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00:00:01:20 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं कि आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और जैसा आप जानते हैं आज हमारे बीच में एक रामपाल से काफी दिनों तक जो कनेक्टेड रह चुके हैं उनका जो प्रचलित नाम है लोकाचार में वह भाऊ है और वो अपनी कुछ यात्रा के बारे में हमें बताना चाहते हैं। काफी प्रेरणादायक है इनकी बातें। इनकी जो चीजें हैं, इनके पास जो सामग्री है और यह आपके समक्ष अपने कुछ विचार रखेंगे। उससे पहले मैं बता दूं कि जिन लोगों ने नहीं देखी कल की चर्चा वो जरूर जाकर के देख लें। आर्य समाज के एक प्रसिद्ध आचार्य अग्निव्रत जी के साथ हमारी चर्चा हुई है कल जिसमें कि सैद्धांतिक विषयों पर बहुत सारी चीजें आपको देखने को मिलेंग कि हर वो तर्क जो आर्य समाज की ओर से दिया जा सकता है हर उस तर्क का वहां पर खंडन हुआ है। अब तर्क के साथसाथ हमने वहां प्रमाण भी दिया। हालांकि प्रमाण वाली बात वही आ जाती है कि यदि व्यक्ति ने अपनी पहले से एक पूर्वाग्रह बना रखा है अपनी बुद्धि के अनुसार कि यह धर्म है

00:01:17:01 ऐसा होना चाहिए तो यदि प्रमाण में स्पष्ट रूप से मिलेगा भी कि भाई आप जो सोच रहे हैं आपका जो तर्क है उसके ठीक विपरीत उसमें लिखा है आपकी बुद्धि जो सोच रही है जैसे कि आज मैंने देखा एक वीडियो इस समलैंगिक एक विवाह इस से जुड़े हुए लोग एक वहां पर तो दंपत्ति कहने में भी लज्जा वहां पर जो है अब वो अपनी बुद्धि के अनुसार यह कहेंगे कि भाई तर्क के अनुसार हमारे तर्क के अनुसार जो है धर्म जो है यह कहना कहना चाहिए धर्म को कि समलैंगिक विवाह अच्छा है और अब यदि वहां पर कहीं पर समलैंगिकता का निषेध भी हो रहा होगा तो वहां पर उस निषेध में भी वह समलैंगिकता का अर्थ निकालने की कोशिश करेंगे और जिसने जो एज इट इज अर्थ किया होगा तो उसको कहेंगे कि भाई तुम्हारा अर्थ गलत है। तो जब हम धर्म शास्त्रों से पहले ही यह सुनिश्चित कर लेंगे कि हमारा धर्म क्या है? तो धर्म शास्त्रों की आवश्यकता क्या रह जाएगी? जब हमें अपने तर्क के अनुसार ही निर्णय करना है कि

00:02:32:07 धर्म क्या है? तो फिर धर्म शास्त्रों की आवश्यकता क्या रहेगी निर्णय के लिए? खैर जो [नाक से की जाने वाली आवाज़] भी है हमने उन्हें तर्क भी दिया, प्रमाण भी दिया और जब उन्होंने हमारे प्रमाण पर आपत्ति जताई कि भाई आपका अर्थ गलत है क्योंकि उनका पूर्वाग्रह है कि भाई किसी भी दशा में जो है अमुक अमुक कार्य नहीं होने चाहिए तो आपके क्योंकि आपके जो आपका जो भाष्य है जिसको आप प्रामाणिक मानते हैं उसमें क्योंकि ऐसी ऐसी अमुक अमुक गलतियां है इस कारण से वह प्रामाणिक नहीं है और इस कारण से हम मानने योग्य हो गए प्रामाणिक तो पहली बात तो यही है कि आपका धर्म धर्म शास्त्रों से पहले ही निश्चित है। जिसके चश्मा जिसका चश्मा लगाकर आप धर्म शास्त्रों को देख रहे हैं। फिर दूसरी बात एक ये आ गई कि अगर दुर्जन तोष न्याय से मान भी लिया जाए सामने वाला जो है ठीक नहीं है। हालांकि आप ही अब एक विषय में उसको प्रामाणिक घोषित कर रहे हैं। यह भी बात है। फिर भी यदि आपको लगता है कि वह ठीक नहीं है किसी कारणवश तो इसका मतलब यह हो गया कि अब जो है किसी भी राह चलते की चीजों को प्रमाण मान लिया जाए। उसका कोई आधार नहीं है। फिर प्रामाणिकता का। प्रामाणिकता का आधार यही है कि हमने यह तय कर लिया है। यह धर्म है। यह धर्म नहीं है। अब जो अर्थ इसके अनुरूप होगा जो हमने तय किया है वही

00:03:47:15 प्रमाण है। वरना प्रमाण नहीं। तो जब हमारी अपने तर्कों के अनुसार ही निश्चय होना है तो प्रमाण पर जाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही? शुरुआत में तर्क पर ही बात चल रही थी। तो प्रमाण और तर्क दोनों ही तरीके से उनका जो है खंडित हुआ। फिर परंपरा वो बता नहीं पाए। फिर वो विषयंतर करके जब उधर ले जाने लगे कि पशु बलि पशु बलि है कि नहीं है। कहां पर प्रतीकात्मक व्याख्या कहां पर वास्तविक है। यह सब एक बड़ा विषय है। और यदि उस पर हम जाएंगे तो अपने आप में वह एक बड़ी चर्चा है। तो अवतार का जब तक निर्णय हुआ नहीं तो आप वह चर्चा क्यों उसमें मैं जब कुछ बोल दूं जैसे शुरू में मैंने बोला था कि माया को लेकर के कुछ बात कही थी तात्विक विवेचना के लिए माया जबकि मेरा अर्थ वहां पर यह था कि भाई मेरे पास भी कुछ ऐसा है जिसके कारण जो प्रतीति हो रही है भगवान की दोषों से लिप्त होने की उसमें भी हम उसे निर्दोष सिद्ध कर लेंगे। तो वहां पर किस तरीके से विषय पकड़ने की कोशिश कर रहे थे कि माया माया को पकड़ लिया जाए तो अवतार रह जाए तो ऐसे अगर एक साथ बहुत सारे टॉपिक्स को ले लेते कोई भी एक टॉपिक क्लियर होगा ही नहीं कभी इसीलिए तो पकड़ के रखा है ना सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मुख शाश्वत धर्म दे दो हम ले चलो अपने साथ

00:05:02:16 मगर वो चीजें समझ में नहीं आती व्यक्ति को खैर उनकी कल अच्छे से चीजें वास्तविकता सामने आई है और हर उस बात का हमने जवाब दिया जो उन्होंने कही और जब वह विषयांतर करके व्यक्तिगत इस पर उतर आए कि आपने तो पाप लिख रखा है अपने ग्रंथों में यह लिख रखा है वो लिख रखा है। अच्छा जबकि शर्त यही थी जो पूर्व में जो शर्तें उनकी ओर से आई थी हमारी ओर से गई थी। उसमें भी शर्तें यही थी कि अगर कोई व्यक्ति व्यक्तिगत टिप्पणी करेगा तो तुरंत उस चर्चा को निष्फल मान लिया जाएगा। निष्फल का मतलब जब चर्चा निष्फल हो गई तो वहां रहने का कोई औचित्य नहीं। तो हमने फिर वहां से हट जाना ही उचित समझा।

00:05:46:04 उन्होंने सबसे पहली बार तो वही बीच में ही कहना शुरू कर दिया था कि आपको मालूम नहीं है। आपको ज्ञान नहीं है। यह क्या है? सिद्धांतिक बात करिए ना कि यह हो सकता है या नहीं हो सकता। यहां ये लिखा है। आपको ज्ञान नहीं है। ये क्या है? व्यक्तिगत कटाक्ष। फिर इसके आगे उन्होंने और भी कुछ कहने की कोशिश की। बाद में इस पे आगे आपने पाप लिख रखा है। हां। आप कुतर्की हो। कुतर्क कर रहे हो। ये सब क्या है? व्यक्तिगत। आप बात को काटिए। जब आपने यह कहा था ना कि ईश्वर अपनी सीमा अपना अंत बता सकता है कौन से दिन होगा तब मैंने उसको कुतर्क कह के झटकार नहीं दिया था उसको कुतर्क को कुतर्क के जरिए ही उसको काटा था हालांकि आपका तो कुतर्क कुतर्क है भी आप भी कह दोगे कि है मैंने तो ऐसी कोई बात कही नहीं थी जो कुतर्क है जिस भाषा में आप बात कर रहे हैं उसी भाषा में मैं बात कर रहा हूं खैर

00:06:34:24 फिर कुतर्क कहने लगे फिर आपने ग्रंथों में पाप लिख दिया है ईश्वर को पाप पाप कर दिया है। ये ये है वो है। मतलब जो कार्य करते हुए उनका निराकार ईश्वर लिप्त नहीं होगा। पापों से उनहीं कार्यों में अगर ईश्वर अवतार ले लेगा तो पापों से ग्रसित हो जाएगा। ये इनकी मेंटालिटी। खैर वो सारी चर्चा आप लोगों ने देखी होगी। और अंतत एक मेरा यह भी कारण रहा वहां से जाने का कि भाई बड़े बूढ़े हैं। अभी मैंने हॉट टॉक ज्यादा कुछ कर दिया। अच्छा मैं यह सोच के आया था कि आज मुझे जो है उस जोन में नहीं जाना है। है ना कि एक होता है ना कि छींटा कैसी जो जैसे हम किसी अपने बराबर के व्यक्ति से कर लेते हैं। तो मैं सोच के ही आया था। किसी ने मुझसे कहा भी था आने से पहले कि आप जो है इसमें अपना विवेक मत खोइएगा। अब भाई सामने वाला मेरी आस्था पर वार कर रहा है। मुझे भी हिट होता है ना। मेरी आस्था पर कोई वार करता है। तो उसको कब तक टोलरेट करना है? दूसरी बात हम दूसरे के दरवाजे पर खड़े हुए हैं। जब दूसरे के दरवाजे पर खड़े हैं और वहां पर गरमा गर्मी हो रही है। इस प्रकार का वातावरण निर्मित हो रहा है कि सामने दिखाई दे रहा है कि सामने वाला हमारी मान्यता पर हमारी आस्थाओं पर प्रहार शुरू कर दिया है करना और अगर हमने कुछ धीरे-धीरे इधर से रेप्लिकेशंस चालू किए तो हो सकता है कि वो इससे आगे भी बढ़े

00:07:50:04 तो आगे बढ़ने में क्या होगा कि हम आपके दरवाजे पर खड़े हैं तो आप जो करना हो वो कर लो हमारे साथ। मतलब वहां पर बेइज्जत होना। इसीलिए दूसरे के यहां जाने में दिक्कत होती है। कोई न्यूट्रल चैनल होता है ना तो वहां पर एक होता है कि भाई जैसे इस वाले इस वाले कहां मिले थे? भले ही वो तादाद में ज्यादा थे मगर वो एक न्यूट्रल जगह थी। पब्लिक प्रॉपर्टी थी। भिड़ गए वहां पर। मगर जब किसी के और के प्रांगण में बैठे। यह भी उनका प्रांगण ही तो था कि उनके यहां थे। अब वह बोल रहे हैं चाहे तो आगे चलकर के म्यूट भी कर सकते हैं। मुझे नहीं लगता करते कि क्योंकि उनका टेक्निकल हैंड उतना नहीं था सही था। मगर पीछे जो टीम खड़ी थी वो कर सकती थी। तो आगे चलकर के जब ये गरमागरर्मी होने लगी तुमने पाप लिख रखा है ये है वो है। तो पहली बात तो यह थी कि वहां बेइज्जत होने के लिए रुकना था क्या? जब व्यक्तिगत कटाक्ष की मनाई थी तो फिर चालू क्यों हुए? जब यह घोषणा करनी थी कि तर्क नहीं है हमारे पास तो बिना यह घोषणा किए हुए प्रमाण पर कूदे क्यों और इसके साथ ही साथ विषयंतर के लिए मनाही थी शर्त में फिर भी उन्होंने विषयंतर किया अंतत मुझे यह भी रहा कि अगर मैं हॉट टॉक करूंगा तो पता नहीं उम्र वाला मामला है कुछ का कुछ अजीब सा कुछ हो जाए तो इससे अच्छा है कि हमारी चीजें हो गई है। हमने अपने

00:09:05:06 अवतार को सिद्ध कर लिया है। उनके पास ना तर्क थे ना प्रमाण अवतार निषेध करने के लिए है ना उसमें भी फस गए ना प्रकट होता है प्रमाण में लिखा है प्रकट होता है और आज तक मुझे लगता है कि आर्य समाजी अवतार को समझ ही नहीं पाए हैं कि हम अवतार कह कैसे रहे हैं उनका मतलब उनको मतलब लगता है अवतार का मतलब वही है कि जो जो राम कृष्ण आदि के रूप में दिखाई दे पहले इसको समझ लो अवतार का मतलब है जो भगवान का जो व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप है सच्चिदानंद स्वरूप वो अगर किसी भी प्रकार से व्यवहार में आने लगेगा तो यह उसका अवतार ही हमारे यहां मान्य जरूरी नहीं है कि वह एक मनुष्य की आकृति में ही दिखे तभी उसे अवतार कहा जाए। तो भगवान तो कहने का मतलब यह है कि भगवान जब अप्रकट हैं तो वो अगर कहीं भी किसी भी प्रकार से प्रकट हो रहे हैं। उनके या तो यह मान लो कि उनका स्वरूप शाश्वत नहीं है। यह मानेंगे तो उनकी ईश्वरता भंग हो जाएगी। और या फिर यह मानना पड़ेगा कि उनका जो स्वरूप है वह वैसा का वैसा ही है। उन्होंने एक और रूप धारण किया है। वह अवतार उसी को हम अवतार कहते हैं। तो यह कभी इस अच्छा मैंने एक चीज और सोची थी कि अ क्या कहते हैं यह चर्चा थोड़ी अभी वहां तक आएगी। अगर वो इसमें ना जाते ना कि आप कुतर्क कर रहे हो प्रमाण दो।

00:10:20:07 भाई वो मुझे लगता था मैं किसी साइंस से जुड़े हुए बंदे के पास गया हूं तो आज जो है धक्के का उत्तर मिलेगा। कुल मिला के बात यह थी बल और फोर्स वाली बात क्योंकि यह सब बातों में तो मैंने खूब रगड़ रखा है पहले आर्य समाजियों को बहुत सारे आर्य समाजी आए हैं और उसमें वो लोग जो है उधर से छींटा कसी करते तो उसमें खूब कई बार मैंने जो है इन चीजों को लेकर के उनको निरुत्तर किया है और कई जो सम्मानित लोग हैं आर्य समाज के उनसे भी चर्चाएं हुई हैं। ठीक अच्छी पर्सनालिटीज हैं। उनसे भी चर्चा हुई है और इन विषयों में उन वह भी निरुत्तर ही सिद्ध हुए हैं। वह मौन उनका दिखाई दिया। तो मैं सोच रहा था कि जब यह यहां पर आएंगे कि भाई जो सब

✅ This part is already used · 00:11:01:15 – 00:11:05:03 (0:04)

→ Used in: A · Live तर्क-तर्क चिल्लाने वाले मुँह छिपाने को विवश at 1:05:55 ↗

00:11:01:15 जगह है वो एक जगह कैसे आ सकता है? अपने स्वरूप विरुद्ध कार्य कैसे कर सकता है?

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00:11:05:03 तो मैंने जो जो ये काउंटर किए थे ना स्वरूप विरुद्ध वाले मामले में व्यवहार वगैरह वाला तो उसमें वो मौन रहे। तो वो बात आने और उस वो बातें मैं अपनी ओर से लाना चाह रहा था। तो उससे पहले उन्होंने वो ट्रैक बदल दिया भाई प्रमाण दो प्रमाण में फिर जो है तुम्हारा शरण का इसलिए नहीं माना जाएगा क्योंकि उसमें बलि है तो भाई ठीक है नहीं माना जाएगा तो किसी राह चलते को मान लेंगे जाकिर नायक का मान लेंगे किसी का भी मान लेंगे कुछ आधार होगा ना योगिक है अर्थ योग बहुत सारे अर्थ निकलते हैं तो प्रामाणिकता को तो ले चलना पड़ेगा ना

00:11:44:04 चलिए ठीक खैर कल की चर्चा बहुत प्रेरणादायक है। आप लोग अवश्य देखें उस चर्चा को और वहां पर देखें कि आर्य समाज के पास सिवाय विषयंतर के और कुछ नहीं है। वो वही जाएगा कह रहे तुम्हारे यहां तो ये लिखा है। अब या तो उन्हीं के स्तर पर उतर के उनसे भिड़ जाओ। उसके लिए भी आपके पास अपॉर्चुनिटीज होनी चाहिए। आपके अनुरूप वातावरण होना चाहिए। तब आप भिड़ोगे। नहीं तो आप केवल अपने आप को फिर वहां अपमानित करवाने के लिए पहुंचोगे। यह वाली बात आ जाएगी।

00:12:16:26 [नाक से की जाने वाली आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] तो इसीलिए फिर वहां से छोड़ देना उचित समझा। बाकी मेरा काम तो मुझे जहां तक मुझे याद है कि जो तर्क और प्रमाण पर भी काफी बात हुई तो कंप्लीट हो गई थी वो। उनके पास अवतार को काटने की वो नहीं थी। अगर उसका एक सार देखा जाए जो लोग यह कहे कि भाई आचार्य जी का पक्ष ले तो एक सार अगर देखा जाए आचार्य जी की ओर से तो क्या सार निकलेगा? कल की चर्चा का कि आर्य समाज अवतार को इसलिए नहीं मानता क्योंकि आर्य समाज के अनुसार शायण भाष्य में विकृति है। आर्य समाज अवतार को इसलिए नहीं मानता क्योंकि आर्य समाज की जानकारी में शायण भाष्य में विकृति है। यह निष्कर्ष है। है ना? चलिए भाऊ जी को ले लेते हैं।

00:13:08:21 जय श्री राम भाऊ जी। जय श्री राम भैया आवाज नहीं आ रही आपकी मुझे नहीं आ रही जय श्री राम अच्छा अच्छा मुझे नहीं आ रही शायद आ रही है की एक मिनट हां बोले बोले आ रही है आ रही

00:13:46:16 जी [गला साफ़ करने की आवाज़] भाजी जी बोलिए आवाज आ रही है मेरी हां अब आ रही है पहले रुक गई थी थोड़ी मुझे नहीं आ रही अब आप बोल रहे हो तो एक तो यार ये मुझे आता ही नहीं चलाना पता नहीं क्यों नहीं इसका भी सीख लो भाई सॉरी एक काम करते हैं वो लगा

00:14:36:24 कैसे हम अब बोलिए जी मैं पहले रामपाल से जुड़ा हुआ था तो मैं इसके बारे में बताना चाहता हूं कि वो लोगों को कैसे पागल बनाता है। पहले तो मैं अपना वो परिचय दे देता हूं कि मैं इसका मतलब भक्त था या नहीं था वो भी बता देता हूं पहले मैं वो नाम दान का जो पत्र होता है वॉल्यूम बढ़वा एक मिनट इसका वॉल्यूम बढ़वा

00:15:15:10 इसका वॉल्यूम आपके पीछे पंखा चल रहा है क्या कोई जी हां थोड़ा उससे आवाज आ रही है बंद कर क्या गर्मी लगेगी आपको रहने दीजिए बोलिए तो मैं पहले वो नाम दान का पत्र बता देता हूं कि उनको विश्वास हो जाएगा कि पहले इसका भक्त था मैं। जी जी

00:16:20:28 आप अपने फोन को अगर ऐसे रख लेंगे तो ज्यादा अच्छी पिक्चर क्वालिटी आ जाएगी शायद। जी [गला साफ़ करने की आवाज़] बाकी कल जो चर्चा हुई है उसमें बहुत सारे नियमों का उल्लंघन तो हुआ ही है जो पूर्व में सुनिश्चित किए गए थे। उस पर जो है एक विस्तृत समीक्षात्मक वीडियो एक लाइव के द्वारा हम लोग करेंगे। इसमें शार्पली हर बात पर बात की जाएगी।

00:17:11:03 जी आप ये मुझे भेज दीजिए फोटो लेकर के मैं यहां स्क्रीन पर दिखवा दूंगा इसको। ठीक है? पहाड़ी जी आप जुड़ना चाहे तो जुड़ सकते हैं। शायद आप देख रहे हैं।

00:18:45:10 अच्छा वो ऊपर वाली नहीं सामने वाली [गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़] अंबेडकर रिडल्स ऐसा है

00:19:34:28 देखिए व्यवहारिक और वैचारिक में अंतर है। ये वाली बात मैंने परसों बताई थी। कुछ लोग कहते हैं उनसे प्रश्न क्यों नहीं करते? उनसे प्रश्न क्यों नहीं करते? वैचारिक और व्यवहारिक में अंतर है। जो संघर्ष है कहीं पर वैचारिक है और कहीं पर व्यवहारिक है। बस इतना ही कहा है। थोड़ा कहा है ज्यादा समझ ले और ऐसा नहीं है कि सामने से कोई मिल जाएगा और हमारी जानकारी में दिख जाएगा तो छोड़ देंगे। अगर इस अभियान के बारे में जानना हो तो अभी एक दो दिन पहले जो अग्निव्रत जी पर हमने एक लाइव की थी उनके वीडियो को लेकर के

00:20:13:25 जी शास्त्रवाद जी जय श्री राम जय श्री राम भैया जय श्री राम इसमें ये जो कमेंट आया है इससे मुझे एक बात याद आई कि हो सकता है वर्तमान में कई सारे आर्य समाजी ये कह रहे होंगे कि भाई तुम भाग क्यों गए? हालांकि मेरे पास अपने तार्किक बहुत सारे बिल्कुल परफेक्ट आंसर्स हैं कि वहां से मैंने वहां से क्यों हटा? पर अगर दुर्जनोष न्याय से मान भी लिया जाए। मैं दुर्जनंतोष न्याय क्यों रखता हूं? जिससे कि जो बात चल रही है वो पूरी हो जाए। बार-बार दुर्जंतोष न्याय रखने की आवश्यकता क्या है? जैसे माया पे हटाया। मैंने कहा अभी आप माया पे मत लो। नहीं तो ये चैप्टर छूट जाएगा। ऐसे ही बलि को लाएंगे बलि का उत्तर दूंगा फिर सिंहिनी प्रकरण आएगा फिर चैप्टर छूटते छूटते बस वो पन्ने पलटते रहेंगे आंसर निष्कर्ष कुछ नहीं आना है और उसमें एक गरमा गर्मी होगी उस गरमा गर्मी को आप झेलते रहो टोलरेट करते रहो चले गए तो भाग भाग भाग्य मगर मान लिया जाए कि मैं वहां से उनके अनुसार जो वो मान रहे हैं वही सही फिर मैंने प्रश्न छोड़ दिया है तुम्हारे गुर्दे के अंदर तुम्हारे हृदय के अंदर जो भी

00:21:28:26 आर्य समाजी देखें तुम्हारे जितने कुतर्क हैं अवतार को काटने के संबंध में उन सब पर मैंने बहुत अकाट उत्तर वहां दिए उसी वीडियो में तुम केवल एक चीज ये लेकर के हार गया हो सकता है कि तुम्हारी मान्यता में जो तुम सोच रहे हो शिवा शिवाश नारायण द्विवेदी हार गया पर उन क्वेश्चंस का जवाब मिला वो जो अकाट पक्ष प्रस्तुत किए गए थे उनका जवाब मिला संतुष्टि जनक बात यह है मैं किस स्थिति में वहां से हटा क्यों हटा वो बहुत सारी रीजनिंग हो सकती है उस एक अपनी चर्चा अलग से हो सकती है और इसमें तुम जीवन भर बिता देना खुश हो के कि जिसने हमसे सवाल किया था वो वहां से चला गया और हमारे लोग ये कहेंगे कि कोई नहीं गया हमारे लोगों ने समीक्षा वो चर्चा देखी है तो तुम ये करते रहना मगर कभी इस पर ध्यान मत देना कि जो क्वेश्चन शिवश नारायण द्विवेदी उठा रहा है उनका आंसर क्या है आर्य समाज के पास इस पर भी तो ध्यान लो कि आचार्य जी इस पर तो उसने पूछा था कि जो ईश्वर निर्वस्त्र स्त्रियों को देख रहा है निराकार रूप से वही ईश्वर जब प्रकट हो जाएगा तो उस पाप क्यों लग जाएगा? अच्छा जीव का साधन है। जीव का साधन है शरीर इसलिए जीव जो है प्रभावित होता है। यदि

00:22:44:07 शरीर मैला होगा तो उसके लिए प्रयत्नशील होता है। तो भैया वही तो हम भी कह रहे हैं कि ईश्वर का साधन नहीं है शरीर तो फिर क्यों वो प्रयत्नशील होगा उसकी शुद्धि के लिए और क्यों तो उसमें दोष आएगा ही। ये सारे सवाल है जो मैं तुम्हारे जहन में छोड़ आया हूं। अपना आत्मवलोकन करो। खुशी मनाओ। खुशी मनाओ जो जो भी तुम्हें क्या कहते हैं जो तुम्हें अपनी ढोल की पोल वाली खुशी बनानी है वह बनाओ पर आत्मवलोकन भी तो करो कि उन सवालों का उत्तर क्या है? तुम्हें लगता है कि मेरे पास जो वो परंपरा के विषय में पूछ रहे हैं। आज से दो तीन साल पहले जो तुम्हारा ऋषि उवा पूछ चुका है वही सवाल कि गड पादाचार्य से लेकर के व्यास के बीच की वो श्रंखला उसमें क्या है? अकाट उत्तर दे दिया था तब से मौन है आज तक यहां वहां औरों से पूछते नजर आते हैं कि शायद इसको ना पता हो तो इसको चुप करा लूंगा ठीक है उसी बात पर जब चर्चा कर लोगे कि हमारी पर पहले परंपरा मानो तो भाई तुम हमसे पूछ रहे हो आज से ढाई हजार साल पहले से पहले का हम तुमसे पूछ रहे हैं कि तुम बस अभी जो है उनसे पहले का बताना शुरू करो

00:23:58:04 और निर्भर तुम हम पर हो ही ऑलरेडी यह सारी बातें हैं। भा आ गए हैं। जी भा जय श्री राम। [गला साफ़ करने की आवाज़] जय श्री राम। आपने मुझे वो कैमरे में थोड़ी प्रॉब्लम है। आप कैमरा मैं आपका वो जो परिचय पत्र है रामपाल गैंग वाला वो उनको पहुंचा दे रहा हूं। अपने ऑपरेटर को वो शो कर। ऑपरेटर जी मैं आपको इनका परिचय पत्र आधार कार्ड दे रहा हूं। रामपाल गैंग के द्वारा जो बनवाया गया है। आप प्लीज उसको जो है कृपा करके यहां प्रदर्शित कर दीजिए सार्वजनिक रूप से।

00:24:51:08 जो कुछ खबरें आ रही है वो ये है कि जो जो वो है ना छोटे प्यादे वो तो खुशी मना रहे हैं दीपावली मना रहे हैं मगर जो वरिष्ठ लोग हैं वो वो ये चर्चा कर रहे हैं कि भाई इस आंधी को रोका कैसे जाए जी भैया बिल्कुल और इस कार्य में वो बिल्कुल ऐसा सफल है अब तक वो रोक नहीं पाएंगे है ना और ऐसे ही सच्चाई सबके सामने आते रहेगी अरे एक कुछ हमारे प्रश्न कितने मांगो

00:25:34:02 शास्त्र जी आप अभी रिमूव हो गए थे शास्त्र जी भाजी जी आप म्यूट कर रहे अभी फिलहाल अभी आपके पीछे से आवाज आ रही है काफी स्थिर स्थिर हो जाइए थोड़ा सा जी आप अपनी बात बोले तब तक वो प्रदर्शित होगा शास्त्र जी आप कुछ कह रहे थे जी आवाज आवाज हां भैया वो यही कह रहे थे कि वो रोक नहीं पाएंगे और कल हम कल जो आपके के प्रश्न थे वो बहुत साधारण से थे। उन साधारण प्रश्नों में भी वो कितनी बार प्रश्नों से भागे हैं। कितनी बार विषयंतर करने का प्रयास किए हैं और ये सभी देखे होंगे। सभी दर्शक देखे होंगे पर अंतिम में तो वो पर्सनल अटैक पर आ ही गए थे। है ना? इसलिए जो भी व्यक्ति ये कह रहे हैं कि शिवश भैया वहां से क्यों हटे? क्यों भाग गए? इस तरह के जो प्रश्न कर रहे हैं। तो पहले ही समझ ले भाई नियम क्या था? नियम जो था उसके अनुरूप भैया ने व्यवहार किया वहां से हट गए। ठीक है? तो भैया का यहां पर कोई दोष नहीं है। अगर दोष है तो उनका है जो जिन्होंने पर्सनल

00:26:49:13 अटैक किया। लास्ट में उन्होंने जो परंपरा पर प्रश्न उठाया था ना कि गॉड पादाचार्य से पहले वो सीधे आप वहां कैसे पहुंच गए व्यास पे? तो मैं जब उस प्रश्न पर भी आंसर देने लगा तो वह तुरंत बोले नहीं नहीं आप इसका बताओ परंपरा का अर्थ है इसकी बात मतलब वह जो कुछ अपना बना के लाए थे कि भाई अगर ये ये परंपरा पूछेगा तो मैं यह पूछूंगा कि ये अर्थ ये जो ये बलि वाला अर्थ क्या है तो खुद ही तो पहले प्रश्न पूछ रहे हो कि गॉड पादाचार्य से लेकर के व्यास के बीच की बात का गैप का क्या है वह मामला सुलझाओ फिर खुद ही रोक रहे हो क्योंकि आपको ऐसा आभास है कि यह कुछ ऐसा उत्तर दे देगा कि मेरे पास फिर उत्तर नहीं होगा। इसलिए केवल आपको विषयंतर करके ही बचना बचने का एक उपाय था। पूरी चर्चा आप देख लो। उसमें लास्ट में उनके पास वही है एक कि भाई आर्य समाज के अनुसार ईश्वर अवतार इसलिए नहीं ले सकता कि परंपरा प्राप्त साय आचार्य ने उनके अनुसार वेद भाष्य में कुछ गलतियां की हैं। ठीक है? यही सिद्धांत है आर्य समाज का। बिल्कुल बिल्कुल। गलती का आधार मतलब गलती कैसे पता है आपको क्या है क्या कारण है मतलब उसका जब आप प्रश्न करते हैं तो वहां से हट जाते हैं वो

00:28:04:19 वो भी वो भी जो है वो उसी संबंध में नहीं है कि अवतार के विषय में ही गलती की उन्होंने ये भी नहीं है किसी और प्रकरण में उन्होंने गलती कर रखी है इसलिए हम ये मानते हैं कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता ये है पूरा ताना बाना खैर मैं देख राम रामपाल एंड गैंग आ चुका है यहां पर। जी आप अपनी बात बोले ऑपरेटर जी इनकी वो इनका परिचय पत्र दिखा दीजिए थोड़ा सा। हां जी हां ये इनका परिचय पत्र आ गया है। और रामपाल गैंग थोड़ा बड़ा कर पाएंगे इसको क्या? इन्होंने अपना जो ओरिजिनल नाम है वह मिटाया हुआ है और यह कबीर परमेश्वर भक्ति ट्रस्ट सतलोक आश्रम टोहाना रोड बरवाला जिला हिसार ये इनका परिचय पत्र है इसमें इनकी वो भी है स्लिप वो कुछ नंबर वंबर होता है कुछ और परीक्षा लेने वाले के हस्ताक्षर जयबंदी छोड़ दी [हंसी] इनका एक अलग कॉमेडी चीख चला करता है पूरा खैर जी अब आप अपनी बात बोले मुख्य विषय जी भैया

00:29:20:19 इसमें क्या होता है कि जो छोटे हो या बड़े हो सभी को मतलब डायरेक्ट जो सामान्य प्रश्न होता है कि आप किसको मानते हो फिर अपन बताते हैं कि हम जैसे ब्रह्मा विष्णु महेश राम भगवान इनको मानते हैं तो बोलते हैं कि यह क्या भगवान की परिभाषा क्या है फिर अपन बोलते की वह तो अजर है तो फिर वह बोलते की यह देखो यहा पर लिखा हुआ है कि तुम्हारे भगवान की तो जन्म मृत्यु हो रही तो यह भगवान हुए कहां से और जो ये आविर्भाव और तिरो भाव जो शब्द है तो इसमें क्या है कि यह मतलब सामान्य बोलचाल में प्रयोग होते भी नहीं है ये शब्द तो किसी को मालूम कैसे चलेगा कि ये शब्द का ये अर्थ है तो इस वजह से भी पागल बन जाते हैं और मैं तो मेरा क्या हुआ था कि जैसे मेरे पिताजी बचपन मतलब मैं जो बचपन से देख रहा हूं तो मेरे लिए तो मेरे पिताजी श्रेष्ठ है जो वो करेंगे तो वह भी उचित है मेरे लिए तो फिर मैंने इनसे मतलब ये साधारण प्रश्न पूछे थे वहां पे जब ढूंढने गया था तो इन्होंने यह जवाब दे दिए। मुझे लगा यह सही बता रहे। फिर इन्होंने वो जो नाम दीक्षा का जो मंत्र देते हैं वो भी जपने के लिए बोला था। बोला ये लाइन से करना। मतलब इसका जो क्रम होता है उसी क्रम से करना है। बाकी आपको लाभ नहीं होंगे। फिर जो मंत्र का भी बताता

00:30:35:27 हूं। उसमें वो ओम जो मंत्र दिया हुआ है फर्स्ट वाले का तो उसमें जो ओम मंत्र है इनके अनुसार वो ब्रह्मा जी का है लेकिन गीता जी में तो बताया हुआ है कि ओम काल का मंत्र है तो वो वहां पर ब्रह्मा जी का हुआ कहां से इनके इनके इनके अनुसार इनके अनुसार काल का मंत्र इनके अनुसार मतलब वो ब्रह्मा जी का भी है और काल का भी है दोनों हो रहा है दोनों कैसे होगा और वहां पे क्या कहते हैं कि ये सबको को अगर किसी को अपनी ओर बुलाना है तो आकर्षित करना पड़ेगा। तो इनके आश्रम में लेके जाते हैं। पहले तो अपने किराए देके भी ले चले जाते किसी को और वहां पे क्या है कि मतलब सुविधा इतनी बारीकी से करते किसी के भी लिए जैसे नहाने तक की साबुन के पैसे नहीं लेते हैं। तो इससे क्या होता है कि ये लोगों को बहलाते हैं कि देखो भगवान के यहां पर हर चीज निशुल्क है। तुम्हारे वहां पर जाओ तो पैसे लेंगे तुमसे। और जो नया नया होता है उससे तो आप आप करके बात करते हैं और वहां पर साथ में रखते हैं। मतलब पहले तो लोगों को पूरा वो भ्रमित कर देते हैं और वहां पे इकट्ठे लोग हो जाते हैं। फिर वो इनका वो झूठी डिबेट आती है ना उसमें बोलते हैं कि हां हम तो मतलब जगत है ये भगत है।

00:31:51:08 तो पूरा घेरा बनाकर बैठ जाते हैं। फिर वो लोगों को पागल करते हैं। [खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] सुन रहा हूं। सुन रहा हूं। आपकी बात सुन रहा हूं। पानी पी रहा था। जी तो तो मैंने अभी एक एक दो दिन पहले ही लाइव में बताया था कि किस तरीके से जो मूल रूप से जो हिंदू सनातन परंपरा के जो लोग हैं उनसे उनके भाइयों को छीन छीन करके कैसे ग्रुपिज्म में बांटा जा रहा है। एक है वह ब्रह्मा कुमारी वाले बताएंगे अपने आप को कि हम यह कुछ उनका है। फर्स्ट लेवल का ज्ञान सेकंड लेवल का उनका मतलब ज्ञान में एक उन्होंने वो बना रखा है कई सारे वो हैं स्टेजेस तो वो ज्ञान के नाम से अपने ग्रुप बना रखे हैं ब्रह्मा कुमारी वालों ने इस वालों ने तो बना ही रखे हैं अभक्त और वो भक्त हैं डिवोटीज और नॉन डिवोटीज आर आर समाजियों ने इस तरह से बनाया है कि हम वैदिक हैं या हम आर्य है और यह सारे पौराणिक है और

00:32:59:22 रामपालियों ने वही भगत और जगत है ना इस तरह से भाई को भाई से अलग किया गया है जी बोलिए ये एक लेवल और ऊपर जाते मतलब लोगों को मतलब अपने यहां पे जोड़ने के लिए क्या करते हैं जैसे अपन जहां पे इनका आश्रम है ठीक है तो उससे दूर जो रेलवे स्टेशन या बस स्टेशन होता है वहां पे भी इनकी गाड़ियां लगी हुई होती है मतलब पूरा वो दिखाने की करते हैं कि ये भगवान और भगवान आपको कभी भी दुख नहीं देगा आपको मतलब यहां से ले जाने तक की सुविधा दे रहे हो और वापस आते समय भी भोजन देते हैं तो जिससे इनको वो हो जाता है कि भाई हमें कुछ खर्चा करने ही नहीं है इनके यहां पे जाएंगे तो और वहां से आराम से रहो लेकिन वहां पर क्या जैसे ये नाम उपदेश देते हैं इनको तो वो पाठ प्रकाश के नाम से पैसे ले लेते हैं और बोलते हैं कि हम पैसे नहीं लेते किसी भी चीज का अच्छा जब प्रश्न पूछ पैसे ले लेते हैं हां अच्छा और इसको क्या बोलते हैं? फिर कैसे कुछ उतारचाव थोड़ा सा वह बताइए। कैसे क्या हुआ आपके जीवन में? आगे कैसे बढ़े कोई घटना हुई हो तो वो बताइए। वो मतलब मैं राजीव दीक्षित जी का नाम सुना होगा आपने।

00:34:14:26 तो हम हम तो मतलब मैं पहले पिच ज्यादा था तो उन भैया ने मुझे राजीव दीक्षित जी के बारे में बताया था। तो मैं उनकी वीडियो देखने लगा तो उसमें वो बता रहे थे कि हमारे जो ऋषि मुनि थे भारत के तो बहुत श्रेष्ठ व्यक्ति थे उनको मतलब सारा ज्ञान था तो फिर मेरे मन में ये प्रश्न रहने लगा रामपाल को मानता था उसके ऊपर विश्वास था लेकिन मन में प्रश्न रहने लगा कि हमारे जो इतनी बड़ी-बड़ी खोज कर रखी है इतना सारा है तो वो मतलब इस छोटी सी चीज को कैसे नहीं समझ पाए ये बोल रहे हैं रामपाल वाले मतलब इतना सा मतलब ये शब्द बता रहे शब्द का ज्ञान तो इनको पहले से ही था तो ये समझ कैसे नहीं पाए मतलब यह प्रश्न बहुत चुकता था अंदर और सहयोग से मतलब जुलनी एकादशी के दिन आपकी वीडियो मेरे सामने आ गई थी YouTube पे आज से दो साल पहले मतलब वो जो राजीव दीक्षित जी के पुराने वीडियोस आप देख रहे होंगे और उसी क्रम में ये सब आपके मन में सवाल चले और फिर हमारी कोई वीडियो आपने देखी हां दो साल पहले आपका वीडियो देखा था मैंने तो आपका वीडियो जैसे ही देखा तो वापस मैंने सोचा कि अब इसके मतलब इनके प्रश्न का जवाब देना पड़ेगा। मतलब उस समय आपके

00:35:30:00 प्रति मेरे मन में द्वेष भाव नहीं थी। लेकिन फिर वो फैक्ट बाय अभिषेक है ना तो इनका क्या है कि वापस भोलीभाली जनता को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए वापस झूठी बात बोलते ही है। वो मतलब एक एक के साथ में वो दिखाने लग जाएंगे जिससे वो उसको ध्यान नहीं रहेगा कि इन लोगों ने क्या-क्या बताया। तो वापस मैं मुझे लगा कि नहीं मतलब शिवश नारायण द्विवेदी जी नाम का कोई आदमी है वो तो झूठ बोलता है। फिर मैंने सोचा कुछ समझ ही नहीं आ रहा है। मतलब हमारा पहला आपने वीडियो देखा फिर उसका खंडन देखा फैक्ट बाय अभिषेक के द्वारा और फिर आपके मन में दोबारा से जो हमारे प्रति जो है वो भावना आ गई कि ये तो झूठा है। जी ऐसा मतलब चार पांच वीडियो तक ऐसा चलता रहा। हमारा कौन सा वीडियो देखा था आपने? हमारा सबसे पहले कौन सा वीडियो देखा था आपने? वो पहले वाले में जो आप बताते हो ना कि ये बोलते हैं ये कवि कवियों का कवि गणपति है। वेद से बताते हो आप उसमें वो वाला देखा था। फिर वो धीरे-धीरे आपका वो चैनल वो पूरा चेक किया तो उसमें ये लाइव वो भी देखी। हम फिर मैंने सोचा पूरा पता ही नहीं चल रहा है क्या हो रहा है तो फिर गीता तो मेरे

00:36:45:01 घर पर पहले से ही पढ़ी थी गीता प्रेस गोरखपुर वाली तो उसको पढ़ा पूरा क्रम से फिर थोड़ा बहुत समझ में आया क्योंकि अब तो आपको सबको मालूम है कि बहुत गहरी चीज है तो पता चलेगा कैसे पहली बार में ही कितनी भी बार पढ़ेंगे तो भी पता चलेगा नहीं लेकिन धीरे-धीरे थोड़े वो समझने की कोशिश की और मैं संस्कृत साहित्य का स्टूडेंट भी हूं तो उस वजह से मालूम है थोड़े व्याकरण के नियम फिर वह जो ये नियम लागू करते हैं अनुतम वाला ब्रज वाला वो सारे मैंने वो खोजना शुरू किया फिर आपने बताया और जो वो सर्वशक्तिमान ईश्वर वाली बात है मेन वो मतलब रामपाल से छोड़ने में मदद की थी जब आप और गोविंद गुरुकुल जी इनको वो फोटो फोटो दिखाते थे ना वो कबीर वाली के यही भगवान है कि आपका तो उस समय मुझे समझ में नहीं आ रहा था लेकिन आप लोग हंसते थे इनके ऊपर और जब ये क्या बोलते हैं इसको मतलब आप बार-बार फोटो दिखाते थे लेकिन उस समय मुझे पता नहीं चल रहा था कि आप हंस क्यों रहे हो आप दोनों फिर धीरे धीरे धीरे वो समझ में आने लगा लगभग पांच छ महीने लगे भाई ये फोटो क्यों दिखा रहे हैं फिर पता चला कि वो साकार निराकार वो सर्वशक्तिमान कैसे सिद्ध करेंगे भाई जो ये चेहरा बन रहा है इसके पास जो जगह

00:38:00:04 खाली है इस कारण से आपने उसको वो फोटो दिखाया लेकिन अभी तक भी यह जो लोग हैं वो समझ नहीं पा रहे हैं चलिए हमारे जो यह सर्वशक्तिमान वाला प्रश्न है इसके कारण यह कह सकते हैं कि रामपाल के गिरोह से आप वापस आए सर्वशक्तिमान वाला प्रश्न ऐसा है जो है ना जी बाकी तो क्या है कि शास्त्र में जैसे वो दिखाएंगे कुछ लाइन आगे पीछे करेंगे तो उससे वो वापस वो संभावना रहती है किसी के भी हम और लेकिन अगर किसी को भी निकलना ये चीजें ऐसी जो कभी नहीं बदलेंग चाहे कुछ भी कर लो सर्वशक्तिमान परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत और पुराण में भी भैया वो ध्यान रखने की बात ये है कि जैसे वो जन्म मृत्यु वाला दिखाते ब्रह सब पुराण में जो ये बात चल रही होती है उसमें ज्यादातर ब्रह्मा जी बता रहे होते हैं कि ये ये चीज हुई ठीक है और जो देवी भागवत में भी बता रहे कि ब्रह्मा विष्णु महेश की जन्म और मृत्यु होती है वो वो वाली बात भी ब्रह्मा जी बता रहे हैं। तो मैंने पढ़ी थी वो पहले भागवत पुराण तो उसमें ब्रह्मा जी को पहले से ही मालूम था कि हमारा जन्म मृत्यु होता है

00:39:15:06 तो वो भगवान शिव को और विष्णु को क्यों बोल रहे कि आप तो अजर अमर हो सर्वशक्तिमान हो या तो ब्रह्मा जी झूठ बोल रहे हैं। तो ब्रह्मा जी की बात को भी माना साथ में। नहीं तो यह लोग मान लेते कि ब्रह्मा जी झूठ बोल रहे हैं। अब बात यह आती है ब्रह्मा जी अगर झूठ बोल रहे तो फिर उनकी वाणी के द्वारा आप यह क्यों मान रहे हो कि उनकी जन्म मृत्यु होती है। अगर ब्रह्मा जी झूठ बोल रहे हैं तो उनकी वाणी दिखा के क्यों सिद्ध कर रहे हो कि शिव जी की जन्म मृत्यु होती है। मतलब तुम्हारा जहां पर काम निकलेगा तुम्हारे मन की बात होगी। वही वाली बात जैसे अभी आर्य समाज उनहीं की तो उपज है। रामपाल पहले आर्य समाज था। है ना? तो वही आर समाज वाली बात हो गई ना कि क्या कहते हैं? जितना हमारे मन का होगा वो हम वैसा लेंगे। बाकी कह देंगे झूठ है, प्रक्षिप्त है या विकृत है। तो धर्म शास्त्र के हिसाब से हम नहीं चलेंगे। हमारे हिसाब से धर्म शास्त्र के अर्थ चलेंगे। ये है ना? और इसमें और आपने अगर वो एस न्यूज़ पर सनातन पूजा के पतन की कहानी देखी हो लगभग एक साल पहले तो रामपाल के लिए भी वो

00:40:30:12 ये जो हमारे धर्म शास्त्र है वो प्रमाणित नहीं है क्योंकि उसने भी लगभग 20034 में यह ग्रंथ पढ़े थे तो उसको यह मिला कि नहीं हिंदू धर्म शास्त्र में भी मेरी वाली बात ही है तो इसके लिए ये ग्रंथ सत्यापित करने का कोई तरीका नहीं है रामपाल के पास परंपरा परंपरा हां क्योंकि क्योंकि मैंने वो वीडियो देखा था उसमें वो बोल रहा था कि मुझे यह ज्ञान हो चुका था लेकिन लगभग 20034 में मैंने ग्रंथ पढ़े तो उसमें भी ये चीजें मिली तो फिर मैंने ग्रंथ से दिखाना शुरू किया वो मिलेगा उसमें यानी कि तीनों ही सवाल अपने काम आते हैं। एक सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत एक व्यक्ति बहुत ही अभद्रता के साथ कमेंट कर रहा है।

00:41:18:28 डिबेट के लिए बोल रहा है। भाई अगर चेहरा लेकर के आ सकते हो तो अभी थोड़ी बहुत देर में लिंक दिया जाएगा। आप आ जाना चेहरे के साथ आना और बदतमीजी के उद्देश्य से मत आना। ठीक है? क्योंकि किसी को कभी हम छेड़ते नहीं और कोई हमें छेड़ दे तो छोड़ते नहीं। ठीक है? ये ये व्यक्ति कह रहा है मुझसे ज्ञान चर्चा करेगा। हां भाई कर लेंगे तुझसे। आजा बाबा को ले आजा तू स्वयं आजा। वैसे तेरे बाबा को दे रखी है चुनौती तेरे बाबा ने कह तो दिया जो कूलर साथ में ले चलता है जो उसको कह तो दिया उसने कह तो दिया कि हम चैनल का इंतजाम करेंगे मुझे लगता नहीं है कि वो जो है कुछ साहस रखता है जो सामने आएगा वो डरपोक जैसा है डरपोक बन करके एक बिल में ही बैठा रहेगा वही उसकी सेहत के लिए अच्छा भी है मालूम पड़ा एक जगह अभी मैं गया था वहां पर जो भीड़ इतना क्रोधित हो रही थी दुर्गा माता के बारे में देख के मैंने खुद वीडियो देखा इसकी फोटो नीचे नीचे डाल के इसकी किताबों पर चप्पल, जूते, मालाएं चढ़ाई जा रही है। अब यह व्यक्ति अगर कहीं सार्वजनिक रूप से इस तरह से आएगा जहां इसका गढ़ है, जहां इसके लोग हैं, जहां इसका वातावरण है, वहां तक तो ठीक है। मगर ये स्वतंत्र हो के अगर कहीं आने जाने लग जाए, कहीं पहुंच जाए तो इसकी

00:42:34:02 कुटाई हो जाएगी। है ना? जी और जब जब मेरे मन में जैसे यह प्रश्न आने लगे तो मैंने पूछा भाई शंका नहीं थी रामपाल के ऊपर मुझे विश्वास था क्योंकि उसको मानता था लेकिन जैसे प्रश्न किया तो वो बोलते हैं कि आपको सत्संग देखने की जरूरत है। आप अभी पूर्ण भक्त नहीं हो। आपको देखना पड़ेगा। फिर मैंने देख लिया सारे सत्संग लगभग लगभग क्योंकि लगभग एक घंटे का होता है और मेरे पास 10थ क्लास से ही फोन आ गया था तो मैं देखने लग गया था और अभी मैं सेकंड ईयर में हूं लगभग चार साल हो गए तो इसमें लगभग लगभग सारे देख लिए तो भी वो उसमें जवाब नहीं मिला फिर पूछा तो बोले आप शंका कर रहे हो आपका नाम खंडित है फिर डराया जाने लगा कि आप अभी आपको पुनरु उपदेश लेना पड़ेगा

00:43:26:28 तो फिर एक एक जने को मैंने पूछा तो उसने बोला कि मेरे को मालूम नहीं है आप वाले प्रश्न पूछे तो फिर मैं उदयपुर गया था इनका वो सेंटर है वहां पे तो वहां से भी मैंने बात की थी वो 2003 से जुड़ा हुआ है पांडी जी के ऊपर ये पांडी जी के चैनल पे उसकी वो वीडियो पड़ी है रिकॉर्डिंग की पांडी जी ने तो वो बोल रहा है कि आप सही हो मैंने बोला मैं तो सही हूं इसीलिए तो आपके पास आया आप सही कैसे हो वो बताओ वो बोल रहा है कि अब कभी आना वापस बात करेंगे तो लेकिन उसने जवाब ही नहीं दिया और मैं भी आपको वीडियो भेज रहा हूं इसके आश्रम में भी गया था वापस प्रश्न पूछने के लिए। वीडियो भेज भेज दीजिए। भेज दीजिए। एक बड़ा अच्छा कमेंट वो शक्ल तो अभी तो मेरी दिख रही है।

00:44:10:00 हां हां भेज दो आप भेज दो। ये अच्छा कमेंट इसमें शक्ल मेरी दिख रही है। एक मिनट ये जो तीन पॉइंट है किस तरह से किसी भी धर्म प्रेमी की रक्षा करते हैं। अगर कहीं से भी चूक जाओगे कहीं कुछ लिखा पढ़ा नहीं पता है क्या है क्या नहीं नहीं पता है मगर यहां तीन चीजें पकड़ लो बस सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म तीन चीजें पकड़े रहोगे कहीं कोई भी आपको आपके धर्म से नहीं कर सकता कहीं कोई आपको बहका नहीं सकता और देखो यह व्यक्ति क्या है देखो इसकी चीजें ये इसके बाबा ने सिखाया है क्या सिखाया है कि न्यूज़ चैनल पर क्यों नहीं गया अबे न्यूज़ न्यूज़ चैनल पे बुला तो सही तब तो जाएंगे। पागल हो गया है क्या? न्यूज़ चैनल पे उड़ जाऊं घर से हवा में चला जाऊं। कहीं न्यूज़ चैनल से फोन आए भाई हम ये फलाने न्यूज़ चैनल वाले बोल रहे हैं। आ जाओ यहां तब तो हम जाए भी। अच्छा दूसरी बात ये अभी कह रहा था पहले कि मुझसे मुझसे करेगा चर्चा तो चर्चा करने के लिए बोल दिया तो अब कह रहा है कि नहीं तू नहीं अपने उसको भेज इसको भेज। और ये

00:45:23:25 यह कबीर कबीर जर्नी वाले अपने बाबा जी के बारे में बता रहे हैं कि उसके भेज दिया मैंने आपको वीडियो उसके बाबा जी पांच साल से क्या कर रहे थे उसका बाबा पांच साल से कुत्ते की तरह क्या लिखा है [हंसी] देखो अब तक देखो इसको हाइड कर दीजिए भाई ऑपरेटर जी इसको हाइड कर दीजिए मैं आपको इनका वीडियो भेज रहा हूं अच्छा स्पैम करोगे तो फिर ब्लॉक मतलब इनको स्पैम मत करो। इनको विश्वास हो जाएगा कि जी हां बोलिए। एक ही मैसेज बार-बार भेज रहे हैं। अबे बेवकूफ वो रिकॉर्डिंग सुना न्यूज़ चैनल पर बुलाने वाली कि न्यूज़ चैनल पर आ जाओ। और ऐसे न्यूज़ चैनल कौन सा न्यूज़ चैनल है भाई? तुम्हारा सतलोक आश्रम का चैनल है वो। न्यूज़ चैनल है कोई? पगले कहीं के तो तुम्हारे बाबा जी बताते रहते हो तुम लोग खुश हो जाते हो न्यूज़ चैनल है अपना खुद का एक खोल लो न्यूज़ चैनल नाम से चैनल मैं भी खोल लेता हूं कल न्यूज़ चैनल नाम से उसके ऊपर केस किया हुआ

00:46:38:26 है ऐसे न्यूज़ पर एफआईआर में नाम है उसका रोहित का जो भी नाम है उसका रोहित है कि कुछ और नाम हां जी आपने भेज दिया हां वो वीडियो बताना इसलिए जरूरी कि यह लोग समझेंगे कि क्योंकि यह तो नाटक करते हैं कि उसमें कि वो जगत लोग भी अब इनके भगत बन चुके हैं क्योंकि होते तो इन्हीं के लोग हैं। तो अभी ये देखेंगे कि मैं आपका ही आदमी हूं। मैंने कभी रामपाल को माना नहीं है। इसलिए वो वीडियो भेजने की जरूरत है। आप वो दिखा दीजिए इसमें। एक मिनट मैं ऑपरेटर को भेज दूं।

00:47:12:26 वो बता रहे तब तक एक वो मतलब बताता हूं। मैंने सोचा था क्योंकि इसको मानते हैं जब तक क्या है कि विवेक शक्ति खत्म हो जाती है सोचने विचारने की तो अगर वो मतलब सबको मतलब अपनी ओर आकर्षित करने के लिए मेन जो ये उदाहरण देते हैं ना गीता का श्लोक का 18 अध्याय का 62वा श्लोक उस परमेश्वर की शरण में शाश्वत पर सनातन परमधाम को प्राप्त होगा आगे तो उसमें क्या है कि जो शाश्वत शब्द दिया हो

00:47:54:19 वहां पे जो शाश्वत शब्द आया है तो उसका अर्थ मतलब चलो ये अगर ये आदि और अंत नहीं मानेंगे तो भी वो उसको अविनाशी तो मानेंगे ना कि सतलोक अविनाशी लोक है हम तो उसमें ये हो रहा है कि ये जो काल के हां सतलोक काल जो 21 ब्रह इनके अनुसार तो अविनाशी है सतलोक नहीं है तो उसमें होता क्या है कि जो काल के इनके द्वारा एक लोक और माना गया है कुछ अमय है पता नहीं एक लोक और है अनामी लोक ऐसे करके उस लोक से आकर के सत का निर्माण होता अरे है वो नहीं अविनाशी तो मानते हैं ना सत सतलोक को ही है। मानते हैं मगर उसमें जब पढ़ते हैं जाकर के तो वो अनामी से आके सतलोक को निर्माण बताया गया है। ऐसा है कुछ वो नहीं सतलोक को लेकर के भी ध्यानलेबाजी है। और ये कह रहे हैं कि

00:49:03:06 कोई एक पता नहीं क्या है। ठीक है। चलो हां तो धाम उसका शिष्य भेजो का और एक व्यक्ति कह रहा है कि आपके शंकराचार्य को हमारे गुरु जी ने वो किया है चैलेंज कौन है तेरा गुरु जेल से छूटा अपराधी 10 साल से जेल में था हम क्या काम करके वहां पर रोटी मिलती थी उसको पता भी है कभी-कभी वहां पर जेल के अंदर लोगों से शौचालय भी साफ करवाए जाते हैं। किसी को माली बनाया जाता है। किसी से गड्ढा खुदवाया जाता है। किसी से बैरिक की सफाई करवाई जाती है। काम करना पड़ता है। वो बाहर निकला होगा तो पता नहीं कितने दिन तक तो उसको नहाना होगा। तब जाकर के वो जो जेल की जो उसके अंदर भर गई होगी चीजें वो उससे दूर होंगी। तब शंकराचार्य जैसे पवित्र जो संत होंगे उनके आसपास वो खड़े होने के योग्य बनेगा। उनकी सभा में जाने के योग्य बनेगा। और तू कह रहा है चैलेंज। सच [गला साफ़ करने की आवाज़] सच तो यह है कि पहले मुझे भी मालूम नहीं दूसरी बात कि तो तेरे तुम्हारे उस छूटे जो आतंकवादी का मुकदमा चल रहा है उस पर सस्पेक्टेड व्यक्ति उसने शंकराचार्य को चैलेंज किया हमने भी तो उसे चैलेंज किया है अरे भैया हमने तो उसके खिलाफ मुकदमा कर रखा है कोर्ट में वो नहीं आया तो एक दिन एक ना एक दिन यहां आना है उसको

00:50:18:14 लिख के ले लो स्ट पेपर पर मुझे WhatsApp करो भेज दूंगा वो जो स्ट का खर्चा है वो भेज देना मैं अपना खर्च नहीं करूंगा। ₹1200 स्ट का आएगा लगेगा। उसमें लिख के दे दूंगा कि एक दिन रामपाल को हाई कोर्ट में आना है। देख लेना वो ऐसे नहीं आएगा। वो दुबका बैठा रहेगा। हमने दिया है उसको चैलेंज। मगर वो ऐसे नहीं आएगा ज्ञान चर्चा के लिए। भागेगा। मगर एक दिन यहां कोर्ट में आकर के उसको जवाब जरूर देना होगा। ये समझ लो। ठीक है? ठीक है। अब आप अपनी बात बोले। हां। ये वीडियो आ गया इनका। क्या नाम है? हां ये वीडियो प्ले सोजत आश्रम का सोजत आश्रम जी

00:51:06:07 से सुन रहे हो भगत जी जी जी ये सोचा था आश्रम जाकर के आपने जो है वो बनाया था। हां तो बात करनी थी उस समय तो मैंने उनको पूछा था कि वीडियो बना सकते हैं क्या? क्योंकि साथ में कोई था नहीं बाकी वह बना लेता। लेकिन इन्होंने मना कर दिया। तो फिर वहां पर मैंने पूछा तो वह जवाब नहीं दिए उन्होंने। यह कह रहा है मेरे गुरु मेहनत की खाते हैं। क्या मेहनत करते हैं तेरे गुरु? साथ में कूलर ले डोल रहे हैं।

00:52:04:26 कूलर क्या मेहनत कर रहे हैं तेरे गुरु? हां। जेल में जब गए थे तब जरूर पत्थर तोड़े होंगे। [हंसी] जेल में जरूर पत्थर तोड़े होंगे। वो मानता हूं। वहां सही है। वहां पर जरूर वो किया होगा। हां चलिए जी आप बोलिए अब कंटिन्यू वो ब्लड की कीमत क्या होती है जो रक्तदान जो करते हैं ना अगर किसी को खरीदना होता है तो उसकी कीमत क्या होगी लगभग मुझे आईडिया नहीं है इस बारे में। हां तो ये क्या है कि रक्तदान भी करवाते हैं लोगों से। तो मतलब मुझे पूरा मालूम नहीं है थोड़ा बहुत दान कर सकते हैं लेकिन संभावना तो रह सकती है ना कि यह रक्त बेचते हो लोगों का क्योंकि इनके पास तो फ्री में आ रहा है इनके वहां पर रक्तदान करवाते हैं और जो यह बोलते हैं कि हमारे आश्रम बन चुके हैं तो वहां पे केवल जो मटेरियल लगेगा उसी का ही पैसे लगेगा क्योंकि इनको मजदूर के पैसे देने नहीं है इनके भक्त होते हैं वही सारा काम करते हैं और इसमें क्या है कि जब क्या आप ये वाली मटेरियल

00:53:20:02 वाली बात दोबारा बता दीजिए। यह बोलते हैं ना कि हमारे आश्रम बन चुके हैं। इतने आ रही है आवाज जी आ रही है। बोलिए आवाज आ रही है? हां ये बोलते हैं ना हमारे इतने आश्रम बन चुके हैं तो इसमें पैसे पैसे की इतनी कोई दिक्कत नहीं क्योंकि जो वो जगह होती है वो इनके भक्त दान कर देते हैं और जो मटेरियल होता है वो भी लगभग लगभग दान में आ जाता है और जो श्रमदान होता है वो भी इनके भक्त कर देते हैं तो इसमें बड़ी बात क्या है

00:53:57:06 वो ये सब बातें कोई मायने ही नहीं है मतलब इसमें कुछ निष्कर्ष प्राप्त नहीं होना मतलब मेन यही है कि इससे आश्रम में जाएंगे तो लोगों से ही मदद लेकर के वहां के कार्य होते हैं। सीधी सी बात है। अब ये अगर कहते हैं कि आश्रम लेते हैं वो लेते हैं। वो इनकी इनकी बुद्धि छोटी इसलिए इनका खुद का आश्रम क्या हवा से चल रहा है? जो भी आश्रम है वहां क्या हवा से हो रहा है। हां वहां पर गोरख धंधे जरूर कुछ ना कुछ हो सकते हैं। इस बात की संभावना है क्योंकि जिस व्यक्ति के वो आश्रम है वो व्यक्ति आतंकवादी का उस पर मुकदमा चल रहा है। उसके पास से अवैध हथियार प्राप्त हुए थे। देशद्रोह का उस पर मुकदमा है। जी

00:54:46:19 मतलब इसमें क्या है कि मेन तो परिवार में अशांति रहती है। मतलब किसी के यहां पे जाने से किसी भी कोई भी कार्यक्रम घर में कर भी नहीं सकते। उसके ऊपर रोग होती है। तो हमारे आसपास के गांव में भी मैंने देखा है जो मतलब परिवार में झगड़े हो गए। जो मृत्यु होती है उस दिन भी झगड़े हो चुके। मृत्यु के दिन कोई झगड़ा करता थोड़ी है। किसी के घर में होती है। मतलब भाई भाई आपस में लड़ गए थे। लेकिन अभी मैं मतलब आसपास के लोग हैं उनसे बात कर रहा हूं और मैंने सोचा था कि यह लेकिन अपने हिंदू लोग क्या है कि बहुत साथ में खड़े होने को तैयार नहीं रहते हैं। बाकी मैंने बोला था कि इनका जो वो लोग हैं इनका प्रचार करते हैं। उनको उनके घर पे है सामग्री बुला के रोकते लेकिन तैयार नहीं हो रहे हैं लोग। लेकिन मैंने मेरे कुछ दोस्त थे वह भी उनसे बात की।

00:55:45:10 नहीं वो वो अलग बातें हैं कि करना क्या है धरातल पर क्योंकि वो स्ट्रेटजी होती है। आप अपनी यात्रा के बारे में बताइए। सतलोक का डर नहीं है। सतलोक के बादाम, खजूर इत्यादि का जो निम्न स्तर का लालच होता है। मतलब यह भी है कि एक होता है ना हाई क्लास का लोभ। तो ये जो सतलोक के नाम पर जो जुड़ते हैं रामपाल से जो लोग उनकी जो डिमांड्स होती है वो भी बहुत बहुत छिच स्तर की छचली सी होती है निम्न स्तर की उसके नाम पर जोड़ते हैं वहां तुम्हें क्या बादाम मिलेगा सेब मिलेगा इस नाम पर इस नाम पर जोड़ते हैं

00:56:27:03 और आश्रम पे भी जाना जरूरी है क्योंकि अगर आश्रम पे मतलब टाइमिंग फिक्स होती है इस टाइमिंग में अगर आप नहीं गए तो आपका नाम खंडित हो जाएगा क्योंकि आश्रम में जाने से क्या होगा कि लोग हमें मिलेंगे वहां पे तो वापस वो नहीं बात करेगा झूठ बोलेगा कि मेरे साथ में यह हो चुका था लेकिन वो हुआ नहीं है और अभी मैं बता दूं आपको कि मैं भाड़ी जी को भी बोला था लेकिन मेरे पिताजी के भी वो मतलब पत्री हो चुकी उसका भी कुछ ऑपरेशन कराना पड़ेगा मेरे पिताजी तो मानते हैं उसको लेकिन अभी मैंने बोला उनको आपके पत्री है तो फिर वो ऑपरेशन कराने की जरूरत क्यों है क्योंकि ये तो कैंसर जैसी बीमारी का तो इलाज कर देता है अपने आप।

00:57:12:28 मैंने बोला कि चलो इसके मुझे मालूम है कि इसको मारने से कुछ नहीं होता है। अगर वो ऑपरेशन कराना पड़ेगा इससे बढ़िया कि मेरी बात झूठी हो जाएगी तो भी चलेगा कि इसकी वजह से वो पत्नी सही हो चुकी है। लेकिन ऐसा भी कुछ नहीं हुआ अभी। और अब लगभग 10-15 दिन में वह करवाना पड़ेगा। तो पिताजी अभी जुड़े हुए हैं। जी अच्छा तो पिताजी को आपत्ति नहीं करेंगे वो इस तरीके से जो विरोध कर रहे हैं उनके बाबा जी का नहीं क्यों हमारे घर में सब स्वतंत्र है जैसे ये लोग बताते हैं ना उतना वो मतलब कुछ गलत कार्य नहीं करना है कहने का मतलब स्वतंत्र का मतलब ये

00:58:04:14 मतलब न्यारे हो जाते हैं ना जो एक राजस्थान में शब्द सुनाया न्यारा हो गया वो ऐसा नहीं न्यारे हो जाते हैं लड़के बड़े हो जाते हैं तो भाई वो अपना देख रहा है अपना खर्चावर्चा चला रहा है अपना चूल्हा उसका अलग हो गया इस तरह से या चूल्हा नहीं भी हुआ तो ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करते एक दूसरे के व्यक्तिगत जीवन ऐसा ही कुछ है नहीं नहीं मतलब मैंने उनसे बात की थी हां पढ़ाई कर रहा हूं मैं। अच्छा मतलब ऐसा नहीं मैंने उनसे आप मैंने उनसे बात की थी इन सारे प्रश्नों को ले लेकिन उनके पास भी जवाब नहीं था। तो फिर तो मुझे आना पड़ेगा ना बताने के लिए। उसमें हां मेन चीज तो बताना भूल गया था कि जो ये काल का डर होता है तो फिर जब मैं छोड़ रहा था तो मुझे लगा कि ये क्या बोलते हो इसको? वो काल भटकाता है फिर अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। वैसा तो नहीं हो रहा मेरे साथ में गई कि भाई ये जो लोग है तो मुझे पागल बना के वापस अपनी ओर ले जा रहा है काल फिर मतलब मेरा मोक्ष नहीं होगा। मोक्ष की परिभाषा मालूम ही नहीं है। हालांकि किसी को इन लोगों में अगर मालूम होती तो जुड़ भी नहीं पाते इनसे।

00:59:19:25 फिर मतलब मैंने थोड़ा लगभग मुझे साल भर लगा कि इनकी मानसिकता से निकलने में ये मतलब अलग-अलग बैठाते थे ना मन में कि ये अलग है भगवान इसकी शक्ति कम है उसकी शक्ति कम है। जब मैं मंदिर में जाता था अभी इससे छोड़ इसको छोड़ने के बाद में तभी मेरे मन में आता था कि मैं सही कर रहा हूं या गलत कर रहा हूं। फिर भाड़ी जी से मैंने बात की तो फिर उन्होंने समझाया उसके बाद में वो धीरे-धीरे एक ही भाव आने लगा है सभी के प्रति मतलब डर बहुत बैठाते है कि अगर आप ऐसा करोगे तो ऐसा हो जाएगा। ऐसा होता है जीवन में जब कभी हम कठिन कार्य करने निकलते हैं ना तो डर सबके मन में आता है और मेरे मेरा अपना व्यक्तिगत अनुभव तो ऐसा रहा है कि बहुत सारी ऐसी चीजें आती है कि यह करना है कि नहीं करना है इससे आगे बढ़ना है कि नहीं करना है बढ़ना है तो मुझे बस एक ही नाम याद आता है राम हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता हमें आ जाओ किसको आना है ठीक है तो इस तरह ऐसा कुछ चलता है और

01:00:29:12 [गला साफ़ करने की आवाज़] जी आगे बोलिए जी उसके बाद में क्या है कि वापस थोड़ा वापस डर लगने लगा था इसका वापस वो वीडियो आया था तो वापस मैंने चेक किया लेकिन इसमें क्या है कि जब हम लोग इसको छोड़ेंगे तो बार-बार मिलाने की जरूरत क्या कौन सा वीडियो आया था आपने भाई वो फैक्ट टू फुल डिबेट में आती है ना खुद वीडियो नहीं इसका वीडियो आया था ना इनका मतलब वो वीडियो आता रहता है तो इसमें क्या है कि मतलब लगभग साल भर लगा मुझे तो अब किसी को अब कितना समय लगेगा वो मालूम नहीं लेकिन इसमें क्या है कि बार-बार चेक करना पड़ता रहेगा हमें कि भाई ये जो बता रहा है वो चीज मिल रही है या नहीं मिल रही है लेकिन उसमें क्या है कि थोड़ी मेहनत करनी पड़ती है जैसे इसने एक लाइन बताई तो उसका वो पूरा अध्याय हमें पढ़ना पड़ेगा तो अपने आप उत्तर मिल जाएगा इसमें यह परेशान हो रहे हैं। थोड़ा सुकून जी थोड़ा सुकून रखिए। इनकी बात जब पूरी हो जाएगी तो लिंक दिया जाएगा। तब तक थोड़ा सुकून रखिए। 681 नंबर का सुकून। ठीक है।

01:01:39:03 हां जी। बोलिए बोलिए। जी और वो मतलब मेन ज्यादा मेरे साथ में इतना कुछ हुआ नहीं क्योंकि मैंने आपको बताया कि अभी वह स्वतंत्र ही है और उम्र भी छोटी है तो ज्यादा कोई बोल भी नहीं सकता है ना और अगर आप कुछ बोलना चाहते हो तो पूछिए इससे जुड़ा हुआ नहीं तो ये लोग जो आपकी शिकायत वगैरह नहीं पहुंचाएंगे आपके पिताजी को अरे आपका लड़का तो ऐसा ऐसा कर रहा है वो है ये बोलेंगे तो कुछ नहीं बोलेंगे ना वापस मैं बोलूंगा अगर जवाब हो तो मैंने तो मैंने तो वह माध्यम चुना कि जिससे मेरी बात पहुंच सके और मुझे जवाब मिल सके

01:02:20:09 और सच बोल रहा हूं इनको तो झूठे सपने आते हैं कि हमें वो सतलोक के पास ले गए थे कबीर जी दिखे हमें लेकिन मैं इसको मानता था तब तक मुझे कभी स्वप्न नहीं आए लेकिन इसको छोड़ने के बाद अभी लगभग महीना भर हुआ हां तो मतलब मुझे किसी ने बोला था मेरा एक दोस्त मतलब बड़े मुझसे हैं आपकी उम्र जितने होंगे होंगे। वो भी ब्राह्मण ही है। तो उन्होंने मुझे बोला कि आप परमात्मा से अर्जी लगाना कि आप मेरे प्रश्न के उत्तर दो। मैंने बोला कोई बात नहीं इनकी वाली बात भी अमल में लेते हैं। तो मैंने रात को सोया उस समय सोच के सोया था कि वाह मेरे प्रश्न के जवाब देना आप। लेकिन दो-तीन दिन हुए कुछ हुआ ही नहीं। लेकिन मतलब उसके बाद एक महीना लगा। इसका वो सपना आया था मुझे। तो मेरे पापा से बात की क्या? किसका सपना स्वप्न आया था? कौन? ये रामपाल आया था। हां वो बता रहा हूं। तो उसमें क्या हुआ था कि जो ये मेरे पापा के साथ में आ रहा था इसके आश्रम से इधर जो ये उदयपुर में इसका सेंटर है वहां पे। तो मेरे पापा ने इसको बोला था कि मेरा लड़का है जो आपको पहले मतलब भक्त था। तो उसको क्या है कि

01:03:35:15 वो कुछ प्रश्न है किसी ने भटका दिया है तो उसके प्रश्न के उत्तर चाहिए तो फिर वो क्या है कि बोला हां स्वप्न में चल रहा है तो उनको बोला था कि घर पधारो लेकिन वो आता नहीं है किसी के घर पे लेकिन उस दिन वो मेरे घर पे भी आ गया था स्वप्न में तो फिर वो आए थे तो मैंने उनसे पूछा वो सर्वशक्तिमान वाली बात तो फिर वो मतलब वो रोने लग गया था वो अपने आप ही उसकी गाड़ियां सब चली गई थी वहां से और वो फिर वो भीख मांग रहा था। अरे [हंसी] ये मतलब मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं इन लोगों की तरह। अगर मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं। उन रामपाल लोगों के अगर सपनों में आ भी गया भगवान ना करे अगर किसी को सपने में दिखाई दे गया वहां पे भी वो इतने निम्न स्तर के ही कार्य कर रहा है। सवाल का जवाब नहीं है तो किसी इनके सपने में जाके वो भीख मांग रहा है। मुझे माफ कर दो। मेरे पास सवाल झूठ नहीं बोल रहा। सच में आया था और उसके वो अपने कूलर और गाड़ी वाले जीपी वाले सब भाग गए उसको छोड़ के वहां पे वो कुछ दिखा ही नहीं स्वप्न में इतना वो थोड़ी प्रश्न रहता है

01:04:44:14 फिर मैंने सोचा कि आ जाओ भाई शकुंत जी आपको लिंक दे देते हैं भाई यहां पर लिंक दे दिया जाए लिंक दे दीजिए ऑपरेटर जी आज खटिया खड़ी कर लेते हैं किसी रामपाल की बहुत दिनों से रामपाल हंट नहीं किया है। रामपाली हंट नहीं किया है। बहुत दिनों से आर्य समाज और इस और ब्रह्मा कुमारी यही सब चल रहा है। जो सबसे मेरा अच्छा वो था [हंसी] वो रामपाल ही था। जैसे होता है ना जो टाइगर होता है ना जंगल में तो उसका जो सबसे सरल शिकार माना जाता है टाइगर का वो वो होता है डियर सांभर डियर वो भारी और मोटा होता है थोड़ा भागने में और उसकी एक फितरत होती है वो भागते भागते पीछे देखता है ऐसा मुझे किसी जंगल में बताया गया था जब मैं वहां पर भ्रमण के लिए गया था [हंसी] तो बस वही थोड़ा समझ लो क्या कहना चाहता हूं है ना तो भाई साम डियर और चीते वाली कहानी याद आती है रामपालियों को देख के हां जी आ जाइए भैया शकून जी सुकून से आइएगा चेहरा ले आइएगा हां आई शपथ आपको बिल्कुल

01:05:59:18 अच्छे से भेजेंगे वापस भाग गया क्या अरे सांभर डियर [हंसी] सियाना निकला सांभर डियर तो वो एक क्रिकेटर था ना पाकिस्तान का कोई क्रिकेट था जो रन आउट बहुत होता था। उसका नाम था गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शायद हां वो क्या करता था? रन लेते समय पीछे देखता था। तो उसी प्रकार से वो जो बाघ है वो जब शिकार करता है सांभर डियर का तो सांभर जो है वो पीछे देखता है तो उसकी गति बाधित होती है। तो उसके लिए आसान होता है पकड़ना उसे। तो रामपाली थोड़ा सा कुछ कुछ

01:06:44:26 है ना वो पीछे देखता था [हंसी] जी तो शकुन जी तो निकल लिए हैं। हां यह देखिए नाम आ गया है ना तो यह जो थे भाई साहब यह रन आउट बहुत होते थे और रन आउट बहुत वजन भी ज्यादा था इनका और रन आउट होते थे इसलिए क्योंकि ये दौड़ते दौड़ते पीछे देखते थे शकुन जी अपना चेहरा दिखाएं शकून के साथ और एक वो बता रहा हूं मैं वो जो वो ब्रज शब्द का तो ये बताते ना वो ब्रज शब्द का ये बताते हैं कि जाना लेकिन जब यह वामन शिवराम आपटे डिक्शनरी का जो प्रस्तावना जो पढ़ते हैं ना भूमिका तो उसमें वो दिया हुआ है कि जो इस शब्द को उसके में जो अर्थ बताए गए हैं शब्दों के उसका अर्थ वो धर्म ग्रंथों में नहीं लेना है और जो हमारी भगवत गीता है वो धर्म ग्रंथ है तो उसमें यह अर्थ कैसे लेंगे ब्रज शब्द का वो भूमिका पढ़ेंगे तो वहां पे दिया हुआ है हम एक्चुअली ब्रज शब्द का अर्थ जो है ना ज्ञानार्थक भी होता है और ज्ञार्थक भी होता दोनों प्रकार से होता है।

01:08:00:02 ज्ञानार्थक होता है कि जैसे कि जैसे जैसे कि कल मैं उनकी लाइव स्ट्रीम में गया था। उनके चैनल पर गया था तो कैसे गया था? मैं तो यही था। किस प्रकार से गया था? तो ऑनलाइन के माध्यम से मेरा जो वर्चुअल स्वरूप है वो वहां पहुंचा था। वर्चुअल रूप एक तरीके से वो भी ज्ञानार्थक दृष्टि से ही मैं वहां पर गया था। इंटरनेट के जरिए मैं तो कहीं नहीं गया था। तो वो ज्ञानार्थक जाना होता है और वह भी कहां कि तू उस मेरे उस रूप की शरण में जा। जैसे हम किसी से बात कर रहे हैं कि भाई जैसे मैं ही कोई सुपरस्टार हूं या मैं ही कोई ऐसी सेलिब्रिटी हूं या मैं ही कोई ऐसा व्यक्ति हूं जिससे कि सामने वाले को मिलना है। जैसे एक बार पूरी के शंकराचार्य जी बताते हैं कि वो शुरुआती दिन थे जब शंकराचार्य बने ही बने थे पूज्य गुरुदेव तो उस समय जो है कोई मिलने आया तो उस समय जो है बाहर जो मठ के जो स मतलब स्वच्छता कार्य होते हैं उसमें लिप्त थे तो उन्होंने पूछा मैं पूरी के शंकराचार्य जी से मिलने आया हूं तो उन्होंने कहा कि आप बैठिए आते होंगे अब उन्होंने जो कहा ना कि आते होंगे वो खुद ही थोड़ी देर बाद आए उनसे मिलने है ना तो यह क्या किया कि पहले उसकी जिस तरीके से निष्ठा हो रही

01:09:15:03 है। उसी तरीके से बात की सामने वाले से कि अभी वो मुझे वो नहीं समझ रहा है। अलग समझ रहा है। तो उस तरीके से बात की कि ईश्वर ऐसा होता है, ऐसा होता है और तुझे उस ईश्वर की शरण में जाना है। और वो बात एक अलग है। अंतत गतवा वो ईश्वर मैं ही हूं। ठीक है। वहां पे हो गया। वहां पे पधारना जी। वहां पर पधारना शब्द भी दिया उसका अर्थ। पधारना। तो पधारना के दोनों अर्थ दोनों अर्थ होते उसका आना और जाना। हम अरे वो एक गाना है ना आजा वंदे शरण राम की ये रामपाल गा रहा है आजा वंदे शरण राम की अब आजा आने के बाद जाने को कह रहा है दो दो बातें निकल रही है वास्तविकता में आने के लिए कह रहा है मगर कौन सा वाला शब्दों में क्या आ रहा है कि जा कौन सा वाला जा आने के रूप में जाने वाला तो जाने का मतलब है गति और आ जो उसमें आ शब्द शब्द आया वो है कहां जाना है आने में जाना है आजा और अगर ऐसे शाब्दिक अर्थ निकालेंगे तो आने का मतलब आने के बाद यहां से चला जाए ये कह रहा है आजा बंदे शरण राम की खैर वो उस पर बहुत सारी चीजें हो चुकी है एक चीज मैंने सोची थी

01:10:30:07 शकून जी है सुकून चोर जो आए थे अभी वो सुकून जो है शायद उनको कोई खाज की बीमारी है चेहरे और स्किन इत्यादि पे तो अपनी चेहरे की जो बेश वो जो है हां शर्म के कारण वो चेहरा नहीं दिखा पा रहे हैं। जिस कारण से भाग गए हैं। 9 दो 11 हो गए हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] आपसे जुड़ने के बाद में क्या है? जी जी बोलिए। आपसे जुड़ने के बाद में क्या है कि थोड़ा वो तर्क वाली वो शक्ति जग जाती है। तो मैंने क्या सोचा पहले कि चलो आपने ये जो ये दे रहे ना प्रमाण ग्रंथ वाले उसको रहने देते हैं। इसी के चीजों से इसका खंडन करते हैं। तो मैं वापस सृष्टि रचना पढ़ी तो उसमें जो यह बताता है कि काल ने जो सृष्टि रचना की वो तीन गुण पांच तत्व मांगे और वो वो ले चला गया। लेकिन उसके ब्रह्मांड में क्या था कि वो खाली था। वहां पर कोई लोग नहीं था। लेकिन काल को मतलब सब जने को जो सतलोक के जो निवासी है तो उनको शक्ति दे रखी है कि वो अपने बच्चे उत्पन्न कर सकते हैं। दोद तो काल के पास भी यह शक्ति थी कि वो दो उत्पन्न कर दे। जो दो उत्पन्न किए तो मतलब यह कड़ी आगे अनंत तक चल सकती है तो उसको लोगों की जरूरत क्या पड़ी वो खुद नहीं कर

01:11:45:10 सकता था हम सही बात है और वो वहां पे दे रखा है कि आत्मा को हंस कहते हैं तो वो जो वहां पे जन्म लेगा वो भी तो आत्मा हुआ इनके अनुसार आत्मा का कभी जन्म होता ही नहीं है। सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि इन्होंने जन्म मान लिया आत्मा का। एक मैं वो आपको वो भेजता हूं इनके मंत्र वाला उसमें वो बताना है। हां अच्छा मैं ये

01:12:22:04 जिसका गुरु जेल में रहकर आया हो वह बंदा मुंह कहां से दिखाएगा? बिल्कुल सही बात है। बिल्कुल सही बात है। बिल्कुल सही कहा आपने। इनको बुलाओ गोविंद गुरुकुल जी को अगर कुछ पूछना हो तो एक मिनट अगर रामपाल वाले को भी अगर मेरे से बात करनी है तो भी आ सकते हैं। हम अब तो बहुत मैं मतलब इनका शिव जी हां शिवा जी का सहारा नहीं लूंगा उत्तर देने में। [हंसी] एक आम बोगे तो लाखों आम पाएंगे। आज देख लीजिए शास्त्रवाद जी लाखों आम उग रहे हैं। जी भैया जी ऐसे ही और लोग आएंगे अभी धीरे-धीरे बहुत लोग तो ऐसे बहुतों में परिवर्तन आया है। अभी और आएंगे। भगत सिंह ने कहा था अपनी फांसी से पहले हमारे बाद और भी आएंगे और भी

01:13:31:22 मैं बता रहा था अगर मान लो पूरी के शंकराचार्य जी इससे शास्त्रार्थ करने पहुंच जाते उसके आश्रम में तो वो हारता वो अलग चीज है लेकिन जो वो शब्द वो सामान्य भाषा में भी जो शब्द प्रयोग करते हैं उसका अर्थ लगाना इसके लिए कठिन हो जाता क्योंकि मैं शुरुआत में आपसे जुड़ने के बाद में मैंने मैंने वो शंकराचार्य जी की वीडियो देखना शुरू की लेकिन वापस मैंने बंद कर दी क्योंकि क्या है कि वो शब्दों के प्रयोग ऐसे करते हैं कि समझ में नहीं आते हैं। नहीं और मैंने वो इनकी इनकी मैंने वो पुस्तकें भी मंगाई सावित्री अच्छा अच्छा अच्छा लेकिन उसमें क्या है कि हां कुछ कुछ है लेकिन वो शब्द आपको मालूम है कि वो इतने वो होते हैं कि समझ में नहीं आता है इतना

01:14:22:00 उनके शब्दों में बहुत ही पकड़ है तो हर कोई नहीं समझ पाता। वो संस्कृत संस्कृत निष्ठ हिंदी बोलते हैं गुरुदेव और ये कमेंट हटा दीजिए। पहाड़ी जी भी आ गए हैं। गुरुदेव को लेकर के एक बात मुझे याद आ रही थी। उतर गई। हां गुरुदेव ने बताया था जब यह वाली बात आई थी कि कई बार हमें संतों की वाणियां समझ में नहीं आ रही होती है कि वो क्या बोल रहे हैं एक्सजेक्टली और कभी-कभी मंत्र भी ऐसे होते हैं श्लोक भी ऐसे होते हैं परंतु जिस प्रकार से जो बुखार की या हम कोई औषधि लेते हैं ना तो हमें भले ही मालूम ना हो कि कैसे काम करती है क्या करती है मगर वो अंदर जाती है और अपना काम करती है उसी प्रकार से ये जो मंत्र होते हैं श्लोक होते हैं संतों की वाणी होती है। आचार्यों की वाणी होती है। यह अपना असर जरूर दिखाती है। अपनी सात्विकता आप में जरूर डाल देती है। तो इसलिए इनकी वाणियां ऐसा नहीं है नहीं समझ में आ रहा है तो नहीं सुनना। मतलब एक अनुशासन के साथ आप अपने जीवन को जोड़िए कि मैं एक वीडियो जरूर एक प्रामाणिक संत का सुनू।

01:15:37:10 एक एक अपना निकालिए कि कितनी देर का सुनना है। वह एक आपके ऊपर है। परंतु अपने जीवन में डालिए कि सुन। भले ही समझ में ना आए परंतु वह ऐसा है मैं आपको बता रहा हूं। अब थोड़ी ज्यादा गढ़ बात हो जाएगी पर आ गई तो मैं बता देता हूं। जब आपने गुलाब जामुन खाया तो उस खाने से आपको एक स्वाद मिला। मिला ना? जी स्वाद मिला। वो स्वाद गुलाब चावल खाने से पहले तक रहता कहां था? अधिष्ठान क्या था? कहां रहता था वह स्वाद? हर दुनिया में जो भी पदार्थ होता है उसका एक अधिष्ठान होता है। उस स्वाद का अधिष्ठान क्या था? भाई जो रसगुल्ला है उसके अंदर तो वो स्वाद है नहीं क्योंकि वो तो जड़ है। तो वो तो एक विचार लेकर के आप तक आ नहीं सकता कि ले भाई मैंने विचार दे दिया। आपने उसको खाया और खाया भी अपने जो ये जड़ तत्वों से बना हुआ शरीर है उसके द्वारा। अंतत गतवा आपको जो स्वाद मिला है वह उस उसको खाने से चबाने से पहले तक कहां था? वह आपके ही अंदर था ना वो स्वाद जो है

01:16:53:08 गुलाब जामुन का वो आपके ही अंदर था। ठीक है? तो अब हुआ क्या कि आपके अंदर की कोई चीज थी जो किसी कुछ एक स्पेसिफिक एक विशेष व्यवहार करने के कारण वो आपके ही अंदर जो चीज थी वो भाषित हो गई। वो अब आपकी पकड़ में आ गई। पहले पकड़ में नहीं थी। आपके ही अंदर थी। जैसे कस्तूरी मृग होता है ना। कस्तूरी मृग होता है ना बस वैसे ही कहानी है हमारी। तो होता क्या है कि यह जो संतों की वाण होती है, वेद मंत्र होते हैं, मंत्रार्थ होते हैं, प्रवचन होते हैं, भाष्य होते हैं, ग्रंथ होते हैं। हम लोग सोचते हैं कि मन नहीं लग रहा, मन नहीं लग रहा। परंतु ये जब हम श्रवण करते हैं, ये अंदर जाते हैं और हमारा जो वो अंदर जो हमारा जो चेतना का सर्वोच्च स्वरूप है ना उसको वहां पर प्रोत्साहित करते हैं कि वो आपके व्यवहार में आए। आप उसकी अनुभूति ज्यादा से ज्यादा कर पाओ। इसलिए ऐसा जब होता है तो आपको भी कई बार ऐसा पता नहीं लगता है कि आपके जीवन में परिवर्तन आ रहा है। परंतु ऐसा लगता है कई बार कोई दिव्य शक्ति हमारा साथ दे रही है। तो वो सब इसी तरह के गतिविधियां होती है। इसलिए सुनना अवश्य चाहिए। भले ही समझ में आए या ना आए क्योंकि वह समझ में तो आ ही रहा है

01:18:08:09 क्योंकि जो भी क्योंकि जो भी जो भी इंफॉर्मेशन आपको मिल रही है अंत तो गतवा वो इंफॉर्मेशन आपके आपके अंदर पहले से ही है। बाहर से नहीं आ रहा है कुछ अंदर ही अंदर ही है। वो कुछ ऐसी क्रिया हो रही है। कुछ क्रियाओं का अभाव है जिनके कारण आप उसको देख नहीं पा रहे हो। उससे जुड़ नहीं पा रहे हो और फिर कुछ क्रियाओं क्रियाओं के उसमें उपस्थिति में वह आप उससे कनेक्ट कर लेते हो। ठीक है जी पहाड़ी जी जय श्री राम जय श्री राम सभी लोगों को और भाजी जी को बहुत-बहुत साधुवाद और घर वापसी के लिए धन्यवाद ऐसे थे

01:18:54:16 जी एक जरा सिंह की बात सुन ले पहाड़ी जी की एक बात सुन ले फिर आपको दोबारा कंटिन्यू नहीं पहाड़ी जी के लिए बताना है क्योंकि पहाड़ी जी पहले बोलेंगे तो अच्छा नहीं लगेगा अच्छा अच्छा जी पहले इनको बोलने दीजिए जी बोलिए बताइए हुआ क्या है कि मतलब जो ये यात्रा आ रही है इससे इसके मतलब घर से निकल के वापस यहां पे आने में तो उसमें क्या है कि पहाड़ी जी की मेन भूमिका थी क्योंकि ये मतलब नौकरी करते बाहर रहते हैं तो कोई भी व्यक्ति नहीं होगा तो अपना समय देगा बात करने में लगभग एक घंटा आधा घंटा जब भी इनको मैं फोन करता था तो ये प्रश्न का वो निवारण करते थे और समझाते थे अच्छे से तो इसके लिए पार्टी जी का बहुत-बत धन्यवाद है। जी बहुत अभी भी जब भी होता है तो बताते पूरा मैं उस लायक का नहीं हूं। जो भी सीखा हमने शिव जी से सीखा और वही चीज आपको दी जाती है औरों को दी जाती है। ठीक है? तो आप एक ऐसे जाल से निकले हैं जहां से निकलना बहुत मुश्किल होता है। क्यों मुश्किल होता है? क्योंकि संसार में लालच और डर दो चीजें ऐसी है कि इससे पार पाना बहुत मुश्किल है। और दोनों चीजें आपको परोसी जाती है आश्रमों में। आपने बताया

01:20:09:22 ना कि जब कहीं सेवा करने का सेवा कहीं लेबरी करनी होती है, कुछ बनाना होता है तो वहां यह चीज बोला जाता है कि आज आपकी सेवा लगी है और आप इस इतने टाइम तक नहीं पहुंचे तो आपका नाम खंड हो जाएगा। आपको काल घसीट के ले जाएगा। तरह तरह की बातें करते हैं। तो आप वहां से निकले हैं जहां से निकलना बहुत मुश्किल होता है। और देख भी सकते हैं कि सामने चीजें दिखाई दे रही है कि एक जो है अभी वो जेल से निकला है। 13 साल बाद जेल से आया वो भी जमानत पे। फिर भी लोगों को यह लगता है कि वो आदमी बिल्कुल शुद्ध है कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया। ठीक है। खैर ये तो कानूनी बात हो गई। आप फोन पर बात कर रहे थे कि आपके कुछ मित्रग भी थे 202 लोग जो जो रामपाल को छोड़ चुके हैं अब और कुछ लोग अभी छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं आप बता रहे थे फोन पे क्योंकि घर में उनके क्लेश रहता था तो मेरे मित्रग है मित्र थे तो उनके परिवार के लोग थे 2025 लोग तो उनके बारे में बताइए कुछ

01:21:23:27 उनके परिवार वाले वाले भी क्या है कि लगभग लगभग एक जुड़ता है तो मतलब व्याकरण और धर्म ग्रंथ कोई भी पढ़ता नहीं है तो उसके घर वाले वापस वो विरोध करने लगते हैं उनको भी समझा रहा हूं घर पे जाता हूं उनके बात करता हूं जी जी मतलब इनको एक तो वो भविष्यवाण होती है ना तो उससे वो ज्यादा पागल कर देते हैं कि देखो इस भविष्यवाणी में दिया हुआ है यह वही संत है आपको मतलब बहलाया जाएगा इस कारण से क्या है कि छूटना मुश्किल हो जाता जी जी जी तो जो भी जो भी अभी तक बहुत सारे निकल चुके हैं मेरे नजर में भी बहुत हैं। तो ये सब हमारे शिवश भाई की ही कृपा होगी हमारे ऊपर कि YouTube पे तो हम सिर्फ रील देखा करते थे। अचानक शिवश भाई की वीडियो आ गई। और जब तब से रील देखनी बंद हुई और यह हमारा ये शिवश जी का जो आहान चैनल है जिसमें धर्म की बातें होती है वो देखना शुरू किया तो वहां से पता चला कि हां कि जब कोई सामने से कोई तर्क कर रहा है या हमारे ईश्वर के ऊपर कुछ लांछन लगा रहा है तो उसका

01:22:38:28 उत्तर कैसे देना है तो ये सारी चीजें हमने शिवान जी से भी सीखी अब कल एक बात शिवान जी ने लाइव डिबेट में एक बात कही उन्होंने कि ईश्वर को दोष नहीं लगता है अब रामपाल के गैंग वाले वो दोष लगाते रहते हैं ईश्वर के ऊपर कि जो भगवान श्री कृष्ण है उन्होंने उपजा के साथ क्या किया या गोपियों के साथ क्या किया तो कल एक इसका एक निवारण भी मिला कि ऐसे तो रामपाल का ईश्वर भी कर रहा है क्यों कर रहा है कैसे कर रहा है क्योंकि वो सर्वत्र है सब कुछ देख रहा है अगर कोई स्त्री नहा रही है तो उसको देख रहा है तो उसको दोष क्यों नहीं लगा वो भी तो पाप है ना तो ऐसे ही जब रामपाल के ईश्वर को दोष नहीं लगा तो हमारे ईश्वर जो भगवान श्री कृष्ण है और जो ये लीला रूप में जो गोपियों के साथ रास लीला का जो वर्णन है वो भी कुछ और विषय है और जो कुब्जा के साथ का जो विषय है उसमें भी भगवान को दोष नहीं लगेगा। तो कल ये सीखने को मिला हमको वहां कि ऐसा दोष अगर मानते हैं आप तो रामपाल के ईश्वर के ऊपर भी लगे। [गला साफ़ करने की आवाज़] अगर रामपाल

01:23:54:09 बोलता कि ना वो उस स्त्री को नहीं देख रहा है जो वो नहा रही है तो वहां पर वो बाधित हो गया। फिर वो सब जगह नहीं देख रहा है। जी धन्यवाद। आपने ये कहा मैं उसका वो बता देता हूं। ये तो हां ये बोलते हैं ना कि तुम्हारे भगवान ने ऐसा किया है। तुम्हें शर्म आनी चाहिए। तो इसका मैं बता देता हूं कि मैंने वो वीडियो देखा था शंकराचार्य जी का तो उसमें बोल रहे थे कि वो नाम क्या है भैया जो वो बोलते हैं ना कि रास लीला हटा देते ये भागवत पुराण से

01:24:34:19 फिर वो कृपात्री जी महाराज उनको वो समझाते फिर वो राधा सुधा लिखी थी उन्होंने। हां बता दी थी वो राधा बता दीजिए वो हुआ क्या? नहीं नहीं ये गीता प्रेस से जो गीता प्रेस से जो भागवत पुराण निकाल रहे थे तो उस समय वो मदद मोहन मालवीय जी शायद उन्होंने बोला था ना कि इससे ये रास लीला वाला हटा देते क्योंकि ये लोगों को अच्छा नहीं लगेगा। लेकिन उस समय उनको समझाया फिर वो तैयार हो गए। तो इसका मतलब ये थोड़ी है कि हमारे जो संत है तो उनको इसका कारण नहीं मालूम है। अगर इनको डर होता या शर्म होती हां वही बता रहा था। जी सही अर्थ जानने की आवश्यकता है। ईश्वर समस्त कार्यों में लिप्त होते हुए भी अलिप्त है। कभी लिप्त नहीं होता। निर्लिप्त है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] और इसका कारण मैंने बता दिया ना क्योंकि ईश्वर जानता है कि ये सब कुछ क्या है? प्रपंच मात्र है और सभी कार्यों को करने वाला दिखते हुए हमने हमें तो दिखेगा ही सब सब कुछ कर रहा है परंतु वास्तविकता में वो निर्लिप्त है। जी शास्त्रवाद जी आप कुछ कहेंगे?

01:25:50:24 जी भैया बहुत सही है ये वाली बात कि ईश्वर को कोई दोष नहीं लगता। कुछ भी हो [गला साफ़ करने की आवाज़] और अभी बात भी अच्छा खासा हो चुका है। आपका जो कल का चर्चा हुआ है इस पे क्या है ना कुछ लोग जो है अलंकारी जो है वो लोग आपके खांसी को बहाना बना रहे हैं। किसको? आपके खांसी को बहाना बना रहे हैं कि यह आपकी घबराहट बता रही है। खांसी जब आप कर रहे हैं वहां पर तो वो आपकी घबराहट मुझे यहां पे इनफेक्शन है भाई मैं यहां पे वो जमा हुआ है। क्या कहते हैं? कफ इनफेक्शन है थ्रोट। तो वो वो कह रहा था अभी न्याय शास्त्रों से दिखाए कि खांसी से खांसी का मतलब है घबराहट। अरे वो कह रहे थे मेरा है नहीं आप ऐसे ही कर रहे हैं मतलब जानबूझ के कर रहे हैं वो आपकी मनोस्थिति को दर्शा रही अरे अगर अगर आपके खांसने से अगर आपके खांसने से आपके घबराहट दिख रही है तो हम ये भी कह सकते हैं ना कि वो तो अपने छाती पर अपने हाथ रखे थे तो उन्हें भी तो वो था

01:27:06:16 हम उन्हें भी घबराहट था बार-बार हो रहा था नहीं ऐसा है कि खास का वो लेकर के ऐसा भी होता है कि हमारे अंदर जो आवेग आ रहा होता है एक ये सिचुएशन होती है मनुष्य की कि आवेग जैसे आ रहा होता है किसी बात को लेकर के तो उस आवेग को ओवरकम करने के लिए मनुष्य कभी-कभी ऐसी कुछ हरकतें कर लेता है जो बिल्कुल विपरीत होती है जैसे कि मान लीजिए कि रोना आ रहा है व्यक्ति हंस लिया या कुछ कुछ भी ऐसी एक्टिविटी जिसमें वो जो है एकदम से उसका जो कॉन्शियसनेस है वहां भटक लग गई तो जिससे कि वो जो जिससे उसे दूर होना था जिस तरह की एक्टिविटी से तो यह जरूरी नहीं है कि खांसी अगर यह मान रहे हैं कि खांसी का मतलब घबराहट ही है। खांसी का मतलब उत्तेजना भी तो हो सकता है। अगर विपरीत कार्य कर रहा हूं किसी चीज को छुपा यह भी तो हो सकता है। क्रोध आ रहा है। यह भी तो हो सकता है कि जल्दबाजी उसको कंट्रोल कर रहा हूं। जल्दबाजी को यह भी तो हो सकता है कि भाई मैं मुझे सामने वाले को सम्मान देना है। मुझे उसको इंटरप्ट नहीं करना है। तो कोई बात एकदम से आई तो मैंने ऐसे कर दिया। ये भी तो सोच सकते हो। वो देखो उल्टे उल्टे खड़े हो जाओगे वो लोग इस ओर ध्यान नहीं देंगे कि भाई क्वेश्चन

01:28:21:20 थे रीजन रीजनिंग थी उसमें क्वेश्चंस में रीजनिंग थी वो ये सब नहीं सोचेंगे और आज नहीं छ महीने बाद जाकर के एक बार उनमें से कोई पूछेगा जरूर इन क्वेश्चंस को कि भाई इस इसका ये जवाब दिया बात क्या था भैया मुख्य बात ये था कि उन्होंने जो है ये सब जो नियम है ना नियम क्या तय तय हुआ था आपके चर्चा से पहले कि कोई भी दुष्प्रचार नहीं करेगा वो कर रहा है और जहां से ये वीडियो आई है वो उसमें ये वैदिक फिजिक्स का जो चैनल है वो भी उसमें कोलैब है तो ये बात तो पता है कि भाई उन्हें भी इस विषय में पता है कि वो किस प्रकार से दुष्प्रचार किया जा रहा है आपके विरुद्ध में खासी को कुछ बता के तो मेन बात ये बताने का था कि उन्होंने नियम तोड़ दिया है अच्छा कोई उनकी ओर से नियम तोड़ा जा रहा है और अति हो रहा है

01:29:15:10 कोलैब कोलैब हुआ है। कोलैब हुआ है जिसमें एक व्यक्ति है सफेद रंग का जो सफेद रंग का एक होता है ना वो बहुत ही हां उसप हां उसप अलग कर लेंगे उसने अभी इनके अभी इनके बहुत सारे वीडियोस आना बाकी हैं। अभी बहुत सारे वीडियोस आना बाकी है। अभी तो एक सुबह एक श निकला है इसमें कि वो पहले अनंत सामर्थवान जितने इन्होंने निषेध के लिए तर्क दिए थे उन सब पर अलग-अलग वो निकल रहा है। एक तो अनंत सामर्थवान और सर्वशक्तिमान वाला अभी निकल के आया है। अब आगे आएगा कि ईश्वर जो है वो बुरे कार्य वाला कि वो पाप लगेगा ये है वो है। तीसरा वो है कि उसका कार्य नहीं है अवतार लेना। यह भी है और अलग से एक वो वाला छोटा बन जाएगा वो जो उन्होंने कहा कि ईश्वर मिथ्या भाषण कर सकता है क्या और एक वो बनेगा कि ईश्वर अपना वो अंत बता सकता है क्या है ना और भी कुछ बनेंगे फिर अंत में वो वाला बनेगा वो सूर्य सूर्य के रूप में प्रकट हुआ है नहीं हुआ है नहीं हुआ है प्रकट हुआ है हुआ है नहीं हुआ है ये सब बन जाएगा ये सब है लाइन अप है सब डाल डाल पापा पात चलने दो खैर जी भैया आज की

01:30:30:14 बहुत अच्छी चर्चा समक्षात्मक वीडियो बनाएंगे। हां हां बिल्कुल बिल्कुल हां जी और कुछ पूछना है आपको जी नहीं नहीं मैं आपको पूछ रहा हूं और कोई पूछना हो तो पूछ लीजिए आपको कोई प्रश्न नहीं बड़ा अच्छा लगा सबसे अच्छी बात तो ये है कि आज आप जो है पूरी तरीके से वहां से अपना ध्यान जो है आप सनातन धर्म से जुड़ गए अपने विवेक पूर्वक आपने कार्य किया और बहुत अच्छी यात्रा आपकी रही और मुझे लगता है भगवान की कृपा रही। आपकी यात्रा कई अन्यों के लिए प्रेरणा बने और इसी प्रकार से हमारे जो सनातनी भाई हैं जो भटक गए हैं और कहीं किनहीं बातों को लेकर के छिटरे बिखरे हुए पड़े हुए हैं वो सब एकत्रित हो वापस आए और धर्म रक्षा में अपनी भूमिका सुनिश्चित करें। ठीक है शास्त्रवाद जी कंप्लीट है। जी चलिए ठीक है वो सुकून चोर था शायद कहीं से वांटेड रहा होगा तो वो चेहरा दिखाने में उसको दिक्कत थी क्योंकि अगर चेहरा दिख जाता वो खुजली वाला तो

01:31:45:15 होगा ही साथ ही साथ कुछ वांटेड भी होगा कि पता नहीं क्या मुंह काला है क्या है जिसके कारण वो चेहरा दिखाने के योग्य नहीं था तो आया तो था बड़ी तेजी में कि मैं शोएब अख्तर ग्लेन मैगरा तो ब्रेटली मिक्स वाली बॉल डालूंगा और फिर जब लास्ट में चेहरे वाली बात आती तो उतनी स्पीड से वापस चला जाता है व्यक्ति। ठीक है? जी भैया जय श्री राम। जय श्री राम। [संगीत]

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 1:33:02 · 22 Jun 2026

रामपाल गैंग से वैदिक सनातनी बनने तक की यात्रा Live discussion

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