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00:00:01:11 [संगीत] जो परम पूज्य गुरुदेव पुरी के शंकराचार्य जी हैं उनका 82 वां प्रकट उत्सव है इनके बारे में जैसे बहुत सारा वर्णन कर पाना संभव नहीं है समय की समय का भाव भी और मैं उस योग्य भी नहीं हूं कि पूरी तरीके से सारी बातें मैं आपको बता पा मैं आज से कुछ वर्ष पूर्व की बात है कुछ चार पाच साल हुए होंगे जो मेरे सामने अगर कोई भी धर्म के विरुद्ध गतिविधि होती थी तो मैं उसमें टांग ड़ा आता था ऐसे मतलब बचपन से इस तरह का मां-बाप के कारण संस्कारों के कारण ऐसा था कि मेरे सामने अगर कुछ भी हो रहा होगा गलत धर्म के विरुद्ध कोई चीज हो रही होगी तो वहां अपनी टांग उड़ाऊ भले ही मुझ में शास्त्र का बल या शस्त्र का बल हो या ना हो तो जैसे कि मान लीजिए कहीं पर कन्वर्जन की बात चल रही है कहीं पर पाखंड हो रहा है जैसे एक बार मुझे याद है कि मैं जब छोटा था मैं एक कैंप में था जहां पर
00:01:01:19 एक क्रिश्चियन था जो डेली मोमबत्ती जला करके उसके किसी साथी के ऊपर भूत आता था और वह बाइबल की कुछ चीजें पढ़ करके उसका भूत उतारने का ड्रामा करता था तो मैंने कई दिन तक जब यह देखा वहां पर तो मैंने भी एक ड्रामा फिक्स किया जब छोटे थे 18 19 साल के थे तो हमने भी एक ड्रामा फिक्स किया मैंने कहा अपने मित्र से कि भाई अब मेरे ऊपर आज रात को भूत आएगा और वो भूत इसके ऊपर अटैक करेगा और जब ये बाइबल वगैरह पढ़ेंगे तो तब जो है आप मैं उस बाइबल से काबू में नहीं आऊंगा मगर आप हनुमान चालीसा पढ़ना तो मैं काबू में आ जाऊंगा यह हमारा ड्रामा था तो इस तरह की गतिविधियां और जैसे आपने अगर संत रामपाल किया या कबीर पंथिया का नाम सुनाओ यहां जो जनल पार्क के पास की बात है हमने गए थे वहां पर तो इनका वहां पर कैंप लगा हुआ था उसमें इतनी भद्दी भद्दी बातें लिखी है कि अगर आप खोल कर के पढ़ लेंगे तो आपके आंसू आ जाए जैसे कि दुर्गा मां के जो पति है व शिवजी नहीं है शंकर नहीं है कोई और है और मतलब काफी गलत बातें हैं जो बोलना भी मर्यादा के बाहर सुनाई देता है अब बात ये आती है कि ऐसे करते करते जब मैं अपने जो गृहस्थ जीवन है उसको
00:02:16:28 एक सामान्य व्यक्ति की तरीके से व्यतीत कर रहा था मगर एक बड़ी घटना हुई मेरे जीवन में वह बड़ी घटना क्या थी मेरे घर पर एक मित्र आया मेरा अच्छा मेरे पास पहले धर्म की रक्षा करने के लिए ऐसा कुछ नहीं था बहुत सारे शास्त्रों का अध्ययन हो कुछ नहीं थोड़ा बहुत मैं राम जी को जानता था और राम जी के प्रति थोड़ी श्रद्धा थी और उनको अपना आइडल मानता था इतना था और हां यह था कि मैं पूरा भारत भ्रमण कर रखा था तो राम जी के पद चिन जहां जहां पड़े थे तो वहां वहां में दर्शन अवश्य करता था इतना था इतनी कृपा थी जो पूर्व जन्म के संस्कार होंगे या प्रारब्ध होगा उसकी वजह से इतनी थी तो अब एक टर्निंग पॉइंट आया मेरे जीवन में वो टर्निंग पॉइंट क्या था वो टर्निंग पॉइंट यही था कि जब मेरे घर पर मैंने एक मित्र को वो क्षत्रिय था जन्म से तो जब वह घर पर आया उस मित्र को मैंने अपने घर पर भोजन के लिए बुलाया हुआ था उस मित्र से मैंने पूछा कि और तुम्हारी आध्यात्मिक रुचि कैसी है उसने बोला कि मुझे मैं नाम नहीं लूंगा मगर मुझे फलाना धर्म बहुत पसंद है तो मेरे पैरों तले एकदम से जमीन सरक गई यह क्या एक तो क्षत्रिय कुल और ऊपर
00:03:32:01 से फिर बिल्कुल ही अपोजिट जो विचारधारा है उसका नाम ले रहा है हमारे उसमें क्या कमी है तो वहां से फिर मेरा जो ये सर्चिंग वाला ब्रेन था कि ये क्या हो रहा है वो शुरू हो गया कि भाई ये हो क्या रहा है कैसे हमारे जो एक हिंदू लड़का है वो कैसे कह रहा है कि मुझे जो है इस्लाम बहुत पसंद है तो मैंने मैंने जब इसको सर्च आउट करना शुरू किया तो इवन कई जगह प मेरे उसको डिबेट नहीं कहेंगे मगर उसको डिस्कशन कहेंगे कई जगह पर मुस्लिम फिलोसोफर से मुस्लिम जो विद्वान होते हैं उनसे क्रिश्चन विद्वान होते हैं उनसे कई जगह पर मेरे उनसे चर्चाएं हुई जिसको दूसरी भाषा में डिबेट कहते हैं लोग मगर मैं कहूंगा कि चर्चा ई हूं तो उसमें मेरे सामने क्या चीजें आई कि जब मैं उनसे कहता था हमारे धर्म की जो सबसे मजबूत बातें हैं जो मैं आपको अभी थोड़ा सा आगे बताने वाला हूं जब मैं उनसे उनको अपने धर्म की सनातन की सबसे मजबूत चीजें बोलता था वो कहते थे कि अरे ये बात तो तुम्हारे वो लोग मानते ही नहीं है वो मेरे ही लोगों का नाम बताते थे मुझे जैसे मान लीजिए कि मैं कहता हूं कि सनातन धर्म में हम लोग मूर्ति पूजा कर सकते हैं मैं उनसे कहता था तुम्हारे यहां मूर्ति नहीं बन सकती ईश्वर की हमारे यहां बन सकती है यही बहुत बड़ी बात है कि हम अपने ईश्वर को अपना प्यार अपना प्रेम प्रकट
00:04:47:10 कर सकते हैं मगर आप लोग नहीं कर सकते आप अपना प्रेम व्यवहार नहीं कर सकते ईश्वर के साथ यह मेरा तर्क रहता था तो वो मुझसे कहते थे अरे तुम्हारे यहां अर समाज जो है वो तो नहीं मानता तो पहले अपने उन लोगों को समझाओ जाकर के इसके अलावा और भी बहुत छोटी-छोटी चीजें जैसे कबीर पंथी ब्रह्मा कुमारी यह लोग ऐसी कई शिक्षाएं हैं जो हमारे ही रास्ते का रोड़ा इनके द्वारा दी जाने वाली शिक्षा बन जाती है तो जब मैंने इसका बहुत वृहद रूप से विस्तृत अध्ययन करना प्रारंभ किया तब मुझे एक सूत्रम शैली में सनातन धर्म की मुख्य समस्या प्राप्त हुई वो मुख्य समस्या क्या थी कि हमारा शत्रु सामने खड़ा हुआ शस्त्र लिए खड़ा हुआ कोई अजनबी नहीं है हमारा कोई ऐसा शत्रु नहीं है जो सामने शस्त्र लिए खड़ा है नहीं हमारा जो वास्तविक शत्रु है वह पीछे शास्त्र लिए खड़ा हुआ कोई अपना है कोई परिचित है यह मुझे पता चला अब जब सामने वाला यह कह रहा है कि तुम मूर्ति पूजा का दंब भर रहे हो और तुम्हारे यहां भी तो कई ऐसे लोग हैं जो कहते हैं मूर्ति पूजा गलत है तो फिर मैं उनकी बात को झुट आऊं कैसे
00:06:02:27 अगर मान लीजिए एक पंक्ति है नाथस प्रतिमा अस्थ नाथस प्रतिमा अस्थ इसका बहुत ज्यादा उपयोग किया जाता है मूर्ति पूजा के खंडन के लिए नाथस प्रथमा अस्थ में भगवान वास्तविक तौर पर कह रहे हैं कि मेरे समान कोई नहीं है जैसे संस्कृत की ज्ञाता हूं तो उनको पता होगा यह बात मेरे समान कोई नहीं है प्रतिमान मगर उसको निकाल लिया गया कि मेरी मूर्ति नहीं है इसका आधार लेकर के लोग करते हैं अब अगर मैं उनसे जाकर के कहूं कि नहीं यहां पर आर्य समाज गलत बोल रहा है यहां पर मूर्ति का खंडन नहीं हो रहा है यहां पर भगवान कह रहे हैं मेरे समान कोई नहीं है इसका अर्थ यह नहीं है कि मेरी मूर्ति नहीं है मगर वो लोग कहेंगे हम तुम्हारी बात क्यों माने आर्य समाज की बात क्यों ना माने हम तुम्हारी बात क्यों माने यहां पर जन्म होता है एक सबसे बड़े शस्त्र का मेरे जीवन में वो शस्त्र क्या था वो भी मैं बताता हूं अब क्या हुआ मेरे जीवन इस तरह से जो अध्ययन है इसमें बीतने लगा आगे में बढ़ने लगा चीजों के साथ अब इसके बाद एक बार क्या हुआ कि मैंने कोई एक बहुत दिल को दुखा देने वाला दिल को दुखा देने वाला उसमें वह मजाक उड़ा रहा था हमारे रिचुअल्स का हमारी मान्यताओं का हमारे शास्त्रों
00:07:18:12 का खिचड़ी करण करके मजाक उड़ा रहा था तो जब मैंने वह देखा जब मैंने वो देखा तो मेरी आत्मा बुरी तरह से चीत्कार करने लगी मैं रोने लगा मैं मतलब मैं उस समय ऐसा हो गया कि मैं क्या करूं अभी के अभी मेरा मन कर रहा था कि उसकी छाती फाड़ दूं मैं इतना मजाक उसने उड़ाया था मैं क्या कर सकता था वो पता नहीं सात समुंदर पार कहां बैठा हुआ उस समय जिस कॉलेज में मैं था तो उस समय कॉलेज की छुट्टियां चल रही थी मैं अकेला उस बिल्डिंग में था और मैं परेशान हो रहा हूं कि तो मैं उसके जो है सीने को चीर दूं मैं कुछ करूं मगर इतना मतलब उस दिन में इतना फ्रस्ट्रेट हो गया कि उस दिन मैं अपने आपे में नहीं था निकला जा रहा था अपने शरीर को छोड़ कर के तो फिर मुझे याद आया अपने जीवन में कि जब कोई भी राह ना बचे जीवन में तो क्या करो राम का नाम लो तो उस दिन से मैंने राम का नाम लेना चालू किया और जो पहली बार जो मैं भगवान का नाम लेकर के चालू किया तो उस दिन मैंने क्योंकि कोई था नहीं वहां टोकने वाला कहने वाला कि क्या कर र तो मैंने वहां पर चिल्ला चिल्ला के रो रो के लेट लेट करके और जो है भगवान का नाम खूब देर तक लिया
00:08:33:20 करीबन दो ढाई घंटे तक और वहां से जो नाम उनका लेना मैंने चालू किया तो व आज तक मेरे जीवन में वह एक हिस्सा बन गया कि राम का नाम तो लेना है अब राम का नाम लेते समय मेरे अंदर जो इच्छा थी वह क्या थी मेरे अंदर इच्छा यह नहीं थी मुझे कार दे दो या फ्रिज दे दो एसी दे दो कूलर दे दो मेरी इच्छा ये थी मुझे ऐसा ब्रह्मास्त्र दो जिस ब्रह्मास्त्र के आधार पर मैं इन जैसे लोगों से लड़ पाऊ अपने धर्म की रक्षा कर पाऊ वोह अकाट्य सिद्धांत मुझे दो जिन अकाट्य सिद्धांतों को रखने के बाद सामने वाला निरुत्तर हो जाए हमारे धर्म का खंडन ना कर पाए जो व्यवहारिक रूप से हम सोचते हैं कि हम सामने वाले को हरा दे वह कोई हार नहीं है जब तक हम उसको विचारों से नहीं हराते तो मैंने मैं हमेशा भगवान से जो अंदर से जो चीत्कार से जो भगवान से प्रार्थना निकलती थी वही निकलती थी कि मुझे एक ब्रह्मास्त्र दो ऐसा हथियार दो जो मैं इन लोगों से लड़ पाऊं य जाकिर नायक के नात प्रथमा स्थ का उत्तर दे पाऊं इन सवालों का उत्तर दे पाऊ कि उसकी बात क्यों ना माने उसकी बात क्यों माने इन सब सवालों का उत्तर दे पाऊ तब मेरे जीवन में भगवान ने कृपा तब मेरे जीवन में मुझे पता चला कि जो सदियों
00:09:49:04 पुराना जो ज्ञान विज्ञान है वेदों का वह हम तक आता कैसे है तब मुझे पता चला परंपरा के बारे में एवं परंपरा प्राप्ति मम भगवत गीता 4 दो 3 16 और मांडूक उपनिषद छंद उपनिषद हर जगह वर्णन दे रहे हैं ऋषि महा ऋषि कि ज्ञान जो आता है वह हमारे पास कैसे आता है परंपरा से गीता प्रेस गोरखपुर शास्त्रों को छाप है गीता प्रेस गोरखपुर हमारा प्रमाण नहीं है प्रमाण है गुरु शिष्य परंपरा कहां दो दो अरब साल पहले वेदा दि शास्त्र इस दुनिया में प्रकट होते हैं संसार में है ना और फिर वो वहां से यहां तक आज तक कैसे आए परंपरा से तो पहला हथियार मुझे मिला परंपरा उसके बाद फिर पता चला कि शास्त्रों के अनुसार जो हमारे पुराण आदि हैं उनके अनुसार भगवान शिव ने अवतार लिया था आज से करीब ाज वर्ष पूर्व भगवान आदि शंकराचार्य के रूप में और क्यों लिया था क्योंकि उस समय भी नास्तिकों का बोलबाला हो गया था तो नास्तिकों का बोलबाला रोकने के लिए भगवान आदि शंकराचार्य जी ने अवतार लिया था इस चीज का पूर्व पुराण में भविष्य पुराण में अब अनेकानेक पुराणों में वर्णन है अब बात ये आती है जब मुझे यह सब पता चल गया तो
00:11:04:04 मुझे पता चला कि जब जो सबसे पहले नारायण विष्णु ज्ञान देते हैं ब्रह्मा को
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00:11:12:09 ब्रह्मा जी ज्ञान देते हैं वशिष्ठ जी को वशिष्ठ जी ज्ञान देते हैं शक्ति को शक्ति जी ज्ञान देते हैं पारा सर को पारा सर ज्ञान देते हैं व्यास जी को व्यास जी ज्ञान देते हैं सुखदेव जी को सुखदेव जी ज्ञान देते हैं श्री गड पादा चार्य को फिर गड पादा चार्य जी ज्ञान देते हैं गोविंद योग मतस्य को फिर वोह ज्ञान देते हैं भगवत पाद आदि शंकराचार्य को
⬜ Not used yet · 00:11:33:04 – 00:18:29:28 (6:57)
00:11:33:04 और भगवत पाद आदि शंकराचार्य से आज तक उनके शिष्य के शिष्य के शिष्य के शिष्य के रूप में वह जो गुरु परंपरा है वह चली आ रही है हमारे धर्म के लिए अकाट्य जो सार्वभौम सिद्धांत है वह हम लोगों तक पहुंचाने के लिए तो ऐसे ही गुरु शिष्य परंपरा में जो आदि शंकराचार्य जी जो थे शंकर भगवान के अवतार उन्होंने दो घोषणाएं की थी वायु पुराण में शिवजी कह रहे हैं कि त्रेता व सतयुग में ब्रह्मा गुरु थे त्रेता में वशिष्ठ गुरु थे द्वापर में व्यास गुरु थे और कलयुग में मैं महेश्वर गुरु हूं उसके बाद जब आदि शंकराचार्य के रूप में वो अवतरित होते हैं जो बीच में आप फोटो देख रहे हैं इस रूप में जब वो आते हैं तो वो कहते हैं कि सतयुग में ब्रह्मा गुरु थे और त्रेता में वशिष्ठ गुरु थे द्वापर में व्यास गुरु थे और कलयुग में मैं शंकराचार्य जगतगुरु हूं इस जगत का गुरु हूं उसके बाद वो कहते हैं कि मेरे द्वारा स्थापित चार पीठे उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम में शंकराचार्य की जो चार पीठे हैं इस पर बैठने वाला जो सन्यासी है मुझ शिव का रूप ही मान्य है तो ऑफिशियल अगर शास्त्रों के हिसाब से देखा जाए तो हमारा जो ऑथेंटिक लीडर है शास्त्रों का सही अर्थ
00:12:48:06 करने वाला वह इन चार गद्दिया पर बैठने वाला होता है शंकराचार्य तो अब इस प्रश्न का उत्तर मुझे प्राप्त हुआ कौन सा जब मुझे लोग कहते थे उसकी बात क्यों ना माने इसकी क्यों माने तो उत्तर क्या आया यह किस परंपरा से है जो भी व्यक्ति गलत बात कर रहा होगा उसकी कोई परंपरा नहीं होगी और परंपरा होगी तो वो शंकराचार्य जो शंकराचार्य की परंपरा जैसे नारायण तक जा रही है तो जो गलत व्यक्ति बात करने वाला है वो ज्यादा से ज्यादा एक गुरु होंगे उनके पीछे दो गुरु होंगे तीन गुरु जैसे आज हम द्विवेदी लगाते हैं या कोई शुक्ला लगाता है मिश्र मिश्रा लगाता है क्यों लगाता है क्योंकि उनके पुरखों का जो परंपरा है वो मिश्रा नाम उनको परंपरा से प्राप्त हुआ है तो ऐसे ही भगवान यह कह रहे हैं हमारे शास्त्र कह रहे हैं कि जो धर्म का सही अर्थ होगा वह परंपरा से प्राप्त होगा तो ऐसे गुरु हमें प्राप्त हुए शंकराचार्य के रूप में अब पर्टिकुलर जो हमारी जो गोवर्धन मठ के शंकराचार्य पूरी शंकराचार्य इनकी महिमा तो वैसे बहुत है मगर मुख्य मुख्य अगर बात में बता दूं तो नासा के वैज्ञानिक तक गणित संबंधी जो उलझन है वो इनसे सुलवा चुके हैं जो विश्व बैंक विश्व बैंक आदि है संयुक्त राष्ट्र संगठन आदि है कोरिया के व्याख्याता वो अपनी गणित संबंधी उलझनों
00:14:03:09 के अ उलझनों का समाधान इनसे प्राप्त कर चुके हैं साथ ही साथ जितने भी आपके ये इजरो के वैज्ञानिक हैं इन सबको गुरुदेव का सानिध्य प्राप्त है ऐसे हैं 200 के आसपास इनके ग्रंथ हैं और वैदिक मै मैथमेटिक्स पर इनके वृहद स्टडी है वृहद स्टडी आप मतलब जो शून्य पे ही इतना बोला है कि आप मतलब आपको चमत्कारिक लगेगा कि हमारे वेदों में इतना सारा ज्ञान का भंडार है तो वैदिक मैथमेटिक जैसी और यह सारी चीजें जितने भी हिंदुत्ववादी है वो भले ही इनका नाम ले या ना ले नाम ना लेने की वजह होती है नाम लेने की वजह होती है ना लेने की वजह होती है कि अगर इनका सही से प्रचार प्रसार हुआ तो शासन जो है इनके हाथ में चला जाएगा क्योंकि फिर धर्म धर्म के हिसाब से शासन होगा जो अभी जो सीन चल रहा है वो क्या हो गया कि जो शासन चल रहा है शासन के हिसाब से धर्म चल रहा है धर्म में क्या होगा शासन त करेगा मगर वास्तविक क्या तरीका है धर्म जो कहेगा वो शासन में होना चाहिए अब धर्म के निर्णायक है शंकराचार्य तो शंकराचार्य को अगर प्रचारित प्रसारित सही से कर दिया जाएगा तो जो मनमानी करनी होगी किसी को वह नहीं कर पाएगा तो ऐसे हमारे परंपरा प्राप्त यह गुरु हैं जो शंकराचार्य
00:15:18:16 जी जो जो आदि शंकराचार्य हैं उनके बाद इनका जो नंबर आता है वो आता है 145 वा यानी कि उन्होंने कहा था ना मेरी गद्दी पर जो बैठेगा उसको मेरा ही समा माने इसलिए इनको टैग मिलता है शंकराचार्य इसलिए इनको कहा जाता है क्योंकि यह उनकी गद्दी पर बैठे हैं तो उन्होंने कहा था कि मेरी पदवी इनको मिलेगी तो इसलिए इनको भी शंकराचार्य कहा जाता है अब बात यह आती है कि अगर आदि शंकराचार्य जी से इनको देखें तो य 145 नंबर पर है मगर नारायण भगवान विष्णु से इनको देखें तो 155 नंबर के गुरु है तो अब मेरे पास वह पांच सिद्धांत थे जिस के आधार पर संसार का कोई भी व्यक्ति भगवत कृपा से मेरे अंदर ऐसा कोई वो नहीं है संसार का कोई भी व्यक्ति मैं आज सीना चौड़ा करके कह सकता हूं कि हिंदू धर्म का खंडन नहीं कर सकता मेरे सामने अगर कोई दुनिया का कहीं का भी हो तो वो मेरे सामने आप उसको मतलब ला सकते हैं शास्त्रार्थ के लिए नहीं चर्चा के लिए गोष्ठी के लिए सामान्य कोई लड़ाई लाठी वाले के दम पर हमें नहीं लड़ना है मगर एक बात कह रहा हूं कि जब मैं गुरुदेव के सानिध्य में आया तो मुझे अपने धर्म के वह सरल से पांच सिद्धांत प्राप्त हुए जिनके
00:16:33:27 आधार पर मैं ऐसा बन पाया कि संसार का कोई भी व्यक्ति मेरे सामने सनातन धर्म का हिंदू धर्म का खंडन नहीं कर सकता अब ये जो परंपरा भी पता चल गई तो उसमें भी कौन सी परंपरा तो लास्ट वाला सिद्धांत है नारायण समारंभा शंकराचार्य मध्यमाम अश्म चार्य पर्यंत वंदे गुरु परंपराम वेदों का प्रारंभ से लेकर के आज तक जो आपको अर्थ उपलब्ध कराया जा रहा है सनातन धर्म के रूप में वो आपको शंकर परंपरा से कराया जा रहा है किसी भी कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है शंकर परंपरा का खंडन करते हुए स्वयं को शुद्ध सनातनी सिद्ध कर दे उसको शंकर परंपरा को मानना ही पड़ेगा तभी वह स्वयं को सनातनी सिद्ध कर सकता है तो यह सारी चीजें मुझे प्राप्त हुई ये सारी नॉलेज जो है जो आज मैंने आप लोगों के साथ साझा की है वो जो मैंने प्रार्थना की थी भगवान से कि भगवान मुझे वो शस्त्र दे दो जिससे कि मैं उन लोगों को रोक पाऊं उन लोगों को जो लोग हमारे धर्म का खंडन कर रहे हैं ब्रेन वश कर रहे हैं कन्वर्जन कर रहे हैं यह सारी चीजें मुझे जो पूज्य गुरुदेव है इनके सानिध्य में आकर के प्राप्त हुई इनका एक सुप्रीम कोर्ट में दिया गया सुप्रीम कोर्ट के जजेस वहां पर बैठ के सुन रहे हैं दिया गया एक भाषण है काफी एक घंटे का वह अगर आपने
00:17:49:01 सुना ना आपको लगेगा कि यह किस लेवल की बातें आपको पता चली जैसे थोड़ा बहुत यहां पर कुछ नहीं है मगर आप जब वो सुप्रीम कोर्ट का इनका पुरी शंकराचार्य जी पुरी शंक सुप्रीम कोर्ट इतना डाल दीजिएगा वो एक घंटे का भाषण आप सुन लोगे आपको ऐसी ऐसी चीजें उससे पता चल जाएंगी साइंटिफिक लेवल पर अपने जो ब्रह्म है जो धर्म है उसको ऐसे समझाया उन्होंने क्लियर कट तरीके से कि आपको तर्क और प्रमाण के साथ कहना ही क्या उसका तो ऐसे बहुत सारे भाषण है और कुल मिलाकर के जब अंत में मुझे जो प्राप्त हुई है जो यहां पर आपको जो देखने को मिलती है जो चीजें वह क्या है दो श्लोक जो अब मुझे सब कुछ पता चल गया अब इसका इंप्लीमेंटेशन कैसे करना है तो दो लोक जीवन को जीने के लिए
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00:18:29:28 वो क्या है रामो विग्रहवां धर्म राम जी हमें मिल गए श्री राम धर्म का साक्षात स्वरूप है जब जीवन में कुछ भी समझ में ना
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00:18:39:06 आए तो श्री राम का अनुकरण करो राम जो है धर्म का साक्षात स्वरूप है और दूसरा क्या जीवन में कभी निराश नहीं होना कि यह फल मिल रहा है कि नहीं मिल रहा है यह हो रहा है कि वो हो रहा है तो क्या है कर्मन वादी का रस्ते मा फलेशु कदाचन तो यह सारी चीजें हमें प्राप्त हुई है ऐसे हमारे पूज्य गुरुदेव है जिनका आज 82 प्रकट उत्सव है मैं अपनी वाणी को इसी के साथ विराम दे रहा हूं हम लोग एक बार लास्ट में जो जयघोष है आपने मंदिरों में एक जयघोष सुना होगा धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो यह जो जयघोष है य इनके जो गुरु हैं यह गुरु है यह करपात्री जी वह जो है तीसरे नंबर पर जो पूज्य गुरुदेव के गुरु हैं यह जयघोष इन्हीं ने लिखा था इन्होंने एक बहुत अच्छा ग्रंथ लिखा है मार्क्सवाद और रामराज उधर रखा हुआ है बीच में तो माक्स वाद और रामराज्य इन्होंने दुनिया भर के नास्तिकों का खंडन करने के लिए ही लिखा है दुनिया भर के नास्तिक उसके आगे घुटना टेकते हैं राम जय राम जय जय
00:19:44:21 राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम धर्म की अधर्म का प्राणियों में विश्व का माता की जय हो गोहत्या अंड हो भारत अखंड हो अखंड हो सर्व भूत हृदय धर्म सम्राट श्री स्वामी करपात्री जी महाराज की जय हो श्री जगन्नाथ महाप्रभु की जय हो श्री बलभद्र महाप्रभु कीय भगवती सुभद्रा देवी की जय हो चक्र सुदर्शन महाभाग्य की जय वृंदावन
00:21:00:06 बिहारी लाल की हर हर महादेव गोविंद जय जय गोपाल जय जय गोविंद जय राधा रमण हरि गोविंद जय जय श्री कृष्ण गोविंद हरे
00:21:36:21 मुरारी हे नाथ नारायण [संगीत] वासुदेवा गोविंद जय जय गोपाल जय जय राधा रमण हरि गोविंद जय जय गोविंद जय जय गोपाल जय
00:22:20:18 [संगीत] जय राधा रमण हरि गोविंद जय जय राधा रमण ह गोविंद गोविंद जय जय गोपाल जय [संगीत]
00:22:56:03 जय राधा रमण हरि गोविंद जय जय हम हिंदू राष्ट्र बनाएंगे हिंदू रा हम भारत भव्य बनाएंगे भत
00:23:30:26 इंदु सर से मान सर तक [संगीत] रन भारत बृहद बनाएंगे स्वस्तिक चिन्हित सूर्य अंकित चित सूर्य अंकित केसरिया ध्वज लहराए हम हिंदू राष्ट्र
00:24:10:02 बनाएंगे हम भारत भव्य बनाएंगे हम भारत बृहद बनाएंगे वंदे मा [संगीत] मातरम वंदे मातरम वंदे [संगीत]
00:24:47:24 मातरम सम उपस्थित सम आदरणीय संत वृंद विदव वृंद भक्त वृंद एवं भक्ति मती मातृ शक्ति आपके अपनत्व की सराहना आपकी आस्था की सराहना भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर की अनुकंपा के अमोघ प्रभाव से आपका सर्वि उत्कर्ष हो ऐसी भावना प्रभु से प्रार्थना
00:25:30:12 [संगीत]
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श्रीमज्जगद्गुरू पूज्य गुरुदेव पुरी शंकराचार्य जी के 82 वें प्राकट्योत्सव पर विशेष #shankaracharya
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