⬜ Not used yet · 00:00:04:16 – 00:03:15:22 (3:11)
00:00:04:16 अभी जो वीडियोस आप लोग देखने वाले हैं, [संगीत] इस प्रकार के वीडियोस बहुत ही हाई लेवल के रिस्क पर हम लोग बनाते हैं और आपको उपलब्ध [संगीत] कराते हैं। केवल और केवल आपको जागरूक करने के लिए कि जो गंभीर विषय हैं जो आप तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कोई भी मीडिया आप तक नहीं पहुंचा रहा है, वह हम आपको उपलब्ध करा सकें। [संगीत] इसमें कई प्रकार के रिस्क होते हैं कि सामने वाले के प्रांगण में हम गए हैं। जैसे हमने [संगीत] एक अधोक्षजानंद का वीडियो बनाया था जो आंतरिक रूप से हमें बहुत ही असामाजिक तत्व दिखाई दिया था। और इसी प्रकार से अभी हम जब गए हैं यहां पर जो वीडियो [संगीत] आप देखने वाले हैं यह व्यक्ति उसी प्रकार का है। तो जब हम ऐसे किसी प्रांगण में जाते हैं जो [संगीत] पूरी तरीके से आपराधिक प्रवृत्ति का है तो वहां पर सबसे पहले तो हमारे प्राणों पर भी बात आ सकती है। हम पर कोई [संगीत] झूठा आरोप लगाया जा सकता है। कोई महिला इत्यादि के साथ हमारे साथ में जोड़ते [संगीत] हुए हम पर कोई आरोप लग सकता है। बहुत सारे वहां पर रिस्क होते हैं। सारे चीजों को, सारी चुनौतियों [संगीत] को ध्यान में रखते हुए हम वहां पहुंचते हैं। और इसीलिए कई बार ऐसा
00:01:19:20 होता [संगीत] है कि वहां पर सच को सामने लाना भी एक उद्देश्य है। और फिर जो वहां पर रिकॉर्डिंग हुई है उस रिकॉर्डिंग को सकुशल लेकर के बाहर आना भी एक टास्क होता है। तो पहली बात तो यही है कि जब व्यक्ति प्रश्न का [संगीत] जवाब देने से मना ही कर देता है तो वहां पर चर्चा को आगे बढ़ाने से या फिर बढ़ाएं तो किस प्रकार से बढ़ाएं यह वाली बात आ जाती है। दूसरी बात यह भी है कि जब ऐसी [संगीत] चीजें रिकॉर्ड हो जाती हैं और हमें अपने मतलब की चीजें प्राप्त हो जाती हैं। संतुष्टिजनक चीजें मिल [संगीत] जाती हैं। तो उसके बाद उन चीजों को बाहर उस प्रांगण से वह जो प्रांगण है जहां पर हम लोग अभी हैं [संगीत] वहां से बाहर लाने तक की यात्रा अभी हमारी शेष होती है कि कहीं ऐसा ना हो कि कोई मोबाइल की [संगीत] छीनापटी हो। जबरदस्ती हमारा वीडियो डिलीट कराया जाए। यह सब कोशिश भी ना हो। तो इन बातों को ध्यान में रखते हुए जब हम [संगीत] ऐसी किसी जगह जाते हैं तो वहां पर हमें सामंजस्य बिठाना होता है कि सच्चाई भी बाहर आ जाए और यह [संगीत] जो सच्चाई अभी राइट नाउ जो हम हमने रिकॉर्ड की अपने कैमरे में [संगीत] वो किस प्रकार से इस प्रांगण से बाहर तक आए। तो इस कारण से हमें कई बार दो बातें सुननी [संगीत] पड़ती हैं। कई बार खून का घूंट पीना पड़ता है। कई बार प्रतिकार नहीं कर पाते।
00:02:34:26 हम तो यह सारी चीजें इतने सारे रिस्क लेकर [संगीत] के हम इस प्रकार की जो जानकारियां हैं, इस प्रकार की जो वीडियोस हैं वो आपको उपलब्ध कराते [संगीत] हैं। तो इसलिए आप लोगों से निवेदन है कि इस ऐसे इस प्रकार के हाई लेवल के रिस्क पर बनाए गए ये जो वीडियोस हैं [संगीत] इनको आप बिल्कुल भी नजरअंदाज ना करें। इग्नोर ना करें और जितना ज्यादा से ज्यादा हो सकता है इसको [संगीत] स्प्रेड करें। अ जैसे भी हो सकता है, जिस रूप [संगीत] में भी हो सकता है, प्रार्थना से हो सकता है या अन्य किसी प्रकार से भी आप अगर सहायता कर सकते हैं तो अवश्य करें। जय श्री राम। [संगीत] तो सभी को जय श्री राम। जैसा कि आप सभी
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→ Used in: A · Video हरिद्वार में आर्यसमाजी आचार्य जी के साथ विशेष वार्ता "अंग्रेजी और उर्दू में भी -... at 0:13 ↗
00:03:15:22 जानते हैं हम विभिन्न जो अध्यात्म को लेकर के विचारधारा है उनको चर्चा के माध्यम से आपके समक्ष प्रस्तुत
⬜ Not used yet · 00:03:24:04 – 00:45:11:00 (41:47)
00:03:24:04 करते हैं और इसी क्रम में आज हम आए हैं क्रिया योग आश्रम आप जब प्रयागराज में आएंगे और यदि आप संगम की तरफ आएंगे तो इस समय माघ मेला भी यहां पर लगा हुआ है। जैसे ही आप संगम को क्रॉस करते हैं तो आपको एक नाम बहुत अच्छे से दिखाई देने लगेगा संगम को जो गंगा मां को जैसे ही पार आप करेंगे ब्रिज के द्वारा तो आप दूसरी तरफ आएंगे इस क्षेत्र को कहते हैं झूसी झूसी कहते हैं तो जैसे ही आप इस पार आएंगे शास्त्री ब्रिज से तो आपको एक नाम दिखाई देगा क्रिया योग आश्रम और बहुत ही भव्यता के साथ यह आश्रम यहां पर बना हुआ है मतलब ऐसा हो नहीं सकता कि आप यहां पर आए और आपको क्रिया योग आश्रम के बारे में मतलब वो वो दिखाई ना दे। तो बहुत यह आकर्षित करने वाला एक लैंडमार्क है इधर गंगा के इस पार का और हो सकता है भविष्य में पूरे विश्व के लिए भी हो संभवत इस समय भी हो। तो आज हम उन्हीं के सानिध्य में हैं जो इस आश्रम के संचालक भी हैं और मार्गदर्शक भी हैं, गुरु भी हैं, आध्यात्म को जो पढ़ा रहे हैं लोगों को। तो सबसे पहले महाराज जी को मैं प्रणाम करता हूं और महाराज जी
00:04:39:08 थोड़ा सा अपना जो आपकी निजी यात्रा रही है इस जीवन में आने के लिए थोड़ी सी वो हमारे दर्शकों को आप बताएं। जैसे प्रत्येक व्यक्ति मांगता है कि हम मनुष्य हैं। जी निजी यात्रा में इतना समय लीजिए कि हम क्रिया योग जी क्रिया योग से हर प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। जैसे मनुष्य ये चाहे तो परबह्म के साथ एकाकार हो जाए। अच्छा भगवान के साथ एकाकार हो जाए। अच्छा अच्छा एकाकार होने का विज्ञान क्या है? जी आप मेडिकल डॉक्टर हो जाइए, नोबेल प्राइज पाइए। इंजीनियर हो जाएंगे। कुछ भी आप पढ़ लीजिए लेकिन उसे प्रभु मिलेंगे ये सुनिश्चित नहीं है। जी क्रिया ध्यान करने से शत प्रतिशत बिना किसी शंका के हमारे प्रभु से मिलन हो जाता है। उस मिलन में क्या होता है? पता चलता है हम अमर है। अमर ही नहीं है। जहांजहां प्रभु वहां वहां हम हैं। जी वो सर्वव्यापी हम भी उसी के साथ हैं। जी उसके अस्तित्व में जो कुछ है पता चलता है हम उसी के साथ हैं। जी ये प्रभु के साथ ये एकता हो जाती है। जी तो हर प्रकार के दुख कष्ट हमेशा के
00:05:54:09 लिए समाप्त हो जाते हैं। जी ये सिद्ध हो चुका है। जी जी और जो भी अभ्यास करते हैं उनको होता ही जी मात्र दो सप्ताह के विधिवत अभ्यास में आभास हो जाता है। अब इसके अभ्यास के पूर्णता में आएंगे। सभी प्रकार का अभाव मिट जाता है। जी अभाव जैसे अंदर में वाइटलिटी का अभाव है, जीवन शक्ति की कमी है, ज्ञान का अभाव है, शक्ति का अभाव है, शांति का अभाव है। ये सब अभाव मिट जाते हैं। और बाहर का भी अभाव मिट जाता है। जैसे घर नहीं है, मकान नहीं है, संसाधन नहीं है। ये सब आ जाते हैं। इसको अगर अभ्यास करते हैं तो हर चीजें वैसे ही प्राप्त हो जाती है। सारे दुख वैसे खत्म हो जाते हैं जैसे गाना सुने होंगे। सुन सुन सुन इस चम्पी में बड़े-बड़े लाख दुखों की एक दवाएं क्यों ना आजमाएं। जी तो आप क्रिया आजमा करके देखिए। हर प्रकार की दिक्कतें हमेशा के लिए समाप्त होती है। किसी एक के लिए नहीं। इसमें ये नहीं होता है कि हम अच्छा काम किए हैं। तब अभ्यास करेंगे। ऐसा नहीं है। जी। हम चाहे जितना भी जघन्य अपराध क्यों ना किए। अगर इसको अपनाते हैं तो जगन अपराध के बाद जो
00:07:09:15 एक आउट इफेक्ट होता है अगर मैंने कोई अपराध किया तो उसका कोई एक जो प्रतिफल मिलता है जो हमें पनिशमेंट मिलता है जब इसकी आयोग से जुड़ते हैं तो दो चीज होती है सारे अपराध का जो पनिशमेंट वो गायब हो जाता है और हम ऐसे सक्षम हो जाते हैं कि दोबारा अपराध करते भी नहीं ये भी होता है जी किसी प्रकार का अपराध दोबारा होता भी नहीं है और हर प्रकार के विपत्ति उससे दुख से पूरी तरह से मुक्त हो जाते हैं। बहुत ही सुंदर व्याख्यान किया महाराज जी ने। अह क्रिया योग के बारे में बताया और मिलने वाले जो परिणाम है एक तरीके से संक्षिप्त में गए हो तो महाराज जी हम कह सकते हैं कि भोग और मोक्ष दोनों ही सुलभ हो जाते हैं। भोग यानी कि जो आपने बताया जो सांसारिक चीजें हैं वो भी प्राप्त होती है। वो भोग शब्द ही गलत है। वो अच्छा अच्छा जो भोग लोगों ने शब्द दे रखा है वो लोग दिए हैं। जी जो असत्य को जानते हैं। अच्छा नहीं आप जिसको सच पता नहीं है। जी जी जी जिसको सच पता है वहां भोग शब्द नहीं है वहां योग है। नहीं जैसे आपने कहा ना सांसारिक जो अभाव है वह भी तो सांसारिक नाम ही नहीं लिए। अच्छा जो बाहरी सामने जो मैंने कहा वो भी आप कह रहे हैं। अच्छा मैं शायद समझ नहीं पाया। जी जी तो जब आप क्रिया से जुड़ते हैं तो भोग शब्द सांसारिक
00:08:24:21 शब्द विलुप्त हो जाता है। जी जी क्यों बचता है कि योग की स्थिति हम जुड़ गए हैं। जुड़ गए हैं। ईश्वर से किससे जुड़ गए? शक्ति से, ज्ञान से, शांति से, आनंद से, अमृत से सबसे जुड़ जाते हैं। हर प्रकार की झगड़ा झंझट, तनाव दूर हो जाता है। जी बहुत बढ़िया। मैं थोड़ी सी समझने में मिस्टेक भी कर रहा था। तो महाराज जी ने मुझे करेक्ट कर दिया। तो महाराज जी जैसे आपने कहा ना कि ईश्वर के साथ एकत्व प्राप्त कर लेते हैं। तो सर्वव्यापक भी हो जाते हैं। ईश्वर जहां-जहां वहां वहां हो जाते हैं। तो आपने एक दूसरी बात कही थी ना कि बाहरी अभाव भी मिट जाता है। वो बाहरी अभाव क्या है? जैसे लोग समझते हैं ना कि हमारे पास कंप्यूटर नहीं है। अच्छा हमारे पास मकान नहीं है। हम हमारे पास जितना संसाधन चाहिए वो नहीं है। जी तो सब चीजें अपने आप आ जाती है। जैसे हम बैठे हैं जी हवा आ रही है। जी सांस ले रहे हैं। जी आसमान भी है। जी पृथ्वी भी है। जी। जब क्रियायोग से जुड़ते हैं तो जितने प्रकार की आवश्यकताएं होती हैं सब स्वता पूरी हो जाती है। बस बस महाराज जी मैं उसी के लिए वो शब्द यूज़ कर रहा था। शायद वो शब्द उचित नहीं है। अच्छा महाराज जी एक चीज देख रहा हूं मैं कि आपके हाथ में एक ये कुछ एक ये हां जी इसके बारे में थोड़ा सा बताएं। ये बड़ा
00:09:40:04 कि हम क्रिया योग क्या है? जी क्रिया एक वैज्ञानिक आध्यात्मिक अभ्यास है। अच्छा प्रैक्टिकल है ये। जी इस पर क्या करते हैं? हम प्रभु को खोजते हैं। कहां खोजे हम मंदिर में? कि मस्जिद में गुरुद्वारे में कि चर्च में कि अपने हाथ में पैर में कि यहां के वहां कहां खोजे तो महतार बाबा ने आविष्कार करके बताया कि महातार बाबा अभी भी लाखों वर्ष के हैं लेकिन अत्य नए रूप में प्रकट होते हैं। उनका नाम ही मृत्युंजय महाता बाबा फिर लड़ी महा ज्ञान दिए उनको क्या ज्ञान दिए कि अगर हम चाहते हो एक ही जन्म में हम पूरी तरीके से उस स्थिति को पा जाए पा जाए अभाव से मुक्त हो जाए हमारे परबह्म में एकता हो जाए तो शरीर के अंदर जो स्पाइनल कॉर्ड है स्पाइनल कॉर्ड का प्रतीक है अच्छा हम स्पाइनल कॉर्ड में और इसके ऊपर जो सिर है ब्रेन है ब्रेन
00:10:46:24 ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को जोड़ता है। मेडुला मेडुला हमारे ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को जोड़ता है। तो जो जोड़ता है इसी में योग का ज्ञान है। जी जब हम अपने अंदर उस चीज को खोजते हैं जिसको अनंत कहते हैं। ये जो स्पाइनल कॉर्ड है इसमें ज्ञान और शक्ति से भर जाता है। शांति से आनंद से अमृत से भर जाता है। इसमें बाढ़ आ जाती है। जैसे नदी में बाढ़ आ जाए। नदी में बाढ़ आने के बाद वो पानी समुद्र में जाता है। जी इसमें बाढ़ आ जाती है। तो ये ज्ञान और शक्ति शांति ऊपर की तरफ फूटता है। जहां जो एक मेडुला लंगेटा है जो है ब्रेन का भाग है जो ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को जोड़ता है। इसमें जब एक थ्रेशहोल्ड पॉइंट से भर जाता है तो जो आप पीला पीला देख रहे हैं ये रिप्रेजेंट करता है विजिबल यूनिवर्स। अच्छा इसके फोटो ले लेते हैं, छू लेते हैं आदि आदि उसका ज्ञान होता है। जैसे अपना शरीर वििबल है ये तो इसका ज्ञान हो जाएगा। फिर अपने को रिपेयर कर लीजिए, हड्डियां ठीक कर लीजिए, मांसपेशियां ठीक कर लीजिए, आंख, कान ठीक कर लीजिए। इसका ज्ञान हो जाता है। यह कहां से आया है? जो आप ब्रू देख रहे हैं। ये ब्रू
00:12:01:25 है एस्टल वर्ड। यहां पर मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार होता है। दसों इंद्रियाएं होती हैं। तन मात्रा होता है। इसका ज्ञान हो जाता है। यही प्रकट होता है भौतिक शरीर के रूप में। यह सूक्ष्म शरीर कहां से प्रकट होता है? यह कारण शरीर। यह सिर है, दो हाथ है, यह दो पैर है। यह ज्ञान का शरीर है। जिसको कहते हैं भाव जगत, कारण जगत, कारण शरीर। यहां से प्रकट हुआ सूक्ष्म शरीर, यहां से भौतिक। जब पूरी तरह से यह थेशोल्ड इसमें हम एकाग्रता पा जाते हैं। हमें तीनों ज्ञान हो जाता है। फिर जब तक चाहे पृथ्वी पर रहे महात्मा गांधी को ये ज्ञान था बचपन से तो सिर में देखते थे। देख रहे होंगे सिर में एक शक्ति घूमती है। शरीर के अंदर आती महात्मा गांधी को फील होता था। सोचे अगर यह सब फील करें तो सभी सत्य हिंसा के मार्ग पर चले। ये टेक्निकल चीज है। कोई आसानी से फील कर ले। ऐसा संभव नहीं हो रहा था। तो उन्होंने क्या कहा? छत्रपती सब चरखा चलाए। यहीं से चरखे का आविष्कार हुआ। जी। महात्मा गांधी चरखा का आविष्कार यहीं शुरू किए। जी जी और पूरे देश का चरखा चला दिए। तो बहुत ही सुंदर और बड़ा मतलब मुझे बड़ा ही रोचक जो इसकी जानकारी मिली। इसको हम नाम क्या
00:13:16:28 देते हैं? मतलब एक्चुअली इसको सामान्य नाम है दंड। दंड। जब कोई हम गलती करें तो दंड स्वीकार करें। यानी हम सिर और में ध्यान लगाए। अच्छा। ध्यान लगाते लगाते पता हमें ब्रह्म ज्ञान हो गया। निर्माण कैसे करें? ये ब्रह्मदंड हो जाता है। ये अच्छा तो ये महाराज जी का दंड का हमने व्याख्यान देखा। बड़ा ही इंटरेस्टिंग था और उन्होंने बहुत ही क्रमानुसार बताया कि किस तरीके से योग के माध्यम से शक्तियां आपकी प्रवाहित होंगी और सर की तरफ और फिर वो वहां पर ज्ञान उद्भाषित होगा। पहले स्थूल फिर सूक्ष्म फिर जो है कारण शरीर के रूप में और महात्मा गांधी जी का भी उन्होंने बताया। अच्छा महाराज जी एक बात आपने कही कि महात्मा गांधी जी ने भी इसी प्रकार से उनको ज्ञान था। महात्मा गांधी का ज्ञान था जब जब परमहंस योगानंद जी जी अमेरिका में 15 साल रहे जी फिर गुरुदेव ने कहा कि जल्दी आओ हमें जाने का समय हो रहा है कहने लगे हमारे से मिलने पहले गांधी दीक्षा दे के आओ तुम्हारों से कर्म बंधन हमसे नहीं है अच्छा उनको दीक्षा देने गई दीक्षा देने बाद महसूस किया परम योग ये तो ग्रेट प्रॉफेट है अच्छा तो ये अपने अंतिम संदेश में कहा ये जो प्रॉफेट थे महात्मा गांधी जी हां ग्रेट प्रॉफेट देखिए यह जब परमहंस योगानंद जब शरीर
00:14:32:21 छोड़ने का समय हुआ तो उस समय महात बाबा ने 50 देशों के फॉरेन डिप्लोमेट्स जितने राजदूत थे वो सब इकट्ठा हुए लेफ्टिनेंट गवर्नर कैलिफोर्निया के सब थे ये और उसके बाद इसमें एक की स्पीकर थे परम सेवन बुलाया गया था उसको मुख्य संदेश देने के लिए तब खड़े हो रहे हैं बोलने के लिए इंडियन एंबेसडर की वाइफ अंतिम फोटो है ये जी अपना संदेश देने के बाद परमहंस योगानंद ऐसे बैठ जाते हैं और इनकी बॉडी ऐसे पड़ी रही अब तो इसमें किसी प्रकार सरन दुर्गंध नहीं आई इस अब इन्होंने जब ये शरीर छोड़ रहे थे तो इन्होंने एक संदेश दिया उस संदेश में उनकी पहली लाइन यही थी आई रिमेंबर माय मीटिंग वि महात्मा गांधी द ग्रेट प्रॉफेट ब्रॉट अ प्रैक्टिकल मेथड ऑफ पीस प्रॉफेट जैसे कि जीसस प्रॉफेट जैसे भगवान राम है भगवान कृष्ण है जीसस है बुद्धा है ये सब ग्रेट प्रॉफेट कहे जाते हैं ये प्रॉफिट है मतलब हमारे यहां तो राम जी और कृष्ण जी का मतलब अवतार होता है अच्छा अच्छा अवतार दूत के रूप में नहीं जो भविष्य बता दे अतीत बता दे वर्तमान बता दे उसे प्रॉफिट कहते हैं। अच्छा हां अच्छा तो ये उस रूप
00:15:47:25 में हम उसे अवतार मानते हैं और ये जो ये लोग जो है ये कहते हैं कि भाई वो किसी मैसेंजर को भेजा गया है। अच्छा अच्छा अब गांधी जी फॉर द फर्स्ट टाइम अपाइड प्रिंसिपल ऑफ़ ट्रुथ एंड नॉन वायलेंस दैट शुड बी फॉललोड बाय ऑल नेशंस टू सॉल्व देयर प्रॉब्लम ही इन्होंने संदेश दे के ऐसे शरीर छोड़ दिया तो वह वही बताने का प्रयास करते हैं कोई गांधी के मार्ग पर चले तो अभाव मिट जाता है गांधी का मार्ग क्या है प्रतिदिन क्रिया योग करते थे बिना नागा के उनका और मार्ग क्या है किसी की निंदा ना करिए कोई गाली दिए आप गाली मत दीजिए कोई कुछ भी करे आप उसकी निंदा करिए ही मत। जी। आपका काम उसकी सेवा करना। बहुत सुंदर। एक सुंदर सेवक बनकर के सेवा करिए और सेवा करके उपकृत हो रहे हैं। ये सोचिए उसे कोई रिटर्न ना चाहिए। इस तरह चलने के बाद जानते हैं भारत की समस्या खत्म हो जाएगी। बिल्कुल बिल्कुल। गांधी मार्ग चलने के बाद हर नेता इस मार्ग पर चले तो पैसे जो इधर-उधर हेराफेरी होती है बंद हो जाएगा। ब्यूरोक्रेसी बदल जाएगी। न्यायपालिका बदल जाएगी। अच्छा महाराज जी जैसे हमने गांधी जी के बारे में जो बताया है वो गांधी जी ने भी अपनी किसी बुक वगैरह में अपनी लिखा है कि मुझे यह चीजें थी मैं इस तरीके से सोचता था। भाई गांधी जी जब ऑपरेशन हुआ पूरी दुनिया जानती है एनिस्ट्रेशन
00:17:02:26 नहीं लिए थे। खाना पीना बड़ा गलत था जेल में। नहीं मतलब उन्होंने लिखा है कई सुनिए हमारी बात। अभी तक उत्तर दे रहे हैं। जी जी जब गांधी जी का जेल में खाना पीना अव्यवस्थित था तो उनको अपेंडिसाइटिस हो गया। हम तो उनका ऑपरेशन अंग्रेज डॉक्टर से उन्होंने कराया। जी बिजली नहीं थी। लालटेन में कराया। नहीं लिया। जी। उस समय सर्जरी बहुत स्थूल थी। पूरा लंबा काटा जाता था। पेट काटा सब कुछ हुआ। स्ट्रेचेस लगी। उसके बाद ना दवा खाया ना तो उन्होंने सीए ना तो दर्द हुआ। तो कौन करेगा ये? ये जग विदित थे ये अनुमान से हम लोग ऐसा कह सकते हैं कि उनको ऐसा ज्ञान था क्योंकि वो ऐसा-सा टॉर्चर झेल गए क्योंकि उन्होंने टॉर्चर मुस्कुराते रहे बात करते रहे झेले कहां वो जी जी हां हां मतलब हां झेले वो झेले टॉर्चर हुआ सब टॉर्चर वो टॉर्चर को वो जॉय समझते रहे उनको पेन हुआ ही नहीं तो इस हिसाब से तो महाराज जी मुझे लगता है कि वो जो अनशन पे बैठते थे वो भी वो केवल एक दिखावा मात्र था अनशन बैठते थे लोगों को कन्विंस करने के लिए अनशन बैठ के सूक्ष्म शरीर में जाए तो उनके अंदर जाके बदल दे। अच्छा। इतने लोग अनशन बैठते हैं क्या कर पाते? कुछ भी नहीं। उनके अनशन बैठते पूरा ब्रिटिश गवर्नमेंट हिल जाती थी। कारण क्या था? अनशन बैठ के जो सूक्ष्म शरीर में
00:18:17:27 जाकर के उनके अंदर प्रवेश करके चेंज कर देते थे। इनके अंदर ये पावर थी। मगर महाराज जी एक बार जो उन्होंने जो असहयोग आंदोलन चलाया था गांधी जी ने तो उसमें ब्रिटिश गवर्नमेंट मानी नहीं थी। बाद में गांधी जी ने उसको वापस ले लिया था। क्यों लिया? क्योंकि बलिया से राम मंगल पांडे ने जी लड़ाई करा दिया 22-22 पुलिस को जला दिया गया वो मना किए थे झगड़ा कोई नहीं करेगा इसे विड्थ कर लिया उन्होंने अच्छा फिर विड्ड का फिर शुरू किया बूम कर गया उन्होंने कहा था कोई झगड़ा नहीं करेगा कोई मारपीट नहीं करेगा कुछ नहीं करेगा आगे बढ़ते रहिए जी जी जी उस मार्ग पर चलते तो 1926 में ही आजादी मिल जाती तो ये गांधी जी के बारे में मैं कुछ जानने को थोड़ा सा स्पिरिचुअल उसमें आते महाराज जी आजकल की जो जनरेशन है वो बहुत ही ज्यादा मतलब लॉजिक मांगती है। जैसे हमने शुरू में ही कहा कि हम ईश्वर के साथ एकत्व को प्राप्त करते हैं। तो वो ईश्वर के अस्तित्व पर ही प्रश्न खड़ा करती है कि भ ईश्वर है ये कैसे मान लें हम? हां सही है तो क्रियाकारी मान लेंगे। भाई मैटर नहीं है। फिजिक्स सिद्ध किया कि नहीं? मैटर होता ही नहीं है। हम हम फिजिक्स में है ये। हम हर चीज कंडेंस एनर्जी है। तो कैसे मानेंगे? उनको प्रयोग करना पड़ेगा। हर जगह इलेक्ट्रिसिटी है। हर जगह अग्नि
00:19:33:01 तत्व से बना है। हम आप एक आयरन रड को आप काटिए तो आपको दिखाई पड़ेगा। उसमें आग ही आग है। लाइट लाइट है। तो कोई चीज सिद्ध करने के लिए उसका प्रयोग करना पड़ता है ना। जो क्रिया का प्रयोग किए वो सिद्ध कर ले गए। उनको अगर सिद्ध करना है। क्रिया का अभ्यास करें सिद्ध हो जाएगा। मगर महाराज जी जैसे सबसे पहले उनको कन्विंस करना होगा ना कि यहां से आपको ईश्वर मिलेगा। कन्वस नहीं करना होता है। जी भुगतते भुगतते फिर आ जाते हैं उसी में जब कहीं रास्ता नहीं मिलता है तब आगे मगर हमारे यहां पे बहुत सारे दर्शन है जैसे विशिष्टाद्वैत अद्वैत इन सब में कोई दर्शन सब दर्शन नहीं सब वो है माया है ईश्वर की सिद्धि तो की गई है ना दर्शन कोई कोई सिद्धि नहीं कर पाया से कि पहले कोई सिद्ध नहीं थे जो थे सिद्ध कबीर थे गुरु नानक देव थे जैसे बौद्धों का खंडन किया था ना शंकराचार्य जी ने कभी नहीं किया बौद्ध खंडन शंकराचार्य को प्रकृष्ट बुद्धा कहा गया ये किसने कहा खंडन किया प्रचंड बौद्ध प्रछंद बौद्ध की कह रहे हैं क्या यानी प्रकृष्ट बौद्ध प्रकृष्ट बौद्ध का मतलब आदि शंकराचार्य को यह कहा गया प्रकृष्ट बुद्धिज्म का प्रचार कीजिए। ये पूरा बुद्धिज्म ला रहे हैं। इसलिए उनको मार दिया केदारनाथ ने। नहीं किसने कहा ये प्रकृष्ट बौद्ध? पूरा पढ़ाया जाता है यूनिवर्सिटी में पढ़िए। फिलहाल पूरा है नहीं नहीं प्रकृष्ट बौद्ध नहीं। आप नहीं जानते पढ़ो। आप पढ़िए। एक जी आपको
00:20:48:04 नहीं पता है। ये जी जी। आदि शंकराचार्य को वो बुद्धिज्म का ही प्रचार किया। संस्कृत भाषा में तब उनको केदारनाथ नहीं उन्होंने तो बौद्धों का खंडन किया था ना कहीं नहीं किया खंडन गलत बताते झूठ बोलते हो हम भी बता रहे हैं हिस्ट्री में ही ये सब लिखा हुआ है महाराज हिस्ट्री गलत लिखा हुआ है हम भी बता रहे हैं तो फिर वहां यूनिवर्सिटी में पत्र आता है फिलॉसफी में एक प्रश्न आता है कि सिद्ध करिए कि आदि शंकराचार्य प्रकृष्ट बौद्ध थे बुद्धिज्म प्रचार किए इसलिए उनको मार दिए ना कि अगर इनका फैल गया बुद्धिज्म फिर से तो हमारे सब ये खत्म हो जाएगा जो महाराज जी जैसे इन्होंने शून्यवाद दिया था ना बौद्धों ने बौद्धों उन्होंने दिया था शून्यवाद कुछ नहीं दिया था बुद्धा ने गलत पढ़ाते हैं तो जब गलत पढ़ाते हैं और एक जगह लिखा है कि ऐसा हुआ था एक जगह लिखा क्या होता है हम लिख देंगे हम घोड़ा है मान लेंगे आप नहीं तो लिखा हनुमान जी बंदर है मान लेंगे आप नहीं मैं वो नहीं कह रहा हूं लिखा पुखा सब गलत होता है कोई चीज लिख दे सही नहीं होता वो नहीं नहीं मैं वो नहीं कह रहा हूं असल में मैं ये कह रहा हूं जैसे एक जगह में पढ़ाया जा रहा है कि गलत पढ़ाया जा रहा है नोट कर लीजिए टोटल गलत पढ़ाया जा रहा है यूनिवर्सिटी में झगड़ा है मैं समझ रहा हूं मेरा प्रश्न कुछ और मैं कह रहा हूं एक जगह हमको पढ़ाया जा रहा है कि जैसे उन्होंने परास्त किया उन्होंने जो है नास्तिकवाद का हराया मतलब बौद्ध जो है ईश्वरवादी नहीं थे और दूसरी जगह आपने बताया यूनिवर्सिटी में ये गलत है
00:22:03:18 गौतम बुद्ध पूरा ईश्वरवादी थे एक मिनट ईश्वर बारे में आप बोल नहीं सकते हैं तो क्या झूठ बोलेंगे वो एक मिनट सत्य के बारे में बोला नहीं बता तो आपको ये परम झूठ तो नहीं बोलेंगे इन्होंने लिखा है बुद्धा ईश्वरवादी थे जिनके शरीर नहीं डिके किया स्वेच्छा शरीर छोड़ के गए ये तो झूठ नहीं बोलेंगे ना नहीं उनके यहां ईश्वर को कहा माना गया। अरे यार आप ये गलत बताएं कि आप ज्यादा ज्ञानी हैं। सुरक्षा शरीर छोड़ा ऐसे पढ़िए। इसमें लिखा हुआ बुद्धिज्म का तो महाराज जी किसी ने तो ये मतलब सिद्धांतिक तौर पर कुछ थ्योरी सिद्धांतिक नहीं है। गलत बताते हैं। नहीं नहीं मैं मैं पूछ रहा था किसी ने थ्योरी तो दी होगी कि ईश्वर होता है कैसे किस प्रकार से सिद्ध होता है। थ्योरी हम दे तो रहे हैं। जैसे थ्योरी मिल तो रही है। अभ्यास कर आपको पता चले कि ईश्वर को खाना खाएंगे तभी स्वाद मिलेगा। जी खाएंगे से स्वाद मिलेगा नहीं। नहीं, स्वाद तो मोक्ष हो गया ना? वह तो ईश्वर का मोक्ष हो गया। मतलब क्या? मोक्ष के बारे में जानते नहीं। फिर क्यों बोल रहे हैं मोक्ष? नहीं। मोक्ष का मतलब क्या है? हां। जैसे ईश्वर को प्राप्त करेंगे तभी तो मोक्ष मिलेगा। उसका मतलब क्या है? मोक्ष वो स्टेट है सच्चिदानंद स्वरूप जो होना चाहता है। मतलब है। जो होना चाहता है सच्चिदानंद क्या है? सत मतलब स्वरूप से सत हो जाए और चित्त अखंड ज्ञान और आनंद अनंत सुख। मोक्ष मोक्ष मतलब अमर हुआ ना? हां जो आपने शुरू में बताया था ना। मोक्ष मतलब अमर हुआ ना? हां। अमर। अमर होने की एक क्रिया
00:23:18:21 है। क्रिया योग अभ्यास कर पता चल नहीं मरते हैं। जो क्रिया नहीं करते समृद्ध लोग मानते हैं। मतलब जब क्रिया करेंगे तभी ये हम मान जान सकते हैं। अरे आप यहां बात कर रहे हैं तभी तो सुनाई पड़ रहा है। जी क्रिया योग करेंगे तभी तो पता चलेगा। नहीं वो तो वो तो प्राप्तव्य हो गया ना महाराज जी जैसे प्राप्तव्य आप चलेंगे कैसे चलेंगे? चलेंगे तभी पहुंचेंगे वहां पर। आप कहेंगे चल नहीं करेंगे पहुंच जाए। वही मैं कह रहा हूं। पहुंचने वाली जगह तो मोक्ष की स्टेट है ना। ईश्वर अरे मोक्ष मतलब क्या होता है? सत्य को जानना है ना? क्रिक अभ्यास करके सत्य को जान जाएंगे। जी। पता चल गया इतना। तो ईश्वर की सिद्धि इसमें कहां से आ गई? मोक्ष जानेंगे। आपको ईश्वर पता है ना सिद्धि पता है। सुन लीजिए कि आप बकवास कर रहे हैं। कर दीजिए। एयर कर दीजिए। आप गलत कर रहे हैं। आपको कुछ आता नहीं है। आप आके ध्यान करिए पता चल जाएगा। सिद्धि का मतलब क्या होता है? हमने सिद्ध कर लिए ईश्वर है। हम्म हम्म। ईश्वर ने सिद्ध कर लिए। गौतम बुद्धा ने किया। ये तो ये तो गलत नहीं लिखेंगे ना गौतम बुद्ध ने गलत नहीं लिखेंगे परम योगानंद सुनिए हमारी बात गलत नहीं लिखेंगे ना परमहंस योगानंद इसमें लिखा है गौतम बुद्धा ने कहा है कि ईश्वर है तो उनके लिटरेचर कोई मिलता है ऐसा अरे पढ़िए ना इसको सब मिलेगा मैं समझ गया जो आदमी अपना मृत्यु पर विजय पाए वो लिखेगा बाकी लोग सही लिखेंगे
00:24:34:21 आप कौन सी लिस्ट से पढ़ना चाहते हैं गलत तो महाराज जी कोई और व्यक्ति भी तो चमत्कारिक हो सकता है तो आप जाइए उनके पास नहीं नहीं मैं ये नहीं कह रहा कोई व्यक्ति जो जाइए ना हम क्या जाने कौन है चमत्कारी नहीं जैसे हम तो जानते हैं कि इनकी शरीर नहीं सड़ी नहीं दुर्गंध आई नहीं कुछ हुआ ये जो लिखे हैं सही है और ये किसके अंदर में रहे हैं इतेश्वरी के अंदर रहे हैं ये भी ऐसे शरीर छोड़े और ये ज्ञान कहां है महतार बाबा ज्ञान इस पे लिखा गया है इसके अलावा बाकी सब पढ़ना अधूरा ज्ञान है अधूरे ज्ञान की चर्चा करने पर आदमी अधूरा मैं आपको प्रणाम कर रहा हूं महाराज जी मगर बस एक जिज्ञासा है क्या जिज्ञासा गलत है ना आपकी बिना खाना खाए पेट भर जाएगा मैं वो वो नहीं नहीं कर रहा कुछ और कह रहा हूं। जैसे इन्होंने बताया है कि गौतम बुद्ध ईश्वरवादी थे। हम् हमने मान लिया तो इस संबंध में गौतम बुद्ध का कोई लिटरेचर हमें प्राप्त इसी में है ना इसमें मिलेगा ना गौतम बुद्ध के बारे में पूरा उनका दर्शन तो पूरा सब मिलेगा इसमें इसमें बाइबल मिलेगा कुरान मिलेगा वेदा वेद मिलेगा सब चीज मिलेगी इसमें हम्म इसमें कबीर साहब के बारे में मिलेगा गुरु नानक जी के बारे में मिलेगा ऐसा कोई भी नहीं पैगंबर जिसके बारे में ना मिले इसमें और इसका जो सूक्ष्म रूप है और कॉम्पैक्ट मैथमेटिकल रूप ये है होली साइंस अच्छा इसमें मिलेगा जी जी इन दोनों कोई फॉलो करें कैंसर ठीक हो जाता है। हमारे यहां
00:25:49:22 कैंसर ठीक हुआ है। सब डॉक्टर घर के लोग हैं। कैंसर कैंसर यहां पे ठीक हो जाता है। अरे ठीक हुआ है भाई रिकॉर्ड सबका। अच्छा अच्छा हां तो तो सब डॉक्टर लोग अपने घर के लोगों को लेके आए हैं। अभी भी क्लास में लोग हैं। अच्छा ऐसा कोई चीज नहीं जो ना हो जाए। ठीक है। ठीक है महाराज जी। इससे थोड़ा सा हम आगे बढ़ते हैं। थोड़ा काम वो भी लाइट हो जाए माहौल। महाराज जी धर्म क्या है? तो माहौल लाइट नहीं है। ये इनलाइट ही तो है। एनलाइटन ही तो हो रहे हैं आपकी शरण में। धर्म कहते हैं जोड़ना। जी। धींत से बना है। जी। ध है धारण किए हैं। उसमें ऋ है वोवेल री मतलब पवित्र तत्व जो धारण किए पवित्र तत्व है। इसको जानना ही धर्म है। नहीं महाराज जी उपयोग के अनुसार मतलब उसका एडवांटेज नहीं होगा। आपका हाथ है। धर्म तत्व से जुड़िए और क्या उपयोग करेंगे आप? मतलब हम धर्म को क्यों माने? अरे भाई धर्म आप धारण किए इसके अंदर शक्ति उसको पकड़ना नहीं है। वही तो धर्म है। नहीं जैसे जो ज्ञान विज्ञान है ना कि हमें ईश्वर को ज्ञान क्या है? सही सही चीज जानना ही तो ज्ञान है। तो आप गलत चीज जानने को ज्ञान कहते हैं। आप मिथ्या चीज को आप ज्ञान कह रहे हैं। नहीं जो धर्म धिधात से बना है। धात में ध कंसोनेंट है। उसमें री वोवेल है। ऋ का मतलब पवित्र है। जो धारण किया पवित्र तत्व है। तो आप इसको धारण करना है तो धर्म हुआ। इसको
00:27:05:01 अनुभव करना है तो धर्म हुआ। यह वाली तो परिभाषा बाकी गलत परिभाषा नहीं बताते। जी नहीं वो गलत नहीं बोल रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं मतलब हम किसी को जैसे बताते हैं कि धर्म तुम्हें पालन माने ना बताइए आप कौन कह रहा है बताइए आप। नहीं नहीं जिसको जानना होगा सही मतलब उसको हम एडवांटेज क्या बताया कि धर्म का पालन करोगे तो तुम्हें ये मिलेगा। हां सब चीज मिलेगा। जी क्रिया का अभ्यास ही धर्म का पालन क्रिया है। जब क्रिया का अभ्यास करेंगे पूरा धर्म का ही पालन होता है। तो अच्छा अच्छा एक चीज और आती है महाराज जी क्या ये जो इस्लाम और जो बाइबल इस्लाम सनातन धर्म एक है। इस्लाम सनातन धर्म क्रिश्चियनिटी सब मैं मैं बस वही पूछ रहा हूं। एक है। जैनिज्म एक है। कबीर साहब, गुरु नानक देव जी जब लोगों ने कराया सब एक है। उनके शिष्य लोग गलत बताते हैं। इससे सब अलग-अलग लगता है। मैं वही पूछ रहा हूं कि जो कुरान है कुरान या बाइबल हो गई या कुरान को मान लीजिए। तो कुरान के अनुसार जो प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है। क्या वो सर्वशक्तिमान है? वही वही महात्मा बाबा ने माना है। ईश्वर जो कुरान मानते हैं। वही वहीश्वर गिरी मानते हैं। वही योगानंद मानते हैं। मगर कुरान कुरान में कुरान में लिखा हुआ है। तो आप किसी की हिंसा ना करिए। किसी का आप खून करेंगे तो भगवान नहीं माफ़ करेगा। उसी से माफी मांगिए। मोहम्मद
00:28:20:12 साहब शुद्ध शाकाहारी थे। 18800 फॉलोवर शाकाहारी थे। मक्का से मदीना जब गए तो पत्ता उबाल खाए। कोई जानवर नहीं मारने दिए। हम ये टोटल बुद्धिज्म है। ये कुरान में सब बुद्धिज्म लिखा है। कुरान की व्याख्या करने वाले इसकी व्याख्या गलत कर देते हैं। जैसे रामायण की व्याख्या गलत किया। राम ने रावण को मारा। क्यों मारेंगे रावण को? व्याख्या गलत है। तो कुरान के अनुसार जो ईश्वर है वो अवतार नहीं ले सकता। वो कहता है अच्छा 150 में लिखा है कुरान में। ना ईश्वर ईश्वर जब अंदर प्रवेश करता है तो आदमी ईश्वर की वाणी बोलता है। यही यही अपना वेद भी गाता है। जब ज्ञान अपने अंदर अवतरित होता है तो हम जो बोलते हैं वही चीज कहते हैं तो उसे प्रोफेट प्रोफेस कहते हैं। नहीं वेद तो यजुर्वेद बोलता है कि ईश्वर अवतरित भी होता है। आपको वेद नहीं आता है। 31 19 में लिखा है महाराज जी। अरे आप वेद नहीं आता सूत्र। वेद क्या बताइए? वेद मतलब क्या है? श्रुति शास्त्र हां। श्रुति शास्त्र मतलब क्या है? जो ज्ञान है ईश्वरीय ईश्वरी जो दूसरा ज्ञान कैसे पाएंगे आप गुरु परंपरा से हां गुरु परंपरा बता तो रहे हैं हम आपको जो लीजिए परंपरा हमारी जी आप आ अभ्यास करिए जो चीज अभ्यास करने से आता है बोलने से आएगा नहीं मैं वो उधर पूछ रहा हूं अरे क्या वो लोग मूर्ख है आपसे हमसे नहीं वो नहीं हमसे आपसे मूर्ख नहीं हो जो सुन रहे हैं। उनको पता है
00:29:35:18 अभ्यास करने से आता है। कृष्ण भगवान ने कहा कि अभ्यास से वैराग मिलता है। हम् वैराग कहते व कहते एक गोला है ना व में व का हर बिंदु आदि और अनंत है। सर्व्यापकता है। तो लंबी लाइन अनंत को व्यक्त करती है। वैराग मतलब अनंत प्रेम होता है। वैराग मतलब घर छोड़ जाना नहीं होता है। नहीं वो ठीक है। कुरान में छह 150 में लिखा हुआ है कि ईश्वर की कोई पत्नी ईश्वर की कोई संतान नहीं हो सकती। तो लिमिटेड ईश्वर हो गया। लिखा हुआ है। गलत कह रहे हैं उसकी। व्याख्या गलत है आपकी। नहीं कुरान में ही लिखा है महाराज। कुरान आप गलत व्याख्या कर रहे हैं कुरान में। मैं व्याख्या नहीं कर रहा हूं। तभी तो ईश्वर की गारंटी नहीं है। लाइए कुरान दिखाइए हमको कहां लिखा है? लाइए कुरान कल लेके आइए। अह कोई मोबाइल में देखेंगे? मोबाइल में कुरान लेके आइए। मेन कुरान लेके आइए। कुरान पुस्तक लेके आइए मेन। हां। अरबी वाला लेके आइए और ठीक है। ये चीज हम 6150 महाराज जी को बताएंगे। 650 में लिखा है कि ईश्वर की कोई हमारे पास बात करने का टाइम नहीं है गलत चीज। जी जी। हम बताएंगे नहीं लिखा है तो आप कहते लिखा है। आप भी दे दीजिए स्पीच सब। महाराज जी पढ़ा है इसलिए पूछ रहे हैं। आप गलत पढ़े हैं ना? आप पढ़ते तो आप नौकरी नहीं करते आप। आप मोहम्मद शाह की तरह प्रॉफिट होते आप। जो कुरान जानता है वो नौकरी नहीं करता है। अच्छा तो वो सीधा पैगंबर होता है राम की तरह कृष्ण की तरह तो आपने पढ़ी है कुरान?
00:30:50:24 मतलब हम अभ्यास कर रहे हैं कुरान की। पढ़ी नहीं है। ये प्रतिदिन अभ्यास हो रहा है। कुरान का अभ्यास हो रहा है। वो बुक बुक ने आपने नहीं पढ़ी है। बोलिए। अरे बुक पढ़ने से पढ़े। आप आम खाएंगे मीठा है। पता चलेगा पढ़ने जब तक खाएंगे नहीं। तो जब हमने मतलब हमें नहीं पता है कि उसमें क्या लिखा है तो हम कैसे कह सकते हैं? अभ्यास करिए बताएंगे ना अभ्यास आगे। अभ्यास से ये पता हो जाएगा कि उसमें क्या लिखा है। टोटल अभ्यास होता है। जो मोहम्मद बोलते थे अभ्यास करते थे तो उनको निकलता था। एक तरीके से कुरान से डिफ़र भी हो सकता है। ऐसा तो कुरान डिफ़र नहीं है। तो महाराज जी कुरान और ये अपना सनातन धर्म हम्म और क्रिश्चियनिटी जैनिज्म बुद्धिज्म और भगवान राम की शिक्षा के सब एक है। अलग-अलग नहीं है। मगर महाराज जी कुरान में तो अंतर है। वो प्रभु आप हमसे अब आप बंद करें आप जाइए। अरे ठीक है। ठीक है। बुलवाते हैं जी फालतू। ठीक है महाराज। माफ़ करो। थोड़ा सा आगे बढ़। क्या है लिखा हुआ ये? ये पागल है लिखे 21 महाराज जी। हां। पागल आप बात मैं कुरान साथ में लिए नहीं हूं। चलिए छोड़िए। कुरान गलत है ना? हम बता रहे हैं। यह महाराज जी उनके मूर्ति पूजा नहीं है ना? हम ये पढ़ा रहे हैं ना क्रिया योग। हम कुरान क्या जाने हम? कुरान क्या पूछ रहे हैं हमसे। आप क्रिया पूछिए जो हम पढ़ा रहे हैं। अच्छा ठीक है। ठीक है महाराज जी। आप बात बताइए दिखा रहे हैं ना देखिए। हम्म।
00:32:05:01 वेद का पहला सूत्र ही कुरान सूत्र है। गलत आप शिक्षा दिलवाते हैं। हम गलत बोले हम यहां बैठकर के जैसे और लोग गलत बोलते ही हैं। प्रॉफेट्स ऑफ ऑल लैंड एंड एजेस हैव सक्सीडेड देयर गॉड क्विस्ट। जितने प्रॉफेट हैं ईश्वर अनुभूति में सक्सेस हुए हैं। जितने प्रॉफेट हैं राम है, कृष्ण है, बुद्धा है, महावीर स्वामी है, कबीर साहब है, गुरु नानक देव जी हैं, मोहम्मद है, सेंट जॉन, सेंट पाल है। ये सब क्या हुआ है? ईश्वर की अनुभूति में सक्सेस हुए हैं। कौन लिख रहा है? परमहंस योगानंद हम हम ये बताएंगे जो आप कहेंगे वो हम बता देंगे। ये तो बिल्कुल सही महाराज जी। हम जैसे हमने आपने ये लिखा है ना तो हमने मान ये हम कह रहे हैं कि ये बिल्कुल सही लिखा है। है ना? ये बिल्कुल जो इन्होंने पहली लाइन लिखी है बिल्कुल सही लिखी है। मगर अ यही चीज उसमें भी लिखी हुई है। ये हम नहीं वो गलत लिखा है। आप गलत अर्थ हां मैं वही कह रहा हूं। आप गलत अर्थ जानते हैं आपको पाप लगेगा। भुगत जाएंगे आप। उसका हम गलत अर्थ जानते हैं। नो यू डोंट ट्राई टू क्रिटिसाइज एनी प्रॉफिट। तारा को नहीं मैं क्रिटिसाइज नहीं कर रहा हूं। और क्या कह रहे हैं? गलत गलत लिखा है। आप क्रोध गलत व्याख्या कर रहे हैं। नहीं मैं ये पूछ रहा हूं। राम ने रावण को मारा। बताइए। देखा आपने? अब जो शास्त्र में प्राप्त हुआ। शास्त्र लिखा है ये?
00:33:20:12 हां? ये शास्त्र में लिखा राम ने रावण को मारा है। हां। कहां लिखा है? युद्ध कांड में। हां। युद्ध का मतलब क्या होता है? लड़ाई। हां। ये कहां लिखा है? युद्ध मतलब लड़ाई। वाल्मीकि रामायण में। कहां लिखा है? युद्ध का मतलब लड़ाई कहां दिया है? अरे तो युद्ध दिया है। जो शब्दकोश है। युद्ध मतलब शब्दकोष किसने लिखा है? रिलाई मास्टर लिखे हैं शब्दकोश। तो महाराज जी ऐसे तो हम बात भी नहीं कर पाए। कुछ भी सब सभी सब सभी कुछ। थोड़ी बात करेंगे आपसे। जी। युद्ध का मतलब लड़ाई नहीं होता है। तो लड़ाई है दुनिया में कि नहीं है। लड़ाई नहीं है। दुनिया में लड़ाई नहीं है। इंडिया पाकिस्तान में लड़ाई नहीं है। लड़ाई नहीं है। बांग्लादेश में हिंदू मारे लड़ाई नहीं कुछ और है वो तो जो भी है वही होता है ना सिरम होता है ना हां उसमें लड़ाई दिखाते होता नहीं है प्रकाश किरणें रा तो बस वही दिखाई वो दिखावे वाला युद्ध दिखाई गलत है जो आप समझ रहे हैं गलत है वो वो चीज सही नहीं है ठीक है महाराज जी वो चीज सही नहीं है ठीक है तो एक थोड़ा सा चलने से पहले एक चीज और है कि महाराज अगर आपको चाहते हो जनता ठीक से आए तो उसको भ्रमित मत करिए जी जी हां कुरान में बाइबल में हर जगह केवल वही लिखा जो होली साइंस में है। जो महात बाबा ने लिखा है। जो राम और कृष्ण ने कहा, जो बुद्धा ने कहा, वही मोहम्मद ने कहा है, ईसा नहीं कहा है। आप भेद मत पैदा करके झगड़ा मत लगवाइए समाज में। नहीं तो आपको दंड मिलेगा, आप बीमार होंगी। फिर हमारे पास आएंगे आप ठीक कराने के लिए।
00:34:36:04 अच्छा ठीक है। एक लॉजिकल एक ये भी भेज दीजिएगा। अगर आपको कुरान और ये सब चीजें मानते अलग-अलग है। तो आपको परेशानी नहीं हम जिज्ञासा कर रहे हैं। जिज्ञासा गलत जिज्ञासा है यार। फालतू टाइम वेस्ट करते हैं हमारा। ये सब नहीं देते इंटरव्यू। जी जी हमारा YouTube करोड़ों में जाता है। जी जी आई डोंट नीड दिस इंटरव्यू। एक दूसरी चीज है महाराज जी ये जैसे आप बात कर लीजिए या तो थोड़ा यहां पर है बहुत बढ़िया चल रहा है। अच्छा लोग जाने नहीं नहीं हम टाइम नहीं। बस पांच मिनट लास्ट है। बस नहीं एक मिनट पूछिए जो पूछिए। हां 1 मिनट 1 मिनट। टोटल बता दें। आप मोहम्मद की पूजा करिए। वो हो गया पूजा करिए। हो गया क्लियर हो गया। और मोजेज की करिए। इब्राहिम की करिए। भगवान राम की करिए, कृष्ण करिए, गुरु नानक देव की करिए, कबीर साहब की करिए। ये सब की पूजा सब ने एक ही ज्ञान दिया है। ये सारे मैं वही ठीक है मैं वो हो गया। महाराज जी जैसे एक लॉजिकल क्वेश्चन आता है कि जैसे हम बात ये लॉजिक लॉजिक मतलब क्या है? लॉजिक मतलब क्या है? अरे महाराज जी मुझे पूछने लॉजिक मतलब है ना? लॉजिक मतलब है जो सही चीज पर आइए ना। लॉजिक गलत चीज पर आएंगे आप। मैं दूसरी चीज ये चैप्टर क्लोज हो गया। आपने क्लियर कर दिया। अब दूसरी चीज पे आ रहा हूं। यह है जैसे कई बार यह आता है जैसे हम कहते हैं कि परमहंस योगानंद जी ने ये कहा है या महावतार बाबा जी ने ये कहा है।
00:35:51:15 तो जैसे हम उनके नाम से एक बुक खोल के दिखा रहे हैं। ये बुक है। है ना? अब ये हम कैसे मान लें? मतलब इसका इसके पीछे लोगों को क्या जवाब दें? जब वो ये पूछे सुनिए तो सुनिए तो कि ऐसा तो नहीं पहले बता दे रहे हैं। सब जवाब प्रैक्टिस मिलता है। सुनिए तो कि इस बारे में इस क्वेश्चन का क्या आंसर हो सकता है? जब वो ये कहे ये बुक आपने अपने मन से तो नहीं छपवा दी उनके नाम से। छपवा दी अपने मन से। पढ़िए। इस मैंने छपवा दिया आप ना पढ़िए और बताइए। चलिए ठीक है महाराज जी आप नाराज ना हो। नाराज नहीं हो रहे हैं। आप झूठ बोल रहे हैं सफरिंग आपको आएगी। गौरा गुमराह मत करिए। ये छपाया एसआरएफ ने। सेल्फ एस एंड फेलोशिप में छपवाए इसको। पूरी दुनिया जानती है। ये उसका पब्लिकेशन है। जैसे हम क्लेम कर देते हैं ना कि एसआरएफ ही है ये। ये हमने नहीं इसका मतलब एसआरएफ को हम प्रमाणिक माने। बिल्कुल प्रमाणिक है। मगर जो बुद्ध के विषय में बता रहे हैं उनको प्रमाणिक माने। एसआरएफ बता रहा है बुद्ध के विषय में। यही बता रहे हैं तो हमने एक को किसी नहीं केवल एसआरएफ टीचिंग सही है हम बता देना आपको अच्छा केवल एसआरएफ एसआरएफ का मतलब क्या है महाराज जी परमहंस योग इंस्टीट्यूशन जो अमेरिका में है जो रांची में है वही शिक्षा जो यहां दी जा रही है उसके अलावा कोई चीज सच नहीं है उसको सच माने और बाकी जो भी कुछ कह रहा है वो झूठ उससे उससे कठिनाई दूर होती है बीमारी दूर
00:37:06:24 होती है आप सच को पकड़िए तो आप चैनल खुद चलाएं किसी के अधीन नहीं रहेंगे आप नहीं तो आप किसी के अधीन रहेंगे जी ऐसे तो बागेश्वर वाले भी कहते हैं हमारे यहां बीमारी दूर होती है। हां। कहां-कहां सिद्ध किया उन्होंने? अब सिद्ध किया। आपको प्रणाम कर रहे हैं। आप नुकसान अपना उठा रहे हैं। चलिए ठीक है। अब दोबारा आपको कभी चरणों में नहीं बुलाएंगे। अरे नहीं महाराज जी नहीं माइक टाइम। चलिए ठीक है महाराज जी। हम कह रहे हैं आप फालतू बातें कर रहे हैं। कुछ आप कुछ कुछ नहीं है। आप आप नहीं फालतू बातें मत मत करिए। सब मैसेज दीजिए। चलिए ठीक है। हां आप भुगत जाएंगे। बता डोंट रिलीज माय एनी मैसेज। क्या आप गलत मैसेज कर रहे हैं ना? इसे हम किसी को नहीं देते हम। एक आदमी आए बढ़िया पूछ के गए थे वो। अच्छा। हां। हां आप तो फालतू चीजें पूछ रहे हैं। सोच रहे हैं आप व्यूअर बढ़ा रहे हो उल्टा सीधा। अरे नहीं नहीं महाराज जी व्हाट डज इट मीन? महाराज जी व्हाट डज इट मी? टेल मी। मैं वही बता रहा था। क्या बता रहे हैं जी? गलत बात करते हैं। आपको आता कुछ नहीं उसके बारे में बता रहे हैं। प्रश्न कौन करता है? जो ज्ञानी होता है सभी को जय श्री राम। हम इस समय हंस भगवान की जन्मस्थली के पास खड़े हुए हैं और आप देख सकते हैं मेरे पीछे जो दीवार और उसके ऊपर फेंसिंग लगी हुई है। उधर जाने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। अ इसके पीछे ही संध्या वट है। हंस भगवान का मंदिर है। हंसकूप है। जन्म स्थली जो कि पूरी तरीके से अतिक्रमण कार्यों के कब्जे
00:38:22:00 में है। और यहां पर जो हर सामान्य से सामान्य हिंदू के लिए सुलभ होना चाहिए। हंस भगवान जो संध्या वट है, हंस भगवान का मंदिर है, हंसकूप है इत्यादि का जो सुलभ होना चाहिए वो इस समय प्रतिबंधित है और एक सामान्य जन जो अपने जन्मों जन्मों के पापों से मुक्त हो सकता है दर्शन मात्र से, स्नान मात्र से या फिर यहां पर संध्या करने मात्र से वो आज उसके लिए सुलभ नहीं है। क्योंकि जो अह अतिक्रमण करने वाले लोग हैं उन्होंने इसको जो है अपनी सीमा में डाल करके और इसकी जो वास्तविकता इसकी जो आध्यात्मिक पहचान है उसको छीनने का प्रयास किया है। तो अब इससे आगे जो आप वीडियो देखने वाले हैं या जो वीडियो आपने देखा है यह जो वीडियो आपने देखा है यह वही व्यक्ति है जिसकी ये सारी जो बाउंड्री आपको दिखाई देगी जब आप गंगा का पुल क्रॉस करेंगे प्रयागराज आने पर तो जब आप पुल को क्रॉस कर रहे होंगे तभी आपको दिखने लगेगा क्रिया योग आश्रम यह बड़ा-बड़ा नाम आपको दिखने लगेगा और आप देखिएगा कि कितनी सारी भूमि में जगह-जगह पर यह सब मतलब ऐसा लगेगा कि पूरा का पूरा एक एंपायर खड़ा किया जा रहा है। अब अंदरूनी तौर पर जब हमने इनको देखा तो इन्होंने अपने यहां पर स्वयं
00:39:37:01 को एक गुरु के रूप में आध्यात्मिक स्पिरिचुअल सो कॉल्ड स्पिरिचुअल लीडर के रूप में स्थापित किया हुआ है। तो सो कॉल्ड स्पिरिचुअल लीडर जब बन जाता है तो फिर हमारे पास आधार आ जाता है कि हम उससे उसका जो वो आध्यात्मिक गुरु बन रहा है उसके बारे में कुछ प्रश्न कर सकें। इसने अपने यहां पर श्री राम, कृष्ण इत्यादि को मोहम्मद और जीसस जैसे व्यक्तित्व के साथ भी खड़ा किया और स्वयं को भी उसी रूप में वहां पर विराजमान कर रखा है फोटोज में और योगानंद जी करके कोई हैं उनको भी। तो जो वीडियो है उसमें मोटे-मोटे कुछ तीन प्रश्न हैं। पहला प्रश्न यह है कि अगर आप महात्मा गांधी की तरफ से कुछ क्लेम कर रहे हैं तो महात्मा गांधी ने ऐसा कब कहा? प्रामाणिक तौर पर हम यह कैसे स्वीकार कर सकते हैं? उस बारे में इस व्यक्ति का कोई जवाब नहीं था। दूसरा प्रश्न था कि भाई ईश्वर है यह सिद्ध कैसे हो सकता है? कैसे होता है ईश्वर सिद्ध? तो इसने कहा यहां क्रिया योग में आइए और सिद्ध हो जाएगा। अंत में तो इसने कई बातों के प्रश्न में मतलब अंत में तो इसका एक ही था कि आप क्रिया योग करिए सब सब हो जाएगा। तो फिर हम लोग चर्चा करने बैठे क्यों थे? जब क्रिया योग करने से ही सब कुछ मालूम पड़ना है तो आप क्यों बैठकर के प्रवचन दे रहे हो? तो कहने का मतलब है इनके पास कुछ भी ज्ञान नहीं है। एक स्पिरिचुअल लीडर वाला जो
00:40:52:02 कि आगे हमने देखा जब हमने कहा कि ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता है तो इन्होंने कहा भाई ईश्वर को क्रिया योग करने से ही सिद्ध कर पाओगे उसमें तरह-तरह के वो आप देख सकते हैं तर्क करने लगे तो ईश्वर है ये सिद्ध होता है कैसे सिद्ध होता है बृहधारणक उपनिषद एक तीन 28 असतो मा सद्गमया तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्युमा मृतमगमया एक नास्तिक के अंदर भी कभी ना मरने की प्यास विद्यमान है एक नास्तिक के अंदर भी सब कुछ जान लेने की चाह विद्यमान है एक नास्तिक के अंदर भी सदा सुखी रहने की चाह विद्यमान है। तो इसी चाह को कहते हैं सतच्चितानंद। तो अब एक नियम है कि हमारे अंदर जो जो इनबिल्ट इच्छाएं हैं उनका सब्जेक्ट उनका निवारण करने वाला जो सब्जेक्ट है वह इस दुनिया में मौजूद है। जैसे हमारे अंदर प्यास है तो दुनिया में पानी है। हमारे अंदर भूख है तो दुनिया में भोजन है। तो जिस प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त अह पानी की प्यास होने से ही पानी का अस्तित्व सिद्ध होता है। उसी प्रकार से एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त सच्चित आनंद की चाह मात्र से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है। अब अगला प्रश्न आता है कि धर्म क्या है? तो मैंने उपयोगिता के अनुसार जब धर्म की व्याख्या पूछी तो जहां धारण करता है वो धर्म है। तो धारण तो उसने मालाएं भी कर रखी हैं। धारण तो उसने एक डंडा भी कर रखा है जिसको वो दंड
00:42:07:03 कह रहा है। उसमें स्टार बना हुआ है। हां। तो वो धर्म है क्या? तो ठीक है। धारण कर रहा है वो धर्म है। हम पूछ रहे हैं उसकी उपयोगिता क्या है? एडवांटेज क्या है? यदि हम धर्म को फॉलो करते हैं तो हमें क्या मिलेगा? तो वह हमें यह नहीं बता पाया कि जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा जीव की चाह के वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि का नाम धर्म है। यानी कि धर्म का जब आप पालन करते हैं तो आपका जो चाह का वास्तविक विषय है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर वो आपको प्राप्त होता है। इसके अलावा इस व्यक्ति ने और भी बहुत सारी चीजें बोली। जैसे कि बुद्ध जो थे वह आस्तिकवादी थे। उनके यहां पर नास्तिकता नहीं थी। जबकि वह ईश्वर का अस्तित्व ना मानने वाली कम्युनिटी है। हमने इसने जब यह कहा कि बुद्ध के बारे में योगानंद जी ने लिखा है तो योगानंद जी की एक बुक में उन्होंने बहुत सारी चीजें लिखी हैं। तो क्या बुद्ध का पूरा का पूरा दर्शन आ गया उसमें? तो हमने जब कहा कि बुद्ध ने कहां पर क्या लिखा है कि योगानंद जी ने कहा है इसलिए मान रहे। तो इसने हर बात में यही कहा कि योगानंद जी ने क्योंकि कहा है तो इसलिए वो ऐसा था। योगानंद जी ने जो कहा है तो इसलिए वो ऐसा था। ठीक है? आगे हमने पूछा कि भाई इस्लाम का ईश्वर तो सर्वशक्तिमान नहीं है क्योंकि वो कहता है मैं अवतार नहीं ले सकता तो फिर तुम उसके साथ हमारे रामकृष्ण आदि को सनातन को क्यों खड़ा कर रहे हो तो फिर वो भड़क उठा है ना और भड़क करके
00:43:22:26 बार-बार मुझे क्वेश्चनिंग करने से रोक रहा था एक फेक गुरु की यही पहचान है वो क्वेश्चनिंग करने से रोकता है या कुछ ऐसे कारण बताता है कि भैया मैं तुम्हारी सवाल का जवाब नहीं दे सकता तुम गलत सवाल कर रहे हो ये सब तो वो क्वेश्चन का आंसर नहीं दे रहा था तो फिर फिर मैंने लास्ट में जब ये कहा कि कुरान में लिखा है कि वो लिमिटेड है। ऐसा ऐसा नहीं हो सकता। हमारे ईश्वर के लिए ये नहीं कहा जा सकता कि दुनिया में कोई ऐसा कार्य है जो वो नहीं कर सकता। मगर कुरान के ईश्वर के लिए ये कहा जाता है कि भैया वो अवतार नहीं ले सकता। इसीलिए उसके यहां मूर्ति पूजा नहीं है। तो उसका कहना था कि कुरान वाले गलत है। मैं सही हूं क्योंकि योगानंद ने कहा है। तो अब जब वो पूरी दुनिया को नकार रहा है तो फिर बुद्ध का अस्तित्व कैसे सिद्ध होगा? मोहम्मद का अस्तित्व कहां से सिद्ध होगा? क्योंकि योगानंद की किताब में सब कुछ तो आ नहीं जाएगा। अब फिर भी उसने सब कुछ नकार दिया। तो लास्ट में मैंने उससे कहा कि जैसे तुम पूरी दुनिया को झूठा कह रहे हो जो भी कुछ बताया जा रहा है उसको तुम झूठा कह रहे हो। अपने योगानंद जी को सही कह रहे हो। मैं मान भी लूं कि योगानंद जी सही है। मगर मैं यह कैसे मानूं कि योगानंद जी के रेफरेंस से तुम जो बता रहे हो वो सही है। इतने में वो आदमी भड़क उठा। जब उसका ही तर्क उसी को लौटा करके दिया गया तो वह कॉलर निकाल के उसने डाल दिया। मुझे तरह-तरह की धमकियां देने लगा। इसके बीच में आपने उसका व्यवहार भी देखा होगा कि किस तरीके से वो
00:44:38:04 कहेंगे कि बदतमीजी कर रहा था। कह रहा था कि तुम ऐसी नौकरी कर रहे हो इसीलिए यहां हो वहां हो। वो बहुत बड़ा भाई हम मनुवादी हैं। शंकर की सेना है हम। और जो है ना उसके साथ हम शांति से सोते हैं। तुम्हारी तरह बाल खड़े नहीं हो गए हमारे। है ना? जो वो कुछ कॉमेडी फिल्में देखी होंगी ना उसमें वो कड़वी चाय पी लेती तो वो बाल खड़े हो जाते। वैसे बाल नहीं खड़े हो गए हमारे। ठीक है? तो यह सब अंत था उसका। तो आप देख सकते हैं किस-किस लेवल का स्पिरिचुअल लीडर है और ये टकरा किनसे रहा है मनुवादियों से। जय श्री राम।
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राम कृष्ण ही मोहम्मद और जीसस हैं?
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