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00:00:01:28 [घंटी की आवाज़] मेरा नाम सरिता शर्मा है और मैं एक टीचर हूं। मेरी इकलौती बेटी है। सिंगल पेरेंट हूं मैं। बेटी मुझसे बहुत ज्यादा जुड़ी हुई थी बचपन से ही। मगर मुझे छोड़ के वो एक दिन भी नहीं रह सकती थी। एक दिन क्या एक टाइम भी नहीं रह सकती थी। लेकिन उसका आध्यात्मिकता में थोड़ा सा उसकी रुचि थी और बचपन से ही उसके सवाल ऐसे थे कि कैसे मतलब हम कहां से आए हैं? मरने के बाद कहां जाएंगे? मरना क्या होता है? ये सारी चीजें वो पूछते रहते थे बचपन से ही। कुछ सवालों के जवाब मेरे पास भी नहीं थे क्योंकि हमने भी इतना ज्यादा आध्यात्मिकता में इतना डीप इन्वॉल्व हुए नहीं। बस इतना जानते थे कि भगवान है और हम अच्छा काम करेंगे तो सब कुछ सही होगा। बस इतना ज्यादा हम डीपली कभी गए नहीं। तो उसके सवाल सवालों के जवाब मैं दे नहीं पाती थी। बाकी अच्छी खासी लाइफ हमारी चल रही थी। मैं जब से सिंगल पेरेंट हुई हूं। वो जब 5 साल की थी 2013 में तब मेरा डिवोर्स हो गया था। उसके बाद से मेरा स्ट्रगल चालू हुआ अपनी जॉब को लेके एक अच्छी लाइफ जीने को लेके तो बेटी को साथ में लेके ही मैंने जॉब की तैयारी की और मेरा गवर्नमेंट जॉब लगा। फिर उसके बाद से हमारी लाइफ थोड़ी सी सुधरने लगी कि हम अच्छी जिंदगी जिएंगे। अब इसी बीच में हमारे
00:01:17:01 परिवार में जो मेरे ताऊ जी की लड़कियां हैं वो ब्रह्मकुमारी को फॉलो करती थी पहले। अच्छा ब्रह्म कुमारी को फॉलो करते करते उनको कहीं ना कहीं थोड़ी सी संतुष्टि हुई कि वो एक भगवान का नशा उनको होने लगा कि दुखों से वो बाहर आ रहे हैं या फिर चीजें सुधर रही है उनकी लाइफ में वो उतना डीप जानकारी तो मुझे है नहीं लेकिन धीरे-धीरे पता नहीं वो कब लोग वो लोग कब आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से जुड़ गए फिर वहां वीरेंद्र देव दीक्षित की आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से जुड़े या ब्रह्माकुमारी से जुड़े पहले ब्रह्मकुमारी से जुड़े थे वो फिर उसके बाद कब उनका डायवर्शन हुआ इस तरफ आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की तरफ यह मुझे उसकी जानकारी नहीं है। मैंने कभी उनकी तरफ इतना ध्यान दिया नहीं। बाकी वो हमारे घर आना जाना उनका तो लगा ही रहता था। हम एक ही घर में पले बड़े हैं। तो कोई भी त्यौहार पर वगैरह मिलते थे। तो बस वह इसी के बारे में बताते रहते थे कि यह दुनिया खत्म होने वाली है। आपको आध्यात्मिकता में आना है। इसका अगर आप ज्ञान लेंगे तो आप सतयुग में जाएंगे और जो लोग इसका ज्ञान लेंगे वही बस सतयुग में जाएंगे। बाकी सारे लोग बर्फ में दब के मर जाएंगे। कलयुग का अंत होने वाला है। अब ज्यादा समय नहीं बचा है हमारे पास। तो ऐसे करते-करते वो सुनाते रहते थे। बस
00:02:32:02 अब घर वाले हैं करके हम उनकी बात का मान रखने के लिए उनके पास बैठ जाते थे सुन लेते थे कभी-कभी और बेटी को भी वो सुनाना चालू किए तो मुझे लगा कि चलो ठीक है कहीं ना कहीं उसको सवालों के जवाब मिल रहे हैं कुछ भी वो सवाल कर रही है तो ये कुछ ना कुछ एक्सप्लेनेशन उसका देती थी अब सही है नहीं है मैंने इतना ध्यान दिया नहीं और इसको कभी लिया भी नहीं कि ऐसा कुछ इतना इतनी दूर तक बात जा सकती है तो धीरे-धीरे मेरी बेटी उनके साथ इनवॉल्व होने लग गई और उसको समझ में आ रहा था कि अह मतलब ज्ञान उनका सही है ऐसे समझ में आ रहा था और ज्यादा टाइम उनके साथ बिताने लग गई और मिलते तब तो ठीक था उसके बाद फोन में भी वो उसके साथ उनके साथ ही बात करती थी और फिर ऑनलाइन क्लासेस अटेंड करना ये सारी चीजें करने लगी और सेंटर पर जाने की कोशिश करना बार-बार मुझसे रिक्वेस्ट करना कि वहां जाना है चलते हैं ऐसे वैसे तो मतलब ये जो आपके जो आपके रिलेशन में जो जो थी पहले से बड़ी मातृशक्ति थी मतलब वो मैच्योर है ना तो उनके साथ उनके उनके साथ के कारण यह आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से जुड़ी और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय को उस समय ऑपरेट कौन कर रहा था उस समय तो वीरेंद्र देव दीक्षित की ही संस्था चलती थी और
00:03:47:13 ये लोग उन्हीं से जुड़े थे उन्हीं की क्लासेस अटेंड करते थे उन्हीं के सेंटर्स पर जाते थे आपकी बिटिया मतलब वीरेंद्र देव दीक्षित से वीरेंद्र देव दीक्षित से आपकी बिटिया मिल चुकी है नहीं नहीं नहीं वो तब तक जब तक मेरी मेरी बिटियां इस इन लोगों से जुड़ी थी तब तक उन वो मतलब छोड़ के जा चुके थे मतलब भाग चुके थे वो उन पर केसेस भी हो चुके थे और मेरी दीदी लोग वो बोलती थी कि इन पर सारे झूठे केसेस हुए हैं। ब्रह्मकुमारी वालों ने केस किया है इन पर मीडिया वालों को पैसे देके तो मैंने कभी उस पर इतना गंभीरता से उसको लिया नहीं और ध्यान भी नहीं दिया क्या चल रहा है। चलो ठीक है इनकी आस्था है या फॉलो कर रहे हैं। इससे हमको कुछ नुकसान नहीं होना है। तो मैंने उनके बातों का विरोध भी नहीं किया। कोई उस उनसे आर्ग्यू भी नहीं किया। छोड़ दिया था उस बात को। फिर बेटी उनके साथ जाती थी कभी सेंटर पर तो मैं उतना मन से तो नहीं भेजती थी लेकिन चलो कोई गलत काम नहीं कर रही है। धार्मिक काम ही है। भगवत गीता के श्लोक ही ये पढ़ते हैं और उसी का विश्लेषण करते हैं। ये सारी चीजें मुझे पता थी। तो थोड़ा सा जिद करके मुझे भी चलने पर मजबूर करती थी। तो मैंने कहा चलो मतलब अकेले को ना भेजूं। क्या है मैं भी देख लेती हूं। मेरी बहन जब आपकी जब आपकी बिटिया गई है मतलब आध्यात्मिक विश्वविद्यालय
00:05:02:21 तब तक वीरेंद्र देव दीक्षित भाग चुके हैं। जी है ना उनप केसेस हो चुके हैं तो वो अपना छोड़ के भाग चुके हैं। तो तब वहां लीडिंग में कौन था जब वो भाग चुके हैं तब जब आपकी बिटिया उनके ही अनुयाई थे जो फॉलो कर रहे थे। उनकी संस्था तो चल ही रही थी। उस पर कोई रोक नहीं हुआ था। स्पेसिफिक स्पेसिफिक नाम वगैरह कुछ नहीं है। उतनी जानकारी मुझे नहीं थी उसके बारे में। लेकिन वहां पर जो हमारे लोकल एरिया में जो सेंटर चलता था वहां पर दीदी लोगों ने कहा था कि आप जाओ वहां पर तो मैं बेटी को ले मेरी भी स्कूल की छुट्टियां ही चल रही थी तो मैं लेके गई थी बेटी को कि क्या है समझे तो सही करके अब वो लोग इतना ज्यादा जोर दे रहे हैं कि ज्ञान सुनो तो आपको चीजें समझ में आएगी तो देख लेते हैं इसमें कोई नुकसान नहीं है तो मैं गई थी उनका कोर्स सुनने चारप दिन तक तो उसमें उन्होंने मेरा भी नाम जोड़ दिया कि मैं भी जाती थी जबकि उनके जोर देने पर मैं जाती जाती थी और मेरी मां को भी उन्होंने ही जोर दिया कि आप यह फॉलो करो आप सुबह मतलब अमृतवेला योग लगाओ ऐसे यह सारी चीजें उनके जोर देने पर ही कभी मेरी मां भी कर लेती थी या फिर ये सारी चीजें तो नहीं की हूं मैं बस हफ्ता भर वो वहां पर बेटी के साथ गई थी और बहुत सारी उनके उनकी बातें ऐसी थी जो समझ में नहीं आ रही थी मुझे और मैं सवाल करती थी तो वो ऐसे जवाब देते थे जिसका
00:06:17:22 कोई कोई लॉजिक ही नहीं बनता है तो मैंने उतना ध्यान दिया नहीं उसके बाद फिर मेरी भांजी भी मेरे पीछे पड़ी कि आप और सुनो डीप ज्ञान सुनो दुनिया खत्म होने वाली है टाइम नहीं है आपके पास तो जबरदस्ती ऑनलाइन क्लास लेना सुनाना सारी चीजें वो भी कर रही थी अब मेरी बेटी बहुत ज्यादा उसमें इन्वॉल्व हो रही थी ये मुझे समझ में आ रहा था लेकिन मुझे कोई कारण नहीं मिल रहा था कि मैं उस पर मतलब उसको रोक-टोक करूं टाइम है कोरोना का टाइम चल रहा है पढ़ाईवढ़ाई भी उतनी ज्यादा नहीं हो रही है तो ठीक है कुछ तो अच्छा ही ज्ञान सीख रही है भगवत गीता के श्लोकों की बात करते हैं ये यही मैं सोच सकती
00:06:54:02 धीरे-धीरे इनवॉल्व होते होते इन्होंने अमोल कोकने से परिचय करवाया। जी जी जी भाई जी आपकी अमोल कोखने जो इनका गुरु है उनसे परिचय करवाया था इन्होंने और मेरी बेटी से कहा गया है कि यह सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं। चीजें तो बहुत सारी उसको बताई गई लेकिन मेरी जानकारी में बस इतनी बातें आई है कि सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं और बहुत जानकार हैं और उनसे अगर हम टच में रहेंगे तो बहुत सारा मतलब नया कुछ सीखने को मिलेगा। बहुत सारी बातें वो सिखाते हैं। ऑनलाइन काम भी वो करते हैं या फिर टेक्निकल स्किल्स भी सीखूंगी। इन इनके पूरे ग्रुप की तरफ से बता रही थी कि इन सब से मुझे टच में रहना है। आपकी शिकायत रहती है कि मैं किसी फ्रेंड से बात नहीं करती हूं। अगल-बगल वालों से बात नहीं करती हूं। तो मैं इस ग्रुप से जुड़ी हूं तो अच्छा काम कर रही हूं। करके मुझे प्रूफ भी दिखाती थी कि देखो ऑनलाइन क्लासेस चल रही है। इसमें भगवत गीता के श्लोक चल रहे हैं और वहां पर उसका विश्लेषण। अब मैं विश्लेषण के डीप में मतलब क्या चल रहा है विश्लेषण में यह तो मैंने ध्यान दिया नहीं। लेकिन भगवत गीता के श्लोक चल रहे हैं। इतना मुझे समझ में आया तो वह रटना उनको फिर उनका टेस्ट देना ऑनलाइन यह चीजें वो करती थी। मैंने कहा चलो अच्छी चीज कर रही है। मैंने कभी किया नहीं। यहां पर मैं यहां पर मैं एक चीज याद दिला दूं कि एक पैटर्न
00:08:09:15 है इन लोगों का काम करने का। सभी के लिए आवश्यक है ये जानना। अक्सर लोग यह दावा करते हैं। अरे भाई हम तो भगवत गीता की बातें कर रहे हैं। क्या दिक्कत है? हम तो वेद की बात कर रहे हैं। उसमें क्या प्रॉब्लम है? हम तो उपनिषद की बात कर रहे हैं। उसमें क्या प्रॉब्लम है? तो पैटर्न क्या है कि आपकी जो जिस द्वेष भावना के साथ कोई बुरी शक्ति कोई बुरा तंत्र आपके आसपास आकर के बैठ गया है नजरें जमा करके और जो भी उसका गलत उद्देश्य उसकी पूर्ति करने के लिए वो वो यह जानता है कि आपकी भावनाएं जुड़ी हुई है गीता से। आपकी भावनाएं जुड़ी हुई है वेद से। तो आपकी आपकी भावनाएं जुड़ी हुई है उपनिषद से तो उसको जो जहर भरना होता है आपके इर्दगिर्द जो भी उसको अपना द्वेष पूर्ण कार्य करना होता है वो गीता वेद पुराण उपनिषद ऐसे शास्त्र जिनसे जिनमें आपकी आस्था है जिनमें आपकी श्रद्धा है उनका नाम लेकर के ताना-बाना बुनता है उनके नाम की आड़ में अपनी वो गलत चीजें आपको देता है क्योंकि अगर डायरेक्ट अपनी चीजें आपको देगा तो आप उसको सुनोगे ही नहीं आप उसको उसको देखोगे ही नहीं। आप उसकी ओर आकर्षित ही नहीं होगे। या फिर आप अपने बच्चों को
00:09:24:16 वहां उस बारे में सुनने की अनुमति नहीं दोगे। बल्कि उसका प्रचार ही रुक जाएगा ना। तो जब गीता का प्रवचन हो रहा है, गीता के नाम पर बात हो रही है तब आप यह सोचते हो कि अच्छी बात है भाई सुन रहा है सुनने दो। नहीं तो वहां पर अगर कोई कहे कि एक नया भगवान आया है। वो अपने भगवान होने के बारे में बता रहा है तो कौन से मां-बाप वहां भेज देंगे? वहां माता-पिता वहां भेजते हैं गीता सुनने के लिए, वेद सुनने के लिए, पुराण सुनने के लिए या जो भी धर्म शास्त्र उनको सुनने के लिए और वहां पर टैग यह लगाया जाता है उसकी आड़ में उनके बातों को तोड़ मरोड़ करके कुछ इस तरह से प्रस्तुत किया जाता है कि वहां अर्थ जब होता है तो गीता होती नहीं है। वहां पर उनका अपना जो मंतव्य होता है वो होता है। तो यह बहुत बड़ा एक पैटर्न है। इस चीज से सभी को बचना चाहिए। जो लोग यह सोचते हैं अरे गीता की बात हो रही है क्या दिक्कत है आचार्य प्रशांत ने तो उपनिषद की बात की है क्या दिक्कत है दिक्कत है वो जानते हैं कि हमारी पहले से आस्था किस में है वो पहले उसको उसका उस नाम को पकड़ते हैं और फिर उनकी जिन चीजों से अपनी बातों को जोड़ सकते हैं नई बातों को अपनी बातों को उन चीजों से जोड़ के आपको प्रस्तुत कर देते हैं। फिर आप यह सोचते हो अरे इनसे क्यों
00:10:39:18 कुछ कहे ये तो वेद की बात कर रहे तो गीता की बात कर रहे हैं। वो बात वही कर रहे हैं जिससे आपको प्रॉब्लम थी। यह सदैव ध्यान रखिए। यह बातें वही है जिनसे आपको प्रॉब्लम है। सनातन को जिनसे प्रॉब्लम है वही बातें हैं। बस वो सिर्फ वेद और गीता के नाम पर आपको परोसी जा रही हैं। जी बिल्कुल वही हां जी। जी तो वही चीजें ये करते थे। उसमें जो भगवान की व्याख्या है वो इन्हीं के बारे में बोला गया है। वीरेंद्र देव दीक्षित के बारे में ही बोला गया है कि जो मूढ़मती लोग होते हैं वो साधारण शरीर में आए हुए भगवान को नहीं पहचान पाते। तो वह वीरेंद्र देव दीक्षित के बारे में बोला गया है। यह उनका कहना है। तो अगर उससे कनेक्ट करके जोड़ा जाए तो मेरी बेटी मानती थी कि यह सारी चीजें सच में यहीं पर अप्लाई होती है और कोई लोग बाकी के लोग यह समझ नहीं रहे हैं। तो शुरू से मेरी बेटी मुझे समझाने की कोशिश करती कि मां यह सही ज्ञान है। हमको इसी ज्ञान में जाना है। सबको यहीं आना है। क्योंकि जब दुनिया खत्म होने वाली रहेगी सबको इन्हीं के पास आना पड़ेगा और जो ज्ञान में रहेंगे वो तो सेफ रहेंगे। बाकी जैसे कि अगर मैं उनका ज्ञान नहीं सुन रही हूं तो बाकी जितने भी लोग हैं जितने मर गए हैं इस बीच में उन सब की आत्माएं
00:11:54:26 ज्ञान सुनने के लिए मेरे शरीर में प्रवेश करेगी तो हर हर एक शरीर में 810 आत्माएं प्रवेश करेगी तो उस शरीर को कितनी तकलीफ होगी तो हमको इस तकलीफ से नहीं गुजरना है हम पहले ही सेफ हो जाए इसके लिए पहले से सुन लेते हैं ज्ञान तो वो मुझे बहुत समझाने की कोशिश करती थी और मैं बोलती थी कि इनका लॉजिक मुझे समझ में नहीं आता है इन इनका कहना है कि 5000 साल का चक्र है मतलब मतलब जो जो आत्माएं यदि हमने अभी ज्ञान नहीं सुना तो बाद में ज्ञान सुनने के लिए बाद में ज्ञान सुनने के लिए हम जो है अ तरसेंगे और तरसेंगे और फिर किसी और के शरीर में प्रवेश करेंगे। ऐसा है। हम नहीं प्रवेश करेंगे। जैसे अभी मैं लास्ट समय में मैं अगर जिंदा हूं तो जो मर गए हैं उनकी आत्मा भटकती रहेगी। तो उन सबकी आत्माएं जो जिंदा शरीर है उस शरीर के अंदर आकर ज्ञान सुनने की कोशिश करेंग। तो मेरे शरीर में मान लीजिए जो मर गए हैं मेरे आसपास 810 लोग मेरे शरीर में घुसेंगे और फिर मेरे शरीर के थ्रू वो ज्ञान सुनने की कोशिश करेंगे क्योंकि सिर्फ आत्मा से वो सुन नहीं सकते। तो जब किसी के शरीर में कोई दूसरी आत्मा प्रवेश करती है तो बहुत तकलीफ होती है शरीर को। तो अंत समय में 810 आत्माएं अगर मेरे शरीर में घुसती है तो मुझे कितनी तकलीफ होगी?
00:13:10:14 उस तकलीफ से बचने के लिए मुझे अभी ज्ञान में आ जाना चाहिए। तो मेरा शरीर सेफ हो जाएगा। फिर कोई दूसरी आत्मा मेरे शरीर में प्रवेश करने की कोशिश नहीं कर पाएगी। अप्रोच नहीं करेगी। जी जी वाह बहुत बढ़िया। तो ये चीजें तो इसका अर्थ तो ये हुआ कि आत्मा जो है ज्ञान ग्रहण नहीं कर सकती। जी ये एक नोट करने वाली बात है। आत्मा ज्ञान ग्रहण नहीं कर सकती। इसका अर्थ तो यह हो गया कि आत्मा को सुख होगा तभी जब वो जो है देह धारण करे जी तभी वो तभी वो मुक्त हो सकती है। इनके हिसाब से मुक्ति तभी है जब वो शरीर धारण करे। शरीर धारण के बिना मुक्ति नहीं है। जी यही हो गया ना क्योंकि वो ग्रहण तो कर नहीं सकती है ज्ञान बिना देह के।
00:14:18:01 [संगीत]
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भगवद्गीता के नाम का सहारा क्यों? सावधान : कोई अपना फंसे उससे पहले समझ लें कालनेमियों का पैटर्न
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