⬜ Not used yet · 00:00:03:06 – 00:19:29:20 (19:26)
00:00:03:06 जी मैं थोड़ी सी मैं अपनी जानकारी में बता दूं मेन मैटर मेरे जानकारी में क्या है? जी जी बिल्कुल बिल्कुल मेरी जानकारी में मेन मैटर यह है कि अभी मुक्तेश्वर जी महाराज है जो उनकी कोई बात आपको ऐसी लगी जो कि धर्म के विरुद्ध जाती हुई दिख रही है आपको है ना तो आपने वहां पर एक कोई वीडियो बनाया और आप मैंने अभी देखा नहीं है वो पहला वीडियो आपने कैसे बनाया पर आपका यह कहना है कि वो मर्यादा में रह के आपने बनाया है ना उसके बाद उनका फेवर करने वाला जो पक्ष है उन्होंने आप पर व्यक्तिगत कटाक्ष इत्यादि शुरू किए और रिप्लाई में रेप्लिकेशन में आपने भी ऐसा नहीं है कि बियों्ड द बिल्कुल वो चले गए मगर मतलब आपने भी फिर उनको उन्हीं की भाषा में समझाया और उसमें आपने भी जो मुक्तेश्वर जी महाराज उनके लिए भी आपने चीजें कुछ बोली है ना व्यक्तिगत कटाक्ष उन पे भी कर दिए अच्छा दूसरी बात मेरी जो जानकारी में है इसी बीच उन्होंने क्या किया कि आपका पक्ष आप पर व्यक्तिगत कटाक्ष करने के लिए उन्होंने कुछ शास्त्रों का सहारा लेने का प्रयास किया और उसमें शास्त्रों का सहारा लेने का प्रयास किया और उसमें सहारा लेने का जो प्रयास किया था वो जो अभी तक मुझे
00:01:18:07 मूल रूप से पता है वो आपका जो विदेश गमन है विदेश में आप रह रहे हो उसको आधार बनाते हुए उन्होंने आपको शास्त्र के विरुद्ध घोषित करते हुए आपका जो है आपके बारे में अनापशनाप जो है बोलने का उन्होंने आधार बनाया। अब इस पर क्या हुआ कि दो चीजें एक तो आपने जो अब मुक्तेश्वर जी पर इनके करने से जो पर्सनल अटैक आपने किया उनके ऊपर वो हमारे और आपके बीच का डिस्कशन है पर वो सेकेंडरी है वो सेकेंडरी नहीं उस उस विदेश गमन के बाद मैंने शंकरा अभी मुक्तेश्वरानंद जी पे कोई टिप्पणी नहीं किया मैंने पर्सनली उस शिष्य पे नहीं मैं मैं नहीं कह रहा हूं मैं नहीं कह रहा हूं मैं नहीं कह रहा हूं जो जो वो है वो मैं नहीं कह रहा हूं अब क्या है कि जो उन्होंने क्या किया कि आप पर व्यक्तिगत कटाक्ष करने के चक्कर में वो एक ऐसी अप्रासंगिक चीजें कहेंगे कि विदेश गमन को लाकर के आपसे बात करने का कोई आधार नहीं था वहां पर पर वह लाए। अब जब लाए तो वह एक बात अलग है कि वह अप्रासंगिक है कि नहीं है। मगर वह जो सिद्धांत है कि विदेश गमन वाला जो सिद्धांत है कि विदेश गमन के बारे में शंकराचार्य परंपरा का क्या कहना है। पर आपने वहां पर यह प्रस्तुत किया कि नहीं विदेश गमन के बारे में जो बताया जा रहा है वो गलत बताया जा रहा है। ऐसा नहीं है। विदेश गमन की यात्रा का कोई निषेध
00:02:33:08 नहीं है। ऐसा आपने प्रस्तुत किया। है ना? तो मेरा एक पक्ष यह है कि जो हमारा परंपरा का और जितने भी प्रामाणिक आचार्य हैं परंपरा प्राप्त चाहे वो रामानुजाचार्य हो चाहे वो शंकराचार्य हो चाहे वो मधवाचार्य जी हो हम वो कोई भी अगर परंपरा प्राप्त आचार्य है तो विदेश गमन की यात्रा का वो निषेध माना है सभी ने अच्छा एक मत हां तो अब मेरा एक तो पक्ष ये है कि मैं ये जो विदेश गमन वाली बात है इस पर बात करूं और इसमें भी एक जो मैंने कहा कि शंकराचार्य परंपरा प्राप्त आचार्यों का विरोध ध करने वाला स्वयं को सनातनी कैसे कहेगा वह भी एक बात आ जाती है यहीं से निकल कर के और तीसरी बात यह आ जाती है कि जब यह चीजें हो जाती है तो इस क्रम में फिर आगे आपका उनका आप पर वो तो मैं दोषी मान ही रहा हूं कि उन्होंने जो है आपके व्यक्तिगत उस पर जाकर के वो किया फिर आपका जो है इसके जवाब में आपका जाना अभिक्तेश्वर जी पर व्यक्तिगत ये सब चीजों पे फिर ये थर्ड हमारा आप साबित करिए कि मैं व्यक्तिगत तौर पे अभिक्तेश्वरानंद जी पे मेरे विदेश विदेश गमन को लेकर गई हूं। मैंने अभी मुक्तेश्वरंद जी का उस वीडियो विदेश गमन को लेकर नहीं विदेश गमन को लेकर नहीं मैं कह रहा हूं कि जब आपने कोई भी विरोध किया उनका हम तो उन्होंने आपका आपके आप पर व्यक्तिगत कटाक्ष
00:03:48:21 और प्रश्न पूछना विरोध नहीं होता। पहली बात आप भी इस बात को मानते होंगे। मैं मानता हूं। ये हमारा तीसरा पक्ष है कि आपने प्रश्न पूछा है विरोध किया वो हम उस समय डिस्कस कर लेंगे। ठीक है। अब शुरू करते हैं। पूछा भी है तो वो मेरा व्यक्तिगत प्रश्न नहीं है। वो इस वजह से है कि मुझे उनकी कोई बात ऐसी बुरी लगी। ठीक है। ठीक। वो ठीक है। अब क्या है? आपको पता है। मैंने आपको डिटेल दिया हुआ है। कौन-कौन सी बात बुरी लगी उसको मैं अभी स्क्रीन पे दिखाकर भी प्रमाणित कर सकती हूं। वो हमारा सेकेंडरी टॉपिक है। मेन मेरा आने की वजह है। नहीं नहीं वही हमारा प्राइमरी है। शिवश जी आई एम सॉरी टू से वही हमारा प्राइमरी है। मेरी आने की मूल वजह मैं जो बता रहा हूं वो एक बार मुझे कह लेने दीजिए। मेरे आने की मूल वजह है कि उन्होंने आप अप्रासंगिक था। यहां पर कहने की कोई आवश्यकता नहीं थी कि भाई आप विदेश आप प्रश्न पूछ रही उनको आपको प्रश्न का उत्तर देना है। मगर उन्होंने अप्रासंगिक चीज को लाए तो सही मगर वहां पर क्या हो रहा है कि जब आप विदेश गमन का पक्ष ले रही हैं तो जितनी भी प्रामाणिक परंपराएं हैं उनके द्वारा निर्गत उनके द्वारा स्वीकार्य जो सिद्धांत है उनका विरोध हो रहा है। तो इसलिए मैं फिर प्रामाणिक आचार्यों की ओर से फिर मैं वहां पर मुझे सामने आना पड़ा है कि नहीं सिद्धांतिक विरोध मत करिए। जो व्यक्ति जिस व्यक्ति का पर्सनल आपका विरोध है वो करिए। तो सिद्धांतिक पक्ष को सिद्धांतिक विरोध किस चीज का
00:05:03:22 है मैं बताती हूं। सिद्धांतिक विरोध जो है वो इस चीज का है कि जो उन्होंने रेफरेंस दिया था अगर तो वो मुझे सही रेफरेंस देते। देखिए आपको मेरी बात उस चीज पर माननी पड़ेगी कि एक उन्होंने रेफरेंस दिया था फॉर एग्जांपल मनुस्मृति 3.148 ठीक है? मैंने उसको वेरीफाई किया। वहां पे वह चीज नहीं लिखा हुआ था। सिमिलर सिमिलर श्लोक मुझे मिला 1 158 3.158 में जिसको कि मैंने अपने वीडियो में भी एक्सप्लेन किया है। बट इट वाज नॉट लाइक कि सिर्फ समुद्र यात्रा करने से कोई अपवित्र हो जाता है। उसमें जो मेधा तिथि का जो कमेंट्री है आप आई डोंट नो आप लोग मानते हो कि नहीं मानते हो। मेधा तिथि मेधा तिथि हमारे यहां की प्रामाणिक कमेंट्री है। हां तो मेधा की कमेंट्री को मैंने दिखाया जिसको ये लोग विकिपीडिया कह रहे हैं। पर वो विकपीडिया नहीं है। हां मेधा तिथि की जो कमेंट्री है वो इंग्लिश और वो भी कोनियल इंग्लिश है जो कि लोगों को समझने में प्रॉब्लम होती है। उसके लिए मैंने जरूर हिंदी में ट्रांसलेट करके उसको अच्छे से हिंदी में शब्दा शब्द बाय शब्द ट्रांसलेट करके उसको नीचे लिखा है। तो अब पता नहीं शायद उसको वो विकपीडिया कह रहे हैं या किस चीज को विकपीडिया कह रहे हैं। आई रियली डोंट नो। लेकिन मैंने मेधा तिथि का क्योंकि मुझे पहले ही पता था कि आप लोग आर्य समाज वाले विशुद्ध मनुस्मृति को नहीं मानते हो तो मैंने सोचा कि जो मानते हो चलो
00:06:18:26 मैं उसी से प्रमाण दिखाती हूं। उसमें मेधा अतिथि ने बहुत अच्छे से एक्सप्लेन किया है कि वो किसके लिए ऐसे धर्म का निषेध है। विदेश यात्रा की बात तो उसमें है ही नहीं। समुद्र पार करने का है। कुल मिला के आपको कुल मिला के आपको शास्त्रों से रेफरेंस चाहिए तो आप मानेंगे कि वो क्या कहते हैं? नहीं मुझे शास्त्रों से भी रेफरेंस नहीं चाहिए। शास्त्रों से भी रेफरेंस नहीं चाहिए। मुझे शास्त्रों से ऐसा रेफरेंस भी है। वेदों के अनुसार मैंने अपने वीडियो में शास्त्रों के अनुसार भी ऐसा रेफरेंस दिया है जो कि आप भले नहीं माने लेकिन मुझे नहीं लगता कि वेद कभी प्रकृति विरुद्ध हो सकते हैं। और दूसरा चीज अगर आप शास्त्र से इस बात को प्रमाणित करेंगे तो फिर आपको मेरी उस बात को भी प्रमाणित करना पड़ेगा कि जब आपके विदेशों में रहने वाले बहुत सारे शिष्य अगर मैं सारी मैं सारी चीजें सारी चीजें आएंगी। अभी तो हम केवल टॉपिक क्लियर कर रहे हैं ना। आप सारी चीज़ यहीं पे रख दे रहे हो। अभी तो हम केवल टॉपिक क्लियर कर रहे हैं ना। फिर आपको वो भी प्रमाणित करना पड़ेगा कि उन
00:07:16:02 मैं सारी चीजें मैं सारी चीजें करूंगा। अब यहां से हम शुरू कर रहे हैं कि हम जो है दो सनातनी है और सनातन के अर्थ को लेकर के आपका कुछ और अर्थ हो रहा है। विदेश गमन को लेकर के मेरा कुछ और अर्थ हो रहा है। है ना? यही है ना? जी और और दूसरी चीज दूसरी दूसरी एक और बात है आपको यह भी क्लेरिफाई करना पड़ेगा क्योंकि इसमें मुझे तीन प्रकार के जवाब मिले हैं इस मामले में जो मैंने बोला था कि भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज जिनको मैं मानती हूं एस पर रिकॉर्ड कि आदि गुरु शंकराचार्य के बाद जिन्होंने धर्म के प्रचार प्रसार के लिए जो सनातन के दर्शन के लिए और फिलॉसफी के लिए जिन्होंने सबसे ज्यादा भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज जगतगुरु मैं लूंगा मैं यह सारी चीज़ आपकी उसमें इंक्लूडेड है। अभी हमने चैप्टर क्लियर किए वो सारी ऑडियंस को भी तो जानना चाहिए ना। ऑडियंस को भी तो वो वो आप वो आपके पॉइंट्स है ना जो आप जब मैं कुछ कहूंगा तो उसके काउंटर में आप ये सब दोगी मुझे जैसे कि भारतीय ईजी होगा। आपको इजी होगा। मैं पहले से बता दे रही हूं। आपको इजी होगा कि मेरा प्रश्न क्या-क्या था उस चीज में। अदरवाइज कहीं ऐसा नहीं हो कि आपका डिस्कशन क्योंकि मेरे मेन पॉइंट्स जानना जरूरी है ना। कि आपके ऐसा नहीं पॉइंट इतना लंबा
00:08:31:08 हो जाए कि हमारे पास फिर समय ही ना बचे कि हम बाकी सारे मैं बता वो मेन पॉइंट्स आपके तब आ रहे हैं ना जब आपको कोई काउंटर किया गया है तो मैंने तो अभी काउंटर किया ही नहीं है शुरू वो मेन पॉइंट्स तब आए सामने जब मैं काउंटर करूं कोई तब आप उनको रख दीजिए इससे क्या होगा एक सिस्टमेटिकली एक स्ट्रक्चरल वे में हमारी डिस्कशन जा सकती है कि अब हमने टॉपिक डिसाइड कर लिया कि वेद वेद गमन को लेकर के क्या पक्ष है सनातन का धर्म का अब जो जो है आगे मैं उसमें आप अपना पक्ष रखूं फिर आप अपना पक्ष रखिए। फिर आपकी कोई आपके पास कोई ऐसा तथ्य है जिससे कि मेरा सिद्धांत कट रहा है तो फिर आप वो रखिए। जैसे आपने कहा कि वेद में प्रमाण है और जैसे आपने कहा भारती कृष्ण तीर्थ जी या जैसे आपने कहा डोनेशन या फिर आपने कहा कि वहां पर जो है विदेशों में अपना वो सेंटर बना रहे हैं। है ना? शंगेरी मठ वाले। तो ये सब चीजें उसके काउंटर में होनी चाहिए जब मैं विदेश गमन का पक्ष लूं। ठीक है? ठीक है। चलिए ठीक है। अब हम क्योंकि दोनों सनातनी है तो मैं यह मान के चल रहा हूं आप सनातनी है। पक्की सनातन धर्मी है। इसमें तो कोई दो राय नहीं है। नहीं आप तो कल मेरे मानव होने पे भी डाउट कर रहे थे। हम लोग बात शुरू करें। ये भी ये भी आप उसमें पॉइंट रखिएगा आगे जब आए। तो आप एक सनातन धर्मी है। वो मान के मैं चल रहा हूं। तो आपके लिए परम प्रमाण वेद
00:09:46:19 है। हम एस पर मनुस्मृति 12.3 13 आई थिंक 2.3 2.3 हां 13 हां तो अब मुझे आप ये बता दीजिए कि आपके पास वेद कैसे आए? वेद कैसे आए? अब हमारे पास ईश्वर परंपरा से आए वेद ये कह सकते हैं। आप आपको आपने किसके वेद को पढ़ा? मैंने कौन से वेद देखो वेदों के कई अर्थ जो वेद अवेलेबल होगा वही तो पढ़ा जाएगा ना। जो वेद अवेलेबल होगा वही तो पढ़ा जाएगा ना? और शब्द आठ शब्द भाई शब्द एक मिनट सॉरी वेद के वेद के रूप में आप किसी किताब को कब मानेंगे यह वेद ही है एक मिनट वेद को कैसे मानूंगी कि जैसे आप मानते हैं जिस तरह हम तो गुरु परंपरा से मानते हैं हमारे गुरु है परंपरा मैं ईश्वर परंपरा से मानती हूं अब अगर इंटरनेट पे मुझे वेद मिल रहे हैं इंटरनेट आर्काइव पे मुझे वेद मिल रहे हैं आज मैंने आपको शयानाचार्य जी का भाष्य का जो बता रही थी तो वो आप कैसे मानेंगे कि वो वेद ही है क्योंकि कॉलोनियल बीच में कॉलोनियल मैंने आपको वो भी प्रमाण दिया था कि अंग्रेजों ने अंग्रेजों ने हमारे धर्म शास्त्रों में मिलावट की है। वो इस बात को प्राउडली एक्सेप्ट करते हैं उनके लेटर्स में। मैक्युले बेबिंगटन के लेटर भी मैक्स मुलर के लेटर
00:11:01:22 इंटरनेट पे कोई भी चीज वेद नाम से आ जाएगी तो आप उसको वेद मान लेंगे। कोई भी चीज कैसे वेद मान लेंगे? तो यही नहीं नहीं। तो आपके पास क्या वेदव्यास जी का मैनुस्क्रिप्ट है? वेदव्यास जी ने जिसको वेद दिए उसने जिसको वेद दिए उसने जिसको वेद दिए उसने जिसको वेद दिए ऐसे करके हमारे पास वेद आ उसी तरह वेद देते देते उसी तरह वो इंटरनेट पे आया तो इंटरनेट पे आया मगर इंटरनेट पे कौन सी चीज वेद है कौन सी नहीं है इसको जस्टिफाई इसको वेरीफाई करने के लिए हमारे पास परंपरा प्राप्त आचार्य है ना तो वो जिनका मैं वो भी आचार्य ही है। कोई ऐसे सड़क छाप कोई मेरे जैसा तो कोई 10थ पास जो 10थ तक संस्कृत पढ़ा है वैसा किसी ने भाषण नहीं किया है। वो भी किसी परंपरा से ही आते हैं। अब आप उस परंपरा को नहीं मानते हैं तो आपकी वो वो आपके किस परंपरा से किस परंपरा से आते हैं? आप परंपरा बताइए तो किस परंपरा से आते हैं? मैं तो शब्दार्थ के साथ जाती हूं कि उस शब्दों में क्या लिखा अरे भाई आपके आपको कोई भी वेद नाम से पुस्तक दे रहा है तो आप उसको बिना वेरिफिकेशन के मान लेंगे ये वेद नहीं तो आप आपसे तो मैंने बताया था अब इसी इसी बात के लिए मैं कह रही थी कि पहले आप जो मेरा प्रश्न है उस पे सिर्फ जवाब दीजिए वेदों पे भी हम जाएंगे लेकिन बाद में जाएंगे तो आपके लिए
00:12:16:26 वेद आपके लिए वेद प्रमाण कैसे मैं वो मैं वो आपके लिए यह सवाल होना ही नहीं चाहिए कि मेरे लिए वेद प्रमाण कैसे है अगर मैं आपको वेद का वो वर्ष दिखाती हूं और आप उसको प्रमाणित कर दे कि यह गलत है जो मैं वेद के वर्सेस आपको दिखा रही हूं। अगर मैं यजुर्वेद से कोई वर्ष आपको दिखा रही हूं और आप मुझसे यह सवाल नहीं करेंगे क्योंकि आप आचार्य परंपरा से आते हैं तो आपको यह क्लियर करना पड़ेगा कि क्या मैं जो भाष्य दिखा रही हूं वो गलत है या सही है। उसके जो शब्द बाय शब्द अर्थ है क्योंकि संस्कृत में मेरी जानकारी पूर्ण नहीं है। तो मैं भी इस शब्दों के अर्थ को समझती हूं। तो आपको यह बताना पड़ेगा कि क्या मैं जो वर्ड्स आपको दिखा रही हूं वो सही है या गलत है। मैं ये बात मैं ये बात मैं ये बात इसलिए नमाजी से ग्रहण किया है या किसी और से मैं मैं ये बात मैं ये बात इसलिए कह रहा हूं। मैं ये बात इसलिए कह रहा हूं क्योंकि वेदों में कई कई शब्द ऐसे होते हैं जिनके कई अर्थ होते हैं। अनेकार्थक होते हैं। ठीक है? उसमें अब जैसे एक ही एक ही शब्द के कई अर्थ निकल रहे हैं। अब इसमें से कौन सा अर्थ मानना है यह हमको जाकर के उससे जानना पड़ेगा जिसने हमको वेद दिए हैं। मैं मैं एक एक मिनट मैं मैं क्लेरिफाई करूं। मैं बता रहा हूं ना क्या बात है हम तो बात ये
00:13:32:00 है कि जिससे हमने वेद लिए जिससे हमारा वेद लेना सिद्ध हो रहा है हम उसका यदि हम उसके अर्थ पर विश्वास नहीं करते तो हमें उसके वेद पे भी विश्वास नहीं होना चाहिए और जिससे हम वेद जिसके हम अर्थ पर विश्वास करते हैं अगर जिसके हम अर्थ पर विश्वास नहीं करते तो उसके वेद पर विश्वास नहीं होना चाहिए और जिसके वेद पर विश्वास है तो उसके अर्थ पर विश्वास ना होना सिद्ध नहीं होता है फिर इसका मतलब आपका कहने का मतलब मतलब यह है कि अगर हमारे पास वेद के कुछ मंत्र हैं जो जिसके संस्कृत की शब्दावली का हमें अर्थ पता है फिर भी हम उस गुरु की बात मानेंगे या किसी परंपरा प्राप्त गुरु की बात मानेंगे जो उसको डिफाइन करता है। राइट हमें अपनी बुद्धि नहीं लगानी है। मतलब अकल लगानी है। लगानी है लगानी है। नहीं नहीं नहीं लगानी है। गुरु गोविंद और ग्रंथ केवल ग्रंथ नहीं केवल गुरु नहीं केवल गोविंद नहीं। गुरु गोविंद और ग्रंथ तीनों के मिक्सचर से होना चाहिए। यानी कि ग्रंथ का आलंबन भी हो। गुरु के उसमें शब्द प्रमाण भी हो और गोविंद भी हो। उससे प्राप्त होने वाला गोविंद हो। और ये मैं नहीं ये मैं नहीं कह रहा हूं। ये मैं नहीं कह रहा ये मैं नहीं कह रहा हूं। अब जैसे आप आप जब आप जब आर्य समाज की बात करती हैं तो आर्य समाज कई मामलों में
00:14:47:03 उसी शब्द का वो अर्थ लेता है जो परंपरा प्राप्त आचार्य नहीं लेते हैं। और उसके दोनों अर्थ निकल रहे हैं। जैसे प्रतिमा का अर्थ गौ ही लेता है। आर्य समाज ये तो डिपेंड करता है श्लोक पे। सॉरी मंत्र डिपेंड करता है मंत्र पे। तो जब मैं आपके सामने मंत्र प्रस्तुत करूंगी और आप उनको लगेगा कि इस मंत्र में कोई शब्द ऐसा है जिसका अर्थ यह नहीं है तब आप मुझे काट सकते हैं। आपके लिए वेद प्रमाण है तो आपने जिससे वेद लिए वो प्रमाण होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? ये बताइए मुझे। मुझे वेद मिले हैं एक ऐसी ईश्वरीय परंपरा से या प्राकृतिक परंपरा से कह लीजिए क्योंकि मेरे पास बुद्धि है। मेरे पास पढ़ने की क्षमता है और मैं यह डिफरेंशिएट कर सकती हूं अपने कॉमन सेंस से भी कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ बोल रहा है। नहीं नहीं ये जैसे भूरभु जैसे भूरभु स्वाहा से क्या कहते हैं? मुक्ति मिलेगी। यह आप कैसे कैसे तर्क से आपने सिद्ध कर रही हैं? एक मिनट। इसको आपने वेद क्यों माना? मुझे सिद्ध करना ही नहीं। सिद्ध तो आपको करना है। आप कहने कहने का मतलब यह है कि अगर स्वयं को सनातनी कहना है, वैदिक कहना है तो हमको परंपरा प्राप्त आचार्य पे अपना विश्वास रखना सिद्ध करना होगा, प्रकट करना होगा। पहले मैं यह चाहता हूं कि आप यह अपना क्लियर कर दीजिए जिससे
00:16:02:09 कि मैं आपको प्रमाण दे सकूं। आप मुझे प्रमाण नहीं देंगे। आपकि आप देखिए आपके और मेरे बीच तो कोई कन्वर्सेशन भी नहीं था। आप तो बीच में खुद से आए हैं मेरे खिलाफ वीडियो बनाकर या मेरे सपोर्ट में वीडियो बना मतलब आप मतलब आपका कहने का मतलब है मतलब आपका कहने का मतलब है कि कहीं से भी कुछ भी हमें वेद के नाम से मिल जाए तो हम उसे स्वीकार कर ले इंटरनेट नहीं कहीं से कुछ भी नहीं जो जो मानवता और प्रकृति के अनुकूल हो वो अच्छा आपकी मानवता कहां से डिफाइन होती है भाई वेद तो आपको अभी जस्टिफाई करने है तो यानी मानवता आपको पहले से पता है वो कहां से डिफाइन होगी हमारी मानवता तो वेद से डिफाइन होती अच्छा तो आपकी मानवता वेद से अगर डिफाइन होती है तो जितने भी परंपरा प्राप्त शिष्य हैं और जो खुद को क्लेम करते हैं परंपरा प्राप्त शिष्य तो कुछ चीजों को तो मैं खुद भी वेरीफाई कर सकती हूं जैसे कि फॉर एग्जांपल आपने बोला हर किसी को आप विषयांतर हो रहा है तो नहीं बोलेंगे विषयांतर नहीं हो रहा है विषयांतर नहीं हो रहा है उदाहरण विषयांतर नहीं होता है ठीक है उदाहर उदाहरण का मतलब होता है शिष्य मुझे क्योंकि मैं मनुस्मृति को तो अच्छे से पढ़ूं। वेदों में मेरी जानकारी कम है। मैंने आपको पहले ही क्लेरिफाई किया। मैंने आपसे पूछा है मनुस्मृति आपके पास आई कहां
00:17:17:18 से? किसने दी? भैया ईश्वर ने दिया। ईश्वर ने दिया। यहां क्या तीन लोग करेंगे क्या कन्वर्सेशन? प्लीज मैं रिक्वेस्ट करती हूं। मुझे अगर कोई डॉक्यूमेंट्स का जरूरत होगा तो मुझे प्रोवाइड करना। हम हां जी। ठीक है। हम जी। तो क्या बोल रही थी मैम? हां। तो मैं उदाहरण दे रही हूं तो उदाहरण उस चीज का पार्ट हो सकता है। क्यों नहीं हो सकता है? उदाहरण इस चीज का पार्ट मैंने मैंने मैंने कह दिया मान लिया आपकी बात आप उदाहरण दीजिए। आप उदाहरण दीजिए। नहीं नहीं अगर माननीय आप उदाहरण दीजिए। अगर आप उदाहरण दीजिए माता जी आप उदाहरण दीजिए। आपके परंपरा प्राप्त शिष्यों ने अगर मनुस्मृति को खंडित करके जिसका जिसका कि मैंने आई थिंक परसों के श्लोक में परसों के वीडियो में जो मैंने मेंशन किया था कि मनुस्मृति का गलत शब्दार्थ करके हाफ वर्ड निकाल के आप पोस्ट बना देते हो और पोस्ट कर देते हो कि समुद्र जो क्रॉप करता है वो मले है वो विधर्मी है वो अधर्मी है। इस टाइप का अगर आप पोस्ट बना के डाल देते हो तो आप भी तो गुरु परंपरा से आ रहे हो और आप ये क्लेम करते हो कि परंपरा से हूं इसलिए सही
00:18:32:24 है। दूसरा चीज भारती तीर्थ जी महाराज का हम आपको हम आप देखिए आप ना इसमें क्या कर रही हैं कि जब आपके पास उत्तर नहीं है तो आप इतना लंबा इमोशनल अटैक कर रही हैं कि हम मैं उसको मेरी मजबूरी हो जाए मेरी मेरी मज मेरी मजबूरी हो जाएगी कि मैं अपने इस विषय को छोड़ करके आपके उनका क्लेरिफिकेशन देने जाऊं। अभी आपने कहा भाई शिवाश भाई शिवाश भाई शिवश भाई आई एम सॉरी टू से लेकिन यह आप जो कर रहे हैं ना इसको मतलब मैं क्या बोली न्यायसंगत नहीं बोला जाएगा क्योंकि आपकी वैदिकता सिद्ध करिए माता जी आपकी वैदिकता सिद्ध करें सिद्ध किया जा सकता है आपके इस मैं सिद्ध कर रहा हूं ना जिससे आपने वेद लिए हैं उस पर आपको भरोसा है कि नहीं या तो आप अवैदिक हो जाइए या तो आप सुनिए हां शिवश जी आपको यह सवाल ही नहीं करना चाहिए कि मुझे वेद किसने दिया है क्यों क्योंकि क्योंकि जिस
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→ Used in: A · Live Where do they learn hypocrisy? मोमिना ने किया मुफ्ती को बेनकाब at 1:12:19 ↗
00:19:29:20 मैटर पे हम डिस्कस करने आए हैं आप जिन अपने गुरु भाई बहनों के बचाव में आए हैं उनके साथ मेरा इस बात को लेकर कोई झगड़ा नहीं था मैंने अभी मुक्तेश्वर आनंद मैं आपको यह बता रहा हूं कि यदि आप परंपरा प्राप्त नहीं मैं आपको यह बता रहा हूं कि आप परंपरा प्राप्त आचार्य की शरण में नहीं है तो आप स्वयं को वैदिक सिद्ध नहीं कर सकती सनातनी सिद्ध नहीं कर सकती धार्मिक सिद्ध नहीं कर सकती मुझे नहीं मानो वैदिक
⬜ Not used yet · 00:19:56:16 – 00:35:38:28 (15:42)
00:19:56:16 आई डोंट मानो नहीं मानो नहीं आप अपनी वैदिकता सिद्ध करिए या तो क्लेम या तो ये क्लेम कर दीजिए कि मैं सनातनी नहीं हूं आप मत मानो मैं तो कह रही हूं आप मत मानो मैं कह रही हूं कि आप मानो मैं कह रही हूं आप मानो आप तो फिलहाल आप सनातनी नहीं है आज के मैं फिलहाल फिलहाल आप सनातनी है कि नहीं फिर मैं फिर मैं अब चली जाऊंगी उस चीज पर जहां पे कि आपके लोग आप कहीं भी जाइए मैं आपको ले आऊंगा। फिर मैं वहां से जाऊंगी कहां पे आपके लोग और मैं प्रमाण दिखाऊंगी कल के चैट का आप ही के गुरु भाइयों के साथ जो लोग गौ बलि को सही मानते हैं फिर तो यह बात हो गई
00:20:33:25 है। सारे जवाब है एक तरफ गौ बलि को देखिए आप आप अगर आप अगर बदतमीजी पे जाएंगी और अपमानजनक भाषा पे जाएगी मुझे जाना पड़ेगा। मैं आपको प्रति उत्तर नहीं दे सकता इन चीजों का। नहीं डिस्कस कर सकते तो नहीं। आप अगर इस तरह से नाम लेंगी जो जो मेरे लिए प्रणम्य है जो मेरे लिए सम्माननीय है अगर आप उनके लिए इस तरह से बात करेंगी सीधे-सीधे नाम लेकर के मुझे छोड़नी पड़ेगी लाइव आप अपनी चीजों पे रहिए तो मैं उनका कुछ और नाम ले उनका नाम अभी उनके नाम उनके उनके नाम के आगे जी लगाइए जी हां तो मैं कब जी नहीं लगाया इस पूरे वीडियो में ये वीडियो अभी आपने बोला बिना जी अभी आपने बोला बिना जी के अभी बोला रिवाइंड करके देख लीजिए किसके किसके बारे में मैंने बोला जी के लिए आपने अभी बिना जी के बोला बोला है। सुनिए यह वीडियो बाद में पोस्ट होगा। भाई सब लोग देख लेना। मैंने जी बोला है कि नहीं बोला है। मैं बिना जी लगाए नहीं बोलती हूं। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। अगर मुझे आपके शंकराचार चलिए अब अब आप अब आप जी अब आप अब आप जी लगा। अब आप जी लगाएंगी ना। अब आप जी लगाएंगी। मैं हमेशा लगाती हूं। ठीक है। ठीक है। मैं हमेशा लगाती हूं। और मैं मुझे नहीं लगता है कि मैंने जी नहीं लगाया था। स्लिप ऑफ नहीं आपने भयंकर आचार्य और ना जाने क्या-क्या कहा है कमेंट्स में जाकर के। भयंकराचार्य कहा है मैंने भयंकराचार्य
00:21:49:03 एंड उस कमेंट को किस चीज पर रिप्लाई किया मैंने वो भी आपको दिखाना चाहिए टारगेट करते हैं कि वो दिखाते कुछ और हैं मतलब ये हाथी के दांत खाने के कुछ और दिखाने के कुछ और तो अगर आप मेरी बात ये चल रही है कि आप वैदिक कैसे हैं यदि आप परंपरा प्राप्त आचार्य का विरोध कर रही हैं तो आप वैदिकता बताइए मैं इसलिए नहीं मैं वैदिक हूं कि नहीं हूं फिर आप अगर इस चीज पे प्रश्न पूछते हैं आप वैदिक नहीं है तो मान लीजिए जी फिलहाल मैं फिलहाल मैं अवैदिक हूं यह कह दीजिए मान लीजिए फिर आप भी मान लीजिए कि आप वेद भी मैं बोल तो रहा हूं मेरे मैं वेद के उस अर्थ को ग्रहण करूंगा जो मुझे परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य ने दिया होगा और वो तार्क और वो तार्किक भी है वो तार्किक भी है मैं सिद्ध करूंगा आप कितना भी आप पर्सनल पे जाइए आप मुझे मालूम है आपके पास [हंसी] यही बात है मैं कहां जा रहा हूं मैंने आपसे पूछा आपकी आप यदि आप सारी चीज़ खोल दो आप सारी चीज़ ले आओ पर यह मत बताना मैं वैदिक कैसे हूं इंटरनेट पे मिलने वाली किसी चीज को आप वैदिक मान लेंगी मैं उस भारतवर्ष की भूमि पर जन्म ली हूं मैं भारतवर्ष की भूमि पर जन्म ली हूं और मैं उसी वैदिक सनातन परंपरा को फॉलो करती हूं जो मुझे
00:23:04:04 मेरे कौन सी परंपरा परंपरा बताइए ना अपनी कौन सी परंपरा मुंडकोष में ऋषि बता रहे हैं अपनी परंपरा गुरु से दीक्षित थे तो मैं उन्हीं की परंपरा को फॉलो कर रही हूं कौन सी परंपरा परंपरा बताइए कौन सी परंपरा? वैष्णव परंपरा को हम लोग फॉलो करते हैं। नाम बताइए वैष्णव कौन सी परंपरा? नाम बताइए। रामानुज रामानुज परंपरा विदेश यात्रा मान रामानुज परंपरा को प्रमाण मानती हैं। फिर आप उनके विरोध में तो नहीं जाएंगी। सुनिए सुनिए सुनिए। विदेश यात्रा की बात विदेश यात्रा रामानुज रामानुज परंपरा को प्रमाण मानती है कि नहीं? ये पूछ रहा हूं मैं। मैंने उनके सारी बुक्स को थोड़ी पढ़ा हुआ है। मेरे सामने तो यानी कि आपको धर्म को जान यानी कि आपको धर्म को जानने से पहले पता है कि मेरा धर्म क्या है? आपको पहले ही पता है। पता है मैं जब आप यानी कि वेद वेद वेद की आवश्यकता ही नहीं है। एक बात बताइए। सुनिए पहले मेरी एक बात बताइए। आप ब्राह्मण है। जन्म से ब्राह्मण है। बोलिए आप जन्म से ब्राह्मण है कि नहीं है? देखिए पहले बातों का आप मुझे इसका रिलेशन रिलेशन सिद्ध करिए। रिलेशन सिद्ध करिए मैं बताऊंगा रिलेशन सिद्ध करिए बताऊंगा रिलेशन सिद्ध करिए बताऊंगा किस कौन सा रिलेशन सिद्ध करूं इस टॉपिक से इस प्रश्न का रिलेशन सिद्ध करिए हां है इस टॉपिक से इस प्रश्न का रिलेशन ये है क्योंकि आप मुझे
00:24:19:10 साबित करने को कह रहे हैं कि मुझे वेद किस परंपरा से प्राप्त है मैं वैदिक हिंदू हूं भी कि नहीं हूं कहने का मतलब यह है कि कहने का मतलब यह है जिससे हम वेद लेंगे यदि हमें उसके अर्थ पर विश्वास नहीं है तो हमें उसके वेद पर भी विश्वास नहीं है विश्वास लेकिन मैं रामानुज परंपरा के विरुद्ध तो नहींंगी आप रामानुज पर मैं वही कह रहा हूं भाई रामानुज रामानुज परंपरा आपके लिए प्रमाण होनी चाहिए यदि आप उनसे वेद ले रही हैं तो मैंने उनसे वेद कहां लिया उन्होंने वेद का भाष्य किया है तो फिर आप बताइए आप बताइए वेद कहां से आ रहे हैं आपके पास सपने में आके दिए भगवान ने मैं मैं बोल रही हूं मैं ईश्वर परंपरा से मेरे पास बुद्धि अरे वो ईश्वर परंपरा में नाम होंगे ना कि आपको किसने वेद दिए
00:25:07:10 और ईश्वर परंपरा हां तो आपको किसने दिए परंपरा से इंटरनेट पे इसका मतलब इंटरनेट आपका प्रमाण है इंटरनेट आपका प्रमाण है इंटरनेट आपका प्रमाण है इंटरनेट नहीं इंटरनेट पे तो कौन भी है तो कौन का प्रमाण ले तो फिर उसको क्यों मैं कह रहा हूं जिससे आपने लिए आप बेवकूफ जैसा आप शंकराचार्य मैं आपको बता रहा हूं शस्त्र शस्त्र नहीं बिल्कुल निशस्त्र दिख रहे हो अरे यही तो ब्रह्मास्त्र है यही ये इलॉजिकल चीजें हैं तो आप अपने उनको बता दीजिएगा ये वीडियो डाल दीजिएगा आप इलॉजिकल चीजें हो तो जिसके वेद जिसके अर्थ पर हमें विश्वास नहीं है उसके वेद पर हमारा के लिए आए थे आपके बेहूदा मैं यहां पर मैं आपको मैं आप लोग जो गुरु परंपरा प्राप्त मैं आपको मेरे पास आपकी हर बात का उत्तर है मेरे पास आपकी हर बात का उत्तर है। मेरे पास आपकी हर बात का उत्तर है। पर उससे पहले अरे उससे पहले उससे पहले आपका आप उससे पहले आपके लिए प्रमाण क्या है? सुनिए जिसका कोई नहीं जिस जो किसी एक को नहीं मानता वो किसी का नहीं होता। तो इसलिए मैं जानना चाह रहा
00:26:22:12 हूं मैं जानना चाह रहा हूं आपके लिए प्रमाण क्या था तब मैं वहां से प्रमाण दूंगा ना। आपका प्रमाण ही आप नहीं बता रहे हो। ठीक है। मैं वैदिक स्क्रिप्चर ड.in पे तीन चार ऋषियों का प्रमाण है। ब्रह्म मुनि का प्रमाण है। वैदिक स्क्रिप्चर .in को वेद कहां से मिले वो बताइए। कहां से मिले उसको वेद? [हंसी] अरे मैं बता दूं शिवश जी भाई साहब आप आप कर लीजिए या तो इन्हीं से बात कर लीजिए आप। एक मिनट दीजिए मुझे एक मिनट। बात कर लीजिए आप। तीसरा व्यक्ति बोलेगा मैं छोड़ दूंगा। आप बात करिए मुझसे। और भाई साहब हेलो आर्यन जी आपको जब आना हो तो आप मेरे साथ लाइव पे अलग से आइएगा। ठीक है।
00:27:01:25 नंबर नोट कर लीजिए। 7408301869 WhatsApp करिए, फॉर्म भरिए, लाइव आइए। मैं फ्री हूं। मैं यहां पे किसी भी चीज को एक्सेप्ट करने के लिए फ्री हूं जो मुझे मानव जाति के कल्याण के लिए लगेगा। और वही वैदिक वैदिक आपको कैसे पता यह कल्याण है? वेद के बिना आपको कैसे पता यह कल्याण है? बताइए। जब वेदवाणी यह कहती है कि वेदों की वेदों की जो कल्याण वेद वेद वाणी का प्रमाण कैसे दे रहे हो आप? नहीं सुनिए जब आपने प्रश्न पूछ दिया तो आपको मेरी बात सुननी पड़ेगी शिवश जी ठीक है सुन रहा हूं सुन रहा हूं क्षमा करिए सुन रहा हूं सुन रहा हूं जब जो वेदवाणी कहेगी कि प्रत्येक मनुष्य पृथ्वी पर एक है एक समान है [हंसी] वेदवाणी कह रही है कि प्रत्येक मनुष्य चाहे वो किसी भी वर्ण से हो किसी भी देश से हो कहीं से भी हो क्योंकि अगर आपके जगतगुरु शंकराचार्य की पदवी ले रहे हैं जगतगुरु तो वो जगतगुरु सिर्फ एक देश के लिए नहीं हो सकता वो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए बहुत एक्सप्लेनेशन बताने की जरूरत नहीं है। टू द पॉइंट आप बात करिए। टू द पॉइंट प्लीज अब जब आपने सवाल पूछा है तो मेरा आंसर एबरेटेड बहुत शॉर्ट भी होता है। एलबोरेटिव में आप क्या करती हैं? ऐसी चीजों पर जाती है जो मेरे लिए सेंसिटिव
00:28:17:01 होती है। मुझे टॉपिक छोड़ करके उनका क्लेरिफिकेशन देना पड़ेगा। इसलिए ऐसा एलबोरेटिव करिए जिसमें मेरी मतलब आप आप गुरु प्राप्त आप गुरु परंपरा प्राप्त शिष्य हैं। आपको लोग शंकराचार्य का शस्त्र कहते हैं तो आप में इतनी शक्ति नहीं है कि आप उसको मेरे में शक्ति है मगर यहां से टॉपिक टॉपिक नहीं छोड़ रही हूं मैं टॉपिक पे ही हूं हां तो आप सेंसिटिव चीजें मत लाइए मुझे छोड़ छोड़ के उनका क्लेरिफिकेशन मैं दूंगा मैं सब आप जितनी चीजें हैं सब नोट कर लीजिए मैं हर एक चीज का जवाब दूंगा एक्सेप्ट किया सुनिए आपने एक्सेप्ट किया कि आप शायनाचार्य के भाष्य को मानते हैं। राइट? आपने एक्सेप्ट किया था कि नहीं किया? मैं यह पूछ रहा हूं कि यदि आप अपने आप को वैदिक सनातनी कह रही हैं तो आप किसके किसके द्वारा वेद को प्राप्त करने पर मान रही हैं कि मैं वैदिक सनातनी हूं। इंटरनेट को मानती है तो मैं इंटरनेट की प्रमाणिकता पूछूंगा। ये पूछूंगा कि इंटरनेट के विरुद्ध तो नहीं। शंकर सर्व्याप्त ईश्वर ने यहां मेरे भेजे में बुद्धि दी हुई है जिससे कि मैं पढ़ सकती हूं। आपको वेद वेद वेद डायरेक्ट वेद डायरेक्ट मिले हैं या किसी ग्रंथ के रूप में मिले हैं आपको? ग्रंथ के भगवान शंकर ने ग्रंथ के रूप में मिले हैं। इसका मतलब भगवान ने डायरेक्ट आपको नहीं दिए हैं। किसी और के द्वारा आपको मिले हैं। भगवान ने डायरेक्ट नहीं दिए ना। तो मैं मैं बता मुझे मैं बता तो रहा हूं। जिससे मुझे वेद
00:29:32:02 मिले हैं उसके भाष्य पर मुझे विश्वास है। आपको विश्वास है कि नहीं? मुझे विश्वास है। वही बात तो मैं कह रही हूं कि तो मुझे बताइए किससे मिले? उस व्यक्ति का नाम बताइए किससे मिले? ब्रह्म मुनि के भाष्य को से मैंने जो आप देखिए पीछे से मत आइए। इधर से चलिए। इधर से बताइए आपको इंटरनेट से मिले कोई आपने वेबसाइट बताई है वहां से मिले ठीक है ठीक है उसमें बता रही हूं ना किसके भाष अब मैंने आज आपको सयानाचार्य के भाष्य के बारे में भी बताया तो वो भी तो मुझे इंटरनेट आर्काइव से ही मिले अब वो इंटरनेट पे होते हुए भी आप मानेंगे या नहीं मानेंगे वो इसलिए मानूंगा क्योंकि मैं इसलिए मानूंगा क्योंकि मेरे परंपरा प्राप्त आचार्य उसपे ठप्पा लगा रहे हैं कि ये वेद है तो आप परंपरा प्राप्त आचार्य ठप्पा लगा रहे हैं ना मैं उस परंपरा में विश्वास नहीं कर सकती जो नहीं रखती तो आप किस में तो आप तो आप किस में रखती हैं? देखा ये बचने का तरीका है गौ बलि गौ बलि जात वो वर्णाश्रम जनमना ये सब लाना आपके गुरु भाई बहन ये सब लाना मैं पूछ रहा हूं आपको अगर वेद पे विश्वास है तो किसके द्वारा आप भी तो बात कुछ और थी टॉपिक कुछ और स्टार्ट हो गया भाई मैं मैं आपने क्या लिखा है टॉपिक का टॉपिक का नाम क्या लिखा है बताइए टॉपिक क्या लिखा हुआ है आपके वहां टॉपिक है आपका कंट्राडिक्टरी
00:30:47:03 टाइटल में क्या लिखा है टाइटल में? टाइटल में लिखा हुआ है कंट्राडिक्टरी कंडक्ट ऑफ शंकराचार्य संप्रदाय संप्रदाय संप्रदाय संप्रदाय आया ना नाम आया ना संप्रदाय पे बात हो रही है तो मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या संप्रदाय के विरुद्ध सुनिए कंट्राडिकरी कंडक्ट मैंने किया अरे भाई मैं आपसे ये पूछ रहा हूं यदि आप अपने आप को संप्रदाय विहीन बता रही है तो आपका वैदिक होना कैसे सिद्ध हो रहा है शास्त्रों को मानने वाला कैसे सिद्ध हो रहा है सनातनी होना कैसे सिद्ध हो रहा है मानव होना कैसे सिद्ध हो रहा है धर्म ना पशु भी समाना जिसका गुरु नहीं वो पशु है। गुरु गीता में लिखा हुआ है। आपको कैसे पता है कि मेरा गुरु नहीं है। मेरे पास है गुरु तो आप उसका नाम बताइए ना भाई। उसका नाम बताइए। मैं मानती हूं मैं आदि गुरु शंकराचार्य को अपना गुरु मानती हूं। बोलिए मैं उनके ही गुरु अश्वतम का ये तो आदि गुरु शंकराचार्य की बुक आपको कैसे मिली? आदि आदि गुरु शंकराचार्य की बुक आपको कैसे मिली? मैं मैं पूछ रहा हूं। आदि गुरु शंकराचार्य की बुक आपको कैसे मिली? आदि गुरु शंकराचार्य से मिली। डायरेक्ट दिए उन्होंने। शंकराचार्य से मिली। आदि गुरु शंकराचार्य को दी उसके उसने किसी को दी। उसने उसको इंटरनेट और मैंने उसको उस बुक को खरीदा।
00:32:02:14 इंटरनेट इंटरनेट पर डाली गई चीज तब तक हमारे लिए सत्य नहीं है जब तक उसको उस गुरु परंपरा के किसी प्रामाणिक आचार्य ने सत्यापित ना किया हो। जिससे उन्होंने फिर आप शयनाचार्य को कैसे फिर आप शयानाचार्य के इंटरनेट आर्काइव को कैसे मान गए? अरे क्योंकि हमारे गुरु ने उसे सत्यापित किया ना हमारे हमारे पास हमारे पास हमारे गुरु के द्वारा सत्यापित बुक्स है अगर इससे मैच खा रहा है इंटरनेट वाला मार मार के दिया तू इसी बुक को मानना चाहे उस बुक उस प्रकाशन की चौखंबा प्रकाशन से चाहे एक ही सपोज अगर चौख चौखंबा प्रकाशन की रामायण है 100 रामायण है उसमें से एक बुक पे स्टैंप मार के दिया हुआ है आपके गुरु ने तो आप बाकी सारी बुक को कूड़ेदान में फेंक देना उस एक बुक को मानना राइट नहीं नहीं नहीं ऐसे नहीं ऐसे परंपरा प्राप्त आचार्य के द्वारा दिए गए परंपरा प्राप्त नहीं बता रहा हूं ना परंपरा प्राप्त नहीं थे ब्रह्म मुनि ब्रह्म मुनि की टाइमलाइन बताइए पहले तो इसी टाइम लाइन की अपनी टाइम लाइन के नहीं आप आप बताइए ब्रह्म मुनि प्राप्त नहीं थे पूछ रहा हूं थे कि नहीं थे अरे भाई पहले उनके बारे में बताइए तो कौन सी परंपरा से थे ईश्वर से लिए थे उन्होंने वेद कहां पे एक्सिस्ट कर रहे हैं वो तो बताइए थे ब्रह्मा मुनि उन उनहीं के समकालीन थे जब आपके शनाचार्य हुए तो उनके उनके उनके आसपास के थे।
00:33:18:12 उनकी परंपरा क्या थी? उन्होंने किससे लिए थे? आपने ही मुझे बताया कि आर्य समाजी थे। ब्रह्म मुनि के बारे में नहीं बताया। मैंने तो मैंने तो उनके बारे में बताया था जिनके नाम के अंत में अलंकार आता है। मैंने उनका भी बोला था। मैंने बोला था कि मैंने जो मैंने मैंने अलंकार मैंने आर्य समाजी होना अलंकार वालों के लिए मतलब आपने ब्रह्म मुनि को एक्सेप्ट किया होगा। नहीं ब्रह्म मुनि के बारे में बताइए। तो वो कौन सी परंपरा से हैं? बताइए कौन सी परंपरा से हैं? मैं केवल इतना कहना चाह रहा हूं। मैं थोड़ा सा बता दूं कि किसी परंपरा प्रामाणिक परंपरा को माने बिना किसी का वैदिक सनातनी धर्म धार्मिक और मनुष्य होना भी सिद्ध नहीं होता। क्योंकि शास्त्रों के अनुसार जिसके पास धर्म नहीं है वो मनुष्य नहीं है। दूसरी बात यह है कि मुंडकोपनिषद में जिसके पास जिसके पास धर्म नहीं है वो मनुष्य नहीं है। ठीक है। हां तो मैं आपके पास धर्म ना होना सिद्ध कर रहा हूं ना। मैं आपके पास धर्म ना होना सिद्ध कर रहा हूं ना। जिसके पास गुरु नहीं वो धर्म नहीं उसके पास। आपको कैसे पता मेरे पास गुरु नहीं है भाई? गुरु अरे तो बताइए। अरे तो बताइए आप बताइए ना माननीय आगे बढ़ जाएगी। एक मिनट लेट मी स्पीक शिवश जी आप इस तरह से गुंडागर्दी टाइप से बात नहीं कर सकते। आपको सुनना भी पड़ेगा। ठीक है? आपको सुनना भी पड़ेगा। गुंडा गुंडागर्दी नहीं गुंडागर्दी
00:34:33:20 नहीं। गुंडागर्दी नहीं। बोलने का मौका नहीं दे रहे और तर्क पे नहीं जा रहे हैं। आप सिर्फ बोल रहे शास्त्र शास्त्र शास्त्र शास्त्र नहीं नहीं ऐसा नहीं है तर्क ही तो दे रहा हूं मैं लॉजिक दे रहा हूं अभी तो मैंने शास्त्र खोला ही नहीं देखिए मुंडको मुंडकोपनिषद में ऋषि बता रहे हैं कि मुझे ये जो वैदिक शिक्षा है कहां से मिली वो अपने गुरुओं के नाम बता रहे हैं आप अपने गुरुओं के नाम बताइए मेरे पास सृष्टि के प्रारंभ से होना चाहते सार्वजनिक मैं उनका नाम नहीं बता सकती मेरे गुरु अभी संसार के परंपरा बताइए परंपरा परंपरा बताइए परंपरा परंपरा बताइए वैष्णव परंपरा है उनका कौन सी परंपरा वैष्णव में मधवाचार परंपरा है श्री संप्रदाय रामानुज है क्योंकि वो लोग त्रिदंड धारण करते हैं तो या तो वो रामानुज यानी ठीक है रामानुज रामानुज परंपरा आपके लिए प्रमाण है उसके विरुद्ध तो नहीं किताबें तो नहीं पढ़ रही हूं ना जो मेरे पास अरे भैया तो ये ये कैसा गुरु हुआ गुरु का मतलब होता है जिसप हम प्रमाण जिसको हम प्रमाण माने क्योंकि अगर आप उनको प्रमाण नहीं शिवश जी शिवश जी हम इस चीज पे डिस्कशन के लिए आए ही नहीं थे पहली बात तो
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→ Used in: A · Live Where do they learn hypocrisy? मोमिना ने किया मुफ्ती को बेनकाब at 1:13:07 ↗
→ Used in: B · Video हिंदुओं का भद्दा मजाक मोमिना को पड़ गया भारी at 10:52 ↗
00:35:38:28 संप्रदाय विहीन होने पर ही तो बात हो रही है। आप संप्रदाय विहीन होते हुए हिंदू सिद्ध नहीं होती है ना। वैदिक सिद्ध हिंदू होने से आप मुझे हिंदू नहीं मानिए। मैं ये कह रही हूं। आप मुझे मुसलमान
⬜ Not used yet · 00:35:52:07 – 00:39:44:00 (3:52)
00:35:52:07 आप फिलहाल ये मान लीजिए कि मैं हिंदू नहीं हूं। फिलहाल मान लिया मैं तो नहीं मानूंगी क्योंकि मुझे भारत की भारत की नहीं। मुझे भारत की आपका संप्रदाय आपका संप्रदाय माने या ना माने। मुझे भारत की मुझे भारत का कानून मुझे दुनिया का दुनिया में जितने भी यानी कि आपके लिए धर्म से धर्म से आगे धर्म धर्म से आगे कानून आ गया। धर्म से आगे कानून है। भाई धर्म से आगे कानून है। हां क्यों आप कानून नहीं मानते क्या? आप भारत में रह के भारत का कानून नहीं मानते क्या? कानून कानून मानूंगा मगर जहां पर धर्म जहां पर धर्म क्रॉस हो रहा है वहां पर कानून के प्रति आस्था नहीं रहेगी। हां हम ये कोशिश करेंगे नहीं मानेंगे। मानेंगे कि नहीं मानेंगे? डजंट मैटर आपकी आस्था है कि नहीं है। मानेंगे कि नहीं मानेंगे? उतनी सीमा में उतनी उतनी सीमा में जितना मेरा धर्म क्रॉस नहीं कर रहा मगर आप समलैंगिकता को मानती हैं। नहीं मानती समलैंगिकता को मानती है तो वो कानून का इजाजत दे रहा है। मेरे ऊपर कंपशन नहीं है। लेकिन बस ऐसे ही बस ऐसे ही बस ऐसे ही मानते हैं हम भी कानून को। ऐसे तो आप कानून को ऐसे मानते हैं तो उसी हिसाब से आपको कानून जो है कानून कभी भी हमारा परम प्रमाण नहीं है मेरे मेरे खानदान में कोई वर्ण शंकर नहीं रहा है तो इस हिसाब से मुझे वैदिक हिंदू माना जाएगा कैसे आप
00:37:07:13 देखिए मैं आपको समझा ये किताब मान लीजिए वेद है ठीक है ये वेद है अब ये किताब मैंने किसी से ली अब मैं यह कह रहा हूं कि जिससे मैंने ली है उस पे मुझे भरोसा नहीं है वो क्या बोल रहा है सच बोल रहा है ईश्वर पे विश्वास नहीं करते आप ईश्वर पे विश्वास ये आप कह रही आपका मैं ईश्वर विश्वास करती हूं अब तो ईश्वर ने जो ज्ञान दिया है वेदों के रूप में बता दी और उस इंटरनेट पे आपके यानी कि अपने मन से आप किसी भी चीज को वेद मान लेंगी किसी भी चीज को कैसे वेद मान लूंगी भाई वो क्या आधार है किसी चीज को किसी चीज को हां ऑथेंटिक किसने किया उसे कैसे ऑथेंटिक है यानी कि आप उस वेबसाइट के विरुद्ध नहीं जाएंगे समाज आप आर्य समाज को ऑथेंटिक नहीं मानते उन्होंने कौन सा अपराध किया जो आप उनको ऑथेंटिक नहीं मानते ये हमारी चर्चा का विषय नहीं है। क्यों? ओह माय गॉड। मतलब जहां अच्छा से जाओ वो आपकी चर्चा का विषय नहीं है। ठीक है। ठीक है। मैं बता रहा हूं। आर्य समाज के पास वेद कहां से आए? बताइए। उनके गुरु से उनके गुरु परंपरा से आए। नाम बताइए नाम। दयानंद सरस्वती कुछ तो अच्छा किया होगा। उनको जहर देके मारा या श्रद्धानंद ऐसे में चले हम कुछ तो अच्छा किया होगा। अच्छा किया गया। कुछ अच्छा किया होगा। ने गोली मारा ये आपका ये आपका लॉजिक है। नंद सरस्वती जी और
00:38:23:03 आप अगर आप अगर इस तरीके से नाम लेंगी आरोप लगाने के लिए आप अपनी वैदिकता सिद्ध करें कृपा करके वैदिकता नहीं करने के लिए हम यहां आए ही नहीं है। आप मुझे तो आपने आप संप्रदाय पर आरोप लगा रही हैं। आप संप्रदाय विहीन होते हुए स्वयं को सनातनी हिंदू वैदिक आर्य सिद्ध कर दीजिए। आपने संप्रदाय का विरोध किया है ना? आप जिनको मातृ शक्ति कह रहे हो जिन आपने संप्रदाय का विरोध किया है ना वो गलत है। जिन्होंने ऐसा किया है वो गलत हैं। तो हिंदू है वो वैदिक हिंदू हैं। उनको वेदों का ज्ञान है। अरे मैं सपोर्ट में आप लोग डाल रहे थे। जिनसे जिनका सपोर्ट ले रहे थे वो वैदिक है। मैं शास्त्रों का ज्ञान मुझे है। मैं ठीक है। मैं एक चीज बता दूं आपको। थोड़ा काम डाउन हो जाइए। ठीक है। आप भी आप भी आप भी मतारी मत कीजिए प्लीज। मैं आपसे विनती करती हूं। आप शंकराचार्य संप्रदाय से आप इस समय इस तरह के शब्दों का प्रयोग करेंगे शब्दों का प्रयोग क्योंकि आपने मुझे धोखा दिया है। अभी मुझे जाना पड़ेगा। मुझे जाना पड़ेगा। जिस चीज पर होनी थी जो
00:39:39:15 आप अगरेंग तो मुझे जाना पड़ेगा। लूंगी मैं बिल्कुल नहीं लूंगी।
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विदेश में बैठकर परंपरा पर टिप्पणी करने वाली स्त्री ने किया सत्य से साक्षात्कार
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