहते हैं मैं भगवान। आइए मैं रास्ता बताता हूं। आइए मैं रास्ता बताता हूं। जी तो आजकल की जो युवा पीढ़ी है वो यही समझती है धर्म नाम की कर्म नाम की या परमात्मा नाम की कोई चीज हां वो इस पे आ जाती है छोड़ वो नास्तिक हो जाते हैं हम कोई भगवान भगवान नहीं लेकिन यहां पर सिर्फ कहते नहीं है हम अपने को भगवान नहीं कह रहे हम अपने को वैसे भी नहीं कह रहे हम धर्म स्थापक के परमात्मा ही आकर के एक साधारण तन में प्रवेश करके उनके माध्यम से ही सारा ज्ञान हमें देते हैं। वो स्वयं बताते हैं कि मैं परमपिता परमात्मा तुम आत्माओं का पिता हूं। तो जो जैसे आपने कहा अनुभव होता है मैं और थोड़ा सा जैसे कि मान लीजिए अगर ये सिद्धांत हो लॉ कि अगर जब यदि ईश्वर होगा तो वो घंटी बजेगी है ना? अब जब मैंने आपने अनुभव कराया घंटी बज गई। इससे सिद्ध हो गया कि ईश्वर है। तो फिर इसी तरीके से क्या ऐसा होता है जिसकी वजह से कोई यह कहता है

00:26:00:26 कि हां ईश्वर है मैं मान गया। लाखों युवाएं भी यहां पर कितने मैं समझती हूं 50000 से मतलब कोई एक स्पेसिफिक क्रिया नहीं है। हां वो हर एक का अपना अपना माना क्योंकि परमात्मा दिव्य दृष्टि विधाता है। दिव्य बुद्धि विधाता है। तो हर कोई उस परमात्मा को पहचानेगा भी नहीं। गीता में लिखा है कोटों में को में भी को मुझे पहचानते हैं। मूढ़ मती लोग तुझ समझ मुझे गाली देते हैं। वरना भगवान को नहीं हम जो धर्म के नाम पर ये कार्य करते हैं उनको फिर गाली देते हैं। हर कोई उसको पहचान ले और फिर अनुभव करें यह भी जरूरी नहीं। मगर हमारे पास थ्योरिकली तो काट होनी चाहिए ना एथिज्म में भी। नहीं तो काट हां नास्तिकता जैसे हम ज्ञान दे रहे हैं संसार में राज हम देख रहे हैं कितनी नास्तिकता है माना आज मनुष्य ये तो ऐसे हो गया ना मानना पहनना और नहीं नहीं यहां तो अनुभव किया जाता है ना जो आते हैं उनको जब हम कोर्स कराते हैं मेडिटेशन मेडिटेशन सीखते हैं वो और सेल्फ रियलाइजेशन करते हैं यहां मेन बात है सेल्फ रियलाइजेशन करना और जब वो यह करते हैं आत्मा को पहचान जाते हैं अनुभव करते हैं परमात्मा अनुभूति ना हो यह नहीं हो सकता है। मतलब अनुभव है थ्योरी नहीं है थ्योरी नहीं अनुभव अच्छा

00:27:16:26 तो दीदी थोड़ा सा आगे चलते हैं जो ईश्वर के बारे में हम बात कर रहे थे तो आपने कहा ईश्वर सर्वशक्तिमान है ऑलमाइटी है सर्वज्ञ है पॉइंट ऑफ लाइट एक एनर्जी है परम एनर्जी तो वो सनातन सत्ता है या मतलब वो भी मनुष्य तो नहीं तो सनातन सत्ता से अलग वो सत्यम शिव सुंदरम है सनातन गॉड इज ट्रुथ ट्रुथ ही गॉड जी तो वो वो भी नित्य है ना सनातन के हां नित्य है डेफिनेटली नित्य है परमात्मा सदा है सदा है आत्मा जैसे सदा परमात्मा भी सदा है वो कभी मरता ही नहीं तो दीदी जैसे क्या ब्रह्मा कुमारी ईश्वर को सर्वव्यापक भी कहता है सर्वव्यापक विभु से एक शब्द आया ना गीता में विभु नहीं विभु नहीं मानता आपने कहा अभी सर्वशक्तिमान सर्वज्ञ ऑलमाइटी अथॉरिटी सब परमात्मा हो जाए उसे आने की आवश्यकता ही नहीं सब परमात्मा नहीं हो जाए सर्वव्या सबके अंदर भी हो जाए समझो आपके अंदर मेरे मेरे अंदर इनके सबके अंदर परमात्मा है हम तो क्या कहा जाता है ब्रदरहुड ब्रदरहुड कहा जाता है ना हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में सब भाई भाई नहीं तो फादरहुड होना चाहिए सब भगवान भगवान

00:28:31:27 भगवान हम हम सर्वज्ञ मानते हैं सर्वशक्ति मानते नहीं है ही हम सर्वव्यापी नहीं व्यापक नहीं तो इसमें दीदी जैसे जैसे हम कहते हैं कि ईश्वर सनातन है। तो सनातन का अर्थ जो निकल के आता है नित्य स्थाई स्थाई ना जो किसी भी देश काल परिस्थिति से बाधित ना हो। है ना? जैसे सनातन के बारे में हम कहते हैं कि जो मतलब सनातन सत्य वो है जिसके लिए ये उसके बारे में अगर कोई लाइन कही जाए तो वो बदलेगी नहीं। वही सनातन सत्य है। किसी भी सिचुएशन में बदल नहीं सकती। जैसे कि मैंने कहा कि मैं अब वर्तमान का समय चल रहा है। शिवश नारायण द्विवेदी जी 2026 में जीवित थे। जीवित हैं। एक्सिस्ट करते हैं। मगर यही जो सत्य है 2075 में बदल जाएगा। अब एक्सिस्ट नहीं करते। शिवांश नारायण द्विवेदी नहीं करते। आत्मिक रूप से होते पर शिवश नारायण द्विवेदी जो उपाधि प्राप्त है शरीर के माध्यम से वो नहीं है। एक्सिस्ट नहीं करते। यानी कि ये सनातन सत्य नहीं है। शिवश नारायण द्विवेदी है ना? क्योंकि यह असत्य है। ये सत्य है। हां। तो इसी तरीके से दूसरी एक बिंदु आती है कि शिवश नारायण द्विवेदी चेयर पे बैठे हैं। चेयर पे बैठा है शिवश नारायण द्विवेदी मगर सोफे

00:29:47:03 पे नहीं बैठा है। इससे भी ये सिद्ध हो रहा है कि मैं सनातन सत्य नहीं हूं। क्योंकि मैं यहां हूं वहां नहीं हूं। मेरी जो मेरा जो सत्य है वो बदल रहा है। जी तो जब हम ईश्वर को सनातन कह रहे हैं ईश्वर सनातन है तो वो तो था और है और रहेगा तो इसमें तो वो सनातन है मगर उसके लिए हम कहें कि ईश्वर यहां है और वहां नहीं है तो ये सत्य बदल गया उसका तो ये सनातन का टकराव हो रहा है ना एक्चुअली ऐसा नहीं है ईश्वर यहां है वो तो एक माना इतनी परमात्मा की और मेरी दूरी है सेकंड में मैं चाहूं जो वो परमधाम निवासी है ब्रह्मांड का निवासी पहुंच हां सेकंड वो देखो आज पहुंचेगा तो दीदी मगर हमने कहा वो यहां नहीं है इसका मतलब कहीं पे है कहीं पे नहीं है तो उसका जो सत्य है वो बदल रहा है नहीं अभी जैसे देखो आप हैं अभी आप कहां म आप कहीं जा रहे हैं आ रहे हैं यहां नहीं है कहीं कहीं जाएंगे ना सब जगह तो नहीं जाएंगे ना तो मैं जहां हो सके हां क्योंकि बॉडी है बॉडी सनातन सत्य नहीं हूं जी मैं आत्मा सनातन सत्य ईश्वर सनातन सत्य है सनातन सत्य सत्य माने सदा ही है। मतलब उसको पता से बाधित नहीं मगर देश से बाधित है। कहीं आप उसको बुलाओ उसको आप याद

00:31:02:07 करो सेकंड में हाजिर हो जाएगा। हां क्योंकि उसके लिए कोई बॉडी नहीं है। तो दीदी जो ये वाला अर्थ है ना सनातन निज स्थाई हर तरह से स्थाई है। मतलब तीन तरह की बाधाएं होती हैं। एक होती है कालकृत एक होती है देशकृत एक होती है परिस्थिति कृत। परिस्थिति बाधा कैसी हो गई कि भाई अह परिस्थिति बाधा ऐसी कि यह मेरी बहन है। मैं विवाह नहीं कर सकता। ये परिस्थिति बाधा है। है ना? तो इसी तरीके से जो ईश्वर है उसके लिए हमने जो भी कुछ कहा वो ना तो देश से बदलना चाहिए ना ही काल से ना ही परिस्थिति से। मगर देश से बदल रहा है। हमने कहा ईश्वर ईश्वर अपनी कहीं उनका लोक है। मान लीजिए। हां। लेकिन उसका जो लोक है हां इस दुनिया से पार, चांद सितारों से पार, सूक्ष्म लोक से भी पार, ठंड ज्योतिम में तत्व तो वह है वहां वहां वह यहां नहीं तो ये उसका वहां होना, यहां ना होना ये देशकृत बाधा से बाधित हो रहा है। तो वो मतलब वो सनातन कैसे कहा जाए फिर उसे? क्योंकि सनातन सनातन काल नहीं आता। सनातन आप कह रहे हैं। मैं नहीं कह रही हूं। अच्छा वो सनातन ईश्वर नहीं है। हां। परमात्मा तो सदा शिव सत्यम शिवम सुंदरम गॉड इज ट्रुथ। पृथ्वी गॉड है। तो सनातन सत्य ही तो कहते हैं उसे परमात्मा को। सनातन सत्य

00:32:17:13 नहीं है। शाश्वत सत्य शाश्वत सत्य तो वही तो सनातन जो देश माना आप वो वो सनातन फिर आप शब्द ले लेते हैं इस सृष्टि पर मुझे ऐसा सृष्टि में नहीं रहता है मुझे ऐसा लगता है कि ब्रह्मा कुमारी के अनुसार जो ईश्वर है वो काल कृत बाधा से तो बाधित नहीं है कि है और रहेगा वो नहीं अनादि अनंत है मगर देश कृत बाधा से बाधित है वो किसी बंधन में बंधता ही नहीं है कोई बाधा उसके के अंदर है ही नहीं। वो न्यूट्रल और न्यारा और प्यारा है। सारे विश्व से न्यारा है। सारे विश्व का वो प्यारा है। नहीं इस इस बाधा से बाधित है ना कि वो यहां है तो वहां नहीं है। नहीं ये तो हम हम तो जहां उसको बुलाए वो आ जाएगा। आज मैं अगर कहीं तो अलग बात है हां तो वो वही है ना ऊपर परमधाम जिसको ज्योति महतत्व कहते हैं वो ज्योति जो सभी ज्योति आत्माएं वो भी वहीं से आती है सृष्टि रूपी रंगमंच पर पाठ प्ले करने के लिए और परमात्मा एक ही बार इस सृष्टि पे आता है इस सृष्टि का परिवर्तन करने के लिए जो कलयुगी दुनिया है उसको सतयुगी पैराडाइज बहिस्त बनाने के लिए आता है। उसके लिए वो ज्ञान योग की शिक्षा देता है। राजयोग मेडिटेशन सिखलाता है।

00:33:32:14 उसको सीख के जो हमने कहा कि नर नारायण नारी लक्ष्मी बन जाती है। मतलब वो आता जाता है मगर वो सनातन रूप से क्योंकि जैसे अभी मैं आत्मा हूं गर्भ में प्रवेश किया मैंने और फिर मैं बच्चा बच्ची बन गई तो मैं 15 साल 20 साल 100 साल तक भी मैं रहूंगा। इस शरीर में बंधन है। परमात्मा को इस तरह का बंधन नहीं है। वह सेकंड में आ जा सकता है क्योंकि उसका रीइकार्नेशन होता है। उसका अवतरण होता है। मगर दीदी इसमें तो ये है ना कि परिस्थिति कृत बाधा से हम बाधित होते हैं। वो नहीं जैसे वो नहीं होता। जैसे हमने कहा कि हम इस शरीर में आ गए। तो हम क्योंकि बाधित हैं इसलिए बंधन फील करेंगे। मगर जैसे ईश्वर है। ईश्वर के लिए मान लीजिए वीडियो गेम हो। हां। वीडियो गेम हम खेल रहे हैं और हम उसके अंदर जो कारें आ रही हैं हमको धक्का लग रहा है तो झटका भी आ रहा है मगर फिर भी हम यह जानते हैं यह वीडियो गेम मैंने चालू किया मैं इसको बंद कर सकता हूं तो परमात्मा इस तरीके से उसमें रहते हुए भी मुक्त भी रहता है है ना

00:34:37:00 [संगीत]

Plans for this video (0)

No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.

🤖 Ask AI for suggestions

AI reads the remaining (unused) parts of this video and gives ideas for new videos: from where to where, hook, and what to remove from the middle. Suggestions follow the RULES and appear here as "AI Suggestion". You can review, edit or approve them.

  • ⬜
    Hindi SRT Required

    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).

A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 34:39 · 19 Aug 2026

क्या ब्रह्माकुमारी की सेक्युलर शिक्षा ही सनातन धर्म है? ब्रह्माकुमारी दिल्ली मुख्यालय

0%
☁️ Drive Not in Drive yet

🔗 This video is made from parts of these videos

B · Video ब्रह्माकुमारी संस्था गीता को क्यों नहीं मानती? वीडियो डिलीट होने से पह...
Open at 00:00:18:19 Open at 00:10:18:04 Open at 00:33:06:19

Notes

Description

(empty)

History

No changes yet.

✂️ Clip Cutter

⌨️ Keyboard shortcuts

Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop

▶

Start

End

🔍 zoom
Already used Plan clips
⚠️ () of this clip is already used in another video (green part). Fine if on purpose, otherwise change the times.
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)

Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".

Clips () · Total

Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.

Hook, full note for editor, status