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00:00:02:14 जय श्री राम जय श्री राम भाई साहब जय श्री राम हम ये कह रहे थे कि शंकराचार्य मौन है यह जानकारी का अभाव है क्योंकि मीडिया उन्हें उतनी कवरेज नहीं देती है। आज शंक आज शंकराचार्य है तो ही सनातन धर्म का अस्तित्व बाकी है। ठीक है। अगर सनात अगर शंकराचार्य अपना जिम्मेदारी से मुख मोड़ लेंगे तो सनातन धर्म नष्ट होने में एक सेकंड लगेगा। खत्म। अब बहुत सी ऐसी बातें हैं शंकराचार्यों की जो जो मेन मीडिया में कवरेज नहीं होती है। जैसे आपको पता नहीं होगा रामसेतु को कांग्रेस खत्म करवाने वाली थी। हां। है ना? कोई प्रोजेक्ट के तहत पूरी लड़ाई पूरी लड़ाई उस समय पूरी के शंकराचार्य जी ने लड़ी थी। अन्य भी साथ में थे। पूरी के शंकराचार्य जी ने अग्रणी भूमिका निभाई। हम जो अपना राम मंदिर का केस जीता गया है उसमें पूरी लड़ाई शंकराचार्य जी द्वारा बनाई गई संस्था ने लड़ी है। आज हमारा रामपाल का केस भी उन्हीं की शिष्य हैं जो लड़ रही हैं। है ना? इसके

00:01:17:20 अलावा ये साईं के बारे में कि वो मुसलमान था। ये जानकारी शंकराचार्य ने निकाली। वैदिक गणित पर पूरे विश्व में वैदिक गणित पर पूरे विश्व में शंकराचार्य जी द्वारा रचित जो ग्रंथ हैं वो पढ़े जा रहे हैं और नासा कोरिया संयुक्त राष्ट्र संघ ये लोग आते हैं शंकराचार्य जी से शिक्षा प्राप्त करते हैं वापस जाते हैं सुप्रीम कोर्ट में जो सुप्रीम कोर्ट के जज होते हैं वह बैठकर के इनसे ज्ञान विज्ञान समझते हैं अधर्म और अधर्म का निर्णय समझते हैं शंकराचार्य का दायित्व क्या है ये शंकराचार्य से ज्यादा कोई नहीं बता सकता बल्कि दुनिया में किसी भी व्यक्ति का दायित्व क्या है? इसका निर्णय शंकराचार्य से आगे ज्यादा कोई नहीं बता सकता। तो शंकराचार्य पर ही ये दोष लगाना कि वो जो करना चाहिए नहीं कर रहे हैं। ये ये मतलब जानकारी के अभाव के कारण है क्योंकि उनके कार्यों को मीडिया कवरेज नहीं मिलती। टीवी मगर मगर जहां पे कहीं पर धर्म की बात हो रही होती है। धर्म क्या है? ब्रह्म क्या है? स्पिरिचुअल स्पिरिचुअल नॉलेज देने की बात होती है तो वहां विदेशों से आए हुए अमोग लीला इत्यादि इस के लोगों को बुला लिया जाता है।

00:02:32:28 वहां शंकराचार्य को बिठा के प्रवचन नहीं लिए जाते। जी जी टीवी पर आज तक पर देखो आप जब स्पिरिचुअल बातें करनी होती है कि जिससे व्यक्ति को कुछ सीखने को मिले। विवाद है तो विवादित विवाद चल रहा है। मान लीजिए जब स्पिरिचुअल नॉलेज की बात होती है तब शंकराचार्यों को बुला के नहीं बिठाया जाता। अभी एबीपी न्यूज़ पे कुछ दिनों पहले एक कार्यक्रम चला था। उसमें डेली मूर्ति पूजा का खंडन करते थे बैठ के आर्य समाजी लोग डेली और वहां पर उनको जवाब देने के लिए मूर्खों को बुलाया जाता था। शंकराचार्य के व्यक्ति को नहीं बुलाया जाता था। शंकराचार्यों ने तो आज ऐसी फौज खड़ी कर दी है भाई साहब कि दुनिया का कोई माई का लाल ऐसा नहीं है जो हिंदू धर्म का खंडन कर सके। शंकराचार्य के द्वारा खड़े हुए लोगों के सामने दुनिया का कोई माई का लाल हिंदू धर्म का खंडन नहीं कर सकता। हां ये शंकराचार्य का ही तो कार्य है। शंकराचार्य ने सन 1947 में ही दिसंबर के दिन की बात है। ये जो रामलला की मंदिर की जो लड़ाई चली है आजादी के बाद तो रामलला की जो मूर्ति है ना जिसकी पूजा होती रही नया राम मंदिर बनने से पहले तक

00:03:48:21 हम वो मूर्ति करपात्री जी महाराज ने प्रकट करवाई थी। उसी के उसी मूर्ति के आधार पर पूरी लड़ाई चली गई है। और आपको बता दें ये जो कांग्रेसी इंदिरा गांधी टाइप के लोग हैं ये अपने जो हिंदू मंदिर हैं इसमें घुस नहीं पाते हैं शंकराचार्यों के कारण। आपको पता होगा इंदिरा गांधी ने क्योंकि गैर हिंदू से शादी कर ली थी। जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया था शंकराचार्य ने। हम सही है और उस समय वो देश की प्रधानमंत्री थी हम उसके बाद ये जब कालांतर में राजीव गांधी भी अपने परिवार को ले गए थे वहीं दर्शन करने और फिर शंकराचार्य ने मना कर दिया था ये कहते हुए हिंदू तुम हिंदू नहीं हो अंदर नहीं जाओगे आज भी शंकराचार्य के नेतृत्व में चलने वाले जो मंदिर हैं जहां शंकराचार्य का निर्णय मान्य होता है सुप्रीम कोर्ट के द्वारा उनका निर्णय सर्वोच्च बताया गया। तो जिनका जिन जिन मंदिरों में शंकराचार्य का निर्णय लागू होता है वो मंदिर आज भी लव जिहाद जैसी चीजों से बचे हुए हैं। आक्रांताओं के आक्रमण से बचे

00:05:03:22 हुए हैं। घुस नहीं सकता वहां मुस्लिम। क्योंकि वहां शंकराचार्य का वो है लागू। बस बात इतनी है कि शंकराचार्य जो होते हैं वो सन्यासी हैं। भीख मांग के खाना खाते हैं। सीधी बात तो उनके पास इतना अर्थ और दूसरी बात क्या है? सन्यासी है तो उनके उनके साथ खड़ा होने वाला व्यक्ति कम मिलता है। क्यों? क्योंकि उनके पास रस तो है नहीं बहुत ज्यादा भौतिक। तो साथ देने वाले हम और आप जैसे लोग जिनको एसी की आदत है, कारों में चलने की आदत है तो उनके साथ खड़े होने वाले रंगारंग कार्यक्रमों को चाहने वाले लोग कम होते हैं। जिसके कारण उनके कार्यक्रमों में उनके क्रियाकलापों में वो रौनक नहीं होती जो इस जैसी संस्थाएं, ब्रह्मा कुमारी जैसी संस्थाएं अपने कार्यक्रमों में रौनक ले आती हैं। जो हमें अच्छा लगता है। तो मीडिया भी वहीं जाती है जहां रौनक हो। मीडिया भी वहां नहीं जाती। जैसे कि आज राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो गई। बहुत बढ़िया मंदिर बन गया। रौनक आ गई। तो आज देखिए वहां पर जनता कितनी है। आज से पहले जब राम जी लला तंबू में रह रहे थे तो क्या वहां जनता जाती थी? रहे सहे गिनती के रोज दर्शन होते थे। कोई ऐसी भीड़ नहीं लगती थी। आज आपको एंट्री के लिए वीआईपी

00:06:18:24 दर्शन मिल रहा है। ये हो रहा है, वो हो रहा है। हो रहा है कि नहीं हो रहा है? तो ये शंकराचार्य जो होते हैं वो सन्यासी होते हैं। और किसी भी किसी भी सन्यासी के यहां आप जाओगे तो आपको आडंबर नहीं मिलेगा। आडंबर ना होने के कारण आज की मीडिया कवरेज नहीं करती है शंकराचार्य का। तो यह कुछ जानकारी का अभाव है। वास्तविकता यह है अगर हम यह कह दें आज की तारीख में कि हम शंकराचार्य को नहीं मानते परम प्रमाण तो हम स्वयं को हिंदू ही नहीं कह पाएंगे। कारण क्या है? कि आज से अरबों खरबों वर्षों पहले वेद शास्त्र भगवान ने प्रकट किए। हमारे जो भी शास्त्र है वो 100 साल पुराने तो है नहीं। वर्षों पहले के हैं। तो वेद शास्त्र प्रकट भगवान ने आज से दो अरब वर्ष पूर्व किए लगभग वहां से लेकर के आप तक वो वेद शास्त्र कैसे आए? ये तो हमारा जवाब होगा मुंडकोपनिषद के अनुसार गीता के अनुसार यह सभी वेद शास्त्र हमारे पास परंपरा से आए हैं। तो परंपरा कौन सी परंपरा? तो उसमें शंकराचार्य का नाम आएगा। ये शंकराचार्य

00:07:34:04 आपको ला के वेद अरबों खरबों वर्ष पहले के आपको दे रहे हैं। अब यदि आपको शंकराचार्य पर विश्वास नहीं है तो फिर उनसे प्राप्त होने वाले धर्म ग्रंथों पर भी विश्वास नहीं होगा। हम और अगर धर्म ग्रंथों पर विश्वास है तो हम यह नहीं कह सकते कि हमें शंकराचार्य पर विश्वास नहीं है। शंकराचार्य वो प्रमाण है जिसके कारण हम जाकिर नायक जैसे व्यक्ति से कह सकते हैं कि तुम अगर वेद का मनमाना अर्थ करोगे तो वो मान्य नहीं होगा। केवल शंकराचार्य जो अर्थ करेंगे वही मान्य होगा। क्योंकि वह परंपरा से हैं। क्योंकि शास्त्र में कहा गया है गुरु वही प्रमाणिक जो परंपरा से हो नहीं तो हर कोई बच्चा राह का बच्चा आज रामपाल रामपाल जैसा व्यक्ति भी वेद का अर्थ करने लग जाएगा। तो एक ही शब्द के कई अर्थ होते हैं। कोई भी अपने मन का अर्थ निकाल लेगा। जैसे कि तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। अब बेर शब्द दो बार आया है। एक बार बेर का शब्द है कि वो पहले दिन में तीन बार खाती थी। तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। मगर अब वो दिन भर में सिर्फ तीन बेर खा रही है। पहले दिन में तीन बार भोजन करती थी। मगर आज वो पूरे दिन में केवल तीन बेर खा रही है।

00:08:49:15 तो बेर शब्द का उपयोग ही अलग-अलग अर्थों में दोनों बार हो गया। तो कहां पर किस शब्द का क्या अर्थ लेना है ये हमें अगर हम परंपरा प्राप्त आचार्यों का सानिध्य छोड़ देंगे तो हम वैदिक ही नहीं रह जाएंगे। और कोई भी जाकिर नायक आकर के हमारे उपनिषदों का हमारे वेदों का अर्थ बताकर हमारे लोगों को ही मुसलमान बनाएगा। तो बहुत बहुत महत्वपूर्ण पद है यह शंकराचार्य। इसीलिए आप देखो कि जितने भी हिंदुत्ववादी संगठन है अपने धर्म रक्षकों के उसमें कभी भी शीर्ष पर बैठने वाला व्यक्ति शंकराचार्य को कुछ नहीं कहता है। चाहे शंकराचार्य कुछ भी कह दे ना मोदी जी कभी कहेंगे ना योगी जी कभी कहेंगे ना मोहन भागवत जी कभी कहे कोई नहीं कहेगा। हम लोग निचले स्तर पर ही मोबाइल के जरिए आने वाले जो ये जो संदेश होते हैं उनमें हम कहीं ना कहीं जानकारी का अभाव होने के कारण फंस जाते हैं और उसके पोषक हो जाते हैं। जो षड्यंत्र हमारे विरुद्ध रचा गया है उसी के हम पोषक हो जाते हैं। आज देखो ये अंग्रेजों की कूटनीति है कि कोई भी व्यक्ति जगत गुरु या आचार्य शब्द लिखने के लिए स्वतंत्र है। अंग्रेज जब भारत छोड़ के गए थे तो कांग्रेस का राज आया।

00:10:04:24 उसने क्या किया? जगतुगुरु कोई भी लिख सकता है। आज इतने जगतगुरु हो गए। वास्तविकता में हमारा जगत गुरु कौन है? हम नहीं जानते। हम पोप को जानते हैं। पोप अगर मरेगा तो तीन दिन भारत का झंडा झुक जाएगा। मगर हम अपने धर्म के जो गुरु हैं वास्तविक उनको नहीं जानते हैं। तो वो जब मरेंगे तो कोई कुछ नहीं कहेगा। ठीक है? तो इससे क्या हो रहा है? हम अपने ही धर्म को नहीं जान पा रहे हैं। तो अब इसमें क्या हो रहा है कि क्या कहते हैं? ये अंग्रेजों की कूटनीति ये थी कि कोई भी व्यक्ति अपने आप को जगतगुरु लिख ले। अंग्रेजों के राज समाप्त होने तक कोई नहीं लिख सकता था। मगर उनके जाने के बाद जब कांग्रेस आई तो कांग्रेस ने ये किया कि जगतगुरु कोई भी लिख ले। आज आचार्य के नाम पर हिंदू धर्म का ही बांटाधार करने वाले कितने आचार्य घूम रहे हैं। आप खुद ही जानते हैं। रामपाल भी क्या है? रामपाल भी उनमें से ही एक है। आचार्य प्रशांत देखो हवन का, यज्ञ का, मूर्ति पूजा का हर हिंदू धर्म की हर चीज का खंडन करता है। रामपाल खुद को जगतगुरु कहता है। होली, दिवाली, मांग में सिंदूर भरना, भाई बहन का त्यौहार, रक्षाबंधन, कांवड़ यात्रा हर चीज का मजाक बनाता है। खुद को जगतगुरु कहता है। तो यह अंग्रेजों

00:11:20:04 की कूटनीति है कि जगतगुरु इतने खड़े कर दो कि वास्तविक जगतगुरु को व्यक्ति जान ही ना पाए और एक दिन असली जगतगुरु की बुराई करने लग जाए। तो ये जो मैसेजेस बनाए जाते हैं शंकराचार्यों के विरोध में यह हमें हमारे सनातन धर्म से दूर करने के लिए बनाई गई एक कूटनीति होती है। जो विदेशी षड्यंत्र के तहत है। जैसे-जैसे हम शंकराचार्य को नहीं जानेंगे दूर होते जाएंगे। हमारा धर्म धर्म की व्याख्या मेरी और आपकी अलग होती जाएगी। आपका धर्म कुछ और होगा। गीता के अनुसार मेरा धर्म कुछ और होगा। तो हम हिंदू होते हुए भी एक साथ कहीं खड़े नहीं हो पाएंगे। क्यों? क्योंकि किसी का धर्म कुछ है, किसी का धर्म कुछ है। जैसे मान लीजिए कि हमारे यहां पर चचेरी, ममेरी, फुपेरी बहनों से शादी करना मना है। हिंदू धर्म के अनुसार। ठीक है? हम् मगर कुछ स्वयं को हिंदू मगर कुछ लोगों के यहां यह परंपरा है कि मामा की लड़की से शादी कर लेते हैं। बहनों ममेरी फुपेरी बहनों से शादी कर लेते हैं। ठीक है? मगर वो कैसे स्वयं को हिंदू हैं। तो अब क्या होगा कि ममेरी फुपेरी बहनों की बहनों की शादी से रोकने के लिए तो हम जाएंगे। के भैया हमारे यहां तो नहीं होती तो अगर कहीं बहन से शादी हो रही होगी तो

00:12:35:08 हम रोकेंगे। रोकेंगे ना और कोई होगा जो उसको बचाने आएगा हिंदू ही हिंदू का दुश्मन क्यों क्योंकि दोनों का धर्म अलग-अलग हो गया हम तो ये एक कारण है हमको ये फूट डालने के लिए शंकराचार्यों के प्रति विरोध हमारी नसों में भरा जाता है उसको समझने की आवश्यकता है हमारा हमारी समस्या है बहु नेतृत्ववाद और वो हमारे अच्छा सोचिए जरा कि अगर देश में हर कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री का टैग लगा के घूमने लगे तो देश का सत्यानाश हो जाएगा कि नहीं? क्योंकि जब व्यक्ति को इंस्पेक्टर के पास पहुंचना है और उसको बहुत सारे इंस्पेक्टर मिल रहे हैं। जब व्यक्ति को थानेदार के पास पहुंचना है तो बहुत सारे एसएओ आियाना एसएओ आशियाना मिल रहे हैं। तो वो व्यक्ति ज्यादा संभावना है कि सही एसएओ तक पहुंच ही नहीं पाएगा। उसी प्रकार से सनातन धर्म का बेड़ा गर्क है बहुत सारे जगतगुरु होने के कारण तो व्यक्ति सही जगतगुरु तक पहुंच ही नहीं पाएगा उल्टा पहुंचने की तो बात दूर वो तो उल्टा अब नफरत करने लगा अपने जगतगुरु से तो हिंदू नाम से होते हुए भी वो अपने हिंदुत्व को जानता ही नहीं है कि हिंदुत्व का अर्थ क्या है हीनता से दूर रहने वाला हिंदू

00:13:50:21 हिमालय से लेकर कन्याकुमारी हिंदू सरोवर के बीच के स्थान को हिंदुस्तान कहा जाता है और वहां रहने वाले को हिंदू इंकार करती हुई गाय को धोने वाला हिंदू यह सब चीजें कहां मालूम है? क्यों नहीं मालूम है? क्योंकि हम अपने जगत गुरु से दूर है। रामो विग्रहवान धर्मा जय श्री राम हम सब कहते हैं। मगर जय श्री राम का अर्थ किसी को नहीं पता है। जय श्री राम क्यों है? क्योंकि राम का अर्थ है धर्म। रामो विग्रहवान धर्म तीन 37 13 वाल्मीकि रामायण और धर्म का अर्थ क्या है? सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है, कौन बहन है, कौन पत्नी है, किसको किस नजर से देखना है, यह हमें धर्म बताता है। अगर हमारे पास धर्म नहीं होगा तो सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में हम लोग अंतर नहीं कर पाएंगे। हम लोग कुत्ता बिल्ली बन जाएंगे। तो जब हम कहते हैं जय श्री राम तो हम कहते हैं उन नियमों की जय जो हमें माता बहन और पत्नी में अंतर करना सिखाते हैं जो हमें पशु से मनुष्य बनाते हैं। तो ये जो सिद्धांत होते हैं ये हमारा हिंदुत्व तुम्हें पता कैसे चलेगा? जब हम वास्तविक जगतगुरु को जान ही नहीं पाएंगे। भाई रामपाल तो बता देगा ब्रह्मा विष्णु महेश ही पूजा करना गलत है।

00:15:06:26 हैं वो सीता माता वो पार्वती माता के अंदर वो काम लालसा थी राम के साथ हम ये वो तो हमें ये बता देगा ना तो इसलिए हमारे अंदर क्या किया गया पहले तो जगतगुरु बहुत सारे खड़े कर दो फिर शंकराचार्य पद के लिए इतनी अवमानना भर दो लोगों में आम जन्म में कि वो शंकराचार्य से दूर रहे आप देखो कोई भी विदेशी षड्यंत्र अपने आप आएगा भारत में उसकी किताब कभी खोल के देखना शुरू में ही पहले दूसरे पन्ने पर शंकराचार्य की बुराई लिखी होगी। रामपाल की किताब देख लो, इस्कॉन की किताब देख लो, आर्य समाज की किताब देख लो। शंकराचार्य की बुराई जरूर लिखी होगी। है ना? तो यह समझने का प्रयास करें। शंकराचार्य बहुत कुछ कर रहे हैं। वह चुप नहीं है। शंकराचार्य ने ऐसे लोगों को खड़ा कर दिया है कि आप दुनिया में कहीं भी चले जाओ। सनातन धर्म पर कोई उंगली नहीं उठा सकता है। जिस दिन सनातन धर्म पर कोई उंगली उठेगी उस दिन जब सब हार जाएंगे तब आखरी आखिर में सनातन धर्म को बचाने वाला शंकराचार्य होगा। कोई अगर नहीं बचा पाएगा तो उसको शंकराचार्य बचा लेंगे। शंकराचार्य

00:16:22:12 से कोई जीत नहीं सकता। पूरी दुनिया में सनातन धर्म के शंकराचार्य के पास ऐसा ज्ञान है। कोई सनातन धर्म का छू नहीं सकता। बौद्धों ने क्या किया था? बौद्ध पूरा खा जाने वाले थे। सनातन धर्म नष्ट हो जाता। ढाई हजार साल पहले शंकराचार्य ने बचा लिया। पूरा खरे दिया भारत से बौद्धों को। ठीक है भाई साहब। आशा करता हूं आपने भाई साहब हम कुछ पूछेंगे। नहीं नहीं आपकी बातें बातों से मैं प्रभावित हुआ हूं। अब हम कुछ पूछेंगे थोड़ा सा आपसे। जी। देखिए होता क्या है? बुरा नहीं मानना कि अगर हम कुछ तर्क वितर्क करेंगे मुझे नहीं जानकारी तभी होगी। जी जी गलत तो नहीं बोला हूं। जी जी जी अब जैसे आपने आप इसकी बातें बताई इनमें से कुछ बातें हमको आपकी अच्छी लगी कि हां ये चीज अगर मैंने की है तो उसमें से थोड़ा सा करेक्शन करने वाला था। ये आपकी बात से मुझे समझ में आया। जी हम लेकिन अब हम यहां आपसे ये पूछेंगे कि ये जैसे शंकराचार्य है तो कितने शंकराचार्य हैं भारत में? शंकराचार्य चार ही होते हैं। चार होते

00:17:37:18 हैं। ठीक है? कि जैसे मीडिया हमारे शंकराचार्यों को कवरेज नहीं दे पा रही तो सोशल मीडिया पे तो हम प्रचार प्रसार कर ही सकते हैं अपनों का। तो कर तो रहे हैं। आप फॉलो नहीं कर रहे हैं उन्हें। ऐसा नहीं है कि वो हिंदुओं का पक्ष नहीं ले रहे हैं। आप देखिए तो सही जाकर के। नहीं मैंने भाई साहब यह बात नहीं कही है कि वो पक्ष नहीं ले रहे हैं। देखो अगर वो नहीं ले आप वो मुख्य बात बताइए जिस पर आपको लग रहा है कि ये होना चाहिए था और उन्होंने नहीं किया है। नहीं मैं उनकी बात नहीं कर रहा हूं। देखिए वो वो लोग जो कुछ कर रहे हैं अब आपने बताया कि उसको मीडिया कवरेज नहीं दे रही तो वो हम लोगों तक बात नहीं पहुंचती है। तो इसलिए मैं अब उनकी बात नहीं कर सकता हूं। वहां पे मेरी गलती है। मैंने मान लिया कि मेरी गलती है। जी जी ठीक है। मेरी गलती है। मैंने स्वीकार की। जी। अब बात यह है कि यह लोग जो आडंबर करके चल रहे हैं इनका विरोध करने कौन आए? उनका विरोध करने देखिए पहली बात तो यह है कि क्या करना है और क्या नहीं करना है में भी हमारा जो अंतिम निर्णय होगा वो उसी का होगा जो हमें शास्त्र दे रहा है तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में एक मात्र शास्त्र प्रमाण है

00:18:52:19 यदि शंकराचार्य ने चुना है कि हम इस रणनीति के तहत हिंदू राष्ट्र के लिए कार्य करेंगे तो हमें उस पर दोष दृष्टि नहीं रख पाएंगे क्योंकि शंकराचार्य हमारे लिए शब्द प्रमाण होते क्योंकि शंकराचार्यों से ही हमें शास्त्र मिले और शास्त्रों से ही हम हिंदू है। है ना? पहली बात। दूसरी बात यह है कि जिन व्यक्तियों का शंकराचार्य सामने से विरोध नहीं कर रहे हैं। उन व्यक्तियों का विरोध करने के लिए हम और आप जैसे बहुत सारे सनातनी शंकराचार्य ही तो खड़े करते हैं। भाई जैसे मान लीजिए रामपाल की बात ले ले। रामपाल का अगर डायरेक्ट शंकराचार्य नाम लेकर के खंडन करने लगेंगे। रामपाल के तो बल्ले बल्ले हो जाएंगे। बिल्कुल सीधे सीधे रामपाल जैसे टपुंजिया व्यक्ति की तुलना शंकराचार्य से होने लगी पर्दे पर छा गए जगह जगह बातें होने लगी अरे रामपाल जो है रामपाल की लड़ाई शंकराचार्य से वैसे मीडिया कवरेज वो नहीं करेगी कवर मगर इस मामले में रामपाल जरूर पूरी दुनिया विश्व विख्यात हो जाएंगे तो शंकराचार्य की एक रणनीति भी होती है क्योंकि शंकराचार्य धर्म और ब्रह्म की व्याख्या के साथ-साथ धर्म की रक्षा करने का कार्य भी कर रहे हैं और इस समय दुविधा क्या है कि उन्हें शासन तंत्र वैसा प्राप्त नहीं है। पहले क्या होता था कि

00:20:07:25 जो रामचंद्र जी होते थे वो वशिष्ठ से निर्देश लेते थे। वशिष्ठ के अनुसार राज्य करते थे। मगर इस समय क्या हो रहा है कि लोकतंत्र स्थापित है। तो कहीं ना कहीं जो देश का राजा है वो हिंदू होते हुए भी उस तरीके से कार्य नहीं कर पा रहा है जैसे रामचंद्र जी करते थे। इतनी तो मानेंगे ना आप। तो उसमें क्या हो रहा है कि जिस जिन अंशों में वो काम नहीं कर पा रहा उन अंशों में से कुछ अंशों को शंकराचार्य को ही अपने हाथों में लेना पड़ेगा कि चलो ये रणनीति हम ही अपनाते हैं। अगर लोकतंत्र लोकतांत्रिक राजा नहीं कर पा रहे हैं जो कार्य तो उनको हम ही करते हैं। तो ऐसे में लोकतांत्रिक राजा की इतनी वाहवाही अवश्य होगी कि जब शंकराचार्य ऐसा कुछ करेंगे तो वो उनको रोकेगा नहीं। जैसे मोदी जी, योगी जी कभी भी शंकराचार्य कोई कार्य करते तो उस पर यह नहीं करते हम यह रोकने जा रहे हैं। है ना? तो अब अब ऐसे में उनके द्वारा जो बनाई गई रणनीतियां होती है ना शंकराचार्यों की तो उसमें कई बार ऐसा होता है कि वो इस मामले पर खुद ना बोल के कोई अमुक व्यक्ति खड़ा कर दिया उसके द्वारा बुलवा रहे हैं। या किसी किसी मामले पर बात नहीं कर रहे हैं। जिन जहां उन्हें आवश्यक लग रहा है। इस पर बात करने से ये विप्लव हो

00:21:22:28 सकता है। यह नुकसान हो सकता है। यह धर्म को क्षति पहुंच सकती है। है ना? तो ऐसा नहीं है कि नहीं कर रहे हैं। अब जैसे रंजना अग्निहोत्री जी हैं जो रामपाल के विरुद्ध जो हमारे देवी देवताओं को गाली देता है। बहुत उत्कृष्ट उदाहरण मैं दे रहा हूं। रंजना अग्निहोत्री जी द्वारिका शंकराचार्य जी की शिष्या हैं। तो उनको रामपाल से लड़ने की प्रेरणा और राम मंदिर का केस भी उन्होंने लड़ा था। तो राम मंदिर के लिए ये इसके लिए लड़ने की प्रेरणा और शिक्षा और ज्ञान कहां से मिला? द्वारका शंकराचार्य से। मैं स्वयं पूरी पूरी पीठ के शंकराचार्य जी का शिष्य हूं। तो रामपाल के विरुद्ध जो आज इतना हम अपनी मेरे घर की स्त्री के साथ बलात्कार करने की धमकी मेरी पांच साल की बिटिया के साथ बलात्कार करने की धमकी चाकुओं से गोदगोद कर मार डालने की धमकी तीन से चार बार मेरे विरुद्ध एफआईआर कराने की धमकी और मेरे पास इस समय 110 करोड़ के 100 लगभग 101 एक करोड़ के नोटिस मेरे पास हैं मानहानि के और इसके बावजूद भी मैं अपनी जगह पे अटल रूप से खड़ा हुआ हूं। यह मुझे कहां से प्राप्त हुआ? मैं तो एक भटका हुआ हिंदू था। किसने भरी ये भावना मेरे अंदर कि अपने धर्म के लिए

00:22:38:00 मर जाओ मगर खड़े रहो। खड़ा किया ना ऐसा व्यक्ति ये तो वो है। ये तो मैं हूं जो मुझ जैसा एक छोटा सा निमित्त जो आपके सामने खड़ा हूं। सोचिए शंकराचार्य ने ऐसे कितने लोग खड़े करे होंगे अभी तक। नहीं बात आपकी सही है। तो आपका जो प्रश्न था कि इन इन लोगों के बारे में कौन बोलेगा तो रणनीति के तहत जहां बोलना उपयुक्त होता है वहां शंकराचार्य बोलते हैं और जहां नहीं बोलना होता है वो उनका निर्णय होता है कि कहां नहीं बोलना है वहां चुप भी रहते हैं और जहां पे अन्यों से बुलवाना होता है वहां पे अन्यों से भी बुलवाते हैं। भाई साहब हम आपकी बात से सहमत है लेकिन अब आपने जो चीज मुझे बताई है वो ठीक है। मैंने आपने बताया जहां नहीं बोलना है वहां वो नहीं बोलते हैं या उनके द्वारा बुलवाया नहीं जाता है। ठीक है। आज की डेट में आप ये बता जान रहे हैं कि आडंबर करने वालों को आडंबर करने वालों के लोग कितना है और किसका सोशल मीडिया हो रहा है। किसका क्या हो रहा है? और आज की डेट में अगर जो कुछ हो रहा है वो टोटल आदमी कैसे जान रहा है? मीडिया या सोशल मीडिया मीडिया से ज्यादा आजकल आजकल सोशल

00:23:53:08 मीडिया है और जैसे अभी कई बार चर्चा हुई कि शिवजीत ने अभी जैसे बताया कि ये जो झांकियां निकलती है ये क्या सही है तो वो गलत है इनको कौन रोकने आएगा अगर हम कह दे वो शंकर भगवान या पार्वती माता को बना के वहां नटा रहे हैं और हम जाके वहां उंगली उठाए कोई आके बोल दे कि आपने ये माता पार्वती ऊपर उंगली उठाई तो वहां पर कौन गलत हुआ हम हुए या कथावाचक हुए अगर वो नचवा रहा है तो कत जो नचवाने वाला है वो गलत हुआ और वहां विरोध किसका होगा सबसे ज्यादा विरोध उसका होगा जो नचवाने वाला होगा उसका विरोध होगा उसका कोई नहीं विरोध करेगा भाई साहब क्योंकि वहां आज की डेट में हिंदुओं को आपने ही कहा इन लोगों को जानकारी नहीं है मैंने ये बात आपकी स्वीकारी है तो भाई साहब इसीलिए तो हम लोगों को कम अपने जो जो मूल सिद्धांत है ना उनको उनको प्रचारित करने की बहुत आवश्यकता है। हमको सभाएं करनी होंगी। हमको अपने हिंदू बच्चों में ठूसना होगा कि सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म असतो मा सदगो मा ज्योतिर्गमया हमको अपने बच्चों में ठूसना होगा। हमको अपने समाज में ये जानकारी देनी होगी कि किसकी बात माननी है? किसकी नहीं माननी है? आचार्य

00:25:08:16 प्रशांत जैसों की बात नहीं माननी है। वो प्रामाणिक आचार्य नहीं है। रामपाल जैसे तट पुंजियों की बात नहीं माननी है। वो प्रामाणिक जगत गुरु नहीं है। हमें बताना होगा और बताने की बजाय यदि हम ही हमारे प्रामाणिक आचार्यों के प्रति अनास्थावान पहले से ही बना देंगे। तो वो कैसे फिर एक दिन हम जा करके कहेंगे कि भाई शंकराचार्य की बात मान्य होगी। रामपाल जब वेदों का ज्ञान होने का दावा करेगा तो हम उससे क्या यह कहेंगे कि नहीं हम अपना वेदों का ज्ञान देंगे नहीं वहां हमें उससे कहना पड़ेगा नहीं रामपाल का नहीं शंकराचार्य का जो वेद वेद का अर्थ है वह मान्य होगा वहां अपना नाम नहीं लेंगे ना तो पहले ही जब शंकराचार्य के प्रति अनास्था बना चुके होंगे तो वहां ये नहीं कहेगा अरे तुम ही ने तो एक दिन स्टेटस लगाया था शंकराचार्य गलत है आज तुम शंकराचार्य सही होके आए हो और ये मैं बता दूं भाई साहब जब भी हम लोग धर्म की रक्षा करने जाएंगे। अंत में हमको शंकराचार्य की जरूरत पड़ जाएगी। उसके बिना हम जीत नहीं पाएंगे उस नाम के बिना। ये मैं आपको बता रहा हूं। इसलिए उस नाम के प्रति आस्था को हमें सुरक्षित बना के रखने की आवश्यकता है हर हिंदू को और ये बिल्कुल। अब मैं आपने कहा मैंने ये आपकी बात स्वीकार की और

00:26:23:20 उसको डिलीट भी किया। ठीक है। मैंने बात रिपीट की। मैं बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत आभार। नहीं धन्यवाद हालांकि मैंने कहा था कि मैंने हालांकि शिवजीत से कहा था कि अरे इसमें डायरेक्ट फोन करने की आवश्यकता नहीं किसी दिन बैठेंगे जब साथ में होंगे तो बातें हो रही होंगी छिड़ जाएगी तो उसी समय बातें नहीं अलग से फोन करने की आवश्यकता नहीं है नहीं नहीं भाई साहब होता क्या है आप आपकी बात से सहमत है हम मैंने कहा आपकी बातों से सहमत देखिए होता क्या है जैसे अभी आपने कुछ चीजें बताई वो मुझे अ समझ में आई अब मैं जो चर्चा कर रहा हूं वो चर्चा आ रही है। यह जो आज की डेट में कथावाचक है, इनका विरोध कौन करेगा? यह कौन सी कथा कहने आते हैं? लोगों के अंदर धर्म की जानकारी नहीं हो पा रही। ये कथावाचक है या लुटेरे हैं। देखिए हम लोग क्या करते हैं जो कथावाचक हैं। हम पहले उनको देख लेते हैं कि यह किस स्तर के हैं और इनको सुनने वाले लोग कितने हैं। अब मान लीजिए किसी कथावाचक को 500 लोग सुनने वाले हैं। ठीक है? और मुझे सुनने वाले हैं दो लाख लोग। ठीक है? अब मैंने अपने दो लाख वाले मंच से 500 वाले का नाम ले कह दिया ये गलत है। ठीक? तो अब क्या होगा कि दो लाख में

00:27:38:24 से दो लाख लोगों को तुरंत उस कथावाचक का नाम पता चल गया। हम्म। ठीक। अब उसको 500 की बजाय उसको चेक करने के नाम पे कहता क्या है विरोध? गंदी बात क्या कहता है? उस गंदी बात को चेक करने के नाम पे वहां पे कम से कम 1 लाख आदमी पहुंच गया। पहले उसको 500 सुन रहे उसको 1500 सुन रहे हैं। इसके बाद क्या होगा कि एट दी सेम टाइम जितने हमारे दु हैं शत्रु चाहे वो नीले वाले हो चाहे वो बाहरी विधर्मी हो चाहे वो कोई भी हो उन सबको हमने एक हमारे एक मतलब उनमें आपस में हमने संपर्क करा दिया वो तुरंत उसके पास भाई तुम तो बहुत अच्छी कथा कहते हो उसको तुरंत इंस्पायर करेंगे और हमसे पैसा ले लो हमारे यहां भी आकर कथा करो समझ रहे हो? तो इसलिए यह देखना पड़ता है कि किस व्यक्ति का विरोध किस प्रकार से होना चाहिए। दूसरी बात कई ऐसे भी होते हैं जो उद्देश्य पूर्वक नहीं कर रहे हैं बल्कि उनको अज्ञानता है। तो उनका सार्वजनिक विरोध सही नहीं होता है। बल्कि उनको भाईचारे के तहत समझाना आवश्यक होता है। जिन्हों जो अज्ञानता पूर्वक कुछ गलती कर रहे हैं तो उनका हम पहले ही अगर सार्वजनिक विरोध कर देंगे तो हो सकता है वो हमारा दुश्मन ही बन जाए जो हमारा भाई था। तो इस मामले में

00:28:55:06 ये सिद्धांत है महाभारत का जब कोई राक्षस था जो इनको क्या कहते हैं कौरव सो रहे होते हैं तो वहां पर कोई राक्षस था इनको मार डालने वाला था क्यों युधिष्ठिर बचाने जाते हैं तो बाकी लोग कहते हैं कि अरे वो क्या कहते हैं अरे क्यों बचाने जा रहे हो हमारे तो दुश्मन है ना तो वहां पर युधिष्ठिर जी ने क्या संदेश दिया नहीं वो हमारे आपस की बात है कि हम में आपस में क्या है अगर अंदर की बात है तो वो 100 हम पांच मगर कोई बाहर का आ जाए तो हम 105 है ना तो अब जैसे करपात्री जी महाराज ने भी यही बात की थी आर्य समाज मूर्ति पूजा का विरोध करते हैं। मूर्ति पूजा का विरोध मतलब अगर आर्य समाज की बातें मान ली जाए तो हमारे देश से हिंदू मंदिर खत्म हो जाए तुरंत तो फिर काहे के लिए लड़े इतने साल राम मंदिर के लिए मूर्ति पूजा तो गलत है। तो आर्य समाजियों के ऊपर जब मुस्लिमों ने वो किया था वार तो करपात्री जी खड़े हो गए उनके साथ लोहा लेने के लिए। क्यों खड़े हो गए? क्योंकि अंदर की बात है कि हम और आर्य समाज में

00:30:10:07 हमारे मतभेद हैं। तो अंदर वो वो 100 हम पांच मगर कोई बाहर का आ जाए तो हम 105 तो इसीलिए यह भी देखना पड़ता है कि जो ये कथावाचक हैं ये किस तरीके के हैं इनका बाहरी विरोध करना है कि अंदरूनी तरीके से इनको इनसे बात करके वाद संवाद स्थापित करके इनसे बात करके और जो है शोधन कार्य किया जाना है। ये सब मतलब बातें जो है विचारनीय होती है। बहुत सोच समझ के कार्य करना पड़ता है। अब जैसे मैं आपको एक बात कहूं छोटी सी प्रदीप मिश्रा जी है बहुत सारी ऐसी बातें बोलते हैं जो शास्त्रों के विरुद्ध है। मगर हम क्योंकि वो शंकराचार्यों के प्रति प्रेमानंद जी जितने भी हमारे प्रामाणिक आचार्य गण हैं उनके प्रति अवमानना नहीं करते। इसलिए हमारे चैनल पर आप देखेंगे YouTube पर तो हमने बहुत लोगों की खाट खड़ी की है। मगर हम इस तरीके से बहुत ज्यादा उनका खंडनात्मक तरीके से प्रदीप मिश्रा जी के बारे में कभी नहीं बोला। क्यों नहीं बोला? क्योंकि हमें मालूम है जो वो कर रहे हैं वो उद्देश्य पूर्वक नहीं कर रहे हैं। वो अज्ञानता वश कर रहे हैं। यदि हम धीरे-धीरे उनसे वाद संवाद स्थापित करेंगे तो बात ठीक हो जाएगी। अब जैसे आप ही की बात ले लीजिए। आपने अभी स्टेटस लगाया तो हमारे मन में

00:31:25:08 यह भाव नहीं आया। इसका हम विरोध करें और जो हम भी स्टेटस लगा दे या इनको जो है शास्त्रार्थ की दृष्टि से देखें। हमारे मन में ये भाव आए भाई ये जो भाई साहब है जानकारी के अभाव के कारण है धीरे-धीरे साथ जब होगा हम लोगों का धीरे-धीरे अपने आप ही इनका जो है वो चीज इनको पता चल जाएगी जो अभी नहीं पता है ये भाव है तो ऐसे ही देखना पड़ता है कि किसका विरोध करना है किसको शोधन करना है किसको केवल बात संवाद करना है किस तरीके से किसके साथ स्थापित करना अगर हम सही मायने में देखने देखने में जाए तो आप तो जानते ही हो उस समय हिंदू समाज कितना भटका हुआ हुआ है। आप 10 धर्म धर्मनिष्ठ जो धर्म को मानने वाले लोग हैं। आप उनके उनको बिठा लो एक कुर्सी पे। ठीक है? मान लीजिए बजरंग दल के हैं या आरएसएस के ही है। उनको एक 10 कुर्सियों डाल के बिाल दो। एक बात बीच में डाल दो कि बताओ सनातन धर्म में मूर्ति पूजा है कि नहीं है या यह डाल दो भगवान निराकार है कि साकार है या यह डाल दो कि मांस खाना है कि नहीं खाना है थोड़ी देर में देखो दसों लोगों में आपस में वो होने लग जाएगा नहीं ये बात आप भैया बात आपकी भाई साहब सही है मैं ये चीज कह रहा हूं

00:32:40:19 कि मतलब अगर थोड़ी-थोड़ी जानकारी होगी तो वो रुकेगी और ज्यादा ज्यादा हो जाएगी तो बाउंस हो जाएगी। गलत तो नहीं एकदम सही बात मैं कह रहा हूं। अब इसको देखिए गलत नहीं समझिएगा। होता है कि नहीं होता है? बहुत आनंदित कर देने वाली चर्चा रही आपसे। मैं मेरा कहना जो ये लगा था ये कह मतलब अब आपने जो बताया वो एक अलग भाव था और वो मेरी समझ में आया। और मेरा जो सोचना था जैसे आपने बताया कि जानकारी का भाव वह बिल्कुल था। ठीक है? और मेरा जो उद्देश्य था वो केवल टारगेट कथा वाचकों का ही था। मैं आपको रियल बता रहा हूं। क्योंकि कोई भी कथावाचक धर्म के प्रति और हमारी महाभारत क्या कहती है? हमारे वेद क्या कहते हैं? हमारी रामायण क्या कहती है? हमारी गीता क्या कहती है? ये कोई नहीं वहां पर बताने आता है। केवल कहानी सुनाने आते हैं सब। तो मैं आपसे एक निवेदन करूंगा। आपने सही किया मगर इसमें भी कथावाचक नाम ना डालिए इसमें भी व्यक्ति को पकड़िए डायरेक्ट जो व्यक्ति बहुत ज्यादा घोर तरीके से कथा का अपमान कर रहा हो है ना तो उस व्यक्ति का क्योंकि कथावाचक अच्छे भी है

00:33:56:07 ऐसा नहीं है कुछ भी तो क्या होगा कि अगर हम कथावाचक कह देंगे ना तो उसमें भी सारे कथावाचक आ जाएंगे तो हम क्या करें नाम लेकर के जो बहुत ज्यादा उसमें भी ऐसा नहीं कि जिस किसी ने कोई थोड़ी बहुत ही गलत बात बोल दी उसके लिए बोल दिया क्योंकि फिर हमारी इंटरनल लड़ाई बाहर वालों को दिखने लगेगी। वो उसका फायदा उठाने लगेंगे और हमारे उस भाई को हमसे तोड़ने का प्रयास करने लगेंगे। तो इसलिए बहुत ज्यादा किसी से घोर गलती हो जाए। जैसे अभी मैंने सुना था जो एक वो नहीं है एक व्यक्ति जो बहुत गंदे तरीके से फिल्मी अंदाज में गाने गा रहा था। उसप एफआईआर हुई थी हजरतगंज में है ना वो व्यक्ति ऐसा था जिसप बोलने लायक है हालांकि उसने जब क्षमा मांग लिया तो हमारे मतलब वो हां ठीक है क्षमा मांग लिया ठीक है मगर वो ऐसा कर रहा था कि बहुत ज्यादा बिल्कुल फिल्मी तरीके से भागवत अरे जो पूरी के शंकराचार्य जी है गुरुदेव वो खुद अपने आज से 35 साल पहले कह चुके हैं कि धर्म को बिगाड़ रहे हैं कथावाचक हम आपको भेजेंगे जब वो कह चुके हैं कथावाचकों के लिए जो आप बात कह रहे हैं कि कथावाचक उन्होंने धर्म को बहुत बिगाड़ दिया है। क्यों? क्योंकि कथा में वेद वेदांग

00:35:11:15 तो रहा नहीं। भगवान जो जो उसका तत्विक बात है वो तो रही नहीं। रंगारंग कार्यक्रम हो जाता है। वही चीज है ना और कथा वाचक और ये जैसे आपने कहा कि उसमें सब नहीं है। तो अब जैसे एक गवर्नमेंट ने अह अह वो किया है कि भ्रष्टाचार या भ्रष्ट। तो हर विभाग में 90% लोग भ्रष्ट है। हर विभाग में 10 10% ईमानदार है। उन 10%ों की गिनती नहीं होती है और गाली पूरे विभाग से दिया जाता है। मगर मगर मैं कहूंगा कि ये किया जाता है। मगर ये सनातन सिद्धांत नहीं है। सनातन देखिए अब आज अगर बात करें स्त्री पुरुष की तो स्त्री पुरुष कितने परसेंट वो हैं? जो व्यभचारी नहीं है। कितने परसेंट होंगे जो बिल्कुल राम और सीता की तरह होंगे। आप हृदय पर हाथ रख के बोलिए आज के टाइम में। आज आज की बात छोड़ दीजिए। आज से 200 साल के बाद आप क्या मानते हैं कि स्त्री पुरुष कितने परसेंट होंगे जो व्यभचारी नहीं होंगे?

00:36:26:24 है ना? फिर भी ज्यादा परसेंटेज आएगी कि ज्यादातर लोग तो व्यभचारी है ही। हम आज की भी समाज में मानसिकता यही है कि लगभग यही माना जाता है कि मतलब 60 70% स्त्री पुरुष जो है वो व्यभचारी हैं। आज की ये मानसिकता है। फिर भी हम सभी स्त्री पुरुषों के लिए तो ये नहीं कह सकते हैं। सभी माओं के लिए तो नहीं कह सकते हैं कि वे भी व्यभचारणी है। मैंने वो चीज नहीं की। मैंने खुद भी आपको एक 90% भ्रष्ट हैं। 10% वाले विरोध उनका नहीं करते हैं। तो कुछ तो करना चाहिए। जब विरोध होगा भैया तभी आगे कुछ होगा। नहीं विरोध ये नहीं कहता हूं कि सबको बता रहा हूं ना। मैं बता रहा हूं ना यह बड़ा रणनीतिक विषय है। कि विरोध किस प्रकार से हो? विरोध भी होता है। ऐसा नहीं हुआ। विरोध होता है अभी क्या कहते हैं कई ऐसे स्वोषित कथावाचक है अपने आप कथावाचक बन गए पहले कविता कहते थे अब जो है कथा कहने लगे उन्होंने गलत व्याख्या की विरोध किया गया विरोध हुआ अब किस रूप से हुआ किस स्तर का हुआ और फिर वो विरोध आप तक पहुंचा कि नहीं पहुंचा ये भी बात है विरोध तो किया गया मगर वो आप तक

00:37:41:25 नहीं पाया तो आपको तो यही लगेगा यार इसका किसी ने विरोध नहीं किया है ना तो बहुत सारी चीजें और रणनीतिक विषय यह जो जो युद्ध का समय होता है ना इसमें बड़ा क्या करना है कैसे करना है बड़ा निर्णायक स्थिति होती है बस और कुछ नहीं थोड़ा एक जटिल मामला होता है क्या बोलना है क्या नहीं बोलना और जो व्यक्ति जितने बड़े मंच पर है उसकी उसका दायित्व उतना ही बढ़ जाता है आप देखिए जैसे छोटी सी बात है जैसे हम आरएसएस वाले हम बजरंग दल वाले हम विश्व हिंदू परिषद वाले इत्यादि सभी अपने धर्म के लिए ही जुड़ते हैं। जुड़ते हैं ना आरएसएस से या किसी भी संगठन से हम इसलिए जुड़ते हैं क्योंकि हम अपने धर्म से प्यार करते हैं। हम निचले स्तर पर और अनाधिकृत रूप से और जो है शंकराचार्यों का विरोध भले ही कर ले मगर कभी भी आपको आधिकारिक रूप से आधिकारिक रूप से ये नहीं आएगा कि जाओ किसी चौराहे पर खड़े हो जाओ। शंकराचार्य का पोस्टर लगाओ। वहां उनका विरोध करो। आएगा कभी? नहीं आएगा। आज तक नहीं आया। क्यों नहीं आया? क्योंकि उनको भी पता है कि शंकराचार्य की अगर कोई बात ऐसी हो भी रही है जो हमें समझ में नहीं आ रही है तो

00:38:56:28 भी उनका सार्वजनिक विरोध नहीं करना है। उससे हमें घाटा होगा। ये रणनीतिक निर्णय हुए कि नहीं? हम तो यही है कभी आप देखो इतनी अभी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में बहुत दोनों पक्षों में शंकराचार्य और भाजपा आरएसएस दोनों पक्षों में इतना हुआ मगर कभी भी मोदी जी ने योगी जी ने डायरेक्ट नाम लेकर के कभी कोई खंडन किया हो कभी कोई बात कह दी हो बल्कि उस दौरान भी सम्माननीय शब्दों द्वारा ही संबोधन हुआ सभी शंकराचार्यों का और राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के तुरंत दो दिन बाद स्वयं मोदी जी द्वारका में द्वारका पीठ में वहां जो उस समय शंकराचार्य के रूप में अभिषिक्त है जाने जा रहे हैं। उनके चरण छूते हुए दिखाई दिए। संबित पात्रा जी पूरी पूरी शंकराचार्य जी के यहां पहुंचे। वह राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के आसपास ही पहुंचे। इतना सब मतलब कभी भी आधिकारिक रूप से बीजेपी द्वारा शंकराचार्यों का विरोध नहीं किया गया। ना कभी भविष्य में किया जाएगा। तो यह क्या है? रणनीतिक विषय है अगर मान लीजिए हमें कोई बात नहीं भी समझ में आ रही है तब भी कहां मौन रहना है विरोध करना है कि नहीं करना है

00:40:12:04 तो यही यही जो क्या कहते हैं विडंबना आचार्यों के पास भी होती है कि किस विषय में कितना बोलना है और वो जो भी निर्णय लेते हैं उसमें आखरी अंतिम हित जो होता है वो हमारा ही होता है हम बस देख नहीं पाते हैं बस इतनी बात है क्योंकि हमारा वो अल्पज्ञता है कि हम समझ नहीं पाते हैं इसलिए इसलिए ये सारी व्याख्या बाकी तो मजा आ गया आपसे इतनी सारी बातें। चलिए बैठेंगे किसी दिन कोई दिक्कत नहीं। जी जी ठीक है ठीक है मिलते हैं किसी दिन। जय श्री राम।

00:40:52:09 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 40:57 · 20 Jul 2025

शंकराचार्य पर प्रश्न करने वाले हिंदू भाई के साथ एक सार्थक चर्चा #शंकराचार्य #सनातनधर्म

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