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00:00:02:15 तो जय श्री राम सभी को आज हमने एक विशेष सेशन रखा है यह उनके लिए जो समर्थन प्रकट करना चाहते हैं और उनको ठीक प्रकार से समय नहीं दे पाते हैं और हम प्रयास करेंगे कि इस प्रकार की चर्चा का आयोजन साप्ताहिक रूप से हम कर सके आने से पहले आचार्य श्री से बात हो रही थी आचार्य श्री जो है प्रयागराज वाले आप लोगों ने उनका चैनल अगर सब्सक्राइब नहीं किया हो तो आप लोग कर ले
00:00:46:01 और कई बातें थी जिसमें कि मार्गदर्शन प्राप्त हुआ उनका तो सनसनी खेज वाला आज नहीं है लाइव आप लोग सनसनी खेज के इंतजार में रहते होंगे आज कौन सा तड़कता बकता मसालेदार लाइव होने वाला है पर आज जो है वो सौहार्द पूर्ण चर्चा के निमित्त हमने रखा है यदि कोई भी समर्थन प्रकट करना चाहते हैं जो हमारे कार्यों से संतुष्ट हैं तो उनका आभार व्यक्त करने के लिए हमने आज की चर्चा रखी है लिंक आपको दिया जा रहा है अगर कोई लाइव जुड़ना चाहते हैं आकर के और जो है विचार प्रकट करना चाहते हैं क्वेश्चंस के लिए नहीं है य लाइव और ना ही वैचारिक मतभेद के निमित्त है यह लाइव है जो समर्थन प्रकट करना चाहते हो वह आ सकते हैं और आकर के अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं क्योंकि होता क्या है कि जो हमारी वैचारिक मतभेद के निमित चर्चा हो रही होती है उस चर्चा के मध्य में या फिर उसके लास्ट में व तरीके से
00:02:01:09 प्रॉपर समर्थकों की बात हो नहीं पाती वहां पर तो इसलिए विशेष रूप से आज उन्हीं के लिए रखा है कि जो भी है वह आ सकते हैं जब तक कोई नहीं आ रहा है तब तक हम लोग भगवत गीता की कुछ बातें करेंगे भगवत गीता एक वो जो प्रश्न आता है कि ईश्वर ऐसा कैसे कर सकते हैं वैसा कैसे कर सकते हैं क्या ईश्वर बुराई वाले कार्य भी कर सकते तो इस बारे में हम लोग कई बार बात कर चुके हैं कि जब ईश्वर ने बुराई को बना दिया तो अगर बुराई करना पाप है या उसका दोष ईश्वर को लग सकता है तो बुराई को बनाने का दोष भी ईश्वर को लग जाता जैसे आर्य समाज की तरफ से प्रकार का कई बार बताया जाता है भाई वह ऐसा कर सकता है वैसा कर सकता है मगर आज हम भगवत गीता में इसका वो दिया गया है वह हम आज जो है बात करते हैं उस बारे
00:03:17:07 में 2.17 से लेकर के 31 तक इस बात का उत्तर दिया है भगवान कि जब कोई मुक्त हो जाता है उसकी सम दृष्टि हो जाती है तो उसको कार्य जो है कर्म वो लिप्त नहीं कर सकते हैं ना तो फिर होने वाला फायदा पहुंचेगा ना ही ना होने से नुकसान 2.17 हम लोग देखते क्या लि भगवान 2.17 से लेकर के 2.31 तक अर्जुन को यही समझा रहे हैं कि ना कोई मरता है ना कोई मारता है है ना देखिए जैसे हम लोग कई बार भगवान का निर्णय इस बा इस आधार पर करते हैं ईश्वर का निर्णय कि अगर ईश्वर है तो य मर क्यों रहा है ईश्वर है भला वो बलि लेगा इस बात पर भी होता है बलि का खंडन बलि इस उसम दिया गया है बली भेंट जो भी है वो एक अलग चैप्टर है कि बली एक परिस विधि है जीवन में जब तमो गुण की प्रधानता के कारण मास मांसाहार आदि जैसा आचरण हो रहा है तो उसका संकुचन
00:04:32:10 कैसे हो व उससे निवृत कैसे हो उसका उसमें परवन है बलि इत्यादि तो वो बात एक अलग है मगर ईश्वर के रहते ईश्वर क्या बलि की व्यवस्था कर सकता है ऐसा कैसे कह सकता है तो जब हम यह कहते कि ईश्वर किसी निर्दोष को निर्दोष का प्राण या बेजन का इस तरह की पंक्तिया कहते हैं पहली बात बताइए कि जब वो अपनी मृत्यु मर रहा होता है पशु मैं भी बलि का विरोधी हूं इस पर मैं वीडियो लाऊंगा पर आज बात कुछ और संदर्भ में है कि क्या ईश्वर को इस पैरामीटर पर हमें नापना चाहिए कि उसके रहते कोई मर क्यों रहा है उसके द्वारा किसी की बलि की व्यवस्था कैसे हो गई तो उस पर मैं बात कर रहा हूं कि यह आधार नहीं होना चाहिए ईश्वर की ईश्वर होता को समझने क्यों नहीं होना चाहिए क्योंकि मान लीजिए कि ईश्वर ने कहीं पर किसी की रक्षा नहीं की है जैसे लोग कहते हैं कि वहां पर रेप हुआ वो हुआ जब वो अपनी मृत्यु मर रहा है तब भी तो ईश्वर उसे बचा सकता है वो बलि नहीं हो रही उसकी उसके साथ कोई दुष्कर्म नहीं हो रहा मगर जब वह अपनी मृत्यु मर रहा है 80 साल प 90 साल प तो तब भी तो ईश्वर उस मृत्यु को रोक
00:05:47:10 सकता है तो क्या आप ईश्वर का अर्थ इस बात में समझते हैं कि किसी मृत्यु नहीं होगी मृत्यु होना बंद हो जाएगा संसार में कोई भी प्राणी मरेगा नहीं क्योंकि जब भी वो मरेगा उसमें ईश्वर का दोष आ जाएगा ईश्वर दोष आ जाएगा भाई ईश्वर ईश्वर के रहते मृत्यु क्यों हो रही है इसका अर्थ यह है कि ईश्वर का आधार य नहीं है कि किसी की मृत्यु होनी है कि नहीं होनी है बेज मान है कि क्या है आयुष जी है आयुष जी आप
00:06:26:21 आइए इनका आ नहीं रहा ऑप्शन आयुष जी ऊपर आने का तो ईश्वर का अर्थ इसमें नहीं है कि कोई भी मरेगा नहीं ईश्वर है तो मरना बंद हो जाए लोग ऐसा कुछ नहीं तो क्या है
00:07:01:20 कि ईश्वर है तो उसको बचा क्यों नहीं रहा है ईश्वर है तो बलि के लिए कैसे कह सकता है तो यह आधार नहीं है ईश्वर की ईश्वर होता को समझने का अब इसको कैसे समझे ईश्वर अर्जुन को क्या बता रहे हैं दो 17 में अविनाशी तो उसको जान जिससे यह संपूर्ण संसार व्याप्त है इस अविनाशी का विनाश कोई भी नहीं कर सकता ठीक है अविनाशी जानने में ना आने वाला और नित्य रहने वाला शरीर के शरीर के यह देह अंत वाले कहे गए हैं इसलिए अर्जुन तुम युद्ध करो जो मनुष्य इस अविनाशी शरीर को मारने वाला मानता है और जो मनुष्य इसको मरा समझता है वह दोनों ही इसको नहीं जानते क्या खंडन कर दिया ना यानी कि मृत्यु मारने वाला मरने वाला और मारा जाने वाला है ना इसमें ऐसा समझने वाला उसको यहां पर क्या कह दिया कि वो नहीं जानता है अज्ञानी कह दिया भगवान क्यों कहा हमारे लिए कोई मर रहा है कोई किसी को मार रहा है हमारे लिए ईश्वर की दृष्टि से वास्तविकता कुछ और है नहीं मर रहा है ना कोई मर रहा
00:08:16:22 है ना कोई मार रहा है ईश्वर की दृष्टि में यह किसी का मरना यह सब चीजें कुछ नहीं है नथिंग यह आपको समझना हो और अगर है तो वो ईश्वर ईश्वर नहीं है वो प्रभावित हो रहा है यहां के प्रपंच से सांसारिक प्रपंच से जो मुसलमान जो इस्लामिक लोग ये क्लेम करते हैं कि तुम्हारा ईश्वर कैसा है उसी की कुरान में लिखा हुआ है तुम्हारा ईश्वर कैसा है वो तो वहां पर भी है यहां पर भी है सब जगह य कैसा ईश्वर है गंदगी में भी उसी के उसम लिखा हुआ है यह संसार जो है उसके लिए खेल है ठीक है इसके आगे क्या कहा भगवान ने यह शरीर ना कभी जन्मता है ना मरता है तो वास्तविकता क्या है जो ईश्वर को पता है कि शरीर में रहने वाला जो देही है व नित्य है वो ना कभी जन्म लेता है ना मरता है तथा यह उत्पन्न होकर फिर होने वाला नहीं है यह जन्म रहित है नित्य निरंतर रहने वाला तो भगवान अर्जुन को सिखा रहे हैं कि इसमें मरने और ना मरने में सम बुद्धि रखो क्योंकि ना कोई वास्तविकता यही है कि ना कोई मर र ना कोई मार रहा है अब जब वोह अर्जुन को सिखा रहे हैं तो क्या वह खुद इस बात से प्रभावित होने चाहिए कि कौन मर रहा है कौन नहीं मर रहा
00:09:32:21 तो इसलिए इस आधार पर ईश्वर को नहीं आकना चाहिए कि भाई वह बलि के कैसे कर सकते हैं उनके रहते किसी की मृत्यु कैसे हो सकती है रेप कैसे हो सकता है वह सम बुद्धि है मुक्त है वह वस्तुतः आत्मा के साथ कुछ नहीं हो रहा है जो वास्तविक जो पहचान है जीव की उसके साथ कुछ नहीं हो रहा है इसलिए वह समबुद्ध है उन चीजों को लेकर और सुनिए शरीर के जाने नहीं मरा जाता हमको लगता है कि हम मर रहे हैं या कोई मर रहा है आप लोग अपना चेहरा दिखाए दक्ष प्रताप
00:10:11:04 सिंह जी जय श्री राम शम जी नहीं नहीं प्रश्न के लिए नहीं है आज आप अभी हमने शुरू मेंही बताया किसलिए है प्रश्न के लिए नहीं है आप हमारा नंबर नोट कर लीजिए 74 8369 इस पर फॉर्म भरेंगे तो इस पर आपको फॉर्म मिल जाएगा करने पर वहां पर फॉर्म आएगा वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा उसको भर दीजिएगा हम लोग लाइव आपसे बात करेंगे ठीक है जय
00:10:57:00 श तो सम बुद्धि हो गई यहां पर मृत्यु और जीवन में सम बुद्धि तो यह जो हम लोग कनेक्ट है क्योंकि बॉडी से और ये सांसारिक प्रपंच से और हमारे लिए यह सब रियलिटी है इसलिए हम लोग प्रभावित होते हैं हमारे लिए किसी का मरना और जीने जीने में अंतर आता है और भगवान इस भाव से ही आपको दूर करने के लिए भगवत गीता में सिखा रहे हैं अर्जुन को कि सम बुद्धि रखो मरने मारने में कोई अंतर नहीं है ना कोई मर रहा है ना कोई मार रहा है तो क्या है आगे क्या बोल हैं जो मनुष्य इस शरीर को अविनाशी नित्य जन्म रहित और अव्य जानता है वह कैसे किसको मारे और कैसे किसको मरवाएगी
00:11:47:07 गु इसीलिए जो जगतगुरु जी का एक वचन है बहुत इंपॉर्टेंट है क्या जिसको आत्मा का ज्ञान हो जाता है उसको भय बहुत कम हो जाता है ये सब अध्यात्म शास्त्र क्यों है आपके जीवन में जो भय है ना वो कम हो जाता है भय रहित होते चले जाते हैं आप यह जो डर लग रहा है यह छिन जाएगा वो छिन जाएगा आपका जो पर्सपेक्टिव है दुनिया को देखने का बदल जाता है और जब पर्सपेक्टिव बदलता है तो आपका लौकिक जीवन भी बहुत सुख और समृद्धि से व्यतीत होता है चैन से व्यतीत होता है क्योंकि आपका उसको देखने का पर्सपेक्टिव चेंज हो गया पर्सपेक्टिव आपका पूरा चेंज हो जाता है अब जब आत्मा का ज्ञान होना ज्ञान हो गया ना कोई मरता ना कोई मारता है एक एग्जांपल लीजिए आप जैसे हमको यह पता चल गया कि कण कण में ईश्वर है ईश्वर भी ईश्वर ही अनेक रूपों में वो हो रहा है तो क्या होता है कि हम जब एक जगह बात क कि सब में ईश्वर को देखो सम सम दृष्टि रखो सब में ईश्वर को देखो ईश्वर में सबको देखो तो क्या हो रहा है कि आप जा रहे हैं अब इस ज्ञान को लेने के बाद जब आप चल रहे हैं सड़क पर तो क्या हो रहा है कि कोई को बिना सिग्नल दिए किसी ने लेफ्ट गाड़ी
00:13:02:09 मोड़ दी अपनी किसी ने दाहिने हाथ पर अपनी गाड़ी मोड़ दी बिना आपको सिग्नल दिए और आप एकदम से आपकी जो है अव्यवस्थित हो गया आपका मामला तो ज्यादातर आपके मन में क्या आएगा यह भी भगवान का अंश है यह भी मेरी तरह है फसा हुआ है गलती हो रही है इसके घर में भी क्लेश होंगे प्रपंच होंगे यह प्राइमरी थॉट आपके अंदर आने लगेगा आपका उनके प्रति जो है उदार भाव हो जाएगा शष्ण हो जाएंगे प्रेम भाव आएगा सबके प्रति यह है समाज निर्माण वाला ज्ञान समय आने पर अति हो जाने पर दंड भी दिया जाएगा मगर जो प्राथमिक वो है उसमें क्या आएगा दया करुणा यह भी देखिए माया में फसा हुआ एक व्यक्ति जो अपने घर के परेशानियों में चला जा रहा है उस ध्यान ना होने के कारण प्रज्ञा शक्ति कमजोर होने के कारण इसने बिना हथ दिए जो है अपनी गाड़ी को मोड़ दिया नहीं तो अगर यह चीजें नहीं होंगी अध्यात्म तो क्या होगा यह वाली जो सम दृष्टि की भावना है वह आप पाना संभव नहीं है उसके चांसेस फिर कम हो जाते हैं फिर क्या होगा मन में उसके प्रति गुस्सा आएगा गाली निकलेगी कैसे इसने गाड़ी मोड़ दी यहां से वहां तो यह अध्यात्म
00:14:17:14 शास्त्र कैसे समाज और राष्ट्र का निर्माण करते हैं इसको भी समझिए मनुष्य जैसे पुराने कपड़ों को छोड़कर नए कपड़े धारण करता है ऐसे ही ही पुराने शरीरों को छोड़कर नए शरीर को धारण करती यह वो पर्सपेक्टिव है जो भगवान देख रहे हैं इसलिए भगवान विचलित नहीं होते हैं यह मर रहा है वो मर रहा है हम विचलित होते हैं क्योंकि हम शरीर के कारण यहां से जुड़ गए हैं और यह हमें केवल थ्योर कली पता चल रहा है कि हम आत्मा है अभी भी हमारे शरीर के जो कर्मेंद्रियां ज्ञानेंद्रियां उनके द्वारा जो हमें प्राप्त हो रहा है जो सूचनाएं हमको मिल रही है वो इतनी प्रबल है कि ये थ्योर कली जान लेने के बाद अभी भी हम इतने इतना ज्यादा कनेक्ट इस संसार से कि इस संसार से आने वाली सूचनाओं की वास्तविकता से जुड़ गए और मुक्ति क्या है इन सूचनाओं से प्रभावित ना होने की स्थिति मुक्ति है ठीक है तो यह अभी मैं आपको बताऊंगा सम बुद्धि रखने की बात कोई आया क्या कोई नहीं है ठीक है आगे चलते हैं
00:15:43:16 शस्त्र इस शरीर को काट नहीं सकते तो भगवान यहां पर हमें सम बुद्धि रहने के लिए ही बता रहे हैं कि शस्त्र इस शरीर को काट नहीं सकते अग्नि इसको जला नहीं सकती नैनम छिंदंति सण नैनम दहति पावक ना चैनले अ न शोष मारता तो आप लोग जानते ही होंगे यह शरीर काटा नहीं जा सकता यह जलाया नहीं जा सकता यह गीला नहीं किया जा सकता है सुखाया नहीं जा सकता कारण कि यह नित्य रहने वाला सब में परिपूर्ण अचल स्थिर स्वभाव वाला है सनातन है शाश्वत है शरीर आत्मा जो है वह सनातन है शाश्वत है तो भगवान यह जानते हैं भगवान आपको इस रूप में जानते हैं उ इसलिए फर्क नहीं पड़ता है आपके साथ ये सब चीजें हो रही है भगवान आपके इस रूप को जानते हैं जैसे कि घर में जब बहुत छोटा कोई शिशु होता है तो वह क्या करता है वो कुछ ऐसी चीजों के लिए रो रहा होता है जो आपकी दृष्टि में मायने नहीं रखती हो सकता है वह दूर वही सूर्य को देख के कहे मुझे आम चाहिए रोने लग जाए आप जानते हो सूर्य सूर्य
00:16:59:00 आम नहीं है ऐसी बहुत सी चीजें शिशु करता है कभी-कभी तो वह गुस्से में आकर के अपने माता-पिता को अभिभावक गणों को घूंसा मारने लगता है कुछ नौच खाने लगता है और जो अभिभावक होते हैं व हस रहे होते हैं तो क्या अभिभावक बुरे हैं गलत है दोषी है नहीं उनका पर्सपेक्टिव जो है व्यापक है वह जानते हैं सच्चाई की वह जो बच्चा जो रो रहा है वोह अज्ञानता के कारण रो रहा है इसलिए वो हसते हैं इसलिए वो शांत रहते हैं इसलिए कंपैरेटिव टू शिशु जो अभिभावक होते हैं वह स्थिर होते हैं इसी प्रकार से हमारे कंपेरिजन में जो ईश्वर है व नित्य स्थिर सनातन है फ्लकचुएट नहीं होता क्योंकि उसको वास्तविकता मालूम है
00:17:47:09 आपकी यह सब चीजें अच्छाई बुराई य फसना मरना जीना और सारे जो कर्म कुकर्म यह सब जो हो रहे है ये हमारे पर्सपेक्टिव से हो रहे हैं अच्छ अच्छाई और बुराई ईश्वर तो देख रहा है ना कहीं कुछ नहीं हो रहा है सब खेल है तो सनातन है यह देही प्रत्यक्ष नहीं दिखता है यह चिंतन का विषय नहीं है शाश्वत कुमार जी जय श्री राम जय श्री राम गुरुजी यह निर्विकार कहा जाता है इस देही को जानकर शोक नहीं करना चाहिए अब ली यहां भगवान ने कह दिया शोक नहीं करना चाहिए जब उसके साथ कुछ हो ही नहीं रहा है तो अर्जुन को वह क्या बता रहे हैं कि जब तूने इसको देही को जान लिया तो अब तुझे शोक नहीं करना चाहिए कि कौन मरा कौन
00:18:45:25 कटा फिर क्या अगर तुम इस देही को नित्य पैदा होने वाला अथवा नित्य मरने वाला भी मानो तो भी तुम्हें इस प्रकार का शोक नहीं करना चाहिए कारण कि पैदा हुए की मृत्यु होगी तो इसका मत मतलब जब किसी को मारा जा रहा है तो उससे भी प्रभावित नहीं होना चाहिए यह बात भगवान बता रहे हैं समत्व बु बुद्धि सम सम दृष्टि लाने की बात भगवान यहां कह रहे हैं अतः निवारण नहीं हो सकता अत इस विषय में तुम शोक नहीं करना चाहिए सभी प्राणी जन्म से पहले
00:19:18:12 अप्रकृतिक थे सब और मरने के बाद फिर अपक हो जाएंगे आज नहीं तो कल तो इस विषय में भी नहीं लाना चाहिए कि इसलिए भी प्रत नहीं होना चाहिए कि किसने किसको मारा किसने क्या किया केवल बीच में ही प्रकट दिखते हैं अत इसमें शोक करने की बात ही क्या है प्रभावित होने की बात क्या जब वह अर्जुन को सिखा रहे हैं कि शोक मत कर प्रभावित मत हो तो आप क्या सोचते हैं कि भगवान को प्रभावित होना चाहिए यह सब उनसे उनके लिए जो बोलते हैं अरे तुम्हारा ईश्वर कैसा है जो ऐसा कर सकता है वैसा कर सकता है यह सब बातें उनके लिए है ईश्वर अगर यहां होने वाले प्रपंच से ऊंच नीच के भेद से अच्छाई बुराई के भेद से प्रभावित हो रहा है तो वह ईश्वर नहीं है क्योंकि वह मुक्त नहीं है वह प्रभावित हो रहा है और यदि प्रभावित नहीं हो रहा है तो उसके लिए सब चीजें इक्वल है और उसी इक्वलिटी को प्राप्त करना ही तो मोक्ष है इसीलिए वह बता रहे मोक्ष का रास्ता कोई इस शरीर को आश्चर्य से देखता है और वैसे ही कोई दूसरा इसका आश्चर्य की तरह वर्णन करता है तथा ने कोई इसको आश्चर्य की तरह सुनता है और इसको सुनकर भी कोई
00:20:33:16 नहीं जानता अर्थात वह दुर्विजय 29 वा श्लोक था इसके बाद अपने छात्र धर्म को देखकर भी तुम्हें विकम अर्थात कर्तव्य कर्म से विचलित नहीं होना चाहिए अब यहां छात्र धर्म की बात ले आए तो हर तरह से व उसको बता रहे हैं कि किसी भी प्रकार से पकड़ लो युद्ध से तुम्हें मुंह नहीं फेरना चाहिए क्योंकि ना कोई मरता ना कोई मारता है अगर तुम मरने और जन्म लेने वाला मान भी रहे हो तो पहले भी व नहीं था बाद में भी नहीं रहेगा अगर आज तुम उसको नहीं मारते हो अपने कर्तव्य का पालन नहीं भी करते हो तो कल को व उस स्थिति में पहुंचना है बस आज तुम अपने कर्तव्य का पालन करके धर्म के पथ पर चलकर अपनी अपना जो साधन है वह सिद्ध करोगे विचलित नहीं होना चाहिए धर्म में युद्ध से बढ़कर छत्रीय के लिए दूसरा कोई कल्याण काक मार्ग नहीं है ये बहुत अच्छी चीज है धर्म मय युद्ध से बढ़कर क्षत्रिय के लिए कोई दूसरा कल्याण काक कर्म नहीं है कभी-कभी कुछ विधर्मी जो सनातन विरुद्ध तंत्र इस तरह के आरोप लगाते हैं कि गीता है यह उसका जवाब है गीता युद्ध करने को कहती है मगर कौन सा धर्म मय धर्म क्या
00:21:48:26 है वो नियम जिनके कारण कोई मनुष्य जान पाता है कि माता है बहन है पत्नी है इसमें अंतर कर पाता है तो धर्मम क्या हुआ उन नियमों की रक्षा नहीं करेंगे तो लुप्त हो जाएंगे मानव मानव नहीं रहेगा मनुष्य मनुष्य नहीं रहेगा माता बहन और पत्नी में अंतर बंद हो जाएगा तो धर्मम युद्ध के लिए गीता कहती है सिर्फ युद्ध के लिए नहीं कहती अपने आप यह 31 तक का था हो गया तो इसमें सम बुद्धि की बात की है और
00:22:29:19 [संगीत] एक चीज और बस मैं दो मिनट लूंगा फिर मैं आपको सुन लूंगा ब दो मिनट और सम दृष्टि से धर्म धर्म युक्त जो युद्ध है वह पाप नहीं है सम दृष्टि अगर आपकी ना आपको जीत की लालसा है ना हार का भय ये 2 38 में कहा है भगवान
00:23:11:04 ने कर्म फल में अनासक्त होकर कर्म करने वाला श्रेष्ठ है कर्म फल में जो अनासक्त है वो कर्म करने वाला श्रेष्ठ है भगवान ने कहा और जो भगवान लिप्त नहीं होते हैं वो देखिए क्या कह रहे हैं भगवान चार न में क्या कह रहे हैं भगवान के जन्म और कर्म की दिव्यता को जानने वा जानना ही तत्व ज्ञान भगवान के जन्म और कर्म जो उनके कर्म है उनको मनुष्य जैसा कर्म करने वाला समझना गलत है उनकी दिव्यता को जानने वाला तत्व ज्ञानी है और क्या कह रहे हैं कि 41 में कह रहे हैं सृष्टि आदि कर्म का कर्ता होने पर भी ये लोग कहते हैं ना कि इकोन के लोग कहते हैं कि सबका कारण कुछ कहते हैं कि सबका कारण जो है कृष्ण है मूल कृष्ण है तो जब सबका कारण कृष्ण है तो यह बात प्रभुपाद जी ने भी कही कि रास्कल का कारण भी कृष्ण है रेपिस्ट का कारण भी कृष्ण है मेरे भाई दुनिया की ऐसी कोई भी चीज जिसका कारण कृष्ण नहीं है अगर है दुनिया में तो फिर कृष्ण ईश्वर नहीं है अगर कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को ईश्वर माना जा रहा है
00:24:26:08 तो अगर वो यह कह रहा है कि मैंने तान का मैं कारण नहीं हूं उसमें शैतान है ना जो भटका है कुरान के अनुसार तो अगर वोह कुरान का ईश्वर जो है शैतान का कारण नहीं तो ईश्वर कैसा कोई दुनिया में कोई चीज है जिस पर उसकी सत्ता नहीं है वो ईश्वर नहीं है सर्वव्यापक सर्व शक्तिमान आर समाज का ईश्वर अगर उसका बुराई पर सत्ता नहीं है उसकी तो वह ईश्वर है क्या ईश्वर नहीं है फिर वो तो यहां क्या कहा जा रहा है ईश्वर के लिए कि सृष्टि आदि कर्म का करता होने पर भी मुझ अविनाशी को तू अकता जान क्यों जान फल में आसक्ति ना होने के कारण भगवान को फल से कोई आसक्ति नहीं वह कुछ कर रहे बस कर रहे हैं उनको ना फल से कोई मतलब है ना नुकसान से ना भय है ना लाभ है ना लाभ है ना हानि का भय
00:25:23:18 तो तो क्या कह रहे हैं कि फल में आसक्ति ना होने से भगवान पर किसी भी कर्म का कर्म के कर्ता होने का दोष नहीं लगता बात खत्म हो गई वो कर्म मुझे लिप्त नहीं कर सकते भगवान ने ये भी कहा है कि उनको कर्म जो है लिप्त नहीं करते कहां कहा है बता देता हूं कामना संकल्प आसक्ति रहित कर्म करने वाला ही ज्ञानी है
00:26:06:18 हां यह चार बा मेंही लिखा है कि फल में आसक्ति ना होने से भगवान पर किसी भी कर्म के कर्ता होने का दोष नहीं लगता और उन्हें कर्म जो है लिप्त नहीं कर सकते तो भगवान को आप समझिए भगवान सर्वव्यापक है ईश्वर है वो अब बात येय आती है कि जब ईश्वर में सबको ईश्वर में अच्छाई बुराई सब कुछ है तो हम ईश्वर की भक्ति क्यों कर रहे हैं तो पहली बात यह है कि आप यह जो आपकी जीवन में जो फ्लकचुएशन हो रहा है जो आप प्रभावित हो रहे हैं सुख और दुख से उससे मुक्त होने के लिए आपको ऐसी ही किसी यह जो आपके अंदर प्यास है इससे मुक्त होने की इस प्यास का विषय वही ईश्वर हो सकता है जो इस प्रभाव से मुक्त हो वो है इसलिए आप उसकी भक्ति कर रहे हो अगर वो मुक्त नहीं है तो आपको मुक्त कहां से कराएंगे जो खुद मुक्त नहीं है वो आपको मुक्त कहां से
00:27:08:13 कराएगा इस्लाम का ईश्वर प्रभावित होता है बाइबल का ईश्वर प्रभावित होता है तो वो आपकी इस मुक्ति का विषय नहीं है कि सुनामी आएगी तो घबरा गए प्रलय आई तो घबरा गए जो वास्तविक संत लोग हैं उनके पास जब आप जाएंगे ना कि हमारे पेट में किडनी खराब हो गई है यह हो गया वो हो गया है हमारे कैंसर हो गया है हम मरने वाले हैं हम क्या करें कोई तंत्र विद्या बताओ वास्तविक संत आपको यह सब नहीं बताएंगे कि हम चमत्कार से आपको सही कर दे हो सकता है उनके पास चमत्कारिक शक्तियां हो नहीं बताएंगे क्या बताएंगे आत्मा का ज्ञान व आपको बताएंगे ना तू कभी मरता है ना कभी मारा जाता है यह है संत व आपको बताएंगे नन छिंदंति सत्रा नन दती पाव का वो इतना आपको यह वाला ज्ञान देंगे कि जिस कि आपके अंदर य जो भय जो कुंठा है वो खत्म होती चली जाएगी और जिसके कारण जितने भी दिन आप उस भौतिक जीवन को जिएंगे वह आपका संतोष पूर्ण हो जाएगा यह होते हैं सं उनको आवश्यकता नहीं है किसी तंत्र से आपका वह चमत्कारिक रूप से आपकी वो चीजें ठीक करने की वो केवल भगवत गीता के श्लोक पढ़ेंगे अगर बुद्धि
00:28:23:19 में आपके आता गया तो फिर आपका यह जो नैनम ति सस्त्र नन दती पावा कहा है ये आपके घुस जाएगा और फिर आपका ये जो भय हो रहा है विचलित हो रहा है प्रभावित हो रहे हैं सब चीजें खत्म हो जाएंगे यह होते हैं संत तो ये चर्चा थी भगवत गीता पर जी शाश्वत कुमार जी जय श्री राम राजा जी जय श्री राम मैं अभी आपसे बात करता हूं शाश्वत कुमार जी जय श्री राम जी प्रणाम जी जी ज जैसे आपने बताया की की चोरी हो या राम हो जो भी हो उनका भी कारण कृष्ण जी ही है तो तो फिर वोह तो आपने बिल्कुल सही बोला तो फिर उसका उसके बाद का क्या
00:29:20:27 होगा पह बात तो य है किय जो चर्चा रखी है प्रश्नोत्तरी के लिए रखी नहीं है जी जी यह रखी है कि अगर कोई संतुष्ट है हमारे कार्यों से तो वह आकर के अपने विचार प्रकट कर सकते हैं मैं तो पूरा संतुष्ट हूं गुरुजी क्योंकि संतुष्ट क्या आपका य सानिध्य प्राप्त आपके जैसा ही मैं भी बनने का प्रयास कर रहा हूं तो अच्छी बात है मगर प्रश्नों के लिए नहीं था फिर आप क्लास आ सकते आज ऐसा होता है कि कंटेंट को लेकर चलते हैं उसम दिक्कत आ जाती है जैसे हम लेकर चले आजन वालो से चर्चा अब कोई व्यक्ति उस टाइटल से सर्च करेगा स्कन वालो से चर्चा खोल के देखेगा अब उसम हो क्या रहा है स्न वाला पा मिनट था 10 मिनट था और उसके बाद वो कंटेंट यह हो रहा है कि उसमें कोई आ रहा है समर्थन कर रहा है या कोई आ रहा है आ समाज के संदर्भ में प्रश्न पूछ रहा है तो कंटेंट उसको मैनेज कैसे करें लाइव को य दिक्कत आती है चलिए पूछिए आपने पूछा तो
00:30:29:15 जी शमा कीजिए गुरुजी बस बोलिए बोलिए प्रश् बोलिए जी मेरा तो जी संतुष्टि से ही लेके इसको मैं प्रश्न को घुमा रहा था कि यदि ईश्वर चाहे जैसे कि अगर चोरी का भी जो जो पावर है वह भी का जो कारण व भी अगर ईश्वर ही है फॉर एग्जांपल तो यदि ईश्वर चाहे तो हमें हमारा दिमाग को उस तरह से प्रोग्राम भी कर सकते हैं कि हमें चोरी भी सही लगे तो मब कर सकते हैं बिल्कुल क्योंकि जैसा आपने बोला कि गलत तो दुनिया में दुनिया में जो चोर है उसमें 90 पर चोर तो यही सोचते हैं ना कि क्या कहते हैं मैं जो कर रहा हूं वो सही कर रहा हूं हां 90 पर तो यही सोचते हैं ना बहुत कम चोर ऐसे होंगे जो अपने आप को पापी समझते हुए चोरी करते होंगे ठीक है तो उन चोरों का माइंड किसने किसके कंट्रोल में है भगवान के कंट्रोल में ये भगवान के पर्सपेक्टिव से ये खेल है हा मनोरंजन ये खेल है एक तमाशा और उसमें जैसे हम लोग कोई खेल खेलते हैं जैसे मान लीजिए
00:31:44:20 कार चल रही है हमारी खेल वीडियो गेम खेल रहे हैं उस कार जब हमारी चल रही है तो उसमें आने वाला जो गड्ढा है उसका निर्माता कौन है उस वीडियो गेम को चालू करने वाले हम उसमें जो कार में चल रहा है वो कौन है वो भी हम ही है उसमें जो गड्ढे आ रहे हैं जो हम बच रहे हैं जिनसे हमें बचना है वो भी हम ही है तो ये इस तरह से है भगवान एक भगवान का रूप है कारण कि वो सबका कारण है मूल ठीक है फिर एक कारण है भगवान का जो सगुण साकार स्वरूप होता है जो जो आपकी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है तो भगवान का जो ये वाला जो रूप होता है जो मोक्ष दायक होता है और जो वेदों की सीमा द्वारा सीमा में होता है यह हमारे अनुकरण अनुसरण भजन का विषय होता है जैसे मैंने कई बार बता जल है वह सब जगह व्याप्त है नमी नमी इत्यादि के रूप में वायुमंडल में व्याप्त है मगर वह हमारे व्यवहार का विषय नहीं है हमारे व्यवहार का विषय क्या है जो हमारे कर पात्र में आ जाए अथवा हमारे चुल्लू में आ जाए हमारे हमारे पात्र में आ जाए गिलास में आ जाए वो पानी हमारे व्यवहार का विषय हो जाता तो इसी प्रकार से भगवान का जो रूप वेदों की सीमा में आ गया
00:33:00:01 सनातन शास्त्रों की सीमा में आ गया सनातन धर्म की सीमा में आ गया वो हमारे भजन का विषय वैसे तो कण कण में दुनिया में ईश्वर है मगर वो पार मार्थी रूप से व्यावहारिक रूप से तो हमें यह दिख रहा है हम भी अडॉप्ट नहीं कर पाए हमने थ्योर कली जान लिया पृथ्वी गोल है मगर हमारे शरीर के कारण हम अडॉप्ट नहीं कर पाए तो क्या हो रहा है हमसे बिहेव हमें चपटा ही करना पड़ेगा तो जब हम चपटा देख रहे हैं हमें चपटा दिख रहा है तो चप करके ही हम उस गोव को प्राप्त कर सकते हैं तो भेद का निर्वाह करके ही अभेद तक पहुंचना है इसी तो भेद का जो जो जो दो मुख्य पॉइंट है स्तंभ है शास्त्रों के वह है धर्म और ब्रह्म सनातन शास्त्रों के दो मुख्य स्तंभ है धर्म और ब्रह्म तो धर्म का आधार है द्वैत क्योंकि यहां व्यवहार हो रहा है धर्म का आधार है द्वैत और ब्र का आधार है अद्वैत मार्ग रास्ता है द्वैत और उसका जो प्राप्त व्य है डेस्टिनेशन व है अवत ठीक है जी आपको कोई विचार भी प्रकट करने आए थे प्रश्न
00:34:15:06 ही पूछने आए थे नहीं गुरुजी एक और बात यह था कि जैसे अभी आजकल बहुत सारे माइथोलॉजी राइटर है जो जो मॉडर्न सो कॉल्ड है उनसे हम कितना बचना चाहिए जैसे अमीश त्रिपाठी जी हो गई हो गए और भी ये सब उनसे हम कितना बचना चाहिए क्योंकि व वे लोग तो अ क्या कहते मुझे लगता है कि अपने फायदे के लिए क्योंकि परंपरागत जो गुरु है जो संप्रदाय से जो गुरु है उनसे जुड़ना बहुत ज्यादा जरूरी है जैसे आपने बताया और लोग उनसे ना जुड़ के क्योंकि कहने की स्पिरिचुअलिटी यानी ये जो अध्यात्म का जो विषय है इस परे इसको पकड़ के बिजनेस बना लेना बहुत आसान है इस इसको पकड़ के कोई भी अपने आप को गुरु प्रोक्लेम कर सकता है क्योंकि क क्योंकि देखिए मेडिकल का किताब हो या इंजीनियरिंग का किताब हो या किसी चीज का किताब हो उसको लिखने के लिए आपको एक क्वालिफिकेशन चाहिए लेकिन स्पिरिचुअलिटी पर अध्यात्म पर अध्यात्म एक ऐसा विषय है कि इस परे आपको किसी का कोई क्वालिफिकेशन नहीं चाहिए बस आप कुछ भीड़ इकट्ठा कर लीजिए और और अपने आप को या तो आईआईटी बोल दीजिए
00:35:30:06 या तो कुछ बोल दीजिए और उस पर अपने आप को गुरु बोल दीजिए और दो दो चार किताब ग्रंथ पढ़ के अपना एक वर्जन छाप लीजिए और आप माइथोलॉजी बन जाएंगे तो इन सब लोगों से बचना जरूरी है क्योंकि मुझे ऐसा लग बचने का रास्ता यही है बचने का रास्ता यही है कि अक्सर ऐसा होता है कि जब हमारे लोगों के सामने या परंपरा प्राप्त जो स्टूडेंट्स है शिष्य है परंपरा प्राप्त आचार्यों के सामान्य शिष्य बिल्कुल लौकिक दुनिया से भौतिक दुनिया से कनेक्ट है और वो उन्होंने शिष्यवृत्ती
00:36:28:10 आप यह कहे कि राम का अध्ययन आपने कहां से किया बस परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य से आपने अध्ययन किया है कि नहीं किया है अगर किया है तो आप आक्षेप लगाने के लिए ऑथराइज है अगर नहीं किया है तो जिन शास्त्रों में आप जिन शास्त्रों के आधार पर आप राम इत्यादि पर आक्षेप लगा रहे हैं श्री राम पर श्री कृष्ण पर आप आक्षेप लगा रहे हैं हमारे शास्त्रों पर कुछ बोल रहे हैं उन्हीं शास्त्रों में परंपरा प्राप्त आचार्य के पास जाने की बातें सिद्ध है अब वो आपसे ये कह सकता है कि आप तो उनके शिष्य हो तो आप ही बता दो तो हमारा जवाब ये होगा हम उनके शिष्य हैं मगर हमने यह सब उनसे नहीं पढ़ा है हमने यह पढ़ लिया है कि परंपरा प्राप्त गुरु से ही धर्म का ज्ञान लेना है तो आप अगर कोई भी बात बता रहे हैं आक्षेप के रूप में तो वह आपकी परंपरा प्राप्त आचार्य से होनी चाहिए और अगर नहीं लिया तो जाइए पहले उनसे कन्फर्म करिए तब आप करके हम पर आक्षेप लगाइए हमारे साम बात खम हम क्यों ऐसा सोचते हैं कि हर बात का बिल्कुल ब मोबाइल परही हमको जो है श्लोक क्रमांक वगैरह सब कुछ मिल जाए सिर्फ एक बात याद रखो परंपरा कहां से ज्ञान प्राप्त किया भाई अगर किसी को आप डॉक्टरी के विषय में बात करने के लिए स्वीकार करेंगे तो इस बात पर करेंगे ना कि उसके पास व
00:37:43:14 सर्टिफिकेट है कि नहीं डॉक्टरी का उसने कहां से डॉक्टरी पास आउट की है मेडिकल साइंस उसने कहां से अध्ययन किया ये जिन भाई साहब की आप बात कर रहे हैं प्रशांत सो कॉल्ड चार तो इनकी आप बात आप देखिए ये अपनी भौतिक जो इनकी शिक्षा है उसके द्वारा अपने अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए बताते हैं कि मैं वो वहां से फलान से हू आई आई पता नहीं कहां से किया है है ना मैं इतनी जगह से हूं मगर अपनी जो आध्यात्मिक शिक्षा है वो छुपाते हैं कि हमने कहां से ग्रहण किया क्योंकि कहीं से किया ही नहीं सब अपने से है सब कुछ वो नहीं बताए मतलब भौतिक शिक्षा इतनी इंपॉर्टेंट है जो लोगों को बताई जाए कि भैया मैंने आईआईटी कहां से आईआईटी एन हूं मैं मगर धार्मिक शिक्षा आध्यात्मिक शिक्षा इंपोर्टेंट नहीं है जो बताई जाए कि मैंने कहां से पढ़ा वो खुद ही बता रहे हैं ना और वैसे उनके लिए अद्वैत सब बेकार है कूड़ा है आईआईटी वगैरह कूड़ा है मगर कूड़े को वो यूज कर रहे अपने लिए प्रभाव उत्पन्न करने में उनके ही अनुसार जो कूड़ा है उस कूड़े का उपयोग कर रहे हैं अपने लिए प्रभाव को उत्पन्न करने में और वा उनके
00:38:58:18 अनुसार जो वाकई में जिसकी जिसका महत्व है उस पर कोई बात नहीं कि मेरा गुरु कौन है मेरी परंपरा क्या है मैं जो बता रहा हूं ज्ञान दे रहा हूं यह कहां से मुझे प्राप्त हुआ है कुछ नहीं आदि शंकराचार्य जी को रोल मॉडल मानेंगे मगर उनका ही लिखा हुआ क जगह खुद ही खंडित कर देंगे कोई प्रमाणिक बात नहीं है जी राम शरण स्मार्थ जी जय श्री राम जय जगन्नाथ धन्यवाद गुरुजी जी [संगीत] जी बहुत बहुत अनंत साधुवाद आपको आवाज आ रही है मेरी जी आ रही है बहुत बहुत साधुवाद बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं आप भगवान आद्य शंकराचार्य की चर विजय हो उनके सिद्धांतों की विजय हो और समस्त समाज भगवान आचार्य के सिद्धांतों के नीचे आए उनका अनुसरण करे यही भावना और बहुत बहुत साधुवाद सब प्रकार से आपका समर्थन करते हैं आज आवश्यकता इस बात की है
00:40:14:02 कि सनातन समाज यह समझे कि सनातन धर्म का मूल जो है वह स्मार्थ परंपरा ही है स्मार्थ परंपरा में ही भिन्न भिन्न देवताओं में भेद नहीं किया जाता यहां एक तत्व के ही विभिन्न रूपों को हम मानते हैं और सबको समान मानते हैं तो मुझे ऐसा लगता है कि सबको स्मार्थ तो होना ही चाहिए भले व वैष्णव स्मार्थ हो अथवा व सव स्मार्थ हो अथवा वह गाण पति स्मार्थ हो परंतु उसको स्मार्थ परंपरा का ही अ करना चाहिए शास्त्रों की विधि तो यही है यदि आप स्मार्थ ना होते हुए स्वयं को वैष्णव घोषित कर रहे हैं तो आप अस्त्रीय बात कर रहे हैं जी कोई भी जैसे कोई भी जैसे सनातनी या हिंदू होते हुए ही ब्राह्मण क्षत्रिय वै सूद की संज्ञा को प्राप्त कर सकता है इसी प्रकार से कोई भी स्मार्थ होते हुए ही वैष्णव सवत सर या नपद हो सकता है यह शास्त्रीय बा ये शास्त्रीय विषय है साथ ही
00:41:29:07 एक बात और हिंदू समाज को स्पष्ट तौर पर समझना चाहिए कि सनातन धर्म का मूल वर्ण व्यवस्था है व भी जन्मना जो वर्ण व्यवस्था है वही सनातन धर्म का मूल है जहां इस व्यवस्था का उे दन कर दिया जाएगा वहा सनातन धर्म केवल आभासी धर्म मात्र रह जाएगा इसलिए सबको सबको बिल्कुल नि भ्रांत होकर के वर्ण व्यवस्था का अनुशीलन करना चाहिए और स्वधर्म का पालन करना चाहिए यह मुझे लगता है भगवान कहते हैं गीता में स्वधर्म निधन श्रे पर धर्म भया भया तो वहां कोई उस समय धर्म तो था ही अन्य कोई पंथ तो थे नहीं बात कही तो धर्म क्या है वास्तविकता तो यह है कि हम केवल अन्य पंथ से जो कु पंथ है उनसे स्वयं को विलग करने के लिए ही सनातन धर्म अथवा हिंदू शब्द हमारी मजबूरी है हमारी बाता
00:42:45:00 जोड़ना पड़ता अन्यथा धर्म शब्द ही पर्याप्त एक मात्र धर्म शब्द ही प्यात है और धर्म के लक्षण जहा वेदों के अनुसार और स्मृतियों के अनुसार घटित होते हैं वही धर्म है जहां स्मृतियों के अनुसार अथवा पूर्व मांसा के अनुसार धर्म के लक्षण घटित नहीं होते वह प अधर्म है तो जो जिसे हम सनातन धर्म कहते सनातन उसकी विशेषता
00:43:19:08 है विशेषण हैय बात है उसका मूल जो है व वव हैम गुरु कपा से एक उदाहरण हमको प्राप्त हुआ था प्रवचन हम जब सुन रहे थे गुरुदेव के तो वहां से हमको एक उदाहरण प्राप्त हुआ था कि उन्होंने कहा कि पहले केवल ही हुआ करता था पहले केवल घी था और मार्केट में जब ये डालडा वनस्पति य तरह तरह के नाम वाले घी आ गए जब नकली आ गया यह वाला आ गया वो वाला आ गया तो फिर अब जो है लगाना पड़ता है दुकान पर जाकर बोलना पड़ता है भैया देसी घी दे दो दे घी सही है और इसके बाद जब जरसी शास्त्र मेंब अध्ययन करते हैं तो केवल घी आता है बिल्कुल बिल्कुल यही दे की आवश्यकता वहा नहीं है मगर क्या है कि हमको बोलना पड़ता है भैया शुद्ध देसी घी अब शुद्ध भी आगे लगाना पड़ रहा है आजल शुद्ध देसी घी इसमें यह बात स्पष्ट करनी इसलिए आवश्यक है क्योंकि आज जो है ना कु शिक्षा के कारण से लोग भ्रांत है सोचते
00:44:34:15 हैं कि यह धर्म हम हम हिंदू धर्म वाले हैं सामने वाला अन फलाना का वो भी तो धर्म है यह भ्रांति है वो नहीं अधर्म है धर्मा भास है री समझ धर्मास भी नहीं है अधर्म है असल में देखिए यह बात तो इस सिद्ध हो जाती है सीधी सी बात है कि धर्म है ईश्वर को प्राप्त करने के निमित्त व्यवस्था तो जहां पर ईश्वर ईश्वर होगा सर्वशक्तिमान वो कहला सकता उसको प्राप्त करने की व्यवस्था धर्म कहला सकती है अब वहा पर व ईश्वर ईश्वर नहीं है वो ईश्वरा भास है व ईश्वरा भास तो वो धर्मास हो गया उसको प्राप्त कराने की विधि अच्छा मैं थोड़ा सा इनको लूगा य काफी देर से आए हैं सज्जन राम पांडे जी जय श्री
00:45:35:16 राम जी बोले जय श्री राम सुन जी एक्चुअली मैं आपको जब ये राम मंदिर का जो प्रकरण स्टार्ट हुआ था तो जब हमारे शंकराचार्य जी को जो भाजपा आईटी शैलियों ने काफी आलोचना करनी स्टार्ट करी थी मेरे ल से उस टाइम से आपने वीडियो बनाने स्टार्ट करे थे लाइ अंकु शर्मा और अजीत भारती के ऊपर आपने एक दो कमेंट करे थे अपने रील्स के माध्यम से तो उस टाइम से मैं आपको फॉलो कर रहा हूं बट उसके बाद से जब पर्टिकुलर आप एक क्या बोलते है प्लेटफॉर्म के थ्रू आए आप मार्केट मतलब य प तो एक दो बात पहले समझने में मेरे को भी दिक्कत आ रही थी कि आप किस टॉपिक पर बात कर रहे हैं और कितनी गुढ़ तरीके से बात कर रहे हैं जो तर्क शक्ति है आपकी वो अतुलनीय है मतलब माइंड ब्लोइंग आप बोल सकते हैं उसको कोई भी बंदा आएगा अगर उसके अंदर में थोड़ा सा भी बुद्धि क्षमता होगी ना उसको समझने के लिए तो इजी में समझ जाएगा आपको कि आप क्या कहना चाह रहे हैं क्या समझाना चाह रहे हैं बट अब जैसे संत रामपाल जी के जो चेले हैं आपके जो उनके जो फॉलोवर्स है उनके माइंड में य सब बातें नहीं घुसने की बट आप कंटीन्यू सली आप इसको ऐसे ही लगातार सेशन करते रहिए हा बेचैनी
00:46:50:20 तो है उनके जो फॉलोवर्स है चाहे जो उनको जो उनके चेले है प्रॉपर में मैं बस आपसे ये कहने आ रहा था कि जैसे कि कुछ चीजें हैं जो मेरे को भी थोड़े से गिल्ट फील करती है जैसे कि मान के चलिए कि जो इंटेलेक्चुअल एक भाव होना चाहिए ना एक प्रॉपर यूट्यूब के अंदर तो थोड़ी सी क्या बोलते हैं उसको जैसे कि अ एक डायलॉग मारते हैं आप बोलते हैं कि मत फड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में तो इस टाइप की जो बातें है ना तो थोड़ा एरोगेंस टाइम में लगता है फील होता है तो मैं आपसे बस यही रिक्वेस्ट करना आया था कि थोड़े से इसको और इंटेलेक्चुअल तरीके से इसको हम कंटिन्यू करते इसको देखते थोड़ प्रोफेशनल हो जाए बिल्कुल बिल्कुल मैं प्रोफेशन की बात कर रहा था अब यह जो बातें कही जाती है वो उनका कोई मीनिंग नहीं होता है मगर कहनी इसलिए पड़ती है कि सामने वाले की ओर से लगातार प्रहार हो रहे हैं तो हम कौन सी कौन मर्यादा में रहते हुए मदा को ना लाते हुए कौन से वो पंक्ति बोले कि सामने वाले को चुबे अब जैसे दूसरा तो बोल जा रहा है व हज करने गए थे तोता
00:48:05:25 बन के अदि शंकराचार्य है ना वो क्योंकि अधर्म का तो कोई वही नहीं है ना सीमा वो कितना भी गिर सकता है मगर हमें गिरना भी है तो झरने की तरह गिरना है तो उसके लिए कि भाई कौन सी ऐसी पंक्ति बोल सकते हैं जिससे की वो चुप भी जाए और अपनी मर्यादा को ना लाे वो इनकी बात देख लीजिए लोग हमेशा बात ही करेंगे पंडे पोंगा यह जो अलंकार समाजी है पौराणिक पंडे वो इस तरह से ही बात करते शैली ही उनकी यही है है ना भांड शब्द का उपयोग करेंगे प तो इसलिए कि अगर आपके पास कुछ ऐसा है जो आप निर्विवाद रूप से नि संकोच रूप से किसी के लिए बोल रहे हो तो हमारे पास मर्यादा के अंदर रहते हुए चीज जो आपको हम मर्यादा बिना लाे हुए चुबा देंगे मगर फिर भी आपने याद दिलाया तो प्रयास करूंगा हालांकि अगला जो वीडियो आ रहा है उसम ये है अगला वीडियो आरहा है उसम य है नहीं क्या होता है जो लो बाग अभी क्या है हमारे व बहुत कम है लिमिटेड वप है जो हमारा प्लेटफार्म है हा जो नए लोग आएंगे वो अलग ले सकते हैं इसको
00:49:20:28 घमंड है अहंकार है इस तरह से जा सकते हैं वो क्योंकि उन्होने पिछली क्या हुआ क्या हु जो लोग एक्चुअल में समझने के लिए आ रहे हैं उनको इस तरीके की मिस अंडरस्टैंडिंग ना हो य इस भाई के अंदर में ऐसी बिहेवियर ऐसी बातें करता है और उसको समझाने के लिए आप उनको अच्छे से कुछ एग्जांपल दे सकते हैं उदाहरण दे सकते हैं अच्छा इससे एक चीज और याद आया मेरे को जब आ समाज के नाम लिया आपने अलंकारी समाज का मैं कुछ टाइम पहले आज से दो तीन साल पहले की बात बता रहा हूं 20141 की बात बता रहा हूं काफी टाइम हो गया मैं बहुत अच्छी तरीके सेन प्रभाव में आ चुका था और अपने घर में आकर कुतर्क करने लग जाता था तर्क करने लग जाता था अपने मम्मी पापा से अपने जो रिलेटिव थे जबक वो बताते थेरे आर्य समाज मतलब आर्य समाज का नाम उससे पहले मैं जानते भी नहीं था लेकिन जो जैसे अंकुर शर्मा हो गया अक अंकुर आर्या हो गया एक ये हो गया आपका र हरियाणा का ही रहने वाला है उसका नाम मैं भूल रहा हूं डंके की चोट प उसका टैगलाइन है उसके वीडियो का याद नहीं आ रहा उसका नाम क्या है उसके प्रभाव में आ गया था मैं अग्नि त िक है तो थोड़ा सा साइंटिफिक बातें रखते हैं तो उनके प्रभाव में भी आ गया था मैं बट काफी टाइम पहले मैं जब सुनने लग गया आपने सनातन समाज
00:50:36:03 के जो साधु संत महात्मा है जैसे निगहा चार्य जी है पता नहीं आप जानते कि नहीं जानते निग चार्य जी जानते हैं आप निग चार्य के बारे में जी जी जी तो उनको जब मैंने सुनना स्टार्ट किया जब वो त तक से शास्त्र को प्रमाणित करने लग गए तो मेरे को जितने भी त कथावा गुरु है मैं बोलना नहीं चाहूंगा इतने बड़ प् फम से बट है जो कथा के नाम प ऐसे अपना बाबागिरी चमका रहे हैं उनका उन्होंने खंडन स्टार्ट करना स्टार्ट करा जो उनमें से एक बहुत फेमस बाबा है जो शंकराचार्य को भी मतलब ललकार रहे थे कि आप शंकराचार्य जी संस्कृत में मेरे से पाच मिनट में भी शास्त्रास नहीं कर सकते ऐसे ऐसे जो बाबा है जो झूठ के नाम पर अपना मार्केट चला रहे हैं जो राम मंदिर के प्रकरण में भी वो बोलते थे कि मेरे ही मेरा ही श्रेय है राम मंदिर को निर्माण कराने में मैंने ही प्रमाणित किया है राम मंदिर को जबकि जो वहां के हाई कोर्ट के जो जज साहब थे उनका नाम था मेरे ख्याल से सुधीर अग्रवाल जी वो खुले प्लेटफार्म से उनके जो वक्तव्य है उनको नकारा था पर फिर भी ये सुधरने वाले नहीं है बाकी जो निगरा चारी को फॉलो करना स्टार्ट करा था जो शास्त्र की जो प्रामाणिकता है जो गुण रहस्य है वो त से तर्क के आधार पर उन्होने समझाना स्टार्ट किया
00:51:51:10 तब मैं कम बैक किया अने वापस किया हा यार येच हो सकता है उसके बाद जो हमारे गुरुजी है पूरी के शंकराचार्य जी उनके वक्तव्य को सुन ल उम तो जैसे मैं अब को सुन रहा था जी कह रहा अग्नि ने को जो आर्य समाज के है तो वो साइंटिफिक तरीके से मत वेद को बिल्कुल साइंस बना दिया उन्होने ये मैटर है ये है वो है फिर जब मैंने पूरी शंकराचा को सुनना स्टार्ट किया तो मैंने बोला ये तो एक कदम आगे है मतलब जो रहस्य बताते हैं वेद के और जो पाच तत्व है जो डिफाइन करते हैं पाच को उस तरीके से फिर मैंने बोला कि यार ये तो बिल्कुल अद्भुत है तो फिर मैंने वहां से कम बैक किया और फिर आपको फॉलो किया आप जैसे जितने भी सनातनी लोग है जो एक्चुअल में सनातन को फॉलो करते हैं उनको मैंने फॉलो करना स्टार्ट किया आप बहुत अच्छा कार्य कर रहे हो अतुल नहीं है आपका मैं माइंड बलो बहुत ज्यादा मतलब प्रभावित हूं आपसे मैं सच्ची बता रहा हूं आप चार पाच दिन तक आप आते भी नहीं है तो फिर मैं वेट करता हूं वीडियो का यार वीडियो नहीं आ र क्या आ ग क्या हो गया तो इस तरीके से मतलब एडिक्शन हो गया आपके प्रति ई वीडियो नहीं आ र तो वो वाला हाल हो गया है बाकी मेरा बस थोड़ा सा सुझाव है थोड़ से
00:53:07:24 हम इस पर विचार अवश्य करेंगे जो भी गेस्ट आ रहे माना उनको नहीं आता है कुछ भी नहीं आता है उनको बस सुन लीजिए क्योंकि वो जाक बाद में प्रोपेट करते है प्रोपेगेंडा करते हैं इसम मैं आपको एक बात कहूंगा कि देखिए कुछ भी आप कर ले प्रोपेट तो करेंगे ही पहली बात कुछ भी कर लीजिए व तो कुछ ना कुछ करेंगे ही दूसरी बात य है कि मुझे इन परिस्थितियों में वो क्या कहते हैं उसको एक वो दिखता होगा आपको कि भाई य डोमिनेट करते हैं डोमिनेट सामने वाले तो किन परिस्थितियों में करना पड़ता है यह ऐसे है जैसे कहीं पर कोर्ट में केस चल रहा है खून का मुकदमा चल रहा है ठीक है एक अपराधी जो दोषी है जिसके ऊपर उसका हत्या का आरोप है वो कटग में खड़ा हुआ है अब जो अधिवक्ता है जो विपक्ष का अधिवक्ता है जो यह सिद्ध करना चाहता है कि इसी ने मर्डर किया है इसी ने हत्या की है और दूसरा एक अधिवक्ता है जो उसका पक्ष लेने के लिए खड़ा हुआ है कटघरे में जो व्यक्ति खड़ा है उसका पक्ष लेने के लिए कि नहीं इसने हत्या नहीं की है अब जब कोर्ट
00:54:23:04 केस शुरू हो रहा है तो शुरू में य वाला अधिवक्ता जो जो उसको हत्यारा सिद्ध करना चाहता है वो क्या दिखा रहा है कोर्ट के कोर्ट में फोटोस दिखा रहा है और फोटोस में यह दिखा रहा है कितनी निर्ममता से हत्या हुई है अब यह बताइए क्या केस इस बारे में है कि कितनी निर्ममता से हत्या हुई या इस बारे में हत्या की किसने केस इस बारे में हत्या की किसने मगर वो क्या दिखा रहा है कोर्ट को कितनी निर्ममता से हत्या हुई इससे क्या हो विषय तो है नहीं दूसरा विषय मगर वह क्यों दिखा रहा है कि यह जो निर्ममता है यह जो निर्ममता है
00:55:10:20 यह यह जो नि निर्ममता है इससे जो है प्रभावित हो जाए कोर्ट कैंपस पूरा और विशेष तौर पर जग और एक मतलब पहले से ही एक अंडरस्टैंडिंग उसके मन में बन जाए कि यह दोषी है नफरत एक क्रिएट हो जाए उसमें इतनी बेरहमी से मारा गया है मरने वाले को कि यह सिद्ध नहीं हुआ कि इसी ने मारा है फिर भी उसके प्रति एक वैमनस्यता का भाव उत्पन्न हो जाए यह फोटो दिखाने का पीछे यही एक वो है इसी प्रकार से जो लोग यहां पर आते हैं जब उनसे एक कट टू कट बात हो रही होती है बहुत सौहार्द पूर्वक सिर्फ सीधे सधे जवाब देते चले और चीज आगे बढ़ती चली जाएंगी मगर वो क्या करते हैं कहीं का श्लोक बोलेंगे संस्कृत दिखाएंगे कहीं का कोई र वाणी बोलेंगे अब उससे कोई मतलब नहीं है मगर उससे क्या हो रहा है कि सुनने वालों के कानों में जाने के कारण क्योंकि सुनने वाले जो है सभी लोग अभी उतने बिल्कुल प्रेजेंस ऑफ माइंड के साथ नहीं बैठे हुए हर व्यक्ति अपनी अपनी स्थिति में बैठा हुआ है कोई कहीं पर सुन रहा है कोई बस में बैठा हुआ सुन रहा है कोई कहीं पर सुन रहा है सुन रहा है तो उसको क्या होगा कि जब वो उनके पास बातों का उत्तर नहीं होता और वो कबीर की वाणी वो दोहे के साथ
00:56:26:16 के साथ गा के सुना देते हैं उससे क्या होता है व्यक्ति के मन में प्रभाव उत्पन्न करते हैं अपना बस और कुछ नहीं प्रभाव उत्पन्न किया सुनने वाले के मन में ये गया कि भाई इसकी बात में बड़ा दम है क्योंकि इसने अभी अभी संस्कृत के पांच श्लोक बोले हैं उससे कोई मतलब नहीं है वहां पर उसने कबीर की वाणी बोली है बड़ी अच्छी काव्य रचना उसम सुनाई दे रही है उससे कोई मतलब नहीं है विषय नहीं है वो विषय उत्तर देना था जो उत्तर नहीं दिया जा रहा है तो जब वो लोग ऐसा कर रहे होते हैं तो मुझे फिर वहां पर उनको बोलना पड़ता है कि ये मत करो आप केवल विषय पर रहो तो इसमें ऐसा लगता है इसमें ऐसा लगता है कि मैं सामने वाले को बोलने नहीं दे रहा हूं अगर वह विषय को ना बदले और यह व्यर्थ का अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए यह जैसे कल एक भाई साहब आए थे बात चल रही है कि क्या प्रभुपाद जी ने गलत बोला झूठ बोला यह पूछा जा रहा है आप विश्वास करते वो संस्कृत के श्लोक बोल रहे भागवत के इनका वही हाल है वो जो मंडन मि जो तोता था ना वो भी संस्कृत अच्छी खासी बोल लेता था मब उनको थोड़ी माना जाएगा ये हाल है वो डू तो वाली हाल है इन लोगों का कि हा बस आके अपना प्रमाण साबित करना है मैं देखता रहता हूं आपका वीडियो वो कांसेप्ट है हमारा बट
00:57:41:16 मैं फिर भी मेरे कोब कभी कभी लगता है कि मतलब बोलने का मौका देना चाहिए था एक बार उनको बात रखने की मौका देना चाहिए था इसीलिए मैंने अपने बात रख हा थोड़ देख के और अा एक चीज एक क्वेश्चन था मेरे मन में एक एक क्वेश्चन ली आपका एक वीडियो देख रहा था मैं जो वो मुस्लिम बंधु के चैनल पर किया था आपने मैसेंजर के आईडी से राइट तो उनके साइड से जैसे की हम बात रखते हैं कि भगवान कुछ भी कर सकता है भगवान सर्व शक्तिमान है तो हालांकि आपने वहां पर नेट तो किया था मैंने देखा था कि वो इटेट इरिटेशन मोड में जा रहे थे जो माइक में जो बंदे नहीं दिखाई दे रहे थे वो तो काफी इरिटेट हो गया था बंदा दूसरा जो फेस टू फेस जिसके चैनल पर आप गए थे वो अपने एक बात रखा था तो उसने यही एक क्वेश्चन किया था तो वो मैं ठीक से देख नहीं पाया थाहे मेरे को समझ में नहीं आया जैसे किने प्रप उसका उसम जितने भीय उत्पन्न हो सकते हैं उसका हमने वीडियो बनाया है आप पीछे जाइए हमारी वीडियो में तो क्वेश्चन आंसर रखे उस वीडियो प आप देखेंगे संतुष्ट हो जाएंगे
00:58:56:08 उसका टाइटल है वाई सनातन सुप्रीम ऐसे करके एक वीडियो है भगवे में क्या खास है उसम मुक्ती जी की फोटो भी है मुफती थे ना वहा पर यासर अलजी क्या नाम है उनकी फोटो भी है उसम तो आप वो पीछे जाइए हमारी लिस्ट है जो वीडियोस की उसको देखिए उसम हमने जो उनका एक एक चीज है कहां कहा पर वो फसे कहां कहा पर वो अपनी बातें सिद्ध नहीं कर पाए तो उन चीजों को हमने वहा दिखाया है सारे उत्तर दि मैंने देखे हुए हैरा बट जो सेशन आपने जो देखा है ना उसी सेशन को लेकर के हमने फिर एक वीडियो बनाया है सारी बातें अपनी रखी है वो आप देखिए जसे क्या भगवान अपने एेंस को खत्म कर सकता है अपने ए से बाहर जा सकता है उस तरीके से वहा क्वेन रा किया था उन्होने तो उसी का आंसर आपको समझने आया था मतलब इस ब में क्या आप है दो पर्सपेक्टिव है परमा में ईश्वर अपने एक्जिस्टेंस से बाहर नहीं जा सकता परमार्थ में ईश्वर किसी को किसी के साथ अन्याय नहीं कर सकता यानी कि परमार्थ में एक तरीके से अगर अभी कहा जाए तो परमार्थ में ईश्वर जो है आपके अनुसार जो वाणी है
01:00:11:09 उसके अनुसार वो सीमित हो रहा है ठीक है मगर वो हो कहां पर रहा है परमार्थ में व्यवहार में क्या होगा कि भाई व्यवहार में भगवान कृष्ण के रूप में आएंगे अपने एसिस्टेंसिया ये कृष्ण भगवान है वो शरीर में नहीं है एेंस छोड़ दिया यही तो है तो व्यवहार में वो कुछ भी कर सकते हैं और परमार्थ में जो परमार्थ जो है वो व्यवहार का अ विषय है व्यवहार का विषय नहीं है अब बात ये आती कहीं ना कहीं तो हो ही रहा है तो सीमित तो हो रहा है आपका भी तो बात ये आती है कि जो परमार्थ है उसका बोध आपको कब कब हुआ परमार्थ का बोध ही आपको तब होता है जब आपने व्यवहार में किसी को स्वीकार कर लिया कि ईश्वर है समझ रहे हैं परमार्थ का तब तक परमार्थ का तब तक एक्जिस्टेंस नहीं है आपके लिए जब तक आपने किसी को ईश्वर नहीं माना तो जब आपने किसी को ईश्वर मान लिया तो फिर वो परमार्थ में सीमित है निश्चित है बाधित है आपके शब्दों के अनुसार हालांकि वो इन व्यवहारों का विषय नहीं है वो तो प्राप्त का विषय मात्र है वाणी का अ विषय है मगर फिर भी आपकी आपकी भाषा में व निश्चित है सीमित है बाधित है सब कुछ है मगर
01:01:26:10 आपने जब ईश्वर इसको मान लिया है तो वहां पर बाधित इत्यादि होने से उसको ईश्वर ना मानना आपका सिद्ध नहीं होगा और अगर आपने उसके अनुसार इसको खंडन कर दिया कि नहीं क्योंकि वह परमार्थ में बाधित है इसलिए मैं व्यवहार में उसे ईश्वर नहीं मानता तो जैसे ही आपने यह कहा कि व्यवहार में जो है व मैं उसे ईश्वर नहीं मानता तो अगर फिर आपसे पूछा जाएगा कि क्यों नहीं मानते तो आप कहोगे परमार्थ के कारण तो आपसे य पूछा जाएगा क्या परमार्थ एजिस्ट करता है आप अगर ईश्वर को नहीं मानते तो परमार्थ एजिस्ट ही नहीं करता है परमार्थ एस्ट तब करता है जब आपने ईश्वर को ईश्वर माना तो इसका संक्षिप्त उत्तर यह है कि ईश्वर का कुछ भी कर सकने वाला इस व्यवहारिक जगत में होना आवश्यक है व्यवहारिक जगत यह जो दुनिया हमें दिख रही है आज हमें किस ईश्वर की आवश्यकता है बारिश ज्यादा हो रही तो कम हो जाए अगर कोई व्यक्ति ईश्वर को मानता ही नहीं है तो उसके लिए परमार्थ अस्तव रखता है क्या कि वहां क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा उससे उसको मतलब नहीं है उसको यहां पर कोई कंट्रोलर चाहिए यहां पर पावरफुल चाहिए यहां पर अल माइटी चाहिए माइटी गॉड सर्वशक्तिमान चाहिए यहां प उ तो यहां जो व्यवहार व्यवहार में सब कुछ कर सके वो ईश्वर सर्वशक्तिमान है
01:02:41:27 वो ईश्वर सर्व शक्तिमान है परमार्थ जो है वो केवल प्राप्ति का विषय है वहां व्यवहार का विषय नहीं है वो क क ये जो क्रिया वाली बात है ना वहां क्रिया की बात ही नहीं है वोसेफ प्राप्त हो सकता है तो ये बात है अब इसको ऐसे समझ लीजिए शॉर्ट एग्जांपल मैंने कई बार अपने वीडियो में बताया हालाकि कि एक सोता हुआ व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि वो किसी के आवाज देने से जाग गया क्योंकि अगर वह सुन रहा है तो उसका सोना सिद्ध नहीं होता और अगर वह सो रहा है तो उसका सुनना सिद्ध नहीं होता तो इसी प्रकार अगर कोई व्यक्ति ईश्वर को ईश्वर मानता है तो परमार्थ के आधार पर ईश्वर को ना मानना सिद्ध नहीं होता और अगर परमार्थ के आधार पर वो ईश्वर को नहीं मानता है तो उसका परमार्थ को जानना सिद्ध नहीं होता इसको ब बार बार अगर सुनेगा सामान शंकराचार्य जीते रहते हैं सोने वाले उदाहरण देते है य नास्को के लिए देते हैं मे ल से जो नाक है को मतलब नहीं मानते हैं उसके लिए व एपल य बताते हैं सुनता रहते चलिए शिवान जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका आप ऐसे ही लगे रहिए और
01:03:57:18 आज धरातल पर आप जुड़िए धरातल पर किस प्रकार से हम कार्य कर सके इस इसके लिए आप जो है जुड़े केवल यही तक सीमित ना रखे आपका समर्थन इन सब बातों का परवन इन सब बातों का जो परवन है वह है हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी एक बहुत आवश्यक एक प्रकल्प है गुरुदेव का कि हमारे मठ मंदिरों को हम शिक्षा रक्षा सेवा का केंद्र बनाए तो आपके घर के निकट जो भी मंदिर हो उसमें जो है बैठना प्रारंभ करें साप्ताहिक रूप से इसी को उन्होंने कहा है कि संगोष्ठी करिए हिंदू राष्ट्र नहीं तो राष्ट्रोदय राष्ट्र उत्कर्ष के नाम से करें मगर एक संगोष्ठी जो है हिंदुत्व के उत्थान के लिए निकट जो मंदिर हो उसमें करें तो ये सब जितना भी प्रचार प्रसार हो रहा है इन सबका प्रचार प्रसार उस गोष्ठी में कि हमारे हर दो किलोमीटर प एक मंदिर ऐसा हो एक बात करना चाहता हूं मैं मैं समझ गया जी एक मिनट मेरे को टाइम दीजिए जैसे कि मैंने आपको बताया कि मैं काफी टाइम से फॉलो करता हूं शंकराचार्य जी को भी आपको भी संगोष्ठी और जो ग्राउंड लेवल प जो बात करने की काम करने की जो बात कर रहे हैं बहुत से बहुत सालों पहले मैंने बहुत प्रयास किए थे
01:05:12:20 लेकिन मैं एक अपने हिंदू समाज के अंदर में जो एक कुंठा भाव उत्पन्न है ना जो उनके जो मतलब पूरा का पूरा हिंदू समाज राजनीतिकरण का शिकार हो चुका है आज के टाइम प राजनीति से हटना चाह रहा है जो भी है उनके लिए अब जैसे कि एक बात बताऊ जैसे इस्लाम है चाहे जो क्रिश्चन है आज के सिनेरियो में उनके लिए क्या है वहां प क्या है कि उनके लिए एक ही व्यक्ति श्रेष्ठ है एक ही बुक उनके लिए प्रायोरिटी है ठीक है उसी तरह 2014 के बाद से 2014 के बाद से हां तक मैंने ऑब्जर्व करने स्टार्ट किया हिंदू समाज के लिए एक ही व्यक्ति श्रेष्ठ हो गया है जिनका नाम है हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी है और उनके एक ही पार्टी उनके लिए सर्वश्रेष्ट हो गई है जा रहे मैं यही पर आपको थोड़ा सा क्षमा चाहूंगा मुझे रोकना पड़ेगा जो कहने जा रहे हैं ठीक है समझ रहे हैं मगर इस बात को ऐसे हम लोग खत्म करें क्योंकि अन भी अन्य को भी लेना है और काफी समय हो गया हम तो इस बात को बस एक विचार के साथ समाप्त कर सकते हैं भगवान ने कहा कर्मन वादी कारते मा फले कदा ये बात है बक बात
01:06:28:25 क एक अपने दिल की बात आपको बताया था शेयर किया था मैंने ऐसे नहीं बहुत प्रयास कि लेकिन क्या होता है जो हमारे राजा बाबू है हम उनको राजा बाबू बोलते हैं ठीक है वो राजा बाबू का कुकृत्य को जब आप फॉलो करना स्टार्ट करेंगे ना तो है देखिए उनके जो फॉलोअर्स इत्यादि है वो किस तरह से उनका प्रचार कर रहे हैं क्या नहीं कर रहे मगर जब कोई व्यक्ति मंच होता है ना तो उसके साथ बहुत सारी दिक्कतें होती है कि उसको क्या बोलना है क्या नहीं बोलना है तो वो उनका पर्सपेक्टिव हो सकता है हम लोग यहां उनकी विवेचना नहीं करेंगे और बात नहीं कर र मैं विवेचना की बात नहीं कर रहा हूं मैं हिंदू समाज के अंदर जो उनके प्रति जो भावना उत्पन्न हो चुकी है ना मैं उनके बारे में आपको शेयर करहा ब्लाइली ब्लाइली जो फॉलो करने वाली भावना है वो गलत है देश कोला वो पूरे मैं मोटा मोटा में कहना चाह रहा हूं ये पता है ये क्या हो रहा है य ये ये लोग डिपेंड जो होते जा रहे डिपेंड मतलब कि हमें कुछ करना ही नहीं है सब कुछ वही करें ये ये जो भावनाए गलत है ये उनके लिए भी हानिकारक है इन पर वो डिपेंड हो रहे हैं उनके लिए भी हानिकारक है ये वही मैं कह रहा हूं कि राजनीति के
01:07:44:00 शिकार हो चुके हैं हिंदू समाज कोई कांग्रेसी है कोई भाजपाई है कोई सपाई है कोई अन्य पार्टी के कोई हिंदू नहीं है मैं आपको सची बताऊ कोई हिंदू भावना से सोच ही नहीं रहा है जो उनके मुद्दे होने चाहिए अरे अभी जो अभिमत सरान सरस्वती जी है इतना बड़ा गो ध्वज का यात्रा निकाल रहे हैं उनके बारे में कोई बात नहीं करता उनके जो मुद्दे होने चाहिए जैसे मंदिर है हमारे इतने बड़े बड़े मंदिर सरकार के अधीन में है उनके लिए कोई वोट नहीं मांगता उनके लिए कोई मुद्दा नहीं उठाता ऐसे बहुत से सारे कार्य है जो होने चाहिए हिंदू मुद्दों के आधार पर लेकिन कोई उसके टॉपिक पर बात नहीं करना चाहता बस राजा बाबू की जय जयकार करो और आने वाला देखिएगा आने वाले कुछ टाइमों में यह इनके पूजा पाठ और स्टार्ट हो चुके है ऐसे ऐसे क्या बता चलिए रहने
01:08:33:08 दीजिए क मवादी कार माले कदाचना और यथा संभव जितना हो सकता है जिस अंश में हो सकता है उतना कार्य करें और नंबर पासम आपसे सग करते अवश जय श्री राम बकल पहले कौन आए थे ओम प्रकाश होता जी आए थे जी होता जी जय श्री राम जी भाई श्री मात्र नम जी जी उड़ीसा से हूं और भगवान शंकराचार्य
01:09:12:01 श अच्छा एक जगह रुक जाते कक आप है वीडियो आपका डिस्टर्ब हो रहा है एक जगह रुक जाए की थ अभ जी जी बोलिए अभी रिसेंटली क्या हुआ था कि सग से हमारे घर में हमारे माता जी है और वो जगन्नाथ जी के बहुत बड़े भक्त है तो उनके कहने पर गए थे हम तुलसी माला लेने के लिए गए थे इसकन मंदिर कक यहां पर पास में नहीं है कुछ ऐसा मतलब जहां से संग्रह कर सके वो वाला तो जब वहां पर गए थे तो वहां पर उपनयन संस्कार हो रहा था ठी है ना उपन संस्कार वहां पर हो रहा था और वो मतलब कैसे डाल र जो जने होता है हमारा जो जने वो तो परंपरिक आता है लेकिन उनका जो नहीं होता है वो लाइन बाय लाइन ख खड़ा हो के रहते है 10 12 बंदे वन बाय वन बिना कोई मंत्र के आवश्यकता नहीं है हरे कृष्णा जब से वन बाय वन वन बाय वन आगे बढ़ते चलो हो गया तुम्हारा जन तो ये हो गया उसके बाद उन्होंने मुझे देखा उन्होने बोला क्या दीक्षा लेने आए हो तो उस समय वो त्रिपुंड लगा था मेरे माथे प तो मैंने बोला नहीं दीक्षा नहीं तो मायावादी परंपरा से हूं आपके हिसाब से मेरी ओर से भूल
01:10:29:14 दिया उने ठीक है बैठी है मतलब समझाने लगे थोड़ा बैठी य पर ठीक है बैठ जाते बात करते हैं थोड़ा व बोलते हैं शिव जी का पूजा करते हो जरूर करते हैं शौक से करते हैं हमारे पिताजी भी करते हैं तो बोले की शंकराचार्य जी से मतलब जी नहीं बोले उनसे वो दीक्षा ले हो आप हा लिए काफी हो गया चार पाच साल हो गया लेते हुए तो फिर उन्होंने बोले कि ठीक है वो तो मतलब जो उनका परंपरा है वो उनके हिसाब से उनका जो परंपरा है व बरा मायावादी है और अगर आप उनके हिसाब से आते हो तो आप वैष्णव निंदा करते हो मतलब हमारे जो गुरु जी है वो वैष्णव निंदक है उनके हिसाब से हमने बोला ऐसा क्यों कि क्योंकि वो राम मंदिर के विरोध में थे मतलब हमारे मन में कुछ डालने लगे वहा पर हम बोला ठीक है तो इतना बड़ा जगन्नाथ मंदिर संभाल रहे जगन्नाथ मंदिर अधिव कौन है महादेव है क्या जगन्नाथ मंदिर अधिव व तो विष्णु ही है तो अगर सबसे दुनिया के सबसे बड़े वैष्णव मंदिर का आचार्य खुद बोल र है मतलब जगन्नाथ जी के भक्ति करने के लिए तो आप य कैसे क सकते हैं कि वो वैष्णव विरोध हो ग पहली बात तो
01:11:44:18 दूसरी बात आप बोल रहे हैं कि जो वैष्णव नाम यथा शभु आपका जो प्रचलित वाड है तो अगर वो सबसे बड़े भक्त है मतलब भगवान कृष्ण के तो उनका एक भी फोटो आपके इसक मंदिर में नहीं है सबसे बड़ा भक्त है फिर भी आप एक भी फोटो नहीं आपके मंदिर में लेकिन प्रभुपाद जी केहे चैतन्य महाप्रभु है ठीक है वो भी आपके पूजन है लेकिन महादव के उनसे तो छोटा नहीं हो सकता ना भक्त के हिसाब से तो उनका फोटो क्यों नहीं लगाते नहीं नहीं वो सबसे बड़े भक्त नहीं है य आपकी ये आपका मिथ्या मिथ्या है ये वो उनके लिए सबसे बड़े भक्त नहीं वो कहने को यूज करते ववा नाम यथा क्योंकि 262 में उन्होंने बता दिया कि वो जो है इंद्रियों के वशीभूत है और इत्यादि इत्यादि है और वह केवल अपनी बात को रखते हुए चीजों को यूज करते हैं कंक्लूजन को यूज अपनी बातों के जैसे कि अगर आदि शंकराचार्य जी
01:12:52:27 मायावादी को वो कहते हैं उन्होंने फैलाया भज गोविंदम अरे भाई तो तुम ही तो कह रहे हो वो गलत फैलाने आए थे भज गोविंदम गलत है क्या भज गोविंदम गलत है क्या या तो यह कहो कि वो गलत फैलाने नहीं आए थे या फिर यह कहो कि भज गोविंदम नहीं फैलाया उन्होंने दोनों चीजों का आलंबन कैसे लेते हो भाई इतना बड़ा दोगलापन कैसे आया कहां से सीखा य प्रॉब्लम है बहुत बड़ी मैं एक बात क्लियर कर दूं उस समय थोड़ा सा ध्यान था इधर की ओर देखते रहना पड़ता है क्योंकि आज वो गोष्ठी भी है साप्ताहिक गोष्ठी जो हमारे य होती है अभी कुछ देर पहले जो सज्जन आए थे पांडे जी वह शायद अप्रत्यक्ष रूप से मैंने ध्यान नहीं दिया राम भद्राचार्य जी के बारे में बात कर रहे थे तो हमने जो हमारे परंपरा प्राप्त जो आचार्य हैं परंपराओं से जुड़े हुए हैं उनके लिए उनकी कभी समीक्षा नहीं करते हैं अपने चैनल पर और प्रत्यक्ष रूप से यदि हुई है तो हमारे चैनल पर तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी भी है जितने अंश में हमने एक बनाया भी था मगर बहुत सम्मान के साथ हमने उसमें भी प्रश्न ही पूछा था हमने समीक्षा नहीं की थी अपनी ओर से केवल प्रश्न पूछा था वो भी एक वीडियो बना कर के जब उन्होंने ये वक्तव्य दे दिया था कि चारों शंकराचार्य में
01:14:07:27 से कोई भी नहीं है जो पांच मिनट भी मुझसे जो है संस्कृत में बात कर सके तो इस इस वक्तव्य के उसमें जिज्ञासा जो हुई क्योंकि राम के भक्त है और रामानंद संप्रदाय से हैं तो हम कहीं से भी उनका वो नहीं कर सकते हैं और बहुत बड़े भी हैं और वह आचार्यों के स्तर की बात होती है मगर एक शिष्य के रूप से ही हमने प्रश्न किया था और मर्यादा में रहते हुए तो ऐसा कहीं भी अगर अप्रत्यक्ष रूप से भी उनके लिए कोई समीक्षा हुई है तो उसके लिए हम जो है क्षमा प्रार्थी है कि हमारे चैनल के माध्यम से हुई और वैसे उन्होंने भी शायद मेरे ख्याल से नाम नहीं लिया था इस कारण से हमारा भी ध्यान नहीं गया उर खर जी ओम प्रकाश जी जी उसके बाद वहा पर बज रहा था हमारा जो जगन्नाथ अष्टकम होता है ना गुरुजी का तो वहा पर व जगन्नाथ अष्टकम बज रहा था तो हमने बोला अच्छा ये किसने लिखा तो बो वल्लभाचार्य ने लिखा बो वल्लभाचार्य का देन है और शंकराचार्य बस फला रहे ने बो मतलब ये कैसा बात हो गया मतलब बरा दोला बात हो ग पह बात तो उसके बाद आ गया वहां पर एक महिला थी वोकन की थी और किसकी थी मैंने नहीं
01:15:23:06 वो नहीं जानता ठीक से तो उन्होंने योज्य पवित्र उनके ऊपर वहां पर डाला हुआ था उन्होंने और न जो जो वहां पर है जो पुजारी है वो तो ब्राह्मण तो नहीं है जन्म से वो जो मछली वगैरह पकड़ते हैं ना तो उन्हीं बरने से कोई आते हैं और व वहां पर ब्राह्मण बनक पूजा करते हैं सेवा देते हैं वकन मंदिर में तो उन्होंने बोला योज तो स्त्रियों के लिए भी है बोला ठीक है यज्ञ में
01:15:57:26 गंजी कर उसके बाद गंज कर के हमार आचार्य है जिनके बाद ज भी संस्कार किए है उन्होने उनके पास उनको रहना पड़ेगा जो नियम है उसको भी तो पालन करना पड़ेगा ना तोव क्या पालन कि इना लंबा बा ले रहे व पर फिर दूसरा बा हो गया हमारा आ गया रामानंद संप्रदाय है बोल हमारे लिए प्रामाणिक है हमने बोला ठीक है तो तुलसीदास भी तो आपके लिए प्रामाणिक हो ग ना उसके उस हिसाब से तो उन्होंने बोला हम तुलसीदास जी को बहुत मानते हैं और वो प्रामाणिक है पूरा अगर वो प्रामाणिक है तो उन्होंने अष्टकम लिखा था रुद्राष्टकम बोल के मैं एक बात कहना चाहूंगा ओम प्रकाश जी हम लोग इसका सेशन रखेंगे स्कन के लेकर के आपके किस तरह के वो है अभी हम लोग थोड़ा सा वो वाली बातें यहां पर ले रहे हैं जो समर्थक है और वो अपने विचार व्यक्त नहीं कर पाते हैं तो थोड़ा सा मैं आपको यहां पर इंटरप्ट करूंगा कि हम लोग किसी दिन रखेंगे न पर चर्चा करेंगे एक आप हमारा नंबर उस पर व करें तो आप उसमें डिटेल वाला फॉर्म है वो आप भर दीजिएगा ठीक है हम लोग किसी दिन रखेंगे आपके साथ तो अच्छा लगा आपने आपने इस प्रकार से भी एक समर्थन
01:17:13:06 ही प्रस्तुत किया है और आप रहे अभी आप जाए ना अगर समय मिला तो अभी अंत में आपके साथ थोड़ी बाकी की चर्चा हम कर लेंगे काफी देर से जो प्रतीक्षा में है तो उनको जरा मैं एक एक एक मिनट जी जी जी बोलिए बोलिए बोलिए जी जी और एक बात आ रही है हमारा यहां पर हमारा एक कुलदेवी का मंदिर है यहां पर तो उसे हम अभी केंद्र बनाने के लिए शुरू किए है क्योंकि इस एरिया में मैं अकेला हूं जो गुरुजी का शिष्य हूं और यहां पर कोई नहीं है वैसे यहां पर हमारा एक वो चल रहा है अभी गोरख आदि का अभी कुछ सजन कोई थे व बहुत प्रभावी थे शंकराचार्य जी से और अ दुर्गा पूजा था तो उनका पुजारी में था व कर्म के हिसाब से तो वो वहां पर ब प्रभावित हुए और बोल रहे थे ठीक है हमारे य
01:18:07:26 जोर आवाज आवाज आपकी क्लियर नहीं आ रही है देवा जी देवा कुमार जी बताए जय श्री राम जय श्री राम मेरा एक प्रश्न था की महिलाओ प्रश्न के लिए नहीं है यह सेशन आपने खामखा इतनी प्रतीक्षा की किस लिए बताइएगा अभी हमने आपको बताया ना आप शुरू से देख रहे हैं वाली चर्चा तो प्रश्नों के लिए नहीं है नहीं सुना आपने
01:18:56:00 संतोष कुमार जी संतोष कुमार अभी आपसे ही फोन पर बात हुई थी क्या हमारी यह चर्चा अभी किस विषय पर हो रही है य लाइव प आपसे पूछ रहा हूं कि अभी आपसे कुछ समय पहले हमारी बात हुई है क्या अभी मैं सीधा आंसर नहीं देंगे क्योंकि किसी ना किसी प्रकार से वो जैसे विश्वामित्र जी यज्ञ करते थे मैं आपसे पूछ रहा हूं आपसे अभी हमारी फोन पर बात हुई है क्या पले हा जी हा तो आप यह जो चर्चा है यह वैचारिक मतभेद के लिए नहीं है आप फॉर्म भरिए फिर आराम से आइए ठीक है क्यों अपना समय व्यर्थ कर रहे हैं
01:19:57:03 अब हम लेते हैं देवा कुमार जी भी प्रश्न लेकर आए थे उनको भी हटाइए और संतोष कुमार जी को भी हटा देते हैं हा सिद्धांत जी को ले लीजिए यह चर्चा किस विषय में मैं सभी को याद दिला द दर्शकों को कि जो लोग हमारे कार्य से संतुष्ट है व अपने विचार प्रकट करें इस बारे में है क्योंकि हम उनके विचार ले नहीं पाते हैं कई बार तो यदि इस इन विचारों को प्रकट करने हेतु आप आ रहे हैं तो आप जुड़े अन्यथा आप ना जुड़े आज
01:20:43:19 तो जी जय हिंद जी जय श्री राम जय श्री राम आवाज आ रही है मेरी जी जी कुछ दिनों से आपके वीडियोस में देखता हूं और काफी अच्छा लगता है क्योंकि शुरुआती दौर से अद्वैत वेदांत मेरा जो है वो मतलब उसमें इंटरेस्ट रहा है और आमतौर पर जो कुछ अलग-अलग जगह पर हम जाते हैं तो हिंदू धर्म के बारे में अलग-अलग भ्रांतियां रहती है उनमें से सबसे ज्यादा मुझे भगवान आदि शंकराचार्य का जो अद विधांत है काफी क्लोज लगता है और उनसे मैं काफी रिलेट कर पाता हूं अपनी सारी जो बातें है और कहीं कहीं सभी चीजों का आंसर जो है वो मुझे ढूंढना होता है तो वहीं पर ढूंढता हूं क्योंकि बाकी सब जगह पर कोई ना कहीं कांट्रडिक्शन मुझे लगता है कि हो जाता है तो आप जो काम कर रहे हैं वो बहुत अच्छा ही है और आपको शुभकामनाए भी देता हूं क्योंकि अद्वैत मतलब इस परंपरा से बहुत कम लोग जो है वोह इंटरनेट पर ऊपर इस तरीके से वीडियोस बनाते हैं और रखते क्य बाकी परंपरा के ऐसे बहुत सारे लोग है जो अपने वीडियोस डालते हैं
01:21:58:21 लाइव स्ट्रीम करते हैं और अपनी अलग अलग चीजों पर बनाते लेकिन वेदांत दर्शन या भगवान आदि शंकराचार्य के जो विचार है जो कि मूलभूत हमारे विचार आते हैं तो उनके ऊपर बहुत कम ऐसे लोग हैं जो बात करते हैं तो आप इस चीज को लेकर सोशल मीडिया के ऊपर आते हैं क्योंकि आज की जो जनरेशन है वो ज्यादातर टाइम अपना सोशल मीडिया ऊपर ही बिता द तो ऐसे में बहुत सारे भ्रम होते हैं तो अगर उनको सही दिशा मिलती है और मार्गदर्शन मिलता है तो बेहद बहुत ही अच्छी बात होगी और काफी दिनों से आपके वीडियोस देखता हूं तो अच्छा लगता है कि आप इस परंपरागत जो हमारे चीज हैं वह आप सभी को बताते हैं और आमतौर पर जो आपने कहते हैं कि गुरु ग्रंथ और गोविंद तीन चीजों का जो साथ में लेकर चलना वो भी जरूरी है क्योंकि बिना गुरु के अगर आप जाएंगे तो शास्त्रों में भी कंफ्यूजन हो जाती है बहुत सारे शास्त्र है और खास करके पुराणों के ऊपर जो है वो बहुत सार ब्रह्म समाज में आज भी फैल
01:23:14:00 रहे हैं तो ऐसे में अगर एक गुरु होता है तो वो मार्गदर्शन देता है और जीवन में आपको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मतलब वो एक मिल पाता है तो मेरा एक आपसे ये अनुग्रह था कि आप जो एक ऐसे ग्रंथ की नामावली के कौन-कौन से प्रमाणिक ग्रंथ है तो एक वीडियो आप जरूर बनाइए कि ऐसे कौन सा ग्रंथ है हम पढ़ सकते जो बिगनर के लिए वैसे में एक बार वो एकात्म धाम में चन मिशन जी का जो रहता है उनमें से ग्रंथ की लिस्ट मैंने बनाई थी लेकिन और भी अगर कोई अच्छे ग्रंथ है जो कि अवत जो हमारी जो सिद्धांत को समझने के लिए जो सिद्धांत मूलभूत सिद्धांत क्या है उनको परर भी अगर आप समय मिले तो एक वीडियो जरूर बनाएगा कि कौन कौन से ग्रंथ है व शुरुआती समय में पढ़ने चाहिए इन सब चीजों को बेसिक जानने के लिए और बाकी सब बहुत ही अच्छा है आप जो काम कर रहे उसके लिए आपको शुभकामनाए बहुत बहुत आभार आप और यही कहेंगे कि धरातल पर भी थोड़ा सा सिद्धांत शर्मा जी मैं आपको लेने से
01:24:29:12 पहले संदेश देना चाहूंगा कि कुछ ऐसे स्वयं को अद्वैत कहने वाले हैं जो वैष्णवास्त्र वास्तविक तौर पर मैं उनको नकली कहूंगा तो इनसे थोड़ा सा अपने आप को बचाएं क्योंकि जितने भी
01:25:14:26 वैष्णवास्त्र गुरु हैं शंकराचार्य इन्होंने कभी इस तरह की चीज नहीं सिखाई हमें बल्कि हमने तो देखा है कि वह इतना ज्यादा आदर सम्मान करते हैं कि अलग से इस विषय पर बात करने का कोई औचित्य नहीं बच जाता है जब हमारे गुरुदेव ही कह रहे हैं कि मैं ऐसा कोई कार्य नहीं कर सकता जिसमें प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से किसी जो
01:25:53:07 वैष्णवास्त्र कर सकते हैं तो अगर परंपरा प्राप्त शिष्य है शंकराचार्य के तो आपको उस रूप में निर्णायक रूप से इसे मानना चाहिए और वैष्णवास्त्र एक दूसरे के प्रति सम्मान की भावना होनी चाहिए जी सिद्धांत शर्मा जी जय श्री राम जय श्री राम शिवांश जी पहले तो आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम अरे नहीं आप इतना अच्छा काम कर रहे हैं और कई सारे लोग हैं जो इस चीज को जानते हुए भी नहीं करना चाहते हैं डर की वजह से कि कहीं कोई कुछ कर ना दे कहीं कोई कुछ मार ना दे इसीलिए कई सारे लोग फसुक पर करते हैं य सारी चीजें और आईडी अपनी गुप्त रखते हैं कि कोई आई दूसरी हो मेरी तो वो इस तरह से करते हैं आप खुले आम कर रहे हैं ये सारे काम तो हम लोगों को काफी कुछ सीखने को मिल रहा है मैंने आपको करीब दो या तीन महीने से फॉलो करना शुरू किया है जब मैं निग्रह चार्य जी को ए अपने गुरुदेव मानता हूं एक तरह से
01:27:08:09 और उन उनकी एक पोस्ट आई थी निग चार जी की कि देखिए अभी मतलब आर्य समाज के लोग जो है अब आपसे क्या कहते हैं ये डिस्कशन वगैरह नहीं करना चाहते आपके ऊपर कुछ निकाल दिया था उन्होंने वो पोस्ट डाली हा तो निगरा चार्य जी ने ये पोस्ट डाली थी वहां से मैंने फिर आपको फॉलो करना शुरू किया क्योंकि मैं तीन साल से निगरा चार्य जी से जुड़ा हुआ हूं और उन्हीं की मतलब जो जितनी भी मतलब में मेरे अधिकार में चीजें हैं और जितना भी मैं मतलब फॉलो कर पाता हूं उतना उनको मानता हूं उतनी उनकी बातें सुनता हूं और उन्हीं के थ्रू मैं आपसे जुड़ पाया था और आपसे केवल यही कहना चाहूंगा कि मतलब आपने जो काम कर रहे हैं बहुत अच्छा कर रहे हैं और एक तो क्या है कि हम लोगों को कई सारे हिंदुओं को यह चीज नहीं पता है कि तो वर्ण व्यवस्था के बारे में और दूसरा उनको यह नहीं पता कि हम किस आचार्य से जुड़े हमारी कुल परंपरा क्या है हमारे कुल देवी क्या है कुल देवता क्या है कुल भैरव क्या है लोगों को इसके बारे में बिल्कुल भी नॉलेज नहीं है और वो क्या करते हैं कि वो टीवी देखते हैं कहीं किसी के साथ जुड़ जाएंगे कहीं किसी के साथ जुड़ जाएंगे उनको मानने लगेंगे जबकि अपने कुल परंपरा को लोग पालन नहीं करते य चीज मैंने आपसे और निगरा चार जी से दोनों से सीखी कि अपने कुल परंपरा से जो प्राप्त आचार्य उनके साथ जुड़िए और वर्ण व्यवस्था का क्या हैमा जी मैं आपको बोलूंगा आपने वर्ण
01:28:23:13 व्यवस्था के वि मैं काफी अच्छे से समझाया तो मैं उसी को जब भी मैं कुछ अगर मुझसे कोई बोलता है कि अरे क्या हो गया अगर किसी ने ठाकुर ने किसी से बनिए से विवाह कर लिया यह सब बोल दिया तो मैं आपके आपका जो वीडियो का जो मैंने आपसे सीखा है उसी के थ्रू मैं उनको समझाता हूं और जो मैंने जो मेरे दोस्त है ब्राह्मण मित्र उनके थ्रू जो मैंने जाना है इसके आगे क्या परिणाम होते हैं मतलब आध्यात्मिक क्या परिणाम होते है जैसे पिंडदान उनकी जो मतलब संतान होगी वो पिंडदान वगैरह नहीं कर पाएगी हमारे जो पूर्वज होंगे वो नरक गामी हो जाएंगे श्राप देंगे मतलब हमारी जो आने वाली पीढ़ उसका ना निश्चित है तो यह सारी चीजें मैंने आपके थ्रू और हमारे जो ब्राह्मण मित्र है जो निग्रह चार जी है आपके थ्रू सीखी हुई है तो आपका जो कार्य है मैं बोलूंगा कि मतलब बहुत अच्छा आप कार्य कर रहे हैं और इसी तरह से आप करते रहिए और एक और चीज है जो स्पन के विषय में लोगों को नहीं पता है लोग स्पन के विषय में भी मतलब बोलते हैं कि रे नहीं यह बहुत अच्छे हैं इस तरह से ये काम करते हैं अब उनसे उनकी कई सारी वीडियोस है वो यह बोलते हैं कि अल्लाह क्या कहते हैं अल्लाह और जीसस हमारे मतलब क्या श्री कृष्ण भगवान के समान है और आप शिव जी के बारे में उनसे पूछोगे तो शिव जी के बारे में बोलते हैं कि नहीं शिव जी छोटे है शिव जी भक्त है मतलब आप अल्लाह को और जीसस को शिव जी से ऊपर रख रहे हैं जबकि शिव जी आप जानते हैं ख आप शंकर परंपरा से हैं और मतलब शिव जी क्या मायने रखते हम लोगों के लिए
01:29:38:15 और वो शिव जी के विषय में जब से हमने इकोन से सवाल पूछना चालू किया है कि कृष्ण अल्लाह को एक क्यों कहते हो तो इसन उसका उत्तर देने के लिए यह बोलने लगते हैं कि अरे वो उन्होंने भी तो अलोक निषद को स्वीकार कर लिया तो इन सब बातों का केवल एक ही उत्तर प्राप्त होता है ऑफिशियल उन्होंने खंडन किया कुरान का कुरान की सीमा का ईश्वर अवतार नहीं ले सकता बाधित है क्या आपने ऑफिशियल कहीं खंडन किया है कुरान की कुरान का कहीं नहीं किया उन्होने नहीं किया आप उनके जो फॉलोअर्स है जिनम अभी भी शंकराचार्य है उनके जो फॉलोअर्स है जो अपने आप को स्कोन समझन समझते हैं मगर उनमें अभी भी शंकराचार्य है प्रमाणिक
01:30:33:02 वैष्णवास्त्र है कितना भी आप लोग इधर उधर से कैसे भी पकड़ लो प्रत्यक्ष प्रमाण आपको दे दिया गया कि कुरान और बाइबल का खंडन प्राप्त है शंकराचार्य जी के द्वारा ठीक इसको इस बात का आलंबन लिया जाता है इसी तरीके से जी तो मैं यही यही कहना शवा आप जो कार्य कर रहे हैं य बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं और यही चाहूंगा मैं कि आप ज्यादा से ज्यादा जो जैसे जो हिंदू है और जो हमारे दूसरी कम्युनिटी के मतलब दूसरी कम्युनिटी मतलब दूसरी जाति के जो लोग हैं जैसे क्षत्रिय है वैस्य हैं और शूद्र जाति से भी जो है उनको भी जोड़िए आप मैं तो जितना ज्यादा हो सक सब जुड़े हैं सब जुड़े हैं अभी देखिए गुरुदेव के जहां प्रवचन होते हैं ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र सब सुनते हैं वहां पर भंडारा होता है ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र सब खाते हैं हमारी जो हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी होती है उसमें ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र सब कार्य करते हैं यह तो केवल इस पर तो रोटियां सेकने वाले हैं जो प्रचार तंत्र में वो रोटियां सेकते हैं धरातल पर आप देखोगे तो सब कुछ सब जगह हो रहा है
01:31:48:25 ठीक है बहुत बहुत अच्छा लगा आपका वक्तव्य सु जय श्री राम आप जी धन्यवाद आप अवनीश दीक्षित जी जय श्री राम आपका जी शिवांश भाई जय श्री राम कैसे हैं आप जी जी कृपा मेरा यही मेरा एक ही विचार है आपके प्रति कि यह जो आपका कार्य है बड़ा ही सराहनीय है बस यह कार्य अनवरत चलता रहे यही श्री राम से प्रार्थना रहेगी जो वैदिक मार्ग पर प्रशस्त है और गृहस्थ आश्रम में प्रशस्त है तो वो मति भ्रम ना हो उनका उसको लेकर यह कार्य आपका अनवरत जारी रहे आभार आपका आभार और एक एक आपसे निवेदन रहेगा कि आपकी जो वो आपका काव्य जो है आपकी कविता वो धरातल पर कब आएगी उसका बड़ा इंतजार है हम लोगों को इसकी सूचना कब तक हम लोगों को प्राप्त हो
01:32:46:07 जाएगी उस पे हम लोग कर रहे हैं उसको अच्छे से बनाने का प्रयास जी जल्दी आपको सुनने को मिलेगा बहुत सारे कार्य करने के लिए अगले माह लखनऊ आ रहे हैं जगतगुरु शंकराचार्य जी तो व भी हई में भी कार्यक्रम हरदोई में भी कार्यक्रम लिया गया है शायद जनवरी में 14 या 15 तारीख के बाद आगमन रहेगा उनका ज गुरुदेव और मुझे लगे य तो ध्यान आ गया तो मैं यह बता दूं जी गुरुदेव का एक एप्लीकेशन आ गया गोवर्धन मट का इसमें उनकी इंफॉर्मेशन रहती कि अब गुरुदेव इस समय कहां मिलेंगे तो हमसे बजाय फोन करके अपना समय और वो नष्ट करने से बचे वो एप्लीकेशन डाउनलोड कर ले उसम और भी बहुत सी चीज प्रकल्प चल रहे हैं अच्छा रहेगा वहां से आपको सब कुछ प्राप्त हो जाएगी जानकारी बहुत बहुत आभार आपका शुक्रिया जी विनय जी जय श्री राम जय श्री राम शिवान जी जैसे मैंने वो आपका टाइटल देखा तो मुझे लगा कि अप्रिशिएट तो करना ही चाहिए इतना इतना ऐसा कार्य तो शायद ही कोई कर रहा है पूरे हमारे समाज में और जब मैंने आपको
01:34:01:10 स्टार्टिंग में देखा तो मुझे ऐसा लगा कि ऐसे डायरेक्ट टेंपल के अंदर घुस के डायरेक्ट उनको चैलेंज करना मतलब बहुत ही बड़ा बड़ा कार्य है ऐसे कोई करता नहीं किसी के हिम्मत नहीं है तो उ उस वक्त से मैं आपको फॉलो करने लग गया और जैसे जैसे देखता गया कि सब सब के सब बाकी के जितने भी तथागत समाजी है समाझ लोग है बाकी तथा गति संप्रदाय जो बताते अपने आपको वो वो जवाब नहीं दे पाते जभी भी प्रश्न करते जैसे कि हम सबको पता है कि अद्वैत को जो सत्य है उसको कोई हरा नहीं सकता इसलिए उनके पास कोई जवाब ही नहीं जवाब भी नहीं मिलता तो मुझे एक्चुअली बहुत ही एक चीज बताना है कि ऐसे कुछ जो सीरियस लोग है जिनको धर्म को जानना है या फिर जो डिबेट कर सकते हैं अच्छे से जाके जैसे आपके जैसे जैसे हम लोग कहते हैं कि पारस मण जो होता है वो लोखंड को छूने से मतलब लोहे को छने से सोना बना देता है लेकिन पारस मण लोहे को पारस नहीं बना सकता तो ठीक उसी तरह आप आपके जैसे कोई ऐसा कोई तैयार होना चाहिए जो बहुत
01:35:17:09 सब जगह सब जगह जाके ऐसे चैलेंज करना चाहिए इ लोगों को ताकि य जो बकवास चीज चल रहा सब खत्म हो जाए जल्द से जल्द तो यही निवेदन है कि जो सीरियस लोग है उनके लिए आप कुछ अलग क्लास या फिर अलग सेशन में उनको आप जोड़िए और उनको तैयार कीजिए नहीं क्ला हम लोग इसी उद्देश्य से चला रहे कि हर घर में एक धर्म रक्षक हो जो युक्ति और प्रमाण के साथ अपने धर्म की रक्षा करने में वैचारिक जो क्रांति लाने के लिए सामर्थ्य मान हूं मगर इसमें क्या होता है कि जब भी हम लोग बात करते हैं तो कई लोग इसमें एक भ्रांति ले आते हैं अपने मन में विशेष तौर पर विपक्षी जो लोग हैं जो सहमत नहीं है कि भाई ये जो है अपनी वर्चस्व होता के लिए लड़ रहा है अपने अपने मत का वो लाना चाहता है कि दयानंद जी को मत मानो और जो है शंकराचार्य को मानो ये एक दिक्कत है मोटिव समझने के लिए है कि हम सर्वशक्तिमान ईश्वर का प्रचार कर रहे हैं अगर कोई ऐसा सिद्धांत है जो शंकराचार्य का नहीं है और वहां से सर्व शक्ति मत्ता सिद्ध हो जाए धर्म
01:36:32:13 की शाश्वता सिद्ध हो जाए मोक्ष की परम स्वतंत्रता सिद्ध हो जाए तो मैंने कई बार यह कहा है कि आप वो सिद्धांत हमें दे दीजिए हम उसी को लेके चलेंगे हमें हमें अपने संप्रदाय की वर्चस्व की कोई लड़ाई नहीं है हार या जीत की लड़ाई लड़ाई नहीं है यह है धर्म रक्षा हमें अपने धर्म को संगठित करना है और संगठित करने लिए अका सिद्धांत चाहिए जिसको काटा ना जा सके ऐसा सिद्धांत दीजिए काटा जा सकेगा तो दिक्कत आ जाएगी तो अगर आपके पास है तो दे दीजिए हम उसी का प्रचार करें हमारा यह रहता है हमारा जो देखि व व्यक्तिगत है कि हमारी आस्था किसम निष्ठा किसम हम अपनी प्रैक्टिसिंग कैसे कर रहे हैं मगर समाज को राष्ट्र को धर्म को मानवता को कौन सा सिद्धांत बचा सकता है उसके लिए हम लोग लड़ रहे हैं हमारा इससे म मतलब नहीं है कि हमारी आस्था क्योंकि शंकराचार्य की है तो इसलिए हम आदि शंकराचार्य जी का प्रचार कर रहे हैं हम वो चीज लेकर नहीं चल रहे हम समाज को संगठित कैसे करें बिखरे हुए सनातन समाज को बराबर कैसे करें हर कदम पर एक नया मत है हर कदम पे इस कारण से वो जब हम जाकर के बात करते हैं कि कोई नहीं है चक्कर में मत प्रकर में हमारा वहां पर भाव ये
01:37:47:16 होता है कि हम सार्वभौम सिद्धांतों को कह रहे हैं हम शंकराचार्य की वहां पर वर्चस्व स्थापित नहीं कर रहे वो बात और है कि ऐसे अकाट्य सिद्धांत उन्हीं से प्राप्त है वो बात एक अलग विषय है मगर हम अकाट्य सिद्धांतों का प्रचार कर रहे हैं हर तरह से बात को अका रूप से रख दो सारे विधर्मी वही हार जाएंगे अभी कुछ दिनों पूर्व देखिए एक महिला आई थी वो अच्छी खासी व्याख्याता थी अपने पक्ष मु पाच मिनट लगे उन्होंने क्विट कर दिया क्यों किया साका सिद्धांत रखेंगे कोई बात आएगी नहीं तुम्हारे यहां कितने विवाह होते कितने नहीं होते हैं ऊंच नीच ये सब जो आजकल जैसे कई और भी इस्लाम के खंडन में बहुत से चैनल चल रहे हैं तो वहां पर जो खंडन होता है वो इस प्रकार से होता है तुम्हारे य स्त्रियों के साथ ये किया जाता है वो किया जाता है ये है वो है यही सब बातों पर होता है मगर इन सब बातों का बिंदु वहां खत्म हो जाता है जब दयानंद जी से पूछा गया सत्यार्थ प्रकाश में पूर्व पक्ष के रूप में वहां पर एक बात आई कि भाई ये जो नियोग की प्रक्रिया है य मुझे व्यभिचार जैसी लग रही है ठीक है तो दयानंद जी का वहा पर उत्तर है कि तुम्हें जो विवाह आदि की
01:39:02:16 प्रक्रिया है कि विवाह होना चाहिए यह कहां से प्राप्त हुई है धर्म से ईश्वर से ईश्वर ही कह रहा है नियोग हो सकता है ईश्वर ही कहर नियो हो सकता है तो फिर वहां पर य सवाल नहीं रह गया कि वय विचार है जब ईश्वर ने कहा विवाह विवाह है तो ईश्वर ने कहा नियोग व्यभिचार नहीं है तो आपको मानना पड़ेगा व्यभिचार नहीं है तो हम जब तक निचले लेवल की लड़ाई लड़ते रहेंगे अरे तुम्हारे यहां तो स्त्रियों के साथ य होता है वो होता है इनका कभी अंत नहीं होगा क्योंकि अंत में बात य भाई ईश्वर ने कहा है यह चीज गलत नहीं है बराबर है ना मल को पना ईश्वर ईश्वर है कि नहीं अगर इस पर हम बात करेंगे तो मर्यादा के अंदर रहते हुए आपत्ति जनक शब्दों के इस्तेमाल के बिना भी हम सामने वाले को ढक्कन कर सकते बराबर है है ना तो इसलिए अ सितो को हम लेकर चल रहे हैं जी वैभव शुक्ला जी जय श्री राम जय श्री राम शिवांस जी जी मैं बहुत समय से आपको फॉलो कर रहा हूं जी लगभग मब काफी समय हो गया तो अभी यहां मैं ग्वालियर पर हूं हमने यहां पर आदित्यवानी जो है प्रारंभ की है अच्छा तो
01:40:17:27 अभी हा हाभी हमारे दो कार्यक्रम ही हुए पिछले संडे को हुआ था और एक संडे को अभी गुरुदेव मथुरा में थे तो वहां पर भी जाना हुआ था हमारा एक्चुअली वृंदावन में हरिहर आश्रम में वहां पर भी रुके दो दिन मैं भी गया था 13 और 14 को मैं भी अच्छा 13 14 को आप वहां थे मैं गया था 15 को अच्छा तो 15 को हम शाम को पहुंचे थे 16 1 और मतलब 17 की शाम को रात में निकल आए थे इस प्रकार से जो कार्यक्रम रहा तो अभी यहां पर जो है प्रकल्प प्रारंभ किया है इसमें जैसे आज हमने हनुमान चालीसा का जो है पाठ किया था उसका अर्थ सहित किया और जो राम भद्राचार्य जी द्वारा आरोप प्रत्यारोप जो है वो लगाए जा रहे हैं उनका भी जो खंडन किया वहां पर अरे उसका रिस्पांस भी अच्छा रहा देखिए आचार्यों के उतर की बात आचार्यों तक ही रहने दी देखिए गुरुदेव से देखिए गुरु जी क्या सिखाते हैं नहीं नहीं उसम हमने वो नहीं वैसा नाम नहीं लिया था किसी का बस य नाम ले लिया ठीक ठीक ठीक ठीक गुरुदेव है उनसे जब ये प्रश्न किया गया कि क्या इसमें यह वाली लाइन ऐसे से
01:41:33:00 ऐसे है तो गुरुदेव ने कहा परंपरा से क्या प्राप्त है तो उन्होने कहा परंपरा से तो य प्राप्त फिर लोग कोशिश करने लगे नाम लेने की कि अरे फलाने तो ऐसा कह रहे हैं तो गुरुदेव ने नहीं नहीं यह सब नहीं परंपरा से क्या तो गुरुदेव ने रोक दिया गुरुदेव व्यक्तित्व की व्यक्तिगत समीक्षा नहीं ही करने का कहते हैं व्यक्तिगत समीक्षाओं से बचे सिद्धांतों की समीक्षा करें सिद्धांतों बात करें बिल्कुल बिल्कुल तो यही वहां पर अपन ने रखा मत और कुछ जो प्राचीन पांडु लिपियां भी देखी थी तो उनमें भी जो है वो मूल पाठ जो परंपरा से प्राप्त है वही वाला है तो वो भी हमने शेयर कर दिया था तो वही चीज आई थी तो उसका बड़ा अच्छा रहा तो ऐसे ही और प्रकार के कार्यक्रम और जो है आयोजित करने के लिए सोच रहे हैं हम तो जैसे लखनऊ में भी आप चला व किस प्रकार के कार्यक्रम होते हैं और क्या क्या चीज होती है आप बताएंगे थोड़ा मार्गदर्शन कर बारे में आद वाहिनी में कैसे काम कर पा रहे हैं उसके लिए हम लोग अपना अनुभव शेयर करते हैं उसम हम लोग उस मीटिंग में आप जुड़िए होगी तो आप कनेक्ट होंगे नहीं मैं आपसे कनेक्टेड नहीं हूं मेरे पास नंबर सेव है आपका आप ये वाले नंबर
01:42:48:07 कर दीजिए तो कनेक्ट हो जाइए तो हम लोग उसम थोड़ा सा आदान प्रदान करेंगे 740 8301 बोलिए नंबर ये सामने आ रहा है स्क्रीन 740 8369 चलिए आभार आप सभी का आने का समय जिन्होंने फॉर्म भर दिया है थोड़ा प्रतीक्षा कर ले
01:43:21:19 और जी आपका विनय जी अगर कुछ शेष हो तो बताए तो फ आवाज नहीं आ रही भाई साब मेरी आवाज आ रही है हा आपका आवाज कट रहा है नहीं नहीं नहीं आवाज कट रही है अच्छा जी भाई साहब पता नहीं कारण ही ऐसा हो रहा है रुक जाइए एक बार मैं मूव हो जाता हूं फिर आता हूं अब आवाज आ रही है आ रही है परफेक्ट जी विन जी कुछ आपका शेष है बोलने को तो बताइए बताए उतना ही बोलना था कि ऐसे स्ट्रंग डर तयार होने चाहिए वही सबसे
01:44:23:16 के बारे में चैत महाप्रभु ने बताया है उत्तम अधिकारी वही है भक्ति में जो तर्क से तर्को प्रतिष्ठा ऐसे लोक आया है सबसे हो ही जो त तक देके सामने वाले को शांत कर सके वही उत्तम अधिकारी च महाप ने गु बोलते कटते चले जाते हैं सुनने करेंगे कि जितना हो सके आपके रूप में और जो वैभव शुक्ला जी इनके रूपों में जगह जगह धर्म रक्षक तैयार हो और इसीलिए जो गोष्ठी का प्रकल्प है ना कि आपके घर पर आप जहां रहते हैं उसके पास में कहीं पर आप जो है साप्ताहिक रूप से बैठ रहे हो वहा हनुमान चालीसा का पाठ इत्यादि जैसा कि वैभव शकला जी ने तो इसमें जो भी जवाइन करना चाहते हैं गोष्ठी वाले प्रकल्प में और हमारी सहायता हम जितना हो सकता है मार्गदर्शन करेंगे तो वो जुड़ सकते हैं नंबर हमने दिया है नामा स्त्र चालू है नामजप में जुड़े सुबह नंबर दे दिया है भाई साहब आपको मैसेज कर दिया है मैंने जी जी जी ठीक है ये
01:45:38:20 गो क र जी अच्छा क्या बोल रहे हैं मैं पूछ रहा था गोष्ठी कब होती है अपनी ये आदित्यवानी को लेके गोष्ठी आज अभी है 4 बजे मैं यहां से निकलूंगा और वहां पहुंच ठीक है हमें जॉइन करेंगे अच्छा अच्छा ठीक है भाई साहब हम जवाइन करेंगे हां ठीक है फिर सभी को लिंक भेज दीजिएगा जॉइनिंग वगैरह की जी जी जी जय श्री राम हा हा मैं आपको प्राप्त हो जाएग जी सभी को जय श्री राम समय देने के लिए सबका आभार और इस प्रकार का हम रखेंगे साप्ताहिक रूप से कि जो संतुष्ट है वो आकर के साता है कि अर्ध मासिक या मासिक रूप से कि वो स्त्रिया नाम जप में क्या करें
✅ This part is already used · 01:46:26:27 – 01:46:35:24 (0:09)
→ Used in: B · Video समझदार और पढ़े-लिखे होकर भी यदि ऐसे लक्षण दिखें, तो क्या उन्हें मूर्ख कहा जाए? D... at 6:57 ↗
01:46:26:27 जनक सुता जग जननी जानकी अतिशय प्रिय करुणा निदान की ताके जुग पद कमल बनाव जा सु कृपा निर्मल मति पाव
⬜ Not used yet · 01:46:35:24 – 01:46:49:00 (0:13)
01:46:35:24 गायत्री मंत्र का रूपांतरण है तुलसीदास जी द हा ब ठीक है सभी को जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय
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