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00:00:01:18 नहीं है। एक अब तुम अपना वो क्लेम बताओ गीता से। हां हां गीता अध्याय दो और नौ में यह स्पष्ट लिखा हुआ है कि जितने भी भूत प्राणी हैं वो प्रकृति में लीन होते हैं और प्रकृति और परब्रह्म दोनों एक ही है। दोनों अलग नहीं है। इसे अलग समझने का प्रयास करेंगे तो फिर मुझे और भी प्रमाण देने पड़ेंगे पुराणों से। गीता अध्याय दो श्लोक नंबर 27 में लिखा हुआ है क्योंकि इस मान्यता के अनुसार जन्मयोग की मृत्यु और मरे हुए का जन्म निश्चित है और नौ में लिखा हुआ है कि प्रकृति जितने भी भूत प्राणी है जितने भी टोटली एक्स व जेड जितने भी भूत प्राणी है प्रकृति में लीन होते हैं और लीन होने के बाद में जब सृष्टि का जो कार्यभार है वह समेटने के बाद में फिर दोबारा से मैं उनको रच देता हूं। तो इस इस हिसाब से जन्म मृत्यु किसी की कटती नहीं है। कहां लिखा है?

00:01:10:26 गीता अध्याय दो श्लोक नंबर 27 पढ़िए। उसके बाद में नौ पे आ जाइए। नौ का सात और आठ पढ़ लीजिए। नौ का सात और आठ पहले दो का 27 पढ़ लीजिए उसके बाद नौ का सात आठ पढ़ना जन्मे हुई की मृत्यु और मरे हुए का जन्म निश्चित है।

00:02:00:12 दो का 27 ये हां दो का एक मिनट एक मिनट देख रहा हूं देख रहा हूं हां दो के 27 में लिखा है संपूर्ण प्राणी जन्म से पहले अप्रकट थे और मरने के बाद भी अप्रकट होने वाले हैं। केवल बीच में ही प्रकट है। ऐसी स्थिति में शोक क्यों? 27 में लिखा है कि इस मान्यता के अनुसार जन्मे हुए की मृत्यु निश्चित है और मरे हुए का जन्म निश्चित है। इससे भी इस बिना उपाय वाले विषय में तू शोक करने योग्य नहीं है।

00:02:45:25 तो इसमें तो एक मान्यता बताई जा रही है। यदि आपको मोक्ष प्राप्त नहीं हो रहा है तो उस स्थिति में जिसकी मृत्यु हो रही है उसका जन्म निश्चित है। जिसका जन्म हो रहा है उसमें मृत्यु निश्चित है। इसमें यह कहा कि उसको मोक्ष मिलेगा ही नहीं। मोक्ष मिल ही नहीं सकता। हां अब अब आप नौ का सात और आठ पढ़ लीजिए। कल्पों के अंत में सब भूत मेरी प्रकृति को प्राप्त होते हैं। अर्थात प्रकृति में लीन होते हैं और कल्पों के आदि में उनको मैं फिर रचता हूं। तो इसका अर्थ क्या हुआ? यह तो महाप्रलय की बात हो रही है। महाप्रलय के समय की बात हो रही है। यह मोक्ष की बात थोड़ी ना हो रही है। जिसके जो जन्मा जन्म जन्मांतर

00:03:57:27 एक सेकंड एक सेकंड सुनिए। अरे पूरा पढ़ा नहीं आपको। पढ़ लेता हूं। अपनी प्रकृति को अंगीकार करके स्वभाव के बल से परतंत्र हुए संपूर्ण भूत समुदाय को बार-बार उनके कर्मों के अनुसार रचता हूं। ठीक है? इसमें क्या दिक्कत है? इसमें क्या दिक्कत है? हां। अब अब सवाल हां मैं आगे आगे बढ़ता हूं। आगे बढ़ता हूं। अब आते हैं गीता अध्याय आठ के श्लोक नंबर 16 में। 16 में कहा है कि हे अर्जुन ब्रह्मलोक पर्यंत सब लोग पुनरावृति में लेकिन मुझे प्राप्त करके पुनर्जन्म नहीं होता यानी कि प्रकृति और परब्रह्म दोनों एक ही है अलग नहीं है।

00:04:44:02 एक मिनट मुझे आठ 16 देख लेने दो। ब्रह्मलोक पर्यंत सब लोक पुनरावर्ती है। परंतु हे कुंती पुत्र मुझको प्राप्त होकर पुनर्जन्म नहीं होता क्योंकि मैं कालातीत हूं और ये सब ब्रह्मा आदि लोक काल के द्वारा सीमित होने से अनित्य है। तो इसमें क्या दिक्कत क्या है? प्रकृति में प्रकृति में प्रकृति में

00:05:30:07 आपका समझने का प्रयास कर रहा हूं। तो मुझे करेक्ट मुझे करेक्ट करिएगा। एक मिनट एक मिनट आप वहां कह रहे हैं कि वो प्रकृति में लीन होते हैं कल्प के समय और यदि मुक्ति यही है कि वो जो है ईश्वर में लीन हो जाए तो क्योंकि प्रकृति और ईश्वर एक ही है तो इसलिए यदि प्रकृति में लीन होने से व्यक्ति मुक्त नहीं होता है तो फिर इसका मतलब ईश्वर में भी लीन होने से व्यक्ति मुक्त नहीं होगा। मतलब आप यह समझते हैं कि प्रकृति और नहीं प्रकृति और ब्रह्म दोनों एक ही है। आपको शिव पुराण में प्रमाण दे सकता हूं। व्यवहार में व्यवहार की दृष्टि से नहीं सुनो सुनो मैं मैं प्रमाण में जानता हूं 120

00:06:22:14 सुन लो सुन लो सुन लो सुन लो हां तत्व की दृष्टि से दोनों एक है। व्यवहार में दोनों अलग-अलग है। तो जहां पर यह कहा जा रहा है कि प्रकृति में लीन होकर के वो लोग वापस आते हैं तो वहां पर व्यवहारिक भेद के अनुसार कहा जा रहा है और जहां पर यह कहा जा रहा है कि परम ब्रह्म और प्रकृति एक है तो उस परम ब्रह्म को प्राप्त करने वाले जो है वहां मोक्ष को प्राप्त कर रहे हैं। जैसे कि जैसे कि इधर देखो भैया इधर देखो वीडियो की ओर देखो मुझे

00:07:01:06 किया है। एक वो मैंने एक्सेप्ट किया है। मैं आपको यह बता रहा हूं कि आपका नाम है अमित दास। आप उदाहरण मत दीजिए। सुनिए श्रीस भाई आपने आप जहां ब्रह्मा विष्णु महेश उदाहरण उदाहरण क्यों नहीं दूं? तुम किसी के भाई हो, किसी के बेटे हो, किसी के किसी के पुत्र हो, किसी के पति हो, किसी के पिता हो कि नहीं हो? तत्व की से हो जहां से ब्रह्मा विष्णु वहां से वहां से आगे जाएंगे क्या आत्मा किससे आगे

00:07:43:10 ब्रह्मा जहां से ब्रह्मा विष्णु महेश प्रकट होते हैं सुनिए जहां से ब्रह्मा विष्णु महेश प्रकट होते हैं आत्मा उससे आप बताइए उसका प्रमाण दीजिए प्रकट होने से आगे जाएंगे प्रकट होने से आगे जाएंगे उसका प्रमाण मैं उसका प्रमाण दूंगा ना अपने भाई मैं आपको प्रमाण दे तो रहा हूं। एक मिनट मैं मैं आपको प्रमाण दे तो रहा हूं। मैंने आपसे कहा कि आप किसी के पिता पुत्र और भाई हैं। पति हैं। क्या आप तत्व की दृष्टि से भी पिता पुत्र पति हैं सबके?

00:08:18:02 एक ही हूं लेकिन व्यवहारिक रूप तत्व की दृष्टि से भी आप पिता पुत्र पति और भाई ये सब हैं। व्यवहारिक रूप से अलग हूं मैं। लेकिन व्यवहारिक रूप से आप वही मैं कह रहा हूं। जहां पर प्रकृति में लीन होकर के वापस आने की बात हो रही है वहां व्यवहार की बात हो रही है। जहां पर प्रकृति और ब्रह्म अलग-अलग है। और जहां पर ब्रह्म को प्राप्त करके जो है मुक्ति पाने की बात हो रही है। वहां पर जब आप कहेंगे प्रकृति एक ही है तो वहां व्यवहार नहीं है वहां मोक्ष है। वहां परमार्थ है। तत्व की दृष्टि की बात हो रही है वहां। समझ में आया? हां। उसी के लिए उसी के लिए गीता ज्ञान दाता प्रभु ने कहा है कि मुझ ब्रह्म का एक ओम मंत्र है और ओम मंत्र से ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। पलट रहे ब्रह्मलोक में प्राणी मंत्र अरे भाई नहीं अब सुनिए अब मेरी बात सुनिए जवाब सुनिए हां आप जवाब सुनिए सुनिए एक एक मिनट अब आप जवाब सुनिए हां सातवा अध्याय बोलिए सातवा अध्याय बोलिए पांच सातवा अध्याय कौन सा खोलू बताइए? सातवां

00:09:33:10 अध्याय खोल लिया मैंने। कौन सा है? बता रहा हूं। कौन सा? इसमें लिखा हुआ है दव श्लोक में जाइए।

00:10:08:00 हेलो हेलो हां मैं सुन रहा हूं। 10व श्लोक में लिखा हुआ है कि इसमें लिखा हुआ है कि

00:10:20:12 हे अर्जुन तू संपूर्ण भूतों का सनातन बीज और मुझको ही जान मैं बुद्धिमानों की बुद्धि और

⬜ Not used yet · 00:10:27:10 – 00:24:26:00 (13:59)

00:10:27:10 तेजस्वी बलवानों का हो गया काफी है सनातन हो गया बस काफी है उतना काफी है सनातन का मतलब क्या है सनातन का सदा रहने वाला जिसका ना कभी जन्म होता है ना कभी मृत्यु होती है सनातन आप ठीक से पढ़ पा रहे हैं ना हां पढ़ रहा हूं पा रहे हैं ना दोबारा आप खुद पढ़िए आप पढ़िए ना पढ़ के तू संपूर्ण भूतों का सनातन बीज मुझको जान

00:11:02:00 हां सनातन बीज मुझको जान बोल रहा है ना सनातन यानी कि जो के लिए मुझसे ही उत्पन्न होना जान सनातन है वो जो बीज है वो सन सनातन है। वो जो बीज है सनातन है। जिससे भूत उत्पन्न हो रहे हैं वो भूत सन वो जो बीज है वो सनातन है। तो इससे ये प्रमाणित नहीं हो गया तो मोक्ष हो जाएगा। अरे मैं मैं सिद्ध करूंगा ना। मैं सिद्ध करूंगा। चार नौ पे जाओ। चार नौ पे जाओ।

00:11:39:10 बताइए चार नौ में क्या है? क्या लिखा है? पढ़ो। नो हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म द दिव्य अर्थात निर्मल अलौकिक है। इस प्रकार जो मनुष्य तत्व से जान लेता है वह शरीर को त्याग कर फिर जन्म को प्राप्त नहीं होता। ठीक है? ये ये बिल्कुल सही बात है। आगे पढ़ो आगे आगे पढ़ो। आगे उसमें एक पंक्त आगे एक पंक्ति और है। किंतु मुझको ही प्राप्त होता है। ये तो पढ़ो। हां किंतु मुझको प्राप्त होता है। कहां लिखा है? ये कोष्क में लिखा हुआ है आपने। गीता वाली में चेक कीजिए। एक मिनट। यह संस्कृत में मामेती लिखा हुआ है। मामेती आपके यहां कोष्टक में लिखा है। यहां पे कोष्क में नहीं लिखा है। ये देखो बिना कोष्क के लिखा है। आप गीता प्रेस कौन सी है पुस्तक आपके पास?

00:12:54:14 गीता प्रेस गीता प्रेस कोक में नहीं लिखा। दिखा दिया ना ये देखो। हां मैं पढ़ के सुना रहा हूं। एक सेकंड सुनो मेरी बात मेरी बात सुनो वहां पे अरे अरे रुक जाओ रुक जाओ एक मिनट एक मिनट एक मिनट वहां पे संस्कृत भी दी गई है मा मेती मुझे ही

00:13:26:00 ठीक है संस्कृत है वहां पे अवेलेबल तो पहली बात तो ये है कि और भी मैं और भी श्लोक दे दूंगा मैं और भी श्लोक दे दूंगा इस बात एक मिनट मैं और भी श्लोक दे दूंगा कि और भी पहले जो आपने बोला है उसको तो क्लियर कर लो मैं करूंगा क्लियर उसको क्लियर करूंगा मुझे बोलने तो दो लेट मी फिनिश मुझे बोलने दो मैं क्लियर कर रहा हूं मां जब ये कह रहे हैं कि भैया वो जन्म और मृत्यु को प्राप्त नहीं होता तो लास्ट में एक शब्द आ रहा है मामेती तो वहां से निकल रहा है कि नहीं वो जन्म मृत्यु को प्राप्त नहीं होता किंतु मुझे ही प्राप्त होता है। ये अर्थ निकल रहा है वहां से। अब दूसरी बात ये आती है कि

00:14:18:00 शायद नौव अध्याय का 34वा श्लोक मुझ में मन वाला हो मेरा भक्त बन मेरा पूजन करने वाला हो मुझको प्रणाम कर इस प्रकार आत्मा को मुझ में नियुक्त करके मेरा पराय होकर तू मुझको ही प्राप्त होता है बस हो गया यहां भी प्राप्त होने एक मिनट मैं अपने पूरे प्रमाण बोल रहा एक मिनट और भी प्रमाण है एक मिनट ठीक है लीजिए फिर मैं बोलूंगा आठ पांचो

00:15:12:24 आठ पांच आठ 13 आठ पांच निकालो पहले आठ पांच ठीक है 8 5 13 इसमें लिखा हुआ है कि सब इंद्रियों के द्वारा द्वारों को रोक कर तथा मन को हृदय में स्थिर स्थिर करके आठ पांच अच्छा आठ पांच हम

00:16:00:28 जो पुरुष अंतकारल में मुझको ही स्मरण करता हुआ शरीर को त्याग कर जाता है वह मेरे साक्षात स्वरूप को प्राप्त होता है। इसमें कुछ भी संदेह नहीं। हम ठीक है। तो अभी हमने जानी दो बातें कि जो गीता को कहने वाला है वह सनातन है। और जो भी व्यक्ति उसका भजन करता हुआ अंत काल में शरीर छोड़ता है वह उसको ही प्राप्त होता है। किसको? जो सनातन है उसके साक्षात स्वरूप को प्राप्त होता है। तो इसका मतलब वो कौन से स्वरूप को प्राप्त होता है? सनातन स्वरूप को। कहां गए? हम हां सुन रहा हूं। आप बोलिए। अरे भाई शक्ल दिखाओ ना अपनी। चेहरा दिखाओ। अरे और भी कोई प्रमाण है बाकी फिर नहीं तो फिर मैं मैं बोलू फिर अब इसको काट सकते हो तो काटो।

00:17:10:19 काटो इसे। और भी कोई प्रमाण है आपके या फिर मैं बोल भाई और भी बहुत सी चीजें पहले इसको काट सकते हो तो काटो हां तो इसी को हां अब अब आई ना बात और प्रमाण देखना है तो देख लो 932 9 33 हम बोल लीजिए आप है ना इकट्ठा बोल लीजिए फिर मेरे बोलने के टाइम आपने कहा प्रमाण है तो दिखा देता हूं और देख लो 932 933

00:17:52:19 हां जब मैं प्रमाण दिखाऊंगा तो आप बीच में नहीं बोलना फिर आपने गीता है हमारी चर्चा तो फिर 932 में लिखा है वो मेरी शरण में होकर परम गति को प्राप्त करता है परम गति ठीक है ठीक है अब काटो इसे हां तो पहला तो मैंने आपको प्रमाण दिया था कि प्रकृति को प्राप्त होकर प्राणी फिर उसका पुनर्जन्म सृष्टि रचना होती रहती है उसके कर्म के आधार से। ठीक है? अब हम आपको प्रमाण दिखाते हैं कि वहां पर व्यवहार की बात हो ही नहीं रही। आप ये कहो ना कि वो वहां पे मुझे प्राप्त हो जाता है। जहां पर मुझको प्राप्त होने की बात हो रही है वो परमार्थ है। या तो सुनिए आप आप बोल लीजिए नहीं तो फिर मुझे प्रमाण दिखाने दीजिए। भाई ऐसा है ना आप आप क्या करोगे यहां से जितने टाइम आपने अपनी बात को रखा और मैंने काउंटर नहीं किया उतने टाइम की क्लिप निकाल कर के वीडियो बनाओगे इसलिए आए हो मैं जहां आप बोलोगे वहां आपको पता चलूंगा ना ठीक है कोई बात नहीं अच्छी बात है लेकिन पहला

00:19:07:27 मेरा प्रमाण जो मैं दिखाता हूं उससे क्लियर हो जाए कैमरा कट कहां गया एक सेकंड इतनी सारी चर्चा करने की आप लोगों को जरूरत भी नहीं होती है। यदि आपके पास परंपरा है। ठीक है? यह सारे श्लोक आपको रटे हो। कहां क्या लिखा है यह भी रटा हो। कोई एक व्यक्ति नहीं है। सनातन का दुश्मन बहुत है। दिन और रात यही चल रहा है। कैसे सनातन को नष्ट करें? कैसे कृष्ण भगवान का खंडन करें? कैसे राम भगवान का खंडन करें? सारे शास्त्रों को या तो आप हर व्यक्ति रटा हो और नहीं तो वो किसी चौक चौराहे पर कोई व्यक्ति मिल गया कि देखो यहां पर तो उसने प्रकृति से लीन होने की बात कही है और प्रकृति और वो तो एक ही है। यानी प्रकृति से व्यक्ति वापस आता है तो लो हो गया। इसलिए आपको यह जानना आवश्यक है कि आपको सारे शास्त्रों को रटा होना आवश्यक नहीं है। आपको परंपरा प्राप्त आचार्य पर आश्रित होना आवश्यक है।

00:20:23:03 अपने धर्म को यदि बचाना है तो नहीं तो हर दूसरा व्यक्ति आपके बच्चों को आपके भाइयों को कब आपसे छीन लेगा। अभक्त के नाम पर काफिर बना देगा। आपके बच्चों को आपको पता नहीं चलेगा। अमित जी फिलहाल गायब हो चुके हैं। इसीलिए कहते हैं इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में। इसीलिए कहते हैं। पहले तो तुम्हारा वो बाहर निकाली आत्मा। शास्त्र कहां से आए? पहले तो वो वो आवश्यक है जनता को सिद्ध करना। परंपरा की आवश्यकता कितनी है? हर व्यक्ति हर बच्चा के रटे हुए घूमेगा कि कृष्ण भगवान ने कहां-कहां अपने आप को कहा है।

00:21:17:18 रट के घूमे हर व्यक्ति तब वो अपने आपको माइंड वाश से बचा सकता है। ब्रेन वाश से बचा सकता है। वरना ये अमित जैसे लोग रामपाल जैसे लोग हर दूसरे दिन आपके भाइयों को आपसे अलग कर देंगे। आपको रटना यह है एवं परंपरा प्राप्तिम मुंडकोपनिषद एक एक से लेकर चार तक यह रटना है आपको कि तुमको शास्त्र कहां से मिले यदि तुम्हें भगवत कृपा से मिले हैं तो शास्त्र रटे होने चाहिए फिर मोबाइल में देख के मत बताओ हम तुम्हें किताब लेने क्यों जाना पड़ रहा है भाई गीता प्रेस तक

00:21:57:18 हमें शास्त्र परंपरा से मिलते और यदि कोई नहीं भी आ रहा है हमें शास्त्र परंपरा से मिलते हैं और परंपरा से जब हमने अपने गुरु मुख से वो चीजें सुनी है तो जब हम गीता प्रेस में कोई भी उसको छाप रहा हो तो हम वहां पर सत्यापित कर सकते हैं कि भैया हमसे हमारे परंपरा प्राप्त गुरुओं ने अपने गुरुओं से सुनी थी कि नहीं। जिन गुरुओं में पीछे वो लोग आ जाएंगे जिन्होंने उन शास्त्रों को लिखा था। कहां गए अमित? भाग गए। अब आ भी जाओ भाई। इतनी देर मत लगाओ।

00:22:38:16 ऊपर लीजिए ना। आप जानबूझ के ऊपर नहीं ले रहे हो। ऊपर ही तो ले गया है। और कितना ऊपर भेज दे तुमको? [हंसी] ऐसा नहीं है। ऐसा नहीं है। कितनी कितनी देर हो गई है तुम्हारे यहां नेट खराब चल रहा है क्या कुछ नेट की प्रॉब्लम है तुम्हारे यहां अभी वो थोड़ा सा छटपटाहट में है कि ऊपर लो ऊपर लो अभी बताता हूं बताता हूं वो पूरा पढ़ के नहीं आए थे वो उनको जितना रटा दिया कि यहां पर देखो यहां जाके इससे लड़ो उससे लड़ो वो उतने रटा रटाए पे आए थे अभी तो मैं वीडियो आपका हां आपका और वीडियो नहीं देखते हैं क्या ये लोग जब फॉर्म भरते तो और वीडियो नहीं देखे क्या

00:23:35:18 ये सब चीज तो आपने चेहरा दिखाकर चर्चा होती है अमित को तो ऊपर लो ना हां अमित बताओ अरे अरे भाई सुभाष भाई आप डर क्यों रहे हो मेरे से चर्चा करने में इतना फालतू बात बोलोगे अमित हम तुमको भगा टू द पॉइंट बात करो उसी पे आ गए टू द पॉइंट बात करो उसी उसी पे आ गए कल जिस पर चर्चा किए थे उसी पे आ गए ये डर गए भाग गया ये हो गया वो हो गया करने लगते हैं जब इनका इनका पारा हल्का होने लगता है तो व्यक्तिगत कटाक्ष जैसे उजेश पांडे जाहिलियत मूर्खता बदतमीजी ये क्या है जब हमारा पला हल्का होने लगे तो व्यक्तिगत कटाक्ष करने लग

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 24:47 · 13 Feb 2026

क्या भगवान श्री कृष्णा से मोक्ष नहीं मिलता

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