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00:00:02:07 तो सभी को जय श्री राम थोड़े से लेट हो गए हम लोग कुछ टेक्निकल दिक्कत आ रही थी तकनीकी पहले की तरह जिस कारण से लेट हो गए चालू करने में ब्राउजर काम नहीं कर रहा था तो अभी जाकर के करा तो फिर हम आए हैं हमारे साथ जुड़ने वाले हैं जो पहले इकन की शिक्षाओं का पालन कर चुके हैं फॉलो कर चुके हैं स्कन के द्वारा जो सिद्धांत उनका अनुगमन कर चुके हैं उसके बाद वहां से उनका कुछ शुद्धि हुई माइंड में शोधन हुआ और अभी वह नाम जप करते हैं भगवान का आ गए हैं मैं उन्हें ले लेता हूं वो अपना परिचय स्वयं ही

00:00:48:01 देंगे जी जय श्री राम भैया जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम मेरा नाम महा सरकार है मेरे बड़े भैया सरकार पहले हम दोनों इसकन में थे करीबन डेढ़ साल तक हम थे उसके बाद हम लोगों ने कुछ ऐसे क्वेश्चन करने स्टार्ट किए कि हम लोग को इसकन कोलकाता ने भगा दिया अगर डायरेक्ट बोले तो भगा दिया वो अच्छा रहेगा नहीं थोड़ा सा मैं कहूंगा चर्चा को चर्चा को शुरू करने से पहले मैं कुछ कहूंगा कि हम लोग यहां पर सिद्धांति विषयों पर चर्चा करेंगे कमेंट में कोई भी व्यक्ति हमारे आदित भाषा का उपयोग ना करे किसी के लिए भी भले वो इकन के फॉलोअर्स के लिए हो या फिर इकन के फाउंडर जो है शील प्रभुपाद जी उनके लिए हो या शव वैष्णव इस तरह की बातें करते हुए कोई भी अमर्यादित शब्द अश्लील शब्द ना बोले हम लोग इसका समर्थन बिल्कुल नहीं करते बस हमारा प्रयास यह है कि किस बात को लेकर के वैचारिक भिन्नता आ रही जिसके कारण व्यवहारिक भिन्नता के चलते जो सनातन विरोधी तत्व है वो हम पर हावी हो जाते हैं वैचारिक भिन्नता के चलते व्यवहारिक

00:02:03:10 दूरी वैचारिक भिन्नता व्यवहारिक दूरी परिणाम स्वरूप जो हिंदू है सनातन है उस पर आक्रमण और वो क्षतिग्रस्त है ना तो इसलिए हमें यहां पर केवल सैद्धांतिक विषय परही बात करनी है तो शब्दों की मर्यादा का सभी याद ध्यान रखेंगे पले वो कमेंट्स में हो या मैं हूं या फिर हमारे जो इस समय जो वक्ता है इस समय आप दिखाई दे रहे हैं जी बताएं

00:02:36:14 हा हमने मतलब इकन में बहुत सारे ऐसे क्वेश्चंस किए जो उनका फिलोसोफी का मेन जो पॉइंट रहता है पहले वो बताते हैं एक पॉइंट वहां से शुरू करते हैं पूरा फिलोसोफी को तो हमने क्वेश्चन डायरेक्ट वो पॉइंट को किया जैसे एक होता है ना अगर हमारे इंडिया के मैप को देखे एक चिकन नेक पीकॉक नेक करके एक जगह है उधर अगर चाइना अटैक कर दे तो पूरा भारत का जयो ग्राफिकल पोजीशन में बहुत ज्यादा अटैक उनका बहुत ज्यादा हावी हो जाएगा ऐसे ही अगर हम इस पॉइंट को पकड़ ले इसकन के कुछ लूप होल्स है जिसको अगर हम पकड़ ले तो शायद उन लोग के पास आंसर नहीं रहेगा और हमने काफी बार यह कोशिश करके देखा है मैं पिछले छ महीने से उनके साथ जाकर चर्चा कर चुका हूं कि आप लोग क्यों इसका आंसर नहीं दे पा रहे हैं तो वो लोग उनके कुछ बड़े-बड़े बहुत स्वामी हैं वो बोलते हैं कि इस क्वेश्चन का जो आंसर है व अगर आप ढूंढने जाओगे तो आप मायावादी बन जाओगे आप राक्षस प्रवृत्ति के हो जाओगे आप असुर बन जाओगे ऐके बस आंसर आंसर आपको नहीं मिलेगा इसलिए आप एक काम करो आप जो प्रभुपाद जी ने कहा है जो हमारे आचार्य गण जो कहा है उसको फॉलो करो उसको फॉलो

00:03:51:14 करके आंख बंद करके भक्ति करते रहो हमने सीधा सवाल किया अरे भक्ति करना है तो कांसेप्ट क्लियर होना चाहिए भक्ति का मतलब है सरेंडर अगर सरेंडर करने के लिए कांसेप्ट क्लियर नहीं है तो कैसे करेंगे आख बंद करके अगर फॉलो करना है तो किसी को भी कर सकते हैं ऐसे करते करते ना करने बात यहां पर प्रश्न ना करने वाली बात है इस पर मैं थोड़ा सा एक प्रकाश डालना चाहूंगा कि हमारे जितने भी सनातन शास्त्र वैदिक वांगम है वो प्रश्न करने के नाम पर ही शुरू होते हैं जैसे जितने भी हमारे पुराण आदि शास्त्र है वो जितनी भी हमारी स्मृतियां है कि वहां पर जैसे भगवत गीता को ले लीजिए अर्जुन ने श्री कृष्ण से प्रश्न किया ब्रह्म सूत्र के जो दो मुख्य वो है शारीरिक भाष के सूत्र अथातो धर्म जिज्ञासा अथातो ब्रह्म जिज्ञासा ये यहां से चालू होता है और ये जिज्ञासा आना आने से ही आपका मतलब सभी मनुष्यों के मन के अंदर यह जिज्ञासा आती है था तो धम जिज्ञासा था तो ब्रह्म जिज्ञासा मगर जो मनुष्य उस जिज्ञासा पर ध्यान दे देता है

00:05:07:02 उसका अध्यात्मिक पथ शुरू हो जाता है और जो उस जिज्ञासा पर ध्यान ना देते हुए एसी टीवी फ्रिज कूलर समोसा चाउमीन बर्गर पिज्जा इन जिज्ञासाओं के लिए ध्यान रखता है कौन सी कौन सी नई फिल्म आ रही है कौन सा यह हो रहा है वो हो रहा है वो यहां से दूर रह जाता है आध्यात्मिक पथ उसका चालू हो जाता है अतो तद गमत सोमा और जब तक यह संशय समाप्त नहीं होता है तो संशय के लिए हमारे शास्त्र में क्या कहा गया है कि संशय आत्मा विनती भगवत गीता में भगवान कह रहे जिसके मन में संशय है वो इस वो परलोक तो क्या इस लोक में भी सुखी नहीं हो पाएगा परलोक की तो बात दूर परलोक में उसको बहुत अच्छा स्थान मिल जाए फिर अब यह जो संशय है संशय का ही व्याख्यान कर संशय को ही दमन करने वाले जो है वह गुरु कहे गए अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर करने वाला गुरु तो अगर कोई स्वयं को गुरु के रूप में खपत करवा रहा है और वो अपने शिष्य से जिसको वो जिसके सामने वह गुरु बना हुआ है यदि वह उसके संशय को समाप्त नहीं कर रहा है तो उसकी जो व गुरु की उपाधि

00:06:22:06 है व चली जाती है उसका संशय क्योंकि वो दूर नहीं कर रहा तो वो गुरु नहीं तो इसलिए मैं यह चीज उठाता हूं कि जैसे अचिंत का अगर यह मतलब निकाला जाए कि आप सवाल ही मत करो प्रश्न ही मत करो अचत का यह मतलब अगर निकाला जाए तो यह फिलोसोफी मैच खाने लगेगी 5101 जो इस्लाम में कहा गया है कि ज्यादा प्रश्न मत करो ज्यादा प्रश्न मत कर का दखल नहीं हा दन में अकल का दखल नहीं देना चाहिए इस्लाम हा देखिए मैं पूरा कर रहा हूं ज्यादा प्रश्न मत करो वरना आपके लिए वो आयत खोल दी जाएंगी जिन आयतों के कारण पहले कुछ लोग बागी हो गए थे यहां इस बात से बहुत सारे तथ उद् भाषित हो गए पहली बात कि पहले धर्म कुछ और था अब धर्म कुछ और है शाश्वता नहीं है धर्म में दूसरी बात क्या हुआ कि हमने उन नियमों को इसलिए बदला है क्योंकि तुमको दिक्कत होगी उन नियमों से इसका अर्थ क्या है कि व्यक्ति के हिसाब से नियम बदल रहे हैं और फिर तीसरी बात क्या है प्रश्न करने से मना किया जा रहा है तो प्रश्न करने से

00:07:37:08 मना जहां पर होगा वहां पर वहां से फिर हमें समझ लेना चाहिए कि यह हमारा आध्यात्मिक मार्ग नहीं हो सकता है है ना प्रश्न करने से मना नहीं होना चाहिए जी बता कंटिन्यू कर फिर हम कुछ दिन पहले कोलकाता में रत यात्रा निकला था हम वहां पर भी गए थे वहां पर पर एक जगह था जगह का नाम था परफेक्ट क्वेश्चन परफेक्ट आंसर वो इकन का ही है पूरा ठीक है हम गए थे वन लोग से हमने पूछ जी हा तो हम लोगों से उनसे पूछा वहा दो व्यक्ति बैठे थे एक हस्बैंड वाइफ बैठे थे तो हम उनसे पूछे कि अगर यह ये चीज आपके फिलोसोफी में है तो यह तो एक लूप होल है यह तो गलत है आप भगवान को कैसे ठुकरा रहे हो यह तो गलत है मैं क्वेश्चन बता रहा हूं कुछ देर बाद ही मैं बता रहा हूं इस क्वेश्चन से आज तक मेरे को आंसर मिला नहीं किसी से इस कन के तो जब उनसे पूछा तो वह डायरेक्टली अपने ही फिलोसोफी के अपने ही गुरु के आचार्य अपने प्रभुपाद जी के जो वाक्य है जो उन्होंने लिखा है उसी को ठुकरा दिए खुद अलग से खुद बताने लगे क्योंकि उनके पास आंसर

00:08:52:10 नहीं है उनके आचार्यों के पास से उनको आंसर नहीं मिला इसलिए वो क्या किए खुद का आंसर खुद बना के देने लगे हम जब पूछने लगे हमको भगा दिया वहां से भी भगा दिया हम आपके पास नेटवर्क रहा आपका नेटवर्क ठीक नहीं आ रहा आप कुछ ऐसा नेटवर्क देख लीजिए जिसमें की मतलब आपका जो पेस है ना वो रुका हुआ है केवल वॉइस आ रही है आपकी चलिए बोलिए बोलिए फिर क्या हुआ अरे अब ठीक है भैया आ रहा है आवाज आवाज तो आ रही है मगर आपका जो चित्र है ना वो रुक रुक कर चल रहा है ठीक है कोई बात नहीं जो है वही बोलिए ठीक है ठीक है तो वहां से आपको मना कर दिया गया कि इस प्रश्न को मत पूछिए हां और खुद के कांसेप्ट को यूज करके अपने आचार्यों के बात को रा दिया गया मतलब एक्चुअली क्वेश्चन जो है उसमें दो पार्ट आते हैं उसमें से एक एक पार्ट ऐसा आता है कि वैकुंठ से कैसे आए

00:10:07:24 तो वो खुद बताने लगे कि वैकुंठ जो है वो वहां से आए हमलोग से नहीं आ वैकुंठ एक मिनट जो वैकुंठ लोक यानी विष्णु भगवान का जो वैकुंठ लोक है है ना हां जी हा वही वही वैकुंठ लोक वैकुंठ लोक से जीव जो है संसार में कैसे आए प्रश्न ये है है ना जी थोड़ा क्लियर क्लियर करते चलिए हां ठीक है मैं बोल रहा हूं उसके ऊपर ही बोल रहा हूं कि वैकुंठ से जीव कैसे आए ये प्रभुपाद जी ने कहा कि वैकुंठ से जीव आए हैं हम पूछते भाई कैसे आए तो उनको उनके पास मेनली दो आंसर रहते हैं एक आंसर रहता है कि पाप करके वहां से आ गए कुंठ करके अब वैकुंठ में कैसे कुंठ किया यह समझ में नहीं आता और दूसरा पॉइंट जो वो बोलते हैं वो बोलते हैं कि हमने भगवान बनने का कोशिश किया हमने भगवान बनने का कोशिश किया वहां पर पहले से श्री कृष्ण ही भगवान है हमने जब भगवान से बोला कि हमें भी भगवान बनना है तो भगवान ने हमारे लिए अलग पृथ्वी बना दिया जहां पर हम भगवान बनने की कोशिश कर सकते हैं एक और एनालॉजी जो देते हैं वो बोलते हैं कि वैकुंठ में हम लोग भगवान से ईर्ष करके आए अच्छा यानी वैकुंठ लोक में भी ये कुंठ है कुंठा है पाप

00:11:23:00 है अपराध है वहां पर भी प्रॉपर सच्चिदानंद नहीं है और ऐसा भी नहीं भैया वहां पर कहा जाता है कि वैकुंठ लोक में हम भगवान से कुछ डिजायर किए मतलब डिजायर करना भी पाप है इसलिए हमको इधर आना पड़ा डिजायर कर दिया तो ये तो वैसी लोको हो गई वो फैंटेसी जो चलती है जो मतलब वैकुंठ लोक में भी मुक्ति नहीं है वो परमधाम नहीं है एक तरीके से और इनके बड़े बड़े जो आचार्य हां जी बिल्कुल भैया इनके बड़े-बड़े जो आचार्य हैं उनमें से एक है राधेश्याम राधेश्याम प्रभु राधेश्याम प्रभु जी है वो ओपनली उनका प्रभु जी य में आपको उनका लेक्चर मिल जाएगा आप वहां पर देखिए वहां पर उन्होने क्लियर बोला है कि वैकुंठ में अगर हम फिर से गए फिर से आ जाएंगे य खुद श्री कृष्णा का बात को ठुकरा दे रहे हैं अगर हम इकन का ट्रांसलेशन से भी चले तद धाम परमम मम जो कहते हैं भगवत गीता में वहां पर मतलब राधेश्याम प्रभु ने खुद य एक्सेप्ट कर लिया कि अगर हम वैकुंठ गए फिर अगर हम वहां कुछ उल्टा सीधा काम जो कि लॉजिकली पॉसिबल नहीं है आना पड़ेगा य पर एक बार यह कहना चाहूंगा कि बैकुंठ लोक

00:12:38:03 और गोलोक धाम के बीच में तो डिफरेंस मानता है नान की नहीं मानता है एक से मानता हैन का कौन सा सेक्शन और एक सेक्शन नहीं मानता कौन सा सेक्शन मतलब हमारे जो गुरु थे इसकन के वो गोलोक धाम वैकुंठ में ज्यादा डिफरेंस नहीं करते थे और स्वामी है ज्यादा और कम नहीं होता डिफरेंस है था कि नहीं था हां था वो तो 100 पर तो जब वो डिफरेंस था तो फिर यहां ये बात आती है अगर उनके अनुसार मुक्ति का नाम गोलोक धाम है तो बैकुंठ लोक को वो लोग कहेंगे कि कहीं ना कहीं वो बैकुंठ लोक में कुछ ना कुछ कुंठा है मगर बैकुंठ लोक का नाम सार्थक नहीं होता अगर वहां कुंठा है वो बात एक अलग है मगर स्कोन के अनुसार बैकुंठ लोक परम धाम नहीं है ना इकन के अनुसार गोलोक परम है मेरा कहने का मतलब यह है मैं समझा दूं कि क्या यह बात जो आप कह रहे हैं कि भाई वहां से भी व्यक्ति वापस आ सकता है ये इस भाव से कह रहे हैं कि उनके अनुसार जो मुक्ति धाम है परम धाम है उस धाम में भी जो है मुक्ति नहीं है वहां पर भी कुछ ना कुछ दिक्कत है आप ये कहना चाह रहे हैं गलो आपको

00:13:53:07 फिर गोलोक धाम बोलना चाहिए गोलोक धाम के विषय में भी उनकी यही राय है हा एकदम हा तो वैकुंठ मत बोलिए उसको इनका आपका कहने का आपको यह कहना चाहिए कि गोलोक धाम में भी अगर व्यक्ति पाप करता है ऐसा करता है वैसा करता है तो व य आ जाता है मुक्त मतलब गोलोक धाम में भी वो मुक्त नहीं होता है वहां भी अपराध है वहां एक चीज इन लोग का मेन जोय पहले ये पहले क्लियर कर दीजिए जिसको आप वैकुंठ वैकुंठ लोग कह रहे हैं वही गोलोक धाम है जी बिल्कुल वो गोलोक और कौन का एक मान्यता है कि एक है कुंठ जगत एक है वैकुंठ जगत और कुंठ जगत और वैकुंठ जगत में भेद है कि यही है राधेश्याम प्रभु जी यही है क्या अच्छा इन्होंने इनका लेक्चर है जिसमें इन्होंने ये बोला है हा जी क्या कहते हैं कि अगर आपने वहां जाकर के गलतियां की तो आप वहां से भी फिर से वापस आ जाओ मतलब मुक्त नहीं हुए वो कहते हैं कि आपके पास फ्रीनेस जो है इंडिपेंडेंस जो है वो हमेशा रहती है वो भगवान आपसे नहीं छीन मैं बोलता हूं ठीक है भाई कोई बात नहीं लेकिन जो आत्मा है वो तो सच्चित आनंद है उनके हिसाब से जीवात्मा को वो आत्मा मानते हैं लेकिन उनके हिसाब से जीवात्मा भी सच्चित आनंद

00:15:08:14 है मैं बोलता हूं हो सकता है लेकिन कैसे अगर वोह सच्चित आनंद है सचित आनंद का मतलब में ये भी आता है फुल ऑफ नॉलेज उसके पास ज्ञान का फुल फुल ऑफ नॉलेज है उस तो अगर उसके पास पूरा ज्ञान है तो फिर ऐसी इच्छा कैसे आ गई जो भगवान के विरुद्ध है वो इच्छा कैसे आ गई ये मेन पॉइंट ये फर्स्ट पॉइंट सेकंड पॉइंट अगर इच्छा आ भी जाती है क्या भगवान इतना निर्दय है कि वो उसका इच्छा को पूरा नहीं करेंगे यह इससे पाया जाता है कि इसकन से जो प्रतिपादित ईश्वर है वह गलत है वो ऐसा हो नहीं सकता देखिए वो गलत है कि सही है यह तो निर्णय जब कोई चर्चा आगे बढ़ेगी जब स्कोन को भी उसका पक्ष रखने का वो दिया जाएगा सर तब बात होगी मगर हां यहां प्रश्न जरूर खड़ा हो जाता है कि इस कन के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है उसके द्वारा जो प्रतिपादित होने वाला धाम है परम धाम है उसको गोलोक धाम कहिए बैकुंठ धाम कहिए वहां पर जाने के बाद भी पाप और पुण्य बच गया है यानी कि वो ऐसा मान सकते हैं कि इस लेयर के बाद एक और लेयर मगर वो मुक्ति है नहीं वो भी एक संसार है जहां आपसे गलती होगी तो आप फिर आ जाओगे है ना सजा के रूप में आओगे एक तरीके से जो इस्लाम का कांसेप्ट है स्वर्ग वाला स्वर्ग और नरक वाला

00:16:23:24 कुछ वैसा कांसेप्ट है यहां प हा काफी चीजें मैच खाती है बिल्कुल अब्राम रिलीजन और इकन में ज्यादा डिफरेंस है नहीं अगर सनातन धर्म की बात करें तो सनातन धर्म बिल्कुल ही अलग हैसे फिर आपके साथ क्या हुआ मतलब कैसे आप कैसे आपका धीरे धीरे वो पथ जो है ठीक हुआ छ महीने से हम लोग करीबन करीबन छ महीने से हम लोग आंसर ढूंढ रहे थे तो बहुत सारे हम लोग एक मिनट एक मिनट ये भाई साहब का एक प्रश्न आया है हमारा लोग सिर्फ आपस में ही लड़ता रहता है अभी आपको बुरा लग रहा है भाई साहब अभी आपको बुरा लग रहा है मार्तंड जी अभी जब संत रामपाल तथाकथित संत रामपाल ब्रह्मा विष्णु महेश का पिता बताएगा कबीर को और जब हम उसको जाकर के कहेंगे कि मत कहो ऐसा तब आपको बुरा नहीं लगेगा तब आपको बुरा नहीं लगेगा इसका अर्थ क्या हुआ अभी ये तथाकथित आचार्य प्रशांत ने एक बात कही है ज बाला के बारे में हम लोगों का वीडियो आने वाला है मैंने बता दिया है मगर एक बात कहिए कि जावाला को यह नहीं पता था कि उसके पुत्र का बाप कौन है पिता कौन है यह शब्द से बाप बाप कौन है ये

00:17:38:26 किसने कहा तथाकथित आचार्य प्रशांत ने अब अगर उसको हम जाकर के काउंटर करेंगे तो आप कुछ नहीं कहेंगे आपका कहने का अर्थ क्या है मार्तंड जी कि राधा राधा जी को कोई गाली दे शिव जी को कोई गाली दे उसको हम कुछ ना कहे तुलसीदास जी को रामचरित मानस रचने वाले को लोग मायावादी कहते हुए कहे कि वो जो है वैष्णव नहीं है वल्लभाचार्य को मायावादी कहते उनको हम कुछ ना कहे और हम लोग शांत रहे चलिए एक बार को मान लेते कि हम शांत रहे मगर इसका परिणाम पता है क्या होता है इसका परिणाम यह होता है कि जब कोई व्यक्ति बाहरी व्यक्ति हम पर आक्रमण करता है तो उस समय हम संगठित नहीं होते हैं इसका परिणाम यह होता है हम लोग जो है क्वेश्चनिंग करते हैं इसीलिए हमें कोई दिक्कत नहीं है मत मानो भाई बैकुंठ को मत मानो कुछ मत मानो शिवजी को विष्णु मत मानो ठीक है आपकी पर्सनल लाइफ है आपने व्यक्तिगत जीवन में अपने अनुसार अपनी जीवन शैली आप चुन रहे हैं मगर वो जब समष्टि के दृष्टिकोण से जब बाधा उत्पन्न करती है समाज के लिए तब वहां बोलना पड़ेगा ना और आपको स्पन के लिए बात हो रही है तो आप बोल रहे आपस में ही लड़ रहे हैं आपको आर समाज के लिए बात हो रही है आपस में लड़ रहे हैं बोल सकते

00:18:53:26 हो मगर अभी वही मैंने कहा त दर्शी रामपाल के लिए बोलूंगा खुद को कल की कहने वाले के लिए मैं बोलूंगा तब आपको बुरा नहीं लगेगा क्यों नहीं लगेगा इसका अर्थ यह है कि आपने चुन रखा है कि मुझे जो जो चीजें अच्छी लगती है उन पर कोई उंगली ना उठाए बाकी सब पर उठाए यह सिद्धांत आपने डिसाइड किया है शायद अपनी लाइफ में हमारा य सिद्धांत नहीं है गुरु गोविंद और ग्रंथ परंपरा प्राप्त ग्रंथ के विरुद्ध शास्त्र के विरुद्ध आचार्य परंपरा के विरुद्ध और गोविंद के विरुद्ध जब कोई जाएगा तो हम उसकी उस जाने वाली शिक्षा पर विरुद्ध जाने वाली शिक्षा पर क्वेश्चनिंग करेंगे जिससे कि उनके बहकावे में आकर के हमारा ही भाई हमसे दूर ना हो जाए हो रहा है ऐसा जैसे वो सीन है केरला स्टोरी का जिसम जो बिटिया होती है व अपने पिता के मुह पर आके थकती है किसी के बहकावे में आ जाने से उसी का बदला हुआ रूप है जब की कोई स्कोन से जुड़ जाता है उसको यह बताया जाता है कि व जो लोग शिव की पूजा कर रहे हैं वो अक्त है ये क्या हुआ हमारा ही भाई हमसे छीन लिया गया ना उसके अंदर हीनता आ गई कि शिवजी पर चढ़ा हुआ प्रसाद मत ग्रहण करना

00:20:08:27 यह क्या है इसलिए क्वेश्चनिंग आवश्यक है अगर आप लोग यह सोचते हो कि आपस में नहीं लड़ना चाहिए सामने वाले से लड़ना चाहिए तो सामने वाले से सामने वाले से लड़ने के लिए हमको संगठित होने की आवश्यकता है कैसे लड़ो ग उनकी तैयारी देख चुके हो हमारे पास क्या है आर्य समाज इसकन ब्रह्मा कुमारी रामपाल आचार्य प्रशांत ये हमारी तैयारी है इसी का फायदा उठाया जाता है इसलिए सोचिए बोलने से पहले जी आप कुछ बोल रहे थे जी ये ये जो एक ट्रेंड है ना जो इकन का एक एक्सपो शियल ट्रेंड है जिसको बोलते हैं मतलब एक साथ बहुत ज्यादा बढ़ रहा है अभी यह बहुत अच्छा नहीं है क्योंकि

00:21:01:14 जो सनातन धर्म नहींन धर्मन धर्म है इसको इसको ठीक से माना नहीं सकते इसमें आप देखिए इतना जरा लूप होल्स है शिव जी को यह भगवान नहीं मानते व सब क बार कर चुके अभी टॉपिक मेरे पास और है एक मुख्य टॉपिक था कुछ लोग कहते हैं वैवा चार्य पर उंगली उठाते हैं स्न की आड़ में तो अभी देख लेते चार्य पर उंगली उठा रहे कि नहीं उठा रहे उठा रहा है तो कौन उठा रहा है तो सबसे पहली बात है कि एक लेख है कन्वर्सेशन एंड मॉर्निंग उसमें मॉर्निंग वक हुई है अगस्त 29 1975 में यह वाणी स्ट्स नाम की जो वेबसाइट है वहां पर आपको मिलेगा तुलसीदास जी ही न नॉट प्योर वैष्णव अब तुलसीदास जी को हम सब जानते हैं राम जी के भक्त के रूप में वैष्णव के रूप में जानते हैं रामानंद संप्रदाय के हैं और उन्होने क्या लिखा

00:22:10:09 कि तुलसीदास जी हां थोड़ा सा ऊपर ऊपर जाइए यह वाला नहीं है यही वाला है इसमें इसमें एक लाइन थोड़ा सा नीचे करिए इसके जस्ट बाद वाली लाइन है नाय तो तुलसीदास टीचिंग बोनाफाइड य जो क्वेश्चन हो रहा है इस क्वेश्चन के नीचे वाला जो लाइन है वो दिखा दीजिए यह तो पेज बदल गया ना ना ये पेज बदल गया उसमें लिखा हुआ है ही इज नॉट प्योर वैष्णव तो वैष्णव तुलसीदास जी भी नहीं है और कहां लिखा है इन्होंने

00:22:52:08 एक जगह पर और लिखा है लेटर टू का ऐसे करके कुछ नाम भाई शोधित कर लेना एक लेटर है य भी वाणी कोर्ट में मिल जाएगा हैमबर्ग 6 सितंबर को य लेटर की बात हो रही है यहां पर भी यह बोल रहे हैं कि उनकी जो टीचिंग है वह इसको थोड़ा बड़ा करिए थोड़ा सा बड़ा करिए बड़ा हो सकता है य हां जी किए ही वा मायावादी टच हा ही वास नॉट प्योर वैष्णव वा ए मायावा गट मायावादी टच ही माया ठीक है ठीक है दीजिए अब देखिए जो वैष्णव है तुलसीदास जी को पूरा संसार वैष्णव के रूप में जानता है और सबसे ज्यादा बिकने वाली धार्मिक ग्रंथ है रामचरित मानस सबसे ज्यादा लोग घर में जाने वा और यह कह रहे हैं कि वो जो है वैष्णव नहीं है तो यह कैसे वैष्णव है जो दूसरे वैष्णव की निंदा कर रहे हैं आपके अनुसार तो मायावादी एक निंदा

00:24:07:08 पूर्ण शब्द है ना तो आप उनको मायावादी कह रहे हैं आपके अनुसार आप हीन भावना से देख रहे हैं तुलसीदास जी के लिखे हुए को सभी संप्रदाय प्रमाण के रूप में उपयोग करते हैं जब मैं और मेरा भाई हा इसकन जाते थे शिक्षा ग्रहण करने तब वही प्रश्न उत्तर में हमने पूछा था कि तुलसीदास जी ने तो शिव जी को ईश्वर बताया फिर राम जी शिव जी की उपासना करते हैं रामस रिद शिव शिवद राम ऐसा श्लोक है फिर हमारे जो गुरु थे उन्होंने ओपनली कहा कह दिया कि तुलसीदास जी को हम अथॉरिटी नहीं मानते वह मायावादी टाइप थे मायावादी नहीं बोला मायावादी टाइप फिर वल्लभाचार्य का वल्लभाचार्य जी को उन्होंने मायावती ओपनली कह दिया का पूरा हमारे पास वीडियो प्रूफ है व आपके साथ डिबेट करने आया था मतलब डिस्कशन करने आया था पीयूष पियूष वडवानी आए थे ना वो हमारे साथ जब बात कर रहे थे उनका पूरा क्लिप हम लोग का हम लोग का पास है कि वल्लभाचार्य मायावादी

00:25:17:10 है तो य वैष्णव में भी भेद करते हैं हा तो अब यह देखिए कि यह किस प्रकार के वैष्णव है जो तुलसीदास जी को भी घृणा से देख रहे हैं तुलसीदास जी के लिए भी जो है वैमनस्यता का बीज बो रहे हैं लोगों के मन में यह वैष्णव नहीं है अगर इस प्रकार से कहा जा रहा है तो यह वैष्णव नहीं है अभी हम लोग वैष्णव कौन होते हैं इस पर भी बात करेंगे पर पहले जरा देख ले अब इन्होंने कृष्णा द सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गॉड हेड में क्या लिखा है प्रभु श्री राम के बारे में कृष्णा बुक 47 नंबर का चैप्टर है शायद को ये भी आपको मिल जाए जिसम की वो कहा गया है शील प्रभुपाद जी के संदर्भ से कहा गया मगर मुझे यह नहीं लगता है कि श प्रभुपाद जी का यह सब लिखा हुआ है क्योंकि उसमें भी बहुत सारी डाउट है ना कौन सी उनकी ऑथेंटिक गीता है बचा है कि नहीं उनके नाम से क्या क्या बदला गया है क्या क्या नहीं बदला गया हमको क्या पता अभ शल जी ऐसा लिख सकते मैं कभी नहीं मान सकता मगर उनके नाम से लिखा हुआ है अकॉर्डिंग टू स्कन क्या लिखा है ज सूपनखा उनके पास आई थी तो एक क्षत्रिय होते हुए

00:26:33:00 उनको उसे सेटिस्फाइड करना चाहिए था हा हा मगर क्या किया उन्होंने उसकी नाक काट करके उसे एक अगली वुमन बना दिया अगली वुमन और इसका कारण क्या बताया कि ही वास सो अट्रैक्टेड बाय द ब्यूटी ऑफ सीता बोलिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम के लिए इस प्रकार से नसता का भी भरा जा रहा है और यह वैष्णव है हरि हरि में भेद कर रहे हैं हरि हरि में भेद कर रहे हैं यह तो मैं पहली बार जब स्पन गया था 2018 में गया था और वहां पर कोई वो चल रही थी गीता क्लासेस टाइप की तो उसम मैंने पहली बार राम को ही लेकर के गया था राम को तो वहां पर जब उन्होंने पूछा कि धर्म क्या है तो मैंने हाथ उठाया बोले कि क्या है धर्म बताइए मैंने राम को फॉलो करना धर्म है बोले हां राम को फॉलो करना धर्म है और भगवान श्री कृष्ण को ओबे करना धर्म है हां मैंने कहा ये भी सही है राम को फॉलो कृष्ण को ओबे हां सही है अनुकरण अनुसरण ठीक है

00:27:48:06 तो उस समय तक भी मेरे पास मेरे इर्दगिर्द ऐसे लोग थे जो मुझे पेन लेकर के समझाते थे कि राम जी 12 कला के क्यों और कृष्ण जी 16 कला के क्यों राम पूर्ण नहीं है कृष्ण जी पूर्ण है मगर उसके बाद क्या हुआ लहर आई प्रभु श्री राम की लहर आई और क्या होता है जो भाई मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों किया मगर मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों किया स्न वालों ने मगर क्या होता है कि जो बिजनेस पॉइंट ऑफ व्यू से अपना काम कर रहे होते हैं ना तो वो देखते हैं किस चीज की हर है उसके अनुसार अपने सिद्धांतों में चेंज करने लगते हैं तो जो स्न ये समझा रहा था एक समय प जो जो राम है वो 12 कलाक है और कृष्ण है जो 16 कलाक है कृष्ण जी श्रेष्ठ है राम जी थोड़ा है ठीक है वही वही राम वही राम का विरोध करने वाले वही राम के प्रति व मनता भरने वाले वही राम और कृष्ण में वो श्रेष्ठ निमता का भेद करने वाले उसके थोड़े दिनों बाद जब य राम मंदिर प्राण प्रा हुई तो यात्रा निकाल रहे तरह तरह से राम जी की बातें हो रही है जगह जगह सब कुछ होने लगा और राम और कृष्ण की

00:29:03:07 एकता की बात होने लगी उस समय वरना आप लोगों को वो वीडियो याद होगा ना जिसम ये जो हमारे तुलसी पीठाधीश्वर जाने जाते हैं जो राम भद्राचार्य जी राम भद्राचार्य जी उन्होंने कहा था कि मां का दूध पिया हो तोन माता जी ने अगर नि से दूध पिलाया हो तो आकर के शास्त्रार्थ कर लो वो भी इस बात पर नाराज हुए थे कौन से जी है ना तो क्या है कि यह चीज थी ना करते थे ना ऐसे आज बदल गया क्योंकि आज राम जी की हवा ऐसी लहर ऐसी हुई तो लहर के साथ साथ थोड़ा सा अपने अंदर अपडेशन लाए जो भेद फैला रहे थे राम कृष्ण में वो भेद फैलाना कम कर दिया तो क्या हुआ वैष्णव को भी हीनता की दृष्टि से देखने वाले राम को हीनता की दृष्टि से देखने वाले प्रचारित प्रसारित करने वाले और उसके साथ ही साथ

00:29:59:08 [संगीत] इसके साथ ही साथ इसके साथ ही साथ क्या है कि आपने भगवान विष्णु को भी नहीं छोड़ा वैष्णवास्त्र हमने कब कर दी मधवा चार्य जी की निंदा कब कर दी हमने रामानुजाचार्य जी की निंदा यह जो विष्णु की निंदा हो रही

00:30:38:07 है भगवत गीता एस इट 2 प2 यह देखिए भगवत गीता एस इट 2.2 इसमें क्या लिखा है इन्होने इसमें क्या लिख रहे हैं कि एकमात्र कृष्ण ही ऐसा दावा कर सकते हैं कि वह भगवान है कोई दावा करने की बात हो रही है उस पर कहा जा रहा है एक मात्र कृष्ण ही यह दावा कर सकते हैं कि वह भगवान है ब्रह्मा शिव या नारायण सहित कोई भी जीव नारायण विष्णु भगवान विष्णु भगवान भी पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है कृष्ण के समान हरि हरि में भेद हो रहा है विष्णु और कृष्ण में भेद हो रहा है कृष्ण और राम में भेद हो रहा है प्रश्न करते हैं य ये

00:31:44:26 जो इनको आप ते अब जरा वैष्णव की बात भी देख ले आप आप कुछ कह रहे थे बताइए जब हम प्रश्न करते हैं कि ऐसा भेद क्यों है ऐसे कैसे हो सकता है ईश्वर में नहीं आ सकता तब कहते कि यह अचिंत विषय है मल हमारी बात तो मानो तु मतलब क्या है कि हमारी बात तो मानो क्योंकि हम तुम्ह क्योंकि हमारी बात मानो क्योंकि हम तुम्ह प्रमाण दे रहे हैं और जब आप कोई तर्क करें प्रमाण अचत हर बात का अंत यही है अभी जब हम इंदौर में गए थे उनके साथ बात करने जो थोड़े वृद्ध थे जो पूरी नॉर्थ जो स्न एसोसिएशन उसके वो है सचिव है है ना वो बोले कि मेरे अंदर सवाल आते थे अपने को लेकर के सवाल यह चीज रिकॉर्ड नहीं हुई है मगर उन्होंने बोला था यह चीज रिकॉर्डेड नहीं है तो उन्होंने हमसे बोला कि भाई मेरे अंदर बहुत सारे सवाल आते थे अपने अपने को लेकर के ये को लेकर के वो को लेकर के लास्ट में जब हमारे बीच कन्वर्सेशन हुई जब हमने यह पूछा कि जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण शिव बन सकते हैं मगर कृष्ण नहीं तो ये ईश्वर

00:33:00:06 की सर्वशक्ति मत्ता भ भंग हो रही है यहां प तो बोले के ये तो अचिंत विषय तो क्या हुआ उनकी यात्रा कहां से शुरू हुई थी सवाल से जी सवाल के कारण वो पहुंचे उनके अनुसार प्रभुपाद जी के पास प्रभुपाद जी के पास जब वो पहुंचे तो उनको उनके सवालों के हल मिले और सवालों का हल क्या मिला अचिंत विषय यही तो हल मिला यही तो हल है जी कुछ मत पूछो सब गलत है मधवा चार्य का द्वैत गलत शंकराचार्य का द्वैत गलत और सही क्या है अचिंत अचिंत कुछ भी सोचना ही सही है कुछ भी ना सोचना सही है कुछ भी चिंतन मनन ना करना सही है अगर तुमने शंकराचार्य का वो कर लिया तो तुम गलत हो जाओगे तुमने मधवा चार्य का वो कर लिया फॉलो तो तुम गलत हो जाओगे तुलसीदास जी का कर लिया तो गलत हो जाओ वल्लभाचार्य जी का कर लिया तो तुम गलत हो जाओगे तो करें क्या कुछ मत करो यही सही है क्योंकि हम कह रहे हैं है ना ये वैष्णव है अब हम लोग पहले नियम जरा सा मैं बताना चाहूंगा वैष्णव के नियम क्या है शास्त्र

00:34:15:24 समत जो भी बातें हमने अभी बोली है उनके लिंक डिस्क्रिप्शन में दिए गए हैं आप लोग वहां पर चेक कर सकते हैं जो भगवान विष्णु का भक्त होता है वो वैष्णव कहलाता है ठीक है जो भगवान विष्णु का भक्त होता है वह वैष्णव कहलाता है पद्म पुराण उत उत्तराखंड उत्तरखंड और 8वा अध्याय दूसरा श्लोक ठीक है अब बात य आती है कि अगर आप विष्णु और कृष्ण में भेद नहीं मानते हो तब तो आप कृष्ण के रूप में अगर उसकी पूजा कर रहे हो तो तो ठीक है तो आप वैष्णवी हो मगर जब आप विष्णु को भी कृष्ण से अलग कर रहे हो तो फिर आप स्वयं को वैष्णव कैसे कह सकते हो फिर तो आप अपने आप को कृष्णव कहो क्रस्ट णव कहो क्योंकि कृष्ण और क्राइस्ट में कोई अंतर नहीं है तो आप अपने आप को वैष्णव कह लो है ना मगर आप वैष्णव कैसे कहोगे जब आपने विष्णु को वहां से अलग कर लिया और फिर विष्णु को नीचे कर दिया भेद करके नीचे भी कर दिया फिर भी आप उसको जो है कह रहे हो कि जो है हम वैष्णव है वैष्णव क्यों कहना क्योंकि पीछे से अपना जो कड़ी

00:35:30:26 है वो जोड़ के रखनी है कड़ी को जोड़ने के बारे में भी समझ लीजिए इस्लाम की उत्पत्ति होती तो इस्लाम ईसा मसीह को छोड़ता नहीं है इस्लाम कहता है कि वो भी हमारे उन्होंने ही भेजा है उसी खुदा ने भेजा है उनको भी व छोड़ता नहीं अलग नहीं करता क्यों क्योंकि अगर उस समय जब वो उसम था जब वो खड़ा हो रहा था अपने पैरों पर उस समय अगर वो ये बात कहेगा कि मैं ईसा मसीह को नहीं मानता पहले वाले जो महापुरुष है उनको नहीं मानता या ईश्वर का स्वरूप है उनको नहीं मानता उसकी बात पर विश्वास कैसे हो इसके बाद क्या हुआ आज एक अपने आप में कल्ट है नया और सुनो तत्वदर्शी तथाकथित तत्वदर्शी रामपाल मैं भी पीछे वाले को मानता हूं राम को मानता हूं कृष्ण को मानता हूं उन सबके अनुसार शिक्षा यह है कि कबीर भगवान यह नहीं है कि मैंने मना कर दिया राम कृष्ण को मानने से पीछे वाले को पकड़ के रखना आवश्यक है शिक्षा नहीं देनी है मगर पीछे वाले के नाम से दे जिससे की हमारी शिक्षा लोग प्रामाणिक मान सके अरे भाई दो अपने को नया भगवान बनाओ कबीर को नया भगवान बनाओ या किसी को भी किसी भी तरीके के भगवान बनाओ सनातन शास्त्रों से तो मत जोड़ो अब जैसे आचार प्रशांत है वो य विचार फैला रहे होशो वाद फैला रहे हैं उन्होंने कह दिया उसमें

00:36:46:15 क्या कहते हैं कि भाई जवाला को नहीं पता था कि उसके पुत्र के पिता का नाम क्या है जबक वहा पर गोत्र जो जवाला थी उनको गोत्र भूल गई थी वो उनको गोत्र स्मरण नहीं था जैसे हमारे घर की सामान्य मातृ शक्ति हो उनसे पूछा जाए भाई गोत्र क्या है प्रवर क्या है वेद कौन सा है तो हो सकता है कुछ कुछ चीजें उनको ना याद तो वो गोत्र उनका स्मरण नहीं था तो उन्होंने गोत्र के लिए ये बात कही आदि शंकराचार्य जी का उस पर भाष्य है आदि शंकराचार्य जी ने तो कहीं पर कुल और गोत्र की बात को मना नहीं कर दिया और वो आदि शंकराचार्य जी को फॉलो करने की बात करते हैं मगर क्या हुआ कि सामने वाले को संतुष्ट करना है अपने श्रोता को श्रोता को कुछ ऐसी बात बतानी है जो आज तक किसी ने ना बताई बिल्कुल नई बात बता दे अब उससे होता क्या है नई बात बतानी है बताओ अगर उपनिषद से जोड़ के बता रहे हो कह दो मेरे पास कोई फरिश्ता आया था रात में उसने कहा है कह दो ना सनातन की आड़ में क्यों बताते हो दिक्कत य है तो अब क्या है कि विष्णु का भक्त ही वैष्णव है तो अगर आप यह कह रहे हो कि विष्णु कृष्ण से निम्नतम है और कृष्ण की हम पूजा करते हैं कृष्ण को हम मानते हैं उस कृष्ण को से विष्णु अलग है तो फिर आप वैष्णव कैसे हुए

00:38:01:19 तो इसलिए वैष्णव को पकड़े हुए हैं आप क्योंकि वैष्णव परंपराएं हैं उस परंपरा से अपने को जोड़ना है परंपरा की बात अगर आती है तो हम जान लेते हैं मवार जी की जो परंपरा है वह स्टार्ट होती है हंस भगवान से मधवा चार जी की परंपरा मेरे पास ऑफिशियल उनकी परंपरा आई है तो ह हंस भगवान से वो मानते हैं य कृष्ण से मानते क्या हुआ यह वो परंपरा नहीं है जो मधवा चार्य जी की परंपरा है और मधवा चार्य जी ने भी भाष्य लिखा भागवत पर श्रीमद भागवत महापुराण भाष्य लिखा और श्रीधर स्वामी ने भी लिखा जो अपने समय के शंकराचार्य थे मगर चैन महाप्रभु ने तो उनको माना श्रीधर स्वामी को क्यों जाना पड़ रहा है भागवत पढ़ने के लिए आपको अकी परंपरा से बाहर परंपरा से प्राप्त नहीं हुआ क्या भागवत वो भी नहीं है हा रियल इंटेंशन का शॉर्ट वीडियो देख लिया है मार्तंड जी और उसका यथोचित समाधान भी कर दिया है जो उत्तर आपको दिया है ना उसी की व्याख्या करते हुए उनको अच्छा सा उत्तर दिया है देखिएगा आएगा एक दो दिन तो अब वैष्णव कौन होता है

00:39:16:25 जो विष्णु की भक्ति करे पदम पुराण के अनुसार तो जब ये कृष्ण को विष्णु से अलग करके वो कर रहे हैं तो य वैष्णव कैसे यह सब सवाल है प्रश्न अब आ जाते हैं इस पर भैया हेलो जी एक बस एक ये बात अपनी पूरी कर ल क्या वैष्णव अव है ये कौन लिख रहे हैं क्या वैष्णव अव है यह कौन लिख रहे हैं यह लिख रहे हैं श्री माधवाचार्य शास्त्री जी रामानुजाचार्य परंपरा से

00:40:09:28 और इसमें यह पृष्ट संख्या है क्यों में दो 69 यह देखिए चैप्टर है पूरा क्या वैष्ण अव है मतलब क्या जो वैष्णव है वो शैव नहीं है या फिर जो शैव है वो वैष्णव नहीं है परंपरा प्राप्त आचार्य परंपरा प्राप्त क्या है जैसे शंकर मत में नारायण की प्रधानता है इसीलिए उन्हें कथम प अ वैष्णव नहीं कहा जा सकता ठीक इसी प्रकार श्री संप्रदाय परंपरा में ना वैष्णवास्त्र के अनुसार शंकर भगवान को ही प्रधान वैष्णव के रूप में स्वीकार किया जाता है तो यह भी यहां पर शव और वैष्णव की एकता की बात कर रहे हैं शव और वैष्णव में कोई अंतर नहीं है और अब शंकर परंपरा के आचार्य क्या कह रहे हैं इस बारे में वो भी देख लीजिए जी भक्ति सुदा इसीलिए मैंने व पांच जो ग्रंथ बताए ना व इसीलिए बताए पांच ग्रंथ पांच ग्रंथ आप सबको जरूर पढ़ने चाहिए कौन-कौन से

00:41:24:28 हैं रामचरित मानस भव गीता ज्ञानेश्वरी और दास बोध समर्थ राम दास जी का भक्ति सुदा और गर्व से कहो हम हिंदू है ये पांच ग्रंथ आपको पढ़ने चाहिए इसमें सब कुछ मिल जाएगा आपको लगभग ये देखिए शिव और विष्णु में अभेद बुद्धि ये सिखाया जाता है हमें शिव और विष्णु में अभेद बुद्धि शिव और विष्णु में अंतर करने वाले नहीं है अब जिसका इस अभेद बुद्धि इसके प्रतिकार स्वरूप अस्तित्व है उसको तो हमसे दिक्कत होगी ना भाई रियल इंटेंशन वाले ने आज एक बात कही कि भाई क्या मैं हिंदू तभी कहला हंगा जब मैं जो है शाक की बुराई करूं वैष्णव की बुराई करूं या शैव की बुराई करूं या साकार वालों की बुराई करूं या निराकार वालों की बुराई करूं मैं तभी हिंदू कहला उंग कट्टर तो भाई अगर तुम इन सबकी बुराई नहीं कर रहे हो तो तुम तो हमारी तरफ खड़े हो जी हम तो उनको प्रश्न कर रहे हैं जो ऐसे व्यक्ति की बुराई करता है जो किसी की बुराई नहीं करता और

00:42:40:02 पंतवाड़ी सबसे बड़े हैं निराकार की ही पूजा सही है राम लीला देखना पाप है मूर्ति पूजा करना अधर्म है अकॉर्डिंग टू आर्य समाज अगर कोई ऐसे कह रहा है और आप ये कह रहे हो नहीं नहीं मूर्ति पूजा भी गलत नहीं है शिव भी बड़े हैं विष्णु भी बड़े हैं तो आप भी अपने आप में एक पंथ वाले बन गए आपने सबको मानने वाला पंथ तैयार कर दिया अब क्योंकि जिनका अस्तित्व ही सबको ना मानने में है जिनका अस्तित्व ही सबको मानने के विरोध में है तो उनके तो ना चाहते हुए भी आप अपोजिट आ गए ना र हमने एक अच्छा सा इस बारे में उत्तर दिया है तो इसमें भगवान शिव और विष्णु में अभेद बुद्धि बता रहे हैं करपात्री जी महाराज भक्ति सुदा में कि क्यों अभेद बुद्धि होनी चाहिए 601 नंबर प्र भक्ति

00:43:50:04 सुदा वैष्णवास्त्र [संगीत] ये ये पूरा प्रमाण के साथ में बता रहे हैं कि क्यों अभेद बुद्धि रखनी चाहिए शिव और विष्णु में ठीक है और सावधान होकर सुनो हे ध्रुव तुम महामति हो स्कंद पुराण की बात हैय और काशी खंड की काशी खंड है स्कंद पुराण का उसमें क्या हो रहा है तुम महामति हो सावधान होकर सुनो मैं तुम्हारे हित की बात कहता हूं जिससे तुम्हारा स्थान अत्यंत अचल हो जाएगा मोक्ष दाता साक्षात भगवान श्री विश्वनाथ जी हैं यह कौन कह रहे हैं विष्णु भगवान कह रहे हैं मोक्ष दाता साक्षात भगवान श्री विश्वनाथ जी हैं उस परम पवित्र काशीपुरी को मैं जाना चाहता हूं इस तरह का यहां पर इन्होंने वर्णन दिया और फिर आगे बहुत सारी चीजें इन्होंने बताई अभेद बुद्धि के बारे में तो आप लोगों को ये पढ़ना चाहिए ब्रह्मा विष्णु और रुद्र में भेद भाव नहीं रखना

00:45:05:24 चाहिए क्योंकि सच्चिदानंद स्वरूप एक ही तत्व है बहुत सारे सैकड़ों शास्त्र वचन है तो शंकराचार्य के आचार्य भी सिखा रहे हैं अभेद बुद्धि रखना और वैष्णवास्त्र जन्म से मानते हैं कि कर्म से मानते हैं जन्म से तो कैसे परंपरा प्राप्त हो गया इनका ज्ञान तो यह सारी चीजें हैं कि वैष्णव कौन है यह पहले पता करिए वैष्णव कौन है केवल अपने आप को वैष्णव कह लेने से काम नहीं चलेगा अगर हिंदू कोई है व निठारी कांड में वो बच्चे खा रहा है कुकर में उबाल उबाल करके तो उसको भी हिंदू कहेंगे क्या कि वो हिंदू है उससे मत भिड़ो तो पहले वैष्णव कौन है यह हमें जानना पड़ेगा तब यह सोचना पड़ेगा कि हम वैष्णव का विरोध कर रहे हैं कि नहीं कर रहे जी आप कुछ कह रहे भैया आपने बताया ना जो कृष्ण को मानने वाले कार्स होते हैं यह अमोग लीला प्रभु ने भी माना है जो कृष्ण के

00:46:20:25 पूजा करते वह काशव होते वैष्णव अलग लोग होते हैं ये क्या बोल रहे हैं एक मिनट यह वाला जो कमेंट है इसको जरा ध्यान रखिएगा इसका मैं आंसर दूंगा और कुमार कांति रव जी आंसर दूंगा जी बोलिए आप क्या कह रहे हैं सर आपने बताया ना जो कृष्ण को मानने वाले कार् णव होते है वैष्णव अलग होते है यह बात इसकन में माना जाता है अच्छा हां कहीं पर कहा भी है ऐसा मैंने सुना है प्रभु ने भी कहा है पूरा वीडियो जी कहा है ऐसा सुना है अभी वो रजिस्ट नहीं है कुछ सालो में जब फलने फलने देंगे तो हो जाएगा रजिस्टर्ड हम तो कृष्णव वैष्णव नहीं है अभी वो रजिस्टर नहीं है थोड़े दिनों में हो जाएगा र जी ठीक है जाता है हा हो सकता है अंदर से सिखाया भी जाता हो मेरे तो कई परिचित वाले हैं जोन से जुड़े हुए हैं तो सूचनाएं मुझे भी प्राप्त होती रहती है क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा है और कुल मिलाकर के हमारा जो प्रश्न होता है हमारी

00:47:36:02 जो चर्चाएं होती है वो केवल इस बात के निमित्त होती है कि गलत बातें क्यों फैलाई जा रही है सनातन शास्त्रों के नाम पर आपका कहना ये है कि हम विदेशों में जाकर प्रचार करते हैं करो हम मुस्लिमों को हिंदू बनाते बनाओ अरे भैया तो जब आप किसी परिस्थिति वस कोई बात बोल रहे हो तो उसको सनातन का चोला क्यों पहना रहे हो सनातन तो परिस्थिति बस नहीं ना वो तो नित्य है ना खैर मुझे लगता है हमारी चर्चा काफी अच्छी रही आप लोगों को कोई और विचार अगर प्रकट करना है तो बताए देखिए अगर इनको अगर संभालना है इनको अगर समझाना है तो हम शास्त्र से अगर इनको बोलेंगे तो यह मानेंगे नहीं क्योंकि शास्त्र हम अलग नजरिया से बोल वो अलग नजरिया से समझ अल है इंटरप्रिटेशन अलग है इसलिए तो हम हमें यह कोशिश मेरे ख्याल से कि हमें यह कोशिश करनी चाहिए कि शास्त्र से उनको ना हराए लॉजिक से उनको हरा दे देख ह हराने की तो कोई बात ही नहीं है हराने की कोई बात ही नहीं है हराना नहीं है केवल हमें शोधन करना है हराने और व जीतने हरने की कोई भावना नहीं है मगर हा जो बात आप कह रहे हो अभी परसों के दिन जो दो चार दिन पहले वो

00:48:51:04 जो एक बालक आया था भव्य राधा कृष्ण दास तो उसके साथ यही हो रहा था जब मैं वह मानता है प्रमाण जब मैं प्रमाण देता हूं इंटरप्रिटेशन तो प्रमाण की आवश्यकता ही नहीं रह गई क्योंकि इंटरप्रिटेशन अब वो कहे वो इंटरप्रिटेशन दो जिसको मैं मानता हूं तो वो तो भैया आप ही के आचार्यों की होगी फिर तो बात ही खत्म हो गई जी तो प्रमाण की बात ही नहीं हो सकती है जब जब आप जो है इंटरप्रिटेशन अलग अलग है आप लोगों के ठीक है अच्छा मैं एक इनका क्वेश्चन ले लू

00:49:29:18 स्वामी नारायण को भगवान का अवतार नहीं माना गया परंपरा प्राप्त आचार्यों के द्वारा भगवान का अवतार नहीं माना गया है परंपरा प्राप्त आचार्यों के द्वारा अच्छा वह जो प्रश्न था मैं उसका उत्तर दे दूं हां बिल्कुल कुमार जी तो यह मैंने नहीं कहा है एक वो जो कमेंट था जो मैंने कहा था इसको हाईलाइट

00:50:06:15 करिए वो कमेंट कौन सा था उसको जरा हाईलाइट करिए हां शो मी वेयर डिड ऋषि आस्क सत्यकाम फॉर गोत्र यू आर रंग देखिए ऋषि ने तो सत्यकाम जी से यह कहा था कि आपका गोत्र क्या है क्योंकि उनका जो सं संवर्थ संस्कार इत्यादि है वो उन्हें करना था मगर कहा ये गया है आचार्य प्रशांत के द्वारा तथाकथित आचार्य नहीं तथाकथित स्वघोषित आचार्य प्रशांत के द्वारा कहा यह गया है कि भाई जब सत्यकाम ने पूछा अपनी मां जबाला से कि भाई वो मेरे पिता कौन है तो उन्होंने कहा मुझे नहीं मालूम तेरे पिता कौन है यह वर्ड है बल्कि पिता नहीं मेरा बाप कौन है तो उन्होने कहा तेरा बाप कौन है मुझे नहीं ये वर्ड है आज तथाकथित आचार्य प्रशांत के उसका हमने रेपन बनाया है बना दिया है व एक दो दिन में आ जाएगा मगर बात वहां पर क्या पूछी गई थी छंद उपनिषद में चौथे अध्याय में चौथे खंड में क्या बात पूछी गई है वहां पूछा यह गया है कि जबाला

00:51:21:18 से सत्यकाम उनके पुत्र पूछते हैं कि मेरा गोत्र क्या है वो कहती मुझे गोत्र स्मरण नहीं है मैं इतना ग्रहस्ती के कार्य में थी वो गोत्र को पिता का नाम बना दिया क्यों क्योंकि सामने बैठी हुई कोई मातृ शक्ति रही होगी जिसने ऐसा कहा कि भाई मेरे मेरे इतने सारे संबंध हो चुके हैं मैं इतने लोगों को डेट कर चुकी हूं तो उन्होंने उसको सही करने के लिए यहां जबाला और सत्य काम के ऊपर ये दोष मर दिया हमारे उपनिषदों के ऊपर दोष मर दिया यह होता है जब हम परंपरा प्राप्त किस के बाहर परंपरा के बाहर किसी को भी अनुमति दे देते हैं कि जाओ शास्त्रों की जाकर व्याख्या करो ठीक है और किसी को क्वेश्चन अगर कोई पूछना है तो पूछे हां जी बोलिए कुछ बोलना चाहते हैं आप

00:52:06:24 लोग भैया वह जो क्वेश्चन था ना जीवात्मा कैसे आए वैकुंठ से इकन के ऊपर इकन के अंदर दो तरह के बिलीव्स रहते हैं एक मानते हैं कि हम वहां अपराध करके आए और एकते और एक कहते हैं कि हम कभी वैकुंठ में थे ही नहीं हम यहां नित्य बद्ध है और और वैकुंठ वाले नित्य मुक्त है अच्छा इसका पूरा वीडियो प्रूफ है मतलब इकोन द्वारका का जो प्रशांत मुकुंद प्रभु है इसको अमोग लीला प्रभु के साथ ही रहते वो उनका पूरा वीडियो लिंक है मतलब क्या ये जो बद्ध वाले लोग है कभी मुक्ति नहीं प्राप्त कर पाएंगे त बद्ध ऐसा नहीं है लेकिन वहां माना जाता है एक पॉइंट एक बिलीफ कहता है कि हम लोग वहां से ही आए हैं और एक कहते है कि हम नित्य बद्ध इधर ही है हम कभी वैकुंठ गए नहीं लेकिन अगर हम साधना करें तो पहुंच जाएंगे ऐसा पॉइंट है लेकिन यहां पर भी तो क्वेश्चन आ जाता है ईश्वर तो किसी के लिए अनइक्वल नहीं है वो तो सबको एक ही रखेंगे या फिर सबको इस पार की सबको इस पार रखेंगे ईश्वर तो अनइक्वल नहीं हो

00:53:20:10 सकते और यहां एक और माना जाता है जो जीवात्मा भगवान के साथ नित्य है भगवान जैसे सनातन है जीवात्मा भी सनातन है लेकिन उसी वीडियो में कहा गया है नित्य बध वाले वीडियो में कि जीवात्मा का उत्पत्ति होता है कारण सागर कारण सागर से यह भी कांट्रडिक्शन है बहुत सारे कांट्रडिक्शन है इसकन के अगर च कशन की बात य है वो तो उनके आगे जो प्रामाणिक गण होंगे जो उनके अनुसार होंगे शायद ज्यादातर उनके पास आंसर हू मगर जो मुख्य मोटी बात है कि गोलोक धाम में भी कुंठा है बैकुंठ में भी कुंठा है तो ये एक बड़ी बात जानने को मिली तुलसीदास जी भी वैष्णव नहीं है यह बड़ी बात जानने को मिली और राम जी ने भी वो नहीं किया जो उन्हें करना चाहिए था ये भी ध्यान रखिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने भी मर्यादा का उल्लंघन कर दिया वो नहीं किया जो उन्हें करना चाहिए था जो करना चाहिए वो धर्म है मर्यादा है अगर हम वो नहीं कर रहे तो मर्यादा का उल्लंघन हो गया तो ये है

00:54:25:10 और और एक लास्ट पॉइंट मैं बोलूं भैया जी जी बोलिए बोलिए जो मानते हैं कि हम वहां पर अपराध करके आए हैं गोलोक से वो लोग मानते हैं कि पहले हम गोलोक में थे वहां पर अपराध करके हम दूसरे किसी वैकुंठ में गए मतलब कोई लोअर वैकुंठ गोलोक से लोअर फिर धीरे-धीरे आते-आते हम लोएस्ट जो है नारायण का वैकुंठ ये लोग मानते हैं वहां है फिर धीरे हम ब्रह्मा जी के लोक में गए फिर देवताओं के आए फिर आते था मनुष्य में ऐसे ये पूरा सीरीज वो लोग लगा दिए कि कैसे कैसे हम अपराध करके नीचे आए

00:55:01:03 जी बहुत सारी चीजें हैं वैष्णव कौन है ठीक है तो आप लोगों से बात करके अच्छा लगा आप लोग आए और अभी आप क्या कर रहे हैं मतलब आप कौन से पथ को फॉलो कर रहे हैं किस आचार्य मैं नाम जब करता हूं और शंकराचार्य को ही मानता हूं अच्छा अब आप शंकराचार्य को मानते हैं और आप कब से कब तक रहे थोड़ा डेट वगैरह बताएंगे स्थान वगैरह कहां पे थे आप इस कौन से जब जुड़े थे मैं जन्म सेही कोलकाता में रहता हूं इकन में मैं जॉइन हुआ था मैं और मेरा भाई एक साथ 2000 22 में हा 2022 से 23 का अंत तक 24 में हम लोग छोड़ दिए व जो जिस मंदिर में आप जुड़े थे उस मंदिर का क्या नाम था इकन कोलकाता मिंटो पार्क इकन कोलकाता विंडो पर बहुत बढ़िया वहा के वाइस प्रेसिडेंट थे वहां के जो वाइस प्रेसिडेंट थे उनके साथ जो भी रहते थे उनके वाइस प्रेसिडेंट को भी हमने पूछा था वो राधानाथ स्वामी जी के शिष्य हैं उनसे भी हमने ये सवाल पूछा था उन्होंने कहा कि इसकन के पास यह क्वेश्चन का आंसर है नहीं यह उन्होंने खुद के पर्सनल असिस्टेंट को कहा था हमको नहीं कहा था लेकिन हो सकता है सही कह रहे हैं कि ये इसका आंसर नहीं है इसकन के

00:56:16:06 किसी के किसी के पास भी नहीं है इसकन में क्योंकि ये कांट्रडिक्शन बात है तो वो व्यक्ति की यात्रा शुरू होती है ना सवाल पने से उसकी यात्रा खत्म होती है अचिंत प पूरा काप है यात्रा शुरू हुई जिज्ञासा से और खत्म हुई अचिंत ये हैरा अचिंत बोल नहीं सकते क्योंकि अगर तुम्हारे प्रभुपाद जी बोल रहे हैं कि आप लोग अपराध करके आए हो तो यह तो गलत ही हो जाता है कैसे अपराध अचिंत कैसे हो जा रहा है ये अगर तुम मान लेते हो कि इनफिनिटी इनफिनिटी तो गलत है ये खैर एक अलग बात हो जाती है कोई नहीं ठीक है तो आप लोगों का आने के लिए आभार आपने अपना समय भी दिया नाम जब बढ़ाइए उपासना सेवा संकीर्तन स्वाध्याय आज दूसरी चर्चा भी है हां रियल इंटेंशन वालों से कई बार कहा है पर वो तरह-तरह के बहाने थोड़ा सा बनाते हैं कि यहां पे आओ यहीं पर आना होगा ऐसा होगा वैसा होगा और हम उनको अपना नंबर देते हैं कि भाई देखो बात करो हमें आप बताइए कहां-कहां पर आने को बोल रहे हो और या हम आपको बताएंगे कहां-कहां पर आया जा सकता है तो इस संबंध में वो कुछ करते नहीं है ऐसे कोई बीच का रास्ता निकालने के लिए बाकी

00:57:31:12 आज रात को भी एक हमारी चर्चा है एक मात शक्ति है इस्लाम से डॉक्टर जाकिया तो इनके साथ रात को चर्चा है 10 बजे आप लोग आए और चर्चा को देखें जी ठीक है तो आप लोगों का दोनों भाइयों का आने के लिए हमें आपका बहुत बहुत आभार एक और निवेदन है हां हां बताइए अगर आप फ्यूचर में कभी किसी की किसी भी इकन के व्यक्ति से अगर डिस्कशन करें इसके बारे में तो कृपया करके यह सवाल जरूर से पूछिए और जितने भी तर्क है वह भी मैं आपको लिख के दे दूंगा वो तर्क बहुत सारे देते हैं कि लीलावत आ चुके हैं यह करके वो करके आ चुके है लेकिन उनका भी कांट्रडिक्शन है उसका भी पिट आंसर है मे पास अच्छा चलिए ठीक है आप लोग अध्ययन भी करिए उपासना सेवा संकीर्तन सभी ठीक है बहुत बहुत धन्यवाद आपका आने के लिए और जय श्री राम जी जय श्री राम

00:58:38:22 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 58:40 · 06 Sep 2024

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