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00:00:01:08 क्या आर्य समाज का त्रतवाद भेद सम्मत है? भैया अगर ऐसा होता तो हम क्वेश्चन क्यों करते उनकी शिक्षाओं पर? शिवश आज समाजी कहते हैं अंग्रेजों ने हमारे ग्रंथों में बदलाव करवाया है। कुछ कुछ अलग से ऐड किया है ताकि हम अपने ग्रंथों का भरोसा नहीं करें। आपके अनुसार क्या यह सही हो सकता है? देखिए, धर्म जो प्रतिपादित होता है, वह केवल ग्रंथ से नहीं होता है। कभी भी हमारे यहां पर ऐसा नहीं हुआ कि केवल हम ग्रंथ पर निर्भर रहे। गुरु गोविंद और ग्रंथ कितने भी अंग्रेज आए कितने भी चले जाए कितने भी मिलावट करने वाले आए कितने भी मिलावट करने वाले चले जाए कितनी भी जो पब्लिश पब्लिकेशंस होती है वो खुल जाए उससे कोई मतलब नहीं है मतलब यह है क्या हमारे पास गुरु गोविंद और ग्रंथ में सामंजस्यता है गुरु जो परंपरा प्राप्त हो जिसने अपने अपने गुरु से उस ज्ञान को सुना हो और फिर वो ज्ञान मैच कर रहा हो ग्रंथ से तो ग्रंथ और गुरु जब मैच खाएंगे और उसके द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो गोविंद होगा वह पूर्ण होगा मतलब
00:01:16:09 उसके आधार पर होगा जो गुरु और गोविंद की जो शिक्षा प्राप्त हो रही है उसके अकॉर्डिंगली जो गोविंद है वो ख्यापित हो रहा होगा तब ये तीनों चीजों में जब बैलेंस होगा ये तीनों चीजें इंटरडिपेंडेंट है इसमें से किसी भी एक चीज को हटा नहीं सकते आप तीनों चीजें इंटरडिपेंडेंट है तब जाकर के धर्म प्रतिपादित होता है केवल ग्रंथों पर निर्भर करेंगे तो आज हो सकता है चलिए ठीक है अंग्रेज आए मिलावट करके चले गए और स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने उसमें स्वामी दयानंद जी ने उसमें ठीक कर दिया मिलावट को बचा लिया हमको मगर क्या यह गारंटी है कि उनके ही यहां अगर उनपे ही हम लोग डिपेंड हो जाए आर्य समाज के ऊपर हम डिपेंड हो जाए तो इस बात की कोई गारंटी है कि उनके यहां कोई असामाजिक तत्व नहीं आएगा अधर्मी तत्व नहीं आएगा जो आगे चलकर के दोबारा वही कार्य करना शुरू करेगा तो कैसे बचाया जाए गुरु परंपरा से आज जो गुरु हमें बताएंगे वो हम कल अपने आज जो गुरु अपने शिष्य को बताएंगे वो कल शिष्य अपने शिष्य को बताएंगे इस तरीके से जो ज्ञान है वो सुरक्षित होता होता है। अब जो किताबें छप रही है, जो बुक्स छप रही है, जो ग्रंथ छप रहे हैं, वह यह जो गुरु परंपरा से प्राप्त होने वाला ज्ञान है, इससे मैच करते हुए छप रहे हैं तो प्रामाणिक है। अगर मैच नहीं कर रहे हैं, सामंजस्य नहीं है तो अप्रामाणिक है। तो यह तो यह जो कहावत है कि उसमें मिलावट हो गई है, ये है वो है।
00:02:31:18 उनके लिए जिनके पास गुरु परंपरा की प्रणाली ना हो। जो खुद को गुरु परंपरा की प्रणाली से दूर रखते हैं उनके लिए तो वह आर्य समाज ऐसा है जिनके पास गुरु परंपरा की प्रणाली नहीं है। तो इसलिए वो इस तरह का नैरेटिव्स फैला सकते हैं जिससे कि हमारी अश्रद्धा हो जाए अपनी गुरु परंपरा में। वास्तविकता यह है कि गुरु परंपरा के बिना जो धर्म है वह अस्तित्व में नहीं। भाई इनके साथ मेरा डिबेट हो चुका है। इनको संस्कृत डिक्शनरी से भी दिखा चुका हूं। आर्य आज क्षत्रिय के लिए जनेऊ और गुरु मंत्र के बारे में बता दीजिए। जनेऊ देखिए जब या तो आप व्यक्तिगत रूप से करवा लीजिए। और अगर नहीं है तो फिर सामूहिक यज्ञ पवित संस्कार होता है। प्रयाग में भी होता है। माघ में तो हर वर्ष होता ही है। तो वहां पर आकर के आप करवा सकते हैं।
00:03:42:12 जी धन्यवाद आपका। सनातनी जी। यह आपका जो आगे आपने लिखा है सनातनी जस्ट वह नहीं पता है और जो मैं बता रहा था आप मार्ग में आकर के करवा सकते हैं और गुरु मंत्र की बात यह है कि कभी भी एक धोती और एक गमछा लेकर के जहां पर गुरुदेव का शिविर हो वहां पर आप पहुंच जाइए। सुबह की जब सुबह के पहर में जाते हैं तो वहां जब गुरुदेव का शिविर जहां पर होता है वहां प्रवचन होता है। प्रवचन के बाद तुरंत बैक टू बैक गुरुदेव फिर गुरु दीक्षा वहां देते हैं। तो आप जब वहां सुबह पहुंच जाएंगे तो आपका नाम लिख लिख लिया जाएगा। दीक्षा वाले कौन-कौन है? आपका नाम लिख जाएगा। तो जैसे ही प्रवचन समाप्त होंगे उसके बाद गुरुदेव दीक्षा देते हैं और आपसे पूछते हैं कि कौन से भगवान को मानते हो? भगवान के किस रूप की पूजा करते हो?
00:04:41:01 मैं मैंने किसी को दिया तो है लिंक कि वह यहां कमेंट कर दे तो मैं उसे पिन कमेंट कर दूं। पर उन्होंने किया ही नहीं है। दोबारा देता हूं एक बार। मिर्गी का दौरा क्यों आता है? क्योंकि मेरे सर में खुजली होती है।
00:05:16:28 आई एम फ्रॉम उड़ीसा। अच्छा उड़ीसा से अच्छी बात है। गुरु जी लखनऊ कब आएंगे? हां, लखनऊ आने का है उनका निकट भविष्य में आने वाले हैं। इन व्यक्ति के साथ मेरी भी डिबेट हुई थी साकार ईश्वर पर। मैंने यजुर्वेद के 16वें अध्याय से साकार ईश्वर दिखाया। यह तब भी नहीं माना। उसके बाद यह सत्यार्थ प्रकाश की दुहाई देने लगा। हम देखिए अभी हमने एक वीडियो बनाया है। सैद्धांतिक प्रश्न हमने पूछे हैं आर्य समाज से। अभी हमने जो कल वीडियो डाला था उसमें हमने केवल डिफेंड किया है। है ना? मगर एक वीडियो और बनाया उसमें हमने आईडियोलॉजिकल क्वेश्चंस उसमें खड़े किए हैं। हां, यह देखिए मैंने यह शेयर किया है आवाज की तरफ से। आप इसको ज्वाइन कर सकते हैं।
00:06:22:00 ब्रह्मा बड़ा या माया सेलर वांट्स टू जॉइ ब्रह्मा बड़ा या माया देखिए अगर पारमार्थिक रूप से देखेंगे तो कुछ भी बड़ा छोटा है ही नहीं अभेद है ना ब्रह्मा बड़े हैं ना माया बड़े सब कुछ एक समान है आप आ जाइए ना आप जो दयानंद सरस्वती जी के होलोग्राम आपका लगा हुआ है। आप चाहे तो आप आ सकते हैं। आपसे बात करना में अच्छा लगेगा। और
00:07:04:24 अभी कोई जुड़ने का किसी ने प्रयास किया था। मगर मेरे पास जैसे ही नोटिफिकेशन आया मैं उसको जब तक क्लिक करता तो नोटिफिकेशन गायब हो गया। किसी को अगर जुड़ना है तो जुड़ जाए। टाइम बढ़ता जा रहा है और अभी तक कोई भी चर्चा नहीं हुई। सत्यार्थ प्रकाश के पहले ही अध्याय में दयानंद सरस्वती जी ने एक मंत्र श्लोक कोट करा है कैवल्य उपनिषद का सा ब्रह्मा सा शिवा तो उसी के ऊपर एक एक और मंत्र आता है उमा सहायम परमेश्वरम
00:07:44:21 जनेऊ के लिए देखिए जो वस्तुनिष्ठ जनेऊ के लिए नियम बहुत सारे होते हैं जैसे शौचाचार का ध्यान रखना मल मूत्र विसर्जन के समय में और क्या कहते हैं मलमूत्र का जब त्याग करते हैं तो उसमें मट्टी का उपयोग करना बहुत सारे तो कुल्ले करने होते हैं। क्या शूद्रों के बच्चों को गुरुकुल में पढ़ाया जा सकता है? बिल्कुल पढ़ाया जा सकता है। वहां पौराणिक इत्यादि जाती हो। नरेंद्र मुंद दादा वांट्स टू जॉइ दिस स्ट्रीम।
00:08:24:16 उस मंत्र में भी साकार ईश्वर का वर्णन है। जब मैंने इससे दिखाया तो यह ब्लॉक करके भाग गया। अच्छा ऐसा भी करते हैं क्या? मुझे तो ठीक-ठाक व्यक्ति लग रहे हैं। अब बात तो हो नहीं पाई। मैं विश्वकर्मा हूं क्या? मैं जनेऊ पहन सकता हूं। देखिए मेरा जो विश्वकर्मा आपको अपना वर्ण बताना होगा। अगर आप वर्ण बताएंगे तो देखिए एक बात ध्यान रखिए मनुष्य जीवन का उद्देश्य जनेऊ पहनना नहीं है। मनुष्य जीवन का उद्देश्य वेद पढ़ना नहीं है। मनुष्य जीवन का उद्देश्य शंकराचार्य बनना नहीं है। अभी कुछ दिन पहले एक वो वीडियो वायरल हुआ था। क्या तुम बनाओगे मुझे शंकराचार्य? अरे भाई पहले तो यह ध्यान रखो कि शंकराचार्य वही बनता है जो उनका शिष्य होता है और शिष्य का मतलब है गुरु की दी जाने वाली शिक्षा को मानने वाला उस पर चलने वाला तो वो तो बात अलग रही मगर बात यह है कि क्या हमारे शास्त्रों में कहीं लिखा है कि हमारा जो उद्देश्य है इस जीवन का वो शंकराचार्य बनना है नहीं हमारे जीवन का उद्देश्य है अथातो धर्म जिज्ञासा अथ अथातो ब्रह्म जिज्ञासा ब्रह्म का ब्रह्म को
00:09:39:18 प्राप्त करना हमारे जीवन का उद्देश्य है। तो इस पर हमें बात करनी चाहिए। कोई आचार मना नहीं करेगा। ब्रह्म को प्राप्त कर सकता हूं कि नहीं। तरीके अलग-अलग है। अगर आप तरीकों के प्रति आसक्त हो रहे हैं कि नहीं मुझे जनेऊ पहन के ब्रह्म को प्राप्त करना है तो आपको ब्रह्म में दिलचस्पी नहीं है। आपको भौतिकवाद में दिलचस्पी है। आपको यहां पर अपनी वर्चस्वता सिद्ध करनी है। भ्राता श्री क्या ऐसा हो सकता है कि आप जब डिबेट करें तो मिनट दो मिनट या पांच मिनट टाइम लगा के चर्चा करें। साथ ही प्रश्नों को स्क्रीन टेक्स्ट फाइल में लिखकर उत्तर का अवलोकन करें। हो सकता है आगे चलकर के देखेंगे। मगर टाइम लगा के का समझ में नहीं आ रहा है। अभी टाइम ना लगाने के संबंध में ही तो ऋषिवाच से उस दिन जो मामला बिगड़ा था। पहले एक मरदित भाषा शैली में बातें हो रही थी। अभी किसी ने ज्वाइन करने के लिए किया था। फिर से उनका वो क्या कहते हैं
00:10:42:02 गुरुदेव जी गौतम बुद्ध को भगवान का अवतार क्यों नहीं मानते जबकि अग्नि पुराण में देखिए आप यह बात अवश्य ही उनके द्वारा सुनकर के आए हैं। क्या नाम है उनका निग्रचार्य तो ये अलग वो है। गुरुदेव के पास भी अपने गुरुदेव ने भी प्रमाण से ही सिद्ध किया है ना कि वो गौतम बुद्ध वो गौतम बुद्ध नहीं है। तो यह क्वेश्चन तो मैं भी कर सकता हूं कि आप गौतम बुद्ध को गौतम बुद्ध गौतम बुद्ध को वही विष्णु का अवतार क्यों मान रहे जबकि वह क्षत्रिय कुल में जन्मे वह जो है ब्राह्मण कुल में जन्मे तो गुरुदेव ने भी ऐसे ही थोड़ी ना कह दिया है तो अध्ययन का विषय है वस्तुनिष्ठ प्रश्न की बजाय सैद्धांतिक प्रश्न करें तो ज्यादा अच्छा होगा और एक चीज और है कि वस्तुनिष्ठ जो प्रश्न होते हैं वो स्वा अध्ययन से भी उसका हल होता है वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के लिए गुरु के पास जाइए। वहां रहिए और वहां जाकर के सीखते हैं कि जैसे जनेऊ के साथ क्या-क्या करना है। कौन-कौन से नियम है पालन करने हैं जो। तो मैं वही कह रहा था कि जीवन का उद्देश्य यह हमें समझना चाहिए कि हमारे जीवन का उद्देश्य ब्राह्मण कहलाना, क्षत्रिय कहलाना, वैश्य कहलाना, शूद्र कहलाना, जनेऊ करना या फिर गायत्री मंत्र का उच्चारण करना, वेद
00:11:57:10 पढ़ना या पुराण पढ़ना इनमें से कोई यह सब हमारा साधन है अलग-अलग तरह के। जीवन का उद्देश्य ब्रह्म को प्राप्त करना, भगवान को प्राप्त करना। तो और हमेशा आप फोकस इस पर रखिए ना। आपका फोकस अगर दूसरी चीजों पर जा रहा है भौतिक जो यह प्रक्रियाओं पर जा रहा है कि मुझे कौन सा रास्ता मिल रहा है तो इसका मतलब आपको ब्रह्म प्राप्ति से मतलब नहीं है आपको मतलब है कि हम कैसे अपनी वर्चस्वता स्थापित कर ले देखो मैंने जनेऊ करवा लिया और यह भीषण तरीके से हमारे मस्तिष्क में डाला गया है इंजेक्ट किया गया है कि देख वो तुझे नीच समझते हैं तेरा जनेऊ नहीं होने देंगे ये इंजेक्ट किया गया हमारे अब हमें हमारे जीवन का मिशन बन गया कि हमें जनेऊ करके दिखाना है कर लीजिए दुकान से खरीदिए धागा मिलता है डाल लीजिए
00:12:45:20 मगर वास्तविकता में शास्त्र सम्मत जनेऊ वो कहलाएगा नहीं तो जीवन के उद्देश्य को समझिए जनेऊ कराना उद्देश्य नहीं है भगवान को प्राप्त करना उद्देश्य है लेटेस्ट वीडियो डिलीट क्यों किया इस वाले के साथ नहीं कहां डिलीट किया कोई वीडियो डिलीट नहीं किया है चल रहा है वह वीडियो है। आप देख सकते हैं जाकर के। आर्य समाजी शब्दों की मर्यादा का उल्लंघन करते हैं। उनकी ऐसी ही प्रवृत्ति है। हां। तो उनसे जब बात हो रही थी उस दिन तो यही बात हो रही थी कि वो यह कहने लगे कि एक व्यक्ति को बोलने का जो है उसके अंदर उसे अपना उत्तर देना होगा। यह मुझे ठीक नहीं लगा। नहीं कि इसका उत्तर कैसा हो? किसका प्रश्न कैसा हो। तो यह हो सकता है कि उनकी कोई ऐसी सोची समझी हुई वो वो भी हो। एक षड्यंत्र कि उन्होंने अपना तैयारी कर ली होगी हमारा इतनी देर में हो जाएगा तो उसी हिसाब से हमें टाइम टाइम लिमिट दे दी भाई ये जो दार्शनिक जो विचार हैं ये तो बहुत लंबेल लंबे हो सकते हैं या छोटे हो सकते हैं और यह तो जनता जो देख रही होगी दर्शक होंगे वो तय करेंगे कि किसका पक्ष मजबूत रहा उसमें ऐसा आवश्यक थोड़ी ना है कि
00:14:01:01 पर सिद्ध बोलना ही है मुंह से कि नहीं मैं हार के जा रहा हूं मैं तुझे हरा के भेज रहा हूं सिद्धियां कैसे पाए भैया? भगवत भक्ति ही सिद्धि है। भगवत भक्ति करिए। [गला साफ़ करने की आवाज़] उड़ीसा रूट हमारा Facebook लिंक दियो हमें डिस्क्रिप्शन करबा। आप आ जाइए ना। आप तो बहुत प्रतिकार कर रहे थे। उसमें क्या नाम है आपका? विकास राउत। आप क्यों नहीं आ रहे? डिस्कशन करते हैं। क्या स्त्री मंत्र दृष्टा बन सकते हैं? मंत्र दृष्टा तो भाई मैंने बताया ना देवताओं की कुतिया भी है। मंत्र दृष्टा तो कबूतर भी है। तो वही मैंने बोला था ना कि अगर इस हिसाब से देखेंगे तो फिर हमें कबूतर का भी जनेऊ कराना चाहिए। क्योंकि मंत्र दृष्टा था कबूतर उसमें। कुतिया का भी कराना चाहिए। वहां देवताओं की कुतिया है जिसका नाम है शर्मा वेदों में।
00:15:05:10 रामानुजाचार्य और मधवाचार्य वालों से क्यों करें? भाई वह परंपरा परंपरा है हमारे यहां की। आदरणीय हमारे आचार्य हैं। अभी मैं एक ग्रंथ पढ़ रहा था। हां दिखाता हूं आपको। यह देखिए राधा सुधा है करपात्री जी की लिखी हुई है और इसमें भूमिका लिखी है जगतगुरु नारकाचार्य जी ने भूमिका इन्होंने लिखी है और नीचे क्या है दिग्दर्शन किसने लिखा है गुरुदेव ने देख सकते हैं जो वास्तविक परंपराएं हैं उनमें कोई ऐसी वैमनसता नहीं है। यह हमें बांटने के लिए भरा जाता है हमारे मन में। अभी लक्षचंडी यज्ञ हुआ था। रामानुज संप्रदाय के जो राघवाचार्य जी हैं वो
00:16:03:01 क्या कहते हैं? इनके यहां पर शिक्षा दीक्षा ले चुके हैं। गुरुदेव के गुरु भाई हैं जो और करपात्री जी का फोटो लगा के वहां पर वो यज्ञ हो रहा है। अभी आप [गला साफ़ करने की आवाज़] जानते हैं श्री संप्रदाय के कई लोग जाते रहते हैं गुरुदेव के पास तो उसमें कोई वो नहीं है जो हम उनसे क्वेश्चन करें। हमारा इतना वह भी नहीं है। हमारे लिए हमारा जो मोटिव है जो ऐसे तंत्र जो खड़े हुए हैं पिछले 100 150 सालों में उन उनसे दी जाने वाली जो भ्रामक शिक्षा है उसका शोधन करना हमारा मोटिव है।
00:16:45:13 [गला साफ़ करने की आवाज़] जी भाई मैं यह रुक्मणी माधव दास के बारे में सारी डिटेल्स जानता हूं। यह एक बार जेल जा चुका है माता कामाख्या को गाली देके। आने दो उसको देखते हैं क्या है? हो सकता है सुधर गया हो। यह Instagram पे आजकल तंत्र बहुत हो रहा है। लोग इस पर बहुत बातें करते हैं। ठीक है। तो मुझे लग रहा है कि कोई आना नहीं चाह रहा है। काफी देर हो गई। आप कभी अच्छा हो तो गया
00:17:27:10 वैष्णव टू विष्णु को ही बड़ा मानेंगे भाई आपके साथ लाइव में आया रहा अभी थोड़ी देर पहले हां आइए ना दोबारा ज्वाइन करिए उसको मैं कनेक्ट करूं कोई बात है तो तो आइए वरना गप्पे लड़ गप्पे लड़ाने के लिए नहीं कोई अगर ऐसा गंभीर विषय आपको लग रहा हो तो आइए। सैद्धांतिक प्रश्न किसी का और कोई हो तो चैतन्य चरितामृत प्रमाणिक ग्रंथ है। नहीं
00:18:06:12 है भाई प्रमाणिक ग्रंथ। उसके बहुत से कारण हैं। आप वह वाला वीडियो देखिए। जो इस के प्रेसिडेंट के साथ हमारा सबसे पहला हुआ था। चर्चा हुई थी। पुरानी वीडियो आपके चैनल से डिलीट क्यों हो गई? कोई टेक्निकल दिक्कत रही होगी। तकनीकी कुछ परेशानी कुछ ऐसा रहा होगा। शायद कॉपीराइट का इशू ना आ जाए इस वजह से ऐसा कुछ
00:18:44:07 वह भी तो शिव और विष्णु में भेद करते हैं रामानुजाचार्य और मधवाचार्य देखिए जो यह जो आचार्य गण है मधवाचार्य रामानुजाचार्य जी इनका जो सिद्धांत है वह शाब्दिक भेद से आदि शंकराचार्य जी का ही सिद्धांत है और जो शिव और विष्णु की बात है तो यदि अगर सामने सामने ऐसा हो रहा होगा मेरे कि शिव और विष्णु में भेद बताया जा रहा होगा तो मैं वहां पर पूछूंगा सस सम्मान ऐसा क्यों है?
00:19:20:20 [गला साफ़ करने की आवाज़] और हमने डायरेक्टली किसी पर भी पहले से बात करना शुरू नहीं करते। पहले भाई उनके केंद्र पर जाते हैं। अभी देखो हमने जब इस पर बात की थी तो सबसे पहले हम वहां गए थे इस मंदिर जब उन लोग वो लोग सेटिस्फाइड नहीं कर पाए उसके बाद हमने वीडियोस बनाना शुरू किया। 14,000 शब्दों की पीडीएफ फाइल है जिसमें उर्दू शब्द हैं और आजकल बहुत प्रचलन में है। यदि किसी तरह उन शब्दों के शुद्ध हिंदी शब्द यदि मिल जाए तो एक ऐप डिक्शनरी बना सकते हैं। आप संपर्क करिएगा इन सब बातों के लिए। हमारा नंबर होगा आपके पास। नहीं हो तो नोट कर लीजिए। 740
00:20:09:06 830 18869 आज की जो लाइव है कोई भी कोई खास नहीं है। किसी को आना नहीं है मुझे लगता है। मैं एक बार वो जो क्रिश्चियन है उनसे बात करके देखता हूं। आदित्य वाहिनी बिहार के सचिव कौन है? बिहार में तो बहुत सक्रिय आदित्य वाहिनी आप संपर्क करिएगा। मैं आपको नंबर वगैरह दे दूंगा जो वहां के जो प्रभारी हैं। रामानुजाचार्य और मधवाचार्य ने सबसे ज्यादा अद्वैत का विरोध किया है।
00:20:50:16 कह सकते हैं ऐसा दिखाई देता है। प्रचारित किया जाता है। अब किया था कि नहीं वो भी एक बात है। प्रचारित तो ऐसा ही होता है। मगर जब उनकी भगवत गीता का भाष्य पढ़ेंगे तो मधवाचार्य जी ने भी और रामानुजाचार्य देखिए कौन क्या कह रहा है वो एक अलग परिपेक्ष है। सीधी सी बात है कि शंकराचार्य का विरोध करते हुए टोटल विरोध करते हुए आप ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं कर सकते और ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध किए बिना आप धर्म की स्थापना नहीं कर सकते और धर्म की स्थापना किए बिना आप इसको मानव समाज नहीं कह सकते फिर तो सब आपस में लिंक्ड है
00:21:39:03 इसको दूसरे रिवर्स तरीके से अगर अगर कहेंगे तो ऐसे समझ लीजिए कि इस संसार में अगर कोई व्यक्ति ऐसा है जो स्वयं को मनुष्य कहता है तो इसका अर्थ है कि वह यह मानता है कि इस संसार में कोई सर्वशक्तिमान ईश्वर है सत्ता है जिसे प्राप्त करने हेतु उसने उन मर्यादाओं का आलंबन लिया हुआ है जिसे धर्म कहते हैं। पहला पॉइंट दूसरा पॉइंट कि यदि इस संसार में कोई मनुष्य ऐसा है जो यह मानता है कि इस संसार में कोई सर्वशक्तिमान ईश्वर है तो इसका अर्थ है कि वो वेदों के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर मानता है वो सनातन धर्म के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को मानता है ये दूसरा पॉइंट बिल्कुल सूत्र बता रहा हूं आपको सूत्रात्मक शैली में और तीसरा पॉइंट क्या है तीसरा सूत्र क्या है कि यदि इस संसार में कोई व्यक्ति ऐसा है जो यह मानता है कि वेदों के द्वारा सनातन धर्म के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो इसका अर्थ है कि वो शंकराचार्य के द्वारा स्वीकार किए गया जो अर्थ है वेदा आदि शास्त्रों का उसको मानता है। अगर आप शंकराचार्य का विरोध कर रहे हैं तो आपका ईश्वर बाधित हो जाएगा। तो अब इस चीज से आप मिला लीजिए कौन क्या कह रहा है कौन नहीं कह रहा है
00:22:55:03 या तो वो घुमा फिरा के शाब्दिक भेद से शंकराचार्य की बात को मानेंगे लोग और यदि नहीं मानेंगे तो ईश्वर बाधित हो जाएगा है ना अब जैसे आज किसी से बात हो रही थी इस वाले थे तो मैंने उनसे प्रश्न एक मतलब यह चीज थी अचिंत वेदाभेद की बात होती है तो अचिं भदाभेद में मधवाचार्य जी ने दो तत्व माने तो पहली बात तो यह हो गई कि जब उन्होंने कहा है द्वैत तो फिर भदाभेद की स्थिति कैसे आ गई और अगर चलो आ गई भदाभद की स्थिति आ गई तो आपने तत्व तो दो ही माने हैं जीव और ब्रह्म तीसरा तत्व भी नहीं माना मगर जब आप भगवान शंकर को अलग कर देते हो तो आप वहां पर जीव शंकर भगवान ना तो आपके अनुसार जीव है ना आपके अनुसार परम ब्रह्म है और प्रकृति भी नहीं है तो एक चौथा ही तत्व आपने निकाल दिया है ना चौथा तत्व आ गया शंकर जी के रूप में और यदि वो कृष्ण ही बन रहे है तो बाधित नहीं हो सकते और कृष्ण नहीं बन रहे है तो चौथा तत्व है दुनिया में ये मानना पड़ेगा जीव के अलावा परब्रह्म के अलावा प्रकृति के अलावा एक चौथा तत्व है
00:24:10:04 वो भी तब जब आप प्रकृति को मान रहे हो अगर प्रकृति को तत्व नहीं मान रहे हो अलग से तो आपने ने तीसरा तत्व अपनी परंपरा के बाहर निकाल दिया। परंपरा कह रही दो ही तत्व है जिसमें अचिंत भेदाभेद है। [खांसने की आवाज़] चलिए ठीक है। तो मैंने अभी ग्रंथ में बताया ना ऐसे ही रामानुजाचार्य परंपरा का परंपरा के जो आचार्य हैं माधवाचार्य शास्त्री जी उनकी जो उनका जो जो क्यों नाम का ग्रंथ है उसमें उत्तरार्ध या पूर्वार्ध एक उन दोनों में से किसी एक भाग का जो भूमिका लिखी है वह स्वामी कृपात्री जी महाराज ने लिखी है। तो जो परंपराएं हैं, वास्तविक परंपराएं उनमें आपस में बहुत ज्यादा कोई व्यवस्थता नहीं है क्योंकि बात उसी बात को घुमा फिरा के अभी मैं शुद्धत वालों से मिला था। तो जो श्री वल्लभ राधा वल्लभाचार्य जी की परंपरा वालों से उनका कहना तो यह है कि वल्लभाचार्य
00:25:25:13 जी ने तो आदि शंकराचार्य जी के सिद्धांतों को ग्लोरिफाई किया है। अब बताइए तो कान को कैसे भी पकड़ लीजिए। शंकराचार्य का विरोध करते हुए धर्म की स्थापना नहीं हो सकती क्योंकि ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं कर सकते। आर्य समाज के आचार्य प्रशांत के साथ बातें क्यों नहीं बातें किया है? नहीं। भाई अवेलेबल तो है ये लोग। हां, वही कह रहा था। इस वालों की अलग ही थ्योरी है। जब आपकी परंपरा में दो तत्वों को स्वीकार किया जा रहा है। पहली बात तो ये भेदाभेद की स्थिति क्यों आ रही है? जब आपके जो परमाचार्य हैं, वह कह रहे हैं कि दो तत्व है उनमें अलग-अलग है। तो कंफ्यूजन की स्थिति कैसे आ गई? जब उन्होंने ज्ञान दे दिया तो कृष्ण भगवान ने उनको दिया। उन्होंने आगे दिया तो कंफ्यूजन की स्थिति क्यों आ गई? और चलो आ भी गई तो आपने तत्व ही बढ़ा दिए। या तो आपको यह मानना पड़ेगा कि कृष्ण ही शिव बन रहे हैं और कृष्ण अगर शिव बन रहे हैं तो वह केवल हमारा जो है उन्हें देखने का हमारा दृष्टिकोण है कि हमें वो ऐसे दिख रहे हैं। वास्तविक रूप में तात्विक रूप में कृष्ण और शिव एक ही हैं। यह मानना पड़ेगा। अभी कुछ दिन पहले पुंडरीिक जी ने यह बात कही थी।
00:26:41:01 वो व्यवहार की दृष्टि से अलग-अलग लीलाएं करते हुए किसी का रूप कुछ दिख सकता है। किसी का रूप कुछ दिख सकता है। मगर तत्व की दृष्टि से उनको एक मानना पड़ेगा। वरना तत्वों की संख्या ज्यादा हो जाएगी। भाई निग्रचार जी पूरी के शंकराचार्य जी के विरोध में कई बातें बोल चुके हैं। कुछ अब वह क्योंकि गुरु विरोध है तो फिर हम उसको तो हम नहीं कहेंगे कि उनको सुनना ठीक है। और ऐसा लगता है कि वो हमेशा शास्त्र सम्मत या तार्किक बात ही करते हैं। कहीं-कहीं पे चीजें हैं पर मैंने उनका उनका प्रतिकार ना करते हुए ही अपनी बात रखने का मैंने कोशिश प्रयास किया था कि क्योंकि वो मुझे लगते हैं कि अगर ऐसे व्यक्ति हमें मिले तो हमको धर्म रक्षा करने में बहुत सहायता होगी। पर पता नहीं वो हमारी इस बात को सुन पाएंगे या नहीं सुन पाएंगे। मगर उनकी जो यह चीज है कि गुरुदेव के लिए जो बोलते हैं वह उचित नहीं है क्योंकि अगर उन्हें कोई चीज है भी मान लीजिए कोई बात ऐसी लग रही है जो कि भ्रामक है जो भी है तो उसको ऐसे स्तर पर सुधारने की आवश्यकता है शोधन की आवश्यकता है जहां
00:27:56:04 से ले दे के लोगों को जैसे तैसे हम लोग ये बता रहे हैं तुम्हारा सार्वभौम गुरु गद्दी कौन सी है और गुरु गद्दी के सानिध्य के बिना जो जो वैचारिक समानता है वो कैसे आएगी? तो ले दे के जब हम यह बता रहे हैं तो आप लोगों के मन में उस गुरु गद्दी के प्रति भी भ्रम डाल रहे हैं। है ना? और सबसे बड़ी बात है कि वो आपका अंतिम विकल्प नहीं है। आपके मन में कोई दिक्कत थी। आप जाकर के बात कर सकते हैं उनसे और अगर नहीं कर रहे हैं तो वह आपसे वरिष्ठ हैं। आप जाकर के बिल्कुल बीच सभा में जाकर के अपना प्रश्न रख सकते हैं उनके सामने। मैं आपकी सहायता करूंगा। पर मगर फिर भी किसी भी स्थिति में ऐसा नहीं कर सकते कि हम अगर हमें दूध पीना होता है और हम दूध ना मिले तो हम कुछ और आपत्तिजनक पदार्थ पी ले। ऐसा नहीं कर सकते। तो यदि वह मिल नहीं पा रहे थे गुरुदेव से तो उस स्थिति में गुरुदेव का खंडन करना, उनके दोष निकालना और भी कुछ चीजें हैं। मैं इस बारे में चर्चा नहीं करना चाहता क्योंकि मैं बैर भाव नहीं रखता हूं। मगर हां गुरु विरोध क्योंकि उन्होंने किया है तो दूरी बनाना आवश्यक है और यदि आवश्यकता पड़ी तो अपने सामर्थ्य के
00:29:11:08 अनुसार प्रतिकार भी करेंगे हम ठीक है तो मुझे लगता है कोई आने वाला नहीं है इसको यही समाप्त करते हैं निग्राचार्य जो समर्थन करते हैं गुरु जी का नहीं जिस अंश में समर्थन करते हैं वह ठीक है मगर ऐसा है ना कि जो बुद्धिजीवी वाली जेंट्री है वह निग्रचार से प्रभावित हो जाती है। तो निराचार्य जी से प्रभावित होती है तो फिर उनके मन में जो वो आएगा वह पक्का वाला आएगा गुरुदेव के प्रति या किसी भी प्रमाणिक आचार्य के प्रति तो जब तक अंतिम विकल्प ना हो इस तरह से बोलना प्रमाणिक आचार्य के लिए अंतिम विकल्प है हिंदुओं का जो गुरु गद्दी है शंकराचार्य की उस दृष्टिकोण से सोचना पड़ेगा समाज में क्या समाज को हम ये बोल रहे हैं कि भाई गुरु गुरु से जब तक आप नहीं जुड़ेंगे तब तक समाज में एकत्व नहीं आएगा और ले दे के जिस गुरु से हम जोड़ रहे हैं जो गुरु जिसके छत्रछाया में सनातन समाज एक हो सकता है आप उसको भी आप क्रिटिसाइज कर रहे हो या उसको भी आप क्लेम कर रहे हो और उन क्लेम्स में भी कई क्लेम्स ऐसे भी हैं जिनके जिनको रिफ्यूट किया जा सकता है क्योंकि गुरुदेव
00:30:26:16 पे आपने बहुत ज्यादा सैद्धांतिक प्रश्न तो किए नहीं प्रासंगिक वैसे व्यवहारिकता वाले प्रश्न किए हैं कि वह वैष्णव क्यों कह दिया या इसी तरीके के खैर कृपया आप इस के अमोग लीला दास से डिबेट करने का प्रयास करें हमारा आप संपर्क करवाएं वो लोग हमसे नहीं करेंगे बातें शंकराचार्य के लोगों से जल्दी बात नहीं करते इस वाले अगर जहांजहां हमने बातें की है वहां वहां पे हमने बताया नहीं था कि हम शंकराचार्य जी की तरफ से हैं। यह तो बताया था कि हम आपसे बातचीत करने आए हैं धार्मिक विषय पर हमने यह नहीं बताया था हम शंकराचार्य जी से जुड़े हुए हैं बताते तो वह होता ही ना आपके सामने आता ही ना कभी तो सांप और बिच्छू शेर को काटा नहीं करते दूर दूर से रेंग कर निकल जाते हैं अगर आपको आप किसी तरीके से हमारा संपर्क स्थापित करवा पाए तो बताइएगा आपके अनुसार श्री कृष्ण पूर्ण परब्रह्म परमात्मा है कि नहीं बिल्कुल है पूर्ण ब्रह्म है कृष्णस्तु भगवान स्वयं देखिए बात ऐसी है शायद अब मैं क्या किया करूंगा जब किसी से तर्क वितर्क होगा चर्चा होगी तो पहले अपना पॉइंट क्लियर कर दूंगा कि हम क्या मानते हैं हम जो जिसको
00:31:41:27 हम फॉलो करते हैं उसमें श्रुति का कहीं भी विरोध नहीं होता है श्रुति ने पांच रूपों को स्वीकार किया है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश तो एक ही ईश्वर स्वयं को पांच रूपों में प्रकट कर रहे हैं जब वो जन्म दे रहे हैं तो ब्रह्मा है जब वो पालन कर रहे हैं तो विष्णु है जब वो संहार कर रहे हैं तो शिव है। जब वो निग्रह कर रहे हैं तो माता है और जब वो अनुग्रह कर रहे हैं तो गणेश है। ब्रह्मा, विष्णु, महेश, भगवती और गणेश। तो ये पांचों रूप हमारे लिए बराबर है। हमारे वीडियोस भी हैं। आप देखिएगा उसमें जाकर के। पांचों रूप बराबर है। अब प्रॉब्लम आती है कि पांच रूप बराबर है तो क्या सबकी भक्ति करें? नहीं। हमारे पूर्व जन्म के प्रभाव के कारण या इस जन्म से प्राप्त संस्कारों के कारण इनमें से किसी एक रूप में हमारा मन ज्यादा लगता है। वह हमारे अंदर श्रद्धा आती है। इस इस जन्म में जो हमें शिक्षा प्राप्त हुई है उसके कारण। तो हमें क्या करना होता है? बाकी के जो चार रूप है उनसे आशीर्वाद लेना किसका? इनकी भक्ति करने का। तो उनका भी मान रह गया और इनकी भी भक्ति हो गई। तो मैं ऐसे करता हूं। हे ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश मैं आप सब की भक्ति प्रभु श्री राम के रूप में करने जा रहा हूं। मुझे प्रभु श्री राम के रूप में अपनी भक्ति प्रदान करिए और बढ़िया प्रभु श्री राम
00:32:57:08 की भक्ति करते उनसे बातें होती है। बातें होती है। अब इसको मत पकड़ लेना। वो जो जैसे गुरुदेव का लोग पकड़ के पूछने लग जाते हैं। अरे उनके पास तो त्रिनेत्र हैं। ये है वो है। इस तरह के जो क्वेश्चंस करते हैं ना लोग इसका अर्थ यह है कि शास्त्र शास्त्रोक्त बातों में उनको खंडन करना आपके बस की बात नहीं है। तब आप साइड की चीजें पकड़ रहे हैं। अब वो खंडन नहीं कर सकते। द्वैत अद्वैत मायावाद ये सब इन सब चीजों का खंडन आप नहीं कर सकते हैं। इसलिए आप ऐसी चीजें कर रहे हैं। नहीं मैं उनका भाई नहीं हूं भाई। मेरी पता नहीं फ्रेज आपको कैसे लग रहा है।
00:33:43:01 समझ गए कौन डरपोक यह किसने कहा? गजब दबदबा है भाई का। नमः शिवाय। अ गुरुदेव के किस्से? चलो इसके बारे में सोचते हैं। दुर्गा मां के लिए कौन सा नाम जपे? लेकिन नाम नहीं उनके लिए गुरुदेव ने बताया है
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00:34:20:14 जनक सुता जग जननी जानकी अतिशय प्रिय करुणा निदान की ताके जुपथ कमल मनाव जा सु कृपा निर्मल मति पावो
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00:34:29:18 क्या गोलोक सच में होता है धाम है भगवान के भगवान है तो उनके धाम भी है कृपया आप इस के अरे यह तो बात हो गई थी खासकर आपके साथ वाले क्या नमः शिवाय का जाप कोई भी कर सकता है? देखिए जाप करें तो जो मंत्र है वह गुरु मुख से सुन के तप किया जाता है। जैसे गुरुदेव का एक उदाहरण है। जैसे बुलेट होती है ना बुलेट अगर आप उसको बुलेट को डायरेक्ट किसी को मारो तो वो कोई चोट नहीं पहुंचाएगी सामने वाले को। पर अ क्या कहते हैं ये? वही बुलेट जब रिवाल्वर के अंदर से निकल के बाहर निकलेगी ट्रिगर दबाओगे तो वो सामने वाले को चोट पहुंचाएगी। तो गुरु जो होते हैं वो उस रिवॉल्वर की तरह ही है जिनके मुख से जब मंत्र रूपी बुलेट निकलती है तो आपका आपके लिए लाभप्रद होती है।
00:35:36:18 [गला साफ़ करने की आवाज़] गुरुदेव देखिए गुरुदेव चुनौती नहीं देते मगर ऐसा भी नहीं है कि अगर कोई उनके पंडाल में पहुंच जाएगा बिल्कुल सामने से बोलने लगेगा तो वह पीछे हट जाए मगर वह जो है इस तरह का शास्त्रार्थ वाला उन्होंने अभी आप इस संबंध में उनका राष्ट्रीय अधिवेशन था 14वा उनका वीडियो देखिएगा उन्होंने बोला इस बारे में और गुरुदेव कहते थे कि इसी मामले में गुरुदेव जो करपात्री जी महाराज हैं उनसे थोड़ा सा एक दूसरा रास्ता है क्योंकि करपात्री जी महाराज शास्त्रार्थ करते थे
00:36:22:04 गुरुदेव पांचों भगवान के जो पांचों रूप है उनमें से किसी की भी गुरुदेव के जो स्वयं के ईस्ट है कृष्ण भगवान कृपात्री जी महाराज के जो इष्ट है इष्ट थे उनके तो वो राम जी थे तो वो पांचों की आपके जो इष्ट है उनकी दीक्षा मिलती है गुरुदेव से वो पूछा जाता है आप किसकी विष्णु भगवान की सूर्य ब्रह्मा या शिव जी या माता या गणेश जी आपने क्या कमेंट किया है? बता दीजिए एक बार और मैं पढूंगा जरूर। अभी दोबारा लिख दीजिए। कबीर गॉड नहीं है आपकी गलतफहमी है। जिस दिन सामना होगा तो आपको कष्ट होगा।
00:37:14:00 मुझे तो यह समझ नहीं आता कि हिंदू लोगों की श्रद्धा फिरंगी संस्था के प्रति इतनी है और हमारी अपनी परंपरा में इतना अविश्वास क्योंकि उनका जो इंफ्रास्ट्रक्चर है प्रचार प्रसार का वो बहुत तगड़ा है और आजकल वही है प्रचार प्रसार के आधार पर आप किसी को भी विलेन बना दो किसी को भी हीरो बना दो गुरुजी कृपया बताएं लिंग के रूप में जिस निर्गुण निराकार परब्रह्म की पूजा जाता है।
00:37:47:10 सिर्फ शिवलिंग ही क्यों कहा जाता है? विष्णु लिंग नहीं शालिग्राम के रूप में निर्गुण निराकार की पूजा होती है। शालिग्राम में जी मेरा एक सवाल है। जैसे शंकर अद्वैत में जगत को मिथ्या कहा गया है और श्री अद्वैत में जगत को सत्यंतु माया में मिश्रित तो क्या यह दोनों सिद्धांत निकट है या दूर? मुझे लगता है शाब्दिक भिन्नता ही है। मिश्रित होना तो शाब्दिक भिन्नता है। गुरुदेव से अभी मैंने प्रश्न पूछा था। आपने देखा होगा विद्या अविद्या जब जब ब्रह्म जो है विद्यावान है तो वो अविद्या कैसे आई? तो उन्होंने बड़ा अच्छा बताया कि जो अविद्या है वह कोई अभाव पदार्थ नहीं है। अभाव पदार्थ का मतलब ऐसा नहीं है कि जब आपके अंदर ज्ञान नहीं है तब अज्ञानता होगी। ज्ञान का ना ज्ञान का ना होना ये सिद्ध करता है क्या आप अज्ञानी हो? नहीं। ज्ञान होते हुए भी आपके मन में एक ऐसा डिपार्टमेंट है जो आपको अज्ञानता से जोड़ सकता
00:39:02:12 है। ज्ञान होते हुए भी। इसका अर्थ है श्वेता शत्रुपनिषद में लिखा हुआ है यह कि जो विद्या और अविद्या है वह साथ में रह सकती है। यही सबसे बड़ा पॉइंट है जो लोगों ने ध्यान नहीं दिया है। यहीं पर आकर के देखिए विद्या और अविद्या जो है वो साथ में रहती है। पांचवें अध्याय में दिया है। ये देखिए। श्वेता शत्रुपनिषद। अब ये विद्या और अविद्या साथ में लेने का मतलब क्या है? इसको एग्जांपल के तौर पर समझे। जैसे कि माया रूपी संसार क्या है? वीडियो गेम। हमारे लिए वीडियो गेम जो है माया रूपी संसार है। तो जो माया वो जो वीडियो गेम है मान के चलिए उसकी एक वो जो पहले वीडियो गेम चलता था कैसेट लगाते थे। तो उसकी वो जो कैसेट है वीडियो गेम की वो हमारे पास रखी है जेब में हमेशा। हम और वह कैसेट हमेशा साथ में है। हम जब चाहे तब उस कैसेट को वीडियो गेम आदि के रूप में प्ले करके अपने मन को वहां से बहला सकते हैं। इसी तरीके से यह वीडियो गेम की कैसेट जो है यह अविद्या है। इसी तरीके से यह जो वीडियो गेम की कैसेट है हमेशा ब्रह्म के साथ रहती है। और अब आप भी सोचो आपको मालूम
00:40:17:13 है कि आप कौन हो? आपकी सच्चाई क्या है? सब कुछ मालूम है। फिर भी आप कोई मूवी देखते हुए प्रभावित हो जाते हो ना। हंसने लगते हो। डर जाते हो, दुखी हो जाते हो। आपको मालूम है सच्चाई नहीं है, कल्पना है। यानी कि वहां पर आपके मन में विद्या भी है, अविद्या भी है। दोनों साथ में रह रहे हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो इसी तरीके से यही एक ऐसे पॉइंट्स हैं। एक तो व्यवहार और परमार्थ। जब यह बात आई कि अरे मैं ही ब्रह्म हूं तो क्या मैं अपनी ही पूजा करूंगा? नहीं भाई अपनी पूजा नहीं करनी है क्योंकि हम लोग मनुष्य भाव को प्राप्त हो गए हैं। जीव भाव को प्राप्त हो गए हैं। तो अब हमें यहां पर द्वैत का निर्वाह करते हुए अद्वैत तक पहुंचना है। अद्वैत जो है प्राप्ति का विषय है और द्वैत जो है व्यवहार का विषय है। जो हम ऐसा नहीं है कि सिर्फ यदि मैं श्री कृष्ण को पूर्ण परब्रह्म स्वीकार करूं
00:41:16:12 और बाकी सभी देवताओं को उनके अंतर्गत मानु तो यह अनुचित होगा। हां उनसे प्रकट मानिए। कोई दिक्कत नहीं है। मगर जब आप उनको भी देखे तो उसमें कृष्ण को देखिए ना। क्या दिक्कत है? शिव को भी देख रहे हैं तो उसमें कृष्ण को देखिए। कि मेरे कृष्ण ही है जो शिव बन गए। मेरे कृष्ण ही है जो राम बन गए हैं। मेरे कृष्ण ही है जो माता के रूप में खड़े हैं। देखो आप कितना अच्छा लगेगा। कितने संतुष्ट हो जाओगे। सोच के तो देखो। एक जगह पे आप यह सोच रहे हो ये सब बेकार है। यह सही है। केवल एक जगह पर आप ये सोच रहे हो इसमें भी तो कृष्ण है। कृष्ण को देखो ना आप सब जगह। आपको भेद आएगा ही नहीं नजर। कृष्ण ही बन गए हैं। कैलाशवासी
00:42:03:20 हम तो राम को देखते हैं सब जगह। अभी एक दिन मैं आलोपी माता के मंदिर गया था प्रयागराज में। बहुत तगड़े से वहां पर रात को आरती हो रही थी, नगाड़े बज रहे थे तो एकदम जैसे ऐसी ध्वनि हो रही थी कि जैसे वो कोई दिव्य वातावरण बिल्कुल वहां बना हुआ था। तो जब मैंने वहां माता के दर्शन किए तो वहां मुझे साक्षात राम जी नजर आए। कि आज वो राम जी माता के रूप में विराजमान है। तो ऐसे देखिए
00:42:36:07 उन सब से आशीर्वाद मांग लीजिए कि वह भगवान के ही अलग रूप है। उनसे कहिए सभी मुझे आशीर्वाद दे दो। इस रूप में आप सब की भक्ति करूंगा। आपको बड़ी संतुष्टि होगी। करके देखिएगा कभी। गुरु कैसे ढूंढे? ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। अथर्ववेद 11 पांच 16 मनुस्मृति 12वा अध्याय 112 से 114 धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बनाए। तो सन्यासी का ब्रह्मचर्य सिद्ध होता है। गृहस्थ का ब्रह्मचर्य सिद्ध नहीं होता। गस्थ रह के भी ब्रह्मचर्य का पालन किया जा सकता है। मगर यदि कोई कर रहा है तो वो सिद्ध नहीं हो सकता। आपके समक्ष वो सिद्ध नहीं है तो उसके स्वाता सुखाय के लिए तो ठीक है। तो सन्यासी का ब्रह्मचर्य जो है सिद्ध है। तो एक तो ये हो गया सन्यासी। फिर परंपरा परंपरा से होना चाहिए। भगवत गीता चार दो तीन 16 निरुक्त है। मुंडकोपनिषद में परंपरा की बात है। परंपरा कही गई है। फिर छंदोग उपनिषद में कहा जा रहा है कि आचार्य से प्राप्त विद्या ही आपके काम की है। तो आचार्य की महत्ता है वहां पर स्वा अध्ययन ना करें। मुंडकोपनिषद में भी इस तरह का भाव प्रकट किया गया है। तो तीन पॉइंट हो गए। परंपरा और आचार्य
00:43:52:04 ब्रह्मचर्य सन्यास सन्यास विरक्तता आप गस्थ से भी आप गस्थ को भी गुरु बना सकते हैं मगर यह ध्यान रखिए वो गृहस्थ किसी सन्यासी के अंडर में रहते हुए आपको शिक्षा दे रहा हो अंतिम निर्णायक सन्यासी ही होगा तो सन्यासी उसके बाद परंपरा और सभी श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा दे ऐसा ना हो कि शिव पुराण मानो विष्णु पुराण मत मानो भगवती पुराण मानो यह मत मानो वो मत मानो वो तो वो है तामसिक है यह नहीं जब वेदव्यास जी ने भी यही लिखा है वो भी उन्होंने लिखा है और कल वो बात बोल रहे थे वो समय नहीं मिल पाया भाई पुराण एक ही है कल्प की शुरुआत में एक ही पुराण का स्मरण किया था ब्रह्मा जी ने वेदव्यास जी द्वापर में आकर के उसके 18 चैप्टर्स बनाते हैं तो अब कैसे आप अंतर कर लोगे और यदि विष्णु भगवान के अलावा कहीं पर भी हरि भक्ति बताई जा रही है और वो भ्रम है तो भागवत पुराण भी तामसिक हो गया फिर तो क्योंकि भागवत में कई जगह पर जो भगवान शिव है उनको श्रेष्ठ बताया गया है महाभारत में बताया गया है महाभारत में भगवान श्री कृष्ण तो उनके नाम की दीक्षा लेकर के 1000 साल तक तपस्या कर रहे हैं पुत्र
00:45:07:08 प्राप्ति के लिए और राम जी पद्म पुराण में उनकी स्तुति कर रहे हैं। ब्रह्म वैवर पुराण में उनकी स्तुति स्तुति कर रहे हैं। क्यों कर रहे हैं भाई? वो जब भगवान है तो स्तुति क्यों कर रहे हैं? किसी और की यानी कि व्यवहार में उन्होंने यह दिखाया कि आपको जो है इस परबह्म की स्तुति करनी है। [गला साफ़ करने की आवाज़] राम जी ने गायत्री मंत्र का जाप किया है। गायत्री मंत्र का अर्थ क्या है? भूभ स्वाहा क्या? सच्चिदानंद। मैं सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को ध्यान कर रहा हूं। अब अगर यह मानेंगे कि राम जी अपना ही ध्यान कर रहे हैं। अगर यह मानेंगे राम जी कृष्ण का ही ध्यान कर रहे हैं तो इसका मतलब वहां पर राम जी ने यह सिखाया कि अपनी ही पूजा करो क्योंकि राम जी तो आदर्श है। मर्यादा पुरुषोत्तम है। राम विग्रह धर्मा। तो राम जी का अगर हम अनुकरण करते हैं तो फिर हमें वहां अगर हम यह मानेंगे राम जी ने जो गायत्री मंत्र पढ़ा वह श्री कृष्ण के लिए पढ़ा विष्णु के लिए पढ़ा तो फिर हमें वहां पर यह मानना पड़ेगा अपनी पूजा करो।
00:46:14:14 है ना? और रामेश्वरम में उन्होंने उनकी पूजा की है। अब रामेश्वर से एक बात याद आई मैंने कल भी बोली थी। वो कुछ अर्थ कुतर्की क्या करते हैं? रामेश्वर का अर्थ है कि राम के ईश्वर नहीं राम जिसके ईश्वर है। अब नर्मदेश्वर का अर्थ क्या हो जाएगा? जो नर्मदेश्वर शालिग्राम जी मिलते हैं तो वहां पर नर्मदेश्वर का अर्थ हो जाएगा नर्मदा जिसकी ईश्वर है। ऐसे ऐसे कुतर्क आते हैं। चलिए अच्छा लगा आप लोगों से बात करके। किसी का प्रश्न रह तो नहीं कि हमें कितने ग्रंथ पढ़ने की आवश्यकता है। आपको गुरु गुरु की शरण में जाने की आवश्यकता है। अगर गुरु की शरण में नहीं जाएंगे तो सारे ग्रंथ कम पड़ जाएंगे और अगर गुरु की शरण में जाएंगे तो एक ही ग्रंथ काफी हो जाएगा। सनातन धर्म क्या मतलब है? फुल डिटेल्स में एक वीडियो बनाइए। एक सरल सी व्याख्या बता दूं आपको। मनुष्य के अंदर सच्चिदानंद स्वरूप को प्राप्त करने की एक चाह विद्यमान है। तो सनातन धर्म वो है जो इस चाह को पूरे करने पूरी
00:47:29:18 करने की विधि आपको बताता है। इस चाह को पूरी करने की विधि का नाम सनातन धर्म। भाई जी आप गुप्ता रखा करो। ऐसे अनुभव गुरुदेव कहते हैं। गुप्त रखा करो। कौन सा अनुभव? चलो बाद में बात करेंगे। गुप्त है तो गुप्त ही रहने दो। गुरु कैसे मिले? भाई प्रामाणिक आचार्य के मैंने जो पैराटर्स होते हैं वह आपको बता दिए हैं। जहां पर आप भगवान की भक्ति करना आप क्या करिए जब भी किसी प्रश्न का जवाब ना मिले तो उस प्रश्न को खुद हल करने मत निकलिए। आप भक्ति करना स्टार्ट करिए। भगवान ने क्या कहा? तेरी प्राप्ति और अप्राप्ति मैं देखूंगा। तू अपने आप कितना भी कर ले प्रयास। तू वह नहीं कर पाएगा जो तुझे मिल सकता है। तो आपके सारे सवालों के उत्तर आपको मिलने लगेंगे। भक्ति लाइए अपने जीवन में। कम से कम सवा घंटे अगर आप में सामर्थ्य है भगवान के सामने बैठने का। भले ही आप भगवान कृष्ण के भगवान कृष्ण को सामने बैठे, राम के सामने बैठे, शिव के सामने बैठे,
00:48:44:26 सवा घंटे अगर आप उनके सामने बैठ पा रहे हैं। तब तो बात है कि आपको उनसे प्रेम है। अन्यथा आप वहां तो कम बैठ पा रहे हैं। और चैट करके वीडियोस में आकर कमेंट करके जवाब देकर शास्त्रार्थ करके डिबेट करके आप कुछ नहीं अपने ईगो को सेटिस्फाइड कर रहे हैं कि मेरी जो मन जो मैंने जिसको नाम दे रखा है जो भी है मैं उसको सेटिस्फाइड करूंगा वो ईगो को सेटिस्फाइड है ओपनिष भैया हमारा पुराना उपनिषद का अनुवाद पढ़ सकते हैं। कृपया बताएं।
00:49:30:14 वस्तुनिष्ठ प्रश्न जो विधिक प्रश्न है ना उसके लिए ऐसा होता है कि हमें जो नियमावली है वो खोलनी पड़ती है। तो यह वर्बली हम नहीं बता सकते विधियों के बारे में। कोई गलत बात हो गई। कोई गलत बात चीजें हो गई और विधियों विधिक के इतने ज्ञाता भी नहीं है विज्ञ नहीं है हम जो हमारे जो गुरुदेव के गुरु भाई हैं आचार्य हैं आचार्य रामशंकर शुक्ल जी उन पर ही निर्भर करते हैं तो जो विधिक निषेध वाली बातें हैं वो वर्बली अब जैसे बिल्कुल ही मुझे मालूम हो कि रुद्राक्ष का क्या नियम है तो वह तो बता भी दूंगा मगर मैं नहीं चाहता हूं कि मैं विधियों में भी विधि भी बताने लगूं क्योंकि कहीं कोई गलती हो गई तो वह एक गलत चीज चली जाएगी नाम जप किसका करना चाहिए? शिव का, कृष्ण का, राम का?
00:50:19:06 किसी का भी करिए इनमें से। भैया हम पुराणों और उपनिषद का अनुवाद पढ़ सकते हैं क्या? ये विधिक ये विधिक क्वेश्चन है। तो जी जी जी प्रयागराज। [नाक से की जाने वाली आवाज़] चलिए फिर आप सबके जुड़ने के लिए बहुत-बहुत आपका आभार। आप पुराणों का श्रवण कर सकते हैं। आप अगर शूद्र हैं तो और इससे और ज्यादा जानकारी मुझे बात करनी होगी आचार्य जी से तो मैं आपको बता दूंगा। और देखिए यहां पे सक्त वाली बात नहीं है। करना चाहिए। ऐसा कोई सख्त वक्त नहीं है। अगर करेंगे तो आपके लिए अच्छा है। नहीं स्वीकार करेंगे नियमों को शास्त्रों को तो वह आप जो भी चीजें आपके लिए है। तो इसमें ऐसा मत समझिए कि यार कोई बाउंडेशन है हमारी ओर से। मैं रोज 11 माला पंच साक्षरी मंत्र जपता हूं। मेरा कोई गुरु नहीं है। नहीं नहीं तो आप तब तक जब तक गुरु से ना मिले तब तक क्योंकि यह जो मंत्र होते हैं तारक भी होते हैं, मारक भी होते हैं। तो गुरु से ना मिले जब तक तो तब तक आप नाम जप करिए ना। क्या दिक्कत है? शिव
00:51:34:07 शिव शिव शिव शिव बोलिए। बहुत अच्छा लगता है। हम तो हम तो ज्यादातर नाम जप ही करते हैं। सबसे अच्छा लगता है नाम जप आनंद आता है। तेज तेज चिल्ला भी सकते हैं। तेज आवाज में भी नाम जप कर सकते हैं। हां ठीक है। ठीक है। हां समझ गया। उत्कल बंदोपाध्याय जी जय श्री सीताराम भगवान ने इंसान और यह सृष्टि क्यों बनाई यूं ही यूं ही बनाई जब वह कौन सी फिल्म का डायलॉग है जब मित्र बनकर काम किया जा सकता है तो फिर शत्रु बनाकर के काम शत्रु बनाने की क्या आवश्यकता है
00:52:20:03 [खांसने की आवाज़] तुलसी माला और रुद्राक्ष माला में किसको धारण करना चाहिए जिसमें आपकी प्रीति हो आध्यात्मिक अनुभव जैसे अपने नीचे आगे हां श्री राम जय जय राम का कीर्तन करिए तो मैं भी करूंगा आपसे विदा लूंगा। भगवान नाम का जाप स्मरण दिन भर में सवा घंटे की भक्ति भगवान के धाम जाने के लिए परमेश्वर के अवतार सतगुरु रामपाल।
00:52:57:10 सदगुरु रामपाल का जो ज्ञान है वह अधूरा है और उनको थोड़ा पढ़ने की आवश्यकता है तो मेरी बातें तो उनको समझ में नहीं आएगी किसी छोटे भाई को मैं बोल दूंगा आप अगर संपर्क कराएंगे तो वो समझा देंगे उनको काफी कुछ चलिए सभी को जय श्री राम बहुत अच्छा लगा आपसे जुड़कर
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