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00:00:02:02 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और जैसा कि सभी को जानकारी है 12 जुलाई को दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस में दिल्ली में पूज्य जगतगुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर जी गुरुदेव महाराज का प्राकट उत्सव मनाया जा रहा है। आप सभी वहां पर आमंत्रित है। वहां आए और उनसे अपने जीवन के लिए, राष्ट्र के लिए, धर्म के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करें। उनकी दिव्य वाणी से स्वयं को अनुित करें। अभी हमारी चर्चा है इस के एक फॉलोअर हैं जो आए हैं। मैं उनको ले लेता हूं सबसे पहले।
00:00:51:13 जय श्री राम नीरज जी। जय श्री राम। जय श्री राम। जी नीरज जी आप सबसे पहले मैं अपना परिचय जी बिल्कुल परिचय से पहले मैं दो शब्द आपके लिए भी कहूंगा मैंने आपके काफी वीडियो देखे और मुझे बहुत अच्छा लगा कि आपने इस चर्चा पर अपनी सहमति जताई मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करना चाहता हूं और अब मैं अपना थोड़ा सा संक्षिप्त परिचय दे देता हूं। मेरा नाम नीरज कुमार नागर है और मैं जयपुर से बिलोंग करता हूं और ग वैष्णव परंपरा को से मैं काफी प्रभावित हूं और अभी ऑफिशली ऐसा तो नहीं है कि मैंने किसी से दीक्षा ले रखी है लेकिन मैं अपने शास्त्रों में थोड़ा सा मेरी रुचि है तो मैंने जब आपके वीडियो देखे तो मुझे लगा कि आपने सनातन के लिए आप काफी अच्छा कर रहे हो तो एक बार कुछ चीजें ऐसी थी जिन पर चर्चा कर सके। मेरा उद्देश्य यहां ऐसा भी नहीं है कि मैं अपने आप को विद्वान दिखाना या किसी को नीचा दिखाना बिल्कुल भी नहीं है। बस खाली एक चर्चा जो करनी है उसके लिए आपने जो सहमति जताई उसके लिए धन्यवाद। जी बहुत बढ़िया तो अभी आप दीक्षित नहीं है और केवल इसको जी बिल्कुल इसको हम फॉलो कर मतलब ग हां उसके जो कुछ चीजें हैं वो मेरे को अच्छी लगती है और थोड़ा सा उनको
00:02:06:19 पसंद कर आप जो बार-बार गड या वैष्णव कह रहे हैं तो आप यह मानते हैं कि आपकी जो स्क की जिस को आप जो समझ रहे हैं वो गौ वैष्णव परंपरा से जुड़ा हुआ है। जी बिल्कुल ऐसा मेरा मानना है और इसमें मैंने थोड़ा सा अध्ययन भी किया था। तो इसमें एक चीज तो निकल के आती है कि स्कॉन पूरी तरह से गॉन में भी एक्चुअली एक तो जो स्कॉन बोर है और एक मुंबई है वो एक दो चीजें है लेकिन फिर भी मैं ये कहूंगा कि इस ग वैष्णव परंपरा से हम मेरे को लगता है कि हां है उससे जुड़ा हुआ है। अच्छा तो इस जब गड़िया वैष्णव परंपरा से जुड़ा हुआ है तो इसका अर्थ यह है कि इस का निर्णय करने वाला कोई गौडिया वैष्णवाचार्य है।
00:02:59:18 जी बिल्कुल कौन है? आप एक बार दोबारा बोल पाएंगे मैं सुन नहीं पाया। देखिए परम जैसे हम कह रहे हैं कि हम शंकराचार्य से शंकराचार्य परंपरा से जुड़े हुए हैं। ठीक है। आपको आवाज आ रही है मेरी? जी जी बिल्कुल आप कह रहे हैं कि मैं कह रहा हूं जैसे मैं कह रहा हूं जैसे मैं कह रहा हूं कि मैं शंकराचार्य परंपरा से जुड़ा हुआ हूं। ठीक है? तो मेरे धर्म का निर्णय करने वाला शंकराचार्य गद्दी पर बैठने वाले जो शंकराचार्य होते हैं वो हैं। ठीक है। जी बिल्कुल जी। तो कौन कौन सा गौ वैष्णव परिवार का जो आचार्य है गौ वैष्णव परंपरा से जुड़ा हुआ जो इस का निर्णय कर रहा है
00:03:52:19 जी हम एक्चुअली जो चैतन्य महाप्रभु थे वो गौर वैष्णव परंपरा से ही थे और उन्हीं से और सबसे पहले जो परंपरा भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब मैंने पहले आप नाम तो बताइए आप पीछे चैतन्य महाप्रभु का नाम बताया ना मैंने अभी अभी अभी अभी जो है प्रभुपाद जी हमारे जो एक एक मिनट भाई साहब एक मिनट एक बात थोड़ी सी घूम जाती है फिर थोड़ा सा चीजें आपने कहा था व्यवस्थित रूप से चर्चा करने आए आए हैं आप तो आप चैतन महाप्रभु के बाद तो बहुत सारी चीजें हैं ना बीच में मैं कह रहा हूं अभी इस का निर्णय अभी इस का निर्णय कौन सा गौ वैष्णव आचार्य कर रहा है इस का निर्णय प्रभुपाद श्रील प्रभुपाद श्रील प्रभुपाद श्रील प्रभुपाद जी तो ऐसे अगर कोई यह कहे कि मेरा निर्णय स्वयं कृष्ण कर रहे हैं तो चलेगा आपको किसका मेरा खुद का मेरा निर्णय कोई ये कहे मैं जो है एक प्रामाणिक परंपरा से हूं और मेरा निर्णय कृष्ण भगवान कर रहे हैं और मैं ये बता रहा हूं कि फुटबॉल खेलने से मुक्ति मिलेगी मानेंगे आप जी अगर कृष्ण कह रहे हैं तो बिल्कुल मानेंगे क्यों नहीं मानेंगे तो मुझे तो कह मुझे कृष्ण अगर ऐसा कह रहे हैं मुझे कह रहे हैं तो बिल्कुल मानिए
00:05:08:12 तो आप माला आज से माला आज से मालाजाप छोड़ के आप जो है फुटबॉल खेलेंगे। जी नहीं बिल्कुल मेरे से तो नहीं कहा ना मेरे से तो कहा ही नहीं उन्होंने आपसे आप कह रहे हैं कि मेरे से कहा है तो आप ऐसा कीजिए मेरे से अगर कृष्ण ऐसा कहेंगे मैं समझ गया तो फिर प्रभुपाद जी का वो बताइए आप प्रभुपाद जी आपके आज के टाइम के निर्णायक है इसका सबूत दीजिए हमारे गुरु परंपरा के इसमें सबूत क्या दूं मैं बताइए अरे तो इसमें क्या सबूत दूं कि श्री कृष्ण मुझे कह रहे हैं कि नहीं कह रहे हैं इसमें क्या सबूत दूं तो मैंने तो मांगा ही नहीं आपसे सबूत ही नहीं मांगा मैंने तो आपसे आप मैंने तो आपसे सबूत ही नहीं मांगा। इसका इसका मतलब है आप कोई ऐसी बात यहां पर कह रहे हैं जो आप यह नहीं चाहते कि वो प्रामाणिक रूप से मानी जाए। नहीं ऐसी बात क्यों नहीं कहा? हमारे गुरु श्री प्रभुपाद जी है। इसमें ये तो सभी जानते हैं। इसमें मेरे पास कोई लेटर मैं बता रहा हूं। आपके और मैंने ये भी ये भी मैंने अरे भाई ये भी मैंने स्टार्टिंग में क्लियर कर बोलने देंगे कि नहीं? बोलने देंगे कि नहीं? आपके आपने ऐसी बात नहीं है। आपने आप बोलिए बोलिए आपके गुरु श्री प्रभुपाद जी थे। वर्तमान में उनकी बात आपको प्रमाणिक एक मिनट
00:06:23:20 मेरी बात पूरी नहीं हुई है। आप फिर में कूद पड़ रहे हैं। इसीलिए चीजें बिगड़ बस। आप लोग रट करके आते हो कि मुझे कैसे करना है वहां पर जिससे कि यह मामला सुलझने की वजह बिलकुल भी बिल्कुल भी बिलकुल भी है। ऐसी बात भी नहीं है। मेरी लाइन आप मेरी लाइन पूरी क्यों नहीं होने दे रहे? फिर बार-बार भी ठीक है आप बोलिए बोलिए आप आप जब कहोगे तब मैं बोलूंगा। ठीक है आप बोलिए। ठीक है। तो श्रील प्रभुपाद जी इस समय वर्तमान में हमारे बीच में नहीं है। ठीक है। जी। शरीर हमारे बीच में नहीं है। जिस तरह से कृष्ण नहीं है। अब मैंने कहा कि मुझे मेरे मेरे जो निर्णय करने वाला है वो करने वाले हैं कृष्ण। तो क्या आप मुझे प्रमाणिक मानेंगे? तो आप आप कह रहे हो कि क्योंकि मेरे से तो कृष्ण ने नहीं कहा है तो मैं आपकी बात पर बिलीव नहीं कर सकता। इसका मतलब मेरी बात आपके लिए प्रमाणिक नहीं है और सही बात है नहीं होनी चाहिए। मगर वहीं पर आप क्या कह रहे हो जो सशरीर प्रत्यक्ष रूप से हमारे बीच में नहीं है। उनका नाम आप ले रहे हो कि इस का निर्णायक प्रभुपाद जी है। प्रभुपाद जी हमारे बीच में नहीं है। वर्तमान में प्रत्यक्ष रूप से जैसे आप मुझसे चाहते हो कि आपको प्रमाण प्राप्त हो कृष्ण का ऐसे ही जिस व्यक्ति का मुझे प्रमाण प्राप्त
00:07:38:24 आप करा सको वो व्यक्ति कौन है इस का निर्णायक वो पूछा है मैंने आपने कह दिया शील प्रभुपाद जी निर्णायक है शील प्रभुपाद जी हमारे बीच में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित नहीं है तो जिस व्यक्ति का आप मेरे समक्ष प्रत्यक्ष एक एक मिनट जिस व्यक्ति का आप मेरे समक्ष प्रामाणिक रूप से प्रत्यक्ष रूप से यह दिखा सको कि यह है हमारे निर्णायक उस व्यक्ति का नाम बताइए ना जी अभी मैं जो हूं वो हरे कृष्णा मूवमेंट है। उसको मैं फॉलो करता हूं। है ना? और अभी मेरा जो दीक्षा तो हुआ मैंने आपसे क्या पूछा? मैंने आपसे क्या पूछा? वर्तमान का श्रील प्रभुपाद जी के बाद उनके जाने के बाद देह त्याग के बाद या परलोक गमन के बाद या जिस लोक में भी वो गए हो उसके बाद आज वर्तमान में आपका प्रत्यक्ष निर्णायक निर्णय करता कौन है? जिसका कि प्रत्यक्षता के साथ नाम बता सके। जी जी मैं इसमें जवाब दे देता हूं। आज के समय में जो निर्णायक है और प्रभुपाद जी ने जो जो ऋित्विक सिस्टम अपॉइंट किया था ऋत्विक आचार्य तो उसमें उन्होंने ऐसा नहीं कहा कि आज अब मेरे बाद में ये गुरु रहेंगे। ऐसा नहीं कहा। उन्होंने एक लेटर दिया था
00:08:54:00 जुलाई 9 जुलाई 1977 का एक लेटर है जिसमें उन्होंने यह बोला था कि आज के बाद जो परंपरा होगी वो ऋत्विक परंपरा से चलेगी दीक्षा जो भी होगी वो ऋतुिक परंपरा से होगी गुरु मैं ही रहूंगा यानी कि मेरे बिहाफ पर ऋत्विक आचार्य इसमें गुरु दीक्षा देंगे और गुरु मैं ही रहूंगा इसमें आगे अभी कोई गुरु नहीं है हमारी में तो हमारी जो एचकेएम है उसमें कोई गुरु नहीं है हम श्री प्रभुपाद जी को ही गुरु मानते हैं और वो जो लेटर है वो जो समझ गया इसमें लिखित भी है आपकी बात समझ गए आपकी बात आपकी बात समझ गई इसका मतलब यह है कि पहली बात तो क्लियर कर ले कि आप जो प्रभुपाद जी की जो ब्रांचेस निकली है उनमें से आप रतिक रतिक वाले हो आप है ना जी बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल ठीक है ठीक है तो अब आप मुझे ये बता दीजिए कि परंपरा का महत्व क्या है क्यों होती है परंपरा परंपरा परंपरा इसलिए बनाई जाती है कि जो एक्चुअल ज्ञान है उसको पीढ़ी दर पीढ़ी सही तरीके से आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना। इसी इसीलिए परंपरा में थोड़ा सा थोड़ा सा थोड़ा सा उदाहरण डाल के इसको प्रैक्टिकली रूप से मुझे बताइए। परंपरा क्या उपयोग है परंपरा? जैसे कि जैसे कि मान लीजिए कोई गुरु जैसे चैतन्य महाप्रभु थे। एक जैसे अभी आपने
00:10:09:06 उदाहरण के लिए कहा तो मैं आपको उदाहरण देकर बताता हूं। जैसे चैतन्य महाप्रभु थे। अब चैतन्य महाप्रभु ने कृष्ण के बारे में जो बताया तत्व से जो बताया है ना फिर उनके उन्होंने अपने अपने शिष्य जो भी उनके जो शिष्य रहे आगे की परंपरा में जो दूसरे अगले गुरु रहे उनको बताया फिर उन गुरु ने अगले गुरु को बताया तो इस तरीके से क्या है कि ज्ञान जो परंपरा से चलता है ना वो वही सही मायने में लास्ट तक पहुंच पाता है और अगर परंपरा से ज्ञान नहीं चलता है हां हां बताइए बताइए बताइए बताइए परंपरा से अगर ज्ञान नहीं चलता है तो उसमें मिला मिलावट होने की या उसमें कुछ चीजें ऐसी मिलावट हो जाती है जिससे कि वो ज्ञान अलग डायरेक्शन में चला जाता है। इसलिए परंपरा होना बहुत जरूरी है क्योंकि परंपरा से जो ज्ञान मैं समझ गया समझ गया समझ गया उसको रिपीिटेटिव बोल के क्या करेंगे आप बोल तो दिया आपने ठीक है ठीक आगे पूछिए फिर अब अब अब प्रश्न ये आता है कि परंपरा का मतलब ये हुआ कि हमारे जो पूर्वाचार्य थे या उनसे पहले जो भगवान थे उन्होंने क्या कहा है एज इट इज उनकी बात का मतलब क्या था क्योंकि एक ही शब्द के कई अर्थ निकल सकते हैं। उनकी बात का सही वास्तविक अर्थ क्या था? यह उनसे जुड़ा हुआ प्रामाणिक रूप से जो उनका शिष्य है वह बताएगा।
00:11:24:24 इसीलिए होती है ना परंपरा। फिर उन्होंने क्या कहा? उन्होंने क्या कहा? ये उनसे जुड़ा हुआ प्रामाणिक रूप से जो शिष्य है वो बताएगा। है ना? और फिर उन्होंने क्या कहा ये वो बताएगा। ठीक है? तो अब बात आप ये कह रहे हैं कि आपके यहां पर प्रभुपाद जी ने क्या कहा है? यह सीधे प्रभुपाद जी से जानो। आज वर्तमान में उनका कोई उत्तराधिकारी है ही नहीं और ना आगे होगा। यह परंपरा है।
00:11:57:10 जी मैं इसमें आपको एक बात बता हां जी बिल्कुल मैं बताता हूं कि होता क्या है कि जो गुरु का आदेश होता है ना वो हमारे लिए सर्वोपरि होता है। गुरु ने जब आदेश दिया कि ऋतु परंपरा से इसको चलाया जाएगा। तो आप आप नहीं आप मेरी बात सुन लीजिए। आप मेरी भी बात सुन लीजिए। मैं बात आपकी मैं बात आपकी सुनूंगा। देखिए मैं बात आपकी सुनूंगा। देखिए होता क्या है? जैसे मैंने पूछा मैंने पूछा कि क्या इस कृष्ण और अल्लाह को एक मानता है? तो व्यक्ति ये कहने लगता है कि वहां देश में ऐसी प्रचार करना था ऐसा करना था। इसलिए उन्होंने ऐसा कहा। मैंने ये नहीं पूछा है। मैंने ये पूछा है कि क्या पहले मान्यता आप स्थापित करिए। तो कहने का मतलब है कि जो आपने अभी परंपरा की डेफिनेशन दी थी वही आप फॉलो कर रहे हो या उस डेफिनेशन के इत जाकर के अपने गुरु द्वारा कुछ नया सिस्टम दिया गया है वो आप फॉलो कर रहे हो यदि वो फॉलो कर रहे हो तो वो बाद की बात है कि वो गुरु की आज्ञा माननी है कि नहीं माननी एक मिनट भाई साहब एक मिनट पहले अपना क्लेम क्लियर करिए कि मैं कर क्या रहा हूं मैं अभी मैंने मेरे से जब परंपरा के बारे में पूछा गया तो मैंने बहुत अच्छे से परंपरा बताया कि परंपरा का महत्व यह है कि पूर्वाचार्यों ने जो कहा यानी कि जो ज्ञान
00:13:12:14 है जो भगवान से प्रारंभ होते हुए पूर्वाचार्यों के माध्यम से हम तक आया है तो परंपरा का महत्व ये होता है कि पिछले पूर्वाचार्य ने क्या कहा है ये उनका प्रमाणिक शिष्य हमें बताएगा है ना ये आपने परंपरा का महत्व बताया परंतु जब परंतु जब आप ऋत्विक में आते हैं तो आप यह कहते हैं कि पूर्वाचार्य ने यह कहा है यह पूर्वाचार्य ही बताएंगे जो कि हमारे बीच में नहीं इस समय वर्तमान में कोई उनकी ओर से प्रामाणिक रूप से कुछ बताने वाला कोई नहीं है। यह आपने कहा। अब अगर अगर आप ऐसा मान रहे हैं और इसके मानने के लिए आपके पास एक कारण है। एक लॉजिकल कारण है। वो बात एक अलग है। पर पहले अपने ये क्लेम को क्लियर करो कि अब हम उस परंपरा वो जो परंपरा जो क्या कहते हैं? वो जो परंपरा की प्रक्रिया है आपके पास शोर हो रहा है। परंपरा की जो वो विधि है जो पहले से चली आ रही है जिसका मैंने अभी विवरण दिया था। मैं उसको नहीं मान रहा हूं। अब मैं अपने गुरु द्वारा दी गई एक नई परंपरा प्रणाली को मान रहा हूं। जो वो परंपरा प्रणाली ऐसा नहीं हां मैं अब मैं बोलूं। हां अब बोलिए। अपने क्लेम को पहले क्लियर करिए आप कि
00:14:27:20 आप वही परंपरा प्रणाली को फॉलो कर रहे हैं या गुरु के द्वारा इजात की हुई कोई नए सिस्टम को फॉलो कर रहे हैं। एक्चुअली इसमें ऐसा होता है कि जब जब किसी आगे चलकर कोई परिस्थिति कुछ कुछ चीजें ऐसी आज इस जो है वो वर्ल्ड वाइड संस्था है वो कोई पर्टिकुलर एरिया में सिमटी हुई नहीं है तो उसके लिए क्या है कि ये सारी चीजों को ध्यान में रखते हुए ऋत्व परंपरा का सिस्टम अपनाया है ताकि जैसे दूसरे देशों के लोग भी होते थे सब देखो एक गुरु जाके दीक्षा देने में प्रॉब्लम तो इनहीं सारी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही ऋत्व परंपरा का प्रभुपाद जी ने भाई साहब भाई साहब आप फिर से जो है अलग जा रहे हैं। मैंने कहा पहले आप अपना क्लेम वो करिए। आपने कहा कि परंपरा वो होती है जिसमें जो शिष्य होता है वो अपने पूर्वाचार्य की बात को बताने के लिए अधिकृत होता है। ठीक है? अब प्रभुपाद जी ने क्या कहा है इस बात को बताने के लिए कोई अधिकृत नहीं है। और आपको सीधे प्रभुपाद से ही जानना है। प्रभुपाद जी बीच में है नहीं। उनकी किताबें हैं। उनकी किताबों की उनकी किताबों की उनकी किताबों की एक एक लाइन के कई अर्थ निकाल सकते हैं। मैं निकाल सकता हूं। मैं अभी आपकी किताब से भगवत गीता से ही आपको जो है अद्वैत को मानने वाला बना दूंगा। जबकि अद्वैत तो आपके यहां माना नहीं गया है। कहने का मतलब निर्णय
00:15:43:13 प्रभुपाद जी जब प्रेजेंट नहीं है तो उनकी किताब में क्या लिखा है इस बात का निर्णय करने के लिए वर्तमान में जो आपने जो परंपरा परंपरा प्रणाली बताई थी परंपरा प्राप्त ज्ञान को प्राप्त करने की वर्तमान में वो विधा आपके यहां लागू है कि हम निर्णय कर सके। प्रभुपाद जी ने यहां पे कहा क्या है? 525 में जी जी बिल्कुल बिल्कुल है बिल्कुल है क्योंकि प्रभुपाद जी के बाद प्रभुपाद जी के जो शिष्य थे प्रभुपाद जी के जो शिष्य थे तो जो जो हमारे वैष्णव सीनियर डिवोटी है वो इस सारी चीजों को मैंने आपसे प्रश्न क्या किया मैंने शुरू में प्रश्न क्या किया कि गौडिया वैष्णव संप्रदाय का गौडिया वैष्णव संप्रदाय का गौडिया वैष्णव संप्रदाय का कौन सा आचार्य है आपने कहा था हम गौडिया वैष्णव तो गडिया वैष्णव संप्रदाय का कौन सा आचार्य है जो आपका निर्णय कर रहा है? ठीक है? तो आपने कहा जी कर रहे हैं। अब आप आए हैं कोई सीनियर अब आप आए हैं कोई सीनियर डिवोटीजेंट है। [हंसी] वो रिप्रेजेंटेटिव है। वो प्रभुपाद जी के रिप्रेजेंटेटिव हो। वो सारे उनका कोई परिकुलर एक नाम नहीं है। एक नाम नहीं है। एक नाम नहीं है कि एक किसी एक पर्टिकुलर का वो सारे मिलके बता रहे हैं
00:16:58:14 और वो सब अपने आप को प्रभुपाद जी का शिष्य कहते हैं और वो प्रभुपाद जी की शिक्षाओं को ही बताते हैं और हमें जब भी कोई चीज समझनी होती है हम उनसे ही समझते हैं। उन्हीं के पास जाते हैं कि प्रभुपाद जी ने इस पर क्या कहा। आपकी आवाज आपकी आवाज भी हां ठीक है यानी कि कुछ सीनियर डिवोटीज है एक नहीं है बहुत सारे हैं वो प्रपाद जी के वो प्रभुपाद जी के सीनियर डिवोटी है और वो जो है ये बता रहे हैं कि प्रभुपाद जी ने क्या कहा था ठीक है जी बिल्कुल जी तो यानी कि इस का निर्णयकर्ता एक नहीं है कई है बहुत सारे हैं नहीं ऐसा नहीं हो सकता ना क्योंकि वो तो सारे के सारे प्रभुपाद जी की शिक्षाओं को फॉलो कर रहे हैं। वो निर्णय करता थोड़ी है। वो तो उनकी शिक्षाओं को फॉलो कर रहे हैं और फॉलो करने वाला अपने अपनी विचारधारा थोड़ी लगाएगा। वो तो जैसा शिव प्रभुपाद जी ने कहा उनकी जो पुस्तकें है उनकी पुस्तकों के माध्यम से उनकी जो शिक्षा है उनको आगे बता रहे हैं। उनकी शिक्षाएं तो निर्णय की बात ही नहीं है ना। निर्णय की बात ही नहीं है। मैं बता रहा हूं। निर्णायक की बात है। निर्णायक की बात है। ऐसा नहीं है। ऐसा दूसरे अरे भाई वो सुनोगे कि नहीं सुनोगे? सुनोगे कि नहीं? मैं सुन रहा हूं। मैं बिल्कुल सुन रहा हूं। आपको हाइपर होने की जरूरत नहीं है। मैं भी शालीनता से नहीं नहीं नहीं मैं बिलकुल शालीनता
00:18:13:15 से जवाब दे रहा हूं। मैं बीच में नहीं बोल रहा। आप जब कह रहे हैं मैं तभी बोल रहा हूं और आप जब कहोगे मैं तभी बोलूंगा और अभी आप म्यूट हो अब मुझे सुन लो। और म्यूट इसलिए किया कि आप बीच में इंटरप्ट कर देते हैं। हां तो आप यह कह रहे हो निर्णय करता कोई नहीं है। जबकि आपसे जब मैंने पूछा कि जब हमें यह जानना होगा कि इस बात के कई मतलब निकल रहे हैं तो हम किससे जाने? तो आपने कहा कि भाई कई सीनियर डिवोटीज हैं उनसे जानेंगे। वही होता है निर्णय। वही निर्णय करता है। एक मिनट अभी आप म्यूट हो। अभी आपकी आवाज नहीं आएगी। अभी आप म्यूट हो। तो निर्णय करने का मतलब कि एग्जैक्ट प्रभुपाद जी ने क्या कहा है? इस विषय में आपके कई लोग हैं जो यह निर्णय करते हैं कि प्रभुपाद जी ने क्या कहा है। दूसरी बात यह आती है कि अगर आपके हिसाब से कोई निर्णयकर्ता होना ही नहीं चाहिए था। तो यह जो गुरु शिष्य परंपरा की प्रणाली में जो करते चले आ रहे थे आचार्य गण अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करते थे फिर वो उनका बताते थे अर्थ अगर मधवाचार्य परंपरा की बात करें तो उसमें जो मधवाचार्य
00:19:29:08 जी के स्थान पर बैठते चले आ रहे हैं जो गुरुजन है हां तो वह सब व्यर्थ था कि कोई एक व्यक्ति निर्णय करता हो यह बताने के लिए कि माधवा माधवाचार्य जी ने एक्सजेक्टली कहा क्या है पहली बात दूसरी बात यह आती है कि कुल मिलाकर के बात यही आ गई घूम फिर के कि आपको आज की डेट में क्या मालूम है कि कौन सा गौडिया वैष्णव आचार्य है जो प्रभुपाद जी की बात को ज्यों की त्यों आपको बता रहा है। तीसरी बात यह आती है कि प्रभुपाद जी के आ जाने के बाद क्या इस अलग हो गया है गड या वैष्णव संप्रदाय से? बोलिए।
00:20:13:10 प्रभुपाद जी के आने के बाद इस प्रभुपाद जी का ही रहा है। लेकिन कुछ विचारधाराओं को लेकर इस में दो दो भाग हो गए हैं। जैसे एक बोर में आता है और एक है मैंने ये पूछा है। मैंने पूछा है कि जो प्रभुपाद जी के आने के बाद इस या प्रभुपाद जी की आगे की जो मान्यता है वो गौडिया वैष्णव परंपरा से अलग हो चुकी है या गौडिया वैष्णव से जुड़ी हुई है अभी भी अगर जुड़ी हुई है तो इस का जो निर्णय करता है जो भी आप बता रहे हो जो सीनियर डिवोटीज क्या वो सलाह मशवरा लेने निर्देश लेने अपने से पूर्व की जो गद्दी है जिससे प्रभुपाद जी जुड़े हुए थे। क्या उनके पास जा रहे हैं। उनके कंट्रोल में है? अगर नहीं है तो फिर कैसे माना जाए कि वह गिया वैष्णव संप्रदाय से जुड़ा हुआ है। अगर जुड़ा हुआ है तो किससे जुड़ा हुआ है? बताइए। कौन सी कथा? मैं बताता हूं। जी ग वैष्णव परंपरा में जो श्री प्रभुपाद जी हमारे लास्ट गुरु थे। उसमें जैसे आज के समय में अगर हमको कोई चीज सलाह लेनी होती है जैसे सीनियर डिवोटी को तो जो प्रभुपाद जी के जो शिष्य रहे उस समय प्रभुपाद जी ने जिनको अपने हाथों से दीक्षा दी थी प्रभुपाद जी ने जिनके साथ
00:21:28:16 उनका बैठना उठना सारी चीजें उन्होंने पर्सनली जिनको बताई थी तो उन उनसे कुछ सीनियर जो हमारे डिवोटी है इस समय उन्होंने दीक्षा ली उनसे सीखे और जो चीज वो बताते हैं वही एक्चुअल चीज हमको बताते हैं और वही वहीं से हमारी जो सलाह की जो होती है वही से होती है। हो गया अब मैं बोलूं? जी बिल्कुल हो गया। जी बिल्कुल बोलिए। प्रभुपाद जी गडिया वैष्णव संप्रदाय के किस परिवार से जुड़े हुए थे? ग वैष्णव किस परिवार से? ग वैष्णव का तो एक ही परिवार था। पूरा एक ही परिवार था। वर्तमान
00:22:07:25 वर्तमान में गड़िया वैष्णव संप्रदाय के आचार्य हैं कि नहीं है। वर्तमान में जीवित? जी अभी जो ग वैष्णव के जो लास्ट आचार्य थे वो चल प्रभुपाद जी है और उन्होंने अभी वो शारीरिक रूप से आध्यात्मिक रूप से तो अवेलेबल है लेकिन शारीरिक रूप से वो अभी है नहीं उनके अलावा उनके अलावा कोई है गड या वैष्णव संप्रदाय का जो वर्तमान में आचार्य हो हमारी उसमें तो हमने ग वैष्णव ग वैष्णव परंपरा की भी कई शाखाएं निकल चुकी है तो मैं उसके बारे में कोई दावा नहीं करूंगा कुछ नहीं बोलूंगा उसके बारे में मुझे कुछ बताना। इसका मतलब ये है इसका इसका इसका मतलब यह है इसका अर्थ यह है कि गौडिया वैष्णव संप्रदाय से ज्ञान विज्ञान प्राप्त करते हैं श्रील प्रभुपाद जी फिर वो अपना एक कैंप बनाते हैं जिसको नाम देते हैं इसके बाद उस में सारी चीजें वो चलती है जो यह तय करेंगे प्रभुपाद जी और वो भी अब चले गए तो अब उसके बाद जो उनके नाम से बताने वाले हैं जिनका आपने नाम लिया 20 21 लोग वो या और ज्यादा हो संख्या में वो तय करेंगे उनका अब गड वैष्णव संप्रदाय के लोगों से कोई मतलब नहीं है कि उनका कोई हस्तक्षेप हो। इस में क्या होगा, क्या नहीं होगा या है हस्तक्षेप?
00:23:26:04 आप बात को थोड़ा समझे नहीं। मैं इसमें बता देता हूं। क्लियर कर देता हूं। शील प्रभुपाद वही चीजें लागू बात बात क्या है? मैं बता दूं आपको क्लियर। गडिया वैष्णव संप्रदाय के कई प्रामाणिक आचार्य आज भी अवेलेबल हैं। ठीक है? आपके प्रभुपाद जी अगर अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं करके गए तो कोई बात नहीं। गौडिया वैष्णव संप्रदाय के आचार्य गण बैठे हुए हैं। तो उनका हस्तक्षेप है कि नहीं? इस में ऋत्विक में और नहीं है तो फिर काहे कि गौडिया वैष्णव संप्रदाय नहीं है तो फिर कैसे हुआ? या तो कह दो वो ग वैष्णव नहीं है। जो लोग बैठे हुए हैं वह अप्रामाणिक है। पुंडरीिक जी इत्यादि ये सब लोग हां
00:24:10:19 जी बिल्कुल नहीं मैं ऐसा किसी के लिए नहीं कहता। मैं पहले ही मैंने आपको क्लियर कर दिया था कि वो क्या उनके बारे में मेरे को जानकारी नहीं है तो मैं उनके बारे में कोई कमेंट नहीं करूंगा। मैं एक बात बताता हूं कि सरस्वती ठाकुर ने प्रभुपाद जी को अपना ऑथेंटिक शिस्से बनाया है और उनको उनको विश्व में प्रचार करने का अधिकार दिया था। आदेश दिया था कि आप जाओ विश्व में भागवतम और भगवत गीता का प्रचार करो और उसी आदेश का प्रभुपाद जी ने पालन तो थोड़ा सा क्या है बहुत सारी बातें एक साथ बोल देने से क्या होता है कि कोई भी चीज क्लियर ही नहीं हो पाती है उन्होंने प्रचार किया क्यों किया वो एक अलग बात है। हम नमन करते हैं उनकी भक्ति को वो जो प्रचार करते हैं उस चीज को उतने अंश में उनका सम्मान है। सब कुछ है। उन्होंने हरे कृष्ण का जाप किया करा करवाया बहुत अच्छी बात है। मगर बात यहां पर यह हो रही है कि आपने जिस प्रकार से शुरुआत की है कि गड या वैष्णव संप्रदाय से हम अब आप कह रहे हो इस विषय में मुझे जानकारी नहीं बस यही बात थी जो शुरू से रखनी थी आपने ही शुरू में कहा था ना अब आप यह कह रहे हो कि गौडिया वैष्णव से उन्होंने उनको अधिकार किया जब जो फाइनल अथॉरिटी है जैसे शंकराचार्य जी है मान लीजिए शंकराचार्य जी के कई शिष्य होते हैं शंकराचार्य जी के
00:25:25:20 या मधवाचार्य जी के कई शिष्य होते हैं। उन्होंने उनमें से किसी एक शिष्य ने अपनी एक संस्था बना ली। इस इत्यादि उनको कहा कि भाई यह संस्था विशेष रूप से जो कार्य करेगी अपने धर्म का प्रचार प्रसार करेगी अच्छी बात है। पर जो जिस अथॉरिटी से वो ऑथेंटिक हुए थे, वेरीिफाइड हुए थे, सत्यापित हुए थे, वो अथॉरिटी खत्म नहीं हो गई। वो अथॉरिटी पीढ़ी दर पीढ़ी आज भी चली आ रही है। ठीक है? तो अगर उन्होंने कोई एक अलग से संस्था बना ली है और उसमें कुछ ऐसा हो रहा है जो गौ वैष्णव पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही तो यह जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है यह परंपरा से प्राप्त जो गद्दी है यह उसमें हस्तक्षेप करने के लिए ऑथराइज्ड है क्योंकि यह पीढ़ी दर पीढ़ी अवेलेबल ऐसा नहीं है गायब हो गई अब जिसका जो मना है वो करे ऐसा तो है नहीं वो तो अवेलेबल है तो गड़िया वैष्णव संप्रदाय के जब प्रामाणिक आचार्य अवेलेबल है तो आपके यहां पर उनका हस्तक्षेप होना चाहिए जो कि नहीं है। प्रभुपाद जी के नाम पर आप अपनी मनमर्जी की कर रहे हैं। जबकि यहां पर निर्णय करने के लिए गड या वैष्णव संप्रदाय के आचार्य गण अवेलेबल है। अब वो वो प्रचार क्यों किया? उसके लिए कोई क्वेश्चन नहीं है। क्वेश्चन यह है कि यदि आप अपने आप को गड़िया
00:26:40:21 वैष्णव संप्रदाय का से कनेक्टेड कह रहे हैं प्रामाणिक। तो क्या गड़िया वैष्णव आचार्यों का अधिकार है आपके यहां की चीजों में दखलंदाजी करने का? यह बात बोलिए। जी उनको नहीं है। लेकिन मैं इस संबंध में आपसे एक चीज पूछना चाहता हूं। अगर आप मेरे को आज्ञा दे तो मैं पूछूं। हां पूछ आपने कहा कि उनको अधिकार है हस्तक्षेप करने का तो मैं भी ना कर रहा हूं कि नहीं है। है ना? अब मैं इस चीज में आपको एक बात पूछ रहा हूं। अभी आपने एक चीज बोली कि ग वैष्णव परंपरा में बहुत सारे प्रमाणिक गुरु अभी बैठे हैं। है ना? तो वो किस सेंस में आप यह बात बोल रहे हो कि वो बड़ी संस्था है या पुरानी है या लोकप्रियता है या
00:27:26:16 आपकी आवाज रुक रही है अब आ रही है मेरी वॉइस आ रही है वॉइस आ रही है मेरी पिक्चर फ्रीज हो गई है आपकी थोड़ा सा अच्छा अच्छा एक्चुअली यहां थोड़ा नेटवर्क का इशू है हां नेटवर्क का इशू रहता है इस वजह से तो मैं एक चीज पूछ रहा आपसे कि आपने जो कहा कि गुरु बहुत सारे प्रमाणिक आचार्य बैठे हुए हैं तो वो किस सेंस में मैं जानना चाहता हूं कि क्या वो बड़ी गद्दी पे बैठे हैं इसलिए बड़ी गद्दी पे नहीं प्रामाणिक रूप से उत्तराधिकारी नियुक्त है प्रामाणिक रूप से जैसे कोई आचार्य जाता है तो अपना उत्तराधिकारी फिक्स करके जाता है ना ऐसे बहुत सारे आचार्य गौ वैष्णव संप्रदाय के अभी भी हैं। आपके यहां पर कोई नियुक्त नहीं करके गए प्रभुपाद जी किसी को तो आपके यहां पर इनका हस्तक्षेप क्यों नहीं है प्रामाणिक वैष्णवाचार्यों का मुझे मैं एक बात जानना चाहता हूं एक बात बोलूं अब जब सरस्वती ठाकुर हमारे गुरु जी के जो गुरु थे है ना तो उस समय उस समय से ही यह चीज हुई कि बहुत सारे जो शिष्य थे वो अलग से ही ग वैष्णव परंपरा से अलग निकल के उन्होंने अपने मत शुरू कर दिए थे अब कौन
00:28:41:18 प्रमाणिक है क्या उस अभी मैं बात नहीं करूंगा लेकिन प्रभुपाद को सरस्वती ठाकुर नहीं करेंगे करिए ना आप ये मुझे आप एक बात बताइए मुझे मुझे एक बात बताइए चलो मुझे एक बात बताइए क्या क्या प्रभुपाद जी सरस्वती ठाकुर के शिष्य नहीं है क्या उन्होंने उनको आदेश नहीं दिया है ये सारी चीजें प्रभुपाद जी ने क्या कहा है इस बारे में निर्णायक कौन होगा नहीं नहीं मैं ये कह रहा हूं मेरा सवाल नहीं मेरा सवाल यह है कि क्या प्रभुपाद भी सरस्वती ठाकुर के शिष्य नहीं है तो प्रभुपाद जी वही धर्म देंगे ना जो पीछे से चला आ रहा है कि नया धर्म तो क्या उन्होंने उन्होंने तो नया धर्म कहां दिया उन्होंने आदेश दिया ना उन्होंने जो आदेश दिया उसी की तो पालना की जा रही है इनमें से जो अभी आचार्य बैठे हैं मेरी बात एक बार मैं कंप्लीट कर एक मिनट एक मिनट मैं कंप्लीट कर अभी जो आचार्य बैठे हैं जिनका आपने आपने मुझसे प्रश्न पूछा है कि क्या वो उनके शिष्य नहीं है उनके शिष्य होने से वर्तमान में जो इस के आप निर्णायकर्ता बोल बोल रहे हो उनका प्रामाणिक होना और प्रामाणिक रूप से गड वैष्णव संप्रदाय को फॉलो करने वाला होना और प्रामाणिक रूप से प्रभुपाद जी की बातों को एज इट इज बताना सिद्ध नहीं होता है और इसीलिए निर्णय करने के लिए गुरु शिष्य परंपरा होती है कि भाई मेरा उत्तराधिकारी
00:29:56:26 जो होगा मेरा जो प्रामाणिक शिष्य होगा वो तुम्हें वो बताएगा जो मैंने कहा है। उसके बाद वो जब जाएगा तो वो उसका प्रामाणिक उत्तराधिकारी होगा वो तुम्हें वो बताएगा जो उसने कहा है। इसलिए गुरु शिष्य परंपरा होती है। अब आपने कहा कि प्रभुपाद जी ने प्रामाणिक रूप से उनसे सरस्वती जी से शिक्षा ली। ठीक है। उसमें कोई दिक्कत नहीं। ली है। मगर अब उनकी बातों को प्रभुपाद जी की बातों को बताने वाला एज इट इज प्रभुपाद जी नियुक्त करके गए नहीं है। दूसरी बात जो प्रामाणिक वैष्णवाचार्य हैं अवेलेबल जो आपने थोड़ा सा अप्रत्यक्ष रूप से आरोप लगाया कि बहुत सारे लोग थे अपने अपने मत चालू करने लग गए थे। तो आप यह कहिए ना कि गड़ वैष्णव संप्रदाय का प्रामाणिक रूप से कोई भी आज वर्तमान में प्रामाणिक नहीं है। इसलिए कोई हम किसी का हस्तक्षेप नहीं करने यह घोषित करिए और और प्रभुपाद सीधे क्वेश्चन पे आए। प्रभुपाद जी के प्रामाणिक रूप से ज्ञान विज्ञान प्राप्त करने से प्रभुपाद जी के नाम पर जो आज जो ऋतिक में दे रहे हैं निर्णय दे रहे हैं। हालांकि आप यह भी कह रहे हो वो निर्णय नहीं दे वो तो शिक्षा दे रहे हैं। ऐसे तो फिर बिना गुरु परंपरा के कोई भी कह सकता है मैं तो शिक्षा दे रहा हूं। मैं निर्णय दे ही नहीं रहा हूं। यह तो सीधे आपके गुरु कृष्ण है। मैं बोलूं कोई भी शिष्य होता है वो अपना निर्णय नहीं देता। वो जो
00:31:12:02 अपने गुरु की जो शिक्षाएं होती है उन्हीं को आगे बढ़ाता है। उन्हीं को अच्छे से समझाते हैं। इसलिए यह कहना है कि वो उनका अपना निर्णय मैं इस बात को नहीं। फिर गुरु शिष्य परंपरा की आवश्यकता क्या रह जाएगी? अगर कोई भी वह नहीं करता है तो फिर गुरु शिष्य परंपरा की आवश्यकता क्या है? कोई भी ऐसा करता ही नहीं जब कोई मिलावट कर ही नहीं सकता है अपने गुरु की बातों में तो कोई भी कर सकता है। फिर तो कोई भी बात बता सकता है। मैं कह दूं मेरे गुरु श्री कृष्ण है। उनकी बात मैं बता रहा हूं आपको। हम
00:31:48:19 एक एक मिनट एक मिनट मानेंगे। मालूम है उनको लेकिन मेरी आपसे एक रिक्वेस्ट है कि आप मेरे को पूरा बोलने दिया करो। आप माइक को म्यूट मत किया करो। इससे क्या है कि मेरे को मैं अपनी पूरी बात अच्छे से रख नहीं पाता हूं। मेरी पूरी बात खत्म हो जाए। आप मेरे को म्यूट कर देते हो। आपके बीच में अगर मैं थोड़ा सा भी एक शब्द भी बोल जाऊं तो आप मेरे को मेरे को चुप करा देते हो। तो मैं जब अपनी बात रख रहा हूं तो मैं भी करता हूं कि मेरे को आप पूरी मेरी अपनी पूरी बात रखने दो। बोलो। आप जब आप जब व्यर्थ में बोलते हैं, एक्स्ट्रा बोलते हैं, अनावश्यक बोलते हैं तो मुझे आपको याद दिलाना पड़ता है कि आप जो है अनावश्यक ना बोले, उससे हम लोग भटक जाएंगे मामले से। दूसरी बात आपने शुरू में कई बार मेरे बीच में बोलते समय आपने प्रश्न कर लिया और मैं बोल रहा हूं और बोलते समय आपने बीच में ये सब चालू किया तब मुझे आपको म्यूट करना पड़ा। अब मैं दोबारा से एक काम करता हूं। अब मैं थोड़ी देर तक म्यूट नहीं करूंगा। मगर मैं देखूंगा कि आप ऐसा ना करें कि आप मुझे काटे जब मैं बोल रहा हूं। जी बोलिए
00:32:50:19 बोलिए हां आपने एक चीज कही कि अभी इस में कोई भी निर्णायक करता नहीं है यानी कि प्रभुपाद जी की जो शिक्षा है वो एज इट इज है कि नहीं है उसको बताने वाला कौन है और अपना मैं यहां पर एक चीज क्लियर करना चाहता हूं कि जो भी जो भी अपने गुरु के शिष्य होते हैं वो अपनी तरफ से कोई निर्णय को किसी के ऊपर थोपते नहीं है। वह अपने गुरु की शिक्षाओं को ही आगे अपने जो जो जूनियर डिवोटी है उनको बताते हैं और उन्हीं की शिक्षाओं का प्रचार प्रसार करते हैं। इसलिए मेरा यह मानना बिल्कुल भी नहीं है कि वो अपने निर्णय को थोप रहे हैं। बिल्कुल भी नहीं है। हां इस विषय में आपकी क्या विचारधारा वो अलग बात हो सकती है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। अब इतनी बात पे ही बात करेंगे। अब इससे आगे मत बढ़िए। इतनी ही बात की है मैंने। मैं इतनी रुक गया। इतनी बात बोल के मैं रुक गया। मैं आगे नहीं बढ़ रहा। ठीक है। ठीक है। तो जो भी शिष्य होते हैं वो अपनी गुरु की चीजों को एज इट इज आगे बढ़ाते हैं। ऐसा नहीं करते हैं कि वह उसमें मिलावट करें। जी बिल्कुल। तो फिर मिलावट की किसने शास्त्रों में? कौन करता है? शास्त्रों में मिलावट? हां। शास्त्रों में मिलावट कौन करता है? कौन से शास्त्रों में आपने आपने परंपरा की आवश्यकता बताई ना कि परंपरा की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि शास्त्रों में मिलावट हो जाती है। इसलिए जो प्रामाणिक मैंने मैंने मैंने
00:34:06:02 नहीं मैंने कभी ये नहीं कहा कि शास्त्रों में मिलावट हो जाती है। समझने के पपस से मैंने कभी ये नहीं कहा कि शास्त्रों में मिलावट हो जाती है। आपने एक चीज कही ना कि एक ही शब्द के कई अर्थ निकल सकते हैं। तो उस सेंस में क्या है कि उस शब्द का एक्चुअल अर्थ क्या है? इसको समझने के लिए हमें गुरु शिष्य परंपरा चाहिए होती है। मैंने यह कभी नहीं कहा कि शास्त्रों में मिलावट हो जाती है। ये तो आप बोल रहे हो। हो गया हो गया। समझने के समझने के पपस में मान लेते हैं। समझने के पपस में ऐसा हो सकता है कि गुरु ने जो कहा वो शिष्य कुछ और बता रहा हो। ऐसा हो सकता है? नहीं शिष्य नहीं बताएगा लेकिन शिष्य परंपरा से हटकर अगर कोई और से अगर इस बात में पूछेंगे तो वो बता सकते हैं। ये ये अंडेशा रहता है। इस वजह से हमें गुरु शिष्य परंपरा की आवश्यकता है क्योंकि गुरु से जो शिष्य तो एक एक मिनट शिष्य से हटकर और कोई अगर बताएगा तो वो अगर जो बताएगा उसमें मिलावट हो सकती है। मगर जो ये गुरु से जो शिष्य जुड़ा होगा उसमें मिलावट नहीं हो सकती है। देखो पहली बात तो ये कि मिलावट शब्द का मैंने कभी प्रयोग नहीं किया। मिलावट शब्द आप प्रयोग कर रहे हैं। मैं बात कर रहा हूं समझने की क्योंकि मैं मैं समझने में मिलावट की ही बात कर रहा हूं। आप क्यों घुमा रहे हैं बात को? मैं समझ में मिलावट की बात नहीं मिलावट आप मिलावट क्यों तो आप यही बोल दो ना फिर कि समझने में फिर समझने में भेद हो सकता है। आप यही बोल दो फिर मिलावट
00:35:21:08 क्यों बोल रहे हो फिर? किसी का हो सकता है उसको समझने में ऐसा लग रहा हो। मिलावट तो मैं वह बोलूं जो आप कह रहे हैं। समझने में मिलावट भी वही है जो समझने में मिलावट का अर्थ भी वही है जो समझने में भेद का अर्थ है। आप शब्द को पकड़ के परेशान मत होइए। समझने में मिलावट का अर्थ भी मेरा वही है जो समझने में भेद का अर्थ है। मिलावट मतलब जो गुरु ने कहा वह आपको नहीं मिला। दूसरी चीज मिली। यह हो गई मिलावट। बात खत्म। तो ऐसा हो सकता है कि जो गुरु ने कहा हो जो ऐसा हो सकता है कि जो गुरु ने कहा हो वह शिष्य ना बताए बल्कि उसमें कुछ समझ में कुछ उलट पुलट करके कुछ और बता दे ऐसा हो सकता है कि नहीं
00:36:08:19 बताइए हां अगर गुरु शिष्य गुरु शिष्य परंपरा से बाहर से अगर हम ज्ञान लेंगे किसी और से तो ऐसा बिल्कुल हो सकता अच्छा ये डिसाइड कैसे होगा कि कौन अगर हम गुरु शिष्य परंपरा से बाहर से ज्ञान लेने की कोशिश करेंगे तो जी बिल्कुल ऐसा हो सकता है। ये डिसाइड ये डिसाइड कैसे होगा कि कौन गुरु शिष्य परंपरा के बाहर है कौन अंदर है? जब दोनों ये कहे कि मैं भी जुड़ा हुआ हूं उनसे। जब दोनों ये कहे कि मैं भी उनका ही शिष्य हूं। आपकी वॉइस
00:36:42:00 आपकी वॉइस थोड़ी कट रही है। मुझे आप एक बार दोबारा बताएंगे आप। मैं कह रहा हूं आपका वीडियो यानी कि सबसे पहली बात तो यह है कि गुरु की बात का अर्थ क्या है? इस बात का निर्णय करने के लिए गुरु के प्रामाणिक शिष्य ही अधिकृत हैं। पहली बात तो ये क्लियर हो गई। जी बिल्कुल बिल्कुल यानी कि ऋत्विक में इस समय यानी कि ऋत्विक में इस समय कुछ लोग निर्णायक हैं प्रभुपाद जी की बात का अर्थ बताने वाले के रूप में सब लोग नहीं जी वो प्रभुपाद जी के शिष्य ही है हां दूसरी बात ये है कि जब सब लोग ये कह रहे होंगे जब सब लोग ये कह रहे होंगे कि मैं भी प्रभुपाद जी का शिष्य हूं तो फिर हम कैसे माने किस कैसे पता करेंगे कि कौन कौन सा शिष्य है जो प्रभुपाद जी की बात एज इट इज बता रहा है जी हमारे पास ऐसी तो कोई समस्या आई नहीं और ऐसे कोई भी उठ के थोड़ी बोल देगा कि पेपर में बात क्यों उसके पास गुरु मैं समझ गया आपके पास समस्या नहीं आई तो फिर ये इस और हरे कृष्णा मूवमेंट में अंतर क्यों आ गया
00:37:46:21 जी बिल्कुल ये ये थोड़ा अलग है नहीं इनमें ये ये अलग भेद कभी नहीं आया कि कोई ये कह रहा है कि तुम प्रभुपाद जी के शिष्य हो तुम प्रभुपाद जी के शिष्य नहीं हो ऐसा भेद कभी नहीं है वहां परे उनकी बात को एज इट इज बताने के संबंध में भेद है कि नहीं? यह भेद नहीं है कि तुम प्रपा जी के शिष्य नहीं हो। उनकी बात को एज इट इज बताने के संबंध में भेद आया कि नहीं आया? जी बिल्कुल नहीं आया। कुछ नहीं अब आपको मैं एक चीज बता देता हूं। जी बिल्कुल नहीं आया। तो किस कारण से क्या कारण है कि अंतर है? अंतर है दोनों में हरे कृष्णा मूवमेंट में और उसमें इस में। क्या हरे कृष्णा वाला यह मानता है कि क्या हरे कृष्ण मूवमेंट वाले यह मानते हैं कि इस प्रभुपाद जी की बात को एज इट इज रख रहा है। एज इट इज बता रहा है। एज इट इज उसका प्रचार कर रहा है। क्या ये मानते हैं हरे कृष्ण वाले? थोड़ी बहुत कुछ जगह पर है। है ना? तो भेद आया है। यानी भेद आया है। उसमें उसमें हो सकता है। लेकिन हमारे पास ऐसा भेद है। जी बिल्कुल। मैं कह रहा हूं भेद आया है ना। गुरु आपने क्लेम किया कि कोई भी शिष्य कोई भी शिष्य अपने गुरु के विपरीत जाकर के शिक्षा नहीं देगा। मगर आप कह रहे हो कि में ऐसे इस में ऐसे प्रीचर्स हैं
00:39:02:04 जो अपनी जो वही प्रभुपाद जी की शिक्षा के विरुद्ध जाकर के शिक्षा दे रहे हैं। जी बिल्कुल ऐसा ऐसा मैंने नहीं कहा। आप चीजों को गलत उसमें ले जा रहे हो। मेरी पूरी बात सुन लीजिए। डिफरेंस कहां आया मैं वो आपको बता देता हूं। डिफरेंस यहां आया कि एक ऋत्विक परंपरा हो गई और एक गुरु परंपरा हो गई। इस में आज एक ऋत्विक परंपरा चल रही है। गुरु उसी को भेद की बात कर रहा हूं। एक्स्ट्रा बातें मत करिए प्लीज। आप एक्स्ट्रा बातें करके जो है जो विषय है बहुत सारे बदल जाते हैं। आप एक्स्ट्रा बातें मत करिए। मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं। अंतर आपने माना है ना दोनों में अंतर है तो या तो यह कहिए कि इस भी एज इट इज प्रभुपाद जी ने जो कहा है वह मान रहा है और या फिर यह कहिए कि नहीं थोड़ा बहुत अंतर है। हां यह बात सही है कि गुरु के विपरीत शिक्षा देते हैं कभी-कभी कुछ लोग।
00:39:59:27 मेरी आवाज आ रही है आपको? आ रही है। हां, मैं एक बात क्लियर करना चाहता हूं कि मैं जो जवाब दे रहा हूं मैं मैं पूरा जवाब अपने मैं हां या ना मैं जवाब नहीं दूंगा कि हां ऐसा है हां ना हां या ना मैं जवाब नहीं दूंगा। मैं अपनी पूरी बात रुकूंगा। मैंने यह बात कभी नहीं कही कि इस के जो प्रीचर है वो प्रभुपाद जी के अगेंस्ट जाकर प्रीचिंग कर रहे हैं। ऐसा मैंने बिल्कुल भी नहीं कहा। मैंने जो डिफरेंस बताया केवल उसी जगह डिफरेंस है। बाकी और कोई डिफरेंस मुझे लग नहीं रहा। अब आपको कोई भाई साहब मेरी बात मैं आपसे हाथ जोड़ के निवेदन कर रहा हूं। देखिए बात होती है क्या कि जैसे मैंने कहा कि वो अगेंस्ट जाकर के कर रहे हैं। आपने इसको मना कर दिया। फिर आपने कहा डिफरेंस है। डिफरेंस का अर्थ भी अगेंस्ट ही निकल रहा है मेरे भाई। आप केवल शब्द को बदल करके वही बात मेरी बोल रहे हैं। डिफरेंस का मतलब क्या है? आपका मानना है मान लीजिए कि प्रभुपाद जी ने ए बी ए से लेकर जेड तक बोली। ए बी सी ई एफ जी एच आई जे के एल एम एन ओ पी क्यू आर एस टी डब्लू एक्स वाई जेड मान लीजिए प्रभुपाद जी ने यह बोला ठीक है आपका यह मानना है कि ऋत्विक जो सिस्टम है वो ए से जेड तक प्रभुपाद जी को एज इट इज फॉलो कर रहा है मगर इस जो है वो ए से ले जेड तक के बीच में कुछ व जेड या एक्स व जेड करके कुछ चीजों में अलग हो गया है इस
00:41:15:10 तो उस एक्स व जेड में वो अपने प्रभुपाद जी के अगेंस्ट हो गया है क्योंकि वहां पर वो एक्स व जेड वाले विषय में प्रपाद जी को फॉलो नहीं कर रहा है। तो यह अंतर आ गया ना। मैंने कौन सा कहा कि प्रभुपाद जी का एक एक वर्ड बदल दिया। मैंने भी यही कहा कि कुछ अंशों में ही सही तो ये चीज तो मैंने पहले ही चीज तो मैंने पहले ही पहले ही बोल दी थी ना कि इस जगह पे अंतर है। एक ऋत्व की तरफ चले गए और एक गुरु की तरफ चले गए। बस यही अंतर है। ये चीज तो मैं बोल ही रहा हूं ना। इसमें से तो मैं भी मान रहा हूं। मैं भी बता रहा हूं ना इसमें से इसमें से प्रभुपाद जीतिक वाली ऋत्विक वाली मतलब वो अगेंस्ट चले गए ना प्रभुपाद जी के तो मैंने कब मना किया मैं बोल रहा हूं ना आप भी उसी बात को बार-बार रिपीट करोगे उससे क्या होगा मैं इस चीज को शुरू में क्लियर कर दिया ना कहने नहीं किया आपने आप बार-बार बच रहे थे अब आपने मैंने किया नहीं मैं नहीं बच रहा था आप देख लीजिए पहले का रिकॉर्डिंग ठीक है मुझे अब मुझे अब अपना सवाल प्लेस करने दीजिए मुझे अपना सवाल सवाल प्लेस करने दीजिए। मुझे अपना सवाल प्लेस करने दीजिए। आपने कहा कि इस जो है वह थोड़ा सा कुछ मामलों में जो है
00:42:30:12 प्रभुपाद जी के अगेंस्ट जा गया और इस को मानने वाले जो लोग हैं इस समय संचालन करता वो वही लोग हैं जो शिष्य हैं। प्रभुपाद जी के जैसे ऋित्विक वाले शिष्य हैं। है ना? शिष्य है ना? हां। तो अभी आपका एक दूसरा क्लेम है कि कोई भी शिष्य अपने गुरु की चीजों को बदल करके नहीं बताता। मगर आप यहां पर कह रहे हैं कि हां कुछ शिष्य ऐसे होते हैं हो सकते हैं जो अपने गुरु की कुछ चीजों को बदल करके बताएं।
00:43:04:19 कि ऐसा भी शिष्य नहीं होना चाहिए। ऐसा शिष्य नहीं होना चाहिए जो अपने गुरु की बताई हुई बातों को बदल के आगे बताए। नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। मैं यह नहीं कह रहा भाई साहब मैं कह रहा हूं ऐसी संभावना है कि नहीं। मैं ये नहीं कह रहा अच्छा क्या है? गलत क्या है? मैं ये नहीं कह रहा अच्छा क्या है? गलत क्या है। मैं ये कह रहा हूं ऐसा ऐसी संभावना हो सकती है कि कोई शिष्य अपने गुरु की बातों को बदल करके बता दे। चाहे थोड़ी सी सही पर बता दे। हो सकता है ना? हां इसीलिए मैंने इसीलिए मैंने पूछा था कि आज के टाइम में प्रभुपाद जी का निर्णय निर्णय करता कौन कौन है? तो आपने कहा था नहीं कोई भी शिष्य अपने गुरु की बातों को बदल के नहीं बताता तो मैंने कहा और फिर मैंने कहा था तो फिर आपके आप ये गुरु शिष्य परंपरा की जरूरत क्या है? फिर तो कोई भी अपने आप को कहेगा कि मैं उनका शिष्य हूं और मैं बता रहा हूं। उन्होंने जो कहा था तो ऐसे तो सब लोगों के मन की बातें माननी पड़गी। तो आपने कहा था मुझे तो इस चीज का सामना नहीं करना पड़ा। मगर आपको तो करना पड़ रहा है। आपके ही संस्था के लोग हैं जो यह कह रहे हैं कि प्रभुपाद जी के कुछ शिष्य हैं जो प्रभुपाद जी के अगेंस्ट बोल रहे हैं। आपने खुद बोला जी
00:44:19:27 बिल्कुल अब आपको एक चीज बता दूं मैं। जी आपको एक चीज बता देता हूं। इस आप मेरा थोड़ा सा सुनना मैं इसमें भी इस कुछ चीज क्लियर हो। सुनिए सुनिए सुनिए। मैं इस मैं अपनी बात तो रख दूं। सुनिए बात मैं फिर अपनी बात रखने में जो आप रख लीजिए रख लीजिएगा। मैं एक बात बोल रही हूं आप बोल लीजिए उसके बाद हम लोग मुख्य विषय पर वापस आएंगे जहां से भटक गए हैं और वो मुख्य विषय यह है कि वर्तमान में कौन सा गड़िया वैष्णवाचार्य इस का या ऋत्विक का इस को तो छोड़ दो ऋत्विक का निर्णय कर रहा है क्योंकि आपने मान लिया है कि जो शिष्य होते हैं वह भी मिलावट कर सकते हैं। तो ऐसे में हमको एक निर्णायक अधिकृत व्यक्ति चाहिए होगा। यही होती है गुरु शिष्य परंपरा जिसमें अधिकृत होता है कोई शिष्य अपने गुरु की बात बताने के लिए ठीक है तो हमें कोई अधिकृत व्यक्ति चाहिए होगा जो यह निर्णय करे कि इस में क्या होना चाहिए ऋत्विक में क्या होना चाहिए अब आपके यहां पर यह है कि कोई भी बाहर का गड़िया वैष्णव संप्रदाय का प्रामाणिक रूप से नियुक्त गद्दी पर बैठने वाला आपके यहां हस्तक्षेप नहीं कर रहा है तो फिर आप किस हिसाब से कह रहे हैं कि हम तो गौडिया वैष्णव को मानने वाले हैं वो लोग वो लोग अभी भी ऋत्विक सिस्टम को नहीं मान रहे आप मान रहे हो तो
00:45:35:01 गडिया वैष्णव संप्रदाय कहां पे एक्सिस्ट कर रहा है आपके यहां जी जी पहले तो मैं आपको बता दूं कि पहले का जो सवाल था उसका जवाब पहले हो जाना चाहिए मेरे हिसाब से है ना जो आपने पूछा था कि कोई भी शिष्य अपने गुरु की बातें चेंज कर सकता है तो फिर गुरु शिष्य परंपरा का क्या महत्व रहा है संभावना है तो फिर गुरु शिष्य परंपरा में एज इट इज ज्ञान कैसे पहुंचेगा नहीं नहीं नहीं नहीं पहली चीज ये नहीं कहा है मैंने ये नहीं कहा है सुन लीजिए मैंने क्या कहा है गुरु शिष्य परंपरा में एक एक ही गुरु के कई शिष्य होते हैं। सुन लीजिए मैंने क्या कहा है वो सुन लीजिए। आप गलत समझ रहे हैं। गुरु शिष्य परंपरा में एक ही गुरु के कई शिष्य होते हैं। तो वो सारे शिष्य गुरु की बात को एज इट इज बताने के लिए ऑथेंटिक नहीं हो जाते हैं। जिसको गुरु कहता है यह होगा मेरी बात बताने वाला वो होता है निर्णायक अधिकृत। ठीक है? जिसको गुरु कह के जाता है यह होगा। अब गुरु नहीं कह के जा रहा है तो फिर गुरु इतने अंश में गुरु शिष्य परंपरा को खत्म कर रहा है। पहली बात और दूसरी बात कि आप कह रहे हो कि आपने जो मेरा सवाल बदल करके बता दिया ना ये चीज कह दी कि आप कह रहे हो कि फिर गुरु शिष्य परंपरा में ज्ञान आया कैसे? जब बदल सकते हैं। मैं नहीं कह रहा। गुरु ने क्या कहा? यह गुरु अपनी सूझबूझ से, अपनी बुद्धि से, अपनी विवेक से तय
00:46:50:02 करेगा कि मेरा निर्णायक कौन होगा? मेरे जाने के बाद मेरा उत्तराधिकारी कौन होगा? वो गुरु तय करता है तो वह आपके यहां पर नहीं है। वह मैं पूछ रहा हूं। मैं समझ नहीं पाया। आपके वॉइस थोड़ा आई आई नहीं थी। एक बार अगर दोबारा रिपीट कर दोगे तो सही रहेगा। मैं यह कह रहा हूं कि मैंने यह नहीं कहा है कि मेरा सवाल यह है कि अगर शिष्य अपने गुरु की बातों में मिलावट कर सकता है तो फिर गुरु परंपरा का ज्ञान हम तक आएगा कैसे? नहीं। मेरा यह है कि एक ही गुरु के कई शिष्य होते हैं। तो वो सारे शिष्य गुरु का अर्थ बताने के लिए ऑथेंटिक नहीं किए जा सकते। जिसको गुरु ऑथेंटिक करेगा वो गुरु की बात को एज इट इज बताने के लिए प्रमाणिक माना जाएगा। सारे शिष्यों को नहीं अगर उसने अगर उसने सारे शिष्यों को ऑथेंटिक किया है तो वो सारे शिष्य माने जाएंगे। अगर नहीं किया है कि यह सब मेरे उत्तराधिकारी नहीं मेरा उत्तराधिकारी कोई नहीं है तो उतने अंश में वह गुरु परंपरा को खत्म कर रहा है गुरु वो नष्ट कर रहा है गुरु गुरु परंपरा के सिस्टम को क्योंकि उसकी बात बताने वाला कोई उत्तराधिकारी
00:48:05:15 वो छोड़ के नहीं जा रहा है और हर कोई व्यक्ति यह कहेगा कि मैं उनका उत्तराधिकारी हूं मैं बताऊंगा उन्होंने क्या है और सबके बीच में मतभेद आ जाएगा तो इसीलिए मैंने इसीलिए मैंने मैंने पूछा था कि आपके यहां पर प्रामाणिक निर्णायकर्ता कौन है जो गौड वैष्णव परंपरा के अधीन हो। मान लीजिए कि मधवाचार्य या शंकराचार्य परंपरा से कोई शिष्य निकला और उनके मधवाचार्य परंपरा के कई शिष्य हो गए। मैं भी शंकराचार्य शंकराचार्य परंपरा में अध्ययनरत हूं। मगर ऐसा नहीं है कि मैं शंकराचार्य की बोल ओर से बोलने के लिए एक ऑथेंटिक व्यक्ति हूं। जितने अंश में मेरी बात उनके साथ है बस वो बैठे हैं निर्णय करने के लिए। मेरे पास मधवाचार्य परंपरा में, शंकराचार्य परंपरा में, रामानुज परंपरा में निर्णय करने वाले लोग बैठे हैं। तो आपके यहां पर निर्णय करने वाले लोग हैं ही नहीं। और वैष्णव गौडिया वैष्णव संप्रदाय से तो कदापि नहीं है। तो आप कहां से हो गए गौडिया वैष्णव? ये बात है। हम बोलिए।
00:49:11:15 जी। अब मैं आपको इस बता देता हूं। अभी जैसे आपने कहा कि एक गुरु के बहुत सारे शिष्य होते हैं। है ना? तो सभी शिष्य अलग-अलग जाके अलग-अलग ब्रांच जाके बना ले तो उसमें उसमें प्रभुपाद जी का कोई दोष नहीं है। प्रभुपाद जी उसी परंपरा का हिस्सा है। और प्रभुपाद जी ने जो लेटर लिख के दिया है बात समझ नहीं पा रहे हो। आप मेरी बात समझ नहीं पा रहे हो। प्रभुपाद जी ने लेटर लिख के दिया है तो क्या हम ये मान ले कि गुरु परंपरा व्यर्थ है। ये मान ले हम निर्णय करता कौन है? 10 लोग 10 बातें कर रहे प्रभुपाद जी के नाम पे। निर्णय करता कौन है? मैं यह पूछ रहा हूं। प्रभुपाद जी के ना होने की स्थिति में 10 लोग 10 प्रकार की बातें कर रहे हैं प्रभुपाद जी के नाम पे। तो हम निर्णय कैसे करेंगे? प्रभुपाद जी ने नियुक्त नहीं किया। अब आप कह रहे हो उन्होंने लेटर दिया। तो भाई ये कहो ना कि यहां पे वो परंपरा की प्रणाली को खत्म कर रहे हैं और यह कह रहे हैं कि आप जो मैं लेटर लेकर जा रहा हूं इन लोगों को समझो और उनमें भी कोई निर्णायक नहीं है। घूमते रहो। अभी मैं बता रहा हूं ना आपको अभी निर्णायक कौन है? अभी जो मधु पंडित दास है श्रीमान जो हमारे वरिष्ठ वैष्णव है मधु पंडित दास वो हमारे निर्णायक है और उन्हीं के आधार पर जो हमारे एचकेएम के प्रेसिडेंट है तो ये हमारे अभी निर्णायक है और ये
00:50:26:16 उसी उसी प्रभुपाद जी के हमारे जो गुरु प्रभुपाद जी रहे उन्हीं के शिष्य रहे हमारे सीनियर वैष्णव भी है तो इनहीं के इनहीं के कितनी देर तक एक ही आदमी का परिचय देते रहोगे आप कितनी एक ही बार दिया मैंने एक ही बार दिया है एक ही बार इतना सा तो सुनना ही पड़ेगा आपने एक व्यक्ति के बारे में बताया कि हमारे उनका नाम यह है। अब वहां जब आपने यह बता दिया कि वह निर्णायक है। ये भी उससे प्रकट हो गया। प्रभुपाद जी के शिष्य है। फिर आप चार बार उन्हीं की चीजों को बता रहे हो। प्रभुपाद जी के शिष्य हैं। वो उन्हीं की शिक्षा बताते हैं। वो वही निर्णायक है। आपको रिपीट करके दिखाऊं आप कितने रिपीटेटिव बोले। नहीं नहीं रहने दीजिए। रहने दीजिए कोई बात नहीं। और चर्चा में इतना सा तो होता ही है। मुझे नहीं पता था कि आपको इतना सा भी बिल्कुल वो नहीं लगता। कोई बात नहीं आगे चलिए अपन आगे बढ़ते हैं। तो [गला साफ़ करने की आवाज़] मतलब कि आपके यहां पर निर्णायक है कोई। ठीक है? जी बिल्कुल है। मतलब निर्णायक तो मैं उनको नहीं कहूंगा लेकिन ये कि हमारे गुरु प्रभुपाद जी की उनकी शिक्षा हम जी आप बोलिए बोलिए आप बोलिए। आप पहले तय कर लीजिए निर्णायक है कि नहीं है। फिर बोल लीजिए। लास्ट बार पूछ रहा हूं। चलो प्रभुपाद जी के शिष्य
00:51:41:22 के तौर पर वो उनकी शिक्षाओं को फैला हमारे मार्गदर्शक है। मैं इतना कहूंगा यानी कि निर्णायक कोई नहीं है। अब मार्गद निर्णायक निर्णायक का जब मार्गदर्शक है और उन्हीं की शिक्षाओं को तो निर्णायक और उससे क्या मतलब रह जाता है? उसका कोई वैल्यू ही नहीं रह जाती। आप एक ही चीज को निर्णायक निर्णायक एक ही चीज को बार-बार रिपीट कर रहे हो। आप भी तो रिपीट कर रहे हो ना। तो मैं कह रहा हूं मार्गदर्शक आप शब्द से बचने का प्रयास कर रहे हैं। मैं पूछ रहा हूं कि कोई है जो प्रभुपाद जी की बात के अर्थ में निर्णय करेगा कि उनकी बात का यह मतलब है तो आप कहते है उसके बाद कहते मैं यह भी नहीं कहूंगा कि है वो मार्गदर्शक है। भाई मार्गदर्शक कई सारे हैं जो कह रहे हैं प्रभुपाद जी ने यह कहा है। उसमें से निर्णायक कौन है? जिसको हम कहें कि प्रभुपाद जी की प्रभुपाद जी ने क्या कहा है? यह यह बताएंगे तो आप कह रहे हैं मैं रिपीिटेटिव हो रहा हूं। आप अपनी बातों को कह कह कह कह करके बदल रहे हैं बार-बार। आपने पहले कहा कि शिष्य जो है बदलाव नहीं कर सकता। फिर बाद में माना बदलाव कर सकता है। पहले शुरू में आपने कहा कोई निर्णायक नहीं है। फिर कहा निर्णायक है। फिर आप कह रहे हैं निर्णायक नहीं है।
00:52:53:20 सुनी आप मेरी पूरी बात नहीं सुनते। मेरी थोड़ी सी बात सुनकर फिर भाई साहब मेरे पास बहुत ज्यादा मैंने घी नहीं पिया है जो मैं जो अब मैं फिर क्या कहूं फिर व्यक्तिगत उसमें आ जाना पड़ेगा आप पहले शांत हो जाइए मैं आपको अनम्यूट कर रहा हूं शांत हो जाइए अभी आप म्यूट है शांत हो जाइए थोड़ा शांत हो जाइए देखिए आप उसको मा आप कान को कैसे भी पकड़ लीजिए सुनिए कान को कैसे भी पकड़ लीजिए प्रभुपाद जी की शिक्षा को मानने वाले के रूप में प्रभुपाद जी की शिक्षा को एज इट इज बताने वाले के रूप में या तो आप यह मान लो कि वर्तमान में कोई नहीं है जो यह निर्णय करेगा। प्रभुपाद जी ने क्या कहा है, क्या नहीं कहा है। या फिर आप यह मान लो कि हां कोई निर्णायक है। हां मगर हम उसको निर्णायक कहने से बच रहे हैं। यह वाली एक चीज आपकी सामने आ रही है कि आप उसको निर्णायक कहने से बच रहे हैं। उसको निर्णायक ही मानना पड़ेगा ना। निर्णायक नहीं मानेंगे। सुनिए अगर उसको निर्णायक नहीं मानेंगे मार्गदर्शक मानेंगे तो मार्गदर्शक तो कल को मैं ज्वाइन कर लूंगा ऋत्विक को और दो-तीन दिन इस जाऊंगा उसके बाद भी मैं यह कह सकता हूं कि भाई प्रभुपाद जी ने क्या कहा है मैं मार्गदर्शन कर दूंगा लो एक और एक और ओपोनेंट खड़ा हो जाएगा ठीक है
00:54:11:06 मैं अन म्यूट कर रहा हूं आप थोड़ा आप थोड़ा धैर्य रखो मैं अन म्यूट कर रहा हूं आपको थोड़ा काम डाउन काम डाउन जी बोलिए। जी मैंने जो बात आपसे कही कि मार्गदर्शन और निर्णय की जो बात कही वो इस सेंस में कही कि जब भगवान श्री कृष्ण जब द्वारिकाधीश थे द्वारिका के राजा थे तो अपने आप को कभी द्वारिका भाई साहब मैं आपसे एक स्ट्रक्चरल वे में बात करना चाह रहा हूं। आप जब भी कोई विवरण बताएं, एक्सप्लेनेशन बताएं तो पहले अपना क्लेम स्थापित करें। आप अपना क्लेम पहले बताएं। किस ओर जा रही है। हो सकता है कि मुझे उसके उसका एक्सप्लेनेशन जानने की जरूरत ही ना पड़े। आप अपना एक्सप्लेनेशन पहले दे रहे हैं। अपना क्लेम बाद में कर रहे हैं। पहले क्लेम तो करिए कि निर्णायक है कि नहीं है। तब एक्सप्लेनेशन दीजिए। आप पहले क्लियर करिए। निर्णायक नहीं है हमारे यहां। कोई यह क्लियर कर दीजिए। फिर एक्सप्लेनेशन दीजिए। समझ रहे हैं? आप पहले उसको जस्टिफाई करने में मत लग जाइए। हो सकता है मैं मुझे जरूरत ही ना पड़े आपको एक्सप्लेनेशन देने की। क्योंकि वैसे भी यह मुख्य टॉपिक नहीं था। आपने शुरू में बहुत जोर देकर के कहा कि मैं गौडिया वैष्णव हूं, गौ वैष्णव हूं तो मैंने आपको पकड़ा
00:55:26:07 वहां पर। ठीक है? है ना? और बात देखो मैं एक चीज आपको क्लियर बता देता हूं। आप आप अगर यह बताने में अपना समय निकालेंगे कि आप मुझे सुन नहीं रहे हैं। मुझे बोलने ही नहीं दे रहे हैं तो मैं क्षमा चाहता हूं। मैं आपसे बात नहीं कर पाऊ। मैंने बहुत देर तक आपको मैं क्या कहूं अब वो फिर व्यक्तिगत कटाक्ष हो जाएगा। आप यह बताने में अपना समय मत लगाइए कि मैं आप मैं आपको बोलने दे रहा हूं कि नहीं बोलने दे रहा हूं। आप विषय को बार-बार भटका रहे हैं इसलिए मुझे ऐसा करने पड़ रहा है। मगर ऐसा नहीं है कि मैं आपको सुनूंगा नहीं। मैं आपको सुनने के लिए अनम्यूट भी कर रहा हूं। ठीक है? अब मैं आपको अनम्यूट करूं।
00:56:07:20 हां जी। अब अपनी बात बोलिए। मेरे को आपसे एक रिक्वेस्ट करना चाहता हूं कि आप मैं थोड़ा सा कुछ बोलने लगता हूं। आप मेरे को बार-बार हो आप निर्णायक की जो बात कर रहे हो ना हां एक एक मिनट एक कि निर्णायक कोई है कि नहीं है ना तो हमारे जो मधु पंडित दास प्रभु है वो अपने आप को निर्णायक नहीं ये उनकी विनम्रता है उनका शिष्टाचार है कि वो अपने आप को निर्णायक नहीं कहते वो अपने आप को कहते हैं कि मैं प्रभु आ जाओ
00:56:45:08 मेरे भाई मैं आपसे ये नहीं पूछ रहा हूं कि कौन किसको क्या कहता है मैंने ये पूछा है क्या मैं पूछ रहा हूं है क्या मैंने ये नहीं पूछा कौन आप अपने यहां सब एक दूसरे को प्रभु जी कहते हैं प्रभु जी का मतलब तो सीधे भगवान भी होता है तो मैं ये थोड़ी ना कह रहा हूं आप लोग एक दूसरे को भगवान क्यों कहते हो या कहते हो कि नहीं कहते हो मैं पूछ रहा हूं है क्या आपके यहां लोकाचार में क्या चलता है वो आप जानो मैं पूछ रहा हूं है क्या सिद्धांत क्या है वो पूछा मैंने जी
00:57:29:06 पर बता रहा हूं मैं निर्णायक है वही है निर्णायक और उन्हीं के माध्यम से हम आगे शिक्षाओं पर चलते हैं और ये चीज़ मैं आपको सबसे कह रहा मैं इसको [हंसी] मैं इसको मैं इस क्षण को थोड़ा सेलिब्रेट करना चाहता हूं। आप प्लीज थोड़ा सा मुझे समय दीजिए। एक बार बोल दीजिए निर्णायक है। एक मिनट एक मिनट हां निर्णायक है और वो प्रभुपाद की ही शिक्षाओं को आगे बढ़ाते हैं। मैं बोल रहा हूं कि जो जो हमारे सीनियर में निर्णायक है।
00:58:03:13 ऋत्विक में निर्णायक है। जी बिल्कुल वो ऐसे दीक्षा नहीं देते लेकिन आप मेरी पूरी बात सुनना लेकिन ऐसे नहीं है कि आप मेरी इतनी सी बात ले अलग डायरेक्शन में साहब भाई साहब भाई साहब मैंने ये नहीं पूछा है वो दीक्षा देते हैं कि नहीं देते हैं मैंने नहीं पूछा है वो दीक्षा देते हैं कि नहीं देते हैं मैंने पूछा है क्या दीक्षा देते हैं कि नहीं देते हैं अभी अभी आप अभी आप लास्ट बार मुझे फिर से बताइएगा निर्णायक है कि नहीं है ऋत्विक में कोई जी एक मिनट एक बात बताओ इस चीज को आपने कितनी बार रिपीट कर दिया? फिर जब मैं कोई चीज को रिपीट कर क्योंकि हर क्योंकि हर बार आप अपनी बात को बोल के उससे बदलते हैं। उसको बदलते हैं। उस चीज को उस चीज पे टिके नहीं रहते। भाई साहब
00:58:52:26 अभी आप सामने वालों को बोलने का मौका नहीं दे। आप चीजों को गोलगोल घुमाते हैं। आप चीजों को गोलगोल घुमाते हैं। इसलिए एक्सप्लेनेशन देनी पड़ती है। कल को बाद में आपको किसी हाई ऐसा नहीं होता है। चीजों को इसलिए एक्सप्लेन करना पड़ता है। मैंने आपको एक्सप्लेन करने से रोका नहीं है। मैं यह कह रहा हूं। जैसे मैंने आपसे पूछा एक मिनट मैं मैं बता रहा हूं। जैसे मैंने आपसे पूछा कि निर्णायक है कि नहीं? ठीक है? तो मेरा यह प्रश्न आपसे इसलिए है कि अगर निर्णायक है तो क्यों है? उसको किसने बताया बनाया? और कौन सा सिस्टम है शास्त्रों का जिसके आधार पर वो निर्णायक है। ठीक है? दूसरी बात आपका कहना है कि अगर एक्सप्लेनेशन नहीं देंगे तो उसके कई मतलब निकल सकते हैं। तो बिल्कुल आप अपनी बात को रखिए। आप किसी आपकी जिस बात के गलत मतलब निकल सकते हैं उस बात को आप बताइए। मगर पहले अपना क्लेम क्लियर कर दीजिए। यदि मेरा सवाल यह है कि आपके यहां कोई निर्णायक है कि नहीं है? तो आप पहले बताइए निर्णायक तो है पर हमारे यहां पर क्या है? एक लोकाचार है कि उनको निर्णायक ना कह करके उनको मार्गदर्शक कहा जाता है। है तो वह असल में निर्णायक ही। यह दूसरी बात यह है कि वो दीक्षा इत्यादि नहीं देते हैं। तो निर्णायक होने का दीक्षा देने
01:00:07:27 से कोई संबंध नहीं है। दीक्षा वो देता है जो किसी शिष्य का गुरु हो। निर्णायक वह होता है जो यह तय करता है कि प्रभुपाद जी ने क्या कहा है, क्या नहीं कहा है। दीक्षा तो वह भी दे सकता है जिसको निर्णय करने वाला कह दे कि तुम जाकर दीक्षा दे दो। दीक्षा वो दीक्षा और किसी आपके यहां पर है ही है कि वो फोटो दिखा के दीक्षा होती है। है ना? तो यहां पर दीक्षा का मैटर ही नहीं है। यहां पर मैटर है कि ऋित्विक का निर्णायक कौन है? तो वो आपने बताया कि है। अब एक बार आप लास्ट बार बता दीजिए तो मैं सेलिब्रेट करूंगा थोड़ा सार्वजनिक रूप से इस बात। जी
01:00:50:04 हमारे जो अभी जो आप जिस निर्णायक जिस शब्द के लिए सुनना चाह रहे हो वो मधु पंडित प्रभु दास है और उन्हीं के गाइडेंस में हम जो हमारा मूवमेंट है वो चल रहा है। बहुत बढ़िया मैं धन्य हो गया आपके इस निर्णय को सुनकर के क्योंकि हमारी बहुत देर तक इस विशेष विषय पर चर्चा हुई कि निर्णायक है कि नहीं। मैंने तो पहले ही बोल दिया था। मैंने तो पहले ही बोल दिया था। मैंने आप बार बदल रहे हो ना आप कह रहे हो निर्णायक नहीं मार्गदर्शक है आपको आप आपको आपका वीडियो दिखाऊं मैं आपको आपका वीडियो दिखाऊं जिसमें आप बोल रहे हैं निर्णायक नहीं मार्गदर्शक है वो आपका वीडियो दिखाऊं आपका वीडियो दिखाऊं मैं पूछ रहा हूं वीडियो दिखाऊं आपका आपने बोला है उसमें वह निर्णायक नहीं मार्गदर्शक है निर्णायक है फिर निर्णायक नहीं मार्गदर्शक है
01:01:48:28 वीडियो दिखाऊं भाई साहब आपको वीडियो दिखाऊं एक काम करते हैं। यह बात यहां पे खत्म एक काम करते हैं। यह बात यहां खत्म कर देते हैं। नहीं तो आप कहो तो मैं वीडियो दिखाऊं। हम यह चीज तो मैंने पहले भी कह दी थी। वीडियो दिखाने की क्या जरूरत है? मैंने पहले भी कह दी थी। लेकिन आप जितनी बार आप मेरे ऊपर ये ब्लेम करेंगे कि आप जो है बार-बार घुमा रहे हैं। यह चीज तो मैंने पहले भी कह दी थी। मैंने पहले कह दिया था मैं इस को मानने वाला हूं और फिर मैं बाद में कहूं कि मैं इस को मानने वाला नहीं हूं। तो ये चीज तो मैंने पहले भी कह दी थी। मैं इस को मानने वाला हूं। क्या बात है?
01:02:31:20 जितनी बार अनम्यूट होने के बाद आप यहां से कहानी शुरू करेंगे कि आप मुझे बोलने नहीं दे रहे हैं या आप रिपीट क्वेश्चन कर रहे हैं उतनी बार मैं आपको वो म्यूट करके फिर मैं आपको बताऊंगा कि भाई साहब आपने जितनी बार क्लेम किया उतनी बार उस क्लेम से आप हट गए। अब आप उस पर टिके हुए हैं। अब या तो आप आगे बढ़ाने की इच्छा प्रकट करें या फिर आप बता दे तो यही रिपीट करना है तो आप बता दें। आगे बढ़ना है या आप दोबारा वही रिपीट करेंगे? ब्लेम आगे बढ़ना है।
01:03:10:04 जी शिवांग जी ऐसे अगर आप लूट करोगे तो डिबेट नहीं हो पाएगी। इस डिबेट को आप आप जा सकते हैं। आप जा सकते हैं। जाइए। क्या है कि व्यक्ति को लगता है कि वो अ बिल्कुल स्पष्ट है अपनी चीजों में। पर कई बार होता यह है कि वह स्वयं ही स्पष्ट नहीं होता है। तो वह किसी को स्पष्टता के साथ अपने सिद्धांत को कह कैसे पाएगा? प्रश्न शुरू यह हुआ था कि आप यह क्लेम कर रहे हो कि आप गड़िया वैष्णव संप्रदाय से हो। गिया वैष्णव संप्रदाय की जो प्रामाणिक गद्दियां हैं बल्कि ऐसी कई गद्दियां जो अभी भी इस के साथ कई जगह पर संबंधित है जैसे पुंडरिक जी इत्यादि तो कई ऐसी गुरु गदियां है जो अभी भी हैं। पर इस के अंदर या अभी बात करें अगर ऋत्विक वालों से बात हो रही है तो ऋत्विक वालों के पास ऋित्विक वालों के सिस्टम या इस में कहीं
01:04:25:10 पर भी गॉड या वैष्णवाचार्यों का हस्तक्षेप नहीं है। अब मान लीजिए कि शंकर परंपरा से कोई महानुभाव दीक्ष दीक्षा प्राप्त करते हैं और आगे जाकर के वह अपने शिष्य बना देते हैं और और किसी को घोषित करके नहीं जाते हैं कि मेरे जाने के बाद मेरे देह त्याग के बाद कौन होगा जो मेरे द्वारा दी जाने वाली जो शिक्षा दीक्षा है उसको प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करेगा वो नहीं करके गए और उनके नाम से जो उनके शिष्यग है वह लेटर दिखाते हैं कि भाई वह किसी को नियुक्त करके नहीं गए तो नियुक्त कोई हो नहीं ठीक है? तो ऐसे में जो जिस परंपरा से आप प्रामाणिक रूप से जुड़े होने का दावा कर रहे हो, अगर आप कह रहे हो कि मैं शंकराचार्य परंपरा से हूं या आप कह रहे हो मधवाचार्य परंपरा से हूं तो उनको सीधे-सीधे आपकी चीजों में हस्तक्षेप करने का अधिकार प्राप्त है। क्योंकि आप खुद कह रहे हो हम गौड या वैष्णव है। अगर आपके गुरु यह चीज स्पष्ट करके नहीं गए हैं कि मेरे जाने के बाद कौन निर्णय करेगा कि मैंने क्या धर्म कहा है, क्या ब्रह्म कहा है? तो वह जो गौ वैष्णवाचार्य बैठे हैं विलुप्त तो हो नहीं गए। चलो विलुप्त हो गए होते तब आपकी बात को इस खिचड़ी को स्वीकार भी कर लिया जाता। वो विलुप्त तो हो नहीं गए हैं। तो वो आज के टाइम में अधिकृत है क्या इस में बोलने के लिए? नहीं। पुंडरीिक
01:05:40:26 जी ने खुद कहा है अपने एक उसमें कि इस वाले बहुत अच्छा कर रहे हैं मगर किसी को बोलने नहीं देते अपने यहां। क्यों भाई? जब आप गौड या वैष्णव संप्रदाय से हो। आपकी आपको मालूम है कौन-कौन प्रामाणिक गौड या वैष्णव है। तो उनको अपने यहां हस्तक्षेप करने दो ना। आप तो हो नहीं अधिकृत तो जो प्रामाणिक रूप से आपके गुरु के भी ऊपर बैठे हुए हैं प्रामाणिक गद्दी से जुड़े हुए हैं उनको हस्तक्षेप करने दो आपके यहां के सिस्टम को उनको बदलने दो बदलाव लाने दो आपके यहां पर पर नहीं वो विदेशी मान्यताओं के अनुसार चीजों को आगे प्रवाह को बढ़ाना है ना तो कैसे हस्तक्षेप करने दें कहने को डंका खूब बजाएंगे हम गौडिया वैष्णव से जुड़े हुए हैं फिर ढूंढने जाएंगे टॉर्च लेकर के कि गौडिया वैष्णव आचार्य कहां है इस में कहां कौन सी गद्दी बैठा तो एक बताएगा जीबीसी करती है निर्णय एक बताएगा जो ऋत्विक की फौज है हमारे पास वो निर्णय करती है और फिर यह भी कह देगा कि निर्णायक है ही नहीं कोई इसी गुथमग्थी में व्यक्ति जूझता रहे यदि कोई प्रश्न करने आया है तो वरना वो जो कह दे वो मान लो
01:06:53:01 ये है कोई धीरज जी करके बोल रहे हैं आपने ऐसा सीख लिया वैसा सीख लिया तो आपसे निवेदन है अगर आप अभी आ सकते हैं तो आ जाइए चेहरा लेकर आइएगा लिंक दे दीजिए भाई यहां पर किसी भी गौडिया वैष्णवाचार्य को आप बोलने नहीं देते हो अपने यहां कौन से रूप से माना जाए कि आप गौडिया वैष्णव संप्रदाय से जुड़े हुए हो। आप यह कहो कि हमारे गुरु तो जुड़े हुए थे पर वह अब कट चुके हैं। गौ वैष्णव से काट के गए क्योंकि सिस्टम ही बदल दिया आपने। भाई सिस्टम ये था कि आचार्य गद्दी पर जो बैठेगा वो निर्णय करेगा। आपने आचार्य गद्दी खत्म कर दी। चलो मान लिया प्रभुपाद जी तक आचार्य गद्दी थी आपके यहां। अब तो आप जा रहे हो तो अब आप जो है तो नियुक्त करके जा ही नहीं रहे हो किसी को। कोई भी व्यक्ति अपने इस मामले में तो ऋत्विक से अच्छा कौन है? कम से कम वह अपने आप पर उस प्रणाली को ले तो चल रहा है। हालांकि वहां भी खिचड़ी पकी हुई है कि निर्णय कर निर्णय निर्णय करने वाला है कौन? वो भी खिचड़ी का विषय है। पर कम से कम इससे तो अच्छा है कि निर्णय करता है भी और नहीं भी। वो अपने आप को कहते नहीं है। और फोटो से दीक्षा दिलाते हैं। आ जाए भैया।
01:08:08:12 कौन है? कोई बात नहीं आगे चलिए अपन आगे बढ़ते हैं तो [गला साफ़ करने की आवाज़] मतलब कि आपके यहां पर निर्णायक है कोई ठीक है जी बिल्कुल है मतलब निर्णायक तो मैं उनको नहीं कहूंगा लेकिन हमारे गुरु प्रभुपाद जी की
01:08:52:00 उनकी ठीक है जी बिलकुल है मतलब तो मैं उनको नहीं कहूंगा हां फॉलो ये कह रहा है कि तू पहले मेरा फॉर्म भर। [हंसी] एक दो मिनट बात करते हैं। शास्त्रवाद जी आप जुड़ जाइए। तू पहले मेरा फॉर्म भर तो अपने आप को फॉर्म भरने लायक बना तो लो। आप कुछ ऐसा करो कि हम भी आपके यहां पर आए। हां जाओ कुछ करो। ऐसा योग्यता प्राप्त करो। हम आपके यहां आएंगे। गए थे ना अभी अग्निवत जी के यहां। जाते तो हैं ना हम घर में घुस के मार के आते हैं घर में घुस के जाते हैं तो यह कहना बंद करो अपने आप को ऐसा बनाओ कि हमें सोचना पड़े कि आपके यहां अटैक कैसे करना है सर्जिकल स्ट्राइक कैसे करनी है सर्जिकल स्ट्राइक के उदाहरण हमारे पास बहुत है ठीक है तो अपने आप को ऐसा बनाओ आएंगे बाकी फिलहाल आपके यहां पर आपके यहां जो
01:10:07:01 अभी जो फिलहाल इचिंग हो रही है अगर वो मिटानी है तो आ जाइए ऊपर खुजली मिटानी है फिलहाल बस 12 जुलाई को दीक्षा कार्यक्रम नहीं होगा उसके पहले 11 को होगा और 13 को होगा हां तो आप एक काम करिए आप जाइए आप जाइए अपने आप को ऐसा योग्य बनाइए कि हम आपके यहां आए आपका फॉर्म भरे। ठीक है? तो आपने देखा भाई बात ऐसी है कि कोई व्यक्ति जब यह ताल ठोकता है कि हम गौडिया वैष्णव संप्रदाय से हैं तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़] और ऐसा है कि जो म्यूट वाली बात है म्यूट वाली बात ऐसी है कि व्यक्ति अगर एक स्ट्रक्चरल वे में बात करता है तो हमें बहुत अच्छा लगता है कि हम उसका स्वागत करें। अ मगर
01:11:20:12 जब व्यक्ति अनावश्यक व्यर्थ में बातें बोलता है और आप जो है मुझे बोल नहीं बार उन्होंने करीबन मैंने जब छह बार उन्हें अनम्यूट किया तो उन्होंने पहले ब्लेम चालू किया कि आप जो है ब्लेम कर रहे हो आप जो है म्यूट कर रहे हो म्यूट कैसे ना करें पूछा कुछ जा रहा है आप बोल कुछ रहे हो बार-बार विषयांतर विषयांतर होता रहेगा आपका चैट क्या है? ठीक है। तो म्यूट करने की आवश्यकता तब पड़ती जब व्यक्ति या तो सामने वाले को बार-बार इंटरप्ट करे जब जब वो बोलना चाहे और ऐसा शुरू में उन्होंने किया। उसके बाद विषय कुछ चल रहा है और वह कुछ कुछ और विषय पर निर्णय देने की बात करें। जैसे मैंने पूछा कि आपके यहां पर निर्णायक है कि नहीं? तो पहले बोले नहीं है। फिर बहुत देर की मगजबारी के बाद बोले है। उसमें भी मुझे बहुत सारे उदाहरण देने पड़े। फिर उसके बाद बोलते बोलते फिर बोले कि नहीं नहीं मैं उन्हें निर्णायक नहीं कहूंगा। यहां पर सिद्धांत की बात हो रही है। वहां आपका अपना जो व्यक्तिगत आप लोग क्या करते हैं? वो एक बात अलग है। एक दूसरे के लिए संबोधन क्या करते हैं? मगर यहां सिद्धांत पूछा जा रहा है। निर्णायक है
01:12:35:13 कि नहीं? तो आप यह कह रहे हो कि निर्णायक नहीं है। नहीं कहूंगा। फिर निर्णायक है। फिर निर्णायक नहीं है। फिर निर्णायक है। मार्गदर्शक है। शिक्षा का प्रचार प्रसार करने वाले हैं। फिर बाद में कह तो मैं कह ही चुका हूं। कह चुके हो तो उस पर सस्टेन आप कहां रहे? टिके कहां रहे? बार-बार बदला। इसलिए फिक्स करने के लिए आपसे इतनी जद्दोजहद करनी पड़ी। अब इस बीच में आप बार-बार कुछ और ऐसी चीजें खोलते हैं जिसकी वहां पर आवश्यकता नहीं है। और जिसकी वजह से खामखा जो टाइम है हमारी कन्वर्सेशन का वो बढ़ता जाएगा। मुख्य विषय छूटता जाएगा। का मुख्य विषय तो छूटा ही है। अंतगत मुख्य विषय ये था कि कौन सा वैष्णवाचार्य है प्रभुपाद जी किसी को नियुक्त करके गए नहीं है तो कौन सा वैष्णवाचार्य है जो हस्तक्षेप कर रहा है। अब यदि प्रभुपाद जी यह कह के गए हैं कि कोई नहीं होगा। आप ही लोग डिसाइड करोगे तो यह प्रभुपाद जी को आपको मानना पड़ेगा कि इतने अंशों में वो परंपरा प्राप्त सिद्धांतों को लेकर आगे नहीं बढ़े। ये ये क्लेम करिए कुछ तो एक जगह तो टिकी है ना। आप यह मान लो कि प्रभुपाद जी ने इतनी इतनी चीजों में परंपरा को नहीं माना अपने से कुछ कर दिया तब आप तब फिर मैं पूछूंगा एस इट इज आपका हां भाई शास्त्र जी जय श्री राम
01:13:45:18 अन म्यूट करिए माइक अपना जय श्री राम भैया आवाज आ रही है हां आ रही है आ रही है जी भैया ये तो बात घुमाए जा रहा है। घुमाए जा रहा है। इतना इतना टाइम सच्चाई बताई नहीं। इतना इतना टाइम और इतना घी थोड़ी ना पिया है भाई हमने कि आप बार-बार अपनी कही हुई बातों से मुकररोगे फिर आओगे फिर मुकररोगे। हम उसी में जद्दोजहद में आपको बार-बार मनवाते रहे।
01:14:28:02 यही बात है। ये लोग मरने वाले नहीं है। इन लोग के पास कुछ है नहीं तो वही कोई निर्णायक तो है नहीं इनके पास तो क्या बताएंगे? ये देखो ये अभी तक कह रहे थे तू मुझे लाइव पे ले ले। अब मैं बता दूंगा क्या हो गया। जब लाइव पे लेने की बात हुई तो बहाने बनाने लगे। वो वो दिखाइए इनका पुराना वाला। तू मुझे लाइव पर ले ले। धीरज जी आ जाइए। आपको सुनते हैं हम बस थोड़ा सा बात को फाल खामखा अपने स्टेटमेंट से मुकरिएगा नहीं और जो विषय चल रहा है उससे विषयंतर ना करिएगा प्लीज
01:15:10:00 ये देखिए बिल्कुल बिल्कुल अभी थोड़ी देर पहले आ जाओ भाई आ जाओ लिंक दिया हुआ है आप आ सकते है लिंक दिया हुआ है अब कह रहा सर अब कह रहे है आई एम अनेबल टू जॉइ आई एम अनेबल टू जॉइ विद दिस लिंक तो क्या नए प्रकार का ऋित्विक लिंक दिया जाए क्या आपको [हंसी] अनेबल टू जॉइ अच्छा है अच्छा है ऐसे ही भागो तुम लोग
01:15:50:16 चलिए ठीक है मुझे आशा है आप लोगों को काफी कुछ समझ में आया होगा तो इस का ये जो क्लेम होता है इस ऋत्विक का यह बंडलबाजी है कि वो गड वैष्णव संप्रदाय से हैं। किसी का भी यही आर्य समाजी भी करते हैं। आर्य समाजी क्या कहते हैं? मैं आपको वही बता रहा हूं जो ऋषियों ने कहा है। इस तरीके से परंपरा नहीं होती है। कोई भी व्यक्ति आएगा कह देगा। मैं आपको वो बता रहा हूं जो प्रभुपाद जी ने कहा है। है ना? सही बात है भैया। ये लोग अपने हिसाब से जो मन सौदा दावा ठोक लेंगे। हम तो क्या है अब ये क्या कह रहा है? आई हैव गिवन के वाई का मतलब क्या होता है? आई हैव गिवन यू माय नंबर लिख रहे होंगे तो के वाई हो गया होगा। आई हैव गिवन यू माय नंबर एंड मैं भागने वालों में से नहीं। मैं भागने देखिए एक स्ट्रक्चरल वे में बात करते हैं तो उसमें कुछ समझ में आती चीजें। बार-बार अपनी कही हुई बातों से कोई पलटता है। बार-बार जो पूछा जा रहा है उसको उसकी बजाय कुछ और बोलता है तो दिक्कत आती है। एक स्ट्रक्चरल वे रखिए। पूछा जा रहा है उस बताइए। जैसे आप जब मुझसे कुछ पूछते हो तो मैं उसमें अपनी चीजें सीधे बताता हूं। बिना उसमें मिलावट के जो है वही बताऊंगा ना। और अगर मैं उसमें
01:17:05:20 मिलावट करके बता रहा हूं तो इसका मतलब मुझे अपनी चीजों पर ना बिलीव है ना उनसे प्रेम है ना उनमें श्रद्धा है। क्यों कर रहे हो मिलावट? भाई आप कह दो ना कि निर्णायक नहीं है या मान लो निर्णायक है पर कहते नहीं है। सीधी बात और अगर मैंने पूछा निर्णायक है कि नहीं है अगर निर्णायक मैंने पूछा है कि नहीं है तो भाई महाभारत द्वारिका अरे भाई पहले क्लेम तो कर दो कि निर्णायक है। अगर मान लो आपने कहा निर्णायक है तो उसको आपको जस्टिफाई करने की जरूरत ही नहीं। जब आप कहोगे निर्णायक नहीं है तब आप उसको जस्टिफाई करने की जरूरत पड़ेगी क्योंकि मेरा क्वेश्चन है निर्णायक के बिना आप निर्णय कैसे करोगे प्रभुपाद जी ने क्या कहा तो पहले मुझे बता तो दो कि आपका किशोर निर्णय है जिससे कि मुझे आपको एक्सप्लेनेशन देने की जरूरत है कि नहीं है अगर नहीं है तो एक्सप्लेनेशन चाहिए है तो क्यों चाहिए फिर तो आप उसी साइड हो जिस साइड में हूं फिर तो बात को आगे बढ़ाते हैं कि कौन है वो गौ वैष्णव संप्रदाय के अधीन है कि नहीं भाई किसी एक प्रामाणिक गुरु गद्दी के अधीन होना पड़ेगा ना आपको और प्रामाणिक गुरु गदियां है अभी भी अवेलेबल है जो तो क्यों नहीं है उनके अधीन हो जाओ उनके अधीन सारा सारी लड़ाई खत्म हो जाएगी हो जाओ अधीन हो जाओ उनकी चीजों को मान लो आप
01:18:21:08 हां जी शास्त्रवादी जी जी भैया बिल्कुल ये लोग के पास सच्चाई है नहीं ये लोग तभी बताएंगे कि इनके पास प्रमाणिक कौन है इसलिए ये लोग भागेंगे पहले तो अपना अपनी इज्जत बचाने के लिए चैलेंज दे देंगे कि आओ मेरे को लो लाइव में। मैं तुम्हें बताता हूं और बाद में जब लिंक दिया जाएगा तो भागते फिरेंगे और बोलेंगे भागने वालों ऐसा नहीं हूं। [हंसी] भाषा देखिए भाषा क्या है इस व्यक्ति की कि तू मुझे लाइव पे ले। फिर मैं बताता हूं तुझे। फिर लाइव पर गए। उसके बाद लाइव पर लेने के बाद तू यह तू वो। तो भाई तू कह क्यों रहा है लाइव पे लेने को? पहले सोच दामोदर नाभि भाषे पहले बोल क्या सोच सोच के बोलना राम जो भी बोलते हैं दो सोच समझ के बोलते हैं दो प्रकार की बातें नहीं बोलते अब तुम्हारे यहां राम को माना ही नहीं जाता है एक अलग ही काल्पनिक कृष्ण बना करके आप लोग पूज रहे हो तो क्या किया जाएगा चलिए खैर आप लोगों को आनंद आया होगा आज की चर्चा में मुझे लगता है और समय देने के लिए सबका आभार शास्त्र जी आपका आभार जय श्री राम सभी को
01:19:33:20 अभी अभी आप अभी आप बताइएगा ये सब बातें आप लाइव आ के करिए क्योंकि मैं आपको यहां भी म्यूट कर सकता हूं। हेलो आप जो यहां बोल रहे हैं ना ये भी आप लाइव आ के करिए। आपको मैं यहां भी म्यूट कर सकता हूं। आपको बैन कर सकता हूं। फिर आप पूछिएगा अधिकार तुझे किसने दिया बैन करने का? जैसे आप यहां पर बात कर पा रहे हो मुझसे। मैं चाह रहा हूं आपको बोलने दे रहा हूं तब आप बोल पा रहे हो। तो आकर के आप जब मैं देख रहा हूं सामने वाला अपनी उसकी जो फितरत है उसके कारण से वो बार-बार बातों को बदल रहा है, घुमा रहा है। तो मैं जब वो मेरी बात में इंटरप्ट कर रहा है तब उसे म्यूट कर रहा हूं। अगर ऐसा ही है कि म्यूट करने का अधिकार किसने दिया तो उससे पूछो कि उसको इंटरप्ट करने का अधिकार किसने दिया। ठीक है? और फिलहाल जो आप यहां पर लिख रहे हैं मैं आपको भी म्यूट कर सकता हूं। तो आपको यहां पर भी लिखना नहीं चाहिए। क्योंकि अगर मेरे आप मेरे द्वारा आपके अधिकार छीनने के कारण आप नहीं आ रहे हैं ऊपर तो वो जो अधिकार छीनने का आधार है वो यहां भी लागू होता है। ठीक है? जय
01:20:48:24 श्री राम सभी को। जय श्री राम भैया।
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रित्विक सिस्टम या गुरु परंपरा का सत्यानाश
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