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00:00:03:10 हां जी बताइए तो क्या बोलते हैं इसमें मैं एक साल से मतलब इस से जुड़ा हुआ था दिल्ली में हम हम तो क्या बोलते हैं मुझे जो मतलब वो बता रहे थे मतलब जो उनका YouTube पे जैसे लेक्चर वगैरह आता है हम प्रभुपाद जी का तो वो बिल्कुल क्लियर कट होता है कांसेप्ट वगैरह सब समझ में आते हैं मतलब क्या बोल रहे क्या कहना चाहते हम पर मैंने मतलब शंकराचार्य वगैरह इनका समझ में नहीं आता मतलब क्या कहते हैं ये मतलब संस्कृत में बोलते हैं हिंदी में बोलते हैं हम तो मतलब कहां से मतलब जोड़ा जाए कि हमें मतलब मतलब पता चले क्या मसला असली हमारा कोर्स होता है उसका फॉर्म भर दीजिए इसी नंबर पर WhatsApp करके तो आपको प्रारंभिक बुनियादी चीजें पता चल जाएंगी और सही अथवा गलत का निर्णय समझ में आने के ऊपर नहीं किया जा सकता है क्योंकि कि आफ्टर ऑल जब आप अपने आरती भजन इत्यादि गाएंगे जहां से आप जुड़े हुए हैं वहां के तो वहां के आरती भजन इत्यादि जो प्रार्थनाएं हैं वो आपकी उतनी समझ में नहीं आएंगी जितना आजकल जो जो क्रिश्चियन मिशनरीज वाले जो प्रार्थना करवा रहे हैं धर्म परिवर्तन कराने के लिए उनकी

00:01:18:16 जो आपको समझ में आएगी। अच्छा तुलसीदास जी ने जो हनुमान चालीसा लिखी है वह आपको उतनी समझ में नहीं आएगी जल्दी अगर आप सामान्य हिंदी भाषी व्यक्ति हैं। हां जबकि वहीं पर जो मिशनरीज हैं जो कन्वर्जन करा रही हैं बहुत ही सरलतम प्रार्थनाएं करवाते हैं। हे ईश्वर हमको अपनी शरण में ले ले। हे ईश्वर आप जैसा कोई नहीं है। इसमें समझने में कोई दिक्कत नहीं है। मगर जुग सहस्त्र जोजन पर भानु ली ताही मधुर फल जानू यह सब समझने में तब भी आपको कठिनाई हो जाएगी। तो इसका अर्थ क्या हुआ? कि यदि किसी ने सरलतम रूप में अथवा अनाधिकृत रूप से प्रस्तुत भी कर दिया है तो इससे ये निर्णय नहीं लिया जा सकता कि वो चीज सही होगी क्योंकि वह सरल और सुलभ है। हां हमें प्रयासरत इसके लिए होना चाहिए कि जो सही चीज हो वही हमारे लिए सुलभ हो जाए। इसका एक दूसरा उदाहरण और भी है कि यदि हमको दूध पीना है और दूध नहीं मिल रहा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम मदिरा पी लेंगे। अच्छा हम दूध के लिए ही ढूंढेंगे ना। दूध का काम तो दूध ही करेगा। मदिरा पी के दूध की दूध की चीजों को हम फुलफिल थोड़ी ना कर पाएंगे। तो क्योंकि मदिरा की दुकान हमें मिल गई और दूध नहीं मिल पा रहा है

00:02:33:18 तो इसलिए मदिरा पी लेंगे तो ये तो कोई लॉजिक नहीं हुआ। ठीक? बाकी आप इसी नंबर पर फोन वो कर दीजिए। नहीं वो तो मैंने कर दिया अभी थोड़ी देर पहले। हम ये मतलब यह चीज बताई जाती थी कि ये मतलब शंकराचार्य वगैरह भगवत गीता में भी लिखा हुआ है कि ये मतलब वो बनना चाहते हैं। ये भगवान बनना चाहते हैं। भगवान बनना चाहते हैं। ऐसा शंकराचार्य ने कहा हैं। मतलब ऐसे भगवत गीता में मतलब आता हैं। इसमें भगवान बनना चाहते वह झूठ बोलते हैं।

00:03:08:24 उन्होंने अपनी भगवत गीता में बहुत सी बातें झूठी लिखी हैं। मनगढ़ंत अच्छा वो कहते हैं कि मतलब अगर हम भगवान मैंने बताया तो वो गलत कहते हैं। अब आप तर्क वितर्क करना चाहते हैं तो वैसा बताएं। मैंने तो आपको बता दिया वो झूठ कहते हैं। नहीं अगर वह झूठ कहते हैं तो मतलब मैंने मतलब उनकी बातें मान लो झूठ मान ली तो प्रभुपाद जी जो बोलते हैं वो भी गलत है। मुझे नहीं पता प्रभुपाद जी सही बोलते हैं गलत बोलते हैं। मैंने मैं बता रहा हूं आपको इस कौन जो इस समय प्रचारित कर रहा है वो गलत है। अच्छा तो इसका मतलब कैसे पता चले कौन सही बोल रहा है? कौन गलत बोल रहा है? सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म

00:03:54:14 कभी ना बदलने वाला धर्म हो। मुक्ति ऐसी हो जो परम स्वतंत्र हो और ईश्वर ऐसा हो जो सर्वशक्तिमान हो। ये तीन चीजें जो आपको दे रहा है वो सही बोल रहा है। इन तीनों में से कोई भी एक चीज भी अगर वो अलग हटा रहा है तो वो गलत बोल रहा है। जैसे कि जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं मगर शिव से कृष्ण पुनः नहीं बन सकते। इसका अर्थ क्या हुआ? कि शिव के रूप में आकर के कृष्ण बाधित हो गए। सर्वशक्तिमान नहीं रहे। हाँ इस चीज पे मैं एक क्वेश्चन करना चाहता हूं आपसे। एक मिनट एक मिनट एक मिनट इसी के साथ-साथ कृष्ण और अल्लाह में कोई अंतर नहीं है। अल्लाह कौन है? जो अवतार नहीं ले सकता

00:04:46:09 जिसकी मूर्ति नहीं बन सकती। तो इसका अर्थ क्या हुआ? इसने आपका में देख लिया था। आपका मतलब क्या कहना चाहते हो? इसका अर्थ क्या हुआ कि इस के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है। हम मिलने वाले मोक्ष की बात कर लेते हैं। क्या इस के द्वारा बताई जाने वाली जो मुक्ति है वह परम स्वतंत्र है नहीं है क्योंकि उसके अनुसार इस के अनुसार जीव जो था वो भगवान की शरण में ही था जैसे रामपाल रामपाल भी यही कहता है जीवात्माएं थी वो सतलोक में कबीर की शरण में थी ठीक है रामपाल का प्रचार हो रहा है यहां पे हरियाणा में रामपाल की ही भाषा को बदल करके इस वाले भी बोल रहे हैं कि जीव जो जीवात्माएं थी भगवान के साथ थी वहां सुख भोग रही थी फिर जीवात्माओं का मन हुआ भोग करने का अलग से भोग करने का वो आकर फंस गई मगर बात यह आती है कि जब आपको सच्चिदानंद प्राप्त है तो आपको और कौन सा भोग करने का मन आ गया मन में आप तो सच्चिदानंद में थे ना स्टेट ऑफ सच्चिदानंद आप तो प्राप्त कर प्राप्त किए हुए थे ना भगवत भक्ति हम

00:06:01:18 तो आप तो ऑलरेडी मुक्त थे तो फिर आप बाधित क्यों हो रहे हैं और अगर बाधित हो रहे हैं तो वहां पर जहां पर जहां से आप अपने नए आनंद को खोजने के लिए नीचे आए हैं वहां पहुंचकर के आप मुक्त कैसे माने जाएंगे? इसके अलावा और भी थ्योरीज है कि वहां पर सेवा करना ही मोक्ष है। तो ये सारी थ्योरीज भी फिर वो काल्पनिक हो जाती हैं। अब आ जाता है शाश्वत धर्म। सर्वशक्तिमान ईश्वर और परम स्वतंत्र मोक्ष हमने देख लिया। अब आ जाता है शाश्वत धर्म। शाश्वत धर्म क्या है? मधवाचार्य की परंपरा से हैं। मधवाचार्य ने द्वैत और अद्वैत में अचिंत नहीं माना है। उन्होंने उन्होंने स्पष्ट द्वैत माना है। तो तुम अचिंत कैसे हो गए? और जो क्या कहते हैं यह आपके ये हैं जो चैतन्य महाप्रभु इनके गुरु हैं श्रीधर स्वामी शंकराचार्य अपने समय के तो फिर आप शंकराचार्य के विरोधी कैसे हो गए?

00:06:58:24 अब इसमें बात आती है कि आपके अंदर यदि कुछ अपना पक्ष रखने वाली बात भी है। यदि जिज्ञासु है तो क्लासेस में आइए और अगर विरोधी हैं तो आप लाइव डिस्कशन में आ जाइए। मैं एक बाधित वाला पूछना चाहता हूं। बाधित में प्रश्न ये सारी बातें आप मैंने कहा ना जिज्ञासु है तो क्लास में आइए और विरोधी हैं जैसे आपको लगता है कि मेरा अपना पक्ष है यदि आपका कोई पक्ष नहीं है आपको जिज्ञासा ही है तो आप क्लास में आइए यदि आपका कोई पक्ष है विरोधी हैं तो आप डिस्कशन में आ जाइए ठीक है तो क्लास तो फिर मैंने इसमें ही किया ना ये इसमें एनरोल कर लिया इस साइट पे हां कर लिया है तो आपसे संपर्क किया जाएगा पर एक छोटी चीज का बता दो मेरे को एक। मेरी अभी एक मीटिंग है। मैंने आपको 10-15 मिनट ऑलरेडी दे दिए हैं। चलो ठीक है। जय श्री हां जी मेरा ही है। हां आप ही वो लेक्चर मतलब वो डिस्कशन वगैरह करते हैं। हम हम हां वेरी गुड। मेरे को आपके क्वेश्चंस बहुत अच्छे लगते हैं। एंड आई एम आल्सो ऑफ कोर्स मेरे को थोड़ा भगवत गीता वगैरह का इंटरेस्ट है। तो यू आस्क क्वेश्चंस डिफरेंट क्वेश्चन। अच्छा मेरे को आपसे ये

00:08:13:25 कहना बोलना है कि आपने जो शंकराचार्य ऑफ कोर्स शंकराचार्य इस द पायर ऑफ हिंदू रिलीजियस लेकिन जब आपका डिस्कशन मैंने देखा कुछ श्री संप्रदाय आप ही है ना वो YouTube वगैरह सब बनाते वो डिस्कशन इस या अलग-अलग संप्रदाय के लोगों से मतलब श्री संप्रदाय के या अलग इनको भी आपने एक्सपोज किया था ब्रह्माकुमारीज मैंने देखी सब अच्छे बहुत अच्छे क्वेश्चन रहते हैं आपको और बहुत रैशन क्वेश्चंस रहते हैं मतलब प्रैक्टिकल तो मुझे बहुत अच्छा लगता है वो आपका डिस्कशन पहले मैं आपको कॉम्प्लीमेंट देना चाहता हूं अच्छा सेकंडली मैं आपको एक बात आपके डिस्कशन में मैंने देखा राम श्री राम के भक्ति के ऊपर मतलब शिव जी के भक्ति के ऊपर तो मेरा ये कहना है मैं खुद मेरे भी कुछ सेंटीमेंट्स है मेरा थोड़ा सा ये है क्योंकि हमारे कुल देवता जो है वो श्री कृष्ण है और हमारी कुलदेवी है जो आर्या दुर्गा है तो मेरा कृष्ण के प्रति थोड़ा सा थोड़ा सा ये है क्या बोलते हैं ज्यादा ये है आनंद तो मैं हां तो मैं ये कहना पूछना चाहता हूं आपको कि भगवत गीता में जो

00:09:28:28 लिखा है आपने बोला ना राम ने इनकी पूजा की शिव जी की वो वो सब सही बात है आपकी वो है ऐसा रामायण में क्योंकि मैंने रामायण भी पढ़े हैं और भागवत महाभारत में भी श्री कृष्ण जी कभी-कभी भी शिव जी का पूजन करते हैं कुछ इसके लिए जैसे जामवती ने शिव जी का पूजन किया था कार्तिकेय को पाने के लिए ऐसे सब वर्ण है कृष्ण भगवान ने भी किया था हां कृष्ण भगवान ने भी किया थे तो ये सब बातें सही है तो लेकिन मेरा एक कहना है इसमें कि भगवत गीता में जो कहते हैं भगवान कि जब मैं मनुष्य रूप में आता हूं तो मैं उनके जैसा ही बर्ताव करता हूं यद्य आचर श्रेष्ठ देव प्रमाण लोकत अनुवर्तते तो उनको को आने के बाद एक धर्म का विस्थापन करना होता है। किन के लिए? नॉट ओनली हायर लेवल के लोग हैं। डिस्कशन में जो आया ना कोई कोई बोल रहा था हायर लेवल के लिए वो इसके लेवल के लिए ऐसा नहीं है। वो सबके लिए करना पड़ता है। जैसे सपोज नॉर्मल लोग भी हो या बड़े हो मतलब पढ़े लिखे भी हो या कोई भी हो हायर लेवल पे हो उनके सबके लिए उनको एक आदर्श सामने रखना पड़ता है। तो अभी देखो आप बोलते हैं राम जी ने शिव जी का पूजन किया। ये तो सही है। लेकिन उन्होंने समुद्र का भी पूजन किया। तीन दिन किया। समुद्र का पूजन ब्रह्म के रूप में नहीं किया। किया कि

00:10:44:02 तीन दिन उपवास किया ना ब्रह्म के रूप में ब्रह्म के रूप में नहीं किया देवता के रूप में किया। हां देवता के रूप में तो मैं ये कहना उन्होंने स्पष्ट कहा है कि शिव जी और मुझ में कोई भेद नहीं है और ब्रह्म माना है भगवान हां तो ये तो बात है वो तो बहुत बार कही दूसरी एक बात ये कह रहे हैं आप कि वो जो जब आते हैं तो आदर्श स्थापित करने के लिए उन्हें मनुष्यों की तरह व्यवहार की स्थापना करते हैं। मनुष्यों की तरह व्यवहार करना पड़ता है। तो इसका मतलब ये जो आप बोले ना गायत्री मंत्र जप करते हैं वो सब उसमें आता है। संध्या वंदन करते हैं। एक मिनट एक मिनट एक मिनट इसका मतलब ये है कि वो ये चाहते हैं कि वो जो व्यवहार कर रहे हैं उसे हम भी करें उसे हम भी करें डेफिनेटली इसका मतलब ये एक मिनट एक मिनट इसका मतलब वो ये चाहते हैं कि यदि वो शिव को भगवान मान रहे हैं तो हम भी माने यस डेफिनेटली लेकिन लेकिन मैं आपको एक इसके आगे का बात कहता हूं लेकिन वो आप जो कह रहे कि ये वो जो कह रहा था सामने वाला कि वो अलग लेवल ऐसा नहीं है। उनको जिस लेवल पे आप है सपोज अभी-अभी आपकी कैटेगरीज होती है जैसे 84 लक्ष योनियां है उसमें भी कैटेगरी है अलग-अलग जलजा नव लक्षण स्थावरम लक्षविषदी वो अलग-अलग कॉन्शसनेस जैसा डेवलप हो जाता है वैसा मनुष्यों में भी कॉन्शसनेस डेवलपमेंट का अलग-अलग स्टेजेस है इसलिए शूद्र है मेंटालिटी मेंटालिटी बोल रहा हूं मैं जाति नहीं बोल रहा हूं

00:11:59:03 और आपने वो भी एक क्वेश्चन उठाया था शूद्र है मेंटालिटी मेंटालिटी बोल रहा हूं मैं मैं ये व्यक्ति नहीं बोल रहा हूं क्षत्रिय मेंटालिटी होते है तो उनके लिए अलग-अलग उन्होंने कुछ ऐसे ये रखे जैसे भी चराते थे। मूल पॉइंट आप पहले बता दीजिए क्योंकि मुझे पता नहीं चल रहा हम लोग किस दिशा में बात कर रहे हैं। हां तो मेरे को मूल पॉइंट ये कहना है कि अगर वो भगवान है एक भगवान है। अब हम लोग सब कहते हैं कि भगवान एक है। तो मेरी मेरे मतलब मुझे ऐसा लगता है कि वो एक ही होना चाहिए। ऐसा नहीं कि ये भी भगवान है वो भी भगवान है। क्योंकि फर्क ये है कि भगवान एक ही है। उसके रूप का ही है। हां रूप रूप का ही है। तो वही एक बात मैं आपको बोलता हूं कि आपका एक डिसीजन मैंने सुना था बीच में कि आपने शिवजी और वो इस के साथ कोई थे कोई थे तो उसमें आपने डिस्कशन किया था कि शिवजी इस लाइक अ मिल्क और ये ऐसा कुछ था। मेरे को अभी याद नहीं आ रहा वो दही और मिल्क ऐसा कुछ तो आपने क्वेश्चन पूछा था। वो बहुत मतलब बहुत ऐसा बहुत से लोगों को वो प्रश्न आता है। तो मेरा ये कहना क्या है कि भगवान के जो मैंने जो इंफॉर्मेशन पढ़ी है जो मेरे हिसाब से जो गर्ग संहिता में तो उन्होंने क्या कहा है गर्ग संहिता में कि अलग-अलग अवतार जो होते हैं वो स्वामंस उसमें फर्क रहता है। स्वा विभिन्न आवश्यकता देखिए यह जो व्याख्याएं हैं

00:13:15:01 ये आपकी एक जो शिक्षा प्रणाली है पर्टिकुलर वो तो सब चीजें जिधर जिधर अच्छी मिलते है उधर मैं रहता हूं वो उससे प्रभावित है हां लेकिन शिक्षा प्रणाली आपके शास्त्रों में है ना शास्त्रों में ये है कि पूर्ण से जब कुछ निकलेगा तो पूर्ण ही होगा बराबर है तो वो उसमें कोई वो उसमें कुछ कमी आ ही नहीं सकती ना लेकिन आप ये मानते हो कि नहीं कि भगवान एक ही है और उनके रूप अनेक है। तो जो रूप है लेकिन वो रूप जो है उसमें उसको आप भगवान कभी-कभी नहीं कह सकते क्योंकि वो अलग थोड़ा सा ऐसा नहीं है। अगर शास्त्रों में आपने अगर शास्त्रों में ये पढ़ा है स्वांश वगैरह तो शास्त्रों में ये भी तो लिखा है कि मैं ब्रह्म हूं। शिव जी कह रहे हैं। मैं ही परम ब्रह्म हूं। देखो आप आपको मैं बताता हूं मैं कि मेरा कहने का मतलब क्या है? अरे भाई यजुर्वेद के 16व अध्याय के दूसरे मंत्र में कह दिया शिव की भक्ति मोक्षदायक है। लेकिन मोक्ष जो पुराण पढ़ा है क्या? ब्रह्म पुराण सुनिए जो मोक्षदायक है वही क्या कहते हैं भगवान है। हां लेकिन तीन तीन नहीं हो सकते ना अलग-अलग। कहां अलग-अलग है? ईश्वर मैं कहां कह रहा हूं होना चाहिए ना? मैं कहां कह रहा हूं? अलग है। कृष्ण ही शिव

00:14:30:02 है। शिव ही कृष्ण है। शिव कृष्ण है। हां। लेकिन उनका फंक्शनिंग अलग है। तो मैं ये कहना चाहता हूं। फंक्शनिंग अलग वो वो फिर देखिए आपकी बात बार-बार बदल रहे हो। जब वो दोनों जब वो दोनों एक है तो दोनों भगवान है। फंक्शनिंग अलग है तो फंक्शनिंग अलग होने से कोई व्यक्ति अलग थोड़ी ना हो जाता है। कोई है ना? जैसे कोई ठीक है। आप ऐसा करिए। आप एक लाइव डिस्कशन में आ जाइए। ठीक है? नहीं नहीं आप सपोज सपोज सपोज मैं अभी घर पे हूं। तो मैं एक अलग हूं ना मेरे पास समय नहीं मेरे पास समय नहीं है। मैं ऊपर करके भी बैठ सकता हूं लेकिन बाहर जाऊंगा ऑफिस में तो वैसा नहीं बैठ सकता। आप लाइव लाइव डिस्कशन में आ जाइए। ठीक है? लेकिन कैसा आने का मेरे को पता नहीं है। लेकिन मैं तो इतना क्वालीफाई नहीं समझता अभी मेरे को आप आप फोटो दीजिए अपनी। हम आपको एक टाइम देंगे। उस टाइम पर हम आपको एक लिंक देंगे। उस लिंक को टच करके आप आ जाना। ठीक है? फोटो देना पड़ेगा। अच्छा कहां देना है फोटो? यहीं पे WhatsApp WhatsApp करिए। ये WhatsApp है। अच्छा फोटो लेकिन एक मैं आपको मानता हूं कि जो प्रश्न पहले किसी ने उठाए नहीं थे ओपन में वो आपने उठाया वो मेरे को बहुत अच्छा लगा क्योंकि आप सच्ची में मतलब आप बोलते हैं ना जिसको जानने के लिए उत्सुक लगते हैं आप मतलब सच क्या है? ठीक है। मैं भी एक बात आपको बोलता हूं। मैं भी समान ही मानता हूं शिव जी। आप आप जो है आप

00:15:45:08 क्वेश्चंस जो मैंने रेज किए हैं उनको आप आंसर करिए। हां लेकिन मैं भी एक बात को पूछ रहा हूं ना कि दोनों समान है। मैं भी मानता हूं लेकिन वो उनका फंक्शनिंग अलग है। आप आप फिर शास्त्र में ये दिखाइए ना कि एक ही तत्व की अगर फंक्शनिंग अलग-अलग होगी तो इस फंक्शनिंग के आधार पर उसे भगवान माना जाएगा और दूसरी फंक्शनिंग के आधार पे उसको भगवान नहीं माना जाएगा। फिर शास्त्र में दिखाइए। आप फंक्शनिंग अलग मान रहे हैं ना। हां तो आप आप वो ले आप आप वो लेके आप लाइव में आइए मैं अभी मैं अभी कहीं पे व्यस्त हूं जय श्री राम

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 16:45 · 08 Mar 2026

शिवजी भगवान नहीं? ISKCON अनुयायी का तर्क

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