Used:
SRT: ⬇ SRT ⬇ Original file

.srt or .vtt (Hindi). The old file is backed up. After that the match for this video is rebuilt (may take a few minutes, keep the page open).

⬜ Not used yet · 00:00:02:02 – 01:16:11:13 (1:16:09)

00:00:02:02 तो जय श्री राम सभी लोगों को। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और आज का विषय आप जानते ही हैं। थंबनेल में हमने बताया है रामपाल गैंग की एक बहुत बड़ी पराजय हुई है। अ उस बारे में आज हम बात करने वाले हैं। वैसे इस बीच ऐसा बहुत सारा ऐसी बहुत सारी सामग्री हमें प्राप्त हुई थी रामपाल की ओर से जिसको लेकर के अपने आप में एक एक अध्याय बनाया जा सकता है। पर केवल अगर कंटेंट की बात की जाए कि कभी-कभी कुछ लोग इस ओर ले जाते हैं बात को कि भाई ये जो है कंटेंट क्रिएट करना चाहते हैं इस वजह से तो इस बीच ऐसी बहुत सी सामग्री हमें रामपाल की ओर से प्राप्त हुई जो अगर हमारा कंटेंट को ढूंढने की अगर मातृ दृष्टि हो तो बहुत सारा कंटेंट रामपाल पे ही अभी आ चुका होता पर अब जाकर के कानून से संबंधित कुछ ऐसी चीजें हमें प्राप्त हुई हैं कोर्ट से संबंधित जो आप लोगों के साथ जो जानकारी साझा करना बहुत आवश्यक लगा तो इसलिए आज हम प्रस्तुत हुए हैं। यद्यपि रामपाल से जो युद्ध चल रहा है कोर्ट

00:01:17:22 से लेकर धरातल से लेकर पुलिस थाना और इवन जो मैन टू मैन एक होता है ना टकराव वो सब चीजों को लेकर के चल रहा है। तो जो लोग जुड़े हुए हैं अपडेटेड हैं उनको पूरा ज्ञात होगा। अब रामपाल के खिलाफ एक जजमेंट आया है। यह जजमेंट मेरे हाथ में है इस समय अ न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 14 लखनऊ है ना और

00:01:52:16 यह जो आदेश आया है नीरज कुमार बरनवाल जी के द्वारा आदेश दिया गया है और किस तरह से इसमें मूकी खाई है रामपाल गैंग ने वह अभी आपको पता चलेगा और किस विषय में है तो सबसे पहले मैं बता दूं विषय क्या है? जब रामपाल से धरातल पर रामपाल की गैंग से रामपाल तो तब जेल में था तो रामपाल की गैंग के साथ जब धरातल पर आमनासामना प्रारंभ हुआ तो इन लोगों ने सबसे पहले प्रयास किया कि भाई जो हमने इनके बुक स्टॉल पर जाकर के विरोध प्रदर्शन किया था जिसके कारण मेला प्रशासन ने इनकी बुक्स को वहां से हटवा दिया गया था। मेला प्रशासन के द्वारा बुक्स को वहां से हटवा दिया गया और फिर जो आगे के दृश्य थे उसी क्रम में आपने देखे कि किस तरह से लोगों ने चौराहे पर एकत्रित होकर के सार्वजनिक रूप से डंके की चोट पर रामपाल का बहिष्कार किया। रामपाल का तिरस्कार किया। उसकी किताबों का तिरस्कार किया और जो हश हुआ वो सब आपने देखा। इन चीजों से आहत हो के जो रामपाल गैंग है यहां का लखनऊ का स्थानीय गैंग जाहिर सी बात है कि

00:03:07:20 इस गैंग को ऊपर से ऑर्डर्स मिल रहे होंगे तभी वो इस तरह के कदम उठा रहा है या फिर यह भी हो सकता है कि क्या है कि रामपाल गैंग में वो सांभर डियर वाले लोग ज्यादा हैं। सांभर डियर पता है ना आपको वो शेर का जो सबसे आसान शिकार बांधवगढ़ के जंगलों में मिलता है। कई जगह मिलता है। मगर मैंने वहां पर जाना था कि भाई सांभर डियर जो है शेर के लिए एक आसान शिकार होता है। क्योंकि वह भागते-भागते पीछे देखता है। जैसे कि वो इंजमामुल हक देखता था क्रिकेटर जो रन आउट सबसे ज्यादा बार हुआ है। उसका रिकॉर्ड्स में नाम है सबसे ज्यादा बार वो रन आउट हुआ है। तो इनकी गैंग में साबर डियर ज्यादा है। रामपाल की गैंग में। रामपाल का बैंड बजाने के लिए कोई बाहर से आने वाले किसी की आवश्यकता नहीं है। उस गैंग में ही इतने साम डियर हैं जो रामपाल की बैंड बजाने के लिए पर्याप्त रहते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो दो बातें हो सकती हैं। या तो रामपाल की गैंग के जो लीडर्स हैं वही इतने बड़े बेवकूफ हैं कि भाई जाओ जाकर के यह जो हुई है किसी तरीके से कानूनी पचड़ों में लपेटने का प्रयास करो सामने वाले को

00:04:22:21 और या फिर इनका इनकी गैंग का जो व्यक्ति है वो खुद ही सामर डियर जैसी हरकत करने वाला है जो थाने पहुंच गया। खैर कुल मिलाकर के ये लोग हमारे विरुद्ध थाने में गए और इन्होंने एक वहां पर तहरीर दी एप्लीकेशन। अच्छा कुछ लोग जो बहुत ज्यादा थाना कोर्ट कचहरी से परिचित नहीं है वह सोचते हैं कि आईजीआरएस कराना या फिर एप्लीकेशन सबमिट कर देना थाने में एप्लीकेशन दे देना वही एफआईआर होती है। जबकि ऐसा नहीं है। जो लोग परिचित होंगे उनके लिए तो आम बात है कि कि सबसे पहले थाने में दी जाती है एक एप्लीकेशन कि हमारे साथ ये घटना हुई है। फिर एक प्रारंभिक स्तर पर एक जो पुलिस विभाग होता है वह अपनी एक जांच करता है। उस जांच के बाद यदि उसको ठीक लगता है तो वो एक गंभीरता देखते हुए मामले की उसको एफआईआर के रूप में दर्ज करता है। और जब एफआईआर के रूप में दर्ज होती है बात तो वो फिर पुलिस विभाग के अनुसार वो व्यक्ति जिसके खिलाफ एफआईआर हुई है। लगभग लगभग वो व्यक्ति एक्यूज़्ड होता है। आरोपी होता है और उसको ही केंद्र में रख के वो कार्य

00:05:38:09 उसको ही केंद्र में रख के वो जांच करती है। हालांकि ऐसा भी होता है कि जो एफआईआर है वो भी अपने आप में एक जांच करने की शुरुआत है। पर ऑफिशियली एप्लीकेशन एक व्यक्ति की शिकायत मात्र है और एफआईआर उस एप्लीकेशन को अब स्वीकार कर लिया गया कि हां हम आपकी जांच कर रहे हैं। ज्यादातर एफआईआर दर्ज तब होती है जब एप्लीकेशन में कुछ दम दिखाई देती है कि हां भाई यह जो अह बातें कह रहे हैं और मामला है जो गंभीर है और जो बातें कही जा रही हैं वो सत्य लगभग सत्य के आसपास तो एफआईआर दर्ज होती है ज्यादातर पुलिस क्योंकि यह नहीं चाहती है कि और पुलिस का एक दृष्टिकोण और होता है कि वो एफआईआर तब ज्यादातर तब दर्ज करते जब उनको यह लगता है कि इस केस को हम सॉल्व कर सकते हैं। यह भी बात होती है क्योंकि पुलिस अपना रिकॉर्ड मेंटेन पुलिस विभाग नहीं कर खराब नहीं करना चाहता है कि भाई हम ऐसी एफआईआर दर्ज करें जिसमें हम कुछ रिजल्ट नहीं दे पाए क्योंकि साल में शायद एक बार कुछ इनका होता है जब चेक किया जाता है कितने केस जो है वो अनसॉल्वड रहे अनसुलझे रहे। खैर [गला साफ़ करने की आवाज़]

00:06:46:07 अब आते हैं कि वो जो हमने विरोध प्रदर्शन किया था मेले में जाकर के इनकी किताबों का और जो कुछ आगे हुआ उससे आहत हो के और कहीं ना कहीं वो सांभर डियर वाली हरकत कर बैठे हमारे विरोध में कुछ झूठे आरोप लेते हुए कुछ वो एससी एसटी की झूठी कहानियां बना करके रामपाल के लोगों के द्वारा जब भी कभी किसी पर कार्रवाही की गई है ये लोग जो बताते हैं कि उस पर कारवाई हो गई, कारवाई हो गई। उस कारवाही में कभी भी यह बात सामने नहीं आती कि किसी ने रामपाल के माने रामपाल को कालनेमी कहा, किसी ने रामपाल के ज्ञान को झूठा कहा। यह सब बातें कभी नहीं आती है शिकायत में। अगर ऑफिशियली किसी के विरोध में कोई शिकायत पंजीकृत की गई होगी तो उसमें आता है इस व्यक्ति ने जातिचक शब्द कहे हैं। यह आता है सबसे ज्यादा। आप कोई भी उठा के देखिए कि रामपाल के गैंग ने किसी पर कारवाही की हो तो जातिचक शब्दों का सहारा लिया जाता है सामने वाले को दबाने में कि भाई इसने हमको जातिचक शब्द कहे हैं। अब वो फिर देखती है स्थानीय पुलिस जो है कि जिस पर आरोप लग रहा है वो व्यक्ति ऐसा है कि नहीं या फिर यह बातें कितनी तथ्यात्मक है। तो खैर यह हमारे

00:08:02:00 विरोध में उस कारवाई से हमारी से आहत हो के कुछ झूठे लाग लपेट करके यह लोग थाने पहुंच गए कि इन्होंने आए और हमारे यहां यह अभद्रता की यह गाली दी वो गाली दी और जातिचक शब्द जरूर जिससे कि वो धारा लग जाए वो एससी एसटी वाला एक्ट लग जाए। खैर पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया और पुलिस विभाग कई मामलों में कई प्रकरणों में जांच अपनी करता रहता है तो कई बार मतलब ऐसा होता है कि पुलिस आसपास के जो स्थानीय लोग होते हैं उनका चरित्र जानती है कि कौन कैसा व्यक्ति है किस धारा में फिर भी पुलिस ने अपनी जांच की उसने पाया ये गलत है जो सूचना दी जा रही है वो गलत है उसमें हमारे जो साथी थे जो हिंदुत्ववादी साथी थे जो हमारे साथ थे उन लोगों ने और पुलिस ने हमसे एक बात कही कि भाई जो विरोध प्रदर्शन हुआ है उसमें एक चीज आ सकती है और मामले को बहुत आसानी से क्लोज किया जा सकता है कि भाई जो विरोध प्रदर्शन हुआ है वो आपको पुलिस के द्वारा वहां पर जाकर के विरोध करना चाहिए था डायरेक्ट नहीं मतलब अगर आपको अगर वह भी करना है प्रदर्शन भी करना है तो आपको एक लिखित में अनुमति

00:09:17:13 ले लेनी चाहिए कम से कम सूचना देनी चाहिए थी तो वह सब नहीं हुआ। तो इस संबंध में यह जो अभाव था यद्यपि हम तो पहले पुलिस के पास ही जाना चाह रहे थे। जो हमारे साथी थे जो उग्र स्वभाव के थे उन लोगों ने कहा कि नहीं नहीं हम तो सीधे जाके ताबड़तोड़ विरोध प्रदर्शन ही करेंगे। तो हमारा तो यही था पहले पुलिस को ले चलो और वहीं से आप जो है अरेस्ट करोगे हाथों। आपको मालूम है एक समय था जब लखनऊ में स्टॉल लगी है। जत्था का जत्था किताबें रखी हुई है रामपाल की खुलेआम मेले में लोगों को बरगलाया जा रहा है। और आज चोरी छुपे कहीं पर बिक रही हो तो बिक रही हो। वो जो डंके की चोट पर आश्रम का नाम लिखा रहता था ना स्टॉल पे खत्म कर दिया मैंने। सतलोक आश्रम खत्म कर दी। आंखों के सामने की बात है। आप देखिए 2023 का वीडियो देखिए। फिर 2000 24 का वीडियो देखिए, 2025 का देखिए और अब देखिए 2026 में क्या होता है वही हस्तशिल्प उद्योग मेला फिर लगेगा। खैर [गला साफ़ करने की आवाज़] तो यह बात सामने आई कि भाई इस बिहाफ पे आप एक खेद प्रकट कर दीजिए

00:10:32:24 कि आपने जो मामला बिना पुलिस के किया जो कार्यवाही उस बात का आपको खेद है और आगे से इसकी पुनरावृत्ति नहीं होगी। तो वैसे हमारा यह भी मन नहीं था लिखने का क्योंकि हम तो अपनी जगह पे सत्य थे। तो हमने अपने जो साथी थे और जो पुलिस वाले थे कुछ सम्मानित गण और भी थे उन लोगों के कहने पर ऐसा कहने पर कि इतने भर से ये मामला जो है रफादफा हो जाएगा। तो हमने खेद प्रकट किया कि भाई हम जो पुलिस के बिना चले गए थे विरोध करने उस बात का हमें खेद है और आगे से इस कथ की पुनरावृति नहीं होगी। उसमें हमने यह नहीं लिखा कि हम रामपाल का विरोध नहीं करेंगे। तो यह वह पर्ची है जो हमने जो खेद प्रकट किया है कि रामपाल के उस पर जाकर के जो हमने किया था उस बात का मुझे खेद है। माफी भी नहीं मांगी। खेद है और इसकी पुनरावृत्ति नहीं होगी। पुनरावृत्ति मतलब अब पुलिस के बिना नहीं जाएंगे। बैंड तो तुम्हारा बजाते रहेंगे पर पुलिस के बिना नहीं जाएंगे और बजाया भी। पुलिस के साथ जाकर के बजाया है। आप लोग जो लोग अपडेटेड है उनको पता होगा पुलिस के साथ में खड़े होकर के डंके की चोट पर और खड़े होकर के और बैंड बजाया है और आगे भी बजाएंगे।

00:11:47:27 तो खैर अब जो मूल विषय है उसकी ओर थोड़ा सा आता हूं। जब यह सब हुआ और हमने पर्ची दे दी। उसके बाद इन लोगों को लगा होगा शायद कि अब शिवश नारायण द्विवेदी कुछ नहीं करेगा। तो यह मेरे ही निवास क्षेत्र में बहुत नजदीक में आकर के इनकी कोई महिला जो है और इस गैंग की महिला और मतलब आसपास के लोगों को ही बल्कि ऐसे लोगों को जो हिंदुत्ववादी दल से बजरंग दल से ऐसे लोग जो हिंदू जो मतलब बहुत ज्यादा विश्वास रखते हैं अपने धर्म में और कहीं ना कहीं यदि कोई व्यक्ति आज के टाइम में बिल्कुल बिल्कुल शुरुआती स्तर पर जब वो जुड़ता है इस प्रकार के किसी संगठन से जिसमें कि धर्म की रक्षा की बात हो रही है तो उसमें उसकी जो पहली भावना होती है वो यही होती है कि उसको धर्म की रक्षा करनी है। तो ऐसे लोगों को जिनके अंदर कहीं ना कहीं कुछ मालूम है धर्म के बारे में नहीं मालूम है वो बातें सब अलग हैं। परंतु यह भावना है कि भाई हमारे हनुमान जी को कोई बुरा ना कहे। हमारे राम को कोई बुरा ना कहे। इतनी जो भावना रखते हैं और मैं अपने धर्म के लिए कुछ योगदान करना चाहता हूं। तो ऐसी भावना रखने वालों को वो

00:13:03:01 महिला जो है उसको पता नहीं था कि किस प्रकार के लोग हैं। तो ऐसी भावना रखने वाले वालों को वो महिला जो है राशन अपना लेने आई थी और रामपाल का ज्ञान चिपका रही थी और हमको जब सूचना मिली तो हमने कहा कि भाई हम तो विरोध करेंगे। हमने जाकर विरोध किया और जब विरोध किया तो मुझे लगता है वह प्लान था पूरा पहले से ही कि अगर मैं यहां पर ऐसा करूंगी तो शिवश नारायण द्विवेदी आकर के करेंगे यदि उस दिन वो अभी सबक नहीं मिला उनको तो अब सबक मिल जाएगा हम जो है फंसाने का प्रयास करेंगे और वही किया उस महिला ने हमने जाकर के पूछा ये किताबें कहां छपती है इसमें क्या-क्या तुमने लिखा है और तुम इसको बांट रही हो तुम इसका प्रचार कर रही हो तो वो जो भी हुआ वो आप लोगों ने देखा होगा और हमारे चैनल पर पढ़ा भी है काफी कुछ। खैर [खांसने की आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़] जब यह सब हो रहा था वहां पर पूरा मोहल्ला एकत्रित हो चुका था। उसमें कई मातृशक्तियां भी थी, पुरुष भी थे। सब उसके साक्षी हैं। सबके सामने उस महिला ने हमको धमकी दी कि आप पुलिस को अगर बुलाएंगे तो मैं भी कह दूंगी कि आपने मुझसे छेड़खानी की है। सीधे-सीधे उस महिला ने वहां पर सबके बीच में कहा वीडियो में

00:14:18:02 भी रिकॉर्ड है। खैर, यह सब होने के बाद पुलिस वहां पर आ नहीं पाई। उससे पहले ही यह हो गया कि वो अपने घर चली गई क्योंकि उसके हाथ में किताब थी नहीं तो हमने भी कुछ नहीं कहा। वह खुद कह रही थी कि हम प्रचार करते हैं। प्रचार करते हैं तो फिर हम कानूनी कारवाई करेंगे। फिर वह बोली कि हम नहीं बांट रहे हैं। पहले बोली थी कि हम बांट रहे हैं। क्या कर लोगे? और फिर जब मामला गरम हो गया तो फिर बोल रही है कि नहीं बांट रहे हैं। तो नहीं बांट रहे तो कोई बात नहीं घर जाओ अपने। खैर अब इसके बाद उस महिला ने और वो कोई सामर डियर जो यहां का रहा होगा लखनऊ का इन लोगों ने मिलकर के सोचा कि अब जो है छेड़खानी के मुकदमे में फंसाया जाए। शिवश नारायण द्विवेदी को और उसके साथ देने वाले लोगों यहां से कहानी शुरू होती है इस निर्णय यह जो आज आया है आज जो निर्णय आया है इसमें रामपाल के उस गैंग की पराजय हुई है जो हमको छेड़खानी के मुकदमे में फंसाने का प्रयास कर रहा था पिछले दो साल से दो साल से लगभग शायद 2024 का अंत वो जो दिसंबर वाला समय हैं। उसी के आसपास की वो घटना है। खैर

00:15:33:27 अब क्या होता है कि वह महिला तहरीर देती है थाने में तो वो क्या शिकायत करती है? पहले मैं वो बता देता हूं। क्या शिकायत करती है। [खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] अच्छा इस ये जो मैं आपके समक्ष पढ़ने जा रहा हूं।

00:16:22:19 हम यह जो मैं आपके समक्ष इस समय पढ़ने जा रहा हूं, यह वो एप्लीकेशन है जो एप्लीकेशन कोर्ट में दी गई है। पहले एप्लीकेशन आईजीआरएस में दी गई। आईजीआरएस जो लोग उत्तर प्रदेश के नहीं है उनको मैं बता दूं आईजीआरएस एक गवर्नमेंट का पोर्टल है कि अगर आपको किसी के विरोध में अगर ऑनलाइन शिकायत करनी है। मुझे लगता है हर स्टेट में होगा किसी ना किसी नाम से। तो यहां पर जो है यूपी गवर्नमेंट का आईजीआरएस वाला है और अगर आपको किसी के विरुद्ध शिकायत करनी है मुकदमा पंजीकृत कराना है तो आप ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं सीधे वो पुलिस स्टेशन में जाएगा संबंधित और फिर वहां से पुलिस आपको संपर्क करेगी कि आपने आपकी क्या शिकायत है तो आईजीआरएस सबसे पहले हमारे विरुद्ध की गई कि भाई इन्होंने छेड़खानी का प्रयास किया और अ उल्टा सीधा उसमें छेड़खानी मतलब मतलब हमें उल्टा सीधा कहा और ऐसे ये वो नीच ये सब जातिवादी वाले शब्द कहे। तो यह शिकायत कर दी गई। अब फिर पुलिस ने फिर उस पर संज्ञान लिया और फिर बातें हमने वीडियो दिखाया पुलिस को तो पुलिस ने निष्पक्ष जांच करते हुए और एक दो जो गवाह हैं वो भी लिए गए मोहल्ले से ही जहां पर ये

00:17:37:22 बात हुई थी जहां का यह दृश्य है तो पुलिस ने इस निष्पक्ष जांच करते हुए देखा और हमारे मतलब हमारे से भी जानकारी ली और अंतत गतवा पुलिस ने एक निष्पक्ष रिपोर्ट लगाई कि भाई यह जो शिकायत की गई है यह इन्होंने इस इस तरीके से पेशबंदी की शिकायत है। पेशबंदी का मतलब होता है कि किसी ने आपके ऊपर कोई मुकदमा कर रखा है या कोई आपके विरोध में कानूनी कारवाई कर रहा है। इसलिए आप कोई एक दूसरा मुकदमा उसके ऊपर लगाने का प्रयास कर रहे हो जिससे कि वह आपके विरोध में जो कानूनी कारवाई कर रहा है उसमें वह दब जाए। इसको पेशबंदी कहा जाता है। कुछ ऐसा ही है बिल्कुल एग्जैक्ट में टर्म नहीं बता पाऊंगा। मगर कुछ ऐसा ही है कि आप पर किसी ने मुकदमा किया तो आपने भी उसके ऊपर कोई मुकदमा कर दिया जिससे कि वो ठंडा पड़े तो तो पुलिस ने बताया कि इनके बीच में धार्मिक मान्यताओं को लेकर के विवाद है और उस विवाद के चलते यह भी कार्यही कर रहे हैं। तो उसी में इनके ऊपर दबाव बनाने के निमित्त ये झूठा झूठी इन्होंने दी है और इस संबंध में हमने जांच की। अमुक अमुक जो वहां के स्थानीय निवासी हैं उनसे भी पता किया। तो पुलिस से मात खाने के बाद यह गैंग जाता है।

00:18:53:10 अच्छा एक चीज़ और देखिए गैंग के काम करने का तरीका देखिए कि पहले इसने जो सबसे पहले जो आरोप लगाया इस महिला ने वो आरोप लगाया था हमारे ऊपर और हमारे साथ में एक दो लोग और थे जो अह हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता थे उनके ऊपर और उनमें से एक तो ऐसा व्यक्ति था जिसको यह स्वयं भैया भैया बोल रही थी जिसको भैया भैया बोल रही है उसके ऊपर भी झूठा मुकदमा लिखवा रही और वह भी इस प्रकार का। यह है इन लोगों का स्तर। यह लोग कहते हैं कि हमारे रामपाल जी यह सिखा रहे हैं। रामपाल जी भगवान है। रामपाल जी ने लोगों का गुटखा सिखा गुटखा छुड़वा दिया या मांस खाना छुड़वा दिया। अच्छी बात है। नशा छुड़वा दिया। मगर मांस और नशा ना खाने का नशा ना करने का और मांस ना खाने का पर्यावसान तो इसमें है ना कि व्यक्ति सत्यवादी बने। सच के साथ लड़े। यह क्या तुम लोग हर बात बात में जो जहां देखो वहां जो है जो गली कूचे की चीजें नहीं होती कंजड़पन वाली बातें कि इसने मुझे जो है जातिवादी जाति सूचक शब्द कहे बस एक ही झंडा है कभी यह नहीं कहोगे कि इसने हमारे रामपाल की बातों को गलत कैसे कहा मैं चैलेंज देता हूं मानहानि

00:20:08:19 का दावा करता हूं इसने मेरी चीजों को गलत कैसे कहा मैं आके इसको सिद्ध करूंगा वेदों से ना कभी ये शिकायत लेके नहीं जाओगे हमेशा यही शिकायत होगी तो भाई जाति सूचक शब्द कह दिए जाति सूचक उसमें भी जो आला दर्जे के लोग हैं वह इन्वॉल्व नहीं होंगे। यही सब तीन टप्पर बटोर लिए जाते हैं सड़क से। इसी प्रकार के तीन टप्पर बटोर करके उनको आगे कर दिया जाता है। यही स्ट्रेटजी है। सीधे-सीधे वो मेन आदमी तो इन्वॉल्व होगा ही नहीं। खैर तो पुलिस से मार खाने के बाद आईजीआरएस में फिर इन्होंने 1563 का प्रयास किया। अच्छा मैं एक बात बता दूं। मैंने कहा ना मेरे पास इतनी सामग्री आई है रामपाल के विरोध में कि मैं अगर इस जो लाइव में आज आपसे मैं बात कर रहा हूं इस प्रकार की बहुत सारी लाइव कर सकता था और अगर मुझे आवश्यकता लगी तो करूंगा भी परंतु मेरा फोकस इस बात पर नहीं है कि मुझे YouTube पर जो है बैठकर केवल आप आप लोगों के लिए कंटेंट प्रोवाइड कराना है। क्यों? मेरे ऊपर इन्होंने कश्मीर से नोटिस भेजा कि तुमने रामपाल को यह कह दिया है कि रामपाल के अड्डों में व्यभचार होता है। व्यभचार का अर्थ नहीं पता। फिर मैंने एक वीडियो में व्यभचार का अर्थ बताया था। मुझे बोर से इन लोगों ने व्यभचार शब्द का

00:21:23:20 उपयोग करने कि रामपाल के अड्डे में व्यभचार होता है। ने कह दिया तो व्यभचार का अर्थ ये लोग हैं तो वही सावर डियर एक व्यक्ति होता है वो हेलमेट वाला मैंने बताया था मारियो जिसने खेला हो वीडियो गेम कभी तो मारियो में जब आप बहुत आगे की स्टेजेस पर पहुंच जाते थे तो फिर आपको जो सामान्य बाधाएं आती थी वह ना आ कर के थोड़ी खतरनाक बाधाएं आने लगती थी स्टेज बढ़ लेवल बढ़ता जाता है ना उसका तो एक समय ऐसा आता था वह जो एक खटमल के जैसा एक कीड़ा जो बड़ा हो जानवर होता था छोटा सा उसको हम लोग जब हम बच्चे थे तो हम लोग कहते थे उसे हेलमेट वो मरता नहीं था अगर उसकी आपने गर्दन पर मार दिया या तो उससे बच के निकलो और या फिर उसकी गर्दन पर मार दो तो वो कछुए जैसा होता था तो गर्दन उसकी अंदर घुस गई है अब वह अंधा हो गया है यह लोग कहते हैं ना अंधा गधा अंधा गधा कमेंट में बस इनको रटी रटाई चीजें इनकी एक लिस्ट होगी कमेंट्स की और वो कमेंट्स की एक लिस्ट में से इनको कॉपी पेस्ट करना होता है। उसके अलावा कुछ भी बात करोगे भाग जाएंगे। खैर तो वो जो जब उसकी यह टूट जाता है ना बुद्धि का

00:22:38:24 निवास स्थान तो अंधा हो जाता है और वह दो खंभों के बीच में एक दूसरे से टकराता रहता है। तो मारियो जब उससे बच के निकल भी जाता था और कभी आप वापस भी आओगे ना उधर ही मारियो को लेकर के अपने खिलाड़ी को लेकर के तो वो जो हेलमेट है जो टकरा रहा था दो खंभों के बीच में वो टकराता ही मिलेगा मतलब वहां पर उसका यह प्रदर्शित किया गया है उस हेलमेट का कि वो अनंत काल तक टकराएगा इन दोनों खंभों के बीच में अनंत काल तक जब भी आप वहां जाओगे तब वो टकराता रहेगा समझ रहे हैं तो कुछ वैसा ही हाल इन लोगों का है मोटी ठस बुद्धि वाला तो अह इन लोगों ने पहले वहां प्रयास किया आईजीआरएस में जब मात खा गए पुलिस स्टेशन से उसके बाद ये लोग गए कोर्ट यहां से शुरू होती है यहां पर अब और निकट आ गए। अब जब ये लोग कोर्ट में गए तो इन्होंने क्या किया? कोर्ट में जाने के बाद इन्होंने जितने लोगों ने हमारे पक्ष में गवाही दी थी उनको भी मुकदमे में शामिल कर दिया। मतलब इनकी स्टेजेस कैसे बदलती है। आप देखिए काम करने का तरीका देखिए। पहले लगाते हैं मेरे साथ मेरे ऊपर।

00:23:55:01 वो मामला खत्म होता है तो फिर लगाते हैं मेरे और मेरा साथ देने वालों के ऊपर। वो जो हिंदुत्ववादी लोग थे। फिर वह मामला खत्म होता है तो फिर लगाते हैं मेरे और मेरे साथ देने वालों के साथ-साथ उन सामान्य नागरिकों के ऊपर भी ब्लेम लगाते हैं जिन्होंने हमारे पक्ष में गवाही दी थी। यद्यपि वो गवाही निष्पक्ष थी। उन्होंने सत्य बोला था। हां। अच्छा। उसके बाद एक बार कोर्ट से भी इनको भगा दिया जाता है। जब एफआईआर के लिए ट्राई करते हैं। तो जब कोर्ट से इनको भगाया जाता है। यह सारी चीजें मेरे पास आई हैं। तो मैं जैसे मैंने बताया ना कश्मीर से मेरे पास नोटिस आ रहा है। बोर से साइबर सेल में मेरे खिलाफ वो हो रही है कि इन्होंने व्यभचार बोल दिया। इतने बड़े वाले हेलमेट हैं ये लोग कि इनको बस यह लगता है व्यभचार का अर्थ एक ही होता है जो रामपाल और बबीता जैसी कहानियां आपको सुनाई देती हैं जो यह वाली चीजें हैं बस इनको वही लगता है कि व्यभचार का अर्थ बस यही होता है इनको और कुछ हिंदी पता ही नहीं है और इनको शिवराम आपटे की डिक्शनरी का वही पेज और उस पेज की भी वही पंक्ति मालूम है जिसमें लिखा हुआ है

00:25:10:04 कि ब्रज का अर्थ जाना होता है उसी पैराग्राफ में ब्रज के और भी अर्थ लिखे हैं। वह इनको नहीं पता है। वह इनको नहीं पता है। ना ही शिवराम आपटे की डिक्शनरी में और कुछ पता है। उसमें व्यभचार का अर्थ भी है। मगर नहीं हम तो सांभर डियर हैं। भागते भागते शेर जब शिकार करने आता है तो पीछे देखते हैं। वही हाल इनका है। शेर से सामना हुआ तो बेचारे पीछे देख रहे हैं। खुद ही उधर उधर जा रहे हैं। जिधर जाना खतरनाक है। और इनके यहां कोई ऐसा व्यक्ति है नहीं जो इनको ठीक से बता पाए। बेटा खामाखा तुम ज्यादा हां एक पवन दास नाम का आया था वो थोड़ा प्रबुद्ध व्यक्ति दिखा था जिसने कहा था बेटा तुम लोग जाकर के बहसबाजी मत करो उसको मालूम है कि उनके पास कुछ है नहीं पवन दास से करीब चार 40 45 मिनट बातचीत हुई थी ना आधे घंटे टूट गया खत्म हो गया कुछ बता नहीं पाए अंत में आया कि मैं तो ऊपर से कूदूंगा और जिसके भगवान में दम होगी वो तो फिर ये कहो कि मैं कूदूंगा ये प्रमाण है और कबीर भगवान है ये मत कहो वेदों में प्रमाण है। समझ रहे हैं? जब उससे बातें हुई थी तो वो अंत में इस पर आ गया था। और उसको पहले से ही मालूम था कि वो हमसे लड़ नहीं सकता है। सैद्धांतिक दृष्टि से रामपाल या रामपाल

00:26:25:20 के गैंग का कोई भी माई का लाल ऐसा नहीं है जो हमसे हमारे सामने खड़ा हो सके। क्षण भर भी यह बात पवन दास को मालूम थी और वो सही सलाह इन लोगों को दे रहा था। मत टकराओ। और कभी भी पवन दास जैसा कोई अगर इनके साथ होता तो इनको यह ना कहता कि शिवश नारायण द्विवेदी को तुम थाने का रास्ता कोर्ट का रास्ता मत दिखाओ मगर दिखा दिया सामर्थ डियर है ज्यादा नेता बनेंगे गरीबों का हक ले रहेंगे खैर मतलब खुद इतने बड़े वाले चोर हो कि नकली किताबें बेच रहे हो फर्जी संस्था खोल रखी है तमाम तरह की क्रिमिनल एक्टिविटीज में लिप्त हो और फिर भी तुम थाने खुद ही जा रहे हो बद के इससे बड़ा वाला सामर डियर और कौन होगा? इससे बड़ा वाला हेलमेट और कौन होगा? यह नमूने हैं। खुद ही जा रहे हैं कोर्ट कि मारो मारो मुझको मारो। [हंसी] अच्छा

00:27:25:22 तो फिर खैर अ फिर क्या हुआ? ये जब कोर्ट गए तो इन्होंने एक स्टेप बढ़ा दिया। इन्होंने क्या किया कि अब की बार उन लोगों का भी नाम लिखवा दिया जिन्होंने हमारे पक्ष में निष्पक्ष सत्य का साथ दिया था और हमारे निष्पक्ष वहां पर जो है गवाही दे दी थी तो फिर देखते अच्छा फिर और तो और सांभर डियर की तो हद हो गई जब इसमें जांच करने वाले पुलिस वालों का भी नाम लिखवा दिया बताइए

00:28:00:09 ठीक है तो कोर्ट में जब फाइनली पहली जो इन्होंने लास्ट एप्लीकेशन दी है पहले हम थे और हमारे साथ सबसे पहले तो आईजीआरएस जो वाली आई थी मेले वाली उसमें केवल मैं टारगेट था। दूसरी वाली जब महिला ने आरोप लगाया मुझको यह कहा वह कहा गलत कहा गलत यह सब किया और छेड़खानी का मुकदमा करने की बात कही तो इस बार मेरे साथ दो चार और हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं को लिया और तीसरी बार उन साक्षियों को ले लिया जिन्होंने निष्पक्ष गवाही दे दी और चौथी बार तो सोने पे सुहागा इन्होंने क्या किया कि हर उस पुलिस वाले का नाम लिखवा दिया जिस पुलिस वाले ने इसमें निष्पक्ष जांच की थी यह है सामर डियर। अब इसमें कितनी बड़ी बेवकूफी आप खुद ही सोचो। भाई आपने बिना किसी बात के डिपार्टमेंट को ही आरोपी बना दिया ना। तो इस प्रकार से तो आपने अपना केस कमजोर ही किया है ना। ये बेवकूफ लोग हैं। अगर मैं इनके यहां होता तो कभी इनको सलाह ना देता कि भैया तुम शिवांश नारायण द्विवेदी के खिलाफ अगर कुछ करने जा रहे हो तो जो है उसके साथसाथ इन लोगों को मत लो। कम से कम पुलिस डिपार्टमेंट को तो मत लो। अपने विरोध में खुद ही अपने विरोधियों को मजबूत बना

00:29:15:15 रहे हो तुम। इस प्रकार से ऐसे बेवकूफ सामर्थ डिियर है। इसीलिए मैं इनको सामर डियर कहता हूं। यह खुद ही अपने को नाश करने के लिए पर्याप्त है। अमित दास और यह लोग है ना जो यह सब सामर्थ डियर की श्रेणी में आते हैं। इनकी बुद्धि का विकास वहीं तक है। खुद ही अपने लिए गड्ढा खोल रहे हैं। अरे भाई जब तुम्हारा टारगेट शिवश नारायण द्विवेदी है तो तुम पुलिस डिपार्टमेंट को भी साथ में ले रहे हो। हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं को भी साथ में ले रहे हो। चलो एक दो को ले लो। मगर तुमने तो उन साक्षियों को भी नहीं छोड़ा जिन्होंने गवाही दी थी। फिर उसके बाद पुलिस वालों को नहीं छोड़ा। इससे बड़ा मूर्ख और कौन होगा जो अपने विरोध के पक्ष को इतना बड़ा बना देगा। उसमें सब इंस्पेक्टर भी हैं, चौकी इंचार्ज भी है, कांस्टेबल भी है। बताइए सबका नाम लिखा दिया और ये दो स्थितियां हो सकती हैं। या तो लखनऊ का जो सांभर डियर होगा वो चाटूकार होगा जिसने ये सलाह दी होगी ऐसा करो और वहां पर कह रहा होगा देखो हमने यह कर दिया। पूरे पुलिस डिपार्टमेंट का भी नाम लिखवा दिया है और या फिर इनके यहां जो शीर्ष पर बैठा हुआ व्यक्ति है वही होगा सावर डियर वो तो जाहिर सी बात है कितनी बुद्धि है आप लोगों ने देखा होगा कितनी तर्क शक्ति है देखा होगा

00:30:31:10 तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] जो इन्होंने फाइनली जो एप्लीकेशन दी है ना जिसमें हमारे साथ-साथ हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ साक्षियों के साथ-साथ और पुलिस वालों का भी नाम है। यह वह एप्लीकेशन है जो मैं अभी आपको पढ़ के सुना रहा हूं। तो इसमें इस एप्लीकेशन को प्रस्तुत किया गया है इस निर्णय में जो हमारे पक्ष में आया है निर्णय क्या आया है कि ये लोग हमारे विरोध में एफआईआर कराना चाहते थे। एफआईआर नहीं हो रही है। मना कर दिया कोर्ट ने। तो इन्होंने जो है जो

00:31:11:20 अपर जिला एवं सत्र न्याय न्यायालय है जो वहां पर अपील की कि भैया हमारा हमारी जो है एफआईआर क्यों नहीं दर्ज हो रही है इनके विरोध में? तो इनको जो है फटकार लगाई गई है इस निर्णय में। फटकार पूरे रामपाल गैंग को। यह निर्णय है। तो यह एक बड़ी जीत है। बहुत दिनों से हमारे विरोध में इस तरह की कारवाई यह गैंग करना चाह रहा था और न्यायालय ने एक निष्पक्ष दृष्टिकोण रखते हुए एक न्यायपूर्ण आदेश दिया जिसमें कहा नहीं और उसमें उसने क्या-क्या चीजें मानी है, क्या-क्या चीजें इस निर्णय में दी गई है, वह सब मैं आपको सुनाऊंगा तो आपको बहुत अच्छा सुनने में लगेगा। तो [गला साफ़ करने की आवाज़]

00:31:57:22 सबसे पहले इन्होंने क्या कहा है कोर्ट से वह मैं आपको बता देता हूं। तो पत्रावली के अवलोकन से मैं यह जो निर्णय है उसके बीच में से वो हिस्सा पढ़ रहा हूं जो आरोप लगाया गया है वो प्रस्तुत किया है। तो इन्होंने क्या एप्लीकेशन दी है? पत्रावली के अवलोकन से यह ज्ञात होता है कि निगरानी द्वारा मतलब निगरानी करता मतलब जो यह कह रहा है कि भाई जो है हम एफआईआर कराना चाहते हैं पर निचली अदालतों ने हमारे एफआईआर कराने के प्रार्थना पत्र को ठुकरा दिया है। तो उसने यह उसने यह कथन किया है कि प्रार्थनी उत्तर प्रदेश राज्य की बई जाति के व्यक्ति हैं। अच्छा सबसे पहली बात यहां यह अपने आप को बढ़ई जाति की कह रही है। जबकि ये लोग अपने किताब के फ्रंट पेज पर लिखते हैं कि हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा और सब लोग दास हैं। तो ये बई जो जाति आती है ये आती है जहां पे वर्ण व्यवस्था है। जहां पे ये सिस्टम लागू होता है। तो फिर अपने आप को बई जाति क्यों कह रहे हो? तुम्हारे लिए तो धार्मिक अंतर नहीं है किसी से तो जातिगत अंतर कैसे आ गया? झूठे लोग हो ना तुम? झूठे लोग

00:33:13:18 मांस छुड़वाओगे, शराब छुड़वाओगे, नशा छुड़वाओगे, खूब ढोल पीटोगे। हालांकि तुम्हारे यहां के लोग कबाड़ खाने बैठे हुए सब नशे पत्ती में ही दिखते हैं। बहुत सारी हमारी लाइव में आए हैं। शक्ल से ही दिख रहा है कितने बड़े नशेड़ी हैं। खैर अह यह सब करने का दावा तो करते हो कि हमने नशा छुड़वा दिया, मांसाहार छुड़वा दिया। पर कभी भी यह सब करने का दावा करोगे पर इन सब का पर्यावसान इसमें है कि व्यक्ति का चरित्र अच्छा हो जाए ना चरित्र तो झूठा है व्यभचार है चरित्र में तो व्यभचार का अर्थ केवल वही नहीं है वो रामपाल बबिता नाम से जो कहानियां फेमस है वो नहीं है केवल व्यभचार का अर्थ यह भी है कि ऐसा काम करना जो गलत है और झूठ बोलना गलत है जब तुम अपने आप को

00:34:10:07 केवल दास मान रहे हो कबीर का या भक्त मान रहे हो कबीर का और तुमने कह दिया कि हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा तो बढ़ जाति न्यारी कहां से हो गई क्योंकि यहां पर वो लेना है ना एससी एसटी वाला हां ये तो चरित्र है तुम लोगों का व्यभचार से युक्त व्यभचार मतलब असत के समर्थन में जब आपका आचरण होता है तो वह व्यभचार कहा जाता है वह असत कुछ भी हो सकता है। ठीक है? तो झूठ का सहारा लेना भी वैभचार है। तो भैया बड़े जाति के व्यक्ति हैं। यह उत्तर प्रदेश लोक सेवा अनुसूचित जातियों में अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण अधिनियम 1994 की अनुसूची के एक के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है और वर्तमान समय में उपरोक्त पते की वासी हैं। प्रार्थनी दिनांक 10125 को अपना राशन लेने अपने पति के साथ पकड़ी खेड़ा मासिक राशन लेने राशन की दुकान लाल बिहारी

00:35:23:13 लाल बिहारी कौन है? वरुण प्रकाश उनका मोबाइल नंबर और यहां यहां पर गई थी दोपहर को। वहीं हमारे गुरु भाई छेदी लाल दास व गुरु बहन अनीता दासी जो कि हमसे मिलने हमारे घर पर ही आ रहे थे। जिन्हें मोबाइल पर बात होने पर राशन की दुकान पर ही बुला लिया था। राशन की दुकान के बगल में बिस्किट चिप्स वगैरह की गुमटी जिसके मालिक श्री शिव कुमार मिश्रा जी हैं जो कि प्रार्थनी के पूर्व से जानने वाले हैं। से ऐसे ही बात करने गई और धर्म धार्मिक पुस्तकों पर चर्चा होने लगी। देखो जब हमने इनके विरोध में इनका जो यहां पर अड्डा है ना सरोजनी नगर में है लखनऊ में जब हमने इनके विरोध में एप्लीकेशन दी थी थाने में सरोजनी नगर में तो इन लोगों ने कहा था हम हम जो है किताबेंताबे जानते ही नहीं है और वहां पर इन लोगों ने यह कहा कि क्योंकि हमारी एक बहन है जो इन पर मुकदमा करना चाहती है इसलिए यह पेशबंदी में हम पर मुकदमा कर रहे हैं लगा रहे हैं क्योंकि मेले में इन्होंने हमारे स्टॉल पर हमला

00:36:38:21 किया था इसलिए ये हम पर जो है मुकदमा लगा रहे हैं। समझ रहे हैं? ये वो अपने बयान दे रहे हैं। और वो स्टॉल किसका था? किताबों का। जबकि किताबों से इनका कोई संबंध नहीं है। ये है सामर डियर। ये है मूर्खता की पराकाष्ठा। खुद ही अपने बयानों में स्वीकार कर रहे हैं। हमारा बुक स्टॉल, हमारी गुरु बहन, वह गुरु बहन जो यहां पर मान रही है कि हम धर्म धर्म और धार्मिक चर्चा करते हैं। धार्मिक किताबों की चर्चा करते हैं। उनका प्रचार प्रसार करते हैं। और फिर एक जगह अपने आप को अलग कर। तुम खुद ही लिखित में बयान दे रहे हो। भैया थोड़ा समय का अभाव है। बहुत सारे मोर्चे हैं। वरना अगर सिंगल पॉइंट एजेंडा अगर केवल एक यही हो जाए ना रामपाल तो बहुत देर नहीं लगेगी। परकच्चे उड़ने में बस थोड़ा क्या है ना दायित्व बहुत सारे हैं और कुछ तुम्हारा

00:37:31:13 होगा कि भैया थोड़ा थोड़ा और वो कहते हैं ना और प्यास बढ़ाई जाए जो जेलधाम की प्यास है उसको और बढ़ाया जाए लिमका का ऐड ऐड देखा है लिमका का थोड़ी और प्यास बढ़ाओ तो वो जो होता है कि जितना ज्यादा प्यास होगी तुम्हारी जेलधाम की जेलधाम ही तो जाना है तुमको अंत में तो खैर थोड़ी उस प्यास को बढ़ाया जाए तो प्यास तो ऐसे ही बढ़ेगी जब बाहर और ज्यादा दिन बिता लोगे थोड़े से और खैर तो इसने बोला कि भाई [खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] देखो धार्मिक पुस्तकों पर चर्चा होने लगी। अंकल जी ने बताया कि हमने भी गुरु कर रखे हैं और अपने गुरु जी से संबंधित पुस्तकें दिखाई। जो कि सदगुरु देव तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जो कि मूल हिंदू सनातनी कबीर पंथिक संत हैं। अब बताइए पहले तो कह रहे हैं हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई कोई धर्म नहीं है न्यारा फिर कह रहे हैं मूल हिंदू सनातनी अरे पढ़ लो थोड़ा सा सनातन किसको कहते हैं अनपढ़ गवार यह भी मैं तुम्हें नहीं कह रहा हूं तुम्हारी भगवत तुम्हारी जो भगवत गीता पर तुमने जो वो किया ना कचरा भगवत गीता

00:38:46:21 के नाम पर गरिमा गीता की किताब उसमें तुम्हें कहा गया अनपढ़ और गवार उसके आधार पर कह रहा हूं मैं नहीं कह रहा हूं तुम्हारे बाबा जी ने कहा है कि उसको मानने वाले जो अनुयाई हैं उसके बाबा जी के वो अनपढ़ और गवार गवार है तो अनपढ़ और गवार लोग हो थोड़ा सा पढ़ाई कर लो सनातन क्या है जान लो जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसका नाम सनातन है और तुम कह रहे हो हम मूल सनातनी है यानी कि बदलता नहीं है और जिसके साथ तुम उसको एक कर रहे हो तो बदल रहा है तुम खुद बदल रहे हो पता नहीं क्या-क्या बदलते हो कभी भविता बदल जाती है कभी धाम बदल जाते हैं कभी नाम बदल जाते हैं कभी ट्रस्ट बदल जाती है कभी गुरु बदल जाता है। कभी भाग जाते हो ताला बंद करके।

00:39:33:22 [गला साफ़ करने की आवाज़] चलिए फिर क्या कहती है आगे प्रार्थना में प्रार्थनी कि इनके व्यक्ति ने जो शिव कुमार मिश्रा जी हैं उनको इन्होंने अपनी धार्मिक पुस्तकें दिखाई। कौन सी धार्मिक पुस्तकें? रामपाल की धार्मिक पुस्तकें। वही कचरा पट्टी हम कौन-कौन सी दिखाई हम प्रार्थनी जो कि सदगुरु देव तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जेलधाम निवासी इसमें नहीं लिखा है जेलधाम निवासी जो कि मूल हिंदू सनातनी कबीर पंथिक संत है की दीक्षित शिष्या है एवं निष्ठावान अनुयाई है और संत जी के प्रवचनों के संकलन ज्ञान गंगा रचित जीने की राह

00:40:29:10 इत्यादि धार्मिक पुस्तकों धार्मिक ग्रंथों पर श्रद्धा विश्वास एवं अपने धर्म शास्त्र के रूप में पवित्रतम मानती है और अपने सदगुरुदेव जी के को भगवान स्वरूप मानती है ने अपने गुरुदेव ज्ञान आधार पर कुछ ज्ञान चर्चा की और मौखिक रूप से न्योता दिया कि हर महीने के प्रथम संडे को हमारे गुरु जी का सत्संग होता है। आप वहां आइएगा। इसी समय ना जाने कहां से रामू द्विवेदी आ गए और मुझे व मेरी आस्था की धार्मिक पुस्तकों के बारे में अपमानजनक प्रलाप करने लगे और फोन करके अपने अन्य साथियों सहित अमुक अमुक को भी बुला लिया। इसमें एक दो नाम और हैं। और फिर आगे आता है शेर का बच्चा एक ही अच्छा। शिवश नारायण द्विवेदी को भी बुलवा लिया। यह सब लोग कार, स्कूटी वगैरह से आ गए और मुझे खुले चौराहे पर घेर कर मेरी अस्मिता को भंग करने का प्रयास किया। यह देखो उस वीडियो में साफ दिख रहा है कि सचिन भैया कहां खड़े हैं और यह उनको सचिन भैया कह रही है और इस यहां पर लिखा है कि सचिन कुमार सिंह ने अन्य लोगों के साथ मिलकर मेरी अस्मिता को भंग करने का प्रयास किया।

00:41:45:22 है नीचता की पराकाष्ठा। एक तरफ भाई कह रही हो एक तरफ उस पर जो है ऐसे कृत होते हैं सच्चे भगवान के भक्त के हां इन कृत्यों को कहते हैं नीचता खैर तो अच्छा फिर आगे क्या झूठा आरोप अच्छा वहां पर जाति शब्द का कोई उपयोग ही नहीं पर इसमें इन्होंने जाति सूचक भी आरोप लगा दिया। क्या लगाया? मेरी अस्मिता को भंग करने का प्रयास किया। और प्रार्थनी के पति भगत जिन्होंने आते ही हमें प्रार्थनी छेदी लाल गौतम जी व भगतमती अनीता दासी नीच सालों को जूते से मारेंगे। इन्हें यहां से भगाएंगे। यह सब अपने मन से इन्होंने मनगढ़ंत डाल लिया है क्योंकि हम कभी भी उस बात के आधार पर लड़ते ही नहीं है जिस पर हमारा पक्ष कच्चा हो। हमारे पास सनातन सिद्धांत है भाई। सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म हमें ये सब जरूरत नहीं है। सब करने की यह जो पोस्टरबाजी है रामपाल के लोग बनाया करते हैं डेली। क्या हम

00:43:00:26 लोग बना नहीं सकते? टाइम नहीं है भाई। तुम पे दिन भर यही टाइम है। पोस्टर बनाओ नए-नए तरीके के रोज। जिस दिन हिंदू अपनी पर आ गए इतने पोस्टर बनेंगे और लगेंगे जगह जगह मुंह छुपाने की जगह नहीं मिलेगी समझे जब तुम्हारे लोगों के पास समय है सिंगल पॉइंट एजेंडा है कि अपने तथाकथित नकली गुरु को काल नेमी को असली गुरु के रूप में ख्यापित करवाना है। तो झूठ को इतनी बार बोलो, इतनी बार बोलो कि ऐसा लगने लगे कि यही सत्य है। लोग सच को ढूंढना ही बंद कर दें। उसी को एक्सेप्ट कर ले सच के रूप में। तो देखिए इनका कृत कितना नीचता की पराकाष्ठा को पार कर रहा है। जिसको यह खुद भाई बोल रहे हैं जो मातृशक्ति किसी को भाई बोल रही है और उसी को बाद में कह रही है मेरी अस्मिता भंग करने का प्रयास किया। और जबकि वीडियो आप देखेंगे तो यह खुद आकर के ज्यादा निकट आकर के जब बात करने लगी तो मैं कह रहा हूं कि दूर से बात करो। दूर से जो व्यक्ति कह रहा है दूर से बात करो उसके लिए कह रही है कि मेरी अस्मिता को भंग करने का प्रयास किया इन लोगों ने मिलकर के। खैर हमारे पास गुरु जी की कोई भी धार्मिक पुस्तक नहीं थी।

00:44:16:21 और उस वीडियो में सबसे पहले कह रहे हैं कि हां हम प्रचार करते हैं। हम प्रचार कर रहे थे। इन्होंने गुरुजी संबंधित धार्मिक पुस्तकों के बारे में अपमानजनक अपमानजनक शब्दों का संबोधन किया। वो तो करते हैं करते रहेंगे। क्योंकि उसमें बहुत सारा कचरा लिखा है तुमने। हमारी दुर्गा माता का अपमान किया है तुमने उन किताबों में हनुमान जी की पूछ की तुलना घरे के गुप्तांग से कर रहे हो दुर्गा माता के मन दुर्गा माता में जो है तुम वो भावनाएं डाल रहे हो जो तुम्हारे रामपाल और बबिता में आती है और शायद तुम में भी आती है वो भावनाएं तुम हमारी दुर्गा मां के लिए बोल रहे हो है ना जिस तरह की बिल्कुल जैसा आरोप तुम लगा रहे हो ये सब भावनाएं कहां पर हैं एग्ज़िस्ट कहां पर करती सब भावनाएं तुम में, तुम्हारे गुरु में और भविता में इत्यादि लोगों में एकिस्ट करती है सब भावनाएं। उसको तुम हमारी दुर्गा माता के लिए बोल रहे हो ऐसी भावनाओं को। तो यह सब चीजें तुम उसमें कर रहे हो ना तो उसके लिए ही उसके लिए अपमानजनक शब्द बोले जाएंगे।

00:45:20:14 अरे भाई अपने कबीर की पूजा करो। किसने रोका है? कबीर की पूजा करो। मंदिर बनवाओ, कबीर के मूर्तियां बनवाओ। कबीर की क्या दिक्कत है? जरूरी है क्या कि हिंदू धर्म का अपमान करके ही वह काम होगा। जरूरी यह है कि यह विदेशी एजेंडा है। विदेशी ताकतें फंडिंग करती हैं कि करो ऐसा जिससे कि हिंदू धर्म का जो मौलिक स्वरूप है वो धीरे-धीरे नष्ट होता चला जाए। यह सब तो तुम लोगों के भेजे में आने वाली बातें हैं। नहीं। तुम लोग हेलमेट स्तर के व्यक्ति हो। कहां इतनी इंटेलेक्चुअल लेवल की बातें मैं कर रहा हूं तुम लोगों से। यह देखिए यहां आपको वो दृश्य दिख जाएंगे। आप किताब बांट रहे हमारा ये जुर्म है किताब बांटना लिखा है दुर्गा माता पढ़िए किताब पढ़िए सीधी बात करो एक मिनट पॉज करो किताब ये देखिए खुद शुरू में स्वीकार कर रही है कि किताब बांट रहे हैं। हां हम बांट रहे हैं। किताब बांटना जुर्म है। ये सब बातें कर रही है खुद ही। ठीक है? और बाद में यहां क्या लिख रही है कि हमने किताब नहीं बांटी। हालांकि वीडियो में भी बोलेगी हमने नहीं बांटी। तो नहीं बांटी तो झगड़ा हुआ क्यों था? क्योंकि तुमने कहा था कि बांटी है। बांटी है कहोगे तो झगड़ा होगा। खैर दिखाइए शुरू से

00:46:37:22 दूर से दूर से करो। आपने यह आपने देखा खुद निकट आ रही है और मैं कह रहा हूं दूर से बात करो क्योंकि भैया हम लोग संध्या वंदन करने वाले लोग हैं और बहुत सारी शुद्धि अशुद्धि इत्यादि विषयों का ध्यान रखना पड़ता है। तो मैं तो खुद ही दूर कर रहा हूं कि भैया दूर से बात करिए आप। खुद निकट आ रही हैं और यहां लिख रही हैं कि मेरी अस्मिता भंग करने का प्रयास किया। ऐसे कृत्यों को कहते हैं पराकाष्ठा झूठ की पराकाष्ठा

00:47:22:02 [गला साफ़ करने की आवाज़] खैर कह दूंगी कि आप कह दूंगी कि आप कह दूंगी कि मैं भी कह दूंगी कि आपने छेड़खानी करी है और कह दिया मेरी अस्मिता को भंग करने का प्रयास किया। खैर फिर क्या होता है आगे? फिर यह लिखती हैं कि हमको यह सब कहा गया। धार्मिक पुस्तकों का अपमान किया गया। हम भयभीत किसी तरह जान बचाकर भागे। यह भयभीत है। देख रहे हो ना? बुलाइए पुलिस को। मैं भी कह दूंगी कि छेड़खानी की है। और यहां क्या लिख रही है? भाई जिस व्यक्ति के पास प्रार्थना पत्र ले जा रहे हो उसको यही तो बात है साम डियर की इन लोगों को। अच्छा शायद इन लोगों को यह नहीं मालूम होगा कि हमारे पास वीडियो में क्या-क्या कंटेंट है। शायद। खैर जो भी है वैसे हमने तो तुरंत डाल दिया था वो पब्लिक कर दिया था बहुत ज्यादा देर नहीं लगी थी तो यह लोग लिख क्या रहे हैं कि हम भयभीत होकर किसी तरह जान बचाकर भागे और यहां क्या हो रहा है बुलाइए पुलिस को मैं भी कह दूंगी कि इन्होंने छेड़खानी की है देख लो और सचिन भैया सचिन भैया और फिर आरोप लगा रहे हैं कि सचिन भैया बनने का प्रयास कर रहे हैं कुछ और

00:48:41:13 तो आसानी से मैं यहां पर एक दृष्टांत अपने जीवन का छोटा सा आपको सुनाना चाहूंगा। बहुत अच्छा लगेगा। आप लोग ध्यान से सुनिएगा। एक बार किसी व्यक्ति से मुझे कुछ सामान था जो जिस जगह वह सामान था वहां से 15 कि.मी. दूर पहुंचवाना था। तो वह जो शॉपकीपर था दुकानदार उसके यहां का जो एक कर्मचारी था वह उस सामान को वहां से स्थानांतरित करने के लिए नियुक्त हुआ था। अब वो किस धर्म को मान मतलब धर्म क्या धर्म तो केवल सनातनी है। किस ईश्वर के संबंध में किस विचारधारा से प्रभावित था यह मैं नहीं कहूंगा और यह भी मैं नहीं बताऊंगा कि वह किस वर्ग से आता था। बस वह वहां का कर्मचारी था। यानी यह मान लीजिए श्रमिक वर्ग था। और अब वह व्यक्ति सुबह मुझे जहां पहुंचाना था वहां बहुत आवश्यक था कि वो समय से पहुंच जाए। दोपहर के 12:00 बजे पहुंच जाए और 15 किलोमीटर का रास्ता मैक्सिमम बहुत ज्यादा अधिक से अधिक अगर लगेगा तो 1 घंटा अगर बहुत ज्यादा ट्रैफिक रहा तो तो वो जो व्यक्ति था इनका

00:49:56:14 स्तर जो होता है इन इस प्रकार के लोगों का जो झूठ बोलते हैं जो असत्य भाषण करते हैं। तो इनका व्यक्तित्व कैसा होता है वो आज मैं आपको बताने जा रहा हूं। तो यह सुबह 10:00 बजे वहां से निकला और मुझसे बोला कि हां मैं निकल चुका हूं। अब यह इस व्यक्ति को 12:00 बज चुके हैं। मैं फोन कर रहा हूं तो पहले तो फोन नहीं उठा रहा है। उसके बाद 1:00 बज गया फिर मैं फोन कर रहा हूं तो फोन नहीं उठा रहा है। 2:00 बज गए और फिर मैंने फोन किया भाई तुम निकले कि नहीं निकले? निकल चुका हूं। बहुत ज्यादा जाम है। तो मुझे लगा कि ठीक है चल भाई देर से निकला होगा। का फोन नहीं उठाया मगर अब पहुंच फिर 4:00 बज गए 4:00 बजे भी बोल रहा है कि निकल चुका हूं बहुत ज्यादा जाम है। 15 किलोमीटर का रास्ता था केवल और सुबह 10:00 बजे का व्यक्ति निकला हुआ है। 4:00 बजे मैंने उससे कहा कि भाई तू अपनी लोकेशन भेज तू है कहां पे? बोला कि मेरा मुझे मेरे पास जो है मुझे फोन चलाना नहीं आता है। लोकेशन भेजना नहीं आता है। समझ रहे हैं? 6:00 बज गया। वो व्यक्ति रात के 9:00 बजे वहां पहुंचा। 15 किलोमीटर एक ही शहर के अंदर रात के 9:00 बजे और सुबह 10:00 बजे मुझसे बोल रहा है मैं निकल चुका हूं तो मैं समझ गया कि

00:51:11:20 निकला है अभी 7:00 बजे निकला होगा 8:00 बजे और अब पहुंचा है तो लास्ट में मुझे उसको भुगतान भी करना था तो मैं जब उससे मिला और युवा था वो लड़का तो मैंने उससे एक बात कही कि भाई यह बताओ कि तुम्हारे जीवन का लक्ष्य क्या है? उद्देश्य क्या है? भाई कोई भी भौतिकवादी भी अगर व्यक्ति है बहुत ज्यादा धार्मिक नहीं है। आध्यात्मिक उसको बिल्कुल नॉलेज नहीं है। मगर उसके अपने कुछ कुछ लक्ष्य होते हैं जीवन में और कुछ नहीं तो यह तो होता ही है कि मुझे बहुत पैसे वाला बनना है। इतना तो है ही समृद्ध बनना है। तो जो समृद्धि होती है ना उसके भी गर्भ में होता है सम्मान। बहुत बड़ी-बड़ी चीजें, बढ़िया मकान। अगर दैहिक रूप से देखें तो उस बड़े मकान की जरूरत नहीं है। उस पेंट की जरूरत नहीं है। उस कार की जरूरत नहीं है। सामान्य कार से भी काम चल सकता है। मगर जो बहुत ज्यादा

00:52:14:24 धन एकत्रित करना है तो उसके गर्भ में भी होता है कि मुझे सब लोग सम्मान दें। तो मैंने उससे पूछा कि तुम अच्छा मैंने उससे यह भी पूछा दहिक के संबंध में कि यह बताओ कि अगर तुमसे कहा जाए कि हम तुम्हें इतना सारा धन देंगे उसके लिए तुम्हें सारा जीवन यह वाला एक शारीरिक कष्ट है कि तुम्हें जो सोने के लिए जो वह मिलेगी जगह बहुत कम मिलेगी। मगर उसके बदले में तुमको इतना सारा धन मिल जाएगा। मतलब जिस जो सहज नहीं होगी तो वह बोला कि हां मैं अगर इतना धन मिलेगा तो मैं सारे जीवन वह कष्ट सह लूंगा यानी देह से ऊपर भी सम्मान हो गया कि जब इतना पैसा मिलेगा तो यहां गाड़ी होंगी वहां कुल मिलाकर के लोग मुझे सम्मान की दृष्टि से देखें यह धेय होता है बहुत ज्यादा धन एकत्रित करने भौतिक सुख की लालसा भी कम हो जाती है जब सम्मान व्यक्ति को चाहिए होता है तो मैंने कहा इसका अर्थ है कि तुम यह चाहते हो कि दुनिया दुनिया तुम्हारा सम्मान करे। पूरा संसार तुम्हारा सम्मान करे। बोला हां यह तो है। भाई कार क्यों लेना चाहते हैं? महंगी से महंगी कार क्यों लेना चाहते हैं? छोटी सी कार में भी काम चल जाएगा। अगर मौसम ज्यादा

00:53:29:25 खराब नहीं है तो दो पहिया वाहन से भी काम चल जाएगा। मगर बड़ी-बड़ी कारें क्यों लेनी है? सोना क्यों पहनना है? काम तो चल जाएगा। जो दैहिक सुख चाहिए वह कम में चल जाएगा काम। मगर जो और ज्यादा आडंबर कर रहे हैं वह किस लिए कर रहे हैं? वह कह रहे हैं कर रहे हैं शान के लिए। शान के लिए व्यक्ति बहुत मेहनत कर रहा है कि भाई लोग मुझे सैल्यूट करें। मेरे सामने सर झुकाए वर्चस्व। तो इसका अर्थ यह है कि जो व्यक्ति था वो मैंने उससे कहा इसका मतलब यह है कि तुम चाहते हो कि दुनिया तुम्हारा सम्मान करे। वो कहा हां भाई यह बात तो आपने सही कही। तो फिर मैंने कहा क्या तुम स्वयं का सम्मान करते हो? बस यही उसकी आवाज अटक गई गले में। जिस जो व्यक्ति झूठ इस प्रकार से बोल रहा है जैसे गीली मिट्टी में हल चल रहा हो। इसका मतलब उसके लिए झूठ बोलना बहुत आम बात है। इसका मतलब क्या है? उसने स्वीकार कर रखा है कि मैं बहुत बड़ा नीच टाइप का झूठा टाइप का व्यक्ति हूं। कोई भी व्यक्ति जब कोई अपराध करने जाता है ना तो सबसे पहले वह अपने आप को अपराधी

00:54:45:01 मानता है। उसके बाद वह अपराध करता है। घोषित करता है कि मैं अपराधी हूं। हां मैं पापी हूं। यह वाला पाप मैं करूंगा और स्वीकार करके फिर आगे चलता है। कोई भी व्यक्ति यानी कि हम दुनिया से तो चाहते हैं। संसार से तो चाहते हैं कि लोग हमारा सम्मान करें। पूरे संसार से सम्मान चाहते हैं। मगर खुद स्वयं अपना सम्मान नहीं करते। स्वयं अपने आप को झूठा मानते हैं। व्यभचारी मानते हैं। स्वयं अपने आप को नशेड़ी मानते हैं। जो लोग नशेबाज है उनके लिए और जो लोग बबिता वाले हैं वो लोग व्यभचारी मानते हैं स्वयं अपने आप को। स्वयं अपने आप को झूठा मानते हैं। जो लोग इस प्रकार के झूठे आरोप लगाने वाले हैं। तो मैंने उसको बताया कि अगर तुम पूरे संसार से अपने लिए

00:55:33:18 सम्मान चाहते हो ना, इज्जत चाहते हो ना तो सबसे पहले स्वयं अपनी इज्जत करना शुरू करो। दो प्रकार के झूठे लोग होते हैं। एक होते हैं जो बहुत सरलता से झूठ बोलते हैं। फटाफट फटाफट धड़ल्ले से झूठ पर झूठ झूठ पर झूठ और कम से कम जो व्यक्ति अपना सम्मान करता है वो कभी भी सरलता से झूठ नहीं बोल पाएगा। उसको दिक्कत होती है झूठ बोलने में। झूठ बोलेगा। हालांकि वो भी अपराध है वो भी पाप है। मगर इनसे थोड़ा श्रेष्ठ होता है। इतनी सरलता से फिसलती हुई जीभ से झूठ नहीं बोलता है। तो ये जो लोग हैं ये जो इस प्रकार से आरोप लगा पा रहे हैं कि मेरी अस्मिता भंग करने का प्रयास किया। यहां पर ताल ठोक रहे हैं कि भैया बुलाओ पुलिस को और उसके बाद वहां कह रहे हैं कि भैया हम लोग जान बचा के भागे। तो क्या है? इन लोगों ने सबसे पहले खुद को माना ना कि मैं झूठी हूं। मैं पापन हूं। पापी हूं। नीच कृत करने वाली हूं। तभी तो झूठ बोला। कैमरे में बोल रहे हो। बुलाओ पुलिस को। खड़े हैं। मैं भी खड़ी हूं। मैं भी कह दूंगी कि छेड़खानी की है। और फिर उसके बाद क्या क्या हो रहा है? लिख रहे हैं तो उसमें लिख रहे हैं कि मेरी अस्मिता भंग करने का प्रयास किया। हम जान

00:56:48:19 बचाकर भागे। खैर आगे क्या लगाया इसने? फिर आरोप लगाया किसी तरह जान बचाकर भाग गए। इन्होंने मेरा हमारा सार्वजनिक जाति सूचक नीच अनपढ़ चौराहे पर गालियां बेइज्जती की। अब देखिए वहां पर तो अनपढ़ शब्द का उपयोग किसी ने नहीं किया। मगर भाई तुम्हारे बाबा ने ही तुमको अनपढ़ कह रखा है और नीच हम तुम्हारे कृत्यों को कह रहे हैं जो तुम यह झूठवाद का सहारा लिया तुमने जाति के लिए नीच कहीं शब्द का उपयोग नहीं कहा किया वहां तो नीच शब्द का उपयोग किया ही नहीं जो आज भी कह रहे हैं वो तुम्हारे जाति के लिए नहीं तुम्हारे कृत्यों के लिए कुकत्यों के लिए जो तुम झूठ बोल रहे हो उसको नीच कहने का अधिकार जो है नीचता कहने का ऐसे कर्त को नीचता कहने का अधिकार हमें प्राप्त है धर्म से भी और फिलहाल आज जो लौकिक संविधान है उसके अनुसार भी नीच अनपढ़ चौराहे पर गालियां तमाम सारे झूठ लिख दिए। हमारी धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस अपमान किया।

00:58:04:26 इस घटना के बाद प्रार्थनी द्वारा श्रीमान अब यहां से देखिए पुलिस का रोल शुरू होता है। इस घटना के बाद प्रार्थनी द्वारा श्रीमान पुलिस आयुक्त जनपद लखनऊ में एक प्रार्थना पत्र दिया गया। आईजीआरएस जो दी गई थी के रूप में दर्ज होकर जांच चौकी इंचार्ज थाना आशियाना लखनऊ श्री अश्विनी कुमार मिश्रा जी को प्राप्त हुई। पुलिस चौकी से हमारे गुरु भाई जी के फलाने फलाने मोबाइल नंबर पर प्रतिपक्षी संख्या चार का फोन आया। नीतू दासी को बयान हेतु चौकी पर भेज दें। अब ये इनकी इनके और उनके बीच की कहानी है। उसमें पुलिस ने अपना बयान दिया है कि हमने क्या कहा था। उसमें एसीपी की रिपोर्ट भी दर्ज हुई बहुत अच्छा उन्होंने निष्पक्ष एक जांच की थी। खैर यह भी उसके भी बाद का मामला है जो अब आपको मैं सुना रहा हूं। एसीपी की जांच लग के क्योंकि जब इन्होंने आईजीआरएस दी तो सबसे पहली जांच की चौकी इंचार्ज ने। फिर जब ये कोर्ट गए तो तब कोर्ट ने आदेश दिया कि एसीपी जांच करें। तो पहले निष्पक्ष जांच चौकी इंचार्ज ने की। फिर एसीपी ने की। तो एसीपी ने भी उसमें लिखा कि ये लोग दबाव बना रहे थे मेरे खिल मेरे ऊपर बार-बार फोन करके कि मैं जो है झूठा मुकदमा पंजीकृत कर लूं। उन्होंने लिखा है उसमें एसीपी ने।

00:59:18:00 [गला साफ़ करने की आवाज़] खैर अब आगे चलते हैं। अ फिर क्या होता है? मैं बुलाया गया। अब ये कह रही है कि मैं एक महिला पीड़िता हूं। मेरे पास ना आकर मुझे सीधे चौकी पर बुलाया गया। मैं दिनांक 8.225 को चौकी पर बुलवाए जाने पर दोपहर में पहुंची तो चौकी पर केवल प्रतिपक्षी संख्या चार व पांच ही मौजूद थे। कोई महिला पुरुषकर्मी नहीं थी। प्रतिपक्षी संख्या पांच ने मेरे बयान लेना स्टार्ट किया और मेरे ही सामने

00:59:54:12 मेरे ही सामने प्रतिपक्षियों जिन्होंने मेरे साथ उपरोक्त घटना को अंजाम दिया था। वह फोन कर बुलवाने लगे और आमनासामना कराने का दबाव बनाने लगे। उत्पीड़ित होकर मैंने अपने भगत भाई दिनेश दास को फोन लगाया। यह दिनेश दास भी एक बहुत इंपॉर्टेंट कैरेक्टर है इस कहानी का। इसने भी अलग से मेरे ऊपर कई प्रकार के प्रयास किए हैं यहां लखनऊ स्तर पर कि कोई मुकदमा पंजीकृत हो जाए। एक तो इसने फोन किया था मुझे। तो फोन पर मैंने इनकी अड्डे के बारे में कुछ चीजें कही थी। तो उस पर जो है कहा कि इन्होंने मेरे धार्मिक जगह को ऐसा कहा वैसा कहा। बोले कि आप हमारे वह सेंटर क्यों गए थे? तो भैया तुम्हारा सेंटर तो सबके लिए खुला है ना। हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा। तो अगर कोई गया है तुम्हारे सेंटर पे तुम्हें क्या तकलीफ हो? तो मैंने बोल दिया था कि वो सेंटर है या क्या है? अमुक है। तो उसी पर वो बोल पुलिस वालों से कहने लगे इन्होंने हमारे सेंटर को ऐसा कहा भाई कहा नहीं था। पूछा था कि तुम्हारा सेंटर है या वैश्यालय है? तुम्हें क्या आपत्ति हो रही है? अगर कोई वहां जा रहा है हां वहां जाकर के कोई गुंडई करे कोई तोड़फोड़ करे ऐसा वैसा कुछ करे तो वहां सीसीटीवी फुटेज है तुम्हारे पास दिखा दो तोड़फोड़ किसने की है खैर

01:01:09:15 तो इनको वो व्यक्ति क्या करता है सबको फोन मिलाया करता है कोशिश करता है फोन पर कुछ सामग्री प्राप्त हो जाए तो हमको मुकदमे में फंसा दें। जब हम लोगों ने हाई कोर्ट में याचिका दर्ज की तो उसमें शायद एक नाम था श्री राम करके उनका नाम है और रामानंद संप्रदाय से हैं। वो याचिका वाले उसमें है उनका नाम वो भी हमारी ओर हमारे उसमें हैं। याचिकाकर्ताओं की सूची में उनका भी नाम। तो इस व्यक्ति ने क्या किया? Facebook पर उसी नाम का व्यक्ति ढूंढने लगा। अब देखिए सामर डियर की हरकत देखिए सामर डिियर जैसी जो बुद्धि है क्यों कही जाती है तो यह जो व्यक्ति है ये Facebook पर सर्च करने लगा उस नाम को और इसको कोई उस नाम का व्यक्ति मिल भी गया और इसने उसको संपर्क भी कर लिया फोन भी हो गया और ये कहा कि भैया तुम्हारे नाम से तो वहां पर हाई कोर्ट में रामपाल के विरोध में मुकदमा लगने जा रहा है। तुम ऐसा करो तुम अपना नाम वापस ले लो। ठीक है? अब वह व्यक्ति घबरा गया मेरे नाम से कौन मुकदमा कर रहा है मैं तो हूं नहीं किसी लिस्ट में जबकि उस नाम का दूसरा व्यक्ति भी हो सकता है मगर सामर डियर जैसी बुद्धि होगी तो कहां

01:02:24:19 व्यक्ति सोच पाएगा वो व्यक्ति दूसरे दिन हमारी अधिवक्ता को फोन कर रहा है कि आप मेरे नाम से मुकदमा पंजीकृत करा रही है याचिका कर रही है तो उनको ठीक किया हमारी अधिवक्ता ने रंजना अग्निहोत्री जी ने उनको हड़काया कि तुम ही एक हो क्या इस नाम की दुनिया में खैर यह व्यक्ति है दिनेश दास। इसने अनेकानेक वह जो आईजीआरएस हुई थी पहली वाली उसमें भी यही था और जो नीतू दासी को जो मोहरा बनाकर के काम किया उसमें भी षड्यंत्र करता यही व्यक्ति है। इसके बाद इसने अपनी ओर से व्यक्तिगत रूप से हम पर जो है एक प्रयास किया मुकदमा दर्ज कराने का। कौन सा कि हमने इसके जो सेंटर है उसको वैश्यालय कह दिया और उससे भी मन नहीं भरा। तो एक एक मुकदमा और कराने का प्रयास किया है कि इन्होंने जो हमारी जो ऑडियो है उसको डाल दिया है चैनल पर और ये लोग एक आरोप और लगाते हैं कि आपके चैनल पर केवल इतने समय में 80 हजार वीडियोस है। इसका मतलब आप आपने कुछ फोर 400 बीसी की है। समझ रहे हैं? इनको इससे इसमें भी इंटरेस्ट है। इनके चैनल पर 80000 वो सर्वशक्तिमान धर्म चैनल है। उस पर फॉलोवर्स ज्यादा है। तो इनको उसमें भी तकलीफ है।

01:03:41:06 तो उससे भी इन्हें दिक्कत है। उसको भी आधार बना रहे हैं। खैर कम टू द पॉइंट। अच्छा बीच में सामर डियर वाली और भी हरकतें इन्होंने की थी। हमारा जो आवाान कॉल ऑफ धर्मा नाम से जो Instagram पेज है उसको बैन कर दिया था Instagram में। वो भी केवल भारत में। कोई ऐसा सरकारी वो नहीं है कि उसको किया जाए। उसमें भी हम हमारे पास समय नहीं ना। लड़ाईयां इतनी सारी है, समय नहीं है। मोर्चा बदलता रहता है। एनर्जी तो उतनी यूज़ होती है ना। तो उसके लिए हम कुछ कर नहीं पाए। करते तो वो भी होता भी लगा हुआ लाइन अप हो रहा है। हो सकता है वो ओपन भी हो जाए। तो इन्होंने फिर एक हमें नोटिस भेजा था। उसमें हमसे कह रहे हैं कि आपकी संस्था तो बैन है। हमारी संस्था ही बैन हो गई। आन कॉल ऑफ धर्मा नाम की Instagram पेज को अगर Instagram एक प्राइवेट तंत्र ने बंद कर दिया वो भी केवल इंडिया में अनअवेलेबल कर दिया तो उससे भारत सरकार के साथ पंजीकृत एक संस्था वो बैन हो गई बंद हो गई और यह लिख रहे हैं यह है सामर डियर वाली हरकतें खैर आगे चलते हैं तो

01:04:56:16 फिर क्या हो रहा है आगे कि फोन कर बुलवा आने लगे और आमनासामना कराने का दबाव बनाने लगे। उत्पीड़ित होकर मैंने भगत भाई दिनेश दास को फोन लगाया जिन्होंने प्रतिपक्षी संख्या पांच से बात की और कहा कि यह तो हद हो गई कि एक महिला उत्पीड़न के मामले में आप पीड़ित महिला का सामना प्रतिपक्षियों उत्पीड़क तत्वों से कराना चाहते हैं। क्या कोई दूसरी घटना घटित कराएंगे सर? मैं चौकी से घर बयान देकर वापस आ गई। इसी दिन यानी 8225 को अब ये क्या कर रहे हैं ना यह कहानी बना रहे हैं कि पुलिस वालों को कैसे अब इसमें लपेटा जाए यह अब कहानी बनाई जा रही है तो क्या हो रहा है मैं चौकी से घर बयान देकर वापस आ गई इसी दिन यानी दिनांक 8225 को चौकी इंचार्ज साहब ने एक मनगढ़ंत कूट रचित रिपोर्ट उपलब्ध कर अपलोड कर दी इस अपलोड रिपोर्ट को देखने से पता चलता है कि चौकी इंचार्ज साहब ने अपनी रिपोर्ट में प्रतिपक्षी संख्या 6 7 8 9 10 को स्वतंत्र गवाह बनाया है। इन तथाकथित स्वतंत्र गवाहों के ना तो पिता पति का नाम लिखा गया है ना ही इनका किसी का पता। जबकि आईजीआरएस रिपोर्ट के कॉलम नौ में इस प्रकार लिखा है स्वतंत्र साक्षी गण के बयान। जांच अधिकारी का यह कृत अभियुक्तों को लाभ देने और प्रार्थनी को स्वयं प्रताड़ित करने की श्रेणी में

01:06:11:20 आता है। सारी रिपोर्ट कूट कूट रचित है। रिपोर्ट देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रतिपक्षी संख्या चार व पांच अन्य अभियुक्तों के साथ प्रार्थना को प्रताड़ित करवाने और अधिक प्रताड़ित करने में सक्रिय रूप से शामिल है। प्रतिपक्षी संख्या सात से मेरे गुरु भाई दिनेश दास जी ने जब रात को बात की। अब यहां पर एक कररेक्टर और आता है। उसके बारे में बता दूं। इनका नाम है नीता मल्होत्रा। जिस जगह पर यह सब हुआ है उस जगह पर यह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। नीता मल्होत्रा तो नीता मल्होत्रा वहां पर जब ये चीजें जब ये घटना घटित हुई थी उसके बाद जब पुलिस को बयान लेने थे कि भाई कुछ स्थानीय लोगों के बयान दे दो तो हमारे पास स्थानीय लोग पर्याप्त थे। ऐसे लोग जो इस वीडियो में दिख रहे हैं वो लोग वहां पर बयान देने के लिए हमारे पास उपलब्ध थे और दिए भी हैं। मगर साथ में नीता मल्होत्रा भी आ गई सामाजिक कार्यकर्ता तो उन्होंने भी बयान दिया। संभवत उन्होंने भी उस दृश्य को देखा होगा। तो खैर उन्होंने भी अपना बयान दिया नीता मल्होत्रा जी ने। तो इस व्यक्ति ने क्या किया था? जैसे अभी रंजना रंजना अग्निहोत्री जी को भी फोन कर चुका है ये हमारी अधिवक्ता को। हमें तो करा ही है। बार-बार फोन करता था तो हमने उस विषय में भी शिकायत की

01:07:26:28 थी और मैंने अभी आपको बताया ना कि फोन पर तोड़ने की कोशिश करता है अपने विरोधियों को कॉल करेगा और कहीं ना कहीं कुछ ऐसा प्रयास इसको लगता है कि ये चार्ल्स सोबराज का बाप है। इसको ऐसा लगता है। इसको पता नहीं है कि जो है कोई नहीं है। मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में। तो इसको ऐसा लगता है कि चाल सुबराज का पिता है। तो इसलिए सबको फोन लगाता है और ऐसी चाले खेलने की कोशिश करता है। मगर जितनी बार हमसे टकराया उतनी बार बेचारे को मुक्की खानी पड़ी। तो इसने क्या किया? नीता मल्होत्रा जी को जिन्होंने स्वतंत्र गवाह की सूची में एक नाम है। उन्होंने अपना नाम लिखवाया था। उसको रात को फोन किया। उनकी फैमिली वालों को पता है। मतलब वो उनको इतना भय दे दिया। उन्होंने थाना कोर्ट कचहरी नहीं देखा होगा भाई अपने जीवन में। तो वो डर गई भय के कारण या कोई उन पर दबाव ऐसा बनाया गया तो वो अगले दिन कहने लगी कि भाई मैंने नहीं देखा था मेरा नाम गलत लिखा गया है और आप मेरा नाम वापस ले लीजिए तब तक पुलिस अपनी रिपोर्ट सबमिट कर चुकी थी तो इस एक बात को खुद ही तो उसको बनाया दबाव डाल के खुद ही ऐसा बुलवाया उस एक बात को लेकर के इसने बना लिया कि पुलिस ने झूठी कारवाई की है। खैर सबसे बड़ी बात है ना कि हमारे

01:08:42:04 पास वीडियो है। अच्छा तो फिर क्या हुआ कि मेरा मोबाइल नंबर तो उन्होंने बताया कि दरोगा जी ने मेरा नाम मोबाइल नंबर किसी फलाने व्यक्ति के कहने पर डाला है। मैं स्वयं एक एनजीओ महिला संरक्षण के लिए चलाती हूं। यह सब इसने अपने मन से लिखा है। यह उन्होंने नहीं कहा। ये इसने अपने मन से लिखा है। उन्होंने पुलिस में यह जरूर कहा कि इस मामले में मुझे कुछ नहीं पता। मगर यह जो बात है कि चलाती हूं महिला उत्पीड़न के खिलाफ कैसे बयान दे सकती हूं। है ना? यह इसने अपने मन से लिख लिया उनके नाम से। उन्होंने एक प्रार्थना पत्र भी दिया जिसका मजमून इस प्रकार है। देखिए अब यह प्रार्थना पत्र दिखा रहा है। तो इसमें देखिएगा क्या नीता मल्होत्रा यह कह रही है कि भाई मैं महिला मैं उत्पीड़ित महिला के खिलाफ बयान कैसे दे सकती हूं? तो इसमें दिखा रहा है महोदय कल एक शिकायत में मेरा नाम फोन नंबर ये नीता मल्होत्रा दे दिया गया है जिसको हटा दिया जाए। मेरा ऐसे मामले से कोई लेना देना नहीं है। कृपया नाम फोन नंबर हटा दिया जाए। बस यह प्रार्थना की है। इसमें कहीं नहीं लिखा कि मैं ये कैसे कर सकती हूं। वो कैसे कर सकती हूं। ठीक है?

01:09:47:27 यह [गला साफ़ करने की आवाज़] इन्होंने दिया था जिसमें कोई दो राय नहीं। तो अतः उपरोक्त विश्लेषण एवं प्रस्तुत तथ्यों परिस्थितियों के सापेक्ष आप जी से प्रार्थना है कि मुझ महिला प्रार्थनी का जो उत्पीड़न हुआ है के संबंध में थाना आशियाना लखनऊ पर बीएनएस 2023 की संगत धाराओं में इस तहरीर के आधार पर जो भी धाराएं बनती हैं के क्रम में थाना आशियाना पर अभियोग पंजीकृत करें। थाना आशियाना पर भी अभियोग पंजीकृत करवाएंगे। यह है सामर डियर वाली बुद्धि। ठीक है। इसको कहते हैं जेब में नहीं है ट्ल्ला टिल्ला और मांग रहे हैं लाल किला। खैर लखनऊ पर बीएएस 2023 की संगत धाराओं में इस तहरीर के आधार पर जो भी धाराएं बनती हैं के क्रम में थाना आसियाना पर अभियोग पंजीकृत करने के आदेश पारित करने की कृपा करें। प्राथमिक परिवार सहित व साक्षियों सहित अत्यंत पीड़ित व भयभीत है। यह सब प्रतिपक्षी गण मेरे मेरे परिवार साक्षियों के साथ कोई भी अप्रिय घटना को यथा मरवा देना, झूठे मुकदमे में फंसवा देना इत्यादि कार्य कर सकते हैं। जिससे बचने के लिए हमें सुरक्षा भी उपलब्ध कराने हेतु पुलिस आयुक्त लखनऊ को एक निर्देश पत्र जारी करने की कृपा करें। फिर यह सब हो गया। यह इन्होंने दिया जब कोर्ट में तो कोर्ट में जो प्रारंभिक न्यायालय

01:11:03:06 था उसने इनका एफआईआर कराना यह सब सब मना कर दिया जिसके जिसके अगेंस्ट जिस ऑर्डर के अगेंस्ट यह लोग कहां गए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 14 फिर वहां पर इस चीज को सुना गया कि एफआईआर दर्ज होगी कि नहीं होगी और तब जो आर्डर दिया है अदालत ने वह मैं आपको सुना रहा हूं न्यायालय ने तो कुछ वैसी टर्म्स हैं जिसमें कि इनका कोर्ट पर आरोप लगा जब ये अपर कोर्ट में गए तो निचली अदालत पर इन्होंने एक अ आरोप लगाया कि भाई ये ठीक से ठीक निर्णय नहीं दिया है एफआईआर ना कराने वाला तो इन्होंने कोर्ट पर भी आरोप लगाया ये सब पर आरोप लगा देंगे तो [गला साफ़ करने की आवाज़] खैर खैर कुछ कानूनी टर्म्स है। मैं सीधे उस पर आता हूं कि फिर वहां पर आगे निर्णय पत्र में और क्या लिया गया है।

01:12:06:02 अच्छा इन्होंने जब अपर कोर्ट में जब यह लगाया है सेशन में जब ये लगाया है जिला कोर्ट में जिला न्यायालय में तो वहां पर इन्होंने कहा है कि न्यायालय द्वारा कुछ बयानों का संज्ञान नहीं लिया गया। झूठी कथित थाने की रिपोर्ट्स को आधार बनाकर आदेश पारित किया गया है जो कि कतई संधार्य नहीं है। विचारण न्यायालय ने प्रश्नगत आदेश पारित करने में विधिक त्रुटि की है। प्रश्नगत आदेश पारित करने में विचारण न्यायालय द्वारा तथ्य एवं विधि की त्रुटि की है। अतः संधार्य नहीं रखा जा सकता है। अतः माननीय न्यायालय से न्याय हित में प्रार्थना है कि निगरानी स्वीकार कर प्रश्नगत आदेश को खंडित करने तथा संय अपराध होने के कारण विपक्षी गण दो तथा 11 के विरुद्ध प्रथम सूचना दर्ज करवा विवेचना कराए जाने का निर्देश अपर न्यायालय को जारी करने की कृपा करें। यह इन्होंने लगा दिया। अब सुनिए आगे कोर्ट क्या कह रही है। विपक्षी गण द्वारा आपत्ति प्रस्तुत कर कथन किया गया है कि वर्तमान दांडिक निगरानी झूठे मनगढ़ंत गुमराह करने वाले और दुर्भावनापूर्ण

01:13:21:20 तथ्यों के आधार पर दायर की गई है। यह निर्णय में लिखा है। सबसे पहले कोर्ट ने यह चीज शामिल की है कि वर्तमान दांडिक निगरानी मतलब निगरानी मतलब वह जो जो हम लोग निचली अदालत से निर्णय लेकर आए हैं उस पर आप जो है जा निगरानी मतलब उसको देखें अवलोकन करें तो वर्तमान दांडिक निगरानी झूठे मनगढ़ंत गुमराह करने वाले और दुर्भावना पूर्ण तथ्यों के आधार पर दायर की गई है। जिसका एकमात्र मकसद प्रतिवादियों को परेशान करना है। उन पर दबाव डालना है। यह कोर्ट के निर्णय में है। क्या कह रहे हैं? कोर्ट इस बात को लेकर चल रही है जिसका एकमात्र मकसद प्रतिवादियों को परेशान करना, उन पर दबाव डालना, उनसे बदला लेना है। किससे? शिवश नारायण द्विवेदी से। क्यों? क्योंकि उसने हाई कोर्ट में याचिका लगाई है ना कि रामपाल हिंदू धर्म का अपमान कर रहा है।

01:14:27:13 इललीगल क्रिमिनल एक्टिविटीज बहुत सारी हो रही हैं। इललीगल रूप से किताबें छप रही हैं। जिनमें हिंदू देवी देवताओं का अपमान है। अत्यंत गंभीर चरित्र चित्रण किया गया है। उन सबका जिन पर हमारी बहुत आस्था है। इस बात को लेकर शिवश नारायण द्विवेदी हाई कोर्ट में लड़ रहा है ना। तो उस पर दबाव डालने के लिए यह किया गया है। उक्त निगरानी विधिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है। घोर दुरुपयोग अब आपको आनंद आएगा लगातार। तो उक्त निगरानी विधिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है। इसे किसी वास्तविक शिकायत के समाधान के लिए नहीं बल्कि निगरानी और उसके सहयोगियों की गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ निजी प्रतिवादियों द्वारा पहले उठाए गए वैध आपत्तियों और शिकायतों के जवाब में जवाबी कार्यवाही के तौर पर दायर किया गया है। विपक्षी मतलब हमने जो कानूनी कारवाईयां हम जो कर रहे हैं उस उनके हमने जो वैध आपत्तियां की हैं उनके जवाब में जवाबी कारवाही के तौर पर दायर किया गया है। विपक्षी गणों के विरुद्ध प्रथम दृष्ट्या कोई भी आरोप नहीं बनता है और विद्वान मजिस्ट्रेट

01:15:43:06 पारित आदेश विधि के अनुसार है। विद्वान विचारण न्यायालय के न्यायिक मस्तिष्क का उपयोग करके और कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पूर्ण अनुपालन करने के बाद आक्षेपित आदेश पारित किया गया है। तो इसके [गला साफ़ करने की आवाज़] बाद आगे क्या है? मामले के संक्षिप्त तथ्य और पृष्ठभूमि यह पढ़िए। अपीलकर्ता का वास्तविक आचरण बहुत बड़े मूल सनातनी है ना। अब देखिए क्या लिखा है। निगरानी

01:16:11:13 नीतू दासी सीधे या परोक्ष रूप से सतलोक आश्रम नामदान सेंटर नाम से चल रहे एक समूह से जुड़ी है। यह समूह रामपाल से जुड़ा है जो खुद को भगवान बताता है। बताने वाला एक व्यक्ति है और हत्या जैसे गंभीर मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्र कैद की सजा

⬜ Not used yet · 01:16:31:25 – 01:16:58:09 (0:26)

01:16:31:25 भी काट रहा है। अभी जमानत पर है। अब रामपाल को अन्य मामलों के अलावा निम्नलिखित मामलों में दोषी भी ठहराया गया है। मुकदमा भी चलाया गया है। उसमें रामपाल के मुकदमे मेंशन है। यहां पर रामपाल के जो मुकदमे हैं एफआईआर नंबर 429 ब 429 2014 सीएआर एचआरएच एस मतलब वो सारा सीरियल नंबर भी

01:16:58:09 है। यह समूह हिंदू सनातनी आस्था को नीचा दिखाने के मकसद से संगठित और व्यवस्थित गतिविधियों में शामिल है। यह कोर्ट के आदेश में है जिसमें हिंदू देवी देवताओं जो यह कहते हैं ना क्लीन चिट मिल गई क्लीन चिट मिल गई यह पढ़ लेना क्लीन चिट तुम्हारी किताबों के लिए यह कोर्ट कोर्ट के आदेश में लिखा है तुम्हारी किताबों के बारे में क्या लिखा है जिसमें हिंदू देवी देवताओं धर्म ग्रंथों संतों और धार्मिक प्रतीकों के खिलाफ अश्लील विकृत और अपमानजनक सामग्री का प्रचार प्रसार करना शामिल है। प्रत्यार्थियों प्रत्यार्थियों ने आपत्तिजनक किताबों के गैर कानानूनी प्रकाशन, बिक्री और वितरण और बिना इजाजत चल रहे नामदार नामदान केंद्रों के खिलाफ कानूनी आपत्तियां और शिकायतें दर्ज कराई। यह केंद्र समाज के कमजोर वर्गों का ब्रेन वाश करते हैं और जबरदस्ती या बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन करवा धर्म परिवर्तन जैसा आस्था का परिवर्तन करवाते हैं जो कानून की नजर में एक अपराध है। यह निगरानी यह निगरानी निगरानी ने प्रतिशोध और बदले की भावना से दायर की है। जिसका एकमात्र उद्देश्य प्रत्यार्थियों को चुप कराना और उन्हें कानूनी उपाय करने

01:18:13:15 से रोकना है।

⬜ Not used yet · 01:18:14:26 – 01:19:45:25 (1:31)

01:18:14:26 देखिए निगरानी ने स्वयं आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज अपनी शिकायत में ऐसी किताबों के प्रमोशन और बिक्री में अपनी भागीदारी स्वीकार की है जिससे उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से साबित होती है। अब अगला है अपीलकर्ता नीतू दासी द्वारा अपराधिक आपराधिक धमकी और झूठी धमकियां। निगरानी ने खुलेआम रेस्पोंडेंट्स को डराने के लिए छेड़छाड़, जाति के आधार पर गाली गलौज और दूसरे गंभीर अपराधों के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। कई मौकों पर निगरानी ने दिनेश चंद्र छोकरा समेत अपने साथियों के साथ मिलकर अधिकारियों और कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की। जिसमें गुमराह करने वाले रिप्रेजेंटेशन फाइल करना और गैर कानानूनी दबाव डालना शामिल था। और सुनिए आगे और क्या लिखा है कोर्ट के निर्णय में। यह तो बहुत आपके लिए आवश्यक है। कोर्ट का निर्णय मैं पीडीएफ बनाकर डाल दूंगा आपके लिए। यह बहुत काम आएगा कोर्ट का निर्णय। क्योंकि इसमें ये सब इन्होंने लिया है ना। ये इन सब चीजों को यहां पर प्रदर्शित कर दिया निर्णय में कि इनकी वास्तविक स्थिति क्या है जिसके लिए ढिंढोरा पीटते हैं। क्लीन चिट क्लीन चिट

01:19:30:24 क्या लिखा है? संगठित समूह और षड्यंत्र निगरानी नीतू दासी उर्फ श्रीमती नीतू शर्मा रवि कुमार और दूसरे साथियों के साथ मिलकर एक ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप के तौर पर काम करती हैं और उनके गैर कानूनी काम

01:19:45:25 आपस में जुड़े हुए हैं। जब सरोजनी नगर में एक गैर कानानूनी नामदान सेंटर के बारे में कुछ लोगों के विरुद्ध शिकायत की गई तब भी पूरे ग्रुप ने मिलकर अ दबाव बनाया जिससे एक जैसा इरादा और साजिश साबित हुई। धार्मिक मान्यताओं का जानबूझकर अपमान। उस ग्रुप द्वारा शेयर किए गए मटेरियल में हिंदू देवी देवताओं जैसे मां दुर्गा, भगवान श्री राम, भगवान हनुमान, भगवान शिव के साथ साथ वेद और भगवत गीता जैसे पवित्र ग्रंथों के बारे में गंदी, भद्दी और ई निंदा वाली बातें लिखी

⬜ Not used yet · 01:20:21:15 – 01:20:47:10 (0:26)

01:20:21:15 हुई हैं। ऐसे कामों के लिए साफ तौर पर आईपीसी की धारा 153 ए, 295 ए, 298 के साथ-साथ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के संबंधित नियमों के तहत भी अपराध बनता है। इसमें एक धारा और वह आती थी शायद 308 जो हमारी एफआईआर में लगी जिसमें 10 साल की सजा है। दंगे जैसी स्थिति उत्पन्न कराने का प्रयास करना। तो

01:20:47:10 फर्जी पब्लिशिंग और अवैध वितरण उस ग्रुप द्वारा बांटी गई किताबों में पब्लिशर की सही जानकारी सीएसटी

⬜ Not used yet · 01:20:54:26 – 01:43:57:00 (23:02)

01:20:54:26 नंबर जीएसटी नंबर और रजिस्ट्रेशन नहीं बताया गया है। कहा जा रहा है कि प्रिंटर कबीर प्रिंटर सी 117 बवाना इंडस्ट्रियल एरिया हमारी सारी चीजों को कोर्ट ने एज इट इज लिया है। इसमें निर्णय बवाना इंडस्ट्रियल एरिया दिल्ली में मौजूद नहीं पाया गया है और इसकी पुष्टि करने वाले वीडियो सबूत सुरक्षित रखे गए हैं। उत्तरदाता कानून मानने वाले नागरिक और सोशल एक्टिविस्ट है। अब हमारी बात आ रही है। प्रतिवादियों का चित्रण अभी तक तो किसका चित्रण था? अभी तक किसका चित्रण हुआ था? अपीलकर्ता नीतू दासी

01:21:36:26 इनका चरित्र चित्रण हुआ था अभी तक। अब प्रतिवादियों का चरित्र क्या लिखा है? उत्तरदाता कानून मानने वाले नागरिक और सोशल एक्टिविस्ट हैं। जिनका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है। यह अपील सिर्फ गैर कानूनी और एंटी सोशल कामों के खिलाफ समाज के विरोध को डराने और दबाने के लिए दायर की गई है। विधिक स्थिति क्या है? यह कानून का एकत नियम है। अब विधिक स्थिति बताई जा रही है कि गलत इरादे बदले या गलत इरादे से शुरू की गई क्रिमिनल कारवाही शुरू में ही खारिज की जा सकती है। फिर आगे कानूनी टर्म्स बताई गई हैं और इसी क्रम में अंत तक आते-आते

01:22:21:25 कुछ जो पूर्व में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जो केसेस चले हैं उन लगभग मिलते जुलते निर्णय उसमें क्या निर्णय दिए हैं वह सब फिर बताते हुए न्यायालय ने कहा कि भाई विद्वान विचारण न्यायालय द्वारा उन्होंने अपनी टर्म में बहुत से उदाहरण दिए कि जब ऐसी स्थिति आई थी तो क्या आदेश दिया गया था। फिर बहुत से उदाहरण देते हुए अंत में फिर आदेश लिखा है। आदेश क्या लिखा है कि नीतू दासी उर्फ आदेश शुरू से पढ़ देता हूं मैं। प्रस्तुत दांडिक पुनरेक्षण यानी अपील संख्या 670 संख्या 670/25 अंतर्गत धारा 438/40 बीएसएस नीतू दासी उर्फ नीतू शर्मा बनाम राज्य व अन्य निरस्त किया जाता है। निरस्त किया जाता है। भगा दिया गया है कोर्ट से तुम लोगों को। झूठ बोलने वालों तथाकथित भगवान के चेलों भागो

01:23:32:16 और जो तुम लोग रील बना के फिरते हो रील के बादशाह वीडियो के बादशाह एक्टिंग के बादशाह जिस दिन हम लोग नाटक करने पर आ गए ना रिपोर्टर खड़ा है आज जो रिपोर्टर है कल वो वो हो जाएगा भटका हुआ हिंदू फिर कल जो भटका हुआ हिंदू था आज रिपोर्टर को हो जाएगा ये सब नौटंकी जो तुम लोग किया करते हो हम में से जिस दिन कोई चटनी चटा देगा तुम लोगों को चूर्ण बना करके जो फेक वीडियोस फेक नैरेटिव्स तुम लोग फैलाया करते हो ये पढ़ लो आदेश तुम तो भगवान वाले हो ना पढ़ो आदेश क्या लिखा है तुम्हारी तो हर जगह जीत होनी चाहिए भाई लग रहा है कि तुम्हारा जो काल है वह तुम्हारे बाबा पर भारी पड़ रहा है हां मैं काल हूं यह देख ले तुम जैसे लोगों के लिए काल ही हूं मैं।

01:24:29:18 तो क्या आया है आदेश? प्रस्तुत दांडिक पुनरीक्षण संख्या 670 ब25 अंतर्गत धारा 438 ब 440 बी एनएसएस नीतू दासी उर्फ नीतू शर्मा बनाम राज्य व अन्य निरस्त किया जाता है बनाम रील इस पर निरस्त कर दिया है जो क्लीन चिट क्लीन चिट हमारी किताबों को क्लीन चिट दी गई है फिर आगे क्या लिखा है मालूम है जो इन्होंने कहा था ना एफआईआर कराओ एफआईआर न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लखनऊ द्वारा अंतर्गत धारा 1734 बीएएसएस प्रकीर्णवाद संख्या 858 ब25 नीतू दासी उर्फ श्रीमती नीतू शर्मा बनाम राबू द्विवेदी व अन्य में पारित आदेश दिनांकित 6825 पुष्ट किया जाता है। सही है वह आदेश एफआईआर कराओगे झूठी झूठे आरोप लगा के

01:25:34:04 निगरानी पत्रावली नियमानुसार दाखिल दफ्तर हो विचारण न्यायालय की पत्रावली इस आदेश की प्रति के साथ अविलंब वापस प्रेषित की जावे नीरज कुमार बरनवाल अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 14 लखनऊ दिनांक 17726 उक्त निर्णय आज मेरे द्वारा खुले न्यायालय में हस्ताक्षरित एवं दिनांकित कर सुनाया नीरज कुमार बरनवाल अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 14 लखनऊ 177 2026 समझ लिया इसीलिए मैं कहता हूं कि वो

01:26:19:03 जो बड़ा सा वो होता है ना क्या कहते हैं उसे बड़ा सा जान क्या होता है बड़ा सा जानवर होता है ना बड़ा हु करके हां हाथी वो बड़ा सा जानवर होता है ना समझ रहे हो कौन सा जानवर होता है वो हाथी वो हम है और वो जो होता है ना वो तुम हो समझ में आ रहा है क्योंकि तुम खड़े हो झूठ के साथ तुम खड़े हो षड्यंत्र के साथ तुम खड़े हो नकली कालनेमी को गुरु बनाकर तुम खड़े हो शास्त्रों का गलत अर्थ करते हुए उसके समर्थन में तुम खड़े हो हमारे सर्वशक्तिमान ईश्वर के अपमान के समर्थन में और हम हम खड़े हैं गुरु गोविंद और ग्रंथ के साथ गुरु गोविंद और ग्रंथ के साथ सत्य के साथ ईश्वर के के साथ सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म है कोई माय का

01:27:34:09 लाल जो टकरा सकता है हमसे नहीं टकरा सकता क्योंकि हमारे पास सत्य के अलावा कुछ है ही नहीं हम तुम्हारी तरह नहीं है जिसने अपने जमीर को मार दिया है जिसने सोच लिया है कि मैं तो झूठा हूं तो मैं झूठ बोलूंगा हमारे को झूठ बोलने की आवश्यकता नहीं है हमारा सत्य ही इतना धारदार है, इतना पैना है, इतना बलशाली है, वही पर्याप्त है तुम जैसों के लिए। बात बस इतनी है कि खरगोश होता है ना वही वाली बात है कि वो थोड़ा आराम करने के लिए बैठ जाता है। तो कछुआ सोचने लगता है कि बस मैं ही मैं हूं। बात बस इतनी सी है। ठीक है ना? तो ध्यान नहीं दिया गया तुम पर तो तुम लोग पनप गए। अरे भाई कबीर का पूजन करने से किसी ने रोका है क्या? तुम किसी का भी पूजन कर लो। रस्ते में जो स्मैक बेच रहा हो, चीनी चोरी कर रहा हो, तोता चोर हो, उसकी पूजा करो। कबीर दास जी को तो हम संत मानते ही हैं। तुम फिर भी तुम कबीर दास जी को भगवान मान लो। तुम रामपाल को भगवान मान लो। तोता चोर को भगवान मान लो। तुम

01:28:49:13 किसी को भी भगवान मान लो। कोई दिक्कत नहीं है। कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत तब है जब तुम हमारे हराध्यों का अपमान करते हो। दिक्कत तब है जब तुम अपनी एक अपोल कल्पित कहानियां हमारे वेद से पुराण से जोड़ते हो। शास्त्रों से जोड़ते हो। दिक्कत तब है जब तुम हमारे परंपरा प्राप्त आचार्यों का अपमान करते हो। मुंह चलाते हो। अब हो गई खारिज। अब बैठे रहना। ठीक है। मुझे लगता है आज के लिए इतना पर्याप्त है। काफी कुछ मिल गया है। इस आर्डर की कॉपी हम डाल देंगे। जो क्लीन चिट क्लीन चिट चिल्लाया करते हैं इनके मुंह पर मारना है इस ऑर्डर। क्लीन चिट

01:29:36:09 [गला साफ़ करने की आवाज़] श्री राम सेना वाले लिख रहे हैं। पहले के ऋषि मुनि को मालूम था कि रामपाल जैसे आएंगे। इसलिए आहान जैसे लोगों को जिम्मेदारी लेंगे हम बहुत-बहुत बधाई हो शिवश द्विवेदी जी जय श्री राम जय श्री राम आभा राजपूत जी

01:30:18:16 और फिर मैं कहता हूं जिसकी भी मां ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो वो रामपाल के दावों को सामने आकर सिद्ध करें। यदि रामपाल की मां है। वैसे रामपाल तो अब मना करते होंगे। रामपाल तो मना करता होगा ना। रामपाल और उसके लोग मना करते होंगे कि नहीं नहीं इसकी कोई मां नहीं इसका कोई पिता नहीं है क्योंकि वह तो अपने आप को कबीर सिद्ध करने में लगा हुआ है। जो भी है जिसकी भी मां ने उसे निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया। सामना करना भाई सामने आकर बात कर। सामने जाते हो तो तुम लोग भाग जाते हो। कहते हो कि हमने पोस्टर ही नहीं लगाया। घर पर पोस्टर लगा हुआ है। वह कहते हैं कि हमने पोस्टर नहीं लगाया। पता नहीं कौन लगा गया है।

01:31:02:26 घर पर पोस्टर लगा हुआ है। पता नहीं कौन लगा गया है। तो एक इस पूरे घटनाक्रम में आज आप लोगों को एक बहुत महत्वपूर्ण सूचना प्रदान की है और बहुत जल्द जो हाई कोर्ट वाली हाई कोर्ट में जो हमारी मुख्य जो प्रकरण है जो याचिका है किसी को अगर ज्वाइन करना हो वैचारिक मतभेद के निमित्त बात करनी है तो वो अ वीडियो के अंत में दिए गए नंबर पर WhatsApp करें

01:31:38:14 और हां दंड भी मिलेगा। फिलहाल तो दंड यही है ना कि तुम जिसको भगवान कह रहे हो उसकी किताबों को लेकर के अपने सर पर चप्पल रख के भाग रहे हो। दौड़ लगा रहे हो। यह भी तो दंड है। है ना? वैचारिक मतभेद के निमित्त किसी को चर्चा करनी है। उसकी मां ने उसको दूध पिलाया तो वो करे आकर के और हमारे आराध्यों का जो अपमान किया है या फिर जो दावे हैं ईश्वर के संबंध में तत्वदर्शी के संबंध में

01:32:19:12 [गला साफ़ करने की आवाज़] रामपाल के लिए रामपाल के गैंग में क्या है ना वो साम अमर डियर की बुद्धि वाले लोग ज्यादा हैं। चलिए ठीक है। और नेक्स्ट जो लाइव मैं लाऊंगा यदि समय मिल पाए तो आपको बताऊंगा कि रामपाल की तारीखें इस प्रकार इस समय कैसे निपटाई जा रही हैं। उस पर भी बात करेंगे हम लोग। रामपाल क्या कह रहा है कोर्ट को कि हम तारीख में क्यों नहीं आ सकते हैं। इसमें भी आनंद आएगा। उसको भी उस किसी दिन आपको प्रस्तुत करेंगे। ठीक है? और फिर से मैं लास्ट में कह रहा हूं कि किसी भी विरोधी किसी भी मायके लाल में दम हो उसको उसकी माता ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो तो वह आए और बताए कि रामपाल या उसके जैसे और जो अप्रामाणिक कालने घूम रहे हैं उनके दावों में कितनी दम है और हमारे पास सनातन सिद्धांत हैं। इसलिए

01:33:34:14 व्यक्तिगत व्यक्तिगत परामर्श मैं दे रहा हूं आप लोगों को कि मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में ठीक है ऑपरेटर जी अगर आप कुछ दिखाना चाह रहे हैं तो मुझे बता दीजिए वरना मैं तो अब इसको क्लोज करने के टाइम मतलब और आगे बढ़ रहा हूं। श्री हरिव मैं इतने दिन से कहां था? बहुत ढूंढा। बहुत ढूंढा।

01:34:10:07 बहुत हिम्मत जुटा कर बोल रहा हूं। अपने इतने दिन से आंसू नहीं रोक पा रहा। लोगों को लग रहा है मेरे खुशी के आंसू है। लेकिन सच में जो भी है। आज बड़ा हिम्मत बांध के बोल रहा हूं कि बोबड़ा पता नहीं कहां खो गया। कहां गायब हो गया। बोबड़े के बिना मैं रह नहीं सकता। दुख इस बात का नहीं है कि वो कहां खो गया है। भाई त्रिकालदर्शी टाइप का व्यक्ति और शास्त्रों का इतना बड़ा ज्ञाता जो साक्षात भगवान शंकराचार्य जी को ज्ञान देने वाला व्यक्ति कहां खो गया। दुख इस बात का नहीं है कि वो खो गया। दुख इस बात का है कि अगर वह किसी से एड्रेस पूछ रहा होगा भाई तो उसकी एड्रेस कोई समझ उसका भाषा उसकी वाणी कोई समझ पा रहा होगा ठीक कि नहीं क्योंकि उसकी बातों को समझना उसे डिकोड करना उसकी बातों की ऐसी की तैसी करना तो मेरा स्वरूपभूत लक्षण ही है और मैं ही कर सकता था जहां तक मैं जानता हूं खैर जो भी है अगर वो कहीं मिल जाए तो मुझे तो

01:35:25:13 क्या आप लोग जानते हैं अभी भी मुझे जितने भी होते हैं उनको सब अभी भी मुझे उसकी आवाज आ रही है वैसे ही जितने अपराधी होते हैं उनको अपराधी दिखाई देते जय श्री राम [हंसी] बोबड़ा बोबड़ा एडिटिंग सोल इज मिसिंग इस पर वीडियो बनाया है अंकित जी ने इनका जो चैनल है आप लोग सब्सक्राइब अवश्य कर लें। राधा माधव नाम से है चैनल। चैनल का डिस्क्रिप्शन दिखा देते हैं एक बार। तो बोबड़ा एडिटिंग शोल इन दिनों गायब हो गया है। तो यह उसके विरहम है। अनिकेत जी बोल रहे हैं कि भाई इनका जो स्वरूपभूत लक्षण है वो है बोबड़े की चीजों को डिकोड डिकोड करना और फिर उनका समाधान प्रस्तुत करना। अब बोबड़ा हो गया गायब। तो यह उसे ढूंढ रहे हैं और यह उसकी व्यथा भी बता रहे हैं कि वह बेचारा किसी को कुछ कहना चाह रहा होगा कि मेरा पता यह है मुझे यहां भेज दो वहां भेज दो मैं यहां जाऊंगा मेरा यह है तो कोई उसकी बात को समझ नहीं पा रहा होगा चल हट हवा हवा आने दे ऐसे करके तो बेचारा वो घर कैसे आएगा दूसरी बात मैं यह भी कह रहा हूं आपके दुख को मैं समझ पा रहा हूं अनिकेत जी

01:36:40:26 पर बात यह है ना कि अ बात ये यह है कि अगर उसकी कोई फोटो वोटोो आप दे दे तो मैं कम से कम उसको ढूंढने का प्रयास भी कर सकूं। आपकी मदद कर सकूं। मगर उसने कभी अपनी कोई फोटो दिखाई नहीं अपनी नपुंसकता के व्यवहार के चलते तो फिर वो मदद भी करना वो सहायता भी आपकी करना बड़ा कठिन हो गया है मेरे लिए। जी शास्त्रवाद जी जय श्री राम। जय श्री राम भैया। आज तो बहुत बढ़िया आया। यह जो लाइव हुआ है इसमें पूरे चीज क्लियर हो गई है। ये लोग जो कहते रहते हैं क्लीन शीट मिल गई। अरे को भगा दिया गया है। देख लो। अच्छे तो समझो। क्लीन शीट क्लीन शीट करते रहते हो। किस तरह? कहांहां भागोगे? अभी तो एक जगह भागे हो। अभी और भागना बाकी है क्या? अभी और भागोगे और सही है भैया। किसी में इतना साहस नहीं जो यहां आ के टकरा सके और जो टकराता है वो चूरचूर हो जाता है। चूरचूर क्योंकि माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध नहीं पिलाया ना उन लोगों को जो हमारे आराध्यों का और हमारी मान्यताओं का अपमान करते हैं। सार्वभौम

01:37:56:14 सिद्धांतों से टकराने के लिए माता जी का निष्ठा पूर्वक दूध चाहिए ना। वो तो पिलाया नहीं ना उन लोगों की माताओं ने। बिल्कुल बिल्कुल इसीलिए हम लोग कई बार परामर्श देते रहते हैं कि भाई कोई मत पड़ो समझते ही नहीं है। मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं। मुझे लगता है कुछ लोग अब समझ गए हैं। मुझे लगता है कुछ लोग समझ गए हैं। इसलिए अब वो कमेंट तक सीमित रहते हैं। वो ये समझ गए हैं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में। या फिर उन्होंने स्वीकार कर लिया है कि उनकी मां ने उनको निष्ठा पूर्वक दूध नहीं पिलाया। इसीलिए बेचारे नहीं आ पाते हैं सामने। हां, सही बात है। या तो उनका चेहरा ठीक नहीं होगा। बेचारे कैसे दिखाएंगे अपना चेहरा यहां आ के? चेहरा दिखाने लायक नहीं बचे वो। आपने उनकी ये दशा कर ली है कि अब वो चेहरा दिखाने लायक भी नहीं रहे।

01:38:54:21 हां गोस्वामी जी। जय श्री राम। जी जय श्री राम। शिवा जी। हर हर महादेव। हर हर महादेव। हर हर महादेव। जी आज कोर्ट का फैसला आ गया। बहुत खुशी हुई सुनके। जी [गला साफ़ करने की आवाज़] तो वो जो है दो चीजें हैं। या तो उन्होंने यह स्वीकार कर लिया है। वो जान गए हैं माता जी से। उन्होंने बात-वात कर ली है। पता चल गया है कि निष्ठा पूर्वक दूध नहीं पिलाया गया है। इसलिए सामने नहीं आते। मुंह छिपाकर इधर-उधर बातें करते रहते हैं। कमेंट तक सीमित रहते हैं और या फिर उन्होंने यह मान लिया है कि मत पड़ो चक्कर में कोई ऐ टक्कर में ये खा जाएगा। इसके चक्कर में मत पड़ो। इसीलिए बेचारे जो नपुंसकता भरा व्यवहार होता है वह कमेंट के माध्यम से उल्टा सीधा गालियां गाली गलौज या फिर झूठे आरोप इत्यादि लगाने के रूप में करते रहते हैं। ठीक करते रहना चाहिए। जय श्री राम। जय श्री राम। बहुत-बहुत बधाई आपको। जी।

01:40:10:09 धन्यवाद। जी। बहुत-बहुत बधाई। धन्यवाद। ये लोग तो भैया पहले ही सोचते हैं कि हम लोग नहीं टकरा सकेंगे। इसीलिए वो लोग कोर्ट का भी रिश्ता अपनाने का शादी करने का सोचते हैं। लेकिन उसमें भी नहीं टिक सके। कोर्ट से भी भगा दिया गया। भगा दिया गया। अरे इनको ये जो अभी हमने पूरा मामला वो लिया है इनको हर जगह से भगाया गया। पहले आईजीआरएस के बिहाफ पर थाने से फिर 156 टी जो किया इन्होंने उसमें कोर्ट से एफआईआर कराने की प्रार्थना होती है। वहां से भगाया गया। फिर उसके बाद जो है फिर उन्होंने या एक बार और कोर्ट में प्रयास किया गया एफआईआर हो जाए। फिर वहां से भगाया गया तब ये जो है सत्र न्यायालय में आए। इतनी बात

01:41:10:07 है सांभर डियर सही नाम सांभर डियर नहीं आप देखना आप कभी जाओगे ना तो अब मुझे नहीं मालूम सांभर डियर का और कोई वैज्ञानिक नाम भी होता हो शायद मगर बांधवगढ़ के जंगलों में उसे सांभर डियर ही बोला जाता है और मुझे मेरा जो गाइड था उसने बताया था कि सांभर डियर जो है वहां पर बाघ होते हैं तो उनका का सबसे आसान शिकार होता है क्योंकि वो खुद मूरखता करता है। भागते भागते पीछे देखता है।

01:41:44:04 वही हाल है। आज का सभी पूरे आन टीम को इसका विजय का बहुत-बत शुभकामनाएं। बहुत बहुत और हां और यह पूरा जो केस हमारी ओर से लड़ा है यह हमारे जो युवा अधिवक्ता हैं माननीय अभिषेक द्विवेदी जी उन्होंने पूरा ये देखा है और वो सशक्त हमारे योद्धा है हमारी टीम के उनको भी बहुत साधुवाद मैं यहां से देता हूं बहुत सारा उन्होंने अथक प्रयास किया और इसमें हमारा जो पक्ष है पूरी निष्ठा के साथ वो रखा वहां पर पूरी मेहनत की तो इसलिए हम उनको भी यहां से सम्मान करते हैं और आपके उज्जवल भविष्य की कामना भी करते हैं। अभिषेक द्विवेदी जी।

01:42:47:01 हो सकता है आने वाले किसी लाइव में वह हमारे साथ ज्वाइन भी करें। तो मुझे नहीं लगता कि कोई आने का दम रखता है। मुझे नहीं लगता किसी की मां ने उसको निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया जो रामपाल की चीजों को सही सिद्ध कर सके सामना कर सके शिवश नारायण द्विवेदी आज आर्य समाज की चर्चा में क्या हुआ ये तो आपने देखा होगा ना आर्य समाज के साथ चर्चा हुई वो सुबह आज नहीं हुई है वो पटना में हो चुकी है 23 तारीख को आज उसे पब्लिक की प्रसारित किया गया है

01:43:26:24 ठीक है फिर उत्तर अब ये तो जो लोग देख रहे हैं वो निर्णय कर सकते हैं। हमारा कार्य है सनातन सिद्धांतों को रख देना बस कर्मवादी कारस्त ठीक है फिर सभी को जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम

Plans for this video (0)

No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.

🤖 Ask AI for suggestions

AI reads the remaining (unused) parts of this video and gives ideas for new videos: from where to where, hook, and what to remove from the middle. Suggestions follow the RULES and appear here as "AI Suggestion". You can review, edit or approve them.

Live: Required tasks are not set on the Rules page yet.

  • ⬜
    Hindi SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).

B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 1:44:24 · 02 Aug 2026

आ गया कोर्ट का जजमेंट रामपाल गैंग की करारी हार

% not set
☁️ Drive Not in Drive yet

🔗 This video is made from parts of these videos

A · Live सतलोक आश्रम गैंग पर F.I.R किस-किस का नाम है?
Open at 00:19:56:19 Open at 00:21:06:19

Notes

Description

(empty)

History

No changes yet.

✂️ Clip Cutter

⌨️ Keyboard shortcuts

Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop

▶

Start

End

🔍 zoom
Already used Plan clips
⚠️ () of this clip is already used in another video (green part). Fine if on purpose, otherwise change the times.
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)

Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".

Clips () · Total

Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.

Hook, full note for editor, status