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00:00:02:24 जय श्री राम सभी लोगों को। आशा करते हैं कि आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और जैसा कि आज जानते हैं जो हमारा शेड्यूल था बुधवार की रात 9:00 बजे के आसपास हमारा सेशन है डे टू जो हमारी नीलिमा जी है वो हमें बीके का वो अलौकिक ज्ञान बता रही हैं जिसको प्राप्त करके बहुत सारे लोग वहां पर जाकर के बीके में फंस जाते हैं और
00:00:41:15 एक तरीके से उनके मन में एक जहर आ जाता है। मैंने अभी एक दो दिन पूर्व ही एक मातृ शक्ति से बात की है। संभवत हम उसको डालेंगे यहां पर। वो जो मातृ शक्ति है उनसे बात कराई थी। उनके जो भरता है पतिदेव उन्होंने बात कराई थी कि आप एक बार मेरी पत्नी से बात करिए क्योंकि मेरी पत्नी जो है ब्रह्मा कुमारी के उसमें फस गई है। तो मैंने उन्हें एक बात बताई कि देखिए इट्स बेटर टू केयर देन क्योर। फिर भी मैं आप कह रहे हैं तो इसलिए मैं बात कर लेता हूं।
00:01:23:05 [गला साफ़ करने की आवाज़] तो मैंने उनसे जब बात की तो वह पढ़ी लिखी लग रही थी बात करने से और समझदार भी लग रही थी जो पर जब जब टेक्निकली यानी कि लॉजिकली जब मैं ब्रह्मा कुमारी की बातों का खंडन कर देता था तो वो उस चीज को एक्सेप्ट करने को तैयार नहीं हो पा रही थी। उनको बार-बार इधर उधर की बात करनी पड़ रही थी या फिर वही मतानुज्ञान गृह स्थान कि भाई तुम्हारा यह है वो कुछ ऐसी कोशिशें वो लगी हुई थी कुल मिलाकर के उनको मानना नहीं था और करीब 38 मिनट के आसपास उनसे बातचीत हुई है और बहुत अच्छी चीजें हैं उसमें जानने को तो मैं डालूंगा उस रिकॉर्डिंग को पर बात यह है कि अगर
00:02:15:08 बात यह है कि अगर एक बार व्यक्ति फस जाता है तो उसका वापस आना बड़ा मुश्किल हो जाता है। तो हम यह जो कोर्स यहां पर रख रहे हैं वो इसलिए नहीं रख रहे कि हमें ब्रह्मा कुमारी का प्रचार करना है। कुछ लोग जो पहली बार देख रहे हैं तो उनको यह भी एक शायद भ्रांति हो रही है कि हम ब्रह्मा कुमारी का प्रचार कर रहे हैं। ब्रह्मा कुमारी का प्रचार नहीं है। ब्रह्मा कुमारी का ये वो सात दिन का कोर्स है। जब भी आप ब्रह्मा कुमारी से प्रश्न करेंगे तो उनको रटा दिया गया है कि भाई सात दिन का कोर्स करो उसके बाद कोई सवाल कर सकते हो। सात दिन का कोर्स नहीं किया तो आपको किसी भी सवाल का उत्तर समझ में नहीं आएगा। हालांकि वह बोगस है एक नंबर का जो कोर्स है कुछ नहीं है उसमें धुआ है फिर भी और उस बिना सात दिन का कोर्स किए भी हमारे पास बहुत सारे उत्तर है इस कुतर्क के पर फिर भी कि वो से डेज का कोर्स क्या होता है जिसके बाद जो है वहां व्यक्ति जो है पागल हो जाता है और फिर वो कुछ भी अपनी समझदारी को छोड़ के अंदर घुसता है और वो कुछ भी सुनना सोचना समझना ब्रह्मा कुमारी के बारे में रियलिटी बंद कर देता है। ताला लगा
00:03:30:16 लेता है बुद्धि पर। एक बार मैंने एक वीडियो डाला था हमारे चैनल पर पढ़ा होगा कि बुद्धि बंद ताला बंद बुद्धि का ताला बंद चाबी गायब। यह ब्रह्मा कुमारी का हाल है। कुछ [गला साफ़ करने की आवाज़] लोग कहेंगे कि ब्रह्मा कुमारी और रामपाली एक जैसे हैं। तो व्यवहार में तो एक जैसा है मगर दोनों की जो उत्पत्ति हो रही है वो अलग-अलग है। इनके बुद्धि है ब्रह्मा कुमारी के मगर ताला बंद करके चाबी गायब कर दी है। और रामपालियों के बुद्धि है ही नहीं। इन दोनों में अंतर होता है। है ना? और किसी को भी अगर
00:04:09:10 कोई वैचारिक मतभेद है हमसे तो और उसने माता जी के दूधों का पान किया है अपनी तो वो हमसे वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करे केवल कमेंट करके स्ान के भांति आचरण ना करे स्ान का भी अर्थ नहीं पता होगा रामपाली है लग रहा है ये व्यक्ति स्वान का अर्थ डिक्शनरी में ले देख लेना वही शिवराम आपटे वाली में जिसको आधार बना के तुम ब्रज का अर्थ बताते हो उल्टा उल्टा सीधा लोगों को ठीक है तो यह हो गया तो वो से डेज कोर्स है जो करने के बाद लोग वापस नहीं आते वहां जाते तो अपनी मर्जी से मगर वापस वहां की मर्जी वो वाला जो हिसाब किताब है वो से डेज का कोर्स यहां पर हमें नीलमा जी बता रही है कि उस सात दिनों में क्या पढ़ाया जाता है अब वो यहां पर आपको नई चीज क्या मिलने वाली है से डेज के कोर्स में से डेज के कोर्स में हमें नई चीज मिलने वाली है कि
00:05:08:00 इसको डिलीट इसको बैन कर दो भाई इस व्यक्ति को इसको कोई तर्क पूर्ण या तथ्यात्मक बात नहीं करनी केवल कमेंट करना है एक इसको [गला साफ़ करने की आवाज़] शिवराज नाम का है इसको बैन कर दो तो यहां पे विशेष क्या है यह कोर्स आपको अन्य चैनल्स पर भी मिल जाएगा पर यहां पर विशेष यह है कि यहां पर हम आपको वह प्रश्न बताएंगे कि वह कौन-कौन से प्रश्न थे सतही स्तर पर जो जिस दिन आपको ये कोर्स कराया जा रहा था उस समय आप उनसे पूछ सकते थे जो आपने नहीं पूछे और अब आपकी यह मजबूरी हो गई है कि वो वाली बात है ना दिल लगा गधी से तो परी क्या चीज है तो अब हमने तो भैया इसको अपना मान लिया है तो अब हम यह कैसे मान ले कि यह गलत है ये वो वाली बात में अपना फंसते उसी दिन अगर ये प्रश्न पूछते आप तो जो लोग बुद्धि बुद्धिजीवी है वो प्रश्न पूछ सके तो इसलिए यह सीरीज है से डेज कोर्स वाली नीलमा जी आ चुकी है हमारे साथ जुड़ चुकी है मैं उन्हें स्टेज पर ले रहा हूं
00:06:16:28 जय श्री राम श्री राम जय श्री राम जी जय श्री राम जी नीलमा जी आप कुशल मंगल है आप जय श्री राम नहीं बोल सकते ओम शांति हां अब शुरू करिए आप भगवान का आशीर्वाद है एक बार वहां से चालू कर दीजिए जो स्लोगन है ना ब्रह्मा कुमारी का वहां से एक बार चालू कर दीजिए आप कम बोलो मीठा बोलो धीरे बोलो
00:06:50:02 यही उनका मेन स्लोगन है जी जी जी तो मतलब जितनी परमिशन है उसका एक स्लोगन है कम बोलो मीठा बोलो धीरे बोलो बोलो। ठीक है। तो आज डे टू है हमारा और शायद तीन लोक कौन से हैं और शिव का धाम कौन सा है? ये बताया जाएगा शायद। ऐसा है क्या? क्या बोल रहे हैं? तीन लोक तीन लोक कौन से हैं? और शिव का धाम कौन सा है? यही है क्या आज का चैप्टर? शायद या तो मेरा नेटवर्क खराब है या आपका मुझे थोड़ा रुक रुक के आवाज आई है। तीन लोग कौन से हैं? हां यही चैप्टर है। आप उसको लगाएंगे तब मैं समझाऊंगी। आप हां हां मैं लगा देता हूं। ऑपरेटर जी ऑपरेटर जी जरा वो इनका पीडीएफ ओपन करके यहां लगा दीजिए। जो पिछली बार हमने पढ़ा था। ब्रह्मा कुमारियों की तरह ही बैठे हो।
00:07:56:14 और ऊपर मुझे चित्र दिखा दीजिए आप ये वाला नहीं है जो दो पीडीएफ है उनमें से एक है एक नहीं है हां आप वो एक मिनट हां यही यही यही है तीन लोग यही है यही है निकल गया नीचे जाइए आप सिर्फ सिर्फ इस पे चित्र रखिए पढ़ने में फिर इसको जूम कर दीजिए चित्र को आप जी हां सिर्फ स्क्रीन पे ये चित्र रखिए हां जी अब इसमें आप देख रहे हैं तीन लोक लिखा हुआ है जैसा कि नीचे देख रहे हैं आप तो यह है मूल वचन जहां आप रहते हैं एक मिनट एक मिनट जरा अपना
00:09:03:15 जी आपको इसमें सब लिखा हुआ मिल जाएगा लेकिन आप अपने प्रश्न लिखते रहिएगा बीचबीच में जो भी आपके प्रश्न और प्रश्न आप बाद में करेंगे तो मुझे सुविधा रहेगी उत्तर देंगे जी जो नीचे है सबसे नीचे पृथ्वी लोक है मूल वतन जहां पर हम लोग रहते हैं हम और आप सब पूरी सृष्टि नीचे जो है मनुष्य सृष्टि रूपी रंग मंच को मूल मूल वतन कहते हैं अच्छा जहां पृथ्वी है और जहां आकाश तक आप देख सकते हो वो है मूल वतन और सूक्ष्म वतन जहां पे ब्रह्मा विष्णु शंकर तीनों निवास करते हैं उसे सूक्ष्म वतन कहते हैं जो यह रेड रेड कलर का पूरा ओरा देख रहे हैं आप। यह परमधाम है और परमधाम भगवान शिव का धाम है जिसे शांति धाम, परमधाम अनेकानेक नाम से जाना जाता है। अनेक धर्मों में इसे अनेक नामों से पुकारा जाता है जिसे मुक्ति धाम भी कहते हैं। हम अभी इन तीन लोकों की यात्रा अगर आप देखेंगे तो यह ब्रह्मा कुमारी के मेडिटेशन द्वारा हम इसका अनुभव
00:10:18:28 आपको दिन प्रतिदिन रोज ही कराते हैं। यह मेडिटेशन मैं सेवन डेज कोर्स के बाद आपको कराऊंगी। जहां पर नीचे पृथ्वी लोक पर बैठकर व्यक्ति अपने कर्म करता है। अपने स्थूल कर्मों के लिए अपने जन्म को भोगने के लिए पृथ्वी पर परमधाम से आत्मा आती है। परमधाम में कैसे रहती है आत्मा? परमधाम से आती है। परमधाम यानी कि जो सबसे ऊपर ब्रह्म लोक है। ब्रह्म कोई ब्रह्म लोक कहते हैं। कोई परमधाम कहते हैं, कोई शांति धाम कहते हैं। कोई मुक्ति धाम कहते हैं इनको। तो वहां से जब आत्मा नीचे आती है तो नीचे की यात्रा में वह फिर पृथ्वी पर आकर मूल वतन में यहां पृथ्वी लोक में अपना कर्म करती है। इस शरीर के द्वारा इस शरीर में आत्मा निवास करती है। मां के गर्भ में आत्मा निवास करती है। तो वो नीचे इस पृथ्वी लोक में पूरा भ्रमण करती है। कर्म करती है। यहां से जैसे आप ये इंद्रधनुष जैसा देख रहे हैं। यह तीन लोक के बीच के लोक है। सूक्ष्म वतन जिसमें ब्रह्मा जी, विष्णु और शंकर तीनों अपने सूक्ष्म शरीर में विराजित है। सबसे ऊपर आप जाएंगे तो ये जो परमधाम
00:11:34:04 में आप सिजरा देख रहे हैं। सिजरा कहते हैं शिव भगवान के साथ आत्माओं का सिजरा। सिजरा मतलब झाड़। झाड़ मतलब वृक्ष। वृक्ष मतलब जिसमें कल्प वृक्ष दिखाया है। जैसे हमारे बैज में भी वह कल्प वृक्ष दिखाते हैं। कल्प वृक्ष का मतलब है यह दुनिया का उल्टा वट वृक्ष जैसे वृक्ष का बीज जो होता है वो हमेशा ही पृथ्वी के तले में होता है। नीचे होता है। लेकिन इस सृष्टि रूपी रंगमंच का जो बीज है परमात्मा वो ऊपर की तरफ है। और पूरा झाड़ नीचे की तरफ है। झाड़ माना वृक्ष मतलब हम मनुष्य आत्माओं का वृक्ष उल्टा मतलब हम उल्टे लटके हुए हैं वहां पे तो वह आत्मा नीचे आती है और फिर आकर के हम इस पृथ्वी लोक में जन्म बाय जन्म अपने जन्म बदलते रहते हैं और मनुष्य अपना कर्म करता रहता है। मेडिटेशन जब आप करते हैं ब्रह्मा कुमारी के मेडिटेशन में हम आत्मा का वही स्वधर्म याद दिला के नीचे से ऊपर तक की यात्रा उसे सूक्ष्म स्वरूप में कराते हैं। कमेंट्री के द्वारा अनुभव के द्वारा हम यहीं पर अनुभव करते हैं कि भगवान शिव परमधाम में रहते हैं। परमधाम
00:12:49:13 के निवासी हैं। तो जब मैं मेडिटेशन कराती हूं आपको या मैं आपको स्वधर्म याद दिलाती हूं आत्मा का तो आत्मा का स्वधर्म सबसे पहले है शांति। तो आप परमधाम में जो देख रहे हैं वो जो लाल रंग का परमधाम नजर आ रहा है आपको वहां पर भगवान शिव के साथ सभी आत्माएं शांति में निवास करती हैं। इसीलिए हम कहते हैं कि आत्मा का स्वधर्म शांत है। तो वो शांति में रहती है। उसका सब चीजों का टाइम लिमिट है। कितने टाइम वो शांति में रहती है, कितने टाइम वो सूक्ष्म वतन में रहती है और कितने टाइम वो नीचे आती है। तो मेडिटेशन के द्वारा हम आपको इसका अनुभव कराते हैं तीन लोकों का। जब हम कहते हैं ब्रह्मा कुमार कुमारियां कहते हैं या ब्रह्मा कुमारी संस्था कहती है कि परमात्मा है और परमात्मा के अस्तित्व को हम अनुभव की बात करते हैं जब आपसे कि हम अनुभव करते हैं तो यह अनुभव इन तीन लोकों की यात्रा के थ्रू ही किया जाता है। जैसे नीचे बैठ के जब हम ध्यान करते हैं परमात्मा का तो सबसे पहले आत्मा का स्वधर्म याद दिलाते हैं। मैं आत्मा हूं। परमधाम निवासी हूं। जैसे मैं दो मिनट आपको मेडिटेशन कराना चाहूंगी। आप करेंगे शिव जी जी जी तो ब्रह्मा
00:14:04:14 कुमार इसका मेडिटेशन करते हैं हम। तो ये जो दोनों हाथ है दोनों हाथों की उंगलियों को आप आपस में ऐसे जोड़ ले बंद कर ले और इन्हें ऐसे करके आप ऐसे गोद में रख के इसे हाथ को बैठ जाए और खुली आंखों से ही आप जो मैं चिंतन कराती हूं उस चिंतन को आप करिएगा और इसी अनुभव को हम रोज रोज जब करते हैं तो हम रोज उस अनुभव को परमात्मा तक जोड़ने के लिए एक साधन मात्र एक सीढ़ी मात्र बनाते हैं। जैसे मैं अब आपको कमेंट्री देती हूं तो वो चिंतन आप करिएगा और ये चिंतन रोज रोज के करने से आप अभ्यस्त हो जाएंगे और इस अभ्यास को करने से परमात्मा का आवरण आपको मिलेगा।
00:14:53:15 तो विचार करिएगा आप इस चित्र को देखते हुए। ओम शांति। इसको आपको रिपीट नहीं करना चिंतन करना है। मैं आत्मा परमधाम निवासी शांति धाम में रहने वाली परमपिता शिव की संतान सर्वशक्तिमान परमात्मा की मीठी मीठी इतनी सारी शक्तियों से परिपूर्ण परमात्मा की हर प्रकार की लाइफ से सुसज्जित जैसे मैं सर्वशक्तिमान हूं। मैं आत्मा शांति के सागर की संतान हूं। मैं आत्मा पावन पवित्र हूं। मैं आत्मा ज्योति बिंदु हूं। मैं आत्मा ज्योति बिंदु स्वरूप परमात्मा का अंश परमधाम से नीचे की तरफ यहां इस पृथ्वी पर इस रंगमंच पर इस शरीर में विराजित हूं। इस शरीर की भी भकुटी के अंदर
00:16:09:15 इस मस्तक के बीचो बीच मैं आत्मा सुसज्जित हूं। अपने माथे में, अपनी भकुटी में और इस भकुटी से सूक्ष्म वतन की तरफ अपने इस शरीर से निकलते हुए जा रही हूं। सूक्ष्म वतन में जहां ब्रह्मा विष्णु शंकर निवास करते हैं। इस शरीर के भान को तोड़ते हुए शरीर की सभी कर्मेंद्रियों का चिंतन छोड़ते हुए सभी कर्मेंद्रियों को भूलते हुए अशरीरी आत्मा मैं परमधाम की तरफ जा रही हूं। धीरे धीरे मैं आत्मा अपने ज्योति बिंदु परमात्मा शिव जो सभी आत्माओं के परम पिता हैं। उस यात्रा की तरफ अग्रसर हो रही हूं। मैं आत्मा परमधाम में पहुंचती हूं। और ज्योति बिंदु का स्वरूप धारण करती हूं। अपने सूक्ष्म शरीर को भी इस सूक्ष्म वतन
00:17:24:26 में ही भूल जाती हूं। अब मैं आत्मा बिंदु स्वरूप होते हुए इस लाल लाल रोशनी में परमात्मा शिव के सामने विराजित हो जाती हूं। यहां इतनी सुंदर शांति है। इस परमधाम में इस ब्रह्म तत्व में इस परमात्मा के चारों तरफ फैली हुई रोशनी में मैं शांति का अनुभव करती हूं। मैं मुक्ति का अनुभव करती हूं। मैं परमात्मा से सर्व शक्तियां समेट रही हूं।
00:18:08:02 अपने अंतःकरण को पवित्र बना रही हूं। इस पवित्रता की किरणों से भरते हुए शक्ति का स्वरूप धारण करते हुए मैं आत्मा नीचे की तरफ फिर से वही पुन दो रही हूं। फिर वही सूक्ष्म शरीर धारण करती हूं। और फिर से नीचे की तरफ बैठे इस शरीर में प्रवेश करती हूं। मेरा यह अभ्यास,
00:18:46:00 मेरा यह चिंतन लेकर मैं परमात्मा की सर्व शक्तियां महसूस करते हुए इस शरीर को वाइब्रेशन दे रही हूं। और शरीर में उस शक्ति को फील कर रही हूं। ओम शांति ओम शांति ओम शांति तो शिवश जी जी ये अनुभव तीन लोक का है जो हम मेडिटेशन के द्वारा बताते हैं। और इसी से हम विश्व शांति की बात करते हैं। यहां हम से परमात्मा के चिंतन की बात करते हैं और हम रोज ही यह मेडिटेशन सभी सेंटर्स पर कराते हैं। तो और मैं आपको कोर्स की बुक दूंगी। रोज आपको इस कोर्स की बुक में से इसको पढ़ना है। जो इसके चारों तरफ लिखा हुआ है। हमने डिटेलिंग दी है उसको आप पढ़ सकते हैं। यही आज का चैप्टर है आज क्योंकि मैंने आपको राजयोग कराया है। तो इसके बाद में आप शांति में हूं तो ज्यादा बात नहीं कर। ओम शांति।
00:20:02:00 अरे तो मैं सवाल नहीं करूंगा। अब आप बात करिए। सवाल करिए तो मैं आंसर। अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा। नहीं मैंने कहा कि मेरा चैप्टर क्लोज हो रहा है क्या? हो गया मेरा चैप्टर क्लोज। [हंसी] मेरे को तो परमिशन हंसने की भी नहीं है ना इस समय। आप तो हस मैं समझ बताइए सबसे पहली बात है कि ये ब्रह्मा विष्णु महेश को किसने बनाया? देखिए ब्रह्मा विष्णु महेश भी परमात्मा शिव की ही रचना है।
00:20:43:27 परमात्मा शिव ने ब्रह्मा विष्णु महेश को बनाया है। हां जी। यानी ब्रह्मा विष्णु महेश भी नष्ट होते हैं। ब्रह्मा विष्णु महेश अलग है। शिव परमात्मा निराकार अलग है। नहीं नहीं मैं कह रहा हूं ब्रह्मा विष्णु महेश नष्ट होते हैं या नहीं? ब्रह्मा विष्णु महेश नष्ट होते हैं नहीं ये इस तरह से तो प्रश्न अलग ही हो गया कि नष्ट होने में मैं क्या जवाब दूं। मेरे पास इसका तो कोई जवाब नहीं है। लेकिन हां सभी आते और जाते हैं। शरीर छोड़ते और लेते हैं। नहीं ब्रह्मा विष्णु महेश तो शरीर धारण नहीं वो तो वो यहां पर परकाया प्रवेश इत्यादि करते हैं मगर जो सूक्ष्म संसार है जो आपका सूक्ष्म लोक वहां तो ब्रह्मा विष्णु महेश सदैव एक्सिस्ट कर रहे हैं ना हां जी तो उनको कोई समय ऐसा था जब ब्रह्मा विष्णु महेश नहीं थे
00:21:41:06 नहीं ऐसा नहीं है हर बार ही आते हैं वो रूप बदल के आते हैं बार-बार नहीं नहीं मतलब कभी ऐसा था कि वो नहीं थे। ऐसा नहीं था। वो हर बार थे। यानी कि वो यानी कि वो सदा सर्वदा रहने वाले ब्रह्मा विष्णु महेश हां जी। हां जी। अच्छा। और विष्णु जी है वो सर्वव्यापक भी है। वो पालन करता है। सर्वव्यापक नहीं है। वो पालन करता है। पालते हैं। इस सृष्टि को प्रकृति को पालते हैं। पालन करता है। नहीं विष्णु का मतलब विष्णु का मतलब तो सर्वव्यापक हो गया ना। व्यापक विष्णु आप इससे अगले वाला चित्र दिखाइए तो मैं आप उसमें ब्रह्मा विष्णु शंकर का हम क्लियर करेंगे त्रिदेवों का त्रिदेवों का चित्र निकाल लीजिए उसप जाने की आवश्यकता नहीं है ये ज्यादा क्लियरली मैं बता पाऊंगी आप ब्रह्मा विष्णु शंकर का इसमें तीसरा ही चित्र है यही तीसरा चित्र है थोड़ा ऑपरेटर्स को बोल के करा लीजिए इसमें तो देखिए अगला पेज क्या ब्रह्मा विष्णु शंकर का ही है कर्तव्य परमात्मा के कर्तव्य वाला निकालिए
00:22:52:24 समझ गए तो इस पर आप आगे आगे चलिए इस पर ज्यादा पूछेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा आगे परमात्मा के दिव्य कर्तव्य लिखा होगा चित्र के पास थोड़ा देख लीजिए ये नहीं आप चित्र को देखिए लिखावट को नहीं आगे चलिए और आगे चलिए ब्रह्मा विष्णु शंकर परमात्मा के दिव्य कर्तव्य लिखिए ऐसा फोटो आएगा ऐसा हां जी ये जी आप पूछिए आप अ जो परमात्मा है वो थोड़ा ऊपर कर लीजिए चित्र को ऊपर कर लीजिए चित्र को थोड़ा और थोड़ा और बस बस बस बस जो परमात्मा का लोक है वो सबसे ऊपर वाला लोक है हां जी वो शिव बाबा है शिव धाम शिव बाबा का लोक हां जी तो शिव शिव बाबा बाबा स्वयं सर्वव्यापक नहीं है। नहीं सर्वव्यापक नहीं है वो। अच्छा वो कार्य क्या-क्या करते हैं? मतलब उनका ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की स्थापना करते हैं। दिव्य कर्तव्य दिखाए। ब्रह्मा ब्रह्मा द्वारा करते हैं। वो या ब्रह्मा ही करते हैं। वो कह देते हैं। द्वारा शिव इस सृष्टि की स्थापना करते हैं। करवाते हैं या करते हैं?
00:24:08:00 करते हैं करवाते नहीं है करते हैं तो क्या वो खुद घुसते हैं क्या ब्रह्मा जी के अंदर हां जी खुद घुसते हैं भगवान शिव परमात्मा के अंदर मतलब परमात्मा शिव ब्रह्मा के अंदर आकर परताया प्रवेश करके कार्य कराते हैं सृष्टि की रचना यानी कि स्थापना इत्यादि अच्छा वैसे अलग से परमपिता का चैप्टर आगे आएगा ना वो नहीं आप इस पर चिंतन करिए क्योंकि आपने मुझसे ब्रह्मा विष्णु शंकर पूछा तो एक एक करके कर लेते हैं। हां हां हां तो अभी मैं यह पूछ रहा हूं कि ईश्वर जो आप बता रहे हो जो सबसे ऊपर वाले लोक में बैठा है वो सर्वव्यापक तो है नहीं जी तो उसका कंट्रोल कैसे होता है सब जगह सब जगह उसका कंट्रोल है या नहीं तो मैं इसका आंसर दे दूं कंट्रोल है कंट्रोल है सब जगह जैसे ये चित्र देख रहे हैं आप जो निकलवाया मैंने तो इसमें ब्रह्मा द्वारा स्थापना है विष्णु द्वारा पालना है और शंकर द्वारा महाविनाश है। तो यह हमने चित्र दिखाया। आप चित्र को ध्यान से देखिए श्रीमान जी और समझिए मैं क्या कहना चाह रही हूं। आप उसमें से क्वेश्चन करिए जो
00:25:23:03 भी करना है। ये ब्रह्मा जी बैठे हैं। इनके अंदर भगवान श्रीमान मैं मैं क्वेश्चन इसलिए कर रहा हूं कि ना तो ब्रह्मा जी सर्वव्यापक हैं ना विष्णु जी सर्वव्यापक हैं ना महेश जी सर्वव्यापक हैं। तो फिर ईश्वर का कंट्रोल हो कैसे रहा? ईश्वर भी परमात्मा भी सर्व्यापक नहीं है। तो परमात्मा का कंट्रोल लेखराज दादा लेखराज के अंदर प्रवेश किया और पूरी सृष्टि को ज्ञान दिया। नहीं नहीं वो ठीक है वो अच्छी बात है वो आप बता रही मैं कह रहा हूं पूरी सृष्टि में उसका होल्ड है कि नहीं? होल्ड है तो कैसे है? क्योंकि वो तो एक जगह पे है। होल्ड है कर्तव्य करवाते हैं भगवान। नहीं कर्तव्य करवाते अच्छी बात है। वो हर जगह पर उनकी उनका वो है पहुंच रीच है कि नहीं हर जगह पर हां क्यों नहीं है रीच है तो वो कैसे है क्योंकि वो तो एक ही जगह है वो तो जहां चाहे वहां कहीं भी किसी के भी पास आकर के कर सकता है ना करा सकता है ना नहीं करवा सकता है वो मैं अलग बात है जैसे मान लीजिए कि कहीं पर कुछ ऐसा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए ठीक है तो उसको
00:26:38:12 रोकना है, नियंत्रण करना है। उसे नियंत्रित करना है। तो परमात्मा जो है अपने किसी एक लोक में बैठा हुआ है। तो उसको वो वहां उड़ के जाएगा या जैसे भी ट्रांसमिट हो के जाएगा मगर वो टेलीपोट होगा। सबसे पहली बात तो है कि वहां जो अनिष्ट होने वाला है वो उसको ज्ञात कैसे हुआ? उसको पता कैसे चलेगा कि वहां अनिष्ट होने वाला है। हां। सर्वज्ञ है ना? सर्वज्ञ है ना भगवान तो सर्वज्ञ के लिए भी उसको सब जगह होना पड़ेगा ना सर्वज्ञ वो इसीलिए है कि वह सर्व्यापक है जैसे सर्वज्ञ है जैसे मान लीजिए मैं अगर सर्वज्ञ है सर्व्यापक और सर्वज्ञ में फर्क है मैं बता रहा हूं ना फर्क है मालूम है मगर सर्वज्ञ होने के लिए सर्व्यापक आवश्यक है। जैसे कि मेरा मन अमेरिका तक सोच सकता है कि अमेरिका में इस समय कुछ हो रहा होगा वह फ्री है। मगर मैं यह जान नहीं सकता ऑब्जेक्टिवली कि वहां एक्चुअल में इस समय कहां कौन से शहर में क्या हो रहा है क्योंकि मैं वहां पर नहीं हूं। मगर सर्वज्ञ यदि मुझे होना है कि मुझे अमेरिका में होने वाली घटनाओं का भी बिल्कुल प्रॉपर ज्ञात हो तो मेरा वहां पास
00:27:53:15 होना भी जरूरी है। यानी कि अगर मेरे को अगर वहां की नॉलेज मिल रही है तो मुझे वहां पर होना जरूरी है वो नॉलेज प्राप्त करने के लिए। परमात्मा सर्वव्यापक ही सर्वज्ञ हो सकता है। परमात्मा को वहां होने की जरूरत नहीं है। परमा ठीक है। तो ये तो एक क्वेश्चन छूट रहा है कि परमात्मा वहां पर होने की जरूरत नहीं। फिर उसको इंस रही है वो आप नहीं बता रहे। मुझे कोई इंफॉर्मेशन तब आती है जब मैं वहां जो चीजें हो रही होती है उनके कनेक्शन में होता हूं। तो परमात्मा को इंफॉर्मेशन कैसे आती तभी कह रहे हैं ना कि उसको ज्ञान है। स्वतः परमात्मा को ज्ञान है सब चीजों का तो उसको कोई आके बताने की जरूरत नहीं होती है। वो सर्वज्ञ है। उसे मालूम ही है कहां क्या हो रहा है। तो ये फिर क्वेश्चन रेज हो रहा है ना कि कैसे मालूम है उसको। वो अगर आप एक आप शक्तिमान है तभी तो सर्वशक्तिमान है। तो आप उसमें रोड़ा लगा रहे हो ना कि वो वहां पर नहीं है। अमेरिका में नहीं है वो। अमेरिका में भी अगर वह है एक ही समय पर वह सर्वत्र व्याप्त है तब तो यह बात मानी जा सकती है कि वह सब जगह जानता है सब कुछ जानता है मगर आप कह रहे हो वो वहां पर नहीं है तो फिर जान कैसे रहा है दूसरी दूसरी बात नहीं
00:29:08:21 होते हुए भी जानना ही तो परमात्मा की शक्ति है नहीं होते हुए भी जानना सब जगह नहीं होते हुए भी जानना ये परमात्मा की शक्ति है। ये सब जगह नहीं है मगर वो जानता सब कुछ है। ये परमात्मा की तब हमने चलो फिलहाल फिलहाल मैं इसको लिख लेता हूं कि ना होते हुए भी जानना हम उसे कहते हैं जानी जाननहार नहीं नहीं ठीक है अभी मैं जो मूल क्वेश्चन है ना तो अब परमात्मा का होल्ड कैसे होगा कि वहां पर वो नहीं गिरे जिस समय वो गिर रही होगी कुछ मान लीजिए कुछ कुछ अनिष्ट हो रहा है जिसको नहीं होना चाहिए तो परमात्मा का होल्ड कैसे होगा नहीं अनिष्ट होना या ना होना जितने भी होनी अनहोनी हो रही है वो तो सर्व ही अपने कर्म के भोगना भोग रहे हैं। हो रहा है जो भी वो कर्म के सिद्धांत अनुसार चल रहा है। वो कर्म की गति को रोकने का कर्ता भी परमात्मा का नहीं है। परमात्मा कर्म बंधन से परे है। कर्म के बंधनों में जो कोई आप यहां पर मुझे ये क्लियर कर दीजिए कि परमात्मा काम क्या-क्या करता है? तब मैं उसी से पूछूंगा। परमात्मा के कार्य क्या-क्या है? अगर शिवा जी फिर वो वाली ब्रह्मा कुमारी नीलिमा से
00:30:23:25 बात कर रहे हो आप तो मैं वो टूटी हुई ब्रह्मा कुमारी नहीं हूं। मैं वो वाली ब्रह्मा कुमारी नहीं हूं जो पल्ला छुड़ा के उठ के चली जाएगी। मैं फिर वो सारी चीजों का जवाब दूंगी आपको। फिर आपको लगेगा कि हां क्या बोल रहे थे आप? मैं पूछ रहा हूं कि परमात्मा के आप कार्य बता दीजिए। क्या है? परमात्मा के कार्य हैं। वही मैं उसी पे आ रही थी कि मेन क्वेश्चन ये कर लीजिए। इसका मैं आंसर दे देती हूं। ब्रह्मा द्वारा स्थापना जो इस चित्र में दिखाई है। नीचे लिखा है। चित्र के नीचे पढ़िए आप और विष्णु द्वारा पालना और शंकर द्वारा महाविनाश ये परमात्मा शिव का कर्तव्य है। ब्रह्मा द्वारा उत्पत्ति और स्थापना उत्पत्ति नहीं स्थापना उत्पत्ति वही हो गई। स्थापना ही तो हो गई। हां हां वही उत्पत्ति उत्पत्ति स्थिति समार उत्पत्ति थी। उत्पत्ति स्थिति संहार हां जो भी कह लीजिए आप स्थापना पालन और क्या है संहार यानी इसमें से कोई काम डायरेक्ट शिव जी नहीं कर रहे हैं जी करा रहे हैं करा रहे हैं नहीं वो आप कह रही थी ना ब्रह्मा जी के अंदर आके करते हैं हां हां परमात्मा
00:31:38:28 का ही काम है सारा लेकिन ये कराते हैं इनके द्वारा नहीं इनके द्वारा कराते हैं कि इनके अंदर घुस के करवाते हैं नहीं शिव पर भगवान शिव ब्रह्मा द्वारा अंदर मतलब अवतरित होकर आकर के कराते हैं। हम केवल ब्रह्मा ब्रह्मा में परकाया प्रवेश करके वो स्थापना कर देते हैं। जी वो कार्य और विष्णु यानी कि जब ब्रह्मा जब वो ब्रह्मा जी के अंदर आते हैं काम कराने के लिए स्थापना कराने के लिए तो जब वो चले जाते हैं तब ब्रह्मा का काम क्या होता है? कुछ नहीं। तब ब्रह्मा नॉर्मल जैसे हम और आप इंसान अपने अपने कर्तव्य कर रहे हैं। ऐसे वो कर्तव्य करते थे। अब वो शरीर में नहीं है। अब वो शरीर छोड़ चुके हैं दादा लेखराज जो ब्रह्मा है जो दिखाए हुए हैं यहां और उस समय वो अपनी स्टडी करते थे। अपनी स्वर्णति करते ब्रह्मा तो ब्रह्मा शाश्वत नहीं है। आप अभी कह रहे थे ना ब्रह्मा विष्णु महेश शाश्वत है। आते हैं अलग-अलग रूप धारण करके। कभी ब्रह्मा ही विष्णु बनते हैं। विष्णु ही कृष्ण बनते हैं। कृष्ण ही राम बनते हैं। फिर राम ही
00:32:54:16 राम के ही जीवन बदलते रहते हैं। फिर लास्ट तक जब वो गिर जाता है। बिल्कुल वो अपने स्वधर्म को भूल जाता है। अपने वो आत्मा एकदम से पापी हो जाती है। काली हो जाती है। तभी तो गोरा कृष्ण और काला कृष्ण दिखाया है। उसके भी आगे चैप्टर आएंगे। जब वो काली आत्मा हो जाती है। बिल्कुल काला हो जाता है कृष्ण। फिर उसके बाद वो दादा लेखराज बनते हैं संगम पे। तब परमात्मा उनके अंदर फिर से आते हैं और फिर उसे याद दिलाते हैं कि तुम्हारे कौन से जन्म है? तुम कौन हो? तुम तुम ही देवता थे और फिर से तुम्हें देवी देवता धर्म स्थापन करना है। ये कर्तव्य कराते हैं परमात्मा। ब्रह्मा से ब्रह्मा से या तीनों से तीनों से नहीं तीनों से नहीं ब्रह्मा से। देखिए अभी मैं थोड़ा सा कंफ्यूज हो रहा हूं यहां पे। पहले तो ब्रह्मा विष्णु महेश सूक्ष्म लोक वाले हैं। उसके बाद ब्रह्मा जी यहां मनुष्य के रूप में जन्म लेते हैं। जी ऐसा ही है। स्थापना करने के लिए जी। स्थापना यानी कि धर्म की स्थापना करने के लिए। जी धर्म की स्थापना करनी। अच्छा यहां से दो बातें निकल के आती है। पहली बात तो ये आ जाती है कि यानी कि संसार बनाने का काम नहीं है ब्रह्मा का। ये
00:34:09:18 धर्म स्थापना काम है ब्रह्मा का। हां जी। तो संसार कौन बनाता है? फिर संसार बनाने वाले क्वेश्चन पर आप वो सांसारिक लोगों के ज्ञान से अगर पूछोगे तो वो एक अलग थोरी है और जैसे स्थापना हुई धर्म की फिर वो अलग थ्योरी है। हम लोग कहते हैं कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं जैसा बताया जाता है। नहीं मैं वो छोड़ दीजिए। आप जो बताना चाहते हैं वो बताइए। हम यह बताना चाहते हैं कि परमात्मा ब्रह्मा द्वारा इस सृष्टि की पुन स्थापना करते हैं। कैसे? आत्मा का धर्म याद दिला के आत्मा को याद दिला के तुम्हारे स्वधर्म शांति है। वो धर्म स्थापना करते हैं। यानी कभी ऐसा था कि यह सृष्टि नहीं थी कि सृष्टि भी हमेशा से है। नहीं सृष्टि है। शुरू से सृष्टि है और सृष्टि सृष्टि यानी पृथ्वी जो गोल पृथ्वी है सूर्य चंद्रमा इत्यादि सब है। हां जी। यानी कि जो ब्रह्मा कुमारी का जो ईश्वर है वो रचयिता नहीं है इनका। क्यों नहीं है? तीनों का रचयता होने के कारण ही तो वो रचनाकार है। तो आप तो कह रहे हमेशा से है। पर परमात्मा तो इनसे भी पहले से है।
00:35:26:04 यानी कि कभी रचा ना इनको हां कभी तो रचा इनको और सृष्टि को परमात्मा ने नहीं रचा। ब्रह्मा विष्णु महेश को रचा। परमात्मा ने रचा। ब्रह्मा विष्णु शंकर के द्वारा सृष्टि ने सृष्टि को रचा है ना ब्रह्मा विष्णु के द्वारा यानी कि ब्रह्मा जी धर्म संस्थापना ही नहीं करते सृष्टि भी बनाते हैं। हां जी ब्रह्मा ब्रह्मा जी जो है वो सृष्टि भी बनाते हैं। है ना? ऐसा कह सकते हैं। हां ऐसा कह सकते हैं। क्लियर नहीं है ये। नहीं क्लियर है लेकिन वो मेरे आंसर में कुछ और है। आपके समझने में कुछ और है। मैं भी धर्म स्थापना की बात कर रही हूं बार-बार कि नहीं जैसे मैं मैं याद दिलाते हैं ना मैं ये कह रहा हूं क्या ब्रह्मा कुमारी के अनुसार ऐसा कभी था जब ये पृथ्वी थी ही नहीं। ऐसा नहीं था। पृथ्वी सदा से थी। पृथ्वी सदा से थी। वही मैं कह रहा हूं। इसका मतलब ये नदियां, पहाड़, झरने इत्यादि ये सब सदैव से है। और सदैव रहेंगे एज इट इज रहेंगे। हां जी। अच्छा। तो जैसे जो कई नदियां सूख रही हैं और
00:36:41:08 विनाश हो रहा है। जैसे आपने बताया इनके द्वारा विनाश हो जाता है। तो विनाश होता है तो किस चीज का विनाश होता है? सृष्टि का ही विनाश होता है। यानी कि जो पृथ्वी इत्यादि यह सब नहीं होती है। फिर विनाश के बाद किस चीज का विनाश होता है? रिफॉर्म होता है। नहीं विनाश ये जो ब्रह्मा विष्णु महेश शंकर जी का काम क्या है विनाश का मतलब परिवर्तन होना शंकर जी का कार्य क्या है ये बताइए शंकर जी का कार्य है विनाश की लीला करना मतलब जब प्रलय आती है भूकंप आते हैं बाढ़ आते हैं या कोई ऐसे काम होते हैं तो हम बोलते हैं ना बम बम भोले तो बम बम का मतलब वही है कि वैज्ञानिक जितने भी चीजें बना रहे हैं वो सब इनहीं के थ्रू होता है। बम बम विस्फोट [हंसी] ये सब सब यही करते हैं। अच्छा ठीक है। तो ये तो ठीक है। मगर मैं ये कह रहा हूं कि इसका मतलब कि ये कुछ ऐसा करते हैं कि जो निर्मित दिख रहा है। है ना? वो नष्ट हो जाता है। जो निर्माण कार्य है वो नष्ट
00:37:56:12 हो जाता है। हां जी। यह कुछ ऐसा करते हैं ना जैसे मान लीजिए कि कोई बिल्डिंग थी तो इन्होंने बिल्डिंग तोड़ दी। जी ठीक है? यानी कि बिल्डिंग एक ऐसा स्टेज आई कि बिल्डिंग अब नई है। तो जो क्या जो शंकर जी हैं वो केवल कुछ नदियां पहाड़ झरने इत्यादि की प्रलय करते हैं या फिर वो पूरी पृथ्वी इत्यादि सब समाप्त सफाई करते हैं। सारी सृष्टि का विनाश करते हैं। विनाश मतलब कि एक समय ऐसा होता है जब पृथ्वी इत्यादि नहीं होती है। पृथ्वी पे चेंज होता है। पृथ्वी नहीं सृष्टि का सृष्टि का विनाश कह रही ना विनाश किस रूप में विनाश क्या होता है ऐसा वो विनाश में विनाश परिवर्तन होना मतलब एक युग से दूसरे युग में परिवर्तन होना एक अरे एक युग में एक दूसरे युग में प्रवेश करना अरे नीलिमा जी एक युग से दूसरे युग में प्रवेश तो युग में ब्रह्मा कुमारी नीलिमा बहन नीलिमा बहन नीलिमा बहन हां दीदी नीलिमा दीदी हां हां बोलिए दीदी ये बता जो आप प्रवेश करने वाली बात कह रही है ना ये प्रवेश तो मनुष्य करेगा या फिर जीवात्मा करेगी एक युग से दूसरे
00:39:11:15 युग में तो अगर वो सृष्टि का विनाश कर रहे हैं ठीक है पहली बात तो ये है कि विनाश का अर्थ परिवर्तन होता है ये कहीं पर किसी भी प्रकार से सिद्ध नहीं मगर बोल रहे हैं उसको हम बिल्कुल विनाश नहीं बोल रहे हैं हां तो ठीक है तो अब यानी कि जो शंकर जी का काम है वो परिवर्तन है विनाश नहीं हां हां जी तो उनका काम है जैसे और फिर वो आप ये बता रही हैं कि जो पृथ्वी इत्यादि है उसमें वो कुछ थोड़ी बहुत तोड़फोड़ करते हैं। पूरा बिल्कुल समूल नाश नहीं करते। परिवर्तन होता है। गंदगी का सफाई में परिवर्तन होता है। अच्छे गुणों का आचरण आता है। बुरे गुण चले जाते हैं। आत्मा पवित्र होती है। सृष्टि का महाविनाश कहलाता है। वो परिवर्तन यानी कि अच्छे से बुरा वो बुरे से अच्छा हो जाता है। अच्छे में प्रवेश करना। अच्छे से बुरे से अच्छा। बुरे से अच्छा एक अच्छे से बुरा दोनों ही है। अच्छे से बुरा भी होता है। नहीं नहीं शंकर जी का काम अच्छे से बुरा नहीं होगा ना? हां शंकर जी का काम अच्छे से बुरा नहीं है। मैं शंकर जी का बुरे से अच्छा है। मैं शंकर जी का बुरे
00:40:26:21 से अच्छा है। हां शंकर जी का बुरे से अच्छा है। तो अब जब शंकर जी का बुरे से अच्छा है नीलमा जी नीलमा बहन तो उसमें ये दिक्कत आ रही है कि जैसे बुरे से अच्छा मनुष्यों के लिए तो कर दिया कि उसको अच्छे गुण दे दिए। वो अच्छे आचरण वाला हो गया। ठीक है? वह भी उसमें बहुत सारे प्रश्न मगर मैं यह कह रहा हूं जो भौतिक पदार्थ हैं जड़ पदार्थ जैसे झरने पर्वत जंगल पृथ्वी इत्यादि इनमें कुछ चेंजेस आते हैं या नहीं आते हैं क्यों नहीं आते ये जो कलयुगी कलयुगी चीजें होती है वो सतयुगी होती है वहां सत यानी कि ये समझ गया यानी कि ये अपडेट हो जाती है जो डाउन डाउनफॉल हो गया था वो अपग्रेड करते हैं अपग्रेड अपग्रेड करते हैं शंकर जी जैसे नदियां सूख रही है तो उनमें दोबारा जल आ जाता है और जो जो चीजें दृश्य में जो अच्छे नहीं लग रहे हैं वो सुंदर हो जाते हैं ये सब करते हैं तो फिर ब्रह्मा जी क्या कर रहे हैं ब्रह्मा जी तो फिर अंत में ब्रह्मा का पाठ होता है जब कलयुग
00:41:41:27 अंत होता है और संगम का सॉरी सतयुग का आदि होता है। सतयुग भी तो वही कर रहे हैं। सुनिए ना सतयुग के आदि और कलयुग के अंत के बीच का एक समय होता है संगम युग जिसमें मैं और आप यहां बैठे हैं। इस संगम युग में दादा लेखराज के स्वरूप में ब्रह्मा आते हैं और उनके तन में भगवान शिव प्रवेश करते हैं और वो प्रवेश करके आत्मा को याद दिलाते हैं कि हे आत्मा तेरा स्वधर्भ शांति है। तो अभी जो मैंने आपको मेडिटेशन कराया वह सारा याद दिला के फिर से पवित्र करते हैं इस पूरी सृष्टि को और जो पवित्र आत्माएं ब्रह्मचर्य को धारण करती हैं ब्रह्मा कुमार कुमारियां जो बनते हैं वो इस सृष्टि रूपी वट वृक्ष के तने के अंदर जो थड़ होता है वृक्ष का वो एक्चुअली हम ब्रह्मा कुमार कुमारी उस धर्म को धारण करते हैं और जब यह धर्म धारण करते हैं तो उसी से हम पूरी सृष्टि को मैं समझ गया एक तरीके से मैं समझ गया एक तरीके से ब्रह्मा जी है जड़ में ब्राह्मण है मतलब ब्रह्मा कुमार कुमारी उसके बाद हम आते हैं सतयुग में देवी देवता बनते हैं फिर हम
00:42:57:03 आते हैं त्रेता युग में फिर हम अपने स्वधर्म को थोड़ा भूलते हैं तो वो आत्मा थोड़ी और विकारों में लिप्त होती है फिर उसके बाद हम आते हैं द्वापर में फिर कलयुग में फिर से संगम पे तो तो ये फिर से हम संगम पे इस तरह स्थापन करते हैं भगवान मैं वो चीज मैं समझ गया कि एक तरीके से मैं अभी तक जो समझ पाया हूं ब्रह्मा जी केवल ज्ञान देते हैं जिसके कारण वो अपना जो स्पिरिचुअल लाइफ है उसमें आगे बढ़ सकते शिव ज्ञान देते हैं ब्रह्मा के तन में आके शिव जी ज्ञान देते हैं ब्रह्मा के तन में आके तो ब्रह्मा जी केवल और केवल ज्ञान देने के लिए है वो उत्पत्ति जो एक सृष्टि रचना हम लोग मान रहे हैं वो शिव जी रचना ही हुई ना वो शिव जी रचना ही हो गई ना ज्ञान मैं भौतिक पदार्थों की रचना की बात कर रहा हूं जैसे पृथ्वी पदार्थ की रचना नहीं करते वो तो मात पिता से शरीर मिला ही है हमें नहीं नहीं शरीर मनुष्यों की बात नहीं कर रहा जो नदियां है वो बना दी झरने बना दिए जंगल बना दिए परमात्मा ने शिव ने बनाया अभी तो शंकर कहा आपने शिव और शंकर में भेद है आप शंकर कह रहे हैं मैं शंकर नहीं कह रही हूं
00:44:12:04 नहीं नहीं अभी हम लोग जब शंकर के कर्म डिसाइड कर रहे थे ना प्रलय के टाइम पे आप गलत समझ रहे हैं मैंने शंकर का विनाश के लिए बात करी है शिव की विनाश के लिए बात नहीं करी शिव और शंकर अलग-अलग है मैं ये कह रहा हूं समझ गया शंकर का काम क्या है विनाश दोबारा पूछ रहा हूं विनाश अब जब मैंने पूछा आपसे कि शंकर का काम क्या है तो विनाश कहा आपने फिर मैंने उस विनाश को खोला जब एक्सप्लोर किया तो उसमें आपने कहा कि विनाश का मतलब है परिवर्तन ठीक है? हां। तो जब आपने परिवर्तन कहा तो मैंने पूछा किस प्रकार का परिवर्तन? तो आपने कहा अपग्रेड करना यानी कि जो करना वो परिवर्तन करना वो सुख देना वो सारा शिव का काम है। शंकर का नहीं। तो बस शंकर का काम क्या है? विनाश करना। मतलब चीजों को नष्ट खत्म कर देना या गायब कर देना। जैसे जैसे आप सुनो सुनो मैं इस तरह समझाती हूं। आपको एक एग्जांपल देती हूं। हम जी ओ डी गॉड जी माना जनरेटर जो जनरेट अरे भाई ओ माना ऑपरेटर मतलब विष्णु ऑपरेट करते हैं और डी माना डिस्ट्रयड मतलब विनाश करते हैं। शंकर विनाश करते हैं। तो अरे भाई विनाश करते हैं तो
00:45:27:06 किस चीज का करते हैं? आप तो कह रही हो कि वो विनाश का मतलब चीज को नष्ट कर देना। हां पूरी को नष्ट करने का। यानी कि एक समय ऐसा आता है जब यह धरती इत्यादि नहीं होती है। धरती होती है वह युग नहीं होते हैं। विनाश किस चीज का होता है? सृष्टि का प्रलय आ के तो सृष्टि में गलत हो जाती है। खराब हो जाती है। सृष्टि में वही पहाड़ खराब तो इन्होंने इंसानों ने कर दिया ना कर्मों से अपने। हाँ तो ये जब सब कुछ खराब हो जाता है। जैसे अभी नेपाल में भूकंप आया देखा आपने सब खत्म हो गया। इस प्रकार का काम शंकर जी का है। यानी कि एक तरीके से जो शंकर जी हैं वो
00:46:16:21 बस ये जो अर्थ पैक लाना सब कुछ खत्म करने के लिए मगर आप सब कुछ कहने के बाद भी आप उसको सीमित कर रही है ना। सब कुछ खत्म का मतलब सब कुछ खत्म। प्रलय आई तो पृथ्वी तो रही ना। चीजें खत्म हो गई। पर पृथ्वी तो है आज मतलब लेकिन पृथ्वी समझ गया मतलब उस नदी नहीं होगी पहाड़ नहीं होंगे झरने नहीं होंगे केवल एक फ्लैट सरफेस होगा पृथ्वी हां जी ऐसा है हां जी गड्ढे भी नहीं होंगे बिल्कुल सब जगह एक जैसी प्रलय होगी तो सब कुछ होगा गड्ढे भी होते हैं सब कुछ होता है वो प्रलय में क्या नहीं होता है जो जो प्रलय में होता है वो सब होगा पर पृथ्वी तो प्रलय में मुझे बता दीजिए ना क्या-क्या है। पृथ्वी के ऊपर से सब चीजों का नष्ट हो जाना। पर ये प्रलय ये प्रलय है। अच्छा ठीक है। बड़ी देर लगी यह फिक्स होने में कि शंकर जी का काम यह है। तो अब जब पृथ्वी के ऊपर पेड़ उगे पेड़ नहीं है ना ही पृथ्वी के गर्भ में बीज है पेड़ के कुछ नहीं है। केवल एक मान लीजिए एक जड़ मट्टी का गोला है। गर्भ में तो देखो शिवा जी गर्भ में तो सब कुछ होता है।
00:47:31:25 आज अगर नेपाल में बाढ़ आई है तो क्या वहां पर हजारों लाशें हजारों बीज पौधे वो ऐसे नहीं हुआ होगा ऊपर का नीचे नहीं हुआ होगा जैसे आप एग्जांपल ले लीजिए द्वारिका समंदर में चली गई समंदर में चली गई द्वारिका फिर वो ऊपर आएगी फिर वो नीचे जाएगी इस तरीके का परिवर्तन मैं प्रलय बोल रही हूं नीचे तो होगा ना सब कुछ यानी कि जिन चीजों से वह वापस आ सकते हैं जिन चीजों से पुनः प्रकट हो सकते हैं। यह सब जितने भी भौतिक जगत हम देखते हैं वह सब चीजें पृथ्वी में समाहित हो जाती है। लय हो जाता है उनका। हां जी। जिनसे वो वापस वापस बनाई जा सकती है उससे निकल के। ठीक है? शंकर जी का ये कार्य है। तो अब वापस आ जाते हैं कि अभी हमने डिसाइड शंकर जी का यहां कार्य खत्म हो गया। अब वापस आ जाते हैं कि ब्रह्मा जी के रूप ब्रह्मा जी के शरीर में प्रवेश करके ईश्वर जो चीजों का वो हो गया ना लय पृथ्वी के अंदर सब सारी चीजें पृथ्वी में समा गई है शिव जी के द्वारा तो ब्रह्मा जी आकर के दोबारा वहां बीजारोपण या पानी देना या झरने बनाना ये सब चालू करते होंगे ना कि नहीं करते जी ब्रह्मा
00:48:47:08 जी जो है वो ज्ञान रूपी सृष्टि बनाने का कार्य करते लेखराज एक साधारण मनुष्य थे। लेखराज एक साधारण मनुष्य थे और तो लेखराज सृष्टि के सुनिए लेखराज जी सृष्टि का झरने बनाना ये बनाना थोड़ी ना करेंगे तो ये कैसे बना वो कैसे बना? सुनिए वो कैसे बना उस पर बात मैं करूंगी। लेखराज जी को शिव भगवान ने नाम दिया ब्रह्मा और उनके अंदर वह आए परकाया प्रवेश हुआ फिर उन्होंने हमें अपने स्वधर्म को याद दिलाया तब हम जाकर के इस ज्ञान रूपी सृष्टि को बना रहे हैं अच्छा मतलब अपने ब्रह्मचर्य से अपने गुणों से इसको अच्छा बना रहे हैं वो है सृष्टि की स्थापना जो आप बात कर रहे हैं कि ये मनुष्य का बनाना या जो भी आप बोल रहे हो यह लेखराज को जिनको ब्रह्मा नाम दिया भगवान शिव ने उनका काम नहीं है। ये कर्म अनुसार अपने आप आत्माएं पैदा होती है और अपने आप जाती है यहां से। नहीं नहीं आत्मा के पैदा होने की बात नहीं कर रहा हूं। जैसे
00:50:02:09 शिव जी ने झरनों को पृथ्वी में समाहित कर दिया। पेड़ों को समाहित कर दिया। शंकर जी ने शंकर जी ने सॉरी सॉरी गलती हो गई। गलती शंकर जी ने जितनी भी व्यवहार जगत में उपयोग में आने वाली जो संसाधन है प्राकृतिक उन सबको शंकर जी ने पृथ्वी में समाहित कर दिया लय हो गया उन सबका तो अब जब दोबारा से इधर जब ब्रह्मा जी आएंगे और इनको उधर ले जाएंगे सतयुग में तो वहां पे सतयुग वाली वो मिलेगी ना वातावरण के हरे हरे पेड़ हैं नदियां हैं पहाड़ हैं तो ये किसने किया दोबारा शिव ने भगवान शिव ने ये शिव ने किया है निराकार रहते हुए निराकार रहते हुए
00:50:47:13 यानी यानी कि ब्रह्मा विष्णु महेश का जो कार्य है ब्रह्मा जी का कार्य है एक तरीके से ज्ञान देना और विष्णु जी का कार्य है क्या कहते हैं पालन करना विष्णु जी का कार्य भी समझते हैं अभी पालन वाला है ना वह भी समझते हैं और इनका कार्य है शंकर जी का लय कर देना। लय करने के बाद जो नई सृष्टि मिलेगी सतयुग में सतयुग बनेगा जो तो वो शिवजी बना के देते हैं। वो जो गायब हो गया था। विष्णु द्वारा विष्णु द्वारा बनाते हैं।
00:51:26:26 तो अभी तो आपने कहा था शिवजी बनाते हैं। नहीं शिवजी ही ब्रह्मा द्वारा बना रहे हैं। शिवजी विष्णु द्वारा कर रहे हैं और शिवजी ही शंकर द्वारा करेंगे। मैंने तो यह बोला तीनों का रचयिता होने के कारण वो भगवान शिव परमात्मा है। इसकी हेडिंग पढ़िए आप चित्र के ऊपर लिखी हुई है। ठीक है? तो विष्णु के द्वारा वो जो है पुनः चीजों को प्रोवाइड करा देते हैं। भगवान विष्णु के द्वारा सब होता है। अच्छा तो जैसे कि मान लीजिए जैसे शिव जी हैं हम तो शंकर जी सॉरी उनका काम है प्रलय करना है ना जी जी प्रलय करना तो क्या हम ये मान सकते हैं यदि किसी ने परमाणु बम वगैरह बहुत तगड़ा बना दिया और जो है पृथ्वी बहुत ज्यादा भीषण वो आ गया तो वो परमाणु बम बनाने वाला शंकर है ये मानेंगे हम जी तो फिर शंकर का सूक्ष्म वैज्ञानिकों को प्रेरणा दे रहे हैं मतलब कि शंकर स्वयं प्रलय इत्यादि नहीं ला रहे हैं। वह प्रेरणा दे रहे हैं वैज्ञानिकों को। हां जी। तो इसी प्रकार से जो शंकर और इसी प्रकार से जब उत्पत्ति करनी है तो शिव जी प्रेरणा
00:52:41:27 दे रहे हैं विष्णु को। देखिए शिव और शंकर को एक कर रहे हैं। नहीं नहीं उत्पत्ति के लिए बोल रहा हूं मैं। उत्पत्ति शिवजी प्रेरणा देते हैं ना विष्णु को। शिव जी शिव जी ने जो किया वो इन तीनों देवताओं के थ्रू किया है। ये तीनों देवता है। ये परमात्मा नहीं है। ये भगवान नहीं है। भगवान शिव भगवान है और ब्रह्मा विष्णु शंकर देवता है। इन तीनों के रचयिता शिव है। फिर समझा रही हूं मैं आपको। भगवान शिव ने ब्रह्मा द्वारा मतलब लेखराज के द्वारा तन में आकर के उनके परकाया प्रवेश करके ज्ञान दिया। उस ज्ञान रूपी सृष्टि से हम ब्रह्मचर्य से इस सृष्टि में देवी देवता धर्म की स्थापना करते हैं। फिर वो देवी देवता धर्म सतयुग में जाते हैं हम लोग। फिर सतयुग में जाकर के हम कुछ कुछ लाख लोग वहां होते हैं। फिर ये सृष्टि धीरेधीरे करोड़ों में बदलती है। एकदम से वो लाख लोगों ये तो ठीक ये ठीक है नीलिमा बहन। मैं यह पूछ रहा हूं कि जैसे शिव जी ने शंकर भगवान ने शंकर भगवान ने जब लय कर दिया झरने पहाड़ इत्यादि का तो वह दोबारा उत्पन्न कौन कर रहा है? आपने अभी कहा था
00:53:56:28 विष्णु जी विष्णु जी के शिव जी ब्रह्मा विष्णु जी द्वारा अच्छा तो वहां पर किसी मीडिएटर की जरूरत नहीं है झरने इत्यादि को मीडिएटर हुए ना विष्णु जी नहीं नहीं विष्णु जी के बाद मीडिएटर की जरूरत नहीं है वहां पे वहां तो पृथ्वी विष्णु की है वहां तो लक्ष्मी नारायण का राज है वहां तो सतयुग है थोड़ा थोड़ा थोड़ा सा थोड़ा संक्षिप्त में चलिए ना जिससे थोड़ा हम लोग आगे बढ़ पाएंगे वो तो सृष्टि सतयुग हो गई ना जो आपने बात करी मीडिएटर की जरूरत क्या है जैसे मीडिएटर यहां पे है कि शिव जी को जब शंकर भगवान को जब लय करना है तो आपने कहा कि वो प्रेरणा देते हैं वैज्ञानिकों को यहां मीडिएटर है ना काम करने में यानी शिव जी की प्रेरणा से तो शंकर काम कर रहे हैं मगर शंकर भी प्रेरणा आगे दे रहे हैं वैज्ञानिकों को हां जी प्रेरणा दे रहे हैं ना तो वहां पर मीडिएटर नहीं है वहां पर शिव जी प्रेरणा दे रहे हैं विष्णु को विष्णु आगे मीडिएटर नहीं है खुद ही पहाड़ झरने इत्यादि बना रहे हैं उसी का राज है वही कर रहे हैं लक्ष्मी नारायण का राज है समझ रहे हो अच्छा और लक्ष्मी नारायण ही अपनी
00:55:12:04 राजधानी चला रहे हैं ठीक है तो ब्रह्मा विष्णु महेश है ब्रह्मा जी के अंदर शिव जी आते हैं स्वयं और वो ज्ञान देते हैं जिससे कि व्यक्ति अपना धर्म को जान सके और अपनी स्पिरिचुअल सर्किल में वह आगे बढ़ सके और विष्णु जो हैं उस शरीर में आते हैं वो शिव जी फिर से आते हैं वो आते नहीं है सॉरी सॉरी गलत हो जाएगा। विष्णु जी को प्रेरित करते हैं और प्रेरित करने के बाद विष्णु जी यह संसार दोबारा से सतयुग वाला संसार तैयार कर देते हैं जो नष्ट हो चुका था। और फिर जो शंकर जी हैं उनको वह जो शिव परमात्मा है शिव बाबा वह जो है प्रेरणा देते हैं। शंकर फिर वैज्ञानिक टाइप के लोगों को गलत लोगों को प्रेरणा देते हैं और फिर उनके द्वारा सृष्टि का विनाश हो जाता है। शंकर स्वयं भी तो करते होंगे विनाश कि प्रेरणा से ही करते हैं। नहीं मनुष्य के द्वारा प्रेरणा के द्वारा करते हैं। प्रेरणा के द्वारा ही करते हैं। यानी विष्णु जी डायरेक्ट काम कर रहे हैं। विष्णु जी डायरेक्ट जो भौतिक पदार्थ है उनके संपर्क में आ रहे हैं। विष्णु जी
00:56:28:04 डायरेक्ट भौतिक पदार्थ है उनके संपर्क में आ रहे हैं। सतयुग में सतयुग में सतयुग में प्रधान सतो प्रधान धर्म में हां बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया तो अब यहां पर एक बात आती है कि ब्रह्मा विष्णु महेश की अपनी सेल्फ कॉन्शियसनेस है खुद की या वह पुतले हैं केवल अब आप इसे किसी भी तरह ले सकते हैं। मैंने सिर्फ यह कहा है कि भगवान शिव ही भगवान है। यह देवता है। नहीं मगर अपने को भूल चुके होते हैं। नहीं वो वाले वो नहीं जो ये मनुष्य के रूप में जन्म लेना इनका जो सूक्ष्म रूप है। अभी मैं उसकी बात कर रहा हूं। सूक्ष्म रूप जो है इनका सूक्ष्म में ही रहते हैं। सूक्ष्म वतन में बैठे तो इनकी अपनी कॉनशसनेस है इन तीनों की इन तीनों की कोई अपनी कॉनशनेस नहीं है। ये भगवान के थ्रू ही करते हैं सब काम। यानी कि इनमें अपनी कोई फीलिंग कुछ भी नहीं है अनुभव। यानी ये जड़ है। भगवान शिव के द्वारा किया जाता है। यानी ये जड़ है। ऐसा कह सकते हैं आप। तो जड़ है तो इसका मतलब जैसे एक आत्मा शरीर धारण करती है मनुष्य
00:57:43:15 का जड़ पदार्थों के जो उससे बनता है जड़ पदार्थों से तो ऐसे ही ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप का का जो शरीर है वह परमात्मा धारण करता है हां परमात्मा धारण नहीं करते परमात्मा सिर्फ ब्रह्मा के अंदर धारण करते हैं ये स्वयं कार्य करते हैं ये दोनों में खुद की कौन कॉनशसनेस है अभी तो आपने मना किया कॉनशसनेस नहीं है नहीं कॉनशसनेस इसलिए देखिए आप कह रहे युगों की बात मत करिए वो वाली बात मत करिए सूक्ष्म की बात करिए तो सूक्ष्म में तो परमात्मा शिव के द्वारा ही प्रेरित होते हैं ये लेकिन जब ये सृष्टि में आते हैं तो सतयुग में स्वयं लक्ष्मी नारायण का राज होता है तो उस समय तो कश में ही काम कर रहे हैं ना देवता
00:58:36:16 जो शरीर शरीर में आते हैं जैसे ब्रह्मा जी शरीर में आए ना लेखराज जी के लेखराज जी के रूप में प्रकट हुए ब्रह्मा जी शरीर में नहीं आए लेखराज ब्रह्मा जी लेखराज जी के रूप में प्रकट हुए जन्म लिया माता के गर्भ से जन्म लिया जी ठीक है तो ब्रह्मा जी जो सूक्ष्म रूप से वहां पर थे सूक्ष्म लोक में उन्होंने लेखराज के रूप में जन्म लिया। यह क्लियर है। ठीक है? जिससे कि उस वो जो जन्म लिया उन्होंने जिससे कि उस शरीर में परमात्मा आकर के फिर वो ज्ञान दे सके। ठीक है? ये क्लियर है। यानी कि परमात्मा आकर के ज्ञान दे सके उनके शरीर में। यानी कि परमात्मा नहीं है तब भी वो एक्सिस्ट कर रहे हैं ना ब्रह्मा जी? हां तब भी कर रहे हैं। अपने साथ ब्रह्मा जी एक्सिस्ट कर रहे हैं। अगर वह मनुष्य लोक में है तो लेखराज के रूप में जो ये शरीर है वो धारण करके एक्सिस्ट कर रहे हैं। जी और अगर वो सूक्ष्म लोक में है तो ब्रह्मा जी वहां पर भी एक्सिस्ट कर रहे हैं। जी तो कॉन्शियसनेस माननी पड़ेगी ना कि वहां पर उनके कॉन्शियस है। कौन है? एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट इसके
00:59:51:22 साथ ही साथ आपने विष्णु और शंकर को भी माना है कि सूक्ष्म लोक में वो भी होते हैं। तो उन दोनों और वहां पे तो आप कह रही हो वो प्रेरणा से करवाते हैं। वहां तो उनके अंदर नहीं आते वो। है ना? यानी कि प्रेरणा लेने के लिए मुझे कॉन्शियस होना पड़ेगा। तभी तो मैं किसी से प्रेरित होऊंगा। यानी कि इन दोनों की भी कॉन्शियसनेस एक्सिस्ट करती है। ब्रह्मा विष्णु महेश की अपनी-अपनी कॉन्शियसनेस है। हां जी। ठीक है? तो कॉन्शियसनेस तीन तरह की हो गई। एक तो ये जो जीवात्मा जो फंसती हैं, फिर आगे चलती है, फिर वो मुक्त होती है, फिर फंसती है, फिर आगे चलती है, फिर मुक्त होती है। एक हो गई परमात्मा की कॉन्शियसनेस। जी। ठीक है? एक परमात्मा की कॉन्शियसनेस हो गई। जी। और एक ये कॉन्शियसनेस है ब्रह्मा, विष्णु, महेश की। जी। तीन। यानी कि जो चेतन सत्ता है पांच तरह की हो गई। जिसमें कि जो कर्म का फल भोग रहा है जी जो कर्म का फल भोग रहा है वह है जीव और जिसको कोई फल नहीं भोगना है वो है परमात्मा इसीलिए परमात्मा सदा मुक्त है मगर अब यहां प्रॉब्लम ये आ रही है कि जीव तो कर्मों का फल भोग रहा है इसलिए मुक्त नहीं है और परमात्मा हम कहते हैं जो सदा के लिए मुक्त है तो सदा के लिए मुक्त
01:01:06:28 तो ये भी सिद्ध हो रहे हैं ना ब्रह्मा विष्णु महेश नहीं देखिए अब मैं बताऊं आपको सूक्ष्म बता में इन तीनों का सूक्ष्म शरीर है और वो सदा ही होता है। वो चाहे जन्म में आए तब भी होता है और ये जन्म में ना आए तब भी होता है। तीनों ही सूक्ष्म शरीर में ऐसे ही विराजित है जैसे शिव परमात्मा परमधाम में। फिर वो जब नीचे प्रवेश करते हैं तो ब्रह्मा का जन्म ये अंत का है और विष्णु का जन्म सबसे पहले सतयुग में विष्णु आते हैं। जब विष्णु जन्म लेते हैं पहले श्री कृष्ण बनते हैं और फिर वह लक्ष्मी नारायण बनते हैं। तब भी सूक्ष्म शरीर में विष्णु ऊपर भी होते हैं और नीचे भी जन्म लेते हैं। ठीक है? फिर वही आत्मा वही विष्णु अब समझिएगा। वही विष्णु त्रेता में राम बने। वही विष्णु फिर द्वापर में उसी विष्णु ने स्वयं के अलग पर जा रहे हैं। नहीं यहां ब्रह्मा और विष्णु एक हो गए हैं। सुनो ना यहां ब्रह्मा और विष्णु एक हो गए हैं। दो बात ये हो रही है परमात्मा के अलावा कोई कॉनशसनेस फ्री है कि नहीं है? परमात्मा
01:02:22:07 के अलावा सूक्ष्म वतन में इन तीनों की कॉनशसनेस है। है तो इनको कोई दुख तो है नहीं। नहीं। ठीक है तो ये मुक्त हुए ना कलयुग में तो होता है सतयुग के बाद तो दुख होता है मैं वही समझाने की कोशिश कर रही हूं इनको इनको इनको ब्रह्मा विष्णु महेश को इनको भी दुख होता है अच्छा वो वो अब आप बताइए कैसे हो रहा है बताने जा बताने जा रही हूं उसी सुख दुख के खेल को बता रही हूं तो वो सतयुग में लक्ष्मी नारायण होते हैं फिर वो त्रेता में राम होते हैं तो राम को जो दुख दिखाया है फिर उसके बाद वो भक्ति करते हैं स्वयं के चित्रों की क्योंकि वह स्वयं के जन्मों को भूल गए हैं तो खुद के ही चित्रों की पूजा करने लगते हैं और फिर यही विष्णु राजा विक्रमादित्य के रूप में जन्म लेते हैं। सोमनाथ का मंदिर बनाते हैं और फिर वो लास्ट में बनते हैं लेखराज। यह लेखराज ही विष्णु है और लेखराज ही ब्रह्मा है। लेखराज का ही जन्म विष्णु जन्म है और लेखराज का ही जन्म लेखराज है और वही लेखराज को फिर शिव भगवान आकर ब्रह्मा नाम देते हैं। शिव होम कहते हैं उनके अंदर आके और फिर वो कलयुग में उनके अंदर आकर पुनः याद दिलाते हैं कि तुम वही विष्णु हो। तुम वही श्री कृष्ण
01:03:37:13 हो। तो बहिष् का फोटो दिखाते हैं। हाथ पर बहिष् लिए हुए श्री कृष्ण का दर्शन होता है इनको। वहां विनाश की लीला का दर्शन होता है। फिर यह अपना सारा जीवन छोड़ देते हैं। यह हीरो के जोरी थे, व्यापारी थे, वह सब छोड़ देते हैं। और यह भगवान शिव का ज्ञान सुनाने लगते हैं। यानी कि लेखराज जी के रूप में केवल ब्रह्मा नहीं आए हैं। ब्रह्मा तो नाम मिला है। तब जब शिव जी आए उनके तन में आए तो विष्णु जी हैं। विष्णु जी तो मनुष्य हो गए ना। विष्णु जी क्यों आए? विष्णु जी शिव के रूप में थोड़ी आए। विष्णु जी तो स्वयं के रूप में आए ना। यह तो लेखराज का ही जन्म हुआ ना। मतलब हम सब भी देवी देवता थे। जैसे लेखराज थे। जैसे लेखराज लक्ष्मी नारायण थे तो हम यानी कि अब मैं समझ गया। यानी कि मैं समझ गया। अब मैं थोड़ा सा कनेक्ट कर पा रहा हूं। यानी कि शंकर जी ने किसी मनुष्य के रूप में ये सृष्टि को नष्ट किया। हां। फिर विष्णु जी ने किसी मनुष्य के रूप में इस सृष्टि में वो झरने वगैरह जो खो गए थे संसाधन उनको दोबारा प्रकट किया और फिर
01:04:53:15 ब्रह्मा जी ने लेखराज नामक मनुष्य के रूप में लोगों को ज्ञान दिया जी ठीक है स्वयं लक्ष्मी नारायण बने और हम सबको भी देवी देवता बनाया ब्रह्मा जी लक्ष्मी नारायण बन जाते हैं हां जी ब्रह्मा जी बनते हां जी तो विष्णु जी कौन है फिर? ब्रह्मा का ही जन्म विष्णु का जन्म है। यानी ब्रह्मा विष्णु एक है। हां जी। जी ब्रह्मा विष्णु एक है। अलग-अलग जन्मों की कहानी है। शंकर अलग है। शंकर अलग है। यानी जो लेख लेखराज के शरीर से जब जिस जन्म में लेखराज रूपी शरीर है और शिव जी आकर के उनके शरीर से वो ज्ञान दे रहे हैं तो वो ब्रह्मा है। ठीक है? और जब वह लक्ष्मी नारायण के रूप में वह सृष्टि को पुन स्थापित कर रहे हैं तो वह विष्णु है। ठीक है जी। और जब वही ब्रह्मा जी वो वो ठीक है वो ठीक है वही ब्रह्मा जी जब शंकर के रूप से शंकर के रूप से शंकर के जब किसी मनुष्य के रूप में सृष्टि का वो कर रहे हैं नाश
01:06:08:19 तो वो शंकर है वही ब्रह्मा जी शंकर ब्रह्मा नहीं है कभी भी लेखराज से शंकर का कनेक्शन नहीं है शिव है यानी कि यानी कि सिर्फ दो शिव शिव जी शंकर है शिव शिव जी लेखराज के अंदर आते हैं शंकर जी नहीं आते शिव और शंकर अलग-अलग है शिवा जी मैं कह रहा हूं कि जो जैसे ब्रह्मा जी का एकत्व स्थापित हुआ विष्णु जी के साथ तो क्या ब्रह्मा जी का के साथ हुआ ऐसे शिव के साथ नहीं शंकर पूछ रहा हूं ये ब्रह्मा विष्णु महेश की बात पूछ रहा हूं शंकर नहीं शंकर डिफरेंट पर्सनालिटी है अच्छा तो यानी दो पर्सनालिटी है यानी कि सूक्ष्म लोक में दो कॉन्शियसनेस है एक है तीनो है लेकिन तीनों में ब्रह्मा और विष्णु के अलग-अलग जन्म है। ब्रह्मा विष्णु एक ही आत्मा है। शंकर अलग आत्मा है। नहीं जन्म में अलग-अलग हो जाना बात अलग है। सूक्ष्म लोक में कितने सूक्ष्म में तीनों एक्सिस्ट करते हैं। तीनों ही अलग तो फिर तीनों अलग-अलग हो गया ना। हां तो फिर यह कैसे हो गया कि वो ब्रह्मा ही विष्णु है। फिर जब तीनों अलग-अलग है जो सृष्टि है ऊपर तीनों अलग-अलग है। लेकिन जो सृष्टि है वो सतयुग
01:07:23:20 से जिस तरह शुरू होती है वो ब्रह्मा की ही आत्मा है। ऐसा भगवान शिव ने बताया है अपनी ज्ञान मुरलियों में। ब्रह्मा की ही आत्मा है तो विष्णु का काम क्या है फिर? अगर ब्रह्मा अगर ब्रह्मा की ही आत्मा लक्ष्मी नारायण है तो फिर वो जो जो सूक्ष्म लोक में जो विष्णु बैठे हैं उनका क्या काम है फिर मैंने आपको बताया ना वहां भी तीनों के शरीर होते हैं और अपने पार्ट में भी तीनों अलग-अलग आते हैं सृष्टि में क्या ऐसा नहीं हुआ है कि श्री कृष्ण का जन्म हुआ तो विष्णु अलग पर्सनालिटी है और कृष्ण अलग है ऐसा नहीं हुआ ना हुआ बस वही मैं बता रही हूं आपको तो मैं मैं ये पूछ रहा हूं उनका काम क्या है विष्णु जी का क्योंकि यहां जो काम है बताना राजा को राजधानी स्थापन करना अपना पाठ तो वो काम तो वो काम तो आप कह रही हो कि ब्रह्मा जी ही वो पालना का राजा बनके पालना का एक मिनट नीलमा नीलमा बहन हां बोलो आप आप बहुत अच्छा डिफेंड कर पा रही मुझे लग रहा है कि शायद ही कोई ब्रह्मा कुमारी ऐसी मिले जो हम डिफेंड कर पाए मगर फिर भी मुझे थोड़ा सा इस बात
01:08:38:24 का ध्यान रखना पड़ रहा है कि मेरी और आपकी एक इस स्ट्रीम के अलावा एक वो है मैत्री। ठीक है? तो मैं ये पूछ रहा हूं। इस बात का ध्यान मत रखिए। आपको जो बोलना है आप बोलिए। तो सबका आंसर दूंगी। तो समस्या ये आ रही है कि सतयुग में जो झरने पहाड़ जो प्राकृतिक संसाधन है जिसकी आवश्यकता मनुष्य को होती है जीवन जीने के लिए। पेट ब्रह्मा कुमारी से बात कर रहे हैं। प्रॉब्लम वहां आ रही है। ठीक है। ठीक है। आपने मुझे दी पिछली बार कि आप डिफेंस करिएगा अपने आपको। इसलिए मैं जरा खुल के बोल रही हूं आज। हां हां। तो अब मैं वही कह रहा हूं। कैसे निकलेंगे? ठीक है। ठीक है। तो अभी मैं ये कह रहा हूं। अभी आपने कहा कि ब्रह्मा जी ही लक्ष्मी नारायण के रूप में जो शंकर जी ने जो लय कर दिया था इस सृष्टि का ब्रह्मा जी ही उसमें जो प्राकृतिक संसाधन लुप्त हो गए थे पृथ्वी में समाहित हो गए थे ब्रह्मा जी ही लक्ष्मी नारायण के रूप में पुन स्थापित करते हैं। क्लियर है? क्लियर है। पक्का है? लॉक कर दे। पक्का है। हां। ठीक है। ब्रह्मा जी लक्ष्मी नारायण कैसे है वो जानना पड़ेगा आपको ना? मैं बैठी हूं आपके सामने। वो हमें
01:09:54:04 ज्ञान देकर हमारे द्वारा गुणों गुणों के द्वारा वाइब्रेशन के द्वारा इस समय कर रहे हैं वो। फिर भगवान फिर लक्ष्मी नारायण के रूप में हम लोग ही जन्म लेंगे। ब्रह्मा और जो मम्मा है ओम राधे वो बनेंगे लक्ष्मी नारायण और हम सब बनेंगे देवी देवता। अभी सृष्टि को साफ करना है। अभी सृष्टि को पावन करना है। तभी तो हम लोगों ने ब्रह्मचर्य व्रत धारण करके यह सब रूप धारण किया है। इसीलिए तो हम ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं।
01:10:32:28 अभी हो रही है सृष्टि की स्थापना तो अभी अभी परिवर्तन हो रहा है। एक तरफ प्लेय हो रही है। देख रहे हैं आप नेपाल जैसी त्रासदी आ रही है। दूसरी तरफ आप मुझे प्लीज क्वेश्चन करने दीजिए। प्लीज मुझे क्वेश्चन करने दीजिए। बोलिए थोड़ा लंबे एक्सप्लेनेशन में चली जाती है थोड़ा-थोड़ा तो बात ऐसी है कि आपने कहा ब्रह्मा जी लक्ष्मीारायण के रूप में सतयुग रूपी जो सृष्टि की स्थापना करनी होती है वो करती करते हैं ब्रह्मा जी और लक्ष्मी नारायण कहलाते हैं। ठीक है? तो जो सूक्ष्म लोक में विष्णु जी हैं उनका कार्य क्या है? देखिए आप जहां मुझे रोक रहे हैं मेरी उसी बात में सार है। अगर आप तोड़त के क्वेश्चन करोगे तो इसका आंसर कभी नहीं मिलेगा और इसमें मैं उलझने वाली नहीं हूं जिसमें आप मुझे उलझाने वाले हैं। आप समझिए मैं आपको स्थापना भी बता रही हूं। पालना भी बता रही हूं और विनाश भी बता रही हूं। तीनों चीजों को समझने का प्रयास करिए। स्थापना यह है कि ब्रह्मा लेखराज दादा लेखराज के रूप में जब ब्रह्मा होते हैं शिव उनके अंदर आते हैं और आकर के पुरानी विकारी दुनिया को निर्विकारी
01:11:48:09 बनाके ब्रह्मचर्य व्रत धारण करके हम जैसे बच्चों को जन्म देते हैं। जन्म माना जैसे कर्ण सुना है आपने कर्ण कर्ण का जन्म कैसे बताते हैं कि कान में ज्ञान दिया कर्ण हो गया और वो जैसे कुंती का पुत्र हुआ जैसे बिना मतलब मैं जिसको ज्ञान दूं वो मेरा बालक कहलाएगा मैं उसकी माता कहलाऊंगी भले जन्म से मैं उसकी माता नहीं हूं ज्ञान सुना के मतलब जो स्टूडेंट होते हैं हमारे समझ रहे हैं शिवा जी समझ रहे ऐसे ऐसे कुंती और कर्ण के पवित्र रिश्ते को दिखाते सूर्य पुत्र कर्ण मतलब ज्ञान सूर्य परमात्मा का पुत्र मतलब मैं जो ज्ञान सुना रही हूं वो ज्ञान सूर्य का ज्ञान सुना रही हूं और जो सुन रहा है वो कर्ण है। यहां पर मैं कुंती हूं जिस समय ज्ञान सूर्य का पुत्र उसे मिला। ये हमारे पास व्याख्या है। पहली बात वो सारे ही हम ज्ञान सूर्य स्थापन करते हैं और ऐसे बच्चों को जन्म देते हैं और ब्रह्मा द्वारा ये हो रहा है। ये हो गया स्थापना का कार्य। उसके बाद होता है यह यही से प्रलय का काम शुरू होते हैं शंकर जी का कि जब इस सृष्टि में नारी जो है वो अपने धर्म को भूल जाए। चोर
01:13:03:15 चोर चोरी ऐसे करने लगे कि अपना घर भी ना छोड़े। नारियां बाल कटवाने लगे। मां-बाप बच्चियों की नौकरी के पैसे खाने लगे। ऐसे कलयुग के जो निशान आते हैं कलयुग के अंत के इसमें शंकर जी प्रलय करते हैं। वो जब प्रलय का कार्य साथसा चलता है तो स्थापना का कार्य भी साथ साथ चलता है। ज्ञान मुरली द्वारा जो ब्रह्मा कुमार कुमारी कर रहे हैं। तुरंत ही इस प्रलय के बाद धीरे-धीरे सृष्टि साफ होती है और सतयुग आता है और यह ब्रह्मा जैसे लेखराज अभी शरीर छोड़ चुके हैं। दादा लेखराज के शरीर छोड़ने के बाद ये आत्मा आती है सतयुग में। फिर श्री कृष्ण के रूप में जन्म लेती है। श्री कृष्ण राधे होकर के ओम राधे श्री कृष्ण बाबा मम्मा आते हैं और हम सब भी धीरेधी उनके साथ सतयुग में जाएंगे। यह है विष्णु का कार्य। तो विष्णु किसी के द्वारा नहीं करा रहे हैं। यहां शंकर का कार्य समाप्त हो गया। अब सृष्टि पुनः नए रूप में शुरू हो गई। तो यहां दादा लेखराज जी विष्णु हो गए। लक्ष्मी नारायण हो गए। नर से नर तो ऐसी करनी करके नारायण बने। नारी तो ऐसी करने लक्ष्मी पूरा हो गया आपका। हां जी। मेरा क्वेश्चन ये नहीं
01:14:18:19 है कि आप मेरी शायद थिंकिंग समझ नहीं पा रही हैं। मैं पूछ रहा हूं सूक्ष्म लोक में तीन लोग हैं या दो लोग हैं? तीनों लोग हैं। तीन है। यानी कि आप ये कह रही है सूक्ष्म कहीं आप ऐसा तो नहीं कह रही सूक्ष्म लोक में भी ब्रह्मा जी ही विष्णु रूप से भी है और ब्रह्मा रूप से भी है। ऐसा कह रही है क्या? जी हां वह तीनों अलग वहां बैठे हैं। उसके बाद भी नीचे सारा कार्य मनुष्य रूप में चल रहा है। सूक्ष्म लोक में तीन लोग हैं या फिर दो लोग हैं? तीन लोग हैं। तीन लोग हैं। अब क्या हुआ कि नीचे ब्रह्मा जी आते हैं, ज्ञान देते हैं और शंकर जी प्रलय कर देते हैं। वो प्रेरित करके करें या खुद आगे करें वो अलग पार्ट हो जाएगा। मगर वह प्रलय कर देते हैं। अब सतयुग आता है तो ब्रह्मा जी जो है वहां पर दोबारा पुन निर्माण कर देते हैं। यह नदियां, पहाड़, झील और झरने, बादल और वादी इन सब का पुनर्निर्वाह कर देते हैं। तो मैं यह कह रहा हूं जो सूक्ष्म लोक में जो तीन एंटिटीज हैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश दो काम स्थापना और क्या कहते हैं? ज्ञान देना और जो है पुन स्थापना वह ब्रह्मा जी
01:15:33:22 ने कर दिए। ठीक है? और शंकर जी ने अपना काम कर दिया। लय कर दिया। तो विष्णु जी जो वहां बैठे हैं सूक्ष्म लोक में उनका कार्य क्या है? यह पूछ रहा हूं मैं। क्योंकि तब भी वहां रहेंगे। वो तीनों तब भी वहां एक्सिस्ट करेंगे और वह कभी भी निवास से हटते हैं और उनका कार्य है जन्म लेकर के अपने जन्मों में आना और फिर से दादा लेखराज के थ्रू ब्रह्मा हो के फिर ज्ञान देना फिर वही सृष्टि चक्र में आना
01:16:05:08 लेखराज के रूप में तो ब्रह्मा जी आ रहे हैं ना वहां तीन चीजें है ना कलयुग में ना आप क्यों क्यों कलयुग में चले जाते हैं बार-बार ठीक है तो आप कलयुग की बात करते सतयुग में सतयुग में विष्णु रूप में आ रहे है ना ब्रह्मा जी तो मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं सूक्ष्म लोक में तो विष्णु जी है ना वहां पर ब्रह्मा जी के बगल में वो शाश्वत है सनातन क्या तो वो वो उन विष्णु का कोई काम है क्या कि नहीं है मैं ये पूछ रहा हूं पालना क्यों नहीं है वो राजा होके पालना करते हैं राजा होके तो ये लक्ष्मी नारायण बनके ब्रह्मा जी पालना करते हैं ना वही तो लक्ष्मी नारायण विष्णु है सूक्ष्म लोक की बात कर रहा हूं मैं। सूक्ष्म लोक में कार्य कर रहे हैं ना। सूक्ष्म लोक से नीचे आए दो शरीर जैसे सूक्ष्म लोक में उनके शरीर है ऐसे मेरे और आपके भी शरीर है। ऐसा नहीं है कि सूक्ष्म शरीर नहीं है। सूक्ष्म शरीर तो साइंस भी मानता है। शिव जी आप मैं ये नहीं कह रहा हूं। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि सूक्ष्म लोक में नहीं मान रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं कि वहां जो जैसे ब्रह्मा विष्णु महेश के अपने-अपने काम है तो ब्रह्मा जी विष्णु वाले काम भी कर रहे हैं तो फिर विष्णु का काम क्या बचा? विष्णु या तो ये कहिए कि वहां
01:17:20:12 पे दो या तो एक मिनट या एक मिनट एक मिनट या तो ये कह दीजिए कि वहां पर सूक्ष्म लोक में तीन चीजें नहीं है। दो ही है। एक ब्रह्मा है एक शंकर है। ब्रह्मा जी नीचे अपने मन से बातें मत बनाइए। देखिए ब्रह्मा जी भी ऊपर है। वो कलयुग में ब्रह्मा का पाठ बजाते हैं और ऊपर जब होते हैं वो मेडिटेशन के थ्रू जब हम उन्हें अनुभव करते हैं तो वो शाश्वती सदा ही मिलते हैं वही रहते हैं। विष्णु जो है वो भी ऊपर है लेकिन अपना पाठ नीचे भी बजाते हैं। ऐसा श्री कृष्ण लीलाओं में या श्री कृष्ण के भागवत में भी पढ़ा होगा आपने कि विष्णु वहां भी है और विष्णु यहां भी है। ऐसा तो नहीं है कि विष्णु वहां रह के नीचे मैं ये नहीं कह रहा। मैं मना नहीं कर रहा हूं। मैं आपसे पूछ रहा हूं नहीं देने देते ना प्रॉब्लम ये हो रही है बताइए बताइए विष्णु जी ऊपर भी है और यहां भी पार्ट बता रहे हैं वो अपने जन्म में आते हैं तो वो पार्ट क्या है उनका पालना करना पालना तो लक्ष्मी नारायण से ब्रह्मा जी कर रहे हैं ना वो सतयुग में कर रहे हैं से ब्रह्मा जी यहां ब्रह्मा जी क्यों जोड़ रहे हैं आप मैंने जन्म बताए हैं वो मैंने आपको ब्रह्मा के जन्म बताए हैं
01:18:35:27 आप ब्रह्मा जी और विष्णु जी को सतयुग त्रेता द्वापर से क्यों जोड़ रहे हैं? आप सूक्ष्म लोक के ब्रह्मा को यहां क्यों जोड़ रहे हैं? मत जोड़िए ना। मैं आपको क्या कह रही हूं? तीनों के शरीर ऊपर है। तीनों ऊपर से कार्य कर रहे हैं। लेकिन जिसका जहां पार्ट है वो बजा रहे हैं। विष्णु जी सतयुग में आते हैं। लक्ष्मी नारायण का रूप धारण करते हैं। कैसे? पहले श्री कृष्ण और राधे के रूप में सतयुग में पहला जन्म हुआ और वही बालक फिर बड़े होते हैं तो लक्ष्मी नारायण बनते हैं। फिर वही बालक और बड़े होते हैं। युग परिवर्तन होता है तो राम सीता बनते हैं। फिर वही धीरेधीरे कलयुग तक ब्रह्मा के रूप में जन्म लेते हैं। मैं ये बोल रही हूं आपको। विष्णु जी ब्रह्मा के रूप में जन्म लेते हैं कलयुग में। हां
01:19:28:16 जो आत्मा [हंसी] विष्णु होती है जो आत्मा विष्णु होती है वही आत्मा फिर दादा लेखराज होती है जिसको ब्रह्मा नाम मिलता है ऐसे ही जैसे ब्रह्मा के जन्म बदलते हैं ऐसे मेरे और आपके भी जन्म बदलते हैं पूरी सृष्टि तो मतलब ये चीज एक बात है आपने जो क्रम बताया कि जैसे विष्णु जी जो है श्री कृष्ण के रूप में होते हैं लक्ष्मी नारायण के रूप में होते हैं राम जी के रूप में होते हैं अंत में ब्रह्मा जी के रूप में होते हैं फिर वो जो ब्रह्मा जी के रूप में होते हैं वह लेखराज जी के रूप में और उसी शरीर में आकर शिव जी ज्ञान देते हैं। ऐसा है। जी जी तो फिर जो सूक्ष्म लोक में ब्रह्मा जी बचे अब उनका काम क्या बचा? ब्रह्मा जी बचे हैं उनका काम है पूरी सृष्टि को प्रकाश देना, शक्ति देना। पूरी सृष्टि को देखना। दुख सुख में परमात्मा जो उन्हें प्रेरणा देते हैं उनका संपर्क साधना जैसा कि आपने शुरू में कहा था कि पता कैसे चलता है जब भी कोई बालक जब भी कोई आत्मा परमात्मा को याद करती है तो उनहीं के थ्रू परमात्मा शिव तक जाया जा सकता है। सदा ही वो परमात्मा सृष्टि की रक्षा उन तीनों के द्वारा करता है। शिव तो सदा ही कल्याणकारी है। यानी कि जो लेखराज
01:20:44:00 के रूप में प्रकट हो रहे हैं वो विष्णु हैं। हां जी और उनको ब्रह्मा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि शिव जी आकर के उनके अंदर बैठकर के ज्ञान दे रहे हैं। जी जी ब्रह्मा इसलिए कहा जा रहा है। जी बाकी वास्तविक ब्रह्मा जो है वो केवल साक्षी मात्र है जो इधर-उधर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मतलब एक मीडिएटर की भूमिका निभाते हैं। में है वो आप जोड़ लीजिए जो भी जोड़ रहे हैं वो आपकी बात से मैं यस नहीं करूंगी लेकिन वो सूक्ष्म वतन में ब्रह्मा है जैसे सभी सूक्ष्म शरीर में ऊपर है ऐसे मैं और आप भी सूक्ष्म शरीर में ऊपर है अरे नीलमा नीलिमा बहन जो सूक्ष्म शरीर के तीन एंटिटीज है ब्रह्मा विष्णु महेश उसमें से विष्णु को आपने बता दिया लक्ष्मी नारायण श्री कृष्ण लक्ष्मी नारायण राम फिर जो है अंत में ब्रह्मा ये वो काम कर रहे हैं शंकर काम कर रहे हैं कि वो किसी को प्रेरणा देकर के पृथ्वी पृथ्वी का लय कर रहे हैं। पृथ्वी में सभी भौतिक संसाधनों का अब जो सूक्ष्म लोक में ब्रह्मा जी बचे हैं सूक्ष्म लोक में उनका काम क्या बचा? ब्रह्मा उनका कोई काम है कि नहीं? ब्रह्मा जी का काम है शक्ति देना दादा लेखराज को भी और हमें भी और आज दादा लेखराज
01:21:59:01 नहीं है तब भी ब्रह्मा के रूप में वो वहां काम कर रहे हैं तो इसका मतलब यही है ना कि यह वाला जो कार्य कहा जाता है कि लेखराज जो है ब्रह्मा है और उनके शरीर में शिवजी आकर के जो वो देते हैं यह उस ब्रह्मा से अलग है जिसका काम केवल शक्ति देना है या अह इंफॉर्मेशन जो इधर की इंफॉर्मेशन मीडिएटर की भूमिका निभाना सारे कार्य परमात्मा शिव के हैं और वो इन तीनों के द्वारा कराते हैं। नीचे मूल वतन में शरीरों के द्वारा कराते हैं और सूक्ष्म वतन मैंने प्रश्न मैंने प्रश्न तो कुछ और पूछा है। खैर चलिए ठीक है हमने काफी देर इसमें कर लिया। कुछ भी मैंने गलत नहीं बताया आपको। शिव जी द्वारा ऊपर से काम कर रहे हैं। ठीक है। अब मनुष्य रूपी अब जो यह थोड़ा सा देख रहे थोड़ा सा दूसरे प्रश्न पे आते हैं। एक आपने ये बताया है हां यानी कि ब्रह्मा विष्णु महेश सूक्ष्म लोक में है। ये तो पक्का है। अच्छा पक्का है। तो ब्रह्मा विष्णु महेश जब सूक्ष्म लोक में है और इनकी अपनीप कॉन्शियसनेस है। शिव जी के जो शिव परमात्मा है वह इनके द्वारा इनको प्रेरित करके अपने कार्य कराते हैं और विष्णु जी हैं वो डायरेक्ट भौतिक संसार के उसमें आ रहे हैं संपर्क में क्योंकि
01:23:14:12 वो पृथ्वी इत्यादि के झरने इत्यादि का निर्माण कर रहे हैं ना तो यानी छू रहे हैं स्पर्श कर रहे हैं वो है ना सब कुछ या शब्द शक्ति हां ठीक है तो वो किसी ना किसी प्रकार से आ रहे हैं संसार में तो अब यहां पर यह बात आती है कि यह अपने आप में कॉन्शियसनेस हैं। तीनों एंटिटीज ब्रह्मा, विष्णु, महेश। अब क्योंकि इनको इनको विष्णु जी को तो दुख हो रहा है क्योंकि वह कृष्ण बन रहे हैं आपके अनुसार लक्ष्मी नारायण बन रहे हैं और वो बन रहे हैं तो ये तो दुख दुख हो रहे हैं तो यानी कि ये भी जो है इनको भी मुक्त होना है यानी ये भी मुक्त होते हैं सूक्ष्म संसार वाले जो विष्णु है मुक्ति मुक्ति पाते हैं ना जो देवत्व को प्राप्त करते हैं दोबारा से लेकिन परमात्मा ही मुक्ति जीवन मुक्ति दाता है शिव भगवान हां ठीक ठीक और शंकर जी को कैसे दुख हो रहा है वह बता दीजिए। शंकर जी का तो जन्म ही नहीं दिखाया हमने। यानी दुख नहीं हो रहा है। नहीं ठीक है। ब्रह्मा जी का भी केवल विनाश है। उसके बाद तपस्या करते हैं। वो सूक्ष्म वतन में बैठ के उनका कोई और कार्य नहीं।
01:24:29:15 और जो ब्रह्मा जी हैं उनका जन्म उनका तो जन्म हो नहीं रहा है। वो तो केवल वो शक्ति प्रदाता है। हां सूक्ष्मतन में है वो वो कलयुग के अंत में कलयुग के उसमें आते हैं। जिस पीरियड में लेखराज जी आए अरे तो वो तो विष्णु जी बन रहे हैं ना राम के बाद तो वही तो है सब वो कहां है तीन है ना शरीर है वो वो ब्रह्मा के ही दो शरीर है अलग अलग एक विष्णु रूप में एक ब्रह्मा रूप में और वो शंकर अलग डिफरेंट पर्सनालिटी है शंकर वही तो मैं आपसे एक घंटे पहले कहा था विष्णु और ब्रह्मा एक ही है विष्णु और ब्रह्मा दोनों में अलग-अलग सूक्ष्म वतन में है पर वो दो अलग-अलग वो है
01:25:14:14 दो रूप दो रूप एक ही यानी कि एक तरीके से देखा जाए तो वहां पर सूक्ष्म लोक में देखा जाए वास्तविक तौर पर दो एंटिटीज हैं। एक एंटिटी दो रूपों में विराजमान है ब्रह्मा और विष्णु के रूप में और एक एंटिटी एक रूप में विराजमान है शंकर के रूप में। हां जी। हां बहुत बहुत बहुत हेडक थोड़ा कम हो गया मेरा। दो एंटिटीज है वास्तविकता में। उनमें से एक एंटिटी दो रूपों में प्रकट है और एक एंटिटी अपने खुद के रूप में। अब बात यह आती है कि जो
01:25:50:28 एक जो ब्रह्मा जी वाली अभी इस एंटिटी को छोड़ देते हैं। शंकर जी को ले लेते हैं। उसमें सरल हो जाएगा। शंकर जी को कभी दुख हो रहा है क्या? नहीं। नहीं। तो इसका मतलब शंकर जी सदैव सदा सर्वदा मुक्त हैं। हां जी। और उनको कोई मार सकता नहीं है। नहीं। ठीक है। उनको कोई मार भी नहीं सकता है। नहीं उनको हां तो वो एक आपको नहीं लगता कि शंकर जी के रूप में एक दूसरा ईश्वर भी है। मतलब क्योंकि वो उनको किसी की जरूरत नहीं है। वो स्वयं में सुखी है। सच्चिदानंद है वो। ऐसा कह सकते हैं। तो दो ईश्वर हो गए। एक शिव परमात्मा, एक शंकर। देखो हम शंकर को देवता बोलते हैं और वो केवल सूक्ष्म में रहते हैं। वो भगवान शिव ने ही हमें बताया। शंकर जी परमात्मा नहीं कह सकते शंकर को। शंकर परमात्मा नहीं है। शिव परमात्मा है। शंकर है। शंकर जी भी तो सदा सर्वदा मुक्त है। उनको किसी की आवश्यकता नहीं है। शिव शंकर एक नहीं है ना। वो जिसके लिए कह रहे हो वो शिव है। मैं एक नहीं कह रहा। मैं एक नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं। आपने कहा शंकर को कभी दुख नहीं होता। यानी वो सदा मुक्त है। जैसे ही कोई भी चेतना अपने
01:27:06:19 स्वतंत्र परमात्मा से स्वतंत्र होकर सर्वदा मुक्त मानी जाएगी तो वो ईश्वर सिद्ध हो जाएगी। परमात्मा शिव ने ब्रह्मा द्वारा जो मुरलियां हमें सुनाई उस मुरलियों में केवल हमें शंकर के लिए एक ही बात बताई कि वो विनाशकारी है और विनाश के समय उनका पार्ट होता है और और समय वो सूक्ष्म वतन में विराजित है। इसके अलावा शंकर जी के विषय में कुछ बताया नहीं गया। बस यह है कि शिव परमात्मा है और शंकर देवता है। चलिए अब पब्लिक देखेगी यह वाले क्वेश्चन उन्हें करने चाहिए। एक चीज और है कि आपने जो बताया ना सबसे ऊपर वाला लोक ब्रह्मलोक है तो वो क्या एरोप्लेन से जा सकते हैं क्या वहां पे कोई ऐसा स्पेसशिपिप वगैरह बनाया जाए। आपको मैंने मेडिटेशन कराया और आप फिर भी ऐसी बात कर रहे हैं। एरोप्लेन से जा सकते हैं। वो मैंने सूक्ष्म एरोप्लेन ही तो दिया आपको कि हां इस तरह से हम परमात्मा के भौतिक मैं भौतिक जगत के एरोप्लेन की बात कर रहा हूं। कोई वो स्पेसशिप वगैरह नहीं जा सकते। क्यों? अगर हमारे पास ऐसा स्पेसशिपिप आए जो अनंत दूरी तक तय कर ले तो नहीं जा सकते। नहीं जा सकते। क्यों? वो ऊपर की दिशा में है ना। सनातन में ब्रह्म कहते हैं आप तो ब्रह्म
01:28:21:27 में आप ब्रह्म में लीन होने की बात करते हैं तो क्या आप एरोप्लेन से जा सकते हैं वहां पे? तो वहां पर तो केवल कॉनशसनेस की बात है ना कॉनशसनेस बंधन से मैंने आपको मेडिटेशन कराया मेरा ऊपर नीचे वाली कोई बात नहीं है यानी ऊपर नीचे वाली कोई बात नहीं है सब कुछ यही है जो भी है ऊपर नीचे वाली बात ऊपर नीचे वाली बात समझा के ही मैंने मेडिटेशन कराया आपको नहीं जो हम जो हमारी जो आपने फिलॉसफी से तुलना की कि ब्रह्म में लीन हो जाना तो उसमें तो केवल यह है कि भाई माया माया से कनेक्ट हो के हम कुछ ऐसा देख रहे हैं जिसके कारण हम यह मान रहे हैं कि जगत है संसार है वो है और जब हमें आत्म स्वरूप का बोध हो रहा है तो हम भगवत भगवत स्वरूप हो जा रहे हैं भगवान में लीन हो जा रहे हैं जो मैंने आपको शुरू में कराई वही सेम चीज है जो आप अभी बोल रहे हो यानी कि वास्तविकता में कोई ट्रेवल नहीं है केवल माइंड का आए सुनिए हम यहां बौद्धिक चीजों में आए हमें ये सब पता चल गया हमने ये त्यागा और आत्म कॉन्शसनेस में आए दे अभिमान को छोड़ दिया। दे अभिमानी बने, विदेही बने और परमात्मा तक जाने की यात्रा की। यानी कि भौतिक रूप से
01:29:36:28 कोई ऐसी एक दिशा वाली यात्रा नहीं है। वो केवल बताया जा रहा है। ब्रह्म तक जाने का कोई भौतिक संसाधन नहीं है। इसी प्रकार से परमात्मा पिता परमधाम में रहने वाले पिता तक जाने का कोई भौतिक साधन नहीं होता। नहीं नहीं वह ठीक है मतलब यह एक केवल प्रपंच रूपी दृष्टिकोण से बात बताई जा रही है वास्तविकता में वहां कॉन्शियसनेस की बात है ऊपर नीचे कुछ नहीं है वास्तविकता में वो केवल व्यवहार जगत की बात जैसे ही आप दिशा मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं मैं मैं बता रहा हूं ऊपर नीचे की बात बता रहा हूं मैं बता रहा हूं जैसे ही हम ऊपर नीचे कहते हैं तो दिशा आ गई जो दिशा तत्व है ये भौतिक जगत का तत्व है या आध्यात्मिक तत्व है सुनिए दिशा केवल पृथ्वी तक सीमित है मैंने पृथ्वी को छोड़ते हुए कॉनशसनेस से परमात्मा का ध्यान करने का चिंतन करने का साधन आपको बताया। तो परमात्मा को आप ऊपर बता रही है खत्म हो जाते हैं। साधन यहां खत्म हो जाते हैं। दिशा, दशा, पानी, झरने, बादल ये सब इस पृथ्वी लोक में खत्म हो जाते हैं। यानी कि जो आप दिशा बता रही है लोक और सूक्ष्म लोक से परमधाम तक की यात्रा कराइए। यानी कि जो दिशा आप बता रही हैं कि जो ब्रह्मलोक है वह ऊपर की दिशा में है। वह कोई
01:30:52:00 दिशा नहीं है। वह तो खत्म हो गई। पृथ्वी में ही दिशा नहीं है वो। हां। तो ऊपर की दिशा नहीं है। कोई भी नहीं। नहीं है। तो वही तो मैं कह रहा हूं कि वास्तविकता में कोई दिशा नहीं है ऊपर की ओर। हां। हां। ठीक है। यही यही पूछ रहा है। जी जी। अच्छा ये हो गया। काफी लंबा टाइम हो गया वो षष्ठी रचना बात करते। इतना लंबा समय ब्रह्मा कुमारी को होता नहीं है वैसे मैं क्योंकि आपसे बहुत कोई ब्रह्मा कुमारी आपको इतना लंबा कैसे समझाएंगी बताइए अच्छा वो स्वधर्म वाली बात फिर से आ गई कि जैसे आत्मा का स्वधर्म शांति है तो वो अशांति भी हो रहा है क्योंकि आत्मा को बुरे कर्म भी करना ही करना है। देखिए शिव जी मैं आपको एक बात यहां रोक के कह रही हूं। कुछ मुझे डर लग रहा है आपसे। मेरी बात सुन लीजिए। वो ब्रह्मा कुमारियां अलग थी जो आपके अलग-अलग इंटरव्यूज में घूमती है। आपके बहुत सारी वीडियोस मैंने देखी है। आपने काफी जगह ब्रह्मा कुमारियों को पकड़ा है। लेकिन मैं वो ब्रह्मा कुमारी हूं इनके लिए। अगर मेरे पास कोई भी आया है तो वो ब्रह्मा कुमारीज को मान के गया है। अब आपका क्या इरादा है मुझे नहीं पता।
01:32:07:08 अगर आप मेरे से ज्यादा उलझेंगे, ज्यादा बातें करेंगे तो मैं तो अपनी बात नहीं छोडूंगी। मैं तो देखो ब्रह्मा कुमारी की ड्रेस में बैठी हूं और मैं मैं बात छुड़वा नहीं रहा हूं। मैं ये मैं समझती हूं धर्म धर्म की रक्षा करना मेरा धर्म है। तो जिस धर्म में जिस भष में मैं हूं उस धर्म की इस समय पूरी वफादारी से रक्षा करूंगी मैं। मैं बिल्कुल नहीं समझती कि मैं नीलिमा बन के बात करूं। मैं तो ये जो बैज लगाया है इस धर्म की रक्षा करूंगी। जो भी धर्म ब्रह्मा कुमारियों का मेरा मेरा उदेश्य आप जो भी क्वेश्चन करेंगे आपके क्वेश्चन पूरे नहीं होने वाले 11:00 बज गए हैं अब 12 भी बज सकते हैं लेकिन मैं क्विट नहीं करूंगी पूछिए सुनिए मेरा उद्देश्य आपको आपकी चीजों को छुड़वाना नहीं है एस ए ब्रह्मा कुमारी मेरा उद्देश्य ये दिखाना कि ब्रह्मा कुमारी कहां-कहां पर उत्तर नहीं दे रही है और वो मैंने जो जो मेरा उद्देश्य है वो मुझे मिल रहा है प्राप्ति हो रही है अभी सर बोलिए तो अह दिशा वाली बात हो गई और बीच में सूक्ष्म लोक हमने देख लिया। ब्रह्मा विष्णु महेश के बारे में जान लिया। अह पहले आज जो आपने पढ़ाया उसके बारे में उल्टा पैर भी हो गया और कर्म भोगने आती ये शांति में आ जाएगा। मेडिटेशन द्वारा
01:33:22:14 अनुभव। अच्छा यह बताइए एक जो बार-बार यह बात की जाती है कि हम लोग ईश्वर को अनुभव करते हैं अनुभव से सिद्ध होता है कि ईश्वर है। तो वो ऐसी क्या चीज होती है जिससे कि हम यह माने कि हां यह ईश्वर का फील हो रहा है हमें। मैंने इसीलिए आज का चैप्टर उठाते ही यह बात निकाली कि आपको अनुभव वाली बात से शुरू कराऊ। तब जाके मैं इस बात को पकड़ पाऊंगी। आप कहीं ना कहीं यह बात कहेंगे। तो जो मेडिटेशन मैंने आपको कराया उसके पहले वाले चैप्टर में मैंने कहा था आपसे कि आत्मा तीन गुणों से सुसज्जित है। याद हो आपके मैं आत्मा हूं में आप देख लेना फिर से एक बार मन, बुद्धि और संस्कार तीन शक्तियों से आत्मा चलती है। ठीक है? अनुभव की बात कर रही हूं। आत्मा की तीन शक्तियां है। जैसे शरीर की सब कर्मेंद्रियां है। शरीर कर्मेंद्रियों से चलता है ना। आंखें, मुख, कान, नाक ये सब स्वाद इंद्रियां ये सब है। इन इंद्रियों से शरीर चल रहा है। इसी प्रकार आत्मा की तीन इंद्रियां है।
01:34:38:07 मन, बुद्धि और संस्कार। मन जिसमें विचार आते हैं। बुद्धि जिससे आत्मा निर्णय लेती है और संस्कार मतलब रिपीटेशन में जो कर्म होता है उसकी उसे आदत पड़ती है। सॉरी जब अच्छे और बुरे किसी भी चिंतन की आदत पड़ती है उसके संस्कार बनते हैं। और जब वो संस्कार बनते हैं ना तो व्यक्ति उसे अनुभव करने लगता है। अब अनुभव में अगर आपको मैं बताऊं कि अनुभव वह चीज होता है कि आप किसी भी चीज को बार-बार करेंगे ना तो वो संस्कार में आकर आपको अनुभव देने लगेगी। अगर छोटा बच्चा भी सुबह ब्रश करता है ना तो धीरे-धीरे उसे ब्रश करना सिखाया जाता है। उसे गोद में ले पहले ब्रश करेगी मां फिर वो धीरे-धीरे सीखेगा। रोज देखेगा खुद करने लगेगा। और जब वो खुद करने लगेगा अभी तो हो नहीं रहा था। कॉनशस में नहीं था वो कि भाई मेरे दांत साफ हो रहे हैं या मेरे मुख का क्या स्वाद है क्या नहीं है जब धीरे-धीरे उसको उसकी हैबिट पड़ती है तो धीरेधी वो उसका स्वाद लेने लगता है धीरेधी वो उसको अनुभव करने लगता है कि इसका अनुभव क्या है समझ रहे हैं
01:35:53:08 मेरी बात अब ऐसे मन बुद्धि संस्कार के द्वारा जब हम परमात्मा को याद करते हैं संक्षिप्त में समझ गया नहीं पूरा होने दीजिए मेरी बात ये अनुभव होने लगता है [हंसी] जब हम जाते परमात्मा को याद करते हैं। जब परमात्मा का चिंतन करते हैं। जब अपनी शक्तियों का चिंतन करते हैं। जब हम अपनी सब शक्तियों को बार-बार याद आती है। मैं आत्मा शांत स्वरूप हूं। मैं आत्मा ज्योति बिंदु हूं। मैं आत्मा निराकार हूं। मैं आत्मा लाइट स्वरूप हूं। मैं आत्मा ये सब जितने भी गुण है। जब मैं बार-बार मन में चिंतन करती हूं। अपनी बुद्धि चलाती हूं। निर्णय लेती हूं कि मुझे कर्मेंद्रियों से न्यारा होकर जितेंद्रिय बनना है। जितेंद्र मतलब इंद्रियों से परे होना है। इंद्रियों के भोग को छोड़ना है। विलास को छोड़ना है। तब मैं परमात्मा को याद करता हूं या करती हूं। और जब मैं उसका हैबचुअल होती हूं तो मुझे वो अनुभव मेरे शरीर को मेरी बुद्धि को मेरे तन को होने लगता है। और परमात्मा अपने आप उसमें शक्ति भर के मुझे परमात्मा अपना फील कराता है। यह होता है अनुभव। अब बताइए आप देखिए इसमें आपने लास्ट में एक लाइन ऐसी बोल दी ना जिसने वह सारी
01:37:08:12 जो चार पांच जो चीजें थी जो अपने आप को काउंटर कर रही थी वो फंसेगी। खैर मैं अब आपसे पूछता हूं। इसका मतलब कि ब्रह्मा कुमारी में रहकर के जो लोग ईश्वर को अनुभव कर रहे हैं। वास्तविकता में बार-बार रेपिटेशन के द्वारा निर्मित वो संस्कार मात्र हैं। वह अलग से कोई ईश्वर नहीं है। नहीं आपने मेरी लाइन तोड़ दी। लास्ट वाली आपने मन से मेरी लास्ट वाली लाइन को तोड़ अरे आप आप गुस्सा मत हो नहीं से डेज जी आपने अपने मन से एक बात बना ली लास्ट वाली लाइन को तोड़ दिया अरे आप ठीक कर दो ना आपने कहा वो संस्कार मात्र है जबकि मैंने इसे पूरा इस तरह नहीं किया मैंने किया कि संस्कार होते हुए जब मुझे वो अनुभव होने लगता है मैंने बच्चे का उदाहरण दिया कि बच्चे को संस्कार पड़ता है ब्रश करने का। फिर उसे अनुभव होने लगता है कि मेरे मुंह की बदबू चली गई। मेरे मुंह के बैक्टीरिया चले गए। मेरा मुंह साफ होने लगा। वो अनुभव करने लगा। इसी प्रकार परमात्मा को याद करते हुए चिंतन करते हुए परमात्मा की शक्ति का अनुभव होता है। परमात्मा का अनुभव होता है। मैंने यानी कि यानी कि वो संस्कार मात्र
01:38:23:13 नहीं है। एक अलग से कुछ विशेष अनुभव होता है। जैसे कि ब्रश करने से उसको यह तो संस्कार बन जाता है कि मुझे बार-बार ब्रश करना है। ठीक है? मगर उसको ब्रश करने पर एक विशेष अनुभव भी होता है कि फ्रेशनेस आती है। अगर उसके उसमें मिंट डला होगा तो उसको वो ठंडाठंडा लगेगा या उसमें बबूल का दंत मंजन होगा तो उसमें वो स्वाद होगा उससे आएगा। तो उस एक विशेष चीज आती है जो उसके पास नहीं थी। एक विशेष अनुभव होता है। तो अब मैं पूछ रहा हूं कि परमात्मा का अनुभव जो कह रहा है ब्रह्मा कुमारी बार-बार मेडिटेशन से संस्कार बन रहा है कि मुझे बार-बार करना है। यह संस्कार तो बन गया। मगर जो विशेष अनुभव बताया जा रहा है कि परमात्मा का अनुभव है वो कैसा होता है? परमात्मा का अनुभव जिसके कारण जिसके कारण जिसके कारण हम यह मान सके कि ईश्वर है इस दुनिया में। यह तो जब आप पूरा से डेज कोर्स कर लेंगे मैं लास्ट में तीन दिन आपको वही अनुभव कराऊंगी। बस बस नहीं अनुभव नहीं करना मुझे। ये पहले जानना है मैं किस अनुभव को किस कारण से यह मान लूं कि ये में जान जाएंगे 7 मैं आपको समझा दूंगी। ठीक ठीक ठीक। तो ये हो गया आगे के लिए। बना
01:39:38:16 दीजिए सुनने का पहले तो फिर आप सुनेंगे। हां सुनने का संस्कार जरूरी है पहले। अच्छा मेडिटेशन ठीक है आज का हो गया काफी अच्छा रहा और अच्छा एक एक चीज है बहुत अच्छी है चाहे तो अगले में ले लीजिएगा ये जो है ना कि जो पाप कर्म है यानी बुरे विचार पाप कर्म होते हैं बुरे विचारों से तो ये बुरे विचार एग्जिस्ट कहां पर करते हैं क्योंकि आत्मा इनको इनसे अलग भी स्वयं को कर सकती है। कर सकती है ना? आत्मा बुरे और अच्छे संस्कारों से अपने आप को अलग तब कर सकती है जब वो स्वयं चाहे तो वो चाह भी पैदा होनी चाहिए। वो वायुमंडल मिलना चाहिए। उसे वो चीज प्रश्न दूसरा है। प्रश्न दूसरा है। अलग किसी भी तरह से कर सके पर कर सकती है। क्लियर है ना? हां। तो इसका मतलब यह है कि जो अ जो बुरे विचार हैं बुरे विचार यानी बुराई पाप कर्म इत्यादि जिसके कारण
01:40:54:00 व्यक्ति दुख में फंसता है और जिसके कारण उसे वो कर्म भोगने आना पड़ता है। हालांकि कर्म भोगने से रिलेटेड भी एक प्रश्न है कि वो कर्म भोगने आ रहा है वो भी एक प्रश्न हो वो अलग हो जाएगा। मगर अभी फिलहाल इस पर ही रहते हैं कि इसका मतलब है यह जो बुरे विचार हैं यह एकिस्ट कहां पे कर रहे हैं जो आ जाते हैं मन में लोगों के मनुष्यों के मन में आ जाते जन्म जन्म बाएं जन्म संस्कारों रहित आत्मा उनको भोगती है और वो बुरे और अच्छे संस्कारों के साथसाथ इन जन्मों को युगों युगों झेलती है और हर बार इन कर्मों से अलग होती है और हर बार पवित्र होती है तो ये पवित्र से अपवित्रता का खेल ये मैं ये मैं समझ गया प्रश्न मेरा कुछ और है जैसे जो बुरे विचार हैं उनके बिना आत्मा एक्सिस्ट कर सकती है यह तो निश्चित हो तो अब ये जो बुरे विचार हैं इनका धारक तत्व क्या है? कहां पर रहेंगे ये? क्योंकि आत्मा तो जिसमें ये आ भी सकते हैं, जा भी सकते हैं। मन में तो ये रहेंगे कहां? किसके मन में? किसके? आत्मा के मन में। आत्मा के मन में। मैं आत्मा तो उससे अलग हो सकती है। इसका वो स्थाई इसका मतलब
01:42:09:13 मैंने आपको अभी कि मन, बुद्धि, संस्कार उसकी तीन शक्तियां है। फिर आप मन को आत्मा में जोड़ रहे हैं। जबकि मैं बार-बार वही जोर दे रही हूं। आत्मा की तीन शक्तियां है। जैसे शरीर की कर्मेंद्रियां है। आत्मा की तीन इंद्रियां है। मन, बुद्धि, संस्कार। मन में रहता है बुरा विचार। बुद्धि निर्णय लेती है बुरा करूं कि अच्छा करूं या कहां जाऊं? किस मार्ग पे जाऊं? और मगर आप ये भी मगर आप ये भी तो कह रही हैं कि जो आत्मा है वो बुरे विचारों से अलग हो सकती है। हां हो सकती है। तो बुरा विचार एक्सिस्ट कहां पे करेगा? बुद्धि लेगी निर्णय मन में मेरे बुरा विचार आया मेरे मन में बुरा विचार मैं पूछ क्या रहा हूं नीलिमा जी मैं पूछ ये रहा हूं कि जो यह विचार होता है इसको रहने के लिए विचार को रहने के लिए एक चेतन तत्व चाहिए अब जीव तो विचारों से अलग हो सकता है इसका मतलब सुनिए नीलिमा जी कह के मुझे पूरा मुझे पूरा पूरा पूरा तो करने दीजिए संस्कार आत्मा की तीन शक्तियां मन में विचार आता है। बुद्धि आता है। कहां से आता है? कहां से आता है? उससे पहले वो विचार कहां था? मन में मन में कहां से
01:43:24:14 आएगा? मन में विचार आता है। मन स्वयं कहां से आता है? स्वयं में चेतन है मन। यानी उसमें विचार वो पहले से ही था। हां वो भूल चुकी होती है और वो याद आता है। यानी कि बुरे विचार, बुरे विचार जीव के अंदर सदैव रहते हैं। सदैव नहीं रहते। निकलते ही जाते हैं। आते हैं तो वो कहां रहते हैं? आते कहां से आते हैं? बुद्धि में रहते हैं। मन मन पैदा करता है। बुद्धि निर्णय लेती है। संस्कार हैबिट बनता है। अगर वो अच्छा विचार करेगी और वो लगातार करेगी तो वो अच्छे विचारों का उत्पन्न करेगी अपने अंदर। आगे बढ़ रही है। मैं कह रहा हूं कि मन मन से जब वो जाते हैं मन से चले जाते हैं तो वो बुराई जो मैं कह रहा हूं बुराई एक्सिस्ट कहां पे कर रही है? क्योंकि यहां पे तो यह तो उसका टेंपरेरी वो है। आत्मा चेतन स्वरूप है, चेतन शक्ति है और मन भी चेतन है। यहां बुद्धि भी चेतन है और संस्कार भी चेतन ही है। मैं आपको क्योंकि मैं सनातन का ज्ञान भी रखती हूं इसलिए उस तरीके से बता रही हूं। चेतना मन में भी है और चेतना बुद्धि में भी है और चेतना संस्कारों में भी है। तो वो जो चेतना है वो मन में पैदा होता है। गलत विचार गलत पॉइंट या गलत सही
01:44:39:20 विचार सही पॉइंट और बुद्धि रूपी तराजू में तोलती है वो कि सही है या गलत है। और फिर यानी कि यानी कि जो यानी कि जो बुराई है वो विशेष देश काल परिस्थिति में उत्पन्न होती है। वह सदा से है नहीं। नहीं जो इविल है सदा से नहीं है शाश्वत नहीं है नहीं है वो परिस्थिति अनुसार नहीं आत्मा के संकल्पों अनुसार आती है हां यानी कि आत्मा जब संकल्प करती है तो बुराई उसमें वो उत्पन्न होने वाला पदार्थ है। बिल्कुल बुराई उत्पन्न होने वाला पदार्थ है। मतलब बुराई के बिना भी आत्मा एक्सिस्ट करती है। हां ठीक है। तो यह निश्चित तो यह निश्चित क्यों हो रहा है कि नहीं एक बार दोबारा बुराई आएगी आएगी यह निश्चित क्यों हो रहा है युगों की वजह से समय की वजह से काल की वजह से कालखंड की वजह से क्या कालखंड सतयुग द्वापर त्रेता कलयुग सतयुग त्रेता द्वापर कलयुग का जो चक्र है उस अनुसार जैसे जो आत्मा है वह पाप से बिल्कुल फ्री हो गई ठीक है सतयुग में अब उसके पास पाप नहीं
01:45:54:21 हां तो अब वो जो है दोबारा से वो जो बुरा करने का विचार है उसको कौन डालेगा? स्वयं को भूल गई ना स्वयं को भूल गई ना भूल गई मगर वो विचार कहां से आ गया? युग अनुसार समय अनुसार जैसा समय हुआ जैसी परिस्थिति यानी किसी और ने वो विचार डाला उसके अंदर यानी किसी और ने डाला आत्मा के मन ने डाला आत्मा मन के द्वारा अरे आप तो जब मैं ये कह रहा हूं जिस समय वो निकल गया उसके मन से भी बाहर हो गया मैं तब की बात कर रहा हूं क्या बाहर हो गया बुराई बुरा विचार है ही नहीं एक्सिस्ट ही नहीं कर रहा हो गई सतयुग के अनुसार समय के अनुसार भक्ति आई भक्ति आई समय के अनुसार ऐसा ऐसा तो नहीं है आत्मा हमेशा ही बुरा कर रही है। अगर वो सतयुग में देवी देवता है आपने को आप युगों को सुनना नहीं चाहते। सुनो आप युगों को सुनना नहीं चाहते। अच्छाई और बुराई पे बात कर रहे हैं। जब आप आत्मा की अच्छाई बुराई पर बात करोगे तो युगों की बात भी होगी। समझो आप आप सतयुग में आई आत्मा पावन पवित्र सतो प्रधान हुई। उसके बाद रजो प्रधान हुई। रजो प्रधान हुई तो उसने भक्ति करी। वो पेड़ पौधे जल थल सबको पूजने लगी।
01:47:09:25 अपने स्वयं के चित्रों को भी पूजने लगी। फिर वो कलयुग में आई। कलयुग में जैसी परिस्थिति तमोगुणी हुई। तमो प्रधानता की अति को पाई। जैसा जैसा समय हुआ आत्मा के विचार बदलते गए। स्वयं को भूलती गई। इसी को याद दिलाने के लिए ब्रह्मा तन्मय शिव परमात्मा ने आके ये सृष्टि का पुनः स्थापना किया कि मैं आप कौन है? आप कहां से आए हैं? आपका धर्म क्या है? आप कैसे भूल गए? तो यह होता है। ठीक है? अब मैं पूछूं कुछ? मैं पूछ ये रहा हूं कि जो आत्मा है एक समय ऐसा आता है तब उसके अंदर जो इविल है यानी कि बुराई यानी कि पाप कर्म के विचार। पाप कर्म नहीं कह रहा हूं। पाप कर्म के विचार वह विचार भी नहीं होते हैं। एक समय ऐसा होता है वह विचार भी उसके अंदर नहीं होते हैं। वह बिल्कुल फ्री होता है। ठीक है? अब ऐसा क्या हुआ जो उसके अंदर वो चीज उत्पन्न हुई आई। क्या हुआ? परिवर्तन हुआ। यानी कि यानी आत्मा का स्टेज बदला। आत्मा यानी कि समय का जब परिवर्तन होता है तो आत्मा के अंदर अपने आप वो चीज उत्पन्न
01:48:25:01 हो जाती है जो पहले नहीं थी। जी बिल्कुल समय का परिवर्तन होने के कारण जी बिल्कुल आत्मा के अंदर एक नया परिवर्तन हो जाता है। एक मिनट एक मिनट शिव जी ऐसे समझेंगे आपके पीछे मैं ये वायुमंडल देख रही हूं जिस तरह से आप ज्ञान की बातें कर रहे हैं। आपके पीछे कुछ बुक्स लगी है। ऐसे समझेंगे आप आपने एक वेशभूषा धारण करी है। आपके कुछ नियम भी होंगे। आपके कुछ कर्तव्य भी होंगे जो आपके याद है। आपको उन नियमों में रहना है। जिस भी धर्म को आप मानते हैं मैं मानती हूं। मैंने एक वेशभूषा धारण करी है। तो यह जो वायुमंडल है उस वायुमंडल में आपके विचार वैसे रहेंगे। अगर इस वायुमंडल को आप परिवर्तन कर दो। बदल दो और आप किसी गलत वायुमंडल में चले जाओ। कोई ऐसी जगह चले जाओ कि जो वायुमंडल ठीक नहीं है। तो कुछ एक आत्माएं हैं। कुछ एक आत्माएं हैं जो अपने आप पर कंट्रोल रख सकती हैं कि नहीं यहां अगर शराब बेची जा रही है तो मुझे शराब नहीं पीनी है क्योंकि मेरा धर्म वो नहीं है। अगर यहां पर मांस खाया जा रहा है तो मुझे मांस नहीं खाना है क्योंकि मेरा धर्म वो नहीं है। यहां कुछ गंदगी हो रही है तो मुझे गंदगी में नहीं जाना है क्योंकि मेरा धर्म वो नहीं है। लेकिन वो तब होगा जब मुझे याद है।
01:49:40:12 लेकिन जब मुझे कुछ याद ही नहीं है जहां बताया जा रहा है कि आत्मा को लग रहा है कि यही मेरा धर्म है यही सब कुछ है तो तो भूल जा रहा है तो वो कुछ भी कर रहा है लेकिन ये याद तो परमात्मा आकर के अब संगम पे दिलाते हैं ना तब आत्मा अच्छा होता ठीक है पूछूं मैं पूछू अब देखिए आपने कहा कि हमारे वातावरण के अनुसार हमारे जो मन है उसमें बुरे विचारों का आना जाना हो सकता है। ठीक है? अब जैसे मैं यहां बैठा हूं तो मेरे जो मेरे पीछे वातावरण है उसके कारण मेरे मन में उस तरह के विचार हैं। ठीक है? यह जो मेरे पीछे चीजें हैं यह कुछ दूसरे कॉन्शियस लोग हैं। कुछ दूसरे चेतन तत्व हैं जिनके यहां विचार हैं। यह कपड़े के रूप में भी किसी दूसरे चेतन तत्व का विचार है जिसके कारण मेरे पास वो विचार आया। ठीक है? तो क्या आप यह कहना चाहती हैं कि वहां पर भी किसी दूसरे चेतन तत्व के विचार होते हैं जो वहां मनुष्य में प्रवेश करते हैं। देखिए जो बात आप कर रहे हैं जो बात अभी आपने करी वो बात आपकी और यह वाली बात बिल्कुल मिसमैच है। ये मैच ही नहीं होती है। आपका
01:50:55:13 किसी और का विचार है। ये किसी और का विचार है। लेकिन अगर आपने धारण किया है तो धर्म धारण किया ये आपका हो गया। कहने का मतलब आप मेरा प्रश्न आप मैं जो पूछना चाह रहा हूं वो आप समझ नहीं रही आप मैं जो पूछना चाह रहा हूं आप समझ नहीं रही है क्यों नहीं समझ रही हूं आप एक्सेप्ट नहीं करना चाहते सुनिए मैं तो समझ रही हूं आप एक्सेप्ट नहीं करना चाहते ये किसी और का नहीं है जब आपने धारण कर लिया आपका धारण धारण करने से पहले क्या स्टेज है मैडम मैं वो पूछ रहा हूं धारण करने से पहले का स्टेज मतलब धारण करने से पहले मैं किसी और कॉनशसनेस से प्रभावित हो रहा हूं ना। पहले की बात कर कैसे सकते हैं आप? जब आपने धारण कर लिया ये क्यों नहीं कर सकते? यही तो बात है। लेती है। जब आत्मा समय को धारण कर लेती है। समय की वायुमंडल को धारण कर लेती है तो वो तो उसका हो गया ना। वो किसी दूसरे पे कैसे मैं अरे बहन मेरा सवाल तो समझिए मैं क्या कह रहा हूं। नहीं अब आपकी बात का आंसर लीजिए ना। किसी की चोरी देखकर संग का रंग समझते हैं आप संग का रंग किसी का संग का रंग लगा और वो दूसरे का भी संग बदल गया छोटे बच्चे और बड़े बच्चे में
01:52:10:16 फर्क होता है यानी कि वो जो पूरी होने दीजिए बात छोटे बच्चे और बड़े बच्चे में फर्क होता है मैच्योर बच्चे को कोई बहका करके अपने साथ ले जाके चोर नहीं बना सकता चोर अगर किसी को ले जाए पाले उसे पो से बड़ा करे और उसे कहे ये तेरा कर्तव्य है क्योंकि मैं तेरा मालिक हूं। तू मेरा धर्म धारण कर। तो उसने तो धर्म धारण इसलिए किया क्योंकि वो उसका बाप बनके उससे करा रहा है। उसे क्या पता ये अधर्म है चोरी करा रहा है। दूसरे का करा लिया। लेकिन वो जब कर रहा है जिस समय चोरी की रिपोर्ट होगी। उस समय वो उसकी होगी। उस समय वो उसका पाप होगा। वो कोई किसी का नाम लेके बच नहीं सकता। चोरी तुमने की है तो पाप तुम्हारा है। यह धर्म तुम्हारा है। फिर जो तुमने किया है। इसी तरह से आत्मा जब किसी भी वायुमंडल से गंदगी को धारण करती है वो उसका खुद का पाप है। वो उसकी खुद के कर्म है। ऐसा नहीं कर सकते कि मुझे तो इसने प्रेरणा दी थी। जी मैं इसलिए ऐसा हो गया। ऐसा नहीं ये धर्म के गुरु शिष्य परंपरा में हो सकता है। अधर्म में नहीं हो सकता। समझ गया आप? हां बताइए। एक लास्ट लास्ट में फिर से एक बार पूछूंगा। आपने जैसे कहा कि कहीं से अगर मैंने गंदगी को लेके धारण कर लिया तो ऐसा
01:53:25:20 नहीं होगा कि सजा तुमको नहीं जिससे तुमने लिया है उसको उसको मिले। ठीक है? इसका मतलब मैं यह नहीं पूछ रहा हूं आपसे कि मुझे सजा क्यों मिल रही? जिससे मैंने लिया उसको मिलनी चाहिए। मैं ये नहीं पूछ रहा हूं। मैं ये पूछ रहा हूं कि जैसे जैसे मैं किसी से गंदगी ले रहा हूं। जैसे आपने उदाहरण लिया किसी से ले रहा हूं। तो आत्मा जब गंदगी से फ्री होती है वहां दिव्य लोक में तो फिर वह बुराई किससे लेती है? यहां पे दूसरे चेतन तत्व एक एक मिनट पूछो पूरा यहां पे दूसरे चेतन तत्व हैं। जिनकी मैं गंदगी ले रहा हूं। यहां पर है अवेलेबल। जिनकी मैं गंदगी या अच्छाई भी ले रहा हूं। इस भौतिक जगत में है दूसरे। तो वहां पे कौन सा होता है? दूसरा चेतन तत्व जिससे कि आत्मा में गंदगी आती है। मैं यही सवाल है। आप चाहते हैं वो आंसर तो आप समझिए बनावटी तो बनेगा नहीं जो आप ये सोच रहे हैं मेरे मुंह से निकलेगा हां जी दूसरा है। ऐसा नहीं है। दूसरा कोई नहीं है। आत्मा का स्वयं का स्वधर्म है। स्वयं स्वधर्म को वो याद रखती है और स्वयं स्वधर्म को भूलती है। सतयुग में जब आती है तब स्वधर्मी होती है। आत्मा स्वयं के धर्म को याद रखती है कि मैं शांति स्वरूप हूं। मैं पवित्र स्वरूप हूं। मेरा क्या काम है?
01:54:40:24 तो सतयुग में कोई बुराई धारण नहीं करती। अच्छाई धारण करती है। वो भी स्वयं की होती है। इनबिल्ट होती है। आत्मा में इनबिल्ट होती है बुराई और अच्छाई जिसका जवाब मैं पहले दे चुकी हूं आपको। वाह फिर [प्रशंसा] वो बहुत अच्छी बात है। इनबिल्ट होती है ना। हां। तो फिर आपने बीच में कहा था नहीं वो तो उत्पन्न होती है। कहां कहा मैंने उत्पन्न होती है। मैंने कहा अरे नीलमा बहन चक्कर आ गया मुझे। ठीक है। आज का ये डे टू का बहुत अच्छा रहा। डे वो कुछ नहीं कहा आपको ऐसा मैंने कहा अच्छाई बुराई समय वो अंदर से निकलती है उसकी। इनबिल्ट है। बुराई इनबिल्ट है आत्मा में कभी अलग नहीं होती। इनबिल्ट वो बुराई से आत्मा कभी अलग नहीं होती। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। आशा करता हूं आप सब लोगों को ये सेशन अच्छा लगा हो। से अलग नहीं होती आत्मा। ठीक है। बहुत बढ़िया। आज का सेशन रहा और जो लोग भी देख रहे हैं वो मनन चिंतन करें बहुत अच्छा लगा और नीलिमा जी आज आपने भी मुझे खूब छकाया है अच्छे से छकाया है और मैं क्षमा चाहूंगा अगर मैंने आपको कहीं परेशान किया हो हां मगर आपने बिल्कुल ओरिजिनल जो ब्रह्मा कुमारी होनी है वो भी टॉप लेवल की वो आपने आज हमको यहां उपलब्ध कराया है
01:55:55:25 कौन आपके जैसा कोर्स में कौन आता है कोई नहीं आता [हंसी] आएगा भी नहीं वो जुदाई फिल्म याद है आपको जो परेश रावल था एक आध मोटरसाइकिल वाला उसको देख के रिवर्स गियर लगा लेता था तो इसी तरीके से रिवर्स गियर लगाते हैं ठीक है अच्छा आज के लिए बहुत है शांति जय श्री राम जय श्री राम तो आप लोगों को कैसा लगा आज का सेशन? आप लोग जरूर बताइएगा और सीरीज अभी बाकी है। आज केवल डे टू हुआ है और हमने बहुत सारी चीजें देखी हैं। हालांकि अभी तक जो जिस कार्य के लिए बोला जाता है सेवन डेज कोर्स कर लो। आपको सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे। मुझे नहीं लगता इस पूरे सेवन डेज कोर्स में जो मेरे जो क्वेश्चंस होते हैं वहां पर ब्रह्मा कुमारियों के पास उसमें से कोई भी क्वेश्चन ये सेवन डेज कोर्स छू पाएगा। हालांकि वो उनका बचने का एक तकिया कलाम होता है। इसलिए सेवन डेज कोर्स मैं कर लेता हूं। आप लोगों को कैसा लग रहा है बताइएगा और जुड़े रहिए भैया।
01:57:06:19 और एक खुशखबरी है शुभ समाचार हैं कुछ रामपाल वाले विषय में जो हमने एक दो दिन पहले जो किया था शेर का बच्चा एक ही अच्छा वाला कार्य था वो तो 100 सुनार की एक लोहार की नहीं होता है। वो उस तरह से कुछ किया था। तो हमने वो उसमें कुछ शुभ सूचनाएं मिली है हमें बहुत जल्द उसको रिवील किया जाएगा पब्लिक कर दिया जाएगा जय श्री राम सभी को हर हर महादेव [संगीत]
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Brahma Kumaris 7-Day Course Day-2 | Ex-BK Neelima Sharma | Hindu Alert
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