⬜ Not used yet · 00:00:01:28 – 00:02:47:22 (2:46)
00:00:01:28 [घंटी की आवाज़] तो सभी को जय श्री राम। चोर चोर मौसेरे भाई आपने टाइटल देख ही लिया होगा। इस मुहावरे को चरितार्थ करते हुए दो लोग आपको इस समय दिख रहे हैं। जो हमारा बंदी छोड़ 2.0 है उसको सही घोषित करने के लिए पुराना अनऑफिशियल आर्य समाजी गालीबाज गुंडा भी आ चुका है। मैं बात कर रहा हूं ऋषिवाच की जो पूर्व में हमारे आचार्यों के लिए हमारे देवी देवताओं के लिए हमारे आराध्यों के लिए बहुत सारी ऐसी अश्लील बातों से युक्त पंक्तियां निर्गत कर चुका है सोशल मीडिया पर जो बहुत अत्यंत निंदनीय चीजें हैं वह सब कर चुका है और समय आने पर जब आर्य समाज से प्रामाणिक रूप से इस बात की पुष्टि की गई थी तो आर्य समाज ने इस व्यक्ति को पहचानने से भी मना कर दिया था तो अब यह पुराना जो अनऑफिशियल आर समाजी गालीबाज गुंडा है वो इस वर्तमान के बंदी छोड़ 2.0 गालीबाज की सहायता करने के लिए आ गया है और इसने घोषित कर दिया है कि भैया यह बहुत बड़ा शास्त्रार्थी है और जो है अमुक अमुक इस तरीके से ऐसेसे फौतियां कस
00:01:17:06 रहा है जैसे कि यही सबसे बड़े दोनों आर्य समाज के प्रामाणिक धुरंधर हैं। तो इन लोगों का कुल मिलाकर के जो क्लेम है वह यही है कि पूरी के शंकराचार्य जी जो है उत्तर नहीं दे पाए। उन्होंने विषयांतर करने की कोशिश की और अह कुल मिलाकर के वहां पर जो है आर्य समाज का मत जो है वह पुष्ट हुआ। अब वह बात एक अलग है कि वहां पर इस व्यक्ति ने अवतार विषय में अपना प्रश्न कितना स्पष्ट रखा था कि नहीं रखा था वह भी चर्चा का एक अलग विषय है। यद्यपि महाराज जी ने भी पूरी के शंकराचार्य जी ने भी इसके सवालों का पर्याप्त उत्तर दिया था कि नहीं दिया था? और क्या गोष्ठी होने के कारण उस चर्चा को आगे नहीं बढ़ाया गया था? अथवा किन कारणों से नहीं बढ़ाया गया था आगे उस बात को यह भी चर्चा का एक अलग विषय है। क्योंकि यदि कोई अगर यह कहता है कि उसको तब तक उत्तर क्यों नहीं दिया गया जब तक वह मौन नहीं हो गया तो यह अपने आप में ही कितनी कुतर्क से भरी हुई बात है वह आप लोगों को समझना चाहिए। सामने खड़ा हुआ व्यक्ति मौन होने वाला व्यक्ति नहीं है। वह व्यक्ति किसी भी प्रकार से दिखाना चाहता है कि भाई मैं चुप नहीं हुआ।
00:02:32:12 तो उसको चुप कराने का प्रयास कब तक करते रहे? वह व्यक्ति तो पागलपन भी करने लगेगा। वह व्यक्ति तो वितंडा भी करने लगेगा। वो व्यक्ति तो कुतर्कों की भरमार लेकर के खड़ा हुआ है। जरा यह ऑडियो सुनिए। तो मैं तो यह कह रहा
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→ Used in: A · Video परंपरा के विषय पर अब तक की सबसे स्पष्ट और निर्णायक वार्ता at 22:19 ↗
00:02:47:22 हूं कि किसी कारण से अगर हमें हमारे गुरुजनों का झूठ बोलना हमारा लग रहा है। यह लग रहा है कि द्वेष वश या लालच वश या भयवश झूठ बोल रहे हैं। सुनो उनके सामने हमने सिद्ध कर दिया। सुनो तो उनके सामने हमने सिद्ध कर दिया। ये देखो अष्टाध्यायी से आपका मैच नहीं खा रहा है। फिर वो वो कह रहा है कि नहीं अष्टाध्यायी से मैच हमारा खा रहा है। तो इसका मतलब [गला साफ़ करने की आवाज़] वो लोग झूठे लोग हैं। उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता। एक सूत भी नहीं किया जा सकता। और जब एक सूत गलत है। क्यों गलत है? अर्ध कुकुट न्याय नहीं अर्ध कुकुट न्याय करोगे यहां? हां। तो क्या दिक्कत है? अर्ध कुकुट न्याय कर दोगे? किसी व्यक्ति की कोई एक बात गलत हो तो सारी बात गलत हो जाती है। क्या? [गला साफ़ करने की आवाज़] अब बस बस अब इस पे मनन करो अब तुम। तो
⬜ Not used yet · 00:03:30:16 – 00:35:00:00 (31:29)
00:03:30:16 जब व्यक्ति निराधार साबित हो रहा है, जब व्यक्ति स्वयं के द्वारा स्वीकार किए गए सिद्धांतों को ही अस्वीकार कर देने वाला व्यक्ति है तो उसको चुप कराने के लिए प्रयास करते रहना कहां तक उचित है? दुर्जनोष न्याय से यदि मान भी लिया जाए कि बंदी छोड़ 2.0 को पूरी के शंकराचार्य जी ने यथोचित उत्तर प्रदान नहीं किया। परंतु उसे शास्त्रार्थ का नाम देकर और शास्त्रार्थ में विजय घोषित करके यह दोनों ही अलंकारी अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार बैठे हैं। कैसे? इस बंदी छोड़ 2.0 ने स्वयं अपने एक वक्तव्य में कहा है कि शंका समाधान के नाम पर यदि कोई शास्त्रार्थ करने का प्रयास करता है तो उसे वितंडा कहते हैं। स्वामी विवेकानंद क्या नाम? परिवराज हां परिवराज वो तो दर्शनाचार्य हैं। वो तो बड़े हाई लेवल के आचार्य हमारे। उनसे मेरी बात होती है। उनसे ना मेरी बातचीत मुझे डाउट होता है ना कुछ दर्शनों के संबंधी। उनके यहां मैंने फोन किया था। अच्छा मुझे चर्चा के लिए आप समय दें। हम तो कहा कि हां गुजरात कभी आइएगा तो इधर हो लीजिएगा। ऐसा कुछ बोला उन्होंने मतलब मतलब बहुत ज्यादा ठोस जवाब नहीं आया।
00:04:45:18 क्योंकि वो क्या करते हैं? वो ऐसे डिबेट इत्यादि नहीं करते हैं। डिबेट नहीं डिबेट के तौर पर शंका समाधान। और शंका समाधान के लिए उनके यहां हर कोई आता है। शंका समाधान देखिए उसमें ये होता है ना जैसे न्याय में सब बता रखा है कि विदंडा क्या है? वाद क्या है? जल क्या है? शंका समाधान। शंका समाधान में क्या होता है कि व्यक्ति का अपना खुद का कोई मत नहीं होता। ये चीज है। तो अगर आप शंका समाधान के नाम पे अपना फिर मत भी वहां पे स्थापित करने का प्रयास करेंगे तो फिर शंका समाधान वो भी तंडा बन जाएगा। तो स्वामी जी ऐसे हैं क्योंकि वो परिवराजक सन्यासी हैं। तो वो क्या करते हैं? उनकी वो आध्यात्मिक थोड़ा एक उन्नति अच्छी है कि वह ऐसी चीजों में पढ़ते ही नहीं जहां पर हल्का सा भी विरोध भाव हो। तो वह उनकी एक ऐसी प्रवृत्ति है तो वह कहते हैं कि अगर आपको मुझसे कोई बात कहनी है ठीक है तो या तो यह चीज हो कि आप नहीं मानोगे तो मैं कह दूंगा ठीक है जी आपकी मर्जी कोई इशू नहीं है और अगर आप आपको शंका समाधान करना है तो मुझे जितना ज्ञान है उस अकॉर्डिंग आपको बता दूंगा बाकी आपकी मर्जी मानना ना मान तो शंका समाधान करते हैं वो भी और स्वामी वो मुनि सत्यजीत जी अब अगर यह व्यक्ति यह कहता है कि वह शंका समाधान नहीं बल्कि शास्त्रार्थ ही था क्योंकि मैंने अपना पूर्व पक्ष बताया था कि मैं आर्य समाजी हूं या फिर मैं अवतार को नहीं मानता हूं तो क्या अपना केवल पूर्व पक्ष बता देने मात्र से या अपना परिचय बता देने मात्र से यह सुनिश्चित हो जाता है कि सामने वाला आपके
00:06:00:26 साथ शास्त्रार्थ करने में रुचि रखता है या नहीं रखता है। क्या उसके पास कारण नहीं हो सकते हैं कि चलती हुई सभा में विघ्न ना डालते हुए जो है एक अलग से एक नया दृश्य शास्त्रार्थ के रूप में बनाना है अथवा नहीं बनाना है। अथवा मुझे शास्त्रार्थ करना है तो किसके साथ करना है? अगर मैं किसी आर्य समाजी के साथ शास्त्रार्थ करूंगा भी उसके विरोधी पक्ष का खंडन करूंगा भी तो सामने आर्य समाज की ओर से कौन सा व्यक्ति होना चाहिए क्या इस प्रकार के सभी निर्णय पूरी के शंकराचार्य जी ने किए हैं नहीं किए हैं आपके प्रस्ताव को स्वीकार किया है शास्त्रार्थ के रूप में बात करना जारी रखना उन्होंने स्वीकार किया है या नहीं किया है यह आपने सुनिश्चित किया था यदि आप कहें कि मैंने वहां पर बताया था कि मैं चर्चा करने आया हूं। तो सबसे पहली बात तो तुम्हारी धूर्तता यहीं पर सिद्ध हो जाती है। जब तुम वहां चर्चा करने गए थे तो अपने थंबनेल में अपने वक्तव्यों में यह क्यों कह रहे हो कि भाई मैंने शास्त्रार्थ में पराजित किया है। चर्चा को शास्त्रार्थ कब से कहा जाने लगा? अगर तुमने वहां पर शास्त्रार्थ शब्द का उपयोग नहीं किया था। चर्चा शब्द का उपयोग किया था तो तुम अपने वक्तव्यों
00:07:15:27 में वहां से भली-भांति वहां से बाहर आ जाने के बाद उस वार्ता को उस चर्चा को शास्त्रार्थ क्यों कह रहे हो? ठीक है? मान भी लिया जाए कि तुम्हारी चर्चा का अर्थ यही था कि भाई तुम शास्त्रार्थ करने आए हो। तो क्या तुमने सुनिश्चित किया था कि सामने बैठे हुए 84 वर्ष की आयु वाले वृद्ध ने जो तुम्हारा प्रश्न भी ठीक से नहीं सुन पाए थे। उन्होंने तुम्हारी जो चर्चा का प्रस्ताव था वह सुन लिया है। क्या तुमने यह सुनिश्चित किया था कि उनके जो परिकर उन्हें तुम्हारा प्रश्न दोहराकर सुना रहे हैं। उन्होंने तुम्हारी तुम्हारा जो चर्चा शब्द का उपयोग करते हुए जो शास्त्रार्थ का प्रस्ताव है वो भली-भांति पूरी के शंकराचार्य जी को बताया था। उसके बाद तुमने क्या सुनिश्चित कर लिया था कि पूरी के शंकराचार्य तुम जैसे गालीबाज भाई उसको जानता कौन है? वह किस प्रकार से प्रामाणिक रूप से जुड़ा हुआ है? आर्य समाज से जो व्यक्ति खुद कहता है कि मैं प्रामाणिक रूप से आर्य समाज से नहीं जुड़ा हुआ हूं। मैं प्रामाणिक रूप से उसका प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा हूं या प्रामाणिक रूप से उसका अनुयाई भी नहीं हूं। मैं तो बस दयानंद जी में विश्वास रखने वाला व्यक्ति हूं। ऐसे व्यक्ति को आर्य समाज की ओर से अपने सामने खड़ा करके पूरी के
00:08:30:28 शंकराचार्य जी इतने निम्न स्तर के व्यक्ति के साथ क्यों करेंगे चर्चा? क्यों करेंगे शास्त्रार्थ? यदि उन्हें करना भी होगा तो तुम्हारे यहां के जो गणमान्य लोग हैं, प्रतिष्ठित लोग हैं, वह उनके साथ चर्चा करेंगे। तुम हो कौन? जो तुम्हें समय दिया जाए शास्त्रार्थ के लिए तो क्या आपने ये सब चीजें सुनिश्चित की थी कि नहीं कि आपके चर्चा के प्रस्ताव को उन्होंने स्वीकार किया है या नहीं किया है। उनको आपका चर्चा का प्रस्ताव पहुंच गया है या नहीं पहुंचा है। यह सब चीजें आपने सुनिश्चित की थी। और अंतत गत्वा जो रिकॉर्डिंग मैंने अभी सुनाई है। इसमें इस व्यक्ति ने खुद यह माना है कि भाई जो स्वामी विवेकानंद परिवराजक जी हैं वो किसी भी प्रकार की विरोध की स्थिति देखते ही उससे दूर रहना उचित समझते हैं। उनका साधना भजन इत्यादि को सुरक्षित रखने के लिए। तो यानी कि आपके पक्ष के व्यक्ति के पास कारण हो सकते हैं। किसी भी प्रकार की विरोधी स्थिति से दूर रहने के लिए। परंतु शंकराचार्य के पास नहीं हो सकते। उनके पास यह कारण नहीं हो सकता है कि भाई मैं यहां पर प्रश्नोत्तरी सभा के लिए बैठा हूं। कई लोगों की शंका का समाधान करना है। मुझे शास्त्रार्थ का दृश्य नहीं बनाना है। बनाना भी है तो किस व्यक्ति के साथ बनाना है यह भी मैं सोचूंगा। इत्यादि इत्यादि उनके पास कारण नहीं हो सकते। परंतु तुम्हारे पास
00:09:46:02 हो सकते हैं। यही है तुम्हारा न्याय दर्शन। यही है तुम्हारा न्याय। अच्छा एक बात और है। यह व्यक्ति यह भी कह सकता है कि भाई मैंने चर्चा का प्रस्ताव दिया था। पूरी के शंकराचार्य जी मान लो नहीं सुन पाए थे तो किसी ने मुझे रोका क्यों नहीं भाई तुझे रोकने उनका एक शिष्य आया था ना जो तुझे तूने कहा हो या ना कहा हो पर वो तुझे जानता था कि तू किस लिए वहां पर आया है तो मैंने तो तुझको आकर के प्रश्न करने से पहले ही प्रस्ताव दिया था कि भाई चर्चा कर व्यवस्थित रूप से बैठकर के क्योंकि इस प्रकार से प्रश्नोत्तरी की सभा में जहां पर एक सीमित अवधि में समय दिया जाता है किसी भी श्रोता को प्रश्न करने का वहां पे तेरा समाधान नहीं होने वाला है यह मुझे पता था क्योंकि तू वहां पर प्रश्नोत्तरी के लिए नहीं शंका समाधान के लिए नहीं वहां तू चर्चा के नाम पर शास्त्रार्थ करने के उद्देश्य से ही आया था कोई बात नहीं तुझे प्रस्ताव दिया गया था ना यानी कि तू यह भी नहीं कह सकता कि किसी ने तुझे रोका नहीं अच्छा अब बात आती है कि अंततो गत्वा जब तुझे तेरे प्रश्न का सटीक उत्तर नहीं मिला था तो तेरे पास व्यवस्थित रूप से बैठकर चर्चा करने का विकल्प तो था ना तो तूने तूने क्यों नहीं की? अगर तू कहे कि तूने षड्यंत्र को भांप लिया था कि भाई अकेले
00:11:01:13 कमरे में ले जाकर के तेरे साथ मार कुटाई हो सकती है। तेरा सामूहिक रूप से बलात्कार इत्यादि हो सकता है। तो षड्यंत्र के लक्षण क्या थे? कैसे सिद्ध होता है कि वो षड्यंत्र ही था। तेरी ही गतिविधियों से सिद्ध होता है कि तुझे सार्वजनिक रूप से चर्चा करने में कोई आपत्ति नहीं थी। कोई भय नहीं था। तुझे भय था। एकांतिक रूप से जो व्यवस्थित व्यवस्थित वार्तालाप जो कहा जा रहा था कि भाई कक्ष में चलकर के करते हैं उससे तुझे भय था क्यों हमने इसलिए हमने इसलिए कहा था कि भाई वहां पर किसी का भीड़भाड़ का बार-बार आना जाना नहीं होगा शोरशराबा कम होगा इसलिए हमें हमने वो सुझाव दिया था परंतु यदि तेरे हिसाब से वो एक षड्यंत्र था बिना लक्षण के बिना न्याय सिद्धांत के वो एक षड्यंत्र था तो तो फिर तूने कक्ष में ना जाकर सार्वजनिक रूप से चर्चा करने का प्रस्ताव क्यों नहीं रखा। अच्छा दूसरी बात यह है कि साहसी कहते किसे हैं? क्या अनुकूल परिस्थितियों में ही कोई धर्मार्थ कार्य करने को ही साहस कहा जाता है? नहीं। वीर वो होता है जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भय होने पर भी आगे जाता है। रिस्क लेता है। वो होता है वीर। वो होता है साहसी। हम गए हैं। भागवतानंद के यहां जब हम गए थे तब हमने जब उसे सार्वजनिक रूप से बुलाया था और उसने हमें एक कक्ष में बुलाया था तो हमें नहीं पता था कि
00:12:16:16 उसके कक्ष में कितने लोग हैं, क्या है, कौन किसकी साइड है पर हम गए थे। वास्तविक रूप से निर्भीक होकर हम पहुंचे थे उसके कक्ष में। जब ईस्ट ऑफ कैलाश दिल्ली से हमें बुलाया गया था कि भाई आकर के चर्चा करो और वहां मंदिर में पहुंचने के बाद भी हमको कहा गया कि एक कक्ष में चलकर के कक्ष चर्चा करो। तो हमने वहां यह नहीं सोचा था कि नहीं नहीं हमारे साथ कुछ हो जाएगा। हम वहां पर आगे बढ़े थे। रिस्क लिया था। तो साहसी इसे कहते हैं। पर इस व्यक्ति ने तो किसी भी प्रकार का साहस दिखाने की बजाय यहां तक कि कक्ष से बचने के लिए सार्वजनिक रूप से चर्चा करने की बात ना कहकर चर्चा की संभावना को ही नष्ट कर दिया। यह कहकर कि भैया तुमने हमारे आचार्यों का अपमान किया है। हम आपसे चर्चा क्यों करें? अरे भैया जब ऐसा ही था अगर आचार्यों के अपमान के कारण चर्चा नहीं हो रही है तो तुमने पहले चर्चा सुनिश्चित क्यों की अपने चैनल पर क्यों बुलाया और यदि भय के कारण तुम चर्चा का परित्याग करना चाहते हो तो चर्चा की संभावना को नष्ट ना करते हुए ऐसा बीच का तुम्हें स्थान ढूंढना मात्र है जहां पर चर्चा संभव हो सके। परंतु तुम्हें तो चर्चा से भागना ही है। यह कैसे सिद्ध होता है? सबसे बड़ा प्रमाण, सबसे बड़ा कैची पॉइंट इस पूरे
00:13:31:20 प्रकरण का। इस व्यक्ति को यह मालूम नहीं था कि हमारे पास कहां-कहां के कौन-कौन से वीडियोस हैं। हमने सबसे पहले जो वीडियो जारी किया था, इस व्यक्ति को यह लगा कि उसमें जितना मटेरियल जितनी सामग्री हमने प्रस्तुत कर दी है, बस इनके पास इतना ही है। नहीं तो और होता तो यह दिखाते अवश्य और यही हमारी स्ट्रेटजी थी। जब हमने कम मात्रा में सामग्री प्रस्तुत की। इस व्यक्ति ने उस घटना को लेकर के ढेर सारे झूठ बोल दिए। जैसे कि मैं बहुत बड़ा फाइटर प्लेन हूं। मैंने चार व्यक्तियों को पहले निपटा दिया। उसके बाद 25 लोगों ने आकर के मुझे मारा। यह झूठ इसने क्यों बोला? क्योंकि इसको ऐसा लगा कि अब हमारे पास और सामग्री है ही नहीं। इसी प्रकार से इसने जो यह झूठ बोला है कि इसने जो है कक्ष में ले जाकर जो है वो जो दबाव बनाने वाला जो मानसिक और शारीरिक दबाव बनाने वाला जो षड्यंत्र है वो भांप लिया था। इसलिए इसने चर्चा से जो है दूरी बनाने का निर्णय लिया। तो अब इसको मैं क्लियर कर दूं। हमारे पास सबसे पहले इसने जब प्रश्न नहीं भी किया है तब का भी वीडियो है।
00:14:59:10 जब इसने चर्चा को सहर्ष स्वीकार किया है। चर्चा स्वीकार हो गई है। उसके बाद इसने प्रश्न किया है। प्रश्न में प्रश्न करने पर एक सीमा तक इसको समय दिया गया। उसके बाद इसको बिठा दिया गया। अब उसको ये जो भी नाम दे वो शंका समाधान है भले ही मगर ये उसको नाम दे कि भाई शास्त्रार्थ है। ठीक है। परंतु इसके पास चर्चा का विकल्प था ना। यह व्यक्ति मेरे सामने से होकर के मुझे बिना देखे हुए क्यों निकल रहा है वहां से? क्यों नहीं बोल रहा है कि कहां करनी है चर्चा? चलो करो चल के। क्यों नहीं बोल रहा है? अगर इसको आर्य समाज ले ले जाकर के भी चर्चा करनी है तो यह मेरे सामने से बिना मुझसे कोई बात किए क्यों भाग रहा है? मैं इसको पीछे से आवाज दे रहा हूं कि क्या हुआ भाई? हमारी तो चर्चा होनी है ना। क्योंकि ये वहां पर इसलिए नहीं आया था कि इसको सत्य का सत्य की स्थापना करनी थी। यह वहां पर इस उद्देश्य से ही आया था कि मुझे जो है अपना प्रश्न करने वाला वीडियो प्राप्त करना है और जाहिर सी बात है कि इतने सारे लोग होंगे तो मुझे एक हद तक ही समय दे पाएंगे और मैं यही प्रचारित कर पाऊंगा अपने वीडियो के माध्यम से कि देखो देखो मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दिया गया मुझे बिठा दिया गया पर संयोग
00:16:14:24 से इसकी वो कहते हैं ना कि खेल अच्छा खेला था तूने आदमी गलत चुन लिया तो यहां पर क्या है खेल अच्छा खेला था तूने समय गलत चुन लिया संयोग से उस दिन वहां पर पूरी के शंकराचार्य जी का सैनिक शिवश नारायण द्विवेदी भी उपस्थित था जो तुझे भलीभांति जानता था। खैर कुल मिलाकर क्या है कि अगर यह कहता है कि कक्ष में ले जाने वाले षड्यंत्र को ये भांप गया था तो भाई उससे पहले तू चर्चा से भागता हुआ दिख रहा है। भगोड़े कायर कहीं के तू तो भाग रहा है ना मैं खड़ा हुआ हूं। मैंने तुझे चर्चा का प्रस्ताव दिया है। हमारी चर्चा बहुत दिनों से जो है टल रही है आमने सामने की अनेक कारणों से। तू वही व्यक्ति है जो मुझे बुला चुका है अपनी ऑनलाइन स्ट्रीम में। हां। और तू मेरे सामने से नजरें चुरा करके भाग रहा है। इसी को कहते हैं मां-बाप के नाम पे कलंक। यह जो विपरीत परिस्थितियों में यह जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धर्म की स्थापना के लिए आगे बढ़ने का जो जज्बा है ना यह हर व्यक्ति के पास नहीं होता है गुर्दा यह माता के गर्भ से एक वीर जन्म लेता है इसके साथ तो ऐसी
00:17:30:04 हरकतें करके तू तो अपने मां-बापों के नाम पे कलंक सिद्ध होता है। कलंक हो तुम कलंक। अच्छा अब आते हैं वह गालीबाज अनऑफिशियल गुंडा जो अब प्रामाणिक आर्य समाज हो गया जिसको एक समय था जब आर्य समाज पहचानता नहीं था तो भाई आप यह देखो कि इस कायर टाइप के व्यक्ति का साथ देने आया भी कौन है कौन निर्णय दे रहा है कि जीत गया जो उस विदुषी को उस महिला को शास्त्रार्थ में विजेता घोषित करता है गार्गी और मैत्रई घोषित करता है आधुनिक गार्गी कहता है जो खुद हमसे कह रही है कि दूसरा प्रश्न करो जो खुद हमसे कह रही है कि नहीं नहीं आप जो है बाल की खाल निकाल रहे हो बाल की खाल होती नहीं है और आज डॉक्टर निष्ठा विद्यालंकार जी हमारे साथ चर्चा में जुड़ी है और उनकी विद्वता का पता आज आपने उनके वीडियो से पता ही चल गया होगा कि वो कितनी विदुषी है। एक भाई साहब ने कमेंट की कि निष्ठा जी साक्षात गार्गी का रूप है। ईश्वर सच्चिदानंद स्वरूप निराकार सर्वशक्तिमान जैसे उसको कहा गया अनंत अबाध्य अनंत सामर्थ्यवान तो अनंत सामर्थ्यवान जब है तो वो फिर प्रकट
00:18:45:13 क्यों नहीं हो सकता फिर ये बाधा उस पर लग जाएगी हम लोगों को किसी ना किसी की सहायता लेने की जरूरत पड़ती है और उसको किसी की सहायता की आवश्यकता नहीं है वो अपना काम स्वयं कर नहीं बाधा उसकी जो शक्ति सामर्थ्य पर उंगली उठ गई ना कि वो ले ही नहीं सकता ये क्वेश्चन है उंगली उठा रहे हैं ये तो ऐसा है ना ये इसका उत्तर नहीं है। नहीं नहीं उत्तर नहीं है। यह एक बाल की खाल है और बाल की खाल होती नहीं है। ये ये आपका कोई तर्क ही नहीं है। ये जो नहीं ये आपका वो सही दिशा में आपका ये प्रश्न नहीं है। प्रश्न कुछ आप ऐसे करिए कि वास्तव में जिनका कुछ तर्क हो। उतने ही आपने वेद ठीक से पढ़े नहीं है। हां उतना आपने वेद नहीं पढ़ा है इसलिए आप इस तरह प्रश्न नहीं कर सकते। नहीं नहीं वह आपने विशुद्ध नहीं बताए वह वहां पर व्याख्या कोई मिलावटी किसी और ने की होगी अब आगे प्रश्न कर रहे हो आप तो ये शंकराचार्य नहीं कह सकते शंकराचार्य ने तुम्हारे प्रश्नों का यथावत उत्तर दिया है और उनके शिष्यगण वहां तुम जैसे तुच्छ व्यक्ति को समय देने के लिए खड़े भी है कि आया है कुतर्की तो ले जा अपना उत्तर तब भी तुम्हारा व्यक्ति वहां से भाग रहा है और तुम उसको शास्त्रार्थ शंका समाधान के नाम पर वह
00:20:00:16 शास्त्रार्थ का प्रचार कर रहा है और तुम उसे शास्त्रान मानते हुए जो है विजेता घोषित कर रहे हो और वहीं पर दूसरी ओर तुम्हारी जो मातृशक्ति है तुम्हारे यहां की वो व्यवस्थित रूप से चर्चा कर रही है जिन्होंने मुझे समय दिया हुआ है चर्चा का और वहां पर चर्चा हो रही है और चर्चा के बीच में प्रश्नों से परेशान होने पर वो यह कह रही हैं कि भैया दूसरा प्रश्न करो बाल की खाल होती नहीं है और उसको भी तुम शास्त्रात्मक विजेता घोषित कर रहे हो तो मूर्ख व्यक्ति ऐसे व्यक्ति के द्वारा दिए गए निर्णय को कौन मानेगा? शायद तुम्हारे यहां के स्वामी विवेकानंद परिवराजक जी इत्यादि मानेंगे। भाई कोई प्रबुद्ध व्यक्ति तो नहीं मान सकता। हां जो अंधे हो गए होंगे जो यह न्याय [गला साफ़ करने की आवाज़] या नैतिकता भूल चुके होंगे, तिलांजलि दे चुके होंगे। वही तुम जैसे जो धूर्त लोग हैं उनके इस प्रकार के अपनी ही बातों का खंडन करने वाले वक्तव्यों पर ध्यान देंगे। अच्छा इसी के साथ-साथ मैं एक भरत मिलाप वाली बात और बता दूं कि जब इस व्यक्ति से मेरी चर्चा हो रही थी यह जो बंदी छोड़ 2.0 है जो एक व्यवहारिक चर्चा हो रही थी फोन पर तब मैंने इसको इसके बारे में भी बताया था ये
00:21:15:20 जो अनऑफिशियल अप्रामाणिक गुंडा है और तब इसने मेरी बातों को स्वीकार किया था कि हां हां हम ऐसे लोगों से आर्य समाज के इस प्रकार के लोगों से दूर रहते हैं। फिर जो है हुआ क्या? मैं पास में था तो मैं चला गया और जब गया तो उन्होंने ईश्वर सर्वशक्तिमान पर भी बात हुई थी उस मंदिर में मगर वो मेरा माइक खराब था। जी तो वो रिकॉर्ड नहीं हो पाई। फिर वहां से हो गई जहां से आपकी परंपरा क्या है। जी जी। अब मैंने उसमें कोई ना बदतमीजी की ना कुछ किया। जी। एक स्पष्ट चर्चा डाल दी मैंने। जी जी। ठीक है। जी। अब ये लोग चालू किए ऋषि उवाच वगैरह। तो ऋषिवाज ने क्या किया वो पूर्वाग्रह जो वेदाटेल से चोट खाए बैठा था जी जी है ना तो उसने ऋषिवाज क्या नाम है कृपेरेश पटेल जी जी तो उसने क्या किया उसके लोग आए और जो है उसने वीडियो बनाया ही था शंगेरी के शंकराचार्य ने मदद की टीपू सुल्तान की ये है वो है हम जी तो वो वो वीडियो मैं देख ही चुका था तब तक उसके वो जो लोग आए वो बोलने लगे मतलब उल्टे सीधी बातें करने लगे Instagram पर लघु शंका इत्यादि को ले बोलने लगे ये हो जाएगा तुम्हारी वो निकल जाएगी ये सब बात जी फिर मैंने कहा कि भैया
00:22:30:21 आके सामना कर लो तो सामना कर लो तो फिर ये आए तो इन्होंने जो है कोई एक बात अटकी कि इतनी देर मैं बोलूंगा इतनी देर वो बोलेगा तो मैं इस तरीके से इसलिए तैयार नहीं हुआ कि भाई यह सब बड़े विषय है इस पर आप ऐसे लगाम नहीं लगा सकते कि यह बोलेगा वो बोलेगा और जब हम चर्चा कह रहे हैं शास्त्रार्थ नहीं कह रहे हैं तो फिर ऐसे क्यों करना है ना? जी जी सही बात भाई वो जनता डिसाइड कर लेगी कौन व्यक्ति फालतू बोल रहा है उसके समक्ष हो रही है ना चर्चा तो जी जी तो हमें वहां पर जीत हार का फैसला निर्णायक क्यों बने हम सही बात उस वीडियो को देख के जिसको जो समझना होगा समझ लेगा और समझते हैं लोग चर्चाओं से लोग समझते हैं जी तो वो कहानी से ये फैला है हमारे बारे में कि हम जो है कट्टर अद्वैती हैं हमको जो है मतलब हम हमारा मिशन है अपने मत को सिद्ध करते हुए दूसरे मत को दबाना नहीं जी जी मैंने अपनी कई वीडियोस में कहा है कि जो भी व्यक्ति मुझे यह चीजें देगा सामने अब तुम ही बताओ कितनी देर तक उनसे हम शास्त्रार्थ करेंगे इन बातों को लेके या तुम्हारे यहां लाला है सही बात तुम्हारे यहां जो है ये है वो है ऐसा कुछ नहीं दुनिया भर के टॉपिक्स हैं नहीं आपका जो पैटर्न है ना बहुत सही है कि सामने वाले का अगर ईश्वर
00:23:45:22 गलत सिद्ध हो गया तो ईश्वर प्रदत्त ज्ञान भी गलत सिद्ध हो गया तो जब उनके पास कुछ नहीं तो हमारे पास आओ बस बस तुम्हारा सब गलत सिद्ध कर देंगे तो उस पे जड़ पे बात करो जी जो और मैंने कभी भी तुम बताओ अपने चैनल पे कभी भी मैंने किसी का अपमान किया हो नहीं नहीं बिल्कुल नहीं दयानंद जी का किया हो या प्रभुपाद जी का ही किया हो किसी का नहीं किया ये लोग करते हैं बिल्कुल बिल्कुल ये लोग करते हैं मगर मैंने नहीं किया वो बीम वगैरह बनाना चाह रहे ये सब कुछ करते हैं हां तो मैं तो मैं तो कह रहा हूं भैया मैं आपको तो देखो मैं ये आर्य समाज से संस्थागत रूप से नहीं जुड़ा हूं क्योंकि क्योंकि मुझे बहुत दोष नजर आते हैं आइडियोलॉजी को सपोर्ट करते हो जी मतलब मेरा ये रहता है जैसे जैसे शादी वाला आपने पॉइंट उठाया। ठीक है? हां। अब जैसे एक एक बात आती है कि सामने वाला व्यक्ति डिफेंड करने के लिए जलेबी बना दे। क्योंकि हम हम एक से एक जैसे मुसलमान वगैरह आप जानते हो कि कितनी जलेबी बनाते हैं। देखो इसमें निर्भय निर्भय एक चीज समझो। तुम जो पॉइंट बोल रहे हो ना वो सही है। मगर उसमें उसकी जड़ को टटोलो। जड़ क्या है? जड़ यही है कि वहां पे गुरु गद्दी नहीं है मेरे भाई। जी ये कमी मुझे भी खल की। अगर गुरु गद्दी होती तो भले ही हम उसको रोक नहीं पाते मगर ऑफिशियली हम क्लेम तो कर सकते थे। यह आर्य समाज नहीं है। तुम सिद्धि नहीं कर पाओगे कि आर्य समाज का है, क्या नहीं है। क्योंकि तुम्हारे यहां एक गद्दी नहीं है गुरु। जी जी जब तक उसको सुरक्षित
00:25:00:26 नहीं करोगे अपने यहां और गुरु गद्दी का मतलब वही परंपरा। अगर परंपरा को तो आप तोड़ के बैठे हो ना खुद ही। ये मैं आपको बताऊं ये उस टाइम मैंने प्रतिनिधि वालों से बात किया था। वहां के जो क्षेत्र वाले थे तो मुझे वो सारा मैटर समझ में आया। लेकिन मैंने जानबूझ बूझ के कॉल रिकॉर्डिंग वगैरह कुछ भी नहीं डाला। मैंने इसलिए नहीं डाला। मैंने सोचा कि यार ये चीज को मैनेज करना कि तुम्हारे नाम से कहां क्या धांधली हो रही है, क्या नहीं हो रही। तुम्हारा काम है। है ना? तुम तुम उस काम को कर नहीं रहे हो। अब हम स्टूडेंट्स आ के तुम्हारे तुम बैठ के फ्री के पैसे फूंको और तुम्हारे बदले आकर के हम जो है वो बातचीत करें और हैंडल करें और कोई और व्यक्ति जो है वो जाके एक्सपोज करे कि नहीं देखो मंदिर में ये चीजें तो मैंने कहा कि फिर करना ही नहीं। तुम अपनी जिम्मेदारी तुम देखो तुम ही झेलो। मैं नहीं कर रहा। तो नौज में कुछ बातें निकल कर के आई। तो बात ये निकल कर के आई। जैसे तुम्हारे ऊपर प्रेशर पड़ रहा होगा ना। हां मेरे ऊपर प्रेशर प्रेशर बढ़ रहा होगा। मैं अभी बहुत कंफ्यूज कर रहा हूं लोगों को। इसीलिए तुम्हारे मैसेज में थोड़ा सा मुझे वो भाव दिखाई दिया कि तुम पर प्रेशर है कोई। अब जैसे मैंने मैं अपने आर्य समाजी लोगों को मैं मित्रों को मैंने बोला मैंने कहा एक बात बताओ अगर श्रीमान जी जो है वो आर्य समाज से खंडन नहीं करते मान के चलो। तो ये बताओ क्या तुम लोग उनका साथ देते कि नहीं देते? क्या रामपाल ही तुम्हारे शत्रु हैं कि नहीं है? तो बोला तो सब ने माना कि हां अगर आर्य समाज खंडन नहीं करते हम उनके साथ होते। तो मैंने बोला कि यानी यानी इस दृष्टिकोण से तुमने माना कि वो गलत व्यक्ति नहीं सही व्यक्ति है। मान लिया तुमने
00:26:16:00 तो उन्होंने बोला हां तो मैंने कहा कि केवल वो तुम्हारा सिद्धांतिक और वो ये तो नहीं कर रहे गला पकड़ के तुम्हारा खंडन कर रहे हैं। तुम्हारी फोटो भी काट रहे तो कर नहीं रहे। सिद्धांतिक प्रश्न ही तो पूछ रहे हैं। उत्तर दे तो बात खत्म सिंपल और क्या है? इसमें कोई जंग थोड़ी लड़नी है। तो मैंने बहुत उसमें कोई मान तो रहा नहीं इतनी समझ में नहीं आया। समझ में नहीं आता है। हां तो मतलब हालांकि मैंने अभद्रता की नहीं कभी। पता नहीं क्यों इतना बड़ा दुश्मन बन गया मैं इन लोगों का। उसमें मैं आपको बताऊं उसमें बीच में क्या हुआ था बीच में जब आपका ऋषुवा जी से जब वो चला था ना तो उसमें यह था कि जो आप वीडियो से लाइव इत्यादि करते थे उसमें भाषा आपकी थोड़ी सी वो कटु वाली होती थी कटाक्ष ये चीज था कटाक्ष कटाक्ष उस समय बहुत ज्यादा होते थे उसमें सैद्धांतिक ललकार और वो कटाक्ष तो फिर हमें हमें थोड़ा सा ये होता था कि यार ललकार यार देखो बात ये है ना कि आप फिर जिसने वो ललकार सुनी उसने वो पक्ष नहीं देखा सामने वाला कह रहा है तुम्हारी परंपरा के चीथड़े उड़ा देंगे मूत निकल जाएगा ये सब शब्द ये सब शब्द मैंने नहीं यूज़ किए थे। मैंने मर्यादा में रहते हुए हां कटाक्ष ऐसे किए थे जो तर्क के निकट होते तो वो प्रभाव ज्यादा छोड़ते हैं। जैसे जैसे मैंने कहा कि भाई जैमिनी से आई तो क्या कैच कराया था क्या? जी तो अब ये वो जो जंप है जो कैच कराना वो कटाक्ष है और कटाक्ष
00:27:31:13 में तर्क भी है। है ना? अब इसी पे वो लोग मतलब सामने वाला भी जो पक्ष है अमन वाला नहीं वो उनके पास कोई निराकरण हो उस बात का वो बात बाद की है। मगर जब कटाक्ष जो है बुद्धि पूर्वक किया जाता है ना एक व्यक्ति कहे कि तुम पागल हो तो उसका इतना प्रभाव नहीं आएगा कोई तर्क तर्क पूर्ण कटाक्ष कर देगा ना विनोद हां तो वो ज्यादा वो ज्यादा चुभता है भले ही सामने वाले ने गाली दी हो तुम्हें उसकी गाली छोटी पड़ जाएगी बिल्कुल सही बात है यही तो है दर्शन विज्ञान और व्यवहार तुमने सामने वाले को सुना भी दिया और जो है तुमने गाली भी नहीं दी, मर्यादा भी नहीं लांगी तुमने। ये चीजें मुझे आपसे सीखने को मिलती है ना मुझे बहुत अच्छा लगता है। तो वो उस पर चिढ़ गए। हालांकि गंदगी उसने बहुत मचाई थी। भाई मैंने क्या किया था? मैंने तुम्हें बताया ना कहानी क्या थी। जी। एक सिंपल एक आर्य समाज मंदिर में गया और मैंने पूछ लिया आपकी परंपरा क्या है। जी जी और वो उसने नहीं बताया तो मैंने उस वीडियो को एज इट इज ज्यों की त्यों डाल दिया। जी। अब वो जब उसके रील व्हील बने तो Facebook Instagram पर आकर के ये लोग उल्टे सीधे कमेंट करने लगे तू तड़ाक वाले तो मैंने फिर ये कह दिया कि भैया जिसने अपनी माता जी का अच्छा ये भी देखो माता जी का निष्ठा पूर्वक दूध पीना ये कितना मतलब इसमें कहीं बुरा नहीं लग रहा है
00:28:46:21 शब्द अच्छे हैं बात बहुत बड़ी है जिसकी माताजी ने उसको निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया वो फिर सामने आ जाए ऐसा बोला मैंने जब उन्होंने गंदे वर्ड बोले तब बोला नहीं तो मैं पहले यह कहता हूं जब कोई साधारण भाषा में विरोध करता है और तो मैं यह कहता हूं कि भैया यदि आपको लगता है कि आप सत्य के पक्षधर हैं तो आप प्रत्यक्ष सामना करने का साहस प्रकट करें। अब इसमें क्या गंदगी है बताओ? नहीं ये तो बिल्कुल सही है। बिल्कुल सही है। फिर जब वो गंदी बात करने लगता है तू मूर्ख है तू गधा है तू तू करना बनता है। तो फिर मैं कहता हूं कि माता जी ने निष्ठा पूर्वक पिलाया तो सामने आ जाओ। ठीक। अब इसप भी वो जब इस पे भी वो जब लघु शंका मूत ये सब इसप चले जाते तो फिर मेरे पास कुछ है नहीं फिर मैं स्टॉप इधर से मैं थोड़ी ना उसके बराबरी में ये सब कर सकता हूं बिल्कुल सही बात है भाई मैं एक हद तक उसको जवाब दूंगा उसकी भाषा में अगर वो अगर मां बहन की गाली देने लगेगा या ऐसी अश्लील बातें करने लगेगा तो फिर मैं स्टॉप हो जाता हूं इधर जी जी बिल्कुल अब वो कॉमेडी बना रहे हैं वो मेरा मुंह बिगाड़ रहे हैं ये कर रहे हैं वो कर रहे हैं मैं नहीं कर सकता बिल्कुल तो वो एक मर्यादा होती तो मैं रुक गया तो इसलिए शायद उनको लगा होगा उन्होंने ऋषिवाच का पक्ष देखा ना जी ये आपकी बात समझ गया मैं बिल्कुल समझ गया
00:30:01:27 सही बात है आपका भरत मिलाप हो भी किन लोगों में रहा है जो खुद एक दूसरे के विपरीत चलने वाले लोग हैं और खुद एक दूसरे को खुद एक दूसरे की बुराई करते हैं खुद एक दूसरे को स्वीकार नहीं करते हैं वो आज आकर के एक दूसरे का समर्थन कर रहे हैं कि जीत गया भाई जीत गया जीत गया भाई जीत गया इसीलिए हमने इस वीडियो का टाइटल रखा है चोर चोर मौसेरे भाई और शायद इसीलिए करपात्री जी ने अपने ग्रंथ में यह बताया था कि कलयुग के किस प्रकार के लोग दयानंद जी को महर्षि कहते हैं। खैर यह जो अनऑफिशियल गुंडा है वर्तमान का प्रामाणिक आर्य समाजी इसको हम पहले भी बता चुके हैं। इससे काफी बार इस तरह की बातें हुई है कि भाई सामने आकर के चर्चा कर लो। तो सामने आकर के चर्चा करने का आधार यही हो सकता है कि तुम पहले अपनी वह जो विवादित आपत्तिजनक सामग्री है, उसको अपने चैनल से हटाओ। जो तुमने अनर्गल आरोप और गलत तरीके की टिप्पणियां कर रखी हैं उनको अपने चैनल से हटाओ। यथोचित रूप से क्षमा याचना करो। तब जाकर के यह विचार किया जाएगा कि कब कहां कैसे तुम्हारे साथ चर्चा करनी है। अच्छा एक बात और बता दूं इस धूर्त की। यह इतना उतावला हो रहा था। किसी प्रकार से हमारे साथ चर्चा करके और जो हमारे पक्ष को
00:31:17:06 जो धूमिल करने के लिए इसने क्षमा मांगने का एक दिखावा भी किया। यह हमको जो है शीशे में उतारने के लिए हमारे जो मठ है द्वारिका मठ वहां पर भी ये गया था। वहां पर इसने लिखित रूप से यह कहा कि भाई मैंने पूर्व में बहुत सारी टिप्पणियां की है। अनुचित टिप्पणियां उनके लिए मुझे खेद है और मैं जो है उस खेद को यहां प्रकट करने आया हूं। पश्चाताप है मेरे अंदर। आप मुझे क्षमा दें। अब वहां पे जहां यह गया है वहां पर तो पता ज्ञात नहीं है उन लोगों के भाई इसने क्या टिप्पणियां की है? क्या नहीं की है? जो चीजें इसने कही हैं विवादित चीजें क्या वो इसके चैनल पर अभी भी है। क्या ये उनका अभी भी समर्थन कर रहा है। उन्होंने इसको कहा कि ठीक है शरण में आया हुआ व्यक्ति है तो उसको क्षमादान दे देना चाहिए। अब ऐसे क्षमा मतलब धूर्तता की पराकाष्ठा देखिए कि क्षमा मांगने का भी दिखावा कर रहा है व्यक्ति कि भैया किसी तरीके से शीशे पर उतर आए तो क्या है कि अगर तुम्हें उस सामग्री पर पश्चाताप है तो उससे खुद को अलग करो ना भाई पश्चाताप से खुद को अपने चैनल पर प्रस्तुत करते हुए चित्रों को बिगाड़ करके लगाते हुए अनर्गल जो है टिप्पणियां करते हुए शीर्षक देते हुए तुम वीडियोस बना रहे हो वो आज भी चल आज भी तुम्हारे
00:32:32:09 प्लेटफार्म पर अवेलेबल है और तुम क्षमा मांग रहे हो। उसके बाद विधिवत क्षमा मांगो। यह कहते हुए क्षमा मत मांगो कि मुझे मालूम नहीं है मैंने क्या किया। फिर भी तुम कहते हो तो मैं क्षमा मांगना। क्लियर कट क्षमा मांग। उसके बाद बात होगी सामने से। और इसी क्रम में मैं बताता चलूं कि अभी जब इनकी वो इनका कुछ हुआ था पंचरंगी ड्रामा वो 150 भी वर्षगांठ वाला। तो इन्होंने मुझे पत्र भेजा था जिसमें कि इन्होंने जिसमें कि पत्र भेजने वालों में जो आयोजक थे कार्यक्रम के उसमें इसका भी नाम था कृतेश पटेल के रूप में तो उस समय उस पत्र का उत्तर देते हुए मैंने बता दिया था कि कुछ लोगों को मैंने प्रतिबंधित किया था। जिसमें से एक यह था ऋषि उवाच एक आर्यवीरा थी जिसको मैंने प्रतिबंधित किया था। वो आज भी प्रतिबंधित है क्योंकि उसने मेरे घर की मातृशक्तियों के फोटो कहीं से प्राप्त करके फिर पुराने Facebook वगैरह जो वहां से प्राप्त करके और उनको जो है एक पब्लिक प्लेटफार्म पे लाके और चार पांच लोगों को बिठा करके गप्प सड़ा के हंसी ठट्टा ये सब करके जो है अनैतिकता
00:33:41:15 अनैतिकता भरे अनैतिक आचरण को प्रस्तुत किया था। खैर उस चर्चा से एक व्यक्ति और जुड़ा हुआ था मोहित गौर जिससे कि मेरी चर्चा हो सकती थी संभावना हो सकती थी अभी भी है तो उस व्यक्ति को भी हमने प्रतिबंधित किया था क्योंकि वह इस चर्चा में शामिल हुआ था मगर अब वो जो वीडियो है जिसमें मोहित गड शामिल हुआ था वह वीडियो वहां पर नहीं है और मोहित गड की तरफ से हमें यह संदेश भी प्राप्त हुआ था कि जब चर्चा हो रही होगी तो उस वो जो व्यक्तिगत गत कटाक्ष किए गए थे जिस चर्चा में उसमें शामिल होने के लिए यह जब मेरी और मोहित गड की चर्चा हो रही होगी तब यह क्षमा मांग लेगा तो हमने इन सारे बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए मोहित गड के लिए यह चीज उसी पत्र में लिख दी थी कि भाई मोहित गड से हम चर्चा कर सकते हैं उससे हमें कोई आपत्ति नहीं है। ऋषि उवाच से चर्चा कब कर सकते हैं? जब ऋषि उवाच अपनी विवादित सामग्री को अलग हटाए और क्षमा मांगे। उसके बाद चर्चा कहां कैसे कब होनी है यह सुनिश्चित किया जाएगा। तो यह सारी बातें थी। बाकी मेरा एक पर्सनल सुझाव जो हमेशा से रहता है। है ना आप लोगों के लिए वो मैं आपको बता दूं कि मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं
00:34:56:21 टक्कर में। ठीक है? जय श्री राम।
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वितंडावादी स्वामी दयानंद जी? चोर-चोर मौसेरे भाई
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