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00:00:01:22 तो अभी कुछ दिनों पहले हमने एक वीडियो डाला था जिसमें कि यह तो अभी कुछ दिनों पहले हमने एक वीडियो डाला था जिसमें हमने एक मुस्लिम विचारधारा को मानने वाले व्यक्ति का एक कुतर्क था उसका निराकरण किया था उसका समाधान किया था तो उसके जवाब में हमें बहुत सारे रेपकेस प्राप्त होने लगे मुस्लिम विचारधारा से प्रभावित लोगों की ओर से तो इसलिए मैं आज एक अंतर को स्पष्ट करने वाला ये वीडियो बना रहा हूं कि मुस्लिम विचारधारा में और सनातन सिद्धांतों में क्या अंतर है सबसे पहली बात यह है कि एक मनुष्य के जीवन में ईश्वर और धर्म की जो उत्पत्ति होती है वो होती है उसके अंदर व्याप्त सत चित आनंद की चाह के कारण यदि इस आधार पर उसके जीवन में धर्म और ईश्वर का ढांचा तैयार नहीं किया जाएगा तो कोई जरूरी नहीं है कि वह धर्म के प्रति आस्थान

00:01:16:24 वित हो ईश्वर के प्रति आस्थान वित हो ईश्वर को सिद्ध भी ऐसे ही किया जा सकता है तो सबसे बड़ा अंतर जो है सनातन में और और जो इस्लाम है उसमें वो यह है कि सनातन ईश्वर को किसी के ऊपर थोप नहीं है कि भाई मेरी पूजा करो सनातन ईश्वर यह नहीं कहता है नहीं मेरी पूजा करो वरना तुम्हारे साथ ये होगा वो होगा अरे भाई पहले समझाओ तो सही तो सनातन सिद्धांत स्वयं कहता है प्रश्न करने के लिए ग्रंथ लिखता है क्या ग्रंथ है अथातो धर्म जिज्ञासा अथातो ब्रह्म जिज्ञासा प्रश्न करने को कहता प्रश्न करने को मना नहीं करता है 5 101 कुरान जहां यह कहा जा रहा है कि

00:02:06:07 ज्यादा प्रश्न मत करो वरना वह आयत तुम्हारे लिए खोल दी जाएंगी जिन आयतों के कारण पिछले कुछ लोग बागी हो

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00:02:13:27 गए थे इसका अर्थ क्या है उसका अर्थ यह निकल रहा है कि वास्तविक जो धर्म था वह कुछ और था मगर उसका पालन करने में कठिनाई आई लोगों को तो उन्होंने मना किया उसका पालन करने के लिए इसलिए कुछ सरलीकरण करके धर्म को दिया गया है तो भाई जो मनुष्य इस दुनिया में जन्म लेता है वह लट के साथ जन्म लेता है उसको जब भी आप धर्म की लगाम द्वारा सीमित करने चलोगे तो उसको तो कठिनाई आएगी उसको कठिनाई ना आए इसलिए धर्म को ही थोड़ी ना बदल दिया जाएगा और यदि यह बदला हुआ धर्म है तो इसका अर्थ है कि यह शाश्वत सिद्धांत नहीं है पहले कुछ और सिद्धांत थे अब कुछ और सिद्धांत हैं [संगीत]

00:03:03:18 और तो बात आ जाती पूरी दोबारा विषय पर आ जाते हैं कि सनातन कहता है प्रश्न करो वहां से शुरू होता है हमारे जितने भी ग्रंथ हैं सनातन धर्म के ग्रंथ वह सभी प्रश्न से शुरू होते हैं भगवत गीता प्रश्न पर है सारे पुराण प्रश्न पर है और प्रश्न करने के लिए तो कहा ही जा रहा है बड़े वचन है श्रुति शास्त्रों के अब जब मनुष्य के अंदर ये जो सत आनंद की प्यास है इस पर बात करना शुरू की जाती है तो इसी के आधार पर यह सिद्ध किया जाता है सनातन के द्वारा कि आपके अंदर जो सत चित आनंद जो आप ढूंढ रहे हो हर तरह से सुखी होना चाहते हो कुल मिलाकर के आपकी चाह यही है कि मुझे ऐसा सुख प्राप्त हो जाए जो कि अवाद रूप से जिसका मैं भोग कर सकू यही है आपकी चाह उ उसी सुख को अगर डिवाइड कर दे तो व सच्चितानंद है आप अगर कुछ जानना चाहो तो जान सको आपको कुछ जानना बाकी ना रह जाए ऐसा दुनिया में कुछ ना हो जो आप ना जानते हो ये चित है आपको कभी मृत्यु का ग्रास ना बनना पड़े यह सत है और आप सदैव सुखी रहो ये आनंद है सत चित आनंद तो व्यक्ति के अंदर

00:04:18:26 व्याप्त सत चित आनंद की जो चाह है उसी से सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई सर्वशक्तिमान ईश्वर है अब इस पर नास्तिक कुतर करने लगते हैं कि किसी व्यक्ति के मन के अंदर को हर चाह का विषय हो यह जरूरी नहीं हां जरूरी नहीं मगर वह चाह वो व्यक्ति छोड़ सकता हो यदि कोई व्यक्ति उड़ने वाले डायनासोर की कल्पना कर रहा है उड़ने वाले हाथी की कल्पना कर रहा है 2024 में तो जब उसको साइंस से बता देगी कि भाई आज की तारीख में ऐसा कोई हाती नहीं है तो उस चा को करना वह व्यक्ति बंद कर देता है छोड़ देता है मगर यह जो चाह है सच्चितानंद की चाह कि मैं कभी ना मरू मेरे प्रियजन कभी ना मर कल इंडिया पाकिस्तान में ये जीत जाए ये हो जाए मौसम ऐसा हो जाए मौसम वैसा बन जाए और मैं सदा सुखी रहूं मैं कभी बूढ़ा ना पढ मेरे दांत कभी ना टूटे मेरा फैट परसेंटेज कभी बढ़े नाना मेरे सिक्स पैक एप्स रहे ये जो वो कर रहा है वो बार-बार प्रकृति के नियमों को तोड़ने की चाह कर रहा है तो जब साइंस ने प्रकृति के उन उन नियमों को तोड़ने की बात को अभी तक नहीं स्वीकारा है तो आप उसकी डिमांड क्यों रखे हो मन में कि ऐसा हो अगर हमारा

00:05:34:01 कोई प्रियजन अस्पताल में दो घं 200 वर्ष की उम्र आयु में भी भर्ती हो जाएगा तो हम चाहेंगे कि वह बच जाए अगर हम ऐसी कामना कर रहे हैं कि वह सुखी रहे हम हमेशा सुखी रहे तो यही कामना है सच्चिदानंद की और इसी से सिद्ध होता है कि दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है तो जो इस्लाम है उसके द्वारा स ईश्वर को सिद्ध नहीं किया गया है सीधे कहा गया है कि मैं ईश्वर हूं मेरी पूजा करो और मैंने जो कहा कहा है वो वो तुम करो अगर तुम करोगे तो तुम मेरी सजाओ से बच जाओगे और आखिर में मेरा दर्शन कर सकोगे तो सबसे पहला क्या अंतर आया सनातन में और सनातन विरुद्ध जो विचारधारा है इस्लाम उसमें क्या अंतर आया सबसे पहले कि सनातन ईश्वर को थोप नहीं है मनुष्य के जीवन पर धर्म को ठोकता नहीं है मनुष्य के जीवन पर उसको सिद्ध करता है उसका और ईश्वर के बीच में एक रिलेशन बताता है और उस वो बताता है कि तुम्हारी जो चाह का वास्तविक विषय है वह ईश्वर ही है और यदि तुम्हें उसे प्राप्त करना है तो तुम्हें इन इन नियमों का पालन करना पड़ेगा जिन्हे सनातन सिद्धांत कहते हैं जिन्हें सनातन धर्म कहते हैं अब इसमें कई बार एक बात आती है कि

00:06:49:04 इस्लाम की तरफ से उनके जो विचारक होते हैं उनके द्वारा य कहा जाता है बार-बार कि भाई हमारा भी षष्टि के प्रारंभ से था हमारा धर्म भी तो और धर्म क्या है वो नियम जो वो नियम जो हमें पशुओं से भिन्न बनाते हैं यह तो इस्लाम के विद्वान भी मानते हैं वो बताते हैं यदि कोई नास्तिक उनके पास आता है तो वो उनसे कहते हैं कि भाई यदि तुम धर्म को नहीं मानते हो ईश्वर को नहीं मानते हो तो बताओ तुम्हें तुम्हारी मोरालिटी कैसे मिली मोरालिटी का मिलना वही मतलब है कि आप पशु से भिन्न मनुष्य कैसे हैं मोरालिटी का आधार क्या है है तो इसका अर्थ है कि धर्म का अर्थ वही है नियम नैतिकता के नियम तो तो इस्लाम की ओर से कई बार दावा किया जाता है कि जो हमारा जो धर्म है हमारे जो सिद्धांत है वो भी सनातन है जबकि अभी मैंने एक बात बताई कि वह खुद ही य क्लेम करता है कि पहले कुछ और सिद्धांत थे अब कुछ और सिद्धांत है इसके साथ ही साथ दो 186 में कहा गया कि कुछ नियम ऐसे थे

00:08:04:18 रोजों की रात में स्त्री संकरना पहले अवैध था अनुमति नहीं थी पर आज से अनुमति दी जा रही है आज से अभी से यह नियम अभी अभी प्रतिपादित हो रहा है इसका अर्थ क्या है कुरान के ही अनुसार कुरान के ही अनुसार कुरान द्वारा प्रतिपादित होने वाले जो सिद्धांत है वह सनातन नहीं है टर्नल नहीं है पहले नहीं थे और अब है और बड़ा दार्शनिक धरातल पर क्या अंतर है कि यदि कुरान को प्रमाण मान लिया जाए तो कुरान खुद यह कहती है कि मुझ पर विश्वास मत करो क्यों क्योंकि दो 106 में कुरान के रचयिता यह बोल रहे हैं कि क्या कहते हैं यह मैं अगर हम कोई आयत बदल देते हैं तो उससे बेहतर आयत देते हैं तो क्या हुआ यहां पर शिक्षा को बदलना सिद्धांतों को बदलना स्वीकार किया गया इसका अर्थ क्या है कि आज मूर्ति पूजा निषेध है तो कल को वैद भी हो सकती है तो जो आज मूर्ति पूजा को लेकर के वो हो रही है दुनिया भर

00:09:20:00 में कि हमें लड़ना होगा अपने उसको बचाना होगा कल को अचानक से कोई नई आयत आ जाएगी आपको कह दिया जाएगा बदल गया भाई तो हम ऐसी चीज की रक्षा कर रहे हैं जो कल को कभी भी बदली जा सकती और यह मैं नहीं कह रहा यह जिस चीज की आप रक्षा कर रहे हो वही कह रही है इसके बाद एक जगह पर बदला भी गया जो मैंने बता दिया आपको 5 101 से पता चल रहा है दो 187 से पता चल रहा है कि बदला गया इसके साथ ही साथ जो मैसेंजर है उसके लिए भी यह कहा गया है कि मैसेंजर भी कभी-कभी शैतान से प्रभावित हो सकता है और वह शैतान से प्रभावित होकर के शैतान जो बात बुलवाना चाहता है वह भी बोल सकता है तो यहां पर अपनी जो क्रेडिबिलिटी है कुरान ने उस पर भी एक प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया कि भाई जो नबी शैतान से प्रभावित हो सकता है उस नबी के द्वारा ऊपर वाले के नाम से आने वाले जो मैसेजेस हैं वह हम समझ रहे हैं मगर हो सकता है कि वो प्रभावित हो गया हो और वो ऊपर वाले के मैसेजेस ही ना हो किसी और के मैसेजेस हो तो यहां पर भी कुरान अपनी क्रेडिबिलिटी पर स्वयं ही सवाल उठा देती है सैटेनिक

00:10:35:03 वर्सेस नाम की जो बुक है वह इसी प्रकरण के इर्दगिर्द लिखी गई थी उस पर मैं नहीं जाऊंगा मगर हां यहां पर क्रेडिबिलिटी पर फिर से एक बार प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जाता है कि जिन सिद्धांतों की हम रक्षा कर रहे हैं वह सिद्धांत वही सिद्धांत है जो मानव जाति की अच्छाई के लिए रचे गए हैं या नहीं अब इसके अलावा एक और बात है जहां पर जिस जिस बात के आधार पर सनातन में और सनातन विरुद्ध सनातन को ना मानने वाले वेदों को ना मानने वाले जितने भी तंत्र है उनमें जो है एक बहुत स्पष्ट अंतर आ जाता है वह क्या कि जिन ग्रंथों पर हम विश्वास करते हैं वह ग्रंथ यह कहते हैं कि उनको ईश्वर ने रचा नहीं है और जिन ग्रंथों पर सनातन विरुद्ध विचारधारा वाले व्यक्ति विश्वास करते हैं वो सभी ग्रंथ यह कहते भी हैं और ये सिद्ध भी है कि किसी किसी देश काल परिस्थिति में उनको रचा गया है अभी इस पर बात करेंगे जैसे कि हमारे यहां दो चार 10 में कहा गया बारण उपनिषद में और भी कई जगह कहा गया कि वेद जो है अपर है उनको रचने वाले ईश्वर भी नहीं है क्यों क्योंकि ईश्वर के ऊपर कोई भी नियम लागू नहीं हो सकता

00:11:50:21 हालांकि कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर पर यह नियम लागू होता है कि व अवतार नहीं ले सकता उसकी मूर्ति नहीं बनाई जा सकती है ना मगर मर फिर भी वो इस नियम इस जब वोह इस नियम को नहीं मानता है जब वो इस नियम को मान लेता है कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर कि वो अवतार नहीं ले सकता मगर उसके ऊपर यह नियम तब भी नहीं लागू होता कि वह झूठ नहीं बोल सकता वो खुद कह रहा है तुम जानते नहीं हम कुछ भी कर सकते हैं इस तरह से वही जहां पर वो यह कह रहा है कि हम अपनी आयतों को बदल देते हैं तो वहां पर वो कह स्वीकार कर रहा है कि हम कुछ भी कर सकते हैं तो जब वो ये स्वीकार कर रहा है कि हम कुछ भी कर सकते हैं तो उस कुछ में भी एक सीमा है वह कुछ कुछ नहीं है असीमित कुछ नहीं है कुछ भी का मतलब कुछ भी नहीं है कुछ भी का मतलब कुछ कुछ कुछ भी नहीं तो जब उसने यहां पर कह दिया कि हम कुछ भी कर सकते तो दूसरी जगह वह अपने अवतारवाद का अपनी मूर्ति का जैसे कहा है उसने 4 150 में कि ईश्वर की कोई संतान कैसे हो सकती है 611 में कहा सॉरी तो ईश्वर की कोई संतान कैसे हो सकती है जबक उसकी कोई पत्नी नहीं तो यहां पर क्या हुआ पत्नी के अभाव में ईश्वर की संतान नहीं हो सकती इसका अर्थ क्या हुआ

00:13:06:02 इसका अर्थ यह हुआ कि जो ईश्वर एक जगह झूठ बोलने के लिए यह बोल रहा है या अपनी बात को बदलने के लिए यह बोल रहा है कि हम कुछ भी कर सकते हैं हमारे ऊपर कोई भी मर्यादा लागू नहीं होती वही ईश्वर अवतार लेने के संबंध में यह कह रहा है कि हमारे ऊपर अवतार ना ले पाने की मर्यादा लागू होती है या संतान का संतान को उत्पन्न ना कर पाने की मर्यादा लागू होती है ठीक है तो क्या हुआ यहां पर अब यह जो बात है कि एक तरफ हम यह मान रहे हैं कि ईश्वर अपनी आयतों को बदल सकता है एक तरफ हम यह मान रहे हैं जैसे सातव सातव जो सुरा है उसमें कहा गया कि ईश्वर जो है भटका है तो जब ईश्वर को भटकाने वाला हम मान लेंगे तो यह कैसे पता चलेगा कि जब यह जो किताब उसने रची है जिसको हम प्रमाण मान रहे हैं यह उसने भटकाने के लिए नहीं रची है और इस बात का प्रमाण क्या है कि ईश्वर भटका आता है वह किताब खुद इस बात का प्रमाण क्या है कि इस किताब को किसने रचा वह किताब खुद तो यदि इस किताब को ही हम प्रमाण मान ले तो उस किताब के ही आधार पर सिद्ध हो रहा है कि इसको रचने वाला ऐसा कोई सोर्स है ऐसा ईश्वर है ऐसा ऊपर वाला है जो कि भटका है और जब वह भटका

00:14:21:08 है तो इस किताब के माध्यम से नहीं भटका रा है यह कैसे पता चलेगा तो यहां पर फिर से एक बार क्रेडिबिलिटी समाप्त हो जाती है अच्छा एक जाकिर नायक साहब ने बहुत ज्यादा सवाल उठाया था कि भाई हम उस किताब का अनुसरण अनुकरण क्यों करें जो कंटक्ट करती अपनी बातों में और उन्होंने चैलेंज भी दिया था हालांकि इस चैलेंज को कई लोगों ने स्वीकार किया है और जवाब भी दिया गया है पर मैं मर्यादा की सीमा का अतिक्रमण करके बात का जवाब ना देते हुए दार्शनिक धरातल पर य एक बहुत अकाट्य सा जवाब दे देता हूं 4150 में संभवतः कहा जा रहा है कि कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर और उसके रसूल के बीच में अंतर करना गलत है ठीक है अब जब अंतर नहीं किया जा सकता तो या तो हम रसूल को माने कि उसको देखा नहीं जा सकता उसकी कोई संतान नहीं हो सकती और या फिर हम ऊपर वाले को माने कि उसको देखा जा सकता है तो यहां पर अवतारवाद सिद्ध हो गया कुरान के अनुसार तो अगर ऐसे हम निकालने बैठे तो अनगिनत कंट्रक्शन कुरान में ही आ जाएंगे जैसे कि

00:15:37:02 एक जगह शराब के लिए आया कि भाई जब आपने शराब पी हो तो आप मस्जिद में ना जाए यानी कि शराब पी सकते हो मगर मस्जिद में ना जाओ मगर आगे क्या आया कि शराब पीना हराम है अब यहां पर दोनों बातें आपस में टकरा रही है अब इन बातों के लिए वो कह सकते कि भाई आपको जो है खुद ना समझे और उसके उसके किसी विद्वान के पास उनसे समझिए तो भाई क्या जाकिर नायक गया था क्या शंकराचार्य के पास सनातन धर्म के बारे में कुप्र चार करने से पहले गया था क्या शंकराचार्य के पास गया था क्या वोह नहीं गया था जबकि हमारे शास्त्रों में वर्णन है कि धर्म का ज्ञान किससे ले सनातन को किससे समझे परंपरा से लक्षण संपन्न सन्यासी से मगर नहीं उसका मोटिव ये था ही नहीं कि उसको जो है एकता लानी थी उसका उसका मोटिव था हिंदू धर्म के बारे में कु प्रचार करना वो उसने किया तो इस प्रकार से देखा जाए तो इस्लामिक जो किताब है उसमें कंट्रक्शन भी सिद्ध हो जाता है और अगर उसका अध्ययन करेंगे तो बहुत सारे कंट्रक्शन निकल आएंगे तो इसलिए यह प्रचार करना भी बंद करें य कंट्रक्शन

00:16:52:08 है दूसरी बात आपने जैसे कहा ना आपका एक उत्तर आ जाता है यह जो मदरा वाली बात है उसके लिए वह क्या आता है कि भाई वह धीरे-धीरे उसकी आयत उतरी हैं इसलिए उस समय की स्थिति यह थी तो वह था और उस समय की स्थिति यह थी तो वह था तो फिर आज की स्थिति के लिए क्या है यह कैसे पता चलेगा अच्छा दूसरी बात एक बात और आ जाती है कि अगर वह स्थिति के वशीभूत हो रहा है चीजें प्रतिपादित हो रही है तो फिर उनको सनातन सिद्धांत इटरनल लॉ क्यों आप बोल रहे हैं सनातन सिद्धांत का मतलब ये नहीं कि आप सनातन धर्म का बोल रहे हैं ध्यान रखिएगा यहां पर मैं गुण की बात कर रहा हूं शाश्वत सिद्धांतों की बात आप क्यों कर रहे हैं अपने लॉज को आप कहिए कि वोह किसी विशेष देश का देश काल परिस्थिति में किसी विशेष देश काल परिस्थिति के लोगों के लिए उतरे थे उनको समान रूप से सभी देश काल परिस्थितियों में लागू करने वाले सिद्धांत मत बताइए एक न पाच के बारे में भी काफी बातें की जाती है जहां पर लिखा हुआ है कि रमजान का पवित्र महीना खत्म होते ही काफिरों को ढूंढो और मारो तो इसके एप्लीकेशन में कई बार इसका अर्थ यह निकलता है कि जो भी कुरान पर विश्वास नहीं करता है उसको

00:18:07:12 रमजान का महीना खत्म होते ही मारो बात ठीक है कि वहां पर कुछ मुशरिक थे मुशरिक मुझे नहीं पता शाब्दिक अर् मैं अपनी भाषा में बात करता हूं कुछ ऐसे डबल स्टैंडर्ड लोग थे जिन्होंने प्रॉमिस किया था कि हम इस युद्ध में आपका साथ देंगे मगर बाद में वह मुकर गए थे तो यहां पर उनकी बात की जा रही है ऐसा कहा जाता है बात ठीक है समझ में आती है मगर यहां पर प्रश्न यह खड़ा होता है कि यदि सिर्फ पर्टिकुलर उनके बारे में बात की जा रही थी तो यहां पर डायलॉग यह आना चाहिए था कि जिन लोगों ने जिन काफिरों ने धोखा दिया है पवित्र महीना खत्म होते ही उनको मारो तो यदि यहां से यह शिक्षा नहीं मिलती है कि काफिरों को मारो यदि कुरान के द्वारा यहां से ये शिक्षा नहीं मिलती है कि काफिरों को मारो तो यह शिक्षा तो मिलती है कि अगर किसी कम्युनिटी के दो-चार लोग 10 लोग कुछ कर देंगे तो उस गुनाह को उस ऑफेंस को पूरी कम्युनिटी का माना जाएगा यानी अगर कुछ 1020 लोगों ने कहीं पर बम लगा दिया उड़ा दिया गया तो वह जिस कम्युनिटी से बिलोंग करते हैं उन सबका नाम लिया जाना ही कुरान ने सिखाया है यह यहां से निकलता है यदि आप यह कहते हैं कि वहां पर जिन वहां पर काफिरों के लिए बात की गई है जिन काफिरों ने वहां पर

00:19:22:13 ऐसा ऐसा किया था उन काफिरों की बात हो रही है और जब आदेश आया कि काफिरों को मारो तो यह नहीं आया कि उन काफिरों को मारो यह आया कि काफिरों को मारो तो इसका मतलब यहां से शिक्षा प्रतिपादित हुई कि जिस कम्युनिटी के लोगों ने ऑफेंस किया है उस ऑफेंस को पूरी कम्युनिटी का ऑफेंस कम से कम माना जाना चाहिए इसके साथ ही साथ एक बहुत ही क्रिटिकल कंडीशन उत्पन्न करने वाली शिक्षा आ जाती है सामने क्या कि भाई 334 में कह दिया गया कि अगर तुमने किसी को माता बहन वगैरह बोल दिया है तो वह तुम्हारी वो हो गई यह तो तुम्हारे सब मुख्य वचन है तुम इनके ठीक विपरीत कार्य भी कर सकते हो इसका अर्थ क्या हुआ क्या हम यह माना जाए इस प्रश्न का उत्तर यदि कोई दे पाए तो दीजिएगा क्या हम यह माने कि उस किताब को मानने वाला उस विचारधारा को मानने वाला जब कभी भी कह रहा है कि बहन भाई तो हम उस पर विश्वास ना करें तो इसका अर्थ है कि आपके बारे में जो लोग ऐसा कहते हैं क्या वह सही है कि इस विचारधारा को मानने वाले लोगों पर विश्वास नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वह विचारधारा का जो प्रमाणिक किताब है वह खुद कह रही है

00:20:37:18 कि नहीं मुख की बातों का कोई वैल्यू नहीं है मुंह की बातें हैं सब तो इसके अलावा एक और भयावह दृश्य वाली शिक्षा है जो प्रश्न चिन्ह खड़ा कर देती है 424 और कई जगह कहा गया है जैसे मूर्ति पूज कों से तब तक लड़ते रहो जब तक मूर्ति पूजा खत्म ना हो जाए या फिर एक बहुत गलत दिखाई देने वाली शिक्षा क्या है जिसमें कि जब तुम युद्ध करते हो इनसे काफिरों से तो वहां की जो स्त्रिया उनको लाओ एक मासिक धर्म के बाद उनसे आप संभोग कर सकते हो यह कैसे आप सिखा सकते हैं भाई हमारे यहां पर यह नहीं सिखाया गया है कि आप युद्ध में जीत जाओ तो वहां की स्त्रियों को ले आओ कैदी बनाओ बंदी बनाओ और ज्यादा दूर मत जाइए केवल रामायण पढ़ लीजिए रामो विग्रह वान धर्मा राम जी ने रावण के यहां से किसी स्त्री को बंदी नहीं बनाया अपने साथ नहीं ले आए ला सकते थे यह नहीं सिखाया तो यह सब अंतर है सनातन में और इस्लाम में अब बात करते हैं कि कई लोग आते कमेंट्स में कहते भाई आपके ग्रंथों में यह लिखा है भाई आपने क्या पढ़ा है पहली बात तो यह है कि जब आपके ग्रंथों से आपको निकाल करके दे रहे हैं अवतारवाद तो आप हमारी बात मान नहीं रहे

00:21:52:19 खैर जो बात आप स्वीकार नहीं करेंगे हम उस पर अड़ते ही नहीं है हमारे पास कुछ ऐसे सिद्धांत जिन पर बात करने से दूध का दूध और पानी पानी हो जाएगा उस पर मैं लास्ट में बात करूंगा मगर जब हम आपके ग्रंथों पर बात करते हैं और कुछ ऐसी बात होती है जो आपको समझ में नहीं आ रही होती तो आप कहते हैं आप भैया उसको जाकर उससे पढ़िए आपने हमारे ग्रंथों को किससे पढ़ा जो आप आकर के हमें बता रहे हो आपके ग्रंथों में य लिखा है भाई किसी एक विशेष वर्ग के कह देने से आर समाज के कह देने से कि नात प्रतिमा अस्थ नात प्रतिमा अस्थ से नहीं हो जाता है कि भगवान अवतार नहीं ले सकते ऋग्वेद में लिखा है भगवान अपनी माया धारा तरह तरह के अवतार लेता है रूप बनाता है प्रकट करता है वेदों में ही लिखा है कि जो ईश्वर होता है वह गर्भ में विचर है गर्भ के मध्य में विरता है मूर्ति पूजा का सिद्धांत दिया हुआ है शता शत्र उपनिषद में मूर्ति पूजा के बारे में बात हो रही है रुद्र की मूर्ति और सीधे-सीधे पत्थर में कहा जा रहा है हे देवता तुम इस पत्थर में आकर के बस जाओ तो आप जब अपने लिए स्वीकार नहीं करते कि हम आपकी शिक्षा अनाधिकृत रूप से ले ले जबकि आपके

00:23:07:19 शास्त्रों ने इस तरह की कोई विधि नहीं दी है कि किससे लेनी है किससे नहीं यह भी बात है हां यह बहुत बड़ा अंतर है सबसे बड़ा अंतर इस्लाम और सनातन में यही है कि इस्लाम में गुरु व्यवस्था का अभाव है 459 में यह कहा गया है कि आप जो है या तो अल्लाह को फॉलो करें और या फिर नबी को फॉलो कर और या फिर अधिकृत लोगों को फॉलो करें अब अल्लाह और नबी व्यावहारिक रूप से यहां पर उपलब्ध नहीं है है ना तो फिर कौन बचा अधिकृत व्यक्ति और अधिक अधिकृत व्यक्ति कौन होगा इसके इसका जो है आप अपने आप आंकलन करिए और जैसे ही आप व्यक्ति अपने आप आंकलन करेगा तो सबकी अपनी अपनी थ्योरी हो जाएगी अधिकृत व्यक्ति के लिए हमारे यहां क्या है बिल्कुल स्पष्ट सिद्धांत धर्म में संचय होने पर ब्रह्मचारी सन्यासी के पास जाएं ब्रह्मचारी आचार्य बनता है अथर्ववेद 11 पा 16 मनुस्मृति 12वां अध्याय 112 से 114 और ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से एवं परंपरा प्राप्ति मम और गुरु की शरण में जाने के लिए बार-बार कहा जा रहा है कि जो इस रास्ते पर पहले गए उन्हीं के पीछे पीछे तुम जाओ और क्या कहा जा रहा है कि गुरु की शरण में जाकर के उनके शरणागत होकर

00:24:22:26 के उनसे प्रश्न करो शरणागत होकर के और क्या कहा जा रहा है सभी शति स्मति शास्त्रों में सामंजस्य की शि शिक्षा देने वाला गुरु है और गुरु वही जो आपका संशय दूर कर दे तो आपने इनमें से कौन से नियम के आधार पर हमारे शास्त्रों को शास्त्रों का अध्ययन किया है जो आ गए आप ना तस प्रतिमा स्ती नात प्रतिमा स्थ अब नाथस प्रतिमा अस्थ के बारे में आर्य समाज ने जो तानाबाना खड़ा किया है जिसकी हेल्प जाकिर नायक ने बहुत ली है है ना तो इसका भी जवाब देते ही चले भाई नात प्रतिमा अस्थ का पहली बात तो अर्थ यह है कि भगवान यह कह रहे हैं कि मेरे समान कोई और नहीं है ईश्वर इसमें भी आर समाज अठखेलिया करने लगेगा कि अरे तो भगवान की बात कर रहे हैं भगवान तो कृष्ण भी थे राम भी थे ईश्वर की बात नहीं कर रहे हैं यहां पर भी अठखेलिया करने लगेगा तो ईश्वर यहां पर यह कह रहे हैं नात प्रतिमा स्ती में कि मेरे समान मेरे प्रतिमान किसी का नहीं है और यह बात जो इनका भाष्य है यजुर्वेद का उसमें लिखी हु है कि प्रासंगिक अर्थ ये भी है इसका यह अर्थ भी हो सकता है मगर सही अर्थ जो मान ग्रहण करने योग्य अर्थ है व यह है तो पहली बात तो ये है कि उन्होंने जो ग्रहण ना करने योग्य अर्थ था वह इन्होंने लिया

00:25:38:07 और ग्रहण करने योग्य जो अर्थ था वह छोड़ दिया कि ईश्वर यहां पर यह कह रहे हैं कि मेरे समान कोई नहीं है दूसरी बात यह आती है क्या शरीर में रहने वाली जो आत्मा है आर समाज के अनुसार बात कर रहा हूं क्या उसका कोई आकार है क्या उसको देखा जा सकता है क्या उसकी मूर्ति है तो अगर प्रतिमा का अर्थ मूर्ति लेना है ना तस्य प्रतिमा अस्ति लेना है तो यह बात तो जीवात्मा के लिए भी है मगर जी जीवात्मा स्थूल शरीर धारण करती है भौतिक शरीर धारण करती है ऐसा शरीर धारण करती है जो मनुष्य की कर्म इंद्रियों का विषय हो सके आंखों का विषय हो सके और फिर उसकी मूर्ति बनती है तो यदि ना तस्य प्रतिमा अस्थ से अर्थ यह निकाला जाएगा कि मेरी कोई मूर्ति नहीं हो सकती तो वो तो जीवात्मा की भी नहीं हो सकती मगर जीवात्मा जिस शरीर को धारण कर रही है उसकी मूर्तियां बन रही है उसके चित्र छप रहे हैं तो इसका अर्थ क्या हुआ कि जब जीवात्मा शरीर धारण कर सकती है तो ईश्वर नहीं कर सकता है इसीलिए सनातन शास्त्रों में भगवान के साकार और निराकार दोनों रूपों की बात की है बन उपनिषद दो तीन एक में लिखा है कि भगवान साकार भी है निराकार

00:26:53:18 भी है दोनों उनके व्यक्तित्व के आयाम है जब आप पढ़ रहे तो केवल वही मत पढ़ो जो आ समाने आर समाज ने अलंकार समाजी ने प्रचारित प्रसारित कर दिया है यह भी पढ़ो ठीक है तो हमारे ग्रंथों को कृपया करके हमें समझाने की कोशिश ना करें अपने ग्रंथों में झांके तो अब बात य आती है अंततः अं गत्वा कि सनातन में और इस्लाम में अंतर क्या है पहला अंतर मैंने आपको बताया कि सनातन ईश्वर को ठोकता नहीं है धर्म को ठोकता नहीं है उसे सिद्ध करता है सिद्ध करता है पूरी दुनिया के नास्तिकों को ले आना जब उनको समझाना पाओ निरुत्तर निराधार करके भेजेंगे वचन है हमारा इसके बाद दूसरा क्या है कि जो इस्लामिक विचारधारा वाली किताब है वह खुद यह सिद्ध करती है कि उसके जो लॉज है उसके द्वारा दिया जाने वाला जो मजहब है दीन है वह शाश्वत नहीं है क्यों क्योंकि वो खुद कह रहे पहले ऐसा था आज ऐसा है वह खुद कह रही है कि आज हम इस चीज को बदल रहे हैं बदल सकता है तीसरी बात कि वह खुद

00:28:08:19 अपनी क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठाती है एक इस बात से कि उसको उस उस मैसेज को पहुंचाने वाले को शैतान काबू में कर सकता है और दूसरी इस बात से कि उसका उसको रचने वाला जो है वह झूठ बोल सकता है या फिर वह अपनी बात को बदल सकता है है ना तो य क्रेडिबिलिटी प प्रश्न हो और तीसरी बात क्या है कि कुछ ऐसी शिक्षाएं हैं जिनका संतुष्टि जनक निर्णय प्राप्त नहीं होता है जैसे कि वह न पाच वाली बात कि यह कैसे सिखा रहा है कि अगर कि कुछ 10 लोगों ने कोई बात कह दी तो उसकी पूरी कम्युनिटी को ही उसमें नाम दे दिया गया यह तो फिर ठीक ही है कि अगर कहीं पर बम लगाने वाले कुछ लोग हैं तो व जिस कम्युनिटी के हो उसका पूरा नाम लेना ठीक है य तो कुरान ही सिखा रही है फिर अच्छा इसके बाद क्या है कि ऐसा कि कुरान की जो शिक्षा है उसमें कंट्रक्शन भर भर के मिलता है जैसे कि आप कह कि मूर्ति पूजा का निषेध है मगर मूर्ति पूजा कुरान से ही सिद्ध हो सकती है अब इसके बाद अगला पॉइंट क्या है कि कुरान जो है जब यह क यह कहते हैं कि कुरान को किसी उसके विद्वान से समझिए तो व विद्वान की पहचान क्या होनी चाहिए यानी कि गुरु तत्व के प्रति आस्था और गुरु तत्व कैसा होना चाहिए इसका

00:29:23:20 निराकरण वहां उपलब्ध नहीं है यह व्यवहारिक अंतर है और अब बात आ जाती है तीन मूल सिद्धांत मनुष्य की वास्तविक चाह है कि वोह सत्य चित आनंद को प्राप्त करे जिससे कि ईश्वर सिद्ध हो सकता है अगर इस इस चाह को आप स्वीकार नहीं करते हैं तो ईश्वर की सिद्धि नहीं कर पाएंगे तो मनुष्य की चाह क्या है सच्चिदानंद को प्राप्त करने की चाह तो क्या उसको सच्चिदानंद ईश्वर दिया जा रहा है क्या उसको सच्चिदानंद रूपी मोक्ष दिया जा रहा है नहीं दिया जा रहा है ईश्वर वो है जो बाधित है किसी नियम के नीचे है मनुष्य क्या करना चाह रहा है दुनिया के हर नियम को तोड़ देना चाह रहा है तोड़ देने वाला बनना चाह रहा है किसी प्राकृतिक नियम के नीचे नहीं रहना चाहता है और उसको मोक्ष में क्या मिल रहा है मोक्ष के रूप में उसे मिल रहा है कि वह आखिर में ऊपर वाले को देख लेगा यह मोक्ष है तो उसकी जो ईश्वर को मानने की धर्म को स्वीकार करने की जो कंडीशन थी वो ये नहीं थी वो थी सभी नियमों को तोड़ देने वाला बनना बनना है ना मगर वह अंत में बन नहीं रहा है यानी कि हम मांग रहे हैं पानी और हमें मिल रहा है दूसरे लिक्विड तत्व

00:30:39:15 जैसे कि कहीं पर एसिड मिल रहा है कहीं पर ऑयल मिल रहा है जिनको व्यक्ति पी तो सकता है मगर उससे प्यास नहीं बुझ सकती है ना और इससे आगे कि उस गंतव्य स्थान तक पहुंचाने वाला जो साधन है यानी कि ईश्वर वह कौन है तो यहां पर सर्वशक्तिमान है किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रम किसी भी प्रकार का मतलब किसी भी प्रकार का नियम नहीं है कोई अगर कहे कि व अवतार नहीं ले सकता तो राम कृष्ण के रूप में अवतार लेता है कोई अगर कहे कि वह कछुआ नहीं बन सकता तो कर् बनता है वरा नहीं बन सकता वरा अवतार लेता है मत्सा नहीं बन सकता मत से अवतार लेता है कोई अगर कहे कि वह झूठ नहीं बोल सकता वो कृष्ण बन जाता है मोहिनी बन जाता है छल नहीं कर सकता तो कोई अगर कहे कि वो सच नहीं बोल सकता व राम बन जाता है और कोई अगर कहे कि वो मूर्ख नहीं हो सकता वह पापी नहीं बन सकता और रावण के रूप में पापी हमारे जैसे मूर्खों के रूप में मूर्ख बन जाता है यह है अब आद्य सर्वशक्तिमान ईश्वर तो जो अब अब कई बार ऐसा प्रश्न आता है

00:31:54:16 कि भाई ईश्वर बुराई कैसे कर सकता है भाई अगर ईश्वर बुराई नहीं कर सकता तो दुनिया में बम बनाने वालों को बना कौन रहा है यह बुराई नहीं है इस पर जो है मुफ्ती साहब शांत हो जाते हैं और कह देते बुराई को बनाना बुराई नहीं है वाह कितनी अच्छी बात है ना और लास्ट में कि पहली बात तो जो मनुष्य को चाहिए वह अंत में मिल नहीं रहा है यानी कि मोक्ष सच्चिदानंद रूपी मोक्ष नहीं मिल रहा है तो हम कहेंगे परम स्वतंत्र मोक्ष जो मनुष्य को मोक्ष दिलवाने वाला ईश्वर चाहिए सर्वशक्तिमान ईश्वर वो नहीं मिल रहा है बाधित ईश्वर मिल रहा है जो जन्म नहीं ले सकता इसकी मूर्ति नहीं बन सकती बहुत से कार्य नहीं कर सकता है वह बात और है कि झूठ ना बोलने वाली मर्यादा को वो तोड़ देता है या बात को बदलने वाली मर्यादा को वह तोड़ देता है और इसके बाद लास्ट में मान भी लिया जाए कि चलो ठीक है वही मोक्ष जो है प्यास बुझाने वा वाला मोक्ष है और वही ईश्वर जो बाधित है मगर व वहां तक पहुंचाने वाला ईश्वर है मगर इन दोनों को साधने के लिए जो नियम है वह शाश्वत नहीं है

00:33:11:07 वह शाश्वत नियम नहीं है तो ना तो परम स्वतंत्र मोक्ष है ना ही सर्वशक्तिमान ईश्वर है और ना ही शाश्वत धर्म है और गुरु तो है ही नहीं कई शिक्षाएं हैं जो भ्रमित कर रही है नौ पाच कंट्रक्शन है ही है ना और ईश्वर की सिद्धि है ही नहीं इसके बाद आखरी में एक बात फिर से मैं दोबारा ले आऊंगा कि मेरे सामने आ सकता है कि भाई हमसे समझो आ करके भाई आपसे कोई क्यों समझे आप जिस ग्रंथ को अच्छे और बुरे के लिए प्रमाण मान रहे हो उससे सिद्ध करो कि किस विधि के द्वारा किसी को सेलेक्ट और रिजेक्ट किया जाए उससे जा हम समझें नहीं कर पाओगे क्योंकि वहां पर चेन ऑफ ट्रेडीशन को आप मानते तो हैं पर कहां से मानते हैं यह मुझे नहीं पता मैं तो कहूंगा कि चेन ऑफ ट्रेडिशनल ही मानते हैं क्यों क्योंकि चेन ऑफ ट्रेडीशन को यानी परंपरावादी

00:34:20:27 है अगर परंपरा से ज्ञान को सुरक्षित रखा जा सकता था कुरान को आने की आवश्यकता ही नहीं थी ज्यादा से ज्यादा वो प्रासंगिक भाषा में जैसे पहले जो नियम प्रतिपादित हो चुके हैं और आज जो है भाषा बदलने के कारण उन नियमों को समझने में परेशानी हो रही है तो ज्यादा से ज्यादा वो जो क्लेरिफिकेशन है उसके रूप में कुरान आ सकती है मगर कुरान तो यह कहती है ना कि मुझसे पहले आई जितनी भी किताबें हैं उनको निरस्त करते हुए मैं आई हूं अब मेरे अंदर जो लिखा है वही उनमें मान्य है बाकी उनमें सारी बातें मान्य नहीं है उनमें मिलावट हो चुकी है कुरान तो य प्रतिपादित करती है तो इसका अर्थ क्या हुआ कि कुरान खुद परंपरा वाद को तोड़ती है तो फिर कुरान को समझने के लिए परंपरा का सहारा कैसे लिया जाए नहीं लिया जा सकता आप कुरान के आधार पर सिद्ध नहीं कर सकते हां थोड़ी बहुत देर के लिए भगवत गीता को मान लीजिएगा तो चार दो और तीन 16 के आधार पर आप यह कह पाएंगे कि परंपरा से प्राप्त ज्ञान ही प्रमाणिक होता है ठीक है ना तो यह सारी चीजें हैं तो व्यर्थ के तंड बाद से बचे और हमारे शास्त्र क्या कहते हैं हमारे ग्रंथ क्या कहते हैं कुछ हमारे यहां के जो अपूर्ण या अजर गगरी छलकत जाए वाले अलंकारी लोग हैं

00:35:36:16 उनके आधार पर आकर के हमारे सामने अपने मंतव्य की पूर्ति करने का प्रयास ना करें तो इसलिए अगर समझना चाहते हैं कोई बात है जो आपको लगता है कि आप सिद्ध कर सकते हैं सनातन सिद्धांतों से श्रेष्ठ सिद्ध कर सकते हैं तो चर्चा के लिए आमंत्रित है और नहीं आते हैं तो जो आपकी दुनिया है उसमें आप खुश रहिए प्रसन्न रहिए अनजान बने रहिए सत्य से मगर जिस दिन सामना होगा उस दिन दृश्य बदल जाएगा जय श्री राम [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 36:14 · 04 Jul 2024

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