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00:00:02:25 तो सभी को जय श्री राम और आज हम यहां प्रस्तुत हुए हैं आर्य समाज के एक बंधु हैं जो आर्य समाज को फॉलो करते हैं और आर्य समाज को लेकर के जो वैचारिक मतभेद आ रहे हैं हमारे बीच में उसके निमित्त आज यहां पर चर्चा के लिए हम लोग उपस्थित हुए हैं पिछली जो एक लाइव हुई थी जिसमें कि [संगीत] रामपाल को फॉलो करने वाले एक बंधु थे वो आए थे उसमें हमें एक थोड़ा सा हृदय को विदर करने वाला एक कमेंट टिप्पणी प्राप्त हुई थी जिसमें कि उन्होंने कहा था कि बाकी सब तो ठीक है मगर हम जो है सामने वाले को बोलने का अवसर नहीं देते हैं ऐसा कुछ उसमें टिप्पणी में लिखा था मगर ऐसा नहीं है हम अपनी जानकारी में तो देते ही है मगर होता क्या है जब विषयात हो रहा होता है या फिर हमें बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा होता है तो ऐसे में हमको थोड़ा सा प्रयास करना पड़ता है कि सामने वाला विषयात ना कर सके क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि संसार भर में जितनी भी जो लड़ाइयां

00:01:17:27 है ईश्वर को लेकर के वैचारिक मतभेद है उसका मूल कारण विषयात है जब भी कभी दो लोग चर्चा करने बैठे तो उसमें कोई बात निकल सकती थी तथ्यात्मक रूप से मगर वो बदल दी जाती बदल बदल के बदल बदल के इतना हल्ला हो गया इतना हल्ला हो गया कि जो मूल जिस पर चर्चा हो रही थी वह ना होकर के कहीं और ही पहुंच गए और तो मैं आशा करूंगा कि आज हम लोग विषयात ना करें आपसे भी हरिओ मर्य जी आए हैं जी अवश्य जी जी और एक चीज और है कि ऐसा नहीं है कि आपको बोलने का अवसर नहीं मिलेगा कई बार ऐसा होता है कि जैसे मैं कोई बात बोल रहा हूं तोम वाले सज्जन है अगर उनकी कोई बात ऐसा होता इंस्टिगेट हो जाते हैं कोई बात कट जाती तो इंस्टिगेट हो जाते हैं तो उसके कारण वह फिर बौखलाहट में फिर पंक्ति को पूरा करने का अवसर दिए बिना ही अपनी बात बोलते रहते हैं तो उससे क्या है जो हमारा य वीडियो हो रहा होता लाइव इसकी क्वालिटी फर बिगड़ती है इसमें कब किसने क्या बोला व वो जो ने लगता है ओवरलैपिंग होने लगती है आवाज की वह सब ना

00:02:26:20 हो विय में एक नियम भी हम बना ले आप बोल रहे हैं रख रहे हैं तो मैं में नहीं इंटरप्ट करूंगा मैं बोल रहा एक अपना विषय जो लगभग एक मिनट में कंप्लीट हो जाता लगभग तो आप इंटरप्ट नहीं करें और स्टेप बाय स्टेप अपने कुछ विषय है जिन पर हम चर्चा करेंगे और लगभग रहेगी हमारी यह चर्चा प्रयास रहेगा कि मतलब ऐसा ना हो किसी के भी जो मौलिक अधिकार है उनका हनन ना हो और अप अपनी अपनी जानकारी में दोनों ही लोग हमें ऐसा लगता है कि धर्म की रक्षा कर रहे हैं इसीलिए यहां पर आए वो धर्म की व्याख्या हो सकता है दोनों की जानकारी में अलग-अलग हो थोड़ी बहुत तो प्रयास यही रहेगा कि मौलिक अधिकारों का हनन ना हो फिर भी जैसे रोड पर निकलने से पहले हम यह नहीं तय कर सकते हैं कि कहां पर ब्रेक लगानी है कहां पर नहीं तो उसी तरीके से बाकी जगह में भी होता है कि एट द एंड जो निर्णय होता है वो बुद्धि और विवेक का हो जाता है मगर ईश्वर को ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि भाई वो हमें ऐसी सद्बुद्धि दे कि हमारी जो चर्चा हो वो मर्यादित रहे और किसी के भी अधिकारों का हनन ना

00:03:41:26 हो अच्छा तो अब हम सीधे आ जाते हैं अपने मूल विषय पर सबसे पहला वही है कि क्या आर्य समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वह सर्व नियामक है क्या वह किसी भी नियम के नीचे नहीं है या है क्या वह सर्वशक्तिमान है क्या वह अनंत है अवाद है बताए जी शिवान जी जो आर्य समाज में सत्या प्रकाश मुख्य वेष रहता है इस विषय का जो वेदों की उसमें ऋषि परमात्मा को सर्वशक्तिमान मानते हैं और सतिमान के रूप में आप जब देखते हैं तो परमात्मा की कुछ ड्यूटीज है जिसमें विशेषकर ओडी के रूप में कहते हैं वो जनरेटर है ऑपरेटर और डिस्ट्रॉय प्रकृति काता है पालन करता है और एक समय अंतराल बाद डिस्ट्रॉय होती है और फिर प्रकृति बनती है परमात्मा की व्यवस्था से चलती है फिर एक और उनका मुख्य कार्य जो बताया जाता है विशेष रूप से कर्मों का फल देना जैसे हम सभी कर्म करने में आत्मा स्वतंत्र है

00:04:56:28 और परमात्मा कर्मों का फल देने में है तो इस रूप में वह सर्वशक्तिमान कह सकते हैं और इसको मोटे रूप में ऋषि के माध्यम से कहा गया है इसको अगर हम एक पति में पिरो इस विषय को सर्वशक्तिमान को कि वह अपना स्वयं का कार्य करने में किसी का भी नहीं लेता वह अपने सभी कार्य स्वयं करने में सक्षम है ठीक है आपने कहा आपकी बात हो गई आपकी बात हो गई जी जी आपने कहा सर्वशक्तिमान वो इसलिए है क्योंकि वह किसी की सहायता नहीं लेता है अपने काम करने में जो उसके कार्य हैं निश्चित चार कार्य तो इसमें दो प्रश्न आते हैं पहली बात हमारा पहला प्रश्न था क्या वो इसमें दो प्रश्न आते हैं पहला हमारा प्रश्न था क्या वो किसी क्या वो किसी भी नियम के नीचे है या नहीं है तो पहले इसको स्पष्ट कर दें जी बिल्कुल स्पष्ट करेंगे बिल्कुल जी ये बड़ा महत्त्वपूर्ण प्रश्न किया आपने जैसे उसके गुणों से ही हमें पता चलता है कि परमात्मा न्याय कारी है तो इस

00:06:12:19 विरु परमात्मा किसी के साथ अन्याय नहीं कर सकता दूसरे उसके गुण भाई साहब चर्चा चर्चा व्यर्थ ही जा रही है सिर्फ इतना बताना है आपको कि वो भी कुछ नियमों के नीचे है या नहीं मैं नियम नहीं पूछ रहा हूं किन नियम के नीचे है आप आप यह बता रहे हैं कि उस पर भी कोई नियम लागू होते हैं आप सिर्फ इतना बता दीजिए नियमों को नीचे है या नहीं जी उनकी परमात्मा की अपनी व्यवस्था है और व नियमों से ही कार्य करता है नियम के नीचे

00:06:48:15 है को आप नियम कह सकते हैं मतलब आप स्पष्ट नहीं बोलेंगे कि हां नियम के नीचे है वो बिल्कुल स्पष्ट है वो नियमों के अंत ही कार्य करता है वोम नियम के चे नियम के चे निम से बाउंड क्या नियमों परमात्मा के मैंने बताया आपको वो आप अगर अन्याय को वसा माने कि अन्याय नहीं कर सकता तो कम ये बातें बात की है कि वो नियम कौन से वाले हैं अभी हम लोग क्लियर कर रहे हैं वो नियमों से बाउंड है या नहीं है नियमों से बंधा हुआ है नियमों से बंधा हुआ यानी कि पहला कंक्लूजन हमारा यह आया कि जो आर्य समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है वह नियमित है नियमित है व है ना और वो भी नियमों से बाउंड है उसकी भी एक सीमा है है ना हा जी उसके व्यवस्था है उन व्यवस्था से बा वो कार्य नहीं करता उसकी भी सीमा है कार्य कर सकने की कार्य

00:08:03:20 करने की उसकी सीमा है ठीक है ना बिल्कुल ठीक अब जब हमने यह मान लिया कि उसकी सीमाएं हैं जिसकी सीमा है जिसकी सामर्थ्य की सीमा है कि वह इन इन कार्यों के बाहर कार्य नहीं करेगा तो उसको हम क्या अनंत कह सकते हैं अनंत सामर्थ क बिल्कुल कह सकते है अनंत सामर्थ्य वान कैसे अनंत का अर्थ क्या हुआ जिसकी प्रत्येक व्यवस्था प्रत्येक गति अनंत तक हो अनाद मैं सिर्फ अनंत का अर्थ पूछ रहा हूं आपसे अनंत का अर्थ क्या है इस श् को मत जोड़ ईश्वर को मत जोड़ अंत ना जिसकी कोई सीमा ना हो इसम एक चीज और ड कर देते अनंत में सामर्थ्य तो अब इसका अर्थ क्या निकलेगा जिसकी सामर्थ्य जो है अनंत सामर्थ्य वाला हो जिसकी सामर्थ्य की भी कोई सीमा ना हो हा अपने काने हमने कहा कि अनंत का अर्थ है जिसका कोई अंत ना हो और अनंत सामर्थ्य का अंतर मतलब है कि जिसकी

00:09:19:13 सामर्थ्य की कोई सीमा ना हो मगर मगर आप कह रहे हैं कि ईश्वर की भी कुछ सीमाएं हैं वो उसके अंदर ही रहता है बाउंड है वो आपने कहा पंक्ति में आपको स्पष्ट कर दिया व जो सीमा है कि परमात्मा कोई गलत कार्य नहीं कर सकता अन्याय नहीं कर सकता असत्य नहीं बोल सकता अजन्मा वो जन्म नहीं ले सकता किसी के गर्भ से और इसके साथ ही व अपना जैसा कोई दूसरा ईश्वर नहीं बना सकता वह अवतार नहीं ले सकता यह आप उसकी सीमाए मान सकते हैं ऐसा वो कभी नहीं कर सीमाए देखिए मैं इस ईश्वर को एक्सेप्ट कर सकता हूं एक चर्चा के उसमें कि मैं आपके ईश्वर को एक्सेप्ट करता हूं मगर जिसकी सीमाएं है उसको हम अनंत कैसे कह सकते हैं जिसकी सामर्थ्य का अंत है जिसकी सामर्थ्य का अंत है उसको अनंत सामर्थ्य वान कैसे कह रहे हैं जी आप जिस रूप में इस विषय को ले रहे हैं आपने जो शुरू में आपने उसकी जो परिधि बांधी और उसमें मैंने जो आपको क किया है उसमें आपको भेद करना पड़ेगा वह एक अयोग्य अ

00:10:34:13 विद्वान बुद्धि शल परमात्मा भी चेतन और आत्मा भी चेतन कहने का अर्थ य है कि परमात्मा की सामर्थ्य का अंत है फिर भी हम उसे अनंत सामर्थ वान कहेंगे यही बात है अ करने में वह सपूर्ण सामर्थ्य शली है उसको किसी भी योग की आवश्यकता नहीं है इसलिए उसको आप प्रशाली वेदों में कहा गया है मैंने अभी आपसे पूछा था कि अनंत का अर्थ क्या है अनंत का अर्थ था जिसका कोई अंत ना हो और अनंत सामर्थ वान का अर्थ आपने बताया था कि जिसकी सामर्थ्य का कोई अंत ना हो इसमें अपने कार्यों को करने की बात आई थी क्या जी अब जो आप परिभाषा दे रहे हैं उसमें अपने कार्य जो कर सकता हो बिना किसी की सहायता से तो यह बात आ रही है क्या अनंत और सामर्थ्य वान का जब हम अर्थ कर रहे हैं उसमें अपने कार्य कर सकता हो यह आपने जोड़ा ना इसमें मैं पूछ रहा हूं जब हमने अनंत का अर्थ लिया कि जिसका अंत ना हो और अनंत सामर्थ्य का अंतर अर्थ हुआ जिसकी सामर्थ्य का अंत ना हो इसमें

00:11:50:00 इस इस शब्द के अर्थ में ये आया क्या कि जिसको अपने कार्य करने में किसी की सहायता ना ले सके वो अनंत है मैं फिर से पूछ रहा हूं आपसे अनंत का अर्थ क्या है नहीं जी आप देखिए द्विवेदी जी जिस शब्द के साथ आप ये अपनी डिबेट को चला रहे हैं शब्द के साथ व्यवस्था के साथ जो आप क्लियर करना चाहते हैं उसमें आप अच्छी तरह अने प्रबलम क्या है प्रॉब्लम यह है कि हम लोगों की एक चर्चा और हो सकती है कौन सी कि भाई वह क्यों सीमित है या वह सर्वव्यापक होते हुए भी अवतार क्यों नहीं हो सकता यह सब हमारी अगली चर्चाएं भी हो सकती है मगर प्रॉब्लम यह है कि जैसे अभी आपने स्पष्ट किया कि हां आर्य समाज का ईश्वर भी नियमित है तो ऐसे ही यहां पर यह स्पष्टता नहीं प्राप्त हो रही है कि जब आपने कहा अनंत का अर्थ है जिसका कोई अंत ना हो अनंत सामर्थ्य का अंत है अर्थ है जिसकी सामर्थ्य का कोई अंत ना हो उसके बाद मैं मान सकता हूं कि यही ईश्वर असली है ईश्वर की यही व्याख्या असली है मगर इसके सामने हम अनंत सामर्थ्य वान क्यों लिख रहे हैं क्योंकि जब हम अनंत शब्द का अर्थ

00:13:05:06 करते हैं और अनंत सामर्थ्य का अर्थ करते तो उसमें यह कहीं नहीं आता है कि जो अपने कार्य बिना किसी की सहायता के कर ले जिस उसमें सिर्फ ये आता है जिसकी सामर्थ्य का अंत ना हो यह आता है तो फिर हम इसमें जब ईश्वर से जोड़ के व्याख्या करने लगते हैं तो इसमें अपने दो चार शब्द जोड़ देते हैं वो क्या कि जो अपने कार्य कर सकता हो बिना किसी जी की सहायता से वो अनंत सामर्थ वान है तो ये बदलाव क्यों हो रहा है मेरा कहने का मतलब है आप इस शब्द को भी जैसे नियमित था उसको छोड़ दीजिए इस शब्द को फिर हम आगे बढ़े इस शब्द को हटा दीजिए भाई हां ठीक है ईश्वर की भी सामर्थ्य का अंत हो सकता है और ऐसा भी ईश्वर हम स्वीकार कर सकते हैं वेदा दि शास्त्र सम्मत के द्वारा अगर वोह प्रतिपादित हो रहा है तो वह बात एक अलग है कि हम करेंगे या नहीं करेंगे उस पर जाया जा सकता है वो अभी से हम ये डिसाइड नहीं कर रहे कि वो ईश्वर गलत है कि सही है हम ये डिसाइड नहीं कर रहे मगर हमें अनंत सामर्थ्य का शब्द जो है छोड़ना होगा अगर हम कह रहे हैं कि उसकी सामर्थ्य का अंत है वह नियमित है वह बाउंड है वो बाधित है तो हमें ये शब्दों को छोड़ना होगा जैसे ही दिव्यांश जी मैं इस अनंत सामर्थ्य को बदलकर शद उपयोग करता हूं कि वह

00:14:20:07 कुछ भी कर सकता है तो इसी के साथ इस विषय में मैं आपको जवाब दूंगा कि क्या वो कुछ भी कर सकते क्या वो मर सकता है क्या वो अपने जैसा दूसरा ईश्वर बना सकता है यह सब बातों का जवाब मैं आपको दूंगा मगर अभी विषय ये चल रहा है अभी विषय मान लीजिए मेरे पास भी मैं कह रहा हूं मेरे पास इनका जवाब नहीं है ठीक है मेरा भी ईश्वर गलत है ठीक अभी ये मान लीजिए फिर भी अगर हम किसी को ईश्वर मान मान रहे हैं इस हिसाब से कि वह जो है अपने काम स्वयं कर सकता है तो उसके साथ हम अनंत सामर्थ्य का वो नहीं जोड़ सकते कहने का मतलब यह है कि अगर मैं गलत हूं तो उससे आपका का सही होना सिद्ध नहीं होता अगर हमें पीने के पीने के लिए दूध नहीं मिल रहा है तो इसका मतलब ये नहीं है हम मदरा पान करने लगे तो मैं गलत हो सकता हूं वो आगे की बात है ठीक है नहीं तो क्या होता है ना मैं अभी यहीं पर जवाब देने लगूंगा आपको इन बातों का क्या ईश्वर मर सकता है क्या ईश्वर बुरे काम कर सकता है इन बातों का जवाब देने लगूंगा उसमें भी तर्क प तर्क तर्क प तर्क तो वही वही बात होगी विषयात होता गया और हमारी जो जो मूल चर्चा थी वो बदलती चली जाएगी इसलिए मैं थोड़ा आगे के लिए रख रहा हू अभी आप ये मान लीजिए मेरे पास भी मेरे पास भी ईश्वर है ही नहीं अभी मैं

00:15:35:09 आपसे पूछ रहा हूं जिसको जिसको आप ईश्वर जिसको आप ईश्वर कह रहे हैं जब आपने खुद बताया कि अनंत का मतलब जिसका कोई अंत ना हो अनंत सामर्थ्य का मतलब जिसकी सामर्थ्य का अंत ना हो उसके बाद जब ईश्वर की डिफाइन करने की बात आती है कि हम ईश्वर को अनंत सामर्थ्य वान क्यों कह रहे तो उसमें हम दो तीन शब्द अलग से लगाते हैं कि जो अपने कार्यों को करने के लिए की सहायता ना लेता हो वो अनंत सामर्थ्य वान है तो यहां तो आपने अपनी ही डेफिनेशन को बदल दिया कहने का मतलब यह है इस शब्द को छोड़कर हम लोग आगे बढ़ सकते हैं पहले हमें इस शब्द को छोड़ना पड़ेगा कि वो अनंत सामर्थ वान हैरा मैंने जो वि दिया अनंत सामर्थ्य वाला और मैंने उसकी साथ में एक पॉजिटिव बंडिंग भी बना दी इस दृष्टिकोण के साथ इसी डेफिनेशन को लेकर आपका क्या विचार है क्योंकि जहां अभ मैंने जितनी भी आपकी वीडियो देखी वहां इस विषय पर आकर विषय बार-बार उलझ रहा है तो क्या इसको आप अपने लेवल पर एक्सप्लेन कर सकते ताकि मैं वो विषय जो नहीं जान पा रहा मैं समझ जी जी जी मैं बता देता हूं देखिए दो डायमेंशन है अब आपने मुझे समझाने को कहा थोड़ा सा मुझे टाइम दीजिएगा मैं अच्छे से समझाऊ दो डायमेंशन

00:16:50:15 एक है व्यवहार और एक है परमार्थ ठीक है परमार्थ जो है वो प्राप्त व्य है वो मनुष्य के व्यवहार का सब्जेक्ट नहीं है और जो व्यवहार है व्यवहार वाला डायमेंशन है वो मनुष्य के व्यवहार का सब्जेक्ट है अब इसको ऐसे समझ लेते हैं जैसे कि जब कोई व्यक्ति मुक्त हुआ आर्य समाज के अनुसार तो क्या अंतरिक्ष में कोई गेट खुलता है दूसरी दुनिया में जाने के लिए नहीं खुलता आपसे पूछ रहा हूं नहीं खुलता यानी कि उसकी डायमेंशन बदल जाती है और जब वोह दूसरी डायमेंशन में जाता है तो उसके लिए यह वाली जो डायमेंशन थी वो क्या हुई ये ह व्यर्थ उसके लिए य वाली जो डायमेंशन थी जिसमें अब तक वो जिसको सच मान रहा था वो सब उसके लिए बालक का बकवास समान हो गया है ना तो ऐसे ही ऐसे ही ऐसे ही यह जो डायमेंशन है आप कह रहे हो कि भगवान क्या मर सकता है क्या अपना अपने जैसा दूसरा ईश्वर परमार्थ में नहीं कर सकता यह बात सत्य है मगर परमार्थ के आधार पर उस ईश्वर को नकारा नहीं जा सकता क्यों क्योंकि उस ईश्वर की अभिव्यक्ति हमारे सामने तब हो रही है जब हमने इस दुनिया में किसी को ईश्वर के रूप में स्वीकार

00:18:05:15 किया जैसे कि कोई व्यक्ति यह नहीं कह सकता मैं किसी के आवाज देने से उठ गया कोई व्यक्ति ये नहीं कह सकता क्यों क्योंकि

00:18:13:25 अगर वह सुन सकता था तो उसका सोना सिद्ध नहीं होता और अगर वह सो रहा है तो

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00:18:18:24 उसका सुनना सिद्ध नहीं होता तो सुनने के आधार पर उठना सिद्ध नहीं होता है इसी प्रकार से परमार्थ में यदि ईश्वर एक ही है वो व्यवहार का विषय है ही नहीं वहां पर क्रिया का उपयोग हो ही नहीं सकता तो उसके आधार पर तो उसे नहीं निकाला जा सकता मगर य एक मिनट यदि वो यदि वो व्यवहार में भी बाधित होने लगा जहां जो क्रिया का विषय है जो मनुष्य के व्यवहार का विषय वहां पर भी यदि वो बाधित होने लगा अपने जैसा दूसरा ईश्वर नहीं बना क्यों नहीं बना सकता राम बने कृष्ण बने उसी समय पर उष राम भी थे अगर इस धारणा को हम माने तो एक ही समय में ईश्वर अपने जैसे ईश्वर बना सकता है लीला करके मार भी सता है अपनी दे का नाश करके भाई मरना हमारे लिए अगर दे का नाश है तो दे का नाश करके भी दिखा सकता है तो ये डायमेंशन का अंतर है और एक चीज और कि यदि हम यह मानते हैं कि यह पूरी दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है यह सब कुछ वास्तविकता वैसी रियलिटी नहीं है क्योंकि आपने य माना कि हम दूसरी डायमेंशन में जाएंगे तो यह वैसी रियलिटी नहीं है तो जब यह रियलिटी नहीं है और इसमें जो भी कुछ हमें दिखाई दे रहा है तो फिर यहां से भी सिद्ध होता है कि जब बाकी सब कुछ हो रहा है जो कि रियलिटी नहीं है तो भगवान अवतार भी ले सकता है जो कि रियलिटी नहीं है मगर वो

00:19:33:26 हमारे लिए रियलिटी है हमारे लिए मनुष्य दृष्टि से वो रियलिटी है कहां से वो रियलिटी नहीं है जहां से भगवान बैठे हैं जहां से ब्रह्म है दूसरे डायमेंशन में जाने पर ही ये रियलिटी नहीं है उस पर्सपेक्टिव से रियलिटी नहीं है अब इसको मैं और बता देता हूं जैसे कि पथवी इसीलिए मैंने कहा था इसमें टाइम लगेगा इसीलिए मैंने कहा था इसमें टाइम लगेगा जैसे कि मैंने कहा कि जो पृथ्वी है वोह गोल है साइंस के अकॉर्डिंग पृथ्वी गोल है मगर वह कहां से गोल है वो गोल है जब हम पृथ्वी से मुक्त हो जाते हैं और उस मुक्त की दृष्टि से जब पृथ्वी को देखते तो गोल है व्यवहार में क्या है पृथ्वी चपटी है इसी प्रकार से व्यवहार में ईश्वर जो है किसी भी प्रकार से बाधित नहीं है तो उस ईश्वर को ईश्वर जब हम मान लेते हैं तभी यह सिद्ध होता है कि परमार्थ में भी उसका कोई एक्जिस्टेंस है वहां पर वो अद्वैत है वहां पर वो सब कुछ कुछ है ही नहीं सिर्फ वो प्राप्त किया जा सकता है तो अब क्या होता है कि हम यदि ये कहे नहीं नहीं तुम्हारा ईश्वर जो है परमार्थ में बाधित है उसको हम नहीं मान सकते कि वो ईश्वर है ठीक है तो जैसे ही हम ये कहेंगे कि वो ईश्वर को हम नहीं मानते तो हम किसी से ये नहीं बता सकते कि परमार्थ में वो बाधित था क्यों क्योंकि

00:20:49:01 वो हमसे पूछेगा कि परमार्थ क्या है वो तो हमें ईश्वर से ही पता चला परमार्थ हमें किससे पता चला ईश्वर से पता चला तो परमार्थ के आधार पर जो ईश्वर की वो निश्चिता दिखाई दे रही है उसके आधार पर उसे नकारा नहीं जा सकता मगर यदि वो व्यवहार में भी बाधित होने लगा तो फिर ईश्वर को एक्सेप्ट ही क्यों किया जाए तो यह व्यवहार और परमार्थ के अंतर में ही बहुत बड़ा एक डिफरेंस आ गया डिफरेंसेस ऑफ ओपिनियन आ गया कि यह बात सब तक पहुंच नहीं पाती है तो ईश्वर जो है रावण के रूप में पाप भी करता है ईश्वर प्रभु श्री राम के रूप में पुण्य भी करता है ईश्वर अपनी देह का नाश भी करके दिखा देता है यह है अनंत अवाद ईश्वर

00:21:31:02 तो यह वो ईश्वर है जो कुछ भी कर सकता है और वो जो मर्यादा है उस पर नहीं ती जी जी जी शिवान जी अब मैं बोल सकता हूं जी जी बो जी शिवान जी मुख्य इस चर्चा में हमारे दोनों के विषय में भेद आया उसका मूल आधार अद्वैत और त्रेत वाद तीन मूल व्यवस्थाएं समाज में चलती है जिसम चलिए बोलिए शंकराचार्य जी ने दिया था जिसमें ब्रह्म और आत्मा का योग बताते एक ही है और दत में अलग अलग लेकिन ऋषि दयानंद ने एक विशेष हटकर एक थ्योरी दी जिसम थरी ये थोरी रामर जी ने भी द है अब धन मेरा विषय आप सुनिए आप तवा ईश्वर अलग सत्ता है उसकी व्यवस्थाएं हैं उसके बारे में आर्य समाज का दूसरा ही नियम प्रतिपादित करता है कि ईश्वर जो है सच्चिदानंद स्वरूप निराकार सर्वशक्तिमान सर्व

00:22:40:01 अंतरकासना करने योग्य है फिर दूसरा तवादिया हम और आप देख रहे हैं और इसके बारे में कुछ कुछ व्यवस्थाएं जैसे आत्मा जो होती है वह अल्प कुछ नहीं जानती वो एक देसी होती एक स्थान पर रहती है और अपनी इच्छा से शरीर नहीं बदल सकती व ईश्वर के अधीन कार्य करती है तो इसकी मोटी मोटी य हो गई और तीसरा प्रकृति जो जड़ अवस्था में है जिसके माध्यम से ये सारी सृष्टि ईश्वर के सहाय से बनती है अब इसके बाद आपने विषय दिया कि रावण ईश्वर है राम भी ईश्वर है श्री कृष्ण भी ईश्वर है लेकिन जब हम पूरी रामायण का अध्ययन करते हैं तो वहां पर जो दृष्टि गोचर होता है विशेष तौर पर हमें इनके अंदर तो वहां पर श्री रामचंद्र जी को कहीं भी परमात्मा के रूप में वाल्मीकी रामायण में प्रतिपादित नहीं किया गया है और यही कारण है कि उनके जितने भी गुण कर्म स्वभाव है वहां पर उनकी पत्नी माता सीता का जब अपहरण

00:23:55:09 हो जाता है तो वो उनको खोजना ही पड़ता है वो ईश्वर की बाती सब कुछ नहीं जानते कि माता सीता कहां है लेकिन ईश्वर जानता है वो सर्वव्यापक है और उसके बाद जब हम देखते हैं कि रावण रावण भी अविद्या युक्त थे क्योंकि अविद्या जो गुण है वो आत्मा का है आत्मा के अंदर विद्या भी और अविद्या आती रहती है लेकिन ईश्वर के अंदर सच्चा ज्ञान है उसके अंदर कोई दिक्कत नहीं आती वो वेदों के अनुसार वो पूर्ण जनी है और इसके बाद आपने एक विषय दिया अवतार का अगर हम इस रूप में ईश्वर का अवतार मान ले तो पहले तो हमें ब्रह्मांड की य अक्सर हमारा डिबेट का विषय रहता है इसको मैं स्पेशली थोड़ा पंच करूंगा क्या रहता है जैसे ही पुराणों में विशेषक अवतार का विषय आया है शैव में थोड़ आपको इंटरप्ट करना चाहूंगा मैं इंटरप्ट करना चाहूंगा इसीलिए मैं कहता हूं कि हमारा विषयात ना हो हमारी चर्चा ये चल रही थी इसीलिए मैं अपना पक्ष भी नहीं बता रहा था इसीलिए मैं नहीं बता रहा था क्योंकि जब मैं अपना ये बताऊंगा कि ईश्वर क्यों सब कुछ कर सकता है व्यवहार परमार्थ तो उसमें कुछ अलग ही व्याख्या खुल जाएगी अभी बात सबसे पहली बात तो क्वेश्चन यह है कि अगर अनंत सामर्थ्य वान

00:25:10:16 का अर्थ यह है कि जिसकी सामर्थ्य का कोई अंत ना हो तो आपको यह बताना है कि क्या आर्य समाज का ईश्वर इस अर्थ को सिद्ध करता है अब आपने इसके विपक्ष में यह मुझसे अगर पूछा कि क्या आपका ईश्वर करता है मेरा ईश्वर मान मैं अभी अपनी व्याख्या को बिल्कुल गायब कर दे रहा हूं इस पूरी चर्चा से इसीलिए मैंने मैं नहीं बता रहा क्योंकि उससे हमारे विषय अंतर हो जाए तो थोड़ हमगा ब मिनट उस देखिए मुझे पूरा पूरा कर लेने दीजिए मेरा वाक्य तो जी जी मैं अपनी उस व्याख्या को हटाए दे रहा हूं मेरे पास कोई ईश्वर है ही नहीं मैं बिल्कुल ईश्वर मेरे पास ईश्वर की कोई व्याख्या नहीं है अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या आर्य समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो अनंत सामर्थ्य वान है मैं आप फिर से पूछ रहा हूं हां तो अनंत का अर्थ आपने क्या बताया इस वर्ष पर शिवान जी हमारी चर्चा हो चुकी है नहीं नहीं आपने चर्चा में यह कहा ना कि मैं थोड़ी देर के लिए आपसे पूछना चाहता हूं इसमें आपका क्या पक्ष है तो मैंने आपका मान रखने के लिए आपकी बात रखने के लिए अपना पक्ष बताया मगर जब पक्ष बताया तो उस पर क्या हुआ नई चर्चा

00:26:25:18 पुराण आ गया प्रमाण आ गया राम आ गया राम को कहीं भी परमात्मा नहीं कहा गया है प्रमाण पर आ गया प्रमाण नहीं है इस बात का तो यह हो गया उसमें नया पक्ष खुल गया आपको मुझे उत्तर यह देना है अनंत सामर्थ्य को सिद्ध करिए आर्य समाज के ईश्वर पर पहले तो शि मैं आपसे रिक्वेस्ट करूंगा कि वो आर्य समाज का ईश्वर बिल्कुल भी नहीं है ऋषि दयान समाज के द्वारा चलिए मैं अपने शब्द सही कर लेता हूं देखिए वही बात है ना छोटी छोटी सी बातों पर ही हम लोग अटके रहेंगे मूल विषय से टते रहेंगे मैं अपनी जो लाइन है वो सही करता हूं मैं सही करता हूं कि आर्य समाज के द्वारा जो ईश्वर की व्याख्या की गई है क्या उसके अनुसार जो ईश्वर है वह अनंत सामर्थ वान सिद्ध हो रहा है वह आप बताइए जी बिल्कुल वो इसकी हमारी व्याख्या जो है वेदों के अनुसार ऋषि द्याने सत्या प्रकाश में जो लिखा कितना लंबा बोलते है ना कितना लंबा बोलते प्रीफिक्स कितना लंबा बोलना पड़ता है जब व्यक्ति का पक्ष कमजोर मैं आपसे लड़ना नहीं चाता हूं हम लोग खामा खा इसको एक वो एक प्रवचन वाला क्यों बना देते हैं आपसे मैंने पूछा है अनंत का अर्थ क्या है सामर्थ्य के अंत क्या है ऋषि दयानंद जी ने जो वेदों के अनुसार जो व्याख्या यह सब

00:27:40:20 क्यों बोलना पड़ रहा है अपनी बात को वजन देने के लिए बोलिए अनंत सामर्थ्य का अर्थ बताइए अनंत एक अलग शब्द है जिसका उसके उससे परिमाण से संबंध है अनंत क्रि वाला भी हो सकता है और जिसकी अ साहब मैं पूछ रहा हूं अनंत का अर्थ आप क्या मानते हैं अनंत केवल अनंत क्या है केवल अनंत जिसका कोई अंत ना हो अनंत सामर्थ्य का मतलब क्या है अनंत सामर्थ्य का अर्थ है जिसका कोई सामर्थ्य का अंत ना हो हां तो क्या अनंत सामर्थ्य को आर्य समाज के ईश्वर से जोड़ा जा सकता है अब ये डेफिनेशन बढ़ाएगा नहीं कम मत करिएगा अब अब आपने डेफिनेशन द जिसके सामर्थ्य का कोई अंत ना हो ये डेफिनेशन अब इस डेफिनेशन के साथ बोलिए जो परमात्मा है उसका सामर्थ्य अनंत है अनंत है और अनंत सामर्थ्य है वह अपने सभी काम अपने अपने सामर्थ्य से पूरे कर सकता है अपने सभी काम सभी काम नहीं अपने सभी काम जी जी उसके जो कार्य है वो स्वयं कर

00:28:55:24 सकता है उसके तो ये अन सामर्थ की डेफिनेशन में य है क्या कि उसके जो कार्य है वह कर सकता है तो अनंत सामर्थ्य वान है यही प्रॉब्लम है बस यही पर प्रॉब्लम है यह टैग हम क्यों नहीं छोड़ सकते कि वह सर्वशक्तिमान है इस टग को छोड़ सकते हैं मगर नहीं छोड़ रहे क्यों पकड़ के रखना है व भगवान जाने अनंत सामर्थ्य वान को हम क्यों नहीं छोड़ रहे इस टैग को अगर उसकी वह नियमित है वह नियमों से बाउंड है तो इस टैग को हमने क्यों पकड़ा है अनंत सामर्थ्य को छट सकता शवास जी य ही आप इसका अनंत को हटाओ ग ना जैसे ही मैं कह देता हूं कि वह अनंत नहीं है सामर्थ्य शली नहीं है तो उसका दूसरा ट हट जाएगा वो सर्वशक्तिमान भी नहीं है श् नहीं होगा वो ईश्व सिद्ध नहीं होगा उसके ईश्वर को बचाने के लिए हमें जबरदस्ती इसका अर्थ जोड़ना पड़ता है मजबूरी और च सर्वव्यापक भी नहीं रहेगा वो वो वो अगला विषय वो अगला विषय सर्वव्यापक रहे नहीं वो अलग विषय मगर हम लोग अनंत सामर्थ्य को इसलिए नहीं हटा रहे हैं आर्य समाज द्वारा प्रतिपादित ईश्वर से जिससे कि उसका ईश्वर बचा रहे जैसे हमने

00:30:11:01 कहा सर्वशक्तिमान ठीक है सर्व में है शिवा जैसे हमने कहा जैसे हमने कहा सर्व शक्तिमान सर्व का मतलब हो गया सब इसमें य नहीं अपने सब इसमें य नहीं आया सर्वशक्तिमान सर्वशक्तिमान में आया सब और हम उसका अर्थ क्या करते हैं अपने सब कार्य करने की जिसकी शक्ति हो वह है समझ रहे मेरी जो मैं कोई लड़ाई या कोई द्वेष भावना नहीं है जो वैचारिक मतभेद है वो इस शब्द को लेकर है कि आप ईश्वर के ईश्वर को पोषित करने के लिए वह जो अनंत जिसका जो टैग नहीं लग सकता है मगर उसको लगाते हैं ईश्वर के साथ शमांस जी इस रूप में जो आप इस विषय को घुमा रहे है ना तो इसको मैं स्पष्ट कर देता हूं यह डेफिनेशन हमारी नहीं है यह वेदा अनुकूल डेफिनेशन है और चलिए ये वेद की बात फिर आ गई प्रमाण प जैसे अभी आपने रामायण में प्रमाण की बात कही थी अब प्रमाण की बात फिर आ गई कुल मिला के ये है डेफिनेशन देखिए डेफिनेशन ये वाली आप डेफिनेशन बताइए मुझे कहां पर है कि जो अपने कार्य स्वयं कर सके उसे सर्वशक्तिमान कहेंगे बताइए कहां प वेद में है य मैं

00:31:26:01 आपको नोट कर लेता हूं मैं इसको खोज के बताऊंगा क्योंकि मेरा वेद के अनुकूल ब्राउंड चलिए चलिए ठीक है यह बहुत अच्छा आपने मतलब बहुत सच्चाई के साथ य बात कही अच्छा लगा अब हम आगे आ जाते हैं कि हम लोग भले ही वह नियमों से बाउंड है भले ही वह सीमाओं से सीमित है भले ही उसकी सामर्थ्य का अंत है मगर हम उसे ईश्वर मान सके इसलिए हम यह कहते हैं कि अनंत सामर्थ मान है अब हम आगे चलते हैं किने

00:31:58:04 बना बना दी डेफिनेशन आप दूसरी डेफिनेशन बना यही तो यही दिक्कत है यही दिक्कत है प्रॉब्लम यही है मैं वही बोल रहा हूं जो आप बोल रहे हैं बस मैं क्लियर बोल रहा हूं और आप थोड़ा उसको उसको थोड़ा सा पेंटिंग पेंटिंग करके बोल रहे हैं मैं वही बोल रहा हूं स्पष्ट जो आप बोल रहे हैं आप बोल दीजिए जो अनंत निर्विकार और निराकार स शक्तिमान ये एक साथ जुड़े हुए शब्द हैं और परमात्मा जिसका इतना विशाल क्षेत्र है केवल हम पृथ्वी को लेकर इसकी उसकी गणना नहीं कर सकते ऐसी पृथ्वी मिल गैलेक्सी पृथ्वी जिसमें हमारी मौजूद है ऐसी अनेक गलेसी ब्रह्मांड को जो संचालक है ये कह रहा हूं मैं तो आपसे यहां तक कहने को मैं तो आपसे यहां तक कहने को तैयार हूं कि यदि वेद में यह लिखा है कि वह जो है सीमित है फिर वेद में उसके लिए लिखा है तो फिर हम क्यों माने वेद को यह भी तो बात आएगी मैं आपसे एक जिज्ञासु बनकर प्रश्न कर रहा हूं हिंदू बन के नहीं कर रहा हूं आप मुझे बताइए कि जिसकी सामर्थ्य का अंत है उसे हम अनंत सामर्थ्य वान

00:33:13:04 क्यों कह रहे हैं अनंत ही है शिवान जी इसका मूल कारण क्या है जहां पर आप उ आपको मैं आपको क्लियर कर दे उलझन हमारी पैदा हो रही है आप जिस ईश्वर को मानते हैं वो अद्वैत के अनुसार है वो आत्मा भी है और वो ब्रह्म भी है वो दोनों एक सत्ता मानते हैं आप उनकी और जैसे न मैं क्या मानता हूं वो मत बताइए मैं नहीं मानता हूं मैं जिज्ञासु हूं मैं सिर्फ अभी आपसे प्रश्न कर रहा हूं मैं नहीं मानता हूं कुछ भी अभी आप मुझे बस ये बताइए अनंत शब्द का अर्थ जब जिसका कोई अंत नहीं है सामर्थ्य शब्द का सामर्थ्य को जोड़ देने पर आता है कि जिसकी सामर्थ्य का कोई अंत नहीं है तो जब हम व्याख्या कर रहे हैं उसकी कि ईश्वर अनंत सामर्थ्य वान है कि नहीं वहां जोड़ रहे हैं क्योंकि ईश्वर अपने सब काम कर सकता है सब कार्यों को करने की उसमें सामर्थ्य है इसलिए वो अनंत सामर्थ्य वान है तो ये दो चार वर्ड ऐड क्यों हो रहे हैं उसके साथ चलो हम इन वर्ड को हटा देते हैं केवल इतना ही रखते हैं कि परमात्मा जो है अनंत है और सामर्थ्य वान अनंत है सामर्थ्य वान नहीं ये मान सकते हैं कि भाई वो क्योंकि सारी सृष्टि में है तो अनंत है अनंत सामर्थ्य वान नहीं है ये ये कह सकते हैं अनंत सामर्थ्य वान है वो अनंत

00:34:28:04 सामर्थ करट कौन सा वर्ड हटाया अभी आपने नहीं अभी आपने चलो वर्ड हटा देते हैं अभी आपने कहाना एक वर्ड हटा देते हैं वो कौन सा वड हटाया करेक्ट कर देता हूं दोबारा से इसको अ सामर्थ अनंत सामर्थ शली हमने एक्से कर इसको अब इसको हमारे अब देखिए अभी क्या हुआ अभी आपने कहा चलिए एक वर्ड को हटा देते हैं अनंत है व अनंत सामर्थ वो सामर्थ नहीं है अनंत सामर्थ नहीं है अनंत है आपने बोला खल वो रिकॉर्डेड है वो दिख जाएगा रड कोई बात नहीं मैं दोबारा बता देता कोई कमेंट करके बताएगा क्या इन्होंने एक शब्द छोड़ा था क्या एक कोई कमेंट करके बताएगा इन्होंने एक शब्द छोड़ा है अभी अभी अभी छोड़ा था इसको फिर पकड़ लिया इन्होंने सामर्थ को पहले छोड़ा शिवान जी मैं यही बैठा हूं मैं कहीं नहीं गया हूं मैं दोबारा करेक्ट कर देता हूं इसका मतलब से गलती से हो गयाली है पर अरे भाई तो जब वो अनंत सामर्थ्य शली है तो आप ही तो कह रहे हो कि वो कुछ नियमों से बाउंड है तो फिर वह अनंत कैसे हुआ या तो बाउंड नहीं है या फिर अनंत नहीं है नहीं

00:35:43:20 बाउंड तो उस रूप में वो परमात्मा विद्वान है तो अविद्या वाले गुणों से तो बाउंड हो गया आप कहेगे क्या वो अविद्या चोरी कर सकता परमात्मा नहीं कर सकता इस रूप में आप इसको बाउंड मान सकते हैं या परमात्मा बुराई नहीं कर सकता इसलिए वो बाउंड है तो ये परमात्मा बुरा करता हाय अंत आया उसकी सामर्थ का उसके गुणों के अनुसार आप इसको अंत नहीं कह

00:36:16:14 सकते आपकी ऑडियंस में कोई जुड़ा हो तो डिस बोल रही है आशुतोष द्वेदी जी बोल रहे हैं मैं इसको बता देता हूं देखिए अनंत है सामर्थ वान नहीं है ये आपने बोला ठीक है आशुतोष बताया है कि अनंत है सामर्थ्य नहीं ऐसा बोला है दो मतलब आपकी जबान फसल गई है मान ले आपकी जुबान फिसल गई ये मान ले मान सकते हैं लेकिन मैं करेक्ट बारबार यही शुरू से यही विषय देने भाईब अगर ये बोला होगा तो तो आप क्या करेंगे अगर आपने बोला होगा यह वर्ड आपके मैं आपको वीडियो दिखा दूंगा तो आप क्या करेंगे जी क्या ये बहस का विषय है सामने जब व्यक्ति झूठ बात बोलने लगता है तो फिर तो बात बदल जाएगी ना हमारे बीच में कितनी स्वाध पूर्ण बात हो रही थी मगर आप अपनी कही हुई बात को भी छिपा रहे हैं आप बोल सकते हैं हा मेरे मुह से निकल गया आपर आप भी नहीं बो आप हमारे बड़े भाई है मैं फिर कह रहा हूं परमात्मा अनंत सामर्थ्य वाला समझ परमात्मा आपके अंगली अनत सामर्थ वान है मैं अभी समझ गया मैं पूछ रहा हूं आपने ये लाइन

00:37:31:15 जो लिखी है अनंत आपने बोली कि नहीं बोली शिवांस जी मैं बार-बार एक बात कह रहा हूं उसी बात पर मैं अटल हूं और मैं आपको कह रहा हूं अब इसे बा नहीं ये लाइ मैं य मैं ये मान सकता हूं मेरे भाई मैं अपने आप को क्या बहरा मान लू आप एक बात बताओ मैं अपने आप को बहरा मान लू क्या मान लूने मेरे देखिए जोही ना जब बात अटकती है तो विषयात होता है अब मैं आपको विषय प कैसे लाऊ बारबार आपने अभी एक लाइन बोली अनंत है सामर्थ वान नहीं है यह आपने लाइन बोली आप कह सकते हैं कि हां वह मुंह से निकल गया मगर इस बारे में जवाब ना दे कर के बार-बार मैं अ भी बार-बार स्पष्ट मुझे स्पष्ट है कि आप अनंत सामर्थ्य वान बोल रहे मगर आपसे एक बार यह निकला है कि ईश्वर अनंत है सामर्थ्य वान नहीं है आपने बोला ऐसा शिवान जी ऐसा अगर बोला है मेरे सेय गलती हुई है मैं इसको ठीक कर रहा हूं ये है सच्चाई ये सच्चाई है ऐसे हम लोग आगे चल सकते हैं और एक पॉइंट इसम साथ में जोड़ सकता हूं इस दिशा में परमात्मा रावण की तरह अत्याचारी नहीं बन सकता अगर आप इसको अनंत

00:38:46:27 ऐड करके काटेंगे तो उस रूप में ना काटिए बराई परमात्मा सर्वव्यापक जी जी बुराई सर्वव्यापक और आवश्यकता ठीक है तो अब हमारे पास अगले तीन पॉइंट है यह तो हमने देख लिया कि हमारे नजर में हम जो जानते हैं आपके बारे में कि आपका जो ईश्वर है आपके अनुसार जो ईश्वर है वह अनंत सामर्थ वान नहीं है मेरी जानकारी में मेरी जानकारी मैं आपकी लाइन नहीं बोल रहा हूं हमारी जानकारी में आपके अनुसार जो ईश्वर है वह अनंत सामर्थ वान नहीं है वो सर्वशक्तिमान नहीं है फिर भी आप लोग नहीं छोड़ते हैं अब हम आगे बढ़ रहे हैं आपका यह कहना है नहीं नहीं उसको नियमों से बाउंड तो है वो बुराई तो नहीं कर सकता वो अवतार तो नहीं ले सकता उसकी सामर्थ्य का अंत है मगर है वो अनंत सामर्थ्य वान यह हमारी जानकारी में आपकी अभी तक की व्याख्या है ठीक है आपकी व्याख्या य है नहीं आपकी व्याख्या क्या है वो तो आप बता ही चुके हैं बकुल सही कहा है परमात्मा अनंत सामर्थ्य शली है और आपने जिस अंग चलते आगे चलते अब बात आती है एक बात बहुत ब सुनने को मिली कि ईश्वर बुराई नहीं कर

00:40:01:27 सकता बताए क्या यह सही है आर समाज का ईश्वर बुराई नहीं कर सकता बुरे कर्म अविद्या युक्त कर्म उस परमात्मा के अंतर्गत नहीं घट सकते जिस तरह आप कह रहे रावण भी ईश्वर है इस रूप में रावण ईश्वर नहीं हो सकता परमात्मा के बुरे कर्म मैं आपसे एक बात पूछ रहा हूं क्या ईश्वर बुराई कर सकता है या नहीं नहीं नहीं अच्छा तो संसार में जो बुराई करने वाले हैं बुराई को बनाना बुराई है कि नहीं अविद्या युक्त जो कार्य होते हैं बुरे कामों के अंतर्गत ग से सिंपल पूछ रहा हूं बुराई को बनाना बुराई मानते हैं कि नहीं जी बुराई को मानते हैं अभी बुराई को बनाना बुराई को बनाना बुराई है अविद्या कम मैं दोबारा पूछ लेता हूं बुराई को बनाना बुराई है कि नहीं दोबारा रिपीट करना बुराई को बनाना बुराई का निर्माण करना बुराई है कि नहीं बुराई शब्द से आपका क्या व्याख्या करेंगे बुराई

00:41:18:01 श जैसे आपने रावण को जिन जिन कार्यों को करने के लिए दोषी बनाया रावण के जैसा व कार्य नहीं कर सकता है तो रावण को बना ने वाला यह जानते हुए कि रावण क्या करेगा रावण को बनाने वाला बुराई कर रहा है कि नहीं जी जो बुरे काम है जो बुरे काम है वे बुराई के अंतर्गत आते हैं और इसमें जो जीवात्मा है अच्छे और बुरे कर्म कर पूर्ण रूप से स्वतंत्र है तो जीवामा क्या मतलब मैंने पूछा क्या है हरि हरि प्रण हरि प्रणव जी मैंने आपसे पूछा क्या है आप मुझे क्या बता रहे हैं मैंने आपसे पूछा कि रावण बुराई करेगा अपनी जो उसकी जो चचेरी बहू है उसके साथ दुराचार करेगा यह जानते हुए भी उसको बनाने वाला रावण को क्या वह बुराई कर रहा है या नहीं बुराई को बनाना बुराई है या नहीं इस रूप में जो आप बोल रहे हैं भविष्य में प्रत्येक जीव उसी का मैं उत्तर दे रहा हूं प्रत्येक अपने कर्म करने में समत है छोटी सी बात छोटी सी बात जो व्याख्यान है वो पहले

00:42:33:01 आप एक पंक्ति स्पष्ट कर द यह आपका मानना है फिर उसके सं संबंध में उसके समर्थन में आप अपना व्याख्यान पहले वो पंक्ति स्पष्ट कर दीजिए बुराई को बनाना बुराई है या नहीं बुराई को बनाना बुराई है हां अब अब आप आगे चलिए अब अब दिक्कत ये देखिए अब देखिए आपका व्याख्यान तो मैं सुन लूंगा उसमें कोई दिक्कत नहीं है जब आपने यही पर यह कह दिया कि बुराई को बनाना बुराई है तो हमें तो कोई आपत्ति है नहीं आपकी इस पंक्ति से जो आपको इसके समर्थन में कोई व्याख्यान देना पड़े ठीक है हमें कोई आपत्ति बिल्कुल सही बात है बुराई को बनाना भी बुराई है तो अगला प्रश्न यह आता है कि रावण आदि को बना कौन रहा है प्रत्येक जीव को परमात्मा बना रहा है प्रत्येक जीव को तो फिर वो भी बुराई कर रहा उसका बुराई करना सिद्ध हो गया आपकी पंक्ति से नहीं जी इससे सिद्ध नहीं होता जी क्योंकि प्रत्येक जीव मैंने जीव का आपको बताया था कर्म करने में स्वतंत्र है तो रावण और आजकल जितने भी रेप हो र ये रेप करने में स्वतंत्र है लेकिन इनका फल भोगने में परतंत्र है प्रथम कार्य राज व्यवस्था का नियंत्र करने में स्वतंत्र है मैं समझ गया रावण यह बुरा कर्म

00:43:48:14 करेगा बांग्लादेश में किसी बच्ची के साथ दुराचार होगा यह ईश्वर को पता है कि नहीं पहले से बनाने से पहले परमात्मा को इस विषय की जानकारी अनंत सामर्थ वाला है तो जानकारी है जैसे जैसे मनुष्य के फिर भी बना रहा है फिर भी बना रहा है सर जानकारी यानी यानी की उसको मालूम है ये आगे जाकर के क्या करेगा फिर भी बना रहा है ना तो यहां पर फील होने तो यहां पर वो फ्रीविल वाली बात तो रह ही नहीं गई उसको पता ना होता कि वो क्या करेगा तब तो बात थी उसको तो पता है बुराई करेगा फिर भी बना रहा है तो यह क्या हु एक बार द्विवेदी जी यह विषय क्लियर कीजिए हमारा इस विषय की डि ये जो डिबेट में विषय चल रहा है इससे हमारे व्यवस्था में हमारे विषय निर्धारित हुए थे उनसे क्या लेना देना क्योंकि उससे लेना देना है आपने यह तर्क दिया कि ईश्वर बुराई नहीं कर सकता तो मैं आपके ईश्वर के द्वारा भी बुराई होना सिद्ध करके दिखा रहा हूं आर स दरा आ समाज ने सुनि आर समाज ने जिस रूप में ईश्वर को स्वीकार किया

00:45:03:16 उस रूप में भी ईश्वर के द्वारा बुराई होना सिद्ध करके दिखा रहा हूं या तो आपको यह मानना पड़ेगा कि व भविष्य नहीं जानता देता है दूसरी बात अब मैं आपको बता रहा हूं इस बारे में सत्यार्थ प्रकाश में क्या तर्क दिया गया है वो मैं आपको बता रहा हूं यदि सत्यार्थ प्रकाश में तर्क यह दिया था जिससे मैं संतुष्ट नहीं हो सका कि यदि कहीं से कोई खनिज नि निकाल रहा है और खनिज यानी लोहा लोहा निकाल लिया ठीक है लोहा निकाल कर के उसने आगे मार्केट में बेच दिया उस लोहे का एक हथियार बनाया गया ठीक है तलवार बनाई हा क्या कह र तलवार बनाई गई एक मिनट बनाने वा अरे मैं बता रहा हूं मुझे बताने दीजिए उस लोहे का एक लोहे की एक तलवार बनाई गई तलवार बनाने के बाद उस तलवार से किसी और ने थर्ड पर्सन ने हत्या कर दी बुराई कर दी तो यहां पर जो व्यक्ति जमीन से लोहा निकाल कर के बेच

00:46:18:20 रहा है मार्केट में वो उस हत्या का दोषी नहीं हुआ ठीक है नहीं है ये सत्या प्रकाश में तर्क दिया गया है अब इस तर्क से मैं संतुष्ट इसलिए नहीं हुआ कि वो जो लोहार है वो यह नहीं जानता कि वो किसको बेच रहा है वो उससे क्या बनाएगा और वो जो बेच जो बनाने वाला है वो ये नहीं जानता कि इससे रक्षा होगी या इससे दमन होगा मगर जो ईश्वर है वो लोहार के जैसा नहीं है उसको मालूम है कि तलवार ये लोहा कहां जाएगा उससे क्या होगा उससे तलवार बनेगी कि नहीं बनेगी या उससे सब्जी काटने का चाकू बनेगा और उसके भी आगे वो ये जानता है कि उससे कौन क्या लेकर के क्या-क्या कार्य करेगा तो यहां पर लोहार को मुक्त किया जा सकता है इस दोष से कि उसने हत्या की मगर यदि इसको हम बुराई मानते हैं ईश्वर के परिपेक्ष से भी अगर हम इसको बुराई में लेते हैं तो यह बुराई भी ईश्वर से जुड़ जाएगी क्योंकि ईश्वर ने जानते हुए कि उस लोहे से कौन क्या क्या करेगा उसने उस लोहे को मार्केट में दे दिया इसलिए मैं इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुआ आपके पास कोई और तर्क हो तो बताइए यह दंड व्यवस्था के सं धर्म में एग्जांपल दिया गया था ऋषि ध्यान के द्वारा और इसमें बताया गया था जिस तरह लोहा

00:47:34:07 लोहा निकालने वाला एक खान से बनाने वाला और उससे खरीदकर हत्या करने वाला इन तीनों में केवल हत्या करने वाला ही दोषी होता है अन्य नहीं ता के संदर्भ में नहीं है यह स्पष्ट है ये ईश्वर विषयक प्रश्न है कि ईश्वर बुरे काम क्यों होने देता है जब वहां पर फ्रीविल की बात हो रही थी करने वाला ही दोषी होता है हां तो फिर बात यही है ना कि वो जो लोहार है उसको नहीं मालूम है कि वो उससे तलवार बनाई जाएगी और उस वो आगे कोई कातिल होगा हत्यारा होगा जो उस तलवार से वध करेगा हत्या करेगा मगर ईश्वर को मालूम है मगर ईश्वर को मालूम है इससे क्या क्या होगा तो इसलिए ईश्वर इससे अलग नहीं रहेगा अब इसमें मेरा उत्तर सुन लीजिए मेरा भी उत्तर सुन लीजिए बताइए हां इसमें मेरा उत्तर सुन लीजिए कि भगवान ने एक बात कही है हालांकि मैं प्रमाण में बात नहीं कर रहा हूं फिर भी मैं एक बात भगवान ने एक बात कही मैं सभी कर्मों से लिप्त होते हुए भी कर्मों में लिप्त नहीं होता उसका एग्जांपल दे रहा हूं ईश्वर के लिए इस दुनिया में कोई अच्छाई बुराई नहीं है उसने इसको इक्वली बनाया है ईश्वर की दृष्टि में वह कुछ गलत नहीं कर रहा है जो भी दुनिया में अच्छाई बुराई है वह हमारे लिए है अब इसको हम समझ सकते हैं कैसे

00:48:49:09 जैसे अभी मैंने कल एक आज एक शॉट डाला है वहा ा पर उसमें क्या था कि मान लीजिए कोई जीवात्मा यहां से मुक्त हो जाती है इतनी धारणा तो आपके यहां भी है मुक्त होने की ठीक है बकुल है अब जब वोह जो आत्मा है वह जो मुक्त हो गई है उसके परिवार के साथ यहां पर भूकंप हो रहा है प्रलय आ रही है उसको दुख तकलीफ दर्द हो रहा है उसका परिवार वही उसकी पत्नी वही उसकी माता वही उसकी बहने वही उसकी बेटी वही उसका भाई वही उसके पिता यहां पर दुख भोग रहे हैं जब तक वो यहां पर था उसको भी दुख होता था उसकी माता और पत्नी को अगर दुख होता था तो अभी वो जो मुक्त हो गया तो क्या अभी जब वो मुक्त हो गया तो क्या उसको दुख होगा नहीं होगा नहीं होगा क्यों नहीं होगा क्योंकि यहां के जो प्रपंच है वास्तविकता में वो मूल वो ओरिजनलिटी है ही नहीं वो प्रपंच यहां के लोगों के लिए सुख दुख अच्छाई बुराई यहां के लोगों के लिए है इसी प्रकार से जब मुक्त आत्मा को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है क्या अच्छा है क्या बुरा ईश्वर को कैसे फर्क पड़ेगा क्या अच्छा है क्या बुरा वो जो अच्छाई बुराई है वो हमारी दृष्टिकोण से है ईश्वर के दृष्टिकोण से सब प्रपंच है खेल है

00:50:04:16 तमाशा है तो इसलिए वो जो दोष है वो दोष ही नहीं हुआ ईश्वर क्योंकि ईश्वर की दृष्टि में तो ये सब खेल है कुछ नहीं हमको लगता है कि नहीं अच्छा हो रहा है ये बुरा हो रहा है तो जब मुक्त आत्मा के लिए अच्छाई बुराई नहीं है संसार में तो ईश्वर के लिए अच्छाई बुराई कैसे है बिल्कुल जी है ना तो इसका यह है तो अभी दोबारा पॉइंट पर आ जाते हैं कि आगे हां आपने जो तर्क दिया था कि बुराई नहीं कर सकता तो यहां पर बुराई करने वाले को बुराई को जन्म देकर के ईश्वर भी बुराई से लिप्त हो रहा है तो इस आधार पर हम यह नहीं कह सकते कि नहीं ईश्वर ये काम नहीं कर सकता दूसरे पर दूसरे पर बात करते हैं सर्वव्यापक ठीक है जी जी हां सर्वव्यापक पर बात करते हैं अब सर्व व्यापक में बात ये आ जाती है वैसे जो हमारे जो आचार्य गण है जो जगतगुरु शंकराचार्य पूज्य करपाती जी महाराज भक्ति सुदा में उन्होंने बताया अवतार रहस्य में गुरुदेव की जो गुरुदेव का ग्रंथ है अवतार रहस्य उसमें उन्होंने समझाया कि ईश्वर के अवतार और उसका जो सर्वव्यापक रूप है उसमें केवल एक अंतर है कि उसका जो अवतार है वह उसका आविर्भव

00:51:20:06 है और जो उसका बाकी का रूप है वो है मगर वो तिरो भाव है ईश्वर ने कुछ ऐसे इफेक्ट पैदा कि अगर हम यहां से देखें तो भौतिक इफेक्ट जिसके कारण वो जो पूरा रूप हमें अनंत दिखाई दे रहा था उसके बीच में एक बाधा आने लगी एक स्ट्रक्चर बन गया और उस स्ट्रक्चर के माध्यम से ईश्वर आदान प्रदान कर रहा है हमसे संदेश का इसलिए व अवतार कहलाया अब हम यह भी नहीं कह सकते कि वोह पूर्ण ईश्वर नहीं है क्यों क्योंकि वह अलग नहीं हुआ है लक्षण साम में से वस्तु साम में जो वो चाहेगा वो अभी भी वो कर सकता है तो उसको अवतार कहा वो जो एक बाधा जैसी हमारी दृष्टि और जोय सर्वव्यापक जैसे आकाश आकाश जो होता है वह अनंत है ठीक है मगर हमारी आंखों के सामने एक बाधा बनाई गई कमरे की और उसमें खिड़की नुमा स्थान खाली छोड़ दिया गया उससे भी आकाश दिख रहा है यह जो खिड़की रूमा जो स्थान है खाली स्थान इससे जो हमें ईश्वर दिखाई दे रहा है ये इससे जो हमें आकाश दिखाई दे रहा है यह आकाश का का अवतार है आकाश के साथ हम कनेक्ट होते हैं यह तो हमारी व्याख्या है मैंने इसलिए कहा कि आपकी व्याख्या क्या है वो भी बता दे

00:52:35:19 अब मैं सवाल यह करता हूं वापस बन जाता हूं जिज्ञासु ठीक है अब मैं आपसे सवाल ये करता हूं कि इसका मतलब यह है कि जो सर्वव्यापक है वह एक देशीय नहीं हो सकता यह आपका कहना यही कहना है ना कि जो सब जगह है वो एक जगह कैसे हो सकता है यानी कि यहां पर हम तर्क पर जानना चाह रहे हैं कि ईश्वर कैसे ले सकता है तक पर एक तरीके से साइंटिफिक पैरामीटर्स पर है ना यही हुआ ना अच्छा अब मैं आपसे पूछता हूं ईश्वर ने अथुनी सृष्टि की रचना कैसे की पहला इंसान कैसे बनाया साइंटिफिक तरीके से बनाया साइंटिफिक तरीके से बनाया या फिर अपनी अनंत सामर्थ्य से बनाया इसका जवाब द्विवेदी जी हमें मिल है कि अक्सर एक क्वेश्चन खड़ा होता है कि पहले मुर्गी आई या अंडा आया मैं ये नहीं भाई साहब मैं मुर्गी अंडे पर नहीं जा रहा हूं मैं यह कह रहा हूं ईश्वर ने जो पहला इंसान बनाया व वज्ञान के नियम पर बनाया विज्ञान का नियम है इंसान बनने का स्त्री और पुरुष जो है आपस में संबंध मेल और फीमेल का संबंध है उससे बनता है ठीक है तो पहला इंसान ऐसे बनाया

00:53:50:27 या फिर उसने अपने आप बना दिया बिना किसी साइंस के नियम के बिना किसी तर्क के द्विवेदी जी पहले तो इस विषय को क्लियर कीजिए आप कि जो आज की हमारी मॉडर्न साइंस है वो ईश्वर की शक्तियों की व्यवस्थाओं की और यहां तक कि आत्मा तक भी कैचिंग में नहीं है उनके और इन विषयों पर कर बत अच्छी बात कही ये तो बहुत अच्छी बात कही ये तो आपने बहुत अच्छी बात कही तो इसका अर्थ ये है कि हमें आज जो साइंस प्राप्त है उसके आधार पर हम ईश्वर के सभी चीजों को नहीं समझ सकते तो फिर वहां पर यह तर्क भी खत्म हो जाता है कि वो सर्व होते हुए एक देशीय कैसे हो सकता है या फिर आप यह कहिए नहीं उतने तर्क तो माने जाएंगे जो आ समाज कहेगा बाकी न कर देंगे पूरा कर दीजिए पूरा करने दीजिए तो वहां पर जो शरू में सृष्टि होती है कहते हैं अनादि काल की सृष्टि है शुरुआत तो कहीं से अवश्य हुई होगी तो उसमें जब विषय आता है तो यही आता है मुर्गी और अंडे वाला तो कहते मुर्गी पहले अ पहले आया तो विद्वानों ने भी यही विषय दिया कि पहले मुर्गी आई अगर अंडा दे दिया तो पालन पोषण कौन करेगा व भी युवावस्था में ऐसे ही सृष्टि

00:55:06:01 का जो तक सत्या प्रकाश में मेंशन है और न का जो मंतव्य था उसमें यही था कि शुरुआत में परमात्मा अवश्य ही पूर्ण मनुष्य उतारे हैं पूर्ण नहीं उतारे का बुजुर्ग उतार आ का आंसर आएगा रमण आर जी इस सवाल का आंसर आएगा और आप अपने ने जो प्रश्न है वो बिना ये जो खिलखिला वाले जो चेहरे होते हैं इनके बिना भी कर सकते हैं देखिए कितनी स्वार्थ पूर्ण बातें हो रही है तो आपको अपने जो भाई है आपके आर समाजी हैं उनका प्रोत्साहन उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए अच्छे तरीके से बात रख करके ना कि ये खिया खिया के आपको कहना चाहिए ठीक है तो इस पर हम आ रहे हैं इस पर हम आ रहे हैं कि वो उसके बिना ये नहीं कर सकता क्या कर सकता है हमारे लिए हम हम व्यवहार उसके लिए कैसे करेंगे उसके लिए ईश्वर का अवतार होता है उसको आवश्यकता नहीं है ठीक है चलिए मैं इस इस विस्तृत तरीके से हम लोग बात करेंगे इस क्वेश्चन प आप अपनी बात बोलिए विषय को पूरा कर कहते हैं उनके अनुसार है कि अवश्य ही पूर्ण अवस्ता में युवावस्था में पुरुष और महिला और अन्य जो आपके जीव जंतु युवावस्था में उन्होंने अवश्य उतारे थे तभी सृष्टि आगे कंटिन्यू हो पाई थी

00:56:21:21 और परमात्मा की जहां तक आप आज की साइंस के अकॉर्डिंग इसको कवर करेंगे तो कहीं कहीं असंभव प्रतीत होगा यह क्योंकि उसका सामर्थ्य अनंत है अभी तक हम उसको पूर्ण नहीं जान मलब तक के आधार पर आर समाज के द्वारा भी प्रतिपादित होने वाली ईश्वर के कई कार्य ऐसे हैं जो तर्क के आधार पर सिद्ध नहीं हो सकता वहां पर हमें ईश्वर की अनंत सामर्थ वान अनंत सामर्थ्य का ही आधार मानना पड़ेगा यही तो हो गया तक के आधार पर मैं दोबारा दोबारा क्लियर कर देता हूं मैं दोबारा क्लियर कर देता हूं के आधार पर आर्य समाज के द्वारा भी ईश्वर द्वारा किए जाने वाले जो कार्य हैं है ना उनको पूर्ण तरीके से तर्क के आधार पर नहीं अपनाया जा सकता उनके लिए भी हमको कहीं कहीं पर ईश्वर की सर्व सामर्थ होता को आधार बनाना पड़ेगा सही कह रहा हूं और बनाया भी है ऋगवेद भूमिका में सुनिए बनाया भी है ऋग्वेद आदि भाष्य भूमिका में जब पूर्व पक्ष के रूप में दयानंद जी ने ये रखा कि उसका मुख नहीं है वो बोल कैसे सकता है तो उन्होंने कहा वोह सर्व सामर्थ मान है यहां उन्होंने तर्क नहीं दिया कोई उन्होंने कहा वोह सर्व सामर्थ्य वान यानी कि

00:57:36:25 सर्व सामर्थ्य वान होना ही काफी है ईश्वर द्वारा किसी भी प्रकार के कार्य की सिद्धि के लिए तो जब वह अपने जो उन्होंने चुने हैं उन कार्यों के लिए सर्व सामर्थ को आधार बना रहे हैं तो फिर अवतार के लिए क्यों अटका रहे हैं कि इसमें भी लॉजिक चाहिए हमें तो द्विवेदी जी मैं विषय अवतार का कवर कर दे ह इसमें समस्या क्या आती है अवतार शब्द मुख्य रूप से हमें दृष्टि गोचर होता है एक पंक्ति बता दू समस्या क्या है मैं एक पंक्ति बोलू समस्या क्या है समस्या यह है कि तर्क को जो आप तर्क दे रहे हैं वो सर्वव्यापी है मगर एक देसी कैसे हो सकता है उसके बारे में व्याख्या है कैसे हो सकता है व बात अलग है और तमाम सारी व्याख्या मगर तर्क को आधार बना कर के ईश्वर द्वारा किसी के किसी प्रकार के कार्य को झुट नहीं जा सकता तक तर्क को आधार बना कर के क्यों कई जगह पर आर्य समाज ने भी त तर्क को हटाया ईश्वर की सर्व सामर्थ को डाल दिया है ठीक है तो जी अब आप बताइए अपनी बात तो अवतार विषय पर जो समस्या आती है वह पुराणों में मुख्य रूप से इसका चिंतन मिलता है परमात्मा बात कर नहीं रहा पुराणों की बात नहीं कर रहा आपि बात बोलिए पुराणों की बात नहीं कर रहा हूं मैंने बोला क्या पुराण

00:58:52:01 और दूसरा पुराणों के बाद विष्णु बमा से सृष्टि फिर शिव पुराण में शिव से सृष्टि और इसके बाद जब रामायण और महाभारत लेखन सारे सवालों के देखिए ये वो वाली बात हो गई फिर से वही कि आपके इन चीजों की वजह से हम अवतार को नहीं मानते भाई इन चीजों को समझने के लिए क्या आप इन चीजों को मानने वाले ऑथेंटिक जगह पर गए परंपरा प्राप्त आचार्य के पास गए पुराण को माना जा रहा है दयानंद जी से पहले से तो जो उनके परंपरा प्राप्त मठ है मंदिर है वहां आप गए कि मुझे समझा दीजिए शंकराचार्य जी जगतगुरु रामानुजाचार्य जी आप मुझे समझा दीजिए यह अवतार का मुझे समझ में नहीं आ रहा है इसमें विष्णु बना रहे हैं इसमें शिव बना रहे हैं आप गए तो हमारी चीज गलत हमारी चीजें आप जान नहीं सके कि क्या सही है क्या गलत है इसकी इसके आधार पर आप निर्णय नहीं दे सकते आर्य समाज गुरु परंपरा को मानता है वो अगला पार्ट वो अगला पार्ट है इसमें मत लाइए गुरु परंपरा मैं ये कह रहा हूं अगर आपने पुराणों को लेकर के शिव विष्णु के द्वारा षष्टि को लेकर के कोई अपने दिमाग में धारणा सिद्ध की निर्मित की तो क्या

01:00:07:08 उसको आपने वेरीफाई कराया जैसे कि मैं अभी कह दूं मैं अभी कह दूं मैं अभी कह दूं कि बास्केटबॉल खेलने से मोक्ष मिलता है ऐसा दयानंद जी ने कहा है तो इसको मैं यूं ही मान लू या पर्टिकुलर आर्थ समाज का जो प्रमाणिक तरीका है मानने का तब मानू कि यूं ही मान लू परमाणु से ही परीक्षा करनी पड़ेगी तभी मानना पड़ेगा हा तो मुझे अगर मान लीजिए अगर मान लीजिए सत्यार्थ प्रकाश नामक बुक एक किसी ने छाप दी और उसमें लिख दिया कि गिल्ली डंडा खेलने से मोक्ष मिल जाएगा ऐसा नंद जी ने लिखा है तो मैं उसको मान लू नहीं मानना चाहिए परमाणु से परीक्षा करनी चाहिए कैसे कैसे कैसे तय करूंगा सत्या प्रकाश असली है कि नकली मैं आपका जो अधिकृत कार्यालय होगा अधिकृत केंद्र होगा वहां जाऊंगा वहां पूछताछ करूंगा भाई यह बात समझ में नहीं आ रही मुझे ये आप मुझे समझा दीजिए और अगर मैं ये नहीं कर रहा हूं अपने आप अपने घर पर बैठे बिठाए मैंने अपनी मंत्रणा कर ली कि हां वो दयानंद जी ने तो गिल्ली डंडे से मोक्ष प्राप्त करने को की शिक्षा दी है तो क्या मैं सही हूं इस जगह पर नहीं जी आप बिल्कुल गलत है और ऐसी ऐसे ही पुराण के विषय में ऐसे ही पुराण के विषय में उत्पन्न होने वाले जो सवाल हैं वो

01:01:22:13 आपको पहले जाकर के सामर्थ्य वान गुरुओं से पूछने चाहिए अगर वह आपको संतुष्ट ना कर सके तब आप अपनी धारणा बना कर के बैठिए नहीं पुराण गलत है यह गलत है वो मुझे नहीं लगता कि आपने ऐसा कोई प्रयास किया है बिलकुल हमने प्रयास किया है और ऐसी कहीं अवतार सध जैसे आज हम देखते भी है साई बाबा को भी अवतार घोषित कर दिया गया है उनके पुराण भी लिखे गए हैं देखिए अभी थोड़ी देर पहले अभी थोड़ी देर पहले एक व्यक्ति का फोन आया कि भाई इन इन बातों की वजह से हमारे धर्म को छोड़कर लोग जा रहे हैं क्यों अवतार वाली बात है तो हर कोई अपने आप को अवतार कह लेता है तो इसलिए अवतार वाली बात को मानना गलत है ठीक है मेरे भाई हम लोग धर्म की रक्षा कर रहे हैं अगर धर्म की कोई विषय वस्तु को समाज समझ नहीं पा रहा है तो हमारा कर्तव्य उस विषय वस्तु का सही रूप समाज में पहुंचाना ना कि उस विषय वस्तु को छोड़ ही देना वही वाली बात कि बाढ़ का पानी खतरे के निशान तक आ

✅ This part is already used · 01:02:19:04 – 01:02:24:04 (0:05)

→ Used in: A · Live Where do they learn hypocrisy? मोमिना ने किया मुफ्ती को बेनकाब at 37:41 ↗

01:02:19:04 गया है तो नेता जी ने कहा कि दो इंच और ऊपर खिसका दो खतरे का निशान

⬜ Not used yet · 01:02:24:04 – 01:16:41:00 (14:17)

01:02:24:04 मतलब जो जो चीज हमारी समझ नहीं आ रही है जटिल होती जा रही है धर्म की उन उन चीजों को हटा दो पीछे कर दो क्योंकि उसके कारण लोग वो अब देखिए देख आपने आपने आधार बताया सुनिए सुनिए आपने आधार एक मिनट एक मिनट आपने आधार बताया कि क्योंकि आज समाज में हर कोई अपने आप को अवतार कहने लगा है नहीं यह आधार नहीं हो सकता अवतारवाद को ना मानने का हम उसको सही करेंगे कि अवतार कौन होगा कौन नहीं कौन कह सकता है कौन नहीं है ना उस देखिए जो जो मनुष्य है इतना तो आप भी मानते हैं कि लस्ट के साथ जन्म लेता है मानते हैं ना आप सही कीजिए किस आधार पर अवतार की मान्यता को आप सही से बता रहे ताकि हमारी भी जानकारी करेक्ट हो अभी हम लोग फिर से मूल विषय से भटक गए हैं हम लोग फिर मूल विषय पर आते हैं कि जो लॉजिक है लॉजिक के बिना भी कई बार ईश्वर की चीजों को आर्य समाज ने माना लॉजिक के बिना ठीक है लॉजिक के बिना ईश्वर की कई चीजों को माना तो इसका मतलब है लॉजिक ना होने के कारण हम यह नहीं कह सकते ईश्वर अवतार नहीं ले सकता नहीं अनेक कारण है जी अवतार नहीं लेने

01:03:39:13 कारण कारण को हटा रहा हूं एक कारण पर चलेंगे अभी एक कारण हटाया बुराई वाला दूसरा कारण अब लॉजिक लॉजिक के आधार पर हम ईश्वर के अवतारवाद को मना नहीं कर सकते अब हम अगले प आएंगे बहुत बढ़िया अब हम आ जाते हैं आवश्यकता जैसा अभी भाई साहब ने कहा था कि ईश्वर अपने संदेश नहीं पहुंचा सकता तो ईश्वर को आवश्यकता क्या है ठीक है अच्छा एक यह लॉजिक वाला मामला जो है इसको मैं और क्लियर कर दूं अच्छा याद आ गया कि आपने कहा जो सर्वव्यापक है वह एक देशीय रूप में प्रकट नहीं हो सकता ठीक है है ना अब जी जो वेद के मंत्र है वेद के मंत्र है व वो ईश्वर में ही है ठीक है है ना वेद के मंत्र ईश्वर सर्वज्ञ है जी मनुष्य के अंदर भी है जी एक देशी रूप से मंत्र प्रकट हो रहे हैं कि नहीं ऋषियों के मन में उसी समय जानवर के मन में आते हैं क्या मंत्र जिस समय ऋषि के मन में आए जिस समय ऋषि के मन

01:04:54:13 में मंत्र आए उसी समय क्या पशु के मन में भी आते हैं क्या इसका मतलब इस विषय पर मैं अपनी अपना मत क्लियर करता हूं पहले फिर आप कंक्लूजन दीजिएगा जी जी आपने दिया ईश्वर के माध्यम से ही वेद मनुष्यों को प्राप्त हुए हैं इसमें जो ऋषि दनन का मत मैं आपको बताऊंगा केवल क्योंकि इसमें मेरा मत कोई ऐड नहीं हो सकता उस लेवल का मैं विद्वान नहीं हूं ये वेद जो है पवित्र आत्माओं को प्राप्त हुए थे उस समय या वो एक देशीय सर्वज्ञ होते हुए भी एक देशीय हो सकते हैं ना पूछ में ये रहा हूं मैं यह नहीं पूछ रहा कैसे हुए सर्वज्ञ होते हुए भी एक देशीय हुए ना क्या हुआ एक देय एक देशीय पमा पवित्र आत्माओ के अंदर आए ना केवल केवल पमा के अंदर आए ना जी जी जी सर्वव्यापक होते हुए भी एक देशीय हो गया अब मैं आपको एक चीज और दिखाऊ नहीं जी इस विषय से आप कैसे जोड़ सकते हैं आप इसको और दिखा देता हूं आपको एक चीज और दिखा देता कर दिया सर्व्य का मतलब होता है सब कुछ जानने वाला और उसने पवित्र आत्मा कोद दिया

01:06:09:15 नहीं नहीं मैं कह रहा हूं ईश्वर सर्व सर्वव्यापक है ना सर्वव्यापक है ठीक है तो वोह मनुष्यों के मन में भी था बिल्कुल था जी तो इसका मतलब ईश्वर का ज्ञान मनुष्य के मन में भी था नहीं था चलिए मैं दूसरी दूसरे तरीके से बता देता हूं भगवत गीता चार छ जो पहले से है उसका प्रकट होना सिद्ध नहीं होता और जो सर्वव्यापक है उसका एक देशीय होना सिद्ध नहीं होता अब इसको हम ले लेते हैं चौथा अध्याय और

01:07:16:20 चार पाच छ देखिए ये आर आर्य का ग्रंथ है आर समाज का देखिए इधर हा जी ठीक है इसमें यह कह रहे हैं कि हम अवतारवाद के सिद्धांत की बहस में यहां नहीं पढ़ना चाहते जो जो मानता हो व मानता हो शता शिवा जी मैं आपको ये पुस्तक आर्य ऋषि ध्यान के दवारा प्रमाणिक नहीं है ये प्रमाणिक नहीं है य ऋषि ध्यान के द्वारा परमाणिक नहीं है स्वामी सम इसको आर्य समाज का ना माने बिल्कुल भी नहीं अच्छा अच्छा तो फिर ठीक है फिर मैं इसको अलग हटा देता हूं फिर मैं अपने प्रमाण को अलग हटा देता हूं ये जो है त्य व्रत सि सिद्धांता अलंकार जी की है और यह जो भगवत गीता भाष्य है यह ऋषि दयानंद जी द्वारा प्रामाणिक नहीं है अब जो है ना नहीं हा अधिकृत पर भी अब बात करनी पड़ेगी आपसे कभी ना कभी कि कौन आर समाज की तरफ से अधिकृत है कौन नहीं है वैसे ये जो आया है मेरे

01:08:32:16 पास यह जो आया है ये आर्स साहित्य ऑनलाइन बुक सेंटर जहां पर आर्थ समाज के ग्रंथ मिलते हैं जो प्रामाणिक संस्थान है वहां से आई है अनेक पुस्तकें छापते हैं ये बिल्कुल अनेक पते चलिए अब मैं आपको दूसरा प्रश्न पूछ लेता हूं क्योंकि ईश्वर सर्वव्यापक है ठीक है तो फिर वो किसी एक जगह पर पृथ्वी का निर्माण कैसे कर रहा है जिस समय वह पृथ्वी का निर्माण करेगा उसी समय सभी जगह वही कार्य होगा क्योंकि वह तो सर्वव्यापक है समान रूप से व एक देशीय कैसे कार्य कर पा रहा है कि पृथ्वी जो है बन रही है या कुछ भी दुनिया में बन रहा है एक देशी बनेगा तभी बनेगा ना बिल्कुल बिल्कुल तो इसका कारण बता देता आपको शीवा जी जो आपके मन में शंका आई है जी वो परमात्मा निराकार है सूक्ष्म है और सब जगह विद्यमान है और अपने सामर्थ्य से एक उदाहरण के रूप में कहते हैं कि उसके हाथ नहीं लेकिन माता के गर्भ में अंधकार रूपी स्थान पर भी संतान का बस बस बस बस बस मैं समझ गया यानी कि बिना तर्क के हमें यहां भी मानना पड़ेगा कि वो अपने कार्य को कर सकता है बिना का तर्क के

01:09:47:24 बस ऐसे ही मैं कह रहा था कि बिना तर्क के हम आगे बढ़ते हैं बिना तर्क के हमको सर तर्क तर्क के अभाव में पाया मेरी कमी हो स जी जी तर्क के अभाव में जी क्या कह रहे हैं मैं तर्क इस बारे में मेरा सामर्थ्य कम हो सकता है हां ठीक है तर्क के अभाव में ईश्वर के अवतार को हम मना नहीं कर सकते मैं बस इस तक पहुंचना अब हम आगे चलते वो तो आपने पहले ही मान लिया था मेरे पास हालांकि ये भगवत गीता थी तो मुझे मालूम नहीं था अधिकृत हम इस इस चर्चा को भी करेंगे कि किसको आर्य समाज की तरफ से अधिकृत माना जाए या ना माना जाए इसके लिए नियमावली क्या होनी चाहिए क्या है इस पर भी हम चर्चा करेंगे र बकल करेंगे अब हम आ जाते हैं आवश्यकता कि ईश्वर को आवश्यकता क्या है अवतार लेने की सही बात है व बिना अवतार के भी सारे कार्य कर सकता है तो उसको अवतार लेने की आवश्यकता क्या है अब यह बताइए वेदों में अलंकार कई मंत्रों में है कि नहीं है अलंकार का उपयोग हुआ है कि नहीं कई मंत्रों में परमाणिक यह विषय मैं नहीं दे पाऊंगा वेदों का चलिए मैं आपके जो वेद है वो उठा लू उसमें दिखाऊं हुआ

01:11:03:12 है हो सकता है जी नहीं ऐसे कैसे चलिए मैं आपको ये बता रहा हूं मैं आपको दिखा देता हूं जिससे कि मैं अपने बात को प्रामाणिक रूप से रख पाऊ मैं दिखा ऐसा कर लीजिए ऐसा कर लीजिए आप दिखा दीजिए [संगीत] वो शर्मा वाला सूक्त कौन सा था कोई बताएगा क्या मैं उसका प्रमाण स्थल भूल गया हूं शर्मा वाला सूक्त कौन सा

01:12:19:02 था 10 108 106 1090 आ गया नवीन जी अगर आप देख रहे हो तो अभी एक दो दिन पहले मैंने आपको एक स्क्रीनशॉट लेकर के भेजा था तो वो अगर आप यहां कमेंट में कर सकते हो तो मुझे आप कमेंट कर दीजिए कि वह क्या श्लोक क्रमांक मंत्र का क्या क्रमांक था प्रमाण स्थल क्या था वैसे तो इसमें भरे ही पड़े हैं जगह जगह अलंकार अलंकार बहुत भरा है पूरा वेद भाष्य में अलंकार है नहीं इस विषय से ऋग्वेद 10 108 हां मैं करता हूं मैं देखता हूं ऋगवेद 10

01:13:29:25 108 एक शिवान जी मेरा नेट डाउन पड़ रहा है बस बस बस हो गया मेरा मेरा काम हो गया ये आ गया 108 देखिए ये दयानंद जी का भाष्य है ठीक है जी और यह आप देखिए यहां पर लिखा है सूचना सूचना में इन्होने माना है अलंकारिक वर्णन प आप पेज ं बता दीजिए पेज नंबर बता दीजिए मैं चेक कर लूंगा इसको आपको दिख रहा है

01:14:12:21 क्या अलंकारिक वन पेज नंबर दिखा दीजिए में नहीं दिखेगा य अच्छा ठीक है तो यह पेज नंबर है 1036 कौन सा भाष है आपके पास अभी ऋग्वेद है दसवा मंडल है 108 इसमें वह मान रहे हैं कि अलंकारिक वर्णन है जी ठीक है अब यह बताइए वेद के मंत्रों में अलंकार की क्या आवश्यकता

01:14:47:00 है जी इस विषय में मैं आपको नहीं अपना वक्तव्य दे पाऊंगा ठीक है तो बुराई क्या आधार पर ईश्वर के अवतार को नहीं हटा सकते सर्वव्यापक के आधार पर नहीं हटा सकते आवश्यकता के आधार पर फिलहाल नहीं हटा सकते आपको क्योंकि पता नहीं है ठीक है तो इसके आगे हम अपनी चर्चा किसी और दिन रख लेंगे क्योंकि आज भंडारा होता है प्रत्येक रविवार को सभी जितने भी महानुभाव देख रहे हैं वो उनसे निवेदन है कि भगवान की भक्ति अवश्य करें हो दि जी मेरा इंटरनेट खत्म हो गया ठीक है ठीक है ठीक है भाई साहब बहुत बहुत धन्यवाद आपको जो है आप यहां पर आए ठीक है और बहुत सौहार्दपूर्ण आपसे चर्चा हुई कोई अगर मुझसे अगर कोई किसी प्रकार का जो अमर्यादित आचरण हुआ हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं तो सभी जितने भी लोग हैं वह अपने अपने नगर में जहां पर गली मोहल्ले में रहते हैं वहां पर अ हिंदू राष्ट्र अपने मत मट मंदिरों को केंद्र बनाए वहां पर शिक्षा रक्षा सेवा के प्रकल्प चलाएं और हिंदू राष्ट्र के निमित्त सनातन

01:16:02:03 समाज को हिंदू समाज को एकत्र करने के निमित्त वहां पर जो है गोठिया करें हम लोग करते हैं साप्ताहिक रूप से आवान के द्वारा जो जगतगुरु शंकराचार्य जी हैं पूरी पीठाधीश्वर उनकी जो सेना है आदित्य वाहिनी के द्वारा वो आपको इस अभियान में सहायता कर सकती है आप उससे जुड़ सकते हैं और अपने क्षेत्र को किला बनाए सुरक्षित रहे यह जितने भी मत मता आ रहे हैं उनको दूर करें जिससे कि आपका ही भाई आपसे दूर ना रहे जिस समय आपको उसकी आवश्यकता हो तो ठीक है चलिए सभी को जय श्री राम

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 1:16:54 · 18 Aug 2024

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A · Live आर्य समाज पर चर्चा | Discussion on Arya Samaj #aryasamaj #satyarthprak...
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