⬜ Not used yet · 00:00:07:25 – 00:33:13:00 (33:05)
00:00:07:25 [घंटी की आवाज़][संगीत] तो आपका कहना है कि रामपाल के द्वारा दी जाने वाली जो शिक्षा है वो बिल्कुल प्रामाणिक है। बिल्कुल सही है। है ना? सही बात है। तो मुझे थोड़ा सा सबसे पहले एक्चुअली रामपाल मतलब जो जिसको भी आप गुरु मानते हैं उसके द्वारा दी जाने वाली जो शिक्षा है उसके बारे में बात करने के लिए कुछ पहले दो एक दो चीजें हैं जिनको जान लेना आवश्यक है। जिससे कि हम बाद में जब बात करेंगे तो जो हमने यहां से जाना है चर्चा के प्रारंभ में वो मदद करेगा। तो इसलिए मैं आपसे जानना चाह रहा हूं कि आपकी जानकारी में धर्म क्या है? वो किस तरह से उपयोगी है मानव के लिए? एक जीव के लिए या मनुष्य के लिए धर्म उपयोगी क्यों है? क्या आवश्यकता है उसे धर्म की? देखिए मैं ज्यादा कुछ बहुत विशेष तो नहीं जानता हूं लेकिन इतना जानता हूं कि जो अच्छे कर्म किया जाए और मानव जीवन में जो उपयोगी है वही और हर व्यक्ति के लिए उसका अपना अपना अलग-अलग धर्म होता है। नहीं नहीं
00:01:23:20 जो अच्छे कर्म है ये तो उसके लक्षण है। और फिर अच्छे अच्छे कर्म भी किसको माना गया किस आधार पर वो भी देखना पड़ेगा। वो एक अलग जैसे जैसे मैंने कहा कि मोटरसाइकिल की क्या आवश्यकता है? तो आपको बताना है कि भाई मोटरसाइकिल से हम एक जगह से दूसरी जगह यात्रा करते हैं। आपको ये नहीं बताना है कि मोटरसाइकिल Hero Honda भी होती है, Pulsar भी होती है या Bajaj का भी होता है, Blet का भी होता है? ये नहीं पूछ रहा हूं। ये लक्षण है। समझ रहे हैं आप? मैंने पूछा कि वो काम क्या आती है? मोटरसाइकिल काम क्या आती है? वो बताइए। क्या जरूरत है धर्म की? आवश्यकता के अनुसार धर्म की परिभाषा क्या है?
00:02:09:03 मूल धर्म तो हम यह मानते हैं कि जिसके द्वारा इंसान का मन क्योंकि मनुष्य जीवन अनमोल है और मोक्ष का रास्ता मिले सबसे बड़ा धर्म है। अच्छा हां ठीक है। अब ये आपने सही बात कह दी। जिसके द्वारा आपको मोक्ष प्राप्त हो जिन कार्यों को करने से जिन नियमों को मानने से आप मोक्ष की ओर आगे बढ़े वो आपका धर्म ठीक है सही बात तो फिर मोक्ष क्या है इस आत्मा का जन्म मरम से हमेशा के लिए छुटकारा हो जाए यही मोक्ष है परमात्मा में चले अच्छा तो आत्मा यहां से पहले कहां थी जो वो मतलब जो वो आज जो वो जन्म मरणम के चक्कर में फंसी है आत्मा ये कैसे फंसी है इससे पहले कहां थी जो फस गई और इसके बाद ये इसके बाद रामपाल रामपाल जी के अकॉर्डिंग ये कहां जाने वाली है आत्मा अकॉर्डिंग टू मोक्ष पहले परमात्मा के साथ में थी नहीं नहीं वो मैं बाद में वो बाद में पूछूंगा मैं ये पूछ रहा हूं कि इसके बाद इसके बाद
00:03:24:12 कहां जाएगी आत्मा देखिए श्रीमद् भागवत गीता में परम अक्षर ब्रह्म बताया गया है। भाई साहब मैं देखिए हम लोग एक सुनिए तो मैं आपसे प्रमाण पूछूंगा मगर बिना बात के प्रमाण आप मत दीजिए। आप खाली अपनी विचार बताइए। जहां प्रमाण की आवश्यकता होगी मैं बोल दूंगा। हां सतलोक सतलोक जाना है। सतलोक जाएगी। तो सतलोक जाकर के जन्म मरण के चक्कर से छूट जाएगी। जी बाकी दुख तकलीफ से नहीं छूटेगी। दुख तकलीफ से तो यहां पर जब तक रहेंगे तब तक छूट ही जाएंगे। यहां भी छूटेंगे और बाकी वहां जाने के बाद तो जन्म मृत्यु होगी ही नहीं। सारे दुखों से छूट जाएंगे। अभी आप दुख तकलीफ से छूटे हुए हैं। 90% यानी पूरी तरीके से नहीं छूटे हुए हैं। हां हां समय लगता है। अच्छा 90% ये कैसे पता चला आपको कि मैं 90% छूटा हुआ हूं? 90%
00:04:33:10 मैं अपना सवाल क्लियर कर दूं। मैं अपना सवाल क्लियर कर दूं। 90% छूटे हुए का मतलब है कि आपको ये मालूम है कि मुझे कितने दुख मिलने वाले हैं और फिर वो नहीं मिल रहे। यानी कि आपके पास कोई लेखाजोखा है कि मुझे इतने ज्यादा दुख मिलने वाले हैं पर वो नहीं मिल रहे। इसलिए मैं 90% छूटा हुआ मान रहा हूं और 10% नहीं छूटा हुआ। तो ये आपके पास कोई विवरण है क्या? आपके लिए कौन-कौन से दुख है जो बंधे हुए हैं? हमारे ऊपर मुसीबतों का पहाड़ था सर जी। वो मैं ये नहीं कह रहा हूं आपके पास क्या था? आप 90% आपके आप 90%
00:05:16:07 मेरा सवाल कुछ और भाई साहब भाई साहब देखिए ट्रैक मत बदलिए। ट्रैक बदलेंगे दिक्कत आएगी। ट्रैक मैं सवाल यह पूछ रहा हूं कि यदि आप यह कह रहे हैं कि मैं 90% बचा हुआ हूं। यानी कि आपको 100% की वैल्यू पता है। वो वैल्यू कैसे पता है? उसका रिकॉर्ड कहां पर मेंटेन है? इस बारे में कोई प्रमाण है शास्त्र का तो वो मुझे बताइए। आपके पास नहीं इसका इसका प्रमाण हमारे पास नहीं है। तो ये सिद्ध कैसे होगा कि 90% आप बचे हुए हैं। मान लीजिए मान लीजिए। मैं बता रहा हूं। आप जो कहने जा रहे हैं उसको ले लेता हूं। मान लीजिए कि आपने कहा कि मैं इतना फंसा हुआ था। ठीक? और फिर यहां आने के बाद में छूट गया। यह भी तो हो सकता है कि जितना आप फंसे हुए थे और जिस दिन आप छूटे हैं वही उसी दिन तक आपको वो तकलीफें मिलनी थी। उसके बाद वो तकलीफें नहीं मिलनी थी। मतलब कि आपके हिस्से में जो दुख बांधा गया था वह उतना ही था जितना जिसके बाद आप छूट गए उससे और अगर आप यह कहेंगे आज की डेट में कि 90% मैं बचा हुआ हूं बिल्कुल कांटे की नोक पे तो फिर आपको ये निश्चित करना होगा हमें प्राकट्य प्रमाण
00:06:31:10 के साथ कि 90% ये मेरा दुख ये खड़ा है पर मुझे छू नहीं पा रहा है इसलिए मैं बचा हुआ हूं केवल 10% दुख मुझे छू पा रहा है नहीं इसका मान नहीं दिया नहीं ठीक है अब ये वैसे भी हमारे मेन विषय से अलग है आपने 10% तो माना ही है कि 10% वो है दुख तकलीफ जीवन में थोड़े ये मानना ही पड़ेगा कि जो सतलोक का सुख है वो यहां नहीं है ये तो सही बात है ये सही बात यानी कि सतलोक में ऐसा सुख है जो कभी खत्म नहीं होता
00:07:07:10 पूछ रहा हूं आपसे दुख नाम की चीज ही नहीं है तो खत्म होने का सवाल दुख नाम की चीज नहीं है। मतलब कि अ जो हम पाना चाहते हैं वो पा लेते हैं। क्या मतलब? जैसे कई बार आती है ना इच्छा कि मुझे वो चाहिए। तो जो हम पाना चाहते हैं वो पा लेते हैं। इसलिए दुख नहीं है कैसे? थोड़ा सा बताएंगे। ऐसा कुछ है जो हमें वहां ना मिलता हो। चाहने पर वहां जाने के बाद सारी इच्छाएं मनुष्य की खत्म हो जाती है। मतलब वो जगह ऐसी है जहां पर कोई इच्छा बाकी नहीं रह जाती। बाकी नहीं रहती।
00:07:47:20 वो जगह ऐसी है जहां पर कोई इच्छा बाकी नहीं रह जाती। हां। और यदि हमें ऐसी जगह भेजा जा रहा है जहां पर इच्छा बाकी रहे तो वो जगह तो मोक्ष की कहलाएगी। वो हो ही नहीं सकता मोक्ष की जगह। तो अब मैं आता हूं तो दोबारा से प्रश्न पे कि जो आत्मा है जो यहां फंसी हुई है वो यहां से पहले कहां थी और फिर कैसे फंसी? ये तो आपने बहुत सारी चर्चाओं में आपने सुन रखा है। और फिर हमसे जानने का उसका कुछ औचित्य नहीं बनता है। औचित्य यही है। ठीक है। मैं बता देता हूं। औचित्य क्या है? मैं बता देता हूं। आपने कहा कि जहां पर कोई इच्छा नहीं बाकी रहती है वह मोक्ष की जगह है। पर आपके ही अनुसार जो जीव है उसके अंदर वो काल नाम का जो आपका राक्षस है क्या है वो उसको फॉलो करने की इच्छा आई। उसके पीछे पीछे जाने की इच्छा आई। तब जो है जीव फंसा संसार में। वो इच्छा कैसे आ गई? अगर वो सतलोक में है। अगर वहां कोई इच्छा आएगी नहीं। वहां दुख का नाम ही नहीं है। अस्तित्व ही नहीं है। तो वह कमी कैसे आ गई उसके अंदर?
00:09:08:07 बताइए। ये इसका इसका तो आपने लोगों से सुन रखा है। आपके वीडियो में मैंने देखा है। लोगों से ये सवाल भी पूछे हैं। उसका उत्तर भी लोगों ने दिया है। उत्तर दिया तो वही उत्तर आप दीजिए मुझे। दे दीजिए। आपके अनुसार लोगों ने उत्तर दिया है ना? हां आपने उत्तर आपने वो चीज कई वीडियो मैंने आपका देखा था उसमें मुझे उत्तर दे दीजिए मैं अभी देखता हूं कौन सा उत्तर है भाई तो क्योंकि काल भी परमात्मा का ही अंश है और वो वो भी साथ ही रहता था और उसको मैं ये नहीं पूछ रहा हूं भाई साहब मैं ये नहीं पूछ रहा हूं कि कैसे वो क्या-क्या हुआ था विवरण नहीं पूछ रहा हूं आपसे मैं पूछ रहा हूं इच्छा कैसे आ गई आप यह बताइए इच्छा आ सकती है कि नहीं आ सकती है सतलोक में या तो आ अगर आ सकती है तो वो मोक्षदायक जगह नहीं है और नहीं आ सकती है तो वहां आई थी फिर जीव फंसना नहीं चाहिए था ये बात मैं विवरण नहीं पूछ रहा हूं जैसे मैंने पूछा कि भैया जब आपने कहा कि मोटरसाइकिल से हम यात्रा करते हैं धरती पर चलते हैं तो ये मोटरसाइकिल चल क्यों नहीं रही है तो आपने बताया कि भैया देखो उसमें
00:10:23:18 पेट्रोल कम है उसमें ये है उसमें वो है। इसका मतलब कि वो यात्रा कराने में सक्षम नहीं है। हमें ये मानना पड़ेगा ना कुल मिलाकर के कि वो जो है यात्रा कराने में सक्षम नहीं है। तो आप मुझे ये बताएं कि वहां पर इच्छा आ सकती है कि नहीं आ सकती है। देखिए सृष्टि रचना के समय की प्रारंभिक स्टडी है। स्टेज है। भाई साहब मुझे मुझे मुझे आप क्लियर देखिए पहले मुझे हेडलाइन बता दीजिए कि आप मेरे प्रश्न से संबंधित क्या बताने जा रहे हैं। फिर उसके अंदर जाइए डिटेल में पहले मैंने पूछा है आप इसको क्लियर करिए सतलोक में कोई इच्छा आ सकती है कि नहीं आ सकती यानी कि सतलोक में हमें किसी प्रकार का अभाव महसूस हो सकता है या नहीं हो सकता है? वहां अभाव महसूस नहीं होता लेकिन हर इंसान की इच्छा तो होती है। कुछ और और अगर ज्यादा पाने की और कुछ बनने की इच्छा हो रही है और वो वहां से भटक रहा है तो उसको कुछ कोई कुछ नहीं कर सकता। इसका मतलब जब ये सतलोक में जाएंगे तो इनकी इच्छा हो सकती है और कहीं भटक सकते हैं। भटक सकते हैं।
00:11:38:21 जिस तरीके से वो भटक करके आ गए। उसके साथ सभी लोग आ गए तो भटक सकते हैं। भटक दोबारा से फस सकते हैं जीवन मरण के चक्कर में भटक के। लेकिन जिस चीज का जिस दुख का पहले से ही एहसास रहेगा कि भाई यह दुख को हमने झेल करके आए हैं तो वापस आदमी उसी काटों में उलझेगा नहीं। ये चीज पहले तो पहले तो मुझे ये बताइए कि ये सिद्धांत कहां लिखा है? हम ये सिद्धांत में आपका थोड़ा आपका थोड़ा सर कट रहा है। ये सिद्धांत कहां लिखा है? यह सिद्धांत गीता जी में भी बताया गया है कि वहां जाने कहा जिस चीज का दुख जिस चीज का दुख हम एक बार झेल लेते हैं उसके लिए हम प्रिपेयर रहेंगे पहले से ही
00:12:30:14 फिर उसमें हम नहीं फसेंगे कबीर सागर के द्वारा कबीर सागर के द्वारा लिखा है हमारे सनातन शास्त्रों में सिद्धांत नहीं है वो तो मैंने पढ़ा नहीं कि उसको बताओ नहीं तो आप हमें तो हमें तो हमारे शास्त्रों से मनवाने आए हो ना। हमें इस पर आपत्ति कभी नहीं है कि आप अपने कबीर सागर के आधार पर क्या क्लेम करो। यद्यपि उसमें हमारे जो देवी देवता हैं सनातन शास्त्रों में वर्णित उनका नाम ना लो। हमें इस पर आपत्ति नहीं है। हमें आपत्ति इस पर है कि हमारे शास्त्रों के आधार पर आप गलत जानकारी या उसके विरुद्ध जाकर के जानकारी मत दो। और यहां के देवी देवताओं का नाम मत खराब करो। अपने आप चाहे जिसकी पूजा करो आप। हमें आपत्ति इस बात की नहीं कबीर सागर में क्या लिखा है? हमें आपत्ति इस बात पर है कि आपने गीता के नाम पर क्या-क्या फैलाया है? उसके लिए हम आप यहां बैठे हुए हैं। तो ठीक है। हम ये कहेंगे कि जैसे गीता जी में गीता जी तो सभी धर्म ग्रंथों का सार है। चारों वेदों का सार है। भाई साहब सुनिए मेरी बात एक समझिए। पहले आप मुझे क्लियर करिए कि हम क्या सुनने जा रहे हैं। खामखा एक आप लंबा सा एक प्रवचन दे दे
00:13:45:22 उसके बाद में आपसे कहूं मैंने तो ये पूछा ही नहीं था। तो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि क्या आपके पास सनातन शास्त्रों से इस बात का प्रमाण है कि एक बार जो दुख हो गया उसके लिए दोबारा हम लोग उसमें नहीं फंस सकते। जो व्यक्ति चोरी करता है जेल जाता है क्या वो दोबारा जेल नहीं जाता? दोबारा चोरी नहीं करता। चोरी करेगा तो करता है कि नहीं? करता है कि नहीं? करता है तो जाएगा। करेगा तो जाएगा। मैं मैं पूछ रहा हूं कोई व्यक्ति एक ही अपराध सजा पा लेने के बाद भी दोबारा करता है कि नहीं? करता है। तो आपने जो सिद्धांत दिया वो ना तो तार्किक सिद्ध हुआ और ना आपने प्रमाण दिया। तो यह सिद्धांत यहां का नहीं है। ये तो सतलोक की बात कर रहे ये सतलोक की बात कर रहे भौतिक जगत की बात कर रहे दोनों में डिफरेंस है ना तो भाई सतलोक के बारे में भौतिक जगत के अंदर उपलब्ध शास्त्रों में लिखा है ना तभी तो सतलोक को जानते हो सतलोक को आपने कहां से जाना एक मिनट सतलोक को आपने कहा सतलोक में जाना कि यहां जाना गीता जी में खुद बताया गया है ना देखिए भाई साहब आप मुझे सज्जन व्यक्ति लग रहे हैं
00:15:00:24 इसलिए मैं आपसे स्पष्ट बातें चाह रहा हूं स्पष्ट बातों पर रहिए आपने कहा कि भैया एक बार जिसमें व्यक्ति चख लेगा दुख का स्वाद तो उसके बाद दोबारा उसमें नहीं फंसेगा। मैंने आपको तर्क भी दे दिया। प्रमाण आप मुझे दे नहीं रहे। आपके पास कोई प्रमाण है सनातन शास्त्रों से तो हम दूसरी बात करते हैं। अभी इस चीज का प्रमाण तो मैं गीता जी की बात कर रहा हूं। तो आप बोल रहे उसकी बात मत करो। अभी गीता जी की बात कहां कर रहे थे? आपने कहा कि प्रमाण कबीर सागर में सनातन शास्त्रों में प्रमाण नहीं है। अब आप कह रहे हो है? नहीं गीता जी के 18 मैंने पूछा यह प्रमाण है क्या एक बार दुख चख लेने के बाद दोबारा नहीं चखेगा ये प्रमाण है क्या गीता जी में नहीं चखेगा ये बात अलग है ये पॉइंट ही अलग है क्योंकि अगर उस इंसान को इस चीज का दुख का आभास रहेगा तो 100% 99% ये होता है कि वापस उस तरफ ना जाए 99 है कि 100 है नहीं 99 100 एक% तो कुछ भी कर सकता है। यानी कि आपका जो मोक्ष है वह 99% सही है। एक% की वहां चूक है। ये आप कह सकते हैं। आप ही ने तो कहा 99%
00:16:16:09 नहीं जाएगा। नहीं हम हम नहीं मान सकते उस बात को। आपके द्वारा हो सकता है। अरे आप 99% मोक्ष मान रहे हो सतलोक में कि 100% मोक्ष मान रहे हो? मोक्ष तो 100% होना है। तो आप तो कह रहे हो 99% आदमी नहीं जाएगा इधर उधर। लेकिन जो भटकाव वाली बात है एक% भटकाव भटकाव होने का चांस है ना एक% आपके अनुसार हां तो वो बता तो रहा हो कि एक% है वो भटक जा सकता है। 1% का भटकाव का चांस है। सतलोक में भी 1% की इच्छा आ जाने का भटकाव आ जाने का अभाव महसूस होने का चांस है। हम है ना? हां सही बात है। तो फिर ये मोक्ष कैसे हुआ? आपने तो कहा मोक्ष तो वो है जहां पर अभाव ना हो। दुख का नाम ही ना हो।
00:17:10:09 अब दुख का नाम तो नहीं है। दुख का नाम तो वहां होगा नहीं। लेकिन आदमी की मनुष्य की अगर इच्छा इस ढंग से बलौती हो रही है कि भाई वो सबके ऊपर परमात्मा के भी ऊपर जाने की कोशिश करता है तो वहां पे तो वो भटकाव तो होना है निश्चित है। यानी कि जब व्यक्ति के अंदर मान लीजिए ऐसी कोई इच्छा आ गई कोई कोई ऐसी इच्छा आ सकती है जिसके कारण पूरा ना होने पर वो दुखी हो। वो सोचने लगे व्यक्ति तभी व्यक्ति दुखी तभी होता है ना जब उसकी इच्छा पूर्ति नहीं होती तो वो दुखी होता है। सही बात है। तो यानी कि वहां पर ऐसा कुछ हो सकता है जिसके कारण व्यक्ति दुखी हो। हां वही सर्वे सर्वा बनने की इच्छा तो फिर आप आप फिर वहां पर आपका मोक्ष सिद्ध नहीं हो रहा है। ये मानना पड़ेगा। ठीक। अब मैं एक बात अगली करता हूं। अब मैं एक बात अगली करता हूं। यह बताइए कि जब काल मर जाता है, काल मरता है कि नहीं मरता है? काल खुद कह रहे हैं कि हमारी जन्म मृत्यु होती है। हम तो काल की वजह से ही फंसते हैं लोग इस दुनिया में। जीव
00:18:26:16 हां। है ना? काल को देख के अट्रैक्ट होते हैं और काल की वजह से फस जाते हैं। तो काल जब मरता है उसकी जन्म मृत्यु होती है। तो जब जिसने आपको फसाया है वो मर गया जिसकी वजह से आप फंसे हो। काल के लोक में फंसे हो तो आप मुक्त माने जाओगे। सारे जीव मुक्त हो गए। फिर तो काल की मृत्यु वो तो प्रलय होने के बाद हो गया। अरे कभी भी हो जिस समय काल मरता है उस समय जिसने काल की पूजा नहीं भी की होगी वो मुक्त होगा ना
00:19:10:02 ये तो बहुत ही अंत की बात कर रहे हैं आप अरे कभी की बात है मैं पूछ रहा हूं जिसने आपके रामपाल के अनुसार पूजा भक्ति नहीं की होगी नाम दीक्षा नहीं ली होगी काल जब मरेगा काल जब मरता है तो उस समय जो आत्माएं होंगी फंसी हुई काल के लोक में वो मुक्त हो जाएंगी ना मुक्त मानना पड़ेगा ना उनको क्योंकि काल की वजह से फंसी थी वो अब इसका जवाब मेरे पास नहीं है हां तो हमें उन्हें मुक्त ही मानना पड़ेगा और दिक्कत ये है कि हमने कहा कि जैसे ही मुक्त हुए तो कहां गए जब ये सब फंसने फंसाने का चक्कर ही समाप्त हो गया तो हम कहां गए सीधे वही जहां से आए थे और जब वहां से आए थे उसके बाद आपने कहा ना नहीं फसेगा वहां गए कहां वो तो उसी जगह कहां रहे कहां रहे गए गए कहां रह गए ना उसी जगह क्योंकि उनको रास्ता तो आगे का मिला नहीं वो तो गए कहां वो तो वही रह गए ना प्रलय हो गया मृत्यु हो गई सबकी मृत्यु हो गई दुनिया दुनिया खत्म हो गई दुनिया खत्म हो गई मगर मनुष्य धरती पे धरती पर जीवित रहा तो वही रह गए ना
00:20:25:06 अभी मनुष्य नहीं मनुष्य मनुष्य का भी शरीर खत्म हो गया सब कुछ हो गया वास्तु चक्र तो वही घूमेगा ना फिर आगे कहां गया वो कहां कहां गया वो धरती पर था मनुष्य एक व्यक्ति है जिंदा ठीक जो काल की वजह से यहां फंसा हुआ है एक जीव है अब जब काल मरा तो वो उसकी बॉडी मरी वो मर के कहीं और गया कि नहीं गया तो कहां गया नहीं गया तो कहां रहा बताइए भाई अभी हम पृथ्वी पे हैं। पृथ्वी का प्रलय हो पृथ्वी का प्रलय हो जाएगा। काल भी खत्म हो जाएगा तो पृथ्वी कहां जाएगी? पृथ्वी तो है ना। तो पृथ्वी कहां है? जितने लोग जितने लोग यही रह जाएंगे। ऊपर कहां जाएंगे? क्योंकि उनको रास्ता ही नहीं मिला। अरे तो पृथ्वी खत्म हो गई। जब प्रलय आ गई काल का लोक खत्म हो गया तो जो लोग बचेगा उसी में जाएंगे ना। हां तो पानी पानी रहा पानी में आए फिर वापस पृथ्वी उसमें रहेगी आपकी ये आपकी ये आपकी सृष्टि रचना में कहां लिखा है
00:21:37:15 मैंने कहा था ना मैंने कहा था ना कि मैं आपसे मांगूंगा प्रमाण जहां आवश्यकता होगी वहां मांगूंगा जब अपने अंदाजी मुद्दे फेंकोगे मनगढ़ंत बातें बोलोगे तो फिर मैं पूछूंगा कि तुम्हारे बाबा जी ने कहां पे लिखा है ये आपने जिससे दीक्षा ली उन्होंने कहां लिखा है यहां तो गीता जी सुनिए आप जो बात जो आप एक मिनट जो बात आप इस समय बोल रहे हैं वो बात तो सनातन सनातन एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट सनातन शास्त्रों की तो दूर की बात है जो बात आप इस समय बोल रहे हैं कि पृथ्वी नहीं रहेगी तो पानी में रहेंगे ये बात आपके जो रामपाल जी है उन्होंने भी नहीं रखी होगी ये तो तर्क की बात आप कर रहे हैं सर जी तर्क भाई साहब मुझे क्या आप कुतर्क कर रहे हैं ना देखिए प्रमाण की जरूरत कहां होती है वहां होती है जब आप कुछ ऐसी बात कर रहे हो जिसको मैं नहीं मान पा रहा हूं या मैं कुछ ऐसी बात कर रहा हूं जिसको आप नहीं मान पा रहे हैं तब हमें एक हायर अथॉरिटी की आवश्यकता होती है तो कम से कम मुझे सनातन शास्त्रों से नहीं तो कम से कम इसमें अपने गुरु की वाणी ही दे दीजिए कि भैया यहां रहेंगे लोग जब धरती खत्म हो गई तो आपने कहा पानी पानी कहां पर है। कहां
00:22:52:19 भरा हुआ है पानी? मन से कुछ भी बोलते चले जाओ। ये गलत बात है। ठीक नहीं है ये। तो हमें यह मानना पड़ेगा कि जब काल मरता है तो जिस लोक से आत्माएं यहां आई हैं जिस कारण से आई है वो कारण जब खत्म हो गया वो मुक्त हो गए तो मुक्त हो के वही पहुंचे जहां से आई है और फिर आप ही ने कहा काल फिर जन्म लेता है तो काल ने फिर जन्म लिया तो फिर अट्रैक्ट होंगी और फिर फसेंग यानी कि सतलोक में मुक्ति नहीं मिल रही है इतना अभी तक हमें क्लियर हो गया एक तो वो 99% से हो और एक इस वाली बात से हो गया। अब आगे चलते हैं। आपने सतलोक सतलोक इसी को मान रहे हैं। किसको मान रहे हैं? इसी इसी इसी लोक को आप सतलोक मान रहे हैं। आपके किस किस लोक को? पृथ्वी लोक को
00:23:52:26 हमने कहां लोक बैकुंठ काल काल का जो 21 ब्रह्मांड है उसी को आप सतलोक मान रहे काल मरा तो सब मर गए और वहां से मुक्त हो गए तो काल मरने पे जो काल की वजह से फंसी हुई है काल जिनको फंसा रहा है काल नहीं चाहता कि ये मुक्त हो जब वो मर जाएगा तो फिर कौन चाहेगा कि यह फंसी कबीर ठीक है आगे आगे चलिए हां इसीलिए कहते हैं कि मत खींचिए बात को अच्छा अब एक बात बताइए मुझे कि आत्मा को आप अविनाशी कहते हैं नित्य कहते हैं शाश्वत कहते हैं क्या कहते हैं आत्मा अविनाशी है नित्य है शाश्वत है मतलब वो ही है और रहेगी हम क्योंकि परमात्मा का अविनाशी जीव है तो आत्मा तो अविनाशी है आत्मा को कभी कुछ नहीं हो सकता है
00:25:07:15 आत्मा को कभी कुछ नहीं आत्मा को कभी कुछ नहीं हो सकता ऐसा कोई समय था जब आत्मा नहीं थी ऐसा तो नहीं है। ऐसा नहीं है। यानी कि आत्मा को आप ईश्वर की तरह नित्य मानते हैं। सब परमात्मा ने रचा है तो परमात्मा परमात्मा खुद से सभी आत्माओं को खुद ने बनाया है और अपने से पैदा किया है। यानी कि किसी समय ऐसा था जब आत्मा नहीं थी। हां ऐसा था। या होगी क्योंकि इतना इतनी विस्तृत हमको जानकारी नहीं है क्योंकि यह कहा गया है कि भाई परमात्मा के साथ ही सब लोग रहते हैं। जब परमात्मा के साथ सब लोग रहते थे और आत्मा अविनाशी थी। परमात्मा की अंश है तो फिर जो है अलग से तो थी नहीं। तो परमात्मा और आत्मा एक ही जैसे थी।
00:26:12:28 आत्मा किसी समय थी या नहीं थी इस बारे में क्लियर आंसर नहीं है क्या आपके पास नहीं ये क्लियर नहीं है आप पता नहीं आप टाइम पास करने आए हैं ऐसा लग रहा है बहुत ही हल्के तरीके से आप रख रहे हैं रामपाल का पक्ष खैर अविनाशी नहीं अविनाशी मानता है रामपाल ने अविनाशी माना है आत्मा को और नित्य नहीं माना है ठीक है रामपाल का कहना है कि आत्मा का अभाव था। एक समय था जब आत्मा नहीं थी। अच्छा हम यानी कि आत्मा जो है
00:26:52:09 क्या कहते हैं? अब एक तरीके से देखा जाए तो जब कोई चीज नहीं थी और है तो फिर वो नष्ट भी हो सकती है। उसी स्टेज में वापस जा सकती है। मगर उसने कहा आपकी किताब ने कि आत्मा का अभाव था उत्पत्ति से पहले। तो अब बात यह आती है फिर आत्मा का जो तत्व है वह कहां से निकाला? नहीं वचन की शक्ति थी उससे पैदा किए वचन की शक्ति शब्द से पैदा किए नहीं शब्द से पैदा किए ये तो यहां ये जो परमार्थ की दुनिया है जहां जो पूर्ण है सतलोक पूर्ण है वहां किसी चीज का अभाव है ही नहीं फिर वहां पर जो चीज नहीं है वो प्रकट हो रही है तो वो तत्व कहां कहां से आ रहा है? वो तत्व एकिस्ट करता था पहले या नहीं करता था? रामपाल कह रहे हैं कि नहीं करता था। तो
00:28:07:15 फिर वो आत्मा किस चीज से बनाई? उसका मटेरियल कहां से लिया? शब्द की शक्ति से बनाई वो अलग है। मटेरियल कहां से लिया? उसका अरे परमात्मा को पता है। हमें नहीं पता। तो आपके जो तत्वदर्शी हैं उनको भी नहीं पता है। उनको पता होगा। उनको पता होगा। यानी कि उन्होंने कहीं लिखा होगा आपको नहीं पता है। मैंने शायद उस चीज को नहीं पढ़ा। तो ये सब चीजें आपको पूछनी चाहिए ना। तात्विक बातें तो यही है। तत्व की बातें कहते हैं तत्वदर्शी है। अत तत्वदर्शी है तो क्या है कि ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा नहीं करनी चाहिए। इनकी पूजा करनी चाहिए। मैं पहले ये था मैं ये हो गया। मैं पहले वो था वो हो गया। ये हो गया। तत्व की बात कहां है इसमें? अब तत्व का प्रश्न किया तो मुझे नहीं पता। मुझे नहीं पता। मुझे नहीं पता। ये तत्व का प्रश्न है। जिनके उत्तर चाहिए होते हैं। इसमें फंसता है व्यक्ति कि आत्मा को तुम कह रहे हो कि वो नहीं है एक समय पे तो फिर जब आप बना रहे हो तो फिर आपको बताना पड़ेगा वो मटेरियल कहां से आ रहा है आत्मा का। ये है तत्वदर्शी। ये है तत्व ज्ञान जो आपको
00:29:22:19 पता नहीं है कि काल मरा तो क्या हुआ फिर दोबारा कैसे उत्पन्न हुई ये सब तत्व तात्विक बातें दार्शनिक दार्शनिक बातें कहते हैं इनको एक समर्थवान गुरु ही समझा सकता है जो कि आपके जिसको आप गुरु कह रहे हो उसने आपको नहीं समझाया अभी तक और कहते आप लोग तत्वदर्शी हो अगर उसकी शरण में जाने से आपका कहना है कि पहले मुझ पर बहुत तकलीफें थी और उनकी शरण में आने से मेरे दुख दूर हो गए। ठीक है? तो आप उसको यह कहिए कि दुख दूर करने वाला बाबा या दुख दूर करने वाला संत तत्वदर्शी की संज्ञा हटानी पड़ेगी ना। नहीं तो तत्व के दर्शन दिखाना पड़ेगा। समझ रहे हैं आप मेरी बात? जैसे कि जैसे कि हमने कहा कि यह मोटरसाइकिल धरती पर दौड़कर आपकी यात्रा पूरी करवाती है। फिर हमने ये भी कह दिया कि ये हवा में भी उड़ती है। फिर हमने ये भी कह दिया कि पानी में भी चलती है। तो धरती पर दौड़ने की बात हमने प्रूफ कर दी। प्रमाण दिखा दिया। मगर जब आसमान में उड़ने की बात आई, पानी में चलने की बात आई तो आप वहां फेल हो गए। तो आपको फिर
00:30:37:27 इन बातों का क्लेम अलग हटाना पड़ेगा। पहले तो यह संज्ञा दूर करो। जब तत्व का दर्शन आपने नहीं सीखा तत्व को उससे नहीं जाना तो आपको कहना होगा फिर तत्वदर्शी नहीं फिर आप वो कहिए हमारे दुख दूर हो गए। अच्छा दूसरी बात ये आती है दूसरी चीज क्या है कि दुख दूर करने वाले जो बाबा की बात आप कर रहे हैं तो अगर हम उनके पास जाकर के अपना दुख दूर करवाते तो बात अलग होती हमने तो एक मंत्र का किया था ना भाई साहब आपके बाबा जी ने अपनी किताब में ये लिखा है कि ब्रह्मा विष्णु महेश जो है उनकी पूजा पूजा करने से इस लोक के मिलने वाले दुख नष्ट होते हैं। पर मोक्ष नहीं मिलता। ठीक है? यह आपके बाबा जी ने ही लिखा है।
00:31:37:08 समझ रहे हो? यानी कि बाबा जी का काम ही वहां से शुरू होता है। बाबा जी के अनुसार जहां ब्रह्मा, विष्णु, महेश इस लोक के दुख शांत कर देते हैं। मगर बाबा जी का काम कहां से शुरू होता है? तत्व, परमार्थ, मोक्ष और उन सब में बाबा जी फेल हो रहे हैं। और यहां की चीजें तो बता रहे हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति से शांत हो जाती है। दिखाऊं उनकी भक्ति तो दिया जाता है ना। उनकी भक्ति तो करते हैं। उनकी भक्ति करने से यहां के दुख दूर हो जाएंगे। ये कहा है आपके बाबा जी ने। तो ये सही बात है। आप फिर ये नहीं कह सकते कि ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति से मेरे दुख दूर नहीं हो रहे थे। यह बात आपके बाबा जी ने भी कही है कि ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति करने से यहां के दुख दूर हो जाएंगे। हां मगर आपको मोक्ष एक मिनट भाई साहब मगर आपको जीवन मरण के चक्कर से मुक्ति नहीं मिलेगी। आपको मोक्ष नहीं मिलेगा। ये कहा है आपके बाबा जी ने। तो जब बात मोक्ष की आ रही है जिसके लिए उन्होंने अपने आप को अधिकृत बताया कि मोक्ष मैं दूंगा। जीवन मरण से आजादी मैं दूंगा। दुख से आजादी मैं दूंगा। यहां के बाद वाला दुख तो उसमें आप फेल हो गए। ना तो आपका मोक्ष सिद्ध हुआ ना आपकी जीवन और मरण की वो से मुक्ति होना सिद्ध हुई और ना
00:32:52:12 ही आपने ये बताया कि वो आत्मा उससे पहले कहां थी ना तो तत्व ज्ञान सिद्ध हो रहा है ना मोक्ष सिद्ध हो रहा है [संगीत]
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YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
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⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
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⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
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⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
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⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
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⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
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⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
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⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
रामपाल के 'सतलोक' की उड़ी धज्जियां | लाइव चर्चा में चेले की बोलती बंद
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